Stop Complaining ? World Needs Problem Solvers NOT Complainers ~ ABK Sir
Author Name:OTT Bharat by Abhimanyu Kumawat
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Transcript:
(00:02) साथियों ओटीडी भारत यानी कि ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत एक मिशन है। हिंदुस्तान के नौजवानों को हिंदुस्तान के हर एक नागरिक को ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी बनाने का। मेरी जिंदगी का हर एक क्षण और मेरे शरीर का हर एक कण इस मिशन के लिए समर्पित रहेगा और मेरे प्रयास में, परिश्रम में, समर्पण में रत्ती बराबर की कमी आपको कभी महसूस होगी। मुझे पता है कि अगर भारत का हर एक नागरिक चाहे वो [संगीत] नौजवान हो, चाहे वो बालक बालिका हो, चाहे वो वृद्ध व्यक्ति हो, अगर ओजस के साथ में, तेजस के साथ में और तपस्वीता के साथ में जीता है तो शायद भारत पूरी दुनिया में एक
(00:43) सर्वशक्तिमान राष्ट्र के रूप में स्थापित हो पाएगा। आप सभी ओटीटियंस का इस चैनल पर और इस प्लेटफार्म पर स्वागत है। आइए भारत को ओजस्वी, तेजस्वी, तपस्वी भारत बनाते हैं और इस यात्रा को शुरू करते हैं। दुनिया अब शिकायतों का समंदर बन चुकी है। जहां देखो वहां कोई ना कोई नाराज है। कोई सिस्टम कोस रहा है, कोई किसी पार्टी को और कोई अपनी ही किस्मत को कोस रहा है तो कोई दूसरों की गलतियों को कमजोर मन का सबसे बड़ा हथियार है शिकायत करना क्योंकि सबसे आसान काम है। इसमें ना मेहनत लगती है ना दिमाग बस एक उंगली उठानी
(01:30) होती है और सारा का सारा दोष दुनिया पर मड़ देना होता है। लेकिन याद रखना इतिहास शिकायत करने वालों का नहीं समाधान देने वालों का लिखा जाता है। और जब पूरी दुनिया शिकायतों का शोर मचा रही होती है तब कुछ लोग खामोशी से अपनी राह बना रहे होते हैं और वही लोग प्रॉब्लम सॉल्व बनते हैं वही लोग लीडर बनते हैं और वही लोग सच्चे ओटीएन बनते हैं। तो आप सभी का स्वागत है वन ऑफ द मोस्ट अमेजिंग सेशन
(02:15) जिसका मूल उद्देश्य है कि हमें किस तरीके से अपने माइंडसेट को शिफ्ट करना है। तो कृपा करके पेन और पेपर लेकर बैठ जाइए और शिद्दत से इस चीज को सुनिए, समझिए और जिंदगी में इंप्लीमेंट करने का प्रयास करिए। सो नमस्कार। आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। शुरू किया जाए सेशन को। आज का समय बड़ा अजीब है। आजकल गालियां भी तालियों के साथ में सुनी
(03:02) जा रही है। मैं ऐसा समय पहली बार देख रहा हूं और मैं जिस समय की बात कर रहा हूं, शायद मैं समय की ही बात कर रहा हूं। गजब का समय है। खैर आज का मुद्दा कुछ डिफरेंट है क्योंकि मैं हर तरफ सिर्फ यही देखता हूं, यही सुनता हूं और आज मैं कुछ चैलेंज आपको देने का प्रयास करूंगा। हम शांति से चर्चा कर सकते हैं। इस प्रकार का कि कुछ बदलाव लाए जाए। अब सिर्फ डिस्कशंस ना हो, कुछ सेशंस ना हो, कुछ बदलाव की बात की जाए। शिकायत
(03:50) यानी कि कंप्लेन और इससे बर्बाद होती शख्सियत। क्योंकि इन दोनों में बहुत सुपर स्ट्रांग कनेक्शन है। शिकायत और बर्बाद शख्सियत आपस में कहीं ना कहीं इंटरकनेक्टेड ही है। कुछ मुद्दे हैं जिनके बारे में हम लोग चर्चा करेंगे। शायद मैं प्रयास [गला साफ़ करने की आवाज़] कर पाऊं कि आपकी सभी समस्याओं का एक तरीके से अंत कर पाऊं। जब आप मेरा सेशन अटेंड करने आते हैं तो इस चीज का विशेष तौर से ध्यान रखें
(04:36) कि हम इंप्लीमेंटेशन की बात करेंगे। हम डॉक्यूमेंटेशन की बात करेंगे। कुछ लोग मुझे कहते हैं कि सर ये चीजें 1 सेकंड में खत्म हो जाए तो बढ़िया। मैंने आज तक 10,000 रील देखने वाले इंसान की जिंदगी चेंज होते हुए नहीं देखी। लेकिन हां मेरे दो सेशन भी शिद्दत से देखने वाले इंसान की जिंदगी को मैंने बदलते हुए देखा है। आप सब लोग भी इस चीज से एग्री करेंगे। वरना आज हमारे देश में 1 लाख से ज्यादा ओटी ओटीियंस नहीं होते। ये सबको पता है। [गला साफ़ करने की आवाज़] सबसे पहले पूरी दुनिया में सबसे कॉमन कंप्लेंट कौन सी? कॉमन कंप्लेंट्स। जो हर कोई गाता रहता है। कोई बुआ को बता
(05:23) रहा है, कोई मौसी को बता रहा है, कोई चाची को बता रहा है, कोई पापा को बता रहा है, गाता ही रहता है। लेकिन जब वो कंप्लेंट गाता है तो उसका क्या इंपैक्ट पड़ता है? अगर आपको लगता है कि कंप्लेन एक मेंटल चीज है तो आप गलतफहमी के शिकार हैं क्योंकि कंप्लेन आपके ब्रेन को श्रिंक तक कर देती है। आपके क्रोमोजोम यानी गुणसूत्रों को खराब करने लगती है। यानी जो आप में गुण हैं वो भी अब खत्म होने लगते हैं। तो इसके इतने डिजास्टरस इंपैक्ट है कि आप बिलीव नहीं कर सकते। इंपैक्ट ऑफ कंप्लेन। यह कुछ जबरदस्त बात है। फिर
(06:11) अगर मैं कंप्लेन की बात कर रहा हूं। बिकॉज़ हम आज का जो सेशन है उसका अल्टीमेट टारगेट है कि हम कैसे एक प्रॉब्लम सॉल्वर बन पाएं। हम किस तरीके से उस डायरेक्शन में जा पाएं जो दूसरों की तरफ उंगली उठाने की बात नहीं करते। क्योंकि जब मैं दूसरों की तरफ उंगली उठाता हूं तो तीन उंगलियां मेरी तरफ होती है। खुद की तरफ उंगली उठाने की बात करें कि यह गलती मेरी है। यह समस्या मेरी वजह से पैदा हुई है। आई विल सॉल्व इट। पता है एक बहुत इंटरेस्टिंग बात है कि हम सबको ऐसा लगता है ना कि अगर मैं अपनी प्रॉब्लम किसी को कह दूंगा तो प्रॉब्लम सॉल्व हो ना हो। मन का बोझ
(06:57) हल्का हो जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि इस दुनिया में जो कान होते हैं ना कान उनको प्रॉब्लम से प्यार है। आप दो कान को कहेंगे वो 10 कान को कहेंगे। वो 10 कान 40 कान को कहेंगे। 40 कान 400 को कहेंगे और वो घूम फिर के आपकी प्रॉब्लम आप तक पहुंच जाएगी। दुनिया सिर्फ मजे लेना जानती है। दुनिया में एक ही चीज को आपकी प्रॉब्लम से नफरत है। वो आपका पेपर नहीं है। वो आपका रिश्तेदार नहीं है। वो वो चीज है जो आपकी समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। वो है पेन। लिखो। आपके घर वाले, आपके रिश्तेदार, आपका पैसा, आपका समय कोई प्रॉब्लम को ठीक
(07:45) नहीं कर सकता। पेन राइट डाउन वेयर इज़ द प्रॉब्लम? जिस वक्त प्रॉब्लम लिख दी जाती है वो खत्म हो जाती है और जिस वक्त प्रॉब्लम सुना दी जाती है वह बढ़ जाती है और इंसान हमेशा हमेशा आसान रास्ता चुनता है। वो हजार लोगों को अपनी प्रॉब्लम सुनाता है और खत्म हो जाता है। तो कोर यही है कि प्रॉब्लम को बोलना नहीं है। प्रॉब्लम को लिखना है। दैट इज द अल्टीमेट थिंग। दैट इज़ द अल्टीमेट कांसेप्ट। खैर इंपैक्ट ऑफ़ द कंप्लेन। देयर आर मेनी बुक्स। बहुत सारी किताबें ऐसी है जो दुनिया में कंप्लेन के ऊपर रखी गई है। बुक्स और उनसे बहुत इंपॉर्टेंट लर्निंग आती है। क्योंकि
(08:20) हम पता है हमारी जिंदगी में हमारी हेल्थ हो, हमारा रिश्ते हो, शिकायत करने पर ही खत्म होते हैं। आज तक आपने कोई रिश्ता खोया होगा तो उसका कारण एक ही निकल के आया होगा कि यार मैंने उससे शिकायत कर दी और गेम खत्म हो गया। इंसान की हेल्थ को बर्बाद करने के पीछे भी कंप्लेन ही है और कोई नहीं है। बिकॉज़ कंप्लेंट का मतलब क्या है? कंप्लेंट का मतलब यह है कि मैं अब एक्शन नहीं लूंगा। सिर्फ शिकायत ही करूंगा। द बुक्स ऑन द कंप्लेंट बुक्स ऑन कंप्लेंट
(09:09) द सॉल्यूशन जिसकी हम बात कर सकते हैं सॉल्यूशन और मैं क्या कुछ नया करने वाला हूं उसकी भी हम बात करेंगे। द सॉल्यूशन एंड सम न्यू इनिशिएटिव जो आगे प्लान है आई विल लेट यू नो एनीथिंग न्यू उसकी हम लोग बात करेंगे। तो अगर मैं सबसे पहले आपको बताऊं मोस्ट कॉमन शिकायतें क्या-क्या होती हैं? अगर मैं कहूं कि दुनिया में ये पांच शिकायतें हैं जो सबसे कॉमन है। दैट इज
(09:55) यार मेरी हेल्थ खराब है। यार मुझे टाइम ही नहीं मिलता यार यार घर वालों का सपोर्ट नहीं है यार मतलब कुछ करना चाहता हूं लेकिन कुछ होता नहीं है यार यार मोटिवेशन नहीं आता है कर तो दूंगा लेकिन लोग क्या कहेंगे यार लोग क्या कहेंगे कैसे होगा यार ये और पता है प्रॉब्लम का रोना रोने वाले लोगों के लिए हजार साल की जिंदगी भी कम पड़ती है हजार साल साल की जिंदगी भी और मैं प्रयास यही कर रहा हूं। मैं प्रयास सिर्फ यही करूंगा कि मैं आपकी प्रॉब्लम को खत्म कर पाऊं क्योंकि आज से मैं भी प्रणय लेने आया हूं
(10:40) कि मैं अगले छ महीने तक कोई शिकायत नहीं करूंगा। दिस इज माय डिसीजन। और मैं चाहता हूं कि जो ओटीटियंस है जो ट्रू ओटीटियंस है जो लड़ना जानते हैं जो योद्धा बनते हैं जो प्रॉब्लम सॉल्व हैं वह भी आने वाले 6 महीने तक कोई शिकायत नहीं करेंगे क्योंकि जिस दिन आप शिकायत करना बंद कर देते हैं उस दिन ईश्वर आपके साथ में हो जाता है। तो अगर मैं यह कहता हूं कि शिकायत करने के क्या-क्या नुकसान होते हैं? सबसे पहली चीज आपके दिमाग का एक हिस्सा होता है उसको बोलते हैं हिप्पोकैंपस। हिप्पोकैंपस वह हिपोकैंपस श्रिंक होने लगता है। यानी कि सिकुड़ने लगता है। यह हिस्सा है। ये
(11:26) आपके दिमाग का वो हिस्सा है जिसको हम हिप्पोकस कहते हैं। और इंटरेस्टिंग फैक्ट पता है क्या है? यह दिमाग का हिस्सा जो हिपोकैंपस हम कह रहे हैं, यह दो चीजों के लिए जिम्मेदार है। एक मेमोरी यानी कि आपको कितना याद रहेगा और दूसरी आपकी मेमोरी जो प्रॉब्लम सॉल्विंग में इनवॉल्वड है, प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल। हालांकि उसके लिए प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स बहुत ज्यादा जिम्मेदार है। लेकिन इनपुट यहीं से आता है प्रॉब्लम सॉल्विंग। यानी कि जब ब्रेन को यह पता लग जाता है कि भाई यह इंसान शिकायत करता है, इसका प्रॉब्लम सॉल्विंग में कोई इंटरेस्ट नहीं है, तो वो खुद ब
(12:06) खुद उन चीजों को खत्म करने लगता है जो इस चीज के लिए जिम्मेदार है। ये इंटरेस्टेड ही नहीं है। इसको मतलब ही नहीं है। इसको आता ही नहीं है। इससे होता ही नहीं है। प्रॉब्लम सॉल्विंग। एंड दिस इज हाउ यू एंड अप डिस्ट्रइंग योरसेल्फ। हिपोकैंपस ड्रिंक हो गया। आपकी मेमोरी काम नहीं कर रही। कुछ याद नहीं आ रहा। कैन यू बिलीव दिस? हमारे शरीर में वो चीज खत्म होने लगती है। लेट्स सी मेरी बॉडी है। मैं बॉडी का यूज़ नहीं कर रहा। क्या होगा? मोटा हो जाऊंगा। धुलला हो जाऊंगा। चलूंगा तो सांस भरेगी। भागूंगा तो गिर पडूंगा। उठूंगा तो चक्कर आएंगे। बीमारियों
(12:49) से गिर जाऊंगा और शरीर खत्म कर लेगा खुद को। ऐसे अगर मैं दिमाग का यूज नहीं कर रहा हूं तो दिमाग को जंग लग जाएगी। मैं खुद की प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को यूज नहीं कर रहा हूं तो दिमाग उस ऑर्गन को डैमेज करने लगेगा जो प्रॉब्लम सॉल्विंग के लिए जिम्मेदार है। और अब मैं अपनी किस्मत खुद लिख रहा हूं। क्योंकि मैंने डिसाइड किया है कि मुझे प्रॉब्लम सॉल्वर नहीं बनना है। मुझे प्रॉब्लम क्रिएटर बनना है। सोचो ना तुम लोग। व्हेन वी टॉक अबाउट द गॉड, व्हाट वी से? कि हमारी सारी प्रॉब्लम आप हर लो खत्म कर दो उन्हें खा जाओ उन्हें मिटा दो वी प्रे
(13:29) टू द प्रॉब्लम सॉल्व अस वी आप देखो कहीं गांव में जाओ लोग सरपंच के आगे हाथ जोड़ते हैं। क्यों? वो मानते हैं कि मेरी प्रॉब्लम सॉल्व करेगा। जब हम पूरी जिंदगी प्रॉब्लम सॉल्व के आगे हाथ जोड़ते हैं तो हम पूरी जिंदगी यह डिसाइड कर रहे होते हैं कि यार मुझे प्रॉब्लम सॉल्व बनना ही नहीं है। मुझे कंप्लेनर बनना है। और जब दिमाग को ये पता लगता है कि इसको भाई प्रॉब्लम सॉल्वर नहीं बनना है तो इसको कंप्लेनर ही बनना है तो हिपोकैंपस को श्रिंक कर देता है। फिर अमगना अमग डैना इसको वो
(14:14) अमगला एक वह हिस्सा है जो कहीं ना कहीं हमारा फियर सेंटर है। हमारा फियर सेंटर है। फियर सेंटर का मतलब क्या है? कि यह इसकी हाइपरट्रोफी कर देता है। इसकी साइज को बढ़ा देता है। मतलब अब जो इंसान कंप्लेन करता है वो हमेशा हमेशा देखो ये होता है अमेग्डेला। यहां समझेंगे ये अमग्डेला है। हिप्पोकस ये रहा अमगडेला वाला पार्ट ये रहा। तो अगर मैं कंप्लेन कर रहा हूं ना तो यह वाला पार्ट तो हिपोकैंपस पार्ट तो श्रिंक होता जाएगा, कम होता जाएगा और अमगडेला बढ़ता जाएगा। ये कौन सा सेंटर है? ये मेरा फियर सेंटर है। अब वो आदमी हमेशा डरा डरा रहने लगेगा।
(15:02) उसका शरीर उसका साथ नहीं दे रहा है। उसका मेमोरी उसकी साथ नहीं दे रहा है। तो वो फाइट और फ्लाइट मोड में आ जाएगा। फाइट एंड फ्लाइट। यू नो वन थिंग। व्हाई आई डू ऑल दी सेशंस? यू नो व्हाई? बिकॉज़ आई स्ट्रोंगली बिलीव। दैट इंडिया डज नॉट हैव प्रॉब्लम सॉल्वर्स। यस, वी डू हैव प्रॉब्लम क्रिएटर्स जो सोशल मीडिया पे प्रॉब्लम क्रिएट कर रहे हैं। पड़ोस में प्रॉब्लम क्रिएट कर रहे हैं। मोहल्ले में प्रॉब्लम क्रिएट कर रहे हैं। उड़ते ही प्रॉब्लम क्रिएट कर रहे हैं। जो अपने आप में प्रॉब्लम है। एवरीवन
(15:48) अब देखो ना भारत में ऐसे हालात हैं कि किसी का प्रॉब्लम सॉल्विंग माइंडसेट ही नहीं बचा। अब इस देश में अब इतने गुलाम हैं जितने शायद उस वक्त नहीं थे जब अंग्रेजों का राज था दिमागी तौर से गुलाम लोग तो सिर्फ और सिर्फ शिकायतें करते हैं। कुछ ऐसे हैं जिनको देश से मतलब ही नहीं है। देश भाड़ में जाए वो अपनी भक्ति में लगे हुए हैं। भक्ति मतलब समझ रहे होंगे आप लोग। तो इस देश में प्रॉब्लम सॉल्वर्स की डेफिशिएंसी है। जब हम बात करते हैं ना कि यार वैकेंसी कहां है? वैकेंसी कहां है?
(16:32) वैकेंसी कहां है? भर्तियां कहां निकल रही है? सबसे ज्यादा वैकेंसी है सेक्टर में। प्रॉब्लम सॉल्वर्स क्योंकि दुनिया में लेट्स सी मैं बहुत सिंपल सी बात करता हूं। इफ आई टॉक अबाउट लेट्स सी मी। मी मैं मेरी बात करता हूं। क्या कोई ऐसी वैकेंसी थी कि ओटीटी भारत एक संस्था बन सकती है? क्या गवर्नमेंट ने मुझे कहा था कि मोदी जी और कहा कि भाइयों और बहनों ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत बनाने के लिए एक वैकेंसी है। आई टूक द इनिशिएटिव बिकॉज़ ऑफ़ माय प्रॉब्लम्स। मैंने अपनी प्रॉब्लम सॉल्व की है और मैंने सोचा कि मुझे ये प्रॉब्लम्स उन लोगों से डिस्कस करनी चाहिए
(17:18) जो बेचारे इतनी सारी प्रॉब्लम से सफर कर रहे होंगे। आई केम हियर। मेरी लाइफ की प्रॉब्लम्स को मैंने रोया नहीं कि मेरे साथ यह हो गया। आई क्रिएटेड द सॉल्यूशन एंड क्रिएटेड मेनी प्रॉब्लम सॉल्वर्स। यू पीपल आर द प्रॉब्लम सॉल्वर्स। क्योंकि मुझे पता है इस प्लेटफार्म को एरागेरा नथूगरा देख ही नहीं सकता है। वो बाकी बहुत जगह जहां गालियां सुनाई जा रही है वहां तालियां बजा रहे हैं। मतलब भारत में तो अब गाली सुनने के लिए लोग पैसे दे रहे हैं। बताओ इंडिया ग्रेट इंडिया नाइस। और गाली देने वाले लोग अपना स्ट्रगल ऐसे दिखा रहे हैं जैसे वो
(17:57) भगत सिंह के पास वाली जेल में ही एडमिट थे। ओ हो हो वाह! खैर लीव दैट। मोस्ट इंटरेस्टिंग फैक्ट। जो लोग शिकायत कर रहे हैं कैन यू बिलीव दिस थिंग यू विल नेवर बिलीव दिस उनके टिलोमियर्स [नाक से की जाने वाली आवाज़] की शॉर्टनिंग होने लगती है। टिलोमियर शॉर्टनिंग टिलोमियर्स छोटे होने लगते हैं। आपको पता है टिलोमियर्स क्या है? टिलोमियर्स वो कैप है, वो टोपी है जो हमारे क्रोमोजोम्स यानी गुणसूत्रों को प्रोटेक्ट करके रखता है। लेकिन जब वो छोटा होने लगता है तो उस चीज की मार्किंग है। क्या बुड्ढे हो रहे हो?
(18:44) सीधा सा कांसेप्ट है भाई। दिमाग के पास मैसेज यह गया कि इस इंसान को इस धरती से बहुत दिखाई दिक्कतें हैं। यह इंसान बहुत सीरियस है। वो सीधा उठाने की प्लानिंग शुरू कर देता है। तुम्हें क्या लगता है? इंसान को चार लोग उठाते हैं इस धरती से। हां। उसका दिमाग उठाता है कि भाई अब तेरे बस की बात नहीं है। चलो। और उस दिमाग को गिराने का काम तुम करते हो तुम्हारे विचारों से। जब तुम दिमाग को गिरा देते हो कि भाई तेरा यूज़ करना ही नहीं है। हम तो को तो रोना रोना है कि हमारे साथ कुछ नहीं हो रहा है। तो फिर दिमाग गिराना शुरू करता है। तुमने उसको गिराया। वो तुम्हें गिरा के
(19:31) नीचे पटक देगा। फिर उठा लिया जाएगा शमशान में। सिंपल गेम है। तो जो भी सीरियस होगा वो निपट जाएगा। और सीरियस कौन है? जो दुनिया को देखकर सीरियस है। उसको लगता है कि सब कुछ तबाह होने वाला है। स्टेट ऑफ़ हॉर्मोस कभी नहीं खुलेगा। ट्रंप से कुछ नहीं होगा। मैं होता तो यह कर देता। खैर व्हाट एवर टिलोमीियर शॉर्टिंग होती है। इसको समझिए। ये रहे मेरे टिलोमियर्स और ये रहे ये टिलोमी। ये कैप है यहां पर। यहां पर यहां पर रियल कोडिंग हो रखी है। ये आपके गुण दिखाने वाले सूत्र हैं जिसको डीएनए क्रोमोजोम्स बोलते हैं। और इसके ऊपर ये कैपिंग हो रखी
(20:08) है ताकि वो डैमेज ना हो। लेकिन जैसे ही आप कंप्लेन करने लगते हैं ये छोटे छोटे छोटे छोटे। अब ये सबसे बुड्ढा इंसान है। एज के साथ भी कम होते हैं और एज के साथ में कम हो ना हो लेकिन कंप्लेनिंग के साथ में तो कम होने लगते हैं। यानी कि आप बुड्ढे होने लगते हैं। आप प्रोटीन एक्स पी रहे हैं। आप विटामिंस ले रहे हैं। आप पता नहीं एक्स वाई जेड कौन-कौन सी गमीज खा रहे हैं आजकल अपने गम मिटाने के लिए। फिर भी आप बुड्ढे हो रहे हैं। बिकॉज़ यू आर बिकमिंग कंप्लेनर। नॉट फाइटर। योर डीएनए वैल्यूस एर फाइटर नॉट ए कंप्लेनर एंड दैट इज व्हाई यू डिस्ट्र
(20:48) योरसेल्फ। मतलब अगर मैं कहूं कि कौन सा ऐसा सेशन है जिसको देखने के बाद आपको मेरा कोई सेशन देखने की जरूरत नहीं है। तो ये है। बिकॉज़ यू विल स्टार्ट सॉल्विंग योर प्रॉब्लम्स। दैट इज माय अल्टीमेट गोल। आई डोंट वांट यू पीपल टू बी डिपेंडेंट ऑन मी। आई वांट दैट यू बिकम प्रॉब्लम सॉल्व एंड रिमेंबर वन थिंग योर फ्रेंड्स योर रिलेटिव्स योर पेरेंट्स एवरीवन लव्स योर प्रॉब्लम एक्सेप्ट द पेन द पेन द पेन इज़ डिफरेंट आस्पेक्ट इज़ द पेन एंड द पेपर दे विल डिस्ट्रॉय इट वन यू राइट इट
(21:37) लेकिन आप बोलते ही रहते हो इंस्टा पे स्टोरी लगा दीजिए Snapchaat पे लिख दिया, WhatsApp पे स्टेटस लगा दिया। कभी पेपर पे लिखा कि प्रॉब्लम क्या है? इंटरेस्टेड ही नहीं है तो मैं बुड्ढा होने लगूं और बुड्ढा इंसान दिमाग से होता है। कई लोगों को लगता है हमारी स्किन तो चमक रही है। हमारे बाल भी शाइनी है। लेकिन हम जब भागते हैं तो सांस भरता है। शरीर धुलथुल है। किसी स्पोर्ट में पार्टिसिपेट नहीं कर सकते। लेकिन हम जवान तो हैं क्योंकि हमारे बाल जो है ना वो सिल्की है। खत्म हो तो
(22:21) 25 साल की उम्र में तुम अगर 10 किलोमीटर नहीं भाग सकते तो क्या खा के जवान हो तो गेम खत्म है खैर टिलोमियर शॉटिंग ये कितनी बड़ी बात है फिर अब अब तुम देखो भारत की समस्याओं का असली कारण है कॉर्टिसोल फ्लडी आई हैव टू बी वेरी वेरी वेरी वेरी साइंटिफिक मैं हमेशा ये मेक श्योर करता हूं कि मैं जो कासेप्ट ले रहा हूं वह मॉडर्न साइंस के ले रहा हूं और सॉल्यूशन जो है वह एंशिएंट विडम और एंशिएंट साइंस और मेरे एक्सपीरियंस को इंक्लूड कर रहा हूं। कॉर्टिसोल फ्लडिंग होती है। जब कॉर्टिसोल फ्लडिंग होती है यानी कि कॉर्टिसोल की बाढ़ है। ये एक नेगेटिव
(23:03) हॉर्मोन है। ये एक नेगेटिव केमिकल है। अच्छा केमिकल नहीं है। तो दो चीजें बढ़ती है। बीपी और शुगर कभी भी देख लेना इसकी उसकी तेरी मेरी इसका उसका उसका ऐसा उसके आदमी से मिली तू लक्षण ही नहीं है उसकी लुगाई को उसकी उसकी उसकी लुगाई को देखा तूने मतलब ही नहीं मेरा तो पोता कोई निहाल ही नहीं करता भाई औलादें करम की नहीं है मेरी तो चल छोड़ तो टाइम हो गया एक बार शुगर की गोली ले लूं
(23:50) दोज़ पीपल विल एंड अप डूइंग लाइक दिस कंप्लेनिंग और हमारे आसपास के लोग जब ये देख रहे हैं ना तो यही सीख रहे हैं हमसे कि कंप्लेन करो। हां आज जितने सेशन देख रहे हैं ना उनसे मैं एक रिक्वेस्ट करूंगा कि oटीt भारत की एक प्रोफाइल फोटो है। कृपा करके आप सभी लोग मेरी हाथ जोड़कर आपसे विनती है कि oटीt भारत की प्रोफाइल फोटो लगा लें। वो एक ओटीटी होने का प्रमाण है इस डिजिटल दुनिया में। ये थोड़ा सा प्रयास करें। दैट इज वेरी वेरी इंपॉर्टेंट। राइट? खैर अब और क्या आप सभी को पता होगा कि इस धरती
(24:38) का जब खात्मा होगा तो उस खात्मे के पीछे एक चीज जिम्मेदार रहेगी दैट विल बी द वायरस। ये धरती बैटम से खत्म नहीं होगी। ये धरती वायरस से खत्म होगी। वायरस और आप बिलीव नहीं करेंगे लेकिन हमारे बॉडी में एंटीबॉडीज तो बनती नहीं है। इंटरफेरों्स बनते हैं थोड़े बहुत जो एंटीवाल जींस होते हैं वो बनाते हैं। कंप्लेन करने वाले लोगों में इनका भी सप्रेशन हो जाता है। यानी कि इनके एंटीवाल जींस प्रॉपर्ली काम नहीं करते हैं। सप्रेशन ऑफ एंटीवाल जींस। कितना अजीब फैक्ट है यह। मतलब कोविड जैसी महामारी अगर फिर से आती है
(25:25) तो उन लोगों के मरने की संभावनाएं ज्यादा है जो उठते हैं और शिकायत करते हैं। और उससे इंपॉर्टेंट बात उन लोगों के सुबह ना उठने की संभावनाएं ज्यादा है जो उठकर शिकायत करेंगे। ऊपर वाला या दिमाग उनको पहले ही निपटा देगा कि तुम उठोगे और शिकायत करोगे। इट मेक्स नो सेंस। न्यूरोजेनेसिस रुक जाता है। कुछ नया नहीं सीख पाते वो। न्यूरोजेनेसिस मतलब न्यू न्यूरॉन्स के बीच में कोलैबोरेशन। नए न्यूरॉन्स का सिंथेसिस जो स्पेसिफिकली हिप्पोकैंपस और अमगला में होता है। यह भी रुक जाता है। इट स्टॉप्स। मतलब
(26:09) अगर मुझे किसी भी प्रकार से खुद को बर्बाद करना हो। मुझे कोई कहा जाए कि आपको खुद को बर्बाद करना है। किसका इस्तेमाल करना चाहेंगे आप? चीनी का, मैदा का, तेल का, नमक का, मिर्च का, पोल्यूशन का, घटिया रिश्तेदारों का, किस चीज का? एग्जाम प्रिपरेशन का, घटिया माहौल का, टॉक्सिक लोगों का, बेकार दोस्तों का किसका? तो रास्ता एक ही निकल के आएगा कि मुझे सिर्फ शिकायत का सहारा लेना है और मैं बर्बाद अपने आप हो जाऊंगा।
(26:57) मैं आज आपको वह चीज सिखाने जा रहा हूं जिससे आप अपनी 100 साल की जिंदगी की वैल्यू हजार साल कर सकते हैं। क्यों? क्योंकि शिकायत का मतलब क्या है? शिकायत का मतलब यह है कि मेरे साथ जो जो हुआ यानी कि पास्ट यानी कि कंप्लेन मैं उसमें अपना बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत समय गवा दूंगा और उससे मुझे ए्जायटी होगी जो मुझे फ्यूचर में ले जाएगी और मैं फ्यूचर का बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत समय गवा दूंगा और अब मेरा प्रेजेंट खराब हो जाएगा। यह बड़ी गजब की बात है। पास्ट और फ्यूचर दोनों में
(27:41) प्रेजेंट को खत्म करने की काबिलियत है। गजब चीज है ना यह। हां, कुछ शानदार है। न्यूरोजेनेसिस स्टॉप हो जाता है। इसके ऊपर मैंने पहले भी ये चीज बताई है कि किस तरीके से न्यूरोजेनेसिस रुकता है। ऑक्सीजन डिप्लेशन गहरी सांस नहीं ले पाते। ये लोग अस्थमा के रोगी हो जाते हैं। देखना किसी में कैसी बातें कर रहे हो सर? टी कभी देख लेना। किसी अस्थमा पेशेंट को देखना। किसी अस्थमा पेशेंट को देखना। आप देखोगे कि वो कंप्लेनिंग नेचर का है। पीक कंप्लेनिंग नेचर का है। देख लो। डिजीज अपने आप इस तरीके से पैदा होती है। और एट द एंड दोज़ पीपल बिकम बर्डन ऑन सोसाइटी बिकॉज़ सोसाइटी
(28:26) लव्स व्हाट? प्रॉब्लम सॉल्वर्स। अब आई होप यह बात आपको समझ में आ गई है कि मुझे अपनी जिंदगी में अगर अपने शरीर को बर्बाद करना है तो एट लीस्ट एटलीस्ट प्रॉब्लम्स की बात नहीं करनी। अब कौन सी प्रॉब्लम्स हैं? कुड यू प्लीज लेट मी नो योर कॉमन प्रॉब्लम्स? मैं एक बार लिखने का प्रयास करता हूं। यहां पर कौन-कौन सी कॉमन प्रॉब्लम्स हैं और फिर हम सॉलशंस की और बुक्स ऑन कंप्लेंट की बात करेंगे। किस तरीके से अपनी कंप्लेंट रखी जाती है। जरूरी नहीं कंप्लेंट हमेशा बुरी हो। कई जगह सही भी होती है। कहां सही होती है उसकी बात भी करेंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़]
(29:08) टाइम नहीं मिलता। टाइम नहीं मिलता। क्यों? क्या करते हो? आईपीएल देखता हूं। फिर रील चलाता हूं। फिर कॉमेडी शो देखता हूं। फिर टाइम नहीं मिलता। एनर्जी ही नहीं है। थका थका रहता हूं। थका थका थका थका रहता हूं। ठीक है साहब थके थके रहते हो [हंसी] हेल्थ साथ नहीं दे रहा है हर दो महीने में नई प्रॉब्लम आ जाती है हेल्थ साथ नहीं है अब मैं कैसे बताऊं कि तुम्हारी हेल्थ को तुम साथ रखना ही नहीं चाहते। हेल्थ तो
(29:53) यहां है लेकिन तुम्हारे साथ में दिक्कत वहां है। फिर घर वाले सपोर्ट नहीं करते हैं। उल्लू के पट्ठे हरामखोर हैं। सभी घर वाले सपोर्ट नहीं देते हैं। ठीक है साहब। यह भी मान लेते हैं। उनकी बात वहां करेंगे। फिर और क्या दिक्कत है? कर तो दूं लेकिन लोग क्या कहेंगे? लोग क्या कहेंगे? कर तो दूं लेकिन लोग क्या कहेंगे? मोटिवेशन नहीं आ रहा है। दो दिन करता हूं, रुक जाता हूं। मोटिवेशन नहीं है तो कंसिस्टेंसी भी नहीं आता है। [गला साफ़ करने की आवाज़] कंसिस्टेंसी नहीं है। इसलिए रुक जाता हूं। टाइम नहीं है, एनर्जी नहीं है, हेल्थ नहीं है, रिसोर्सेज ही नहीं है। गरीब हूं। मेरा
(30:39) बाप कोई अंबानी थोड़ी ना है। गरीब हूं। यह लैंग्वेज है। ये मैं लैंग्वेज बता रहा हूं जो हम यूज़ कर गरीब हूं। गरीब हूं, लाचार हूं, बेचारा हूं, हेल्थ नहीं है, मोटिवेशन नहीं है। अब उम्र हो गई। अब नहीं होगा। चलो साहब। यह सारी समस्याएं मैं अक्सर देख लेता हूं अपनी लाइफ में जो मुझे महसूस होती है। ठीक है? हां। यही कुछ प्रॉब्लम्स हैं। किस्मत खराब है। उसको भी लिख देते हैं ना। किस्मत खराब है। कर्म ही फूटे हुए हैं ना। किस्मत ही फूटी
(31:24) हुई है। किस्मत फूटी हुई है। किस्मत फूटी है। चलो भाई बहुत बढ़िया। कैसी-कसी गजब की बातें हैं। गजब की बातें। अब मैं कुछ ऐसी जबरदस्त किताबें हैं जिनकी चर्चा करूंगा और फिर इनके सॉल्यूशन की बात करेंगे। आपको पता है कंप्लेन हमेशा गलत नहीं होती है। कैसे? एक किताब है। [गला साफ़ करने की आवाज़] कंप्लेन इज गिफ्ट। [हंसी] इतनी सारी बातें बोलने के बाद एक किताब है। उसका नाम है कंप्लेन इज अ गिफ्ट।
(32:12) क्या मतलब? केस सब बताया। फिर यह बताया। कंप्लेंट इज अ गिफ्ट। वी कांट बिलीव दिस। यस। कंप्लेंट इज अ गिफ्ट। एक किताब लिखी गई है बिजनेस ओनर्स के लिए कि अगर आपका कोई कस्टमर है, आपका कोई क्लाइंट है जो आपको पैसा देता है और वो सर्विस से खुश नहीं है या आपके प्रोडक्ट से खुश नहीं है तो आप उस कंप्लेंट को एक्सेप्ट करिए। उसको थैंक यू बोलिए और सुधार करने का प्रयास करिए। और इंटरेस्टिंग बात यह है कि बिजनेस वर्ल्ड में वन ऑफ द टॉप सेलिंग बुक रही है। यह कंप्लेन कंप्लेंट इज अ गिफ्ट। कंप्लेंट इज ए गिफ्ट।
(32:58) दिस वन। दिस इज अ बुक दैट यू कैन सी ओवर हियर। और ये थोड़ी अलग दुनिया है। तो क्या कंप्लेंट हमेशा बुरी चीज है। नहीं। यह उस वक्त अच्छी चीज हो जाती है जब कोई दूसरा आपसे आपकी कंप्लेन कर रहा हो और इसीलिए ये कहा गया है कि निंदक नियरे राखिए कि आपको ध्यान है कि नहीं है उससे आप आपकी रिफाइनिंग होती रहती है आपने सुनी होगी ये चीज कि जब कंप्लेन करने वाला आपके पास में होता है तो आप में सुधार होता रहता है खुद नहीं करनी समझते जाइएगा वो आपकी कंप्लेन
(33:45) हो रही है। कंप्लेंट इज़ अ गिफ्ट। एक और किताब है। एक और किताब है। मैं मेन मुद्दे पे आऊंगा। उससे पहले मुझे गजब की किताबें पढ़ने का मौका मिला आज थोड़ा सा। किताब का नाम है सिक्वी व्हील। [गला साफ़ करने की आवाज़] वी इस किताब का नाम है। एस क्यू यू ई के वाई के यहां लिख देते ky पता है इस किताब में क्या है
(34:30) कि कंप्लेन करना सीखिए मान लेते हैं आपको किसी इंसान में सुधार करना है कि यार तुम है ना थोड़े स्वीट तो हो लेकिन तुम है ना बेवकूफ हो यार। है ना? नेक्स्ट टाइम से मैं ये उम्मीद करूंगा कि तुम थोड़े कम बेवकूफ रहो। तो मैंने क्या किया? इस बुक में ये सिखाया गया कि प्रॉब्लम को सैंडविच की तरह जितने भी लोग चैट सेक्शन में हैं, प्लीज थोड़ा होल्ड ऑन करिए। आई विल रीड योर प्रॉब्लम्स। जस्ट होल्ड ऑन। तो इस किताब में सिखाया गया कि अगर मैं किसी को अपनी समस्या बता रहा हूं तो मुझे
(35:14) सैंडविच फॉर्म में बताना है या बर्गर फॉर्म में बताना है। पहले जाओ उसकी थोड़ी तारीफ करो। सबसे मुश्किल काम है दुनिया में किसी की बुराई कर देना और उसको बुरा ना लगे। तुम सिस्टम को बदलना चाहते हो। तुम घर को बदलना चाहते हो। तुम परिवार को बदलना चाहते हो। तुम कंपनी को बदलना चाहते हो। तुम प्रॉब्लम बता दो सामने वालों को। उसको फील ना हो। उसको लगे कि अरे मेरी अच्छाई चाहता है। ये इस किताब में सिखाया गया है कि प्रॉब्लम को बताने का तरीका होता है सैंडविच पैटर्न। और यही लोग आगे जाके लीडर्स बनते हैं
(36:01) जिनको यह पता हो कि प्रॉब्लम बतानी कैसे है। 90% लोगों को पता ही नहीं है। तू पागल है यार। आप पता है बहुत अच्छे हो। थोड़े से पागल हो। नेक्स्ट टाइम तो थोड़ी पागलपंती कम करना तो उसको सही लगता है कि यार हां यार मेरी काम की बात कह रहा है। ये ये इस किताब में कहा गया। खैर एक और किताब है। अब अपन हमारे मेन मुद्दे पर पहुंचते हैं। किताब का नाम है हग योर हेटर्स। वाह वाह वाह वाह वाह वाह। यह वहां मैं बात कर रहा हूं जहां पर आपकी
(36:48) कंप्लेंट हो रही है। आपसे कंप्लेंट हो रही है। हग योर हेटर्स। पता है दोस्त पहले क्या होता था? पहले कंप्लेंट्स बहुत या आपकी शिकायतें बहुत प्राइवेट होती थी कि किसी ने किसी के बारे में कहा तो दो चार जगह तक पहुंची और खत्म बात। आजकल पता है क्या होता है? प्रॉब्लम्स सोशल मीडिया पर लिख दी जाती है। प्रॉब्लम सोशल मीडिया पर लिख दी जाती है कि भाई तेरे साथ में यह दिक्कत है। तू सटका हुआ है या मैंने एक्स वzेड सर्विस ली। मुझे इंसान सही नहीं लगा।
(37:32) या इंसान चोर है। Lindin पर लिख दी जाती है, Instagram पर लिख दी जाती है, YouTube पर लिख दी जाती है, Facebook पर लिख दी जाती है। बहुत ही सिंपल सॉल्यूशन है कि जब भी ऐसा हो आप जाओ और उसका रिप्लाई दो। चाहे उसकी शिकायत कितनी ही कड़वी क्यों ना हो। रिप्लाई द इशू। पता है इससे क्या होगा? आपकी ऑथेंटिसिटी बढ़ेगी कि यार यह बंदा सही है और जो प्रॉब्लम लिख रहा है ना इसकी शिकायतें कर रहा है ना वही दिमागी रूप से पागल है। कितना टफ है कि मैं आप कुछ कह रहे हैं क्या कि मैं कुछ अपनी प्रॉब्लम्स को देखूं। मैं अपनी प्रॉब्लम्स को देखूं और
(38:21) हम ऐसा नहीं कर पाते ना। यार किसी ने मेरे बारे में क्या-क्या बोल दिया यार। एंग्जायटी हो रही है भाई। पैनिकिक अटैक आ रहा है यार। नहीं झेल पाऊंगा यार। तुम सोचो ना। सबसे ज्यादा गालियां कौन सुन रहा है सुबह उठ के? चलो दुनिया में सबसे ज्यादा गालियां किसे पड़ती है? दुनिया की बात कर रहा हूं। सुबह उठ के दुनिया में सबसे ज्यादा गालियां किसे पड़ रही है? आप कहोगे डोनाल्ड जे ट्रंप भारत में। नरेंद्र दामोदर दास मोदी। आपके किसी स्टेट में जहां भी आप रहते हैं वहां के सीएम को। वह प्रॉब्लम्स जो शिकायत उनके सामने आ रही है उसको ढेलते
(38:56) हैं, सुनते हैं, इग्नोर नहीं करते हैं। टीम उसको रहने देती है। टीम बताती है, वो फेस करते हैं। शिकायतें होना, गालियां पढ़ना, आपकी कमियां बताना यह इस बात का सबूत है कि आप कुछ कर रहे हैं। यू आर अलाइव। जिंदा हैं आप। दैट इज व्हाई। खैर एक किताब है जिसका नाम है कंप्लेंट फ्री वर्ल्ड। किताब यह कहती है कि शिकायतें इस दुनिया को बर्बाद कर रही है। इजराइल ने यूएस से ईरान की शिकायत कर दी। न्यूक्लियर पावर बनना चाहता है। खामनाई का खात्मा कर दो। शिकायत
(39:43) कितने मासूम लोग मारे गए। स्कूल की बच्चियां मारी गई। फिर रिलेशन तो खराब हुए इंटरनेशनल लेवल पर सेहत जो लोग शिकायत कर रहे हैं उनकी सेहत बिल्कुल खत्म है। डॉक्टर्स के पास में दवाई लेने वही लोग जाते हैं जो सुबह से शाम तक शिकायत करते हैं। आप देख लो पेशेंट्स बहुत इरिटेटेड होते हैं। नहीं जो इरिटेटेड होते हैं वही पेशेंट बनते हैं। यार पेशेंट बहुत उनको बहुत प्रॉब्लम होती है। नहीं जिनको बहुत प्रॉब्लम होती है वही पेशेंट बनते हैं। यार वो हमें मतलब चिड़चिड़े हो जाते हैं पेशेंट्स। नहीं जो चिड़चिड़े होते हैं वही पेशेंट बनते हैं। कोई नहीं समझता इस चीज
(40:29) को। नो वन वांट टू लिव। आज मुझे प्रॉमिस करना पड़ेगा आपको। खैर, हम सॉल्यूशन की बात करेंगे। कंप्लेंट फ्री वर्ड यही कहता है कि यह जहर है। शिकायत एक जहर का दूसरा नाम है। शिकायत जहर है। और यह आपको मारने का सबसे तेज तरीका है जिससे आपकी डेथ तक हो सकती है। यह कोर बुक है व्हिच टॉक्स अबाउट द कॉम्प्ल। खैर बात आती है मेन कि सॉल्यूशन कैसे किया जाए किसी भी प्रॉब्लम का, किसी भी समस्या का। तो भाई स्टेप बाय स्टेप चलते हैं।
(41:15) एक समय था दोस्त एक समय था जब भारतीयों के पास में पढ़ने की सुविधा नहीं थी और आप कह सकते हो कि साउथ ईस्ट एशियन कंट्री के पास में पढ़ने की सुविधा नहीं थी। जैसे आप अभी ओटीटी भारत का सेशन ले रहे हैं तो ऑब्वियस सी बात है पढ़ रहे हैं। यह पढ़ने का ही तरीका है। पढ़ने की सुविधा नहीं थी। एक समय तक ठीक है? फिर सुविधा हो गई। गवर्नमेंट के बहुत सारे प्रोग्राम आए। प्राइवेट स्कूल्स भी हो गई। बहुत सारी चीजें हो गई। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] फिर आया कोविड, फिर आया 4G और फिर आया फ्री इंटरनेट।
(42:02) और लोगों ने फिर से बढ़ना पढ़ना बंद कर दिया। पढ़ना बंद कर दिया तो बढ़ना बंद कर दिया। और आज हम सबसे गवार जनरेशन के साक्षी हैं। किसी में तहजीब नहीं है। किसी में तमीज नहीं है। क्योंकि सब रील देख रहे हैं। घटिया चीजें वहां सुनते हैं। घटिया चीजें बोलते हैं। घटिया तरीके का बर्ताव है। जीरो पेशेंस है। और इंडियंस ने आज पेन और पेपर लगभग फेंक दिए हैं। जो इस धरती के सबसे बड़े हथियार हैं। पेन और पेपर फेंक दिए। तो अगर मैं कहूं कि मुझे प्रॉब्लम सॉल्व बनना है तो मुझे क्या करना पड़ेगा सर? तो
(42:47) भाई मुझे प्रॉब्लम लिखनी पड़ेगी। राइट द प्रॉब्लम। लिखी हुई समस्या खत्म हो जाती है और बोली हुई समस्या बढ़ जाती है। यह कबीर जी ने नहीं कहा। रहीम दास ने नहीं कहा। यह मैं कह रहा हूं। लिख लेना इसको। लिख लेना इसको। आज जब मैं पूरे दिन सोच रहा था, सोच रहा था, सोच रहा था यार क्या क्या उतने समय में मेरे पास में एक लाइन आती है कि प्रॉब्लम बोलेगा तो बढ़ जाएगी। लिखेगा तो खत्म हो जाएगी। यार बिजनेस नहीं चल रहा है यार। बोलता रहे लोगों को मजा आएगा। लोगों को मजा आएगा। बर्बाद हो रहा है। पैसे ही नहीं है। किस्त नहीं जा रही इसकी।
(43:33) खत्म हो जाएंगे। इनके शौक खत्म हो गए और ला Scorpio वाले हम Fortuner वाले हो गया खत्म यार दो साल से तबीयत ठीक नहीं है यार हां और खाओ भाई डोमिनोज के पिज़्ज़ा बर्गर हम अमीर लोग हो ना तुम तो एंड यू आर लॉस्ट यू विल बी गॉन डोंट टेल यहां से प्रॉब्लम कान तक पहुंच पहुंची और तुम खत्म। और मैंने इसीलिए वो एक डीडब्ल्यूआर डायरी बनाई है क्योंकि मुझे पता है मैं मॉडर्न ट्रेंड में नहीं चलता हूं। मैं एंशिएंट ही रहना चाहता हूं। लोग तो ऐप बना दिए हैं। लोग पता नहीं क्या-क्या बना दिए हैं कि
(44:18) इससे प्रॉब्लम सॉल्व नहीं होती है भाई। आज भी जिसको महान बनना है, वह जेब से पेन निकालता है। वहां से डायरी निकालता है। आज मुझे क्या-क्या करना है, उसको लिखता है। क्या-क्या जो लिखा है, वह करता है और जीते हुए योद्धा की तरह घर जाता है। आज जीता हुआ योद्धा वो नहीं है जो तलवार चलाता है। आज योद्धा वो है जो पेन चलाता है। आज हारा वो वो है जो मोबाइल चलाता है। अब सेनापति वह है जो पेन चलाते हैं। सैनिक वह हैं जो मोबाइल चलाते हैं। सिंपल। तो अब मैं स्टेप बाय स्टेप जितनी प्रॉब्लम्स हैं उनकी भी बात कर लेता हूं। वहां पर लिखा हुआ है मैं एक रिक्वेस्ट
(45:00) करूंगा। एक रिक्वेस्ट करूंगा ये इस पे ये फिंगर में मुझे फ्रैक्चर हो गया है। जिसको साइड में रखते हैं। प्लीज कीप दिस साइड। बहुत समय से बच्चे सवाल पूछ रहे थे कि फिंगर में क्या हो गया है? क्या है? यह कोई डिवाइस नहीं है। सिंपली एक फ्रैक्चर हो गया है। खैर यहां पर कुछ मुद्दे सबसे पहला मुद्दा सबसे पहला मुद्दा है टाइम नहीं मिलता है। ऐसा मुद्दा होगा ना लाइफ में कि टाइम नहीं मिलता है। टाइम बहुत है बेटा। टाइम बहुत है अपने पास में। टाइम की प्लानिंग नहीं आती है। टाइम की वैल्यू नहीं है अपने पास। आपके पास में टाइम उतना ही है जितनी टाइम
(45:46) की आपके पास प्लानिंग है। सिंपल गेन अगर आप सिंसियरिटी के साथ में प्लानिंग कर सकते हैं तो आपके पास में समय होगा और आपके पास में रिटन फॉर्मेट में कुछ नहीं है। कई लोगों को ये लगता है ना कि टाइम टेबल सिर्फ 12वीं क्लास तक काम में आता है। स्कूल तक काम में आता है। ना ना टाइम टेबल स्कूल और कॉलेज से पास आउट होने के बाद जो बनाना सीख जाते हैं ना फिर लोग उनसे टाइम लेके मिलते हैं। स्कूल और कॉलेज में तो हर किसी के पास टाइम टेबल होता है। हर किसी के पास होता है। प्लानिंग नहीं। और प्लानिंग के लिए मैं हमेशा कहता हूं डी डब्ल्यू ए आर
(46:25) डी डब्ल्यू आर डी फॉर व्हाट आई डिड मैंने क्या किया? डब्ल्यू फॉर व्हाट आई विल मैं क्या करूंगा? ए फॉर मेरा अचीवमेंट क्या है? आर फॉर मेरा रिग्रेट क्या है? कि मैंने क्या ऐसा गलत किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था? ये लिखा होना चाहिए। यह लिखा होना चाहिए। अगर वह नहीं लिखा हुआ है ना भाई यह चार चीजें हैं जो हम कहते हैं ना कि ब्रह्मचर्य है हां गृहस्थ है वानप्रस्थ है सन्यास है वैसे डी डब्ल्यू ए आर डिड वेल अचीव्ड रिग्रेट अचीवमेंट क्या है क्या आज मैं 10 किलोमीटर भागा हूं ये अचीवमेंट है कितनी अचीवमेंट है तुम्हारी लाइफ में
(47:14) शून्य ने कभी भागे हो आज तक हां भागे हैं को लेकर पुलिस पीछे आई ढूंढ लिया उन्होंने इतना तेज भागते तो ओलंपिक में क्यों नहीं गए ट्रेन में भागे थे कहां से पटना से कहां को इलाहाबाद पहुंचे थे मोबाइल था तो पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर लिया। पकड़ लिया हमको। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] नहीं वह अचीवमेंट की बात कर रहे थे। अब भागे हैं ना 10 कि.मी. कहां है? 1000 कि.मी.
(47:55) भागे। बहुत दूर भागे। भागते-भागते मांग भर दिए। पुलिस वाले लाए। वो हमारी मांग भर दिए। यही बात है। अचीवमेंट नहीं है यार। मैं अगर जवान हूं और मेरी जिंदगी में कुछ भी फिजिकल मेंटल अचीवमेंट ही नहीं है। इट मेक्स नो सेंस टू माय लाइफ। इट मेक्स नो सेंस टू माय लाइफ। आज मैं अगर यह अचीवमेंट लिखूं कि यार मैं 20 किलोमीटर पैदल चला 20 कि.मी.
(48:39) अचीवमेंट नहीं है। यह मेरी फिजिकल स्ट्रेंथ का अचीवमेंट है कि मैं फिजिकली इतना पावरफुल हुआ करता था। इट विल मोटिवेट मी। द डिसिप्लिन विल मोटिवेट यू एट द एंड ऑफ़ द डे। बिकॉज़ व्हेन डिसिप्लिन बिकम्स मोरेंट फॉर यू देन मोटिवेशन यू योरसेल्फ बिकम मोटिवेशन फॉर द अदर्स बट व्हेन यू स्टार्ट सीकिंग द मोटिवेशन यू जस्ट बिकम नो वन बट द फॉलोअ द फॉलोअर्स इफ दे बिकम मोटिवेटेड दे बिकम लीडर्स तो प्लानिंग सबसे इंपॉर्टेंट है प्लानिंग फिर घरवाले सपोर्ट नहीं करते संजू सैमसन को भी नहीं करते थे। देखो इंडिया वाले कहां सपोर्ट करते थे
(49:26) संजू सैमसन को? आज संजू सैमसन चेन्नई सुपर किंग से तीन मैच खेल लिया। किसी की औकात है सपोर्ट ना करें उसे। संजू हां अगले पांच मैच में भी जीरो पे आउट हो जाना। हम वैसे ही वह तो नाम लिया था आपका। क्यों परफॉर्म कर चुका है? अंदर वाले हो चाहे बाहर वाले हो। सपोर्ट परफॉर्मेंस को मिलता है। अगर तुम परफॉर्म नहीं करोगे, लोग सपोर्ट नहीं करेंगे। तुम क्या करते हो उससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। तुम कैसे करते हो उनसे उन्हें कोई मतलब नहीं है। उनको रिजल्ट दिखाओ कि देखो पापा मैंने 7 दिन में ये कर दिया है। पापा देखो मैंने 15 दिन में ये कर दिया है। अब
(50:06) मैं इतना और कर सकता हूं। शो देम रिजल्ट। शो देम रिजल्ट। सिंपल। इट्स अ सिंपल गेम। दुनिया सिर्फ रिजल्ट को सलाम ठोकती है दोस्त। बाकी और किसी को कुछ नहीं पढ़ा है। कुछ नहीं पढ़ा है। और यह मैंने इसलिए लगा रखी है बार-बार इस पर लग जाती है। पैर पर भी लग गई है। कुछ लोग मुझसे पूछ रहे थे बहुत टाइम से कि सर क्या आप सेशन बैठ के ले रहे हैं? लेने पड़ेंगे। पैर के लगी हुई है। सेशन ले रहा हूं ना। दैट इज मोर इंपॉर्टेंट। पैर कट भी जाएंगे तब भी आकर बोल दूंगा। जब तक जिंदा हूं तब तक जिंदा नजर आऊंगा। यह मेरा वादा है। खैर लोग क्या कहेंगे? क्या कहेंगे मरी हुई?
(50:48) मरी हुई जनता क्या कहेगी? लोग क्या कहेंगे? लोग कुछ भी कर लो। लोग तो कहेंगे मैं जब कुछ नहीं करता था। कहते थे कुछ क्यों नहीं करता? जब मैं बहुत कुछ करने लगा। कहते इतना क्यों करता? आराम भी किया कर। दुनिया है यार। इसके चक्कर में मत जाओ। इसके चक्कर में मत जाओ। दुनिया बड़ी अजीब है। भैया जरा मीठे अमरूद देना और फिर नमक लगा के खाते हैं। तो दुनिया के बारे में जाओगे तो फिर तो यार गेम खत्म है। फिर तो बात ही
(51:33) मत करो लड़ने की। दुनिया उसके बारे में ही बात करती है। एट द एंड ऑफ़ द डे। आखिर में दुनिया उसी के बारे में बात करती है जो दुनिया की बात नहीं सुनता है। भगत सिंह ने कहां सुनी होगी? कहा होगा घर वालों ने पागल है क्या? सिया गया है क्या? 21 की उम्र में अंग्रेज अंग्रेजों से लड़ना। लोग बीजेपी से नहीं लड़ पा रहे हैं आज। अंग्रेजों से लड़ता था वो इंसान। अंग्रेजों से बोले नहीं। जो करना है इस धरती के लिए करना है। मेरा देश मेरे लिए सब कुछ है। दुनिया की बात मानी। नहीं मानी ना तब दुनिया उनकी बात करती है आज और हम पापा मैं वो iPhone वो ब्लैक
(52:18) वाला ले लूं नहीं सफरन सॉरी पापा क्यों पूछना पड़ रहा है ये क्योंकि पिताजी के पैसे हैं। खैर आगे चलते हैं। ऐसी डरपोक दुनिया ये बात करती है कि हम यह कर देंगे, हम वो कर देंगे, हम क्या कर देंगे। खैर हेल्थ साथ नहीं देती। इसके लिए तो मैं बहुत बहुत बहुत बार मेरे सेशंस ले चुका हूं। एक चीज जरूर से देखना। साइकोसोमेटिक इलनेस और मेडिटेशन वाला सेशन है। इस सेशन के बाद में जरूर से देखना अगर आपके पास में समय हो तो। साइकोसोमेटिक इलनेस का एक सेशन है। साइकोसोमेटिक इलनेस और मेडिटेशन। भाई एबी के सर लिखना और उनको जरूर से देखना। दो सेशन विल बी वेरी वेरीेंट। हेल्थ के
(52:54) बारे में उनमें मैंने बहुत बात की है। आप समझ जाएंगे। अब उम्र हो गई। दो बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं यहां पर। रिसोर्सेज मतलब उम्र हो गई। इन पर मैं जरूर से बात करना चाहता हूं। आज पहले इसको पकड़ लेते हैं रिसोर्सेज को। [गला साफ़ करने की आवाज़] सुनना मान लो मेरे पास में पांच किताब खरीदने के पैसे नहीं है। मैं रिसोर्सेज की बात कर रहा हूं। मेरे पास पांच किताब खरीदने के पैसे नहीं है। एक सब्जेक्ट है। मैं यूपीएससी की तैयारी कर रहा हूं। हिस्ट्री की पांच किताब आती है और मार्केट में पांचों ही चलती है। अब
(53:40) मुझे किसी टीचर ने कहा कि भाई हिस्ट्री की ये पांच किताब है। इनमें सारा सिलेबस कवर्ड है। ये खरीद लो। अलग-अलग राइटर की है। कोर्स सब में पूरा है। लेकिन किताब पांच आती है। अब मैं अमीर इंसान हूं तो खरीद लूंगा। लेकिन मैं गरीब हूं। मैं बुद्धि लगाऊंगा यार। पांच किताब है। क्या करें? एक काम करते हैं यार एक किताब को पांच बार पढ़ते हैं। कितना बड़ा सॉल्यूशन है ये। मैं फिर भी उतना ही कंटेंट ग्रेस कर पाऊंगा जितना मैं पांच किताबों को पढ़ के करता। इवन उससे ज्यादा। बिकॉज़ इट इज़ नॉट अबाउट रिसोर्सेज। इट इज़ अबाउट रिसोर्सफुलनेस। तुम्हारे पास
(54:17) जो है उसका तुम कितने सही से इस्तेमाल करते हो बजाय कि ढूंढते रहते हो कि यार मुझे यह मिल जाए, मुझे वह मिल जाए, मुझे यह मिल जाए। कभी कुछ नहीं मिलता है। जो है उसका सही से इस्तेमाल करो। लेकिन नहीं मुझे जिंदगी में यह नहीं मिला, मुझे जिंदगी में वो नहीं मिला, मैं बर्बाद हो गया, मैं खत्म हो गया। अब तो उम्र बीत गई है यार। अब कैसे हो पाएगा? अब कैसे हो पाएगा? अब तो हो ही नहीं सकता। एक बात बताऊं? ट्रंप को तुम देखते हो ट्रंप को। डोनाल्ड जे ट्रंप को किस एंगल से लगता है कि वह आदमी बुड्ढा है। डोनाल्ड ट्रंप
(55:04) द गोल्डन गडूरा हां क्योंकि उसको पता है कि सुबह उठके उसके पास में हजार काम है। जिस भी शरीर के पास में काम होगा वो शरीर बुड्ढा हो ही नहीं सकता। मुझे पता है कि मुझे सुबह उठ के 100 काम करने हैं। दिमाग को मैसेज जाएगा कि भाई इसको जिंदा रख, इसको जवान रख। इसको बहुत कुछ करना है। और जब यह है तो रिटायरमेंट हो गए साहब। रेलवे में थे। जी। हां। बहुत सेवा करी देश की।
(55:50) अब तो बीड़ी पीते हैं जी। सुबह बस आराम करते हैं। 5 साल में निपट जाएगा वो आदमी। 5 साल में जिसको 60 साल कोई बीमारी नहीं हुई, खांसी जुकाम नहीं हुई, पांच साल में निपट गया। क्यों? टारगेट ही नहीं था। अब अगर जिसको जिंदा रहना है, जिसको जवान रहना है, उसके पास गोल्स होने चाहिए। अब उम्र हो गई है। नया टारगेट लो, नया गोल सेट करो। लेकिन शिकायतें करो बस। साहब तो हाथ पैर काम नहीं करते साहब तो सहारा ले चलो देख रहे हो जो सुबह उठ के काम कर रहा है जो सत्ता में है वो जवान है मैं तो देख पाता हूं 17 18 19 साल के लोगों को उनमें उतना जोश नहीं जिनमें वो 70 80 साल के
(56:35) डोकरों में है। क्यों? सत्ता काम करना है, कर्म करना है। फिर मोटिवेशन नहीं है तो मोटिवेशन तो कुछ करने से आता है। मैं एक सेशन लेता हूं तो मेरा दूसरा सेशन लेने का मन करता है। मैं एक चैप्टर पढ़ता हूं दूसरा चैप्टर पढ़ने का मन करता है। 1 कि.मी. भागता हूं। 2 कि.मी. भागने का मन करता है। एक पुश अप लगाता हूं। दो पुश अप लगाने का मन करता है। सिंपल है भाई। सिंपल। एक ब्रेकफास्ट अच्छा करता हूं। लंच अच्छा करने का मन करता है। लंच अच्छा करता हूं। डिनर अच्छा करने का मन करता है। पट अच्छी पहन लेता हूं। शर्ट अच्छा पहनने का मन करता है ये तो
(57:05) डिसिप्लिन से आता है भाई मोटिवेशन क्या करेगा इसमें नहीं वो सॉरी सर वो लेकिन डिसिप्लिन जो नहीं है ना सर तो फिर कुछ नहीं हो सकता मोटिवेशन इज फेक इट इज क्रैप यू कैन यू विल आई कैन आई विल व्हाट इज दिस व्हाट इज दिस इट इज टोटल क्रैप इट इज टोटल क्रैप इट मेक्स नो सेंस इट मेक्स नो सेंस तो मैंने इस सारी बातें हेल्थ हेल्थ के लिए तो मैं बार-बार कहता रहा हूं कि ये ये चीज है इसको फॉलो करना है और सुबह उठ के मैं इसमें पीआर और ऐड कर रहा हूं। पीआर प्रसिद्ध कर रहा हूं। उसको सिद्ध से
(57:49) प्रसिद्ध करता हूं। प्रसिद्ध कर रहा हूं कि प्रातः काल उठो। ईश्वर को याद करो। जो भी आपका ईश्वर है। मैंने राम लिखा है। है ना? प्रातः काल उठो। राम को याद करो। डेली अच्छे से सोना है, एक्सरसाइज करना है, डाइट डाइट का ध्यान रखना है, डीप ब्रीथिंग करनी है, पानी अच्छे से पीना है। प्रसिद्ध अपने आप हो जाओगे। ईश्वर कोई भी हो सकता है। कोई भी ईश्वर हो सकता है। एनीवन जो आपको लगता हो। अभी मैं जब सेशन ले रहा हूं तो मेरे लिए शब्द ईश्वर है। सिंपल बहुत सिंपल। बहुत बहुत सिंपल चीजें। तो मैं अब सिद्ध को आज से प्रसिद्ध कर रहा हूं। प्रातः काल
(58:30) उठना है। ईश्वर को याद करना है। मेरा कर्म मेरे लिए ईश्वर है। मैं रूटीन को ईश्वर मानता हूं। राम को ईश्वर मानता हूं। स्लीप, एक्सरसाइज, डाइट, डीप ब्रीथिंग, हाइड्रेशन ये ये मेरे लिए ईश्वर है जो मैंने लिखा है। ठीक है? अब एक बार जो कुछ हमारे साथियों की समस्याएं हैं जो चैट में लिख रहे हैं उनसे एक बार। हां बिल्कुल राधा नाम से भी बिल्कुल जो आपको सही लगे मैंने तो आर फॉर प्रसिद्ध लिख दिया है। ठीक है कुछ बच्चों का सवाल है मेस्टबेशन कैसे रोके इसके बारे में मेरे कई सेशन है आप प्लीज जाके देखिए सेक्सुअल हेल्थ के ऊपर मेरे कई डिस्कशंस मैंने लिए हैं।
(59:11) चलिए हां प्रसिद्ध कर दिया है उसको। यह बहुत बहुत इंपॉर्टेंट है कि सुबह हम जल्दी उठे। कोई भी चीज 10 गुना प्रभावी हो जाती है कि अगर वो सुबह की जाए। सुबह जल्दी अगर वो चीज कोई होती है तो 10 गुना ज्यादा प्रभावी हो जाती है। लेकिन एक चीज को याद रखना है। कंप्लेन बोलने से नहीं लिखने से सॉल्व होती है। कंप्लेन पेन और पेपर को देखकर डर जाती है और कानों को देखकर खुश हो जाती है। उसको सिर्फ कान चाहिए होते हैं ताकि वह फैल सके। समस्याएं फैल सके। लेकिन आप पेन और पेपर पे अपनी प्रॉब्लम्स लिखते हैं। गेट डिस्ट्रॉयड।
(59:56) भारतीयों ने उसे इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। इस चीप इंटरनेट के जमाने में। मैं पेन और पेपर का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करता हूं। चीजें लिखता हूं। मैं एक वेलनेस के नाम से भी चैनल लाने का प्रयास कर रहा हूं। डॉक्टर एबीके वेलनेस जहां पर मैं हेल्थ की बात थोड़ी रेगुलरली आपके साथ में कर पाऊं, साझा कर पाऊं। आप सभी को प्रणाम करता हूं। आप सभी का साथ बना रहे। हम आगे जाकर कुछ बड़ा कर पाएं। धीरे-धीरे संगठन मजबूत हो रहा है। आगे और बेहतर करेंगे। इस सेशन का फीडबैक कमेंट सेक्शन में जरूर से दीजिएगा। और डॉक्टर एबी के क्योंकि मैं देखता हूं कि हेल्थ
(1:00:31) केयर सेक्टर में ऐसे ऐसे लोग अब गाइड कर रहे हैं जिनके पास ना डिग्री है, ना एक्सपीरियंस है, ना कुछ है बट स्टिल दे आर टॉकिंग एंड टॉकिंग एंड टॉकिंग बाय रील्स। तो एक बार जरूर से फीडबैक दीजिएगा। चीजें बताइएगा और फिर हम जरूर से आगे अगर आपका सपोर्ट रहा आगे आपके विचार रहे कि हां सर वेलनेस के ऊपर वास्तव में ऑथेंटिक बात होनी चाहिए तो मैं उसके ऊपर जरूर से काम करूंगा। चाहे कोई सी प्रॉब्लम हो। मैंने लिखा ब्लड प्रेशर और मैं उसका पूरा डिटेल में डिस्कशन आपके साथ में कर रहा हूं। मैंने लिखा शुगर और मैं उसका पूरा डिस्कशन आपके साथ में कर रहा हूं क्योंकि मेरा
(1:01:01) बैकग्राउंड एमबीबीएस का रहा है तो शायद मैं उस चीज से ज्यादा रिलेट कर पाऊंगा। ऐसा नहीं है कि जो बाकी लोग काम कर रहे हैं वो अच्छा नहीं कर रहे हैं। बट फेक न्यूज़ बहुत ज्यादा फैली हुई है हमारे समाज में। प्रणाम शुभ रात्रि। ध्यान रखिएगा ये दुनिया शिकायत करने वालों को नहीं। प्रॉब्लम सॉल्व करने वालों को ढूंढ रही है। दैट कैन बी यू।
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