Wednesday, August 19, 2026

Why are Indian Couples hiring Private Detectives?

Why are Indian Couples hiring Private Detectives?

Author Name:Nikita Thakur

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@nikitaksthakur

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=LBUeCUtc98c



Transcript:
(00:00) एक नॉर्मल सा दिखने वाला जैकेट, अंदर छुपा एक स्पाई कैमरा, और एक 12 साल लंबी शादी टूट गई। वॉच, टॉय ट्रक्स, स्विचेस, कैप, वॉल क्लॉक जैसी मामूली चीजों में भी स्पाई कैमरास, और माइक्रोफोनस इस तरह से छुपाए जाते हैं कि आप खुद नहीं बता पाओगे कि आपको कोई सीक्रेटली रिकॉर्ड कर रहा है। अब बताइए कहां है इसमें स्पाईक? इधर बिल्कुल मिडिल में स्पाईक है। इसके देखिए। इसके अंदर कैमरा रहने वाला है। यहां है तो हो गई यहां कैमरा। साथ-साथ में फ्रंट में कैमरा रहेगा। इसमें भी कैमरा है। इसमें इधर आता है दोस्तों। फैन में भी कैमरा है। 15 दिन वाला वॉइस रिकॉर्डर है। 7 दिन वाला
(00:36) वॉइस रिकॉर्डर है। आपको हमारे पास की चैन के अंदर भी वॉइस रिकॉर्डर मिल जाएंगे। इनफैक्ट ये शर्ट का बटन तो वर्ल्ड स्मालेस्ट स्पाई कैमरा है। आजकल जो वीडियो कैमरा है सिर्फ इतना सा हो गया है। दुनिया का सबसे छोटा स्पाई कैमरा है। मगर ऐसे कैमरास बन ही क्यों रहे हैं? इंडिया में एक बिज़नेस साइलेंटली बूम कर रहा है। प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन ड्यू टू राइजिंग मैरिटल फ्रॉड्स। तो मुझे उस पर शक हुआ। वो मुझे चीट तो नहीं कर रहा। तो मैंने अपना शक दूर करने के लिए विनस डिटेक्टिव को कॉल किया। लव अफेयर। माय हस्बैंड इज डेटिंग समवन एल्स। माय वाइफ इज डेटिंग समवन एल्स। सो
(01:09) माय गर्लफ्रेंड इज डेटिंग, माय बॉयफ्रेंड इज डेटिंग, माय ग्रे पार्टनर इज डेटिंग। यस, वी डू कपल ऑफ़ थिंग्स व्हिच आर अनेथिक। वी हड अ केस वेयर द वाइफ केम टू अस, शी फेल्ट दैट द हस्बैंड वास्ड विथ हर मेड। सीएनए ने इंडियन डिटेक्टिव्स के एक स्टिंग ऑपरेशन को रिकॉर्ड किया जिससे दो परिवार बच गए। पहला केस एक हैप्पी कपल, एक बेटी 12 साल से मैरिड मगर वाइफ को शक कि उसका हस्बैंड यह है उसे लड़के पसंद है और वो अपनी वाइफ पर [संगीत] चीट कर रहा है। अ हाउस वाइफ मैरिड फॉर 12 इयर्स है जस्ट मेड अ स्टिंग डिस्कवरी अबाउट हस्बैंड। आफ्टर 12यर ऑफ़ मैरिज?
(01:49) हाउ कम यू हैव अ डॉटर? ओ ओके। दूसरा केस एक कपल लव मैरिज करना चाहता है मगर लड़की के पेरेंट्स को शक था कि क्या लड़का जेनुइनली लॉयल है? पेरेंट्स आर टर्निंग टू डिटेक्टिव्स फॉर हेल्थ एंड वंदना सिद्धी आर कंसर्न अबाउट देयर डॉटर हु हैज़ फॉल इन लव। इन दोनों फैमिलीज़ ने एक डिटेक्टिव एजेंसी को हायर किया जिन्होंने यह पूरा केस बहुत ही इंटरेस्टिंगली सॉल्व किया। एक कंट्रोवर्शियल टेक्निक से हनी ट्रैपिंग। यानी एक डिटेक्टिव टारगेट का पोटेंशियल लव इंटरेस्ट बनता है। उसके क्लोज आता है और देखता है कि क्या टारगेट बाउंड्री क्रॉस करता है या नहीं। इस केस में दोनों भी
(02:27) टारगेट्स को लगा कि उनका हर कन्वर्सेशन प्राइवेट था लेकिन हर वर्ड हर टच सीक्रेटली रिकॉर्ड हो रहा था। यह दो अलग केसेस थे मगर इनके नतीजे एक दूसरे से कंप्लीटली ऑोजिट। इस हनी ट्रैपिंग ऑपरेशन को अंजाम दे रहे लोग हैं प्राइवेट डिटेक्टिव्स। दिल्ली की भीड़ में यह एस्ट्रोलॉजर का छोटा सा ऑफिस दिख रहा है। अक्सर प्राइवेट डिटेक्टिव्स के ऑफिस इन्हीं नामों से डिसगाइस्ड होते हैं। मेरा नाम भावना पालीवाल है और मैं एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूं। ऑफ कोर्स कई प्राइवेट एजेंसीज ओपनली अपना नाम डिस्प्ले करती है। लेकिन कुछ ऑफिसिसेस एस्ट्रोलॉजी, कंसलटेंसी, इंश्योरेंस या
(03:03) लोन सर्विसेस के बोर्ड्स के पीछे ऑपरेट करते हैं। रीज़ सोशल सीक्रेसी। कस्टमर्स खुद नहीं चाहते कि उन्हें कोई एक प्राइवेट डिटेक्टिव के पास जाते हुए देख ले। मगर इन बोट्स के पीछे बैठी होती है एक [संगीत] स्पेशलाइज्ड टीम। 15 एजेंट्स आर वर्किंग ऑन केसेस। 15 अदर्स आर ऑन द स्ट्रीट्स गैदरिंग एविडेंस। ये है एक एजेंसी स्लॉट्स इंडिया का वेबसाइट। यहां आपको मिलेंगे फॉर्मर टॉप कॉप्स, एक्स इंटेलिजेंस ऑफिसर्स, रिटायर्ड आर्मी ऑफिशियलल्स। यह दूसरी डीडीएस डिटेक्टिव एजेंसी में भी सिमिलर पैटर्न दिखेगा। इनकी टीम में भी कई सारे फॉर्मर इंटेलिजेंस ब्यूरो और सीबीआई ऑफिसर्स हैं।
(03:40) दिल्ली की एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट डिटेक्टिव्स के पास भी लगभग 600 रजिस्टर्ड मेंबर्स हैं जिसमें काफी रिटायर्ड पुलिस और आर्म्ड फोर्सेस बैकग्राउंड से आते हैं। बट इन एजेंसीज में सच्चाई जानने की कीमत कितनी [संगीत] है? वेल डिपेंड्स आपको कितना सच जानना है। यह दिल्ली की एक छोटी डिटेक्टिव एजेंसी का रेट कार्ड है। एंट्री लेवल वेरिफिकेशन एप्रोक्समेटली ₹2000 काम टारगेट के बेसिक रेपुटेशन, एड्रेस और उसके बैकग्राउंड क्लेम्स को वेरीफाई करना। पर अगर आपको टारगेट का रेगुलर सर्लेंस करवाना है, पीछा करवाना है, उसके कंप्लीट फाइनेंशियल डिटेल्स, उसके सिविल या
(04:14) क्रिमिनल केसेस का रिकॉर्ड चाहिए विद वीडियो एंड फोटो एविडेंसेस। तो प्रीमियम पैकेजेस 90000 [संगीत] से स्टार्ट होते हैं। कई एस्टैब्लिश्ड फॉर्म्स में आपके केस के लीगल रिक्वायरमेंट्स के हिसाब से बजट 25 लाख तक जा सकता है। जिसमें 15 डिटेक्टिव्स की एक पूरी इंडिपेंडेंट टीम टारगेट पर 6 महीनों तक निगरानी रखती है। सबसे एक्सपेंसिव होते हैं डिवोर्स केसेस। क्योंकि एविडेंस सिर्फ मिलना नहीं चाहिए बल्कि कोर्ट में लीगली अनचैलेंजेबल होना चाहिए। बट क्या लोग सच में इतना पैसा दे रहे हैं? वेल, इंडिया में लगभग 15,000 कंपनीज यह काम कर रही है।
(04:49) प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसीज हैं और वेडिंग सीजन में एक एजेंसी एवरेज 50 से 100 केसेस हर महीने हैंडल करती है। यानी एक वेडिंग सीजन में 10 लाख से भी ज्यादा एक्टिव केसेस और पिछले 5 सालों में यह डिमांड 300% से भी ज्यादा बढ़ी है। व्हिच इज अ मैसिव इनक्रीस। अब डिटेक्टिव्स की डिमांड बढ़ी तो उनके ट्रेनिंग का एक मार्केट भी खड़ा हो गया है। डिटेक्टिव्स के ट्रेनिंग इंस्टट्यूट्स खड़े हो चुके हैं जो लिटरली सर्वेलेंस, हनी ट्रैपिंग, स्पाई कैमरास का यूजेज एंड इवन जीपीएस ट्रैकिंग की ट्रेनिंग देते हैं। बट एक ग्रोइंग डिटेक्टिव एजेंसी में ना एक बड़ी प्रॉब्लम
(05:23) है। हर बिजनेस में ग्रोथ और स्केल के साथ मार्केट डिमांड नहीं कोऑर्डिनेशन कॉस्ट सबसे बड़ी प्रॉब्लम बन जाती है। जब आपके क्लाइंट्स, टीम, डॉक्यूमेंट्स, एक्सपेंसेस, अकाउंटिंग और बाकी सारे बिजनेस ऑपरेशंस अलग-अलग सॉफ्टवेयर्स में बिखरे हो तो आपके कंपनी का ग्रोथ एक्सट्रीमली केओटिक बन जाता है। बट अब ओडू इन सबको एक ही प्लेटफार्म पर लाता है। सो योर बिज़नेस ग्रोस बट द केओस डज़ नॉट। एंड नाउ वी आर आल्सो इन लक क्योंकि अगले ही महीने 11th एंड 12th सप्टेंबर को हो रहा है इंडियास बिगेस्ट टेक एंड बिजनेस इवेंट ओडो एक्सपीरियंस। महात्मा मंदिर गांधीनगर
(05:57) गुजरात में। 6 महीने की एंटरप्रेन्योरियल लर्निंग आपको सिर्फ 2 दिन में यहां मिल सकती है। क्योंकि ओडू एक्सपीरियंस में होंगे 200 से भी ज्यादा लाइव टॉक्स विथ द स्मार्टेस्ट ब्रेंस एंड बिनेस। लाइव डेमोस इनफ्लुएंसरर सेशंस और सबसे बड़ी अपॉर्चुनिटी है कि यहां पर 45,000 से भी ज्यादा अटेंडस एक्सपेक्टेड है फ्रॉम डवर्स बैकग्राउंड्स जिनके साथ आप पर्सनली नेटवर्किंग भी कर सकते हो। एंड ऑल दिस व्हाइल एंजॉयंग एन अमेजिंग इवनिंग फील्ड विथ इनसाइटफुल सेशंस, लर्निंग, इवन आफ्टर पार्टी एंड डिलीशियस फूड। यहां एंट्री अब्सोलुटली फ्री है। लेकिन हां स्लॉट्स
(06:29) लिमिटेड है। इसीलिए डजंट मैटर आप किस भी फील्ड से हो। एक एंटरप्रेन्योर हो, जॉब कर रहे हो या फिर लर्न और नेटवर्किंग करना चाहते हो। अगर आप इंटरेस्टेड हो रियल बिज़नेसेस से खुद सीखने के लिए। सो डू नॉट फॉरगेट टू रजिस्टर फॉर ओडू एक्सपीरियंस। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन। नाउ लेट्स कम बैक। काफी सारे डिटेक्टिव्स को ट्रेन करने के एजेंसीज ओपन हो चुके हैं। जैसे कि यह लिस्ट गरुड़ा डिटेक्टिव एजेंसी, शरलॉक इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक स्टडी, वीनस इंस्टट्यूट ऑफ इन्वेस्टिगेशन स्टडीज जैसे कई एजेंसीज हैं जो थ्री लेवल के प्रोग्राम्स ऑफर करते हैं। सर्टिफिकेट
(07:01) कोर्स, डिप्लोमा एंड पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा। इनके ट्रेनिंग प्रोग्राम्स रफ्ली कुछ मंथ से एक साल तक चलते हैं विथ फीस रेंजिंग फ्रॉम ₹0000 टू ₹90,000। इनके करिकुलम में लॉ, क्रिमिनल प्रोफाइलिंग, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, सर्िलेंस के एथिक्स और एविडेंस डॉक्यूमेंटेशन जैसे सब्जेक्ट शामिल होते हैं। बट सबसे इंटरेस्टिंग होता है इनका प्रैक्टिकल [संगीत] ट्रेनिंग। कई इंस्टट्यूट्स में स्टूडेंट्स को स्पाई डिवाइसेस कैसे यूज करना है? स्ट्रिप कैमरा इंस्टॉल केलेला है। कैमरा पेन हां एचडी रेसोल्यूशन म है। ऑडियो रिकॉर्डिंग होता है तो गगल कैमरा है।
(07:36) डेली ऑब्जेक्ट्स जैसे कि टॉयज खिलौनों में ये स्पाई कैमरास को कैसे इंस्टॉल करना है? कोई भी देखेगा तो एक स्पाई कैमरा है। बोलेगा व्हीकल्स में जीपीएस ट्रैकर इंस्टॉल करके टारगेट को ट्रैक कैसे करना है? उसका लोकेशन कैसे आइडेंटिफाई करना है? इन सारी चीजों का लाइव डेमो दिया जाता है। [संगीत] ये ग्रीन जाला है। नाउ कुछ एजेंसीज हनी ट्रैप स्टाइल ऑपरेशंस की भी ट्रेनिंग देती हैं। हनी ट्रैपिंग का बेसिकली मतलब हुआ कि यंग फीमेल डिटेक्टिव्स को सिखाया जाता है कि वो टारगेट के साथ इमोशनल रिलेशंस इनिशिएट करके एडल्टरी या फिर अफेयर के एविडेंसेस
(08:15) कैसे गैदर कर सकते हैं। देयर आर फीमेल्स कमिंग टू अस। दे वांटेड टू नो वेदर देयर बॉयफ्रेंड और देयर फेयरसेस आर लॉयल टू देम और नॉट। [संगीत] सो फॉर देम वी हैव टू डू दिस हनी ट्रैक। बट नाउ एक इन्वेस्टिगेशन एक्चुअली स्टार्ट से लेकर एंड तक होता कैसे है? यह समझने से पहले समझते हैं कि प्राइवेट डिटेक्टिव इंडस्ट्री सडनली इतना फास्ट क्यों ग्रो कर रही है। एमिया में ट्रस्ट खत्म नहीं हुआ है। बट ट्रस्ट का पुराना सिस्टम काफी ज्यादा आउटडेटेड हो गया है। पहले शादी का रिश्ता रिलेटिव्स, नेबर्स और कॉमन कांटेक्ट्स के नेटवर्क से आता था। लेकिन
(08:48) आज मैट्रिमोनियल और डेटिंग प्लेटफॉर्म्स ने इस चॉइस को एक छोटे से कम्युनिटी से निकालकर क्रॉस सिटी, क्रॉस स्टेट एंड इवन ग्लोबल बना दिया है। matrimony.com सिर्फ इस एक वेबसाइट में 400 लाख कस्टमर्स हैं। यानी इन प्लेटफॉर्म्स ने पोटेंशियल पार्टनर्स का पूल इतना एक्सपैंड कर दिया है कि चॉइस इटसेल्फ हैज़ बिकम अ बिग प्रॉब्लम। नेक्स्ट चॉइस बड़ी लेकिन वेरिफिकेशन नेटवर्क छोटा होता गया। अब नेबर्स और रिलेटिव्स पोटेंशियल पार्टनर्स की प्रोफाइल्स को पहले जैसे वेरीफाई नहीं कर सकते हैं। अगर मुंबई की एक लड़की हैदराबाद के किसी लड़के से शादी करती है
(09:22) तो उसके पेरेंट्स लड़के का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कैसे करेंगे? जॉब टाइटल, इनकम, फैमिली बैकग्राउंड, रिलेशनशिप स्टेटस, ऑनलाइन प्रोफाइल पर ऑलमोस्ट कुछ भी फेक किया जा सकता है। कुछ भी क्लेम किया जा सकता है। 2025 में पुलिस ने एक फ्रॉड शादी रैकेट बस्ट किया जिसमें मेल मॉडल्स के फोटोस यूज करके फेक मैट्रिमोनियल प्रोफाइल्स बनाए गए। ए प्रोफाइल से फिर 21 औरतों से शादी की बात की। उनके परिवार तक का भरोसा जीत लिया और फिर शादी से पहले फाइनेंसियल प्रॉब्लम्स का बहाना देकर उनसे ₹3 करोड़ लूट लिए। कई रैकेट्स बस्ट हुए हैं। इसीलिए अब फैमिली सिर्फ यह नहीं पूछ
(09:56) रही है कि लड़का या लड़की अच्छे हैं या नहीं। वो वेरीफाई करवाना चाहते हैं जो बताया गया है स्टेटस में बायोडेटा में। क्या वो सच भी है? एक और एक केस। केरला की रेशमा। 2014 से उसने 10 अलग-अलग आदमियों से शादी की। हर हस्बैंड को लगता था कि वो ही उसका इकलौता पति है। बट सच तब सामने आया जब वो 11वीं बार शादी करने जा रही थी। फ्रॉम केरला अ 30 ईयर ओल्ड वुमेन नेम रेशमा हैज़ नॉट मैरिड वन और टू बट 10 टाइम्स। महाराष्ट्र में भी एक मिलताजुलता केस हुआ। एक औरत और आदमी ने मिलकर नौ शादियां की और हर बार वही सेम पैटर्न। पहले शादी का भरोसा दिलाया। फिर ट्रस्ट जीता और उसके
(10:34) बाद ज्वेलरी कैश और फिर गायब। सिया गोयल का केस भी सब जानते हैं। सिया और उसका बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी ने सिया के फिओन से 26 साल के केतन अग्रवाल को लोहागढ़ फोर्ट से धक्का मार के गिरा दिया। एक इनोसेंट 26 साल के लड़के की जान चली गई। सिर्फ क्योंकि सिया को केतन नहीं चेतन पसंद था। बट सिया के पेरेंट्स उसे अरेंज मैरिज के लिए फोर्स कर रहे थे। ऐसे केसेस ने जेनुइनली इंडिया में मैरिज के पहले होने वाले वेरिफिकेशन सिस्टम को और ज्यादा एसेंशियल बना दिया है। प्लस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में प्राइवेट अकाउंट्स, डेटिंग एप्स और डिसअपीयरिंग चैट्स ने
(11:10) सीक्रेट रिलेशनशिप्स को मेंटेन करना बहुत इजी बना दिया है। ये ओयo में क्या होटल में क्या करने आए हो? ऑफिस जाना है तुम्हें। क्या कर रही है तू यहां पे? किसके साथ आई है? आइए किसी के साथ। आवाज नीचे। किसके साथ आई है? आवाज नीचे। किसी के भी साथ आई हूं। तुझे क्या मतलब? डोमेस्टिक वायलेंस का केस किया हुआ है तुम दोनों में। यहां पे नंगे पड़े हुए हो। और यार इतनी आधी उम्र की लड़की है ये। रातों को उसके साथ वीडियो चैट करता है। ये सारी चीजें क्या है पापा? आप ये सब मुझे कर रहे हो। इकोनमिक टाइम्स के सर्वे के मुताबिक इंडिया में 34% एंप्लाइजस का ऑफिस अफेयर
(11:41) रह चुका है। मतलब हर तीन में से एक इंसान ग्लिंडन टिंडर बंबल जैसा ही एक इंटरनेशनल डेटिंग ऐप है। बट सिर्फ मैरिड लोगों के लिए जिन्हें एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करना है। इस ऐप के सर्वे ने रिवील किया कि इंडियन यूज़र्स में उन्हें एक मैसिव 270% का राइज मिला है। सो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स, मैरिटल फ्रॉड्स इंडिया में धीरे-धीरे करके बढ़ते जा रहे हैं। और इसीलिए कई प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन फर्म्स के बिजनेस का एक बड़ा चंक प्री एंड पोस्ट मैरिटल इन्वेस्टिगेशन से आता है। एक दिल्ली बेस्ड डिटेक्टिव एजेंसी का कहना था उनका तो 80% बिजनेस सिर्फ एक्स्ट्रा
(12:17) मैरिटल इन्वेस्टिगेशन से आता है। आज एक गलत डिसीजन की कॉस्ट भी एक्सप्पोनेंशियली बढ़ चुकी है। मैरिज अब सिर्फ इमोशनल कमिटमेंट नहीं रहा है। इसके साथ प्रॉपर्टी, सेविंग्स, इन्हहेरिटेंस, मेंटेनेंस, एलुमिनी, कस्टडी एंड फैमिली [संगीत] की रेपुटेशन भी लिंक्ड हो चुकी है। मेरी वाइफ मेरे ऊपर ₹2 लाख महीने का मेंटेनेंस मांग रही है। जब एक गलत डिसीजन का इमोशनल और फाइनेंसियल कॉस्ट इतना हाई हो, तब बैकग्राउंड वेरिफिकेशन सिर्फ एक एक्सपेंस नहीं रिस्क इंश्योरेंस लगने लगता है। इसी एग्जैक्ट गैप में प्राइवेट डिटेक्टर्स एंटर करते हैं। इनके साथ फर्स्ट मीटिंग इज ऑलवेज
(12:52) क्लाइंट ब्रीफिंग। क्लाइंट एक्जेक्टली क्या इन्वेस्टिगेट करवाना चाहता है? अफेयर, फ्रॉड, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, कोई मिसिंग पर्सन है या फिर कोई ब्लैकमेल का केस है? रजनी मैडम वो लेडी डिटेक्टिव है। लड़की है मेरी। मुझे ऐसा डाउट है कि वो किसी के पास घूमती है। वीएसएस ह यंग सिस्टर इज इंगेज्ड टू अ मैन शी फेल इन लव विथ ऑनलाइन ही इज कंसर्न द रिलेशनशिप इजंट व्हाट इट सीम्स। आंध्र प्रदेश? व्हाट्स द एज ऑफ़ दैट पर्सन हुजन मिसिंग? इस ब्रीफिंग में टारगेट के सारे डिटेल्स नोट किए जाते हैं। आइडेंटिटी, एड्रेस, गाड़ी, ऑफिस, फैमिली, रिलेशनशिप्स, उसका
(13:30) डेली रूटीन कैसा दिखता है सब कुछ। बट डिटेक्टिव्स ऑन ग्राउंड उतरे उससे पहले मेजॉरिटी इन्वेस्टिगेशन डिजिटल होता है। टारगेट की कंप्लीट डिजिटल प्रोफाइलिंग की जाती है। सोशल मीडिया एक्टिविटी, फ्रेंड्स और कनेक्शंस, प्रोफेशनल लाइफ, ऑनलाइन बिहेवियर, पब्लिक रिकॉर्ड्स एंड यस डेटिंग ऐप का प्रेजेंस भी। वैसे प्राइमरीली अफेयर्स या फिर प्रीमैरिटल बैकग्राउंड चेकक्स में होता है जिसका नेक्स्ट स्टेप होता है अक्सर हनी ट्रैफिक। एजेंसी के डिटेक्टिव्स मल्टीपल ऑनलाइन प्रोफाइल्स के थ्रू टारगेट को बार-बार अप्रोच करते हैं सिर्फ यह चेक करने के लिए कि यह टारगेट
(14:01) अफेयर के लिए ओपन है या नहीं। इसी स्टेज में ऑन ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन का भी पूरा ब्लूप्रिंट बनता है। टारगेट किस रूट से गुजरेगा? किस लोकेशन से उस पर नजर रखी जाएगी? कितनी टीम्स उसमें डिप्लॉय होंगी? कौन सा डिटेक्टिव किस व्हीकल में प्रेजेंट होगा? एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स क्या होंगे? अगर टारगेट रूट बदल दे तो प्लान बी क्या होगा? एंड सबसे इंपॉर्टेंट बात टारगेट के कितने पास जाना है ताकि वो कभी महसूस ही ना कर सके कि उसका पीछा हो रहा है। जैसे कि मैं लोन इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बनके जा रही हूं। तो उनके अगर घर जाएंगे तो उनको पता चलेगा। तो हम लोग इन्वेस्टिगेशन
(14:34) करने उनके घर नहीं जाएंगे। हम उनके नेबर्स रिलेटिव्स अगर रहे तो उनसे पूछताछ कर सकते हैं। आपकी पोजीशन वहां हो कि सीसीटीवी आपको कैप्चर ना कर सके। क्योंकि सर्वेलेंस का गोल्डन रूल है। अगर टारगेट को एक बार शक हो गया तो इन्वेस्टिगेशन वहीं पर खत्म हो जाती है। इसीलिए पूरा ऑपरेशन वाइट बोर्ड मैप और लैपटॉप की स्क्रीनंस पर पहले मैप आउट किया जाता है ऑन ग्राउंड जाने से पहले। इसके बाद शुरू होता है ऑन ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन जिसमें डिटेक्टिव्स का सबसे पावरफुल टूल कैमरा या जीपीएस नहीं आइडेंटिटी है। एंड यहीं पे आते हैं सबसे इंटरेस्टिंग स्टोरीज। अह डिसगाइस यूज़ करना
(15:07) जरूरी पड़ता है। कभी पागलपन दिखाना पड़ता है, [संगीत] कभी अंधे का रोल करना पड़ता है। कभी गूंगे बहरे का रोल करना पड़ता है। यह मेरा सबसे बेहतरीन चीज है कि इससे किसी को पता नहीं चलता है कि बुर्खे के पीछे कौन है। सिचुएशन के अकॉर्डिंग डिटेक्टिव को कभी कस्टमर तो कभी डिलीवरी वर्कर, बेगर या इवन सब्जी वाला का कवर आइडेंटिटी अडॉप्ट करना पड़ सकता है। उनका प्राइमरी गोल होता है टारगेट के बारे में ज्यादा से ज्यादा इनेशन गैदर करना। इसीलिए उन्हें कभी बैंक लोन ऑफिसर बनके कस्टमर वेरिफिकेशन के नाम पर नेबर्स से सारे डिटेल्स मांगने पड़ते हैं।
(15:39) नमस्ते मैं काजोल बैंक से हूं। आपके पास में कोई रहते हैं उन्होंने लोन लिया है तो उसके बारे में थोड़ा डिटेल चाहिए था। तो कभी एक्टिंग करके टारगेट का नंबर निकलवाना पड़ता है। तो बाद में बोला मुझे चक्कर आती है जरा बैठने को मिलेगा क्या? टू द गर्ल्स इट्स नंबर। तो कभी एक भाजी वाली बनकर टारगेट के सोसाइटी में 3 महीने तक काम करना पड़ता है ताकि टारगेट के जितने हो सके उतना क्लोज जा सके। वाइफ केम टू अस शी फेल्ट दैट द हस्बैंड वास् इन्वॉल्व्ड विथ हर मेड माय इन्वेस्टिगेटर हैड टू बिकम अ वेजिटेबल वेंडर। वी फाउंड आउट फर्स्ट दैट ही वास एक्चुअली इनवॉल्व्ड विथ हर एंड दे
(16:17) वुड गो आउट सो ऑफेन दे वुड गो टू डिफरेंट होटल्स आल्सो द मेड। याह। इसके बाद अगला स्टेज है फॉलोविंग द टारगेट। [संगीत] द टीम प्राइवेट डिटेक्टिव मैन वाइफ सस्पेक्ट चीटिंग ऑन हर सो [संगीत] इसके बाद अगला स्टेज है ट्रैपिंग द टारगेट। अच्छा इसी स्टेज में हम इंट्रोडक्शन के वो दो केसेस पर भी वापस आएंगे। एक हैप्पी फैमिली मगर बीवी को शक कि उसका गे हस्बैंड उस पर चीट कर रहा है और दूसरा केस एक कपल के पेरेंट्स का जिन्हें शक है कि लड़का उनकी बेटी से शादी तो करना चाहता है पर क्या वो उसके प्रति लॉयल है। इन दोनों भी केसेस में टारगेट को
(16:59) हनी ट्रैप करके रिलेशंस इनिशिएट किए गए। एक तरफ एक गे लड़का पोटेंशियल लव पार्टनर बना, मगर उसके जैकेट में एक सीक्रेट स्पाई कैमरा छुपा था। कि हम अब उसकी लाइफ में एक मेल अंडर कवर इंडक्ट करेंगे, जिसके थ्रू व्हेन ही गेट क्लोज टू हिम, ही विल गेट एविडेंसेस जो उसके लिए कोर्ट में काम आएंगे। और दूसरी तरफ एक लड़की ने रिलेशन्स एस्टेब्लिश किए, मगर उसके बैग में सीक्रेट कैमरा था। [संगीत] द स्टिंग रिलाइज ऑन अ सिंगल एक्सेसरी, द हैंडबैग। कंसील [संगीत] कैमरा बिटवीन द एजेंट एंड टारगेट दोनों टारगेट्स का हर रिएक्शन रिकॉर्ड हो रहा था जब तक सारा एविडेंस गैदर नहीं हो
(17:38) गया कैन हियर द कन्वर्सेशन क्योंकि वो बहुत क्लियरली बता रहा है दैट ही फील्स हड टच एंड ही सॉ हि फोटोग्राफ्स उसने कुछ फोटोग्राफ्स भेजी अपने सब्जेक्ट को एंड ही रिएक्टेड ऑन दोज़ फोटोग्राफ्स आल्सो इसके बाद आता है द लास्ट स्टेज एविडेंस हैंड ओवर रिकॉर्डेड फुटेजेस डायरेक्टली कोर्ट तक नहीं जाती है। उससे पहले एक टेक्निकल लेयर आ जाता है। भारतीय साक्षी अधिनियम का सेक्शन 63 के हिसाब से कोई भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स अगर हम कोर्ट में देते हैं तो उसका एक सर्टिफिकेट जमा करना पड़ता है। जिसमें कौन सा डिवाइस यूज हुआ उस वीडियो को रिकॉर्ड करने के लिए उसका
(18:12) मेकिंग, मॉडल, सीरियल नंबर, आईएमईआई नंबर। इसीलिए द प्रिंट को एक प्राइवेट डिटेक्टिव ने बताया कि रिकॉर्डिंग को एविडेंस के तौर पर यूज करना हो तो वो क्लाइंट का फोन अक्सर लेते हैं और उसी क्लाइंट के फोन से वीडियोस और फोटोग्राफ्स रिकॉर्ड करते हैं ताकि इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस सर्टिफिकेट ऑब्टेन किया जा सके और इसके बाद ही यह रिकॉर्डिंग्स कोर्ट में परमिसिबल होती है एज लीगल एविडेंस। फाइनली [संगीत] जब हर पीस फिट हो जाता है तब बनती है फाइनल इन्वेस्टिगेशन की फाइल फोटोस, वीडियोस, डॉक्यूमेंट्स, टाइमलाइन, [संगीत] बिहेवियरल ऑब्जरवेशंस। डिटेक्टिव की
(18:45) महीनों की मेहनत को इस फाइल में डिटेल में नोट किया जाता है और फिर क्लाइंट को ऑफिस बुलाया जाता है। डिटेक्टिव क्लिप चलाकर बताता है, यह देखिए यहां पहली बार कांटेक्ट एस्टैब्लिश हुआ। यहां पर टारगेट की गाड़ी लोकेट हुई और यहां से एग्जैक्टली कंफर्म हुआ कि आपका डाउट [संगीत] एक्चुअली में सही था। जरूरत पड़े तो इसी रिपोर्ट को डिवोर्स या फिर कोई लीगल प्रोसीडिंग में भी यूज किया जा सकता है। बट क्लाइंट जब इस इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट को लेकर निकलता है उसके हाथ में सिर्फ एविडेंस नहीं होता उसके हाथ में खरीदा हुआ सच होता है। एंड यही मॉडर्न इंडिया का सबसे अनकंफर्टेबल
(19:19) ट्रांसफॉर्मेशन है। हम हमारे रिलेशनशिप्स को ट्रस्ट पर अब भी शुरू तो करते हैं बट शादी, पैसा, रेपुटेशन और कस्टडी जैसे हाई स्टेक्स पर ट्रस्ट अकेला सिस्टम नहीं हो सकता है। क्योंकि डिजिटल इंडिया ने आइडेंटिटी बनाना तो आसान कर दिया है पर उसे वेरीफाई करना बहुत मुश्किल है। इसी गैप में एक नई इकॉनमी पैदा हो चुकी है। द प्रूफ इकॉनमी, द प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन इकॉनमी। प्राइवेट डिटेक्टिव्स उस स्ट्रक्चरल फेलियर का मार्केट रिस्पांस है जहां क्लेम्स तो बहुत है लेकिन वेरिफिकेशन बिल्कुल नहीं। पहले सोसाइटी कहती थी भरोसा कर लो। अब सोसाइटी पूछ रही है एविडेंस
(19:54) क्या है? सबूत क्या है? इसीलिए शायद फ्यूचर में ट्रस्ट खत्म नहीं होगा। मगर ब्लाइंड ट्रस्ट लग्जरी बन जाए। 11th एंड 12th सप्टेंबर को हो रहा है इंडियास बिगेस्ट टेक एंड बिजनेस इवेंट ओडो एक्सपीरियंस। एंट्री अबब्सोलुटली फ्री है बट स्लॉट्स लिमिटेड है। लिंक इज इन द डिस्क्रिप्शन।

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