Body Count Se Healing Kaise Kare? | The Real Solution to Energy Imprints
Author Name:Yogi Aikam Ji
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@YogiAikam
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Transcript:
(00:00) जब आप छोटे से बड़े होते हो, आपका माइंड ज्यादा जागृत एक्टिव हो जाता है। माइंड एनर्जी मांगता है। पुराने जमाने में जो माता-पिता चूज़ करते थे, उसी के साथ संबंध हम बनाते थे। लेकिन आजकल तो ऐसा नहीं है। देयर इज अ फैशन ऑफ़ फैंटसी इस गोइंग ऑन। ऐसे ही जीवन है। जो भी आता है आपके ऊपर। चलो आ जाओ। आप भी मेरे ऊपर अपनी निशानी छोड़ के चले जाओ। आपके माता की एनसेेस्टल लाइन, आपके पिता की एनसेेस्ट लाइन। आ जाओ मेरे पास बहुत स्पेस है। हल क्या है? चलिए [संगीत] बात करते हैं हल की। यही तो जानना चाहते थे ना। जब हमने लास्ट एक वीडियो बनाया था कि जो भी आपके जीवन में आता है
(00:41) वो कैसे आपकी एनर्जी छोड़ के जाता है आपके भीतर और उसके साथ हमारा एक एनर्जी का कॉन्ट्रैक्ट हो जाता है। उसकी जो एनसेेस्ट्रल लाइन है वो भी हमारे साथ कनेक्टेड हो जाती है और बहुत सारे बच्चों ने यह प्रश्न बहुत सारे प्रश्न किए हैं। धन्यवाद आप सबका। इसीलिए ये फॉलो अप वीडियो वो मेरे पिछले वीडियो है जहां पर मैं बता रहा था कि जब आप किसी के रिलेशनशिप में आते हो तो आपकी लाइफ में क्या इंपैक्ट आता है। उसी को कंटीन्यूअस करते हैं और कुछ आई विल टेल यू कि वो सॉलशंस उसका हल क्या है कि अब अब अगर नदी में छलांग लगा ही दी है तो बाहर तो आपको
(01:21) आना ही पड़ेगा। तो कोई तौलिया दे दे शरीर बदन सुखा ले वहीं तो नहीं रहेंगे ना नदी में अगर कुछ हो गया तो ठीक है जो भी है जीवन तो जीना ही है ना तो लेट्स लेट्स टॉक अबाउट इट इसको बात करते हैं कि लास्ट हमने यह डिस्कस किया था कि जब हमारे जीवन में कोई भी व्यक्ति आता है एक तो पहले कि यह सारा का सारा ऊर्जा का खेल है एनर्जी का राइट जब आप छोटे से बड़े होते हो आपका माइंड ज्यादा जागृत एक्टिव हो जाता है और माइंड एनर्जी मांगता है जब वो आप भोजन करते हो कुछ भी वो भी एक ऊर्जा एनर्जी देता है आपको आपके माइंड को लेकिन
(02:07) वो बिकॉज़ ज्ञान नहीं है वो ऊर्जा नीचे से बाहर फ्लो करती है ग्रेविटी पुल वो सारी बाहर को जाएगी और और एक्टिवेट योर सेक्सुअल ऑर्गन्स और यू आर देन क्या करते हो? बाहर अपने पार्टनर ढूंढना शुरू कर देते हो। क्योंकि एक यह प्रकृतिक प्रोसेस है। प्रकृति जागृत हो रही है। आपको तैयार कर रही है ताकि आने वाले सीजन में जो भी जैसे प्रकृति होती है। इट्स अ सेल्फ प्रिजर्वेशन। आप आगे बढ़ेंगे। पुराने जमाने में माताएं, बहने, बाबूजी, पिताजी सब एक ही रिलेशनशिप होता था। या होता भी होगा हमें नहीं पता। लेकिन जो माता-पिता चूज़ करते थे
(02:53) उसी के साथ संबंध हम बनाते थे। है ना? लेकिन आजकल तो ऐसा नहीं है। देयर इज अ फैशन ऑफ फेंटसी इज गोइंग ऑन। और कितने एप्स हैं। क्या-क्या है। चलो आपको पता होगा जहां पर आप ढूंढते हो कि कोई मुझे मिल जाए ताकि मेरे शांति मुझे मिले। जो अग्नि जल रही है कोई इसमें ठंडा पानी डाले ऑफिस जाते हो ऑफिस 10 12 घंटे 13 घंटे ऑफिस में ही रहते हो और दो-ती घंटे ट्रैफिक में घर तो आप छ सात घंटे के लिए खाना खा के सोने ही तो आते हो तो आप बेसिकली तो जिंदगी बाहर जी रहे हो दूसरों के साथ घर पे तो छत पर सोने के लिए आते होटल की तरह है सराए आश्रम कि आए खाना
(03:38) खाया सो गए दो बातें की और चलो फिर चले गए और बड़ा स्वाभाविक है कि फ्रेंड्स के साथ कुछ रिलेशनशिप बन गया और ऑफिस में कुछ रिलेशनशिप बन गया और कई बार तो इसकी आदत पड़ जाती है कि किसी को कौन सा पता चलेगा। भाई अभी आता हूं असली बात पर जो आपको दिक्कत दे रही है कि अब हो गया तो क्या करें? अब हो गया तो या तो कुछ भी नहीं। आई लाइक इट। आई विल कैरी ऑन। या फिर यह ठीक नहीं हुआ। जो भी हुआ क्योंकि जो भी व्यक्ति आपके जीवन में आता है जिसके साथ आपके कनेक्शन बनते हैं एनर्जी के उसके साथ आपका
(04:24) एक कॉन्ट्रैक्ट एक अनुबंध हो गया। माइंड में आप चाहे उसको याद रखो ना रखो वो याद रहेगा। लेकिन आपकी बॉडी जो है जैसे जिसने आपको छुआ या फूंक भी मारी या जैसे किसी ने कोई शब्द कहा वैसा या आपके भीतर गया वो वो आपके ऊर्जा के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट बना के गया है। उसने आपकी एनर्जी फील्ड में अपना स्थान बना लिया है। और बॉडी कीप्स द स्कोर। जितने सेल हैं हमारे बॉडी में वह सबके सब होते हैं
(05:09) साइकोसोमेटिक। हर एक जो सेल है उनमें एक मेमोरी एक याद रह जाती है उस व्यक्ति की। और जितने व्यक्ति आपके जीवन में आएंगे आपकी ऊर्जा के भीतर उतने ही आपके कॉन्ट्रैक्ट बन रहे हैं। और इनको रिजॉल्व करने के लिए आपको आना पड़ेगा। एंड जितने यह छोड़कर गए हैं अपनी एनर्जी आपके भीतर क्योंकि वह आपकी एनर्जी नहीं है। वह बाहर से आई है। इसलिए वो एनर्जी को आपके भीतर से निकलना ही होगा। यही रूल है। क्योंकि आपके भीतर आप ही की एनर्जी आएगी और वहीं पर परमात्मा
(05:57) जागृत होगा। वहां पर किसी और का स्थान नहीं है। यह तुम्हारे और तुम्हारे भगवान के भीतर है। भगवान ही बैठा है अंदर। और जितने तिनके जितने कण अंदर आए उस धूल के वो साफ करने ही पड़ेंगे आपको। इसका कोई हल नहीं है। और जितनी देर वह आपके भीतर रहेंगे, वह डिस्टरबेंस करते रहेंगे और आपके जीवन में उथल-पुथल आती रहेगी। जितना आप लोगों के साथ यह रिलेशनशिप संभोग में जाएंगे उतना ही आप डीप मडी वाटर्स में जा रहे हो। आप बीइंग अ एजुकेटेड पर्सन बीइंग इन अ मॉडर्न सोसाइटी आप कुछ भी कह लो भाई इससे बचने वाले नहीं हो।
(06:45) यहां पर कौन किसकी बात करता है? यहां पर आप अपनी बात करते हो। यह बात स्वाद लेने की नहीं है। यह बात हंसने की नहीं है। यह बात टोंट करने की नहीं है। अभी कितने मेरे भाई बहन आ जाएंगे सोशल मीडिया पर क्योंकि आजादी है लिखने की बकवास वो लिख के चले जाएंगे। दिमाग है नहीं कुछ डेप्थ है नहीं। कुछ समझना चाहते नहीं है। बस मुंह खोलना आता है क्योंकि जिसने उनको सवाल सवाल किया प्रश्न किया वह डिस्टर्ब हो जाएंगे। कुछ आएंगे बस बर्ड्स की तरह पक्षियों की तरह बीट करेंगे और चले जाएंगे, उड़ जाएंगे। कोई मतलब है ही नहीं उनको। ऐसे ही जीवन है जो भी आता है आपके ऊपर चलो
(07:28) आ जाओ आप भी मेरे ऊपर अपनी निशानी छोड़कर चले जाओ आपके माता की एनसेेस्टर लाइन आपके पिता की एनसेेस्टर लाइन आ जाओ मेरे पास बहुत स्पेस है 10 व्यक्तियों के साथ संबंध हो गए और 10 के मां-बाप 20 एनसेेस्टर लाइन भाई तुम अपना पहले ख्याल रख लो उसके बाद लोगों का ख्याल रखना और अपना ख्याल तब तक पूरा नहीं होगा जब तक यह स्पेस खाली नहीं होगा आपके भीतर बॉडी कीप्स द स्कोर वह सेंसेशन, वह मेमोरी, वह बैंक में चली जाती है। सारी की सारी ऊर्जा आपके भीतर बैठ जाएगी। हल क्या है? चलिए बात करते हैं हल की। यही तो जानना चाहते थे ना।
(08:12) किसी ने हल कहने से पहले एक और किसी ने बोला था कि गुरुजी वो जो पोर्न स्टार्स होते हैं उनका क्या? हां पोन स्टार्स होते हैं लेकिन वह एक जॉब कर रहे हैं जो उनके बिल्स पे कर रही है लेकिन उनकी भी बॉडी स्कोर रखेगी ऐसा इससे कोई बचता नहीं है एवरीबडी इज रिस्पांसिबल फॉर देयर ओन लाइफ देर ओन बॉडी आपको जिम्मेवारी लेनी पड़ेगी आप किसका कूड़ा कर्कट उठा के चल रहे हो वो आप पर है। लेकिन चलो गलती से कूड़ा उठा लिया तो क्या सारी उम्र ढोते रहोगे? उसको फेंकोगे तो सही तो ठीक है गुरु जी उसी की बात करेंगे। पहली बात जो भी आपने इमोशनल कनेक्शन बनाया है
(08:59) उस व्यक्ति के साथ उस फीलिंग के साथ मेमोरी है ना वो याद है ना आपके भीतर उसको न्यूट्रल करना पड़ेगा। न्यूट्रल कैसे करोगे? चिंतन करने से देखो जब आप उस व्यक्ति के बारे में सोचते हो कि मुझे बहुत अच्छा लगा उसी समय आपकी बॉडी ने उस तरह से रिएक्ट करना शुरू कर दिया क्योंकि वो जा वो फीलिंग अभी भी जागृत है। क्या आप अभी उस व्यक्ति के बारे में जिसने आपको बहुत खुशी दी उस समय उसी उस क्षण में अब आप उसके साथ उसको सोच के देखो और आपके शरीर में कुछ भी हिलना नहीं चाहिए। वह स्टेट ऑफ न्यूट्रलिटी
(09:43) समभाव में आना है। अगर अभी भी कुछ होता है उसके बारे में सोचकर तो फिर वह अभी भी जागृत है। या जिसके बारे में सोच के गुस्सा आ गया वह भी तुम्हारे भीतर ही है। इन सब रिलेशनशिप को यह जो हमारा कॉन्ट्रैक्ट है इनको बोलते हैं। ऋण अनुबंध जिसको आप ऋणानुबंध भी कहते हो। ऋणानि इसको अगर संधि विच्छेद करेंगे तो ऋण मींस कर्जा डेट अनु का मतलब बाद में बंध मींस टुगेदरनेस तो जिसके साथ रहने के बाद आप कर्जाई हो गए उसके साथ वो ऋणानुबंध है। चाहे वह संभोग की स्थिति हो, चाहे किसी ने आपको छू लिया
(10:29) हो, चाहे किसी ने कुछ भी किया हो, अब वह साइकिक ब्रिज बन गया है, उसको तोड़ना पड़ेगा। जब तक वो ऊर्जा का आदान-प्रदान होता रहेगा आपके भाव से, सोच से तब तक आप बचने वाले नहीं हो। तब तक आपके भीतर वह ऊर्जा रहेगी। और वह ऊर्जा वह छोटे कांटे की तरह है। चाहे वह कुछ ना हो। लेकिन जिस दिन वहां हाथ लगा वह दर्द होगी। एक ही इलाज है। कांटा निकालना पड़ेगा भाई। अब वो जो साइकिक मेमोरी है उसको न्यूट्रलाइज करना ही पड़ेगा। एक है कंटप्लेशन चिंतन। दूसरा साधना को पकड़ना पड़ेगा। बाबा साधना को।
(11:15) साधना में ही वो ऊर्जा जब आप जाओगे तो वो न्यूट्रलाइज होगी। आपके शरीर में वो सेंसेशन न्यूट्रलाइज होगी। कई लोग कैथसिस में चले जाते हैं। दे कैन स्टार्ट फीलिंग कि वो किसी ने छुआ इधर से किसी ने कुछ किया साधना से मन क्लियर होगा और फिर वो न्यूट्रलिटी पे आओगे। कुछ हमारे जो बॉडी है कई बार तो उसको बोलते हैं कि चलो एप्सम साल्ट से उसको धो लो। अरे शरीर को तो धो लोगे। इसका क्या जिसके जिसके बारे में सोचते ही सिरहन दौड़ती है शरीर में उसका क्या मन है ना तन को योगी सब करे मन को करे ना कोई जो मन को जोगी करे सहज विधि सब होए तो एक
(12:04) योगी का भाव बिल्कुल न्यूट्रल होता है वो अब्सॉर्ब नहीं करता इसलिए आपको इमोशनली डिस्कनेक्ट होना पड़ेगा वो मेमोरी अगर जितनी बार याद करे करेगा उतना ही वो छोटे से बड़ा से बड़ा वो मेमोरी होती जाएगी। जितना आप फोकस करोगे वो मेमोरी और मैग्नीिफाई हो जाएगी। इट्स अ लॉ ऑफ़ मैग्नीिफिकेशन। जिस चीज के बारे में सोचोगे वो आपके जीवन में और बड़ी हो जाएगी। ओके? सो साधना देखिए इसका मैं आपको एग्जांपल देता हूं। जो हमारे मछिंद्रनाथ गुरु जी थे। सबको पता है उनके बारे में। अलख निरंजन आदेश। ठीक? उन्होंने भी इसको परखा था और उन्होंने इसको नाम दिया था लता साधना। लेकिन आप इस
(12:46) वर्ड को यूज करके दिमाग का दही मत कर लेना आप और वहां जाकर हर जगह मुंह मत मारने लग जाना कि ओ ये तो मच्छिंद्रनाथ ने भी की थी तो मैं भी हूं। तुम नहीं हो वहां पर। वो नाथ संप्रदाय के गुरु थे। जिनको लता साधना बोला गया था। जहां से वो अपने भीतर अपनी ऊर्जा को नहीं बाहर जाने देते हैं। यह योगियों की एक सबका नहीं मुझे पता लेकिन जो कुछ होते हैं वह संकुचित कर लेते हैं अपनी ऊर्जा को। साथ में रहने पर भी आप न्यूट्रल देखो मोहनदास करमचंद गांधी ले घूमते थे ना आसपास आप सब हंसोगे। पर यह है कि वह ऋणाबंद से कैसे छूटा जाए कि साथ में होते
(13:31) हुए भी मेरे शरीर में कोई हलचल नहीं है। लेकिन आप देखो कोई बस में जा रहा है। कोई ट्रेन में किसी को देख लिया तो क्या शरीर में उथल-पुथल करंट दौड़ने लग जाते हैं आपके। तो बेटा बचोगे नहीं। ये रुणान बंद आप क्रिएट कर रहे हो। एक मैं भूखा हूं। मैं प्यासा हूं। मुझे दे दो। मुझे खिलाओ। मैं यह हूं। मैं जन्मजनम का प्यासा हूं। मैं जन्मजनम का भूखा हूं। और दे दो और दे दो। एक दिन बोलोगे मेरे शरीर में बीमारी कहां से आ गई? कुछ भी नहीं हुआ फिर भी मेरे दिल की धड़कन कोई चल नहीं हो गई। शुरू भी नहीं है पर फिर भी मेरा मन परेशान क्यों रहता है? रात को नींद क्यों नहीं
(14:06) आती है? मेरे शरीर में मेरी बॉडी मेरी बात क्यों नहीं सुनती है? सो पहली बात इस बात को आप याद रखना कि जिसके साथ आपके हृदय के तारे जुड़ गए अगर उस समय उस अवस्था में आप अपने शरीर में नहीं हो तो वह संबंध नहीं बना रहे हो। आप ऋणानुबंध बना रहे हो। ऋणानुबंध चाहे आपकी पत्नी हो चाहे आपका पति हो चाहे बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड जो भी आप नाम दे दो। प्रॉब्लम यह होती है कि आप व्यक्ति के साथ होते हो लेकिन मन कहीं और चिपका हुआ जाके साइकिकली तो आप दो ऋण बंद हो गए। एक तो इसके साथ क्योंकि शरीर इसके साथ है मन
(14:51) नहीं है क्योंकि आप शरीर में नहीं हो। दूसरा जिसके साथ आपका मन है साइकिकली आप उसकी भी एनर्जी से आदान प्रदान हो रहा है। जितनी बार आप अपने शरीर में नहीं है जिसके बारे में भी आप सोच रहे हैं। आपका शरीर वो सब स्कोर रखता है भाई। सारा स्कोर रख रहा है। कोई बचने वाला नहीं है। चक्की में दाना आ गया, कोई पहले जाएगा, कोई बाद में लेकिन जाएंगे सभी चक्की के अंदर। यह कर्म की परिभाषा है। यह तो श्री कृष्ण ने ज्ञान दिया था कि जो इस चक्कर में आ गया कॉज एंड इफेक्ट इफेक्ट के चक्कर में आ गया वो चाहे हे अर्जुन चाहे चक्की में वह गेहूं का दाना
(15:37) पहले जाए या बाद में वह चक्की में सारे ही दाने जाएंगे। चाहे आप अभी समझो या ना समझो चाहे जो भी किया है इसका आपको भुगतान करना ही होगा और बार-बार आते रहोगे जाते रहोगे बस इसी स्थिति को न्यूट्रलाइज करने के चक्कर में आज कर लो अभी कर लो बहुत अच्छा है मे बी आपको कुछ सेशंस लेने पड़े थेरेपी सेशंस लेने पड़े ताकि वह मेमोरी को न्यूट्रल कर दो आप साधना में एक गुरुजी ढूंढ लो जो आपको क्लियर करें। आपको ज्ञान दे, मार्गदर्शन करें। लेकिन यह सब भाग जाओगे या हाहा इससे कुछ नहीं होता। बेटा आपकी आंख बंद करने से रात नहीं होगी। तो
(16:22) शुतुरमुर्ग मत बनना। डोंट बी एन ऑस्ट्रिज। ओपन योर आइज एंड फेस द प्रॉब्लम। दिस इज अ रियल इशू हियर। ठीक है? तो क्या-क्या है सशन? रिककैप करो। दे जैसे आपने शरीर को धोना है कोई एप्सम साल्ट से पानी में गर्म पानी में बैठ के बैठो और उसको याद करो और अपने शरीर से जोर-जोर से सांस निकालो उसके बारे में सोच रहे हो और जिस जहांजहां पर हो रहा है उसको खाली करो यह इंटेंशन से होगा विजुअलाइज से सो
(17:13) पूरा खाली कर देना। बार-बार कर देना। पेट को संकुचित कर देना। दूसरा बैठे हो सोच रहे हो। शरीर न्यूट्रल उसको याद करना। उसको याद करना। वो सारी की सारी बात जिसने आपको बहुत ललचाया था। बिल्कुल उसी स्थिति में चले जाना और शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ देना और तब तक करते रहना जब तक उसको सोच सोच के बाहर अब शरीर में कुछ नहीं होता है। ओके तीसरा जस्ट बी ना भूतकाल ना भविष्य बस अभी मैं अपने शरीर से
(18:02) प्रेम करना और माफी भी मांग लेना। कि जाने अनजाने में अगर मैंने कोई बाहर की ऊर्जा अपने शरीर में रखी है तो आज मैं इसी समय उसको निकालता हूं और जो भी आया उसको यही बोलना कि आपका बहुत धन्यवाद आप आए एक अनुभव दिया अब मैं अपने आपसे शरीर से आपका संबंध विच्छेद करता हूं या करती हूं। यह बार-बार करना तब तक करना जब तक बिल्कुल आप न्यूट्रल ना हो जाओ। हां लता साधना बड़ी मुश्किल है बेटा जी मोहनदास करमचंद गांधी ने भी की थी और भी कई ऋषि मुनि है जिन्होंने की थी सबके साथ डिटच रहना है शरीर में कोई आने ना पाए भाव
(18:50) में कोई आने ना पाए और जिस दिन आ गया अगर आपको पता चल गया तो निकाल देना तो एक बार फिर से क्या करना है फोर्सफुल एक्सेल और इतना जैसे गुब्बारे से सारी हवा निकाल ली उससे क्या होगा जब आप पेट से करेंगे जैसे सांस पूरा निकाला और फिर पेट को आगे पीछे किया जिसको आप रेचक बोलते हैं उससे क्या होगा बॉडी के अंदर एक वैक्यूम आपके पेट के अंदर वैक्यूम क्रिएट हो जाएगा और जितनी बॉडी की हर सेल में जो ऊर्जा है धीरे-धीरे वो वैक्यूम उसको खींचेगा और उसको खींच के आपने बाहर निकालना है। शरीर बाहर फेंक देगा। तो एक बार और मैं आपको दिखाता हूं कि आप अपने भीतर
(19:34) डिटॉक्सिफिकेशन कैसे करेंगे। सब कुछ पेट में रहेगा क्योंकि यही खाता है ना पचाता है। दिमाग याद रखता है। तो अब सीधा बैठेंगे। एक लंबा सांस अंदर लेंगे और धीरे से अब बाहर निकालेंगे और सारी का सारी की सारी चेतना नाभि में आनी चाहिए। वैसे श्वास बाहर निकालो, पूरा बाहर निकालो। और अब फोकस पैसिव जो फोकस है वो इन्हेल पर एक्टिव फोकस वो एग्ेल पर रहेगा। इन्हेल अपने आप ही हो जाएगा। लेकिन आपने सांस बाहर निकालनी है। उसके साथ विजुअलाइज
(20:19) करना है कि वो सारी ऊर्जा जो है मेरी जो गंद मंद जो भी है वो बाहर निकल रहा है। बीमारी बाहर निकल रही है। वो तकलीफ वो वो गुस्सा वो डिसपॉइंटमेंट वो सब बाहर निकल रही है। तो दिस विल गो लाइक दिस। मेमोरी को सामने रख लो अपने और अब [हंसी] लंबा सांस बाहर और पेट आगे पीछे। फिर एक लंबा सांस अंदर।
(21:09) दो चार सेकंड के लिए, 5 सेकंड के लिए होल्ड करो। फिर से सांस बाहर निकालो। फिर से मेमोरी को लेकर आओ। शरीर को बोलो। आज मैं यह निकालता हूं। परमात्मा को गुरु को बोलो मेरी मदद करना। और फिर से सोचो उसके बारे में और एक पूरी डिटरमिनेशन से आंखों में गुस्सा, एक पर्पस, सांस बाहर रेक
(22:03) फिर एक लंबा सांस होल्ड फॉर फ्यू सेकंड्स और फिर रिलैक्स। ओके? तो, यह आपको मैंने एक डेमोंस्ट्रेशन दी है। जब भी आप यह करेंगे, तो उसके बाद थोड़ा सा पानी जरूर पी लेना। इसमें से आपकी बहुत सारी जो अग्नि है वह जागृत होने वाली है। ओके? यह कपालभाति नहीं है। इसको आप विजुअलाइजेशन के साथ, एक इंटेंशन के साथ करेंगे तो बहुत असर देगी आपको डिटॉक्सिफाई करने में। यह जो एक्स्ट्रा फैट, एक्स्ट्रा लेयर्स, एक्स्ट्रा मेमोरीज है ना बेटा आपके भीतर वह इस अग्नि से जलकत भस्म हो जाएंगी। अगर आपके पास गुरु जी हैं तो उनके सानिध्य में करें तो और भी बढ़िया
(22:49) है। अगर नहीं है तो यह गुरु जी को याद कर लेना कि मैं यह करना चाहता हूं। आप मेरे पास आइए। मेरे सामने रहिए और मेरे मुझे यह साधना करवाइए ताकि मैं अपने भीतर एक संबंध स्थापित करूं। मैं अपने ही भीतर अपने साथ संबंध स्थापित करना चाहता हूं या चाहती हूं। अभी तक आप शरीर के से अलग हैं। आप अपने आप को शरीर समझ रहे हैं। लेकिन अपने आत्मा के साथ अभी कनेक्शन नहीं हुआ है। वह संबंध नहीं बना है। ठीक? तो इसको करेंगे आपकी बॉडी डिटॉक्सिफाई हो जाएगी। साधना भी करना और दोबारा उस कीचड़ में मत छलांग लगा देना। यह नहीं कि अब मुझे पता चल गया चलो
(23:34) फिर से खेलते हैं होली। आ जाओ पार्क योर कार इन माय स्पेस। डोंट डू दैट। जब जागे तभी सवेरा। ये सनातन बहुत साइज बहुत गहरी है। इधर यह जो जो चमकते हैं ना चमक फमक जो होती है उसके पीछे मत भागना। ऑल दैट ग्लिटर्स इज नॉट अ गोल्ड। लर्न योर वर्थ। नो योर हेरिटेज, नो योर कल्चर, रिस्पेक्टेड, फॉलो द पैथ, द पैथ टवर्ड्स इटरनल पीस विद इन यू। हर हर महादेव। जय गुरुदेव। आपका कल्याण हो सबका। शाबाश। बहुत खुश रहो। [संगीत]
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