The Psychology of Love: Love, Breakups, Overthinking & Attachment Psychology @YourVikas
Author Name:Readers Books Club
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@ReadersBooksClub
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=tSdvU-T9MpM
Title: The Psychology of Love: Love, Breakups, Overthinking & Attachment Psychology @YourVikas
Author Name: Readers Books Club
Description: Why do relationships fail even when two people genuinely love each other? Why do we overthink, struggle with trust issues, feel emotionally disconnected, or repeatedly attract the wrong partners? Is love alone enough to make a relationship last, or is there a deeper psychology behind healthy and successful relationships?
In this insightful episode of Readers Books Club, Dr Amiett Kumar sits down with Vikas Chaudhary to explore the psychology of love, relationships, emotional intelligence, attachment styles, and the hidden reasons why modern relationships struggle. From communication gaps and jealousy to emotional unavailability, breakup healing, and personal boundaries, this conversation explores what it really takes to build a healthy, meaningful, and long-lasting relationship.
💡 In This Podcast, You'll Discover:
✅ Why modern relationships fail despite love and attraction.
✅ The biggest relationship mistakes that slowly destroy emotional connection.
✅ How overthinking, jealousy, and trust issues affect relationships.
✅ Why communication gaps and emotional distance lead to breakups.
✅ How to identify red flags and emotionally unavailable partners.
✅ Why we repeatedly attract or choose the wrong partners.
✅ How to heal emotionally after a painful breakup.
✅ The importance of emotional intelligence in love and relationships.
✅ Why men often struggle to express their emotions.
✅ How to establish healthy boundaries without hurting your relationship.
✅ The difference between privacy and secrecy in relationships.
✅ How attachment styles influence emotional security and relationship satisfaction.
✅ Why understanding your partner is more important than trying to change them.
✅ The secrets to building trust, emotional intimacy, and lasting love.
📚 Relationship Books & Powerful Ideas Discussed:
📖 The 5 Love Languages by Gary Chapman — Understanding how people express and receive love.
📖 Men Are from Mars, Women Are from Venus by John Gray — Understanding differences in communication and emotional needs.
📖 Attached by Amir Levine and Rachel Heller — Understanding attachment styles and emotional security.
❤️ Whether you're single, dating, married, going through a breakup, or struggling to understand your partner, this conversation offers valuable perspectives on love, emotional healing, and building stronger relationships. Because a successful relationship isn't just about finding the right person. It's also about understanding yourself, communicating better, and choosing to nurture love every single day.
====================================================
Connect with Vikas Choudhary Ji:
📌YouTube: / @yourvikas
📌Instagram: / yourviikas
📌Facebook: / yourviikas
====================================================
📘 Manifest Anything in 100 Days (English): https://link.amazon/B05dtDgTF
📘 Manifest Anything in 100 Days (Hindi): https://link.amazon/B0iS6ruc3
📤Join Sampann Sadhana: https://amiettkumar.com/meditation/
📤All Course: https://amiettkumar.com/allcourses/
================================================
Important Social Media Links
💎 Instagram: / readersbooksclub
💎 Facebook: / readersbooksclub
💎 Dr Amiett Kumar: / @amiettkumar
💎 Dr Amiett Kumar Live: / @amiettkumarlive
💎 Sampann Sadhana: / @sampannsadhana
================================================
For Collaboration & Promotion
Email us at: connect@readersbooksclub.com
================================================
00:00:00 Trailer
00:02:35 Introducing Vikas Choudhary Ji
00:04:21 Why Are Modern Relationships Changing?
00:11:14 What Is Emotional Intelligence?
00:20:50 Ego vs Self-Respect
00:40:18 Understanding Love Languages
00:45:43 Love vs Attraction
00:52:18 Can Long-Distance Relationships Work?
00:53:26 How Social Media Affects Relationships
01:08:44 Why Do People Keep Changing Partners?
01:14:11 The Worst Relationship Advice
01:15:16 Recommended Books on Relationships
01:16:03 Final Learnings & Closing Thoughts
#RelationshipPsychology #PsychologyOfLove #RelationshipAdvice #WhyRelationshipsFail #HealthyRelationships #ModernRelationships #LoveAndRelationships #EmotionalIntelligence #RelationshipGoals #ReadersBooksClub
Transcript:
(00:00) कॉन्सेप्ट ऑफ लव लैंग्वेजेस। यह ओवर रेटेड है या सही है यह। जानना चाहिए लोगों को। रिलेशनशिप के डायनामिक्स पिछले एक दो डिकेड्स में जिस तरह से शिफ्ट हुए हैं टू सम एक्सटेंट सोसाइटी रेडी नहीं थी इस ट्रांजिशन के लिए एकदम। हर जगह पर इंसान को चाहिए कि मेरे पास ये राइट्स क्यों नहीं है। मैं ये क्यों नहीं कर सकता, मैं वो क्यों नहीं कर सकता। यानी कि आपका मानना है कि एक तरफा प्यार भी प्यार है। मेल एंड फीमेल्स जब मिलते हैं बात करते हैं तो हम देखते हैं कि समटाइम्स फीमेल आर दे आर मोर इमोशनल और मे बी वो अपने आपको एक्सप्रेस कर पाती है। एज़
(00:28) कंपेयर टू मेल। मेल अपने इमोशंस को इतना सप्रेस कर क्यों रहा है? अभी भी क्यों नहीं समझेगा? इसलिए ऐसा बोलते हैं हम रिलेशनशिप के मामलों में कि अगर एक लड़की अपने रिश्तों में खुश नहीं है तो अपने काम पर फोकस नहीं कर पाएगी। और अगर एक लड़का अपने काम में खुश नहीं है तो अपने रिश्ते पर फोकस नहीं कर पाएगा। क्या बात है वाह। ये कितना इंपॉर्टेंट है अपोजिट जेंडर की साइकोलॉजी को समझना। कि एक लड़की दूसरी लड़की से बात कर रही है तो वो जानती है कि हम बात करने के लिए बात कर रहे हैं। हमें कोई सॉल्यूशन नहीं चाहिए। और एक लड़का जब दूसरे लड़के से बात
(00:53) कर रहा है तो वो जानता है मुझे टू द पॉइंट बता क्या करूं। मान लीजिए किसी समाज में 10 लोग हैं और 10 में से एक व्यक्ति एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर कर रहा है तो नौ लोगों को रास नहीं आएगा तो वो नौ लोग कहेंगे कि यार यह गलत है। यानी कि समाज उस चीज को बुरा मानेगा। बट उसी समाज में जब सात लोग एक्स्ट्रा मेरिटल करेंगे यानी कि जब तक आप आपकी भावनाओं को हैंडल करने के लिए परिपक्व नहीं है। तब तक आप कभी जीवन में आध्यात्मिक नहीं हो पाएंगे। हम्म। हाई आईक्यू आपको एक अच्छी जॉब दिला सकता है। बट हाई इमोशनल कोशंट आपको वहां सस्टेन रख सकता है और आपको आगे ग्रो करवा सकता
(01:19) है। डू यू योरसेल्फ बिलीव्स इन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप? हां रिलेशनशिप होती है पर आजकल उनका सर्वाइवल बहुत मुश्किल है यार। इनसिक्योरिटीज के इश्यूज बहुत हैं कि उस रिश्ते को चलाने के लिए हम बाकी सब चीजों का त्याग करें। हर वो चीज जो हमारे आमने सामने दिख रही है उन सब चीजों की तरफ हम नजर भी ना डालें। इसलिए आप भारत में देखना कि स्पिरिचुअलिटी के नाम पर एक बहुत बड़ी आबादी स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस रोजाना करती है। पर उनसे उनका गुस्सा नहीं संभलता। तो 60% से ज्यादा कैदी किसी क्रिमिनल बैकग्राउंड से नहीं आए। ना उनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड कभी रहा। और उनका
(01:47) कहना है कि ये जिस क्राइम की वजह से हम यहां आए हैं, यह भी हम करना नहीं चाहते थे। ये हीट ऑफ द मोमेंट में हुआ। वुमेन एंपावरमेंट एक अच्छी कैंपेन है, एक अच्छा इनिशिएटिव है, बहुत अच्छी चीजें हैं। बट जब उसमें ऐसा होने लग जाए कि लड़के सिगरेट पी सकते हैं सड़क पे खड़े होके। तो लड़कियां क्यों नहीं? तो हम क्यों नहीं पी सकती? तो जब सोच का स्तर यह हो जाए तो फिर समाज में एक दुर्दशा निश्चित तौर पे आना शुरू होती है। एक इंसान जो मल्टीपल रिलेशनशिप में आता है। पहले किसी के साथ होता है उसको छोड़ता है। थोड़े दिन बाद [संगीत] मतलब मन भर
(02:10) जाता है। जेन्युइनली उसको फील होता है। नहीं यार आई एम नॉट गेटिंग व्हाट आई वांट फ्रॉम दिस रिलेशनशिप। देन मूव टू अनदर वन। देन मूव टू अनदर वन। यहां सबसे बड़ी गलती क्या है? रिलेशनशिप में वर्स्ट एडवाइस जो आपने आज तक सुनी [संगीत] है। कौन सी वाली बताऊं? [हंसी] मल्टीपल बताता हूं आपको। बहुत सारे लोग हर अट्रैक्शन को प्यार का नाम दे देते हैं। अट्रैक्शन और प्यार में एक्चुअली फर्क है क्या? डू यू बिलीव इन मैनिफेस्टेशन? इसके बारे में तो मुझे हालांकि कुछ पूछना था जाने से पहले आपसे। अच्छा। विकास जी आपका हमारे पॉडकास्ट में बहुत-बहुत स्वागत है।
(02:41) थैंक यू। थैंक्स अ लॉट यार। आई एम रियली हैप्पी। [हंसी] सच में आपका कंटेंट बहुत ही इंप्रेसिव है। और मुझे लगता है कि एक रिलेशनशिप एक ऐसा एरिया है जहां पर बहुत सारे डेफिनेटली सवाल आते होंगे। मैं ज्यादातर मैनिफेस्टेशन लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन के बारे में बात करता हूं। हम दो कॉमन सबसे जो कॉमन इशूज़ हैं वो रहते हैं। या तो पैसा या रिलेशनशिप। हम मतलब ये एट पार ही चलता है हमेशा। बराबर ही आते रहते हैं। करेक्ट। करेक्ट। तो इसका मतलब डेफिनेटली यही है कि लोग रिलेशनशिप एक ऐसा एरिया है जहां पर लोग स्ट्रगल कर रहे हैं या यह भी कह सकते हैं कि जहां पर लोग कॉन्शियसली
(03:19) बहुत कुछ इंप्रूव करने की कोशिश कर रहे हैं और आप उस फील्ड में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। थैंक यू। थैंक यू लॉट। एंड थैंक यू सो मच फॉर कमिंग इन एंड आई एम श्योर अबाउट इट। जितने भी लोग आज ये पडकास्ट देख रहे हैं उनको बहुत वैल्यू ऐड होने वाला है। आई एम रियली ग्लैड इधर आकर बहुत खुशी है और अ लोगों को वैल्यू मिलना भी चाहिए हम क्योंकि रिलेशनशिप एक ऐसा एरिया है जहां पर अब इसको एजुकेशन की तरह देखना चाहिए हम कि जिंदगीियों में कुछ उथल-पुथल है तो अ थोड़ा एजुकेट कर लें खुद को हम थोड़ा असेस कर लें थोड़ा देख लें हम कि कहां गड़बड़ियां है
(03:51) हम क्योंकि रिलेशनशिप के डायनामिक्स पिछले एक दो डिकेड्स में जिस तरह से शिफ्ट हुए हैं हम टू सम एक्सटेंट सोसाइटी रेडी नहीं थी इस ट्रांजिशन के लिए एकदम [हंसी] तो थोड़ी उथल-पुथल है। ऐसा लगता है कि 510 साल और लगेगा सेटल होने में। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] फिर जो डिस्ट्रक्शन और क्राइसिस आ रहा है उसके हम आधी हो जाएंगे। [हंसी] अभी तब तक हम थोड़ा झटपटाएंगे। तो उसको ठीक से अब्सॉर्ब करने के लिए या ठीक से टैकल करने के लिए हम हम सबको इस फ्रंट पे थोड़ा तो एजुकेट होना चाहिए। करेक्ट। तो नया ट्रेंड है क्या? ये नया ये व्हाट्स न्यू इन द रिलेशनशिप नाउ। नया ट्रेंड कि
(04:28) एकदम से आप देखें कि खूब सारा लिबरलाइजेशन आ जाना रिश्तों में और कहते हैं कि जो भारत की संस्कृति है तो भारत की संस्कृति में आप अगर पूरी इंसानियत का जो सबसे स्मालेस्ट यूनिट देखोगे हम तो वो एक परिवार माना जाता है। बिल्कुल सही है। कि ये परिवार जो है ये हम एक हैं। हम अब परिवार के अंदर कोई यूनिट नहीं है। हम जो स्मालेस्ट यूनिट है वो फैमिली है। फैमिली है। तो एज अ फैमिली हम सोचते हैं। एज अ फैमिली हम डील करते हैं। एज अ फैमिली हम आगे बढ़ते हैं। करेक्ट। और वेस्टर्न फिलॉसोफी अगर आप देखोगे कि जो स्मालेस्ट यूनिट है किसी भी समाज की वो है
(05:06) एक इंडिविजुअल। वाह राइट? हम तो वहां एक घर के अंदर भी पांच लोग ये सोच रहे हैं कि मेरा क्या? वैसा इसलिए वो अपने पेरेंट्स के साथ भी एक समय के बाद सहज नहीं है कि मैं क्यों रहूं इनके साथ। हम या मैं कंफर्टेबल नहीं हूं तो मैं क्यों इन्हें झेलूं। हम बेवजह हम तो माइंडसेट में डिफरेंस है। हम तो वो ज्यादा [नाक से की जाने वाली आवाज़] लिबरल माइंडसेट है। जहां पर हमने ऐसा सीखा देखा कि आप अपनी चिंता करो। आपको जो लगता है और हमारे का माइंडसेट थोड़ा सा ज्यादा कोलबेटिव है। जहां पर हम सोचते हैं कि हम कलेक्टिव रहें, हम साथ रहें, हम ज्यादा कंपैशनेट
(05:40) रहें, अफेक्शनेट रहें, एक दूसरे के प्रति करुणा रखें। एक दूसरे का ख्याल रखें। और इसलिए हम यूनाइटेड रहने में ज्यादा यकीन रखते हम तो अब हमारी वो जो थ्योरी है या जो हमारा वो जो स्टाइल है उसको हम अपने से दूर कर रहे हैं। हम तो इंडिविजुअलिटी पे सब कुछ आ गया है। लिबरल थॉट्स बहुत ज्यादा आ गए हैं। अ हर जगह पर इंसान को चाहिए कि मेरे पास ये राइट्स क्यों नहीं है? मैं ये क्यों नहीं कर सकता? मैं वो क्यों नहीं कर सकता? यानी इंसान ये सोचने लगा है कि मैं अगर एक शादी में हूं और मेरा वो मन नहीं लग रहा तो मैं क्यों नहीं जा सकता बाहर? हम
(06:16) या [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर मुझे बाहर कोई पसंद आ जाए हम तो मैं क्यों नहीं बात कर सकता उससे? हम तो जब यह सोच जो है एंटर कर रही है तो जाहिर तौर पर इसके नुकसान जो है वो तो हमें उठाने होंगे। हम जैसे लिबर्टी में कोई दिक्कत नहीं है। जैसे हम बात नहीं करते ऐसे वुमेन एंपावरमेंट की और सबकी भी बात होती है कि भुमन एंपावरमेंट एक अच्छी कैंपेन है। एक अच्छा इनिशिएटिव है। बहुत अच्छी चीज़ है। बट जब उसमें ऐसा होने लग जाए कि लड़के सिगरेट पी सकते हैं सड़क पे खड़े होके तो लड़कियां क्यों नहीं? तो हम क्यों नहीं पी सकते? तो जब सोच का स्तर यह हो जाए तो
(06:47) फिर समाज में एक दुर्दशा निश्चित तौर पे आना शुरू होती है। तो वैसा ही कुछ रिलेशनशिप की दुनिया में भी कि हम ये नहीं तय कर पा रहे हैं कि हम जो एक्सपेक्ट कर रहे हैं हम वो कितना हेल्दी है और उसके लॉन्ग टर्म कॉन्सिक्वेंसेस कैसे हैं। हम उस इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन में ही जी रहे हैं कि अभी इमीडिएट कैसा लगेगा। अभी कितना मजा है हम तो ठीक है। शायद सीख जाएंगे हम धीरे-धीरे। इस चीज के लिए कि क्या रिस्पांसिबल कारण क्या है इस चीज के पीछे? इसके पीछे कारण यह है कि इट्स अ कलेक्टिव फेलियर। इसके लिए कोई एक जनरेशन रिस्पांसिबल नहीं है। ओके?
(07:22) कोई एक समाज या एक धड़े के लोग रिस्पांसिबल नहीं है। ये कलेक्टिव फेलियर है और इस फेलियर के पीछे अगर आप थोड़ी गहराई में जाएंगे तो आप देखेंगे कि अध्यात्म से जो हमारी दूरी है उसने हमें नाकाबिल बनाया है हम। अपने प्रलोभनों को हैंडल करने में। ओके। अब आप देखें कि मान लीजिए किसी समाज में 10 लोग हैं और 10 में से एक व्यक्ति एक्स्ट्रा मेडल अफेयर कर रहा है। तो नौ लोगों को रास नहीं आएगा। हम तो वो नौ लोग कहेंगे कि यार ये गलत है। यानी कि समाज उस चीज को बुरा मानेगा। हम बट उसी समाज में जब सात लोग एक्स्ट्रा मेरिटल करेंगे। तो वो जो सात लोग हैं वो उस चीज को
(08:03) नॉर्मलाइज करने की कोशिश करेंगे। बिल्कुल सही। कि यार मैं अकेला गलत होता तो वो भी नहीं करता ना। हम्। बट हम सब हो रहे हैं। मतलब नॉर्मलाइज़ कर रहे हैं। हम तो अब समाज कलेक्टिवली अपने प्रलोभनों को टैकल करने में फेल हो रहा है। यानी कि हम सब मिलकर अपनी-अपनी जगहों पर, अपनी डिजायर्स को, अपनी इच्छाओं को नहीं हैंडल कर पा रहे हैं। तो हमने उसको न्यू नॉर्मल बना दिया। हम और हम यह जो सात लोग हैं यह मिलकर उसी को मॉडर्नाइजेशन कहते हैं। हम यह उसी को एडवांसमेंट कहते हैं। यह उसी को इवॉल्व होना कहते हैं। जबकि ये दुर्दशा है। पर वो उसी को ऐसा
(08:37) मानते हैं तो बाकी के तीन लोग इनफीरियर हो रहे हैं कि हम आउटडेटेड हैं क्या? हम तो अब बदलना उन तीन लोगों को है कि हम भी इनकी तरह सोचें। [हंसी] ना कि इंसान को। तो ये जो धारणा है जो एक न्यू नॉर्मल जो बन रहा है वो उस दिशा में ही जाना है क्योंकि हम अपनी उन डिजायर्स को, हमें अपनी इच्छाओं को मैनेज नहीं कर पा रहे। और सिर्फ बात रिलेशनशिप की नहीं है। आप हेल्थ की दुनिया में भी देख लीजिए। हम ओबेसिटी के मामले बढ़ रहे हैं। डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं। ब्लड प्रेशर के हाइपरटेंशन के मामले बढ़ रहे हैं। अर्थराइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। क्यों?
(09:11) क्योंकि खाने का प्रलोभन भी नहीं छूट रहा। हम लग्जरी का प्रलोभन भी नहीं छूट रहा। इंसान को वॉक करना है या पसीना बहाना है तो उससे वो भी नहीं हो रहा। हम तो हम हर वो चीज जो हमारा मन कहता है हम मन के इतने गुलाम हो गए हैं कि हमें हर वह चीज करनी है जो मन कर जाए। तो कहते हैं ना मन के जीते जीत मन के हारे हार। हम मन को जीत नहीं पा रहे और मन को क्यों नहीं जीत पा रहे? अगर आप रूट देखोगे तो वही कि हम उन स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस में अब है ही नहीं। शुरुआत से हमने अभावों को नहीं देखा। हमने चीजों को अपने से दूर रखने के लिए अपने को ट्रेन नहीं किया।
(09:44) हम तो हम चीजों को देते चले गए अपने आपको और शायद हम आदि हो गए कि मुझे जो चाहिए वो मिलना ही चाहिए। हम तो ये एक नया बदलाव है हम जो ऊपर से देखने में एक समाज को सा लगता है कि भाई यही आने वाला कल है हम पर अगर आप एक रिस्चर की तरह देखें थोड़ा गहराई से तो ये कलेक्टिव फेलियर था जिसमें हम सब नाकाबिल साबित हुए हैं। हम वाह क्या बात है। अ पेरेंटिंग का कितना इंपॉर्टेंट रोल है इसमें? पैरेंटिंग का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है। बट पैरेंटिंग उन समस्याओं में नहीं गिनी जाती जो अर्जेंट समस्याएं हैं। जैसे आपने शुरू में कहा कि पैसा और रिलेशनशिप और एक हेल्थ
(10:24) हम हेल्थ में भी वेलनेस नहीं सिकनेस सिकनेस है ना क्योंकि अर्जेंसी वेलनेस में नहीं है। सिकनेस में है। हम तो वैसे ही पैरेंटिंग इज नॉट अर्जेंट प्रॉब्लम। इसलिए पैरेंटिंग पे दुनिया कभी काम नहीं करेगी। पैरेंटिंग में आप फेलियर और ज्यादा ही देखोगे और हमें कभी रियलाइज भी नहीं होगा कि हमने बहुत बुरा किया। हम बस यह करेंगे कि हम अपनी गिल्ड कंपनसेेट करने के लिए वही बात है कि 10 में से एक व्यक्ति कर रहा था गलत तो वो खुद को सुधारने की कोशिश करता हम पर जब पांच सात लोग फेल हो रहे हैं तो हम सब मान लेते हैं कि यही चल रहा है आजकल तो ऐसे ही है।
(10:57) हम तो पैरेंटिंग में कुछ खास उम्मीद नहीं की जा सकती मेरे ख्याल से। ओके। हम अह [गला साफ़ करने की आवाज़] जब हम रिलेशनशिप के बारे में बात कर रहे हैं, समझ रहे हैं तो कहीं ना कहीं इमोशंस हैं ये सब हमारे जो इम्बैलेंस हो रहे हैं। एक टर्म यूज़ की जाती है आप भी यूज़ करते हैं। इमोशनल इंटेलिजेंस ये क्या है? अ यूं समझे [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि इसको थोड़ा सा सिंपलीफाई करता हूं। ठीक है? कि मान लीजिए एक इंसान है जो उसकी जिंदगी का कोई भी पिलर इवॉल्व नहीं हुआ। कहते हैं कि चार पिलर्स होते हैं। हम कोई भी इवॉल्व नहीं है तो वो इंसान दुनिया
(11:32) में कहीं भी मैनपुलेट हो के आ जाएगा। हम उसको कोई भी एक्सप्लइट कर देगा। मान लीजिए उसका फिजिकल पिलर ठीक है। हम शारीरिक रूप से ठीक है। हम तो अगर उसको किसी ने एक्सप्लइट करने की कोशिश की तो सोचेगा समझेगा नहीं बट दो लप्पड़ तो मार देगा। करेक्ट है। है ना? खुद को डिफेंड करने के लिए। सही। वो ये नहीं सोचेगा कि हो सकता है उसके चार लोग और आके फिर मेरी पिटाई कर दें। वो शायद इतना नहीं सोच पाएगा। उसी इंसान का इंटेलेक्चुअल पिलर भी स्ट्रेंथन हो जाए तो हो सकता है वो ये सोचेगा कि यार हाथापाई करना तो अभी ठीक नहीं है हम पर इसको छोडूंगा नहीं
(12:05) सही तो वो अपनी पूरी एनर्जी लगा देगा उस इंसान के साथ उस रिवेंज के लिए वो बदले लेने के लिए उसका बुरा करने के लिए इंसान इंटेलिजेंट है बट उसकी जो एनर्जी है वो इस दिशा में है कि उसने मेरे साथ बुरा कैसे कर दिया हम तो मुझे उसका बदला लेना है मुझे ठीक करना है हम तो इंटेलिजेंस है तो कितना ज्यादा बैंड बजा सकते हैं वो सब सोचने की काबिलियत हम उसी इंसान का इमोशनल पिलर भी स्ट्रांग हो जाए जिसको इमोशनल इंटेलिजेंस हम कह रहे हैं। हम तो वो इंसान यह तय करेगा कि मुझे यहां प्रतिक्रिया देनी भी है कि नहीं देनी है। ऐसा तो नहीं कि मैं अपना समय खराब कर रहा
(12:36) हूं। हम्। ऐसा तो नहीं कि यह तो वो वो समस्या है जो डे टू डे लाइफ में आती रहती है और मेरे फोकस के हिसाब से यह डिस्ट्रैक्शन है। तो मुझे इस पर रिएक्शन देना है कि नहीं देना है। गुस्सा आ रहा है हम पर मुझे इस दिशा में जाना ही नहीं है। मुझे प्रतिक्रिया में पड़ना ही नहीं है। हम दिस इज़ इमोशनल इंटेलिजेंस। कि हम अपने इमोशंस को मैनेज कर पा रहे हैं। हम और चौथा पिलर है स्पिरिचुअलिटी का अध्यात्म। हम् जहां पर इंसान को गुस्सा ही नहीं आ रहा है। हम मैनेज [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या ही करना है? हम आ ही नहीं रहा है। किसी ने गाली बक दी तो
(13:08) कह दिया कि ठीक गॉड ब्लेस। हम वैसा जिससे फर्क ही नहीं पड़ रहा इन बातों से। हम तो ये चार पिलर्स हैं जिस पर हम लोग काम करते हैं। तो ऐसा कहते हैं कि जब तक इमोशनल इंटेलिजेंस वाला पिलर आपका स्ट्रांग ना हो यानी कि जब तक आप आपकी भावनाओं को हैंडल करने के लिए परिपक्व नहीं है। तब तक आप कभी जीवन में आध्यात्मिक नहीं हो पाएंगे। हम इसलिए आप भारत में देखना कि स्पिरिचुअलिटी के नाम पर एक बहुत बड़ी आबादी स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस रोजाना करती है हम पर उनसे उनका गुस्सा नहीं संभलता हम उनसे उनका फ्रस्ट्रेशन उनकी ओवरथिंकिंग उनका प्रोकस्टिनेशन
(13:45) या फिर उनकी जो कुछ खाने की या कुछ पीने की जो ज़िद है जो डिजायर है वो नहीं संभलती हम या कुछ बुरी आदतें उन्हें लग गई तो वो उसे नहीं ठीक कर पा रहे हम कि गुटखा भी खा रहा है और पूजा पूजा पाठ भी कर रहा है। वैसा पता है कि यह चीज कैंसर भी कर सकती है। इसको छोड़ना चाहिए। बट आप आध्यात्मिक हो तो ऐसी चीजों का तो आपके ऊपर कंट्रोल ही नहीं होना चाहिए हम जो आपको इतना गुलाम बना ले। बट दरअसल परेशानी ये है कि अभी तीसरा पिलर स्ट्रंग नहीं है और चौथे की बात चल रही है। हम तो उन्हें रिजल्ट नहीं मिलेगा। वो जिंदगी भर में प्रैक्टिससेस करते रहेंगे।
(14:18) थोड़ा सा स्पिरिचुअल गुरुस का भी फॉल्ट मानता हूं मैं। तो हम कि उन्होंने एनलाइटन किया नहीं इस तरह से कभी। ओके। उन्होंने हमेशा क्या किया? लोगों को कुछ एक्टिविटीज में इंगेज कर दिया। हम उन्होंने भावनाओं के तल पर, मन के तल पर लोगों को शिक्षित नहीं किया। हम मुझे ऐसा लगता है कि भाई ठीक है ये चीज अच्छी है ये मत करो ये चीज कर लो और ये ये प्रैक्टिससेस है जो रोजाना होनी चाहिए हम है ना तो क्या है कि वो प्रैक्टिससेस तो रोजाना हो रही है पर जो एक इनर वर्ल्ड है इंसान का वो उसको कैसे ठीक किया जाए उस पर काम नहीं हुआ तो इमोशनल इंटेलिजेंस
(14:54) वो पिलर है जो आपकी जिंदगी में अगर संतुलन चाहिए तो उसकी पहली सीढ़ी है हम वो चाहे रिलेशनशिप हो प्रोफेशनल लाइफ हो पर्सनल लाइफ हो फाइनेंसियल लाइफ हो आप देखें कि मैं कैदियों के साथ भी काम करता हूं जेलों में जाकर। हम तो 60% से ज्यादा कैदी किसी क्रिमिनल बैकग्राउंड से नहीं आए। हम ना उनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड कभी रहा। और उनका कहना है कि ये जिस क्राइम की वजह से हम यहां आए हैं ये भी हम करना नहीं चाहते थे। हम ये हीट ऑफ द मोमेंट में हुआ। लाइफ डजंट गिव एनी अनडू ऑप्शन। करेक्ट। वो वहां पर है। वैसे ही इंडिया में 80% से ज्यादा लोग जितने भी लोग कर्जे
(15:32) में हैं, ईएमआई दे रहे हैं, लोंस पे कर रहे हैं, उसमें 80% से ज्यादा लोग उन कर्जों में होते ही नहीं अगर वो इंपल्सिव बायर नहीं होते। सही बहुत सही। बहुत है ना? मतलब वो कार खरीदना कि यार कार कौन सी रोज-रोज़ आती है? घर कौन सा रोज-रोज़ बनता है? बच्चे की शादी कौन सी रोज-रोज़ आती है? ये अरे भाई क्यों भावुक हो इतने यार? क्यों इतने इंपल्सिव हो? है ना? 500 की इनकम नहीं है और iPhone चाहिए। हम इंपल्ससेस है। इनकम नहीं है और मालदीव्स जाना है हनीमून करने। व्हाट इज द पॉइंट? हम है ना? आपकी फाइनेंसियल मैनेजमेंट कैसी है? हम तीसरा जितने भी लोग अल्कोहल या सिगरेट्स
(16:10) कंज्यूम करते हैं इसका 90% लोग जिन्होंने जब पहली बार कंज्यूम किया होगा हम तो इन्होंने अपने आप के लिए एक लिमिट तय की होगी कि मैं इतना कंज्यूम करूंगा। बहुत पीछे छूट गई। हम क्यों? क्यों? क्योंकि वो डिजायर को मैनेज नहीं कर पाया। लैक ऑफ इमोशनल इंटेलिजेंस। तो आप कर्जे की बात कर दें। वहां भी इमोशनल इंटेलिजेंस का अभाव है। क्राइम की दुनिया की बात कर दें। आप सैडनेस, ए्जायटी, डिप्रेशन के इश्यूज सुसाइड के मामले देख लें। वहां पर इमोशनल इंटेलिजेंस की कमी है। अगर आप ये अल्कोहल या व्यसनों की बात कर दें। वहां इमोशनल इंटेलिजेंस की परेशानी
(16:42) है। और एक और मजे की बात। कहते हैं कि 60% जॉब परफॉर्मेंस भी हाई ईक्यू से आता है। हाई आईक्यू से नहीं। [हंसी] हाई आईक्यू आपको एक अच्छी जॉब दिला सकता है। हम बट हाई इमोशनल कोशेंट आपको वहां सस्टेन रख सकता है और आपको आगे ग्रो करवा सकता है। हम और 90% हायर अथॉरिटीज जब हायर अथॉरिटीज बनती है तो उनके असेसमेंट में जो चीज सबसे ज्यादा प्राइमरीली असेस की जाती है वो होता है उनका इमोशनल कोशेंट कि प्रेशर हैंडल करने की कैपेबिलिटी। दूसरा कि इस व्यक्ति का खुद की इंपल्ससेस। तीसरा इसकी लीडरशिप स्किल्स, इसकी सोशल स्किल्स। ये कनेक्ट कितना जल्दी करता है।
(17:16) ये लोगों के सेंटीमेंट को कितना अच्छे से समझता है। इन सारी एबिलिटीज को देखकर लोगों को प्रमोट किया जाता है। और ये सब इमोशनल कोशेंट से जुड़ी हुई चीजें हैं। तो इमोशनल इंटेलिजेंस टू सम एक्सटेंट सर वो चीज है जिसके बिना जिंदगी की कल्पना ही नहीं है। ये कैटलिस्ट है लाइफ का। और दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारे एजुकेशन व्यवस्था में। नर्सरी से लगा के यूजी पीजी तक सोशियोलॉजी और साइकोलॉजी को छोड़ दिया तो इसमें पैराग्राफ भी लिखा हुआ नहीं है जबकि ये मैंडेटरी होना चाहिए हम एजुकेशन व्यवस्था में हम जैसे आपने बताया कि स्कूल में कॉलेजेस में
(17:51) इनको कम्युनिकेट नहीं किया गया एक्सप्रेस नहीं किया गया इसलिए लोग नहीं जानते हम लेकिन क्या आपको आज भी ये लगता है कि खराब रिलेशनशिप के कारण भी वन ऑफ द मोस्टेंट रीज़न इज आल्सो कम्युनिकेशन हां अभी कुछ दिन पहले की दो-चार दिन पहले की बात थी मैं कहीं बता रहा था कि कम्युनिकेशन मतलब हमारे इंसानों के जीवन में तो कम्युनिकेशन जो है वो इतना इंपॉर्टेंट रोल है कि थर्ड फोर्थ स्टैंडर्ड में एक मॉडल पढ़ाया जाता है। उस बहुत ही सिंपल है। कि आप मैसेज को पहले एनकोड करो। है ना? फिर उस मैसेज को जो सेंडर है वो मैसेज पहले एनकोड करता है कि मुझे कहना क्या है।
(18:32) हम है ना? अगर वो डायरेक्ट कह रहा है तो अपने ज़हन में उस बात को फ्रेम कर रहा है कि मुझे ये बात किस तरह से कहनी है या लिखना है तो कैसे लिखना है है ना लेटर भेजना है तो कैसे लिख के भेजना है उसने एनकोड किया उसने मैसेज भेज दिया सामने वाले ने उसको सुना पढ़ा देखा जो भी यानी कि उसने रिसीव किया हम उसने फिर उसको डिकोड किया हम है ना यानी कि उसने अपना मतलब निकाला उस से हम उसने डिकोड किया और वो उधर से बोलना शुरू किया तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की हम है ना हम अब कम्युनिकेशन अधूरा इसलिए रहा क्योंकि आपका काम है कि आपने डिकोड किया उसके बाद
(19:09) आप मुझसे पूछो कि तुम्हारा यह मतलब था विकास हम और मैं कह रहा हूं हां मेरा यही मतलब था तो कम्युनिकेशन कंप्लीट हुआ है। ओके अब वो कह रही है कि तुम्हारा ये मतलब था। मैं कह रहा हूं नहीं नहीं नहीं मेरा ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है। नहीं मुझे पता है तुम्हारा यही मतलब है। हम है ना? मुझे पता है तुम क्या सोच रहे हो। मुझे पता है तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है। है ना? मुझे पता है तुमने ऐसा क्यों बोला है। अब उसने अपनी ही दुनिया बना ली। हम अब मैं कह रहा हूं कि भाई साहब मेरा यह मीनिंग नहीं था इसके पीछे तुम गलत समझ रहे हो। नहीं नहीं मुझे सब पता है तुम्हारा
(19:36) क्या मीनिंग था। अब ये कम्युनिकेशन नहीं हो रहा है। अब ये बकवास हो रही है हम और इस बकवास का कोई [हंसी] एंड नहीं हो रहा है। है ना? तो रिश्तों में आप देखें ज्यादातर जगहों पर जब क्राइसिस आता है तो उन्हें ऐसा लगता है यार विकास हमने बहुत बात करके देख ली। कुछ नहीं हो रहा। नहीं असल में आपने बात की ही नहीं। वाह क्या बात है। आपने बहस की है। आप बेकार में आपने दीवार में सिर मारा है। [हंसी] ठीक है। हेल्दी कम्युनिकेशन में तो इतना समय ही नहीं लगता। हम आप देखें कि दुनिया भर के दो देशों के बड़े-बड़े विवाद ऐसे बैठ के ही सुलझते हैं। हम हेल्दी कम्युनिकेशन से।
(20:10) हम है ना? कि हम क्या कहना चाहते हैं? हमारा क्या मतलब है और आपका क्या मतलब है? तो दुनिया के बड़े-बड़े प्रॉब्लम्स ऐसे सॉल्व हो जाते हैं। तो क्या दो लोगों का रिलेशनशिप का मैटर सॉल्व नहीं हो सकता? लोग लड़ते लड़ते सड़क पे चले जाते हैं। कोर्ट में चले जाते हैं। पुलिस स्टेशन के चक्कर लगा रहे हैं। व्हाट इज द पॉइंट? हम आप समझ लो ना बैठ के। हम हम पर लोग कम्युनिकेट नहीं कर पाते। हम तो ये कम्युनिकेशन एक ऐसी चीज है जिसकी बात बहुत होती है। पर इसका यू कहते हैं इंप्लीमेंटेशन हम बहुत कम है। मतलब अभी भी वो अंडररेटेड है। हम ऐसा है। ईगो का क्या है? कितना बड़ा रोल है इसमें?
(20:48) ईगो और सेल्फ रिस्पेक्ट दो बातें हैं। बीइंग एन इमोशनल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट हम ईगो को उस लिस्ट में रखते हैं जो नेगेटिव इमोशंस की लिस्ट होती है। करेक्ट? और आत्मसम्मान को हम सकारात्मक साइड पर रखते हैं। तो ईगो क्योंकि नकारात्मकता है। ईगो जो है उसमें रिवेंजफुलनेस है। हम उसमें इंसान का बागी होना है। हम अ उस किसी भी चीज को इस तरह से ले लेना कि मेरे साथ ऐसा हुआ है तो मुझे इसी तरह से प्रतिक्रिया देनी है जिसमें जिस प्रतिक्रिया में डिस्ट्रक्शन शामिल है। किसी का बुरा करना या किसी को नीचा दिखाना या किसी को गलत कहना। तो इसलिए इस वाले
(21:26) इमोशन को कभी भी एप्रिशिएट तो नहीं किया जाएगा। बट इस इमोशन को हमेशा बैलेंस करने के लिए एक पॉजिटिव इमोशन हमेशा होता है कि सेल्फ रिस्पेक्ट इज देयर। आत्मसम्मान जो है वो जरूरी है। पर ईगो जो है वो डिस्ट्रक्टिव है। हम वैसा ईगो यानी ये कि आत्मसम्मान यानी कि यहां पर ऐसा चल रहा है। मैं ये नहीं सहन कर सकता तो मैं चला गया। हम और ईगो यानी ये कि इन्होंने मुझे यहां बुलाकर ऐसा कैसे कर दिया। अब मैं इनको बताता हूं मैं कौन हूं। हम तो मतलब मैंने मेरे जीवन में ये एजेंडा कभी नहीं था कि मुझे जाके कहीं किसी से लड़ना है। बट उस ईगो ने मेरे को लड़ाई
(22:00) करवा दी यहां पर। हम मतलब वो सारे फोकस वो सारी जरूरी चीजें पीछे छूट गई और अब मैं इस लड़ाई में शामिल हो गया क्योंकि मैं हर्ट हो गया। हम और आत्मसम्मान के लिए सिर्फ इतना जरूरी था कि आप उठो बाहर हो जाओ। हम सिर्फ इतना हम तो हमारी प्रतिक्रियाएं जो है वो इससे तय होती है कि आप कौन सा इमोशन एक्सपीरियंस करते हो। हम और हमारी अवेयरनेस हमको यह बताती है कि आप जो इमोशन एक्सपीरियंस कर रहे हो वह कौन सा है और वो कितना ठीक है। तो लोगों को अवेयरनेस ही नहीं है कि वो जो कर रहे हैं वो क्यों कर रहे हैं। हम आप देखें कि लोग प्यार करते हैं हम [गला साफ़ करने की आवाज़]
(22:34) फेल हो जाते हैं रिलेशनशिप में। हम जब आप पूछेंगे कि क्या हो गया? तो कहेंगे कि मैंने उसके लिए ये किया, वो किया, ऐसा किया, वैसा किया, मुझे क्या मिला? हम इमोशनल इंटेलिजेंट अगर कोई इमोशनली कोई इंटेलिजेंट है तो वो व्यक्ति इस बात को समझेगा कि अ कब कहां किस इमोशन का कैसे इस्तेमाल किया जाए हम जैसे इसमें एक इंटरेस्टिंग बात है वो ये कि अ हम ह्यूमन ब्रेन ऐसा ही बना है कि हम हमेशा अ किसी भी स्थिति में हम सर्वाइवल इंस्टिंक्ट हमारा पहला एक्टिव रहता है। है ना? मुझे ऐसा लगता है कि भ इंसानी दिमाग जो है हम वो जब इधर आया तो उसका मेन काम ये था कि तुम
(23:18) अपने को किसी तरह से सर्वाइव हम करवा के रखो। अपने को संभालो और खुद मुझे अगर अपने को संभालना है तो मुझे नेगेटिवली सोचना पड़ेगा कि कहीं ये कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहा है। हम इसने ऐसा कैसे कह दिया मुझे हम मैं ये नहीं सुन सकता। है ना? अगर किसी ने थोड़ा अटैकिंग मोड में आया तो मुझे गुस्सा दिखाना है। मतलब मुझे अपने को संभालने के लिए कोई ग्रो कर रहा है और मैं नहीं कर रहा तो मुझे वो जेलसी होनी चाहिए ताकि मैं भी ग्रो करूं। हम तो सिर्फ मैं मैं है उसमें हम सर्वाइवल के चलते। इसलिए आप देखना कि ईगो हो गया, जेलसी हो गया, घृणा हो गया, सैडनेस हो गया। जितने
(23:53) भी नेगेटिव इमोशंस हैं इसको आप बेसब्री हो गया। इसको आप इनवाइट नहीं करते। आप एस चाहते नहीं कभी कि मैं चाहता हूं मुझे गुस्सा आए या ईगो आए। यह अपने आप आते हैं। राइट? [गला साफ़ करने की आवाज़] और जितने भी पॉजिटिव इमोशंस हैं, हैप्पीनेस हो गया, कामनेस हो गया, पीस हो गया, जॉय हो गया, एक्साइटमेंट हो गया, लव हो गया, कंपैशन हो गया। ये साथ में मिलजुल के रहना, एक दूसरे का भला करना। ये वो है जो हमने क्रिएट किए। हम कि यार साथ में रह रहे हैं। हम एक समाज हैं। सबका अच्छा करो। सबका फायदा पहुंचाओ। सबको प्यार करो। किसी से कंपटीशन मत करो। कोई अगर आपको
(24:27) बुरा कह भी रहा है तो कहने दो। हम है ना? यह सब हमने क्रिएट किया है। तो इसलिए दिमाग ना एक कांस्टेंट केओस में है कि यार एक जिसके लिए मैं आया हूं और एक जो यह मुझे बता रहे हैं कि करना है। हम हम है ना? इसलिए लोग मुझे कई बार पूछते हैं सर ऐसा क्या होता है कि नेगेटिव इंसान अपने आप हो जाता है और पॉजिटिव होने के लिए मेहनत लगती है। हम पॉजिटिविटी के लिए बहुत प्रैक्टिस करनी पड़ती है ना कुछ। क्योंकि पॉजिटिविटी को हमने पैदा किया ना। हम नेगेटिविटी तो पहले से थी। वो तो हमारे सर्वाइवल के लिए जरूरी थी कि हमने पैदा की। हम्। तो इसलिए इमोशनल इंटेलिजेंस जो है यह एक
(25:00) मैकेनिज्म है। हम है ना? जो आपको अवेयर करता है कि जैसे ही कोई नेगेटिव इमोशन आया आपको रुकना है और आपको अपने को बोलना है कि रुको। इसका अल्टरनेट हमने क्या बनाया है? हम मैं वो चूज़ करूं। ऐसा क्योंकि अब हम जंगलों में तो रह नहीं रहे कि जहां मुझे मैं ही करना पड़ेगा। नहीं तो कोई खा जाएगा। हम अब मैं एक प्रोटेक्टेड एनवायरमेंट में हूं। जहां मुझे किसी का डर, कोई टेंशन नहीं है। मैं इवॉल्व [गला साफ़ करने की आवाज़] इवॉल्व हो रहा हूं, ग्रो कर रहा हूं। मेरे राइट्स, लॉज़ सब कुछ मुझे प्रोटेक्ट कर रहे हैं। हम तो मुझे यहां पर क्या है कि एक समरस्ता
(25:32) दिखानी है। हम प्यार मोहब्बत से रहना है सबको मिलजुल के। तो वो जो हमने बनाया है उसी को वैल्यू करना पड़ेगा। हम तो लाइफ अच्छी हो सकती है। तो ईगो जो है वो अगर आया है तो ऐसा नहीं कि ईगो मुझ में नहीं आ सकता। आप में नहीं आ सकता। हम में भी आता है। अहंकार हम में भी आता है। इट जस्ट [गला साफ़ करने की आवाज़] कि हम उसको ठहरने नहीं देते। बिल्कुल। हम ये तय करते हैं कि मतलब मुझे मैं चाहूं तो उसकी बैंड बजा सकता हूं। हम बट आई डोंट वांट टू रिएक्ट लीव इट हम तो उस ईगो के ऊपर ह्यूमिलिटी को हम चूज़ करते हैं हम कि एक व्यक्ति ग्रो करेगा तो उसके अंदर
(26:05) ईगो आएगा कि मैं बड़ा बन गया बट वो चूज़ करता है ग्राउंडेड रहना तो इमोशनल इंटेलिजेंस का मतलब यह है कि नेगेटिव इमोशन अगर किसी को आ रहे हैं और किसी को नहीं आ रहे हैं तो जिनको नहीं आ रहे हैं उनका मतलब ये नहीं है कि इनके अंदर ईगो है अहंकार या कुछ बुरा नहीं है। इनके अंदर भी सब कुछ है। आपके अंदर भी सब कुछ है। हम इन्होंने हमेशा चुना है हम कि इसका अल्टरनेट क्या है जो मेरी जिंदगी को ज्यादा स्थिर रख सकता है और क्योंकि आप भावनात्मक रूप से परिपक्व नहीं है तो आप उन्हीं भावनाओं को जो आपने एक्सपीरियंस कर ली उन्हीं के साथ बह जाते
(26:36) हो आप ठहरते नहीं आप कुछ और चुनते नहीं और फिर ऐसा कहते हैं कि वो जो फीलिंग आई नेगेटिविटी की वो चाहे ईगो हो चाहे कुछ भी एंगर हो उस फीलिंग के साथ इंसान क्या करता है कुछ स्टोरीज कनेक्ट करता है मेरी अगर लड़ाई हो गई अपनी वाइफ से किसी बात पर और मैंने गुस्से में थोड़ा ज्यादा बोल दिया। अब मुझे पता है कि मुझे इतना बुरा नहीं बोलना चाहिए था। बट वो गुस्से वाली फीलिंग थी। बोल दिया। तो अब अब उस फीलिंग के साथ मैं स्टोरीज जोड़ रहा हूं। अच्छा अगर इसने इसने ऐसा क्यों किया? अगर ये ऐसा करती ही नहीं तो मैं नहीं बोलता। दैट्स अ स्टोरी।
(27:09) हम है ना? फिर अगर मैंने गुस्सा कर दिया तो तुझे सुनना चाहिए था। तुझे इसको करेक्ट करना चाहिए था। तूने उल्टा 10 साल पुरानी बात क्यों निकाली? दैट्स अ स्टोरी। हम अच्छा हम दोनों जब लड़ रहे हैं तो तेरी मम्मी उधर खड़े-खड़े सुन रही है। वो आके नहीं बोल सकती थी कुछ। दैट्स अ स्टोरी कि मैं अपने एंगर को जस्टिफाई करने के लिए कुछ कहानियां इस एंगर के साथ जोड़ रहा हूं ताकि मुझे ये लगने लगे कि एंगर जो था वैलिड था हम इसकी जरूरत थी हम राइट? और ये वैलिडेशन मैं अपने को दे दूंगा दो चार ऐसी बकवास सी स्टोरीज के साथ जोड़ के हम और मैं अपने अंदर में एक मतलब मैं अपने को
(27:42) एक जस्ट एक वैलिडेशन दे दिया कि मुझे बदलाव की जरूरत नहीं है। और इमोशनली इंटेलिजेंट इंसान जो रहता है वो थोड़ा ऑनेस्ट होता है। वो असेस करता है। उसमें गट्स होते हैं खुद को कहने के कि नहीं मैं गलत था। मुझे नहीं करना चाहिए था। हम तो वो अवेयर रहता है कि आइंदा से ऐसा ना हो। हम और वो इवॉल्व होता रहता है। वो बेहतर बनता रहता है। और ये लोग ये जिंदगी भर उसी पैटर्न में जीते रहते हैं। इन्हें ऐसा लगता है कि इनका ईगो इनका गुस्सा जो है वो टूल है। एक स्वैगी फैक्टर है। अपने से किसी की सहन नहीं होती। अपन किसी की नहीं सुनते। अपन किसी की नहीं जलते।
(28:12) मैं तो ऐसा ही। इनको ऐसा अपन तो ऐसे ही हैं। इनको ऐसा लगता है कि भाई ये कोई प्राउड वाली बात है। भाई तुम लाचार हो। [हंसी] तुम इवॉल्व नहीं हुए हो। क्या बात है। जरा एजुकेट करो खुद को। थोड़ा ऊपर उठो। ये सब छोड़ो चक्कर। जिंदगी बड़ी खूबसूरत है। तो ये सब सीखने का जरूरत है। हम सुपर्ब। एक सवाल मेरा यहां पर ये है कि कई बार क्या होता है कि वी सी जब इन यू नो मेल एंड फीमेल्स जब मिलते हैं बात करते हैं तो हम देखते हैं कि समटाइ्स फीमेल आर दे आर मोर इमोशनल और मे बी दे दे आर वो अपने आप को एक्सप्रेस कर पाती हैं। बहुत ज्यादा एस कंपेयर टू मेल। तो मेल
(28:52) अपने इमोशंस को इतना सप्रेस कर क्यों रहा है? अभी भी क्यों नहीं समझ रहा? बहुत ही बेसिक आईडिया है जो आजकल हम सब सुनते ही है यहां वहां कि अ जो सेटअप था जैसे हम इवॉल्व होना शुरू हुए हैं हम तो वहीं पर ऐसा हो गया कि पहली चीज तो ये कि एक बच्चे को एक लड़की पैदा कर पा रही है। हम लड़के का उसमें कंट्रीब्यूशन है। बट एंड ऑफ द डे उसे ही उसको नर्चर करना है। उसे ही अपने वॉम में उसको रखना है। उसे ही उसको डिलीवर करना है। उसी के साथ उसके इमोशन जितने ज्यादा कनेक्टेड हैं, हम्। है ना? उतने शायद मतलब वह नहीं छोड़ सकती उसको। उसे ही उसको फीड करना है।
(29:33) हम कहते हैं ना कि अगर एक बच्चे ने बच्चा रोने लग गया तो कोई भी महिला उस बच्चे को देख के ही कह देगी कि इसने सुसु की है हम हम या इसकी तबीयत खराब है या इसको नींद आ रही है या इसको इरिटेशन हो रहा है। हम बट मेल्स को नहीं समझ में आती। उनको सिर्फ इतना समझ में आ रहा है कि रो रहा है मतलब अंदर ले जाके दे दो। हम मम्मी को या वाइफ को हम तो फीमेल्स एक्स्ट्रा सेंसिटिव इसलिए हैं क्योंकि उन्हें उस तरह की सिचुएशनंस फेस करनी है। हम उन्हें उस बच्चे को बड़ा करना है तो शी हैज़ टू बी एक्स्ट्रा सेंसिटिव। तो वो इमोशन को ज्यादा बारीकी से एड्रेस
(30:07) कर पाती है हम कि इस बच्चे को क्या चाहिए। हम मेल्स नहीं कर पाते। क्यों? क्योंकि वो सिचुएशन में कभी रहे नहीं ज्यादा। और क्योंकि फीमेल्स इस तरह से इवॉल्व हुई है तो इसलिए आप देखिए कि मैं अपनी मम्मी से उनके मुंह पर ऐसे झूठ नहीं बोल सकता। हम पापा को मैं घुमा सकता हूं बहुत ईजीली। मम्मी पकड़ लेगी मम्मी को। इनफैक्ट जो मदर्स होती हैं अगर आपने फोन पर भी झूठ बोला है ना तो वो जो टोनालिटी में थोड़ा सा डिफरेंस है वो उसमें भी कह देगी कि चुपचाप बता देना कहां पर है। [हंसी] है ना? मतलब आपकी गर्लफ्रेंड हो, वाइफ हो, मदर हो, सिस्टर हो, डॉटर हो।
(30:42) वुड अंडरस्टैंड। है ना? वो समझ जाती है। पापा नहीं समझ रहे। क्यों? क्योंकि उनको ईश्वर ने नवाजा है उस काबिलियत के साथ कि वो उतनी बारीकी उतना डिटेलिंग जो है वो नोटिस कर पाती है। हम राइट तो एक्स्ट्रा सेंसिटिव है क्योंकि वो बायोलॉजी ऐसी है और मतलब इस सृष्टि का नियम ही कुछ ऐसा रहा कि उसे ही बच्चे को बर्थ देना है और आगे बढ़ाना है। और उस प्रोसेस में मेल क्या करते हैं घर पे बैठे-बैठे? तो उनका काम ये था कि तुम बच्चा संभाल रही हो तो मैं कुछ बाहर से सामान ले आऊं। हम तो वो हमेशा जो हार्ड जॉब्स थी उन जॉब्स को करता रहा कि खाना लेके आना है या कोई
(31:18) एनिमल पीछे है तो भागना है या उससे प्रोटेक्ट करना है टैकल करना है भागने की निशाना लगाने की शिकार करने की सब क्षमताएं हमारे अंदर ज्यादा अच्छी विकसित हो गई और इसके चलते ऐसा हुआ है कि हम मसल वाइज भी ज्यादा पावरफुल है। हम ज्यादा तेज भाग सकते हैं। हम में ज्यादा जोर है हम और इन्हीं सब चीजों ने हमारे अंदर वो सेंटीमेंट भी डेवलप किया कि आई एम द प्रोटेक्टर हम आई एम द प्रोवाइडर हम और वो प्रोटेक्टर प्रोवाइडर वाली जो इमेज बनी उसमें वो जो एक संजीदगी है जो सेंसिटिविटी है वो हमने खो दी हम और फिर बाद में कुछ काम समाज ने भी कर दिया
(31:55) कि फिर वो मेल फीमेल वाला जो डिफरेंस है लड़का लड़की वाला क्या लड़की की [गला साफ़ करने की आवाज़] तरह रो रहा है वाला वो एक वो एक और एक लेयर है ऊपर की हम् वह लेयर हालांकि अब कम हो गई है हम पर यह एलिमेंट तो है और ऐसी चीज़ जो इतनी हजारों सालों की कंडीशनिंग से हुई होती हम वो इससे दो चार जनरेशन में खत्म नहीं होती हम टाइम लेती है हम पर हां मतलब ये डिफरेंस है हम कि दे आर एक्स्ट्रा सेंसिटिव इसलिए ऐसा बोलते हैं हम रिलेशनशिप के मामलों में कि अगर एक लड़की अपने रिश्तों में खुश नहीं है तो अपने काम पर फोकस नहीं कर पाएगी हम हम और अगर एक लड़का अपने काम में खुश नहीं है
(32:35) तो वो अपने रिश्ते पर फोकस नहीं कर पाएगा। क्या बात है। वाह। क्योंकि क्योंकि उसकी प्राइमरी नीड ये है कि काम सही चलना चाहिए क्योंकि नहीं तो घर कैसे चलेगा? हम और लड़की की नीड प्राइमरी शायद ये है कि रिश्ता ठीक चलना चाहिए। हम वैसा नहीं तो काम पर कैसे तो थोड़ा मतलब वो एक एक थीम है। मतलब हम मुझे तो पता नहीं ये बात कैसे साउंड करेगी। हो सकता है थोड़ा कुछ लोगों को ना भी पसंद आए। बट मुझे ऐसा लगता है कि इस थीम में कुछ एडजस्टमेंट्स करने की जरूरत थी। हम इस थीम को पूरा उथलपुथल करने की जरूरत कभी भी नहीं थी जो हमने कर दिया। हम [गला साफ़ करने की आवाज़]
(33:11) इस थीम में जरूरी राइट्स, जरूरी पावर्स, जरूरी अथॉरिटीज उनको मिलनी चाहिए लड़कियों को ताकि वो हमारे बराबर आ सके उन मामलों में जहां हम उनको सप्रेस कर रहे थे। और वो जिन चीजों में हमसे ज्यादा अच्छी थी हम उन चीजों में उनको रिकॉग्निशन मिलना चाहिए था। हम जिस पर हमने कभीेंस दी ही नहीं। दी। राइट? तो उन सब चीजों को फिक्स होना चाहिए था। बट अब यह वाला जो गेम आ गया ना कि इफ इफ मैन कैन डू इट, वुमेन कैन डू इट। हम तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये फिजूल की एक लड़ाई है। हर चीज में क्योंकि ऐसा बोलते हैं कि फीमेल ब्रेन जो है वो ज्यादा क्रिएटिव है।
(33:50) हां। तो वो ज्यादा क्रिएटिव है। वो नर्चरिंग की एबिलिटी है। वो रिश्तों को अच्छा संभाल सकती है। एचआर जैसे जॉब ज्यादा अच्छा कर सकती है। आपकी असिस्टेंट हमेशा फीमेल ही होनी चाहिए। हम तो वह आपको पीछे से बता देगी कि सर मुझे वह बंदा जो है वह ठीक नहीं लगा हम या मुझे कुछ तो गड़बड़ लगा जो सेंस आप नहीं कर पा रहे हम तो आपको हमेशा अच्छा असिस्ट करेगी वो ज्यादा अच्छा डिकोड करती है ना वो हर वो चीज जहां पर इंसान की देखरेख है या ह्यूमन रिसोर्स का इन्वॉल्वमेंट है वहां पर उसका काम ज्यादा अच्छा होगा हम तो वो उन चीजों में अच्छी है और मेल्स जो
(34:27) है वो लॉजिक वाली साइड पर ज्यादा अच्छे हैं वो कैलकुलेशंस में मैथ्स में इंजीनियरिंग में अच्छे हैं। तो देखिए कि हमने इन चीजों को सॉफ्ट मान लिया और इनको प्राइमरी मान लिया। ये बड़ी चीज है। और इनको इधर आना है। इनको इधर जाने का कोई शौक नहीं है। [हंसी] हमको उधर नहीं जाना है। हम उनको इधर [गला साफ़ करने की आवाज़] आना है। पर क्यों आना है भाई? हम क्या जरूरत है? आपका ब्रेन जिस चीज को सपोर्ट करता है आप करते रहो। अच्छा ऐसा नहीं है कि जो लड़का कर रहा है वो आप नहीं कर सकते। उसके लिए आपको अपने को थोड़ा एक्स्ट्रा चैलेंज करना पड़ेगा।
(34:54) हम भ लड़के क्या कुकिंग नहीं कर सकते या लड़के क्या क्रिएटिव नहीं हो सकते। हो सकता है। थोड़ा चैलेंज करना पड़ेगा। हम पर ये अगर ये बाय चॉइस हो रहा है तो ठीक है। एक लड़ाई की तरह क्यों कर रहे हैं हम इसको? [नाक से की जाने वाली आवाज़] हम थोड़ा वैसा है। ओके [हंसी] एक बेहतरीन किताब है। मैनर फ्रॉम मार्स एंड वमेन फ्रॉम वीनस जहां पर मेल और फीमेल की साइकोलॉजी के बारे में बताया गया है। ये कितना इंपॉर्टेंट है अपोजिट जेंडर की साइकोलॉजी को समझना। ये कितना जरूरी है आज के दौर में? यह बहुत ज्यादा जरूरी है जब हम कहते हैं कि कपल एजुकेशन बहुत इंपॉर्टेंट है कि
(35:29) रिलेशनशिप में भी शिक्षा होनी चाहिए। तो टू सम एक्सटेंट यही बात है शायद वो कि इसका कोर यही है हम कि दो लोगों को साथ में रहना है तो हमको उनकी साइकोलॉजिकल नीड समझनी चाहिए। उनकी इमोशनल नीड समझनी चाहिए। हम तो अ ऐसा कहते हैं कि 86% जो मेल्स हैं उनका जो बेस्ट फ्रेंड होता है वो दूसरा मेल होता है। करेक्ट चाहे वो अपनी सोलमेट से शादी करके बैठा हुआ है। हम बट उसका जो बेस्ट फ्रेंड है ना दूसरा मेल है। मेल है। और 78% लड़कियों की जो बेस्ट फ्रेंड है वो दूसरी लड़की है। हम ना कि उनका कोई मेल फ्रेंड या उनका कोई सोलमेट ठीक है सोलमेटलमेंट सब अपनी जगह है
(36:15) हम पर क्यों है ऐसा कि एक मेल दूसरे मेल के साथ एक फीमेल दूसरे फील ज्यादा कंपैटिबल जब वो अपनी जिंदगी के कुछ जरूरी मामलों में चर्चाएं करना चाहते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि वो एक दूसरे की कंपैटिबिलिटी माइंडसेट को ज्यादा अच्छा रीड करते हैं है ना तो वो वो कॉम्प्लेक्सिटी नहीं आती उसमें कि लड़की कुछ कह रही है और मैं सॉल्यूशन दे रहा हूं या मैं कुछ कह रहा हूं और लड़की मुझे सिर्फ सिंपथाइज कर रही है। हम मतलब उसमें वो कॉम्प्लेक्सिटी नहीं है। सो सॉर्टेड है कि एक लड़की दूसरी लड़की से बात कर रही है तो वो जानती है कि कि हम बात करने के लिए
(36:49) बात कर रहे हैं। हमें कोई सॉलशन नहीं चाहिए। हम हम और एक लड़का जब दूसरे लड़के से बात कर रहा है हम तो वो जानता है कि मुझे टू द पॉइंट बता क्या करूं? हम है ना? उसे वो सिर्फ कहने के लिए नहीं कह रहा वो बात। इनफैक्ट मेल्स के अंदर वो जो फैक्टर होता है मेल ईगो वाला हम वो इतना ज्यादा है कि अगर मैं कहीं सच में फदू निकल गया या सच में अगर मेरे साथ कुछ मैंने कोई चोट हो गई फेलियर आ गया तो पहली कोशिश मेरी ये रहेगी कि मैं दुनिया में किसी को बताऊं ना और खुद ब खुद ही उसको ठीक कर दूं हां करेक्ट जब वो चीज कहीं से भी वर्कआउट नहीं होती फिर मैं अपने किसी दोस्त को जाके बताऊंगा
(37:24) कि यार बताओ मेरे साथ ऐसा हो गया [हंसी] ठीक है नहीं तो बात नहीं बनेगी हम्म हम और लड़कियां इस चीज में बिल्कुल अपोजिट है। उनको घर में कॉकरोच भी दिखा तो उनको ऐसा लगता है किसी को तो बताना पड़ेगा [हंसी] कि यार घर में कॉकरोच दिखा। क्या करना है कॉकरोच का वो बाद में देखेंगे। बट वो बात तो होनी चाहिए। तो थोड़े अलग हैं। और यही खूबसूरती है कि हम अलग हैं। हम इसीलिए साथ में रहने का फन भी है। बट अगर फन तब है जब हम एक दूसरे को थोड़ा समझने का भाव रखें। हम थोड़ा एजुकेट कर लें। तो इजी था। अभी तक क्या हो रहा था ना सर? अभी तक भी चीजें चल ही रही जैसे मुझे कई
(37:59) लोग बोलते हैं कि यार ये तुम सब ये सब लेके आ गए तो अभी तक क्या हम हम लोगों ने जिंदगियां नहीं जीI हमारे पेरेंट्स ऐसा कहते हैं मेरी मम्मी पापा तो मैं उनको बताता हूं कि मैं बहुत छोटे से गांव से आता हूं मैं कम से कम 100 ऐसी महिलाएं बता सकता हूं उस गांव में जिनकी जिंदगियां घुट रही है पर उन्होंने कभी आवाज नहीं उठाई हम राइट क्यों नहीं आवाज उठाई क्योंकि समाज वो पसंद नहीं करता कभी भी हम कि कि आप बागी हो जाओ। हम तो समाज ने भी यही ठीक समझा कि जब जहां जो जहां जैसा है वो वहां वैसा ही रहे। चुप रहे अपना काम करें। हम है ना? तो वो सेपरेशन में जी रहे हैं।
(38:39) किसको जाके कहेंगे? हम हम और अब जब वो लोड खत्म हो गया उनके ऊपर से तो उन्होंने बोलना शुरू कर दिया। तो बोलना शुरू कर दिया तो टूटफूट शुरू हो गई। रिलेशनशिप में टूटना, डिवोर्सेस, ब्रेकअप्स ये सब स्टार्ट हो गए। तो मतलब पॉइंट यही है कि जब हम लोगों को समझते नहीं हम और वो लोग जब एमावर हो जाते हैं तो वो आपके साथ रहते नहीं। फिर हम अब वो या तो एंपावर होते ही नहीं तो उनको दबा के चलने देते जैसा चल रहा था। हम अब वो एंपावर हो गए हैं तो उनको समझना पड़ेगा। उनको जगह देनी पड़ेगी। उनको सीट देनी पड़ेगी बस। है ना? तभी सर्वाइवल पॉसिबल है। तभी बात बनेगी। हम
(39:14) तो मुझे यह चीज बड़ी हैरान करती है कि हम हमारे अंदर यह इतनी ख्वाहिश क्यों थी हम समाज को इतना एस्थेटिकली देखने की हम कि चाहे वो 100 जिंदगियां घुट रही है है ना पर क्योंकि व्यवस्था सही नजर आ रही है तो घुटने दो तो घुटने दो हम और आज क्योंकि उन लोगों ने आकर जब कह दिया ऐसा कि हमको नहीं रहना तो उन्हें उनका हक मिल रहा है बट समाज बिखरा हुआ लग रहा है तो हमें ऐसा लग रहा है गलत हो रहा है। [हंसी] क्या बात है क्या एस्थेटिकली चाहिए सब कुछ सब कुछ व्यवस्था अच्छी नजर आनी चाहिए अंदर चाहे कुछ भी चाहे अंदर लोगों की जिंदगियां बर्बाद हो जाए हम
(39:55) ऐसा थोड़ी होना चाहिए अब वो बदलाव हो रहा है तो थोड़ा सा हमको चुभ भी रहा है हम बहुत बुरा हो रहा है और कुछ लोग ऐसे हैं जो उस बदलाव में अपनी रोटियां सेक लेते हैं मतलब ऐसे कि सब कुछ अच्छा चल रहा था उन्होंने सोचा कि यार हर कोई तो गलत कर ही रहा है तो फिर मैं भी कर ही लूं तो कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने उस चीज को एक इनकैश किया हम या अपने फायदे के लिए यूज़ किया हम तो ओके सो एक कांसेप्ट बहुत आजकल लोग बहुत बात करते हैं। कासेप्ट ऑफ लव लैंग्वेजेस हम यह ओवरेटेड है या सही है यह जानना चाहिए लोगों को ये एक इंटरेस्टिंग थ्योरी है और इसमें ऐसा है कि और ये वाकई में मुझे लगता
(40:40) है कि ये है ओके है ना ये है बिल्कुल कि हर इंसान के अ हर इंसान के जो वैल्यूस के हिसाब से हम उसकी कंटेंटमेंट वाली जो चीजें हैं कि मुझे कहां से जीवन में फुलफिलमेंट महसूस हो रहा है, संतुष्टि मिल रही है, वो अलग-अलग हो सकती है। ठीक है? तो हर इंसान की जरूरत है। उनकी इमोशनल नीड्स अलग है। एंड सिंपल एस दैट। और क्योंकि मेरी इमोशनल नीड जो है उसके अकॉर्डिंग ही अगर मुझे कुछ कर दो आप तो आई विल बी हैप्पी। हम अगर गिफ्ट्स रिसीव करना मेरी लव लैंग्वेज है। है ना? तो मैं ये सोचूंगा कि मैं जा रहा अरे कुछ दे देते यार। है ना? मैं हर जगह गिफ्ट सोच रहा हूं। कोई हैंपर मिल
(41:20) जाए। है ना? कहीं कुछ ऑफर मिल जाए। कहीं डिस्काउंट मिल जाए कि ये मिल जाए वो मिल जाए। हम मजा आ रहा है। ऐसा नहीं है कि वो इंसान वो चीज अफोर्ड नहीं कर सकता या वो खुद नहीं खरीद सकता। हम बट उसकी लव लैंग्वेज वो है ना तो उसको हमेशा उस चीज में बहुत एक्स्ट्रा खुशी मिलेगी। अब मेरे साथ कैसा है पर्सनली? आई डोंट गो वेल विद गिफ्ट्स। हम कि मुझे गिफ्ट लेने का भी कोई खास क्रेज नहीं है। और मैं गिफ्ट्स देता भी नहीं। हम मतलब ठीक है देना चाहिए शायद थोड़ा रुड है। पर मतलब वो रहा नहीं उस साइड पे कभी। हम बट किसी के लिए वो चीज इंपॉर्टेंट है। वर्ड ऑफ़ अमेशन जो है किसी को ऐसा लगता है
(41:56) यार मुझे कुछ नहीं चाहिए। अगर मैंने कुछ अच्छा किया है तो कम से कम मुझे एप्रिशिएट कर दो। आप देखना बहुत सारी महिलाएं शिकायत करती है कि यार मुझे कुछ नहीं चाहिए यार। बस ये है कि मैं जितना करती हूं ना इनके लिए हम अगर ये कभी कह देते कि हां तूने किया इतना तो मुझे फ्यूल मिल जाता और आगे करते रहने के लिए। करेक्ट है। पर साले रिकॉग्नाइज भी नहीं कर रहे। हम है ना? तो किसी का है कि एक्ट ऑफ सर्विस जैसा उन्होंने लिखा उनकी किताब में हम कि हाथ बटा दिया तो लगा कि कुछ बात हो गई। अब मेरे लिए है ये एक्ट ऑफ सर्विस। हम मैं अपने खुद के लिए भी कभी चाय बना के भी
(42:31) नहीं पीता। अगर मैं 10 दिन भी अपने घर में अकेला हूं। हम वैसा है। और अगर कोई बहुत ही अजीज मेरा घर पे आया है। तो हो सकता है दुनिया के लिए चाय पीना बहुत आम बात होगी। बट मेरे लिए ऐसा है कि चल तेरे लिए चाय बना देता हूं। [हंसी] ये मैं किसी के लिए नहीं करता। हम तो मेरे लिए वो प्यार एक्सप्रेस करने का तरीका है कि हम मैं इसके लिए चाय बना रहा हूं। हम तो मेरी मेरे आसपास के लोगों को पता लगा आपने चाय बना के क्यों लाई? उनको ऐसा हो जाएगा कि यार ये आपके लिए कितना इंपॉर्टेंट होगा। है ना? तो उसमें मेरा प्यार का जो भाव है वो नजर आ रहा है।
(43:04) कि मैं कब किसी के लिए एक्स्ट्रा माइल जाऊंगा या फिर कब मैं अपने कंफर्ट के बाहर जाके कुछ करता हूं। हम है ना? तो वो मैं तब करता हूं जब मुझे भी वही चीज पसंद है। बहुत सही। तो मुझे अगर गिफ्ट लेना पसंद है ना तो मैं देने में यकीन रखूंगा। अगर मुझे अप्रिसिएशन पसंद है तो वो इंसान अप्रिशिएट भी करता होगा। कोई कुछ करता होगा तो अगर किसी को ये पसंद है कि कोई मेरा हाथ बटा दे तो वो भी हाथ बटाता होगा जहां भी जाता होगा। हम हम थोड़ा वैसा है। गिलव लैंग्वेज ये डिफाइन करती है कि मुझे क्या चीज करने का शौक है। हम वही मुझे चाहिए रिटर्न। हम [गला साफ़ करने की आवाज़]
(43:35) और बहुत कितनी सिंपल सी बात है। बट यहां लोग क्या करते हैं कि मुझे अगर एक्ट ऑफ सर्विस पसंद है तो मैं जबजब अपनी वाइफ को प्यार एक्सप्रेस कर रहा हूं। मैं सोच रहा हूं कि मैं इसका हाथ बैठा दूं किचन में जाके तो शी विल फील लव्ड। हम बट उसकी लव लैंग्वेज तो वो है ही नहीं। उसको ऐसा लग रहा है तुम बैठो ना यार इधर क्या टेंशन ले रहे हो। ये भी हम कर देते हैं। अपना काम करो। हम हम वो ऐसा कह रही है। ठीक है? उससे अ फिजिकल टच वाला उसका लव लैंग्वेज है। जो नॉन सेक्सुअल फिजिकल टच होता है कि अगर आप मूवी देख रहे हो मैं यहां बैठा हूं वो यहां बैठी है
(44:09) और अगर मैं उसका हाथ नहीं पकड़ूं तो थोड़ी देर में ऐसे हो जाएगी। हां हां है ना? [हंसी] तो अगर वो वहां कुछ काम कर रही है और मैं यहां बैठा हूं तो अगर उसने चाय रखी सपोज गैस के ऊपर हम तो वो जब तक उसको बीच में 30 40 50 सेकंड कि वो उबल रही है तो इतने में वो यहां आ जाएगी ऐसे ही यहां आएगी कुछ बाल में कुछ किया इधर हाथ देके खड़ी हो जाएगी फिर भागते हुए चली जाएगी उसको देखने तो क्योंकि उसकी लव लैंग्वेज है हम वो अगर पास में है और अगर वो किसी भी तरह से टच नहीं है तो उसको ऐसा लगता है कि आप मुझसे दूर-दूर क्यों हो रहा है हम पैसा हो
(44:44) तो मुझे यह समझना होगा कि उसकी लव लैंग्वेज क्या है? तो उसके लिए जब मुझे जब करना है तो मुझे उसी के स्टाइल में करना पड़ेगा। हम सिर्फ इतना बट सबकी लव लैंग्वेज डिफरेंट है वो प्रॉब्लम नहीं है। लोगों को लगता है कि क्योंकि मेरी ये है तो सामने वाले को भी इसी चीज में उतनी खुशी मिलेगी। हम नॉट नेसेसरी ये मिस्टेक है जो हम कर देते हैं। तो हमें लोगों के लव लैंग्वेज समझने चाहिए। हम बहुत आसान है और उसी तरह से हम अगर अभिव्यक्त करें अपना प्यार हम तो वह ज्यादा फलेफ बोलेगा। हम अमेजिंग वेरी गुड वेरी गुड वेरी नाइस। थैंक यू बहुत अमेजिंग। बहुत अच्छे से आपने
(45:19) एक्सप्रेस किया। मुझे यहां पर एक चीज जाननी है। अ आज के वक्त आज के दौर में हम अट्रैक्शन एक बड़ा इंपॉर्टेंट वर्ड है। आई गेट अट्रैक्टेड टुवर्ड्स समबडी। ठीक है? लेकिन यह भी देखा जाता है कि बहुत सारे लोग हर अट्रैक्शन को प्यार का नाम दे देते हैं। अट्रैक्शन और प्यार में एक्चुअली फर्क है क्या? मुझे ऐसा लगता है कि अट्रैक्शन जो है वो एस्थेटिक्स के भरोसे है सिर्फ बाहरी। हां एक्स्ट्रा नहीं तो कैसे होगा अट्रैक्शन? कोई इंसान मान लो अच्छा नहीं दिख रहा है। हम तो आपको अट्रैक्शन क्यों होगा? हम पर उस इंसान के साथ अगर आप रह रहे तो हो
(46:01) सकता है कि आपको ऐसा लगे यार इससे सही इंसान नहीं दुनिया में। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] तो जैसे हम दोस्तों में ही देख लें कि क्या हम वहां पे शक्ल देख के तो फ्रेंडशिप करते नहीं है। हम तो वहां हम टेक्निकली उस इंसान का व्यवहार उसका बिहेवियर देख के ही जुड़ते हैं उससे। करेक्ट है। बट रिलेशनशिप में ये गलतियां पूरी दुनिया करती है हम कि वहां हम सिर्फ एस्थेटिक्स की वजह से हम उस इंसान के साथ रिलेशन बनाते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो एक बहुत सिंपल फंडा हो गया क्योंकि हार्मोनली हम लोग इतने मोटिवेटेड है ना कि अगर हम किसी भी जगह गए
(46:32) किसी भी जगह मैं किसी क्लास में गया तो सबसे पहले मुझे ये करना है कि बाय डिफॉल्ट हां कंडीशंड ऐसे कि बाय डिफॉल्ट दो तीन लड़कियां जो मुझे अपने हिसाब से एस्थेटिकली अच्छी लग रही हैं। मैंने उनको टारगेट कर लिया। ये तीन लड़कियां अच्छी लग रही है। और हंटिंग शुरू और हंटिंग जब स्टार्ट हो गया है तो उन तीन में से एक आध जगह तो कुछ बात बन ही जाएगी। हम है ना? अब इसमें प्यार का भाव नहीं है। इसमें डोपामिन है। हम कि क्योंकि वो अच्छी लग रही थी ना तो देखो रिवॉर्ड केमिकल है ना कि उसको किसी तरह से अचीव कर लेना। हम तो वो एक सेंस ऑफ़ अचीवमेंट मेरे अंदर दे
(47:06) रहा है। हम कि देखा जो बंदी पसंद है दो हफ्ते में पटा लिया मैंने। उसके साथ घूम रहे हैं, फिर रहे हैं, समय बिता रहे हैं। अब उसकी कुछ आदतें नहीं पसंद है या उसको मेरी आदतें नहीं पसंद है या बिहेवियरल फ्रंट पे हम लोग चीजें वर्कआउट नहीं हो पा रही है। हमारी वैल्यू्यूज बहुत अलग-अलग हैं आपस में। 6 महीने में ब्रेकअप या फिर उस रिलेशनशिप में केओस रहेगा और खींचते रहेंगे उसको। तो इधर प्यार हुआ ही कहां बताओ? इधर प्यार हुआ ही कहां? यह जब मैंने 2017 में Instagram एक पेज बनाया था तो मैंने उस पेज का नाम दिया था गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड जीएफ बीएफ वर्सेस लवर्स। [हंसी]
(47:45) तो मेरे को लोग बोलते हैं भाई ये क्या है अतरंगी चीज नहीं। तो मैंने कहा यार इसमें ये है कि मुझे ऐसा लगता है कि जो लवर्स होते हैं वो तो लवर्स होते ही हैं। हम पर जो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड होते हैं वो सारे लवर्स नहीं होते। [हंसी] तो जो लोग प्यार में हैं वो तो प्यार में है ही। सही है। ठीक है? हो सकता है कि वो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड बने भी ना हो हम कि वो इंसान जो उस लड़की को चाह रहा है वो लड़की इसकी कभी हुई ही नहीं ना इसने उसको बताया हां ये बट ये लव ये उस प्यार में है ये उस इश्क में है उसके साथ आ और ये जो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड है
(48:16) हम ये हंटिंग वाले हैं सारे के सारे सही [हंसी] ये सब हंटिंग वाले हैं जिन्होंने टारगेट किया कि यार ये चाहिए वो चाहिए ये अच्छा है वो अच्छा है हम और एस्थेटिक्स को देखकर इन्होंने कनेक्शंस बना लिए अपने-अपने औकात के हिसाब से हम और [हंसी] वो वर्कआउट थोड़े टाइम बाद हुए तो हुए नहीं हुए तो नहीं हुए हम तो वहां ब्रेकअप्स फटाफट होते हैं हम तो वहां पर डेप्थ नहीं नजर आएगी आपको कभी हम वहां पर समर्पण नहीं नजर आएगा वहां पर त्याग नहीं नजर आएगा हम तो कहते हैं कि प्यार जो है वो वो भाव है मतलब हमने हैप्पीनेस भी है जॉय भी है एक्साइटमेंट भी है केयर भी है काइंडनेस भी
(48:55) है सब कुछ है बट हमने प्यार को इतना ज्यादा ऊपर क्यों रखा हुआ है हमने प्रेम को इतना ज्यादा प्योर क्यों माना है हम हमेशा से क्या बात है इस सेंटीमेंट में ऐसी तो इस सेंटीमेंट की खूबसूरती ये है कि जब आप किसी इंसान के लिए कुछ समर्पण कर रहे हो कुछ त्याग कर रहे हो अपनी अपना कंफर्ट अपनी चीजें छोड़ रहे हो उसकी खुशी के लिए और ऐसा करके आपको संतुष्टि मिल रही है हम दिस इज लव हम हम है ना कि वो ठीक से खा ले चाहे मेरे हक का ही खा ले हम हम हम तो मुझे अच्छा लगेगा। अगर वह भूखा रह गया ना तो मैं नहीं चैन से रह पाऊंगा। हम हम और उसने ठीक से खा लिया और आप भूखे सो गए।
(49:37) बट आप संतुष्टि से सोए हम कि यार कम से कम उसने खा लिया। ये प्रेम है। ये प्यार है। जहां पर मिलता कुछ नहीं है। जहां कोई रिवॉर्ड नहीं है। जहां सिर्फ देना ही उस प्यार का प्रकृति है। वही नेचर है। है ना? सैक्रिफाइस करना और त्याग करना सबमिशन में समर्पण में रहना और उसमें रहकर जो संतुष्टि मिल रही है इसलिए वो प्यार मुझे ऐसा लगता है कि इसलिए वो इमोशन थोड़ा सा स्पेशल है इसलिए वो थोड़ा अलग है हम कि यार सिर्फ देकर आपको वो संतुष्टि कैसे मिल सकती है बट होता है ऐसा इसलिए वो लव जो है वो इतना हम उसको हैरारकी में इतना ऊपर रखते हैं हम
(50:14) अब ये जो जनरेशन है जो ऐसे 10 लोगों को एक साथ हेलो हाय के मैसेज डाल रहे हैं जिसका रिप्लाई आ गया उसी से बात चालू कर कर दी। हम अब इसमें कहां है यह वाली बात? लव तो इंट्रोड्यूस ही नहीं हुआ असल में। चाहे वो रिलेशनशिप साल साल रहा भी होगा और वो खत्म भी हो गया होगा। वो गिव एंड टेक ट्रांजैक्शनल ही रहा पूरा। हम वैसा क्योंकि कंपैटिबिलिटी थोड़ी थी तो दो साल चल भी गया। हम बट प्यार तो है ही नहीं। हम वाह वेरी गुड। यानी कि अब आपका मानना है कि एक तरफा प्यार भी प्यार है। हां भाई प्यार का उधर से क्या रिस्पांस आ रहा है इससे लेना देना ही नहीं है। हम
(50:54) [गला साफ़ करने की आवाज़] जैसे एक छोटा बच्चा है वो नहीं सुन रहा हमारी। हम कह रहे हैं कि ये मत करो फिर भी वो कर रहा है। वो सुन भी नहीं रहा है। वो ध्यान भी नहीं दे रहा है। हम तो क्या हम ये बोलते हैं कि ठीक है फिर तू निकल अब यहां से। नहीं हम क्योंकि हम [गला साफ़ करने की आवाज़] प्यार में है ना उसके साथ [हंसी] तो हमें वहां से कुछ मिले कि नहीं मिले? हम उस चाहत के साथ थोड़ी कुछ करते हैं। हम हम तो इसलिए करते हैं क्योंकि वो कर वो नहीं करेंगे तो शायद हम बुरा महसूस करेंगे कि हमने नहीं किया। हम हम तो प्यार जो है वो अब जैसे हैप्पीनेस है तो
(51:27) ऐसा नहीं है ना कि हैप्पीनेस दोनों तरफ से होनी चाहिए। यार मैं खुश हूं तो हूं। हम है ना? यह तो यह तो ईश्वर की विशेष कृपा है हम कि आप जिस इंसान के साथ प्रेम में हैं, प्यार में हैं, वही आपके साथ प्यार में है। ये तो आप स्पेशली ब्लेस्ड हैं। फिर क्या बात है। और फिर ऐसी चीज को तो आपको पूजना चाहिए। ऐसी चीजों को तो आपको किसी कीमत पे खराब होने ही नहीं देना चाहिए। हम वो तो इतनी ज्यादा बड़ी एक तरह से नियामत है ईश्वर की। हम तो मुझे ऐसा लगता है कि बहुत ऐसे अभाग्य लोग हैं जिनके जीवन में उनको ये अनुभव कभी मिलता ही नहीं है कि उन्हें किसी से इस तरह प्यार हो
(52:02) हम कि वो उनके लिए करने का ही भाव रखें हम और अभी वो अगर जब हो जाए तो उसका अनुभव अलग है। हम तो बड़ा खूबसूरत एक्सपीरियंस है। क्या बात है। क्या बात है। आज के टाइम में अह डू यू डू यू योरसेल्फ बिलीव्स इन यू नो लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप होती है? हां रिलेशनशिप होती है पर आजकल उनका सर्वाइवल बहुत मुश्किल है यार इनसिक्योरिटीज के इश्यूज बहुत हैं। हम और हम लोग प्रलोभनों से इतने घिरे हुए हैं कि उस रिश्ते को चलाने के लिए हम बाकी सब चीजों का त्याग करें। हर वो [गला साफ़ करने की आवाज़] चीज जो हमारे आमने सामने दिख रही है हम उन सब चीजों की तरफ हम नजर भी ना डालें।
(52:45) हम इतनी स्ट्रेंथ अब ज्यादातर लोगों में रही नहीं। हम तो लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप चलते हैं और बहुत अच्छे चलते हैं। पर वहां एक्स्ट्रा केयर, एक्स्ट्रा अटेंशन और एक्स्ट्रा मेरे ख्याल से एफर्ट्स की जरूरत है उस रिलेशनशिप को। मतलब आपको एक आम रिश्ते से थोड़ा सा ज्यादा वहां [गला साफ़ करने की आवाज़] पर देना होगा। और देना मतलब कुछ करना नहीं है। मतलब अंतर्मन से हमें प्रिपेयर होना होगा उस रिलेशनशिप को चलाने के लिए। लॉन्ग डिस्टेंस वाला वो इनसिक्योरिटी से भरा होता है क्योंकि हम तो वहां पर छटपटाहट बहुत है हम तो कम होता जा रहा है मतलब देखा जाए तो
(53:24) और सर्वाइवल थोड़ा मुश्किल है। आपको ये लगता है कि सोशल मीडिया रिलेशनशिप को आज के टाइम में ज्यादा डैमेज कर रहा है। सोशल मीडिया जो है वो एक मतलब एक तरह की मिठाई है जो अगर ज्यादा खा ली तो नुकसान देगी। हम है ना? अगर उसका संतुलन में कंजमशन होता रहे तो शायद आप आनंद भी लेंगे हम और नुकसान भी नहीं करेगी। तो सोशल मीडिया वैसा है कि ना सिर्फ रिलेशनशिप पर वो जिंदगी के बहुत सारे डायमेंशंस को खराब कर रहा है। हम क्योंकि हम इंसानों की तकलीफ ये है कि हमारा एक सोशल ब्लूप्रिंट पहले से ही बना हुआ है। यानी कि जो बच्चा अभी पैदा भी नहीं हुआ ना
(54:04) उसका भी एक ब्लूप्रिंट रेडी है। कि वो पैदा होगा तो उसको कौन से स्कूल भेजना है। हम उसको क्या बनाना है? क्या पढ़ाना है? वो इंसान कैसा होना चाहिए? उसके पेरेंट्स ने उस जो एक सामाजिक व्यवस्था है, उन्होंने सब तय करके रखा हुआ है। यह 10 ऑप्शन है। इसमें से कुछ डिसाइड कर लो आप। हम क्या [गला साफ़ करने की आवाज़] बनाओगे? सिंगर बनाओगे, स्पोर्ट्समैन बनाओगे, अच्छा एकेडमशियन बनाओगे, कोई क्रिएटिव साइड कुछ करवाओगे या क्या करवाओगे? 810 ऑप्शंस हैं। हम ये करवाना है। तो हम हमारा एक क्या है कि एक ब्लूप्रिंट है। हम प्रोफार्मा है कि ऐसे ही होगा सब कुछ। हम
(54:35) तो उस वो ब्लूप्रिंट की समस्या यह है कि जैसे किसी भी कॉलोनी के अंदर हम दो घर हैं हम एक घर जो है वो एकदम बड़ा बंगलो है BMW Mercedes सब है उधर वर्ल्ड टूर करते रहते हैं बहुत हाई क्लास लाइफ स्टाइल है बट कास्टेंट स्ट्रेस में जीते हैं और एक घर ऐसा है जो छोटा सा घर है टू बीएचके वाला Wagon R टाइप कोई कार है एवरेज लेवल के स्कूल में उनका बच्चा पढ़ता हम एवरेज जीवनशैली जीत है हम पर रोज ईश्वर को धन्यवाद बोलते हैं कि हम खुश हैं बहुत है हम समाज जो है वो किसे ज्यादा सफल मान रहा है दोनों में से हां जो दिख रहा है [हंसी] है ना समाज क्योंकि इसलिए सफल मान रहा है
(55:21) क्योंकि हमारे उस ब्लूप्रिंट में हम बड़ी गाड़ी बड़ा घर बड़ी सक्सेस बड़ा ट्रैवल इसको ज्यादा महत्व है हां है ना और मतलब जो कंटेंटमेंट है ये कम में खुश होने वाली जो बात है उसको वो जगह नहीं मिली। हम मतलब एक इंसान अगर कम में खुश है ना तो कोई कोई भी उठाकर कह देगा कि तुझसे उम्मीद नहीं थी यार कम से कम तू कुछ करता जीवन में। है ना? तू कैसे मतलब ऐसे बैठा हुआ है। मतलब वैसी वाली बात है। करेक्ट करेक्ट। तो हमने क्या किया कि उस स्ट्रेसफुल लाइफ को नहीं देखा। हमने ये देखा कि इन्होंने क्या-क्या अचीव कर लिया है। हम तो एक सोशल ब्लूप्रिंट है। उस ब्लूप्रिंट
(55:54) के हिसाब से सफलता की एक डेफिनेशन है। हम कि ये सफलता ऐसी दिखती है। जब ऐसा घर, ऐसी गाड़ी, ऐसी लाइफ ताई लोग। हम तो क्या होता है कि हम जब रिलेशनशिप्स हैं तो रिलेशनशिप को लेकर भी एक ब्लूप्रिंट है। हम है ना? अब ऐसा हो रहा था पहले कि सोशल मीडिया नहीं था तो सब अपनी जिंदगियां जी रहे थे। सब अपना गोल सेट कर रहे थे। उसको अचीव कर रहे थे। हम अब सोशल मीडिया की वजह से हम इतने लोगों की जिंदगियों को देख रहे हैं कि हमें ऐसा लगता है उसने ऐसा किया। हमने तो वैसा किया ही नहीं। उसने वैसा किया। हमने क्या किया आज तक? एक मतलब एक बहुत ही बिलो एवरेज
(56:27) फाइनेंसियली जो व्यक्ति है ना उसके मन में भी ये भाव चल रहा है कि एक इंटरनेशनल ट्रिप तो मारना है यार। कुछ भी हो जाए। भाई क्यों मारना है यार? [हंसी] छोड़ना है यार। क्यों इस दुख में जी रहा है? सब बहुत अच्छा है। इसलिए मारना है क्योंकि आसपास का हर इंसान होकर आ गया है। हम है ना? तो उसको वो बात सता रही है। तो हम सोशल कंपैरिजन में पड़ गए और सोशल कंपैरिजन में अ हमको ऐसा महसूस करा दिया है कि हम इनफ नहीं है। हमारे पास बेस्ट नहीं है। अभी हम बहुत चीजों में कमजोर हैं या बहुत सारी चीजें कम है। हम और सोशल मीडिया जो है उसकी जो डार्क साइड
(56:59) है वो ये है कि वहां पर सिर्फ अच्छी चीजें प्रोजेक्ट होती है। फेलियर्स नहीं प्रोजेक्ट होते। हम हम है ना? तो सब अपना अच्छा तो बता रहे हैं बट अंदर की बात कोई नहीं बता रहा है। हम कहते हैं कि रिसर्चेस ये बताती है कि इंडिया में 58% लोगों को जो मैरिड है उसका 58% लोगों को लगता है कि मेरा पार्टनर मेरा सोलमेट नहीं है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मतलब 10 में से छह लोगों को है ना? 10 में से छह लोगों को ऐसा लगता है कि हम बेहतर डिर्व करते थे। हमें थोड़ा और अच्छा मिलना चाहिए था। राइट? और उन छह में से एक या दो ऐसे होंगे जिन्होंने अडप्ट कर लिया कि यार अब जो है
(57:34) यही है। हम जैसा भी है यही है और इसी के साथ रहना है। बट चार से पांच लोग ऐसे हैं जो रोज लड़ रहे हैं। जिनके घर में रोज युद्ध चल रहे हैं। हम जो कास्टेंट फाइट में है कि उस इंसान को किसी तरह मैं वैसा बना दूं जैसा मुझे चाहिए था। और सामने वाला भी यही सोच रहा है। और उनकी लड़ाईयां एंड होने का नाम नहीं ले रही है। बट उन लोगों की भी सोशल मीडिया प्रोफाइल देखोगे तो अच्छे-अच्छे फोटो डले हुए हैं। [हंसी] अब बीइंग अ रिलेशनशिप कोच मैं आपको बता रहा हूं कि जो कपल मेरे पास आकर अपनी दुर्गति बता रहा है जब उसकी सोशल मीडिया साइट अगर आप विजिट कर लो एक बार तो लगेगा यार
(58:10) सब लोग यहां तो कुछ ऐसा नजर नहीं आ रहा क्योंकि लोगों ने अपनी डिजिटल इमेज को इतना मेंटेन करके रखा है ना और लोग उससे प्रभावित हो रहे हैं हम और अपनी खुद की जिंदगी को कम आंक रहे हैं गॉड तो ये डिजास्टर है ना हम इसमें संतुलन गड़बड़ है तो सोशल मीडिया से ज्यादा इस तरह से इंस्पायर होना लोगों कीियों से कंपेयर करना वो सोशल कंपैरिजन में नहीं हो तो सोशल मीडिया इज अ ग्रेट टूल हम अगर आप कास्टेंट सोशल कंपैरिजन में है तो सोशल मीडिया जो है आपको कभी भी उस ग्रेटट्यूड के फीलिंग में आने ही नहीं देगा कि आपको लगे कि यार जितना है बहुत है वैसा है
(58:42) ओके अमेजिंग डू यू बिलीव इन मैनिफेस्टेशन [हंसी] इसके बारे में तो मुझे हालांकि कुछ पूछना था जाने से पहले आपसे अच्छा बट मेरा बचपन से अभी तक का अनुभव ऐसा है कि मैनिफेस्टेशन का जो पूरा मैकेनिज्म है वह तो मुझे नहीं पता पर मुझे इतना जरूर समझ में आता है कि एक इंसान जो फरारी के लिए काम करता है और एक इंसान जो Honda City के लिए काम करता है वो सोच जो है कि मुझे क्या चाहिए और मैं क्या विजुअलाइज करता हूं वो सोच उनके कोर्स ऑफ एक्शन को डिफाइन कर देती है हम कि फरारी वाला व्यक्ति नेचुरली ज्यादा काम
(59:26) करना ज्यादा ज्यादा मेहनत करना, ज्यादा हाथ पैर मारना, ज्यादा रिस्क लेने का इंटेंट अपने अंदर डेवलप कर लेता है। बिल्कुल सही है। और Honda City वाला व्यक्ति नेचुरली कंपेटिवली कम कम रहेगा उससे। और क्योंकि वो कोर्स ऑफ एक्शन बना है कि मुझे इतना तो करना ही है, उतना तो करना ही है। तो मैं ज्यादा मेहनत कर रहा हूं। मैं ज्यादा काम कर रहा हूं। मैं ज्यादा कमिटेड हूं और वर्क एथिक्स मेरे उस अकॉर्डिंग है तो नेचुरली मेरी उस इंसान से सफल होने की ज्यादा सफल होने की संभावनाएं हम होगी क्योंकि मेरा जो स्टाइल है काम करने का वो उससे कहीं ज्यादा इवॉल्वड है
(59:59) और उससे कहीं ज्यादा इंटेंस है हम तो मुझे ऐसा लगता है कि मैनिफेस्टेशन में जो फिजिक्स इनवॉल्वड है कि विचार की फ्रीक्वेंसी उसका अ जो प्रकृति है जो नेचर है उसकी फ्रीक्वेंसी के साथ कनेक्ट करना। फिर उन चीजों का आपकी तरफ आना। ये जो थ्योरी है ये तो अपनी जगह होगी और काम करती ही होगी। हम बट अगर कोई कोई सिर्फ इस तरह से सोच रहा है कि तो भी मुझे लगता है कि मैनिफेस्टेशन इज अ ग्रेट टूल क्योंकि वो आपके वर्क एथिक्स ही बदल देती है। हम वो आपके इंटेंट को चेंज कर देती है। आपके कोर्स ऑफ़ एक्शन को डिफाइन कर देती है। इसलिए जरूरी है कि आपको बहुत क्रिस्टल
(1:00:35) क्लियर पता हो कि मुझे क्या चाहिए। हम ताकि आपका कोर्स ऑफ़ एक्शन जो उतना ही क्लियर डिफाइंड हो और आप उस दिशा में काम करें। तो मुझे नहीं लगता कि कोई व्यक्ति जिसको फरारी चाहिए वो दिन भर सोफे पर बैठ सकता है। तो वो विचार जो है उस विचार ने उसके अंदर ये भाव पैदा किया कि भाई निकलो और कुछ करो हम तो अ इस लिहाज से मैंने अपनी लाइफ में बहुत सारी चीजें अचीव की है। नाइस और आगे भी बहुत सारी चीजें सोचता रहता हूं और मुझे लगता है कि इन कारणों से मैं इस फैशन को कंटिन्यू रखूंगा [हंसी] कि हां मतलब इससे मेरे अंदर इंटेंट डेवलप होता है और इसलिए बड़े सपने देखना, बड़ी
(1:01:14) चीजें विजुअलाइज करना, बड़े फॉर्म पे अपने को विजुअलाइज करना, बड़ी हस्तियों के बीच में अपने को देखना या बड़ा [गला साफ़ करने की आवाज़] इंपैक्ट क्रिएट करते हुए अपने को सोचना ये सब मैं करता रहता हूं ताकि फिर मुझे समझ में आता है कि जब मैं अपने को इस तरह से देख रहा हूं कि मैंने लाखों लोगों की जिंदगीियों में कुछ इंपैक्ट डाला है। तो फिर मेरा पड़ोसी उधर क्या पानी फैला दे रहा है और क्या कर दे रहा है तो मेरे को फिजूल लगता है वो सब फालतू चीजों में पड़ना। मुझे ऐसा लगता है यार अपना क्या विज़ है और इससे भी कौन बहस करेगा इससे भी कौन
(1:01:43) पड़ेगा चक्कर में तो कोर्स ऑफ़ एक्शन डिफाइन हो गया कि आप क्या चाहते थे उस कोर्स ऑफ़ एक्शन में ये आ ही नहीं रहा कि आप ये जो छोटी-मोटी हवाएं चलती रहती है आसपास हम इसमें आप हिल जाएं हम तो आपको इन हवाओं के ऊपर उड़ना पड़ेगा वो क्लियर हो जाता है अमेजिंग तो ये मेरी समझ है इसके बारे में बहुत सही बहुत सही अ क्या जैसे क्या होता है लोगों के अपने एक्सपीरियंस होते हैं हां फॉर एग्जांपल रिलेशनशिप में जब हम मैनिफेस्टेशन की बात करते हैं हम तो एक इंसान का एक्सपीरियंस शुरू में कोई खराब रहा हम और फिर बहुत बार जब वो पैटर्न क्रिएट हो चुके होते हैं हम
(1:02:20) तो उस वो इंसान सिमिलर तरह के लोग और भी अट्रैक्ट करता है अपने जीवन में क्योंकि वो करेक्शन नहीं कर पाता है अपनी सोच में तो डू यू बिलीव इन दिस ऐसा होता है हां ऐसा होता है ना कि हम लोग मैंने ऐसे बहुत केसेस देखे हैं कि व्यक्ति रिलेशनशिप में फेल हो गया है। उसे नया रिलेशनशिप बनाना है। हम तो ये वही नहीं सोच रहा है कि वो फेल हो गया है। हम वो नए में पीछे वाले को ढूंढ रहा है। ओ हम कि यार उसकी वो बात अलग थी। उसकी वो चीज ऐसी थी। उसकी वो चीज वैसी थी। अब नए वाले में आप वो ढूंढ रहे हो। अरे ये भाई वो इतना ही अच्छा था तो आपका वर्कआउट
(1:02:57) हो रहा होता ना। हम तो पहले थी ये असेसमेंट कि हम समझे कि वो उतना अच्छा भी नहीं था। है ना? और फिर यह कि हमें आगे जो चाहिए वो कैसा हो हम तो उसकी क्लियर डेफिनेशन होनी चाहिए। मतलब बीइंग एन इमोशनल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट मुझे समझ में आता है कि आप किसी भी चीज को किस तरह से पर्सव करते हो हम ये सबसे बड़ी गेम है हम कि जैसे आप 100 लोगों से जाके पूछो प्यार क्या है? तो 100 डेफिनेशन दे देंगे। हां हां एक कह देगा प्यार वो है यार जिसमें इंसान आपके लिए सब कुछ छोड़कर आ जाए। हम हम और एक कह रहा है कि प्यार वो है यार जिसमें इंसान आपके साथ बैठना चाहता है पर
(1:03:37) फिर भी आपके साथ ना होकर वो कहीं दूर जाकर कमा रहा है ताकि आप खुश रह सको। आ है ना हम तो सबकी अपनी डेफिनेशन है। डेफिनेशन मतलब मुझे जो चाहिए मेरे कन्वीनियंस के हिसाब से मैंने एक डेफिनेशन बना ली। हम क्योंकि मुझे ये चाहिए तो मेरे हिसाब से अगर तुम मुझसे प्यार करते तो ये करते हम है ना? तो मैंने प्यार को जैसे पर्सव किया है हम वो एक एक खाका तैयार है दिमाग में। अब जिस दिन एक ऐसा इंसान टकरा जाए हम जिसका बिहेवियर जिसका स्टाइल उस ब्लूप्रिंट के साथ थोड़ा सा मेल खा रहा है उस इंसान को देख के लगेगा शी इज़ द वन। हां है ना? हो सकता है कि कोई और जो है उसने उसको
(1:04:17) रिजेक्ट किया है। हम बट वो मुझे पसंद आ गई है। क्यों? क्योंकि मेरे जो जिस तरह से मैंने पर्सव किया प्यार को या मैंने अपने रिलेशनशिप को जिस तरह से सोचा उसमें फिट बैठ रही है। हम तो सच कहूं तो जैसे अब शांति पीस की बात कर लो। पीस आपके लिए कुछ हो सकती है मेरे लिए कुछ हो सकती है। हम है ना? तो आपने हमेशा पीस को किस तरह से पर्सव किया और मैंने कैसे पर्सीव किया। किसी को ऐसा लग रहा है कि पहाड़ों में ही शांति है। है ना? और किसी को ऐसा लग रहा है कि घर के सामने जो पार्क है ना वो भी काफी है। है ना? आप जा के उधर बैठो तो सही। आप ऐसी बड़ी-बड़ी बातें क्यों कर रहे हो कि
(1:04:52) पहाड़ों में जाना है? तो जब जाएंगे तब जाएंगे। हमें तो रोज चाहिए। तो वो पार्क भी काफी है। वहां भी नेचर है। वहां भी पेड़ पौधे हैं। वहां भी ग्रीनरी है। वहां भी आप म्यूजिक लगाइए, बैठिए, वॉक करिए। यू विल फील पीस। हम इट जस्ट कि हम कैसे पर्सव करते हैं। अब जिन्होंने वैसे ही पर्सव किया है ना वो मौका ढूंढते रहते हैं कि मौका मिले तो उधर जाएं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] अरे यार कब तक भागते रहोगे? हम चीजों को आप डिफरेंटली सोच कर आसान भी बना सकते हो। हम ऐसा तो हम चीजों को कैसे पर्सव करते हैं वैसे ही हमें वो चीजें महसूस होती है हम
(1:05:24) और रिलेशनशिप में भी यह होता है कि आप जब रिलेशनशिप में पढ़ना चाहते हो तो आपने उस चीज को किस तरह से इमेजिन किया है किस तरह से सोचा है हम जब वैसा हो जाएगा तो आपको ऐसा लगेगा कि सही मिल गया। तो यह असेसमेंट होना चाहिए कि आपकी सोच, आपकी जो धारणाएं हैं या आपकी कंडीशनिंग है या आपके प्रीवियस एक्सपीरियंसेस के जो पैटर्न्स आपके दिमाग में बने हैं हम वो कितने ठीक हैं। अगर वो ठीक नहीं है तो उनको चेंज कर लो क्योंकि वो सोच बदल जाएगी ना तो उस पार्क में भी शांति मिलेगी। हम अब किसी को बार के अंदर बैठ के ही वो दो पैक मार के ही शांति मिल रही है। हम
(1:05:57) है ना? तो उस उसका उसने वैसे पर्सव किया है कि अगर मुझे थोड़ा पीस चाहिए या थोड़ा सा रिलैक्सेशन चाहिए ना तो फिर हाथ में ड्रिंक होना चाहिए यार। मुझे मजा नहीं आता ना। मेरे को नहीं हो पाता कहीं से। उसने ये सोच रखा है कि मेरा हो ही नहीं पाता है कहीं से। हम जबकि पीस जो है वो जो सेंटीमेंट है उस सेंटीमेंट का ऐसा कोई नियम नहीं है। हम कि मैं इसको ऐसे ही होने वाली हूं। [हंसी] है ना? बट उस व्यक्ति ने अपने लिए क्या लिमिटेशन क्रिएट कर ली? हम तो आप उस लिमिटेशन को ब्रेक कर दो। हम आप नए एमावरिंग बिलीफ डेवलप कर लो। तो वही चीज आपको और आप देखना कि जिन लोगों ने
(1:06:31) ट्रांसफॉर्मेशन अपने जीवन में की है वो बोलते हैं ऐसा हम कि यार पहले मैं बहुत अल्कोहलिक था और जब मैंने छोड़ा अब मुझे इस पार्क में और यहां चहक महक चलती रहती है यहीं पे अच्छा लगता है। अब मेरा मन भी नहीं करता वहां जाने का। अब मुझे ये चाहिए हम कहने कि वो बिलीफ शिफ्ट हो गया। तो जो चीज पहले वहां मिल रही थी अब वो यहां मिल रही है। इसका मतलब यह है कि हर चीज हर जगह उपलब्ध है। हम आप उसको ट्यून कहां बैठ के करते हो हम ये आप तय करते हो और ये एक धारणा से होता है और धारणाएं बदली जा सकती है। बहुत सही। है ना? और अगर आपको लग रहा है यार मुझसे
(1:07:04) नहीं हो पा रहा तो आप किसी एक्सपर्ट की हेल्प ले लो। हम कि वो थेरेपीस करें। वो आपके साथ सेशंस करें, बैठे, बातें करें और उन धारणाओं को शिफ्ट करने में आपकी मदद कर दे। जस्ट एन अकाउंटेबिलिटी पार्टनर हम सिर्फ ऐसा हम तो मतलब जिंदगी बड़ी खूबसूरत है और बड़ी आसान है। आप उसको थोड़ा सा स्मार्टली या उसको थोड़ा सा वाइड थोड़ा ब्रॉड नजरिए से देखें। वैसे नहीं कि हमने ऐसा देखा है तो यही होता है। हम वो ना हो बस [गला साफ़ करने की आवाज़] हम ऐसा कोई रिलेशनशिप मिथ जो आप बहुत ज्यादा सुनते हैं और आपको लगता है नहीं कोई भी मिथ कोई गाइडेंस कोई मिथ
(1:07:40) [गला साफ़ करने की आवाज़] एक बहुत बड़ा मिथ तो ये है कि रिलेशनशिप जो है वो रिवॉर्ड का मामला है। है ना? लोगों को ऐसा लगता है कि मुझे अब शादी इसलिए कर लेनी चाहिए क्योंकि अब शादी जरूरी है। मतलब एज इफ शादी होने से कोई एक रिवॉर्ड आ जाएगा उनके लाइफ में। हम या मुझे एक गर्लफ्रेंड इसलिए चाहिए क्योंकि गर्लफ्रेंड होने के अपने कोई रिवॉर्ड्स हैं। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] है ना? दैट्स अ मिथ। रिलेशनशिप इज़ मोर अबाउट सैक्रिफाइसेस, इट्स मोर अबाउट रिस्पांसिबिलिटी, इट्स मोर अबाउट इनकन्वीनियंस। हम और जब ये तीनों चीजें करके आपको अच्छा लगे
(1:08:14) तो ही पढ़ो। पढ़ो नहीं तो यू आर नॉट रेडी। तो आप उससे बचिए। हम कोई इंसान रेडी नहीं है और आप उसके सिर पर रिलेशनशिप ले जा के रख देंगे वो उसके जीवन का सबसे बड़ा ट्रॉमा बन जाएगा। करेक्ट। तो रिलेशनशिप हमेशा हर इंसान के लिए एक जैसा काम नहीं करते। हम वो अगर इन तीन चीजों के लिए इनक्वीनियंस रिस्पांसिबिलिटी और सैक्रिफाइसेस इनके लिए रेडी है तो ही रिलेशनशिप आपके लिए है। सिर्फ लवी डवी वाली चीजें जो अच्छी हैपनिंग साइड है उसकी उसको देखकर रिलेशनशिप बन रहा है तो आप गड्ढे में भी कर सकते हो। [हंसी] हम ये एक इंसान जो मल्टीपल रिलेशनशिप में आता है
(1:08:52) पहले किसी के साथ होता है उसको छोड़ता है थोड़े दिन बाद मतलब मन भर जाता है सो मतलब जेनुइनली उसको फील होता है कि नहीं यार आई एम नॉट गेटिंग व्हाट आई वांट फ्रॉम दिस रिलेशनशिप देन मूव टू अनदर वन देन मूव टू अनदर वन यहां सबसे बड़ी गलती क्या है देखिए हमारा जो ब्रेन है वो इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन पे काम करता है हम [गला साफ़ करने की आवाज़] कि बर्गर बर्गर भी सामने रखा है और डंबल भी सामने रखा है। [हंसी] है ना? या तो पसीना बहा लो या बैठ के बर्गर खा लो। हम तो मन बर्गर का ही करेगा। हम टीवी है, रिमोट है, एसी है या तो Netflix लगा लो या बाहर जाके मेहनतें करो धूप में।
(1:09:31) हम तो मन यही करेगा। तो इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन हम लोग इसलिए इस तरह से प्रोग्राम्ड है क्योंकि वही बात है कि जब जंगलों में हो रहे थे हम तो तब हमारे ऐसा नहीं होता था ना कि फरारी लेनी है, ड्रीम्स है, गोल्स है, फाइव ईयर डाउन द लाइन, 10 ईयर है। ये तो था नहीं। हम तब ऐसा था कि अभी अभी क्या चाहिए? हम तो अभी जो चाहिए वही सबसे ज्यादाेंट है। हम है ना? अभी यहां पे थ्रेट लग रहा है यहां से भागना ही इंपॉर्टेंट है और कुछ भी इंपॉर्टेंट नहीं है। चाहे आप कुछ जरूरी चीज लेने आए थे भूल जाओगे उसको बस भागो। तो वो इंस्टेंट इस मोमेंट पे क्या जरूरी
(1:10:02) है? हम वो सोचते रहने के लिए हम लोग प्रोग्राम्ड हैं ज्यादा। हम बट अब उन जंगलों में नहीं है। हम एक बहुत ही व्यवस्थित सेटअप में जी रहे हैं। हम तो अब हम क्या प्लान कर पाते हैं? 2 साल में क्या चाहिए? 5 साल में, 10 साल में, 20 साल में, 50 साल में अब हम ये प्लानिंग कर रहे हैं। तो ब्रेन उसके लिए रेडी नहीं है। ये हमारी क्रिएशन है। हम राइट? तो अब क्या हो रहा है कि इंसान जब किसी इंसान के क्लोज जाता है। मान लीजिए कि मुझे हार्मोनल मोटिवेशन है अंदर। मुझे कोई लड़की मेरे हिसाब से अच्छी लगी। हम तो टेस्टोस्टेरोन इज देयर। हम उस लड़की को अगर मैं चस करता हूं तो
(1:10:36) डोपामिन इज देयर। हम उससे अगर बात बनती है तो ऑक्सीटोसिन इज देयर। हम तो यह जो सारी केमिस्ट्री है बॉडी के अंदर की वह मुझे अच्छा महसूस करा रही है उस इंसान के होने से हम जिसको कहते हैं हवाओं में रहना फील गुड फैक्टर इट्स अ ग्लोरियस पार्ट ऑफ रिलेशनशिप हम है ना जिसको हनीमून पीरियड कहते हैं हम तो ये ग्लोरियस फेस जो होता है ये इनिशियल फज़ होता है रिलेशनशिप का जो 6 से 18 महीने के बीच में कभी भी डाइलट हो जाता है हम क्योंकि एक ही इंसान को बार-बार सामने पूरे टाइम देख के कितना सरप्राइज हो लोगे है ना हम एक कि इंसान को बार-बार सामने देख के
(1:11:11) कितना लव्ड फील कर लोगे। हम कितना सेक्स कर लोगे, कितना रोमांस कर लोगे। तो एक टाइम के बाद वो ऑक्सीटोसिन है या वो डोपामिन मिल नहीं रहा उस रिलेशनशिप में। हम बट वही चीज वापस रिपीट हो सकती है। अगर कैरेक्टर चेंज हो जाए इंसान नया आ जाए तो फिर वो जीरो से शुरू होगा। हम तो क्या होता है कि किसी भी रिलेशनशिप की जो शुरुआत होती है वो यूफोरिक होती है। हम एक यूफोरिक एक्सपीरियंस होता है। जैसे किसी ने कोई सब्सटेंस ले लिया हम है ना? तो वो यूफोरिक एक्सपीरियंस होता है हम कि उतनी देर के लिए बहुत मजेदार लग रहा है और वो उस एक्सपीरियंस को बार-बार लेने के
(1:11:44) लिए बार-बार वो कंज्यूम करता है। इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन में हम क्या करते हैं? हम अपने आपको वो ग्रेटिफिकेशन देना चाहते हैं कि यार अभी कोई ऐसी चीज जो मुझे वो वो यूफोरिक एक्सपीरियंस दे सके। अच्छा फील कराएगा। अच्छा फील करा सके तो वो करना है। सही। तो आपको एक इंटरेस्टिंग बात बता देता हूं कि एक्स्ट्रा मेटल अफेयर्स जो होते हैं वो ज्यादातर वो लोग करते हैं जो हैप्पीली मैरिड है। हम इंटरेस्टिंग है। है ना? हमें ऐसा लगता है कि ये व्यक्ति खुश नहीं होगा इसलिए ऐसा कर रहा है। नहीं अगर वो खुश नहीं होता तो शायद उधर ही हाथ पैर मार रहा होता।
(1:12:18) कुछ ठीक करूं। क्योंकि ये कंटेंटमेंट में है। एफर्टलेसली इनका रिलेशनशिप चल रहा है। तो जैसा आपने शुरुआत में नहीं कहा था कि वो एडवेंचर चाहिए। अब करूं क्या? हम रिलेशनशिप अच्छा ही चल रहा है। सब बढ़िया ही है। हम तो बढ़िया है मतलब थोड़ी बोर्डम है। हम स्पार्क नहीं है। हम तो वो यूफोरिक एक्सपीरियंस कहां से आएगा फिर? हम वो एक नया इंसान से आ जाता है। तो व्यक्ति जो है वो करता रहता है। और कुछ लोग टेंडेंसी होती है कुछ लोगों की कि वो हैबचुअली इस काम को रिपीट करते रहते हैं। हम वो उनके एक्स्ट्रा मेडल अफेयर मतलब एक पे नहीं रुकता। चलते ही रहते हैं। जितनी जगह
(1:12:53) चल रहा है उतना यूफोरिया हम उतना मजा है। तो एक नशा है। हम तो जो लोग इस तरह की टेंडेंसीज में वो आमतौर पर एकदम से निकल भी नहीं पाते। उन्हें पता है कि यार उन्होंने बहुत अच्छा नाम कमाया है। बहुत अच्छी पोजीशन बनाई है। सब बर्बाद हो गया है समाज में। सब नाम खराब हो गया है। सबको पता लग गया है कि ये किस तरह का इंसान है। और उसको ऐसा लग रहा है यार कि मैंने जिंदगी में जो कमाया वो सब पानी में चला गया। फिर तो रुक जाना चाहिए कि नहीं? हम रुकना चाहता है बट फिर वापस जहां मौका मिलेगा फिर हरकत कर देगा। क्यों? क्योंकि आदतन ऐसी चीजें कर रहा है।
(1:13:29) इस तरह के पैटर्न्स बन गए हैं कि वो रिपीट होते रहेंगे। बहुत स्ट्रांग बिल चाहिए ऐसे पैटर्न से बाहर निकलने के लिए। तो वो यूफोरिया जो है वो चाहे अल्कोहल हो, चाहे ड्रग्स हो, चाहे कोई भी सब्सटेंस हो, अ चाहे ट्रैवलिंग हो, घूमना हो, है [हंसी] ना? चाहे अपने दोस्तों से मिलना हो, हम है ना? चाहे एक रिलेशनशिप बनाना हो। ये सब यूफोरिक एक्सपीरियंसेस हैं। हम इसलिए हम इन सब चीजों को बार-बार करना चाहते हैं। हम बट ऐसा कहते हैं कि अ जीनियस नोस वेयर टू स्टॉप। हम तो एक बुद्धिमान इंसान को पता होता है कि हां यह करना है बट इतना करके रुक जाना है हम
(1:14:05) और जो लोग भावनात्मक रूप से परिपक्व नहीं है वो उसी रास्ते चलते चलते चले जाते हैं रिलेशनशिप में वर्स्ट एडवाइस जो आपने आज तक सुनी है कौन सी वाली बताऊं [हंसी] मल्टीपल बताओ आप हां रिलेशनशिप में वर्स्ट एडवाइस की बच्चा पैदा कर लो सब ठीक हो जाएगा ओ और ये ये मतलब सारे जहाजों को जला देने वाला रास्ता ही है। पर ये रिलेशनशिप के लिए ठीक नहीं है। स्पेशली तब जब आप दोनों का ही सर्वाइवल ठीक नहीं है और आप एक तीसरी जिंदगी को ले आओगे और आपको लगता है उसके भरोसे आपका जीवन चलेगा। म गॉड ये तो गलत है। ओके बेस्ट एडवाइस यू हैव हर्ड। अ मुझे लगता है कि
(1:14:52) भावनात्मक रूप से थोड़ा परिपक्व रहना और इंपल्सिव ना रहते हुए स्थिरता रखना और हेल्दी कम्युनिकेट कर लेना ये कितने भी बड़े मसले को सॉल्व कर सकता है मतलब अगर आपको चलाना है तो भी नहीं चलाना है तो भी म्यूचुअली शांति से बहुत कुछ चीजें हैंडल ओवर होती है हेल्थली कम्युनिकेट करना और स्थिरता रखना ओके ऐसी कोई किताब या किताबें जो आप सजेस्ट करते हैं कि अगर कोई रिलेशनशिप में है तो यार ये तो पढ़ना चाहिए। जानोगे तो ही आप बेहतर कर पाओगे। जैसे दो तीन बुक का आपने जिक्र भी किया था। वो तो बहुत ज्यादा पॉपुलर है ही। फाइव लव लैंग्वेज हो गई। मेन आर फ्रॉम मार्स वमेन
(1:15:31) आर फ्रॉम वीनस एलन पीस और बारबरा पीस ने काफी कुछ लिखा है। हम रिलेशनशिप के ऊपर तीन चार किताबें। मुझे लगता है सारी पढ़नी चाहिए। अमेजिंग। और उसके अलावा इमोशनल इंटेलिजेंस के अराउंड कुछ किताबें हैं। मतलब इमोशनल इंटेलिजेंस और ह्यूमन साइकोलॉजी पर अगर कुछ लिखा है तो वो पढ़ना चाहिए क्योंकि यह कैटलिस्ट है। हम अ अपने इमोशंस को कैसे हम एड्रेस करें, कैसे हम उसको मैनेज करें, कैसे उनको समझें? इतना भर इंसान समझ ले ना तो उसकी पर्सनल प्रोफेशनल लाइफ हर जगह वो बहुत एक्सेल कर सकता है। हम अमेजिंग अमेजिंग। आई थिंक भाई मुझे ऐसा लगता है कि जितने भी लोग यहां तक पडकास्ट
(1:16:10) में रहे हैं सबको आज बहुत कुछ मिल गया है और सच में जिस सहजता से आप ये सब एक्सप्रेस कर रहे हैं इससे ये समझ में आ रहा है कि आपका जो कंट्रीब्यूशन टुवर्ड्स पीपल है इज सो मच नो एंड ऑब्वियसली वो आपके वीडियोस के थ्रू आपके कंटेंट के थ्रू झलकता ही है लेकिन जेनुइनली बोल रहा हूं मैं आपको कि आपसे इंटरेक्ट करके मुझे समझ में आया कुछ नए मायने समझ में आए रिलेशन रिलेशनशिप के कुछ ऐसी चीजें समझ में आई जिस जिस पर्सपेक्टिव को मैं समझ नहीं पा रहा था आज वो आपसे सुनने को मिला समझने को मिला और बहुत सारी कुछ ऐसी भी चीजें हैं जो मैं मैं जीवन में
(1:16:44) मानता हूं तो आप आए तो समझ में आया कि चलो मैं सही सोच रहा हूं एंड आई एम श्योर अबाउट इट जितने भी लोग ये पडकास्ट देख रहे हैं आज आपको बहुत सारे ऐसे सीक्रेट समझ में आए होंगे जो आपको रिलेशनशिप में आपकी मदद जरूर करने वाले हैं। कोई भी ऐसी जो बेस्ट चीज आपको लगी, आप मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखना कि दिस इज़ यह सबसे इंपॉर्टेंट चीज थी जो मेरे लिए थी। वो कमेंट बॉक्स में करना और साथ के साथ मैं डिस्क्रिप्शन में सर के सारे लिंक डाल दूंगा डिस्क्रिप्शन में। इनका कंटेंट कंज्यूम जरूर करना। इतना प्यारा कंटेंट बनाते हैं। चाहे वो शॉर्ट फॉर्म
(1:17:16) वीडियो हो, चाहे वो लॉन्ग फॉर्म वीडियो हो। इतना प्यारा कंटेंट है और मुझे ऐसा लगता है कि रिलेशनशिप एक ऐसी चीज है जो हम सबसे ज्यादा इग्नोर करते हैं। लेकिन यह मुझे लगता है ये आर्ट का हिस्सा है। इसको सीखा जा सकता है। अगर आप सही कंटेंट कंज्यूम कर रहे हैं, सही किताबें पढ़ रहे हैं तो आप जान सकते हैं कि आप अपने रिलेशनशिप को बेहतर कैसे कर सकते हैं। बहुत सारी चीजें हम खराब कर चुके होते हैं। लेकिन उनको हील भी किया जा सकता है। खराब जो चीजें हैं उनको बेहतर भी अपनी गलतियों को सुधारा भी जा सकता है। ना कि यह देखकर कि सामने वाले इंसान में क्या
(1:17:46) गलती है। बट ये देखकर एटलीस्ट कि मैं क्या बदल सकता हूं। एंड एंड ऑल द क्रेडिट गोज़ टू विकास आपको। थैंक यू सो मच। थैंक यू सो मच। मुझे बहुत खुशी हुई। बहुत ही अच्छा लगा। हम्म और उम्मीद है कि ये कुछ वैल्यू ऐड करेगा और अगर सच में वैल्यू ऐड की तो और आगे बातचीत करेंगे। अब्सोलुटली। अब्सोलुटली। पार्ट टू लिख देना। कमेंट बॉक्स में पार्ट टू लिख देना कि आपको लगा अभी प्रेशर आ जाएगा ना। जितने [हंसी] नंबर होंगे पार्ट टू पर उतना उतना जल्दी दोबारा से ब्रडकास्ट करेंगे। विकास भाई इट वास प्रेजर मीटिंग यू जेनुइनली बोल रहा हूं फ्रॉम माय हार्ट आई फेल्ट अमेजिंग
(1:18:20) मीटिंग यू बहुत ही जेन्युइन फील हुआ आपके साथ ये वक्त बिता कर एंड लुकिंग फॉरवर्ड टू सी यू अगेन थैंक यू सो मच डेफिनेटली जरूर मिलेंगे थैंक्स अ लॉट थैंक्स अ लॉट
Author Name:Readers Books Club
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@ReadersBooksClub
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=tSdvU-T9MpM
Title: The Psychology of Love: Love, Breakups, Overthinking & Attachment Psychology @YourVikas
Author Name: Readers Books Club
Description: Why do relationships fail even when two people genuinely love each other? Why do we overthink, struggle with trust issues, feel emotionally disconnected, or repeatedly attract the wrong partners? Is love alone enough to make a relationship last, or is there a deeper psychology behind healthy and successful relationships?
In this insightful episode of Readers Books Club, Dr Amiett Kumar sits down with Vikas Chaudhary to explore the psychology of love, relationships, emotional intelligence, attachment styles, and the hidden reasons why modern relationships struggle. From communication gaps and jealousy to emotional unavailability, breakup healing, and personal boundaries, this conversation explores what it really takes to build a healthy, meaningful, and long-lasting relationship.
💡 In This Podcast, You'll Discover:
✅ Why modern relationships fail despite love and attraction.
✅ The biggest relationship mistakes that slowly destroy emotional connection.
✅ How overthinking, jealousy, and trust issues affect relationships.
✅ Why communication gaps and emotional distance lead to breakups.
✅ How to identify red flags and emotionally unavailable partners.
✅ Why we repeatedly attract or choose the wrong partners.
✅ How to heal emotionally after a painful breakup.
✅ The importance of emotional intelligence in love and relationships.
✅ Why men often struggle to express their emotions.
✅ How to establish healthy boundaries without hurting your relationship.
✅ The difference between privacy and secrecy in relationships.
✅ How attachment styles influence emotional security and relationship satisfaction.
✅ Why understanding your partner is more important than trying to change them.
✅ The secrets to building trust, emotional intimacy, and lasting love.
📚 Relationship Books & Powerful Ideas Discussed:
📖 The 5 Love Languages by Gary Chapman — Understanding how people express and receive love.
📖 Men Are from Mars, Women Are from Venus by John Gray — Understanding differences in communication and emotional needs.
📖 Attached by Amir Levine and Rachel Heller — Understanding attachment styles and emotional security.
❤️ Whether you're single, dating, married, going through a breakup, or struggling to understand your partner, this conversation offers valuable perspectives on love, emotional healing, and building stronger relationships. Because a successful relationship isn't just about finding the right person. It's also about understanding yourself, communicating better, and choosing to nurture love every single day.
====================================================
Connect with Vikas Choudhary Ji:
📌YouTube: / @yourvikas
📌Instagram: / yourviikas
📌Facebook: / yourviikas
====================================================
📘 Manifest Anything in 100 Days (English): https://link.amazon/B05dtDgTF
📘 Manifest Anything in 100 Days (Hindi): https://link.amazon/B0iS6ruc3
📤Join Sampann Sadhana: https://amiettkumar.com/meditation/
📤All Course: https://amiettkumar.com/allcourses/
================================================
Important Social Media Links
💎 Instagram: / readersbooksclub
💎 Facebook: / readersbooksclub
💎 Dr Amiett Kumar: / @amiettkumar
💎 Dr Amiett Kumar Live: / @amiettkumarlive
💎 Sampann Sadhana: / @sampannsadhana
================================================
For Collaboration & Promotion
Email us at: connect@readersbooksclub.com
================================================
00:00:00 Trailer
00:02:35 Introducing Vikas Choudhary Ji
00:04:21 Why Are Modern Relationships Changing?
00:11:14 What Is Emotional Intelligence?
00:20:50 Ego vs Self-Respect
00:40:18 Understanding Love Languages
00:45:43 Love vs Attraction
00:52:18 Can Long-Distance Relationships Work?
00:53:26 How Social Media Affects Relationships
01:08:44 Why Do People Keep Changing Partners?
01:14:11 The Worst Relationship Advice
01:15:16 Recommended Books on Relationships
01:16:03 Final Learnings & Closing Thoughts
#RelationshipPsychology #PsychologyOfLove #RelationshipAdvice #WhyRelationshipsFail #HealthyRelationships #ModernRelationships #LoveAndRelationships #EmotionalIntelligence #RelationshipGoals #ReadersBooksClub
Transcript:
(00:00) कॉन्सेप्ट ऑफ लव लैंग्वेजेस। यह ओवर रेटेड है या सही है यह। जानना चाहिए लोगों को। रिलेशनशिप के डायनामिक्स पिछले एक दो डिकेड्स में जिस तरह से शिफ्ट हुए हैं टू सम एक्सटेंट सोसाइटी रेडी नहीं थी इस ट्रांजिशन के लिए एकदम। हर जगह पर इंसान को चाहिए कि मेरे पास ये राइट्स क्यों नहीं है। मैं ये क्यों नहीं कर सकता, मैं वो क्यों नहीं कर सकता। यानी कि आपका मानना है कि एक तरफा प्यार भी प्यार है। मेल एंड फीमेल्स जब मिलते हैं बात करते हैं तो हम देखते हैं कि समटाइम्स फीमेल आर दे आर मोर इमोशनल और मे बी वो अपने आपको एक्सप्रेस कर पाती है। एज़
(00:28) कंपेयर टू मेल। मेल अपने इमोशंस को इतना सप्रेस कर क्यों रहा है? अभी भी क्यों नहीं समझेगा? इसलिए ऐसा बोलते हैं हम रिलेशनशिप के मामलों में कि अगर एक लड़की अपने रिश्तों में खुश नहीं है तो अपने काम पर फोकस नहीं कर पाएगी। और अगर एक लड़का अपने काम में खुश नहीं है तो अपने रिश्ते पर फोकस नहीं कर पाएगा। क्या बात है वाह। ये कितना इंपॉर्टेंट है अपोजिट जेंडर की साइकोलॉजी को समझना। कि एक लड़की दूसरी लड़की से बात कर रही है तो वो जानती है कि हम बात करने के लिए बात कर रहे हैं। हमें कोई सॉल्यूशन नहीं चाहिए। और एक लड़का जब दूसरे लड़के से बात
(00:53) कर रहा है तो वो जानता है मुझे टू द पॉइंट बता क्या करूं। मान लीजिए किसी समाज में 10 लोग हैं और 10 में से एक व्यक्ति एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर कर रहा है तो नौ लोगों को रास नहीं आएगा तो वो नौ लोग कहेंगे कि यार यह गलत है। यानी कि समाज उस चीज को बुरा मानेगा। बट उसी समाज में जब सात लोग एक्स्ट्रा मेरिटल करेंगे यानी कि जब तक आप आपकी भावनाओं को हैंडल करने के लिए परिपक्व नहीं है। तब तक आप कभी जीवन में आध्यात्मिक नहीं हो पाएंगे। हम्म। हाई आईक्यू आपको एक अच्छी जॉब दिला सकता है। बट हाई इमोशनल कोशंट आपको वहां सस्टेन रख सकता है और आपको आगे ग्रो करवा सकता
(01:19) है। डू यू योरसेल्फ बिलीव्स इन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप? हां रिलेशनशिप होती है पर आजकल उनका सर्वाइवल बहुत मुश्किल है यार। इनसिक्योरिटीज के इश्यूज बहुत हैं कि उस रिश्ते को चलाने के लिए हम बाकी सब चीजों का त्याग करें। हर वो चीज जो हमारे आमने सामने दिख रही है उन सब चीजों की तरफ हम नजर भी ना डालें। इसलिए आप भारत में देखना कि स्पिरिचुअलिटी के नाम पर एक बहुत बड़ी आबादी स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस रोजाना करती है। पर उनसे उनका गुस्सा नहीं संभलता। तो 60% से ज्यादा कैदी किसी क्रिमिनल बैकग्राउंड से नहीं आए। ना उनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड कभी रहा। और उनका
(01:47) कहना है कि ये जिस क्राइम की वजह से हम यहां आए हैं, यह भी हम करना नहीं चाहते थे। ये हीट ऑफ द मोमेंट में हुआ। वुमेन एंपावरमेंट एक अच्छी कैंपेन है, एक अच्छा इनिशिएटिव है, बहुत अच्छी चीजें हैं। बट जब उसमें ऐसा होने लग जाए कि लड़के सिगरेट पी सकते हैं सड़क पे खड़े होके। तो लड़कियां क्यों नहीं? तो हम क्यों नहीं पी सकती? तो जब सोच का स्तर यह हो जाए तो फिर समाज में एक दुर्दशा निश्चित तौर पे आना शुरू होती है। एक इंसान जो मल्टीपल रिलेशनशिप में आता है। पहले किसी के साथ होता है उसको छोड़ता है। थोड़े दिन बाद [संगीत] मतलब मन भर
(02:10) जाता है। जेन्युइनली उसको फील होता है। नहीं यार आई एम नॉट गेटिंग व्हाट आई वांट फ्रॉम दिस रिलेशनशिप। देन मूव टू अनदर वन। देन मूव टू अनदर वन। यहां सबसे बड़ी गलती क्या है? रिलेशनशिप में वर्स्ट एडवाइस जो आपने आज तक सुनी [संगीत] है। कौन सी वाली बताऊं? [हंसी] मल्टीपल बताता हूं आपको। बहुत सारे लोग हर अट्रैक्शन को प्यार का नाम दे देते हैं। अट्रैक्शन और प्यार में एक्चुअली फर्क है क्या? डू यू बिलीव इन मैनिफेस्टेशन? इसके बारे में तो मुझे हालांकि कुछ पूछना था जाने से पहले आपसे। अच्छा। विकास जी आपका हमारे पॉडकास्ट में बहुत-बहुत स्वागत है।
(02:41) थैंक यू। थैंक्स अ लॉट यार। आई एम रियली हैप्पी। [हंसी] सच में आपका कंटेंट बहुत ही इंप्रेसिव है। और मुझे लगता है कि एक रिलेशनशिप एक ऐसा एरिया है जहां पर बहुत सारे डेफिनेटली सवाल आते होंगे। मैं ज्यादातर मैनिफेस्टेशन लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन के बारे में बात करता हूं। हम दो कॉमन सबसे जो कॉमन इशूज़ हैं वो रहते हैं। या तो पैसा या रिलेशनशिप। हम मतलब ये एट पार ही चलता है हमेशा। बराबर ही आते रहते हैं। करेक्ट। करेक्ट। तो इसका मतलब डेफिनेटली यही है कि लोग रिलेशनशिप एक ऐसा एरिया है जहां पर लोग स्ट्रगल कर रहे हैं या यह भी कह सकते हैं कि जहां पर लोग कॉन्शियसली
(03:19) बहुत कुछ इंप्रूव करने की कोशिश कर रहे हैं और आप उस फील्ड में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। थैंक यू। थैंक यू लॉट। एंड थैंक यू सो मच फॉर कमिंग इन एंड आई एम श्योर अबाउट इट। जितने भी लोग आज ये पडकास्ट देख रहे हैं उनको बहुत वैल्यू ऐड होने वाला है। आई एम रियली ग्लैड इधर आकर बहुत खुशी है और अ लोगों को वैल्यू मिलना भी चाहिए हम क्योंकि रिलेशनशिप एक ऐसा एरिया है जहां पर अब इसको एजुकेशन की तरह देखना चाहिए हम कि जिंदगीियों में कुछ उथल-पुथल है तो अ थोड़ा एजुकेट कर लें खुद को हम थोड़ा असेस कर लें थोड़ा देख लें हम कि कहां गड़बड़ियां है
(03:51) हम क्योंकि रिलेशनशिप के डायनामिक्स पिछले एक दो डिकेड्स में जिस तरह से शिफ्ट हुए हैं हम टू सम एक्सटेंट सोसाइटी रेडी नहीं थी इस ट्रांजिशन के लिए एकदम [हंसी] तो थोड़ी उथल-पुथल है। ऐसा लगता है कि 510 साल और लगेगा सेटल होने में। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] फिर जो डिस्ट्रक्शन और क्राइसिस आ रहा है उसके हम आधी हो जाएंगे। [हंसी] अभी तब तक हम थोड़ा झटपटाएंगे। तो उसको ठीक से अब्सॉर्ब करने के लिए या ठीक से टैकल करने के लिए हम हम सबको इस फ्रंट पे थोड़ा तो एजुकेट होना चाहिए। करेक्ट। तो नया ट्रेंड है क्या? ये नया ये व्हाट्स न्यू इन द रिलेशनशिप नाउ। नया ट्रेंड कि
(04:28) एकदम से आप देखें कि खूब सारा लिबरलाइजेशन आ जाना रिश्तों में और कहते हैं कि जो भारत की संस्कृति है तो भारत की संस्कृति में आप अगर पूरी इंसानियत का जो सबसे स्मालेस्ट यूनिट देखोगे हम तो वो एक परिवार माना जाता है। बिल्कुल सही है। कि ये परिवार जो है ये हम एक हैं। हम अब परिवार के अंदर कोई यूनिट नहीं है। हम जो स्मालेस्ट यूनिट है वो फैमिली है। फैमिली है। तो एज अ फैमिली हम सोचते हैं। एज अ फैमिली हम डील करते हैं। एज अ फैमिली हम आगे बढ़ते हैं। करेक्ट। और वेस्टर्न फिलॉसोफी अगर आप देखोगे कि जो स्मालेस्ट यूनिट है किसी भी समाज की वो है
(05:06) एक इंडिविजुअल। वाह राइट? हम तो वहां एक घर के अंदर भी पांच लोग ये सोच रहे हैं कि मेरा क्या? वैसा इसलिए वो अपने पेरेंट्स के साथ भी एक समय के बाद सहज नहीं है कि मैं क्यों रहूं इनके साथ। हम या मैं कंफर्टेबल नहीं हूं तो मैं क्यों इन्हें झेलूं। हम बेवजह हम तो माइंडसेट में डिफरेंस है। हम तो वो ज्यादा [नाक से की जाने वाली आवाज़] लिबरल माइंडसेट है। जहां पर हमने ऐसा सीखा देखा कि आप अपनी चिंता करो। आपको जो लगता है और हमारे का माइंडसेट थोड़ा सा ज्यादा कोलबेटिव है। जहां पर हम सोचते हैं कि हम कलेक्टिव रहें, हम साथ रहें, हम ज्यादा कंपैशनेट
(05:40) रहें, अफेक्शनेट रहें, एक दूसरे के प्रति करुणा रखें। एक दूसरे का ख्याल रखें। और इसलिए हम यूनाइटेड रहने में ज्यादा यकीन रखते हम तो अब हमारी वो जो थ्योरी है या जो हमारा वो जो स्टाइल है उसको हम अपने से दूर कर रहे हैं। हम तो इंडिविजुअलिटी पे सब कुछ आ गया है। लिबरल थॉट्स बहुत ज्यादा आ गए हैं। अ हर जगह पर इंसान को चाहिए कि मेरे पास ये राइट्स क्यों नहीं है? मैं ये क्यों नहीं कर सकता? मैं वो क्यों नहीं कर सकता? यानी इंसान ये सोचने लगा है कि मैं अगर एक शादी में हूं और मेरा वो मन नहीं लग रहा तो मैं क्यों नहीं जा सकता बाहर? हम
(06:16) या [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर मुझे बाहर कोई पसंद आ जाए हम तो मैं क्यों नहीं बात कर सकता उससे? हम तो जब यह सोच जो है एंटर कर रही है तो जाहिर तौर पर इसके नुकसान जो है वो तो हमें उठाने होंगे। हम जैसे लिबर्टी में कोई दिक्कत नहीं है। जैसे हम बात नहीं करते ऐसे वुमेन एंपावरमेंट की और सबकी भी बात होती है कि भुमन एंपावरमेंट एक अच्छी कैंपेन है। एक अच्छा इनिशिएटिव है। बहुत अच्छी चीज़ है। बट जब उसमें ऐसा होने लग जाए कि लड़के सिगरेट पी सकते हैं सड़क पे खड़े होके तो लड़कियां क्यों नहीं? तो हम क्यों नहीं पी सकते? तो जब सोच का स्तर यह हो जाए तो
(06:47) फिर समाज में एक दुर्दशा निश्चित तौर पे आना शुरू होती है। तो वैसा ही कुछ रिलेशनशिप की दुनिया में भी कि हम ये नहीं तय कर पा रहे हैं कि हम जो एक्सपेक्ट कर रहे हैं हम वो कितना हेल्दी है और उसके लॉन्ग टर्म कॉन्सिक्वेंसेस कैसे हैं। हम उस इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन में ही जी रहे हैं कि अभी इमीडिएट कैसा लगेगा। अभी कितना मजा है हम तो ठीक है। शायद सीख जाएंगे हम धीरे-धीरे। इस चीज के लिए कि क्या रिस्पांसिबल कारण क्या है इस चीज के पीछे? इसके पीछे कारण यह है कि इट्स अ कलेक्टिव फेलियर। इसके लिए कोई एक जनरेशन रिस्पांसिबल नहीं है। ओके?
(07:22) कोई एक समाज या एक धड़े के लोग रिस्पांसिबल नहीं है। ये कलेक्टिव फेलियर है और इस फेलियर के पीछे अगर आप थोड़ी गहराई में जाएंगे तो आप देखेंगे कि अध्यात्म से जो हमारी दूरी है उसने हमें नाकाबिल बनाया है हम। अपने प्रलोभनों को हैंडल करने में। ओके। अब आप देखें कि मान लीजिए किसी समाज में 10 लोग हैं और 10 में से एक व्यक्ति एक्स्ट्रा मेडल अफेयर कर रहा है। तो नौ लोगों को रास नहीं आएगा। हम तो वो नौ लोग कहेंगे कि यार ये गलत है। यानी कि समाज उस चीज को बुरा मानेगा। हम बट उसी समाज में जब सात लोग एक्स्ट्रा मेरिटल करेंगे। तो वो जो सात लोग हैं वो उस चीज को
(08:03) नॉर्मलाइज करने की कोशिश करेंगे। बिल्कुल सही। कि यार मैं अकेला गलत होता तो वो भी नहीं करता ना। हम्। बट हम सब हो रहे हैं। मतलब नॉर्मलाइज़ कर रहे हैं। हम तो अब समाज कलेक्टिवली अपने प्रलोभनों को टैकल करने में फेल हो रहा है। यानी कि हम सब मिलकर अपनी-अपनी जगहों पर, अपनी डिजायर्स को, अपनी इच्छाओं को नहीं हैंडल कर पा रहे हैं। तो हमने उसको न्यू नॉर्मल बना दिया। हम और हम यह जो सात लोग हैं यह मिलकर उसी को मॉडर्नाइजेशन कहते हैं। हम यह उसी को एडवांसमेंट कहते हैं। यह उसी को इवॉल्व होना कहते हैं। जबकि ये दुर्दशा है। पर वो उसी को ऐसा
(08:37) मानते हैं तो बाकी के तीन लोग इनफीरियर हो रहे हैं कि हम आउटडेटेड हैं क्या? हम तो अब बदलना उन तीन लोगों को है कि हम भी इनकी तरह सोचें। [हंसी] ना कि इंसान को। तो ये जो धारणा है जो एक न्यू नॉर्मल जो बन रहा है वो उस दिशा में ही जाना है क्योंकि हम अपनी उन डिजायर्स को, हमें अपनी इच्छाओं को मैनेज नहीं कर पा रहे। और सिर्फ बात रिलेशनशिप की नहीं है। आप हेल्थ की दुनिया में भी देख लीजिए। हम ओबेसिटी के मामले बढ़ रहे हैं। डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं। ब्लड प्रेशर के हाइपरटेंशन के मामले बढ़ रहे हैं। अर्थराइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। क्यों?
(09:11) क्योंकि खाने का प्रलोभन भी नहीं छूट रहा। हम लग्जरी का प्रलोभन भी नहीं छूट रहा। इंसान को वॉक करना है या पसीना बहाना है तो उससे वो भी नहीं हो रहा। हम तो हम हर वो चीज जो हमारा मन कहता है हम मन के इतने गुलाम हो गए हैं कि हमें हर वह चीज करनी है जो मन कर जाए। तो कहते हैं ना मन के जीते जीत मन के हारे हार। हम मन को जीत नहीं पा रहे और मन को क्यों नहीं जीत पा रहे? अगर आप रूट देखोगे तो वही कि हम उन स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस में अब है ही नहीं। शुरुआत से हमने अभावों को नहीं देखा। हमने चीजों को अपने से दूर रखने के लिए अपने को ट्रेन नहीं किया।
(09:44) हम तो हम चीजों को देते चले गए अपने आपको और शायद हम आदि हो गए कि मुझे जो चाहिए वो मिलना ही चाहिए। हम तो ये एक नया बदलाव है हम जो ऊपर से देखने में एक समाज को सा लगता है कि भाई यही आने वाला कल है हम पर अगर आप एक रिस्चर की तरह देखें थोड़ा गहराई से तो ये कलेक्टिव फेलियर था जिसमें हम सब नाकाबिल साबित हुए हैं। हम वाह क्या बात है। अ पेरेंटिंग का कितना इंपॉर्टेंट रोल है इसमें? पैरेंटिंग का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है। बट पैरेंटिंग उन समस्याओं में नहीं गिनी जाती जो अर्जेंट समस्याएं हैं। जैसे आपने शुरू में कहा कि पैसा और रिलेशनशिप और एक हेल्थ
(10:24) हम हेल्थ में भी वेलनेस नहीं सिकनेस सिकनेस है ना क्योंकि अर्जेंसी वेलनेस में नहीं है। सिकनेस में है। हम तो वैसे ही पैरेंटिंग इज नॉट अर्जेंट प्रॉब्लम। इसलिए पैरेंटिंग पे दुनिया कभी काम नहीं करेगी। पैरेंटिंग में आप फेलियर और ज्यादा ही देखोगे और हमें कभी रियलाइज भी नहीं होगा कि हमने बहुत बुरा किया। हम बस यह करेंगे कि हम अपनी गिल्ड कंपनसेेट करने के लिए वही बात है कि 10 में से एक व्यक्ति कर रहा था गलत तो वो खुद को सुधारने की कोशिश करता हम पर जब पांच सात लोग फेल हो रहे हैं तो हम सब मान लेते हैं कि यही चल रहा है आजकल तो ऐसे ही है।
(10:57) हम तो पैरेंटिंग में कुछ खास उम्मीद नहीं की जा सकती मेरे ख्याल से। ओके। हम अह [गला साफ़ करने की आवाज़] जब हम रिलेशनशिप के बारे में बात कर रहे हैं, समझ रहे हैं तो कहीं ना कहीं इमोशंस हैं ये सब हमारे जो इम्बैलेंस हो रहे हैं। एक टर्म यूज़ की जाती है आप भी यूज़ करते हैं। इमोशनल इंटेलिजेंस ये क्या है? अ यूं समझे [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि इसको थोड़ा सा सिंपलीफाई करता हूं। ठीक है? कि मान लीजिए एक इंसान है जो उसकी जिंदगी का कोई भी पिलर इवॉल्व नहीं हुआ। कहते हैं कि चार पिलर्स होते हैं। हम कोई भी इवॉल्व नहीं है तो वो इंसान दुनिया
(11:32) में कहीं भी मैनपुलेट हो के आ जाएगा। हम उसको कोई भी एक्सप्लइट कर देगा। मान लीजिए उसका फिजिकल पिलर ठीक है। हम शारीरिक रूप से ठीक है। हम तो अगर उसको किसी ने एक्सप्लइट करने की कोशिश की तो सोचेगा समझेगा नहीं बट दो लप्पड़ तो मार देगा। करेक्ट है। है ना? खुद को डिफेंड करने के लिए। सही। वो ये नहीं सोचेगा कि हो सकता है उसके चार लोग और आके फिर मेरी पिटाई कर दें। वो शायद इतना नहीं सोच पाएगा। उसी इंसान का इंटेलेक्चुअल पिलर भी स्ट्रेंथन हो जाए तो हो सकता है वो ये सोचेगा कि यार हाथापाई करना तो अभी ठीक नहीं है हम पर इसको छोडूंगा नहीं
(12:05) सही तो वो अपनी पूरी एनर्जी लगा देगा उस इंसान के साथ उस रिवेंज के लिए वो बदले लेने के लिए उसका बुरा करने के लिए इंसान इंटेलिजेंट है बट उसकी जो एनर्जी है वो इस दिशा में है कि उसने मेरे साथ बुरा कैसे कर दिया हम तो मुझे उसका बदला लेना है मुझे ठीक करना है हम तो इंटेलिजेंस है तो कितना ज्यादा बैंड बजा सकते हैं वो सब सोचने की काबिलियत हम उसी इंसान का इमोशनल पिलर भी स्ट्रांग हो जाए जिसको इमोशनल इंटेलिजेंस हम कह रहे हैं। हम तो वो इंसान यह तय करेगा कि मुझे यहां प्रतिक्रिया देनी भी है कि नहीं देनी है। ऐसा तो नहीं कि मैं अपना समय खराब कर रहा
(12:36) हूं। हम्। ऐसा तो नहीं कि यह तो वो वो समस्या है जो डे टू डे लाइफ में आती रहती है और मेरे फोकस के हिसाब से यह डिस्ट्रैक्शन है। तो मुझे इस पर रिएक्शन देना है कि नहीं देना है। गुस्सा आ रहा है हम पर मुझे इस दिशा में जाना ही नहीं है। मुझे प्रतिक्रिया में पड़ना ही नहीं है। हम दिस इज़ इमोशनल इंटेलिजेंस। कि हम अपने इमोशंस को मैनेज कर पा रहे हैं। हम और चौथा पिलर है स्पिरिचुअलिटी का अध्यात्म। हम् जहां पर इंसान को गुस्सा ही नहीं आ रहा है। हम मैनेज [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या ही करना है? हम आ ही नहीं रहा है। किसी ने गाली बक दी तो
(13:08) कह दिया कि ठीक गॉड ब्लेस। हम वैसा जिससे फर्क ही नहीं पड़ रहा इन बातों से। हम तो ये चार पिलर्स हैं जिस पर हम लोग काम करते हैं। तो ऐसा कहते हैं कि जब तक इमोशनल इंटेलिजेंस वाला पिलर आपका स्ट्रांग ना हो यानी कि जब तक आप आपकी भावनाओं को हैंडल करने के लिए परिपक्व नहीं है। तब तक आप कभी जीवन में आध्यात्मिक नहीं हो पाएंगे। हम इसलिए आप भारत में देखना कि स्पिरिचुअलिटी के नाम पर एक बहुत बड़ी आबादी स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस रोजाना करती है हम पर उनसे उनका गुस्सा नहीं संभलता हम उनसे उनका फ्रस्ट्रेशन उनकी ओवरथिंकिंग उनका प्रोकस्टिनेशन
(13:45) या फिर उनकी जो कुछ खाने की या कुछ पीने की जो ज़िद है जो डिजायर है वो नहीं संभलती हम या कुछ बुरी आदतें उन्हें लग गई तो वो उसे नहीं ठीक कर पा रहे हम कि गुटखा भी खा रहा है और पूजा पूजा पाठ भी कर रहा है। वैसा पता है कि यह चीज कैंसर भी कर सकती है। इसको छोड़ना चाहिए। बट आप आध्यात्मिक हो तो ऐसी चीजों का तो आपके ऊपर कंट्रोल ही नहीं होना चाहिए हम जो आपको इतना गुलाम बना ले। बट दरअसल परेशानी ये है कि अभी तीसरा पिलर स्ट्रंग नहीं है और चौथे की बात चल रही है। हम तो उन्हें रिजल्ट नहीं मिलेगा। वो जिंदगी भर में प्रैक्टिससेस करते रहेंगे।
(14:18) थोड़ा सा स्पिरिचुअल गुरुस का भी फॉल्ट मानता हूं मैं। तो हम कि उन्होंने एनलाइटन किया नहीं इस तरह से कभी। ओके। उन्होंने हमेशा क्या किया? लोगों को कुछ एक्टिविटीज में इंगेज कर दिया। हम उन्होंने भावनाओं के तल पर, मन के तल पर लोगों को शिक्षित नहीं किया। हम मुझे ऐसा लगता है कि भाई ठीक है ये चीज अच्छी है ये मत करो ये चीज कर लो और ये ये प्रैक्टिससेस है जो रोजाना होनी चाहिए हम है ना तो क्या है कि वो प्रैक्टिससेस तो रोजाना हो रही है पर जो एक इनर वर्ल्ड है इंसान का वो उसको कैसे ठीक किया जाए उस पर काम नहीं हुआ तो इमोशनल इंटेलिजेंस
(14:54) वो पिलर है जो आपकी जिंदगी में अगर संतुलन चाहिए तो उसकी पहली सीढ़ी है हम वो चाहे रिलेशनशिप हो प्रोफेशनल लाइफ हो पर्सनल लाइफ हो फाइनेंसियल लाइफ हो आप देखें कि मैं कैदियों के साथ भी काम करता हूं जेलों में जाकर। हम तो 60% से ज्यादा कैदी किसी क्रिमिनल बैकग्राउंड से नहीं आए। हम ना उनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड कभी रहा। और उनका कहना है कि ये जिस क्राइम की वजह से हम यहां आए हैं ये भी हम करना नहीं चाहते थे। हम ये हीट ऑफ द मोमेंट में हुआ। लाइफ डजंट गिव एनी अनडू ऑप्शन। करेक्ट। वो वहां पर है। वैसे ही इंडिया में 80% से ज्यादा लोग जितने भी लोग कर्जे
(15:32) में हैं, ईएमआई दे रहे हैं, लोंस पे कर रहे हैं, उसमें 80% से ज्यादा लोग उन कर्जों में होते ही नहीं अगर वो इंपल्सिव बायर नहीं होते। सही बहुत सही। बहुत है ना? मतलब वो कार खरीदना कि यार कार कौन सी रोज-रोज़ आती है? घर कौन सा रोज-रोज़ बनता है? बच्चे की शादी कौन सी रोज-रोज़ आती है? ये अरे भाई क्यों भावुक हो इतने यार? क्यों इतने इंपल्सिव हो? है ना? 500 की इनकम नहीं है और iPhone चाहिए। हम इंपल्ससेस है। इनकम नहीं है और मालदीव्स जाना है हनीमून करने। व्हाट इज द पॉइंट? हम है ना? आपकी फाइनेंसियल मैनेजमेंट कैसी है? हम तीसरा जितने भी लोग अल्कोहल या सिगरेट्स
(16:10) कंज्यूम करते हैं इसका 90% लोग जिन्होंने जब पहली बार कंज्यूम किया होगा हम तो इन्होंने अपने आप के लिए एक लिमिट तय की होगी कि मैं इतना कंज्यूम करूंगा। बहुत पीछे छूट गई। हम क्यों? क्यों? क्योंकि वो डिजायर को मैनेज नहीं कर पाया। लैक ऑफ इमोशनल इंटेलिजेंस। तो आप कर्जे की बात कर दें। वहां भी इमोशनल इंटेलिजेंस का अभाव है। क्राइम की दुनिया की बात कर दें। आप सैडनेस, ए्जायटी, डिप्रेशन के इश्यूज सुसाइड के मामले देख लें। वहां पर इमोशनल इंटेलिजेंस की कमी है। अगर आप ये अल्कोहल या व्यसनों की बात कर दें। वहां इमोशनल इंटेलिजेंस की परेशानी
(16:42) है। और एक और मजे की बात। कहते हैं कि 60% जॉब परफॉर्मेंस भी हाई ईक्यू से आता है। हाई आईक्यू से नहीं। [हंसी] हाई आईक्यू आपको एक अच्छी जॉब दिला सकता है। हम बट हाई इमोशनल कोशेंट आपको वहां सस्टेन रख सकता है और आपको आगे ग्रो करवा सकता है। हम और 90% हायर अथॉरिटीज जब हायर अथॉरिटीज बनती है तो उनके असेसमेंट में जो चीज सबसे ज्यादा प्राइमरीली असेस की जाती है वो होता है उनका इमोशनल कोशेंट कि प्रेशर हैंडल करने की कैपेबिलिटी। दूसरा कि इस व्यक्ति का खुद की इंपल्ससेस। तीसरा इसकी लीडरशिप स्किल्स, इसकी सोशल स्किल्स। ये कनेक्ट कितना जल्दी करता है।
(17:16) ये लोगों के सेंटीमेंट को कितना अच्छे से समझता है। इन सारी एबिलिटीज को देखकर लोगों को प्रमोट किया जाता है। और ये सब इमोशनल कोशेंट से जुड़ी हुई चीजें हैं। तो इमोशनल इंटेलिजेंस टू सम एक्सटेंट सर वो चीज है जिसके बिना जिंदगी की कल्पना ही नहीं है। ये कैटलिस्ट है लाइफ का। और दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारे एजुकेशन व्यवस्था में। नर्सरी से लगा के यूजी पीजी तक सोशियोलॉजी और साइकोलॉजी को छोड़ दिया तो इसमें पैराग्राफ भी लिखा हुआ नहीं है जबकि ये मैंडेटरी होना चाहिए हम एजुकेशन व्यवस्था में हम जैसे आपने बताया कि स्कूल में कॉलेजेस में
(17:51) इनको कम्युनिकेट नहीं किया गया एक्सप्रेस नहीं किया गया इसलिए लोग नहीं जानते हम लेकिन क्या आपको आज भी ये लगता है कि खराब रिलेशनशिप के कारण भी वन ऑफ द मोस्टेंट रीज़न इज आल्सो कम्युनिकेशन हां अभी कुछ दिन पहले की दो-चार दिन पहले की बात थी मैं कहीं बता रहा था कि कम्युनिकेशन मतलब हमारे इंसानों के जीवन में तो कम्युनिकेशन जो है वो इतना इंपॉर्टेंट रोल है कि थर्ड फोर्थ स्टैंडर्ड में एक मॉडल पढ़ाया जाता है। उस बहुत ही सिंपल है। कि आप मैसेज को पहले एनकोड करो। है ना? फिर उस मैसेज को जो सेंडर है वो मैसेज पहले एनकोड करता है कि मुझे कहना क्या है।
(18:32) हम है ना? अगर वो डायरेक्ट कह रहा है तो अपने ज़हन में उस बात को फ्रेम कर रहा है कि मुझे ये बात किस तरह से कहनी है या लिखना है तो कैसे लिखना है है ना लेटर भेजना है तो कैसे लिख के भेजना है उसने एनकोड किया उसने मैसेज भेज दिया सामने वाले ने उसको सुना पढ़ा देखा जो भी यानी कि उसने रिसीव किया हम उसने फिर उसको डिकोड किया हम है ना यानी कि उसने अपना मतलब निकाला उस से हम उसने डिकोड किया और वो उधर से बोलना शुरू किया तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की हम है ना हम अब कम्युनिकेशन अधूरा इसलिए रहा क्योंकि आपका काम है कि आपने डिकोड किया उसके बाद
(19:09) आप मुझसे पूछो कि तुम्हारा यह मतलब था विकास हम और मैं कह रहा हूं हां मेरा यही मतलब था तो कम्युनिकेशन कंप्लीट हुआ है। ओके अब वो कह रही है कि तुम्हारा ये मतलब था। मैं कह रहा हूं नहीं नहीं नहीं मेरा ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है। नहीं मुझे पता है तुम्हारा यही मतलब है। हम है ना? मुझे पता है तुम क्या सोच रहे हो। मुझे पता है तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है। है ना? मुझे पता है तुमने ऐसा क्यों बोला है। अब उसने अपनी ही दुनिया बना ली। हम अब मैं कह रहा हूं कि भाई साहब मेरा यह मीनिंग नहीं था इसके पीछे तुम गलत समझ रहे हो। नहीं नहीं मुझे सब पता है तुम्हारा
(19:36) क्या मीनिंग था। अब ये कम्युनिकेशन नहीं हो रहा है। अब ये बकवास हो रही है हम और इस बकवास का कोई [हंसी] एंड नहीं हो रहा है। है ना? तो रिश्तों में आप देखें ज्यादातर जगहों पर जब क्राइसिस आता है तो उन्हें ऐसा लगता है यार विकास हमने बहुत बात करके देख ली। कुछ नहीं हो रहा। नहीं असल में आपने बात की ही नहीं। वाह क्या बात है। आपने बहस की है। आप बेकार में आपने दीवार में सिर मारा है। [हंसी] ठीक है। हेल्दी कम्युनिकेशन में तो इतना समय ही नहीं लगता। हम आप देखें कि दुनिया भर के दो देशों के बड़े-बड़े विवाद ऐसे बैठ के ही सुलझते हैं। हम हेल्दी कम्युनिकेशन से।
(20:10) हम है ना? कि हम क्या कहना चाहते हैं? हमारा क्या मतलब है और आपका क्या मतलब है? तो दुनिया के बड़े-बड़े प्रॉब्लम्स ऐसे सॉल्व हो जाते हैं। तो क्या दो लोगों का रिलेशनशिप का मैटर सॉल्व नहीं हो सकता? लोग लड़ते लड़ते सड़क पे चले जाते हैं। कोर्ट में चले जाते हैं। पुलिस स्टेशन के चक्कर लगा रहे हैं। व्हाट इज द पॉइंट? हम आप समझ लो ना बैठ के। हम हम पर लोग कम्युनिकेट नहीं कर पाते। हम तो ये कम्युनिकेशन एक ऐसी चीज है जिसकी बात बहुत होती है। पर इसका यू कहते हैं इंप्लीमेंटेशन हम बहुत कम है। मतलब अभी भी वो अंडररेटेड है। हम ऐसा है। ईगो का क्या है? कितना बड़ा रोल है इसमें?
(20:48) ईगो और सेल्फ रिस्पेक्ट दो बातें हैं। बीइंग एन इमोशनल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट हम ईगो को उस लिस्ट में रखते हैं जो नेगेटिव इमोशंस की लिस्ट होती है। करेक्ट? और आत्मसम्मान को हम सकारात्मक साइड पर रखते हैं। तो ईगो क्योंकि नकारात्मकता है। ईगो जो है उसमें रिवेंजफुलनेस है। हम उसमें इंसान का बागी होना है। हम अ उस किसी भी चीज को इस तरह से ले लेना कि मेरे साथ ऐसा हुआ है तो मुझे इसी तरह से प्रतिक्रिया देनी है जिसमें जिस प्रतिक्रिया में डिस्ट्रक्शन शामिल है। किसी का बुरा करना या किसी को नीचा दिखाना या किसी को गलत कहना। तो इसलिए इस वाले
(21:26) इमोशन को कभी भी एप्रिशिएट तो नहीं किया जाएगा। बट इस इमोशन को हमेशा बैलेंस करने के लिए एक पॉजिटिव इमोशन हमेशा होता है कि सेल्फ रिस्पेक्ट इज देयर। आत्मसम्मान जो है वो जरूरी है। पर ईगो जो है वो डिस्ट्रक्टिव है। हम वैसा ईगो यानी ये कि आत्मसम्मान यानी कि यहां पर ऐसा चल रहा है। मैं ये नहीं सहन कर सकता तो मैं चला गया। हम और ईगो यानी ये कि इन्होंने मुझे यहां बुलाकर ऐसा कैसे कर दिया। अब मैं इनको बताता हूं मैं कौन हूं। हम तो मतलब मैंने मेरे जीवन में ये एजेंडा कभी नहीं था कि मुझे जाके कहीं किसी से लड़ना है। बट उस ईगो ने मेरे को लड़ाई
(22:00) करवा दी यहां पर। हम मतलब वो सारे फोकस वो सारी जरूरी चीजें पीछे छूट गई और अब मैं इस लड़ाई में शामिल हो गया क्योंकि मैं हर्ट हो गया। हम और आत्मसम्मान के लिए सिर्फ इतना जरूरी था कि आप उठो बाहर हो जाओ। हम सिर्फ इतना हम तो हमारी प्रतिक्रियाएं जो है वो इससे तय होती है कि आप कौन सा इमोशन एक्सपीरियंस करते हो। हम और हमारी अवेयरनेस हमको यह बताती है कि आप जो इमोशन एक्सपीरियंस कर रहे हो वह कौन सा है और वो कितना ठीक है। तो लोगों को अवेयरनेस ही नहीं है कि वो जो कर रहे हैं वो क्यों कर रहे हैं। हम आप देखें कि लोग प्यार करते हैं हम [गला साफ़ करने की आवाज़]
(22:34) फेल हो जाते हैं रिलेशनशिप में। हम जब आप पूछेंगे कि क्या हो गया? तो कहेंगे कि मैंने उसके लिए ये किया, वो किया, ऐसा किया, वैसा किया, मुझे क्या मिला? हम इमोशनल इंटेलिजेंट अगर कोई इमोशनली कोई इंटेलिजेंट है तो वो व्यक्ति इस बात को समझेगा कि अ कब कहां किस इमोशन का कैसे इस्तेमाल किया जाए हम जैसे इसमें एक इंटरेस्टिंग बात है वो ये कि अ हम ह्यूमन ब्रेन ऐसा ही बना है कि हम हमेशा अ किसी भी स्थिति में हम सर्वाइवल इंस्टिंक्ट हमारा पहला एक्टिव रहता है। है ना? मुझे ऐसा लगता है कि भ इंसानी दिमाग जो है हम वो जब इधर आया तो उसका मेन काम ये था कि तुम
(23:18) अपने को किसी तरह से सर्वाइव हम करवा के रखो। अपने को संभालो और खुद मुझे अगर अपने को संभालना है तो मुझे नेगेटिवली सोचना पड़ेगा कि कहीं ये कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहा है। हम इसने ऐसा कैसे कह दिया मुझे हम मैं ये नहीं सुन सकता। है ना? अगर किसी ने थोड़ा अटैकिंग मोड में आया तो मुझे गुस्सा दिखाना है। मतलब मुझे अपने को संभालने के लिए कोई ग्रो कर रहा है और मैं नहीं कर रहा तो मुझे वो जेलसी होनी चाहिए ताकि मैं भी ग्रो करूं। हम तो सिर्फ मैं मैं है उसमें हम सर्वाइवल के चलते। इसलिए आप देखना कि ईगो हो गया, जेलसी हो गया, घृणा हो गया, सैडनेस हो गया। जितने
(23:53) भी नेगेटिव इमोशंस हैं इसको आप बेसब्री हो गया। इसको आप इनवाइट नहीं करते। आप एस चाहते नहीं कभी कि मैं चाहता हूं मुझे गुस्सा आए या ईगो आए। यह अपने आप आते हैं। राइट? [गला साफ़ करने की आवाज़] और जितने भी पॉजिटिव इमोशंस हैं, हैप्पीनेस हो गया, कामनेस हो गया, पीस हो गया, जॉय हो गया, एक्साइटमेंट हो गया, लव हो गया, कंपैशन हो गया। ये साथ में मिलजुल के रहना, एक दूसरे का भला करना। ये वो है जो हमने क्रिएट किए। हम कि यार साथ में रह रहे हैं। हम एक समाज हैं। सबका अच्छा करो। सबका फायदा पहुंचाओ। सबको प्यार करो। किसी से कंपटीशन मत करो। कोई अगर आपको
(24:27) बुरा कह भी रहा है तो कहने दो। हम है ना? यह सब हमने क्रिएट किया है। तो इसलिए दिमाग ना एक कांस्टेंट केओस में है कि यार एक जिसके लिए मैं आया हूं और एक जो यह मुझे बता रहे हैं कि करना है। हम हम है ना? इसलिए लोग मुझे कई बार पूछते हैं सर ऐसा क्या होता है कि नेगेटिव इंसान अपने आप हो जाता है और पॉजिटिव होने के लिए मेहनत लगती है। हम पॉजिटिविटी के लिए बहुत प्रैक्टिस करनी पड़ती है ना कुछ। क्योंकि पॉजिटिविटी को हमने पैदा किया ना। हम नेगेटिविटी तो पहले से थी। वो तो हमारे सर्वाइवल के लिए जरूरी थी कि हमने पैदा की। हम्। तो इसलिए इमोशनल इंटेलिजेंस जो है यह एक
(25:00) मैकेनिज्म है। हम है ना? जो आपको अवेयर करता है कि जैसे ही कोई नेगेटिव इमोशन आया आपको रुकना है और आपको अपने को बोलना है कि रुको। इसका अल्टरनेट हमने क्या बनाया है? हम मैं वो चूज़ करूं। ऐसा क्योंकि अब हम जंगलों में तो रह नहीं रहे कि जहां मुझे मैं ही करना पड़ेगा। नहीं तो कोई खा जाएगा। हम अब मैं एक प्रोटेक्टेड एनवायरमेंट में हूं। जहां मुझे किसी का डर, कोई टेंशन नहीं है। मैं इवॉल्व [गला साफ़ करने की आवाज़] इवॉल्व हो रहा हूं, ग्रो कर रहा हूं। मेरे राइट्स, लॉज़ सब कुछ मुझे प्रोटेक्ट कर रहे हैं। हम तो मुझे यहां पर क्या है कि एक समरस्ता
(25:32) दिखानी है। हम प्यार मोहब्बत से रहना है सबको मिलजुल के। तो वो जो हमने बनाया है उसी को वैल्यू करना पड़ेगा। हम तो लाइफ अच्छी हो सकती है। तो ईगो जो है वो अगर आया है तो ऐसा नहीं कि ईगो मुझ में नहीं आ सकता। आप में नहीं आ सकता। हम में भी आता है। अहंकार हम में भी आता है। इट जस्ट [गला साफ़ करने की आवाज़] कि हम उसको ठहरने नहीं देते। बिल्कुल। हम ये तय करते हैं कि मतलब मुझे मैं चाहूं तो उसकी बैंड बजा सकता हूं। हम बट आई डोंट वांट टू रिएक्ट लीव इट हम तो उस ईगो के ऊपर ह्यूमिलिटी को हम चूज़ करते हैं हम कि एक व्यक्ति ग्रो करेगा तो उसके अंदर
(26:05) ईगो आएगा कि मैं बड़ा बन गया बट वो चूज़ करता है ग्राउंडेड रहना तो इमोशनल इंटेलिजेंस का मतलब यह है कि नेगेटिव इमोशन अगर किसी को आ रहे हैं और किसी को नहीं आ रहे हैं तो जिनको नहीं आ रहे हैं उनका मतलब ये नहीं है कि इनके अंदर ईगो है अहंकार या कुछ बुरा नहीं है। इनके अंदर भी सब कुछ है। आपके अंदर भी सब कुछ है। हम इन्होंने हमेशा चुना है हम कि इसका अल्टरनेट क्या है जो मेरी जिंदगी को ज्यादा स्थिर रख सकता है और क्योंकि आप भावनात्मक रूप से परिपक्व नहीं है तो आप उन्हीं भावनाओं को जो आपने एक्सपीरियंस कर ली उन्हीं के साथ बह जाते
(26:36) हो आप ठहरते नहीं आप कुछ और चुनते नहीं और फिर ऐसा कहते हैं कि वो जो फीलिंग आई नेगेटिविटी की वो चाहे ईगो हो चाहे कुछ भी एंगर हो उस फीलिंग के साथ इंसान क्या करता है कुछ स्टोरीज कनेक्ट करता है मेरी अगर लड़ाई हो गई अपनी वाइफ से किसी बात पर और मैंने गुस्से में थोड़ा ज्यादा बोल दिया। अब मुझे पता है कि मुझे इतना बुरा नहीं बोलना चाहिए था। बट वो गुस्से वाली फीलिंग थी। बोल दिया। तो अब अब उस फीलिंग के साथ मैं स्टोरीज जोड़ रहा हूं। अच्छा अगर इसने इसने ऐसा क्यों किया? अगर ये ऐसा करती ही नहीं तो मैं नहीं बोलता। दैट्स अ स्टोरी।
(27:09) हम है ना? फिर अगर मैंने गुस्सा कर दिया तो तुझे सुनना चाहिए था। तुझे इसको करेक्ट करना चाहिए था। तूने उल्टा 10 साल पुरानी बात क्यों निकाली? दैट्स अ स्टोरी। हम अच्छा हम दोनों जब लड़ रहे हैं तो तेरी मम्मी उधर खड़े-खड़े सुन रही है। वो आके नहीं बोल सकती थी कुछ। दैट्स अ स्टोरी कि मैं अपने एंगर को जस्टिफाई करने के लिए कुछ कहानियां इस एंगर के साथ जोड़ रहा हूं ताकि मुझे ये लगने लगे कि एंगर जो था वैलिड था हम इसकी जरूरत थी हम राइट? और ये वैलिडेशन मैं अपने को दे दूंगा दो चार ऐसी बकवास सी स्टोरीज के साथ जोड़ के हम और मैं अपने अंदर में एक मतलब मैं अपने को
(27:42) एक जस्ट एक वैलिडेशन दे दिया कि मुझे बदलाव की जरूरत नहीं है। और इमोशनली इंटेलिजेंट इंसान जो रहता है वो थोड़ा ऑनेस्ट होता है। वो असेस करता है। उसमें गट्स होते हैं खुद को कहने के कि नहीं मैं गलत था। मुझे नहीं करना चाहिए था। हम तो वो अवेयर रहता है कि आइंदा से ऐसा ना हो। हम और वो इवॉल्व होता रहता है। वो बेहतर बनता रहता है। और ये लोग ये जिंदगी भर उसी पैटर्न में जीते रहते हैं। इन्हें ऐसा लगता है कि इनका ईगो इनका गुस्सा जो है वो टूल है। एक स्वैगी फैक्टर है। अपने से किसी की सहन नहीं होती। अपन किसी की नहीं सुनते। अपन किसी की नहीं जलते।
(28:12) मैं तो ऐसा ही। इनको ऐसा अपन तो ऐसे ही हैं। इनको ऐसा लगता है कि भाई ये कोई प्राउड वाली बात है। भाई तुम लाचार हो। [हंसी] तुम इवॉल्व नहीं हुए हो। क्या बात है। जरा एजुकेट करो खुद को। थोड़ा ऊपर उठो। ये सब छोड़ो चक्कर। जिंदगी बड़ी खूबसूरत है। तो ये सब सीखने का जरूरत है। हम सुपर्ब। एक सवाल मेरा यहां पर ये है कि कई बार क्या होता है कि वी सी जब इन यू नो मेल एंड फीमेल्स जब मिलते हैं बात करते हैं तो हम देखते हैं कि समटाइ्स फीमेल आर दे आर मोर इमोशनल और मे बी दे दे आर वो अपने आप को एक्सप्रेस कर पाती हैं। बहुत ज्यादा एस कंपेयर टू मेल। तो मेल
(28:52) अपने इमोशंस को इतना सप्रेस कर क्यों रहा है? अभी भी क्यों नहीं समझ रहा? बहुत ही बेसिक आईडिया है जो आजकल हम सब सुनते ही है यहां वहां कि अ जो सेटअप था जैसे हम इवॉल्व होना शुरू हुए हैं हम तो वहीं पर ऐसा हो गया कि पहली चीज तो ये कि एक बच्चे को एक लड़की पैदा कर पा रही है। हम लड़के का उसमें कंट्रीब्यूशन है। बट एंड ऑफ द डे उसे ही उसको नर्चर करना है। उसे ही अपने वॉम में उसको रखना है। उसे ही उसको डिलीवर करना है। उसी के साथ उसके इमोशन जितने ज्यादा कनेक्टेड हैं, हम्। है ना? उतने शायद मतलब वह नहीं छोड़ सकती उसको। उसे ही उसको फीड करना है।
(29:33) हम कहते हैं ना कि अगर एक बच्चे ने बच्चा रोने लग गया तो कोई भी महिला उस बच्चे को देख के ही कह देगी कि इसने सुसु की है हम हम या इसकी तबीयत खराब है या इसको नींद आ रही है या इसको इरिटेशन हो रहा है। हम बट मेल्स को नहीं समझ में आती। उनको सिर्फ इतना समझ में आ रहा है कि रो रहा है मतलब अंदर ले जाके दे दो। हम मम्मी को या वाइफ को हम तो फीमेल्स एक्स्ट्रा सेंसिटिव इसलिए हैं क्योंकि उन्हें उस तरह की सिचुएशनंस फेस करनी है। हम उन्हें उस बच्चे को बड़ा करना है तो शी हैज़ टू बी एक्स्ट्रा सेंसिटिव। तो वो इमोशन को ज्यादा बारीकी से एड्रेस
(30:07) कर पाती है हम कि इस बच्चे को क्या चाहिए। हम मेल्स नहीं कर पाते। क्यों? क्योंकि वो सिचुएशन में कभी रहे नहीं ज्यादा। और क्योंकि फीमेल्स इस तरह से इवॉल्व हुई है तो इसलिए आप देखिए कि मैं अपनी मम्मी से उनके मुंह पर ऐसे झूठ नहीं बोल सकता। हम पापा को मैं घुमा सकता हूं बहुत ईजीली। मम्मी पकड़ लेगी मम्मी को। इनफैक्ट जो मदर्स होती हैं अगर आपने फोन पर भी झूठ बोला है ना तो वो जो टोनालिटी में थोड़ा सा डिफरेंस है वो उसमें भी कह देगी कि चुपचाप बता देना कहां पर है। [हंसी] है ना? मतलब आपकी गर्लफ्रेंड हो, वाइफ हो, मदर हो, सिस्टर हो, डॉटर हो।
(30:42) वुड अंडरस्टैंड। है ना? वो समझ जाती है। पापा नहीं समझ रहे। क्यों? क्योंकि उनको ईश्वर ने नवाजा है उस काबिलियत के साथ कि वो उतनी बारीकी उतना डिटेलिंग जो है वो नोटिस कर पाती है। हम राइट तो एक्स्ट्रा सेंसिटिव है क्योंकि वो बायोलॉजी ऐसी है और मतलब इस सृष्टि का नियम ही कुछ ऐसा रहा कि उसे ही बच्चे को बर्थ देना है और आगे बढ़ाना है। और उस प्रोसेस में मेल क्या करते हैं घर पे बैठे-बैठे? तो उनका काम ये था कि तुम बच्चा संभाल रही हो तो मैं कुछ बाहर से सामान ले आऊं। हम तो वो हमेशा जो हार्ड जॉब्स थी उन जॉब्स को करता रहा कि खाना लेके आना है या कोई
(31:18) एनिमल पीछे है तो भागना है या उससे प्रोटेक्ट करना है टैकल करना है भागने की निशाना लगाने की शिकार करने की सब क्षमताएं हमारे अंदर ज्यादा अच्छी विकसित हो गई और इसके चलते ऐसा हुआ है कि हम मसल वाइज भी ज्यादा पावरफुल है। हम ज्यादा तेज भाग सकते हैं। हम में ज्यादा जोर है हम और इन्हीं सब चीजों ने हमारे अंदर वो सेंटीमेंट भी डेवलप किया कि आई एम द प्रोटेक्टर हम आई एम द प्रोवाइडर हम और वो प्रोटेक्टर प्रोवाइडर वाली जो इमेज बनी उसमें वो जो एक संजीदगी है जो सेंसिटिविटी है वो हमने खो दी हम और फिर बाद में कुछ काम समाज ने भी कर दिया
(31:55) कि फिर वो मेल फीमेल वाला जो डिफरेंस है लड़का लड़की वाला क्या लड़की की [गला साफ़ करने की आवाज़] तरह रो रहा है वाला वो एक वो एक और एक लेयर है ऊपर की हम् वह लेयर हालांकि अब कम हो गई है हम पर यह एलिमेंट तो है और ऐसी चीज़ जो इतनी हजारों सालों की कंडीशनिंग से हुई होती हम वो इससे दो चार जनरेशन में खत्म नहीं होती हम टाइम लेती है हम पर हां मतलब ये डिफरेंस है हम कि दे आर एक्स्ट्रा सेंसिटिव इसलिए ऐसा बोलते हैं हम रिलेशनशिप के मामलों में कि अगर एक लड़की अपने रिश्तों में खुश नहीं है तो अपने काम पर फोकस नहीं कर पाएगी हम हम और अगर एक लड़का अपने काम में खुश नहीं है
(32:35) तो वो अपने रिश्ते पर फोकस नहीं कर पाएगा। क्या बात है। वाह। क्योंकि क्योंकि उसकी प्राइमरी नीड ये है कि काम सही चलना चाहिए क्योंकि नहीं तो घर कैसे चलेगा? हम और लड़की की नीड प्राइमरी शायद ये है कि रिश्ता ठीक चलना चाहिए। हम वैसा नहीं तो काम पर कैसे तो थोड़ा मतलब वो एक एक थीम है। मतलब हम मुझे तो पता नहीं ये बात कैसे साउंड करेगी। हो सकता है थोड़ा कुछ लोगों को ना भी पसंद आए। बट मुझे ऐसा लगता है कि इस थीम में कुछ एडजस्टमेंट्स करने की जरूरत थी। हम इस थीम को पूरा उथलपुथल करने की जरूरत कभी भी नहीं थी जो हमने कर दिया। हम [गला साफ़ करने की आवाज़]
(33:11) इस थीम में जरूरी राइट्स, जरूरी पावर्स, जरूरी अथॉरिटीज उनको मिलनी चाहिए लड़कियों को ताकि वो हमारे बराबर आ सके उन मामलों में जहां हम उनको सप्रेस कर रहे थे। और वो जिन चीजों में हमसे ज्यादा अच्छी थी हम उन चीजों में उनको रिकॉग्निशन मिलना चाहिए था। हम जिस पर हमने कभीेंस दी ही नहीं। दी। राइट? तो उन सब चीजों को फिक्स होना चाहिए था। बट अब यह वाला जो गेम आ गया ना कि इफ इफ मैन कैन डू इट, वुमेन कैन डू इट। हम तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये फिजूल की एक लड़ाई है। हर चीज में क्योंकि ऐसा बोलते हैं कि फीमेल ब्रेन जो है वो ज्यादा क्रिएटिव है।
(33:50) हां। तो वो ज्यादा क्रिएटिव है। वो नर्चरिंग की एबिलिटी है। वो रिश्तों को अच्छा संभाल सकती है। एचआर जैसे जॉब ज्यादा अच्छा कर सकती है। आपकी असिस्टेंट हमेशा फीमेल ही होनी चाहिए। हम तो वह आपको पीछे से बता देगी कि सर मुझे वह बंदा जो है वह ठीक नहीं लगा हम या मुझे कुछ तो गड़बड़ लगा जो सेंस आप नहीं कर पा रहे हम तो आपको हमेशा अच्छा असिस्ट करेगी वो ज्यादा अच्छा डिकोड करती है ना वो हर वो चीज जहां पर इंसान की देखरेख है या ह्यूमन रिसोर्स का इन्वॉल्वमेंट है वहां पर उसका काम ज्यादा अच्छा होगा हम तो वो उन चीजों में अच्छी है और मेल्स जो
(34:27) है वो लॉजिक वाली साइड पर ज्यादा अच्छे हैं वो कैलकुलेशंस में मैथ्स में इंजीनियरिंग में अच्छे हैं। तो देखिए कि हमने इन चीजों को सॉफ्ट मान लिया और इनको प्राइमरी मान लिया। ये बड़ी चीज है। और इनको इधर आना है। इनको इधर जाने का कोई शौक नहीं है। [हंसी] हमको उधर नहीं जाना है। हम उनको इधर [गला साफ़ करने की आवाज़] आना है। पर क्यों आना है भाई? हम क्या जरूरत है? आपका ब्रेन जिस चीज को सपोर्ट करता है आप करते रहो। अच्छा ऐसा नहीं है कि जो लड़का कर रहा है वो आप नहीं कर सकते। उसके लिए आपको अपने को थोड़ा एक्स्ट्रा चैलेंज करना पड़ेगा।
(34:54) हम भ लड़के क्या कुकिंग नहीं कर सकते या लड़के क्या क्रिएटिव नहीं हो सकते। हो सकता है। थोड़ा चैलेंज करना पड़ेगा। हम पर ये अगर ये बाय चॉइस हो रहा है तो ठीक है। एक लड़ाई की तरह क्यों कर रहे हैं हम इसको? [नाक से की जाने वाली आवाज़] हम थोड़ा वैसा है। ओके [हंसी] एक बेहतरीन किताब है। मैनर फ्रॉम मार्स एंड वमेन फ्रॉम वीनस जहां पर मेल और फीमेल की साइकोलॉजी के बारे में बताया गया है। ये कितना इंपॉर्टेंट है अपोजिट जेंडर की साइकोलॉजी को समझना। ये कितना जरूरी है आज के दौर में? यह बहुत ज्यादा जरूरी है जब हम कहते हैं कि कपल एजुकेशन बहुत इंपॉर्टेंट है कि
(35:29) रिलेशनशिप में भी शिक्षा होनी चाहिए। तो टू सम एक्सटेंट यही बात है शायद वो कि इसका कोर यही है हम कि दो लोगों को साथ में रहना है तो हमको उनकी साइकोलॉजिकल नीड समझनी चाहिए। उनकी इमोशनल नीड समझनी चाहिए। हम तो अ ऐसा कहते हैं कि 86% जो मेल्स हैं उनका जो बेस्ट फ्रेंड होता है वो दूसरा मेल होता है। करेक्ट चाहे वो अपनी सोलमेट से शादी करके बैठा हुआ है। हम बट उसका जो बेस्ट फ्रेंड है ना दूसरा मेल है। मेल है। और 78% लड़कियों की जो बेस्ट फ्रेंड है वो दूसरी लड़की है। हम ना कि उनका कोई मेल फ्रेंड या उनका कोई सोलमेट ठीक है सोलमेटलमेंट सब अपनी जगह है
(36:15) हम पर क्यों है ऐसा कि एक मेल दूसरे मेल के साथ एक फीमेल दूसरे फील ज्यादा कंपैटिबल जब वो अपनी जिंदगी के कुछ जरूरी मामलों में चर्चाएं करना चाहते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि वो एक दूसरे की कंपैटिबिलिटी माइंडसेट को ज्यादा अच्छा रीड करते हैं है ना तो वो वो कॉम्प्लेक्सिटी नहीं आती उसमें कि लड़की कुछ कह रही है और मैं सॉल्यूशन दे रहा हूं या मैं कुछ कह रहा हूं और लड़की मुझे सिर्फ सिंपथाइज कर रही है। हम मतलब उसमें वो कॉम्प्लेक्सिटी नहीं है। सो सॉर्टेड है कि एक लड़की दूसरी लड़की से बात कर रही है तो वो जानती है कि कि हम बात करने के लिए
(36:49) बात कर रहे हैं। हमें कोई सॉलशन नहीं चाहिए। हम हम और एक लड़का जब दूसरे लड़के से बात कर रहा है हम तो वो जानता है कि मुझे टू द पॉइंट बता क्या करूं? हम है ना? उसे वो सिर्फ कहने के लिए नहीं कह रहा वो बात। इनफैक्ट मेल्स के अंदर वो जो फैक्टर होता है मेल ईगो वाला हम वो इतना ज्यादा है कि अगर मैं कहीं सच में फदू निकल गया या सच में अगर मेरे साथ कुछ मैंने कोई चोट हो गई फेलियर आ गया तो पहली कोशिश मेरी ये रहेगी कि मैं दुनिया में किसी को बताऊं ना और खुद ब खुद ही उसको ठीक कर दूं हां करेक्ट जब वो चीज कहीं से भी वर्कआउट नहीं होती फिर मैं अपने किसी दोस्त को जाके बताऊंगा
(37:24) कि यार बताओ मेरे साथ ऐसा हो गया [हंसी] ठीक है नहीं तो बात नहीं बनेगी हम्म हम और लड़कियां इस चीज में बिल्कुल अपोजिट है। उनको घर में कॉकरोच भी दिखा तो उनको ऐसा लगता है किसी को तो बताना पड़ेगा [हंसी] कि यार घर में कॉकरोच दिखा। क्या करना है कॉकरोच का वो बाद में देखेंगे। बट वो बात तो होनी चाहिए। तो थोड़े अलग हैं। और यही खूबसूरती है कि हम अलग हैं। हम इसीलिए साथ में रहने का फन भी है। बट अगर फन तब है जब हम एक दूसरे को थोड़ा समझने का भाव रखें। हम थोड़ा एजुकेट कर लें। तो इजी था। अभी तक क्या हो रहा था ना सर? अभी तक भी चीजें चल ही रही जैसे मुझे कई
(37:59) लोग बोलते हैं कि यार ये तुम सब ये सब लेके आ गए तो अभी तक क्या हम हम लोगों ने जिंदगियां नहीं जीI हमारे पेरेंट्स ऐसा कहते हैं मेरी मम्मी पापा तो मैं उनको बताता हूं कि मैं बहुत छोटे से गांव से आता हूं मैं कम से कम 100 ऐसी महिलाएं बता सकता हूं उस गांव में जिनकी जिंदगियां घुट रही है पर उन्होंने कभी आवाज नहीं उठाई हम राइट क्यों नहीं आवाज उठाई क्योंकि समाज वो पसंद नहीं करता कभी भी हम कि कि आप बागी हो जाओ। हम तो समाज ने भी यही ठीक समझा कि जब जहां जो जहां जैसा है वो वहां वैसा ही रहे। चुप रहे अपना काम करें। हम है ना? तो वो सेपरेशन में जी रहे हैं।
(38:39) किसको जाके कहेंगे? हम हम और अब जब वो लोड खत्म हो गया उनके ऊपर से तो उन्होंने बोलना शुरू कर दिया। तो बोलना शुरू कर दिया तो टूटफूट शुरू हो गई। रिलेशनशिप में टूटना, डिवोर्सेस, ब्रेकअप्स ये सब स्टार्ट हो गए। तो मतलब पॉइंट यही है कि जब हम लोगों को समझते नहीं हम और वो लोग जब एमावर हो जाते हैं तो वो आपके साथ रहते नहीं। फिर हम अब वो या तो एंपावर होते ही नहीं तो उनको दबा के चलने देते जैसा चल रहा था। हम अब वो एंपावर हो गए हैं तो उनको समझना पड़ेगा। उनको जगह देनी पड़ेगी। उनको सीट देनी पड़ेगी बस। है ना? तभी सर्वाइवल पॉसिबल है। तभी बात बनेगी। हम
(39:14) तो मुझे यह चीज बड़ी हैरान करती है कि हम हमारे अंदर यह इतनी ख्वाहिश क्यों थी हम समाज को इतना एस्थेटिकली देखने की हम कि चाहे वो 100 जिंदगियां घुट रही है है ना पर क्योंकि व्यवस्था सही नजर आ रही है तो घुटने दो तो घुटने दो हम और आज क्योंकि उन लोगों ने आकर जब कह दिया ऐसा कि हमको नहीं रहना तो उन्हें उनका हक मिल रहा है बट समाज बिखरा हुआ लग रहा है तो हमें ऐसा लग रहा है गलत हो रहा है। [हंसी] क्या बात है क्या एस्थेटिकली चाहिए सब कुछ सब कुछ व्यवस्था अच्छी नजर आनी चाहिए अंदर चाहे कुछ भी चाहे अंदर लोगों की जिंदगियां बर्बाद हो जाए हम
(39:55) ऐसा थोड़ी होना चाहिए अब वो बदलाव हो रहा है तो थोड़ा सा हमको चुभ भी रहा है हम बहुत बुरा हो रहा है और कुछ लोग ऐसे हैं जो उस बदलाव में अपनी रोटियां सेक लेते हैं मतलब ऐसे कि सब कुछ अच्छा चल रहा था उन्होंने सोचा कि यार हर कोई तो गलत कर ही रहा है तो फिर मैं भी कर ही लूं तो कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने उस चीज को एक इनकैश किया हम या अपने फायदे के लिए यूज़ किया हम तो ओके सो एक कांसेप्ट बहुत आजकल लोग बहुत बात करते हैं। कासेप्ट ऑफ लव लैंग्वेजेस हम यह ओवरेटेड है या सही है यह जानना चाहिए लोगों को ये एक इंटरेस्टिंग थ्योरी है और इसमें ऐसा है कि और ये वाकई में मुझे लगता
(40:40) है कि ये है ओके है ना ये है बिल्कुल कि हर इंसान के अ हर इंसान के जो वैल्यूस के हिसाब से हम उसकी कंटेंटमेंट वाली जो चीजें हैं कि मुझे कहां से जीवन में फुलफिलमेंट महसूस हो रहा है, संतुष्टि मिल रही है, वो अलग-अलग हो सकती है। ठीक है? तो हर इंसान की जरूरत है। उनकी इमोशनल नीड्स अलग है। एंड सिंपल एस दैट। और क्योंकि मेरी इमोशनल नीड जो है उसके अकॉर्डिंग ही अगर मुझे कुछ कर दो आप तो आई विल बी हैप्पी। हम अगर गिफ्ट्स रिसीव करना मेरी लव लैंग्वेज है। है ना? तो मैं ये सोचूंगा कि मैं जा रहा अरे कुछ दे देते यार। है ना? मैं हर जगह गिफ्ट सोच रहा हूं। कोई हैंपर मिल
(41:20) जाए। है ना? कहीं कुछ ऑफर मिल जाए। कहीं डिस्काउंट मिल जाए कि ये मिल जाए वो मिल जाए। हम मजा आ रहा है। ऐसा नहीं है कि वो इंसान वो चीज अफोर्ड नहीं कर सकता या वो खुद नहीं खरीद सकता। हम बट उसकी लव लैंग्वेज वो है ना तो उसको हमेशा उस चीज में बहुत एक्स्ट्रा खुशी मिलेगी। अब मेरे साथ कैसा है पर्सनली? आई डोंट गो वेल विद गिफ्ट्स। हम कि मुझे गिफ्ट लेने का भी कोई खास क्रेज नहीं है। और मैं गिफ्ट्स देता भी नहीं। हम मतलब ठीक है देना चाहिए शायद थोड़ा रुड है। पर मतलब वो रहा नहीं उस साइड पे कभी। हम बट किसी के लिए वो चीज इंपॉर्टेंट है। वर्ड ऑफ़ अमेशन जो है किसी को ऐसा लगता है
(41:56) यार मुझे कुछ नहीं चाहिए। अगर मैंने कुछ अच्छा किया है तो कम से कम मुझे एप्रिशिएट कर दो। आप देखना बहुत सारी महिलाएं शिकायत करती है कि यार मुझे कुछ नहीं चाहिए यार। बस ये है कि मैं जितना करती हूं ना इनके लिए हम अगर ये कभी कह देते कि हां तूने किया इतना तो मुझे फ्यूल मिल जाता और आगे करते रहने के लिए। करेक्ट है। पर साले रिकॉग्नाइज भी नहीं कर रहे। हम है ना? तो किसी का है कि एक्ट ऑफ सर्विस जैसा उन्होंने लिखा उनकी किताब में हम कि हाथ बटा दिया तो लगा कि कुछ बात हो गई। अब मेरे लिए है ये एक्ट ऑफ सर्विस। हम मैं अपने खुद के लिए भी कभी चाय बना के भी
(42:31) नहीं पीता। अगर मैं 10 दिन भी अपने घर में अकेला हूं। हम वैसा है। और अगर कोई बहुत ही अजीज मेरा घर पे आया है। तो हो सकता है दुनिया के लिए चाय पीना बहुत आम बात होगी। बट मेरे लिए ऐसा है कि चल तेरे लिए चाय बना देता हूं। [हंसी] ये मैं किसी के लिए नहीं करता। हम तो मेरे लिए वो प्यार एक्सप्रेस करने का तरीका है कि हम मैं इसके लिए चाय बना रहा हूं। हम तो मेरी मेरे आसपास के लोगों को पता लगा आपने चाय बना के क्यों लाई? उनको ऐसा हो जाएगा कि यार ये आपके लिए कितना इंपॉर्टेंट होगा। है ना? तो उसमें मेरा प्यार का जो भाव है वो नजर आ रहा है।
(43:04) कि मैं कब किसी के लिए एक्स्ट्रा माइल जाऊंगा या फिर कब मैं अपने कंफर्ट के बाहर जाके कुछ करता हूं। हम है ना? तो वो मैं तब करता हूं जब मुझे भी वही चीज पसंद है। बहुत सही। तो मुझे अगर गिफ्ट लेना पसंद है ना तो मैं देने में यकीन रखूंगा। अगर मुझे अप्रिसिएशन पसंद है तो वो इंसान अप्रिशिएट भी करता होगा। कोई कुछ करता होगा तो अगर किसी को ये पसंद है कि कोई मेरा हाथ बटा दे तो वो भी हाथ बटाता होगा जहां भी जाता होगा। हम हम थोड़ा वैसा है। गिलव लैंग्वेज ये डिफाइन करती है कि मुझे क्या चीज करने का शौक है। हम वही मुझे चाहिए रिटर्न। हम [गला साफ़ करने की आवाज़]
(43:35) और बहुत कितनी सिंपल सी बात है। बट यहां लोग क्या करते हैं कि मुझे अगर एक्ट ऑफ सर्विस पसंद है तो मैं जबजब अपनी वाइफ को प्यार एक्सप्रेस कर रहा हूं। मैं सोच रहा हूं कि मैं इसका हाथ बैठा दूं किचन में जाके तो शी विल फील लव्ड। हम बट उसकी लव लैंग्वेज तो वो है ही नहीं। उसको ऐसा लग रहा है तुम बैठो ना यार इधर क्या टेंशन ले रहे हो। ये भी हम कर देते हैं। अपना काम करो। हम हम वो ऐसा कह रही है। ठीक है? उससे अ फिजिकल टच वाला उसका लव लैंग्वेज है। जो नॉन सेक्सुअल फिजिकल टच होता है कि अगर आप मूवी देख रहे हो मैं यहां बैठा हूं वो यहां बैठी है
(44:09) और अगर मैं उसका हाथ नहीं पकड़ूं तो थोड़ी देर में ऐसे हो जाएगी। हां हां है ना? [हंसी] तो अगर वो वहां कुछ काम कर रही है और मैं यहां बैठा हूं तो अगर उसने चाय रखी सपोज गैस के ऊपर हम तो वो जब तक उसको बीच में 30 40 50 सेकंड कि वो उबल रही है तो इतने में वो यहां आ जाएगी ऐसे ही यहां आएगी कुछ बाल में कुछ किया इधर हाथ देके खड़ी हो जाएगी फिर भागते हुए चली जाएगी उसको देखने तो क्योंकि उसकी लव लैंग्वेज है हम वो अगर पास में है और अगर वो किसी भी तरह से टच नहीं है तो उसको ऐसा लगता है कि आप मुझसे दूर-दूर क्यों हो रहा है हम पैसा हो
(44:44) तो मुझे यह समझना होगा कि उसकी लव लैंग्वेज क्या है? तो उसके लिए जब मुझे जब करना है तो मुझे उसी के स्टाइल में करना पड़ेगा। हम सिर्फ इतना बट सबकी लव लैंग्वेज डिफरेंट है वो प्रॉब्लम नहीं है। लोगों को लगता है कि क्योंकि मेरी ये है तो सामने वाले को भी इसी चीज में उतनी खुशी मिलेगी। हम नॉट नेसेसरी ये मिस्टेक है जो हम कर देते हैं। तो हमें लोगों के लव लैंग्वेज समझने चाहिए। हम बहुत आसान है और उसी तरह से हम अगर अभिव्यक्त करें अपना प्यार हम तो वह ज्यादा फलेफ बोलेगा। हम अमेजिंग वेरी गुड वेरी गुड वेरी नाइस। थैंक यू बहुत अमेजिंग। बहुत अच्छे से आपने
(45:19) एक्सप्रेस किया। मुझे यहां पर एक चीज जाननी है। अ आज के वक्त आज के दौर में हम अट्रैक्शन एक बड़ा इंपॉर्टेंट वर्ड है। आई गेट अट्रैक्टेड टुवर्ड्स समबडी। ठीक है? लेकिन यह भी देखा जाता है कि बहुत सारे लोग हर अट्रैक्शन को प्यार का नाम दे देते हैं। अट्रैक्शन और प्यार में एक्चुअली फर्क है क्या? मुझे ऐसा लगता है कि अट्रैक्शन जो है वो एस्थेटिक्स के भरोसे है सिर्फ बाहरी। हां एक्स्ट्रा नहीं तो कैसे होगा अट्रैक्शन? कोई इंसान मान लो अच्छा नहीं दिख रहा है। हम तो आपको अट्रैक्शन क्यों होगा? हम पर उस इंसान के साथ अगर आप रह रहे तो हो
(46:01) सकता है कि आपको ऐसा लगे यार इससे सही इंसान नहीं दुनिया में। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] तो जैसे हम दोस्तों में ही देख लें कि क्या हम वहां पे शक्ल देख के तो फ्रेंडशिप करते नहीं है। हम तो वहां हम टेक्निकली उस इंसान का व्यवहार उसका बिहेवियर देख के ही जुड़ते हैं उससे। करेक्ट है। बट रिलेशनशिप में ये गलतियां पूरी दुनिया करती है हम कि वहां हम सिर्फ एस्थेटिक्स की वजह से हम उस इंसान के साथ रिलेशन बनाते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो एक बहुत सिंपल फंडा हो गया क्योंकि हार्मोनली हम लोग इतने मोटिवेटेड है ना कि अगर हम किसी भी जगह गए
(46:32) किसी भी जगह मैं किसी क्लास में गया तो सबसे पहले मुझे ये करना है कि बाय डिफॉल्ट हां कंडीशंड ऐसे कि बाय डिफॉल्ट दो तीन लड़कियां जो मुझे अपने हिसाब से एस्थेटिकली अच्छी लग रही हैं। मैंने उनको टारगेट कर लिया। ये तीन लड़कियां अच्छी लग रही है। और हंटिंग शुरू और हंटिंग जब स्टार्ट हो गया है तो उन तीन में से एक आध जगह तो कुछ बात बन ही जाएगी। हम है ना? अब इसमें प्यार का भाव नहीं है। इसमें डोपामिन है। हम कि क्योंकि वो अच्छी लग रही थी ना तो देखो रिवॉर्ड केमिकल है ना कि उसको किसी तरह से अचीव कर लेना। हम तो वो एक सेंस ऑफ़ अचीवमेंट मेरे अंदर दे
(47:06) रहा है। हम कि देखा जो बंदी पसंद है दो हफ्ते में पटा लिया मैंने। उसके साथ घूम रहे हैं, फिर रहे हैं, समय बिता रहे हैं। अब उसकी कुछ आदतें नहीं पसंद है या उसको मेरी आदतें नहीं पसंद है या बिहेवियरल फ्रंट पे हम लोग चीजें वर्कआउट नहीं हो पा रही है। हमारी वैल्यू्यूज बहुत अलग-अलग हैं आपस में। 6 महीने में ब्रेकअप या फिर उस रिलेशनशिप में केओस रहेगा और खींचते रहेंगे उसको। तो इधर प्यार हुआ ही कहां बताओ? इधर प्यार हुआ ही कहां? यह जब मैंने 2017 में Instagram एक पेज बनाया था तो मैंने उस पेज का नाम दिया था गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड जीएफ बीएफ वर्सेस लवर्स। [हंसी]
(47:45) तो मेरे को लोग बोलते हैं भाई ये क्या है अतरंगी चीज नहीं। तो मैंने कहा यार इसमें ये है कि मुझे ऐसा लगता है कि जो लवर्स होते हैं वो तो लवर्स होते ही हैं। हम पर जो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड होते हैं वो सारे लवर्स नहीं होते। [हंसी] तो जो लोग प्यार में हैं वो तो प्यार में है ही। सही है। ठीक है? हो सकता है कि वो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड बने भी ना हो हम कि वो इंसान जो उस लड़की को चाह रहा है वो लड़की इसकी कभी हुई ही नहीं ना इसने उसको बताया हां ये बट ये लव ये उस प्यार में है ये उस इश्क में है उसके साथ आ और ये जो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड है
(48:16) हम ये हंटिंग वाले हैं सारे के सारे सही [हंसी] ये सब हंटिंग वाले हैं जिन्होंने टारगेट किया कि यार ये चाहिए वो चाहिए ये अच्छा है वो अच्छा है हम और एस्थेटिक्स को देखकर इन्होंने कनेक्शंस बना लिए अपने-अपने औकात के हिसाब से हम और [हंसी] वो वर्कआउट थोड़े टाइम बाद हुए तो हुए नहीं हुए तो नहीं हुए हम तो वहां ब्रेकअप्स फटाफट होते हैं हम तो वहां पर डेप्थ नहीं नजर आएगी आपको कभी हम वहां पर समर्पण नहीं नजर आएगा वहां पर त्याग नहीं नजर आएगा हम तो कहते हैं कि प्यार जो है वो वो भाव है मतलब हमने हैप्पीनेस भी है जॉय भी है एक्साइटमेंट भी है केयर भी है काइंडनेस भी
(48:55) है सब कुछ है बट हमने प्यार को इतना ज्यादा ऊपर क्यों रखा हुआ है हमने प्रेम को इतना ज्यादा प्योर क्यों माना है हम हमेशा से क्या बात है इस सेंटीमेंट में ऐसी तो इस सेंटीमेंट की खूबसूरती ये है कि जब आप किसी इंसान के लिए कुछ समर्पण कर रहे हो कुछ त्याग कर रहे हो अपनी अपना कंफर्ट अपनी चीजें छोड़ रहे हो उसकी खुशी के लिए और ऐसा करके आपको संतुष्टि मिल रही है हम दिस इज लव हम हम है ना कि वो ठीक से खा ले चाहे मेरे हक का ही खा ले हम हम हम तो मुझे अच्छा लगेगा। अगर वह भूखा रह गया ना तो मैं नहीं चैन से रह पाऊंगा। हम हम और उसने ठीक से खा लिया और आप भूखे सो गए।
(49:37) बट आप संतुष्टि से सोए हम कि यार कम से कम उसने खा लिया। ये प्रेम है। ये प्यार है। जहां पर मिलता कुछ नहीं है। जहां कोई रिवॉर्ड नहीं है। जहां सिर्फ देना ही उस प्यार का प्रकृति है। वही नेचर है। है ना? सैक्रिफाइस करना और त्याग करना सबमिशन में समर्पण में रहना और उसमें रहकर जो संतुष्टि मिल रही है इसलिए वो प्यार मुझे ऐसा लगता है कि इसलिए वो इमोशन थोड़ा सा स्पेशल है इसलिए वो थोड़ा अलग है हम कि यार सिर्फ देकर आपको वो संतुष्टि कैसे मिल सकती है बट होता है ऐसा इसलिए वो लव जो है वो इतना हम उसको हैरारकी में इतना ऊपर रखते हैं हम
(50:14) अब ये जो जनरेशन है जो ऐसे 10 लोगों को एक साथ हेलो हाय के मैसेज डाल रहे हैं जिसका रिप्लाई आ गया उसी से बात चालू कर कर दी। हम अब इसमें कहां है यह वाली बात? लव तो इंट्रोड्यूस ही नहीं हुआ असल में। चाहे वो रिलेशनशिप साल साल रहा भी होगा और वो खत्म भी हो गया होगा। वो गिव एंड टेक ट्रांजैक्शनल ही रहा पूरा। हम वैसा क्योंकि कंपैटिबिलिटी थोड़ी थी तो दो साल चल भी गया। हम बट प्यार तो है ही नहीं। हम वाह वेरी गुड। यानी कि अब आपका मानना है कि एक तरफा प्यार भी प्यार है। हां भाई प्यार का उधर से क्या रिस्पांस आ रहा है इससे लेना देना ही नहीं है। हम
(50:54) [गला साफ़ करने की आवाज़] जैसे एक छोटा बच्चा है वो नहीं सुन रहा हमारी। हम कह रहे हैं कि ये मत करो फिर भी वो कर रहा है। वो सुन भी नहीं रहा है। वो ध्यान भी नहीं दे रहा है। हम तो क्या हम ये बोलते हैं कि ठीक है फिर तू निकल अब यहां से। नहीं हम क्योंकि हम [गला साफ़ करने की आवाज़] प्यार में है ना उसके साथ [हंसी] तो हमें वहां से कुछ मिले कि नहीं मिले? हम उस चाहत के साथ थोड़ी कुछ करते हैं। हम हम तो इसलिए करते हैं क्योंकि वो कर वो नहीं करेंगे तो शायद हम बुरा महसूस करेंगे कि हमने नहीं किया। हम हम तो प्यार जो है वो अब जैसे हैप्पीनेस है तो
(51:27) ऐसा नहीं है ना कि हैप्पीनेस दोनों तरफ से होनी चाहिए। यार मैं खुश हूं तो हूं। हम है ना? यह तो यह तो ईश्वर की विशेष कृपा है हम कि आप जिस इंसान के साथ प्रेम में हैं, प्यार में हैं, वही आपके साथ प्यार में है। ये तो आप स्पेशली ब्लेस्ड हैं। फिर क्या बात है। और फिर ऐसी चीज को तो आपको पूजना चाहिए। ऐसी चीजों को तो आपको किसी कीमत पे खराब होने ही नहीं देना चाहिए। हम वो तो इतनी ज्यादा बड़ी एक तरह से नियामत है ईश्वर की। हम तो मुझे ऐसा लगता है कि बहुत ऐसे अभाग्य लोग हैं जिनके जीवन में उनको ये अनुभव कभी मिलता ही नहीं है कि उन्हें किसी से इस तरह प्यार हो
(52:02) हम कि वो उनके लिए करने का ही भाव रखें हम और अभी वो अगर जब हो जाए तो उसका अनुभव अलग है। हम तो बड़ा खूबसूरत एक्सपीरियंस है। क्या बात है। क्या बात है। आज के टाइम में अह डू यू डू यू योरसेल्फ बिलीव्स इन यू नो लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप होती है? हां रिलेशनशिप होती है पर आजकल उनका सर्वाइवल बहुत मुश्किल है यार इनसिक्योरिटीज के इश्यूज बहुत हैं। हम और हम लोग प्रलोभनों से इतने घिरे हुए हैं कि उस रिश्ते को चलाने के लिए हम बाकी सब चीजों का त्याग करें। हर वो [गला साफ़ करने की आवाज़] चीज जो हमारे आमने सामने दिख रही है हम उन सब चीजों की तरफ हम नजर भी ना डालें।
(52:45) हम इतनी स्ट्रेंथ अब ज्यादातर लोगों में रही नहीं। हम तो लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप चलते हैं और बहुत अच्छे चलते हैं। पर वहां एक्स्ट्रा केयर, एक्स्ट्रा अटेंशन और एक्स्ट्रा मेरे ख्याल से एफर्ट्स की जरूरत है उस रिलेशनशिप को। मतलब आपको एक आम रिश्ते से थोड़ा सा ज्यादा वहां [गला साफ़ करने की आवाज़] पर देना होगा। और देना मतलब कुछ करना नहीं है। मतलब अंतर्मन से हमें प्रिपेयर होना होगा उस रिलेशनशिप को चलाने के लिए। लॉन्ग डिस्टेंस वाला वो इनसिक्योरिटी से भरा होता है क्योंकि हम तो वहां पर छटपटाहट बहुत है हम तो कम होता जा रहा है मतलब देखा जाए तो
(53:24) और सर्वाइवल थोड़ा मुश्किल है। आपको ये लगता है कि सोशल मीडिया रिलेशनशिप को आज के टाइम में ज्यादा डैमेज कर रहा है। सोशल मीडिया जो है वो एक मतलब एक तरह की मिठाई है जो अगर ज्यादा खा ली तो नुकसान देगी। हम है ना? अगर उसका संतुलन में कंजमशन होता रहे तो शायद आप आनंद भी लेंगे हम और नुकसान भी नहीं करेगी। तो सोशल मीडिया वैसा है कि ना सिर्फ रिलेशनशिप पर वो जिंदगी के बहुत सारे डायमेंशंस को खराब कर रहा है। हम क्योंकि हम इंसानों की तकलीफ ये है कि हमारा एक सोशल ब्लूप्रिंट पहले से ही बना हुआ है। यानी कि जो बच्चा अभी पैदा भी नहीं हुआ ना
(54:04) उसका भी एक ब्लूप्रिंट रेडी है। कि वो पैदा होगा तो उसको कौन से स्कूल भेजना है। हम उसको क्या बनाना है? क्या पढ़ाना है? वो इंसान कैसा होना चाहिए? उसके पेरेंट्स ने उस जो एक सामाजिक व्यवस्था है, उन्होंने सब तय करके रखा हुआ है। यह 10 ऑप्शन है। इसमें से कुछ डिसाइड कर लो आप। हम क्या [गला साफ़ करने की आवाज़] बनाओगे? सिंगर बनाओगे, स्पोर्ट्समैन बनाओगे, अच्छा एकेडमशियन बनाओगे, कोई क्रिएटिव साइड कुछ करवाओगे या क्या करवाओगे? 810 ऑप्शंस हैं। हम ये करवाना है। तो हम हमारा एक क्या है कि एक ब्लूप्रिंट है। हम प्रोफार्मा है कि ऐसे ही होगा सब कुछ। हम
(54:35) तो उस वो ब्लूप्रिंट की समस्या यह है कि जैसे किसी भी कॉलोनी के अंदर हम दो घर हैं हम एक घर जो है वो एकदम बड़ा बंगलो है BMW Mercedes सब है उधर वर्ल्ड टूर करते रहते हैं बहुत हाई क्लास लाइफ स्टाइल है बट कास्टेंट स्ट्रेस में जीते हैं और एक घर ऐसा है जो छोटा सा घर है टू बीएचके वाला Wagon R टाइप कोई कार है एवरेज लेवल के स्कूल में उनका बच्चा पढ़ता हम एवरेज जीवनशैली जीत है हम पर रोज ईश्वर को धन्यवाद बोलते हैं कि हम खुश हैं बहुत है हम समाज जो है वो किसे ज्यादा सफल मान रहा है दोनों में से हां जो दिख रहा है [हंसी] है ना समाज क्योंकि इसलिए सफल मान रहा है
(55:21) क्योंकि हमारे उस ब्लूप्रिंट में हम बड़ी गाड़ी बड़ा घर बड़ी सक्सेस बड़ा ट्रैवल इसको ज्यादा महत्व है हां है ना और मतलब जो कंटेंटमेंट है ये कम में खुश होने वाली जो बात है उसको वो जगह नहीं मिली। हम मतलब एक इंसान अगर कम में खुश है ना तो कोई कोई भी उठाकर कह देगा कि तुझसे उम्मीद नहीं थी यार कम से कम तू कुछ करता जीवन में। है ना? तू कैसे मतलब ऐसे बैठा हुआ है। मतलब वैसी वाली बात है। करेक्ट करेक्ट। तो हमने क्या किया कि उस स्ट्रेसफुल लाइफ को नहीं देखा। हमने ये देखा कि इन्होंने क्या-क्या अचीव कर लिया है। हम तो एक सोशल ब्लूप्रिंट है। उस ब्लूप्रिंट
(55:54) के हिसाब से सफलता की एक डेफिनेशन है। हम कि ये सफलता ऐसी दिखती है। जब ऐसा घर, ऐसी गाड़ी, ऐसी लाइफ ताई लोग। हम तो क्या होता है कि हम जब रिलेशनशिप्स हैं तो रिलेशनशिप को लेकर भी एक ब्लूप्रिंट है। हम है ना? अब ऐसा हो रहा था पहले कि सोशल मीडिया नहीं था तो सब अपनी जिंदगियां जी रहे थे। सब अपना गोल सेट कर रहे थे। उसको अचीव कर रहे थे। हम अब सोशल मीडिया की वजह से हम इतने लोगों की जिंदगियों को देख रहे हैं कि हमें ऐसा लगता है उसने ऐसा किया। हमने तो वैसा किया ही नहीं। उसने वैसा किया। हमने क्या किया आज तक? एक मतलब एक बहुत ही बिलो एवरेज
(56:27) फाइनेंसियली जो व्यक्ति है ना उसके मन में भी ये भाव चल रहा है कि एक इंटरनेशनल ट्रिप तो मारना है यार। कुछ भी हो जाए। भाई क्यों मारना है यार? [हंसी] छोड़ना है यार। क्यों इस दुख में जी रहा है? सब बहुत अच्छा है। इसलिए मारना है क्योंकि आसपास का हर इंसान होकर आ गया है। हम है ना? तो उसको वो बात सता रही है। तो हम सोशल कंपैरिजन में पड़ गए और सोशल कंपैरिजन में अ हमको ऐसा महसूस करा दिया है कि हम इनफ नहीं है। हमारे पास बेस्ट नहीं है। अभी हम बहुत चीजों में कमजोर हैं या बहुत सारी चीजें कम है। हम और सोशल मीडिया जो है उसकी जो डार्क साइड
(56:59) है वो ये है कि वहां पर सिर्फ अच्छी चीजें प्रोजेक्ट होती है। फेलियर्स नहीं प्रोजेक्ट होते। हम हम है ना? तो सब अपना अच्छा तो बता रहे हैं बट अंदर की बात कोई नहीं बता रहा है। हम कहते हैं कि रिसर्चेस ये बताती है कि इंडिया में 58% लोगों को जो मैरिड है उसका 58% लोगों को लगता है कि मेरा पार्टनर मेरा सोलमेट नहीं है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मतलब 10 में से छह लोगों को है ना? 10 में से छह लोगों को ऐसा लगता है कि हम बेहतर डिर्व करते थे। हमें थोड़ा और अच्छा मिलना चाहिए था। राइट? और उन छह में से एक या दो ऐसे होंगे जिन्होंने अडप्ट कर लिया कि यार अब जो है
(57:34) यही है। हम जैसा भी है यही है और इसी के साथ रहना है। बट चार से पांच लोग ऐसे हैं जो रोज लड़ रहे हैं। जिनके घर में रोज युद्ध चल रहे हैं। हम जो कास्टेंट फाइट में है कि उस इंसान को किसी तरह मैं वैसा बना दूं जैसा मुझे चाहिए था। और सामने वाला भी यही सोच रहा है। और उनकी लड़ाईयां एंड होने का नाम नहीं ले रही है। बट उन लोगों की भी सोशल मीडिया प्रोफाइल देखोगे तो अच्छे-अच्छे फोटो डले हुए हैं। [हंसी] अब बीइंग अ रिलेशनशिप कोच मैं आपको बता रहा हूं कि जो कपल मेरे पास आकर अपनी दुर्गति बता रहा है जब उसकी सोशल मीडिया साइट अगर आप विजिट कर लो एक बार तो लगेगा यार
(58:10) सब लोग यहां तो कुछ ऐसा नजर नहीं आ रहा क्योंकि लोगों ने अपनी डिजिटल इमेज को इतना मेंटेन करके रखा है ना और लोग उससे प्रभावित हो रहे हैं हम और अपनी खुद की जिंदगी को कम आंक रहे हैं गॉड तो ये डिजास्टर है ना हम इसमें संतुलन गड़बड़ है तो सोशल मीडिया से ज्यादा इस तरह से इंस्पायर होना लोगों कीियों से कंपेयर करना वो सोशल कंपैरिजन में नहीं हो तो सोशल मीडिया इज अ ग्रेट टूल हम अगर आप कास्टेंट सोशल कंपैरिजन में है तो सोशल मीडिया जो है आपको कभी भी उस ग्रेटट्यूड के फीलिंग में आने ही नहीं देगा कि आपको लगे कि यार जितना है बहुत है वैसा है
(58:42) ओके अमेजिंग डू यू बिलीव इन मैनिफेस्टेशन [हंसी] इसके बारे में तो मुझे हालांकि कुछ पूछना था जाने से पहले आपसे अच्छा बट मेरा बचपन से अभी तक का अनुभव ऐसा है कि मैनिफेस्टेशन का जो पूरा मैकेनिज्म है वह तो मुझे नहीं पता पर मुझे इतना जरूर समझ में आता है कि एक इंसान जो फरारी के लिए काम करता है और एक इंसान जो Honda City के लिए काम करता है वो सोच जो है कि मुझे क्या चाहिए और मैं क्या विजुअलाइज करता हूं वो सोच उनके कोर्स ऑफ एक्शन को डिफाइन कर देती है हम कि फरारी वाला व्यक्ति नेचुरली ज्यादा काम
(59:26) करना ज्यादा ज्यादा मेहनत करना, ज्यादा हाथ पैर मारना, ज्यादा रिस्क लेने का इंटेंट अपने अंदर डेवलप कर लेता है। बिल्कुल सही है। और Honda City वाला व्यक्ति नेचुरली कंपेटिवली कम कम रहेगा उससे। और क्योंकि वो कोर्स ऑफ एक्शन बना है कि मुझे इतना तो करना ही है, उतना तो करना ही है। तो मैं ज्यादा मेहनत कर रहा हूं। मैं ज्यादा काम कर रहा हूं। मैं ज्यादा कमिटेड हूं और वर्क एथिक्स मेरे उस अकॉर्डिंग है तो नेचुरली मेरी उस इंसान से सफल होने की ज्यादा सफल होने की संभावनाएं हम होगी क्योंकि मेरा जो स्टाइल है काम करने का वो उससे कहीं ज्यादा इवॉल्वड है
(59:59) और उससे कहीं ज्यादा इंटेंस है हम तो मुझे ऐसा लगता है कि मैनिफेस्टेशन में जो फिजिक्स इनवॉल्वड है कि विचार की फ्रीक्वेंसी उसका अ जो प्रकृति है जो नेचर है उसकी फ्रीक्वेंसी के साथ कनेक्ट करना। फिर उन चीजों का आपकी तरफ आना। ये जो थ्योरी है ये तो अपनी जगह होगी और काम करती ही होगी। हम बट अगर कोई कोई सिर्फ इस तरह से सोच रहा है कि तो भी मुझे लगता है कि मैनिफेस्टेशन इज अ ग्रेट टूल क्योंकि वो आपके वर्क एथिक्स ही बदल देती है। हम वो आपके इंटेंट को चेंज कर देती है। आपके कोर्स ऑफ़ एक्शन को डिफाइन कर देती है। इसलिए जरूरी है कि आपको बहुत क्रिस्टल
(1:00:35) क्लियर पता हो कि मुझे क्या चाहिए। हम ताकि आपका कोर्स ऑफ़ एक्शन जो उतना ही क्लियर डिफाइंड हो और आप उस दिशा में काम करें। तो मुझे नहीं लगता कि कोई व्यक्ति जिसको फरारी चाहिए वो दिन भर सोफे पर बैठ सकता है। तो वो विचार जो है उस विचार ने उसके अंदर ये भाव पैदा किया कि भाई निकलो और कुछ करो हम तो अ इस लिहाज से मैंने अपनी लाइफ में बहुत सारी चीजें अचीव की है। नाइस और आगे भी बहुत सारी चीजें सोचता रहता हूं और मुझे लगता है कि इन कारणों से मैं इस फैशन को कंटिन्यू रखूंगा [हंसी] कि हां मतलब इससे मेरे अंदर इंटेंट डेवलप होता है और इसलिए बड़े सपने देखना, बड़ी
(1:01:14) चीजें विजुअलाइज करना, बड़े फॉर्म पे अपने को विजुअलाइज करना, बड़ी हस्तियों के बीच में अपने को देखना या बड़ा [गला साफ़ करने की आवाज़] इंपैक्ट क्रिएट करते हुए अपने को सोचना ये सब मैं करता रहता हूं ताकि फिर मुझे समझ में आता है कि जब मैं अपने को इस तरह से देख रहा हूं कि मैंने लाखों लोगों की जिंदगीियों में कुछ इंपैक्ट डाला है। तो फिर मेरा पड़ोसी उधर क्या पानी फैला दे रहा है और क्या कर दे रहा है तो मेरे को फिजूल लगता है वो सब फालतू चीजों में पड़ना। मुझे ऐसा लगता है यार अपना क्या विज़ है और इससे भी कौन बहस करेगा इससे भी कौन
(1:01:43) पड़ेगा चक्कर में तो कोर्स ऑफ़ एक्शन डिफाइन हो गया कि आप क्या चाहते थे उस कोर्स ऑफ़ एक्शन में ये आ ही नहीं रहा कि आप ये जो छोटी-मोटी हवाएं चलती रहती है आसपास हम इसमें आप हिल जाएं हम तो आपको इन हवाओं के ऊपर उड़ना पड़ेगा वो क्लियर हो जाता है अमेजिंग तो ये मेरी समझ है इसके बारे में बहुत सही बहुत सही अ क्या जैसे क्या होता है लोगों के अपने एक्सपीरियंस होते हैं हां फॉर एग्जांपल रिलेशनशिप में जब हम मैनिफेस्टेशन की बात करते हैं हम तो एक इंसान का एक्सपीरियंस शुरू में कोई खराब रहा हम और फिर बहुत बार जब वो पैटर्न क्रिएट हो चुके होते हैं हम
(1:02:20) तो उस वो इंसान सिमिलर तरह के लोग और भी अट्रैक्ट करता है अपने जीवन में क्योंकि वो करेक्शन नहीं कर पाता है अपनी सोच में तो डू यू बिलीव इन दिस ऐसा होता है हां ऐसा होता है ना कि हम लोग मैंने ऐसे बहुत केसेस देखे हैं कि व्यक्ति रिलेशनशिप में फेल हो गया है। उसे नया रिलेशनशिप बनाना है। हम तो ये वही नहीं सोच रहा है कि वो फेल हो गया है। हम वो नए में पीछे वाले को ढूंढ रहा है। ओ हम कि यार उसकी वो बात अलग थी। उसकी वो चीज ऐसी थी। उसकी वो चीज वैसी थी। अब नए वाले में आप वो ढूंढ रहे हो। अरे ये भाई वो इतना ही अच्छा था तो आपका वर्कआउट
(1:02:57) हो रहा होता ना। हम तो पहले थी ये असेसमेंट कि हम समझे कि वो उतना अच्छा भी नहीं था। है ना? और फिर यह कि हमें आगे जो चाहिए वो कैसा हो हम तो उसकी क्लियर डेफिनेशन होनी चाहिए। मतलब बीइंग एन इमोशनल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट मुझे समझ में आता है कि आप किसी भी चीज को किस तरह से पर्सव करते हो हम ये सबसे बड़ी गेम है हम कि जैसे आप 100 लोगों से जाके पूछो प्यार क्या है? तो 100 डेफिनेशन दे देंगे। हां हां एक कह देगा प्यार वो है यार जिसमें इंसान आपके लिए सब कुछ छोड़कर आ जाए। हम हम और एक कह रहा है कि प्यार वो है यार जिसमें इंसान आपके साथ बैठना चाहता है पर
(1:03:37) फिर भी आपके साथ ना होकर वो कहीं दूर जाकर कमा रहा है ताकि आप खुश रह सको। आ है ना हम तो सबकी अपनी डेफिनेशन है। डेफिनेशन मतलब मुझे जो चाहिए मेरे कन्वीनियंस के हिसाब से मैंने एक डेफिनेशन बना ली। हम क्योंकि मुझे ये चाहिए तो मेरे हिसाब से अगर तुम मुझसे प्यार करते तो ये करते हम है ना? तो मैंने प्यार को जैसे पर्सव किया है हम वो एक एक खाका तैयार है दिमाग में। अब जिस दिन एक ऐसा इंसान टकरा जाए हम जिसका बिहेवियर जिसका स्टाइल उस ब्लूप्रिंट के साथ थोड़ा सा मेल खा रहा है उस इंसान को देख के लगेगा शी इज़ द वन। हां है ना? हो सकता है कि कोई और जो है उसने उसको
(1:04:17) रिजेक्ट किया है। हम बट वो मुझे पसंद आ गई है। क्यों? क्योंकि मेरे जो जिस तरह से मैंने पर्सव किया प्यार को या मैंने अपने रिलेशनशिप को जिस तरह से सोचा उसमें फिट बैठ रही है। हम तो सच कहूं तो जैसे अब शांति पीस की बात कर लो। पीस आपके लिए कुछ हो सकती है मेरे लिए कुछ हो सकती है। हम है ना? तो आपने हमेशा पीस को किस तरह से पर्सव किया और मैंने कैसे पर्सीव किया। किसी को ऐसा लग रहा है कि पहाड़ों में ही शांति है। है ना? और किसी को ऐसा लग रहा है कि घर के सामने जो पार्क है ना वो भी काफी है। है ना? आप जा के उधर बैठो तो सही। आप ऐसी बड़ी-बड़ी बातें क्यों कर रहे हो कि
(1:04:52) पहाड़ों में जाना है? तो जब जाएंगे तब जाएंगे। हमें तो रोज चाहिए। तो वो पार्क भी काफी है। वहां भी नेचर है। वहां भी पेड़ पौधे हैं। वहां भी ग्रीनरी है। वहां भी आप म्यूजिक लगाइए, बैठिए, वॉक करिए। यू विल फील पीस। हम इट जस्ट कि हम कैसे पर्सव करते हैं। अब जिन्होंने वैसे ही पर्सव किया है ना वो मौका ढूंढते रहते हैं कि मौका मिले तो उधर जाएं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] अरे यार कब तक भागते रहोगे? हम चीजों को आप डिफरेंटली सोच कर आसान भी बना सकते हो। हम ऐसा तो हम चीजों को कैसे पर्सव करते हैं वैसे ही हमें वो चीजें महसूस होती है हम
(1:05:24) और रिलेशनशिप में भी यह होता है कि आप जब रिलेशनशिप में पढ़ना चाहते हो तो आपने उस चीज को किस तरह से इमेजिन किया है किस तरह से सोचा है हम जब वैसा हो जाएगा तो आपको ऐसा लगेगा कि सही मिल गया। तो यह असेसमेंट होना चाहिए कि आपकी सोच, आपकी जो धारणाएं हैं या आपकी कंडीशनिंग है या आपके प्रीवियस एक्सपीरियंसेस के जो पैटर्न्स आपके दिमाग में बने हैं हम वो कितने ठीक हैं। अगर वो ठीक नहीं है तो उनको चेंज कर लो क्योंकि वो सोच बदल जाएगी ना तो उस पार्क में भी शांति मिलेगी। हम अब किसी को बार के अंदर बैठ के ही वो दो पैक मार के ही शांति मिल रही है। हम
(1:05:57) है ना? तो उस उसका उसने वैसे पर्सव किया है कि अगर मुझे थोड़ा पीस चाहिए या थोड़ा सा रिलैक्सेशन चाहिए ना तो फिर हाथ में ड्रिंक होना चाहिए यार। मुझे मजा नहीं आता ना। मेरे को नहीं हो पाता कहीं से। उसने ये सोच रखा है कि मेरा हो ही नहीं पाता है कहीं से। हम जबकि पीस जो है वो जो सेंटीमेंट है उस सेंटीमेंट का ऐसा कोई नियम नहीं है। हम कि मैं इसको ऐसे ही होने वाली हूं। [हंसी] है ना? बट उस व्यक्ति ने अपने लिए क्या लिमिटेशन क्रिएट कर ली? हम तो आप उस लिमिटेशन को ब्रेक कर दो। हम आप नए एमावरिंग बिलीफ डेवलप कर लो। तो वही चीज आपको और आप देखना कि जिन लोगों ने
(1:06:31) ट्रांसफॉर्मेशन अपने जीवन में की है वो बोलते हैं ऐसा हम कि यार पहले मैं बहुत अल्कोहलिक था और जब मैंने छोड़ा अब मुझे इस पार्क में और यहां चहक महक चलती रहती है यहीं पे अच्छा लगता है। अब मेरा मन भी नहीं करता वहां जाने का। अब मुझे ये चाहिए हम कहने कि वो बिलीफ शिफ्ट हो गया। तो जो चीज पहले वहां मिल रही थी अब वो यहां मिल रही है। इसका मतलब यह है कि हर चीज हर जगह उपलब्ध है। हम आप उसको ट्यून कहां बैठ के करते हो हम ये आप तय करते हो और ये एक धारणा से होता है और धारणाएं बदली जा सकती है। बहुत सही। है ना? और अगर आपको लग रहा है यार मुझसे
(1:07:04) नहीं हो पा रहा तो आप किसी एक्सपर्ट की हेल्प ले लो। हम कि वो थेरेपीस करें। वो आपके साथ सेशंस करें, बैठे, बातें करें और उन धारणाओं को शिफ्ट करने में आपकी मदद कर दे। जस्ट एन अकाउंटेबिलिटी पार्टनर हम सिर्फ ऐसा हम तो मतलब जिंदगी बड़ी खूबसूरत है और बड़ी आसान है। आप उसको थोड़ा सा स्मार्टली या उसको थोड़ा सा वाइड थोड़ा ब्रॉड नजरिए से देखें। वैसे नहीं कि हमने ऐसा देखा है तो यही होता है। हम वो ना हो बस [गला साफ़ करने की आवाज़] हम ऐसा कोई रिलेशनशिप मिथ जो आप बहुत ज्यादा सुनते हैं और आपको लगता है नहीं कोई भी मिथ कोई गाइडेंस कोई मिथ
(1:07:40) [गला साफ़ करने की आवाज़] एक बहुत बड़ा मिथ तो ये है कि रिलेशनशिप जो है वो रिवॉर्ड का मामला है। है ना? लोगों को ऐसा लगता है कि मुझे अब शादी इसलिए कर लेनी चाहिए क्योंकि अब शादी जरूरी है। मतलब एज इफ शादी होने से कोई एक रिवॉर्ड आ जाएगा उनके लाइफ में। हम या मुझे एक गर्लफ्रेंड इसलिए चाहिए क्योंकि गर्लफ्रेंड होने के अपने कोई रिवॉर्ड्स हैं। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] है ना? दैट्स अ मिथ। रिलेशनशिप इज़ मोर अबाउट सैक्रिफाइसेस, इट्स मोर अबाउट रिस्पांसिबिलिटी, इट्स मोर अबाउट इनकन्वीनियंस। हम और जब ये तीनों चीजें करके आपको अच्छा लगे
(1:08:14) तो ही पढ़ो। पढ़ो नहीं तो यू आर नॉट रेडी। तो आप उससे बचिए। हम कोई इंसान रेडी नहीं है और आप उसके सिर पर रिलेशनशिप ले जा के रख देंगे वो उसके जीवन का सबसे बड़ा ट्रॉमा बन जाएगा। करेक्ट। तो रिलेशनशिप हमेशा हर इंसान के लिए एक जैसा काम नहीं करते। हम वो अगर इन तीन चीजों के लिए इनक्वीनियंस रिस्पांसिबिलिटी और सैक्रिफाइसेस इनके लिए रेडी है तो ही रिलेशनशिप आपके लिए है। सिर्फ लवी डवी वाली चीजें जो अच्छी हैपनिंग साइड है उसकी उसको देखकर रिलेशनशिप बन रहा है तो आप गड्ढे में भी कर सकते हो। [हंसी] हम ये एक इंसान जो मल्टीपल रिलेशनशिप में आता है
(1:08:52) पहले किसी के साथ होता है उसको छोड़ता है थोड़े दिन बाद मतलब मन भर जाता है सो मतलब जेनुइनली उसको फील होता है कि नहीं यार आई एम नॉट गेटिंग व्हाट आई वांट फ्रॉम दिस रिलेशनशिप देन मूव टू अनदर वन देन मूव टू अनदर वन यहां सबसे बड़ी गलती क्या है देखिए हमारा जो ब्रेन है वो इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन पे काम करता है हम [गला साफ़ करने की आवाज़] कि बर्गर बर्गर भी सामने रखा है और डंबल भी सामने रखा है। [हंसी] है ना? या तो पसीना बहा लो या बैठ के बर्गर खा लो। हम तो मन बर्गर का ही करेगा। हम टीवी है, रिमोट है, एसी है या तो Netflix लगा लो या बाहर जाके मेहनतें करो धूप में।
(1:09:31) हम तो मन यही करेगा। तो इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन हम लोग इसलिए इस तरह से प्रोग्राम्ड है क्योंकि वही बात है कि जब जंगलों में हो रहे थे हम तो तब हमारे ऐसा नहीं होता था ना कि फरारी लेनी है, ड्रीम्स है, गोल्स है, फाइव ईयर डाउन द लाइन, 10 ईयर है। ये तो था नहीं। हम तब ऐसा था कि अभी अभी क्या चाहिए? हम तो अभी जो चाहिए वही सबसे ज्यादाेंट है। हम है ना? अभी यहां पे थ्रेट लग रहा है यहां से भागना ही इंपॉर्टेंट है और कुछ भी इंपॉर्टेंट नहीं है। चाहे आप कुछ जरूरी चीज लेने आए थे भूल जाओगे उसको बस भागो। तो वो इंस्टेंट इस मोमेंट पे क्या जरूरी
(1:10:02) है? हम वो सोचते रहने के लिए हम लोग प्रोग्राम्ड हैं ज्यादा। हम बट अब उन जंगलों में नहीं है। हम एक बहुत ही व्यवस्थित सेटअप में जी रहे हैं। हम तो अब हम क्या प्लान कर पाते हैं? 2 साल में क्या चाहिए? 5 साल में, 10 साल में, 20 साल में, 50 साल में अब हम ये प्लानिंग कर रहे हैं। तो ब्रेन उसके लिए रेडी नहीं है। ये हमारी क्रिएशन है। हम राइट? तो अब क्या हो रहा है कि इंसान जब किसी इंसान के क्लोज जाता है। मान लीजिए कि मुझे हार्मोनल मोटिवेशन है अंदर। मुझे कोई लड़की मेरे हिसाब से अच्छी लगी। हम तो टेस्टोस्टेरोन इज देयर। हम उस लड़की को अगर मैं चस करता हूं तो
(1:10:36) डोपामिन इज देयर। हम उससे अगर बात बनती है तो ऑक्सीटोसिन इज देयर। हम तो यह जो सारी केमिस्ट्री है बॉडी के अंदर की वह मुझे अच्छा महसूस करा रही है उस इंसान के होने से हम जिसको कहते हैं हवाओं में रहना फील गुड फैक्टर इट्स अ ग्लोरियस पार्ट ऑफ रिलेशनशिप हम है ना जिसको हनीमून पीरियड कहते हैं हम तो ये ग्लोरियस फेस जो होता है ये इनिशियल फज़ होता है रिलेशनशिप का जो 6 से 18 महीने के बीच में कभी भी डाइलट हो जाता है हम क्योंकि एक ही इंसान को बार-बार सामने पूरे टाइम देख के कितना सरप्राइज हो लोगे है ना हम एक कि इंसान को बार-बार सामने देख के
(1:11:11) कितना लव्ड फील कर लोगे। हम कितना सेक्स कर लोगे, कितना रोमांस कर लोगे। तो एक टाइम के बाद वो ऑक्सीटोसिन है या वो डोपामिन मिल नहीं रहा उस रिलेशनशिप में। हम बट वही चीज वापस रिपीट हो सकती है। अगर कैरेक्टर चेंज हो जाए इंसान नया आ जाए तो फिर वो जीरो से शुरू होगा। हम तो क्या होता है कि किसी भी रिलेशनशिप की जो शुरुआत होती है वो यूफोरिक होती है। हम एक यूफोरिक एक्सपीरियंस होता है। जैसे किसी ने कोई सब्सटेंस ले लिया हम है ना? तो वो यूफोरिक एक्सपीरियंस होता है हम कि उतनी देर के लिए बहुत मजेदार लग रहा है और वो उस एक्सपीरियंस को बार-बार लेने के
(1:11:44) लिए बार-बार वो कंज्यूम करता है। इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन में हम क्या करते हैं? हम अपने आपको वो ग्रेटिफिकेशन देना चाहते हैं कि यार अभी कोई ऐसी चीज जो मुझे वो वो यूफोरिक एक्सपीरियंस दे सके। अच्छा फील कराएगा। अच्छा फील करा सके तो वो करना है। सही। तो आपको एक इंटरेस्टिंग बात बता देता हूं कि एक्स्ट्रा मेटल अफेयर्स जो होते हैं वो ज्यादातर वो लोग करते हैं जो हैप्पीली मैरिड है। हम इंटरेस्टिंग है। है ना? हमें ऐसा लगता है कि ये व्यक्ति खुश नहीं होगा इसलिए ऐसा कर रहा है। नहीं अगर वो खुश नहीं होता तो शायद उधर ही हाथ पैर मार रहा होता।
(1:12:18) कुछ ठीक करूं। क्योंकि ये कंटेंटमेंट में है। एफर्टलेसली इनका रिलेशनशिप चल रहा है। तो जैसा आपने शुरुआत में नहीं कहा था कि वो एडवेंचर चाहिए। अब करूं क्या? हम रिलेशनशिप अच्छा ही चल रहा है। सब बढ़िया ही है। हम तो बढ़िया है मतलब थोड़ी बोर्डम है। हम स्पार्क नहीं है। हम तो वो यूफोरिक एक्सपीरियंस कहां से आएगा फिर? हम वो एक नया इंसान से आ जाता है। तो व्यक्ति जो है वो करता रहता है। और कुछ लोग टेंडेंसी होती है कुछ लोगों की कि वो हैबचुअली इस काम को रिपीट करते रहते हैं। हम वो उनके एक्स्ट्रा मेडल अफेयर मतलब एक पे नहीं रुकता। चलते ही रहते हैं। जितनी जगह
(1:12:53) चल रहा है उतना यूफोरिया हम उतना मजा है। तो एक नशा है। हम तो जो लोग इस तरह की टेंडेंसीज में वो आमतौर पर एकदम से निकल भी नहीं पाते। उन्हें पता है कि यार उन्होंने बहुत अच्छा नाम कमाया है। बहुत अच्छी पोजीशन बनाई है। सब बर्बाद हो गया है समाज में। सब नाम खराब हो गया है। सबको पता लग गया है कि ये किस तरह का इंसान है। और उसको ऐसा लग रहा है यार कि मैंने जिंदगी में जो कमाया वो सब पानी में चला गया। फिर तो रुक जाना चाहिए कि नहीं? हम रुकना चाहता है बट फिर वापस जहां मौका मिलेगा फिर हरकत कर देगा। क्यों? क्योंकि आदतन ऐसी चीजें कर रहा है।
(1:13:29) इस तरह के पैटर्न्स बन गए हैं कि वो रिपीट होते रहेंगे। बहुत स्ट्रांग बिल चाहिए ऐसे पैटर्न से बाहर निकलने के लिए। तो वो यूफोरिया जो है वो चाहे अल्कोहल हो, चाहे ड्रग्स हो, चाहे कोई भी सब्सटेंस हो, अ चाहे ट्रैवलिंग हो, घूमना हो, है [हंसी] ना? चाहे अपने दोस्तों से मिलना हो, हम है ना? चाहे एक रिलेशनशिप बनाना हो। ये सब यूफोरिक एक्सपीरियंसेस हैं। हम इसलिए हम इन सब चीजों को बार-बार करना चाहते हैं। हम बट ऐसा कहते हैं कि अ जीनियस नोस वेयर टू स्टॉप। हम तो एक बुद्धिमान इंसान को पता होता है कि हां यह करना है बट इतना करके रुक जाना है हम
(1:14:05) और जो लोग भावनात्मक रूप से परिपक्व नहीं है वो उसी रास्ते चलते चलते चले जाते हैं रिलेशनशिप में वर्स्ट एडवाइस जो आपने आज तक सुनी है कौन सी वाली बताऊं [हंसी] मल्टीपल बताओ आप हां रिलेशनशिप में वर्स्ट एडवाइस की बच्चा पैदा कर लो सब ठीक हो जाएगा ओ और ये ये मतलब सारे जहाजों को जला देने वाला रास्ता ही है। पर ये रिलेशनशिप के लिए ठीक नहीं है। स्पेशली तब जब आप दोनों का ही सर्वाइवल ठीक नहीं है और आप एक तीसरी जिंदगी को ले आओगे और आपको लगता है उसके भरोसे आपका जीवन चलेगा। म गॉड ये तो गलत है। ओके बेस्ट एडवाइस यू हैव हर्ड। अ मुझे लगता है कि
(1:14:52) भावनात्मक रूप से थोड़ा परिपक्व रहना और इंपल्सिव ना रहते हुए स्थिरता रखना और हेल्दी कम्युनिकेट कर लेना ये कितने भी बड़े मसले को सॉल्व कर सकता है मतलब अगर आपको चलाना है तो भी नहीं चलाना है तो भी म्यूचुअली शांति से बहुत कुछ चीजें हैंडल ओवर होती है हेल्थली कम्युनिकेट करना और स्थिरता रखना ओके ऐसी कोई किताब या किताबें जो आप सजेस्ट करते हैं कि अगर कोई रिलेशनशिप में है तो यार ये तो पढ़ना चाहिए। जानोगे तो ही आप बेहतर कर पाओगे। जैसे दो तीन बुक का आपने जिक्र भी किया था। वो तो बहुत ज्यादा पॉपुलर है ही। फाइव लव लैंग्वेज हो गई। मेन आर फ्रॉम मार्स वमेन
(1:15:31) आर फ्रॉम वीनस एलन पीस और बारबरा पीस ने काफी कुछ लिखा है। हम रिलेशनशिप के ऊपर तीन चार किताबें। मुझे लगता है सारी पढ़नी चाहिए। अमेजिंग। और उसके अलावा इमोशनल इंटेलिजेंस के अराउंड कुछ किताबें हैं। मतलब इमोशनल इंटेलिजेंस और ह्यूमन साइकोलॉजी पर अगर कुछ लिखा है तो वो पढ़ना चाहिए क्योंकि यह कैटलिस्ट है। हम अ अपने इमोशंस को कैसे हम एड्रेस करें, कैसे हम उसको मैनेज करें, कैसे उनको समझें? इतना भर इंसान समझ ले ना तो उसकी पर्सनल प्रोफेशनल लाइफ हर जगह वो बहुत एक्सेल कर सकता है। हम अमेजिंग अमेजिंग। आई थिंक भाई मुझे ऐसा लगता है कि जितने भी लोग यहां तक पडकास्ट
(1:16:10) में रहे हैं सबको आज बहुत कुछ मिल गया है और सच में जिस सहजता से आप ये सब एक्सप्रेस कर रहे हैं इससे ये समझ में आ रहा है कि आपका जो कंट्रीब्यूशन टुवर्ड्स पीपल है इज सो मच नो एंड ऑब्वियसली वो आपके वीडियोस के थ्रू आपके कंटेंट के थ्रू झलकता ही है लेकिन जेनुइनली बोल रहा हूं मैं आपको कि आपसे इंटरेक्ट करके मुझे समझ में आया कुछ नए मायने समझ में आए रिलेशन रिलेशनशिप के कुछ ऐसी चीजें समझ में आई जिस जिस पर्सपेक्टिव को मैं समझ नहीं पा रहा था आज वो आपसे सुनने को मिला समझने को मिला और बहुत सारी कुछ ऐसी भी चीजें हैं जो मैं मैं जीवन में
(1:16:44) मानता हूं तो आप आए तो समझ में आया कि चलो मैं सही सोच रहा हूं एंड आई एम श्योर अबाउट इट जितने भी लोग ये पडकास्ट देख रहे हैं आज आपको बहुत सारे ऐसे सीक्रेट समझ में आए होंगे जो आपको रिलेशनशिप में आपकी मदद जरूर करने वाले हैं। कोई भी ऐसी जो बेस्ट चीज आपको लगी, आप मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखना कि दिस इज़ यह सबसे इंपॉर्टेंट चीज थी जो मेरे लिए थी। वो कमेंट बॉक्स में करना और साथ के साथ मैं डिस्क्रिप्शन में सर के सारे लिंक डाल दूंगा डिस्क्रिप्शन में। इनका कंटेंट कंज्यूम जरूर करना। इतना प्यारा कंटेंट बनाते हैं। चाहे वो शॉर्ट फॉर्म
(1:17:16) वीडियो हो, चाहे वो लॉन्ग फॉर्म वीडियो हो। इतना प्यारा कंटेंट है और मुझे ऐसा लगता है कि रिलेशनशिप एक ऐसी चीज है जो हम सबसे ज्यादा इग्नोर करते हैं। लेकिन यह मुझे लगता है ये आर्ट का हिस्सा है। इसको सीखा जा सकता है। अगर आप सही कंटेंट कंज्यूम कर रहे हैं, सही किताबें पढ़ रहे हैं तो आप जान सकते हैं कि आप अपने रिलेशनशिप को बेहतर कैसे कर सकते हैं। बहुत सारी चीजें हम खराब कर चुके होते हैं। लेकिन उनको हील भी किया जा सकता है। खराब जो चीजें हैं उनको बेहतर भी अपनी गलतियों को सुधारा भी जा सकता है। ना कि यह देखकर कि सामने वाले इंसान में क्या
(1:17:46) गलती है। बट ये देखकर एटलीस्ट कि मैं क्या बदल सकता हूं। एंड एंड ऑल द क्रेडिट गोज़ टू विकास आपको। थैंक यू सो मच। थैंक यू सो मच। मुझे बहुत खुशी हुई। बहुत ही अच्छा लगा। हम्म और उम्मीद है कि ये कुछ वैल्यू ऐड करेगा और अगर सच में वैल्यू ऐड की तो और आगे बातचीत करेंगे। अब्सोलुटली। अब्सोलुटली। पार्ट टू लिख देना। कमेंट बॉक्स में पार्ट टू लिख देना कि आपको लगा अभी प्रेशर आ जाएगा ना। जितने [हंसी] नंबर होंगे पार्ट टू पर उतना उतना जल्दी दोबारा से ब्रडकास्ट करेंगे। विकास भाई इट वास प्रेजर मीटिंग यू जेनुइनली बोल रहा हूं फ्रॉम माय हार्ट आई फेल्ट अमेजिंग
(1:18:20) मीटिंग यू बहुत ही जेन्युइन फील हुआ आपके साथ ये वक्त बिता कर एंड लुकिंग फॉरवर्ड टू सी यू अगेन थैंक यू सो मच डेफिनेटली जरूर मिलेंगे थैंक्स अ लॉट थैंक्स अ लॉट
No comments:
Post a Comment