Friday, June 26, 2026

5 Daily Habits Destroying Your Brain Health and Memory (Most People Do All 5)

5 Daily Habits Destroying Your Brain Health and Memory (Most People Do All 5)

Author Name:Satvic Movement

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@SatvicMovement

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=LNBn2BWWtU0



Transcript:
(00:00) इस वीडियो में आप जानेंगे पांच ऐसी हैबिट्स जो साइलेंटली आपकी ब्रेन हेल्थ, मेमोरी और फोकस को डिस्ट्रॉय कर रही है। फ्रॉम बैड टू वर्स्ट। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप फोन अनलॉक करते हो और तुरंत भूल जाते हो क्यों किया? या पूरा पेज पढ़ने के बाद रिअलाइज़ करते हो कि एक शब्द भी अंदर नहीं गया। या शाम तक मेंटली इतना थक जाते हो जबकि दिन में ज्यादा कुछ भी नहीं किया। हमें लगता है कि यह सब होना तो एकदम नॉर्मल है। लेकिन वर्ल्ड के टॉप न्यूरोलॉजिस्ट्स बता रहे हैं कि ये अर्ली ब्रेन डैमेज के साइन हैं। जिनके पीछे हैं यही पांच हैबिट्स। शुरू करते हैं नंबर
(00:37) फाइव से मल्टीटास्किंग। मतलब ब्रेन से दो एनर्जी रिक्वायरिंग टास्क साथ में करवाना। मान लो आप किसी से बात कर रहे हो। लेकिन हर 5 मिनट में WhatsApp खोल के चेक करे जा रहे हो। कोई मैसेज तो नहीं आया? या आप खाना खा रहे हो लेकिन साथ-साथ किसी को टेक्स्ट भी करे जा रहे हो या पढ़ाई करते-करते Instagram पे स्टोरी डाल दी और हर कुछ मिनट में देखते हो कितने व्यूज आए या शायद जैसे अभी भी आप इस वीडियो को देखतेदेखते साइड में कुछ काम कर रहे हो। लेकिन ये मल्टीटास्किंग से ब्रेन में होता क्या है? यही समझने के लिए हमने अपनी टीम के साथ एक बहुत इंटरेस्टिंग
(01:13) एक्सपेरिमेंट किया। ऑलराइट। अब आप सबके पास एक पेपर ऑन पेन है। आपका टास्क है। आपको इस पे ए से लेकर जेड तक पहले सब अल्फाबेट्स लिखने है। वो पूरा होने के बाद वन से लेके 26 तक सब नंबर्स जितना जल्दी हो सके। योर टाइम स्टार्टस नाउ। डन डन। ओके? डन। ऑलराइट। तो आपको ये करने में लगे ऑलमोस्ट 35 सेकंड्स। अब हम उसी एक्सरसाइज को एक बार फिर करेंगे लेकिन एक ट्विस्ट के साथ। इस बार आपको पहले एक अल्फाबेट लिखना है। फिर एक नंबर। फिर एक अल्फाबेट फिर एक नंबर। बार-बार स्विच करते जाना है। रेडी? यस। योर टाइम स्टार्ट्स नाउ।
(02:05) डन। ओके। डन। डन। इस बार आपको वो सेम चीज करने में लगा ऑलमोस्ट 55 सेकंड्स यानी नियरली डबल टाइम। आपको पता है क्यों? क्योंकि सेकंड राउंड में जब मल्टीटास्किंग करी ब्रेन डीप फोकस मोड में जा ही नहीं पाया। और यही एक्जेक्टली रोज हमारी लाइफ में भी होता है। जब हमारी ज़ूम मीटिंग चल रही होती है और हम साथ-साथ ग्रोसरी ऑर्डरिंग भी कर रहे होते हैं। या जब हम अपने लैपटॉप पे 10 टैब्स खोल के रखते हैं और एक से दूसरे पे जंप करते रहते हैं। अगर हमारे पास 100 यूनिट्स ऑफ फोकस है वो दो या तीन चीजों के बीच स्प्लिट रहता है। पूरा दिन और पूरी
(02:42) लाइफ। रिजल्ट हां, सब कामों की स्पीड तो गिरती ही है। जैसे आपने उस एक्सपेरिमेंट में देखा। पर असली डैमेज यहां होता है। क्योंकि मल्टीटास्किंग करने से हम हर वक्त अपने ब्रेन को एक ही ट्रेनिंग दे रहे हैं कि किसी भी चीज को अपना आधा फोकस देना नॉर्मल है। पार्शियल अटेंशन देना नॉर्मल है। और महीनों ऐसा करते-करते हमारी ब्रेन की फोकस मसल इतनी श्रिंक हो जाती है कि हम किसी चीज को फुल फोकस फुल अटेंशन दे ही नहीं पाते। डॉन से ज्यादा मुश्किल तो आपकी फोकस को पकड़ना हो गया है। लेकिन याद रखना विराट कोहली आधे फोकस से क्रिकेट खेलता तो
(03:16) कभी सेंचुरी ना मारता। ए आर रहमान आधे फोकस से लिखते तो आज हमारे पास उनके गाने ना होते। स्टीव जॉब्स आधे फोकस से काम करते तो हमारे हाथ iPhone ना होता। दुनिया का कोई भी ग्रेट काम आधा फोकस करके नहीं हुआ। तो स्यूशन क्या है? मोनोटास्किंग यानी एक टाइम पे एक काम करना। उसमें पूरा अब्सॉर्ब हो जाना। मीटिंग में हो तो बस मीटिंग अटेंड करो। खाना खा रहे हो तो सिर्फ खाना खाओ। कोई आपसे बात कर रहा है तो आप उनको अपनी पूरी प्रेजेंस दे के सुनो। कुछ काम कर रहे हो और बीच में कोई नया आईडिया आता है आप उस पे एकदम से जंप मत मारो। उसको लिख लो और बाद में उस पे
(03:54) वापस आ जाओ। अब अगली हैबिट पे बढ़ने से पहले मैं आपको एक बहुत प्रैक्टिकल चीज बताना चाहती हूं। मल्टीटास्किंग को बंद और अपनी ब्रेन पावर को वापस लाने के लिए अपने फोन की सारी नोटिफिकेशंस बंद कर दो। सोचो आप किसी काम पे फोकस कर रहे हो और अचानक ट्रिंग फैमिली ग्रुप में किसी का मैसेज आता है और आप अचानक उस पे डिस्ट्रैक्ट हो जाते हो। आप कुछ पढ़ रहे हो और Amazon से नोटिफिकेशन आती है। 30% ऑफ सेल कुछ खरीदना भी नहीं था लेकिन फोकस पूरा टूट के वहां डायवर्ट हो जाता है। ये एप्स दिन भर आपके कंधे पे टैप करती रहती है। बिना आपकी परमिशन के बिना किसी काम के।
(04:31) तो क्या करना है? फोन की सेटिंग्स में जाओ। फिर नोटिफिकेशंस पे और एक-एक करके सब बंद कर दो। सोशल मीडिया, Zomato, Blinkkit, शॉपिंग एप्स, स्पोर्ट्स अलर्ट्स सब। मैंने पर्सनली सिर्फ फोन कॉल्स और एक दो क्रिटिकल एप्स छोड़ के बाकी सब ऐप की नोटिफिकेशंस बंद करी हुई है। ए्जायटी होती है ना हमको कि कोई मैसेज या अपडेट मिस तो नहीं हो जाएगा। वेल, उसके लिए दिन में तीन-चार बार जाके देख लो अपनी मर्जी से। लेकिन इन एप्स के हाथ में विक्टिम मत बनो। जस्ट रिमेंबर मल्टीटास्किंग चिप्स योर ब्रेन। मोनोस्किंग स्ट्रेंथ्स इट। बढ़ते हैं हैबिट नंबर फोर पे। यहां से हर
(05:08) नेक्स्ट हैबिट का आपकी ब्रेन हेल्थ पे डैमेज और भी गहरा है। डूम स्क्रोलिंग। मतलब फोन उठाना यह सोच के कि सिर्फ दो मिनट सोशल मीडिया देखेंगे। लेकिन कब आधा घंटा निकल जाए पता ही ना लगना या सुबह उठकर सोचना कि फोन एक बार चेक कर लेते हैं। और 20 मिनट तक स्क्रोल ही करते जाना या रात को नींद में खुद को कहना बस एक और रील। यह डूम स्क्रोलिंग से हमारे ब्रेन में कुछ ऐसा होता है जो सोशल मीडिया कंपनीज आपसे छुपाने की पूरी कोशिश करती हैं। आपका ब्रेन एक घर जैसा है जिसमें बहुत सारे रूम्स हैं। अब हर टॉपिक का अलग रूम है। खाना, फैशन, न्यूज़, एंटरटेनमेंट,
(05:43) फिटनेस। अब स्क्रोल करते-करते होता क्या है? एक रील खाने की। तो ब्रेन की एनर्जी दौड़ी खाने के रूम में। अगला वीडियो किसी का डांस। तो ब्रेन की एनर्जी दौड़ी एंटरटेनमेंट के रूम में। अगला ब्रेकिंग न्यूज़। तो वही एनर्जी गई न्यूज़ के रूम में। अगला किसी की शादी, अगला फिटनेस टिप, अगला कॉमेडी क्लिप, अगला ब्यूटी टिप। तो 1 मिनट में 10 अलग-अलग रूम्स, 10 अलग-अलग टॉपिक्स, 10 बार ब्रेन की एनर्जी एक जगह से दूसरी जगह भागे जा रही है। नॉनस्टॉप। अगर आप ऐसे भागते रहो तो क्या होगा? वही होता है आपके ब्रेन के साथ। कुछ मिनट स्क्रोलिंग के बाद ही वो एग्जॉस्ट हो जाता
(06:21) है और यही है सबसे बड़ी आयरनी। क्योंकि जब हम दिन भर काम करके थक जाते हैं, सोचते हैं चलो थोड़ा चिल कर लेते हैं और स्क्रोल करना चालू। ये सिर्फ आपके साथ नहीं होता, मेरे साथ भी होता है। हम सोचते हैं कि हम रेस्ट कर रहे हैं। लेकिन अब आप ही बताइए कि रेस्ट हुआ या ब्रेन के लिए सबसे एनर्जी ड्रेनिंग चीज। याद रखना जैसे-जैसे आप करते हो स्वाइप वैसे-वैसे ब्रेन होता रहता है प्रोवाइड। तो इसका सशन क्या है? वेल बेस्ट सशन है रोज 12 आवर्स की फास्टिंग। सुभा जी आपको फास्टिंग से प्यार है क्या? इसका स्क्रोलिंग से क्या कनेक्शन? अरे मैं
(06:59) खाने वाली फास्टिंग की बात नहीं कर रही। 12 आवर डिजिटल फास्टिंग की बात कर रही हूं। सिंपल वर्ड्स में बोलूं तो रात 8:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक किसी सोशल मीडिया से इंटरेक्ट मत करो। चाहे वो हो Instagram, YouTube, Facebook, Twitter, Snapchaat या न्यूज़ चैनल्स। यह आपके ब्रेन को आपकी तरफ से पहला गिफ्ट होगा। द गिफ्ट ऑफ साइलेंस। लेकिन यह प्रैक्टिकल होगा कैसे? यह वीडियो देखने के बाद दो दिन तो बड़ा जोश रहेगा लेकिन फिर सब वापस वही। बिल्कुल राइट। अगर आपने डूम स्क्रोलिंग की आदत को तोड़ना अपनी विल पावर पे छोड़ दिया तो फेलियर पक्का है। क्योंकि आप एक साइड
(07:33) हो और दूसरी साइड पे सिलिकॉन वैली की पूरी सेना हजारों इंजीनियर्स जिनकी दिन रात एक ही जॉब होती है। आपको इन एप्स से हुक्क रखना। तो मोटिवेशन पर रिलाई नहीं कर सकते। इंस्टेड एक सिस्टम सेट करना होगा जिससे स्क्रोलिंग की आदत यूं छूट जाए। रिजल्ट ऑफ वि आपका ब्रेन एकदम शार्प और फोकस्ड रहने लगेगा। यह सिस्टम है रोज 12 घंटे के लिए सोशल मीडिया एप्स को ब्लॉक कर देना। इसके लिए मल्टीपल एप्स टेस्ट करने के बाद हमारी टीम को जो बेस्ट लगी वो है Oppo। यह फ्री है iPhone और Android दोनों पे। ऐप के सेकंड टैब पे जाके ऐप लिमिट पे क्लिक करो।
(08:10) फिर क्रिएट स्ेड्यूल पे। अपनी डिजिटल फास्टिंग की विंडो सेलेक्ट करो। सारे डेज सेलेक्ट करो और जो सोशल मीडिया एप्स ब्लॉक करनी है उनको सेलेक्ट करो। अब इन 12 घंटों में यह एप्स खुलेंगे ही नहीं। हां, एक और इंपॉर्टेंट चीज बाकी 12 घंटों के लिए भी सोशल मीडिया एप्स पे एक डेली टाइम लिमिट सेट करो। फॉर एग्जांपल Instagram के लिए रोज 15 मिनट की लिमिट। अब 15 मिनट स्क्रोलिंग के बाद वो आपको और स्क्रोल करने ही नहीं देगा। यह कुछ ही चेंजेस करने से होगा क्या? जब आप सुबह उठोगे पहला ख्याल आपका अपना होगा। किसी और की रील का नहीं। वो ख्याल आने लगेंगे जो स्क्रोल
(08:45) करते वक्त कभी नहीं आते। आपके बेस्ट आइडियाज, आपके सवालों के जवाब, वो बिना वजह की ए्जायटी खत्म होने लगेगी। वो रेस्टलेसनेस, वो फीलिंग कि आप हमेशा कुछ मिस कर रहे हो। सब धीरे-धीरे जाने लगेगी। अगर मल्टीटास्किंग और डूम स्क्रोलिंग ब्रेन को इतना नुकसान करता है तो बाकी तीन हैबिट्स क्या है जिनका नुकसान और भी ज्यादा है। आपको सच बोलूं तो वो फर्स्ट हैबिट ऐसी है जिसके लिए मैं खुद गिलती हूं। लेकिन पहले देखते हैं हैबिट नंबर थ्री। फॉलोइंग डिजिटल चंक। डूम स्क्रोलिंग का मतलब था बहुत ज्यादा क्वांटिटी में कंटेंट कंज्यूम करना। लेकिन
(09:20) डिजिटल जंक एक पूरी अलग प्रॉब्लम है जिसका मतलब है फालतू का जीरो वैल्यू कंटेंट कंज्यूम करना। डिजिटल जंक में क्या आता है? ब्रेनलेस मीम्स। सेलिब्रिटी गॉसिप जैसे एयरपोर्ट पे किसी एक्टर की वीडियो जहां पापा राजसी उनको फॉलो कर रहे हो। बाय द वे आपको पता है ना आधे से ज्यादा टाइम ये नकली होता है। सेलिब्रिटीज खुद उन वीडियोग्राफर्स को बुलाते हैं। इसके अलावा गेट रेडी विथ मी वीडियोस। प्रैंक वीडियोस, रोस्ट वीडियोस, और आजकल तो एआई एनिमेटेड वीडियोस जहां लौकी से लेकर गोभी तक सब बात कर रहे होते हैं। अगर आप टीवी देखते हैं तो ऐसे शोज़
(09:59) जिनमें लोग लड़ रहे होते हैं। रोने का नाटक कर रहे होते हैं। एक दूसरे के पीछे गसिप कर रहे होते हैं। वो मूवीस जिनमें सिर्फ वायलेंस होता है। खून, मार, थमकी। मुझे पता है अभी आप क्या सोच रहे हो। यही ना? अरे लेकिन पूरा दिन काम करके रात को माइंड थोड़ा एंटरटेनमेंट मांगता है। थोड़ा बहुत ही तो देखते हैं। क्या फर्क पड़ता है? आप इमेजिन करो आप एक फ्राइड समोसा उसके ऊपर कोक उसके ऊपर एक शुगर से भरी जलेबी अपनी बॉडी में डाल दो। जितना यह आपकी बॉडी को डैमेज करता है, उतना ही यह डिजिटल जंक आपके ब्रेन को डैमेज करता है। एक रिसर्च स्टडी में 63 यंग एडल्ट्स को दो ग्रुप्स
(10:37) में डिवाइड किया गया। पहले ग्रुप ने 15 मिनट तक नॉर्मल Instagram फीड देखी। दूसरे ग्रुप ने 15 मिनट तक सिर्फ जंक फूड कंटेंट की फीड देखी। बाद में दोनों से क्वेश्चनिंग की गई। जो ग्रुप जंक फूड वाली फीड देख रहा था उन्हें ज्यादा अनहेल्दी फूड की क्रेविंग्स आई। साथ ही ज्यादा हंगर भी और ज्यादा स्ट्रेस और सैडनेस भी। रिस्चर्स का इससे यह कंक्लूजन था कि जो आप स्क्रीन पे देखते हो वो डायरेक्टली अफेक्ट करता है कि आप क्या फील करते हो और क्या डिजायर करते हो। गसिप देखोगे तो आप खुद गॉसिप करने लगोगे। किसी की हॉलिडे देखते रहोगे तो अपनी लाइफ छोटी लगेगी। वायलेंस
(11:15) देखोगे तो अंदर वायलेंस फील होगा। तो देखा जाए तो यह जंक कंटेंट आप नहीं कंज्यूम कर रहे। असल में वो कंटेंट आपको कंज्यूम कर रहा है। तो क्या हम सोशल मीडिया देखना बंद कर दें? कॉनेंट देखना छोड़ दें? नहीं। आपको कंटेंट को क्विट नहीं स्विच करना है। सोशल मीडिया की बात करें तो अपनी फीड को एक हाई वैल्यू फीड में बदलो जो आपके ब्रेन को डिप्लीट नहीं नरिश करें। जो पेजेस डिजिटल जंग शेयर कर रहे हैं उन्हें आज ही अनफॉलो करें और वो पेजेस और चैनल्स जिनसे आपको सच में कुछ सीखने को मिले जो वैल्यूुएबल इनफेशन या स्किल्स शेयर कर रहे हैं उन्हें फॉलो करो। उनमें से एक ऐसा
(11:53) चैनल जो आप ऑलरेडी देख रहे हो वो है सात्विक मूवमेंट। यहां हम हर महीने ऐसी वीडियोस आप तक लाते हैं जो आपकी हेल्थ और आपके ब्रेन दोनों को बदलने की ताकत रखती है। तो सब्सक्राइब जरूर करें ताकि यह सफर यहां खत्म ना हो। दूसरा ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पे भी आप क्या देखते हैं उसको केयरफुली चूज़ करो। कुछ मूवीज होती है टाइमपास मूवीस। देखते वक्त तो मजा आता है लेकिन एंड होने के बाद आपको कंपैरिजन, ईगो, फियर जैसी फीलिंग्स फील होती है। इनको बहुत ज्यादा देखने से हमारा ब्रेन लिटरली रोट होने लगता है। दूसरी तरफ कुछ मूवीज होती है ट्रांसफॉर्मेटिव मूवीस। ये
(12:27) भी आपको एंटरटेन जरूर करती है लेकिन अंदर बहुत कुछ जगा भी देती है। जैसे कोई स्टोरी जो आपको महीनों मोटिवेट करे। मैं ये नहीं कह रही कि कुछ लाइट हार्टेड या टाइम पास कभी मत देखो। मैं खुद देखती हूं लेकिन वो एक एक्सेप्शन है। महीने में एक बार नॉर्म नहीं। मुझे पर्सनली जो मूवीज आज तक सबसे ज्यादा ट्रांसफॉर्म करी है मैंने उनकी एक लिस्ट बनाई है आपके लिए और इस लिस्ट को इस वीडियो के नीचे डिस्क्रिप्शन में अटैच कर दिया है। एंड ऑफ द डे अगर आपको एक शार्प ब्रेन चाहिए तो अपनी कंटेंट डाइट का उतना ही ध्यान रखना होगा जितनी अपनी फूड डाइट
(13:01) का। आप रैंडमली ऐसी कुछ खाते नहीं हो ना? तो रैंडमली कुछ भी देखते क्यों हो? चलिए बढ़ते हैं सेकंड वर्स्ट हैबिट पे। लेकिन पहले मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहती हूं। देखते हैं आप सही बता पाते हैं कि नहीं। यह है एक कमरा जिसमें एक कुर्सी पर ये सब चीजें रखी है। एक सिगरेट का पैक, एक अल्कोहल की बोतल, एक बड़ा सा बर्गर और एक फोन। अगर मैं आपसे पूछूं, इनमें से आपके ब्रेन के लिए सबसे ज्यादा अनहेल्दी चीज कौन सी है? आप क्या बोलोगे? आप में से ज्यादातर लोग सिगरेट या अल्कोहल की तरफ पॉइंट करोगे या शायद बर्गर भी। लेकिन इन सबके नेगेटिव इफेक्ट्स के बारे
(13:36) में तो आप ऑलरेडी जानते हैं और इन्हें लिमिट भी करने की कोशिश करते हैं। एक्चुअली इनमें से सबसे बड़ी कल्पेट है यह कुर्सी। हम अपना पूरा दिन एक कुर्सी से दूसरी कुर्सी पर बैठे-बैठे बिताते हैं। सुबह उठते हैं, बेड पर बैठते हैं। बाथरूम गए तो टॉयलेट पे बैठे हैं। ब्रेकफास्ट कर रहे हैं तो टेबल पे बैठे हैं। ऑफिस जाते हैं तो कैब या मेट्रो पे बैठे हैं। काम करते हैं तो पूरा दिन डेस्क पे बैठ के। घर आते हैं तो सोफा पे बैठ जाते हैं। और रात को फाइनली बेड में वापस। ऑल डे लॉन्ग वी आर प्लेइंग म्यूजिकिकल चेयर्स नॉट इन अ बर्थडे पार्टी बट इन आवर
(14:15) रियल लाइफ। और यही है हमारी सेकंड हैबिट जो आपके ब्रेन हेल्थ और मेमोरी को कमजोर कर रही है। लिविंग ग्लूड टू अ चेयर। आपने कभी नोटिस किया है कोई वर्कआउट करने से पहले चाहे आप खुद को कितना भी फोर्स करके क्यों ना लाओ करने के बाद आपको हमेशा बहुत अच्छा फील होता है। एक खुशी सी फील होती है। ये एक कोइंसिडेंस नहीं है। ये इसलिए होता है क्योंकि जब आप मूव करते हो अपनी बॉडी को आपका ब्रेन तुरंत तीन पावरफुल हॉर्मोंस रिलीज करता है। एंडोरफिंस, डोपामिन और सेरेटोनिन। इन्हें कहते हैं हैप्पी हॉर्मोंस। ये वही केमिकल्स हैं जो आपके मूड को अपलिफ्ट करते हैं जो आपको
(14:53) मोटिवेटेड फील कराते हैं। इनफैक्ट ड्यूक यूनिवर्सिटी में एक स्टडी की गई जिसमें डिप्रेस्ड पेशेंट्स को लिया गया। उनको अलग-अलग ग्रुप्स में बांट दिया। पहले ग्रुप ने एंटी डिप्रेसेंट पिल्स ली। दूसरे ग्रुप ने सिर्फ एक्सरसाइज करी। 4 महीने बाद आपको पता है क्या हुआ? दोनों ग्रुप्स में सेम इंप्रूवमेंट पाई। इसीलिए मल्टीपल रिसर्च स्टडीज ने कंक्लूड किया है कि रेगुलर एक्सरसाइज डिप्रेशन को ट्रीट करने के लिए एंटी डिप्रेसेंट पिल्स जितनी इफेक्टिव है। दूसरी तरफ जब आप हफ्तों कोई मूवमेंट नहीं करते। यह हैप्पी हॉर्मोंस प्रोड्यूस ही नहीं होते। इसीलिए सुबह उठ के दिन के लिए
(15:30) एक्साइटेड नहीं फील होता। काम करने की कोशिश करते हैं लेकिन ब्रेन एकदम स्लगिश रहता है। ब्रेन फॉग इतना होता है कि एक सिंपल डिसिशन लेने में इतना समय लग जाता है। सो रिमेंबर मूवमेंट इज वन ऑफ द बेस्ट मेडिसिंस फॉर योर ब्रेन। अगर आप मूवमेंट को अपनी डेली लाइफ का हिस्सा बनाना चाहते हो तो हमने सात्विक ऐप पे रिसेंटली डेली योगा क्लासेस शुरू करी है। मतलब हर रोज एक 45 मिनट्स का योगा सेशन जो आप अपने घर से कर सकते हैं। इनको लीड करते हैं हमारे योगा विंग के लीडर्स राधिका और अक्षय हमारा इससे एक ही इंटेंशन है कि ये नॉलेज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। अगर आप
(16:06) शुरू करना चाहते हो तो सात्विक ऐप डाउनलोड करके एनरोल कर सकते हो। ऑलराइट मूविंग ऑन आपको क्या लगता है? वो कौन सी हैबिट है जो ब्रेन हेल्थ को सबसे ज्यादा डैमेज करती है? इन चारों से ज्यादा? मैं आपको बताऊं उससे पहले आपके लिए तीन सवाल जो आपको यस या नो में आंसर देने हैं। क्या सुबह अलार्म बजने पर आप उसको बार-बार स्नूस करते रहते हैं? क्या दिन में चाय या कॉफी पीने के बिना आपका काम ही नहीं चलता? क्या कभी ऐसा होता है कि आप किसी से मिले और 5 मिनट बाद उनका नाम ही भूल गए? अगर आप हार ऑर्ड कर रहे थे तो मतलब आप भी यह हैबिट कर रहे हैं। कटिंग योर स्लीप शॉट और नहीं
(16:42) सिर्फ ज्यादा सोने से यह प्रॉब्लम सॉल्व नहीं होगी। आपको स्लीप की गोल्डन विंडो में सोना होगा। तभी ब्रेन ऑप्टिमली काम करेगा। क्या है ये विंडो? जिससे पहले मैं आपको बताऊं। आपको पता है जब आप सो रहे होते हो, आपके ब्रेन के अंदर एक बहुत ही माइंड ब्लोइंग प्रोसेस चल रहा होता है। पूरा दिन आप सोचते हैं, काम करते हैं। इससे ब्रेन सेल्स वेस्ट प्रोड्यूस करते हैं। जो ब्रेन के अंदर जमा होता रहता है। इन्हें कहते हैं बीटा एमेलॉयड। अब सोते वक्त ब्रेन सेल्स फिजिकली छोटे हो जाते हैं। 60% तक श्रिंक हो जाते हैं। इसके कारण सेल्स के बीच में जगह बनती है और उस
(17:18) जगह में एक फ्लूइड फ्लो होती है जिसे कहते हैं सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड। सो इफ यू थिंक अबाउट इट, स्लीप इज एक्चुअली अ शावर फॉर योर ब्रेन। लेकिन जब आप अपनी स्लीप को कट शॉट कर देते हो तो क्या होता है? ब्रेन में ये वेस्ट क्लीन हो ही नहीं पाता अच्छे से। शार्ट टर्म में इस टॉक्सिक बिल्ड अप के कारण मेमोरी वीक होने लगती है। हम छोटी-छोटी चीज जैसे किसी का नाम या हम क्या बोल रहे थे उसको भूलने लगते हैं और लॉन्ग टर्म में ये टॉक्सिक बिल्ड अप अल्जाइमर्स और डिमेंशिया भी क्रिएट करता है। तो क्या करें? दो चीजें। पहली रोज कम से कम 7 से 8
(17:54) घंटे की नींद लीजिए। यह मिनिमम है। और दूसरी और ज्यादा इंपॉर्टेंट स्लीप की गोल्डन विंडो में कुछ और नहीं लेकिन स्लीप ही कीजिए। यह गोल्डन विंडो है रात 10:00 बजे से सुबह 2:00 बजे तक। यह वो टाइम है जिसमें ब्रेन और बॉडी की सबसे ज्यादा क्लीनिंग होती है। सबसे गहरा रिपेयर होता है। मैंने आपको आज जो भी बताया पर्सनली मेरे लिए यह हैबिट फॉलो करना सबसे मुश्किल है। बट मैं पूरी कोशिश कर रही हूं कि रात 9:30 बजे तक सब काम खत्म करके बेड में आ जाऊं। ऑलराइट। सो यही कंप्लीट होती है हमारी फिफ्थ हैबिट के साथ-साथ पांचों हैबिट्स। याद रखना यह ब्रेन हमें मां
(18:28) प्रकृति का दिया एक बहुत कीमती गिफ्ट है। इसको कभी फॉर ग्रांटेड मत लेना। मेरी तरफ से आज के लिए इतना ही। हम जल्द फिर वापस मिलेंगे।

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