Did India Really Rule the Seas? | Ancient Maritime Power Nobody Talks @NileshOak @rupabhaty6757
Author Name:EST Show
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Title: Did India Really Rule the Seas? | Ancient Maritime Power Nobody Talks @NileshOak @rupabhaty6757
Author Name: EST Show
Description: How far back does India’s maritime history really go?
In this special episode, two renowned researchers come together on one podcast for the first time to explore the fascinating story of ancient India’s seafaring and maritime culture.
Rupa Bhaty : Architect, Researcher & Adjunct Assistant Professor at the School of Indic Studies
Nilesh Nilkanth Oak : Author, Speaker, Researcher, GAIA & TEDx Speaker
Together, they explore what ancient Indian texts, historical interpretations and archaeological evidence can tell us about India’s connections with the wider world.
From references connected with the Ramayana and Mahabharata to discussions around the Indus Valley and Harappan civilisations, the conversation travels across centuries of Indian history.
The episode also explores:
• Ancient Indian seafarers and maritime trade
• India’s connections with distant regions
• What ancient texts say about travel and commerce
• Indus Valley & Harappan civilisation
• The Aryan Invasion debate and different historical interpretations
• Ancient trade routes and cultural exchange
• What archaeology can and cannot tell us about the past
• How we can understand India’s maritime history through multiple sources
This is a conversation about history, evidence, interpretation and the many questions surrounding India’s ancient relationship with the sea and the wider world.
Watch the complete conversation and decide for yourself what the evidence tells us.
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Transcript:
(00:04) कोलंबस ने अमेरिका डिस्कवर किया। वास्कोडि गामा ने सी रूट टू इंडिया डिस्कवर किया। तो ये एक्चुअली में डिस्कवरी थी नीलेश सर या ये वो है जो लिखा गया है। हम नेविगेशन जो है वो इंडस सिविलाइजेशन के समय से कर रहे हैं। ही यूज्ड टू टेक टैक्सेस कृष्णा जी। वहां पे जो भी शिप्स लगती थी तो वो टैक्सेस लेते थे। ऐसा विवरण जो है और रामायण का जो समय है वो 14,000 इयर्स का है। लेकिन उनके जो कोडक्स थे ना ये कोडक्स ये स्पेनिश लोगों ने यूरोपियन लोगों ने जलाई है। सो आर्यन इन्वज़ इज नॉनसेंस। डोंट गो विद इट। [हंसी] तो पहाड़ भी मिलेगा जो हनुमान जी लेके आए
(00:46) थे संजीवनी वाला। [संगीत] नमस्ते इंडिया। वेलकम टू द ईएसटी शो। हम लोग जनरली ना यह पढ़ते हुए बड़े हुए हैं कि कोलंबस ने अमेरिका डिस्कवर किया था। वास्को दगामा डिस्कवर्ड दी सी रूट टू इंडिया। हाउएवर, आज जो मेरे साथ दो रिसर्चरर्स हैं, दे हैव बीन आस्किंग मच मोर अनकंफर्टेबल क्वेश्चंस विद रिस्पेक्ट टू हाउ द हिस्ट्री हैज़ बीन डॉक्यूमेंटेड? क्या यह वर्ड जो डिस्कवरी है, क्या इस शब्द को ही हमें क्वेश्चन देना चाहिए? द वर्ड डिस्कवरी इज क्वेश्चनेबल इटसेल्फ। और उनकी रिसर्च एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र में,
(01:31) आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में इमेंस है। एंड यू ऑल हैव मेड दीज़ गेस्ट सेवरल टाइम्स। आई थिंक इन सम काइंड ऑफ़ कॉन्फ्रेंसेस और पडकास्ट यू नो देम वेरी वेल। और मुझे यह कहने में बहुत ज्यादा हर्ष की अनुभूति होती है कि आई एम होस्टिंग बोथ द रिसर्चर्स फर्स्ट टाइम ऑन द ईएसटी शो टुगेदर। आई एम सो प्राउड टू वेलकम नीलेश ओक एंड रूपा भाटी मैम ऑन द एएसटी शो फॉर दी वेरी फर्स्ट टाइम दीज़ बोथ टॉप रिसर्चर्स आर कमिंग टुगेदर वेलकम सर वेलकम मैम वेलकम टू द एएसटी शो नमस्कार
(02:17) सो हैप्पी टू सी यू बोथ टुगेदर आई मीन इट्स एन ऑनर फॉर मी कि मैं दो ग्रेट ऐसे रिस्चर्स के साथ बैठी हुई हूं जिन्होंने बिल्कुल हिस्ट्री को पूरी तरीके से उधेड़ बुन दिया है। उधेड़ करके ऐसे-ऐसे फैक्ट्स आप लोग सामने लाए हैं जो हमने शायद अभी भी नहीं पढ़ते हैं जो हमने सुने नहीं थे लेकिन अब शायद हम उसके बारे में पढ़ना शुरू कर रहे हैं। सो, अ सर एंड मैम, आई ऍम गोइंग टू कीप दिस पॉडकास्ट वैरी ओपन क्योंकि डिस्कशन बहुत लेवल पे जा सकता है जा करके। लेकिन आज हम जानना चाहेंगे एंशिएंट सिविलाइज़ेशन इन टर्म्स ऑफ सी फेरर्स। क्योंकि शायद पहले
(02:56) ही वही ट्रैवलिंग का एक मीडियम था। तब एयर ट्रैवल था नहीं। हम सी फेरर्स की बात कर रहे हैं। तो हम यह जानना चाहते हैं कि डिस्कवर डिस्कवरी के दौरान जो चीजें लिखी गई हैं जैसे कोलंबस ने अमेरिका डिस्कवर किया। भारत वास्कोडिगामा ने सी रूट टू इंडिया डिस्कवर किया। तो यह एक्चुअली में डिस्कवरी थी नीलेश सर या यह वो है जो लिखा गया है? डिस्कवरी थी फ्रॉम यूरोपियन लोगों के पॉइंट ऑफ व्यू से क्योंकि उनसे यूरोपियन लोगों को इंडिया पता था हम और वो बीच में के जो अरब लोग हैं उनका बीच में ट्रांजिशन करके उनसे उनके कारण हमारा व्यापार चल रहा था। लेकिन उनको डायरेक्ट
(03:38) एक्सेस नहीं था। तो जो मिडिल ईस्ट के जो लोग हैं वो यूरोपियन लोगों को डायरेक्ट एक्सेस देते नहीं थे क्योंकि उनका ही साम्राज्य चल रहा है। साम्राज्य यानी कि कंट्रोल इवन द सप्लाई चेन आप बोल सकते हैं लॉजिस्टिक्स वाला तो चांस नहीं देते थे बिकॉज़ उनको तो मार्जिन रखना है ना बीच में बिजनेस का करके उनको बायपास करने के लिए उनको अलग ढूंढना पड़ा। तो यह डिस्कवरी है बट इट इज फ्रॉम अ यूरोपियन पॉइंट ऑफ व्यू और हमें डिस्कवरी क्या है? एक शॉर्ट में बताता हूं क्योंकि वो भी बड़ा सब्जेक्ट होगा जो हम विज्ञान की डिस्कवरी करके अभी जो हम उसका
(04:08) उपयोग करते हैं ना ऐसी डिस्कवरी वो नहीं है वो उसका एक वेरी स्पेसिफिक वेरी अब्राहमिक रिलीजन स्पेशली उसमें क्रिश्चियनिटी का कॉन्ट का कॉन्टेक्स्ट का मीनिंग है कि बेसिकली लाइक द होल वर्ल्ड वी ओन इट काइंड ऑफ और जो हम तो उनके लिए ऐसा लाइसेंस जैसा दिया जाता था एक्सपिडिशन हम प्रपोजल जैसा कि आप जाके ढूंढो और आप जो ढूंढ ढूंढ के निकालेंगे ना तो जिसने पहले देखा फ्रॉम अ यूरोपियन पॉइंट ऑफ व्यू उसने वो डिस्कवर किया डिस्कवर किया यानी कि नाउ ही हैज़ अ कंट्रोल ओवर इट विथ रिस्पेक्ट टू द यूरोप तो वो तो बाकी लोगों को तो पेगन जैसा ही सोच रहे थे। सो
(04:48) डिस्कवरी का अदर देन कि नया ढूंढ लिया एंड नाउ जिसने वह उसका शोध किया उसका उसके ऊपर कंट्रोल है। आई मीन ही हैज़ अ सम ही गोइंग टू गेट अ प्रायोरिटी ऑन अ फाइनेंशियल गेंस फ्रॉम दैट ऑनगोइंग ट्रांजैक्शंस। सो इट्स अ वेरी डिफरेंट टाइप ऑफ़ मीनिंगफुल डिस्कवरी अदर देन लाइक अ प्योर साइंटिफिक डिस्कवरी। ओके मैम ऑन द सेम ग्राउंड्स आपने इंडस सील पे इतना रिसर्च किया है। उसमें आपने ज्योग्राफिकल लोकेशनेशंस के बारे में ट्रेस किया है। एंड देन यू हैव टॉक्ड अबाउट दी सी रूट फ्रॉम द अरेबियन सी। तो ये अपने आप में आप इसे कैसे रिलेट करती हैं विद रिस्पेक्ट टू दी सी फेरर्स।
(05:29) द ओल्ड सी फेरर्स दैट वुड बी देयर। एक्चुअली देखा जाए तो ऋग्वेद के समय से ही नावः शब्द आ गया है और हम लोग सी फायरिंग जो है वो काफी समय से कर रहे हैं। मतलब थाउजेंड्स एंड थाउजेंड्स ऑफ इयर्स से। लेकिन कहीं हमें जो डॉक्यूमेंटेशन है वो थोड़ा सा हमें कम दिखाई देता है। इन अ वेरी फुलर फॉर्म यानी बहुत अच्छे तरीके से जो दिखाई देता है दैट इज़ इन अर्थशास्त्र। ओके। सो नावाध्यक्ष भी हैं। उनके नीचे के जो सुपरवाइजर्स हैं वो भी हैं। जो रोलर्र्स हैं वो हैं। मतलब बहुत सारे जो अरित्र का काम करेंगे वो हैं। माल ढोने वाले जो हैं जो अंदर बंकरिंग करेंगे वो
(06:13) है। उस समय बंकरिंग वाज़ नॉट अबाउट डीजल और क्रूड ऑयल। उस समय की बंकरिंग का मीनिंग है कि फूड जो है वो फूड सप्लाई एंड वाटर सप्लाई। क्योंकि समुंदर के बीच में जाके तो आप पानी नहीं पीते। खारा पानी तो नहीं पी सकते। सो द काइंड ऑफ बंकरिंग कौन करेगा? कैसे करेगा? क्या होगा? सील फैक्टर्स जो हैं वो जब मुझे जो मिलना शुरू हुए तो उसमें मुझे यह समझ में आने लगा कि यह जो है ट्रांजैक्शंस की बात हो रही हैं। इन सबके बीच के ट्रांजैक्शंस की भी बात हो रही हैं। गुड्स के ऊपर सील लगने की भी बात हो रही है। तो वहां से हमको पता चलता है कि डिस्कवरी जो इन यूरोपियन ने करी है वो एक
(06:54) उनके पॉइंट ऑफ व्यू से जैसा नीलेश जी ने कहा। लेकिन हमारे पॉइंट ऑफ व्यू से तो हम नेविगेशन जो है वो इंडस सिविलाइजेशन के समय से कर रहे हैं। एंड सबसे इंटरेस्टिंग बात कि हम ब्लैक एबोनी जैसी चीजें जो हैं श्रीलंका से हम लेकर के आ रहे हैं गोवा पोर्ट तक। ब्लैक इबनी वी आर सेइंग वुड वुड लकड़ी की बात करें। और वो बहुत ही प्रिशियस है फॉर इजिपशियन टेंपल्स एंड मेसोपोटियन टेंपल्स। ये सिर्फ वही श्रीलंका में ही मिलती है। एंड सम पार्ट ऑफ़ मालाबार हिल। मतलब छोटा सा एक पैच जो है वो मालावर में मिलता है। तो मुझे उसका नाम मिल रहा है उसमें सील
(07:33) में तो वो कॉन्टेक्स्ट जो है वो सारी चीजें उस समय के काल के हिसाब से जैसे नीलेश जी हमेशा कहते हैं कि काल समय और पात्र यानी कि देश काल देश काल पात्र देश काल पात्र के हिसाब से जब हम देखते हैं सील को तो वो बिल्कुल परफेक्ट बैठती है कि वी वर वेरी ग्रेट नेविगेटर्स ब्यूटीफुल उसमें मैं एक और ऐड कर दूं कि उन्होंने कहा कि डिटेल्स ऑफ नेविगेशन रिलेटेड बातें जो है वह अर्थशास्त्र में मिलते हैं यानी कि चाणक्य और जो चाणक्य का जो एग्जैक्ट समय अभी मॉडर्न एकेडमिक्स को लगता है उन्होंने फाइंड आउट किया है उनके पास कोई एविडेंस नहीं है। ओके बहुत सारे एजमशंस
(08:14) है। एलेक्जेंडर का मेगस्थिस का लेके फिर वो मेगस्थनीस का जो सैंड्रोकोटस हुआ वो चंद्रगुप्त मौर्य ही था। ऐसा एजमशन है वो। उसके मुझे कोई एविडेंस नहीं है। वो हो भी सकता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] लेकिन समय जो है चाणक्य का वो 300 बीसी से लेके 2300 बीसी के बीच में कहां भी हो सकता है। ये दैट इज द ट्रू रेंज। तो ये लोगों को हमें समझना चाहिए कि कोई चीजें हमें आई डोंट नो वी डोंट नो। डोंट नो मींस क्या? 300 से करेक्ट है। उसके बाद में नहीं है करके पता है। और 20 300 बीसी के पीछे भी ज्यादा जाएगा नहीं। बट एक बीच में जो अभी
(08:48) 2000 2000 दो सहस्त्र वर्षों का जो समय है उसमें एक है और उन्होंने जो कहा कि अर्थशास्त्र में अच्छे शब्द आते हैं नेविगेशन के रिलेटेड ओके मींस नाव वर्ड आया नेविगेशन नाव वर्ड तो ऋग्वेद में भी है लेकिन उसमें यह कह दूं क्योंकि अगेन एकेडमिया में उनका क्या लॉजिक में रॉन्ग है मुझे पता नहीं पर उनको ये समझ में नहीं आता करके वो सामान्य लोगों को तो समझाना जरूरी है। एकेडमिक समझे नहीं समझे जब कभी समझेंगे लकी है तो समझ लेंगे। ये बात ऐसी है कि अभी प्रोफेसर रामस्वामी उन्होंने जो तमिलनाडु में जो रिसर्च किया है जो समुद्र के अंदर जो पोर्ट्स है 30 कि.मी. तक अंदर
(09:29) के पोर्ट्स है और वो पोर्ट्स कब फंक्शनल थे? तो उसका हम समय निकाल सकते हैं जो रामस्वामी ने निकाला है। तो वो 20,000 इयर्स तक पीछे चले जाते हैं। तो जो शब्द जो आपने कहा वो तो अर्थशास्त्र में मिलते हैं हमें। लेकिन जो हमारा सोफेस्टिकेटेड नेविगेशन सोफेस्टिकेटेड पोर्ट्स उसका जो हमारे पास जो साक्ष्य है वह 20,000 साल तक की पीछे जाती है। और उसमें यह भी मैं कह कहना चाहता हूं कि वो फिर बहुत लोग ऐसा ये सुनेंगे और कहने लगेंगे कि अच्छा तो हमारे पास 20,000 सालों से हमारा नेविगेशन का प्रारंभ हुआ। यह भी रॉन्ग है। एक्चुअली उसका अर्थ यह है कि 20,000 साल तक का
(10:06) साक्ष्य हमारे पास है। उसके पहले जा सकता है। हां। तो उसके ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि जिसके कारण हम उसके पहले नहीं था बोल सकते हैं। ओके उसके पहले भी होगा। हमें मिला नहीं है। लेकिन कोई उसका अर्थ ये करे कि तब उसका प्रारंभ हुआ। ये बहुत सारी मिस्टेक्स होते रहती है। आर्कियोलॉजी लोगों की तो इतनी मिस्टेक होते रहती है कि उससे वो बाहर आना भी नहीं चाहते। इसलिए महत्वपूर्ण है ये बहुत पुराना है। जैसा उन्होंने कहा ऋग्वेद के समय से उसके वर्णन आते हैं। लेकिन आर्कियोलॉजी एविडेंस भी हमें 20,000 इयर्स तक लेके जाता है। सोफेस्टिकेटेड नेविगेशन।
(10:37) वाओ। सो आर्कियोलॉजी एविडेंस भी हमें 20,000 पहले तक जाके लेके जाता है विद रिस्पेक्ट टू द नेविगेशन। इंडियन नेविगेशन की बात कर रहे हैं हम। जो हारबर्स के जो लूप्स हैं बहुत क्लियरली दिखाई दे रहे हैं रामास्वामी जी के पेपर में। इट्स ऑलमोस्ट लाइक 25 कि.मी. अवे से शुरू होता है। एंड द सेम थिंग इज मेंशंड इन अच्छा वो दैट इज़ एन एक्सटेंशन ऑफ़ पुमपुहार। करेक्ट। सो ये पुमपुहार का जो इसमें डल जो हुआ है जो प्रॉब्लम आई है वो मणिमेखलाई में और इन सब में उसका विवरण भी मिलता है जो संगम लिटरेचर है तमिलनाडु का तो उसमें उसका वर्णन आता है
(11:16) उसमें उसका वर्णन आता है तो वो जो 5000 बीसी के आसपास का जो डिलज हुआ है वो उसका [गला साफ़ करने की आवाज़] जो द्वारका कृष्णा द्वारका का 5525 बीसी का तो ट्रायंगुलेशन हो रहा है कि उनके ग्रंथों में उसका वर्णन है एक तरफ से जो मददुराई का नष्ट होना नया मधुराई का निर्माण होना और यह जो अभी रामस्वामी का जो एविडेंस है वो मैच हो रहा है। ऋग्वेद बहुत पुराना हजारों साल सहस्त्र साल पुराना उसमें एकदम वेरी कंफर्टेबली नेविगेशन नेविगेशन की बात हो रही है। 100 क्या ओर्स बोलते हैं उसको 100 ओर्स 100 ऐसा करने के शिप्स के वर्णन है। ओके तो फिर मतलब वो जगेंटिक शिप्स होंगे
(11:51) जैसे हम देखते हैं अगर हम 100 ओर्स की बात कर रहे हैं। हां हां ओके तो सर आपने बोला कि 20,000 तक साल पहले तक के हमारे पास एविडेंस हैं। तो दिस डेट्स टू महाभारत टाइमलाइंस दिस आल्सो डेट्स टू रामायण टाइमलाइंस। क्योंकि रामायण के भी महाभारत के भी पहले का है। रामायण महाभारत के भी पहले ये जो हारबर्स मिले हैं ये उसके भी पहले उसके भी पहले के हैं। ये सुपर्ब। तो सर कुछ ऐसे एविडेंसेस मैम महाभारत के टाइम से या रामायण के टाइम से जो आप बता सकते हैं कि इस टाइम पे हमारी सी फेरर्स थे और यहां से यहां तक हमारा ट्रेड होता था। हमारा आना जाना रहता था।
(12:27) ऐसे कुछ एविडेंसेस हैं क्या? महाभारत में इंटरेस्टिंग एविडेंस है द्वारका को लेकर के जिसको ओखामंडल बोलते हैं। ओखामंडल। ओखामंडल बोलते हैं। यह ओखामंडल से ही मेलुखा वर्ड जो है वह आया है। मेड ओखा ओखा मंडल अभी भी बोलते हैं। तो ओखा इज़ अ नेम व्हिच इज़ कमिंग फ्रॉम बाणासुरस डॉटर उषा। तो उषा का प्राकृत रूप जो है वो ओखा हो गया। तो वो जो है दहेज में समझिए उनको मिला। वो जगह जो है वो कभी बाणासुर के अधीन अधीन रही होगी। बहुत इंटरेस्टिंग फैक्ट्स ये मिलते हैं कि ही यूज्ड टू टेक टैक्सेस कृष्ण जी वहां पे जो भी शिप्स लगती थी तो वो टैक्सेस लेते थे। ऐसा विवरण
(13:12) जो है वो महाभारत में आया है। तो नेविगेशन उसमें जो टैक्सेस लगना है उसमें लोडिंग अनलोडिंग होनी है। तो वो चीजें तो समझ में आ रही हैं कि द्वारका में बहुत प्रॉपर वे में चल रहा है उस समय। देन चोलास पांड्यास चेरास एंड इवन कलिंग देन आंध्रा अ ताम्रलिप्ती वर्ड भी इसमें सील में मिल रहा है दैट इज बंगाल तो पूरा का पूरा ही आपका समझ लीजिए अरेबियन सी से लेके बे ऑफ़ बंगाल तक हम लोग प्रॉपर्ली राउटेड थे। मतलब यह पूरा प्रॉपर राउट था वहां से यहां आने के लिए। बेसिक जो सील्स जो हमको मिलती हैं वो सिर्फ हमें लोथल तक
(14:00) मिल रही हैं। लेकिन गोपिकापट्टनम की डेटिंग हुई है। मेरी निगम जी से बात हुई थी राजीव निगम जी जो किशनग्राफी में थे ही जस्ट रिटायर्ड। तो उनसे जब बातचीत हुई तो उन्होंने कहा गोपिकापट्टनम वी डेटेड फॉर 1000 बीसी एटलीस्ट। ओके। हम तो मैंने कहा फिर तो गोपिकापट्टनम का आगे वाला पोर्शन जो है वह सी के अंदर में जो है वह तो अभी तक देखा नहीं गया। उन्होंने कहा नहीं देखा गया है वो। तो इसका मतलब है आगे भी रहा होगा। नाउ इंटरेस्टिंग फैक्ट कम्स इन सुमेरियन टेक्स्ट वेयर इट सेस देयर इज़ अ पोर्ट नेम गोबी गोबी। नाउ गोबी इज़ नथिंग बट गोपिकापट्टनम।
(14:42) ओ ओके आई हैव मेंशंड दिस इन बुक आल्सो। विशाखापट्टनम का वाइजग हो जाता है ना। यस यस। वहां पे वो उन लोगों ने प जो है वो अच्छे से प्रोनाउंस नहीं होता है तो वो वर्ब प्रोनाउंस कर रहे हैं उसको तो गो भी बोल रहे हैं। ओके एंड दैट इज मेंशंड इन द कुनाई फॉर्म टेक्स्ट जो है वंडरफुल सर हमें रामायण एरा में मिलते हैं कुछ एविडेंस किसके नेविगेशन के नेविगेशन के नेविगेशन के ऐसे मिलते हैं समुद्र के इतने ज्यादा नहीं मिलते जैसे कि रावण और उसकी आर्मी समझ लो वर्ल्ड वाइड जा रही है वो कैसी जा रही है ऐसा इसका क्लियर वर्णन नहीं है। मुझे लगता है वह बोट से ही जाते
(15:19) होंगे। मींस आर्मी तो जा रहे तो ऐसे ही जाते होंगे। मींस वर्ल्ड मींस पाताल में गए, यमुपुरी में गए, अंटार्कटिका में गए। ऐसे वर्णन है रामायण में। लेकिन जब वो गंगा, यमुना जब क्रॉस कर रहे हैं भगवान राम, लक्ष्मण वगैरह तो बोट्स बोट्स, बोट्स का वर्णन है। इतना ही नहीं जब भरत आते हैं राम को मिलने के लिए, चित्रकूट पे तो वो आर्मी लेके आए हैं। और ऐसा आर्मी क्रॉस करने के लिए जो गुहा क्या उनका नाम? अ जिन्होंने मदद किया ना निषाद निषाद निषाद जो किंग वगैरह थे उनके मींस एस अ मल्टीपल आई मीन आई डोंट नो एक्सैक्ट नंबर क्या है वो शत बोला है या 100्स ऑफ
(15:57) बोट्स सो 100्स ऑफ बोट से उन्होंने मिलिट्री मींस आर्मी भरत के आर्मी को उन्होंने नदी के एक पार से दूसरे पार तक लेके गए हैं तो वो सोफेस्टिकेटेड बोट्स रिवर्स वाले भी थे उसे हमें एक्सटेंड करके सी में जाने के लिए स्टेरिया से तो हम आगे जा ही सकते थे हां और उन ये जो रामायण और हमने जो बात की पुहार की 2000 तक का है और उसके पहले भी होगा बिकॉज़ सी देयर इज़ नथिंग इन इन टर्म्स ऑफ़ ह्यूमन इंटेलेक्ट इन टर्म्स ऑफ़ टेक्नोलॉजी कि जो 20,000 में वो पोर्ट्स बांध रहे हैं। ऐसा कुछ मैजिकली हुआ नहीं है कि उसके पहले वो नहीं हो सकता। राइट? एंड इवन ओनली नॉट ओनली जस्ट पमहार
(16:40) उसके पैरेलल में आप आंध्रा में देखिए बंगाल में देखिए नीचे श्रीलंका की तरफ देखिए हारबर्स मिलेंगे अभी तक हमने खोजे नहीं खोजे नहीं पूरे और जो गंगा की पूरी जो क्या बोलते हैं वालू जो सैंड जो जाके जो यू नो जो बनाती है बनाती है ना तो इधर नीचे नीचे वो चले जाते हैं लेकिन अभी हमें ये आर्कियोलॉजी एविडेंस जो मिला है जो हमारे लिटरेरी एविडेंस के साथ मैच हो रहा है जैसे जैसे कि संगम लिटरेचर नाउ लेट्स गो बैक टू से महाभारत का वर्णन रामायण का वर्णन ऋग्वेद का वर्णन पुराणों का वर्णन कि सगर पुत्र मींस वो भगवान राम के बहुत पहले इनके रिसर्च के अनुसार तो अभी हमें समझता
(17:22) है कि बृहद्रथ का जो एक श्वाकु वंश के राजा थे उनका समय ही 36000 इयर्स पहले का है 34500 बीसी यानी कि 36000 इयर्स का पहले और उसके पहले हरिश्चंद्र सगर ये जो विश्वकु वंश के जो प्रसिद्ध राजा है वो उसके पहले के हैं और सप पुत्रों का नष्ट हुआ था नष्ट होना पड़ा इसलिए वो भगीरथ ने बाद में गंगा लाई ना तो उसका भी अर्थ ये है कि सगर पुत्र कहां जा रहे थे उधर से वो कपिल क्षेत्र यानी कि वो जो कोलकाता के साउथ में आता है वहां से वो पाताल में गए हैं और पाताल में लॉस्ट हो गए करके जो पाताल यानी कि दक्षिण अमेरिका ओके और बाद में उनको ढूंढा गया तो वो पाताल
(18:00) में गए मींस कैसे वो नेविगेशन से ही जा रहे हैं ना हम तो हमारे पास सिर्फ अभी लिटरली एविडेंस क्योंकि हमनेक के आसपास तो पानी सके इवन जेनेटिक एविडेंस में भी जो ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच रहे हैं तो इट इज नॉट कि पूरा लैंड जुड़ा हुआ था। करेक्ट करेक्ट। कहीं ना कहीं उनको नेविगेशन का सहारा लेना पड़ा था। तब ब्रूई को क्रॉस करते हुए और दूसरे जो आइलैंड्स हैं उनको क्रॉस करते हुए ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचे होंगे। एंड टू वेव्स की बात होती है जिसमें एक 60000 बीसी के समय में हुआ। एक 40,000 में भी हुआ। यस तो इस तरह से आ रहे हैं बट उस समय ऐसा भी
(18:37) नहीं था कि वो सारे के सारे लैंड फुल्ली जुड़े हुए थे तो नेविगेशन तो वो भी यूज़ कर रहे हैं इन सम वे तो मैम ये सारा एविडेंस हमें कहीं ना कहीं पे अपने लिटरेचर के थ्रू मिल रहा है जाकर के दैट इज टू वी आर टॉकिंग अबाउट इंडियन लिटरेचर दुनिया का और कोई लिटरेचर या टेक्स्ट क्या इन चीजों को वेरीफाई करता है नॉट टॉकिंग अबाउट इंडियन लिटरेचर कोई और हिस्टोरिकल एविडेंस किसी और कंट्री का उनकी हिस्ट्री क्या इस चीज को वैलिडेट करती है? कहीं पे मेंशन मिलता है? नहीं, ऐसा उन लोगों का इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि एक तो डेमोग्राफी बहुत
(19:12) डिफिकल्ट वे में वहां पे चेंज हो रही थी। लाइक ग्रीक में भी स्वैप हो रहा था। ऊपर [नाक से की जाने वाली आवाज़] साइबेरिया में भी स्वैप हो रहा था। अभी एक बड़ा इंटरेस्टिंग आया है कि साइबेरिया का जो एक मैटरनल आपका जो है वो इंडिया में क्रोमोसोम्स लाइक मैटरल मैटरल क्रोमोजोम जो है साइबेरिया वाला वो 7000 बीसी का हमें सदर्न इंडिया में मिल रहा है। दिस इज द लेटेस्ट डेवलपमेंट। महाभारत समय में एक्सचेंज हो रहा है। महाभारत के पहले महाभारत के पहले एक्सचेंज भी हो रहा है। तो ये भी हमको दिखाई दे रहा है। तो इतना आसान तो नहीं है नेविगेशन तो फिर
(19:48) भी चाहिए ना। एंड दे न्यू कि किस समय हमें सेल करना है टाइट्स में नॉन टाइडल टाइम में। किस तरह से हमें जाना है, आना है। इसीलिए हमारा तिथि जो है वो यूज़फुल हो जाती है। तो दूसरे टेक्स्ट में कहीं हमें ओरल ट्रेडिशन की वजह से हमारे में तो कंजर्व हो गया है। लेकिन उनके में वो ओरल ट्रेडिशंस तो अगर ग्रीस का ले लें तो इलियड्स है, ओडीसीस हैं। ये सब चीजें बहुत रीसेंट वाली है। प्लेडिस के टाइम की हैं। इट इज़ लाइक 2000 3000 बीसी के आसपास की हैं। उससे पहले का हमको कुछ जैसे हम बहुत ओल्ड लिटरेचर में एक मेसोपनामिया की बात करते हैं। एक
(20:29) चाइनीस की भी बात करते हैं। तो यूके में भी ऐसा कुछ इजिप्शन की बात करते हैं। नहीं होता क्या है सी हम उनको [गला साफ़ करने की आवाज़] मेसोपोटेमिया करके ओल्ड करके बात करते हैं ना ये हमारा कॉलोनियल हैंगओवर है। ओके। मेसोपोटेमिया को ओल्ड बिकॉज़ वो सोचते हैं मेसोपोटेमिया ओल्डेस्ट। हम ये उनकी मूर्खता है। दूसरा कोई शब्द नहीं है इसके लिए। क्योंकि उनको क्या था? दे वेर लुकिंग फॉर उनका रूट्स लाइक अब्राहमिक रिलीजंस का रूट लाइक क्रिश्चियनिटी का जीसस कहां कुछ मिल रहा है क्या करके और उसके पहले मोजेस मोजेस के रिलेटेड तो वो क्या करते थे उनका जो आईडिया होता
(21:05) था कहां देखेंगे चलो इजराइल में शुरू करेंगे इजराइल जॉर्डन वो पेलेस्टाइन वो एरिया में आर्कियोलॉजी करते थे उधर कुछ ज्यादा उनको इंटरेस्टिंग मिला नहीं कुछ इंटरेस्टिंग चीजें मिली भी है मैं आता हूं उसके ऊपर लेकिन आगे फिर इराक में उनको कुछ मिला तो उनका क्या होता था इट्स अ हैपसंस डाटा जैसा कि इराक में कुछ उनको को मिला तो उधर ही और डीक करने लगे। तो इराक इस बेसिकली मेसोपोटेमिया और उनको लगता है वो सबसे ओल्डेस्ट है हम और वो उनके मन में दो है उनको जो मिल रहा है वो उनके लिए बहुत ओल्ड हो रहा है करके अच्छा लग रहा है और फिर वो इतना इंडिया
(21:36) में ढूंढना भी नहीं चाहते बिकॉज़ दे विल नॉट एबल टू कनेक्ट द डॉट्स जैसा उनको एजेंडा ड्रिवन उनका जो करना है उसको हो गया नहीं ओके लेकिन आप जो पहला प्रश्न था उसका मैं उत्तर देता हूं कि और दुनिया में क्यों नहीं मिल रहे हैं एक तो लास्ट ग्लेशियल मैक्सिमम जो 20,000 साल का हमारा एक नेचुरल लिमिट हो गया है नॉलेज के उसके पहले भी हमारा तो चल रहा था नेविगेशन इंडिया का नेविगेशन क्या पूरा संस्कृति चल रहा है लेकिन 20ाउज इयर्स के पीछे आप चले जाइए तो वेस्टर्न यूरोप इज अंडर टू टू 4 किमी शीट ऑफ़ आइस आइस तो उधर तब तो कुछ हो नहीं रहा है
(22:10) अदर दैन लाइक एस्कीमो जैसे लोग कुछ रहते होंगे राइट आइस एज की बात कर रहे हैं क्या आइस की बात कर रहे हैं लेकिन उधर आइस एज का है भारत में आइस एज नहीं हुआ है 250 मिलियन इयर्स में यू नो नाउ नॉर्थ अमेरिका में भी वही रहा है तो वहां आप ढूंढने भी मत जाओ ना कोई जाना है तो जा सकता है कोई लेकिन वो पिघल गया तो वो आइस के साथ वो पानी में शायद मुझे आपकी उस किताब से याद आ रहा है सुग्रीवास एटलेस से जहां आपने बताया है और सुग्रीव जी बोल रहे हैं कि वो इसके आगे मत जाना इसके आगे मत जाना वहां कुछ नहीं है लेकिन दूसरे जगह साक्ष्य हमें शायद क्यों नहीं
(22:43) मिलती उसका मैं उदाहरण दे रहा हूं तो ये तो वहां सिनेरियो हुआ नाउ दक्षिण अमेरिका इज अ वेरी प्रोस्परस और वेरी प्रोस्पेक्टिव प्लेस लेकिन वहां का चैलेंज क्या है मैं बताता हूं हूं कि उधर अभी हमें कुछ मिला है क्या? तो एक्चुअली उनके पास कोडक्स थे। जैसे कि स्पेनिय्स मेक्सिको में आ गए और मेक्सिको के बाद वो फिर इक्वाडोर, ब्राजील, परू, चिले, अर्जेंटीना नीचे गए। लेकिन जब वो गए ना लाइक मेक्सिको इज अ परफेक्ट वन। मेक्सिको में जो एस्टेक उनके यहां गए तेनो चितलन मेक्सिको सिटी का पुराना नाम था तेनो चितलन। ओके? वो तो वेरी सोफेस्टिकेटेड था। उधर जब
(23:21) लोगों ने लिखा है ना उन्होंने ऐसा वर्णन किया है कि जो मेक्सिको सिटी उनको दिख रही है ना बिफोर दे डिस्ट्रॉयड इट वो बोल रहे हैं कि ऐसी जगह ऐसी सोफेस्टिकेटेड जगह यूरोप में ये 500 इयर्स पहले की बात चल रही है सिर्फ और 500 इयर्स पहले अभी जो हम रोम जाके जो देखते हैं या फ्लोरेंस देखते हैं वैसा था फ्लोरेंस वाज़ लाइक दैट एंड रोम वाज़ लाइक दैट द वे वी सी टुडे लाइक वि द कोलोसियम कोसियम तो 2000 ईयर ओल्ड है बट दीज़ पीपल आर सेइंग कि ऐसी जगह हम जो मिक्स मेक्सिको देख रही है मेक्सिको सिटी तेनो चितलन ऐसी कोई जगह पूरे यूरोप में नहीं है।
(23:55) दैट मींस इट वास एक्सट्रीमली अमेजिंग प्लेस और उसको उसके अवशेष तो हमें मिलते हैं। लेकिन उनके जो कोडक्स थे ना ये कोडक्स ये स्पेनिश लोगों ने यूरोपियन लोगों ने जलाई है। तो जो लाइब्रेरी जो जली अभी ऑफेंसिव इस्लाम के कारण जो भारत में तक्षशिला नालंदा और बहुत सारे जगह में जली सिर्फ भारत में नहीं हुआ है। अलेग्जेंडि का भी जलाया गया। क्रिश्चियन लोगों ने जलाया है वो ऑलमोस्ट लाइक एंटाई नॉलेज और फिर मेक्सिको सिटी में जलाया उन्होंने तो होंगे भी सो कोई रेफरेंसेस तो वो शायद चले गए यस यस तो दैट कुड बी अ वेरी गुड रीज़ कि शायद टेक्स्ट होंगे लेकिन हमारे पास वो
(24:32) इनफेशन है नहीं तो ये शायद इस चीज को भी मैं इस नेक्स्ट क्वेश्चन पे आ रही थी बट प्रोबब्ली इट आंसर्स दैट कि हमने लिखा क्यों नहीं हमारे सी फेरर्स के बारे में तो शायद लिखा होगा शायद बट इट वास काइंड ऑफ़ ओरल उसमें ज्यादा था पुराने जो थे उतना हम इतने इतने अच्छे थे कि लिखने की जरूरत भी नहीं लगी क्योंकि वी आर वेरी प्रोफिशिएंट उसमें हम रोजमर्रा ही जो काम हो रहे हैं उसको उनको कहीं पे लिखने की ऐसी उनको जरूरत भी नहीं पड़ी तो सुचारू रूप से हो रहा था जैसे कुनेफ टेक्स्ट में मिलता है कि उससे इतना वूल लिया उसको इतना शकल के सिल्वर देना है इसने प्रॉपर जितना वेट का
(25:09) वूल दिया था उतना ही माल वापस नहीं आया है रिमोफुलनेस है किंग्स की कि इसको इतना लैंड किया ये दे नहीं रहा है तो टेबलेट्स में उनको वो सारी जो चीजें हैं हो रही थी। मगर अगर आप अर्थशास्त्र पढ़ें तो वहां पे दंड बहुत खतरनाक है। हम तो इसका मतलब है कि उसके प्रीवियस टाइम में भी वही चीजें चल रही थी। एंड फाइनली अर्थशास्त्र में उन्होंने लिखा इट वास मतलब चाणक्य ने अचानक से विष्णुगुप्त ने नया कुछ इजात नहीं किया था कि अचानक से मैं एक पूरी ट्रीटीज लिख रहा हूं। हां नया अर्थशास्त्र उन्होंने प्रारंभ नहीं किया। नहीं प्रारंभ नहीं किया। वो पहले से चला आ
(25:45) रहा था। एंड ही सैट डाउन एंड रोट एवरीथिंग कि चलो अब मैं इसको लिखता हूं। अभी कोई एक प्रोफेसर लिखता है ना कि सुलभ अकाउंटिंग फॉर डमीज़ [हंसी] डमीज़ के लिए नहीं बट डजंट मीन उन्होंने अकाउंटिंग का प्रारंभ किया। वो एक बुक लिख रहे हैं ऐसे ही। और आपका जो एक पहला प्रश्न था उसके ऊपर मैं बताता हूं कि हमें और क्या साक्ष्य मिलते हैं कि व्यापार की पीछे के समय में तो महाभारत के समय में हम क्या मिलते हैं बता रहा हूं कि जो इंडियन कॉटन नेति नेति का हम जो बोलते हैं ना नॉट दिस नॉट दिस एलिमिनेशन फॉल्सिफिकेशन का उपयोग करके अभी जो आर्कियोलॉजी एविडेंस
(26:18) में दिखाया है कि इजराइल में 5200 बीसी यानी कि महाभारत के समय के बाद 300 इयर्स में तो महाभारत का समय समझ लो उस समय में फॉसिलाइज एविडेंस ऑफ जो कॉटन मिला है इजराइल में इजराइल जॉर्डन है ना लिटरली उसका डेटिंग 5200 बीसी है जो महाभारत के समय का 5500 बीसी का और उसका उन्होंने ये किया कि वो जो कॉटन है उसका ओरिजिन इंडिया करके अभी के पेपर बोल रहे हैं अभी रीसेंट है ये लास्ट 20 इयर्स समझ लो फॉर सेफ रीज़न मुझे एक्सैक्ट ईयर पता नहीं और मेहरगढ़ में जो इंडियन कॉटन मिला है स्ट्रैंड्स बिटवीन द बीड्स कॉपर बीड्स के अंदर जो मिला है दैट इज डेटेड फॉर 6000
(26:59) प्लस गो करेक्ट करेक्ट ओल्डेस्ट वही है ओल्डेस्ट वही है और 5200 बीसी में इजराइल में भारत का मिल रहा है मेरगढ़ में भारत का है 6000 बीसी यानी कि व्यापार चल रहा है यहां से वहां चीजें जा रही हैं और आप नेविगेशन कहा करके मैं बोला नहीं था लेकिन वो लोगों के लिए ऐड कर दूं कि जैसे नेविगेशन चल रहा है वैसा अक्रॉस द रोड भी चल रहा है लाइक लैंड भी चल रहा है और वो लैंड के जो मिलते हैं ना आप उसको क्या बोलोगे लाइक जो कलरिंग करने के लिए लाइक नेचुरली है उसके पाउडर्स वहां पे बहुत यूज़ होते हैं और वो क्या बोलते हैं डाई जैसे नेचुरल डाई
(27:34) वाला जैसा मिलेगा ना स्टोन या ऐसा कलरिंग कर सकते हैं आप उसको हां ये ऑकर ऑकर कलर्स होते हैं रेड चक्स होते हैं ओके तो गेरू होता है गेरू जैसा तो उसका जो एविडेंस मिला है जैसे कि स्टर्ड इन केव्स ऑफ जॉर्जिया जॉर्जिया यानी कि कैस्पियंस समुद्र के पश्चिम में उधर ऐसा मिला है आई हैव दोज़ पेपर्स कि उसका ओरिजिन फिर इवन कैन गो टू इंडिया और शघाई यानी कि जैसे सिल्क क्राउड चल रहा है ना ऐसे ये क्राउड चल रहा है चल रहा है और ये लेकिन कब अभी सिल्क क्राउड मींस वो सोचते हैं एक 1000 साल पहले 2000 साल पहले ये नहीं बात चल रही है वी आर टॉकिंग जो जॉर्जिया का है वो
(28:11) 26ाउजेंड इयर्स बीसी का 26ाउ ये जो मुझे एक्सैक्टली शब्द नहीं आ रहा है जो कलर पाउडर गेरू ऐसा करने के लिए और शघाई तक चल रहा है मीनिंग द रेफरेंस फ्रॉम जॉर्जिया इज़ जॉर्जिया मींस कंट्री तो शघाई तक मीनिंग बिज़नेस चल रहा वि इंडिया इन बिटवीन इंडिया इन बिटवीन राइट लैंड से वाओ तो मैम ये जो अभी आपने बात की चॉक पाउडर एंड देन यू वी स्पोक अबाउट वुड आल्सो तो ये सारी चीजें तो इंडस वैली सिविलाइजेशन में कहीं ना कहीं पे आती हैं वहां पे ट्रेड बहुत ज्यादा स्ट्रांग था तो वहां से आई एम अस्यूमिंग शायद मोहनजोडारो से पोर्ट से तो वो कौन से सी रूट लेकर के
(28:51) कहां और कहां-कहां हमारा सामान जा रहा था वहां से लेकर के वेयर ऑल इट वास गोइंग वन नेम्स कम एस भरणी। सो भरणी इज़ नथिंग बट पेरूनेफर जैसा जो शब्द है रेड सी के ऊपर तो वो आज भी है भरणी हां भरणी तो भरणी आया है तो उसको उन्होंने यज्ञ भरणी कहा तो मैंने कहा पेनेफर है वो उस वो जो राउट है वो रेड सी वाला राउट जो है वो मिलता है हम लोगों को। दूसरा जो है वो पर्शियन गल्फ वाला भी मिलता है और हमारे सील्स जो है वो वहां पे भी मिलते हैं। फाइलाका आइलैंड में मिलते हैं। सऊदी अरेबिया में मिलते हैं। हमारे जो सील्स हैं मेसोपोटामिया में भी मिलते हैं।
(29:31) सुसा में मिलते हैं। सुसा इज़ अ इल्मारम व्हिच इज़ राइट साइड ऑफ़ द अर्लियर मेसोपोटामिया। ओके टुडेज़ ईरान। टुडेज़ टुडेज़ ईरान इज़ इलाम। या ओके अर्लियर इलाम। तो ये वो साइरस द ग्रेट वाला नहीं। यह उसके भी पहले वाला है जो एमराइट्स और यह सब लोगों ने उसको अटैक किया और उसके बाद फिर सरस द ग्रेट ने उसने अटैक करके वो चीज ली। अ जो लापिस लाजुली है उसका जो रूट है वो बहुत इंटरेस्टिंग है। वो आपको लैंड रूट्स भी मिलेंगे। वो आपको सी रूट्स पे भी मिलेंगे। ओके। तो लैंड से भी जाता था बदशान एरिया से ऊपर होते हुए एंड अशोर वाली जो जगह थी अनातोलिया तक एंड देन लवांड तक भी तो 4000
(30:19) बीसी का एक एक पेपर में मेंशन है कि हाउ द लापीस लाजोली मेड द राउट्स जो कहां कैसे जाएंगे सो व्हाट इज दिस आर्य थ्योरी ऑल अबाउट देन ये मतलब तो मतलब ये मतलब तो कहा कि आर्यंस आए फिर इंडिया बसा और देन वी जस्ट स्टार्टेड आफ्टर इंडस वैली सिविलाइजेशन ये तो बिल्कुल ही ये इस मतलब हुआ कि वो मितानी का जब मिला ना जब मित्तानी के कुछ मिले जिस जिसमें सुमेरियन कुनेफॉर्म टेक्स्ट ही यूज़ हुए हैं। उसमें इंद्र नासत्य वरुणा ये शब्द मिले हैं वहां पे। तो उसकी वजह से एक थ्योरी जो वेस्टर्न अथॉरिटीज हैं या एकेडमिया हैं इन्होंने यह बना लिया
(31:05) कि हेटाइट्स वाले जो एरिया है वहां से ही संस्कृत जो है वो यहां पे इंडिया आई होगी लेकिन वो ये भूल गए कि बीच में जो एरिया है दैट वाज़ द ये जो साइरस जिस लीनियस से आते हैं पारसीज द पार्श्वगणा व्हिच इज़ मेंशंड एस पारश्व गणा इन पाणिनी। तो ये जो पार्श्वग है ये अश्व को अस्व बोलते हैं। तो मैं एक सिंपल एग्जांपल ले रही हूं। अश्व को अश्व बोलते हैं। लेकिन आप अनातुलिया के राजा का नाम बिरदशवा है। हम बिरिदश्व वो अश्व है। वो अश्व है। बीच में अश्व है। हम यहां अश्व बोल रहे हैं तो ये बीच में अश्व कहां से आया?
(31:49) तो अगर वो लोग वहां से आए हैं तो इनको भी रौंदते हुए ही आएंगे इंडिया। हम तो फिर यह बीच में अस्प कहां से आ गया? हम व्हाई दे आर प्रोनाउंसिंग इन अ डिफरेंट फॉर्म एंड उसका भी आर्किक डिफरेंट फॉर्म जो है वो आपको अवस्था में भी मिल जाता है और सिमिलर फॉर्म्स जो है आपको ऋग्वेद में भी मिल जाते हैं। ओके? एंड अथर्ववेद में भी मिल जाते हैं। सो अथर्वन तो हम मानते ही हैं उनको जो वो हमारे ही ऑफशूट हैं। तो सपोजिंगली वहां से ही अगर आना होता हेटाइट्स वाले जो एरिया है लिवांट एरिया है वहां से ही जो स्टेप रीजन जो हम बोलते हैं दैट वास द फर्टाइल
(32:31) लैंड जहां से आर्यंस आए हैं। तो फिर बीच में अस्प वाले को भी अश्व बनाते हुए ही आगे बढ़ते हैं। ना हम तो वो अस्प क्यों रह गए? तो ऐसा है मैं मेरा टू सेंट्स ऑन आर्यन ये है कि लास्ट 150 200 इयर्स में उनको कॉलोनियल रीजंस के कारण लेफ्टिस्ट रीजन के कारण कम्युनिस्ट रीजन के कारण मार्क्सिस्ट रीजन के कारण जो कुछ कारण तो अलग-अलग है। ये सब लोग उसमें एक जगह आ जाते हैं आर्यन इन्वज़न के लिए। बाकी उनके ये विरोध भी होगा एक दूसरे के साथ। मींस मार्क्सिस्ट और इंपीरियलिस्ट में बी डिफरेंट। बट यहां वो एक जगह आ जाते हैं क्योंकि हर एक का अपना मोटिवेशन अलग है बट दे मैचेस ऑन दैट
(33:10) आर्यन नॉनसेंस। अभी जो रूपा जी ने कहा मित्तानी का तो मित्तानी का जो समय निकाला उन्होंने लाइक 1600 1700 1800 बीसी वाला उसके कारण वो अटक गए हैं कि उसके पीछे वो लेके नहीं जा सकते। हम तो वो तो एकदम जुगाड़ जिसको हम कहते हैं ना जैसा पॉलिटिकल में जुगाड़ बनाते हैं ऐसा ही जुगाड़ है नंबर वन। तो ऐसा क्यों कहते हैं वो ऐसा एक्चुअली वो थ्यरी है ही नहीं। मैं तो बोलता हूं कि आज कोई भी आज या कोई लास्ट समय तो जो चले गए उनका भूल जाओ। लेकिन आज कोई भी दुनिया के कहां भी एकेडमिया में या पब्लिक इंटेलेक्चुअल स्फीयर में आउटसाइड एकेडमिया में कोई
(33:48) आर्यन इन्वजन आर्यन माइग्रेशन आर्यन टूरिज्म आर्यन इन्व इन्वजन बोला तो एआईबी बोलने लगता है नहीं नहीं वो आजकल माइग्रेशन हुआ है व्हाट नॉनसेंस इट डजंट मैटर व्हाट स्टूपिड थिंग यू से वेदर माइग्रेशन इन्वेजन टूरिज्म कुछ भी बोलो व्हाटएवर इट इज इट जस्ट नॉट अ थिअरी इफ यू लुक एट इट फ्रॉम अ साइंस पॉइंट ऑफ व्यू फ्रॉम अ लॉजिक पॉइंट ऑफ व्यू फ्रॉम अ इंपेरिकल हार्ड डेटा पॉइंट ऑफ ऑफ यू तो आई विल से वी हैव टू शेम दिस इडियट्स वेदर इन द पब्लिक इंटेलेक्चुअल स्पीयर और इन एकेडमिया बिकॉज़ कुछ भी नहीं है बट होता क्या है आप भी प्रश्न पूछोगे पडकास्ट में हम भी उसका
(34:23) उत्तर देंगे और जो कॉमन मैन जो सुन रहा है ना उनको क्या होता है इतना डिस्कशन के बाद उनके कुछ समझ में नहीं आया उनको ये समझ में आया कि कुछ तो आर्यन इन्वजन है हम तो मैं बोलता हूं कि बेसिकली वी नीड टू शेम दिस पीपल ओके उनको पूछो कि आप कौन सा चेयर पे बैठे हो यू डोंट डिर्व दिस दिस चेयर आपको ना विज्ञान पता है ना लॉजिक पता है ना इंपेरिसिज्म पता है ना आपको साइंस समझ में आता है दिस इज द फैक्ट जो इन्होंने बोला मित्तानी उसके कारण वो 1700 1800 2000 बीसी लिमिट हो गया और जो मैक्स मुलर ने बोला था 1200 बीसी में शायद ऋग्वेद होगा बाद में ही रिकेंटेड लेकिन रिंग कैंटिंग
(35:01) करने के बाद उन्होंने सुना नहीं क्योंकि उन्होंने सुना नहीं है तो इसलिए 2000 बीसी से लेके 1200 बीसी या आर्यन इन्वजन का उन्होंने समय समय है करके कहा लेकिन ये थ्यरी नहीं है। ये तो सर्कुलर लॉजिक जैसा है। सर्कुलर लॉजिक से भी वर्स है। क्योंकि मैं बताता हूं थ्योरी में क्या होता है? एक प्रॉब्लम है आपके पास कि वो प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए आप थ्यरी प्रपोज कर रहे हो। तो क्या प्रॉब्लम था तो प्रॉब्लम था। प्रॉब्लम हमारे लिए नहीं है। जैसे डिस्कवर इज़ नॉट अ प्रॉब्लम फॉर अस। हमें इंडियन को हमें खुद को डिस्कवर नहीं करना है ना। ठीक है? यूरोपियन को पता नहीं है वो उनका
(35:34) प्रॉब्लम है। सिमिलरली [नाक से की जाने वाली आवाज़] जब वो सर विलियम जों्स भारत में आ गए। 1785 के आसपास और वो कोलकाता में वह जज बने थे। तो उन्होंने जज करना चाहिए करके भारतीय शास्त्रों का अभ्यास किया तो संस्कृत के साथ उनका संबंध आया। फिर संस्कृत पाणिनि के साथ संबंध आया तो फिर उनको भाषा के सिमिलरिटी समझने लगे। यूरोपियन भाषा की सिमिलरिटीज भी पाणिनि के ग्रामर के कारण। तो उनको एक ऐसा प्रश्न था। सो दिस इज द प्रॉब्लम कि व्हाई दी लैंग्वेज आर रिलेटेड? हम यूरोप की लैंग्वेज भारतीय लैंग्वेज के साथ संस्कृत के साथ भी क्यों रिलेटेड है? हम
(36:06) यह प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए उन्होंने यह नहीं कहा था। उन्होंने सिर्फ यह कहा था कि यह दोनों लैंग्वेज में कोई रिलेशनशिप है। हम विलियम जों्स ने आर्यन इन्वजन भी नहीं कहा था। एक्चुअली 1785 से लेके समझ लो 1850 तक इज कंसीडर रोमांटिक पीरियड। रोमांटिक हां पहले रोमांस रहता है ना। इंडिया इज़ अ गुड थिंग। लाइक वाल्टर जैसा आदमी कह रहा है कि एवरीथिंग वर्थ वाइल हैज़ हैपेंड ऑन द बैंक ऑफ़ गेंजेस। राइट, राइट। मार्क 12 1810 तक थोड़ा अमेरिका का अलग माहौल है कंपेयर टू यूरोप बिकॉज़ अमेरिकन का सिचुएशन हमारे जैसा ही है ना यूरोपियंस आर एक्सप्लइटिंग देम
(36:40) तो मार्क का भी ऐसा है कि अगेन ऑल द ग्रेट थिंग्स आर हैपनिंग ऑन द बैंक ऑफ़ गेंजेस और समथिंग लाइक दिस जब 1857 में इंग्लिश लोगों का ब्रिटिश लोगों का हमारे यहां पे कंट्रोल हो गया तो उनके समझ में यह बात आ गई कि हमने उनको उनको मींस भारतीयों को शरीर से तो कंट्रोल कर लिया है राजाओं को मांडली बनाया है। टेम करके रखा है। बट क्या यह इंडियन लोग मन में हमें सुपीरियर समझते हैं? ब्रिटिश लोगों को समझते हैं। तो उनको समझ में आएगा कि मन में समझ नहीं रहे। अभी उनकी पावर नहीं करके मान रहे हैं। तो उनको टेम कैसा किया जाए? तो टेम करने के लिए उनको लगा सिर्फ शरीर को
(37:16) कंट्रोल करके फायदा नहीं। उनके मन और बुद्धि को भी हमें मैनिपुलेट करना ब्रेन वाश करना जरूरी है। उसमें बहुत सारे टूल्स उन्होंने उपयोग किया। उसमें एक टूल था ये आर्यन इन्वर्जन। नॉनसेंस बट ये नॉनसेंस ही है। उसमें जो हम थ्यरी विज्ञान की थ्योरी कहेंगे तो मॉडर्न साइंस में भी जो फाइव स्टेप फार्मूला कहते हैं कि ट्रायंगुलेशन ऑफ एक्सप्लेनेशन प्रेडिक्शन टेस्टिंग इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ थ्योरी इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ बैकग्राउंड नॉलेज उसमें से कोई भी चीज उनके पास नहीं है। वाओ सो आर्यन इन्वज़ इज़ नॉनसेंस। डोंट गो विद इट। [हंसी] ओके। थोड़ा सा नेविगेशन से हट के आते हैं।
(37:55) मैम कुरुक्षेत्र, अवंती एंड लंका थोड़ा सा इसके बारे में बात करते हैं। आई नो द बुक इज येट टू बी रिलीज़्ड? बट इज देयर समथिंग दैट यू वांट टू टॉक अबाउट इट? व्हाट इज दिस बुक ऑल अबाउट? मैं तो सबसे प्रश्न पूछना चाहूंगी कि व्हाई कुरुक्षेत्र इस मेंशंड ऑन द प्राइमरी रीडिंग? हां। तो अगर आपके जो दर्शक हैं वो लिखेंगे तो फिर मैं उसका उत्तर दूंगी। बिलकुल बिलकुल। कुरुक्षेत्र का एक बहुतेंस है तो वो बुक में हम उसको एक्सप्लेन करेंगे। ओके व्हाई कुरुक्षेत्र? व्हाई नॉट समथिंग एल्सो नॉट समथिंग एल्स लेकिन एक सूर्य सिद्धांत टेक्स्ट है जिसमें कुरुक्षेत्र का नाम नहीं है। उसमें
(38:33) रोहतक का नाम है। हम रोहितांक करके नाम आया है। एंड अवंती एंड उज्जैन ये दो नाम जो है स्वाइप होते रहते हैं। बहुत सारे टेक्स्ट में। लेटर टेक्स्ट में उसी प्राइम मेरीडियन में और भी दो चार जो है सिटीज जोड़ दिए गए। बट लास्ट स्टेशन वाज़ ऑलवेज लंका। एंड लंका वाज़ ऑन इक्वेटर। हम एंड लंका को सूर्य सिद्धांत में राक्षसालय बोला गया। अच्छा। दैट मींस समवन वाज़ लिविंग। हम द पीपल नेम राक्षसालय। राक्षस आलय आलय हो। देवालय देवालय ऐसे राक्षस आल। राइट। सो मेजर पोर्शन मस्ट हैव बीन इन द असुर भाग एंड देयर वास अ लैंड ऑन द इक्वेटर जीरो ज़ीरो उस पर जहां पे वो लंका थी। नाउ इट इज़ नो
(39:22) मोर देयर। लेकिन अभी आपने मरकेटर का भी देखा ना कि मैप्स किस तरह से एनलार्ज हो गए थे। एनलार्ज हो गए थे। एंड अभी नया किया। अभी पैक भी किया है। कुछ कंट्रीज मान रही हैं और कुछ कंट्रीज नहीं मान रही। बोलती है हम पुराने वाले में ही जाएंगे। उसमें रशिया का साइज एकदम छोटा छोटा है [हंसी] एंड ऑल दो थिंग। सो हम कितने हजार साल पहले के कार्टोग्राफी के बारे में हम बात कर रहे हैं। सो आई एम गोइंग थ्रू दैट ऑल दोज़ मैप्स एंड आई एम ब्रिंगिंग आउट द फैक्ट्स दैट हाउ द होल थिंग अह छागोस लेट्स देवर ब्रिज व्हिच वाज़ वंस अह इन अ वैरी टेपर्ड फॉर्म इन
(40:02) टुडेज टाइम इट इज़ क्वाइट अह पैरलल टू द लोंगिट्यूड। सो दैट इज गोइंग टू ब्रिंग अबाउट वेयर द एक्चुअल लंका वास वेयर द एक्चुअल लंका वास या सो दैट वास अ क्वेश्चन आई वास गोइंग टू आस्क लेकिन ठीक है हम वो कहने का इंतजार करेंगे [हंसी] लेकिन हां लंका मैं उस क्वेश्चन पे आ रही थी कि तो फिर मुझे जहां तक समझ में आ रहा है जब हम एक्चुअल लंका कहां थी अगर उसकी बात करेंगे तो मतलब जिस श्रीलंका की अभी हम बात करते हैं दैट्स नॉट द लंका अच्छा वो क्यों नहीं है वो भी बड़ी मजेदार चीज है जो आपका कॉन्टिनेंटल शेलफ है इंडिया का और श्रीलंका का वो एक ही है।
(40:38) कॉन्टिनेंटल शेलफ जो है वो एक ही है। अ जब लास्टेशियल मैक्सिमम टाइम था इवन 16,000 बीसी तक भी आई थिंक 12,000 बीसी तक भी अ इवन फ्यू थाउजेंड इयर्स पहले तक भी वो लैंड जैसा जुड़ा ही हुआ था। ओनली 2 मीटर्स डीप 2 मीटर्स डीप कई जगह पे तो दैट्स इट। उतना ही। हां मतलब आप पैदल भी चलना चाहते हैं तो जा सकते हैं और कृष्णा के द्वारका का समय का जो एलिवेशन हुआ है समुद्रल का वो भी 6.
(41:12) 5 मीटर तक हुआ है इसका अर्थ तब भी वो नेविगेबल चल के जा सकते हो कनेक्टेड ही होगा कनेक्टेड ही होगा तो सेम कॉन्टिनेंटल शेलफ में ये दोनों चीजें हैं और जुड़ी हुई हैं। ओके। और आज भी आप अह उन जगहों में देख लेंगे तो 5 मीटर से ज्यादा कोई भी नीचे जो एडमम्स ब्रिज अभी जो हम बोलते हैं जो नल सेतु नहीं है। एथनोग्राफिक मेमोरी में भी नहीं है कि वो नलसेतु था। रामसेतु ही बोलते हैं उसको। राइट लेकिन रामायण में वो नल सेतु। नल सेतु है। कितना बीच में समय गया है आप इमेजिन कीजिए। बिल्कुल। और रामसेतु शब्द महाभारत में भी नहीं आया। करेक्ट। नल सेतु ही है।
(41:49) नल सेतु ही नाम है। नल नी जिन्होंने बनाया था वह तो उनके नाम से है। [गला साफ़ करने की आवाज़] नल सेतु तो यह रामसेतु में कब कन्वर्ट हुआ? नहीं वह राम को महत्व ऐसा उसमें भी कोई रोंग है ऐसा मैं नहीं कहता। नहीं उसमें भी श्रीलंका में भी उन लोगों ने ऐसा-सा स्पॉट्स बनाए हैं जो कि ऐसा दिखाया जाता है कि यहां पे सीता कुंड है। यहां सीता हां आई वास कमिंग टू दैट। फिर उसका क्या रेलेवेंट? है वो। अह व्हाट हैपेंस इज़ कि कुछ जो चीज़ें हैं वह जैसे डेमोग्राफ़ी शिफ़्ट होती है ना यूची लोगों ने अह सीथियंस को नॉर्थ नॉर्थ ऑफ़ अपने उज़्बेकिस्तान वाला जो एरिया
(42:22) वहां से हटा करके इस तरफ लिया था। नॉर्थ वेस्ट हम बाल्क एरिया से होते हुए भी और नीचे आए फिर इंडिया में भी एंटर किए। हम तो इतना डेमोग्राफी चेंज होता है तो कुछ भी चीज स्टैटिक नहीं है। तो जैसे यहां से इसीलिए जो बिल्कुल सदर्न पोर्शन था वहां पे जो अगस्तश्वर है जहां पे एक्चुअल में राम ने शायद शिवलिंग बना के पूजा करी होगी। वो सारी एथनोग्राफिक मेमोरीज धीरे-धीरे शिफ्ट हो के इस सेतु पे आ गई जो कि दिखाई दे रहा था। इट हार्डली 6.
(42:57) 5मी का पैच है जिसके बीच में समंदर है। अदरवाइज बाकी अभी भी अभी भी बाकी इट वास ऑलवेज लाइक आप पैदल वै शैलो वै शैलो वैलो अभी भी वो सेटेलाइट पिक्चर में इट्स प्रीटी मच विजिबल अच्छा और उसका बड़ा इंटरेस्टिंग उसके फैक्ट्स हैं कि नीचे वाला जो लेयर है दैट इज न्यू न्यूर और ऊपर वाले लेयर थोड़े से ओल्डर हैं। यानी कि कभी किसी ने नीचे के कुछ आजू-बाजू के जो बोल्डर्स हैं उसको उठा के ऊपर इसके रखे होंगे। हम जस्ट टू हैव अ वॉकवे काइंड ऑफ़ अ थिंग। अच्छा ये भी मेमोरीज हैं कि कौन से कौन से गांव जो हैं वो उस सेतु के आसपास जो थे वो डूब गए हैं।
(43:38) ओ ये भी डॉक्यूमेंटग्राफिक मेमोरीज भी हैं। इवन ताम्रपणी जो ताम्रपणी रिवर है एकदम साउथ में जो ईस्ट डायरेक्शन में बहती है और उसका पानी में जाने के बाद द लैंड बिटवीन लैंड नहीं सी बिटवीन श्रीलंका और इंडिया तो नीचे ये पेपर है ये पीियर पेपर्स है कि जहां नीचे आपको वैलीज मिलती है वो ताम्रपणी रिवर की और उसका पुराना वर्णन जो आपका संगम लिटरेचर में इनडायरेक्टली आता है ताम्रपर्णी का लेकिन आप कहां अटक के बैठे मुझे देखा कि उन्होंने उन्होंने क्या बोला कि अभी भी वो तो ऊपर से देखा तो ब्रिज तो दिख रहा है। सो वो क्या है ब्रिज के भी बात करते हैं
(44:17) और श्रीलंका में अभी जब रामायण की टूर जाती है मेरे मित्र हैं बाला शंकुरात्री वो यहां से लेके जाते हैं तो वो हमें प्रॉब्लम नहीं है। प्रॉब्लम नहीं है। मींस श्रद्धा में तो हम कहां भी कर सकते हैं। देखो कृष्ण के द्वारका तो पानी में चल चली गई। कृष्ण के द्वारका का जो जगह है वो सोमनाथ से अंदर 15 कि.मी.
(44:38) जाना पड़ेगा। लेकिन आज हम जाते हैं और भगवान मंदिर में जाते हैं तो यह उधर ऐसा होता है कि यहां उन्होंने पूछते हैं। हां बिकॉज़ ये हमारा ऐसा है कि इट्स कॉल्ड स्पिरिचुअलाइजेशन ऑफ अ प्लेस एक बार समझ लो हो गया जैसा कि बहुत सारे रेफरेंस होंगे। जैसे कि आप श्रीलंका में चले जाइए आज टूर पे तो आपको जगह मिलते हैं कैंडी के आसपास कि यहां सीता को रावण ने वनवास में बिठाया था। दिस एंड दैट। तो यह बात है कि एक बार आपने श्रद्धा में मान लिया फॉर व्हाटएवर रीजन जैसा कि अभी लंका द्वारका पानी में गई करके आप अभी कृष्ण की लीला कृष्ण और रुक्मणी यहां बैठे थे करके
(45:15) आज आप दिखाएंगे उधर नहीं बैठते थे वो वो द्वारका तो अंदर है लेकिन आप श्रद्धा में मान लिया सिमिलरली श्रद्धा में आपने एक बार मान लिया कि श्रीलंका लंका है तो आपको सब दिखने लगेगा उसमें कोई ऑफ नेम्स हो जाता है समथिंग लाइक जैसे भृगुक कच्छ है तो भरूच जिसको हम बोलते हैं गुजरात का जो भरूच है [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो हमें नाम से ही पता चलता है कि वो भृगु की जगह भृगु की जगह रही होगी। लेकिन अमरकंटक के ये अपने इंदौर के पास में जनपा करके कुटी है और बोलते हैं जमदागिनी वहां पे रहते थे। परशुराम वहां पैदा हुए। इस तरह की भी मेमोरी है। फिर बोलते हैं कि
(45:51) परशुराम ने सारी जो लैंड है वो सब दे दिया। फिर वो कोंकण और केरला जो है रिक्लेम किया। वो सारी भी स्टोरी आती हैं। तो बहुत सारे रीडुप्लीकेशन ऑफ़ नेम्स भी ओवरलैपिंग हो जाता है। लेकिन आपको अभी भी आपका जो फिर रामसेतु का क्या करें या इसलिए मैं ये कह रहा हूं कि ये पहले नेचुरल स्ट्रक्चर है कनेक्टेड वाला। नाउ वो उसके लिए जैसा इन्होंने कहा कि ऊपर स्टोन रख के जाने के लिए किया भी होगा। अभी रिसेंट टाइम्स में भी डजंट मैटर। बट जब हमें वाल्मीकि रामायण के बिकॉज़ वाल्मीकि रामायण इज़ द प्राइमरी टेक्स्ट। बहुत बार अभी आर्कियोलॉजी के समझ में क्या
(46:26) नहीं आता मैं बताता हूं कि वो लिटररी एविडेंस है वो बोलेंगे मैं उनको बताता हूं कि आपको आर्कियोलॉजी ढूंढना है ना समझ लो हाइपोथेटिकल आप द्वारका के गुजरात में गए और आपको फ्लूट मिल गई है एक और फ्लूट का आपने डेटिंग किया वो कुछ भी आएगा 2000 बीसी भी आएगा 5000 बीसी भी आएगा कितना भी आ सकता है ना फ्लूट का नाउ आप उसका क्या वर्णन करोगे बिकॉज़ आज का ही होगा हां आजकल की मूर्खता क्या होती है समझ लो सनाली का आपको चैरियट्स मिल स्टार्ट टॉकिंग उनको फुलिश नहीं हम कहते बट जो कहते हैं वो फुलिशनेस है कि महाभारत हुआ 2000 बीसी व्हाट नॉनसेंस
(47:11) इज दैट उसमें कौन सा विज्ञान है कौन सा लॉजिक है बट कोई पूछता नहीं सब एक दूसरे के हां में हां मिला के चलते हैं तो सिमिलरली कि एक बार वो फ्लूट मिला ना तो लोग सपोज कहेंगे कि कृष्ण की फ्लूट है मैं उनको पूछता हूं कि वो कृष्ण की फ्लूट थी ये आपको कहां से पता चला एक तो ओरल ट्रेडिशन से पता चला या टेक्स्ट से पता चला तो भाई टेक्स्ट के बिना या ओरल ट्रेडिशन के बिना आपका आपका रिसर्च का प्रारंभ भी नहीं होता। हम लेकिन दिस इज़ दिस पॉइंट इज कंप्लीटली लॉस्ट। सिमिलरली जब हमने लंका को रावण की लंका मान ली तो नाउ वी हम सब वो ढूंढने लगेंगे कि भाई नल सेतु कहां है? सीता की
(47:49) स्नान करने की जगह कहां थी? अशोक वन कहां था? ये सब हम ढूंढने लगेंगे। तो मैं आपको बेनिफिट ऑफ़ डाउट देने के लिए तैयार हूं। आपको यानी कि जब कैंडी के आसपास आप जाओगे तो जो लंका का रामायण में वर्णन आता है त्रिकूट लंका। त्रिकूट लंका वो मिल जाता है आपको। तीन पहाड़ मिलेंगे। मिलेंगे। बट दैट इज़ समथिंग वेरी इंटरेस्टिंग कि कहते हैं कि वह पहाड़ भी मिलेगा जो हनुमान जी लेके आए थे संजीवनी वाला। नहीं नहीं पहाड़ मिल गया और आपने तो मान लिया है ना ऑलरेडी कि वो लंका श्रीलंका रावण की लंका है तो पहाड़ मिल गया वो हनुमान का ही पहाड़ होगा और किसका होगा।
(48:20) राइट राइट। सी ये एकदम बेसिक है वो हमें समझना जरूरी है। हम राइट मैम। अच्छा डायरेक्शन वाइज भी उसमें महेंद्रगिरी से उतर के फिर इधर क्यों जाएंगे? महेंद्रगिरी से जो लैंड है जाते हैं। हां महेंद्रगिरी जो है लैंड फिनिश होने के बाद जंप मारेंगे ना तो महेंद्रगिरी से वो जंप मार रहे हैं तो महेंद्रगिरी से नहीं मारते थे ना वो रामेश्वर महेंद्रगिरी कहां है पता है आपको केरल और तमिलनाडु के बॉर्डर में माउंटेन है उधर से जा रहे हैं एंड सदर्न मो सदर्न मोस्ट टिप है वो सदर्न मोस्ट टिप जैसा है जहां पे वो बोल रहे हैं कि अब साउथ की दिशा में जाने के लिए अगस्त को देखो और
(48:56) फिर वहां से आगे बढ़ो दूसरी बात समझ लो पहले दक्षिण दिशा में जा रहे हैं तो पता नहीं एक्सक्ट एक्सक्टली कहां है करके वो सब दिशा में जाएंगे। लेकिन जब हनुमान जी ने पहचान लिया कि एक्सैक्टली रावण की लंका कहां है और वो मैसेज लेके आ रहे हैं तो ठीक है अभी वो फिर कशकिंदा में आ गए यानी कि हम्पी बेलारी में अभी तो उनको एग्जैक्टली पता है लंका कहां है और कहां जाना है तो उसके बाद जब वानरा आर्मी राम लक्ष्मण सुग्रीव सब जब निकलते हैं वो मैंने वो पाथ लिया है रोड से लाइक रामेश्वरम से लेके महाबलीपुरम से आके चेन्नई से लेपाक्षी से लेके बेंगलुरु
(49:33) से लेके हम्पी बेलारी तक कार से आए हैं। वाओ 2023 अर्ली जनवरी में तो वो फ्लैट है। मोस्टली द लैंड इज़ पूरा फ्लैट है। बीच-बीच में छोटे हिल्स आते हैं। नाउ ये अभी वर्णन उसके अगेंस्ट कंपेयर कीजिए। अभी हनुमान जी को तो पता है ना कि श्रीलंका जाना है। तो वहां से लेके जाते हैं। लेकिन आप वाल्मीकि रामायण के वर्णन देखिए। वो कैसे जाते हैं? सय्य सह्याद्री माउंटेन को फॉलो कर रहे हैं। यानी कि स्ट्रेट नीचे जाओ जा रहे हैं वो। हां। उसके बाद मलय पर्वत फॉलो कर रहे हैं। नीलगिरी को फॉलो कर रहे हैं। अगस्त मलाई फॉलो कर रहे हैं। अगस्तमलाई फॉलो कर रहे हैं। वो केरल की
(50:07) तरफ जा रहे हैं। फिर और एक बताता हूं कि जो रावण को जैसा उन्होंने राक्षस कहा है वैसा दूसरा वर्णन है नैरुरतस। नैरुत्तस हां नैरुरतस यानी कि क्या दो साउथ वेस्टर्नस ओ आग्नेय नैत्य वायव्य ईशान्य। सो नैत साउथ वेस्टर्न हम वेस्टर्न साउथर्न ईस्टर्न ऐसा जैसा कहते हैं ना तो हम्पी से भी या अयोध्या से भी या कहां के भी जगह ले लो या नासिक से भी पंचवटी से भी साउथ वेस्ट डायरेक्शन में जाना है श्रीलंका साउथवेस्ट में कितना भी जंप करो उल्टापुल्टा घूमो साउथवेस्ट में नहीं आती वो राइट तो दैट इज आल्सो इज देयर इंटरेस्टिंग मैम व्हाई इज उज्जैन सोेंट
(50:53) उज्जैन काेंस ट्रॉपिक ऑफ कैंसर की वजह से आता है। वहां से सन ट्रोपे लेता है। यानी कि दिशा चेंज करता है वापस इक्वेटर की तरफ तक उगने के लिए। मतलब एव्री टाइम द सन फ्रॉम इक्विनॉक्स डे वो इक्वेटर पे उगते-उगते धीरे धीरे धीरे-धीरे आगे के लैटीट्यूड्स में उगना और डूबना शुरू होते हैं। एंड इट रीचेस टू द लास्ट पॉइंट व्हिच इज़ उज्जैन। ओके? नर्दन मोस्ट नॉर्दन मोस्ट वहां उसके आगे सन ट्रोपे नहीं करता है। वहां से बैक हो जाते हैं। एंड फिर वो हम देखते हैं कि दूसरे मंथ में यानी कि कैंसर मंथ तक वहां पर हुए उसके बाद के मंथ में नीचे आते-आते इक्वेटर पे
(51:38) आएंगे ऑटोमनिक्स पे। हां। जैसे कि सामान्य आदमी के पॉइंट ऑफ़ व्यू से जो अभी रूपा जी ने कहा, वह कैसा होगा? समझ लो वह एग्जैक्टली ईस्ट डायरेक्शन में फेस करके वह आदमी खड़ा रहा है। और कुछ मूव ही नहीं होता। साल भर वैसा ही खड़ा रहा ऐसा हाइपोथेटिकल थॉट एक्सपेरिमेंट में कर सकते हैं ना। ऐसा खड़ा तो उसको क्या दिखेगा? इक्विनोक्स डे पे एग्जैक्टली ईस्ट में सूर्य आ गया। सूर्य आ गया। और अभी समझ लो हमारा वसंत ऋतु है। लाइक कि मार्च की बात चल रही है आज के जमाने में। तो उसके बाद क्या होगा? एवरीडे ना वह थोड़ा नॉर्थ में थोड़ा नॉर्थ में वह सन आ रहा है।
(52:11) विद इन द 23° 23° में ही चल रही है बात। 23° इधर और 23° इधर ऐसा चल रहा है। तो सूर्य तो 21 जून को एक्सट्रीम नॉर्थ में जो सूर्य आएगा ना वो 20 वो शून्य एग्जैक्ट ईस्ट डायरेक्शन से 23° इधर आने वाला है। हम क्योंकि पृथ्वी का अक्ष उतना और बाद में वो जो कह रही है कि वो फिर अभी वो साउथ में जाने लगा या बैक एंड फोर्थ वाइपर जैसा वाइपर जैसा। सूर्य का जो एवरीडे का आना है तो वो जो निकला तो एक्सट्रीम नॉर्दन पॉइंट इज़ उज्जैन एंड अवंती। ओके तो वो हमेशा देन दैट इज द रीज़न कि वो एस्ट्रोनॉमिकल तरीके से बहुत ही रेलेवेंट रहा है। हर जगह उज्जैन का नाम आता है और इट हैज़ इट्स दैट
(52:52) पॉइंट महाकाल इसीलिए महाकाल। महाकाल का ही महाकाल के वहां स्टैगनेंट है। वो नहीं बदलता। बदलता है बदलता है वो 24.5 तक भी गया एक बार 25 तक भी उससे उससे भी ऊपर गया वो काशी के ऊपर से भी निकला तो काशी विश्वनाथ इज वेरी ओल्ड उसके बाद फिर वो उज्जैन यानी कि ये जो आपका जो टोटल 23.5 डिग्रीज का जो हम बता रहे हैं अभी ट्रॉप पे ये 24 तक भी गया 25 तक भी गया एंड 22.
(53:28) 5 तक भी आया जो जहां पे मानधाता आइलैंड है ओकारेश्वर हां लाइक महेश्वर मानधाता आपको ज्योग्राफिकली पता ओकेश्वर उज्जैन काशी ये तो ये सब ट्रॉपिक लाइंस पे थे ट्रॉपिक लाइंस पे थे तो ये हम 12 ज्योतिर्लिंगों की बात कर रहे हैं ज्यादातर जो ज्योतिर्लिंग है वो यही ट्रोपे के बीच में आ जाते हैं तो इमेजिन कीजिए कि ये जो पृथ्वी का जो अवश्य है ना तो अभी तो जहां उसका इंक्लिनेशन है वो उज्जैन पे है महाकाल पे लेकिन ये जो रूपा जी कह रही है कि 24.
(53:59) 5 तक भी जा सकता है तो और नीचे गया नीचे गया मींस नॉर्थ तक गया और और इंक्लाइन हुआ तो वह गया वाराणसी तक पहुंचेगा और ऐसा हुआ तो वो महेश्वर ओंकारेश्वर जो नर्मदा का जो प्रवाह है उधर तक आएगा तो दैट रेंज है उधर रेंज है सिर्फ आप ये भी मत कहिए कि ज्योतिर्लिंग क्योंकि फिर रामेश्वरम का क्या करें और केदारनाथ का क्या करेंगे दैट इज़ अगेन वो प्राइम मेरीडियन के लिए हो जाता है लेकिन एट वन पॉइंट ऑफ़ ऑफ़ टाइम ये जो ओमकारेश्वर है और जो महेश्वर में है महेश्वर एंड ओमकारेश्वर और ऑलमोस्ट ऑन सेम लैटीट्यूड लेकिन उज्जैन से ओम ओमकारेश्वर जितने
(54:43) किलोमीटर्स दूर है उसमें वो 23.5 से 22.5 पे आ जाते हैं। हम एंड इट टेक्स अराउंड लाइक वन 1 डिग्री 22.5 में आएगा। हां शॉर्टेस्ट ये जो 24 से 22 एंड 22 से 24 पूरा जो साइकिल है पूरा साइकिल है 4ाउ 41000 ईयर का साइकिल है ये 41000 इयर्स का साइकिल है आप सोचते होंगे कि इतना माइन्यूट क्या मेजर कर रहे होंगे बट वो वन सेकंड में ना एव्री ईयर 15 मीटर का डिफरेंस आ जाता है। करेक्ट मतलब ज़ीरो शैडो डे जो है वो आपको फिर नेक्स्ट नेक्स्ट ईयर जो है वो 15 मीटर दूर में मिलेगा। हां करेक्ट। हां इनफैक्ट मैं अभी बता दूं कि अभी हम
(55:28) उज्जैन कह रहे हैं ना बट अभी जो आपको जीरो शैडो डे 21 जून का देखना है तो ये जो पद्मश्री हरिभाऊ वाककर आपने नाम सुना होगा जिन्होंने सरस्वती नदी का चैनल का स्टडी किया तो उन्होंने ये जगह ढूंढ के निकाली वो जगह का नाम है मींस उज्जैन से निकल के भी हम मैं गया हूं अभी एक कुछ समय में गया था एक साल में लास्ट ईयर में वो वाककर फैमिली के साथ ही और विनीता जी देश पांडे हमारे साथ थे। तो एक समझ लो हमें 1ढ़ घंटा 2 घंटा लगा वही रोड के कारण भी होगा। तो एक्चुअली मध्य प्रदेश गवर्नमेंट को जगह पता है। उसका जगह का नाम है डोंगला। डोंगला हां तो राइट नाउ
(56:05) मुझसे कनेक्ट हुई थी। विनीता जी ना तो राइट नाउ इट हैज़ मूव्ड फ्रॉम उज्जैन टू डोंगला में। जो ये कह रही उज्जैन में भी नहीं है। उज्जैन में भी नहीं है। उज्जैन में भी नहीं है। अब वो जो सन ट्रॉपी लेता है वो डोंगला से लेता है। करेक्ट। एंड्री और 15 देन इट्स सिग्निफिकेंट 15 मीटर क्वाइट क्वाइट सिग्निफिकेंट कि आप पेग लगा सकते हैं कि इस साल यहां पे हुआ फिर नेक्स्ट ईयर एक पेग और लगाया कि अरे इतना आगे आ गया हमारा धरती डूब रहा है क्या फिर इतना और आगे आ गया अरे सन जो है वो इतना इतना ऊपर से उग रहा है डूब रहा है तो वो साइके पे अलग डिफरेंट तरीके से काम
(56:47) करता है। हां नहीं मैं इसमें ऐड कर दूं कि आप इसमें दिखाने के लिए लोगों को दिखाने के लिए आप Google में चेक करोगे ना तो मेक्सिको में जो इक्विवेलेंट आता है ना तो मेक्सिको में हां नहीं नहीं इक्वेटर तो इक्व हुआ लेकिन मेक्सिको में अपना उज्जैन इक्विवेलेंट जो आता है उधर उन्होंने क्या किया है मैं देखा है वो मेरे पास फोटो नहीं है अभी बिकॉज़ वो पुराने जमाने में है फोटोग्राफ हां लेकिन मिलेगा आपको कि इयर्स लगाया है कि वो बोर्ड लगाया है कि हां 2004 और सर आप ड्राइव करोगे तो दिखते जाएगा यू कैन लुक फॉर इट तो इतना सबको लगता है ना कि 41000 में क्या
(57:24) ऑब्जरवेशन किया राइट बट पृथ्वी पे बहुत फर्क पड़ रहा है पृथ्वी पे फर्क पड़ रहा है राइट मैम मैम आपके बुक्स में इनका वर्णन आया आर्या दासु अस्तुरा राक्षसा ये इनका ना मैं कुछ डिफरेंस समझना चाहूंगी हु आर दीज़ पीपल क्या ये सिर्फ डिफरेंट सरनेम्स की बात कर रहे हैं प्रजातियों की बात कर रहे हैं किन लोगों की बात कर रहे हैं ट्राइब्स ही हैं ट्राइब्स की बात कर रहे हैं ये है यू है असुरस हैं ध्रुय ध्रुय है हाय हाय किंगडम तुर्वसुस हैं कब के हैं ये कौन सी लीनियन नबूष के जो बच्चा था याति उनके जो पांच पुत्र थे उनमें से चार को देश निकाला
(58:04) उन्होंने दे दिया था बिकॉज़ वो अच्छे से प्रोनंसिएशन उनका प्रॉब्लमैटिक था वैदिक प्रोनंसिएशन अच्छा तो प्रोनंस भी ठीक नहीं है तो भी निकाला जा सकता निकाला जा सकता है [हंसी] और उसके लिए लेकिन एक अलग कथा आई कि ययात्री ने अपना यौवन मांगा बच्चों में से और उन्होंने वो यौवन नहीं दिया सिर्फ पुरु ने दिया तो बाकियों को बोला कि आप बाहर जाइए लेकिन उनकी भाषाओं में भी प्रॉब्लम्स थी। इस प्रकार के संकेत हमें ग्रंथों में मिलते हैं। तो ये जो लोग थे ये नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर एरियाज में चले गए। यानी कि जो हमारे जो सेवन सेजेस जो जितने भी रिवर्स फ्रंट्स
(58:46) में रहते थे वहां से ये थोड़े से दूर चले गए। यानी यदु तुर्वसु तुर्वसु बाद में अह आप अह कह लीजिए तुर्की वाले हो गए या तुर्कमेनिस्तान वाले हो गए वो नाम अभी भी रहा है रहा है जैसा जैसे कुरु का किरगिस्तान हम सो कुरूस आर लाइक फ्रॉम कुरुस तो कौरवास की बात कर रहे हो हां कौरवास की बात कर रहे हैं तो वो किरगिस्तान के ही लोग थे ऊपर से आए हुए बाद में हमने उसको उत्तर कुरु नाम दिया नीचे का जो है वो कुरुक्षेत्र नाम हो गया है ना अजमेर जो हैं वो इस तरफ में आए अजमेर बसाया फिर यहां से कुरुक्षेत्र मतलब इस तरह से अह जो इनकी जो डेमोग्राफी है
(59:26) कैसे अंदर एंटर हुई है ये बाद की बात बट ये लोग जो हैं डिफरेंट-डिफरेंट ट्राइब्स हो गए यदु अलग ट्राइब हो गई ध्रुहियो अलग हो गई तुर्वसुस अलग हो गए अनुस अलग हो गए अनु जो है वो मुझे लगता है कि मेसोपोटामिया वाले जो रीजन है उसको इनहबिटेट किया तो इसीलिए अनु जो ऊपर से आए उनको जो ऐसा ऐसा लगता है कि एलियंस जैसे कोई आए तो वो हिंदू जब क्रॉस किया होगा मेसोपोटामिया की तरफ गए होंगे तो दैट वे दे इनहबिटेड दोज़ रीज़ंस जैसे ध्रुयस है वो ये तर्क है मींस उसका एकदम साक्ष्य मिलता है ऐसा नहीं लेकिन ध्रुयस शायद ड्रड्स हो के आयरलैंड तक के
(1:00:06) गए हैं आयरलैंड के तो बहुत रीसेंट में जो आपके मैप्स मिलते हैं ना उसमें ट्राइब्स नेम बड़े इंटरेस्टिंग है नागनती यस यस और रिवर मेरवती रिवर नेम्स भी उसी के बेस पे कावेरी है ओल्ड ओल्ड आयरिश ओल्ड आइलैंड के मैप्स में मैप्स में आप देख नदी का नाम कावेरी है गंगा गंगा है गंगानी गंगानी राइट रादिनी राधिनी इज़ अ संस्कृत वर्ड फॉर अ रिवर अर्धिनी हां दीज़ काइंड ऑफ़ नेम्स आर देयर दे वर द ट्राय ओल्ड आईश मैप्स इर्दनी रागिनी एंड यू कावेरी कावेरी गंगा गंगानी गंगानी हां अ ऑफ रिलेटेड क्वेश्चंस आए लेकिन ये सारे नाम फीमेल हैं। तो व्हाई
(1:00:52) सो मतलब मैंने वैसे भी किसी नदी का नाम नहीं मस्कुलिन में नहीं सुना है। ऐसा क्या था हमारे ओल्ड उनका एक थ्योरी होगा। मेरा अलग थ्योरी है। [हंसी] मेरा मैं ऐसा ह्यूमरसली बोलने वाला था कि स्त्री चंचल रहती है। [हंसी] वो तो है सर। लेकिन हां ये बड़ा इंटरेस्टली आप देखेंगे जितने भी चाहे अरब कंट्री आप ले लीजिए चाहे मेसोपोटामिया भी ले लें मैक्सिमम जो प्रीस्टेस रही और सब फेमिनाइन थी जैसे अपोलो डेल्फी का भी आप देख लें चाहे ग्रीसी ही देख लें वो मैक्सिमम जो आप जितनी भी आप सिविलाइजेशन में देखेंगे इंक्लूडिंग इंडिया इंडिया में बहुत इजीली आप समझ सकते हैं कि
(1:01:35) एक ऋषिका का नाम था नद्याह नद्याह अब नद्या तो प्लूरल है। नदी नदी नद्याह तो नद्याह में कौन-कौन आ गई? सारी नदियां नदियां हो गई सारी। सारी नदियों को एक ही में पिरो दिया और वहीं पे उनका सूक्त जो है खत्म कर दिया। तो जब पेट्रियकल जब आया तो फिर ये सारे सूक्त जो है धीरे-धीरे फेड अवे होने लगे। तो एक ही सूक्त में उनको लिख के नद्याह करके लिख दिया कि ये सब जो हैं ये हमारी देवियां थी। तो वुमेन सेंट्रिक ही रहा है। इवन अभी भी अफ्रीकन ट्राइब्स में आप देख लेंगे कोई भी ट्राइबल रीजन में आप चले जाइए वो वुमेन सेंट्रिक ज्यादा होता है। बहुत कम होता है
(1:02:17) जो जिसमें पुरुष जो है वो लीड करते हैं। पुरुषों का काम होता है कि उनको सेफगार्ड करके रखें। शी इज़ अ क्वीन बी काइंड ऑफ़ अ थिंग। प्रोटेक्टेड सो शी कैन क्रिएट द सिविलाइजेशन। सिविलाइजेशन। अदरवाइज वो ही नहीं रहेगी तो फिर प्रोक्रिएशन कैसे होगा? हम इंटरेस्टिंग वै इंटरेस्टिंग। सो मतलब हम ये बोल रहे हैं कि फीमेल वाज़ दी सेंटर ऑफ दी सिविलाइजेशन राइट एंड और मेल्स का बेसिकली काम था टू प्रोवाइड सिक्योरिटी एंड टू प्रोवाइड दी थिंग्स टू क्रिएट दी सिविलाइजेशन सी देयर वास्टेनेंस हां मसल मसल पावर समझना इनफैक्ट मुझे ऐसा लगता है कि जैसा इन्होंने
(1:02:53) [नाक से की जाने वाली आवाज़] कहा कि जनरली वो मैट्रियर्कल या फीमेल सेंट्रिकी जैसा था तो कभी-कभी जैसे कि साइकिल ऑफ सिविलाइजेशन में कभी पेट्रियर्कल कब हुआ होगा पॉसिबबली इन द टाइमिंग ऑफ़ क्राइसिस। एग्जैक्टली मैं भी वही बोलना चाह रही थी कि जब क्राइसिस आई अ जैसे कि हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट में प्रॉब्लम्स आई। नदियों में प्रॉब्लम्स आ रही हैं। कोई नदी एकदम सूख जा रही है। सिविलाइजेशन को यहां से वहां जाना पड़ रहा है। एक मंत्र में आया है जिसमें कह रहे हैं कि सरस्वती दूर जा रही है। हम तो दूर ना जाओ आप। ऐसे करके एक सूक्त और एक मंत्र आया है। तो इन द सेंस कि जब
(1:03:29) क्लाइमेटिक कंडीशंस में इतनी सारी प्रॉब्लम्स आ रही हैं। अह प्रोक्रिएशन में प्रॉब्लम है। ऐसा उस समय फिर जो पेट्रियाकल है वो आगे आता है क्योंकि वॉर्स हो रहे हैं। अचानक से वॉर शुरू हो रहे हैं। रिसोर्सेज के लिए फाइट हो रही है। रिसोर्सेज के लिए फाइट हो रही है। पूरा नॉर्दर्न एरिया जो आपका है वो पूरा बर्फ से ढक चुका है। वहां के लोग भी इंडिया आना चाह रहे हैं। तो इंडिया वाज़ अ काइंड ऑफ़ अ रिफ्यूजी। करेक्ट। आज भी है। आज भी है। आज भी है। और बिकॉज़ हिमालय के कारण जो प्रोटेक्ट होके बैठा है। सो ऑलवेज बेटर रिफ्यूजिया व्हिच वास हैविंग ऑल काइंड ऑफ़ फूड। मतलब
(1:04:03) आपके पास धान है खाने को। आपके पास कंदमूल है खाने को। पेड़ हैं यहां पे। आपको ट्रॉपिकल फॉरेस्ट भी मिल जा रहे हैं। आपको डिफरेंट टाइप के बहुत सारे फल भी मिल जा रहे हैं। तो ये एक रिफ्यूजिया था। हम और यव ऐसे ही उग रहा है। धान ऐसे ही उग रहा है। इस वाइल्ड हार्वेस्टिंग करके भी हो रहा है। हां वाइल्ड हार्वेस्टिंग भी हो रहा है। इस खुद करने एफर्ट लगाने की भी ज्यादा जरूरत है। में जो 16000 बीसी के जो हम ग्रेंस वगैरह मिले हैं उसमें यही है ना धान भी है, यव भी है और सीरियल्स भी हैं मेरे ख्याल से। तो ये सारी चीजें वहां पे मिल रही हैं।
(1:04:41) तो वो खा रहे थे इसलिए केव में लेके गए ना वहां पे खाने के लिए। केव में तो उगेगा नहीं तो वहां पे कोई बात है जो वाइड हार्वेस्टिंग एविडेंस गोस बैक टू 45000 इयर्स 45000 इयर्स बियर रिव्यूड पेपर्स जो लोग दैट इज द टाइम ऑफ़ ऋग्वदा ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट हां 45000 इयर्स और वो पॉइंट पे और एक बता दूं कि जो हिमालय से प्रोटेक्ट करके भारत भूमि हुई है ना जो अभी का जो भारत हम मेजर कह सकते हैं एग्रीकल्चर पॉइंट ऑफ व्यू आज का जो मॉडर्न उनको एग्रीकल्चर ज़ों्स कहते हैं कि ये ज़ोन में ऑरेंजज़ होंगे, ये ज़ोन में एप्पल्स होंगे। तो ऐसे एग्रीकल्चर डिवीजन
(1:05:20) एक ब्रॉडली सेवन डिवीज़ंस है और छोटा-छोटा करके अबाउट 140 डिवीज़ंस है। हम वर्ल्ड वाइड ऐसा एक स्टैंडर्ड या सेमाय स्टैंडर्ड क्लासिफिकेशन। यह कहना चाहता हूं कि इन्होंने कहा कि यह रेफ्यूज है। ये जो पूरे 140 जो अप्रोक्समेट जो कुछ नंबर होगा ये जो डिफरेंट एग्रीकल्चर ज़ोंस है ना आज का जो भारत है ना 1947 के बाद वाला भारत उसमें वो सब ज़ोन ज़ोन मिलते हैं। कोई ज़ोन समझ लो एक 2 कि.मी.
(1:05:48) का भी होगा लेकिन वो सब ज़ोन मिलते हैं। इजंट दैट अ ब्यूटीफुल थिंग। सो प्रैक्टिकली राइट फ्रॉम एप्पल्स टू ब्लू बेरीज से जो कुछ दुनिया में जो ग्रो होता है इन प्रिंसिपल वी कैन ग्रो। यस। सो दैट बिकम अ वेरी बेस्ट रिफ्यूजिया जो सदर्न आपका अफ्रीका है एंड हमारा जो इंडिया है दी टू रीजन वेर द बेस्ट रिफ्यूजियास कह सकते हैं हम लोग मैम इतना बड़ा सिविलाइजेशन था इंडस वैली सिविलाइजेशन आई थिंक वी आर टॉकिंग अबाउट सम 50 लाख पीपल कितने 50 50 लाख लोगों की बात करते हैं अगर हम मजेडारो से हड़प्पा की बात करते हैं तो 1 लाख स्क्वायर किलोमीटर मतलब इतना तो
(1:06:25) फैला हुआ है तो ऑलमोस्ट 50 लाख इफ आई एम नॉट रोंग तो इतना बड़ा सिविलाइजेशन खत्म कैसे हो गया? खत्म नहीं हुआ। डिसइीग्रेट हो गया एक्चुअली क्योंकि जो चीजें मेसोपोटामिया को और इन सब लोगों को चाहिए थी वो चीजें अचानक से सू जब मेसोपोटामिया के ऊपर कब्जा कर लिया यानी कि वो जरूरत ही खत्म हो गई। उनको नहीं चाहिए थी ये सारी चीजें। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] ओके इट इज समथिंग लाइक जैसे अभी है ना कि अचानक से जो 1970 में शाह के बाद का जो समय ईरान ने जो देखा है
(1:07:10) सो ये सारी चीजें जो है वो महिलाओं को उपलब्ध नहीं होनी चाहिए और जो चीजें जा रही थी वो महिलाओं के लिए ही जा रही थी। कार्निलियंस है और ज्वेलरीज है वो सारी चीजें उनके लिए ही जा रही थी। अ ऑयल जा रहा था। डिफरेंट टाइप ऑफ घी जो है वो जा रहा था। एनिमल [नाक से की जाने वाली आवाज़] प्रोडक्ट्स जा रहे थे। वो सारी चीजें अचानक से इन लोगों ने वो बंद कर दिया। तो ट्रेड इंपैक्ट हुआ। ट्रेड इंपैक्ट हुआ। तो ट्रेड फिर क्या करेगा? अपने हिंटलैंड में वापस जाएगा और अपने हिंटलैंड के साथ में काम करना शुरू करेगा। एंड अपना ओवरऑल जो खुद का जो
(1:07:47) नेविगेशनल रूट है वो अपने खुद के हिंटलैंड के लिए यूज़ करेगा। लेकिन फिर भी चोलाज़ [गला साफ़ करने की आवाज़] लोगों ने साउथ ईस्ट पकड़ लिया हम और फिर वहां जो चाइना तक काफी सारी चीजें गई। इनफैक्ट पंशुई वगैरह जो है ना इस तरह की जो साइंसेस हैं वो भी हमारे यहां से मैजिक स्क्वायर जो है वो वहां पे गई और चोलास ने वो वाला रूट ले लिया। एंड वहां पे उन लोगों ने फिर ट्रमफेंटली रूल भी किया। कई जगहों को अह पूरा साउथ ईस्ट एशिया जो है वो उन्होंने कवर किया। तो ऐसा नहीं है कि वो यह वाली हिस्ट्री क्योंकि हमें बहुत रीसेंट हिस्ट्री है और तो मिल जाती
(1:08:28) है। सिमिलर हिस्ट्री इस तरफ की भी थी लेकिन वो नहीं मिलती क्योंकि हम सील अभी तक पढ़ नहीं पा रहे लेकिन अब जब पढ़ पा रहे हैं तो हम समझ रहे हैं कि यस यहां पे भी चेरा चोला और पंड्यास जो सील है उसमें नाम आए हैं। तो ये लोग वहां पे यहां पे भी उतना ही उत्कृष्ट मरीन का जो यूज कर रहे थे वो तो मतलब बेसिकली दे डिसइीग्रेटेड फ्रॉम दैट प्लेस अलग-अलग जगह पे जाकर के काम करना शुरू किया। यानी 1500 बीसी का एक पोटरी शार्ट जो है वो मालदीव्स में मिला है। वि द सेम आईबीसी मार्क्स तो आप समझ सकते हैं कि कहां डिसइीग्रेट हुआ है। मतलब अपने सदर्न
(1:09:11) पोर्शन में भी हुआ और उसके बाद फिर ताम्रलिप्ती तक एंड देन बर्मा एंड ऑल दोज़ एरियाज धीरे-धीरे उन्होंने चाइना भी पकड़ा वो वाला जो राउट है वो भी वो भी लिया। और आज के समय में भी ना डिफरेंट फर्सेस यह तो अभी क्या ड्राइनेस हुआ जो कुछ पता नहीं बट डिफरेंट फर्सेस जैसे कि कनाडा में एक जगह है फोर्ट मैकमरी तो उधर ऑइल सैंड्स लाइक लिटरली सैंड्स मिलते हैं उसको क्रश करके उससे ऑइल एक्सट्रैक्ट करते हैं ना तो क्या होता है दैट ऑपरेशन इज प्रॉफिटेबल व्हेन ऑइल प्राइस इज़ अबव सर्टेन नंबर हम तो जब अबव सर्टेन नंबर था बीच में जब कॉस्टली तो उन्होंने इतना एक्सट्रैक्ट
(1:09:48) किया ऑइल सैंड उधर एकदम मींस लाइक इट्स लाइक अ प्रोस्परस प्लेस लाइक स्कूल्स हो रहे हैं, बार्स है, सब एवरीथिंग इज देयर। नाउ जब ऑइल प्राइस नीचे आ गई एक सिंपल फैक्टर तो वो बंद हो गए। आई मीन थिंग्स कैन चेंज इन अ वेरी शॉर्ट टाइम आल्सो। राइट राइट अब्सोलुटली। अचानक से भी ऑर्गेनिक पोमीग्रेनेट्स का बहुत ज्यादा अरब कंट्री से रिक्वायरमेंट आई। तो पूरे कच्छ रीजन में पोग्रेनेट उगा रहे थे। फिर अचानक खत्म हो गया। तो फिर दैट वेंट अवे। राइट। राइट। ओके। सुपर्ब। सो सर मैम, ऑन अ क्लोज़िंग नोट, व्हाट वुड यू वांट टू से टू दी ऑडियंस इन टर्म्स ऑफ़ द एंशिएंट
(1:10:29) सिविलाइज़ेशन? आर्यन इन्वेशन थ्योरी भूल जाइए। [हंसी] प्लीज एंड रामायण, महाभारत, दे आर इतिहास। वो हिस्ट्री है। उसको उसी प्रकार से देखिए ना कि माइथोलॉजीस एंड ऑल। ठीक है। इलियाड्स भी माइथोलॉजिकल बोलते हैं ना हम लोग। लेकिन हुआ है क्योंकि उसमें प्लेडस आ जाता है। उसमें ओरायन आ जाता है। एंड वी नो दैट कि कौन से टाइम पे हुआ होगा। का जो हमें आर्कियोलॉजी मिलता है वो भी वही पीरियड ऑफ़ टाइम का है। तो वी कैन कोरिलेट लाइक वाइज हमारी द्वारका मिल रही है। हमारे पुमहार के 25 कि.मी.
(1:11:06) [नाक से की जाने वाली आवाज़] डाउन साइड में हारबर्स मिल रहे हैं। इतने ब्यूटीफुल लूप वाले हार्बर मतलब सोच नहीं सकते कि कितने अच्छे तरीके से वो 20,000 बीसी में बना रहे हैं। सो दीज़ आर ऑल फैक्ट्स। हम तो फैक्ट्स पे ही बात करें ना कि कुछ भी फिक्शन नहीं है। कुछ भी मनोरंजन के लिए नहीं है। रामायण मनोरंजन के लिए नहीं लिखी गई है। मैंने एक बार इनको कहा था नीलेश जी को कि हमारी एक बार बातचीत हुई थी मानधाता को लेकिन उन्होंने कहा कि मानधाता तो कितना बड़ा राजा हो के आया देन उनके बारे में कुछ भी नहीं मिलता। मैंने कहा उनको उनका वाल्मीकि नहीं मिला ना। हां
(1:11:45) [गला साफ़ करने की आवाज़] और उसमें मैं दो नाम ऐड कर दूं मानधाता में उनको भी उनका वाल्मीकि या व्यासदेव [नाक से की जाने वाली आवाज़] नहीं मिले वो है अगस्त्य अगस्त और परशुराम भी हां वरना परशुराम जी की तो कहानी इतनी बड़ी है कि जिसका कोई जवाब नहीं है और ये तीनों मींस उनका कॉमन फैक्टर भी समझ लो अगस्त्य मानदाता और परशुराम ये तीनों इन सम फॉर्म उनके सूक्त के रूप में ऋग्वेद में है उनकी तीनों की चर्चा रामायण में है। तीनों की चर्चा महाभारत में तीनों की चर्चा पुराण में आती है। सारे पुराणों में लेकिन उनके बारे में हमें बहुत कम पता है।
(1:12:19) लेकिन वह कुछ ग्रेट हुए ही होंगे। नहीं तो इतनी चर्चा क्यों रहेगी? क्यों रहेगी? लेकिन उनकी कथा को प्रॉपर्ली लिखने वाले वाल्मीकि नहीं मिले। हम और मेरे पॉइंट में मैं क्या ऐड करूंगा कि होता क्या है? हमें हम भारतीय लोग तो मैं कहूंगा कॉमन मैन बोल रहा हूं। बट इवन स्टडी एजुकेटेड लोग भी हम ऑथॉरिटी फैलेसी में फंसे हुए हैं। हम जो कोई पोजीशन किसी का है, कोई एक इंस्टट्यूट का हेड है, कोई एकेडमिया में है, कोई प्रोफेसर पीियर रिव्यूड ऐसा जो नॉनसेंस है ना पीियर रिव्यूड का अपना महत्व है। हम हम भी पीियर रिव्यूड में पब्लिश किए हुए हैं। लेकिन जब हम कॉर्पोरेट में गए तो
(1:12:57) उसका कुछ जरूरत नहीं है। प्रोफेसर को पीियर रिव्यूड में करना पड़ता है। उसका जॉब रखने के लिए। कॉर्पोरेट में उसकी जरूरत नहीं है बारिश में। लेकिन एक ऑथॉरिटी फैलेसी में ना फंसे और ऐसा भी मत सोचिए कि अरे मुझे बड़े-बड़े पीएचडी वाले लोग पूछते हैं कि नीलेश जी आपका जो रिसर्च है वो क्या किसी ने इंडिपेंडेंटली वैलिडेट किया है? मैं पूछता हूं तू कर ना आप कर लो। तो बोलते नहीं मैं एक्सपर्ट नहीं हूं। मैं बोलता दिस इज द प्रॉब्लम जो जो है तो एक्सपर्ट कोई है ही नहीं। और जो कोई लोग ऐसे मूर्ख लोग हैं कि उनको लगता है वो एक्सपर्ट है और वो हमें ट्रोलिंग करते
(1:13:31) बैठते हैं। उनका तो करना चाहिए। बिकॉज़ वो मैं तो बोलता हूं मेरा एक्सटेंडेड मार्केटिंग टीम है। लेकिन मुझे यह कहना चाहता है कि जो एक्चुअली विज्ञान क्या है या तर्कशास्त्र क्या है? तंत्र युक्ति क्या है? इंपेरिज्म क्या है? ये इतने कठिन विषय नहीं है। आपको किसी को सच में भारत के लिए प्यार है और उसको करना है तो एक थोड़ा सा करने की बात है। आपको समझना है तो रूपा जैसे मेरे जैसे नीरज अत्री जी, राजीव मल्होत्रा ऐसे ऑथेंटिक लोग हैं। उनको श्रद्धा में समझ लीजिए। हम पर श्रद्धा में रुकने की जरूरत नहीं है। जैसे पतंजलि कहते हैं श्रद्धा वीर्य
(1:14:05) स्मृति समाधि प्रज्ञा पूर्वक श्रद्धा से प्रारंभ करना जरूरी है। लेकिन उधर रुकना जरूरी नहीं है। वो आपका ऑप्शनल सब्जेक्ट है। तो वीर्य यानी कि तपस्या करनी है। श्रद्धा वीर्य स्मृति यानी कि बैकग्राउंड स्टडी करो। कौन कौन से पानी में कितना क्या है। सब तो लोग करेक्ट नहीं हो सकते। महाभारत की 140 अलग-अलग डेट्स हैं। तो यह तो बेसिक लॉजिक समझ लो कि इदर सब रॉन्ग है इंक्लूडिंग नीलेश की 561 बी सी या करेक्ट है तो सिर्फ एक ही करेक्ट हो सकती है। 114 है तो ये कॉमन सेंस है। मैं आपको बता दूं ये लोग ये सिंपल जो मैंने बात कही ना कि इदर ऑल ऑफ़ देम आर रोंग और ओनली वन ऑफ़
(1:14:42) देम इज़ करेक्ट। ये भी तो समझ में नहीं आता लोगों के। कि प्रोफेसर लोगों को भी समझ में नहीं आता, कॉमन लोगों को समझ में नहीं आता। ये अभी हमारे आईओ में चर्चा हो रही थी। मैं बोला कैन वी अग्री ऑन दिस? वो सब डायग्रेस हो के इधर-उधर जा रहे हैं लेकिन यह मान नहीं रहे। मींस ये मेरे मानो मत। वो मान समझ नहीं रहे हैं। मींस उनका लॉजिक का जो ज्ञान है वो इतना कम है। तो ये ऐसा कोई ऑथॉरिटी फैलेसी करके मत बैठो। कोई भी हमारे यहां से जो सिंसियर है जिसमें श्रद्धा है वहां से प्रारंभ करके प्रज्ञा यानी कि रिफाइन इंटेलेक्ट तक कोई भी हम पहुंच सकते हैं।
(1:15:15) प्रज्ञा की प्रज्ञा का सिर्फ स्पार्क चाहिए। क्वांटिटी की जरूरत नहीं है। बस पार्क चाहिए और आप वहां पे पहुंच सकते हैं। इट्स ऑलवेज अ प्लेजर टू टॉक टू बोथ ऑफ यू। नीलेश सर से सेकंड टाइम और रितू मैम आपसे फर्स्ट टाइम मिली है। लेकिन आई एम श्योर दिस इज़ नॉट द लास्ट टाइम। वी विल कीप मीटिंग। और हमने अभी जस्ट बात की परशुराम जी के बारे में। उनके वाल्मीकि नहीं मिले। लेकिन आई एम श्योर जितनी भी इंफॉर्मेशन उनके बारे में होगी वो नेक्स्ट टाइम इट वुड बी वर्थ टॉकिंग अबाउट इट। कि परशुराम जी के बारे में जब इतनी चर्चा है सारे ग्रंथों में आते हैं तो जरूर इस टॉपिक को
(1:15:49) मैं नेक्स्ट टाइम एक्सप्लोर करना चाहूंगी। थैंक यू सो मच फॉर ऑल द ग्रेट थिंग्स दैट यू हैव डन फॉर इंडिया एंड इंडियन हिस्ट्री। आई मीन सच में आई थिंक वी ऑल आर ग्रेटफुल। द ऑडियंस इज ग्रेटफुल। थैंक यू। थैंक यू। [संगीत]
Author Name:EST Show
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@ESTshow
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=NzTA5ef_sAw
Title: Did India Really Rule the Seas? | Ancient Maritime Power Nobody Talks @NileshOak @rupabhaty6757
Author Name: EST Show
Description: How far back does India’s maritime history really go?
In this special episode, two renowned researchers come together on one podcast for the first time to explore the fascinating story of ancient India’s seafaring and maritime culture.
Rupa Bhaty : Architect, Researcher & Adjunct Assistant Professor at the School of Indic Studies
Nilesh Nilkanth Oak : Author, Speaker, Researcher, GAIA & TEDx Speaker
Together, they explore what ancient Indian texts, historical interpretations and archaeological evidence can tell us about India’s connections with the wider world.
From references connected with the Ramayana and Mahabharata to discussions around the Indus Valley and Harappan civilisations, the conversation travels across centuries of Indian history.
The episode also explores:
• Ancient Indian seafarers and maritime trade
• India’s connections with distant regions
• What ancient texts say about travel and commerce
• Indus Valley & Harappan civilisation
• The Aryan Invasion debate and different historical interpretations
• Ancient trade routes and cultural exchange
• What archaeology can and cannot tell us about the past
• How we can understand India’s maritime history through multiple sources
This is a conversation about history, evidence, interpretation and the many questions surrounding India’s ancient relationship with the sea and the wider world.
Watch the complete conversation and decide for yourself what the evidence tells us.
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Transcript:
(00:04) कोलंबस ने अमेरिका डिस्कवर किया। वास्कोडि गामा ने सी रूट टू इंडिया डिस्कवर किया। तो ये एक्चुअली में डिस्कवरी थी नीलेश सर या ये वो है जो लिखा गया है। हम नेविगेशन जो है वो इंडस सिविलाइजेशन के समय से कर रहे हैं। ही यूज्ड टू टेक टैक्सेस कृष्णा जी। वहां पे जो भी शिप्स लगती थी तो वो टैक्सेस लेते थे। ऐसा विवरण जो है और रामायण का जो समय है वो 14,000 इयर्स का है। लेकिन उनके जो कोडक्स थे ना ये कोडक्स ये स्पेनिश लोगों ने यूरोपियन लोगों ने जलाई है। सो आर्यन इन्वज़ इज नॉनसेंस। डोंट गो विद इट। [हंसी] तो पहाड़ भी मिलेगा जो हनुमान जी लेके आए
(00:46) थे संजीवनी वाला। [संगीत] नमस्ते इंडिया। वेलकम टू द ईएसटी शो। हम लोग जनरली ना यह पढ़ते हुए बड़े हुए हैं कि कोलंबस ने अमेरिका डिस्कवर किया था। वास्को दगामा डिस्कवर्ड दी सी रूट टू इंडिया। हाउएवर, आज जो मेरे साथ दो रिसर्चरर्स हैं, दे हैव बीन आस्किंग मच मोर अनकंफर्टेबल क्वेश्चंस विद रिस्पेक्ट टू हाउ द हिस्ट्री हैज़ बीन डॉक्यूमेंटेड? क्या यह वर्ड जो डिस्कवरी है, क्या इस शब्द को ही हमें क्वेश्चन देना चाहिए? द वर्ड डिस्कवरी इज क्वेश्चनेबल इटसेल्फ। और उनकी रिसर्च एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र में,
(01:31) आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में इमेंस है। एंड यू ऑल हैव मेड दीज़ गेस्ट सेवरल टाइम्स। आई थिंक इन सम काइंड ऑफ़ कॉन्फ्रेंसेस और पडकास्ट यू नो देम वेरी वेल। और मुझे यह कहने में बहुत ज्यादा हर्ष की अनुभूति होती है कि आई एम होस्टिंग बोथ द रिसर्चर्स फर्स्ट टाइम ऑन द ईएसटी शो टुगेदर। आई एम सो प्राउड टू वेलकम नीलेश ओक एंड रूपा भाटी मैम ऑन द एएसटी शो फॉर दी वेरी फर्स्ट टाइम दीज़ बोथ टॉप रिसर्चर्स आर कमिंग टुगेदर वेलकम सर वेलकम मैम वेलकम टू द एएसटी शो नमस्कार
(02:17) सो हैप्पी टू सी यू बोथ टुगेदर आई मीन इट्स एन ऑनर फॉर मी कि मैं दो ग्रेट ऐसे रिस्चर्स के साथ बैठी हुई हूं जिन्होंने बिल्कुल हिस्ट्री को पूरी तरीके से उधेड़ बुन दिया है। उधेड़ करके ऐसे-ऐसे फैक्ट्स आप लोग सामने लाए हैं जो हमने शायद अभी भी नहीं पढ़ते हैं जो हमने सुने नहीं थे लेकिन अब शायद हम उसके बारे में पढ़ना शुरू कर रहे हैं। सो, अ सर एंड मैम, आई ऍम गोइंग टू कीप दिस पॉडकास्ट वैरी ओपन क्योंकि डिस्कशन बहुत लेवल पे जा सकता है जा करके। लेकिन आज हम जानना चाहेंगे एंशिएंट सिविलाइज़ेशन इन टर्म्स ऑफ सी फेरर्स। क्योंकि शायद पहले
(02:56) ही वही ट्रैवलिंग का एक मीडियम था। तब एयर ट्रैवल था नहीं। हम सी फेरर्स की बात कर रहे हैं। तो हम यह जानना चाहते हैं कि डिस्कवर डिस्कवरी के दौरान जो चीजें लिखी गई हैं जैसे कोलंबस ने अमेरिका डिस्कवर किया। भारत वास्कोडिगामा ने सी रूट टू इंडिया डिस्कवर किया। तो यह एक्चुअली में डिस्कवरी थी नीलेश सर या यह वो है जो लिखा गया है? डिस्कवरी थी फ्रॉम यूरोपियन लोगों के पॉइंट ऑफ व्यू से क्योंकि उनसे यूरोपियन लोगों को इंडिया पता था हम और वो बीच में के जो अरब लोग हैं उनका बीच में ट्रांजिशन करके उनसे उनके कारण हमारा व्यापार चल रहा था। लेकिन उनको डायरेक्ट
(03:38) एक्सेस नहीं था। तो जो मिडिल ईस्ट के जो लोग हैं वो यूरोपियन लोगों को डायरेक्ट एक्सेस देते नहीं थे क्योंकि उनका ही साम्राज्य चल रहा है। साम्राज्य यानी कि कंट्रोल इवन द सप्लाई चेन आप बोल सकते हैं लॉजिस्टिक्स वाला तो चांस नहीं देते थे बिकॉज़ उनको तो मार्जिन रखना है ना बीच में बिजनेस का करके उनको बायपास करने के लिए उनको अलग ढूंढना पड़ा। तो यह डिस्कवरी है बट इट इज फ्रॉम अ यूरोपियन पॉइंट ऑफ व्यू और हमें डिस्कवरी क्या है? एक शॉर्ट में बताता हूं क्योंकि वो भी बड़ा सब्जेक्ट होगा जो हम विज्ञान की डिस्कवरी करके अभी जो हम उसका
(04:08) उपयोग करते हैं ना ऐसी डिस्कवरी वो नहीं है वो उसका एक वेरी स्पेसिफिक वेरी अब्राहमिक रिलीजन स्पेशली उसमें क्रिश्चियनिटी का कॉन्ट का कॉन्टेक्स्ट का मीनिंग है कि बेसिकली लाइक द होल वर्ल्ड वी ओन इट काइंड ऑफ और जो हम तो उनके लिए ऐसा लाइसेंस जैसा दिया जाता था एक्सपिडिशन हम प्रपोजल जैसा कि आप जाके ढूंढो और आप जो ढूंढ ढूंढ के निकालेंगे ना तो जिसने पहले देखा फ्रॉम अ यूरोपियन पॉइंट ऑफ व्यू उसने वो डिस्कवर किया डिस्कवर किया यानी कि नाउ ही हैज़ अ कंट्रोल ओवर इट विथ रिस्पेक्ट टू द यूरोप तो वो तो बाकी लोगों को तो पेगन जैसा ही सोच रहे थे। सो
(04:48) डिस्कवरी का अदर देन कि नया ढूंढ लिया एंड नाउ जिसने वह उसका शोध किया उसका उसके ऊपर कंट्रोल है। आई मीन ही हैज़ अ सम ही गोइंग टू गेट अ प्रायोरिटी ऑन अ फाइनेंशियल गेंस फ्रॉम दैट ऑनगोइंग ट्रांजैक्शंस। सो इट्स अ वेरी डिफरेंट टाइप ऑफ़ मीनिंगफुल डिस्कवरी अदर देन लाइक अ प्योर साइंटिफिक डिस्कवरी। ओके मैम ऑन द सेम ग्राउंड्स आपने इंडस सील पे इतना रिसर्च किया है। उसमें आपने ज्योग्राफिकल लोकेशनेशंस के बारे में ट्रेस किया है। एंड देन यू हैव टॉक्ड अबाउट दी सी रूट फ्रॉम द अरेबियन सी। तो ये अपने आप में आप इसे कैसे रिलेट करती हैं विद रिस्पेक्ट टू दी सी फेरर्स।
(05:29) द ओल्ड सी फेरर्स दैट वुड बी देयर। एक्चुअली देखा जाए तो ऋग्वेद के समय से ही नावः शब्द आ गया है और हम लोग सी फायरिंग जो है वो काफी समय से कर रहे हैं। मतलब थाउजेंड्स एंड थाउजेंड्स ऑफ इयर्स से। लेकिन कहीं हमें जो डॉक्यूमेंटेशन है वो थोड़ा सा हमें कम दिखाई देता है। इन अ वेरी फुलर फॉर्म यानी बहुत अच्छे तरीके से जो दिखाई देता है दैट इज़ इन अर्थशास्त्र। ओके। सो नावाध्यक्ष भी हैं। उनके नीचे के जो सुपरवाइजर्स हैं वो भी हैं। जो रोलर्र्स हैं वो हैं। मतलब बहुत सारे जो अरित्र का काम करेंगे वो हैं। माल ढोने वाले जो हैं जो अंदर बंकरिंग करेंगे वो
(06:13) है। उस समय बंकरिंग वाज़ नॉट अबाउट डीजल और क्रूड ऑयल। उस समय की बंकरिंग का मीनिंग है कि फूड जो है वो फूड सप्लाई एंड वाटर सप्लाई। क्योंकि समुंदर के बीच में जाके तो आप पानी नहीं पीते। खारा पानी तो नहीं पी सकते। सो द काइंड ऑफ बंकरिंग कौन करेगा? कैसे करेगा? क्या होगा? सील फैक्टर्स जो हैं वो जब मुझे जो मिलना शुरू हुए तो उसमें मुझे यह समझ में आने लगा कि यह जो है ट्रांजैक्शंस की बात हो रही हैं। इन सबके बीच के ट्रांजैक्शंस की भी बात हो रही हैं। गुड्स के ऊपर सील लगने की भी बात हो रही है। तो वहां से हमको पता चलता है कि डिस्कवरी जो इन यूरोपियन ने करी है वो एक
(06:54) उनके पॉइंट ऑफ व्यू से जैसा नीलेश जी ने कहा। लेकिन हमारे पॉइंट ऑफ व्यू से तो हम नेविगेशन जो है वो इंडस सिविलाइजेशन के समय से कर रहे हैं। एंड सबसे इंटरेस्टिंग बात कि हम ब्लैक एबोनी जैसी चीजें जो हैं श्रीलंका से हम लेकर के आ रहे हैं गोवा पोर्ट तक। ब्लैक इबनी वी आर सेइंग वुड वुड लकड़ी की बात करें। और वो बहुत ही प्रिशियस है फॉर इजिपशियन टेंपल्स एंड मेसोपोटियन टेंपल्स। ये सिर्फ वही श्रीलंका में ही मिलती है। एंड सम पार्ट ऑफ़ मालाबार हिल। मतलब छोटा सा एक पैच जो है वो मालावर में मिलता है। तो मुझे उसका नाम मिल रहा है उसमें सील
(07:33) में तो वो कॉन्टेक्स्ट जो है वो सारी चीजें उस समय के काल के हिसाब से जैसे नीलेश जी हमेशा कहते हैं कि काल समय और पात्र यानी कि देश काल देश काल पात्र देश काल पात्र के हिसाब से जब हम देखते हैं सील को तो वो बिल्कुल परफेक्ट बैठती है कि वी वर वेरी ग्रेट नेविगेटर्स ब्यूटीफुल उसमें मैं एक और ऐड कर दूं कि उन्होंने कहा कि डिटेल्स ऑफ नेविगेशन रिलेटेड बातें जो है वह अर्थशास्त्र में मिलते हैं यानी कि चाणक्य और जो चाणक्य का जो एग्जैक्ट समय अभी मॉडर्न एकेडमिक्स को लगता है उन्होंने फाइंड आउट किया है उनके पास कोई एविडेंस नहीं है। ओके बहुत सारे एजमशंस
(08:14) है। एलेक्जेंडर का मेगस्थिस का लेके फिर वो मेगस्थनीस का जो सैंड्रोकोटस हुआ वो चंद्रगुप्त मौर्य ही था। ऐसा एजमशन है वो। उसके मुझे कोई एविडेंस नहीं है। वो हो भी सकता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] लेकिन समय जो है चाणक्य का वो 300 बीसी से लेके 2300 बीसी के बीच में कहां भी हो सकता है। ये दैट इज द ट्रू रेंज। तो ये लोगों को हमें समझना चाहिए कि कोई चीजें हमें आई डोंट नो वी डोंट नो। डोंट नो मींस क्या? 300 से करेक्ट है। उसके बाद में नहीं है करके पता है। और 20 300 बीसी के पीछे भी ज्यादा जाएगा नहीं। बट एक बीच में जो अभी
(08:48) 2000 2000 दो सहस्त्र वर्षों का जो समय है उसमें एक है और उन्होंने जो कहा कि अर्थशास्त्र में अच्छे शब्द आते हैं नेविगेशन के रिलेटेड ओके मींस नाव वर्ड आया नेविगेशन नाव वर्ड तो ऋग्वेद में भी है लेकिन उसमें यह कह दूं क्योंकि अगेन एकेडमिया में उनका क्या लॉजिक में रॉन्ग है मुझे पता नहीं पर उनको ये समझ में नहीं आता करके वो सामान्य लोगों को तो समझाना जरूरी है। एकेडमिक समझे नहीं समझे जब कभी समझेंगे लकी है तो समझ लेंगे। ये बात ऐसी है कि अभी प्रोफेसर रामस्वामी उन्होंने जो तमिलनाडु में जो रिसर्च किया है जो समुद्र के अंदर जो पोर्ट्स है 30 कि.मी. तक अंदर
(09:29) के पोर्ट्स है और वो पोर्ट्स कब फंक्शनल थे? तो उसका हम समय निकाल सकते हैं जो रामस्वामी ने निकाला है। तो वो 20,000 इयर्स तक पीछे चले जाते हैं। तो जो शब्द जो आपने कहा वो तो अर्थशास्त्र में मिलते हैं हमें। लेकिन जो हमारा सोफेस्टिकेटेड नेविगेशन सोफेस्टिकेटेड पोर्ट्स उसका जो हमारे पास जो साक्ष्य है वह 20,000 साल तक की पीछे जाती है। और उसमें यह भी मैं कह कहना चाहता हूं कि वो फिर बहुत लोग ऐसा ये सुनेंगे और कहने लगेंगे कि अच्छा तो हमारे पास 20,000 सालों से हमारा नेविगेशन का प्रारंभ हुआ। यह भी रॉन्ग है। एक्चुअली उसका अर्थ यह है कि 20,000 साल तक का
(10:06) साक्ष्य हमारे पास है। उसके पहले जा सकता है। हां। तो उसके ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि जिसके कारण हम उसके पहले नहीं था बोल सकते हैं। ओके उसके पहले भी होगा। हमें मिला नहीं है। लेकिन कोई उसका अर्थ ये करे कि तब उसका प्रारंभ हुआ। ये बहुत सारी मिस्टेक्स होते रहती है। आर्कियोलॉजी लोगों की तो इतनी मिस्टेक होते रहती है कि उससे वो बाहर आना भी नहीं चाहते। इसलिए महत्वपूर्ण है ये बहुत पुराना है। जैसा उन्होंने कहा ऋग्वेद के समय से उसके वर्णन आते हैं। लेकिन आर्कियोलॉजी एविडेंस भी हमें 20,000 इयर्स तक लेके जाता है। सोफेस्टिकेटेड नेविगेशन।
(10:37) वाओ। सो आर्कियोलॉजी एविडेंस भी हमें 20,000 पहले तक जाके लेके जाता है विद रिस्पेक्ट टू द नेविगेशन। इंडियन नेविगेशन की बात कर रहे हैं हम। जो हारबर्स के जो लूप्स हैं बहुत क्लियरली दिखाई दे रहे हैं रामास्वामी जी के पेपर में। इट्स ऑलमोस्ट लाइक 25 कि.मी. अवे से शुरू होता है। एंड द सेम थिंग इज मेंशंड इन अच्छा वो दैट इज़ एन एक्सटेंशन ऑफ़ पुमपुहार। करेक्ट। सो ये पुमपुहार का जो इसमें डल जो हुआ है जो प्रॉब्लम आई है वो मणिमेखलाई में और इन सब में उसका विवरण भी मिलता है जो संगम लिटरेचर है तमिलनाडु का तो उसमें उसका वर्णन आता है
(11:16) उसमें उसका वर्णन आता है तो वो जो 5000 बीसी के आसपास का जो डिलज हुआ है वो उसका [गला साफ़ करने की आवाज़] जो द्वारका कृष्णा द्वारका का 5525 बीसी का तो ट्रायंगुलेशन हो रहा है कि उनके ग्रंथों में उसका वर्णन है एक तरफ से जो मददुराई का नष्ट होना नया मधुराई का निर्माण होना और यह जो अभी रामस्वामी का जो एविडेंस है वो मैच हो रहा है। ऋग्वेद बहुत पुराना हजारों साल सहस्त्र साल पुराना उसमें एकदम वेरी कंफर्टेबली नेविगेशन नेविगेशन की बात हो रही है। 100 क्या ओर्स बोलते हैं उसको 100 ओर्स 100 ऐसा करने के शिप्स के वर्णन है। ओके तो फिर मतलब वो जगेंटिक शिप्स होंगे
(11:51) जैसे हम देखते हैं अगर हम 100 ओर्स की बात कर रहे हैं। हां हां ओके तो सर आपने बोला कि 20,000 तक साल पहले तक के हमारे पास एविडेंस हैं। तो दिस डेट्स टू महाभारत टाइमलाइंस दिस आल्सो डेट्स टू रामायण टाइमलाइंस। क्योंकि रामायण के भी महाभारत के भी पहले का है। रामायण महाभारत के भी पहले ये जो हारबर्स मिले हैं ये उसके भी पहले उसके भी पहले के हैं। ये सुपर्ब। तो सर कुछ ऐसे एविडेंसेस मैम महाभारत के टाइम से या रामायण के टाइम से जो आप बता सकते हैं कि इस टाइम पे हमारी सी फेरर्स थे और यहां से यहां तक हमारा ट्रेड होता था। हमारा आना जाना रहता था।
(12:27) ऐसे कुछ एविडेंसेस हैं क्या? महाभारत में इंटरेस्टिंग एविडेंस है द्वारका को लेकर के जिसको ओखामंडल बोलते हैं। ओखामंडल। ओखामंडल बोलते हैं। यह ओखामंडल से ही मेलुखा वर्ड जो है वह आया है। मेड ओखा ओखा मंडल अभी भी बोलते हैं। तो ओखा इज़ अ नेम व्हिच इज़ कमिंग फ्रॉम बाणासुरस डॉटर उषा। तो उषा का प्राकृत रूप जो है वो ओखा हो गया। तो वो जो है दहेज में समझिए उनको मिला। वो जगह जो है वो कभी बाणासुर के अधीन अधीन रही होगी। बहुत इंटरेस्टिंग फैक्ट्स ये मिलते हैं कि ही यूज्ड टू टेक टैक्सेस कृष्ण जी वहां पे जो भी शिप्स लगती थी तो वो टैक्सेस लेते थे। ऐसा विवरण
(13:12) जो है वो महाभारत में आया है। तो नेविगेशन उसमें जो टैक्सेस लगना है उसमें लोडिंग अनलोडिंग होनी है। तो वो चीजें तो समझ में आ रही हैं कि द्वारका में बहुत प्रॉपर वे में चल रहा है उस समय। देन चोलास पांड्यास चेरास एंड इवन कलिंग देन आंध्रा अ ताम्रलिप्ती वर्ड भी इसमें सील में मिल रहा है दैट इज बंगाल तो पूरा का पूरा ही आपका समझ लीजिए अरेबियन सी से लेके बे ऑफ़ बंगाल तक हम लोग प्रॉपर्ली राउटेड थे। मतलब यह पूरा प्रॉपर राउट था वहां से यहां आने के लिए। बेसिक जो सील्स जो हमको मिलती हैं वो सिर्फ हमें लोथल तक
(14:00) मिल रही हैं। लेकिन गोपिकापट्टनम की डेटिंग हुई है। मेरी निगम जी से बात हुई थी राजीव निगम जी जो किशनग्राफी में थे ही जस्ट रिटायर्ड। तो उनसे जब बातचीत हुई तो उन्होंने कहा गोपिकापट्टनम वी डेटेड फॉर 1000 बीसी एटलीस्ट। ओके। हम तो मैंने कहा फिर तो गोपिकापट्टनम का आगे वाला पोर्शन जो है वह सी के अंदर में जो है वह तो अभी तक देखा नहीं गया। उन्होंने कहा नहीं देखा गया है वो। तो इसका मतलब है आगे भी रहा होगा। नाउ इंटरेस्टिंग फैक्ट कम्स इन सुमेरियन टेक्स्ट वेयर इट सेस देयर इज़ अ पोर्ट नेम गोबी गोबी। नाउ गोबी इज़ नथिंग बट गोपिकापट्टनम।
(14:42) ओ ओके आई हैव मेंशंड दिस इन बुक आल्सो। विशाखापट्टनम का वाइजग हो जाता है ना। यस यस। वहां पे वो उन लोगों ने प जो है वो अच्छे से प्रोनाउंस नहीं होता है तो वो वर्ब प्रोनाउंस कर रहे हैं उसको तो गो भी बोल रहे हैं। ओके एंड दैट इज मेंशंड इन द कुनाई फॉर्म टेक्स्ट जो है वंडरफुल सर हमें रामायण एरा में मिलते हैं कुछ एविडेंस किसके नेविगेशन के नेविगेशन के नेविगेशन के ऐसे मिलते हैं समुद्र के इतने ज्यादा नहीं मिलते जैसे कि रावण और उसकी आर्मी समझ लो वर्ल्ड वाइड जा रही है वो कैसी जा रही है ऐसा इसका क्लियर वर्णन नहीं है। मुझे लगता है वह बोट से ही जाते
(15:19) होंगे। मींस आर्मी तो जा रहे तो ऐसे ही जाते होंगे। मींस वर्ल्ड मींस पाताल में गए, यमुपुरी में गए, अंटार्कटिका में गए। ऐसे वर्णन है रामायण में। लेकिन जब वो गंगा, यमुना जब क्रॉस कर रहे हैं भगवान राम, लक्ष्मण वगैरह तो बोट्स बोट्स, बोट्स का वर्णन है। इतना ही नहीं जब भरत आते हैं राम को मिलने के लिए, चित्रकूट पे तो वो आर्मी लेके आए हैं। और ऐसा आर्मी क्रॉस करने के लिए जो गुहा क्या उनका नाम? अ जिन्होंने मदद किया ना निषाद निषाद निषाद जो किंग वगैरह थे उनके मींस एस अ मल्टीपल आई मीन आई डोंट नो एक्सैक्ट नंबर क्या है वो शत बोला है या 100्स ऑफ
(15:57) बोट्स सो 100्स ऑफ बोट से उन्होंने मिलिट्री मींस आर्मी भरत के आर्मी को उन्होंने नदी के एक पार से दूसरे पार तक लेके गए हैं तो वो सोफेस्टिकेटेड बोट्स रिवर्स वाले भी थे उसे हमें एक्सटेंड करके सी में जाने के लिए स्टेरिया से तो हम आगे जा ही सकते थे हां और उन ये जो रामायण और हमने जो बात की पुहार की 2000 तक का है और उसके पहले भी होगा बिकॉज़ सी देयर इज़ नथिंग इन इन टर्म्स ऑफ़ ह्यूमन इंटेलेक्ट इन टर्म्स ऑफ़ टेक्नोलॉजी कि जो 20,000 में वो पोर्ट्स बांध रहे हैं। ऐसा कुछ मैजिकली हुआ नहीं है कि उसके पहले वो नहीं हो सकता। राइट? एंड इवन ओनली नॉट ओनली जस्ट पमहार
(16:40) उसके पैरेलल में आप आंध्रा में देखिए बंगाल में देखिए नीचे श्रीलंका की तरफ देखिए हारबर्स मिलेंगे अभी तक हमने खोजे नहीं खोजे नहीं पूरे और जो गंगा की पूरी जो क्या बोलते हैं वालू जो सैंड जो जाके जो यू नो जो बनाती है बनाती है ना तो इधर नीचे नीचे वो चले जाते हैं लेकिन अभी हमें ये आर्कियोलॉजी एविडेंस जो मिला है जो हमारे लिटरेरी एविडेंस के साथ मैच हो रहा है जैसे जैसे कि संगम लिटरेचर नाउ लेट्स गो बैक टू से महाभारत का वर्णन रामायण का वर्णन ऋग्वेद का वर्णन पुराणों का वर्णन कि सगर पुत्र मींस वो भगवान राम के बहुत पहले इनके रिसर्च के अनुसार तो अभी हमें समझता
(17:22) है कि बृहद्रथ का जो एक श्वाकु वंश के राजा थे उनका समय ही 36000 इयर्स पहले का है 34500 बीसी यानी कि 36000 इयर्स का पहले और उसके पहले हरिश्चंद्र सगर ये जो विश्वकु वंश के जो प्रसिद्ध राजा है वो उसके पहले के हैं और सप पुत्रों का नष्ट हुआ था नष्ट होना पड़ा इसलिए वो भगीरथ ने बाद में गंगा लाई ना तो उसका भी अर्थ ये है कि सगर पुत्र कहां जा रहे थे उधर से वो कपिल क्षेत्र यानी कि वो जो कोलकाता के साउथ में आता है वहां से वो पाताल में गए हैं और पाताल में लॉस्ट हो गए करके जो पाताल यानी कि दक्षिण अमेरिका ओके और बाद में उनको ढूंढा गया तो वो पाताल
(18:00) में गए मींस कैसे वो नेविगेशन से ही जा रहे हैं ना हम तो हमारे पास सिर्फ अभी लिटरली एविडेंस क्योंकि हमनेक के आसपास तो पानी सके इवन जेनेटिक एविडेंस में भी जो ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच रहे हैं तो इट इज नॉट कि पूरा लैंड जुड़ा हुआ था। करेक्ट करेक्ट। कहीं ना कहीं उनको नेविगेशन का सहारा लेना पड़ा था। तब ब्रूई को क्रॉस करते हुए और दूसरे जो आइलैंड्स हैं उनको क्रॉस करते हुए ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचे होंगे। एंड टू वेव्स की बात होती है जिसमें एक 60000 बीसी के समय में हुआ। एक 40,000 में भी हुआ। यस तो इस तरह से आ रहे हैं बट उस समय ऐसा भी
(18:37) नहीं था कि वो सारे के सारे लैंड फुल्ली जुड़े हुए थे तो नेविगेशन तो वो भी यूज़ कर रहे हैं इन सम वे तो मैम ये सारा एविडेंस हमें कहीं ना कहीं पे अपने लिटरेचर के थ्रू मिल रहा है जाकर के दैट इज टू वी आर टॉकिंग अबाउट इंडियन लिटरेचर दुनिया का और कोई लिटरेचर या टेक्स्ट क्या इन चीजों को वेरीफाई करता है नॉट टॉकिंग अबाउट इंडियन लिटरेचर कोई और हिस्टोरिकल एविडेंस किसी और कंट्री का उनकी हिस्ट्री क्या इस चीज को वैलिडेट करती है? कहीं पे मेंशन मिलता है? नहीं, ऐसा उन लोगों का इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि एक तो डेमोग्राफी बहुत
(19:12) डिफिकल्ट वे में वहां पे चेंज हो रही थी। लाइक ग्रीक में भी स्वैप हो रहा था। ऊपर [नाक से की जाने वाली आवाज़] साइबेरिया में भी स्वैप हो रहा था। अभी एक बड़ा इंटरेस्टिंग आया है कि साइबेरिया का जो एक मैटरनल आपका जो है वो इंडिया में क्रोमोसोम्स लाइक मैटरल मैटरल क्रोमोजोम जो है साइबेरिया वाला वो 7000 बीसी का हमें सदर्न इंडिया में मिल रहा है। दिस इज द लेटेस्ट डेवलपमेंट। महाभारत समय में एक्सचेंज हो रहा है। महाभारत के पहले महाभारत के पहले एक्सचेंज भी हो रहा है। तो ये भी हमको दिखाई दे रहा है। तो इतना आसान तो नहीं है नेविगेशन तो फिर
(19:48) भी चाहिए ना। एंड दे न्यू कि किस समय हमें सेल करना है टाइट्स में नॉन टाइडल टाइम में। किस तरह से हमें जाना है, आना है। इसीलिए हमारा तिथि जो है वो यूज़फुल हो जाती है। तो दूसरे टेक्स्ट में कहीं हमें ओरल ट्रेडिशन की वजह से हमारे में तो कंजर्व हो गया है। लेकिन उनके में वो ओरल ट्रेडिशंस तो अगर ग्रीस का ले लें तो इलियड्स है, ओडीसीस हैं। ये सब चीजें बहुत रीसेंट वाली है। प्लेडिस के टाइम की हैं। इट इज़ लाइक 2000 3000 बीसी के आसपास की हैं। उससे पहले का हमको कुछ जैसे हम बहुत ओल्ड लिटरेचर में एक मेसोपनामिया की बात करते हैं। एक
(20:29) चाइनीस की भी बात करते हैं। तो यूके में भी ऐसा कुछ इजिप्शन की बात करते हैं। नहीं होता क्या है सी हम उनको [गला साफ़ करने की आवाज़] मेसोपोटेमिया करके ओल्ड करके बात करते हैं ना ये हमारा कॉलोनियल हैंगओवर है। ओके। मेसोपोटेमिया को ओल्ड बिकॉज़ वो सोचते हैं मेसोपोटेमिया ओल्डेस्ट। हम ये उनकी मूर्खता है। दूसरा कोई शब्द नहीं है इसके लिए। क्योंकि उनको क्या था? दे वेर लुकिंग फॉर उनका रूट्स लाइक अब्राहमिक रिलीजंस का रूट लाइक क्रिश्चियनिटी का जीसस कहां कुछ मिल रहा है क्या करके और उसके पहले मोजेस मोजेस के रिलेटेड तो वो क्या करते थे उनका जो आईडिया होता
(21:05) था कहां देखेंगे चलो इजराइल में शुरू करेंगे इजराइल जॉर्डन वो पेलेस्टाइन वो एरिया में आर्कियोलॉजी करते थे उधर कुछ ज्यादा उनको इंटरेस्टिंग मिला नहीं कुछ इंटरेस्टिंग चीजें मिली भी है मैं आता हूं उसके ऊपर लेकिन आगे फिर इराक में उनको कुछ मिला तो उनका क्या होता था इट्स अ हैपसंस डाटा जैसा कि इराक में कुछ उनको को मिला तो उधर ही और डीक करने लगे। तो इराक इस बेसिकली मेसोपोटेमिया और उनको लगता है वो सबसे ओल्डेस्ट है हम और वो उनके मन में दो है उनको जो मिल रहा है वो उनके लिए बहुत ओल्ड हो रहा है करके अच्छा लग रहा है और फिर वो इतना इंडिया
(21:36) में ढूंढना भी नहीं चाहते बिकॉज़ दे विल नॉट एबल टू कनेक्ट द डॉट्स जैसा उनको एजेंडा ड्रिवन उनका जो करना है उसको हो गया नहीं ओके लेकिन आप जो पहला प्रश्न था उसका मैं उत्तर देता हूं कि और दुनिया में क्यों नहीं मिल रहे हैं एक तो लास्ट ग्लेशियल मैक्सिमम जो 20,000 साल का हमारा एक नेचुरल लिमिट हो गया है नॉलेज के उसके पहले भी हमारा तो चल रहा था नेविगेशन इंडिया का नेविगेशन क्या पूरा संस्कृति चल रहा है लेकिन 20ाउज इयर्स के पीछे आप चले जाइए तो वेस्टर्न यूरोप इज अंडर टू टू 4 किमी शीट ऑफ़ आइस आइस तो उधर तब तो कुछ हो नहीं रहा है
(22:10) अदर दैन लाइक एस्कीमो जैसे लोग कुछ रहते होंगे राइट आइस एज की बात कर रहे हैं क्या आइस की बात कर रहे हैं लेकिन उधर आइस एज का है भारत में आइस एज नहीं हुआ है 250 मिलियन इयर्स में यू नो नाउ नॉर्थ अमेरिका में भी वही रहा है तो वहां आप ढूंढने भी मत जाओ ना कोई जाना है तो जा सकता है कोई लेकिन वो पिघल गया तो वो आइस के साथ वो पानी में शायद मुझे आपकी उस किताब से याद आ रहा है सुग्रीवास एटलेस से जहां आपने बताया है और सुग्रीव जी बोल रहे हैं कि वो इसके आगे मत जाना इसके आगे मत जाना वहां कुछ नहीं है लेकिन दूसरे जगह साक्ष्य हमें शायद क्यों नहीं
(22:43) मिलती उसका मैं उदाहरण दे रहा हूं तो ये तो वहां सिनेरियो हुआ नाउ दक्षिण अमेरिका इज अ वेरी प्रोस्परस और वेरी प्रोस्पेक्टिव प्लेस लेकिन वहां का चैलेंज क्या है मैं बताता हूं हूं कि उधर अभी हमें कुछ मिला है क्या? तो एक्चुअली उनके पास कोडक्स थे। जैसे कि स्पेनिय्स मेक्सिको में आ गए और मेक्सिको के बाद वो फिर इक्वाडोर, ब्राजील, परू, चिले, अर्जेंटीना नीचे गए। लेकिन जब वो गए ना लाइक मेक्सिको इज अ परफेक्ट वन। मेक्सिको में जो एस्टेक उनके यहां गए तेनो चितलन मेक्सिको सिटी का पुराना नाम था तेनो चितलन। ओके? वो तो वेरी सोफेस्टिकेटेड था। उधर जब
(23:21) लोगों ने लिखा है ना उन्होंने ऐसा वर्णन किया है कि जो मेक्सिको सिटी उनको दिख रही है ना बिफोर दे डिस्ट्रॉयड इट वो बोल रहे हैं कि ऐसी जगह ऐसी सोफेस्टिकेटेड जगह यूरोप में ये 500 इयर्स पहले की बात चल रही है सिर्फ और 500 इयर्स पहले अभी जो हम रोम जाके जो देखते हैं या फ्लोरेंस देखते हैं वैसा था फ्लोरेंस वाज़ लाइक दैट एंड रोम वाज़ लाइक दैट द वे वी सी टुडे लाइक वि द कोलोसियम कोसियम तो 2000 ईयर ओल्ड है बट दीज़ पीपल आर सेइंग कि ऐसी जगह हम जो मिक्स मेक्सिको देख रही है मेक्सिको सिटी तेनो चितलन ऐसी कोई जगह पूरे यूरोप में नहीं है।
(23:55) दैट मींस इट वास एक्सट्रीमली अमेजिंग प्लेस और उसको उसके अवशेष तो हमें मिलते हैं। लेकिन उनके जो कोडक्स थे ना ये कोडक्स ये स्पेनिश लोगों ने यूरोपियन लोगों ने जलाई है। तो जो लाइब्रेरी जो जली अभी ऑफेंसिव इस्लाम के कारण जो भारत में तक्षशिला नालंदा और बहुत सारे जगह में जली सिर्फ भारत में नहीं हुआ है। अलेग्जेंडि का भी जलाया गया। क्रिश्चियन लोगों ने जलाया है वो ऑलमोस्ट लाइक एंटाई नॉलेज और फिर मेक्सिको सिटी में जलाया उन्होंने तो होंगे भी सो कोई रेफरेंसेस तो वो शायद चले गए यस यस तो दैट कुड बी अ वेरी गुड रीज़ कि शायद टेक्स्ट होंगे लेकिन हमारे पास वो
(24:32) इनफेशन है नहीं तो ये शायद इस चीज को भी मैं इस नेक्स्ट क्वेश्चन पे आ रही थी बट प्रोबब्ली इट आंसर्स दैट कि हमने लिखा क्यों नहीं हमारे सी फेरर्स के बारे में तो शायद लिखा होगा शायद बट इट वास काइंड ऑफ़ ओरल उसमें ज्यादा था पुराने जो थे उतना हम इतने इतने अच्छे थे कि लिखने की जरूरत भी नहीं लगी क्योंकि वी आर वेरी प्रोफिशिएंट उसमें हम रोजमर्रा ही जो काम हो रहे हैं उसको उनको कहीं पे लिखने की ऐसी उनको जरूरत भी नहीं पड़ी तो सुचारू रूप से हो रहा था जैसे कुनेफ टेक्स्ट में मिलता है कि उससे इतना वूल लिया उसको इतना शकल के सिल्वर देना है इसने प्रॉपर जितना वेट का
(25:09) वूल दिया था उतना ही माल वापस नहीं आया है रिमोफुलनेस है किंग्स की कि इसको इतना लैंड किया ये दे नहीं रहा है तो टेबलेट्स में उनको वो सारी जो चीजें हैं हो रही थी। मगर अगर आप अर्थशास्त्र पढ़ें तो वहां पे दंड बहुत खतरनाक है। हम तो इसका मतलब है कि उसके प्रीवियस टाइम में भी वही चीजें चल रही थी। एंड फाइनली अर्थशास्त्र में उन्होंने लिखा इट वास मतलब चाणक्य ने अचानक से विष्णुगुप्त ने नया कुछ इजात नहीं किया था कि अचानक से मैं एक पूरी ट्रीटीज लिख रहा हूं। हां नया अर्थशास्त्र उन्होंने प्रारंभ नहीं किया। नहीं प्रारंभ नहीं किया। वो पहले से चला आ
(25:45) रहा था। एंड ही सैट डाउन एंड रोट एवरीथिंग कि चलो अब मैं इसको लिखता हूं। अभी कोई एक प्रोफेसर लिखता है ना कि सुलभ अकाउंटिंग फॉर डमीज़ [हंसी] डमीज़ के लिए नहीं बट डजंट मीन उन्होंने अकाउंटिंग का प्रारंभ किया। वो एक बुक लिख रहे हैं ऐसे ही। और आपका जो एक पहला प्रश्न था उसके ऊपर मैं बताता हूं कि हमें और क्या साक्ष्य मिलते हैं कि व्यापार की पीछे के समय में तो महाभारत के समय में हम क्या मिलते हैं बता रहा हूं कि जो इंडियन कॉटन नेति नेति का हम जो बोलते हैं ना नॉट दिस नॉट दिस एलिमिनेशन फॉल्सिफिकेशन का उपयोग करके अभी जो आर्कियोलॉजी एविडेंस
(26:18) में दिखाया है कि इजराइल में 5200 बीसी यानी कि महाभारत के समय के बाद 300 इयर्स में तो महाभारत का समय समझ लो उस समय में फॉसिलाइज एविडेंस ऑफ जो कॉटन मिला है इजराइल में इजराइल जॉर्डन है ना लिटरली उसका डेटिंग 5200 बीसी है जो महाभारत के समय का 5500 बीसी का और उसका उन्होंने ये किया कि वो जो कॉटन है उसका ओरिजिन इंडिया करके अभी के पेपर बोल रहे हैं अभी रीसेंट है ये लास्ट 20 इयर्स समझ लो फॉर सेफ रीज़न मुझे एक्सैक्ट ईयर पता नहीं और मेहरगढ़ में जो इंडियन कॉटन मिला है स्ट्रैंड्स बिटवीन द बीड्स कॉपर बीड्स के अंदर जो मिला है दैट इज डेटेड फॉर 6000
(26:59) प्लस गो करेक्ट करेक्ट ओल्डेस्ट वही है ओल्डेस्ट वही है और 5200 बीसी में इजराइल में भारत का मिल रहा है मेरगढ़ में भारत का है 6000 बीसी यानी कि व्यापार चल रहा है यहां से वहां चीजें जा रही हैं और आप नेविगेशन कहा करके मैं बोला नहीं था लेकिन वो लोगों के लिए ऐड कर दूं कि जैसे नेविगेशन चल रहा है वैसा अक्रॉस द रोड भी चल रहा है लाइक लैंड भी चल रहा है और वो लैंड के जो मिलते हैं ना आप उसको क्या बोलोगे लाइक जो कलरिंग करने के लिए लाइक नेचुरली है उसके पाउडर्स वहां पे बहुत यूज़ होते हैं और वो क्या बोलते हैं डाई जैसे नेचुरल डाई
(27:34) वाला जैसा मिलेगा ना स्टोन या ऐसा कलरिंग कर सकते हैं आप उसको हां ये ऑकर ऑकर कलर्स होते हैं रेड चक्स होते हैं ओके तो गेरू होता है गेरू जैसा तो उसका जो एविडेंस मिला है जैसे कि स्टर्ड इन केव्स ऑफ जॉर्जिया जॉर्जिया यानी कि कैस्पियंस समुद्र के पश्चिम में उधर ऐसा मिला है आई हैव दोज़ पेपर्स कि उसका ओरिजिन फिर इवन कैन गो टू इंडिया और शघाई यानी कि जैसे सिल्क क्राउड चल रहा है ना ऐसे ये क्राउड चल रहा है चल रहा है और ये लेकिन कब अभी सिल्क क्राउड मींस वो सोचते हैं एक 1000 साल पहले 2000 साल पहले ये नहीं बात चल रही है वी आर टॉकिंग जो जॉर्जिया का है वो
(28:11) 26ाउजेंड इयर्स बीसी का 26ाउ ये जो मुझे एक्सैक्टली शब्द नहीं आ रहा है जो कलर पाउडर गेरू ऐसा करने के लिए और शघाई तक चल रहा है मीनिंग द रेफरेंस फ्रॉम जॉर्जिया इज़ जॉर्जिया मींस कंट्री तो शघाई तक मीनिंग बिज़नेस चल रहा वि इंडिया इन बिटवीन इंडिया इन बिटवीन राइट लैंड से वाओ तो मैम ये जो अभी आपने बात की चॉक पाउडर एंड देन यू वी स्पोक अबाउट वुड आल्सो तो ये सारी चीजें तो इंडस वैली सिविलाइजेशन में कहीं ना कहीं पे आती हैं वहां पे ट्रेड बहुत ज्यादा स्ट्रांग था तो वहां से आई एम अस्यूमिंग शायद मोहनजोडारो से पोर्ट से तो वो कौन से सी रूट लेकर के
(28:51) कहां और कहां-कहां हमारा सामान जा रहा था वहां से लेकर के वेयर ऑल इट वास गोइंग वन नेम्स कम एस भरणी। सो भरणी इज़ नथिंग बट पेरूनेफर जैसा जो शब्द है रेड सी के ऊपर तो वो आज भी है भरणी हां भरणी तो भरणी आया है तो उसको उन्होंने यज्ञ भरणी कहा तो मैंने कहा पेनेफर है वो उस वो जो राउट है वो रेड सी वाला राउट जो है वो मिलता है हम लोगों को। दूसरा जो है वो पर्शियन गल्फ वाला भी मिलता है और हमारे सील्स जो है वो वहां पे भी मिलते हैं। फाइलाका आइलैंड में मिलते हैं। सऊदी अरेबिया में मिलते हैं। हमारे जो सील्स हैं मेसोपोटामिया में भी मिलते हैं।
(29:31) सुसा में मिलते हैं। सुसा इज़ अ इल्मारम व्हिच इज़ राइट साइड ऑफ़ द अर्लियर मेसोपोटामिया। ओके टुडेज़ ईरान। टुडेज़ टुडेज़ ईरान इज़ इलाम। या ओके अर्लियर इलाम। तो ये वो साइरस द ग्रेट वाला नहीं। यह उसके भी पहले वाला है जो एमराइट्स और यह सब लोगों ने उसको अटैक किया और उसके बाद फिर सरस द ग्रेट ने उसने अटैक करके वो चीज ली। अ जो लापिस लाजुली है उसका जो रूट है वो बहुत इंटरेस्टिंग है। वो आपको लैंड रूट्स भी मिलेंगे। वो आपको सी रूट्स पे भी मिलेंगे। ओके। तो लैंड से भी जाता था बदशान एरिया से ऊपर होते हुए एंड अशोर वाली जो जगह थी अनातोलिया तक एंड देन लवांड तक भी तो 4000
(30:19) बीसी का एक एक पेपर में मेंशन है कि हाउ द लापीस लाजोली मेड द राउट्स जो कहां कैसे जाएंगे सो व्हाट इज दिस आर्य थ्योरी ऑल अबाउट देन ये मतलब तो मतलब ये मतलब तो कहा कि आर्यंस आए फिर इंडिया बसा और देन वी जस्ट स्टार्टेड आफ्टर इंडस वैली सिविलाइजेशन ये तो बिल्कुल ही ये इस मतलब हुआ कि वो मितानी का जब मिला ना जब मित्तानी के कुछ मिले जिस जिसमें सुमेरियन कुनेफॉर्म टेक्स्ट ही यूज़ हुए हैं। उसमें इंद्र नासत्य वरुणा ये शब्द मिले हैं वहां पे। तो उसकी वजह से एक थ्योरी जो वेस्टर्न अथॉरिटीज हैं या एकेडमिया हैं इन्होंने यह बना लिया
(31:05) कि हेटाइट्स वाले जो एरिया है वहां से ही संस्कृत जो है वो यहां पे इंडिया आई होगी लेकिन वो ये भूल गए कि बीच में जो एरिया है दैट वाज़ द ये जो साइरस जिस लीनियस से आते हैं पारसीज द पार्श्वगणा व्हिच इज़ मेंशंड एस पारश्व गणा इन पाणिनी। तो ये जो पार्श्वग है ये अश्व को अस्व बोलते हैं। तो मैं एक सिंपल एग्जांपल ले रही हूं। अश्व को अश्व बोलते हैं। लेकिन आप अनातुलिया के राजा का नाम बिरदशवा है। हम बिरिदश्व वो अश्व है। वो अश्व है। बीच में अश्व है। हम यहां अश्व बोल रहे हैं तो ये बीच में अश्व कहां से आया?
(31:49) तो अगर वो लोग वहां से आए हैं तो इनको भी रौंदते हुए ही आएंगे इंडिया। हम तो फिर यह बीच में अस्प कहां से आ गया? हम व्हाई दे आर प्रोनाउंसिंग इन अ डिफरेंट फॉर्म एंड उसका भी आर्किक डिफरेंट फॉर्म जो है वो आपको अवस्था में भी मिल जाता है और सिमिलर फॉर्म्स जो है आपको ऋग्वेद में भी मिल जाते हैं। ओके? एंड अथर्ववेद में भी मिल जाते हैं। सो अथर्वन तो हम मानते ही हैं उनको जो वो हमारे ही ऑफशूट हैं। तो सपोजिंगली वहां से ही अगर आना होता हेटाइट्स वाले जो एरिया है लिवांट एरिया है वहां से ही जो स्टेप रीजन जो हम बोलते हैं दैट वास द फर्टाइल
(32:31) लैंड जहां से आर्यंस आए हैं। तो फिर बीच में अस्प वाले को भी अश्व बनाते हुए ही आगे बढ़ते हैं। ना हम तो वो अस्प क्यों रह गए? तो ऐसा है मैं मेरा टू सेंट्स ऑन आर्यन ये है कि लास्ट 150 200 इयर्स में उनको कॉलोनियल रीजंस के कारण लेफ्टिस्ट रीजन के कारण कम्युनिस्ट रीजन के कारण मार्क्सिस्ट रीजन के कारण जो कुछ कारण तो अलग-अलग है। ये सब लोग उसमें एक जगह आ जाते हैं आर्यन इन्वज़न के लिए। बाकी उनके ये विरोध भी होगा एक दूसरे के साथ। मींस मार्क्सिस्ट और इंपीरियलिस्ट में बी डिफरेंट। बट यहां वो एक जगह आ जाते हैं क्योंकि हर एक का अपना मोटिवेशन अलग है बट दे मैचेस ऑन दैट
(33:10) आर्यन नॉनसेंस। अभी जो रूपा जी ने कहा मित्तानी का तो मित्तानी का जो समय निकाला उन्होंने लाइक 1600 1700 1800 बीसी वाला उसके कारण वो अटक गए हैं कि उसके पीछे वो लेके नहीं जा सकते। हम तो वो तो एकदम जुगाड़ जिसको हम कहते हैं ना जैसा पॉलिटिकल में जुगाड़ बनाते हैं ऐसा ही जुगाड़ है नंबर वन। तो ऐसा क्यों कहते हैं वो ऐसा एक्चुअली वो थ्यरी है ही नहीं। मैं तो बोलता हूं कि आज कोई भी आज या कोई लास्ट समय तो जो चले गए उनका भूल जाओ। लेकिन आज कोई भी दुनिया के कहां भी एकेडमिया में या पब्लिक इंटेलेक्चुअल स्फीयर में आउटसाइड एकेडमिया में कोई
(33:48) आर्यन इन्वजन आर्यन माइग्रेशन आर्यन टूरिज्म आर्यन इन्व इन्वजन बोला तो एआईबी बोलने लगता है नहीं नहीं वो आजकल माइग्रेशन हुआ है व्हाट नॉनसेंस इट डजंट मैटर व्हाट स्टूपिड थिंग यू से वेदर माइग्रेशन इन्वेजन टूरिज्म कुछ भी बोलो व्हाटएवर इट इज इट जस्ट नॉट अ थिअरी इफ यू लुक एट इट फ्रॉम अ साइंस पॉइंट ऑफ व्यू फ्रॉम अ लॉजिक पॉइंट ऑफ व्यू फ्रॉम अ इंपेरिकल हार्ड डेटा पॉइंट ऑफ ऑफ यू तो आई विल से वी हैव टू शेम दिस इडियट्स वेदर इन द पब्लिक इंटेलेक्चुअल स्पीयर और इन एकेडमिया बिकॉज़ कुछ भी नहीं है बट होता क्या है आप भी प्रश्न पूछोगे पडकास्ट में हम भी उसका
(34:23) उत्तर देंगे और जो कॉमन मैन जो सुन रहा है ना उनको क्या होता है इतना डिस्कशन के बाद उनके कुछ समझ में नहीं आया उनको ये समझ में आया कि कुछ तो आर्यन इन्वजन है हम तो मैं बोलता हूं कि बेसिकली वी नीड टू शेम दिस पीपल ओके उनको पूछो कि आप कौन सा चेयर पे बैठे हो यू डोंट डिर्व दिस दिस चेयर आपको ना विज्ञान पता है ना लॉजिक पता है ना इंपेरिसिज्म पता है ना आपको साइंस समझ में आता है दिस इज द फैक्ट जो इन्होंने बोला मित्तानी उसके कारण वो 1700 1800 2000 बीसी लिमिट हो गया और जो मैक्स मुलर ने बोला था 1200 बीसी में शायद ऋग्वेद होगा बाद में ही रिकेंटेड लेकिन रिंग कैंटिंग
(35:01) करने के बाद उन्होंने सुना नहीं क्योंकि उन्होंने सुना नहीं है तो इसलिए 2000 बीसी से लेके 1200 बीसी या आर्यन इन्वजन का उन्होंने समय समय है करके कहा लेकिन ये थ्यरी नहीं है। ये तो सर्कुलर लॉजिक जैसा है। सर्कुलर लॉजिक से भी वर्स है। क्योंकि मैं बताता हूं थ्योरी में क्या होता है? एक प्रॉब्लम है आपके पास कि वो प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए आप थ्यरी प्रपोज कर रहे हो। तो क्या प्रॉब्लम था तो प्रॉब्लम था। प्रॉब्लम हमारे लिए नहीं है। जैसे डिस्कवर इज़ नॉट अ प्रॉब्लम फॉर अस। हमें इंडियन को हमें खुद को डिस्कवर नहीं करना है ना। ठीक है? यूरोपियन को पता नहीं है वो उनका
(35:34) प्रॉब्लम है। सिमिलरली [नाक से की जाने वाली आवाज़] जब वो सर विलियम जों्स भारत में आ गए। 1785 के आसपास और वो कोलकाता में वह जज बने थे। तो उन्होंने जज करना चाहिए करके भारतीय शास्त्रों का अभ्यास किया तो संस्कृत के साथ उनका संबंध आया। फिर संस्कृत पाणिनि के साथ संबंध आया तो फिर उनको भाषा के सिमिलरिटी समझने लगे। यूरोपियन भाषा की सिमिलरिटीज भी पाणिनि के ग्रामर के कारण। तो उनको एक ऐसा प्रश्न था। सो दिस इज द प्रॉब्लम कि व्हाई दी लैंग्वेज आर रिलेटेड? हम यूरोप की लैंग्वेज भारतीय लैंग्वेज के साथ संस्कृत के साथ भी क्यों रिलेटेड है? हम
(36:06) यह प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए उन्होंने यह नहीं कहा था। उन्होंने सिर्फ यह कहा था कि यह दोनों लैंग्वेज में कोई रिलेशनशिप है। हम विलियम जों्स ने आर्यन इन्वजन भी नहीं कहा था। एक्चुअली 1785 से लेके समझ लो 1850 तक इज कंसीडर रोमांटिक पीरियड। रोमांटिक हां पहले रोमांस रहता है ना। इंडिया इज़ अ गुड थिंग। लाइक वाल्टर जैसा आदमी कह रहा है कि एवरीथिंग वर्थ वाइल हैज़ हैपेंड ऑन द बैंक ऑफ़ गेंजेस। राइट, राइट। मार्क 12 1810 तक थोड़ा अमेरिका का अलग माहौल है कंपेयर टू यूरोप बिकॉज़ अमेरिकन का सिचुएशन हमारे जैसा ही है ना यूरोपियंस आर एक्सप्लइटिंग देम
(36:40) तो मार्क का भी ऐसा है कि अगेन ऑल द ग्रेट थिंग्स आर हैपनिंग ऑन द बैंक ऑफ़ गेंजेस और समथिंग लाइक दिस जब 1857 में इंग्लिश लोगों का ब्रिटिश लोगों का हमारे यहां पे कंट्रोल हो गया तो उनके समझ में यह बात आ गई कि हमने उनको उनको मींस भारतीयों को शरीर से तो कंट्रोल कर लिया है राजाओं को मांडली बनाया है। टेम करके रखा है। बट क्या यह इंडियन लोग मन में हमें सुपीरियर समझते हैं? ब्रिटिश लोगों को समझते हैं। तो उनको समझ में आएगा कि मन में समझ नहीं रहे। अभी उनकी पावर नहीं करके मान रहे हैं। तो उनको टेम कैसा किया जाए? तो टेम करने के लिए उनको लगा सिर्फ शरीर को
(37:16) कंट्रोल करके फायदा नहीं। उनके मन और बुद्धि को भी हमें मैनिपुलेट करना ब्रेन वाश करना जरूरी है। उसमें बहुत सारे टूल्स उन्होंने उपयोग किया। उसमें एक टूल था ये आर्यन इन्वर्जन। नॉनसेंस बट ये नॉनसेंस ही है। उसमें जो हम थ्यरी विज्ञान की थ्योरी कहेंगे तो मॉडर्न साइंस में भी जो फाइव स्टेप फार्मूला कहते हैं कि ट्रायंगुलेशन ऑफ एक्सप्लेनेशन प्रेडिक्शन टेस्टिंग इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ थ्योरी इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ बैकग्राउंड नॉलेज उसमें से कोई भी चीज उनके पास नहीं है। वाओ सो आर्यन इन्वज़ इज़ नॉनसेंस। डोंट गो विद इट। [हंसी] ओके। थोड़ा सा नेविगेशन से हट के आते हैं।
(37:55) मैम कुरुक्षेत्र, अवंती एंड लंका थोड़ा सा इसके बारे में बात करते हैं। आई नो द बुक इज येट टू बी रिलीज़्ड? बट इज देयर समथिंग दैट यू वांट टू टॉक अबाउट इट? व्हाट इज दिस बुक ऑल अबाउट? मैं तो सबसे प्रश्न पूछना चाहूंगी कि व्हाई कुरुक्षेत्र इस मेंशंड ऑन द प्राइमरी रीडिंग? हां। तो अगर आपके जो दर्शक हैं वो लिखेंगे तो फिर मैं उसका उत्तर दूंगी। बिलकुल बिलकुल। कुरुक्षेत्र का एक बहुतेंस है तो वो बुक में हम उसको एक्सप्लेन करेंगे। ओके व्हाई कुरुक्षेत्र? व्हाई नॉट समथिंग एल्सो नॉट समथिंग एल्स लेकिन एक सूर्य सिद्धांत टेक्स्ट है जिसमें कुरुक्षेत्र का नाम नहीं है। उसमें
(38:33) रोहतक का नाम है। हम रोहितांक करके नाम आया है। एंड अवंती एंड उज्जैन ये दो नाम जो है स्वाइप होते रहते हैं। बहुत सारे टेक्स्ट में। लेटर टेक्स्ट में उसी प्राइम मेरीडियन में और भी दो चार जो है सिटीज जोड़ दिए गए। बट लास्ट स्टेशन वाज़ ऑलवेज लंका। एंड लंका वाज़ ऑन इक्वेटर। हम एंड लंका को सूर्य सिद्धांत में राक्षसालय बोला गया। अच्छा। दैट मींस समवन वाज़ लिविंग। हम द पीपल नेम राक्षसालय। राक्षस आलय आलय हो। देवालय देवालय ऐसे राक्षस आल। राइट। सो मेजर पोर्शन मस्ट हैव बीन इन द असुर भाग एंड देयर वास अ लैंड ऑन द इक्वेटर जीरो ज़ीरो उस पर जहां पे वो लंका थी। नाउ इट इज़ नो
(39:22) मोर देयर। लेकिन अभी आपने मरकेटर का भी देखा ना कि मैप्स किस तरह से एनलार्ज हो गए थे। एनलार्ज हो गए थे। एंड अभी नया किया। अभी पैक भी किया है। कुछ कंट्रीज मान रही हैं और कुछ कंट्रीज नहीं मान रही। बोलती है हम पुराने वाले में ही जाएंगे। उसमें रशिया का साइज एकदम छोटा छोटा है [हंसी] एंड ऑल दो थिंग। सो हम कितने हजार साल पहले के कार्टोग्राफी के बारे में हम बात कर रहे हैं। सो आई एम गोइंग थ्रू दैट ऑल दोज़ मैप्स एंड आई एम ब्रिंगिंग आउट द फैक्ट्स दैट हाउ द होल थिंग अह छागोस लेट्स देवर ब्रिज व्हिच वाज़ वंस अह इन अ वैरी टेपर्ड फॉर्म इन
(40:02) टुडेज टाइम इट इज़ क्वाइट अह पैरलल टू द लोंगिट्यूड। सो दैट इज गोइंग टू ब्रिंग अबाउट वेयर द एक्चुअल लंका वास वेयर द एक्चुअल लंका वास या सो दैट वास अ क्वेश्चन आई वास गोइंग टू आस्क लेकिन ठीक है हम वो कहने का इंतजार करेंगे [हंसी] लेकिन हां लंका मैं उस क्वेश्चन पे आ रही थी कि तो फिर मुझे जहां तक समझ में आ रहा है जब हम एक्चुअल लंका कहां थी अगर उसकी बात करेंगे तो मतलब जिस श्रीलंका की अभी हम बात करते हैं दैट्स नॉट द लंका अच्छा वो क्यों नहीं है वो भी बड़ी मजेदार चीज है जो आपका कॉन्टिनेंटल शेलफ है इंडिया का और श्रीलंका का वो एक ही है।
(40:38) कॉन्टिनेंटल शेलफ जो है वो एक ही है। अ जब लास्टेशियल मैक्सिमम टाइम था इवन 16,000 बीसी तक भी आई थिंक 12,000 बीसी तक भी अ इवन फ्यू थाउजेंड इयर्स पहले तक भी वो लैंड जैसा जुड़ा ही हुआ था। ओनली 2 मीटर्स डीप 2 मीटर्स डीप कई जगह पे तो दैट्स इट। उतना ही। हां मतलब आप पैदल भी चलना चाहते हैं तो जा सकते हैं और कृष्णा के द्वारका का समय का जो एलिवेशन हुआ है समुद्रल का वो भी 6.
(41:12) 5 मीटर तक हुआ है इसका अर्थ तब भी वो नेविगेबल चल के जा सकते हो कनेक्टेड ही होगा कनेक्टेड ही होगा तो सेम कॉन्टिनेंटल शेलफ में ये दोनों चीजें हैं और जुड़ी हुई हैं। ओके। और आज भी आप अह उन जगहों में देख लेंगे तो 5 मीटर से ज्यादा कोई भी नीचे जो एडमम्स ब्रिज अभी जो हम बोलते हैं जो नल सेतु नहीं है। एथनोग्राफिक मेमोरी में भी नहीं है कि वो नलसेतु था। रामसेतु ही बोलते हैं उसको। राइट लेकिन रामायण में वो नल सेतु। नल सेतु है। कितना बीच में समय गया है आप इमेजिन कीजिए। बिल्कुल। और रामसेतु शब्द महाभारत में भी नहीं आया। करेक्ट। नल सेतु ही है।
(41:49) नल सेतु ही नाम है। नल नी जिन्होंने बनाया था वह तो उनके नाम से है। [गला साफ़ करने की आवाज़] नल सेतु तो यह रामसेतु में कब कन्वर्ट हुआ? नहीं वह राम को महत्व ऐसा उसमें भी कोई रोंग है ऐसा मैं नहीं कहता। नहीं उसमें भी श्रीलंका में भी उन लोगों ने ऐसा-सा स्पॉट्स बनाए हैं जो कि ऐसा दिखाया जाता है कि यहां पे सीता कुंड है। यहां सीता हां आई वास कमिंग टू दैट। फिर उसका क्या रेलेवेंट? है वो। अह व्हाट हैपेंस इज़ कि कुछ जो चीज़ें हैं वह जैसे डेमोग्राफ़ी शिफ़्ट होती है ना यूची लोगों ने अह सीथियंस को नॉर्थ नॉर्थ ऑफ़ अपने उज़्बेकिस्तान वाला जो एरिया
(42:22) वहां से हटा करके इस तरफ लिया था। नॉर्थ वेस्ट हम बाल्क एरिया से होते हुए भी और नीचे आए फिर इंडिया में भी एंटर किए। हम तो इतना डेमोग्राफी चेंज होता है तो कुछ भी चीज स्टैटिक नहीं है। तो जैसे यहां से इसीलिए जो बिल्कुल सदर्न पोर्शन था वहां पे जो अगस्तश्वर है जहां पे एक्चुअल में राम ने शायद शिवलिंग बना के पूजा करी होगी। वो सारी एथनोग्राफिक मेमोरीज धीरे-धीरे शिफ्ट हो के इस सेतु पे आ गई जो कि दिखाई दे रहा था। इट हार्डली 6.
(42:57) 5मी का पैच है जिसके बीच में समंदर है। अदरवाइज बाकी अभी भी अभी भी बाकी इट वास ऑलवेज लाइक आप पैदल वै शैलो वै शैलो वैलो अभी भी वो सेटेलाइट पिक्चर में इट्स प्रीटी मच विजिबल अच्छा और उसका बड़ा इंटरेस्टिंग उसके फैक्ट्स हैं कि नीचे वाला जो लेयर है दैट इज न्यू न्यूर और ऊपर वाले लेयर थोड़े से ओल्डर हैं। यानी कि कभी किसी ने नीचे के कुछ आजू-बाजू के जो बोल्डर्स हैं उसको उठा के ऊपर इसके रखे होंगे। हम जस्ट टू हैव अ वॉकवे काइंड ऑफ़ अ थिंग। अच्छा ये भी मेमोरीज हैं कि कौन से कौन से गांव जो हैं वो उस सेतु के आसपास जो थे वो डूब गए हैं।
(43:38) ओ ये भी डॉक्यूमेंटग्राफिक मेमोरीज भी हैं। इवन ताम्रपणी जो ताम्रपणी रिवर है एकदम साउथ में जो ईस्ट डायरेक्शन में बहती है और उसका पानी में जाने के बाद द लैंड बिटवीन लैंड नहीं सी बिटवीन श्रीलंका और इंडिया तो नीचे ये पेपर है ये पीियर पेपर्स है कि जहां नीचे आपको वैलीज मिलती है वो ताम्रपणी रिवर की और उसका पुराना वर्णन जो आपका संगम लिटरेचर में इनडायरेक्टली आता है ताम्रपर्णी का लेकिन आप कहां अटक के बैठे मुझे देखा कि उन्होंने उन्होंने क्या बोला कि अभी भी वो तो ऊपर से देखा तो ब्रिज तो दिख रहा है। सो वो क्या है ब्रिज के भी बात करते हैं
(44:17) और श्रीलंका में अभी जब रामायण की टूर जाती है मेरे मित्र हैं बाला शंकुरात्री वो यहां से लेके जाते हैं तो वो हमें प्रॉब्लम नहीं है। प्रॉब्लम नहीं है। मींस श्रद्धा में तो हम कहां भी कर सकते हैं। देखो कृष्ण के द्वारका तो पानी में चल चली गई। कृष्ण के द्वारका का जो जगह है वो सोमनाथ से अंदर 15 कि.मी.
(44:38) जाना पड़ेगा। लेकिन आज हम जाते हैं और भगवान मंदिर में जाते हैं तो यह उधर ऐसा होता है कि यहां उन्होंने पूछते हैं। हां बिकॉज़ ये हमारा ऐसा है कि इट्स कॉल्ड स्पिरिचुअलाइजेशन ऑफ अ प्लेस एक बार समझ लो हो गया जैसा कि बहुत सारे रेफरेंस होंगे। जैसे कि आप श्रीलंका में चले जाइए आज टूर पे तो आपको जगह मिलते हैं कैंडी के आसपास कि यहां सीता को रावण ने वनवास में बिठाया था। दिस एंड दैट। तो यह बात है कि एक बार आपने श्रद्धा में मान लिया फॉर व्हाटएवर रीजन जैसा कि अभी लंका द्वारका पानी में गई करके आप अभी कृष्ण की लीला कृष्ण और रुक्मणी यहां बैठे थे करके
(45:15) आज आप दिखाएंगे उधर नहीं बैठते थे वो वो द्वारका तो अंदर है लेकिन आप श्रद्धा में मान लिया सिमिलरली श्रद्धा में आपने एक बार मान लिया कि श्रीलंका लंका है तो आपको सब दिखने लगेगा उसमें कोई ऑफ नेम्स हो जाता है समथिंग लाइक जैसे भृगुक कच्छ है तो भरूच जिसको हम बोलते हैं गुजरात का जो भरूच है [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो हमें नाम से ही पता चलता है कि वो भृगु की जगह भृगु की जगह रही होगी। लेकिन अमरकंटक के ये अपने इंदौर के पास में जनपा करके कुटी है और बोलते हैं जमदागिनी वहां पे रहते थे। परशुराम वहां पैदा हुए। इस तरह की भी मेमोरी है। फिर बोलते हैं कि
(45:51) परशुराम ने सारी जो लैंड है वो सब दे दिया। फिर वो कोंकण और केरला जो है रिक्लेम किया। वो सारी भी स्टोरी आती हैं। तो बहुत सारे रीडुप्लीकेशन ऑफ़ नेम्स भी ओवरलैपिंग हो जाता है। लेकिन आपको अभी भी आपका जो फिर रामसेतु का क्या करें या इसलिए मैं ये कह रहा हूं कि ये पहले नेचुरल स्ट्रक्चर है कनेक्टेड वाला। नाउ वो उसके लिए जैसा इन्होंने कहा कि ऊपर स्टोन रख के जाने के लिए किया भी होगा। अभी रिसेंट टाइम्स में भी डजंट मैटर। बट जब हमें वाल्मीकि रामायण के बिकॉज़ वाल्मीकि रामायण इज़ द प्राइमरी टेक्स्ट। बहुत बार अभी आर्कियोलॉजी के समझ में क्या
(46:26) नहीं आता मैं बताता हूं कि वो लिटररी एविडेंस है वो बोलेंगे मैं उनको बताता हूं कि आपको आर्कियोलॉजी ढूंढना है ना समझ लो हाइपोथेटिकल आप द्वारका के गुजरात में गए और आपको फ्लूट मिल गई है एक और फ्लूट का आपने डेटिंग किया वो कुछ भी आएगा 2000 बीसी भी आएगा 5000 बीसी भी आएगा कितना भी आ सकता है ना फ्लूट का नाउ आप उसका क्या वर्णन करोगे बिकॉज़ आज का ही होगा हां आजकल की मूर्खता क्या होती है समझ लो सनाली का आपको चैरियट्स मिल स्टार्ट टॉकिंग उनको फुलिश नहीं हम कहते बट जो कहते हैं वो फुलिशनेस है कि महाभारत हुआ 2000 बीसी व्हाट नॉनसेंस
(47:11) इज दैट उसमें कौन सा विज्ञान है कौन सा लॉजिक है बट कोई पूछता नहीं सब एक दूसरे के हां में हां मिला के चलते हैं तो सिमिलरली कि एक बार वो फ्लूट मिला ना तो लोग सपोज कहेंगे कि कृष्ण की फ्लूट है मैं उनको पूछता हूं कि वो कृष्ण की फ्लूट थी ये आपको कहां से पता चला एक तो ओरल ट्रेडिशन से पता चला या टेक्स्ट से पता चला तो भाई टेक्स्ट के बिना या ओरल ट्रेडिशन के बिना आपका आपका रिसर्च का प्रारंभ भी नहीं होता। हम लेकिन दिस इज़ दिस पॉइंट इज कंप्लीटली लॉस्ट। सिमिलरली जब हमने लंका को रावण की लंका मान ली तो नाउ वी हम सब वो ढूंढने लगेंगे कि भाई नल सेतु कहां है? सीता की
(47:49) स्नान करने की जगह कहां थी? अशोक वन कहां था? ये सब हम ढूंढने लगेंगे। तो मैं आपको बेनिफिट ऑफ़ डाउट देने के लिए तैयार हूं। आपको यानी कि जब कैंडी के आसपास आप जाओगे तो जो लंका का रामायण में वर्णन आता है त्रिकूट लंका। त्रिकूट लंका वो मिल जाता है आपको। तीन पहाड़ मिलेंगे। मिलेंगे। बट दैट इज़ समथिंग वेरी इंटरेस्टिंग कि कहते हैं कि वह पहाड़ भी मिलेगा जो हनुमान जी लेके आए थे संजीवनी वाला। नहीं नहीं पहाड़ मिल गया और आपने तो मान लिया है ना ऑलरेडी कि वो लंका श्रीलंका रावण की लंका है तो पहाड़ मिल गया वो हनुमान का ही पहाड़ होगा और किसका होगा।
(48:20) राइट राइट। सी ये एकदम बेसिक है वो हमें समझना जरूरी है। हम राइट मैम। अच्छा डायरेक्शन वाइज भी उसमें महेंद्रगिरी से उतर के फिर इधर क्यों जाएंगे? महेंद्रगिरी से जो लैंड है जाते हैं। हां महेंद्रगिरी जो है लैंड फिनिश होने के बाद जंप मारेंगे ना तो महेंद्रगिरी से वो जंप मार रहे हैं तो महेंद्रगिरी से नहीं मारते थे ना वो रामेश्वर महेंद्रगिरी कहां है पता है आपको केरल और तमिलनाडु के बॉर्डर में माउंटेन है उधर से जा रहे हैं एंड सदर्न मो सदर्न मोस्ट टिप है वो सदर्न मोस्ट टिप जैसा है जहां पे वो बोल रहे हैं कि अब साउथ की दिशा में जाने के लिए अगस्त को देखो और
(48:56) फिर वहां से आगे बढ़ो दूसरी बात समझ लो पहले दक्षिण दिशा में जा रहे हैं तो पता नहीं एक्सक्ट एक्सक्टली कहां है करके वो सब दिशा में जाएंगे। लेकिन जब हनुमान जी ने पहचान लिया कि एक्सैक्टली रावण की लंका कहां है और वो मैसेज लेके आ रहे हैं तो ठीक है अभी वो फिर कशकिंदा में आ गए यानी कि हम्पी बेलारी में अभी तो उनको एग्जैक्टली पता है लंका कहां है और कहां जाना है तो उसके बाद जब वानरा आर्मी राम लक्ष्मण सुग्रीव सब जब निकलते हैं वो मैंने वो पाथ लिया है रोड से लाइक रामेश्वरम से लेके महाबलीपुरम से आके चेन्नई से लेपाक्षी से लेके बेंगलुरु
(49:33) से लेके हम्पी बेलारी तक कार से आए हैं। वाओ 2023 अर्ली जनवरी में तो वो फ्लैट है। मोस्टली द लैंड इज़ पूरा फ्लैट है। बीच-बीच में छोटे हिल्स आते हैं। नाउ ये अभी वर्णन उसके अगेंस्ट कंपेयर कीजिए। अभी हनुमान जी को तो पता है ना कि श्रीलंका जाना है। तो वहां से लेके जाते हैं। लेकिन आप वाल्मीकि रामायण के वर्णन देखिए। वो कैसे जाते हैं? सय्य सह्याद्री माउंटेन को फॉलो कर रहे हैं। यानी कि स्ट्रेट नीचे जाओ जा रहे हैं वो। हां। उसके बाद मलय पर्वत फॉलो कर रहे हैं। नीलगिरी को फॉलो कर रहे हैं। अगस्त मलाई फॉलो कर रहे हैं। अगस्तमलाई फॉलो कर रहे हैं। वो केरल की
(50:07) तरफ जा रहे हैं। फिर और एक बताता हूं कि जो रावण को जैसा उन्होंने राक्षस कहा है वैसा दूसरा वर्णन है नैरुरतस। नैरुत्तस हां नैरुरतस यानी कि क्या दो साउथ वेस्टर्नस ओ आग्नेय नैत्य वायव्य ईशान्य। सो नैत साउथ वेस्टर्न हम वेस्टर्न साउथर्न ईस्टर्न ऐसा जैसा कहते हैं ना तो हम्पी से भी या अयोध्या से भी या कहां के भी जगह ले लो या नासिक से भी पंचवटी से भी साउथ वेस्ट डायरेक्शन में जाना है श्रीलंका साउथवेस्ट में कितना भी जंप करो उल्टापुल्टा घूमो साउथवेस्ट में नहीं आती वो राइट तो दैट इज आल्सो इज देयर इंटरेस्टिंग मैम व्हाई इज उज्जैन सोेंट
(50:53) उज्जैन काेंस ट्रॉपिक ऑफ कैंसर की वजह से आता है। वहां से सन ट्रोपे लेता है। यानी कि दिशा चेंज करता है वापस इक्वेटर की तरफ तक उगने के लिए। मतलब एव्री टाइम द सन फ्रॉम इक्विनॉक्स डे वो इक्वेटर पे उगते-उगते धीरे धीरे धीरे-धीरे आगे के लैटीट्यूड्स में उगना और डूबना शुरू होते हैं। एंड इट रीचेस टू द लास्ट पॉइंट व्हिच इज़ उज्जैन। ओके? नर्दन मोस्ट नॉर्दन मोस्ट वहां उसके आगे सन ट्रोपे नहीं करता है। वहां से बैक हो जाते हैं। एंड फिर वो हम देखते हैं कि दूसरे मंथ में यानी कि कैंसर मंथ तक वहां पर हुए उसके बाद के मंथ में नीचे आते-आते इक्वेटर पे
(51:38) आएंगे ऑटोमनिक्स पे। हां। जैसे कि सामान्य आदमी के पॉइंट ऑफ़ व्यू से जो अभी रूपा जी ने कहा, वह कैसा होगा? समझ लो वह एग्जैक्टली ईस्ट डायरेक्शन में फेस करके वह आदमी खड़ा रहा है। और कुछ मूव ही नहीं होता। साल भर वैसा ही खड़ा रहा ऐसा हाइपोथेटिकल थॉट एक्सपेरिमेंट में कर सकते हैं ना। ऐसा खड़ा तो उसको क्या दिखेगा? इक्विनोक्स डे पे एग्जैक्टली ईस्ट में सूर्य आ गया। सूर्य आ गया। और अभी समझ लो हमारा वसंत ऋतु है। लाइक कि मार्च की बात चल रही है आज के जमाने में। तो उसके बाद क्या होगा? एवरीडे ना वह थोड़ा नॉर्थ में थोड़ा नॉर्थ में वह सन आ रहा है।
(52:11) विद इन द 23° 23° में ही चल रही है बात। 23° इधर और 23° इधर ऐसा चल रहा है। तो सूर्य तो 21 जून को एक्सट्रीम नॉर्थ में जो सूर्य आएगा ना वो 20 वो शून्य एग्जैक्ट ईस्ट डायरेक्शन से 23° इधर आने वाला है। हम क्योंकि पृथ्वी का अक्ष उतना और बाद में वो जो कह रही है कि वो फिर अभी वो साउथ में जाने लगा या बैक एंड फोर्थ वाइपर जैसा वाइपर जैसा। सूर्य का जो एवरीडे का आना है तो वो जो निकला तो एक्सट्रीम नॉर्दन पॉइंट इज़ उज्जैन एंड अवंती। ओके तो वो हमेशा देन दैट इज द रीज़न कि वो एस्ट्रोनॉमिकल तरीके से बहुत ही रेलेवेंट रहा है। हर जगह उज्जैन का नाम आता है और इट हैज़ इट्स दैट
(52:52) पॉइंट महाकाल इसीलिए महाकाल। महाकाल का ही महाकाल के वहां स्टैगनेंट है। वो नहीं बदलता। बदलता है बदलता है वो 24.5 तक भी गया एक बार 25 तक भी उससे उससे भी ऊपर गया वो काशी के ऊपर से भी निकला तो काशी विश्वनाथ इज वेरी ओल्ड उसके बाद फिर वो उज्जैन यानी कि ये जो आपका जो टोटल 23.5 डिग्रीज का जो हम बता रहे हैं अभी ट्रॉप पे ये 24 तक भी गया 25 तक भी गया एंड 22.
(53:28) 5 तक भी आया जो जहां पे मानधाता आइलैंड है ओकारेश्वर हां लाइक महेश्वर मानधाता आपको ज्योग्राफिकली पता ओकेश्वर उज्जैन काशी ये तो ये सब ट्रॉपिक लाइंस पे थे ट्रॉपिक लाइंस पे थे तो ये हम 12 ज्योतिर्लिंगों की बात कर रहे हैं ज्यादातर जो ज्योतिर्लिंग है वो यही ट्रोपे के बीच में आ जाते हैं तो इमेजिन कीजिए कि ये जो पृथ्वी का जो अवश्य है ना तो अभी तो जहां उसका इंक्लिनेशन है वो उज्जैन पे है महाकाल पे लेकिन ये जो रूपा जी कह रही है कि 24.
(53:59) 5 तक भी जा सकता है तो और नीचे गया नीचे गया मींस नॉर्थ तक गया और और इंक्लाइन हुआ तो वह गया वाराणसी तक पहुंचेगा और ऐसा हुआ तो वो महेश्वर ओंकारेश्वर जो नर्मदा का जो प्रवाह है उधर तक आएगा तो दैट रेंज है उधर रेंज है सिर्फ आप ये भी मत कहिए कि ज्योतिर्लिंग क्योंकि फिर रामेश्वरम का क्या करें और केदारनाथ का क्या करेंगे दैट इज़ अगेन वो प्राइम मेरीडियन के लिए हो जाता है लेकिन एट वन पॉइंट ऑफ़ ऑफ़ टाइम ये जो ओमकारेश्वर है और जो महेश्वर में है महेश्वर एंड ओमकारेश्वर और ऑलमोस्ट ऑन सेम लैटीट्यूड लेकिन उज्जैन से ओम ओमकारेश्वर जितने
(54:43) किलोमीटर्स दूर है उसमें वो 23.5 से 22.5 पे आ जाते हैं। हम एंड इट टेक्स अराउंड लाइक वन 1 डिग्री 22.5 में आएगा। हां शॉर्टेस्ट ये जो 24 से 22 एंड 22 से 24 पूरा जो साइकिल है पूरा साइकिल है 4ाउ 41000 ईयर का साइकिल है ये 41000 इयर्स का साइकिल है आप सोचते होंगे कि इतना माइन्यूट क्या मेजर कर रहे होंगे बट वो वन सेकंड में ना एव्री ईयर 15 मीटर का डिफरेंस आ जाता है। करेक्ट मतलब ज़ीरो शैडो डे जो है वो आपको फिर नेक्स्ट नेक्स्ट ईयर जो है वो 15 मीटर दूर में मिलेगा। हां करेक्ट। हां इनफैक्ट मैं अभी बता दूं कि अभी हम
(55:28) उज्जैन कह रहे हैं ना बट अभी जो आपको जीरो शैडो डे 21 जून का देखना है तो ये जो पद्मश्री हरिभाऊ वाककर आपने नाम सुना होगा जिन्होंने सरस्वती नदी का चैनल का स्टडी किया तो उन्होंने ये जगह ढूंढ के निकाली वो जगह का नाम है मींस उज्जैन से निकल के भी हम मैं गया हूं अभी एक कुछ समय में गया था एक साल में लास्ट ईयर में वो वाककर फैमिली के साथ ही और विनीता जी देश पांडे हमारे साथ थे। तो एक समझ लो हमें 1ढ़ घंटा 2 घंटा लगा वही रोड के कारण भी होगा। तो एक्चुअली मध्य प्रदेश गवर्नमेंट को जगह पता है। उसका जगह का नाम है डोंगला। डोंगला हां तो राइट नाउ
(56:05) मुझसे कनेक्ट हुई थी। विनीता जी ना तो राइट नाउ इट हैज़ मूव्ड फ्रॉम उज्जैन टू डोंगला में। जो ये कह रही उज्जैन में भी नहीं है। उज्जैन में भी नहीं है। उज्जैन में भी नहीं है। अब वो जो सन ट्रॉपी लेता है वो डोंगला से लेता है। करेक्ट। एंड्री और 15 देन इट्स सिग्निफिकेंट 15 मीटर क्वाइट क्वाइट सिग्निफिकेंट कि आप पेग लगा सकते हैं कि इस साल यहां पे हुआ फिर नेक्स्ट ईयर एक पेग और लगाया कि अरे इतना आगे आ गया हमारा धरती डूब रहा है क्या फिर इतना और आगे आ गया अरे सन जो है वो इतना इतना ऊपर से उग रहा है डूब रहा है तो वो साइके पे अलग डिफरेंट तरीके से काम
(56:47) करता है। हां नहीं मैं इसमें ऐड कर दूं कि आप इसमें दिखाने के लिए लोगों को दिखाने के लिए आप Google में चेक करोगे ना तो मेक्सिको में जो इक्विवेलेंट आता है ना तो मेक्सिको में हां नहीं नहीं इक्वेटर तो इक्व हुआ लेकिन मेक्सिको में अपना उज्जैन इक्विवेलेंट जो आता है उधर उन्होंने क्या किया है मैं देखा है वो मेरे पास फोटो नहीं है अभी बिकॉज़ वो पुराने जमाने में है फोटोग्राफ हां लेकिन मिलेगा आपको कि इयर्स लगाया है कि वो बोर्ड लगाया है कि हां 2004 और सर आप ड्राइव करोगे तो दिखते जाएगा यू कैन लुक फॉर इट तो इतना सबको लगता है ना कि 41000 में क्या
(57:24) ऑब्जरवेशन किया राइट बट पृथ्वी पे बहुत फर्क पड़ रहा है पृथ्वी पे फर्क पड़ रहा है राइट मैम मैम आपके बुक्स में इनका वर्णन आया आर्या दासु अस्तुरा राक्षसा ये इनका ना मैं कुछ डिफरेंस समझना चाहूंगी हु आर दीज़ पीपल क्या ये सिर्फ डिफरेंट सरनेम्स की बात कर रहे हैं प्रजातियों की बात कर रहे हैं किन लोगों की बात कर रहे हैं ट्राइब्स ही हैं ट्राइब्स की बात कर रहे हैं ये है यू है असुरस हैं ध्रुय ध्रुय है हाय हाय किंगडम तुर्वसुस हैं कब के हैं ये कौन सी लीनियन नबूष के जो बच्चा था याति उनके जो पांच पुत्र थे उनमें से चार को देश निकाला
(58:04) उन्होंने दे दिया था बिकॉज़ वो अच्छे से प्रोनंसिएशन उनका प्रॉब्लमैटिक था वैदिक प्रोनंसिएशन अच्छा तो प्रोनंस भी ठीक नहीं है तो भी निकाला जा सकता निकाला जा सकता है [हंसी] और उसके लिए लेकिन एक अलग कथा आई कि ययात्री ने अपना यौवन मांगा बच्चों में से और उन्होंने वो यौवन नहीं दिया सिर्फ पुरु ने दिया तो बाकियों को बोला कि आप बाहर जाइए लेकिन उनकी भाषाओं में भी प्रॉब्लम्स थी। इस प्रकार के संकेत हमें ग्रंथों में मिलते हैं। तो ये जो लोग थे ये नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर एरियाज में चले गए। यानी कि जो हमारे जो सेवन सेजेस जो जितने भी रिवर्स फ्रंट्स
(58:46) में रहते थे वहां से ये थोड़े से दूर चले गए। यानी यदु तुर्वसु तुर्वसु बाद में अह आप अह कह लीजिए तुर्की वाले हो गए या तुर्कमेनिस्तान वाले हो गए वो नाम अभी भी रहा है रहा है जैसा जैसे कुरु का किरगिस्तान हम सो कुरूस आर लाइक फ्रॉम कुरुस तो कौरवास की बात कर रहे हो हां कौरवास की बात कर रहे हैं तो वो किरगिस्तान के ही लोग थे ऊपर से आए हुए बाद में हमने उसको उत्तर कुरु नाम दिया नीचे का जो है वो कुरुक्षेत्र नाम हो गया है ना अजमेर जो हैं वो इस तरफ में आए अजमेर बसाया फिर यहां से कुरुक्षेत्र मतलब इस तरह से अह जो इनकी जो डेमोग्राफी है
(59:26) कैसे अंदर एंटर हुई है ये बाद की बात बट ये लोग जो हैं डिफरेंट-डिफरेंट ट्राइब्स हो गए यदु अलग ट्राइब हो गई ध्रुहियो अलग हो गई तुर्वसुस अलग हो गए अनुस अलग हो गए अनु जो है वो मुझे लगता है कि मेसोपोटामिया वाले जो रीजन है उसको इनहबिटेट किया तो इसीलिए अनु जो ऊपर से आए उनको जो ऐसा ऐसा लगता है कि एलियंस जैसे कोई आए तो वो हिंदू जब क्रॉस किया होगा मेसोपोटामिया की तरफ गए होंगे तो दैट वे दे इनहबिटेड दोज़ रीज़ंस जैसे ध्रुयस है वो ये तर्क है मींस उसका एकदम साक्ष्य मिलता है ऐसा नहीं लेकिन ध्रुयस शायद ड्रड्स हो के आयरलैंड तक के
(1:00:06) गए हैं आयरलैंड के तो बहुत रीसेंट में जो आपके मैप्स मिलते हैं ना उसमें ट्राइब्स नेम बड़े इंटरेस्टिंग है नागनती यस यस और रिवर मेरवती रिवर नेम्स भी उसी के बेस पे कावेरी है ओल्ड ओल्ड आयरिश ओल्ड आइलैंड के मैप्स में मैप्स में आप देख नदी का नाम कावेरी है गंगा गंगा है गंगानी गंगानी राइट रादिनी राधिनी इज़ अ संस्कृत वर्ड फॉर अ रिवर अर्धिनी हां दीज़ काइंड ऑफ़ नेम्स आर देयर दे वर द ट्राय ओल्ड आईश मैप्स इर्दनी रागिनी एंड यू कावेरी कावेरी गंगा गंगानी गंगानी हां अ ऑफ रिलेटेड क्वेश्चंस आए लेकिन ये सारे नाम फीमेल हैं। तो व्हाई
(1:00:52) सो मतलब मैंने वैसे भी किसी नदी का नाम नहीं मस्कुलिन में नहीं सुना है। ऐसा क्या था हमारे ओल्ड उनका एक थ्योरी होगा। मेरा अलग थ्योरी है। [हंसी] मेरा मैं ऐसा ह्यूमरसली बोलने वाला था कि स्त्री चंचल रहती है। [हंसी] वो तो है सर। लेकिन हां ये बड़ा इंटरेस्टली आप देखेंगे जितने भी चाहे अरब कंट्री आप ले लीजिए चाहे मेसोपोटामिया भी ले लें मैक्सिमम जो प्रीस्टेस रही और सब फेमिनाइन थी जैसे अपोलो डेल्फी का भी आप देख लें चाहे ग्रीसी ही देख लें वो मैक्सिमम जो आप जितनी भी आप सिविलाइजेशन में देखेंगे इंक्लूडिंग इंडिया इंडिया में बहुत इजीली आप समझ सकते हैं कि
(1:01:35) एक ऋषिका का नाम था नद्याह नद्याह अब नद्या तो प्लूरल है। नदी नदी नद्याह तो नद्याह में कौन-कौन आ गई? सारी नदियां नदियां हो गई सारी। सारी नदियों को एक ही में पिरो दिया और वहीं पे उनका सूक्त जो है खत्म कर दिया। तो जब पेट्रियकल जब आया तो फिर ये सारे सूक्त जो है धीरे-धीरे फेड अवे होने लगे। तो एक ही सूक्त में उनको लिख के नद्याह करके लिख दिया कि ये सब जो हैं ये हमारी देवियां थी। तो वुमेन सेंट्रिक ही रहा है। इवन अभी भी अफ्रीकन ट्राइब्स में आप देख लेंगे कोई भी ट्राइबल रीजन में आप चले जाइए वो वुमेन सेंट्रिक ज्यादा होता है। बहुत कम होता है
(1:02:17) जो जिसमें पुरुष जो है वो लीड करते हैं। पुरुषों का काम होता है कि उनको सेफगार्ड करके रखें। शी इज़ अ क्वीन बी काइंड ऑफ़ अ थिंग। प्रोटेक्टेड सो शी कैन क्रिएट द सिविलाइजेशन। सिविलाइजेशन। अदरवाइज वो ही नहीं रहेगी तो फिर प्रोक्रिएशन कैसे होगा? हम इंटरेस्टिंग वै इंटरेस्टिंग। सो मतलब हम ये बोल रहे हैं कि फीमेल वाज़ दी सेंटर ऑफ दी सिविलाइजेशन राइट एंड और मेल्स का बेसिकली काम था टू प्रोवाइड सिक्योरिटी एंड टू प्रोवाइड दी थिंग्स टू क्रिएट दी सिविलाइजेशन सी देयर वास्टेनेंस हां मसल मसल पावर समझना इनफैक्ट मुझे ऐसा लगता है कि जैसा इन्होंने
(1:02:53) [नाक से की जाने वाली आवाज़] कहा कि जनरली वो मैट्रियर्कल या फीमेल सेंट्रिकी जैसा था तो कभी-कभी जैसे कि साइकिल ऑफ सिविलाइजेशन में कभी पेट्रियर्कल कब हुआ होगा पॉसिबबली इन द टाइमिंग ऑफ़ क्राइसिस। एग्जैक्टली मैं भी वही बोलना चाह रही थी कि जब क्राइसिस आई अ जैसे कि हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट में प्रॉब्लम्स आई। नदियों में प्रॉब्लम्स आ रही हैं। कोई नदी एकदम सूख जा रही है। सिविलाइजेशन को यहां से वहां जाना पड़ रहा है। एक मंत्र में आया है जिसमें कह रहे हैं कि सरस्वती दूर जा रही है। हम तो दूर ना जाओ आप। ऐसे करके एक सूक्त और एक मंत्र आया है। तो इन द सेंस कि जब
(1:03:29) क्लाइमेटिक कंडीशंस में इतनी सारी प्रॉब्लम्स आ रही हैं। अह प्रोक्रिएशन में प्रॉब्लम है। ऐसा उस समय फिर जो पेट्रियाकल है वो आगे आता है क्योंकि वॉर्स हो रहे हैं। अचानक से वॉर शुरू हो रहे हैं। रिसोर्सेज के लिए फाइट हो रही है। रिसोर्सेज के लिए फाइट हो रही है। पूरा नॉर्दर्न एरिया जो आपका है वो पूरा बर्फ से ढक चुका है। वहां के लोग भी इंडिया आना चाह रहे हैं। तो इंडिया वाज़ अ काइंड ऑफ़ अ रिफ्यूजी। करेक्ट। आज भी है। आज भी है। आज भी है। और बिकॉज़ हिमालय के कारण जो प्रोटेक्ट होके बैठा है। सो ऑलवेज बेटर रिफ्यूजिया व्हिच वास हैविंग ऑल काइंड ऑफ़ फूड। मतलब
(1:04:03) आपके पास धान है खाने को। आपके पास कंदमूल है खाने को। पेड़ हैं यहां पे। आपको ट्रॉपिकल फॉरेस्ट भी मिल जा रहे हैं। आपको डिफरेंट टाइप के बहुत सारे फल भी मिल जा रहे हैं। तो ये एक रिफ्यूजिया था। हम और यव ऐसे ही उग रहा है। धान ऐसे ही उग रहा है। इस वाइल्ड हार्वेस्टिंग करके भी हो रहा है। हां वाइल्ड हार्वेस्टिंग भी हो रहा है। इस खुद करने एफर्ट लगाने की भी ज्यादा जरूरत है। में जो 16000 बीसी के जो हम ग्रेंस वगैरह मिले हैं उसमें यही है ना धान भी है, यव भी है और सीरियल्स भी हैं मेरे ख्याल से। तो ये सारी चीजें वहां पे मिल रही हैं।
(1:04:41) तो वो खा रहे थे इसलिए केव में लेके गए ना वहां पे खाने के लिए। केव में तो उगेगा नहीं तो वहां पे कोई बात है जो वाइड हार्वेस्टिंग एविडेंस गोस बैक टू 45000 इयर्स 45000 इयर्स बियर रिव्यूड पेपर्स जो लोग दैट इज द टाइम ऑफ़ ऋग्वदा ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट हां 45000 इयर्स और वो पॉइंट पे और एक बता दूं कि जो हिमालय से प्रोटेक्ट करके भारत भूमि हुई है ना जो अभी का जो भारत हम मेजर कह सकते हैं एग्रीकल्चर पॉइंट ऑफ व्यू आज का जो मॉडर्न उनको एग्रीकल्चर ज़ों्स कहते हैं कि ये ज़ोन में ऑरेंजज़ होंगे, ये ज़ोन में एप्पल्स होंगे। तो ऐसे एग्रीकल्चर डिवीजन
(1:05:20) एक ब्रॉडली सेवन डिवीज़ंस है और छोटा-छोटा करके अबाउट 140 डिवीज़ंस है। हम वर्ल्ड वाइड ऐसा एक स्टैंडर्ड या सेमाय स्टैंडर्ड क्लासिफिकेशन। यह कहना चाहता हूं कि इन्होंने कहा कि यह रेफ्यूज है। ये जो पूरे 140 जो अप्रोक्समेट जो कुछ नंबर होगा ये जो डिफरेंट एग्रीकल्चर ज़ोंस है ना आज का जो भारत है ना 1947 के बाद वाला भारत उसमें वो सब ज़ोन ज़ोन मिलते हैं। कोई ज़ोन समझ लो एक 2 कि.मी.
(1:05:48) का भी होगा लेकिन वो सब ज़ोन मिलते हैं। इजंट दैट अ ब्यूटीफुल थिंग। सो प्रैक्टिकली राइट फ्रॉम एप्पल्स टू ब्लू बेरीज से जो कुछ दुनिया में जो ग्रो होता है इन प्रिंसिपल वी कैन ग्रो। यस। सो दैट बिकम अ वेरी बेस्ट रिफ्यूजिया जो सदर्न आपका अफ्रीका है एंड हमारा जो इंडिया है दी टू रीजन वेर द बेस्ट रिफ्यूजियास कह सकते हैं हम लोग मैम इतना बड़ा सिविलाइजेशन था इंडस वैली सिविलाइजेशन आई थिंक वी आर टॉकिंग अबाउट सम 50 लाख पीपल कितने 50 50 लाख लोगों की बात करते हैं अगर हम मजेडारो से हड़प्पा की बात करते हैं तो 1 लाख स्क्वायर किलोमीटर मतलब इतना तो
(1:06:25) फैला हुआ है तो ऑलमोस्ट 50 लाख इफ आई एम नॉट रोंग तो इतना बड़ा सिविलाइजेशन खत्म कैसे हो गया? खत्म नहीं हुआ। डिसइीग्रेट हो गया एक्चुअली क्योंकि जो चीजें मेसोपोटामिया को और इन सब लोगों को चाहिए थी वो चीजें अचानक से सू जब मेसोपोटामिया के ऊपर कब्जा कर लिया यानी कि वो जरूरत ही खत्म हो गई। उनको नहीं चाहिए थी ये सारी चीजें। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] ओके इट इज समथिंग लाइक जैसे अभी है ना कि अचानक से जो 1970 में शाह के बाद का जो समय ईरान ने जो देखा है
(1:07:10) सो ये सारी चीजें जो है वो महिलाओं को उपलब्ध नहीं होनी चाहिए और जो चीजें जा रही थी वो महिलाओं के लिए ही जा रही थी। कार्निलियंस है और ज्वेलरीज है वो सारी चीजें उनके लिए ही जा रही थी। अ ऑयल जा रहा था। डिफरेंट टाइप ऑफ घी जो है वो जा रहा था। एनिमल [नाक से की जाने वाली आवाज़] प्रोडक्ट्स जा रहे थे। वो सारी चीजें अचानक से इन लोगों ने वो बंद कर दिया। तो ट्रेड इंपैक्ट हुआ। ट्रेड इंपैक्ट हुआ। तो ट्रेड फिर क्या करेगा? अपने हिंटलैंड में वापस जाएगा और अपने हिंटलैंड के साथ में काम करना शुरू करेगा। एंड अपना ओवरऑल जो खुद का जो
(1:07:47) नेविगेशनल रूट है वो अपने खुद के हिंटलैंड के लिए यूज़ करेगा। लेकिन फिर भी चोलाज़ [गला साफ़ करने की आवाज़] लोगों ने साउथ ईस्ट पकड़ लिया हम और फिर वहां जो चाइना तक काफी सारी चीजें गई। इनफैक्ट पंशुई वगैरह जो है ना इस तरह की जो साइंसेस हैं वो भी हमारे यहां से मैजिक स्क्वायर जो है वो वहां पे गई और चोलास ने वो वाला रूट ले लिया। एंड वहां पे उन लोगों ने फिर ट्रमफेंटली रूल भी किया। कई जगहों को अह पूरा साउथ ईस्ट एशिया जो है वो उन्होंने कवर किया। तो ऐसा नहीं है कि वो यह वाली हिस्ट्री क्योंकि हमें बहुत रीसेंट हिस्ट्री है और तो मिल जाती
(1:08:28) है। सिमिलर हिस्ट्री इस तरफ की भी थी लेकिन वो नहीं मिलती क्योंकि हम सील अभी तक पढ़ नहीं पा रहे लेकिन अब जब पढ़ पा रहे हैं तो हम समझ रहे हैं कि यस यहां पे भी चेरा चोला और पंड्यास जो सील है उसमें नाम आए हैं। तो ये लोग वहां पे यहां पे भी उतना ही उत्कृष्ट मरीन का जो यूज कर रहे थे वो तो मतलब बेसिकली दे डिसइीग्रेटेड फ्रॉम दैट प्लेस अलग-अलग जगह पे जाकर के काम करना शुरू किया। यानी 1500 बीसी का एक पोटरी शार्ट जो है वो मालदीव्स में मिला है। वि द सेम आईबीसी मार्क्स तो आप समझ सकते हैं कि कहां डिसइीग्रेट हुआ है। मतलब अपने सदर्न
(1:09:11) पोर्शन में भी हुआ और उसके बाद फिर ताम्रलिप्ती तक एंड देन बर्मा एंड ऑल दोज़ एरियाज धीरे-धीरे उन्होंने चाइना भी पकड़ा वो वाला जो राउट है वो भी वो भी लिया। और आज के समय में भी ना डिफरेंट फर्सेस यह तो अभी क्या ड्राइनेस हुआ जो कुछ पता नहीं बट डिफरेंट फर्सेस जैसे कि कनाडा में एक जगह है फोर्ट मैकमरी तो उधर ऑइल सैंड्स लाइक लिटरली सैंड्स मिलते हैं उसको क्रश करके उससे ऑइल एक्सट्रैक्ट करते हैं ना तो क्या होता है दैट ऑपरेशन इज प्रॉफिटेबल व्हेन ऑइल प्राइस इज़ अबव सर्टेन नंबर हम तो जब अबव सर्टेन नंबर था बीच में जब कॉस्टली तो उन्होंने इतना एक्सट्रैक्ट
(1:09:48) किया ऑइल सैंड उधर एकदम मींस लाइक इट्स लाइक अ प्रोस्परस प्लेस लाइक स्कूल्स हो रहे हैं, बार्स है, सब एवरीथिंग इज देयर। नाउ जब ऑइल प्राइस नीचे आ गई एक सिंपल फैक्टर तो वो बंद हो गए। आई मीन थिंग्स कैन चेंज इन अ वेरी शॉर्ट टाइम आल्सो। राइट राइट अब्सोलुटली। अचानक से भी ऑर्गेनिक पोमीग्रेनेट्स का बहुत ज्यादा अरब कंट्री से रिक्वायरमेंट आई। तो पूरे कच्छ रीजन में पोग्रेनेट उगा रहे थे। फिर अचानक खत्म हो गया। तो फिर दैट वेंट अवे। राइट। राइट। ओके। सुपर्ब। सो सर मैम, ऑन अ क्लोज़िंग नोट, व्हाट वुड यू वांट टू से टू दी ऑडियंस इन टर्म्स ऑफ़ द एंशिएंट
(1:10:29) सिविलाइज़ेशन? आर्यन इन्वेशन थ्योरी भूल जाइए। [हंसी] प्लीज एंड रामायण, महाभारत, दे आर इतिहास। वो हिस्ट्री है। उसको उसी प्रकार से देखिए ना कि माइथोलॉजीस एंड ऑल। ठीक है। इलियाड्स भी माइथोलॉजिकल बोलते हैं ना हम लोग। लेकिन हुआ है क्योंकि उसमें प्लेडस आ जाता है। उसमें ओरायन आ जाता है। एंड वी नो दैट कि कौन से टाइम पे हुआ होगा। का जो हमें आर्कियोलॉजी मिलता है वो भी वही पीरियड ऑफ़ टाइम का है। तो वी कैन कोरिलेट लाइक वाइज हमारी द्वारका मिल रही है। हमारे पुमहार के 25 कि.मी.
(1:11:06) [नाक से की जाने वाली आवाज़] डाउन साइड में हारबर्स मिल रहे हैं। इतने ब्यूटीफुल लूप वाले हार्बर मतलब सोच नहीं सकते कि कितने अच्छे तरीके से वो 20,000 बीसी में बना रहे हैं। सो दीज़ आर ऑल फैक्ट्स। हम तो फैक्ट्स पे ही बात करें ना कि कुछ भी फिक्शन नहीं है। कुछ भी मनोरंजन के लिए नहीं है। रामायण मनोरंजन के लिए नहीं लिखी गई है। मैंने एक बार इनको कहा था नीलेश जी को कि हमारी एक बार बातचीत हुई थी मानधाता को लेकिन उन्होंने कहा कि मानधाता तो कितना बड़ा राजा हो के आया देन उनके बारे में कुछ भी नहीं मिलता। मैंने कहा उनको उनका वाल्मीकि नहीं मिला ना। हां
(1:11:45) [गला साफ़ करने की आवाज़] और उसमें मैं दो नाम ऐड कर दूं मानधाता में उनको भी उनका वाल्मीकि या व्यासदेव [नाक से की जाने वाली आवाज़] नहीं मिले वो है अगस्त्य अगस्त और परशुराम भी हां वरना परशुराम जी की तो कहानी इतनी बड़ी है कि जिसका कोई जवाब नहीं है और ये तीनों मींस उनका कॉमन फैक्टर भी समझ लो अगस्त्य मानदाता और परशुराम ये तीनों इन सम फॉर्म उनके सूक्त के रूप में ऋग्वेद में है उनकी तीनों की चर्चा रामायण में है। तीनों की चर्चा महाभारत में तीनों की चर्चा पुराण में आती है। सारे पुराणों में लेकिन उनके बारे में हमें बहुत कम पता है।
(1:12:19) लेकिन वह कुछ ग्रेट हुए ही होंगे। नहीं तो इतनी चर्चा क्यों रहेगी? क्यों रहेगी? लेकिन उनकी कथा को प्रॉपर्ली लिखने वाले वाल्मीकि नहीं मिले। हम और मेरे पॉइंट में मैं क्या ऐड करूंगा कि होता क्या है? हमें हम भारतीय लोग तो मैं कहूंगा कॉमन मैन बोल रहा हूं। बट इवन स्टडी एजुकेटेड लोग भी हम ऑथॉरिटी फैलेसी में फंसे हुए हैं। हम जो कोई पोजीशन किसी का है, कोई एक इंस्टट्यूट का हेड है, कोई एकेडमिया में है, कोई प्रोफेसर पीियर रिव्यूड ऐसा जो नॉनसेंस है ना पीियर रिव्यूड का अपना महत्व है। हम हम भी पीियर रिव्यूड में पब्लिश किए हुए हैं। लेकिन जब हम कॉर्पोरेट में गए तो
(1:12:57) उसका कुछ जरूरत नहीं है। प्रोफेसर को पीियर रिव्यूड में करना पड़ता है। उसका जॉब रखने के लिए। कॉर्पोरेट में उसकी जरूरत नहीं है बारिश में। लेकिन एक ऑथॉरिटी फैलेसी में ना फंसे और ऐसा भी मत सोचिए कि अरे मुझे बड़े-बड़े पीएचडी वाले लोग पूछते हैं कि नीलेश जी आपका जो रिसर्च है वो क्या किसी ने इंडिपेंडेंटली वैलिडेट किया है? मैं पूछता हूं तू कर ना आप कर लो। तो बोलते नहीं मैं एक्सपर्ट नहीं हूं। मैं बोलता दिस इज द प्रॉब्लम जो जो है तो एक्सपर्ट कोई है ही नहीं। और जो कोई लोग ऐसे मूर्ख लोग हैं कि उनको लगता है वो एक्सपर्ट है और वो हमें ट्रोलिंग करते
(1:13:31) बैठते हैं। उनका तो करना चाहिए। बिकॉज़ वो मैं तो बोलता हूं मेरा एक्सटेंडेड मार्केटिंग टीम है। लेकिन मुझे यह कहना चाहता है कि जो एक्चुअली विज्ञान क्या है या तर्कशास्त्र क्या है? तंत्र युक्ति क्या है? इंपेरिज्म क्या है? ये इतने कठिन विषय नहीं है। आपको किसी को सच में भारत के लिए प्यार है और उसको करना है तो एक थोड़ा सा करने की बात है। आपको समझना है तो रूपा जैसे मेरे जैसे नीरज अत्री जी, राजीव मल्होत्रा ऐसे ऑथेंटिक लोग हैं। उनको श्रद्धा में समझ लीजिए। हम पर श्रद्धा में रुकने की जरूरत नहीं है। जैसे पतंजलि कहते हैं श्रद्धा वीर्य
(1:14:05) स्मृति समाधि प्रज्ञा पूर्वक श्रद्धा से प्रारंभ करना जरूरी है। लेकिन उधर रुकना जरूरी नहीं है। वो आपका ऑप्शनल सब्जेक्ट है। तो वीर्य यानी कि तपस्या करनी है। श्रद्धा वीर्य स्मृति यानी कि बैकग्राउंड स्टडी करो। कौन कौन से पानी में कितना क्या है। सब तो लोग करेक्ट नहीं हो सकते। महाभारत की 140 अलग-अलग डेट्स हैं। तो यह तो बेसिक लॉजिक समझ लो कि इदर सब रॉन्ग है इंक्लूडिंग नीलेश की 561 बी सी या करेक्ट है तो सिर्फ एक ही करेक्ट हो सकती है। 114 है तो ये कॉमन सेंस है। मैं आपको बता दूं ये लोग ये सिंपल जो मैंने बात कही ना कि इदर ऑल ऑफ़ देम आर रोंग और ओनली वन ऑफ़
(1:14:42) देम इज़ करेक्ट। ये भी तो समझ में नहीं आता लोगों के। कि प्रोफेसर लोगों को भी समझ में नहीं आता, कॉमन लोगों को समझ में नहीं आता। ये अभी हमारे आईओ में चर्चा हो रही थी। मैं बोला कैन वी अग्री ऑन दिस? वो सब डायग्रेस हो के इधर-उधर जा रहे हैं लेकिन यह मान नहीं रहे। मींस ये मेरे मानो मत। वो मान समझ नहीं रहे हैं। मींस उनका लॉजिक का जो ज्ञान है वो इतना कम है। तो ये ऐसा कोई ऑथॉरिटी फैलेसी करके मत बैठो। कोई भी हमारे यहां से जो सिंसियर है जिसमें श्रद्धा है वहां से प्रारंभ करके प्रज्ञा यानी कि रिफाइन इंटेलेक्ट तक कोई भी हम पहुंच सकते हैं।
(1:15:15) प्रज्ञा की प्रज्ञा का सिर्फ स्पार्क चाहिए। क्वांटिटी की जरूरत नहीं है। बस पार्क चाहिए और आप वहां पे पहुंच सकते हैं। इट्स ऑलवेज अ प्लेजर टू टॉक टू बोथ ऑफ यू। नीलेश सर से सेकंड टाइम और रितू मैम आपसे फर्स्ट टाइम मिली है। लेकिन आई एम श्योर दिस इज़ नॉट द लास्ट टाइम। वी विल कीप मीटिंग। और हमने अभी जस्ट बात की परशुराम जी के बारे में। उनके वाल्मीकि नहीं मिले। लेकिन आई एम श्योर जितनी भी इंफॉर्मेशन उनके बारे में होगी वो नेक्स्ट टाइम इट वुड बी वर्थ टॉकिंग अबाउट इट। कि परशुराम जी के बारे में जब इतनी चर्चा है सारे ग्रंथों में आते हैं तो जरूर इस टॉपिक को
(1:15:49) मैं नेक्स्ट टाइम एक्सप्लोर करना चाहूंगी। थैंक यू सो मच फॉर ऑल द ग्रेट थिंग्स दैट यू हैव डन फॉर इंडिया एंड इंडियन हिस्ट्री। आई मीन सच में आई थिंक वी ऑल आर ग्रेटफुल। द ऑडियंस इज ग्रेटफुल। थैंक यू। थैंक यू। [संगीत]
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