Friday, May 22, 2026

Casual Sex = Casual Karma | Spiritual STDs | Dr Sayan Bhattacharjee | Hindi | EP32

Casual Sex = Casual Karma | Spiritual STDs | Dr Sayan Bhattacharjee | Hindi | EP32

Author Name:NAAD The Cosmic Sound

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@naadtcs

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=p9VgWcY5roM


ఈ వీడియోలో చెప్పిన ముఖ్యమైన ఆలోచనలు (key takeaways) సింపుల్‌గా, తెలుగులో ఇలా:

### ముఖ్యమైన పాయింట్లు

- **మరణం ఒక్కసారిగా జరిగేది కాదు**  
  శరీరం ఆగిపోయినా, సెల్ లెవల్‌లో ప్రాసెస్ కొంతకాలం కొనసాగుతుంది. ప్రాణ శక్తి (ప్రాణ వాయువులు) క్రమంగా బయటకు వెళ్తాయి.

- **“ఆత్మ” అనే భావనకు భిన్నమైన వివరణ**  
  స్పీకర్ ప్రకారం “ఆత్మ” అనేది ఒక వ్యక్తి గుర్తింపుతో ఉండే దాని కంటే, వాసనలు (desires), సంస్కారాలు (impressions) మరియు కర్మల సమాహారం.

- **శ్రాద్ధం యొక్క అసలు ఉద్దేశ్యం**  
  ఇది మూడు కోణాల్లో ఉంటుంది:
  - సోషల్: కుటుంబానికి సపోర్ట్, మానసిక స్థిరత్వం  
  - సైకాలజికల్: దుఃఖాన్ని అంగీకరించడానికి సహాయం  
  - స్పిరిచువల్: departed energy కి శాంతి ఇవ్వడం

- **శ్రాద్ధంలో తిలం (నువ్వులు), ఉప్పు వాడకం**  
  ఇవి “మెమరీ/ఎనర్జీ” ని గ్రహిస్తాయని చెప్పబడింది. వాటిని ఒక “వెక్టర్” లా ఉపయోగించి ఎనర్జీ పంపుతారు అని వివరణ.

- **క్యాజువల్ సెక్స్ = క్యాజువల్ కర్మ**  
  చాలా మంది పార్ట్నర్స్ ఉంటే, వారి “ఎనర్జీ/కర్మ ప్రభావాలు” మన మీద పడవచ్చు అని చెప్పారు (ఇది స్పిరిచువల్ దృక్పథం).

- **Spiritual STDs (ఉపమానం)**  
  ఫిజికల్ STDs లాగా, ఎనర్జీ/కర్మ స్థాయిలో కూడా ఇతరుల ప్రభావాలు మనపై పడతాయని భావన.

- **మరణం తర్వాత 14 నుండి 90 రోజులు ముఖ్యమైనవి**  
  ఈ సమయంలో ప్రాణ శక్తి పూర్తిగా డిసాల్వ్ అవుతుందని చెప్పారు. అందుకే శ్రాద్ధాలు ఆ సమయంలో చేస్తారు.

- **స్త్రీలు శ్రాద్ధం చేయకూడదు అనేది కఠిన నియమం కాదు**  
  వారు ఎక్కువగా ఎమోషనల్‌గా ఉంటారని, పరిస్థితిని హ్యాండిల్ చేయగలిగితే వారు కూడా చేయవచ్చు.

- **శ్రాద్ధంలో భోజనం చేయాలా వద్దా?**  
  ఆహారం కూడా భావోద్వేగాలను (energy) గ్రహిస్తుంది. కాబట్టి అది మీపై ప్రభావం చూపవచ్చు. కావాలంటే తీసుకోవచ్చు, లేదంటే తప్పుకోవచ్చు.

- **పిండదానం & గయా వెళ్లడం**  
  గయా వెళ్లకపోయినా రీతులు పూర్తవుతాయి. గయా ఎక్కువగా ఒక ఎనర్జీ స్థలం మరియు మానసిక సహాయం.

- **రుణానుబంధం (karmic bonds)**  
  మనం ఉపయోగించే వస్తువులు, మన సంబంధాలు—all create subtle connections.  
  ఉదాహరణ: ఇతరుల వస్త్రాలు వాడటం కూడా వారి “మెమరీ” ప్రభావం తీసుకురావచ్చు.

- **మన ఆలోచనల శక్తి (before sleep & after waking)**  
  నిద్రకి ముందు చివరి ఆలోచన, లేవగానే మొదటి ఆలోచన చాలా ప్రభావవంతం. అవి మన జీవితంలో మేనిఫెస్ట్ అవుతాయని చెప్పారు.

### చిన్న ఉదాహరణ
ఉదాహరణకు, మీరు ఎప్పుడూ నెగటివ్‌గా ఆలోచిస్తూ నిద్రపోతే → అదే భావం బలపడుతుంది.  
పాజిటివ్ ఆలోచనతో నిద్రపోతే → అది మీ మైండ్‌లో బలంగా నిలుస్తుంది.

***

ఇవి ప్రధానంగా స్పిరిచువల్/ఫిలాసఫికల్ అభిప్రాయాలు. ఇవి శాస్త్రీయంగా పూర్తిగా నిరూపించబడినవి కాదు—కాబట్టి ఆలోచించి, మీకు సరిపడిన వాటిని మాత్రమే తీసుకోవడం మంచిది.



Transcript:
(00:01) सो वंस अगेन वेलकम बैक टू आवर स्टूडियो ऑन नदा कस्मिक साउंड। हाउ आर यू डॉक्टर शायन? आई एम फाइन। ऑसम। कैसा चल रहा है लाइफ? इतने छोटे शब्दों में आंसर दे रहे हो आजकल? आजकल लोग छोटे वीडियो ज्यादा खाते हैं ना। अच्छा तो बड़ा वाला वीडियो नहीं खाते हैं क्या? तो हम इतने लंबे-लंबे पॉडकास्ट कर रहे हैं। तो किसके लिए कर रहे हैं? शॉर्ट क्रिस्पी। क्रिस्पी। ओके। डायरेक्ट हम टॉपिक पे आ जाते हैं। आज कौन से टॉपिक को लेकर बात करना चाहते हो? कोई भी जो आपको अच्छा लगे। कोई भी टॉपिक एनीथिंग दैट यू वांट टू डू। ओके। तो कुछ दिन पहले हम वुमस डे सेलिब्रेट कर रहे थे
(00:31) और वहां से एक क्वेश्चन एक्चुअली मेरे सोशल मीडिया पे एक दीदी ने ये क्वेश्चन डाला था कि अ ये जो श्राद्ध होता है ना तो श्राद्ध में लड़की लोग जो होते हैं उनका कोई अधिकार नहीं है। वो लोग नहीं कर पाते हैं। क्या वो बात सच है और अगर है तो इसके पीछे जो पूरा सिस्टम है उसके बारे में थोड़ा हमको जानकारी चाहिए। अगर मैं यहां से बात शुरू करूं कि श्राद्ध फीमेल्स कर सकते हैं कि नहीं कर सकते। तो फिर हमको इसको बेसिक में जाना पड़ेगा। बेसिक्स में जाना तो हम पहले तो बेसिक से समझने से पहले जो पिछले बार भी हमने डिस्कस किया था डेथ एंड डेथ के स्टेप्स वहां से शुरू करते
(01:04) हैं। राइट? क्योंकि वो चीज समझना जरूरी है श्राद्ध के प्रोसेस वहां क्या होता है क्या नहीं होता है और उन सब चीजों को समझने के लिए। डेथ कोई सडन एक प्रोसेस नहीं है। है ना? डेथ एक ग्रेजुअली होने वाला इवेंट है। एज अ मेडिको हम जब पेशेंट को डेथ डिक्लेअ करते हैं हॉस्पिटल में हम बेसिकली क्या देखते हैं कि रेस्पिरेशन होल्ड हुआ है कि नहीं? हम हार्ट रेट हार्ट बीटिंग बंद हुआ है कि नहीं? हम है ना? ईसीजी में फ्लैट लाइन है कि नहीं। ज्यादा से ज्यादा हम ईजी पे ब्रेन एक्टिविटी को देख सकते हैं। जो हम जनरली देखते नहीं। हम इन तीन चीजों के आधार पे ही और कुछ ब्रेन
(01:46) एंड रिफ्लेक्सेस देखते हैं। उनके आधार पे हम डिसाइड करते हैं पेशेंट डेथ है कि नहीं। लेकिन उस पल जब हम पेशेंट को डेथ डिक्लेअ कर देते हैं कि द पेशेंट इज नो मोर। हम उस पल भी पेशेंट के सेलुलर लेवल पे टिश्यू लेवल पे मेटाबॉलिज्म कंटिन्यूस चल रहा होता है। है ना? हमारे जो सेल्स हैं कुछ सेल्स ऐसे हैं जो इमीडिएट हाइपोगिया होने में, ऑक्सीजन नहीं पहुंचने में, तुरंत मर जाएंगे। कुछ लंबे समय तक जी सकते हैं। एक प्रश्न आ रहा है मेरे दिमाग में। ये जो फर्स्ट तीन स्टेप आप पहले देखते हो उसके बाद डेथ डिक्लेअर कर देते हो। क्या कभी ऐसा होता है कि इन तीन स्टेप
(02:21) देखने के बाद भी अगर आप डेथ सर्टिफिकेट डिक्लेअर कर दिए उसके बाद कोई यहां आदमी जिंदा हो गया है। मेरे साथ तो ऐसा हुआ नहीं है। लेकिन लिटरेचर में ऐसा डॉक्यूमेंटेड है। बहुत रीज़ंस हो सकते हैं उसके। ओके? कि उसके पीछे का रीज़ सबसे प्राइमरी तो हो सकता है कोई जूनियर डॉक्टर ने डीसी बिना देखे ही दे दिया हो। है ना? दूसरा देख सकते हैं कि शायद जैसे बहुत बार होता है ना कि हमने डेथ डिक्लेअ कर दिया किसी का। जनरली सीपीआर ही ऑफिशियल गाइडलाइंस में सीपीआर ही चलना होता है 45 मिनट्स उससे ज्यादा। तो वो सीपीआर का फेस गया नहीं हो। है ना? कार्डियक एक्टिविटी
(02:58) बंद हुआ। तुरंत घर वालों ने बोल दिया और घर वाले क्या करते हैं? पेशेंट के ऊपर गिर के रोते हैं। हम तो जब घर वाले पेशेंट के ऊपर गिर के रोते हैं बहुत बार मरीज को अरे तुम उठो वो करके मारते भी हैं। तो एक स्ट्रांग फीस्ट अगर हम पेशेंट के चेस्ट में डालें तो अराउंड 25 जूल का इलेक्ट्रिक करंट उस पे डिलीवर होता है। ओके। तो जनरली हम जब शौक देते हैं हम 200 इवन 300 तक 300 जूल तक जाते हैं। लेकिन 25 जूल्स में भी उतना कैपेसिटी है कभी कबभार। अच्छा कि अचानक से कार्डियक एक्टिविटी को स्टिमुलेट करें। दो बेसिकली जूल से मतलब फास्ट फ्लोइंग हार्ट रेट को हम बंद कर सकते हैं।
(03:37) तो वो चीज बहुत बार होता है। तो ऐसे एक दो कंडीशंस लिटरेचर में डॉक्यूमेंटेड है। बट ऐसा नहीं है कि ऑलरेडी कोई डेथ हो गया तो उठ के बैठ गया बाद में। ये जनरली नहीं है। बट हां डॉक्यूमेंटेशन है लिटरेचर में थोड़ा बहुत। वो इन सब कारण के वजह से ही है। कोई सुपर नेचुरल कोई स्पिरिचुअल रीज़ंस हम मेडिकल लिटरेचर में डॉक्यूमेंट नहीं है। नहीं है। तो अब जब पेशेंट को हमने डेथ डिक्लेअ कर दिया उस डेथ में क्या होता है कि सेल्यूलर लेवल पेशेंट इज़ स्टिल अलाइव। है ना? उसके मेटाबॉलिज्म चल रहे हैं जो एरोबिक मेटाबॉलिज्म से एनरोबिक में कन्वर्ट हो रहा है वो सब कुछ सेलुलर लेवल
(04:13) पे चल रहा है। तो इस चीज को हमारे सनातन धर्म ने या योगिक साइंसेस ने डिवाइड किया इनू द प्राण वायु प्राण शक्ति दिस प्राणा हैव बीन डिवाइडेड इनू फाइव जो हमने पांच पांच तरीके के हमारे वायु है ना पाना पाना समाधाना उदाना व्याना तो इसके आधार पे डिवाइड किया है तो द मोमेंट रेस्पिरेशन होल्ड होता है तो प्राणवायु जाता है प्राणवायु के बाद ग्रेजुअली ली धीरे-धीरे समाना एक के एक बाद निकलता रहता है। तो द हाईएस्ट फॉर्म जो है वो अराउंड वही 14 टू 48 डेज के बीच में जाके निकलता है। और अगर डेथ एक नेचुरल
(04:59) प्रोसेस के वजह से नहीं हुआ है। हम और डेथ हुआ है अननेचुरल प्रोसेस है कि तुम्हारा फिजिकल बॉडी बहुत ज्यादा इंटैक्ट है। हम यू हैव अ गुड अमाउंट ऑफ कार्मिक स्ट्रक्चर लेफ्ट बट सडनली क्रैश हो गया तुम्हारा फिजिकल बॉडी। कार्मिक स्ट्रक्चर उतना ही इंटेंस है। बट फिजिकल बॉडी प्राण को होल्ड करने के लिए सक्षम नहीं है। किसी भी रीज़न से आपने सुसाइड कर लिया हो, आपका एक्सीडेंट हो गया हो, आपने जहर खा लिया हो कि फिजिकल बॉडी और प्राण को होल्ड नहीं कर पा रहा। बट वो कामिक स्ट्रक्चर हो। तो ऐसे प्रोसेस में जो समाना और उन सब का निकलना है वायुस का निकलना है वो इवन अप टू 90
(05:38) डेज तक बॉडी से ग्रेजुअल प्रोसेस में निकल सकता है स्टेज बाय व्हिच द प्राण लिफ्ट तब तक तो बॉडी डैमेज हो जाएगा डैमेज हो जाएगा इसीलिए हमारा धर्म का यही चीज है कि द सेंसेशन ऑफ़ पेन खत्म होता है हम विद इन अ स्पैन ऑफ़ फोर आवर्स ओके ओके है ना हम डेथ से फोर आवर्स के बाद एज अर्ली एस पॉसिबल बॉडी को बांड करना। हां। क्योंकि उसके पीछे का रीज़न है जो आत्मा बाहर निकलता है। अब देयर इज नथिंग नोन एस आत्मा। इट इज़ ओनली वासना संस्कार। देयर इज़ नो इंटेलेक्ट। इट इज़ द ओनली टेंडेंसी। ओके? जो हमने आज तक कांसेप्ट बना लिया ना कि ये सिद्ध सिद्ध का आत्मा है। ये मेरा आत्मा
(06:16) है। ये ऐसा चलता ही नहीं है। यू नो आत्मा कुछ अलग चीज नहीं है। ये बस द वासना संस्कार अलोंग विकार स्ट्रक्चर। ये बाहर निकलता है। देयर इज़ नो इंटेलेक्ट। व्हाटएवर यू विल बी गिविंग इट इट इट विल मल्टीप्लाई टू इंटेंसिटी। ठीक? इंफिनिटी। तो ऐसे कंडीशन में जब आत्मा बाहर निकल जाता है शरीर से तो वो बार-बार रिपीटेडली उस शरीर को तो अपना मानता है। तो रिपीटेडली उस शरीर में घुसने का प्रयास करता रहता है। कि जब हम बोलते हैं कि आत्मा बोल के कुछ नहीं होता है। तो फिर हम किसी को समझाने के लिए बार-बार ये आत्मा आत्मा क्यों बोलते हैं? तो फिर हम वासना
(06:47) संस्कार के बारे में क्यों नहीं बोलते हैं? हमारा सनातन धर्म ऐसे बनाया गया है। स्टोरीज के आधार पे हमने छोटे-छोटे स्टोरीज बना रखे हैं। जिसे पहली बार देखने में लगेगा ये एक स्टोरी है। लेकिन आप जब गहराई में जाओगे तो आपको फील होगा कि वो स्टोरी स्टोरी नहीं है। क्यों नहीं है? क्योंकि सच्चाई को एज इट इज़ अगर मैं आपको अभी यहां बोलूं निराकार परबह्म और आप ही परबह्म हो। हम है ना? तो आप उसको अभी रियलाइज करने में बहुत दिक्कत हो जाएगा। हम देयर इज़ अ ह्यूज प्रॉब्लम दैट विल फेस। राइट? नाउ बट इफ आई से यू कि यह आकार है उनका और यहां से आकार से निराकार का जर्नी
(07:22) विल बी कंपेरेटिवली मोर इज़ियर ऑन योर पार्ट। ठीक है? तो जैसे कोई मूर्ति है मूर्ति पूजन है तो उसका जो बेसिक पर्पस है वो यही है। जैसे वही स्टोरी जो पिछले बार भी मैंने बताया था कि धृतराष्ट्र और गांधारी वाला वो तो हमने देखने पे एक स्टोरी बता दी कि दोनों का शादी हो गया और 100 कौरव हो गए। लेकिन था क्या गांधारी गांधारी था कि उन्हें देखना आता है ही चूज नॉट टू सी नॉट टू सी धृतराष्ट्र वास ब्लाइंड बर्थ ऐसे दो क्वालिटीज को अगर साथ रख लोगे आप तो आपके जीवन में दुशासन दुर्योधन यही जन्म लेंगे तो ये पहली बार देखने में तो स्टोरी लगता
(08:02) है लेकिन दोतीन बार जब हम अंदर घुसते हैं और अनलॉक करते हैं तो ये लगता है कि जिंदगी का वो सीख है जो हमें दे रहे दिए जा रहे हैं यही वो रीज़ है बस हम ठीक तो जहां हम थे कि जब ये आत्मा शरीर शरीर से बाहर निकल गया। आत्मा अगर शरीर से बाहर निकल गया तो वो तो बार-बार वहां घुसने की प्रयास करेगा। तो हमारा सबसे इंपॉर्टेंट बात है कि सबसे पहले हम जो करते हैं पता नहीं आजकल लोग यहां करते हैं कि नहीं। लेकिन हां जिन परंपराओं में अब तक हमारे प्राचीन तत्व को अभी भी पकड़ के रख के उसके साथ चलना रखा उन्होंने। यू हैव टू टाइप बोथ ऑफ योर टोस टुगेदर। जो पैर कहे। क्यों?
(08:41) क्योंकि दोनों पैर अगर ऐसे सीधे में आके एक साथ जुड़ जाएंगे दोनों एक साथ हम है ना तो पैर तो दोनों सीधे हो गए तो आपका जो मूलाधार है वो ब्लॉक हो गया ओके द मोमेंट मूलाधार ब्लॉक हो गया तो आप दोबारा रीएंट्री नहीं मार पाओगे अब जो बार-बार प्रयास है रीएंट्री नीचे से ऊपर की तरफ का जर्नी मूलाधार से होते हुए जाता है तो वो चीज आप नहीं कर पाओगे तो ये टेक्निक होता है द मोमेंट द पेशेंट इज़ डेड टाई टोज़ एंड बर्न द बॉडी एज अर्ली एज पॉसिबल भैरवी महायातना के बारे में भी पिछली बार हमने बहुत डिटेल में बात किया तो उसके बारे में अभी और डेथ के बारे में
(09:16) नहीं बात करते लेकिन ये स्टेप्स है तो जब यहां तक हो जाता है बॉडी बर्न हो जाए तो अब उसको डिसोल्यूट होने में शुरू होता है क्योंकि उसके पहले तो ये ऋणानुबंधा जो है और ये सब कुछ बार-बार उसे वही खींचा आता है ना अच्छा ऋणानुबंधा इज अ बॉन्डेज विथ दिस मटेरियलिस्टिक थिंग दैट यू हैव अंक है ना तो जो आपके यूज़ किए हुए सामान है उसे डिस्ट्रॉय करना इज गुड। मतलब सो दैट आपका कोई अटैचमेंट यहां ना रहे। अच्छा राइट तो वासना संस्कार विदाउट एन इंटेलेक्ट जब ऊपर चला जाता है उस लेवल पे वो उसे ही आत्मा का भी बोला गया है। आत्मा का कोई अलग पावर
(09:56) नहीं है कि आत्मा ना ही कुछ ऐसा है कि वो पॉजिटिव आत्मा हो। नेगेटिव आत्मा हो, भूत है, वो दिस इज़ समथिंग प्रेत योनि, गंधर्व योनि ये अलग-अलग योनियां है अलग-अलग चीजों के आधार पे। लेकिन हम जो सोचते हैं भूत मतलब कोई मर जाए भूत दिस इज़ नॉट हां यू कैन फील द प्रेजेंस यू कैन सी द कार्मिक स्ट्रक्चर यहां बैठे भी बहुत आपको अगर आपको देखना आता है तो देखो देयर आर अ लॉट ऑफ़ विद अ कार्मिक स्ट्रक्चर हम ये जब शरीर निकल गया हम ठीक तो वो कार्मिक स्ट्रक्चर डिॉल्व होता है। अब कोई किसी का अगर कार्मिक श्र डिॉल्व नहीं हो एक्सीडेंटल डेथ हो तो उसको लंबा समय लगता है शरीर से
(10:34) निकलने में अप टू 90 डेज जब वो चीज हो जाए तब हम श्राद्ध का प्रक्रिया शुरू करते हैं श्राद्ध का प्रक्रिया अननेचुरल डेथ में तो वो तीन दिन में ही तो कुछ श्राद्ध कम हो जाता है ना ऐसा नहीं है या चार दिन में ऐसा नहीं है ये इसका साइंस यही है कि श्राद्ध का प्रक्रिया होता क्या है हम श्राद्ध का प्रक्रिया जो है वो ये है कि उसका एक स्पिरिचुअल एस्पेक्ट है हम्। उसका एक सोशल एस्पेक्ट है। उसका एक साइकोलॉजिकल एस्पेक्ट है। जब किसी का देहांत होता है तो सोशल एस्पेक्ट पे सब लोग आपके घर आ जाते हैं। हम हम है ना? हमने 13वीं का एक टाइम रखा। हम दो इसके बारे में गरुड़
(11:14) महापुराण के अंदर अगर आप जाओ तो बहुत कुछ डिटेल में लिखा हुआ है चीजें हैं तो मतलब आई डोंट पर्सनली बिलीव कि कोई भी ऐसा चीज को हम मतलब हम अंधविश्वास को नहीं बढ़ाना लेकिन हर चीज का एक वैज्ञानिक और विज्ञान के रूप में आंसर्स है। अच्छा है ना? जब तक मैं वो आंसर्स को नहीं मानता तब तक मैं वो काम नहीं करता। हां। मुझे पूजा अगर कर रहा हूं तो मुझे पूजा का मतलब चाहिए। अगर मैं आरती कर रहा हूं तो मुझे आरती को समझाओ तो आरती क्यों करूं? भक्ति मार्ग में मैं कर रहा हूं तो इट्स वेल फाइन। अगर मैं भक्ति के वजह से कर रहा हूं तो मुझे आरती धूप
(11:52) अगरबत्ती जलाने का आग जलाने का मतलब क्यों? क्यों जलाऊं? तो यहां बैठ के उतना ही भक्ति में लीन हो सकता हूं आप पे। उतना ही प्रेम और वैराग्य में जा सकता हूं। अगर मैं स्टिल मैं एक दिया जला रहा हूं तो मुझे ये समझना होगा ना वो दिया मैंने जलाया क्यों? एक्सक्ट्ली मेरा बात है। अगर मैंने भक्ति में किया हम तो तो मैं समझ रहा हूं लेकिन दिया जा मैं भक्ति चतुरी चला रहा हूं तो देयर इज़ सर्टेन पर्पस ऑफ़ डूइंग इट एंड आई हैव टू अंडरस्टैंड द साइंस बिहाइंड इट वंस आई अंडरस्टैंड द साइंस आई कैन मूव अहेड करेक्ट तो ऐसे ही जब आत्मा शरीर से निकल जाता है श्राद्ध
(12:25) ऐसा चीज है उसका जो साइकोलॉजिकल डोमेन है और सोशल डोमेन है सोशल डोमेन में सब लोग आपके घर रहते हैं हम है ना सब लोग जब आपके घर रहते हैं तो आपको थोड़ा सा साइकोलॉजिकली ई होता है उस आप भी तो बॉन्डेज में थे। आप भी तो मोह बंधन में थे। तो वो मोह बंधन काटने में थोड़ा मदद होता है। यह 101 दिन लोग रहते हैं घर पे तो आपके लिए थोड़ा सा इजी हो जाता है। जो स्पिरिचुअल एस्पेक्ट है वो क्या है कि वो वो जो जा रहा है उसका जाने को थोड़ा इजी करना। उसको थोड़ा और प्लेजेंट फील करवाना। दैट इज द मेन पर्पस। अच्छा और कुछ नहीं है। उसके पास इंटलेक्ट नहीं है। द आप जो
(13:05) भी एनर्जी वहां तक पहुंचाओगे वही एनर्जी मल्टीप्लाई हो जाएगा इनफिनिटी तक। है ना? तो तो बेटर टू मेक इट लिटिल प्लेज़ेंट फॉर दैट वासना संस्कार। सो दैट ही कैन मूव ऑन। तो उनको कैसे पता चलता है कि ये सब चीज चल रही है या फिर एनर्जी यहां से कैसे वहां तक ट्रांसफर होती है देयर आर टेक्निक्स देयर आर तांत्रिक टेक्निक्स देयर आर डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ तो हम तो काला भेद बकिया है उसमें और भी बहुत कुछ है। तो हमें तो ये तांत्रिक टेक्निक्स कुछ पता नहीं है। तो इसीलिए आप किसी को बुला के लाते हो। अच्छा पंडित जी को बुला के लाते हो तो फिर पंडित जी को बुला के लाते हो।
(13:35) क्यों? उसमें आप श्राद में देखोगे देयर इज अ ह्यूज रोल ऑफ तिल एंड सॉल्ट। क्यों आप अभी अगर कोई आपको नमक आप नमक का कटोरा क्यों नहीं पकड़ते हो? बिकॉज़ साल्ट हैज़ अ लॉट ऑफ़ मेमोरी। द मोमेंट आई एम टेकिंग साल्ट डायरेक्टली फ्रॉम योर हैंड। तो आई नो आई एम द ट्रांसफरिंग आई एम ह्यूज अमाउंट ऑफ़ मेमोरी। अब ये एक स्ट्रेटा के लिए अंधविश्वास है। हां। और मेरे लिए भी था। हम तब तक जब तक मैंने इसके साइंस को नहीं समझा था। उससे पहले मैं नमक लेता था। हां हां। क्योंकि मैं वही चीज है ना कि जब तक मुझे समझाओगे नहीं और मैं उस चीज को क्लेरिटी से नहीं समझूंगा तो मैं उस चीज
(14:10) को नहीं करूंगा। बाद जब उठ ही गया है तो फिर थोड़ा दर्शकों को बता दो कि वो क्यों नहीं करना चाहिए। मेमोरी दिस इज द मतलब वाटर है वाटर आप जिसके भी हाथ से नमक ले रहे हो वो नमक हैज़ अ क्वालिटी टू अब्सॉर्ब थिंग्स जैसे कलर है कलर है ठीक है आप अगर कहीं एग्जाम देने जा रहे हो और आप ब्लैक कलर के शर्ट पहन के जाओगे तो क्या होगा एग्जाम हॉल में चारों तरफ क्या हो रहा है चारों तरफ ए्जायटी है। सब लोग टेंशन में लिखे जा रहे हैं। सेंस ऑफ़ कंपटीशन है। एंड ब्लैक कलर जो है वो एनर्जी को अब्सॉर्ब करता है। लाइट एनर्जी को भी करता है वो। हां। ऑल सॉर्ट ऑफ़
(14:47) एनर्जी को अब्सॉर्ब करता है। है ना? तो कोई ऐसा प्रोसेस हो जहां आपको आसपास का एनर्जी बहुत ताकतवर एनर्जी हो तो आप ब्लैक पहनते हो। क्योंकि आपको उसको एनर्जी जैसे तांत्रिक प्रोसेससेस है। आपको कुछ तांत्रिक करना है, पूजा है, मंदिर में जा रहे हो तो आप ब्लैक पहन के जाते हो। और वाइट आप कहां पहनते हो? वाइट क्या करता है? रिफ्लेक्ट आउट करता है। तो रिफ्लेक्ट जब करता है जो एनर्जी आपको अब्सॉर्ब नहीं करना ऐसे जगह जब आप जा रहे हो किसी का डेथ में जा रहे हो। है ना? तो अननोइंगली हम सब वही कर रहे हैं। डेथ पे आध वाइट पहन के जाते हैं।
(15:16) लेकिन मेरा बात है कि समझाओ तो क्यों? हम है ना? द सेम थिंग अबाउट साल्ट है। साल्ट इज़ अ प्रॉपर्टी टू अब्सॉर्ब। साल्ट हैज़ अ प्रॉपर्टी टू अब्सॉर्ब। आप सिर्फ साल्ट वाटर को रिटेन करता है। ऐसा नहीं है। आप साल्ट का डब्बा खोल के रख दो पानी अब्सॉर्ब कर लेगा वो। इट एब्सॉर्ब एनर्जी? इट अब्सॉर्ब मेमोरी। नाउ हाउ इट अब्सॉर्ब्स एनर्जी एंड मेमोरी। अगर न्यूरो बायोलॉजी के बात करें मेमोरी तो आर जनरली प्रोटंस। हम ठीक है ना? तो इसके बारे में बात करना है तो मुझे और एनर्जी तत्व के बारे में घुसना होगा। उसके गहराई में घुसना होगा जो शायद एक पॉडकास्ट के लिमिट
(15:49) के कई गुना बाहर है कि एनर्जी क्या है? वहां से शुरू करना होगा। एकदम पतंजलि योग सूत्र में जाना होगा। ठीक? लेकिन हां द बेसिक कांसेप्ट इज़ इट अब्सॉर्ब्स एनर्जी। नाउ अब आपके पास है वो साल्ट। आपने उस चीज को अब्सॉर्ब किया। वो साल्ट किसी और के पास था। वहां अब्सॉर्ब किया। तो इसके चारों तरफ क्या हुआ कि अलग-अलग लोगों के एनर्जी का एक हम गोला बन गया। अब आप उसे अपने हाथों से ले रहे हो। हम अब मेरा बात समझ रहे हो? उसको खोल के खाए जा रहे हो। ठीक? तो आप उस पार्ट को अपने में अब्सॉर्ब कर रहे हो। तो किसी और का चीज जो आप तक कभी आना ही नहीं चाहिए था वो आप फेस कर
(16:29) रहे हो। हम है ना? मल्टीपल सेक्सुअल पार्टनर वाला थिंग ना। क्यों मल्टीपल सेक्सुअल पार्टनर्स नहीं होना चाहिए। इसी रीज़न ही नहीं होना चाहिए। तो क्योंकि किसी और का बैड लक अचानक से आपके ऊपर से निकलेगा और आपको पता भी नहीं है कि यह चीज मेरी जिंदगी में क्यों हुआ एंड यू डोंट नो आपको लगेगा जैसे हर लोगों को लगता है कि ये तो बाय चांस हुआ अचानक से हुआ भाग्य के लिए हुआ लेकिन ऐसा थोड़ी है लोग एस्ट्रोलॉजर के पास भागेंगे एस्ट्रोलॉजर जस्ट 0.
(16:55) 1% ऑफ़ द थिंग एस्ट्रोलॉजर डजंट कंट्रोल एनीथिंग इन द वर्ल्ड है ना इट कंट्रोल्स 0.1% अगर आप अपने कार्मिक रिडीम के ऊपर निकल गए तब एस्ट्रोलॉजी इज़ वेरीेंट फॉर यू क्योंकि दैट वन पर्सन क्रिएट्स मेनीथिंग लेकिन आप काम, क्रोध, लो, मो, अहंकार के बीच में बैठे हो। आप उसी से जूझ रहे हो। अब आप एस्ट्रोलॉजी से सोच रहे हो कि एक पत्थर आपका जिंदगी बदल देगा। तो कहीं पे तो कुछ गलत हो रहा है। रिस्पेक्ट एस्ट्रोलॉजी डीपली बट आई नो व्हेन एंड वेयर टू प्लाई। हम बात वहां है। है ना? ऐसे ही जब नमक आप दोगे तो आप एनर्जी अब्सॉर्ब कर रहे हो और आपके जिंदगी में भी वही चेंजज़ आ रहे हैं। इसलिए हम क्या करते
(17:28) हैं? हम नमक एक दूसरे के हाथ से कभी लेते ही नहीं। हम हम ठीक। ग्राउंडिंग करते हैं, अर्निंग करते हैं, एनर्जी को निकालने के प्रयास करते हैं। उसके बाद उसको उठाते हैं। यही चीजें होते हैं। टिल अगेन श्राद्ध में क्यों? टिल अगेन हैव अ पावर ऑफ होल्डिंग ऑन टू मेमोरी। तो कोई श्राद्ध विदाउट टिल हो ही नहीं सकता। अच्छा। ठीक। तो अब श्राद्ध की जो प्रोसेस है तो हम इसको क्या कर रहे हैं कि यहां का जो एनर्जी है वो वहां तक इस सम चीजों के दौरान हम उसको ट्रांसफर किए जा रहे हैं। समथिंग दैट हैज़ मेमोरी। अच्छा सारे जो मेमोरी है समथिंग दैट हैज़ द पावर
(18:06) टू होल्ड मेमोरी। मेरे पास एक ऑप्शन है उसमें क्या मेमोरी इनफ्यूज करूं। ओके। बात मेरा समझ रहे हैं? ये खाली मेमोरी कार्ड की तरह है। अच्छा। उसमें मैं क्या इनफ्यूज करूं? करके उसको कहां तक भेजना है मेरे को। अच्छा। अच्छा अच्छा ये एक व्हीकल है ये एक वेक्टर है तो ये मेमोरी भेजते क्यों है उनको मतलब ताकि इसका सारे जो बॉन्डिंग है मुझे प्लीज मुझे शांति भेजना है सपोज अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा आनंद भेजना है तो एक जरिया तो चाहिए तो क्योंकि मैं तो बैठा हूं अन्नमय कोश में हां मुझे विज्ञान में आनंदमय कोष को क्रॉस करके उसके बाद फिजिकल
(18:41) रिलेट के बाहर भेजना है तो यहां से इस फिजिकिटी को क्रॉस करने के लिए भी तो कुछ चीज चाहिए मेरे को वेक्टर चाहिए मेरे को तो ये सब वो वेक्टर के पार्ट्स हैं। समझ गए? कालवे क्रिया में भी वी नीड वेक्टर्स। बिकॉज़ वेक्टर का अलग एक रोल है। हम ठीक? ये मैं बहुत सिंपलीफाई वे में बता रहा हूं। बहुत इतना सिंपलीफाई वे शायद समझने में डिफिकल्ट नहीं होगा क्योंकि मैं बहुत सारे ऐसे कॉम्प्लेक्स पॉइंट को जानबूझ के हां। हां थोड़ा सा हट रहा हूं क्योंकि वो तब बताना ज्यादा बेटर है क्योंकि जब हम मतलब थोड़ा और डिटेल जानकारी मिल जाए हम लोग नहीं तो मिस प्रैक्टिस होने का एक
(19:21) संभावना अब हम कुछ और भेज दे कुछ और भेज दे फिर कुछ और आ जाएगा अच्छा ऐसा भी होता है यहां पे प्रोसेस शुरू हुआ तो पहला कुछ दिन हमें शोक मनाने देने का टाइम होता है और उसी टाइम में पूरा समाना पाना बाना निकलते निकलते 14 दिन लग जाता है नॉर्मली तो बॉडी का वो पूरा सिस्टम निकल गया हम वो आत्मिक एनर्जी लेवल निकल गया तो अगर जैसे तू बोल रहा है कि बॉडी से निकल गया बॉडी तो पहले ही बर्न हो चुका है तो उसके बाद वो कैसे निकलता है वो तो पहले ही निकल गया सिर्फ अन्नमय कोष को बर्न किया ना हमारे एक्सिस्टेंस का ओके बाकी सब रह गए थे अभी तक इंटेक्ट ही तो है
(20:00) ओके व्हाट इज दिस बॉडी दिस इज ओनली अन्नमय कोष आप सोचो आप जब बच्चे थे आप इतने से साइज के जब थे तो आपका का जो टोटल मास था हम आज आपका मास हां उस समय 1ढ़ किलो था या 2 किलो आधा किलो और अभी 60 किलो तो ये जो ये जो 75 हां ये जो इतने किलो आपने गेन किया मास कैन नाइदर बी क्रिएटेड नर बी डिस्ट्रॉयड मास आपने कहीं से लोन ही तो लिया है किसके थ्रू लोन लिया है कहां से लोन लिया है जो आप जो खाए हो वहां से आपने वो एटम्स और मॉलिक्यूल्स को गेन किया है। सांस के थ्रू आपने उस ऑक्सीजन और नाइट्रोजन को गेन किया है। हम वाटर के थ्रू आपने हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को गेन
(20:38) किया है। इसी के थ्रू तो आपने वह गेन करके अपने में स्टोर करके आज इस साइज के हो। तो यह है क्या बेसिकली? हम ये जो आप देख रहे हो ये बेसिकली अन्नमय कोष आपका एक्सिस्टेंस ऑन द लेवल ऑफ़ फूड बॉडी है। बस इट इज़ जस्ट एन एक्यूमुलेशन ऑफ़ डिफरेंट मॉलिक्यूल्स ऑफ़ फूड। हम बस और कुछ भी है सिर्फ एटम्स ऑफ उसका मॉलिक्यूल्स का तो एक ढांचा है बस अन्नमय कोष के बाद के जो पांचों कोष है मैंने ये भी मान लिया अन्नमय मनोमय विज्ञानमय तक फिजिकल रियलिटी में आता है उसके बाद के दो कोश फिजिकल रियलिटी में नहीं आता है उसके बाहर सपोज चला जाता है चीजें ठीक लेकिन उस लेवल तक
(21:16) भी हमें जब चीजें निकल जाए तभी तो पूर्ण डिसोल्यूशन हम बताओगे आप तो वही चीज होता है यहां पे तो श्राद्ध में भी अराउंड 14 डेज टाइम लगता है नॉर्मल कंडीशन में और एब्नॉर्मेलिटी में अप टू 90 डेज समय लगता है। ये डिसोल्यूशन होने में। हम ठीक। अब जहां पे ओल्ड एज है हम कोई लंबे समय तक बीमार था। कार्मिक स्ट्रक्चर डिॉल्व हो गया है। वहां घर वालों को भी ये चीज एक्सेप्ट करने में इजी हो जाता है। अच्छा। उसका मेंटल कंडीशन भी थोड़ा कम रहता है। कि ग्रेजुअल प्रोसेस में धीरे-धीरे प्राणवायु डिप्लीट होते ग्रेजुअली एक इंसान ओल्ड एज आके निकल गया। हम ठीक। अब
(21:57) अगर ये चीज इंटेंस हो हम एक्सीडेंट के बाद हो सुसाइड के बाद हो तो जो वास सबसे निकला है जिसे हम महात्मा बोल रहे हैं उसके लिए भी तो वो बहुत ज्यादा पेनफुल है। हम इसलिए हम क्या करते हैं? 14 दिन के एस्पेक्ट को इनिशियली कुछ दिन में हम थोड़ा सा उसे रिलैक्स करने की कोशिश करते हैं। ग्रेजुअली हम बाद में भी करते हैं। एक महीने बाद भी करते हैं और रिपीटेड बेसिस में उस प्रोसेस को कंटिन्यू करते रहते हैं। अब आता है जो आप बता रहे हो कि ये प्रोसेस में फीमेल्स क्यों नहीं अलाउड है? हम कहीं देखा है आपने लिखा हुआ है ऐसा। मैंने तो अपने पूरे कल्चर में ये कहीं
(22:34) नहीं देखा है कि फीमेल्स नहीं अलाउड है। जनरली वो करते नहीं है। शायद इसीलिए वो बन गया है कि फीमेल्स आर नॉट अलाउड। इन बंगाल दैट्स व्हाई आई एम आस्किंग इन दिस कल्चर अभी मैं इधर त्रिपुरा अगरतला में देखता हूं शमशान में फीमेल्स नहीं जाती नॉर्थ इंडिया में तो शमशान में फीमेल नहीं जाती है ना अभी जाता है कई कई जगह पे मैंने देखा है मैंने खुद देखा है ये यहां की कल्चर है फीमेल्स को इसलिए थोड़ा सा अवॉइड किया जाता है कि फीमेल इलनेस अब बात आ जाता है ना शक्ति और शिवा का अंतर क्या है फीमेल इलनेस तो फीमेल इलनेस इस नेवर 12 शक्ति इज़ ऑलवेज 11 शक्ति थोड़ी हिली हुई
(23:07) है अच्छा अब ये बात एक कंट्रोवर्सी है इसका न्यूरोल न्यूरोलॉजिकल बेसिस है जरूर। ये मैं बोलते ही आपके बहुत सारे व्यूअर्स मेरे ऊपर हेट्रेट के वो लाएंगे। लेकिन हां आप अगर नोटिस करोगे कि आप खुद बताना कि कोई मेल गाड़ी चला रहा हो वो राइट में इंडिकेटर देता है तो वो राइट में ही मुड़ेगा। उसका चांस कितने परसेंट है? ऑलमोस्ट 99% 99 कि वो राइट में देके राइट में मुड़ेगा। कोई फीमेल है वो अगर राइट में इंडिकेटर देता है और राइट में ही गाड़ी जाएगा उसका चांस कितने परसेंट होता है मैं कुछ नहीं बताऊंगा आप समझ गए ना मैं भी कुछ नहीं बताऊंगा मैं भी नहीं बता रहा
(23:48) तो देयर इज सम देयर इज़ अ नेचुरल इंक्लाइनेशन लेकिन फीमेल में ऐसे क्वालिटीज और ताकत है जो आप में नहीं है और मुझ में नहीं है। हां फीमेलिनेस में एक ह्यूज अमाउंट ऑफ स्ट्रेंथ है। वह जिस प्रोसेस से गुजरते हैं, जिस लेवल ऑफ़ इमोशनल इंटेंसिटी है, वह इंटेंसिटी आप और मुझ में हो ही नहीं सकता। तो, नेचर ने ही दो चीजों को जो आज बोलते हैं ना कि मेल एंड फीमेल इक्वल है, वो सब गलत बोल रहे हैं। मेल एंड फीमेल इक्वल हो ही नहीं सकता। वो भले ही अलग चीजों के लिए है। हम आप बात समझ उसका मतलब ये नहीं कि फीमेल इनस को घर के अंदर बैठ के चूल्हा का काम
(24:20) करना है। नो वो चीज नहीं है। लेकिन जो बेसिक अन्नमय कोश का बनावट है हम वो ही अलग है। हम आप बात समझ रहे हो? उनके जैसे इंटेंसली आप प्यार नहीं कर पाओगे। उनके लिए इंटेंसली आप इमोशंस को एक्सप्रेस नहीं कर पाओगे। हम मेरा बात समझ रहे हो? शक्ति शक्ति जब साथ हो और शिवा अलग है शिवा भोला है बात समझ रहे हैं अगर टशट दर्शन में आप जाओगे हमारा सनातन धर्म में जो छह फिलॉसोफीस है उसमें एक फिलॉसफी सांख्य फिलॉसोफी है है ना सांख्य फिलॉसोफी में शिवा शक्ति जब जॉइन होता है द फर्स्ट एक्सप्रेशन इज़ महंत महंत द फर्स्ट हम अहम भी नहीं उसके बाद
(25:04) रजस्ता सत्य बहुत कुछ और क्या अल्टीमेटली दिस इज़ अ जर्नी ऑफ़ हाउ देयर इज़ हाउ हाउ द एनर्जी गेट गेट इटसेल्फ कन्वर्टेड इनू द कॉन्शियसनेस इनू मैटर। ओके? ठीक। इसका एक फोटो भी है डॉ. वसंत लैड जी जो प्रोमिनेंट आयुर्वेदिक फिजिशियन है। उनके एक बुक है द टेक्स्ट बुक ऑफ़ आयेदा पार्ट वन के इनिशियल चैप्टर्स में ही। एकदम क्लियरली एक्सप्लेन शट दर्शन का वो फोटो भी है। अच्छा इस टॉपिक में थोड़ा जाने से पहले एक डाउट मेरा क्लियर कर दें कि ये शिवा को हम 12 क्यों बोलते हैं और शक्ति को हम 11 क्यों बोल रहे हैं? शक्ति थोड़ा सकी है ना मतलब
(25:43) 12 ही क्यों को कंट्रोल 10 कुछ भी हो सकता था लेकिन ये 12 ही क्यों हम साइकिल्स में चलते हैं। आप अगर अपनी जिंदगी को देखोगे वो भी साइक्लिक पैटर्न में चलता होगा। हम है ना? कुछ दिल का नेगेटिव फज़ आता है। फॉललोड बाय अच्छा। फिर एक नेगेटिव फज़ आता है। अब हर इंडिविजुअल का साइकिल का जो लेंथ है वो अलग-अलग है। अच्छा। वन इज़ सोलर साइकिल, वन इज़ लूनर स ल्यूलर स ल्यूलर साइकिल इज़ ऑफ़ 28 डेज। सोलर साइकिल इज ऑफ़ 12 इयर्स। 12 इयर्स। क्योंकि सूरज को एक बार घूमने में 12 साल लगते हैं। हम ठीक। चंद्रमा को पृथ्वी को घूमने में 28 दिन लगते हैं। हम ठीक। जितना आपका साइकिल का
(26:29) लेंथ इंक्रीस होता जाएगा आप उतना ही शांत स्वरूप होते रहोगे। और आपका साइकिल जितना रिपीटली घूमेगा आप उतना ही बेचैन होते रहोगे। अंग्रेजी में पागल लोगों को देयर इज़ नथिंग पागल। WHO ने गाइडलाइंस से हटा दिया। पागल नहीं है। वो मेंटली डिसेबल्ड इंसान जो है जो थोड़ा सा बीमार है ऐसे लोग उनको ल्यूलेक बोला जाता है। तो ये ल्यूलेक शब्द ल्यूनर से लिया गया है और इसी कांसेप्ट के आधार पे लिया गया है। अच्छा क्योंकि उनके साइकिल्स बहुत छोटे होते हैं। तो दिस इज द रीज़न व्हाई वी कंप्लीट शिवा बिकॉज़ हम सोलर साइकिल की तरफ जा रहे होते हैं और दस इट इज 12 12 12 इट इज ऑल
(27:09) अबाउट द सोलर स क्योंकि द इन्फ्लुएंस ऑफ़ एक्स्ट्रा सेलेस्टियल ऑब्जेक्ट ऑन अस इज़ सिग्निफिकेंट ओनली वेल वी हैव क्रॉस द डायमेंशन ऑफ़ कर्मा मतलब कार्मिक इन्फ्लुएंस अगर इतना लिगलिजिबल हो तब जाके वो पॉइंट वन% ह्यूज हो जाता है। मतलब अगर मैं पढ़ाई कर रहा हूं क्लास से में अगर और मैंने इतना नहीं पढ़ रखा है कि मैं पास हो जाऊं तो मेरे लिए अभी एनसीआरटी किताब पढ़ के पास होना इज मोरेंट रेदर देन मैं यहां बैठ के जेई का प्रिपरेशन लूं हम नीट का प्रिपरेशन लूं हम है ना लीट का प्रिपरेशनेंट है बट किन लोगों के लिएेंट है जिनका बेस क्लियर है जिनका चीजें हो
(27:53) रखी है उनके लिए लीट प्रिपरेशन इजेंट हम बट लॉट कि उन लोगों के लिए नहीं है जहां मुझे एनसीआरटी अभी पढ़ना खत्म नहीं हुआ है। हम लाइक मी मेरा बात समझ रहे हैं ना? तो ये चीज है तो एस्ट्रोलॉजी एक्स्ट्रासेलेस्टियल ऑब्जेक्ट्स आरेंट ओनली वेल यू नीड अदरवाइज फोकस ऑन द कर्मा कर्मा कैन डू मिरेकल्स टू योर लाइफ। बाप तो ये है 12 वर्ष शक्ति और शिवा तो इस वजह से जो फीमेलि है वो फीमेलनेस जो चीज बना पा रहा है तो अब किसी का डेथ हो जाए उसके लिए तो इंटेंस एक फील ऑफ वॉइड स्पेस क्रिएट हो गया ना हम तो उस इमोशन को वो बहुत सिग्निफिकेंटली फील कर पाती है तो
(28:36) वहां ना उसे बहुत ज्यादा और पेनफुल एक्टिविटी होता है। तो दिस इज़ द रीज़न हम उनको थोड़ा सा अलग है। इफ अ फीमेलि पर्सन हैज़ द कैपेसिटी टू फेस हैंडल हम एंड येट बी इन अ स्टेबल मोड हम एंड शी इज़ मोस्ट वेलकम टू कम ओके इफ अ फीमेलि हैज़ मेड हरसेल्फ इंटू अ स्टेट वेयर एक्सटर्नल इनफ्लुएंसेस कैन नॉट चेंज हर इनर एनर्जी पैटर्न शी इज़ मोस्ट वेल क्योंकि फीमेल क्योंकि इमोशनल होती है थोड़ा सा आपने नोटिस किया ना थोड़ा सा एनर्जी वनरेबल होती हम हम इसलिए आप अलग-अलग जगहों पे देखो कि इन्फ्लुएंस भी उनप ज्यादा होता है। हम माता के जगराते हुए बैठे ना माता आ गई।
(29:19) माता-वाता तो आती नहीं है। देर इमोशंस इतने इंटेंस हो जाते हैं। हम आप बात समझ रहे हो ना? तो इफ इफ अ पर्सन इफ इफ यू मे फील्स आई एम इमोशनली फुल्ली स्टेबल आई कैन हैंडल इट। हम तो मोस्ट वेलकम यू कम एंड। अच्छा ये क्यों बोला जाता है? यह अभी एक ट्रेंडिंग में चल रहा है कि हम जब किसी श्रादवारे में जाते हैं तो वहां कोई अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए या फिर ऐसा कुछ काम नहीं करना चाहिए उसको मतलब ये रिचुअल जो है वो रिचुअल ही बंद कर देना चाहिए तो ये रिचुअल का कुछ सिग्निफिकेंस कारण मतलब है क्या फूड अगेन इज़ अ थिंग दैट होल्स हम स्वातिक खाना खाओगे स्वातिक जाएगा राजसिक
(30:00) खाना जाओगे राजसिक जाएगा तामसिक जाओगे तो तामसिक जाएगा हम ठीक अब किसी घर पे सिर्फ दुख है। हम पेन है हम तो डेफिनेटली उस फूड में कुछ तो इफेक्ट वाइब्रेशन ऑफ़ पेनल है। हम आप मेरा बात समझ रहे हो ना? उस पे को उसने अब्सॉर्ब किया है। तो उस पे को अगर आप लोगे तो आपका हल्का सा वो पेल आना शुरू होगा। इफ यू वांट टू शेयर दैट पे। इफ यू वांट टू फील दैट पे। इफ यू वांट टू लीव दैट पे तो यू कैन हैव द फूड। अगर आपको नहीं उसमें इन्वॉल्व होना तो यू कैन गो अहेड। और आज के जमाने में जैसे खाना होता है कि श्राद्ध में जाके कहीं और हमें इनवाइट कर
(30:39) दिया। किसी और ने खाना बनाना। हु इज नॉट इवन इमोशनली इनवॉल्व इनू इट। तो उसका मतलब ही नहीं। उस फूल खाने में तो एनर्जी आया ही नहीं ना। अच्छा पिछले जन्म में लोग मतलब घर के लोग ही वो खाना प्रिपेयर करते थे। बिल्कुल आएगा। तब तो कैटरिंग सर्विस था नहीं। एक्साक्ट्ली। हां। पिछले जन्म में नहीं कुछ दिन पहले तक। तो अभी हम जो सब चीजों के बारे में जान रहे हैं या फिर पालन कर रहे हैं हमारे अभी की लाइफ में वो पुराने जमाने के रूल्स थे। तो इस जमाने का जो रूल्स होगा वो कब अप्लाई होगा वो कब हमारे सामने आएगा। बाद आता है कि अब वही बात यहां पे दोबारा आ गया कि वो
(31:08) सिग्निफिकेंट इतना सा पॉइंट वन% ऑफ़ पेन आपने बढ़ाएगा। हम है ना? तो आप ऑलरेडी इस लेवल पे होते हो अगर आप स्पिरिचुअली इतना इंक्लाइंड हो गए हो कि इतना सा भी चेंज आप फील कर पाते हो। हम तो यू हैव टू चूज़ योर फूड। जैसे हम एस्ट्रोलॉजी के बात किए, जैसे हम क्लास सेवंथ के बात किए, आपने एनसीआरटी खत्म कर लिया। अब आप इतना तो बेसिक्स आपको आता है। अब छोटे से प्रॉब्लम्स में भी आपको थोड़ा सा प्रॉब्लम हो सकता है। हां। लेकिन अगर आप उस लेवल पे नहीं हो, आप वो खाना भी खाओगे, तो 99% ऑफ़ अस को वो एनर्जी चेंज फील ही नहीं होगा। तो आप खाते रहो
(31:47) क्या जाता है? लेकिन आपको अगर सिग्निफिकेंटली एनर्जी चीज फील होने लगे तो आपको ही समझ में आ जाएगा कि नाउ आई माय रिसेप्टिविटी हैव इंक्रीज लिटिल बिट आइदर ड्यू टू डिफरेंट पर्पससेस डिफरेंट क्रियास दैट आई एम परफॉइंग और बहुत बार तो अननोइंगली क्रिया हो जाता है उससे ही हो जाता है चीज़ हम हम आप बात समझ रहे हो ना तो इफ इट इज़ अफेक्टिंग बेटर टू अवॉयड इफ यू वांट टू शेयर इट एंड इफ यू वांट टू रिलीव द पेन हम गो एंड हैव इट और सिर्फ खाने से नहीं ऐसे तो घर में जाएंगे घर का इफ़ेक्ट भी है घर के साथ भी रुलू बंदा है घर के साथ भी कार्मिक बॉन्डेज है।
(32:19) कोई शहर में जा रहे हो शहर के साथ भी कार्मिक बॉन्डेजेस है। व्हाई बिज़नेस इन मुंबई विल फ्लोरिश मोर देन बिज़नेस इन कोलकाता। राइट? वजह तो वही है ना हम क्योंकि गणेश तत्व हायर साइड है। हम शक्ति तत्व यहां है। हम आप बात समझ लो। लक्ष्मी तत्व कोलकाता में है। हम लेकिन कुबेर तत्व उधर है। तो अंतर है ना? लोग ये भी तो गलत ही समझ रहे हैं कि लक्ष्मी पैसा देगा। हर थर्सडे को लक्ष्मी जी का यह इट इज़ नॉट लक्ष्मी कुबेर हु विल यू गिव लक्ष्मी तो इज़ लक्ष्मी ही शी नोज़ हाउ टू मैनेज ओके द ट्रेज़र इज़ कुबेर अच्छा तो पैसा अट्रैक्ट करने के लिए कुबेर जी को कुबेर जी के पास
(33:01) जाना पड़ेगा। अट्रैक्ट तो वैसे कुछ करते नहीं है नहीं करना चाहिए। बट देयर इज़ अ पार्ट ऑफ़ योर माइंड ऑन इज़ ओके। चित्ता हां राइट ये एक स्पिरिचुअल हैक है ये बोलना नहीं चाहिए बट आज चलो इतनी देर तक किसी ने पडकास्ट सुना है तो उनको कुछ तो मिलना चाहिए ना सर्टेन पार्ट ऑफ योर माइंड नोन ऐ चित्त चित्त क्या है आउट ऑफ द 64 पार्ट ऑफ़ माइंड इट इज़ अ पार्ट जो डायरेक्ट यूनिवर्सल्स के साथ कनेक्टेड है। बट चित्त में जाने का कोई डायरेक्ट रास्ता आपके पास नहीं है। है अगर आप योग कर रहे हो अष्टांग योग में आप कोई भी क्रिया कर रहे हो उसके अंदर से आप
(33:39) जा सकते हो लेकिन हां अगर नहीं है तो आप क्या करोगे कि द मोमेंट यू स्लिप उसके ठीक पहले वाला जो मोमेंट है है ना जहां पे हम कॉन्शियस से अनकॉन्शियस सबकॉन्शियसनेस और नींद के तरफ एक जा रहे हैं। सिर्फ वो जो पल होता है वो बहुत बार हम स्लिप करके चित्त में पहुंच जाते हैं। अच्छा ठीक है। तो अगर आप रेगुलर बेसिस में इस टाइम में और उठते ही पहला थॉट जहां हम पीछे से वापस आ रहे हैं। अच्छा लास्ट थॉट एंड द फर्स्ट थॉट आपको जो भी चीज चाहिए जीवन में आपको डॉक्टर बनना है। आपको इंजीनियर बनना है। आपको जॉब चाहिए। आपको पैसे कमाने हैं। कोई बीमारी
(34:23) से मुक्ति चाहिए। अब ये अंधविश्वास है। उन लोगों के लिए जिनने इस चीज को अभी तक अनुभव नहीं किया है। माइंड के बारे में नहीं। उन्होंने एक पडकास्ट में मेरे मुंह से सुन लिया। वो लोग प्रैक्टिस करते रहे। वो चीज नहीं करना है। हम क्योंकि अंधविश्वास है। मैं ये चीज हमेशा अपने दर्शकों को भी बोलता हूं कि जब तक आप लोगों को यह फील ना हो और आप अपने अंतर्मन से इन चीजों को नहीं समझ लो। उसके साइंसेस को एक्सप्लेन नहीं कर पाओ। वो आपके अनुभूति में ना आए तब तक मेरे इन सब बातों को नहीं मानना है। आप बात समझ रहे हो ना? ये सब बातें को अगर मान लो तो अगेन कोई अंधविश्वास कोई तो
(35:04) मान रहे हो उसका साइंस मैंने बताया अभी नहीं बताया ऑन कैमरा तो अगर मैं नहीं बताया तो जो देख रहा है उसके लिए क्या है अंधविश्वास है ना क्लेरिफाई करो उसको उसके रिसर्च करो उसके बीच में अनुभव करो गहन मेडिटेशन में बैठो अंदर जाके देखो उसके बाद अगर लगे तो करना लेकिन हां मैं एक सिंपल टेक्निक बता दिया लास्ट थॉट एंड फ़ास्ट थॉट वो चीज का रखो कुछ दिन के लिए पता ही नहीं चलेगा कब आप उसको चित्त में पहुंचो और चित्त में जो भी चीज आएगा यूनिवर्स उसे मैनिफेस्ट करेगा यूनिवर्स उसे मैनिफेस्ट करेगा। इसलिए कभी भी नेगेटिव सोच के तो मत सो जाना। अच्छा
(35:39) आए ना आए बुरा जरूर आ जाएगा। ओके। अच्छा मेरा दूसरा सवाल ये है कि बहुत सारे लोग है ना कि श्राद्ध कम खत्म करने के बाद हम गया है कि फाइनल रिचुअल्स कंप्लीट करने के लिए। तो ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो गरीब है वो इंसान वहां तक नहीं जा पाते हैं। तो क्या वो जो कर्म करते हैं इधर वो पूरा नहीं हो पाता है और हम जब वहां जाके ही कुछ कर्म करते हैं तभी जाके इसका मुफ्त मिलता है इसके बारे में क्या राय है आपका? यहां बहुत पॉइंट्स हैं। एक्चुअली जो श्राद्ध हम करते हैं वो श्राद्ध कितना होता है? जिस बंदे से करवा रहे हैं जो पंडित जी आ रहे हैं उसे कितना नॉलेज है
(36:17) हमें नहीं पता। हम 80% टू 90% आज जो चल रहा है हम क्या चल रहा है? बिज़नेस चल रहा है। अच्छा बिज़नेस ही तो चल रहा है। अगर आप तिल नहीं भी लाओगे हम बोले ठीक है तिल का दक्षिणा दे दीजिएगा हो जाएगा बिना तिल के। तो हाउ द हेल यू विल डू दिस विदाउट दिस उपचार? एक एग्जांपल बता रहा हूं मैं। राइट? देयर आर सर्टेन टेक्निक्स एंड द टेक्निक्स आर साइंटिफिक। हम मैं तब तक नहीं विश्वास किया जब तक मुझे नहीं पता था। हम मुझे समझाओ। बहुत बार तो ऐसे भी होता है ना वो बिल्ली वाला स्टोरी जो मैं बताता हूं कि एक हीरा व्यवसाई था। उनके घर उनका बेटा,
(36:56) वाइफ और ये तीन लोग थे। अचानक उनका एक दिन डेथ हो जाता है। हम जब डेथ हो जाता है हम तो सब लोग आके बैठते हैं। उनके बॉडी रखा हुआ रहता है। उनके घर पे एक बिल्ली भी था। वो बार-बार उनके बॉडी के ऊपर जंप करते रहते हैं। तो उनके घर वाले क्या करते हैं? उसे बांध के कोने में रख देते हैं। बेटा उसका छोटा था। उसने इस चीज को देखा कि पापा का जब डेथ हो गया तो एक हमारे बिल्ली को बांध के उधर रख दिया गया। तो 20 30 साल निकल गए। बेटा बड़ा हो गया। बेटे का शादीवादी हो गया। अब उसके मां का डेथ हो गया। तो बेटा ने बोला कि हमारे परिवार में नियम है कि किसी का
(37:28) डेथ होने पे किसी बिल्ली को बांध के रखना पड़ता है। आप बिल्ली ढूंढ के लाओ। फिर बिल्ली लाया गया और बांधा गया। और ये प्रचलन फैमिली बेसिस पे चल गया। तो हमारे स्पिरिच मतलब सनातन धर्म में भी सनातन में नहीं हिंदुत्व में बहुत ऐसी चीज है जो बिल्ली है जो बाद में विदाउट साइंस ऐड ऑन कर दिया। मैं उन सबके बारे में नहीं बोल रहा हूं। लेकिन जो साइंटिफिक पार्ट्स हैं जिसके पीछे एक साइंस है सनातन से ऊपर कुछ है ही नहीं। एक्चुअली जहां फिजिक्स खत्म होता है ना जो क्वांटम खत्म होता है वहां से सनातन आता है। जो चंद्रशेखर लिमिट बोल दो आप ये जो 108 का चीज है अर्थ मतलब हर
(38:02) जगह आप जहां पे भी देखोगे यही तो है। हमने प्लूटो को उस प्लनेट कभी बताया नहीं। हम आज जाके आप बता रहे हो प्लूटो प्लनेट है। हमने तो कभी बोला ही नहीं। अब यहां आप बताओगे आप तो चंद्रमा को भी प्लनेट बोल दिए हम हमने प्लनेट का डेफिनेशन सही से देखो जाके एस्ट्रोलॉजी में वो वो है कि ऐसे सेलिस्ट ऑब्जेक्ट जिसका हमारे पास इंटेंसिटी और इफेक्ट आता हो आप गहराई को समझ रहे हो ना हम तो ये ऐसा ब्रांच है कि टेलिस्कोप डिस्कवरी से पहले हम ये बोल रखे कि इतने हैं और आप हम दिस इज दिस इज द एंटायर और रियल साइंस ऑफ़ सनातन हम ठीक तो यही है तो
(38:46) ऐसे कुछ रुचल्स नहीं है जो अस्थियां है है ना अब पिंडदान का मतलब क्या है तर्पण अलग है पिंडदान अलग है ये सब जो काल भैरव क्रिया अलग है पिंडदान का मतलब पिंड शब्द है इस मांस का मैं एक अन्नमय कोश का हम अगेन आई एम सेड ना कि जो मांस है वो अब तो अन्न है हम तो आपको एक नया बॉडी के लिए भी तो एक अन्नमय कोश का ढांचा चाहिए हम ढांचा ही तो चाहिए। हम गुरुदेव को जिनको समाधिस्थ अवस्था में रखते हैं उनका पिंडदान करते हैं। नहीं करते हैं ना? क्योंकि हमें पता है कि वो वापस नहीं आ। हम राइट? तो अगर एक ढांचा हम अन्न का क्यों दे रहे हैं? क्योंकि द नेक्स्ट वर्ड यू यू
(39:33) नीड ए प्ल्ड टू ट्रांसफर अ लिटिल बिट ऑफ़ मटेरियलिज्म इंटू लिटिल बिट ऑफ़ अनलव कोष। एक प्रयास है। जाता नहीं है। वो अलग चीज है। कैसे ब्रह्मंद से हम घुसते हैं और कैसे निकलते हैं जो इंटरेक्शन मदर के बॉडीज के साथ है। 42 दिन का क्या रोल है वो गर्भ संस्कार प्रयास अलग चीज हो गया। मतलब ठीक। तो एक प्रयास है कि उसको एक इजी वे में पिंडित दिया जाए जिसके थ्रू एक रिब्थ का प्रोसेस वो दोबारा शुरू कर पाए। हम तो दैट इज अ पॉइंट। और जो अस्थियां है हम उसको क्या करते हैं? उस अस्थियों को जो आग में नहीं जल पाया हम वही तो चीज है वो जो राख है आपका उसको मैंने अलग-अलग नदियों
(40:16) पर बहा दिया भाई ये नदियां क्या है भारत भूमि का नदियां उसके वेंस और आर्टरीज तो है वो जाके वहां समुंदर में मिल जाएगी मतलब मैंने उसको डिस्पर्स कर दिया अलग-अलग जगहों में कि एक साथ नहीं कि तुम अपने आप को इस ऐश में ही ढूंढते रहो तुम्हारा ऐश भी मैंने फैला दिया चारों तरफ यू आर नो मोर हियर डोंट गेट योरसेल्फ एंटेंगल्ड विद दिस दिस यू आर फ्री मूव अहेड। दिस इज़ द एंटायर थिंग। फाइंड द परमटेशन कॉम्बिनेशन के हिसाब से अम गेट द पेंड गेट इनसाइड सी फॉर 30 डेज इफ यू कैन ओके लीव दिस इज़ हाउ इट इज़ हैपनिंग राइट। तो गया में जो होता है यह काम विष्णु
(41:01) पदा गया में विष्णु पदा बोला जाता है। अच्छा तो वहां पे भी वही चीज है और कुछ नहीं है। एक एनर्जी फोर्स और कतई कुछ नहीं है। मतलब वही अगर होता आप सोचो ना आप सोचो ना अगर विष्णु गया में जाके ही विष्णु पद मिलते तो गुरुदेव ने केवल धाम में वहां भी विष्णु पद बना के रख दिया कि यहीं सब हो जाएगा और कहीं जाने की जरूरत नहीं। हम तो इट इज़ नॉट द प्लेस दैट इज़ेंट। इफ यू गो आप ट्रैवल करो तो आप मेंटली भी थोड़ा रिलैक्स होते हो। ऐसे कंडीशन से निकलते हो। यहां से बाहर जाते हो तो आपको एक ताकत मिलता है। लोगों से मिलते हो। आपके पास एक पर्पस
(41:35) रह जाता है। अरे ये मर गए तो मैं भी मर ही जाता हूं। लेकिन आपको एक जिम्मेवारी का एहसास होता है। नहीं मैं कैसे मर सकता हूं। उनका पिल्ल दान करना है। ये करना है। तो आप दोबारा आपको बांधने का एक प्रयास होता है। वो सब जरूरी भी है सोशल एस्पेक्ट में बट नॉट फ्रॉम स्पिरिचुअल। ओके। ओके। सोशल एस्पेक्ट में जरूरी क्यों? क्योंकि हस्बैंड वाइफ थे, हस्बैंड मर गया। अब वाइफ बोलेगी मेरा तो और पर्पस ही नहीं है। मैं मर जाता हूं। लेकिन अब अगर उसे ये एहसास होने लगे कि उनके जाने के बाद भी बहुत सारे काम और मुझे करने हैं। तो उनके पास एक पर्पस है जीने का। हम तो धीरेधी और उस
(42:05) जीतेजीते वो दोबारा और पर्पस बनाते जाएंगे अपना। तो नाउ शी इज़ लिविंग अ लाइफ। हम फुल फुलफिल तो नहीं लेकिन हां नाउ शी कैन लीव। अदरवाइज तू पागल हो के घूमती। है ना? रिस्पसिबिलिटी है कि मुझे श्राद्ध का काम करना है। इसलिए वो थोड़ा स्टेबल होती है। कि नहीं मुझे नहीं पता मेरा अपना है और उनका श्राद्ध का काम मुझे 100% करना है। वो तुम्हारे स्टेबिलिटी के लिए भी तो जरूरी है। हम कार्मिक चीजें इंटरेक्ट स्पिरिचुअल चीज़ है। इसलिए मैंने बोला उसका एक साइकोलॉजिकल एस्पेक्ट है। एक सोशल एस्पेक्ट है और एनर्जी एस्पेक्ट तो अलग है ही है। उसमें एनर्जी एस्पेक्ट में मैंने
(42:41) एकदम बहुत सुपरफिशियली है। बोला डीप डाउन करूं तो बहुत कुछ जा सकता हूं। उसके लिए गरुड़ महापुराण के एकदम गहराई में घुसना होगा। गरुड़ महापुराण अगर आप पहली बार में पढ़ोगे तो आपको लगेगा अब सिर्फ बकवास है। अच्छा क्यों लगेगा? क्योंकि वो स्टोरी के फॉर्म में बताया गया है। लेकिन उसके साइंस को जब समझ लोगे तब लगेगा रे क्योंकि वो बोला कुछ और है। मीन कुछ और कर रहा है। वो एज अ स्टोरी ऐसे-ऐसे गरम तेल के नरक में जाओगे और ये सब अच्छा क्या वो बात सच है क्या? मतलब बहुत सारे लोग ऐसे बोलते हैं। कहां है? कहीं नहीं तो फिर इसका साइंस का इसके पीछे जो कारण
(43:19) है साइंस बिहाइंड द इसके भी सोशल रीज़ है कि डर दिखाएंगे तो काम गलत नहीं करेगा। ठीक। दूसरा रीज़न ये है कि भैरवी विवाह यात्रा द मोमेंट यू आर लिविंग योर बॉडी एंड इफ यू हैव आपने अपने पूरे जिंदगी में जिस-जिस इमोशन से जिंदगी जिया है जिसज काम को आपने किया है वो ड्यूरिंग दिस टाइम ऑफ लिविंग वो इंफिनिटी से मल्टीप्लाई हो के इतना इंटेंस हो जाता है तो आपने अपनी जिंदगी को अगर प्योरिटी के हिसाब से रखा है खुश रखा हंसते हुए निकाला है तो वो हंसी इंफिनिटी तक इंटेंसिफाई हो जाएगा और अगर आपने इस दुख में कंप्लेनिंग में पेन में है ना
(44:07) नेगेटिविटी में जिया है तो वो इंटेंसिफाई होगा तो जब इतना इंटेंस दर्द होता है ना आप ले नहीं पाओगे उसी को ही नरक बोला है इट इज़ ऑल अबाउट द भैरव यातना अगर आप डेथ में और गहराई में जाओगे तो और भी कांसेप्ट है बंधा मतलब चीज़ है और थोड़ा डिटेल्स में जाना चाहते हैं आज पडकास्ट लंबे होते-होते 15 दिन का बन जाएगा। हां वो हो सकता है शायद इस क्षण तक भी पडकास्ट हमने जितना रिकॉर्ड किया है सिर्फ दो-तीन लोग ही होंगे जो आपको तुझे सुन रहा है तो शायद इनके लिए आप कुछ छोड़ के जाए। रुणानुबंध एक तरीके का बॉन्डेज है जो आप आउटसाइड युवा में कोश में बनते हो।
(44:48) किसी का शर्ट भी नहीं पहनना चाहिए। ओके। क्यों नहीं पहनना चाहिए? आपने ये शर्ट जो आप पहन के रखे हो ना इसे अभी टांग के रखो। हम आने वाले 10 साल, 15 साल और 20 साल वेट करो। इस शर्ट में आपके सेल्स हैं बॉडी के हम उसमें न्यूक्लिक एसिड्स हैं। उस न्यूक्लिक एसिड में डीएनए मटेरियल है। उस डीएनए मटेरियल को रिसर्च करके आपका पूरा क्लोन बना देंगे। अभी तक हम वहां तक पहुंचे नहीं है। सिंपल बात नहीं पहुंचे लेकिन पहुंच जाएंगे। देयर इज़ अ जेनेटिक मेमोरी। यू हैव अ वास्ट अमाउंट ऑफ़ जेनेटिक मेमोरी। ठीक? तो स्पिरिचुअलिटी में क्या इसका एग्जांपल है कि अब आप कर तो जरूर
(45:26) सकते हैं लेकिन आप जब ये कपड़ा किसी और को दोगे तो ये जो मेमोरी है आपका वो होल्ड कर लेगा। हां अब मैंने आपका मेमोरी होल्ड कर लिया वो मेमोरी मेरे पास है। हम्म तो मेरे लिए मेरा सिस्टम कंफ्यूज आ गया ना। हम मेरे लिए चीजें ईजी नहीं हुए हैं। जितना इजी किया जा सकता है उतना सिस्टम के लिए बेटर है। हम मेडिकल साइंस में आई सपोर्ट ट्रांसप्लांटेशन। राइट। किडनी ट्रांसप्लांट लिवर होना चाहिए। किडनी डोनेशन बढ़ना ही चाहिए। लिवर डोनेशन बढ़ना चाहिए। क्योंकि लोगों को अन्नव में कोष में जीने का अधिकार है। हम लेकिन वो ट्रांसप्लांट कभी कबभार इसी प्रोसेस के
(46:02) लिए हम प्रॉब्लम होता है। डोनर के लिए तो नहीं बट रिसिप के लिए इतना कंफ्यूज्ड एनर्जी स्टेट है कि देयर इज़ अ लिटिल बिट ऑफ़ प्रॉब्लम फॉर बट वो इतना इनसिग्निफिकेंट होता है क्योंकि अन्नमय कोष इतना अब कोई साधु बाबा इस लेवल का आ जाए जो आनंदमय कोश में हो और उनका किडनी फेल हो जाए तो उनको अगर मैं एज अ ट्रीटिंग फिजिशियन देख रहा होगा तो मैं उनको एक बार जरूर बोलूंगा बियों्ड साइंस जाके सर और गुरुदेव डू यू लिटरली वांट ट्रांसपेरेंट टू बी डन ओके। यह है मेरी बात क्योंकि शरीर तो कितने दिन का है। बट ऐज़ अ डॉक्टर, ऐज़ अ फिजिशियन हम मैं ओपनली बोल रहा हूं आई
(46:45) सपोर्ट ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन। आई सपोर्ट ऑर्गन डोनेशन एंड ये होने चाहिए। क्योंकि 80 टू 99% लोग हम सोल कॉन्शियसनेस में है ही नहीं। यहां वो देहा अभिमानी है। देही अभिमानी परिस्थिति तक पहुंचे ही नहीं। हम तो अगर देह अभिमान है तो सब कुछ जायज है। देह अभिमानी जब होता है तब तो शरीर के लिए दिक्कत ही नहीं है ना तब तो शरीर चाहिए भी नहीं वो अलग है तो लोग मुझे पागल बोलेंगे फिर मुझे आईआईटी बाबा बोल देंगे तो बेटर है अपने तो आईआईटी बाबा के कुछ बुक्स पढ़े होंगे उन्होंने लिखा है अभय सिंह उसका ओरिजिनल नाम है आईआईटी बाबा को लेकर आजकल
(47:26) बहुत चर्चा हो रही है कंट्रोवर्सी टॉपिक उठा रहे हो बेटा कंट्रोवर्सी तो लाइफ में होनी चाहिए तभी तो लोगों के सामने जाएगा ना ये बात तो उसका कांसेप्ट क्या है? मतलब उनको लेकर आपका राय क्या है? वो क्या सोचते हैं? उन्होंने जो लिखा है ना बुक में बस तूने वो बुक पढ़ा है तो उसके बारे में थोड़ा समझ ना ही मैं कांसेप्ट बनाता हूं ना ही मैं जज करता हूं। तो मैं क्या ही कांसेप्ट बनाऊं किसी के बारे में। ठीक है। तो बस कासेप्ट थोड़ा आईडिया हमें दे दे कि क्या देखिए जो मैंने कुछ वीडियोस उनके देखे हैं जहां पर वो बात कर रहे हैं। हम है ना जो शून्य के बारे में वो बात
(48:04) करते हैं जो सेट्स के बारे में वो बात करते हैं। हम हां बात तो सही है। अच्छा ऐसा नहीं है। तो ज्ञान कुछ हद तक तो जो वो बोल रहे हैं मैं जज तो नहीं कर पाऊंगा सही गलत क्योंकि दुनिया में कुछ सही और गलत होता नहीं है। सब रिलेटिव एंड पर्सपेक्टिव होता है। जिस एंगल से मैं देख रहा हूं उस एंगल से है। कुछ लॉज़ है। जो वो बात करते हैं वो बात लॉज़ में है। अच्छा। अब कितना उन्होंने उस लॉज़ को अपने जीवन में धारण कर पाए कि नहीं कर पाए। हम वो तो मैं यहां से कैसे बोलूं? ओके। व्हाटएवर ही इज़ सीइंग उनकी किताबों में उन्होंने जो लाइन बोला
(48:44) है एक एक कविता तो उनके मुख में ऐसा भी है जहां उन्होंने ये भी शब्द बोला है। पहले जब उनके कुछ वह है कि व्हाटएवर बी द स्टोरी हम है ना वेदर इट इज़ अ स्टोरी मतलब मैं एग्जैक्ट कोट नहीं कर पा रहा हूं लेकिन वेदर इट इज़ अ स्टोरी ऑफ़ फेलियर हम और इट इज़ अ स्टोरी ऑफ़ सक्सेस हम बोथ द स्टोरी हैज़ अ वेट यू हैव टू कैरी द वेट विथ यू। तो अगर हम उस स्टोरी को पकड़ते हुए आगे बढ़े तो एक वजन है जिसके साथ हम ट्रैक कर रहे हैं। हम तो इस चीज को आप झूठ कैसे बोल रहे हो? हम तो यही बात है कि जो बोल रहे हैं हम जैसे शक्ति का बारे में बात किया कि उन्होंने
(49:25) लेफ्ट हैंड के नाखून जो मैंने वीडियो देखा कि नाखून वाज़ हाई हम है ना देयर वाज़ कुंडल देयर वाज़ हाफ पार्ट ऑफ़ द फेस वाज़ क्या बोलूं मेकअप किया हुआ इट इज़ेंट इन सर्टेन एस्पेक्ट लेकिन जिस लेवल पे इंपॉर्टेंट है कि आप क्यों लेफ्ट हाफ आप अगर आपके वाइफ के साथ फोटो खिंचवाने जाओगे तो आपको वाइफ को किस तरफ रखना प्रेफर करते लेफ्ट से क्यों लेफ्ट ये किसी ने सिखाया था लेफ्ट नहीं राइट में भी रखो तो कोई गलत नहीं है लेकिन क्यों जनरली सब लेफ्ट में रखना है क्योंकि द लेफ्ट इज द फीमेल इन वर्ल्ड इज़ द चंद्रमा नाड़ी एंड द राइट इट इज़ अ सोलर
(50:06) इट इज़ अ मेल डोमिनेंट इट इज़ अ फीमेल ओके नाउ इफ अगर मेरा इंटेंसिटी इतना हो चुका है कि मैं उस गहराई को समझ पाता हूं तो तो मैं लेफ्ट में एज अ फीमेलियन को अगर मुझे के अनुभव करना है हम तो मैं इतना डीप हो चुका हूं तो तो मैं अनुभव कर सकता हूं। ये भी एक तरीका है बाकी तरीकों के हम कि समझने का आई एग्री तो जो बोल रहे हैं वो गलत है नहीं पता। कितना अपनी जिंदगी में अप्लाई किए हैं वो मैं किसी के बारे में कैसे जजमेंट कर दूं? आई एम नॉट समबडी हु कैन से ही इज़ राइट और रोंग। बट व्हाट ही इज़ सेइंग इज राइट। राइट मतलब व्हाट इज सेइंग इज
(50:48) अकॉर्डिंग टू व्हाट यूनिवर्सल लॉस इज दारू गांजा मिला है। ऐसे भी सुनने में आया है। अब यहां पे भी लोग हमारे दर्शक ये सोच सकते हैं कि बाबा लोग गांजा क्यों फूंकते हैं? हम एक्चुअली गांजा फूंकना कहीं लिखा नहीं है। और गांजा शिवजी नहीं फूंकते हैं। देयर इज़ समथिंग नोन एट इंटरनल ऑफ़ पॉइंट्स। आप अगर थोड़ा रिसर्च करोगे दैट इज़ अ कॉनंसेप्ट नोन ऐज़ आनंद माइट पे नोबेल प्राइज मिला है। एक टर्म है आनंद माइट। एक आप ही आपके शरीर में ओपॉइड रिसेप्टर्स ऑलरेडी प्रेजेंट है। अच्छा आप बात समझ रहे हो? आप जो गांजा फूंकते हो ना वो एक तरीके का उपाइड है। वो जाके उस रिसेप्टर में
(51:27) बैठता है म्यू रिसेप्टर्स पे और जाके उपाय के एक्शनंस होते हैं। तो आपके शरीर को पहले से थोड़ी पता था कि आप गांजा फूंकोगे कि उसने पहले एक रिसेप्टर बना के रखा जिसमें गांजा आ के बैठेगा। आप मेरा बात समझ रहे हो? अगर आपके शरीर में उप रिसेप्टर्स हैं तो देयर इज सर्ट तो डेफिनेटली वो बाहर के कोई चीज के वजह से नहीं है। देयर इज़ सम एंडोजेनस उपइ दैट वी सीक्रेट। अच्छा। और ऐसे ही एक एंडोजेनस जब हम मेडिटेशन के गहरी एस्पेक्ट में पहुंच जाए। आनंदमय रिलीज़ होता है। आनंदमय कोर्स से ये नाम लिया गया है उस उपाए का। इसलिए उसका नाम है आनंदम। नोबेल प्राइज मिला हुआ
(52:03) है इस पे रिसर्च अपने दर्शक रिसर्च करना चाहे तो डिटेल में कर सकते हैं। तो वो आनंदवाइड एक ओप है। ओपड मतलब गांजा है। अच्छा गांजा इज़ अ टाइप ऑफ़ ओपोइड ओनली ना तो वो इंटरनल उपाइड के बारे में समझाया गया था शिव महापुराण में जिसको आपने बाहर से लेना शुरू कर दिया। अच्छा। तो यहीं तो गलतियां होती है ना। यहीं से पूरा चीज पूरा सिस्टम अलग हो जाता है। इट इज़ नॉट द पॉइंट दैट यू कंज्यूम फ्रॉम आउटसाइड बट यू हैव टू सट। यू हैव टू मेडिटेट एंड यू हैव टू जनरेट द एंडोजेनस पॉइंट। मतलब गांजा फूकने के बाद जो फीलिंग होता है वो ऐसे मेडिटेशन में बैठ के वो स्टेज तक हम पहुंच
(52:35) सकते हैं। गांजा फूकने के बाद वाला स्टेज तो कुछ भी नहीं है। उसके हजारों गुना ऊपर पहुंच सकते हो और गांजा फिर बाबा लोग गांजा क्यों फकते हैं? मिसअंडरस्टैंडिंग उन्हें लगा वो पॉइंट लिखा है तो पॉइंट ले तो इतने सारे बाबा सब मतलब रॉन्ग डायरेक्शन पे जा रहे हैं। यही तो पॉइंट्स हैं। यही तो पॉइंट है जिन्हें पता है वो अलग है। हां हां वो भी है। वो भी लिखा है। तो अब एक इसीलिए तो सनातन सनातन को मिसअंडरस्टैंड करने का चांस बहुत बढ़ गया है क्योंकि हमने गुरु शिष्य परंपरा को ही तोड़ दिया है। हम ब्रिटिशर जब आए तो बोला कि इंडिया को तब तक नहीं तोड़ा जा सकता जब
(53:13) तक ये गुरु शिष्य परंपरा इंडिया में रहेगा। तो सबसे पहले चेंज एजुकेशन सिस्टम नो गुरु शिष्य परंपरा नोबडी इस देयर टू टीच यू व्हाट और अगर आपको ये नहीं पता कि व्हाट क्यों हम तो आपको ये अंधविश्वास लगेगा आप धीरे-धीरे उसे छोड़ दोगे। हम्। आजकल जो बच्चे प्रणाम करते हैं मां-बाप को या किसी को कोई फ़ायदा मिलता है प्रणाम करके? नहीं मिल रहा है। प्रणाम करना है करना है। निकल जा रहे हैं। तो अगर दो जनरेशन बाद हम प्रणाम करना तो भूल जाएंगे। भूल इसीलिए हमारा जनरेशन प्रणाम करता ही नहीं है। क्यों नहीं करता? क्योंकि उसे कोई एडवांटेज नहीं मिल रहा है ना उस चीज
(53:47) का। और एडवांटेज क्यों नहीं मिल रहा है? दैट यू हैव टू अंडरस्टैंड ना। क्योंकि द टेक्निक ऑफ़ प्रणाम उसमें ही गलती है। हम हैंड्स एंड फीट द रिसीवर। ट्रांसमीटर आप दो हाथ को ऐसे अपने एकदम पास में आओगे स्टार्ट फीलिंग एंड सॉर्ट ऑफ एनर्जी हां है ना हाथ से एनर्जी रेडिएट आउट होता है हम पैर से एनर्जी रेडिएट आउट होता है हम आप बात समझ रहे हो और ब्रह्म रद्र के थ्रू आप एनर्जी को अब्सॉर्ब करते हो हम अब हम प्रणाम कैसे करते हैं ऐसे करके छू लेते हैं पैर को हम तो हमसे जो एल्डरली है उनके ट्रांसमीटर पे हमने अपना ट्रांसमीटर रख दिया हम कुछ होगा हमें तो वहां अपना
(54:28) रिसीवर रखना चाहिए था तब ना वो एनर्जी हम रिसीव करते दो ट्रांसमीटर इधर से भी मैं दे दे रहा हूं उधर से वो दे रहे हैं क्या फायदा हुआ तो ऐसे परिणाम का कोई मतलब ही नहीं तो जब मतलब नहीं तो दो जनरेशन तभी करेंगे कल्चरल बेसिस के लिए और उसके बाद जब उसे दिखेगा इस परिणाम का कोई मतलब नहीं कोई फायदा नहीं हो रहा है कुछ एनर्जी मिल ही नहीं रहा उस परिणाम के बाद मुझे कुछ नहीं कर रहा अपने मां-बाप के चरणों पे अपना सर रख के दो बार प्रणाम करके देखो कितना पॉजिटिव एनर्जी अपने आपके अंतर्मन में रखता है और वो बस ऐसे कर ले वो जो अपना हाथ आपके सर पे रखता है ना हम
(55:07) ट्रांसमिटर टू द टू द रिसीवर तो जाके वो बात होता है आप बात समझ रहे हो तो बहुत कुछ है। अगर आप क्रिया शरीररा को समझोगे क्रिया शरीरा के गहराई में जाओगे तो आपको बहुत आपको इतने तरह के श्रोताज़ हैं और ये है इतने एनर्जी वेटिंग पॉइंट्स है चक्रास है ईडा इगला मतलब पिंगला और सुषमा का बंधन है एनर्जी बॉडीज है और और भी बियों्डे जाओगे आपको उसमें आपको जब गुणों का इफ़ेक्ट दिखना शुरू करेगा रजस तमस क्या है मजा आता रहता है तो ये जनरेशन का मेरा यह वार्ता है कि आप घूम के आओ वापस हम ऐसे वैसे भी हम कलयुग में तो है नहीं। सबको यही पता है
(55:48) हम कलयुग में है। मुझे मार भी सकते हैं लोग कि हम कलयुग में नहीं है। अगर मैं बोलूं कि मैं हमने कलयुग से द्वापर क्रॉस करके अभी हम त्रेता में कुछ दिनों में हम सतयुग में जाएंगे। लोग बोलेंगे क्या कि अभी मैंने यहां बैठ के गांजा फूंका है। उसके बाद वीडियो रिकॉर्ड किया है। लोग यही बोलेंगे ना। लेकिन जो टाइम है आप वो फोटो भी डाल देना। टाइम जो है वो ना ऐसे इलिप्ट्स में है। राइट? इधर चार युग, इधर चार युग, सत्य, त्रेता, द्वापर, कली। आप बात समझ रहे हो? हमने ये वाला फज़ निकाल लिया। फिर हम इधर से जा रहे हैं वापस। तो क्या होगा? कली हम द्वापर। अब हम त्रेता
(56:30) में है एंड मूविंग टुवर्ड्स सतयुग। अच्छा। दिस इज़ द फेस। बट नोबडी विल रियलाइज़। और ये किसके आधार पे होता है? सन के डिस्टेंस टुवर्ड्स अर्थ। दिस इज़ लिप्ट। जितना वी आर क्लोज टू द साइन उतना ही पॉजिटिविटी। जितना वी आर अवे फ्रॉम द सन उतना ही तामसिक। अच्छा जैसे हर एक युग में कुछ कुछ बोलते ये सन का क्लोज भी लोग बोलेंगे कि मुझे वो नहीं पता। अच्छा चलो आप जो बोल रहे हो बताओ। नहीं थोड़ा बता दो। नहीं बता थोड़ा बता दो। मतलब ये लोग को ही लगेगा ना कि मैंने सर के रिवोल्यूशन के बारे में बात किया है। व्हिच इज नॉट सन का नक्षत्र और राशियों के
(57:05) इफेक्ट किस जगह पे है? सबके बारे में है। तो इसमें बारे में अगर मैं डिटेल में जाऊं तो मुझे पूरा जैसे महीने भर तो इसी में बात करना होगा क्योंकि सन क्या है? सन कहां घूम रहा है? सन भी तो स्टेशनरी नहीं है। सन भी रिवॉल्विंग है। सन एक जगह पर थोड़ी है जो हमें लग रहा है कि सूरज के चारों तरफ घूम रहा है। अरे सूरज भी घूम रहा है बेटा। सूरज हम सभी को लेकर घूम रहा है। लेकर घूम रहा है। अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा आप बात समझ रहे हो? तो देयर आर ह्यूज वो जो काल का हिसाब है ब्रह्म का एक दिन श्रीमद् भागवत में इतने ब्रह्म के दिन और इतने ब्रह्म के
(57:40) रात ओसम एवरीथिंग इज़ सो साइंटिफिक। एवरीथिंग इज सो साइंटिफिक। जब आपने किलोमीटर का डिस्क्रिप्शन नहीं दे पाए ना तब से हमें पता है कि यहां से चंद्रमा का डिस्टेंस कितना है। यहां से वहां का डिस्टेंस कितना है। मैं पूछ रहा था कि ये चार है मतलब सतद्रा पर त्रेता कली इन सब में कुछ ना कुछ तो गुण हाई है। जैसे कलयुग में ये हाई हो गया। सतयुग में वो हाई हो गया। अभी मेरे एक फ्रेंड का कहना था कि अब हर एक घर में स्पिरिचुअलिटी को लेकर बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है। बने रह ना आप नोटिस कर रहे हो आज से 15 साल पहले आपको जितना स्पिरिचुअलिटी पता था आज उससे बहुत ज्यादा
(58:17) पता है। थोड़ा बहुत हां तो यह इंक्लेशन स्पिरिचुअलिटी की तरफ बढ़ता जाएगा। स्पिरिचुअलिटी क्या है? ब्लोइंग द स्पिरिट स्पिरिचुअल व्हाट इज आई एम नेवर इंटू रिलीजियस एक्टिविटीज़ या आई नो दैट बट बीइंग इन स्पिरिचुअलिटी इट इज़ व्हाई इट इज़ेंट एंड व्हाट इज़ देंस ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी? बीइंग स्पिरिचुअल। बी बीइंग स्पिरिचुअल का मतलब क्या होता है? नो योर स्पिरिट नो द सेल्फ। देयर इज़ नथिंग नो स्पिरिट एक्चुअली बट अंग्रेज तो उसके ऊपर कोई शब्द दे नहीं पाए तो मतलब यू कैन नॉट ट्रांसलेट संस्कृत इनू इंग्लिश जो ट्रांसलेट करते हैं विद ड्यू रिस्पेक्ट बट
(58:55) यू कैन नॉट ट्रांसलेट क्योंकि जिस गहराई पे हम उस चीज को बोलते हैं उस गहराई में तो शब्द ही नहीं है वो एक्सप्लेन करें वहां तक तो वो पहुंच ही नहीं पाए तो स्पिरिट क्या है खुद को जानना सांख्य को समझना सांख्य फिलॉसफी को समझना दैट इज़ स्पिरिट तो फिर हम मैं जो बोल रहा था कि चार योग जो है हम इसके बारे में थोड़ा ऐसा कुछ नहीं है। सूरज से आपका जब डिस्टेंस ज्यादा होता है तो आप में तामसिक चीजें ज्यादा होंगी। एनर्जी लेवल कम होंगे। जितने पास होते जाएंगे ऐसा क्या है? सतयुग में सब कुछ अच्छा होगा। ये गलत कांसेप्ट डाल दिया है किसी ने किसी के दिमाग में कि दिस इज
(59:32) सतयुग। दिस इज त्रेतायुग। दिस इज कलयुग। कलयुग में पाप ज्यादा होंगे। अच्छा। गत ही नहीं। हां सतयुग जब आएगा ना तब भी ऐसे ही दिन आएंगे। अच्छा ऐसे ही दिन ऐसे ही दिन रहेंगे। हां आपको बात समझ रहे हैं? हां। ऐसा कतई नहीं है कि युगों में परिवर्तन हो गया कुछ। अच्छा युग जो 5000 साल पहले तो अकॉर्डिंग टू द दिस रिलीजियस कैलकुलेशन। 5000 साल पहले कलयुग का शुरुआत हुआ। ओके? हम स्पिरिचुअल कैलकुलेशन अलग चलता है। बट रिलीजियस कैलकुलेशन के अनुसार तो 5000 साल पहले ऐसा कुछ हो गया था कि उससे पहले सब कुछ सही थे उसके बाद गलत हो गया। हम उसमें भी तो रेप
(1:00:12) हो रहे थे। पूरा महाभारत उसी चीज के आधार पे हम आप मेरा बात समझ रहे हो? उसमें भी तो शोषण हो रहा था। हम तो ऐसा क्या है कि कली में नहीं है। तो दिस इज़ अ मिसकंसेप्ट कि कली में सब खराब होगा और सतयुग में सब अच्छा होगा। यह गुणों का प्रवृत्ति है। चप के अंतर है। हम है ना? आप आप थोड़ा पॉजिटिव ज्यादा फील करते रहोगे तो आप शायद उस तरफ ज्यादा जाते रहो। हम लेकिन आप अगर चूज़ नेगेटिव को करोगे तो सतयुग में भी आप नेगेटिविटी कर सकते हो। ऐसा कुछ नहीं कि गुणों का प्रभाव आप पे बहुत है। वही वन% का इफ़ेक्ट है सब में। बाकी सर्व कर्म का खेल है। तो जब तक कर्म
(1:00:50) का बंधन को नहीं जीत पाई यह सब बहुत इतना इनसिग्निफिकेंट है कि आपने पांच स्टोन हाथ में लगा दिए और आपका भाग्य बदल जाएगा और कर्म आपका खराब है। आपने पढ़ाई नहीं किया पूरा साल और पांच स्टोन से आप पढ़ाई पास करके टॉप मार लोगे। हम ये संभव है नहीं। ओके। और अगर है तो जिस एस्ट्रोलॉजर ने आपको ये बात बताया उसने अपने को भारत का प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनाया? हां प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनाया? बनाना तो चाहिए था ना। राजा बनना चाहिए था उसे। वो क्यों नहीं राजा बन पाया अभी तक? आप बात समझ रहे हो? हां। वो इफेक्ट लाएगा वन% पे। जब आप कर्म के दायरे को
(1:01:32) क्रॉस कर लोगे। उसके बाद वो चीज़ इंपॉर्टेंट होता है क्योंकि वो तब तो माइन्यूट चीज पे हमें नोटिस करना होता है ना। हम तो वो माइन्यूट चीज पे हमें फोकस करना बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि हमें मुक्ति की राह पे निकलना है। तो हर चीज इंपॉर्टेंट होता है। लेकिन अगर मैं स्टार्ट कर रहा हूं कोई चीज एक बिज़नेस शुरू कर रहा हूं हम अब आप पडकास्ट शुरू कर दो हम ठीक आपको भी पता है कि जो ये माइक है ये सपोज 40,000 का माइक है। हम और 40 लै का भी माइक है। हां वो भी है। है ना? अब अगर स्टार्टिंग ऑफ़ द पॉडकास्ट में 40 लैक्स ऑफ़ माइक पे
(1:02:05) लगाओगे हम तो उसका इफ़ेक्ट और इसका इफ़ेक्ट में कितने परसेंट का चेंज होगा? और वो चेंज अभी आपके जितने सब्सक्राइबर हैं उसमें सिग्निफिकेंट है। हां अभी के लिए तो बहुत काफी है। अभी के लिए ये सही है। वो चेंज इनसिग्निफिकेंट है आपके लिए। लेकिन जब आपके पास 12 मिलियन 13 मिलियन फॉलोवर्स हो जाएंगे। तब वो चीज आपके लिए कितना सिग्निफिकेंट हो जाएगा। हां आज वो इतना सा इरशनल चीज़ उस टाइम कितना सिग्निफिकेंट लाता है। आप बात समझ रहे हो मेरा सेम चीज़ इधर है। अब मैं हूं काम क्रोध लोभ अहंकार में कर्म का बॉन्डेज करने पे बोझ लेके थका हारा एक इंसान उसके के लिए तो सहानुभूति
(1:02:45) उसको तो कर्म ठीक करना है। उसको सपोर्ट करना है। उसका आत्मबल को बढ़ाना है। उसको मनोबल को बढ़ाना है। उसको समझाना है भाई तू कर सकता है। अच्छा उसको उठाना है वहां से। उसको थोड़ी यह बोलना है कि तेरा शनि खराब है। साढ़े साती चल रहा है। और राहु ने खा लिया केतु आ गया तो कभी भी मर जाएगा। तेरे नौवे घर में ये है खत्म। दिस इज़ नॉट व्हाट एस्ट्रोलॉजिस्ट। अच्छा मतलब मैंने कभी-कभी देखा है एस्ट्रोलॉजी में लोग जो प्रेडिक्ट करते हैं ना वो कभी-कभी सच हो जाता है। ये कैसे होता है? वो कैसे पहले ही जानते हैं ये सब कुछ होने वाला है। एस्ट्रोलॉजी ऐसा
(1:03:22) एक ब्रांच है जो कंप्लीट स्टैटिस्टिकल साइंस के ऊपर आधारित है। इस नक्षत्र के सामने ये वाला प्लनेट इट वाले कंडीशन में ये प्रवणता बहुत ज्यादा होने की संभावना है। होगा कि नहीं वो डिसाइड करेगा आपका काम। अच्छा तो इसीलिए 90% एस्ट्रोलॉजिकल असेसमेंट गलत हो जाता है। 10% सही होता है। ओके इट इज ऑल अबाउट काका। मेरे को भी तो बोला था कि मैं कभी एमबीबीएस पास ही नहीं कर पाऊंगा। अच्छा ठीक और तू अभी एमडी ऑलमोस्ट शुद्ध बांग्ला में वो लाइन था जो दी एमबीबीएस पास लाए। हम गॉड ओके और जब मुझे इधर से निकल के मुझे टॉप रैंक मिल गया यूनिवर्सिटी रैंक
(1:04:09) मिल गया तो मैंने उसी एस्ट्रोलॉजर के पास दोबारा गया देखने कि एमडी पास कर पाऊंगा कि नहीं तब उन्होंने उन्होंने बोला एमडी में बहुत अच्छा रैंक लेके निकलूूंगा अच्छा क्योंकि मैंने थोड़ा सुना है भी था ना तो अब मेरा एमडी अभी 2 महीने में और कंप्लीट हो जाएगा तब मैं दोबारा जाऊंगा कि अब तो एमडी मेडिसिन हो गया अब बताओ आगे डीएम मिलेगा कि ये बात है। तो एस्ट्रोलॉजी पॉइंट वन है आपका कर्म बहुत ज्यादा है। कर्म को आप ठीक करोगे तो हां तो मैं वही पूछ रहा था कि कर्म को कैसे ठीक कर सकते हैं? कर्म था अच्छा है। कर्म के ऊपर एक पूरा वीडियो है।
(1:04:44) हां। कार्मिक स्ट्रक्चर के ऊपर वीडियो है। दोबारा हर एक वीडियो में तो वही बोलता है कि इससे ज्यादा तो मैं नहीं बोल पाऊंगा। इससे ज्यादा तो तेरा ही नहीं है। मैं अब कुंडली के बारे में बता दूं। मैं बता दूं बीज मंत्र के बारे में। मैं बता दूं कैसे उसे एक्टिवेट करते हैं। मैं क्रिया के प्रोसेस दिखा दूं बैठ के तो वो तब तक मैं नहीं दिखा सकता ना जब तक मुझे यह नहीं समझ में आएगा सामने वाला कितना एलिजिबल है। तो जब मैं एक वीडियो रिकॉर्ड कर रहा हूं तो मैं जीरो से 100 तक सबके लिए कर रहा हूं। तो मैं सिर्फ सेफ चीज जैसे मैंने एक टोटका
(1:05:15) बताया कि चित्त में जाने वाला है। चित्त में जाना है। है ना? वो किसी भी करोगे सेफ करोगे। अगर नेगेटिव तो स्पिरिचुअल स्कूल कब बनेगा? वहां जाके तेरा स्पिरिचुअल स्कूल क्या है? तो गोविंद है बस मैं कौन हूं? मैं कोई नहीं हूं। मैं क्या हूं? मैं एक छोटा सा डॉक्टर हूं। मरीज देखता हूं। यही मेरा कर्म है। मेरा स्पिरिचुअल स्कूल थोड़ी है। मैं गुरु थोड़ी हूं। अच्छा मैं भी तो उसी राह का एक छात्र हूं केवल। इतने सारे नॉलेज है तेरे पास कैसे आए? कहां है मेरे पास। इतने सारा कह तो पॉइंट वन कुछ ना है। अच्छा इसीलिए नहीं बताता है। हां मुझे क्या पता मैं जो पता है वो
(1:05:47) सच सुपरफिशियली मतलब ऐसे बोल के छोड़ देते हैं दर्शकों के सामने। हां मैं तो मुझे बहुत कुछ पता है। आपको समझा ना समझना पड़ेगा। तो समझ रहे थे कि मुझे बहुत आता है। बात एनीवे एफर्ट फ्रॉम दिस बकवास आई हैव अनदर क्वेश्चन। एक्चुअली कुछ दिन पहले हम शिवरात्रि के पालन कर रहे थे। इसको लेकर हर साल बहुत कंट्रोवर्सी शिवरात्रि और शिवजी पे दूध डालने का जो रिप्लाई है मैंने आपको WhatsApp में कर रखा है। वो आप लोग दर्शकों से शेयर कर देना। नहीं वो मुझे पता है। ठीक है ना? आप मेरे मुंह से निकालना चाहते हो वो ऑन कैमरा। चलो तब भी पूछो। हां। एक्चुअली ये थोड़ा समझना
(1:06:25) पड़ेगा। समझना पड़ेगा। आपको समझ नहीं आया। मुझे समझ में आ गया है। लेकिन मेरा ना एक प्रॉब्लम ये हो जाता है कि मैं जब दूसरे किसी को समझ समझाने की कोशिश करता हूं ना उस समय थोड़ा तो कुछ प्रॉब्लम हो जाता है। या फिर आई एम नॉट एलिजिबल टू मेक देम अंडरस्टैंड राइट नाउ। सो दैट्स व्हाई ये नहीं हो पाता है। तो इसलिए एक्चुअली ये पडकास्ट चैनल का चालू हुआ है। मैं ये यहां बैठ के गेस्ट को क्वेश्चन करता हूं तो जो जवाब जाता है ना वैसे सभी को आंसर मिल जाता है। अ मैं वो दीदी का नाम नहीं ले नहीं लेना चाहता हूं पडकास्ट में। लेकिन आई एम सॉरी टू से बिकॉज़ उस दिन मैंने जैसे
(1:06:59) मैसेज किया था शायद मुझे भी अच्छा नहीं लगा कि वो शब्द चयन जैसे मैंने किया था। लेकिन उसी का ही क्वेश्चन रिपीट कर रहा हूं। दीदी का मानना ये है कि हम जैसे दूध वेस्ट कर रहे हैं एक दिन। हां शिव जी के चरणों में डाल के तो क्या वो दूध को हम कहीं गरीबों में बांट दे तो इससे ज्यादा शायद फल मिल सकता है। ये दीदी का कहना है। हां दीदी किसी को बोल नहीं रहा है कि आप ये करो वो करो। लेकिन दीदी का मानना है कि ये करोगे तो फिर अच्छा होगा तो फिर मैं ये करूंगा। तो इसके मामले में आपने जो मुझे बोला था वही थोड़ा डिटेल्स समझा दो। डिटेल्स बहुत कुछ है।
(1:07:35) देखो शिव जी पे दूध तुम चढ़ा क्यों रहे हो? सबसे प्रथम बात शिव जी पर ऐसे जो लोग सारे जाकर दूध चढ़ाते हैं, उसका कोई वजह और रीज़ नहीं होता है। ठीक? देयर इज़ एब्सोलुटली नो साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन व्हाई यू विल बी पोरिंग मिल्क कॉन्शियस। हम जो रीज़ है वो है कॉन्सिक्रेशन का प्राण प्रतिष्ठा का। हम जब भी कोई नॉन लिविंग ऑब्जेक्ट को हम प्राण प्रतिष्ठा करते हैं, कोई स्टोन को प्राण प्रतिष्ठा या कॉन्सक्रेट करते हैं, तो उस स्टोन में लाइफ एनर्जी को रहने के लिए उस स्टोन का इंटीग्रिटी को मेंटेन करना बहुत जरूरी है। वो स्टोन अगर बीच से
(1:08:20) टूट जाए तो उसके जो हमने उसके अंदर इड़ा पिंगला बनाया उसके अंदर जो स्रोताज़ बनाए वो डिस्मेंटल हो गए। डिस्मेंटल होने के बाद मुझे उस स्टोन में प्राण का फ्लो नहीं हो पाएगा। एंड दिस स्टोन विल बी अ डेड मंदिर। जैसे हमारे 99% ऑफ हिंदू टेंपल्स आर डेड टुडे। काशी विश्वनाथ भी आईसीयू में है। काशी विश्वनाथ के च जितने भी चक्र सिस्टम थे उसमें ज्यादातर चक्र डेवलपमेंट के नाम पे इफेक्ट हो गया है। तो काशी विश्वनाथ भी बहुत दिन और अलाइव काशी विश्वनाथ इस एन अलाइव टेंपल। हम अभी भी जिंदा है। ज्यादातर मंदिर मुर्दे मंदिर है। वहां भगवान जी का लिंग है, पूजा होता है, सब
(1:08:59) कुछ होता है। बट देयर इज नो एनर्जी रिवाइब्रिटेटिंग प्राण शक्ति नहीं है। इफ यू कैन फील द एनर्जी जो मेरा लेफ्ट हैंड बहुत ज्यादा है। तो तो वो चीज नहीं है। आपको याद होगा बनारस में कैसे सिर्फ एक लेफ्ट हैंड से हमने तोतापुरी का टेंपल ढूंढ लिया था। राइट? राइट? कि नाउ यू कैन सी यू कैन फील द इंटेंसिटी। राइट? तो आपको खींच लेगा ना आपको बस आप उस एनर्जी को फॉलो करते जाओ लाइक मैगनेट यू कैन फील द डेंसिटी यू कैन अब बात आता है आपने नोटिस किया होगा मैं ऐसेसे करता हूं बिकॉज़ दिस इज द रेडिएटर पार्ट ओके ये सो यू आर आल्सो अब अगर गरम
(1:09:35) टेंपरेचर देखना है तो मैं इधर से देखते हो इधर से देखता हूं ऐसे किसी को टेंपरेचर गरम है आप इधर से छू के देख लो और इधर से छू के देखना अच्छा इधर से ज्यादा बेटर है क्योंकि दिस इज अ गुड रिसीविंग एंड अच्छा दिस इज द रिसीवर ओके है ना तो हां मैं ऐसे तो शिवम टेंपल में जब हम कॉन्सग्रेट करते हैं हम सालों साल हजारों सालों के लिए एक पत्थर को कंसग्रेट करते हैं तो एक पत्थर को अगर मैं क्रैक ना आने दूं हम उसका मेंटेनेंस सिस्टम रखूं तो उसको रिपीटेड बेसिस में अगर फैट से फैट फैट से उसको लेपा करूं तो उसका लाइफ लंबा हो जाता है। अच्छा आप मेरा
(1:10:14) बात समझ रहे हो? उसमें क्रैक्स कम आते हैं। इसके वजह से हम फैट को चूज़ करते हैं। एनिमल फैट में बहुत ज्यादा तामसिक एनर्जी होता है। अगर मैं किसी जानवर को मार के उसका चर्बी निकाल लूं। हम इसलिए हम दूध को प्रेफर करते हैं। दूध में उतना फैट भी है, दूध में लिक्विडिटी भी है, दूध में सात्विक कंटेंट भी है। तो इसलिए दूध से अगर हम उस स्टोन को थोड़ा देर के लिए इमर्ज कर दें या उसके फैट को यूज़ करें तो वो जो स्टोन है वो कुछ हजार साल तक प्रिजर्व रहेगा। लेकिन वो काम सिर्फ उस मंदिर का गर्भ गृहिया का पुरोहित करना चाहिए। ये डिपेंडिंग ऑफ़ लिंग एक गिलास दूध से ही हो
(1:10:56) जाना चाहिए। हजार लाखों लोग लाइन पे लगे दूध डालने का कोई मतलब नहीं है। नहीं है। ये हो गया मेंटेनेंस पॉइंट ऑफ व्यू का आंसर। ओके। आप मेरा बात समझ रहे हो? हम तो हमारा काम मंदिर में जाके पूजा करना नहीं है। हम गीले शरीर में मंदिर में सिर्फ बैठना हमारा काम है। एनर्जी को अब्सॉर्ब करना हमारा काम है। पूजा का मतलब वो सर्टेन स्टेप्स है जो कॉन्सिक्रेशन को मेंटेन करने के लिए जरूरी है जो गर्भ गृह के अंदर दायित्व प्राप्त हम पंडित जी करेंगे। हम हमें नहीं करना। राइट? हमें गर्भगृह के अंदर जाने का भी अनुमति नहीं है। हमें मंडप में रुक के गीले शरीर में
(1:11:40) उस एनर्जी को अब्सॉर्ब करना है। क्योंकि हर मंदिर एक ट्रांसमीटर है। हम पॉजिटिव वाइफ का यूनिवर्सल एनर्जी का। तो आपको वो करना है। दूसरा पॉइंट क्या है? दूसरा पॉइंट है स्पिरिचुअल पॉइंट। स्पिरिचुअल पॉइंट में अगर आप भक्ति भर हम अब यहां बात आता है। ठीक है ना? कि आप कौन से लेवल पे खड़े हो। अगेन आप एनसीआरटी के लेवल तक हो या आपको अब नीट पीजी आईआईटी जेआईटी देना है या उसके ऊपर के कोई एग्जाम्स देना है। आप कहां पे एक्सैक्टली लाई कर रहे हो? आप ऐसे कंडीशन में हो जहां पे भक्ति आपका मैं ये नहीं बोल रहा कि भक्ति ऊपर है तो भक्ति नीचे है तो ज्ञान ऊपर है। सब बराबर है।
(1:12:19) भक्ति से भी आप ऐसेसे जगह पहुंच सकते हो जहां शायद ज्ञान कभी ना पहुंचा पाए। और ऐसे जगह पे भी ज्ञान से जा सकते हो जहां भक्ति पहुंच। मतलब कोई भी मार्ग अलग है ऐसा नहीं है। सब कुछ का अपना एक तरीका है। तो जो भक्ति मार्ग है वो ब्लाइंड मार्ग है। हम मेरा बात समझ रहे हैं? भक्ति मार्ग में मैं कोई ज्ञान समझूंगा ही नहीं। कोई लॉजिक नहीं समझूंगा। सिर्फ मैं अपना प्यार न्योछावर कर रहा हूं। एक मां दूध से अपना प्यार नछावर करता है। एक राजा प्रोस्पेरिटी को दिखाने के लिए पानी की जगह दूध का कुआं खोदता है। आप मेरा बात समझ रहे हो? तो उसे मैं मानता हूं कि पानी
(1:12:52) से ज्यादा महंगा है। मेरे पास सबसे महंगा चीज दूध है। हम है ना? तो मैं वही आप पे अर्पण करता हूं। ये कांसेप्ट है भक्ति मार्ग का। ज्ञान मार्ग में जब आप ऊपर उठ जाते हो तो कुछ हद तक शहद, दूध, घी, दही, दही, हरिद्र, फिर कुछ-कुछ पर्टिकुलर फल का रस, कुछ पत्ते, कुछ फूल, हम कुछ कुमकुम का पाठ, कुछ चंदन, हम कुछ दुर्वाएं। ऐसे बहुत सारे चीजों का कॉम्बिनेशन होता है। कभी कबार लोग उसे पंचामृत बोल देते हैं कोई। वो एक एक स्वातिक ओरा जनरेट करता है आपके चारों तरफ। ओके? ये वन% वाला पार्ट है। अगर ये सब हो गया तब आपको जरूरत है उस
(1:13:38) स्वातिक ओरा का। ओके? है ना? तब आपको स्वातिक ओरा को उसको आप यूटिलाइज़ कर सकते। लेकिन वो यूटिलाइजेशन उस एनर्जी लेवल तक पहुंचना ही अगर आपको नहीं आता। आपको पता ही नहीं उसको हैंडल कैसे कर रहे हैं तो उसका कोई मतलब ही नहीं है। तो वन% लोगों को वो औररा जनरेशन के लिए वो चीज चाहिए। यहां तक समझ में आ गया। अब आता है और डिटेल में आओ। तो अब आता है क्या? आयुर्वेदिक पॉइंट ऑफ व्यू हम है ना? शिवरात्रि दिन मतलब शिवरात्रि साल में एक बार नहीं होता है। अच्छा हर महीने शिवरात्रि होता है। है ना? इसमें चतुर्दशी में चतुर्दशी में अमावस्या के पूर्व जो
(1:14:15) चतुर्दशी है उसमें शिवरात्रि है हर उस और इसमें महाशिवरात्रि साल का एक को बता देते हैं तो हर शिवरात्रि के चतुर्दशी तिथि में द अमाउंट ऑफ डाइजेस्टिव कंडीशन जैसे एकादशी है हम आप अगर किसी को बताओ नहीं ना कि एकादशी कहां है कब है और आज आप एक चीज नोटिस करो कि आप अगर सुबह 1:00 बजे खा दोपहर के 1:00 बजे लदी करते हो डेली 1:00 बजे आपको भूख लगता है हम्। आप अगर इस साइकिल को अपना ब्रेक कर दो कि मेरे पास कोई टाइम नहीं है। कब मैं खाता हूं। आगे पीछे इधर-उधर खाता हूं। हम ठीक? जैसे जंगलों में जानवर है। हम मॉडर्न साइंस बोलेगा टाइम पे खाना बहुत सही है। मैं तो
(1:14:53) भाई नहीं मानता हूं। लेकिन मैं मॉडर्न साइंस का स्टूडेंट हूं तो मुझे मानना पड़ता है। जो किताबों में लिखा है वो मुझे मानना है। बट मेरे पास एक ताकत है सवाल पूछने का जो मुझे पता नहीं बाकी लोग पूछते हैं कि नहीं। मेरे हिसाब से टाइम पे खाना खाना नहीं ठीक है। राइट? लेकिन दर्शक सब टाइम पे ही खाना खाए। मॉडर्न साइंस एविडेंस बेस्ड साइंस यही बोलता है और टाइम पे ही खाना खाना चाहिए। ठीक? जंगलों में जो जानवर है वो टाइम पे खाना तो नहीं खाता है। जब भूख लगता है तब खाना खाना लेता है तब खाता है। है ना? हमारा बायोलॉजी ऐसे बना हुआ है।
(1:15:24) तो आप अगर किसी को ये मत बताओ कब अमावस्या है और वो तो देखोगे ज्यादातर एकादशी वाले दिन लोगों को भूख ही नहीं लगता। क्योंकि सिस्टम ऐसा इंक्लाइंड है यार। हम्म। एकादशी के दिन आप जितना ठूसोगे ना हम उतना अनडाइजेस्टेड फूड प्रोडक्ट ज्यादा रहेगा। हम वहां फर्मेंटेशन ज्यादा होगा और आयुर्वेद में जो टॉक्सिन है उसका नाम है आम। उतना आमा प्रोडक्शन ज्यादा होगा। ऐसे ही चतुर्दशी तिथि में मिल्क को डाइजेस्ट करने का जो कैपेसिटी है हम है ना? वो कम हो जाता है। अच्छा। तो वो भी एक प्राइमरी रीज़न है। लेकिन इतना भी कम नहीं होता कि बहुत ज्यादा
(1:16:04) सिग्निफिकेंस है। आप बात समझ रहे हो? और एक सोशल आंसर है कि एक दिन आप किसी को दूध पिला दोगे उससे क्या फर्क हो जाएगा? मतलब आप एक दिन 5000 लीटर दूध किसी एक बच्चे को दिन में एक गिलास पिला दिए। उसमें कोई फर्क नहीं होता। अगर आपको कोई सोशल काम करना है तो 5000 बच्चा छोड़ो। किसी एक बच्चे को डेली पिला दो उसका कल्याण हो जाएगा। एक गिलास दूध एक दिन के लिए बस नो इफेक्ट उनका कहना है कि दिन के लिए तो सही एक गिलास दूध रिपीटेड बेसिस एस इफेक्ट ठीक है उनको अगर ये चीज में अच्छा लग रहा है शी इज़ मोस्ट वेलकम टू परफॉर्म दैट शी इज़ मोस्ट वेलकम टू परफॉर्म दैट एंड वी विल बी
(1:16:46) हैप्पी कि किसी को कुछ मिला तो दूध का जो चीज़ है ये है बात तो ये जो सब जगह दूध डालते हैं वो भक्ति से क्यों डालते हैं विज्ञान से क्यों डालते हैं? चतुर्दशी तिथि में दूध आयुर्वेद जनरली ओपनली मना नहीं करता है। जैसे विरुद्धार वाला कांसेप्ट है ओपनली मना करता है। ऐसा नहीं। लेकिन आप अगर गहराई ऑफ़ आयुर्वेद में जाओगे तो देखोगे कि चतुर्दशी तिथि में मिल्क इज हैवी टू डाइजेस्ट। अच्छा। लघु और एक गुरु बोलते हैं उसको हैवी टू डाइजेस्ट। दैट कैन जनरेट डिसामा। इसलिए चतुर्दशी तिथि में हम दूध को लिटिल बिट अवॉइड करने की कोशिश करते हैं। फॉललोड बाय
(1:17:23) द अमावस्या पीरियड। वैसे पीरियड इज़ आल्सो नॉन दैट वेरी वेरी हाई एनर्जी पीरियड नहीं है। अच्छा ठीक है ना? तो उसमें हम थोड़ा सा अवॉइड करते हैं चीजों को। उसका यह रीजन

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