Uchchisht Ganapati Tantra Har Kisi Ke Liye Nahi | The Real One
Author Name:The Real One
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Transcript:
(00:00) आरबीआई के सामने जाएंगे तो दो मूर्तियां हैं। वो दोनों मूर्तियां यक्ष और यक्षिणी की है। क्योंकि वो धन का आरबीआई के सामने। हां जी। यह देखिए। यक्ष एंड यक्षिणी इन फ्रंट ऑफ आरबीआई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया। माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा देव देव जगन्नाथ सृष्टि लयात्मक विना ध्यान विना मंत्रम विना होमम विना जपम ये स्मरण मात्रते यानी हे भगवान महाकाल सदा शिव क्या कोई ऐसी पूजा है कि ना ध्यान करना पड़े ना मंत्र जपना पड़े ना यज्ञ करना पड़े लेकिन जो मैं सोचू वो हो जाए तब भगवान ने बोला देवी प्रक्षा गणनास उच्चष्ट गणपति जो है वो सर्व सिद्धि
(00:40) प्रदान कर देते हैं सिर्फ ध्यान करने [संगीत] से बोला जाता है यस निग्रह मात्र पृथ्वी प्रलय करता भगवती काली का एक स्वरूप है विपरीत प्रत्यंग अगर वो धरती के ऊपर से घूम जाए इस गैलेक्सी के ऊपर से निकल जाए तो प्रलय आ जाता है [संगीत] तंत्र के 64 64 ग्रंथ तीन चीजों में विभाजित होते हैं रथ क्रांत विष्णु क्रांत अथर्व क्रांत तो वही धर्म है और ये विलुप्त क्यों हुआ गणपत्य संप्रदाय सबसे बड़ा इनवेडर्स आक्रांता नालंदा जला दिया सब कुछ जल गया सबसे बड़ा वशीकरण का मंत्र मैं आपको यही दे देता हूं पडकास्ट इसको उठा जब आप सुनना [हंसी] जब आप सुनना शुरू करेंगे व्यक्ति को
(01:17) अरे अभी अभी मैं रामायण देख रहा था तो मैं देख रहा था कि उसमें बताया जा रहा था कि सबसे बड़े तांत्रिक ये बैठे हैं रावण जी सीता में वशीकरण क्यों नहीं कर पा रहे Reliance को लात मारी गई तब जिओ आया है ये कर्म योगी है ये होकर के बिना कोई बनता ही नहीं कुछ शक्ति हमेशा डोमिनेट कर देगी इसलिए मन की शक्ति पे जो काबू पा ले वो वास्तविक शिव है श्मशान के अंदर ना तो कोई पैदा होता है और ना तो कोई मरता है। मरने के बाद व्यक्ति श्मशान जाता है और पैदा होने के बाद ही शमशान जाता है। वहां पर स्थिरता है जो ब्लैक होल में है। आज तक का सबसे वैलिड पॉइंट आज आपने
(01:52) शव के ऊपर में साधना होने का मतलब यह होता है शिव शव समान है। इसीलिए काली मां आरुढ़ होती है। जिस फोटो में काली मां का राइट हैंड राइट लेग शिव जी के ऊपर हो वो दक्षिणा मार्गी होती है। तो वास्तविक जो काली है वो शव के ऊपर ही विराजमान होती है। यम कामते काम तम निश्चितम भगवान शिव बार-बार क्यों कह रहे हैं तंत्र ग्रंथ में जब जब सोचोगे तब तब प्राप्त होगा क्यों यूनिवर्सल लॉ मेनिफेस्टेशन जो सोचोगे वही वैसी वैसी स्थितियां कृष्ण भी यही कह रहे हैं भगवत गीता में जो सोचोगे वैसा ही होगा वैसी नमः [संगीत] पिछली बार आपके साथ जो पडकास्ट हुआ
(02:38) जी आपका कैसा अनुभव था उसके बाद क्या रिस्पांस आया क्या पब्लिक का क्या बहुत ही दिव्य अनुभव रहा और बहुत-बहुत धन्यवाद करूंगा आपका बहुत कृतज्ञता उमड़ी मेरे हृदय में आपके लिए कमेंट्स पढ़े आपने सारे बहुत बहुत लोगों का बहुत ही कह सकते हैं भावापन्न हो गए लोग और बहुत अच्छा लगा लोगों को हेल्प करके जो वास्तविक साधन के मार्ग में आगे जाना चाहते हैं उनको तो हम लोगों का कार्य यही है कि उनकी सहायता हो पाए किसी भी तरीके से मैंने कल रात ही थोड़े से कमेंट्स उसके टटोले हम दो कमेंट्स का जवाब चाहता हूं। ओके। जैसे मैंने भी आपको इसके लिए धन्यवाद ही
(03:13) दिया कि यह कृपा है कि इतनी उम्र में भी आप हम तो उम्र के प्रति एक तो उसमें वो थे कि यार ये उसके बारे में क्या कहना चाहेंगे? उम्र के बारे में। उम्र से व्यक्ति को नहीं आका जा सकता। गुरुओं की कृपा हो तो व्यक्ति किसी भी उम्र में कुछ भी कर सकता है। आद्य शंकराचार्य जी सबसे बड़ा एग्जांपल है। उनसे कंपेयर नहीं कर रहा। मैं तो धूर्त हूं। उनके आगे कुछ नहीं हूं। लेकिन गुरुओं की कृपा से व्यक्ति कुछ भी कर सकता है। सत्य है। कर्ता करे ना कर सके गुरु करे सो होए। तीन लोक नौ खंड में गुरु से बड़ा ना कोई। गुरुओं की कृपा है जी। दूसरा कमेंट था
(03:46) हम कि हमने जो थंबनेल टाइटल लगाया था वो देखा आपने? बिल्कुल। आपने एक आई ओपनिंग पडकास्ट था वो मेरे लिए भी। जी। क्योंकि उच्चिष्ट गणपति तांत्रिक गणपति का ऐसा रूप मैंने देखा नहीं था। कई लोगों को भी वह डाइजेस्ट नहीं हुआ। अभी भी उसको एक्सप्लेन करिए। वह सबके लिए डाइजेस्ट करने वाली बात ही नहीं है। घी का स्वाद उन्हीं लोगों को पता हो सकता है जिन्होंने घी वाकई चखा हो और वही एक्सप्लेन कर पाते हैं और वो एक्सप्लेनेबल भी नहीं होता। उच्चिष्ट गणपति जो है वो सामान्य फॉर्म नहीं है। वो लोगों के लिए नहीं है। हम उच्चिष्ट गणपति ही चुनते हैं।
(04:24) ठीक है? हम मैं फोटो फिर से लगा देता हूं वाली। इसका कुछ सिंबॉलिक मीनिंग बताना चाहेंगे? 100% वो यूनियन ऑफ शिव एंड शक्ति को दर्शाता है। कैसे इसके कैसे मैस्कुलिन एनर्जी और फ़ेमिनाइन एनर्जी जब जुड़ते हैं तो यही वास्तविक तंत्र है। तंत्र की अगर कोई परिभाषा पूछे तो वास्तविक उच्चिष्ट गणपति का चित्र है। क्या बात है? शिव और शक्ति का संगम दिखाया जा रहा है। उसी से आ गए आपकी इस बात से क्योंकि अभी मैं इसी चीज को एक्सपीरियंस कर रहा हूं और इसी चीज से मैं भी आगे जी बढ़ रहा हूं। बिल्कुल यह सत्य है। थोड़ा सा और क्लियर कट बात यह है रामचरितमानस में
(04:56) तुलसीदास जी ने कहा है जाने जो ही देहिव जनाए जानत तुमही तुम्ह हो जाए। राम को वही जान पाता है जिसको राम चाहते हैं कि मुझे जाने और राम को जानते-जते व्यक्ति राम ही हो जाता है। तो उच्चिष्ट गणपति को वही जान पाएगा जिसको उच्चिष्ट गणपति चाहते हैं कि ये मुझे जाने। तो हर समय पर कोई ना कोई देव तत्व एक्टिव होता है संसार में किसी ना किसी बदलाव के कारण। क्योंकि सृजन का मूलभूत शक्ति है। एक शक्ति एक स्त्री अगर व्यक्ति के जीवन में आ जाए तो उसको ट्रांसफॉर्म कर सकती है। और उच्चिष्ट गणपति जो हैं ठीक है? अगर उनके मंत्र देखे जाए तो सबके अंत में
(05:27) स्वाहा आता है। नपुंसकलिंग स्त्री और पुरुष दोनों के तत्व को दर्शाता है। तो इसी कारणवश थोड़ा सा एक्सप्लेन करिए इसको। उच्चिष्ट मंत्रों के कई प्रकार होते हैं। ये लोगों को नहीं पता। जिसमें नमः आता है। नमः का मतलब होता है नमस्कार करना। ठीक है? ओम उच्चिष्ट महात्मन्य नमः नमः का मतलब प्रणाम करना। हे उच्चिष्ट गणपति हम आपको प्रणाम करते हैं। जिनके अंत में स्वाहा आता है। दो देवियां हैं अग्नि की पत्नी अग्नि पुराण का अगर आप अध्ययन करें तो पता चलेगा। स्वाहा और स्वाधा जब भी हम आहुति में स्वाहा बोल के आहुति देते हैं तो स्वाहा नाम की देवी उस देवता को आहार
(06:00) पहुंचाती है जिसका हमने नाम लेकर स्वाहा बोला और स्वधा नाम की देवी पितरों को आहार पहुंचाती है। ये भी लोगों को नहीं पता है। क्या बात है। तो ये महत्वपूर्ण बात है और उच्चिष्ट गणपति ट्रांसफॉर्म करते हैं व्यक्ति को। बहुत प्लेफुल है जितना मैंने जाना साधना की विशेष बातें नहीं बताई जा सकती। उच्चिष्ट गणपति आज के टाइम पे विलुप्त हैं। सुग्रीव ने इनकी उपासना की थी। विभीषण को राज्य इन्हीं की कृपा से मिला था। माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा देव देव जगन्नाथ सृष्टि स्थिति लयात्मक विना ध्यानम विना मंत्रम विना होम विना जपम येन स्मरण मात्र लभ्यते चाम यानी हे
(06:31) भगवान महाकाल सदा शिव क्या कोई ऐसी पूजा है कि ना ध्यान करना पड़े ना मंत्र जपना पड़े ना यज्ञ करना पड़े लेकिन जो मैं सोचूं वो हो जाए तब भगवान ने बोला शणो देवी प्रवक्षामिष्ट गणनाथस कवचम सर्वदम उच्चिष्ट गणपति जो है वो सर्वस सिद्धि प्रदान कर देते हैं सिर्फ ध्यान करने से तो वास्तविक जो सनातन का मूल है वो ध्यान है क्योंकि ऋषियों को भी जो वेद प्राप्त हुए हैं वो ध्यान से ही प्राप्त हुए हैं। हर मंत्र का एक ऋषि होता है। लोगों को यह भी नहीं पता। वो डायरेक्ट मंत्र लेकर जपने लगते हैं। भगवान शिव ने सारे मंत्र दिए हुए हैं। आगम निगम बखानी
(07:04) तुम शिव पटरानी। भगवती ने ही निगम और आगम का बखान किया। वेदों का और तंत्र का। ये लोगों को नहीं पता है। तो उसी तंत्र के माध्यम से भगवान शिव ने सारा ज्ञान दिया। तो सबका जो मूलभूत है वो शिव है और किसी को तो दिया होगा। तो जिस ऋषि को दिया है वो ऋषि एक मंत्र का प्रधान ज्ञाता होता है। जब तक कि उसको प्रणाम नहीं करेंगे वो मंत्र सिद्ध नहीं होगा। क्या बात है ये किसी को नहीं पता। आपने विष्णु पुराण पढ़ी है? बिल्कुल योगानंद प्रेम परमहंस योगानंद जी योगानंद परमहंस जी की विष्णु पुराण उनकी वाली नहीं पढ़ी गीता अलग है। उनकी अलग है। अंदर के जीवन को दर्शाती है। मत्स्य अवतार
(07:38) से लेकर कृष्ण का पूर्ण अवतार अंदर की चेतना कैसे विकसित हो सकती है। कैसे विकसित हो सकता है? उसके अंदर यह बात जो समुंदर मंथन की बात है ना जी तो जो आपने बोला ना ध्यान में वेद और ग्रंथ सब चारों वेद ये मैंने विष्णु पुराण में पढ़ा है और विष्णु पुराण के आप 10 के 10 अवतार देखे तो ह्यूमन एवोल्यूशन पूरा एक्सप्लेन कर दिया हमने ह्यूमन एवोल्यूशन ही है अवतार यानी कि लिक्विड फॉर्म से लेकर उस पूर्ण चेतना तक बिल्कुल पूरा का पूरा सब कुछ लिक्विड से ही आया हम लोग बात करते हैं यक्षिणियों की ये मूलभूत सब लोग बात करते हैं उनके के जो मेल काउंटर पार्ट है
(08:14) उनको यक्ष बोला जाता है। आरबीआई के सामने जाएंगे तो दो मूर्तियां हैं। वो दोनों मूर्तियां यक्ष और यक्षिणीयों की है क्योंकि वो धन का आरबीआई के सामने हां जी एक बार मेरे को दिखा सकते हैं क्या? बिल्कुल दीजिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आगे यक्ष की जो मूर्ति है क्या बात है ये तो इंटरेस्टिंग बात है जी एक सेकंड आरबीआई आरबीआई यस रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया वो इन चीजों को मानते हैं सर सनातन को तो सबको एक्सेप्ट करना पड़ेगा। हमारे पास में जो थ्योरी थी वो किसी के पास में नहीं है। ये देखिए यक्ष
(09:00) एंड यक्षिणी इन फ्रंट ऑफ आरबीआई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया। सनातन सर्वभौम है। नटराज द कॉस्मिक डांसर भी। देखिए कहां-कहां पे स्थित है। क्या बात है। जी। क्या बात है। ये फोटो लगा देना यहां पे। जी। तो यह जो यक्ष और राक्षस हैं यह भी समुद्र से उत्पन्न है। जलाशय ही इन सबका मूल प्रकृति का कारण है। ब्रह्मा जी ने दो लोगों को बताया और बोला कि एक जल की रक्षा करना। ठीक है? और एक ध्यान रखना। तो जो रक्षण करने वाले थे वो राक्षस हुए। इसलिए राक्षस जो नाम आया रक्षण करने से आया। क्या बात है? और और यह आज आज भी इस समय पर भी यह सारी एनर्जी विद्यमान है। सूक्ष्म मार्ग से जब
(09:44) भी कोई व्यक्ति बड़ा तप करता है तो इंद्र का भी सिंहासन डोलता है। क्योंकि वो वो ऊर्जा जनरेट कर पा रहा है जो साधारण रूप से नहीं हो सकती। इसीलिए ये ट्रांसफॉर्मेशंस आती हैं। ये को आ जाना, महामारी आ जाना इतनी इतनी स्थितियां ये इसी वजह से है क्योंकि कुछ ऐसा कार्य हुआ है जो बहुत ही अधर्मतापूर्ण है। बोला जाता है यस निग्रह मात्रण पृथ्वी प्रलयम गरता भगवती काली का एक स्वरूप है विपरीत प्रत्यंगरा। अगर वो धरती के ऊपर से घूम जाए इस गैलेक्सी के ऊपर से निकल जाए तो प्रलय आ जाता है। तो ये सब चीजें बहुत सिंबॉलिक हैं। इनको अगर देखा जाए डायरेक्ट
(10:16) नहीं बोला जा सकता कि ऐसा हो गया। लेकिन अगर इसको अंदर के विषय को व्यक्ति समझे तो बहुत ज्यादा बिल्कुल बिल्कुल अभी मैं बता आपने आपने बोला भी कि मैंने बताया कि भगवत गीता में बहुत ज्यादा उसके अंदर जब मैंने योगानंद परमहंस जी की पढ़ी तो मेरे ना पहले से ही ध्यान में कुछ चीजें आती थी जी कि कृष्ण क्या है अर्जुन क्या है दुर्योधन क्या है सब अंदर ही है बिल्कुल हायर कॉन्शियसनेस होल कॉन्शियसनेस हमारे मन के अंदर सवाल आ रहे हैं और हमारे जो चेतना के रूप में देवी बैठी है या देवी सर्वभूतेषु चेतना विधते नम तत्स नम तस नम तस नमो नम देवी मा ही चेतना के रूप में
(10:56) उत्तर देते जा रही है और वही चेतना विकसित हो के शिव से मिलेगी और तंत्र हो जाएगा यही सत्य है जी तो मैंने काफी आठ महीने बाद मुझे ये गीता मिली योगानंद रमन जी की तो मैं उसमें देख रहा हूं उसमें लिखा हुआ है दृष्टराज उसके आगे ब्रैकेट में लिखा हुआ है अंधा मन मैंने कहा यार ये एक-एक बात कैसे मैच हो रही है हम तो जो आपने बताया ना इंद्र का सिंहासन तो तब समझ में आया इंद्र है क्या? हम अंदर इच्छाएं हैं। इच्छाएं हैं। करेक्ट करेक्ट। अंदर जिसके ऊपर अर्जुन ने काबू पा लिया। और जब तक के ऐसी परम चेतना साथ में नहीं है तब तक के नहीं। कृष्ण भगवान की कृपा
(11:29) हुई तभी वो अपने अंदर झांक पाया इतना। आपने उच्च गणपति की बात करी। जी। मैं बहुत सारे तांत्रिकों से मिलता हूं। हम्म। सबके लिए तो वो साधना नहीं है। बिल्कुल नहीं। संप्रदाय पूर्ण है। गुरु सिखाए तो ही मिल सकती है। कैसे पता लगेगा किसके लिए क्या साधनाएं हैं? बहुत सारी चीजें हैं। देयर इज़ समथिंग कॉल्ड एलिमेंटल कंपैटिबिलिटी टेस्ट जिसको बोलते हैं कुलाकुल चक्र। ठीक है? आपके नाम के फर्स्ट टू लेटर्स को। ठीक है? एक नवचक्र टेबल होता है एस्ट्रोलॉजी का उससे मैच किया जाता है नक्षत्र के अनुसार और मंत्र के जो वर्ण होते हैं उससे मैच किया
(12:01) जाता है। अगर वो अतिमित्र या शेम ठीक है? या वध ये तीन श्रेणियां बताई गई है। वध श्रेणी में वो डिस्ट्रक्शन कॉज करेगा आपको। तो अगर मित्र श्रेणी में आता है तो ही आपको दिया जा सकता है। हर चीज का एक लेवल होता है। अगर एक व्यक्ति स्कूल में जा रहा है तो पहले वर्ड फॉर्मुलेशन सीखेगा। धीरे-धीरे बड़ा होगा फिर वो फ्लुएंसी से बात करेगा। उसी प्रकार से उच्चिष्ट गणपति की विद्या में घुसने से पहले व्यक्ति को गणपति का मूल तत्व समझना पड़ेगा। गणपति अथर्वशीषम का अगर व्यक्ति पाठ करे उसको ध्यान से समझे। जिस प्रकार आपने इतना अच्छा उल्लेख किया भगवत गीता
(12:30) का। गणपति अथर्व शीशम की एक-एक चीज एक-एक क्वांटम फिजिक्स के प्रिंसिपल को दर्शा रही है अपने आप में। त्वमेव प्रत्यक्ष तत्व मसी आप ही तत्व हो, आप ही एटम हो, आप ही मैटर हो और आप ही ये पूरी सृष्टि हो। तो सब कुछ तो अंदर ही है। बाहर क्या खोज रहे हैं? उच्चिष्ट गणपति साधना का सबसे बड़ा नियम। वही कर सकता है जो स्वयं उच्चिष्ट गणपति है। जो स्वयं के अंदर के शिव और शक्ति को समझ पा रहा है वही उच्चिष्ट गणपति है। उच्चिष्ट गणपति की साधना उच्चिष्ट गणपति बनकर ही करते हैं। ऐसा है। और उसमें जो झूठन है वो बहुत बड़ा रोल प्ले करता है। झूठे मुख से ही जप होता
(13:01) है। झूठे मुख से ही जप होगा। मुंह के अंदर कुछ रखना पड़ेगा फिर ही जप होगा। उससे यह दिखाया जा रहा है। इसका रीजन सबसे बड़ा यह है कि जीवन में जो चीजें बच जा रही हैं, आप उनको वैल्यू नहीं कर रहे हैं। लेकिन वास्तविक रूप से वही श्रेष्ठ हैं। जब व्यक्ति की मृत्यु होगी, एक तो इस चीज पे मैं आना चाहूंगा आपके सामने। सब लोग आजकल इंडिपेंडेंसी को बड़ा प्रेस करते हैं। इंडिपेंडेंस थ्योरी ऑफ़ इंडिपेंडेंस को। वास्तविक रूप में कोई इंडिपेंडेंट नहीं है। जितनी फीमेल्स भी बोलती हैं, हम इंडिपेंडेंट होना चाहते हैं या मेल्स बोलते हैं हम इंडिपेंडेंट नहीं
(13:31) हो सकते। क्यों? बच्चा जब पैदा हुआ तो वो नाल लगी हुई थी मां के ऊपर डिपेंडेंट था खाना खाने के लिए। थोड़ा बड़ा हुआ तो कनिष्ठ उंगली के ऊपर डिपेंड हुआ माता-पिता की कि मैं चलना सीख ले। थोड़ा सा बड़ा हुआ तो एजुकेशन के लिए माता-पिता पे। फिर थोड़ा और बड़ा हुआ तो पत्नी पे डिपेंडेंट है प्रेम के लिए। फिर थोड़ा और बड़ा हुआ वृद्ध हो गया तो बच्चों पे डिपेंडेंट है कि अब ये मेरा टेक केयर करेंगे। और लास्ट में जब गया तो चार कंधों पे डिपेंडेंट हो गया। ठीक है? और बच गई क्या? आत्मा। तो जो आत्मावती वही उच्चिष्ट है और उच्चिष्ट गणपति ही सर्वश्रेष्ठ है। ऐसा है।
(14:00) आपने एक टॉपिक भेजा जिसमें शैविज्म, वैष्णिज्म, शक्तशाज्म जी गणपति जो संप्रदाय है, यह विलुप्त क्यों हो गया है? बहुत सारे रीज़ंस हैं और शाक्तिम्म का भी जो तंत्र पे अगर हम आए तो तंत्र ये जो शब्द है, यह तनु और त्र से आता है। उसी प्रकार मंत्र आता है। तनु का मतलब होता है क्लेश। त्र का मतलब होता है इंस्ट्रूमेंट। ऐसा इंस्ट्रूमेंट जिसको अगर हम यूज करें, ऐसी टेक्निक को यूज करें जिससे सारे क्लेश हट जाए मन के कि व्यक्ति उस परम ब्रह्म को जान पाए वो वास्तविक तंत्र है ना कि ये सब जादू टोना ये करना नींबू उड़ाना ये सब कुछ तंत्र नहीं है।
(14:33) दूसरी चीज मंत्र मंत्र मंत्र में अगर विभाजित करें तो मन और त्र द इंस्ट्रूमेंट दैट इज यूज्ड टू ट्रांसफॉर्म आवर माइंड इज कॉल्ड मंत्र। मंत्र हमारे मन को बदल सकता है। उसी प्रकार सारे संप्रदाय अलग-अलग हैं। सनातन धर्म के मूल छह संप्रदाय बोले गए। गाणपत्य संप्रदाय जो गणेश जी को मानने वाले उपासक हैं। सौर संप्रदाय सूर्य को मानने वाले, कौमार संप्रदाय कार्तिकेय को मानने वाले, शैव संप्रदाय शिव जी को मानने वाले, काल भैरव को मानने वाले, वैष्णव संप्रदाय विष्णु जी को मानने वाले, राम को मानने वाले, कृष्ण को मानने वाले और उसके
(15:04) बाद में शाक्त संप्रदाय शक्ति को मानने वाले और ये छह संप्रदाय सनातन धर्म के मूल संप्रदाय हैं। जैसे ये साहब ने किया हर व्यक्ति को एक ही आलू की सब्जी है। आपको कुछ पसंद आएगा, मुझे कुछ पसंद आएगा, इसको कुछ पसंद आएगा। जो जिसके टेंपरामेंट के अनुसार सूट करे अथवा जिसकी चेतना जितनी विकसित है वो जिसको उतने अच्छे से समझ पा रहा है उसके लिए वो एग्जैक्ट अच्छा है उस समय के अनुसार रास्ता सबका एक है लेके सब शिव लोगों से मिलिए शिव पुराण पढ़िए शिव पुराण में क्लियर लिखा हुआ है सब कुछ रुद्र है हरि भी रुद्र ही है सब कुछ शिव है गणपति संप्रदाय की बुक पढ़िए गणेश जी
(15:37) की सब कुछ गणपति है और एक सबसे बड़ा थ्योरी यह है कि शिव जी की शादी में भी गणेश पूजन हुआ था [हंसी] तो सनातन धर्म को समझने के लिए जन्मों कम पड़ जाएंगे। हमारे पास में जो मूलभूत विज्ञान है वो किसी भी रिलिजन के पास में नहीं है। क्योंकि धर्म मात्र एक सनातन हिंदू धर्म बाकी सब रिलजन है। रिजिड थ्योरीज है। रूल्स हैं। धर्म का मतलब ये है ड्यूटी। आग का कहा हमें जलाना वो जलाएगा वो धर्म है उसका। तो वही धर्म है। और ये विलुप्त क्यों हुआ गणपति संप्रदाय? सबसे बड़ा इनवेडर्स आक्रांता आए। नालंदा जला दी। सब कुछ जल गया आपने। तंत्र के 64
(16:11) 64 ग्रंथ तीन चीजों में विभाजित होते हैं। रथ क्रांत, विष्णु क्रांत, अथर्वक क्रांत। विंध्याचल जो पर्वत है उससे जो ईस्ट साइड की चीजें हैं वो रथ क्रांत में आती हैं। ऐसे ही यश्वक्रांत है विष्णु क्रांत है। ये 64 64 बुक्स डिवाइड हुई। उसी में मुंडमाला तंत्र है। कुलारव तंत्र है। अलग-अलग प्रकार की बुक्स हैं। ये सब अलग-अलग शास्त्र अलग-अलग संप्रदायों के अलग-अलग मठों के पास थे। जैसे-जैसे आक्रांताओं ने हमला किया। इनकी उपासनाएं बिल्कुल खत्म हो गई। मूलभूत जैसे वेस्टर्नाइजेशन आया, पाश्चात्य मानसिक स्थिति डेवलप हुई। धर्म का आराधन छोड़
(16:40) दिया है। आज के टाइम पे कोई धर्म को नहीं चाहता है। सब फास्ट बेनिफिट चाहते हैं। एक व्यक्ति को हायर एजुकेशन करनी है तो कितना पैसा लगता है आज के टाइम पे 15 लाख 20 लाख मेडिकल साइंस कर रहा है लॉ कर रहा है व्यक्ति और महाविद्या कितने में प्राप्त करेंगे ये विद्या की बात है और महाविद्या इनको ₹3000 ₹000 में महाविद्या की सिद्धि चाहिए फिर क्या बोले व्यक्ति विद्या का मतलब होता है अगर हमने कोई इंफॉर्मेशन पढ़ी तो उसके बेस पे जो हमारे ब्रेन ने एनालाइज किया वो विद्या बनेगा क्योंकि उसी के बेस पे हम तर्क वितर्क कर पाएंगे डिस्कस कर पाएंगे महाविद्या क्या है
(17:08) सुप्रीम मैनिफेस्टेशन ऑफ नॉलेज ये सारी चीजों का जो मूल है वो महाविद्या है और इस महाविद्याओं की बात ऐसे मजाकों में होती है। यह महाविद्याओं को समझने में भगवान शिव कांप गए। थर थरथर थर थर का क्या आपको नहीं लगता कि यह भी प्रभु की इच्छा है? 10001% है। प्रभु की इच्छा एकमात्र है। सबसे बड़ी चीज है फ्री विल। जब मनुष्य का जीवन प्रभु ने दिया है तो फ्री विल से दिया है कि आप करो। कर्म की थ्योरी आपको गार्ड करने के लिए है। ठीक है? शंकर भगवान ने गणेश जी का सर धड़ से अलग किया। ठीक है? आपको पता है फिर गजमुख लगाया। क्या आपको पता है भगवान शिव
(17:43) को भी कर्म भोगना पड़ा था? गणपति का तांत्रिक स्वरूप दुर्मुख गणपति जिनके उपासक थे सूर्य भगवान। एक बार एक राक्षस को भगवान शिव से वरदान था। उसने भगवान शिव से ये वरदान प्राप्त किया था। जब आपको मैं बुलाऊंगा तब आना होगा। तो भगवान शिव ने बोला ठीक है। उसने सूर्य को ही निगलना चाहा। सूर्य से उसका युद्ध हुआ। अब सूर्य ने क्या किया? सूर्य ने अपने देवता का आराधन किया। अब उसने उस राक्षस ने भगवान शिव को बुला लिया। भगवान शिव हावी होने लग गए सूर्य पे। तो सूर्य ने दुर्मुख गणपति का आह्वान किया। और दुर्मुख गणपति ने शिव जी का ही सर धाड़ से अलग कर दिया। तो यह
(18:14) दर्शाता है कर्म फल की थ्योरी। अवश्य में भक्तव्यम कृतन कर्म शुभाशम। अवश्य भोगने पड़ेंगे वो कर्म जो किए हैं शुभ अपितु अशुभ। तो भगवान शिव कर्म से नहीं बच पाए तो हम क्या चीजें? क्लियर कट बात है। अभी आपने थोड़ी देर पहले बोला कि तंत्र ये नहीं है जिसमें नींबू उड़ाया जाए। हम कैसे पहचाने? क्योंकि तांत्रिक तो अब बाढ़ आ गई है। तांत्रिकों की तो हर गली में घरघर में तांत्रिक बैठा है। और 1100100 वशीकरण हो रहे हैं। आप एक बात बताइए आज एक अच्छा गिफ्ट किसी व्यक्ति को देने जाएं तब भी 10,000 20,000 अनगिनत रुपए लग जाते हैं। ठीक है? उससे वो
(18:51) इंप्रेस नहीं हो पाता। ₹100100 में किसी को कैप्टिवेट कर लेंगे क्या? लाइफ टाइम के लिए पॉसिबल ही नहीं है। सबसे बड़ा वशीकरण का मंत्र मैं आपको यहीं दे देता हूं पडकास्ट में। इसको उठा के यहां लगा लेना। जब आप सुनना जब आप सुनना शुरू करेंगे व्यक्ति को अरे अभी अभी मैं रामायण देख रहा था तो मैं देख रहा था कि उसमें बताया जा रहा था कि सबसे बड़े तांत्रिक ये बैठे हम रावण जी हम फिर मैंने कहा सीता पे वशीकरण क्यों नहीं कर पा रहे आद्य पराशक्ति पे क्या वशीकरण चलता है उससे देवताओं पे वशीकरण है तो [हंसी] अब ये जो चीज है जब हम ऑब्जर्व करने
(19:24) लगेंगे आपने वशीकरण करा हुआ था वो प्रेम करा है वही वैसे ही हो सकता है करेक्ट उसके बाद का यही प्रेम उसके अलावा कुछ 1100 2100 में कुछ नहीं होने वाला। हज़ारों करोड़ों रुपए खर्च कर दीजिए कुछ नहीं होने वाला। सब प्रेम से चलता है। पूरा तंत्र प्रेममई है। कभी भी कोई भी तांत्रिक ग्रंथ उठा के देखिए। जितने भी तांत्रिक आारी हैं इन्होंने तंत्र ग्रंथ पढ़े ही नहीं। इनको यह तक नहीं पता होगा कि तंत्र ग्रंथों में खंड वंड नहीं होते। पद्धति पटल होता है। इनको ये तक नहीं पता होगा। तंत्र ग्रंथों का जो मूल है वो शिव और पार्वती के बीच का संवाद
(19:53) है। इसलिए बार-बार लिखा आता है हर गौरी संवाद है या आकाश भैरव संवाद प्रत्यंगरा से। तो ये संवाद में प्रेममय है। शिव जी रोमांटिक है। पूरा तंत्र रोमांटिसाइज्ड है। भगवान शिव बार-बार बोल रहे हैं हे प्राण वल्लभ विश्व सुंदरी देवी ऐसे बात कर रहे हैं। और भगवान देवी मां ऐसे बात कर रही है मेरे प्राण वल्लभ प्रिय भगवान महाकाल तो प्रेम में जो चीज निकलती है ना वो कभी ऐसे जनरली नहीं निकल सकती। इसलिए प्रेम में ये तंत्र निकला है। यह वशीकरण काम करता है। लेकिन यह अधर्मिक अधार्मिक जो तत्व थे उनके ऊपर करने के लिए था और अब के टाइम पे ये विद्याएं एक्सिस्ट
(20:25) नहीं करती। और कोई व्यक्ति ने अगर हजारों साल तपस्या की, कोई भी व्यक्ति किसी से दीक्षित भी होता है ना तो गुरु जितना भी जप करे उसका 10% बेनिफिट शिष्य को ऑटोमेटिकली लगता है। ये लोगों को नहीं पता। ठीक है? और दूसरी इंपॉर्टेंट बात यहां पे ये है अब मैंने कोई तप किया 12 साल तपस्या की। अब कोई भी मेरे पास आके ₹2100 रखेगा और बोलेगा अपने तपोबल के माध्यम से किसी को वशीकरण करो। तो मुझे पागल कुत्ते ने थोड़ी काटा है कि मैं करूंगा। [हंसी] ये भी तो है। तो वशीकरण जो लोग कर [नाक से की जाने वाली आवाज़] रहे हैं वो अपने माता-पिता को तो खुश कर नहीं पा रहे।
(20:54) तो बाहर में क्या वशीकरण करेंगे? सत्य। सबसे बड़ी बात यह है। कैसे पहचाने? लेकिन ये वास्तविक तांत्रिक कैसे पहचाने? स्वाध्याय जब तक के खुद पढ़ेंगे नहीं जानेंगे नहीं। ठीक है? आजकल व्यक्तियों को बोले हजार प्रकार की किताबें पढ़ते हैं। भगवत गीता नहीं उठाई जाती। तो क्या जानेंगे? क्या बात है? जब तक के हम अपने ग्रंथ नहीं पढ़ेंगे तब तक के कुछ नहीं जान सकते। सबका मूल यह है स्वाध्याय। सेल्फ स्टडी। सेल्फ स्टडी। सेल्फ स्टडी। व्यक्ति कहीं मर्जी कोचिंग जाए। जो नंबर आएंगे और जो उसका डेवलपमेंट होगा वो सेल्फ स्टडी से ही आएगा। एकांत
(21:24) में ही सबसे उच्च स्थिति प्राप्त की जा सकती है। जब तक के एकांत में मन के साथ में बैठेगा नहीं व्यक्ति और अंदरूनी अंतर्मन चिंतन नहीं करेगा तब तक के बाहरी तंत्र असंभव नहीं है। जितने भी पूजन है सब में ध्यान होता है। एक चीज को किसी को नहीं पता। हर देवता के एक मंत्र का ध्यान होता है। वो ध्यान श्लोक कभी भी शेयर नहीं किया जाता दूसरे इंडिविजुअल के साथ में। वो ध्यान श्लोक रीज़न ये है क्योंकि आप वो चिंतन कर रहे हैं तो आपने अपनी मन की स्थिति उस परम ब्रह्म के साथ कनेक्ट की हुई है। तो उसमें ब्रेक आ जाता है एक प्रकार से क्योंकि दूसरे को आपने पूरा
(21:54) विज्ञान साझा कर दिया ना अपना सामने वाला उसी के बेस पे सिद्धि है। सिद्धि क्या है? अकंप्लिशमेंट। अब स्त्रियों के पास में गर्भधारण करने की सिद्धि ही है। पुरुष थोड़ी कर सकते हैं। सिद्धि डेवलप होती है। इवोल्यूशन का नतीजा है वो सिद्धि। उसी प्रकार से जितना हम मन को इवॉल्व करते जाएंगे, वैसे-वैसे सिद्धियां डेवलप होती जाएंगे। अब यह थोड़ी है कि एक मंत्र लाख बारी जप लिया तो सिद्धि हो गई। बहु मंत्र जबा देवता सिद्धि बोला जाता है। लेकिन मंत्र का मतलब क्या है? मनन करना मंत्र। मनन इति मंत्र है। जब तक मनन ही नहीं हुआ। मन ही नहीं लगा मंत्र में तो क्या सिद्धि
(22:23) वेस्ट कुछ नहीं होगा। आप मुझे बता रहे थे तमिलनाडु की एक घटना कि आप गए थे तो जी। क्या है वो? मतलब वहां पे इतना एग्जैक्ट इतना वास है ज्योतिष। जी जी करेक्ट। इतना वास है। ज्योतिष का एक ब्रांच है नाड़ी ज्योतिषी। ताड़ के पत्र होते हैं। जी महर्षि वशिष्ठ राम जी के गुरु जी महर्षि अगस्त्य जिन्होंने राम जी को धनुष बाण दिया था रावण के संहार के लिए। इन सब महर्षियों ने बहुत व्यवस्थित रीति से लिखा हुआ है इतिहास और शास्त्रों में बिल्कुल वर्णन किया हुआ है। ये ये व्यक्ति ये ये करेगा। तो वहां पर जाके जस्ट अंगूठे का निशान देने मात्र से वो ताड़ के पत्तों का बंडल
(22:57) लेकर आते हैं और आपके सामने वो तमिल में बोलते हैं। ठीक है? तो वो एक ट्रांसलेटर लगता है और वो आपको एक्सप्लेन करता जाता है। जब आपके मम्मी पापा का नाम एग्जैक्ट आ जाए तो आपको यस नो यस नो करना होता है। तो आपके मम्मी का नाम, पापा का नाम, आपका पास्ट लाइफ सब कुछ बता देते हैं। तो ऐसा ही मेरे साथ हुआ। उन्होंने मेरे गुरुओं का नाम बता दिया। आप किसके उपासक हैं? उनका नाम क्लियर कट दे दिया। उन्होंने उच्चिष्ट गणपति नहीं बोला। उन्होंने बोला गणपति का तांत्रिक स्वरूप। उन्होंने ऐसा मेंशन किया। उन्होंने बोला कृष्ण की भूमि में रहने वाले आपके गुरु होंगे जिनका नाम
(23:25) कृष्ण से संबंधित होगा। आपके एक गुरु का नाम है जो क से है वह देवी के पुत्र हैं। तो उसमें क्लियर कट आ गया। मेरे पास्ट लाइफ का उन्होंने वर्णन किया। दैट इज कॉन्फिडेंशियल कि इतना इतना मतलब डिटेल में डिटेल में आता है। बट स्टिल आसपास है कोई अगर मैं मैं जैसे ऐसी अपना दिल्ली में भी बहुत सारे लोग हैं लेकिन स्टिल आई विल रिकमेंड कि आप वैदीश्वरन कोविल तमिलनाडु जाके ही दिखाएं क्योंकि इसमें भी बहुत बढ़ गया है। जैसे कि तांत्रिक हल गली में पैदा हो गए हैं। वैसे ज्योतिष शास्त्र भी हर गली [हंसी] में है। अभी कुछ नहीं किया जा सकता। हम
(23:54) वैसे तो मैंने सुना है कि ज्योतिष विद्या काफी ज्यादा विलुप्त हो चुकी है। जी पहले ज्योतिष चलती थी। लेकिन [नाक से की जाने वाली आवाज़] अब मैं गीता पढ़ता हूं तो मैं ना इन सब बातों से छोड़ ही दीजिए। ये ये सब क्योंकि वो कृष्ण कह ही नहीं रहे कि तू साउथ वेस्ट में खड़ा हो गया तीर चला ये कर रहा है। वो तो अब इतना ही अगर होता [हंसी] तो कृष्ण भगवान अर्जुन को बोलते गांडीव मत उठा अभी मुरत देख रहा हूं। क्लियर कट बात है। उन्होंने तो क्लियर कट बोला पूजा पाठ को गलत नहीं बता रहे हैं। कर्म को प्रधानता दे रहे [गला साफ़ करने की आवाज़] हैं। उच्चतम
(24:25) स्तर उच्चतम स्तर कर्म का है। कर्म का बताया गया है कि कर्म भगवान कह रहे हैं कि मैं भी अभी अभी मैं कल ही देख रहा था। कल ही देख रहा था जगन्नाथ का मैं कुछ स्टडी कर रहा था। तो मैंने उसमें देखा कि भगवान कृष्ण का वो आखिरी लम्हा जब वो पैर में तीर लगा। हम्म। तो भगवान भी नहीं बच पाए कर्म के सिद्धांत से। कोई नहीं बच सकता। उन्होंने ही रचा था कि ये कर्म ऐसे आ के मेरे शरीर का अंत करेगा। और दीपक जी इसमें एक और बहुत बड़ा रास छुपा हुआ है। बाली का वध किया था राम जी ने छुप के। ठीक है। तो बाली ने भी बोला था कर्म के फल से आप भी नहीं बच पाएंगे
(25:02) प्रभु। और जब द्वापर में वही विष्णु भगवान कृष्ण के रूप में आए तो वही बाली वो व्यक्ति शिकारी बन के आया हुआ था। बिल्कुल सत्य है। कर्म के फल से कर्म के फल से कोई नहीं बच सका। लेकिन इसमें मैंने विष्णु पुराण की एक और चीज़ रिलेट करी कि विष्णु पुराण में राम के शरीर का वर्णन नहीं है। नरसिंह के शरीर का वर्णन नहीं है। लेकिन कृष्ण का हृदय नहीं जल पाया। पूरा शरीर जल गया। अर्जुन ने जब वो उनका शरीर को जलाया दिल बच गया। क्योंकि उस दिल में सिर्फ प्रेम था। वो नहीं जल पाया। वो नष्ट नहीं हो पाया। कर बात है। वह बोला गया जन्मजन्म मोहि जतन कराए अंत
(25:46) राम गुण आवत नाही बहुत जन्मों जन्म व्यक्ति के लग जाते हैं जन्म होते कभी भी वो राम का तत्व या परम ब्रह्म परमात्मा को नहीं समझ पाता क्यों क्योंकि उसने बाहर में मंदिरों में ढूंढा यहां ढूंढा ही नहीं मन स्वचलित मंदिर है स्वयं चलता फिरता मंदिर शरीर है उसकी इज्जत कर नहीं रहे शैलेंद्र जी की बात कर रहे थे जी उन्होंने एक मेरा ऐसा ब्र तोड़ा [हंसी] मैं ना मन से बहुत लड़ता था अब तक हम मैं मन से बहुत लड़ता था। मैं मेरा मन कहता था कि भूख लग रही है। मैं चुप बैठा रहे। आज नहीं मिलेगा खाना। तो मैं उसके पार ही जाता था हमेशा। लेकिन मैंने उनको कहा कि जब ऊपर जाएंगे तो
(26:24) भगवान कहेगा कि चप्पल बाहर उतार के आओ। हम्म। मन को बाहर छोड़ के आओ। तो उन्होंने [नाक से की जाने वाली आवाज़] कहा भगवत गीता तुमने ढंग से पढ़ी नहीं है। मन ही तो भगवान है। वो कहते हैं इंद्रियों में मन हूं। हां भगवत गीता में बोल रहे हैं श्री कृष्ण भगवान तो भगवान को छोड़ के कहां जा रहे हो? कहां जा रहे हो? अब फंस गया चक्कर और ज्यादा। और सबसे बड़ी बात है दीपक जी अगर इसी में हम तंत्र में भी घुसेंगे तो तंत्र पूरा मनोमय है। यानी मन से पूरा विश्व चल रहा है। ये तंत्र भी मन के प्रभाव से चलता है। व्यक्ति के प्रेम है। तो ये विश्व है।
(26:59) अब काली को काली मां के जितना काली काली को बोल के जितना मर्जी पूजो। काली को प्राप्त करना किसी के बस की बात नहीं है। रामकृष्ण परमहंस जी सबसे बड़ा उदाहरण है। रामकृष्ण परमहंस को भैरवी मां से तंत्र की दीक्षा प्राप्त हुई थी। ऐसा बोला जाता है। तोतापुरी जी महाराज योग मार्गी थे। आपको पता होगा तोतापुरी जी महाराज वो आए रामकृष्ण परमहंस को काली वाली कुछ नहीं होती। सब मिथ्या है। सब मन में है। तू ध्यान में बैठ मैं तेरे को बताता हूं। तो ध्यान में बैठे तो उन्होंने चीरा लगाया उसके यहां पे। आपने सुना होगा ना कथा। उन्होंने तलवार लगाई थी यहां पे कि यहां
(27:29) पर ध्यान कर। यहां यहां पर ध्यान कर। यहां पर काली वाली कुछ नहीं होता। लेकिन प्रेम हर चीज को परास्त कर सकता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस कहानी में छुपा है। रामकृष्ण परमहंस जी भाग के दक्षिणेश्वरी काली के दरबार पहुंचे। बोले कि तोतापुरी जी कहते हैं तू नहीं है काली। वो कहते हैं तू नहीं है। मां प्रकट हो गई तक्षण क्योंकि उनके समक्ष हो जाती थी। प्रेम ही उनका उसकी उनकी स्थिति चेतना की इतनी विकसित थी जिसकी लिमिट नहीं। तो काली प्रकट हो गई। मैं हूं तो खड़ी हूं तेरे सामने। कभी बालिका बन जाती हूं तो तेरी गोदी में बैठ के खाना खाती हूं। कभी मैं
(27:57) मां बन जाती हूं तो तू मेरी गोदी में बैठ के खाता है। तोतापुरी को प्रूफ करो। प्रूफ करो। बोले जब तक के प्रयत्न जो लोग बोलते हैं ईश्वर दिखाओ तो उन सब से मैं यही बोलूंगा कि बिना फ्री फोकट में यहां पे किसी को कुछ नहीं मिलता। नहीं ईश्वर तो वैसे ईश्वर के दर्शन नहीं करे जा सकते। ईश्वर ईश्वर से संसार के दर्शन करे जा सकते हैं। करेक्ट करेक्ट करेक्ट। ईश्वर के दर्शन नहीं कर सकते। और ईश्वर एक ऐसी चीज है। आप कह रहे हैं ना कि मुझे अगर प्रेत प्रेतों को भजोगे तो प्रेत योनि में जाओगे देव को भजो। वही ईश्वर है। वही ईश्वर है। काली बोलोगे तो वो काली बन के आ जाएगा
(28:28) सामने। कृष्ण गणपति बोलेंगे गणपति आ जाएगा कृष्ण बोलेंगे कृष्ण आ जाएगा तब इसमें क्या हुआ रामकृष्ण परमहंस जी पहुंचे तोतापुरी जी के पास में काली ने बोला रुको मैं कुछ करती हूं तोतापुरी जी के पेट में भयानक दर्द होने लग गया अब तोतापुरी जी महाराज परेशान इतना दर्द की अनुभूति उनको कभी नहीं हुई थी अब उन्होंने क्या सोचा उनको तो सिद्धि थी योगिक सिद्धि उन्होंने कहा मैं मूल बंद करता हूं प्राणायाम करता हूं और सांस निकाल लेता हूं प्राण ही खींच लेता हूं शरीर में से क्योंकि आत्मा को थोड़ी दर्द की अनुभूति होती है शरीर को हो रही है वो
(28:56) निकाल ही ना पाए योगिक सिद्धि वेस्ट हो काली के सामने उन्होंने देखा सामने गंगा है कूद जाता हूं 2 इंच पानी रह गया गंगा का [हंसी] तो रामकृष्ण परमहंस ने बोला माया में रह के महामाया को नकारता है हम सब माया में है काली मां की और हम महामाया को नकार रहे हैं तो ऐसा तो संभव नहीं है सब कुछ मन से ही चलित है ये जो पूरा इल्ल्युजन क्रिएट किया काली ने क्योंकि काली स्वयं इल्लुजन है और हम इल्लुजन में ही जी रहे हैं और जिस प्रकार हम निकलते जाएंगे यहां से तब वास्तविक शिव और काली के दर्शन हो जाएंगे मन में यह पूरा रहस्य है इसका क्या बात है क्या बात है जी
(29:29) श्मशान का जिक्र बड़ा होता है तंत्र में। जी। क्या जरूरत है श्मशान की? श्मशान में सिद्धि करने की श्मशान में सिद्धि करने की उसका एक वामाचार तांत्रिक प्रैक्टिस में लेफ्ट हैंड पाथ तंत्र में वर्णन आता है। लेकिन एक बात मैं आपको बोलूं जो फैक्ट है श्मशान के अंदर ना तो कोई पैदा होता है और ना तो कोई मरता है। मरने के बाद व्यक्ति श्मशान जाता है और पैदा होने के बाद ही श्मशान जाता है। ना वहां पे कोई पैदा हो रहा है और ना तो वहां पे कोई मर रहा है। तो वहां पर जो स्थिरता है ना वो शिव भगवान जैसी है। साक्षात भगवान महाकाल कहीं विराजमान
(30:01) है तो शमशान में विराजमान है। क्योंकि वहां पर मन शून्य होता है। वहां ना सृजन हो रहा है ना अंत हो रहा है ना संहार हो रहा है। वहां पर स्थिरता है जो ब्लैक होल में है। अब आज तक का मेरे को सबसे वैलिड पॉइंट आज आपने दिया है। धन्यवाद। श्मशान का जी। तो श्मशान में शव के ऊपर में साधना होने का मतलब यह होता है शिव शव समान है। इसीलिए काली मां आरुढ़ होती है। जिस फोटो में काली मां का राइट हैंड राइट लेग शिव जी के ऊपर हो वो दक्षिणा मार्गी होती है। लेफ्ट पैर हो तो वो शमशान काली होती है। ये भी डिफरेंस है काली मां की आइकोनोग्राफी का। दूसरी चीज शव के ऊपर में
(30:35) साधना का मतलब यह होता है जिस चीज के ऊपर आपको इतना गुमान था जिसके दम पर आप दुनिया में कुछ भी करने का सामर्थ्य रख रहे थे वह सब शून्य हो गया। तो वास्तविक जो काली है वह शव के ऊपर ही विराजमान होगी। क्योंकि शक्ति और नीति आमने सामने आ जाए यानी पूरी प्लानिंग और एग्जीक्यूशन आगे सामने आ जाए और कोई पावर वाला आ जाए तो पावर दबा देगा। शक्ति हमेशा डोमिनेट कर देगी। इसलिए मन की शक्ति पे जो काबू पा ले वो वास्तविक शिव है। क्योंकि मन की शक्ति हर चीज को डोमिनेट कर देती है। कोई व्यक्ति सोचे मैं ब्रह्मचर्य रहूंगा। अखंड ब्रह्मचर्य का मन दो मिनट
(31:04) में गायब कर देगा सब कुछ। मन की तो [हंसी] गति है उसके आगे कोई कुछ नहीं। जी। बाली है। बिल्कुल। आदि शक्ति खींच लेता है तभी के। करेक्ट। [हंसी] की तो अलग ही पावर है। जी। ये सत्य बात है। मन के आगे किसी की चलत नहीं हो पाती। मैंने भी थोड़े दिन पहले ही मैं ना ऐसी सी परमात्मा ने ऐसी दृष्टि दे दी। मैं ऐसी-ऐसी चीजें देखता रहता हूं। बैठा-बठा अभी मैं सुबह 6:00 बजे उठता था जिम के लिए। जी। जब जब मेरे दिमाग में आता था ना कि 15 मिनट और सो लेता हूं। हम् हम तभी जिम में भी है ना हल्कास ऐसे कम केमिकल रसायन है बॉडी के अंदर। हम सोचो तो आप बात है
(31:44) वो तभी नींद ही ला देता है यार और जैसे ही एकदम खड़े हो ना तो नींद लाया करेक्ट है ये जो प्रोग्रामिंग है वो अलग ही है खतरनाक प्रोग्रामिंग है खतरनाक जो रसायन जो रसायन निकल रहे हैं ना बॉडी के अंदर से वो बड़े खतरनाक है बड़े खतरनाक बड़े खतरनाक प्रायोरिटी डिसाइड करती है कि आपको तकलीफ होगी या नहीं होगी अभी मैं हाथ पे आपके कट लगा दूं तो दर्द होने लग जाएगा। लेकिन सामने अगर और कोई बड़ा नुकसान हो गया ना तो वो दर्द गायब हो जाएगा। वहां चला जाएगा। सेकंड विंड थ्योरी है साइकोलॉजी की। यही काम करता है। अब व्यक्ति के आगे व्यक्ति का बेटा दबने लग जाए गाड़ी में तो पता
(32:22) नहीं कौन सी अदृश्य शक्ति आ गई गाड़ी खींच देगा। कुछ भी हो सकता है मन। तो यही भगवान श्री कृष्ण ने अगर महाभारत हम देखें भगवत गीता का सहारा ले इसमें। तो सोचिए किस लेवल की प्रोग्रामिंग उन्होंने अर्जुन के दिमाग की कर दी कि जो अर्जुन बोल रहा था कि मैं अपनों से कैसे लडूं? तो भगवान ने बोला हतो प्राप्त स्वर्गम जित्वा भक्षस महिम तस्मतिष् युद्धा कृत निश्चय हारोगे तो वीर कहलाओगे जीत जाओगे तो सब भोगोगे और मुझे प्राप्त करोगे तो युद्ध करो जो तुम्हारा कर्म है क्या बात है जी साधना की सबसे बड़ी गलती साधना की सबसे बड़ी गलती साध्य को और
(32:55) स्वयं को एक ना मानना जो 99% सीकर्स करते ही करते हैं। सब करते हैं आसन अब टेक्निकल आस्पेक्ट पे आएंगे। सबसे पहले तो ये साइकोलॉजिकल बात पे आते हैं। साधना का अगर हम डायवर्जन करें। ठीक है? तो साध्य जिसको हम अटेन करना चाहते हैं उसको साध्य कहा जाता है। जिस मीडियम से अटेन करना चाहते हैं वो साधना है। और जो कर रहा है वो साधक है। साधक सब्जेक्ट है। हमें जिसको अटेन करना है वो साध्य है। व्यक्ति क्या करता है? साध्य को अलग मानता है। रिलेशनशिप एस्टैब्लिश नहीं करता देवता के साथ। काली मां काली मां बोल रहा है लेकिन मन से क्या काली को मान रहा है। जब थोड़ी सी चिंता
(33:25) आती है तो ज्योतिषों पे तांत्रिकों पे भागता है। क्यों नहीं काली के पास में उतना रोदन कर रहा है जितना ज्योतिषों के पास में रो रहा है जाके। काली के पास रो के देखो फिर क्या करती है काली? तो वो प्रेम जिस दिन हो जाएगा तो वास्तविक साधना सफल होगी। अब टेक्निकल आस्पेक्ट की बात करें तो व्यक्तियों को मंत्र साइंस नहीं पता है। तंत्र में सबसे ज्यादा सीकर्स फेल होने का रीजन क्या है? सबसे बड़ा फेल होने का रीज़न ये है कि ये वीरों का मार्ग है। सब वीर नहीं है। मुझे ऐसा लगता है पर्पस पर्पस डिसाइड करता है कि आप कर किस ले रहे हो? और कहां तक जा पाओगे?
(33:54) नहीं कर किस ले रहे हो? क्या क्या करना है? उसकी प्राप्ति करनी है या खुद को सर्वश्रेष्ठ बनाना है? करना क्या है? करेक्ट बात है। तो इसी में लोग कंफ्यूज रह जाते हैं। उनको सर्वश्रेष्ठ भोगों में उसको नहीं पाना। उनको बस वो ये है कि 10 मिनट के अंदर कुछ भी हो जाए। यक्षिणी चाय बना के ले आए। [हंसी] बताइए तलवार से मक्खी मारेंगे ये सब। [हंसी] ये पॉसिबल है वैसे आपकी नज़रों में कि यक्षिणी चाय बने। पॉसिबल दुनिया में सब कुछ है। लेकिन यक्षिणी से चाय बनवाने वाली जिसकी मानसिक स्थिति है उसको यक्षिणी छोड़ दो। उसकी खुद की वाइफ उसको मुंह नहीं लगा। [हंसी]
(34:31) सही कह रहे हो। जिसकी ये मानसिक मानसिकता है ना उसको सुबह बैठ-बैठ उसकी घर वाली भी चाय ना दे। चाय ना दे। सही बात है। सही बात है। तो ये चीजें हैं। 10 महाविदओं के ऊपर थोड़ी और बात करते हैं। मैं आज 10 महाविदओं के ऊपर यही बोलूंगा। ठीक है? महाविद्या का मतलब होता है सुप्रीम मैनिफेस्टेशन ऑफ़ नॉलेज। और 10 महाविद का पूरा कांसेप्ट आज ही क्लियर कर देते हैं। कोई और वीडियो की लाइफ में ही जरूरत नहीं पड़ेगी व्यक्तियों को। बताइए। 10 महाविद्याओं की। 10 महाविदओं की शुरुआत हो रही है काली से। काली का अगर आप स्वरूप देखेंगे तो काली नग्न है। काली नग्न है और
(35:00) युवा है। तो आजकल व्यक्तियों को सामान्य स्त्रियों को देखकर के इतना आकर्षण होता है। लस्ट आता है। जिस दिन लस्ट को डोमिनेट कर लिया तो एक विजय प्राप्त कर ली तो काली का तत्व जागृत हो गया। और जैसे ही लस्ट पे ओवरकम कर लिया व्यक्ति ने तो तारा पे पहुंचा व्यक्ति। तारा क्या है? प्रोडक्टिविटी। जैसे ही व्यक्ति ने लस्ट ओवरकम कर लिया तो वर्क एक्सीलेंस हो गया। प्रोडक्टिविटी बढ़ गई। तो वर्क एक्सीलेंस आ गया उसके पास। तीसरी महाविद्या क्या है? शोडशी। जैसे ही शोडशी के पास पहुंचा जब वर्क एक्सीलेंस है तो ऐश्वर्य तो अपने आप आएगा पैसा अपने आप आएगा वो आने लग गया
(35:28) क्या बात फोर्थ थिंग भुवनेश्वरी चतुर्थ महाविद अब जिसके पास में पैसा आ गया उसके पास अथॉरिटी आ गई भुवनेश्वरी यानी भुवन की ईश्वरी का पुत्र हो गया अथॉरिटी वाला हो गया पांचवी महाविद्या किसके पास पहुंचा भुवनेश्वरी आ गई तो उसके पास में किसके पास पहुंचा छिन्न मस्तिका के पूछे पास में पहुंचा छिन्न मस्तिका का तत्व क्या है जब उसने देख लिया सब अथॉरिटी आ ही गई सब कुछ आ ही गई ठीक है तो सब कुछ दान में ही है ममता में ही है वो मदरली लव को समझ आया अपनी भी गर्दन काट करके लोगों की हेल्प करना शुरू कर गया। छठवां तत्व भैरवी जब कुछ सब कुछ खोने का
(35:58) डर ही नहीं रहा तो भैरवी तत्व प्राप्त हो गया। त्रिपुर भैरवी सप्तम धूमावती। अब जब उसको यही पता चल गया कि सब कुछ मेरे ही अंदर है तो अब किसका डर किसकी जरूरत है? इंडिपेंडेंट हो गया। धूमावती देवी के शिव नहीं होते। उसने सब कुछ अपने अंदर निगल लिया और खुद हो गया। सब कुछ। उसके बाद अष्टम महाविद्या बगलामुखी। जब उसने इस सब पे काबू कर लिया तो मन के जितने गंदे विचार थे और विकार थे जो उसकी चेतना को विकसित होने से खींच रहे थे। उसको स्तंभित कर दिया शत्रु को मानसिक तो नवम पे पहुंच गया मातंगी। मातंगी क्या है? कला की देवी। अब उसके अंदर वो कला जागृत हो गई जिसके
(36:28) माध्यम से उस तत्व को प्राप्त किया जा सकता है। तो 10वीं महाविद्या पे पहुंच गया। परम ऐश्वर्य कमलात्मिका मोक्ष हो गया। क्या बात है। महागणपति। क्या बात है। धन्यवाद। मजा आ गया। धन्यवाद। तो ये 10 महाविदओं का रहस्य है। क्या बात है। बहुत बढ़िया जी। बहुत बढ़िया। और इसी को लोग समझ रहे हैं हम 10 महाविदओं से पैसे कमाएंगे। [हंसी] इतनी बड़ी चेतना को हैंडल करके पैसे लेना चाहते हैं। हां। अब सामने देवी खड़ी है और देवी को क्या बोल रहे हैं कि थोड़े से जल के छींटे मार दो मुंह पे। क्या बोले? समुद्र खड़ा हो के पूछ रहा है क्या चाहिए? जल के छींटे मार दो हमारे मुंह पे। क्या
(37:02) करेंगे? महाविद्या को वही समझ पाएगा जो शिव बन पाएगा। हर महाविद्या के साथ 10 गणपति हैं और 10 शिव हैं। 10 भैरव हैं। और महाविद्या को लोग कैसे अप्रोच करते हैं? 2100 5100 में 10,000 में 20,000 में लाख में मंत्र लेकर के जपने लगते हैं। यह भूल जाते हैं कि 10 महाविद्याओं के साथ में 10 10 पोटेंट एनर्जी सोर्सेस को इफ यू आर हैंडलिंग तो आपको उसके लिए वो स्थिरता भी तो रिक्वायर्ड होगी। तो स्थिरता उन शिवों से प्राप्त होगी और वो शिव की स्थिति को अपने अंदर धारण करने से होगी। काली को अप्रोच करना हलवा थोड़ी बनाना है। व्यक्ति हिल जाएगा अंदर से। भगवान शिव कांप रहे
(37:35) हैं जिसको देख के यस निग्रह मात्रण पृथ्वी प्रलयम ग पृथ्वी पर प्रलय आ जा रहा है वो देवी को व्यक्ति समझने की कोशिश कर रहा है ₹5100 में ₹100 लाख में तो क्या होगा ये बातें दिमाग घुमा दिया आपने मेरा भी गुरुओं की कृपा है सब क्या बात है 10 महाविद ये वास्तविक 10 महाविद रहस्य जो लोगों को समझना चाहिए ना कि ये कि मैं काली काली से निडरता प्राप्त करूंगा और अभी 10 अनुष्ठान करूंगा। ऐसे यज्ञ स्वाहा स्वाहा स्वाहा मेरे सारे शत्रु खत्म। आंतरिक शत्रु पर विजय नहीं है और बाहरी शत्रु को स्तंभित करने चले हो ब्रह्मास्त्र विद्या से। सारी विद्याएं उसी दिन तिरोधान हो जाएंगी
(38:18) जिस दिन व्यक्ति को समझ आ जाएगा कि सब कुछ मन में ही है। उस दिन 10 की 10 महाविद्याएं 10 के 10 शिव 10 के 10 के गणपति सामने के सामने दिख जाएंगे। ये गेम पूरा है। राहु और शिव का भी एक टॉपिक था। जी। तो जो राहु है भगवान शिव के गले में जो मुंडों की माला है उसमें सारे मुंड ज्यादातर के जो मुंड हैं ठीक है वो मृत मुंड है शिव राहु ही एकमात्र जीवित मुंड है शिव जी के गले में राहु को ऐसा वरदान है भगवान शिव द्वारा ठीक है कि वो कैसे भी तृप्त नहीं हो सकता वो ज्ञान से ही तृप्त होता है इसलिए राहु की महादशा किसी पे आ जाए तो व्यक्ति को ज्ञान वर्धन शुद्ध शुरू
(38:52) करना चाहिए पुराण पढ़ना शुरू करें कोई भी फिलॉसोफिकल किताबें पढ़े ठीक है नॉनफिक्शन पढ़े कुछ भी पढ़े राहु को सिर्फ ज्ञान से कैटर किया जा सकता है कैप्टिवेट किया जा सकता है। वरना राहु जितने मर्जी रत्न पहन लो, गोमेद पहन लो, कुछ भी पहन लो, राहु केटर नहीं हो सकता। राहु कैप्टिवेट नहीं हो सकता। जो मर्जी शांति कराइए, कुछ नहीं होने वाला। राहु को ज्ञान की भूख है। जितना ज्ञान दोगे उतना और जितने भी मीडिया के लोग हैं और जितने भी इंटरव्यू लेते हैं, इंटरव्यू करते हैं, मीडिया पर्सनालिटीज़ हैं, प्रोफेसर्स हैं। ठीक है? ये सब राहु के द्वारा डोमिनेटेड फील्ड में
(39:24) है। और राहु इल्यूजन को दर्शाता है। तो जितना ज्यादा स्टडी करेंगे, उतनी ज्यादा वृद्धि होगी। राहु सिर्फ ज्ञानियों को सपोर्ट करता है अज्ञानियों को राहु दबा देता है और शिव भी उसको सपोर्ट करते हैं जो ज्ञानी है। जो लोग बोलते हैं ना भोले बन के शिव के जाओ। वो ये नहीं समझते भोला ही परम ज्ञानी है। भोला ही परम परम ज्ञानी है। भोले को लोग मूर्ख समझ रहे हैं। यम यम कामते कामम तम तम प्राप्तति निश्चितम भगवान शिव बार-बार क्यों कह रहे हैं तंत्र ग्रंथ में जब जब सोचोगे तब तब प्राप्त होगा। क्यों? यूनिवर्सल लॉ ऑफ़ मेनिफेस्टेशन। जो सोचोगे वही वैसी वैसी
(39:50) स्थितियां बस बस बस बस कृष्ण भी यही कह रहे हैं कि सृष्टि तथा सृष्टि भगवत गीता में जो सोचोगे वैसा ही होगा वैसी स्थितियां आएंगी जो चाहिए वैसे बन जाओ प्रेम चाहिए तो प्रेमी बन जाओ बन जाओ धोखा चाहिए तो धोखेबाज बन जाओ शिव चाहिए तो शिव बनो बस शिव [हंसी] की अवस्था यही यही परम सत्य है। यही परम सत्य है। यही परम सत्य है। इसी को नहीं समझ पाए। अभी-अभी मैं एक देख रहा था कि अभी बड़ा दुख होता है मेरे को। अभी कावड़ यात्रा पर मैं देख रहा था कि एक किसी कैंपर ने टक्कर मार दी। बहुत दुखद। बहुत दुखद था वो। इसके लिए थोड़ा सा और लोगों को एक पॉडकास्ट पे एक अलग बात करता हूं आपसे।
(40:34) पता नहीं आप कैसा जवाब देंगे उसका। हम आप नहीं गए सीजेपी के प्रोटेस्ट में। बिल्कुल भी नहीं। [हंसी] सारे युवा गए थे। बिल्कुल भी नहीं। में युवाओं की मांग का सम्मान करता हूं और बहुत ही उत्तम कार्य वो कर रहे हैं। सरकार के विपक्ष में जो भी करना चाह रहे थे वो। ठीक है? जब अराजकता का माहौल पहुंचे तब अराजकता स्थापित करने के लिए व्यक्ति को प्रयत्न करना चाहिए। अपने लेवल पे जो भी कर सके वो ठीक है। लेकिन बात ये है जब उसमें अराजक एलिमेंट्स इन्वॉल्व हो जा रहे हैं तो वो पूरे प्रोटेस्ट का जो मेन मोटिव था। ठीक है? वो वहीं पे ध्वस्त हो जा रहा है।
(41:04) तो ये किसकी मोरालिटी थी? किसका क्या जो अभिजीत के जो भी उसके संचालनकर्ता थे क्या वो इस बात का जिम्मेदारी नहीं लेंगे कि हमारे यहां पर कुछ भी ऐसे नारे वो कह रहा है एक गंजा हम कामरा हां कि राम की बीवी सीता का पति पता भी है इनको राम है कौन ये वो दशरथ पुत्र राम की बातें कर रहे हैं हां इनका कुछ नहीं हो सकता उनकी भी बातें करने का इनका सामर्थ्य नहीं है जिव्हा अभी [हंसी] खैर ये तो सत्य है उनकी भी बात जानने का इनका सामर्थ्य नहीं है। इनका किसी संत की बात करने प्रेमानंद जी महाराज को बोल रहे हैं प्रेम भाई हम इनके घर के हैं वो महाराज शब्द का वो पूछ रहे हैं
(41:47) प्रेमानंद महाराज महाराज कैसे है इन गधों को यह समझना चाहिए जो करोड़ों राजा जिसके पास में जाकर के सर झुका रहे हैं बड़े अब आज के टाइम पे तो मोनार्की है नहीं राजा लोग है नहीं जिन लोगों को हमने इलेक्ट करके दिया है एमपीज एमएलए ये सब अपने आप में राजा ही हैं विशेष कॉन्स्टीट्यूएंसी के तो ये जब जाके किसी से धर्म ज्ञान ले रहे हैं वास्तविक धर्मबोध कर रहे हैं तो महाराज ही है ठीक है चाणक्य नहीं होता तो क्या बनता चंद्रगुप्त वास्तविक महाराज वही है। उसी ने चक्रवर्ती बनाया। तो यही धर्म गुरु है जिनकी कृपा से राजकता स्थापित हो
(42:15) सकती है। देश को विश्व गुरु बनाया जा सकता है। लेकिन जब तक कि यूथ यहां डायवर्ट होगा धर्म के प्रति डाइवर्ट होने की जगह। धर्म का मतलब रिलीजन से नहीं कह रहा हूं। धर्म का मतलब यह कह रहा हूं खुद को जानो। सही गलत का भेद समझो। शिव को पूज रहे हो तो मन से पूजो और अवस्था को पूजो। तो वास्तविक पता चलेगा क्या है। सीता का पति बोल देना बहुत आसान है। सीता के पति ने जो कार्य करके दिखाया है ना वह करोड़ों जन्म ले मर के पैदा हो जाओगे तो नहीं कर पाओगे। ठीक है? एक अकेला व्यक्ति नीता के पति ने भी जो करके दिखाया वो भी नहीं कर पाएंगे।
(42:47) सीता के पति छोड़ छोड़ दो। [हंसी] नीता के पति की बात करते हैं वो। सही बात है। जो नीता के कर्म योगी है। करेक्ट बात है। मेहनत कितनी कर्म योगी है। अभी मैं जब कृष्ण की बात करता हूं ना तो मैं बहुत सारी चीजें स्टडी करता हूं। जब मैं देखता हूं ना Apple कैसे Apple बना तो Windows को लात मारी गई तब Apple आया है। करेक्ट बात है। Reliance को लात मारी गई तब Jio आया है। ये कर्म योगी है ये। ठोकर के बिना कोई बनता ही नहीं कुछ। ठोकर के बिना कोई कुछ नहीं बन सकता। मैं इतना काली मां की उपासना करता था देवी की कृपा से। जब ठोकर लगी जीवन में जब समझ आया कि
(43:23) क्या मैं पूज रहा हूं। सब कुछ तो अंदर है। तब वास्तविक पता चला कि क्या अर्थ है क्या नहीं। और लोग जो आ के मेरे पास कॉल करके बोलते हैं ना हमें ये पूजा कर दीजिए ये कर दीजिए धन के लिए। तो मैं दूर से हाथ जोड़ता हूं मेरे पास मत आओ। मैं वो सब नहीं करता जादू टोने फलाना। तो ये सब गलत काम है और बिछड़े प्यार वापसी। दूर से ही नमस्कार दूर निकलो कहीं और ये टाइम पास वाला काम नहीं करना है हमें। हम लोग हमारी भी एनर्जी अफेक्ट होती है इन सब लोगों की। क्योंकि जिन लोगों के साथ आप बात कर रहे हैं वैसे ही थॉट्स आएंगे मन में। ठीक है? जैसा संग वैसा भजन होता है।
(43:53) अब ऐसे लोगों का संग करके अपनी एनर्जी कौन खराब करे? दुर्मुख गणपति के बारे में भी हम वही वो गणपति का स्वरूप है छिन्न मस्तिका जो देवी हैं। ठीक है? जो ईगो का दमन दिखा रही हैं जो ईगो को डोमिनेट कर रही हैं। तो वही शिव का एक प्रकार का अगर ईगो था। ठीक है? कि गणपति का शीश अलग करके जो मैंने कर्म फल थ्योरी से मैं बच जाऊंगा। ठीक है? के तो दुर्मुख गणपति ने भगवान शिव का सर धड़ से अलग करके स्थापित कर दिया कि कर्म फल प्रधान है जो भगवान श्री कृष्ण ने स्थापित किया है। भीष्म पर्व से ही तो ली गई है पूरी महाभारत के भीष्म पर्व से भगवत गीता
(44:22) तो स्थापित कर दिया 700 श्लोकों की भगवत गीता में श्री कृष्ण भगवान ने वही शिव भगवान को स्थापित कर दिया गणपति ने कि कर्म फल है आप भी नहीं बच सकते कोई नहीं बच सकता तो जितना मर्जी कर लीजिए किसी तांत्रिक पे जाकर वशीकरण कर लीजिए जो आपका हो रखा है जो कर्म फल है वही मिल रहा है उसको क्या काटने के लिए तांत्रिकों को ढूंढ रहे हो भोगो [हंसी] बिना भोगे कुछ नहीं होने वाला। अभी सत्य है। सीता माता ने क्या आद्य पराशक्ति किसी के वन में पड़ी हुई है। अनंत कोटि ब्रह्मांडों की महारानी। ठीक है? और वेट कर रही है अपने पति का। मुझे याद नहीं आ रहा किसी ने मेरे से बात
(44:52) करी थी। उसने बहुत अच्छी बात बोली थी। कह रहा है कि अब जैसे कि 10 कर्म में से आपने तीन बुरे करे और सात अच्छे करें तो ऐसा थोड़ी होगा कि तीन घट के सात अच्छे मिल गए। वो तीन बुरे भी भोगने पड़ेंगे। सात अच्छे भी भोगने पड़ेंगे। जो लोग ज्योतिषों के पास जाते हैं अब जैसे मैंने अंगूठी पहनी हुई है तो ग्रहों को बली करने के लिए पहनी हुई है। ये नहीं है कि मैं क्रम काट लूंगा इनसे या कुछ कर लूंगा। सबसे बड़ी बात यह है जितने भी लोग हैं वो सोचते हैं हम ज्योतिषियों के पास जाएंगे। ये ये उपाय करेंगे तो महाराज जी जो होने वाला था अब टल जाएगा ना। अरे जो तेज चांटा पड़ने वाला
(45:20) था अब हल्का लगेगा लेकिन लगेगा जरूर। कर्म फल भोगना पड़ेगा। और जहां जोर से लगने वाला है वहां लगेगा। थोड़ा सा बचाव हो सकता है प्रोटेक्टिव शील्ड आ जाए और कुछ नहीं। चांटा उतनी तेज चांटा तो लगेगा ही। गाल मजबूत गाल मजबूत हो जाएगा मजबूत करना चाहिए गाल मजबूत करना है [हंसी] अब साधना भजन बना के मैं बता ही दूंगा तो उतनी तेज [हंसी] और आपने एक क्वेश्चन पूछा था अभी साधना के बारे में कि साधना की मूल गलतियां तो पहले तो मैं मंत्र साइंस थोड़ा सा एक्सप्लेन करना चाहूंगा किसी भी पडकास्ट पे अभी तक नहीं हुआ है और ये लोगों को नहीं पता है
(45:52) मंत्र के कुछ छह अंग कहे गए हैं। एक मंत्र का ऋषि बहुत इंपॉर्टेंट है। जिसने शिव भगवान के मुख से डायरेक्ट मंत्र सुना। तो उसने अपनी परंपरा में अपने शिष्यों को दिया। तो उसको मंत्र का ऋषि कहा जाता है। जैसे कि गणपति भगवान के मंत्र का ऋषि गणक ऋषि है। कंकोल ऋषि हैं। ठीक है? उसी के बाद छंद होता है मंत्र में। यानी किस मीटर किस रिदमम पे वो मंत्र बोला जाता है। अनुष्टूप छंद होता है। त्रिस्तूप छंद होता है। उसके बाद में क्या आता है? सबसे इंपॉर्टेंट कीलक जो भगवान शिव ने लॉक लगाया हुआ है मंत्र पे। उसको अनलॉक करना होता है। वो कैसे होगा? मन की चेतना जब
(46:21) उतनी विकसित होगी तो वो लॉक खुल जाएगा ऑटोमेटिकली। ये उसके बाद में सबसे इंपॉर्टेंट क्या है? न्यास। देवता की इंस्टॉलेशन करनी होती है। सब बाहरी कर्मकांड है। हृदय नमः सिरसे हाय वषट कवचाय ने तत्राय वषटस्त्राय पट ये हृदय न्यास होता है। तो न्यास करके देवता के तत्वों को हम इंस्टॉल करते हैं। उसके बाद दिगबंध दिगबंध मतलब ओम भूर्वस भान के जो एरिया लॉक करते हैं कि नेगेटिव शक्तियां आपको इन्फ्लुएंस ना कर पाए। सबसे बड़ी नेगेटिव शक्तियां हमारे मन में ही है। इसलिए सहस्त्रार के ऊपर घुमाया जाता है। ये तीन बार इस कतक विज्ञान नहीं समझते
(46:52) लोग। जो बाहर घूम रहे हो सब कुछ तो अंदर है। क्या है? पूरा तंत्र यहां से शुरू हो के यहां खत्म है। कुंडलिनी शक्ति की अगर हम बात करें दीपक जी लोग बोलते हैं हमारे चक्र जागृत हो गए। हम साधना में बैठे तो चक्र जागृत। अरे हलवा [हंसी] है क्या? चक्र है क्योंकि वेबलेट समझ रहे हैं चक्र को सब के सब। अब इनको क्या बोले? चक्र जागृत हो गए। अगर जागृत होने की थोड़ी सी अवस्था भी आती है ना तो बंदा हॉस्पिटल की ओर भागता है करेक्ट इतनी पुलपटेशन ऐसे हो जाती है गुरु ना हो ढंग का तो व्यक्ति गया गया गुरु नहीं हुआ तो गया व्यक्ति ये चीज [हंसी] है अब चक्रों को ही मैं एक समझाने
(47:27) का कोशिश करूंगा कुंडलिनी शक्ति को कुंड का मतलब होता है पिट अब वो जलाशय भी हो सकता है नॉर्मल गड्ढा भी हो सकता है उसमें जो लेटेंट शक्ति है इंग्लिश ग्रामर में एक कांसेप्ट है एनाग्राम लेटेंट वर्ड को किसी वर्ड फॉर्मुलेशन बिगड़ के उसका मीनिंग चेंज हो जाता है जैसे टैलेंट का लेट ेंट हो जाता है। लेटेंट का टैलेंट हो जाता है। उसी प्रकार से जो शक्ति जो लेटेंट यानी कि स्टेशनरी पोजीशन में पड़ी हुई है। ठीक है? वो कुंडलिनी शक्ति वो कहां है? मूलाधार से भी नीचे रसातल में। वो धीरे-धीरे जब हम अपने आप को समझने लगते हैं तो वो भेद करती
(47:53) है। तीन नोट्स होती है। ब्रह्म ग्रंथि, विष्णु ग्रंथि और रुद्र ग्रंथि आज्ञा चक्र के पास में। इसका जैसे-जैसे भेद होता जाता है। अगर ब्रह्म ग्रंथि का भी भेद हो जाए तो व्यक्ति को वैराग्य की स्थिति आ जाती है। उसको समझ ही बंद हो जाती है दुनिया की। तो ये कह रहे हैं चक्र जागृत हो गए। उसके बाद धीरे-धीरे अब एक नाल कनेक्टेड है स्वाधिष्ठान के पास में। आपको पता है बच्चे की नाल काटी जाती है जब पैदा होता है तो और देवी को क्या बोला गया है तंत्र में हिरण्य गर्भा सबसे बड़ी गर्भ वही है वम वही है जिसके अंदर हम सब हैं। तो क्या अगर हम अपनी उसी नाल को अगर उनसे कनेक्ट
(48:23) कर दें तो हम सबसे बड़ी मृत संजीवनी विद्या जागृत कर सकते हैं। जिससे हम हमेशा एंटी एजिंग के प्रोसेस में लिप्त हो जाएंगे और हमारी एजिंग स्टॉप हो जाएगी और बहुत धीरे हो। यही सब योगी लोग करते हैं। यह मूल तंत्र है। धीरे-धीरे व्यक्ति काली माही कुंडलिनी के फॉर्म में यहां है। जैसे-जैसे ग्रंथि भेद होता गया तो यहां शिव भगवान सहस्त्रार में इसलिए गुरु का ध्यान यहां पे होता है। गुरु कौन है? आदिनाथ भगवान शिव। शिव भगवान सहस्त्रार में ब्रह्म कमल में। जैसे काली जाकर के शिव से मिल जाएगी तो वास्तविक तंत्र हो जाएगा। तो कुंडलिनी ही तंत्र विद्या है।
(48:54) सबसे सर्वोच्च तंत्र विद्या। हाकिनी, शाकिनी ठीक है। वर्णिनी ये सबका वास है। वो सब देवियां हैं। ठीक है? अब देवी है एक सबसे बड़ी ठीक है उनको कोई जानता नहीं है महाविद्याएं 10 समझी जाती है 18 महाविद्याएं हैं उसमें सिद्ध विद्या भी है एक विद्या भगवती प्रत्यंग गिरा एकमात्र ऐसी महाविद्या जिसका अगर कोई महासिद्ध हो जाए विद्याओं में भी दीपक जी श्रेणी होती है एक होता है साधक एक होता है सिद्ध एक होता है महासिद्ध एक बन जाता है आत्मगुरु जिसको देवता का बिल्कुल डायरेक्ट कनेक्शन है या जो अपनी चेतना को इतना विकसित कर चुका है कि वह सब कुछ जान चुका है कि सब
(49:26) कुछ मैं ही हूं अब मेरे ही अंदर सब कुछ है मैं ही काली मैं ही दुर्गा मैं ही चंडी चामुंडा जो समझ जाता है वो उस चेतना में वो आत्मगुरु है। क्या बात है। वो समझ जाता है वो समझ जाता है सब कुछ मन है खेल तगड़ा [हंसी] चल रहा है। तो जब उसको ये समझ आ जाता है तो वही ऐसे बदलाव कर सकता है। तो गुरु की पहचान सबसे बड़ी ये है जिस व्यक्ति को सामने देखकर ये लग जाए हां यही है वो गुरु है। गुरु प्रेम से जिस प्रकार माता का पुत्र से प्रेम है। पुत्र का माता से प्रेम है। पिता का पुत्र से प्रेम है। पुत्र का पिता से प्रेम है। दोस्त का बंधु
(49:55) से प्रेम है। और सखी का अपनी सखी से प्रेम है। और प्रेमी का प्रेमिका से प्रेम है। वैसा प्रेम गुरु से होता है। की गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड, माता-पिता, बेटा, बहन सब गुरु ही लगता है। प्रेम बचा ही कहां है? लेकिन लेकिन है ही नहीं ना। इनको गुरु किस लिए चाहिए? गुरु संरक्षण कर दे। गुरु हेल्प कर दे हमारी। गुरु को कुछ नहीं। जो भी है प्रेम चाहे गुरु सब लालच है। अभी सब लालच है। अभी अभी नहीं बचाया। लेकिन हल्का सा भी कोई समझ गया कि इसको भगवान गणपति ने या शिव ने कृपा कर दी इतनी सी और जो समझ गया इस चीज को वो ऐसा वो पकड़ लेगा। वो लपक लेगा।
(50:28) वो लपक लेगा इसको। अब ये देखिए जिसको सपने में भगवान आते हैं ना उसका खुद का जीवन चेंज होता है क्योंकि उसने उसको कोई ना कोई इनर मैसेज प्राप्त हुआ ना अपनी अंतर्मन की चेतना से तो इस चेतना को पकड़ने के लिए प्रयत्न करेगा जिसको भगवान साक्षात दिख जाते हैं मतलब आत्म साक्षात्कार हो जाता है स्वयं का साक्षात्कार हो जाता है वो व्यक्ति पूरे ब्रह्मांड में चेंज कर देता है रामकृष्ण परमहंस को आत्म साक्षात्कार था विवेकानंद जैसा चेला तैयार कर दिया शिकागो में धर्म का डंका बजा दिया उसने तो सबसे बड़ी बात यह है गुरु अच्छा होगा तभी चेले अच्छे होंगे पॉकेट मारगा चेला
(50:57) पॉकेट मार [हंसी] गुरु अच्छा ढूंढिए। पहली बात तो जो भी गुरु होगा ना जी मुझे जो लगता है मैं हो सकता है इतना ज्ञान मेरे पास है नहीं गुरु जो होगा वो गुरु ही बनाता है हम वो चेला नहीं बनाता जो शिष्य बना रहा है ना वो शिष्य ही है हम करेक्ट करेक्ट जो चेला बना रहा है वो चेला ही है गुरु गुरु बनाएगा गुरु गुरु ही बनाता है हम जो आप होंगे वो आप वही तो बना सकोगे करेक्ट करेक्ट दक्षिणामूर्ति भगवान भैरव सबके गुरु हैं भगवान शिव का स्वरूप उनसे ही सभी ऋषियों ने साधना ग्रहण की, मंत्र ग्रहण किया और वह सब अपने आप में ब्रह्म गुरु हैं आज के टाइम पे। तो गुरु गुरु
(51:32) बनाता है। कभी शिष्य नहीं बनाएगा। और एक्स्ट्राऑर्डिनरी गुरु है तो एक्स्ट्राऑर्डिनरी ही चेले मिलेंगे। साधारण मिलेंगे नहीं। साधारण मिलेंगे। मिलेंगे नहीं। और जिसके साधारण मिल रहे हैं वो स्वयं साधारण है। या तो गुरु के प्रति ऐसा विस्मयकारी प्रेम हो जाए चेले का तो वो चेला नाम कर देता है गुरु का। ठीक है? बाबा जी महाराज को हम सब कब जानते हैं। हमारे कुल के गुरु हैं। हमारे श्रेष्ठ हैं। लेकिन जितना नाम हम सुनते हैं परमहंस योगानंद जी का। देखिए उन्होंने क्या क्रांति की है। ठीक है? अभी मैं बहुत पढ़ रहा हूं उनको। हां तो गुरु की कृपा हो जाए। बहुत उनके
(52:01) बारे में तो जितना पढ़े उतना कम है। क्या जीवनी रही है उनकी? क्या जीवनी रही? पूरे वेस्टर्न समाज को दबा दिया उन्होंने एक प्रकार से। धर्म का डंका बजा दिया। क्या बात है। आपकी भी सोच मेरे को बड़ी अच्छी लगी जो आप अभी उच्चिष्ट गणपति के हैं। जी बताइए उसके बारे में। तो उच्चिष्ट गणपति ये नहीं है जितने लोग समझ रहे हैं कि उच्चिष्ट गणपति का मंत्र कर लेंगे। इसमें संशय नहीं है कि वो ऐसी कोई फ्रीक्वेंसी पे अलाइन होते हैं वो डेट। आपने बताया ना कि मैं बनाना चाहता हूं कुछ प्रतिमा उनकी और [नाक से की जाने वाली आवाज़] स्थापित करना चाहता हूं। वो बड़ा
(52:27) मेरा एक लक्ष्य है जीवन का उच्चिष्ट गणपति का पूरे वर्ल्ड में एकमात्र मंदिर है जो कि तिरणवेली तमिलनाडु स्थित है। मेरा ऐसा मानना है कि मैं कृष्ण की नगरी में गणपति को स्थापित करना चाहता हूं मथुरा में। क्या बात है। तो लगभग 37 फीट की एक मूर्ति बनाना चाहता हूं अनकावर्ड। बहुत बढ़िया। मेरा भी कुछ ऐसा ही लक्ष्य है कि मैं शिव की नगरी में कृष्ण को बसाना चाहता हूं। जय हो जय हो। [हंसी] में वैष्णव का डंका है। सब कुछ वास्तविक एक ही है। गणपति को भी लोग नहीं समझ पाते। बड़े-बड़े कान है इसका मतलब कह रहे हैं कि सुनो ज्यादा बोलो कम। मोटा पेट है इसका
(53:01) मतलब ये है सुख-दुख सब समान उसको एक्सपीरियंस करो। ये मत बोलो कितना गलत हो गया। अपने आप को कोसो मत। सब कुछ डाइजेस्ट करो। भगवान शिव ने उनको मूषक दे दिया छोटा सा। कार्तिकेय को इतना सुंदर मोड़ दिया। उन्होंने कभी बोला क्या दे दिया पिताजी आपने। उन्होंने क्या बोला? इसी पे सब कुछ करके दिखाऊंगा। देखो कर दिया। तो चूहा मन की गति को दिखाता है। मन की गति के ऊपर वही सवार हो सकता है जिसको पता है उसकी एक्सिस्टेंस का। एक बहुत सुंदर गाना है। हस्ती के सागर की धारा तू ही कश्ती और किनारा यानी कि एग्जिस्टेंस का जो मूल है वही गणपति है। वही कश्ती पे मन के ही ऊपर
(53:32) सवार होकर के व्यक्ति परम मन को समझ पाएगा। ब्रह्म के ऊपर सवार हो के परम ब्रह्म को सत्य है। बिल्कुल सत्य है। आत्मा की तरंग को पकड़ लिया तो जो परमात्मा है समझ आ जाएंगे। तो वही गेम है। तो मेरा ऐसा लक्ष्य है। अब उच्चिष्ट गणपति करवाएंगे। मानवीय सहायता की मेरे को अपेक्षा नहीं है। मेरे को उच्चिष्ट गणपति से सहायता प्राप्त होगी। वो करवा देंगे। क्या बात है। जी। बहुत ही मजा आया आपसे बात करके। बहुत ही सुंदर। बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। और एक पडकास्ट मैं करूंगा आपके साथ। हम हरिद्वार या कहीं चल के 100% बैठ के आराम से। मैं चाहता हूं आप दक्षिण गए हैं या दीपक
(54:03) जी? नहीं मैं दक्षिण का। मैं चाहता हूं हम साउथ इंडिया जाए एक बार। बताइए। रामेश्वरम चल के हम करते हैं शिव की नगरी में या वहां पर जगन्नाथ आपसे। डन पक्का। मैं अगले महीने इसको लॉक करते हैं और ये करते हैं। धन्यवाद कोटि आभार। पक्का बहुत-ब धन्यवाद। और कुछ और ऐसा निकालते हैं जो कि ये मेरा वादा है आपसे अगले महीने आपके साथ डन। अरे वाह जय हो। गणपति बाप्पा का उत्सव भी आ रहा है। क्या बात है। बिल्कुल चलते हैं। बहुत ही धन्यवाद आपका आने के लिए। जो भी मैं चाहता हूं दिल से कि ऐसे व्यक्ति बहुत कम बचे हैं जो चेतना पे काम करना चाहते हैं और इनकी उम्र जो भी हो
(54:40) लेकिन उम्र में कुछ नहीं रखता। बहुत उम्रदराज लोगों से भी मिला हूं मैं। [हंसी] आपने तारीफ कर दी। मेरा हृदय गदगद हो गया। और मैं यही कहूंगा आप नहीं बोल रहे हैं वही मेरे लिए बहुत है। ठीक है? पूरी रियल वन टीम का बहुत-बहुत धन्यवाद। जो रेवोल्यूशन कर रहे हैं, क्रांति कर रहे हैं पडकास्ट के जगत में और पडकास्ट छोड़ के जो परम चेतनाओं को ला के दे रहे हैं यहां पे आप सबके समक्ष। यह कहीं पे नहीं मिलेगा। बड़े-बड़े ओटीटी के प्लेटफॉर्म्स वो नहीं दिखा सकते। कोई प्लेटफार्म नहीं दिखा सकता जो आप YouTube पे दे रहे हैं। ब्रह्म ज्ञान दे रहे हैं आप YouTube पे।
(55:16) देवता का कार्य है। जब तक के कृष्ण भगवान की कृपा नहीं है तब तक के योगियों की चेतना यहां नहीं आ सकती। कृष्ण भगवान को ही प्रणाम करूंगा जो आपके हृदय में विराजमान है जिनके कारण ये सब हो पा रहा है। जय श्री कृष्णा। जय भगवान गणपति। जय भगवान उच्चष्ट। मैं चाहता हूं कि जो भी इनका उद्देश्य है सारे के सारे जो भी मेरे व्यूअर्स देख रहे हैं जरूर इसमें बढ़-चढ़कर इनका साथ दें। इस पडकास्ट का जो भी बेस्ट पार्ट था जरूर हमें कमेंट्स करके बताएं जो भी आपको समझ में आया जो भी गालियां देनी है या फिर प्यार आपके ऊपर है। इन्होंने कहा ना कि
(55:49) फ्री विल [हंसी] योगीराज महाराज की जय। जय गुरुदेव। जय हो।
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