Wednesday, September 9, 2026

Signs Before Death: Nepal Flood Tragedy, Akal Mrityu & Pain | Simranjeet Singh | EP 217

Signs Before Death: Nepal Flood Tragedy, Akal Mrityu & Pain | Simranjeet Singh | EP 217

Author Name:Supertalks by themovingship

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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=T0-mo-WFSTg



Transcript:
(00:00) कैलाश की यात्रा जीवन का सपना होता है। हम सब ने देखा नेपाल में फ्लड्स आए। इतने लोग गए और वापस नहीं आए। क्या यह भगवान की कृपा है या उनका गुस्सा? कर्म और समय के घेरे में हर कोई बंदा है। तो जो मौत का विधान है वो तो अटल है। वो किसी भी समय, किसी भी रूप में और किसी भी जगह वो घट सकता है। अ मैसिव चंक ऑफ आइस स्नप ऑफ अ ग्लेशियर। वाटर स्टार्टेड टू एक्यूमलेट एंड द प्रेशर ऑन द अनस्टेबल डैम स्टार्टेड टू इंक्रीस अंटिल इट फाइनली गव वे। जब हम कोई खास तौर पर किसी तीर्थ की यात्रा करते वहां पे भाव बढ़ जाता है। अगर उस भाव में डेथ हो जाती है। अध्यात्म की
(00:42) तरफ से वो एक गिफ्ट मिल गया। कैसे? जब किसी का आखिरी सेकंड होता है क्या उस पल उन्हें कहीं से साइन मिलने लग जाते हैं बॉडी को कि डेथ आने वाली है जब भी आप ध्यान सिमरन साधना शुरू करते हो मुख में मिठास शुरू हो जाती जब आपका समय नजदीक होगा तो यह और तेज हो जाएगा लास्ट के एक या दो दिन में जिसका कोई जो गुजर गया है किसी तरीके से देख सकता है मिल सकता है आप कम से कम 3 घंटे जैसे आपने नाम जप किया बैठ के उसके बाद प्रार्थना करो जो सिमरन की पावर और आपकी मैन मैनिफेस्टेशन काम करेगी। वो जहां भी होगा आपको मिल जाएगी। कई योगी के पास ऐसी पावर्स भी होती हैं कि
(01:20) जब कोई व्यक्ति मर भी जाता है तो वो उस प्राणा को वापस लाकर उस इंसान को जिंदा भी कर सके। ये [संगीत] कैसे मानते हैं? जो श्वास होते हैं ना वो गिनती के होते हैं। टाइम गिनती का नहीं। हरमंदर साहिब की एक कथा आती है। तो वहां जब सरोवर की खुदाई कर रहे थे तो वहां पर कहते हैं खुदाई करते-करते बीच में से एक साधु उनका शरीर वैसे का वैसा धरती में से निकला। वो कहता है कि मैं तो त्रेता युग से इस समाध में हूं। कौन सा समय चल रहा है? कलयुग आज एक पॉडकास्ट नहीं बल्कि सत्संग होने वाला है। पडकास्ट के बाद आपको बहुत पीसफुल सुकून महसूस होगा। मैं कह सकता हूं कि अगर
(02:07) आपके परिवार में से कोई गया है, कोई लव्ड वन इस धरती में नहीं है, इस एपिसोड में आपको मीनिंग मिलेगा। और अगर ऐसा नहीं हुआ तो भगवान भी इस विधान से बाहर नहीं थे। तो हम सबको भी अपनी या अपनों की डेथ देखनी होगी। तो इस एपिसोड में आप उस दिन के लिए तैयार हो जाओगे। उस दर्द को कैसे झेलना है आपको पता होगा। मैंने आपको प्रॉमिस किया था कि संजीव मलिक जी की इस वीडियो से हम जो रेवेन्यू जनरेट करेंगे उसका एक सिग्निफिकेंट पोर्शन हम नेपाल फ्लड्स के लिए डोनेट करेंगे। आई एम हैप्पी टू टेल यू दैट वी कोलबोरेटेड वि सिख एड फाउंडेशन और उनकी टीम नेपाल पहुंच
(02:49) चुकी है। लंगर करा रही है और अलग-अलग डेस्क्यू ऑपरेशंस में भी अपना हक दे रही है। आई वांट टू लेट यू नो कि हमने नहीं बल्कि आपने किया है। थैंक्स टू यू। आपकी ब्लेसिंग्स और आपकी विशेस से सुपर टॉक्स को हम सबको प्रेरणा मिलती है कि हम इस तरह का स्टेप उठा सकें। करें कराएं आप सब जने बढ़ाई दें। आई जस्ट विश अ लॉट ऑफ करज पीस टू द पीपल ऑफ नेपाल और पूरे विश्व का कल्याण हो। नमस्ते। सिमरन से स्टार्ट करें। हां जी। हां जी। हां जी। एक एक मिनट के आज थोड़ी सी शांति से ही पीसफुल वातावरण से शुरू ठीक है जी ठीक है वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह
(03:40) गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु गुरु वाहे गुरु जी का खालसा वाहे गुरु जी की फतेह बहुत-बहुत स्वागत है आपका हां जी शुक्रिया जी आपका और इस वक्त आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है हमें हां जी मुझे लगता है कि जिस तरह से सिर्फ मैं कहूंगा दुनिया की या देश की बात नहीं है इंसान के अंदर ही इतनी हलचल हो रही है कि हां जी हम जवाब ढूंढ रहे हैं बिल्कुल और मुझे लगता है कि जिंदगी में जब इस तरह से हम स्पिरिचुअलिटी को लेकर
(04:28) हां जी सही समझ रखें किसी चीज की तो थोड़ा सा जिंदगी में वो जो दर्द है वो कम हो जाता है। तो आज बहुत लोग दर्द में है। मैं चाहता हूं कि उस दर्द को हम आपकी वाणी के थ्रू थोड़ा सा हील कर सकें। जी जी बिल्कुल अभी नेपाल में फ्लड्स आए। हम हम सब ने देखा और स्पेशली क्योंकि कैलाश हमारे लिए भी बड़ा क्लोज टॉपिक है। हां जी और मैं पढ़ रहा था इवन गुरु ग्रंथ साहिब में भी गुरु नानक देव जी भी कैलाश गए थे यात्रा में उदासी पीरियड में जी तो सबसे पहले तो इतने लोग मरे इतने हाई अबाउट जैसे एरिया में कैलाश की यात्रा जीवन का सपना होता है। हां जी।
(05:09) इतने लोग गए और वापस नहीं लौटे। जी ये जो गए क्या यह भगवान की कृपा है या उनका गुस्सा? हां जी देखिए जो हम जब वाणी में भी पढ़ते हैं और अगर हम हिस्ट्री को भी पूरा खोल के देखते हैं तो एक बात अटल सच्चाई है वो है हमारा कर्म। कर्म और समय के घेरे में हर कोई बंधा हुआ है। जो भी संसार में आकार है, जो भी संसार में बना हुआ है, इस धरती पर है, सबका कर्म के हिसाब से विधान चल रहा है। विधान कह लीजिए, कर्म कह लीजिए, किस्मत कह लीजिए। उसमें तीर्थ भी आ जाते हैं। उसमें देव भी आ जाते हैं। उसमें गुरु साहिबान भी
(05:53) आ जाते हैं। अब गुरु कौन होता है? जिसका नाम से उस अकाल पुरुष से सीधा कांटेक्ट है। लेकिन जो उसकी संसारी जीवन जो होगा ना उसका जो उसकी बेसिक लाइफ होगी वो कर्मों से बंधी होती है। अब यह तो कैलाश की बात है। अगर हम गुरु साहिबान का कृष्ण जी का, राम जी का और भी अनेक योद्धा जो पहले हुए हैं और आज भगत संत। उनके दुनियावी जीवन में भी कितनी हलचल आई है। अब सिखी में देखें तो गुरु गोविंद सिंह जी के बच्चे शहीद हो गए। परिवार शहीद हो गया। ठीक है जी। उनसे बड़ा तो कोई भी नहीं था। परिवार में बहुत ज्यादा क्लेश देखने को मिला जो जेलसी में आ गए। इसी प्रकार से अब जैसे
(06:38) संगत जा रही है। तो जो मौत का विधान है वह तो अटल है तो वह किसी भी समय किसी भी रूप में और किसी भी जगह वह घट सकता है। ठीक है जी। तो वह जो हुआ जो विधान है उसके आगे किसी भी बड़े और छोटे को नहीं देखा जाता। वाणी में आता है राजा प्रजा सम कर मारे एसो काल बिडानी रे। जो काल की ड्यूटी लगी हुई है ना वो ना राजा के प्रति है ना प्रजा के प्रति है ना रंक के प्रति है। वह सबके लिए एक चलता है। तो वह उसी विधान में यह सब हुआ। हां जी। तो इसको हम इसको हम कृपा मानेंगे या गुस्सा मानेंगे? यह गुस्सा नहीं है। विधान
(07:25) है। विधान को समझने के लिए थोड़ी वास्ट हमारे को होना पड़ेगा कि आपके जीवन में कुछ भी किसी भी समय कुछ भी घटित हो सकता है। मौत मौत जो है वह अटल है। अब वो अगर हम पूरी तरह से क्योंकि हमारे सोचने का तरीका क्या है? हमारे सोचने का तरीका है कि अगर आपके पास अच्छा घर है, आपके पास सुख सहूलतें हैं। आप एक अच्छी लग्जरियस लाइफ जी रहे हो तो आप खुश हो। तो वह तो अच्छा है हम और अगर आप कुछ जीवन में आप में पैसा नहीं है आपके पास स्टैंडर्ड नहीं है तो वो फिर बुरा है लेकिन जब गुरुणी गुरु को विचारेंगे या किसी संत महापुरुष से आप विचार करोगे जो पूर्ण ब्रह्म में समाया
(08:11) हुआ है तो वो कहेगा कि जितना भी अच्छा है और जितना भी बुरा है अमीरी है चाहे गरीबी है चाहे आपके जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा है लेकिन अगर आप भगवान के सन्मुख नहीं हो अगर आप भक्ति भाव में नहीं चल रहे हो तो चाहे आपका जीवन जपजी साहिब में कहते हैं कि नौ खंड तक का आपके पास राज हो नौ खंड जो नौ धरतियां हैं उन सब पर आप भ्रमण करते करना जानते हो 40 युग तक आप अपनी उम्र को बढ़ाने में सक्षम हो कि 50 100 200 साल नहीं 40 युग तक आप जीना जानते हो और हर कोई आपका नाम लेता हो तो भी अगर आप भगवान के भक्ति भाव में नहीं है तो वह बुराई है।
(08:56) ठीक है? तो अब वो जा तो रहे हैं। अब यह तो कोई ये तो विधान तो सबके लिए एक है। मौत तो जो तीर्थ के ऊपर वास करते हैं उनकी भी होती है। दुख कष्ट तो उनको भी आता है। तो कहीं ना कहीं कुदरत एक बहाने से हमारे को यह चेताती रहती है कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। तू मुझे मत भूल। यानी मतलब हम कहना ये चाह रहे हैं कि ये होना ही था। बहाना बहाना वो बना पर ये होना ही था। अब जैसे अक्सर हम कहते हैं जैसे पिछली बार हमने एपिसोड में बात करी थी अबाउट डेथ कि जस्ट आफ्टर डेथ क्या होता है? किस तरह से सोल की जर्नी होती है। बहुत खूबसूरती से
(09:40) आपने समझाया। जी। इस बार मैं इस कॉन्टेक्स्ट में समझना चाहता हूं क्योंकि बहुत से लोग हम पूरी जिंदगी लगाते हैं कि सपना होता है कि तीर्थ जाएंगे, यहां पर जाएंगे। जी और एक डेथ होती है जो कि नॉर्मली यहां पर हम चले जाएं एक पूरा प्रोसेस होता है जी और एक कहा जाता है ऐसा कि कैलाश जैसा एक कोई जगह कोई आम जगह नहीं है। इतने साधु संत ने वहां पर तपस्या की है। तो कई ये भी मैंने सुना कि इसको एक सीक्रेट पोर्टल कहा जाता है। हम कि यहां पे अगर किसी की डेथ होती है तो वो हायर रेल्व्स में एकदम पहुंचता है। एकदम वो मोक्ष को प्राप्त करता है। तो
(10:19) क्या यह डेथ और कैलाश को हम इसमें कैसे समझ सकते हैं? अ इसमें ध्यान का भाव है। कई बार आप संगत में भी बैठे हो, आप किसी तीर्थ पे हो या कैलाश पे हो, अगर आपका ध्यान उस भाव में नहीं है। हम क्योंकि जो डेथ का प्रोसेस है ना हम जो हमारी योनियां है, जो हमारा मोक्ष है वो हमारे सीधा-सीधा ध्यान पर निर्भर करता है। अब आप हां ये पॉसिबिलिटीज बढ़ सकती हैं कि आप कैलाश यात्रा कर रहे हो। आपके मन में सिमरन चल रहा है। आपका ध्यान भगवान की ओर है और उधर से क्योंकि वह भाव आम तो बनता नहीं है। लेकिन जब हम कोई खास तौर पे किसी तीर्थ की यात्रा करते हैं या नाम वहां पे
(11:00) भाव बढ़ जाता है। हम अगर वो उस भाव में डेथ हो जाती है तो वो तो एक अध्यात्म की तरफ से वो एक गिफ्ट मिल गया। कैसे? क्योंकि अगर नॉर्मल डेथ हो मान लीजिए कि अगर हमारा परिवार में ध्यान है बच्चों में ध्यान है उस ड्यूरिंग डेथ हो जाती है तो वह डेथ जो है अगर आप भोग विलास में ध्यान है तो वह हमारे को 84 लाख योनियों में ले जाती है और किसी भी बहाने से अगर आपका ध्यान भगवान की तरफ है तो आपके ऊपर इस प्रकार का टाइम आ जाता है तो आप मोक्ष को प्राप्त हो जाते हो यानी कोई रिबर्ट्स नहीं होगा नहीं होगा अगर ध्यान शब्द में है। भाव आपका भगवान की तरफ है। भक्ति में
(11:42) है। तो बार-बार हम जप क्यों करते हैं? कि जो हमारा ध्यान है डायवर्जन में चला जाता है। जैसे हमने शुरू में बात की कि डायवर्ट हो जाता है बार-बार फिर विचारों में आ जाता है। जप करने के बावजूद भी विचारों में आ जाता है। यात्रा करने के बाद बावजूद भी अगर हम जैसे अपने शब्दों में जब हम मानते हैं कि जब आखिरी मोमेंट में हम इस तरह से नाम जप कर रहे हैं तो उस तरह से मुझे मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्हीं के बारे में सोच रहा हूं। हम तो क्या ये जो पावर है नाम की हम करोड़ों सालों से अगर एक जगह पर नाम होता जा रहा है अगर हम कैलाश की ही बात कर लें
(12:18) तो क्या ऐसी जगहों में क्या ऐसी एनर्जीज वाइबेशंस जी क्या वो इफेक्ट करती हैं वो कैसे डिफरेंस लाती हैं और मैं सुन मैं जानना ये चाह रहा हूं कि अगर जो यहां पर जितने लोगों की डेथ हुई होगी हम कैलाश में डेथ होने का मतलब क्या है क्योंकि कैलाश में आज तक जब हम कैलाश का नाम लेते हैं तो बहुत सारे साधु संत जति सती तपी आ जाते हैं। जिन्होंने वहां पर बैठकर तपस्या की है। अब एक जीव है जो समाधि में बैठा है। समाधि में बैठे-बैठे बैठे ही उसका जो है अंत समय आ गया तो वह समाधि में ही विलीन हो जाता है। अब समाधि में भी यह है कि कोई पूर्ण समाधि
(13:03) में बैठा है। उस भगवान के ज्योत के सनुख बैठा है, नाम में बैठा है या अभी वह समाधि में बैठा था लेकिन मोक्ष की प्राप्ति नहीं हुई। अभी वह यतन कर रहा था। तो यह दो प्रकार से है। अगर कोई समाधि में पूर्ण हो गया वो बैठा है ध्यान में उसको उस परम तत्व का ज्ञान हो गया तो वो जब चाहे उसको मौत आ जाए वो भगवान में ही समा जाता है। वो किसी भी जगह में उसकी पावर या एनर्जी जो है वो भगवान का रूप हो गया। लेकिन कुछ साधक ऐसे होते हैं समाधि में तो वह बैठे हैं लेकिन वह भगवान के परम तत्व को पहचान नहीं सके तो तब वो जब वो निकलते हैं तो वह
(13:42) रास्ते में जैसे सूक्ष्म लोक में अलग-अलग हमारे को जैसे लोक बताए जाते हैं जैसे आप सुनते हो पित लोक होता है देवलोक होता है संतलोक होता है ब्रह्मलोक ब्रह्मलोक होता है और इसी प्रकार से रुद्र लोक होता है तो फिर आपकी एनर्जी के साथ आप जितना भी जिस भी भक्ति की जितने भी लेवल पर थे उस लोक में वास हो जाता है। अब वो लोक कहां है? जो यह खाली स्पेस है ना आपके मेरे बीच में ये खाली स्पेस हम बाहर देख इसी स्पेस में ही सारे लोक अपनीपनी ग्रेविटी के साथ कुदरत ने बनाए हुए। यह किसी और ने लोक नहीं बनाए। यह पारबह्म जिसको हम अकाल पुरुष कहते हैं, शिव भी कह देते हैं,
(14:22) ब्रह्मा भी कह देते हैं। उसी यूनिवर्स जिसने यूनिवर्स को पैदा किया तो यह जिस प्रकार से हमारे को धरती बनाकर दी है। ऐसे सूक्ष्म में भी लोक बनाए हुए हैं। जैसे सात आकाश है, सात पाताल है। गुरुणी भी इस बात को मानती है। फिर 14 लोक हैं। तो वहां वास हो जाता है। अब जो कैलाश में बहुत सारे ऐसे साधक जति सती तपी हैं जिनको तप करते करते बहुत समय हो गया लेकिन मिलाप नहीं हुआ तो जो उनकी सोल्स की एनर्जी है ना जहां जिस भी धरती पर बहुत ज्यादा नाम जप और ध्यान किया जाता है उस धरती पर एक ऐसी वाइब्रेशन क्रिएट हो जाती है कि वहां पर कोई जाकर भी बैठ जाए तो उसके मन शांत
(15:04) हो जाते हैं। विचारों से रहित हो जाता है। तो वह एनर्जी कैलाश की धरती में है। क्योंकि वहां बहुत सारे साधक हैं क्योंकि आज भी माना जाता है कि कुछ तो जैसे श्वास क्रिया को उल्टा कर जो श्वास को नाभि पर रोक कर बैठ जाते थे। हजारों सालों से बैठे रहते उनका शरीर भी नहीं गलता। इस प्रकार से समाधि होती है कि आप कई कई 100 वर्ष भी बैठ सकते हो। जैसे बहुत सारी हमारी इतिहास में आती है। हरमंदर साहिब की एक कथा आती है। गुरुद्वारा संतोसर साहिब है वहां पर। पांच अमृत सरोवर माने गए हैं। तो वहां पर जब गुरुद्वारा संतोसर साहिब में खुदाई हो
(15:45) रही थी ना कथा आती है तो वहां जब सरोवर की खुदाई कर रहे थे तो वहां पर कहते खुदाई करते-करते बीच में से एक साधु उनका शरीर वैसे का वैसा धरती में से निकला। अब वह जब साधु निकला तो गुरु अर्जुन देव महाराज जी को बताते हैं जैसे गुरु रामदास जी गुरु अर्जुन देव महाराज को बताते तो फिर वह कहते हैं कि अब पाशाह जी के पास तो उनके पास तो दिव्य दृष्टि होती है सतगुरु पूर्ण होते तो जब वो अपनी दिव्य दृष्टि डालकर उसको समाधि से बाहर लाते हैं तो वो कहता है कि मैं तो त्रेता युग से इस समाधि में हूं। कौन सा समय चल रहा है? तो वो कहते हैं कलयुग चल रहा है। उद्धार करते
(16:24) हैं। गुरुद्वारा संतोसर साहिब की कथा थी। इसी प्रकार से कैलाश की भी बहुत सारी कथाएं आती हैं कि आज भी वहां पर सूक्ष्म रूप में तो है ही लेकिन कुछ देश रूप में भी साधक हैं जो बैठ के वहां पर तो वहां पर एक ऐसी जगह है जहां पर शराब पी जा रही है। नाच गाना हो रहा है। एक ऐसी जगह है जहां पर कोई 100 200 5000 साल से लगातार एक ध्यान में बैठा हुआ है। जितने [गला साफ़ करने की आवाज़] लोग वहां पर होंगे और कहते हैं कि जो आखिरी समय होता है डेथ का सबसे ज्यादा क्रिटिकल होता है। तो इस वक्त अगर क्योंकि अभी बहुत से लोग जो जिन्होंने अपने घर वाले खोए होंगे वो
(17:01) आपको सुन रहे हैं। वो हमारे इस एपिसोड को खुद को हील करने के लिए भी सुनेंगे। जी जी तो क्या ऐसा होता है कि जब किसी का आखिरी सेकंड होता है हम क्या उस पल उन्हें पता होता है कहीं से साइन मिलने लग जाते हैं बॉडी को कि डेथ आने वाली है या उनके कोई लव्ड वंस को ऐसे पता लग सकता है कि किसी तरीके से कोई साइन आ रहा है जैसे हम अक्सर कहते हैं कि यार हमारी अगर लेफ्ट आंख फड़क रही है कुछ बुरा होने वाला है जी तो ऐसा डेथ से पहले 1 घंटे पहले 24 घंटे पहले क्या कोई इंडिकेशन इंसान को मिलता है जी जो डेथ है ना वह डेफिनेटली होती है। मतलब डेथ का टाइम डेफिनेट है कि वह यह तो है
(17:40) नहीं यार आज इसकी मौत आई नहीं थी। यह तो वैसे ही मर गया। ये दुनियावी जीव की बातें हैं। हम क्योंकि वेदांत में वेद शास्त्र में चले जाओ, गुरुणी में चले जाओ। तो वो कहते हैं कि डेथ का टाइम बड़ा डेफिनेट होता है। हम तो उसके पहले जो कुदरत के नजदीक है, जो ध्यान में बैठता है या जो साधक है, खुद के नजदीक है, उसको तो अनुभव हो जाता है। अब हमने विचार की थी ना हमारी बॉडी के अंदर अनहद शब्द लगातार चल रहे हैं। सबके अंदर जब हमारा डेथ टाइम आता है तो आमतौर से यह मेरा भी प्रैक्टिकल है कि जिनका डेथ टाइम नजदीक था। शुरुआत मैंने मेरे फादर से ही मैं देखूंगा। मेरे फादर
(18:24) थे। मेरे दादाजी थे। दादा जी के भाई मेरे ससुराल में थे। मेरे वाइफ के नाना जी थे। और काफी जिनसे मेरे को डेथ टाइम के पांच चार दिन पहले हम क्योंकि मैंने सुना हुआ था कि जो आपके अनहद वाणी के शब्द है ना जब आपकी डेथ नजदीक आती है जैसे तो नॉर्मल अब भी जैसे मेरे को सुन रहा है तो जिसके अंदर अनहद शब्द चलता है उसको अंदर से एक साउंड चलती रहती है तो लेकिन जब आपका डेथ टाइम आता है तो वो बहुत ज्यादा तेज हो जाती है। आम जो हमारे को आवाज सुनती है ना उससे बहुत ज्यादा तेज आवाज हो जाती है। जिन ने प्रैक्टिकल करके शब्द के अभ्यास और ध्यान में बैठने के बाद हमारे मुख में जो
(19:07) हमारे मन के लिए खुराक बनाई है ना अमृत रस हमारे मुख में जब भी आप ध्यान सिमरन साधना शुरू करते हो मुख में मिठास शुरू हो जाती है जैसे सलाइवा आता है ना तो मीठामीठा अमृत आता रहता है जब आपका समय निर्णय होगा नजदीक होगा तो यह और तेज हो जाएगा और जो ज्योत के हम दर्शन करते हैं वो ज्योत का प्रकाश भी तेज तेज हो जाता है। वहां से साधक समझ जाता है कि जो अनहद शब्द ज्यादा हो गया बहुत ज्यादा तेज सुनने लग जाता है और अमृत बहुत ज्यादा तेज हो जाता है। तो मेरा डेथ टाइम नजदीक है। लेकिन मैंने यह भी देखा कि जिन्होंने कोई ध्यान साधना नहीं की थी लास्ट के एक या दो दिन
(19:48) में उनको भी वह अंदर से अनहद शब्द सुनने आरंभ हो जाते हैं। अब वह कहते हैं कि मेरे अंदर से आवाज आ रही है। कुछ हो रहा है। अब वह डॉक्टर को पता नहीं है क्योंकि अध्यात्म के बारे में डॉक्टर कहते हैं कि यह तो टिनिटस है। कोई कहता है कि यह आपके सिर में रेशा जमाव हो गया है। आपके अंदर रेशा जम गया तो वह आपको सुन रहा है। तो ये एक डेथ का डेफिनेटली साइन है। 100% श्योर। अगर कोई ध्यान साधना करता है उसके साथ तो होना ही होना है। लेकिन अगर थोड़ा सा भी कोई नजदीक है ना भगवान वाले रास्ते की तरफ। भक्ति भाव तो यह लास्ट टाइम में आपको एक साउंड जो है वह सुननी शुरू हो जाती है
(20:27) और लास्ट का तो बोलते हैं कि जब दो चार घंटे पहले और लास्ट के जैसे कोई 5 7 10 मिनट में तो बहुत तेज हो जाती है क्योंकि जब हमारा मन इस शरीर से बाहर निकलता है तो सबका रास्ता एक है क्योंकि सबकी दरगाह वो सच खंड वो एक है तो एकदम से इतनी ज्यादा गर्जना होती है हमारी बॉडी के अंदर कि जैसे कोई 100 200 जहाज आपकी छत के ऊपर से जा रहा है। इतनी गर्जना होती है। वो लास्ट टाइम की गर्जना होती है। अगर किसी को ज्ञान है वो गर्जना को सह जाए। हमारा मन उस गर्जना को सह नहीं सकता जिसने भक्ति नहीं की। वो सह नहीं सकता उसको क्योंकि गर्जना बहुत ज्यादा होती है। तो मन जो है
(21:08) सूक्ष्म में वो गर्जना को सुनकर सूक्ष्म में दूर भाग जाता है। जैसे सपने में हम भागते हैं ना उस प्रकार से दूर भाग जाता है। मतलब ये जो आवाज है यह आवाज किस चीज की है? जो हम जिसका जप करते होंगे उसी नहीं। फिर यह नाद की आवाज है जो ऑल टाइम पूरे ब्रह्मांड में नाद की जिसको कोई ओम कहता है कोई आमीन कहता है कोई वाहेगुरु कहता है यूनिवर्सल साउंड है एक सबके अंदर भी चल रही है पूरी धरती के कण कण में चल रही है यूनिवर्सल है नाद क्यों कहा जाता है नाद एक इंस्ट्रूमेंटल वो है तो अगर आपने समझना है कि नाद कैसी साउंड है तो आप YouTube पे भी अगर सर्च
(21:50) करेंगे नाद की साउंड कैसी होती है? इस प्रकार से आपके अंदर चल रही है। हमारे अंदर चल रही है और वो अभी आप ये कह रहे हैं कि हमें वो ऑडिबल नहीं होगी इस फ्रीक्वेंसी में और उस वक्त वो सुनने लग जाती है। सुनने लग जाती है। और इंडिकेशंस तो आती हैं जैसे बेचैनी आनी, मन में बेचैनी आनी, आपके परिवार में बेचैनी आनी क्योंकि ये मैंने काफी देखा है कि अगर कोई आपके साथ एकदम से गलत भी होना है तो आपके मन में एक बेचैनी शुरू हो जाती है। कई तो यह कहते हैं कि कुछ जैसे गलत होने से पहले या मौत होने से आपके अंदर ही अंदर से ना आपको ऐसे लग रहा है मेरे अंदर
(22:25) मैं रो रहा हूं। आपकी आत्मा रोनी शुरू कर जाती है। आपके अंदर जो एक नेगेटिविटी आनी शुरू हो जाती है। यह भी होता है। लेकिन जो यह साउंड है यह डेफिनेटली होती है। तो हमने करना क्या जब साउंड आपको सुन रही है आखिरी टाइम में अपना पूरा फोकस उसी साउंड में कर लेना है। उसी को नाम बोला है। और अगर जब गर्जना होती है आप उसमें फोकस नहीं कर पाते। आपका मन जैसे हम स्वपन में भागते हैं ना स्वप्न की तरह तो वह दूर भाग जाता है। तो थोड़े टाइम में वो गर्जना बंद होती है। हम उसमें फोकस नहीं कर पाए। उसमें समा नहीं पाए। फिर हमारे को जूनियों में जाना
(23:02) पड़ता है। यह भी साइंस है। बहुत इंपॉर्टेंट है। यह स्पिरिचुअल है। हर एक के एक का रास्ता नाम ही है और नाम बोला गया है वायगुरु हरि अल्लाह तो यह जप है राम राधा कृष्ण यह जप है ये तो यहां इस देश के जप है जिस देश से हम आए हैं वहां पर कोई जप नहीं है वहां नाद चलता है हां तो उसी में जो ध्यान एकचित हो जाते हैं तो वो तो समा गया उसको कहते हैं कि वो सत स्वरूप हो गया सतनाम हो गया कि सत्य का जो नाम था उसमें चला गया तो ये इंडिकेशंस आते हैं राइट मतलब एक सबसे पहले आपने बोला जो नाद सुनाई दे रहा है वो नाद किसी को अपनेप टर्म्स में आएगा किसी को ओम सुनाई देगा किसी को
(23:42) अल्लाह सुनाई देगा किसी को वाहगुरु [गला साफ़ करने की आवाज़] सुनाई देगा ये यहां के जप है ना यहां के जप है हां जी हां जी लेकिन जो वो ध्वनि सुनती है डेथ के नियर हां वो अल्लाह वाहगुरु राम नहीं बोलेगी वो तो एक नाद इंस्ट्रूमेंट की तरह बजेगी जैसे तार बज रहा है हां जैसे नाद एक साउंड इंस्ट्रूमेंटल साउंड है वो आप सुनोगे ना कि जैसे हारमोनियम है हां पियानो है गिटार है ऐसे नाद का भी एक साउंड होता है नाद तो वो नाद की साउंड साउंड की तरह से आने लग जाएगा। आने लग जाएगा। तो यह एक सबसे पहला हां यह आपको हफ्ता पहले भी शुरू हो सकता है।
(24:15) जिनका तो चल रहा है जो मेडिटेट कर रहे हैं उनको पता लग उनका ऊंची हो जाता है। बहुत ज्यादा लगातार ऊंची और जिनका नहीं है तो उनका हफ्ता पहले भी शुरू हो सकता है। तीन दिन पहले भी लेकिन लास्ट के मोमेंट में आधा घंटा घंटा 3 घंटे पहले तो हो ही जाएगा। तो हमने उसी का ध्यान करना है। यह नाद आता कहां से है? यह यूनिवर्सल साउंड है। जब से ब्रह्मांड बना है तब से जैसे हमारी बॉडी में रक्त चल रहा है, खून चल रहा है, श्वास चल रहा है, पानी चल रहा है। इसी प्रकार से नाद तब से चल रहा है। पर पता कैसे चले किसी को कि ये नाद है या कोई और साउंड है? हां। एक अकेली नाद की साउंड
(24:52) ही हमारे अंदर नहीं चल रही। बहुत सारी साउंड है। जब आप सिमरन करके जैसे हमने वायगुरु जप किया ना। तो वायगुरु जप करके जब आप विचारों से रहित होकर अंदर बैठोगे ना ध्यान में तो आपको जैसे तबला चलता है रबाब की साउंड भी चलती है। जैसे यहां वो रबाब की साउंड इस मस्तिष्क पे होती है। गुरुणी भी कहती है कर कर ताल पखावज नैनो माथे बजे रबा करनो मद बांसुरी बाजे जीवा तजा और जो शब्द आता है ना तन तन खंड श्री वृंदावना जय खेले श्री नारायणा अब वो वृंदावन बाहर वाले की को अंदर ले गए महाराज तो वो कहते हैं ऐसा धन्य वो वृंदावन है जहां पर मेरा नारायण आज भी खेल रहा है तो
(25:39) वो वो कहां है? कहते हैं मधुर मधुर तन अनहत वाजे जहां पर वो मधुर मधुर वो बांसुरी आज भी बज रही है। जैसे कहते हैं ना कृष्ण जी ने बाहर बांसुरी बजाई। जब वो बांसुरी बजाते थे तो पशु पक्षी गाय सब इकट्ठी होकर बैठ जाती थी। वो कृष्ण आज भी हमारे अंदर है। वो कौन है? वह अकाल पुर प्रकाश रूप जिसको कहा सर्व कृष्ण एक देवा देव देवात आत्म तो वो आज भी हमारे अंदर वो कहां पर वो बजती है वह बताते हैं माथे बजे रबा करणो मद बांसुरी बजे कानों के अंदर बांसुरी की आवाज आएगी जीहवा तो नागा जीवा पर ऐसी आवाजें आएंगी जैसे सांप सुर चल रहे हैं मस्तक पे ऐसे आएगा जब रबाब चल रहा है तभी
(26:23) तो कह रहे हैं कि ध्यान करो जो अंदर शांति है अंदर आपको प्राप्त होगा वो बाहर नहीं होगा। अब वह काफी साउंड्स चलती हैं। तो फिर जब वह अभ्यासी जीव पूछते हैं ना कि मेरे अंदर यह साउंड चल रही है तो वह फिर बता दी जाता है। आजकल तो YouTube आ गया तो वह देख लेते हैं कौन सी अलग-अलग किंगरी की जैसे किंगुरी एक होता है जो जोगी लोग बजाते थे वैसे ही साउंड अंदर चलती है। घुंघरू की चलती है। आप बैठे हो तो ध्यान से आप देखोगे जैसे कोई भिंडा बोल रहा है। चिड़ियों की चहचहाट बोल रही है। बेसिकली मतलब कि पंछियों के जैसी आवाजें नाद की आवाजें और जो है घुंघरू की आवाजें बहुत सारी चलती
(27:04) हैं। हां जी। लेकिन जो मुख्य आवाज है वो नाद की आवाज है। जो अंत में आती है। हां जी। नाद में ये सभी साउंड्स समा जाती हैं। हां जी। क्या अब जैसे जिसकी डेथ होने वाली है उसको तो ये नाद की आवाज आ रही है। अगर मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं। क्या मुझे भी ऐसा कुछ अनुभव होगा कि मेरा कोई लव बन जा रहा है कि कोई अगर जा रहा है हमारे से दूर तो वही हम बात कर रहे थे ना कि मन में बेचैनी महसूस हो जानी दूसरे को भी चाहे होगी कोई जाने वाला मेरा अपना तो मुझे भी होने लग जाएगी होने लग जाएगी आपका मन के अंदर ऐसे एक अजीब भाव बन जाएगा कि जैसे आपका रोने को
(27:44) दिल करेगा आपको ऐसे कुछ लगेगा कि आपसे कुछ छूट रहा है पीछे छूट रहा है जो आपके आपने एक्सपीरियंस किया है किसी जी जी कैसा थोड़ा सा बताएं कैसा किसी ने क्योंकि अ आमतौर पे ना हमारे जैसे फैमिली में भी जैसे कोई नानका परिवार में डेथ होती है दाद परिवार में होती है तो आप आम तौर पे ही जैसे जैसे नानका परिवार में कभी डेथ हुई ना तो मदर दो-तीन दिन पहले ही ऐसे कहना शुरू कर देते थे आमतौर से कि मेरे को कुछ लग रहा है कुछ होने वाला है कुछ होने वाला है अब जैसे एक ज्योतिष है मेरा फ्रेंड तो वह स्वप्न के ऊपर बड़ी बात करता है। अब वह कह रहा था कि अगर आपको सपने में
(28:25) कोई बहुत ज्यादा भीड़ दिखाई दे मैं उसकी बात को यह तो नहीं कह रहा कि 100% सच है। वो उसकी बात बता रहा हूं मैं। तो अगर भीड़ दिखाई दे सफेद वस्त्र में दिखाई दे तो वह भी संकेत होता है कि मतलब कि किसी की डेथ होने वाली है। चलो यह उसके ओपिनियन था। लेकिन इतना जरूर होता है कि अगर कुछ घटने वाला है तो आपके मन में बेचैनी, सैडनेस ये जरूर इंडिकेशंस तो जरूर आते हैं। मुझे पता है ये बहुत बड़ी बात पूछ रहा हूं मैं। पर क्या ऐसा हो सकता है कि उस वक्त कोई जब ऐसी बेचैनी हो रही है तो क्या कोई किसी को जाते हुए रोक सकता है? नहीं यह तो नहीं पॉसिबल। क्योंकि अगर आपको
(29:07) पता भी है तो भी नहीं रोक सकते क्योंकि विधान है ना जो विधान को कोई नहीं टाल सका। एक था मैंने एक हमने पॉडकास्ट किया था गुरु सकला मां के साथ। जी। उन्होंने प्राणा की बात की थी कि हमारी बॉडी में अलग-अलग प्राणा निकलते हैं। तो उन्होंने बताया था कि कई योगी के पास ऐसी पावर्स भी होती हैं कि जब कोई व्यक्ति मर भी जाता है तो वो उस प्राणा को वापस लाकर उस इंसान को जिंदा भी कर सकते हैं। हम ये कैसे मुमकिन है? नहीं यह समाद की बात है। समाधि की बात है। जैसे योगी लोग उम्र को बढ़ा लेते थे। अब वह बढ़ाई कैसे जाती है? जैसे जो श्वास होते हैं ना वो गिनती
(29:44) के होते हैं। टाइम गिनती का नहीं होता। इस चीज को थोड़ा बारीकी में समझना पड़ता है। जैसे कहते हैं ना जोगी लोग जो अब जैसे गुरुणी में शब्द आया जे जुग जारे आरजा हो और दसोनी हो। चाहे तो चार जुग से दस जुग उम्र बानी जानता हो। ठीक है जी। एक शब्द आता है वड्डी आरजा फिर जन्मे हरस भेद ना कहे तो वह क्या होता है कि आपका श्वास क्रिया जो अंदर चल रही है बाहर आ रही है यह गिनती की है टाइम गिनती का नहीं है श्वास अगर खर्च ना हो एज इट इज जमा होता रहे शून्य में से स्वास आ रहा है ये खाली स्पेस में से हम श्वास ले रहे हैं ना इसको शून्य बोला यहां से खींच रहे हैं यही
(30:25) छोड़ रहे हैं अगर शून्य में से श्वास आ रहा है शून्य में ही जमा हो जाए तो आपकी की उम्र नहीं घटती। तो जोगी लोग जो है प्राणायाम और प्राण साधना करके श्वास को इतना सूक्ष्म में ले जाते अपने श्वास को उल्टा कर वो शून्य में टिका देते हैं। शून्य में श्वास को रोक लेते हैं। वहां पर हमारे शरीर को भोजन खाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। श्वास को अगर आप सूक्ष्म कर लोगे तो जैसे आप ऐसे तरह के योगी भी हुए हैं जो पौण आहारी हुए हैं जिन्होंने अपना भोजन शरीर का सिर्फ हवा से लिया सूरज से लिया है श्वास क्रिया की साधना जब पवन पवन को श्वास को सूक्ष्म करके आप बैठोगे अब आपका
(31:10) ध्यान शून्य में है आपका प्राण शून्य में से आ रहा है शून्य में ही समा रहा है अब जो गिनती के श्वास है वो रुक गई गिनती तो फिर वो खर्च ही नहीं हो इधर से टाइम चल रहा है। आप अपने 500 स्वास000 साल में भी ले सकते हो। ठीक है जी। अगर कोई साधना में बैठा हुआ जीव है। कई बारी साधना में प्राण ऊपर चढ़ जाते थे। इधर से वो उसको बुलाते थे। भी कोई बोलेगा ये करता तो उसके प्राण आकाश में चढ़ जाते थे। तो क्या हुआ कि उसके कानों के पास धमाका करते। जैसे आज भी है ना संस्कार होगा तो उसके घड़े में पानी डाल के कार निकाल के फिर उसके धमाका करते हैं फोड़ते
(31:52) हैं घड़िया फोड़ते हैं ना उसका तो इस प्रकार से अगर कोई इस तरह की मौत में चला गया वो मरा हुआ एक समान है उसको योगी लोग अपनी दिव्य ताकत से दोबारा बॉडी में ला सकते हैं। लेकिन जो विधान में मर गया अब गोरख से बड़ा कोई जोगी नहीं हुआ। आज भी जोग पंथ जो जितना भी है वह गोरख को ही तो मतलब तो गोरख जी जाते ही ना मछिंदर जी है गोरख जी हैं बड़े जोगी हुए हैं तो वह तो यही रह जाते मौत के आगे कोई भी अटल नहीं हो सका हां अगर कोई ध्यान साधना में बैठा जिसके श्वास उलट गए हैं इधर से तो अब वो हिल नहीं रहा है ना उसकी बॉडी में श्वास श्वास इतना सूक्ष्म हो जाता है नाक में
(32:34) चलता हुआ भी महसूस नहीं होता ये हमारे छोटे-छोटे जो रोम है ना यह श्वास को खींचना और छोड़ने लग जाते नाक से श्वास की क्रिया बंद हो जाती है। यह प्राणायाम से हो सकता है। मतलब जैसे इसको अगर हम सिंपली समझे कि अगर 5 करोड़ मुझे सांस लेने हैं मेरी जिंदगी में तो मैंने अभी इस वक्त मेडिटेट ऐसे कर रहा हूं कि मैंने उस 5 करोड़ सांस को रोक लिया तो 1 लाख साल में ले सकते हो वो। हां। तो वो मैं सांस लंबा ले सकता। पर टाइम तो उसके साथ ही चलेगा ना। नहीं। टाइम बीत रहा है। शून्य में टाइम नहीं है ना? अच्छा। अपनी स्टेट शून्य हो गई। हां। अपनी स्टेट शून्य हो गई ना। यह यह
(33:09) सुनकर कोई हो सकता है कोई हंसे कोई यह ऐसे कैसे वैसे कैसे विधान जो जो लोग जोगी लोगों ने जो आज हमने कैलाश की बात की ना कि जैसे कैलाश में आज भी जोगी जो अपनी साधना में बैठे हैं हम मैंने गुरुद्वारा संतोस सर की बात बताई आपको हम तो वो कहते हैं हाउ इज इट पॉसिबल ये कैसे होगा तो जब आप देखेंगे ना जो शून्य की साधना होती है साधना से कुछ संसार में कुछ भी इंपॉसिबल नहीं है है ना जी तो वो साधना से मान लीजिए मेरे मेरे हजार स्वास पड़े हैं। एक उदाहरण है। पर मैंने हजार स्वास नहीं आज लेने। तो अगर मेरे पास वो साधना की टेक्निक है वो एकदम
(33:45) से तो आती नहीं है। प्राणायाम की काफी साधना है। अब नेट पर इस पर सारा विस्तार पड़ा होगा क्योंकि आज तो ग्रंथ नहीं कोई पढ़ता नेट पर सर्च मारेगा। तो मैंने हजार श्वास मैंने 100 साल में लेने हैं। वो टाइम इधर चल रहा है। मैं शून्य में बैठा हूं। तो जब मैं शून्य में बैठता हूं। एक शून्य तो गुरमत बताती है। वह तो कहते हैं कि आप किसी भी चीज को बढ़ाओ और घटाओ मत। आप मन को सहज में रखो। गृहस्थ का कर्म करते रहो। लेकिन जो जोग कहता है हम वो उसमें है कि आप शून्य में बैठे हो। बाहर 500 साल भी बीत सकते हैं, 800 साल भी बीत सकते हैं। वो आपके ऊपर कोई भी इफेक्ट
(34:22) नहीं डालेंगे। राइट? एक एक जो हम प्राणा की बात कर रहे हैं हम अ जो तंत्र साधना है वैदिक तंत्र है उस साधना में ऐसा बताया जाता है कि जो धनंजय प्राणा है हम ये प्राणा मरने के बाद भी शरीर में होता है कुछ समय तक हां जी अब इसका मतलब ये हुआ कि इंसान मरा भी है और नहीं भी मरा हम तो इस दौरान क्या हो रहा है हां जी क्योंकि क्योंकि एक ज्ञान यह भी है कि जब हमारी बॉडी छूट जाती है जो हमारे मन का हिसाब किताब है जो हमारे मन के कर्मों का हिसाब है जो उसको करने के लिए छ घंटे का टाइम लगता है।
(35:08) एक ज्ञान यह भी है। अब वो छ घंटे के टाइम में आपकी आंखों की ज्योति जैसे कहते हैं ना कि जो आपकी [गला साफ़ करने की आवाज़] आंखें हैं वो छ से सात घंटे के बीच-बीच में डोनेट कर सकते हैं। तो वो जितनी देर तक आपके कर्मों का हिसाब नहीं हो रहा है। आपको अगली योनि में क्या मिला क्या नहीं मिला उतनी देर तक क्योंकि इसी शरीर के अंदर ही सूक्ष्म जो इस शरीर का दो भाग है शरीर के स्थूल और सूक्ष्म इसी शरीर के अंदर का जो सूक्ष्म भाव है अंत समय श्वास क्रिया बंद करके इसी अंदर सूक्ष्म भाव में आपका हिसाब किताब होता है। उतनी देर तक आपकी बॉडी में जब
(35:43) हिसाब किताब हो रहा है, वह एक मालूम सी बिल्कुल छोटी सी प्राण शक्ति जिसको धनंजय प्राण कहते हैं, वह मौजूद रहती है। कि आपको क्या दिया जा रहा है, क्या बोला जा रहा है। इसी शरीर से आप निकल कर आगे कनेक्ट हो जाते हो। अब उससे तंत्र साधना की जाती है क्योंकि तंत्र जो है वह एक ताकत है। तंत्र जो है कि जैसे चुंबक की ताकत है खींचना तो मैंने देखना है कि यह ताकत मेरे को कहां पर जरूरी है। तो मैं चुंबक को सिद्ध करने में लग गया। इसी प्रकार से अगर किसी का संस्कार हुआ है, देह का संस्कार हुआ है, उसकी बॉडी के अंदर भी देह का संस्कार होता है। क्योंकि इस इस बॉडी के अंदर
(36:27) लाखों जीवों का वास है। छोटे-छोटे लाखों जीव बसते हैं। हमारी बॉडी में बहुत सारे अंदर तत्व के जो है ताकतें हैं। हमारी जो है इनविज़िबल ताकत हैं। तो उनको कैसे सिद्ध करना है? संस्कार होने के कुछ टाइम का बाद टाइम होता है कि इस बॉडी से मैंने अपनी एनर्जी इस बॉडी की एनर्जी को लेकर इसको तंत्र में कैसे यूज करना है। इसी प्रकार से पूर्णिमा अमावस्या प्रभाव होता है। हर चीज में प्रभाव है। उस प्रभाव को सिद्ध करके मैं अपनी ताकत से जब आगे चलाता हूं उसको तंत्र कहते हैं। मुझे अगर सिंपली यह समझना है कि लाइफ यह जो धनंजय प्राण प्राणा मेरा अंदर है। हां इस वक्त शरीर
(37:11) में क्या हो रहा है लाइफ बिटवीन वो लाइफ वो मैं बता रहा वो आपको बताया कि हिसाब किताब हो रहा है जो हमारे कर्मों का हिसाब होता है 6 घंटे के भीतर भीतर तब हमारे मन को सजा मिल रही है इधर के छ घंटे मैं बोल रहा हूं आगे का तो टाइम है ही नहीं लेकिन उसको समझने के लिए मैं कह रहा हूं हां जी तब हमारे कर्मों का हिसाब हो रहा है हां जी तो वह तंत्र जो है तंत्र किसी भी चीज के प्रभाव को पकड़ कर उस प्रभाव को मैं अपनी ऊर्जा से अपने अंदर खींचता हूं और दूसरे की तरफ छोड़ता हूं। इसको तंत्र कहते हैं। अभी जैसे जब कोई कलेक्टिव डेथ होती है जब
(37:55) इतने सारे लोग एक साथ मरते हैं। क्या इसका भी कोई मतलब होता है? हां जी। क्योंकि हम बहुत लंबे चले हुए हैं। क्योंकि अब जैसे पीछे से गुजरात में प्लेन क्रैश हुआ था। कई बार बच्चों की बस हम सुनते हैं कि बच्चों की बस को क्रैश हो गया। यह हमारे इकट्ठों का संजोग होता है। हम बहुत लंबे से चले हुए हैं। सतयुग से चले हुए हैं। हमारी रिब्थ हो रहा है बार-बार। तो इस प्रकार से कुछ कर्म होते हैं जो हमने इकट्ठे किए हैं। इकट्ठे कर्मों का भोग भोगना पड़ता है। कुछ अकेले ने कर्म किए हुए हैं। तो पिछले समय में तो काफी टाइम में बोलते हैं कि जो द्वापर युग
(38:30) में तो जनसंख्या भी बहुत थी। जैसे आज पापुलेशन है इससे भी यह आम महापुरुष थे वह बताते होते थे कि अगर एक गांव के किसी जैसे इकट्ठे गांव ने किसी मेले में जाना है कहीं दूसरी जगह पे जाना है ना तो कहते थे कि उनके जो पैरों पैर पैरों की धड़ है ना उससे सात आठ फुट का खड्डा भर जाता था इतनी जनसंख्या थी क्योंकि अब जैसे हमने कुछ पास्ट लाइफ के कुछ ऐसे गेस्ट को कवर किया है तो उन्होंने जैसे अक्सर कई कई केसेस में उन्होंने बताया कि जैसे अगर आपको अपने यहां पर दर्द हो रहा है। तो पिछले जन्म में आपकी डेथ कहीं शायद यहीं पर कुछ आपका हुआ होगा कि वजह से डेथ हुई।
(39:09) तो कनेक्शन कहीं ना कहीं पिछले जन्म से आ रहा है कि किसी को यहां से घुटन होती है तो लास्ट में कुछ इस तरह से डेथ हुई। तो ऐसा कुछ कनेक्शन मिलता है। ये मैं कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिनको हम बहुत ज्यादा महसूस करते हैं और वो महसूस करतेकरते वो डेथ हो जाती है। जब रिब्थ होता है तो जैसे कोई दर्द है दर्द से मैं करा रहा हूं। कराते कराते मेरी डेथ हो गई। हम तो नेक्स्ट टाइम में वह जो करा रहा था, महसूस कर रहा था तो उसके सिम्टम्स मेरे साथ आ सकते हैं। काफी अब जैसे रिब्थ वाले हैं जो वो ये दावा करते हैं कि यह पिछले जन्म का मेरा साइन था, निशान है। यह अगले जन्म में मेरे
(39:47) साथ आ गया। तो ये भी आ जाते हैं। ये बर्थ मार्क्स करते हैं क्या? आ जाते हैं। हां आ सकते हैं। क्योंकि कर्म ही है ना। कर्म का मतलब क्या है? कि जो आपने किया और कितनी मजबूती से किया कितनी पावर से किया वो आपके साथ चलता रहता है वो आपके साथ चलता रहता है क्या ये डेथ चुनी गई या ये अपने आप ही बनता है विधान जब आप आते हो सबसे पहले आप डेथ लिखाते हो फिर आप यहां आते हो मरण लिखाए मंडल में आए जीवन साजे माई आपकी डेथ सबसे पहले लिखी जाती है फिर आप यहां आते हो और कैसे होगी यह भी लिखा जाता है। जी जी जी जब अब देखते हैं ना कि कृष्ण जी के पैरों में वो तीर लगा
(40:29) तो वो कहते हैं कि मृग की आंख समझ के उन्होंने तीर मारा तो फिर वो कहते हैं कि पहले मैंने इसको इस प्रकार रामायण में तो वो वो सारा विधान है। अब देखो वो अवतारी पुरुष है वो भी विधान के बीच में ही चल रहे हैं। तो विधान तो है ना अब हनुमान जी को जैसे ये होती है ना अंडर आर्म होती है। इसमें लास्ट टाइम में उनको यहां पर जैसे जख्म हो जाता है ना इस प्रकार से हो गया था जिसका इलाज वह टिल डेथ भी नहीं हो सका था उनके इसमें हो गया था अंडर आर्म में तो वो भी विधान था आप क्या कर रहे हो लेकिन आपके साथ आपके कर्मास का लॉज़ भी लॉ भी चल रहा है
(41:10) तो तो भगवान अगर आ भी रहे हैं तो वो खुद भी यही दिखाना चाह रहे हैं कि कर्मा से कोई नहीं हो सकता अब हनुमान जी चाहते तो संजीवनी बूटी अगर उठा के ला सकते हैं तो वो तो अगर वो तो ये तो बहुत छोटी चीज़ थी। पर शायद यह भगवान का एक बताने का तरीका है। तरीका है। विधान है ना? राइट? तो आपने जैसे बताया कि जो सोल है वो अपनी ये जो सोल का एग्जिट पॉइंट है। तो इसका मतलब ये जितने लोगों की डेथ हुई होगी इन्होंने अपनी डेथ में ये इन्होंने बताया होगा कि हम कैलाश में इस तरह से हमारी डेथ होगी। ऐसा जी जी जी पहले पहले जन्म से ही यह विधान बना होता है कि कैलाश में ऐसा होगा और हम
(41:46) जाएंगे। ऐसा बिल्कुल बिल्कुल अब जैसे भविष्यवाण होती है तो भविष्यवाणियां भी तो इसी प्रकार से होती है कोई चीज अगर पहले से निश्चित है तो उसकी भविष्यवाणी की जा सकती है हम पुरातन में भी भविष्यवाण हुई है आज भी भविष्यवाणी हो रही है हम हां जी तो इस प्रकार से भविष्य डेफिनेटली होता है वो ये कैसे पता चले कि ये अकाल मृत्यु है कि नहीं अकाल मृत्यु बेसिकली उसको कहा जाता है कि जो विचार भोग विलास में मर जाता है संत मोहे क्या रोइए जो अपने गृह जाए रो साकत बपड़े जो हट अकाल मृत्यु है कि जो भोग विलास के विचारों में मर गया उसको बोलते हैं या
(42:27) विचारों के बहुत ज्यादा दबाव बढ़ने से जो मर जाता है अब जैसे जो कोई फांसी ले लेता है कोई कूद के जान दे देता है बहुत ज्यादा विचार उसके बढ़ जाते हैं है तो विधान ही है विधान में ही सब कुछ चल रहा है विधान से बाहर तो कुछ नहीं है उसको एक अकाल मृत्यु कहा जाता है अब जैसे कोई डेथ इस प्रकार से कर लेता है कि कोई किसी ने फांसी ले ली, किसी ने जहर पी ली तो उसको तो बहुत ज्यादा परेशानी होती है। सुसाइड वाला तो जितना परेशान होता है उतना कोई होता ही नहीं। नहीं पर ये इसको हम ऐसा नहीं देखते कि कर्म बनने थे जैसे किसी की डेथ हुई। जी
(43:00) होना ही था। जी लिखा ही हुआ था। तो सुसाइड में ये नहीं सोचते कि भाई वो लिखा ही था इसने। होता तो लिखा ही है। लेकिन वो मंद भाग थे। उसके माड़े भाग थे कि भाग्य उसका इतना माड़ा था कि वो सुसाइड की वजह से गया। विचार तो उसकी होती है ना। मतलब आप कह रहे सुसाइड लिखा हुआ नहीं हो सकता। नहीं नहीं लिखा ही होता है। कोई भी विधान बाहर नहीं है। विधान से बाहर नहीं है। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे जो नाम और भगवान से जुड़ जाता है। उसका जो भाग्य है उसकी किस्मत है वो सीधी गुरु सतगुरु के मुताबिक चलती है। और जो नाम वाग वाणी से नहीं जुड़ा है। उसकी किस्मत जो है वह काल,
(43:41) काम, क्रोध, लो, अहंकार, माया, भोग, विलास के मुताबिक चलती है। अब उसका विधान क्या है कि वह काल गर्भ से बाहर नहीं निकला है। माया गर्भ से बाहर नहीं निकला है। तो माया ही उसको बार-बार विचारों में डालकर फिर मार रही है। फिर विचारों में डाल के फिर मार रही है। फिर विचारों में डाल के है ये निश्चित है। अकाल मृत्यु कैसे मानेंगे? अकाल मृत्यु जो बहुत ज्यादा विचारों के बंधन में आकर किसी भोग विलास में किसी तरफ ध्यान करके मर गया वो अकाल मृत्यु होती है। एक्सीडेंट हुआ है। एक्सीडेंट को अकाल मृत्यु नहीं कहेंगे। नहीं कहेंगे। नहीं कहेंगे।
(44:15) एकदम से हम जा रहे हैं और एकदम से ऐसा हुआ। नहीं आपके ध्यान से ही यह लॉजिक को भी समझना पड़ता है ना। अच्छा अब ये भी तो एक एक्सीडेंट ही रहा है। एक तरह से जो नेपाल एक्सीडेंट ही है ना ये अकाल मृत्यु। अब कोई बैठा है। अब किसी ने तो कुछ किया नहीं। अब एकदम से एक बड़ा ग्लेशियर आता है। वो गिरता है। वो झील बनती है। नीचे पानी आ जाता है। तो ये भाव जो विधान है विधान से तो कुछ नहीं। मतलब उसके आगे नहीं कुछ कह सकते हैं कि यह तो गलती से हो गया। गलती से कुछ भी नहीं होता। नहीं मैं समझना चाह रहा हूं मतलब जो मेरी को मैं कि कोई अकाल मृत्यु जो है मुझे ये बात समझ
(44:54) आई कि आपने कहा कि अकाल मृत्यु वो है जो कोई इस वक्त नाम नहीं ले रहा या कोई इस वक्त भोग विलास में। भोग विलास में है। राइट? मैं पार्टी कर रहा हूं। मैं मर गया। तो आप बोलोगे कि हो सकता है तुमने दारू दादा पी ली। एकदम सेल ऐसा नशा वगैरह किया तो तुम अकाल मृत्यु हो सकती है। यह अकाल मृत्यु पर उसके अलावा अकाल मृत्यु नहीं हो सकती। तो मैं अब ये समझना चाह रहा हूं। इसका मतलब ये हुआ कि जितने डिजास्टर से कोई गया या अगर कोई एक्सीडेंट में मरा तो ये उसका होना ही था। होना ही था। गुरुणी में कहा है क्या जाना कि मरेंगे कैसा मरना हो। यह कोई पता नहीं है कि कोई कैसे मरेगा।
(45:30) ठीक है कि नहीं? लेकिन अगर आप भक्ति भाव में हो तो कैसी भी मौत आ जाए आप मुक्त रहोगे। कैसी भी मौत आ जाए। ठीक है कि नहीं? अब ऐसे [गला साफ़ करने की आवाज़] संत साधु हुए हैं काफी जिनके एक्सीडेंट में मौत हो जाती है। हम अब दमदमी टसाल के थे, गुरमुख थे, मुखी थे। उनकी एक्सीडेंट में मौत हो गई संत जी की। अब उनको हम कह कह देंगे कि ये अकाल मृत्यु में चले गए। बहुत सारे ऐसे जीव होते हैं तो संत साधु हैं, भगत जन भी हैं जिनकी एक्सीडेंट में भी हो जाती है। किसी प्रकार से कोई बड़ा हादसा हो गया उसमें भी हो जाती है। तो वो अकाल मृत्यु
(46:06) होती है। जैसे बहुत ज्यादा विचारों में आ गया। जिस किसी ने सुसाइड कर ली। सुसाइड करने वाले को एकदम से उसके मन को आगे सूक्ष्म कोई आकार नहीं मिलता है। भटका हुआ होता है। ओवर थिंकिंग हो रही है तो वो जो एक्सट्रीम डिसीजन ले रहा है तो वो वही रुक जाता है उसका आकार। अब जो और भी सूक्ष्म योने हैं हम जैसे भूत कहते हैं, प्रेत कहते हैं, पिशाच कहते हैं। यह सूक्ष्म आकार हैं। जैसे 84 लाख योनियों में यह भी योनियां आती हैं। तो वो उसको फिर तंग करते हैं। उसको उनकी वाइब्रेशन से वहां पे उसको जैसे हमारे को दर्द महसूस होता है ना तो वो फिर बार-बार प्रे करता है कि मेरे को
(46:42) आगे आकार मिले। फिर वो कहते हैं ना कि बाहर डाल रहा है और कर रहा है कि आगे मेरे को आकार मिले। मेरे को आकार नहीं मिल रहा है। मेरी अरदास करो। मेरी मेहनती करो। मेरी को पूजा करो। इस प्रकार से है। हां जी। गॉट इट। डेथ के वक्त दर्द होता है मौत के वक्त कुछ? हां जी। गुरुणी कहती है कि जिन नि हड्डा को कड़काए कि जो तो जिन्होंने तो ध्यान साधना की है उनको तो नहीं। क्योंकि वो तो नाम द्वारा मोक्ष लेते हैं उनको कोई दर्द नहीं। लेकिन जो भोग विलास में पड़ा हुआ है जिसको कोई पता नहीं है। जो मानता ही नहीं था किसी चीज को। उसको फिर सारी जैसे हमारी एक-एक हड्डी
(47:23) को जैसे 100-100 भाग में तोड़ा जाए ना इतना दर्द होता है क्योंकि जो हमारी सुरती है ना हमारा ध्यान है वो बिखरा हुआ है। हमारे रोमों में फंसा हुआ है। तो हमारे मन को जब खींचते हैं एकदम से इस बॉडी में से तो बहुत दर्द होता है। मन के ऊपर जो सूक्ष्म आकार है ना सूक्ष्म और स्थूल आकार को जब अलग करते हैं तो दर्द महसूस होता है। कैसा दर्द होगा? बहुत ज्यादा जैसे कोई बिच्छू डंक मारता है ना कई बिच्छू डंक मारेंगे इस प्रकार से दर्द होता है और यह सबके लिए सेम होगा जो नहीं करते जो जो नाम में है उनके लिए नहीं कुछ होता है नाम वाले को तो फिर आनंद बन जाता है
(48:05) कबीर जे मरने ते जगत डरे मेरे मन आनंद कहते हैं कि जिस मरने से जगत डरता है वो मरना मेरे तो आनंद बन जाएगा मरने ही ते पमानंद जब हम मर जाएंगे तभी पूर्ण भगवान की प्राप्ति होगी। अब तो रोज रोज यहां आओ फिर जाओ फिर यहां आओ फिर जाओ। ठीक है ना? तो वो जो है मनमुख है उसको तो फिर बहुत दर्द होता है। बहुत ज्यादा तशद्दुत होती है इस पर। और ये जो मनमुख है हम क्या ये कर्मों के हिसाब से दर्द होगा या डेथ सबकी कॉमन ही होगी? डेथ तो कॉमन होती है। ये सबको बिच्छू काट रहे हैं। ऐसा भी जो हम बार-बार आज वागुरु वाहगुरु जप रहे हैं। हमारे को कहते हैं आप तो मूर्ख हो।
(48:46) यही नाम जपते जपते क्योंकि दो दो रास्ते हैं ना एक धात का एक लिव का है एक संत मार्ग है एक धात मार्ग है और हम संत मार्ग पे नाम जपने वाले ध्यान करने वाले संत मार्ग पर चल रहे हैं उसमें तो सूक्ष्मना खुली श्वास खत्म हुआ नाम की गर्जना हुई और संत अपने घर चले गए और उसको वो सूक्ष्मन मार्ग पर चला ही नहीं सूक्ष्मना मार्ग पर चला ही नहीं वो धात मार्ग पर चल रहा है अब वो खुला गर्जना हुई उसको पता नहीं तो वो दर्द ही दर्द है उसको मतलब एकदम से आखिरी वक्त में नाद बढ़ गया है। आवाज तेज हो रही है। और आनंद बढ़ गया। हां। हमारा तो आनंद बढ़ गया।
(49:20) आपका आनंद बढ़ गया। अमृत रस पूरा आ गया। भरभ के आ रहा है। प्रकाश हो रहा है। और धुन चल रही है। से फिर यहां से निकल गया। और जो बाकी होगा उसका क्या होगा? सर फटने लग जाएगा। वो जब गर्जना होगी उसने तो कभी ऐसा कुछ फील ही नहीं किया। ना उसने कोई साधना की तो उसको इतनी दर्द होगी और सब होगा क्योंकि वो जमों के साथ रला हुआ है। काम करो लोगों का। तो वो दर्द उसको उसको सहारा नहीं जाएगा। मतलब कान फटने लगेंगे। एक ये चीज हुआ अंदरली तरफ से ऐसे लगा जैसे कान फट रहे हैं। फट रहे हैं ना बहुत तेज हो गई है। और एकदम से जैसे कि कान के सामने डीजे बजा
(49:51) दिया एकदम इस आवाज बढ़ गई। अंदर मुझे बिच्छू की तरह काटना महसूस हो रहा है। क्योंकि वो मन वो भोग विलास में था। अब अगर हम बैठे भी है ना अगर कोई आलस में भी बैठा है तो वो शरीर को ही भोग रहा है ना। हां हां तो एकदम से अब भोग विलास सब बंद हो रहा है। तो वो दर्द होती है। फिर आपके एक वीडियो में आपने कल्कि की बात की हुई थी। हां जी। क्या कल्कि कैलाश से आएंगे? कल्कि का अभी नहीं जैसे कलयुग का तीन चरण में कलयुग का समय बताया। चौथे में नाश होगा कलयुग का और सतयुग का आरंभ होगा। अभी कलयुग का पहला चरण चल रहा है। शुरुआत है कलयुग की। और कल्कि का जो आगमन है वह तीसरे चरण में
(50:37) है। अभी लंबा समय है। तो जो कल्कि कहा गया है कि जिसके पास इतनी पावर है कि वह एक आंख की झपकते ही मतलब कि नष्ट कर सकता है दुनिया को। तो वो जो आत्माएं होती हैं वो स्टोर की होती है। यह शून्य में स्टोर की हुई है। जैसे आज हम देखते हैं ना कि दुर्योधन इतना था। पांडवों के पास इतना बल था। अब वो कहां गए? वो आत्माएं जो सोल्स है वो मन है वो स्टोर हो जाता है शून्य में। इसी प्रकार से जो कल्कि की आत्मा है जिसके पास इतनी पावर है अब उतनी पावर की यहां पर धरती पे अभी जगह नहीं बनी है। तो शून्य में से वो आत्माएं आती है। देवलोक में से वो आत्माएं आती है। अब कैलाश तो है
(51:22) हमारी धरती पर है। ठीक है ना? जो जहां से हमारे को बॉडी मिलती है जैसे अब माता के गर्भ में तो हर को हर एक को आना पड़ता है। अगर किसी ने धरती पर आना है तो पहले उसको माता चूज करनी पड़ेगी। अब माता में से वह फिर उसका गर्भ चूज़ करेगा। तो यह सब कहां से हो रहा है? जिसको हम बोलते हैं परलोक सचखंड। तो वहीं से ही सबको यहां भेजा जाता है। अब वह अपनी जीवन यात्रा कहां से शुरू करता है? अब जैसे कुछ ग्रंथ यूपी कहते हैं, कुछ कैलाश से कहते हैं। अब पंजाब की तरफ कहेंगे तो वो कहते हैं कि पंजाब से शुरू होगा, लदे पंजाब से शुरू होगा। तो ये
(52:01) अनुमान है अपनेप। लेकिन कल्कि की जो सोल है उसको अभी काफी टाइम पड़ा है। पर ये गुरुणी भी कहती है कल्कि अवतार के बारे में। हां जी परफेक्ट तो एक दशम ग्रंथ में कल्कि का दशम ग्रंथ जो है गुरु ग्रंथ साहिब से अलग जो दशम ग्रंथ है उसमें कल्कि का वर्णन आया है। गुरु ग्रंथ साहिब में तो यह कहा है कि जब एक गुरुख और एक संत जन साधुजन जाग जाते हैं वही कल्कि बन जाते हैं कि जैसे वह पापों को खत्म कर दे। अब जैसे नाम जप करवाते हैं संत। अब भारत में कितने संत नाम जप करवा रहे हैं। तो नाम जप से जैसे दूसरों के पापों का खंडन होता है तो वह सतयुग आता जाता है। जितने गुरु सिख
(52:40) गुरुख नाम जपने लग जाएंगे वो सतयुग आ गया। लेकिन जो दुनिया पर अभी जो चल रहा है सिस्टम चल रहा है हम देखते हैं कि करप्शन बहुत हो गई है। गलत पाप बहुत हो उसको खत्म करने के लिए तो फिर कोई ना कोई गुरख प्रकट करता है। तो उसमें क्या लिखा हुआ है उस ग्रंथ में जब बता रहे हैं। दशम ग्रंथ में हां दशम ग्रंथ में तो उन्होंने यही लिखा है कि अह गुरु गोविंद सिंह जी की सोल को ही कहा है कि वो कल्कि के रूप में अब दोबारा आएंगे। हरमंदर साहिब से वो जंग शुरू करेंगे और फिर वो खालस राज प्रकट करेंगे। हां जी। मतलब वही कि कहने का अर्थ यही हुआ जो
(53:20) कल्कि ने आना तो जरूर है कि कल्कि अवतार ऐसा हुआ कि जो भी हुआ रहा है उसको खत्म करने के लिए एक फोर्स आ रही है। अब हर रिलजन अपने हिसाब से उसको एक अंडरस्टैंडिंग में बोल सकता है। पर अल्टीमेटली मतलब तो वही आ रहा है। हां जी। क्योंकि गुरु गोविंद सिंह जी या है चाहे कोई बड़े महापुरुष है वो जन्म मरण में तो है नहीं। लेकिन ये माना जाता है कि वो उनकी ड्यूटी लगाकर भेजेंगे। बहुत सुंदर। हां जी हर बार आपसे मिलना होता है और बहुत ऐसा लगता है कि एक अलग स्पिरिचुअल जोन में है और खुद मिलकर बहुत अच्छा लगता है। मैंने पिछली बार भी कहा था कि साक्षात ऐसी
(53:56) वाणी आती है आपसे जो कि दिल को आनंद देती है और मुझे लगता है ये जो पल होता है जब कोई अपना किसी पर्सनल निजी जो उसका व्यक्ति है किसी की डेथ होती है पर्सनल फैमिली में उस वक्त कुछ भी अच्छा नहीं लगता तो शायद ये शब्द आज हम उन सबके लिए और नेपाल में जितनी फैमिलीज के साथ ये हादसा हुआ उन सबके लिए हम प्रे करते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिले और इसी के साथ मैं चाह रहा हूं कि अगर हम जाते-जाते उन सबके लिए आज हम एक मेडिटेशन के माध्यम से सबके लिए प्रे करें। हां जी बिल्कुल क्योंकि हमने जो बात की ना कई बार कुछ अवस्थाएं कुछ चीज ऐसी होती है
(54:38) कोई ध्यान होता है कि जो हम 5 साल 10 साल 15 साल में प्राप्त करनी होती है। क्योंकि एक वैराग्य में ही भगवान की प्राप्ति है। अब वो वैराग्य कब बनता है? उसके लिए हम लगातार मेडिटेशन कर रहे हैं। तो जो आपने बात की ना कि आज जिस टाइम में नेपाल फ्लड में जाने वाली फैमिलीज हैं वो हो आज एकदम देखने से हो सकता है उनके मन में वो 10 साल का 15 साल का वैराग्य आज के दिन में इकट्ठा हो गया। उन्होंने जो चीज धीरे धीरे धीरे दुख को हंडाना था। तो इस वैराग्य को नष्ट ना होने दें। आप इस वैराग्य में मन को डोलने ना दें। आप इस वैराग्य में मन को नेगेटिविटी
(55:17) की तरफ मत जाने दे। एक जो होता है ना हुकुम और भाणा अगर आप इसको मान इस टाइम के बीच में आप भक्ति भाव में शुरू हो जाते हो ना तो जिस आदमी को कोई 10 साल को 15 साल में फल मिलना था 20 में मिलना था वो आपको इन दिनों में मिल जाएगा। एक छोटी सी मेडिटेशन के साथ करें। हां जी। हां जी। आप सबके लिए आज हम इस प्रार्थना से सभी जितने भी नेपाल में जितने लोगों ने अपनी फैमिली को खोया है तो हम उन सबके लिए मैं प्रे अपनी तरफ से भगवान को वाहेगुरु को हां जी बिल्कुल जी और थोड़ा जाप कर ले फिर थोड़ा जाप करते हैं उन सभी गई हुई आत्माओं के नाम से
(55:54) हम एक मिनट का जाप करते हैं जिससे उनको शांति मिले वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु वाह गुरु गुरु वाहे गुरु जी का खसा वाहे गुरु जी की
(56:40) फते भगवान सभी उन फैमिली को पीछे अपना हुकुम मानने की भाणा मानने की हिम्मत दे और सब पर कृपा करें कि वह इस दुख के समय में अपने मन को इधरउधर डोलने से बचाएं और नाम शब्द के साथ जुड़ जाए। वाह गुरु जी का खलसा आज का पूरा शो देखने के लिए दिल से शुक्रिया एपिसोड कैसा था मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा चैनल को सब्सक्राइब भी अवश्य करें क्योंकि सुपर टॉक्स एक मूवमेंट है जो हमारे देश का भविष्य उज्जवल बना रहा है जय

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