Author Name:Namah Talks Podcast
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కీలక అంశాలు
అడిక్షన్ ఒక దీర్ఘకాలిక వ్యాధి.
ఇది కేవలం అలవాటు కాదు; చికిత్స అవసరమైన సమస్యగా చూడాలి.
ముందుగా సమస్యను అంగీకరించడం ముఖ్యం.
“నాకు అడిక్షన్ ఉంది” అని ఒప్పుకోవడం మార్పుకు మొదటి అడుగు.
మాస్టర్బేషన్ నార్మల్, కానీ పరిమితి దాటి సమస్య అవుతుంది.
అది సమయం వృథా చేయడం, పనులు, సంబంధాలు, లేదా సెక్సువల్ లైఫ్పై ప్రభావం చూపితే జాగ్రత్త.
వేపింగ్ సేఫ్ కాదు.
అది కూడా నికోటిన్ అడిక్షన్ను పెంచుతుంది, లంగ్ ఇంజరీలు కలిగించవచ్చు.
అల్కహాల్కి సేఫ్ లిమిట్ లేదు.
ఏ మొత్తమూ పూర్తిగా సురక్షితం కాదు అని వీడియోలో చెబుతున్నారు.
స్మోకింగ్ శరీరమంతా ప్రభావం చూపుతుంది.
లంగ్స్తో పాటు గుండె, మెదడు, కిడ్నీలు, బ్లాడర్, చర్మం, రక్తనాళాలు అన్నింటినీ ప్రభావితం చేస్తుంది.
స్మోకింగ్ మానడానికి 4 Dలు ఉపయోగపడతాయి.
Delay, Drink water, Distract yourself, Discuss — ఇవి క్రేవింగ్ను తగ్గించడంలో సహాయపడతాయి.
నికోటిన్ గమ్ మరియు ప్యాచ్లు ఉపయోగకరమైనవి.
ఇవి క్రేవింగ్, చిరాకు, ఫోకస్ సమస్యలను తగ్గించడంలో సహాయం చేస్తాయి.
కొన్ని ప్రిస్క్రిప్షన్ మందులు కూడా సహాయపడతాయి.
వేరెనిక్లైన్, బుప్రోపియన్ వంటి మందులు ఉపయోగపడవచ్చు.
కుటుంబం విమర్శించకుండా సపోర్ట్ చేయాలి.
అడిక్షన్ను నైతిక తప్పుగా కాకుండా, వైద్య సమస్యగా చూడాలి.
అడిక్షన్ చికిత్సతో నియంత్రించవచ్చు.
పూర్తిగా “ఒక్కసారిగా పోయిపోతుంది” అనే హామీ లేకపోయినా, మంచి జీవితాన్ని తిరిగి నిర్మించుకోవచ్చు.
చిన్న సారాంశం
అడిక్షన్ను ఒప్పుకోవాలి, మెల్లగా తగ్గాలి, అవసరమైతే వైద్య సహాయం తీసుకోవాలి; కుటుంబం సపోర్ట్గా ఉండాలి.
Transcript:
(00:00) हाउ टू डील विद एडिक्शन ऑफ मास्टरबेशन? मेस्टबेशन इज अ टॉपिक जिस पे लोग डिस्कस नहीं करते या मे बी जो टैबू है मैं ये बताना चाहूंगा मेस्टबेशन एक नॉर्मल ह्यूमन प्रोसेस है व्हिच इज लाइक नॉर्मल इन बोथ मेल्स एंड फीमेल्स जब तक आप नॉर्मल उसमें हैं तब तक उसकी कोई दिक्कत नहीं है। शुड बी एंड कैन बी कंटिन्यूड हम बट कहां पे लिमिट क्रॉस हो जाती है फिर जहां आपको यह लग रहा है कि आप बहुत ज्यादा समय खराब कर रहे हैं और एक्टिविटीज जो करनी थी या आपकी जो और रिलेशनशिप्स हैं उनमें इस चीज का फर्क पड़ रहा है। बहुत सारे लोगों को इसलिए दिक्कत होती है कि
(00:40) मैस्टरबेशन से क्योंकि उनके बाकी जो संबंध होते हैं वो खराब होते हैं। सबसे पहले मैं एक रैपिड फायर करूंगी जिसमें हर टाइप के एडिक्शन का मैं पूछूंगी आपसे कि हाउ टू डील विद इट। सो हाउ टू डील वि द एडिक्शन ऑफ वेप? सिगरेट के पैक पे लिखा होता है कि सिगरेट विल कॉज कैंसर। ये बात सबको पता है। पर कैंसर ऐसा नहीं है आज पी लो कल हो जाएगा। तो लोगों को उससे डर नहीं लगता उतना। डॉक्टर पे जाने से डर रहे हैं। कोई बच्चा है जो अपने घर पेरेंट्स को नहीं बता सकता कि मुझे ऐसा कोई एडिक्शन है तो घर पे क्या कर सकते हैं? आज अगर मैं स्मोकिंग करना
(01:08) छोड़ दूं तो नेक्स्ट थ्री डेज में, नेक्स्ट वन वीक में, नेक्स्ट वन मंथ में और नेक्स्ट सिक्स मंथ्स में मैं क्या-क्या अपनी बॉडी में चेंजेस देख सकती हूं? सबसे पहले यह बोला जाता है कि जब भी आपको स्मोक करना है तो आप उसको डिले करें कि अगर मेरा अभी बहुत ज्यादा मन कर रहा है मे बी मैं 15 मिनट 20 मिनट रुक जाऊं जितना भी आपकी कैपेबिलिटी हो सेकंडली हम बहुत सिंपली बोलते हैं ड्रिंक वाटर दूसरा डी होता है ड्रिंक वाटर इट विल हेल्प इट विल हेल्प टू रिड्यूस योर क्रेविंग अ बिट देन थर्ड बोला जाता है कि डिस्ट्रैक्ट योरसेल्फ टेप सिगरेट से ज्यादा सेफ है क्या ये सच
(01:39) है इन शॉर्ट नहीं स्मोकिंग छोड़ने के लिए आप मुंह में ना लौंग या क्लोव मुंह में रखो तो आपका स्मोकिंग करने का मन नहीं करता। क्या यह सच है? डॉक्टर निकोटीन के अलावा फिर क्या ऐसी चीजें हैं जो मार्केट में जो हमें स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प कर सकती है? क्योंकि निकोटीन सब जानते हैं निकोटीन पैचेस या निकोटीन गम्स। एनी अदर थिंग दैट इज हेल्पिंग अस कि जो हम स्मोकिंग छोड़ने में यूज़ करें? तो इस समय पे हमारे पास बहुत अच्छे-अच्छे इलाज हैं। पहले तो कुछ दवाइयां हैं। जैसे एक दवाई आती है वनेकलन नाम से। एडिक्शन सिर्फ ड्रग्स या अल्कोहल तक सीमित
(02:25) नहीं है। दुनिया में बहुत तरह के एडिक्शन है जैसे कि पोर्न एडिक्शन, गेमिंग एडिक्शन, स्मोकिंग, वेपिंग एंड अ लॉट मोर। और यह इतना कॉमन है कि हम जानते भी नहीं है। बट इससे ज्यादा डेंजरस बात यह है कि हम मानते नहीं है कि हम एडिक्टेड हैं। एंड दैट्स व्हाई टुडे वी हैव विद अस अ साइकट्रिस्ट। एन एडिक्शन साइकेट्रिस्ट फ्रॉम एम्स दिल्ली जिन्होंने हाईएस्ट डिग्री की है यानी कि डीएम कर रखी है इसी टॉपिक पे और वो रोज रियल पेशेंट्स के साथ डील करते हैं और आज आपको समझाएंगे एडिक्शन के बारे में एंड हाउ टू डील विद इट। वेलकम टू द नमा टॉक्स पडकास्ट डॉ. सिद्धार्थ सू
(02:57) वी आर वेरी ग्लैड टू हैव यू हियर। एंड आज हम जब बात करने वाले हैं एडिक्शन की तो मैं बिल्कुल डायरेक्टली आपसे पहला क्वेश्चन यही पूछूंगी कि हम एडिक्शन से डील कैसे करें? बिकॉज़ दिस इज समथिंग जो ऑडियंस देखने आई है आज हमारी। सो, हाउ टू डील वि द एडिक्शन ऑफ़ वेप? सो, वेपिंग इज़ समथिंग जो अभी इज़ इललीगल इन इंडिया। बट ऑब्वियसली अगर आप ले रहे हैं या किसी को जानते हैं जो लेता हो तो किसी भी क्वालिफाइड डॉक्टर को दिखाएं। वेपिंग ऐसी चीज है जो पूरी तरह से ट्रीटेबल है। पर उसका इलाज भी हो सकता है। पर कोई ना कोई क्वालिफाइड साइकेटिस्ट चाहिए उसके
(03:28) लिए। सबसे जरूरी यही चीज है कि रिकॉग्नाइज़ करें कि वेपिंग के बहुत दिक्कतें हैं। बहुत साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इतना कि इंडियन गवर्नमेंट ने उसे बैन करा हुआ है। तो आप अगर ऐसा है तो जरूर इलाज लें। और घर पर बैठे अगर कोई अभी देखना चाहे चाहे डॉक्टर पे जाने से डर रहे हैं। कोई बच्चा है जो अपने घर पेरेंट्स को नहीं बता सकता कि मुझे ऐसा कोई एडिक्शन है तो घर पे क्या कर सकते हैं? घर पे आप यही कर सकते हैं कि अगर एकदम से आपके लिए रोक पाना मुश्किल हो रहा है कि विथड्रॉल्स हो रहे हैं या कोई दिक्कत है तो धीरे-धीरे कम कर सकते हैं आप।
(03:57) धीरे-धीरे ग्रेजुअल रिडक्शन हो सकता है। जनरली एडिक्शन में हम ये देखते हैं कि लोगों को लगता है कभी-कभी मोटिवेशन आता है कि एकदम से बंद करते हैं जो कि हो नहीं पाता जिससे और ज्यादा दिक्कत होता है। तो ग्रेजुअल टेपरिंग धीरे-धीरे बंद करना ही ठीक रहेगा। ठीक है? नेक्स्ट आते हैं हाउ टू डील विद एडिक्शन ऑफ़ अल्कोहल। सो अल्कोहल इज़ मेरे ख्याल से सबसेेंट टॉपिक है। अल्कोहल ऐसी चीज है जिसको हम नॉर्मल मानते हैं हम कि एक पैक लगा लिया, दो पैक लगा लिया। तो सबसे पहले तो यह समझना कि कोई अमाउंट ऑफ अल्कोहल सेफ नहीं है। बहुत हमारा ओवर द
(04:28) इयर्स रिसर्च रहा है फार्मा की तरफ से 90ज में 200 में कि इतनी सेफ है। इससे हार्ट के एडवांटेज भी नहीं है। कोई एक ड्रिंक भी सेफ नहीं है या समझना। एंड सबसे पहले यह बात समझना कि अल्कोहल के बहुत साइड इफेक्ट्स हैं। एंड अगर आपको कोई भी दिक्कत हो रही है तो आपके लिए छोड़ना ही बेस्ट रहेगा। अब कैसे छोड़ना है? उसके लिए सबसे जरूरी तो यह होता है पहले यह बात मानना कि हमें दिक्कत है। उसके बाद धीरे-धीरे आप उसका इलाज आगे ले सकते हैं। पर उसमें भी जनरली यह है कि धीरे-धीरे छोड़ना या किसी भी क्वालिफाइड साइकेटिस्ट के ओपिनियन लेना जरूरी है।
(05:00) ठीक है? नेक्स्ट पे आते हैं हाउ टू डील विद एडिक्शन ऑफ़ मास्टरबेशन। सो इट इज वेरीेंट कि बहुत सारी बिहेवियरल एक्टिविटीज हैं जिसमें मेस्टरबेशन है। पर्स से मेस्टबेशन इज अ टॉपिक जिस पे लोग डिस्कस नहीं करते या मे बी जो टैबू है मैं यह बताना चाहूंगा मैस्टरबेशन एक नॉर्मल ह्यूमन प्रोसेस है व्हिच इज़ लाइक नॉर्मल इन बोथ मेल्स एंड फीमेल्स। तो जब तक आप नॉर्मल उसमें हैं तब तक उसकी कोई दिक्कत नहीं है। बिल्कुल लिमिट में रह रहे हैं। आपको उससे कोई शारीरिक दिक्कत नहीं हो रही है या आपको और कोई दिक्कत हो रही है तब तक मास्टरबेशन से कोई दिक्कत नहीं है। इट्स अ
(05:36) नॉर्मल प्रोसेस एंड इट शुड बी एंड कैन बी कंटिन्यूड। हम बट कहां पे लिमिट क्रॉस हो जाती है? फिर जहां आपको यह लग रहा है कि आप बहुत ज्यादा समय खराब कर रहे हैं और एक्टिविटीज जो करनी थी या आपकी जो और रिलेशनशिप्स हैं उनमें इस चीज का फर्क पड़ रहा है। बहुत सारे लोगों को इसलिए दिक्कत होती है कि मास्टरबेशन से क्योंकि उनके बाकी जो संबंध होते हैं वो खराब होते हैं। वो उतने अच्छे तरीके से मे बी संबंध नहीं बना पाते हैं। उनकी क्वालिटी ऑफ़ सेक्सुअल लाइफ खराब होती है। प्योरली बिकॉज़ वो लोग ज्यादा मैस्टरबेट कर रहे हैं। तो जब ऐसा हो रहा
(06:08) हो या आपके पार्टनर ऐसा कंप्लेन करें तो आपको सोचना चाहिए इस बारे में। एंड व्हाट इज दैट वन टिप यू कैन गिव टू पीपल जो ज्यादा मास्टरबेट करते हैं एंड उसको रोकना चाहते हैं। आप यही समझे कि ग्रेजुअल रिडक्शन भी करना जरूरी है। एंड इसका ओवरटर्म ज्यादा मास्टरबेशन से बहुत साइड इफेक्ट हो सकते हैं। तो धीरे-धीरे उसको अपनी फ्रीक्वेंसी कम करें। व्हाट इज दैट अल्टरनेटिव? जैसे कोई आपके पास पेशेंट आया अभी और कहे मैं मास्टरबेशन नहीं रोक पा रहा तो आप क्या अल्टरनेटिव देंगे? सो दैट वो बिहेवियर कम हो सके। ग्रेजुअल रिडक्शन बोलना आसान है, करना
(06:38) मुश्किल है। तो क्या आप अल्टरनेटिव देंगे उन्हें? तो इसके लिए इस तरह की थेरेपीस होती हैं। जैसे हमें मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग बोलते हैं या मोटिवेशनल एनहांसमेंट थेरेपी है जिससे हम पेशेंट की आंदोनिक मोटिवेशन बढ़ाते हैं। उसकी हेल्प करते हैं। मैं समझ रहा हूं कि मेरे लिए यहां पे कहना बहुत आसान है कि ये बंद कर दो, वो बंद कर दो। एक्चुअल प्रोसेस मुश्किल है। तो क्या-क्या उनको दिक्कतें आ सकती हैं केस टू केस बेसिस पे? क्या ऐसे कारण है कि उनको ये कंटिन्यू उनको एक्टिविटी करना पड़ रहा है? क्यों उनको मेस्टबेट करते रहना पड़ रहा है? यह
(07:06) सब कारण हम देखते हैं, समझते हैं पर्सनलाइज़ उस पे केस टू केस बेसिस पे और फिर उस हिसाब से ट्रीट करते हैं। ठीक है? तो अब आते हैं गेमिंग पे। तो गेमिंग के एडिक्शन से कैसे डील करें? तो गेमिंग एडिक्शन एक बिहेवियर एडिक्शन है जो अभी आईसीडी 11 में एज डायग्नोसिस माना गया है। हम राइट? जैसे अल्कोहल यूज़ डिसऑर्डर हो सकते हैं। अल्कोहल एडिक्शन है वैसे ही गेमिंग है। तो ये बहुत जरूरी बात है ये बात समझना। पर किसी भी चीज में कोई भी एडिक्शन हो चाहे वो गेमिंग हो या गैंबलिंग हो जिसे आईसीडी ने भी माना है जब आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ खराब होने लग जाए कोई डिस्फंक्शन आए
(07:41) चाहे वो आपके करियर में हो आपके एजुकेशन में हो या आपके पर्सनल रिलेशनशिप में हो इनमें से कुछ भी हैंपर होने लग जाए तब आपको यह सोचना शुरू कर देना चाहिए कि यह एक तरह की बिहेवियर एडिक्शन है मुझे भी हो सकती है एंड मुझे इसके लिए इलाज लेना चाहिए एंड इसमें भी पहले हमें यह बात मानना कि यह एक दिक्कत है। हमेशा पहला स्टेप होता है। गेमिंग में भी आपको यह बात समझनी पड़ेगी कि अब यह नॉर्मल गेमिंग नहीं रह गई है। यह एक एडिक्शन है और इसका मुझे इलाज लेना चाहिए। बट अगर लेट्स से मेरे घर में कोई इंसान है जो गेमिंग नहीं छोड़ पा रहा पूरी-पूरी रात
(08:13) अगर वो इंसान गेमिंग कर रहा है एंड उसके बिना उसे अच्छा लगना बंद हो जाता है और बिना गेमिंग के वो चिड़चिड़ हो जाता है अपने घर वालों के साथ। आई थिंक दिस इज अ कॉमन बिहेवियर वी सी इन गेमिंग एडिक्शन। अब उसको छोड़ना है बिफोर दे कैन कंसल्ट एन एक्सपर्ट और कम टू एनीबडी फॉर हेल्प। अभी कोई गेमिंग एडिक्शन किसी को लग रहा है उसको है तो क्या करें? कैसे छोड़े वो हैबिट्स? को स्टार्ट कैसे करें? छोड़ना। नाउ दैट ही हैज़ एक्सेप्टेड कि मुझे गेमिंग एडिक्शन है। पहला स्टेप अगर ये हो गया है कि पेशेंट ने एक्सेप्ट कर लिया बहुत अच्छी बात है। अब
(08:41) वो ये समझ सकते हैं कि हो सकता है उनको बाकी एक्टिविटीज से उतना मजा ना आए। हम तो उनको अल्टरनेटिव एक्टिविटीज जैसे मे बी स्पेंडिंग टाइम विद फैमिली मे बी फिजिकल एक्सरसाइज या ऐसी अल्टरनेटिव एक्टिविटीज थोड़ी-थोड़ी शुरू कर देनी चाहिए जिससे जो उनको वो सेम डोपामिन रश जो गेमिंग से आ रहा है वो भी मिल पाए बट वो नहीं मिलता है आई थिंक इजीली वो इजीली नहीं मिलता बट अगर आप सेम चीजें करें जैसे एक्सरसाइज हो गया जो प्रूवन है टू गिव यू द सेम काइंड ऑफ हाई या सेम काइंड ऑफ एंडोजेनस ओपिओइडस या डोपामिन जो गेमिंग देता है वो इमीडिएटली नहीं होगा
(09:13) गेमिंग से बहुत इमीडिएट डोपामिन रश आता है बट उसके उतने फिर साइड इफेक्ट्स भी आ रहे हैं। एक्सरसाइज से मे बी उतना नहीं आ पाएगा पर आएगा। एंड धीरे-धीरे अगर आप यह बात एक्सेप्ट कर लें धीरे-धीरे शुरू करेंगे। आपकी 5 घंटे गेमिंग है तो मे बी आधा घंटा कम करके कुछ फिजिकल एक्टिविटी करें। एंड धीरे-धीरे ग्रेजुअल रिडक्शन इसको आप कर सकते हैं। कर पॉसिबल है। पूरी तरह से पॉसिबल है। ऐसा जितने भी हमारे बिहेवियर एडिक्शन है, सब्सटेंस एडिक्शन है, सबका ट्रीटमेंट पूरी तरह पॉसिबल है। ठीक है? नाउ वन लास्ट थिंग जो एक और एडिक्शन का मैं पूछना चाहूंगी क्योंकि
(09:43) स्मोकिंग है वेपिंग से कहीं ना कहीं आई थिंक डिफरेंट होता है स्मोकिंग एडिक्शन। कई बार अगर हम उसको एनालाइज करें पूरी तरीके से। तो व्हाट आर द थ्री प्रैक्टिकल स्टेप्स? यू सजेस्ट कि हम स्मोकिंग एडिक्शन छोड़ पाए जिनसे। तो जैसे आप कह रहे हो बिल्कुल सही बात है। इंडिया में अगर एब्सोल्यूट नंबर देखना है या वर्ल्ड में आपको एब्सोल्यूट नंबर देखना है तो नंबर वन एडिक्शन हमेशा स्मोकिंग होता है। तो इट इज़ वेरी कॉमन एंड इट इज़ ऑलमोस्ट इसको हम अपने कल्चर का पार्ट चाहे बता माना जाता है। तो अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आपको इससे दिक्कत हो रही है। सबसे
(10:15) पहली बात तो इसमें भी आपको अपनी इंटरनल मोटिवेशन कि मुझे इस इस कारणों से दिक्कत हो रही है। देखो सिगरेट के पैक पे लिखा होता है कि सिगरेट विल कॉज कैंसर। हम यह बात सबको पता है पर कैंसर ऐसा नहीं है आज पी लो कल हो जाएगा तो लोगों को उससे डर नहीं लगता उतना दैट्स ट्रू तो इसका आप सोचिए कि आज मे बी आपको कैंसर नहीं हो रहा पर उससे खांसी हो सकती है आपकी और चीजों में दिक्कत हो सकती है आपको हार्ट की दिक्कतें हो सकती है जो कैंसर से कहीं पहले हो जाएंगी और आप यह भी सोचिए स्मोकिंग से आपको तो फर्क पड़ ही रहा है पर जिनके आसपास आप स्मोकिंग कर रहे हैं
(10:44) उनको भी स्मोक जा रहा है। पैसिव स्मोकिंग से पैसिव स्मोकिंग हो गया। सेकंड हैंड स्मोकिंग हो गया। इवन थर्ड हैंड स्मोकिंग हो गया। सेकंड हैंड अब सामने वाले ने इन्हेल कर लिया। ठीक है। पर जो एनवायरमेंट है वहां पे जाके वो स्प्रेड होता है। वहां पे टॉक्सिंस रहते हैं स्मोक के। एंड वो लेटर ऑन भी हार्म कर सकते हैं। आपको भी एंड आपके घर वालों को या जहां भी आप स्मोक कर रहे हैं। तो स्मोकिंग करते वक्त आपको ये बात समझनी चाहिए। ये सिर्फ आपको ही नहीं आपके आसपास वालों को भी इफेक्ट कर रहा है। तो इस चीज के बारे में सोें और इसको उतनी ही गंभीरता से लें। उस चीज का
(11:14) ना सोें कि जनरली जो मैं पेशेंट देखता हूं कि चल कोई नहीं कैंसर होगा देखा जाएगा। वो होगा जब देखा जाएगा। बट अभी जो दिक्कतें हो रही है उसका सोचें। तो क्या अभी आप सजेस्ट करें तीन प्रैक्टिकल टिप्स कि ये अभी आप फॉलो करो कुछ दिन के लिए तो आप ग्रेजुअली इसे रिड्यूस कर सकते हो स्मोकिंग को। तो एक बहुत इंपॉर्टेंट हम बात होता है हम इसको जनरली फोर डीज बोलते हैं। हम सबसे पहले ये बोला जाता है कि जब भी आपको स्मोक करना है तो आप उसको डिले करें कि अगर मेरा अभी बहुत ज्यादा मन कर रहा है मे बी मैं 15 मिनट 20 मिनट रुक जाऊं जितना भी आपकी कैपेबिलिटी हो।
(11:44) सेकंडली हम बहुत सिंपली बोलते हैं ड्रिंक वाटर। दूसरा डी होता है ड्रिंक वाटर। इट विल हेल्प। इट विल हेल्प टू रिड्यूस योर क्रेविंग अ बिट। देन थर्ड बोला जाता है कि डिस्ट्रैक्ट योरसेल्फ। अब डिस्ट्रैक्शन मे बी मे बी एज सिंपल एज घर वालों से बात करना किसी माइंडफुल एक्टिविटी में इंगेज करना वो मुश्किल होगा बहुत। बट आप कोशिश कर सकते हैं टू डिस्ट्रैक्ट योरसेल्फ। चौथी बात बोला जाता है डिस्कस। कि जब भी आपको क्रेविंग हो रही है स्मोकिंग की आपका बहुत ज्यादा मन कर रहा है। आप इस बारे में किसी से डिस्कस करें। बात करें। वो आपका दोस्त हो सकता है, घर
(12:12) वाला हो सकता है, कोई भी हो सकता है। आई थिंक यह बहुत इंटरेस्टिंग टिप्स दी आपने और याद करना भी बहुत आसान है कि ये चार डी फॉलो करके एंड आई फील ये किसी भी एडिक्शन में काम कर सकती है। मैं अभी अपने दिमाग में ये सोच रही हूं कि इसको अल्कोहल एडिक्शन है, गेमिंग एडिक्शन है, वो भी ये सारी चीजें फॉलो कर सकता है। बिल्कुल जो आप ये बात कह रहे हो, हम एडिक्शन में एक रिलैप्स प्रिवेंशन थेरेपी करते हैं। उसमें हम पेशेंट्स को ये फोर डीज़ सिखाते हैं। तो ओवरऑल किसी भी बिहेवियर एडिक्शन या सब्सटेंस एडिक्शन में हम ये चीज प्रैक्टिकली अप्लाई कर सकते
(12:39) हैं। एंड जस्ट ये होता है कि हमें अपने ऊपर उस बेस करना है कि हमारे लिए क्या है? हम कैसे डिस्ट्रैक्ट करेंगे? मेरा डिस्ट्रैक्शन का तरीका मे बी आपसे अलग हो। ऑफ कोर्स। तो ये चीज पर्सनलाइज करना ये सोचा जा सकता है। बट ओवरऑल ब्रॉडली यही किया जाता है। ये कॉमनली यूज स्ट्रेटजी है। ठीक है। अभी हम स्मोकिंग की बात कर रहे हैं तो एक दिमाग में क्वेश्चन आता है कि क्या निकोटीन गम स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प करती है? बिल्कुल। निकोटीन गम्स ऐसे हैं जिन्हें हम प्रिस्राइब भी करते हैं जिनका बहुत ज्यादा फायदा होता है। स्मोकिंग जब हम करते हैं
(13:09) चाहे वो डायरेक्टली स्मोक हो या टोबेको यूज़ हो वो इसलिए होता है कि उससे निकोटीन मिलता है जो जाके ब्रेन पे एक्ट करता है। एंड इससे दिक्कत यह रहती है कि एकदम से हाई आता है फिर उसको वो अमाउंट गिर भी जाता है। नोकोटीन गम से सेम चीज सेम निकोटीन हमारे ब्रेन को जाता है। तो बहुत सारे जो स्मोकिंग ना करने से दिक्कतें होती हैं जैसे क्रेविंग हो गया स्मोकिंग की तलब जिसे बोलते हैं हम या स्मोकिंग में सबसे ज्यादा जरूरी होता है इरिटेबिलिटी। चिड़चिड़ापन स्मोकिंग जब भी कम करें बंद करें वो आता है। तो इस चीज के इलाज में निकोटिन गम का बहुत
(13:39) ज्यादा रोल है। एंड ये यूज करना चाहिए। और सिमिलरली निकोटीन पैचेस भी निकोटीन पैच भी सेम चीज है। निकोटिन पैच का फायदा यह रहता है कि उससे एक कास्टेंट अमाउंट ऑफ निकोटीन ब्लड में हमेशा बना रहता है। तो लेवल वेरीरी नहीं होता। तो एक निकोटीन अमाउंट ब्रेन को जाता रहता है जिससे कि दिक्कत नहीं होती। फिर और ये हमारे को हेल्प करेगा स्मोकिंग छोड़ने में धीरे-धीरे। बिल्कुल। आप यह समझ लीजिए कि धीरे-धीरे निकोटीन गम हो गया, या निकोटीन पैच हो गया। वो वही काम वही आपको केमिकल देंगे जो आपको निकोटीन जो सिगरेट से मिल रहा है। बट इससे आपको बाकी साइड इफेक्ट्स है ना जैसे
(14:12) जो हाइड्रोकार्बन मिल रहे हैं जिससे एक्चुअली कैंसर होते हैं और दिक्कतें होती हैं वो सब नहीं मिलेंगे। एक टिप जो कई बार मैंने कहीं डॉक्टर से भी सुनी है। आप अगर कंफर्म करें सही है कि नहीं कि स्मोकिंग छोड़ने के लिए आप मुंह में ना लौंग या क्लोव मुंह में रखो तो आपका स्मोकिंग करने का मन नहीं करता। क्या ये सच है? कुछ हद तक? हां कुछ हद तक ना क्योंकि स्मोकिंग का सिर्फ यह नहीं होता कि निकोटिन जा रहा है या सब हो रहा है। एक साइकोलॉजिकल चीज भी होती है कि प्रोब्ली हमारे मुंह में वो सिगरेट वो पूरा एक्ट कि हम सिगरेट डाल रहे हैं सिर उतना है। तो इन
(14:41) सब चीजों में वो हेल्प कर सकता है। एंड सिमिलरली निकोटीन गम का भी एक ही सेम रेशनेल होता है कि मुंह में रहता है। सिमिलरली जैसे आप जितनी आप स्मोकिंग करते हो वैसे ही रहेगा। एंड सिमिलरली पहले के टाइम पे जो ये करते थे इसका कुछ एक्चुअली एविडेंस भी है। ओके। कोई इंसान अगर 510 साल से स्मोक कर रहा है तो आई थिंक उसके लंग्स तो इफेक्ट हो चुके हैं इस टाइम तक। तो क्या वो लंग्स रिकवर हो सकते हैं? दोबारा हेल्दी स्टेट में आ सकते हैं अगर वो स्मोकिंग छोड़ दे। बहुत सारे स्मोकिंग से हुए साइड इफेक्ट्स इंप्रूव हो जाते हैं। कुछ नहीं भी। वो
(15:10) इंडिविजुअल केस टू केस एंड अगेन जो लंग्स में डैमेज हुआ है या नहीं वो इंप्रूव हो सकता है मोस्ट केसेस में। अगर आप आज भी बंद कर देंगे जो डैमेज हुआ है उसमें से कुछ रिवर्स हो जाएगा। तो ऐसे कौन से साइड इफेक्ट्स हैं स्मोकिंग के जो रिवर्स हो सकते हैं? स्मोकिंग के यही होता है जैसे जो लोग रेगुलरली स्मोक करते हैं उनका स्टेमिना कम होता है। उनकी सांस जल्दी फूलती है। ये सब चीजें जो हो रही हैं ये कुछ ही दिन में ठीक होनी शुरू हो जाती है और आपकी ओवरऑल हेल्थ वो भी कुछ ही दिन में ठीक होनी शुरू हो जाती है जब आप स्मोकिंग पूरी तरह से बंद करते
(15:42) हैं। डॉक्टर निकोटीन के अलावा फिर क्या ऐसी चीजें हैं जो मार्केट में जो हमें स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प कर सकती है क्योंकि निकोटीन सब जानते हैं निकोटीन पैचेस या निकोटीन गम्स एनी अदर थिंग दैट इज हेल्पिंग अस कि जो हम स्मोकिंग छोड़ने में यूज़ करें तो इस समय पे हमारे पास बहुत अच्छे-अच्छे इलाज है पहले तो कुछ दवाइयां हैं हम जैसे एक दवाई आती है वन नाम से उसका बहुत अच्छा रिस्पांस आता है सिमिलरली एक दूसरी दवाई आती है बोटप्रोपन उसका भी थोड़ा अच्छा रिस्पांस है निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी पैच हो गया गम्स हो उसकी हमने बात कर ली। लोजेंजर्स भी आती हैं। वो भी ट्राई
(16:14) करे जा सकते हैं। इसी तरह की दो-तीन अलग-अलग दवाइयां और आती हैं जो स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प कर सकती हैं। पर ये सब दवाइयां ओवर द काउंटर नहीं है। ये प्रिस्रिप्शन मेडिसिंस हैं जिसे कोई रिस्पेक्टिव साइकेटिस्ट ही लिख सकता है। तो इसके बारे में आप जरूर पढ़ें। नाम वनेक्कलन हो गया, बुप्रोपन हो गया जो कि ट्राई करी जाती है, यूज़ करी जाती हैं जिसे हम प्रिस्क्राइब करते हैं। ये दवाइयां लेने से स्मोकिंग करने का मन नहीं करता। यह दवाइयां लेने से स्मोकिंग करने का मन कम करता है। जो क्रेविंग होती है वो कम होती है। एंड मोरेंटली जो
(16:44) विड्रॉल आता है जैसे इरिटेबिलिटी हो गया या बहुत लोग ये कंप्लेन करते हैं कि हम स्मोकिंग नहीं करेंगे तो हम फोकस नहीं कर सकते। कंसंट्रेट नहीं कर सकते। इन सब चीजों में भी ये दवाइयां हेल्प करती हैं। ठीक है? तो अगर वो किसी साइकेट्रिस्ट के पास जाए और ये दवाइयां लिखें तो इट्स गुड फॉर देम जो उन्हें हेल्प करेगा। ठीक है? वन मोर क्वेश्चन अबाउट स्मोकिंग जो एक ऑडियंस अगर देख रही हो किसी को स्मोकिंग एडिक्शन है तो वो समझ पाए। आज अगर मैं स्मोकिंग करना छोड़ दूं तो नेक्स्ट थ्री डेज में नेक्स्ट वन वीक में नेक्स्ट वन मंथ में और नेक्स्ट सिक्स
(17:16) मंथ्स में मैं क्या-क्या अपनी बॉडी में चेंजेस देख सकती हूं। सबसे पहले जो चेंज आता है यह होता है कि कार्बन मोनोऑक्साइड के लेवल्स कम होते हैं। उससे प्रैक्टिकली ये देखा जाएगा कि आपका जो टेस्ट है एंड योर एबिलिटी टू स्मेल दैट इंप्रूव्स एज सून एज मे बी वन डेज थ्री डेज एंड विद वीक जो कि बहुत इंपॉर्टेंट बात है। ओके? देन क्योंकि और आपका स्टेमिना इंप्रूव हो रहा है। आपका ज्यादा ऑक्सीजन डिफरेंट पार्ट्स ऑफ़ बॉडी में जा रही है। चाहे वो हार्ट हो गया, ब्रेन हो गया। तो आपका स्टेमिना आपकी ओवरऑल हेल्थ इंप्रूव होती है। व्हिच स्टार्ट्स मे बी विद इन वन वीक
(17:46) टू वन मंथ। तो आप ओवरऑल बेटर फील करना शुरू करते हैं। एंड ऐसा बोला जाता है रिसर्च स्टडीज में आफ्टर स्मोकिंग इज स्टॉप्ड एक साल के बाद आपके जो हार्ट की हेल्थ है वो भी इंप्रूव होती है। ऐसा माना जाता है 40% केसेस में और बहुत ज्यादा अच्छा इंप्रूवमेंट हार्ट की हेल्थ में देखा जाता है स्मोकिंग बंद करने के बाद। ठीक है? एंड व्हाट इज लाइक हमने आपने तीन-चार दिन की बताया और एक साल का बताया। बट बीच के पीरियड में और कोई चेंजेस जो हम देख सकते हैं। बीच के पीरियड में मोस्टली यही देखा जाता है कि धीरे-धीरे चीजें बेटर होती हैं। अगर
(18:14) आज आप इतना चल पा रहे हैं। सांस फूलने से पहले तो वो धीरे-धीरे बढ़ता है। धीरे-धीरे आपकी एबिलिटी बढ़ती है बहुत सारी चीजें करने की। चाहे वो आपका काम हो गया एंड इवन डायरेक्टली इनडायरेक्टली आपकी जो रिलेशनशिप की क्वालिटीज है जो कि स्मोकिंग के कारण मे बी हैंपर हो रही हो वो भी इंप्रूव होती हैं। लोग कहीं ना कहीं मानते हैं कि स्मोकिंग करने से लंग्स खराब होते हैं। बट और जैसे कि मूवीज में दिखाया जाता है धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है और उसमें सारा लंग कैंसर एंड ऑल दिखाते हैं। बट हार्ट वहां पे बोला जाता है कि हार्ट को भी
(18:44) अफेक्ट करता है। किस वे में स्मोकिंग हमारे हार्ट से रिलेटेड है फिर और क्या ये परमानेंट डैमेज कर देता है? सो ये आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा। नॉर्मली हम ये सोच रहे हैं हम स्मोक कर रहे हैं, स्मोक लंग्स में जा रहे हैं तो वहीं पे जो भी डैमेज होना है ऐसा नहीं है। एंड इवन अगर आप सिगरेट के पैक देखें उस पे कैंसर के फोटो बना देंगे। स्मोकिंग कॉजज़ कैंसर तो हमें लगता है कि यार कैंसर यहां हो रहा है। मुंह का कैंसर दिखा देते हैं। ऐसा नहीं है। जब आप स्मोक ले रहे हैं वो आपके लंग्स के थ्रू पूरे शरीर में जा रहा है। जो हाइड्रोकार्बंस होते हैं वो हर जगह जाते
(19:10) हैं। आप ये बात समझ लें। अब वो आपके किडनी को भी इफ़ेक्ट करेंगे। वो आपके ब्लैडर को भी करेंगे। वो आपके शरीर के जहां भी शरीर में खून जा रहा है, वहां इफ़ेक्ट करेंगे। अब हार्ट का क्या होता है? जब हम स्मोकिंग करते हैं, उससे हमारा हार्ट रेट बढ़ता है। उससे हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ता है। तो आप यह समझ लीजिए जितने टाइम आप करते रहेंगे स्मोकिंग वो बड़ा रहेगा। एंड लॉन्ग टर्म जो रहेगा इससे डैमेज हार्ट में होता ही होता है। इसे बहुत सिंपल टर्म्स में बोलते हैं कि सिंपैथेटिक एक्टिविटी बढ़ जाती है। हम बहुत बार यह बात करते हैं कि हमें जब
(19:37) रिलैक्स होना है तो पैरासिंैथेटिक एक्टिविटी बढ़ानी है। स्मोकिंग से सिंपैथेटिक एक्टिविटी बढ़ती है। हार्ट में ये सब दिक्कतें आ सकती हैं। लॉन्ग टर्म में बहुत सारी हार्ट की ऐसी बीमारियां जैसे हार्ट अटैक इन सबका कारण भी स्मोकिंग होता है। तो जब इसके रिस्पेक्टिव डॉक्टर्स का इलाज करते हैं तो हमेशा बोला जाता है कि अब आप स्मोकिंग बंद करते हैं। वह इसी कारण से है कि हार्ट पे भी इफेक्ट्स हो रहा है। सिमिलरली जो कैंसर चाहे मुंह का दिखा देते हैं पर बहुत सारे अलग तरह के कैंसर है जो कि प्रूवन है कि स्मोकिंग के कारण हो रहे हैं। मैं आपको यह कहूंगा जैसे
(20:06) ब्लैडर कैंसर हो गया। ब्लैडर कैंसर ब्लैडर कैंसर अब स्मोकिंग से अब आप सोचें कहां शरीर में कहां ब्लैडर है और कहां हम सिगरेट ले रहे हैं। तो जहां भी जो हाइड्रोकार्बंस हैं वो स्मोक आपके शरीर में जा रहा है। जहां लंग्स में रहा है पर वो शरीर में हर जगह जाएगा। ब्लड से ब्लड से। ब्लड से वो आपके हर जगह है। बहुत सारी ऐसी दिक्कतें होती हैं कि ब्लड सप्लाई और जगह कम हो रही है। हाथों पैरों में ब्लड सप्लाई कम हो रही है। वेसल्स जो हैं ब्लड की उनमें डिपोजिशन आ रहे हैं वो थिक हो रहे हैं स्मोकिंग के कारण। और हर चीज बॉडी का हर पार्ट जो आप सोच
(20:38) सकते हैं उस पे कुछ ना कुछ इफेक्ट होता ही है। तो आप ये मत सोचें कि मेरे लंग्स हेल्दी हैं। मुझे कुछ नहीं होगा। आपकी कुछ ना कोई इफेक्ट हो ही सकता है। अगर पूरी तरीके से देखें अभी तो कौन-कौन से ऐसे ऑर्गन्स हैं जो स्मोकिंग से अफेक्ट होते हैं हमारी बॉडी में? तो सबसे पहले तो हमारा लंग्स हो गए। सेकंड हम अपने ब्रेन के बारे में सोचते हैं कि ब्रेन को भी निकोटीन की आदत पड़ जाती है। है ना? उसके बिना फिर हमें चिड़चिड़ापन होता है। कंसंट्रेट नहीं कर पाते हैं। बहुतेंटली एक चीज होती है। बहुत सारे लोग ये बोलते हैं कि हमें सुबह उठते ही स्मोक
(21:07) करना पड़ता है क्योंकि हम फ्रेश नहीं हो पा रहे हैं। तो बावल मूवमेंट नहीं हो पाती। तो लोग ये काइंड ऑफ़ कॉन्स्टिपेशन भी लोगों को हो जाता है जिसके लिए अब स्मोक करना ही करना पड़ता है। अब आप ये सोचें कि कॉन्स्टिपेशन कहां से हो रहा है एंड स्मोक कहां जा रहा है? तो ये बात सोचनी पड़ेगी। सिमिलरली आगे किडनी पे भी इफेक्ट पड़ सकता है। जिन लोगों को हाइपरटेंशन जैसी दिक्कतें हैं वो और खराब होती हैं। है ना? एंड इससे आगे शरीर में बहुत दिक्कतें हो सकती हैं। क्या स्किन पे भी इफेक्ट करता है स्मोकिंग? स्किन पे भी कुछ ना कुछ तरह का इफेक्ट हो सकता है। वो भी डायरेक्टली
(21:37) इनडायरेक्टली इसलिए होता है कि जो ब्लड सप्लाई है वो हर जगह कम होती है। एंड सिमिलरली स्किन हमारे शरीर का ऐसा ऑर्गन है व्हिच इज द लार्जेस्ट व्हिच नीड्स अ लॉट ऑफ़ ब्लड सप्लाई एंड वो कॉम्प्रोमाइज हो सकती है और होती है स्मोकिंग के कारण। ठीक है? अब एक क्वेश्चन जो आई थिंक पूरी जनता इंडिया की स्पेशली मानती होगी कि वेप सिगरेट से ज्यादा सेफ है। क्या ये सच है? इन शॉर्ट नहीं। नो वेपिंग का पूरा कांसेप्ट अगर आप देखें वेपिंग इसीलिए लाया गया था। मार्केटिंग ऐसे करी गई थी कि भाई यह सेफ है इसे यूज़ करें। पर ऐसा नहीं है। वेपिंग में सिंपली जब हम स्मोक करते हैं
(22:10) तो एक अमाउंट ऑफ निकोटीन हमारे ब्लड स्ट्रीम में जाता है जो आगे ऐड करता है। बट सिगरेट्स में बहुत सारे और चीजें होती हैं जिसे हम हाइड्रोकार्बन बोलते हैं। तो वो जाते हैं उनसे दिक्कतें होती है। तो अब वेपिंग जो कंपनीज़ है वो इस कांसेप्ट से लाए कि क्यों ना हम ये सब रिप्लेस करके ज्यादा अमाउंट ऑफ निकोटीन दे दें। एंड वेपिंग से बहुत हाई अमाउंट ऑफ निकोटीन आता है जो कि वेपिंग की स्टिक में हीट होता है। उसको हम इन्हेल करते हैं और वह जाकर एक्ट करता है। अब वो निकोटीन या सिगरेट की तरह मे बी कैंसर वगैरह डायरेक्टली नहीं करे बट लंग इंजरी कर सकता है इस हद तक कि
(22:42) जो भारत सरकार है उन्होंने बैन करा क्योंकि इस चीज के केसेस बहुत ज्यादा बढ़ रहे थे जो वेपिंग के कारण होने वाली लंग इंजरीज हैं। ओरल जैसे जहां माउथ में ले रहे हैं इट्स अ डिवाइस ऑपरेटेड बाय बैटरी। तो उसके कारण माउथ में भी आपको दिक्कतें हो सकती हैं और होती हैं। तो वेपिंग से भी बहुत ज्यादा दिक्कत है। एंड वेपिंग से जो एडिक्शन पोटेंशियल है वो स्मोकिंग से कहीं ज्यादा है। तो वेपिंग सेफ नहीं है। वेपिंग से कैंसर नहीं हो सकता। वेपिंग से कैंसर का डाटा अभी उतना स्ट्रांग नहीं है जितना कि स्मोकिंग से इस्टैब्लिश्ड है। स्टडीज है बट अभी
(23:15) कंक्लूसिव कह पाना मुश्किल है। तो जब मैं वेप कर रही हूं मेरी लंग्स में जाके उस स्मोक से हो क्या रहा है एक्जेक्टली। तो आप ये समझ लें कि बहुत ज्यादा अमाउंट ऑफ स्मोक जो कि हीटेड स्मोक है वो आपके लंग्स में जा रहा है जब भी आप वेप करते हैं उससे आपको लंग इंजरी बहुत तरह की हो सकती हैं जो कि परमानेंट भी होती हैं टू द पॉइंट कि वो लंग डैमेज रिवर्स नहीं होगा स्मोक वेपिंग लाया ही इसलिए गया था कि स्मोकिंग का इलाज हो पर वेपिंग से बहुत ज्यादा लोगों को बहुत सारे ऐसे लोग थे जैसे जो यंगस्टर हैं एडलेसेंट है जो पहले स्मोक कर ही नहीं रहे उनको
(23:46) वेपिंग के कारण ही वेपिंग का एडिक्शन हो गया वो स्मोकिंग कभी करते ही नहीं थे। एंड आज उनको वेपिंग का एडिक्शन है। एंड वेपिंग के बहुत ज्यादा रिस्क हैं। वेपिंग से बहुत ज्यादा अमाउंट ऑफ निकोटीन चला जाता है आपके शरीर में, आपके दिमाग में जिससे आने वाले टाइम में बहुत साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। तो ज्यादा स्केरी है वेप करना। बिल्कुल। आप इस और आज के टाइम में देखिए तो सारे टीनएजर्स और यंग एडल्ट्स के हाथ में वेप है। वेपिंग की बात खास बात यह है कि वेपिंग की जो मार्केटिंग है बहुत सारे कूल-कूल फ्लेवर्स आते हैं। मार्केटिंग है। वो लोग टारगेट ही ऐसे करते हैं जैसे मैं
(24:19) कुछ दिन पहले देख रहा था मेंथोल फ्लेवर आता है। स्मोकिंग का ये दिक्कत रहती है। आप सिगरेट स्मोक करें आपके स्मेल आएगी जो कि सबको पता चलेगी। वाटरमेलन, कीवी, स्ट्रॉबेरी ऐसे फ्लेवर्स आ रहे हैं वेप में। तो आप वेप करेंगे आपको जो वेपिंग का फायदा है वो तो मिलेगा ही। बट आपसे आफ्टर स्मेल ये आएगी। तो किसी को यह नहीं पता चलेगा कि आप कोई चीज यूज़ कर रहे हैं। यह बहुत स्मार्ट मार्केटिंग टेक्निक है जो कि यूज़ करी गई है। वेब का स्मोक से कुछ हमें स्मेल तो आती नहीं है। बट क्या वेब के स्मोक से पैसिव स्मोकिंग भी हो सकती है? वो एक्चुअली हो तो सकती है पर उतनी वेल
(24:49) इस्टैब्लिश्ड नहीं है जितनी कि सिगरेट स्मोकिंग में है। तो रिस्क है कितना है? रिस्क काफी कम है स्मोकिंग से क्योंकि वेपिंग में मोस्टली निकोटीन ही होता है। बाकी हाइड्रोकार्बंस नहीं होते हैं। पैसिव स्मोकिंग में सबसे ज्यादा दिक्कत हमें बाकी हाइड्रोकार्बन से होती है। क्योंकि निकोटीन के अलावा जो एक्चुअली जो भी डैमेज बॉडी में हो रहे हैं वो कर रहे हैं तो वो वेपिंग में उतना नहीं होता। तो वेपिंग के केस में डायरेक्टली ही लंग इंजरीज इतनी हो जाती है कि हमें आगे कुछ सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ठीक है? यूजुअली एडिक्टेड लोग ना ये बोलते
(25:19) हैं मैं कभी भी छोड़ सकता हूं। मुझे अगर मुझे अल्कोहल की आदत है या मुझे स्मोकिंग की आदत है। मुझे किसी भी चीज की आदत है तो मैं लोग जब मुझे कहेंगे ना तू क्यों करता है? क्यों करती है? तो मैं बोलूंगा मैं कभी भी छोड़ सकता हूं। ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। क्या यह मैं कभी भी छोड़ सकता हूं नशा? यह एक वार्निंग साइन है एडिक्शन का? बिल्कुल। यह बहुत जरूरी बात कही आपने। एक हम क्लीनिकली टर्म यूज़ करते हैं लॉस ऑफ कंट्रोल। तो जो भी पेशेंट्स हमारे पास एडिक्शन के लिए ट्रीटमेंट के लिए आते हैं उनसे अगर आप बात करें तो उनका हमेशा ये रहेगा कि अब हम छोड़ सकते हैं, हम छोड़
(25:48) सकते हैं। आज छोड़ देंगे, कल छोड़ देंगे। लोग ऐसा क्लेम करते हैं बहुत ज्यादा ओवर कॉन्फिडेंस होता है। एंड जब आपको ऐसा लगने लग जाए तो आपको ये कंसीडर करना चाहिए कि एक वार्निंग साइन है। चाहे वो आप में हो या आपके घर वालों में हो, किसी या किसी फ्रेंड में हो। वन लास्ट थिंग जो मैं अपने आई थिंक एडिक्शन की जब हम बात कर रहे हैं तो एडिक्शन से सिर्फ वो इंसान इफेक्ट नहीं हो रहा जिसको एडिक्शन है। उसकी पूरी फैमिली अफेक्ट होती है उसके एडिक्शन से। तो बट क्या होता है कई बार कोई इंसान छोड़ना भी चाहता है ना एडिक्शन? उसकी फैमिली उसको
(26:16) इतना डिमीन फील करा देती है, डिसिस्पेक्ट फील करा देती है कि उसका मन नहीं करता उसके बाद छोड़ने का। तो अभी आप एडिक्टेड लोगों की फैमिलीज को क्या मैसेज देंगे कि कैसे वो डील कर सकते हैं जब किसी को घर में उनका एडिक्शन है किसी चीज का। ठीक है? तो ये बहुत जरूरी होता है कि जब हम किसी का इलाज कर रहे हैं तो फैमिली का साइको एजुकेशन करना। सबसे पहले पेशेंट को और फैमिली को बात समझनी है कि एडिक्शन चाहे किसी भी चीज का हो, चाहे अल्कोहल हो, सिगरेट हो। इट्स अ क्रॉनिक डिसऑर्डर लाइक एनी अदर डिसऑर्डर। जैसे डायबिटीज हो गया, हाइपरटेंशन हो गया, बीमारी है।
(26:48) बीमारी है। उसी तरीके की बीमारी है जैसे ये बीमारियां हैं। तो जब अगर आपके किसी फैमिली मेंबर को बीपी की दिक्कत है तो उसको आप एक दिक्कत मानेंगे, इलाज कराएंगे खुद भी और फैमिली का भी सोचेंगे आप। उनको आप क्रिटिसाइज नहीं करेंगे। एडिक्शन के केस में क्या हो जाता है कि ये बहुत ज्यादा ब्लेम आता है कि आप ऐसा खुद अपनी मर्जी से कर रहे हैं जो कि पूरी तरह सही नहीं है। फैमिली वालों को भी ऐसा लगता है फैमिली ब्लेम करती है और इससे बहुत ज्यादा जैसे आने समय वाले टाइम में दिक्कत होती है। लोगों को ये लगता है कि क्या फायदा फायदा मेरी फैमिली तो बुराई कर रही है।
(27:17) एंड उससे पूरा प्रोसेस खराब होता है। विशियस सर्कल चलता रहता है। इसे हम टेक्निकली एक्सप्रेस्ड इमोशंस बोलते हैं। तो इससे हमें डील करना पड़ता है। फैमिली को ये बात समझानी पड़ती है कि देखो यह भी एक तरह की दिक्कत है। इसका इलाज हो सकता है और हम करेंगे। आपका रोल ये है कि वही ताने ना देना, क्रिटिसाइज ना करना क्योंकि उनसे कुछ बात बदलेगी नहीं। जो दिक्कतें हो चुकी हैं उसको आप नहीं बदल सकते। तो बार-बार वही बात कहना उससे कोई फायदा नहीं है। तो यहां पे हम एक्चुअली हम पेशेंट्स को और उनके फैमिलीज़ को समझाते हैं। फैमिली का बहुत ग्रेट रोल होता है पूरे ट्रीटमेंट
(27:49) के प्रोसेस में। ठीक है। वन लास्ट क्वेश्चन दैट आई हैव फॉर यू सर इज़ कि क्या एडिक्शन फुल्ली रिवर्सिबल है किसी भी चीज का एडिक्शन? अल्कोहल, वेव्स, स्मोकिंग, पोर्न, मास्टरबेशन? सी एडिक्शन भी एक क्रॉनिक डिसऑर्डर है एंड इट कैन बी ट्रीटेड इट क्योर एट दिस पॉइंट ऑफ टाइम मेडिकल साइंसेस में सिर्फ इनफेशस डिजीज का है उसके अलावा कोई क्योर नहीं है हम वैसे ही आप किसी से पूछे कि डायबिटीज का आप क्योर कर सकते हैं पॉसिबल ही नहीं सिमिलरली एडिक्शन कैन बी ट्रीटेड एंड इट कैन बी ट्रीटेड वेरी वेल इतना कि आप अपनी नॉर्मल जिंदगी जी पाए पहले की तरह
(28:24) ठीक है थैंक यू सो मच डॉक्टर बहुत मजा आया आई थिंक जिन लोगों के लिए टॉपिक टॉपिक इंपॉर्टेंट था। वही देखने आएंगे यह एपिसोड क्योंकि वह रिलेट करेंगे इस चीज से। एंड उनको इस एपिसोड में एक सेफ स्पेस मिला होगा यह समझने का कि वह एडिक्शन रोक सकते हैं। कैसे रोक सकते हैं? क्या चीजें वो कर सकते हैं? क्या उनकी फैमिली उनके लिए कर सकती है। तो यह पूरा एपिसोड बहुत इंपॉर्टेंट था कुछ ऐसे लोगों के लिए जो कहीं ना कहीं अकेले स्ट्रगल कर रहे हैं किसी ना किसी चीज के नशे से। सो थैंक यू सो मच ये इंफॉर्मेशन देने के लिए और आप ऐसे लोगों को डील करते हैं उनको हेल्प
(28:54) करते हैं मैनेज करने में और इतने बड़े हॉस्पिटल एम्स जैसे हॉस्पिटल में आप यह करवाते हैं। ठीक है? बहुत मजा आया मुझे आपसे आज बात करके एंड हमारा एक और एपिसोड मैं ऑडियंस को बताना चाहूंगी रिलीज होने वाला है जिसमें हम बात करेंगे ऑन साइकेट्री एज अ सब्जेक्ट कि एज अ साइकेट्रिस्ट क्या पढ़ाई करनी होती है? क्या रियलिटीज है साइकेट्री फील्ड की एंड मच मोर जो बहुत ही साइकेट्री ओरिएंटेड एपिसोड है। यह एपिसोड था एडिक्शन से रिलेटेड। तो अगर उस टॉपिक में किसी भी ऑडियंस को इंटरेस्ट हो तो जाके वो एपिसोड जरूर देखिए। अगर यह पॉडकास्ट पसंद आया हो
(29:23) तो लाइक जरूर कीजिएगा। कमेंट करके बताइए। प्यार दिखाइए। कोई क्वेश्चंस है आपके दिमाग में तो हम जरूर डॉक्टर को बोलेंगे। आंसर करें। आप कमेंट में जरूर बताइए। इस एपिसोड को शेयर करना मत भूलिएगा। चैनल को सब्सक्राइब करें। दिस इज योर होस्ट खुशी केग। थैंक यू। रख दे तू कोई दिल विच ग्ला रब दे बंदिया तू सब जाने अपने अंदर लेके तदा क्यों फिकरा विच पल तू गवावे जा राज तेरे अपने ल तू समा ओम नम
(30:12) ओम नम ओम नम
(00:00) हाउ टू डील विद एडिक्शन ऑफ मास्टरबेशन? मेस्टबेशन इज अ टॉपिक जिस पे लोग डिस्कस नहीं करते या मे बी जो टैबू है मैं ये बताना चाहूंगा मेस्टबेशन एक नॉर्मल ह्यूमन प्रोसेस है व्हिच इज लाइक नॉर्मल इन बोथ मेल्स एंड फीमेल्स जब तक आप नॉर्मल उसमें हैं तब तक उसकी कोई दिक्कत नहीं है। शुड बी एंड कैन बी कंटिन्यूड हम बट कहां पे लिमिट क्रॉस हो जाती है फिर जहां आपको यह लग रहा है कि आप बहुत ज्यादा समय खराब कर रहे हैं और एक्टिविटीज जो करनी थी या आपकी जो और रिलेशनशिप्स हैं उनमें इस चीज का फर्क पड़ रहा है। बहुत सारे लोगों को इसलिए दिक्कत होती है कि
(00:40) मैस्टरबेशन से क्योंकि उनके बाकी जो संबंध होते हैं वो खराब होते हैं। सबसे पहले मैं एक रैपिड फायर करूंगी जिसमें हर टाइप के एडिक्शन का मैं पूछूंगी आपसे कि हाउ टू डील विद इट। सो हाउ टू डील वि द एडिक्शन ऑफ वेप? सिगरेट के पैक पे लिखा होता है कि सिगरेट विल कॉज कैंसर। ये बात सबको पता है। पर कैंसर ऐसा नहीं है आज पी लो कल हो जाएगा। तो लोगों को उससे डर नहीं लगता उतना। डॉक्टर पे जाने से डर रहे हैं। कोई बच्चा है जो अपने घर पेरेंट्स को नहीं बता सकता कि मुझे ऐसा कोई एडिक्शन है तो घर पे क्या कर सकते हैं? आज अगर मैं स्मोकिंग करना
(01:08) छोड़ दूं तो नेक्स्ट थ्री डेज में, नेक्स्ट वन वीक में, नेक्स्ट वन मंथ में और नेक्स्ट सिक्स मंथ्स में मैं क्या-क्या अपनी बॉडी में चेंजेस देख सकती हूं? सबसे पहले यह बोला जाता है कि जब भी आपको स्मोक करना है तो आप उसको डिले करें कि अगर मेरा अभी बहुत ज्यादा मन कर रहा है मे बी मैं 15 मिनट 20 मिनट रुक जाऊं जितना भी आपकी कैपेबिलिटी हो सेकंडली हम बहुत सिंपली बोलते हैं ड्रिंक वाटर दूसरा डी होता है ड्रिंक वाटर इट विल हेल्प इट विल हेल्प टू रिड्यूस योर क्रेविंग अ बिट देन थर्ड बोला जाता है कि डिस्ट्रैक्ट योरसेल्फ टेप सिगरेट से ज्यादा सेफ है क्या ये सच
(01:39) है इन शॉर्ट नहीं स्मोकिंग छोड़ने के लिए आप मुंह में ना लौंग या क्लोव मुंह में रखो तो आपका स्मोकिंग करने का मन नहीं करता। क्या यह सच है? डॉक्टर निकोटीन के अलावा फिर क्या ऐसी चीजें हैं जो मार्केट में जो हमें स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प कर सकती है? क्योंकि निकोटीन सब जानते हैं निकोटीन पैचेस या निकोटीन गम्स। एनी अदर थिंग दैट इज हेल्पिंग अस कि जो हम स्मोकिंग छोड़ने में यूज़ करें? तो इस समय पे हमारे पास बहुत अच्छे-अच्छे इलाज हैं। पहले तो कुछ दवाइयां हैं। जैसे एक दवाई आती है वनेकलन नाम से। एडिक्शन सिर्फ ड्रग्स या अल्कोहल तक सीमित
(02:25) नहीं है। दुनिया में बहुत तरह के एडिक्शन है जैसे कि पोर्न एडिक्शन, गेमिंग एडिक्शन, स्मोकिंग, वेपिंग एंड अ लॉट मोर। और यह इतना कॉमन है कि हम जानते भी नहीं है। बट इससे ज्यादा डेंजरस बात यह है कि हम मानते नहीं है कि हम एडिक्टेड हैं। एंड दैट्स व्हाई टुडे वी हैव विद अस अ साइकट्रिस्ट। एन एडिक्शन साइकेट्रिस्ट फ्रॉम एम्स दिल्ली जिन्होंने हाईएस्ट डिग्री की है यानी कि डीएम कर रखी है इसी टॉपिक पे और वो रोज रियल पेशेंट्स के साथ डील करते हैं और आज आपको समझाएंगे एडिक्शन के बारे में एंड हाउ टू डील विद इट। वेलकम टू द नमा टॉक्स पडकास्ट डॉ. सिद्धार्थ सू
(02:57) वी आर वेरी ग्लैड टू हैव यू हियर। एंड आज हम जब बात करने वाले हैं एडिक्शन की तो मैं बिल्कुल डायरेक्टली आपसे पहला क्वेश्चन यही पूछूंगी कि हम एडिक्शन से डील कैसे करें? बिकॉज़ दिस इज समथिंग जो ऑडियंस देखने आई है आज हमारी। सो, हाउ टू डील वि द एडिक्शन ऑफ़ वेप? सो, वेपिंग इज़ समथिंग जो अभी इज़ इललीगल इन इंडिया। बट ऑब्वियसली अगर आप ले रहे हैं या किसी को जानते हैं जो लेता हो तो किसी भी क्वालिफाइड डॉक्टर को दिखाएं। वेपिंग ऐसी चीज है जो पूरी तरह से ट्रीटेबल है। पर उसका इलाज भी हो सकता है। पर कोई ना कोई क्वालिफाइड साइकेटिस्ट चाहिए उसके
(03:28) लिए। सबसे जरूरी यही चीज है कि रिकॉग्नाइज़ करें कि वेपिंग के बहुत दिक्कतें हैं। बहुत साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इतना कि इंडियन गवर्नमेंट ने उसे बैन करा हुआ है। तो आप अगर ऐसा है तो जरूर इलाज लें। और घर पर बैठे अगर कोई अभी देखना चाहे चाहे डॉक्टर पे जाने से डर रहे हैं। कोई बच्चा है जो अपने घर पेरेंट्स को नहीं बता सकता कि मुझे ऐसा कोई एडिक्शन है तो घर पे क्या कर सकते हैं? घर पे आप यही कर सकते हैं कि अगर एकदम से आपके लिए रोक पाना मुश्किल हो रहा है कि विथड्रॉल्स हो रहे हैं या कोई दिक्कत है तो धीरे-धीरे कम कर सकते हैं आप।
(03:57) धीरे-धीरे ग्रेजुअल रिडक्शन हो सकता है। जनरली एडिक्शन में हम ये देखते हैं कि लोगों को लगता है कभी-कभी मोटिवेशन आता है कि एकदम से बंद करते हैं जो कि हो नहीं पाता जिससे और ज्यादा दिक्कत होता है। तो ग्रेजुअल टेपरिंग धीरे-धीरे बंद करना ही ठीक रहेगा। ठीक है? नेक्स्ट आते हैं हाउ टू डील विद एडिक्शन ऑफ़ अल्कोहल। सो अल्कोहल इज़ मेरे ख्याल से सबसेेंट टॉपिक है। अल्कोहल ऐसी चीज है जिसको हम नॉर्मल मानते हैं हम कि एक पैक लगा लिया, दो पैक लगा लिया। तो सबसे पहले तो यह समझना कि कोई अमाउंट ऑफ अल्कोहल सेफ नहीं है। बहुत हमारा ओवर द
(04:28) इयर्स रिसर्च रहा है फार्मा की तरफ से 90ज में 200 में कि इतनी सेफ है। इससे हार्ट के एडवांटेज भी नहीं है। कोई एक ड्रिंक भी सेफ नहीं है या समझना। एंड सबसे पहले यह बात समझना कि अल्कोहल के बहुत साइड इफेक्ट्स हैं। एंड अगर आपको कोई भी दिक्कत हो रही है तो आपके लिए छोड़ना ही बेस्ट रहेगा। अब कैसे छोड़ना है? उसके लिए सबसे जरूरी तो यह होता है पहले यह बात मानना कि हमें दिक्कत है। उसके बाद धीरे-धीरे आप उसका इलाज आगे ले सकते हैं। पर उसमें भी जनरली यह है कि धीरे-धीरे छोड़ना या किसी भी क्वालिफाइड साइकेटिस्ट के ओपिनियन लेना जरूरी है।
(05:00) ठीक है? नेक्स्ट पे आते हैं हाउ टू डील विद एडिक्शन ऑफ़ मास्टरबेशन। सो इट इज वेरीेंट कि बहुत सारी बिहेवियरल एक्टिविटीज हैं जिसमें मेस्टरबेशन है। पर्स से मेस्टबेशन इज अ टॉपिक जिस पे लोग डिस्कस नहीं करते या मे बी जो टैबू है मैं यह बताना चाहूंगा मैस्टरबेशन एक नॉर्मल ह्यूमन प्रोसेस है व्हिच इज़ लाइक नॉर्मल इन बोथ मेल्स एंड फीमेल्स। तो जब तक आप नॉर्मल उसमें हैं तब तक उसकी कोई दिक्कत नहीं है। बिल्कुल लिमिट में रह रहे हैं। आपको उससे कोई शारीरिक दिक्कत नहीं हो रही है या आपको और कोई दिक्कत हो रही है तब तक मास्टरबेशन से कोई दिक्कत नहीं है। इट्स अ
(05:36) नॉर्मल प्रोसेस एंड इट शुड बी एंड कैन बी कंटिन्यूड। हम बट कहां पे लिमिट क्रॉस हो जाती है? फिर जहां आपको यह लग रहा है कि आप बहुत ज्यादा समय खराब कर रहे हैं और एक्टिविटीज जो करनी थी या आपकी जो और रिलेशनशिप्स हैं उनमें इस चीज का फर्क पड़ रहा है। बहुत सारे लोगों को इसलिए दिक्कत होती है कि मास्टरबेशन से क्योंकि उनके बाकी जो संबंध होते हैं वो खराब होते हैं। वो उतने अच्छे तरीके से मे बी संबंध नहीं बना पाते हैं। उनकी क्वालिटी ऑफ़ सेक्सुअल लाइफ खराब होती है। प्योरली बिकॉज़ वो लोग ज्यादा मैस्टरबेट कर रहे हैं। तो जब ऐसा हो रहा
(06:08) हो या आपके पार्टनर ऐसा कंप्लेन करें तो आपको सोचना चाहिए इस बारे में। एंड व्हाट इज दैट वन टिप यू कैन गिव टू पीपल जो ज्यादा मास्टरबेट करते हैं एंड उसको रोकना चाहते हैं। आप यही समझे कि ग्रेजुअल रिडक्शन भी करना जरूरी है। एंड इसका ओवरटर्म ज्यादा मास्टरबेशन से बहुत साइड इफेक्ट हो सकते हैं। तो धीरे-धीरे उसको अपनी फ्रीक्वेंसी कम करें। व्हाट इज दैट अल्टरनेटिव? जैसे कोई आपके पास पेशेंट आया अभी और कहे मैं मास्टरबेशन नहीं रोक पा रहा तो आप क्या अल्टरनेटिव देंगे? सो दैट वो बिहेवियर कम हो सके। ग्रेजुअल रिडक्शन बोलना आसान है, करना
(06:38) मुश्किल है। तो क्या आप अल्टरनेटिव देंगे उन्हें? तो इसके लिए इस तरह की थेरेपीस होती हैं। जैसे हमें मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग बोलते हैं या मोटिवेशनल एनहांसमेंट थेरेपी है जिससे हम पेशेंट की आंदोनिक मोटिवेशन बढ़ाते हैं। उसकी हेल्प करते हैं। मैं समझ रहा हूं कि मेरे लिए यहां पे कहना बहुत आसान है कि ये बंद कर दो, वो बंद कर दो। एक्चुअल प्रोसेस मुश्किल है। तो क्या-क्या उनको दिक्कतें आ सकती हैं केस टू केस बेसिस पे? क्या ऐसे कारण है कि उनको ये कंटिन्यू उनको एक्टिविटी करना पड़ रहा है? क्यों उनको मेस्टबेट करते रहना पड़ रहा है? यह
(07:06) सब कारण हम देखते हैं, समझते हैं पर्सनलाइज़ उस पे केस टू केस बेसिस पे और फिर उस हिसाब से ट्रीट करते हैं। ठीक है? तो अब आते हैं गेमिंग पे। तो गेमिंग के एडिक्शन से कैसे डील करें? तो गेमिंग एडिक्शन एक बिहेवियर एडिक्शन है जो अभी आईसीडी 11 में एज डायग्नोसिस माना गया है। हम राइट? जैसे अल्कोहल यूज़ डिसऑर्डर हो सकते हैं। अल्कोहल एडिक्शन है वैसे ही गेमिंग है। तो ये बहुत जरूरी बात है ये बात समझना। पर किसी भी चीज में कोई भी एडिक्शन हो चाहे वो गेमिंग हो या गैंबलिंग हो जिसे आईसीडी ने भी माना है जब आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ खराब होने लग जाए कोई डिस्फंक्शन आए
(07:41) चाहे वो आपके करियर में हो आपके एजुकेशन में हो या आपके पर्सनल रिलेशनशिप में हो इनमें से कुछ भी हैंपर होने लग जाए तब आपको यह सोचना शुरू कर देना चाहिए कि यह एक तरह की बिहेवियर एडिक्शन है मुझे भी हो सकती है एंड मुझे इसके लिए इलाज लेना चाहिए एंड इसमें भी पहले हमें यह बात मानना कि यह एक दिक्कत है। हमेशा पहला स्टेप होता है। गेमिंग में भी आपको यह बात समझनी पड़ेगी कि अब यह नॉर्मल गेमिंग नहीं रह गई है। यह एक एडिक्शन है और इसका मुझे इलाज लेना चाहिए। बट अगर लेट्स से मेरे घर में कोई इंसान है जो गेमिंग नहीं छोड़ पा रहा पूरी-पूरी रात
(08:13) अगर वो इंसान गेमिंग कर रहा है एंड उसके बिना उसे अच्छा लगना बंद हो जाता है और बिना गेमिंग के वो चिड़चिड़ हो जाता है अपने घर वालों के साथ। आई थिंक दिस इज अ कॉमन बिहेवियर वी सी इन गेमिंग एडिक्शन। अब उसको छोड़ना है बिफोर दे कैन कंसल्ट एन एक्सपर्ट और कम टू एनीबडी फॉर हेल्प। अभी कोई गेमिंग एडिक्शन किसी को लग रहा है उसको है तो क्या करें? कैसे छोड़े वो हैबिट्स? को स्टार्ट कैसे करें? छोड़ना। नाउ दैट ही हैज़ एक्सेप्टेड कि मुझे गेमिंग एडिक्शन है। पहला स्टेप अगर ये हो गया है कि पेशेंट ने एक्सेप्ट कर लिया बहुत अच्छी बात है। अब
(08:41) वो ये समझ सकते हैं कि हो सकता है उनको बाकी एक्टिविटीज से उतना मजा ना आए। हम तो उनको अल्टरनेटिव एक्टिविटीज जैसे मे बी स्पेंडिंग टाइम विद फैमिली मे बी फिजिकल एक्सरसाइज या ऐसी अल्टरनेटिव एक्टिविटीज थोड़ी-थोड़ी शुरू कर देनी चाहिए जिससे जो उनको वो सेम डोपामिन रश जो गेमिंग से आ रहा है वो भी मिल पाए बट वो नहीं मिलता है आई थिंक इजीली वो इजीली नहीं मिलता बट अगर आप सेम चीजें करें जैसे एक्सरसाइज हो गया जो प्रूवन है टू गिव यू द सेम काइंड ऑफ हाई या सेम काइंड ऑफ एंडोजेनस ओपिओइडस या डोपामिन जो गेमिंग देता है वो इमीडिएटली नहीं होगा
(09:13) गेमिंग से बहुत इमीडिएट डोपामिन रश आता है बट उसके उतने फिर साइड इफेक्ट्स भी आ रहे हैं। एक्सरसाइज से मे बी उतना नहीं आ पाएगा पर आएगा। एंड धीरे-धीरे अगर आप यह बात एक्सेप्ट कर लें धीरे-धीरे शुरू करेंगे। आपकी 5 घंटे गेमिंग है तो मे बी आधा घंटा कम करके कुछ फिजिकल एक्टिविटी करें। एंड धीरे-धीरे ग्रेजुअल रिडक्शन इसको आप कर सकते हैं। कर पॉसिबल है। पूरी तरह से पॉसिबल है। ऐसा जितने भी हमारे बिहेवियर एडिक्शन है, सब्सटेंस एडिक्शन है, सबका ट्रीटमेंट पूरी तरह पॉसिबल है। ठीक है? नाउ वन लास्ट थिंग जो एक और एडिक्शन का मैं पूछना चाहूंगी क्योंकि
(09:43) स्मोकिंग है वेपिंग से कहीं ना कहीं आई थिंक डिफरेंट होता है स्मोकिंग एडिक्शन। कई बार अगर हम उसको एनालाइज करें पूरी तरीके से। तो व्हाट आर द थ्री प्रैक्टिकल स्टेप्स? यू सजेस्ट कि हम स्मोकिंग एडिक्शन छोड़ पाए जिनसे। तो जैसे आप कह रहे हो बिल्कुल सही बात है। इंडिया में अगर एब्सोल्यूट नंबर देखना है या वर्ल्ड में आपको एब्सोल्यूट नंबर देखना है तो नंबर वन एडिक्शन हमेशा स्मोकिंग होता है। तो इट इज़ वेरी कॉमन एंड इट इज़ ऑलमोस्ट इसको हम अपने कल्चर का पार्ट चाहे बता माना जाता है। तो अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आपको इससे दिक्कत हो रही है। सबसे
(10:15) पहली बात तो इसमें भी आपको अपनी इंटरनल मोटिवेशन कि मुझे इस इस कारणों से दिक्कत हो रही है। देखो सिगरेट के पैक पे लिखा होता है कि सिगरेट विल कॉज कैंसर। हम यह बात सबको पता है पर कैंसर ऐसा नहीं है आज पी लो कल हो जाएगा तो लोगों को उससे डर नहीं लगता उतना दैट्स ट्रू तो इसका आप सोचिए कि आज मे बी आपको कैंसर नहीं हो रहा पर उससे खांसी हो सकती है आपकी और चीजों में दिक्कत हो सकती है आपको हार्ट की दिक्कतें हो सकती है जो कैंसर से कहीं पहले हो जाएंगी और आप यह भी सोचिए स्मोकिंग से आपको तो फर्क पड़ ही रहा है पर जिनके आसपास आप स्मोकिंग कर रहे हैं
(10:44) उनको भी स्मोक जा रहा है। पैसिव स्मोकिंग से पैसिव स्मोकिंग हो गया। सेकंड हैंड स्मोकिंग हो गया। इवन थर्ड हैंड स्मोकिंग हो गया। सेकंड हैंड अब सामने वाले ने इन्हेल कर लिया। ठीक है। पर जो एनवायरमेंट है वहां पे जाके वो स्प्रेड होता है। वहां पे टॉक्सिंस रहते हैं स्मोक के। एंड वो लेटर ऑन भी हार्म कर सकते हैं। आपको भी एंड आपके घर वालों को या जहां भी आप स्मोक कर रहे हैं। तो स्मोकिंग करते वक्त आपको ये बात समझनी चाहिए। ये सिर्फ आपको ही नहीं आपके आसपास वालों को भी इफेक्ट कर रहा है। तो इस चीज के बारे में सोें और इसको उतनी ही गंभीरता से लें। उस चीज का
(11:14) ना सोें कि जनरली जो मैं पेशेंट देखता हूं कि चल कोई नहीं कैंसर होगा देखा जाएगा। वो होगा जब देखा जाएगा। बट अभी जो दिक्कतें हो रही है उसका सोचें। तो क्या अभी आप सजेस्ट करें तीन प्रैक्टिकल टिप्स कि ये अभी आप फॉलो करो कुछ दिन के लिए तो आप ग्रेजुअली इसे रिड्यूस कर सकते हो स्मोकिंग को। तो एक बहुत इंपॉर्टेंट हम बात होता है हम इसको जनरली फोर डीज बोलते हैं। हम सबसे पहले ये बोला जाता है कि जब भी आपको स्मोक करना है तो आप उसको डिले करें कि अगर मेरा अभी बहुत ज्यादा मन कर रहा है मे बी मैं 15 मिनट 20 मिनट रुक जाऊं जितना भी आपकी कैपेबिलिटी हो।
(11:44) सेकंडली हम बहुत सिंपली बोलते हैं ड्रिंक वाटर। दूसरा डी होता है ड्रिंक वाटर। इट विल हेल्प। इट विल हेल्प टू रिड्यूस योर क्रेविंग अ बिट। देन थर्ड बोला जाता है कि डिस्ट्रैक्ट योरसेल्फ। अब डिस्ट्रैक्शन मे बी मे बी एज सिंपल एज घर वालों से बात करना किसी माइंडफुल एक्टिविटी में इंगेज करना वो मुश्किल होगा बहुत। बट आप कोशिश कर सकते हैं टू डिस्ट्रैक्ट योरसेल्फ। चौथी बात बोला जाता है डिस्कस। कि जब भी आपको क्रेविंग हो रही है स्मोकिंग की आपका बहुत ज्यादा मन कर रहा है। आप इस बारे में किसी से डिस्कस करें। बात करें। वो आपका दोस्त हो सकता है, घर
(12:12) वाला हो सकता है, कोई भी हो सकता है। आई थिंक यह बहुत इंटरेस्टिंग टिप्स दी आपने और याद करना भी बहुत आसान है कि ये चार डी फॉलो करके एंड आई फील ये किसी भी एडिक्शन में काम कर सकती है। मैं अभी अपने दिमाग में ये सोच रही हूं कि इसको अल्कोहल एडिक्शन है, गेमिंग एडिक्शन है, वो भी ये सारी चीजें फॉलो कर सकता है। बिल्कुल जो आप ये बात कह रहे हो, हम एडिक्शन में एक रिलैप्स प्रिवेंशन थेरेपी करते हैं। उसमें हम पेशेंट्स को ये फोर डीज़ सिखाते हैं। तो ओवरऑल किसी भी बिहेवियर एडिक्शन या सब्सटेंस एडिक्शन में हम ये चीज प्रैक्टिकली अप्लाई कर सकते
(12:39) हैं। एंड जस्ट ये होता है कि हमें अपने ऊपर उस बेस करना है कि हमारे लिए क्या है? हम कैसे डिस्ट्रैक्ट करेंगे? मेरा डिस्ट्रैक्शन का तरीका मे बी आपसे अलग हो। ऑफ कोर्स। तो ये चीज पर्सनलाइज करना ये सोचा जा सकता है। बट ओवरऑल ब्रॉडली यही किया जाता है। ये कॉमनली यूज स्ट्रेटजी है। ठीक है। अभी हम स्मोकिंग की बात कर रहे हैं तो एक दिमाग में क्वेश्चन आता है कि क्या निकोटीन गम स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प करती है? बिल्कुल। निकोटीन गम्स ऐसे हैं जिन्हें हम प्रिस्राइब भी करते हैं जिनका बहुत ज्यादा फायदा होता है। स्मोकिंग जब हम करते हैं
(13:09) चाहे वो डायरेक्टली स्मोक हो या टोबेको यूज़ हो वो इसलिए होता है कि उससे निकोटीन मिलता है जो जाके ब्रेन पे एक्ट करता है। एंड इससे दिक्कत यह रहती है कि एकदम से हाई आता है फिर उसको वो अमाउंट गिर भी जाता है। नोकोटीन गम से सेम चीज सेम निकोटीन हमारे ब्रेन को जाता है। तो बहुत सारे जो स्मोकिंग ना करने से दिक्कतें होती हैं जैसे क्रेविंग हो गया स्मोकिंग की तलब जिसे बोलते हैं हम या स्मोकिंग में सबसे ज्यादा जरूरी होता है इरिटेबिलिटी। चिड़चिड़ापन स्मोकिंग जब भी कम करें बंद करें वो आता है। तो इस चीज के इलाज में निकोटिन गम का बहुत
(13:39) ज्यादा रोल है। एंड ये यूज करना चाहिए। और सिमिलरली निकोटीन पैचेस भी निकोटीन पैच भी सेम चीज है। निकोटिन पैच का फायदा यह रहता है कि उससे एक कास्टेंट अमाउंट ऑफ निकोटीन ब्लड में हमेशा बना रहता है। तो लेवल वेरीरी नहीं होता। तो एक निकोटीन अमाउंट ब्रेन को जाता रहता है जिससे कि दिक्कत नहीं होती। फिर और ये हमारे को हेल्प करेगा स्मोकिंग छोड़ने में धीरे-धीरे। बिल्कुल। आप यह समझ लीजिए कि धीरे-धीरे निकोटीन गम हो गया, या निकोटीन पैच हो गया। वो वही काम वही आपको केमिकल देंगे जो आपको निकोटीन जो सिगरेट से मिल रहा है। बट इससे आपको बाकी साइड इफेक्ट्स है ना जैसे
(14:12) जो हाइड्रोकार्बन मिल रहे हैं जिससे एक्चुअली कैंसर होते हैं और दिक्कतें होती हैं वो सब नहीं मिलेंगे। एक टिप जो कई बार मैंने कहीं डॉक्टर से भी सुनी है। आप अगर कंफर्म करें सही है कि नहीं कि स्मोकिंग छोड़ने के लिए आप मुंह में ना लौंग या क्लोव मुंह में रखो तो आपका स्मोकिंग करने का मन नहीं करता। क्या ये सच है? कुछ हद तक? हां कुछ हद तक ना क्योंकि स्मोकिंग का सिर्फ यह नहीं होता कि निकोटिन जा रहा है या सब हो रहा है। एक साइकोलॉजिकल चीज भी होती है कि प्रोब्ली हमारे मुंह में वो सिगरेट वो पूरा एक्ट कि हम सिगरेट डाल रहे हैं सिर उतना है। तो इन
(14:41) सब चीजों में वो हेल्प कर सकता है। एंड सिमिलरली निकोटीन गम का भी एक ही सेम रेशनेल होता है कि मुंह में रहता है। सिमिलरली जैसे आप जितनी आप स्मोकिंग करते हो वैसे ही रहेगा। एंड सिमिलरली पहले के टाइम पे जो ये करते थे इसका कुछ एक्चुअली एविडेंस भी है। ओके। कोई इंसान अगर 510 साल से स्मोक कर रहा है तो आई थिंक उसके लंग्स तो इफेक्ट हो चुके हैं इस टाइम तक। तो क्या वो लंग्स रिकवर हो सकते हैं? दोबारा हेल्दी स्टेट में आ सकते हैं अगर वो स्मोकिंग छोड़ दे। बहुत सारे स्मोकिंग से हुए साइड इफेक्ट्स इंप्रूव हो जाते हैं। कुछ नहीं भी। वो
(15:10) इंडिविजुअल केस टू केस एंड अगेन जो लंग्स में डैमेज हुआ है या नहीं वो इंप्रूव हो सकता है मोस्ट केसेस में। अगर आप आज भी बंद कर देंगे जो डैमेज हुआ है उसमें से कुछ रिवर्स हो जाएगा। तो ऐसे कौन से साइड इफेक्ट्स हैं स्मोकिंग के जो रिवर्स हो सकते हैं? स्मोकिंग के यही होता है जैसे जो लोग रेगुलरली स्मोक करते हैं उनका स्टेमिना कम होता है। उनकी सांस जल्दी फूलती है। ये सब चीजें जो हो रही हैं ये कुछ ही दिन में ठीक होनी शुरू हो जाती है और आपकी ओवरऑल हेल्थ वो भी कुछ ही दिन में ठीक होनी शुरू हो जाती है जब आप स्मोकिंग पूरी तरह से बंद करते
(15:42) हैं। डॉक्टर निकोटीन के अलावा फिर क्या ऐसी चीजें हैं जो मार्केट में जो हमें स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प कर सकती है क्योंकि निकोटीन सब जानते हैं निकोटीन पैचेस या निकोटीन गम्स एनी अदर थिंग दैट इज हेल्पिंग अस कि जो हम स्मोकिंग छोड़ने में यूज़ करें तो इस समय पे हमारे पास बहुत अच्छे-अच्छे इलाज है पहले तो कुछ दवाइयां हैं हम जैसे एक दवाई आती है वन नाम से उसका बहुत अच्छा रिस्पांस आता है सिमिलरली एक दूसरी दवाई आती है बोटप्रोपन उसका भी थोड़ा अच्छा रिस्पांस है निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी पैच हो गया गम्स हो उसकी हमने बात कर ली। लोजेंजर्स भी आती हैं। वो भी ट्राई
(16:14) करे जा सकते हैं। इसी तरह की दो-तीन अलग-अलग दवाइयां और आती हैं जो स्मोकिंग छोड़ने में हेल्प कर सकती हैं। पर ये सब दवाइयां ओवर द काउंटर नहीं है। ये प्रिस्रिप्शन मेडिसिंस हैं जिसे कोई रिस्पेक्टिव साइकेटिस्ट ही लिख सकता है। तो इसके बारे में आप जरूर पढ़ें। नाम वनेक्कलन हो गया, बुप्रोपन हो गया जो कि ट्राई करी जाती है, यूज़ करी जाती हैं जिसे हम प्रिस्क्राइब करते हैं। ये दवाइयां लेने से स्मोकिंग करने का मन नहीं करता। यह दवाइयां लेने से स्मोकिंग करने का मन कम करता है। जो क्रेविंग होती है वो कम होती है। एंड मोरेंटली जो
(16:44) विड्रॉल आता है जैसे इरिटेबिलिटी हो गया या बहुत लोग ये कंप्लेन करते हैं कि हम स्मोकिंग नहीं करेंगे तो हम फोकस नहीं कर सकते। कंसंट्रेट नहीं कर सकते। इन सब चीजों में भी ये दवाइयां हेल्प करती हैं। ठीक है? तो अगर वो किसी साइकेट्रिस्ट के पास जाए और ये दवाइयां लिखें तो इट्स गुड फॉर देम जो उन्हें हेल्प करेगा। ठीक है? वन मोर क्वेश्चन अबाउट स्मोकिंग जो एक ऑडियंस अगर देख रही हो किसी को स्मोकिंग एडिक्शन है तो वो समझ पाए। आज अगर मैं स्मोकिंग करना छोड़ दूं तो नेक्स्ट थ्री डेज में नेक्स्ट वन वीक में नेक्स्ट वन मंथ में और नेक्स्ट सिक्स
(17:16) मंथ्स में मैं क्या-क्या अपनी बॉडी में चेंजेस देख सकती हूं। सबसे पहले जो चेंज आता है यह होता है कि कार्बन मोनोऑक्साइड के लेवल्स कम होते हैं। उससे प्रैक्टिकली ये देखा जाएगा कि आपका जो टेस्ट है एंड योर एबिलिटी टू स्मेल दैट इंप्रूव्स एज सून एज मे बी वन डेज थ्री डेज एंड विद वीक जो कि बहुत इंपॉर्टेंट बात है। ओके? देन क्योंकि और आपका स्टेमिना इंप्रूव हो रहा है। आपका ज्यादा ऑक्सीजन डिफरेंट पार्ट्स ऑफ़ बॉडी में जा रही है। चाहे वो हार्ट हो गया, ब्रेन हो गया। तो आपका स्टेमिना आपकी ओवरऑल हेल्थ इंप्रूव होती है। व्हिच स्टार्ट्स मे बी विद इन वन वीक
(17:46) टू वन मंथ। तो आप ओवरऑल बेटर फील करना शुरू करते हैं। एंड ऐसा बोला जाता है रिसर्च स्टडीज में आफ्टर स्मोकिंग इज स्टॉप्ड एक साल के बाद आपके जो हार्ट की हेल्थ है वो भी इंप्रूव होती है। ऐसा माना जाता है 40% केसेस में और बहुत ज्यादा अच्छा इंप्रूवमेंट हार्ट की हेल्थ में देखा जाता है स्मोकिंग बंद करने के बाद। ठीक है? एंड व्हाट इज लाइक हमने आपने तीन-चार दिन की बताया और एक साल का बताया। बट बीच के पीरियड में और कोई चेंजेस जो हम देख सकते हैं। बीच के पीरियड में मोस्टली यही देखा जाता है कि धीरे-धीरे चीजें बेटर होती हैं। अगर
(18:14) आज आप इतना चल पा रहे हैं। सांस फूलने से पहले तो वो धीरे-धीरे बढ़ता है। धीरे-धीरे आपकी एबिलिटी बढ़ती है बहुत सारी चीजें करने की। चाहे वो आपका काम हो गया एंड इवन डायरेक्टली इनडायरेक्टली आपकी जो रिलेशनशिप की क्वालिटीज है जो कि स्मोकिंग के कारण मे बी हैंपर हो रही हो वो भी इंप्रूव होती हैं। लोग कहीं ना कहीं मानते हैं कि स्मोकिंग करने से लंग्स खराब होते हैं। बट और जैसे कि मूवीज में दिखाया जाता है धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है और उसमें सारा लंग कैंसर एंड ऑल दिखाते हैं। बट हार्ट वहां पे बोला जाता है कि हार्ट को भी
(18:44) अफेक्ट करता है। किस वे में स्मोकिंग हमारे हार्ट से रिलेटेड है फिर और क्या ये परमानेंट डैमेज कर देता है? सो ये आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा। नॉर्मली हम ये सोच रहे हैं हम स्मोक कर रहे हैं, स्मोक लंग्स में जा रहे हैं तो वहीं पे जो भी डैमेज होना है ऐसा नहीं है। एंड इवन अगर आप सिगरेट के पैक देखें उस पे कैंसर के फोटो बना देंगे। स्मोकिंग कॉजज़ कैंसर तो हमें लगता है कि यार कैंसर यहां हो रहा है। मुंह का कैंसर दिखा देते हैं। ऐसा नहीं है। जब आप स्मोक ले रहे हैं वो आपके लंग्स के थ्रू पूरे शरीर में जा रहा है। जो हाइड्रोकार्बंस होते हैं वो हर जगह जाते
(19:10) हैं। आप ये बात समझ लें। अब वो आपके किडनी को भी इफ़ेक्ट करेंगे। वो आपके ब्लैडर को भी करेंगे। वो आपके शरीर के जहां भी शरीर में खून जा रहा है, वहां इफ़ेक्ट करेंगे। अब हार्ट का क्या होता है? जब हम स्मोकिंग करते हैं, उससे हमारा हार्ट रेट बढ़ता है। उससे हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ता है। तो आप यह समझ लीजिए जितने टाइम आप करते रहेंगे स्मोकिंग वो बड़ा रहेगा। एंड लॉन्ग टर्म जो रहेगा इससे डैमेज हार्ट में होता ही होता है। इसे बहुत सिंपल टर्म्स में बोलते हैं कि सिंपैथेटिक एक्टिविटी बढ़ जाती है। हम बहुत बार यह बात करते हैं कि हमें जब
(19:37) रिलैक्स होना है तो पैरासिंैथेटिक एक्टिविटी बढ़ानी है। स्मोकिंग से सिंपैथेटिक एक्टिविटी बढ़ती है। हार्ट में ये सब दिक्कतें आ सकती हैं। लॉन्ग टर्म में बहुत सारी हार्ट की ऐसी बीमारियां जैसे हार्ट अटैक इन सबका कारण भी स्मोकिंग होता है। तो जब इसके रिस्पेक्टिव डॉक्टर्स का इलाज करते हैं तो हमेशा बोला जाता है कि अब आप स्मोकिंग बंद करते हैं। वह इसी कारण से है कि हार्ट पे भी इफेक्ट्स हो रहा है। सिमिलरली जो कैंसर चाहे मुंह का दिखा देते हैं पर बहुत सारे अलग तरह के कैंसर है जो कि प्रूवन है कि स्मोकिंग के कारण हो रहे हैं। मैं आपको यह कहूंगा जैसे
(20:06) ब्लैडर कैंसर हो गया। ब्लैडर कैंसर ब्लैडर कैंसर अब स्मोकिंग से अब आप सोचें कहां शरीर में कहां ब्लैडर है और कहां हम सिगरेट ले रहे हैं। तो जहां भी जो हाइड्रोकार्बंस हैं वो स्मोक आपके शरीर में जा रहा है। जहां लंग्स में रहा है पर वो शरीर में हर जगह जाएगा। ब्लड से ब्लड से। ब्लड से वो आपके हर जगह है। बहुत सारी ऐसी दिक्कतें होती हैं कि ब्लड सप्लाई और जगह कम हो रही है। हाथों पैरों में ब्लड सप्लाई कम हो रही है। वेसल्स जो हैं ब्लड की उनमें डिपोजिशन आ रहे हैं वो थिक हो रहे हैं स्मोकिंग के कारण। और हर चीज बॉडी का हर पार्ट जो आप सोच
(20:38) सकते हैं उस पे कुछ ना कुछ इफेक्ट होता ही है। तो आप ये मत सोचें कि मेरे लंग्स हेल्दी हैं। मुझे कुछ नहीं होगा। आपकी कुछ ना कोई इफेक्ट हो ही सकता है। अगर पूरी तरीके से देखें अभी तो कौन-कौन से ऐसे ऑर्गन्स हैं जो स्मोकिंग से अफेक्ट होते हैं हमारी बॉडी में? तो सबसे पहले तो हमारा लंग्स हो गए। सेकंड हम अपने ब्रेन के बारे में सोचते हैं कि ब्रेन को भी निकोटीन की आदत पड़ जाती है। है ना? उसके बिना फिर हमें चिड़चिड़ापन होता है। कंसंट्रेट नहीं कर पाते हैं। बहुतेंटली एक चीज होती है। बहुत सारे लोग ये बोलते हैं कि हमें सुबह उठते ही स्मोक
(21:07) करना पड़ता है क्योंकि हम फ्रेश नहीं हो पा रहे हैं। तो बावल मूवमेंट नहीं हो पाती। तो लोग ये काइंड ऑफ़ कॉन्स्टिपेशन भी लोगों को हो जाता है जिसके लिए अब स्मोक करना ही करना पड़ता है। अब आप ये सोचें कि कॉन्स्टिपेशन कहां से हो रहा है एंड स्मोक कहां जा रहा है? तो ये बात सोचनी पड़ेगी। सिमिलरली आगे किडनी पे भी इफेक्ट पड़ सकता है। जिन लोगों को हाइपरटेंशन जैसी दिक्कतें हैं वो और खराब होती हैं। है ना? एंड इससे आगे शरीर में बहुत दिक्कतें हो सकती हैं। क्या स्किन पे भी इफेक्ट करता है स्मोकिंग? स्किन पे भी कुछ ना कुछ तरह का इफेक्ट हो सकता है। वो भी डायरेक्टली
(21:37) इनडायरेक्टली इसलिए होता है कि जो ब्लड सप्लाई है वो हर जगह कम होती है। एंड सिमिलरली स्किन हमारे शरीर का ऐसा ऑर्गन है व्हिच इज द लार्जेस्ट व्हिच नीड्स अ लॉट ऑफ़ ब्लड सप्लाई एंड वो कॉम्प्रोमाइज हो सकती है और होती है स्मोकिंग के कारण। ठीक है? अब एक क्वेश्चन जो आई थिंक पूरी जनता इंडिया की स्पेशली मानती होगी कि वेप सिगरेट से ज्यादा सेफ है। क्या ये सच है? इन शॉर्ट नहीं। नो वेपिंग का पूरा कांसेप्ट अगर आप देखें वेपिंग इसीलिए लाया गया था। मार्केटिंग ऐसे करी गई थी कि भाई यह सेफ है इसे यूज़ करें। पर ऐसा नहीं है। वेपिंग में सिंपली जब हम स्मोक करते हैं
(22:10) तो एक अमाउंट ऑफ निकोटीन हमारे ब्लड स्ट्रीम में जाता है जो आगे ऐड करता है। बट सिगरेट्स में बहुत सारे और चीजें होती हैं जिसे हम हाइड्रोकार्बन बोलते हैं। तो वो जाते हैं उनसे दिक्कतें होती है। तो अब वेपिंग जो कंपनीज़ है वो इस कांसेप्ट से लाए कि क्यों ना हम ये सब रिप्लेस करके ज्यादा अमाउंट ऑफ निकोटीन दे दें। एंड वेपिंग से बहुत हाई अमाउंट ऑफ निकोटीन आता है जो कि वेपिंग की स्टिक में हीट होता है। उसको हम इन्हेल करते हैं और वह जाकर एक्ट करता है। अब वो निकोटीन या सिगरेट की तरह मे बी कैंसर वगैरह डायरेक्टली नहीं करे बट लंग इंजरी कर सकता है इस हद तक कि
(22:42) जो भारत सरकार है उन्होंने बैन करा क्योंकि इस चीज के केसेस बहुत ज्यादा बढ़ रहे थे जो वेपिंग के कारण होने वाली लंग इंजरीज हैं। ओरल जैसे जहां माउथ में ले रहे हैं इट्स अ डिवाइस ऑपरेटेड बाय बैटरी। तो उसके कारण माउथ में भी आपको दिक्कतें हो सकती हैं और होती हैं। तो वेपिंग से भी बहुत ज्यादा दिक्कत है। एंड वेपिंग से जो एडिक्शन पोटेंशियल है वो स्मोकिंग से कहीं ज्यादा है। तो वेपिंग सेफ नहीं है। वेपिंग से कैंसर नहीं हो सकता। वेपिंग से कैंसर का डाटा अभी उतना स्ट्रांग नहीं है जितना कि स्मोकिंग से इस्टैब्लिश्ड है। स्टडीज है बट अभी
(23:15) कंक्लूसिव कह पाना मुश्किल है। तो जब मैं वेप कर रही हूं मेरी लंग्स में जाके उस स्मोक से हो क्या रहा है एक्जेक्टली। तो आप ये समझ लें कि बहुत ज्यादा अमाउंट ऑफ स्मोक जो कि हीटेड स्मोक है वो आपके लंग्स में जा रहा है जब भी आप वेप करते हैं उससे आपको लंग इंजरी बहुत तरह की हो सकती हैं जो कि परमानेंट भी होती हैं टू द पॉइंट कि वो लंग डैमेज रिवर्स नहीं होगा स्मोक वेपिंग लाया ही इसलिए गया था कि स्मोकिंग का इलाज हो पर वेपिंग से बहुत ज्यादा लोगों को बहुत सारे ऐसे लोग थे जैसे जो यंगस्टर हैं एडलेसेंट है जो पहले स्मोक कर ही नहीं रहे उनको
(23:46) वेपिंग के कारण ही वेपिंग का एडिक्शन हो गया वो स्मोकिंग कभी करते ही नहीं थे। एंड आज उनको वेपिंग का एडिक्शन है। एंड वेपिंग के बहुत ज्यादा रिस्क हैं। वेपिंग से बहुत ज्यादा अमाउंट ऑफ निकोटीन चला जाता है आपके शरीर में, आपके दिमाग में जिससे आने वाले टाइम में बहुत साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। तो ज्यादा स्केरी है वेप करना। बिल्कुल। आप इस और आज के टाइम में देखिए तो सारे टीनएजर्स और यंग एडल्ट्स के हाथ में वेप है। वेपिंग की बात खास बात यह है कि वेपिंग की जो मार्केटिंग है बहुत सारे कूल-कूल फ्लेवर्स आते हैं। मार्केटिंग है। वो लोग टारगेट ही ऐसे करते हैं जैसे मैं
(24:19) कुछ दिन पहले देख रहा था मेंथोल फ्लेवर आता है। स्मोकिंग का ये दिक्कत रहती है। आप सिगरेट स्मोक करें आपके स्मेल आएगी जो कि सबको पता चलेगी। वाटरमेलन, कीवी, स्ट्रॉबेरी ऐसे फ्लेवर्स आ रहे हैं वेप में। तो आप वेप करेंगे आपको जो वेपिंग का फायदा है वो तो मिलेगा ही। बट आपसे आफ्टर स्मेल ये आएगी। तो किसी को यह नहीं पता चलेगा कि आप कोई चीज यूज़ कर रहे हैं। यह बहुत स्मार्ट मार्केटिंग टेक्निक है जो कि यूज़ करी गई है। वेब का स्मोक से कुछ हमें स्मेल तो आती नहीं है। बट क्या वेब के स्मोक से पैसिव स्मोकिंग भी हो सकती है? वो एक्चुअली हो तो सकती है पर उतनी वेल
(24:49) इस्टैब्लिश्ड नहीं है जितनी कि सिगरेट स्मोकिंग में है। तो रिस्क है कितना है? रिस्क काफी कम है स्मोकिंग से क्योंकि वेपिंग में मोस्टली निकोटीन ही होता है। बाकी हाइड्रोकार्बंस नहीं होते हैं। पैसिव स्मोकिंग में सबसे ज्यादा दिक्कत हमें बाकी हाइड्रोकार्बन से होती है। क्योंकि निकोटीन के अलावा जो एक्चुअली जो भी डैमेज बॉडी में हो रहे हैं वो कर रहे हैं तो वो वेपिंग में उतना नहीं होता। तो वेपिंग के केस में डायरेक्टली ही लंग इंजरीज इतनी हो जाती है कि हमें आगे कुछ सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ठीक है? यूजुअली एडिक्टेड लोग ना ये बोलते
(25:19) हैं मैं कभी भी छोड़ सकता हूं। मुझे अगर मुझे अल्कोहल की आदत है या मुझे स्मोकिंग की आदत है। मुझे किसी भी चीज की आदत है तो मैं लोग जब मुझे कहेंगे ना तू क्यों करता है? क्यों करती है? तो मैं बोलूंगा मैं कभी भी छोड़ सकता हूं। ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। क्या यह मैं कभी भी छोड़ सकता हूं नशा? यह एक वार्निंग साइन है एडिक्शन का? बिल्कुल। यह बहुत जरूरी बात कही आपने। एक हम क्लीनिकली टर्म यूज़ करते हैं लॉस ऑफ कंट्रोल। तो जो भी पेशेंट्स हमारे पास एडिक्शन के लिए ट्रीटमेंट के लिए आते हैं उनसे अगर आप बात करें तो उनका हमेशा ये रहेगा कि अब हम छोड़ सकते हैं, हम छोड़
(25:48) सकते हैं। आज छोड़ देंगे, कल छोड़ देंगे। लोग ऐसा क्लेम करते हैं बहुत ज्यादा ओवर कॉन्फिडेंस होता है। एंड जब आपको ऐसा लगने लग जाए तो आपको ये कंसीडर करना चाहिए कि एक वार्निंग साइन है। चाहे वो आप में हो या आपके घर वालों में हो, किसी या किसी फ्रेंड में हो। वन लास्ट थिंग जो मैं अपने आई थिंक एडिक्शन की जब हम बात कर रहे हैं तो एडिक्शन से सिर्फ वो इंसान इफेक्ट नहीं हो रहा जिसको एडिक्शन है। उसकी पूरी फैमिली अफेक्ट होती है उसके एडिक्शन से। तो बट क्या होता है कई बार कोई इंसान छोड़ना भी चाहता है ना एडिक्शन? उसकी फैमिली उसको
(26:16) इतना डिमीन फील करा देती है, डिसिस्पेक्ट फील करा देती है कि उसका मन नहीं करता उसके बाद छोड़ने का। तो अभी आप एडिक्टेड लोगों की फैमिलीज को क्या मैसेज देंगे कि कैसे वो डील कर सकते हैं जब किसी को घर में उनका एडिक्शन है किसी चीज का। ठीक है? तो ये बहुत जरूरी होता है कि जब हम किसी का इलाज कर रहे हैं तो फैमिली का साइको एजुकेशन करना। सबसे पहले पेशेंट को और फैमिली को बात समझनी है कि एडिक्शन चाहे किसी भी चीज का हो, चाहे अल्कोहल हो, सिगरेट हो। इट्स अ क्रॉनिक डिसऑर्डर लाइक एनी अदर डिसऑर्डर। जैसे डायबिटीज हो गया, हाइपरटेंशन हो गया, बीमारी है।
(26:48) बीमारी है। उसी तरीके की बीमारी है जैसे ये बीमारियां हैं। तो जब अगर आपके किसी फैमिली मेंबर को बीपी की दिक्कत है तो उसको आप एक दिक्कत मानेंगे, इलाज कराएंगे खुद भी और फैमिली का भी सोचेंगे आप। उनको आप क्रिटिसाइज नहीं करेंगे। एडिक्शन के केस में क्या हो जाता है कि ये बहुत ज्यादा ब्लेम आता है कि आप ऐसा खुद अपनी मर्जी से कर रहे हैं जो कि पूरी तरह सही नहीं है। फैमिली वालों को भी ऐसा लगता है फैमिली ब्लेम करती है और इससे बहुत ज्यादा जैसे आने समय वाले टाइम में दिक्कत होती है। लोगों को ये लगता है कि क्या फायदा फायदा मेरी फैमिली तो बुराई कर रही है।
(27:17) एंड उससे पूरा प्रोसेस खराब होता है। विशियस सर्कल चलता रहता है। इसे हम टेक्निकली एक्सप्रेस्ड इमोशंस बोलते हैं। तो इससे हमें डील करना पड़ता है। फैमिली को ये बात समझानी पड़ती है कि देखो यह भी एक तरह की दिक्कत है। इसका इलाज हो सकता है और हम करेंगे। आपका रोल ये है कि वही ताने ना देना, क्रिटिसाइज ना करना क्योंकि उनसे कुछ बात बदलेगी नहीं। जो दिक्कतें हो चुकी हैं उसको आप नहीं बदल सकते। तो बार-बार वही बात कहना उससे कोई फायदा नहीं है। तो यहां पे हम एक्चुअली हम पेशेंट्स को और उनके फैमिलीज़ को समझाते हैं। फैमिली का बहुत ग्रेट रोल होता है पूरे ट्रीटमेंट
(27:49) के प्रोसेस में। ठीक है। वन लास्ट क्वेश्चन दैट आई हैव फॉर यू सर इज़ कि क्या एडिक्शन फुल्ली रिवर्सिबल है किसी भी चीज का एडिक्शन? अल्कोहल, वेव्स, स्मोकिंग, पोर्न, मास्टरबेशन? सी एडिक्शन भी एक क्रॉनिक डिसऑर्डर है एंड इट कैन बी ट्रीटेड इट क्योर एट दिस पॉइंट ऑफ टाइम मेडिकल साइंसेस में सिर्फ इनफेशस डिजीज का है उसके अलावा कोई क्योर नहीं है हम वैसे ही आप किसी से पूछे कि डायबिटीज का आप क्योर कर सकते हैं पॉसिबल ही नहीं सिमिलरली एडिक्शन कैन बी ट्रीटेड एंड इट कैन बी ट्रीटेड वेरी वेल इतना कि आप अपनी नॉर्मल जिंदगी जी पाए पहले की तरह
(28:24) ठीक है थैंक यू सो मच डॉक्टर बहुत मजा आया आई थिंक जिन लोगों के लिए टॉपिक टॉपिक इंपॉर्टेंट था। वही देखने आएंगे यह एपिसोड क्योंकि वह रिलेट करेंगे इस चीज से। एंड उनको इस एपिसोड में एक सेफ स्पेस मिला होगा यह समझने का कि वह एडिक्शन रोक सकते हैं। कैसे रोक सकते हैं? क्या चीजें वो कर सकते हैं? क्या उनकी फैमिली उनके लिए कर सकती है। तो यह पूरा एपिसोड बहुत इंपॉर्टेंट था कुछ ऐसे लोगों के लिए जो कहीं ना कहीं अकेले स्ट्रगल कर रहे हैं किसी ना किसी चीज के नशे से। सो थैंक यू सो मच ये इंफॉर्मेशन देने के लिए और आप ऐसे लोगों को डील करते हैं उनको हेल्प
(28:54) करते हैं मैनेज करने में और इतने बड़े हॉस्पिटल एम्स जैसे हॉस्पिटल में आप यह करवाते हैं। ठीक है? बहुत मजा आया मुझे आपसे आज बात करके एंड हमारा एक और एपिसोड मैं ऑडियंस को बताना चाहूंगी रिलीज होने वाला है जिसमें हम बात करेंगे ऑन साइकेट्री एज अ सब्जेक्ट कि एज अ साइकेट्रिस्ट क्या पढ़ाई करनी होती है? क्या रियलिटीज है साइकेट्री फील्ड की एंड मच मोर जो बहुत ही साइकेट्री ओरिएंटेड एपिसोड है। यह एपिसोड था एडिक्शन से रिलेटेड। तो अगर उस टॉपिक में किसी भी ऑडियंस को इंटरेस्ट हो तो जाके वो एपिसोड जरूर देखिए। अगर यह पॉडकास्ट पसंद आया हो
(29:23) तो लाइक जरूर कीजिएगा। कमेंट करके बताइए। प्यार दिखाइए। कोई क्वेश्चंस है आपके दिमाग में तो हम जरूर डॉक्टर को बोलेंगे। आंसर करें। आप कमेंट में जरूर बताइए। इस एपिसोड को शेयर करना मत भूलिएगा। चैनल को सब्सक्राइब करें। दिस इज योर होस्ट खुशी केग। थैंक यू। रख दे तू कोई दिल विच ग्ला रब दे बंदिया तू सब जाने अपने अंदर लेके तदा क्यों फिकरा विच पल तू गवावे जा राज तेरे अपने ल तू समा ओम नम
(30:12) ओम नम ओम नम
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