“What Happens When a Monk Falls in Love?” Ven. Siri Sivali on Desire, Sex & Spirituality
Author Name:Beyond The Screen with Shivijj
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Title: “What Happens When a Monk Falls in Love?” Ven. Siri Sivali on Desire, Sex & Spirituality
Author Name: Beyond The Screen with Shivijj
Description: What happens when a Buddhist monk falls in love? Can a monk experience sexual desire while following a spiritual path? In this thought-provoking conversation, Ven. Siri Sivali explores the complex relationship between love, desire, sex, celibacy, and spirituality.
Discover how Buddhist teachings approach romantic attachment, physical desires, self-discipline, and the challenges of living a monastic life. This discussion raises important questions about human emotions, spiritual commitments, and the search for inner peace.
Topics Covered:
What happens when a monk falls in love?
Buddhist teachings on desire and attachment
Sex, celibacy, and monastic discipline
Love versus spiritual commitment
Understanding human emotions through spirituality
Overcoming desire and finding inner peace
About Our Guest :
Ven. Siri Sivali is a Buddhist monk who brings a refreshingly open perspective to spirituality, relationships, human desires, and the realities of monastic life. Known for addressing questions that are often left unspoken, he challenges conventional thinking and explores the relevance of Buddhist teachings in today's world.
From relationships and human desires to spirituality, religion, and inner peace, this episode explores thought-provoking questions about Buddhist teachings and the realities of monastic life.
🎙️ Watch till the end for “Would Buddhism Allow This?” and “What Would Buddha Say?”
💬 COMMENT BELOW: Can a person truly give up love, desire, and worldly attachments to follow a spiritual path?
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0:00 - Intro
2:08 - Guest Intro
2:51 - Do Women Face More Rules in Buddhism?
7:47 - Why Are Women Seen as Distractions?
9:58 - Can a Monk Fall in Love?
11:10 - His Thailand Love Story
13:02 - Can a Buddhist Monk Have Physical Intimacy ?
13:33 - Do Monks Ever Hide Their Desires?
15:55 - The Decision to Become a Monk
18:45 - Hinduism vs Other Religions
26:14 - Women’s Freedom in Hinduism vs Other Religions
31:38 - One World, One Religion
36:28 - Jay Shetty: From Monk to Normal Life
38:43 - His Controversial Views on Sadhguru
42:47 - Why Do We Feel Empty Despite Having Everything?
43:56 - Instagram Through Buddha’s Eyes
45:31 - Segment : Would Buddhism Allow This ?
50:38 - Segment : What Would Buddha Say ?
1:00:27 - Thank You
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Transcript:
(00:00) आई एम अ मक जो सबसे फेमस और पॉपुलर है। हिज नेम इज जय शेट्टी। [संगीत] बट द होल वर्ल्ड इज फॉलोइंग हिम फॉर श्योर। और लोग तो आसाराम बापू को भी फॉलो करते थे। राम रहीम को भी फॉलो करते थे। और भी ऐसे बड़े-बड़े [संगीत] स्पेशल लीडर्स हैं जिनके कई सारे ये आए हैं। तो ना दिख दिखाने की बात अलग होती है। दिखने की बात अलग होती है। पर मैं जय शेट्टी के बारे में ऐसा। व्हाट इज योर टेक ऑन सद्गुरु देन? आप चाहते हैं कि ये पडकास्ट कंट्रोवर्शियल जाए। इज इट ट्रू कि बुद्धिज्म में वुमेन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है मक बनने के लिए। ज्यादा रूल्स है वुमेन के लिए। बिकॉज़
(00:40) व्हाई डू वी सी मोस्ट ऑफ़ देम आर मेल। फीमेल जा इतनी आसानी से गुरु तय के लिए तैयार नहीं होती है। क्या आप इतना अपने आसानी से बाल काटने तैयार रहेंगे? बुद्धा ने ये तो बोला है कि ये फील मत करो बट कोई फीलिंग्स को रोक नहीं सकता। तो जब मॉम फील करता है किसी वीमेन के लिए तो क्या होता है? कि यही वो प्यार है जिसका मैं इंतजार कर रहा था। ऐसे टाइप का हो जाएगा। क्या आपने पर्सनल लाइफ में अपने ऐसा कुछ फेस किया है कभी आकर्षण? उस मॉल में जब मैं गया था तो आई वास लुकिंग समथिंग तो वहां पे एक लड़की आई थी। ठीक है? शी वास् नॉट दैट मच अट्रैक्टिव
(01:11) बाय लुक्स। और दरअसल फिर जब मेरा ध्यान गया उस लड़की पे तो आई वाज शॉक कि वो बहुत कॉन्फिडेंटली मुझे देख रही थी। वो लड़की मुझे अट्रैक्ट हुई और मेरे माइंड में लड़की वो दो दिन चली। मुझे लगा कि मेरे को Facebook पे तो भी नंबर Facebook पे तो भी फ्रेंड बनाना चाहिए था। क्या बुद्धिज्म के ओल्ड टेक्स्ट में यह लिखा गया है कि वीमेन इज अ टेंप्टेशन और अ डिस्ट्रैक्शन। एक मैन के लिए क्या है? वुमेन टेंप्टेशन है। वुमेन के लिए मैन टेंप्टेशन। मैं वीमेन की बात करूं क्योंकि वी एवर टॉकिंग अबाउट इट। एंड अगर वीमेन के लिबरलिज्म की बात करें तो जितना लिबरलिज्म
(01:40) [संगीत] आई थिंक हिंदू में भी हमें देखने को मिलता है। वो शायद हमें कहीं और इतना देखने को मिलता है। बिलकुल गलत है यह बात। बिल्कुल भी गलत है। ज्यादा कोई बड़ी बात नहीं है। [हंसी] अगर एक ही रिलीजन पूरी दुनिया हो जाए लेस डिस्ट्रक्टेड। डिस्ट्रक्टेड बुद्धिज्म। बुद्धिज्म। एंड उसके बाद सेकंड हम अगर बुद्धा ने आज Instagram देखा तो सबसे ज्यादा उनको क्या डिस्टर्ब करेगा? आज मैं बात करने वाली हूं एक बुद्धिस्ट मॉक के साथ ऑन दिस पडकास्ट एंड ही इज भते सिरसवाली। मैंने उनसे बात की हमारे मॉडर्न लाइफस्टाइल्स, रिलेशनशिप्स, फाइनेंससेस,
(02:21) करियर को लेके हमारे एवरीडे लाइफ में जो इशूज़ होते हैं और वो क्यों होते हैं? नॉट जस्ट अबाउट दैट। व्हाई आर वीमेन गोइंग थ्रू द वे थिंग्स आर गोइंग एंड टर्निंग आउट फॉर देम। टेकिंग हिस पर्सपेक्टिव हैज़ बीन कंट्रोवर्शियल। सो इफ यू लाइक बी ऑन द स्क्रीन विजय डोंट फॉरगेट टू सब्सक्राइब। वेलकम टू बियन द स्क्रीन विथ मी शिविजय। कैसे हैं आप? मैं अच्छा हूं। आप कैसे हैं? मैं भी एकदम बढ़िया। मैं आज आपसे यह सवाल पूछना चाहती हूं कि इज इट ट्रू कि बुद्धिज्म में वीमेन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है मक बनने के लिए। ज्यादा रूल्स हैं वीमेन के लिए? बिकॉज़ व्हाई डू वी सी
(03:00) मोस्ट ऑफ़ देम आर मेल्स? नो देयर आर अ लॉट ऑफ फीमेल नर्स टू बट एक बात है ना कि फीमेल इतने आसानी से गृह त्याग के लिए तैयार नहीं होती है क्या आप इतना अपने आसानी से बाल काटने तैयार रहेंगे नहीं नहीं तो ये है कि फीमेल बहुत कम फीमेल्स में वो गृह त्याग के इच्छा उत्पन्न होती है कि मुझे घर त्यागना है मुझे बाल काटना है मुझे ये सब कुछ छोड़छाड़ के क्या जाना है सन्यास जाना है मतलब 100 लोगों में 10 नहीं 100 में नहीं 100 में अगर एक तैयार 100 में बड़ा कोई एक मेल तय तैयार होता पर 100 फीमेल में एक नहीं हो सकता। 1000 फीमेल में शायद से एक हो सकती है जो नन
(03:36) बनने के लिए तैयार हो। स्पेशली बुद्ध बुद्धिज्म में मोनेस्टिक नन जो होती है क्योंकि उसमें बाल वगैरह काटना पड़ता है पूरा है ना सब कुछ त्याग देना पड़ता है। पर वुमेन अपने बाल रख के मंग क्यों नहीं बन सकती है? नहीं तो मंग मेल भी रह सकता ना वो तो मेल भी मेल भी अपने बाल नहीं रख सकता है। क्यों? क्योंकि भगवान ने उसके दोष बताए गए हैं कि बाल होने के कारण से फिर आपको कंघी रखना पड़ता है। ऑइल रखना पड़ता है। फिर जुए निकालनी पड़ती है। फिर जुओं को मारना पड़ता है। फिर बालों को मेंटेन करना पड़ता है। फिर उसके लिए आईना भी रखना पड़ता है।
(04:05) तो मंक आप ये सब चीजें रखने के लिए नहीं हो ना। फिर तो ये फिर से फिर से गृहस्थ सामान जिंदगी हो गई। राशन पानी ला के रखना पड़ रहा है। तो ये चीजों से छुटकारा के लिए तो आपने गृह त्याग किया है ना? तो आप आईना नहीं देखते। मोस्टली नहीं। आईना देखने की जरूरत भी नहीं पड़ती ना मुझे तो। किस लिए देखो आईना मोस्टली ज्यादातर आईना किसे देखा जाता है? हम्। बाल जब होते हैं तब आपको मोस्टली यहां देखना पड़ता है। ना मुंह में पानी मार के भी आप बाहर निकल जाएंगे। क्योंकि बालों को सवारना है। पहले शुरुआत होती है। फिर अलाइनर वगैरह लगाएंगे तो वो नेक्स्ट बात
(04:32) है। पर फर्स्ट तो उससे शुरू होता है ना। तो व्हाई इज इट अ बैड थिंग आईना देखना। नहीं जितना आप खुद को देखोगे, जितना आप खुद की ब्यूटी को सवारना चाहोगे। आप खुद को सवारना नहीं चाहोगे। अच्छा। आप ये बात सोचिए। आपका पूरा फोकस क्या आ रहा है? आपके आउटर फेस पे आ रहा है। इनर ब्यूटी पे नहीं आता है। हम आपको लग रहा है ना कि मैं ये तो सुंदर दिखूंगी। और देखिए जिनके पास है ना एक फेस कार्ड जिसे हम कहते हैं ना मॉडर्न लैंग्वेज में कि फेस कार्ड का एक अलग ही ईगो होता है। वो अलग ही अलग ही वो अलग ही बंदा होता है जिसका फेस कार्ड होता है। तो ये मैंने खुद
(05:04) पूछा है। एक बार हमारे शिष्य ने अम्मा मैं अपने कुछ और बाकी दो अच्छे हैंडसम शिष्यों के साथ बैठा हुआ था और मेरी एक शिष्य पूछती है कि बोले आप लोग हमें बताइए बोलिए कि स्मार्ट होने के आपने कभी प्रिविलेज फील किया है क्या? मतलब लगा है क्या कि स्मार्ट होने से सुंदर होने से आपको लगा है कि आपको ये चीज एक्स्ट्रा मिली है या आपके साथ ये अच्छी हुई है तो आप सभी से पूछिए जितने भी हैंडसम है उनसे पूछिए आप ये लोग जो सुंदर लड़के जो सुंदर लड़के हैं उनसे पूछिए आप कि जब उन्हें लगता है कि वो सुंदर है तो उन्हें उन्हें वो उनका एटीट्यूड कैसा हो जाता है जब आपको लग रहा
(05:36) है कि आप सुंदर हो तो ऑफ कोर्स आपका एटीट्यूड थोड़ा सा अलग होगा और जब आप चाहते हो कि मैं सुंदर दिखूं तो उससे भी एटीट्यूड अलग होगा इन दोनों बातों में तो दोनों एटीट्यूड एक मंक में नहीं होने चाहिए क्योंकि ये उसके ईगो को और क्या करेगा बूस्ट करेगा अगर हमें इसे अपने मॉडर्न लाइफ के साथ जोड़ना हो तो कैसे हम सुंदरता के साथ क्योंकि लोग आई ऑलाइनर लगाना और लिपस्टिक लगाना तो छोड़ेंगे नहीं तो सुंदरता के साथ कैसे वो अपने इनर ग्रोथ [गला साफ़ करने की आवाज़] तो ये मंग्स के लिए नर्स के लिए उपासकों के लिए बुद्धिज्म में नॉर्मल लिए पर्सन के
(06:05) लिए बिल्कुल भी मनानी हो तो श्रृंगार कर सकते हैं। अपना बुद्ध के समय में अम्रपाली कितना प्यारा श्रृंगार करती थी। आप देखिए विशाखा जिसके पास इस प्रकार का हार था कि सर से लेकर पांव तक जब वो हार पहन के ढक जाता था मतलब बारीक-बारीक सोने के तार से बना था कि ये पूरा कंधा ढक जाएगा पूरा गला ढक जाएगा पूरा सर से लेकर पैरों तक ऐसा उस समय का सबसे महंगा हार था 9 करोड़ का हार था शायद से वो उस समय में जो सोने के छोटे-छोटे तारों से समय की बात कर रहे हैं बुद्ध के समय का जो कि बुद्ध की सबसे बड़ी उपासिका थी सबसे बड़ी और सबसे करीब और जो
(06:38) धर्म को सबसे अच्छे से जानती थी तो सोचिए वो इतना अच्छा मेकअप करती करती थी। वो अपने को इतना मेंटेन रखती थी। तो नॉर्मल इंसान अगर नॉर्मल लाइफ में है तो यह कॉमन है आपके लिए। और आपको जान आपको क्योंकि उस समय में एक जो बुद्धिस्ट गृहस्थ होता है एक जो नॉर्मल डिवोटी होता है उसमें ये भी अंडरस्टैंडिंग स्ट्रांग होती जाती है कि मेरे शील से ज्यादा सुंदर मेरी बाहरी सुंदरता नहीं हो सकती है। अगर मैं कितनी भी सुंदर क्यों ना हो पर अगर मैं किसी के साथ बुरे तरीके से बात करती हूं तो मैं उसके लिए अच्छी नहीं रहूंगी और ये मेरे भी कर्म अच्छे नहीं
(07:08) बनाएगा। मैं किसी को इंसल्ट करती हूं तो यह मेरे लिए भी अच्छा नहीं रहेगा। एक सुष्मिता सेन ने कितना प्यारा कहा था एक जगह पे कि आप कितने सुंदर दिखते हैं। लोग कुछ समय के लिए याद रख सकते हैं। आपने कौन सा ड्रेस पहना है, कौन से कलर की चप्पल है, कौन से कलर का ड्रेस है, कितना महंगा ड्रेस है। ये लोग शायद ही नोटिस करेंगे या कभी कबार नोटिस करेंगे और कभी कबभार याद रखेंगे और एक समय के बाद भूल भी जाएंगे। लेकिन लोग ये कभी नहीं बोलेंगे कि आपने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था, कैसा बर्ताव किया था। तो बुद्धिज्म में एक जो भी बुद्धिस्ट
(07:39) डिवोटी होता है वो यह बात समझ जाता है कि मेरा व्यवहार ज्यादा इंपॉर्टेंट है मेरी आउटर ब्यूटी के मुकाबले पर इसका मतलब यह नहीं कि वो वो ब्यूटी प्रोडक्ट इस्तेमाल करना बंद कर देता है। क्या बुद्धिज्म के ओल्ड टेक्स्ट में ये लिखा गया है कि वुमेन इज अ टेंपटेशन और अ डिस्ट्रैक्शन। देखिए ये सिर्फ मतलब ये सिर्फ वुमस के लिए वुमस को लेके नहीं बोला गया है। है ना? एक मैन के लिए क्या है? वुमेन टेंप्टेशन है और एक वुमेन के लिए मैन टेंप्टेशन है। आपको ये बात समझनी होगी। पर किस तरह के मैन के लिए किस तरह के वुमेन के लिए वो भी समझने की जरूरत
(08:13) है। याद रखिएगा एक मैन जो कमिटेड है, एक मैन जो मैरिड है या एक मैन जो अपनी जिंदगी में कुछ चाहना चाहता है, कुछ अचीव करना चाहता है, उस तरह के मैन के लिए वुमेन टेंप्टेशन एक भटकाव है। है ना? पर जो मैन कमिटेड नहीं है, जो मैन अपनी जिंदगी में कुछ प्राप्त नहीं करना चाहता है, तो उसके लिए वुमेन टेंप्टेशन नहीं है। क्या पता कोई अच्छी स्त्री उसकी जिंदगी में आए और उसको मार्ग पे लाए, उसको अच्छे दिशा दिलाए तो उसके लिए अच्छी है। और किस तरह की वुमेन ये भी तो है ना कि जो वुमेन दुशील है, जो वुमेन अच्छा आचरण नहीं करती है, जो वुमेन कपटी है, जो वुमेन दुराचार करती है,
(08:45) उस तरह की वुमेन तो जिंदगी और खराब कर देंगी। तो हमें वो भी वो स्पेशल इस तरह के वुमेन के लिए बोला गया। इस तरह के मैन के लिए बोला गया है। उसी तरह अगर कोई वुमेन कमिटेड है, कोई वुमन मैरिड है, कोई वुमन अपनी जिंदगी में कुछ प्राप्त करना चाहती है, तो उस तरह के वुमेन के लिए मैन क्या हो सकता है? डिस्ट्रैक्शन हो सकता है। और किस तरह का मैन जो मैन अच्छा नहीं है, जो मैन शराबी है, जो मैन कम लॉयल नहीं रह सकता है, जो मैन में गलत-गलत विचार आते रहते हैं। उस तरह का मैन। और एट देंट मुंह क्योंकि बुद्धिज्म में ज्यादातर जो प्रवचन बुद्धा ने दिए हैं वो मंक को दिए हैं या
(09:16) नंस को दिए हैं। तो मोस्टली जब मंक्स को समझा रहे हैं तो क्या समझाएंगे बुद्धा? कि स्त्रियां आपके लिए अच्छी नहीं है। स्त्रियों के प्रति आकर्षित मत मत हो। हम और जब एक बच्चे को एक मां सिखा रही है तो ऑफ कोर्स जिस चीज से दूर रखना सिखा रही है उसके दुर्गुनी बताएंगी ना। हम सुख सगुण थोड़ी बताएंगे। तो वो वैसा ही है कि तो ये इसलिए जब बुद्ध के कोई कोट कर रहा है तो ये कोट बुद्ध ने अपने समय में बोला है कि अगर आप मेरी कोई बात बता रहे हैं तो ये बोला गया और इसलिए जो भी बुद्धा का उपदेश देना शुरू करता है वो बताता है व्यक्ति कि कहां बोला गया है किसको बोला
(09:45) गया है क्यों बोला गया है ये कोट होना मतलब बुद्धिज्म एक मात्र रिलजन है जो रेफरेंस के साथ बात करता है वरना किसी रिलजन में रेफरेंस के साथ बात नहीं करते हैं तो ये है कि अगर कोई बुद्ध की बात कोट हो रही है तो किसको बोला गया है क्यों बोला गया कहां बोला गया ये बहुत इंपॉर्टेंट है। बुद्धा ने यह तो बोला है कि यह फील मत करो बट कोई फीलिंग्स को रोक नहीं सकता। तो जब मॉक फील करता है किसी वुमेन के लिए तो क्या होता है? एक तो सबसे पहली बात अगर मक का माइंड स्ट्रांग नहीं होगा तो वो बह जाएगा और वो समझ जाएगा कि यही वो प्यार है जिसका मैं
(10:12) इंतजार कर रहा था। ऐसे टाइप का हो जाएगा। बट मोस्ट ऑफ मक एक मैच्योर हो जाते हैं। थोड़े एक लेवल के बाद उन्हें समझ जाता है कि ये मेरे किस तरह दुख का कारण बनेगा। तो वो क्या करता है? वो उसे उस तरीके से देखना शुरू करता है। अगर वो उसे अट्रैक्टिव लग रही है तो वो उसके डीमैड्स भी देखना शुरू होता है कि अगर मैं अपना ये जीवन छोड़ के गृहस्थ लाइफ में जाता हूं तो फिर मेरी लाइफ में क्या-क्या प्रॉब्लम्स आएंगी। जितनी सुंदर मुझे आज ये चेहरे से लग रही है या उसके शब्दों से लग रही है या उसके व्यवहार से लग रही है। पर ये व्यवहार इसलिए लग रहा है कि मैंने ऐसी कोई हरकत
(10:42) नहीं की जिससे इसका मन दुखे। पर अगर मैंने ऐसी कुछ हरकत की जिससे इसका मन दुखे जिसके ये दुखी हो या इरिटेट हो तो फिर ये मुझे अपना रुद्र रूप दिखाएंगी। क्या मैं झेल पाऊंगा? हम्म फिर मुझे वही कटकट वही सब तो फिर एट देन वही होने वाला है। मैं जो अभी थोड़ा छोटे जो थोड़ी सुंदरता दिख रही है जो थोड़ा अच्छा पन दिख रहा है शब्दों में यह हमेशा नहीं रह रहेगा। है ना? ये ड्रीम लाइफ हमेशा नहीं रहेंगी या नयापन हमेशा नहीं रहेंगा। तो जब पुराना हो जाएगा तब क्या तो इस तरीके से उसके प्रति सोचता है। तो उसका जो वो रस है जो आकर्षण है वो अपने आप वहीं
(11:10) पे नष्ट हो जाता है। क्या आपने पर्सनल लाइफ में अपने ऐसा कुछ फेस किया है कभी आकर्षण? हां मैं हां हुआ है कई बार मुझे कभी कबार कुछ लोग सुंदर लगे पर ऑफ कोर्स कुछ समय के लिए लगे है फिर लगा है कि नहीं ये लाइफ ज्यादा बेस्ट है क्योंकि माइंड का जैसे कि एक बार मैं थाईलैंड में थाईलैंड में जब मैं था [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो मैं एक मॉल में गया था उस मॉल में जब मैं गया था तो आई वास लुकिंग समथिंग फॉर मैं कुछ अपने मैं अपनी कुटी में रहता था उस कुटी में कुछ सामान लेने के लिए आया था मैं ख्याल से लाइट वगैरह कुछ लेने के लिए मैं थाईलैंड में गया था तो वहां पे एक
(11:42) लड़की आई थी ठीक है शी वाज़ नॉट दैट मच अट्रैक्टिव बाय लुक्स सॉरी अगर उनको बुरा लगा तो एक ऑफकोर्स तो तो अट्रैक्टिव नहीं थी वो लड़की ऑफ कोर्स एक मंकी तो मोस्ट ऑफ़ लड़की अट्रैक्टिव नहीं लगती है उनको तो शायद से वो होंगी किसी और के लिए तो जब मैं देख रहा था तो मैं अपना सर्च कर रहा था टेबल पे वगैरह देख रहा था वो लड़की वो उधर दूर खड़ी थी मतलब दूर मतलब चार पांच हाथ दूर खड़ी थी और वो मुझे देख रही थी और दरअसल फिर जब मेरा ध्यान गया उस लड़की पे तो आई वास शॉक कि वो बहुत कॉन्फिडेंटली मुझे देख रही थी और उसके आंखों आंखों का वो करिश्मा जो कॉन्फिडेंट था उससे मैं
(12:17) काफी अट्रैक्ट हो गया था। तो कम से कम मेरे मन में एकद दिन के लिए वो बात रही। वो लड़की मुझे उस तरीके से अट्रैक्ट हुई नॉट बाय ब्यूटी। तो अट्रैक्शन की कई सारी उस तरीके से वो लड़की मुझे अट्रैक्ट हुई और मेरे माइंड में लड़की वो दो दिन चली। मुझे लगा कि मेरे को Facebook तो भी नंबर Facebook पे तो भी फ्रेंड बनाना चाहिए था। इट नॉट नॉट एज अ एप्रोच कि बाबा मुझे उसके साथ रिलेशनशिप में जाना या पर मुझे वो कॉन्फिडेंट लगी। उसकी पर्सनालिटी लगी कि वाओ कि वो वो भी क्या पर्सनालिटी क्या व्यक्ति है। मतलब आप एक एक जिस प्रकार से हम किसी
(12:47) मोटिवेशनल स्पीकर के प्रति अट्रैक्ट होते हैं ना या फिर किसी एक पर्सनालिटी जो अपनी लाइफ में वो अचीव कर चुका है। तो मुझे वो आश्चर्य लगा कि एक मैं बुद्धिस्ट नेशन में और बुद्धिस्ट नेशन में ये एटीट्यूड देखने को मिलता नहीं है। स्पेशली कोई एक स्त्री मंक इतना कॉन्फिडेंटली देखे तो मुझे उसका कॉन्फिडेंस अच्छा लगा। उसकी वो जज्बा वो हिम्मत काफी अच्छी लगी थी। तो फिजिकल इंटिमेसी अलाउड नहीं होता मक्स में। कोई भी इंटिमेसी अलाउ नहीं होती है। [हंसी] कोई भी फिजिकल इंटिमेसी हो, इमोशन क्योंकि इंटिमेसी लीड्स टू लव। हम आप याद रखिए चाहे फिजिकल इंटिमेसी हो या
(13:15) फिर इमोशनल इंटिमेसी हो। आप Facebook पे नंबर ले भी लेते हैं। इट वुड नॉट हैव गॉन एनीवेयर। द सिचुएशन वुड हैव स्टेड। आई थिंक वुड हैव कंट्रोल इट। नो नो नो नो नो नो। कंट्रोल कब होगा? जब वो एक्शन नहीं करेंगे। जब उन एक्शन को आप ज्यादा आगे नहीं बढ़ाएंगे। आप आगे तो इसका एंड फिर गृहस्थ जीवन है। तो वंस यू मेक दैट मिस्टेक बुद्धा ने क्या कहा है कि अगर आपका एक वो मिस्टेक हो गया तो क्या आप वापस अपने एक मॉक लाइफ में नहीं जा सकते? बिल्कुल जा सकते हैं। तो ये मिस्टेक काफी मक्स बार-बार करके वापस भी जा सकते हैं। किस तरह की मिस्टेक नहीं देखो मिस्टेक्स की भी एक लेवल्स होते
(13:51) हैं ना। जैसे कि कैंसर के लेवल होते हैं। फर्स्ट से फर्स्ट लेवल, सेकंड लेवल, थर्ड लेवल उसी प्रकार मिस्टेक के भी ऐसे क्या होते हैं? लेवल्स होते हैं। अगर वो उस तरह के एकदम हीनियस मिस्टेक कर चुका है देन देयर इज नो कमबैक। व्हाट इज द हीनियस मिस्टेक अकॉर्डिंग टू बुद्धिज्म हीनियस मिस्टेक अकॉर्डिंग टू बुद्धिज्म द सेक्सुअल इंटरकोर्स स्पेशली द पेनिटेटिव सेक्स ओ माय गॉड माइंड वर्ड्स पेनिटेटिव सेक्स ओके नॉट द आउटर और द सॉफ्ट वंस यस दैट आल्सो दैट दैट उस उसमें रास्ता है उसमें वो मिस्टेक है रिग्रेट होगा संघ के सामने कबूल करेगा कि मुझसे ये गलती हुई है संघ
(14:31) उसे पनिशमेंट देगा देन ही अगेन प्यूरिफाई बट वंस ही डन द सेक्सुअल इंटरकोर्स और वो भी पेनिटेट सेक्स देन ही नीड टू लीव द मंक हुडनेस अनदर क्वेश्चन व्हाई वुड अ मंक अग्री टू दिस दैट दे डिड समथिंग लाइक दिस वो क्यों करेगा वो छुपा भी तो सकता है। बुद्ध कहते हैं संसार में चार तरह के भय होते हैं। और जब तक इसमें से एक भी भय तब तक वो अच्छा इंसान बना रहता है। अगर ये चारों भय चले गए तो कभी अच्छा इंसान बना नहीं सकता। कभी मोरल पर्सन थोड़ा भी नहीं रह सकता है वो। हम सबसे पहले एक होता है अपना आत्मभय हम आत्मभय मतलब कि मेरा मन नहीं मानेगा मैं
(15:06) कर लूंगा तो मेरा मन क्या होते रह रहेगा पछतावा करते रहेंगे कि मैं क्या करके बैठा हूं तो जो बुद्धिस्ट मंग ट्रेनिंग कर रहा है उसका तो सेल्फ इतना स्ट्रांग हो जाता है कि उसे आत्मा भय लगा रह जाता है कि मैंने क्या कर लिया मैंने क्या पाप कर लिया अनिंदा भय है ना सामाजिक भय कि मेरा अगर ये कर लूंगा और समाज के सामने मैं आएगा और आएगा आज कभी ना कभी तो लोग मुझे क्या बोलेंगे क्रिटिसाइज करेंगे मेरी बदनामी हो जाएंगे इसके कारण से भी कोई पाप कर्म नहीं कर पाता है। तीसरा भाई पनिशमेंट कि सरकार मुझे दंड देंगे। अथॉरिटीज़ मतलब जो पुलिस है उससे मुझे दंड मिलेगा। पनिशमेंट
(15:34) मिलेंगे। फांसी मिल सकती है। इसके कारण भी कोई पाप कर्म नहीं करता। अपने को पाप कर्म से दूर रखता है। चौथा नर्क भय जिसे हम अध्यात्म भय कहते हैं कि मैं ये कर्म करने के बाद नर्क जाऊंगा। तो ये चारों तरह के भय एक मंग को पढ़ाए जाते हैं। उसको ऐसा ट्रेन किया जाता है। तो इसलिए मोस्टली मंग करते हैं। और जो पहले से ही गया बीता है जो बस किसी और काम के लिए बना है। उसका तो कोई मतलब ही नहीं ना। एट व्हाट स्टेज डस अ पर्सन डिसाइड कि चलो मैं तो अब मक ही बन जाता हूं। व्हाट वास योर स्टेज? रीज़न अलग-अलग हो सकते हैं। हम आपका क्या था रीज़न?
(16:07) देखो कोई लगता है देखो अभी ये एक ट्रेडिशन थाईलैंड ने एक बहुत प्यारा एक पॉलिसी लगा दी है। श्रीलंका ने भी एक बहुत पहले से लगाई है। और स्पेशली बुद्धिस्ट नेशन है। थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार वगैरह। उन लोगों ने क्या कर दिया? स्पेशली बुद्धिस्ट खुल बुद्धिस्ट स्कूल बना दिया है। है ना? और उस स्कूल में क्या कि जो भी मंक बन के पढ़ेगा उसकी फीस नहीं से मतलब नहीं। अच्छा क्योंकि वो चाहते हैं कि उनकी यूथ मंक बने क्योंकि मंक रह रहेगा तभी वो बुद्धिज्म बचा रहेगा। तो थाईलैंड श्रीलंका ने म्यांमार ने क्या कर दिया? ये मतलब एक कर दिया काम कि
(16:36) उन्होंने मंक्स के लिए फ्री स्कूल खोल दिए कि अगर तुम मं मंक बन के पढ़ते हो तो जो गरीब बच्चे होते हैं वो चलो बाबा मंक बन जाएंगे तो हमारे पैसे बच जाएंगे। और मां-बाप भी कहते हैं कि अगर कुछ मां-बाप गरीब होते हैं तो अपने बच्चों को पानी पाते। तो मंग बना तू मंक बन के पढ़ 18 साल 19 साल की उम्र तक के तब तक के मंग बन जाओ और बाद में छोड़ देना फिर हां घर वापस आ जाना तो जो ऐसी मेंटालिटी लेके चवर ले रहा है आप बताओ सही में वो सब उतना ध्यान देंगा बुद्धिस्ट फिलॉसोफी की तरफ नहीं नहीं उसको सिर्फ अपने एजुकेशन के लिए बनाया कि फ्री में हो जाएगा पर यहीं पे तो
(17:05) मेन वो काम किया है गवर्नमेंट ने वहां क्योंकि कम से कम हजार बच्चे में से एक तो भी ऐसा बनेगा जिसको बुजम के प्रति इंटरेस्ट आएगा और यही हुआ थाईलैंड में श्रीलंका में म्यांमार में उसमें से एक दो तीन भिक्षु ऐसे बने कि उन्होंने ही पूरा बुजम संभाला है पूरे कंट्री में तो भले ही बाकी लोग फॉलो ना करें और वो छोड़ भी देंगे। एक समय के बाद वो छोड़ भी देंगे। पर एक बात है कि उनको पता लग जाएगा कि कैसे व्यवहार करते हैं, कैसे रहते हैं मंक्स के साथ। वो उस कल्चर का थोड़ा रंग तो आ जाएगा उन पे। हम [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो ये तो मैंने वही कहा ना कि हर एक
(17:34) व्यक्ति के अलग-अलग रीज़न हो सकते हैं। कोई बस अपने एजुकेशन लेने के लिए मंग बन जाता है या कोई लगता है कि नहीं जिंदगी यहां पे आसान है इसलिए मंग बन जाता है। या किसी को लगता है कि नहीं मुझे बुद्धि टीचर बुद्धिस्ट टीचिंग समझनी है इसलिए मंग बन जाता है या कोई शादी से परेशान हो के मंग बन जाता है या फिर कोई सही में निर्वाह प्राप्त करने के लिए मंग बन जाता है। वो वो किस चीज से मोटिवेट हो के मंग बना है वो तय करेगा। ये सारी बातें। सो क्या मंग सिर्फ मंक हुड ही जी सकता है और दूसरे कोई अन्य काम नहीं कर सकता। फॉर एग्जांपल अगर वो स्कूल में पढ़ा है तो
(18:00) उसका ऑफ कोर्स मन होगा कि मैं मक भी बना रहा हूं और मैं अपने करियर भी मक आगे बढ़ मक एक एक गुरु एक गुरु की पोजीशन है और गुरु के अंडर के अंडर में वर्क नहीं कर सकता है तो हर तरह की जॉब नहीं कर सकता जैसे कि तो जॉब कर सकता है वो जैसे लेक्चरशिप कर सकता है प्रोफेसरशिप कर सकता है जज वो रह सकता है फिर थाईलैंड में तो स्पेशली एक अलग एडमिनिस्ट्रेशन है संघ एडमिनिस्ट्रेशन एक अलग से ऑफिस है तो वहां पे मोस्टली मंग्स होते हैं तो वहां पे रह सकता है बाकी जगह पे नहीं तो जहां पे अलग से एक एडमिनिस्ट्रेशन होता है वहां पे जॉब कर सकता है। तो नहीं तो नेचुरली नॉर्मली
(18:34) वो लेक्चरशिप कर सकता है। प्रोफेसरशिप कर सकता है। इंडिया में काउंसलर रह सकता है वो। इंडिया में कई सारे अमंग्स प्रोफेसर है। हम तो ये वो रह सकते हैं। आई डू अंडरस्टैंड कि थाईलैंड और श्रीलंका में क्यों बुद्धिज्म को आगे बढ़ाया जा रहा है। बट इंडिया में आपको लगता है कि बुद्धिज्म को इक्वली उस तरीके से वैल्यू मिल रहा है। देखिए इंडिया में स्पेशली मैं महाराष्ट्र से बिलोंग करता हूं और मैं महाराष्ट्रियन कम्युनिटी का एक हिस्सा हूं। मुझे लगता है कि महाराष्ट्रियन कम्युनिटी में एक जो ये चल रहा है कि वो अंदर से ही बहुत ही अ डिस्टर्ब होते जा रही है। अंदर
(19:13) से ही जो एक विश्वसनीयता है वो खोते जा रही है। है ना? अंदर से बहुत खोखली होती जा रही है। तो उसके लिए हिंदूज़्म तो है। हम्म। मतलब? उसके लिए हिंदूइज़्म तो है अगर वो खोखले होते जा रहे हैं अंदर से महाराष्ट्रियन बुद्धिज्म अपने आप को हिंदूइज़्म से 10 कोस दूर रखेगा 10 क्या 100 कोस अच्छा बहुत दूर रखेगा एक बार वो इस्लाम के पास जाना पसंद करेगा इस्लाम से ज्यादा फ्रेंडली होना पसंद करेंगे वो क्रिश्चियन ज्यादा फ्रेंडली होना पसंद करेगा पर वो हिंदूइज़्म के साथ नहीं क्योंकि उन्हें लगता है कि ढाई हजार साल की गुलामी उन्होंने हिंदूइज़्म के कारण ही देखी
(19:44) क्योंकि महाराष्ट्र जो बुद्धिस्ट कम्युनिटी है वो मोस्टली एससी कम्युनिटी है जो बाबा साहब ने डॉक्टर बी आर अंबेडकर ने दीक्षा दी है दी थी है ना उसके तो वो मोस्टली वो जो तो उनकी गुलामी कैसी थी गले में मड़का पीछे में झाड़ू मतलब वो जमीन पे थूक भी नहीं सकते थे उनके जमीन पे पैरों के निशान भी नहीं होने चाहिए थे झाड़ू तुम चलो तुम्हारे पैरों के निशान भी हट जाने चाहिए पानी पीना अलाउ नहीं था तो जो गुलामी जो अछूत थे उनको लगता है कि मोस्टली हिंदू फिलॉसोफी के कारण और हिंदूइज़्म के कारण हुआ है तो इसलिए वो एक बार का हर धर्म में चले जाएंगे लेकिन
(20:14) हिंदूज़्म वो कभी नहीं क्योंकि उनको फिर से वो गुलामी नहीं देखनी है। हम तो एक बहुत बहुत मतलब उनमें वो है कि नहीं सब चल जाएंगे पर हिंदूज़्म नहीं चलेंगे। उनको लगता है कि हिंदू हम सबसे वर्स्ट है तो वो हिंदूज़्म के कभी करीब नहीं आ सकता। और ऊपर से हिंदूइज़्म और बुद्धिज्म में बहुत डिस्प्यूट वाले फिलॉसोफिकल डोगमा फिलॉसोफिकल चीजें हैं। जैसे कि वो ईश्वर या अनश्वर है। वो वेदों को मानता है या वेदों की अथॉरिटी को नहीं मानता है। है ना? तो ये डिफरेंसेस आते हैं वो मोर पुरोहित है। पुरोहित उसमें है पुरोहित परंपरा है। ब्राह्मण परंपरा है। इसमें
(20:50) श्रमण परंपरा है। और ये ब्राह्मण परंपरा श्रमण परंपरा ये ये अपोजिट है। बिल्कुल ये बहुत क्लशेस है इनमें। है ना? ब्राह्मण परंपरा के अपोज में शमन श्रमण परंपरा डेवलप हुई दरअसल। तो इसलिए वो कभी नहीं हो सकता है। बट ये तो ये कहना हुआ कि ब्रिटिशर्स ने हमारे ऊपर इतने दिन से रूल किया और अब हम लंदन नहीं जाएंगे। ये तो वैसी वाली बात हो गई। नहीं देखिए ब्रिटिशर ने रूल किया ये बात अलग होगी और ब्रिटिशर का रूल होना ये बात अलग है। लंदन जाना एक अलग बात है और लंदन में स्थापित होना एक बात अलग है और वो जिस ब्रिटिश हुकूमत की वो बात करें अब क्या वो
(21:25) मौजूद है? बट इफ यू लुक एट अदर रिलजंस जैसे कि अगर हम नॉर्मली एक इस पॉइंट ऑफ व्यू से देखें कि कितने क्राइम्स हुए हैं। जब आप एक हिंदूज़्म में जाते हो और कितने क्राइम्स आप अगर इस्लाम में देखते हो क्रिश्चियनिटी का आई हैव नो नॉलेज। सो व्हाट डू यू थिंक बिकॉज़ हिंदूइज़्म इज़ नॉट सेइंग कि आप कन्वर्ट हो जाओ किसी को। एंड येट सम हाउ दिस वन थिंग आई थिंक व्हिच इज नॉट देखिए क्रिश्चियनिटी तो क्रिश्चियनिटी और इस्लाम ये दोनों अब्राहमिक रिलजन है और ये दोनों मिशनरी रिलीजन है तो वो कन्वर्शन उनका उनका वो फिलॉसोफी का एक हिस्सा है एक पार्ट है वो करेंगे ही
(22:11) हम है ना उसमें आप उनको रोक नहीं सकते कि वो उनका पार्ट है और उनके कन्वर्जन के भी अपने-अपने तरीके हैं ना कितना प्यारा तरीका है क्रिश्चियनिटी का एक हाथ में किताब और एक हाथ में मेडिसिन अगेन क्रिश्चियनिटी का मैं समझ रही हूं बट जैसे फॉर एग्जांपल नाइन 11 अटैक्स हुए थे जब मुस्लिम राइट सो यह तो आप बहुत ही टाइम की बात करें जब आज के टाइम पे देयर आर प्रॉपर लॉज़ फॉर हिंदूज दैट यू नो व्हाट आई वास सेइंग कि देयर आर प्रॉपर लॉज़ नाउ व्हेन इवन इन इंडिया कि शेड्यूल कारस्ट शेड्यूल ट्राइब ऑल ऑफ़ देम आर गिवेन अ बेटर चांस एंड अ यू नो किस बिकॉज़ ऑफ़ लॉज़। सो देयर आर
(22:50) प्रॉपर लॉज़ बट देयर आर नो लॉज़ अगेंस्ट टेररिज्म। देयर नो लॉज़ अगेंस्ट यू नो प्रॉपर लॉज़ अगेंस्ट पीपल एंड अदर रिलीजन। सो हिंदूइज़्म इज़ एक्चुअली दे आर वर्किंग ऑन इट। बट लाइक व्हाट अबाउट व्हाट यू वांट टू से? आई वांट टू से कि हिंदुइज़्म में फिर भी एक अंडरस्टैंडिंग है कि जो पीछे हो चुका है। जैसे आपने कहा कि लोगों को गलत तरीके से सो रहे हैं। एक दलित अभी की बात है। दलित महिला होने के कारण से डॉक्टर ने उसकी प्रेगनेंसी नहीं की। दवाखाने के बाहर उसने क्या किया है? जन्म दिया है। अभी की बात है। एक साल की बात है कि एक एक दलित युवा
(23:26) के हाथ काट दिए गए क्योंकि अपने एक ठाकुर घर के सामने से बुलेट लेके गया। हम है ना? मतलब बुलेट पेन देखा सका। एक आईएएस अफसर दलित होने के कारण से उसको घोड़ी से उतार गया बारात में। तो कहां कन्वर्ट कहां चेंज हो रहा है? अभी भी अगर आप वो इलाकों में जाओ तो वो सारा भेदभाव देखने के लिए। देयर आर दी वन ऑफ़ केसेस फॉर एग्जांपल दीज़ आर वन ऑफ़ केसेस हर देयर आर लॉट ऑफ़ केसेस। अगर आप अगर आप आंकड़ों में जाएंगे अगर आप डाटा में जाएंगे तो आपको पता लगेगा आए दिन कहीं ना कहीं दलितों का शोषण हो रहा है। माय पॉइंट इज हाउ कैन यू से वन रिलिजन इज़ बेटर देन दी अदर बिकॉज़ एव्री रिलीजन इफ यू
(24:01) विल नॉट इफ यू नॉट एबल टू डिसाइड दैट व्हिच रिलिजन इज़ बेस्ट फॉर मी देन हाउ विल यू लीड योर लाइफ तो आपने जैसे कहां रिलिजन इज़ अ फिलॉसोफी इज़ अ वे टू लिव योर लाइफ इफ यू कांट डिसाइड दैट व्हिच रिलिजन इज़ बेस्ट व्हिच रीजन सूट्स योर ऑन फॉर यू फॉर योर मेंटालिटी फॉर योर थॉट। लाइव लाइव लाइव लाइव लाइव लाइव लाइफ हम। है ना? लाइक यू सेड कि बुद्धिज्म इज मोर अट्रैक्टेड टुवर्ड्स लेट से इस्लाम क्रिश्चियनिटीज इज नॉट अट्रैक्टेड मतलब क्रिश्चियनिटी महाराष्ट्र पीपल इफ दे अगर वो चूस करना चाहते अगर उनको अगर अगर उनके साथ कॉर्ड रिलेशन के साथ रिलेशनशिप अगर के
(24:32) साथ रिलेशनशिप को स्ट्रांग करने की इच्छा रखेंगे तो वो पहले एक तो क्रिश्चियनिटी या इस्लाम चूज़ करेंगे नॉट दे विल नॉट चूस हिंदूइज़्म। व्हाई इट इज़ नॉट बिकॉज़ ऑफ़ हिंदू फिलॉसोफी। इट इज़ नॉट बिकॉज़ ऑफ़ हिंदूइज़्म। इट इट इज़ बिकॉज़ द पॉलिटिक्स व्हिच वो जो कि हिंदू लोगों में होती है नॉट हिंदू लोगों में लोगों को दोना बहुत ही गलत है पर वो कुछ लोग हैं वहां के जो वो पॉलिटिक्स करना चाहते हैं जो हमेशा ऊंच नीचता चला चलाना चाहते हैं उसके कारण से जैसे कि कई सारे लोग जो चीजें बदनाम हुई है वो कुछ लोगों के कारण बदनाम हुई है और वो कहते हैं ना वही लोग पावरफुल होते
(25:05) हैं हम तो उस चीज के कारण से आई एम नॉट क्रिटिसाइजिंग फिलॉसफी मैं यही कह रही हूं कि ये जो चीज है ना ये जो ड्रॉबैक है वो अगर हर रिलजन में है कवर मतलब वो हर रिलजन में है अगर आप टेक्निकली देखिए एक भागवत हिंदू धर्म के जो बड़े अभी रक्षक माने जाते हैं मोहन भागवत जी आरएसएस के सरस संचालक उन्होंने अपने एक भाषण में एक एक बड़ी प्यारी बात कही थी एक अपने एक भाषण में बता रहे थे कि जब कौरव और पांडवों का युद्ध होने वाला था हम तो उसमें जो यादव थे यादव के सामने सवाल आ गया कि हम किसकी साइड ले कौरव की साइड ले या पांडव की साइड ले क्योंकि उनको साइड लेना पड़ेगा किसी वो
(25:46) दोनों देखे उन्होंने सोचा फिर वो डिबेट चला आपस में वो लोग सभी लोग यादव लोग सोचने लगे अरे किसकी साइड ले कुछ ने बोला पांडव लेते हैं तो बोला पांडव की साइड लगे पांडव ने तो गलत किया है अपनी बीवी को दांव पे लगाया वो कौन थे तो कौरव के साइड तो बोले कौरव भी कौन सही है तो किसकी साइड ले बड़ा हुआ तो मोहन भागवत कहते हैं कि जो कम जहां पे नुकसान हो जो कम दोषी हो जो कम पापी हो उसके साइड लेना क्या होता है ज्यादा श्रेयस्कर होता है तो हम वही देखेंगे ना कि हमारे कम लॉसेस देखो तीनों में तो लॉसेस वेल अगर मैं वुमेन की बात करूं क्योंकि वीवर टॉकिंग अबाउट इट एंड
(26:19) अगर वीमेन के लिबरलिज्म की बात करें तो जितना लिबरलिज्म आई थिंक हिंदू में भी हमें देखने को मिलता है वो शायद हमें कहीं और इतना देखने को मिलता गलत है ये बात बिल्कुल भी गलत है ज्यादा कोई बड़ी बात नहीं है [हंसी] अब भी एक बहुत प्यारे पडकास्टर थे उनका एक बड़ा प्यारा वीडियो था जब वो प्रोटेस्ट चल रहा था घूंघट सॉरी अपना बुरखा विरोध में एक आंदोलन चल रहा था तो उसमें कई सारे हिंदू महिला घूंघट पहन के आए थे बताइए आप मतलब बुर्खा का विरोध वक्त वो महिला कर रहा है जो खुद घूंघट डाल के है। बकायदा वीडियो बकायदा वीडियो ये Instagram
(26:49) पे है। ठीक है। कौन घूंघट पहन के चल रहा है दिल्ली में? आप बताइए। नहीं उनके वीडियो अवेलेबल है। मैंने देखा है बकायदा। दिल्ली में हाउ मेनी वीमेन हैव यू सीन जो घूंघट पहन के वॉक कर रहे हो। ठीक है? दिल्ली क्योंकि एक मॉडर्न है एक मेट्रोपॉलिटिक। आप मुंबई में देखिए। हां। बट जहां पे कभी आप घरों में जाइए। एक टिपिकल ट्रेडिशनल घरों में जाइए। जो बहुत धार्मिक हिंदू है। उनके घर में जा के देखिए। वो कथा वाचा देखिए ना वो कि उनकी कथा वाचा देखिए ना। आई एम नॉट सेइंग देयर आर ये कह रहा हूं वी आर टॉकिंग अबाउट द मेजोरिटी मेजोरिटी की अगर हम बात करें आप वो
(27:16) अनुराधाचार्य जी की वो देखिए एटलीस्ट द वु वीमेन अगर हम ऐसी ही बात करें वीमेन की हालात जो जिसमें हमें ये डिसाइड करना पड़ रहा है कि घूंघट इज बेटर देन ये मैं कह रहा हूं ये मैं नहीं घूंघट इज स्टिल बेटर देन बुरखा आई एम सॉरी बुर्खा में देयर इज नो कलर इट्स जस्ट ब्लैक एट लीस्ट पुअर वूमेन हु इज बिहाइंड एंड आप ये कह रहे हैं बिहाइंड अ सो आई एम जस्ट सेइंग अबाउट लिबरलिज्म। आप ये कह रहे हैं कि पुअर वुमेन आप ये कह रहे हैं कि लोहे के हथकड़ियां ज्यादा सुंदर है रस्सी की हथकड़ियों के मुकाबले। आप ये कह रहे हैं हथकड़ी हथकड़ियां होते हैं। आप उनको ये
(27:55) नहीं कह सकते। देखिए आपने वी विषय को इस बात से शुरू किया। नहीं मतलब आई एम टॉकिंग अबाउट वीमेन वेयर डू दे फील मोर फ्री? सी वुमेनस की मोस्ट जगहों पे कंडीशन सेम है। मोस्ट ऑफ रिलीजन में। हम ये नहीं कह सकते कि यहां पे ज्यादा लिबर सबका हर तरीके से होता है। ऑफ कोर्स मैं ये बोल रही हूं तो जैसे आपने बोला मेरा बस ये कहना है कि चूजिंग वन रिलीजन ओवर दी अदर आई एम नॉट इवन टॉकिंग अबाउट हियर कि यू नो हिंदूज़्म इज अबोव और बिय्ड और स्टेटमेंट वाज़ नॉट लाइक दैट। आपने कहा कि बाबा हिंदूज़्म में ज्यादा लिबरलिज्म है। आपका ये शब्द था अभी तो आप देखिए है।
(28:29) आपने क्या कहा कि हिंदूज़्म में ज्यादा तो मैं बिकॉज़ आई एम अ हिंदू। सो आई फील दैट यस वी आर मोर लिबरल। आई डु फील एंड आई फील वेरी स्केर्ड व्हेन आई थिंक ऑफ इट कि हैड आई बीन अ डिफरेंट दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से फैलने वाला धर्म फिलहाल इस्लाम है एक्जेक्टली बिकॉज़ दे ट्राई टू कन्वर्ट अदर पीपल राइट बट आप किसी को जबरदस्त थोड़ी कन्वर्ट कर रहे हो लोग फॉलो कर रहे हैं इस्लाम एक दिन में अगर कोई आपकी अपना एक दिन में अपने देवी देवताओं को पूजना छोड़ के किसी ईश्वर की पूजा कर एक दिन में आई नॉट टेलिंग यू टू फॉलो हिंदू देवता थिंग लेट
(29:03) मी टेल यू द सीक्रेट एंड मोस्टेंट थिंग हियर ना कि यहां पे जो हिंदू धर्म के जो धर्म गुरु है वह अपना काम अच्छे से नहीं कर रहे। इसलिए वो लोग इस्लाम की तरफ कन्वर्ट हो रहे हैं। आप ये बात समझिए ये हिंदूज़्म का खुद का ड्रॉबैक है। वो लोग अपना वर्क कर रहे हैं ना। क्रिश्चियनिटी अपना वर्क कर रही है। इस्लाम अपना वर्क और उनके धर्म जो सिखा है वो अपने धर्म के हिसाब से प्रचार प्रसार। उनको बताइए कि धर्म का प्रचार प्रसार करो। सो यू थिंक हिंदू के जो लीडर्स हैं उनको ये बोलना चाहिए अपने यू नो फॉलोअर्स को कि आप इतना लीन हो जाए कि आप दूसरों को बोलिए कन्वेंस
(29:36) देम कन्वेंस देम इफ यू आर कन्वेंस देम टू कन्वर्ट अदर रिलीजन इंटू हिंदूज़्म दैट्स व्हाट यू टेलिंग लोग अपने आप कन्वर्ट हो जाते हैं। बोलने की जरूरत नहीं है। फॉरेन में इतने लोग हिंदू हिंदू कल्चर अपना रहे हैं। तो कैसे हुए? उन्होंने बुरा तो नहीं। कोई भी नहीं बोलता कि ये हो। आई मीन द थिंग इज कि सी सबका अपना पर्सनल एक्सपीरियंस होता है। मैंने भी एक एक्सपीरियंस अगर आपको ये काम नहीं करना है तो इस बात को लेकिन शिकायत भी मत रखो ना कि लोग इस्लाम में कन्वर्ट हो रहे हैं। ये रीज़न अच्छा ओरिजन अच्छा है। अगर आपको लग रहा है कि आपका रीज़न अच्छा है। वो ज्यादा फ्रीडम
(30:05) देता है। वो ज्यादा लिबरलनेस देता है। वो इंसान को एक अच्छी लाइफ देता है तो लोगों तक अच्छी लाइफ पहुंचाओ। हिंदूइज़्म वो लाइफस्टाइल लोगों तक पहुंचाओ। लोग अपने आप कन्वर्ट करेंगे। अगर आप एक तो आप नहीं पहुंचा रहे या फिर वो लाइफ स्टाइल साइड में अच्छी नहीं है। दो में से कोई एक रीज़न हो सकता है। सो बॉटम लाइन इज़ हिंदू लीडर्स नीड टू टेल देयर फॉलोअर्स कि नो हिंदू लीडर्स दे नीड टू बी मोर कन्वेंसिव कन्वेंस यू इनफ देखिए मैं मुझे बोलने की जरूरत नहीं है कि आप बुद्धिज्म में कन्वर्ट करो। अगर मैं बुद्धिज्म अच्छे से बता रहा हूं ना आपको
(30:32) खुद मन करेगा कि यार मैंने भी बुद्धिस्ट बनना चाहिए। नो स्पिर आई डोंट डिसएग्री विथ द फिलॉसफी ऑफ़ बुद्धिज्म बिकॉज़ इन द एंड इट मेक्स यू अ बेटर पर्सन फॉर श्योर। उसमें मेरे मुझे उसमें कोई वो नहीं है, दो राहे नहीं है कि इट्स अ वेरी ग्रेट रिलिजन एंड इट्स समथिंग दैट इज़ ऑलवेज अट्रैक्टेड मी वेरी नाइस। बट दैट आल्सो इज़ हैप्पेनिंग बिकॉज़ बीइंग अ हिंदू यू आर लिबरल इनफ टू वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट व्हाई व्हाई व्हाई हिंदू ऑलवेज टेल देमसेल्व कि हम डेमोस्टेशनल लोग हैं। हम है जो हर चीज टोलरेट कर रहे हैं। वी आर नॉट टोलरेटिंग वी आर सेइंग कि वी
(31:08) पहले भी ऐसा हुआ। नहीं है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मैं जब थालैंड में था एक मुसलमान इंसान आके वो हमारे बुद्धिस्ट टेंपल में झाड़ू मारता था। खुद समझता था। ऐसा नहीं है। कई सारे मुसलमान हमें घर पे बुलाते हैं। हमें आदर आप नागपुर में आइए। वो काफी भंते जी आप है क्या? आइए आइए आइए। है ना? क्रिश्चियन भी बताओ जब थालैंड में था मैं तो वहां पे क्रिश्चियन महिला हमको दान देती थी। तो लिबरलनेस हर पढ़ाता है। हर धर्म पढ़ाता है। आप ये मत बोलिए कि सिर्फ हिंदूज़्म लिबर लिबरल है। इवन बुद्धिस्ट आल्सो लिबरल इस्लाम जहां पे मल्टीकल्चरल अ लाइफ स्टाइल
(31:40) आई हैव वन गुड क्वेश्चन फॉर यू लेट्स से द होल वर्ल्ड कन्वर्ट्स इनू बुद्धिज्म दैट विल बी बेस्ट और होल वर्ल्ड बिकम्स इस्लामिक दैट विल बी बेटर किस में डिस्ट्रक्शन कम होगा और द होल वर्ल्ड बिकम्स हिंदू सो आप अपने-अपने कुछ फायदे तीनों के अपने-अपने कुछ नुकसान आप रेट करिए कि व्हिच विल व्हिच विल बी लीस्ट डिस्ट्रक्टिव एंड व्हाई मैं इसके आधार पर तो बता नहीं सकता हूं नहीं मतलब लीस्ट डिस्ट्रक्टिव एंड व्हाई सेंस लीस्ट डिस्ट्रक्टिव व्हाट सेंस? इन द सेंस ऑफ़ लिबरलनेस और अह नो इन द सेंस ऑफ़ फ्रीडम ऑफ़ लाइफ। फ्रीडम ऑफ़ लाइफ फॉर एववरीबडी, फॉर वीमेन, फॉर मेन
(32:20) एंड यस। सो व्हिच विल बी लेस डिस्ट्रक्टिव। अगर एक ही रिलीजन पूरी दुनिया हो जाए, व्हिच विल बी लेस डिस्ट्रक्टिव। लेस डिस्ट्रक्टिव। मीन द वर्ड लेस डिस्ट्रक्टिव। डिस्ट्रक्टिव बुद्धिज्म। बुद्धिज़्म। एंड उसके बाद सेकंड, हम्म। नो दैट्स इनफ। नो सेकंड एंड थर्ड यू हैव टू गिव मी सेकंड एंड थर्ड। ओके लेट्स डिस्ट्रक्टिव। इस पे मुझे बहुत ट्रोल किया जाएगा। [हंसी] नो जस्ट इट्स योर पॉइंट ऑफ़ बहुत आक्रामक हो जाती है जनता। देखिए मुझे लगता है कि इस्लाम में भी ऐसे कुछ बहुत सुंदर बातें हैं। हिंदूज़्म में भी ऐसे कुछ बहुत सुंदर बात है। आई एम जस्ट आस्किंग यू सेकंड एंड थर्ड।
(32:56) दैट्स इट। उससे ज्यादा बियनड कुछ नहीं करना है। वी विल चेंज द टॉपिक आफ्टर दिस। नो, आई कांट आंसर दिस क्वेश्चन। इफ इफ अगर मैं आंसर दूंगा तो अपने तरीके से मैं अपने तरीके से जवाब दूंगा। इफ यू आर आस्किंग मी यस यू आर जस्ट डिबेटिंग विद मी अबाउट दिस। सो आई जस्ट वांट योर नेचुरल ओपिनियन सो आई विल आई मैं यस और नो मैं जॉब ही देने वाला हूं। आई विल एक्सप्लेन इट इफ यू आर गोइंग टू अंडरस्टैंड दे नो नो आई विल एक्सप्लेन द थिंग। ओके। सो यू विल गिव मी सेकंड एंड थर्ड विद एक्सप्लेनेशन। ओके। डन। सो गिव मी फर्स्ट इज़ बुद्धिज्म। ओके। फर्स्ट बुद्धिज्म बिकॉज़
(33:28) बिकॉज़। फर्स्ट इन बुद्धिज्म बिकॉज़ बुद्धिज्म में ये हो जाता है कि आपको किसी कल्चरल रूल्स आपको फॉलो नहीं करने पड़ते। आप बुद्धिज्म में कल्चरल रूल्स नहीं है। जैसे एक बाकी बाकी धर्मों में होता है कि महिलाओं को कपड़ों को लेके या फिर घूंघट को लेके या फिर श्रृंगार को लेके या किसी भी चीज को लेके बहुत होते हैं। चाहे वो हिंदूज़्म हो या इस्लाम हो। दोनों में और दोनों की अपने-अपने चीजें अपनी जगह पे ठीक है। क्योंकि उस तरीके से एक डिसिप्लिन मेंटेन रहता है। एक एक ऑर्गेनाइज्ड वे रहता है। ठीक है? फैमिली स्ट्रक्चर मैं दोनों की बात कर रहा हूं। फैमिली स्ट्रक्चर मेंटेन
(34:01) रखने के लिए वुमस और मेंस दोनों के कुछ ना कुछ रिस्ट्रिक्शन होते हैं। इन इसके मुकाबले बुद्धिज्म में कम रिस्ट्रिक्शन है। कल्चरल रिस्ट्रिक्शन ऑन वुमेन ऑन वुमेन कल्चरल रिस्ट्रिक्शन है ही नहीं बुद्धिज्म में। अच्छा बुद्धिज्म में कल्चरल टाइप के रिस्ट्रिक्शन कोई भी रिस्ट्रिक्शन नहीं है। जैसे वुमस पे कल्चरल जैसे मैं कल्चर रिस्ट्रिक्शन की बात कर हां कल्चर जैसे किस तरीके से जैसे कि बाकी धर्मों में है लिबास को लेके श्रृंगार को लेके आना जाना बाहर जाना ये सब को लेके अच्छा हां ऐसा कोई भी रिस्ट्रिक्शन नहीं है बुद्धिज्म में इसलिए मैंने बुद्धिज्म
(34:33) फर्स्ट चूस किया ये एक रीज़न है। दूसरी बात फिर उसके बाद अगर इस्लाम अगर मुझे चूज़ करने में आएगा तो इस्लाम की मुझे एक बात बहुत पसंद आती है कि सबसे ज्यादा अधिकार किसी महिला को है धर्म ग्रंथ के आधार पर तो वो है इस्लाम की महिलाओं को। हम सबसे ज्यादा कानूनी अधिकार मतलब जो धर्म ग्रंथ देता होगा वो इस्लाम में है। अगर आप कभी कुरान शरीफ पढ़ेंगे तो पता लगेगा कि हालांकि महिलाएं उसका इस्तेमाल नहीं कर रही है पर महिलाओं को सबसे पहला अगर पूरे विश्व में किसी धर्म ने अगर अधिकार दिए हैं वो भी धर्म ग्रंथ के आधार पर जिसका कॉन्स्टिट्यूशन कह सकते हैं वो
(35:14) इस्लाम था। तो इस्लाम इज बेस्ट इन दैट वे। पर एक नॉलेज के इंटेलेक्चुअल शिप में अगर कोई धर्म सबसे अच्छा रहा है मतलब जिसमें काफी चीजों के काफी डिफरेंट-डिफरेंट ब्रांच के नॉलेजेस में कोई रहा है तो हिंदूइज़्म हम तो ये तीनों की अपनी-अपनी एक खासियत रही है। पर उन्हीं चीजों के कारण फिर वो नेगेटिव इंपैक्ट भी देखने के लिए मिलता है उसका। ओके। सो सेकंड वाज़ इस्लाम, थर्ड इज़ हिंदूइज़्म। मैंने नहीं मैंने ऐसा रखा ही नहीं। मैंने तीनों के गुण बताया। आप देखिए अभी थाईलैंड में बुद्धिज्म सबसे स्ट्रांग है पर कॉन्स्टिट्यूशन वहां पे सबसे ज्यादा है।
(35:45) हम ठीक है? फ्रीडम पूरी है। प्रॉस्टिट्यूशन वहां पे सबसे ज्यादा है। हाउएवर देयर आर डिफरेंट के डिफरेंट रीज़ है। आर दी बुद्धिस्ट वुमेन जो ज्यादातर प्रॉस्टिट्यूट कांट से कि बुद्धिस्ट वुमेन इट्स अ कल्चरल थिंग। ओके? हां बिकॉज़ उनका तो जनरेशन से चल रहा है। तो वो कल्चरल थिंग। इससे बुद्धिस्ट फिलोसोफी को दोष नहीं दे सकते। तो मतलब वो मेजरली दे आर बुद्धिस्ट बेसिकली यू आर से। बुद्धिस्ट होंगे। लेकिन बाकी नहीं है। यह नहीं है। भूटान में नहीं है। वहां पे तो हम ऐसा नहीं कह सकते। रैंकिंग करना ही ज्यादा डिफिकल्ट होगा। और जब आपने मुझे तीन ऑप्शन दिए तो
(36:20) मैंने उसमें बुलम को फर्स्ट रखा। मैंने उसमें बुलम बेस्ट बताया। तीनों में से। मैंने बुलम को फर्स्ट नहीं रखा। प्लीज बट मैंने तीनों धर्म की तारीफ की है। समबडी हु आल्सो सेस आई एम अ मॉक। जो सबसे फेमस और पॉपुलर है। हिज नेम इज जय शेट्टी। ओके। एंड यू आर आल्सो अ मक यस सो व्हाट इज द डिफरेंस देखिए ही यूज्ड टू बी अ मंक अच्छा जय शेट्टी मंक अभी नहीं है ना वो तो पहले मंक थे हम तो वो उसके आधारों पर उनको एक एक प्लस पॉइंट मिल गया कि मैं कभी मंक रहा हूं बट ही वास नॉट अ बुद्धिस्ट मंक ओके जय शेट्टी ही वाज़ अ मंक इन अ आई थिंक एस्कॉन आई थिंक सो मुझे पर्टिकुलरली अवेयर
(36:58) नहीं है तो उसमें वो मंक रहे और एक एक देखिए अगर आप ट्रेडिशन एक अलग ट्रेडिशन के उसके रूल्स अलग होते हैं हमारे के रूल्स अलग होते हैं हर चीज को लेके तो उनको उस बात का एक्सपीरियंस है लेकिन जो मंक हुडनेस छोड़ चुका है हम आई एम नॉट मैं पर्सनली नहीं हो रहा हूं माफी भी चाहूंगा इस बात के लिए पर जो मंक हुडनेस छोड़ चुका है और जो फिर से मटलिस्टिक लाइफ में वापस आ चुका है देन फिर उस बात को वैल्यू क्या रहा हां अगर आपको मंक लाइफ का विज़डम मिला है और वो मंक लाइफ के विज़डम में आप वापस आ रहे हैं नॉर्मल लाइफ में तो इट मींस आपने मंक लाइफ
(37:28) का विज़डम इस्तेमाल ही नहीं किया क्योंकि मंक लाइफ का विज़डम ऐसा होता है कि जो आपको सस्टेन रखे मंक लाइफ में जिससे आपको पता लगता है कि मंक लाइफ इज़ मोर ग्रेटर, मोर वाइसर एंड मोर फॉर मोर बेनिफिशियल देन ले लाइफ नॉर्मल लाइफ। पर क्योंकि एक जो मंक हुआ है उसको ये बात अनुभव हो चुकी है कि इस लाइफ में ज्यादा पाप होते हैं। ज्यादा अकुशल कर्म होते हैं। ये लाइफ ज्यादा अच्छी नहीं है। उसके इससे ज्यादा लाइफ कौन थी? कि ये अच्छे है। ये श्रेष्ठ है। ये पूजनीय है। ये आदरणीय है। सम्माननीय है। गौरवनीय है। ये लाइफ आप समझ चुके हैं। इसलिए आप मंक लाइफ चूज़ करते हैं। इसलिए आप
(37:59) मंक लाइफ में रहते हैं। पर फिर भी अगर आप उस लाइफ में जाने का मन कर रहा है तो इसका मतलब आप इसका संतुलन खो बैठे हैं। है ना? आप उधर मतलब पराजित हो गए। आप हार गए। आप उससे आकर्षित हो चुके हैं। बट द होल वर्ल्ड इज़ फॉलोइंग हिम फॉर श्योर। और लोग तो आसाराम बापू को भी फॉलो करते थे। राम रहीम को भी फॉलो करते थे। और भी ऐसे बड़े-बड़े स्पेशल लीडर्स हैं जिनके कई सारे ये आए हैं। तो ना दिख दिखाने की बात अलग होती है। दिखने की बात अलग होती है। पर मैं जय शेट्टी के बारे में ऐसा कुछ नहीं कह रहा हूं। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि जय शेट्टी बुरे हैं।
(38:28) मैं बस ये कह रहा हूं कि एक मंक होना और एक मंक रहना दोनों में बहुत डिफरेंस होता है। दोनों में हम कंपेयर नहीं कर सकते हैं। जो मंक है एट द एंड वो डिफरेंट है। और जो मंक रह चुका था वो डिफरेंट है। तो व्हाट इज योर टेक ऑन सद्गुरु देन? [हंसी] आप चाहते हैं कि ये पडकास्ट कंट्रोवर्शियल जाए। मैं आपसे मिल रही हूं आज तो आई हैव टू टेक योर ओपिनियंस। सी मुझे किसी की लाइफ पे कमेंट करना बिल्कुल भी ये अच्छा नहीं है। ये शोभनीय नहीं है। लेकिन क्योंकि वो पब्लिक पर्सनालिटी बन चुकी है। तो ऑफ कोर्स उन पे कमेंट आएंगे और मुझ पे भी कमेंट आएंगे ही
(39:07) आएंगे क्योंकि हम अभी एक ओपन फोरम एक ओपन प्लेटफार्म की हमारी पर्सनालिटी बन चुकी है। हमारी इमेज ही उससे बोलते हैं पर हम जाने भी उसी आधार पर जाते हैं। देखिए सद्गुरु एक अलग से अलग से सेट से है। वो शव शव इस सेट से आते हैं और हम बुद्धिस्ट सेक्ट से आते हैं। तो कई बार हिस्ट्री में और एकेडमिक वर्ल्ड में कई बार श फिलोसफी और बुद्ध फिलोसफी को कंपेयर भी किया है। उनमें बहुत सारे सिमिलरिटीज भी देखे गए हैं। तो कहीं ना कहीं पर उनके और हमारी फिलॉसोफी में जमीन आसमान का फर्क है। वो ऐश्वरवादी है। हम ईश्वरवादी है। है ना? वो वेदों के ऑथॉरिटी को मानते हैं। हम वेदों
(39:39) की ऑथॉरिटी को नहीं मानते हैं। है ना? हम एक मोनेस्टिक सिस्टम है। उनका मोनेस्टिक सिस्टम नहीं है। हमारा जो मंक हुसैन है वो एक मोनेस्टिक सिस्टम को रिप्रेजेंट करता है। हम और उनका मोनेस्टी सिस्टम को रिप्रेजेंट नहीं करते हैं। तो बहुत सारे डिफरेंसेस है। तो इसलिए हमारे हिसाब से हमारे पॉइंट ऑफ व्यू से वो कभी भी उतने सही नहीं होंगे और उनके पॉइंट ऑफ व्यू से हम शायद से उतने सही नहीं होंगे। फिलॉसोफिकल बेसिस पे देखें तो। बट स्टिल ही हैज़ अचीव्ड स्पिरिचुअली जो उनके फॉलोअर्स मानते हैं। ऑफ कोर्स उनके फॉलोवर्स को कुछ हुआ होगा मुझे नहीं पता। डायरेक्टली मेरा
(40:10) एक्सपीरियंस नहीं है। तो उसके बारे में मैं ज्यादा कह नहीं सकता। पर बट मटेरियलिस्टिकली ही हैज़ अचीव्ड वन वन प्लेटफार्म। उनके भी वो हरारकी उनकी एक पोजीशन है और उन पोजीशन पे मैं पहुंचने का हूं। एंड अगर आप मटलिस्टिकल भी बोले तो मेरा उनप कमेंट करना उचित बिल्कुल भी नहीं है। तो पर फिर भी मैं कहूंगा कि जिस प्रकार से मार्केटिंग उनकी होती है और जिस प्रकार से उनको लेके कई सारे विवादस्पद प्रूफ बेस्ड व्हाट काइंड ऑफ़ प्रूफ बेस्ड जो एक कई बीच में कुछ उनका बहुत ऐसा एक डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी। हम कुछ बातों को लेके उसको लेके भी बहुत सारा
(40:45) मैंने भी सुना वो डॉक्यूमेंट्री पूरी जिसमें जग वासुदेव करके वो डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी शायद से तो उसमें कई सारे लॉजिकल ऐसे कुछ बातें रखी गई थी कि ये ऐसा हुआ वो ऐसा क्या हुआ क्या लॉजिकल बातें थी मैं उसके बारे में ज्यादा बोलना नहीं चाहूंगा बट व्हाट इज योर टेक ऑन दैट आपको क्या लगता है जो डॉक्यूमेंट्री है वो मुझे ऐसा लगता है कि अगर वो बातें प्रूव्ड नहीं हुई है हम तो उस पे विश्वास करना उचित नहीं है क्योंकि बातें तो कई सारे कई लोगों के प्रति होती है अगर वो प्रूव्ड हो चुकी है अह उसको चैलेंज्ड किया गया है और प्रॉपर्ली वेरीिफाइड है
(41:15) हम तो फिर वी मस्ट टेक अ प्रॉपर एक्शन ऑन इट बट इट इफ इट इज़ नॉट वेरीिफाइड देन वी शुड नॉट कंसीडर इट एज अ रियल मुझे ऐसा लगता है और इन एट द एंड ये सारा होने के बावजूद भी देखो एक इंसान फॉर एग्जांपल मैं अगर आपसे अच्छे से बात कर रहा हूं तो मैं आपके लिए अच्छा हूं भले ही फिर मैं किसी का खून भी करके क्यों ना हूं किसी और का हम आप ये बात समझिए इंसान इंसान का कॉग्निटिव बायस कैसे वर्क करता है। अगर मैं आपसे अच्छे से बात कर रहा हूं। मेरा आपके साथ कुछ बुरा हुआ नहीं है और मैंने बाहर कहीं दूर किसी और का मर्डर भी किया है। पर मैंने इधर आपकी हेल्प की तो मैं आपके लिए
(41:48) हमेशा अच्छा रहूंगा। हम है ना? और उनके लिए हमेशा क्या रहूंगा? बुरा रहूंगा। हम हम ह्यूमंस इस तरीके से वर्क करते हैं मोस्टली। है ना? हम हमारा पर्सनल इंटरेक्शन उनके साथ किसका है? तो हमें ये बात भी नहीं बोलना चाहिए कि जग वासुदेव मतलब सॉरी सद्गुरु जी के आश्रम में ऑलरेडी कई सारे लोग पढ़ रहे हैं। स्पिरिचुअल बेनिफिट ले रहे हैं और कई सारे लोगों के दुख दूर हो रहे हैं। तो हमने कहीं वो आस्पेक्ट भी नहीं भूलना चाहिए कि मुझे नहीं पता कि वो कितना हद तक सही है। पर लोगों के कितने सारे लोग इतने सारे लोग वहां से ईशा फाउंडेशन में जाके वो सब
(42:17) सीख रहे हैं और उनकी लाइफ चेंज हो रही है। तो मुझे लगता है कि हमने वो बातों को ध्यान में रखते हुए कि बेनिफिट कितना ज्यादा हो रहा है। उस पे ज्यादा ध्यान देते हुए उस इंसान को जज करना चाहिए। एट देन जजमेंट होंगी ही होंगी। सोसाइटी में जजमेंट होंगी होंगी। तो सोसाइटी में जजमेंट करते हुए मुझे लगता है कि कितने लोगों को बेनिफिट हुआ है क्योंकि उस पर्सनालिटी वैसी है। संत हुडनेस मोटिवेशनल स्पीकर इस आधार पर जाना जाता है कि उसके कारण कितने लोगों का बेनिफिट हुआ है ना कि उसका पर्सनल लाइफ देखते हैं क्योंकि एव्री संत हैज़ पास्ट एंड एव्री
(42:47) सीनर हैज़ फ्यूचर। मूविंग ऑन टू सम मॉडर्न लाइफ इशज़। जैसे कि लोगों के पास सब कुछ है। मनी, करियर, रिलेशनशिप बट उसके बाद भी वह एम्प्टी फील करते हैं। आज लोगों के पास सब है। सब कुछ है। मनी मनी दे हैव मनी, दे हैव करियर, दे हैव रिलेशनशिप्स, दे आर हैप्पी, हेल्दी, मैरिड। आई डोंट नो वेदर दे आर हैप्पी। कौन कह रहा है कि किसी इंसान के पास सभी है। अगर इंसान के पास सही में सभी होंगे, तो सही में हैप्पी होंगा वो। हम किसी के पास मनी है तो रिलेशनशिप नहीं है। किसी के पास रिलेशनशिप है तो मनी नहीं है। हम और किसी के पास करियर नहीं है।
(43:23) मनी है रिलेशनशिप है। फादर की कमाई में पैसा है और रिलेशन भी उस पैसे का थोड़ा बहुत पर क्या है? करियर नहीं है। वो अपना लाइफ सेट नहीं कर पा रहा किसी डायरेक्शन में। अपना गोल अचीव नहीं कर पा रहा है। नहीं इंसान के पास सभी नहीं है। अगर सभी होंगे तो इंसान सेटिस्फाई रह रहेगा। वो लोनलीनेस फील नहीं करेगा। इंसान के पास सारी चीज नहीं है। तो क्या ये सारी चीजें होने से इंसान सच में बेटर फील करेगा? अगर उसने अच्छे तरीके से हासिल की है तो हम उसने उसके लिए कोई ऐसा गलत काम नहीं किए जिसके कारण उसमें रिग्रेट हो हम तो वो फील करेंगे। अच्छी फील करेंगे। उसे
(43:52) एक प्राउड रह रहेगा कि यार मैंने अपनी मेहनत से अपनी एफर्ट्स अचीव की है। तो हील अगर बुद्धा ने आज Instagram देखा तो सबसे ज्यादा उनको क्या डिस्टर्ब करेगा? बुद्धा Instagram देखेंगे ही नहीं, खोलेंगे ही नहीं। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] अगर उनको पता चले कि देयर इज़ समथिंग लाइक Instagram तो उनको क्या सबसे ज्यादा डिस्टर्ब करेगा आज के टाइम पे? बुद्ध को Instagram बुद्ध तो आज के समय होंगे नहीं। अगर बुद्ध को सबसे पहले अगर कुछ डिस्टर्ब करेगा तो मुझे लगता है रियल सिर्फ 15 सेकंड की इस बात से। अच्छा ओके। व्हाई इज दैट? क्योंकि पेशेंस उससे इंसान का लूज़ हो रहा
(44:24) है। हम सिर्फ 15 सेकंड की चीजें देखने से इंसान उतना ही ये होते जाएगा। और दूसरा द एल्गोरिदम मेथड जो एल्गोरिदम के कारण से जो हमें रील्स आ रही है हम एक जो एल्गोरिदम क्योंकि एल्गोरिदम ऐसे वर्क करता है कि हम जो देखेंगे वही दिखते रहेंगा तो उसके कारण से और मतलब दिशा हमारी चेंज नहीं होती रहेंगी हम और डिप्रेस है तो और डिप्रेसिव होंगे हां क्योर नहीं होंगे तो ये जो एल्गोरिदम जो प्रोसेस है या जो एल्गोरिदम जो ये जो जो है ये उससे वो मुझे ऐसा लगता है कि ये एल्गोरिदम्स जो है ये आपके फीलिंग्स को वैलिडेट करता रहता है और और यू नो नहीं एल्गोरिदम वर्क ही ऐसा जिसपे आप
(44:57) ध्यान दे रहे हैं वो वैसी चीजें और सजेस्ट करेंगे आपको तो वैलिडेट नहीं कर रहा है आपको। वो आपको उसमें एंटर करा रहा है। एक्सक्ट्ली अगर आप एंटर भी हो रहे हैं तो कहीं ना कहीं आप रिलेटेबल कंटेंट देख रहे हैं तो आप एक वैलिडेशन फील कर रहे हैं कि मेरे जैसे और भी ऐसे लोग हैं जो फील करते हैं तो इसका मतलब मैं सही नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं इस तरीके से वैलिड नहीं मेरे जैसे और भी लोग ऐसा फील कर रहे हैं। मैं ही सही हूं। अच्छा ये फीलिंग आती है। मैं ही सही होने से गलत है। मैं भी सही हो सकता हूं। ये फीलिंग आनी चाहिए। पर मैं ही सही हूं। ये फीलिंग आती
(45:26) है। इस कारण से वो रिश्तों कोेंस देना छोड़ देता है। कि मैं क्यों झुकूं फिर? ऑलराइट। एक सेगमेंट है वुड बुद्धिज्म अलाउ दिस? चीटिंग बट विदाउट एनी इमोशनल अटैचमेंट? चीटिंग इज चीटिंग। आइदर इज़ इमोशनल और फिजिकल। यू कांट एडवोकेट फॉर वन ऑन अनदर। चीटिंग इज़ चीटिंग। चीटिंग मतलब चीटिंग क्यों बुरी मानी जाती है? उसका रीज़न है क्योंकि झूठ बोलना पड़ता है। अगर झूठ ना बोलना पड़े तो वो चीटिंग नहीं होंगे। अगर आप सच बोले कुछ कर रहे हैं जैसे कि ओपन रिलेशनशिप हम दैट्स आर ओके दैट कैन बी फाइन इन बुद्धिज्म दैट्स फाइन इन बुद्धिज्म या बट आप झूठ बोल के एक को विश्वास में रख
(46:04) के दूसरे के साथ जा रहे हैं अच्छा वो गलत है झूठ होने के कारण चीटिंग गलत है बुद्धिज्म झूठ बोलना पड़ता है इसलिए किसी को माफ कर देना बट दोबारा उसे लाइफ में कभी ना लाना व्हाट डस बुद्धिज्म से इट्स ओके वी आर देन यू कैन कम बैक और नो वी आर गुड नो नीड टू कम बैक अगर आपको लगे कि वो मिस्टेक सुधार नहीं सकता है इट इज बेटर माफ माफ करो और आगे बढ़ जाओ। अपनी हैप्पीनेस के लिए अपने पेरेंट्स को डिसपॉइंट करना। अपने हैप्पीनेस के लिए पेरेंट्स को डिसपॉइंट करना। सबसे पहले एक यहां पे तो दोनों तरफा प्रॉब्लम है कि पेरेंट्स की किस तरह की एक्सपेक्टेशंस है और बच्चा उन
(46:41) एक्सपेक्टेशंस को किस तरीके से देख रहा है। डिसपॉइंटमेंट किस लेवल का है? दैट्स मैटर। क्या जेलसी से रिएक्ट जो लोग करते हैं, जो लोग मैनपुलेट करते हैं और जो लोग अपने आपको जेलसी के मारे बार-बार यह दिखाते हैं कि भाई हम आपसे आगे हैं एंड वो छल कपट से आगे बढ़ रहे हैं। इस केस में बुद्धिज्म क्या कहता है? और क्या यह सही है? जलेसी होना एक बहुत ही कॉमन चीज है। पर जेलसी के कारण एक्शन करना याद रखना कि आपकी भी लाइफ में कोई वैसा करें। पहली बात यह दूसरी बात आपको अगर लग रहा है कि उसके पास वह है तो आपको यह समझना इस पर कंटेंप्टिनेट करना चाहिए कि उसके पुण्य
(47:20) कर्मों का फल है। किसी ना किसी चीज़ में उसने वो चीज़ किया होगा इसलिए वो चीज़ मिली है। मैं वो चीज़ नहीं कर सकती। एक तो मेरे मोरल के खिलाफ होऊंगा इसलिए मैंने मैंने वो नहीं किया इसलिए मेरे पास नहीं है। या फिर मेरे पुण्य में नहीं हऊंगा इसलिए मेरे पास नहीं है। अगर ऐसा कह के खुद को दिलासा दे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। तो बुद्धि जैसे के समय में खुद को दिलासा देना ज्यादा आवश्यक है। ना किसी और को देखना। तो बुद्धिज्म में भी देयर इज अ कांसेप्ट ऑफ कर्मा लाइक हिंदूइज़्म। या सी देयर इज अ कर्मा इन एव्री रिलीजन इन एव्री फिलॉसोफी स्पेशली रिलीजियस फिलॉसोफी
(47:49) देयर इज़ अ थ्यरी ऑफ़ अ कर्मा। सो व्हाट डस बुद्धिस्ट कर्मा? कर्मा का रिजल्ट कौन देता है? कहां से आता है? इस पे सारे थ्यरीज़ अलग-अलग बताते हैं। बुद्धिज्म में भी कर्मा है। जैसा करोगे वैसा भरोगे। और कर्मा का बेसिक कांसेप्ट ये होता है। जैसा करोगे वैसा भरेंगे। हर किसी भी धर्म का क्यों ना हिंदू का इस्लाम क्रिश्चनिटी बौद्ध हर एक में ये कॉमन है। अपने पार्टनर का फोन चेक करना बिकॉज़ दिस सस्पेक्ट दैट यू आर चीटिंग इज दिस नॉर्मल। सी आपको ये बात समझनी होंगी कि आप जितना ज्यादा चेक करेंगे उतने आपको ट्रस्ट इशू होंगे। उतनी आपको प्रॉब्लम फेस करनी पड़ेगी। आप
(48:22) अपने आप को शांत नहीं रख पाएंगे और बार-बार आपका दिमाग उसी डायरेक्शन में चलेगा। तो ये आपकी प्रॉब्लम आगे जाके बहुत आपको भारी पड़ेंगी। पर मोबाइल एक दो क्लियर हो जाना अच्छी बात है। पर बार-बार वही थॉट आ रहे हैं। तो यू नीड टू टेक अ प्रॉपर मेजर ऑन दैट। पर हां अपने मोबाइल का अपने अपने मुझे लगता है कि एक ट्रांसपेरेंसी होनी चाहिए हस्बैंड और वाइफ में गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड में कि वो एक दूसरे का फोन कभी भी देख ले। कभी भी देख सकते हैं। कभी भी चेक कर सकते। टेक्स्ट मैसेजेस एंड एवरीथिंग। एवरीथिंग ईमेल्स। एक बात बताइए ऐसा क्या कर रहे हैं कि आपको
(48:55) दिखने की जरूरत नहीं पड़ रही है? हम अगर आपको किसी के साथ फ्लटिंग करने की जरूरत पड़ रही है तो इसका मतलब क्या फ्लटिंग इज़ इंटिमेसी? हम आपके पास समरी इंटिमेसी आगे जाके कई सारे चीजों में रोल प्ले कर सकती है। तो नो यू कांट यू मस्ट नॉट टू लाइक दिस थिंग्स। इफ यू वांट टू बी लॉयल इन रिलेशनशिप देन सो। व्हाट हैप्पेंस व्हेन समबडी इज़ अनहैपी इन द रिलेशनशिप। और उनको अपने मैरिज को फिर भी संभाल के रखना है। चाहे वो बुद्धिज्म में हो या किसी भी रिलजन इट्स अ गुड थिंग कि आप अनहैपी है और फिर भी रिश्ते को संभाले रखना चाहते हैं। इसका मतलब आप में ये आशा है कि रिश्ता फिर कभी
(49:28) अच्छा होगा। अभी तो हम बस एक पढ़ाव देख रहे हैं। रिश्ता फिर से ठीक कह सकते हैं। वो आशा होना जरूरी है। चीजें कितनी भी खराब क्यों ना हो। कितनी बुरी क्यों ना हो। चीट भी किया और क्यों ना हुआ हो। तो जब वो संभाल रखने की कोशिश करो तो आप एक आशा के साथ जिले और होता है रिलेशन कई बार अच्छे होते हैं। ये पीयूष मिश्रा जिनकी वो कितनी प्यारी पोएम है आरंभ है प्रचंड है वो मस्तक प्रचंड तो वो भी बताते हैं कि यार मैंने जवानी में बहुत गलत काम किया पर मेरे पति ने मुझे संभाल के रखा उसने मुझे माफ किया और आज रिश्ता संभाला हुआ है तो होती है चीजें सुधरती है
(49:57) आप में आशा होनी चाहिए कि चीजें ठीक होंगी और ये भी और मैं और क्या अच्छे अच्छी बातें उस चीज के रिश्ते में कर सकती हूं सोचना चाहिए किसी रिलेशनशिप को एंड कर देना बिकॉज़ यू फील दैट यू डिर्व समवन बेटर अगर आपको लग रहा है कि मैं किसी और को डिर्व करती हो तो इतने अब तक आप थे क्यों फिर अभी ऐसी क्या घटना हो गई ऐसी क्या बात हो गई जिसके कारण आपको लग रहा है कि आप डिर्व बेटर करते हो क्या वो चीजें चेंज नहीं कर सकते अगर सामने वाले की मिस्टेक है तो चेंज नहीं कर सकते क्या उसका भी उतना ही उसी प्रकार का मत है क्या वो भी वो चीज चाहता है कि हम
(50:28) रिलेशनशिप मूव ऑन हो जाए अगर म्यूचुअल कंसेंट है देन इट्स ओके बट आप बस अपनी समझ के आधार पर कह रहे हैं विदाउट प्रॉपर कम्युनिकेशन विदाउट चीजों को सॉल्व किए देन इट्स योर इग्नोरेंस ओके वन क्विक क्वेश्चन व्हाट वुड बुद्धा से टुडे यू हैव वन लाइन टू से आपका फ्रेंड आपसे ज्यादा सक्सेसफुल हो गया आप जेनुइनली उसके लिए हैप्पी हो बट अंदर से जेलसी फील हो रही है व्हाट वुड बुद्धा से उसने अपने पूर्व जन्म में वो कर्म किए होंगे आपके पास बहुत पैसा है लेकिन आपको फिर भी लगता है और होता तो बहुत अच्छा होता व्हाट वुड बुद्धा से और होता तो बहुत अच्छा होता पैसा होता और तो आई मीन
(51:02) आपके पास बहुत पैसा है फिर भी आप चाहते हो कि मेरे पास और पैसा होता लो या कुशल कर्म की जननी है आप किसी की लाइव देखते हो Instagram पर और सडनली आपको अपनी लाइफ ऑर्डिनरी लगने लगती है। व्हाट वुड बुद्धा से? दुख तो उसकी जिंदगी में भी आएगा। आपको करियर में सक्सेस मिल रही है बट उसके चक्कर में आपका फैमिली लाइफ, आपकी स्लीप और रिलेशनशिप सारे अफेक्ट हो रहे हैं। व्हाट वुड बुद्धा से? [गला साफ़ करने की आवाज़] विश्वास ही परम न्याती है। मतलब मतलब विश्वसनीय काम करो। हर चीज ठीक रहेंगे। न्याती ही बने रहेंगे। विश्वास रखो अपने रिश्तों पे, अपने काम पर और अपने
(51:41) कर्मों पर। कोई इंसान कंट्रोवर्सी करके फेमस हो रहा है। हम और लोग उसे देख रहे हैं। मिलियंस ऑफ पीपल वाच देम। व्हाट वुड बुद्धा से। सच छुपता नहीं है। एआई आपके थिंकिंग, आपके राइटिंग सबको इन्फ्लुएंस कर रहा है। आज व्हाट वुड बुद्धा से। संगति अच्छी रखो। संगति अच्छे रखने से आप आई डिड अंडरस्टैंड दिस क्योंकि एआई आपके मैसेजेस लिख रहा है। आपको आपके डिसीजंस भी ले रहा है। क्योंकि आप आलसी हो रहे हो। आलस अच्छा नहीं है। आलस कि मृत्यु लोगों का जीवन आल आलसी व्यक्ति मरे व्यक्ति समान है। तो एआई हमें आलसी बना रहा है।
(52:27) सो एज अ रिजल्ट बुद्धा इस सेइंग कि संगति ही अच्छे रखो। क्योंकि आप अच्छे संगति में रहोगे तो आप एक्टिव रहोगे। आप देखोगे कि वो आगे बढ़ रहे हैं। मुझे भी आगे बढ़ना होगा। मुझे भी मेहनत करना होगा। वो अच्छी मेहनत कर रहे हैं। मैंने मेहनत करना चाहिए। आपको किसी ने बहुत हर्ट किया और दिल से अभी तक एंगर नहीं गया है हम उस इंसान के प्रति। सो व्हाट वुड बुद्धा से? एंगर नहीं गया है। [गला साफ़ करने की आवाज़] कि इस प्रकार से मत सोचो कि उसने तुम्हें कुछ गलत बोला है। ऐसा सोचोगे तो गांठे तुम्हारे अंदर ही रहेंगी। मतलब तुम चाहते हो हमारे सामने वाला इंसान
(52:59) पर जहर तुम पी रहे हो। या आपको पता है कि कोई डिजायर आपके लिए अनहेल्ी है पर फिर भी आप उसको छोड़ नहीं पा रहे हैं। हम व्हाट वुड बुद्धा से? उन लोगों को देखो जो सिर्फ अपने ही डिजायर्स पूरे करने के पीछे लगे रहे। उनका एंड कैसे हुआ वो देखो। उनकी कहानियां जानो। ओके। इफ एवरीथिंग हैपेंस बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा, हमारा लाइफ कितना हमारे एवरीथिंग हैपेंस बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा। समथिंग हैपन बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा, समथिंग हैपेंड बिकॉज़ ऑफ़ फूड, समथिंग हैपन बिकॉज़ ऑफ़ एनवायरमेंट। ओके? तो बुद्धिज्म ऐसा नहीं है कि आपके कर्म खराब हो। कबार आपके कर्म ही जिम्मेदार नहीं है। कभी
(53:37) कबार आपका प्रॉपर फूड इंटेक भी उसके लिए जिम्मेदार होता है। कभी कबार आपका एनवायरमेंट भी उसके लिए जिम्मेदार है। सर्दी किस कारण होती है? एनवायरमेंट के कारण। है ना? आपका बाकी जो कुछ रोग है वो तो फूड के कारण होता है। फूड इंफेक्शन फूड के कारण होता है। बट एवरीथिंग इस हैपनिंग बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा। वेरी एक्सट्रीम सिचुएशंस लाइक एक्सट्रीम एक्सट्रीम सिचुएशंस जहां पे यू नो सैड स्टोरी सुनने को मिलती है एंड यू नो समटाइ्स अ लव्ड वन पाससेस अवे बिफोर टाइम यू नो सो दैट्स नॉट कर्मा दैट इज कर्मा दैट्स कर्मा इफ यू आर सफरिंग बिकॉज़ ऑफ़ द लॉस ऑफ लव वंस
(54:17) इट्स योर योर कर्मा दैट यू नीड टू सफर फ्रॉम दैट दैट पेज इट्स योर कमा। सो, यह हमने अपनी पास्ट लाइफ में ऐसा कुछ किया। नॉट जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द पास्ट कामा। इट्स इट्स द यू हु हैव डेवलप्ड सच काइंड ऑफ़ अटैचमेंट व्हिच इज़ व्हिच व्हिच वाज़ कंप्लीटली इग्नोरेंट कि तुमने कभी सोचा भी नहीं कि इंसान भी कभी दूर जाएगा, कभी जिंदगी से निकलेगा। अगर तुम समय-समय पे ऐसा कंटेंप्लेट करे, तो आज इतनी गहरी अटैचमेंट नहीं होती। वह गहरी अटैचमेंट है अगर तुम सफर कर रहे हो। बिकॉज़ ऑफ़ पास्ट डीड, नॉट बिकॉज़ ऑफ़ पास्ट कमा बिकॉज़ ऑफ़ प्रेज़ेंट कम्मा। द कम्मा वाज़ योर अटैचमेंट।
(54:53) सो जिस जो तुमने अटैचमेंट को अलव हो किया जमा होने के लिए इट्स लाइक अ पॉट जहां पे तुमने गंदा पानी जमा होने दिया। अटैचमेंट इज़ नॉट अ गुड थिंग देन अटैचमेंट अ पोज़ेसिव अटैचमेंट इज़ नॉट अ इग्नोरेंट अटैचमेंट इज़ नॉट अ गुड थिंग। माइंडफुल अटैच हाउएवर व्हेन देयर इज अ माइंडफुल रेयरली अटैचमेंट हो सकता है पर अटैचमेंट होती शायद देन सो वी समय-समय पे हमने कंटेंट करना होता है प्रॉपर्ली अपनी अटैचमेंट को लेके कि मैं मेरा अटैचमेंट गहरा हो रहा है क्या मैं टॉक्सिक हो रहा हूं क्या मैं ज्यादा डिपेंडेंट हो रहा हूं क्या मैं पोजेसिव हो रहा हूं क्या सवाल
(55:30) बार-बार बार-बार समय से खुद खुद खुद से पूछने पड़ते हैं समय-समय पे पर ये तो एक ऐसा चीज है जो लाइफ में यू डोंट वांट टू सफर देन सो ओके हम अनटाइमली सफरेंस यस अनटाइमली सफरिंग्स इफ यू डोंट वांट सफरिंग देन इफ यू वांट अ जन्मों जन्मों का साथ तो फिर छोड़ो साथ निभाना साथ या अगर हम अपना पास्ट लाइफ याद ही नहीं रखते हैं तो हमें क्यों रिस्पांसिबल ठहराया जाता है हमारे कर्मों के लिए कोई रिस्पांसिबल नहीं ठहराता ये तो समाज की हैबिट गिर चुकी है कि भाई तो अपने तो धार्मिक लैंग्वेज बन चुकी है एक तरीके से कोई कंसोल करने के लिए इस्तेमाल करता है
(56:06) कुछ उड़ाने के लिए इस्तेमाल करता है कोई नीचा दिखाने के लिए इस्तेमाल करता है। पर यह शब्दों का दूसरे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनाए गए। यह शब्द खुद को कंसोल करने के लिए इस्तेमाल किए गए कि हां शायद मेरे कुछ कर्म होंगे। पर आजकल हम उसे टारगेट करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। नाइफ नाइफ नाइफ इज सेम। बस कोई उस उसे काट के सब्जी बनाना चाहता है और दूसरों का पेट भरना चाहता है। कोई ऑपरेशन करके किसी की जान बचाना चाहता है और कोई खून करके अपना पर छोड़ देना चाहता है। क्या एक इंसान का एक्शन दूसरे पर्सन का कर्मा चेंज कर सकता है? नॉट कर्मा चेंज बट
(56:39) एक समय का एक का कर्म दूसरे को इन्फ्लुएंस कर सकता है। अच्छा वो कैसे अगर आप कोई कुशल कर्म करे तो आपको देख के उससे भी कुशल कर्म करने का मन कर सकता है और उसने कुशल कर्म किया तो मे बी जो कुछ बुरी हरकत उसके साथ होने वाली थी वो ना हो क्योंकि उस पुण्य कर्म का अपना बल बन गया है। देयर वर वन स्टोरी कि सारी पुत्र बंती वन ऑफ द मोस्ट स्ट्रांगेस्ट मंक एंड मोस्ट इंटेलेक्चुअल मंक आफ्टर बुद्धा ही वास द राइट हैंड ऑफ़ बुद्धा वो बहुत पुण्यवान थे पर एक जो बच्चा था कुल नाम का वो भी मंक था छोटा सा शिष्य 16 17 18 साल का होगा शायद से वो इतना उसका पाप कर्म था कि उसे
(57:15) कभी जिंदगी में पेट भर खाने के लिए नहीं मिला फिर सारे पुत्र को लगा चल तू मेरे साथ चल क्या पता मेरे पुण्य के प्रताप से तुम्हें भी भोजन मिल जाए पर देखिए उस बच्चे का बैड लक इतना इतना रहा कि सारी पुत्र बंधु को भोजन नहीं मिला उस दिन सारी पुत्र बंधु ने बोला कि नहीं तुम जाओ मैं जाता अकेला फिर सारी बातें बनते अकेले गए और फिर उनको भोजन मिला तो ऐसा होता है एक दूसरे के कर्मा एक दूसरे को इन्फ्लुएंस करते हैं कुछ रोक देते हैं कुछ मिल जाता है कभी किसी का लक काम करता है लाइक देयर इज़ वन माय डिसाइपल जूही उसका लक काफी अच्छा है क्योंकि शी इस मोर पुण्यवान वो
(57:42) बहुत पुण्य है बहुत पुण्य करते सत्कर्म करते रहती है तो वी वर प्लेइंग प्लेइंग वन गेम वंस दमशरा वो हम खेल रहे थे समझना था कि मेरे तो पुण्य उतने अच्छे लक के संदर्भ में मेरे पुण्य नहीं है पुण्य तो कई तरह के होते पर जब लक के संदर्भ में कोई पुण्य मेरा हो तो कभी अच्छा नहीं होता। मेरा कभी ऐसा लॉट वगैरह लक वगैरह लगता नहीं। मैं जानता हूं कि मेरा पुण्य है ही नहीं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो हम सभी मेरे डिसाइपल्स वगैरह हम सब लोग गेम खेल रहे थे। तो खेलतेखेलते मेरा सभी लोगों के कई सारे नंबर्स निकल गए। पर मेरे नंबर निकले नहीं एक फिर सडनली वो मेरी शिष्य आई
(58:13) है। जुई शिष्या है। मैंने बोलाई कम ऑन मेरी चेयर को हाथ लगाओ। है ना? मेरी चेयर को हाथ ला के पकड़ो। मेरे पास मतलब ऐसा खड़े रहो क्योंकि शी फीमेल तो मेरे पता था पानी। तो मैंने कहा मेरी चेयर को हाथ लाके पकड़ो और मेरे लिए अच्छा मतलब सोचो। ब्लेस करो मुझे। है ना? सो जब से उसने चेयर लगाया तो लगातार चार नंबर निकले मेरे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] सो ऐसा इनफ्लुएंस होता है। किसी का लक आप बोरो कर सकते हैं। किसी का बैड लक भी बोरो होता है। तो अपने फैमिली के साथ जो रहते हैं एक कलेक्टिवली एक पति पत्नी और बच्चा एक दूसरे के लिए कैसे अच्छे कर्म क्रिएट कर
(58:41) सकते हैं? देखिए एक दूसरे के लिए अच्छे कर्म हम क्रिएट नहीं कर सकते। हम क्या कर सकते हैं कि हम अपने पुण्य कर्म कर सकते हैं। अपना माइंड वैसा प्योर रख सकते हैं और सोच सकते हैं कि उसका भी भला हो। वो भी सुखी रहे। इस प्रकार के थॉट से भी आप उसका जीवन सुखी बना सकते हैं। इसे मंगल मैत्री कहते हैं। वन ऑफ़ द मोस्ट पावरफुल कांसेप्ट है बुद्धिज्म में। आज भी अगर किसी बीमार होता है तो मुझे कई सर लोग कॉल करते हैं और कहते हैं बंती जी प्लीज मंगल मैत्री दीजिए। आप उसके बारे में अच्छा अच्छा सोचिए। मंगल मैत्री मतलब उसके बारे में अच्छा सोचना। तो एनर्जी कनेक्ट हो जाती है
(59:09) और फिर वो कई सारे अच्छे रिस्पांस भी आए हमको कि बंती जी शुक्रिया आपकी मंगल मैत्री के लिए। मंगल मैत्री जैसे क्या होता है कि कई बार जो मदर्स हैं सबसे ज्यादा वो परेशान रहती है अपने बच्चों के लिए। आप परेशान रह के मंगलमैत्री नहीं कर सकते। शांत माइंड रह के ही मंगलमैत्री कर सकते हैं। माइंड रह के अगर मैं परेशान हूं मेरे बच्चे के लिए तो मैं मंगलमैत्री नहीं कर सकता हूं। मेरी जो वाइब्रेशन है हां नहीं वो सुखी रहना चाहिए। नहीं वो अच्छा रहना चाहिए। उसका भला हो। ये मंगलमैत्री नहीं है। मंगलमैत्री वो कामनेस होती है। जैसे कि हां मतलब ज्यादा मैं उससे बिना अटैच
(59:39) हुए ज्यादा उसके डिसमेरिट सोच के बस एक पूरा प्योर काम माइंड रहते हुए सोचूं कि हां वह सुखी रहे। वह मंगल हो वह कल्याण हो रोग मुक्त रहे। इस प्रकार का विचार रखना और जिसका जितना मेंटल स्टेट मजबूत होगा जितना मेंटल स्टेट उस समय काम होगा उतनी अच्छी उसकी मैत्री लगेगी सामने वाले को उतना कनेक्ट हो पाएगा उस एनर्जी के साथ क्या अपने दुश्मनों के लिए भी जिसके बारे में जो आप जानते हो जिस टाइप के लोग होते हैं वो आपके वेलविशर्स नहीं है क्या उसके प्रति भी अच्छा सोच रखना हमारे कर्म को काटे उसके प्रति भी मंगल मैत्री करते हैं तो एक
(1:00:11) समय ऐसा आएगा कि वो शत्रु आपका मित्र बन जाएगा इतना पावर होता है थॉट में मैनिफेस्टेशन हम वो जो शत्रु है आज वो एक समय आएगा कि आपका मित्र बन जाएगा। आपके पास हेल्प मांगने के लिए आएगा या आपकी हेल्प करेगा। अगर आप मैत्री करते हैं उसके प्रति तो थैंक यू सो मच फॉर कमिंग टू बियों द स्क्रीन वि मीच फॉर इनवाइटिंग मी। ग्रेट टॉकिंग टू यू एंड हैविंग योर पर्सेक्टिव। थैंक यू सो मच। थैंक यू। [संगीत]
Author Name:Beyond The Screen with Shivijj
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Title: “What Happens When a Monk Falls in Love?” Ven. Siri Sivali on Desire, Sex & Spirituality
Author Name: Beyond The Screen with Shivijj
Description: What happens when a Buddhist monk falls in love? Can a monk experience sexual desire while following a spiritual path? In this thought-provoking conversation, Ven. Siri Sivali explores the complex relationship between love, desire, sex, celibacy, and spirituality.
Discover how Buddhist teachings approach romantic attachment, physical desires, self-discipline, and the challenges of living a monastic life. This discussion raises important questions about human emotions, spiritual commitments, and the search for inner peace.
Topics Covered:
What happens when a monk falls in love?
Buddhist teachings on desire and attachment
Sex, celibacy, and monastic discipline
Love versus spiritual commitment
Understanding human emotions through spirituality
Overcoming desire and finding inner peace
About Our Guest :
Ven. Siri Sivali is a Buddhist monk who brings a refreshingly open perspective to spirituality, relationships, human desires, and the realities of monastic life. Known for addressing questions that are often left unspoken, he challenges conventional thinking and explores the relevance of Buddhist teachings in today's world.
From relationships and human desires to spirituality, religion, and inner peace, this episode explores thought-provoking questions about Buddhist teachings and the realities of monastic life.
🎙️ Watch till the end for “Would Buddhism Allow This?” and “What Would Buddha Say?”
💬 COMMENT BELOW: Can a person truly give up love, desire, and worldly attachments to follow a spiritual path?
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0:00 - Intro
2:08 - Guest Intro
2:51 - Do Women Face More Rules in Buddhism?
7:47 - Why Are Women Seen as Distractions?
9:58 - Can a Monk Fall in Love?
11:10 - His Thailand Love Story
13:02 - Can a Buddhist Monk Have Physical Intimacy ?
13:33 - Do Monks Ever Hide Their Desires?
15:55 - The Decision to Become a Monk
18:45 - Hinduism vs Other Religions
26:14 - Women’s Freedom in Hinduism vs Other Religions
31:38 - One World, One Religion
36:28 - Jay Shetty: From Monk to Normal Life
38:43 - His Controversial Views on Sadhguru
42:47 - Why Do We Feel Empty Despite Having Everything?
43:56 - Instagram Through Buddha’s Eyes
45:31 - Segment : Would Buddhism Allow This ?
50:38 - Segment : What Would Buddha Say ?
1:00:27 - Thank You
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Transcript:
(00:00) आई एम अ मक जो सबसे फेमस और पॉपुलर है। हिज नेम इज जय शेट्टी। [संगीत] बट द होल वर्ल्ड इज फॉलोइंग हिम फॉर श्योर। और लोग तो आसाराम बापू को भी फॉलो करते थे। राम रहीम को भी फॉलो करते थे। और भी ऐसे बड़े-बड़े [संगीत] स्पेशल लीडर्स हैं जिनके कई सारे ये आए हैं। तो ना दिख दिखाने की बात अलग होती है। दिखने की बात अलग होती है। पर मैं जय शेट्टी के बारे में ऐसा। व्हाट इज योर टेक ऑन सद्गुरु देन? आप चाहते हैं कि ये पडकास्ट कंट्रोवर्शियल जाए। इज इट ट्रू कि बुद्धिज्म में वुमेन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है मक बनने के लिए। ज्यादा रूल्स है वुमेन के लिए। बिकॉज़
(00:40) व्हाई डू वी सी मोस्ट ऑफ़ देम आर मेल। फीमेल जा इतनी आसानी से गुरु तय के लिए तैयार नहीं होती है। क्या आप इतना अपने आसानी से बाल काटने तैयार रहेंगे? बुद्धा ने ये तो बोला है कि ये फील मत करो बट कोई फीलिंग्स को रोक नहीं सकता। तो जब मॉम फील करता है किसी वीमेन के लिए तो क्या होता है? कि यही वो प्यार है जिसका मैं इंतजार कर रहा था। ऐसे टाइप का हो जाएगा। क्या आपने पर्सनल लाइफ में अपने ऐसा कुछ फेस किया है कभी आकर्षण? उस मॉल में जब मैं गया था तो आई वास लुकिंग समथिंग तो वहां पे एक लड़की आई थी। ठीक है? शी वास् नॉट दैट मच अट्रैक्टिव
(01:11) बाय लुक्स। और दरअसल फिर जब मेरा ध्यान गया उस लड़की पे तो आई वाज शॉक कि वो बहुत कॉन्फिडेंटली मुझे देख रही थी। वो लड़की मुझे अट्रैक्ट हुई और मेरे माइंड में लड़की वो दो दिन चली। मुझे लगा कि मेरे को Facebook पे तो भी नंबर Facebook पे तो भी फ्रेंड बनाना चाहिए था। क्या बुद्धिज्म के ओल्ड टेक्स्ट में यह लिखा गया है कि वीमेन इज अ टेंप्टेशन और अ डिस्ट्रैक्शन। एक मैन के लिए क्या है? वुमेन टेंप्टेशन है। वुमेन के लिए मैन टेंप्टेशन। मैं वीमेन की बात करूं क्योंकि वी एवर टॉकिंग अबाउट इट। एंड अगर वीमेन के लिबरलिज्म की बात करें तो जितना लिबरलिज्म
(01:40) [संगीत] आई थिंक हिंदू में भी हमें देखने को मिलता है। वो शायद हमें कहीं और इतना देखने को मिलता है। बिलकुल गलत है यह बात। बिल्कुल भी गलत है। ज्यादा कोई बड़ी बात नहीं है। [हंसी] अगर एक ही रिलीजन पूरी दुनिया हो जाए लेस डिस्ट्रक्टेड। डिस्ट्रक्टेड बुद्धिज्म। बुद्धिज्म। एंड उसके बाद सेकंड हम अगर बुद्धा ने आज Instagram देखा तो सबसे ज्यादा उनको क्या डिस्टर्ब करेगा? आज मैं बात करने वाली हूं एक बुद्धिस्ट मॉक के साथ ऑन दिस पडकास्ट एंड ही इज भते सिरसवाली। मैंने उनसे बात की हमारे मॉडर्न लाइफस्टाइल्स, रिलेशनशिप्स, फाइनेंससेस,
(02:21) करियर को लेके हमारे एवरीडे लाइफ में जो इशूज़ होते हैं और वो क्यों होते हैं? नॉट जस्ट अबाउट दैट। व्हाई आर वीमेन गोइंग थ्रू द वे थिंग्स आर गोइंग एंड टर्निंग आउट फॉर देम। टेकिंग हिस पर्सपेक्टिव हैज़ बीन कंट्रोवर्शियल। सो इफ यू लाइक बी ऑन द स्क्रीन विजय डोंट फॉरगेट टू सब्सक्राइब। वेलकम टू बियन द स्क्रीन विथ मी शिविजय। कैसे हैं आप? मैं अच्छा हूं। आप कैसे हैं? मैं भी एकदम बढ़िया। मैं आज आपसे यह सवाल पूछना चाहती हूं कि इज इट ट्रू कि बुद्धिज्म में वीमेन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है मक बनने के लिए। ज्यादा रूल्स हैं वीमेन के लिए? बिकॉज़ व्हाई डू वी सी
(03:00) मोस्ट ऑफ़ देम आर मेल्स? नो देयर आर अ लॉट ऑफ फीमेल नर्स टू बट एक बात है ना कि फीमेल इतने आसानी से गृह त्याग के लिए तैयार नहीं होती है क्या आप इतना अपने आसानी से बाल काटने तैयार रहेंगे नहीं नहीं तो ये है कि फीमेल बहुत कम फीमेल्स में वो गृह त्याग के इच्छा उत्पन्न होती है कि मुझे घर त्यागना है मुझे बाल काटना है मुझे ये सब कुछ छोड़छाड़ के क्या जाना है सन्यास जाना है मतलब 100 लोगों में 10 नहीं 100 में नहीं 100 में अगर एक तैयार 100 में बड़ा कोई एक मेल तय तैयार होता पर 100 फीमेल में एक नहीं हो सकता। 1000 फीमेल में शायद से एक हो सकती है जो नन
(03:36) बनने के लिए तैयार हो। स्पेशली बुद्ध बुद्धिज्म में मोनेस्टिक नन जो होती है क्योंकि उसमें बाल वगैरह काटना पड़ता है पूरा है ना सब कुछ त्याग देना पड़ता है। पर वुमेन अपने बाल रख के मंग क्यों नहीं बन सकती है? नहीं तो मंग मेल भी रह सकता ना वो तो मेल भी मेल भी अपने बाल नहीं रख सकता है। क्यों? क्योंकि भगवान ने उसके दोष बताए गए हैं कि बाल होने के कारण से फिर आपको कंघी रखना पड़ता है। ऑइल रखना पड़ता है। फिर जुए निकालनी पड़ती है। फिर जुओं को मारना पड़ता है। फिर बालों को मेंटेन करना पड़ता है। फिर उसके लिए आईना भी रखना पड़ता है।
(04:05) तो मंक आप ये सब चीजें रखने के लिए नहीं हो ना। फिर तो ये फिर से फिर से गृहस्थ सामान जिंदगी हो गई। राशन पानी ला के रखना पड़ रहा है। तो ये चीजों से छुटकारा के लिए तो आपने गृह त्याग किया है ना? तो आप आईना नहीं देखते। मोस्टली नहीं। आईना देखने की जरूरत भी नहीं पड़ती ना मुझे तो। किस लिए देखो आईना मोस्टली ज्यादातर आईना किसे देखा जाता है? हम्। बाल जब होते हैं तब आपको मोस्टली यहां देखना पड़ता है। ना मुंह में पानी मार के भी आप बाहर निकल जाएंगे। क्योंकि बालों को सवारना है। पहले शुरुआत होती है। फिर अलाइनर वगैरह लगाएंगे तो वो नेक्स्ट बात
(04:32) है। पर फर्स्ट तो उससे शुरू होता है ना। तो व्हाई इज इट अ बैड थिंग आईना देखना। नहीं जितना आप खुद को देखोगे, जितना आप खुद की ब्यूटी को सवारना चाहोगे। आप खुद को सवारना नहीं चाहोगे। अच्छा। आप ये बात सोचिए। आपका पूरा फोकस क्या आ रहा है? आपके आउटर फेस पे आ रहा है। इनर ब्यूटी पे नहीं आता है। हम आपको लग रहा है ना कि मैं ये तो सुंदर दिखूंगी। और देखिए जिनके पास है ना एक फेस कार्ड जिसे हम कहते हैं ना मॉडर्न लैंग्वेज में कि फेस कार्ड का एक अलग ही ईगो होता है। वो अलग ही अलग ही वो अलग ही बंदा होता है जिसका फेस कार्ड होता है। तो ये मैंने खुद
(05:04) पूछा है। एक बार हमारे शिष्य ने अम्मा मैं अपने कुछ और बाकी दो अच्छे हैंडसम शिष्यों के साथ बैठा हुआ था और मेरी एक शिष्य पूछती है कि बोले आप लोग हमें बताइए बोलिए कि स्मार्ट होने के आपने कभी प्रिविलेज फील किया है क्या? मतलब लगा है क्या कि स्मार्ट होने से सुंदर होने से आपको लगा है कि आपको ये चीज एक्स्ट्रा मिली है या आपके साथ ये अच्छी हुई है तो आप सभी से पूछिए जितने भी हैंडसम है उनसे पूछिए आप ये लोग जो सुंदर लड़के जो सुंदर लड़के हैं उनसे पूछिए आप कि जब उन्हें लगता है कि वो सुंदर है तो उन्हें उन्हें वो उनका एटीट्यूड कैसा हो जाता है जब आपको लग रहा
(05:36) है कि आप सुंदर हो तो ऑफ कोर्स आपका एटीट्यूड थोड़ा सा अलग होगा और जब आप चाहते हो कि मैं सुंदर दिखूं तो उससे भी एटीट्यूड अलग होगा इन दोनों बातों में तो दोनों एटीट्यूड एक मंक में नहीं होने चाहिए क्योंकि ये उसके ईगो को और क्या करेगा बूस्ट करेगा अगर हमें इसे अपने मॉडर्न लाइफ के साथ जोड़ना हो तो कैसे हम सुंदरता के साथ क्योंकि लोग आई ऑलाइनर लगाना और लिपस्टिक लगाना तो छोड़ेंगे नहीं तो सुंदरता के साथ कैसे वो अपने इनर ग्रोथ [गला साफ़ करने की आवाज़] तो ये मंग्स के लिए नर्स के लिए उपासकों के लिए बुद्धिज्म में नॉर्मल लिए पर्सन के
(06:05) लिए बिल्कुल भी मनानी हो तो श्रृंगार कर सकते हैं। अपना बुद्ध के समय में अम्रपाली कितना प्यारा श्रृंगार करती थी। आप देखिए विशाखा जिसके पास इस प्रकार का हार था कि सर से लेकर पांव तक जब वो हार पहन के ढक जाता था मतलब बारीक-बारीक सोने के तार से बना था कि ये पूरा कंधा ढक जाएगा पूरा गला ढक जाएगा पूरा सर से लेकर पैरों तक ऐसा उस समय का सबसे महंगा हार था 9 करोड़ का हार था शायद से वो उस समय में जो सोने के छोटे-छोटे तारों से समय की बात कर रहे हैं बुद्ध के समय का जो कि बुद्ध की सबसे बड़ी उपासिका थी सबसे बड़ी और सबसे करीब और जो
(06:38) धर्म को सबसे अच्छे से जानती थी तो सोचिए वो इतना अच्छा मेकअप करती करती थी। वो अपने को इतना मेंटेन रखती थी। तो नॉर्मल इंसान अगर नॉर्मल लाइफ में है तो यह कॉमन है आपके लिए। और आपको जान आपको क्योंकि उस समय में एक जो बुद्धिस्ट गृहस्थ होता है एक जो नॉर्मल डिवोटी होता है उसमें ये भी अंडरस्टैंडिंग स्ट्रांग होती जाती है कि मेरे शील से ज्यादा सुंदर मेरी बाहरी सुंदरता नहीं हो सकती है। अगर मैं कितनी भी सुंदर क्यों ना हो पर अगर मैं किसी के साथ बुरे तरीके से बात करती हूं तो मैं उसके लिए अच्छी नहीं रहूंगी और ये मेरे भी कर्म अच्छे नहीं
(07:08) बनाएगा। मैं किसी को इंसल्ट करती हूं तो यह मेरे लिए भी अच्छा नहीं रहेगा। एक सुष्मिता सेन ने कितना प्यारा कहा था एक जगह पे कि आप कितने सुंदर दिखते हैं। लोग कुछ समय के लिए याद रख सकते हैं। आपने कौन सा ड्रेस पहना है, कौन से कलर की चप्पल है, कौन से कलर का ड्रेस है, कितना महंगा ड्रेस है। ये लोग शायद ही नोटिस करेंगे या कभी कबार नोटिस करेंगे और कभी कबभार याद रखेंगे और एक समय के बाद भूल भी जाएंगे। लेकिन लोग ये कभी नहीं बोलेंगे कि आपने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था, कैसा बर्ताव किया था। तो बुद्धिज्म में एक जो भी बुद्धिस्ट
(07:39) डिवोटी होता है वो यह बात समझ जाता है कि मेरा व्यवहार ज्यादा इंपॉर्टेंट है मेरी आउटर ब्यूटी के मुकाबले पर इसका मतलब यह नहीं कि वो वो ब्यूटी प्रोडक्ट इस्तेमाल करना बंद कर देता है। क्या बुद्धिज्म के ओल्ड टेक्स्ट में ये लिखा गया है कि वुमेन इज अ टेंपटेशन और अ डिस्ट्रैक्शन। देखिए ये सिर्फ मतलब ये सिर्फ वुमस के लिए वुमस को लेके नहीं बोला गया है। है ना? एक मैन के लिए क्या है? वुमेन टेंप्टेशन है और एक वुमेन के लिए मैन टेंप्टेशन है। आपको ये बात समझनी होगी। पर किस तरह के मैन के लिए किस तरह के वुमेन के लिए वो भी समझने की जरूरत
(08:13) है। याद रखिएगा एक मैन जो कमिटेड है, एक मैन जो मैरिड है या एक मैन जो अपनी जिंदगी में कुछ चाहना चाहता है, कुछ अचीव करना चाहता है, उस तरह के मैन के लिए वुमेन टेंप्टेशन एक भटकाव है। है ना? पर जो मैन कमिटेड नहीं है, जो मैन अपनी जिंदगी में कुछ प्राप्त नहीं करना चाहता है, तो उसके लिए वुमेन टेंप्टेशन नहीं है। क्या पता कोई अच्छी स्त्री उसकी जिंदगी में आए और उसको मार्ग पे लाए, उसको अच्छे दिशा दिलाए तो उसके लिए अच्छी है। और किस तरह की वुमेन ये भी तो है ना कि जो वुमेन दुशील है, जो वुमेन अच्छा आचरण नहीं करती है, जो वुमेन कपटी है, जो वुमेन दुराचार करती है,
(08:45) उस तरह की वुमेन तो जिंदगी और खराब कर देंगी। तो हमें वो भी वो स्पेशल इस तरह के वुमेन के लिए बोला गया। इस तरह के मैन के लिए बोला गया है। उसी तरह अगर कोई वुमेन कमिटेड है, कोई वुमन मैरिड है, कोई वुमन अपनी जिंदगी में कुछ प्राप्त करना चाहती है, तो उस तरह के वुमेन के लिए मैन क्या हो सकता है? डिस्ट्रैक्शन हो सकता है। और किस तरह का मैन जो मैन अच्छा नहीं है, जो मैन शराबी है, जो मैन कम लॉयल नहीं रह सकता है, जो मैन में गलत-गलत विचार आते रहते हैं। उस तरह का मैन। और एट देंट मुंह क्योंकि बुद्धिज्म में ज्यादातर जो प्रवचन बुद्धा ने दिए हैं वो मंक को दिए हैं या
(09:16) नंस को दिए हैं। तो मोस्टली जब मंक्स को समझा रहे हैं तो क्या समझाएंगे बुद्धा? कि स्त्रियां आपके लिए अच्छी नहीं है। स्त्रियों के प्रति आकर्षित मत मत हो। हम और जब एक बच्चे को एक मां सिखा रही है तो ऑफ कोर्स जिस चीज से दूर रखना सिखा रही है उसके दुर्गुनी बताएंगी ना। हम सुख सगुण थोड़ी बताएंगे। तो वो वैसा ही है कि तो ये इसलिए जब बुद्ध के कोई कोट कर रहा है तो ये कोट बुद्ध ने अपने समय में बोला है कि अगर आप मेरी कोई बात बता रहे हैं तो ये बोला गया और इसलिए जो भी बुद्धा का उपदेश देना शुरू करता है वो बताता है व्यक्ति कि कहां बोला गया है किसको बोला
(09:45) गया है क्यों बोला गया है ये कोट होना मतलब बुद्धिज्म एक मात्र रिलजन है जो रेफरेंस के साथ बात करता है वरना किसी रिलजन में रेफरेंस के साथ बात नहीं करते हैं तो ये है कि अगर कोई बुद्ध की बात कोट हो रही है तो किसको बोला गया है क्यों बोला गया कहां बोला गया ये बहुत इंपॉर्टेंट है। बुद्धा ने यह तो बोला है कि यह फील मत करो बट कोई फीलिंग्स को रोक नहीं सकता। तो जब मॉक फील करता है किसी वुमेन के लिए तो क्या होता है? एक तो सबसे पहली बात अगर मक का माइंड स्ट्रांग नहीं होगा तो वो बह जाएगा और वो समझ जाएगा कि यही वो प्यार है जिसका मैं
(10:12) इंतजार कर रहा था। ऐसे टाइप का हो जाएगा। बट मोस्ट ऑफ मक एक मैच्योर हो जाते हैं। थोड़े एक लेवल के बाद उन्हें समझ जाता है कि ये मेरे किस तरह दुख का कारण बनेगा। तो वो क्या करता है? वो उसे उस तरीके से देखना शुरू करता है। अगर वो उसे अट्रैक्टिव लग रही है तो वो उसके डीमैड्स भी देखना शुरू होता है कि अगर मैं अपना ये जीवन छोड़ के गृहस्थ लाइफ में जाता हूं तो फिर मेरी लाइफ में क्या-क्या प्रॉब्लम्स आएंगी। जितनी सुंदर मुझे आज ये चेहरे से लग रही है या उसके शब्दों से लग रही है या उसके व्यवहार से लग रही है। पर ये व्यवहार इसलिए लग रहा है कि मैंने ऐसी कोई हरकत
(10:42) नहीं की जिससे इसका मन दुखे। पर अगर मैंने ऐसी कुछ हरकत की जिससे इसका मन दुखे जिसके ये दुखी हो या इरिटेट हो तो फिर ये मुझे अपना रुद्र रूप दिखाएंगी। क्या मैं झेल पाऊंगा? हम्म फिर मुझे वही कटकट वही सब तो फिर एट देन वही होने वाला है। मैं जो अभी थोड़ा छोटे जो थोड़ी सुंदरता दिख रही है जो थोड़ा अच्छा पन दिख रहा है शब्दों में यह हमेशा नहीं रह रहेगा। है ना? ये ड्रीम लाइफ हमेशा नहीं रहेंगी या नयापन हमेशा नहीं रहेंगा। तो जब पुराना हो जाएगा तब क्या तो इस तरीके से उसके प्रति सोचता है। तो उसका जो वो रस है जो आकर्षण है वो अपने आप वहीं
(11:10) पे नष्ट हो जाता है। क्या आपने पर्सनल लाइफ में अपने ऐसा कुछ फेस किया है कभी आकर्षण? हां मैं हां हुआ है कई बार मुझे कभी कबार कुछ लोग सुंदर लगे पर ऑफ कोर्स कुछ समय के लिए लगे है फिर लगा है कि नहीं ये लाइफ ज्यादा बेस्ट है क्योंकि माइंड का जैसे कि एक बार मैं थाईलैंड में थाईलैंड में जब मैं था [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो मैं एक मॉल में गया था उस मॉल में जब मैं गया था तो आई वास लुकिंग समथिंग फॉर मैं कुछ अपने मैं अपनी कुटी में रहता था उस कुटी में कुछ सामान लेने के लिए आया था मैं ख्याल से लाइट वगैरह कुछ लेने के लिए मैं थाईलैंड में गया था तो वहां पे एक
(11:42) लड़की आई थी ठीक है शी वाज़ नॉट दैट मच अट्रैक्टिव बाय लुक्स सॉरी अगर उनको बुरा लगा तो एक ऑफकोर्स तो तो अट्रैक्टिव नहीं थी वो लड़की ऑफ कोर्स एक मंकी तो मोस्ट ऑफ़ लड़की अट्रैक्टिव नहीं लगती है उनको तो शायद से वो होंगी किसी और के लिए तो जब मैं देख रहा था तो मैं अपना सर्च कर रहा था टेबल पे वगैरह देख रहा था वो लड़की वो उधर दूर खड़ी थी मतलब दूर मतलब चार पांच हाथ दूर खड़ी थी और वो मुझे देख रही थी और दरअसल फिर जब मेरा ध्यान गया उस लड़की पे तो आई वास शॉक कि वो बहुत कॉन्फिडेंटली मुझे देख रही थी और उसके आंखों आंखों का वो करिश्मा जो कॉन्फिडेंट था उससे मैं
(12:17) काफी अट्रैक्ट हो गया था। तो कम से कम मेरे मन में एकद दिन के लिए वो बात रही। वो लड़की मुझे उस तरीके से अट्रैक्ट हुई नॉट बाय ब्यूटी। तो अट्रैक्शन की कई सारी उस तरीके से वो लड़की मुझे अट्रैक्ट हुई और मेरे माइंड में लड़की वो दो दिन चली। मुझे लगा कि मेरे को Facebook तो भी नंबर Facebook पे तो भी फ्रेंड बनाना चाहिए था। इट नॉट नॉट एज अ एप्रोच कि बाबा मुझे उसके साथ रिलेशनशिप में जाना या पर मुझे वो कॉन्फिडेंट लगी। उसकी पर्सनालिटी लगी कि वाओ कि वो वो भी क्या पर्सनालिटी क्या व्यक्ति है। मतलब आप एक एक जिस प्रकार से हम किसी
(12:47) मोटिवेशनल स्पीकर के प्रति अट्रैक्ट होते हैं ना या फिर किसी एक पर्सनालिटी जो अपनी लाइफ में वो अचीव कर चुका है। तो मुझे वो आश्चर्य लगा कि एक मैं बुद्धिस्ट नेशन में और बुद्धिस्ट नेशन में ये एटीट्यूड देखने को मिलता नहीं है। स्पेशली कोई एक स्त्री मंक इतना कॉन्फिडेंटली देखे तो मुझे उसका कॉन्फिडेंस अच्छा लगा। उसकी वो जज्बा वो हिम्मत काफी अच्छी लगी थी। तो फिजिकल इंटिमेसी अलाउड नहीं होता मक्स में। कोई भी इंटिमेसी अलाउ नहीं होती है। [हंसी] कोई भी फिजिकल इंटिमेसी हो, इमोशन क्योंकि इंटिमेसी लीड्स टू लव। हम आप याद रखिए चाहे फिजिकल इंटिमेसी हो या
(13:15) फिर इमोशनल इंटिमेसी हो। आप Facebook पे नंबर ले भी लेते हैं। इट वुड नॉट हैव गॉन एनीवेयर। द सिचुएशन वुड हैव स्टेड। आई थिंक वुड हैव कंट्रोल इट। नो नो नो नो नो नो। कंट्रोल कब होगा? जब वो एक्शन नहीं करेंगे। जब उन एक्शन को आप ज्यादा आगे नहीं बढ़ाएंगे। आप आगे तो इसका एंड फिर गृहस्थ जीवन है। तो वंस यू मेक दैट मिस्टेक बुद्धा ने क्या कहा है कि अगर आपका एक वो मिस्टेक हो गया तो क्या आप वापस अपने एक मॉक लाइफ में नहीं जा सकते? बिल्कुल जा सकते हैं। तो ये मिस्टेक काफी मक्स बार-बार करके वापस भी जा सकते हैं। किस तरह की मिस्टेक नहीं देखो मिस्टेक्स की भी एक लेवल्स होते
(13:51) हैं ना। जैसे कि कैंसर के लेवल होते हैं। फर्स्ट से फर्स्ट लेवल, सेकंड लेवल, थर्ड लेवल उसी प्रकार मिस्टेक के भी ऐसे क्या होते हैं? लेवल्स होते हैं। अगर वो उस तरह के एकदम हीनियस मिस्टेक कर चुका है देन देयर इज नो कमबैक। व्हाट इज द हीनियस मिस्टेक अकॉर्डिंग टू बुद्धिज्म हीनियस मिस्टेक अकॉर्डिंग टू बुद्धिज्म द सेक्सुअल इंटरकोर्स स्पेशली द पेनिटेटिव सेक्स ओ माय गॉड माइंड वर्ड्स पेनिटेटिव सेक्स ओके नॉट द आउटर और द सॉफ्ट वंस यस दैट आल्सो दैट दैट उस उसमें रास्ता है उसमें वो मिस्टेक है रिग्रेट होगा संघ के सामने कबूल करेगा कि मुझसे ये गलती हुई है संघ
(14:31) उसे पनिशमेंट देगा देन ही अगेन प्यूरिफाई बट वंस ही डन द सेक्सुअल इंटरकोर्स और वो भी पेनिटेट सेक्स देन ही नीड टू लीव द मंक हुडनेस अनदर क्वेश्चन व्हाई वुड अ मंक अग्री टू दिस दैट दे डिड समथिंग लाइक दिस वो क्यों करेगा वो छुपा भी तो सकता है। बुद्ध कहते हैं संसार में चार तरह के भय होते हैं। और जब तक इसमें से एक भी भय तब तक वो अच्छा इंसान बना रहता है। अगर ये चारों भय चले गए तो कभी अच्छा इंसान बना नहीं सकता। कभी मोरल पर्सन थोड़ा भी नहीं रह सकता है वो। हम सबसे पहले एक होता है अपना आत्मभय हम आत्मभय मतलब कि मेरा मन नहीं मानेगा मैं
(15:06) कर लूंगा तो मेरा मन क्या होते रह रहेगा पछतावा करते रहेंगे कि मैं क्या करके बैठा हूं तो जो बुद्धिस्ट मंग ट्रेनिंग कर रहा है उसका तो सेल्फ इतना स्ट्रांग हो जाता है कि उसे आत्मा भय लगा रह जाता है कि मैंने क्या कर लिया मैंने क्या पाप कर लिया अनिंदा भय है ना सामाजिक भय कि मेरा अगर ये कर लूंगा और समाज के सामने मैं आएगा और आएगा आज कभी ना कभी तो लोग मुझे क्या बोलेंगे क्रिटिसाइज करेंगे मेरी बदनामी हो जाएंगे इसके कारण से भी कोई पाप कर्म नहीं कर पाता है। तीसरा भाई पनिशमेंट कि सरकार मुझे दंड देंगे। अथॉरिटीज़ मतलब जो पुलिस है उससे मुझे दंड मिलेगा। पनिशमेंट
(15:34) मिलेंगे। फांसी मिल सकती है। इसके कारण भी कोई पाप कर्म नहीं करता। अपने को पाप कर्म से दूर रखता है। चौथा नर्क भय जिसे हम अध्यात्म भय कहते हैं कि मैं ये कर्म करने के बाद नर्क जाऊंगा। तो ये चारों तरह के भय एक मंग को पढ़ाए जाते हैं। उसको ऐसा ट्रेन किया जाता है। तो इसलिए मोस्टली मंग करते हैं। और जो पहले से ही गया बीता है जो बस किसी और काम के लिए बना है। उसका तो कोई मतलब ही नहीं ना। एट व्हाट स्टेज डस अ पर्सन डिसाइड कि चलो मैं तो अब मक ही बन जाता हूं। व्हाट वास योर स्टेज? रीज़न अलग-अलग हो सकते हैं। हम आपका क्या था रीज़न?
(16:07) देखो कोई लगता है देखो अभी ये एक ट्रेडिशन थाईलैंड ने एक बहुत प्यारा एक पॉलिसी लगा दी है। श्रीलंका ने भी एक बहुत पहले से लगाई है। और स्पेशली बुद्धिस्ट नेशन है। थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार वगैरह। उन लोगों ने क्या कर दिया? स्पेशली बुद्धिस्ट खुल बुद्धिस्ट स्कूल बना दिया है। है ना? और उस स्कूल में क्या कि जो भी मंक बन के पढ़ेगा उसकी फीस नहीं से मतलब नहीं। अच्छा क्योंकि वो चाहते हैं कि उनकी यूथ मंक बने क्योंकि मंक रह रहेगा तभी वो बुद्धिज्म बचा रहेगा। तो थाईलैंड श्रीलंका ने म्यांमार ने क्या कर दिया? ये मतलब एक कर दिया काम कि
(16:36) उन्होंने मंक्स के लिए फ्री स्कूल खोल दिए कि अगर तुम मं मंक बन के पढ़ते हो तो जो गरीब बच्चे होते हैं वो चलो बाबा मंक बन जाएंगे तो हमारे पैसे बच जाएंगे। और मां-बाप भी कहते हैं कि अगर कुछ मां-बाप गरीब होते हैं तो अपने बच्चों को पानी पाते। तो मंग बना तू मंक बन के पढ़ 18 साल 19 साल की उम्र तक के तब तक के मंग बन जाओ और बाद में छोड़ देना फिर हां घर वापस आ जाना तो जो ऐसी मेंटालिटी लेके चवर ले रहा है आप बताओ सही में वो सब उतना ध्यान देंगा बुद्धिस्ट फिलॉसोफी की तरफ नहीं नहीं उसको सिर्फ अपने एजुकेशन के लिए बनाया कि फ्री में हो जाएगा पर यहीं पे तो
(17:05) मेन वो काम किया है गवर्नमेंट ने वहां क्योंकि कम से कम हजार बच्चे में से एक तो भी ऐसा बनेगा जिसको बुजम के प्रति इंटरेस्ट आएगा और यही हुआ थाईलैंड में श्रीलंका में म्यांमार में उसमें से एक दो तीन भिक्षु ऐसे बने कि उन्होंने ही पूरा बुजम संभाला है पूरे कंट्री में तो भले ही बाकी लोग फॉलो ना करें और वो छोड़ भी देंगे। एक समय के बाद वो छोड़ भी देंगे। पर एक बात है कि उनको पता लग जाएगा कि कैसे व्यवहार करते हैं, कैसे रहते हैं मंक्स के साथ। वो उस कल्चर का थोड़ा रंग तो आ जाएगा उन पे। हम [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो ये तो मैंने वही कहा ना कि हर एक
(17:34) व्यक्ति के अलग-अलग रीज़न हो सकते हैं। कोई बस अपने एजुकेशन लेने के लिए मंग बन जाता है या कोई लगता है कि नहीं जिंदगी यहां पे आसान है इसलिए मंग बन जाता है। या किसी को लगता है कि नहीं मुझे बुद्धि टीचर बुद्धिस्ट टीचिंग समझनी है इसलिए मंग बन जाता है या कोई शादी से परेशान हो के मंग बन जाता है या फिर कोई सही में निर्वाह प्राप्त करने के लिए मंग बन जाता है। वो वो किस चीज से मोटिवेट हो के मंग बना है वो तय करेगा। ये सारी बातें। सो क्या मंग सिर्फ मंक हुड ही जी सकता है और दूसरे कोई अन्य काम नहीं कर सकता। फॉर एग्जांपल अगर वो स्कूल में पढ़ा है तो
(18:00) उसका ऑफ कोर्स मन होगा कि मैं मक भी बना रहा हूं और मैं अपने करियर भी मक आगे बढ़ मक एक एक गुरु एक गुरु की पोजीशन है और गुरु के अंडर के अंडर में वर्क नहीं कर सकता है तो हर तरह की जॉब नहीं कर सकता जैसे कि तो जॉब कर सकता है वो जैसे लेक्चरशिप कर सकता है प्रोफेसरशिप कर सकता है जज वो रह सकता है फिर थाईलैंड में तो स्पेशली एक अलग एडमिनिस्ट्रेशन है संघ एडमिनिस्ट्रेशन एक अलग से ऑफिस है तो वहां पे मोस्टली मंग्स होते हैं तो वहां पे रह सकता है बाकी जगह पे नहीं तो जहां पे अलग से एक एडमिनिस्ट्रेशन होता है वहां पे जॉब कर सकता है। तो नहीं तो नेचुरली नॉर्मली
(18:34) वो लेक्चरशिप कर सकता है। प्रोफेसरशिप कर सकता है। इंडिया में काउंसलर रह सकता है वो। इंडिया में कई सारे अमंग्स प्रोफेसर है। हम तो ये वो रह सकते हैं। आई डू अंडरस्टैंड कि थाईलैंड और श्रीलंका में क्यों बुद्धिज्म को आगे बढ़ाया जा रहा है। बट इंडिया में आपको लगता है कि बुद्धिज्म को इक्वली उस तरीके से वैल्यू मिल रहा है। देखिए इंडिया में स्पेशली मैं महाराष्ट्र से बिलोंग करता हूं और मैं महाराष्ट्रियन कम्युनिटी का एक हिस्सा हूं। मुझे लगता है कि महाराष्ट्रियन कम्युनिटी में एक जो ये चल रहा है कि वो अंदर से ही बहुत ही अ डिस्टर्ब होते जा रही है। अंदर
(19:13) से ही जो एक विश्वसनीयता है वो खोते जा रही है। है ना? अंदर से बहुत खोखली होती जा रही है। तो उसके लिए हिंदूज़्म तो है। हम्म। मतलब? उसके लिए हिंदूइज़्म तो है अगर वो खोखले होते जा रहे हैं अंदर से महाराष्ट्रियन बुद्धिज्म अपने आप को हिंदूइज़्म से 10 कोस दूर रखेगा 10 क्या 100 कोस अच्छा बहुत दूर रखेगा एक बार वो इस्लाम के पास जाना पसंद करेगा इस्लाम से ज्यादा फ्रेंडली होना पसंद करेंगे वो क्रिश्चियन ज्यादा फ्रेंडली होना पसंद करेगा पर वो हिंदूइज़्म के साथ नहीं क्योंकि उन्हें लगता है कि ढाई हजार साल की गुलामी उन्होंने हिंदूइज़्म के कारण ही देखी
(19:44) क्योंकि महाराष्ट्र जो बुद्धिस्ट कम्युनिटी है वो मोस्टली एससी कम्युनिटी है जो बाबा साहब ने डॉक्टर बी आर अंबेडकर ने दीक्षा दी है दी थी है ना उसके तो वो मोस्टली वो जो तो उनकी गुलामी कैसी थी गले में मड़का पीछे में झाड़ू मतलब वो जमीन पे थूक भी नहीं सकते थे उनके जमीन पे पैरों के निशान भी नहीं होने चाहिए थे झाड़ू तुम चलो तुम्हारे पैरों के निशान भी हट जाने चाहिए पानी पीना अलाउ नहीं था तो जो गुलामी जो अछूत थे उनको लगता है कि मोस्टली हिंदू फिलॉसोफी के कारण और हिंदूइज़्म के कारण हुआ है तो इसलिए वो एक बार का हर धर्म में चले जाएंगे लेकिन
(20:14) हिंदूज़्म वो कभी नहीं क्योंकि उनको फिर से वो गुलामी नहीं देखनी है। हम तो एक बहुत बहुत मतलब उनमें वो है कि नहीं सब चल जाएंगे पर हिंदूज़्म नहीं चलेंगे। उनको लगता है कि हिंदू हम सबसे वर्स्ट है तो वो हिंदूज़्म के कभी करीब नहीं आ सकता। और ऊपर से हिंदूइज़्म और बुद्धिज्म में बहुत डिस्प्यूट वाले फिलॉसोफिकल डोगमा फिलॉसोफिकल चीजें हैं। जैसे कि वो ईश्वर या अनश्वर है। वो वेदों को मानता है या वेदों की अथॉरिटी को नहीं मानता है। है ना? तो ये डिफरेंसेस आते हैं वो मोर पुरोहित है। पुरोहित उसमें है पुरोहित परंपरा है। ब्राह्मण परंपरा है। इसमें
(20:50) श्रमण परंपरा है। और ये ब्राह्मण परंपरा श्रमण परंपरा ये ये अपोजिट है। बिल्कुल ये बहुत क्लशेस है इनमें। है ना? ब्राह्मण परंपरा के अपोज में शमन श्रमण परंपरा डेवलप हुई दरअसल। तो इसलिए वो कभी नहीं हो सकता है। बट ये तो ये कहना हुआ कि ब्रिटिशर्स ने हमारे ऊपर इतने दिन से रूल किया और अब हम लंदन नहीं जाएंगे। ये तो वैसी वाली बात हो गई। नहीं देखिए ब्रिटिशर ने रूल किया ये बात अलग होगी और ब्रिटिशर का रूल होना ये बात अलग है। लंदन जाना एक अलग बात है और लंदन में स्थापित होना एक बात अलग है और वो जिस ब्रिटिश हुकूमत की वो बात करें अब क्या वो
(21:25) मौजूद है? बट इफ यू लुक एट अदर रिलजंस जैसे कि अगर हम नॉर्मली एक इस पॉइंट ऑफ व्यू से देखें कि कितने क्राइम्स हुए हैं। जब आप एक हिंदूज़्म में जाते हो और कितने क्राइम्स आप अगर इस्लाम में देखते हो क्रिश्चियनिटी का आई हैव नो नॉलेज। सो व्हाट डू यू थिंक बिकॉज़ हिंदूइज़्म इज़ नॉट सेइंग कि आप कन्वर्ट हो जाओ किसी को। एंड येट सम हाउ दिस वन थिंग आई थिंक व्हिच इज नॉट देखिए क्रिश्चियनिटी तो क्रिश्चियनिटी और इस्लाम ये दोनों अब्राहमिक रिलजन है और ये दोनों मिशनरी रिलीजन है तो वो कन्वर्शन उनका उनका वो फिलॉसोफी का एक हिस्सा है एक पार्ट है वो करेंगे ही
(22:11) हम है ना उसमें आप उनको रोक नहीं सकते कि वो उनका पार्ट है और उनके कन्वर्जन के भी अपने-अपने तरीके हैं ना कितना प्यारा तरीका है क्रिश्चियनिटी का एक हाथ में किताब और एक हाथ में मेडिसिन अगेन क्रिश्चियनिटी का मैं समझ रही हूं बट जैसे फॉर एग्जांपल नाइन 11 अटैक्स हुए थे जब मुस्लिम राइट सो यह तो आप बहुत ही टाइम की बात करें जब आज के टाइम पे देयर आर प्रॉपर लॉज़ फॉर हिंदूज दैट यू नो व्हाट आई वास सेइंग कि देयर आर प्रॉपर लॉज़ नाउ व्हेन इवन इन इंडिया कि शेड्यूल कारस्ट शेड्यूल ट्राइब ऑल ऑफ़ देम आर गिवेन अ बेटर चांस एंड अ यू नो किस बिकॉज़ ऑफ़ लॉज़। सो देयर आर
(22:50) प्रॉपर लॉज़ बट देयर आर नो लॉज़ अगेंस्ट टेररिज्म। देयर नो लॉज़ अगेंस्ट यू नो प्रॉपर लॉज़ अगेंस्ट पीपल एंड अदर रिलीजन। सो हिंदूइज़्म इज़ एक्चुअली दे आर वर्किंग ऑन इट। बट लाइक व्हाट अबाउट व्हाट यू वांट टू से? आई वांट टू से कि हिंदुइज़्म में फिर भी एक अंडरस्टैंडिंग है कि जो पीछे हो चुका है। जैसे आपने कहा कि लोगों को गलत तरीके से सो रहे हैं। एक दलित अभी की बात है। दलित महिला होने के कारण से डॉक्टर ने उसकी प्रेगनेंसी नहीं की। दवाखाने के बाहर उसने क्या किया है? जन्म दिया है। अभी की बात है। एक साल की बात है कि एक एक दलित युवा
(23:26) के हाथ काट दिए गए क्योंकि अपने एक ठाकुर घर के सामने से बुलेट लेके गया। हम है ना? मतलब बुलेट पेन देखा सका। एक आईएएस अफसर दलित होने के कारण से उसको घोड़ी से उतार गया बारात में। तो कहां कन्वर्ट कहां चेंज हो रहा है? अभी भी अगर आप वो इलाकों में जाओ तो वो सारा भेदभाव देखने के लिए। देयर आर दी वन ऑफ़ केसेस फॉर एग्जांपल दीज़ आर वन ऑफ़ केसेस हर देयर आर लॉट ऑफ़ केसेस। अगर आप अगर आप आंकड़ों में जाएंगे अगर आप डाटा में जाएंगे तो आपको पता लगेगा आए दिन कहीं ना कहीं दलितों का शोषण हो रहा है। माय पॉइंट इज हाउ कैन यू से वन रिलिजन इज़ बेटर देन दी अदर बिकॉज़ एव्री रिलीजन इफ यू
(24:01) विल नॉट इफ यू नॉट एबल टू डिसाइड दैट व्हिच रिलिजन इज़ बेस्ट फॉर मी देन हाउ विल यू लीड योर लाइफ तो आपने जैसे कहां रिलिजन इज़ अ फिलॉसोफी इज़ अ वे टू लिव योर लाइफ इफ यू कांट डिसाइड दैट व्हिच रिलिजन इज़ बेस्ट व्हिच रीजन सूट्स योर ऑन फॉर यू फॉर योर मेंटालिटी फॉर योर थॉट। लाइव लाइव लाइव लाइव लाइव लाइव लाइफ हम। है ना? लाइक यू सेड कि बुद्धिज्म इज मोर अट्रैक्टेड टुवर्ड्स लेट से इस्लाम क्रिश्चियनिटीज इज नॉट अट्रैक्टेड मतलब क्रिश्चियनिटी महाराष्ट्र पीपल इफ दे अगर वो चूस करना चाहते अगर उनको अगर अगर उनके साथ कॉर्ड रिलेशन के साथ रिलेशनशिप अगर के
(24:32) साथ रिलेशनशिप को स्ट्रांग करने की इच्छा रखेंगे तो वो पहले एक तो क्रिश्चियनिटी या इस्लाम चूज़ करेंगे नॉट दे विल नॉट चूस हिंदूइज़्म। व्हाई इट इज़ नॉट बिकॉज़ ऑफ़ हिंदू फिलॉसोफी। इट इज़ नॉट बिकॉज़ ऑफ़ हिंदूइज़्म। इट इट इज़ बिकॉज़ द पॉलिटिक्स व्हिच वो जो कि हिंदू लोगों में होती है नॉट हिंदू लोगों में लोगों को दोना बहुत ही गलत है पर वो कुछ लोग हैं वहां के जो वो पॉलिटिक्स करना चाहते हैं जो हमेशा ऊंच नीचता चला चलाना चाहते हैं उसके कारण से जैसे कि कई सारे लोग जो चीजें बदनाम हुई है वो कुछ लोगों के कारण बदनाम हुई है और वो कहते हैं ना वही लोग पावरफुल होते
(25:05) हैं हम तो उस चीज के कारण से आई एम नॉट क्रिटिसाइजिंग फिलॉसफी मैं यही कह रही हूं कि ये जो चीज है ना ये जो ड्रॉबैक है वो अगर हर रिलजन में है कवर मतलब वो हर रिलजन में है अगर आप टेक्निकली देखिए एक भागवत हिंदू धर्म के जो बड़े अभी रक्षक माने जाते हैं मोहन भागवत जी आरएसएस के सरस संचालक उन्होंने अपने एक भाषण में एक एक बड़ी प्यारी बात कही थी एक अपने एक भाषण में बता रहे थे कि जब कौरव और पांडवों का युद्ध होने वाला था हम तो उसमें जो यादव थे यादव के सामने सवाल आ गया कि हम किसकी साइड ले कौरव की साइड ले या पांडव की साइड ले क्योंकि उनको साइड लेना पड़ेगा किसी वो
(25:46) दोनों देखे उन्होंने सोचा फिर वो डिबेट चला आपस में वो लोग सभी लोग यादव लोग सोचने लगे अरे किसकी साइड ले कुछ ने बोला पांडव लेते हैं तो बोला पांडव की साइड लगे पांडव ने तो गलत किया है अपनी बीवी को दांव पे लगाया वो कौन थे तो कौरव के साइड तो बोले कौरव भी कौन सही है तो किसकी साइड ले बड़ा हुआ तो मोहन भागवत कहते हैं कि जो कम जहां पे नुकसान हो जो कम दोषी हो जो कम पापी हो उसके साइड लेना क्या होता है ज्यादा श्रेयस्कर होता है तो हम वही देखेंगे ना कि हमारे कम लॉसेस देखो तीनों में तो लॉसेस वेल अगर मैं वुमेन की बात करूं क्योंकि वीवर टॉकिंग अबाउट इट एंड
(26:19) अगर वीमेन के लिबरलिज्म की बात करें तो जितना लिबरलिज्म आई थिंक हिंदू में भी हमें देखने को मिलता है वो शायद हमें कहीं और इतना देखने को मिलता गलत है ये बात बिल्कुल भी गलत है ज्यादा कोई बड़ी बात नहीं है [हंसी] अब भी एक बहुत प्यारे पडकास्टर थे उनका एक बड़ा प्यारा वीडियो था जब वो प्रोटेस्ट चल रहा था घूंघट सॉरी अपना बुरखा विरोध में एक आंदोलन चल रहा था तो उसमें कई सारे हिंदू महिला घूंघट पहन के आए थे बताइए आप मतलब बुर्खा का विरोध वक्त वो महिला कर रहा है जो खुद घूंघट डाल के है। बकायदा वीडियो बकायदा वीडियो ये Instagram
(26:49) पे है। ठीक है। कौन घूंघट पहन के चल रहा है दिल्ली में? आप बताइए। नहीं उनके वीडियो अवेलेबल है। मैंने देखा है बकायदा। दिल्ली में हाउ मेनी वीमेन हैव यू सीन जो घूंघट पहन के वॉक कर रहे हो। ठीक है? दिल्ली क्योंकि एक मॉडर्न है एक मेट्रोपॉलिटिक। आप मुंबई में देखिए। हां। बट जहां पे कभी आप घरों में जाइए। एक टिपिकल ट्रेडिशनल घरों में जाइए। जो बहुत धार्मिक हिंदू है। उनके घर में जा के देखिए। वो कथा वाचा देखिए ना वो कि उनकी कथा वाचा देखिए ना। आई एम नॉट सेइंग देयर आर ये कह रहा हूं वी आर टॉकिंग अबाउट द मेजोरिटी मेजोरिटी की अगर हम बात करें आप वो
(27:16) अनुराधाचार्य जी की वो देखिए एटलीस्ट द वु वीमेन अगर हम ऐसी ही बात करें वीमेन की हालात जो जिसमें हमें ये डिसाइड करना पड़ रहा है कि घूंघट इज बेटर देन ये मैं कह रहा हूं ये मैं नहीं घूंघट इज स्टिल बेटर देन बुरखा आई एम सॉरी बुर्खा में देयर इज नो कलर इट्स जस्ट ब्लैक एट लीस्ट पुअर वूमेन हु इज बिहाइंड एंड आप ये कह रहे हैं बिहाइंड अ सो आई एम जस्ट सेइंग अबाउट लिबरलिज्म। आप ये कह रहे हैं कि पुअर वुमेन आप ये कह रहे हैं कि लोहे के हथकड़ियां ज्यादा सुंदर है रस्सी की हथकड़ियों के मुकाबले। आप ये कह रहे हैं हथकड़ी हथकड़ियां होते हैं। आप उनको ये
(27:55) नहीं कह सकते। देखिए आपने वी विषय को इस बात से शुरू किया। नहीं मतलब आई एम टॉकिंग अबाउट वीमेन वेयर डू दे फील मोर फ्री? सी वुमेनस की मोस्ट जगहों पे कंडीशन सेम है। मोस्ट ऑफ रिलीजन में। हम ये नहीं कह सकते कि यहां पे ज्यादा लिबर सबका हर तरीके से होता है। ऑफ कोर्स मैं ये बोल रही हूं तो जैसे आपने बोला मेरा बस ये कहना है कि चूजिंग वन रिलीजन ओवर दी अदर आई एम नॉट इवन टॉकिंग अबाउट हियर कि यू नो हिंदूज़्म इज अबोव और बिय्ड और स्टेटमेंट वाज़ नॉट लाइक दैट। आपने कहा कि बाबा हिंदूज़्म में ज्यादा लिबरलिज्म है। आपका ये शब्द था अभी तो आप देखिए है।
(28:29) आपने क्या कहा कि हिंदूज़्म में ज्यादा तो मैं बिकॉज़ आई एम अ हिंदू। सो आई फील दैट यस वी आर मोर लिबरल। आई डु फील एंड आई फील वेरी स्केर्ड व्हेन आई थिंक ऑफ इट कि हैड आई बीन अ डिफरेंट दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से फैलने वाला धर्म फिलहाल इस्लाम है एक्जेक्टली बिकॉज़ दे ट्राई टू कन्वर्ट अदर पीपल राइट बट आप किसी को जबरदस्त थोड़ी कन्वर्ट कर रहे हो लोग फॉलो कर रहे हैं इस्लाम एक दिन में अगर कोई आपकी अपना एक दिन में अपने देवी देवताओं को पूजना छोड़ के किसी ईश्वर की पूजा कर एक दिन में आई नॉट टेलिंग यू टू फॉलो हिंदू देवता थिंग लेट
(29:03) मी टेल यू द सीक्रेट एंड मोस्टेंट थिंग हियर ना कि यहां पे जो हिंदू धर्म के जो धर्म गुरु है वह अपना काम अच्छे से नहीं कर रहे। इसलिए वो लोग इस्लाम की तरफ कन्वर्ट हो रहे हैं। आप ये बात समझिए ये हिंदूज़्म का खुद का ड्रॉबैक है। वो लोग अपना वर्क कर रहे हैं ना। क्रिश्चियनिटी अपना वर्क कर रही है। इस्लाम अपना वर्क और उनके धर्म जो सिखा है वो अपने धर्म के हिसाब से प्रचार प्रसार। उनको बताइए कि धर्म का प्रचार प्रसार करो। सो यू थिंक हिंदू के जो लीडर्स हैं उनको ये बोलना चाहिए अपने यू नो फॉलोअर्स को कि आप इतना लीन हो जाए कि आप दूसरों को बोलिए कन्वेंस
(29:36) देम कन्वेंस देम इफ यू आर कन्वेंस देम टू कन्वर्ट अदर रिलीजन इंटू हिंदूज़्म दैट्स व्हाट यू टेलिंग लोग अपने आप कन्वर्ट हो जाते हैं। बोलने की जरूरत नहीं है। फॉरेन में इतने लोग हिंदू हिंदू कल्चर अपना रहे हैं। तो कैसे हुए? उन्होंने बुरा तो नहीं। कोई भी नहीं बोलता कि ये हो। आई मीन द थिंग इज कि सी सबका अपना पर्सनल एक्सपीरियंस होता है। मैंने भी एक एक्सपीरियंस अगर आपको ये काम नहीं करना है तो इस बात को लेकिन शिकायत भी मत रखो ना कि लोग इस्लाम में कन्वर्ट हो रहे हैं। ये रीज़न अच्छा ओरिजन अच्छा है। अगर आपको लग रहा है कि आपका रीज़न अच्छा है। वो ज्यादा फ्रीडम
(30:05) देता है। वो ज्यादा लिबरलनेस देता है। वो इंसान को एक अच्छी लाइफ देता है तो लोगों तक अच्छी लाइफ पहुंचाओ। हिंदूइज़्म वो लाइफस्टाइल लोगों तक पहुंचाओ। लोग अपने आप कन्वर्ट करेंगे। अगर आप एक तो आप नहीं पहुंचा रहे या फिर वो लाइफ स्टाइल साइड में अच्छी नहीं है। दो में से कोई एक रीज़न हो सकता है। सो बॉटम लाइन इज़ हिंदू लीडर्स नीड टू टेल देयर फॉलोअर्स कि नो हिंदू लीडर्स दे नीड टू बी मोर कन्वेंसिव कन्वेंस यू इनफ देखिए मैं मुझे बोलने की जरूरत नहीं है कि आप बुद्धिज्म में कन्वर्ट करो। अगर मैं बुद्धिज्म अच्छे से बता रहा हूं ना आपको
(30:32) खुद मन करेगा कि यार मैंने भी बुद्धिस्ट बनना चाहिए। नो स्पिर आई डोंट डिसएग्री विथ द फिलॉसफी ऑफ़ बुद्धिज्म बिकॉज़ इन द एंड इट मेक्स यू अ बेटर पर्सन फॉर श्योर। उसमें मेरे मुझे उसमें कोई वो नहीं है, दो राहे नहीं है कि इट्स अ वेरी ग्रेट रिलिजन एंड इट्स समथिंग दैट इज़ ऑलवेज अट्रैक्टेड मी वेरी नाइस। बट दैट आल्सो इज़ हैप्पेनिंग बिकॉज़ बीइंग अ हिंदू यू आर लिबरल इनफ टू वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट व्हाई व्हाई व्हाई हिंदू ऑलवेज टेल देमसेल्व कि हम डेमोस्टेशनल लोग हैं। हम है जो हर चीज टोलरेट कर रहे हैं। वी आर नॉट टोलरेटिंग वी आर सेइंग कि वी
(31:08) पहले भी ऐसा हुआ। नहीं है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मैं जब थालैंड में था एक मुसलमान इंसान आके वो हमारे बुद्धिस्ट टेंपल में झाड़ू मारता था। खुद समझता था। ऐसा नहीं है। कई सारे मुसलमान हमें घर पे बुलाते हैं। हमें आदर आप नागपुर में आइए। वो काफी भंते जी आप है क्या? आइए आइए आइए। है ना? क्रिश्चियन भी बताओ जब थालैंड में था मैं तो वहां पे क्रिश्चियन महिला हमको दान देती थी। तो लिबरलनेस हर पढ़ाता है। हर धर्म पढ़ाता है। आप ये मत बोलिए कि सिर्फ हिंदूज़्म लिबर लिबरल है। इवन बुद्धिस्ट आल्सो लिबरल इस्लाम जहां पे मल्टीकल्चरल अ लाइफ स्टाइल
(31:40) आई हैव वन गुड क्वेश्चन फॉर यू लेट्स से द होल वर्ल्ड कन्वर्ट्स इनू बुद्धिज्म दैट विल बी बेस्ट और होल वर्ल्ड बिकम्स इस्लामिक दैट विल बी बेटर किस में डिस्ट्रक्शन कम होगा और द होल वर्ल्ड बिकम्स हिंदू सो आप अपने-अपने कुछ फायदे तीनों के अपने-अपने कुछ नुकसान आप रेट करिए कि व्हिच विल व्हिच विल बी लीस्ट डिस्ट्रक्टिव एंड व्हाई मैं इसके आधार पर तो बता नहीं सकता हूं नहीं मतलब लीस्ट डिस्ट्रक्टिव एंड व्हाई सेंस लीस्ट डिस्ट्रक्टिव व्हाट सेंस? इन द सेंस ऑफ़ लिबरलनेस और अह नो इन द सेंस ऑफ़ फ्रीडम ऑफ़ लाइफ। फ्रीडम ऑफ़ लाइफ फॉर एववरीबडी, फॉर वीमेन, फॉर मेन
(32:20) एंड यस। सो व्हिच विल बी लेस डिस्ट्रक्टिव। अगर एक ही रिलीजन पूरी दुनिया हो जाए, व्हिच विल बी लेस डिस्ट्रक्टिव। लेस डिस्ट्रक्टिव। मीन द वर्ड लेस डिस्ट्रक्टिव। डिस्ट्रक्टिव बुद्धिज्म। बुद्धिज़्म। एंड उसके बाद सेकंड, हम्म। नो दैट्स इनफ। नो सेकंड एंड थर्ड यू हैव टू गिव मी सेकंड एंड थर्ड। ओके लेट्स डिस्ट्रक्टिव। इस पे मुझे बहुत ट्रोल किया जाएगा। [हंसी] नो जस्ट इट्स योर पॉइंट ऑफ़ बहुत आक्रामक हो जाती है जनता। देखिए मुझे लगता है कि इस्लाम में भी ऐसे कुछ बहुत सुंदर बातें हैं। हिंदूज़्म में भी ऐसे कुछ बहुत सुंदर बात है। आई एम जस्ट आस्किंग यू सेकंड एंड थर्ड।
(32:56) दैट्स इट। उससे ज्यादा बियनड कुछ नहीं करना है। वी विल चेंज द टॉपिक आफ्टर दिस। नो, आई कांट आंसर दिस क्वेश्चन। इफ इफ अगर मैं आंसर दूंगा तो अपने तरीके से मैं अपने तरीके से जवाब दूंगा। इफ यू आर आस्किंग मी यस यू आर जस्ट डिबेटिंग विद मी अबाउट दिस। सो आई जस्ट वांट योर नेचुरल ओपिनियन सो आई विल आई मैं यस और नो मैं जॉब ही देने वाला हूं। आई विल एक्सप्लेन इट इफ यू आर गोइंग टू अंडरस्टैंड दे नो नो आई विल एक्सप्लेन द थिंग। ओके। सो यू विल गिव मी सेकंड एंड थर्ड विद एक्सप्लेनेशन। ओके। डन। सो गिव मी फर्स्ट इज़ बुद्धिज्म। ओके। फर्स्ट बुद्धिज्म बिकॉज़
(33:28) बिकॉज़। फर्स्ट इन बुद्धिज्म बिकॉज़ बुद्धिज्म में ये हो जाता है कि आपको किसी कल्चरल रूल्स आपको फॉलो नहीं करने पड़ते। आप बुद्धिज्म में कल्चरल रूल्स नहीं है। जैसे एक बाकी बाकी धर्मों में होता है कि महिलाओं को कपड़ों को लेके या फिर घूंघट को लेके या फिर श्रृंगार को लेके या किसी भी चीज को लेके बहुत होते हैं। चाहे वो हिंदूज़्म हो या इस्लाम हो। दोनों में और दोनों की अपने-अपने चीजें अपनी जगह पे ठीक है। क्योंकि उस तरीके से एक डिसिप्लिन मेंटेन रहता है। एक एक ऑर्गेनाइज्ड वे रहता है। ठीक है? फैमिली स्ट्रक्चर मैं दोनों की बात कर रहा हूं। फैमिली स्ट्रक्चर मेंटेन
(34:01) रखने के लिए वुमस और मेंस दोनों के कुछ ना कुछ रिस्ट्रिक्शन होते हैं। इन इसके मुकाबले बुद्धिज्म में कम रिस्ट्रिक्शन है। कल्चरल रिस्ट्रिक्शन ऑन वुमेन ऑन वुमेन कल्चरल रिस्ट्रिक्शन है ही नहीं बुद्धिज्म में। अच्छा बुद्धिज्म में कल्चरल टाइप के रिस्ट्रिक्शन कोई भी रिस्ट्रिक्शन नहीं है। जैसे वुमस पे कल्चरल जैसे मैं कल्चर रिस्ट्रिक्शन की बात कर हां कल्चर जैसे किस तरीके से जैसे कि बाकी धर्मों में है लिबास को लेके श्रृंगार को लेके आना जाना बाहर जाना ये सब को लेके अच्छा हां ऐसा कोई भी रिस्ट्रिक्शन नहीं है बुद्धिज्म में इसलिए मैंने बुद्धिज्म
(34:33) फर्स्ट चूस किया ये एक रीज़न है। दूसरी बात फिर उसके बाद अगर इस्लाम अगर मुझे चूज़ करने में आएगा तो इस्लाम की मुझे एक बात बहुत पसंद आती है कि सबसे ज्यादा अधिकार किसी महिला को है धर्म ग्रंथ के आधार पर तो वो है इस्लाम की महिलाओं को। हम सबसे ज्यादा कानूनी अधिकार मतलब जो धर्म ग्रंथ देता होगा वो इस्लाम में है। अगर आप कभी कुरान शरीफ पढ़ेंगे तो पता लगेगा कि हालांकि महिलाएं उसका इस्तेमाल नहीं कर रही है पर महिलाओं को सबसे पहला अगर पूरे विश्व में किसी धर्म ने अगर अधिकार दिए हैं वो भी धर्म ग्रंथ के आधार पर जिसका कॉन्स्टिट्यूशन कह सकते हैं वो
(35:14) इस्लाम था। तो इस्लाम इज बेस्ट इन दैट वे। पर एक नॉलेज के इंटेलेक्चुअल शिप में अगर कोई धर्म सबसे अच्छा रहा है मतलब जिसमें काफी चीजों के काफी डिफरेंट-डिफरेंट ब्रांच के नॉलेजेस में कोई रहा है तो हिंदूइज़्म हम तो ये तीनों की अपनी-अपनी एक खासियत रही है। पर उन्हीं चीजों के कारण फिर वो नेगेटिव इंपैक्ट भी देखने के लिए मिलता है उसका। ओके। सो सेकंड वाज़ इस्लाम, थर्ड इज़ हिंदूइज़्म। मैंने नहीं मैंने ऐसा रखा ही नहीं। मैंने तीनों के गुण बताया। आप देखिए अभी थाईलैंड में बुद्धिज्म सबसे स्ट्रांग है पर कॉन्स्टिट्यूशन वहां पे सबसे ज्यादा है।
(35:45) हम ठीक है? फ्रीडम पूरी है। प्रॉस्टिट्यूशन वहां पे सबसे ज्यादा है। हाउएवर देयर आर डिफरेंट के डिफरेंट रीज़ है। आर दी बुद्धिस्ट वुमेन जो ज्यादातर प्रॉस्टिट्यूट कांट से कि बुद्धिस्ट वुमेन इट्स अ कल्चरल थिंग। ओके? हां बिकॉज़ उनका तो जनरेशन से चल रहा है। तो वो कल्चरल थिंग। इससे बुद्धिस्ट फिलोसोफी को दोष नहीं दे सकते। तो मतलब वो मेजरली दे आर बुद्धिस्ट बेसिकली यू आर से। बुद्धिस्ट होंगे। लेकिन बाकी नहीं है। यह नहीं है। भूटान में नहीं है। वहां पे तो हम ऐसा नहीं कह सकते। रैंकिंग करना ही ज्यादा डिफिकल्ट होगा। और जब आपने मुझे तीन ऑप्शन दिए तो
(36:20) मैंने उसमें बुलम को फर्स्ट रखा। मैंने उसमें बुलम बेस्ट बताया। तीनों में से। मैंने बुलम को फर्स्ट नहीं रखा। प्लीज बट मैंने तीनों धर्म की तारीफ की है। समबडी हु आल्सो सेस आई एम अ मॉक। जो सबसे फेमस और पॉपुलर है। हिज नेम इज जय शेट्टी। ओके। एंड यू आर आल्सो अ मक यस सो व्हाट इज द डिफरेंस देखिए ही यूज्ड टू बी अ मंक अच्छा जय शेट्टी मंक अभी नहीं है ना वो तो पहले मंक थे हम तो वो उसके आधारों पर उनको एक एक प्लस पॉइंट मिल गया कि मैं कभी मंक रहा हूं बट ही वास नॉट अ बुद्धिस्ट मंक ओके जय शेट्टी ही वाज़ अ मंक इन अ आई थिंक एस्कॉन आई थिंक सो मुझे पर्टिकुलरली अवेयर
(36:58) नहीं है तो उसमें वो मंक रहे और एक एक देखिए अगर आप ट्रेडिशन एक अलग ट्रेडिशन के उसके रूल्स अलग होते हैं हमारे के रूल्स अलग होते हैं हर चीज को लेके तो उनको उस बात का एक्सपीरियंस है लेकिन जो मंक हुडनेस छोड़ चुका है हम आई एम नॉट मैं पर्सनली नहीं हो रहा हूं माफी भी चाहूंगा इस बात के लिए पर जो मंक हुडनेस छोड़ चुका है और जो फिर से मटलिस्टिक लाइफ में वापस आ चुका है देन फिर उस बात को वैल्यू क्या रहा हां अगर आपको मंक लाइफ का विज़डम मिला है और वो मंक लाइफ के विज़डम में आप वापस आ रहे हैं नॉर्मल लाइफ में तो इट मींस आपने मंक लाइफ
(37:28) का विज़डम इस्तेमाल ही नहीं किया क्योंकि मंक लाइफ का विज़डम ऐसा होता है कि जो आपको सस्टेन रखे मंक लाइफ में जिससे आपको पता लगता है कि मंक लाइफ इज़ मोर ग्रेटर, मोर वाइसर एंड मोर फॉर मोर बेनिफिशियल देन ले लाइफ नॉर्मल लाइफ। पर क्योंकि एक जो मंक हुआ है उसको ये बात अनुभव हो चुकी है कि इस लाइफ में ज्यादा पाप होते हैं। ज्यादा अकुशल कर्म होते हैं। ये लाइफ ज्यादा अच्छी नहीं है। उसके इससे ज्यादा लाइफ कौन थी? कि ये अच्छे है। ये श्रेष्ठ है। ये पूजनीय है। ये आदरणीय है। सम्माननीय है। गौरवनीय है। ये लाइफ आप समझ चुके हैं। इसलिए आप मंक लाइफ चूज़ करते हैं। इसलिए आप
(37:59) मंक लाइफ में रहते हैं। पर फिर भी अगर आप उस लाइफ में जाने का मन कर रहा है तो इसका मतलब आप इसका संतुलन खो बैठे हैं। है ना? आप उधर मतलब पराजित हो गए। आप हार गए। आप उससे आकर्षित हो चुके हैं। बट द होल वर्ल्ड इज़ फॉलोइंग हिम फॉर श्योर। और लोग तो आसाराम बापू को भी फॉलो करते थे। राम रहीम को भी फॉलो करते थे। और भी ऐसे बड़े-बड़े स्पेशल लीडर्स हैं जिनके कई सारे ये आए हैं। तो ना दिख दिखाने की बात अलग होती है। दिखने की बात अलग होती है। पर मैं जय शेट्टी के बारे में ऐसा कुछ नहीं कह रहा हूं। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि जय शेट्टी बुरे हैं।
(38:28) मैं बस ये कह रहा हूं कि एक मंक होना और एक मंक रहना दोनों में बहुत डिफरेंस होता है। दोनों में हम कंपेयर नहीं कर सकते हैं। जो मंक है एट द एंड वो डिफरेंट है। और जो मंक रह चुका था वो डिफरेंट है। तो व्हाट इज योर टेक ऑन सद्गुरु देन? [हंसी] आप चाहते हैं कि ये पडकास्ट कंट्रोवर्शियल जाए। मैं आपसे मिल रही हूं आज तो आई हैव टू टेक योर ओपिनियंस। सी मुझे किसी की लाइफ पे कमेंट करना बिल्कुल भी ये अच्छा नहीं है। ये शोभनीय नहीं है। लेकिन क्योंकि वो पब्लिक पर्सनालिटी बन चुकी है। तो ऑफ कोर्स उन पे कमेंट आएंगे और मुझ पे भी कमेंट आएंगे ही
(39:07) आएंगे क्योंकि हम अभी एक ओपन फोरम एक ओपन प्लेटफार्म की हमारी पर्सनालिटी बन चुकी है। हमारी इमेज ही उससे बोलते हैं पर हम जाने भी उसी आधार पर जाते हैं। देखिए सद्गुरु एक अलग से अलग से सेट से है। वो शव शव इस सेट से आते हैं और हम बुद्धिस्ट सेक्ट से आते हैं। तो कई बार हिस्ट्री में और एकेडमिक वर्ल्ड में कई बार श फिलोसफी और बुद्ध फिलोसफी को कंपेयर भी किया है। उनमें बहुत सारे सिमिलरिटीज भी देखे गए हैं। तो कहीं ना कहीं पर उनके और हमारी फिलॉसोफी में जमीन आसमान का फर्क है। वो ऐश्वरवादी है। हम ईश्वरवादी है। है ना? वो वेदों के ऑथॉरिटी को मानते हैं। हम वेदों
(39:39) की ऑथॉरिटी को नहीं मानते हैं। है ना? हम एक मोनेस्टिक सिस्टम है। उनका मोनेस्टिक सिस्टम नहीं है। हमारा जो मंक हुसैन है वो एक मोनेस्टिक सिस्टम को रिप्रेजेंट करता है। हम और उनका मोनेस्टी सिस्टम को रिप्रेजेंट नहीं करते हैं। तो बहुत सारे डिफरेंसेस है। तो इसलिए हमारे हिसाब से हमारे पॉइंट ऑफ व्यू से वो कभी भी उतने सही नहीं होंगे और उनके पॉइंट ऑफ व्यू से हम शायद से उतने सही नहीं होंगे। फिलॉसोफिकल बेसिस पे देखें तो। बट स्टिल ही हैज़ अचीव्ड स्पिरिचुअली जो उनके फॉलोअर्स मानते हैं। ऑफ कोर्स उनके फॉलोवर्स को कुछ हुआ होगा मुझे नहीं पता। डायरेक्टली मेरा
(40:10) एक्सपीरियंस नहीं है। तो उसके बारे में मैं ज्यादा कह नहीं सकता। पर बट मटेरियलिस्टिकली ही हैज़ अचीव्ड वन वन प्लेटफार्म। उनके भी वो हरारकी उनकी एक पोजीशन है और उन पोजीशन पे मैं पहुंचने का हूं। एंड अगर आप मटलिस्टिकल भी बोले तो मेरा उनप कमेंट करना उचित बिल्कुल भी नहीं है। तो पर फिर भी मैं कहूंगा कि जिस प्रकार से मार्केटिंग उनकी होती है और जिस प्रकार से उनको लेके कई सारे विवादस्पद प्रूफ बेस्ड व्हाट काइंड ऑफ़ प्रूफ बेस्ड जो एक कई बीच में कुछ उनका बहुत ऐसा एक डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी। हम कुछ बातों को लेके उसको लेके भी बहुत सारा
(40:45) मैंने भी सुना वो डॉक्यूमेंट्री पूरी जिसमें जग वासुदेव करके वो डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी शायद से तो उसमें कई सारे लॉजिकल ऐसे कुछ बातें रखी गई थी कि ये ऐसा हुआ वो ऐसा क्या हुआ क्या लॉजिकल बातें थी मैं उसके बारे में ज्यादा बोलना नहीं चाहूंगा बट व्हाट इज योर टेक ऑन दैट आपको क्या लगता है जो डॉक्यूमेंट्री है वो मुझे ऐसा लगता है कि अगर वो बातें प्रूव्ड नहीं हुई है हम तो उस पे विश्वास करना उचित नहीं है क्योंकि बातें तो कई सारे कई लोगों के प्रति होती है अगर वो प्रूव्ड हो चुकी है अह उसको चैलेंज्ड किया गया है और प्रॉपर्ली वेरीिफाइड है
(41:15) हम तो फिर वी मस्ट टेक अ प्रॉपर एक्शन ऑन इट बट इट इफ इट इज़ नॉट वेरीिफाइड देन वी शुड नॉट कंसीडर इट एज अ रियल मुझे ऐसा लगता है और इन एट द एंड ये सारा होने के बावजूद भी देखो एक इंसान फॉर एग्जांपल मैं अगर आपसे अच्छे से बात कर रहा हूं तो मैं आपके लिए अच्छा हूं भले ही फिर मैं किसी का खून भी करके क्यों ना हूं किसी और का हम आप ये बात समझिए इंसान इंसान का कॉग्निटिव बायस कैसे वर्क करता है। अगर मैं आपसे अच्छे से बात कर रहा हूं। मेरा आपके साथ कुछ बुरा हुआ नहीं है और मैंने बाहर कहीं दूर किसी और का मर्डर भी किया है। पर मैंने इधर आपकी हेल्प की तो मैं आपके लिए
(41:48) हमेशा अच्छा रहूंगा। हम है ना? और उनके लिए हमेशा क्या रहूंगा? बुरा रहूंगा। हम हम ह्यूमंस इस तरीके से वर्क करते हैं मोस्टली। है ना? हम हमारा पर्सनल इंटरेक्शन उनके साथ किसका है? तो हमें ये बात भी नहीं बोलना चाहिए कि जग वासुदेव मतलब सॉरी सद्गुरु जी के आश्रम में ऑलरेडी कई सारे लोग पढ़ रहे हैं। स्पिरिचुअल बेनिफिट ले रहे हैं और कई सारे लोगों के दुख दूर हो रहे हैं। तो हमने कहीं वो आस्पेक्ट भी नहीं भूलना चाहिए कि मुझे नहीं पता कि वो कितना हद तक सही है। पर लोगों के कितने सारे लोग इतने सारे लोग वहां से ईशा फाउंडेशन में जाके वो सब
(42:17) सीख रहे हैं और उनकी लाइफ चेंज हो रही है। तो मुझे लगता है कि हमने वो बातों को ध्यान में रखते हुए कि बेनिफिट कितना ज्यादा हो रहा है। उस पे ज्यादा ध्यान देते हुए उस इंसान को जज करना चाहिए। एट देन जजमेंट होंगी ही होंगी। सोसाइटी में जजमेंट होंगी होंगी। तो सोसाइटी में जजमेंट करते हुए मुझे लगता है कि कितने लोगों को बेनिफिट हुआ है क्योंकि उस पर्सनालिटी वैसी है। संत हुडनेस मोटिवेशनल स्पीकर इस आधार पर जाना जाता है कि उसके कारण कितने लोगों का बेनिफिट हुआ है ना कि उसका पर्सनल लाइफ देखते हैं क्योंकि एव्री संत हैज़ पास्ट एंड एव्री
(42:47) सीनर हैज़ फ्यूचर। मूविंग ऑन टू सम मॉडर्न लाइफ इशज़। जैसे कि लोगों के पास सब कुछ है। मनी, करियर, रिलेशनशिप बट उसके बाद भी वह एम्प्टी फील करते हैं। आज लोगों के पास सब है। सब कुछ है। मनी मनी दे हैव मनी, दे हैव करियर, दे हैव रिलेशनशिप्स, दे आर हैप्पी, हेल्दी, मैरिड। आई डोंट नो वेदर दे आर हैप्पी। कौन कह रहा है कि किसी इंसान के पास सभी है। अगर इंसान के पास सही में सभी होंगे, तो सही में हैप्पी होंगा वो। हम किसी के पास मनी है तो रिलेशनशिप नहीं है। किसी के पास रिलेशनशिप है तो मनी नहीं है। हम और किसी के पास करियर नहीं है।
(43:23) मनी है रिलेशनशिप है। फादर की कमाई में पैसा है और रिलेशन भी उस पैसे का थोड़ा बहुत पर क्या है? करियर नहीं है। वो अपना लाइफ सेट नहीं कर पा रहा किसी डायरेक्शन में। अपना गोल अचीव नहीं कर पा रहा है। नहीं इंसान के पास सभी नहीं है। अगर सभी होंगे तो इंसान सेटिस्फाई रह रहेगा। वो लोनलीनेस फील नहीं करेगा। इंसान के पास सारी चीज नहीं है। तो क्या ये सारी चीजें होने से इंसान सच में बेटर फील करेगा? अगर उसने अच्छे तरीके से हासिल की है तो हम उसने उसके लिए कोई ऐसा गलत काम नहीं किए जिसके कारण उसमें रिग्रेट हो हम तो वो फील करेंगे। अच्छी फील करेंगे। उसे
(43:52) एक प्राउड रह रहेगा कि यार मैंने अपनी मेहनत से अपनी एफर्ट्स अचीव की है। तो हील अगर बुद्धा ने आज Instagram देखा तो सबसे ज्यादा उनको क्या डिस्टर्ब करेगा? बुद्धा Instagram देखेंगे ही नहीं, खोलेंगे ही नहीं। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] अगर उनको पता चले कि देयर इज़ समथिंग लाइक Instagram तो उनको क्या सबसे ज्यादा डिस्टर्ब करेगा आज के टाइम पे? बुद्ध को Instagram बुद्ध तो आज के समय होंगे नहीं। अगर बुद्ध को सबसे पहले अगर कुछ डिस्टर्ब करेगा तो मुझे लगता है रियल सिर्फ 15 सेकंड की इस बात से। अच्छा ओके। व्हाई इज दैट? क्योंकि पेशेंस उससे इंसान का लूज़ हो रहा
(44:24) है। हम सिर्फ 15 सेकंड की चीजें देखने से इंसान उतना ही ये होते जाएगा। और दूसरा द एल्गोरिदम मेथड जो एल्गोरिदम के कारण से जो हमें रील्स आ रही है हम एक जो एल्गोरिदम क्योंकि एल्गोरिदम ऐसे वर्क करता है कि हम जो देखेंगे वही दिखते रहेंगा तो उसके कारण से और मतलब दिशा हमारी चेंज नहीं होती रहेंगी हम और डिप्रेस है तो और डिप्रेसिव होंगे हां क्योर नहीं होंगे तो ये जो एल्गोरिदम जो प्रोसेस है या जो एल्गोरिदम जो ये जो जो है ये उससे वो मुझे ऐसा लगता है कि ये एल्गोरिदम्स जो है ये आपके फीलिंग्स को वैलिडेट करता रहता है और और यू नो नहीं एल्गोरिदम वर्क ही ऐसा जिसपे आप
(44:57) ध्यान दे रहे हैं वो वैसी चीजें और सजेस्ट करेंगे आपको तो वैलिडेट नहीं कर रहा है आपको। वो आपको उसमें एंटर करा रहा है। एक्सक्ट्ली अगर आप एंटर भी हो रहे हैं तो कहीं ना कहीं आप रिलेटेबल कंटेंट देख रहे हैं तो आप एक वैलिडेशन फील कर रहे हैं कि मेरे जैसे और भी ऐसे लोग हैं जो फील करते हैं तो इसका मतलब मैं सही नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं इस तरीके से वैलिड नहीं मेरे जैसे और भी लोग ऐसा फील कर रहे हैं। मैं ही सही हूं। अच्छा ये फीलिंग आती है। मैं ही सही होने से गलत है। मैं भी सही हो सकता हूं। ये फीलिंग आनी चाहिए। पर मैं ही सही हूं। ये फीलिंग आती
(45:26) है। इस कारण से वो रिश्तों कोेंस देना छोड़ देता है। कि मैं क्यों झुकूं फिर? ऑलराइट। एक सेगमेंट है वुड बुद्धिज्म अलाउ दिस? चीटिंग बट विदाउट एनी इमोशनल अटैचमेंट? चीटिंग इज चीटिंग। आइदर इज़ इमोशनल और फिजिकल। यू कांट एडवोकेट फॉर वन ऑन अनदर। चीटिंग इज़ चीटिंग। चीटिंग मतलब चीटिंग क्यों बुरी मानी जाती है? उसका रीज़न है क्योंकि झूठ बोलना पड़ता है। अगर झूठ ना बोलना पड़े तो वो चीटिंग नहीं होंगे। अगर आप सच बोले कुछ कर रहे हैं जैसे कि ओपन रिलेशनशिप हम दैट्स आर ओके दैट कैन बी फाइन इन बुद्धिज्म दैट्स फाइन इन बुद्धिज्म या बट आप झूठ बोल के एक को विश्वास में रख
(46:04) के दूसरे के साथ जा रहे हैं अच्छा वो गलत है झूठ होने के कारण चीटिंग गलत है बुद्धिज्म झूठ बोलना पड़ता है इसलिए किसी को माफ कर देना बट दोबारा उसे लाइफ में कभी ना लाना व्हाट डस बुद्धिज्म से इट्स ओके वी आर देन यू कैन कम बैक और नो वी आर गुड नो नीड टू कम बैक अगर आपको लगे कि वो मिस्टेक सुधार नहीं सकता है इट इज बेटर माफ माफ करो और आगे बढ़ जाओ। अपनी हैप्पीनेस के लिए अपने पेरेंट्स को डिसपॉइंट करना। अपने हैप्पीनेस के लिए पेरेंट्स को डिसपॉइंट करना। सबसे पहले एक यहां पे तो दोनों तरफा प्रॉब्लम है कि पेरेंट्स की किस तरह की एक्सपेक्टेशंस है और बच्चा उन
(46:41) एक्सपेक्टेशंस को किस तरीके से देख रहा है। डिसपॉइंटमेंट किस लेवल का है? दैट्स मैटर। क्या जेलसी से रिएक्ट जो लोग करते हैं, जो लोग मैनपुलेट करते हैं और जो लोग अपने आपको जेलसी के मारे बार-बार यह दिखाते हैं कि भाई हम आपसे आगे हैं एंड वो छल कपट से आगे बढ़ रहे हैं। इस केस में बुद्धिज्म क्या कहता है? और क्या यह सही है? जलेसी होना एक बहुत ही कॉमन चीज है। पर जेलसी के कारण एक्शन करना याद रखना कि आपकी भी लाइफ में कोई वैसा करें। पहली बात यह दूसरी बात आपको अगर लग रहा है कि उसके पास वह है तो आपको यह समझना इस पर कंटेंप्टिनेट करना चाहिए कि उसके पुण्य
(47:20) कर्मों का फल है। किसी ना किसी चीज़ में उसने वो चीज़ किया होगा इसलिए वो चीज़ मिली है। मैं वो चीज़ नहीं कर सकती। एक तो मेरे मोरल के खिलाफ होऊंगा इसलिए मैंने मैंने वो नहीं किया इसलिए मेरे पास नहीं है। या फिर मेरे पुण्य में नहीं हऊंगा इसलिए मेरे पास नहीं है। अगर ऐसा कह के खुद को दिलासा दे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। तो बुद्धि जैसे के समय में खुद को दिलासा देना ज्यादा आवश्यक है। ना किसी और को देखना। तो बुद्धिज्म में भी देयर इज अ कांसेप्ट ऑफ कर्मा लाइक हिंदूइज़्म। या सी देयर इज अ कर्मा इन एव्री रिलीजन इन एव्री फिलॉसोफी स्पेशली रिलीजियस फिलॉसोफी
(47:49) देयर इज़ अ थ्यरी ऑफ़ अ कर्मा। सो व्हाट डस बुद्धिस्ट कर्मा? कर्मा का रिजल्ट कौन देता है? कहां से आता है? इस पे सारे थ्यरीज़ अलग-अलग बताते हैं। बुद्धिज्म में भी कर्मा है। जैसा करोगे वैसा भरोगे। और कर्मा का बेसिक कांसेप्ट ये होता है। जैसा करोगे वैसा भरेंगे। हर किसी भी धर्म का क्यों ना हिंदू का इस्लाम क्रिश्चनिटी बौद्ध हर एक में ये कॉमन है। अपने पार्टनर का फोन चेक करना बिकॉज़ दिस सस्पेक्ट दैट यू आर चीटिंग इज दिस नॉर्मल। सी आपको ये बात समझनी होंगी कि आप जितना ज्यादा चेक करेंगे उतने आपको ट्रस्ट इशू होंगे। उतनी आपको प्रॉब्लम फेस करनी पड़ेगी। आप
(48:22) अपने आप को शांत नहीं रख पाएंगे और बार-बार आपका दिमाग उसी डायरेक्शन में चलेगा। तो ये आपकी प्रॉब्लम आगे जाके बहुत आपको भारी पड़ेंगी। पर मोबाइल एक दो क्लियर हो जाना अच्छी बात है। पर बार-बार वही थॉट आ रहे हैं। तो यू नीड टू टेक अ प्रॉपर मेजर ऑन दैट। पर हां अपने मोबाइल का अपने अपने मुझे लगता है कि एक ट्रांसपेरेंसी होनी चाहिए हस्बैंड और वाइफ में गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड में कि वो एक दूसरे का फोन कभी भी देख ले। कभी भी देख सकते हैं। कभी भी चेक कर सकते। टेक्स्ट मैसेजेस एंड एवरीथिंग। एवरीथिंग ईमेल्स। एक बात बताइए ऐसा क्या कर रहे हैं कि आपको
(48:55) दिखने की जरूरत नहीं पड़ रही है? हम अगर आपको किसी के साथ फ्लटिंग करने की जरूरत पड़ रही है तो इसका मतलब क्या फ्लटिंग इज़ इंटिमेसी? हम आपके पास समरी इंटिमेसी आगे जाके कई सारे चीजों में रोल प्ले कर सकती है। तो नो यू कांट यू मस्ट नॉट टू लाइक दिस थिंग्स। इफ यू वांट टू बी लॉयल इन रिलेशनशिप देन सो। व्हाट हैप्पेंस व्हेन समबडी इज़ अनहैपी इन द रिलेशनशिप। और उनको अपने मैरिज को फिर भी संभाल के रखना है। चाहे वो बुद्धिज्म में हो या किसी भी रिलजन इट्स अ गुड थिंग कि आप अनहैपी है और फिर भी रिश्ते को संभाले रखना चाहते हैं। इसका मतलब आप में ये आशा है कि रिश्ता फिर कभी
(49:28) अच्छा होगा। अभी तो हम बस एक पढ़ाव देख रहे हैं। रिश्ता फिर से ठीक कह सकते हैं। वो आशा होना जरूरी है। चीजें कितनी भी खराब क्यों ना हो। कितनी बुरी क्यों ना हो। चीट भी किया और क्यों ना हुआ हो। तो जब वो संभाल रखने की कोशिश करो तो आप एक आशा के साथ जिले और होता है रिलेशन कई बार अच्छे होते हैं। ये पीयूष मिश्रा जिनकी वो कितनी प्यारी पोएम है आरंभ है प्रचंड है वो मस्तक प्रचंड तो वो भी बताते हैं कि यार मैंने जवानी में बहुत गलत काम किया पर मेरे पति ने मुझे संभाल के रखा उसने मुझे माफ किया और आज रिश्ता संभाला हुआ है तो होती है चीजें सुधरती है
(49:57) आप में आशा होनी चाहिए कि चीजें ठीक होंगी और ये भी और मैं और क्या अच्छे अच्छी बातें उस चीज के रिश्ते में कर सकती हूं सोचना चाहिए किसी रिलेशनशिप को एंड कर देना बिकॉज़ यू फील दैट यू डिर्व समवन बेटर अगर आपको लग रहा है कि मैं किसी और को डिर्व करती हो तो इतने अब तक आप थे क्यों फिर अभी ऐसी क्या घटना हो गई ऐसी क्या बात हो गई जिसके कारण आपको लग रहा है कि आप डिर्व बेटर करते हो क्या वो चीजें चेंज नहीं कर सकते अगर सामने वाले की मिस्टेक है तो चेंज नहीं कर सकते क्या उसका भी उतना ही उसी प्रकार का मत है क्या वो भी वो चीज चाहता है कि हम
(50:28) रिलेशनशिप मूव ऑन हो जाए अगर म्यूचुअल कंसेंट है देन इट्स ओके बट आप बस अपनी समझ के आधार पर कह रहे हैं विदाउट प्रॉपर कम्युनिकेशन विदाउट चीजों को सॉल्व किए देन इट्स योर इग्नोरेंस ओके वन क्विक क्वेश्चन व्हाट वुड बुद्धा से टुडे यू हैव वन लाइन टू से आपका फ्रेंड आपसे ज्यादा सक्सेसफुल हो गया आप जेनुइनली उसके लिए हैप्पी हो बट अंदर से जेलसी फील हो रही है व्हाट वुड बुद्धा से उसने अपने पूर्व जन्म में वो कर्म किए होंगे आपके पास बहुत पैसा है लेकिन आपको फिर भी लगता है और होता तो बहुत अच्छा होता व्हाट वुड बुद्धा से और होता तो बहुत अच्छा होता पैसा होता और तो आई मीन
(51:02) आपके पास बहुत पैसा है फिर भी आप चाहते हो कि मेरे पास और पैसा होता लो या कुशल कर्म की जननी है आप किसी की लाइव देखते हो Instagram पर और सडनली आपको अपनी लाइफ ऑर्डिनरी लगने लगती है। व्हाट वुड बुद्धा से? दुख तो उसकी जिंदगी में भी आएगा। आपको करियर में सक्सेस मिल रही है बट उसके चक्कर में आपका फैमिली लाइफ, आपकी स्लीप और रिलेशनशिप सारे अफेक्ट हो रहे हैं। व्हाट वुड बुद्धा से? [गला साफ़ करने की आवाज़] विश्वास ही परम न्याती है। मतलब मतलब विश्वसनीय काम करो। हर चीज ठीक रहेंगे। न्याती ही बने रहेंगे। विश्वास रखो अपने रिश्तों पे, अपने काम पर और अपने
(51:41) कर्मों पर। कोई इंसान कंट्रोवर्सी करके फेमस हो रहा है। हम और लोग उसे देख रहे हैं। मिलियंस ऑफ पीपल वाच देम। व्हाट वुड बुद्धा से। सच छुपता नहीं है। एआई आपके थिंकिंग, आपके राइटिंग सबको इन्फ्लुएंस कर रहा है। आज व्हाट वुड बुद्धा से। संगति अच्छी रखो। संगति अच्छे रखने से आप आई डिड अंडरस्टैंड दिस क्योंकि एआई आपके मैसेजेस लिख रहा है। आपको आपके डिसीजंस भी ले रहा है। क्योंकि आप आलसी हो रहे हो। आलस अच्छा नहीं है। आलस कि मृत्यु लोगों का जीवन आल आलसी व्यक्ति मरे व्यक्ति समान है। तो एआई हमें आलसी बना रहा है।
(52:27) सो एज अ रिजल्ट बुद्धा इस सेइंग कि संगति ही अच्छे रखो। क्योंकि आप अच्छे संगति में रहोगे तो आप एक्टिव रहोगे। आप देखोगे कि वो आगे बढ़ रहे हैं। मुझे भी आगे बढ़ना होगा। मुझे भी मेहनत करना होगा। वो अच्छी मेहनत कर रहे हैं। मैंने मेहनत करना चाहिए। आपको किसी ने बहुत हर्ट किया और दिल से अभी तक एंगर नहीं गया है हम उस इंसान के प्रति। सो व्हाट वुड बुद्धा से? एंगर नहीं गया है। [गला साफ़ करने की आवाज़] कि इस प्रकार से मत सोचो कि उसने तुम्हें कुछ गलत बोला है। ऐसा सोचोगे तो गांठे तुम्हारे अंदर ही रहेंगी। मतलब तुम चाहते हो हमारे सामने वाला इंसान
(52:59) पर जहर तुम पी रहे हो। या आपको पता है कि कोई डिजायर आपके लिए अनहेल्ी है पर फिर भी आप उसको छोड़ नहीं पा रहे हैं। हम व्हाट वुड बुद्धा से? उन लोगों को देखो जो सिर्फ अपने ही डिजायर्स पूरे करने के पीछे लगे रहे। उनका एंड कैसे हुआ वो देखो। उनकी कहानियां जानो। ओके। इफ एवरीथिंग हैपेंस बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा, हमारा लाइफ कितना हमारे एवरीथिंग हैपेंस बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा। समथिंग हैपन बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा, समथिंग हैपेंड बिकॉज़ ऑफ़ फूड, समथिंग हैपन बिकॉज़ ऑफ़ एनवायरमेंट। ओके? तो बुद्धिज्म ऐसा नहीं है कि आपके कर्म खराब हो। कबार आपके कर्म ही जिम्मेदार नहीं है। कभी
(53:37) कबार आपका प्रॉपर फूड इंटेक भी उसके लिए जिम्मेदार होता है। कभी कबार आपका एनवायरमेंट भी उसके लिए जिम्मेदार है। सर्दी किस कारण होती है? एनवायरमेंट के कारण। है ना? आपका बाकी जो कुछ रोग है वो तो फूड के कारण होता है। फूड इंफेक्शन फूड के कारण होता है। बट एवरीथिंग इस हैपनिंग बिकॉज़ ऑफ़ कर्मा। वेरी एक्सट्रीम सिचुएशंस लाइक एक्सट्रीम एक्सट्रीम सिचुएशंस जहां पे यू नो सैड स्टोरी सुनने को मिलती है एंड यू नो समटाइ्स अ लव्ड वन पाससेस अवे बिफोर टाइम यू नो सो दैट्स नॉट कर्मा दैट इज कर्मा दैट्स कर्मा इफ यू आर सफरिंग बिकॉज़ ऑफ़ द लॉस ऑफ लव वंस
(54:17) इट्स योर योर कर्मा दैट यू नीड टू सफर फ्रॉम दैट दैट पेज इट्स योर कमा। सो, यह हमने अपनी पास्ट लाइफ में ऐसा कुछ किया। नॉट जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द पास्ट कामा। इट्स इट्स द यू हु हैव डेवलप्ड सच काइंड ऑफ़ अटैचमेंट व्हिच इज़ व्हिच व्हिच वाज़ कंप्लीटली इग्नोरेंट कि तुमने कभी सोचा भी नहीं कि इंसान भी कभी दूर जाएगा, कभी जिंदगी से निकलेगा। अगर तुम समय-समय पे ऐसा कंटेंप्लेट करे, तो आज इतनी गहरी अटैचमेंट नहीं होती। वह गहरी अटैचमेंट है अगर तुम सफर कर रहे हो। बिकॉज़ ऑफ़ पास्ट डीड, नॉट बिकॉज़ ऑफ़ पास्ट कमा बिकॉज़ ऑफ़ प्रेज़ेंट कम्मा। द कम्मा वाज़ योर अटैचमेंट।
(54:53) सो जिस जो तुमने अटैचमेंट को अलव हो किया जमा होने के लिए इट्स लाइक अ पॉट जहां पे तुमने गंदा पानी जमा होने दिया। अटैचमेंट इज़ नॉट अ गुड थिंग देन अटैचमेंट अ पोज़ेसिव अटैचमेंट इज़ नॉट अ इग्नोरेंट अटैचमेंट इज़ नॉट अ गुड थिंग। माइंडफुल अटैच हाउएवर व्हेन देयर इज अ माइंडफुल रेयरली अटैचमेंट हो सकता है पर अटैचमेंट होती शायद देन सो वी समय-समय पे हमने कंटेंट करना होता है प्रॉपर्ली अपनी अटैचमेंट को लेके कि मैं मेरा अटैचमेंट गहरा हो रहा है क्या मैं टॉक्सिक हो रहा हूं क्या मैं ज्यादा डिपेंडेंट हो रहा हूं क्या मैं पोजेसिव हो रहा हूं क्या सवाल
(55:30) बार-बार बार-बार समय से खुद खुद खुद से पूछने पड़ते हैं समय-समय पे पर ये तो एक ऐसा चीज है जो लाइफ में यू डोंट वांट टू सफर देन सो ओके हम अनटाइमली सफरेंस यस अनटाइमली सफरिंग्स इफ यू डोंट वांट सफरिंग देन इफ यू वांट अ जन्मों जन्मों का साथ तो फिर छोड़ो साथ निभाना साथ या अगर हम अपना पास्ट लाइफ याद ही नहीं रखते हैं तो हमें क्यों रिस्पांसिबल ठहराया जाता है हमारे कर्मों के लिए कोई रिस्पांसिबल नहीं ठहराता ये तो समाज की हैबिट गिर चुकी है कि भाई तो अपने तो धार्मिक लैंग्वेज बन चुकी है एक तरीके से कोई कंसोल करने के लिए इस्तेमाल करता है
(56:06) कुछ उड़ाने के लिए इस्तेमाल करता है कोई नीचा दिखाने के लिए इस्तेमाल करता है। पर यह शब्दों का दूसरे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनाए गए। यह शब्द खुद को कंसोल करने के लिए इस्तेमाल किए गए कि हां शायद मेरे कुछ कर्म होंगे। पर आजकल हम उसे टारगेट करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। नाइफ नाइफ नाइफ इज सेम। बस कोई उस उसे काट के सब्जी बनाना चाहता है और दूसरों का पेट भरना चाहता है। कोई ऑपरेशन करके किसी की जान बचाना चाहता है और कोई खून करके अपना पर छोड़ देना चाहता है। क्या एक इंसान का एक्शन दूसरे पर्सन का कर्मा चेंज कर सकता है? नॉट कर्मा चेंज बट
(56:39) एक समय का एक का कर्म दूसरे को इन्फ्लुएंस कर सकता है। अच्छा वो कैसे अगर आप कोई कुशल कर्म करे तो आपको देख के उससे भी कुशल कर्म करने का मन कर सकता है और उसने कुशल कर्म किया तो मे बी जो कुछ बुरी हरकत उसके साथ होने वाली थी वो ना हो क्योंकि उस पुण्य कर्म का अपना बल बन गया है। देयर वर वन स्टोरी कि सारी पुत्र बंती वन ऑफ द मोस्ट स्ट्रांगेस्ट मंक एंड मोस्ट इंटेलेक्चुअल मंक आफ्टर बुद्धा ही वास द राइट हैंड ऑफ़ बुद्धा वो बहुत पुण्यवान थे पर एक जो बच्चा था कुल नाम का वो भी मंक था छोटा सा शिष्य 16 17 18 साल का होगा शायद से वो इतना उसका पाप कर्म था कि उसे
(57:15) कभी जिंदगी में पेट भर खाने के लिए नहीं मिला फिर सारे पुत्र को लगा चल तू मेरे साथ चल क्या पता मेरे पुण्य के प्रताप से तुम्हें भी भोजन मिल जाए पर देखिए उस बच्चे का बैड लक इतना इतना रहा कि सारी पुत्र बंधु को भोजन नहीं मिला उस दिन सारी पुत्र बंधु ने बोला कि नहीं तुम जाओ मैं जाता अकेला फिर सारी बातें बनते अकेले गए और फिर उनको भोजन मिला तो ऐसा होता है एक दूसरे के कर्मा एक दूसरे को इन्फ्लुएंस करते हैं कुछ रोक देते हैं कुछ मिल जाता है कभी किसी का लक काम करता है लाइक देयर इज़ वन माय डिसाइपल जूही उसका लक काफी अच्छा है क्योंकि शी इस मोर पुण्यवान वो
(57:42) बहुत पुण्य है बहुत पुण्य करते सत्कर्म करते रहती है तो वी वर प्लेइंग प्लेइंग वन गेम वंस दमशरा वो हम खेल रहे थे समझना था कि मेरे तो पुण्य उतने अच्छे लक के संदर्भ में मेरे पुण्य नहीं है पुण्य तो कई तरह के होते पर जब लक के संदर्भ में कोई पुण्य मेरा हो तो कभी अच्छा नहीं होता। मेरा कभी ऐसा लॉट वगैरह लक वगैरह लगता नहीं। मैं जानता हूं कि मेरा पुण्य है ही नहीं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो हम सभी मेरे डिसाइपल्स वगैरह हम सब लोग गेम खेल रहे थे। तो खेलतेखेलते मेरा सभी लोगों के कई सारे नंबर्स निकल गए। पर मेरे नंबर निकले नहीं एक फिर सडनली वो मेरी शिष्य आई
(58:13) है। जुई शिष्या है। मैंने बोलाई कम ऑन मेरी चेयर को हाथ लगाओ। है ना? मेरी चेयर को हाथ ला के पकड़ो। मेरे पास मतलब ऐसा खड़े रहो क्योंकि शी फीमेल तो मेरे पता था पानी। तो मैंने कहा मेरी चेयर को हाथ लाके पकड़ो और मेरे लिए अच्छा मतलब सोचो। ब्लेस करो मुझे। है ना? सो जब से उसने चेयर लगाया तो लगातार चार नंबर निकले मेरे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] सो ऐसा इनफ्लुएंस होता है। किसी का लक आप बोरो कर सकते हैं। किसी का बैड लक भी बोरो होता है। तो अपने फैमिली के साथ जो रहते हैं एक कलेक्टिवली एक पति पत्नी और बच्चा एक दूसरे के लिए कैसे अच्छे कर्म क्रिएट कर
(58:41) सकते हैं? देखिए एक दूसरे के लिए अच्छे कर्म हम क्रिएट नहीं कर सकते। हम क्या कर सकते हैं कि हम अपने पुण्य कर्म कर सकते हैं। अपना माइंड वैसा प्योर रख सकते हैं और सोच सकते हैं कि उसका भी भला हो। वो भी सुखी रहे। इस प्रकार के थॉट से भी आप उसका जीवन सुखी बना सकते हैं। इसे मंगल मैत्री कहते हैं। वन ऑफ़ द मोस्ट पावरफुल कांसेप्ट है बुद्धिज्म में। आज भी अगर किसी बीमार होता है तो मुझे कई सर लोग कॉल करते हैं और कहते हैं बंती जी प्लीज मंगल मैत्री दीजिए। आप उसके बारे में अच्छा अच्छा सोचिए। मंगल मैत्री मतलब उसके बारे में अच्छा सोचना। तो एनर्जी कनेक्ट हो जाती है
(59:09) और फिर वो कई सारे अच्छे रिस्पांस भी आए हमको कि बंती जी शुक्रिया आपकी मंगल मैत्री के लिए। मंगल मैत्री जैसे क्या होता है कि कई बार जो मदर्स हैं सबसे ज्यादा वो परेशान रहती है अपने बच्चों के लिए। आप परेशान रह के मंगलमैत्री नहीं कर सकते। शांत माइंड रह के ही मंगलमैत्री कर सकते हैं। माइंड रह के अगर मैं परेशान हूं मेरे बच्चे के लिए तो मैं मंगलमैत्री नहीं कर सकता हूं। मेरी जो वाइब्रेशन है हां नहीं वो सुखी रहना चाहिए। नहीं वो अच्छा रहना चाहिए। उसका भला हो। ये मंगलमैत्री नहीं है। मंगलमैत्री वो कामनेस होती है। जैसे कि हां मतलब ज्यादा मैं उससे बिना अटैच
(59:39) हुए ज्यादा उसके डिसमेरिट सोच के बस एक पूरा प्योर काम माइंड रहते हुए सोचूं कि हां वह सुखी रहे। वह मंगल हो वह कल्याण हो रोग मुक्त रहे। इस प्रकार का विचार रखना और जिसका जितना मेंटल स्टेट मजबूत होगा जितना मेंटल स्टेट उस समय काम होगा उतनी अच्छी उसकी मैत्री लगेगी सामने वाले को उतना कनेक्ट हो पाएगा उस एनर्जी के साथ क्या अपने दुश्मनों के लिए भी जिसके बारे में जो आप जानते हो जिस टाइप के लोग होते हैं वो आपके वेलविशर्स नहीं है क्या उसके प्रति भी अच्छा सोच रखना हमारे कर्म को काटे उसके प्रति भी मंगल मैत्री करते हैं तो एक
(1:00:11) समय ऐसा आएगा कि वो शत्रु आपका मित्र बन जाएगा इतना पावर होता है थॉट में मैनिफेस्टेशन हम वो जो शत्रु है आज वो एक समय आएगा कि आपका मित्र बन जाएगा। आपके पास हेल्प मांगने के लिए आएगा या आपकी हेल्प करेगा। अगर आप मैत्री करते हैं उसके प्रति तो थैंक यू सो मच फॉर कमिंग टू बियों द स्क्रीन वि मीच फॉर इनवाइटिंग मी। ग्रेट टॉकिंग टू यू एंड हैविंग योर पर्सेक्टिव। थैंक यू सो मच। थैंक यू। [संगीत]
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