Friday, August 28, 2026

The Crazy Life Of Lokenath Baba | The Eastern Lens

The Crazy Life Of Lokenath Baba | The Eastern Lens

Author Name:The Eastern Lens

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@TheEasternLens

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=mQ9yJBWFbgg



Transcript:
(00:04) जरा सोचो। करोड़ों लोग एक ऐसे संत [संगीत] की पूजा करते हैं जिनके बारे में कहानी है कि वो 160 सालों तक जिए थे। दो देशों के मंदिरों में उनकी मूर्तियां पाई जाती हैं। उनके अनुयायियों का मानना है कि उन्होंने तीन बार मक्का की यात्राएं करी थी। आर्कटिक को क्रॉस करा था और रोग ग्रस्त लोगों को मात्र छूने से ही [संगीत] ठीक कर दिया था। मगर हैरानी की बात तो यह है कि एक कोड डॉक्यूमेंट [संगीत] के हिसाब से जो उनके खुद के लोगों ने पेश किया था। इस संत की उम्र 160 की नहीं बल्कि 85 साल की ही थी। तो फिर आखिरकार सच क्या है? क्या वाकई
(00:46) में यह सब कारनामे यह सब चमत्कार हुए थे? आज हम जिन संत के बारे में बात करेंगे वो ऐसे हैं जिनकी मृत्यु के एक सदी बाद भी उनकी लोकप्रियता कम होने का नाम नहीं ले रही है। यह कहानी है लोकनाथ बाबा की। मेरा नाम है ऋषभ एंड आप देख रहे हैं द ईस्टर्न लैंड्स। परंपरा के अनुसार लोकनाथ घोषाल का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी 31 अगस्त 1730 को हुआ था। ब्राह्मण पेरेंट्स रामनारायण घोषाल और कमला देवी की वो चौथी संतान थे। लोकनाथ बाबा के जन्म स्थान को लेकर कई अटकलें लगाई जाती हैं। दो गांव जो एक दूसरे से बस
(01:33) 15 कि.मी. ही दूर है। दोनों यह दावा करते हैं कि बाबा उन्हीं के यहां पैदा हुए थे। कहानी बताती है कि उनके पिता ने एक कसम खाई थी कि अपने बच्चों में से वह एक को पूरी तरह से सन्यास के लिए दे देंगे और जिसके लिए लोकनाथ को चुना गया था। इसी के चलते जब वह 10 साल के थे। उन्हें एक स्थानीय योगी भगवान गांगुली के पास अध्ययन करने के लिए भेजा जाता है। उनके एक मित्र बेनी मधाब अपने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध जाकर लोकनाथ को उनके प्रशिक्षण में ज्वाइन कर लेते हैं। इसी के चलते वो दोनों बालक पहले कोलकाता और फिर बनारस जाते हैं। मगर यहां से लोकनाथ बाबा की
(02:18) कहानी एक दिलचस्प मोड़ ले लेती है। कहा जाता है कि अपनी मृत्यु से पहले उनके गुरु उन दोनों बालकों को आगे के प्रशिक्षण के लिए हितलाल मिश्रा नाम के एक इंसान को सौंप देते हैं। एक ऐसे इंसान जो अपने दूसरे नाम से दुनिया भर में मशहूर थे। त्रैलंग स्वामी वो महान सन्यासी जिनके बारे में मान्यता है कि वह 280 सालों तक जिए थे। अगले 25 से 30 साल लोकनाथ हिमालय में कठोर योगिक अनुशासन में बिताते हैं। ब्रह्मचर्य, उपवास और कहानी की माने तो सदियों तक बिना नींद के रहना। लोगों का तो यह [संगीत] तक कहना है कि उनका कद 7 फुट ऊंचा था। सोचो जब उन्हें मुक्ति उपलब्ध
(03:05) होती है तो [संगीत] उनकी उम्र 90 सालों की बताई जाती है। लोकनाथ जो अब लोकनाथ बाबा के नाम से जाने जाने लगे थे। इसके बाद लगभग पूरी दुनिया के भ्रमण पर निकल जाते हैं। माना जाता है कि वह पैदल दक्षिण और दक्षिण पूर्वी एशिया के तीर्थ पर निकल गए थे। चाइना, अफगानिस्तान, परर्शिया, अरेबिया और पैलेस्तीन तक का उन्होंने सफर तय करा था। यहां तक कि मक्का में वो तीन बार जाते हैं। इस्लाम, क्रिश्चियनिटी, [संगीत] जुटाइज्म, बुद्धिज्म, सिखिज्म और जैनिज्म इन सब [संगीत] के पवित्र स्थानों का वो दौरा करते हैं। सोचो। हालांकि इतिहासकार उनकी इन पद यात्राओं को तथ्य नहीं मानते।
(03:47) जैसे कि बहुत से संतों के जीवन की चमत्कारिक घटनाओं को तथ्य नहीं माना जाता। मगर इनका मकसद तथ्य बताना होता भी नहीं है। किसी संत या किसी ऋषि के बारे में यह घटनाएं, [संगीत] यह चमत्कार किसी गहरे अर्थ या किसी टीचिंग को उजागर करने के लिए होती हैं। और हमें इन्हें देखना भी वैसे ही चाहिए। मगर सत्य हो या नहीं। अब जो उनके जीवन में आगे होने वाला था वो कुछ ऐसा था जो सबके होश उड़ा देने वाला था। हाय अगर आप यह वीडियो यहां तक देख रहे हो तो मैं आपको बता दूं कि आप उन 20% ऑडियंस में से हो जो यह वीडियो यहां तक देख रहे हो। इस साल मैंने खुद के लिए एक क्रेजी
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(05:14) वो महिलाएं जिनको संतान नहीं हो रही थी। उन्हें संतान का आशीर्वाद दे देना। उनके जीवन की गाथा ऐसे चमत्कारों से भरने लगी थी। वो अक्सर कहा करते जब भी तुम मुश्किल में हो चाहे कोई युद्ध हो जंगल हो या समुद्र हो मुझे याद करना और मैं तुम्हें बचा लूंगा। लोगों के लिए यह सिर्फ एक दयालु बूढ़ा आदमी नहीं था। यह एक जीवित देवता थे जो उनके बीचोंबीच रह रहे थे। कहा तो यह भी जाता है कि लोकनाथ बाबा ने अपनी मृत्यु की बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी कर दी [संगीत] थी। 1 जून 1890 को वो अपने एकत्रित भक्तों के सामने गोमुख आसन में बैठते हैं। एक गहरी समाधि में उतरते हैं।
(06:01) आंखें बंद करते हैं और ठीक सुबह के [संगीत] पौ:45 बजे अपना शरीर त्याग देते हैं। आज भी यह दिन तिरोधन दिवस के नाम से मनाया जाता है। मगर लोकनाथ बाबा की कहानी जितनी सीधी और सरल लगती है, उससे कई ज्यादा पेचीदा और रहस्यमई है। 19वीं सदी की शुरुआत में नित्य गोपाल शाह नाम के एक बाबा के भक्त हाई कोर्ट में एक केस फाइल करते हैं। यह स्पष्ट करने के लिए कि लोकनाथ बाबा का जन्म स्थान आखिर कौन सा है। कोर्ट कछुआ नाम के एक गांव के पक्ष में फैसला करता है। मगर वो दूसरा गांव चकला जो स्वयं यह मानता था कि बाबा उनके यहां पैदा हुए थे। कोर्ट के इस फैसले को
(06:45) मानने से मना कर देता है। आज तक दोनों के दोनों गांव का बाबा के जन्म स्थान पर दावा बरकरार है। मगर सिर्फ इतना ही नहीं सालों बाद जब बंगाली शोधकर्ता इस केस का अध्ययन कर रहे थे तो उन्हें कुछ अजीब चीजें मिलती हैं। एक बाबा की उम्र उनके खुद के भक्तों द्वारा कोर्ट में 85 साल बताई गई थी ना कि 160 जो आमतौर पर मानी जाती है। दो, उस केस के कागजों में बरसत नाम की जगह का जिक्र आता है जो कि बाबा के जन्म से जुड़ी हुई मानी जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस नाम की जगह कोर्ट में बाबा की बताई गई उम्र के 104 सालों के बाद तक एक्ज़िस्ट ही
(07:31) नहीं करती थी। और तीन, यहां तक कि कोर्ट में बताया गया बाबा के पिता का नाम भी। उस नाम से मेल नहीं खा रहा था जो आमतौर पर उनके पिता का नाम बताया जाता है। इतने सारे कंट्राडिक्शंस, इतने सारे विरोधाभासों के बावजूद लोकनाथ बाबा की कहानी लाखों लोग एक मत में जानते और सुनाते हैं। [संगीत] सोचो। मगर क्या हो अगर मैं आपको कहूं कि बाबा के भक्त जो आज की डेट में लाखों की तादाद में हैं। एक समय पर बस एक या दो गांव तक ही सीमित थे। लोकनाथ बाबा अपनी मृत्यु के पश्चात फेमस नहीं हुए थे। कई दशकों तक वो बस एक बाबा थे जो कभी किसी गांव में रहते थे। जैसा कि
(08:16) भारत देश में हजारों बाबाओं के बारे में बोला जाता है। मगर आज की डेट में लाखों की तादाद में लोग उनके भक्त हैं। आखिर कैसे नित्य गोपाल साह की ही वजह से बाबा के वही भक्त जिन्होंने उनके जन्म स्थान [संगीत] की पुष्टि के लिए कोर्ट में केस किया था। नित्य गोपाल 19वीं सदी की शुरुआत में लोकनाथ बाबा के नाम को भारत, [संगीत] म्यांमार और नेपाल में जाकर फैलाते हैं। इसी के चलते भक्तों द्वारा उन्हें बाबा द्वारा ही भेजे गए एक दूत के तौर में देखा जाता है। इसके अलावा आज की डेट में जो लोकनाथ बाबा का जीवन चरित्र प्रचलित है। उसे सुधांद ब्रह्मचरी [संगीत]
(08:59) नाम के एक इंसान ने लिखा था। जिनका दावा है कि 1978 में बाबा खुद उनके सपने में आए थे और अपनी मृत्यु के करीबन 100 साल बाद उन्हें यह जीवन चरित्र लिखने का आदेश दिया था। दूसरे शब्दों में लोकनाथ बाबा की लोकप्रियता का श्रेय [संगीत] नित्य गोपाल और सुधांद को जाता है। जिन्होंने बाबा को बंगाल के एक गांव के सिद्ध पुरुष से उठाकर लोगों के घर-घर में पहुंचा दिया है। आज की डेट में लोकनाथ बाबा के मंदिर दो देशों में स्थापित हैं और हर साल लाखों [संगीत] तीर्थ यात्रियों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। लोकनाथ बाबा की कहानी जितनी रोमांचक
(09:40) थी, उनके गुरु त्रैलंग स्वामी का जीवन भी उतना ही रोचक था। एक ऐसे गुरु जिन्हें शिव का अवतार माना जाता है। एक ऐसे गुरु जिनका [संगीत] अंत ऐसा था कि आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। अगर आप इन्हीं त्रैलंग स्वामी के जीवन और कमाल के अंत के बारे में जानना चाहते हो तो इस वीडियो को अभी देखो। अगली वीडियो मैं किस टॉपिक पर बनाऊं, यह मुझे नीचे कमेंट सेक्शन में लिखकर बताओ क्योंकि यह सिर्फ मेरा ही नहीं आप लोगों का भी चैनल है। तब तक के लिए, थैंक

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