India’s Leading Knee Doctor on Arthritis, Exercises, Shoes, Knee Replacement, & ACL | Dr. Daral Ep17
Author Name:Food Pharmer
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Transcript:
(00:00) 140 में से 6.2 करोड़ लोगों को ऑस्टियो आर्थराइटिस है। दिस इज द डायग्नोस जो रिपोर्टेड है। बट इतना ही नंबर है जो अनरपोर्टेड है। नी का शरीर में वही रोल है जो टायर का गाड़ी में रोल है। बिकॉज़ ऑफ़ अस नॉट टेकिंग केयर ऑफ़ आवर नीज़। तो वो टायर्स डीजेनरेट कर जाते हैं। जो बोलते हैं ना कि हील पहनने से आपका पोश्चर बेटर हो रहा है। मेरे पास पेशेंट्स हैं जो एिएशन इंडस्ट्री में है। आप यकीन नहीं मानेंगे। दो से चार ऐसी कैबिन क्रूज हैं जिनको अपनी जॉब छोड़नी पड़ गई। हाई हील्स की वजह से एमआरआई पे पता चला कि डिस्क बल्ज हो गया है। सो हाउ कैन समवन सिलेलेक्ट द राइट
(00:37) फुटवेयर? तो अगर आपको शू खरीदना है तो आपको ये देखना है तो जितने भी ऑफिस गोवर्स हैं जो कंप्लेन करते हैं कि उनके पास टाइम नहीं है एक्सरसाइज करने का। तो ऑफिस में बैठे-बैठे ये छोटी सी अगर एक्सरसाइज करेंगे अपना एक पैर को हवा में रखना है। नी रिप्लेसमेंट सर्जरी का कॉस्ट क्या रहता है? अ कॉस्ट वैजज़ ऑन द हॉस्पिटल यू गेट इट डन फ्रॉम बट एवरेज कॉस्ट में जो चीपेस्ट है चीपेस्ट से चीपेस्ट एंड एवरेज जो एक्सपेंसिव साइड जाता है तो मैक्सिमम जा सकता है। फॉर नी तो बेटर मैं एक्सरसाइज ही कर लूंगा। दैट इज टू मच। अगर कोई ये देख रहा है और उसे ग्रेड वन या ग्रेड टू ऑस्टियो
(01:10) आर्थराइटिस है। उसे क्या करना चाहिए टू प्रिवेंट कि वो ग्रेड थ्री या ग्रेड फोर में नहीं पहुंचे। सबसे पहले तो उसे बिफोर वी बिगिन आई वांट टू थैंक्स Zerodhas मीडिया नेटवर्क ज़ीरो वन फॉर सपोर्टिंग दिस एंटायर शो रिथिंक इंडिया एंड विदाउट देम नन ऑफ़ दिस वुड हैव बीन पॉसिबल। [संगीत] [संगीत] आज है हमारे साथ डॉक्टर मयंक डराल वन ऑफ
(02:05) इंडियास लीडिंग एसीएल एंड नी रिप्लेसमेंट सर्जन्स और आज हम डीप ड्राइव करेंगे नी के बारे में। थैंक यू सो मच डॉक्टर। थैंक यू सो मच फॉर हैविंग मी। या इंडिया बहुत सालों से डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड है। लेकिन अब इंडिया नी पेन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड भी बनते जा रहा है। एंड मैंने कुछ स्टडीज पढ़ा था कि इंडिया में आर्थराइटिस और एसीएल 15 गुना ज्यादा है कंपेयर टू अदर वेस्टर्न कंट्रीज? तो क्या यह सही है? एंड व्हाट इज द प्रॉब्लम इन इंडियास नीज़? व्हाई इज इट सच अ बिग पेंडेमिक? n नंबर ऑफ फैक्टर्स हैं। इंडिया का पुअर न्यूट्रिशन कह दें, वाइडली विटामिन डी डेफिशिएंसी
(02:44) रहे। उसके अलावा अब नाउ मॉडर्न मैन लाइफस्टाइल जिसे कहते हैं जिसे ऑफिस गोइंग वर्कर्स या ऑफिस गोइंग हमारे जो यूथ पापुलेशन है ना एक्सरसाइज करती है सिर्फ ऑफिस में रहती है। देन सिंग क्रॉस लेग। अब अगर आप एवोल्यूशन देखें तो पहले इंडिया एक कृषि प्रधान देश था। जहां सारी चीजें फार्मिंग से लेके हमारी पूजा पाठ से लेके हमारा टॉयलेट तक लेके सब नीचे जमीन में बैठने के काम होते थे। परंतु उसके लिए हमारे नी स्ट्रांग थे। अब हमारे पास कंक्रीट रोड, मार्बल के घर ये सब आ गए हैं। तो इंसान जब भी चल रहा होता है तो सारा प्रेशर उसके घुटनों पे आता है। और जब
(03:16) वो घुटना अ के साथ चल रहा होता है तो ग्राउंड रिएक्टिंग फोर्सेस उसके घुटने पे अपोजिट काम कर रही होती हैं। जैसे एव्री एक्शन हैज़ अ अपोजिट रिएक्शन। अगर मैं दीवार में कुछ मारता हूं तो उसका दुगना मेरे हाथ में चोट लगती है। तो अब जब ग्राउंड रिएक्टिंग फोर्सर्सेस जो मिट्टी अब्सॉर्ब करती थी वो नहीं है और हमारी आदतें वैसी की वैसी ही हैं तो अब नीज़ में ज्यादा प्रॉब्लम आ रही है। तो अब अ वर्क इज़ वरशिप। मूवमेंट इज़ नॉट वरशिप। तो इसीलिए वी आर वेरी वेरी मच वनरेबल। और ऊपर से स्ट्रेस और वर्क लोड तो एक परफेक्ट कॉकटेल बन गया है जो सारा सारा हमारे
(03:50) घुटनों पे काम कर रहे हैं। कहते थे पहले कि किसी का दिमाग उसके घुटनों में क्यों होता है? परंतु अब मुझे लगता है कि अब हम सबको अपना दिमाग घुटनों पे डाल देना चाहिए। सो दैट वी गेट आउट ऑफ दिस और इस पेन को हम ओवरकम करें। एज अ नेशन। 100% इस नी पेन को ओवरकम करना है। और यही पॉइंट है ये पूरा एपिसोड का। तो शुरू करते हैं। मुझे आपसे जानना है नी का पॉइंट क्या है हमारे बॉडी में? व्हाट रोल डस इट सर्व एंड एसीएल टेयर और अर्थराइटिस होता क्यों है? सो अगर नी का रोल देखना है हमें तो नी का शरीर में वही रोल है जो टायर का गाड़ी में रोल है। सो एक हमारी मूवमेंट के लिए
(04:35) जो सबसे इंपॉर्टेंट टायर्स हैं शरीर में वो नी जॉइंट है। ओके? है ना? तो अगर यह देखें कि अगर किसी गाड़ी के टायर कितने साल में रीजनरेट करते हैं? मैक्सिमम से मैक्सिमम 5 साल, 10 साल, 15 साल। बट हमारे जो ह्यूमंस की जो नीज़ हैं, दे कैन लास्ट एज गुड एस 70 टू 90 इयर्स आराम से। परंतु बिकॉज़ ऑफ़ अस नॉट टेकिंग केयर ऑफ़ आवर नीज़। तो वो टायर्स डीजनरेट कर जाते हैं। और उसी टायर्स के डीजनरेट करने के बाद अगर आप ये देखिए गाड़ी के टायर अगर खराब हो गए तो आप क्या करते हैं? या रिप्लेस इट? यस। तो या तो उसमें हवा भरवाई जाएगी, पंचर होंगे जिसे एसी यानिस रिपेयर करवाया
(05:12) जाएगा। बट अगर उसमें बिल्कुल खराब हो गए हैं कि ठीक करने लायक नहीं है तो हम उसे चेंज करते हैं। तो सिमिलरली नीज़ आर द टायर्स ऑफ अ व्हीकल जैसे गाड़ी में होते हैं वैसे घुटनों में इंसानों में दे आर मोर लाइकली एट द टायर्स ऑफ द बॉडी जो शरीर का भार लेते हैं। वेरी इंटरेस्टिंग डॉक्टर आपने बोला कि सिर्फ गाड़ी में 5 से 10 से 15 साल एक टायर चलता है। ह्यूमंस का लेकिन लाइफ स्पैन जो है हर सेंचुरी में भर रहा है। 5 600 साल पहले ह्यूमंस वर लिविंग फॉर प्रोबब्ली ओनली 30 इयर्स। अब लोग 80 90 साल जी रहे हैं। तो क्या इसका मतलब है कि नी में भी अब ज्यादा एफर्ट पड़ रहा है
(05:52) क्योंकि पहले तो लोग 30 35 साल का ही लाइफ स्पैन था तो उनको उतना नी का नी का भी लाइफ स्पैन कम था। अब क्योंकि और लंबा टाइम चल रहा है तो उससे कुछ फर्क पड़ता है। सी अ आज से पहले अगर गोइंग बैक टू 20 इयर्स पहले तो नी रिप्लेसमेंट सर्जरीज इतनी नहीं होती थी और अगर मैं कहूं कि हमारे जो अभी एल्डर्ली लोग हैं तो पीपल अबव 85 टू 90 उनमें नी पेन अभी उस लेवल पे उस लेवल का नहीं देखा गया है जो अब इतना रैपिडली इंक्रीस हो रहा है। कहीं ना कहीं तो दे वर हैप्पीली हैविंग अ वेरी हेल्दी नीस बिकॉज़ ऑफ देयर लाइफस्टाइल बिकॉज़ ऑफ़ एवरीथिंग एल्स। सो नो डाउट कि अब लाइफ
(06:30) स्पैन बढ़ रहा है तो लाइफ स्पैन पे तो सबका फोकस है। बट लाइफ स्पैन के साथ कैन यू रन अ लाइफ विद डीजनरेटेड टायर्स। सो वी हैव टू पे इक्वल अमाउंट ऑफ एनर्जी। उतना ही ध्यान हमें अपने टायर्स पे, गाड़ी के और अपने घुटनों पे देना है। सो दैट वी कैन प्रोवाइड इट द लोंगिविटी हमारे शरीर को, हमारे जो टेंपल है शरीर को उसको रन करने के लिए उस पे उतना ही ध्यान देना पड़ेगा। मुझे डिवाइड करना है दो चीज में। एक है प्रॉब्लम्स और सॉलशंस। सो अभी थोड़ा प्रॉब्लम्स पे फोकस करते हैं। फिर सलूशन पे आएंगे। जी। मेन नी को लेके लोगों को क्या कॉमन इंजरीज
(07:05) या क्या प्रॉब्लम कॉमन प्रॉब्लम्स होते हैं? नी की प्रॉब्लम्स हम इंसानों में दो पार्ट में डिवाइडेड हैं। एक तो जो 40 इयर्स से नीचे हैं और एक जो 40 इयर्स से ऊपर हैं। जो 40 इयर्स से नीचे हैं। जैसे आप, मैं जितना भी हमारे फ्रेंड्स हैं तो जितनी ये मूवमेंट्स करते हैं बिकॉज़ दे हैव अ वेरी एक्टिव लाइफस्टाइल। स्पोर्ट्स कह लो या ऑफिस जाना कह लो या ड्राइविंग कह लो। सो इनमें ओवरएक्टिविटी या फिर टू मच यूज़ या नॉर्मल यूज़ की वजह से इंजरीज होती हैं। जिसमें आपका एसीएल लिगामेंट या मेनिस्कस टियर या कार्टिलेज डिफेक्ट हो सकता है। और 40 से जो ऊपर हैं उनमें ऑस्टियो
(07:46) अर्थराइटिस नाम की बीमारी स्टार्ट होती है। ऑस्टियो आर्थराइटिस होता क्या है? सबसे पहले ऑस्टियो अर्थराइटिस मतलब जॉइंट माइस। जॉइंट माइ मतलब जोड़ों का चूहा जो आपके जॉइंट्स को धीरे-धीरे करके खा जाता है और जॉइंट्स को खत्म कर देता है। गठिया जिसे हिंदी में कहते हैं। सो वो ऑस्टियोअरिस है। जैसे मेरे पास एक ये नी जॉइंट है। ये एक हेल्दी नी जॉइंट है। इसमें ये ऊपर कार्टिलेज है। ये मेनिस्कस है। ये नीचे वाला जॉइंट है। इन दोनों के बीच में एक स्पेस होता है। स्पेस मतलब जैसे दरवाजे में पल्ला होता है। एक जॉइंट होता है जिससे दरवाजा खुलता है, बंद
(08:21) होता है। वो स्पेस होता है। एक पल्ला होता है। परंतु आपने कभी देखा है बारिश में अगर किसी दरवाजे को काफी दिन तक छोड़ दें और फिर उसको खोलें तो वह खुलता ही नहीं है। तो यह एक हेल्दी जॉइंट है और ओवर यूज़ की वजह से ऐज की वजह से ये पूरा जॉइंट खत्म हो जाता है। ये कार्टिलेज जो बिल्कुल स्मूथ थी ये पूरी डीजनरेट हो गई। मेनिस स्टेयर हो गया और हड्डियां टूट-टूट के आपस में साइड में जुड़ गई। और जो जॉइंट स्पेस होते हैं जो आप कहते हैं कि हमारी जो है स्पेस कम हो गई। तो वो स्पेस बिल्कुल कम हो जाती है क्योंकि आपस में चिपक जाता है और अगर दरवाजे के पल्ले में बिल्कुल वो
(08:54) पल्ला नहीं रहेगा तो दरवाजा खुल और बंद नहीं हो पाएगा तो उसी वजह से हमारा जो जोड़ है फिर चलना बंद हो जाता है पर दरवाजे में और इंसानों में यह फर्क है दरवाजे को दर्द नहीं होता है पर इंसान जब भी चलेंगे उनको बार-बार दर्द होगा और वह फिर चलना कम कर देंगे और जब वह चलना कम कर देंगे तो कहीं ना कहीं वो सोचेंगे कि मैं कोई भी जो काम कर रही हूं या कर रहा हूं तो मेरे को जीने में मजा नहीं आएगा। जब जीने में मजा नहीं आएगा तो साइकोलॉजिकली लाइफ स्पैन भी कम होने लग जाता है। तो इसीलिए हेल्दी जॉइंट्स बिकॉज़ जैसे चलती का नाम गाड़ी है। लाइफ मींस मोबिलिटी जिंदगी
(09:28) का नाम है चलना। इसलिए ये सारा प्रयास रहता है कि वी रिस्टोर द मोमेंट। बिकॉज़ वो डायरेक्ट ना डायरेक्ट लाइफ स्पैन से कोरिलेट होता है। दैट मेक्स अ लॉट ऑफ़ सेंस। बिकॉज़ मेरे पेरेंट्स ने भी देखा हो जब नी पेन बहुत ज्यादा होता है तो उनका बस फुल एनर्जी आउटलुक टुवर्ड्स द डे भी बहुत डाउन हो जाता है। मोराल डाउन हो जाता है। मुझे आपसे जानना है इसका कितने लोग को ऑस्टियो आर्थराइटिस होता है। सी सबसे पहले आपने कहा मोराल डाउन होने के बाद मेरे एक कनाडियन प्रोफेसर थे ऑर्थो के तो मैं उनसे काफी सलाह मशवरा करता था कि इंडिया में और जो भाग जो बाहर के यूरोपियन
(10:03) कंट्रीज हैं उनमें क्या फर्क पड़ता था नी पेन के रिलेटेड। तो वो कहते थे इंडिया की जो पेन टॉलरेंस है ना वो बहुत ज्यादा है। तो इंडियंस बहुत प्राइड लेते हैं ये कहने में कि हम तो पेन टोलरेट कर सकते हैं। या फिर आपने एक उदाहरण सुना होगा तो इंडियंस तो कहते हैं कि हम तो सिर्फ 6 घंटे सोते हैं। हम तो सिर्फ 5 घंटे सोते हैं। आज तो बैक टू बैक मीटिंग्स। तो हम कहीं ना कहीं पेन टोलरेट करने में एक प्राइड लेते हैं जो कि सही बात नहीं है। वेस्ट में मैंने जो अपने डॉक्टर्स से सुना है दे कम एट द फर्स्ट फर्स्ट इंसिडेंस ऑफ़ पेन दे कम दैट समथिंग इज रोंग इन माय नीज़
(10:38) और फिर दैट इज इजीली अर्ली डायग्नोस्ड और उनके जो ऑस्टियो आर्थराइटिस की जो इंसिडेंसेस हैं इतने लेवल पे नहीं बढ़ रहे हैं जितना इंडियंस के लेवल पे बढ़ रहे हैं। एक कारण उसमें से पेन टॉलरेंस भी है। और रहा नंबर्स का बात तो एस पर द लेटेस्ट स्टडी एस पर द लेटेस्ट स्टडी जो मैंने पढ़ी अ 62 मिलियन या फिर 6.2 करोड़ 140 में से 60 6.
(11:11) 2 करोड़ लोगों को ऑस्टियो अर्थराइटिस है वाओ ऑलमोस्ट लाइक 5% हां पर 5% ऑस्टियो अर्थराइटिस 40 इयर्स की ऐज से ज्यादा ज्यादा है। पर अब ये 140 करोड़ में से कितने सारे लोग 40 इयर्स से नीचे हैं? तो अगर 40 इयर्स से ऊपर हैं तो उन लोगों में ये 22% होगा। ओके? सो टोटली 6.2 करोड़ लोगों का ऑस्टियो आर्थराइटिस है इंडिया में व्हिच इज़ अराउंड 5% लेकिन अगर हम 40 के ऊपर के एज ब्रैकेट में देखें तो 22% लोगों को ऑस्टियो आर्थराइटिस है। सो ऑलमोस्ट लाइक वन एंड फोर और फाइव पीपल दैट्स क्रेजी। और इसके अलावा 70 इयर्स से जो ऐज से ऊपर हैं। अभी तक इंडिया इज अ यूथ नेशन। अब इंडिया इज़ अ
(11:52) यूथ नेशन। अब दिस इज़ एजिंग नाउ। सो वी आर गोइंग टू हैव अ वेरी बिग पपुलेशन दैट इज़ गोइंग टू बी अबव 40 इयर्स। एंड इज़ इंडिया प्रिपयर्ड फॉर इट? इज़ इंडिया नॉट प्रिपयर्ड फॉर इट? बिकॉज़ 70 इयर्स से ऊपर ऑलमोस्ट 50% इज़ द केस ऑफ़ ऑस्टियोअरिस। और मैं ये तो सिर्फ बातें उनकी कर रहा हूं जो डायग्नोस हैं। बिकॉज़ यू आर अ रेवोल्यूशनरी इन योरसेल्फ, यू आर ब्रिंगिंग दिस अवेयरनेस। मैं तो सिर्फ ये बातें कर रहा हूं जो रिपोर्टेड हैं। जो चीजें रिपोर्टेड नहीं है। बिकॉज़ एक पैरेलल इकॉनमी बिकॉज़ पेन टॉलरेट करने की वजह से काफी लोग तो डायग्नोस ही नहीं हो पाते हैं। सो मेनी
(12:26) केसेस आप देखेंगे अपने शहर में कि जो बूढ़ी औरतें झुक के चल रही होती हैं या चलते वक्त उनका जो नी का गेट है वो बदल गया है। उनसे पूछो क्या हो गया है? तो दे विल नॉट रिसोंड। बिकॉज़ कहीं ना कहीं उन्हें लगता है कि उनके बच्चों पे इसका कॉस्ट का बाहर आएगा। मुझे यह लगता है दिस इज़ द डायग्नोस जो रिपोर्टेड है बट इतना ही नंबर है जो अनरपोर्टेड है। तो द प्रॉब्लम इज ह्यूज एंड इवन गोइंग टू बी ह्यूजर। वाओ। तो अगर आप बोल रहे हो कि इतना ही नंबर अनडायग्नोस्ड भी है तो ये 22% ऑलमोस्ट 44% भी हो सकता है। व्हिच इज़ ऑलमोस्ट लाइक वन इन टू पीपल।
(12:58) जी कैन बी कैन बी। मैंने कहीं सुना था कि वीमेन को ज्यादा नी प्रॉब्लम्स होते हैं कंपेयर टू मैन। इज दैट ट्रू? यस यस दिस इज़ कंप्लीटली ट्रू। देखो वुमेन में ना आफ्टर द एज ऑफ़ 40 देयर आर सम हार्मोनल चेंजेस है ना? क्योंकि पोस्ट मेनोपॉज़ होता है और उसके बाद ऑस्टियोपोसिस। अभी हम बात कर रहे हैं ऑस्टियोराइटिस की। परंतु इसके अलावा एक और प्रॉब्लम होती है ऑस्टियोपरोसिस। अब वो एडिशनली वुमेन में ज्यादा होता है। बिकॉज़ हार्मोनल चेंजेस आए। ऑस्टियोपोसिस इज़ हड्डियों में पोर्स बनना या हड्डियों का कमजोर होना। अब वुमेन हु डोंट एक्सरसाइज।
(13:33) वीमेन हु हैव अह अ लेस फ़िज़िकली हेल्दी बॉडी। वीमेन अह आर हैविंग ऑस्टियोपोरोसिस एंड वीमेन अह आर डूइंग ऑल द हाउसहोल्ड वर्क इन द ट्रेडिशनल इंडियन वे। तो दिस हिट्स देम ट्वाइस विद व्हाट इट हिट्स अ मेल। तो वीमेन आर नो डाउट मोर प्रोन टू डेवलप ऑस्टियोअराइटिस दन मेल्स। नो डाउट। बिल्कुल सही सवाल है आपका। ओके। तो वुमेन को ज्यादा ख्याल रखना पड़ेगा। जी जी बिल्कुल देयर इज़ नो डाउट। हम लोगों ने नंबर्स का बहुत बात किया। अब मुझे जानना है सिम्टम्स क्या होता है ऑस्टियो आर्थराइटिस का। सबसे पहले तो पेन। पेन का मतलब ये नहीं कि आज पेन हुआ तो मुझे ऑस्टियो अर्थराइटिस हो
(14:12) गया। एक्यूट पेन और क्रॉनिक पेन दो अलग-अलग चीज है। अगर रोज-रोज़ पेन हो रहा है अगर कुछ भी काम करने से पहले सोचना पड़ रहा है और अगर रात को सोने से पहले पेन हो रहा है या फिर पेन के साथ स्वेलिंग आ रही है तो यह आपको कहीं ना कहीं फिर डायग्नोस करवाना चाहिए। यह पेन का रीज़न क्या है? हर इंसान को ऑस्टियोअराइटिस नहीं होता। नॉर्मल पेन भी हो सकता है, स्पजम भी हो सकता है, टायर्डनेस भी हो सकती है। बट देन सबसे बड़ा पेन रोज-रोज़ हो रहा है या पेन एकद बार ही हो रहा है। तो पेन इज द नंबर वन इंडिकेटर फर्स्ट ऑफ़ ऑल। ओके? सो पेन इज़ नंबर वन। व्हाट आर द नंबर
(14:47) टू एंड थ्री? उसके बाद स्वेलिंग। उसके बाद रेंज ऑफ मोशन कम होना। मतलब पैर पूरा ना चलाना, पैर मोड़ने में दर्द होना। ठीक है? और उसके बाद पैर कई बार लोगों के पैर टेढ़े हो जाते हैं। आपने देखा होगा पैर इंसानों के टेढ़े हो जाते हैं जो वो चल रहे होते हैं। तो डिफिटी की वजह से क्योंकि जो घुटना है अंदर की तरफ घिस जाता है तो वो अंदर की तरफ होके बाहर की तरफ मुड़ जाते हैं। इज दैट व्हाट इज़ कॉल्ड नॉक नीज़? नहीं नहीं नॉक नीज़ इज़ जब घुटने अंदर की तरफ होते हैं और ये जीनू वम होता है। नॉक नीज़ इज़ जैसे आपने ग्रेट खली को देखा होगा। तो सही नहीं है मेंशन करना। बट देन इट इज़
(15:25) अ टाइप ऑफ़ नॉकनीज़ और दैट इज़ बाय बर्थ और यह ऑस्टियोराइटिस की वजह से भी हो सकते हैं। तो नॉकनीज़ जब घुटने अंदर की तरफ मुड़ जाते हैं उसे नॉकनीज़ कहते हैं। अगर यह बच्चों में होता है नॉकनीज़ तो इसे फिजियोलॉजिकल नॉकनीज़ कहते हैं। जो चार साल की उम्र तक या 12 साल की उम्र तक चांसेस रहते हैं रिजॉल्व होने के। बट कुछ लोगों में रॉल्व नहीं होते हैं तो उनमें ऑस्टियो आर्थराइटिस के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। तो इसीलिए इनको भी एड्रेस करना बहुत जरूरी है। तो डॉक्टर आपने बोला पेन, स्वेलिंग और रेंज ऑफ मोशन कम होना आर द सिम्टम्स। लेकिन अगर वो सिम्टम आ गया किसी के में तो
(16:00) व्हाट शुड द पर्सन डू नेक्स्ट? क्या उन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए? फिजियोथरेपिस्ट के पास जाना चाहिए, कारोप्रेक्टर के पास जाना चाहिए, एक योगा वाले के पास जाना चाहिए? क्या करना चाहिए उसे? सी दिस इज़ अ वेरी कंट्रोवर्शियल क्वेश्चन। आइडली वो एक पर्सन की चॉइस है कि उसको किसके पास जाना चाहिए। बट मुझे लगता है एज अ इनफॉर्म्ड और एज अ पर्सन हु इज़ एजुकेटेड आई ऑलवेज गो फॉर एन एक्सपर्ट ओपिनियन दैट इज क्वालिफाइड। राइट? तो उसमें जिसकी जो चॉइस हो परंतु हां इंडिया में एक पैरेलल इकॉनमी है। लोग डॉक्टर के पास लास्ट में पहुंचते हैं जब उन्होंने सारे नुस्खे
(16:33) अप्लाई कर लिए होते हैं। तो तब जो सिचुएशन है इट गोज़ स्लाइट आउट ऑफ हैंड। तब वो इतनी इफेक्टिवली हम लोग हील नहीं कर पाते हैं या ट्रीटमेंट ऑप्शंस लिमिटेड रह जाते हैं और हमें इस बात से कोई परहेज भी नहीं है कि वो किसी और के पास जा रहे हैं। बिकॉज़ वी नो इट कि घूम के उनको आना ही है। नॉन डिप्लोमेटिक वे में डॉक्टर के पास जाना चाहिए। ऑफ कोर्स व्हाई नॉट। जी। ओके। कोई डॉक्टर के पास गया तो इसका सॉल्यूशन क्या है? चलो उसको ऑस्टियो आर्थराइटिस हो गया। तो इसका सॉल्यूशन क्या है? और ये रिवर्सिबल है या रिवर्सिबल नहीं होता है? इसका सॉल्यूशन डिपेंड करता है इसका ग्रेड
(17:06) क्या है? कितने ग्रेड्स होते हैं? चार ग्रेड होते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि हमने देख लिया किसी के घुटने में दर्द है और सीधा नी रिप्लेसमेंट कर दिया। इसका एक सबसे पहले एक्सरे रिक्वायर्ड होता है। हम उसमें एक्सरे में यह देखते हैं कि इसका ग्रेड कितना है। यह ग्रेड मैनेजेबल है, दवाइयों से ठीक हो सकता है, एक्सरसाइज से ठीक हो सकता है, फिजियोथरेपी से ठीक से हो सकता है या ये इससे नहीं ठीक हो सकता है। एंड स्टेज जो है इसकी, इसकी जो एंड स्टेज है, अगर वो यह कहती है कि यह हील नहीं है, तब जाके उसको नी रिप्लेसमेंट करवाते हैं। बट
(17:37) ऑस्टियोअरिस रिवर्सिबल नहीं है। जैसे गाड़ी के टायर अगर घिस गए हैं तो उसको रिवर्स कैसे कर सकते हैं? तो इसीलिए यह रिवर्सिबल तो नहीं होता है बट हां इसका जो पेन के साथ कोरिलेशन है ऐसा नहीं है कि हर इंसान को ऑस्टियो अर्थराइटिस है उसको दर्द हो रहा है। परंतु पेन कौन कितना टोलरेट करता है तो एक्सरसाइजेस, दवाइयां इनसे अगर वो पेन टॉलरेट कर पा रहा है और अपना लाइफस्टाइल नॉर्मल जी पा रहा है तो धीरे-धीरे विद एक्सरसाइज वो पेन खत्म हो जाता है। एंड ही कैन लिव अ हेल्दी लाइफ। बट उस दिन से ही हैज़ टू फोकस ऑन एवरीथिंग दैट इज़ न्यूट्रिशन, एवरीथिंग ऑन हेल्थ,
(18:11) एवरीथिंग ऑन लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज, वे ऑफ़ सिटिंग एवरीथिंग। यहां तक फुटवेयर भी। ही विल हैव टू टेक प्रॉपर केयर अगर वो अर्ली ग्रेड्स में पकड़ा गया है तो? तो सपोज़ कोई ग्रेड वन या ग्रेड टू है व्हिच इज़ आई थिंक द लेसर लेवल। जी। जी। तो ग्रेड वन या ग्रेड टू में क्या यूजुअली होता है? सी ग्रेड वन या ग्रेड टू में वी गिव देम कार्टिलेज फॉर्मिंग मेडिकेशंस या जॉइंट न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स और एक्सरसाइज और कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट की तरफ फॉलो करते हैं ताकि ये ग्रेड जो है ये यहीं रुक जाए ये आगे ना बढ़े और अब तक जो हम गलती करते आए हैं जो इसको पेन कॉज कर
(18:47) रही थी वो रुक जाए। अगर कोई ये देख रहा है और उसे ग्रेड वन या ग्रेड टू ऑस्टियो आर्थराइटिस है उसे क्या करना चाहिए टू प्रिवेंट कि वो ग्रेड थ्री या ग्रेड फोर में नहीं पहुंचे। सबसे पहले तो उसे अपना अगर वो हैवी वेट है तो वेट कम करना चाहिए। बट वेट उसे यह नहीं है कि ऑलरेडी ग्रेड वन या ग्रेड टू ऑस्टियो अर्थराइटिस है और उसे रनिंग करके वेट कम करना चाहिए। तब तो वो उसे और डीजनरेट कर लेगा। थ्रू अल्टरनेट वेज़ ही हैज़ टू लूज़ अ वेट बिकॉज़ वेट सीधा-सीधा उसके घुटनों में पड़ रहा है। फिर उसको अपना लाइफस्टाइल देखना चाहिए। उसका लाइफस्टाइल क्या है?
(19:18) अगर वो ऑफिस गोइंग है और वो स्क्वाटिंग पोजीशन में बैठता है या क्रॉस लेग बैठता है तो उसको अपनी नीज़ एक्सटेंशन में बैठना है। अगर वो अपना फुटवेयर इंप्रोपर है तो उसे करेक्ट करना है। और अगर टाइट पट्स पहन रहा है तो उनको थोड़ा लूज़ करना है। बिकॉज़ हिप भी रिस्ट्रिक्ट होती है तो भी नी पेन आ रहा होता है। और उसके अलावा फिर अगर वो ड्राइव कर रहा है तो उसको ड्राइव थोड़ा अवॉइड करना चाहिए। ठीक है? ड्राइव क्यों अवॉयड करना चाहिए? सी नो डाउट जब इंसान खुद ड्राइव कर रहा होता है तो हिज नीज़ आर इन अ पोजीशन दैट एक्सलरेट द नी पेन। तो बार-बार नी मूवमेंट्स की वजह
(19:50) से अगर उसको ऑलरेडी ऑस्टियो अर्थराइटिस डेवलप हो रहा है तो ड्राइविंग की वजह से भी क्लच और स्पीड की वजह से उसको नी पेन हो सकता है। और उसके अलावा उसको जॉइंट न्यूट्रिशन और हेल्दी फ़ूड्स हेल्दी फूड्स अगेन न्यूट्रिशन हैज़ अ बिग रोल आल्सो और उसके बाद उसको एक्सरसाइज करना चाहिए। देयर आर फ्यू थिंग्स दैट वी पुट हिम ऑन। ओके। न्यूट्रिशन में एनी क्विक पॉइंटर्स अराउंड ऑस्टियो आर्थराइटिस सी शुगर वंस अगेन यू हैव यू हैव अ वेरी वेरी वाइड अवेयरनेस कैंपेन दैट यू हैव स्टार्टेड एंड थैंक्स टू यू पूरा इंडिया इतना अवेयर हो गया है ऑन शुगर बट देन आई
(20:25) विल टेल यू शुगर इंक्रीसेस इनफ्लेमेशन ऑफ द नीज़ अगर किसी को ऑस्टियो आर्थराइटिस है तो शुगर आग में घी का काम करता है इनफ्लेमेशन बढ़ाता है इनफ्लेमेशन फ्लेम मींस कंपन को बढ़ाना और ऑस्टियो अर्थराइटिस में जब घुटने घिसते हैं तो इनफ्लेमेशन होती है और शुगर कोई खाता है तो उससे इंसुलिन स्पाइक होता है तो वो जो आग इनफ्लेमेशन है वो बढ़ती है और कोई डायरेक्टली इनडायरेक्टली कॉन्शियसली अनकॉन्शियसली उसे खा रहा होता है तो वो इनफ्लेमेशन या आग में घी डाल रहा होता है तो नो डाउट शुगर शुड बी अवॉयडेड एंड देन शुड फोकस ऑन ड्राई फ्रूट्स एंड दैट हैव
(21:06) माइक्रोोनट्रिएंट्स बिकॉज़ उनमें काफी कि ऐसे माइक्रोोनट्रिएंट्स होते हैं जो जॉइंट फॉर्मेशन करते हैं। जैसे कंड्रइटिन हो गया, ग्लूकोसमाइन हो गया, रोज हिप हो गया। ये सारे जो हैं दे विल रियली हेल्प अ लॉट इन द जॉइंट हेल्थ। सो डॉक्टर आपने माइक्रोोनट्रिएंट्स का बात किया। मैं जानता हूं कि इंडिया में वेरी लार्ज नंबर ऑफ पीपल को विटामिन डी डेफिशिएंसी है। डी3 स्पेशली। यस। सो क्या उन्हें ये सब का सप्लीमेंट्स लेना चाहिए? डी3 और बी12? सी विटामिन डी3 इज आल्सो अ बिग बिग पेंडेमिक दैट इज हैपनिंग है ना तो जैसे एक बार गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने देखा था कि
(21:43) आयोडीन डेफिशिएंसी हुआ था तो एक फर्टिफाइड राइज करा गया था आयोडीन के साथ ताकि आयोडीन डेफिशिएंसी हटे नाउ इंडिया में विटामिन डी डेफिशिएंसी इतनी ज्यादा हो रही है जिसकी वजह से डायरेक्टली इनडायरेक्टली ऑस्टियोराइटिस हो रहा है। आपने मेरे से पूछा कि वुमेन है वुमेन को नी पेन ज्यादा है। अब 90% ऑफ द इंडिया इज़ विटामिन डी डेफिशिएंट। इंडिया इज रिच इन इट्स सनलाइट बट देन विटामिन डी डेफिशिएंसी की वजह से भी नी पेन आ रहा है। बिकॉज़ वीक बोनस है, ऑस्टियोपोसिस है। अब नाउ सम नेशनल प्रोग्राम शुड बी स्टार्टेड लाइक आयोडीन एंड समबडी हैज़ टू टेक अ लीड कि जो
(22:18) फर्टिफाइड जैसे हमने आयोडीन डेफिशिएंसी करी थी, विटामिन डी को भी वैसे करा जाए। नॉट जस्ट सप्लीमेंट्स बट ऑन अ लार्जर लेवल विटामिन डी डेफिशिएंसी शुड बी एड्रेस एंड इट्स अ वेरी वेरी बिग पॉइंट। डॉक्टर गवर्नमेंट के लिए क्यों वेट करते हैं? हम लोग दोनों ही ये एपिसोड खत्म होने दीजिए। लेट्स बोथ ऑफ़ अस डिस्कस कि हम लोग कैसे इसको बढ़ा सकते हैं। बिकॉज़ जैसे आपने बोला गवर्नमेंट ने बहुत अच्छा आयोडीन पोलियो बहुत अच्छे इनिशिएटिव्स किए हैं जो पास्ट में व्हिच इरेडिकेटेड पोलियो एंड अ लॉट ऑफ़ अदर प्रॉब्लम्स। सो कैन द गवर्नमेंट फर्टिफाई सर्टेन फूड्स ताकि
(22:55) विटामिन डी और विटामिन बी12 वो सब फूड्स में आ जाए और हमारा न्यूट्रिशन बढ़ जाए क्योंकि ये एक पेंडेमिक है आपने बोला विटामिन डी डेफिशिएंसी एक पेंडेमिक है जिसके कारण ही ऑस्टियो आर्थराइटिस हो रहा है। हां, एक कारण यह भी है। बिल्कुल। इट विल बी अ वेरी मैसिव लीड और एक मैसिव मूवमेंट होगा इफ समथिंग कम्स अप टू इरेडिएट द विटामिन डी डेफिशिएंसी। ये एक मास मूवमेंट होगा। इससे मेरे को नहीं लगता कि आज के टाइम पे नेशन में इससे बड़ा कोई मूवमेंट होगा। बिकॉज़ कहीं ना कहीं नी हेल्थ में थाउजेंड्स ऑफ़ करोड़ लग रहे हैं। तो उसका जो प्रीक कर्सर
(23:28) है, वो कहीं ना कहीं विटामिन डी डेफिशिएंसी है। चाहे कोई बूढ़ा हो, चाहे कोई बच्चा हो, सब में विटामिन डी डेफिशिएंसी है। ऑलमोस्ट 80 टू 90%। तो अगर आप गवर्नमेंट से भी यह देख रहे हो, इफ यू कैन रीच आउट टू अस इन सम वे ऑफ़ फॉर्म, हम लोग भी ट्राई करेंगे इसे कुछ ना कुछ एक कैंपेन लाने का, ब्रेन स्टॉर्म साथ में करने का कि कैसे इसे सॉल्व कर सकें हम। सो डॉक्टर समवन हु हैज़ ऑस्टियो आर्थराइटिस हम लोग कैसे डिसाइड करें कौन सा जूता खरीदना है। व्हाट इज द बेस्ट वे टू डिसाइड? बेस्ट जूता कैसे खरीदना है? फॉर समवन हु हैज़ ऑस्टियोथराइटिस। मेरे को लग रहा है मेरे
(24:02) को ये शू कंपनीज़ शू कर देंगी अगर मैंने बोला तो। शू इज अ वैरी कमर्शियल स्पेस। यू आर हैविंग एनी शूज विथ यू? या या हम लोग ने अरेंज किया है। ओके। ये एक जूता हम लोगों ने अरेंज किया है। ओके। जस्ट गिव मी वन शू। सो अगर आपको शू खरीदना है तो आपको ये देखना है कि आपके शू में कोई इंक्लिनेशन ना हो। जैसे इस जूते में है। कोई ब्रांड तो नहीं दिख रहा है। नहीं तो कंपनीज़ मुझे शू कर देंगी। जब आपके शू में इंक्लिनेशन होता है तो आप आगे की तरफ झुके होते हैं। लोअर बैक स्पम में आगे होती है। अपर बैक पीछे होता है। बिकॉज़ न्यूट्रल टिल्ट बनाना
(24:34) होता है। और फिर गर्दन आगे होती है। तो एक छोटे से शू में इंक्लिनेशन की वजह से आपके पूरी बॉडी में पेन हो सकता है। कभी नी में, कभी कमर में, कभी गर्दन में और यहां तक कि सिर दर्द भी दिखा गया है कि आपके इंप्रोपर फुटवेयर की वजह से हो सकता है। तो, यह बिल्कुल न्यूट्रल रखना है आपको। और इसके अलावा जो टो बॉक्स है ये पॉइंटेड रहता है। है ना? सो हमारी बॉडी में कुछ आर्चेस होती हैं फुट में। जैसे घर की नींव होती है चार कोनों में वैसे ही फुट की जो नीव है वो तीन कोनों में होती है। तो आगे वाली जो टो बॉक्स है उसमें दो आर्चेस होती
(25:09) है। मिडियल और लेटरल और वो पीछे एड़ी से मिली होती है। परंतु उस आर्च को हम कर्व कर देते हैं टो बॉक्स की वजह से। सो ये टो बॉक्स एक न्यूट्रल होना चाहिए। आगे से चौड़ा होना चाहिए। जैसे आपने पुराने जूते या चप्पलें देखी जो वाइड टो बॉक्स होता है। थर्ड क्योंकि हम फुटवेयर पहनते रहते हैं तो हमारे जो फुट हैं दे आर आल्सो लिविंग एंड दे नीड टू ब्रीथ पर वो स्वेट कर रहे होते हैं। तो दे शुड बी ब्रीथेबल। फोर्थ कुछ जूते इतने टाइट होते हैं कि जो नॉर्मल पैर का मूवमेंट है वो ना होके जूते का मूवमेंट होता है। तो ऑलवेज चेक वेदर योर शू इज़ फ्लेक्सिबल। अ इट्स वेरी टाइट।
(25:47) अगर यह इतना टाइट इतने हाथ लगाने पे हो रहा है, तो सोचिए आपके पैर को मूवमेंट कैसे करने देगा। तो यह कुछ पॉइंट्स हैं जो मैं पर्सनली मेक श्योर करता हूं कि मैं जूता पहनने से पहले लूं। हां, जज भी करा जाता हूं कि डॉक्टर हो के हमेशा स्पोर्ट शूज पहनता हूं। बट देन लॉन्ग रन में आई नो व्हाट इज हैपनिंग एंड व्हाट इट्स नॉट हैपनिंग। सो दीज़ आर द थिंग्स। दैट यू शुड टेक केयर पर्सनली। 15 सेकंड में चारों पॉइंट समराइज करते हैं। एक बार रिककैप करते हैं। पहला था आप बोले इंक्लिनेशन नहीं होना चाहिए। आप बोले फ्लैट होना चाहिए। बिल्कुल। सेकंड आप बोले कि ये नैरो नहीं होना
(26:23) चाहिए। ये वाइट टो बॉक्स होना चाहिए। थर्ड आप बोले कि ब्रीदेबल होना चाहिए शूज। और फोर्थ आप बोले कि ये बहुत ईजीली ये बेंड होना चाहिए। अभी बहुत टाइट है। ये बहुत ईजीली फ्लेक्सिबल होना चाहिए शूज। बेसिकली। जी। एंड तो ये चार पॉइंट है। हां। हां एंड वुमेन को क्या ध्यान ऑब्वियसली वुमेन भी ये पहनते हैं। लेकिन अगर वुमेन का शूज थोड़ा कभी-कभी अलग होता है। वुमेन को क्या ध्यान देना चाहिए? इट्स सेम फॉर वुमेन एंड मेन एंड वुमेन क्योंकि पतली चप्पलें पहनती है। दे शुड यूज़ इट स्लाइट मोर कुशंड। बिकॉज़ वीमेन में प्लांटर फिश सबसे कॉमन देखा गया है क्योंकि उनकी बॉडी भी शार्प
(27:00) रहती है और चप्पलें भी पतली रहती है। तो दे कैन यूज़ इट अ स्लाइट मोर कुशंड देन अ नॉर्मल चप्पल। तो उनके जो है उसमें कुशंड होना चाहिए। और हील्स को लेके आपका क्या ओपिनियन है? हील्स वंस अगेन अगर जैसे कोई ब्रिज है, ब्रिज के पिलर्स होते हैं तो मैंने बोला कि अपने फिट जो होते हैं उनके तीन पिलर्स होते हैं। मीडियल आर्च, लेटरल आर्च और ये सब कन्वर्ज करते हैं एडी पे। और एडी पे सारे कन्वर्ज कर रहे हैं। और उस एडी को या हील को हमने ऑलरेडी एक पतली सी हील पे रखा है। तो देयर आर मोर चांसेस कि वो एंकल ट्विस्ट हो। उसमें प्लांटर फेसाइटिस हो।
(27:36) अब आप सोचिए आपके शरीर की जो नीव है आपका फुट उसको आपने एक और नीव पे रखा है जो कमजोर है। सो यू आर पर्पसली मेकिंग इट मोर प्रोन टू डैमेज। बट सम पीपल लोग बोलते हैं ना कि हील पहनने से आपका पॉश्चर बेटर हो रहा है। वो सही नहीं है। अ पोश्चर मे बी फॉर टेंपरेरी बेटर होगा। बट अब जैसे मेरे पास पेशेंट्स हैं जो एिएशन इंडस्ट्री में हैं। आप यकीन नहीं मानेंगे। दो से चार ऐसी कैबिन क्रूज़ हैं जिनको अपनी जॉब छोड़नी पड़ गई क्योंकि उनका डिस्क बल्ज इतना बढ़ गया उनके फुटवेयर या हाई हील्स की वजह से बैक पेन जा ही नहीं रहा छ से आठ महीने का और एमआरआई पे पता
(28:15) चला कि बिकॉज़ ऑफ़ दिस लॉन्ग टर्म पॉश्चर करेक्शन डिस्क बल्ज हो गया। बॉडीज़ गोल इज़ टू बी कंफर्टेबल एंड स्ट्रेंथफुल नॉट ऑन द टोज़। सो इसीलिए कोटेशन कहते हैं बी अ ओल्ड शू। एंड ओल्ड शू लाइक यू हैव टू हैव इट वेरी कंफर्टेबल एंड ग्राउंडेड ऑन द फुट। डॉक्टर व्हाट शुड पेरेंट्स डू फॉर द नीज़ ऑफ़ देयर चिल्ड्रन? बच्चे लोग का नी को प्रोटेक्ट करने के लिए क्या करना चाहिए? आई थिंक हम अब ऐसे जंक्चर में हैं कि पेरेंट्स बच्चों के लिए ना करें। बच्चे पेरेंट्स के लिए करें। बिकॉज़ अब सपोज मैं अपनी मदर का केस लेता हूं। शी डजंट एक्सरसाइज। शी इज़ हैविंग
(28:52) ऑस्टियोपोरोसिस। एंड देन घर में स्टेयर क्लाइंबिंग होता है। आई हैव टेकन हर टू योगा क्लासेस। आई हैव टेकन हर टू डांस क्लासेस। बट शी डजंट हैस द थिंग फॉर एक्सरसाइजज़। तो मुझे पता है उनको नी पेन है। आगे जाके यह बैड होगा। तो एज अ चाइल्ड इट्स ऑन आवर शोल्डर्स टू मेक श्योर दैट आवर पेरेंट्स स्टार्ट डूइंग दीज़ नी एक्सरसाइजज़, हैव प्रॉपर न्यूट्रिशन, देयर विटामिन डी एंड एवरीथिंग एल्स। सो अभी द नेक्सेस लाइ ऑन द चिल्ड्रन टू टेक केयर बिकॉज़ इट्स अ इमीडिएट थ्रेट। इट्स अ इमीडिएट थ्रेट इज द नीज़ ऑफ़ आवर पेरेंट्स एंड देन वंस दैट इज़ डन बिकॉज़ हम बीच में
(29:35) देन द किड्स तब हमें किड्स पे फोकस करना चाहिए। बचपन से ही दे कैन स्टार्ट हैविंग अ वेरी हेल्दी एंड एक्टिव लाइफस्टाइल जिसमें दैट इन्वॉल्व स्पोर्ट्स एंड नी स्ट्रेंथनिंग सेंट्रली। ओके मेक सेंस। सो डॉक्टर आपने चार ग्रेड बताया था ऑस्टियोथराइटिस का। कौन से ग्रेड में लोगों को नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने की जरूरत होती है? अह ग्रेड फोर जो कहते हैं जिसमें घुटने हमें लगते हैं कि जॉइंट स्पेस बिल्कुल खत्म हो गया है और अब कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट से कुछ नहीं होगा। खाली दवाई चूर्ण खाने से कुछ नहीं होगा। तब हम कहते हैं कि इट्स बेटर कि जैसे घोड़े के पैर की
(30:11) नाल बदलते हैं। आपने देखा होगा हॉेज के जो हॉर्ेज चलते हैं तो उनके पैर में नाल बदलते हैं। उसी प्रकार से नी रिप्लेसमेंट तब हम सजेस्ट करते हैं कि अब देयर इज़ नो पॉइंट ऑफ रिटर्न। अब आपको नी रिप्लेसमेंट करवा देना चाहिए। अ जी तो अगर नो पॉइंट ऑफ रिटर्न है और कोई नी रिप्लेसमेंट सर्जरी करा रहा है। नी रिप्लेसमेंट सर्जरी का कॉस्ट क्या रहता है? कितना खर्चा होता है? नी रिप्लेसमेंट का कॉस्ट वैरी करता है। जैसे हर चीज का केस वैरी करता है। बट मेडिसिन इज़ मोर स्लाइटली रेगुलाइज्ड देन एनी अदर प्रोफेशन। अ कॉस्ट वैरीज़ ऑन द हॉस्पिटल यू
(30:50) गेट इट डन फ्रॉम और द लोकेशन ऑफ द हॉस्पिटल एंड n नंबर ऑफ थिंग्स एंड द इंप्लांट आल्सो यूज़्ड कि कौन सा इंप्लांट यूज़ हुआ है। बट एवरेज कॉस्ट में अ 1.5 लैक्स टू ₹ लाख पर नी इज़ द एवरेज फ्रॉम हाई एंड टू लो एंड। एंड जब यूजली लोग नी रिप्लेसमेंट कराते हैं वो एक ही नी का कराते हैं या दोनों का भी कराते हैं साथ में? इट डिपेंड्स दोनों की अलग-अलग इंडिकेशन है। कुछ लोगों में सिर्फ एक घुटना खराब होता है तो उनमें एक करा जाता है। कुछ लोग क्योंकि आते ही तब है जब दोनों घुटने खत्म हो जाते हैं। कई बार क्या होता है नी एक ही खराब होता है।
(31:27) बट लोग डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते सही टाइम पे तो बॉडी बहुत स्मार्ट है। जैसे अगर कोई कैंडल या मोमबत्ती जल रही हो और हमारा हाथ उसमें लग जाए तो वी टेक इट बैक। तो अगर कोई एक घुटना खत्म है और उसमें चोट है या दर्द हो रहा है तो माइंड इज़ वेरी स्मार्ट। तो उस पे प्रेशर नहीं डालता है। तो वो वेट को दूसरे पैर पे डिस्ट्रीब्यूट कर देता है और दूसरा घुटना भी फिर रैपिडली डीजनरेट हो जाता है। तो इस स्टेज पे बहुत सारे लोग पहुंचते हैं। फिर उनके सिर्फ बटरल नी रिप्लेसमेंट या दोनों नी रिप्लेसमेंट करने पड़ते हैं एक साथ। हम सो आपने बोला डॉक्टर 1.5 से 7 लाख पर नी
(32:01) जो चीपेस्ट है चीपेस्ट से चीपेस्ट 1.5 लाख एंड एवरेज जो एक्सपेंसिव साइड जाता है दैट कैन गो डिपेंड्स ऑन कौन हॉस्पिटल है कौन सी जगह पे लोकेटेड है कौन से स्टेट में है तो 7 लाख तक मैक्सिमम जा सकता है। इससे तो बेटर मैं एक्सरसाइज ही कर लूंगा वो तीन वाला हर दिन दैट इज टू मच क्योंकि आप सोचो एवरेज इंडियन एवरेज भी लूं मैं 3 लाख पर नहीं लूं आपने 1.
(32:25) 5 से सात बोला मैं एवरेज बीच का कोई ले रहा हूं 3 लाख अबाउट 3 लाख पर नहीं दैट इज टू मच मनी फॉर एन एवरेज मिडिल क्लास इंडियन एंड तो बहुत मतलब ये स्केरी नंबर है जी और आपने बोला था कि डेढ़ से 1.5 लाख लोग हर साल ये करा रहे हैं। जी बिल्कुल। पर देन फिर भी ये वर्ल्ड में सबसे चीपेस्ट है। ओके। इट इज़ द चीपेस्ट इन द वर्ल्ड। इसीलिए द होल वर्ल्ड इज़ कमिंग टू इंडिया बिकॉज़ नॉट ओनली इज़ द ट्रीटमेंट बेस्ट बट इट इज़ आल्सो द चीपेस्ट। तो जैसे लोग हेयर ट्रांसप्लांट हो सब के लिए टर्की जाते हैं वैसे नी के लिए लोग इंडिया आते हैं। फॉर ऑर्थोपेडिक नी हिप एसीएल। इट इज़ 10 टू
(33:05) 50 टाइम्स चीपर देन द होल वर्ल्ड। वाओ। लेकिन ऐसा क्यों कि इंडिया में इतना चीप है? इसको ऐसे पूछ सकते हैं कि वेस्ट में इतना महंगा क्यों है? क्यों है इतना वेस्ट में महंगा? आई डोंट नो व्हाई इट इज वेरी एक्सपेंसिव बट देन इन इंडिया इट इज़ रीज़नेबली अफोर्डिंग जो बेस्ट इंप्लांट वही लोग यूज़ करते हैं उसी क्वालिटी का उसी स्टैंडर्ड का या इवन बेटर वी आर यूजिंग। एंड एक बार कोई रिप्लेस करा लिया अपना नहीं। तो वो क्या वो लाइफ लॉन्ग चलता है या उसको भी एक शेलफ लाइफ होता है कि हर 10 साल में रिप्लेस करना होगा। सी इंडियंस का ना बहुत सारे मिथ्स हैं।
(33:39) सपोज इंडियंस क्यों नहीं करवा पाते रिप्लेसमेंट? वी हैव आवर ओन स्टोरीज। वी हैव आवर ओन एग्जांपल्स। जैसे एक एग्जांपल आपने सुना होगा अटल बिहारी वाजपेयी जी का। किसी ने सुना था कि अटल बिहारी वाजपेयी जी का अच्छा नहीं हुआ तो इसलिए हम भी नहीं करवाएंगे। द लाइफ स्पैन ऑफ़ अ नी रिप्लेसमेंट इज़ 25। बट इसमें ये नहीं सोचना है कि दोबारा करने की जरूरत पड़ेगी। बिकॉज़ 95 से 98% लोगों को सेकंड नी रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ती नहीं। फर्स्टली हार्ड ट्रुथ क्योंकि लाइफ स्पैन ही 67 से 67 से 70 है बट वो इंक्रीस हो रहा है फिर भी जी जो पहले बोले कि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने
(34:14) उनका नी रिप्लेसमेंट शायद से उतना अच्छा नहीं गया तो वो कहानी के कारण वो एक चीज के कारण लोग बहुत और लोग भी सोच रहे हैं कि मैं नहीं कराता हूं। फेमस आदमी का कुछ भी होता है तो लोग कोट अनकोट जरूर करते हैं। सो एक धारणा ये होती है और दूसरा अब जैसे मेडिसिन इज डिफरेंट फ्रॉम अदर साइंसेस से क्यों डिफरेंट है? बिकॉज़ हमारे पास साइंटिफिक पेपर्स हैं और किसी हेल्थ सर्विज या हेल्थ साइंस के पास इतने साइंटिफिक पेपर्स डे टू डे बेसिस पे नहीं होते। केस रिपोर्ट्स नहीं हो रहे होते हैं। तो अगर कोई हम कहते हैं कि नहीं रिप्लेसमेंट करवाना है कहेंगे हमारे घर के
(34:46) साइड में जो है उनका तो अच्छा नहीं हुआ था। बट दैट इज़ ओनली वन सैंपल साइज। एक सैंपल साइज है। ठीक है? अब उनका क्या हुआ है? क्या नहीं हुआ? उनको क्या एडिशनल प्रॉब्लम है? बट हमारे पास ऐसे हजारों सैंपल सक्सेससेस हैं। नी रिप्लेसमेंट इज़ वन ऑफ़ द मोस्ट सक्सेसफुल सर्जरीज़ ऑन अर्थ। ऑन अर्थ। इट इज़ वेरी सिंपल एंड वर द मोस्ट सक्सेसफुल बट बिकॉज़ ऑफ़ द फियर बिकॉज़ ऑफ़ द मिथ्स सपोज़ आई एम अफ्रेड टू ट्रेवल इन फ्लाइट्स। तो इसलिए मैं फ्लाइट्स कम ट्रैवल करता हूं। बट अगर स्टैट्स देखें आई मीन अगर एक इंसिडेंस खराब हुआ है। बट फिर भी अगर मैं स्टैट्स देखूं तो इट इज़ द सेफेस्ट मोड ऑफ़
(35:19) ट्रेवल ऑन अर्थ। उससे ज्यादा तो साइकिल के एक्सीडेंट हो जाते हैं। हां हां। सो अपने व्यूअर्स को एक चीज बोलना है डोंट गो बेस्ड ऑन एनेडोट्स कहानियां WhatsApp फॉरवर्ड्स आप स्टैटिस्टिक्स और फैक्ट्स के हिसाब से जाइए और स्टैटिस्टिकली नी रिप्लेसमेंट इज़ वेरी वेरी सेफ। ऑब्वियसली मैं नहीं बोल रहा हूं सब लोगों को कराना चाहिए। बट अगर आप ग्रेड फोर में हैं और अगर आपका और कोई ऑप्शन नहीं है तब आपको यह सोचना चाहिए कि शायद नी रिप्लेसमेंट इज़ बेटर देन सफरिंग एंड यूजिंग अनसाइटिफिक वेज़ टू क्योर योर नीज़। एक्जेक्टली दैट्स व्हेन इट कम्स
(35:54) फ्रॉम रिवांजी आई मीन इट हैज़ मोर मोर इंपैक्ट ऑन द पीपल बिकॉज़ यू हैव बिल्ड अ रेपुटेशन फॉर बीइंग द मार्केट लीडर इन टेलिंग पीपल अबाउट द थिंग्स दैट आर राइट एंड दैट आर रोंग और अब जैसे मेरे पास ओल्ड एजेड पेशेंट्स आते हैं तो मैं उनको नहीं कहता हूं। मैं उनके बच्चों को कहता हूं यह ओल्ड हैं। इनके बिलीव्स अलग हैं। यह नहीं करवाएंगे कभी। बट इट इज़ ऑन द चाइल्ड। बिकॉज़ वो करवाने से कहीं ना कहीं लाइफ स्पैन भी इंक्रीस होता है। क्योंकि अगर हर चीज करने के लिए बार-बार सोचना पड़े कि मुझे फ्रिज तक जाना है, मुझे नीचे जाना है। एंड पेन इज़ रियल।
(36:30) पेन इज़ रियल। तो कहीं ना कहीं दे लूज़ द एलेग्जर ऑफ़ लाइफ। हम एंड देन द लाइफ स्पैन डिक्रीजसेस। सो इट डिपेंड्स ऑन द किड्स हु वांट टू सी देयर पेरेंट्स वेरी हैप्पी। इफ दे आर हैविंग दैट कंडीशन शुड टेक द स्टेप। इफ दे लाइफ स्पैन वर्ड आप यूज़ किए। लाइफ स्पैन एक चीज होता है और हेल्थ स्पैन एक और चीज होता है। चाहे उसका लाइफ स्पैन 80 इयर्स भी हो। बट उनका हेल्थ स्पैन शायद 60 इयर्स ही है। और वो लास्ट 20 साल में वही सोच रहे हैं कि अरे मैं फ्रिज भी कैसे जाऊं? मैं बाथरूम कैसे जाऊं? तो हमें सिर्फ लाइफ स्पैन नहीं सोचना है। हमें हेल्थ स्पैन भी
(37:04) सोचना है। ब्यूटीफुल। ब्यूटीफुल। आई हैव नेवर सीन इट दैट वे। एक बार किताब में जरूर पढ़ा था। द गोल इज नॉट टू पुट इयर्स इन लाइफ बट टू पुट लाइफ इन इयर्स। हम्म। सो, दैट्स हाउ यू हैव पुट इट। थैंक यू सो मच फॉर टेलिंग दिस। ऑफ़ कोर्स। मैं वही सिमिलर चीज में बोलता हूं। हम लोग सब हेल्थ केयर बोलते हैं। लाइक नो हेल्थ केयर शब्द में लोग बोलते हैं हॉस्पिटल्स, मेडिसिन। लेकिन मेरे हिसाब से वो एक सिक केयर है। हेल्थ केयर होता है अपना हेल्थ का केयर करना। सिक केयर होता है कि आप जब बीमार हो तो आप केयर कर रहे हो और जब आप बीमार हो। आप हेल्थ केयर पे पहले फोकस
(37:42) करिए। फिर आप सिक केयर पे फोकस करिए। लोग हेल्थ केयर पे फोकस ही नहीं करते हैं। लोग खाली सिक केयर पे फोकस करते हैं। केयरिंग व्हेन यू आर सिक। नेवर नेवर थॉट इट दैट वे बट देन दैट इज एन आई ओपनर। हां। सो हम लोग ने 40 प्लस एज ग्रुप में ऑस्टियोराइटिस के बारे में बहुत कुछ बात किया है। अब मुझे 40 के बिलो एज ग्रुप के बारे में बात करना है। वहां पर जो मैं देखा हूं एसीएल टेयर यह बहुत कॉमन है। मैं स्पोर्ट्स वाले लोग को देखता हूं। बहुत कॉमन है। तो व्हाट आर द कॉमन थिंग्स व्हिच हैपन बिलो 40 इज इट एसीएल टेयर और और भी कुछ होता है?
(38:14) एसीएल एंड मेनिस्कस द मोस्ट कॉमन राइट। सो अ सपोज़ दिस इज़ अ नी जॉइंट। तो ऐसा नहीं है कि शरीर में सिर्फ हड्डी है और हड्डी पे हम सब चल रहे हैं। हड्डी के कुछ स्टेबलाइज़र्स होते हैं जो हड्डी के बीच में लिगामेंट्स होते हैं जो नीज़ को आगे पीछे चलने में मदद करते हैं। तो ये होते हैं हमारे लिगामेंट्स। और जब हम चल रहे होते हैं जैसे हम बैठे हैं तो इसमें कुशन की जरूरत है। वैसे ही हमारे नीज़ को एक कुशन की जरूरत होती है जिसे मेनिस्कस कहते हैं। तो नी के दो सबसे मेन लिगामेंट एसीएल, पीसीएल और मेनिस्कस जो कुशन होते हैं और एमसीएल, एलसीएल जो बाकी
(38:52) स्पोर्ट्समैन में बहुत कॉमनली इंजर्ड होते हैं। सो नो डाउट यस इनका भी ख्याल रखना बहुत जरूरी है। और सबसे कॉमनली ये इंजर्ड हो जाते हैं एट पीपल जो 40 इयर्स से नीचे में हैं। और अगर वो इसको अनअटेंडेड छोड़ेंगे तो उनको आगे चलके भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। सो ये मेनली स्पोर्ट्स इंजरी से होता है। जरूरी नहीं है कि ये सिर्फ स्पोर्ट्स इंजरीज से होता है। आमतौर पे जितने भी पीपल जितने भी लोग 40 से कम हैं वो स्पोर्टिंग एक्टिविटीज करते ही रहते हैं। ऐसा नहीं है कि स्पोर्ट्स में ही स्पोर्टिंग एक्टिविटी हो रही है। ऊपर सीढ़ी से नीचे जाने पे भी स्पोर्टिंग
(39:26) एक्टिविटी हो रही है। दैट रिक्वायर्स वॉकिंग बट इन द यूथ मोस्ट कॉमनली एसीएल और मेनिसस स्टेयर हो रहे हैं। एंड इट कैन बी एज सिंपल एस क्लाइंबिंग डाउन द स्टेयर्स। मेरा एक पेशेंट आया था जो डांस करते हुए टूट गया। वो नी ट्विस्टिंग या नी बेंडिंग इंजरीज की वजह से हो सकते हैं। इट्स वेरी वेरी कॉमन। तो एसीएल के बारे में हम लोग बहुत बात करने वाले हैं। बट एसीएल होता क्या है? फुल फॉर्म क्या है उसका? एसीएल इज़ एंटीरियर क्रूशियट लिगामेंट। एक लिगामेंट जो आपकी नी को स्टेबलाइज करता है और उसको मूवमेंट प्रोवाइड करता है। नहीं तो घुटना आगे निकल के भाग जाएगा।
(40:01) अब आप देखते हैं आप वॉक कर रहे हैं। नहीं अपनी जगह पे है। उसको जितना चलना है उतना ही चलना है। बट अगर वो टूट जाता है तो लॉकिंग वाली एक इनस्टेबिलिटी वाली फीलिंग आती है। कॉन्फिडेंस नहीं आता। पैर लचक खाता है। ओके। जी। एसीएल सर्जरी में दूरबीन से ऑपरेशन होता है। दूरबीन इज़ आर्रोस्कोप। एक कैमरा जाता है और एक हमारा इंस्ट्रूमेंट जाता है और जो लिगामेंट है जैसे अब फोटो फ्रेम है अगर किसी दीवार पे कोई फोटो फ्रेम है और वो फोटो फ्रेम लटक जाता है तो हमें ना तो पूरा फोटो फ्रेम हटाना है ना वो जो हुक है वो हटाना है बस हमें उन दोनों को दोबारा
(40:34) ब्रिज कर देना है। सो जो फुटप्रिंट है वहां से और नीचे तक दोबारा टाई करना है। एक नया लिगमेंट बना के उसका एक ग्राफ्ट हार्वेस्ट होता है। आपके शरीर में कई जगह एक्सेसिव ग्राफ्ट्स होते हैं। और उस ग्राफ्ट को हार्वेस्ट करते हैं और टाई कर देते हैं दोबारा। तो इट इज अ अ की होल सर्जरी जिसे कहते हैं स्मॉल 1 सेमी एंड 1 सेंटीमीटर का इंसीजन आता है एंड इसमें इंसीजंस बिल्कुल नहीं होते हैं। सो एसीएल का फुल फॉर्म है एंटीरियर क्रुशिएट लिगमेंट। क्रुशिएट आता है वर्ड क्रक्स वर्ड से जो एक लैटिन वर्ड है जिसका मीनिंग है क्रॉस और हमारा नी भी एक क्रॉस शेप में
(41:10) है और यहां से यह वर्ड आता है क्रुशिएट। सो अगर किसी का एसीएल टेयर हो गया तो व्हाट आर द नेक्स्ट स्टेप्स? व्हाट शुड द पर्सन डू? अगेन मैं सेम कोई कंट्रोवर्शियल क्वेश्चन पूछूंगा। उन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए, फिजियोथरेपिस्ट के पास जाना चाहिए, कैरियोप्रेक्टर के पास जाना चाहिए, कोई योगा वाले के पास जाना चाहिए? अगर एसीएल लिगामेंट टूट गया है तो इंडिया में एक पैरेलल इकॉनमी है जिसके बारे में मैं बोलता ही रहता हूं। डॉक्टर के पास लास्ट में पहुंचता है। अब वो एशियल लिगमेंट पार्शियल टयर है जो हील हो सकता है। जो नहीं हील हो सकता है। उसका डिसीजन
(41:42) मेकिंग बहुत जरूरी है। एक तैमूर लंग नाम का राजा होता था। बहुत क्रूल राजा था। पर उसके नाम में लंग था। मतलब लंगड़ाता था। वो क्यों लंगड़ाता था? क्योंकि उस टाइम पे सर्जिकल इंटरवेंशन नहीं हुई होगी। तो सर्जरी इज़ अ इंटरवेंशन व्हेन इट डेवलप्ड। जैसे अगर 5 साल पहले जितने एसीएल लिगामेंट रिपेयर होते थे अब उसके फाइव टाइम्स या 100 टाइम्स एसीएल सर्जरीज हो रही हैं। बिकॉज़ देयर इज़ अ रिक्वायरमेंट बट व्हेन पीपल आर नॉट कॉम्पिटेंट इन दीज़ काइंड ऑफ सर्जरीज देन दे ट्राई टू हील द पेशेंट। पेशेंट आएगा एसीएल सर्जरी के लिए आएगा आना ही पड़ेगा। परंतु तब तक क्या निकल चुका
(42:20) होता है? समय निकल चुका होता है। उसकी हेल्थ निकल चुकी होती है। और सबसे बड़ी बात पैसा निकल चुका होता है। ही इज़ वेस्टेड सिक्स मंथ्स में क्या कुछ क्या कुछ। और इसीलिए साउथ के कुछ डॉक्टर्स ने सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल करा और कहा कि ये जो पीआरपी इंजेक्शन लगाते हैं इस पे बैन होना चाहिए। यह प्लेसिवो है। तो कोई भी ऑडियंस कहीं पे भी जाए मैं नहीं कहूंगा कि इसको कहां जाना चाहिए। अगर वो मेक आउट कर सकते हैं। दे आर मोस्ट वेलकम टू गो एनीवेयर। बट हां अगर टाइमली दे गो टू एन एक्सपर्ट दे कैन सेव टाइम मनी एफर्ट्स एनर्जी एंड गेट द बेस्ट
(42:54) ट्रीटमेंट। तो अगर आपका कोई एसीएल टेयर हुआ है आप प्लीज अल्टरनेटिव थेरेपीस में टाइम वेस्ट मत करिए। वो आपके लिए खराब है। डायरेक्टली एक डॉक्टर के पास जाइए। सो मैंने फॉर एग्जांपल देखा था मैंने देखा था ऋषभ पंत जिनका वो कार एक्सीडेंट हुआ। उनका एसीएल टेयर भी शायद से हुआ है। तो उनको काफी टाइम लगा रिकवर करने में लेकिन वो रिकवर कर गए। सो कितना टाइम यूजुअली लगता है एसीएल रिकवरी में? सो ऋषभ पंत का मल्टीलिगामेंटस इंजरी हुआ था। उनके तीन से चार लिगामेंट टय हुए थे जो एग्जैक्ट डिटेल शेयर नहीं हुए हैं। पर जो हमें पता है फ्रॉम द इंटरनेट एसीएल,
(43:31) पीसीएल और एमसीएल लिगामेंट टय हुआ था। जो एक रेयर केसेस में होता है। मोस्ट कॉमन इज़ एसीएल, फिर एसीएल प्लस पीसीएल और फिर एमसीएल। हाउएवर मेरे पास सबसे ज्यादा सवाल यह आता है कि एसीएल टेयर के बाद कैन आई रिटर्न टू अ स्पोर्ट्स? मेरा एक पेशेंट है ही वांट्स टू क्लाइम द माउंट एवरेस्ट। वो कहता है मैं एसीएल लिगामेंट सर्जरी करूं। आई वांट टू कैन आइम द माउंट एवरेस्ट। ही इज़ इंटू माउंटेनियरिंग। तो नो डाउट 100% रिकवरी रहती है एसीएल सर्जरी के बाद। बट इट टेक्स टाइम। इट इज़ नॉट कि आज हुआ और दो दिन में यू गो। बिकॉज़ द माइंड लूजेस द प्रोप्रायोसेप्शन मसल मेमोरी। तो वो डेवलप
(44:11) करने में टाइम लगता है। नॉर्मली बेस्ड ऑन द रिक्वायरमेंट। आपकी रिक्वायरमेंट क्या है? आपको प्रोफेशनल स्पोर्ट्स में रिटर्न करना है। आपको सिर्फ ऑफिस जाना है। इस पे रिक्वायरमेंट और इस पे रिहब डिपेंड करता है। बट हां 3 महीने में यू कैन लीड अ नॉर्मल लाइफ। सिक्स मंथ्स में यू कैन डू योर पार्शियल रनिंग एंड एवरीथिंग एल्स। प्रोफेशनल स्पोर्ट्स इट मे टेक सिक्स मंथ्स टू 9 मंथ्स। बट यस 100% पॉसिबल है। और अभी आपने देखा ऋषभ पंत भाई सेंचुरी पे सेंचुरी मार रहे हैं। तो इट गिव्स मोर बिलीव टू ऑल दीज़ पीपल कि हां इट इज़ 100% रिकवरी एंड आल्सो वन ऑफ़ द
(44:43) मोस्ट सक्सेसफुल सर्जरीज। ओके। सो एटलीस्ट नाइन मंथ्स नाइन मंथ्स काफी लंबा है वैसे बट नाइन मंथ्स में रिकवर आप हो जाएंगे। फॉर प्रोफेशनल स्पोर्ट्स बट पीपल डु रिकवर इन थ्री टू फोर मंथ्स फॉर अ नार्मल लाइफ। नार्मल लाइफ तीन से चार महीने में बिल्कुल रिकवर कर जाते है। रनिंग ऑन अ ट्रेड मिल इज बैड फॉर योर नीस। विथ ओट। सो ट्रेडमल अगर शॉक ऑब्जर्वर अच्छा नहीं है कैन डीरेंज और डीजनरेट द नीज़। अगर आप रेगुलर ट्रेडमल कर रहे हैं तो आप एक पोजीशन पे कर रहे हैं तो एक पोजीशन पे कर रहे हैं बजाय आप पार्क में अगर कर रहे हैं तो देयर इज़ अ फॉरवर्ड मूवमेंट। तो
(45:20) पार्क में लेस चांसेस ऑफ ऑस्टियो अर्थराइटिस इफ समबडी इज रनिंग डेली वर्सेस अगर कोई ट्रेड मिल कर रहा है तो मुझे पर्सनली लगता है आई कांट कोट द स्टडी और अनस्टडी इट्स माय पर्सनल ओपिनियन कि ट्रेडमिल करने से नी पेन एग्रीगेट होता है। तो हम लोग ने पहले भी बात किया था कि ऑस्टियो आर्थराइटिस में अगर आपको वेट लूज़ करना है लेकिन रन नहीं करना है तो काफी एक अच्छा मेथड है कि आप साइकिल करो या स्विमिंग करो दिस इज़ अ ग्रेट वे टू लूज वेट। अगर रनिंग करेंगे तो बार-बार माइक्रोट्रोटमा होगा। है ना? और फिर अगर उसका अल्टरनेट करना है तो साइकिलिंग वेट
(45:54) तो ऑफलोड कर लेगा बट देन स्टैमिना और रेंज ऑफ मोशन इट विल बी मोर बेनिफिशियल फॉर द जॉइंट्स एंड वेट लूजिंग देन रनिंग। जी ओके। दैट्स अ वेरी रेकमेंडेड साइकिलिंग और स्विमिंग। जी जी। जी अनफॉर्चूनेटली लेकिन बहुत कम लोग साइकिलिंग हमारे इंडिया में एटलीस्ट उतना कल्चर नहीं है। मैं जब वहां बाहर रहता था यूएस में यूके में भी लोग कैजुअली साइकिल करते थे काम पे ऐसी पार्क में चला रहे हैं। इंडिया में बहुत कम है। ऑलमोस्ट कि खाली वो लोअर इनकम लोग के लिए। नॉट इट्स नॉट फॉर एवरीवन। वेयर एस बाहर में सब लोग कर रहे हैं साइकिल। तो वो आई थिंक एक चीज
(46:32) इंडिया में इंकल्केट करना चाहिए। लीड द चेंज। वेस्ट में तो सोशल मीडिया पे हमने ये देखा है कि उनके प्राइम मिनिस्टर भी साइकिल में जा रहे होते हैं। सोशल मीडिया पे कोई पोस्ट आया था। बट देन यहां पे मेरा एक पेशेंट आया जो पिछले छ साल से दिल्ली से गुड़गांव साइकिल पे जाता है और साइकिल पे ही वापस आता है। सिंस लास्ट सिक्स इयर्स। तो फिर मैंने उसकी स्टोरी अपने सोशल मीडिया पे डाली। मैंने लिखा पुरुष या महापुरुष। 90% लोगों ने उसे महापुरुष कहा। बट देन साइकिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इज मस्ट। हम इन इंडिया 100% सो एक एडवाइस है कि जैसे डॉक्टर्स के लिए
(47:09) नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस है या फिर ट्रैवल अलाउंस है या किसी भी गवर्नमेंट एंप्लई के लिए एक ट्रेवल अलाउंस है आई मीन अगर ये हैबिट ऐसे तो हम किसी को नहीं फोर्स कर सकते बट अगर जैसे ट्रैवल अलाउंस मिलता है हाउसिंग अलाउंस मिलता है एचआरए मिलता है जितने भी गवर्नमेंट एंप्लाइजज़ हैं गवर्नमेंट एंप्लाइजज़ को अगर हम एक साइकिलिंग अलाउंस दें दैट दे विल गेट अलाउंस ट्रैवल अलाउंस के अलावा फॉर साइकिलिंग ₹2000 का महीने का। तो मुझे तो लगता है जितने भी गवर्नमेंट एंप्लई हैं अगर वह इलेक्शन विन करने में हेल्प कर सकते हैं उनका टैक्स फ्री करने
(47:42) से अगर उनको एक साइकिलिंग अलाउंस दे तो इंडिया विल हैव ओवरनाइट साइकिलिंग पपुलेशन। ठीक है? तो बोल रहे हो आप कि ₹2000 पर मंथ उनको दे रहे हो साइकिल खरीदने और वो सब के लिए। आई मीन इट्स जस्ट एन ओपिनियन है ना? सी 2000 पर मंथ या व्हाटएवर इज़ राइट द पॉलिसी मेकर्स लाइक यू एंड थिंक टैंक्स कैन थिंक अपॉन इट। अगर एक साइकिलिंग अलाउंस दे क्योंकि ट्रेवल अलाउंस तो गवर्नमेंट दे ही रही है ना। न्यूज़पेपर अलाउंस तो दे ही रही है ना। टेलीफ़ोन अलाउंस तो दे ही रही है ना। अब वो ट्रैवल अलाउंस में अगर उनको ये कहा जाए कि यू कैन यूज़ इट एज अ साइकिलिंग अलाउंस।
(48:13) हम दे बाय अ साइकिल एंड यूज़ अ साइकिल एंड फॉर दैट दे गेट अ इनिशिएटिव और इंसेंटिव। राइट? सो इट विल बी समथिंग कैन बी समथिंग वेरी गुड। इट्स अ ग्रेट पॉइंट। गवर्नमेंट आई थिंक कैन टेक दी स्टेज। वन इज़ कि साइकिलिंग लेंस। हमारे इंडिया में साइकिलिंग लेंस नहीं है। आप साइकिल चला रहे हो आपको डर लग रहा है। कोई गाड़ी आके मार दिया आपको। तो वन इज साइकिलिंग लेंस। सेकंड जो आप बोले कि साइकिलिंग अलाउंस कंपनी अपने एंप्लई को बोल रहा है कि ये ₹00 पर साल या ₹25,000 पर साल या जितना भी अमाउंट हर साल आपको दे रहे हैं अगर आप साइकिल खरीद रहे
(48:48) हो और यूज़ कर रहे हो। इट्स अ वेरी अमेजिंग इनिशिएटिव। एंड आई थिंक नॉट ओनली गवर्नमेंट ये कंपनीज़ भी ले सकते हैं। हां। कैन बी अ रेवोल्यूशन। इफ इन्फ्लुएंसर्स लाइक यू एंड आर स्टार्ट स्पीकिंग अबाउट इट एंड या अब तो ई साइकिल्स भी आ गई हैं। तो पेडल नहीं करना पड़ता है। तो दे आर सोलर्स एंड ई साइकिल्स वेट लॉस भी नहीं होगा फिर। बट क्या पता वेट गेन ही ना हो फिर अगर यूज करना स्टार्ट करें? हां। ओके। तो जितने भी ऑफिस गोवर्स हैं जो कंप्लेन करते हैं कि उनके पास टाइम नहीं है एक्सरसाइज करने का। तो ऑफिस में बैठे-बैठे ये छोटी सी अगर एक्सरसाइज
(49:24) करेंगे तो उनकी नीज़ बहुत ज्यादा स्ट्रेंथन हो जाएगी और उनके एसीएल और नी रिप्लेसमेंट की जो इंसिडेंस है वो बहुत ज्यादा डिले हो जाएंगे। सो ऑफिस में बैठे-बैठे टेबल चेयर तो सबके पास होगा। अपना एक पैर को हवा में रखना है। मैं कॉपी करूंगा आपको जो भी बोल रहा है। हां प्लीज प्लीज आप ही को फॉलो करेंगे। डॉक्टर्स की तो वैसे भी कोई सुनता नहीं है। तो नीस को ऐसे करना है और इसको होल्ड करना है। यह आप टेबल पर बैठ के करें। काउंट टिल 20 अब आप देखेंगे इससे आपका प्रेशर आ रहा है आपकी कॉसेप मसल्स पर। इसके बाद आपको नीचे रख देना है। एंड सेम यू डू फॉर दिस अपोजिट
(50:00) लेग। ये 10-10 के अगर आप सेट करेंगे तो आपकी जो कॉडसेस मसल्स है बहुत स्ट्रांग हो जाएगी। बिकॉज़ जो नी का जितना भी वेट है यह ऑफलोड कर देती है। तो आपने सुना होगा मार्केट में कोई ऑफलोडिंग बसेस आती हैं। अब ऑस्टियो अर्थराइटिस में घुटने आपस में टकराते हैं और वो घुटने खत्म है या कार्टलेज डैमेज है। अब वो आपस में टकराएंगे तो दर्द होगा। तो अगर स्ट्रांग कॉडसेस मसल्स होंगी वो उनको ऑफलोड करेगी तो पेन बहुत ज्यादा कम हो जाएगा। और जिन लोगों को ऑस्टियोअरिस नहीं है उनको ऑस्टियोअर का चांसेस 20 से 25% डिले हो जाएगा। लाइफ में डेवलप होना। तो एवरीडे एक
(50:38) एक्सरसाइज ये करिए। अगर आपके कितना फ्रीक्वेंटली करना चाहिए? रोज ऑफिस जाते ही अपना दिन इससे स्टार्ट करें। क्या दिक्कत है? और लाइक सपोज दिन आप बोल रहे हैं 20 काउंट्स और 10 और 10 बार करना है 20 काउंट्स। और वो 10 बार कर लिए दिन में एक बार तो चलेगा। इट्स चलेगा तो मतलब देअर इज नो एंड टू हेल्थ बट देन वुड बी बेटर। ओके। फॉर समबडी जो बिल्कुल नहीं कर रहा है। इससे कम से कम नीस के तो इंसिडेंस बहुत ज्यादा कम हो जाएंगे। अ दूसरा अह जो लोग ऑफिस नहीं जाते हैं, घर में कोई भी तकिया होगा। जैसे यू हैव अ तकिया। ठीक है? इसको अपने अह हैमस्ट्रिंग के नीचे
(51:13) डालिए। ओके। हां। और पैर सीधा करके इसको दबाइए। इसको दबाइए। जितने भी घर में पेरेंट्स हैं इसको दबाइए। अब आपको कहां पे स्ट्रेच फील हो रहा है? आपको अपनी क्वाड्रासेप्ट पे स्ट्रेच हो रहा है फील? हां। तो ऐसे करके फिर 20 गिनना है। यह आपका पैर यह सपोर्टेड होगा बेड पे जो यह उन लोगों के लिए जो बेड पे बैठ के कर रहे हैं। घर पे जितने भी हमारे पेरेंट्स हैं, मम्मी पापा हैं अगर वो ये करेंगे तो इससे भी आपकी क्वार्टरशिप स्ट्रेंथिंग होगी। बेड पे लेटे-लेटे हो जाएगी ये। तो इसको भी वही 20 गिनना और 10 बार ये करना और 10 बार उस वाले पैर में करना।
(51:45) ओके? और ठीक है। हां। और थर्ड जो है अगर आप करना चाहें तो आप खड़े होके घर में कोई भी घर में कोई भी स्टेयरकेस हो तो स्टेयरकेस के कोने पे पैर ऊपर नीचे ऊपर नीचे तो क्वाड्रासेप जब ऊपर से ऑफलोड कर रही होती है हमारे नी पेन को तो हमारी काफ मसल्स नीचे से नी पेन को लोड करेगी इससे काफ मसल बहुत स्ट्रांग होंगी तो अगर टू बिगिन विद बहुत तीन सिंपल सी चीजें हैं। ये एक्सरसाइजज़ हैं। तो दिस विल रियली हेल्प इन कंपैरिजन टू जो कोई भी एक्सरसाइज नहीं कर रहा है। तो विल बी वेरी इफेक्टिव।
(52:30) ये थर्ड वाला वापस कर सकते हैं एक बार। सो आपको घर में कोई भी स्टेयरकेस है। स्टेयरकेस पे ऐसे कोने पे खड़ा होना है जैसे काफ मसल पे ऊपर, नीचे, ऊपर नीचे। यस। एक्सैक्टली। बट एक-एक पैर के साथ अगर करेंगे 10 टाइम्स ऊपर, 10 टाइम्स नीचे। हां। तो किसी चीज को पकड़ लेना इसमें। होल्ड समथिंग। कहीं ऐसा ना हो कि घुटने सही के चक्कर में आप दोबारा गिर जाए तो तब मुझे ब्लेम मत करना। ऐसे करेंगे तो यस नीज़ बहुत हेल्दी होंगे इनसे। सो दीज़ आर द थ्री एक्सरसाइजेस व्हिच यू कैन डू ताकि आपका ऑस्टियो आर्थराइटिस से पेन कम हो। बिल्कुल। और ऑस्टियो अर्थराइटिस डेवलप भी
(53:07) ना हो। ओके? नी स्ट्रांग हो। तो ये सिर्फ उन लोग के लिए नहीं है बेटा है। हां जी। सो ये तीन एक्सरसाइज सिर्फ उन लोग के लिए नहीं है जो लोग का ऑस्टियो आर्थराइटिस ऑलरेडी है। ये उन लोग के लिए भी है जो लोग के ऑस्टराइटिस है भी नहीं और बस उन्हें स्ट्रेंथन करना है ताकि उन्हें कभी भी लाइफ में ऑस्टियो अर्थराइटिस हो भी ना। जी बिल्कुल सही। दिस इज़ आल्सो प्रिवेंटिव। जी वेरी प्रिवेंटिव। डॉक्टर द मोस्ट कॉमन फॉर्म ऑफ एक्सरसाइज फॉर मोस्ट इंडियंस है वॉकिंग? तो इज वॉकिंग गुड फॉर नीस और बैड फॉर नीज़? देयर आर टू कंट्रा इंडिकेशंस इन द क्वेश्चन। हम इंडियंस सोचते हैं वॉकिंग इज
(53:47) एक्सरसाइज। बट देन जैसे अगर मेरी मदर है मैं कहूंगा कि एक्सरसाइज कर लो तो कहेंगे हम वॉक पे जा रहे हैं। बट वॉकिंग इज अ लीजर वॉक। इट्स गुड फॉर मेंटल हेल्थ, इट्स गुड फॉर हार्ट। इट आल्सो नरिशेस द नी जॉइंट। बिकॉज़ चलती का नाम गाड़ी है ना? और जितना चलेंगे और नीज़ का काम है चलना तो ब्लड सप्लाई नरिश होंगे। बट देन वॉकिंग को एक्सरसाइज के साथ कंफ्यूज ना करें। जब तक उनकी स्ट्रेंथनिंग नहीं होगी तो वो वॉकिंग हेल्प नहीं करेगी और वॉक भी अगर करना है तो शुड बी वॉक्ड इन अ पार्क रादर देन ऑन द कंक्रीट। तो इसलिए आप अब देख रहे होंगे पार्कक्स में सिंथेटिक ट्रैक्स आ गई हैं
(54:26) जो ऑब्जर्व करती हैं। तो यस वॉकिंग इज नो डाउट हेल्पफुल बट देन शुड बी हैविंग स्ट्रेंथनिंग साथ में और बी डन इन द पार्क। सो वॉक करना अच्छा है लेकिन आप पार्क में करिए घर पे नहीं और वॉकिंग को एक्सरसाइज मत सोचिए। एक्सरसाइज के लिए आपको और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग वो सब करना पड़ेगा। आप बोले वॉक करो पार्क में। मैं मुंबई में रहता हूं। यहां पार्क ही नहीं है। लिटरली मैं वॉक करने के लिए मॉल जाता हूं कि मॉल के चक्कर काट रहा हूं कि यहां पार्क ही नहीं है कहीं मतलब तो वो एक दूसरा चैलेंज है। वो गवर्नमेंट को वो भी सोचना चाहिए। जी। बट देन एक स्पेशल फॉर्म ऑफ वॉकिंग भी होती
(55:05) है। बैकवर्ड वॉकिंग। तो बैकवर्ड वॉकिंग आल्सो हैज़ बिकॉज़ जब हम फ्रंट वॉक कर रहे होते हैं तो आगे जो हमारे एंटीरियर बॉडी की मसल्स हैं क्वाड्रेसिप्स वगैरह वो ज्यादा यूज़ होती हैं। तो अगर बैकवर्ड वॉकिंग करेंगे तो जो हैमस्ट्रिंग ग्लूड्स काफ मसल्स ये स्ट्रेंथन होती हैं तो इस दे ये बैकवर्ड वॉकिंग शो करती है कि नी पेन और नी स्ट्रेंथिंग में हेल्प करती है। तो बैकवर्ड वॉकिंग इज आल्सो वेरी हेल्पफुल। जब मैं लोग को बैकवर्ड वाकिंग कर मुझे लगता था कि यह कोई अंधविश्वास वाला चीज होगा। बट आई डिड नो इट्स साइंटिफिक। हां, इट इज साइंटिफिक आल्सो।
(55:41) ओके। सो वन लास्ट क्वेश्चन डॉक्टर इंडिया एज वी सेड इज द नी पेन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड? सो, गवर्नमेंट क्या कर सकता है हमें नी पेन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड से हटाने और हेल्थ कैपिटल बनाने? गवर्नमेंट शुड फर्स्ट ऑफ ऑल बिकॉज़ इंडियंस बहुत स्मार्ट हैं। मेरा मानना है। और इंडियंस आज के टाइम पर बिकॉज़ ऑफ सोशल मीडिया बिकॉज़ ऑफ इन्फ्लुएंसर्स बहुत हेल्थ अवेयर हो गए हैं। सो गवर्नमेंट अगर सिर्फ अवेयरनेस भी प्लान करेगी या अवेयरनेस को प्रमोट करेगी तो इंडियंस आर सो स्मार्ट दैट दे विल फाइंड आउट देयर वे। द सेकंड थिंग दैट गवर्नमेंट कैन डू इज़ टू अवॉइड क्वकरी इन मेडिसिन।
(56:23) ओके। राइट? तो आई थिंक समवेयर दैट आल्सो इज कॉजिंग अ सीवियर डीजनरेशन और सीवियर डिफिटी जो अर्ली लेवल पे पकड़ी जा सकती थी। है ना? सो क्वालिफाइड मेडिकल प्रोफेशनल्स को प्रमोट करना और हेल्थ अवेयरनेस को बताना। एंड स्कूल लेवल में भी अगर पीटी पीरियड होता है तो उसमें इफ दे जस्ट फोकस ऑन द नी स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइजज़ स्कूल पीटी पीरियड में ही तो नीचे से ही हमारे बच्चों के जो है स्ट्रंगर नीज़ आते रहेंगे। तो एट स्कूल लेवल ओनली इफ दे स्टार्ट टेलिंग देम अबाउट द नी एक्सरसाइजज़ेंट ऑफेंस ऑफ़ नीज़ जैसे फिर इंडिया एक बहुत स्ट्रांग आईटी सेक्टर में फ़ बना, साइंटिस्ट में बना,
(57:05) डॉक्टर्स में बना, हेल्थ में भी बनेगा। अगर स्कूल लेवल पे ही इंडिया इज़ ऑलरेडी डूइंग इट। विटामिन डी फर्टिफिकेशन वगैरह और करें और नी स्ट्रेंथनिंग के बारे में बताएं तो इट विल बी इवन बेटर। थैंक यू सो मच डॉक्टर। वेरी वेरीरी इनसाइटफुल। आई एम श्योर सब लोग ने बहुत कुछ आज सीखा है नी के बारे में। हम लोग यूजुअली नी के बारे में उतना सोचते नहीं है डे टू डे लाइफ में। चेहरे के बारे में सोचते हैं। बाल के बारे में सोचते हैं। नी के बारे में नहीं सोचते हैं। लेकिन आज बहुत कुछ सीखे हैं हम। थैंक यू सो मच शौक। थैंक यू सो मच। थैंक यू फॉर हैविंग मी। और
(57:35) आपके प्लेटफार्म से बिकॉज़ लाखों लोग करोड़ों लोग इंपैक्ट हो रहे हैं। मैंने भी वो शुगर वाला आपका देखा था। और डॉक्टर होने के बावजूद भी अह डॉक्टर होने के बावजूद भी वी वर कंज्यूमिंग सो मच शुगर एवरीडे नाउ एंड देन। बट देन सिंस वी सॉ वर ईल्स। हमें पता है उसके बैड इफेक्ट्स क्या हैं। बट फिर भी इट इज़ बिकम एन इंटीग्रल पार्ट। लोग इतने अवेयर हो गए हैं। दे आर अवॉयडिंग शुगर एंड फेक फ़ूड्स। सो थैंक्स टू यू आल्सो एंड थैंक्स फॉर टेकिंग दिस इनिशिएटिव। थैंक यू सो मच। थैंक यू सो मच। मीन्स अ लॉट टू मी। थैंक यू। याद रखिएगा लाइफ स्पैन और हेल्थ स्पैन दो
(58:10) अलग चीज होते हैं। इंडिया में बहुत सारे लोग का लाइफ स्पैन 80 90 इयर्स है। लेकिन उनका हेल्थ स्पैन सिर्फ 50-60 इयर्स है। क्योंकि उनका नीज़ 50-60 के ऐज के बाद खराब हो जाता है। अपने नी के हेल्थ के लिए आप न्यूट्रिशन पे ध्यान दीजिए। विटामिन डी लीजिए। वेट कंट्रोल में रखिए। और याद रखिएगा अगर आपके नी में पेन हो रहा है तो कोई अल्टरनेटिव थेरेपी या अल्टरनेटिव मेडिसिन मत करिए। सीधा डॉक्टर के पास जाइए।
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