Love, Marriage & Cheating: The Mind Games You Need to Understand | Raj Shamani Clips
Author Name:Ajay Inspiration
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Transcript:
(00:00) व्हाट डू यू फील? व्हाट्स बेटर? लव मैरिज, अरेंज मैरिज? [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेरा पहला सवाल है कि मैरिज या नो मैरिज? एक तो पहला सवाल [हंसी] है। मैरिज या नो मैरिज? ठीक है। तो मैरिज या नो मैरिज मुझे ऐसा लगता है कि फ्यूचर मैरिज का बहुत सेफ नहीं है। क्यों? फिर एक बात है। इवोल्यूशन का माइंडसेट कहें या वैसे माइंडसेट कहें। हम हर इंसान के दिमाग में इंसान ही नहीं हर स्पीशीज के दिमाग में हर प्राणी के दिमाग में एक तराजू रखा हुआ है। हां उसके एक तरफ कॉस्ट एक तरफ बेनिफिट है। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] आप कहें ना कहें आपके दिमाग में 24 घंटे
(00:39) वो तराजू एक्टिव रहता है। हर चीज में कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस। हर ह्यूमन रिलेशन अल्टीमेटली यहां तक कि फैमिली के अंदर भी इसी सिस्टम पे काम करते हैं। मां और बच्चे का रिलेशन स्पेशली जब बच्चा बहुत छोटा हो तो थोड़ा सा इससे अलग उसको अनकंडीशनल लव कह देते हैं। अदरवाइज हर ह्यूमन रिलेशन इसी बेटे का हुआ है। ठीक है? शादी छोड़ के बाकी सारे रिश्ते ऑलमोस्ट सारे रिश्ते फैमिली वाले गिवन है। हम मैं अपने पिताजी को नहीं चुन सकता, मां को नहीं चुन सकता, भाई बहन नहीं चुन सकता। हम वो तो गिवन है। हां जहां गिवन है वहां दिमाग उतना चलता नहीं
(01:15) कि फायदा है कि नुकसान है। यह है [हंसी] तो है कभी-कभी आप दुखी हो सकते हैं कि अच्छा बाप मिल जाता अच्छा भाई मिल जाता है। अच्छी बहन मिल जाती कभी-कभी [नाक से की जाने वाली आवाज़] खुश हो सकते हैं। अच्छा वो वो नहीं मिला मेरे वाले ज्यादा अच्छे हैं। हम पर चॉइस नहीं है वहां उनके पास। हमारी पूरी जिंदगी में एक रिश्ता जहां चॉइस है। हां। फैमिली रिलेशंस की बात करूं। दोस्तों को छोड़ के बात कर रहा हूं। वो स्पाउस है। और यह भी तय है कि स्पाउस का इंपैक्ट हमारे जीवन पर सबसे ज्यादा है। हम इनिशियल पार्ट ऑफ लाइफ छोड़ दें। मोटे तौर माने जी 25 की उम्र में शादी हुई तो 25 से
(01:51) लेके 75 80 90 जरूरी है। हम लगभग 3/4 ऑफ़ द लाइफ उसी का इंपैक्ट रहने वाला है। और 24 घंटे का इंपैक्ट है। [गला साफ़ करने की आवाज़] ना मां के साथ 24 घंटे, ना बाप के साथ, ना भाई के साथ, ना बहन के साथ। हम् वहां 24 घंटे का है। जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला है शादी। तो कॉस्ट बेनिफिट का राजू सबसे ज्यादा एक्टिव रहता है। हम ये अलग बात है कि शादी कम उम्र में हो गई। जब तक प्री फ्रंटल कॉर्टेक्स आपका डेवलप ही नहीं हुआ था तो अफसोस से नहीं इमोशन से बह के हाजी कर लेते हैं। 18 20 साल के बच्चे हैं। प्यार हुआ भागे शादी कर ली। वो एक अलग बात है।
(02:26) हां। पर अगर आप 25 क्रॉस कर गए और ये हिस्सा डेवलप हो गया। तराजू ठीक से डेवलप हो गया। आप देखेंगे जो 25 तक शादी नहीं करते फिर अक्सर वो लेट हो जाते हैं। फिर वो 30 हो गया, 35 हो गया। अभी तराजू बहुत एक्टिव हो गया है। [हंसी] अब उनको हर मामले में लगता है कि यार बेनिफिट ज्यादा है कि कॉस्ट ज्यादा है। वो नोट्स बनाते हैं। लिस्ट बनाते हैं। लॉस क्या है? क्स क्या है? [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] और हमेशा लगता है कि ये पैकेज ठीक नहीं है। हम्म। इसमें लॉस ज्यादा है। इन टोटिटी मुझे ऐसा लगता है कि नियर फ्यूचर में मैरिज सिस्टम अपने
(03:05) [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप में जितने बेनिफिट देगा उससे ज्यादा प्रॉब्लम्स देगा। तो जो जनजी है आप भी जजी वाले शायद होंगे। हां जी। और जो जैन अल्फा है उसमें टेंडेंसी ये बढ़ेगी कि लोग शादी ना करें। हम और जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा ये टेंडेंसी और बढ़ेगी कि शादी ना करें। यह मेरा अनुमान है। बीइंग अ स्टूडेंट ऑफ़ सोशियोलॉजी एंड साइकोलॉजी मुझे लगता है कि ऐसा होगा। क्यों? क्योंकि शादी से जो बेनिफिट्स मिलते थे वो बिना शादी के ही मिल रहे हैं। भाई पुराने जमाने में लोग शादी क्यों करते थे? क्योंकि उनको सेक्सुअल नीड्स फुलफिल करने का एक ही रास्ता था शादी।
(03:43) हम या तो रेड लाइट एरिया में आप जाएंगे। मेल्स को ये ऑप्शन मिल जाएगा। पर ये कोई ऐसा ऑप्शन तो है नहीं कि आप इसके भरोसे जिंदगी गुजारेंगे। नहीं तो एक ही तरीका है। समाज ने एक ही रास्ता छोड़ रखा है शादी। सेक्सुअल नीड्स एक उम्र के बाद परेशान करती हैं। वो आपको पूरी करनी ही है तो शादी कर लो। इसलिए कल्चर क्या थी? लड़कियों के पेरेंट्स बहुत जोर लगाते थे कि बेटा शादी से पहले मिलना नहीं है। हम बहुत बाद में हुआ तो मुंह दिखाई कर लो। मिलने के टाइम पे दो मिनट बात कर लो अकेले में। लेकिन मिलना नहीं है क्योंकि लोगों को आईडिया है कि वह खुमार 4 दिन, 10 दिन, 20
(04:22) दिन में खत्म हो जाएगा और फिर हो सकता है स्पेशली लड़के के मामले में हो सकता है कि उसको लगे कि नहीं हम उस खमार को उतरने से पहले शादी करवा देनी है। जिंदगी भर का इंश्योरेंस लेना है। क्योंकि लड़कियों के पास उस समय नौकरी नहीं है। पढ़ाई लिखाई है नहीं। हम समाज ने भेजा ही नहीं पढ़ने लिखने के लिए। नौकरी केवल बेटा करेगा। खेती केवल बेटा करेगा। बाहर का सारा काम बेटा करेगा। कमा के बेटा लाएगा। बेटे की जरूरतें पूरी करने के लिए एक दुल्हन आएगी। दुल्हन के पास यूएसपी क्या है कि [गला साफ़ करने की आवाज़] वो उसकी एक नीड को पूरा कर सकती है। दुल्हन से कोई पूछेगा
(05:00) ही नहीं कि तुम्हें लड़का पसंद है कि नहीं है। कोई नहीं पूछता था। हम और सबको पता है लड़की के बाप को भी लड़के के बाप को भी सबको पता है क्योंकि वो भी उस दौर से गुजरे हुए हैं हम कि सेक्सफुल नीड्स कुछ समय के बाद जब कम होती हैं या मन भरने लगता है तो विवाह नहीं टिकता उसके बाद हम तो दो सिस्टम्स आप देखेंगे पुराने समाजों में एक तो शादी से पहले मेल मिलाप नहीं होगा हम दूसरा शादी के बाद तलक नहीं होगा हम चाहे आप कैथोलिक्स में देखें यहूदियों में देखें हिंदुओं में सिखों में जैनों में बौद्धों में मुस्लिम्स के अपवाद हैं थोड़े से डिवोर्स नहीं होगा क्योंकि डिवोर्स का
(05:38) दरवाजा खोल दिया तो लाइन लग जाएगी हम तो मौका देना ही नहीं है बांध लेना है अब आज के समाज में क्या है लड़कियां खूब पढ़ती हैं कॉलेज जाती हैं उनकी नौकरी है करियर है मैं स्पेशली बॉम्बे दिल्ली की बात कर रहा हूं गांव [नाक से की जाने वाली आवाज़] में भी वही चल रहा है अब यहां डेटिंग साइट्स हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] नौकरी में लोग मिलते हैं। स्कूल कॉलेज में लोग मिलते हैं। हजारों इंटरेक्शंस हैं। अगर प्रेम हो गया, कानून आपके फेवर में है। अगर आप 18 प्लस के हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] या दोनों बच्चे 18 से कम के हैं। हम ये दोनों 18 से ऊपर हैं। कानून परेशान
(06:14) नहीं करता आपको। कोई रोक ही नहीं सकता। हम कोई पुलिस, कोई समाज आपको मना कर ही नहीं सकता प्रेम करने से लीगली। तो आप कर रहे हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] सोशल मीडिया आप देख रहे हैं। रील लगातार देख रहे हैं। टीवी देखते हैं, फिल्में देखते हैं। हर जगह वैसा माहौल है। डेटिंग साइट्स पे लाइन लगी हुई है। आपको इतने ऑप्शंस मिल जाते हैं। हालांकि उसमें खतरे भी होते हैं। बहुत इंसिडेंट्स हैं लेकिन ऑप्शंस तो हैं। हम पहले खतरा क्या था कि अगर फिजिकली इंटिमेट हो गए, वो लड़की प्रेग्नेंट हो गई तो जिंदगी खत्म। हम यह सबसे बड़ा खतरा है। हमने लिटरेचर में देखा है हजार साल के
(06:52) लिटरेचर में लगभग हर सदी में कुछ ऐसी रचनाएं हैं जहां महिला प्रेग्नेंट हो गई और जिंदगी खत्म हो गई। ये सबसे बड़ा खतरा रहा है ह्यूमैनिटी के लिए। एनिमल्स में खतरा नहीं है क्योंकि हमारी शादी का सिस्टम नहीं है। हम ह्यूमंस में है। क्यों खत्म हो गई? क्या? 1961 में पहला कंट्रासेप्टिव यूके में आया। हम्म। जिसमें ये हुआ कि आप मतलब महिलाओं के लिए था। एक पिल थी। हम [हंसी] उसको लोगों ने मैजिक बिल बोलना शुरू किया वहां पर हम वो प्रेगनेंसी को रोक सकती थी हम 1961 के बाद कंट्रासेप्ट्स बहुत सारे आ गए हम पहली बार दुनिया उस स्थिति में है जहां
(07:30) फिजिकल इंटिमेसी के बाद भी आप माना बनना चाहे तो ना बने हम जबरदस्ती नहीं हम जब ये हो जाएगा ओपननेस है ही लोग मिल रहे हैं बाहर उनमें से बहुत लोगों को शादी करने की जरूरत क्यों लगेगी? एक बहुत बड़ी संख्या में लोग हैं जिनके लिए शादी का इतना ही मतलब था। उन्हें वो सब मतलब नहीं था कि दो लोग रहेंगे आत्मा तन मन विचार मिलेंगे और हम लोग कंपैनियनशिप वो सब तो शहरी किस्म की बातें हैं। एक आम जो बच्चा है जो पढ़ा लिखा नहीं है। मजदूरी करता है। वैसे उसके दोस्त हैं। उनकी भाषा में जब बात होती है तो शादी किस लिए की जाती है? हम एक लड़की चाहिए जरूरतें पूरी करने के लिए
(08:16) तो बच्चे चाहिए वो लड़की घर में आएगी घर का माहौल ऐसा है कि वो उसमें ढलना ही होगा उसको हम क्योंकि कल्चर ये भी है कि डोली यहां से गई अर्थी वहां से उठेगी वापस नहीं आना है हम अलग नहीं होना है डिवोर्स का कानून हमारे समाज में 1955 में आया है 1955 से पहले कोई हिंदू सिख जैन या बौद्ध तलाक ले ही नहीं सकता था 1955 अभी सिर्फ 70 साल हुए हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] [नाक से की जाने वाली आवाज़] तलाक का ऑप्शन नहीं है। संस्कार है कि लड़की वापस नहीं आएगी अपने मायके में। लड़की वापस नहीं आई तो कहां जाएगी? ससुराल में ही रहना है और वहां पति की जरूरतें पूरी करनी
(08:56) है। ये एक सेटअप था जो दुनिया के अधिकांश समाजों में था। हम अब ऐसे बहुत सारे ऑप्शंस हैं। अगर किसी को शादी केवल इसलिए करनी थी कि मेरी नीड्स पूरी हो। हम हजारों ऑप्शंस हैं। ऐसे बहुत लोग हैं जिनको पेरेंट बनना ही नहीं है। मेरे कई दोस्त हैं जिनकी उम्र 40 के आसपास है। पतिप्नी है। पेरेंट नहीं है ना उनको बनना है। हम नहीं बनना। डंक बोलते हैं वो लोग उनको डबल इनकम नो किट्स या सिंक हो गया। सिंगल इनकम नो किट्स हैं। चाहिए नहीं बच्चे। हम पूछते हैं कि बच्चा क्यों नहीं चाहिए? बोलते हमने पूछा कि आपको क्यों चाहिए? [नाक से की जाने वाली आवाज़]
(09:34) आपकी चॉइस आपको चाहिए। हमारी चॉइस हमें नहीं चाहिए। तो जिसको बच्चा चाहिए ही नहीं। उसके लिए शादी का क्या मतलब था? नीड्स पूरी हो जाए। एक दोस्त मिल जाए जिंदगी भर के लिए। दोस्त वैसे ही मिल सकते हैं। कोलिविंग में मिल जाते हैं। हम को लिविंग में ये ऑप्शन भी है कि आप एक समय के बाद नहीं कंपैटिव बोले अलग हो जाइए। क्यों साथ रहना है? दोनों पढ़े लिखे हैं। दोनों समझदार हैं। कॉन्फिडेंट हैं, सिक्योर हैं। कोई इनसिक्योरिटी है नहीं तो क्या परेशानी है उनको? इसलिए जिस गति से लोग पढ़ लिख रहे हैं, बड़े शहरों में रह रहे हैं, कमा रहे हैं।
(10:10) ओपननेस जो उनके थॉट्स में आ गई है। क्रॉस जेंडर जो इंटरेक्शंस की क्वांटिटी और क्वालिटी बढ़ गई है। ग्लोबल कल्चर का जो इंपैक्ट है, अमेरिका में, फ्रांस में क्या हो रहा है, वो हम यहां पर देख रहे हैं। ठीक-ठाक चांसेस हैं कि शादी [गला साफ़ करने की आवाज़] का इंपैक्ट कम होता जाएगा। अभी भी हिस्ट्री में हाईएस्ट नंबर ऑफ सिंगल लोग आज हैं। हां पर जेन्युइन मुझे इफेक्ट नहीं पता पर ये व्हिच इज द अंडरस्टैंडेबल है। हाईएस्ट नंबर ऑफ़ सिंगल पीपल टुडे इन द वर्ल्ड। मैंने नंबर ऑफ़ पीपल हु आर चूजिंग नॉट टू बी मैरिड। टू नॉट टू बी मैरिड। नॉट टू आल्सो बी इन अ
(10:48) रिलेशनशिप ऑफ़ एनी फर्म ऑफ़ कमिटमेंट। दे आर लाइक नॉन कमिटेड रिलेशनशिप में हम रह लेंगे। कमिटेड रिलेशनशिप में हम किसी में भी नहीं रहेंगे। हाईएस्ट नंबर ऑफ़ एनसीए हम उसको बोलते हैं क्या है नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] कमिटेड क्या है नॉन मोनोगैमी वाला एक शब्द चलता है आजकल जिसका मतलब ये है कि हम ट्रांसपेरेंट है हम पर नॉन मोनोगमस है हम [गला साफ़ करने की आवाज़] और हमारे अंदर या पॉलीमरोस रिलेशनशिप सुनते होंगे ना पॉलीगमोस रिलेशन पॉलीगम से डू यू फील लोग पॉलीगैमस ही होते हैं पॉलीगैमस अलग है पॉलीगमेरोस से अलग है एकदम अलग-अलग बातें हैं
(11:21) नहीं बाय बाय बर्थ डू यू फील ह्यूमंस यस यस यस वेरी मच नॉट इवन ह्यूमंस इवन द एनिमल्स तो आर देयर मोस्ट ऑफ़ द एनिमल्स आर एनिमल्स की बात नहीं बर्ड्स की बात कर रहा हूं। बर्ड्स के बारे में ये गलतफहमी रही है लंबे समय तक कि वो मोनोगमस होते हैं। हम लेकिन जब डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से रिसर्च हुई तो पाया गया सर दरअसल मोनोगैमी के चार टाइप्स होते हैं। एक होता है मेंटल मोनोगैमी। हम कि मेरे दिमाग में भी किसी और का विचार नहीं आएगा। हम एक होती है सेक्सुअल मोनोगैमी कि दिमाग में बेशक आता रहे पर रिलेशनशिप एक से ही रहेगी हम एक होती है जेनेटिक मोनोगैमी कि रिलेशंस
(12:02) किसी से बनते रह पर मां-बाप बनेंगे तो हम दोनों ही बनेंगे किसी और के साथ नहीं बनेंगे ओके एक होती है सोशल मोनोगैमी कि [नाक से की जाने वाली आवाज़] मां-बाप किसी और के साथ बन भी गए ना तो समाज को देखेगा यही कि हम दोनों पतिपत्नी हैं और ये हमारा बच्चा है। ऐसे बहुत बच्चे हैं जो उन पेरेंट्स के साथ नहीं है जो दरअसल जिसके हैं हम ऐसी कहावतें हैं मदर्स बेबी फादर्स मे बबी एक ऐसी कहावत बहुत प्रसिद्ध है अफ्रीकन कहावत है ये एक ब्रिटिश कहावत है मदर इज अ फैक्ट फादर इज अ फेथ भाई डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से पहले कोई कैसे क्लेम कर सकता था कि ये मेरा बाप है
(12:40) कि नहीं है तो भरोसा है अब डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से पता लग जाता है हम और ये तो मुश्किल से पिछले 50 साल की बात है। 30 साल की बात है। हम तो 30 साल पहले तक दुनिया में केवल भरोसा चल रहा था। हम अभी ब्रिटेन में शाही परिवार के एक बच्चे का जब जेनेटिक स्ट्रक्चर देखा गया तो उसके जींस में इंडियन जींस भी देखे गए हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप किसी का भी निकाल लेंगे पूरी कुंडली तो विश्वास उठ जाएगा। हां। पीछे की किसी ना किसी पीढ़ी में कभी ना कभी ऐसा हुआ होगा। हम तो भरोसे पे दुनिया चल रही है। [हंसी] ये भरोसे पे और क्या है? [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
(13:17) भाई हां आप बता रहे हो तो सोशल मोनोगैमी हम हम लोग सोशल मोनोगमी में आम तौर पे रहते हैं। हम तो मेरा मानना यह है पक्षियों के बारे में भी यह माना गया फाइनली उनमें सोशल मोनोगैमी है। उनमें जेनेटिक या सेक्सुअल मोनोगैमी नहीं है। कबूतर कबूतरी एक बच्चा पाल रहे हैं मिलके पर हो सकता है उस कबूतर का ना हो। पर वो एक हम कपल की तरह से पालेंगे क्योंकि उनकी स्पीशीज को बाईपेरेंटल केयरिंग चाहिए। हम जहां तक ह्यूमंस की बात है, ह्यूमंस के बारे में सामान्य धारणा यही है कि वह मेंटल मोनोगमी तो इंपॉसिबल ही मान के चलिए। सेक्सुअली मोनोगमस मेरे ख्याल से
(13:58) ठीक-ठाक संख्या में लोग होते हैं। जिसमें एक बड़ी वजह है कि उनके पास ऐसी ओपोरर्चुनिटीज भी नहीं होती हैं। एक ट्राइबल माहौल में आपकी शादी हुई, वहां इतनी बंदिशें हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] कि कोई संभावना ही नहीं है। और अगर आपने गलती की तो सीधे मर्डर हो जाएगा आपका। हम तो कई लोग रहेंगे जिंदगी भर जिंदगी [नाक से की जाने वाली आवाज़] भर रिलेशनशिप में ही नहीं रहेंगे और रहेंगे तो एक से रहेंगे ऐसे लोग बहुत सारे हैं हम लेकिन मेरे ख्याल से ह्यूमन सोसाइटी अगर नेचर की बात करें ह्यूमन बीइंग्स की स्पेशली इफ यू आर टॉकिंग अबाउट मेल्स
(14:35) तो मोनोगैमी एक कल्चरल कंस्ट्रक्ट है वो नेचुरल फिनोमिना नहीं है। व्हाई यू सेड मेल्स वुमेन में नहीं होता ये वुमेन के मामले में उतना नहीं मानते हैं। उसकी वजह यह है कि जब दोनों में इंटरेक्शन होता है, दो वजहों से ऐसा कहा जाता है। मैं यह नहीं कह रहा कि फीमेल्स में नहीं होता है। मैं कह रहा हूं स्पेशली इन मेल्स टू टू एट एक्सटेंट फीमेल्स में भी ऐसा हो सकता है। लेकिन दो रीज़ंस इसको थोड़ा सा अलग करते हैं। पहला रीज़न यह है कि जो इमोशनल लव है, हम जनरल परसेप्शन यह है कि आदमी का इमोशनल लव बहुत तेजी से उठता है, उतना ही तेजी से डाउन चला जाता है।
(15:18) शुरुआती प्रेम में आप देखेंगे लड़के ज्यादा उत्सुक रहते हैं। हर चीज में डिमांड वही करते हैं। हर नया [गला साफ़ करने की आवाज़] प्रस्ताव वही देते हैं। हम उनके हार्मोंस, टेस्टोस्टरॉन को बहुत परेशान करता है। पर वो तब तक है जब तक फिजिकल इंटिमेसी नहीं बनी है। हम फिजिकल इंटिमेसी बनने के बाद या दो चार 10 20 बार बनने के बाद बहुत तेजी से उनका ग्राफ नीचे आना शुरू होता है। इसलिए महिलाओं को अक्सर शिकायत रहती है कि तुम जैसे पहले थे वैसे अब नहीं हो। और वो [नाक से की जाने वाली आवाज़] बेचारा जानबूझ के ऐसा नहीं कर रहा। उसकी नेचर वैसी है।
(15:50) ओके? इवोल्यूशन में उसको बनाया ऐसा गया है। फीमेल्स का जो लव का फिनोमिना है वो समय के साथ मैच्योर होता है। एक झटके में नहीं होता। वह धीरे-धीरे उस स्थिति में आती हैं। हम चाहे वह फिजिकल लव हो, चाहे नॉन फिजिकल लव हो। फिजिकल लव में भी उन्हें वक्त लगता है इंटिमेट होने में और इंटिमेसी के उस बिंदु पर पहुंचने में जो मेल्स को नहीं लगता है। [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] और जब वो रहने लगती हैं, धीरे-धीरे उनका प्रेम गहरा होने लगता है। दिस इज़ नॉट अबाउट ऑल द वुमेन। इन जनरल और उनके प्रेम में इमोशनल एलिमेंट ज्यादा हो। यह संभावना ज्यादा रहती है। दिस इज वन
(16:32) थिंग। दूसरा [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेल्स की सेक्सुअल लाइफ की ड्यूरेशन बहुत ज्यादा है। हम 1415 साल की उम्र से 55 60 आजकल तो शायद 65 70 की उम्र तक भी वो एक्टिव रह लेते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] एंड दे हैव द कैपेसिटी ऑफ़ प्रोड्यूसिंग चिल्ड्रन इवन इन [गला साफ़ करने की आवाज़] द एज ऑफ़ 50 55 60 65 70। तो फीमेल्स को यह भी पता है कि हमारा अट्रैक्टिव होना, मदर हो पाना बहुत दूर तक चलेगा नहीं। हम तो सबकॉन्शियस अनकॉन्शियस में इवोल्यूशनरी साइकोलॉजी में बात कही जाती है। तो उनमें डेविएशन का स्कोप थोड़ा सा कम इस अनकॉन्शियस एलिमेंट से भी होता है कि एक
(17:12) को चुने। वो बात तक हमें सुरक्षा दे। तो जरूरी है कि एक ठीक से चुन लें। दूसरे साथ हम रहें। तो दूसरा पैरामीटर क्या हुआ? इमोशंस। तीसरा उनकी जो बायोलॉजी है उसका अंतर भी उनको थोड़ा सा परेशान करता है। इसलिए वुमेन में ये टेंडेंसी थोड़ी सी कम दिखेगी कि वो मल्टीपल पार्टनर्स के साथ में हो। सोशल कंट्रोल भी इसमें एक फैक्ट है। ऐसा नहीं कि वो नहीं है। सोशल कंट्रोल कम भी हो तो भी अगर आप देखेंगे तो मेरे ख्याल से रिलेटिवली मेल्स में टेंडेंसी आपको ज्यादा नजर आएगी। क्योंकि अगर आप पूरा डिजाइन देखें बच्चा पैदा करने में उनकी भूमिका केवल कुछ मिनट की है और मां
(17:54) की पूरी 9 महीने की है। उन कुछ मिनटों के बाद वो फिर भूखा है। हम उसको फिर जरूरतें हैं एक [गला साफ़ करने की आवाज़] दिन दो दिन के बाद। फिर उसके अंदर ये टेंडेंसी भी है कि कुछ नयापन हो। ये भी इवोल्यूशन से आ रहा है। [गहरी सांस लेने की आवाज़] उसका इवोल्यूशनरी डिज़ केवल एक ही है कि उसको अपनी संतान पैदा करनी है सुरक्षित। हम और संतान जहां से भी पैदा हो सकती है करनी है। इसलिए जो जो सुंदर स्वस्थ फीमेल्स उसको देखेंगे उसके मन में अट्रैक्शन आएगा और अट्रैक्शन का इतना ही मतलब है कि उसका जेनेटिक मेकअप उसको परेशान कर रहा है कि इस महिला के थ्रू भी संतान पैदा कर लो
(18:35) ताकि तुम्हारे बेस्ट जीन सुरक्षित रहे। इतना ही मतलब है इसका। इस प्रकृति को ना विवाह से मतलब है, तलाक से मतलब है। प्रकृति को मतलब केवल एक चीज से है कि आप मरने से पहले अपना बच्चा पैदा कर दें। हम सर्वाइवल बना रहे। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्योंकि महिला को 9 महीने लगने हैं और उसके बाद दूध भी उसको पिलाना है। पालना भी उसको है। उसके लिए प्रैक्टिकल भी नहीं है कि वो बहुत सारे मेल्स ढूंढे। हम मेल का काम कुछ मिनट का ही है। इसलिए वह बार-बार अपने जींस छोड़ सकता है। अपने जो स्पर्म छोड़ सकता है यहां भी वहां भी वहां
(19:09) भी ताकि उसकी जनरेशंस आगे बढ़े कंटिन्यू हो। इसलिए जो लोग इवोल्यूशनरी पर्सपेक्टिव से साइकोलॉजी को समझते हैं, सोशियोलॉजी को समझते हैं, उनका मानना है कि मेल्स में मोनोगमस या मोनी या क्या कहेंगे? मोनो एम्रोस ना होना बहुत ही कॉमन बात है। बिकॉज़ ऑफ़ इवोल्यूशन इवोल्यूशन। तो पॉलीगमी का मतलब है एक शादी का सिस्टम। हम पॉली एमरोस का मतलब है कि दो मेल दो फीमेल एक साथ रहते हैं। दोनों को दोनों से प्यार है। दोनों को दोनों से प्यार है। वो ट्रांसपेरेंसी है। धोखा नहीं दे रहे। ओपन है। तो आज क्यों करते हैं लोग? अब क्योंकि अब तो यह सारे फैक्टर्स हट गए। अब
(19:52) जेनेटिकली लोगों को कोई अपना ऑफस्प्रिंग भी नहीं बनाना। राइट? इट्स नॉट वो जगह देना नहीं है। इवोल्यूशनरी राइट। तो आज तो आज क्यों लोग मल्टीपल पार्टनर्स आते हैं। बहुत लोग चीटिंग भी करते हैं। बहुत क्यों चीटिंग करते हैं? चीटिंग ग्राफ वर्ल्ड में भी वो भी बहुत हाई पे है। व्हाई डू यू थिंक टुडे पीपल चीट? अब इसमें दो बातें हैं। एक तो अब तो बच्चे बहुत सारे नहीं चाहिए तो ऐसा क्यों करते हैं? इसका जवाब ये है कि सबकॉन्शियस या अनकॉन्शियस को बनने में हजारों साल लगते हैं। हम उसको चेंज होने में भी हजारों साल लगेंगे। हम [नाक से की जाने वाली आवाज़]
(20:27) तो हम आज की स्थितियों को कितना भी समझे हमारा अनकॉन्शियस पहले के हिसाब से चल रहा है। हम उसको चेंज होने में कई हजार साल लगेंगे। इसलिए हजार साल तक या कई हजार साल तक ये कंट्राडिक्शन बना रहेगा कि आज कंडीशन चेंज हो गई पर हमारा दिमाग वैसे ही काम करता है। एक तो ये है दूसरा आपने कहा ये लोग चीटिंग क्यों करते हैं? [गला साफ़ करने की आवाज़] चीटिंग इसलिए करते हैं कि जैसे हम अनकॉन्शियस में हैं, इवोल्यूशन से बने हैं और जैसे हमारे सोशल स्ट्रक्चर बने हैं उसके बीच में कंट्राडिक्शन है। सोशल स्ट्रक्चर आपसे कहता है कि आप मोनोवस रहें।
(21:06) हम ये मूल्य है, संस्कार है। कानून भी ये है। जिंदगी भर कानून भी ये है। हालांकि कानून अब क्राइम तो नहीं माना जाता है। पहले भी क्राइम बहुत स्पेसिफिक केस में था। ऐसे क्राइम नहीं माना जाता। अगर दो कंसेंटिक लोग हैं, एडल्ट्स हैं तो कोई दिक्कत नहीं है। अभी पर हमें भारत की बात कर रहा हूं। कई देशों में दिक्कत है। हम जैसे ईरान में अगर कोई महिला ऐसा करेगी तो उसको पत्थरों से मारा जाएगा। ये आज भी नियम है। पाकिस्तान में भी ऐसा नियम है। तो कंट्राडिक्शन ये है कि मेरे जींस मुझे बार-बार परेशान करते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] कि नएपन की खोज
(21:45) करो। और मेरे सोशल स्ट्रक्चर मुझे धमकी देते हैं कि अगर की तो छोड़ेंगे नहीं। हम अब इस कंट्राडिक्शन में तीन चीजें हो सकती हैं। एक तो ये कि मैं समाज को छोड़ के भाग जाऊं [गला साफ़ करने की आवाज़] और इवोल्यूशनरी साइकोलॉजी के लेवल पे जीूं। हम पागल हो गया कोई आदमी। मान लीजिए सड़क पे घूमता रहता है आवारा हो के। लोग उस पे ध्यान देना बंद कर दें। कुछ भी करता रहे। हां। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो उसने समाज को छोड़ दिया। और इवोल्यूशन के लेवल पे जी रहा है। बट इसकी मीटिंग वैल्यू भी तो कम हो जाएगी। फिर हां। या किसी और कंट्री में चला गया।
(22:17) मीटिंग वैल्यू कम हो जाएगी। लेकिन ऐसे लोग कुछ ना कुछ तो मिल ही जाएंगे कि कम से कम उसको जरूरतें पूरी हो जाए। इंपॉसिबल नहीं। दूसरा तरीका क्या है? उसने अपने सोशल स्ट्रक्चर्स को संभालने के लिए अपनी जेनेटिक, इवोल्यूशनरी और बायोलॉजिकल नीड्स को पूरी तरह से सप्रेस कर दिया। हम जो बहुत लोग करते ही हैं और दुनिया को बोलते हैं कि हम तो ट्रूली मोनोगमस हैं। अंदर तो स्ट्रगल चलता ही है। क्फ्लिक्ट चलता ही है उनके अंदर भी। उस क्फ्लिक्ट में वो अपने नेचुरल आस्पेक्ट को मार देते हैं। अपने सोसाइडल एस्पेक्ट को ठीक रखने के लिए। अधिकांश लोग ना ये कर पाते हैं ना वो कर
(22:58) पाते हैं। तब एक ही रास्ता है। यह दो रास्ते हैं। हम [नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] वो अपने स्पाउस से बहुत ट्रांसपेरेंट ऑनेस्ट बातचीत करें कि देखो भाई मेरा जेनेटिक मेकअप मुझे बड़ा परेशान करता है। सोशल नॉर्म यह है कि हम [गला साफ़ करने की आवाज़] लोग मोनोगमस रहे हैं। मैं रह नहीं पा रहा हूं। तो मैं क्या करूं? अब ऐसे में मेल ये चाहेगा कि उसकी पत्नी ये कहे कि अच्छा तुम जो ठीक समझो कर लो। मुझे दिक्कत नहीं है। पर चिंता ये भी अगर उसने ये कह दिया कि ठीक है तुम भी और मैं भी वो झेल नहीं पाएगा। क्योंकि दोनों में पज़ेसिवनेस भी ठीक-ठाक
(23:39) है और वह भी उस इनसिक्योरिटी से कनेक्टेड है। हम शुरुआती इनसिक्योरिटी से। इतना ट्रांसपेरेंट होने की परमिशन हमारे स्ट्रक्चर देते भी नहीं आमतौर पे। ये बात कितने पतिपत्नी आपस में कर सकते हैं। शायद ही कोई 01% कोई होंगे तो होंगे। हम अब एक ही रास्ता बचा है। चीटिंग हम इसलिए चीटिंग का कोई डाटा तो हमारे पास है नहीं। पर मेरा ख्याल है कि चीटिंग इतनी ज्यादा होती होगी जितनी हमारा डाटा बता नहीं पाएगा। आप जिस डाटा की बात कर रहे हैं वो तो बहुत क्योंकि इन चीजों का ग्राफ सर्वे कैसे हो सकता है? कोई और सोशली लोगों का साउंड भी करेक्ट भी तो साउंड करना है। प्लस देयर आर
(24:23) एप्स नाउ आई नो ओनली फॉर चीट एंड ओनली फॉर चीटिंग ओनली फॉर चीटिंग एंड देन एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स। मैंने रिसर्च किया किसी एक ऐप के बारे में पढ़ा था कि इंडिया में या शायद ग्लोबली काम करती है जो केवल चीटिंग के लिए करती है। एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा ग्रीड शायद नाम उसका है ना इट्स बीन डाउनलोडेड लेफ्ट राइट सेंटर लाइक इट्स उसका डाउनलोड डेट भी बहुत है इंडिया में तो इट्स [हंसी] इट्स इनसेन नहीं वो तो है ही और मैंने सुना है कि शायद साउथ इंडिया के किसी शहर में शायद कोची का नाम बीच में ऐसा है कि वहां सबसे ज्यादा डाउनलोड्स हैं उस ऐप के [हंसी]
(24:58) दैट आई डोंट नो एक्सक्टली पर [नाक से की जाने वाली आवाज़] यू नो यह जो आपने बातें करी यह तो बहुत सुनने के बाद प्रीफंटल कॉेक्स काम करेगा तो समझ में आएगी नहीं तो लिंबिक सिस्टम तो ये बोलता है कि भाई कैसी बातें कर रहे हो [हंसी] इन सिंपल वर्ड्स कि इमोशनली जिस सोसाइटी में मैं पला बड़ा हूं आप पले बड़े हो उसमें ये बातें भी रॉन्ग है कि आप सोच कैसे सकते हो इस बारे में कि नहीं लेकिन चीटिंग को किसी किसी भी तरह से डिफाइन करके नॉर्मलाइज कैसे कर? नहीं नॉर्मलाइज कर भी दे रहे हैं लेकिन मैं एक बात इसमें बहुत इंटरेस्टिंग बात ये भी है
(25:37) [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] इसी सोसाइटी में कुछ बड़े नेताओं ने ये बात कही है कि लड़के हैं गलती हो जाती है इसी सोसाइटी की बात है ना सोसाइटी का काम करने का अलग तरीका है क्या जो पेरेंट्स हैं या फोर पेरेंट्स हैं हम वो भी कभी इस उम्र में थे ही हम मेंटल मोनोगैमी तो वो भी नहीं कर पाए होंगे हम हो सकता है कि चीटिंग्स उन्होंने भी की हो हम पर चीटिंग का तो सौंदर्य इसी में है कि किसी को ना पता लगे हम उन दोनों के अलावा किसी को ना पता हो तो लगभग सब लोगों को दोनों बातें पता है हम एक तो ये कि चीटिंग हर जनरेशन के लोगों ने किसी ना किसी मात्रा में की है
(26:22) हम और ये भी कि अगली जनरेशन को सिखाना है कि मत करो। कल्चरल नॉर्म्स में मैं अकेले में डेविएट हो गया तो मैं पब्लिकली थोड़ी ना कहूंगा कि नॉर्म गलत है। हम कभी-कभी ऐसा होता है कि 100 लोग हैं समाज में 100 के 100 चीटिंग कर रहे हैं पर नॉर्म ये है कि नहीं करनी है। और जब जब 100 इकट्ठे बैठ रहे हैं नारा लगा रहे हैं कि नहीं करनी है। [हंसी] तो ट्रेडिशनल सोसाइटीज में ऐसा होता है। और [गला साफ़ करने की आवाज़] इसीलिए आप कहीं भी डाटा पढ़ेंगे तो जो रेप होते हैं उन रेप में 95% से ऊपर वही लोग करते हैं जो परिवार के हैं या [गला साफ़ करने की आवाज़] परिवार में आते
(26:55) जाते हैं। यह 98 के आसपास शायद है परसेंट 95% मोर देन 95% ऑफ द रेप्स आर कमिटेड बाय द पीपल हु आर द फैमिली मेंबर्स और लाइक फैमिली मेंबर्स। असली रेप वो थोड़ी ना जिसमें बहुत शोरशराबा हुआ, हंगामा हुआ, पुलिस केस हुआ। तो फैमिली के अंदर हुआ पता भी नहीं चला। पेरेंट्स ने बोल दिया बच्चे को चुप रहना भाई। अधिकांश आप डाटा देखिए। मैं जहां तक याद करूं 98% के आसपास डाटा है। ऐसा क्यों होता एक ऐसा समाज जिसमें कुंठाएं हैं, कहने की हिम्मत नहीं है। नॉर्म [नाक से की जाने वाली आवाज़] फिक्स
(27:40) हैं। नॉर्म्स [गला साफ़ करने की आवाज़] चेंज नहीं हो पाती हैं। लोग अंदर ही अंदर डेविएट होते हैं। चीटिंग करते हैं। चेहरा ऐसा सबका होता है कि हम चीटिंग नहीं कर रहे हैं। लेकिन करते हैं। और जिनको लगता है कि ये ज्यादा बुरा है फिर वो डिवोर्स से रहते हैं या अलग होते हैं। पर 1955 से पहले तो डिवोर्स भी नहीं ले सकते थे। तब क्या करते होंगे? या क्या होता था उस समय कई लोग दो तीन शादियां करते थे हिंदुओं में भी करते थे क्योंकि एक ही शादी करनी यह भी 1955 में आया है हिंदू मैरिज एक्ट उसके पहले उसी में डिवोर्स का ऑप्शन भी है और उसी में
(28:16) मोनोगमी का एक कंपलसरी लॉ है उसके बारे में नियम नहीं था हम आप केवल तीन जनरेशन पीछे अपने ही घर में जाकर देख लीजिए अपने दादा जी से पूछिएगा कि उनके दादाजी और उनके आसपास के जो लोग थे उनमें से कितने लोगों ने दो शादियां की थी आप आएंगे बहुत लोगों ने की होंगी एंड व्हाई डू यू थिंक कि ऐसा होता है जब मैन इवन इन टुडे सोसाइटी लड़का अगर कुछ ऐसा करता है और वो जाके चीटिंग करता है बाहर पकड़ा जाता है तो मोस्टली फैमिली मेंबर्स ऐसे बोलते हैं लड़का है हो जाता है [गला साफ़ करने की आवाज़] एंड लड़की को इतनी इजीली नहीं छोड़ते व्हाई डू वी पनिश
(28:55) वुमेन मोर देन मेन फॉर द सेम मिस्टेक इसके पीछे भी इवोल्यूशन इस साइकिल पे जाना पड़ेगा [हंसी] आगे के क्वेश्चंस बाय चांस सारे वही आ रहे हैं जो इवोल्यूशनरी साइकोलॉजी में जिसके आंसर ज्यादा इवोल्यूशन और सोशियोलॉजी की क्लास है ये [हंसी] है आदमी के बारे में क्यों लोग ऐसा कहते हैं इसके पीछे एक कांसेप्ट है अनडिस्प्यूटेड पैटर्निटी का हम आपने एक आदमी का नाम सुना होगा कार्ल मार्क्स का कार्ल मार्क्स के एक दोस्त थे फ्रेडरिक एंजेल्स हम उन्होंने इस मतलब ये कांसेप्ट बहुत पुराना है पर उन्होंने इस पे लिखा है हम अगर आप देखें कि लोगों की फैमिली से बेसिक
(29:36) नीड क्या है? हम प्रॉपर्टी लगभग 90% से ऊपर आज भी मेल्स के हाथों में है। हम [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] पर्सनल प्रॉपर्टी छोड़ के मैं बोल रहा हूं जो प्राइवेट प्रॉपर्टी है। पर्सनल का मतलब मेरा रुमाल, मेरा चश्मा, मेरे कपड़े है ना। प्राइवेट मतलब मेरा घर, संपत्ति, बैंक बैलेंस वगैरह। क्योंकि मेल्स बाहर काम करते रहे हमेशा। प्रॉपर्टीज उनके नाम पे होती रही। फिर लगभग सभी समाजों के सिस्टम्स में भी प्रॉपर्टी बाप से बेटे को मिलती है। हिंदुओं में भी ऐसा होता है। चाहे मताक्षर [नाक से की जाने वाली आवाज़] मान ले चाहे दाएं भाग मान ले दो सिस्टम्स
(30:08) हमारे समाज में काम करते हैं। संपत्ति बेटे को मिलती है। 1955 में हिंदू सक्सेशन एक्ट आया तो उसके बाद से प्रॉपर्टी में बेटी का हिस्सा होने लगा पर वो कागज ही ज्यादा है। व्यावहारिक रूप से आज मिलता नहीं है। ये लगभग हर समाज में है। सिर्फ हिंदू [गला साफ़ करने की आवाज़] समाज की बात नहीं है। जिंदगी भर आपने मेहनत से प्रॉपर्टी कमाई और आप चाहते हैं कि मरने से पहले अपने बेटे को प्रॉपर्टी देके मरूं। हम अब यहां एक पेज है। ये गारंटी कैसी है कि जिसको मैं अपना बेटा मान रहा हूं वो मेरा ही बेटा है। [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या गारंटी है इस बात की?
(30:45) हम अनडिस्प्यूटेड पैटर्निटी मैं कैसे एस्टेब्लिश करूं? हम आज तो हो सकता है डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से। लेकिन आज से 50 साल पहले पूरी ह्यूमन हिस्ट्री में कैसे हो सकता था? इसका एक ही तरीका था [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि एक औरत ऐसी हो जिसका फिजिकल रिलेशन केवल इस आदमी से हो और इसको इतना एक्सपोज़र ही ना हो कि किसी और के साथ रिलेशनशिप में जा सके। आदमी चार जगह चला गया तो इसकी प्रॉपर्टी पे खतरा नहीं आ रहा। औरत कहीं चली गई कहीं और प्रेग्नेंट हो गई तो जिंदगी भर की मेहनत किसी और के बच्चे
(31:29) को देके जाएगा। इसलिए प्रॉपर्टी अगली पीढ़ी को सेफ तरीके से मिलती रहे। जरूरी था कि महिलाओं की जो फिजिकल इंटिमेसीज सर्कल है वो इतना कंट्रोलोल्ड हो कि उसमें इंट्यूजन हो ही ना सके। एंड एस पर द मार्क्सिस्ट सोशलिस्ट थिंकर्स लाइक फ्रेडरिक एंजेल्स दिस इज द बेसिक रीज़ बिहाइंड मोनोगैमी। अभी जैसे आप उत्तराखंड में जाएंगे तो वहां देहरादून के पास एक जगह है खस जोन सर बाबर पर बोलते हैं देहरादून के पास खस ट्राइब रहती है। हिमाचल में जाइए हट्टी ट्राइब अभी एक न्यूज़ कुछ दिन पहले आई थी वहां की बहुत पॉपुलर। जितने भाई होते हैं उनकी एक ही वाइफ होती
(32:12) है। आज भी यह है। मैं भारत की बात कर रहा हूं। तीन ट्राइब्स का नाम बता रहा हूं। खस उत्तराखंड में, हटी हिमाचल में, टोडा, नीलगिरी हिल्स में। आज भी यह सिस्टम चल रहा है। और ये केवल उन समाजों में है जहां प्रॉपर्टी बहुत कम है। [गला साफ़ करने की आवाज़] तीन भाई हैं। तीन शादियां करेंगे बट जाएगी प्रॉपर्टी। प्रॉपर्टी बांट नहीं सकते हैं। और तीनों भाई की एक ही पत्नी है। अब जितने बच्चे होंगे सबके हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] अगली पीढ़ी में सब भाई एक ही पत्नी आएगी। प्रॉपर्टी वैसी की वैसी रहेगी। बटेगी नहीं। प्रॉपर्टी के सिस्टम्स ने मैरिज के
(32:50) सिस्टम्स को ठीक-ठाक डिफाइन किया है। और यह अनडिस्प्यूटेड पैटर्निटी एक ऐसी प्रॉब्लम रही है ह्यूमन हिस्ट्री में और इसलिए हमारी कल्चर क्या बन गई कि लड़का कहीं चला गया तो उतना खतरा नहीं है। पर उसी पैरामीटर से अगर लड़की जाती है तो उस पूरे सिस्टम को चैलेंज हो जाएगा जिस पे हमारी प्रॉपर्टी के ट्रांसफर लिखे हुए हैं। और इसीलिए आप देखेंगे घर में बेटियों पर जितने बंधन लगते हैं नैतिकता के उतने बेटों पर नहीं लगते हैं। हम 12वीं क्लास के बाद बेटा बाहर पढ़ने चला जाए जितना आसान है वो बेटी के मामले में नहीं है। ट्रू दिमाग भी वही है ना इवोल्यूशन के साइकिल
(33:33) के वो जो सबकॉन्शियस अनकॉन्शियस एलिमेंट्स बैठ गए हैं दिमाग के अंदर वो वैसे ही काम जस्टिफिकेशन डिफरेंट है पर कोई कहेगा थोड़ी ना उनको भी समझ में नहीं आ रहा कि हम ऐसा क्यों कर रहे हैं हम उनके दिमाग में अनकॉन्शियस में ये बैठा है उनको भी नहीं पता अनकॉन्शियस का तो मतलब ही है तो पता ही नहीं क्या बैठा हुआ है ट्रू पर वो बैठा तो है नेगेटिव वाली बात तो कर ली ठीक है बट आज भी लोग शादी करते हैं लेकिन शादी का पूरा पैकेज है वो एक पैकेज है हम अगर वह पैकेज पूरा कॉस्ट बेनिफिट में बेनिफिट ज्यादा दे रहा है तो लोग कर रहे हैं क्योंकि ज्यादा नहीं कर रहे हैं
(34:06) क्योंकि इससे सेक्सुअल नीड्स नहीं है ना कंपैनियन शादी के चार पांच नीड्स मानी जाती है शादी में चार पांच बातें मानी जाती है सबसे पहले सेक्सुअल नीड्स को सेटिस्फाई करना आजकल लोग ये बात कम इसलिए कह रहे हैं कि उनके पास और बहुत सारे ऑप्शंस होते हैं इसलिए उसको उतना फोकस नहीं करते हैं लेकिन आज से 100 साल पहले 50 साल पहले दैट वाज़ ओनली ऑप्शन इसलिए वो केंद्र में रहता था आज क्या है दूसरा होता था पेरेंटहुड हम कि मुझे भाई बच्चे का बाप बनना है तो कोई चाहिए मुझे सास में उसकी मदर भी चाहिए पेरेंट हुड हो गया तीसरा कि मैं पेरेंट हूं तो ये भी तो चाहिए कि बच्चे का
(34:42) इनिशियल सोशलाइजेशन करना है कॉलेज 18 साल की उम्र से पहले वाली उसकी पूरी परवरिश ताकि वो अच्छा इंसान बन जाए जैसा मैं चाहता हूं तो शादी चाहिए उसके लिए भी एक व्यक्ति [नाक से की जाने वाली आवाज़] चाहिए जो रात दिन उस बच्चे का ध्यान रखे और उसको अच्छा इंसान बनाए कौन करेगा? स्पाउस करेगा आपका। अब मैं मिलके एंगल से बात कह रहा हूं। भैया ना चौथा जब बच्चे बड़े हो जाएंगे मैं काम करने के लायक नहीं रहूंगा। मैं बूढ़ा हो जाऊंगा। मुझसे कौन बात करेगा? कोई [गला साफ़ करने की आवाज़] तो चाहिए। तो मेरे दुख-सख शेयर करने के लिए अभी से लेकर
(35:17) ही और स्पेशली इन द एज व्हेन आई विल नॉट बी फिजिकली वेरी फिट। कोई तो हो साथ में इमोशंस शेयर करने के लिए, हार्ट टू हार्ट बात करने के लिए, कंपैनियनशिप के लिए कोई तो हो वो कौन होगा? वही एक व्यक्ति जिसने आपके साथ 25 30 साल गुजारे हैं। रोज साथ रहा है तो आप कंपैनियन बन गए हैं। ये तीन चार फैक्टर्स काम करते हैं। एक पांचवा होता है कि फाइनेंशियल स्टेबिलिटी। अगर दोनों काम कर रहे हैं तो दोनों मिलके घर बना लेंगे। एक काम कर रहा है तो दूसरा उस पे डिपेंडेंट रहेगा। और कभी कल को क्राइसिस हो जाए मैं ना काम कर पाऊं तो कम से कम कोई संभाल ले फैमिली को एक थोड़ा सा
(35:55) अश्योरेंस रहता है जो जॉइंट फैमिली के पीछे एक बड़ा कारण है कि अगर एक भाई काम ना भी कर पाए तो कम से कम बाकी लोग मिलके संभाल लेंगे एक इंश्योरेंस जैसा सिस्टम जॉइंट फैमिली बन जाता है ये चार पांच चीजें हैं बस अब जिसको फिजिकल नीड्स के लिए कोई व्यक्ति नहीं चाहिए या उसकी एक से कमिटमेंट है ही नहीं हो नहीं सकती है या उसकी नीड्स ही नहीं है आजकल एक एक शब्द चलता है एसेक्सुअल जो एलजीबीटी कAए है ना कुछ लोग हैं जो सेक्सफुल है नहीं उनकी नीड्स ही नहीं है उनकी इच्छा ही नहीं होती किसी से भी उस तरह की इंटिमेसी करने की उनके पास पहला
(36:28) कारण नहीं है जिनको पता है कि वो पोली एमरोज़ हैं वो किसी एक के साथ टिक ही नहीं सकते हैं जिंदगी भर झूठ बोलना पड़ेगा झूठ क्यों बोलना छोड़ो नहीं करते हम पहला रीज़न नहीं है जिसको बाप या मां बनना ही नहीं है एकदम क्लियर है कि नहीं बनना है [गला साफ़ करने की आवाज़] उसके पास सेकंड रीज़न नहीं है हम जिसको [नाक से की जाने वाली आवाज़] लगता है कि मैं एक व्यक्ति से दोस्ती करके नहीं चल पाऊंगा। मुझे 100 दोस्त चाहिए भाई। झुंड चाहिए पूरा मुझे तो उसके लिए कंपैरिजनशिप भी कारण नहीं है। हम जो लोग किसी एक के साथ रह के 10 दिन में बोर हो जाते हैं, झेल ही नहीं पाते। उसके
(37:00) बाद हम उनको वो कंपैनियनशिप काम नहीं करती है कि मैं तो बोर ही हो जाऊंगा 10 दिन में। 40 साल कौन साथ में रहेगा? हम जो बहुत ज्यादा एक्स्ट्रोवर्ट हैं, दिन भर बाहर घूमते हैं। जिनको घर में आने का मन ही नहीं करता है। वो क्यों बंधना चाहेंगे कि कोई बार-बार फोन करके बोले कब आओगे? कब आओगे? घर में रहते नहीं कभी। तो जो आजाद ख्याल लोग हैं जिनको पॉलिटिक्स में जाना है, कोई बड़ा सोशल काम करना है, स्टार्टअप करना है, साइंस में रिसर्च करनी है और उनको रिसर्च में इतना मजा आता है कि वही उनकी पहली मोहब्बत है। हम स्पिरिचुअल लाइफ जीने का मन करता है।
(37:35) जिनको फैमिली की चिकचिक नहीं चाहिए। जिनको बच्चे पालने का एकदम मन नहीं करता है। पेरेंट बनने का एकदम मन नहीं करता है। उन सबका धीरे-धीरे रुझान ये होगा कि शादी ना करो। जो कर रहे हैं। कुछ इसलिए कर रहे हैं कि वो फैमिली मैन टाइप के लोग हैं। उनका मन करता है या तो इतना सोचते ही नहीं या सोचते नहीं या फैमिली के प्रेशर में झुक जाते हैं। हम क्योंकि आपके मन में आ रहा है कि मैं शादी क्यों करूं? पेरेंट्स को आपस में दबाव है। हम फूफा [गला साफ़ करने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़] मौसा सब कह रहे हैं फादर को कि भाई बच्चा बड़ा हो गया है। शादी कर दो हाथ से निकल
(38:07) जाएगा। हम्। वह आप पे दबाव बना रहे हैं। किसी इमोशनल मोमेंट पे उन्होंने कहा कि बेटा हार्ट अटैक आ गया है। बस तुम्हें तुम्हारी पत्नी सब देख के मरना चाहता हूं। अब ऐसे में क्या करेंगे? तो बहुत सारे बच्चे अपने पेरेंट्स की खुशी के लिए अपनी जिंदगी तबाह करते हैं। हम और ये जनरेशनल तरीके से चलता है। तो बहुत सारी शादियां ऐसी भी है जहां बच्चे नहीं चाहते शादी करना। मतलब उस इंडिविजुअल के साथ नहीं वो चाहते ही नहीं। हम सिर्फ इसलिए कि भाई अब पेरेंट्स ने ऐसी बात बोल दी है। ऐसा इमोशनली ब्लैकमेल किया है कि अब क्या करें?
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