Sunday, October 18, 2026

जो सोचोगे, वही बनोगे! पतंजलि योग सूत्र की शक्ति : Dr. Jitendra Adhia

जो सोचोगे, वही बनोगे! पतंजलि योग सूत्र की शक्ति : Dr. Jitendra Adhia

Author Name:Ekta Mishra Show

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@EktaMishraShow

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=tsrQRy6JQVY





Title: जो सोचोगे, वही बनोगे! पतंजलि योग सूत्र की शक्ति : Dr. Jitendra Adhia

Author Name: Ekta Mishra Show

Description: POWER OF PATANJALI YOGA SUTRAS | You Become What You Think! | Dr. Jitendra Adhia

Do our thoughts shape our reality? What is the power of the mind, and how can we make our own mind our strength?

In this special podcast, we'll explore the principles of the mind, the subconscious mind, and the Patanjali Yoga Sutras, which can give a new direction to our thinking, understanding, and perspective on life.

We often seek change in our lives, but have we ever tried to understand our thoughts and beliefs that influence our decisions? This conversation discusses ways to understand the mind and bring about positive change within ourselves through topics like meditation, affirmations, and limiting beliefs.

Key topics discussed in this podcast:

The role of our mind and subconscious mind
The influence of thoughts and emotions on our behavior
The power of meditation and affirmations
Self-love and the importance of understanding ourselves better
Ways to overcome negative beliefs
Financial freedom and the right mindset
Breathing techniques and inner energy
The concept of an ageless body
The relevance of Patanjali Yoga Sutras
Spirituality, self-growth, and mind mastery

📌 Timestamps / Chapters:

00:00 Podcast Highlights & Teaser
02:27 Welcome to the Ekta Mishra Show: Age Is Just a Number
04:58 How to Stay Active at 76: The Ageless Mindset Secret
07:58 Why People Age Faster Today: The Hidden Impact of Stress
12:04 Retirement Planning & The Reality of an Aging Population
15:47 How EMI & Credit Card Traps Destroy Mental Peace (Needs vs. Wants)
21:18 Dr. Jitendra Adhia’s Inspiring Journey: From Poverty to Success
24:55 Financial Planning for Old Age & The Meaning of an Ageless Body
27:45 Modern Relationship Problems & The 'Monkey Mind' Explained
32:13 Controlling the 5 Senses (Pratyahara) & Finding Life Balance
36:06 How to Break Limiting Beliefs & Reprogram Your Subconscious Mind
40:00 Overcoming Struggles: Self-Upgradation & Skill Building
51:37 Harvard Study on Longevity, Blue Zones & Joint Families
55:38 Daily Routine & Discipline Habits for a Healthy, Wealthy Life
58:35 3 Secrets of Patanjali Yoga Sutras for Mental Peace
1:00:29 The Power of Self-Love & Mirror Affirmations
1:03:50 Future Vision: Ageless Body Clinics & Patanjali Yoga Trainers
1:08:27 Securing Your Future & Final Conclusion

This podcast is for those who want to deeply understand their mind, work on their thinking, and develop a positive outlook on life.

Sometimes change begins not with external circumstances, but with understanding the thoughts within us. This conversation will give you a new perspective on thinking in that direction.

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How important a role do your thoughts play in your life? Share your thoughts in the comments section.

🎙️ Watch the complete conversation on the Ekta Mishra Show.

If you are interested in Astrology, Face Reading, Personality Analysis, and the mysteries of human nature, this episode is definitely worth watching.

Watch. Listen. Observe. And see people differently.

Disclaimer: This podcast is for informational purposes only. The views expressed are personal and not professional advice. Always consult experts before making any decisions.

🎙 About the Host:
Ekta Mishra brings you unfiltered, deep, and thought-provoking conversations on the Ekta Mishra Show. From mental health and societal myths to spirituality and personal growth, Ekta dives into the stories and truths that matter most to you.

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Transcript:
(00:00) 76 इयर्स यू आर। यस। एंड यू आर एक्टिव। हाउ इट इज पॉसिबल? हमारे ऐज में हम सोचते हैं भाई एक घंटे की नींद दोपहर में मिल जाए तो मजा आ जाए। आपने माइंड सेट कर लिया कि 60 के बाद आपको कुछ नहीं करना है तो कुछ नहीं करोगे आप। मैंने स्टार्टअप स्टार्ट किया जब मैं 70 इयर्स का था। 70 इयर्स में आपने स्टार्टअप स्टार्ट किया। शुरू किया मैंने। 72 इयर्स में मैंने स्काई ड्राइविंग किया। कोई एज इज जस्ट अ नंबर मेरे लिए। तो मेन सीक्रेट ये है कि यंग रहने के लिए। आज हमारे बाल 30 में भी सफेद होते जा रहे हैं। इमेजिन करो मैं मेडिकल कॉलेज में था तब से
(00:33) डाई करता हूं मैं। यंग बॉडी रखने का एक ही सीक्रेट है। ओल्ड एज के एक सर्वे ये कहता है सबसे ज्यादा लोगों को स्ट्रेस फैक्टर मारता है ना वो है ईएमआई। और यह सोच के वो परेशान होते हैं कि भाई कोई भी पॉडकास्ट में कितना भी ज्ञान दे दे, मेरा ईएमआई तो नहीं चुका पाएगा ना। आज लोग अपने बेटे या बेटी की शादी के लिए लोन लेते हैं। कनेक्शन के लिए फोन होना मेरी नीड है। मगर iPhone होना वो मेरी इंडिया में सबसे ज्यादा iPhone ईएमआई से खरीदा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा है। पर जवानी के दिनों में अगर आपने वांट को कंट्रोल नहीं किया।
(01:08) क्रेडिट कार हमारे लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। जिंदगी ना मिलेगी दोबारा एंजॉय करो। यह जो डायलॉग है ना पैसा तो बहुत है लेकिन परिवार नहीं है। 85% यंगस्टर में ब्रेकअप का अनुभव हो चुका रहता है। आपने शादी कर लिया हर चीज अच्छी चाहिए। एक्स्ट्रा मैरिटल एफर्ट भी तो वही है। आपकी इंद्रियों को सेटिस्फाई करने का है। पतंजलि योग सूत्र से हमें ये टेक्निक सीखने को मिलती है क्या कि हम पैसे के साथ-साथ अपने रिलेशनशिप को भी कैसे बैलेंस करें? जीवन के जितने भी प्रॉब्लम्स आपने दिखाए सभी का सॉल्यूशन पता नहीं है। काबिलियत हासिल करें ना तो ये सब कुछ होने
(01:46) वाला है। हम इंडियंस फॉरेन चीजों को ज्यादा एक्सेप्ट करने की होड़ में आ चुके हैं। हमने शायद पैसों को ज्यादा प्रायोरिटी दे दी है। मैंने ऐसे लोग देखे हैं कि शादी हो गई। एक महीने के बाद दोस्तों के साथ टूर में जाते हैं। दोस्तों के साथ फिल्म देखने को जाते हैं। रात को 2-2 बजे तक रेस्टोरेंट में जाके गप्पे मारते हैं। वाइफ एट कर रही है। पतंजलि योग सूत्र के कौन से ऐसे अब थ्री सीक्रेट्स हैं? सबकॉन्शियस माइंड ये नहीं सोचेगा कि उसके फादर बोल रहे हैं, मदर बोल रहे हैं या खुद बोल रहा है। उसको जो अंदर फीडिंग जा रहा है वो डेवलप। जब हम 60 प्लस होते हैं ना या ऐसा हमें
(02:30) फील होना शुरू होता है कि अब हमारा शरीर हमारा साथ नहीं दे रहा है। हम बूढ़े होते जा रहे हैं। तो हम खुद को सेटल करने के ज़ोन में चलते रहते हैं। या हमें लगता है कि अब हमें अपने बच्चों को सेटल कर देना चाहिए। इनके नाम पे सब कुछ कर देना चाहिए और हम रिलैक्स मोड में आना शुरू कर देते हैं। बट अगर मैं आपको यह कहूं कि नहीं यह तो आपका एक लाइफ चेंजिंग मोमेंट होना चाहिए। एक आपका नया रिबर्थ होना चाहिए। क्योंकि आज जो गेस्ट है ना मेरे सामने उन्होंने इस बात को प्रूफ किया है। उन्होंने यह प्रूफ किया है कि एज इज जस्ट अ नंबर। हम किसी भी एज में अपने ड्रीम को
(03:06) पूरा कर सकते हैं। जरूरी नहीं है कि हमारा जो ड्रीम 25 साल में पूरा नहीं हुआ है वह 65 साल में पूरा नहीं हो सकता है। जरूरी यह नहीं है कि हमने अगर 22 साल में पायलट बनने का कोर्स नहीं कंप्लीट किया है तो हम उसको 62 साल में नहीं कर सकते हैं। जरूरी यह नहीं है कि हमने अगर 40 साल तक अपने बैंक में सेविंग ₹1 लाख की कर ली है तो हम 65 साल में नहीं कर सकते हैं। नो इट्स ऑल अ मिथ जो हमारा ब्रेन हमें डेवलप करता है हमारे सराउंडिंग्स को सिखा के। तो यह कैसे हम चेंज करें? कैसे हम किसी भी ऐज में अपने बॉडी को यह स्वीकार करने को कहें कि
(03:44) भाई तू हर चीज कर सकता है। अभी मरा नहीं है तू। अभी भगवान ने तुझे अपने पास नहीं बुलाया। और जब तक इस पृथ्वी पे है तब तक जी ले। यह सारा कांसेप्ट आज हम सीखेंगे डॉक्टर जितेंद्र अर्य जी से जो हमें यह बताएंगे कि कैसे अपने आपको एजलेस रखना है। क्या ऐसी टेक्निक्स है, क्या ऐसे सीक्रेट्स है जिसको हम अपने डेली लाइफ में अगर अप्लाई करते हैं देन कुछ भी हमसे दूर नहीं है। तो चलिए इस पॉडकास्ट की शुरुआत करते हैं। हेलो एंड वेलकम टू एकता मिश्रा शो। सर स्वागत है आपका। थैंक यू सो मच। शुक्रिया जी आपने बहुत अच्छा बोल दिया। अच्छी तारीफ कर ली है।
(04:24) तारीफ तो नहीं सर। मैंने तो वही बताया है जो सच्चाई है जो आप लोगों को दे रहे हैं काफी समय से। सही बात है। एंड फर्स्ट ऑफ ऑल कांग्रेचुलेशंस आपके पडकास्ट काफी अच्छे जा रहे हैं लोगों के साथ। आप लोगों के वजह से ये सब कुछ हो रहा है। आपने मुझे फेमस कर दिया। यह सब यूनिवर्स करता है जैसा आप बताते हैं और काफी अच्छे मैंने कमेंट्स भी पढ़े जो आपने फेलो पॉडकास्टर्स के साथ और जो मैंने आपके दूसरे चैनल्स पे भी देखे हैं। लोग बहुत खुश हैं। ईश्वर को शुक्रिया कह रहे हैं कि आपने उनको अपना नॉलेज दिया। उनके फील्ड में आए 76 इयर्स यू आर? यस। यंग
(05:01) एंड यू आर एक्टिव। हाउ इट इज पॉसिबल? सुबह 6:00 बजे से मैं उठ के काम कर रहा हूं। यस। रात को 10 तो बजट जाएंगे। कैसे पॉसिबल है यह? एनीथिंग यह होता है। कैसे पॉसिबल? हमारे ऐज में हम सोचते हैं भाई 1 घंटे की नींद दोपहर में मिल जाए तो मजा आ जाए। ऑल इज माइंडसेट। कैसे सर? कैसे शुरुआत? ओनली माइंडसेट। आपने माइंडसेट कर लिया कि 60 के बाद आपको कुछ नहीं करना है तो कुछ नहीं करोगे। आपने सोचा जिंदा रहूंगा तब तक करूंगा। तो होता है। मैंने तो 60 के बाद ही सब कुछ किया। ऐसा कह सकते हैं। सब कुछ नियरली मैंने 60 के। मैंने मैक्सिमम इंटरनेशनल ट्रेवलिंग भी 60 के बाद की है।
(05:35) तो वाओ। और जैसे आपने बताया मेरा बचपन का सपना पायलट बनने का था जो मैंने 65 इयर्स पे किया। मेरा स्काई ड्राइविंग का सपना था जो मैंने 72 में किया। मैंने स्टार्टअप स्टार्ट किया जब मैं 70 इयर्स का था। अब मैं 76 70 इयर्स में आपने स्टार्टअप शुरू किया। शुरू किया मैंने। अरे मुनि गुरु नाम का। ओके। हां। आज बहुत बड़ा प्लेटफार्म बन चुका है। वो मेरा बेबी है। तो लोग 70 इयर्स में ये सोचते हैं मैं स्टार्टअप स्टार्ट करूं। बिल्कुल नहीं सोचते। 72 इयर्स में मैंने स्काई ड्राइविंग किया। अभी 76 ईयर में मैं मिशन लेके निकला हूं। सबको एडलेस बनाने का, एडलेस बॉडी देने का
(06:11) और पतली योग सूत्र का ज्ञान घरघर तक पहुंचाने का मिशन जब तक आपके लाइफ में पर्पस रहता है, कुछ मिशन रहता है तो आप बूढ़े नहीं होते। आपकी एनर्जी खत्म नहीं होती है। बूढ़े वो होते हैं निकम्मे वो हो जाते हैं जिनकी लाइफ में कोई पर्पस ही नहीं है। बस पढ़ना, लिखना, शादी करना, दो बच्चा पैदा करना, रिटायर हो के मर जाना। यह जो माइंडसेट वाले होते हैं ना उनको तकलीफ होती है 60 के बाद जिनके पास पर्पस रहता है मिशन रहता है उनको ये कोई एज इज जस्ट अ नंबर मेरे लिए तो मेरे से कितने यंग लोग मेरे से कम काम करते हैं और कुछ नहीं करते ऐसे रहते हैं जबकि मैं सुबह से
(06:47) सोता हूं आज क्या करूं या क्या करूं आप तो मुझे काफी जानते हैं देखते होंगे मैं ऑलवेज कुछ ना कुछ आईडियाज लेके आता हूं और दूसरी बात है हमारा माइंड अगर एयरलेस रहा तो बॉडी अपने आप हो जाती है तो मेरा माइंड यंग जैसा है यंग लोगों का कैसा माइंड होता है क्यूरियोसिटी कुछ करके दिखाना है क्रिएटिव करना है कुछ नया करो नया करो तो मेरा यही चलता रहता है बूढ़े का क्या रहता है कुछ नहीं कुछ नहीं करना है पढ़ो बैठो और आराम करो तो माइंड निकमा हो जाता है तो कहने का मतलब है कि अगर आप यंग माइंड रखोगे और मेरा एक बड़ा सीक्रेट मुझे बहुत लोग पूछते हैं कि आप इतने यंग क्यों रहते
(07:22) हो क्योंकि मेरे साथ जितने भी काम करने वाले हैं मेरे से आधी उम्र के हैं। मैं यंग लोगों के साथ काम करता हूं। अभी मुस्कान करके मेरे साथ काम कर रही है। वो मेरे से 1/3 एज की है। हम शी जस्ट 23 और मैं 76 का हूं। वन थर्ड एज के लोगों के साथ अगर मैं काम करता हूं तो उनके जैसी मेरी सोच हो जाएगी ना। मेरा माइंड भी वैसा ही हो जाएगा। अगर मेरे जैसे ऐज के लोगों के साथ मैं गार्डन में जाके बैठा रहूंगा। नेगेटिव बातें करता रहूंगा तो मैं तो जल्दी मर जाऊंगा। तो मेन सीक्रेट ये है कि यंग रहने के लिए यंग लोगों के साथ रहो। उनकी जैसी सोच बनाओ।
(07:53) आपकी बॉडी एजलेस तब बनेगी जब आपका माइंड एजलेस है। यही तो मेन सीक्रेट है। इट्स अ फैक्ट और लोग इस बात को एक्सेप्ट नहीं करते। उन्हें लगता है कि जो फिल्मी दुनिया में दिख रहा है या जो सिखाया जा रहा है वही सच है। मुझे एक बात बताइए सर कि इट्स ट्रू कि हम जब ऋषि मुनि के जमाने की बात करें जब वो साधना करते थे तो उनकी ऐज चाहे 70 साल हो जाए चाहे 80 साल हो जाए पता नहीं चलता था। उनकी ऐज से रिफ्लेक्ट नहीं करता था। और यह हमारी ही सनातन की पद्धति है जो आज हम भूलते जा रहे हैं। आज हमारे बाल 30 में भी सफेद होते जा रहे हैं। में होते हैं।
(08:29) स्कूल में हो मेरी बेटी का स्कूल में हो गया था। बिल्कुल मेरा खुद का कॉलेज के दिनों में हो गया था। इमेजिन करो मैं मेडिकल कॉलेज में था तब से डाई करता हूं मैं। 50 साल से तो मैं डाई कर रहा हूं। तो स्कूल और कॉलेज में हो गया। जबकि एक जमाना था जब 50 के बाद आने लग बिल्कुल। तो ऐसा क्या बीच में आपको क्या लगता है? ऐसा क्या गैप आया कि हमसे वो जो एक सीक्रेट आप कह लीजिए जो उस समय के लोग करते थे या जो उस समय की चीजें ऐसी होती थी क्या ऐसी चीजें जो हमसे छुपाई गई या हमारे अंदर वो फीड ही नहीं किया गया जिस वजह से हमारा बॉडी ऐसा होते चला गया और
(09:06) हमने अपने सेल्स को यह बताना शुरू किया दैट यू आर गेटिंग ओल्ड डे बाय डे। सच बात है। यह सीक्रेट एक्चुअली था मगर हमने कभी उसके ऊपर गौर नहीं किया। हमारी प्रायोरिटी में नहीं रहा। हमारी प्रायोरिटी रही पैसा कमाओ फैमिली को सेटल करो यह करो हमारा प्रोग्रामिंग हो चुका था हार्ड वर्क करो खूब मेहनत करो खूब पैसा कमाओ और ये सबका चक्कर में हमारा स्ट्रेस लेवल बढ़ता गया और ये स्ट्रेस ही हमें बूढ़ा बनाता है तो आजकल देखो हर इंसान के जीवन में स्ट्रेस है। बच्चे को पढ़ाई का स्ट्रेस है। एडल्ट हुए तो उनको कॉलेज में डिग्री लेने का स्ट्रेस है। रिलेशनशिप का
(09:41) स्ट्रेस है। ब्रेकअप का स्ट्रेस है। शादी का स्ट्रेस है। उसके बाद डवोर्स का स्ट्रेस है। नौकरी में स्ट्रेस है, बिजनेस में स्ट्रेस है। सबको स्ट्रेस है। तो कहने का मतलब यह है कि स्ट्रेस ही एक कारण है कि हमको जल्दी बूढ़ा बना देता है। जल्दी हमें मार देता है। और हमने सुविधा तो खड़ी की मगर साथ में हमने यह साइड इफेक्ट में लिया स्ट्रेस का लेवल। अगर यह स्ट्रेस का लेवल को हम ठीक करने का सीख ले जो बहुत प्यारा विज्ञान है। मगर लोगों ने कभी ऐसी कोशिश नहीं की कि मेरा बूढ़े होने का, बीमार होने का, मेरी लाइफ को बर्बाद करने का कारण क्या है? और उसका सॉल्यूशन क्या
(10:13) है? इंटरनेट के ऊपर सब कुछ है। हमारे ग्रंथों में लिखा है। हमारे जो संस्कृतिक ग्रंथ है उसमें लिखा है। पतली योग सूत्र में सब कुछ लिखा है। पतली योग सूत्र में लिखा है कि आप कितने सालों तक जवान रह सकते हैं और जिंदा रह सकते हैं। मगर किसी ने उसको समझने की कोशिश नहीं किया। हमारा फोकस ही नहीं था। अब क्या हुआ कि हमारे पास पैसा आ गया। सुख सुविधाएं आ गई। अब हम सोचने लगे कि हम यंग कैसे रहे? क्या करें? क्या खाएं तो हम हेल्दी रहे? यह अभी का पिछले 30-40 सालों से है। मुझे याद है पहले तो सिर्फ पैसा कमाना, घर बड़ा बनाना उसके पीछे ही भागते थे। अब एक नई जनरेशन आ
(10:49) गई है जो यह सोचने लगी है कि ऐसे भी हो सकता है। अच्छी बात है। और हमारे पडकास्ट के माध्यम से हम यह नॉलेज को और फैला सकते हैं कि यू कैन डू एनीथिंग। यू कैन रिमेन यंग फॉर एवर। मैं 76 में अगर इतना काम कर सकता हूं तो आप क्यों नहीं कर सकते? चेंज योर माइंडसेट। और पैशन और प्रोफेशन जब साथ में रहता है ना तो एक जुनून पैदा होता है। लोग क्या करते हैं? उनका पैशन अलग रहता है और प्रोफेशन अलग रहता है। तो ये दोनों का कॉम्बिनेशन एक जुनून पैदा करता है। वो जिंदगी भर आपको दौड़ाता है और आपको यंग रखता है। हम और यंग बॉडी रखने का एक ही सीक्रेट है।
(11:24) बॉडी को चलाते रहो। बॉडी और माइंड ऐसी चीज है कि जितना चलाओगे इतना वो फिट रहेगा। लंबा चलेगा और जितना उसको नहीं चलाओगे कम चलाओगे उतना वह बूढ़ा होके मार देगा आपको। इसलिए मैंने देखा गवर्नमेंट ऑफिसर होते हैं 60 के बाद रिटायर होते हैं। कुछ आगे का प्लानिंग नहीं रहता है रिटायरमेंट का। घर में बैठे रहते हैं तो उनका एक तो सोशल स्टिमुलस बंद हो जाता है। उनके लिए एंटरटेनमेंट नहीं रहता है। बच्चे अपनी लाइफ में बिजी है। ग्रैंड चिल्ड्रन उसमें बिजी है। तो उनके लाइफ में कोई पर्पस नहीं रहता है। बैठे-बैठे नेगेटिव मोड में चले जाते हैं। अकेला रहना यह भी एक बहुत बड़ा
(11:59) स्ट्रेस है। तो उसकी वजह से उनका बुढ़ापा जल्दी आगे बढ़ता है और जल्दी मर जाते हैं। तो सीक्रेट ये है कि अगर आपको रिटायरमेंट में मैंने ज्यादातर रिटायरमेंट में किया है। देखो मैं अभी सेवन डेज सिक्स का हूं। मैं 60 मेरी रिटायरमेंट एज मान लो। तो मैं लास्ट 16 इयर्स में मैंने जो प्रोग्रेस की वो कभी पहले नहीं किया था। तो दीज़ आर योर गोल्डन इयर्स। क्योंकि आपके सब जिम्मेदारी पूरी हो जाती है। बच्चे बड़े हो जाते हैं, कॉलेज में चले जाते हैं या शादी हो जाती है, डिग्री मिल जाती है। तो आप हमारे लिए बहुत अच्छा टाइम होता है दो चीजें करने के
(12:30) लिए। एक तो हमारी जो हॉबीज़ है जो हमने एंजॉय नहीं कर पाए। वो आप करिए। कुछ क्रिएटिव करना था वो करिए। कुछ नई चीजें सीखना था वो सीखिए। ये हमारे लिए बेस्ट टाइम है। मगर यह तब होगा जब आपने रिटायरमेंट का कुछ प्लानिंग किया हो। खास करके फाइनेंसियल प्लानिंग ओल्ड एज के एक सर्वे ये कहता है कि हिंदुस्तान में जो रिटायर्ड लोग हैं उसमें से 87% बुरी हालत में है। बिकॉज़ दे नेवर थॉट अबाउट दिस। उसने कभी सोचा नहीं कि हमारे रिटायरमेंट की क्या लाइफ हो सकती है। कभी इमेजिन नहीं किया, कभी कुछ प्लानिंग नहीं किया, कुछ एक्शन नहीं लिया। हम बस ऐसे जीते रहे, जीते रहे और आधी ये हालत
(13:07) है उनकी। तो इसके लिए बहुत जरूरी है। मैंने तो बहुत पहले सोच लिया था। मैंने परफेक्ट प्लानिंग किया है। तीन चीजों में पैसे का प्लानिंग, फाइनेंसियल प्लानिंग, दूसरा होता है हेल्थ का प्लानिंग, रिलेशनशिप का प्लानिंग और सोशल प्लानिंग। ये सब कुछ मैंने कर लिया था। तो मैं अभी बेस्ट मेरी रिटायरमेंट लाइफ एंजॉय कर रहा हूं। मुझे पैसे की कोई कमी नहीं है। कमाने की कोई चिंता नहीं है। मैं 100 साल जिंदा रहूं तो भी मुझे एक पैसा कमाए बिना मेरा घर चल सकता है। इतना मैंने प्लानिंग करके रखा है। और लग्जरी के साथ बेयर मिनिमम नहीं बे मैक्सिमम। तो यह सब चीजें अगर लोग
(13:41) जान ले करें ना तो यह दुख वाले दिन जो बूढ़े लोग देखते हैं ना आफ्टर 60 वाले वो नहीं देखेंगे। यह बहुत जरूरी है। और आजकल देखोगे ना तो हिंदुस्तान की बात छोड़ के बाकी जग सब जगह पे एजिंग पपुलेशन ज्यादा है। हम मैंने देखा मैं यूरोपियन कंट्री बार-बार जाता हूं। जापान गया, चाइना बहुत बार गया। चाइना में तो क्या हालत है मालूम है कि एक जमाना था कि उन्होंने फैमिली प्लानिंग को इतना स्ट्रिक कर दिया। इतना स्ट्रिक्ट कर दिया कि यंग जनरेशन आई नहीं मार्केट में। तो ओल्ड एज की पॉपुलेशन यह यंग और एडल्ट से बढ़ गई। अच्छा अभी वहां पे स्टैंडर्ड
(14:19) ऑफ लिविंग इतना अच्छा है कि लोग 8090 के बाद भी जीते हैं। मगर दोनों में से एक पार्टनर चला जाता है छोड़ के तो एक पार्टनर अकेला घर में रहता है। तो अकेला घर में रहना यह सबसे बड़ा स्ट्रेस है। कोई नोबडी टू टेक केयर ऑफ यू। और वहां तो चाइनीस गवर्नमेंट ने ऐप बनाई है जो हर सिटीजन को कनेक्ट करती है। जिनको डेली एक बटन दबाना पड़ता है उतने उसके उसमें जाके कि मैं जिंदा हूं। बटन दबाया तो वहां गवर्नमेंट को पता चलता है जिंदा है। क्योंकि चाइना में जापान में ऐसा हो रहा है कि लोग बूढ़े लोग अकेले रहते हैं। बंद कम कमरे में रहते हैं। मर जाते हैं।
(14:53) तीन-तीन दिन तक पता ही नहीं चलता मर गया। जब स्मेल आने लगती है उसकी सड़ने की। पड़ोसी लोग कंप्लेंट करते हैं तब वो पुलिस आके निकाल के उसको अंतिम क्रिया करते हैं। यह हालत हो गई है। नोबडी देयर टू टेक केयर ऑफ दैट। एंड दे हैव नेवर प्लांट मी अबाउट इट। तो डेली बटन नहीं दबाया। एक दिन भी बटन नहीं दबाया तो दूसरे दिन पुलिस आके उसके घर पे चेक करती है कि कल बटन क्यों नहीं दबाया मर तो नहीं गया है हिंदुस्तान की भी यही हालत हो सकती है यहां भी बिल्कुल हो सकती है हां क्योंकि यहां पे मी एंड माय लाइफ और वो क्या नो किडन डबल इनकम डीएन के कुछ आया
(15:26) है ना ये जो फिलॉसोफी है इसको पता नहीं है कि इससे डेंजर क्या है। आप शादी नहीं करोगे या करोगे तो बच्चे पैदा नहीं करोगे तो आप जब बूढ़े बनोगे तो आपकी केयर करने वाला कोई नहीं होगा। फिर वही बटन दबाने वाली टेक्नोलॉजी हिंदुस्तान में भी लानी पड़ेगी कि मैं जिंदा हूं यह बताने के लिए करो नहीं तो कल पुलिस आ जाएगी। यह हालत हो गई है। बिल्कुल होता है सर। और ये इस चीजों का लोग समझ नहीं रहे हैं। एक्चुअली क्या इंडिया में भी अब ये पॉलिसी इट्स ट्रू कि धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है कि मैं सिर्फ अपना लाइफ देखूं। या ज्यादा से ज्यादा मैं
(15:58) और मेरा हस्बैंड पार्टनर बच्चे की भी लोगों को नीड उतनी नहीं लगती है कि ठीक है नहीं है तो नहीं है तो है इस तरीके से भी चीजें हो रही है। अच्छा हम जब स्ट्रेस फैक्टर की बात कर रहे थे तो इंडिया में जो सबसे ज्यादा लोगों को स्ट्रेस फैक्टर मारता है ना वो है ईएमआई। लोग ईएमआई से बहुत परेशान हैं और ईएमआई लोगों को इतना स्ट्रेस में डाल दे रहा है कि उनके चेहरे पर झुर्रियां साफ दिखाई देनी शुरू होती है। एजिंग फैक्टर साफ दिखाई देना शुरू होता है और यह सोच के वो परेशान होते हैं कि भाई कोई भी पडकास्ट में कितना भी ज्ञान दे दे मेरा ईएमआई तो
(16:34) नहीं चुका पाएगा ना। उनका सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आप मुझे जो ज्ञान दे रहे हो उससे क्या मैं अपना ईएमआई चुका पाऊंगा? जो मैंने अपने ऊपर कर्जा ले लिया है अपने परिवार को पालने के लिए या गाड़ी के लिए क्योंकि आजकल गाड़ी भी जीरो डाउन पेमेंट पर मिल रही है। सो हर चीजों के लिए ईएमआई फैसिलिटी ज्यादा हो चुकी है इन इंडिया। ये लोगों को मार रही है। ये लोग कैसे इस इस फियर से कैसे ओवरकम करें? सबसे पहली बात है कि मेरी बात करूं तो मैं बहुत सालों से विदाउट ईएमआई जी रहा हूं। पहली बात यह है क्योंकि मुझे पता था कि मेरी रिटायरमेंट लाइफ में यह मेरा सबसे
(17:08) बड़ा दुश्मन बनने वाला है। दूसरी बात है कि ईएमआई क्यों लेते हैं? क्योंकि उनके लाइफ में प्लानिंग नहीं होता। इसके लिए लेना होता है। आज लोग अपने बेटे या बेटी की शादी के लिए लोन लेते हैं। तो जब बेटा पैदा हुआ बेटा या बेटी तब पता नहीं था ये बड़ा होगा और उसकी शादी मुझे करनी पड़ेगी। तो तब से उसने बचाना शुरू करना चाहिए था ना। उन्होंने नहीं किया। तो अब उसको ईएमआई से करना पड़ता है। बच्चा अभी एजुकेशन लोन लेते हैं तो पता नहीं था कि एजुकेशन के लिए मुझे पैसे की जरूरत पड़ेगी। तो उन्होंने क्यों अपना फाइनेंस को कंट्रोल में नहीं रखा और उसका
(17:41) ईएमआई लेने की जरूरत पड़ेगी। सेम घर लेने की, गाड़ी लेने की। देखिए दो चीज समझ लेना जरूरी है कि हमारे जीवन में दो चीज होती है। एक तो हमें नीड हमारी जरूरत है और दूसरी हमारी इच्छा है। हमारी वांट है। यह दोनों में लोग फर्क समझते नहीं है। और उसकी वजह से यह ईएमआई के चक्कर में स्ट्रेस आता है और बीमारियां आती है और बूढ़े पे बहुत दुखी होते हैं। पहली बात है मेरे पास व्हीकल होना यह मेरी नीड है। मगर Mercedes होना यह मेरी वांट है। मेरे घर में फ्रीज होना यह मेरी नीड है। मगर बड़ा दो डोर वाला फ्रीज होना यह मेरी वांट है। एक कनेक्शन के लिए एक फोन
(18:21) होना मेरी नीड है। मगर iPhone होना वो मेरी इंडिया में सबसे ज्यादा iPhone ईएमआई से खरीदा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा है। ईएमआई से दुनिया में सबसे ज्यादा यह यंगस्टर खरीदते हैं। जैन जी वाले खरीदते हैं। जो इसके वांट है तो जवानी के दिनों में अगर आपने वांट को कंट्रोल नहीं किया तो यह दिन आएंगे जो अभी आज लोगों के होते हैं। जवानी के दिनों में सिर्फ नीड को सेटिस्फाई करो। वांट को रहने दो और उसकी वजह से जो आपसे बचत होगी वह बचत को जमा करके आगे का प्लानिंग करो। फाइनेंसियल प्लानिंग एंड रिटायरमेंट के ऊपर मेरी बुक है पूरी जिसका नाम है धन की खेती और मैंने
(18:59) उसके ऊपर लिखा है कि धन एक ही भाषा बोलता है। आप मुझे अभी बचाओ मैं आपको भविष्य में बचाऊंगा। एक ही भाषा बोलता है। और हम क्या करते हैं? जवानी के दिनों में मजा जिंदगी ना मिलेगी दोबारा करके बेफम खर्चा कर लेते हैं और बाद में ईएमआई के चक्कर में पड़ जाते हैं। सबसे ज्यादा डेंजरस है। क्रेडिट कार्ड हमारे लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। वारेन बफेट तो कहता है क्रेडिट कार्ड मत रखो और मैंने कब से क्रेडिट कार्ड तो छोड़ दिया है। क्योंकि क्रेडिट कार्ड हमें ललचाता है। बाय नाउ एंड पे लेटर वाली थिंग। अमेरिका की हालत यह है। पूरा अमेरिका देश भी कर्जे के ऊपर है और हर
(19:34) इंडिविजुअल कर्जे के ऊपर है। और वही कल्चर हमारे यहां आ रहा है। हमारे यहां नहीं था पहले। ये अमेरिकन कल्चर है। क्रेडिट कार्ड वाला, ईएमआई वाला। मैंने तो जब मेरी पहली स्कूटर खरीदी तब ईएमआई का पता ही नहीं था। मुझे मैंने तो पैसा देके लिया था। यह लोग ललचा ललचा के यहां तक लेके आया कि हर इंसान कर्जे में देता रहे। ऐसा कर रहे हैं। तो लोगों को समझना चाहिए कि फाइनेंसियल प्लानिंग सबसे इंपॉर्टेंट है क्योंकि फाइनेंसियल हेल्थ बिगड़े तो शरीर की हेल्थ बिगड़ेगी। दोनों हेल्थ बिगड़ी तो रिलेशनशिप की हेल्थ बिगड़ेगी और जिंदगी भर दुख के चक्कर में चले जाओगे। हम
(20:09) ये हालत है अभी। बिल्कुल। अच्छा हम कुछ और टॉपिक पे आगे बढ़े। जैसे पतंजलि योगसूत्र है या हम माइंड पावर की बात करें या एजलेस बॉडी की बात करें। आपकी बॉडी देख के ही लगती है इट्स अ एजलेस बॉडी। ठीक है? आपने बिल्कुल ये तो हर कोई कहता है। आपको मैं यही कहने वाला था आपके लिए अभी मगर आपने पहले कर दिया। नहीं सर अब फॉर्मेलिटी लगेगी। मैं बोलूंगा कि आप भी यही [हंसी] ले सकती हो। नहीं अभी आप मैं जब 50 की हो जाऊंगी तब आप बोलना। फिर आप जो सिखा रहे हो मुझे मैं उसको अप्लाई करूंगी। अभी तो 50 की होने में 25 साल बाकी है ना आपके। [हंसी] अभी तो अब अब आप गेस कर लीजिए कितने साल
(20:44) बाकी है। बट यस सर मैं मेरा यह क्वेश्चन है कि लोग सबसे पहले यह जानना चाहेंगे ना कि आप जो बता रहे हो पतंजलि योगसूत्र के बारे में, एजलेस बॉडी के बारे में, माइंड पावर के बारे में, फाइनेंशियल हेल्थ के बारे में आपने अपने लाइफ में क्या इस चीजों के कारण परिवर्तन देखा है? क्या आपने ट्रांसफॉर्मेशन देखा है? क्या आप शुरुआत से ही आपके पास इतना इनफ मनी था कि आप अपनी चीजों को कर ले जाइए या फिर आपने भी चैलेंजेस देखा है जिसको आपने इन चीजों को अपनी लाइफ में अप्लाई करके ट्रांसफॉर्म किया है। चलो पहले फाइनेंस की बात करते हैं। मैं
(21:20) राजकोट में बड़ा हुआ हूं। मेरा पत्रे का घर था। एक रूम नौ लोग दो भाई चार बहने फादर मदर दादी मां नौ लोग एक कमरे के पत्रे के घर में हम रहते अभी भी वो घर ऐसा के ऐसा है राजकोट में सांगणवा चौक में एबीसी मेडिकल नीचे दुकान है उसके ऊपर वाला घर अभी भी वैसा के वैसा टूटा फूटा पड़ा है वो ₹2 महीने का किराया हुआ करता था वहां पे मैं बड़ा हुआ इलेक्ट्रिसिटी बाद में आई टेलीफोन बाद में आया सब कुछ बाद में आया मेरे घर में साइकिल भी नहीं थी मेरे फादर फ्रूट की लारी चलाते थे वेजिटेबल एंड फ्रूट की घर-घर जाकर बेचते थे जब मैं समझना लगा तब यह मेरी शुरुआत शुरुआत हुई
(22:01) थी। उसके बाद क्या हुआ कि फिर मैं पढ़ा मेडिकल कॉलेज में जाने का मौका आया तो मेडिकल कॉलेज की फीस के पैसे नहीं थे। तब कितनी फीस थी? ₹300 टर्म फी थी। मैं ₹3000 में डॉक्टर बना हूं। छ महीने की टर्म फी हुआ करती थी। ₹300 तो साल की 600 हुई। 5 साल की मैंने ₹3000 फीस दी मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस करने में। वो था। वो भी मेरे फादर मुझे कहीं से कर्जे पे लाके मुझे बेचा करते थे। ठीक है? तो यह मेरा बचपन गुजरा था। मेरे फादर को मैं हमेशा करके में देखा। उनकी आदत थी आमदनी अठानी कर्जा रुपया और उनकी गुडविल अच्छी थी। कहीं से भी उनको उधार मिल जाते थे। और मैंने देखा
(22:39) था कि बहुत सारे मैंने दुख लायक के लोग घर पर पैसा लेने को आते थे। कर्जा मांगने को मेरे फादर सॉरी कहते थे। फील करते थे। ये मैंने बहुत सू देखा था बचपन में। तो मुझे तब लगा था यार यह लाइफ तो मुझे नहीं चाहिए। मैं कैसे भी करके मेरी फाइनेंस कंट्रोल करूंगा। मुझे ऐसा कर्जे वाला जिंदगी नहीं पसंद है। फिर डॉक्टर बना तो कर्जे वाली जिंदगी तो नहीं रही क्योंकि धीरे-धीरे इनकम बढ़ने लगी। फिर भी मेरा माइंडसेट ऐसा था वही ज्यादा खर्च करने वाला। तो मैं 40 साल का हुआ। हां तब तक 45 साल तक मेरा खुद का घर नहीं था। डॉक्टर होके एमडी करके मैं आई नेवर
(23:17) मॉडरेटर अबाउट इट। मेरा पहला घर मैंने लिया जब मैं 45 का था तब मेरा ड्रीम हाउस खरीदा। मैंने अभी 10 साल पहले यानी 65 में खरीदा। तो यह मेरी हालत थी। मगर मैं यह तो समझ गया कि यह मेरी गलती की वजह से हो रहा है। मेरा अनाड़ीपन है कि मैं फाइनेंस को ध्यान नहीं दे रहा हूं। देखिए जीवन में कोई भी चीज में आप फोकस नहीं करोगे, ध्यान नहीं दोगे, सीरियसनेस नहीं समझोगे तो बिगड़ेगा। हेल्थ की बात करो तो हेल्थ को ध्यान नहीं दोगे, जंक फूड खाओगे, अननेसेसरी रात को जागोगे, इरेगुलर जिओगे, बैठे रहोगे तो आपकी हेल्थ बिगड़ेगी। रिलेशनशिप में आप केयर नहीं करोगे तो
(23:56) रिलेशनशिप बिगड़ेगी। फाइनेंस के ऊपर फोकस नहीं करोगे तो फाइनेंस बिगड़ेंगे तो हर जगह दुख ही दुख आएगा। तो हमारे देश में बहुत सारे अनाड़ी अनपढ़ ऐसे लोग हैं जो ये सीखते नहीं है जानते नहीं है कुछ करते नहीं है तो बेचारे बनके रह जाते हैं और देखो सिगरेट के ऊपर लिखा रहता है कि यह कैंसर कर सकता है फिर भी पढ़े लिखे लोग इसको पीते हैं सबसे ज्यादा स्मोकिंग इंग्लैंड के डॉक्टर करते हैं और स्मोकिंग के वजह से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और लंग कैंसर होता है दुनिया में सबसे ज्यादा इंग्लैंड के डॉक्टरों को होता है दारू पीने से लीवर खराब होता है। जिसको सिरोसिस
(24:34) ऑफ लिवर कहते हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा इंग्लैंड के डॉक्टर को होता है। सोच लो। तो यह पढ़े लिखे अनपढ़ लोग हैं। दे डोंट टेक देयर हेल्थ सीरियसली। जिंदगी ना मिले लेकिन दोबारा एंजॉय करो। यह जो डायलॉग है ना ये लोगों को बर्बाद करता है। तो मेरे ख्याल से लोगों को अभी अवेयरनेस क्रिएट करनी चाहिए कि हम कभी ना कभी तो हमारी ऐज बढ़ेगी तब हमारे लिमिटेशन बढ़ेंगे। एक के साथ हमारे लिमिटेशन बढ़ते हैं। पैसा कमाने का लिमिटेशन, मूवमेंट का लिमिटेशन, सोचने का लिमिटेशन, बहुत सारे लिमिट काम करने का लिमिटेशन तो वो दिन तो सबके आने ही वाले हैं। तो वो टाइम पे इनकम
(25:13) कम होती है, खर्चा बढ़ता है, उल्टा होता है। यंग रहते हैं तो इनकम ज्यादा रहती है, खर्चा कम रहता है। उल्टा होने लगता है। रिटायर होने के बाद इनकम कम होती है। नेगेटिव बैलेंस में चले जाते हैं। और वही हमारे जीवन के दुख का कारण बन जाता है। 87% ऑफ द पीपल आर लिविंग एट द मर्स ऑफ देयर चिल्ड्रन और चैरिटी ऑर्गेनाइजेशन। ये हालत है हमारे देश की। ए हेल्प एज इंडिया का सर्वे कहता है लोग सोचते नहीं है रिटायरमेंट प्लानिंग कैसे करना। यहां की बात छोड़ो। अमेरिका यूरोप की भी वही हालत है। मैं तो बहुत बार यूरोप अमेरिका गया हूं। मैं वहां लोगों को मिलता हूं। पता
(25:46) है। मगर कुछ कंट्री ऐसे हैं जिन्होंने सोशल सिक्योरिटी सिस्टम फुल प्रूफ बना दिए। जैसे स्केंडिवनियन कंट्री डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे यह सब ऐसे कंट्री है जो बुढ़ापे में आप गवर्नमेंट आपकी केयर करती है। अमेरिका में केयर करती है। फिर भी मैंने अमेरिका में लास वेगास में ठंडी में लोगों को बिना ओढ़े हुए फुटपाथ पर हाथ निकालते हुए देखा है। लॉस एंजेलस में देखा है। न्यूयॉर्क में देखा है। शिकागो में देखा है। भूख के मारे चिल्लाते हुए लोग देखे। मेरी पहली अमेरिका ट्रिप थी। एक लेडी चिल्ला रही आई एम हंग्री गिव मी समथिंग रो रही थी रास्ते में खड़े रह के
(26:24) ये अमेरिका की बात है बूढ़ी थी अब अमेरिका में यह हालत है तो इंडिया की क्या सोच सकते हैं बोलो और वहां तो इतनी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम है तो भी मगर लोग सोचते ही नहीं है जैसे हमारा कभी बुढ़ापा आने वाला नहीं है हमारे कभी अच्छे ही दिन रहेंगे ये गलत बात है ये मत करिए बिल्कुल अगर और ये सब देख के मैं एकदम अलर्ट हो गया कि मुझे ऐसा उठा पा नहीं देखना है। मुझे तो चलते फिरते एक्टिविटी के साथ जीना है मुझे। जब तक जिऊंगा तब तक एक्टिविटी के साथ तो मैंने सीखा उसमें से तो मेरी एजलेस बॉडी किताब मिली मुझे। वैसे तो मेरा मेडिकल नॉलेज था ही। मगर ये एजलेस का पूरा
(27:04) कांसेप्ट मुझे इसमें से ही आया अनुभव से कि मुझे हमेशा यंग रहना है। एलेस का मतलब ऐसा नहीं कि आप हमेशा गुड दिखोगे। एनर्जी वाला जो किसी के ऊपर डिपेंड नहीं हो। अपना काम कर सको। अपना माइंड क्लियर हो। आपकी स्ट्रेंथ क्लियर हो। आपको किसी का हाथ पकड़ के चलना नहीं पड़े। जब तक मरो तब तक आप फुल ऑफ एक्टिविटी एंड फुल ऑफ इंडिपेंडेंसी रहो। दैट इज एनलेसनेस। ऐसा रहता है। वेरी ट्रू। और अगर हम अपने ऊपर इन सारी चीजों को कर लेते हैं जो आप टेक्निक अभी हमें बताएंगे उन टेक्निक्स को आई विल से कि ऑडियंस फॉलो करें और अगर आपने अभी तक नहीं सुना है इस बारे में तो जरूर इन
(27:42) चीजों को करना चाहिए। एक और चीज जो सवाल उठेगा जैसे मैंने आपसे बात की ईएमआई के चीजों की कुछ ऐसे चीजें होती है ना चाहे वो बड़े फैमिलीज में हो कि रिलेशंस बहुत खराब रहते हैं और अब जितनी बड़ी से बड़ी आप फैमिलीज देखोगे इंडिया में उतने आपस में ही अलगाव ज्यादा होते हैं या एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स चल रहे होते हैं या पेरेंट्स के साथ रिश्ते अच्छे नहीं होते हैं या बच्चों के साथ रिश्ते अच्छे नहीं होते है पैसा तो बहुत है लेकिन परिवार नहीं है या कोई अपना नहीं है उनके पास नौकरों के भरोसे है फिर नौकरों को बेस्ट एग्जांपल है यस अब नौकरों को जब मौका मिला तो वो भी
(28:25) आपका 9 दो 11 करके छुट्टी कर ली और सब कुछ उनके पास हो गया बहुत सारी चीजें ऐसे एग्जांपल सुनने को आते हैं रहते हैं नौकर खून करके सब लेकर चले जाते हैं इसलिए किस्सा सुना है हमने बिल्कुल तो क्या पतंजलि योग सूत्र से हमें ये टेक्निक सीखने को मिलती है क्या कि हम पैसे के साथ-साथ अपने रिलेशनशिप को भी कैसे बैलेंस करें? गुड आईडिया। सबसे पहली बात यह है कि जीवन के जितने भी प्रॉब्लम्स आपने दिखाए सभी का सॉल्यूशन पता नहीं योग सूत्र में। अगर यह सीख लिया और इसको फॉलो किया तो प्रॉब्लम है वो डिसअपीयर हो जाएंगे और नहीं आएंगे भी नहीं। यह है। अब मैं आपको बताऊं आपने
(29:04) जितना भी प्रॉब्लम बताया जो दुनिया को सबको मालूम है। डवोर्स रेट बढ़ रहा है, सुसाइड रेट बढ़ रहा है, डिप्रेशन बढ़ रहा है। हर चीज बढ़ रही है। ठीक है? तो मैंने तो यह सुना। अभी मैंने ब्रेकअप के ऊपर किताब लिखी है। हाउ टू रिकवर फ्रॉम ब्रेकअप? लिखते लिखते मुझे पता चला कि 85% यंगस्टर में ब्रेकअप का अनुभव हो चुका रहता है। दो-दो तीन-तीन ब्रेकअप होता है। और जो ब्रेकअप करने वाले लोग आगे जाकर शादी करेंगे तो उनकी नॉर्मल मैरिड लाइफ कैसे रहेगी सोच लो। उनके माइंड में क्या प्रोग्रामिंग करके वह शादी करेंगे। बाद में पुरानी यादें भूलेंगे नहीं। फिर से
(29:43) उनके साथ कनेक्ट होंगे। बहुत सारी मैंने स्टोरियां सुनी है। मेरे पास काउंसलिंग में लोग आते हैं। ऐसेसे लोग आते हैं। तो यह प्रॉब्लम तो बहुत है। अब सवाल यह है कि प्रॉब्लम का कारण क्या है? सॉल्यूशन क्या है? तो जब मैं यह पता नहीं योग सीखा तब मुझे पता चला कि हर प्रॉब्लम का कारण है। हमारा मन है। वैसे हम सुनते तो आ रहे हैं। मन ही सुख का कारण मन ही दुख का कारण है। एक वो पुराने जमाने का काजल पिक्चर का गाना था। मन ही सुख का कारण है। दुख का कारण है। मैं भूल गया उसका। मन उजियारा हो तो जग उजियारा हो। यह वाला एक गाना है। बहुत फेमस था। मेरा फेवरेट था
(30:21) जमाने में। तो अगर मन को समझ ले और मन को कंट्रोल कर ले तो यह सब सुखदख चला जाएगा। तो ये एडलेस बॉडी और पता सूत्र में यह सब चीजों का जिक्र है। अब हमारे हर दुख का कारण है हमारा मंकी माइंड। मंकी माइंड यानी क्या? आपने देखा होगा मंकी एक जगह पे 1 मिनट भी नहीं बैठ सकता। इधर-उधर भागता ही रहेगा। वैसा हमारा माइंड होता है। कभी यह विचार करेगा, कभी वह चार करेगा, कभी यह करेगा, भागता ही रहेगा। और दूसरी बात है मेरे पास एक वीडियो है। किसी का कॉपीराइटेड होगा। मैं दिखाऊंगा तो आप हैरान हो जाओगे कि मंकी माइंड क्यों कहा गया है। तो उसमें दिखाते हैं कि एक मंकी
(31:01) बैठा है। उसको एक आदमी उसको खाने का पांव देता है। वह अभी खाना शुरू करता है तो उसको दूसरा देता है। तो दूसरा भी ले लेता है। एक हाथ से खा रहा है। तीसरा देता है तो पहले वाले को छोड़कर तीसरा वाला ले लेता है। फिर उसको चौथा देता है तो एक हाथ में दो पांव पकड़ता है। पांचवा देता है तो खाने वाले हाथ में भी दो पांव पकड़ता है। फिर छठा देता है तो दो फेंक देता है फिर पकड़ता है तो जितने आए उसका ना नहीं बोलता लेता रहता है और फेंकता रहता है स्टोरी क्या है कि यह कुछ भी एंजॉय नहीं कर रहा है तो हमारा माइंड भी ऐसा होता है हम ज्यादा पाओ ज्यादा पाओ उसके लिए भागते
(31:37) रहते हैं और पैसा और सक्सेस जो पैसा मिला है जो लग्जरी मिली है जो कंफर्ट मिला है उसको एंजॉय करने का टाइम ही नहीं है भागते रहते हैं और पैसा और पैसा एक बडरूम का घर मिला तो दो बैडरूम का तीन बैडरूम का फिर पूरा विला फिर पूरा फ्लोर क्या-क्या होता है? साइकिल थी उसमें से स्कूटर आया फिर Maruti आई फिर Honda City आई फिर Mercedes आई फिर Rollf यही चलता है। मंकी माइंड है हमारा तो हमारा मन कंटिन्यूसली एक्टिव रहता है। भटकता रहता है। और यह सभी प्रॉब्लम का कारण वो भटकता हुआ मन है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की बात करें। आपने शादी कर लिया। यू शुड बी हैप्पी विद योर
(32:17) वाइफ और हस्बैंड। मगर यू आर नॉट हैप्पी। यह दिल मांगे मोर। और दूसरी बात क्या है कि हमारा पूरा जो काम रहता है ना वह हमारी पांच इंद्रियों को सेटिस्फाई करने के लिए होता है। अच्छा खाओ, अच्छे रेस्टोरेंट में जाओ, अच्छा खाना बनाओ। टेस्ट को हमने सेटिस्फाई किया। अच्छा देखो, सुंदर जगह पे जाओ, सुंदरता देखो, आंखों को सेटिस्फाई किया। अच्छे गाने सुनो, अपनी तारीफ सुनो, कान को सेटिस्फाई किया, अच्छा स्पर्श करो। हर चीज अच्छी चाहिए। एक्स्ट्रामरल एफआर भी तो वही है। आपकी इंद्रियों को सेटिस्फाई करने का है। और इंद्रियां इतनी स्मार्ट है कि जितना सेटिस्फाई करोगे उतना
(33:00) और मांगेगी वो क्रेविंग क्रिएट करेगा। बिल्कुल। तो वो एक बार एक्स्ट्रा एफआर हो गया तो धीरे-धीरे वो चलता रहेगा। दिल मांगे और दिल मांगे और करते जाओ करते जाओ। वहां से रिलेशनशिप के प्रॉब्लम, हेल्थ के प्रॉब्लम ये प्रॉब्लम शुरू हो जाते हैं। हम समझे ना? तो इंद्रियों को कंट्रोल नहीं कर पाते क्योंकि किसी ने बताया नहीं कैसे करना है जो पतली योग सूत्र में बताया पतली योग सूत्र का एक अष्टांग योग का रास्ता है उसमें पांचवा स्टेप है प्रत्याहार पत सॉरी प्रत्याहार यानी अपनी सेंसेस को कंट्रोल करने का कंट्रोलिंग योर फाइव सेंसेस तो उसको पूरा विज्ञान है कैसे इसको करना
(33:39) है तो अगर प्रत्याहार सिर्फ एक ही स्टेप करेंगे अष्टांग योग के जो पता नहीं योग का सिस्टम उसमें तो ही आपके आधे दुख कम हो जाएंगे। डायबिटीज क्यों होता है? शुगर क्यों होता है? मोटापा क्यों होता है? खाने का शौक बंद नहीं होता है। इसको सेटिस्फाई करते जाओ, करते जाओ। थोड़ी देर मजा आएगा। फिर बोलेगा चलो और अच्छा खाते हैं और अच्छे रेस्टोरेंट में जाते हैं। सेम चीज होती है। तो देखिए पता नहीं सूत्र में जो पांचवा स्टेप है वो कितना इंपॉर्टेंट है। ज्यादातर दुख का यही कारण है। सेम पैसा क्यों चाहिए? और मजे करने के लिए चाहिए। अब कि जरूरत से ज्यादा पैसा
(34:13) क्यों चाहिए? और मजे करने के लिए और क्या है? 5000 करोड़ का क्या यूज करोगे बताओ? मेरे प्रोग्राम में आते हैं। मैं बोलता हूं क्या तुम्हारा गोल है? सर मुझे मुझे 5000 करोड़ कमाना है। बोला वेरी गुड लिख यहां पे। अब मुझे बताओ कि 5000 करोड़ तू कैसे यूज़ करेगा? तेरे पास कोई प्लान है? बोले नहीं प्लान है। फिर मैं बोला तुझे कैसे आईडिया आया कि मुझे कमाना है। कंपटीशन देख के दूसरे की। अब 5000 करोड़ कमा के तुम करेगा क्या? यह बताओ। तुम्हारी जरूरत कितनी है? कभी-कभी तो उसको सेंस पर लाने के लिए मैं बिठा के बोलता हूं कि चल मेरे सामने बैठ तेरे आज घर का खर्चा कितना
(34:46) है लिख अगले 50 साल का खर्चा कितना होगा इनफ्लेशन के साथ लिख तेरे शौक क्या है वो शौक का खर्चा महीने का कितना है लिख दारू पीने का सिगरेट पीने का जुआ खेलने का जो भी है लिखना है दुनिया घूमने का लिख इनफ्लेशन के साथ लिख और इनसिक्योर फील होता है तो सिक्योरिटी के लिए कितना पैसा चाहिए लिख अब टोटल कर कितना होता 50 करोड़ से ज्यादा किसी का नहीं हुआ आज तक कितनी भी लग्जरी की बात करें तो 5000 करोड़ के पीछे क्यों भाग रहा है भाई तुम उसके लिए तुम कितना सैक्रिफाइस करना पड़ेगा नेम सैक्रिफाइस करनी पड़ेगी फैमिली लाइफ सैक्रिफाइस करनी पड़ेगी हेल्थ
(35:22) सैक्रिफाइस करनी पड़ेगी राकेश झुनझुन वाला का एग्जांपल है हमारे सामने 45000 करोड़ छोड़ के गए पिछले छ साल उनके व्हीलचेयर में थे छ साल से भी ज्यादा प्लेजर प्लेजर प्लेजर रात को छह दारू के पैक पीने करने का खुद ने रियलाइज किया कि मैंने हेल्थ कोने के लिए किया। यह पैसा क्या काम आया उनके लोग समझते नहीं है। बेसिकली सुखी होने का एक फार्मूला है बैलेंस लाइफ। बैलेंस लाइफ हमारा गोल ऐसा होना चाहिए। फिजिकल गोल, मेंटल गोल, सोशल गोल एंड स्पिरिचुअल गोल। हम गोल रखते हैं तो सिर्फ फाइनेंसियल गोल रखते हैं। बस पैसा कमाना, गाड़ी, बंगला यही गोल रखते हैं। बाकी सब
(36:01) गोल नेगलेक्ट होते हैं और नेगलेक्ट होते हैं तो वही प्रॉब्लम शुरू होता है। आपने तो एक एग्जांपल दिया कि कोई ऐसा आया जो 5000 करोड़ की आपके सामने बात किया कि उसका मैनिफेस्टेशन है। उसको करना है। बट बहुत बार ऐसा भी होता है ना कि हमारे माइंड में वो पावर ही नहीं होता है कि हम अपने बारे में यह सोच भी सके कि दैट हम उस लेवल पे कुछ कमा सकते हैं। जैसे बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो यह भी नहीं अस्यूम कर पाते हैं कि उनमें इतनी कैपेसिटी है कि वो महीने का ₹1 लाख बहुत ईजीली कमा सकते हैं। उस उनका माइंड उनको इस लेवल के लिए अलाउ ही नहीं करता है। वो जब सोचते हैं कि
(36:36) कुछ करना है या बिजनेस का प्लान बनाते हैं या स्ट्रेटजी बनाते हैं। तो फिर उनका माइंड उनको कहता है भाई तू इसके लिए नहीं बना है। तू कहां से यह सब चीजें सोच रहा? तू इतने में ही गुजारा कर ले। मैं भी बहुत लोगों से मिलती हूं या बातचीत करती हूं। मैं मेरा इतना ही हो जाए ना बहुत है मेरे लिए मुझे मैं कैसे यह सब कर सकता हूं। मेरे अंदर थोड़ी इस लेवल का टैलेंट है या मैं थोड़ी इन चीजों के लिए बनाऊं। यानी कि इनसिक्योरिटी कि मेरे पास जो है वो मेरा चला जाएगा फियर कि मैं उस लेवल पर पहुंच ही नहीं सकता हूं। और दूसरी चीज कि अपने आपको यह स्वीकार कर लेना कि मुझसे अच्छा
(37:12) सामने वाला है। मैं तो भाई हूं ही नहीं उस तरीके का। ये जो ये फैक्टर्स हैं ये कैसे आदमी हटा सकता है और कैसे अपने माइंड को इस लेवल पर ट्रेन कर सकता है सर ये दैट यू कैन डू वन ये देखिए बिलीफ नाम का ब्लॉक होता है हम देखिए दुनिया में सबसे मजबूत कोई जेल है ना तो हमारी मान्यता की जेल है ये तिहाड़ जेल यरवाड़ा जेल साबरमती जेल कोई बड़ी जेल नहीं है इसको [हंसी] तो बहुत लोगों ने तोड़ा है मगर ये जो हमारी मान्यता की जेल है ना एक ही आदमी ने तोड़ा है जिनको मैं जानता हूं दुनिया जानती वह मोहनदास करमचंद गांधी उन्होंने अपनी मान्यता की जेल तोड़ी और
(37:50) महात्मा गांधी बन गए। कैसे तोड़ी? सत्य के प्रयोग करके। किसके ऊपर सत्य के प्रयोग किए? अपनी मान्यता के ऊपर। हर चीज के बारे में क्या मान्यता है? उसको उसने चेक किया। जो सही नहीं थी उसको बदला और महात्मा गांधी बन गए। तो हमें यह जो रोकता है ना पैसे के बारे में हमारी मान्यताएं होती है। मैं कभी नहीं सोच सकता था एक जमाने में कि महीने का लाख रुपया कमा सकता हूं मैं। एक बार तो अभी-अभी के बात है 15 20 साल पहले मैं किसी को बोला ₹ लाख अगर मेरे पास हो ना तो मुझे लाइफ लॉन्ग पैसा कमाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तो मैं यह सोच रहा था
(38:25) कि मेरी 8 लाख ₹8 लाख में अगले 50 साल निकल जाएंगे। ये मेरी सोच हुआ करती थी। आज मैं ₹8 लाख एक दिन में भी कमा लेता हूं। समझे ना? तो मैंने यह सोच बढ़ाई। तब मेरी सोच ऐसी थी। ठीक है? मैंने कभी बचपन में ऐसा पैसा देखा ही नहीं। मेरा प्रोग्रामिंग हो चुका था। मेरे फादर हमारे घर में पैसा रहा ही नहीं करता था। मेरी मम्मी मेरे फादर से मांगा करती थी। वो टालते रहते थे। कल दूंगा कल दूंगा। यही मैंने देखा है। तो यही जीवन है। ऐसा मेरा प्रोग्रामिंग हो गया था। पैसे के अभाव में रहने का मेरा प्रोग्रामिंग हो गया था। तो उसके आगे सोचना ही मुश्किल होता है। और इसको होल्ड
(38:58) करना भी मुश्किल होता है। इसका एग्जांपल है। आपको पता है कि जितने सामान्य लोगों को लॉटरी लगती है, जैकपॉट लगता है, उसका क्या हालत होता है? 5 साल के बाद उसकी स्टडी हुई है। वह पहले से ज्यादा गरीब बन जाते हैं। उनको होल्ड करना भी नहीं आता। उनकी माइंड की कैपेसिटी क्या बाहर है कि आप महीने का 500 में नौकरी कर रहे हैं और केबीसी में चले गए और वहां से 10 करोड़ का आपको चेक दे दिया तो 10 करोड़ 5 साल में खत्म भी हो जाएंगे और पहले से गरीब ज्यादा हो जाएंगे। क्योंकि यह माइंड प्रोग्रामिंग है। यह माइंड प्रोग्रामिंग है। जो हम सालों से
(39:34) सोच रहे थे, जो जीवन जी रहे थे, वो हमारे ऊपर इतना कंट्रोल कर लेता है कि उसके आगे सोच नहीं सकते। फिर किताब आई मैजिक ऑफ थिंकिंग भी डेविड स्व की तब मुझे पता चला कि यह सब हम तोड़ सकते हैं। मैंने पढ़ी बहुत साल पहले पढ़ी थी। मैंने थिंक एंड ग्रो रिच किताब पढ़ी। तब तक मेरा पॉवर्टी का ही प्रोग्रामिंग था। सोलो मैं डॉक्टर बना, एमबीबीएस हुआ और एक महीने के बाद मेरे फादर ने मेरी शादी करवा दी। जबरदस्ती नहीं करवाई मगर कर ली और मैंने गवर्नमेंट जॉब ज्वाइन किया था जिसकी तनख्वाह 3 महीने के बाद पहली आती है। तो मेरी जब शादी हुई तो मेरे फादर ने शादी का
(40:11) खर्चा तो किया मगर मेरा 3 महीने तक घर भी चलाया। प्रोग्रामिंग बिल्कुल कर लिया मैंने। आजकल लोग ऐसी गलतियां नहीं करते हैं और फिर मेरी ₹800 तनख्वाह थी और मेरा घर छोटा पड़ रहा था। एक कमरे में रहते थे। मेरी अहमदाबाद में नौकरी थी। फिर मैं किराए के घर में रहने को गया। चार ₹00 किराया और ₹800 की तनख्वाह। ₹400 में हमारा पांच छह लोगों का फैमिली में चलाता था। कितना स्ट्रेस आया होगा। शादी के बाद का मेरा जीवन बोल रहा हूं मैं यह। फिर मैं कंटाल गया। बोला नहीं यह तो नहीं चलेगा। और मैं आई वास नॉट हैप्पी विद जॉब। बोला छोटे गांव में जाके मैं
(40:48) प्रैक्टिस करूंगा और मैंने एक जमाने में हिमालय की गोद में पिक्चर देखी थी तो मनोज कुमार की वो लाइफ से इंप्रेस था। बोला मनोज कुमार जैसा करूंगा। कोई छोटे गांव में जाके प्रैक्टिस करूंगा। मैंने एकदम प्रैक्टिस स्टार्ट कर दी वहां पे और पैसा आने लगे। रोज रोज के 300 400 आने लगे। रोज के 300 400 यानी कितना हुआ? ₹9000 हुआ ना? हम 300 हां बिल्कुल। 800 के इनकम से मैं 10 टाइम ज्यादा हो गया। हम मगर लाइफ एग्जॉस्ट हो गई। मेरी शादी के बाद एक साल मैंने विलेज में प्रैक्टिस किया। जहां इलेक्ट्रिसिटी नहीं थी, ट्रांसपोर्ट नहीं थे, रोड नहीं थे, गैस
(41:24) नहीं था, टैप वाटर नहीं था। तो मेरी वाइफ की लाइफ क्या थी? चूल्हे पे लकड़ियां जला के रसोई बनाती थी। कुएं में जाके पानी भर के आती थी। पीने का नदी पे जाके कपड़े धोती थी। मेरे क्लीनिक के सामने से वो निकलती थी। सर पे बेड़ा लेके या वो कपड़े का यह लेके धोने के लिए। यह मेरी शादी के बाद की लाइफ थी। खास बात ऐसी टॉयलेट नहीं था। वहां सब लोग खुले में जाते थे। अब मुझे तो आदत नहीं थी। मेरी वाइफ को भी नहीं थी। तो डब्बा लेके हम खेत में टॉयलेट के लिए जाया करते थे। डॉक्टर बनने के बाद और एक दिन तो ऐसा आया कि साइक्लोन आया और मुझे डायरिया
(42:02) हो गया। रात भर मुझे खेत में खुले में जाना पड़ता था। एक हाथ में छाता, एक हाथ में वो लालटेन, एक हाथ में पानी का डब्बा और ऐसे लेकर जाया करता था। वह नाइट मेरा लाइफ का फ्रस्टेटिंग था। मुझे यह लाइफ नहीं चाहिए। मुझे कुछ करना है। और फिर मैंने वह छोड़ के मुंबई गया। मुंबई में जाके मैंने एमडी किया। मेरी वाइफ को मायके भेज दिया। तीन साल तू भी पढ़ाई कर। मैं भी एमडी करता हूं। फिर हम मुंबई में घर करेंगे। तो मैंने ये फ्रस्ट्रेशन से मैंने यह पहला कदम लिया जो कोई नहीं करता है सर। है ना? तो ऐसे मेरी लाइफ में बदलाव आया। जबरदस्त।
(42:38) फिर मैंने एमडी किया। मेरी वाइफ ने बीए किया। वो कॉलेज के फर्स्ट ईयर में थी और मेरी शादी हो गई थी। मेरी 24 साल की उम्र थी। उसकी 17 साल की थी। 7 साल का गैप था हमारा। हो गई थी। उसको भी कुछ नहीं पता था। वो भी मेरे पे कदम कदम पे चलती थी। दुखी होती थी। बोलती नहीं थी। क्या करें? फादर ने भेज दिया था। जाओ घर से। पति तुम्हारा परमेश्वर है। तो वही चल रहा था। ऐसी लाइफ से मैं बाहर आया। मुंबई गया। सीखा मैं क्या सीखा? पहले तो इंग्लिश बोलना सीखा। डॉक्टर था मगर यस नो थैंक यू के अलावा बोलना नहीं आता था। तो देखा कपड़े कैसे पहनना यह सीखा। हेल्थ बनाना
(43:15) सीखा। मैंने परफेक्ट बॉडी बनाई। मैं लल्लू जैसा था दुबला पतला। तो मैंने सीखा। मैंने एक साल में 20 किलो वजन बढ़ाया। परफेक्ट बॉडी बनाई एकदम। उसके बाद मैंने एमडी की डिग्री ली। लोगों से कैसे बिहेव करना, लोगों का कैसे दिल जीतना। ऐसा मैंने सीखा और इतना सीखा कि मेरे सभी दोस्त Mercedes वाले थे और मुझे घर पर लेने को आते थे, छोड़ने को आते थे और घुमाने को लेके जाते थे। फॉरेन लेके जाते थे। [खांसने की आवाज़] ऐसे मुझे मिलने लगे। तब मैं आरब लोग मुंबई में बहुत आते थे। तो मैं मेरे ऐसे कॉमन फ्रेंड के साथ दोस्ती होती थी। वो बीमार
(43:52) होते थे। तो मैं ट्रीटमेंट के लिए मुझे बुलाते थे। होटल में जाता था। मैं एक-एक इंजेक्शन मार के ₹1000 कमाता था। जब मेरी तनख्वाह ही ₹800 थी। तो मैंने अपने को ऐसा डेवलप किया कि मुझे एक्स्ट्रा इनकम शुरू हो गई। फिर अरब लोग मुझे पूरे इंडिया घुमाने ले जाते थे। हवाई जहाज में, फाइव स्टार में जो मैंने सपने में नहीं सोचा था। ओबेरॉय ताज आज मुंबई में, कल बेंगलुरु में, परसों केरला में ऐसा मैंने लाइव एक [गला साफ़ करने की आवाज़] भी मेरा पैसा नहीं क्योंकि मैंने ऐसा मेरी पर्सनालिटी बना दी कि लोग खींच के आते पैसा वाले लोग आते थे
(44:27) खींच के कि मुझे आपसे दोस्ती करनी है। ऐसा अभी भी मेरी सबसे दोस्ती है। बड़े-बड़े धनवान लोग हैं। ऐसे मेरी सारिका से साथ पहचान हुई थी। सारिका जो है सचिन सारिका की जोड़ी थी। उसके घर पे जाके मैं गप्पे मारा करता था। वो तब एक्सीडेंट से बीमार थी तो बेड रेस्ट में थी। दोस्ती करता था। खुदा गवा पिक्चर जिसने बनाया मनोज देसाई। मेरा बडी था। मुझे अमिताभ के घर पे लेके जाता था। फिल्म वाले मुझे रिस्पेक्ट करते थे। एज अ डॉक्टर एज अ गुड पर्सनालिटी तो मैंने अपने को बहुत चेंज किया मुंबई जाके और फिर अभी पैसा नहीं था नौकरी चालू थी मेरी नौकरी का माइंडसेट था नौकरी में तो
(45:04) इतना ही तनख्वाह मिलता है [नाक से की जाने वाली आवाज़] फिर पैसे के लिए मैं भाग दौड़ शुरू की नौकरी करते-करते पैसा कमाना तो गल्फ में जाना पड़ता है बहुत मेहनत करके मैंने सऊदी अरेबिया में जॉब लिया मेरी मुंबई की लास्ट इनकम थी ₹2500 तनख्वाह सऊदी अरेबिया में नेक्स्ट डे ₹25000 की तनख्वाह और मैं 99 90 में 90 में जब छोड़ के आया तब मेरी ₹1 लाख महीने की तनख्वाह थी। आज से 37 इयर्स पहले कितने? 37 आज भी ₹1 लाख महीने की तनख्वाह बड़ी बात होती है। मेरी 37 इयर्स पहले थी तनख्वाह। मैं ₹25 लाख लेके आया था वो जमाने में सेव करके सऊदी अरेबिया से। पता नहीं क्या करना
(45:44) है। मैंने शेयर मार्केट में लगा दिए किसी के एडवाइस से। तब तेजी चल रही थी और अचानक हर्षद मेहता का स्कैंडल खुला शेयर मार्केट नीचे गया मेरा सब पैसा डूब गया 5 लाख हो गया ₹2 लाख का फिर वही एबीसीडी वाली बात वहां लाख तनख्वाह दी यहां ₹4000 की मेडिकल कॉलेज की नौकरी स्टार्ट किया वहां मैं Mercedes लेके घूमता था यहां मैंने बजाज स्कूटर लिया और वहां से जिंदगी की शुरुआत की फिर से मैं एसी के बिना सोता नहीं था यहां पंखे में सोना शुरू किया ऐसे अप एंड डाउन आना शुरू हो गया मेरी लाइफ में मगर अगर ये सब अप एंड डाउन ने मुझे जिंदगी में
(46:19) बहुत कुछ सिखाया जिसने मुझे मैच्योर बनाया। आज मैं लोगों को सिखा सकता हूं। लोगों को मेरी लाइफ इसलिए पसंद आती है कि मैं सब अनुभव से सीखा हुआ बोलता हूं। अभी आज के यंग ट्रेनर क्या करते हैं? किताबें पढ़ लिया, दो चार सेमिनार कर लिया और सीख लिया और टाइल मारना सीख लिया। स्टेज पे जाके कुछ भी बोल लेते हैं। लोग खुश भी होता है, फायदा भी होता है। मगर मेरा जो सिखाने का वो मेरा अनुभव से निकला है। मैंने देखा है कि गरीबी देखा है। पैसे को गिरते हुए देखा है। पैसे को उठाते हुए देखा है। सऊदी अरेबिया में एक जमाना ऐसा था मैं एक दिन
(46:51) में 1 लाख का शॉपिंग किया है। पहली कार Mercedes खरीदी थी मैंने। वहां से लेके Bajaj चेतक पे आ गया था। ये हुआ था। तो कहने का मतलब है कि सब लोग अनुभव से नहीं सीखना चाहिए। जो हमारे दर्शक मित्र देख रहे हैं उनको बोलता हूं कि आप हमारी लाइफ इतनी बड़ी नहीं होती कि खुद अनुभव करके सीखें। दूसरे के अनुभव से सीखें। अब जैसे मेरे अनुभव बता रहा हूं तो उसमें से कुछ आप सीखें कि ऐसा नहीं करना चाहिए जो मैंने गलती की है। पहली बात तो तनख्वाह नहीं आई और शादी कर ली। करियर के बारे में सोचा नहीं और शादी कर ली फादर के कहने पे। पहले अपने ये करो। शादी भी फादर के पैसे
(47:27) से घर भी फादर चला रहे। वो भी पहले से गरीब थे और हम गरीब बन गए। उसकी वजह से तो ऐसा नहीं करना चाहिए। दूसरी बात यह है कि अगर आपको जीवन में आगे बढ़ना है तो अपने आपको आगे बढ़ाना पड़ेगा। थ्री एडिट में डायलॉग है। कामयाबी के पीछे मत भागो। काबिल बनो। लोग क्या करते हैं? काबिल नहीं बनते। कामयाबी के पीछे भागते हैं। काबिल बनना यानी नॉलेज एंड स्किल डेवलप करना। जो मैंने बंबई में सबसे पहला काम किया। बॉडी बनाने का, लोगों के साथ क्या व्यवहार करना, कैसे कपड़े पहनना, इंग्लिश बोलने का, सोच कैसी होनी चाहिए? बहुत कुछ पढ़ने लगा मैं और बड़े-बड़े मेरे साथ
(48:03) ओपोरर्चुनिटी आने लगी। मैंने एक गवर्नमेंट की डॉक्यूमेंट्री में एज अ डॉक्टर का रोल किया था 50 साल पहले मैटर ऑफ लाइफ एंड डेथ करके थी। उसमें मैंने डॉक्टर का रोल किया था। वो डॉक्यूमेंट्री को इंटरनेशनल अवार्ड मिला। वो मैंने ऐसी पर्सनालिटी बनाई तब यह सब कुछ हुआ। मेरी हॉस्पिटल में शूटिंग होने वाला था और वो डायरेक्टर मेरे से बात करने को आया। मैं एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट पे था कि मुझे यहां शूटिंग करना है। मुझे परमिशन दो। तो मेरे से बात करते-करते इंप्रेस हो गया। बोले सर आप तो बहुत अच्छा बोलते हो। आप दिखते भी अच्छे हो। तो आप ही
(48:33) इसमें डॉक्टर का रोल कर दो। मैं बोला कर देता हूं। तो मैंने डॉक्टर का रोल भी किया। चंकी पांडे के फादर डॉक्टर शरद पांडे बहुत बड़े कार्डियोलॉजिस्ट थे। उन्होंने एक मैगजीन निकाला बॉडी एंड ब्यूटी केयर। तो उनको मेरे बारे में पता चला। उसने मुझे आर्टिकल लिखने का ऑफर किया। तो मैं इंग्लिश में आर्टिकल लिखना शुरू कर दिया बॉडी केयर के ऊपर। तो ऐसे-ऐसे जीवन में बनता गया। मगर उसके लिए मैंने अपने को अपग्रेड करता गया। अपग्रेड करता गया। कामयाबी के पीछे नहीं भागा। मेरे अपने आप को काबिल किया। फिर मुझे पब्लिक स्पीकिंग नहीं आता था। फिर मैंने
(49:05) वहां पब्लिक स्पीकिंग की बकायदा ट्रेनिंग ली। मुंबई में। पब्लिक स्पीकिंग सीखा तो बोलने की आदत बन गई। फिर मेडिकल कॉलेज जॉब में स्टूडेंट को सिखाता था। तो इंग्लिश बोलने की प्रैक्टिस हो गई। वहां तो इंग्लिश में लेना पड़ता है। पब्लिक स्पीकिंग का कॉन्फिडेंस बढ़ गया। स्टूडेंट मेरे से इंप्रेस होने लगे। तब पता चला कि मैं अच्छा स्पीकर हूं, ट्रेनर हूं। ऐसे-से मेरी जर्नी चलती गई। तो कहने का मतलब यह है कि अगर यह जो देख रहे हैं वो कामयाबी सॉरी कामयाबी के पीछे नहीं भागे और काबिलियत हासिल करें ना तो यह सब कुछ होने वाला है। आप अपने ऊपर फोकस करो। अपने आप
(49:39) को इंस्पेक्ट करो और खास करके माइंड को चेंज करो। क्योंकि हमारा जो व्यवहार है ना वह माइंड से आता है। अगर माइंड का प्रोग्रामिंग सही हुआ ना तो आपका बिहेवियर सही रहेगा और रिजल्ट भी सही रहेगा। तो मैं अंदर भी चेंज करता गया, बाहर भी चेंज करता गया, कूल होता गया। मैं वेरी एंग्री यंग मैन था। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैं एमबीबीएस करने के बाद इंटर्नशिप में ऐसी लड़ाई की थी कि सामने वाले के फ्रैक्चर कर दिए थे। हॉकी और पाइप से मारा था उसको। इतना [हंसी] एंग्री यंग मैन था। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैं डॉक्टर बनने के बाद एक बार अहमदाबाद
(50:09) में एक रिक्शा वाले के साथ मारपीट कर ली थी मैंने। हम मगर बाद में समझा कि ये सही नहीं है। फिर मैंने मन को शांत करने की मेरी प्रैक्टिस की। मैंने सेवन हैबिट्स ऑफ हाईली इफेक्टिव पीपल पढ़ी। जिसमें पहली हैबिट है बी प्रोएक्टिव। तो अपने ऊपर मैंने एक्सपेरिमेंट किया कि मुझे रिएक्टिव नहीं बनना है, प्रोएक्टिव बनना है। तो बहुत कुछ मैं चेंज करता गया, चेंज करता गया। अब मेरे पास सब कुछ है। आप देख सकते हैं हेल्थ है, रिलेशनशिप है। मेरे दो घर हैं। एक अहमदाबाद में, एक न्यूयॉर्क में है। मैं हर साल वेकेशन करने को न्यूयॉर्क जाता हूं और दुनिया घूमता रहता हूं। लोग
(50:42) मुझे स्पोंसर करते हैं। मैं 45 कंट्री में से हार्डली फाइव कंट्रीज में मेरा खर्चा किया होगा। लोगों के खर्चे पर मैंने वर्ल्ड ट्रैवल किया है यह फील्ड में आने के बाद और लोग खुश होते हैं। मुझे वहां अपने घर में रखते हैं। एयरपोर्ट पे लेने को आते हैं। टिकट भेजते हैं। शॉपिंग करवाते हैं। यह iPhone मुझे गिफ्ट में मिला था। लास्ट अमेरिकन ट्रिप में जबरदस्ती दिया मुझे केलेलो साहब करके। एक लैपटॉप मुझे गिफ्ट किया। गाड़ी गिफ्ट मिली मुझे दीपक डबलिया करके एक मेरा स्टूडेंट है। उसने 20 लाख का गाड़ी गिफ्ट किया। यह सब कुछ हुआ क्योंकि मैं अपने उसके लिए
(51:14) लायक बना। मैं फोकस यह किया कि मैं कैसे अच्छा इंसान बन सकता हूं। इंटेंशन से भी और एक्शन से भी और विचारों से सबसे तो मैं लोगों को यही कहता हूं कि अपने आप को अपग्रेड करना शुरू करो। लाइफ के बारे में सोचो। रिटायरमेंट के बारे में सोचो। आपकी रिलेशनशिप बिगड़ी हुई है तो सोचो। और इसमें एयरलेस बॉडी में हमने एक हार्व यूनिवर्सिटी की स्टडी लिखी है। दुनिया को मालूम है हार्व यूनिवर्सिटी दुनिया की नंबर वन यूनिवर्सिटी है। उन्होंने यह स्टडी किया कि लोग लंबा कैसे जीते हैं और सुखी कैसे होते हैं। आज से 85 इयर्स पहले स्टडी हुई जो आज भी चल रही है।
(51:53) और थर्ड जनरेशन आ गई स्टडी चालू है। उन्होंने यह ढूंढ के निकाला कि सुखी होने का लंबा जीने का एक ही रास्ता है। फैमिली के साथ मिलजुल के रहो और कोई रास्ता नहीं है। यस जो आज खत्म होते जा रहा है जो आज खत्म होते जा रहा है तो आप हैप्पी कैसे हो सकता है? आप लंबा कैसे जीने जी सकते हैं? वै ट्रू समझे ना? और जो भी लोग 100 साल से ज्यादा जीते हैं। ऐसे दुनिया में बहुत सारे पॉकेट्स है जिसको ब्लू ज़ों्स कहते हैं। उसमें से एक फेमस है जो आजकल वो ओकिनावा आइलैंड है जापान का जिसके ऊपर इकी का एक पुस्तक आया। तो साइंटिस्ट ने स्टडी किया कि लोग लंबा कैसे जीते हैं, सुखे कैसे
(52:30) होते हैं? तो उन्होंने तीन चार चीजें कॉमनली जो उसने फाइंड आउट की वो मिलजुल के रहते हैं। नियमित जीते हैं। नींद अच्छी लेते हैं। शारीरिक श्रम करते हैं। सिंपल फूड खाते हैं। उनके जीवन में स्ट्रेस नहीं होता है। तो ये उसकी इच्छाएं को कंट्रोल रखते हैं। वहां ईएमआई का कोई चक्कर ही नहीं है। जो है उसमें खुश है। वो लोग ज्यादा सुखी होते हैं और ज्यादा लंबा जीते हैं। ये स्टडी हुई है। तो यही और नेचर के साथ जुड़े रहते हैं। तो यही चीज मैंने एलेस बॉडी किताब में लिखी है कि जो अभी प्रूवन टेक्निक है जो यह भी कहते हैं हार्व की स्टडी कहते हैं कि मिलजुल के रहो
(53:08) और आजकल तो मैंने देखा है शादी के पहले ही हस्बैंड को मार दिया। अब क्या समाज पहुंच गया आपने सुना होगा एक किस्सा था ऐसे गए थे और उसको धक्का मार के फेंक दिया। शादी के एक दिन के बाद डिवोर्स की बात हुई। ऐसे में मैं किस्सा जानता हूं। 8 दिन के बाद डिवोर्स की बात चलना शुरू हो गया। यह भी मैं जानता हूं। बहुत कुछ जानता हूं। तो लोगों को पता ही नहीं है कि हम कहां भाग रहे हैं, क्या कर रहे हैं। एक्चुअली मुझे ऐसा लगता है ना सर कि ये चीजें जो हो रही है जो जो सोसाइटी में हो रही है, एक तो सबसे पहले कि हम इंडियंस फॉरेन चीजों को ज्यादा एक्सेप्ट करने की
(53:42) होड़ में आ चुके हैं कि हमें ऐसा लगता है कि उनकी लाइफ ज्यादा सॉर्टेड है। दैट्स व्हाई हमें उनके जैसी चीजों को अपनाना चाहिए। दूसरी चीज जो आप मिलजुल के रहने की बात कर रहे हैं या हारवर्ड ने यह कहा है स्टडीज फॉरेन कंट्रीज में हो रही है। ये ऑलरेडी हमारी सनातन पद्धति है। हम बिना फैमिली के डिनर नहीं करते थे पहले। जब तक घर के मर्द घर ना आ जाए औरतें खाना नहीं परोसती थी। पूरी फैमिली साथ खाती थी। नीचे बैठ के खाती थी। हाथों से खाती थी। हम सुख-दुख की बातें करते थे। लेकिन वो सब हम खत्म कर दिए। एक्साक्ट्ली। तो हमें पता ही नहीं कि मेरे फादर हेल्दी
(54:20) हैं या नहीं। मेरे फादर को कोई प्रॉब्लम है या नहीं। भले वो मेरे घर पे हैं। वो खाना खा के हमसे पहले सो चुके हैं और हम आ रहे हैं 11:00 बजे तब हम खाना खा रहे हैं। तो यह हर घर की कहानी हो चुकी है। और हमने शायद पैसों को ज्यादा प्रायोरिटी दे दी है रेदर देन अपने रिश्तों को। मुझे ऐसा लगता है कि अगर हमारे रिश्ते अच्छे रहे तो पैसे तो आ ही जाएंगे और पैसे आने ही हैं अगर उसमें सही तरीके से काम हुआ तो। आपकी बात सही है। मैं 20 बार अमेरिका गया हूं। पूरा अमेरिका घुमा है। एक कॉर्नर से दूसरे मल्टीपल टाइम और जाता हूं तो सबके घरों
(54:52) में ही रहता हूं। होटल में कभी रहने का होता ही नहीं है मेरा। तो मैंने देखा है कि यहां जितने प्रॉब्लम है उससे ज्यादा प्रॉब्लम है। बहुत प्रॉब्लम्स है। बहुत है सर। और हमें दिखता है बढ़िया घर, बड़ी गाड़ी ये सब कुछ वो मेन टर्न का एरिया दिखता है। इतने प्रॉब्लम्स हैं। माय गॉड। आई कैन नॉट इमेजिन। जब तक आप वहां पे एक लेवल पे नहीं हो ना यू कांट अफोर्ड अ मेड। यस। आपके पास इतना यहां है फैसिलिटी कि आपको मेड इजीली एक्सेसिबल है। आपके लिए 24 घंटे आप चाहे तो उसको मेड को आप रख सकते हैं। लेकिन वहां आप ऐसा नहीं कर सकते हैं। यू हैव टू पे अ हायर सैलरी।
(55:26) यस जो यहां नॉर्मल एक सैलरी लोगों को नहीं मिलती है इन एमएसी कंपनीज़। उससे ज्यादा आपको वहां मेड को पे करना है। सो बहुत सारी चीजें ऐसी है जो हम अपने कल्चर को छोड़ते जा रहे हैं। व्हिच इज रॉन्ग। मैं आपसे कुछ क्वेश्चंस अब पूछूंगी जो शॉर्ट क्वेश्चंस होंगे सर क्योंकि मुझे लगता है कि हमने काफी लंबा समय इसमें गुजारा है। लेकिन कुछ ऐसी चीजें जो लोगों को शॉर्ट फॉर्म में आंसर्स मिले और लोग इस चीजों से आपसे इंस्पायर होके अपनी लाइफ को बदलना शुरू करें। सबसे पहले तो यह बताइए कि एक इंसान की चाहे 25 साल का है, 20 साल का है, 40 साल का है, 65 साल का है। उसकी
(56:00) डेली हैबिट्स क्या होनी चाहिए जिसको उसको डेली अपने रूटीन में इनवॉल्व जरूर कर लेना चाहिए। सबसे पहली बात है डिसिप्लिन लाइफ। मैं बहुत डिसिप्लिन से जीता हूं। मेरा 10 टू सिक्स स्लिप साइकिल है। कभी-कभी वेरिएशन होता है ट्रेवलिंग के टाइम पे जब घर से बाहर रहता हूं तभी फिर भी यहां नोएडा में मैं मेंटेन कर रहा हूं। 10:00 बजे सोता हूं, 6:00 बजे उठता हूं। उठते ही मैं मेडिटेशन करता हूं। थोड़ा आधा कप चाय के साथ खाखरा या कुछ खा लेता हूं। फिर आज मैंने दोपहर को लंच में क्या लिया है? एक काकड़ी और दो टमाटर। काकड़ी यानी खीरा। गुजराती में काकड़ी बोलते हैं।
(56:33) एक खीरा और दो टमाटर। बस वही लिया है मैंने और मेरा दिन चल रहा है आराम से एनर्जी के साथ रात को मैं सिंपल फूड लूंगा सो जाऊंगा मैंने योगा किया प्राणायाम किया वक किया मेरा मॉनिटर करता हूं मैंने कितना वक किया ऐसा मैं पहले कम हो गया था अभी मैंने फिर ज्यादा कर दिया 6000 से ज्यादा मेरे स्टेप चलने का होता है यूजुअली और एवरीथिंग इज इन डिसिप्लिन टाइम मेरा लंच का टाइम फिक्स रहता है डिनर का टाइम फिक्स रहता है सब कुछ फिक्स रहता है मेरा मोबाइल रात को बंद हो हो जाता है। 10:00 बजे मेरे सोने के टाइम पे डाइनिंग टेबल पे मेरा मोबाइल नहीं रहता है। बेडरूम में रहता है
(57:10) और मैं अननोन नंबर को जरूरत नहीं है तो उठाता भी नहीं हूं और रात को बंद करता हूं। डाइनिंग टेबल पे नहीं रहता है। यह मेरी सब डिसिप्लिन लाइफ है। मैंने योगा टीचर रखा है जो मुझे योगा करवाते हैं। यह सब चीजें जीवन में सुखी होने के लिए, सफल होने के लिए, पैसा कमाने के लिए जरूरी है। इसलिए मैं इतना पैसा कमा रहा हूं। ठीक है? पैसा कमाने के लिए पैसा हम माइंड से कमाते हैं। बॉडी से नहीं अगर बॉडी से कमाते होते तो यह जो रास्ते पर काम करते हैं मजदूर हमसे ज्यादा धनवान होते थे। और माइंड को अगर आप कैपेबल नहीं रखोगे, शांत नहीं रखोगे,
(57:43) फोकस नहीं रखोगे तो आप पैसा ज्यादा नहीं कमा सकते। तो अगर आप डिसिप्लिन लाइफ जिओगे तभी आपका मन शांत रहेगा और शांत मन से आप सही डिसीजन एक्शन लोगे तभी पैसा मिलेगा। तो धनवान बनने के लिए भी यह जरूरी है। हेल्दी रहने के लिए जरूरी है। आज तक मेरी शादी को 52 इयर्स हो गए। आज तक मैं शादी के बाद दोस्तों के साथ कभी पीछे देखने को नहीं गया। आज तक नहीं गया है। रूटीन जाता हूं तो फैमिली के साथ। अब तो देखना ही कम हो गया है। मगर देखता हूं तो सिर्फ फैमिली के साथ। मैंने ऐसे लोग देखे हैं कि शादी हो गई। 1 महीने के बाद दोस्तों के साथ टूर
(58:16) में जाते हैं। दोस्तों के साथ फिल्म देखने को जाते हैं। रात को 2-2 बजे तक रेस्टोरेंट में जाके गप्पे मारते हैं। वाइफ वेट कर रही है। मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ है। तो डिसिप्लिन लाइफ इज द मोस्टेंट थिंग जो आपको करनी चाहिए। हेल्दी रहने के लिए, सक्सेसफुल होने के लिए, सुखी होने के लिए सबके लिए। बिल्कुल। दूसरी चीज सर कि पतंजलि योग सूत्र के कौन से ऐसे अब थ्री सीक्रेट्स हैं जो अगर लोग फॉलो कर ले कुछ ऐसी तीन बातें जो आप उनमें से बताना चाहोगे। वैसे तो बहुत सारी हैं लेकिन कोई ऐसी तीन चीजें एटलीस्ट इतना भी लोग फॉलो करना शुरू कर दे
(58:49) तो उनको अपनी लाइफ में चेंजेस दिखने शुरू हो जाएंगे। जैसे मैंने कहा पतल्य योग क्या कहता है कि मन की वृत्ति को शांत करना विचारों को शांत करना यही योग है। हमने ज्यादा बात नहीं किया और मन के विचारों को शांत क्यों करना जरूरी है? कि हमारे हर प्रॉब्लम का कारण वहीं पे है। अशांत मन होता है। तो मन को शांत करना है तो उसके लिए उन्होंने तीन आईडिया दिया है। स्वाध्याय, तप एंड ईश्वर प्राणिद। स्वाध्याय यानी अपने बारे में स्टडी करो। अपने देखो कि आपकी लाइफ क्या चल रही है? आपकी हैबिट क्या है? आपकी बिलीफ सिस्टम क्या है? आप सोचते क्या हो?
(59:25) आप बिहेवियर करते हो और उसको इंप्रूव करो। दूसरा है तप। तप यानी मेडिटेशन। ज्यादा से ज्यादा मेडिटेशन करो ताकि आपका मन शांत हो जाए और तीसरा है ईश्वर प्राणिधान यानी भगवान के ऊपर छोड़ दो। आप कर्म करो जैसे भगवत गीता में कहते हैं कि कर्म के ऊपर आपका अधिकार है फल के ऊपर नहीं है। आप कितनी मेहनत करो फिर भी हो सकता है सफल नहीं हो। हमने इतनी मेहनत करके अभी पडकास्ट शूट किया। हो सकता है लोगों को पसंद नहीं भी आए। वो भगवान की इच्छा होती है। और अभी मेरा श्वेता के साथ ऐसे मजाकमज़ाक में हमने कर दिया और लोगों को पसंद आ गया। मिलियन को फटाफट क्रॉस कर
(59:58) दिया। तो ईश्वर की इच्छा होती है। तो जब आप ईश्वर प्राणिदान करोगे कि हर कर रहा है और यह करके नहीं कि मैं कर रहा हूं। मेरी वजह से पडकास्ट चल रहा है या नहीं। ये तो ईश्वर करवा रहा है। मेरे से बुलवा रहा है और जो रिजल्ट देना है वो वो देगा। तो ये तीन चीजें करेंगे ना। अपने आप को स्वाध्याय यानी खुद के बारे में सोचना। सेल्फ एनालिसिस तप करना यानी मन को शांत करने की प्रैक्टिस और ईश्वर प्राणिद हर दुख खत्म हो जाएगा आपके और सुख की तरफ जाओगे जो मैं करता हूं। अ 60 के बाद अपने आपको उस लेवल पर ले जाना कि लोगों के बारे में ना सोच के बच्चों के
(1:00:36) बारे में ना सोच के सोचना चाहिए लेकिन फर्स्ट ऑफ ऑल अपने से प्यार करना खुद को सेल्फ लव सिखाना मोस्टेंट पॉइंट सो ये कैसे आप बोलोगे कि डेवलप करे कोई अपने अंदर शिक्षा के बाद या पहले एक्चुअली जो पहले करोगे देखिए डेवलप करना यानी आदत बनाना आदत हमारी ज्यादा बचपन में बन जाती है अगर बचपन से हमारी लाइफ ऐसी रही जहां सेल्फ लव के बदले सेल्फ हैट ट्रेड हो खुद के बारे में ही नेगेटिव इमेज हो तो उसको बुढ़ापे में बदलना बहुत मुश्किल होता है। पहली बात है तो आप अपने बच्चे को ऐसे ट्रीट करो कि वो बड़े हो तब उनका सेल्फ लव चालू रहे। हम समझे ना? और हमारी दुख की बात यह है कि हम
(1:01:12) दूसरे को प्यार कर सकते हैं। खुद को नहीं कर सकते। खुद को नहीं कर सकते। हमारी अपने बारे में इमेज गलत रहती है। तो हमें उसके ऊपर काम करना पड़ेगा। अपनी इमेज को इंप्रूव करने के लिए सबसे पहला प्यार अपने ऊपर करना चाहिए। और दूसरी बात है कि एज अ मेडिकल डॉक्टर और एज अ यह सब चीजें मैं जानता हूं कि लव इज द बेस्ट मेडिसिन एंड वो भी सेल्फ लव इज द बेस्ट मेडिसिन। दुनिया वाले सब अपने-अपने में बिजी है। मगर हमारे पास एक मेडिसिन है खुद की वो लव है। तो अगर सेल्फ लव करना चालू करेंगे तो आपके हेल्थ के प्रॉब्लम भी सॉल्व हो जाएंगे। मगर यह नहीं होता है बुढ़ापे में
(1:01:47) क्योंकि इसके बारे में अज्ञानता है। लोगों को पता नहीं है कि इसकीेंस क्या है और इसके लिए कभी उसने कोशिश ही नहीं किया है। आजकल तो ये इंटरनेट की वजह से पडकास्ट की वजह से इतना ज्ञान लोगों में फैल रहा है कि कहीं ना कहीं ये नॉलेज मिल जाएगा कि सेल्फ लव कैसे करना है। समझे ना? और सेल्फ लव क्या होता है कि बचपन में हमने हमारे बारे में गलत बातें सुनी है तो हमारे लिए हेट्रेड हो जाता है। वो इसको एफमेशन कहते हैं। बार-बार हमारे अंदर बोल के डाला गया तू काला है, तू काली है, तू इडियट है। तो हम अपनी छवि बिगाड़ते गए तो हमारे लिए लव
(1:02:20) नहीं रहा। तो नया अफमेशन चालू करो। आईने में देख के बोलो। आई लव यू। आई लव यू। आई लव यू। यू आर अ स्मार्ट गाय। यू आर अ स्मार्ट गाय। बोलो। तो वही हमारा सबकॉन्शियस माइंड है ना बुद्धू है। यह इमोशन हमारे सबकॉन्शियस माइंड में है। थ्री डेट में बोलते हैं यह दिल है ना वो बड़ा बुद्धू है। उसको बुद्धू बना के रखो। बाहर सब कुछ गलत है। फिर भी बोला ऑल इज वेल ऑल इज वेल। ये बहुत अच्छा उसने बताया है। तो ये ऑल इज वेल वाली बातें ना वो सेल्फ लव के लिए बहुत जरूरी है। तो अगर आप एक बार डिसाइड करो कि मुझे सेल्फ लव की जरूरत है। मेरे जीवन में
(1:02:53) सेल्फ लव की कमी है। लोगों के पास मुझे लव करने का टाइम नहीं है। कोई बात नहीं। खुद का लव शुरू कर दो और उसके लिए आईने में देख के बोला करो। आई लव यू। आई लव यू। यू आर अ नाइस पर्सन। आई लव यू। आई लव यू। सबकॉन्शियस माइंड यह नहीं सोचेगा कि उसके फादर बोल रहे हैं, मदर बोल रहे हैं या खुद बोल रहा है। वो नहीं सोचेगा। उसको जो अंदर फीडिंग जा रहा है वो डेवलप करेगा। सीधी बात है। तो आप सेल्फ लव डेवलप कर सकते हैं। ऐसा। सो और लुईस एक किताब है। यू कैन हील योर लाइफ। उसके अंदर ये प्रैक्टिस करवाती है हर मरीज को। ये मिरर प्रैक्टिस करवाती है। सामने
(1:03:26) देख के बोलो आई लव यू। आई लव यू। यह बहुत छोटी-छोटी चीजें हैं। अगर लोग अपनी लाइफ में इसको ले लेन इट कैन क्रिएट अ मिरेकल्स। बट लोग लोगों को यह लगता है कि बेवकूफी है। ये क्या पागलपंती है? मैं क्यों ऐसे बोलूं? मैं क्यों इस तरीके से करूं? एवरीथिंग इज गोइंग इन द लॉजिक। लॉजिक चीज है। अच्छा एक और सर आखिरी सवाल मैं आपसे यह पूछना चाहूंगी कि लोग आपसे जुड़ना चाहे अगर ठीक है? और लोग आपके बुक्स को परचेस करना चाहे क्योंकि आपकी मार्केट में बहुत सी बुक्स है जो आपकी बुक है मेरी। 135 बुक्स है सर की जो अलग-अलग टॉपिक्स पे है, माइंड पे है, मन
(1:04:00) पे है, ब्रेन पे है, यूजलेस बॉडी मनी के ऊपर पांच पांच किताबें ट्रांजैक्शनल एनालिसिस के ऊपर 11 किताबें मेरी और ये सारी Amazon पे अवेलेबल है। सारी तो नहीं है। कुछ-कुछ है। हां। मगर जो है सर आप जरूर लोगों को और है। अभी तो टेक्नोलॉजी आ गई तो मैं ऐसा कर रहा हूं कि सबको क्यूआर कोड देता हूं। यहां भी हम क्यूआर कोड डाल सकते हैं। तो हमारे साथ कांटेक्ट में भी रह सकते हैं। दूसरी बात है कि मैं पहले सोशल मीडिया पे बहुत एक्टिव नहीं था। यह मेरी गलती है क्योंकि आप कढ़े हुए हैं ना सर धीरे धीरे धीरे धीरे सर सब लोग बोलते हैं साहब इतने आपके पास
(1:04:31) ज्ञान है और आप सोशल मीडिया पे तो बिल्कुल दिखते ही नहीं हो हां तो अभी मेरी अवेयरनेस क्रिएट हुई है तो मैं गोल सेट करता हूं मेरी लाइफ में मैनिफेस्ट होता है तो मैंने गोल सेट किया है 200 किताब का लेखक और 100 सोशल पडकास्ट तो अभी तक 30 को तो हमने क्रॉस कर दिया है ऐसा जो एक बार करता है दूसरी बार तीसरी बार करते रहते हैं तो बहुत जल्द मेरे 100 पडकास्ट हो जाएंगे अभी भी बहुत अच्छे पडकास्ट चल रहे हैं। तो मेरे साथ मेरा नॉलेज लेने का एक जरिया है। मेरी पडकास्ट देखते रहिए। मेरी किताब अभी मैं मैं Facebook पे हूं। inा पे हूं। हर
(1:05:04) सोशल मीडिया पे छाया हुआ हूं। अभी और मैं कोशिश कर रहा हूं कि उसमें मेरे फॉलोवर्स बढ़ते जाए। यही है। पर्सनली मैं ज्यादा मिलता नहीं हूं। मेरा पर्सनल टेलीफोन नहीं देता हूं। मगर मेरी कंपनी को फोन करके लोग मेरा टेलीफोन नंबर निकाल के मुझे फोन करते रहते हैं। यह है अब तो मैं यह सोच रहा हूं कि मुझे कब तक मुझे मार्केट में रहना है। मगर मेरा नॉलेज मार्केट में रहना चाहिए। तो एजलेस मैं माइंड पावर के ट्रेनर बहुत तैयार किए। जैसे आप जानते हो स्नेह देसाई, हिमानी युवाएसआर ये सब मेरे ट्रेनर हैं। तो सब ये करते हैं। मगर मैं सोचा कि वो तो
(1:05:38) बहुत ट्रेनर हो गए। अब एयरलेस बॉडी का ट्रेनर कोई भी नहीं है। तो मैं एयरलेस एयरलेस ट्रेन अह बॉडी के ट्रेनर बनाना चाहता हूं। एयरलेस बॉडी के क्लीनिक करना स्टार्ट करता हूं। आज ही मुझे आते-आते ही मैसेज मिला अहमदाबाद सॉरी आज ही आते-आते मुझे मैसेज मिला राजकोट का एक डॉक्टर है डॉक्टर उसका नाम मैं भूल गया कि मुझे एडलेस क्लीनिक खोलना है। मेरी हॉस्पिटल है उसमें। तो अभी डॉक्टर के फोन आने लगते हैं मेरी किताब पढ़ के। तब मैं नया कांसेप्ट ला रहा हूं कि हर सिटी में मेरे एजलेस क्लीनिक भी होंगे क्योंकि इसके ऊपर मेरा बहुत सारे नॉलेज है तो वो तब होंगे जब
(1:06:11) मेरे ट्रेनर होंगे तो मैं एलेस बॉडी का ट्रेनर बना रहा हूं तो मेरी इच्छा है कि मैं 100 पावरफुल ट्रेनर बना दूं जिसमें श्वेता मेरे साथ काम करने वाली है कि हम एजलेस बॉडी का ट्रेनर बनाए क्योंकि उनका दुबई में क्लीनिक है वो एजलेस बॉडी का ही क्लीनिक है तो हम वो दुबई की टेक्नोलॉजी यहां लाके यह करेंगे तो हर जगह यह रहेगा तो इसके जरिए जुड़ सकते हैं फिर पतान योग सूत्र में सेवा के रूप में कर रहा हूं। रॉयल्टी भी नहीं लेता हूं। प्रॉफिट भी नहीं लेता हूं। जो कॉस्ट में छपती है वही कॉस्ट में मैं लोगों को देता हूं। तो वो खरीद सकते हैं। मैं उसके भी 100 ट्रेनर
(1:06:44) तैयार करना चाहता हूं। मैं मेरी जो ट्रेनर बनाने की फीस बहुत तगड़ी है मेरी। मगर पतली योग की ट्रेनर फी है वो जीरो है। मगर कुछ कमिटमेंट उनसे लेना है मुझे। मगर मैं कोई ट्रेनिंग चार्ज नहीं लूंगा। तो मैं अभी 100 ट्रेनर में पता नहीं युग सूत्र के बनाना चाहता हूं कि जो नॉलेज अभी मैंने गेन किया उसके अंदर जल्दी से जल्दी इंस्टॉल कर दो बिफोर आई रिटायर फाइनली तो वो लोग अपना ज्ञान और फैलाएंगे ना बिल्कुल तो ये होगा तो अब मैं ये भी प्रोजेक्ट के ऊपर काम कर रहा हूं कि जो लोग ये देख रहे हैं उनको अगर पतली योग के ट्रेनर बनना चाहते हैं एडलेस्ट के बनना चाहते हैं तो
(1:07:20) हम क्यूआर कोड दे देंगे जो Google फॉर्म खुलेगा वही आईडिया है अच्छी कि वो हमें Google फॉर्म एक तरीके से वो फोन नंबर देने से क्या होता है? अनलिमिटेड फोन आने शुरू हो जाते हैं और हमारी लाइफ का भी तो रेस्ट्रिक्शन होता है। मैं ज्यादा आपने देखा होगा सुबह से एक भी फोन मुझे नहीं आया। आप मुझे तीन-चार घंटे से मेरे साथ में हो। इन्होंने देखा है नहीं आता है। मैं अपनी लाइफ को ऐसे बनाई कोई मुझे हिम्मत ही नहीं करता है पर्सनल फोन करने नहीं, यह जरूरी भी है। लोग आपसे सीख भी रहे हैं ऑनलाइन और सारी चीजों को देख के। और मुझे यह लगता है कि पतंजलि योग
(1:07:49) सूत्र की जो आप बात कर रहे हैं अगर आप ट्रेन होते हैं, कमिटमेंट देते हैं तो आप एक तरीके से एक रोजगार के अवसर भी लोगों के लिए आप ओपन कर रहे हो। और वो पैसा कमा सकते हैं। मैं नहीं कमाऊंगा। एक काम योग सीख ले। वो पैसा देके दुनिया को सिखाए। मेरे पास से एक प्रिंटेड कोर्स में किताब खरीदे और प्रॉफिट के साथ बेचे। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है क्योंकि उनका तो कमाने का बाकी है। मैं कमा के बैठा हूं। मेरे स्टूडेंट थोड़े कमा के बैठे हैं। उनको तो नाम कमाना अलाउड है। पैसा कमाना अलाउड है। सब कुछ अलाउड है। नहीं काम ये करना है जो मैं सिखाऊंगा वो।
(1:08:20) बहुत बहुत ही शानदार आप काम कर रहे हैं सर। और मैं यह कहूंगी कि अगर कोई इस तरीके का डेडीकेशन 76 साल में दिखा सकता है तो हम 22 साल में 25 साल में 30 साल में सोशल मीडिया से ऊपर उठकर रील स्क्रोल करने से ऊपर उठ के अपने बारे में तो सोच ही सकते हैं। और जाहिर सी बात है अगर आज हमने अपना फ्यूचर सिक्योर नहीं किया तो अगर आप यह सोच रहे हो कि आने वाले टाइम में आपके बच्चों के पैसों पर आप पलोगे और उनके पैसों से सारी चीजों को करोगे देन ट्रस्ट मी स्ट्रेस में इतना रहोगे ना कि जो आपकी ऐज 80 साल की होगी हो सकता है कि आप 60 साल में ही दम तोड़ दो। क्योंकि हम फिर उस
(1:09:00) समय सोच ही नहीं सकते और हमें यह बुरा लगेगा कि हमें जब पैसे चाहिए तो हमारे बच्चे हमें उस समय पैसे नहीं दे रहे हैं और ये चीजें जब आती है ना दिमाग में तो ट्रस्ट मी बहुत ज्यादा ये खराब लगता है। सो अगर नहीं समझ में आया तो रेमंड का एग्जांपल देख लो। विजय सिंघानिया को मिलो। पूछो के क्या हालत है आपकी? 15,000 करोड़ का मालिक कंप्लीट मेन ब्रांड डायमंड जिन्होंने बनाया आज बेचारा बनके जी रहा है। घर से बाहर है। यही हो रहा है। टीवी के सामने बोल रहा है कि मेरा बेटा नालायक है। बाप बेटे के बारे में ऐसा बोल रहा है। यही हो रहा है सर। और बहुत बहुत सारे ऐसे
(1:09:34) सोशल मीडिया पे आपको एग्जांपल्स दिखेंगे कि ओल्ड एज कपल्स आते हैं। बोलते हैं बहू बेटे ने घर से निकाल दिया। बच्चे नहीं स्वीकार कर रहे हैं। और जो जो नहीं भी आ रहे हैं, वायरल नहीं भी हो रहे। आप हर दूसरे घर में जाओ। यह प्रॉब्लम्स आपको देखने को मिलेगा ही मिलेगा। सो अगर आप चाहते हो कि आपका आने वाला फ्यूचर सिक्योर रहे, आप स्वस्थ रहे तो अपने दिमाग और अपने शरीर को दौड़ाना आज से ही शुरू करो। बेड पर बैठ के फोन स्क्रोल करना छोड़ो। आप किस चीज के लिए बने हो इस चीज को तलाशो। ट्रेनिंग लेना चाहते हो सर से ट्रेनिंग लो। इनके पडकास्ट को सुनो। यह ऑफलाइन
(1:10:11) इवेंट्स भी करते हैं। इनके सोशल मीडिया हैंडल्स पे आपको इनकी सारी जानकारी मिल शेयर करो। अगर यह पडकास्ट अच्छा लगा है तो लोगों को बिल्कुल करना चाहिए और मुझे लगता है कि अगर मैं नहीं भी बोल रही हूं तो आपको जरूर करना चाहिए क्योंकि ये हर किसी के लिए है और ग्रेटट्यूड और लोगों की हेल्प करने की फीलिंग तो हमारे अंदर होनी ही चाहिए। सो थैंक यू सो मच। बहुत ही आज शानदार जानकारी मिली और उससे ज्यादा अच्छा लगा कि मैं एक ऐसे एनर्जी के साथ बैठी हूं जो मुझे इस चीजों के लिए इंस्पायर कर रहा है कि अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है और बहुत दुनिया
(1:10:46) देखनी बाकी है देन डू योर वर्क। सो थैंक यू सो मच। एक कविता पढ़ी थी बचपन में जो आज भी मुझे याद है। अमेरिकन कविता थी रॉबर्ट फ्रॉस्ट की माइल्स टू गो बिफोर आई स्लीप। या माइल्स टू गो बिफोर आई स्लीप एंड मुझे लगता है स्लीप में बहुत टाइम है हमारे पास। सो डू सम वंडर्स। सो थैंक यू सो मच सर। अगर आपको यह पडकास्ट अच्छा लगा है देन डू लाइक, शेयर एंड सब्सक्राइब दिस चैनल। और अगर आप सर से मिलना चाहते हैं, बुक उनके खरीदना चाहते हैं तो हमने नीचे क्यूआर कोड दे दिया। आप उनकी टीम से संपर्क कर सकते हैं, कांटेक्ट कर सकते हैं। हम मिलते हैं अगले पडकास्ट में कुछ
(1:11:19) नए टॉपिक के साथ, कुछ नए तैरानों के साथ।

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