Friday, May 15, 2026

Why Youth Are Losing Direction Today | The secret of longevity and energy

Why Youth Are Losing Direction Today | The secret of longevity and energy @BijayAnandTransform

Author Name:Namah Talks Podcast

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@namahtalkspodcast

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=ZsYHA7U7cNk




ఇదిగో ఈ ఎపిసోడ్‌కి **తెలుగులో key takeaways**:

## కీలక అంశాలు

- **యువత దారి తప్పడానికి ప్రధాన కారణం ఇంట్లో నుంచే వచ్చే ప్రెజర్.**  
  చదువు, ఉద్యోగం, డబ్బు, “సక్సెస్” మీద చిన్నప్పటి నుంచే బలవంతం చేయడం వల్ల పిల్లల్లో అసురక్షిత భావం పెరుగుతుందని వీడియోలో చెప్పారు. [1]

- **పిల్లలపై ఎక్కువ నియంత్రణ ఉంచడం రిబెలియన్‌ను పెంచుతుంది.**  
  చాలా కఠిన నియమాలు, హెలికాప్టర్ parenting వల్ల పిల్లలు rebellion లేదా confusion వైపు వెళ్లే అవకాశం ఉంటుందని సందేశం. [1]

- **పిల్లకి “నీ జీవితం నీది” అన్న బాధ్యత ఇవ్వడం బలంగా మారుస్తుంది.**  
  అతిగా కట్టడి చేయకుండా, ఎంపికలతో పాటు బాధ్యతను కూడా ఇవ్వడం వల్ల పిల్లలు స్వతంత్రంగా ఎదుగుతారని చెప్పారు. [1]

- **సంస్కారం కంటే మంచి మనిషి కావడం ముఖ్యమని సందేశం.**  
  “లాయర్ కావాలి”, “డాక్టర్ కావాలి” వంటి బయటి లక్ష్యాల కన్నా, పిల్ల సంతోషంగా ఉండే జీవితం ఎంచుకోవడం ముఖ్యమని అన్నారు. [1]

- **నిజమైన విజయం అంటే ఫేమ్ కాదు, అంతర్మనశ్శాంతి.**  
  బిజయ్ ఆనంద్ తన కెరీర్, ఫేమ్ మధ్య కూడా శాంతి, స్పిరిచువాలిటీని నిలుపుకున్నట్లు చెప్పారు. [1]

- **ధ్యానం ఎక్కడైనా చేయవచ్చు.**  
  ధ్యానం కోసం ప్రత్యేక గది లేదా ప్రత్యేక సమయం అవసరం లేదని, మనసు కేంద్రీకరించడమే ముఖ్యమని తెలిపారు. [1]

- **కర్మ మరియు మంచి పనులు జీవితాన్ని ప్రభావితం చేస్తాయి.**  
  ఎవరి మనసు నొప్పించకుండా, మంచి పనులు చేయడం జీవితానికి అసలైన పునాది అని అన్నారు. [1]

- **ఫేక్ గురువుల నుంచి జాగ్రత్త.**  
  నిజమైన గురువు స్వీయ ప్రచారం, డబ్బు, భయం చూపించడు; జ్ఞానాన్ని పంచుతాడని వీడియోలో స్పష్టం చేశారు. [1]

- **శరీరాన్ని దేవాలయంలా చూసుకోవాలి.**  
  ఆహారం, మానసిక స్థితి, భావాలు—all ఇవి ఆరోగ్యాన్ని ప్రభావితం చేస్తాయని చెప్పారు. [1]

- **జెన్ Z మతం నుంచి కాదు, రూల్స్ నుండి దూరం అవుతోంది.**  
  కఠిన ఆచారాలు, భయం, guilt ఆధారిత approach వల్ల యువత దూరమవుతుందని వీడియోలో చెప్పిన ముఖ్యమైన పాయింట్. [1]

## చిన్న సారాంశం

**ఈ ఎపిసోడ్‌లో ప్రధానంగా చెప్పింది: పిల్లలపై ప్రెజర్ తగ్గించాలి, బాధ్యత ఇవ్వాలి, మంచి మనిషిగా ఎదగనివ్వాలి; అలాగే ధ్యానం, మంచి కర్మ, అంతర్మనశ్శాంతి జీవితంలో దారి చూపుతాయి.** [1]





Transcript:
(00:00) लिखो गैंगस्टर योगी। तो सब हके बके हैं। बोले क्यों? आपको मैंने यह अधिकार दिया कि आप मुझे गुरु बोलो या गुरु समझो। तो कल आप मेरे पे उंगली उठाके बोले कि आप तो वाइन पी रहे हो। आप वाइन क्यों पी रहे हो? आप तो टीचर हो। आप तो स्पिरिचुअल हो। कि विजय जी को ओशो का रोल प्ले करना चाहिए क्योंकि आप ओशो जैसे लगते हो। आज मैं जो कुछ भी हूं वो जो बीच था वो ओशो का ही था। ओशो वाज वे अहेड ऑफ ह टाइम। फिर आपके सामने जो भी भगवान बन के आता है कि मैं साधु हूं। मैं आसाराम बापू हूं। मैं ये हूं मैं वो जो भी आपके आप उसको पकड़ लेते हो। यह नहीं देखते कि कुछ शकल से चोट
(00:30) लगता है। आपकी मम्मी का नाम क्या है? शीतल। शीतल जी। [हंसी] आप अगर ये देख रही हैं तो सलू्यूट आपको। दिस इज़ पेरेंट। मैंने जितनी छूट अपनी बेटी को दी है आज वो 17 साल की है। आप बिलीव नहीं करोगे कितनी छूट दी है। लेकिन मैंने हर छूट के साथ यही बोला तेरी लाइफ है। सत्यानाश करना है कर। और इस चीज से ना जेंसी बड़ा रिलेट कर रही है। क्योंकि जेंज़ रिलीजियस से दूर इसलिए भाग रहे हैं रूल्स की वजह से। एक क्लास में जो मैं गया ऋषिकेश में क्लास हो रही थी जो विजय आनंद उस क्लास में गया था और जो विजय आनंद उस क्लास से बाहर निकला वो दो अलग इंसान थे।
(01:02) हकीनी मुद्रा होता है ऐसे। ये हकीनी मुद्रा मैंने इतने सक्सेसफुल लोगों को करते हुए देखा है। मतलब आप ईलॉन मस्क को देखा है। दिलजीत दुस को देखा है। विराट कोहली क्रिस्टियाना रोनाल्डो को भी करते हुए देखा है। ये हकीनी मुद्रा कहा जाता है पावर को सिंबलाइज करता है। कॉन्फिडेंस आता है। क्या ये सच है? तो और रियल होता है। कैसे देख पाते हैं औररा? बहुत इजी है। कैसे? जैसे ही आपके सामने कोई आदमी आएगा एक सेकंड में आपको उस आदमी की हिस्ट्री जग्राफी बायोग्राफी सब समझ में आ जाएगा। चैलेंज के साथ बोलता हूं। अच्छा आपको मालूम है लंजेबिटी का सीक्रेट क्या है?
(01:32) क्या है? जो लोग मेरे को बोलते हैं आप 56 के दिखते नहीं हो। पॉजिटिविटी के लिए बहुत सारे तरीके हैं। आपको कितना पॉजिटिव करना है लाइफ को? आप डिसाइड करो। कुछ दो चार तरीके बताओ पॉजिटिविटी के लिए। अब ऐसा लग रहा है किसी ज्ञानी के सामने बैठो। वंस इन अ लाइफ टाइम वाला होता है ऐसी कॉन्वर्सेशंस। बड़ा मजा आया। [संगीत] [संगीत] वेलकम टू नामा टॉक्स विजय बहुत ही एक्साइटेड हूं मैं बिकॉज़ समबडी हु हैज़ बीन एन एक्टर ऑल हिज़ लाइफ अ सुपर मॉडल यू हैव वर्क्ड इन टीवी सीरीज यू आर वर्कड इन मूवीस एंड नाउ पीपल सी यू एज़ अ स्पिरिचुअल योगी दैट इज़ लाइक अ 360 डिग्री
(02:19) ट्रांसफॉर्मेशन देट नोबडी एक्सपेक्टेड सेड कि समबडी फ्रॉम बॉलीवुड कैन टर्न इंटू अ स्पिरिचुअल योगी हु इज़ टीचिंग अस अबाउट योगा, टीचिंग अस अबाउट आयुर्वेदा, टीचिंग अस अबाउट वेलनेस। एंड बहुत लोगों को बहुत क्वेश्चंस आते होंगे दिमाग में। हाउ डिड यू डू दिस? यह कैसे पॉसिबल है? बिकॉज़ द वर्ल्ड ऑफ़ फेम इज़ इनटॉक्सिकेटिंग। हमें जब एक बार फेम चक जाती है, उसके बाद एक कामनेस और पीस की लाइफ में आना, उस चीज को गिव अप करना। देन अगेन यू वेंट इंटू एक्टिंग। बट एट द सेम टाइम यू डिड नॉट लीव इट बिहाइंड। डिड नॉट लीव योर स्पिरिचुअलिटी बिहाइंड। यू केप्ट इट ऑल
(02:54) बैलेंस्ड। तो बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी है। बट उससे पहले जब हम स्पिरिचुअलिटी की बातें आपसे करेंगे। उससे पहले जो ऑडियंस को सबसे ज्यादा इंटरेस्ट आता है आता है आपके टीवी करियर के बारे में। आपकी एक्टिंग करियर के बारे में। तो अभी सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग है कि रणवीर और साईं पल्लवी की रामायण इस कमिंग। हमारी जनरेशन ने रामानंद सागर की रामायण देखी है। जिसने जनरेशंस को इन्फ्लुएंस किया। आज तक कोई नहीं भूल पाया रामानंद सागर के रामायण को देन उसके बाद सिया के राम जिसमें आप खुद जनक बने थे उस उस भी रामायण ने इतना इन्फ्लुएंस किया था हर जनरेशन को उसके बाद
(03:28) आई आदि पुरुष जिसमें फियास्को क्रिएट उसमें भी आप खुद थे बट कहीं ना कहीं आदि पुरुष से लोग कनेक्ट नहीं कर पाए बिकॉज़ आई व्हाट मेरा ओपिनियन इसमें है कि वो एक मूवी थी इसलिए मन सागर जी की रामायण या फिर आपकी सिया के राम की रामायण वो दोनों सीरीज थी बट अब देखा जाए हर हर रिलीजियस सीरीज जो आई है उसमें जो कररेक्टर्स प्ले किए हैं सबको एक पेडेस्टियल पे रख देते थे। हम उन्हें भगवान मानते हैं। चाहे महादेव की सीरीज आई थी तो हमने उन्हें भगवान मान लिया। रामायण आई है तो उसमें जो कररेक्टर्स प्ले करे हमने उन्हें भगवान मान लिया। रणबीर कपूर और साईं पल्लवी अब
(04:02) भगवानों का कैरेक्टर प्ले प्ले कर रहे हैं। एंड उनकी इमेज वैसी नहीं है जिनको हम पेडेस्टल पे रख सकते हैं कहीं ना कहीं। तो व्हाट डू यू थिंक जो अब जो रामायण आ रही है रणबीर कपूर की क्या हम उसको भी उसी वे में कनेक्ट कर पाएंगे या दैट विल बी अनदर फ्लॉप। दैट इज वेरी लोडेड क्वेश्चन [हंसी] बिकॉज़ आई थिंक एट द एंड ऑफ़ द डे होता क्या है जब आप थिएटर में जाते हैं और एक बार जो मूवी है वो शुरू होती है कोई भी फिल्म है जब एक बार शुरू होती है तो वो रणवीर कौन है दीपिका कौन है अगर वो आप उस फिल्म में उस कैरेक्टर में आपको रणवीर ही दिखा
(04:36) तो वो फिल्म फ्लॉप होनी ही होनी है क्योंकि जब तक आप उस कैरेक्टर को नहीं देखोगे तब तक आप आइडेंटिफाई नहीं करोगे कनेक्ट नहीं करोगे और जो हो रहा है स्क्रीन के ऊपर और आप उसके साथ एक आपके कनेक्शन बनेगा ही नहीं। हम तो फिर तो वो फिल्म प्लब होनी ही है। लेकिन एज एक्टर्स दे आर सच ग्रेट एक्टर्स रणवीर एंड ऑल इन दैट होल स्टार कास्ट आई एम प्रीटी श्योर इट्स गोइंग बी अ ग्रेट हिट एंड आई एम रियली लुकिंग फॉरवर्ड इट। यू रियली थिंक इट्स गोइंग टू बी अ ग्रेट हिट। आई थिंक सो बहुत प्यार से बना रहे हैं। बहुत पैशन के साथ बन रही है। देन व्हाई डिड आदि पुरुष फील एट द सेम
(05:07) टाइम? बिकॉज़ आदि पुरुष वाज़ अ वेरी बोल्ड एक्सपेरिमेंट इन प्रेजेंटिंग अ कंटेंपरेरी वर्जन ऑफ़ द ऑफ द रामायण हम ओके इट वाज़ बेसिकली आपको समझना चाहिए कि फिल्म [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेकिंग होती क्या है? पेंटिंग जो होती है मैं आई एम आर्ट डीलर मैं पेंटिंग में डील करता हूं। एमएफ हुसैन हो गए जो आपको नाम सुना होगा रजा है। तो उस तरह की पेंटिंग्स हम लोग सेल करते हैं। अब एक पेंट पेंटर जो है आर्टिस्ट वो क्या होता है? उसको एक ब्लैंक कैनवस वाइट कलर का दिया जाता है। वो [नाक से की जाने वाली आवाज़] चूज़ करता है कि उसमें ब्लैक कलर यूज़ होगा, ब्लू होगा,
(05:45) रेड होगा, येलो होगा, ग्रीन होगा और [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसे जो बनाना है वो बनाता है। अब कभी-कभी वो मास्टर पीस पेंटिंग बन जाती है जो 100 करोड़ में बिकती है, 80 करोड़ में बिकती है, 50 करोड़ में बिकती है और कभी-कभी बहुत ही वाहियात गंदी पेंटिंग बन जाती है जिसे कोई खरीदना ही नहीं चाहता। आर्टिस्ट वही है। उसी आर्टिस्ट ने ये पेंटिंग भी बनाई, ये पेंटिंग भी बनाई। ठीक है? लेकिन इसमें सबसे बड़ी बात क्या होती है कि वो आर्टिस्ट के ऊपर है कि उसे क्या बनाना है। आज ओम रावत को अपने पैसे से अपनी एक जो काबिलियत के साथ जो उसे बनाना था उस उसका
(06:19) जो कैनवस था उसे जो कलर चूज़ करने थे उसे जो चित्र बनाना था उसने बनाया। आपको पसंद नहीं आया तो कोई बात नहीं। इट्स नॉट ह फॉल्ट। इट्स जस्ट इट डिडंट क्लिक विथ यू। बट एज अ एज अ एज अ मीडियम फिल्म मेकिंग इज आर्ट। वो आप मत बोलिए कि एक आर्टिस्ट को जो बनाना है वो बनाएगा। आप ये मत बोलो कि तुम्हें ये बनाना चाहिए। आप एमएफ हुसैन को ये मत बोलो कि तुम घोड़े ही बनाओ। मुझे वही देखना है। उसे अगर मदर ट्रीसा बनानी है तो वो भी बनाएगा। उसे अगर माधुरी बनानी है तो वो भी बनाएगा। वो आप मत देखो। आप मत देखो। आपको माधुरी नहीं देखनी है। तो आपको खाली घोड़े देखने हैं तो आप घोड़े
(06:57) देखो। लेकिन आर्टिस्ट को ये मत बोलो कि तुम्हें क्या बनाना चाहिए। वो एक एक लिबर्टी होती है आर्टिस्टिक लिबर्टी। आप अगर उसे कुचल दोगे आप अगर बोलोगे ओम रावत को कि तुम्हें ये स्टाइल तुम्हें नहीं बनाना चाहिए था। अगली बार ऐसा मत करना हम लोग वो गलत है। क्योंकि फिर आप जो फिल्म मेकिंग का जो प्रोसेस है फिर आक्रोश जैसी सुपरहिट फिल्में जो एक्सपेरिमेंटल थी लेकिन सुपरहिट हो गई। या तो फिर गॉडफादर कितनी एक्सपेरिमेंटल थी अपने टाइम पे। लेकिन आज भी मतलब मैंने गॉडफादर नई-नई करके 14 या 15 बार देखी होगी। इट्स अ मास्टर पीस। इट इज़। वो भी जैसे ओम रावत ने एक्सपेरिमेंट किया
(07:29) वैसे उसी तरह से दैट वाज़ आल्सो मायन एक्सपेरिमेंटल फिल्म। तो दैट इज़ अ क्राफ्ट। हर एक चीज़ सक्सेसफुल नहीं होती। आज मैं भी एक्टर हूं। मैंने अगर कोई किरदार निभाया वो मेरा इंटरप्रिटेशन है। अगर उसमें गलती हो गई आपको पसंद नहीं आया वो अलग बात है। लेकिन एज एन आर्टिस्ट कला क्या बोलते हैं? कला क्या होता है? एक आर्टिस्टिक एक्सप्रेशन जो आपके अंदर जो आपके सोल में जो आवाज है वो आवाज बाहर आई। वो आपको जो सुनना है वो उसके हिसाब से नहीं चलती। वो एक स्पिरिचुअल कनेक्शन होता है आर्टिस्ट का अपने कैरेक्टर के साथ। तो आई थिंक आई आई एक्चुअली सलू्यूट ओम
(08:03) रावत फॉर बीइंग बोल्ड इनफ फॉर मेकिंग व्हाट ही मेड एंड द वे ही मेड इट। अगर फ्लॉप हो गई तो उसकी भी एक एक करज चाहिए वो एक्सेप्ट करने के लिए। एंड मूव ऑन फ्रॉम इट। करेक्ट। एंड आई थिंक आदि पुरुष सेट द पेव। उस आदि पुरुष की वजह से और ऐसी मूवीज आई है जिसने वीएफएक्स के साथ फिर एक्सपेरिमेंट किया एंड इंप्रूव किया। आदि पुरुष वास वन ऑफ द फर्स्ट जो थोड़ा सा वीएफएक्स के साथ प्ले करना स्टार्ट किया था। देन ब्रह्मास्त्र देखी हमने और ऐसी बहुत मूवीस आई उसके बाद तो कहीं ना कहीं वो एक गलती ने लोगों को एक रास्ता दिखाया कि इस रास्ते पे चलो तो
(08:35) बहुत पोटेंशियल है या बट आपका एक और रोल था जनक का सिया के राम में। कोविड के टाइम पे लोगों ने इतना पसंद किया उस रोल को बिकॉज़ कोविड के टाइम पे हम सिया के राम देख रहे थे सब। एंड कहीं ना कहीं उस रोल की वजह से लोगों ने इतना कनेक्ट किया कि नोबडी कैन प्ले जनक बेटर देन यू। आज भी आई थिंक लोग आपको मिलके यही बोलते होंगे कि जनक आप जनक हो ना आप वही हो ना जो जनक हैं। ऐसे शायद बात करते होंगे। मैं आपका एक्सपीरियंस जानना चाहूंगी कि सिया के राम में आपने जो जनक रोल प्ले किया था तो वो कैसा एक्सपीरियंस रहा आपके लिए? सबसे बड़ी बात तो ये है जो आपको शायद पता
(09:09) भी नहीं होगी कि मैंने प्यार तो होना ही था के बाद एक्टिंग छोड़ दी थी। हम मुझे एक्टिंग नहीं करनी है। वो मैंने एक डिसिशन लिया हूं। जैसे कि मेरा मैं हमेशा अपनी मेरी बुक में भी लिखा है मैंने द प्रोस्पेरिटी को जो अभी रिलीज़ हुई है कि मेरा जो एक लाइफ है उसकी जो सक्सेस है वो मेरी इंटेलिजेंस की वजह से नहीं है। वो इंट्यूशन की वजह से है कि मेरा एक एक अंदर से आत्मा से जो आवाज आती है मैं वही करता हूं। फिर आत्मा ने अगर बोला कि नदी में कूद जाओ तो मैं कूद जाता हूं। और बहुत बार कूदा भी हूं। मतलब इस तरह से इस तरह के डिसिशन लिए हैं मैंने। जो लोग बोलते हैं
(09:41) कि तुम पागल हो गए हो क्या? जैसे कि प्यार तो होना ही था। इतनी बड़ी हिट थी। सिल्वर जुबली हुई। मुझे 20 फिल्मों के ऑफर आए और मैंने एक्टिंग छोड़ दी। तो लोग बोलते हैं पागल हो गए। 20 साल तुमने एक्टिंग की। अब तुम्हारी सुपरहिट हुई। सिल्वर जुबली मिली। तुम एक्टिंग छोड़ रहे हो। तो वो मेरा डिसिशन नहीं था। वो इंट्यूशन थी। एक अंदर से आवाज आई। मैंने छोड़ दिया। मैं वो क्वेश्चन नहीं करता। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो 16 साल एक्टिंग नहीं की। और 202 प्रोजेक्ट को ना बोला कि नहीं करना नहीं करना नहीं करना। बहुत बार मतलब बहुत अग्रेसिवली
(10:12) इन्होंने मुझे पर्स्यू किया। ये कैरेक्टर आपके लिए बनाया। आपको ही करना है। मैं बोला नहीं मुझे नहीं करना। लेकिन जब मुझे निखिल सिन्हा ने सिया के राम के लिए बुलाया उस वक्त मैं ऑलरेडी टीचर था। मैं स्पिरिचुअल क्लासेस पूरे वर्ल्ड में मेक्सिको, चाइना, यूरोप सब जगह जाके सिखाता था। जब मैंने ये कैरेक्टर सुना, उसकी थोड़ी सी लाइंस सुनी। हम तो मुझे ऐसा लगा कि मैं क्लास में सिखाता हूं तो मेरे क्लास में कितने लोग होते हैं? 100, 300, 600, 800, 1000। ठीक है? तो 1000 लोग होते हैं। मैंने कुछ अच्छा बोला तो 1000 लोगों में से कम से कम 400
(10:47) लोगों को फायदा होगा क्योंकि 600 को समझ में नहीं आएगा शायद। हम लेकिन अगर ये कैरेक्टर मैं निभाता हूं अगर इससे मैं करता हूं तो एक टाइम पे लाखों लोगों को बेनिफिट होगा कि ये एक फिलॉसफी क्या थी? व्हाट वास जनक फिलॉसफी? कि आप एक योगी भी हो सकते हो और एक राजा का जीवन भी व्यतीत कर सकते हो। एट द सेम टाइम। यहां जो कुछ भी है वो मेरा नहीं है। ना यह शरीर ना यह राज सिंहासन ना ही मिथिला सब नश्वर है। तो वो जो एक डायलॉग था वो जो एक लाइन थी और उसका जो एक एज अ फादर जो सीता के साथ जो कनेक्शन था वो मुझे इतना प्यारा लगा कि मुझे लगा कि दुनिया को ही देखना
(11:26) चाहिए कि ये क्या है और मैं ये दिखाना चाहता था। तो इसीलिए मैंने सेवा के भाव से उस कैरेक्टर के लिए हां कहा कि मैं हां करूंगा क्योंकि मुझे लगा कि ये एज अ टीचर मेरा एक एक्सटेंशन हो जाता है कि ये मैं मुझे एक और कुछ सिखाने का एक मौका मिल रहा है। तो उसी मैंने उसे ना नहीं कहा। मैंने हां कहा फिर वो खून वापस चक लिया एक्टिंग का। फिर मैंने एक के बाद एक शेरशाह भी की। फिर बड़े मियां छोटे मियां की। फिर क्रैक करके फिल्म की जिसमें मेरा विलन का रोल था। फिर आधी पुरुष की। तो अभी भी एक्टिंग के रोल तो आते रहते हैं लेकिन क्या है कि
(11:58) मैं भी एक्टिंग शो किया करता हूं। मुझे एज अ प्रोफेशन मेरा एक्टिंग नहीं है। जब मुझे अच्छा लगता है, मजा आता है तो मैं करता हूं कि भ लोकेशन क्या है? लोग कैसे हैं? रोल क्या है? अगर इसे एक्साइटिंग लगा तो हां कहता हूं। नहीं तो 10 में से सात या आठ प्रोजेक्ट्स को ना कहता हूं। नहीं करना। लोगों का सपना होता है कि उन्हें 10 प्रोजेक्ट है और आप उसमें से सात मना कर देते हो। बट जनक का वो एक रोल था जिसने आपको वापस इस इंडस्ट्री में खींचा और जनक की फिलॉसफी ने आपको खींचा। या क्या ऐसे आपने अपनी उस जर्नी में नया सीखा जब आप जनक का रोल प्ले कर रहे थे?
(12:32) एक वैलिडेशन मिला के मैं जो कर रहा हूं सही कर रहा हूं। क्योंकि मुझे बिजनेस क्लास भी पसंद है, महंगी गाड़ियां भी पसंद है, महल में रहना भी पसंद है। लेकिन वो जो एक अगर एक पर्सन का सपोजिंग अगर दिमाग में कंफ्यूजन था कि यार योगी भी हूं। मेडिटेशन भी पसंद है। ऋषिकेश में बैठना भी पसंद है। वहां जाके बहुत टाइम यू नो व्यतीत करता हूं ऋषिकेश में। तो ये एक जो एक क्रॉस है कि ये इतना लग्जरी और इतना धार्मिक इतना मैं खुद हवन भी करना सुबह-सुबह उठ के 4:00 बजे उठता हूं 10:00 बजे सोता हूं। तो ये क्या मतलब लेकिन जनक का जब कैरेक्टर मैंने प्ले किया
(13:12) और जब उसके सारे लाइंस जो मैंने जो बोले जो समझे उससे लगा कि हां ये वैलिडेशन हो गया कि हां जो मैं कर रहा हूं ठीक कर रहा हूं। एक्टिंग के साथ-साथ मेडिटेशन कर पाते थे आप। हां हां क्यों नहीं? हो पाती थी। इतनी कओटिक सेट होते होंगे। अभी 2 घंटे की फ्लाइट में आया हूं दिल्ली टू बॉम्बे। हां। फ्लाइट में भी मेडिटेशन किया। उसमें क्या मेडिटेशन के लिए जगह ऐसे कोई स्पेशल जगह नहीं होती कि आपको मेडिटेशन हॉल चाहिए, एकांत चाहिए, शांति चाहिए। आप अगर मेडिटेटर हो जहां आप बैठते हो वो मेडिटेशन की कुर्सी बन जाती है। और यही हम सोचते हैं क्योंकि मैं भी खुद
(13:45) मेडिटेशन करने के लिए सोचती हूं। मुझे शायद अकेले कमरे में बैठना पड़ेगा, शांति में बैठना पड़ेगा। और इस वजह से आई थिंक प्रोक्रास्टिनेट करती रहती हूं मैं मेडिटेशन को। बट आप यह कहना चाह रहे हो कि कहीं भी मेडिटेशन हो सकता है। मेडिटेशन आपके बाहर है ही नहीं। आप हो ही नहीं। आपके अंदर ऑलरेडी है। तो आपको खाली उसके साथ कनेक्ट करना है तो किधर भी हो सकता है। उसके लिए स्पेशल जगह की स्पेशल टाइम की किसी की भी जरूरत नहीं है। देयर इज़ नो नीड फॉर एनी ऑन दैट। आई थिंक इस स्टेज तक आने में बहुत साल बहुत मेहनत लगती होगी। मैंने तो कोई मेहनत नहीं की। मैंने पिछले
(14:18) जन्म के कर्म थे। फ्रैंकली। ऐसा कैसे? आप जो भी कर्म करते हो वो इस जन्म में अगर पूरे होते हैं तो होते हैं। नहीं होते तो अगले जन्म में कैरी फॉरवर्ड होते हैं। अच्छे भी और बुरे भी। यू बिलीव इन पास्ट लाइफ कर्मा। वो 100% मैं तो मेरा पूरा जो फिलॉसफी है जो भी मैं सिखाता हूं मैं तो यहां तक लोगों को बोलता हूं कि आप योगा भी मत करो। साथ में खाना भी मत खाओ। कुछ भी मत करो। योगा भी मत करो। मेडिटेशन मत करो। खाली अच्छे कर्म करो। कि जो आप अच्छे कर्म करते हो उसका बेनिफिट आपको हर एक दिशा से आता है। आपको हर एक डायरेक्शन से उसका बेनिफिट मिलता है। और जो आप योगा
(14:56) करोगे, मेडिटेशन करोगे, सात्विक वेजिटेरियन खाना खाओगे, सब करोगे। लेकिन आपने किसी एक आदमी का दिल दुखाया, एक आदमी की बद्दुआ ली। आपको भगवान भी आके नहीं बचा सकता। आपको नर्क जाना ही होगा। तो बद्दुआ मत लो किसी की। जितनी दुआएं ले सकते हो, उतनी दुआएं लो। जितना अच्छे कर्म कर सकते हो उतने अच्छे कर्म करो। क्या कभी बॉलीवुड इंडस्ट्री में आपने ऐसा कुछ बैकलैश फेस किया जहां पे क्योंकि बॉलीवुड इंडस्ट्री जानी इसी चीज के लिए जाती है। थोड़ा टॉक्सिक थोड़ा नेगेटिव चीजें होती हैं वहां पे। फाइट्स हैं। इंडस्ट्री को बहुत नेगेटिव लाइट में लिया
(15:30) जाता है और आप उस लाइट में रह के भी एक योगी बने रहे। यह एक मिसकसेप्शन है कि बॉलीवुड में नेगेटिविटी है, टॉक्सिसिटी है। मैं आपको बताऊं आप कोई भी प्रोफेशन ले लो हम आप एफएमसीजी ले लो फार्मा ले लो सीमेंट बनाने की फैक्ट्री ले लो पुलिस डिपार्टमेंट ले लो पॉलिटिक्स ले लो यहां तक कि स्पिरिचुअलिटी ले लो आज मैं योगा सिखाता हूं मुझे इनविटेशन आता है बाली से मेक्सिको से रशिया से चाइना से पूरे वर्ल्ड में जाके सिखाता हूं योगा में जितनी टॉक्सिसिटी नेगेटिविटी जितनी जेलसी है मैं आपको बता बता नहीं सकता। आप सुन के शॉक हो जाएंगे।
(16:15) सही में मुझे बाली में बुलाया गया बाली स्पिरिट फेस्टिवल में। आपको मैं एक उदाहरण दे रहा हूं। बाली स्पिरिट फेस्टिवल में मेरी फर्स्ट क्लास फुल मतलब कभी ऐसा हुआ नहीं कि एक क्लास में किसी टीचर की पहली क्लास में 400 लोग हैं। तो जब दूसरी क्लास थी तो बोला उसमें तो फिट होंगे नहीं। क्योंकि फिर वो फैल गई बात कि 400 लोग ऐसे आए तो सब उनका एक्सपीरियंस क्या था। तो दूसरी क्लास उन्होंने और बड़े लोकेशन में रखी। वहां पे 700 लोग थे। वो भी फुल हो गया। फिर और लोगों को नहीं बैठ सके। ऐसे करके करके वो साइज बढ़ाते रहे। लास्ट में उन्होंने बोला हार के बोला कि जहां पर रॉक
(16:45) कॉन्सर्ट होती है उनकी शाम की जहां पे म्यूजिक कॉन्सर्ट होता है वहां पे विजय की क्लास रखते हैं। तो वो मेरा और मेरा क्लास का टाइमिंग चेंज करके उसको इतना बड़ा ये कर दिया कि क्लोजिंग सेरेमनी बता दिया उसको कि भ [नाक से की जाने वाली आवाज़] विजय आनंद इस गोइंग टू क्लोज द होल बाली स्पिरिट फेस्टिवल। ठीक है? हो गया। वहां पे 1000 के ऊपर लोग थे और बाहर 400 लोग थे जो अंदर नहीं आ सकते थे। इतना मतलब वहां पर यह हो गया था मेरी क्लास के लिए। अगले साल मुझे इनवाइट ही नहीं किया उन्होंने क्योंकि मेरे से पहले जो टीचर थे उनका था वहां पे होल्ड उनकी एक जो बोलते हैं
(17:21) पॉलिटिक्स वो वो पिछले 7 आठ साल से सिखा रहे थे मेरी जो पॉपुलैरिटी उन्होंने देखी इतने डर के मेरे को आज तक उन्होंने बुलाया नहीं और सिर्फ ये यहीं पे नहीं हुआ और भी फेस्टिवल हैं जिनको मैं अभी नाम नहीं लूंगा इंडिया में भी हो चुका है मेरे साथ सेम सेम चीज हुई है मेरे साथ इंडिया में कि वो जो मेरे साथ जो फर्स्ट फेस्ट फेस्टिवल में जो मैंने सिखाया जो फर्स्ट फेस्टिवल में जो मेरी पॉपुलैरिटी हुई जो लोगों ने जितना पसंद किया उससे इतना डर गया वहां के इस्टैब्लिश जो पहले के टीचर थे मुझे वापस बुलाया नहीं गया। अच्छा ये छोड़ो रशिया में जब मैं गया तो मेरी जो
(17:53) मुझे इनवाइट किया तो जो कुंडलिनी के कुंडलिनी योगा जो मैं सिखाता हूं वहां के जो छात्र जो स्टूडेंट्स थे कोई नहीं आया। हम लोग एकदम शॉक्ड थे कि भ ऐसे कैसे क्योंकि सब जानते हैं मुझे कुंडलिनी योगा में तो कोई नहीं आया तो कोई बात नहीं। ठीक है? तो पहली क्लास में सिर्फ 10 जन थे। दूसरी क्लास जो नेक्स्ट डे की उसमें 50 थे। फिर 200 हो गए। फिर 300 हो गए। जब मैं अगले साल गया नेक्स्ट ईयर तो 500 600 लोग थे क्लास में लेकिन मुझे फोन आया क्लास के बाद और रशियन में बोल रहा था तो मेरी जो ट्रांसलेटर थी उसने बोला कि यू नो ये ये करके आदमी है। वो
(18:29) आपको सॉरी बोल रहे हैं। मतलब कौन है? तो जो रशियन फेडरेशन का जो हेड था कुंडलिनी योगा का उसका हेड था उस एरिया का कजान और चेनी करके एक एरिया है उसका हेड था वो तो बोला मुझे मिस्टर आनंद को सॉरी बोलना था तो मैं बोला आपको बोल दो मैंने क्या हुआ बोला नहीं मैंने पिछले साल मैंने अपने सारे स्टूडेंट्स को बोला कि इनकी क्लास में मत जाओ और अगर आप इनकी क्लास में जाओगे तो आप बीमार पड़ जाओगे आपके साथ ये होगा आपके साथ बहुत बुरा होगा वो बहुत तो मैं हंसने लगा मैं बोला कोई बात नहीं लेकिन क्यों किया उन्होंने ऐसा हां पूछो पूछो तो बोला कि नहीं मैंने सुना कि
(19:05) बहुत उनकी क्लास पावरफुल होती है। बहुत लोग पसंद करते हैं। तो मैं थोड़ा इनसिक्योर हो गया था। लेकिन मुझे बहुत अफसोस हो रहा है मुझे माफी मांगने। बोला कोई बात नहीं। तो अभी आप क्या टॉक्सिसिटी की बात करते हो कि बॉलीवुड में टॉक्सिसिटी होती है। जब योगा में होती है, स्पिरिचुअलिटी में होती है तो आप बॉलीवुड को क्यों ब्लेम करते हो? सब जगह है। इंसानियत जो होती है वो एक आदमी के अंदर है या नहीं है। चाहे वो बॉलीवुड में बैठा हो, चाहे पॉलिटिक्स में बैठा हो या धार्मिकता में बैठा हो। जहां पे भी बैठा है वो आपके अंदर है। क्लेश आपके अंदर है,
(19:34) क्रोध आपके अंदर है, दुख आपके अंदर है, सुख आपके अंदर है। और कुछ अच्छा करने की भाव जो होती है, वो भी आपके अंदर है। ये सब अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरह से बटा हुआ है। आप क्या उसका प्रमाण दिखाते हो? आप क्या आप उस आपके अंदर क्या है वही बाहर आता है और कहीं ना कहीं हर इंडस्ट्री में टॉक्सिसिटी का रीजन है खुद की इनसिक्योरिटी हां तो हमारे अंदर इनसिक्योरिटी क्यों आती है इतनी मैं खुद एक्सेप्ट करूंगी मेरे भी आती है और सबके आती होगी मन में इनसिक्योरिटी तो उस वही मैं मेरा जो एक मिशन है लाइफ का वही चेंज करने का इसीलिए मेरी पहली बुक प्रोस्पेरिटी के ऊपर नहीं
(20:12) थी। मैंने जो पहली बुक लिखी वो पैरेंटिंग के ऊपर थी। वाओ तो लेकिन वो पब्लिशर रूपा पब्लिकेशन बोला नहीं यह आप पहले प्रोस्पेरिटी की करो बहुत अच्छी लिखी गई है आप इसको पहले करो लोगों को चाहिए कि भाई पैसे कैसे कमाने मैंने ठीक है पहले वो कर लो दूसरी बुक लेकिन मैं बोला अब वो पैरेंटिंग की होगी वो दूसरी बुक का नाम लिखी हुई है अभी वो रिलीज होगी पैरेंटिंग कोड है उस बुक का नाम और आपने जो सवाल पूछा वो हर एक इंसान के अंदर दुख इनसिक्योरिटी ये क्यों है क्योंकि आपको बचपन से ये बोला गया था कि आपको सक्सेसफुल होना है आपको पैसे कमाने हैं आपको आपको यश
(20:45) कमा कमाना है आपको एक सुख भरा एक जीवन यू नो यू नीड दैट वेल्थ सिक्योरिटी कि भाई जॉब अच्छी हो शादी अच्छी हो पति अच्छा मिलना चाहिए बच्चे अच्छे होने चाहिए मेरे को वो तोड़ना है क्योंकि मेरी जो बुक है उसमें यही लिखा है कि एज अ पेरेंट आपको बच्चों को सिर्फ इतना ही कहना है कि आपको एक अच्छा इंसान होना चाहिए और आपको ऐसा जीवन चूज़ करना करना चाहिए जिसमें आपको सुख मिले। तो अगर आपको एक कैनवस दिया गया और आपको पेंट करने में सुख मिलता है तो आप वही करो। हम लॉयर बनने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर बनने की जरूरत नहीं है। आपको अच्छा नहीं लगता
(21:25) खून देखना मत डॉक्टर बनो। लेकिन वो डैडी ने बोला है वो तो करना पड़ेगा। उनके उनके दादा भी डॉक्टर थे। उनके उनके भी फादर डॉक्टर थे। मुझे भी डॉक्टर बनना पड़ेगा। गया मर गया सर। वो आदमी का एक जो सोल होता है उसी को मार दिया आपने। एक चाकू लेके घोट दिया उसके अंदर। अब कहां से सुखी होगा वो? और कहां से वो सुख डिस्ट्रीब्यूट करेगा? ये बात याद रखना कि आदमी सुख जो खुद महसूस करता है जो खुद एक्सपीरियंस करता है वो बांटता है और जो आदमी दुख का एक जीवन व्यतीत करता है जो दुखी है वो दूसरों को दुखी ही देखना चाहेगा इसीलिए टेररिज्म है इसीलिए ट्रंप जैसे लोग
(22:02) प्रेसिडेंट बन गए आपको क्या लगता है ट्रंप बहुत सुखी इंसान है कूट-कूट के भरा हुआ है उसके अंदर दुख अभी हमारा बैड लक है कि यू नो ही बिकम द प्रेसिडेंट ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट तब क्या करेंगे? और उसकी इनसिक्योरिटी हम पे भारी पड़ रही है। हम पे पूरे पूरे वर्ल्ड पे भारी पड़ रही है। लेकिन प्रॉब्लम सिर्फ ट्रंप की नहीं है। प्रॉब्लम पैरेंटिंग की है। मतलब प्रॉब्लम हमारी सोच की है जो हमारे अंदर घोट-घोट के भरा गया था बचपन से। मुझे भी बोला गया था। कि पढ़ो लिखो। नहीं तो क्या करोगे? मैं बोला नहीं पढ़ना। मैं अनपढ़ हूं। आज बुक के ऊपर बुक लिख रहा हूं। मुझे
(22:39) इनविटेशन मिलते हैं हावर्ड के ग्रेजुएट्स को लेक्चर देने कि अभी भी नागपुर में लिटरेचर फेस्टिवल में जा रहा हूं यहां से दिल्ली से लिटरेचर फेस्टिवल में मेरा लेक्चर होगा इनविटेशन से अ वाईपीओस जो होते हैं वो वो ग्रुप ईओस ग्रुप फिकी में लेक्चर्स दिए हैं मैंने इतने सारे अनपढ़ हूं भाई क्या हो गया वो ये डायलॉग तो मतलब मेरी मदर सुना सुना के थक जाती थी कि पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे गे कूदोगे तो बनोगे खराब ऐसे कुछ तो भी था तो वो तो बोल-बोल के मेरे को मतलब पका डाला उन्होंने क्या हो गया मैं तो कभी पढ़ा ही नहीं और यहीं पे मैं अपनी मम्मी की तारीफ करना
(23:19) चाहूंगी सच बताऊं तो मेरी मम्मी ने मुझे पूरी लाइफ कहा पढ़ाई पढ़ना पसंद था मुझे मैं पढ़ाने पढ़ने वाला बच्चा था बट वो यही कहती थी पढ़ाई लिखाई में कुछ नहीं रखा है गुरु मत पढ़ इतना क्यों इतनी तुझे पढ़ना है तो मन से पढ़ टेंशन से मत पढ़ एग्जाम की वो यही कहती थी कि पढ़ के कोई ना अमीर बना है ना कोई सक्सेसफुल बना है। अपने अंदर की काबिलियत पर्सनालिटी में दिखती है, स्किल्स में दिखती है। तो पढ़ाई लिखाई में कुछ नहीं रखा। और कहीं ना कहीं पेरेंट्स होमवर्क, एग्जाम मार्क्स और इस सब की वजह से डांट पड़ती थी। मुझे कभी डांट ही नहीं पड़ी और मैं सोचती थी मेरी
(23:52) मम्मी खुश भी नहीं हो रही मेरे मार्क्स से। आपकी मम्मी का नाम क्या है? शीतल। शीतल जी। आप अगर ये देख रही हैं तो सैल्यूट आपको। इसी इसी दिस इज पेरेंटिंग। ये जो आदर्श पेरेंट जो होता है माता-पिता वो वो नहीं है। मेरी बिल्डिंग में एक एक फैमिली है। उन्होंने अपनी दो बेटियों को इतना पढ़ने के लिए प्रेशराइज किया कि कभी वो बच्चियां खेलने नहीं गई मेरी मेरी बेटी के साथ नीचे वो हमेशा पढ़ती रहती थी। बहुत ऐसे और इतना स्ट्रेस उनको कि एग्जिमा हो गया। वेट गेन हो गया। कोई दुख नहीं सुख नाम की चीज का मतलब ही नहीं पता उन्हें। बहुत ऐसे कम नहीं है।
(24:30) आपने उनकी लाइफ खराब कर दी। पूरा बचपन खत्म कर दिया उनका डॉक्टर बनाने के चक्कर में। तो आपकी जो मम्मी है जो शीतल जी हैं वेरी गुड आई एम वेरी हैप्पी टू यू दैट मैं यहां पे एक रिक्वेस्ट करूंगी आपसे बिल्कुल एक पैरेंटिंग पे पॉडकास्ट जब आपकी बुक रिलीज हो हमारे साथ ये फिक्स है मैं ऑन कैमरा आपको कह रही हूं हम एक पैरेंटिंग पे पॉडकास्ट करेंगे सारे पेरेंट्स के लिए उनको समझाने उनकी भी फीलिंग्स वैलिडेट करने के लिए क्योंकि कहीं ना कहीं उनका इंटेंशन भी गलत नहीं होता बट वो यही सोच के डर रहे होते हैं क्या मैं सही कर रहा हूं क्या मैं गलत कर
(25:01) रहा हूं अगर मैंने ज्यादा छूट दे दी तो बच्चा गलत रास्ते चला जाएगा| इन्हीं चीजों के बारे में बात करेंगे उसमें। मैंने जितनी छूट अपनी बेटी को दी है आज वो 17 साल की है। आप बिलीव नहीं करोगे कितनी छूट दी है मैंने। लेकिन मैंने हर छूट के साथ यही बोला तेरी लाइफ है। सत्यानाश करना है कर। [हंसी] अगर कुछ अच्छा बनना है तो मैं सपोर्ट करूंगा। हां। लेकिन उसको ये रिस्पांसिबिलिटी उसके सर पर रख दी। आप क्या करते हो एज अ पेरेंट? कि बोलते हो ऐसा कर वैसा कर। ये अच्छा है वो गलत है। तो बच्चे के अंदर एक रिबेलियन पैदा हो जाता है। एकक्टली तो मेरी बेटी तो वो तो मैगी नूडल भी नहीं
(25:37) खाती दारू भी नहीं पीती। उसको नॉनवेज पे भी छोड़ दिया उसने। अपने आप ही योगा करने चली जाती है। पियानो सीख रही है। खुद ही बोलती है मुझे कथक सीखना है। क्योंकि मैंने उसको रिस्पोंसिबिलिटी है कि भाई तेरी लाइफ है जो करना है कर। योगा के पैसे भी मैं दूंगा। कथक के पैसे भी मैं दूंगा। जो करना है कर। अगर खराब करना है तो भी मैं मना नहीं करूंगा। जो करना है कर। वो बालकनी है वहां से कूदना है कूद जा। अब इतनी रिससिबिलिटी आप किसी बच्चे के सर पर रखोगे तो उसको मालूम है कि अभी मैं अपनी लाइफ क्यों करूं खुद खराब हूं। मैं पागल थोड़ी हूं।
(26:03) बिल्कुल सही। कोई कंज दिमाग खड़ा थोड़ी है उसका कि वो अपनी लाइफ खुद खराब करेगी। बिल्कुल सही। क्योंकि यही सेम चीज मैं बता रही हूं। मेरे घर में मेरी मम्मी ने मुझे छूट दी। जो करना है कर जहां जाना है जा। कभी किसी चीज की रोक-टोक नहीं की। मैंने जो गलत काम भी किए आके बताए मम्मी को। मम्मी ने उसके लिए भी मुझे नहीं डांटा। रिस्पांसिबिलिटी मेरी रही। एट द सेम टाइम मेरे कजिंस जिनके पेरेंट्स हेलीकॉप्टर पैरेंटिंग कर रहे थे। मेरे को तो आज वही स्ट्रगल कर रहे हैं करियर में भी मेंटल हेल्थ में भी रिलेशनशिप में भी और टच वुड उस चीज में मेरे को लगता है मैं
(26:40) मेरी ही मम्मी की वजह से बहुत ऑनलाइन रही हूं कि बिल्कुल सही लाइन पे रही हूं। तो वो पेरेंटिंग के पॉडकास्ट में आप मैं और आपकी मम्मी तीनों बैठेंगे। पक्का [हंसी] मैं डेफिनेटली क्योंकि ये कितना ही इंपॉर्टेंट टॉपिक है। हम हर चीज में हम आज भी मैं जो हूं हम सब जो हैं हमारी पेरेंटिंग की वजह से हमारी अपब्रिंगिंग की वजह से हैं और पेरेंट्स का प्रेशर अलग है। बच्चों पेरेंट्स का प्रेशर अलग है। कहीं ना कहीं हर कोई इस बात से रिलेट करेगा। या अब अगर थोड़ा सा ऑफ टॉपिक जो हम गए हैं मुझे तो बहुत मजा आया बट वापस आते हैं थोड़ा सा क्योंकि मैंने एक कमेंट देखा था
(27:12) जो मेरा आपसे बात करने का बड़ा मन था। आपकी ही एक वीडियो में कमेंट आया था कि विजय जी को ओशो का रोल प्ले करना चाहिए क्योंकि आप ओशो जैसे लगते हो। व्हाट योर टेक ऑन दैट? ये तो मैं सुन सुन के सुन सुन के थक गया हूं। इतना आपने एक कमेंट पढ़ा है मेरे पास तो मैं आपको बाद में एक आपके पडकास्ट के लिए आपको आपकी टीम को एक फोटो भेजूंगा। किसी ने फोटो बनाई मेरी फोटो यहां रखी और ओशो की फोटो यहां रखी। हम्। मतलब वह फोटो देखना जैसी जैसी उन्होंने बनाके भेजी है किसी फैन ने। तो ये मैंने बहुत सुना है और आप बिलीव नहीं करेंगे ये कमेंट जिसने भी लिखा है और आप ये जो जिस
(27:47) ये जो टॉपिक है मेरा जो कुछ भी क्रेडिट है फिलॉसफी का समझने का उसकी जो जेनेसिस होती है जो बीज जिसको बोलते हैं बीज आप आप डालोगे मिट्टी में तो वो झाड़ बनता है। आज मैं जो कुछ भी हूं वो जो बीज था वो ओशो का ही था। आज भी अगर आप मेरा फोन देखोगे तो उसके ऊपर ओशो की फोटो है वॉलपेपर पे क्योंकि ओशो वाज़ वे अहेड ऑफ ह टाइम हम ठीक है और मैंने आज तक जितने भी घंटों के उसके यू नो वीडियो सुने हैं आप बिलीव नहीं करेंगे एज अ ह्यूमन बीइंग आपके मुंह से एक गलत
(28:31) शब्द निकल सकता है ना उनके मुंह से आज तक इतने घंटों में इतने इतने इतने सारे वीडियोस में एक गलत शब्द नहीं सुना कि मतलब एक जो फिलॉसफी की क्लेरिटी है उनकी कि ये जीवन है इसे ऐसे व्यतीत करना चाहिए ये खुशी है ये स्वर्ग है ये जो जिस टॉपिक पे भी उन्होंने बोला है एक वर्ड उनके मुंह से गलत नहीं है एक वो है एलन व्स है गुरु रामदास है और एक स्वामी सर्वप्रियंदा है। ये चार लोगों को मैं इतनी खुशी से सुनता हूं कि एक मैं अपनी फिलॉसफी खुद जी रहा हूं और यही ओशन ही सिखाया मुझे कि मैं जो बोल रहा हूं वो मत सुनो और मैं भी अपने स्टूडेंट्स को यही बोलता हूं। मेरे जितने
(29:07) भी लाखों स्टूडेंट्स हैं मैं भी यही बोलता हूं। उनको भी यही मैं भी यही बोलता हूं कि मैं जो बोलता हूं वो मत सुनो। मैं जो बोलता हूं वो खाली एक बार सुनो और फिर उसे अपना बनाओ कि मैं मुझे क्या समझ में आए और मैं इसे रिफाइन करके अपने तरीके से कैसे जियोऊं। यह कोई रिलजन नहीं है कि मंडे को आपको उपवास करना है, ट्यूसडे को आपको गाय को यह देना है और वेडनेसडे को आपको पंडित को यह देना है। यह कोई रिलजन नहीं है। ये जीवन व्यतीत करने का टू लिव योर लाइफ। दिस इज़ अ फिलॉसफी ऑफ़ लाइफ इटसेल्फ। एंड इट्स अ वेरी ईजी फिलॉसफी। ये प्रॉब्लम क्या है ना कि इस फिलॉसफी में
(29:42) कोई अगड़म बगड़म नहीं है। तो उसका उसके लिए मेरे को टीका लगा के सफेद कपड़े पहन के वो सब करने की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि मैं कुछ जो बोल रहा हूं वो इतना सिंपल है कि कोई भी यूज़ कर सकता है और और जिंदगी भर खुश रह सकता है। अच्छे कर्म करो। अपनी बॉडी को जो मंदिर है वो बाहर नहीं है। आपकी बॉडी मंदिर है। ठीक है? सबसे पहले ये समझो क्योंकि आपके अंदर जो दिमाग में केमिकल्स हैं वो केमिकल्स जैसे होंगे ना जिस तरह के केमिकल्स होंगे उस तरह का आपके अंदर डिप्रेशन आएगा क्रोध आएगा दुख आएगा अलग-अलग फीलिंग्स उन केमिकल की वजह से आ रही है वो केमिकल कैसे बन रहा है आपने जो
(30:19) खाया उसकी वजह से तो आप जो खा रहे हो जो आप अगर आपको आयुर्वेद समझ में आता है तो अगर आप यू नो टाइम टू टाइम पंचकर्मा डिटॉक्स कर रहे हो फिर आप जाके जंगल में थोड़ा टाइम है तो जंगल में जाके रह जाता हूं सड़ जाता हूं वहां पे इतना खुशी खुशी-खुशी रहता हूं वहां पे कि मतलब मेरे को वहां से खींच के बाहर निकालना पड़ता है। क्योंकि आई लव द जंगल। आई लव द फॉरेस्ट टू बी कनेक्टेड विथ नेचर। फोटोग्राफी करता हूं मैं। बर्ड फोटोग्राफी करता हूं। तो इतना मतलब भूल जाता हूं कि मैं यहां पे शहर में भी हूं। दिल्ली भी है, बॉम्बे भी है, पेरिस भी है, लंदन भी
(30:50) है। मैं एज व्हेन आई एम इन द फॉरेस्ट, आई एम इन द फॉरेस्ट। तो वो फिलॉसोफी है। सिंपल। उसमें भी मैं क्या टीका लगा के सफेद कपड़े पहन के घूमूं? इट्स अ वेरी सिंपल फिलॉसोफी। और इस चीज से ना जजी बड़ा रिलेट करेंगे क्योंकि जेंजी रिलीजियस से दूर इसलिए भाग रहे हैं रूल्स की वजह से यह फॉलो करो ये रिचुअल करो ये मत पहनो ये लगाओ और इसी चीज की वजह से हम अपने सनातन धर्म से जो दूर भाग रहे हैं इन रूल्स की वजह से भाग रहे हैं। यह फिलॉसफी के वे में कोई उन्हें समझा दे लाइफ। सनातन धर्म एज अ फिलॉसफी उसमें कोई गलत नहीं है। मतलब मैं खुद आई
(31:28) एम अ हिंदू बट आपको प्रॉब्लम ये होती है कि अगर आप उससे बहुत ज्यादा मतलब उसके बहुत अंदर घुस जाओ ना और उसका एक एडिक्ट बांध के उसका अगर आप एक जैसे फात्वा होता है ना वैसे आपका उसका फातुवा बना दे ऐसे करोगे नहीं करोगे तो उसको मान लो तुम्हें काट देंगे वैसे नहीं वो गलत हो जाता है। एज व्हाट एव्री फिलॉसफी टीचेस दिस इज़ वेरी इंपॉर्टेंट। भले ही वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, अह क्रिश्चियनिटी हो, बुद्धिज्म हो, पीस, लव, जॉय, ब्लेस, हेवन इज़ अ कोर ऑफ़ एव्री फिलॉसफी। हम वायलेंस कहां से बीच में आया? टेररिज्म कहां से बीच में आ गया? कि अगर आप इसमें
(32:11) नहीं मानते हो तो आपको काट के मार देंगे। वो कहां से आ गया? ये कौन लाया? जिसे कंट्रोल करना है हम हु वांट्स टू कंट्रोल हु वांट टू कंट्रोल पॉलिटिशियंस रिलीजियस हेड्स जो ओशो बोलते थे प्रीस्ट फॉर पावर फॉर पावर बिकॉज़ वो पावर हो जाती है आपके ऊपर कि मैंने ऐसा बोला भगवान ने ऐसा बोला था मैं आपको बोल रहा हूं कि भगवान ने ऐसा बोला तो अभी आपको वैसे ही करो नहीं अगर आपने किया तो आके चंदा दो गिल्ट आपको गिल्ट फील हो रहा है तो आके चंदा देंगे आप हां वो जो एक पावर जो एक प्रीस्ट को आप देते से ओके फॉरगिव मी फादर आई हैव फ्रेंड फॉरगिव मी मैंने देखा मैं जहां पे रहता
(32:49) हूं बांद्रा में मुंबई में वहां पे एक स्कूल है माउंट मेरी मैंने देखा एक बार कुछ 600 बच्चे एक लाइन में जा रहे थे लंबी लाइन में सबके हाथ में क्रॉस था बच्चों की उम्र हो गई 7 साल से लेके 10 11 12 साल तक और सब लाइन में ऐसे जाके क्रॉस पकड़ के फॉर गिगिव मी फादर आई हैव फॉरगिव मी फादर आई हैव सेंट मतलब भगवान मुझे माफ करो मैंने पाप किया है आपने क्या पाप किया भैया? बच्चे। हां। तो ये रिलजन है। आप पहले ही घूंटघूंट के बोल रहे हो बचपन से कि आप एक पापी हो। आपको भगवान ही बचा सकता है। सत्यानाश हो गया आपका तो। बिल्कुल। और प्रॉब्लम क्या होती है कि आपका सोल का
(33:31) स्ट्रक्चर इतना वीक हो जाता है। पंजाबी कहते हैं डूबते तिनके का सहारा दे रहा होता है। मतलब जो डूब रहा होता है आदमी अगर वो एक तिनका दिखेगा। उसका भी सहारा लेगा। वो बोलेगा यार इसको पकड़ लेता हूं शायद इससे बच जाऊं मैं। तो फिर आपके सामने जो भी भगवान बन के आता है कि मैं साधु हूं, मैं आसाराम बापू हूं, मैं यह हूं, मैं वो जो भी आपका आप उसको पकड़ लेते हो। उसकी वैलिडिटी चेक नहीं करते। ये नहीं देखते कि कुछ शक्ल से चोट लगता है। वो नहीं देखते आप। आप बोलते हो ये मुझे बचाएगा। तो मैंने एक लेक्चर दिया था एक कॉलेज में तो बोला कि आप हमारे छात्र जो हैं स्टूडेंट्स हैं।
(34:06) क्या बोलना चाहेंगे आप उनको? मैंने आप सब यहां पर हो एमबीए कर रहे हो। हम आपको सक्सेसफुल होना है। आप बहुत मेहनत कर रहे हो। जिंदगी भर मेहनत करते रहोगे। एक बात याद रखना एक हॉल था। उस हॉल में 400 लोग थे। बिल गेट्स भी था, मुकेश अंबानी भी था, अडानी भी था, अ मिस्टर बिरला भी थे। जो भी थे सब सब थे। सब ऐसे मुख खड़े ऐसे यू नो वेट कर रहे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] 20 मिनट बाद दरवाजा खुला। एक आदमी आए। हिमालय में रहते थे। एक सफेद रंग की धोती पहनी थी, कुर्ता पहना था। वो जैसे ही आए सब खड़े हो गए। और सब 400 लोग यह होप कर रहे थे कि मुझे उनके पैर छूने का एक मौका
(34:50) मिल जाए। हम उन्होंने क्या मेहनत की? कुछ नहीं। हिमालय में बैठ के मेडिटेट करते हैं खाली। तो अगर आप जिंदगी भर मेहनत करोगे और फिर आपको यह जरूरत पड़ जाए कि किसी का पैर छूकर आपको सुख का एक एक एक्सपीरियंस यू नो महसूस हो तो क्या किया आपने? किस चीज के लिए मेहनत की आपने? क्यों मेहनत की आपने? मेडिटेट ही करो। जब आपको वही आदमी बचा सकता है जिसने मेडिटेट किया तो आप भी मेडिटेट ही करो ना। सही बात है। लाइक इन लोगों को ना यह है कि मुझे पैसा, पावर, मनी, फेम जो इनको मिला हुआ है वह भी चाहिए। और मैं जो पाप कर रहा हूं यह सब कमाने के लिए वो सब धोने के लिए मैं जाके
(35:33) पैर छोड़ जाके मंदिर में दक्षिणा दे दूं। चादर चढ़ा दूं जो भी सर्विस कर दूं। बट मैं यही सोचती हूं कि आजकल जैसे Instagram पे इतने सारे बाबा लोग हैं। कई लोग बहुत अच्छी बातें कर भी रहे हैं। अच्छी चीजें सिखा भी रहे हैं। कई लोग फायदा उठा रहे हैं लोगों के सेंटीमेंट्स का। लोगों की सर्विस की सेंटीमेंट्स का उस भगवान वाले भाव का। आपका उस पे क्या कहना है? मुझे कुंभ मेला में बुलाया गया था एक लेक्चर देने के लिए। तो मैं गया मेरे लेक्चर के पहले किसी बाबा का लेक्चर था। अच्छा तो मैं था आज 20 मिनट जल्दी तो मैं सुन रहा था उनकी बातें ओ बाप रे ये फिलॉसफी वो
(36:17) फिलॉसफी फिर घूम फिर के जो लास्ट के पांच मिनट थे 7 मिनट उन्होंने शुरू किया कि कृष्ण सुदामा सुदामा ने एक ये दिया चावल और आपके खिसे में भले 5 पैसे हो या 20 पैसे हो या ₹20 हो या ₹200 हो यह चंदा पेटी में डालो आप एकदम भगवान के नजदीक हो जाओगे बाद में मुझे पता पता चला है बाबा के तीन होटल हैं। अब लोगों को दिखता कैसे नहीं है मुझे ये समझ में नहीं आता। एक्सक्टली। तो ये जो एक माइंडसेट है स्पेशली इंडिया में तो बहुत है कि आपने अगर कुछ ऐसे करके ऐसे दिखा दिया कि आपके हाथ में कुछ आ गया तो मतलब आप अंतर्यामी हो। जैसे ओएमजी मूवी में था।
(36:59) हां। तो अब ये तोड़ना पड़ेगा। ये जो अंधविश्वास है कि भ जो बाबा होता है वो कभी जो रियल गुरु होता है ये बोलेगा ही नहीं कि मैं गुरु हूं। सबसे पहली बात मैं तो अपने आपको गैंगस्टर बुलाता हूं बाय द वे। अच्छा उसके बारे में बाद में बात करेंगे। तो वो ना तो ये बोलेगा कि मैं गुरु हूं। ना बोलेगा कि मुझे बहुत बड़ी फॉलोइंग चाहिए। मेरे जो टीचर है मेरे गुरु नहीं है। एक टीचर है गुरुमुख और गुरु शब्द। आप उन्हें किसी एयरपोर्ट पे देखेंगे ना तो उनका एक हैव सैक है। दोनों खुद दे आर 75 8 इयर्स ओल्ड खुद उठा के जा रहे हैं। कोई ऐसे 400 लोग आगे पीछे भी वो सबको मना करते
(37:35) हैं। बोले मुझे एयरपोर्ट लेने भी मत आना छोड़ने भी मत आना। तो जो रियल टीचर है जो रियल गुरु है ना उसे शोष चाहिए ना उसे आपका प्रेम चाहिए। ना उसे आपका एक ना उसे आपकी दान पेटी चाहिए। उसे सिर्फ देना है। अ रियल टीचर जॉय इज़ इन शेयरिंग ह विडम नॉलेज एक्सपीरियंसेस विद अदर पीपल सो दैट दे बेनिफिट फ्रॉम इट। इसीलिए उन्हें बोधिसत्व कहा जाता है क्योंकि उन्हें मोक्ष का चांस था। वो मोक्ष लेके जा सकते थे। उन्होंने बोला नहीं एक बार वापस आके मैंने जो कुछ भी सीखा पिछले 100 जन्मों में 1000 जन्मों में 800 जन्मों में मुझे ये लोगों को देना है। इसी इसीलिए उन्हें
(38:15) बोधिसत्व कहा जाता है। वाओ। तो जब आपको जो उस तरह का जब टीचर मिला जो ना शोष वाला है ना उसे ना तो उसने कार्टून जैसे कपड़े पहन रखे हैं बहुत सारे पता नहीं क्या-क्या अंतर बंतर सिंपल गुरु गुरु सिंपल होते हैं उन्हें आपसे कुछ चाहिए ही नहीं क्या दोगे आप गुरु को आप क्या दे सकते हो सही बात मुझे बड़ा कनेक्ट होता है प्रेमानंद महाराज जी से उनकी बातें दिल को छू जाती है और उनकी एक स्माइल है उनको शायद किडनी का कोई इशू श्रू भी है जिसकी वजह से बहुत लोग कह रहे हैं अपनी किडनी उन्हें देने को बट वो नहीं ले रहे हैं। हां बट उनकी बातें उनकी लाइफ की फिलॉसफी वो
(38:56) बड़ी कनेक्ट करती है। आपको कैसे लगता है वो? मैंने सुना नहीं। मैंने मैंने रिसेंटली एक नए नए टीचर को सुना सत्य उनका उनका पडकास्ट है सत्य स्पीक्स। मुझे अच्छा लगा उनका तो थोड़ा और सुनना है उनके बारे में। लेकिन अच्छा मतलब नेचुरल लगा। वो मैंने बोला ना जैसे वो शोषा वाले बाबा नहीं है। ये नहीं बोलते कि मुझे आप मैं बया हूं। मैं बोल रहा हूं। हां भाई ये अभी मैं क्या करता हूं? मैं यही बोलता हूं कि देखो भाई मैं हेल्दी हूं। 56 का हूं। इतना हेल्दी हूं। ठीक है? मैं मेरे को बीमारियां थी। अर्थराइटिस था, एग्जिमा था, हाई कोलेस्ट्रॉल था। सब सॉल्व
(39:29) कर दिया। ऐसे सॉल्व किया। बस इतना ही बोलता हूं। और मेरे सुख का कारण ये है। अब मैं शेयर कर रहा हूं आपके साथ। मैं तो यह बोल नहीं रहा कि मैं बहुत बड़ा बाबा हूं। मैं बहुत बड़ा फिलॉसफी हूं। यू नो इसके लिए मैं अभी जितने भी मेरी कॉर्पोरेट वर्कशॉप्स जो मैं करता हूं जो कंपनियां मुझे बुलाती हैं लेक्चर्स देने के लिए तो मुझे बोलती है इंट्रोडक्शन लिखो हम आपके बारे में क्या बोले तो पहले तो मैं पढ़ा किसी ने लिखा कि बाप रे इतना बड़ा ये गुरु विजय बोले भाई एक काम कर अभी [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] लिखो गैंगस्टर योगी तो सब हके बके बोले क्यों
(40:05) मैं बोला गैंगस्टर योगी इसलिए क्योंकि आप मुझसे कोई अपेक्षा मत रखो मेरे पास पास जो है देने के लिए मैं आपको देने आया हूं। लेकिन मुझे देख के आप बोलोगे गुरु है। अगर मैंने आपको यह मौका दिया आपको मैंने ये अधिकार दिया कि आप मुझे गुरु बोलो या गुरु समझो तो कल आप मेरे पे उंगली उठा के बोलोगे आप तो वाइन पी रहे हो। आप वाइन क्यों पी रहे हो? आप तो टीचर हो। आप तो स्पिरिचुअल हो। आप तो मैं मैं भाई मेरे को वाइन पी रहे हैं। आप क्या प्रॉब्लम है आपको? अगर मैं सिखा रहा हूं तो कब मैं कोई गलत कर रहा हूं। आपको कुछ देने के लिए आया हूं। कोई लेने नहीं आया हूं। आप तो ये
(40:34) आपको तो गुस्सा आता है। अरे गुस्सा आता है तो क्या इंसान हो भाई? तो एज अ ह्यूमन बीइंग मेरा यह सेवा है। मेरी यह सेवा है। मुझे सेवा करना है। ठीक है? बस उसके अलावा अगर मैं आपको ये ये बोलूं कि आपको मैं ये हक दूं कि आप मुझे गुरु बुलाए। आप मुझे ये समझे कि मैं भगवान हूं। वो भैया कोई मैं गैंगस्टर हूं। क्योंकि मुझे अगर गुस्सा आएगा तो आएगा। अगर मुझे वाइन पीना है तो पीना है। अगर मुझे मंदिर नहीं जाना है तो नहीं जाना है। अगर जाना है तो जाना है। एज अ टीचर आप मुझको उंगली उठा के ये मत बोलो कि तुमने ये किया ये ये नहीं किया तुम्हें ऐसा करना
(41:08) चाहिए था या वैसा करना चाहिए था। वो मैं कभी होने नहीं दूंगा। हम तो आप टीचर हो। आप गुरु नहीं हो। क्योंकि जैसे देखा जाए स्कूल के टीचर होते हैं। अब जब जितनी देर 8 घंटे वो स्कूल में हैं वहां वो टीचर हैं। उसके बाद उनकी अपनी पर्सनल लाइफ है। वो जो भी करें। आप अपने को गैंगस्टर क्यों बुलाते हो? वही मैंने बोला ना कि आप मुझे गुरु बनाना चाहते हैं। मैं उसका ऑोजिट नाम दे रहा हूं आपको ताकि आप मुझसे कोई अपेक्षा रखो ही मत। एक्सपेक्टेशन खत्म करने के लिए। कोई खत्म कर सीखने आओ मेरे पास अगर सीखना है तो फिर अगर सीखना चाहते हो तो आओ तो
(41:40) मोस्ट वेलकम। आप कुंडलिनी योगा सिखा रहे हैं लोगों को। क्या होता है कुंडलिनी योगा? हर एक इंसान के अंदर इस जन्म के और पिछले जन्म के दुख क्रोध पीड़ाएं जो भरी होती हैं जो सोल आत्मा के अंदर जो भरी होती हैं उन्हें आप कैसे निकालोगे? अगर आप योगियों को देखो, ऋषियों को देखो तो वह तपस करते हैं। हम उस तपस से यह जो आपके अच्छा पाप भी होते हैं, हम कर्म भी होते हैं। उनको धोने का तरीका क्या है? जो आप बॉडी डिटॉक्स करनी है तो आप आयुर्वेदा करते हो। हां आप 14 दिन जाके हॉस्पिटल में पंचकर्मा करते हो, विरेचन करते हो, बस्ती करते हो तो आपके सब जो
(42:26) बॉडी के पाप है जो डिटॉक्सिफिकेशन होना है वो हो जाता है। आपका सोल कैसे डिटॉक्स होगा बताओ? मेडिट योगा से नहीं होगा। मेडिटेशन से भी नहीं होगा। फिर कुंडलिनी योगा से ही होता है। मैंने खुद एक्सपीरियंस किया। मैंने सब सब करके सब ट्राई किया मैंने। 14 साल का था तब खुद के पैसे देके सिद्ध समाधि योगा का कोर्स किया 21 दिन का। सबसे यंग स्टूडेंट रहा था मैं शायद। मेरे से यंग कभी कोई किसी ने खुद के पैसे से खुद के कमाए हुए पैसे से कभी जॉइ नहीं किया होगा वो कोर्स सिद्ध समाधि योगा का। लास्ट में जंगल में रहना था चार दिन। वो भी किया सिद्ध समाधि योग में। फिर
(42:57) मेडिटेशन भी किया। विपासना भी किया। योगा अलग-अलग टाइप के किए। भले आप

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