Rise of Radical Feminism in India
Author Name:Nikita Thakur
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@nikitaksthakur
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=nxU8KLZ4Cgo
Title: Rise of Radical Feminism in India
Author Name: Nikita Thakur
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HerStory presents a rewritten History of all the Untold Stories of How Women Shaped India, written by an Indian Woman, faithful to our roots and free from Western biases.
It's time to Unlearn and Uncover the Truth of our Past!
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Is feminism in India becoming a fight for equality or a war against men?
From rising anti-men narratives and viral outrage to controversial gender laws and false allegations, this video explores the uncomfortable side of modern feminism. But the real shock lies in human psychology. Scientific experiments reveal how deeply gender bias and group identity can influence our sense of justice. While millions of women still fight for basic rights, men's struggles deserve attention too.
Because true equality isn't about choosing sides. It's about equal rights, equal protection and equal accountability.
Transcript:
(00:00) फेमिनिस्ट गॉन वाइल्ड हेटिंग मैन। ऐसे नामों से वीडियोस रोज वायरल होते हैं। आई ऍम अ प्राउडी सो फील फ्री टु कॉल मी दैट। सुप्रीमिसी। टिकट मांगा तो लड़की खुद अपने कपड़े फाड़ कर टीटी को धमकी देती है। अब देख तुझे कैसे फसाती हूं। ये मेरा कपड़ा छू रहा है यार। घबराओ मत। बहुत तेज हो। अभी हम खुद बताते हैं। ओपनली धमकी देना। तुझे जान से मार दूंगी। मार दूंगी तुझे जान से। तो कहीं छोटे-मोटे झगड़े पर किसी आदमी का गाड़ी डैमेज करना। [संगीत] हम देखते हैं, रोस्ट करते हैं और स्क्रोल कर देते हैं। बट व्हाट इफ दिस इजंट जस्ट फनी इंटरनेट कंटेंट? सिया ने अपने ही फिओन से केतन का
(00:36) कोल्ड ब्लडेड मर्डर कर दिया। सिर्फ इसीलिए क्योंकि उसे अपने सीक्रेट बॉयफ्रेंड चेतन से शादी करनी थी। बट इस ब्रूटल मर्डर से भी ज्यादा शॉकिंग है। इस पर कुछ लड़कियों के रिएशंस। ऐसे झूठ बोलोगे तो मरोगे ही ना। सो हैशटैग आई हेट मैन। [हंसी] दो आदमी क्या मर गए? मर्द समाज में डर फैला। सो भाई देखो मुझे तो बड़ी खुशी होती है ऐसे नहीं। मैं तो लड़कियां तुम्हारे साथ इतनी गर्ल्स मुझ में होती तुम अभी तक पांच छह मर्डर कर चुकी होती बट नहीं है तुम बहुत अच्छा कर रहे हो ऐसे और मरे और डर पैदा हो इन लड़कों में ये कोई अनएजुकेटेड रूरल लड़की नहीं है शी
(01:06) इज़ अ फार्मासिस्ट और उसका मकसद आदमियों को औरतों के खौफ में जीना चाहिए क्यों इज दिस फेमिनिज्म आपसे एक सवाल एकदम ऑनेस्टली आंसर करना इमेजिन एक रनवे ट्रॉली आ रही है और सामने लोग हैं। अब इन लोगों को बचाने के लिए आपको ब्रिज से एक इंसान को नीचे फेंकना होगा ट्रैक पर। और आपके पास चॉइस है। आप एक मेल को धक्का दोगे या एक फीमेल को? साइंटिस्ट ने एक्सैक्टली यही जानना चाहा एंड द रिजल्ट्स एक्सप्लेन क्यों आज 2026 में भी जेंडर लॉस, जेंडर डिबेट्स चलते रहते हैं। हमें ट्रू इक्वलिटी आज तक नहीं मिल पाई है। बट उससे पहले समझते हैं सोशल मीडिया ऐसे फेक फेमिनिस्ट कंटेंट को
(01:43) इतना रिवॉर्ड क्यों करती है। ऑलवेज डेट अ वूमन हु इज अ मैन हेटर बट नेवर अ मैन हु इज अ वूमेन हेटर। छोटे कपड़े [संगीत] क्यों नहीं पहनती? बाकी लड़कियों के जैसे क्योंकि यह मेरी बॉडी है। कोई पब्लिक प्रॉपर्टी नहीं। वेट व्हाट? दैट्स नॉट मॉडेसिटी। दैट्स इंटरनलाइज मिसनी शोइंग अप। इंटरनलाइज्ड मिसोजनी जैसे साइंटिफिक टर्म्स यूज करने से बात में लॉजिक नहीं आ जाता। दिस इज नॉट इंटरनलाइज्ड मिसोजनी। दिस इज अ पर्सनल चॉइस। जस्ट हाउ वेयरिंग शॉर्ट क्लोथ्स इज आल्सो अ पर्सनल चॉइस। एंड अगर आप किसी फीमेल के पर्सनल चॉइस ऑफ वेयरिंग फुल क्लोथ्स के खिलाफ जा रहे हो
(02:17) तो क्या यह आपको एक एंटीफेमिनिस्ट नहीं बना देता? आई फाउंड आउट आई वाज प्रेग्नेंट व्हेन आई वाज 18 एंड आइ गव बर्थ एट 19 ओर यू शुड हैव गोटन प्रेग्नेंट बट हु इज गोइंग टू टॉक अबाउट हाउ आई एंटड अप इन दैट सिचुएशन बीइंग पार्ट ऑफ हर स्पिरिचुअल फैमिली बीइंग रेस्ड विथ द स्क्रिप्चर लैक ऑफ एजुकेशन और कंट्रासेसप्टिवस इट्स लाइक एस्पेशली इन स्पिरिचुअल कम्युनिटीज़। अनपुलर ओपिनियन बट जो लोग ये गेट रेडी विथ मी वीडियोस बना रहे हैं बाई वेअरिंग इनरवेयर एंड देयर फर्स्ट फ्रेम ओर बाय डूइंग दिस इन द फर्स्ट फ्रेम। यह सिर्फ वूमेन के बारे में नहीं है। कोई लड़का भी
(02:47) अगर अपने अंडरवियर में वीडियो स्टार्ट करेगा, पब्लिक अनकंफर्टेबल होगी, एस्पेशली क्योंकि आपका जॉनर इज नॉट 18 प्लस एडल्ट कंटेंट, इट्स यूनिवर्सल फैशन कंटेंट। आई थिंक हम सब जानते हैं यह एक बहुत ही पुरानी सेक्सुअलाइज्ड क्लिकबेट स्ट्रेटजी है। सो देयर इज रियली नो लॉजिक हियर। बहुत सिमिलर सा फ्लॉड लॉजिक आपको बॉलीवुड स्टार्स के इंटरव्यूज में भी दिख जाएगा। एक इंटरव्यू बीच में वायरल हुआ जहां दिया मिर्जा लिटरली कह रही है क्लाइमेट चेंज के पीछे मर्दों का हाथ है। इट्स मैन हु हैव ड्रिवन क्लाइमेट चेंज एंड दे आर एंटायरली एंड टोटली रिस्पांसिबल फॉर
(03:17) द केओ। बट कभी नोटिस किया है आजकल सोशल मीडिया पर ज्यादा एंगेजमेंट अक्सर यूज़फुल कंटेंट को नहीं आउटरेज वाले कंटेंट को ज्यादा मिलता है। क्रिएटर्स और ब्रांड्स डेलीबेटली ऐसे कंटेंट बनाते हैं। बिकॉज़ रेज गेट्स एंगेजमेंट। बट Instagram और YouTube को कैसे पता चलता है कि आप किस कंटेंट पर रुकोगे, क्या स्किप करोगे या किस चीज पर कैसे रिएक्ट करोगे? इसका आंसर है डाटा। आपके क्लिक्स, स्किप्स, वॉच टाइम, सर्चेस ये सब एनालाइज करके एल्गोरिदम्स प्रेडिक्ट करते हैं कि आप नेक्स्ट क्या देखना चाहेंगे। और यह सिर्फ सोशल मीडिया तक लिमिटेड नहीं है। Netflix डिसाइड करता है
(03:51) आपको कौन सा शो रेकमेंड करना है। ब्लिंकडप्टो प्रेडिक्ट करते हैं कि मंथली [संगीत] कितनी इन्वेंटरीज लगेंगी एंड व्हेन दे नीड टू स्टॉक अप। टुडे डाटा इज द फाउंडेशन बिहाइंड एव्री [संगीत] बिगेस्ट और स्मालेस्ट डिजिटल बिज़नेसेस अक्रॉस द वर्ल्ड। यही वजह है कि नीति आयोग खुद प्रेडिक्ट कर रही है [संगीत] डाटा एंड एआई के टेक्नोलॉजीस 2030 तक 40 लाख जॉब्स क्रिएट करेंगे। एट दिस मोमेंट टू डेटा साइंस जॉब्स आर ग्रोइंग एट द पेस ऑफ़ 36%। बट बहुत लोगों को लगता है डेटा साइंस का मतलब कोडिंग एंड वो बहुत मुश्किल है। पर ऐसा नहीं है विदाउट कोडिंग नॉलेज भी आप बस
(04:23) 6 महीनों में डेटा साइंस सीख सकते हो वि आईआईटीएम प्रवर्तक एंड HCL गुबीस डाटा साइंस कोर्स। [संगीत] HCL GBI यह एक HCL ग्रुप कंपनी है। यह वही HCL है जिसने इंडिया का आईटी बैकबोन बिल्ड करने में कंट्रीब्यूट किया था। वही सेम इंडस्ट्री एक्सपर्टीज HCL Googbi के एआई इनफ्यूज्ड करिकुलम के साथ आपके करियर को शेप करेगी। यहीं आप 10 प्लस इंडस्ट्री ग्रेड प्रोजेक्ट्स बिल्ड करोगे। आपको मिलेगा आईआईटीएम प्रवृत्तक सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट सपोर्ट फ्रॉम 1000 प्लस हायरिंग पार्टनर्स। सो फ्यूचर रेडी करियर्स बनाना चाहते हो तो अभी इनका फ्री करियर
(04:55) कंसल्टेशन कॉल बुक करो। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन। नाउ कमिंग बैक टू रेडिकल फेमिनिज्म। यह एक्सपेरिमेंट साइकोलॉजी का एक ब्रूटल ट्रुथ बताता है। 1970 में साइकोलॉजिस्ट हेनरी तचफेल ने कुछ बच्चों को दो कंप्लीटली रैंडम और एकदम मीनिंगलेस ग्रुप्स में बांट दिया। फिर उन्हें पावर दी कि वो एक दूसरे को रियल मनी बांट सके। ऑप्शन वन, ग्रुप ए और बी दोनों को ₹10, ऑप्शन बी, ग्रुप ए को ₹7 बट ग्रुप बी को सिर्फ ₹1। सरप्राइजिंगली बच्चों ने इक्वल पैसे नहीं चुने। उन्होंने इंटेंशनली वो ऑप्शन चुना जिसमें उन्हें खुद कम पैसे मिले। बस इस शर्त पर कि दूसरे ग्रुप को
(05:28) उनसे भी बड़ा नुकसान हो। मतलब अपना नुकसान चलेगा। पर सामने वाले की बर्बादी जरूर होनी चाहिए। सिर्फ क्योंकि सामने वाले पर एक लेबल लग गया है दे वो लोग। बट अगर ह्यूमन नेचर इतना डिस्ट्रक्टिव है तो लोग आपस में यूनाइट कैसे होते हैं? एक और फेमस एक्सपेरिमेंट रॉबर्स केव में दो राइवल ग्रुप्स जो एक दूसरे से लिटरली नफरत करते थे उन्हें मिलाने की पूरी कोशिश की गई। प्यार, टीम बिल्डिंग एक्टिविटीज, दोस्ती सब फेल। एंड में बस एक ही चीज काम की। जब रिसर्चरर्स ने कैंप का पानी बंद कर दिया तो सर्वाइवल के लिए वो हेट भूलकर तुरंत दोस्त बन गए। साइंटिस्ट का कंक्लूजन
(06:06) शेयरर्ड थ्रेट। वन कॉमन एनिमी इज द स्ट्रांगेस्ट सोशल ग्लू। सो, क्या यही चीज सोशल मीडिया के छोटे इको चेंबर्स में भी तो नहीं हो रही? क्या यह क्रिएटर्स कुछ सिमिलर करने की कोशिश तो नहीं कर रहे? Instagram पर जब यंग गर्ल्स रिपीटेडली ऐसे रील्स देखती है जहां मैसेज फेमिनिज्म नहीं बल्कि मैन आर द प्रॉब्लम बन जाता है तो यह उनकी इनर रियलिटी बनने लगती है। एक छोटा सा डिस्क्लेमर। यह वीडियो डीयू प्रोटेस्ट से पहले बन चुका था। बट सूडो फेमिनिज्म को कॉल आउट करना जेन्युइन वुममेंस राइट्स के खिलाफ होना बिल्कुल भी नहीं है। लेकिन यहां कंसर्न है कि एक सीरियस प्रोटेस्ट
(06:37) में कुछ प्रोटेस्टर्स ऐसे स्लोगंस क्यों लगा रहे हैं? गंदी नसबंदी। गंदी नसबंदी। फेमिनिज्म का मतलब ही है इक्वलिटी फॉर ऑल ह्यूमंस। तो आप खुद को फेमिनिस्ट कह कर दूसरों के राइट्स कैसे जीत सकते हो। सोचो ऐसे स्लोगन सुनने वाली यंग गर्ल्स एंपावरमेंट के नाम पर इक्वलिटी सीखेंगी या हेट्रेड? एंड जेनुइनली ऐसे हो भी रहा है। अबकी बार इंडियन फोर बी मोमेंट इसमें चार एस्पेक्ट्स हैं कि वी वोंट डेट मैन। वी वोंट मैरी मैरी देम एंड उनके चिल्ड्रन हम बेयर नहीं करेंगे एंड उनके साथ हम फिजिकल इंटरकोर्स नहीं करेंगे। और यहीं से फेमिनिज्म और जेंडर वॉर के बीच की लाइन
(07:15) ब्लर होने लगती है। सोशल मीडिया के अलावा हमारे देश का लीगल स्ट्रक्चर भी इस मैन वर्सेस वूमेन रेडिकलिज्म को और बढ़ावा दे रहा है। यह वीडियो एक स्ट्रिंग ऑपरेशन है जो दैनिक भास्कर की टीम ने एक ऐसे गैंग पर किया जो यूपी में मर्दों के खिलाफ फेक क्रिमिनल केसेस करती है। इस गैंग की लीडर सफलता पाठक का कहना है कि हमारे पास 20 से 25 यंग लड़कियां हैं। कुछ तो माइनर लड़कियां हैं यानी अंडर 18 जो किसी भी आदमी पर फेक रेप ड्रग्स या इवन पॉक्सो यानी माइनर्स के रेप केसेस में फंसाने के लिए पूरा काम करेंगी। कि डायरेक्टली धमकी देते हैं। अगर उनसे
(08:03) काम नहीं करवाया तो यूपी के अंदर कहीं भी छुप जाओ आप जिंदा नहीं बचोगे। जयपुर में एक औरत पकड़ी गई जिसने 15 रेप केसेस फाइल किए थे अलग-अलग मर्दों पे अलग-अलग पार्ट्स ऑफ इंडिया में। ऐसे कई सारे केसेस देखकर एक अनकंफर्टेबल सवाल उठता है। क्या हमारे देश में आदमियों को फॉल्स केसेस में फंसाना इतना आसान है? यस। काफी हद तक और वजह है हमारे लीगल सिस्टम के कुछ क्रिटिकल लूप होल्स। सबसे पहले तो बीएएनएस सेक्शन 63 पे आते हैं। क्लियरली मेंशंड है अ मैन इज सेड टू कमिट रेप इफ ही डॉट डॉट डॉट डॉट। बट यहां पर अगर लड़की एक लड़के का रेप करे तो उसका कोई मेंशन नहीं है।
(08:40) नेक्स्ट सबसे बड़ा कन्फ्यूजन है सेक्सुअल इंटकोर्स बाय एंप्लॉइंग डिसाइडफुल मींस। इमेजिन एक कपल का फिजिकल रिलेशनशिप कंसेंशुअल था क्योंकि शादी का प्लान भी उनका जेन्युइन था। पर बाद में उनका ब्रेकअप हो गया। तो बीएनएस सेक्शन 69 के वेगनेस की वजह से कई फीमेल्स के लिए इज़ियर हो जाता है लड़के पर केस फाइल करके उसे अरेस्ट करवा लेना। जबकि उनका फिजिकल रिलेशनशिप कंप्लीटली कंसेंशियल था। मेरे ऊपर एक लड़की ने आरोप लगाया है कि [संगीत] मैं इसको शादी का झूठा झांसा देके 5 साल तक रेप किया हूं। नेक्स्ट बीएएनएस सेक्शन 85 क्रुएल्टी टुवर्ड्स वाइफ। अगेन इस लॉ में लिखा है
(09:13) हस्बैंड और रिलेटिव ऑफ अ हस्बैंड ऑफ अ वूमेन सब्जेक्टिंग हर टू क्रुएल्टी। बट अगेन क्रुएल्टी का डेफिनेशन बहुत वेग और ओपन एंड है और इसीलिए इसी सेक्शन का फायदा उठाकर कोर्ट ने खुद माना है कि कुछ औरतें अपने हस्बैंड के पूरे खानदान यहां तक कि बेड रिटन दादा-दादी को भी अरेस्ट करवा लेती है। आल्सो सेक्शन 85 के तहत औरत पर क्रुवेल्टी के लिए सजा हो सकती है। लेकिन अगर सेम क्रुएल्टी एक आदमी के साथ हो तो लॉ काफी हद तक साइलेंट [संगीत] है। नेक्स्ट एलिमनी लॉस। इस तरह के वीडियोस बहुत वायरल होते हैं। 66300 पर मंथ डस एनीबडी स्पेंड दिस मच? अ सिंगल
(09:50) लेडी फॉर हरसेल्फ? ओ इफ शी वांट्स टू स्पेंड लेट हर अर्न। एक साल की शादी के बाद 5 करोड़ की एलुमिनी मंथली 15 लाख की डिमांड। पीएनएस सेक्शन 144 में वाइफ हस्बैंड से मेंटेनेंस क्लेम कर सकती है। बट हस्बैंड वाइफ से नहीं। हां, दूसरे लॉज़ में हस्बैंड्स के लिए भी एलुमिनी के ऑप्शंस है। बट यहां एक मेजर ग्रे एरिया है नो फिक्स्ड फार्मूला। दूसरे देशों की तरह इंडिया में मेंटेनेंस का कोई फिक्स्ड परसेंटेज या मैथमेटिकल फार्मूला नहीं है जिससे एलुमिनी कैलकुलेट हो। कोर्ट बेसिकली वाइफ की इनकम, नीड्स, मैरिज ड्यूरेशन एंड मैरिज के दौरान वाइफ का क्या स्टैंडर्ड ऑफ
(10:23) लिविंग था ऐसे फैक्टर्स देखकर डिसाइड करती है। बट इसी का नतीजा है कुछ वाइफ्स का कॉन्फिडेंस से महीने के 5 से 6 लाख, ₹15 लाख तक मांगना। सिर्फ लाइफस्टाइल मेंटेन करने के लिए। आई वांट 12 क्रॉप्स। शी डजंट वांट द मैरिज। नोबडी वांट्स द मैरिज। बट शी वांट्स टुडे 12 क्रॉस BMW कार एट्सेट। विल यू टेक एलुमिनी। ऑफ़ कोर्स। ऑब्वियसली। ऑब्वियसली? यस। लाइक हमारा राइट्स है। ऑब्वियसली एवरीबडी शुड टेक इट। नोबडी शुड अवॉयड इट। या। या। नेक्स्ट आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट प्रेशर भी बहुत कॉमन है। डरी और क्रुएल्टी जैसे प्रोविजंस के मिसयूस पर सुप्रीम कोर्ट खुद
(11:00) कंसर्न रेज कर चुकी है। एस्पेशली क्योंकि क्रिमिनल केसेस की बदनामी फैमिलीज़ को मजबूर कर देती है एलिमिनी के लिए ह्यूज अमाउंट्स दे देने के लिए राजी होने के लिए। सेटलमेंट हो गया। पत्नी भी तैयार हो गई। साइन भी कर दिए। लेकिन अचानक पत्नी को कुछ चीजें अच्छी नहीं लगी। शादी के 23 साल बाद घरेलू हिंसा यानी डोमेस्टिक वायलेंस का मुकदमा भी दर्ज कर दिया। अच्छा इसी के बीच एनसीआरबी का डाटा एक डिस्टर्बिंग पैटर्न दिखाता है। फैमिली और मैरिज प्रॉब्लम्स की वजह से सी करने वालों में मैरिड मर्दों की गिनती मैरिड औरतों से रफ्ली 2.5 [संगीत]
(11:30) टाइम्स ज्यादा है। ऑफकोर्स एक डाटा अपने आप में कंक्लूजिव नहीं है। बट एटलीस्ट ये डाटा एक अलार्मिंग सिचुएशन हाईलाइट कर रहा है। एंड फाइनली सबसे कड़वी रियलिटी सिर्फ इंडियन लॉस ही नहीं कहीं ना कहीं जैसे मैंने इंट्रो में बताया साइंस भी औरतों के प्रति हल्का सा बायस्ड है। दो हार्ड साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स बताती हूं। फर्स्ट न्यूरो साइंटिस्ट डॉक्टर ओरियल फेल्डमैन हॉल और उनकी टीम ने कई एक्सपेरिमेंट्स किए सिर्फ एक चीज मेजर करने के लिए। क्या एक इंसान का मोरल डिसीजन मेकिंग चेंज हो जाता है सामने वाले इंसान के जेंडर के बेसिस पर। फर्स्ट टेस्ट
(12:03) पेन वर्सेस गेन। पार्टिसिपेंट्स के सामने पैसे और दो ऑप्शंस रखे गए। ऑप्शन वन पैसा अपने पास रखो बट आपके सामने वाले इंसान को एक पेनफुल इलेक्ट्रिक शॉक लगेगा। ऑप्शन टू पैसा गिव अप करके अपने सामने वाले इंसान को शौक से बचा लो। रिजल्ट पार्टिसिपेंट्स ने सिग्निफिकेंटली ज्यादा पैसे कुर्बान किए जब सामने एक फीमेल को शौक मिल रहा था एज कंपेयर टू एक मेल को। सेकंड एक्सपेरिमेंट तो और डिस्टर्बिंग है। द फुटब्रिज डलेमा। साइकोलॉजी का सबसे ब्रूटल एक्सपेरिमेंट। इमेजिन एक रनवे ट्रॉली आ रही है और कुछ लोग ट्रैक पर फंसे हुए हैं। [संगीत] उन्हें बचाने के लिए आपको ब्रिज
(12:37) से एक इंसान को नीचे धक्का देना पड़ेगा। बट आपके पास चॉइस है मैन या वुमेन? किसको धक्का दोगे? शॉकिंगली 88% पार्टिसिपेंट्स ने कहा पुश द मैन 88%। यहीं से एक अनकंफर्टेबल सवाल उठता है क्या हम एक्चुअली इक्वलिटी बिलीव करते हैं? क्योंकि अल्टीमेटली बायोलॉजिकली हमारा ब्रेन सिर्फ यह नहीं देख रहा कि कितना हार्म हुआ। हम सबकॉन्शियसली यह भी देख रहे हैं हार्म किसको हुआ। दर्द किसको हुआ, किस जेंडर को हुआ। और जब विक्टिम एक मर्द हो तो वह दर्द, वो पेन हमें प्योरली साइकोलॉजिकली कम महसूस होता है। इसीलिए इग्नोर हो जाता है। गॉड दिस एक्सप्लेन सो
(13:17) मेनी थिंग्स। हमारा मोरल इंस्टिंक्ट वुमेन को प्रोटेक्ट करने की तरफ टिल कर सकता है। इवन व्हेन दैट मीन्स लेस प्रोटेक्शन फॉर आवर मैन। ऑफकोर्स दिस इज नॉट टू से वुमेन डू नॉट नीड प्रोटेक्शन। इंडिया में स्पेशली क्राइम अगेंस्ट वुमेन [संगीत] पीक पर है। डीओ प्रोटेस्ट हो ही इसलिए रहे हैं। एंड अब्सोलुटली सपोर्ट इट। इंडिया में एक तरफ कुछ औरतें कानून को वेपन बना रही है। बट करोड़ों औरतें ऐसी भी हैं जो बेसिक राइट्स के लिए भी लड़ रही है। ये दोनों रियलिटीज [संगीत] एक साथ एक्सिस्ट करती है। इसीलिए इक्वलिटी का सलूशन मैन को विनर बनाना नहीं है। और [संगीत] ना ही
(13:46) फेमिनिज्म का मतलब है एक रात में चार लड़के स्कोर करो और एंपावर्ड फील करो। टॉक्सिक फेमिनिज्म एंड कैसे हमारे लॉस फीमेल्स के प्रति बायस्ड है। इसके सशंस क्या है? इन टॉपिक्स पर मैंने ऑलरेडी दो डिटेल वीडियोस बना रखी है विद [संगीत] एक्चुअल सशंस। क्योंकि इक्वलिटी सिर्फ स्लोगन से नहीं आती है। ग्राउंड रियलिटी तब चेंज होती है जब सिस्टम और लॉस बदलते हैं। वो वीडियोस जरूर देखना। एंड हां एआई एंड डेटा साइंस जैसे फ्यूचर रेडी स्किल्स अगर आपको बिल्ड करने हैं तो HCL गोवी में एक फ्री करियर कंसल्टेशन अवेलेबल है। नीचे डिस्क्रिप्शन में लिंक है। डू चेक इट आउट।
(14:18) हम्म।
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Is feminism in India becoming a fight for equality or a war against men?
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Because true equality isn't about choosing sides. It's about equal rights, equal protection and equal accountability.
ఇది వీడియో యొక్క తెలుగు అనువాదం—విద్యాసంబంధమైన, శాస్త్రీయ వివరణ రూపంలో ఇస్తున్నాను. వీడియోలో కొన్ని వివరణలు **పరికల్పనలే** అని స్పష్టంగా చెప్పబడింది; అవి ఖరారైన వైద్య లేదా చట్టపరమైన సలహా కాదు.
## శీర్షిక
**భారతదేశంలో రాడికల్ ఫెమినిజం పెరుగుదల**
భారతదేశంలో ఫెమినిజం సమానత్వం కోసం పోరాటమా లేక పురుషులపై యుద్ధమా?
పెరుగుతున్న పురుషవిరోధక వాదనలు, వైరల్ కోపం, వివాదాస్పద లింగ చట్టాలు, తప్పుడు ఆరోపణలు—ఈ వీడియో ఆధునిక ఫెమినిజం యొక్క అసౌకర్యమైన పక్షాన్ని పరిశీలిస్తుంది. కానీ నిజమైన షాక్ మానవ మనస్తత్వంలో ఉంది. శాస్త్రీయ ప్రయోగాలు లింగ పక్షపాతం, గుంపు గుర్తింపు మన న్యాయభావాన్ని ఎంత లోతుగా ప్రభావితం చేస్తాయో వెలికితీస్తాయి.
లక్షలాది మంది స్త్రీలు ఇంకా ప్రాథమిక హక్కుల కోసం పోరాడుతున్నప్పటికీ, పురుషుల సమస్యలు కూడా దృష్టి పొందాలి. ఎందుకంటే నిజమైన సమానత్వం పక్షాలు ఎంచుకోవడం కాదు; సమాన హక్కులు, సమాన రక్షణ, సమాన జవాబుదారీతనం.
## పరిచయం
“ఫెమినిస్ట్ గాన్ వైల్డ్ హేటింగ్ మెన్” వంటి పేర్లతో వీడియోలు రోజూ వైరల్ అవుతున్నాయి. “నేను గర్వంగా ఉన్నాను, నన్ను అలా పిలవండి” అని చెప్పేవారు, “సుప్రీమసీ” వంటి పదాలు, టికెట్ అడిగితే స్త్రీ స్వయంగా బట్టలు చింపి టికెట్ తనిఖీదారుని బెదిరించడం—ఇలాంటి దృశ్యాలు సోషల్ మీడియాలో వైరల్ అవుతున్నాయి.
చిన్న చిన్న కలహాలపై ఒక పురుషుడి కారును దెబ్బతీయడం, బెదిరించడం, “నిన్ను చంపేస్తాను” అని బెదిరించడం—ఇలాంటి క్లిప్లను మనం చూస్తాము, రోస్ట్ చేస్తాము, స్క్రోల్ చేస్తాము. కానీ ఇది కేవలం వినోదభరితమైన ఇంటర్నెట్ కంటెంట్ మాత్రమేనా?
## ఘోరమైన ఉదాహరణ
సియా తన కాబోయే భర్త కేతన్ను చల్లగా హత్య చేసింది—తన రహస్య ప్రియుడు చేతన్ను వివాహం చేసుకోవడానికి మాత్రమే. ఈ బలమైన హత్య కంటే కూడా షాకింగ్గా ఉన్నది కొందరు యువతుల ప్రతిస్పందనలు.
“ఇలా అబద్ధాలు చెప్తే చనిపోతారే” అని కొందరు అన్నారు; “#I hate men” అని హ్యాష్ట్యాగ్లు వేశారు; “ఇద్దరు పురుషులేమైనా చనిపోయారా?” అని సరదాగా రాసుకున్నారు. పురుషులలో భయం పెరుగుతుందని కొందరు సంతోషంగా రాసుకున్నారు.
ఇలా మాట్లాడినవారు అన్విద్యురాలైన గ్రామీణ యువతులు కాదు; ఒకరు ఫార్మసిస్ట్. ఆమె ఉద్దేశం పురుషులు స్త్రీల భయంలో జీవించాలని చెప్పడం. ఇది ఫెమినిజమా? ఒక ప్రశ్న అడగండి—ఒక ట్రాలీ వస్తోంది; దానిని ఆపడానికి వంతెన నుంచి ఒక వ్యక్తిని కిందకు నెట్టాలి. పురుషుడినా స్త్రీనా ఎవరిని నెట్టేవారు?
## సోషల్ మీడియా ప్రభావం
సోషల్ మీడియా ఇలాంటి తప్పుడు ఫెమినిస్ట్ కంటెంట్ను ఎందుకు రివార్డ్ చేస్తుంది? “ఎల్లప్పుడూ పురుషద్వేషి స్త్రీని డేట్ చేయండి, స్త్రీద్వేషి పురుషుడిని కాదు” వంటి వాదనలు, “చిన్న బట్టలు ఎందుకు ధరించకూడదు? ఇది నా శరీరం, ప్రజల ఆస్తి కాదు” వంటి వాదనలు వైరల్ అవుతున్నాయి.
“ఇది అంతర్గత స్త్రీద్వేషం” అని శాస్త్రీయ పదాలు వాడడం ద్వారా మాటలో తర్కం వచ్చినట్లు కాదు. పూర్తి బట్టలు ధరించడం వ్యక్తిగత ఎంపిక; చిన్న బట్టలు ధరించడం కూడా వ్యక్తిగత ఎంపిక. ఒక స్త్రీ పూర్తి బట్టలు ధరించడాన్ని వ్యతిరేకిస్తే అది ఫెమినిస్ట్ కాకపోవడం ఎలా?
ఒక యువతి 18 ఏళ్ల వయసులో గర్భవతి అయి, 19లో ప్రసవించింది; “నువ్వు గర్భవతి కావాల్సిందే” అని కొందరు రాసుకున్నారు. కానీ ఆమె ఆ పరిస్థితిలో ఎలా నిలిచిందో—ఆధ్యాత్మిక కుటుంబంలో పెరిగింది, విద్య లేదు, గర్భనిరోధక అవగాహన లేదు—దీని గురించి ఎవరు మాట్లాడుతున్నారు?
## సెక్సుయలైజ్డ్ క్లిక్బెయిట్
ఇన్నర్వేర్లో వీడియో ప్రారంభించడం ద్వారా “గెట్ రెడీ విత్ మీ” వీడియోలు చేసేవారు గురించి ఇది కేవలం స్త్రీల గురించి కాదు. ఒక యువకుడు అండర్వేర్లో వీడియో ప్రారంభిస్తే ప్రజలు అసౌకర్యంగా అనుభవిస్తారు—ముఖ్యంగా ఇది 18+ కంటెంట్ కాదు, సార్వత్రిక ఫ్యాషన్ కంటెంట్ కాబట్టి.
ఇది చాలా పాత సెక్సుయలైజ్డ్ క్లిక్బెయిట్ వ్యూహం. ఇక్కడ తర్కం లేదు. బాలీవుడ్ నటీనటుల ఇంటర్వ్యూల్లో కూడా ఇలాంటి తప్పు తర్కం కనిపిస్తుంది—దియా మిర్జా “క్లైమేట్ చేంజ్ వెనుక పురుషుల చేతి ఉంది; పురుషులే CO2కి పూర్తిగా, పూర్తిస్థాయిలో బాధ్యులు” అని చెప్పిన ఇంటర్వ్యూ వైరల్ అయింది.
## ఎంగేజ్మెంట్ తర్కం
ఈనాడు సోషల్ మీడియాలో ఉపయోగకరమైన కంటెంట్ కంటే కోపం రేపే కంటెంట్కు ఎక్కువ ఎంగేజ్మెంట్ వస్తుందని గమనించారా? క్రియేటర్లు, బ్రాండ్లు ఉద్దేశపూర్వకంగా ఇలాంటి కంటెంట్ చేస్తారు—ఎందుకంటే కోపం ఎంగేజ్మెంట్ను పెంచుతుంది.
Instagram, YouTubeకు మీరు ఏ కంటెంట్పై ఆగుతారో, ఏది స్కిప్ చేస్తారో, ఏది ఎలా రియాక్ట్ చేస్తారో ఎలా తెలుస్తుంది? సమాధానం **డేటా**. మీ క్లిక్లు, స్కిప్లు, వాచ్ టైమ్, సెర్చ్లు—వీటిని విశ్లేషించి అల్గారిథమ్లు మీరు తర్వాత ఏం చూడాలనుకుంటారో అంచనా వేస్తాయి.
ఇది కేవలం సోషల్ మీడియాకే పరిమితం కాదు. Netflix మీకు ఏ షోను సిఫారసు చేయాలో నిర్ణయిస్తుంది; Blinkit నెలవారీ ఎన్ని ఇన్వెంటరీలు అవసరమో, ఎప్పుడు స్టాక్ చేయాలో అంచనా వేస్తుంది. ఈనాడు డేటా ప్రపంచవ్యాప్తంగా అతిపెద్ద, చిన్న డిజిటల్ వ్యాపారాల పునాది.
## డేటా సైన్స్ ప్రమోషన్
నీతి ఆయోగం కూడా 2030 నాటికి డేటా, AI సాంకేతికతలు 40 లక్షల ఉద్యోగాలు సృష్టిస్తాయని అంచనా వేస్తోంది. ప్రస్తుతం డేటా సైన్స్ ఉద్యోగాలు 36% వేగంతో పెరుగుతున్నాయి.
చాలామందికి డేటా సైన్స్ అంటే కోడింగ్ అని, అది చాలా కష్టమని అనిపిస్తుంది. కానీ అలా కాదు—కోడింగ్ నాలెడ్జ్ లేకుండానే 6 నెలల్లో డేటా సైన్స్ నేర్చుకోవచ్చు అని HCL GUVI డేటా సైన్స్ కోర్సు ప్రకటన చెబుతోంది. ఇది HCL గ్రూప్ కంపెనీ; 10+ ఇండస్ట్రీ-గ్రేడ్ ప్రాజెక్ట్లు, IITM Pravartak సర్టిఫికేషన్, 1000+ హైరింగ్ పార్ట్నర్ల నుంచి ప్లేస్మెంట్ సపోర్ట్ అందుతుందని చెప్తోంది.
## టాజ్ఫెల్ ప్రయోగం
ఇప్పుడు రాడికల్ ఫెమినిజం వైపు తిరిగి వస్తే—ఈ ప్రయోగం మనస్తత్వం యొక్క కఠినమైన సత్యాన్ని చూపుతుంది. 1970లో మనస్తత్వవేత్త హెన్రీ టాజ్ఫెల్ కొందరిని పూర్తిగా యాదృచ్ఛిక, అర్థరహిత రెండు గుంపుల్లో విభజించారు. తర్వాత వారికి ఒకరికొకరు నిజమైన డబ్బు పంచగలగడానికి అధికారం ఇచ్చారు.
ఎంపిక 1: గ్రూప్ A, B రెండింటికీ ₹10. ఎంపిక 2: గ్రూప్ Aకి ₹7, గ్రూప్ Bకి ₹1 మాత్రమే. ఆశ్చర్యకరంగా పిల్లలు సమాన డబ్బు ఎంచుకోలేదు; తమకు తక్కువ డబ్బు వచ్చే ఎంపికనే ఉద్దేశపూర్వకంగా ఎంచుకున్నారు—ఇతర గుంపుకు తమ కంటే ఎక్కువ నష్టం జరిగే షరతుపై.
అంటే తమ నష్టం పర్వాలేదు; ఎదురివారి నాశనం జరగాలి. ఎందుకంటే ఎదురివారిపై ఒక లేబల్ పడింది—“వాళ్ళు ఆ వాళ్ళు.”
## రాబర్స్ కేవ్ ప్రయోగం
మానవ స్వభావం ఇంత విధ్వంసకరంగా ఉంటే ప్రజలు ఎలా కలుస్తారు? మరో ప్రసిద్ధ ప్రయోగం—**రాబర్స్ కేవ్**—ఒకరినొకరు నిజంగా ద్వేషించే రెండు పోటీ గుంపులను కలపడానికి ప్రయత్నించారు.
ప్రేమ, టీమ్-బిల్డింగ్ కార్యకలాపాలు, స్నేహం—అన్నీ విఫలమయ్యాయి. చివరికి ఒకే ఒక్క విషయం పనిచేసింది: పరిశోధకులు క్యాంప్ నీటిని నిలిపివేసినప్పుడు, మనుగడ కోసం ఆ ద్వేషాన్ని మర్చిపోయి వెంటనే స్నేహితులయ్యారు.
శాస్త్రవేత్తల నిర్ధారణ: **పంచుకున్న బెదిరింపు**. ఒక సాధారణ శత్రువే బలమైన సామాజిక బంధం. అదే విషయం సోషల్ మీడియా చిన్న ఎకో చేంబర్లలో కూడా జరుగుతోందేమో? క్రియేటర్లు ఇలాంటిదే చేయడానికి ప్రయత్నిస్తున్నారేమో?
## ఎకో చేంబర్లు
Instagramలో యువతులు పదేపదే ఇలాంటి రీల్స్ చూస్తుంటే—సందేశం “ఫెమినిజం” కాదు, “పురుషులే సమస్య” అయిపోతే—అది వారి అంతర్గత వాస్తవంగా మారడం ప్రారంభమవుతుంది.
ఒక చిన్న డిస్క్లైమర్: ఈ వీడియో నిరసనకు ముందే తయారైంది. కానీ తప్పుడు ఫెమినిజాన్ని విమర్శించడం అసలైన స్త్రీ హక్కులకు వ్యతిరేకం కాదు. ఇక్కడ ఆందోళన ఏమిటంటే—తీవ్రమైన నిరసనలో కొందరు నిరసనకారులు “గందీ నస్బందీ” వంటి నినాదాలు ఎందుకు అంటున్నారు?
ఫెమినిజం అంటేనే అన్ని మానవులకు సమానత్వం. తనను తాను ఫెమినిస్ట్ అని చెప్పుకుని ఇతరుల హక్కులను ఎలా గెలుస్తారు? ఇలాంటి నినాదాలు వినే యువతులు సమానత్వం నేర్చుకుంటారా లేదా ద్వేషాన్ని నేర్చుకుంటారా?
## 4B ఉద్యమం
నిజంగా ఇలా జరుగుతోంది. ఈసారి **Indian 4B movement**—ఇందులో నాలుగు అంశాలు: పురుషులతో డేట్ చేయకూడదు, వివాహం చేసుకోకూడదు, వారి పిల్లలను కనకూడదు, వారితో శారీరిక సంబంధం పెట్టుకోకూడదు.
ఇక్కడే ఫెమినిజం, లింగ యుద్ధం మధ్య గీత మసకబడటం ప్రారంభమవుతుంది.
## చట్టపరమైన అంశాలు
సోషల్ మీడియాతో పాటు దేశ చట్టపరమైన నిర్మాణం కూడా ఈ పురుషులపై స్త్రీల రాడికలిజానికి ప్రోత్సాహం ఇస్తోందని వీడియో వాదిస్తుంది. దైనిక్ భాస్కర్ జట్టు ఉత్తరప్రదేశ్లో పురుషులపై తప్పుడు క్రిమినల్ కేసులు వేసే గ్యాంగ్పై స్టింగ్ ఆపరేషన్ చేసింది.
ఆ గ్యాంగ్ నాయకురాలు సఫలతా పాఠక్ చెప్పినట్లు—వారి వద్ద 20–25 యువతులు ఉన్నారు; కొందరు 18 ఏళ్ల లోపు వారు. ఏ పురుషుడినైనా తప్పుడు అత్యాచారం, మాదకద్రవ్యాలు, POCSO కేసుల్లో చిక్కగట్టడానికి పూర్తి పని చేస్తారని వాదన.
జైపూర్లో ఒక స్త్రీని అరెస్ట్ చేశారు—వేర్వేరు పురుషులపై, దేశంలోని వేర్వేరు ప్రాంతాల్లో 15 అత్యాచార కేసులు నమోదు చేసింది. ఇలాంటి అనేక కేసులు చూస్తే ఒక అసౌకర్యమైన ప్రశ్న వస్తుంది: మన దేశంలో పురుషులను తప్పుడు కేసుల్లో చిక్కగట్టడం ఇంత సులభమా?
## BNS సెక్షన్లు
అవును—కొంతవరకు అని వీడియో వాదిస్తుంది; కారణం చట్ట వ్యవస్థలోని కొన్ని ముఖ్యమైన లోపాలు.
- **BNS సెక్షన్ 63:** “ఒక పురుషుడు అత్యాచారం చేసినట్లయితే…” అని స్పష్టంగా ఉంది; కానీ ఒక యువతి యువకుడిపై అత్యాచారం చేస్తే దానికి ప్రస్తావన లేదు.
- **BNS సెక్షన్ 69:** “విధేయత లేని మార్గాల ద్వారా లైంగిక సంపర్కం” అనే భాగంపై గందరగోళం ఉంది. వివాహం ప్లాన్ నిజమైనదిగా ఉన్న సంప్రదాయ సంబంధం తర్వాత విడిపోయినప్పుడు, ఈ వాగ్నెస్ కారణంగా కొందరికి పురుషుడిపై కేసు వేసి అరెస్ట్ చేయించడం సులభమవుతుందని వాదన.
- **BNS సెక్షన్ 85:** “భార్యపై క్రూరత్వం” — భర్త, భర్త బంధువులు స్త్రీని క్రూరత్వానికి గురిచేస్తున్నారని పేర్కొంది; కానీ “క్రూరత్వం” నిర్వచనం చాలా విశాలంగా, తెరిచినదిగా ఉందని వాదన. దీని దుర్వినియోగంతో కొందరు భర్త కుటుంబం మొత్తాన్ని, పడకగదిలో ఉన్న తాతాయమ్మలను కూడా అరెస్ట్ చేయిస్తున్నారని కోర్టులే గుర్తించాయని వాదన.
## భరణం వివాదం
అలాగే **భరణం (alimony) చట్టాలు**—ఇలాంటి వీడియోలు చాలా వైరల్ అవుతాయి. “నెలకు ₹66,300 ఖర్చు చేస్తారా? ఒక్క అమ్మాయికి ఇంత?” అని వాదనలు వస్తున్నాయి. ఒక సంవత్సరం వివాహం తర్వాత ₹5 కోట్ల భరణం, నెలకు ₹15 లక్షలు డిమాండ్ చేసిన కేసులు ఉదాహరణలుగా చూపబడ్డాయి.
**PNSS సెక్షన్ 144**లో భార్య భర్త నుంచి నిర్వహణ డబ్బు కోరగలదు; భర్త భార్య నుంచి కాదు. అవును—ఇతర చట్టాల్లో భర్తలకు కూడా భరణం ఎంపికలు ఉన్నాయి. కానీ ఇక్కడ పెద్ద గ్రే ఏరియా ఉంది—నిర్దిష్ట సూత్రం లేదు.
ఇతర దేశాల మాదిరిగా భారతదేశంలో భరణం లెక్కించడానికి నిర్దిష్ట శాతం లేదా గణిత సూత్రం లేదు. కోర్టు భార్య ఆదాయం, అవసరాలు, వివాహ వ్యవధి, వివాహ కాలంలో ఆమె జీవన ప్రమాణం వంటి అంశాలను చూసి నిర్ణయిస్తుంది.
కానీ దీని ఫలితంగా కొందరు భార్యలు జీవన ప్రమాణాన్ని నిలిపివచ్చుకోవడానికి నెలకు ₹5–6 లక్షలు, ₹15 లక్షల వరకు కోరుతున్నారని వాదన. “నాకు 12 కోట్లు కావాలి” అని ఒక వ్యక్తి చెప్పిన దృశ్యం ఉదాహరణ.
## కోర్టు వెలుపల పరిష్కారాలు
కోర్టు వెలుపల పరిష్కార ఒత్తిడి కూడా చాలా సాధారణం. క్రూరత్వం, దారుణత్వం వంటి నిబంధనల దుర్వినియోగంపై సుప్రీం కోర్టు కూడా ఆందోళన వ్యక్తం చేసింది—ముఖ్యంగా క్రిమినల్ కేసుల అపఖ్యాతి కుటుంబాలను భారీ భరణాలకు అంగీకరించేలా బలవంతం చేస్తుంది కాబట్టి.
ఒక కేసులో పరిష్కారం జరిగింది; భార్య కూడా సిద్ధమైంది, సంతకాలు చేసింది. కానీ హఠాత్తుగా భార్యకు కొన్ని విషయాలు నచ్చలేదు; వివాహం జరిగిన 23 సంవత్సరాల తర్వాత గృహ హింస కేసు కూడా నమోదు చేసింది.
## NCRB డేటా
ఇంతలో NCRB డేటా ఒక ఆందోళనకరమైన నమూనాను చూపుతోంది. కుటుంబ, వివాహ సమస్యల కారణంగా ఆత్మహత్య చేసుకున్నవారిలో వివాహిత పురుషుల సంఖ్య వివాహిత స్త్రీల కంటే సుమారు 2.5 రెట్లు ఎక్కువ.
ఒక డేటా అదే తనలో నిర్ణయాత్మకం కాదు; కానీ కనీసం ఈ డేటా ఒక హెచ్చరికగల పరిస్థితిని హైలైట్ చేస్తోంది.
## శాస్త్రీయ ప్రయోగాలు
చివరికి అత్యంత కఠినమైన వాస్తవం—కేవలం భారతీయ చట్టాలే కాదు; కొంతవరకు శాస్త్రం కూడా స్త్రీల వైపు స్వల్పంగా పక్షపాతపరంగా ఉందని వీడియో వాదిస్తుంది.
రెండు కఠినమైన శాస్త్రీయ ప్రయోగాలు:
- **న్యూరోసైంటిస్ట్ డాక్టర్ ఓరియల్ ఫెల్డ్మాన్ హాల్, ఆమె టీమ్** ఒక వ్యక్తి నైతిక నిర్ణయం ఎదురివారి లింగం ఆధారంగా మారుతుందా అని తెలుసుకోవడానికి అనేక ప్రయోగాలు చేశారు.
- **మొదటి పరీక్ష—పెయిన్ వర్సెస్ గెయిన్:** పాల్గొనేవారి ముందు డబ్బు, రెండు ఎంపికలు ఉన్నాయి—డబ్బును తన దగ్గరే ఉంచుకోవడం కానీ ఎదురివారికి బాధాకరమైన విద్యుత్ షాక్ వచ్చేలా చేయడం; లేదా డబ్బును వదిలేసి ఎదురివారిని షాక్ నుంచి కాపాడడం. ఫలితం: ఎదురుగా స్త్రీకి షాక్ వచ్చేటప్పుడు పురుషుడికి వచ్చేటప్పుడు కంటే గణనీయంగా ఎక్కువ డబ్బు వదులుకున్నారు.
- **రెండో ప్రయోగం—ఫుట్బ్రిడ్జ్ డైలమా:** ట్రాలీ వస్తోంది; ట్రాక్పై కొందరు చిక్కి ఉన్నారు. వారిని కాపాడడానికి వంతెన నుంచి ఒక వ్యక్తిని కిందకు నెట్టాలి. పురుషుడా స్త్రీయా? షాకింగ్గా 88% పాల్గొనేవారు “పురుషుడిని నెట్టండి” అని చెప్పారు.
## అసమానత్వ ప్రశ్న
ఇక్కడ ఒక అసౌకర్యమైన ప్రశ్న వస్తుంది: మనం నిజంగా సమానత్వాన్ని నమ్ముతున్నామా? ఎందుకంటే చివరికి జీవసంబంధంగా మన మెదడు ఎంత హాని జరిగిందో మాత్రమే చూడట్లేదు; అపస్పృకంగా హాని, నొప్పి ఎవరికి జరిగింది, ఏ లింగానికి జరిగిందో కూడా చూస్తుంది.
బాధితుడు పురుషుడైతే ఆ నొప్పి, ఆ బాధ మనకు శుద్ధంగా మానసికంగా తక్కువగా అనిపిస్తుంది; అందుకే విస్మరించబడుతుంది.
ఇది అనేక విషయాలను వివరిస్తుంది. మన నైతిక సహజ ప్రవృత్తి స్త్రీలను రక్షించడం వైపు మొగ్గు చూపగలదు—అది పురుషులకు తక్కువ రక్షణ అయినా. అంటే స్త్రీలకు రక్షణ అవసరం లేదని కాదు; భారతదేశంలో స్త్రీలపై నేరాలు పీక్లో ఉన్నాయి. అందుకే నిరసనలు జరుగుతున్నాయి; వాటిని పూర్తిగా మద్దతు ఇస్తాము.
## సమానత్వ పరిష్కారం
భారతదేశంలో ఒకవైపు కొందరు స్త్రీలు చట్టాన్ని ఆయుధంగా వాడుతున్నారు; మరోవైపు కోట్లాది స్త్రీలు ప్రాథమిక హక్కుల కోసం కూడా పోరాడుతున్నారు. ఈ రెండు వాస్తవాలు ఒకేసారి ఉంటాయి.
అందుకే సమానత్వ పరిష్కారం పురుషుడిని విజేతగా చేయడం కాదు; ఫెమినిజం అంటే ఒక రాత్రిలో నలుగురు అబ్బాయిలను స్కోర్ చేసి సశక్తీకరించినట్టు అనుకోవడం కాదు.
టాక్సిక్ ఫెమినిజం, మన చట్టాలు స్త్రీల వైపు ఎంత పక్షపాతపరంగా ఉన్నాయి, దాని పరిణామాలు ఏమిటి—ఈ అంశాలపై వీడియో నిర్మాత ఇంతకుముందే రెండు వివరణాత్మక వీడియోలు చేసినట్లు చెప్తోంది.
## ముగింపు
సమానత్వం కేవలం నినాదంతో రాదు. వ్యవస్థలు, చట్టాలు మారినప్పుడే నేలపై వాస్తవం మారుతుంది. ఆ వీడియోలు తప్పక చూడండి.
AI, డేటా సైన్స్ వంటి భవిష్యత్-సిద్ధమైన నైపుణ్యాలను నేర్చుకోవాలంటే HCL GUVIలో ఫ్రీ కెరీర్ కన్సల్టేషన్ అందుబాటులో ఉందని వీడియో ప్రకటన చేస్తోంది; లింక్ వివరణలో ఉందని చెప్తోంది.
Transcript:
(00:00) फेमिनिस्ट गॉन वाइल्ड हेटिंग मैन। ऐसे नामों से वीडियोस रोज वायरल होते हैं। आई ऍम अ प्राउडी सो फील फ्री टु कॉल मी दैट। सुप्रीमिसी। टिकट मांगा तो लड़की खुद अपने कपड़े फाड़ कर टीटी को धमकी देती है। अब देख तुझे कैसे फसाती हूं। ये मेरा कपड़ा छू रहा है यार। घबराओ मत। बहुत तेज हो। अभी हम खुद बताते हैं। ओपनली धमकी देना। तुझे जान से मार दूंगी। मार दूंगी तुझे जान से। तो कहीं छोटे-मोटे झगड़े पर किसी आदमी का गाड़ी डैमेज करना। [संगीत] हम देखते हैं, रोस्ट करते हैं और स्क्रोल कर देते हैं। बट व्हाट इफ दिस इजंट जस्ट फनी इंटरनेट कंटेंट? सिया ने अपने ही फिओन से केतन का
(00:36) कोल्ड ब्लडेड मर्डर कर दिया। सिर्फ इसीलिए क्योंकि उसे अपने सीक्रेट बॉयफ्रेंड चेतन से शादी करनी थी। बट इस ब्रूटल मर्डर से भी ज्यादा शॉकिंग है। इस पर कुछ लड़कियों के रिएशंस। ऐसे झूठ बोलोगे तो मरोगे ही ना। सो हैशटैग आई हेट मैन। [हंसी] दो आदमी क्या मर गए? मर्द समाज में डर फैला। सो भाई देखो मुझे तो बड़ी खुशी होती है ऐसे नहीं। मैं तो लड़कियां तुम्हारे साथ इतनी गर्ल्स मुझ में होती तुम अभी तक पांच छह मर्डर कर चुकी होती बट नहीं है तुम बहुत अच्छा कर रहे हो ऐसे और मरे और डर पैदा हो इन लड़कों में ये कोई अनएजुकेटेड रूरल लड़की नहीं है शी
(01:06) इज़ अ फार्मासिस्ट और उसका मकसद आदमियों को औरतों के खौफ में जीना चाहिए क्यों इज दिस फेमिनिज्म आपसे एक सवाल एकदम ऑनेस्टली आंसर करना इमेजिन एक रनवे ट्रॉली आ रही है और सामने लोग हैं। अब इन लोगों को बचाने के लिए आपको ब्रिज से एक इंसान को नीचे फेंकना होगा ट्रैक पर। और आपके पास चॉइस है। आप एक मेल को धक्का दोगे या एक फीमेल को? साइंटिस्ट ने एक्सैक्टली यही जानना चाहा एंड द रिजल्ट्स एक्सप्लेन क्यों आज 2026 में भी जेंडर लॉस, जेंडर डिबेट्स चलते रहते हैं। हमें ट्रू इक्वलिटी आज तक नहीं मिल पाई है। बट उससे पहले समझते हैं सोशल मीडिया ऐसे फेक फेमिनिस्ट कंटेंट को
(01:43) इतना रिवॉर्ड क्यों करती है। ऑलवेज डेट अ वूमन हु इज अ मैन हेटर बट नेवर अ मैन हु इज अ वूमेन हेटर। छोटे कपड़े [संगीत] क्यों नहीं पहनती? बाकी लड़कियों के जैसे क्योंकि यह मेरी बॉडी है। कोई पब्लिक प्रॉपर्टी नहीं। वेट व्हाट? दैट्स नॉट मॉडेसिटी। दैट्स इंटरनलाइज मिसनी शोइंग अप। इंटरनलाइज्ड मिसोजनी जैसे साइंटिफिक टर्म्स यूज करने से बात में लॉजिक नहीं आ जाता। दिस इज नॉट इंटरनलाइज्ड मिसोजनी। दिस इज अ पर्सनल चॉइस। जस्ट हाउ वेयरिंग शॉर्ट क्लोथ्स इज आल्सो अ पर्सनल चॉइस। एंड अगर आप किसी फीमेल के पर्सनल चॉइस ऑफ वेयरिंग फुल क्लोथ्स के खिलाफ जा रहे हो
(02:17) तो क्या यह आपको एक एंटीफेमिनिस्ट नहीं बना देता? आई फाउंड आउट आई वाज प्रेग्नेंट व्हेन आई वाज 18 एंड आइ गव बर्थ एट 19 ओर यू शुड हैव गोटन प्रेग्नेंट बट हु इज गोइंग टू टॉक अबाउट हाउ आई एंटड अप इन दैट सिचुएशन बीइंग पार्ट ऑफ हर स्पिरिचुअल फैमिली बीइंग रेस्ड विथ द स्क्रिप्चर लैक ऑफ एजुकेशन और कंट्रासेसप्टिवस इट्स लाइक एस्पेशली इन स्पिरिचुअल कम्युनिटीज़। अनपुलर ओपिनियन बट जो लोग ये गेट रेडी विथ मी वीडियोस बना रहे हैं बाई वेअरिंग इनरवेयर एंड देयर फर्स्ट फ्रेम ओर बाय डूइंग दिस इन द फर्स्ट फ्रेम। यह सिर्फ वूमेन के बारे में नहीं है। कोई लड़का भी
(02:47) अगर अपने अंडरवियर में वीडियो स्टार्ट करेगा, पब्लिक अनकंफर्टेबल होगी, एस्पेशली क्योंकि आपका जॉनर इज नॉट 18 प्लस एडल्ट कंटेंट, इट्स यूनिवर्सल फैशन कंटेंट। आई थिंक हम सब जानते हैं यह एक बहुत ही पुरानी सेक्सुअलाइज्ड क्लिकबेट स्ट्रेटजी है। सो देयर इज रियली नो लॉजिक हियर। बहुत सिमिलर सा फ्लॉड लॉजिक आपको बॉलीवुड स्टार्स के इंटरव्यूज में भी दिख जाएगा। एक इंटरव्यू बीच में वायरल हुआ जहां दिया मिर्जा लिटरली कह रही है क्लाइमेट चेंज के पीछे मर्दों का हाथ है। इट्स मैन हु हैव ड्रिवन क्लाइमेट चेंज एंड दे आर एंटायरली एंड टोटली रिस्पांसिबल फॉर
(03:17) द केओ। बट कभी नोटिस किया है आजकल सोशल मीडिया पर ज्यादा एंगेजमेंट अक्सर यूज़फुल कंटेंट को नहीं आउटरेज वाले कंटेंट को ज्यादा मिलता है। क्रिएटर्स और ब्रांड्स डेलीबेटली ऐसे कंटेंट बनाते हैं। बिकॉज़ रेज गेट्स एंगेजमेंट। बट Instagram और YouTube को कैसे पता चलता है कि आप किस कंटेंट पर रुकोगे, क्या स्किप करोगे या किस चीज पर कैसे रिएक्ट करोगे? इसका आंसर है डाटा। आपके क्लिक्स, स्किप्स, वॉच टाइम, सर्चेस ये सब एनालाइज करके एल्गोरिदम्स प्रेडिक्ट करते हैं कि आप नेक्स्ट क्या देखना चाहेंगे। और यह सिर्फ सोशल मीडिया तक लिमिटेड नहीं है। Netflix डिसाइड करता है
(03:51) आपको कौन सा शो रेकमेंड करना है। ब्लिंकडप्टो प्रेडिक्ट करते हैं कि मंथली [संगीत] कितनी इन्वेंटरीज लगेंगी एंड व्हेन दे नीड टू स्टॉक अप। टुडे डाटा इज द फाउंडेशन बिहाइंड एव्री [संगीत] बिगेस्ट और स्मालेस्ट डिजिटल बिज़नेसेस अक्रॉस द वर्ल्ड। यही वजह है कि नीति आयोग खुद प्रेडिक्ट कर रही है [संगीत] डाटा एंड एआई के टेक्नोलॉजीस 2030 तक 40 लाख जॉब्स क्रिएट करेंगे। एट दिस मोमेंट टू डेटा साइंस जॉब्स आर ग्रोइंग एट द पेस ऑफ़ 36%। बट बहुत लोगों को लगता है डेटा साइंस का मतलब कोडिंग एंड वो बहुत मुश्किल है। पर ऐसा नहीं है विदाउट कोडिंग नॉलेज भी आप बस
(04:23) 6 महीनों में डेटा साइंस सीख सकते हो वि आईआईटीएम प्रवर्तक एंड HCL गुबीस डाटा साइंस कोर्स। [संगीत] HCL GBI यह एक HCL ग्रुप कंपनी है। यह वही HCL है जिसने इंडिया का आईटी बैकबोन बिल्ड करने में कंट्रीब्यूट किया था। वही सेम इंडस्ट्री एक्सपर्टीज HCL Googbi के एआई इनफ्यूज्ड करिकुलम के साथ आपके करियर को शेप करेगी। यहीं आप 10 प्लस इंडस्ट्री ग्रेड प्रोजेक्ट्स बिल्ड करोगे। आपको मिलेगा आईआईटीएम प्रवृत्तक सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट सपोर्ट फ्रॉम 1000 प्लस हायरिंग पार्टनर्स। सो फ्यूचर रेडी करियर्स बनाना चाहते हो तो अभी इनका फ्री करियर
(04:55) कंसल्टेशन कॉल बुक करो। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन। नाउ कमिंग बैक टू रेडिकल फेमिनिज्म। यह एक्सपेरिमेंट साइकोलॉजी का एक ब्रूटल ट्रुथ बताता है। 1970 में साइकोलॉजिस्ट हेनरी तचफेल ने कुछ बच्चों को दो कंप्लीटली रैंडम और एकदम मीनिंगलेस ग्रुप्स में बांट दिया। फिर उन्हें पावर दी कि वो एक दूसरे को रियल मनी बांट सके। ऑप्शन वन, ग्रुप ए और बी दोनों को ₹10, ऑप्शन बी, ग्रुप ए को ₹7 बट ग्रुप बी को सिर्फ ₹1। सरप्राइजिंगली बच्चों ने इक्वल पैसे नहीं चुने। उन्होंने इंटेंशनली वो ऑप्शन चुना जिसमें उन्हें खुद कम पैसे मिले। बस इस शर्त पर कि दूसरे ग्रुप को
(05:28) उनसे भी बड़ा नुकसान हो। मतलब अपना नुकसान चलेगा। पर सामने वाले की बर्बादी जरूर होनी चाहिए। सिर्फ क्योंकि सामने वाले पर एक लेबल लग गया है दे वो लोग। बट अगर ह्यूमन नेचर इतना डिस्ट्रक्टिव है तो लोग आपस में यूनाइट कैसे होते हैं? एक और फेमस एक्सपेरिमेंट रॉबर्स केव में दो राइवल ग्रुप्स जो एक दूसरे से लिटरली नफरत करते थे उन्हें मिलाने की पूरी कोशिश की गई। प्यार, टीम बिल्डिंग एक्टिविटीज, दोस्ती सब फेल। एंड में बस एक ही चीज काम की। जब रिसर्चरर्स ने कैंप का पानी बंद कर दिया तो सर्वाइवल के लिए वो हेट भूलकर तुरंत दोस्त बन गए। साइंटिस्ट का कंक्लूजन
(06:06) शेयरर्ड थ्रेट। वन कॉमन एनिमी इज द स्ट्रांगेस्ट सोशल ग्लू। सो, क्या यही चीज सोशल मीडिया के छोटे इको चेंबर्स में भी तो नहीं हो रही? क्या यह क्रिएटर्स कुछ सिमिलर करने की कोशिश तो नहीं कर रहे? Instagram पर जब यंग गर्ल्स रिपीटेडली ऐसे रील्स देखती है जहां मैसेज फेमिनिज्म नहीं बल्कि मैन आर द प्रॉब्लम बन जाता है तो यह उनकी इनर रियलिटी बनने लगती है। एक छोटा सा डिस्क्लेमर। यह वीडियो डीयू प्रोटेस्ट से पहले बन चुका था। बट सूडो फेमिनिज्म को कॉल आउट करना जेन्युइन वुममेंस राइट्स के खिलाफ होना बिल्कुल भी नहीं है। लेकिन यहां कंसर्न है कि एक सीरियस प्रोटेस्ट
(06:37) में कुछ प्रोटेस्टर्स ऐसे स्लोगंस क्यों लगा रहे हैं? गंदी नसबंदी। गंदी नसबंदी। फेमिनिज्म का मतलब ही है इक्वलिटी फॉर ऑल ह्यूमंस। तो आप खुद को फेमिनिस्ट कह कर दूसरों के राइट्स कैसे जीत सकते हो। सोचो ऐसे स्लोगन सुनने वाली यंग गर्ल्स एंपावरमेंट के नाम पर इक्वलिटी सीखेंगी या हेट्रेड? एंड जेनुइनली ऐसे हो भी रहा है। अबकी बार इंडियन फोर बी मोमेंट इसमें चार एस्पेक्ट्स हैं कि वी वोंट डेट मैन। वी वोंट मैरी मैरी देम एंड उनके चिल्ड्रन हम बेयर नहीं करेंगे एंड उनके साथ हम फिजिकल इंटरकोर्स नहीं करेंगे। और यहीं से फेमिनिज्म और जेंडर वॉर के बीच की लाइन
(07:15) ब्लर होने लगती है। सोशल मीडिया के अलावा हमारे देश का लीगल स्ट्रक्चर भी इस मैन वर्सेस वूमेन रेडिकलिज्म को और बढ़ावा दे रहा है। यह वीडियो एक स्ट्रिंग ऑपरेशन है जो दैनिक भास्कर की टीम ने एक ऐसे गैंग पर किया जो यूपी में मर्दों के खिलाफ फेक क्रिमिनल केसेस करती है। इस गैंग की लीडर सफलता पाठक का कहना है कि हमारे पास 20 से 25 यंग लड़कियां हैं। कुछ तो माइनर लड़कियां हैं यानी अंडर 18 जो किसी भी आदमी पर फेक रेप ड्रग्स या इवन पॉक्सो यानी माइनर्स के रेप केसेस में फंसाने के लिए पूरा काम करेंगी। कि डायरेक्टली धमकी देते हैं। अगर उनसे
(08:03) काम नहीं करवाया तो यूपी के अंदर कहीं भी छुप जाओ आप जिंदा नहीं बचोगे। जयपुर में एक औरत पकड़ी गई जिसने 15 रेप केसेस फाइल किए थे अलग-अलग मर्दों पे अलग-अलग पार्ट्स ऑफ इंडिया में। ऐसे कई सारे केसेस देखकर एक अनकंफर्टेबल सवाल उठता है। क्या हमारे देश में आदमियों को फॉल्स केसेस में फंसाना इतना आसान है? यस। काफी हद तक और वजह है हमारे लीगल सिस्टम के कुछ क्रिटिकल लूप होल्स। सबसे पहले तो बीएएनएस सेक्शन 63 पे आते हैं। क्लियरली मेंशंड है अ मैन इज सेड टू कमिट रेप इफ ही डॉट डॉट डॉट डॉट। बट यहां पर अगर लड़की एक लड़के का रेप करे तो उसका कोई मेंशन नहीं है।
(08:40) नेक्स्ट सबसे बड़ा कन्फ्यूजन है सेक्सुअल इंटकोर्स बाय एंप्लॉइंग डिसाइडफुल मींस। इमेजिन एक कपल का फिजिकल रिलेशनशिप कंसेंशुअल था क्योंकि शादी का प्लान भी उनका जेन्युइन था। पर बाद में उनका ब्रेकअप हो गया। तो बीएनएस सेक्शन 69 के वेगनेस की वजह से कई फीमेल्स के लिए इज़ियर हो जाता है लड़के पर केस फाइल करके उसे अरेस्ट करवा लेना। जबकि उनका फिजिकल रिलेशनशिप कंप्लीटली कंसेंशियल था। मेरे ऊपर एक लड़की ने आरोप लगाया है कि [संगीत] मैं इसको शादी का झूठा झांसा देके 5 साल तक रेप किया हूं। नेक्स्ट बीएएनएस सेक्शन 85 क्रुएल्टी टुवर्ड्स वाइफ। अगेन इस लॉ में लिखा है
(09:13) हस्बैंड और रिलेटिव ऑफ अ हस्बैंड ऑफ अ वूमेन सब्जेक्टिंग हर टू क्रुएल्टी। बट अगेन क्रुएल्टी का डेफिनेशन बहुत वेग और ओपन एंड है और इसीलिए इसी सेक्शन का फायदा उठाकर कोर्ट ने खुद माना है कि कुछ औरतें अपने हस्बैंड के पूरे खानदान यहां तक कि बेड रिटन दादा-दादी को भी अरेस्ट करवा लेती है। आल्सो सेक्शन 85 के तहत औरत पर क्रुवेल्टी के लिए सजा हो सकती है। लेकिन अगर सेम क्रुएल्टी एक आदमी के साथ हो तो लॉ काफी हद तक साइलेंट [संगीत] है। नेक्स्ट एलिमनी लॉस। इस तरह के वीडियोस बहुत वायरल होते हैं। 66300 पर मंथ डस एनीबडी स्पेंड दिस मच? अ सिंगल
(09:50) लेडी फॉर हरसेल्फ? ओ इफ शी वांट्स टू स्पेंड लेट हर अर्न। एक साल की शादी के बाद 5 करोड़ की एलुमिनी मंथली 15 लाख की डिमांड। पीएनएस सेक्शन 144 में वाइफ हस्बैंड से मेंटेनेंस क्लेम कर सकती है। बट हस्बैंड वाइफ से नहीं। हां, दूसरे लॉज़ में हस्बैंड्स के लिए भी एलुमिनी के ऑप्शंस है। बट यहां एक मेजर ग्रे एरिया है नो फिक्स्ड फार्मूला। दूसरे देशों की तरह इंडिया में मेंटेनेंस का कोई फिक्स्ड परसेंटेज या मैथमेटिकल फार्मूला नहीं है जिससे एलुमिनी कैलकुलेट हो। कोर्ट बेसिकली वाइफ की इनकम, नीड्स, मैरिज ड्यूरेशन एंड मैरिज के दौरान वाइफ का क्या स्टैंडर्ड ऑफ
(10:23) लिविंग था ऐसे फैक्टर्स देखकर डिसाइड करती है। बट इसी का नतीजा है कुछ वाइफ्स का कॉन्फिडेंस से महीने के 5 से 6 लाख, ₹15 लाख तक मांगना। सिर्फ लाइफस्टाइल मेंटेन करने के लिए। आई वांट 12 क्रॉप्स। शी डजंट वांट द मैरिज। नोबडी वांट्स द मैरिज। बट शी वांट्स टुडे 12 क्रॉस BMW कार एट्सेट। विल यू टेक एलुमिनी। ऑफ़ कोर्स। ऑब्वियसली। ऑब्वियसली? यस। लाइक हमारा राइट्स है। ऑब्वियसली एवरीबडी शुड टेक इट। नोबडी शुड अवॉयड इट। या। या। नेक्स्ट आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट प्रेशर भी बहुत कॉमन है। डरी और क्रुएल्टी जैसे प्रोविजंस के मिसयूस पर सुप्रीम कोर्ट खुद
(11:00) कंसर्न रेज कर चुकी है। एस्पेशली क्योंकि क्रिमिनल केसेस की बदनामी फैमिलीज़ को मजबूर कर देती है एलिमिनी के लिए ह्यूज अमाउंट्स दे देने के लिए राजी होने के लिए। सेटलमेंट हो गया। पत्नी भी तैयार हो गई। साइन भी कर दिए। लेकिन अचानक पत्नी को कुछ चीजें अच्छी नहीं लगी। शादी के 23 साल बाद घरेलू हिंसा यानी डोमेस्टिक वायलेंस का मुकदमा भी दर्ज कर दिया। अच्छा इसी के बीच एनसीआरबी का डाटा एक डिस्टर्बिंग पैटर्न दिखाता है। फैमिली और मैरिज प्रॉब्लम्स की वजह से सी करने वालों में मैरिड मर्दों की गिनती मैरिड औरतों से रफ्ली 2.5 [संगीत]
(11:30) टाइम्स ज्यादा है। ऑफकोर्स एक डाटा अपने आप में कंक्लूजिव नहीं है। बट एटलीस्ट ये डाटा एक अलार्मिंग सिचुएशन हाईलाइट कर रहा है। एंड फाइनली सबसे कड़वी रियलिटी सिर्फ इंडियन लॉस ही नहीं कहीं ना कहीं जैसे मैंने इंट्रो में बताया साइंस भी औरतों के प्रति हल्का सा बायस्ड है। दो हार्ड साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स बताती हूं। फर्स्ट न्यूरो साइंटिस्ट डॉक्टर ओरियल फेल्डमैन हॉल और उनकी टीम ने कई एक्सपेरिमेंट्स किए सिर्फ एक चीज मेजर करने के लिए। क्या एक इंसान का मोरल डिसीजन मेकिंग चेंज हो जाता है सामने वाले इंसान के जेंडर के बेसिस पर। फर्स्ट टेस्ट
(12:03) पेन वर्सेस गेन। पार्टिसिपेंट्स के सामने पैसे और दो ऑप्शंस रखे गए। ऑप्शन वन पैसा अपने पास रखो बट आपके सामने वाले इंसान को एक पेनफुल इलेक्ट्रिक शॉक लगेगा। ऑप्शन टू पैसा गिव अप करके अपने सामने वाले इंसान को शौक से बचा लो। रिजल्ट पार्टिसिपेंट्स ने सिग्निफिकेंटली ज्यादा पैसे कुर्बान किए जब सामने एक फीमेल को शौक मिल रहा था एज कंपेयर टू एक मेल को। सेकंड एक्सपेरिमेंट तो और डिस्टर्बिंग है। द फुटब्रिज डलेमा। साइकोलॉजी का सबसे ब्रूटल एक्सपेरिमेंट। इमेजिन एक रनवे ट्रॉली आ रही है और कुछ लोग ट्रैक पर फंसे हुए हैं। [संगीत] उन्हें बचाने के लिए आपको ब्रिज
(12:37) से एक इंसान को नीचे धक्का देना पड़ेगा। बट आपके पास चॉइस है मैन या वुमेन? किसको धक्का दोगे? शॉकिंगली 88% पार्टिसिपेंट्स ने कहा पुश द मैन 88%। यहीं से एक अनकंफर्टेबल सवाल उठता है क्या हम एक्चुअली इक्वलिटी बिलीव करते हैं? क्योंकि अल्टीमेटली बायोलॉजिकली हमारा ब्रेन सिर्फ यह नहीं देख रहा कि कितना हार्म हुआ। हम सबकॉन्शियसली यह भी देख रहे हैं हार्म किसको हुआ। दर्द किसको हुआ, किस जेंडर को हुआ। और जब विक्टिम एक मर्द हो तो वह दर्द, वो पेन हमें प्योरली साइकोलॉजिकली कम महसूस होता है। इसीलिए इग्नोर हो जाता है। गॉड दिस एक्सप्लेन सो
(13:17) मेनी थिंग्स। हमारा मोरल इंस्टिंक्ट वुमेन को प्रोटेक्ट करने की तरफ टिल कर सकता है। इवन व्हेन दैट मीन्स लेस प्रोटेक्शन फॉर आवर मैन। ऑफकोर्स दिस इज नॉट टू से वुमेन डू नॉट नीड प्रोटेक्शन। इंडिया में स्पेशली क्राइम अगेंस्ट वुमेन [संगीत] पीक पर है। डीओ प्रोटेस्ट हो ही इसलिए रहे हैं। एंड अब्सोलुटली सपोर्ट इट। इंडिया में एक तरफ कुछ औरतें कानून को वेपन बना रही है। बट करोड़ों औरतें ऐसी भी हैं जो बेसिक राइट्स के लिए भी लड़ रही है। ये दोनों रियलिटीज [संगीत] एक साथ एक्सिस्ट करती है। इसीलिए इक्वलिटी का सलूशन मैन को विनर बनाना नहीं है। और [संगीत] ना ही
(13:46) फेमिनिज्म का मतलब है एक रात में चार लड़के स्कोर करो और एंपावर्ड फील करो। टॉक्सिक फेमिनिज्म एंड कैसे हमारे लॉस फीमेल्स के प्रति बायस्ड है। इसके सशंस क्या है? इन टॉपिक्स पर मैंने ऑलरेडी दो डिटेल वीडियोस बना रखी है विद [संगीत] एक्चुअल सशंस। क्योंकि इक्वलिटी सिर्फ स्लोगन से नहीं आती है। ग्राउंड रियलिटी तब चेंज होती है जब सिस्टम और लॉस बदलते हैं। वो वीडियोस जरूर देखना। एंड हां एआई एंड डेटा साइंस जैसे फ्यूचर रेडी स्किल्स अगर आपको बिल्ड करने हैं तो HCL गोवी में एक फ्री करियर कंसल्टेशन अवेलेबल है। नीचे डिस्क्रिप्शन में लिंक है। डू चेक इट आउट।
(14:18) हम्म।
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