Wednesday, August 5, 2026

The Crazy Life of Devraha Baba | The Eastern Lens

The Crazy Life of Devraha Baba | The Eastern Lens

Author Name:The Eastern Lens

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@TheEasternLens

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=maIN1L0_9iE



Transcript:
(00:04) जरा सोचो। एक ऐसे बाबा जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कभी जमीन को छुआ तक नहीं। चलने सोने किसी के लिए नहीं। कहा जाता है कि भारत के प्रधानमंत्री एक लकड़ी के मकान के नीचे झुक के खड़े होते थे। ताकि यह बाबा अपना पैर उनके सर पर रख के उन्हें आशीर्वाद दे सके। लोगों का मानना था कि यह बाबा 150 साल से जिंदा थे। कुछ भक्तों का तो यह भी दावा था कि इनकी उम्र 700 साल से भी ज्यादा थी। एक ऐसे इंसान जो कुछ नहीं [संगीत] खाते थे। सिर्फ नदी के पानी के ऊपर जिंदा रहते थे। यह कहानी है देवराह बाबा की। एक ऐसे बाबा
(00:50) जिनके बारे में कहा जाता है कि आधी सदी तक देश के सबसे ताकतवर लोग नीचे बैठ उनके एक आशीर्वाद मात्र का इंतजार करते थे। मेरा नाम है ऋषभ एंड आप देख रहे हैं द ईस्टर्न लैंड्स। वृंदावन का एक स्थाई हिस्सा बनने से पहले देवराहा बाबा देरिया डिस्ट्रिक्ट के मायेल गांव के पास सरयू नदी के किनारे एक मचान में रहते थे। माने लकड़ी की लठों और बांस से बना हुआ एक ऊंचा प्लेटफार्म जो हवा में 10 से 12 फीट ऊंचा था। माना जाता है कि अथर्ववेद के मुताबिक जो साधु सन्यासी
(01:36) भगवान जैसी स्थिति को प्राप्त कर लेते हैं। उनका निवास धरती और आसमान के बीच में होता है। बाबा लगभग हर समय उसी मचान पर रहते थे। सिर्फ सूरज उगने से पहले नदी में नहाने के लिए नीचे आया करते [संगीत] थे। वो ना के बराबर कपड़े पहनते। एक छोटी सी मृगल माने डियर [संगीत] स्किन और बाकी जगहों को ढकने के लिए लकड़ी के फट्टे ही उनके वस्त्र थे। मचान पर ऊपर बैठे बाबा [संगीत] को हजारों लोग एक साथ देख सकते थे। उन्हें कभी भीड़ के बीच से चल के नहीं जाना पड़ता। बस भीड़ ऊपर देखती और वह वहां बैठे मिलते। अक्सर बाबा ऊपर बैठ अपना पैर नीचे करते थे ताकि उनके भक्त उसे छू
(02:23) आशीर्वाद ले सके। लोगों के मुताबिक देवराहा बाबा का इस तरह उन्हें पैर से छूना यह कोई आम चीज नहीं थी बल्कि यह एक शक्ति पथ था। माने एनर्जी का एक ऐसा ट्रांसमिशन जो शब्दों से नहीं हाथ के टच से नहीं बल्कि एक झुके हुए सर पर रखे हुए पैर के तलवे से मिलता था। देवराहा बाबा एक ऐसे फकीर थे जिनके पास देने को कुछ नहीं था। मगर इसके बावजूद उनकी कहानी भारत के तमाम राजनेताओं और प्रधानमंत्रियों की मुलाकातों से भरी हुई है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.
(03:05) राजेंद्र प्रसाद कहते हैं कि जब वो एक छोटे [संगीत] बच्चे थे तब उनके पिता उन्हें इस योगी का आशीर्वाद दिलाने ले गए थे। उस समय जब उनके पिता देवराहा बाबा को खुद कई दशकों से जानते थे। राजेंद्र प्रसाद हिसाब लगाते हैं अगर यह पूरी बात सच थी तो उनके सामने बैठे [संगीत] वो बाबा कम से कम 150 साल की उम्र के थे। [संगीत] सोचो बाबा के बारे में ऐसे कई दावे सामने आते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक वकील का कहना था कि उनका परिवार लगातार सात पीढ़ियों से इस योगी के चरणों में बैठती आ रही थी। कहानियां तो यह भी चलती है कि बाबा 16वीं सदी में संत तुलसीदास से मिले थे और उन्हें आशीर्वाद
(03:52) दिया था। वही तुलसीदास जिन्होंने आगे चलकर रामचरित्रमानस लिखी [संगीत] थी। सोचो कैलकुलेट करने पर उनकी उम्र 400 सालों से भी ज्यादा निकलती है। कईयों का तो यह तक मानना था कि 400 नहीं बल्कि वो 700 सालों से जिंदा थे। अक्सर यह कहा जाता है कि वो किसी कोख से पैदा ही नहीं हुए थे। बल्कि वो बस पानी से बाहर निकल आए थे। उनके भक्तों का कहना है कि इस सब का राज केचरी मुद्रा थी। एक ऐसी एडवांस्ड योगिक टेक्निक जिसमें जीभ को नाक के पीछे की कैविटी में घुमाकर रखना सिखाया जाता है। श्वास पर इस किस्म के नियंत्रण के साथ जो उनके शरीर के मेटाबॉलिज्म को
(04:37) लगभग जीरो पर ले आता था। कहा जाता है कि वो कोई सॉलिड फूड नहीं खाते थे। सिर्फ नदी के पानी और कभी-कभी थोड़े से फल या दूध इत्यादि पर ही जीवित रहते थे। देखने वालों का दावा था कि वह बिना किसी मदद के आधे-आधे घंटे तक पानी के अंदर रह जाते थे। उनके भक्तों का मानना था कि वह अक्सर एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों पर प्रकट हो जाते। कई लोगों का तो यह तक दावा था कि एक बार एक बदतमीज व्यापारी को सबक सिखाने के लिए उन्होंने उसे भैंस बना दिया था। मगर इसके बाद जो अब आगे होने वाला था वो कुछ ऐसा था जिसने उन्हें देश के सबसे ताकतवर
(05:23) लोगों की नजरों में लाके खड़ा कर दिया था। हाय अगर आप यह वीडियो यहां तक देख रहे हो तो मैं आपको बता दूं कि आप उन 20% ऑडियंस में से हो जो यह वीडियो यहां तक देख रहे हो। इस साल मैंने खुद के लिए एक क्रेजी गोल सेट किया है। दैट इज ऑफ रीचिंग 50,000 सब्सक्राइबर्स। तो अगर यह गोल रीच करने में आप मेरी हेल्प करना चाहते हो तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर करना। एंड नाउ बैक टू द वीडियो। 1977 इंदिरा गांधी इलेक्शंस हार जाती हैं। इमरजेंसी अभी-अभी खत्म हुई थी। उनकी पार्टी स्प्लिट हो चुकी थी और उसी के साथ कांग्रेस ने अपना पुराना इलेक्शन सिंबल
(06:04) गाय और बछड़ा, काऊ एंड काफ खो दिया था। उन्हें एक नए चिन्ह की [संगीत] जरूरत थी। मगर इलेक्शन कमीशन जाने से पहले वो नदी के किनारे देवराहा बाबा के पास जाती हैं। उनका आशीर्वाद लेने। बाबा अपना दाहिना हाथ उनकी तरफ उठाते हैं अभय मुद्रा में जो कि डर को दूर करने की एक प्राचीन मुद्रा मानी जाती है और जब इलेक्शन कमीशन उन्हें संभावित प्रतीकों की सूची थमाती है वह तुरंत एक खुले हाथ को चुन लेती हैं। उनका कहना था कि यह देवराह बाबा का ही हाथ था जिसे उन्होंने अपनाया [संगीत] था जिससे उन्होंने आशीर्वाद ग्रहण किया था। वही हाथ आज भी इंडियन नेशनल कांग्रेस का ऑफिशियल
(06:51) सिंबल है। जो इंसान जमीन पर पैर तक नहीं रखता था। उसने देश की सबसे पुरानी पॉलिटिकल पार्टी को एक नया चिन्ह दे दिया था। ऐसी ही एक और घटना में करीबन एक दशक बाद जब राम जन्मभूमि आंदोलन बढ़ती जा रही थी। देवरा बाबा अपना ठिकाना सरयू की बजाय यमुना के पास शिफ्ट कर लेते हैं। माने राजधानी दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर दूर। इसी के चलते वृंदावन के वो सन्यासी विश्व हिंदू परिषद और प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार के बीच जानकारी के आदानप्रदान का एक गुप्त मार्ग बन जाते हैं। सोचो नवंबर 1989 में सरकार अयोध्या की विवादित जमीन
(07:38) पर शिलान्यास [संगीत] माने फाउंडेशन स्टोन लेइंग सेरेमनी की अनुमति दे देती है। कहा जाता है कि यह देवरा बाबा की मध्यस्थता माने मीडिएशन ही थी कि यह सब कुछ बिना किसी हिंसा के हो पाया था। माना जाता है कि उस समय के केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह ने उनके साथ सीधे तौर पर काम किया था। इस सबको मुमकिन बनाने के लिए। यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेई ने भी उनसे मार्गदर्शन लिया था। सोचो वामपंथी हो या दक्षिणपंथी भारत पर शासन करने वाली हर एक विचारधारा ने कभी ना कभी उनसे मुलाकात की थी। उनके भक्तों का तो यह तक मानना था कि
(08:23) उन्होंने अपनी मृत्यु का समय उससे 5 साल पहले ही बता दिया था। 19 जून 1990 को योगिनी एकादशी के दिन वो अपने वृंदावन आश्रम में महासमाधि ले लेते हैं। बिना किसी दाह संस्कार के उनके शरीर को जल समाधि दी जाती है। एक ऐसा आंत जो सिर्फ सबसे ऊंचे सन्यासियों के लिए ही होती है। एक लकड़ी के संदूक में बंद करके उन्हें यमुना में उतार दिया जाता है। और उनके भक्तों के मुताबिक जब उस संदूक ने पानी को छुआ तो उनका शरीर वहीं घुल गया। अंदर कुछ भी नहीं बचा। अब मानो या ना मानो मगर लोगों का तो इसी काव्यात्मक अंत पर
(09:08) विश्वास है। एक ऐसे इंसान जिन्होंने अपनी पूरी [संगीत] जिंदगी धरती और आसमान के बीच बिता दी थी। अंत में वो उसी में [संगीत] जाकर विलीन हो गए थे जिसने उन्हें जिंदा रखा था पानी में। आज की डेट में दो जगहें हैं जो उनकी याद को जिंदा रखे हैं। वृंदावन में नदी के दूसरी तरफ उनका समाधि स्थल आज भी उस मचान को संभाले हुए है जहां से वो लोगों को आशीर्वाद दिया करते थे। और [नाक से की जाने वाली आवाज़] दूसरा दियोरिया में सरयू नदी के किनारे जहां से यह सब शुरू हुआ था। उनका पहला आश्रम आज भी श्रद्धालुओं को [संगीत] आकर्षित करता रहता है। एक ऐसे इंसान जिनके बारे में मान्यता
(09:51) थी कि वो 700 [संगीत] सालों से जिंदा थे। जिनके जीवन से कई चमत्कार जुड़े थे। एक आदमी को भैंस बनाने की कहानी, एक ही समय पर दो अलग-अलग जगह खोने की कहानी और ना जाने क्या किया। मगर इस सब के अलावा वो एक [संगीत] ऐसे सन्यासी थे जिन्होंने अपना सब कुछ त्याग दिया था। खाना, कपड़े यहां तक कि जमीन को भी और अंत में वह उन लोगों से भी ज्यादा पॉलिटिकली कनेक्टेड निकले जिन्होंने अपनी पूरी [संगीत] जिंदगी सत्ता के पीछे भागने में बिता दी थी। देवरा बाबा की ही तरह मैंने भारत के और भी बहुत से संतों के ऊपर वीडियोस बनाई हैं। उस प्लेलिस्ट को देखने के लिए यहां क्लिक
(10:35) करें। अगली वीडियो मैं किस टॉपिक पे बनाऊं? यह मुझे नीचे [संगीत] कमेंट सेक्शन में लिख कर बताओ क्योंकि यह सिर्फ मेरा ही नहीं आप लोगों का भी चैनल है।

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