Monday, April 6, 2026

The SHOCKING LAST 24 HOURS Of Ramana Maharshi | The Eastern Lens

The SHOCKING LAST 24 HOURS Of Ramana Maharshi | The Eastern Lens

Author Name:The Eastern Lens

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@TheEasternLens

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=4_FSxij4i68



Transcript:
(00:04) 14 अप्रैल 1950 रात के 8:47 पूरे भारत में एक ऐसी चीज हुई जिसने सभी देखने वालों को अचंभे में डाल दिया था। [संगीत] बॉम्बे में मिस पेटेट अपनी बालकनी से एक अजीब नजारा देखती हैं। वो देखती हैं कि एक बहुत बड़ा चमकदार सा मीटियोर जो इतना धीमे था कि उसकी रोशनी ने आसमान को दो हिस्सों में बांट दिया था। आगे बढ़ रहा था। वो समझ गई थी। बिना किसी न्यूज़ या समाचार के उन्होंने एक चिट्ठी लिखी। महर्षि चल बसे हैं। उसी वक्त लखनऊ में एच डब्ल्यूएल पूजा को जो [संगीत] आगे चलकर स्वयं अद्वैत के एक मास्टर बनने वाले थे। अपनी छाती में एक फिजिकल झटका महसूस होता है। बाहर जाने पर
(00:51) उन्हें भी वही चमकदार मिटयर दिखाई देता है। दक्षिण में मद्रास में लोग सड़कों पर निकल आते हैं। सबकी आंखें उसीयर की तरफ थी, जो वहां के पवित्र पहाड़ अरुणाचल की तरफ बढ़ रहा था। आखिर क्या मतलब था उस मीटियो का? मतलब बहुत गहरा था। क्योंकि उसी रोज उसी समय तिरुवनामलाई में एक 70 साल के ऋषि जो पिछले 50 सालों से उस पहाड़ को छोड़कर कहीं नहीं गए थे। अपनी आखिरी सांसे छोड़ रहे थे। आखिर क्या हुआ था उस रोज उन आखिरी क्षणों में? यह है कहानी रमण महर्षि और उनके आखिरी 24 घंटों की। मेरा नाम है ऋषभ एंड आप देख रहे हैं द ईस्टर्न लेंस।
(01:39) रमन महर्षि के आखिरी 24 घंटों को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा। रमन के बचपन का नाम वेंकट रमन अय्यर था। वो किसी साधु के घर पैदा नहीं हुए थे। ना ही बचपन में उन्हें किसी धर्म विशेष या आध्यात्मिकता में कुछ रुचि थी। बल्कि इसके उलट वो एक साधारण से बच्चे थे। जिसमें कुछ भी अलग या विशेष नहीं था। लेकिन 16 [संगीत] साल की उम्र में मदुराई में अपने अंकल के घर बैठे हुए उन्हें अचानक मृत्यु के डर ने घेर लिया था। आगे जो होने वाला था वो उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल देने वाला था। उस डर से बचकर वह भागे नहीं बल्कि वह जमीन पर एक
(02:25) लाश की तरह लेट गए। उन्होंने अपनी सांस रोक ली। मुंह बंद कर लिया और [संगीत] खुद से एक सवाल पूछा जो उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बनने वाला था। वह क्या चीज है जो मर रही है? इस एक प्रश्न के चलते वो अपने सेल्फ अपने असल स्वरूप के सामने खड़े थे। उस रोज उन्हें [संगीत] समझ आता है कि सेल्फ मौत से परे है। इस सत्य तक पहुंचने के बाद वह अपना घर छोड़ देते हैं और दक्षिण भारत में ही स्थित तिरुवनामलाई पहुंच जाते हैं। अगले कई साल वो पाताल लिंगम नाम की एक अंधेरी अंडरग्राउंड गुफा में ध्यान में लीन होकर बिताते हैं। सोचो वो इतने ध्यान ग्रस्त थे कि अक्सर उनके
(03:09) शरीर को कीड़े [संगीत] खाने लगते। मगर उन्हें दर्द का जरा भी एहसास नहीं होता। [नाक से की जाने वाली आवाज़] 1948 में उनकी लेफ्ट कोहनी पर एक छोटा सा लंप निकल आता है। डॉक्टर्स इसे सारकोमा माने एक डेडली कैंसर [संगीत] बताते हैं। इसी के चलते उनकी चार सर्जरीज होती हैं। उन्हें रेडियम थेरेपी दी जाती है। डॉक्टर्स हैरान थे कि कैंसर के सेल्स उनके पूरे हाथ में फैल चुके थे। लेकिन महर्षि के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं आती। और तो और अपने मेडिकल प्रोसीजर्स [संगीत] वो बिना एनस्थीसिया के माने बेहोश हुए बिना करवाते हैं। [संगीत] जब उनसे पूछा
(03:49) गया कि आपको दर्द नहीं होता तो उनका जवाब था दर्द मन को होता है मुझे नहीं। उनके लिए उनका शरीर एक पुराने कपड़े जैसा था जिसे उन्होंने कब का उतार दिया था। हाय अगर आप यह वीडियो यहां तक देख रहे हो तो मैं आपको बता दूं कि आप उन 20% ऑडियंस में से हो जो यह वीडियो यहां तक देख रहे हो। इस साल मैंने खुद के लिए एक क्रेजी गोल सेट किया है दैट इज ऑफ रीचिंग 50ाउजेंड सब्सक्राइबर्स। तो अगर यह गोल रीच करने में आप मेरी हेल्प करना चाहते हो तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर करना। एंड नाउ बैक टू द वीडियो। अपनी मृत्यु से एक दिन पहले उन्होंने सबको बाहर जाने को कहा। उन्होंने
(04:31) अपनी प्राइवेसी मांगी। कुछ ऐसा जो उन्होंने 50 सालों में कभी नहीं किया था। उस रात उनके कमरे में क्या हुआ किसी को नहीं पता। 14 अप्रैल को सुबह 8:00 बजे रमन महर्षि का शरीर इतना कमजोर हो चुका था कि अब वो हिल भी नहीं सकते थे। उनके अटेंडेंट रंगस्वामी जब उन्हें मसाज कर रहे थे तो महर्षि उन्हें इंग्लिश में [संगीत] कहते हैं। थैंक्स। रंगस्वामी भी मानो दंग से रह गए। महर्षि ज्यादातर तमिल, तेलुगु या मौन के जरिए ही बात करते थे। उनका इंग्लिश में बोलना एक कमाल की बात थी। 11:00 बजे वो थोड़ा सा लिक्विड फूड लेते हैं। [संगीत] जब उनसे पूछा गया कि क्या वो ठीक हैं? तो
(05:15) उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा अब से समय का कोई महत्व नहीं रहेगा। यह अनाउंसमेंट थी कि उनकी महासमाधि का काउंटडाउन अब शुरू हो चुका था। दोपहर तक 500 से ज्यादा लोग उनके कमरे के बाहर भीड़ लगाए खड़े थे। [संगीत] गर्मी 40 डिग्री से भी ऊपर थी। यह देखते हुए महर्षि अचानक से बोलते हैं, सबको अंदर आने दो। उन्हें मेरे दर्शन लेने दो। यह कहते हुए उनकी आंखें तेजी से चमक रही थी। मानो जैसे उनके अंदर कोई बहुत बड़ी ऊर्जा प्रज्वलित हो रही थी। शाम 7:00 बजे डॉक्टर्स उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर के जरिए जिंदा रखने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने
(05:58) 5 मिनट तक ऑक्सीजन ली और फिर उसे हटा दिया। उन्होंने इशारे से कहा कि अब शरीर को जबरदस्ती जिंदा रखने की जरूरत नहीं है। उन्हें एक मेडिटेशन पोश्चर में बिठाया गया। अंधेरा हो चुका था। कमरे में सिर्फ एक तेल का दिया चल रहा था। अचानक बाहर गार्डन से मोर की चिल्लाने की आवाज आई। महर्षि जो मुश्किल से सांस ले पा रहे थे। उन्होंने पूछा क्या मोरों को खाना खिला दिया गया है? रमनम महर्षि का शरीर भले ही मर रहा हो मगर उनकी करुणा अब भी जिंदा थी। रात करीबन 8:40 पर। बाहर वरांडा में उनके कुछ शिष्यों ने महर्षि का ही भजन अक्षरा मन मलाई माने द
(06:43) मैरिटल गार्लंड ऑफ लिटर्स गाना शुरू किया जो महर्षि ने कई साल पहले उस पवित्र पहाड़ अरुणाचला से अपने रिश्ते के लिए गाया था। जैसे ही अरुणाचला का नाम गूंजा महर्षि ने अपनी आंखें खोली। [संगीत] उनकी आंखों से आनंद के आंसू निकलकर उनके कानों तक बह चले और फिर सन्नाटा। महर्षि ने एक गहरी सांस ली और बस [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] [गहरी सांस लेने की आवाज़] रमन महर्षि अरुणाचल के वो महान संत चल बसे थे। ठीक उसी क्षण वो मशहूर चमकदार मीटियोर आसमान में दिखाई देता है। वहां मौजूद फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर ब्रेसर बाद में बताते हैं
(07:26) कि उस मीटियोर की रोशनी ने पूरे आश्रम को दिन की तरह उज्ज्वलित कर दिया था। अगली सुबह 4000 लोग तिरुवनामलाई पहुंचते [संगीत] हैं। सोचो रमन के शरीर को जैसमीन और सैंडलवुड से ढका जाता है। उन्हें जलाया नहीं गया क्योंकि शेफ परंपरा के मुताबिक एक ज्ञानी का शरीर एक जिंदा मंदिर होता है। इसलिए उनकी समाधि बना उन्हें नमक, कपूर और मिट्टी के साथ दफनाया गया। उनके [नाक से की जाने वाली आवाज़] सर के ठीक ऊपर एक शिवलिंगम लगाया गया। आज भी वहां जाने वाले लोग कहते हैं कि उस जगह की हवा में वो शांति महसूस होती है जो महर्षि की प्रस्तुति में महसूस हुआ करती थी। महर्षि
(08:09) ने मरने से पहले अपने रोते हुए भक्तों से एक आखिरी [संगीत] बात कही थी। लोग कहते हैं कि मैं जा रहा हूं। पर मैं कहां जा सकता हूं? मैं यहीं हूं। उस [संगीत] यहीं हूं का मतलब था कि मृत्यु सिर्फ शरीर की होती है। उस चेतना की नहीं जो हम सबके अंदर है। रमण महर्षि की ही तरह हजारों ऐसे संत महात्मा हुए हैं जिन्होंने भारत की धरती पर कदम रखे हैं। उनमें से बहुतों पर मैं ऑलरेडी वीडियोस बना चुका हूं। उस प्लेलिस्ट को देखने के लिए यहां क्लिक [संगीत] करें। अगली वीडियो में किस टॉपिक पर बनाऊं? यह मुझे नीचे कमेंट सेक्शन में लिखकर बताओ क्योंकि यह सिर्फ [संगीत] मेरा
(08:47) ही नहीं आप लोगों का भी चैनल है। तब तक के लिए थैंक यू। [संगीत] [संगीत]

No comments:

Post a Comment