Digital India's New Frontier: How AI Is Preserving Our Ancient History | Dr. Vikram Sampath
Author Name:MyGov India
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Transcript:
(00:00) विष्णु पुराण में हमने पढ़ा है कि भारत क्या [संगीत] है? इसकी परिकल्पना हमारे पूर्वजों को बहुत ही स्पष्ट तरीके से थी कि उत्तरम यत समुद्रस हिमाद्रव दक्षिणम वर्षत भारतम नाम भारतीय यत्र संततिम्लिश [संगीत] हिस्टोरियन जो हमारा अतीत है उसका हमारे भविष्य से क्या लिंक है क्यों जरूरी है उसको समझना किसी भी देश का इतिहास उस देश के दर्पण जैसा है [संगीत] गुजरात की एक नायकी देवी नाम की एक रानी जो मोहम्मद घोरी को हरा देती है। 1178 में कसरहाड़ा के युद्ध में। रेलू [संगीत] नाचियार तमिलनाडु की शिवगंगा की रानी इकलौती रानी थी जिन्होंने ईस्ट इंडिया
(00:44) कंपनी को हरा के [संगीत] अपनी रियासत वापस भी ले ली। हमने शायद उसके बारे में नहीं सुना है। वीर सावरकर [संगीत] जी की जी। शुरुआत करते हैं। हमारी क्या अंडरस्टैंडिंग थी और फैक्ट्स क्या है? द प्राइम मिनिस्टर हिमसेल्फ [संगीत] वेंट टू पोर्ट ब्लेयर टू द कालापानी टू सावरकर सेल। आई थिंक दैट वाज़ अ वेरी पावरफुल मैसेज कि ये स्थान जो है ये एक तीर्थ स्थान है हमारे हमारे देश के लिए। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व [संगीत] जो मनाया जा रहा है। स्वाभिमान किस चीज का कि महमूद गजनी ने आके तोड़ दिया। इसके हजारवीं जयंती मनाने की क्या जरूरत है? इट इज नॉट यू नो
(01:21) कमेंरेटिंग दी डिस्ट्रक्शन बट डिस्पाइट द डिस्ट्रक्शन कि हम उठ खड़े हुए। [संगीत] ये माननीय प्रधानमंत्री जी से आपकी मुलाकात थी तो ये क्या कहता है? किसी को ये हिंट भी नहीं मिला कि उसके चंद [संगीत] चार या पांच घंटे बाद ऑपरेशन सिंदूर वास गोइंग टू बी लॉन्च्ड। हाउ आर यू यूजिंग एआई टू फर्दर एक्सपेंड योर वर्क इन हिस्ट्री। आज के पडकास्ट का प्लान बड़ा सिंपल है। आपको पास्ट में ले जाएंगे अतीत में। अब आप कहोगे शरद शो का नाम है ग्रोथ ड्रीम्स एंड पैशन। इट्स अबाउट आवर फ्यूचर इंडियास फ्यूचर। पास्ट में क्यों ले जाना चाहते
(02:08) हैं? उसका एक रीजन है। देखिए अगर हम भारत के पास्ट को अपने पास्ट को समझ लेते हैं तो हम भारत के भविष्य को अपने भविष्य को बेहतर समझ पाएंगे। अब आप कहोगे साउंड्स गुड। लेकिन ये हिस्ट्री की क्लास कौन लेगा? एक ऐसे शख्स जिन्होंने भारत की हिस्ट्री को रिलेटेबल, फैक्ट बेस्ड और इंटरेस्टिंग बनाया। वन ऑफ द मोस्ट पावरफुल स्टोरी टेलर्स ऑफ आवर टाइम्स बेस्ट सेलिंग ऑथर एंड अवार्डेड हिस्टोरियन डॉ विक्रम संपत ऑन द जीडीपी पडकास्ट [संगीत] डॉक्टर डॉक्टर विक्रम संपत वेलकम टू द
(03:09) जीडीपी पाडकास्ट थैंक यू थैंक यू शरद जी मैं आपको विक्रम बुला सकता हूं जी बिल्कुल दैट्स ऑसम बढ़िया ये जब मैं रिसर्च करने लगा इस इंटरव्यू का तो जो मेरे जेहन में पहला सवाल आया वो यही था कि जो हमारा अतीत है उसका हमारे भविष्य से क्या लिंक है वो क्यों जरूरी है उसको समझना राइट तरीके से समझना उसकी बारीकी में घुसना तो शुरुआत बात इसी से करते हैं। जी। एक बहुत ही क्रूड एनालॉजी अगर मैं दूं तो कोई गाड़ी जब चला रहा है कार तो [गला साफ़ करने की आवाज़] हमेशा एक कहा जाता है कि रेयर व्यू मिरर पे एक नजर रखो। पीछे से क्या कौन सी गाड़ी आ रही है इस पे
(03:52) थोड़ी नजर होनी चाहिए। पर अगर हमारी नजर वहीं पे टिकी रहे तो आगे जाके एक्सीडेंट हो जाएगा। तो कुछ हद तक देखते रहना चाहिए। पर उसी में यू शुड नॉट बी स्टक इन द पास्ट। आई थिंक वेरी सिमिलरली द हिस्ट्री ऑफ़ अ नेशन इज आल्सो दैट वे। मुझे लगता है कि किसी भी देश का इतिहास उस देश के दर्पण जैसा है। जिसमें वह देश और उसके देशवासी अपने आप को एक सिविलाइजेशन के रूप में, एक सभ्यता के रूप पे और एक राष्ट्र के रूप में वो खुद को दे कैन आइडेंटिफाई देमसेल्व्स। अब इफ आप मान लीजिए एक दर्पण टूटा हुआ है, शीशा टूटा हुआ है और उसमें आप अपने आप को
(04:33) देख रहे हैं। तो ऑब्वियसली यू विल कम इन अ वेरी डिस्टोर्टेड मैनर। तो किसी भी देश को भी अगर हम उसके इतिहास को विकृत दृष्टिकोण से देख रहे हैं तो हम अपने अतीत को भी उसी नजरिए से वी विल बी लुकिंग एट देयर वाज़ दिस इंग्लिश नवेलिस्ट जॉर्ज औरवेल जिन्होंने कहा था कि ही हु कंट्रोल्स द पास्ट कंट्रोल्स द प्रेजेंट एंड द फ्यूचर। हम और ये बात कि अतीत पे जिसका कब्जा होता है वही देश के वर्तमान और भविष्य दोनों पर भी उसका अधिपत्य स्थापित होता है। आई थिंक ये चीज हमारे कॉलोनियल मास्टर्स जो ब्रिटिश थे वो अच्छी तरह से समझ चुके थे और आफ्टर
(05:13) इंडिपेंडेंस द रूलिंग क्लास दे आल्सो अंडरस्टुड दिस। अ सो आई थिंक इट इज़ व्हाइल इट इज़ नॉट नेसेसरी टू बी स्टक इन द पास्ट। अ क्लियर अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ हु वी आर वेयर वी केम फ्रॉम। व्हाट आर द अचीवमेंट्स ऑफ़ आवर पास्ट एंड ऑफ़ आवर एनसेेस्टर्स फॉर व्हिच वी कैन हैव जेन्युइन प्राइड फॉर। देखिए बहुत देयर इज़ अ वैरी नैरो दिस थिंग बिटवीन जिंगोइज़्म एंड जेन्युइन प्राइड। मेरा भारत महान हर चीज अतीत में हो गया था। देयर वाज़ अ ग्लोरी एज। ऐसा अगर हम कहते रहें तो अभी के पीढ़ी के लिए कुछ करने के लिए बचा नहीं है। एवरीथिंग हैज़ ऑलरेडी बीन अचीव्ड। बट आई थिंक जेन्युइन प्राइड
(05:50) फॉर द पास्ट। आल्सो जो मिस्टेक्स हमने किए एज़ अ सिविलाइज़ेशन इन द पास्ट, हाउ दोज़ शुड नॉट बी रिपीटेड इन द फ्यूचर। आई थिंक हिस्ट्री हैज़ अ रोल टू गिव ऑल ऑफ़ दिस। एंड फाइनली, हिस्ट्री इज़ आल्सो अ स्पेस व्हिच ऑफर्स फॉर कलेक्टिव हीलिंग। हम्म जो इंडिया हैज़ बीन अ वूंडेड सिविलाइज़ेशन। अज़ ना नेपाल हैज़ कॉल्ड इट। अह एंड आई थिंक हिस्ट्री इज़ द स्पेस वेयर यू कैन टॉक अबाउट दीज़ विथ नो एनिमोसिटी टुवर्ड्स एनी प्रेजेंट कम्युनिटीज़। बट एट द सेम टाइम टॉक अबाउट इट। अ ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन विथ इट एंड मूव ऑन आफ्टर मेकिंग पीस विथ इट। आई थिंक फॉर ऑल दीज़ रीज़ंस देश के
(06:27) इतिहास को अच्छी तरह से समझना बहुत ही इंपॉर्टेंट है। इट्स लाइक द ऑपरेटिंग यू नो ओएस इन अ ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर इन अ कंप्यूटर सिस्टम। आपका हार्डवेयर बहुत अच्छा हो पर योर ऑपरेटिंग सिस्टम हैज़ अ वायरस देन द कंप्यूटर विल नॉट वर्क। राइट? उसी तरह वी कैन बी मिलिट्रली स्ट्रांग। वी कैन बी अ जिओपॉलिटिकल फोर्स। आवर जीडीपी कुड बी ग्रोइंग। बट इफ वी डू नॉट हैव दैट सेल्फ कॉन्फिडेंस इन आवरसेल्व्स एज़ अ नेशन एंड एज़ अ सिविलाइज़ेशन, आय थिंक आर मार्च टू द फ्यूचर विल आल्सो बी इंपैक्टेड। दैट्स वेरी ब्यूटीफुली। यू पुट इट वैरी ब्यूटीफुली।
(07:05) तो, व्हेन यू लुक एट नेशंस अक्रॉस द बोर्ड, किन कंट्रीज़ ने यह अच्छे से किया आपके हिसाब से? देखिए अमंग द कॉलोनाइज्ड यू नो नेशंस इफ यू सी द अफ्रीकन कंट्रीज वहां पे यू हैड द फेमस नाइजीरियन ऑथर कॉल्ड चिनवा आचिबे हुस फेमस कोर्ट इज़ अंटिल द लायंस हैव देयर ओन हिस्टोरियंस द हिस्ट्री ऑफ़ द हंट विल ऑलवेज ग्लोरिफाई द हंटर जब तक जो शेर हैं वो अपने इतिहासकारों को ढूंढते नहीं है तब तक शिकारी का ही इतिहास का यू नो महिमा मंडन होगा तो आई थिंक दे हैव नॉट ओनली इन हिस्ट्री। आई थिंक इवन इन लैंग्वेजेस द काइंड ऑफ़ डीकॉलोनाइजेशन व्हिच हैपेंस एवरीवेयर। द अफ्रीकन कंट्रीज
(07:50) हैव डन दैट विथ अ लॉट ऑफ़ किया उन्होंने थोड़ा सा अगर आप आई थिंक द वैरी फैक्ट दैट इट इज़ नॉट लुक डाउन अपॉन एंड देयर इज़ अ प्राइ देयर इज़ अ प्राइड टू इट। एंड इट इज़ सीन एज अ वैरी नेचुरल प्रोसेस ऑफ इंडिपेंडेंस कि देश को आजादी मिली तो उसके बाद चार्टिंग दैट ग्रैंड नैरेटिव ऑफ़ दैट कंट्री इज़ेंट। तो वेयर डिड वी गो रॉन्ग विक्रम अह हमें जब 1947 में आजादी मिली फिर भी हम आजाद नहीं हो पाए वो जो कॉलोनियल माइंडसेट है उससे हम कभी भी पूरी तरीके से रिहा नहीं हो पाए तो क्या वो गलतियां की हमने आपके हिसाब से देखिए कॉलोनियलिज्म का मेरे हिसाब से देयर
(08:33) आर थ्री डायमेंशंस वन इज़ ऑफ कोर्स अ पॉलिटिकल कॉलोनाइजेशन वेयर सुदूर से आए एक आइलैंड के लोगों ने ने हम पे 250 साल राज किया। टू गेट रेड ऑफ़ पॉलिटिकल कॉलोनाइजेशन इज़ प्रोबेब्ली स्टिल इज़ियर। आई एम नॉट सेइंग इट्स वैरी सिंपल। बट यू नो इफ यू कीप एट इट इफ यू स्ट्राइक एज़ वी डीड 90 इयर्स ऑफ़ फ्रीडम मूवमेंट एंड सो ऑन यू गेट इट। या इकोनमिक कॉलोनाइजेशन इज द अदर वेयर यू नो ऑल द रॉ मटेरियल्स फ्रॉम दिस कंट्री गोइंग अवे टू द मैनचेस्टर मिल्स और यहां के लोकल इंडस्ट्रीज को जिस तरह से यू नो इट वाज़ क्रश्ड दैट टू कैन बी ओवरकम वी आर नाउ
(09:12) ऑलमोस्ट प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं अपने कॉलोनाइजर के साथ टू फोर्थ लार्जेस्ट फिफ्थ लार्जेस्ट ऑल ऑफ़ दीज़ थिंग्स बट द थर्ड एंड द मोरेंट डायमेंशन ऑफ़ कॉलोनाइजेशन इज़ ऑफ़ द माइंड द कैप्चर ऑफ़ द माइंड एंड दैट टेक्स टेक्स अ वेरी लॉन्ग टाइम टू डू इट। और दिस आल्सो आर ब्रिटिश मास्टर्स अंडरस्टुड। और मैकोले का वो इनफेमस मिनट ऑफ़ 1835 इज़ देयर व्हेयर ही सेज़ वेरी क्लियरली कि दी होल ऑब्जेक्टिव ऑफ़ इंग्लिश एजुकेशन इज़ टू क्रिएट अ वास्ट बॉडी ऑफ़ इंटरप्रेटर्स बिटवीन अस एंड द मिलियंस हुम वी गवर्न। हु आर ओनली इंडियन इन स्किन, कलर एंड ब्लड बट
(09:51) दे आर इंग्लिश, इन देयर ओपिनियंस, इन देयर टेस्ट, इन देयर मोरल्स एंड देयर इंटेलेक्ट। दैट वास हिज एग्जैक्ट फ्रेज़। सो एंड द आयरनीज हम ये बातचीत भी उन्हीं की भाषा में ही ज्यादातर कर रहे हैं। सो दैट इज द वही विडंबना है अबाउट आवर कंट्री। बट यू नो, दिस कैप्चर ऑफ़ द माइंड टेक्स अ लॉन्ग टाइम डीलोनाइजिंग द इंडियन माइंड। एंड आई थिंक इतनी कुट्टी पिला दी गई है हमको। और इसका जो द मैनिफेस्टेशन ऑफ़ दिस द मैक्सिमम यू प्रोबब्ली सी इन हिस्ट्री। वी हैड अ गोल्डन चांस आई थिंक आफ्टर इंडिपेंडेंस। व्हिच वी काइंड ऑफ़ स्क्वंडर्ड अवे। अ बाई परपेचुएटिंग अ लॉट
(10:28) ऑफ़ आई थिंक व्हाट द क- कॉलोनियल मास्टर्स हेड लेफ्ट अस विद डिस्टॉरशनंस। वी एडेड मोर टू इट। एंड आई हैव नो क्वार्म्स इन मेंशनिंग दैट दिस वाज़ थैंक्स टू अ सर्टेन आइडियोलॉजी। अह द मार्क्सिस्ट आइडियोलॉजी व्हिच हैज़ मेंटेंड इट्स ट्रेंगलह होल्ड ऑन हिस्ट्री राइटिंग इन इंडिया। एस्पेशली आफ्टर इंडिपेंडेंस एंड द बिगेस्ट यू नो विडंबना आप कह सकते हैं या हास्यास्पद चीज जो है वो कह सकते हैं कि इवन ड्यूरिंग द ब्रिटिश टाइम्स देयर वाज़ स्कूल फॉर एन देयर वाज़ स्पेस फॉर एन अल्टरनेटिव स्कूल ऑफ़ इंडियन हिस्ट्री राइटिंग जेम्स यहां जेम्स मिल जो स्कॉटिश
(11:05) हिस्टोरियन थे वो कभी भारत आए नहीं थे। उन्होंने सबसे पहले द हिस्ट्री ऑफ़ ब्रिटिश इंडिया लिखा था। उसमें पूरी तरह से भारत की सभ्यता, संस्कृति, इतिहास सबको उन्होंने बहुत ही निकृष्ट तरीके से उन्होंने प्रस्तुत किया था। उसका खंडन करते हुए सो मेनी इंडियन हिस्टोरियंस और स्कॉलर्स स्टार्टेड राइटिंग आर्टिकल्स टू न्यूज़पेपर्स। ऑफ कोर्स वी वर अ स्लेव कंट्री। सो ओपनली हम उसका खंडन नहीं कर सकते थे। तो दीज़ वर इन अनोनिमस नेम्स। द फर्स्ट हिंदू, द सेकंड हिंदू ऐसे करके दीज़ आर्टिकल्स स्टार्टेड कमिंग। एंड स्लोली कौन से साल की बात है?
(11:40) 1850 60 उस दौर का एंड दैट स्लोली आल्सो लेड टू द इमरजेंस ऑफ अ राष्ट्रवादी इतिहास लेखन या नेशनलिस्ट हिस्टोरियोग्राफी स्कूल यू हैड पीपल लाइक सर जदुनाथ सरकार जी एस सरदेसाई भंडारकर वी के रजवाड़े सो मेनी ऑफ़ देम बंगाल में महाराष्ट्र में अह जहां पे राइटिंग इंडियन हिस्ट्री फ्रॉम एन इंडिक लेंस वाज़ नॉट कंसीडर्ड इवन ड्यूरिंग द ब्रिटिश टाइम्स एंड दैट इज़ द ऑगजिमरॉन। इट वाज़ अलाउड बट आफ्टर इंडिपेंडेंस ऑल ऑफ़ दोज़ स्कूल्स ऑफ़ थॉट वर स्नफ्ड आउट। वी हैव दैट फेमस एग्जांपल ऑफ़ हाउ समवन ऑफ़ द एमिनेंस ऑफ़ डॉ.
(12:22) आरसी मजूमदार यू नो हु वाज़ आस्क्ड टू हेड अ कमिटी टू राइट द ऑफिशियल हिस्ट्री ऑफ़ द इंडिपेंडेंस मूवमेंट इन इंडिया। देश अभी-अभी आजाद हुआ था। बहुत सारे लोग जो स्वतंत्रता सेनानी थे वो अभी जिंदा थे। तो उनके जो व्यूज हैं वो सब गैदर करके इनकी अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई कि आप इसका इतिहास लिखें। मजूमदार साहब ने बोल दिया था कि लुक आई एम नॉट गोइंग टू बी अ दरबारी इतिहासकार। और उनको कांग्रेस का जो वर्शन ऑफ इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल हो या गांधी की नीतियां उससे काफी ही हैड ह डिफरेंसेस एंड ही मेड इट क्लियर टू द गवर्नमेंट दैट आई एम गोइंग टू राइट दिस इन अ ऑनेस्ट एक निष्पक्ष
(13:00) निष्पक्ष तरीके से मैं लिखूंगा। फॉर दैट क्राइम ही वाज़ एक्चुअली रिमूव्ड फ्रॉम द कमिटी एंड समवन एल्स हु वाज़ वैरी प्लांट अ ब्यूरोक्रेट वाज़ पुट इन हिस प्लेस। बट ऑफ कोर्स मजूमदार साहब वाज़ ग्रेट इनफ दैट ही वेंट ऑन टू राइट हिज़ ओन 11 वॉल्यूम्स ऑफ यू नो द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल उसमें तीन वॉल्यूम्स हैं जो स्वतंत्रता संग्राम के बारे में ही है। तो ही कुड अफोर्ड टू डू दैट बट अ लॉट ऑफ़ अदर हिस्टोरियंस हु डिपेंडेड ऑन स्टेट लार्जेस्ट। अब अभी देयर इज सोशल मीडिया देयर इज देयर आर वाइडर यू नो एवेन्यूस फॉर डिसमिनेशन बट उस जमाने में अगर आप एक
(13:38) प्रोफेशनल हिस्टोरियन हैं किसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं तो आपको सरकार जो बता रही है वही करना आपको पॉसिबल था योर करियर डिपेंडेड ऑन इट पीपल हैव लॉस्ट देयर यू नो करियर्स रिस्क देयर प्रोफेशन एंड सो द बेस्ट थॉट वुड बी जैसे सरकार बोल रही है वही कर दें पर जब इतिहासकार एक बावर्ची बन जाता है ना कि आपका मालिक बोलता है इसमें नमक मिर्च मेरे स्वाद अनुसार आप डालो तो इतिहास इज़ द बिगेस्ट कैजुएल्टी एंड आई थिंक हमने बावर्ची इतिहासकारों को इतना ज्यादा अह बढ़ावा दिया है आफ्टर इंडिपेंडेंस अनफॉर्चुनेटली एंड इट हैपेंड मोर आई थिंक इन द 1970 अह व्हेन इंदिरा गांधी नीडेड द
(14:22) सपोर्ट ऑफ द कम्युनिस्ट टू रन हर गवर्नमेंट द कम्युनिस्ट आर वैरी अह यू नो स्मार्ट पीपल दे नो नो वर्ल्ड वाइड कि इंस्टीट्यूशनल कैप्चर क्या है? कैप्चर ऑफ़ द माइंड व्हाट दैट व्हाट दैट मीन्स फॉर द आईडियोलॉजी यू मे बी आउट ऑफ पॉलिटिकल पावर बट टू कैप्चर अभी जो हाल ही में हमारे इसमें चलता रहता है। सरकार हमारी है सिस्टम उनका है। तो ये सिस्टम उनका कैसे बनता है? बाय द कैप्चर ऑफ़ द माइंड। हम बस उसको वी कीप रिपीटिंग दैट वी डोंट डू एनी करेक्टिव मेजर्स। दैट्स अनदर थिंग। बट आई थिंक दिस एस्पेक्ट दैट यू नो हैव ओनली वन मोनोक्रोमेटिक लेंस ऑफ़ लुकिंग एट इंडियन
(15:02) हिस्ट्री एंड एनीबडी हु हैज़ अ पैरेलल और एन ऑपोजिंग व्यू जस्ट कट देम ऑफ इनडिसक्रिमेंटली। आई थिंक दैट वाज़ द बिगेस्ट प्रॉब्लम। हम्म। तो मैं यह चाहता हूं कि हम कुछ एग्जांपल से आपसे समझे कि और एंड मे बी वी कैन टेक सम हिस्टोरिकल फिगर्स अ कि उनकी हिस्ट्री हमें कैसे पढ़ाई गई और फैक्ट्स क्या कहते हैं मे बी हम वीर सावरकर जी की से शुरुआत करते हैं। आपने उन पे दो बेस्ट सेलिंग किताबें लिखी तो सावरकर की जो अंडरस्टैंडिंग और मैं ये चाहता हूं कि ये लास्ट 10 साल में काफी कुछ बदला है। बट बिफोर दैट हाउ डड वी अंडरस्टैंड सावरकर और उसमें फक्चुअल क्या गैप्स थे?
(15:47) बिफोर सावरकर कैन आई जस्ट टॉक आल्सो अबाउट आपने बोला व्हाट आर द अदर एग्जांपल्स ऑफ डिस्टॉर्शन या बहुत सारे एक बिंदु हैं इसमें एक तो व्हिच स्ट्राइक्स अस एट आवर रूट ऑफ़ आवर आइडेंटिटी कि आप किसी भी एजुकेटेड इंडियन को भी पूछ लीजिए। द थिंग दे विल से इज़ भारत एक राष्ट्र भी नहीं था। इट वास अ ब्रिटिश हु केम एंड गव अस अ सेंस ऑफ नेशनहुड। तब तक हम आपस में लड़ते मरते रहे। टेरिटरी रजवाड़े थे। हां सब रजवाड़े एक दूसरे के साथ लड़ाई करते रहते थे। इट वाज़ अ ब्रिटिश हु यूनिफाइड अस इनू वन कंट्री दे गव अस एजुकेशन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर आईसीएस यू नो सिविल
(16:29) सर्विस सब कुछ ब्रिटिश के बदौलत है। अ लॉट ऑफ़ एजुकेटेड इंडियंस आई थिंक हार्ट ऑफ़ हार्ट्स दे डू बिलीव इन दिस। जबकि एक नेशन और नेशन स्टेट आई थिंक दोज़ आर वेरी डिफरेंट थिंग्स। अ नेशन स्टेट इज़ डिफाइंड बाय लॉज़ एंड पॉलिटिकल बॉर्डर्स। और ये चीजें बदलती रहती हैं। बॉर्डर्स बदलते हैं। पार्लियामेंट लॉज़ को बदलते रहते हैं। बट राष्ट्र जो है इट इज़ नॉट डिफाइंड बाय लॉज़ एंड पॉलिटिकल बॉर्डर्स ओनली। इट इज़ दैट सेंस ऑफ़ कॉमन यू नो अह इमोशनल कनेक्ट टू अ कॉमन ज्योग्राफी। एंड इन दैट पर्टिकुलर एस्पेक्ट 5000 8000 सालों के इतिहास में देयर इज एन
(17:08) एस्टोनिशिंग कन्वर्जेंस ऑफ व्यूज एंड वी नो राइट फ्रॉम द विष्णु पुराण में हमने पढ़ा है कि भारत क्या है? इसकी परिकल्पना हमारे पूर्वजों को बहुत ही स्पष्ट तरीके से थी कि उत्तरम यत समुद्रस्य हिमाद्रसव दक्षिणम वर्षत भारतम नाम भारतीय यत्र संतति समुद्र के ऊपर और हिमालय के नीचे जो विशाल भूखंड है उसको भारत वर्ष तद उस देश को भारत कहा जाता है और उसकी संतति भारतीय है तो इससे ज्यादा स्पष्ट एक राष्ट्र का की परिभाषा क्या हो सकती है और हमारे सारे जो तीर्थ स्थान है जो [गला साफ़ करने की आवाज़] 12 ज्योतिर्लिंग हो या जो शक्तिपीठ हो या जो भी हो चारधाम
(17:49) सप्तपुरी ये मैप आप देखिए तो पूरे अनडिवाइडेड भारतवर्ष में हिंगलाज माता से ले ढाकेश्वरी तक और नीचे रामेश्वरम और श्रीलंका तक भी एक इट इट एक्चुअली मैप्स आउट आवर यू नो मैप ऑफ इंडिया द सीक्रेट ज्योग्राफी ऑफ़ इंडिया जब आदि शंकराचार्य दिग्विजय यात्रा पे गए पूरे देश में तीन बार उसके उसके बाद उन्होंने क्यों वो केरल से आते थे तो वहां पे ही वो अपना मठवट स्थापित कर सकते थे। उन्होंने चारों दिशाओं में श्रृंगेरी दक्षिण में पूरी पूरब में उत्तर में बद्री और पश्चिम में द्वारका ये चारों धाम क्यों सेलेक्ट किए कि दिस इज द गोल्डन क्वाड्रीलैटरल। दिस इज
(18:34) दी ज्योग्राफी ऑफ़ इंडिया। और उसके सबसे ऊपर सर्वग्न पीठ जो कहलाता था वो था कश्मीर। हम् कश्मीर [गला साफ़ करने की आवाज़] द इंटेग्रल पार्ट ऑफ़ इंडियन सिविलाइजेशन एंड आर इंटेलेक्चुअल यू नो क्राउन ऑफ़ इंडिया। सो इन ऑल दीज़ और जब शंकराचार्य जी केरल से दिग्विजय पे निकले तो जब वो शायद महाराष्ट्र गए या फिर उत्तर प्रदेश गए। किसी ने ये नहीं बोला कि तुम किसी दूसरे राष्ट्र से हो। तुम यहां क्या तुम यहां क्या कर रहे हो? तुम किस भाषा से हमसे बात कर रहे हो? क्या हमने ये सोचा है कि जब हमारे पूर्वज भी तीर्थ यात्राओं में जाते थे। उस समय चारधाम की
(19:09) यात्रा से कोई वापस लौट आए तो दैट यूज्ड टू बी कंसीडर्ड अ ग्रेट फील। अभी की तरह हेलीकॉप्टर्स नहीं है कि आप सुबह जाके शाम को आ जाए। महीनों लगते थे तो ऐसे में कोई वैयमनसिता क्यों नहीं थी कि ये किसी और देश से आया है। दैट कॉमन सेंस ऑफ़ बिलोंगिंग अटल जी जैसे कहते थे कि भारतवर्ष एक जीता जागता राष्ट्र पुरुष है। सो दैट कंसेप्शन आई थिंक हिट्स एट द फंडामेंटल ऑफ आवर आइडेंटिटी एज अ नेशन। और इसको हैज़ बीन डिस्टोर्टेड फॉर अस। सो दैट हम अपने आप में कुंठित मानस से सोचे कि हम तो राष्ट्रीय नहीं थे। और उसी से लिंक एक चीज है कि आप आप और
(19:48) आपके दर्शक इफ यू रिकलेक्ट जो भी इतिहास हमने पढ़ा है स्कूलों में जो लड़ाईयां युद्ध हमें सिखाए जाते हैं वो एक बहुत ही लंबी श्रेणी है। ऐसी लड़ाईयों का जो हम हारे हैं। बिल्कुल। आप तरन के युद्ध हो, पानीपत की लड़ाई लड़ाई हो, बक्सर, प्लासी, एंग्लो मैसूर वॉर, मराठा वॉर, सिख वॉर ये सारे वॉर्स जो हैं वो लंबी एक कड़ी है। एक के बाद एक हम भारत और भारतवासियों के तौर पे हम हारते गए। कोई बाहर से आया और हमें यू नो डिस्ट्रॉय करके चला गया। पर आज इफ वी आर दी ओनली प्री ब्रोंज़ एज इरा सिविलाइजेशन जो अभी जीवित है पनप रहा है या सो देन देयर मस्ट बी सम वॉर्स दैट
(20:35) हमारे बेचारे पूर्वजों ने कुछ जीते भी होंगे ना कुछ तो उन्होंने भी शौर्य पराक्रम दिखाए होंगे तो ऐसी लड़ाईयों का ऐसे शूरवीरों और वीरांगनाओं का जिक्र क्यों नहीं होता गुजरात की एक नाईकी देवी नाम की एक रानी जो मोहम्मद घोरी को हरा देती है 1178 में कसरहाड़ा के युद्ध में हमने शायद उसके बारे में नहीं सुना है या कर्नाटक के रानी अबक्का चार [गला साफ़ करने की आवाज़] रानियां जिन्होंने पोर्चुगीज़ सेनाओं को पराजित किया था या कश्मीर में ललितादित्य मुक्त पीड़ा जिन्होंने अरब्स को पछाड़ दिया था और सिंध को छोड़ के वो बाके बाकी भारतवर्ष में अपना कब्जा नहीं कर पाए। ऐसे
(21:17) बहुत सारे अन्य लोग हैं। केरल में मार्तंड वर्मा जिन्होंने डच को हराया। बैटल ऑफ कोलाचल में वेलू नाचियार तमिलनाडु की शिवगंगा की रानी जिन्होंने वो शायद पहली और इकलौती रानी थी जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी को हरा के अपना अपनी रियासत वापस भी ले ली उनसे तो ऐसे लोगों का जिक्र हमें मिलता ही नहीं है। और गौरतलब बात ये भी है कि 712 में अरब इन्वेशन होता है मोहम्मद बिन कासिम। मोहम्मद बिन कासिम के बारे में हम सबको पता है अपने इतिहास में। पर ये हमें नहीं बताया जाता कि अरबों को भी सिंध पे कब्जा करने के लिए उनको समय 60 साल लगे। जो छ थे
(21:59) वहां के ब्राह्मण जो राजा और उनके पुत्र दहर उन्होंने 60 साल तक रेजिस्टेंस किया था। और अरब इन्वेशन के बाद जो पहली इस्लामिक सल्तनत भारत में स्थापित हुई वो 1206 में दिल्ली सल्तनत अह कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा हुई। तो 500 साल 72 टू 126 500 साल था उसमें हां 500 साल तक लोग आते रहे ऐसा नहीं है कि नहीं आए लोग आते रहे हमने रेजिस्ट किया और बहुत सारे ऐसे लोग महाराणा बप्पा रावल ललितादित्य का मैंने जिक्र किया यशोवर्मन कन्नौज के गुर्जर प्रतिहारा रूलर विक्रमादित्य राष्ट्रकूटा रूलर दंती दुर्गा ये सारे लोग आप देखिए उत्तर पश्चिम दक्षिण सब जगह से
(22:46) आते हैं कंट्री सेंट्रल इंडिया से भी हां भोज परमार ये सारे लोग आपस में तो लड़ते रहते थे पर बाहर से अगर कोई आए तो अपनी दुश्मनी भूल के वो एक गठबंधन कर लेते थे और उनको पछाड़ देते थे। बाद में उसके जाने के बाद फिर से लड़ाई शुरू हो जाती थी। तो ये चीजें जो भारत के बारे में है यह हमें समझाया नहीं जाता। और एक और बहुत बड़ी मुझे लगता है भूल जो भारतीय इतिहास लेखन में है ये बहुत ही दिल्ली केंद्रित इतिहास रहा है। हमारे पाठ्य पुस्तकों में भी हो या कहीं और भी दिल्ली और उसके आसपास के छोटे-छोटे जो इनसिग्निफिकेंट डायनेस्टीज बोल सकते हैं
(23:26) खिलजी तुगलक लोदी इन्होंने इस देश के लिए क्या कंट्रीब्यूशन किया मुझे पता नहीं है। तो उसके बावजूद दक्षिण भारत हो या उत्तर पूर्व भारत हो या मराठाओं का इतिहास हो उसको वो दर्जा नहीं दिया जाता जो इट डिर्व्स। सो आई थिंक व्हेन यू टॉक ऑफ़ द हिस्ट्री ऑफ़ भारत इट शुड रिप्रेजेंट एव्री पार्ट ऑफ़ भारत एंड बी एन इंक्लूसिव हिस्ट्री ऑफ एव्री रीजन ऑफ दिस कंट्री। तो विक्रम ये आपने बड़ी इंटरेस्टिंग बात बोली और मैं चाहता हूं कि कुछ हम एग्जांपल्स के साथ इसको और थोड़ा समझे मे बी हम वीर सावरकर जी की जी से शुरुआत करते हैं कि हमने उनको कैसे समझा समझाया गया लास्ट
(24:13) 10 साल हम हटा देते हैं उससे पहले हमारी क्या अंडरस्टैंडिंग थी और फैक्ट्स क्या हैं ये मैं जानना चाहूंगा जी आई थिंक वीर सावरकर इज अ सिम्टम ऑफ अ लार्जर यू नो थीम ऑफ हिस्ट्री राइटिंग इन इंडिया कि जहां हमें बताया गया है कि दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना घाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल नहीं गांधी जी और जो यू नो नॉन वायलेंस मूवमेंट है नोबडी इज डिस्पराजिंग दैट उसको कोई भी गौर नहीं कर सकता पर क्या उसी के वजह से हमें स्वतंत्रता मिली उस पे प्रश्न चिन्ह लग सकते हैं क्योंकि राइट फ्रॉम 1800 1857 फिर भी बाद में आता है। 1800 में दक्षिण
(25:00) में पालीगार वॉर्स जो हुए उसके बाद जो ट्राइबल रिवोल्ट्स हुए भील भी्स का रिवोल्ट हो या भगवान बिरसा मुंडा का रिवोल्ट हो या सन्यासी रिबेलियन जो बंगाल में हुआ और फिर 1857 1857 से लेके 1946 तक सशस्त्र क्रांति की एक अविरल धारा बहती रही। इस देश में तो अलोंग साइड पैरेलल एक तरह से नॉन वायलेंट स्ट्रगल भी चलता रहा व्हिच वाज़ेंट व्हिच यूनिफाइड द होल कंट्री विथ द सेंस ऑफ़ नेशनलिज्म उसके साथ-साथ एक सशस्त्र क्रांति का भी एक तबका बना ही रहा और उसमें वीर सावरकर का बहुत ही प्रमुख योगदान है। क्योंकि ही वाज़ नॉट ओनली जस्ट अ रेवोल्यूशनरी। ही वाज़ आल्सो एन
(25:44) आइडियोलॉग फॉर द रेवोल्यूशनरीज़। उनके द्वारा लिखा गया 1857 की किताब दैट वाज़ ऑलमोस्ट लाइक अ गीता फॉर ऑल द रेवोल्यूशनरीज। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य में बैठ के लंदन में बैठ के उन्हीं के दस्तावेजों को लेके हमारा इतिहास हमारे पक्ष से लिखा है। और उन्होंने बहुत साफ उसमें कह दिया था कि 1857 इस देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हमें मानना चाहिए ना कि सिपॉई म्यूटिनी। आई थिंक माननीय गृह मंत्री जी ने भी बताया था कि अगर वीर सावरकर नहीं होते तो 18757 वुड हैव बीन अ फुटनोट इन आवर हिस्ट्री कि बस कुछ छुटपुट लोग कुछ सिपाही थे वो ग्रीस वो
(26:25) कार्ट्रीजेस उसमें बी फॉर पोर्क लार्ड था तो उसके खिलाफत करते हुए कुछ लोगों ने बगावत की और उनको फांसी चढ़ा दिया गया बस एंड ऑफ़ स्टोरी बट ही सेड इट वाज़ नॉट जस्ट दैट इट क्रिएटेड दैट सेंस ऑफ़ नेशनलिज्म फॉर टू फंडामेंटल प्रिंस प्रिंसिपल्स व्हिच इज स्वराज्य और स्वधर्म के लिए हिंदू और मुसलमान दोनों साथ आए अगेंस्ट द ब्रिटिश ड्यूरिंग द 1857 वॉर। तो इफ यू सी सावरकर जी के बारे में इंडिपेंडेंस के बाद भी और इवन ड्यूरिंग द टाइम ऑफ प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी उनके बारे में काफी इज्जत से ही बात होती थी। जब उनका निधन हुआ 1966 में सावरकर जी का तब तत्कालीन
(27:06) प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने खुद एक मैसेज दिया था कि हिज कंट्रीब्यूशन टू द फ्रीडम स्ट्रगल इट ऑक्युपाइज़ अ वेरी इंपॉर्टेंट [गला साफ़ करने की आवाज़] रोल इन द एनल्स ऑफ़ द हिस्ट्री ऑफ़ द फ्रीडम मूवमेंट एंड ही वाज़ अ वेरी सिंबल ऑफ़ डेरिंग एंड करज एंड पेट्रियटिज्म। जब उनकी शताब्दी हुई जन्म शताब्दी तो तब भी इंदिरा गांधी ने उनके नाम से एक स्टैंप पेपर निकाला स्टैंप निकाला डार्क ये और आल्सो कमिश्ंड अ डॉक्यूमेंट्री इन हज़ नेम शी गव सम ऑफ़ हर पर्सनल मनी आल्सो फॉर अ फंड इन हिज नेम। अब क्या इंदिरा गांधी जी जो देश की इतनी शीर्षस्थ नेता थी,
(27:45) कांग्रेस की इतनी बड़ी नेता थी, उनको यह पता नहीं था कि यह तो जैसे आज बोला जाता है कि ये अंग्रेजों के पिट्ठू थे। ये इस्लामोफोब थे। ये गांधी के हत्यारे थे। ये सब उनको भी पता था। पर अगर यह सच होता तो उनको पता होता। तो ये 1990 तक सावरकर जी को महाराष्ट्र में आप चले जाइए। आई एम हाफ अ महाराष्ट्रियन। सो आई नो दैट इन महाराष्ट्र आज भी कांग्रेस हो कोई भी दल हो दे लुक अप टू सावरकर, लोकमान्य तिलक ये सारे जो लोग हैं आई मीन दे आर लुक्ड एट विथ रेस्पेक्ट। अह आई थिंक द प्रॉब्लम हैपेंड व्हेन द फर्स्ट एनडीए गवर्नमेंट केम टू पावर उम् अटल जी की
(28:26) सरकार जहां सबसे पहले अह सावरकर जी केम राइट इंटू दी पार्लियामेंट ऑफ इंडिया विथ हिज़ पोट्रेट अह देयर डायग्नोनली ऑपोजिट टू गांधी ऑलमोस्ट एज़ द टू पैरलल्स व्हिच वुड नेवर मीट अह एंड आई थिंक उसके बाद थोड़े दिन बाद यू हैड द देन पेट्रोलियम मिनिस्टर रामनायक जी हु पुट अ प्लॉक इन अह काला पानी इन हिज़ अह मेमोरी और जब यूपीए की सरकार आई तो दैट प्लक वाज़ रिमोटेड एंड मनी शंकर अय्यर ने काफी उनके बारे में आपत्तिजनक स्टेटमेंट्स दिए थे। तो आई थिंक टिल देन द कांग्रेस और सारे जो पॉलिटिकल पार्टीज हैं दे दे वर ओके टू अकोमोडेट सच अ ग्रेट पेट्रिएट।
(29:08) पिछले 10 साल में हमने ये भी देखा कि प्रोबब्ली वीर सावरकर इज़ गेटिंग ह ड्यू। अ एक कलेक्टिव कॉन्शियसनेस में उनकी कन्वर्सेशंस अब आ गई। अ कुछ ऐसी चीजें जो व्हिच यू थिंक दैट द गवर्नमेंट डिड राइट एंड [नाक से की जाने वाली आवाज़] हैज़ हेल्प्ड यू नो फर्दर बिल्ड ह लेगसी। देखिए द वेरी फैक्ट दैट वी कैन इवन टॉक अबाउट हिम ओपनली। वही इन 12 सालों का योगदान है। वी टॉक ऑफ द नेहरू टाइम्स ऑफ फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड सो ऑन। पर सबको पता होगा कि सावरकर जी एक बहुत प्रखर कवि भी थे। मराठी में कई उनके कविताएं यू नो दे आर वेरी फेमस जैसे जयोस्तुते श्री महान
(29:56) मंगले शिवास्पदे शुभदे या सागरा प्राण तडमडला तो उसमें जो वेरी फेमस म्यूजिक कंपोजर पंडित हृदयनाथ मंगेशकर जी लता जी और आशा जी के भाई तो उन्होंने सम ऑफ द पोएम्स ऑफ सावरकर ही हैड टेकन इट ट्यून इट एंड ऑल द सिस्टर्स लता जी आशा जी और खुद हृदयनाथ जी इनको गाए थे और रिकॉर्ड किए थे। एंड तब हृदयनाथ जी वाज़ इन ऑल इंडिया रेडियो फॉर द क्राइम ऑफ एक्चुअली टेकिंग सावरकर पो्स एंड ट्यूनिंग इट एंड सिंगिंग इट। ही गॉट अ शो कॉज नोटिस फ्रॉम ऑल इंडिया रेडियो सेइंग कैन यू एक्सप्लेन व्हाई यू हैव पिक्ड दिस। और मंगेशकर जी ने बोला गुड पोएट वंडरफुल पोयम दैट इज़ द रीज़न
(30:39) इनफ टू टेक अ थिंग टू बी ट्यून। एज़ सिंपल एज दैट। एज़ सिंपल फॉर दैट ही वाज़ एक्चुअली थ्रोन आउट ऑफ़ ऑल इंडिया रेडियो। सो मच सो फॉर फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन एंड फ्रीडम ऑफ स्पीच इन दोज़ डेज ऑफ़ हनी एंड ग्लोरी कि बात भी नहीं हो सकती। मैं यह नहीं कहता मैं हमेशा यही कहता हूं कि यू नो यू कैन लव समवन यू कैन हेट समवन आप बट योर लव और हेट्रेड फॉर समबडी शुड बी इनफॉर्म्ड कि आप उनके बारे में पढ़िए। उनके विचार पढ़िए। किसी भी व्यक्ति का केवल वीर सावरकर का नहीं किसी भी व्यक्ति का। आप पढ़िए उनके बारे में। उसके बाद अगर आपको लगे कि मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता तो ठीक है। पर यू नो
(31:18) बेस्ड ऑन रेटोरिक एंड मिसइफेशन और हाफ ट्रुथ्स टू एक्चुअली रिमूव इवन डिस्कशन ऑन द पर्सन पीपल पीपल लॉस्ट देयर जॉब्स जो मैंने पहले बताया था हृदय जी लॉस्ट हिज जॉब। सो, आई डोंट नो मे बी प्रायर टू 2014 इफ दिस बुक ऑफ़ माइंड हैड कम इट वुड नॉट हैव सीन द लाइट ऑफ़ डे। इट वुड हैव बीन बैंड। अह और यू नो इवन डिस्कशन लाइक दिस इन द मेन स्ट्रीम। प्रो और एंटी इज़ ओके। उनके विरुद्ध कोई बोले। आई एम नॉट हिज़ अ लॉयर टू एक्चुअली यू नो डिफेंड हिम एवरीवेयर। बट अ डेमोक्रेटिक सिस्टम रिक्वायर्स दैट पीपल विद डिफरिंग व्यू पॉइंट्स एक्चुअली टॉक टू ईच अदर। और
(31:59) द इंडियन फिलोसोफिकल एंड नॉलेज सिस्टम वही है कि वाद विवाद तर्क इन सब से ही लोगों को यू डिफिट अनदर पर्सन शंकराचार्य जी दिग्विजय पे गए ही डिड गो एंड किल एंड स्लॉटर एंड ही कन्वर्टेड अदर पीपल थ्रू लॉजिक्स थ्रू आर्गुमेंट्स तो वो चीज अगर हमारे देश में ना हो एंड यू हैव दिस ब्लासफ मी कि इनके बारे में बात ही नहीं हो सकती दैट इज द वेरी बैड थिंग एंड आई थिंक इन द लास्ट 10 12 इयर्स दैट सिचुए सिचुएशन हैज़ चेंज वेयर एटलीस्ट इन द ओपन पीपल आर राइटिंग और मेरे किताब लिखने के बाद बहुत सारे वेस्टर्न एकेडमिशियंस हैव सडनली रिसकवर्ड सावरकर एंड दे आर राइटिंग
(32:40) यू नो डैमिंग बुक्स अबाउट हिम व्हिच इज़ परफेक्टली फाइन आई मीन सम ऑफ़ इट इज़ यू नो ट्राइंग टू रिबर्ट व्हाट आई से बट दैट इज़ वेरी एनकरेज्ड डोंट मेक एनी इशू अ टैबू उसके बारे में डिस्कशन कीजिए एंड देन लेट इट बी अ वैरी इंटेलेक्चुअल आर्गुमेंट एंड आई थिंक द वे द काला पानी आल्सो हैज़ कम इनू पीपल्स कॉन्शियसनेस। मुझे पता नहीं है हाउ मेनी ऑफ़ अस रेड अबाउट काला पानी इन आवर ग्रोइंग अप इयर्स इन द फॉरगेट सावरकर जी बट देयर वर 100्स ऑफ़ अदर्स हु वर देयर इन यू नो द जेल्स ऑफ़ कालापानी द बेसिक बेसिक ह्यूमन फैसिलिटीज़ नॉट गिवन टू द पॉलिटिकल प्रिजनर्स देयर
(33:22) मोस्ट ऑफ़ देम दे वर इन देयर टीस और अर्ली 20ज़ उनको ना यू नो अच्छा अच्छी अच्छा खाना दिया जाता था दे डिड नॉट इवन हैव द बेसिक फैसिलिटी ऑफ़ गोइंग टू द टॉयलेट। और अपने ही सेल में दे हैड टू डिफकेट एंड यूरिनेट एंड स एंड स्टैंड एंड स्लीप अमिट्स दैट। और दिन भर वो कोलू का बैल का पनिशमेंट जहां पोर्ट ब्लेयर की कड़कती धूप में उनको वो यू नो ऑइल दे हैड टू एक्सट्रैक्ट ऑइल। और अगर 30 पाउंड्स ऑइल नहीं निकले। एक आउंस भी कम हो उससे तो आपको कोड़े पड़ते थे। आपको खाना नहीं मिलता था। आज आप पूछ लीजिए देश की युवा जनता को कि पोर्ट ब्लेयर में जिन लोगों ने काला पानी में
(34:06) शहादत दी या बलिदान दिए पांच ऐसे नाम गिना दीजिए हम बगले झांकने लगेंगे आई थिंक द वेरी फैक्ट दैट द प्राइम मिनिस्टर हिमसेल्फ वेंट टू पोर्ट ब्लेयर टू द कालापानी टू सावरकर सेल आई थिंक दैट वाज़ अ वेरी पावरफुल मैसेज कि ये स्थान जो है ये एक तीर्थ स्थान है हमारे हमारे देश के लिए थैंक्स टू दी सैक्रिफाइसेस ऑफ़ दोज़ हंड्रेड्स एंड थाउजेंड्स ऑफ अनसंग अननोन यू नो ब्रेव हार्ट्स आज आप और हम इस स्वतंत्र हवा में सांस ले पा रहे हैं। द लीस्ट वी कैन डू एस अ ग्रेटफुल नेशन इज टू एटलीस्ट नो कि वो लोग कौन थे? वो भी हम भूल जाए तो व्हाट एन अनग्रेटफुल नेशन वी
(34:49) वुड बी एंड ऐसा एक कृतज्ञ राष्ट्र जो है वो आगे हाउ कैन इट मूव फॉरवर्ड विथ विदाउट हैविंग दिस बेसिक सेंस ऑफ़ ग्रेटट्यूड। सो आई थिंक मेनी ऑफ़ दीज़ आस्पेक्ट्स दैट दैट हैव हैपेंड इन द रीसेंट पास्ट हैव ब्रॉट बैक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जो प्रतिमा है दिल्ली में जहां पंचम जॉर्ज की मूर्ति थी वहां जाके उसको स्थापित करना हो या फिर प्रधानमंत्री संग्रहालय में नॉट ओनली जस्ट वन पर्सन बट अ गैलेक्सी ऑफ़ लीडर्स आई थिंक दे आल्सो अ म्यूजियम फॉर द फॉर बिरसा मुंडा एंड द यू नो ट्राइबल रिव्ट्स आई थिंक वाइडनिंग द फोकस ऑर द कैनवस ऑफ़ द फ्रीडम स्ट्रगल आई थिंक दैट इज व्हाट हैज़
(35:32) हैपेंड इन द लास्ट 12 इयर्स व्हिच इज़ वेरी इम्पोर्टेन्ट। ऑसम यू यू स्पोक अबाउट द फोरगॉटन हीरोज़ अह ऑफ़ इंडिया। तो उसमें अहम डायनेस्टी की बात आती है। तो ये क्या डायनेस्टी थी? थोड़ा बताइए। और क्या हमें सिखाया गया और फैक्ट क्या था? हम में से कितने लोगों को एक या दो अहोम राजाओं का नाम भी हम शायद गिन नहीं पाते। जबकि अहोम्स रूल्ड फॉर 600 इयर्स दे वर अमंग द लॉन्गेस्ट रेनिंग रॉयल हाउसेस और ये केवल अहोम नहीं वो दैट एंटायर रीजन जो काम रूप कहलाता था अभी असम कहलाता है असम का ही मीनिंग है असमा जिसको जिस व्हिच कैन नॉट बी कैप्चरर्ड और असमिया अहोमिया
(36:21) भाषा में स और ह एक जैसा होता है तो असम बिकम्स अहोम तो आप देखिए उससे पहले भी अहम तो बाहर से आए थे बट देन दे दे एक्चुअली बिकम केम अस इंटीग्रेट हुए इन द लोकल मिल बट उनसे पहले भी आप देखें कि व्हेन बख्तियार खिलजी गोज़ ऑल द वे टू बंगाल बंगाल को कैप्चर करता है। फिर नालंदा जाता है और नालंदा का ध्वंस करके वी ऑल नो दैट जब नालंदा गिरी थी तो सिक्स मंथ्स ऑलमोस्ट सिक्स मंथ्स मिलियंस ऑफ मैनुस्क्रिप्ट्स देयर पांडुलिपियां जलती रही। तो नालंदा का ध्वंस करके जब बख्तियार कामरूप पहुंचा तो वहां का एक लोकल राजा था पृथु तो द काइंड ऑफ रेजिस्टेंस दैट वाज़ गिवेन वाज़ सच दैट
(37:08) सच अह यू नो इंपीरियल आर्मी अह ही हैड टू फ्ली लिटरली यू नो सेविंग हिज़ लाइफ। तो तब से लेके टिल दी एंड दी अस दी अहोमिया जो थे दे मैनेज्ड टू मेंटेन द सोवनिटी एंड इंडिपेंडेंस बार बरिंग अ फ्यू डेकेड्स हियर एंड देयर। तो ड्यूरिंग शाहजहां एंड औरंगजेब्स टाइम पार्ट ऑफ वेस्टर्न आसाम वास कैप्चरर्ड एंड तब चक्रध्वज सिंघा नाम के अहोम रूलर भी थे। बट दे टूक इट ऑन देमसेल्व्स लाइक अ प्रोजेक्ट कि वी हैव टू रिगेन आवर ऑनर एंड आई थिंक दिस इज़ अ केस स्टडी जो बी स्कूल्स में पढ़ाया जाना चाहिए कि द डेविड एंड गोलायत फाइट में जो अंडर डॉग कैसे विन होता है कि दे वर अ स्मॉल
(37:54) ग्रुप विथ हार्डली एनी एमुनेशन बट विथ सिंगल पॉइंटेड फोकस एस टू हाउ टू डिफिट द मुगल्स एंड टू रिगेन आवर किंगडम एंड आवर ग्लोरी बैक दे सेट ऑफ ऑन अ मिशन और उसमें राजा का जो सेनापति होता है लचित अह बोर हुकॉन अह हु इज़ द मिलिट्री कमांडर ऑफ़ द होम राजा दे मेक इट देयर नेशनल मिशन ऑलमोस्ट फॉर टू थ्री इयर्स एंड देन औरंगजेब सेंट्स द लार्जेस्ट इंपीरियल आर्मी ही हैज़ अंडर राजा राम सिंह ऑफ़ जयपुर अह टू डिफिट दीज़ रिबेल्स एंड व्हाट फॉलोज़ देर आफ्टर इज़ नोन ऐज़ द बैटल ऑफ़ सराई घाट। यह 1671 की बात है। वेयर दी एसएमीस विथ देयर रुडीमेंट्री यू नो मैकेनिज्म वेपन्स
(38:38) हो या व्हाटएवर दे हैड लॉट ऑफ़ बमबू देयर देयर वर लॉट ऑफ़ एलीफेंट्स। तो जो अपने स्ट्रेंथ्स हैं प्लेइंग अपॉन देयर स्ट्रेंथ्स ड्रैगिंग द एनिमी टू योर स्ट्रेंथ एंड डिफिटिंग देम थ्रू दैट। नेवल वॉरफेयर में मुगल्स वर नॉट अवेयर सो मच ऑफ़ द लोकल ज्योग्राफी। सो दे पुल्लड देम टुवर्ड्स अ नेवल बैटल एंड इन द बैटल ऑफ सराई घाट द मुगल आर्मी व्हिच वाज़ द लार्जेस्ट इंपीरियल आर्मी दैट वाज़ सेंट टू आसाम वाज़ डिफिटेड बाय दिस हैंडफुल ऑफ़ पीपल इन द बैटल ऑफ़ सराई घाट एंड सो अशेम्ड वाज़ औरंगजेब दैट ही नेवर लुक बैक ऐट आसाम आफ्टर दैट एंड इट कंटिन्यू टू रिमेन असम
(39:16) या यू नो इनविंसिबल बट द बैटल ऑफ़ सराई घाट आल्सो टिल आई थिंक रिसेंटली आफ्टर दिस गवर्नमेंट एंड द गवर्नमेंट ऑफ़ आसाम अंडर मिस्टर शर्मा। आई थिंक दैट इज दे सेलिब्रेटेड द 400 बर्थ एनिवर्सरी ऑफ़ लचित। मैं गया था उसमें भाग लेने के लिए। दिल्ली में विज्ञान भवन में कार्यक्रम हुआ था। एंड इट वास फैसिनेटिंग टू सी फ्रॉम द दिल्ली एयरपोर्ट टिल द वेन्यू हर फ्यू मीटर्स में देयर वा ह्यूज बोर्ड्स ऑफ़ लचित एंड हिज पीपल यू नो लिटरली दैट वॉर क्राई। जी। इट वास लिटरली कि इतने यू नो शताब्दियों तक आप मुझे भूल गए थे। सो आई हैव टू लिटरली स्क्रीम टू
(40:01) मेक द पीपल ऑफ़ दिल्ली। नो दैट आई एक्सिस्ट। एंड आई थिंक ही कम बैक इंटू कॉन्शियसनेस इन द मैनर दैट ही डिसर्वार्स। एंड ऑफ़ कोर्स द इंडियन आर्मी आप दे टू गिव अ मेडल इन द नेम ऑफ़ लचित बरकोगान फॉर द बेस्ट अह आउटगोइंग कैडिट यू नो फ्रॉम 2000 सो द ईयर 2000। बट जो जनमानस है उनको अहोम्स के बारे में हो या लचित के बारे में उतनी जानकारी नहीं थी। लाइक द रेस्ट ऑफ द नॉर्थ ईस्ट डू वी नो अबाउट द रूलर्स ऑफ़ मणिपुर और अबाउट त्रिपुरा द माणिक्य बर्मन रूलर्स हो या यू नो द रूलर्स ऑफ़ मणिपुर जहां पे रासलीला जहां पे हिंदूइज़्म एज अ रिलिजन बिकम अ स्टेट रिलजन इन मणिपुर
(40:44) एंड भाग्यचंद्र जय सिंह जिन्होंने रास जो लीला थी। गोविंद देव जी की मंदिर इंफाल में स्थापित की। इन सबके बारे में आई थिंक देयर नीड्स टू बी दैट एक्सपेंशन ऑफ द कैनवस ऑफ व्हाट इंडियन हिस्ट्री एक्चुअली इज। ये आपने जो बात बोली ऑफ एक्सपेंशन ऑफ इंडियन हिस्ट्री एंड मेन स्ट्रीमिंग इट। इसमें अह जब हम बड़ी मूर्तियां, प्रतिमाएं और स्टैचूस बनाते हैं। उसका क्या सिग्निफिकेंस जैसे लचित और भूकंग का एक 125 फीट का स्टैचू बनाया। माननीय प्रधानमंत्री ने इनोगेट किया। तो कई बार एक उसपे एक व्यू आता है
(41:29) कि ये स्टैचू बनाने से क्या होता है? राइट? तो फॉर द यंग ऑडियंस आप ये बताइए कि व्हाट इज इट सिग्निफिकेंस एंड एंड डू यू सपोर्ट दिस काइंड ऑफ़ इनिशिएटिव्स? द फर्स्ट थिंग दैट इट्स ऑलमोस्ट लाइक मूर्ति पूजा क्यों होती है ना? तो आई मीन ईश्वर सगुण है निर्गुण है हमें पता नहीं फिर भी टू फोकस ऑन द निर्गुण विदाउट हैविंग अ प्रतिमा इज प्रोबब्ली डिफिकल्ट तो पहले हम मूर्ति की पूजा करते हैं बट वी शुड ट्रांसेंड द आइडल एंड गो टू द स्पिरिट स्पिरिट ऑफ इट आई थिंक वी व्हाइल दिस इज़ कमेंडेबल जिस देश में इन सब वीर वीरांगनाओं के नाम भी किसी को पता नहीं है
(42:09) वहां आई थिंक द टू टू लिटरली वेक मेक पीपल अप फ्रॉम द स्लमबर दी जॉइंट आइडल्स प्ले अ वेरीेंट रोल बट आई थिंक वी शुडंट रिमेन रेस्ट्रिक्टेड ओनली टू दैट कि अच्छा हमने मूर्ति बना दी तो अब हमारा काम खत्म। आई थिंक द वर्क स्टार्ट्स आफ्टर दैट। जब जनमानस जागृत हो जाए उसके बाद यू शुड आस्क हु इज दिस लचित? जिसकी इतनी बड़ी अह प्रतिमा यहां पे स्थापित हुई है। व्हाट उनकी उपलब्धि क्या है? हमें उनके जीवन से क्या सीख मिल सकती है? आई थिंक दोज़ आर मोरेंट क्वेश्चंस। द फर्स्ट स्टेप एंड एनेंट स्टेप इज़ पुटिंग द आइडल। बट आई थिंक अ लॉट ऑफ़ अस फील अच्छा मूर्ति लगा दी तो
(42:50) हमने अपना जवाबदारी हो गया हमारा और कुछ हम हमें करने की जरूरत नहीं है। व्हिच इज़ रोंग। एंड आई डोंट थिंक दैट इज़ द गवर्नमेंट्स वर्क। अह आई थिंक देयर वर्क इज़ टू एट लीस्ट यू नो, इंस्पायर पीपल वे अवेकन देम फ्रॉम देयर स्लम। उसके बाद इट इज अप टू सिविल सोसाइटी पीपल लाइक अस इन द मीडिया इन स्कॉलरशिप इन हिस्टोरियोग्राफी टू एक्चुअली मेक दीज़ आइडल्स कम अलाइव एंड एक्चुअली [नाक से की जाने वाली आवाज़] यू नो टेल द कंट्री मेन एंड वीमेन एस्पेशली द यंग एस टू व्हाट इज द इंपोर्टेंस ऑफ दीज़ पीपल हु आर बीइंग आइडलाइज्ड लिटरली ग्रेट थोड़ा सोमनाथ मंदिर के बारे में बात
(43:28) करते हैं सोमनाथ मंदिर के बारे में हमने जब किताबों में पढ़ा बचपन में जब हम अपने टेक्स्ट बुक्स में पढ़ते थे तो वो एक इकोनॉमिक प्लंडर की तरह दिखता था हमें कि भाई आए और लूट के ले गए हम लेकिन उसका क्या सिग्निफिकेंस था उसके पीछे की कहानी क्या है और क्या ऐसे फैक्ट्स हैं जो अभी हिंदुस्तान का हर व्यक्ति शायद नहीं जानता उस बारे में सोमनाथ हो या काशी विश्वनाथ ये सारे जो इंपॉर्टेंट तीर्थ स्थल जहां पे प्लंडर एंड लूट हुए आई थिंक इट वाज़ एज इफ शाइन फेल बट शाइन रोज़ एंड द हिंदूज़ ऑफ़ भारत नेवर गव अप। आई थिंक एज मच एस दीज़ आर पेनफुल स्टोरीज ऑफ़
(44:16) डिस्ट्रक्शन, प्लंडर एंड लूट। साइमलटेनियसली आई थिंक जो सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जो मनाया जा रहा है। आई थिंक इट इज़ नॉट स्वाभिमान किस चीज का कि महमूद गजनी ने आके तोड़ दिया। इसके हजारवीं जयंती मनाने की क्या जरूरत है? इट इज नॉट यू नो कमेरेटिंग दी डिस्ट्रक्शन बट डिस्पाइट द डिस्ट्रक्शन कि हम उठ खड़े हुए। जैसे वो एक मोहम्मद इकबाल का ये है कि कुछ तो है कि हस्ती मिटती नहीं हमारे इतनी। तो वो [गला साफ़ करने की आवाज़] कुछ क्या है? इट इज़ नॉट जस्ट इट इज़ बोथ फिजिकल रेजिस्टेंस बट इट्स आल्सो दिस नेवर से डाई एटीट्यूड ऑफ़ रेजिलियंस। एंड आई थिंक
(44:51) सोमनाथ अह सिंबलाइज़ज़ दैट वेरी थिंग। पर उसमें भी जैसे हमें द काइंड ऑफ डिस्टॉर्शन दैट हैज़ हैपेंड इंक्लूडिंग यू नो एमिनेंट हिस्टोरियंस ऑफ़ दिस कंट्री लाइक प्रोफेसर रोमिला थापर हु इज़ रिटन अबाउट सोमनाथ से ये तो थियोलॉजिकल रीज़न था ही नहीं इट वाज़ जस्ट फॉर प्लंडर एज़ यू सेड अब व्हाट डू द कंटेंपररी सोर्सेस ऑफ़ दैट टाइम से अब महमूद गजनी आया वहां से गजना से ही हैड हर्ड अबाउट दिस प्लेस कॉल्ड सोमनाथ जहां पे काफिर लोग जाके की पूजा करते हैं और मानते हैं कि उन्हें मोक्ष मिल जाती है। प्रभासपाटन जो क्षेत्र है वो महाभारत के टाइम से इट इज़ भगवान कृष्ण ने अपना देह
(45:33) वहां त्यागा है। तो बिकॉज़ ही सेड दैट इज द बेस्ट प्लेस फॉर मोक्ष। तो उसके प्रति बहुत लोगों की आस्था है। तो उसको किसी तरह ध्वस्त करना है। यह उनके खुद के कोर्ट हिस्टोरियंस लिखते हैं। अलबरूनी हो या उनके साथ एक अल उतबी नाम का एक आदमी जो आता है किताब अल यामिनी उसका लिखा हुआ। ही इज़ राइटिंग अ आई विटनेस अकाउंट। वो वो इंटेंट बिल्कुल क्लियरली दिख रहा है उसमें। मोहम्मद गजवी जब उसके साथ-साथ वो आ रहा है कूच पे टू इंडिया एंड ही इज़ पुटिंग अ डायरी सेइंग यहां हम गए फिर यहां गए तो उसमें देयर आर नो टू व्यूज अबाउट इट तो देन ही कम्स टू गुजरात और वहां चालुक्य
(46:15) वंश का जो राजा था भीमदेव ही इज़ नॉट यू नो एक्सपेक्टिंग दिस अटैक सो ही रंस अवे एंड सो गजनी है मोहम्मद गजनी हैज़ अ वेरी इजी यू नो वे ऑल द वे टू सोमनाथ पर द गौरतलब जो बात है कि वह मानता था कि अरे राजा ही भाग गया है तो आसानी से इस मंदिर को ढा जा सकता है। बट वहां जब वह जाकर देखता है कि लगभग 5000 सामान्य हिंदू जो अलग-अलग जाति वर्णों से आते थे कृषक हो या किसान हो सब लोग अपने टूटे फूटे औजार ले खड़े हैं मंदिर की प्रतिरक्षा के लिए और उसको तीन दिन लगता है उन सबको मार के मंदिर में प्रवेश करने के लिए जब कि उसको लगा कि आराम से चले जाओ राजा ही भाग गया है मैं
(47:00) 10 मिनट में इसको ध्वस्त कर सकता हूं तो और जब वो जाता है अंदर तो सारे पुजारी भाग के आके उसको बोलते हैं कि तू तो लुटेरा है। तुम्हें जितना धन चाहिए हम दे देंगे। तुम धन ले चले जाओ। हमारे भगवान को छोड़ दो। तब अलतबी लिखता है कि मोहम्मद गजनी यू नो हंसते हुए बोलता है कि अगर मैं ऐसा करूं तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेरा नाम इतिहास में बुतों का व्यापारी मूर्तियों के व्यापारी के तौर पर दर्ज होगा। जबकि मैं चाहता हूं कि मेरी जो लेगसी है बुत शिकन या मूर्तियों का भंजक के नाम से मुझे लोग याद रखें। तो ये एक फैक्ट है और जब वो
(47:38) वापस भी जा रहा होता है वेरी इंटरेस्टिंगली अ कॉमन हिंदू कम्स देयर पोजिंग एज अ ट्रैवल गाइड। यह दे लूज़ देयर ट्रैक व्हाइल दे आर गोइंग बैक। एंड दे द एंटायर आर्मी इज़ वेरी थस्टी। तब ये आदमी आता है सेइंग आई विल शो यू द वे एंड ही बरगला के उनको रेगिस्तान के अंदर अंदर अंदर कहीं ले चला जाता है देन मोहम्मद गजनी को शक होता है कि ये समथिंग इज फिश तब उसको पकड़ के पूछा जाता है कि कौन हो तुम क्यों हमें यहां पे लेके जा रहे हो तो देन ही रिवील्स कि आई एम नो ट्रेवल गाइड मुझे पता नहीं कि यहां पे तालाब या कुछ कहां पे है यू डिस्ट्रयड आवर गॉड एंड तो
(48:20) आई केम हियर टू टेक रिवेंज कि आप सबको बरगला कि कहीं गुमराह कर दूं और तुम और तुम्हारे सारी जो सेना है वो भूख और प्यास से मर जाए। तो इस तरह की जो कॉन्शियसनेस अबाउट दिस वास देयर इन द कॉमन कॉमन पीपल फॉरगेट राजे रजवाड़े इन सब लोगों तो जब ये है जब वो खुद उसके कोर्ट हिस्टोरियंस बोल रहे हैं कि ये थियोलॉजिकल रीज़ंस के लिए था कि काफिरों के धर्म को नीचा करने के लिए मैंने किया। तो आज के इतिहासकार उस पे कवर फायर क्यों देना है उनको कि ये तो जी प्लंडर के लिए था इकोनमिक दैट वास वन रीजन नो डाउट बट दैट वास नॉट द ओवराइडिंग रीज़ ठीक है मान लेते हैं पहली बार प्लंडर के
(49:01) लिए था औरंगजेब के टाइम पे जब उसने सोमनाथ को मंदिर को फिर से ढाहा था तब वहां पे कौन से ट्रेजर थे तब तो कोई राजा था नहीं वहां गुजरात के नवा सुल्तानंस वहां रूल करते थे तो उसके बाद कौन से हिंदू ने वहां वहां पे ट्रेजर रखा कि वो मंदिर को तोड़ के चले गए। तो सोमनाथ में एक के बाद एक अलाउद्दीन खिलजी हो या गुजरात के सुल्तान हो मोहम्मद बेगाड़ा वगैरह उन सबके खिलाफ लोग खड़े ही रहे। वहां के वीर हमीर जी गोहिल नाम के एक आदमी और जालौर के चौहान ये सारे लोग मंदिर की प्रतिरक्षा के लिए कन्नड़ दे
(49:47) [नाक से की जाने वाली आवाज़] नाम के जालौर के चौहान ये सभी लोग बार-बार एक रेजिस्टेंस देते रहे। मंदिर गिरे पर मंदिर फिर से उभरे भी और देश की जो आस्था और अस्मिता थी वो खत्म होने नहीं दिया। अच्छा एस आई इंस्टॉलिंग मैं आपसे एक और सवाल पूछना चाहता हूं। दिस इज अबाउट यू नो दी एंटीक्स एंड एंटीक्विटीज कमिंग बैक टू इंडिया। कुछ मैं फैक्ट्स देख रहा था। 67 इयर्स में 13 एंटीक्स हमारे पास आए। दिस वास टिल 2014 2014 से लास्ट यू नो 11 ऑड इयर्स 650 प्लस एंटिक्स हैव कम। अ एक डिपार्चर हम देख रहे हैं सरकार की दे आर नाउ नॉट
(50:35) लुकिंग एट देम एस जस्ट म्यूजियम पीसेस फ्रॉम द वेस्ट बट दे आर रिकग्नाइजिंग इट एस सिविलाइजेशनल प्रॉपर्टी। यस। सो एस अ हिस्टोरियन आप इसे कैसे देखते हैं और इसकी क्या सिग्निफिकेंस है? आई थिंक इट्स एन एक्सट्रीमलीेंट स्टेप कि लोग बोलते हैं ब्रिटिश म्यूजियम इज द वर्ल्ड्स बिगेस्ट चोर बाजार जहां दुनिया भर की लूट वहां पे एकत्रित की गई है। तो वहां से द वेरी फैक्ट दैट द लीडर ऑफ़ द कंट्री इज़ मेकिंग इट इंपॉर्टेंट कि हमारे देश का जो धरोहर चुरा के वहां रखा गया है, उसको वापस हमें दे दीजिए। एंड एंड द ईज़ विथ व्हिच इट इज़ हैपनिंग शोज़ दैट अगर हम
(51:11) सही तरीके से पूछते तो पहले भी मिल सकता था। ऐसा नहीं कि द फॉरेन गवर्नमेंट्स वांट टू कीप इट विद इट। इट्स जस्ट दैट वी डिड नॉट एवर केयर टू आस्क बिकॉज़ हमें नहीं लगा कि वो इंपॉर्टेंट है। आई थिंक जो अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति भी आई वहां से एंड इट इज़ एस्टैब्लिश्ड एट द काशी विश्वनाथ प्रांगण टू इट्स वेल डिर्व्ड ग्लोरी। आई थिंक दैट इज़ अ वेरीेंट स्टेप। और एज वी स्पीक आई थिंक नेदरलैंड्स चोला जो कॉपर प्लेट्स प्लेट्स है दीज आर कमिंग बैक। आई थिंक ऑल दीज आई थिंक वी एस इंडियंस नीड टू स्टार्ट वैल्यूइंग आवर पास्ट एंड आवर हिस्ट्री एंड
(51:48) आर्टिफैक्ट्स, मोन्युमेंट्स, मैन्युस्क्रिप्ट्स, डॉक्यूमेंट्स, दीज़ आर वेरी वेरी इंपॉर्टेंट एलिमेंट्स ऑफ़ आवर पास्ट। एंड विदाउट प्रिज़र्विंग देम और वैल्यूइंग देम, आई डोंट थिंक वी विल हैव वैल्यू फॉर आवर हिस्ट्री आल्सो। अच्छा विक्रम आप आप हिस्टोरियन हो अतीत आपके लिए बड़ा इंटरेस्ट रखता है लेकिन अब जो जो अभी का जो वर्तमान है और भविष्य की जो टेक्नोलॉजीस हैं वो भी बहुत बड़ा रोल प्ले कर रही हैं अतीत को बचाने में उसके उसको प्रिजर्व करने में तो अब जैसे मैं आई वास रीडिंग अप ज्ञान भारतम करके जो डिजिटाइजेशन का जो इनिशिएटिव है सरकार का
(52:30) जी मैनुस्क्रिप्ट्स का जी इसका क्या सिग्निफिकेंस है? हाउेंट इज दिस इनिशिएटिव? आई थिंक एज अ हिस्टोरियन इट वार्म्स माय हार्ट कि सच अ मिशन हैज़ बीन लॉन्च्ड। ये पहले था एक नमामि करके नेशनल मैनुस्क्रिप्ट मिशन व्हिच वाज़ आल्सो पार्ट ऑफ़ आईजीएनसीए। पर शायद उसमें उतना उतनी गति नहीं आ रही थी। तो आई थिंक रिसेंटली आई थिंक लास्ट ईयर ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर इनोगेटेड द एंटायर इनिशिएटिव ऑफ़ ज्ञान भारतम वेयर आई थिंक इट्स पब्लिक क्राउड सोर्सिंग ऑफ मैनुस्क्रिप्ट्स। जिन-जिन लोगों के पास मैनुस्क्रिप्ट्स हैं, वो बस सरकार को लिख दें कि हमारे पास यह इंपॉर्टेंट
(53:05) मैनुस्क्रिप्ट है और इसको मे बी द डिजिटाइजेशन यूनिट विल गो देयर एंड इफ यू डोंट वांट टू हैंड ओवर योर कलेक्शन द यूनिट विल गो देयर डिजिटाइज इट एंड कीप इट इन अ सेंट्रल रेपोजिटरी एंड एंड व्हिच इज़ एक्सेसबल फॉर ऑल फॉर एवरीबडी एवरीबडी। आई थिंक दैट इज द बेस्ट पार्ट एंड वी आर सीइंग आप आज भी जो नेशनल आर्काइज ऑफ़ इंडिया का वेबसाइट है वहां आप जाइए तो यू नो आई यूज़ इट सो रेगुलरली सो आई कीप सीइंग कि ऑन अ डेली बेसिस देयर इज़ अ काउंटर सेइंग सो मेनी रिकॉर्ड्स डिजिटाइज्ड दिस इज़ द अभिलेख पटेल ऑफ द नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया तो सम कुड बी डिजिटाइज्ड ऑन डिमांड या सम आर
(53:42) ऑलरेडी डिजिटाइज्ड एंड ऑफ़ कोर्स इफ यू वांट अ कॉपी वन नीड्स टू पे फॉर इट व्हिच इज़ ओनली अह नेचुरल अह बट आई थिंक द वेरी एफ्फर्ट अह इन दिस डायरेक्शन इज़ एक्सट्रीमलीेंट बिकॉज़ रिमेंबर दीज़ मैनुस्क्रिप्ट्स वुड बी इन स्क्रिप्ट्स व्हिच वी प्रोबब्ली कैन नॉट इवन रीड नाउ। ब्राह्मी में हो सकते हैं, खरोष्ठी में हो सकते हैं या फिर शारदा लिपि जो कश्मीर की लिपि हो या ओल्ड तमिल स्क्रिप्ट हो। तो इन सबका एक सेंट्रल रेपोजिटरी करके यूजिंग मॉडर्न टेक्नोलॉजी टू एक्चुअली मेक दीज़ एक्सेसबल टू स्कॉलर्स टुडे। आई थिंक दैट्स अ वेरी वेरी वेलकम
(54:16) इनिशिएटिव। अच्छा आपने मॉडर्न टेक्नोलॉजीस की बात की। सो वन इनिशिएटिव जो जिसके साथ आप जुड़े हैं व्हिच इज नाउ एआई। तो ये क्या इनिशिएटिव है? एंड हाउ आर यू यूजिंग एआई टू टू यू नो फर्दर यू नो एक्सपेंड योर वर्क इन हिस्ट्री। भारत की जो आत्मा है वह भारतीय भाषाओं में बसता है। तो द वेरी फैक्ट दैट इवन टू हैव माय बुक्स ट्रांसलेटेड इनू इंडियन लैंग्वेज इट वुड टेक दो साल तीन साल सावरकर जी की जो किताबें हैं मराठी में आने में उसको दो साल लग गए। मैंने मैसूर राजवंश पे जो लिखा है मेरी सबसे पहली किताब 2008 में वो अब तक कन्नडा में नहीं
(54:58) आया है। सो आई थिंक दीज़ वर प्रॉब्लम्स नॉट ओनली मी अ लॉट ऑफ़ अदर ऑथर्स आल्सो फेस जो अंग्रेजी में लिखते हैं। बिकॉज़ ट्रांसलेशन इन इंडिया इज अ वेरी स्लो लेबोरियस मैनुअल प्रोसेस कि हाथ से कोई लिख के उसको कितने सालों साल लगता है उसको एंड इट्स नॉट इवन इकोनॉमिकली लुकटिव फॉर देम। सो दैट्स व्हेन आई वास डिस्कसिंग दिस विथ अनदर फ्रेंड ऑफ़ माइन कॉल्ड संदीप सिंह चौहान जो टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड से आते हैं कि कैन दे बी अ टेक्नोलॉजी स्यूशन फॉर दिस। एंड दैट्स हाउ वेरी ऑर्गेनिकली अबाउट एक साल से ज्यादा हुआ है। जब भी एएनआई टुगेदर स्टार्टेड दिस कंपनी कॉल्ड नाव एआई। नाव
(55:35) यानी बोट। तो जैसे एक नाव जो है एक छोर से दूसरे छोर तक जाता है। ये टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म है जो एक भाषा से दूसरी भाषा को हमारे कंटेंट को लेके जाता है। और एआई के प्रयोग से ऑल काइंड्स ऑफ लॉन्ग फॉर्म कंटेंट। इट कुड बी बुक्स फुल लेंथ बुक्स। 1000 पन्नों की किताब भी आप हमारा हमारा जो प्लेटफार्म हमने बनाया है उसमें आप डालेंगे तो विद इन एन आवर और सो यू विल गेट अ आउटपुट इन द टारगेट लैंग्वेज व्हिच इज़ अबाउट 80% 85% एक्यूरेट कोई दावा नहीं कर सकता कि आज के जो एलएलएम मॉडल्स हैं वो शत प्रतिशत सही अनुवाद कर कर सकता है। तो बट देन व्हाट वी हैव डन इज़ इन आवर टीम वी
(56:18) हैव हायर्ड लैंग्वेज एक्सपर्ट्स लिंग्विस्ट एंड ट्रांसलेटर्स। उनको भी एक आमदनी का स्रोत मिल गया कि दे विल देन गो थ्रू द एंटायर मैनुस्क्रिप्ट लाइन बाय लाइन द फर्स्ट कट ऑफ द आउटपुट एंड जो किताब उनको छ महीने लगते थे ट्रांसलेट करने के लिए अभी करेक्शन में उनको शायद तीन-चार हफ्ते लगेंगे तो उन छ महीनों में वो छह किताबें कर सकते हैं जबकि तब एक ही किताब उनसे पॉसिबल हो सकती थी तो जो लोग बोलते हैं एआई आने से जॉब चली जाएंगी इट विल नॉट आई थिंक यू हैव टू अपस्किल लेफ्ट बिहाइंड एंड आल्सो एक और चीज इसमें है कि वॉइस रिकॉर्डिंग्स
(56:59) टू लाइक यू नो वेरी इजीली द बुक कुड बी कनवर्टेड इंटू एन ऑडियो फॉर्मेट तो जो लोग अनपढ़ हैं वो क्यों साहित्य से वंचित रहे और आज एस्पेशली इन द लास्ट 10 इयर्स द काइंड ऑफ़ डिजिटल आउटरीच दैट हैज़ गॉन देश में हर एक चप्पे में यूपीआई यू नो कोड है डिजिटल इंडिया के माध्यम से द इंटरनेट पेनिट्रेशन इज़ सो वास्ट। सो पीपल कैन एक्सेस कंटेंट एंड दोज़ हु कांट रीड एंड राइट एटलीस्ट दे कैन हियर। और शहरों में भी बोर जैसे शहर में जहां घंटों लोग ट्रैफिक जैम में फंसे रहते हैं। आते-जाते वो पडकास्ट सुनते हैं। उसी तरह किताब भी सुन लें। अपनी भाषा
(57:39) अपनी भाषा में सुन लें। सो ब्यूटीफुल। एंड विथ अ लॉट ऑफ़ इमर्सिव साउंड इफेक्ट्स दैट वी ऐड टू दिस। सो दैट इट्स नॉट अ बोरिंग नरेशन। अब इतिहास का कोई किताब है युद्ध का सीन है तो पीछे यू नो एिफेंट्स आर ट्रंपेटिंग हॉेज आर नेइंग ड्रम्स आर बीटिंग उस सबके बीच में अगर आप उस किताब को सुने तो उसका मजा ही अलग होता है तो दैट्स व्हाट वी आर डूइंग एट नाउ एआई एंड आई थिंक दिस इज़ आल्सो इन लाइन विथ सम ऑफ़ द गवर्नमेंट इनिशिएटिव्स इन दिस रिगार्ड भाषिनी हो या अनुवादिनी हो ये सारे जो दिस थिंग एंड सर्वम सर्वम इज़ वन ऑफ़ आवर पार्टनर्स इन दिस इंपॉर्टेंट प्रोजेक्ट कि अ सोववरन
(58:18) एलएलएम फॉर इंडियन लैंग्वेजेस एंड आई थिंक द इंडिया एआई समिट दैट हैपेंड आई थिंक दैट वाज़ अ फेदर इन द गैप ऑफ द कंट्री वेयर ऑल द ग्लोबल लीडर्स ऑफ द वर्ल्ड केम टू इंडिया आवर बिगेस्ट स्ट्रेंथ इज आवर डेमोग्राफिक यू नो डायवर्सिटी एंड लिंग्विस्टिक डायवर्सिटी इफ वी जस्ट फोकस ऑन द इंडियन लैंग्वेजेस जो 22 शेड्यूल्ड भाषाएं हैं आप डायलेक्ट्स को छोड़ ही दीजिए दिस इज़ अ स्ट्रेंथ व्हिच वी शुड कैपिटलाइज एंड मोनेटाइज। सो कंपनीज़ लाइक दिस नाउ एंड सो ऑन व्हिच वर्क ऑन इंडियन लैंग्वेज। आई थिंक दैट नीड्स यू नो टू बी एनकरेज ताकि इससे बहुत ज्यादा और ऐसे आए। सी दी
(59:04) एप्लीकेशनेशंस इन से हेल्थ केयर इन फाइनेंसियल इंक्लूजन जो बीएफएसआई कंपनीज़ हो थ्रू चैट बॉट्स एंड सो ऑन। नाउ पीपल आर एक्चुअली टॉकिंग इन इंडियन लैंग्वेज टू अ विलेजर। कैसे बैंक का खाता खोला जाए? व्हाट डाउट्स दे मे हैव अबाउट यू नो टीकाकरण कब हो या व्हाट इज दी हेल्थ इशूज़? आई थिंक एआई एंड टेक्नोलॉजी इन इंडियन लैंग्वेजज़ वुड प्ले अ वेरीेंट रोल देयर। इट्स इट्स सो रिफ्रेशिंग टू सी एन हिस्टोरियन हुस हु इज आल्सो वैरी पैशनेट अबाउट टेक्नोलॉजी एंड आल्सो हैज़ गॉट सच अ स्टंग एंटरप्रेनोरियल स्ट्रीट एंड प्रोब्ली दैट्स हाउ वी ऑलवेज वर्क राइट आई
(59:46) थिंक ये हमारा सही दिस इज़ द वे वी ऑलवेज वर्क एस इंडियंस आपके दो एंटरप्रेन्योरियल वेंचर्स के बारे में मैं पूछना चाहता हूं एफआईएचसीआर एंड आर्काई ऑफ़ इंडियन म्यूजिक ये दो क्या इनिशिएटिव्स हैं आर्काइव ऑफ इंडियन म्यूजिक पहले हुआ था। इट वास इन 2011 तो तब मैंने भारत की सर्वप्रथम जो महिला और कलाकार थी जिन्होंने अपनी आवाज ग्रामोफोन पे रिकॉर्ड किया था। 1902 में जब रिकॉर्डिंग टेक्नोलॉजी इंग्लैंड से भारत आया उनका नाम था गौहर जान। अ उनके बारे में मैंने एक किताब लिखी और उस दौरान एक फेलोशिप के अंतर्गत मैं बर्लिन गया था और बर्लिन में
(1:00:29) रहते हुए यूरोप के अलग-अलग जो नेशनल साउंड आर्काइव्स हैं उनका दौरा किया था। चाहे वो पेरिस में हो, वियना, लंदन और बर्लिन में और मैं अचंभित रह गया कि उन सब आर्काइव्स में भारत के बहुत सारे कक्शंस हैं। ना केवल उनके देश के बल्कि भारत के भी अ लॉट ऑफ रिकॉर्डिंग्स आर अवेलेबल। अ मिसाल के तौर पे बर्लिन में एक लाउड आर्काइव नाम का एक आर्काइव है। जहां पे ऑलमोस्ट 200 250 भारत के प्रिजनर्स ऑफ वॉर ऑफ द फर्स्ट वर्ल्ड वॉर जो जर्मनी के वॉर कैंप्स में बंदित किए गए थे। उनकी आवाजें हैं। और उनको एक आने के लिए या समथिंग एक बीड़ी देके उनको बोला जाता था कि आप अपनी भाषा
(1:01:14) में कुछ कहिए। चुटकुला सुनाइए। कुछ और कि आपकी भाषा सुनने में लगता कैसा हां बिल्कुल और वो प्रिजर्व हो जाए प्रिजर्व हो जाए और जर्मन बीइंग जर्मन वो 3 मिनट का रिकॉर्डिंग होता था उसको अगर उस आदमी को जो बंदी था उसको पढ़ना लिखना आता था तो जो भी उसने बोला है उसको अपनी लिपि में लिखवा लिखवाया जाता था और जो भी उसने लिखा है उसको जर्मन में ट्रांसलिटरेट और ट्रांसलेट किया जाता था और ये भी दस्तावेज थे कि ये आदमी कहां से है किस गांव में पैदा हुआ उसके पिता का नाम सारी सारी डिटेल्स तो बंगाल बंगाली, पंजाबी, तमिल, पुश्तो, सिंधी इन सब भाषाओं की जो वइसेस
(1:01:56) ऑफ आवर एनसेेस्टर्स वो वहां बर्लिन में मुझे सुनने को मिले और सुनते-सुनते रोंगटे खड़े हो गए थे। और वहां लाला हरदयाल जो गदर पार्टी के नेता थे। उन्होंने जब बर्लिन में कुछ डिस्कोर्स दिया उसका रिकॉर्डिंग है। रविंद्र नाथ ठाकुर उनका रिकॉर्डिंग इन द जर्मन हमबोल्ट यूनिवर्सिटी वो सारी चीजें वहां पे थी। और एक ही सवाल जो बार-बार मुझे लोग पूछते थे कि क्या भारत में एक नेशनल साउंड आर्काइव नहीं है? और एक मैं संगीत का भी स्टूडेंट हूं शास्त्रीय संगीत का और इतिहास का और एक भारतीय के नाते ये बहुत शर्मनाक मुझे लगता था कि हमारे पास हमारे जो सारे जो
(1:02:36) ऑडियो जो वेल्थ है वो चोर बाजार और रद्दी के दुकानों में मिलते हैं। जो पुराने वो ग्रामोफोन की जो 78 आरपीएम वो आपको क्रैंक करके उसको चलाते थे ना उस पे नीडल चलती थी। आज वो नीडल नहीं मिलते। तो हमारे दादी परदादी इनके जो अ ये थे हम उसको कबाड़ी में बेच देते हैं या दे देते हैं। तो आई वेंट टू द प्रीवियस [गला साफ़ करने की आवाज़] गवर्नमेंट जब यूपीए सरकार थी कि मैंने ऑलमोस्ट 6 महीने बर्लिन में ये पूरा डिजिटाइजेशन का प्रोसेस मैंने सीख लिया था। तो मैंने उनको ऑफर किया कि आई वालंटियर टू हेल्प द गवर्नमेंट सेट अप अ नेशनल साउंड आर्काइव
(1:03:13) फॉर इंडिया। अह बट वो फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर जाती गई। देयर वाज़ नो मूवमेंट ऑन दैट। उसके बाद बाय चांस आई मेट मिस्टर टीवी मोहन दास पाई जो तब इंफोसिस में थे यहां बोर में तो उन्होंने कहा आप क्यों सरकार के पीछे भागते हैं? आप प्राइवेट इनिशिएटिव में इसको एस्टैब्लिश कीजिए। ये दो 2011 की बात है। एंड दैट्स हाउ आर्काइव ऑफ इंडियन म्यूजिक वा टूक बर्थ एंड [नाक से की जाने वाली आवाज़] हमने तब से लेके अब तक ऑलमोस्ट 15,000 ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स जो हैं वो चोर बाजार और रद्दी के दुकानों से वी हैव रेस्क्यूड इट। एंड दिस इंक्लूड्स शास्त्रीय कर्नाटक और
(1:03:51) हिंदुस्तानी संगीत हो, लोक संगीत हो, जो थिएटर रिकॉर्डिंग्स हो, अर्ली सिनेमा के संगीत हो, सहगल और देविका रानी सब जमाने की या बड़े-बड़े नेता जो हैं गांधी हो या टैगोर, सुभाष चंद्र बोस इन सबकी के वॉइस इन सबको डिजिटाइज करके साउंड क्लाउड पे इन सबको फ्री ऑफ कॉस्ट मैंने डाल दिया है। यह कोई मेरे इट्स नॉट माय प्रॉपर्टी। दिस इज द प्रॉपर्टी ऑफ एव्री यंग इंडियन मैन एंड वुमेन। क्या बात है। हमारे देश की धरोहर है। हमें उस पे वी हैव नो होल्ड ओवर इट। तो फ्री ऑफ कॉस्ट आप अपने घर में बैठ के ऑलमोस्ट 2000 से ज्यादा ऐसे ट्रैक्स हैं साउंड क्लाउड.com
(1:04:31) उसमें आर्काइव ऑफ इंडियन म्यूजिक अगर आपके दर्शक टाइप करें तो दे कैन सी एट ऑफ इंडियन mus ऑन साउंड क्लाउड.com तो उसमें यू कैन सट एट होम एंड लिसन टू दी फर्स्ट एवर रिकॉर्डिंग ऑफ एमएस सुबलक्ष्मी भारत रत्न एमएस सुबलक्ष्मी एज अ न ईयर ओल्ड चाइल्ड और सबसे पहला रिकॉर्डिंग जो जनगण मन हमारे नेशनल एंथम एंड वंदे मातरम का सबसे पहला रिकॉर्डिंग 191 में हुआ। विश्व भारती कोरस जो रवींद्र नाथ टैगोर का था। तो उसका रिकॉर्डिंग का यह है। गांधी जी का ओनली रिकॉर्डिंग ऑन अ ग्रामफोन डिस्क कॉल्ड द स्पिरिचुअल मैसेज ऑफ गांधी। तो ऐसे अनगिनत ऐसे अह यू नो ट्रेजर्स आर देयर व्हिच पीपल
(1:05:16) कैन लिसेसन फ्रॉम द कन्फाइंस ऑफ़ देयर होम विथाउट एनी अह प्रॉब्लम। सो दैट इज दी आर ऑफ अ ब्यूटीफुल इनिशिएटिव या अब एफआई एचसीआर वो क्या है तो ये भी ये ऑलमोस्ट दो साल हुए एफआईएचसीआर को जन्म लिए कि मुझे यही लगता था कि मैं तो किताबें लिख रहा हूं अ एज मच एस पॉसिबल टू ट्राई एंड प्रोवाइड एन अल्टरनेटिव वर्शन टू इंडियन हिस्ट्री बट मैं अपनी जिंदगी में कितना और काम कर सकता हूं इसमें दे नीड्स टू बी अ काइंड इसमें गति आनी चाहिए और स्कॉलरशिप शुड बी प्रोड्यूस्ड। ये काफी नहीं है कि हम बस कहते रहे कि मार्क्सवादी इतिहासकारों ने देश की देश के इतिहास को विकृत करके तोड़
(1:06:01) मरोड़ के प्रस्तुत किया है। दैट इज़ नॉट सफिशिएंट। व्हाट इज द अल्टरनेटिव स्कॉलरशिप दैट यू आर प्रोड्यूसिंग एस्पेशली आज के जमाने में जब पॉलिटिकली सोशली कल्चरली द एटमॉस्फेयर इज़ फेवरेबल। सो दैट इज हाउ दिस इनिशिएटिव बिगेन इट्स अ नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन एस्टैब्लिश्ड विथ द हेल्प ऑफ Ola फाउंडर भावेश अग्रवाल हु इज़ वेरी वेरीरी पैशनेट अबाउट नेशनल रिसर्जेंट्स एंड यू नो द आत्मनिर्भरता ऑफ़ भारत जो ईवी फैक्ट्री भी वह बना रहे हैं। दैट इज़ एंटायरली फॉर दैट अह यू नो दैट वी कैन प्रोड्यूस आवर ओन थिंग्स विदाउट डिपेंडिंग ऑन ग्लोबल सप्लाई
(1:06:40) चेस। सो एफआईएचसीआर स्ट्राइव्स टू प्रोड्यूस अल्टरनेटिव स्कॉलरशिप इन इंडियन हिस्ट्री। तो इसमें बहुत सारे आयाम हैं इसके। एक सर जदुनाथ सरकार के नाम से वी हैव अ फेलोशिप एंड दैट इज़ ओपन टू ऑल इंडियन सिटीजंस टू अप्लाई। और बहुत ही रिगरस प्रोसेस के साथ बाद सिलेक्शन होता है। एंड वंस दे आर सिलेक्टेड, ईच फेलो गेट्स अबाउट 15 लैक्स ओवर द कोर्स ऑफ़ वन ईयर अह टू फॉर अ बुक फेलोशिप। द ओनली आस्क इज़ वह 1 साल के बाद यू शुड हैव अ पब्लिश वर्दी मैनुस्क्रिप्ट। अह एंड थ्रू दैट ईयर मी एंड द एंटायर टीम वी मेंटोर दीज़ फेलोज़। गिव देम गाइडेंस
(1:07:21) व्हेयरवर दे नीड़ एक्सेस टू आर्काइव्स, कनेक्शंस विथ यू नो गवर्नमेंट डिपार्टमेंट्स वेयर दे नीड टू यू नो गेट मटेरियल। एंड एट द एंड ऑफ़ दैट वन ईयर वी आल्सो एनश्योर दैट देयर बुक्स आर ऑल पब्लिश्ड बाय द लीडिंग पब्लिशिंग हाउसेस आल्सो। सो हर साल अगर 10 किताबें जुड़ जाए थ्रू दिस फेलोशिप द वेल्थ ऑफ दी स्कॉलरशिप इंक्रीसेस। इसके साथ-साथ वी हैव अ रिसर्च डिवीजन आल्सो इन एफआईएचसीआर वेयर वी इनक्यूबेट इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च इन इंडियन हिस्ट्री विथ वेरियस एजुकेशनल इंस्टीटश इन इंडिया। हमारी विडंबना यही है, दुर्भाग्य यही है कि हमारा इतिहास ऐसे भाषाओं में लिखे गए
(1:08:04) हैं जो हम समझते नहीं है। संस्कृत हो, फारसी हो, अरेबिक हो, ओल्ड सन तमिल हो कोई भी हम समझ नहीं पाते। एंड वी रिलाई ऑन वेस्टर्न ट्रांसलेशंस व्हिच आर आइदर डुबियस और यू नो इग्नोरेंट। तो मोस्ट ऑफ़ आवर रिसर्च प्रोजेक्ट्स आर वेयर वी गो बैक टू द प्राइमरी सोर्सेस इन देयर ओरिजिनल लैंग्वेज। तो फॉर इंस्टेंस हमारा पहला प्रोजेक्ट जो नालंदा यूनिवर्सिटी के साथ हमने किया है। दैट्स गॉन ऑन फॉर टू इयर्स। अभी जून में इट विल गेट कंप्लीटेड। इट इज़ ऑन द हिस्ट्री ऑफ़ द राइज़ एंड फॉलो बुद्धिज्म इन भारत। अह भारत इज़ द बर्थ प्लेस ऑफ़ बुद्धिज्म एंड द गवर्नमेंट हैज़
(1:08:46) बीन डूइंग अ लॉट फॉर द पिल्ग पिल्ग्रिम सेंटर्स ऑफ़ द बुद्ध बुद्धिस्ट सर्किट। हम्। बट व्हाट इज़ द इंटेलेक्चुअल बैकग्राउंड ऑफ़ ऑल ऑफ़ दैट? व्हाट इज़ देंस ऑफ़ इंडिया इन अह द बुद्धिस्ट यू नो फिलॉसफी। सो इसमें इट्स अ क्रॉस डिसिप्लिन टीम वेयर अलोंग विथ अ हिस्टोरियन इज़ आर्कियोलॉजिस्ट देयर इज़ अ संस्कृत पंडित, अ पाली, प्राकृत, टिबेटन स्कॉलर। सब लोग साथ मिलके जो ओरिजिनल प्राइमरी सोर्सेस हैं उनको डिकोड करके वी आर ब्रिंगिंग आउट अ थ्री वॉल्यूम यू नो सीरीज ऑन दिस। साथ ही वी आर ट्राइंग टू डिबंग द आर्यन इन्वजन मिथ व्हिच हैज़ बीन पुट ऑन आवर हेड्स बाय आवर कॉलोनियल
(1:09:26) मास्टर्स अगेन कि हमको बताया गया है कि जैसे हमने पहले बताया बात किया कि आपके सबसे पहले जो पूर्वज आए वो भी बाहर से ही है। आपका सबसे पुराना ग्रंथ ऋग्वेद वो भी बाहर के लोगों ने ही लिखा है। सो वी द ब्रिटिश आर जस्ट अ सॉफ्टवेयर अपडेट क्योंकि हांग वर्शन 2.0 है और आपकी नियति ही ऐसी है कि आप बाहर वालों के कब्जे में आप शासित रहें। तो आई थिंक द आर्यन इन्वज़ नीड्स टू बी सेटल्ड अगेन थ्रू अ मल्टीडिसिप्लरी रूट। ये हिस्ट्री है, आर्कियोलॉजी, मेटोलर्जी, पॉपुलर पपुलेशन जेनेटिक्स, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, फोनेटिक्स, लिंग्विस्टिक्स इन
(1:10:03) सभी डिसिप्लिन से दैट इट्स फ़क्चुअल एंड लॉजिकल एविडेंस बेस एविडेंस बेस नो रेटोरिक, नो पॉलिटिकल आईडियोलॉजी इट हैज़ टू स्टैंड द टेस्ट ऑफ़ साइंटिफिक डिस्कवरी ऑफ़ हिस्ट्री। तो वी आर डूइंग वन ऑन दिस और कश्मीर के हिंदू इतिहास और उसकी द हिंदू हेरिटेज ऑफ कश्मीर लाइक वी स्पोक रिसेंटली अभी कि सर्वज्ञ पीठ जो था और वहां कश्मीर शैविज्म हो या तंत्रा हो और बौद्ध दर्शन हो किस तरह वो पनपा समथिंग ऑन कश्मीर वी आर डूइंग अ प्रोजेक्ट सिमिलरली ऑन द हिस्ट्री ऑफ़ द जयपुर रॉयल फैमिली ऑफ़ द कछवाहास कर्नाटका के कदंबाज़ उन पे काम कर रहे हैं। तो ऐसे
(1:10:46) बहुत सारे प्रोजेक्ट्स वी आर डूइंग वि एजुकेशनल यूनिवर्सिटीज। द थर्ड एंड द फाइनल वर्टिकल विद इन एफआईएचसीआर इज कॉल्ड युवा। ये सारी चीजें हम कर सकते हैं रिसर्च वगैरह मोटी-मोटी किताबें छाप सकते हैं। पर अगर ये देश के युवा तक नहीं पहुंचे तो आई डोंट थिंक इट सर्व्स एनी पर्पस। सो दिस इज स्पेसिफिकली फोकस्ड फॉर चिल्ड्रन एंड यंग एडल्ट्स कि उनको जिस भाषा में जिस शैली में जिस मीडिया फॉर्मेट में समझ आए अगर 40 सेकंड का Instagram रील ही है जो वो कंज्यूम करना चाहते हैं ना कि 400 पन्ने का किताब तो उसी में सही पर इट शुड नॉट बी दिस WhatsApp हिस्ट्री जो लोग
(1:11:27) बोलते रहते हैं आजकल इट शुड बी मेिकुलस रिसर्च बट आल्सो एक्सेसिबल रिसर्च तो वहां पे ये एआई का भी इस्तेमाल हम कर रहे हैं। एफआईएचसीआर की जो जो किताबें आई हैं नाव एआई ने उसको सात आठ भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी कर दिया है। उसको ऑडियो बुक्स भी बनाए हैं बच्चों के लिए और वर्चुअल रियलिटी वीआर के माध्यम से किस तरह से इतिहास को रोचक बनाया जा सके ये भी हम काम कर रहे हैं। इसके साथ-साथ युवा ने पूरे देश में एक अह नेशनल सर्वे भी किया कि बच्चों और अह उनके जो इतिहास टीच के टीचर्स हैं या पेरेंट्स हैं उनसे बात करके यह जाना जाए कि व्हाट आर द गैप्स इन
(1:12:09) हिस्ट्री टीचिंग एंड लर्निंग इन इंडिया एंड हाउ कैन दिस बी सप्लीमेंटेड आउटसाइड द स्कूल सिस्टम। और बहुत सारे प्राइवेट स्कूल्स हैव आल्सो रीच्ड आउट टू अस टू डू पेडागोजिकल इंटरवेंशंस व्हेयर वी आर रिीडज़ाइनिंग देयर हिस्ट्री टेक्स्ट बुक फॉर देम। अब एनईपी के माध्यम से दैट इंडिपेंडेंस हैज़ कम टू पीपल कि देयर इज नो फिक्स्ड टेक्स्ट बुक देयर इज़ देयर आर ब्रॉडर थीम्स। सो थीम्स के अंतर्गत जो एनईपी द्वारा परिभाषित थीम्स हैं उसके अंतर्गत किस तरह वी कैन एक्सपेंड द टेक्स्ट बुक्स एंड आई थिंक दैट्स अ ग्रेट फ्रीडम दैट एजुकेटर्स एंड कंटेंट क्रिएटर्स हैव गॉट।
(1:12:46) टू एनश्योर दैट दीज़ बुक्स आर डन। सो क्लास सिक्स, सेवन, एट, नाइन इन सबके लिए हम पैरेलल हिस्ट्री टेक्स्ट बुक्स इन एडिशन टू द गुड वर्क दैट एनसीईआरटी इज़ डूइंग। दैट्स व्हाट वी आर अटेमप्टिंग टू डू। तो दिस इज़ अ एन एंटायर यू नो अ वेरी वेरी एंबिशियस प्रोजेक्ट बट अ प्रोजेक्ट व्हिच कम्स विथ अ लॉट ऑफ़ यू नो अह गुड इंटेंशंस एंड अ सेंस ऑफ़ नेशनलिज्म। कि कुछ तो करना चाहिए कि ना कि केवल कंप्लेन करते रहे कि इन्होंने विकृत किया, इन्होंने यह किया, वह लिखा। कंप्लेन नहीं करना है। कुछ करके दिखाना है। अपना योगदान बहुत ही कम हो। इट कैन बी एज मच एज अ स्क्विरल्स
(1:13:26) कंट्रीब्यूशन। पर एक स्क्विरल ने कुछ पत्थर डाले तभी तो रामसेतु भी बना। और श्री रामचंद्र ने भी उनको उनके कंधे पे हाथ लगा के चिन्ह भी छोड़ दिए। तो आई थिंक दिस इज जस्ट अ स्माल सर्विस इन दिस पार्ट। नो आई थिंक इट्स वेरी इंस्पायरिंग विक्रम विक्रम माननीय प्रधानमंत्री जी से आपकी कई बार मुलाकात हुई है तो पहली मुलाकात कैसी रही और कुछ जुड़ी हुई यादें उनके साथ एनी अनकडो्स दैट यू वुड लाइक टू शेयर देयर हैव बीन आई हैव बीन फॉर्चूनेट टू हैव मेट हिम सेवरल टाइम्स पहली बार शायद आई वाज़ अह रेजिडेंट फेलो एट द राष्ट्रपति भवन अह आई थिंक व्हेन प्रेसिडेंट प्रणव
(1:14:08) मुखर्जी जी वाज़ द प्रेसिडेंट। ही हैड स्टार्टेड दिस ब्यूटीफुल इनिशिएटिव कि देशभर से चार आर्टिस्ट एंड राइटर्स हु कुड स्टे एट द राष्ट्रपति भवन फॉर आई थिंक थ्री वीक्स एंड बी अ पार्ट ऑफ़ द लाइफ देर कंट्रीब्यूट टू द इंटेलेक्चुअल यू नो सराउंडिंग्स देयर एंड सो ऑन। तो उस दौरान 2015 की बात है। तब आई हैड द ओपोरर्चुनिटी टू मीट द ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर एंड प्रेजेंट माय बुक्स एंड आई थिंक द इंटरेस्ट विथ व्हिच ही वेंट थ्रू ईच ऑफ़ दोज़ आस्किंग वैरी प्रोबिंग क्वेश्चंस ही न्यू द फैक्ट दैट जो मैसूर का राजवंश है वाडियार्स का दे वर एक्चुअली नेटिव्स ऑफ़ गुजरात फ्रॉम
(1:14:46) द्वारका दैट इज़ द पॉपुलर बिलीफ एंड आई वाज़ वैरी प्लेज़ेंटली सप्रेड दैट ही न्यू दैट। ये तो गुजरात से आए हैं। उन्होंने पहले सबसे पहले वही बोला। सो देन देन आई थिंक अ फ्यू इयर्स लेटर वी मेट अ कपल ऑफ़ टाइम्स उनके घर पे भी देयर वर सम डिस्कशन फॉर व्हिच ही हैड इनवाइटेड सम पीपल आई थिंक ईच टाइम व्हाट आई हैव बीन स्ट्रक इज़ द अनडाइंग एनर्जी ऑफ़ द मैन जो एंड इट रिफ्लेक्ट्स इन एव्री एस्पेक्ट अह आई रिमेंबर 21 जून जो इंटरनेशनल योगा डे है उस दिन पे यह मीटिंग था द मीटिंग वेंट ऑन फॉर 3 टू फोर आवर्स एंड एंड पीपल लाइक अस हु आर रिलेटिवली यंगर वी वर जोोनिंग आउट
(1:15:28) एंड गेटिंग टायर्ड जबकि प्रधानमंत्री उस दिन सुबह योगा डे आई थिंक वास इन देहरादून [गला साफ़ करने की आवाज़] या कहीं करके पांच छह और मीटिंग्स करके शाम को ये डिस्कशन था। इसके बाद देयर वर थ्री फोर मीटिंग्स आफ्टर आवर्स वी वर गेटिंग टायर्ड बट ही वाज़ नॉट और हर एक चीज को इतनी बारीकी से वो समझ समझ रहे थे एंड स्मॉलस्मॉल अटेंशन फॉर डिटेल एंड दैट्स व्हाट आई थिंक रिमेंस विथ पीपल कुछ 10-15 लोग बैठे हैं ऑन अ राउंड टेबल इन सेवन व्हाट इज इट कॉल्ड नाउ लोक कल्याण मार्ग सो एंड आई थिंक देयर वाज़ वाटर एंड ऑल आर दिस टेबल्स मेरा मेरा पानी खत्म हो
(1:16:08) गया था। समवन वाज गिविंग अ प्रेजेंटेशन ही वास् लुकिंग एट दैट बट मैंने ऐसे गिलास लिया पानी नहीं था तो रख दिया अंदर तो ही यू नो बेल्ट बजा के दरबान को बुलाया इनको पानी दीजिए तो यू नो द फैक्ट दैट द पर्सन हैज़ फॉर डिटेल्स फॉर समवन हु ही डिड नॉट बोदर अबाउट मेरे मेरे गिलास में पानी है या नहीं है उनको कोई फर्क तो पड़ना नहीं चाहिए। सो आई थिंक दिस काइंड ऑफ़ अ पैशन एंड दैट डेडिकेशन दैट इज़ आई थिंक सीन ईच टाइम। द अदर टाइम व्हिच वाज़ वेरी मेमोरेबल वाज़ अ सिमिलर प्रोग्राम ऑफ़ रेजिडेंसी वाज़ ऑर्गेनाइज्ड इन दी राजभवन ऑफ़ महाराष्ट्र।
(1:16:47) अह जब भगत सिंह कोशियारी जी वहां के राज्यपाल थे। तो वहां एक बहुत रोचक बात है कि बाय चांस इट वास डिस्कवर्ड आई थिंक इन 2015 और समथिंग कि देयर इज़ अंडरग्राउंड सुरंग मार्ग है अ बिग यू नो बंकर इन द राजभवन एंड एज़ यू नो द राजभवन वाज़ द रेजिडेंस ऑफ़ द बॉम्बे गवर्नर द ब्रिटिश बॉम्बे गवर्नर। तो दिस वाज़ एन एस्केप रूल कि अगर अटैक्स हो तो वहां से वो भाग जाए और दूसरे तरफ देयर इज़ अ शिप व्हिच इज़ ऑलवेज वेटिंग टू टेक हिम टू से फॉर शोरर्स। सो इट वाज़ लंग आई थिंक व्हेन विद्यासागर राव जी वाज़ अ गवर्नर इट वाज़ डिस्कवर्ड बट कुछ हुआ नहीं था। तो आई
(1:17:30) टोल्ड कोशियारी जी कि व्हाई डोंट वी क्रिएट अ म्यूजियम हियर फॉर ऑल द क्रांतिकारीज़ ऑफ़ महाराष्ट्र। इन द टनल इन दैट टनल इन द टनल व्हिच एक्चुअली मेड द ब्रिटिश सो स्केर्ड टू रन अवे वहां उन लोगों के नाम पे करना चाहिए। सो कोशियारी जी लव द आईडिया एंड देन ओवर द नेक्स्ट 8 टू 10 मंथ्स वी डिड दैट आई थिंक मेरे मित्र श्री संजीव सानियाल जी ने ऐसा ही डिड अ प्रोजेक्ट इन द विक्टोरिया मेमोरियल हॉल इनक जो बंगाल के रेवोल्यूशनरीज थे। तो बंगाल और महाराष्ट्र जो यू नो अलोंग विद पंजाब दीज़ वर हॉट बेड्स ऑफ रेवोल्यूशन। सो वासुदेव बलवंत फड़के हो, चाफेकर ब्रदर्स हो, वीर सावरकर
(1:18:13) इन सबके बारे में यू नो इवन द गदर मूवमेंट। तो दिस दिस वाज़ अ वॉक थ्रू इन दैट वेरी वेरीरी नैरो बहुत ही तंग सी एक जगह है। वहां पे हमने ये विथ लॉट ऑफ़ डिफिकल्टी बिकॉज़ सी पेज बहुत होता है। एंड मुंबई इज़ सो ह्यूमिड। तो टू मेंटेन द आर्टिफेक्ट्स इज़ आल्सो टफ। बट सम हाउ वी वी मेड अह टनल कॉल्ड क्रांति गाथा। तो उसको इनोग्रेट करने के लिए प्रधानमंत्री जी आए थे। एंड आई हैड द ऑनर एंड प्रिविलेज ऑफ वाकिंग हिम थ्रू दैट अ फॉर अबाउट 15 मिनट्स एक्सप्लेनिंग ऑल द यू नो एक्सिबिट्स। एंड द सेम दैट यू नो डज़ अ रेज़ शार्प एंड ही इज़ अ रजिस्टरिंग एव्री वर्ड दैट यू आर सेइंग एक
(1:18:55) दो जगह कुछ गलती भी हो तो ही विल करेक्ट यू। एंड या सॉरी सॉरी आई वास जस्ट गेटिंग ओवरवेल तो कुछ और मैंने बोल दिया बट आई थिंक दैट वाज़ वेरी वेरी इंस्पायरिंग एंड इनफैक्ट ही वाज़ काइंड इनफ टू इवन गिव मी ऑडियंस टू रिसीव द सावरकर बुक एंड आई थिंक ही वाज़ क्वाइट हैप्पी विथ द वे दैट फाइनली वीर सावरकर जी इस गेटिंग हिज ड्यू। अच्छा मैं ये आपका एक ट्वीट देख रहा था विक्रम। जी। ये माननीय प्रधानमंत्री जी से आपकी मुलाकात थी तो यह क्या किस्सा है इसका? अरे ओ माय गॉड। बट दिस वास वैरी इंटरेस्टिंग कि आई थिंक दिस वास ऑन द फिफ्थ ऑफ़ मई और सिक्स्थ ऑफ़ मे ऑफ़ 2025
(1:19:30) जी एक मीडिया समिट चल रहा था दिल्ली में एंड यूजुअली प्राइम मिनिस्टर गिव्स द की नोट एड्रेस एंड तभी अ लॉट ऑफ़ पीपल हु द की स्पीकर्स हैव दिस ओपोरर्चुनिटी टू मीट हिम इन पर्सन तो अलोंग विथ मी देयर वाज आई रिमेंबर इव्न आमिर खान देयर वेर फ्यू अदर्स हु आर ऑल मीटिंग हिम तो वह इतने कामली ही वाज टॉकिंग अबाउट ही आस्क मी व्हाट इज योर नेक्स्ट बुक कभी क्या लिख रहे हैं आप? एंड देन आमिर खान को पूछा कि उनकी मां की तबीयत कैसी है? बहुत सारी ऐसी चीजें एंड ऑन द स्टेज हिज एड्रेस आल्सो ही वास लाइक कूल एज अ कक्कंबर। किसी को यह हिंट भी नहीं मिला कि उसके चंद
(1:20:09) चार या पांच घंटे बाद ऑपरेशन सिंदूर वाज़ गोइंग टू बी लॉन्च्ड। [हंसी] सो नाइदर इन हिज़ स्पीच नॉर इन हिज़ बॉडी लैंग्वेज। अब हाउ मच मस्ट बी गोइंग ऑन इन ह माइंड कि चारप घंटे में अब सच अ बिग स्ट्राइक इज गोइंग टू हैपन और आप कामली किसी के किताब के बारे में किसी की मां की सेहत के बारे में नन ऑफ अस वुड बी एबल टू डू दैट एंड वो कहीं ना कहीं यू फील लाइक टॉकिंग अबाउट इट टू द ऑडियंस आल्सो बट ही हेल्ड ऑन टू दैट इन एंड देन इन फैक्ट दैट सेम मीडिया हाउस द नेक्स्ट मॉर्निंग आई वाज सपोज्ड टु हैव अ पॉडकास्ट एंड डेट्स व्हाई आई वाज स्टेइंग बैक इन दिल्ली बट
(1:20:46) इवन दोज़ पीपल डिडन्ट नो देयर अरे आज द अटैक हैज़ हैपेंड। सो बाकी सारी न्यूज़ कट वी हैव टू ओनली कवर ऑपरेशन सिंदूर। सो आई थिंक इट्स दैट कैन ओनली हैपन इफ ही इज़ आई थिंक स्पिरिचुअली ब्लेस्ड द काइंड ऑफ़ मेडिटेटिव प्रैक्टिससेस और व्हाटएवर ही मस्ट बी डूइंग टू मेंटेन दैट जो स्थित प्रज्ञा जो भगवान कृष्ण गीता में बोलते हैं स्थित प्रज्ञ टू मेंटेन योर इक्वनिमिटी एंड कंपोज़र इवन इन द वेक ऑफ सच ट्राइंग सरकमस्ट्ससेस। आय थिंक फॉर लॉट ऑफ यंगर पीपल दोज हु आर मच यंगर दैन हिम अलोंग विथ दैट अटेंशन फॉर डिटेल्स दैट वी स्पोक अबाउट दिस इकोनोमिटी फोकस एंड
(1:21:25) कामनेस ऑफ डिमिनर दैट इज द ओनली की टू सक्सेस एंड आई थिंक दैट्स व्हाट द प्राइम मिनिस्टर लिव्स बाय एग्जांपल ऑलमोस्ट ऑन अ डेली बेसिस नाउ वी हैव सम यंग ऑडियंस क्वेश्चंस विक्रम आर यू रेडी ऑफकोर्स ओके पहला सवाल है कि व्हाट इज द सेगोल एंड एंड उसका क्या सिग्निफिकेंस है ऑफ प्लेसिंग इट एट द हार्ट ऑफ आवर पार्लियामेंट। द सिंगोल वाज़ अ वो एक राजदंड है। द चोला चोलाज़ यू नो दे हैड दिस एज अ सिंबल कि दिस कीप्स अ ट्रैक और कीप्स इवन द रूलर अंडर कंट्रोल। कंट्रोल कि आप धर्म के हिसाब से राजपाठ चलाएंगे। दिस वर्ड धर्म हम इसको इंग्लिश में जब
(1:22:11) अनुवादित करते हैं इट बिकम्स रिलजन व्हिच इज रोंग। आई डोंट थिंक धर्म इज एक्चुअली रिलिजन। इट इज यतो धर्मस्तो जय। हमारे सुप्रीम कोर्ट का भी वो मोटो है। इट मींस वर्चूस राइटियस लिविंग। सो अ रूलर एनीवन ऑफ़ अस कॉमन मैन हो या रूलर हो ही और शी हैज़ टू अियर टू सर्टेन धर्म। हम उसको राज धर्म बोल सकते हैं। हमें हम उसको [नाक से की जाने वाली आवाज़] यू नो नागरिक धर्म बुला सकते हैं। कुछ भी द राइटियस लिविंग इज व्हाट वी ऑलवेज वेंट बाय एंड द चोलाज़ हैड दिस एज़ अ वेरी इंपॉर्टेंट अह यारार्ड स्टिक फॉर एडमिनिस्ट्रेशन एंड दिस सिंगोल वाज़ एक्चुअली गिवेन टू द फर्स्ट
(1:22:50) प्राइम मिनिस्टर अह जस्ट बिफोर इंडिपेंडेंस। बिफोर द ट्रांसफर ऑफ़ पावर देयर वाज़ अ प्राइवेट सेरेमनी हवन वेयर ऑल दीज़ अह अधीनम्स फ्रॉम द वेरियस मठास इन अह तमिलनाडु केम एंड प्रेजेंटेड दिस टू हिम। नाउ दैट वाज़ कंसाइंड टू सम अह म्यूजियम अह यू नो विदाउट मच केयर। आई थिंक द फैक्ट दैट दैट वाज़ रिएस्टाब्लिशड। अह इन इट्स सीट्स ओवर द स्पीकर्स अह चेयर सेइंग, यू नो दिस हाउस विल बी रन बाई अह धर्म बाय राइटियसनेस। आई थिंक दैट वाज़ अ वेरी पावरफुल मैसेज। इट वाज़ आल्सो टॉकिंग अबाउट अ पार्ट ऑफ़ इंडिया व्हिच इज़ नॉट स्पोकन अबाउट इन द हिस्ट्री सो मच ऑफ़ इंडिया,
(1:23:30) व्हिच इज़ द साउथ एंड द रूल ऑफ़ द चोलाज़। सो, आई थिंक इट वाज़ वेरी वेरी सिग्निफिकेंट। क्या बात है। कैन स्टूडेंट्स वेरीफाई हिस्टोरिकल क्लेम्स इन द एज ऑफ Instagram रील्स एंड WhatsApp फॉरवर्ड्स? यस टू टू अ लार्ज एक्सटेंट आई थिंक द ओनर्स इज ऑन पीपल, चिल्ड्रन, यंग, हुएवर कि जो भी चीजें आपको परोसी जाए, आप प्लीज डोंट टेक इट ऑन फेस वैल्यू। टुडे देयर इज नो एक्सक्यूज दैट एनीवन कैन गिव कि लाइब्रेरी जाना है। वहां पे एक्सेस नहीं है। इंफॉर्मेशनेशन इज अवेलेबल ऑन द टिप ऑफ योर फिंगर ऑन योर स्मार्टफोन। आरv.
(1:24:08) org वगैरह है। द गवर्नमेंट आर्काइव्स आर देयर। वेयर डिजिटाइज्ड कंटेंट इज़ फ्रीली अवेलेबल फॉर पीपल टू एक्सेस। सो व्हाटएवर इज़ यू नो कम्स योर वे। आई थिंक इट्स इनकंबेंट ऑन पीपल टू फैक्ट चेक इट टू एनश्योर दैट व्हाटएवर इज सर्व्ड टू यू इज नॉट फैब्रिकेटेड हिस्ट्री। व्हाट रेस्पोंसिबिलिटी डू यंग इंडियंस हैव इन शेपिंग द नेक्स्ट वर्जन ऑफ आवर हिस्टोरिकल नैरेटिव। आई थिंक अ ह्यूज रेस्पोंसिबिलिटी इन इंश्योरिंग दैट दे रीड मोर। दे कंज्यूम मोर अबाउट वेरियस अस्पेक्ट्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री। द काइंड ऑफ़ थिंग्स दैट वी स्पोक अबाउट ड्यूरिंग दिस कन्वर्सेशन। अनसंग
(1:24:52) अननोन फैट्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री। गेट फॉर देमसेल्व दैट सेंस ऑफ़ जेन्युइन प्राइड फॉर व्हाट योर एनसेेस्टर्स हेव डन। नॉट जिंगोज़म्म, नॉट रेटोरिक नॉट यू नो ब्लाइंड आईडियोलॉजिकल अडियरेंस बट एविडेंस बेस्ड, इनफॉर्मेशन बेस्ड, साइंटिफिक टेंपर एंड साइंटिफिक थिंकिंग व्हेन इट कम्स टू हिस्ट्री। आई थिंक नो वन बेटर देन द यूथ ऑफ द कंट्री टू डू दैट। ओके। सो नाउ इट्स टाइम फॉर अ रैपिड फायर राउंड। अरे बाप रे। ओके। ठीक है। सो दिस इज दिस और दैट। सो नीड टू चूज़ वन राइट विदाउट गिविंग रीज़ंस। आई होप यू कैन आल्सो गिव द रीज़ंस। राइट? चोला नेवी और द मराठा इनफेंट्री। [हंसी]
(1:25:35) दैट इज वेरी अनफेयर। आई थिंक बोथ। ओके। अहिल्याबाई होलकर या रानी लक्ष्मीबाई। अगेन सो अनफेयर [हंसी] वी कांट मेक अ बाइनरी ऑफ़ दी टू अहिल्याबाई वाज़ अ सिविलाइजेशनल हीरो हु रिएस्टब्लिशड ऑल द डिस्ट्रयड टेंपल्स रानी लक्ष्मीबाई ऑफ़ झांसी फॉट फॉर द कंट्री। आई थिंक बोथ वर वॉरियर्स इन देयर ओन डिफरेंट वेज़। सुपर्ब। सो, ओरल फोकलोर और फिजिकल आर्काइव्स। अगेन बोथ। आई थिंक मैं [हंसी] आई एम गोइंग इन द मिडिल पार्ट। सो व्हाट इज द सिग्निफिकेंस ऑफ़ बोथ यू कुड एक्सप्लेन।
(1:26:17) सी आई यू सी फाइनली रिटन डॉक्यूमेंटेशन इज़ दी अकाउंट ऑफ द प्रिविलेज्ड। अह दे से हिस्ट्री इज़ रिटेन बाय द विक्टर्स। राइट? फाइनली जो दर्ज होता है किसी किताब में या पांडुलिपि में वो उसका पक्ष है जिसने नैरेटिव वॉर हु हैज़ वन इट। वी सॉ दैट पोस्ट इंडिपेंडेंस कि दोज़ हु हैड दबदबा वन हिस्ट्री दे रोट द हिस्ट्री ऑफ़ द कंट्री द सेम इवन इन द सेंचुरीज बिफोर दैट बट जहां पे यू नो डॉक्यूमेंटेड हिस्ट्री वेयर इट डजंट एंटर दैट इज वेयर आई थिंक ओरल हिस्ट्रीज थ्राइव एंड दैट इज़ वेयर भारतीय भाषा इस आल्सो कमिंग वेयर ऑल ऑफ़ दिस लिव्स इन फोकलोर अब झांसी
(1:27:03) की रानी की भी जो यू नो द वीरता है इन बुंदेल खंड इन हर एंटायर एरिया दैट सर्वाइव्ड लार्जली थ्रू फोकलोर अहिल्याबाई होलकर का भी मे बी शी वाज़ नॉट रिटन सो मच अबाउट बाय मेन स्ट्रीम हिस्टोरियंस बट आज भी इंदौर में उसके महेश्वर में थ्रू ओरल हिस्ट्री थ्रू थ्रू लिव्ड एक्सपीरियंस दी स्टोरीज सर्वाइव। सो, आई थिंक बोथ आर इक्वली इंपॉर्टेंट एंड अ गुड हिस्टोरियन शुड मेक यूज़ ऑफ बोथ दीज़। वेरी इंटेलीजेंटली अह नॉट टेकिंग इट एट फेस वैल्यू बट क्रिटिकिंग बोथ एंड ब्रिंगिंग आउट एन इंटरप्रिटेशन आउट ऑफ इट। अ काम आर्काइवल रूम और अ लाइवली लिटफेस्ट
(1:27:45) स्टेज। हियर इट इज़ इज़ी, इट्स द फर्स्ट वन ऑलवेज। [हंसी] फॉर अ हिस्टोरियन आई थिंक एंड यू नो सब्समिंग योरसेल्फ इन अ रूम फुल ऑफ डॉक्यूमेंट्स मुझे दैट गिव्स मी सो मच मोर प्लेजर देन सिटींग इन अ लिट फेस्ट और इवन इन अ पॉडकास्ट फॉर दैट मैटर [हंसी] बट आई अंडरस्टैंड कि यू नो ये भी जरूरी ये भी जरूरी है इट्स नॉट दैट इट इज इट हैज़ नो वैल्यू इट मे नॉट बी योर फर्स्ट आई एम अ वेरी इंट्रोवर्टेड पर्सन सो मुझे लाइट्स और इन सबसे उतनी उतना उतना आकर्षण नहीं है। आई वुड लाइक टू बी इन माय लाइब्रेरी एंड माय स्टडी बट अनलेस यू डिसमिनेट व्हाट
(1:28:24) यू हैव देन यू नो जंगल में मोर नाचा किसने देखा? सो इट्सेंट दैट दीज़ थिंग्स आल्सो कम आउट। एक बात जो विक्रम मैं आपसे पूछना चाहता हूं। [गला साफ़ करने की आवाज़] ये कई लोगों ने जब व्हेन व्हेन आई वास रिसर्चिंग फॉर यू नो दिस इंटरव्यू लोगों ने इस बारे में बोला और कहा कि विक्रम से जरूर पूछना कि जब हिस्ट्री की बात आती है तो एक एक एक अल्टरनेटिव जो एक बात लोग कहते हैं वह यह है कि जब आप हिस्ट्री की बात करते हो तो इट लीड्स टू डिबेट, इट लीड्स टू कंट्रोवर्सी एंड चकि यू शुड बी मोर फॉरवर्ड लुकिंग। व्हाई डू यू गो बैक टू हिस्ट्री। व्हाई डू यू
(1:29:05) ऑब्सेस ओवर इट एंड एंड अह यू नो एज़ एन ऐज़ अ नेशन, वी शुड स्टॉप ऑब्सेसिंग ओवर इट। एंड मे बी समटाइम्स इवन इग्नोर इट। एंड स्टार्ट ओनली थिंकिंग ऑफ द फ्यूचर। राइट? आपने उसको इन अ सर्टन वे आंसर किया था शुरू में। बट मैं ये चाहूंगा आप ये बताएं कि एक यंग जो बच्चे होते हैं जो यंग इंडियंस हैं इनके मन में बार-बार यही सवाल आता है। जैसे किसी सिटी का नाम जब बदला जाता है तो उनको लगता है यार क्या मतलब है? हाउ डस इट मैटर? या कोई एक हिस्ट हिस्टोरिकल फिगर के बारे में बात होती है, डिस्कशन होता है, डिबेट होता है, दे फील यार व्हाई आर यू गाइस इवन इंटू दिस।
(1:29:46) राइट? तो अगर आप इसे थोड़ा समझाएं फॉर द यंग ऑडियंस। आई थिंक यू सी एस आई सेड आवर सिविलाइजेशन, आवर नेशन हैज़ बीन अ वंडेड सिविलाइजेशन। और हजारों सालों के इतिहास में इट्स ऑब्वियस दैट देयर विल बी इन्वेज़ंस, देयर विल बी प्लंडर ऑल ऑफ़ दैट। अब एक व्यक्ति के भी जीवन में व्हेन देयर इज ट्रॉमा यू गो फॉर थेरेपी राइट यू गो टू अ साइकेट्रिस्ट वो ऐसा नहीं बोलता कि भूल जाओ फॉरगेट अबाउट इट यू गो फॉर थेरेपी यू हील फ्रॉम इट एंड ओनली देन यू कैन कम आउट ऑफ इट भूलने से कुछ होता नहीं है लेपापोती करने से आपको वापस रिविजिट करना रिविजिट करके उसको यू हैव टू यू नो हील
(1:30:26) फ्रॉम जड़ से फिर आप उसे हां एंड देन मूव फॉरवर्ड जस्ट एस एन इंडिविजुअल डस दैट आप आपको फिजिकल चोट लगती है तब भी आपको मरम पट्टी करने की जरूरत है। ऐसे छोड़ दो तो इट मे टेक कपल ऑफ़ मंथ्स टू इट कुड इट कुड वर्सन सिमिलरली मानसिक रोग हो तो भी। सो सिमिलर वे आई थिंक द व्हेन अ कंट्री हैज़ बीन डैमेज्ड एंड इट हैज़ बीन इन द केस ऑफ़ इंडिया विल ड्यूरेंट द अमेरिकन हिस्टोरियन हैड कॉल्ड दी इस्लामिक कॉन्क्वेस्ट ऑफ इंडिया एस द ब्लडीएस्ट टेल ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री नॉट जस्ट इंडियन हिस्ट्री। सो इट इज वो जनमानस में आज भी है। द ओन क्रॉनिकलर्स ऑफ दोज़
(1:31:03) पीपल हु डिड ऑल दैट आर सेइंग गाजेबाजे के साथ वो बता रहे हैं। वो औरंगजेब हो या वो गजनी, घोरी, तिमोर, टीपू सुल्तान उनको कोई परहेज ही नहीं था। दे वर वेरी प्राउड ऑफ़ व्हाट दे डिड। पर आज के लोग हम ये क्यों करते हैं? दिस इज़ ओनली बिकॉज़ आई थिंक पोस्ट 1947 और देश इस्लाम के नाम पे बटा था। दैट इज़ अ फैक्ट। अह आई थिंक द फाउंडिंग फादर्स एंड मदर्स ऑफ़ द कंट्री दे फ़्ट कि इतना यू नो ब्लड शेड से आया है पार्टीशन के बाद। लेट्स नॉट टॉक अबाउट दीज़ और लोगों में वैमनस्य और ज्यादा हो होगा। आई डोंट एग्री विथ दैट बट स्टिल ठीक है। आई कैन स्टिल रैशनलाइज़ इट फॉर दैट पीरियड।
(1:31:46) बट अभी 80 साल हो गए हैं। इन सारे तथ्यों के बारे में खुल के मुक्त तरीके से बात करने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेपापोती करके आप इतिहास को यू नो यू कांट गुमराह नहीं कर सकते। व्हाट इंडिया नीड्स इज अ ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन कमीशन। जैसे साउथ अफ्रीका में जो अपार्थाई था उसके बाद डेसमन टू टू ने वहां पे एक उबुन टू नाम का एक शुरू किया वेयर द विक्टिम एंड द पपिट्रेटर दे केम फेस टू फेस एंड द पपिट्रेटर सेड आई एम सॉरी फॉर व्हाट आई डीड। लेट्स फॉरगेट इट एंड बी फ्रेंड्स। एंड इट वाज़ ओवर। इंडिया में द परपिट्रेटर एंड द विक्टिम आर बोथ डेड। यह
(1:32:28) 400 500 साल पहले हुआ। बट देयर इज इंटर जनरेशनल ट्रॉमा दैट एकिस्ट? पीपल स्टिल रिमेंबर दैट। दैट्स वेयर ओरल हिस्ट्रीज, फोक लो इसमें ये सारी चीजें अभी भी दर्ज है। सो डजंट इट रिक्वायर एनी काइंड ऑफ़ क्लोज़र। इट नीड्स दैट हीलिंग टच। सो दैट वी कैन मूव ऑन। सो दैट वी कैन मूव ऑन। और देखिए हम ब्रिटिश के जो जो भी मिलिट्री गवर्नर्स थे कॉर्नवालिस हो या फिर अ चर्चिल जिसके वजह से बंगाल का फेमिन हुआ जहां दो-ती मिलियन लोग भी मारे गए उनके बारे में मुक्त तौर से बात करते हैं राइट एंड इवन इन आवर मूवीस द ब्रिटिश इज़ ऑलवेज शोन ऐज़ द विलेन
(1:33:09) वहां हम ये नहीं सोचते कि इनके बारे में अगर सच बोला जाए तो देश के क्रिश्चियंस को बुरा लग जाएगा बिकॉज़ दे आल्सो हैव द सेम रिलजन एस द ब्रिटिश बट व्हेन व्हेन इट कम्स टू द मुस्लिम इनवेडर्स व्हाई डू वी थिंक दैट टॉकिंग अबाउट देम विल सम हाउ अपसेट टुडेज़ कम्युनिटीज़ एंड आई थिंक दैट इज द बिगेस्ट प्रॉब्लम। इससे ये सारी चीजें रीनेमिंग ऑफ सिटीज ये जो विवाद अभी चल रहे हैं ज्ञानवापी में, मथुरा में, भोजशाला में ये सब चलते ही रहेंगे। टिल वी मेक पीस विथ आवर पास्ट। ओसम। टू ऑल द यंग इंडियंस फॉर वाचिंग दिस पॉडकास्ट। आपका क्या मैसेज होगा? ह
(1:33:50) यू नो गिव इंपोर्टेंस टू योर पास्ट टू अंडरस्टैंडिंग योर पास्ट। आई थिंक इट्स ओनली बाई अ क्लियर साउंड, सेल्फ कॉन्फिडेंट, सेल्फ अशोर्ड, अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ वेयर यू केम फ्रॉम? अह व्हाट आर योर अचीवमेंट्स? व्हाट आर योर मिस्टेक्स, एज़ अ नेशन, कैन यू मूव वेरी कॉन्फिडेंटली इंटू द फ्यूचर। बट एट द सेम टाइम डोंट बी स्टक इन द पास्ट? अह लुक एट द फ्यूचर। इंडिया इज लिटरली नॉकिंग ऑन द डोर्स ऑफ ग्रेटनेस इन ऑल वेज़ इकोनॉमिकली, मिलिट्रीली एंड आई थिंक द बेस्ट अह डेकेड्स फॉर इंडिया आर टू कम एंड द यूथ ऑफ इंडिया आर फॉर्चूनेट टू बी यू नो स्टेक
(1:34:33) होल्डर्स और बेनिफिशरीज़ ऑफ़ दिस इंडिया सक्सेस स्टोरी। सो डोंट बी स्टक इन द यू नो द बैड थिंग्स ऑफ द पास्ट मेक पीस विथ देम एंड मूव फॉरवर्ड टू अ ग्लोरियस फ्यूचर। ऑसम आपने इतने पैशन के साथ अपनी बात को रखा। इतनी गहराई और बारीकी से एक-एक एस्पेक्ट को समझाया। उसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। इट वास एन अबब्सोल्यूट प्लेजर टू बी इन कन्वर्सेशन विथ यू। थैंक यू सो मच। थैंक यू सो मच। थैंक यू। [संगीत]
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