Friday, May 22, 2026

The Nice Guy vs Toxic Guy

The Nice Guy vs Toxic Guy

Author Name:Nidhi Arora

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@Nidhi-theothervoice

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=qOZ1kNEITcU



ఈ వీడియోలో చెప్పిన “Nice Guy vs Toxic Guy” గురించి ముఖ్యమైన పాయింట్లు తెలుగులో ఇలా:

### ముఖ్యమైన ఆలోచనలు

- **“Nice guy” ఎందుకు బోరింగ్‌గా అనిపిస్తాడు?**  
  చాలా సార్లు చాలా ఎక్కువగా అందుబాటులో ఉండటం (over-available), ఎలాంటి challenge లేకపోవడం వల్ల excitement తగ్గిపోతుంది.

- **“Toxic guy” అంటే ఏమిటి?**  
  - ఎమోషన్స్ క్లియర్‌గా చెప్పకపోవడం  
  - commitment ఇవ్వకుండా ambiguityలో ఉంచడం  
  - hot & cold behavior (కొన్నిసార్లు చాలా sweet, కొన్నిసార్లు దూరంగా)  

- **థ్రిల్ & ఛేజ్ ఫ్యాక్టర్**
  కొన్ని అమ్మాయిలకు “చేస్ చేయడం” లేదా “చాలెంజ్” ఉండటం వల్ల excitement పెరుగుతుంది → అందుకే toxic behavior ఆకర్షణగా అనిపిస్తుంది.

- **Evolutionary perspective (పాతకాలపు మనస్తత్వం ప్రభావం)**
  - ఫోకస్ ఉన్న, self-driven, independent వ్యక్తి → “సేఫ్ & ప్రొవైడర్” అనిపిస్తాడు  
  - చాలా needy గా ఉండే వ్యక్తి → ఆకర్షణ తగ్గుతుంది

- **Too available అవ్వడం = attraction తగ్గడం**
  ఎప్పుడూ అందుబాటులో ఉంటే → “ఇతనికి పని లేదు” అనే భావన వస్తుంది

- **Girls contradiction (వ్యతిరేక కోరికలు)**
  - loyalty కావాలి  
  - కానీ thrill కూడా కావాలి  
  - attention కావాలి  
  - కానీ over-attachment వద్దు  
  → ఇది confusion కాదు, clarity లేకపోవడం/immaturity

- **Healthy attraction అంటే balance**
  - focus on life + care for partner  
  - కొంత mystery + కొంత affection  
  - neither too needy nor too detached

- **Relationshipలో పెద్ద సమస్య: balance లేకపోవడం**
  చాలా మంది extremes లో ఉంటారు:
  - ఒకవైపు: overly needy  
  - ఇంకోవైపు: commitment avoid చేసే వారు

- **Emotional maturity లక్షణాలు**
  - clear communication  
  - ఇద్దరికీ separate life + shared life  
  - attachment కాకుండా genuine connection  
  - peace & clarity ఉండటం

- **“Spark” ఎప్పటికీ ఉండదు**
  relationship smooth గా మారితే బోర్ అనిపించవచ్చు  
  కానీ అది natural → కొత్త excitement కోసం బయట వెతకడం తప్పు

- **Relationship = excitement కోసం కాదు**
  అది:
  - companionship  
  - understanding  
  - peace కోసం

- **Couple goals అవసరం**
  కలిసి ఏదైనా సాధించడం (travel, financial goals etc.) → relationship strong అవుతుంది

- **Obsessive / possessive behavior = toxic**
  - ప్రతి విషయం control చేయడం  
  - freedom ఇవ్వకపోవడం  
  - constant checking (calls, restrictions)  
  ఇవి “love” కాదు → toxicity

- **Boundaries vs Control**
  - boundaries: healthy limits  
  - control: partner freedom తీసేయడం → unhealthy

- **Maturity లేకపోవడం వల్లే ఎక్కువ సమస్యలు**
  - ego (“నాకు అన్నీ తెలుసు”)  
  - learning mindset లేకపోవడం  
  → relationship issues పెరుగుతాయి

### చిన్న ఉదాహరణ

ఒక వ్యక్తి:
- ఎప్పుడూ కాల్ చేస్తూ, “ఎక్కడ ఉన్నావు?” అని అడిగితే → అది care కాదు, control  
మరో వ్యక్తి:
- తన పనులు చేస్తూ, respect ఇస్తూ, space ఇస్తే → అది healthy relationship

***

**మొత్తం మెసేజ్:**  
“Nice vs Toxic” అనేది black & white కాదు.  
అసలు ఆకర్షణ **balance, self-focus, emotional maturity** మీద ఆధారపడుతుంది.


Transcript:
(00:00) ओके हाय गाइस वेलकम बैक तो फिर से हमें ज्वाइन किया है हर्ष ने एंड आज का हमारा टॉपिक है कि लड़कियों को टॉक्सिक लड़के क्यों पसंद आते हैं? अब इसके पीछे बहुत सारे रीज़न हो सकते हैं। सोशल मीडिया, मूवीस या बहुत कुछ तो डिस्कस करते हैं। तो हर्ष सबसे पहले तो वेलकम एंड आपको क्यों लगता है ऐसे मतलब ऐसा क्या रीजन है कि यू नो नाइस जो लड़के होते हैं ना जो अच्छे लड़के होते हैं वो लड़कियों को बोरिंग लगते हैं और टॉक्सिक लड़के अट्रैक्टिव लगते हैं। तो सबसे पहला क्वेश्चन मेरा यही है। रीज़ सिंपल है। एक्साइटमेंट नहीं होती। नाइस है, अच्छा है लेकिन बोरिंग होती है।
(00:37) सारी चीजें में अगर कुछ इमोशंस अप एंड डाउन नहीं होंगे बंदे के तो फिर बोर हो जाती है। एंड बस यही एक रीज़न है छोटा सा। बाकी आप मुझे बताइए कि टॉक्सिसिटी की डेफिनेशन क्या है? एक्सैक्टली मतलब क्या होता है टॉक्सिक का? पता है मुझे ऐसा लगता है कि बीइंग अ गर्ल मतलब मैंने भी एक्सपीरियंस किया है एक टाइम पे। अ लड़कियों को ना शायद वो थ्रिल वाली फीलिंग बहुत पसंद आती है। अब मैं शायद गलत हो सकती हूं। लेकिन मैंने ये नोटिस किया है कि जहां लड़कियों को कोई लड़का चस कर रहा है ना तो उनको अट्रैक्टिव नहीं लगता। अब जहां लड़कियों को चस करना
(01:13) पड़ रहा है मतलब लड़का टॉक्सिक इन द सेंस कि वो अपने इमोशंस को ना एक्सप्रेस नहीं कर रहा है। और अपने इमोशंस को लेके श्योर नहीं है। लाइक वो आपको ना ऐसे मिडिल में लगता है कि देखेंगे लेट्स सी वेयर इट गोस। लड़की कमिटमेंट मांगती रहती है। लड़का देता नहीं है। लेकिन फिर भी इन चीजों की वजह से इनके होने के बाद भी लड़कियों को वो थ्रिल शायद बहुत एंजॉय एंजॉयबल लगता है। वो एंजॉय करती हैं इस थ्रिल को। क्योंकि आपने भी ऐसे एक्सपीरियसेस सुने होंगे। मैं भी अपने आसपास देखती हूं। तो पता नहीं ऐसा क्यों है कि लड़कियों को ना मतलब जो लड़का उनको कमिटमेंट नहीं दे पा
(01:47) रहा है या फिर उनसे थोड़ा ऑन ऑफ करके बिहेव करता है कभी बहुत स्वीट कभी बहुत ज्यादा यू नो एकदम ही बैड बिहेवियर तो उनको वो लड़के अच्छे लगते हैं अट्रैक्टिव लगते हैं उनको लगता है कि यार यही तो रियल रिलेशनशिप है मतलब इसी पे तो हमें वर्क करना है लाइक वी वी मेक इट वर्क तो ये मेरी डेफिनेशन है आप बताओ मतलब आपके अकॉर्डिंग आपने क्या एक्सपीरियंस किया है ऐसे टॉक्सिक लड़के या फिर ये सब चीजें नहीं बात सही है एक्चुअली में रीज़न यही यही है कि ऐसे लड़कियां ना लड़की के लिए चैलेंज होता है। एंड लड़की यह सोचती है कि हां रियली में अब मैं इसको सही करके
(02:20) रहूंगी। तो कहीं ना कहीं वहां पे यही फंडा होता है कि वो एक चैलेंज है एंड अब मुझे इस चैलेंज को सॉल्व करना है। तो लड़की इस माइंडसेट के साथ उसके पास जाती है। तो ये सिचुएशन होती है। लेकिन अगर हम थोड़ा इवोल्यूशनरी पर्सपेक्टिव से देखा जाए ना तो सिचुएशन क्या होती है ना कि पहले के जमाने में क्या होता था? जब हम शिकार करने जाते थे तब हमें रियली में शिकार करने जाना ही पड़ता था। हमारा जो गोल था वो यह था कि हमें खाना लाना है घर पे ताकि सब लोग खा सकें एंड हम जिंदा रह सके। सर्वाइवल की बात थी। तो इसी वजह से है ना लड़की के बायोलॉजिकली दिमाग में यह होता
(02:55) है कि जो बंदा रियली में अपनी लाइफ में फोकस्ड है, वही उसको रियली में सेफ फील करवा सकता है। वही उसको प्रोवाइड करवा सकता है। क्यों? बिकॉज़ अगर उसकी पूरी दुनिया अगर मैं बन गई तो यह खाना लेने थोड़ी जाएगा बाहर। ओके? शिकार करने थोड़ी जाएगा। एंड अगर यह शिकार करने नहीं गया तो फिर मैं तो यहां पे भूख ही रहूंगी। ओके? हमारे बच्चों का क्या होगा? तो कहीं ना कहीं यह माइंडसेट हम लड़की के दिमाग में ज्यादा ही रहती है। इसी वजह से लड़की ऐसे बंदे से ज्यादा अट्रैक्टेड फील करती है जो अनफेक्टेड है जो अनबॉदर्ड है। जो वो कितना भी ज्यादा ड्रामा क्यों ना करे, कितना भी
(03:29) ज्यादा चिल्लाए क्यों नहीं या तो फिर कितना भी ज्यादा क्यों ना बोले कि यार रिलेशनशिप में आ जाए ये कर ले वो कर ले। लेकिन उसको कोई फर्क नहीं पड़ता। वो बस अपनी जिंदगी में मजे से चिल कर रहा है। क्यों? क्योंकि लड़की को ऐसा लगता है कि यार यह बंदा सही है। ठीक है? कि यह बंदा रियली में अपनी लाइफ में फोकस कर रहा है एंड यह मुझे इतना भाव भी नहीं देता। तो उसे कहीं ना कहीं उसके दिमाग में यह लग चलने लगता है कि हां यही बंदा मेरा ध्यान रख पाएगा। यही बंदा मुझे सेफ फील करवा पाएगा एंड यही बंदा मेरे लिए प्रोवाइड करवा पाएगा। तो टॉक्सिसिटी की डेफिनेशन
(03:58) ऑब्वियसली आज के जमाने के हिसाब से चेंज होती जा रही है। क्योंकि आजकल क्या है? आजकल हमें शिकार करने नहीं जाना। ओके? तो आजकल थोड़ा यह होता है कि रिलेशनशिप में थोड़ी मैच्योरिटी आनी चाहिए। थोड़ी कंपैटिबिलिटी होनी चाहिए। तो उस हिसाब से लेकिन फिर भी लड़की का अभी भी दिमाग इवोल्यूशनरी पर्सपेक्टिव से ही चल रहा है। ओके? इवोल्यूशन अभी भी घुसा हुआ है लड़की के दिमाग में। एंड लड़के के दिमाग में भी। लेकिन लड़की यही है कि नीडी हरकतें कर देते हैं। एंड फिर उसे ये लगता है कि ये बंदा मेरा ध्यान कैसे रख पाएगा? अगर अभी से इतना ज्यादा मेरे पे फिदा हो गया है।
(04:32) इतना क्लींगी हरकतें कर रहा है तो फिर ये मेरा ध्यान थोड़ी रख पाएगा। तो बस यही दिक्कत है नाइस लड़कों के साथ। हां और लेकिन आपको ऐसे नहीं लगता कि लड़कियां ना कभी-कभी खुद को ही कंट्राडिक्ट करती हैं। लाइक जैसे अभी हमने यह वाली बात बोली कि अ लड़कियां लड़कियों के ना मन में ये चीज होती है कि वो बाहर जाके यू नो मतलब प्रोटेक्टर बने या हमें प्रोवाइड करें प्रोवाइडर बने। तो उनका पूरा जो दुनिया है वो सिर्फ हमारे अराउंड रिवॉल्व ना करें। लड़कियों को यह चीज लगती है। एंड मेरे माइंड में भी यह है कि लाइक यू नो एक भले ही मैं इंडिपेंडेंट हूं
(05:05) लेकिन एक वो लड़का थोड़ा मैस्कुलिन प्रोवाइडर वाली वाइब अच्छी लगती है। बट मुझे ऐसा लगता है कि लड़कियां कभी-कभी खुद को कंट्राडिक्ट भी करती हैं। लाइक आपने ये देखा होगा जैसे मुझे ऐसे फील होता है दैट लड़कियां यह भी चाहती हैं कि यह वाला चीज भी हो, प्रोवाइडर वाला भी हो। लेकिन कुछ लड़कियों के माइंड में यह चीज भी है कि उसकी पूरी दुनिया सिर्फ हम ही बन जाए। लाइक उसके कोई फ्रेंड्स ना हो, कोई मेल फ्रेंड्स ना हो, कोई कुछ ना हो। तो उसके मतलब वो सिर्फ हमारे आसपास घूमे और फिर यह चाहते हुए भी उनका यह भी होता है कि वो हमारे लिए कमा के भी लेके आए, वो भी करे।
(05:37) तो आपको ऐसे लगता है कि और यह चीज भी और फिर लड़कियां ना कभी-कभी जैसे ऐसे भी कंट्राडिक्ट करती हैं लाइक वो बोलती हैं कि आई वांट अ लॉयल गाय। मतलब उनके माइंड में होता है कि लड़का लॉयल होना चाहिए। है ना? कुछ हो ना हो लॉयल हो। लेकिन फिर भी वो टॉक्सिक लड़कों को पसंद करती हैं। तो ऐसे लड़कियां अपने आप में इतनी कंफ्यूज्ड मैं बोलूं या क्या कंट्राडिक्ट क्यों करती हैं ऐसे अपने आपको इतना ये कंट्राडिक्शन की बात नहीं है। ये कहीं ना कहीं लैक ऑफ मैच्योरिटी है। क्योंकि वो एक्सेप्ट करना नहीं चाहती कि वो एक्चुअली में क्या चाहती है? क्योंकि अगर वो
(06:04) एक्सेप्ट कर लेगी कि मुझे रियली में ऐसा बंदा चाहिए तो वो सोसाइटी के रूल्स एंड रेगुलेशंस के हिसाब से इतना ज्यादा सही नहीं बैठता। ओके? तो वो अपने आप को प्रोटेक्ट करने के लिए कभी भी उस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेगी। लेकिन अट्रैक्टेड उसी बंदे से होंगे। ओके? तो कंट्राडिक्शन नहीं है यहां पे। यहां पे बस ये है कि वो कंफ्यूज सॉरी उसे मैच्योरिटी नहीं है। ओके? उसे खुद नहीं पता कि उसे क्या चाहिए। एंड लड़की देखो बहुत सारी चीजें चाहती है अपनी लाइफ में। ठीक है? कि लड़का मेरे लिए ये करे मेरे लिए वो करे ऐसा रहे। ऐसे वैसे रहे। लेकिन इसको बोलते हैं कि वो लीड कर
(06:37) रही है। बट मैं क्या बोलता हूं कि लड़की जो जो भी बोल रही है वो ठीक है। लेकिन तुम्हें क्या सही लगता है? ओके। तुम्हें क्या सही लगता है कि तुम्हें क्या करना है? है अपनी लाइफ में करना एट द एंड ऑफ़ द डे वही होता है। बिकॉज़ अगर तुम लड़की की सारी बातें मानने लगे ना तो वह स्टीयरिंग व्हील चला रही है। ओके? वो गाड़ी चला रही है एंड तुम बाजू में पैसेंजर सीट पे बैठे हो। एंड लड़की को यह कभी भी पसंद नहीं होता कि तुम पैसेंजर सीट पे बैठे हो। ओके? लड़की को यह चाहिए होता है कि तुम स्टेयरिंग चलाओ। तुम सही डायरेक्शन में गाड़ी को आगे बढ़ाओ। ओके? तो ये होता है। लेकिन इसी वजह
(07:09) से लोग मुझे कॉल करके पूछते हैं ना कि यार लड़की क्या चाहती है? मुझे यह बताओ। पर मैं उन्हें बोलता हूं कि लड़की क्या चाहती है उससे फर्क नहीं पड़ता। आप मुझे यह बताइए कि आप क्या चाहते हो। ओके? तो मतलब वो क्या चाहती है उससे फर्क नहीं पड़ता। आपको यह पता होना चाहिए कि व्हाट यू वांट इन योर लाइफ? या ट्रू हम एंड ये जो हम बात कर रहे हैं ये टॉक्सिक लड़कों की और ये सब चीजें तो आपको ऐसा क्यों लगता है कि यह क्यों एक ऐसा वो आया कि लड़कियां चेजिंग की फीलिंग को एंजॉय करती हैं या थ्रिल मिलता है उनको ऐसे। तो ये सोशल मीडिया की वजह से है
(07:44) क्योंकि जैसे आजकल ये मूवीस भी एनिमल कबीर सिंह बहुत बड़ा एग्जांपल है इसका जैसे उसमें वो शाहिद कपूर का जो कररेक्टर था कबीर सिंह का वो कैसे टॉक्सिक ही बोलेंगे उसको मेरे लिए वो टॉक्सिक लड़का है तो फिर भी लड़कियों मतलब उसको ना बहुत ग्लोरिफाई किया मूवीस में कि ऐसा लड़का मैस्कुलिन होता है तो क्या ये सोशल मीडिया की वजह से या मूवीस की वजह से है या फिर कुछ और रीज़न है इसके पीछे ओके मैं नहीं मानता कि ये सोशल मीडिया या मूवीस इसकी वजह से रीज़न है। ये इवोल्यूशन की वजह से ही है ये रीज़। एंड ऑब्वियसली आप कबीर सिंह को मैस्कुलिन नहीं बोल सकते
(08:19) बिकॉज़ ही वाज़ अ नीडी गाय। ओके? लड़की चली गई तो क्या हुआ? लड़की के पीछे भाग रहा था ना वो। एंड उसको ओवरकम करने के लिए इतने ज्यादा चीजें में आगे बढ़ रहा था। इतने नशे कर रहा था। इतना कैजुअल सेक्स। तो ये सारी चीजें कहीं ना कहीं मैस्कुलिनिटी शो नहीं करती। मैस्कुलिनिटी का मतलब क्या होता है कि ठीक है अगर वो आना चाहती है तो ठीक है दरवाजा खुले लेकिन अगर वो जाना चाहती है तो चली जाए लेकिन ये फिर दरवाजा बार-बार खुलेगा नहीं ओके तो ये होना चाहिए एंड अगर हम मैस्कुलिनिटी की बात करें ना तो धुरंधर मूवी ज्यादा बढ़िया रहेगी ओके वहां पे जो
(08:54) कैरेक्टर है हमजा का वो क्या है अपनी लाइफ पे फोकस्ड है ठीक है अपने गोल्स पे फोकस्ड अपने मिशन पे फोकस्ड तो ऐसा बंदा होना चाहिए जिसको कोई फर्क नहीं पड़ता ठीक है वो बंदी से प्यार कर रहा है। वो बंदी कोई केयर भी कर रहा है। कोई दिक्कत नहीं है। हमें करना चाहते हैं। ठीक है? हम करना चाहते हैं बंदी की केयर कि लव करना चाहते हैं। सारी चीजें करना चाहते हैं। लेकिन एट द सेम टाइम कहीं ना कहीं हम खुद को खो देते हैं। ओके? एंड वही प्रॉब्लम क्रिएट करती है। जब हम हम खुद को खो देंगे ना एंड बंदी के पीछे ही सारी चीजें करने लगेंगे तब जाके दिक्कत होगी। एंड ये आप पुष्पा
(09:27) मूवी का भी एग्जांपल ले सकते हो। पुष्पा में भी वही सेम सीन है। ओके? कि वो मतलब अपनी लाइफ पे फोकस करता है। उसकी वाइफ के लिए कुछ भी करेगा। लेकिन उसकी लाइफ पे भी उसका फोकस है। तो ऐसा सीन होना चाहिए। ठीक है? कि ठीक है वाइफ की रिस्पेक्ट कर रहा है। सब कुछ है। लेकिन एट द एंड ऑफ़ द डे अपनी लाइफ पे फोकस भी है। हां। तो मतलब इससे हम क्या ये कह सकते हैं कि ज्यादा अवेलेबल होना अट्रैक्शन किल कर देता है। मतलब अगर आप ज्यादा ही अवेलेबल रहोगे लड़कियों के लिए, अपने काम पे फोकस नहीं करोगे, अपने आप पे, अपनी ग्रोथ पे फोकस नहीं करोगे, तो मतलब ऐसा हो सकता है।
(10:02) राइट? दैट कि लड़कियों का इंटरेस्ट आपके ऊपर से खत्म हो जाए। ऑब्वियसली इसमें कोई डाउट है ही नहीं। बिकॉज़ थिंग क्या है ना कि अगर आप ज्यादा अवेलेबल रह रहे हो तो लड़की को यही लगेगा कि इसके पास कुछ काम है ही नहीं। एंड अगर उसको ऐसा लग रहा है कि कुछ काम है ही नहीं तो फिर उसको ऐसा कैसे फील होगा कि ये बंदा मेरा ध्यान रख पाएगा। बिकॉज़ अगर आप उसी के ऊपर फोकस हो तो आप काम नहीं कर रहे। आप काम नहीं कर रहे हो तो आप पैसे नहीं कमा पाओगे। सारी चीजें एक लाइन में चल रही है। ओके? अगर आप अवेलेबल हो रहे हो तो उसे यही लगता है कि यह बंदा नल्ला बैठा रहता है।
(10:32) इसके पास और कुछ काम नहीं है। ओके? तो बंदी भले ही आपसे कितना भी ज्यादा टाइम क्यों ना मांगे। ओके? कितना भी ज्यादा अटेंशन क्यों ना मांगे पर आप में ये हिम्मत होनी चाहिए कि नहीं अभी नहीं बाद में। ओके? एंड देखो अगर बंदी मैच्योर होती है ना तो वो खुद इतना ज्यादा इंटरफेयर नहीं करती। वो खुद अपनी लाइफ में भी बिजी होती है। अंडरस्टैंड करती है। एंड वो खुद अपनी लाइफ में बिजी होती है। ओके? ऐसा थोड़ी है कि वो उसके पास कुछ काम ही नहीं है। अगर हम मैन के पास एक लाइफ है। ठीक है? एक पर्पस है तो एक लड़की के पास भी तो पर्पस होना चाहिए ना। अभी वो हम स्टोन एज
(11:06) में तो रह नहीं रहे जहां पे लड़की के पास बस खाना बनाने के अलावा और कुछ काम नहीं है। ओके? तो यहां पे बहुत सारी चीजें हैं जो कर सकती है वो। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] राइट। अ बट ऐसे आपको लगता है जैसे आप तो काउंसलिंग वगैरह भी करते हो तो आपके पास काफी लड़कों के कॉल आते होंगे कि लड़कों को ये बैलेंस बनाने में अभी भी दिक्कत हो रही है। लाइक हम बहुत इजीली ये चीज बोल रहे हैं कि यू नो अपनी ग्रोथ पे काम करो। लेकिन जैसे मैं भी ये रिलेशनशिप के स्पेस पे पडकास्ट करती हूं। तो मेरे पास भी ना ऐसे काफी सारे वो डीएम्स आते हैं दैट मैं जब लाइव पे आती
(11:37) हूं तो ऐसे बहुत सारे वह आते हैं कि हमें तो अपने पास्ट गर्लफ्रेंड लाइक अपने एक्स गर्लफ्रेंड की याद आ रही है। अपने पास्ट की मेमोरीज आती रहती हैं ये सब चीजें और हमें नहीं पता ओवरकम कैसे करें और जैसे हमने जो लास्ट पॉडकास्ट में भी बात की थी वो मूविंग ऑन वाली कि कुछ लोगों के लिए बहुत टफ हो जाता है। तो आई एम श्योर कि काफी लड़के ना अभी भी बैलेंस मतलब इस चीज को समझ रहे हैं कि खुद पर वर्क करना है लेकिन बैलेंस नहीं बना पा रहे हैं। जैसे मुझे भी ना अभी लड़कों की दो साइड मतलब एक्सेप्शनंस आर देयर ऑब्वियसली ऐसे लड़के होंगे जो अपने रिलेशनशिप को भी अच्छे
(12:09) प्रायोरिटी पे रखते हैं लेकिन अपने करियर को भी देते हैं टाइम देते हैं। लेकिन अभी भी ना जैसे दो साइड देखने को मिलती हैं। लाइक एक्सट्रीम साइड्स लाइक एक टाइप के लड़के ऐसे हैं जो एकदम ही लड़कियों के पीछे बहुत अवेलेबल और पूरी लाइफ ही लड़कियां बन चुकी हैं। लेकिन अब कुछ ऐसे लड़के भी हैं जो बोलते हैं दैट नहीं वी डोंट वांट अ रिलेशनशिप। हमें तो रिस्पांसिबिलिटी नहीं चाहिए या फिर बेकार की चीजें हैं। तो वह अब इतना ज्यादा अपने पास्ट एक्सपीरियंस से बोल लो या फिर पता नहीं कौन सा डर है या क्या है। अब एक्सट्रीम्स हो चुके हैं। एक साइड पे
(12:42) लड़के ऐसे हैं जो बहुत ही ज्यादा लड़कियों के पीछे भाग रहे हैं। और एक साइड ऐसे हैं जो अपनी गर्लफ्रेंड जो लॉयल है जो उनको अंडरस्टैंड भी करती है लेकिन तब भी कमिटमेंट इशूज़ या फिर वो नहीं दे पा रहे हैं। वो टाइम जो जितना टाइम देना चाहिए तो यह बैलेंस क्यों नहीं बना पा रहे हैं लड़के मतलब कौन सा डर है या फिर क्या चीज है जो ऐसे एक्सट्रीम साइड्स देखने को मिल रही हैं आजकल डर तो बहुत सारी चीजों का है जैसे लीगली लॉज़ हमारे फेवर में नहीं है एंड ये सारी चीजें लेकिन देखो यही है कि रीजन कुछ भी क्यों ना हो ले हम विक्टिम माइंडसेट तो
(13:15) नहीं पा सकते ना एट द एंड ऑफ द डे ये सारी चीजें कंडीशनिंग है ओके कि आप कैसे एनवायरमेंट में बड़े हुए हो अगर आपको लग रहा रहा है। आप इस एनवायरमेंट में बड़े हो एंड आपको लग रहा है कि शादी नहीं करनी चाहिए तो मत करो। कोई दिक्कत नहीं है। अगर आपको लग रहा है कि शादी करनी चाहिए तो करो। लेकिन सारी चीजों का एक प्रॉपर वे होता है। ओके? हेल्थी रिलेशनशिप मेंटेन की जा सकती है। लेकिन सीखनी पड़ती है क्योंकि इसकी टेक्स्ट बुक तो थी नहीं। स्कूल में सिखा तो थे नहीं तो हमें पता नहीं है। तो दिक्कत यही है बस कि हमें आता नहीं है कि रिलेशनशिप को कैसे आगे बढ़ाना है सही
(13:48) तरीके से। एंड एट द सेम टाइम अपनी लाइफ पे भी कैसे फोकस करना है। तो वो कहीं ना कहीं लैक ऑफ नॉलेज की ही बात है। ओके? या तो फिर लैक ऑफ प्रायोरिटी मान लीजिए। हम हम एंड आपको मतलब लड़कियों के साइड से क्या चीज? लड़कों का तो हमने बोला लैक ऑफ फेयर या फिर लैक ऑफ प्रायोरिटी ये सब चीजें हैं। अ बट लड़कियों के साइड से आपको क्या लगता है कि मतलब लड़कियां जो हम ये टॉक्सिक लड़कों की बात कर रहे थे। तो लड़कियों को एग्जैक्टली मतलब वह जो आपने एववोल्यूशन वाली बात बोली वह तो मतलब उनको एग्जैक्टली क्या चाहिए? उनको जैसे इमोशनल सिक्योरिटी चाहिए जैसे हमने प्रोवाइडर
(14:25) वाली बात की या फिर उनको सच में वह थ्रिल वाली उसमें मजा आता है क्योंकि ना इस पे मेरे बहुत डाउट्स हैं। आई मीन यह ऐसे काफी सारी स्टडीज भी हुई हैं दैट यू नो कुछ लोगों को थ्रिल चस करने में मजा आता है। बट वो चीज भी है जो आपने प्रोवाइडर वाला चीज बोला वह तो है डेफिनेटली है। बट लड़कियों को एग्जैक्टली क्या चाहिए रहता है? लाइक साइकोलॉजिकली या फिर उनको इमोशनल सिक्योरिटी चाहिए या फिर वह थ्रिल में ही वापस मतलब वह एक बार ऐसे सोचती हैं दैट यू नो अब हमें इस टॉक्सिक रिलेशनशिप से बाहर निकलना है। लेकिन वह शायद फिर ऐसे ही नेक्स्ट पार्टनर्स भी ऐसे अट्रैक्ट करती
(15:02) हैं जहां उनको वही फिर वो सेम लूप उनको वो मिले चेजिंग वाला। तो उनको इमोशनल सिक्योरिटी भी चाहिए रहती है। लेकिन अब मतलब कैसे आप इसको डिफाइन करोगे कि उनको पीस तो चाहिए, एक सिक्योरिटी भी चाहिए लेकिन वो थ्रिल भी चाहिए। तो इसको आप कैसे डिफाइन करोगे? अब यहां पे भी वही सेम चीज की बात आएगी कि बैलेंस की बात आती है कि हम कितना ज्यादा अच्छे से बैलेंस मेंटेन कर पा रहे हैं। क्योंकि आपने सही बोला। मोस्ट बंदे है ना इन सारी चीजों का बैलेंस नहीं मेंटेन कर पाते। टेंशन होना चाहिए। क्यूरियोसिटी होनी चाहिए, मिस्ट्री होनी चाहिए। एंड
(15:35) अपनी लाइफ में फोकस्ड है। एट द सेम टाइम केयर भी कर रहा है। ओके? लवी डवी भी कभी-कभी बन रहा है। कभी-कभी बहुत ज्यादा टॉक्सिक भी बन जाता है। तो एक बैलेंस लाइफ में हर एक चीज में एक बैलेंस होना चाहिए। एंड यहां पे भी वही सेम चीज अप्लाई होती है। लेकिन दिक्कत क्या होती है ना जब भी बंदे अटैच हो जाते हैं ना तब वो ये बैलेंस की वाट लगा देते हैं। स्टार्टिंग में बैलेंस होता है। स्टार्टिंग में परफेक्ट बैलेंस होता है। कोई दिक्कत नहीं होती। एंड इसी वजह से वो लड़की उनसे बात करती है। उनको टाइम देती है। सारी चीजें होती है। लेकिन धीरे-धीरे है ना यह बैलेंस
(16:05) झुकता जाता है। धीरे-धीरे यह बैलेंस लड़की के फेवर में होता जाता है। ओके? कि वो लड़की को इतना प्यार करते हैं। इतनी फीलिंग्स आ रही है तो ठीक है फिर क्यों ना उसके लिए कुछ भी करें हम। ओके? क्यों इतना एफर्ट्स ना करें हम। ये सारी चीजें करेंगे, अटेंशन देंगे, टाइम देंगे। लेकिन वही सारी चीजें उसे नहीं चाहिए। ओके? भले वो बोल रही है कि मुझे ये सारी चीजें चाहिए। बट कहीं ना कहीं उसे नहीं चाहिए। तो उसे बस वहां पर थोड़ा-थोड़ा दो। थोड़ी-थोड़ी चीजें दे सकते हो तुम। ओके? लेकिन देखो लड़की मैच्योर होती है ना तो अगेन ये सारी चीजों की बात ही नहीं आएगी।
(16:37) यहां पे कहीं ना कहीं मुझे यही लगता है कि रिलेशनशिप में आजकल मैच्योरिटी नहीं है। ना ही लड़की में ना ही लड़कों में। एंड इसी वजह से इशूज़ आ रहे हैं। अगर मैच्योरिटी दोनों पहले तो एक्सेप्ट करना पड़ेगा कि हां यार हमारे में मैच्योरिटी नहीं है। लेकिन नहीं लोग एोगेंट है। ठीक है? लड़की बहुत ज्यादा है। लड़के थोड़े कम है। इसी वजह से लड़कों के सेल्फ इंप्रूवमेंट वीडियोस आपको ज्यादा देखने को मिलेंगे। एंड लड़कियों के बहुत ज्यादा कम। ओके? तो कहीं ना कहीं एोगेंस बहुत ज्यादा है कि मुझे सब पता है। मुझे क्यों सिखा रहे हो? ओके? तो इस इन सारी चीजों की वजह
(17:10) से वो सीखना नहीं चाहते। एंड बिलीव मी मेरी लाइफ में ऐसी भी लड़की आई है जो ऐसा मानती है कि वो बहुत ज्यादा अच्छी दिखती है। वह बहुत ज्यादा अच्छे से रिलेशनशिप को जानती है। बस मुझे ही नहीं पता रिलेशनशिप कैसे करना है। ठीक है? तो ऐसा भी होता है कि हमें ही नहीं पता होता है। एंड लड़की को सारी चीजें पता होती है। ऐसा वो बिलीव करती है। ओके? एंड इसी वजह से कि जब भी आपको सारी चीजें पता होती है आप यही मान के आगे बढ़ोगे ना तो दिक्कत तो आने ही वाली है। बिकॉज़ ये ईगो हो गया। इतना ज्यादा ईगो है तुम्हारा या तो फिर हां मतलब अगर हम जैसे आपने बोला इमोशनली
(17:50) आजकल लोग यू नो मैच्योर नहीं है या फिर रिलेशनशिप ही मैच्योर नहीं है आजकल पता नहीं अटैचमेंट को लव बोल देते हैं एंड देन जो एक वह होता है नया-नया एक यू नो डोपामिन रश होता है उसको अह तो अकॉर्डिंग टु यू इफ आई आस्क यू तो आपके अकॉर्डिंग एक इमोशनल रिलेशनशिप या इमोशनल जैसे हम टॉक्सिक लड़कों की बात कर रहे हैं अभी तो लड़कों पे रहते तो आपके लिए एक इमोशनल मैच्योर लड़का या फिर एक इमोशनल मैच्योर रिलेशनशिप के क्या ट्रेट्स होते हैं या फिर क्या होने चाहिए? लाइक हां तो कैसे पता करें? ठीक है मैं आपको इमोशनल मैच्योर रिलेशनशिप के बारे में बताता हूं। यहां पे क्या
(18:26) सिचुएशन होगी ना? सबसे पहले आपको हर बार प्रॉब्लम्स होगी ना तब कम्युनिकेट करने में इतना ज्यादा प्रॉब्लम नहीं आएगा। ईजीली कम्यनिकेट हो जाएगा। वो बंदी भी आपसे बात करेगी। आप भी बात करोगे। यहां पे फिर साइलेंस मोड में नहीं चले जाओगे। यहां पे फिर एक दूसरे को ब्लॉक नहीं कर दोगे। ओके? आपकी लाइफ में कुछ पर्पस होगा। जैसे कि मैं लड़का हूं। मेरी लाइफ में कुछ पर्पस होगा। मेरी बंदी है। उसकी लाइफ में कुछ पर्पस होगा। हम दोनों की इंडिविजुअल लाइफ होगी। ओके? इंडिविजुअल लाइफ। उससे अलग मेरी एक अलग दुनिया होगी। एंड उसकी भी एक अलग दुनिया होगी मेरे अलावा। एंड हम
(18:59) दोनों की एक कंबाइंड दुनिया होगी। ओके? एंड ऐसे, फिर मैं उसके साथ इसीलिए हूं क्योंकि मुझे उसके साथ रहने में मजा आ रहा है। इसीलिए नहीं क्योंकि मैं बहुत ज्यादा अटैच हूं। ओके। इसीलिए नहीं क्योंकि मैं बहुत ज्यादा प्यार करता हूं। हम इतना सिंपल रखते हैं कि मुझे इस बंदी के साथ टाइम स्पेंड करने में मजा आ रहा है। इसके साथ अच्छा लगता है। अच्छा सही रहता है। मैच्योर है। ओके? इतना ज्यादा दिक्कत नहीं आती। एंड मेरे लाइफ में पीस आता है। प्यार को हम छोड़ देते हैं। अटैचमेंट को छोड़ देते हैं। इन सारी चीजों से दूर रहते हैं हम। एंड बस इतना सिंपल रखते हैं कि हां
(19:29) ठीक है। ये बंदी हमारी लाइफ में शांति ला रही है। क्लेरिटी है हमें कि क्या करना है, क्या नहीं करना है। तो बस इतना काफी है हमें रिलेशनशिप में आगे बढ़ने के लिए। एंड शादी शादी इसीलिए नहीं करनी होती क्योंकि वो लुक्स में बहुत ज्यादा अच्छी है या तो फिर रिलेशनशिप में भी इसीलिए नहीं आना होता पर मोस्ट ऑफ बंदे या मोस्ट ऑफ लड़की ऐसा करते ही है ओके कि वो बंदा अच्छा दिखता है ठीक है उसके साथ आ जाती हूं लेकिन सिर्फ अच्छा दिखना इनफ नहीं होता ओके और भी ज्यादा चीजें मैटर करती है जैसे कम्युनिकेशन हो गया जो टॉप पे आएगा क्योंकि उसके बिना कभी भी ये रिलेशनशिप
(20:01) आगे बढ़ ही नहीं पाएगी एंड आजकल बहुत ज्यादा कम्युनिकेशन गैप है बहुत मतलब बहुत ही ज्यादा बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा ना बहुत स्मूथ चलता है। आप एक दूसरे की कंपनी एंजॉय करते हो एंड सब कुछ ठीक है। लेकिन ना तभी आपको फील होता है। जैसे हम बात कर रहे थे ना कि लड़कियों को वो टॉक्सिसिटी क्यों पसंद है? और यह मैं लड़कों की साइड से ही बोल रही हूं कि जब एक रिलेशनशिप ना बहुत स्मूथ चल रहा है। सब कुछ ठीक है। तो बोरिंग रिलेशनशिप लगता है लोगों को। मतलब अब यह लोग इतने अपनी साइकोलॉजी नहीं समझ पाते। हम कैसे इवॉल्व हुए हैं। लाइक यू नो
(20:32) यह एक मुझे लगता है कि लास्ट फेस होता है आपके रिलेशनशिप का। मतलब जो बहुत जरूरी होता है अटैचमेंट वाला कि सब कुछ है मतलब आपका वो लस्ट लव सब कुछ है लेकिन अटैचमेंट वाला जो होता है ना बहुत ही सुंदर होता है कि अब इसी पर्सन के साथ एक कमिटमेंट है लेकिन काफी लोग इस चीज को समझ नहीं पाते हैं एंड उनको है कि अब तो बोरिंग हो गया है कोई स्पार्क नहीं है बिकॉज़ स्पार्क तो नहीं रहता है कभी भी हमेशा एक ही पर्सन के साथ हमेशा के लिए तो आपको लगता है कि ऐसे टाइम पे लड़के या लड़कियां बोर हो जाते हैं एंड देन दे सीक फॉर समवन एल्स क्योंकि
(21:03) उनको वो स्पार्क वाला फील नहीं आ रहा होता वह चज़िंग वाली फील नहीं आ रही होती। तो आपको लगता है कि जब रिलेशनशिप स्मूथ चलता है तो लोग अपने ऑप्शंस देखते हैं या बोर हो जाते हैं या स्पार्क को मिस करते हैं। हां ऑब्वियसली बात सही है कि अगर स्पार्क ही नहीं रहेगा तो ऐसा होने की प्रोबेबिलिटीज़ और ज्यादा बढ़ जाएगी। लेकिन हमें यही समझना पड़ेगा कि जैसे कि आपने बोला स्पार्क हमेशा नहीं रहने वाला। ओके? आज नहीं तो 10 साल बाद खत्म हो जाएगा। तो उसे इवेंचुअली आज का खत्म होना ही है उसे। तो अब हमें यही समझना पड़ता है कि हमारी लाइफ में रिलेशनशिप इतनी इंपॉर्टेंट नहीं
(21:40) होनी चाहिए। ओके? रिलेशनशिप है इंपॉर्टेंट। लेकिन उसके अलावा हम अपनी लाइफ में क्या कर रहे हैं? ओके? हमारा मेन पर्पस क्या है? हम कोई भी चीज को अचीव करने के लिए रोज मेहनत कर रहे हैं। तो वही हमारा मेन होना चाहिए फोकस। एंड अगर वह फोकस रहेगा ना एंड वह जो दूसरा पर्सन है वह आपको सपोर्ट कर रहा है इस जर्नी में। दोनों साथ मिलके अचीव करने की कोशिश कर रहे हो तो आपको और ज्यादा मजा आएगा इस रिलेशनशिप में। लेकिन अगर आप दोनों के रिलेशनशिप गोल्स ही नहीं है। ठीक है? रिलेशनशिप गोल्स ऐसे मान लो कि सिंपली इतना है कि आप दोनों इंग्लैंड जा रहे हो
(22:15) इस इस साल। ओके? ऐसे कुछ रिलेशनशिप गोल्स रखा करो। ओके? दोनों पैसे कम इकट्ठा करेंगे, सेव करेंगे एंड थोड़े टाइम बाद हम बाहर जाएंगे कहीं पे। ऐसा गोल रखो। या तो फिर ऐसा गोल रखो कि हम दोनों मिलके इतनी इनकम अचीव करेंगे। हम दोनों मिलके यह ऐसा घर लेंगे। व्हाटएवर तो कपल गोल्स भी तो होने चाहिए ना। जैसे इंडिविजुअल गोल्स होते हैं लाइफ में वैसे कपल गोल्स रखो। देखो अगर आपकी लाइफ में कुछ भी बड़ा नहीं होगा ना बड़ा। ओके? रिलेशनशिप मैं नहीं मानता कि शादी करना बहुत ज्यादा बड़ी बात है। बच्चे करना बहुत ज्यादा बड़ी बात है। ये सारी चीजें नॉर्मल है। कोई फर्क नहीं
(22:49) पड़ता। ठीक है? सब करते हैं। सब लोग करते हैं। तो आप भी कर रहे हो उसमें कौन सी बड़ी बात है। ओके? कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन अगर आप दोनों मिलके कुछ अचीव करने की कोशिश कर रहे हो जो आपको रियली में अपनी लाइफ में चाहिए। तो दैट इज़ समथिंग व्हिच नॉट मोस्ट आर डूइंग। बिकॉज़ मोस्ट ऑफ को यही है यार ठीक है नॉर्मली आराम से ऑफिस पे गया काम किया, चिल किया, अब Netflix देखता हूं। मतलब और कुछ अचीव नहीं करना। ओके? एंड अगर आपको कुछ अचीव नहीं करना होगा ना तो जिंदगी जीने में मजा नहीं आने वाला। क्यों? बिकॉज़ तुम्हारी जिंदगी एक्साइटिंग ही नहीं है। अगर तुम्हारी
(23:21) जिंदगी में एक्साइटमेंट नहीं है। ओके? तो फिर तुम्हें कैसे मजा आएगा दूसरे पर्सन के साथ? नहीं मजा आने वाला। आज नहीं तो कल उसके साथ भी एक्साइटमेंट खत्म हो जाएगी। बिकॉज़ यू आर फाइंडिंग एक्साइटमेंट थ्रू रिलेशनशिप। ओके? तो ऐसा नहीं होता यार। रिलेशनशिप एक्साइटमेंट के लिए थोड़ी बना है। रिलेशनशिप तो बस अच्छा लग रहा है। मजा आ रहा है। मैच्योरिटी है, कंपैटिबिलिटी है। आराम से हंस के बात कर सकते हैं। साथ में रो सकते हैं। अंडरस्टैंड कर सकती है। ये सारी चीज़ है। इसीलिए हम रिलेशनशिप में रिलेशनशिप में वो ऐसा उसका काम यह थोड़ी है कि मुझे एक्साइटमेंट देता रहेगा। मेरा
(23:52) डोपामिन बढ़ाता रहेगा। ओके? ये नहीं है। लेकिन मोस्ट ऑफ को समझ नहीं आता। एंड मोस्ट ऑफ को रिलेशनशिप से ये चाहिए होता है। तो वो रिलेशनशिप इसके लिए बनी ही नहीं है। आप अपनी लाइफ में कुछ एक्साइटिंग चीजें कीजिए क्योंकि कोई एक्टिविटीज कर सकते हो। कुछ भी कर सकते हो। लेकिन रिलेशनशिप एक्साइटमेंट के लिए नहीं है। एक्साइटमेंट और ऑब्सेशन पता है मेरे को ना अभी इससे वो याद आया है। एक वो एक्ट्रेस हैं तेजस्वी प्रकाश करके। सुना होगा आपने। तो उनका ना एक क्लिप बहुत वायरल हुआ था। तो ही शी इज़ स्टेटिंग करण कुंद्रा तो इतना ज्यादा वायरल हुआ था कि किसी ने पूछा दैट
(24:27) आप कितना मतलब बातें वाते करते हो एंड कितना ऑब्सेस्ड हो एक दूसरे से तो उसने ऐसे तेजस्वी प्रकाश ने कैसे आंसर किया दैट यू हैव टू ऑब्सेस्ड फॉर ईच अदर लाइक यू नो मतलब उसने एग्जांपल दिया दैट मैं तो अपनी जब गर्ल फ्रेंड्स के साथ भी बाहर जाती हूं ना फीमेल फ्रेंड के साथ बाहर जाती हूं तो वह मुझे उनके साथ भी बाहर नहीं जाने देता तो ही इज़ लाइक नहीं हम ही मिलते हैं। हम चलेंगे। एंड कि जब तक आपको आपका बॉयफ्रेंड रोज बार-बार कॉल नहीं कर रहा है। रोज आई लव यू नहीं बोल रहा है। तो दैट इज़ नॉट लव। तो उसने ऐसे एक्सप्लेन किया कि ये जो ये
(25:02) जो सारे ट्रेट्स होते हैं रिलेशनशिप में यही ट्रू लव है। एंड ऑब्सेशन होना बहुत इंपॉर्टेंट है। लड़के का आपके पीछे पागल होना बहुत जरूरी है। तो मुझे लगता है कि यह भी एक टॉक्सिक ट्रेट होता है। मतलब लड़कियां इसको ना बहुत प्राउडली वअ करती हैं कि हमारा बॉयफ्रेंड तो ऐसे है कि वह हमसे ऑब्सेस्ड है, ओवरपज़ेसिव है। एंड यू नो सिर्फ हमारे आसपास रहना चाहता है। तो मुझे लगता है दैट यह बहुत बड़ा टॉक्सिक ट्रेट है कि लड़का आपको अपनी गर्लफ्रेंड्स के साथ भी नहीं जाने दे रहा। लाइक यू नो मैं उनकी अभी बात नहीं कर रही हूं। लाइक काफी लड़कियां ना इसको बहुत ही उससे वो
(25:35) करती हैं कि बहुत प्राउडली कि वो तो हमारे लिए बहुत पज़ेसिव है। हमें तो रोज दिन में 10-10 बार कॉल करता है। कहां जा रही है, क्या कर रही है? तो आपको भी लगता है कि ये बहुत बड़ा टॉक्सिक ट्रेट है क्योंकि हमने टॉक्सिक उससे स्टार्ट किया। तो मुझे लगता है कि यह भी एक बहुत बड़ा टॉक्सिक ट्रेट है कि आप इतना किसी के लिए ऑबसेशन और वो ज्यादा ही ओवरपज़ेसिव तो मुझे लगता है कि लड़का फिर शायद ना अगर वो थोड़ा-थोड़ा आपका वो जो होता है ना कि स्पार्क खत्म होने लगता है तो फिर वो कहीं और जाके ढूंढेगा। तो आपके क्या थॉट्स हैं इस पे? ऑब्वियसली आप सही बोल रहे हो। बिल्कुल।
(26:08) अगर आपको लग रहा है कि इसको बोलते हैं प्यार तो फिर ये प्यार तो जल्दी खत्म हो जाएगा। ओके? बिकॉज़ यह सारी चीजें कोई भी लंबे टाइम तक मेंटेन कर ही नहीं सकता। एंड मजा भी नहीं आता ये सारी चीजें मेंटेन करने में। क्या बार-बार अब मैं उसको यही पूछता रहो कहां जा रही है? मत जा ये कर वो कर। और कुछ काम ही नहीं है क्या मेरे पास? ठीक है? तो ऐसा नहीं होना चाहिए। एंड दिस इज़ नॉट रियली लव। मैं नहीं मानता कि ये लव है। एंड मैं कभी भी मैंने कभी भी ये क्लिप देखी नहीं है। मुझे सेंड करना एक बार कि ये कौन सी क्लिप है। हां मैं सेंड करूंगी। तो ऐसे ना मतलब काफी
(26:41) सारी वीडियोस मिलती हैं देखने को जहां लड़कियां ना बहुत प्राउडली अपने वह दिखा यह चीज बोलती हैं दैट हमारा तो बॉयफ्रेंड इतना ऑब्सेस्ड है इतना ज्यादा पज़ेसिव है तो वही हम बात करते हैं ना कि लड़कियों को क्यों ऐसे लड़के पसंद आते हैं तो यह तो हमने डिस्कस कर लिया वो एक एववोल्यूशन वाली चीज और यह सब जैसे ऐसे हम इवॉल्व हुए हैं प्रोटेक्टर प्रोवाइडर वाली फील लेकिन यह वाला टॉक्सिक ना बहुत ही गलत होता है तो मेरे को तो पता है लगता है हर्ष कि यह कबीर सिंह जैसी मूवीस में ना लड़कियां ना देख के क्योंकि वहां पे लड़कों को ऐसे मार्केट किया जाता है। ऐसे ग्लोरिफाई किया
(27:14) जाता है कि यह है ऐसा लड़का होना चाहिए। तो वह आपने बहुत सही बोला कि एनिमल में वो सॉरी धुरंधर में जैसे दिखाया वो है एक मैस्कुलिन लड़का जो अपने काम पे भी ध्यान दे रहा है। एंड वो उसको बोल भी रहा है कि देख मैं तेरे लिए लॉयल रहूंगा लेकिन तू मेरे से पूछेगी नहीं हर चीज कि मैं कहां जा रहा हूं, क्या काम कर रहा हूं। तो दिस इज मुझे लगता है कि यह आइडियल एक स्पेस होना चाहिए लड़कियों के लिए भी और लड़कों के लिए भी कि लड़कियों का भी एक अपना वो हो जहां पे वो खुद भी अपनी ग्रोथ पे फोकस कर रखें फोकस करें। ऐसा स्पेस होना चाहिए और लड़कियों के लिए भी लड़कों के लिए भी
(27:45) होना चाहिए और दोनों को एक दूसरे को सपोर्ट करना चाहिए। तो ये हमने टॉक्सिसिटी की सारी बातें की। तो हर्ष खत्म करते हैं इस पॉडकास्ट को। लेकिन एक मैं आपसे क्वेश्चन पूछती हूं। मतलब इसका एक वो दे देते हैं, कंक्लूजन दे देते हैं कि लड़कियों को ऐसे कौन से दो-तीन ट्रेट्स पहचान जाना चाहिए। अह एक फाइनल वो हम वर्डिक्ट करते हैं कि वो उस रिलेशनशिप को समझ पाए कि वो लिटरली टॉक्सिक है। क्योंकि काफी लड़कियां अंडरस्टैंड भी नहीं करती हैं कि वह एक टॉक्सिक रिलेशनशिप में है। उनको लगता है कि यही लव है। ऐसे ही होना चाहिए। तो कोई दो तीन ऐसी चीजें बता दो
(28:16) जिससे उनको समझ में आए कि दिस इज़ नॉट ट्रू लव। दिस इज़ टॉक्सिसिटी। तो ऐसी कोई भी दो तीन चीज जो आपके माइंड में आ रही है अभी। एक्चुअली में मैं लड़कियों के रिलेटेड कंटेंट नहीं बता बनाता ना तो मुझे याद मतलब थोड़ा दिक्कत हो रही है। तो सिचुएशन हां एक्चुअली लड़कियों को क्या ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा बंदा नहीं होना चाहिए। राइट हम या सबसे पहले तो वो नीडी हरकतें ना करें। ऑब्सेसिव ना हो। इतना ज्यादा ऑब्सेशन कभी भी हेल्दी नहीं होता है। ओके? बार-बार कंट्रोल नहीं करना चाहिए कि यह नहीं कर सकती, वह नहीं कर सकती। बाउंड्रीज़ होना अलग होता है एंड कंट्रोल करना अलग होता
(28:58) है। ओके? तो हमें बाउंड्रीज़ पे ध्यान रखना चाहिए। लेकिन कंट्रोल कभी भी किसी को भी नहीं करना चाहिए। लड़की को अगर जब भी ये लग रहा है ना कि वो किसी के साथ रिलेशनशिप में आके इसकी उसकी हाथों पे ऐसी हथकड़ियां लग गई है तो दिक्कत है। अगर उसको ऐसा फील हो रहा है कि मेरी फ्रीडम ही नहीं है। मुझे बार-बार हर चीज इस बंदे से पूछनी पड़ रही है तो दिक्कत है। ओके? तो पर्सनल स्पेस होनी चाहिए। वह फ्री है। उसको जो भी अपनी लाइफ में करना है कोई दिक्कत नहीं है। परमिशन नहीं लेनी होती। बताना होता है कि हां मैं यह कर रही हूं। ओके? दिक्कत है
(29:30) तो है। कोई दिक्कत नहीं मुझे मैं करूंगी फिर भी। तो ऐसा ही होना चाहिए। क्योंकि अगर लड़का अपनी लाइफ में कुछ भी कर रहा है एंड बस उसे बता रहा है तो फिर लड़कियों को भी बस करना होता है एंड बताना होता है। परमिशन नहीं लेनी होती बार-बार। ओके? एंड यहां पे एक हेल्दी लाइन आएगी। ठीक है? लड़कियों के लिए भी मैं ऐसा नहीं बोल रहा कि सारी चीजें अलाउड है कि तुम बहुत सारे लड़कों के साथ घूमो, पार्टीज करो और ये सारी चीजें ये सारी चीजें कभी भी हेल्दी नहीं है। तो ये सारी चीजें कभी भी मैं नहीं बोल रहा कि ये सारी चीजें करो। बाउंड्रीज होनी चाहिए लड़कों को कि नहीं
(30:03) ये सारी चीजें गलत है। लेकिन कंट्रोलिंग बिहेवियर नहीं होना चाहिए। बस यही सारी चीजें मैटर करती है। एंड प्यार करें लेकिन साथ-साथ अपनी लाइफ पे भी ध्यान रखें। हां। हां। हां तो वही कंट्रोलिंग वाला तो यार मतलब मैं इस पे वही मैं मेरे को ना बार-बार कबीर सिंह का वो याद आ जाता है मूवी वाला तो वही उसमें भी वही दिखाया कि प्रीति को कंट्रोल करता है वो कि अपने कपड़े ऐसे पहनो inा नहीं जाना ऐसे मेरे से पूछ के यह किया कर तो वो वाला ना पता नहीं क्यों मेरे को तो बहुत ज्यादा लगता है कि हमने ना ऐसे एक वो बना दिए हैं मूवीस के थ्रू या फिर लड़कियों को ऑब्जेक्टिफाई
(30:38) किया जाता है तो लड़कियों को लग मतलब लड़कों को लगता है कि हम इनको ऑब्जेक्ट की तरह कंट्रोल कर सकते हैं। एंड लड़कियों को वो चीज लव भी लगती है। तो मेरा तो फाइनल मैसेज यही रहेगा कि वो लव नहीं होता है। वो ऑब्सेशन वो कंट्रोलिंग बिहेवियर या फिर यू नो ओवरपज़ेसिव होना। तो यह सब टॉक्सिसिटी में ही आता है। तो बचो ऐसे रिलेशनशिप से क्योंकि आजकल बहुत सारी लड़कियां एंड लड़के भी गलत लड़कियों में यू नो इनवॉल्वड हैं। तो इस पे हम नेक्स्ट पडकास्ट लड़कों के पर्सपेक्टिव से करेंगे कि वो वो कैसे गलत लड़कियों के साथ हैं। लाइक जो गोल्ड डिगर्स एंड बहुत सारी
(31:13) लड़कियां भी गलत कर रही हैं आजकल लड़कों के साथ। तो इस पे हम पडकास्ट करते हैं। सो थैंक यू सो मच हर्ष फॉर जॉइनिंग अस। आपको कुछ लास्ट मैसेज देना है तो आप दे दो। बस यही है लड़की को टॉक्सिक बंदे पसंद आने ही वाले हैं। टॉक्सिक की डेफिनेशन हालांकि ये नहीं है तुम जो समझ रहे हो। ठीक है। ऐसा लड़का कभी भी लड़की को पसंद नहीं आता जो उसे मारता हो, पीटता हो या तो फिर ऐसा कुछ सीन है जो तो ऐसा टॉक्सिक की डेफिनेशन मेरे हिसाब से नहीं है। टॉक्सिक की डेफिनेशन मेरे हिसाब से वही है कि ऐसा बंदा जो अपनी लाइफ में फोकस्ड है। अनफेक्टेड रहता है। एंड ये सारी चीजें है।
(31:49) ओके? तो ऐसा तुम्हें भी बनना चाहिए। ओके? बार-बार अगर तुम्हें वो कॉल नहीं कर रही, मैसेज नहीं कर रही एंड तुम्हें फर्क पड़ रहा है तो दिक्कत है। तो बस इन सारी चीजों का ध्यान रखो। बाकी लाइक एंड सब्सक्राइब कर देना। ओके? या [हंसी] थैंक यू सो मच हर्ष। प्लीज लाइक, सब्सक्राइब एंड कमेंट गाइस। हाइप भी कर देना। जितना हेल्प करोगे उतना वीडियो लार्जर ऑडियंस तक पहुंचेगी। सो प्लीज लाइक, शेयर, सब्सक्राइब एंड कमेंट। एंड थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग।

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