Author Name:The Mumta Podcast
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ఈ YouTube పోడ్కాస్ట్లో డ్రై దేబ్రాజ్ షోమ్ చెప్పిన ప్రధాన విషయాలను సరళంగా తెలుగులో ఇలా చెప్పొచ్చు:
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### 1. కాస్మెటిక్ సర్జరీ & ఇంజెక్షన్స్ సేఫ్ అనేది
- కాస్మెటిక్ సర్జరీ, ఫిల్లర్స్, బొటోక్స్ లాంటివి సైన్స్కి అనుగుణంగా చేస్తే చాలా భద్రంగా ఉంటాయి, కానీ ఎవరు చేయిస్తున్నారు, ఎక్కడ చేయిస్తున్నారు అనేది చాలా ముఖ్యం.
- బొటోక్స్, ఫిల్లర్స్ లాంటి వాటిని మాల్స్ లేదా స్పాల్లో చేయించకుండా, డాక్టర్ సూచించిన క్లినిక్లో మాత్రమే చేయించుకోవాలి. [1][2]
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### 2. గ్లూటాథియోన్ గురించి నిజం
- గ్లూటాథియోన్ అంటే శరీరంలో ఉండే ఒక యాంటీ ఆక్సిడెంట్; ఇది సేఫ్ కానీ “తెల్లగా చేసే మ్యాజిక్ ఇంజెక్షన్” కాదు. [1][3]
- కొందరిలో కొంచెం బ్రైట్నెస్ లేదా టోన్ మార్చినట్లు కనిపిస్తుంది, కానీ అది “ఫేర్నెస్ ట్రీట్మెంట్” కోసం తయారు చేసిన ఔషధం కాదు (off‑label use). [1][4]
- చాలా high doseలో IV గ్లూటాథియోన్ తీసుకోవడం ప్రమాదకరం కావచ్చు; దీన్ని ఎప్పుడూ డాక్టర్ సూచించిన క్లినిక్లో, పరీక్షలు చేసుకుని మాత్రమే తీసుకోవాలి. [1][5]
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### 3. ఇండియన్ స్కిన్ & ఫేర్నెస్ మైండ్సెట్
- భారతీయ స్కిన్లో ఎక్కువ మెలనిన్ ఉండడం వలన త్వరగా వయసు కాకుండా ఉంటుంది; కొరియన్ లేదా తెల్ల స్కిన్ మాదిరిగా “ఫేర్ = బ్యూటిఫుల్” అనే మైండ్సెట్ పాత కాలపు సోషల్ బ్యాక్గ్రౌండ్ నుంచి వచ్చింది. [1][4]
- తమ స్వంత షేడ్ను అప్రిసియేట్ చేసుకుంటేనే ఆరోగ్యకరమైన బ్యూటీ గోల్. గోరిమారుతానని రిస్క్లు చేసుకోవడం యుక్తి కాదని డా. షోమ్ చెప్పారు. [1]
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### 4. బొటోక్స్, ఫిల్లర్స్, HIFU, Ultherapy
- బొటోక్స్, ఫిల్లర్స్ లాంటివి నాన్-సర్జికల్ ఏంటీ-ఎయిజింగ్ టూల్స్; 30 నుంచి 40లో వీటితో ఎయిజింగ్ను కొంచెం postpon చేయొచ్చు. [1][2]
- HIFU మరియు Ultherapy రెండూ ఫేస్ లిఫ్టింగ్కి ఉపయోగిస్తారు, కానీ Ultherapy టెక్నాలజీ మరింత advanced మరియు సురక్షితంగా ఉందని చెప్పారు. [1][2]
- Thermage (ఫేస్ / ఐస్ ట్రీట్మెంట్) ప్రభావం చాలా తక్కువ అని, డాక్టర్ దీన్ని ప్రాధాన్య ట్రీట్మెంట్ గా చూడట్లేదు. [1]
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### 5. నోస్, ఐస్, బాల్స్ లాంటి బ్యూటీ ఫోకస్
- ఫేస్లో అత్యంత ముఖ్యమైన భాగాలు: బాల్స్, ఐస్, నోస్ (బొటను, కళ్ళు, ముక్కు). బాల్స్ లేకపోతే కూడా చాలా మంది సెలబ్రిటీలు హెయిర్ ట్రాన్స్ప్లాంట్ చేయించుకుంటున్నారు. [1][2]
- బ్యూటిఫుల్ ఐస్ అంటే ఎక్కువగా బిగ్, సిమెట్రికల్ ఐస్; వయసుతో పాటు పాప్లైడ్ క్రిందకు వెళ్లి ఐస్ చిన్నవి అయ్యే ఇమేజ్ కనిపిస్తుంది; దీనిని లైట్ సర్జరీ లేదా ఫిల్లర్స్ తో కొంచెం correct చేయొచ్చు. [1]
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### 6. మైక్రో నీడ్లింగ్, కొరియన్ స్కిన్ ట్రెండ్స్
- మైక్రో నీడ్లింగ్, ఫ్రాక్షనల్ లేజర్స్ వంటివి కోల్లాజెన్ పెంచడానికి చాలా సేఫ్గా పనిచేస్తాయి. కానీ గ్రే‑మార్కెట్ ఉత్పత్తులు, పరీక్షలు లేని “ఎక్సోజోమ్స్, పీడీఎఎన్” లాంటి ట్రీట్మెంట్స్ను ఇష్టపూర్వకంగా avoid చేయాలని డాక్టర్ చెప్పారు. [1][6]
- “కొరియన్ గ్లాస్ స్కిన్” ట్రెండ్ లో చాలా మైండ్గేమ్ ఉంటుంది; సరైన సన్స్క్రీన్, మాయిశ్చరైజర్, లేజర్/పీల్స్ లాంటి మెడికల్‑ట్రీట్మెంట్స్ కలిపి మాత్రమే గ్లో వస్తుంది. [6][4]
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### 7. రోజువారీ స్కిన్కేర్ హైలైట్స్
- సన్స్క్రీన్ లేకుండా ఏ ట్రీట్మెంట్ చేసినా ఎఫెక్ట్ తగ్గుతుంది; సన్స్క్రీన్ అసలు “మ్యాజిక్ బుల్లెట్”. [2][6]
- రెటినోల్, హైయలూరోనిక్ యాసిడ్ లాంటి ఇంగ్రిడియెంట్స్ మంచి ఎఫెక్ట్ చూపిస్తాయి, కానీ డెంసిటీ చేసి చేయించుకోవాలి (స్కిన్ టైప్కు అనుగుణంగా). [1][5]
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ఈ ఎపిసోడ్లో అసలు మెసేజ్ ఏమిటంటే: *“బ్యూటీ కోసం ఏమి చేస్తున్నామో అంతే కాదు, ఎలా చేస్తున్నామో చాలా ముఖ్యం.”* సెలబ్రిటీ రీల్స్ను చూసి అందులో ఉన్న ట్రీట్మెంట్స్ను బ్లైండ్గా ఫాలో కాకుండా, డెర్మటాలజిస్ట్ / ప్లాస్టిక్ సర్జన్ సలహా తీసుకుంటే మాత్రమే సేఫ్ అని చెప్పారు. [1][2]
Transcript:
(00:00) कितना सेफ है कॉस्मेटिक सर्जन? बहुत ज्यादा बुलशेट है ये [संगीत] सब। हर किसी को यह सब करने की आवश्यकता नहीं है। मैं तो अपने स्किन पे ये सब कुछ भी ना करूं। परफेक्ट फेस क्या होता है? द लेंथ ऑफ द फेस और विड्थ ऑफ द फेस को वो कंपेयर करती हैं। [संगीत] जैसे कि लेंथ ऑफ द फेस शुड बी अबाउट सिक। जैसे श्रीदेवी की जब डेथ हुई थी या शेफ अली जरीवाला का कि इन्होंने एक्स्ट्रा ही लाइक बहुत ज्यादा इसमें थी एंड डोसेज बहुत ज्यादा ले रही थी। तो उसकी वजह से कहीं ना कहीं उसका असर था उनकी डेथ का या हार्ट अटैक आने का। किसी बॉलीवुड सेलिब्रिटी ने कुछ करवा रखा
(00:32) है और आपने देखा और आपने कहा यही सही होगा क्योंकि इसने किया हुआ है। आपने ये नहीं सोचा कि क्या बेवकूफ है? कोविड के लिए तो वैक्सीन आ गया। स्टुपिडिटी के लिए अभी भी बात की है। आपके हिसाब से सुंदर आइस की क्या डेफिनेशन है? [संगीत] फेस पे सबसे ज्यादा कॉमन तीन चीज़ है और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट तीन चीज़ है। माइक्रो नेडली कितने सेफ है और कौन सा किस ऐज में किसको लेना चाहिए? कि अगर कोई 30 साल की है तो आप यह सब चीजें करके और 10 साल सर्जरी रोक सकते हो। पूरी जिंदगी 30 साल के लग सकते हो। दोनों में क्या डिफरेंस है? हाइपो एंड अलथरेपी में।
(01:02) आप ज्यादा मशीन यूज़ करोगे तो आप नर्व्स वगैरह को भी डैमेज कर सकते हो। बट अलथरेपी आज हमारे साथ हैं डॉक्टर देवराज शमी। एक ऐसे एक्सपर्ट जो सिर्फ चेहरे नहीं बल्कि लोगों का कॉन्फिडेंस और उनकी पहचान तक बदल देते हैं। फेशियल प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक [संगीत] सर्जरी की फील्ड में उन्होंने ना सिर्फ इंडिया बल्कि ग्लोबली अपनी एक स्ट्रांग पहचान बनाई है। यह बातचीत सिर्फ सर्जरी या लुक्स तक सीमित नहीं रहेगी। यह आपको समझने में मदद करेगी कि असली कॉन्फिडेंस कहां से आता है अंदर से या बाहर से। तो स्टार्ट करते हैं यह पडकास्ट। स्टे ट्यून जय माता दी। सनस्क्रीन यूज
(01:32) करने के बाद टैनिंग क्यों दिखने लग जाती है? प्रिस्क्रिप्शन रिलेटेड ड्रग्स को आप ओटीसी की तरह आप अपने चेहरे पे मल रहे हो। ऑब्वियसली क्या ग्लूटाथायोन सच में रंग गोरा करता है? तो इसको ऑफ लेबल ट्रीटमेंट बताया जाता है क्योंकि ग्लूटाथायोन वो भी एक माइंडसेट है कि अगर गोरी है बाकी और कुछ नहीं है। मतलब चाहे वो उसका एजुकेशन या वर्किंग कुछ भी नहीं कोई नहीं देगा। गोरी लड़की है सुंदर है डार्क। यह माइंडसेट इसलिए है [संगीत] जय माता दी। वेलकम टू आवर पॉडकास्ट।
(02:16) नमस्कार। मुझे यहां बुलाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू। थैंक यू। अ आप आर्मी बैकग्राउंड से हैं एंड कॉस्मेटिक सर्जरी दोनों बहुत अलग फील्ड है। बिकॉज़ आर्मी वालों के बच्चे मोस्टली आर्मी की तरफ ही प्रेफर करते हैं। लाइक मैं आर्मी बैकग्राउंड से थी तो ऑब्वियसली मेरे हस्बैंड आर्मी में हैं। तो ये चीज होती है। कहीं ना कहीं अब मेरी बेटी के अंदर भी वो है कि मुझे आर्मी ऑफिसर बनना है। आपने कैसे कॉस्मेटिक सर्जरी को चूज़ किया? क्या और क्या फर्क पड़ता है? मैं यह भी ऐड ऑन करना चाहूंगी कि क्या फर्क पड़ता है बैकग्राउंड से जब हम
(02:43) आपका जो प्रोफेशन होता है उस पे देश सेवा करने के बड़े तरीके होते हैं। जी सरहद पर लड़ना एकमात्र तरीका नहीं है। जी स्वास्थ्य अगर हम देखें 150 करोड़ लोग हिंदुस्तानी जो हैं तो स्वास्थ्य बढ़ाना वो भी देश सेवा है। तो इसीलिए मेरे फादर भी आर्मी मेडिकल कोर में थे। वो एनटी सर्जन थे। हम तो इसलिए डॉक्टर बनना तो उनसे सीखा पर उसके बाद क्योंकि हमें आगे बढ़ना था प्राइवेट प्रैक्टिस में जानी थी तो इसलिए आर्मी के बारे में नहीं सोचा लेकिन आर्मी ने बहुत कुछ सिखाया आर्मी ने सिखाया कि व्यक्तिगत व्यक्तिगत प्रोग्रेस से ज्यादा जरूरी है सामूहिक प्रोग्रेस सबको साथ ले चलना आर्मी
(03:30) ने सिखाया कि कर्तव्य का पालन हर रोज करना बहुत जरूरी है अनुशासन का एक रोल होता है। तो पापा आर्मी में थे तो वह सब सीख मिली और प्लस ऑब्वियसली क्योंकि हम लोग खुद हिंदू रिफ्यूजीस हैं बांग्लादेश से। सो वो सब जो आपकी जब आप शरणार्थी जब होते हैं किसी और देश में आते हैं और उसके बाद जो आप सीखते हैं तो फिर जो संघर्ष उससे होता है उसी से पूरे जीवन की प्राप्ति हुई है। व्हाई कॉस्मेटिक सर्जरी? यही प्रोफेशन क्यों चूज़ किया? तो मैं चार साल का था। जब मैं 4 साल का था तो मेरी मां कहती है कि मैं चेहरा चेंज करने के बारे में बात करने लगा। मैं बताने
(04:08) लगा कि मैं लोगों को इंजेक्शन दूंगा और उनका चेहरा चेंज करूंगा। अब यह बात कहां से मेरे में आई मुझे पता नहीं है। मेरा यह विश्वास है मैं काफी स्पिरिचुअल हूं। तो मेरा यह विश्वास है कि हम बहुत सारी चीजें इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि हम करना चाहते हैं। हम इसलिए करते हैं क्योंकि हमें जीवन में लाया गया है वह कार्य हमारे थ्रू करने के लिए। तो इसीलिए यह बात यह बात को समझते हुए मुझे ऐसे लगता है कि कोई तो बात होगी जिसकी वजह से पूरी कायनात लग गई अब मेरे पीछे कि मैं चेहरे चेंज करना शुरू करूं। तो मेरी सर्च मैंने पहले अमेरिकन बोर्ड सर्टिफिकेशन हासिल की और
(04:43) मैं प्लास्टिक फेशियल प्लास्टिक और फेशियल कॉस्मेटिक सर्जरी में सर्टिफाई हुआ यूएस में। मैंने मेरे पहला मैंने करियर स्टार्ट किया टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से। तो इसीलिए वहां पर चीज यह थी कि जब लोगों को कैंसर हो जाता है तो आप जौ सर्जरी वगैरह करते हो, पैर से हड्डी निकाल के करते हो ताकि आप पूरे फेस को रिकंस्ट्रक्ट कर सको। धीरे-धीरे धीरे-धीरे ये 2007 की बात है। उस वक्त 90% हमारी प्रैक्टिस पूरी प्लास्टिक सर्जरी थी। रिकंस्ट्रक्टिव [गला साफ़ करने की आवाज़] सर्जरी। उसके बाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे वक्त गुजरता चला गया और हम लोग कॉस्मेटिक
(05:15) सर्जरी में ज्यादा से ज्यादा घुसते चले गए। जब अब हालत ऐसी है कि 90% ऑफ आवर वर्क इज इन कॉस्मेटिक सर्जरी। तो कभी-कभी चेंजेस जो आते हैं वो हमें भी पता नहीं चलता कैसे आते हैं। तो मैंने कहा जरूर था कि मैं चेहरे को चेंज करूंगा। बट धीरे-धीरे आई थिंक डिमांड रिलेटेड क्योंकि हम लोग बॉलीवुड के काफी लोगों को ट्रीट करते हैं और हम खुद मुंबई में हैं और वो सब चीजों के देखते हुए धीरे-धीरे पूरी प्रैक्टिस ही चेंज हो गई और हम लोग पूरी तरह चेहरे बदलने में और पूरे बॉडी को चेंज करने में और कॉस्मेटिक सर्जरी में घुस गए। कितना सेफ है कॉस्मेटिक सर्जरी?
(05:48) बहुत ज्यादा सेफ है। तो जैसे हम ये सुनते हैं जैसे श्रीदेवी की जब डेथ हुई थी या शेफाली जरीवाला का कि इन्होंने एक्स्ट्रा ही लाइक बहुत ज्यादा इसमें थी एंड डोजेज बहुत ज्यादा ले रही थी तो उसकी वजह से कहीं ना कहीं उसका असर था उनकी डेथ का या हार्ट अटैक आने का जो सडन डेथ हो जाती है। तो कहीं ना कहीं इसको ब्लेम किया जाता है। क्या ऐसा होता है? मैं लोगों को अक्सर कहता हूं जी। कि मैंने अभी छींक मारी और 1 मिनट के बाद भूकंप आता है। तो जरूरी नहीं है मेरी भूकंप मेरे भूकंप मेरी छींक की वजह से आया हो। दो इवेंट्स जो एक के बाद एक हो जरूरी नहीं
(06:26) है जो पहला वाला इवेंट हुआ है वो दूसरे वाले को कॉज कर रहा हो। तो शेफाली ज़रीवाला क्या करती थी मुझे पता नहीं है। बट अगर वो ग्लटाथायोन लेती ग्लूटाथॉन खुद बहुत ही ज्यादा सेफ है। अगर आप देखोगे तो इस देश में इस वक्त 1 करोड़ लोग ग्लूटाथोन ले रहे होंगे। क्या इसका मतलब है कि ग्लटाथॉन अनसेफ हो गया है? कल मैं जिम जा सकता हूं। जिम में अकस्मात ऐसे हो सकता है कि मुझे हार्ट अटैक आ जाए। क्या इसका मतलब यह है कि मैं जिम जा रहा था इसलिए मेरा हार्ट अटैक आ गया। चीजों को समझ समझना बहुत ज्यादा जरूरी है। हम एज अ सोसाइटी काफी ज्यादा रिएक्टिव हैं
(07:03) और दो चीजें जब एक साथ होती है हम उसे जोड़ने में माहिर हैं। और मीडिया का भी इसमें रोल है। मीडिया दो चीज को जोड़ के उस पे खयाली पुलाव बना के अच्छी तरह अपनी रोटी तवे पे सेकती है। तो क्या ग्लटायन सच में रंग गोरा करता है? जो एक मतलब कहीं ना कहीं एक मिथ है या एक कांसेप्ट फैला हुआ है कि आप अगर ग्लटाथोयन की शॉट्स ले रहे हैं या कैसे भी किसी भी फॉर्म में अगर आप ले रहे हैं तो आप गोरे होने लग जाओगे। क्या सच में है ये? ग्लटाथायोन है क्या? वो एक एंटीऑक्सीडेंट है जो कि नॉर्मली भी आपके लिवर में प्राप्ति होती है उसकी। तो आप ग्लटाथायोन
(07:37) जब आप यूज करते हो तो आप एंटीऑक्सीडेंट के हिसाब से यूज करते हो। जब आप एंटीऑक्सीडेंट के हिसाब से यूज करने लगे तब आपने देखा कि कुछ लोगों के रंग में फर्क आने लगा। जब कुछ लोगों के रंग में फर्क आने लगा तो आपने हायर डोजेस देके रंग चेंज करने की कोशिश की ग्लटाथायोन देकर। क्या ग्लटाथायोन सेफ है? हां जी सेफ है बट सेफ तो पैरासिटामॉल भी है। मतलब क्रोसिन जो आप खाते हैं वो भी सेफ है। बट मौत पैरासिटामॉल से भी होती है। क्योंकि मोस्ट इंपॉर्टेंट चीज जो हमें जानना है हर एक इंसान अलग है। हर किसी की बायोमेट्रिक्स अलग है। अगर यह टेबल लकड़े से बना हुआ है
(08:14) और वो लकड़ा हर एक टेबल बनाने के लिए अलग हो तो फिर कैसा टेबल बनेगा या कैसी मेज बनेगी मुझे कैसे पता? तो मैं यह कहना चाहता हूं कि ग्लटाथायन सेफ है पर ज्यादातर लोगों में सेफ है। और क्या वह रंग गोरा करता है? कुछ लोगों में वह गोरा करता है। और हम जब रंग गोरा करने के लिए यूज करते हैं तो इसको ऑफ लेबल ट्रीटमेंट बताया जाता है। क्योंकि ग्लूटाथोन इसके लिए बना ही नहीं था। वो एज अ एज अ चेंज मतलब कुछ और करते हुए आपने देखा कि वो रंग गोरा करने लग गया। क्या वो सेफ है? क्या मैं आईवी ग्लूटाथायन लूंगा? अगर मुझे जरूरत हो मैं लूंगा। बट क्या आईवी
(08:52) ग्लूटाथन अकेले मेरे पूरे रंग को गोरा कर सकता है? जनरली नहीं। कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट्स की जरूरत होती है। जैसे कि पील्स की जरूरत होती है। अंदर से न्यूट्रिशन मतलब ग्लटाथायोन की जरूरत होती है। कुछ टाइम कुछ तरह की लेज़र्स होती हैं जो पिगमेंटेशन या मेलेनिन को रिड्यूस करती है। मुझे इसके पहले एक सवाल पूछना जरूरी है। हिंदुस्तान में ऐसा क्यों है कि गोरी गोरी स्किन ही अच्छी मानी जाती है। हां, यह है माइंडसेट। यह माइंडसेट इसलिए है क्योंकि 300 वर्ष 350 वर्ष ब्रिटिशर्स ने हम पर राज किया। हमारी ये हमारा यह विश्वास बन गया कि जो
(09:28) हम पे राज कर रहा है वो गोरा है। तो इसलिए गोरा होना एक तरीके से एक स्टेटस सिंबल बन गया। नहीं कहीं ना कहीं एक जो है माइंडसेट कि जो अगर लड़कियों के इसमें देखा जाए कि गोरी अगर लड़कियां है तो वो ज्यादा सुंदर हैं। वो भी एक माइंडसेट है कि अगर गोरी है बाकी और कुछ नहीं है। मतलब चाहे वो उसका एजुकेशन या वर्किंग कुछ भी नहीं कोई नहीं देखेगा। गोरी लड़की है, सुंदर है। डन। बट ये हर हिंदुस्तान के हर प्रांत में एक जैसा नहीं है। अगर हम एक वेब सीरीज एक आई थी। मैं उसका नाम नहीं लूंगी। उसमें भी यही दिखा था कि उस लड़की ने गोरी होने के लिए ग्लटाथायोन
(09:59) का आईवी ड्रिप वगैरह लिया। एंड उससे उसको रिएक्शन हो गया था। एंड शायद कई उसके बाद क्योंकि जब मैं भी स्किन क्लीनिक उन सब में जाती हूं तो बहुत जगह ये बैन है। बंद हो गया है। तो बैन भी किस लिए हुआ? फिर नहीं। सो दो-तीन चीजें आपने पूछी हैं। मैं अलग-अलग जवाब देना चाहूंगा। पहली चीज मुझे नहीं लगता किसी हिंदुस्तानी को गोरा बनने की जरूरत है। और ये जो मानसिकता है, सॉरी टू से, ये नॉर्थ इंडिया में ज्यादा है। ये अगर आप मैं जहां से आता हूं, मैं अभी प्रैक्टिस करता हूं मुंबई में, बट मैं हूं बंगाली रिफ्यूजी फ्रॉम बांग्लादेश। और अगर
(10:36) हम देखें बंगाल में अगर हम देखें डार्क स्किन को अच्छा माना जाता है। हमारी सब देवियां थोड़ी सी डार्क स्किंड ही रही हैं। काली इज डार्क। राइट? सो इसीलिए ये हमारी मानसिकता है कि गोरा मतलब हायर स्टेटस। बट मेरे हिसाब से पहले पहला सवाल तो यह है गोरा होने की जरूरत है क्या? इतने सारे मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स बने हैं हिंदुस्तान से। हमारी स्किन जो है उसमें मेलेनिन है क्योंकि मेलेनिन है इसीलिए वो इतनी जल्दी एज नहीं करती है। इसीलिए वो एज नहीं करती है। इसीलिए 40-50 साल के भी आप औरतों में यहां पे लाइंस नहीं देखते हो जो कि आप एक गोरे या
(11:13) कोकेशियन पर्सन या वाइट स्किन पर्सन में देखोगे। तो यह टाइम आ गया है कि हम अपने स्किन को अपनाएं। पहले तो अपने आप को अपनाओ। फिर दूसरी बात है क्या मैं गोरा बन सकता हूं? हां ऐसी टेक्नोलॉजीस अवेलेबल हैं जिससे मेलेनिन जितना है वो रिड्यूस हो सकती है जिसमें एक ग्लटाथायोन भी है। ब्लड ग्लटाथायोन लाया कहां से गया है? कौन दे रहा है? कहां पे दे रहा है? कहां से सोर्स करी गई केमिकल? क्या प्योर है कि नहीं है? वो सब सवाल भी तो आने चाहिए। तो कहां सेफ है ये? कहां से लेना चाहिए? अगर एक इंसान सोच रहा है कि ठीक है। सेफ है। जैसे आपने कहा कि ठीक है ले सकते हैं।
(11:46) बट कहां से? ये मेडिकल थेरेपीस हैं। ओके। और मेडिकल थेरेपीस अगर है तो वो मेडिकल इंस्टीटश में होनी चाहिए। वो एक प्लास्टिक सर्जन एक डर्मेटोलॉजिस्ट को एग्जामिन करके होनी चाहिए। ऑब्वियसली उसकी साइड इफेक्ट्स हो सकती हैं। क्योंकि किसी भी चीज को जब आप नस में डाल रहे हो तो उसकी साइड इफेक्ट्स हो ही सकती है। तो उसको मेडिकल सर्वेलेंस में लेना चाहिए। मैंने यह सुना हुआ है कि शेफाली ज़रीवाला अपने घर पे ग्लटाथोन लिया करती थी। यह घर पे लेने वाली चीज नहीं है। अगर यह सच है तो यह गलत है। बट जैसे हम देखते हैं काफी रील्स में जैसे सेलिब्रिटीज की बॉलीवुड सेलिब्रिटीज की
(12:20) रील्स देखते हैं तो उनका मेकअप हो रहा होता है और साइड में उनके चल रही होती है आई ड्रिप। अगर आप बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को बहुत ज्यादा इंटेलिजेंट मान लेते हैं और अगर आप बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को यह मान लेते हैं कि उनको स्वास्थ्य के बारे में सब कुछ पता है तो फिर तो हम गलत डिबेट में पड़ गए हैं। नहीं लोग कहीं ना कहीं इनफ्लुएंस होते हैं उनसे। आप अगर आप गलत इंसान से इन्फ्लुएंस हो गए तो फिर आपके साथ भी गलत ही होना चाहिए ना। अगर मैं अभी अभी किसी बॉलीवुड सेलिब्रिटी को पूछूंगा कि भाई देश कैसे चलना चाहिए या फिर मैं बॉलीवुड सेलिब्रिटी को पूछूंगा कि
(12:50) हिंदुस्तान का क्रिकेट कप्तान कौन होना चाहिए जिसमें हुनर है उनको वो चीज पूछिए ना। उनको ये पूछिए कि लाइटिंग कैसे होनी चाहिए और शूट कैसे करना चाहिए वो मुझे मत पूछिए। बट स्वास्थ्य पे आज ज्यादा हेल्थ केयर इन्फ्लुएंसरर है और डॉक्टर्स को आप पूछ नहीं रहे हैं। ये कहां से सही है? अगर आप यह डिसाइड करेंगे एक किसी बॉलीवुड सेलिब्रिटी ने कुछ करवा रखा है और आपने देखा और आपने कहा यही सही होगा क्योंकि इसने किया हुआ है। आपने ये नहीं सोचा कि क्या बेवकूफ है। इसकी बेवकूफी मुझे नहीं करनी चाहिए थी। इसने अगर कुएं में छलांग लगाया क्योंकि ये बॉलीवुड सेलिब्रिटी आप
(13:21) भी लगा दोगे उसके पीछे। सो मेडिकल थेरेपी को मेडिकल जगह में करो। है ना? ये ये यूएस में भी बहुत प्रचलित हुआ था। यूएस में बोटक्स जो है वो मॉल्स में होने लग गया। आप मॉल में नहीं कर सकते हो बोटक्स क्योंकि बोटक्स की साइड इफेक्ट्स होती हैं और बोटक्स इनफेक्शन हो सकता है। अब आप नस को बिना साफ किए आप कुछ भी नस में घुसेड़ दोगे। कहां से आप ग्लूटाथन लेके आओगे कुछ देखोगे नहीं। अश्लील प्रोडक्ट स्मगल करोगे इंडिया में जिसकी गवर्नमेंट आपको एक्चुअली परमिशन भी नहीं देती है। उस चीज को आप फिर बॉडी में डालोगे और फिर बोलोगे कि ग्लूटाथन ने मुझे मार दिया। तो एक्चुअली
(13:59) तो आपकी स्टुपिडिटी ने आपको मार दिया। और जैसे मैं हमेशा कहता हूं कोविड के लिए तो वैक्सीन आ गया। स्टुपिडिटी के लिए अभी भी बाकी है। और स्टुपिडिटी ने बहुत सारे जान ले लिए जो कोविड भी कोविड ने भी आज तक नहीं लिया। आपकी भी लाइफ में प्रॉब्लम्स चल रही हैं। आप भी कहीं ना कहीं भूत प्रेत बाधा से तकलीफ में हैं। पितृ दोष हैं या आपको समझ नहीं आ रहे हैं कि लाइफ के आप उस फज़ में है जहां आपको क्लेरिटी नहीं मिल रही है। बिजनेस करें या जॉब करें? लव मैरिज या अरेंज मैरिज। आगे फ्यूचर क्या है? मोक्ष की [गला साफ़ करने की आवाज़] राह पर चल भी
(14:29) रहे हैं कि नहीं? आपको अपने इष्ट देव के बारे में पता भी है। लाइफ का पर्पस क्या है? करने क्या आए हैं? इस धरती पर कभी भी कोई भी ऐसे ही जन्म नहीं लेता है। हर एक आत्मा का एक लक्ष्य होता है। कुछ करने वो आई है। इन सबकी क्लेरिटी कहां मिलेगी? इन सबकी क्लेरिटी आपको आकाशिक रीडिंग में मिल जाएगी। जहां आपके ही मास्टर्स, जहां आपके ही पूर्वज, जहां आपका ही इष्ट देव यह बताएगा कि आपको क्या करना चाहिए। इस पूरी लाइफ में आपका क्या पर्पस है और पास्ट लाइफ में आप क्या करके आए थे। कोई कर्म पेंडिंग तो नहीं था जो आपको पूरा करना चाहिए। क्या आपके पूर्वज जो इस धरती पर
(15:03) नहीं है कुछ कहना तो नहीं चाहते हैं? इन सारे सवालों के जवाब सिर्फ और सिर्फ आपको आकाशिक रीडिंग के सेशन में मिल जाएंगे। अगर आप भी अपनी रीडिंग करवाना चाहते हैं, आप भी क्लेरिटी चाहते हैं लाइफ को लेकर तो नीचे दिए गए नंबर पर आप कांटेक्ट कर सकते हैं। बुक कर सकते हैं अपना स्लॉट तो अपने बारे में जानिए। क्लेरिटी लीजिए लाइफ में कि करना क्या है? सशंशंस पाइए अपने इष्ट देव से, अपने पूर्वजों से। जय माता दी। एज अ कॉस्मेटिक सर्जन सबसे ज्यादा डिमांड किसकी आती है आपके पास? देखिए मैं अमेरिकन बोर्ड सर्टिफाइड हूं फेशियल कॉस्मेटिक सर्जरी में। तो मैं फेस
(15:36) में सुपर स्पेशलाइज करता हूं। मेरे जितने फेलोशिप्स बाहर हैं वो फेस में सुपर स्पेशलाइज्ड हैं। तो मैं फेस की बात करता हूं। फेस पे सबसे ज्यादा कॉमन तीन चीजें हैं और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट तीन चीजें हैं। पहले तो बाल। ओके। बाल, मैं बाल सोच भी नहीं रही थी। बाल अगर एक मेल में ना हो तो कैसा लगे? है ना? अब सपोज सपोज आप किसी सेलिब्रिटी को देख रही हैं। उसको बाल के बिना इमेजिन करके देखिए और फिर सोचिए कि वो धुरंधर लगते हैं कि कुछ और लगते हैं। है ना? बालों का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है। जिसकी वजह से बॉलीवुड में अगर आप देखो एक आध को
(16:13) छोड़ के सबके हेयर ट्रांसप्लांट्स हैं। क्योंकि बाल अगर नहीं होंगे तो आप तरुण कैसे लगोगे? ताजगी कैसे आएगी चेहरे पे? है ना? सो बाल बहुत इंपॉर्टेंट है। सेकंड आंखें। है ना? यह कहा जाता है कि सबसे सुंदर औरतों में आप उनकी आंखें नोटिस करती हैं। बाकी सब में आप उनकी नाक नोटिस करती है। तो आंखें नोटिस हो रही है कि नाक नोटिस होती है। वो नाक के नक्शे पे डिपेंड करता है। नाक अगर अच्छी नहीं है तो आप नाक नोटिस करते हो। नाक अगर अच्छी है तो नाक नोटिस में भी नहीं आती है क्योंकि आप आंखें नोटिस कर रहे होते हो। सो द मोस्ट ब्यूटीफुल वुमेन यू नोटिस देयर आईज। यू
(16:52) डोंट नोटिस देयर नोज। एवरीवन एल्स, यू नोटिस देयर नोज़। आपके हिसाब से सुंदर आईज की क्या डेफिनेशन है? एज अ कॉस्मेटिक सर्जन? सुंदर आईज की डेफिनेशन अलग रेसेस में अलग होती है। अब अगर मुझे पूछोगे आप सुंदर आईज कोरियन में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आईज हिंदुस्तानी में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आइज नॉर्थ ईस्ट में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आइज बंगालीज में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आइज पहाड़ों में कैसी होनी चाहिए? अगर हम इसको चार जगह डिवाइड कर देते हैं। फॉर एग्जांपल नॉर्थ का पहले बात करते हैं। नॉर्थ के हिसाब से जो जैसे नॉर्थ इंडियंस हैं उसके हिसाब से सुंदर आइज क्या डिफाइन
(17:27) करती हैं आप? इन जनरल अगर आप देखें हमारी जितनी देवियां हैं सबकी बड़ी-बड़ी आंखें हैं। यस। है ना? सरस्वती, लक्ष्मी सबकी बड़ी-बड़ी आंखें हैं। और बड़ी आंखें एक चीज से अगर आप सोचो तो फीमेल्स में ईस्ट्रोजन ज्यादा होता है। और फीमेल्स में क्योंकि ईस्ट्रोजन फीमेल हॉर्मोन बड़ी होती ज्यादा होती है इसलिए आंखें बड़ी होती हैं। इसलिए जब भी आप एक ब्यूटीफुल फीमेल की बात करते हैं तो आंखें बड़ी दिखाई देती है। वेयर एस अगर आप देखो किसी भी इंटेंस मेल को देखो अभी जो फिल्में निकली है उसमें भी आपने देखी होंगी। आंखें छोटी हो जाती है मेल्स
(18:00) की। जब वो गुस्से में होते हैं तो वो इंटेंसिटी दिखाने के लिए आंखें छोटी होती हैं। एक मेल में अगर आंखें बड़ी हो तो वो इंटेंसिटी नहीं आती है। ये हॉर्मोंस का भी खेल है। जैसे कि टेस्टोस्टेरोन आंखों को छोटा और ज्यादा इंटेंस बनाता है क्योंकि वो एंबिशन रिलेटेड हॉर्मोन है। वेयर एस ईस्ट्रोजन आंखों को बड़ा बनाता है। सो ये सब चीजें जो है ये डिपेंड करता है कई सारी चीजों पे। आपकी आंखें आपके प्रांत के साथ कैसे मेल खाती हैं? आपकी एथनिसिटी के साथ कैसे मेल खाती हैं? आपकी उम्र के साथ कैसे मेल खाती है? हाउ डस इट फिट इन बाकी सब
(18:35) फीचर्स के साथ। तो वो सब देखना पड़ता है टू डिटरमिन कि अच्छी आंखें कैसी होनी चाहिए। एक्चुअली में अगर आप देखो ब्यूटी दो चीज होती है। सिमेट्री मतलब राइट साइड ऑफ द फेस और लेफ्ट साइड ऑफ द फेस इक्वल एक जैसे लगे। अगर आप अपने फोटो या मेरे फोटो को राइट साइड और लेफ्ट साइड को उल्टा करके लगा दो तो राइट साइड की जो बनेगी जो चेहरा बनेगा और लेफ्ट साइड का जो चेहरा बनेगा वो दोनों चेहरे एकदम अलग होंगे। अलग होते हैं। यस। राइट? ये कहा जाता है कि इन द मोस्ट ब्यूटीफुल पीपल जो सबसे सुंदर है उसमें राइट और लेफ्ट साइड्स एक जैसे दिखते हैं।
(19:12) ऑलमोस्ट लाइक ट्विंस। और बाकी सब में इट ऑलमोस्ट लुक्स लाइक कजिंस। हम सो कितनी सिमेट्री है दोनों साइड पे यह पता चलता है। इस सब का साइंस से भी मेल है। एक्चुअली सुंदरता इंपॉर्टेंट क्यों है? क्योंकि सुंदरता जब एक पुरुष और एक महिला एक दूसरे को देखते हैं तो वो डिसाइड कर रहे हैं कि उनकी स्पर्म के लिए यह पर्टिकुलर एग सही है कि नहीं। एक्चुअली एववोल्यूशनरी और बायोलॉजिकल प्रिंसिपल्स होते हैं। आप 1 मिनट में तय करने की कोशिश कर रहे हो। इज शी वर्दी ऑफ़ बेयरिंग माय चाइल्ड? यह वाली कहानी होती है। तो यह एक्चुअली में आप जैसे दिख रहे हो उसका
(19:49) डायरेक्ट कनेक्शन बनाया जा रहा है कि आप कितने फर्टाइल हो। आप बच्चे को कैसे पनपने वाले हो। आप कितनी अच्छी मां बनोगी। सो ये सब चीजें मेल खाती हैं। तो आपका दिमाग एक्चुअली में डिसाइड करता है 7 सेकंड में कोई एक दूसरे लुक किसी को देना चाहिए कि नहीं। तो अगर 7 सेकंड में मेरे दिमाग को तय करना है। यह आंखें अच्छी लग रही है कि नहीं। कुछ तो एल्गोरिदम्स होंगे। मैथमेटिकल फार्मूला मेरे दिमाग में होगा जिससे मुझे यह तय करना पड़ेगा कि वो सोचने का मौका तो है नहीं 7 सेकंड में। तो इसीलिए यह हमेशा कहा जाता है कि आप एक चेहरे को देख के डिसाइड करते हो कि वो
(20:24) आपके स्पर्श या आपके संपर्क में आने के योग्य है कि नहीं और वो 7 सेकंड में आप डिसाइड करते हो। फिर पूरी जिंदगी आप लगाते हो उस डिसिशन को जस्टिफाई करने में कि वो सही है कि नहीं। तो जैसे आपने कहा कि आईज जो है एज के साथ भी चेंज होती हैं। कैसे चेंज होती है? और क्या सही होता है या फिर कुछ लोग होते हैं जैसे आपके पास आते होंगे कि नहीं हमें तो वैसे ही चाहिए चाहे हमारी ऐज 50 या 60 में भी जाए देन आल्सो हमारी आईज चेंज नहीं होनी चाहिए। तो एक्चुअली हो क्या रहा है? एक्चुअली जो हो रहा है यह बात है कि हम धरती मां के ऊपर हैं। और धरती मां हमें अपनी तरफ खींच
(20:58) रही है। ग्रेविटी हमें नीचे खींच रही है और अल्टीमेटली हम में से हर कोई धरती मां में सिमट जाएंगे। है ना? सो ग्रेविटी जो खींच रही है इससे फेस में डिसेंट हो रहा है। मतलब वो नीचे आ रही है। तो पलक आपकी नीचे आ रही है विद एज। तो आप जैसे देखोगे अगर आप 20ज में थे तो जब आप स्माइल करते थे आंखें जितनी बड़ी रहती थी फिर आप उस स्टेज पे आए जब फोटो लेने लगे। आपने अगर स्माइल किया आंखें दिखनी बंद हो गई। वो इसलिए क्योंकि सब कुछ नीचे आने लग गया। तो इसीलिए मूविंग डाउनवर्ड्स मतलब पूरी पूरी आपकी फेस नीचे आ रही है इस वक्त भी क्योंकि धरती मां उसे नीचे बुला रही है।
(21:38) तो अगर एजिंग के सब चेंजेस फेस का नीचे आना है तो एंटी एजिंग का मतलब है फेस को ऊपर लेके जाना। यही प्रिंसिपल है। तो इसीलिए अगर कोई 30 साल का आता है और कहता है कि मेरी आंखें बड़ी छोटी लग रही है देन यू हैव टू पुट इन प्लेस। कुछ स्ट्रक्चर्स या कुछ सर्जरीज या कुछ नॉन सर्जिकल प्रोसीजर्स जिससे आंखें छोटी नहीं हो। ताकि आप जब हंसे तो दांत भी दिखे और आंख खुले भी लगे। ऐसे नहीं कि आंख बंद लगने लगे क्योंकि आंख इतनी छोटे हो गए हैं। ओके एक क्वेश्चन आई थिंक ऑडियंस के दिमाग में भी अभी आ रहा होगा। कितनी सर्जरीज पॉसिबल हैं? एक अगर जैसे आइज का अगर जा
(22:14) रहे हैं तो कितनी महंगी होंगी? अगर एक आम इंसान सोच रहा है कि एक एवरेज या मिडिल क्लास एक इंसान सोच रहा है। तो उसको क्या रेकमेंड करोगे आप? कितनी महंगी होती है? एंड उसका हीलिंग टाइम कितना होता है? कौन-कौन सी सर्जरीज होती? मैं डिवाइड करता हूं। यस। जैसे कि सबसे यंगेस्ट जिसमें मैंने आईलिड सर्जरी की है वो तीन दिन का बच्चा था। राइट? क्यों? क्योंकि आंख पूरी तरह बंद थी। क्यों? क्योंकि टोसिस नाम की प्रॉब्लम होती है। पी टी ओ एस आई एस टोसिस नाम की प्रॉब्लम होती है जिससे बाय बर्थ आइलिड नीचे होती है। अब जब आईलिड पूरी तरह नीचे
(22:50) है तो आंख में रोशनी नहीं जाएगी। इस बच्चे में एक्चुअली विज़ जो दृष्टि है उसकी डेवलपमेंट ही नहीं होने वाली है। तो इसलिए इसमें लेज़ आई डेवलप हो जाता है। इसलिए आप इसमें सर्जरी करते हो ताकि आंख खुले, आंख के अंदर रोशनी जाए और दृष्टि का डेवलपमेंट हो। तो तीन दिन के बच्चे में मैंने ऑपरेट किया हुआ है। राइट? मैंने सबसे जो बुजुर्ग इंसान में आईलिड सर्जरी की हुई है, वो 90 इयर्स के थे। क्यों? सुंदर दिखने के लिए नहीं। क्योंकि धीरे-धीरे आईलिड नीचे आने लगी। आंखें नॉर्मल होने के बावजूद पलकें नीचे आ गई और पलकें नीचे आने की वजह से
(23:27) उनको दिखना बंद हो गया। अब जब मेरी आंखें आईलिड नीचे आ जाएंगी क्योंकि धरती मां उसे नीचे बुला रही है और वो नीचे आ रही है। टिश्यूज़ लैक्स हो रहे हैं तो फिर मेरी आंखें नॉर्मल है पर मैं किसी को देख नहीं पा रहा हूं। आंखें नॉर्मल होने के बावजूद अगर मैं ना देख पाऊं तो आंखों का क्या मतलब फिर? तो फिर मुझे टोसिस सर्जरी करनी पड़ेगी। बिकॉज़ मुझे आईलेट को ऊपर लेके जाना है। अब मैंने 3 दिन के बारे में बताया। मैंने 90 साल के बारे में बताया। अब ये 3 दिन वाला बच्चा 10 साल में भी आ सकता था। राइट? और 30 साल की युवती भी आ सकती है ये कहने के लिए। महिला भी आ सकती
(24:00) है ये कहने के लिए कि मेरी आईलिड धीरे-धीरे छोटी हो रही है। सो डिपेंडिंग ऑन वो कब आती है? सर्जरी की जरूरत है कि नहीं वो देखना पड़ता है। कुछ-कुछ चीजें तो नॉन सर्जिकली भी ट्रीट हो सकती है। क्या यह हो सकती है नॉन सर्जिकली? जैसे कि अभी फिलहाल इस साल हमें जो बेस्ट रिसर्च पेपर अवार्ड मिला हुआ है वो इसलिए मिला हुआ है क्योंकि हमारी संस्था ने यह फाइंड आउट किया है कि यहां पे फिलर्स डालने से और यहां पे बोटक्स डालने से आप एक्चुअली आइब्रो को ऊपर लेके जा सकते हो और आईलिड को कुछ हद तक ऊपर लेके जा सकते हो। मतलब 2 मिलमी तक फर्क पड़ सकता है। क्या ये सब
(24:36) में काम करेगा जिसकी आईलिड एकदम नीचे आ गई? ऑब्वियसली नहीं। बट जिसमें आईलिड धीरे नीचे आ रही है अगर कोई 30 साल की है तो आप यह सब चीजें करके और 10 साल सर्जरी रोक सकते हो। सो टेक्नोलॉजी बढ़ती जा रही है। मेडिकल डिवाइसेस ऐसे आ रहे हैं कि आप अगर फेसलिफ्ट के बारे में बात करो फेस को बिना काटे बिना खोले आप नॉनसर्जिकली ऊपर कर सकते हो। सो टेक्नोलॉजी ऐसे जैसे बढ़ते जाएगी हर एक चीज के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। और आज की टेक्नोलॉजी ऐसी अवेलेबल है कि आप पूरी जिंदगी 30 साल के लग सकते हो। एंड ये कितनी एक्सपेंसिव होती है? जैसे आई
(25:12) सर्जरी आपने बताया मानिए कोई भी आपके पास मेल फीमेल कोई आ रहे हैं एंड वो उनकी ऐज है बिटवीन 30 टू 40 या 50 आप लगा लीजिए। तो सर्जरी चाहिए नहीं चाहिए। सर्जरी अगर उनको चाहिए सर्जरी अगर चाहिए तो डिपेंड करता है कौन सी टाइप की सर्जरी होती है। ये एक आध लाख भी हो सकता है या तीन चार लाख भी हो सकता है। डिपेंड करता है कैसी सर्जरी हीलिंग कितना टाइम लगता है इसमें? इसमें हीलिंग लगभग 14 दिन लगते हैं। तो हम हमेशा इस चीज में हीलिंग को दो फेस में डिवाइड करते हैं। जैसे ही आपने नाक की सर्जरी करवाई तो फॉर इंस्टेंस मैं किसी एक सेलिब्रिटी को ऑपरेट कर रहा था पिछले
(25:44) हफ्ते। तो उनका पहला सवाल ये था मैं कब नॉर्मल लगूंगी? तो मैंने कहा नॉर्मल का अर्थ क्या है? क्या नॉर्मल का मतलब है मैं कब पे जाऊंगी तो चार हफ्ते। राइट? क्या नॉर्मल का मतलब यह है कि मैं कब पार्टी में जाऊंगी तो शायद आठ हफ्ते। सूजन ना दिखाई दे। क्या नॉर्मल का मतलब मैं हाई डेफिनेशन कैमरा पर आऊंगी ताकि वह भी पिकअप ना कर सके कि मेरी नाक चेंज हुई है तो एक साल एक साल नाक की सर्जरी में तो वो डिपेंड करता है कौन से अंग की सर्जरी की जा रही है और वो सर्जरी में कितनी सूजन होती है जैसे कि फॉर इंस्टेंस आईलिड में इतनी सूजन नहीं
(26:20) होती है बट नाक क्योंकि डिपेंडेंट एरिया है अगर सूजन होगी तो फिर वो पूरी टिप ऑफ द नोज बल्बस लगने लगती है तो इसीलिए नाक की सर्जरी में हीलिंग में बड़ा टाइम लगता है तो इसीलिए नाक की सर्जरी के जगह शायद नॉन सर्जिकल कुछ करना बहुत पॉसिबल है। जैसे कि सपोज आप अगर आए और आप बताएं कि मुझे मेरे नाक को और ज्यादा बेहतर बनाना है। अगर मुझे ये फ्रंटल यहां पे थोड़ा सा जो अगर शेप देना है वो तो मैं फिलर से भी कर सकता हूं। फिलर इंजेक्शन से भी वह किए जा सकते हैं। और फिलर्स जो नॉर्मली लोग लिप्स में डालते हैं या फेस की शेपिंग में डालते
(26:56) हैं, वह नोज में भी डाली जा सकती है। ऑब्वियसली हुनर होने की जरूरत है। हर कोई यह नहीं कर सकता। बट अगर हुनर हो, तो वो फिलर्स से भी कर सकते हैं। जैसे आपने अभी मेकअप से अपने नाक को शेप किया होगा। फर्क यह होगा कि वो परमानेंटली ऐसे शेप हो जाएगा। कल सुबह आप उठेंगी और चेहरा आप धो भी लेंगी तो मेकअप जाने के बावजूद वो रह जाएगा। तो फिलर से भी किया जा सकता है। लेकिन अगर आप कहें कि मेरी नाक ब्रॉड है और मुझे ब्रॉडनेस को रिड्यूस करना है। ब्रॉडनेस रिड्यूस करने का कोई तरीका ही नहीं है क्योंकि ये बोन है। तो अगर बोन को की ब्रॉडनेस रिड्यूस करनी है तो बोन को
(27:30) तोड़ के सर्जिकली अंदर करना पड़ेगा। सो डिपेंड करता है कौन से टाइप की चेंज चाहिए। जैसे कि मैंने आप में भी मैंने दो ये बताया। तो अगर आप अपने नाक को रेट करती हैं सिक्स ऑन 10 एट ऑन 10 तो वो बन सकता है फिलर से भी अब लेकिन न 9फ ऑन 10 चाहिए बहुत ही बढ़िया नाक चाहिए एंड वो कंप्लीटली डिफाइंड हो तो उसमें सर्जरी लगेगी सो दैट इज हाउ वी डिसाइड क्या ये वही सर्जरी है राइनोप्लास्टी जिसे हम कहते हैं। ओके ये कितनी एक्सपेंसिव होती है? तो अगेन राइनोप्लास्टी कितनी एक्सपेंसिव होती है इज़ अ लिटिल लाइक आस्किंग मी कि मैं आज मुंबई दिल्ली से मुंबई जा रही हूं।
(28:03) इसका क्या कॉस्ट होने वाला है? फिर भी एस्टीमेट एस्टीमेट आल्सो डिपेंड्स इट डिपेंड्स राइट क्योंकि अगर आप दिल्ली से मुंबई जा रहे हैं आप फर्स्ट क्लास ट्रेवल कर रहे हो कि आप बिज़नेस क्लास ट्रेवल कर रहे हो कि आप प्रीमियम इकॉनमी ट्रेवल कर रहे हो कि आप ट्रेन में जा रहे हो कि पैदल जा रहे हो ऑब्वियसली सर्जन सर्जन में फर्क पड़ेगा ना अगर आप जा रहे हो पाव भाजी खाने और आप ताज में जा रहे हो और आप पाव भाजी खाने सड़क पे जा रहे हो तो फर्क तो पड़ेगा ही सो इट डिपेंड्स ऑन द सर्जन इट डिपेंड्स ऑन द प्रोसीजर इट डिपेंड्स ऑन दी हॉस्पिटल इट
(28:31) डिपेंड्स ऑन सो मेनी फैक्टर्स क्या करने की जरूरत है राइट राइट? सपोज फिलर करने की जरूरत है तो फिर तो क्लियर है 50 60000 में हो जाएगा। लेकिन अगर बात यह है कि मुझे पूरा हड्डी तोड़ना है तो फिर सीटी स्कैन करवानी है देखने के लिए कि अंदर भी सेप्टम सही है नहीं है। वो इट्स अ मेडिकल ट्रीटमेंट क्योंकि नाक के दो इंपॉर्टेंट उपयोग हैं। इसलिए कॉस्मेटिक सर्जरी प्लास्टिक सर्जरी से मेल खाती है। क्योंकि नाक को श्वास भी लेना है। अब जैसे कि अगर आप देखो मैं सेलिब्रिटी एक हैं जिन्होंने 2000 में एक सुपरहिट फिल्म रिलीज़ की थी सन 2000 में। कौन है आप समझ जाएंगे जिस
(29:05) तरह से मैं बोल रहा हूं मैं नाम नहीं लूंगा। राइट? राइट? लोग कमेंट्स करके बता देंगे। राइट? सो 2000 में इन्होंने अपनी नाक की सर्जरी करवाई थी। राइट? दिखने में बहुत सुंदर है। बहुत ज्यादा हैंडसम है। बट लोगों को ये नहीं पता कि तीन बार नाक की सर्जरी हुई है। राइट? अब अगर आप नाक को देखते हो अब की जो फिल्में आ रही हैं तो आप देखोगे कि यहां से नस्ट्रिल ऊपर हो गई है। नाक, नाक जो है ये ऊपर हो गई है। क्यों? क्योंकि आपने नाक को बहुत ज्यादा रिफाइन कर दिया। उसमें से श्वास जब जाएगी जब आप नॉर्मली अब हम बैठ के श्वास ले रहे हैं तो आधा लीटर हवा जा रही है मेरे
(29:39) फेफड़ों में। लेकिन मैं जब भागूंगा ट्रेडमल पे तो 5 लीटर हवा जाएगी मेरे फेफड़ों में। मतलब 10 गुना ये इनक्रीस होने की जरूरत है। एक प्रिंसिपल है बर्नोलीस प्रिंसिपल जो फिजिक्स में हमने पढ़ी होगी कि टनल में टनल की साइज अगर आप छोटी कर दोगे बहुत ज्यादा तो हवा जब जाएगा तो रेजिस्टेंस बढ़ता है। जब रेजिस्टेंस बढ़ेगा तो वो कार्टिलेजेस को ऊपर पुश कर देगा। ओके? जी। सो इसीलिए सर्जरी भी अगर हमें करनी है, सर्जरी इस तरह से करनी है कि फंक्शनल जो काम है, जो श्वास लेने का काम है, दैट सर्व्स द पर्पस कॉस्मेटिक दिखने के साथ-साथ। वरना आज अच्छा दिखे लेकिन 10 साल
(30:15) के बाद नाक की शेप चेंज हो जाए क्योंकि मैं श्वास ले रहा हूं। तो दिस इज़ नॉट द राइट टाइप ऑफ़ सर्जरी। बट लोगों को कौन समझाए? क्योंकि लोगों को तो आज और अभी जीना है। कल का तो कोई किसी ने देखा नहीं है। तो दिस इज़ द थिंग दैट हैज़ टू बी डिसाइडेड कि अंदर की कौन सी सर्जरी है? कौन से हड्डियों को ठीक करना है, श्वास कैसे लेगा? बहुत सारी मेडिकल डिसिशनंस हैं। तो ये मेडिकल ट्रीटमेंट्स हैं। जैसे आपने कहा कि फिलर्स से भी हो सकती है। लेकिन अगर जैसे फिलर्स से भी मेरे एक फ्रेंड है उन्होंने कहा था कि अगर आपका मेटाबॉलिज्म रेट हाई है तो बहुत जल्दी
(30:44) डिॉल्व हो जाता है और जल्दी-जल्दी आपको करवाना पड़ता है। क्या ये सच है? फिलर्स अलग-अलग टाइप के होते हैं। हम जनरली कोई भी फिलर हो, कोई भी ब्रांड हो उसको डिवाइड करते हैं दो टाइप्स में। लो जी प्राइम फिलर और हाई जी प्राइम फिलर। जी प्राइम का क्या मतलब है? जी प्राइम का मतलब है कि फिलर कितनी उसमें इंटेग्रिटी होती है। मतलब वो कितने सकारात्मक रूप से वो कितने क्रॉसलिंक्ड होते हैं फिलर्स। तो फिलर्स जो ज्यादा क्रॉस लिंक होते हैं वो टिश्यू में ज्यादा लंबे रह जाते हैं। ऐसे भी फिलर्स हैं जो कि टेंपरेरी होने के बावजूद 3 साल के बाद भी रहते हैं। और ऐसे
(31:16) भी फिलर्स हैं जो कि अंडर आई एरिया में जहां स्किन सबसे थिन है यूज की जाती है जो 6 महीने में डिसअपीयर हो जाए। तो कौन सा फिलर और फिर किस में डाला जा रहा है और जिसमें डाला जा रहा है उसकी लाइफस्टाइल हैबिट्स कैसे हैं जो जिम जाएगा उसकी मेटब हायर होगी उसका बोटक्स और फिलर्स जल्दी उतरेगा जो जिम जाएगा और अपने मसल्स को इस तरह से कुछ मोड़ेगा उसके बोटक्स ज्यादा जल्दी वेयर ऑफ होगी जो स्मोक कर रहे हैं या फिर बाकी सब नशे कर रहे हैं ऑब्वियसली उनमें फिलर्स इतना लास्ट नहीं करने वाला तो बड़ी सारी चीजें होती है जिसको फार्म फार्माकोडायनेमिक्स और फार्माकोइनेटिक्स
(31:54) बोलते हैं। मैंने स्टार्ट किया था ये कह के कि हर किसी में लकड़ाई सेम नहीं है तो आप कैसे डिसाइड करोगे? वही पैरासिटामॉल जो आपके सर दर्द को गायब कर सकता है। वो किसी और के लेने पे उनको पोइजन करके उनको मार भी सकता है। पैरासिटामॉल की गलती नहीं है। आपकी शरीर कैसे रिएक्ट कर रही है उस चीज के साथ उस पे पूरा दारोमदार है। आजकल एक वर्ड बहुत ट्रेंडिंग चल रहा है। हाईफू [गला साफ़ करने की आवाज़] एंड अलथरेपी भी जैसे दोनों में क्या डिफरेंस है? HF थेरेपी में अ एक नैनो और Mercedes में जो फर्क है वही में है। ओके चार पहिए होने से इसका मतलब यह नहीं है कि
(32:28) हर नैनो क्या है इनमें? HFO HFO ऑब्वियसली HFO के मशीनंस जो कोरियन मशीनंस हैं और HFO के चाइनीस मशीनंस दो चार 5 लाख में मशीनंस आते हैं। 10 लाख में आ जाते हैं। अल थेरेपी का कॉस्ट अराउंड 35 से ₹40 लाख खर्चा है। तो अगर 35 से ₹40 लाख कोई क्लीनिक चेन उसमें इन्वेस्ट कर रही है। ऑब्वियसली उसको रिजल्ट्स भी वैसे ही मिलने वाले हैं। एक चार वाट की मशीन है। एक 40 W की मशीन है। अगर आप सोचो कि सिर्फ चार पहिए होने से Mercedes और नैनो सेम काम करते हैं। फिर तो कोई कुछ कर ही नहीं सकता है। बट हमें यह समझना पड़ेगा कि बेसिकली वह मशीन किस लिए बनाई गई है। हाई
(33:02) इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड जो कि टेक्नोलॉजी है जिसको हाईफू कहा जाता है। वो करता क्या है? वो अल्ट्रासाउंड मतलब साउंड एनर्जी छोड़ता है। साउंड एनर्जी जब बहुत कंसंट्रेटेड होती है। मतलब ये वही एनर्जी है जो आप यूज़ कर रहे हो जब बच्चा आपकी पेट में है उसको इवैलुएट करने के लिए आप अल्ट्रासोनोग्राफी यूज़ कर रहे हो। जब आप उसको हाई इंटेंसिटी बनाते हो तो वो स्किन के नीचे जाकर बेसमेंट मेंब्रेन जो हमारी होती है उसे कोलाजन के उत्पादन को बढ़ाता है। अब नॉर्मली 30 साल की उम्र के बाद कोलाजन उत्पादन होना इंसानी शरीर में बंद हो जाता है। कोलाजन के क्या क्यों
(33:37) इंपॉर्टेंट है आपके चेहरे के लिए? अब आप ये बिल्डिंग को देखिए। इस बिल्डिंग में अगर आप सब सीमेंट निकाल देंगे तो आरसीसी और सलाखें होंगी। वो बिल्डिंग को स्ट्रक्चर देती हैं। वो बिल्डिंग को सकारात्मक तरीके से सीधा रखती हैं ताकि वो मुड़ ना जाए। फेस पे कोलाजन का वही रोल है। कोलाजन जो रहता है वो फेस को ऊपर करके रखता है। ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम 30 साल के बाद कोलाजन का उत्पादन बंद हो जाता है। और जब कोलाजन का उत्पादन बंद हो जाता है तो हाइफू क्या करती है? हाइफू एक्चुअली इसको प्रमोट करती है कि वो शरीर कोलाजन बनाना शुरू करे कि वो स्टिमुलेट करती है बेसमेंट
(34:12) मेंब्रेन को जिससे कोलाजन बने। बट कितनी एनर्जी है हाइफो मशीन में उस पे ही तो पूरा खेल है। अब जब 40 वाट की मशीन यूज़ होगी जैसे कि अलथेरेपी है कंपेयर टू अ फोर फोर्ट मशीन और वो एक्चुअली विज़िबिलिटी आएगी। अलथेरेपी में ये भी है आप ज्यादा मशीन यूज़ करोगे तो आप नर्व्स वगैरह को भी डैमेज कर सकते हो। बट अलथरेपी में विज़िबिलिटी है कि आप देख सकते हो कौन से लेयर पे मैं मार रहा हूं। तो वो जब विजिबिलिटी आएगी गाड़ी की डैशबोर्ड पे ही तो पूरी कहानी है। तो टेक्नोलॉजी मैटर्स अ लॉट और अल थेरेपी अगर यूज करना है मैं अपने फेस पे हाईफू शायद इसलिए यूज़ ना करूं
(34:47) क्योंकि उस पे वर्स्ट केस सिचुएशन फर्क नहीं आएगा। बेस्ट केस सिचुएशन फर्क नहीं आएगा। और वर्स्ट केस सिचुएशन हो सकता है कि कुछ और नर्व्स वगैरह में भी प्रॉब्लम आ जाए। सो अलथेरेपी यूज़ करना इज़ मच बेटर देन हाईफू यूज़ करना बिकॉज़ टेक्नोलॉजी इस फार सुपीरियर। तो क्या इसमें जल्दी क्योंकि मोस्टली लोग डबल चिन एंड आर्म्स के लिए या स्टमक के लिए भी बहुत ज्यादा कर रहे हैं। वेट लॉस के लिए कर रहे हैं। सेफ है ये? हाईफू इतना बॉडी के लिए नहीं यूज़ होता है। हाईफू यूज़ होता है मेनली फेस के लिफ्टिंग के लिए। जो आप डबल चिन के लिए बात कर रही हैं वो
(35:17) डिफरेंट टेक्नोलॉजी है। कूल स्कल्पिंग कूल स्कल्पिंग इज क्रायोलाइपोलिसिस। क्रायोलाइपोलिसिस का मतलब है कि फैट के सेल्स को ठंडा करके उसको मार देना। क्रायोलाइपोलिसिस और हाई इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड आर वेरी डिफरेंट टेक्नोलॉजीस। हाईफू सिर्फ फेस के लिए। हाईफू फेस के लिए कोलाजन रेज करने के लिए और उसको ये करने के लिए हाईफू 4 मिलमीटर के नीचे जाता ही नहीं है। साउंड एनर्जी 4 मिलमीटर के नीचे क्या डबल चिन क्या डबल चिन जाती है हाईफू से? टाइटन हो जाएगी। स्किन टाइटन हो जाएगी। बट डबल चिन अगर फैट की वजह से हाईफू उस पे काम नहीं करेगा। तो इसलिए कॉम्बिनेशन
(35:50) ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। मतलब उसमें फिर डबल चिन को निकालने के लिए अगर फैट बहुत ज्यादा हो तो डीऑक्सीकोलिक एसिड यूज की जाती है जो कि लाइपोलिसिस बोलते हैं। काइबला नाम की एक दवाई है। काइबेला इंजेक्ट की जाती है ताकि आप डबल चिन के फैट को निकालो। बट डबल चिन कई कारणों से हो सकता है। राइट? इट्स नॉट दैट सिंपल। डबल चिन हो सकता है। लूज स्किन की वजह से। अगर लूज स्किन की वजह से है तो जो लाइन शेपिंग के लिए हाइफ यूज़ होगी। लेकिन अगर वो फैट की वजह से हो तो उसको काइबला यूज़ करना पड़ेगा या कूल स्कल्पिंग यूज़ करनी पड़ेगी। एंड दोनों एकदम अलग-अलग टेक्नोलॉजी
(36:20) है। वन इज अ यॉट। वन इज अ कार। यॉट गाड़ी पे रोड पे नहीं चलते हैं और कार्स नदी पे नहीं चलते हैं। दैट्स द डिफरेंस। आइस का जैसे आप बात कर रहे थे तो थर्मास जो होता है ये कितना सेफ है? और क्या ये जैसे आइस के ऊपर जैसे ये हैवी हो जाता है या जैसे आप कह रहे हैं स्किन लूज हो जाती है। उसमें कितनी हेल्प करता है? थर्मास इज अ यूज़लेस टेक्नोलॉजी। मैं उस टेक्नोलॉजी में बिल्कुल भी विश्वास नहीं करता हूं। 2006 में जब मेरी प्लास्टिक सर्जरी की फेलोशिप चल रही थी यूएस में तब थर्माच बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट था यूएस में। लेकिन मैं सच बताऊं तो मेरे यूएस
(36:53) वाले फेलोशिप में भी थर्माच की टेक्नोलॉजी की मुझे बिफोर्स एंड आफ्टर्स जब पेशेंट का बिफोर और पेशेंट का आफ्टर देखूं मुझे समझ में नहीं आता था कौन सा बिफोर है कौन सा आफ्टर। सो बहुत सारी टेक्नोलॉजी चेंज हुई है। आज के जमाने में मेरे हिसाब से थर्माज मेरी नंबर वन चॉइस नहीं है। आई वुड हैव प्रेफर्ड एन अल थेरेपी। आई वुड हैव प्रेफर्ड थिंग्स लाइक इंजेक्टेबल्स लाइक काबेला। आई वुड प्रेफर थ्रेड्स जो कि कॉक थ्रेड्स होते हैं फेस को लिफ्ट करने के लिए। आई वुड प्रेफर हाई जी प्राइम फिलर्स। आई वुड प्रेफर पॉसिबबली बायोमॉड्यूलेटर्स जैसे कि प्रोफाइलो इंजेक्शंस हो गए या फिर
(37:26) अभी जैसे आ रहा है स्कल्प्रा या रेडियस इस तरह के इंजेक्शंस आ जाए। बट आई वुड प्रेफर ऑल ऑफ दैट ताकि क्योंकि मेरा ऑब्जेक्टिव मेरा उद्देश्य है कोलाजन फॉर्म करना और थर्मा जितनी कोलाजन फॉर्म करता है दैट फॉर मी इज नॉट बिग इनफ और जिस जो उसकी प्राइसिंग है क्योंकि एक तरह से अगर हम देखें वी आर आल्सो फाइनेंसियल कंसलटेंट्स हमारे पेशेंट्स के लिए। तो अगर मैं 1 लाख की एक ट्रीटमेंट दूं जिसमें कुछ भी फर्क नहीं पड़ने वाला है। तो उसका क्या ही मतलब होने वाला है। मुझे प्लानिंग करनी पड़ेगी ना कि मैं इस अगर एक ही लाख है मेरे पेशेंट के पास तो मुझे क्या-क्या उसको
(37:56) ट्रीटमेंट देना चाहिए जिससे उसको एक नजर में आए कि मेरे फेस एक्चुअली में बहुत बेहतर हुई है। मेरी पहचान बेहतर हुई है। मैं तरुण लग रही हूं। मैं ताजगी आई है मेरे चेहरे में। वो फर्क ही अगर नहीं आएगा तो फिर करके क्या मतलब? आजकल जैसे फेस के लिए बहुत सारे पीडीआरएन, एक्सोजोम्स और यह बहुत सारे ट्रीटमेंट चल रहे हैं। माइक्रो नीडलिंग कितने सेफ हैं और कौन सा किस ऐज में किसको लेना चाहिए? माइक्रो नीडलिंग जो है बहुत ज्यादा सेफ है। माइक्रो नीडलिंग का क्या मतलब है? माइक्रो नीडलिंग का मतलब है कि छोटे-छोटे इंसेशनंस या छोटे-छोटे डॉट्स या पंक्चर्स
(38:30) करो। कंट्रोलोल्ड इंजरी करो। जिससे इनफ्लेमेशन आए, जिससे कोलाजन बने और जिससे स्किन बेटर लगे। बट माइक्रो नीडलिंग तो आप डर्मा रोलर से भी कर सकते हो। उसमें क्लनिक में जाने की क्या जरूरत है? डर्मा रोलर Amazon पे मिलता है। 1 मिलमीटर का डर्मा रोलर मिल जाएगा। रोज अपने फेस को घिसो उससे। उससे भी हो सकता है। राइट? बट बात ये है कि आपको कंट्रोलोल्ड इंजरी अगर करनी है। कंट्रोलोल्ड इंजरी के बड़े सारे बेहतरीन तरीके हैं। आपको माइक्रो नीडलिंग वो देखो माइक्रो नीडलिंग में प्रॉब्लम क्या है? आपके प्रेशर पे भी डिपेंड करेगा। कितनी पेनिट्रेशन हो रही है उस पे भी
(39:03) डिपेंड करेगा। वेरिएबिलिटी बहुत ज्यादा है। जबकि आप उसी चीज को लेजर से अगर करोगे तो लेजर एक्चुअली डेप्थ तय करेगा कौन से डेप्थ तक लेजर जा सके। जैसे कि आप फ्रैक्शनल CO2 अगर करवाओगे तो फ्रैक्शनल CO2 ये तय करेगा कि कौन से डेप्थ तक आप जाओगे और कोलजन की आप प्रोडक्शन इनक्रीस कर सकते हो। सो इसीलिए वो डिफरेंट टाइप्स की टेक्नोलॉजीस हम यूज़ करते हैं डिफरेंट चीजों में। बहुत सारी जो प्रोडक्ट्स आ रही हैं जैसे कि एक्सोजोम्स जैसे कि पीडीआरएन इंडिया में दे आर नॉट इवन अप्रूव्ड। बहुत सारी चीजें इसलिए यूज हो रही है क्योंकि वो ग्रे मार्केट के थ्रू आ रही हैं। मैं
(39:37) ना अपने चेहरे में कोई ग्रे मार्केट वाला प्रोडक्ट यूज़ करूंगा ना मैं अपने पेशेंट से यूज़ करवाऊंगा। क्योंकि अगर बाय चांस कोई साइड इफेक्ट्स हो गए। जैसे कि शेफाली ज़रीवाला में हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? जब सरकार आके मुझे पूछे कि तुमने भाई यह प्रोडक्ट यूज़ किया उसकी वजह से किसी की डेथ हो गई है। किसने तुम्हें अप्रूवल दिया यह इंपोर्ट करने के लिए? सीडीएस को का लाइसेंस कहां है इस पे? तो मैं क्या कहूंगा? तो इसीलिए मैं उस सब चीजों में नहीं पड़ना चाहता हूं। और मैं और एक चीज समझता हूं कि इसीलिए क्लीनिकल रिसर्च का बहुत योगदान है। हमारी जो
(40:09) संस्था है द एस्थेरिक क्लीनिक्स उसमें क्लीनिकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है। रिसर्च का यह योगदान है कि आप डेटा डेवलप करें। डाटा डेवलप करेंगे तो हमको पता चलेगा कौन से चीज से क्या फर्क पड़ रहा है। दो पेशेंट पर डाटा नहीं बनता। डाटा बनता है 200 पेशेंट पे। अगर आपने 200 पे ट्रीट किया है और 200 पे उसके अच्छे रिजल्ट्स आए हैं और 200 में वो सेफ रहा है तब आप 200 फर्स्ट पेशेंट पे आप आराम से यूज़ कर सकते हो। ऐसे नहीं कि जो मिल गया आपने यूज़ कर दिया। जैसे कि फॉर इंस्टेंस सालन मतलब जो फिश है उससे उससे बनाई जा रही है एक्सोजोम्स। राइट? ट्राउड जो फिश है उससे
(40:42) एक्सोजोम्स बनाई जा रही हैं। ऐसे एग्जोजोम्स अवेलेबल हैं जो कि अंबेलिकल स्टेम सेल से बनाई जाती हैं। राइट? अब ये एग्जोजोम्स को यूएसएफडीए ने एडवाइज़री लगाई हुई है कि ये सब अगर आप यूज़ करो देन यू आर यूजिंग इट एट योर ओन रिस्क क्योंकि लोग मर भी सकते हैं। कल कैंसर भी डेवलप हो सकता है। बाल तो आपको भी चाहिए, मुझे भी चाहिए। लेकिन क्या बाल उगाने के लिए हम मरने को तैयार हैं? मैं तो नहीं हूं। नहीं ऑब्वियसली। नाइदर फॉर मसेल्फ नर फॉर माय पेशेंट्स। क्योंकि एस्थेटिक मेडिसिन में आप पेशेंट हो ही नहीं। आप कंज्यूमर हो और आप बेहतर बनना चाहते हो। अगर 1% रिस्क भी उसमें है
(41:19) जिससे आप अब जैसे हो उससे खराब बन जाओ। आप क्यों लोगे वो रिस्क? वो मैं तो नहीं लूंगा अपने फेस पे और ना ही मैं चाहता हूं कि कोई अपने बालों में या अपने सर पे ले। आजकल जैसे कोरियन ब्यूटी बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा ही डिमांड में है कि सबको ग्लास कोरियन ग्लास स्किन चाहिए। तो क्या यह सही है अपनी इंडियन ब्यूटी को देखते हुए? क्योंकि उनका खाना पीना और सब कुछ बहुत अलग है। बट डिमांड है और बहुत ज्यादा लोग इसको वो भी प्रेफर भी कर रहे हैं कि ओके कोरियन फेशियल या फिर ये ट्रीटमेंट लो इससे आपका वैसी ग्लास स्किन हो जाएगी। क्या सच में होती है? कोविड आने के पहले
(41:53) मुझे ऐसे लगता था कि 80% इंसान खुद के लिए सोच ही नहीं सकते हैं। 20% लोग अपने लिए सोचते हैं। बाकी 80% तो भेड़चाल में लगे हुए हैं। कोविड एक बार आ गया तो मैंने अपनी एनालिसिस बदल ली। मुझे लगता है 99 दर्शन और 9% लोग खुद के लिए सोच नहीं सकते हैं। वो सिर्फ भेड़चाल में लगे हुए हैं। राइट? कोरियंस बनना चाहते हैं। उनको स्किन वैसी चाहिए जैसे कि इंडियंस की स्किन हो। कोरियंस में इतने सारे प्रॉब्लम्स हैं क्योंकि हमारे जो प्रोडक्ट्स हैं, हमारे कुछ प्रोडक्ट्स जैसे कि वी आर पेटेंट होल्डर्स फॉर मल्टीपल प्रोडक्ट्स जो इंडिया में और बाकी देशों में भी आवर
(42:25) रिसर्च एंड प्रोडक्ट्स आर सोल्ड तो कोरिया में हमारी खुद की मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री है। तो कोरिया बहुत आना जाना होता है। कोरियंस लव इंडियन स्किन और यहां पे इंडियंस पागल हो रहे हैं कोरियन स्किन के लिए। सो स्टुपिडिटी है थोड़ा सा। जैसे कि फॉर इंस्टेंस हमारे पास एक पेशेंट आए जिन्होंने आके कहा मुझे कोरियन आइस चाहिए। कोरियन आइस का क्या मतलब है कि बेसिकली यह ऐसे हो जाए। मतलब यह रिवर्स तरह से चला जाए कैंथस और यह ऐसे हो जाए पूरी। मैंने मना कर दिया। मैंने कहा मैं नहीं करने वाला हूं बिकॉज़ इट डजंट मेक सेंस है ना? और ये यू विल लुक वेरी फनी। इंडियन फेस,
(42:58) इंडियन फीचर्स, अचानक कोरियन आंखें आंखें तो बाकी चेहरे के साथ बैठनी चाहिए ना। ऐसे नहीं कि आप सर्कस में मतलब आप कुछ भी कर रहे हो। राइट? और एक्सपेरिमेंट कर रहे हो। खुद के चेहरे पे तो मत करो। और खुद के चेहरे पर अगर कर रहे हो तो उसके लिए आप उसका हामियाना भरने के लिए आप तैयार रहो। उसने सुनी नहीं मेरी बात। वो कोरिया गया। उसने सर्जरी करवाई। तीन महीने बाद रोते हुए आया। कहा कि सर अभी मैं बहुत ही ऑड लग रहा हूं। यह पूरा ऊपर चला गया है। मेरी पूरी कैंथस ऐसी हो गई है। मैं देखने में बहुत ही अजीब लग रहा हूं। दैट इज ट्रू। अजीब लग रहा था वो। क्योंकि उसके स्किन,
(43:30) उसके कलर, उसकी बाकी फीचर्स के साथ वो मेल नहीं खा रही थी। ऑथेंटिसिटी भी तो होनी चाहिए ना। आपकी आंखें कैसे लगती हैं? वह आपकी पहचान है। आपकी आइडेंटिटी है। आप अपनी आइडेंटिटी थोड़ी बदल पाओगे। आप अपनी जेनेटिक्स थोड़ी बदल पाओगे। सो बेसिकली अब वो वापस आया आके कहता है मैं जैसे था वैसे बना दो। फिल्म चल रही है कि मैं उसको फास्ट फॉरवर्ड करूं और रिवाइंड करूं बार-बार। यह नहीं हो सकता इस तरह से। वंस यू मेड द मिस्टेक मेरे प्रोफेसर एक कहा करते थे कि दो बार नापो, एक बार काटो। ऐसे नहीं कि एक बार काट के फिर उसके बाद दूसरी बार काटने के लिए तैयार हो जाओ। तो दो बार
(44:05) नापो, दो बार सोचो, चार बार सोचो कूदने के पहले कूद गए अब पैर टूट गया। अब आप उठकर कह रहे हो कि मेरे पैर को वैसे ही बना दो जैसे पहले था। सो मैं ये सब फैट्स के एकदम खिलाफ हूं। मुझे लगता है ये फैट्स हैं और ये स्टूपिड है। जो लोग ये सब कर रहे हैं उनको बेसिक्स की अंडरस्टैंडिंग नहीं है और मैं प्रेफर करता हूं कि इंटेलिजेंट पेशेंट्स के साथ डील करूं ना कि इस तरह के ट्रेंड्स के बीच में ट्रेंडबाजी में पड़ो। फीमेल्स में सबसे ज्यादा पिगमेंटेशन, लाज्मा ये प्रॉब्लम्स आती है और आफ्टर प्रेगनेंसी ज्यादा आती है। प्रेगनेंसी में स्टार्ट हो जाते हैं उनके पिगमेंटेशन
(44:35) वगैरह। क्यों आती हैं और कैसे इसको ध्यान रखें कि ये ना आए? सो बेसिकली हमारे जैसे इंडियन स्किन में जहां पर हमारी मेलानिन पिगमेंट होती है उसमें पिगमेंटेशन के ज्यादा चेंजेस आते हैं। भगवान कुछ देता है तो कुछ आपसे लेता भी है। अगर जो गोरो रेसेस में उन्होंने पिगमेंट नहीं दी हुई है तो वो एज ज्यादा जल्दी कर जाते हैं और हम जैसों के इसमें पिगमेंटेशन की प्रॉब्लम आती है। हॉर्मोन रिलेटेड होते हैं ये चेंजेस और मेलाज्मा एक डीप डर्मल पिगमेंटेशन है। मतलब डीप पिगमेंटेशन है। उसको प्रॉपर्ली ट्रीट करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। बहुत सारे टाइप के लेज़र्स आते
(45:09) हैं, बहुत सारे टाइप के पील्स आते हैं, स्किनसटिकल्स आते हैं जिससे यह ट्रीट किया जा सकता है। बट कंट्रोल होता है। पूरी तरह क्योर नहीं हो सकता। इट्स अ वेरी डिफिकल्ट प्रॉब्लम टू ट्रीट। ओके। रेटिनॉल क्या है? रेटिनॉल एक तरह की स्किन क्रीम है। वो स्किन के बैरियर फंक्शन को चेंज करती है। वो स्किन के टर्नओवर को चेंज करती है। बहुत सारे लोग रेटिनॉल को यूज़ करते हैं इन ऑर्डर फॉर इट्स एंटी एजिंग इफेक्ट एज वेल। बट रेटिनॉल से स्किन सेंसिटिव भी होती है। तो इसलिए केयर लेना जरूरी है। बेसिकली लोग क्या करते हैं? लोग अपनी स्किन रेजीमेंट
(45:37) में यह ध्यान नहीं रखते हैं कि वो किसके बाद क्या चीज लगानी चाहिए। चार पांच चीज आप सर पे आप अगर लगा दोगे स्किन में ज्यादा रिएक्शन हो जाएगा। ज्यादा प्रॉब्लम्स हो जाएंगे। रात दिन वो बेहतर दिखने लगे। ये सब मेडिकल ड्रग्स हैं और मेडिकल ड्रग्स को डॉक्टर को पूछ के इस्तेमाल करना चाहिए। आज तकलीफ क्या हो गई है कि द इंटेलिजेंट पीपल जो इंडिया में इंटेलिजेंट है वो शांत बैठे हुए हैं। वो कुछ बोल नहीं रहे हैं। और बाकी सब स्किन इन्फ्लुएंसरर बन गए हैं। राइट? 12वीं पास के लोग स्किन इन्फ्लुएंसरर बन रहे हैं। मैं मेरे पास फॉर इंस्टेंस एक लेडी आई
(46:08) ट्रीटमेंट करवाने के लिए तो उन्होंने उठ के कहा कि मैं कॉस्मेटोलॉजिस्ट हूं। तो मैंने कहा ओके तो आप तो हमारी स्पेशलिटी से हैं क्या मतलब कौन से ब्रांच से हैं? आपने डर्मैट किया है क्या किया है? तो कहती है नहीं मैंने डॉक्टरी नहीं की है। तो मैंने कहा कॉस्मेटोलॉजिस्ट इसका क्या मतलब है फिर? तो कहती है कि मैं एक्चुअली में मैं पील्स वगैरह सब करती हूं। मैंने कहा ठीक है आप करती हैं लेकिन आपने एक्चुअली किया क्या है? तो कहती एथ पास हूं। मैंने तीन दिन का कोर्स किया हुआ है। तो मैंने देखा फिर मैंने कहा कि आप स्किन ट्रीटमेंट के लिए और फिलर्स और बोट्स आपने
(46:41) कहा आप सब करती हैं। तो मेरे पास क्यों आई हुई हैं? आप खुद ही कर लेती। तो कहती है नहीं खुद तो मैं नहीं करूंगी ना। अपने आप पे थोड़ी करूंगी। मतलब आप एट्थ पास हो। आपने तीन दिन का कॉस्मेटोलॉजी कोर्स किया हुआ है। आपने एक क्लीनिक खोल ली है। कुरला में बाकायदा आपकी क्लीनिक है। आप वहां पे दूसरों की ट्रीटमेंट कर सकते हो। लेकिन खुद खुद की ट्रीटमेंट नहीं कर सकते हो। तो यह सब चीजों पर पाबंदी होनी चाहिए ना। यहां पर देखो आप तो कोई भी बैठ के कुछ भी सलाह दे रहा है स्किन के ऊपर। अब मलाइका अरोरा खान मे बी रियली स्मार्ट। बट अगर स्किन समझ सकती हैं वो तो उनको भी एमडी
(47:15) डर्मेटोलॉजी कर लेनी चाहिए। वो क्यों मतलब डॉक्टर नहीं है। सो बेसिकली मेडिकल करियर की बात यह है। देखिए कैसा है अपेंडिक्स निकालना मैं आपको 5 दिन में सिखा दूंगा अगर आप नर्स हो। वो प्रॉब्लम नहीं है। अगर कोई कॉम्प्लिकेशन हो जाए तब आप कैसे संभालेंगे? डील कैसे करेंगे? तो आप डील कैसे करेंगे? वो कॉम्प्लिकेशन संभालने के लिए ही एक सर्जन 14 वर्ष ट्रेनिंग लेते हैं। और यही रोल है अनुभव का कि 14 साल की प्रैक्टिस होगी। इसने सब तरह के केसेस देखे होंगे। तो इसलिए मेरे चेहरे को वो अच्छा कर देगा। ऐसे अगर होता कि हम एक सिर्फ कार्य की तरह
(47:52) अपेंडिक्स निकाल दें या फिर पील कर दें तो तो बात ही क्या है? कोई भी कर देगा। तो रेटिनॉल पे जैसे हम आते हैं तो वो किसको यूज़ करना चाहिए? कहते हैं मतलब जितना जैसे आपने कहा कि इन्फ्लुएंसर्स इतने ज्यादा हो गए हैं हर रील में दिखाते हैं कि आफ्टर 30 आप यूज़ करना स्टार्ट कर दीजिए। एक कीर्ति सेन की एक रील भी बहुत वायरल हुई थी जिन्होंने जिसमें उन्होंने दिखा कि मैं ये यूज़ करती हूं और उसके बाद शायद कमेंट्स जब मैंने देखे तो हर कोई मांग रहा है कि कहां है ये कहां है? कहां है? मुझे भी ऑर्डर करना है। कितना सेफ है ये? मेरे हिसाब से तो बिल्कुल सेफ नहीं है।
(48:19) रेटिनॉल रेटिनॉल क्योंकि स्किन अगर आपकी सेंसिटिव है उस पे डिपेंड करेगा। स्किन किस तरह की स्किन है वो डिपेंड करेगा। देखिए प्रॉब्लम क्या है जानने के लिए कि आपको क्या नहीं पता है आपको कुछ पता होने की जरूरत है क्योंकि मैं कॉस्मेटिक सर्जरी में हूं। मैं तो डर्मेटोलॉजी पे बात भी नहीं करता। हमारे टीईसी में द एस्थेटिक क्लेंस में डर्मेटोलॉजिस्ट हैं जो बाकायदा स्किन एग्जामिन करके डिसाइड करेंगे कि आप में रेटिनॉल यूज़ होना चाहिए कि नहीं। जानने के लिए आप क्या नहीं जानते। कुछ तो जानना जरूरी है। इनको शायद यह भी नहीं पता कि इनको क्या पता है और क्या नहीं पता है और
(48:53) उनके एक-एक प्रतिक्रिया से लोग कैसे भेड़चाल में उनके पीछे घुस जाते हैं। इसी की वजह से साइड इफेक्ट्स होते हैं। अगर आप साइड इफेक्ट्स के बारे में बात करेंगे तो साइड इफेक्ट्स इसी वजह से हो रहे हैं क्योंकि एवरीवन इस ट्रीटिंग ये सब प्रिस्रिप्शन रिलेटेड ड्रग्स हैं। प्रिस्रिप्शन रिलेटेड ड्रग्स को आप ओटीसी की तरह आप अपने चेहरे पे मल रहे हो। तो ऑब्वियसली साइड इफेक्ट्स होने वाले हैं ना। आप बैठ के ग्लूटाथायोन लगा रहे हो अपने वैनिटी वैन में या ग्लूटाथायोन लगा रहे हो अपने घर में। आप हेयर रिमूवल लेजर के लिए किसी को बुला रहे हो अपने घर पे ये
(49:22) करने के लिए। कोई हिसाब ही नहीं है। इतनी अनरेगुलेटेड सेक्टर है। और अगर आप सिस्टम्स की संरचना नहीं करोगे तो फिर यही सब प्रॉब्लम्स होने वाले हैं। वही सब हमें दिखाई दे रहे हैं। जो सिक्स स्टेप मेथड है कि स्किन केयर जो जैसे कि नाइट का ये है कि आप पहले फेस वॉश करेंगे देन मॉइस्चराइजर एंड पता नहीं क्या-क्या। सिक्स सिक्स स्टेप्स आजकल बहुत ज्यादा रील्स वायरल हो रही हैं। ये कितना सही है। बहुत ज्यादा बुलशेट है ये सब। हर किसी को यह सब करने की आवश्यकता नहीं है। मैं तो अपने स्किन पर यह सब कुछ भी ना करूं। और अगर आप यह सब कर रही हैं और वह भी बिना
(49:57) मेडिकल एडवाइस के आप कर रही हैं तो भगवान बचाए आपको। आपके हिसाब से क्या करना चाहिए? क्या सही है? और कितनी लेयर्स होनी चाहिए? मैं अगर आप मेरे स्किन केयर के बारे में पूछो। मैं एक फेस वॉश यूज़ कर लूं तो बहुत ज्यादा है। बहुत ज्यादा है। उससे ज्यादा कुछ करने की आवश्यकता भी नहीं है। अगर मेरे स्किन में प्रॉब्लम्स नहीं है, मेरी एक्ने नहीं है, मेरी स्किन इवन टोनड है, तो ज्यादा कुछ करने की आवश्यकता क्यों है? और अगर मुझे कुछ ट्रीटमेंट लेनी होगी, तो मैं प्रॉपर मेडिकल एडवाइस के साथ जाऊंगा। मैं एक डर्मेटोलॉजिस्ट के बेस जाऊंगा। मैं
(50:31) कृति सन की बात नहीं सुनूंगा। हाइड्रोनिक एसिड कितना सेफ है और कितना कितना यूज़ करना चाहिए? बिकॉज़ बहुत ज्यादा ट्रेंड में है। हर चीज में हाइड्रोनिक एसिड। इवन लिपस्टिक भी अगर आप ले रहे हो तो इसमें भी हाइड्रोनिक एसिड। पहली चीज तो जो लिपस्टिक में आप हाइड्रोनिक एसिड ले रहे हो वो तो एंटर ही नहीं होती है। तो वो इमीडिएटली अभी वाटर वो एक हाइड्रोफोबिक मॉलिक्यूल है तो वो पानी खींचता है क्योंकि वो पानी खींचता है। थोड़े टाइम के लिए आपकी पाउट लगी रहती है। जैसे ही वो उतरेगा जैसे ही आप वॉश करोगे वो चला जाएगा। हैलोरोनिक एसिड काम
(51:00) करता तब है हाइलोरोनिक एसिड बेसिक है आपके स्किन का वो बायोमॉलिक्यूल है। जैसे कि कोलजन में हलोरोनिक एसिड होती है। तो हलोरोनिक एसिड आपके घुटनों में भी होती है। जैसे कि अगर घुटने अगर आप देखो तो उसके बीच में जो साइनोवियल फ्लूइड होती है उसमें आप हाइलोनिक एसिड होती है। तो हैलोरोनिक एसिड नॉर्मली स्किन में प्रेजेंट है और हलोरोनिक एसिड की फिलर्स जो होती है जो आप इंजेक्ट करते हो वो काम करते हैं। ज्यादातर चीजें जो आप देखो स्किन के राउट से वो एंटर ही नहीं होते बॉडी में। जब स्किन के राउट्स से वो अब्सॉर्ब ही नहीं होंगे तो वो काम कैसे
(51:32) करेंगे? तो बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो फैट हैं जो एक्चुअली में स्किन को कुछ भी इंपैक्ट नहीं करती हैं। अगर हैरोनिक एसिड को का इंपैक्ट एक्चुअली देखना है तो फिर फिलर्स इंजेक्ट करवाइए। अगर आप फिलर्स इंजेक्ट करवाएंगे ऑब्वियसली इट मेक्स अ डिफरेंस। प्रॉपर मात्रा, प्रॉपर जगह पर, प्रॉपर टाइप की हैरोनिक एसिड यूज करने से काफी तरुण लोग लग सकते हैं। ओके। सनस्क्रीन कितनी सेफ है? यूज़ करनी चाहिए सबको बिकॉज़ बच्चों की भी आती है और बाहर मतलब छोटे से बच्चे से स्टार्ट हो जाता है कि सनस्क्रीन लगाओ। एंड मैंने कहीं पढ़ा था कि सनस्क्रीन से कैंसर भी
(52:03) होने लग जाता है। कितनी सेफ हैं ये? आप एकदम गलत इंसान को पूछ रही हैं। सच में बताऊं तो मैं आपको एक कहानी बताता हूं। एक चुटकुला मैं आपको सुनाता हूं तो आपको समझ में आ जाएगा कि आप क्यों गलत इंसान को पूछ रही हैं। तो एक बार क्या हुआ? हमारी फेलोशिप प्रोग्राम्स चलती हैं। तो एक डर्मेटोलॉजिस्ट मेरे पास ट्रेनिंग ले रही थी एस्थेटिक मेडिसिन में। राइट? सो वो रूम में बैठी हुई थी। मेरी कलीग हैं तो वो रूम में बैठी हुई थी। तो उस रूम में मैं पास के रूम में पेशेंट देख रहा था। इनके रूम में बाथरूम थी। तो मैं बाथरूम में अंदर घुस गया और फिर मैं बाहर आया। बाहर आया तो
(52:33) ऑब्वियसली चेहरा भीगा हुआ था। तो मैंने रुमाल वगैरह से चेहरा पोछा पोछा। तो वो मुझे पूछती है सर। आप चेहरा धो के आ रहे हो। तो मैंने कहा हां क्यों किससे धोया आपने? अब लेडीज यह सब इवैलुएट करती हैं। तो मैंने बोला साबुन से वहां तो फेस वॉश नहीं है। डोंट टेल मी आप डेटोल सोप से अपना चेहरा धो के आ रहे हो। [हंसी] तो जनरली हम लोग ऐसे ही हैं। लाइफ बॉय और डेटोल सोप से ही चेहरा धोने वाले लोग हैं। बट उससे अगर मतलब कोई भी नहीं धोता होगा। ये तो बहुत शॉकिंग है। और वो भी अभी आपसे सुन रहे हैं कि डेटॉल से फेस वॉश मतलब ये कितना सेफ कितना है? करना चाहिए कि नहीं
(53:09) करना चाहिए? देखिए कैसा है। सेफ एक चीज है। डॉक्टर की नॉलेज एक चीज़ तरफ है और खुद जो हम लोग इस्तेमाल करते हैं वो अलग चीज है। दीज़ आर ऑल डिफरेंट थिंग्स। सो कुछ लोगों को फर्क नहीं पड़ता है। मैं उनमें से हूं जिन्हें मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। सो अब प्रवृत्ति ऐसे है तो कोई क्या कर सके? सनस्क्रीन वुड बी नाइस। क्योंकि अगर आप सनस्क्रीन यूज़ करोगे तो आप सन को से प्रोटेक्ट करोगे। आप जब सनस्क्रीन यूज़ करोगे तो आप टैनिंग से और अनइवन स्किन टोन से बहुत सारे बचे रहोगे। बट आज की कहानी ऐसी है कि ज्यादातर लोगों को तो एक्चुअली सन की एक्सपोज़र ही नहीं
(53:43) है। यस इंडोर्स में आप जब रहते हो तब भी अल्ट्रावायलेट ए और बी रेज अंदर आती हैं। तो आपको बेसिकली अपनी स्किन को प्रोटेक्ट करने की जरूरत है। बट क्या मैं करता हूं? नहीं मैं नहीं करता हूं। मैं क्रिकेट भी खेला करता था तब भी मैं सनस्क्रीन नहीं इस्तेमाल करता था। और आई एम जस्ट नॉट द राइट काइंड ऑफ़ पर्सन। मैं भी नहीं हूं। मैं सनस्क्रीन मुझसे भी पूछते हैं कि आप मैं सबसे लेजी हूं। मुझे लगता है कि अगर मैंने सनस्क्रीन लगाया तो मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं स्वेट नहीं कर पा रही हूं और एक एक लेयर आ जाती है और मुझे अगर टैनिंग होती है तो मुझे लगता है
(54:12) कि ओके एलोवेरा मैं करूंगी एंड वो ठीक हो जाएगी बट सनस्क्रीन मैं नहीं यूज करती हूं। मैं आज भी बहुत एम्बरेस्ड हूं जब भी मेरी ये कलीग मुझे मिलती है तो वो जब भी मैं लोगों को बता रहा होता हूं कि उनको सनस्क्रीन यूज करना चाहिए। उनके स्किन थेरेपी में क्या करना चाहिए। तो वो दूर बैठ के हंसती रहती है मेरी तरफ देख के। और मुझे मुझे ऐसे लगता है कि मैं बहुत ही अनऑेंटिक हो रहा हूं जब लोगों को कह रहा हूं यह सब करने के लिए। आपकी भी लाइफ़ में प्रॉब्लम्स चल रही हैं। आप भी कहीं ना कहीं भूत प्रेत बाधा से तकलीफ़ में हैं। पितृ दोष हैं। या आपको समझ नहीं आ रहे हैं
(54:41) कि लाइफ़ के आप उस फेज में है जहां आपको क्लेरिटी नहीं मिल रही है। बिज़नेस करें या जॉब करें? लव मैरिज या अरेंज मैरिज। आगे फ्यूचर क्या है? मोक्ष की राह पर चल भी रहे हैं कि नहीं? आपको अपने इष्ट देव के बारे में पता भी है। लाइफ का पर्पस क्या है? करने क्या आए हैं? इस धरती पर कभी भी कोई भी ऐसे ही जन्म नहीं लेता है। हर एक आत्मा का एक लक्ष्य होता है। कुछ करने वो आई है। इन सबकी क्लेरिटी कहां मिलेगी? इन सबकी क्लेरिटी आपको आकाशिक रीडिंग में मिल जाएगी। जहां आपके ही मास्टर्स, जहां आपके ही पूर्वज, जहां आपका ही इष्ट देव यह बताएगा कि आपको क्या करना चाहिए। इस पूरी
(55:16) लाइफ में आपका क्या पर्पस है और पास्ट लाइफ में आप क्या करके आए थे। कोई कर्म पेंडिंग तो नहीं था जो आपको पूरा करना चाहिए। क्या आपके पूर्वज जो इस धरती पर नहीं है कुछ कहना तो नहीं चाहते हैं? इन सारे सवालों के जवाब सिर्फ और सिर्फ आपको आकाशिक रीडिंग के सेशन में मिल जाएंगे। अगर आप भी अपनी रीडिंग करवाना चाहते हैं, आप भी क्लेरिटी चाहते हैं लाइफ को लेकर तो नीचे दिए गए नंबर पर आप कांटेक्ट कर सकते हैं। बुक कर सकते हैं अपना स्लॉट तो अपने बारे में जानिए। क्लैरिटी लीजिए लाइफ में कि करना क्या है? सलूशंस पाइए अपने इष्ट देव से, अपने पूर्वजों से। जय माता दी। अ
(55:49) एज अ कॉस्मेटिक सर्जन आपके पास 20ज में सबसे ज्यादा जो जिनकी एज 20ज में है सबसे ज्यादा क्या डिमांड करते हैं और उनको क्या करवाना चाहिए आप क्या रेकमेंड करते हैं? मैं एक्चुअली कुछ भी नहीं रेकमेंड करता। मेरे हिसाब से किसी को भी कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। अगर आप मेरे पास आओगे तो मैं आपको यह नहीं कहूंगा कि आपको यह चेंज करना चाहिए, वो चेंज करना चाहिए। अगर आप कहोगे कि मेरी नाक को मुझे इस तरह से चेंज करनी है तो मैं आपको सजेशंस दे सकता हूं व्हिच कुड रेंज फ्रॉम अ फिलर इंजेक्शन और इट कुड बी बेसिकली समथिंग लाइक अ राइनोप्लास्टी सर्जरी डिपेंड करता है मेरे
(56:22) हिसाब से आप कैसे दिखते हो दिस इज रिलेटेड टू आइडेंटिटी और आपकी पहचान बनती है उस चीज से लोगों को हमें जरूरत नहीं है चेंज करने की हमें उन्हें यह बताना है कि वो ऑथेंटिक किस तरह से लग सकते हैं। अगर वह एज हो रहे हैं, अगर आप घर भी आपने ली हुई है, तो 10 साल के बाद वह घर की भी मरम्मत करवाने की जरूरत होगी। तो, वह केयर करना अलग बात है और एकदम चेहरे को बदल देना अलग बात है। मैं उनमें से नहीं हूं जो बिलीव करता है कि किसी के भी चेहरे को बदलने की जरूरत है। मैं यह जरूर मानता हूं कि जैसे-जैसे ऐज आते जाता है, तो चेहरे को निखारने की जरूरत पड़ सकती है। यह हो सकता
(56:57) है कि चेहरे में अंडर आई, डार्क सर्कल्स आ जाए। उससे आपकी कॉन्फिडेंस इंपैक्ट हो रही है। वो सब चीजों को चेंज किया जा सकता है। बट उसके लिए ताज़गी लाने के लिए पूरी तरह चेंज करने की आवश्यकता नहीं होती है। जैसे मैंने बताया आंख अगर आपकी चेंज हो जाएगी तो आप कैसे लगते हो और आपकी आइडेंटिटी आपकी पहचान पूरी तरह बदल जाएगी और वो चेंज के लिए बहुत सारे लोग रेडी नहीं होते हैं। तो इसलिए वो सब ध्यान में रखते हुए ही सर्जरी करनी चाहिए। आजकल डिंपल्स की बहुत ज्यादा हम देख रहे हैं। बहुत ज्यादा रील्स वायरल हो रही है। डिंपल्स की बहुत डिमांड
(57:28) आ रहा है। कितनी कितना सही है? यह करवाने चाहिए। डिंपल्स प्रिपेयर कर सकते हैं। तो डिंपल यहां पे इसलिए होती है क्योंकि यहां पे चीक मसल में वीकनेस होती है। तो आप जब स्माइल करते हो तो वो स्किन अंदर घुस जाती है वो वीकनेस के थ्रू। एक्चुअली आप क्या कर रहे हो डिंपल प्लास्टिक सर्जरी में? वो वीकनेस को क्रिएट कर रहे हो। और प्रॉब्लम कैसी होती है कि अगर आपने वो क्रिएट करने की कोशिश की और वो हमेशा रह गई। नॉर्मली डिंपल क्रिएट होनी चाहिए जब आप स्माइल करो। यस। ऐसे कई सारे सुपरस्टार हैं जिन्होंने डिंपल सर्जरी करवाई और वह रह गया। तो अब
(57:58) जब नॉर्मली भी फेशियल एक्सप्रेशन नहीं है तो डिंपल दिखाई दे रहा है। वो दिखने में बहुत ही खराब लगता है। सो हर किसी के लिए नहीं है वो डिंपल। हर किसी के चेहरे पे वो मेल भी नहीं खाता। और मेरे हिसाब से पूरी तरह स्ट्रक्चर फेस की देख के फिर डिसाइड करना जरूरी है। ओके। आपके पास अगर आपसे मैं पूछूं सही फेस क्या है? बिकॉज़ ऑब्वियसली अगर कोई आ रहा है तो आप खुद रेकमेंड नहीं करते जैसे आपने बताया। जब तक मैं नहीं कहूंगी कि मुझे यह कराना है आप नहीं कहोगे। आप कहोगे आप ठीक है जैसे अच्छे हैं। लेकिन जब आपने स्टडी किया होगा एक परफेक्ट फेस क्या होता है?
(58:32) कुछ मैथमेटिकल फॉर्मूले होते हैं। जैसे कि एक मार्कट्स मास्क होता है या फिर फाई होती है। फाई इज़ बेसिकली एक ग्रीक मैथमेटिकल सिंबल। तो वो क्या होता है? द लेंथ ऑफ़ द फेस और विड्थ ऑफ़ द फेस को वो कंपेयर करती हैं। जैसे कि लेंथ ऑफ़ द फेस शुड बी अबाउट 61% लगर देन द विड्थ ऑफ़ द फेस। मतलब लंबाई ज्यादा हो, चौड़ाई कम हो। आइडियल फसेस जो हो वो हार्ड शेप्ड या ओवल शेप्ड होनी चाहिए। स्क्वायरिश नहीं होनी चाहिए। जैसे कि स्क्वायर अगर होंगी या राउंड अगर होंगी तो वो इतनी ज्यादा मानी नहीं जाती है कि फेशियल शेप बहुत ज्यादा एस्थेटिक है। तो इट इज़ अ कॉम्बिनेशन ऑफ़ ऑल
(59:06) ऑफ़ दीज़ थिंग। सिमिलरली अलग-अलग चीज के प्रपोर्शनंस होते हैं। जैसे कि अप्पर लिप की प्रोपोर्शन टू द लोअर लिप, आंखों की प्रोपोर्शन एंड द डिस्टेंस कैंथस की डिस्टेंस फ्रॉम ईच अदर। हाउ कितनी अप्पर थर्ड ऑफ दी फेस कितनी बड़ी होनी चाहिए? मिडिल थर्ड ऑफ दी फेस कितनी बड़ी होनी चाहिए? लोअर थर्ड ऑफ़ दी फेस कितनी बड़ी होनी चाहिए। ये सब के मैथमेटिकल फॉर्मूले हैं। बट वो मैथमेटिकल फॉर्मूले हमने समझा है। बिकॉज़ ये ऑलरेडी एग्ज़िस्ट करती थी। अगर आप देखो एववोल्यूशन जो है जिस तरह से ह्यूमन बीइंग्स ने इवॉल्व किया हुआ है उससे ह्यूमन ब्यूटी की भी अंडरस्टैंडिंग
(59:38) इवॉल्व हुई है और वो एववोल्यूशन जो है उस तरह से फेस को बनाने से वो दूसरे में ये फीलिंग इवोक करता है कि ये बहुत सुंदर फेस है। सो दैट इज़ बेसिकली व्हाट वी यूज़ मैथमेटिकल फॉर्मूले हैं जिसके थ्रू ये किया जाता है। सबसे ज्यादा जैसे आपने कहा ओवल एंड डायमंड फेस होता है। मैं वैसे पूछना चाहूंगी मेरा फेस अब क्या है? ओवरले मेरे हिसाब से अगर आपकी थोड़ी विड्थ यहां पे कम होगी तो फर्क पड़ेगा। ओके? तो फेस अगर विड्थ यहां पे कम होगी ये लोअर फेस की जो विड्थ है वो अगर श्रिंक होगी तो फेस थोड़ी सी ज्यादा ओवल लगेगी। एंड अभी क्या है? अभी भी इट इज मतलब ओवलाइज्ड है। बहुत
(1:00:16) ज्यादा ये नहीं है। बट ये हैवी है। ये पार्ट्स हैवी हैं। लोअर फेस हैवी है। लोअर फेस अगर हम देखें अगर हम प्रोपोशनंस देखें तो सबसे ब्रॉड पार्ट ऑफ द फेस शुड बी यहां पे ज़गोमेटिक एरिया में इस जगह पे। यह जगह पे काफी नैरो होनी चाहिए। तो अगर यह पार्ट को ज्यादा रेज किया जाए जो कि कुड बी डन थ्रू आइदर फेशियल थ्रेड्स, इट कुड बी डन थ्रू अल थेरेपी। इट कुड बी डन बाय यूजिंग हाई जी प्राइम फिलर किसी तरीके से जिससे फेस की स्ट्रक्चर को चेंज किया जाए तो और बेहतर फर्क पड़ेगा। सो आई थिंक आई थिंक ये फेस सुंदर फेस है। मुझे हर कोई सुंदर ही लगता है। बट इट कैन
(1:00:49) बी इंप्रूव्ड फर्दर और दैट इज द जॉब ऑफ़ अ कॉस्मेटिक सर्जन। आइज का भी ऐसे बहुत बड़ा रोल होता है। मैंने रणबीर कपूर का एक जगह सुना था कि मेरी आईज ऐसी हैं कि मुझे हमेशा थोड़ा सा उदास सैड वाला ही रोल सैडिश वाला रोल होता है। आइज का बहुत फर्क पड़ता है। तो क्या आईज चेंज हो सकती हैं? मतलब जैसे अगर वो मानिए अगर किसी का आइज ऐसे थोड़ी सी डाउनवर्ड्स हैं या बहुत ही उनका चेहरा हमेशा लगे उदास इंसान है ये और चाहे वो बेशक कितने खुश हो तो इससे इसकी चेंज हो सकती हैं वही तो बात है कॉस्मेटिक सर्जरी अगर एक्चुअली आपकी पहचान दर्शाती है तो मैं एक
(1:01:24) एक्चुअली आपको उदाहरण देना चाहूंगा 46 इयर्स ओल्ड की लेडी आई हमारे पास और वो एक्चुअली सीईओ थी एक मल्टीीनेशनल कंपनी की दुबई में वो आई इसलिए उसने आके ये नहीं कहा कि मुझे यंग दिखना है उसने कहा मैं बहुत टायर्ड लग रही हूं। उसने कहा ऐसे लगता है कि मैं एनर्जी मेरे में कम है। आप और इस एनर्जी के कम होने की वजह से मुझे मेरी नेक्स्ट रोल के लिए क्योंकि वो सीईओ थी एक मल्टीीनेशनल कंपनी की। मुझे मेरी नेक्स्ट रोल की प्रमोशन नहीं मिल रही है। सो कभी-कभी आप जैसे दिखते हैं। हो सकता है कि आप में एनर्जी भर-भर के हो। हो सकता है कि आप बहुत खुश
(1:01:59) इंडिविजुअल हो। लेकिन आपकी फेशियल फीचर्स डिटरमिन करती है सामने वाला क्या सोच रहा है। जब तक वो रियलाइज रियलाइज यह करेगा कि आप अच्छी लग रही हैं कि नहीं या फिर आप बहुत खुश है कि नहीं उसके लिए तो आपको उसके साथ बातचीत करनी पड़ेगी बट कवरिंग जो है मतलब गिफ्ट की कवरिंग उससे बाकी सब चीजें डिसाइड होती हैं। सो एज अ रिजल्ट ऑफ व्हिच ऑब्वियसली आपकी फेशियल फीचर्स परसेप्शन ड्राइव करती हैं। ओके। तो इस पॉडकास्ट को एंड करते हैं। मैं कुछ सेलिब्रिटीज के नाम लूंगी। एंड आप मुझे सिर्फ यस और नो में अगर आप बता देंगे अगर थोड़ा सा डिटेल में बता देंगे तो
(1:02:31) ऑडियंस खुश हो जाएगी कि इन्होंने क्या कराया हुआ है। लेकिन अगर आप यस और नो में भी बताएंगे तो भी ठीक है। सेलिब्रिटीज बॉलीवुड सेलिब्रिटीज वो तो यस ही आने वाला है आंसर। तो सबका सबका ही यस आने वाला है। तो इसमें पूछने लायक क्या है? ओके। सो बेसिकली क्या है? हमें ऐसे हिंदुस्तानी के हिसाब से हमें लगता है कि हर कोई नेचुरल लगना चाहिए। हम बट नेचुरल कोई भी चीज़ लाइफ लॉन्ग तो अच्छी नहीं लग सकती है। अगर आप किसी स्टार को देख रही हैं 20 साल की उम्र में तो 40 में भी वह सेम लगे ऐसे कैसी पॉसिबिलिटी है? लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिनके बारे में
(1:03:01) हमने सुना है कि इन्होंने नहीं कराया है। लाइक करीना कपूर जैसे कि जैसे कि कुछ स्टार्स हैं जो कहते हैं मैं 50 साल की हूं और मैं बहुत योग करती हूं जिसकी वजह से मैं बहुत तरुण लग रही हूं। तो मैं हमेशा यही कहता हूं कि योग तो बाबा रामदेव भी कर रहे हैं। हां वो भी तरुण लगते हैं बट आपकी तरह तो नहीं लग रहे। सो ये वो वाली बात नहीं है। एक्चुअली में हमें यह मानना पड़ेगा कि लोग ध्यान रखते हैं अपना। अलग-अलग चीजें करते हैं। कुछ लोग हाइलोनिक एसिड के फिलर लिपस्टिक यूज़ कर रहे होते हैं। कुछ लोग मेकअप यूज़ कर रहे होते हैं और कुछ लोग कॉस्मेटिक
(1:03:32) सर्जरी या कोई और प्रोसीजर्स करवा रहे होते हैं। किसी भी चीज को अगर आपको मेंटेन रखना है उसमें एनर्जी तो डालनी पड़ेगी। तो आप जब एनर्जी डालोगे तभी वो चीज मेंटेन रहेगी। वही वाली बात है। ओके। मैं फिर भी नाम लेना चाहूंगी। आप प्लीज बताइएगा। करीना कपूर। यस। करीना कपूर यस यस आपको लगता नहीं है फेस चेंज हुई है नहीं नहीं मतलब मैंने हमेशा जब भी मेट के फेस में और अभी के फेस में फर्क नहीं है वो जीरो फिगर था बहुत वेट लॉस किया हुआ था तो वेट लॉस की बात नहीं है सर फीचर्स चेंज नहीं हुए हैं ओके ओके अगर सलमान खान क्या चेहरा चेंज हो क्या वेट लूस करने से
(1:04:09) नाक का नक्शा बदल सकता है थोड़ा सा ज्यादा नहीं क्या चेहरा चेंज होने से या फिर वेट लॉस होने से आंखें बदल सकती हैं। छोटी दिख आंखें छोटी दिखेंगी। अगर आपका देखिएगा आप आप जरूर चेहरे को देखिएगा जो भी आप सेलिब्रिटीज की बात कर रही हैं। 20 साल पहले की फोटो ले लीजिएगा और अभी की फोटो ले लीजिएगा या 10 साल पहले की आपको डिफरेंस दिखेगा। जिस तरह से नाक चेंज हो रही है। जिस तरह से टिप चेंज हो रही है। जिस तरह से सब कुछ मतलब स्तन बढ़ रहे हैं। यू विल बी एबल टू फिगर आउट। ओके। आलिया भट्ट ऑब्वियसली यस दीपिका नहीं लगता आपको कोई चेंज चेहरे में। ओके
(1:04:45) दीपिका भी कीर्ति सेनन आपको नहीं लगता चेंज आप मुझ पे डाल रहे हैं आप बताइए यस और नो बॉलीवुड की सिर्फ बात नहीं है आपको खुद के चेहरे में कुछ चेंज नहीं पता चलता आज में और 5 साल पहले में रेखा योगा से यंग लग रही हैं बट मेकअप उनका मेकअप होता है हैवी मेकअप सिर्फ मेकअप से ऐसे लग सकती हैं आपकी मतलब शी मस्ट बी 70 प्लस 75 प्लस आपकी दादी ऐसी लगती है नहीं वो रेखा है क्यों ओके तो रेखा किसी की दादी नहीं हो सकती है ओके तो वो दादी की उम्र में भी कैसे योग से अच्छी लग रही है जय बच्चन नहीं मुझे नहीं लगता उन्होंने कुछ करवाया है कोई तो है ओके अमिताभ बच्चन
(1:05:26) आपको लगता है वो बाल नेचुरल हैं ओके सलमान खान आपको लगता है वो बाल नेचुरल हैं शाहरुख शाहरुख के बाल तो नेचुरल लगते हैं बट बाकी रितिक रोशन आपको लगता है कुछ नहीं करवाया उन्होंने हां लगता है। अच्छा रणवीर सिंह रणवीर सिंह आपने कौन सी वाली मूवी थी? पहली वाली मूवी जो आई थी बैंड बाजा बैंड बाजा उसमें और धुरंधर में फर्क नहीं है। ओके क्या फर्क बालों में? थोड़ा सा थोड़ा सा दिखावे पे मत जाओ। अपनी अकल लगाओ। फेस को साइड बाय साइड रखो। ओके। हम दोनों हम स्क्रीन में शेयर
(1:06:09) करेंगे। देखते हैं ऑडियंस कितना पहचान पाती है। साइड बाय साइड रखो फेस को और फिर ध्यान खुद ही समझ में आएगा क्या हो रहा है। रश्मिका मंदना मैंने उनको पर्सनली देखा नहीं है। हम क्योंकि ज्यादातर मुंबई में ही हैं तो इसलिए रश्मिका को मैं जानता नहीं हूं। तो काफी कुछ जानने को मिला। एंड आपके हिसाब से आपसे एक लास्ट एडवाइस क्या चेंज करने की जरूरत है या खुद को एक्सेप्ट करने की जरूरत है? देखो आप अगर खुद को एक्सेप्ट नहीं करते हो तो कोई भी चेंज आपको खुश नहीं कर सकता। खुशी अंदर से आती है और खुशी अच्छे नाक से नहीं आती है। अच्छा नाक आपको और बेहतर दिखा सकता है।
(1:06:48) आपकी कॉन्फिडेंस को पॉजिटिवली इंपैक्ट कर सकता है। बट आपकी वो पहचान नहीं हो सकती है। क्योंकि आप अपने नाक से विपरीत हैं। आप अपने नाक से बहुत बढ़कर हैं। सो खुद को एक्सेप्ट करना सबसे ज्यादा जरूरी है। फिर बाकी सब छोटे-मोटे चेंजेस तो हम कर ही सकते हैं। बिल्कुल। सो थैंक यू सो मच फॉर कमिंग। थैंक यू सो मच। बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके और बहुत कुछ जानने को मिला। आपके कोई क्वेश्चंस हैं या बीच में जैसे इन्होंने नाम नहीं लिए हैं और आप समझ गए हैं तो प्लीज कमेंट्स में जरूर बताइएगा। जय माता दी। [संगीत] [घंटी की आवाज़]
(00:00) कितना सेफ है कॉस्मेटिक सर्जन? बहुत ज्यादा बुलशेट है ये [संगीत] सब। हर किसी को यह सब करने की आवश्यकता नहीं है। मैं तो अपने स्किन पे ये सब कुछ भी ना करूं। परफेक्ट फेस क्या होता है? द लेंथ ऑफ द फेस और विड्थ ऑफ द फेस को वो कंपेयर करती हैं। [संगीत] जैसे कि लेंथ ऑफ द फेस शुड बी अबाउट सिक। जैसे श्रीदेवी की जब डेथ हुई थी या शेफ अली जरीवाला का कि इन्होंने एक्स्ट्रा ही लाइक बहुत ज्यादा इसमें थी एंड डोसेज बहुत ज्यादा ले रही थी। तो उसकी वजह से कहीं ना कहीं उसका असर था उनकी डेथ का या हार्ट अटैक आने का। किसी बॉलीवुड सेलिब्रिटी ने कुछ करवा रखा
(00:32) है और आपने देखा और आपने कहा यही सही होगा क्योंकि इसने किया हुआ है। आपने ये नहीं सोचा कि क्या बेवकूफ है? कोविड के लिए तो वैक्सीन आ गया। स्टुपिडिटी के लिए अभी भी बात की है। आपके हिसाब से सुंदर आइस की क्या डेफिनेशन है? [संगीत] फेस पे सबसे ज्यादा कॉमन तीन चीज़ है और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट तीन चीज़ है। माइक्रो नेडली कितने सेफ है और कौन सा किस ऐज में किसको लेना चाहिए? कि अगर कोई 30 साल की है तो आप यह सब चीजें करके और 10 साल सर्जरी रोक सकते हो। पूरी जिंदगी 30 साल के लग सकते हो। दोनों में क्या डिफरेंस है? हाइपो एंड अलथरेपी में।
(01:02) आप ज्यादा मशीन यूज़ करोगे तो आप नर्व्स वगैरह को भी डैमेज कर सकते हो। बट अलथरेपी आज हमारे साथ हैं डॉक्टर देवराज शमी। एक ऐसे एक्सपर्ट जो सिर्फ चेहरे नहीं बल्कि लोगों का कॉन्फिडेंस और उनकी पहचान तक बदल देते हैं। फेशियल प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक [संगीत] सर्जरी की फील्ड में उन्होंने ना सिर्फ इंडिया बल्कि ग्लोबली अपनी एक स्ट्रांग पहचान बनाई है। यह बातचीत सिर्फ सर्जरी या लुक्स तक सीमित नहीं रहेगी। यह आपको समझने में मदद करेगी कि असली कॉन्फिडेंस कहां से आता है अंदर से या बाहर से। तो स्टार्ट करते हैं यह पडकास्ट। स्टे ट्यून जय माता दी। सनस्क्रीन यूज
(01:32) करने के बाद टैनिंग क्यों दिखने लग जाती है? प्रिस्क्रिप्शन रिलेटेड ड्रग्स को आप ओटीसी की तरह आप अपने चेहरे पे मल रहे हो। ऑब्वियसली क्या ग्लूटाथायोन सच में रंग गोरा करता है? तो इसको ऑफ लेबल ट्रीटमेंट बताया जाता है क्योंकि ग्लूटाथायोन वो भी एक माइंडसेट है कि अगर गोरी है बाकी और कुछ नहीं है। मतलब चाहे वो उसका एजुकेशन या वर्किंग कुछ भी नहीं कोई नहीं देगा। गोरी लड़की है सुंदर है डार्क। यह माइंडसेट इसलिए है [संगीत] जय माता दी। वेलकम टू आवर पॉडकास्ट।
(02:16) नमस्कार। मुझे यहां बुलाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू। थैंक यू। अ आप आर्मी बैकग्राउंड से हैं एंड कॉस्मेटिक सर्जरी दोनों बहुत अलग फील्ड है। बिकॉज़ आर्मी वालों के बच्चे मोस्टली आर्मी की तरफ ही प्रेफर करते हैं। लाइक मैं आर्मी बैकग्राउंड से थी तो ऑब्वियसली मेरे हस्बैंड आर्मी में हैं। तो ये चीज होती है। कहीं ना कहीं अब मेरी बेटी के अंदर भी वो है कि मुझे आर्मी ऑफिसर बनना है। आपने कैसे कॉस्मेटिक सर्जरी को चूज़ किया? क्या और क्या फर्क पड़ता है? मैं यह भी ऐड ऑन करना चाहूंगी कि क्या फर्क पड़ता है बैकग्राउंड से जब हम
(02:43) आपका जो प्रोफेशन होता है उस पे देश सेवा करने के बड़े तरीके होते हैं। जी सरहद पर लड़ना एकमात्र तरीका नहीं है। जी स्वास्थ्य अगर हम देखें 150 करोड़ लोग हिंदुस्तानी जो हैं तो स्वास्थ्य बढ़ाना वो भी देश सेवा है। तो इसीलिए मेरे फादर भी आर्मी मेडिकल कोर में थे। वो एनटी सर्जन थे। हम तो इसलिए डॉक्टर बनना तो उनसे सीखा पर उसके बाद क्योंकि हमें आगे बढ़ना था प्राइवेट प्रैक्टिस में जानी थी तो इसलिए आर्मी के बारे में नहीं सोचा लेकिन आर्मी ने बहुत कुछ सिखाया आर्मी ने सिखाया कि व्यक्तिगत व्यक्तिगत प्रोग्रेस से ज्यादा जरूरी है सामूहिक प्रोग्रेस सबको साथ ले चलना आर्मी
(03:30) ने सिखाया कि कर्तव्य का पालन हर रोज करना बहुत जरूरी है अनुशासन का एक रोल होता है। तो पापा आर्मी में थे तो वह सब सीख मिली और प्लस ऑब्वियसली क्योंकि हम लोग खुद हिंदू रिफ्यूजीस हैं बांग्लादेश से। सो वो सब जो आपकी जब आप शरणार्थी जब होते हैं किसी और देश में आते हैं और उसके बाद जो आप सीखते हैं तो फिर जो संघर्ष उससे होता है उसी से पूरे जीवन की प्राप्ति हुई है। व्हाई कॉस्मेटिक सर्जरी? यही प्रोफेशन क्यों चूज़ किया? तो मैं चार साल का था। जब मैं 4 साल का था तो मेरी मां कहती है कि मैं चेहरा चेंज करने के बारे में बात करने लगा। मैं बताने
(04:08) लगा कि मैं लोगों को इंजेक्शन दूंगा और उनका चेहरा चेंज करूंगा। अब यह बात कहां से मेरे में आई मुझे पता नहीं है। मेरा यह विश्वास है मैं काफी स्पिरिचुअल हूं। तो मेरा यह विश्वास है कि हम बहुत सारी चीजें इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि हम करना चाहते हैं। हम इसलिए करते हैं क्योंकि हमें जीवन में लाया गया है वह कार्य हमारे थ्रू करने के लिए। तो इसीलिए यह बात यह बात को समझते हुए मुझे ऐसे लगता है कि कोई तो बात होगी जिसकी वजह से पूरी कायनात लग गई अब मेरे पीछे कि मैं चेहरे चेंज करना शुरू करूं। तो मेरी सर्च मैंने पहले अमेरिकन बोर्ड सर्टिफिकेशन हासिल की और
(04:43) मैं प्लास्टिक फेशियल प्लास्टिक और फेशियल कॉस्मेटिक सर्जरी में सर्टिफाई हुआ यूएस में। मैंने मेरे पहला मैंने करियर स्टार्ट किया टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से। तो इसीलिए वहां पर चीज यह थी कि जब लोगों को कैंसर हो जाता है तो आप जौ सर्जरी वगैरह करते हो, पैर से हड्डी निकाल के करते हो ताकि आप पूरे फेस को रिकंस्ट्रक्ट कर सको। धीरे-धीरे धीरे-धीरे ये 2007 की बात है। उस वक्त 90% हमारी प्रैक्टिस पूरी प्लास्टिक सर्जरी थी। रिकंस्ट्रक्टिव [गला साफ़ करने की आवाज़] सर्जरी। उसके बाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे वक्त गुजरता चला गया और हम लोग कॉस्मेटिक
(05:15) सर्जरी में ज्यादा से ज्यादा घुसते चले गए। जब अब हालत ऐसी है कि 90% ऑफ आवर वर्क इज इन कॉस्मेटिक सर्जरी। तो कभी-कभी चेंजेस जो आते हैं वो हमें भी पता नहीं चलता कैसे आते हैं। तो मैंने कहा जरूर था कि मैं चेहरे को चेंज करूंगा। बट धीरे-धीरे आई थिंक डिमांड रिलेटेड क्योंकि हम लोग बॉलीवुड के काफी लोगों को ट्रीट करते हैं और हम खुद मुंबई में हैं और वो सब चीजों के देखते हुए धीरे-धीरे पूरी प्रैक्टिस ही चेंज हो गई और हम लोग पूरी तरह चेहरे बदलने में और पूरे बॉडी को चेंज करने में और कॉस्मेटिक सर्जरी में घुस गए। कितना सेफ है कॉस्मेटिक सर्जरी?
(05:48) बहुत ज्यादा सेफ है। तो जैसे हम ये सुनते हैं जैसे श्रीदेवी की जब डेथ हुई थी या शेफाली जरीवाला का कि इन्होंने एक्स्ट्रा ही लाइक बहुत ज्यादा इसमें थी एंड डोजेज बहुत ज्यादा ले रही थी तो उसकी वजह से कहीं ना कहीं उसका असर था उनकी डेथ का या हार्ट अटैक आने का जो सडन डेथ हो जाती है। तो कहीं ना कहीं इसको ब्लेम किया जाता है। क्या ऐसा होता है? मैं लोगों को अक्सर कहता हूं जी। कि मैंने अभी छींक मारी और 1 मिनट के बाद भूकंप आता है। तो जरूरी नहीं है मेरी भूकंप मेरे भूकंप मेरी छींक की वजह से आया हो। दो इवेंट्स जो एक के बाद एक हो जरूरी नहीं
(06:26) है जो पहला वाला इवेंट हुआ है वो दूसरे वाले को कॉज कर रहा हो। तो शेफाली ज़रीवाला क्या करती थी मुझे पता नहीं है। बट अगर वो ग्लटाथायोन लेती ग्लूटाथॉन खुद बहुत ही ज्यादा सेफ है। अगर आप देखोगे तो इस देश में इस वक्त 1 करोड़ लोग ग्लूटाथोन ले रहे होंगे। क्या इसका मतलब है कि ग्लटाथॉन अनसेफ हो गया है? कल मैं जिम जा सकता हूं। जिम में अकस्मात ऐसे हो सकता है कि मुझे हार्ट अटैक आ जाए। क्या इसका मतलब यह है कि मैं जिम जा रहा था इसलिए मेरा हार्ट अटैक आ गया। चीजों को समझ समझना बहुत ज्यादा जरूरी है। हम एज अ सोसाइटी काफी ज्यादा रिएक्टिव हैं
(07:03) और दो चीजें जब एक साथ होती है हम उसे जोड़ने में माहिर हैं। और मीडिया का भी इसमें रोल है। मीडिया दो चीज को जोड़ के उस पे खयाली पुलाव बना के अच्छी तरह अपनी रोटी तवे पे सेकती है। तो क्या ग्लटायन सच में रंग गोरा करता है? जो एक मतलब कहीं ना कहीं एक मिथ है या एक कांसेप्ट फैला हुआ है कि आप अगर ग्लटाथोयन की शॉट्स ले रहे हैं या कैसे भी किसी भी फॉर्म में अगर आप ले रहे हैं तो आप गोरे होने लग जाओगे। क्या सच में है ये? ग्लटाथायोन है क्या? वो एक एंटीऑक्सीडेंट है जो कि नॉर्मली भी आपके लिवर में प्राप्ति होती है उसकी। तो आप ग्लटाथायोन
(07:37) जब आप यूज करते हो तो आप एंटीऑक्सीडेंट के हिसाब से यूज करते हो। जब आप एंटीऑक्सीडेंट के हिसाब से यूज करने लगे तब आपने देखा कि कुछ लोगों के रंग में फर्क आने लगा। जब कुछ लोगों के रंग में फर्क आने लगा तो आपने हायर डोजेस देके रंग चेंज करने की कोशिश की ग्लटाथायोन देकर। क्या ग्लटाथायोन सेफ है? हां जी सेफ है बट सेफ तो पैरासिटामॉल भी है। मतलब क्रोसिन जो आप खाते हैं वो भी सेफ है। बट मौत पैरासिटामॉल से भी होती है। क्योंकि मोस्ट इंपॉर्टेंट चीज जो हमें जानना है हर एक इंसान अलग है। हर किसी की बायोमेट्रिक्स अलग है। अगर यह टेबल लकड़े से बना हुआ है
(08:14) और वो लकड़ा हर एक टेबल बनाने के लिए अलग हो तो फिर कैसा टेबल बनेगा या कैसी मेज बनेगी मुझे कैसे पता? तो मैं यह कहना चाहता हूं कि ग्लटाथायन सेफ है पर ज्यादातर लोगों में सेफ है। और क्या वह रंग गोरा करता है? कुछ लोगों में वह गोरा करता है। और हम जब रंग गोरा करने के लिए यूज करते हैं तो इसको ऑफ लेबल ट्रीटमेंट बताया जाता है। क्योंकि ग्लूटाथोन इसके लिए बना ही नहीं था। वो एज अ एज अ चेंज मतलब कुछ और करते हुए आपने देखा कि वो रंग गोरा करने लग गया। क्या वो सेफ है? क्या मैं आईवी ग्लूटाथायन लूंगा? अगर मुझे जरूरत हो मैं लूंगा। बट क्या आईवी
(08:52) ग्लूटाथन अकेले मेरे पूरे रंग को गोरा कर सकता है? जनरली नहीं। कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट्स की जरूरत होती है। जैसे कि पील्स की जरूरत होती है। अंदर से न्यूट्रिशन मतलब ग्लटाथायोन की जरूरत होती है। कुछ टाइम कुछ तरह की लेज़र्स होती हैं जो पिगमेंटेशन या मेलेनिन को रिड्यूस करती है। मुझे इसके पहले एक सवाल पूछना जरूरी है। हिंदुस्तान में ऐसा क्यों है कि गोरी गोरी स्किन ही अच्छी मानी जाती है। हां, यह है माइंडसेट। यह माइंडसेट इसलिए है क्योंकि 300 वर्ष 350 वर्ष ब्रिटिशर्स ने हम पर राज किया। हमारी ये हमारा यह विश्वास बन गया कि जो
(09:28) हम पे राज कर रहा है वो गोरा है। तो इसलिए गोरा होना एक तरीके से एक स्टेटस सिंबल बन गया। नहीं कहीं ना कहीं एक जो है माइंडसेट कि जो अगर लड़कियों के इसमें देखा जाए कि गोरी अगर लड़कियां है तो वो ज्यादा सुंदर हैं। वो भी एक माइंडसेट है कि अगर गोरी है बाकी और कुछ नहीं है। मतलब चाहे वो उसका एजुकेशन या वर्किंग कुछ भी नहीं कोई नहीं देखेगा। गोरी लड़की है, सुंदर है। डन। बट ये हर हिंदुस्तान के हर प्रांत में एक जैसा नहीं है। अगर हम एक वेब सीरीज एक आई थी। मैं उसका नाम नहीं लूंगी। उसमें भी यही दिखा था कि उस लड़की ने गोरी होने के लिए ग्लटाथायोन
(09:59) का आईवी ड्रिप वगैरह लिया। एंड उससे उसको रिएक्शन हो गया था। एंड शायद कई उसके बाद क्योंकि जब मैं भी स्किन क्लीनिक उन सब में जाती हूं तो बहुत जगह ये बैन है। बंद हो गया है। तो बैन भी किस लिए हुआ? फिर नहीं। सो दो-तीन चीजें आपने पूछी हैं। मैं अलग-अलग जवाब देना चाहूंगा। पहली चीज मुझे नहीं लगता किसी हिंदुस्तानी को गोरा बनने की जरूरत है। और ये जो मानसिकता है, सॉरी टू से, ये नॉर्थ इंडिया में ज्यादा है। ये अगर आप मैं जहां से आता हूं, मैं अभी प्रैक्टिस करता हूं मुंबई में, बट मैं हूं बंगाली रिफ्यूजी फ्रॉम बांग्लादेश। और अगर
(10:36) हम देखें बंगाल में अगर हम देखें डार्क स्किन को अच्छा माना जाता है। हमारी सब देवियां थोड़ी सी डार्क स्किंड ही रही हैं। काली इज डार्क। राइट? सो इसीलिए ये हमारी मानसिकता है कि गोरा मतलब हायर स्टेटस। बट मेरे हिसाब से पहले पहला सवाल तो यह है गोरा होने की जरूरत है क्या? इतने सारे मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स बने हैं हिंदुस्तान से। हमारी स्किन जो है उसमें मेलेनिन है क्योंकि मेलेनिन है इसीलिए वो इतनी जल्दी एज नहीं करती है। इसीलिए वो एज नहीं करती है। इसीलिए 40-50 साल के भी आप औरतों में यहां पे लाइंस नहीं देखते हो जो कि आप एक गोरे या
(11:13) कोकेशियन पर्सन या वाइट स्किन पर्सन में देखोगे। तो यह टाइम आ गया है कि हम अपने स्किन को अपनाएं। पहले तो अपने आप को अपनाओ। फिर दूसरी बात है क्या मैं गोरा बन सकता हूं? हां ऐसी टेक्नोलॉजीस अवेलेबल हैं जिससे मेलेनिन जितना है वो रिड्यूस हो सकती है जिसमें एक ग्लटाथायोन भी है। ब्लड ग्लटाथायोन लाया कहां से गया है? कौन दे रहा है? कहां पे दे रहा है? कहां से सोर्स करी गई केमिकल? क्या प्योर है कि नहीं है? वो सब सवाल भी तो आने चाहिए। तो कहां सेफ है ये? कहां से लेना चाहिए? अगर एक इंसान सोच रहा है कि ठीक है। सेफ है। जैसे आपने कहा कि ठीक है ले सकते हैं।
(11:46) बट कहां से? ये मेडिकल थेरेपीस हैं। ओके। और मेडिकल थेरेपीस अगर है तो वो मेडिकल इंस्टीटश में होनी चाहिए। वो एक प्लास्टिक सर्जन एक डर्मेटोलॉजिस्ट को एग्जामिन करके होनी चाहिए। ऑब्वियसली उसकी साइड इफेक्ट्स हो सकती हैं। क्योंकि किसी भी चीज को जब आप नस में डाल रहे हो तो उसकी साइड इफेक्ट्स हो ही सकती है। तो उसको मेडिकल सर्वेलेंस में लेना चाहिए। मैंने यह सुना हुआ है कि शेफाली ज़रीवाला अपने घर पे ग्लटाथोन लिया करती थी। यह घर पे लेने वाली चीज नहीं है। अगर यह सच है तो यह गलत है। बट जैसे हम देखते हैं काफी रील्स में जैसे सेलिब्रिटीज की बॉलीवुड सेलिब्रिटीज की
(12:20) रील्स देखते हैं तो उनका मेकअप हो रहा होता है और साइड में उनके चल रही होती है आई ड्रिप। अगर आप बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को बहुत ज्यादा इंटेलिजेंट मान लेते हैं और अगर आप बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को यह मान लेते हैं कि उनको स्वास्थ्य के बारे में सब कुछ पता है तो फिर तो हम गलत डिबेट में पड़ गए हैं। नहीं लोग कहीं ना कहीं इनफ्लुएंस होते हैं उनसे। आप अगर आप गलत इंसान से इन्फ्लुएंस हो गए तो फिर आपके साथ भी गलत ही होना चाहिए ना। अगर मैं अभी अभी किसी बॉलीवुड सेलिब्रिटी को पूछूंगा कि भाई देश कैसे चलना चाहिए या फिर मैं बॉलीवुड सेलिब्रिटी को पूछूंगा कि
(12:50) हिंदुस्तान का क्रिकेट कप्तान कौन होना चाहिए जिसमें हुनर है उनको वो चीज पूछिए ना। उनको ये पूछिए कि लाइटिंग कैसे होनी चाहिए और शूट कैसे करना चाहिए वो मुझे मत पूछिए। बट स्वास्थ्य पे आज ज्यादा हेल्थ केयर इन्फ्लुएंसरर है और डॉक्टर्स को आप पूछ नहीं रहे हैं। ये कहां से सही है? अगर आप यह डिसाइड करेंगे एक किसी बॉलीवुड सेलिब्रिटी ने कुछ करवा रखा है और आपने देखा और आपने कहा यही सही होगा क्योंकि इसने किया हुआ है। आपने ये नहीं सोचा कि क्या बेवकूफ है। इसकी बेवकूफी मुझे नहीं करनी चाहिए थी। इसने अगर कुएं में छलांग लगाया क्योंकि ये बॉलीवुड सेलिब्रिटी आप
(13:21) भी लगा दोगे उसके पीछे। सो मेडिकल थेरेपी को मेडिकल जगह में करो। है ना? ये ये यूएस में भी बहुत प्रचलित हुआ था। यूएस में बोटक्स जो है वो मॉल्स में होने लग गया। आप मॉल में नहीं कर सकते हो बोटक्स क्योंकि बोटक्स की साइड इफेक्ट्स होती हैं और बोटक्स इनफेक्शन हो सकता है। अब आप नस को बिना साफ किए आप कुछ भी नस में घुसेड़ दोगे। कहां से आप ग्लूटाथन लेके आओगे कुछ देखोगे नहीं। अश्लील प्रोडक्ट स्मगल करोगे इंडिया में जिसकी गवर्नमेंट आपको एक्चुअली परमिशन भी नहीं देती है। उस चीज को आप फिर बॉडी में डालोगे और फिर बोलोगे कि ग्लूटाथन ने मुझे मार दिया। तो एक्चुअली
(13:59) तो आपकी स्टुपिडिटी ने आपको मार दिया। और जैसे मैं हमेशा कहता हूं कोविड के लिए तो वैक्सीन आ गया। स्टुपिडिटी के लिए अभी भी बाकी है। और स्टुपिडिटी ने बहुत सारे जान ले लिए जो कोविड भी कोविड ने भी आज तक नहीं लिया। आपकी भी लाइफ में प्रॉब्लम्स चल रही हैं। आप भी कहीं ना कहीं भूत प्रेत बाधा से तकलीफ में हैं। पितृ दोष हैं या आपको समझ नहीं आ रहे हैं कि लाइफ के आप उस फज़ में है जहां आपको क्लेरिटी नहीं मिल रही है। बिजनेस करें या जॉब करें? लव मैरिज या अरेंज मैरिज। आगे फ्यूचर क्या है? मोक्ष की [गला साफ़ करने की आवाज़] राह पर चल भी
(14:29) रहे हैं कि नहीं? आपको अपने इष्ट देव के बारे में पता भी है। लाइफ का पर्पस क्या है? करने क्या आए हैं? इस धरती पर कभी भी कोई भी ऐसे ही जन्म नहीं लेता है। हर एक आत्मा का एक लक्ष्य होता है। कुछ करने वो आई है। इन सबकी क्लेरिटी कहां मिलेगी? इन सबकी क्लेरिटी आपको आकाशिक रीडिंग में मिल जाएगी। जहां आपके ही मास्टर्स, जहां आपके ही पूर्वज, जहां आपका ही इष्ट देव यह बताएगा कि आपको क्या करना चाहिए। इस पूरी लाइफ में आपका क्या पर्पस है और पास्ट लाइफ में आप क्या करके आए थे। कोई कर्म पेंडिंग तो नहीं था जो आपको पूरा करना चाहिए। क्या आपके पूर्वज जो इस धरती पर
(15:03) नहीं है कुछ कहना तो नहीं चाहते हैं? इन सारे सवालों के जवाब सिर्फ और सिर्फ आपको आकाशिक रीडिंग के सेशन में मिल जाएंगे। अगर आप भी अपनी रीडिंग करवाना चाहते हैं, आप भी क्लेरिटी चाहते हैं लाइफ को लेकर तो नीचे दिए गए नंबर पर आप कांटेक्ट कर सकते हैं। बुक कर सकते हैं अपना स्लॉट तो अपने बारे में जानिए। क्लेरिटी लीजिए लाइफ में कि करना क्या है? सशंशंस पाइए अपने इष्ट देव से, अपने पूर्वजों से। जय माता दी। एज अ कॉस्मेटिक सर्जन सबसे ज्यादा डिमांड किसकी आती है आपके पास? देखिए मैं अमेरिकन बोर्ड सर्टिफाइड हूं फेशियल कॉस्मेटिक सर्जरी में। तो मैं फेस
(15:36) में सुपर स्पेशलाइज करता हूं। मेरे जितने फेलोशिप्स बाहर हैं वो फेस में सुपर स्पेशलाइज्ड हैं। तो मैं फेस की बात करता हूं। फेस पे सबसे ज्यादा कॉमन तीन चीजें हैं और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट तीन चीजें हैं। पहले तो बाल। ओके। बाल, मैं बाल सोच भी नहीं रही थी। बाल अगर एक मेल में ना हो तो कैसा लगे? है ना? अब सपोज सपोज आप किसी सेलिब्रिटी को देख रही हैं। उसको बाल के बिना इमेजिन करके देखिए और फिर सोचिए कि वो धुरंधर लगते हैं कि कुछ और लगते हैं। है ना? बालों का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है। जिसकी वजह से बॉलीवुड में अगर आप देखो एक आध को
(16:13) छोड़ के सबके हेयर ट्रांसप्लांट्स हैं। क्योंकि बाल अगर नहीं होंगे तो आप तरुण कैसे लगोगे? ताजगी कैसे आएगी चेहरे पे? है ना? सो बाल बहुत इंपॉर्टेंट है। सेकंड आंखें। है ना? यह कहा जाता है कि सबसे सुंदर औरतों में आप उनकी आंखें नोटिस करती हैं। बाकी सब में आप उनकी नाक नोटिस करती है। तो आंखें नोटिस हो रही है कि नाक नोटिस होती है। वो नाक के नक्शे पे डिपेंड करता है। नाक अगर अच्छी नहीं है तो आप नाक नोटिस करते हो। नाक अगर अच्छी है तो नाक नोटिस में भी नहीं आती है क्योंकि आप आंखें नोटिस कर रहे होते हो। सो द मोस्ट ब्यूटीफुल वुमेन यू नोटिस देयर आईज। यू
(16:52) डोंट नोटिस देयर नोज। एवरीवन एल्स, यू नोटिस देयर नोज़। आपके हिसाब से सुंदर आईज की क्या डेफिनेशन है? एज अ कॉस्मेटिक सर्जन? सुंदर आईज की डेफिनेशन अलग रेसेस में अलग होती है। अब अगर मुझे पूछोगे आप सुंदर आईज कोरियन में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आईज हिंदुस्तानी में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आइज नॉर्थ ईस्ट में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आइज बंगालीज में कैसी होनी चाहिए? सुंदर आइज पहाड़ों में कैसी होनी चाहिए? अगर हम इसको चार जगह डिवाइड कर देते हैं। फॉर एग्जांपल नॉर्थ का पहले बात करते हैं। नॉर्थ के हिसाब से जो जैसे नॉर्थ इंडियंस हैं उसके हिसाब से सुंदर आइज क्या डिफाइन
(17:27) करती हैं आप? इन जनरल अगर आप देखें हमारी जितनी देवियां हैं सबकी बड़ी-बड़ी आंखें हैं। यस। है ना? सरस्वती, लक्ष्मी सबकी बड़ी-बड़ी आंखें हैं। और बड़ी आंखें एक चीज से अगर आप सोचो तो फीमेल्स में ईस्ट्रोजन ज्यादा होता है। और फीमेल्स में क्योंकि ईस्ट्रोजन फीमेल हॉर्मोन बड़ी होती ज्यादा होती है इसलिए आंखें बड़ी होती हैं। इसलिए जब भी आप एक ब्यूटीफुल फीमेल की बात करते हैं तो आंखें बड़ी दिखाई देती है। वेयर एस अगर आप देखो किसी भी इंटेंस मेल को देखो अभी जो फिल्में निकली है उसमें भी आपने देखी होंगी। आंखें छोटी हो जाती है मेल्स
(18:00) की। जब वो गुस्से में होते हैं तो वो इंटेंसिटी दिखाने के लिए आंखें छोटी होती हैं। एक मेल में अगर आंखें बड़ी हो तो वो इंटेंसिटी नहीं आती है। ये हॉर्मोंस का भी खेल है। जैसे कि टेस्टोस्टेरोन आंखों को छोटा और ज्यादा इंटेंस बनाता है क्योंकि वो एंबिशन रिलेटेड हॉर्मोन है। वेयर एस ईस्ट्रोजन आंखों को बड़ा बनाता है। सो ये सब चीजें जो है ये डिपेंड करता है कई सारी चीजों पे। आपकी आंखें आपके प्रांत के साथ कैसे मेल खाती हैं? आपकी एथनिसिटी के साथ कैसे मेल खाती हैं? आपकी उम्र के साथ कैसे मेल खाती है? हाउ डस इट फिट इन बाकी सब
(18:35) फीचर्स के साथ। तो वो सब देखना पड़ता है टू डिटरमिन कि अच्छी आंखें कैसी होनी चाहिए। एक्चुअली में अगर आप देखो ब्यूटी दो चीज होती है। सिमेट्री मतलब राइट साइड ऑफ द फेस और लेफ्ट साइड ऑफ द फेस इक्वल एक जैसे लगे। अगर आप अपने फोटो या मेरे फोटो को राइट साइड और लेफ्ट साइड को उल्टा करके लगा दो तो राइट साइड की जो बनेगी जो चेहरा बनेगा और लेफ्ट साइड का जो चेहरा बनेगा वो दोनों चेहरे एकदम अलग होंगे। अलग होते हैं। यस। राइट? ये कहा जाता है कि इन द मोस्ट ब्यूटीफुल पीपल जो सबसे सुंदर है उसमें राइट और लेफ्ट साइड्स एक जैसे दिखते हैं।
(19:12) ऑलमोस्ट लाइक ट्विंस। और बाकी सब में इट ऑलमोस्ट लुक्स लाइक कजिंस। हम सो कितनी सिमेट्री है दोनों साइड पे यह पता चलता है। इस सब का साइंस से भी मेल है। एक्चुअली सुंदरता इंपॉर्टेंट क्यों है? क्योंकि सुंदरता जब एक पुरुष और एक महिला एक दूसरे को देखते हैं तो वो डिसाइड कर रहे हैं कि उनकी स्पर्म के लिए यह पर्टिकुलर एग सही है कि नहीं। एक्चुअली एववोल्यूशनरी और बायोलॉजिकल प्रिंसिपल्स होते हैं। आप 1 मिनट में तय करने की कोशिश कर रहे हो। इज शी वर्दी ऑफ़ बेयरिंग माय चाइल्ड? यह वाली कहानी होती है। तो यह एक्चुअली में आप जैसे दिख रहे हो उसका
(19:49) डायरेक्ट कनेक्शन बनाया जा रहा है कि आप कितने फर्टाइल हो। आप बच्चे को कैसे पनपने वाले हो। आप कितनी अच्छी मां बनोगी। सो ये सब चीजें मेल खाती हैं। तो आपका दिमाग एक्चुअली में डिसाइड करता है 7 सेकंड में कोई एक दूसरे लुक किसी को देना चाहिए कि नहीं। तो अगर 7 सेकंड में मेरे दिमाग को तय करना है। यह आंखें अच्छी लग रही है कि नहीं। कुछ तो एल्गोरिदम्स होंगे। मैथमेटिकल फार्मूला मेरे दिमाग में होगा जिससे मुझे यह तय करना पड़ेगा कि वो सोचने का मौका तो है नहीं 7 सेकंड में। तो इसीलिए यह हमेशा कहा जाता है कि आप एक चेहरे को देख के डिसाइड करते हो कि वो
(20:24) आपके स्पर्श या आपके संपर्क में आने के योग्य है कि नहीं और वो 7 सेकंड में आप डिसाइड करते हो। फिर पूरी जिंदगी आप लगाते हो उस डिसिशन को जस्टिफाई करने में कि वो सही है कि नहीं। तो जैसे आपने कहा कि आईज जो है एज के साथ भी चेंज होती हैं। कैसे चेंज होती है? और क्या सही होता है या फिर कुछ लोग होते हैं जैसे आपके पास आते होंगे कि नहीं हमें तो वैसे ही चाहिए चाहे हमारी ऐज 50 या 60 में भी जाए देन आल्सो हमारी आईज चेंज नहीं होनी चाहिए। तो एक्चुअली हो क्या रहा है? एक्चुअली जो हो रहा है यह बात है कि हम धरती मां के ऊपर हैं। और धरती मां हमें अपनी तरफ खींच
(20:58) रही है। ग्रेविटी हमें नीचे खींच रही है और अल्टीमेटली हम में से हर कोई धरती मां में सिमट जाएंगे। है ना? सो ग्रेविटी जो खींच रही है इससे फेस में डिसेंट हो रहा है। मतलब वो नीचे आ रही है। तो पलक आपकी नीचे आ रही है विद एज। तो आप जैसे देखोगे अगर आप 20ज में थे तो जब आप स्माइल करते थे आंखें जितनी बड़ी रहती थी फिर आप उस स्टेज पे आए जब फोटो लेने लगे। आपने अगर स्माइल किया आंखें दिखनी बंद हो गई। वो इसलिए क्योंकि सब कुछ नीचे आने लग गया। तो इसीलिए मूविंग डाउनवर्ड्स मतलब पूरी पूरी आपकी फेस नीचे आ रही है इस वक्त भी क्योंकि धरती मां उसे नीचे बुला रही है।
(21:38) तो अगर एजिंग के सब चेंजेस फेस का नीचे आना है तो एंटी एजिंग का मतलब है फेस को ऊपर लेके जाना। यही प्रिंसिपल है। तो इसीलिए अगर कोई 30 साल का आता है और कहता है कि मेरी आंखें बड़ी छोटी लग रही है देन यू हैव टू पुट इन प्लेस। कुछ स्ट्रक्चर्स या कुछ सर्जरीज या कुछ नॉन सर्जिकल प्रोसीजर्स जिससे आंखें छोटी नहीं हो। ताकि आप जब हंसे तो दांत भी दिखे और आंख खुले भी लगे। ऐसे नहीं कि आंख बंद लगने लगे क्योंकि आंख इतनी छोटे हो गए हैं। ओके एक क्वेश्चन आई थिंक ऑडियंस के दिमाग में भी अभी आ रहा होगा। कितनी सर्जरीज पॉसिबल हैं? एक अगर जैसे आइज का अगर जा
(22:14) रहे हैं तो कितनी महंगी होंगी? अगर एक आम इंसान सोच रहा है कि एक एवरेज या मिडिल क्लास एक इंसान सोच रहा है। तो उसको क्या रेकमेंड करोगे आप? कितनी महंगी होती है? एंड उसका हीलिंग टाइम कितना होता है? कौन-कौन सी सर्जरीज होती? मैं डिवाइड करता हूं। यस। जैसे कि सबसे यंगेस्ट जिसमें मैंने आईलिड सर्जरी की है वो तीन दिन का बच्चा था। राइट? क्यों? क्योंकि आंख पूरी तरह बंद थी। क्यों? क्योंकि टोसिस नाम की प्रॉब्लम होती है। पी टी ओ एस आई एस टोसिस नाम की प्रॉब्लम होती है जिससे बाय बर्थ आइलिड नीचे होती है। अब जब आईलिड पूरी तरह नीचे
(22:50) है तो आंख में रोशनी नहीं जाएगी। इस बच्चे में एक्चुअली विज़ जो दृष्टि है उसकी डेवलपमेंट ही नहीं होने वाली है। तो इसलिए इसमें लेज़ आई डेवलप हो जाता है। इसलिए आप इसमें सर्जरी करते हो ताकि आंख खुले, आंख के अंदर रोशनी जाए और दृष्टि का डेवलपमेंट हो। तो तीन दिन के बच्चे में मैंने ऑपरेट किया हुआ है। राइट? मैंने सबसे जो बुजुर्ग इंसान में आईलिड सर्जरी की हुई है, वो 90 इयर्स के थे। क्यों? सुंदर दिखने के लिए नहीं। क्योंकि धीरे-धीरे आईलिड नीचे आने लगी। आंखें नॉर्मल होने के बावजूद पलकें नीचे आ गई और पलकें नीचे आने की वजह से
(23:27) उनको दिखना बंद हो गया। अब जब मेरी आंखें आईलिड नीचे आ जाएंगी क्योंकि धरती मां उसे नीचे बुला रही है और वो नीचे आ रही है। टिश्यूज़ लैक्स हो रहे हैं तो फिर मेरी आंखें नॉर्मल है पर मैं किसी को देख नहीं पा रहा हूं। आंखें नॉर्मल होने के बावजूद अगर मैं ना देख पाऊं तो आंखों का क्या मतलब फिर? तो फिर मुझे टोसिस सर्जरी करनी पड़ेगी। बिकॉज़ मुझे आईलेट को ऊपर लेके जाना है। अब मैंने 3 दिन के बारे में बताया। मैंने 90 साल के बारे में बताया। अब ये 3 दिन वाला बच्चा 10 साल में भी आ सकता था। राइट? और 30 साल की युवती भी आ सकती है ये कहने के लिए। महिला भी आ सकती
(24:00) है ये कहने के लिए कि मेरी आईलिड धीरे-धीरे छोटी हो रही है। सो डिपेंडिंग ऑन वो कब आती है? सर्जरी की जरूरत है कि नहीं वो देखना पड़ता है। कुछ-कुछ चीजें तो नॉन सर्जिकली भी ट्रीट हो सकती है। क्या यह हो सकती है नॉन सर्जिकली? जैसे कि अभी फिलहाल इस साल हमें जो बेस्ट रिसर्च पेपर अवार्ड मिला हुआ है वो इसलिए मिला हुआ है क्योंकि हमारी संस्था ने यह फाइंड आउट किया है कि यहां पे फिलर्स डालने से और यहां पे बोटक्स डालने से आप एक्चुअली आइब्रो को ऊपर लेके जा सकते हो और आईलिड को कुछ हद तक ऊपर लेके जा सकते हो। मतलब 2 मिलमी तक फर्क पड़ सकता है। क्या ये सब
(24:36) में काम करेगा जिसकी आईलिड एकदम नीचे आ गई? ऑब्वियसली नहीं। बट जिसमें आईलिड धीरे नीचे आ रही है अगर कोई 30 साल की है तो आप यह सब चीजें करके और 10 साल सर्जरी रोक सकते हो। सो टेक्नोलॉजी बढ़ती जा रही है। मेडिकल डिवाइसेस ऐसे आ रहे हैं कि आप अगर फेसलिफ्ट के बारे में बात करो फेस को बिना काटे बिना खोले आप नॉनसर्जिकली ऊपर कर सकते हो। सो टेक्नोलॉजी ऐसे जैसे बढ़ते जाएगी हर एक चीज के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। और आज की टेक्नोलॉजी ऐसी अवेलेबल है कि आप पूरी जिंदगी 30 साल के लग सकते हो। एंड ये कितनी एक्सपेंसिव होती है? जैसे आई
(25:12) सर्जरी आपने बताया मानिए कोई भी आपके पास मेल फीमेल कोई आ रहे हैं एंड वो उनकी ऐज है बिटवीन 30 टू 40 या 50 आप लगा लीजिए। तो सर्जरी चाहिए नहीं चाहिए। सर्जरी अगर उनको चाहिए सर्जरी अगर चाहिए तो डिपेंड करता है कौन सी टाइप की सर्जरी होती है। ये एक आध लाख भी हो सकता है या तीन चार लाख भी हो सकता है। डिपेंड करता है कैसी सर्जरी हीलिंग कितना टाइम लगता है इसमें? इसमें हीलिंग लगभग 14 दिन लगते हैं। तो हम हमेशा इस चीज में हीलिंग को दो फेस में डिवाइड करते हैं। जैसे ही आपने नाक की सर्जरी करवाई तो फॉर इंस्टेंस मैं किसी एक सेलिब्रिटी को ऑपरेट कर रहा था पिछले
(25:44) हफ्ते। तो उनका पहला सवाल ये था मैं कब नॉर्मल लगूंगी? तो मैंने कहा नॉर्मल का अर्थ क्या है? क्या नॉर्मल का मतलब है मैं कब पे जाऊंगी तो चार हफ्ते। राइट? क्या नॉर्मल का मतलब यह है कि मैं कब पार्टी में जाऊंगी तो शायद आठ हफ्ते। सूजन ना दिखाई दे। क्या नॉर्मल का मतलब मैं हाई डेफिनेशन कैमरा पर आऊंगी ताकि वह भी पिकअप ना कर सके कि मेरी नाक चेंज हुई है तो एक साल एक साल नाक की सर्जरी में तो वो डिपेंड करता है कौन से अंग की सर्जरी की जा रही है और वो सर्जरी में कितनी सूजन होती है जैसे कि फॉर इंस्टेंस आईलिड में इतनी सूजन नहीं
(26:20) होती है बट नाक क्योंकि डिपेंडेंट एरिया है अगर सूजन होगी तो फिर वो पूरी टिप ऑफ द नोज बल्बस लगने लगती है तो इसीलिए नाक की सर्जरी में हीलिंग में बड़ा टाइम लगता है तो इसीलिए नाक की सर्जरी के जगह शायद नॉन सर्जिकल कुछ करना बहुत पॉसिबल है। जैसे कि सपोज आप अगर आए और आप बताएं कि मुझे मेरे नाक को और ज्यादा बेहतर बनाना है। अगर मुझे ये फ्रंटल यहां पे थोड़ा सा जो अगर शेप देना है वो तो मैं फिलर से भी कर सकता हूं। फिलर इंजेक्शन से भी वह किए जा सकते हैं। और फिलर्स जो नॉर्मली लोग लिप्स में डालते हैं या फेस की शेपिंग में डालते
(26:56) हैं, वह नोज में भी डाली जा सकती है। ऑब्वियसली हुनर होने की जरूरत है। हर कोई यह नहीं कर सकता। बट अगर हुनर हो, तो वो फिलर्स से भी कर सकते हैं। जैसे आपने अभी मेकअप से अपने नाक को शेप किया होगा। फर्क यह होगा कि वो परमानेंटली ऐसे शेप हो जाएगा। कल सुबह आप उठेंगी और चेहरा आप धो भी लेंगी तो मेकअप जाने के बावजूद वो रह जाएगा। तो फिलर से भी किया जा सकता है। लेकिन अगर आप कहें कि मेरी नाक ब्रॉड है और मुझे ब्रॉडनेस को रिड्यूस करना है। ब्रॉडनेस रिड्यूस करने का कोई तरीका ही नहीं है क्योंकि ये बोन है। तो अगर बोन को की ब्रॉडनेस रिड्यूस करनी है तो बोन को
(27:30) तोड़ के सर्जिकली अंदर करना पड़ेगा। सो डिपेंड करता है कौन से टाइप की चेंज चाहिए। जैसे कि मैंने आप में भी मैंने दो ये बताया। तो अगर आप अपने नाक को रेट करती हैं सिक्स ऑन 10 एट ऑन 10 तो वो बन सकता है फिलर से भी अब लेकिन न 9फ ऑन 10 चाहिए बहुत ही बढ़िया नाक चाहिए एंड वो कंप्लीटली डिफाइंड हो तो उसमें सर्जरी लगेगी सो दैट इज हाउ वी डिसाइड क्या ये वही सर्जरी है राइनोप्लास्टी जिसे हम कहते हैं। ओके ये कितनी एक्सपेंसिव होती है? तो अगेन राइनोप्लास्टी कितनी एक्सपेंसिव होती है इज़ अ लिटिल लाइक आस्किंग मी कि मैं आज मुंबई दिल्ली से मुंबई जा रही हूं।
(28:03) इसका क्या कॉस्ट होने वाला है? फिर भी एस्टीमेट एस्टीमेट आल्सो डिपेंड्स इट डिपेंड्स राइट क्योंकि अगर आप दिल्ली से मुंबई जा रहे हैं आप फर्स्ट क्लास ट्रेवल कर रहे हो कि आप बिज़नेस क्लास ट्रेवल कर रहे हो कि आप प्रीमियम इकॉनमी ट्रेवल कर रहे हो कि आप ट्रेन में जा रहे हो कि पैदल जा रहे हो ऑब्वियसली सर्जन सर्जन में फर्क पड़ेगा ना अगर आप जा रहे हो पाव भाजी खाने और आप ताज में जा रहे हो और आप पाव भाजी खाने सड़क पे जा रहे हो तो फर्क तो पड़ेगा ही सो इट डिपेंड्स ऑन द सर्जन इट डिपेंड्स ऑन द प्रोसीजर इट डिपेंड्स ऑन दी हॉस्पिटल इट
(28:31) डिपेंड्स ऑन सो मेनी फैक्टर्स क्या करने की जरूरत है राइट राइट? सपोज फिलर करने की जरूरत है तो फिर तो क्लियर है 50 60000 में हो जाएगा। लेकिन अगर बात यह है कि मुझे पूरा हड्डी तोड़ना है तो फिर सीटी स्कैन करवानी है देखने के लिए कि अंदर भी सेप्टम सही है नहीं है। वो इट्स अ मेडिकल ट्रीटमेंट क्योंकि नाक के दो इंपॉर्टेंट उपयोग हैं। इसलिए कॉस्मेटिक सर्जरी प्लास्टिक सर्जरी से मेल खाती है। क्योंकि नाक को श्वास भी लेना है। अब जैसे कि अगर आप देखो मैं सेलिब्रिटी एक हैं जिन्होंने 2000 में एक सुपरहिट फिल्म रिलीज़ की थी सन 2000 में। कौन है आप समझ जाएंगे जिस
(29:05) तरह से मैं बोल रहा हूं मैं नाम नहीं लूंगा। राइट? राइट? लोग कमेंट्स करके बता देंगे। राइट? सो 2000 में इन्होंने अपनी नाक की सर्जरी करवाई थी। राइट? दिखने में बहुत सुंदर है। बहुत ज्यादा हैंडसम है। बट लोगों को ये नहीं पता कि तीन बार नाक की सर्जरी हुई है। राइट? अब अगर आप नाक को देखते हो अब की जो फिल्में आ रही हैं तो आप देखोगे कि यहां से नस्ट्रिल ऊपर हो गई है। नाक, नाक जो है ये ऊपर हो गई है। क्यों? क्योंकि आपने नाक को बहुत ज्यादा रिफाइन कर दिया। उसमें से श्वास जब जाएगी जब आप नॉर्मली अब हम बैठ के श्वास ले रहे हैं तो आधा लीटर हवा जा रही है मेरे
(29:39) फेफड़ों में। लेकिन मैं जब भागूंगा ट्रेडमल पे तो 5 लीटर हवा जाएगी मेरे फेफड़ों में। मतलब 10 गुना ये इनक्रीस होने की जरूरत है। एक प्रिंसिपल है बर्नोलीस प्रिंसिपल जो फिजिक्स में हमने पढ़ी होगी कि टनल में टनल की साइज अगर आप छोटी कर दोगे बहुत ज्यादा तो हवा जब जाएगा तो रेजिस्टेंस बढ़ता है। जब रेजिस्टेंस बढ़ेगा तो वो कार्टिलेजेस को ऊपर पुश कर देगा। ओके? जी। सो इसीलिए सर्जरी भी अगर हमें करनी है, सर्जरी इस तरह से करनी है कि फंक्शनल जो काम है, जो श्वास लेने का काम है, दैट सर्व्स द पर्पस कॉस्मेटिक दिखने के साथ-साथ। वरना आज अच्छा दिखे लेकिन 10 साल
(30:15) के बाद नाक की शेप चेंज हो जाए क्योंकि मैं श्वास ले रहा हूं। तो दिस इज़ नॉट द राइट टाइप ऑफ़ सर्जरी। बट लोगों को कौन समझाए? क्योंकि लोगों को तो आज और अभी जीना है। कल का तो कोई किसी ने देखा नहीं है। तो दिस इज़ द थिंग दैट हैज़ टू बी डिसाइडेड कि अंदर की कौन सी सर्जरी है? कौन से हड्डियों को ठीक करना है, श्वास कैसे लेगा? बहुत सारी मेडिकल डिसिशनंस हैं। तो ये मेडिकल ट्रीटमेंट्स हैं। जैसे आपने कहा कि फिलर्स से भी हो सकती है। लेकिन अगर जैसे फिलर्स से भी मेरे एक फ्रेंड है उन्होंने कहा था कि अगर आपका मेटाबॉलिज्म रेट हाई है तो बहुत जल्दी
(30:44) डिॉल्व हो जाता है और जल्दी-जल्दी आपको करवाना पड़ता है। क्या ये सच है? फिलर्स अलग-अलग टाइप के होते हैं। हम जनरली कोई भी फिलर हो, कोई भी ब्रांड हो उसको डिवाइड करते हैं दो टाइप्स में। लो जी प्राइम फिलर और हाई जी प्राइम फिलर। जी प्राइम का क्या मतलब है? जी प्राइम का मतलब है कि फिलर कितनी उसमें इंटेग्रिटी होती है। मतलब वो कितने सकारात्मक रूप से वो कितने क्रॉसलिंक्ड होते हैं फिलर्स। तो फिलर्स जो ज्यादा क्रॉस लिंक होते हैं वो टिश्यू में ज्यादा लंबे रह जाते हैं। ऐसे भी फिलर्स हैं जो कि टेंपरेरी होने के बावजूद 3 साल के बाद भी रहते हैं। और ऐसे
(31:16) भी फिलर्स हैं जो कि अंडर आई एरिया में जहां स्किन सबसे थिन है यूज की जाती है जो 6 महीने में डिसअपीयर हो जाए। तो कौन सा फिलर और फिर किस में डाला जा रहा है और जिसमें डाला जा रहा है उसकी लाइफस्टाइल हैबिट्स कैसे हैं जो जिम जाएगा उसकी मेटब हायर होगी उसका बोटक्स और फिलर्स जल्दी उतरेगा जो जिम जाएगा और अपने मसल्स को इस तरह से कुछ मोड़ेगा उसके बोटक्स ज्यादा जल्दी वेयर ऑफ होगी जो स्मोक कर रहे हैं या फिर बाकी सब नशे कर रहे हैं ऑब्वियसली उनमें फिलर्स इतना लास्ट नहीं करने वाला तो बड़ी सारी चीजें होती है जिसको फार्म फार्माकोडायनेमिक्स और फार्माकोइनेटिक्स
(31:54) बोलते हैं। मैंने स्टार्ट किया था ये कह के कि हर किसी में लकड़ाई सेम नहीं है तो आप कैसे डिसाइड करोगे? वही पैरासिटामॉल जो आपके सर दर्द को गायब कर सकता है। वो किसी और के लेने पे उनको पोइजन करके उनको मार भी सकता है। पैरासिटामॉल की गलती नहीं है। आपकी शरीर कैसे रिएक्ट कर रही है उस चीज के साथ उस पे पूरा दारोमदार है। आजकल एक वर्ड बहुत ट्रेंडिंग चल रहा है। हाईफू [गला साफ़ करने की आवाज़] एंड अलथरेपी भी जैसे दोनों में क्या डिफरेंस है? HF थेरेपी में अ एक नैनो और Mercedes में जो फर्क है वही में है। ओके चार पहिए होने से इसका मतलब यह नहीं है कि
(32:28) हर नैनो क्या है इनमें? HFO HFO ऑब्वियसली HFO के मशीनंस जो कोरियन मशीनंस हैं और HFO के चाइनीस मशीनंस दो चार 5 लाख में मशीनंस आते हैं। 10 लाख में आ जाते हैं। अल थेरेपी का कॉस्ट अराउंड 35 से ₹40 लाख खर्चा है। तो अगर 35 से ₹40 लाख कोई क्लीनिक चेन उसमें इन्वेस्ट कर रही है। ऑब्वियसली उसको रिजल्ट्स भी वैसे ही मिलने वाले हैं। एक चार वाट की मशीन है। एक 40 W की मशीन है। अगर आप सोचो कि सिर्फ चार पहिए होने से Mercedes और नैनो सेम काम करते हैं। फिर तो कोई कुछ कर ही नहीं सकता है। बट हमें यह समझना पड़ेगा कि बेसिकली वह मशीन किस लिए बनाई गई है। हाई
(33:02) इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड जो कि टेक्नोलॉजी है जिसको हाईफू कहा जाता है। वो करता क्या है? वो अल्ट्रासाउंड मतलब साउंड एनर्जी छोड़ता है। साउंड एनर्जी जब बहुत कंसंट्रेटेड होती है। मतलब ये वही एनर्जी है जो आप यूज़ कर रहे हो जब बच्चा आपकी पेट में है उसको इवैलुएट करने के लिए आप अल्ट्रासोनोग्राफी यूज़ कर रहे हो। जब आप उसको हाई इंटेंसिटी बनाते हो तो वो स्किन के नीचे जाकर बेसमेंट मेंब्रेन जो हमारी होती है उसे कोलाजन के उत्पादन को बढ़ाता है। अब नॉर्मली 30 साल की उम्र के बाद कोलाजन उत्पादन होना इंसानी शरीर में बंद हो जाता है। कोलाजन के क्या क्यों
(33:37) इंपॉर्टेंट है आपके चेहरे के लिए? अब आप ये बिल्डिंग को देखिए। इस बिल्डिंग में अगर आप सब सीमेंट निकाल देंगे तो आरसीसी और सलाखें होंगी। वो बिल्डिंग को स्ट्रक्चर देती हैं। वो बिल्डिंग को सकारात्मक तरीके से सीधा रखती हैं ताकि वो मुड़ ना जाए। फेस पे कोलाजन का वही रोल है। कोलाजन जो रहता है वो फेस को ऊपर करके रखता है। ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम 30 साल के बाद कोलाजन का उत्पादन बंद हो जाता है। और जब कोलाजन का उत्पादन बंद हो जाता है तो हाइफू क्या करती है? हाइफू एक्चुअली इसको प्रमोट करती है कि वो शरीर कोलाजन बनाना शुरू करे कि वो स्टिमुलेट करती है बेसमेंट
(34:12) मेंब्रेन को जिससे कोलाजन बने। बट कितनी एनर्जी है हाइफो मशीन में उस पे ही तो पूरा खेल है। अब जब 40 वाट की मशीन यूज़ होगी जैसे कि अलथेरेपी है कंपेयर टू अ फोर फोर्ट मशीन और वो एक्चुअली विज़िबिलिटी आएगी। अलथेरेपी में ये भी है आप ज्यादा मशीन यूज़ करोगे तो आप नर्व्स वगैरह को भी डैमेज कर सकते हो। बट अलथरेपी में विज़िबिलिटी है कि आप देख सकते हो कौन से लेयर पे मैं मार रहा हूं। तो वो जब विजिबिलिटी आएगी गाड़ी की डैशबोर्ड पे ही तो पूरी कहानी है। तो टेक्नोलॉजी मैटर्स अ लॉट और अल थेरेपी अगर यूज करना है मैं अपने फेस पे हाईफू शायद इसलिए यूज़ ना करूं
(34:47) क्योंकि उस पे वर्स्ट केस सिचुएशन फर्क नहीं आएगा। बेस्ट केस सिचुएशन फर्क नहीं आएगा। और वर्स्ट केस सिचुएशन हो सकता है कि कुछ और नर्व्स वगैरह में भी प्रॉब्लम आ जाए। सो अलथेरेपी यूज़ करना इज़ मच बेटर देन हाईफू यूज़ करना बिकॉज़ टेक्नोलॉजी इस फार सुपीरियर। तो क्या इसमें जल्दी क्योंकि मोस्टली लोग डबल चिन एंड आर्म्स के लिए या स्टमक के लिए भी बहुत ज्यादा कर रहे हैं। वेट लॉस के लिए कर रहे हैं। सेफ है ये? हाईफू इतना बॉडी के लिए नहीं यूज़ होता है। हाईफू यूज़ होता है मेनली फेस के लिफ्टिंग के लिए। जो आप डबल चिन के लिए बात कर रही हैं वो
(35:17) डिफरेंट टेक्नोलॉजी है। कूल स्कल्पिंग कूल स्कल्पिंग इज क्रायोलाइपोलिसिस। क्रायोलाइपोलिसिस का मतलब है कि फैट के सेल्स को ठंडा करके उसको मार देना। क्रायोलाइपोलिसिस और हाई इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड आर वेरी डिफरेंट टेक्नोलॉजीस। हाईफू सिर्फ फेस के लिए। हाईफू फेस के लिए कोलाजन रेज करने के लिए और उसको ये करने के लिए हाईफू 4 मिलमीटर के नीचे जाता ही नहीं है। साउंड एनर्जी 4 मिलमीटर के नीचे क्या डबल चिन क्या डबल चिन जाती है हाईफू से? टाइटन हो जाएगी। स्किन टाइटन हो जाएगी। बट डबल चिन अगर फैट की वजह से हाईफू उस पे काम नहीं करेगा। तो इसलिए कॉम्बिनेशन
(35:50) ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। मतलब उसमें फिर डबल चिन को निकालने के लिए अगर फैट बहुत ज्यादा हो तो डीऑक्सीकोलिक एसिड यूज की जाती है जो कि लाइपोलिसिस बोलते हैं। काइबला नाम की एक दवाई है। काइबेला इंजेक्ट की जाती है ताकि आप डबल चिन के फैट को निकालो। बट डबल चिन कई कारणों से हो सकता है। राइट? इट्स नॉट दैट सिंपल। डबल चिन हो सकता है। लूज स्किन की वजह से। अगर लूज स्किन की वजह से है तो जो लाइन शेपिंग के लिए हाइफ यूज़ होगी। लेकिन अगर वो फैट की वजह से हो तो उसको काइबला यूज़ करना पड़ेगा या कूल स्कल्पिंग यूज़ करनी पड़ेगी। एंड दोनों एकदम अलग-अलग टेक्नोलॉजी
(36:20) है। वन इज अ यॉट। वन इज अ कार। यॉट गाड़ी पे रोड पे नहीं चलते हैं और कार्स नदी पे नहीं चलते हैं। दैट्स द डिफरेंस। आइस का जैसे आप बात कर रहे थे तो थर्मास जो होता है ये कितना सेफ है? और क्या ये जैसे आइस के ऊपर जैसे ये हैवी हो जाता है या जैसे आप कह रहे हैं स्किन लूज हो जाती है। उसमें कितनी हेल्प करता है? थर्मास इज अ यूज़लेस टेक्नोलॉजी। मैं उस टेक्नोलॉजी में बिल्कुल भी विश्वास नहीं करता हूं। 2006 में जब मेरी प्लास्टिक सर्जरी की फेलोशिप चल रही थी यूएस में तब थर्माच बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट था यूएस में। लेकिन मैं सच बताऊं तो मेरे यूएस
(36:53) वाले फेलोशिप में भी थर्माच की टेक्नोलॉजी की मुझे बिफोर्स एंड आफ्टर्स जब पेशेंट का बिफोर और पेशेंट का आफ्टर देखूं मुझे समझ में नहीं आता था कौन सा बिफोर है कौन सा आफ्टर। सो बहुत सारी टेक्नोलॉजी चेंज हुई है। आज के जमाने में मेरे हिसाब से थर्माज मेरी नंबर वन चॉइस नहीं है। आई वुड हैव प्रेफर्ड एन अल थेरेपी। आई वुड हैव प्रेफर्ड थिंग्स लाइक इंजेक्टेबल्स लाइक काबेला। आई वुड प्रेफर थ्रेड्स जो कि कॉक थ्रेड्स होते हैं फेस को लिफ्ट करने के लिए। आई वुड प्रेफर हाई जी प्राइम फिलर्स। आई वुड प्रेफर पॉसिबबली बायोमॉड्यूलेटर्स जैसे कि प्रोफाइलो इंजेक्शंस हो गए या फिर
(37:26) अभी जैसे आ रहा है स्कल्प्रा या रेडियस इस तरह के इंजेक्शंस आ जाए। बट आई वुड प्रेफर ऑल ऑफ दैट ताकि क्योंकि मेरा ऑब्जेक्टिव मेरा उद्देश्य है कोलाजन फॉर्म करना और थर्मा जितनी कोलाजन फॉर्म करता है दैट फॉर मी इज नॉट बिग इनफ और जिस जो उसकी प्राइसिंग है क्योंकि एक तरह से अगर हम देखें वी आर आल्सो फाइनेंसियल कंसलटेंट्स हमारे पेशेंट्स के लिए। तो अगर मैं 1 लाख की एक ट्रीटमेंट दूं जिसमें कुछ भी फर्क नहीं पड़ने वाला है। तो उसका क्या ही मतलब होने वाला है। मुझे प्लानिंग करनी पड़ेगी ना कि मैं इस अगर एक ही लाख है मेरे पेशेंट के पास तो मुझे क्या-क्या उसको
(37:56) ट्रीटमेंट देना चाहिए जिससे उसको एक नजर में आए कि मेरे फेस एक्चुअली में बहुत बेहतर हुई है। मेरी पहचान बेहतर हुई है। मैं तरुण लग रही हूं। मैं ताजगी आई है मेरे चेहरे में। वो फर्क ही अगर नहीं आएगा तो फिर करके क्या मतलब? आजकल जैसे फेस के लिए बहुत सारे पीडीआरएन, एक्सोजोम्स और यह बहुत सारे ट्रीटमेंट चल रहे हैं। माइक्रो नीडलिंग कितने सेफ हैं और कौन सा किस ऐज में किसको लेना चाहिए? माइक्रो नीडलिंग जो है बहुत ज्यादा सेफ है। माइक्रो नीडलिंग का क्या मतलब है? माइक्रो नीडलिंग का मतलब है कि छोटे-छोटे इंसेशनंस या छोटे-छोटे डॉट्स या पंक्चर्स
(38:30) करो। कंट्रोलोल्ड इंजरी करो। जिससे इनफ्लेमेशन आए, जिससे कोलाजन बने और जिससे स्किन बेटर लगे। बट माइक्रो नीडलिंग तो आप डर्मा रोलर से भी कर सकते हो। उसमें क्लनिक में जाने की क्या जरूरत है? डर्मा रोलर Amazon पे मिलता है। 1 मिलमीटर का डर्मा रोलर मिल जाएगा। रोज अपने फेस को घिसो उससे। उससे भी हो सकता है। राइट? बट बात ये है कि आपको कंट्रोलोल्ड इंजरी अगर करनी है। कंट्रोलोल्ड इंजरी के बड़े सारे बेहतरीन तरीके हैं। आपको माइक्रो नीडलिंग वो देखो माइक्रो नीडलिंग में प्रॉब्लम क्या है? आपके प्रेशर पे भी डिपेंड करेगा। कितनी पेनिट्रेशन हो रही है उस पे भी
(39:03) डिपेंड करेगा। वेरिएबिलिटी बहुत ज्यादा है। जबकि आप उसी चीज को लेजर से अगर करोगे तो लेजर एक्चुअली डेप्थ तय करेगा कौन से डेप्थ तक लेजर जा सके। जैसे कि आप फ्रैक्शनल CO2 अगर करवाओगे तो फ्रैक्शनल CO2 ये तय करेगा कि कौन से डेप्थ तक आप जाओगे और कोलजन की आप प्रोडक्शन इनक्रीस कर सकते हो। सो इसीलिए वो डिफरेंट टाइप्स की टेक्नोलॉजीस हम यूज़ करते हैं डिफरेंट चीजों में। बहुत सारी जो प्रोडक्ट्स आ रही हैं जैसे कि एक्सोजोम्स जैसे कि पीडीआरएन इंडिया में दे आर नॉट इवन अप्रूव्ड। बहुत सारी चीजें इसलिए यूज हो रही है क्योंकि वो ग्रे मार्केट के थ्रू आ रही हैं। मैं
(39:37) ना अपने चेहरे में कोई ग्रे मार्केट वाला प्रोडक्ट यूज़ करूंगा ना मैं अपने पेशेंट से यूज़ करवाऊंगा। क्योंकि अगर बाय चांस कोई साइड इफेक्ट्स हो गए। जैसे कि शेफाली ज़रीवाला में हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? जब सरकार आके मुझे पूछे कि तुमने भाई यह प्रोडक्ट यूज़ किया उसकी वजह से किसी की डेथ हो गई है। किसने तुम्हें अप्रूवल दिया यह इंपोर्ट करने के लिए? सीडीएस को का लाइसेंस कहां है इस पे? तो मैं क्या कहूंगा? तो इसीलिए मैं उस सब चीजों में नहीं पड़ना चाहता हूं। और मैं और एक चीज समझता हूं कि इसीलिए क्लीनिकल रिसर्च का बहुत योगदान है। हमारी जो
(40:09) संस्था है द एस्थेरिक क्लीनिक्स उसमें क्लीनिकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है। रिसर्च का यह योगदान है कि आप डेटा डेवलप करें। डाटा डेवलप करेंगे तो हमको पता चलेगा कौन से चीज से क्या फर्क पड़ रहा है। दो पेशेंट पर डाटा नहीं बनता। डाटा बनता है 200 पेशेंट पे। अगर आपने 200 पे ट्रीट किया है और 200 पे उसके अच्छे रिजल्ट्स आए हैं और 200 में वो सेफ रहा है तब आप 200 फर्स्ट पेशेंट पे आप आराम से यूज़ कर सकते हो। ऐसे नहीं कि जो मिल गया आपने यूज़ कर दिया। जैसे कि फॉर इंस्टेंस सालन मतलब जो फिश है उससे उससे बनाई जा रही है एक्सोजोम्स। राइट? ट्राउड जो फिश है उससे
(40:42) एक्सोजोम्स बनाई जा रही हैं। ऐसे एग्जोजोम्स अवेलेबल हैं जो कि अंबेलिकल स्टेम सेल से बनाई जाती हैं। राइट? अब ये एग्जोजोम्स को यूएसएफडीए ने एडवाइज़री लगाई हुई है कि ये सब अगर आप यूज़ करो देन यू आर यूजिंग इट एट योर ओन रिस्क क्योंकि लोग मर भी सकते हैं। कल कैंसर भी डेवलप हो सकता है। बाल तो आपको भी चाहिए, मुझे भी चाहिए। लेकिन क्या बाल उगाने के लिए हम मरने को तैयार हैं? मैं तो नहीं हूं। नहीं ऑब्वियसली। नाइदर फॉर मसेल्फ नर फॉर माय पेशेंट्स। क्योंकि एस्थेटिक मेडिसिन में आप पेशेंट हो ही नहीं। आप कंज्यूमर हो और आप बेहतर बनना चाहते हो। अगर 1% रिस्क भी उसमें है
(41:19) जिससे आप अब जैसे हो उससे खराब बन जाओ। आप क्यों लोगे वो रिस्क? वो मैं तो नहीं लूंगा अपने फेस पे और ना ही मैं चाहता हूं कि कोई अपने बालों में या अपने सर पे ले। आजकल जैसे कोरियन ब्यूटी बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा ही डिमांड में है कि सबको ग्लास कोरियन ग्लास स्किन चाहिए। तो क्या यह सही है अपनी इंडियन ब्यूटी को देखते हुए? क्योंकि उनका खाना पीना और सब कुछ बहुत अलग है। बट डिमांड है और बहुत ज्यादा लोग इसको वो भी प्रेफर भी कर रहे हैं कि ओके कोरियन फेशियल या फिर ये ट्रीटमेंट लो इससे आपका वैसी ग्लास स्किन हो जाएगी। क्या सच में होती है? कोविड आने के पहले
(41:53) मुझे ऐसे लगता था कि 80% इंसान खुद के लिए सोच ही नहीं सकते हैं। 20% लोग अपने लिए सोचते हैं। बाकी 80% तो भेड़चाल में लगे हुए हैं। कोविड एक बार आ गया तो मैंने अपनी एनालिसिस बदल ली। मुझे लगता है 99 दर्शन और 9% लोग खुद के लिए सोच नहीं सकते हैं। वो सिर्फ भेड़चाल में लगे हुए हैं। राइट? कोरियंस बनना चाहते हैं। उनको स्किन वैसी चाहिए जैसे कि इंडियंस की स्किन हो। कोरियंस में इतने सारे प्रॉब्लम्स हैं क्योंकि हमारे जो प्रोडक्ट्स हैं, हमारे कुछ प्रोडक्ट्स जैसे कि वी आर पेटेंट होल्डर्स फॉर मल्टीपल प्रोडक्ट्स जो इंडिया में और बाकी देशों में भी आवर
(42:25) रिसर्च एंड प्रोडक्ट्स आर सोल्ड तो कोरिया में हमारी खुद की मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री है। तो कोरिया बहुत आना जाना होता है। कोरियंस लव इंडियन स्किन और यहां पे इंडियंस पागल हो रहे हैं कोरियन स्किन के लिए। सो स्टुपिडिटी है थोड़ा सा। जैसे कि फॉर इंस्टेंस हमारे पास एक पेशेंट आए जिन्होंने आके कहा मुझे कोरियन आइस चाहिए। कोरियन आइस का क्या मतलब है कि बेसिकली यह ऐसे हो जाए। मतलब यह रिवर्स तरह से चला जाए कैंथस और यह ऐसे हो जाए पूरी। मैंने मना कर दिया। मैंने कहा मैं नहीं करने वाला हूं बिकॉज़ इट डजंट मेक सेंस है ना? और ये यू विल लुक वेरी फनी। इंडियन फेस,
(42:58) इंडियन फीचर्स, अचानक कोरियन आंखें आंखें तो बाकी चेहरे के साथ बैठनी चाहिए ना। ऐसे नहीं कि आप सर्कस में मतलब आप कुछ भी कर रहे हो। राइट? और एक्सपेरिमेंट कर रहे हो। खुद के चेहरे पे तो मत करो। और खुद के चेहरे पर अगर कर रहे हो तो उसके लिए आप उसका हामियाना भरने के लिए आप तैयार रहो। उसने सुनी नहीं मेरी बात। वो कोरिया गया। उसने सर्जरी करवाई। तीन महीने बाद रोते हुए आया। कहा कि सर अभी मैं बहुत ही ऑड लग रहा हूं। यह पूरा ऊपर चला गया है। मेरी पूरी कैंथस ऐसी हो गई है। मैं देखने में बहुत ही अजीब लग रहा हूं। दैट इज ट्रू। अजीब लग रहा था वो। क्योंकि उसके स्किन,
(43:30) उसके कलर, उसकी बाकी फीचर्स के साथ वो मेल नहीं खा रही थी। ऑथेंटिसिटी भी तो होनी चाहिए ना। आपकी आंखें कैसे लगती हैं? वह आपकी पहचान है। आपकी आइडेंटिटी है। आप अपनी आइडेंटिटी थोड़ी बदल पाओगे। आप अपनी जेनेटिक्स थोड़ी बदल पाओगे। सो बेसिकली अब वो वापस आया आके कहता है मैं जैसे था वैसे बना दो। फिल्म चल रही है कि मैं उसको फास्ट फॉरवर्ड करूं और रिवाइंड करूं बार-बार। यह नहीं हो सकता इस तरह से। वंस यू मेड द मिस्टेक मेरे प्रोफेसर एक कहा करते थे कि दो बार नापो, एक बार काटो। ऐसे नहीं कि एक बार काट के फिर उसके बाद दूसरी बार काटने के लिए तैयार हो जाओ। तो दो बार
(44:05) नापो, दो बार सोचो, चार बार सोचो कूदने के पहले कूद गए अब पैर टूट गया। अब आप उठकर कह रहे हो कि मेरे पैर को वैसे ही बना दो जैसे पहले था। सो मैं ये सब फैट्स के एकदम खिलाफ हूं। मुझे लगता है ये फैट्स हैं और ये स्टूपिड है। जो लोग ये सब कर रहे हैं उनको बेसिक्स की अंडरस्टैंडिंग नहीं है और मैं प्रेफर करता हूं कि इंटेलिजेंट पेशेंट्स के साथ डील करूं ना कि इस तरह के ट्रेंड्स के बीच में ट्रेंडबाजी में पड़ो। फीमेल्स में सबसे ज्यादा पिगमेंटेशन, लाज्मा ये प्रॉब्लम्स आती है और आफ्टर प्रेगनेंसी ज्यादा आती है। प्रेगनेंसी में स्टार्ट हो जाते हैं उनके पिगमेंटेशन
(44:35) वगैरह। क्यों आती हैं और कैसे इसको ध्यान रखें कि ये ना आए? सो बेसिकली हमारे जैसे इंडियन स्किन में जहां पर हमारी मेलानिन पिगमेंट होती है उसमें पिगमेंटेशन के ज्यादा चेंजेस आते हैं। भगवान कुछ देता है तो कुछ आपसे लेता भी है। अगर जो गोरो रेसेस में उन्होंने पिगमेंट नहीं दी हुई है तो वो एज ज्यादा जल्दी कर जाते हैं और हम जैसों के इसमें पिगमेंटेशन की प्रॉब्लम आती है। हॉर्मोन रिलेटेड होते हैं ये चेंजेस और मेलाज्मा एक डीप डर्मल पिगमेंटेशन है। मतलब डीप पिगमेंटेशन है। उसको प्रॉपर्ली ट्रीट करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। बहुत सारे टाइप के लेज़र्स आते
(45:09) हैं, बहुत सारे टाइप के पील्स आते हैं, स्किनसटिकल्स आते हैं जिससे यह ट्रीट किया जा सकता है। बट कंट्रोल होता है। पूरी तरह क्योर नहीं हो सकता। इट्स अ वेरी डिफिकल्ट प्रॉब्लम टू ट्रीट। ओके। रेटिनॉल क्या है? रेटिनॉल एक तरह की स्किन क्रीम है। वो स्किन के बैरियर फंक्शन को चेंज करती है। वो स्किन के टर्नओवर को चेंज करती है। बहुत सारे लोग रेटिनॉल को यूज़ करते हैं इन ऑर्डर फॉर इट्स एंटी एजिंग इफेक्ट एज वेल। बट रेटिनॉल से स्किन सेंसिटिव भी होती है। तो इसलिए केयर लेना जरूरी है। बेसिकली लोग क्या करते हैं? लोग अपनी स्किन रेजीमेंट
(45:37) में यह ध्यान नहीं रखते हैं कि वो किसके बाद क्या चीज लगानी चाहिए। चार पांच चीज आप सर पे आप अगर लगा दोगे स्किन में ज्यादा रिएक्शन हो जाएगा। ज्यादा प्रॉब्लम्स हो जाएंगे। रात दिन वो बेहतर दिखने लगे। ये सब मेडिकल ड्रग्स हैं और मेडिकल ड्रग्स को डॉक्टर को पूछ के इस्तेमाल करना चाहिए। आज तकलीफ क्या हो गई है कि द इंटेलिजेंट पीपल जो इंडिया में इंटेलिजेंट है वो शांत बैठे हुए हैं। वो कुछ बोल नहीं रहे हैं। और बाकी सब स्किन इन्फ्लुएंसरर बन गए हैं। राइट? 12वीं पास के लोग स्किन इन्फ्लुएंसरर बन रहे हैं। मैं मेरे पास फॉर इंस्टेंस एक लेडी आई
(46:08) ट्रीटमेंट करवाने के लिए तो उन्होंने उठ के कहा कि मैं कॉस्मेटोलॉजिस्ट हूं। तो मैंने कहा ओके तो आप तो हमारी स्पेशलिटी से हैं क्या मतलब कौन से ब्रांच से हैं? आपने डर्मैट किया है क्या किया है? तो कहती है नहीं मैंने डॉक्टरी नहीं की है। तो मैंने कहा कॉस्मेटोलॉजिस्ट इसका क्या मतलब है फिर? तो कहती है कि मैं एक्चुअली में मैं पील्स वगैरह सब करती हूं। मैंने कहा ठीक है आप करती हैं लेकिन आपने एक्चुअली किया क्या है? तो कहती एथ पास हूं। मैंने तीन दिन का कोर्स किया हुआ है। तो मैंने देखा फिर मैंने कहा कि आप स्किन ट्रीटमेंट के लिए और फिलर्स और बोट्स आपने
(46:41) कहा आप सब करती हैं। तो मेरे पास क्यों आई हुई हैं? आप खुद ही कर लेती। तो कहती है नहीं खुद तो मैं नहीं करूंगी ना। अपने आप पे थोड़ी करूंगी। मतलब आप एट्थ पास हो। आपने तीन दिन का कॉस्मेटोलॉजी कोर्स किया हुआ है। आपने एक क्लीनिक खोल ली है। कुरला में बाकायदा आपकी क्लीनिक है। आप वहां पे दूसरों की ट्रीटमेंट कर सकते हो। लेकिन खुद खुद की ट्रीटमेंट नहीं कर सकते हो। तो यह सब चीजों पर पाबंदी होनी चाहिए ना। यहां पर देखो आप तो कोई भी बैठ के कुछ भी सलाह दे रहा है स्किन के ऊपर। अब मलाइका अरोरा खान मे बी रियली स्मार्ट। बट अगर स्किन समझ सकती हैं वो तो उनको भी एमडी
(47:15) डर्मेटोलॉजी कर लेनी चाहिए। वो क्यों मतलब डॉक्टर नहीं है। सो बेसिकली मेडिकल करियर की बात यह है। देखिए कैसा है अपेंडिक्स निकालना मैं आपको 5 दिन में सिखा दूंगा अगर आप नर्स हो। वो प्रॉब्लम नहीं है। अगर कोई कॉम्प्लिकेशन हो जाए तब आप कैसे संभालेंगे? डील कैसे करेंगे? तो आप डील कैसे करेंगे? वो कॉम्प्लिकेशन संभालने के लिए ही एक सर्जन 14 वर्ष ट्रेनिंग लेते हैं। और यही रोल है अनुभव का कि 14 साल की प्रैक्टिस होगी। इसने सब तरह के केसेस देखे होंगे। तो इसलिए मेरे चेहरे को वो अच्छा कर देगा। ऐसे अगर होता कि हम एक सिर्फ कार्य की तरह
(47:52) अपेंडिक्स निकाल दें या फिर पील कर दें तो तो बात ही क्या है? कोई भी कर देगा। तो रेटिनॉल पे जैसे हम आते हैं तो वो किसको यूज़ करना चाहिए? कहते हैं मतलब जितना जैसे आपने कहा कि इन्फ्लुएंसर्स इतने ज्यादा हो गए हैं हर रील में दिखाते हैं कि आफ्टर 30 आप यूज़ करना स्टार्ट कर दीजिए। एक कीर्ति सेन की एक रील भी बहुत वायरल हुई थी जिन्होंने जिसमें उन्होंने दिखा कि मैं ये यूज़ करती हूं और उसके बाद शायद कमेंट्स जब मैंने देखे तो हर कोई मांग रहा है कि कहां है ये कहां है? कहां है? मुझे भी ऑर्डर करना है। कितना सेफ है ये? मेरे हिसाब से तो बिल्कुल सेफ नहीं है।
(48:19) रेटिनॉल रेटिनॉल क्योंकि स्किन अगर आपकी सेंसिटिव है उस पे डिपेंड करेगा। स्किन किस तरह की स्किन है वो डिपेंड करेगा। देखिए प्रॉब्लम क्या है जानने के लिए कि आपको क्या नहीं पता है आपको कुछ पता होने की जरूरत है क्योंकि मैं कॉस्मेटिक सर्जरी में हूं। मैं तो डर्मेटोलॉजी पे बात भी नहीं करता। हमारे टीईसी में द एस्थेटिक क्लेंस में डर्मेटोलॉजिस्ट हैं जो बाकायदा स्किन एग्जामिन करके डिसाइड करेंगे कि आप में रेटिनॉल यूज़ होना चाहिए कि नहीं। जानने के लिए आप क्या नहीं जानते। कुछ तो जानना जरूरी है। इनको शायद यह भी नहीं पता कि इनको क्या पता है और क्या नहीं पता है और
(48:53) उनके एक-एक प्रतिक्रिया से लोग कैसे भेड़चाल में उनके पीछे घुस जाते हैं। इसी की वजह से साइड इफेक्ट्स होते हैं। अगर आप साइड इफेक्ट्स के बारे में बात करेंगे तो साइड इफेक्ट्स इसी वजह से हो रहे हैं क्योंकि एवरीवन इस ट्रीटिंग ये सब प्रिस्रिप्शन रिलेटेड ड्रग्स हैं। प्रिस्रिप्शन रिलेटेड ड्रग्स को आप ओटीसी की तरह आप अपने चेहरे पे मल रहे हो। तो ऑब्वियसली साइड इफेक्ट्स होने वाले हैं ना। आप बैठ के ग्लूटाथायोन लगा रहे हो अपने वैनिटी वैन में या ग्लूटाथायोन लगा रहे हो अपने घर में। आप हेयर रिमूवल लेजर के लिए किसी को बुला रहे हो अपने घर पे ये
(49:22) करने के लिए। कोई हिसाब ही नहीं है। इतनी अनरेगुलेटेड सेक्टर है। और अगर आप सिस्टम्स की संरचना नहीं करोगे तो फिर यही सब प्रॉब्लम्स होने वाले हैं। वही सब हमें दिखाई दे रहे हैं। जो सिक्स स्टेप मेथड है कि स्किन केयर जो जैसे कि नाइट का ये है कि आप पहले फेस वॉश करेंगे देन मॉइस्चराइजर एंड पता नहीं क्या-क्या। सिक्स सिक्स स्टेप्स आजकल बहुत ज्यादा रील्स वायरल हो रही हैं। ये कितना सही है। बहुत ज्यादा बुलशेट है ये सब। हर किसी को यह सब करने की आवश्यकता नहीं है। मैं तो अपने स्किन पर यह सब कुछ भी ना करूं। और अगर आप यह सब कर रही हैं और वह भी बिना
(49:57) मेडिकल एडवाइस के आप कर रही हैं तो भगवान बचाए आपको। आपके हिसाब से क्या करना चाहिए? क्या सही है? और कितनी लेयर्स होनी चाहिए? मैं अगर आप मेरे स्किन केयर के बारे में पूछो। मैं एक फेस वॉश यूज़ कर लूं तो बहुत ज्यादा है। बहुत ज्यादा है। उससे ज्यादा कुछ करने की आवश्यकता भी नहीं है। अगर मेरे स्किन में प्रॉब्लम्स नहीं है, मेरी एक्ने नहीं है, मेरी स्किन इवन टोनड है, तो ज्यादा कुछ करने की आवश्यकता क्यों है? और अगर मुझे कुछ ट्रीटमेंट लेनी होगी, तो मैं प्रॉपर मेडिकल एडवाइस के साथ जाऊंगा। मैं एक डर्मेटोलॉजिस्ट के बेस जाऊंगा। मैं
(50:31) कृति सन की बात नहीं सुनूंगा। हाइड्रोनिक एसिड कितना सेफ है और कितना कितना यूज़ करना चाहिए? बिकॉज़ बहुत ज्यादा ट्रेंड में है। हर चीज में हाइड्रोनिक एसिड। इवन लिपस्टिक भी अगर आप ले रहे हो तो इसमें भी हाइड्रोनिक एसिड। पहली चीज तो जो लिपस्टिक में आप हाइड्रोनिक एसिड ले रहे हो वो तो एंटर ही नहीं होती है। तो वो इमीडिएटली अभी वाटर वो एक हाइड्रोफोबिक मॉलिक्यूल है तो वो पानी खींचता है क्योंकि वो पानी खींचता है। थोड़े टाइम के लिए आपकी पाउट लगी रहती है। जैसे ही वो उतरेगा जैसे ही आप वॉश करोगे वो चला जाएगा। हैलोरोनिक एसिड काम
(51:00) करता तब है हाइलोरोनिक एसिड बेसिक है आपके स्किन का वो बायोमॉलिक्यूल है। जैसे कि कोलजन में हलोरोनिक एसिड होती है। तो हलोरोनिक एसिड आपके घुटनों में भी होती है। जैसे कि अगर घुटने अगर आप देखो तो उसके बीच में जो साइनोवियल फ्लूइड होती है उसमें आप हाइलोनिक एसिड होती है। तो हैलोरोनिक एसिड नॉर्मली स्किन में प्रेजेंट है और हलोरोनिक एसिड की फिलर्स जो होती है जो आप इंजेक्ट करते हो वो काम करते हैं। ज्यादातर चीजें जो आप देखो स्किन के राउट से वो एंटर ही नहीं होते बॉडी में। जब स्किन के राउट्स से वो अब्सॉर्ब ही नहीं होंगे तो वो काम कैसे
(51:32) करेंगे? तो बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो फैट हैं जो एक्चुअली में स्किन को कुछ भी इंपैक्ट नहीं करती हैं। अगर हैरोनिक एसिड को का इंपैक्ट एक्चुअली देखना है तो फिर फिलर्स इंजेक्ट करवाइए। अगर आप फिलर्स इंजेक्ट करवाएंगे ऑब्वियसली इट मेक्स अ डिफरेंस। प्रॉपर मात्रा, प्रॉपर जगह पर, प्रॉपर टाइप की हैरोनिक एसिड यूज करने से काफी तरुण लोग लग सकते हैं। ओके। सनस्क्रीन कितनी सेफ है? यूज़ करनी चाहिए सबको बिकॉज़ बच्चों की भी आती है और बाहर मतलब छोटे से बच्चे से स्टार्ट हो जाता है कि सनस्क्रीन लगाओ। एंड मैंने कहीं पढ़ा था कि सनस्क्रीन से कैंसर भी
(52:03) होने लग जाता है। कितनी सेफ हैं ये? आप एकदम गलत इंसान को पूछ रही हैं। सच में बताऊं तो मैं आपको एक कहानी बताता हूं। एक चुटकुला मैं आपको सुनाता हूं तो आपको समझ में आ जाएगा कि आप क्यों गलत इंसान को पूछ रही हैं। तो एक बार क्या हुआ? हमारी फेलोशिप प्रोग्राम्स चलती हैं। तो एक डर्मेटोलॉजिस्ट मेरे पास ट्रेनिंग ले रही थी एस्थेटिक मेडिसिन में। राइट? सो वो रूम में बैठी हुई थी। मेरी कलीग हैं तो वो रूम में बैठी हुई थी। तो उस रूम में मैं पास के रूम में पेशेंट देख रहा था। इनके रूम में बाथरूम थी। तो मैं बाथरूम में अंदर घुस गया और फिर मैं बाहर आया। बाहर आया तो
(52:33) ऑब्वियसली चेहरा भीगा हुआ था। तो मैंने रुमाल वगैरह से चेहरा पोछा पोछा। तो वो मुझे पूछती है सर। आप चेहरा धो के आ रहे हो। तो मैंने कहा हां क्यों किससे धोया आपने? अब लेडीज यह सब इवैलुएट करती हैं। तो मैंने बोला साबुन से वहां तो फेस वॉश नहीं है। डोंट टेल मी आप डेटोल सोप से अपना चेहरा धो के आ रहे हो। [हंसी] तो जनरली हम लोग ऐसे ही हैं। लाइफ बॉय और डेटोल सोप से ही चेहरा धोने वाले लोग हैं। बट उससे अगर मतलब कोई भी नहीं धोता होगा। ये तो बहुत शॉकिंग है। और वो भी अभी आपसे सुन रहे हैं कि डेटॉल से फेस वॉश मतलब ये कितना सेफ कितना है? करना चाहिए कि नहीं
(53:09) करना चाहिए? देखिए कैसा है। सेफ एक चीज है। डॉक्टर की नॉलेज एक चीज़ तरफ है और खुद जो हम लोग इस्तेमाल करते हैं वो अलग चीज है। दीज़ आर ऑल डिफरेंट थिंग्स। सो कुछ लोगों को फर्क नहीं पड़ता है। मैं उनमें से हूं जिन्हें मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। सो अब प्रवृत्ति ऐसे है तो कोई क्या कर सके? सनस्क्रीन वुड बी नाइस। क्योंकि अगर आप सनस्क्रीन यूज़ करोगे तो आप सन को से प्रोटेक्ट करोगे। आप जब सनस्क्रीन यूज़ करोगे तो आप टैनिंग से और अनइवन स्किन टोन से बहुत सारे बचे रहोगे। बट आज की कहानी ऐसी है कि ज्यादातर लोगों को तो एक्चुअली सन की एक्सपोज़र ही नहीं
(53:43) है। यस इंडोर्स में आप जब रहते हो तब भी अल्ट्रावायलेट ए और बी रेज अंदर आती हैं। तो आपको बेसिकली अपनी स्किन को प्रोटेक्ट करने की जरूरत है। बट क्या मैं करता हूं? नहीं मैं नहीं करता हूं। मैं क्रिकेट भी खेला करता था तब भी मैं सनस्क्रीन नहीं इस्तेमाल करता था। और आई एम जस्ट नॉट द राइट काइंड ऑफ़ पर्सन। मैं भी नहीं हूं। मैं सनस्क्रीन मुझसे भी पूछते हैं कि आप मैं सबसे लेजी हूं। मुझे लगता है कि अगर मैंने सनस्क्रीन लगाया तो मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं स्वेट नहीं कर पा रही हूं और एक एक लेयर आ जाती है और मुझे अगर टैनिंग होती है तो मुझे लगता है
(54:12) कि ओके एलोवेरा मैं करूंगी एंड वो ठीक हो जाएगी बट सनस्क्रीन मैं नहीं यूज करती हूं। मैं आज भी बहुत एम्बरेस्ड हूं जब भी मेरी ये कलीग मुझे मिलती है तो वो जब भी मैं लोगों को बता रहा होता हूं कि उनको सनस्क्रीन यूज करना चाहिए। उनके स्किन थेरेपी में क्या करना चाहिए। तो वो दूर बैठ के हंसती रहती है मेरी तरफ देख के। और मुझे मुझे ऐसे लगता है कि मैं बहुत ही अनऑेंटिक हो रहा हूं जब लोगों को कह रहा हूं यह सब करने के लिए। आपकी भी लाइफ़ में प्रॉब्लम्स चल रही हैं। आप भी कहीं ना कहीं भूत प्रेत बाधा से तकलीफ़ में हैं। पितृ दोष हैं। या आपको समझ नहीं आ रहे हैं
(54:41) कि लाइफ़ के आप उस फेज में है जहां आपको क्लेरिटी नहीं मिल रही है। बिज़नेस करें या जॉब करें? लव मैरिज या अरेंज मैरिज। आगे फ्यूचर क्या है? मोक्ष की राह पर चल भी रहे हैं कि नहीं? आपको अपने इष्ट देव के बारे में पता भी है। लाइफ का पर्पस क्या है? करने क्या आए हैं? इस धरती पर कभी भी कोई भी ऐसे ही जन्म नहीं लेता है। हर एक आत्मा का एक लक्ष्य होता है। कुछ करने वो आई है। इन सबकी क्लेरिटी कहां मिलेगी? इन सबकी क्लेरिटी आपको आकाशिक रीडिंग में मिल जाएगी। जहां आपके ही मास्टर्स, जहां आपके ही पूर्वज, जहां आपका ही इष्ट देव यह बताएगा कि आपको क्या करना चाहिए। इस पूरी
(55:16) लाइफ में आपका क्या पर्पस है और पास्ट लाइफ में आप क्या करके आए थे। कोई कर्म पेंडिंग तो नहीं था जो आपको पूरा करना चाहिए। क्या आपके पूर्वज जो इस धरती पर नहीं है कुछ कहना तो नहीं चाहते हैं? इन सारे सवालों के जवाब सिर्फ और सिर्फ आपको आकाशिक रीडिंग के सेशन में मिल जाएंगे। अगर आप भी अपनी रीडिंग करवाना चाहते हैं, आप भी क्लेरिटी चाहते हैं लाइफ को लेकर तो नीचे दिए गए नंबर पर आप कांटेक्ट कर सकते हैं। बुक कर सकते हैं अपना स्लॉट तो अपने बारे में जानिए। क्लैरिटी लीजिए लाइफ में कि करना क्या है? सलूशंस पाइए अपने इष्ट देव से, अपने पूर्वजों से। जय माता दी। अ
(55:49) एज अ कॉस्मेटिक सर्जन आपके पास 20ज में सबसे ज्यादा जो जिनकी एज 20ज में है सबसे ज्यादा क्या डिमांड करते हैं और उनको क्या करवाना चाहिए आप क्या रेकमेंड करते हैं? मैं एक्चुअली कुछ भी नहीं रेकमेंड करता। मेरे हिसाब से किसी को भी कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। अगर आप मेरे पास आओगे तो मैं आपको यह नहीं कहूंगा कि आपको यह चेंज करना चाहिए, वो चेंज करना चाहिए। अगर आप कहोगे कि मेरी नाक को मुझे इस तरह से चेंज करनी है तो मैं आपको सजेशंस दे सकता हूं व्हिच कुड रेंज फ्रॉम अ फिलर इंजेक्शन और इट कुड बी बेसिकली समथिंग लाइक अ राइनोप्लास्टी सर्जरी डिपेंड करता है मेरे
(56:22) हिसाब से आप कैसे दिखते हो दिस इज रिलेटेड टू आइडेंटिटी और आपकी पहचान बनती है उस चीज से लोगों को हमें जरूरत नहीं है चेंज करने की हमें उन्हें यह बताना है कि वो ऑथेंटिक किस तरह से लग सकते हैं। अगर वह एज हो रहे हैं, अगर आप घर भी आपने ली हुई है, तो 10 साल के बाद वह घर की भी मरम्मत करवाने की जरूरत होगी। तो, वह केयर करना अलग बात है और एकदम चेहरे को बदल देना अलग बात है। मैं उनमें से नहीं हूं जो बिलीव करता है कि किसी के भी चेहरे को बदलने की जरूरत है। मैं यह जरूर मानता हूं कि जैसे-जैसे ऐज आते जाता है, तो चेहरे को निखारने की जरूरत पड़ सकती है। यह हो सकता
(56:57) है कि चेहरे में अंडर आई, डार्क सर्कल्स आ जाए। उससे आपकी कॉन्फिडेंस इंपैक्ट हो रही है। वो सब चीजों को चेंज किया जा सकता है। बट उसके लिए ताज़गी लाने के लिए पूरी तरह चेंज करने की आवश्यकता नहीं होती है। जैसे मैंने बताया आंख अगर आपकी चेंज हो जाएगी तो आप कैसे लगते हो और आपकी आइडेंटिटी आपकी पहचान पूरी तरह बदल जाएगी और वो चेंज के लिए बहुत सारे लोग रेडी नहीं होते हैं। तो इसलिए वो सब ध्यान में रखते हुए ही सर्जरी करनी चाहिए। आजकल डिंपल्स की बहुत ज्यादा हम देख रहे हैं। बहुत ज्यादा रील्स वायरल हो रही है। डिंपल्स की बहुत डिमांड
(57:28) आ रहा है। कितनी कितना सही है? यह करवाने चाहिए। डिंपल्स प्रिपेयर कर सकते हैं। तो डिंपल यहां पे इसलिए होती है क्योंकि यहां पे चीक मसल में वीकनेस होती है। तो आप जब स्माइल करते हो तो वो स्किन अंदर घुस जाती है वो वीकनेस के थ्रू। एक्चुअली आप क्या कर रहे हो डिंपल प्लास्टिक सर्जरी में? वो वीकनेस को क्रिएट कर रहे हो। और प्रॉब्लम कैसी होती है कि अगर आपने वो क्रिएट करने की कोशिश की और वो हमेशा रह गई। नॉर्मली डिंपल क्रिएट होनी चाहिए जब आप स्माइल करो। यस। ऐसे कई सारे सुपरस्टार हैं जिन्होंने डिंपल सर्जरी करवाई और वह रह गया। तो अब
(57:58) जब नॉर्मली भी फेशियल एक्सप्रेशन नहीं है तो डिंपल दिखाई दे रहा है। वो दिखने में बहुत ही खराब लगता है। सो हर किसी के लिए नहीं है वो डिंपल। हर किसी के चेहरे पे वो मेल भी नहीं खाता। और मेरे हिसाब से पूरी तरह स्ट्रक्चर फेस की देख के फिर डिसाइड करना जरूरी है। ओके। आपके पास अगर आपसे मैं पूछूं सही फेस क्या है? बिकॉज़ ऑब्वियसली अगर कोई आ रहा है तो आप खुद रेकमेंड नहीं करते जैसे आपने बताया। जब तक मैं नहीं कहूंगी कि मुझे यह कराना है आप नहीं कहोगे। आप कहोगे आप ठीक है जैसे अच्छे हैं। लेकिन जब आपने स्टडी किया होगा एक परफेक्ट फेस क्या होता है?
(58:32) कुछ मैथमेटिकल फॉर्मूले होते हैं। जैसे कि एक मार्कट्स मास्क होता है या फिर फाई होती है। फाई इज़ बेसिकली एक ग्रीक मैथमेटिकल सिंबल। तो वो क्या होता है? द लेंथ ऑफ़ द फेस और विड्थ ऑफ़ द फेस को वो कंपेयर करती हैं। जैसे कि लेंथ ऑफ़ द फेस शुड बी अबाउट 61% लगर देन द विड्थ ऑफ़ द फेस। मतलब लंबाई ज्यादा हो, चौड़ाई कम हो। आइडियल फसेस जो हो वो हार्ड शेप्ड या ओवल शेप्ड होनी चाहिए। स्क्वायरिश नहीं होनी चाहिए। जैसे कि स्क्वायर अगर होंगी या राउंड अगर होंगी तो वो इतनी ज्यादा मानी नहीं जाती है कि फेशियल शेप बहुत ज्यादा एस्थेटिक है। तो इट इज़ अ कॉम्बिनेशन ऑफ़ ऑल
(59:06) ऑफ़ दीज़ थिंग। सिमिलरली अलग-अलग चीज के प्रपोर्शनंस होते हैं। जैसे कि अप्पर लिप की प्रोपोर्शन टू द लोअर लिप, आंखों की प्रोपोर्शन एंड द डिस्टेंस कैंथस की डिस्टेंस फ्रॉम ईच अदर। हाउ कितनी अप्पर थर्ड ऑफ दी फेस कितनी बड़ी होनी चाहिए? मिडिल थर्ड ऑफ दी फेस कितनी बड़ी होनी चाहिए? लोअर थर्ड ऑफ़ दी फेस कितनी बड़ी होनी चाहिए। ये सब के मैथमेटिकल फॉर्मूले हैं। बट वो मैथमेटिकल फॉर्मूले हमने समझा है। बिकॉज़ ये ऑलरेडी एग्ज़िस्ट करती थी। अगर आप देखो एववोल्यूशन जो है जिस तरह से ह्यूमन बीइंग्स ने इवॉल्व किया हुआ है उससे ह्यूमन ब्यूटी की भी अंडरस्टैंडिंग
(59:38) इवॉल्व हुई है और वो एववोल्यूशन जो है उस तरह से फेस को बनाने से वो दूसरे में ये फीलिंग इवोक करता है कि ये बहुत सुंदर फेस है। सो दैट इज़ बेसिकली व्हाट वी यूज़ मैथमेटिकल फॉर्मूले हैं जिसके थ्रू ये किया जाता है। सबसे ज्यादा जैसे आपने कहा ओवल एंड डायमंड फेस होता है। मैं वैसे पूछना चाहूंगी मेरा फेस अब क्या है? ओवरले मेरे हिसाब से अगर आपकी थोड़ी विड्थ यहां पे कम होगी तो फर्क पड़ेगा। ओके? तो फेस अगर विड्थ यहां पे कम होगी ये लोअर फेस की जो विड्थ है वो अगर श्रिंक होगी तो फेस थोड़ी सी ज्यादा ओवल लगेगी। एंड अभी क्या है? अभी भी इट इज मतलब ओवलाइज्ड है। बहुत
(1:00:16) ज्यादा ये नहीं है। बट ये हैवी है। ये पार्ट्स हैवी हैं। लोअर फेस हैवी है। लोअर फेस अगर हम देखें अगर हम प्रोपोशनंस देखें तो सबसे ब्रॉड पार्ट ऑफ द फेस शुड बी यहां पे ज़गोमेटिक एरिया में इस जगह पे। यह जगह पे काफी नैरो होनी चाहिए। तो अगर यह पार्ट को ज्यादा रेज किया जाए जो कि कुड बी डन थ्रू आइदर फेशियल थ्रेड्स, इट कुड बी डन थ्रू अल थेरेपी। इट कुड बी डन बाय यूजिंग हाई जी प्राइम फिलर किसी तरीके से जिससे फेस की स्ट्रक्चर को चेंज किया जाए तो और बेहतर फर्क पड़ेगा। सो आई थिंक आई थिंक ये फेस सुंदर फेस है। मुझे हर कोई सुंदर ही लगता है। बट इट कैन
(1:00:49) बी इंप्रूव्ड फर्दर और दैट इज द जॉब ऑफ़ अ कॉस्मेटिक सर्जन। आइज का भी ऐसे बहुत बड़ा रोल होता है। मैंने रणबीर कपूर का एक जगह सुना था कि मेरी आईज ऐसी हैं कि मुझे हमेशा थोड़ा सा उदास सैड वाला ही रोल सैडिश वाला रोल होता है। आइज का बहुत फर्क पड़ता है। तो क्या आईज चेंज हो सकती हैं? मतलब जैसे अगर वो मानिए अगर किसी का आइज ऐसे थोड़ी सी डाउनवर्ड्स हैं या बहुत ही उनका चेहरा हमेशा लगे उदास इंसान है ये और चाहे वो बेशक कितने खुश हो तो इससे इसकी चेंज हो सकती हैं वही तो बात है कॉस्मेटिक सर्जरी अगर एक्चुअली आपकी पहचान दर्शाती है तो मैं एक
(1:01:24) एक्चुअली आपको उदाहरण देना चाहूंगा 46 इयर्स ओल्ड की लेडी आई हमारे पास और वो एक्चुअली सीईओ थी एक मल्टीीनेशनल कंपनी की दुबई में वो आई इसलिए उसने आके ये नहीं कहा कि मुझे यंग दिखना है उसने कहा मैं बहुत टायर्ड लग रही हूं। उसने कहा ऐसे लगता है कि मैं एनर्जी मेरे में कम है। आप और इस एनर्जी के कम होने की वजह से मुझे मेरी नेक्स्ट रोल के लिए क्योंकि वो सीईओ थी एक मल्टीीनेशनल कंपनी की। मुझे मेरी नेक्स्ट रोल की प्रमोशन नहीं मिल रही है। सो कभी-कभी आप जैसे दिखते हैं। हो सकता है कि आप में एनर्जी भर-भर के हो। हो सकता है कि आप बहुत खुश
(1:01:59) इंडिविजुअल हो। लेकिन आपकी फेशियल फीचर्स डिटरमिन करती है सामने वाला क्या सोच रहा है। जब तक वो रियलाइज रियलाइज यह करेगा कि आप अच्छी लग रही हैं कि नहीं या फिर आप बहुत खुश है कि नहीं उसके लिए तो आपको उसके साथ बातचीत करनी पड़ेगी बट कवरिंग जो है मतलब गिफ्ट की कवरिंग उससे बाकी सब चीजें डिसाइड होती हैं। सो एज अ रिजल्ट ऑफ व्हिच ऑब्वियसली आपकी फेशियल फीचर्स परसेप्शन ड्राइव करती हैं। ओके। तो इस पॉडकास्ट को एंड करते हैं। मैं कुछ सेलिब्रिटीज के नाम लूंगी। एंड आप मुझे सिर्फ यस और नो में अगर आप बता देंगे अगर थोड़ा सा डिटेल में बता देंगे तो
(1:02:31) ऑडियंस खुश हो जाएगी कि इन्होंने क्या कराया हुआ है। लेकिन अगर आप यस और नो में भी बताएंगे तो भी ठीक है। सेलिब्रिटीज बॉलीवुड सेलिब्रिटीज वो तो यस ही आने वाला है आंसर। तो सबका सबका ही यस आने वाला है। तो इसमें पूछने लायक क्या है? ओके। सो बेसिकली क्या है? हमें ऐसे हिंदुस्तानी के हिसाब से हमें लगता है कि हर कोई नेचुरल लगना चाहिए। हम बट नेचुरल कोई भी चीज़ लाइफ लॉन्ग तो अच्छी नहीं लग सकती है। अगर आप किसी स्टार को देख रही हैं 20 साल की उम्र में तो 40 में भी वह सेम लगे ऐसे कैसी पॉसिबिलिटी है? लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिनके बारे में
(1:03:01) हमने सुना है कि इन्होंने नहीं कराया है। लाइक करीना कपूर जैसे कि जैसे कि कुछ स्टार्स हैं जो कहते हैं मैं 50 साल की हूं और मैं बहुत योग करती हूं जिसकी वजह से मैं बहुत तरुण लग रही हूं। तो मैं हमेशा यही कहता हूं कि योग तो बाबा रामदेव भी कर रहे हैं। हां वो भी तरुण लगते हैं बट आपकी तरह तो नहीं लग रहे। सो ये वो वाली बात नहीं है। एक्चुअली में हमें यह मानना पड़ेगा कि लोग ध्यान रखते हैं अपना। अलग-अलग चीजें करते हैं। कुछ लोग हाइलोनिक एसिड के फिलर लिपस्टिक यूज़ कर रहे होते हैं। कुछ लोग मेकअप यूज़ कर रहे होते हैं और कुछ लोग कॉस्मेटिक
(1:03:32) सर्जरी या कोई और प्रोसीजर्स करवा रहे होते हैं। किसी भी चीज को अगर आपको मेंटेन रखना है उसमें एनर्जी तो डालनी पड़ेगी। तो आप जब एनर्जी डालोगे तभी वो चीज मेंटेन रहेगी। वही वाली बात है। ओके। मैं फिर भी नाम लेना चाहूंगी। आप प्लीज बताइएगा। करीना कपूर। यस। करीना कपूर यस यस आपको लगता नहीं है फेस चेंज हुई है नहीं नहीं मतलब मैंने हमेशा जब भी मेट के फेस में और अभी के फेस में फर्क नहीं है वो जीरो फिगर था बहुत वेट लॉस किया हुआ था तो वेट लॉस की बात नहीं है सर फीचर्स चेंज नहीं हुए हैं ओके ओके अगर सलमान खान क्या चेहरा चेंज हो क्या वेट लूस करने से
(1:04:09) नाक का नक्शा बदल सकता है थोड़ा सा ज्यादा नहीं क्या चेहरा चेंज होने से या फिर वेट लॉस होने से आंखें बदल सकती हैं। छोटी दिख आंखें छोटी दिखेंगी। अगर आपका देखिएगा आप आप जरूर चेहरे को देखिएगा जो भी आप सेलिब्रिटीज की बात कर रही हैं। 20 साल पहले की फोटो ले लीजिएगा और अभी की फोटो ले लीजिएगा या 10 साल पहले की आपको डिफरेंस दिखेगा। जिस तरह से नाक चेंज हो रही है। जिस तरह से टिप चेंज हो रही है। जिस तरह से सब कुछ मतलब स्तन बढ़ रहे हैं। यू विल बी एबल टू फिगर आउट। ओके। आलिया भट्ट ऑब्वियसली यस दीपिका नहीं लगता आपको कोई चेंज चेहरे में। ओके
(1:04:45) दीपिका भी कीर्ति सेनन आपको नहीं लगता चेंज आप मुझ पे डाल रहे हैं आप बताइए यस और नो बॉलीवुड की सिर्फ बात नहीं है आपको खुद के चेहरे में कुछ चेंज नहीं पता चलता आज में और 5 साल पहले में रेखा योगा से यंग लग रही हैं बट मेकअप उनका मेकअप होता है हैवी मेकअप सिर्फ मेकअप से ऐसे लग सकती हैं आपकी मतलब शी मस्ट बी 70 प्लस 75 प्लस आपकी दादी ऐसी लगती है नहीं वो रेखा है क्यों ओके तो रेखा किसी की दादी नहीं हो सकती है ओके तो वो दादी की उम्र में भी कैसे योग से अच्छी लग रही है जय बच्चन नहीं मुझे नहीं लगता उन्होंने कुछ करवाया है कोई तो है ओके अमिताभ बच्चन
(1:05:26) आपको लगता है वो बाल नेचुरल हैं ओके सलमान खान आपको लगता है वो बाल नेचुरल हैं शाहरुख शाहरुख के बाल तो नेचुरल लगते हैं बट बाकी रितिक रोशन आपको लगता है कुछ नहीं करवाया उन्होंने हां लगता है। अच्छा रणवीर सिंह रणवीर सिंह आपने कौन सी वाली मूवी थी? पहली वाली मूवी जो आई थी बैंड बाजा बैंड बाजा उसमें और धुरंधर में फर्क नहीं है। ओके क्या फर्क बालों में? थोड़ा सा थोड़ा सा दिखावे पे मत जाओ। अपनी अकल लगाओ। फेस को साइड बाय साइड रखो। ओके। हम दोनों हम स्क्रीन में शेयर
(1:06:09) करेंगे। देखते हैं ऑडियंस कितना पहचान पाती है। साइड बाय साइड रखो फेस को और फिर ध्यान खुद ही समझ में आएगा क्या हो रहा है। रश्मिका मंदना मैंने उनको पर्सनली देखा नहीं है। हम क्योंकि ज्यादातर मुंबई में ही हैं तो इसलिए रश्मिका को मैं जानता नहीं हूं। तो काफी कुछ जानने को मिला। एंड आपके हिसाब से आपसे एक लास्ट एडवाइस क्या चेंज करने की जरूरत है या खुद को एक्सेप्ट करने की जरूरत है? देखो आप अगर खुद को एक्सेप्ट नहीं करते हो तो कोई भी चेंज आपको खुश नहीं कर सकता। खुशी अंदर से आती है और खुशी अच्छे नाक से नहीं आती है। अच्छा नाक आपको और बेहतर दिखा सकता है।
(1:06:48) आपकी कॉन्फिडेंस को पॉजिटिवली इंपैक्ट कर सकता है। बट आपकी वो पहचान नहीं हो सकती है। क्योंकि आप अपने नाक से विपरीत हैं। आप अपने नाक से बहुत बढ़कर हैं। सो खुद को एक्सेप्ट करना सबसे ज्यादा जरूरी है। फिर बाकी सब छोटे-मोटे चेंजेस तो हम कर ही सकते हैं। बिल्कुल। सो थैंक यू सो मच फॉर कमिंग। थैंक यू सो मच। बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके और बहुत कुछ जानने को मिला। आपके कोई क्वेश्चंस हैं या बीच में जैसे इन्होंने नाम नहीं लिए हैं और आप समझ गए हैं तो प्लीज कमेंट्स में जरूर बताइएगा। जय माता दी। [संगीत] [घंटी की आवाज़]
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