Tuesday, May 26, 2026

Raai Kotha Viral Podcast | @RaaiKotha | Dr Shivam Mishra Podcast | #viral #raaikotha #yoga #1

Raai Kotha Viral Podcast | @RaaiKotha | Dr Shivam Mishra Podcast | #viral #raaikotha #yoga #1

Author Name:Skm Yoga

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@skmyoga

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=-nSWSIHZ81g



ఈ podcastలో Raai Kotha, Dr. Shivam Mishraతో కలిసి ప్రధానంగా యోగా, శక్తి యోగం, తంత్ర యోగం, యోగ శిక్షణ మరియు సోషల్ మీడియా ప్రభావం వంటి అంశాలపై చాలా లోతుగా మాట్లాడుతుంది. ఇది తెలుగులో key takeaways:

### 1. శక్తి యోగం & తంత్ర యోగం  
- రాయ్ కోథా “యోని” లాంటి పదాలతో శక్తి యోగా మరియు మూలాధార చక్రం ద్వారా శక్తి సంవహనం గురించి నేరుగా మాట్లాడుతుంది. [1][2]
- తంత్రయోగం చెడ్డ పేరుకు గురిఅయినా, దీన్ని సరైన ఉద్దేశ్యంతో, స్వచ్ఛమైన మనస్తత్వంతో అభ్యసిస్తే సమాజ కల్యాణానికి కూడా దోహదపడగలదు అని ఆమె చెప్తుంది. [1]
- తంత్రయోగంలో శక్తిని దుర్వినియోగం చేస్తే ఆ ప్రతిఫలం అభ్యాసకుడి మీదే తిరుగుతుందని (karmic law) ఆమె స్పష్టం చేస్తుంది. [1]

### 2. యోగ శిక్షకుడి లక్షణాలు  
- యోగ శిక్షకుడు ముందుగా తానే స్థిరంగా ప్రాక్టీస్ చేయాలి, ఆపైనే ఇతరులకు నేర్పాలి. [1][2]
- రోజూ 4–8 గంటల ప్రాక్టీస్ చేయడం వల్ల ఆసనాలు, శరీర స్థిరత, మానసిక శాంతి గణనీయంగా పెరుగుతుందని రాయ్ కోథా స్వయంగా చెప్పుకుంటుంది. [1]

### 3. ఆహారం, జీవన విధానం  
- “Food is your meditation” – తినేది చాలా ముఖ్యం అని ఆమె బలంగా చెప్పుతుంdి; వేజ్ / నాన్‌వెజ్ కంటే చైతన్యం మార్చే ఆహారం పై దృష్టి ఉండాలని చెప్పుతుంది. [1]
- ఆమె ముందు నాన్‌వెజ్ తినేదానే; యోగం ఎక్కువగా చేయడంతో జంతు శరీరాల బాధను భావించడం వల్ల నెమ్మదిగా నాన్‌వెజ్ ని విడిచిపెట్టింది అని చెప్తుంది. [1]

### 4. ప్రాణాయామం – ప్రతిరోజు అవసరం  
- రాయ్ కోథా అనులోమ‑విలోమ, సూర్యభేది ఉదయం, చంద్రభేది (Chandrabhedi) రాత్రి సోయాముకు ముందు చేయడం ఎంతో ముఖ్యమని చెప్పుతుంది. [1]
- ఆసనాలకు ముందు ప్రాణాయామం చేస్తే మనస్సు, శరీరం ఇద్దరూ ఆసనాలకు సిద్ధమవుతాయి అని ఆమె ఒత్తి చెప్తుంది. [1]

### 5. నగ్నత (nudity) / వస్త్రాలు – స్త్రీ దృష్టితో  
- ఆమె “న్యూడ్ యోగా” ను మద్దతు పలకడం లేదు; భారతీయ సందర్భంలో గౌరవం, శిక్షణ అవసరమని చెప్తుంది. [1]
- స్త్రీలు వస్త్రాలు ధరించాలని, అప్పటికే సౌకర్యవంతంగా, సౌందర్యంతో, కానీ “సోషల్ మీడియా కోసం” మాత్రమే చూపించే విధంగా అంగాలను కనపరచకూడదని హెచ్చరిస్తుంది. [1]

### 6. యోగ శిక్షకులు ఎలా విజయం సాధిస్తారు?  
- ప్రారంభంలో పైసా ఆలోచించకుండా “స్కిల్ పెంచుకోవడం” ముఖ్యమని చెప్పుతుంది; స్కిల్ బాగుంటే డబ్బు స్వయంగా వస్తుందని దృష్టి పెడుతుంది. [1]
- యోగ శిక్షకుడు చిన్న వేదికల నుండే ప్రారంభించి, స్థిరంగా ప్రాక్టీస్ చేసి, స్థిరమైన ప్రజా సంప్రదింపు నిర్మాణం చేసుకుంటే పెద్ద సంస్థలు/ఫాలోయింగ్ రావచ్చు అని చెప్తుంది. [1][2]

### 7. స్త్రీ శక్తి, మహిళా యోగ శిక్షకులు  
- ఆమె స్త్రీలు శక్తి అని నొక్కి చెప్పుతుంది; కానీ సామాజిక ఒత్తిడి వల్ల చాలా మంది స్త్రీ యోగ శిక్షకులు హోమ్ ఫ్రంట్‌లోనే ఉండిపోతున్నారని చెప్తుంది. [1]
- షర్మా, హంసా మాం, ఇరా త్రివేది లాంటి కొద్ది మంది మాత్రమే “ప్రముఖ” మహిళా యోగా గురువులుగా బయటకు చూపబడుతున్నారని, కానీ లక్షల మంది స్త్రీలు ఇంటిలో యోగం ద్వారా కర్మ యోగం చేస్తున్నారని చెప్తుంది. [1]

### 8. ట్రోలింగ్, వ్యతిరేకత ఎలా భరించాలి?  
- తంత్ర, యోని, శక్తి వంటి విషయాలపై మాట్లాడినప్పుడు చాలా trolls వచ్చాయని, కానీ మూలాధార్ చక్రం ద్వారా స్థిరత కలిగితే హృదయం కూడా స్థిరంగా ఉంటుందని చెప్తుంది. [1]
- తాను చేస్తున్న పని మంచి ఉద్దేశ్యంతో ఉంటే, అభ్యాసం ద్వారా స్థిరత వచ్చే వరకు విమర్శలను లెక్కించడానికి వీలవుతుందని చెప్తుంది. [1]

### 9. యోగం – కేవలం బాహ్య ఆసనాలు కాదు  
- ఆమె యోగం అంటే కేవలం “అష్టాంగ యోగ” లేదా హఠయోగ కాదని, మంత్ర యోగం, భక్తి యోగం, కర్మ యోగం కూడా భారతీయ సంప్రదాయంలో ఉన్నాయని చెప్పుతుంది. [1]
- నేడు ప్రపంచం అష్టాంగ & హఠయోగానే ఎక్కువగా చూస్తున్నా కూడా తంత్ర, మంత్ర, లయ యోగా వంటివి తిరిగి అధ్యయనానికి అవసరమని చెప్తుంది. [1]

***

ఈ podcast నుండి చివరిగా గుర్తుంచుకోవల్సిన సందేశం:  
**ముందు “యోగి”, తరువాత “యోగ టీచర్”. స్కిల్, ప్రాక్టీస్, స్థిరత, నైతిక స్థిరత లేకుండా పేరు/ఫాలోయింగ్ వచ్చినా అది నిలకడ లేదని రాయ్ కోథా స్పష్టం చేస్తుంది.** [1][2]

మీరు ఇప్పుడే ఏ యోగా స్టయిల్ నేర్చుకోవాలని అనుకుంటున్నారు: హఠయోగ, అష్టాంగ, లేదా శక్తి/తంత్ర యోగా?  
మొదటి దశలో ఏ ప్రాణాయామం చేయాలని ఆలోచిస్తున్నారు?


Transcript:
(00:00) योनि शक्ति शिवा शिवोहम योनि शक्ति ज्ञानम सोहम लिंगाम शंभो शिवा शिवा राई कोथा ने योनि जैसे शब्द को बहुत सुदृढ़ता से स्थापित कर दिया। जब आप इस तरीके की विषय वस्तु को सामने रखती हैं तो क्या आपका भी विरोध होता है? राई कोथा का भी विरोध होता है। जब आप मूलाधार पे पूरी तरीके से स्थापित है तो जाहिर सी बात है हृदय चक्र वो प्रभावित होगा। आपके सामने कोई आपको ट्रोल कर रहा हो तो कैसे आउटकम कर पाई आप कि ऐसा क्या हुआ? व्हाई यू डिच योर बॉलीवुड करियर और समथिंग जो आप
(00:46) एक्ट्रेस थी। व्हाई यू लीव दैट? [हंसी] एक्टिंग प्रोफेशन में मैंने बहुत ज्यादा टाइम दिया। हम लेकिन मुझे एक टाइम के बाद मुझे रियलाइजेशन हुआ कि वहां से मुझे कुछ शायद जितना मुझे मिलना था उतना नहीं मिल रहा है। योग में नग्नता भारत के परिपेक्ष में आपकी क्या टिप्पणी है? कुछ कन्याएं वस्त्रों को छोटा या अदर्शनीय इसलिए बना देती हैं कि लोग उनके वीडियोस को देखें। देखें। हां। कौन से अभ्यास को महसूस किया है कि एक योग शिक्षक के साथ-साथ सामान्य जनता के लिए भी बहुत जरूरी प्राणायाम है। क्या तंत्र योग समाज के कल्याण के लिए भी साबित हो सकता
(01:31) है? क्या एक अष्टांग योगी भी तंत्र योगा सीख सकता है? घंटे पीछे आप ₹1 ₹100 ले लेती हैं। इस तरीके का मतलब आप स्वयं भी बहुत ज्यादा बहुत एक्सपेंसिव योग शिक्षिका हैं। चलिए बहुत क्विकली मैं कुछ आपसे रैपिड फायर प्रश्न पूछता हूं। योग को आध्यात्म में रहने दें या योग को मॉडर्नाइज किया जाना चाहिए? योग शिक्षकों को योग शिक्षकों के जैसा वस्त्र धारण करना चाहिए या वो कुछ भी ऊटपटांग पहन के जा सकते हैं। अच्छा अष्टांग योग ही इतना क्यों पॉपुलर है? अन्य योग क्यों नहीं? मुझे तो ऐसा नहीं लगता है योग शिक्षक साधक नहीं बचा इस समय। आपका क्या आपकी क्या टिप्पणी है इस कि योग
(02:08) शिक्षक विदेश में स्थापित होना चाहता है जो कि आप तो पूरे विश्व में स्थापित है। फॉरेन जाने के लिए या एक व्यक्ति को क्या ऐसा क्या-क्या ऐसा गुण लेना चाहिए कि वो विदेश चला जाए। नमस्कार। पडकास्ट की दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो यत्र बहुत सारे विषयों पर बातें करते रहते हैं और ऑथेंटिकेट करके बात करना वैलिडेट करके बात करना संभवत अभी कम हो चला है इस संदर्भ में हमने कोशिश किया कि क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए जिसके माध्यम से हम कुछ ऐसे विद्वानों को आमंत्रित करें जिन लोगों ने योग के साम्राज्य में योग की दुनिया में लौकिक दुनिया में खास करके कुछ
(02:51) ना कुछ ऐसा विशिष्ट प्राप्त करने की पुरजोर कोशिश की है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल जो कि ऐतिहासिक धरती है भारत के संदर्भ में वहां की विश्व विख्यात योग शिक्षिका सुश्री राई कोथा मैडम को आज हमने आमंत्रित किया है। राई कोथा जी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। पूर्ववत में आप बंगाली मूवीज में एक्टर के तौर पर स्थापित रही। एक्टिंग की एक्ट्रेस रही। तदोपरांत जीवन की नैसर्गिकता ने इतना शानदार मोड़ लिया और अब पूर्णकालिक योग शिक्षिका बन चुकी हैं। रायकोथा जी के फैंस पश्चिम बंगाल सहित
(03:36) पूरी दुनिया में हैं। और यह सारे फैंस इनके ज्ञान कौशल और एडवांस आसनों को बहुत सरलता से सिखा देने वाली टेक्निक के कारण है ना कि इनकी फेस वैल्यू को बहुत ज्यादा मानते हुए। इनके ज्ञान कौशल ने इनको राई कोथा बनाया है। वास्तविक स्वरूप में इनका कुछ अन्य नाम भी है। मौलिक रूप में शक्ति संवहन के सिद्धांत को शिव शक्ति के सिद्धांत को समझते हुए आपने कार्य किया जो कि आज के समय में एक बहुत बड़ा बोल्ड स्टेप है। जब आप तंत्र योगा की बात करते हैं और तांत्रिक गतिविधियों की बात करते हैं। ऐसे में जब योग आता है तो पश्चिम बंगाल तंत्र योग का गढ़ रहा है।
(04:20) परंतु अब ऐसा नहीं है। बहुत सारी चीजें परिवर्तित हो चली हैं। हम में से चाहे मैं हूं या आप हो आप देखेंगे कि हम हठ योग और अष्टांग योग के विधाता बन चुके हैं। अष्टांग योग को ही फॉलो कर रहे हैं। यह नहीं होना था। अन्य योग को भी आगे आना था। मंत्र योग भी था, लय योग भी था, राजयोग भी था। परंतु अब इस प्रकार का योग उतना आगे नहीं रहा। इसी में तंत्रा की बात करते हैं तो विदेशों में तंत्र बहुत बुरी तरीके से स्थापित हो चला है और जिसका प्रवाह कहीं ना कहीं हमारे ऊपर देखने को मिल जाएगा। आप भी बाखूबी जानते हैं मैं किस विषय की बात
(04:58) कर रहा हूं। आज इस पडकास्ट में सुश्री राय कोथा जी को आमंत्रित करते हुए मैं बड़ा गौरवान्वित हूं। मैडम बहुत-बहुत स्वागत है आपका आज के इस पडकास्ट में। मेरा विनम्र प्रणाम स्वीकार करें। मेरा भी प्रणाम लेना और आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कि मुझे आपने बुलाया है और आपके साथ बैठ के बात करना मतलब और बहुत कुछ सीखना एंड पार्ट ऑन मी फॉर माय हिंदी। अभी मैं हिंदी सीख रही हूं और बस बहुत खुश हूं आपके साथ मिलके। ये मैं समझता हूं कि मेरा सौभाग्य है कि आपने इतनी विनम्रता का परिचय दिया है। मैम आज की ऑडियंस आपसे सबसे पहले यही जानना चाहती है कि राई कोथा ने योनि जैसे
(05:47) शब्द को बहुत सुदृढ़ता से स्थापित कर दिया। राई कोथा ने शक्ति योग का स्वरूप लिया और उसे स्थापित करने में योगदान दिया। सबसे पहला प्रश्न तो मेरा यही है कि डिफिकल्टी कितनी रही होगी क्योंकि आज का समाज जब हम तंत्रा की इन गतिविधियों पर बात करते हैं तो वो स्वीकार नहीं करता है। आपके सामने भी कुछ ऐसी बाधाएं हैं जो जब आप वास्तविक स्वरूप में जब आप लेखनी के स्वरूप में जब आप विद्वता के स्वरूप में स्थापित होती हैं एंड जब आप इस तरीके की विषय वस्तु को सामने रखती हैं तो क्या आपका भी विरोध होता है? राई गोता का भी विरोध होता है। हां बहुत बहुत जब मैंने छ साल पहले ये
(06:31) शुरू किए थे तो बहुत लोगों ने मुझे भी बहुत सुनाया है। ये वो बहुत कुछ सुनाया है। धीरे-धीरे धीरे-धीरे जब लोग मेरे साथ जुड़ते रहे। जब देखे कि नहीं इंटेंशन आपके कुछ गलत नहीं है। क्या होता है ना हम जब काम कुछ शुरू करते हैं तब हम भी सीखते ही हैं। ऐसा नहीं है कि बहुत सारे ज्ञान हम लेके बैठे हैं और वही कर रही हूं। उम्र ही कितना है कि कैसे ज्ञान उतना मिले तो शुरुआत में तो सुनना ही है तो लोगों लोगों ने सुनाया है लेकिन मैंने उसको सीख लिया है कि ठीक है आप सुनाते जाइए तो मैं सीखूंगी और भी ज्यादा तो जो रास्ता है वो धीरे-धीरे सीधा होते जा रहे हैं अभी-अभी
(07:11) तो वो मैं सुनती थी बहुत कुछ बोले हैं बहुत कुछ ऑनलाइन बुलिंग्स होते हैं अगर अभी भी अगर छ साल पहले आप मतलब लुक बैक करेंगे तो आपको मिलेंगे कितने सारे ट्रोलिंग मैंने झेले है कैसे आउटकम कर लेती हैं आप क्योंकि जिस योग के जिस विषय को आपने मुख्य धारा में स्थापित करने का प्रयास किया है तंत्र योग का और खास करके मूलाधार व्यवस्थाओं में शक्ति को संवहन क्षमता को जिसे हम बोलते हैं जिसके आधार पे समग्र विश्व स्थापित भी है। तो कैसे झेल पाती हैं आप? क्योंकि अह जब आप मूलाधार पे पूरी तरीके से स्थापित है तो जाहिर सी बात है हृदय चक्र वो प्रभावित
(07:51) होगा। आपके सामने कोई आपको ट्रोल कर रहा हो तो कैसे आउटकम कर पाई आप? वो अगर बोले तो देखिए उसमें तो थोड़ा बहुत तो खराब लगता है कि मेरा तो इंटेंशन खराब नहीं है कि मैं कुछ कर रही हूं और कुछ करने की प्रयास कर रही हूं और उससे लोगों के अच्छा ही होंगे। अब बल्कि कुछ खराब नहीं होंगे। लेकिन जब यह शुरू होते हैं तब या इसको मतलब सहन करने में बहुत दिक्कत होती है। बट कैसे आप सहन करोगे? आप तब भी इसको ले पाओगे अगर आप सच्ची में एक योगी हो। अगर आप भी योग प्रैक्टिस करते हो। अच्छा आपके हिसाब से क्या लक्षण योगियों के होने चाहिए? मतलब अदर दन बुक्स में
(08:35) बातें कर रहा हूं कि किताबों से हट जाते हैं। एक योगिनी या एक योग शिक्षिका या योग की छात्रा रायगोदा से यदि कोई पूछे कि एक योग शिक्षक का क्या-क्या गुण होना चाहिए तो क्या होना चाहिए? देखिए बंगाल में भी ये बहुत मानते हैं। कुछ भी चीज आपके पेट से शुरू होते हैं। तो पहला जो है ना मेरे मानना है और मेरे मोटिवेशन वही है फूड इज योर मेडिटेशन। फर्स्ट मेडिटेशन योर फूड। आपको पहले आपके खाना ठीक करना है। तो जो भी चीज आपके ना ये पेट से शुरू होता है। नाभि से ही शुरू होता है। है ना? क्योंकि नाभि से ही सारी चीजें कनेक्टेड होते हैं।
(09:14) मां के साथ बचपन में बचपन से ही शुरू होता है। तो बोलते हैं ना कर्मा। कर्मा हमारे ऊपर बहुत हावी होते हैं। क्यों होता है ना? हम पूर्वज को पूजा नहीं करते हैं। हम उनको कुछ सोचते नहीं क्योंकि जितना भी आप कर्म कर लो, जितना भी पूजा पाठ कर लो आपके कर्म आपके जो है ना आपके पूर्व पुरुष से वो लिंक होते हैं। है ना? तो पेट से ही शुरू होता है। अगर आप पांच बात कर रहे हो लेकिन आपके खाना पीना और सोने का ही कोई आपका ध्यान नहीं है। आप कुछ भी कर रहे हो, कुछ भी खा रहे हो। आई एम नॉट सेइंग आपको वेजिटेरियन ही होना है। आई एम नॉट सेइंग
(09:49) क्यों आप नॉनवेज ले रही हो? ऐसा नहीं है। मैं इस चीजों को लेकर बात नहीं। ये एक बहुत बड़ा कंट्रोवर्शियल कंट्रोवर्शियल अगर इस बात को लेकर हम पढ़ेंगे तो शायद वही एक टॉपिक हो जाएंगे। एक्सैक्टली बट जो भी आप खा रहे हो ना आपके मन का खाओ। फाइन। बट उसमें भी आप ऐसा नहीं है कि अभी पकाया वो खा रही हो आप कल परसों। कल परसों और वो पका के आपने फ्रिज में रख दिया। एक लक्षण ये हो गया योगी का कि भोजन और पेट बड़ा महत्वपूर्ण है और क्या-क्या लक्षण उसके बाद आपको सुबह उठना ही है। आपकी सुबह सूरज उठ रही है और आप 12:00 बजे उठ रहे हो। 12:00 बजे उठ रही हो और आप इसमें बहुत
(10:26) अच्छे से आप बोल भी रही हो। नहीं मैं तो रात में काम कर रही थी। देखिए आप इसको भी आप बिटरे नहीं कर पाओगे कि जो लोगों का काम रात में है, ड्यूटीज में रात में है, तो वो लोग कैसे सुबह आएंगे? सुबह तो उनके लिए रात है। लेकिन हर एक इंसान तो ऐसा नहीं है ना। हम हम हर एक इंसान ऐसा नहीं हर एक इंसान के काम रात में ही नहीं होते तो आप पहले तो ऐसे बोलना बंद करिए हम कि हां नहीं मुझे वो नहीं हुआ समय नहीं मिला किसी के पास बहुत सारे समय बहुत होते हैं लेकिन आपको वो सही तरह से यूटिलाइज करना होता है तो सीखना है कैसे आप यूटिलाइज करोगे अपने आपको दूसरों को कुछ
(11:08) बोलने से पहले वो आप खुद प्रैक्टिस करो कि मुझे सुबह उठने हैं 21 डेज आप एक ऐसे प्रैक्टिस कर लो कि हर सुबह मुझे 5:00 बजे को उठना है। उसके बाद थोड़ा सा जप कर लो। फिर आप वार्म वाटर से दिन शुरू करिए। हम फिर थोड़ा सा प्रैक्टिस करिए। उसके बाद आप आपका कर्म स्टार्टिंग। अच्छा आज का योग शिक्षक कक्षा में इतना इनवॉल्व है कि उसके पास समय ही नहीं है कि वो अपने लिए कोई कार्य करें। अपने अपनी प्रैक्टिस का तो प्रश्न ही नहीं बनता। जो प्राणायाम किए और और आसन किए उसे सालों बीत जाता है। खुद का पेट उससे आगे चला जा रहा है। उसका करियर बाद में आगे जाता है। योग शिक्षक का पेट
(11:46) उससे पहले आगे चला जाता है। बाद में बोलता है कि समय नहीं मिल रहा है। तो इसके इसके ऊपर आपकी क्या टिप्पणी है? वो टिप्पणी एक्चुअली ये टिप्पणी है मेरे लिए। मैं बोलूंगी इसमें। ऐसा नहीं है कि इन्हें मैं नहीं बोलूंगी। देखिए यह मैं भी देखती हूं सोशल मीडिया में बहुत सारे ऐसे टीचर्स हैं जो कि खुद ही प्रैक्टिस नहीं करते और ये आप नहीं बोल सकते कि मैं प्रैक्टिस कर रही हूं। देखने से पता चलता है कि आप प्रैक्टिस नहीं कर रही हो। और एक चीज है आप पे ज्ञान है। आप जानते हो क्या करना है। और देखिए ये क्या करना है, क्या नहीं करना है। आप एक
(12:21) बुक्स पढ़ लो। हम पतंजलि की एक बुक्स पढ़ लो। आपको पता चल जाएंगे कि नहीं करना है। लेकिन वो आप खुद ही प्रैक्टिस नहीं कर रही हो और फिर धीरे धीरे धीरे धीरे आप ऐसे हो रही हो और आप ऐसे ज्ञान दे रहे हो कि हां ये करना है वो करना है तो इससे क्या होगा खुद के ही नुकसान हो रहे हैं हम राइट एक एक टाइम के बाद आप कितनी देर तक आप ऑनलाइन पे बोलोगे आपके साथ कोई आके भेंट करेंगे आपके साथ कोई बैठेंगे बात करेंगे तब आपके ना जो कररेक्टर है ना वो ऐसे डाउन हो जाएंगे हम तो ज्यादातर तो मैं ऐसे ऐसे ही बोल बोलूंगी कि आप प्रैक्टिस करिए थोड़ा बहुत
(12:59) आप भी प्रैक्टिस करिए उसके बाद आप बोलिए पता है कितना अभ्यास करती हैं मैं सच्ची में बोलूं पहले 8 घंटा करती थी अभी वो चार घंटा आया है मैं झूठ नहीं बोलती सच बोल रही हूं लेकिन वो चार घंटा भी जो मैं प्रैक्टिस करती हूं हर रोज करती हूं मैं अगर ऐसा हो कि मेरा प्रैक्टिस ना हो आपका आसन बड़ा शानदार लगता है उसका क्या राज है वो प्रैक्टिस है अच्छा प्रतिदिन का हां प्रतिदिन का प्रैक्टिस है और वो मैं अपनी गुरुजी से भी वो ही सीखी हूं मेरी गुरुजी अभी अभी भी प्रैक्टिस करते हैं। हम अभी भी वो प्रैक्टिस करते हैं ऋषिकेश में और उनको जब देखती हूं ना तो मुझे इंस्पेशन
(13:33) मिलते हैं और भी ज्यादा कि इतने साल हो गए हैं। अच्छा व्हाट ब्रिंग्स यू इन योगा? दैट इज वै इंटरेस्टिंग क्वेश्चन एक्चुअली कि ऐसा क्या हुआ? व्हाई यू डिच योर बॉलीवुड करियर और समथिंग जो आप एक्ट्रेस थी। व्हाई यू लीव दैट? [हंसी] आई लव दैट? हां देखिए मेरा यह मानना है सच्ची में कभी कबभार हमें मन होता है किसी और चीज करने के लेकिन हमारे जन्म होते हैं किसी और चीज करने के लिए अगर हम भूल गलत ट्रैक्ट में चले जाते हैं ना तो हमें ना वो फेम नेम और मानी नहीं मिलते हैं और ऐसे बोल रहे थे कि फेम नेम मानी तो फेम नेम हो जाता है सरस्वती माता और मानी हो जाता है
(14:17) लक्ष्मी माता कि दोनों एक ही साथ चलते हैं है ना तो अगर आप गलत गलत ट्रैक में होंगे। आई एम नॉट सेइंग कि वो रास्ता गलत है। शायद मेरे जीवन में वो लिखा नहीं था। मैं सच्ची में बोल रही हूं क्योंकि मैं जब एक्टिंग प्रोफेशन में थी तब मेरे पास था नेम था फेम था। लेकिन अभी लोग जैसे हां सेटिस्फेक्शन आई एम सेइंग यू सेटिस्फेक्शन मेरे पास नहीं था। मैं जो भी कर रही हूं लोग मुझे देख रहे थे या फिर लोग मुझे पसंद भी कर रहे थे मतलब छोटे वो भी बहुत छोटे ही थे वो लेकिन मेरे को ऐसा लग रहा था नहीं सेटिस्फेक्शन मतलब मुझे सेटिस्फाइड और किसी और चीजों में है ये चीज छोड़ के
(15:02) दूसरी चीजें मैं करने लगी थी तो अल्टीमेटली वो सेटिस्फेक्शन मुझे नहीं मिला वहां पे और एक बात है धन भी मुझे देखिए जीवन में कुछ करने के लिए ना धन बहुत जरूरी होता है। अगर आपके पास धन ही नहीं है ना तो आप कैसे लोगों के लिए भी अच्छे सोचेंगे? अगर आपके मन में है कि मैं करूंगी, वह करूंगी तो करने के लिए धन चाहिए। हम तो जो कि मुझे योग दिया है हम क्योंकि एक्टिंग प्रोफेशन में मैंने बहुत ज्यादा टाइम दिया। हम लेकिन मुझे एक टाइम के बाद मुझे रियलाइजेशनंस हुआ कि वहां से मुझे कुछ शायद जितना मुझे मिलना था उतना नहीं मिल रहा है। हम फिर बचपन से ही मैं योग करती थी। मैं
(15:44) स्पोर्ट्स में बहुत अच्छी थी। तो मैं मुझे मैं गोल्ड मेडलिस्ट हूं, सिल्वर मेडलिस्ट हूं। लेकिन कभी बार कभी भी मैंने वो सोचे नहीं हूं कि मैं उसको लेकर काम करूंगी या फिर मैं सिखाऊंगी कुछ ऐसा करूंगी। जब लॉकडाउन आया ना तब 2019 की बात है। 18 के बाद तब मेरे ऐसे ही मेरे मैनेजर ने एक ऐसे ही मतलब मेरे छोटे भाई ऐसा तो छोटे भाई ने मेरा एक योग की वीडियो मेरे चैनल में दे दिया। तो इतना वायरल हो गए थे [हंसी] फिर तो मेरा आइडेंटिटी चेंज हो गई है सारे ऐसे बोल रहे कि नहीं जनता ने आपको खींच के बुलाया तो मैंने मैंने चूज़ किए थे एक्टिंग
(16:19) प्रोफेशन हम जो कि मैं करना चाहती थी जो कि मैं कर रही थी लेकिन जो मेरे जनता है ना जो बोलते हैं ना जनता ही जनार्दन होते हैं। तो जनता ने मुझे दूसरे रास्ता दिखाया है कि आपको यह करना है। तो फिर मैं टीचिंग भी नहीं करती थी। फिर ऐसे कमेंट्स आते थे प्लीज आप सिखाना स्टार्ट करिए, सिखाना स्टार्ट करिए। फिर हमारा ऑनलाइन सेशन स्टार्ट हुए। हम अभी तो मेरे असिस्टेंट टीचर्स हैं। वो लोग क्लासेस लेते हैं। राइट राइट राइट। लेकिन क्या है ना? मेरा एक मानना है कि जब आपको वो लव मिलने लगता है, प्यार मिलने लगते हैं जनता से तब आप खुद को मत अच्छा बहुत सारे लोग ऐसे हैं
(17:00) जो एक्टिंग में हैं और उन्होंने यह स्वीकार किया कि वास्तविकता में एक्टिंग भी एक योग है, मनोवियोग है, भाव योग है और तमाम तरीके का आप डॉ. जयॉल का नाम आपने सुना होगा जो शक्तिमान में आते थे। तो उन्होंने एक योग संस्था बनाई और अपनी योग संस्था उसमें इसी तरीके का नाम दिया और यह लिखा भी कि एक एक्टर से बड़ा कोई योगी क्या ही होगा। है ना? क्योंकि वो अपने कर्म में इनवॉल्व है। गीता भी इस परिभाषा को स्वीकार करती है कि जो अपने कर्म में जो होता है जो कर्म में बड़ा एक्सपर्ट होता है वो वो योगी का कहलाता है। योगी कहलाने का हकदार है। दूसरा
(17:40) अध्याय इसके विषय में खूब सारी बातें करता है। तो क्या आप ये नहीं मानती कि जब आप एक्टिंग में थी उस समय आप उस समय भी आप एक योगिनी थी। हां ऑब्वियसली मानती हूं। मैंने तो बोला ना सारी एक कर्म ही योगा होता है। सारी एक आप जो भी काम कर रहे हो ना वो आपके लिए योगा होता है। अच्छा आपके हिसाब से किसका योग प्रायोरिटी पे? शिव का योग हठ योग। ठीक है? वो प्रायोरिटी लेकिन मैं पहले जो आपने क्वेश्चन किया ना उसका मैं आंसर कर लेती हूं। तो जैसे आपने बोला कि वो आप नहीं मानते हो कि वो योग था। हां ऑब्वियसली वो योग था। सारे एक काम योग होता है। जो भी आप कर रहे हो। द थिंग
(18:14) इज कौन से वर्क और कौन सा काम आपको चाहते हैं और आपको चाह रहे हैं और आपके लिए अच्छे होंगे। तो मैंने सिर्फ वही बोला है कि वो शायद वो फील्ड मेरे लिए नहीं थे। योग कर्म सु कौशलम जो परिभाषा है कि कर्म की कुशलता योग है चाहे उसमें रहे आप चाहे जो भी करिए हैप्पीनेस गोल शायद उसमें मेरा गोल नहीं था। शायद वो उसमें मैंने अपना लाइफ नहीं देखा। फिर मेरा प्रोग्रेस में नहीं देखा मैंने। फिर जब मैंने योगा फील्ड लिया तो मैंने प्रोग्रेस देखा। काफी सारे एक्टर्स होंगे ऐसे जो वो लोग भी बहुत अच्छे योगा करते हैं। लेकिन उन लोगों का प्रोग्रेस एक्टिंग
(18:48) में ही हो रहा है। योग फील्ड में नहीं हो रहा है। राइट राइट राइट। द थिंग इज पथ। मेरे पथ अलग है और उनके पथ अलग है। एक प्रश्न बड़ा कुरेतता है समाज में और शास्त्रीय योग शिक्षकों को बहुत कष्ट है इस विषय से। उन्हीं का प्रश्न है। मैं चाहता हूं आप क्योंकि बहुत मुखरता से उत्तर देती हैं इसलिए मैं आपसे प्रश्न पूछना चाहता हूं। जो विश्वविद्यालयों में हैं ट्रेडिशनल योग शिक्षक हैं। मंत्र पे बड़ा फोकस करते हैं और जो लीक से हटना नहीं चाहते या लीक पे ही बने हुए हैं। ऐसे लोग योग में नग्नता इस विषय को लाते हैं। न्यूडिटी इन योगा। यह उनका टॉपिक है। देयर
(19:33) आर लॉट ऑफ पर्संस जो आजकल के खासकर के विश्वविद्यालयों की लड़कियां या इस तरीके के लोग जो गंगा के घाट पर जाते या इस तरीके के लोग जहां पे मतलब योग के एसेंस को जो उसका जो उसकी सुचिता थी, पवित्रता थी उसमें प्रतिघात कर रहा है। और यह प्रतिघात इतना हो चला है कि एक कांसेप्ट ही डेवलप हो गया है पश्चिम में न्यूड योगा। मतलब आप सोचिए कि वस्त्रों का हरण इस प्रकार से हो चला है कि धीरे-धीरे भारत में तो चलिए फिर भी थोड़ी मर्यादा है। लेकिन विदेशों में इस स्तर तक की बात पहुंच चली है और ये बड़ा घातक है। अभी अन्य बहुत सारी व्यवस्थाएं आ रही है इस
(20:15) तरीके की जिसमें जिसका मतलब वर्णन भी नहीं किया जा सकता। सो आई जस्ट वांट टू नो व्हाट इज योर एप्रोच फॉर दिस। क्या किस तरीके से एक एक मतलब एक तृतीय व्यक्ति होते हुए क्योंकि आप आप बखूबी समझती हैं आपका विदेश जाना आना होता है यू नो वेरी वेल कि इस तरीके की प्रतिभूतियां स्थापित हो रही हैं। तो जो ट्रेडिशनल शिक्षक है जो आपके इस बात को सुनेगा वो एक आयाम जानना चाहता है क्योंकि हम जो जिस दृष्टिकोण से मैं देखता हूं उस दृष्टिकोण से ये सिर्फ गलत ही गलत दिखता है। हम लेकिन जिस दृष्टिकोण से आप देखती हैं क्योंकि आप एक महिला हैं और मैं मुखरता से
(20:53) आपसे बात कर सकता हूं क्योंकि समकक्ष हैं आप हमारे योग में नग्नता भारत के परिपेक्ष में आपकी क्या टिप्पणी है इसमें [हंसी] मैं सपोर्ट नहीं करती हूं इसमें ऑब्वियसली मैं सपोर्ट नहीं करती हूं और एक बात है हम जैसे सीख के बरी हुई हूं या फिर हमारे गुरु जो सिखाया है हमें कभी इस बारे में कुछ सिखाया नहीं है हम तो आप मेरी शिक्षा में या फिर मेरी जो जर्नी है उस जर्नी में यह नहीं है। अच्छा लेट्स लेट्स ऐड फेमिनिज्म एक महिला होके मान लीजिए आप एक महिला हैं और मैं आपसे कह रहा हूं कि आप हर प्रकार के वस्त्र पहन के ऐसे आसन नहीं कर सकती
(21:31) तो उसमें आपकी क्या टिप्पणी है एज अ फीमेल नहीं वस्त्रों को लेकर मैं कुछ नहीं बोलूंगी। वस्त्र वैसे तो है वस्त्र आपको पहनना चाहिए। संभाल के ही पहनना चाहिए। खुद का सामान रख के ही पहनना चाहिए। लेकिन आपको अगर कंफर्टेबल फील हो रहा है और अगर बो कोई प्रॉब्लम नहीं कर रहा है तो आप पहनो लेकिन आप ध्यान में रखो कि आप वो पहन के क्या कर रही हो हम आजकल की लड़कियां आजकल की लड़कियां इन्फ्लुएंस बस इन्फ्लुएंस मत करो आपको पहनना है पहनो ऐसा नहीं कि मैं नहीं पहनती ऑब्वियसली पहनती हूं मैं भी पहनती हूं अगर मैं यहां पे बैठ के कुछ बोल दूं
(22:10) और मेरा अगर सोशल मीडिया लोग देखेंगे तो देखेंगे कि मैं भी पहन रही हूं ऑब्वियस्ली पहनो। नो बट आप इनफ्लुएंस मत करो। ठीक है? मतलब किसी को प्रभावित करने के लिए ना हो। आपके अंतरंग के लिए आपकी सुचिता है। आपका मस्तिष्क उसमें इन्वॉल्व है। तो लेट्स गो फॉर नो ऑब्वियसली और एक चीज है। आप जो भी वस्त्र पहन रही हो ना बस आप कहां पे पहन रही हो? हम आप समुंदर में जा रही हो, बीच में हो तो आप आपकी कंफर्टेबल ड्रेस पहन ही सकते हो। तो वस्त्रों को लेकर मैं नहीं कुछ मानती। आप इसमें शायद काफी सारे लोग कभी कुछ बोलेंगे। लेकिन मेरी मानना है वस्त्रों को
(22:43) लेकर ऐसे टिप्पणी करना कुछ सही नहीं है। यह ऐसा विषय है। होता क्या है कि कुछ कन्याएं ये बात सत्य है। कुछ कन्याएं वस्त्रों को छोटा या अदर्शनीय इसलिए बना देती हैं कि लोग उनके वीडियोस को देखें। देखें। हां। सीटीआर बड़े पेमेंट ज्यादा आए, पैसा मिल मिलता है YouTube, Facebook इत्यादि से तो लोग सोचते हैं कि कोई क्यों देखेगा? हम आप अच्छे कपड़ों में योग करें और एक कन्या अनग्न अवस्था में अर्धनग्न अवस्था में योग करें तो यह दोनों विषय मतलब बीइंग अ फेमिनिस्ट आल्सो मैं भी महिला उत्थान का बड़ा समर्थक हूं। मैं गार्गी घोष अपाला जैसी विदुषी महिलाओं का समर्थक हूं। मैं
(23:28) समझता हूं कि अनुसूया, सती, अनुसूया जैसी स्त्रियां योग शक्तियों के बल पे तीनों त्रिदेवों को बालक बना के बिठा लिया था। और और ये घटना बड़ी कहानी बड़ी शानदार है कि तीनों देवों ने कहा कि हमें सती अनुसूया को चेक करना है तो पहुंच गए और बोले हमें आपका स्तनपान करना है दूध पिलाइए तो ये बोली ठीक है पतिदेव है नहीं तो अभी मैं आप आप भगवान के स्वरूप में क्योंकि ये तो अपने सती बल से पहचान गई थी कहानी लंबी है उसका छोटा पार्ट बता रहा हूं तो उन्होंने कहा कि ठीक है एक काम कीजिए तो उन्होंने बोला कि मैं अपने तप बल से आपको बालक बनाती हूं और उन्होंने मतलब
(24:02) तीनों देव आप समझिए पूरा ब्रह्मांड जिसके कंट्रोल में वो उनके यहां पालने में खेल रहा था उनके पतिदेव वो आए तो उनको बोला कि ये कोई आया था जी वो पूछ रहा था दुग्ध पान करने के लिए साधु के स्वरूप में आया था तो मैंने इनको दुग्धपान कराया बालक बना दिया अभी बालक बनके हेलो तो वो पहुंचे उनके पतिदेव तो जाके देखा कि ये तीनों टेस्ट लेने के लिए ब्रह्मा विष्णु महेश है तो स्त्रियां इतनी पावरफुल होती थी है ना आज के समय में आप देखिए तलाक का रेट वो बड़ा इंपॉर्टेंट है गृह क्लेश बड़ा इंपॉर्टेंट है ऐसा लगता है कि मतलब द्वंद है। आप समझ
(24:40) रही हैं? लोगों के अंदर योग को लेके प्रेम नहीं रहा। और जो आप जिस बात पे क्योंकि ये तो मैं बड़ा सौभाग्यशाली हूं इस बात को सुन के भी आपने बड़ा शानदार उत्तर दिया जब आपने ये कहा कि आपका मन कैसा है दैट इज वेरी इंपॉर्टेंट। तो मैं भी इस बात से एग्री करता हूं कि यदि आप सिर्फ इन्फ्लुएंस करने के लिए जा रहे हैं फिर तो आप योग नहीं फुलफिल कर रहे हैं। राइट? आप जाहिर सी बात है कि आप सकाम होके जा रहे हैं कुछ प्राप्त करने के लिए। दैट्स वेरी फैंटास्टिक आंसर एक्चुअली। तो और विश्व में भी खास करके जब हम लोग वियतनाम में योगा सिखाते हैं तो वहां
(25:11) हमारे एड्रेस बहुत मायने नहीं रखती है। एक बड़ा प्रश्न और है मैम बड़ा इंपॉर्टेंट है। शाकाहारी होना इस विषय पे आप अपनी टिप्पणी रखें क्योंकि मुझे आपके यहां रहने का सौभाग्य मिला है। भिन्न-भिन्न प्रकार की सब्जियां हमने खाई है आपके यहां तो मैं बड़ा आभारी हूं उसके लिए। तो मैं यह जानना चाहता हूं कि माना जाता है कि पश्चिम बंगाल या उधर पूरब जो है खासकर बिहार से ही जब मिथिला शुरू हो जाता है तो वहां ब्राह्मण क्या क्षत्रिय क्या शूद्र क्या तमाम चीजें वैश्य क्या कोई फर्क नहीं पड़ता स्वयं विवेकानंद के भी संदर्भ में ये टिप्पणी है कि वो भी मछली खा लिया करते
(25:47) थे और एग्री करते थे आपकी क्या टिप्पणी है इस विषय में योगा शिक्षक को खास करके पूर्वी योग शिक्षक को शाकाहारी होना ही चाहिए देखिए सच्ची में मैं भी तो नॉन वेजिटेरियन थी। अच्छा है ना? मैं भी लेती थी। मेरी फैमिली भी लेती थे। ठीक है। इसमें क्या है ना आप शाखा होंगे और मैं शाकाहारी फैमिली से ही बिलोंग करती हूं। दोनों में अंतर है। हम अब मैं जहां पे जन्म ली हूं। वहां के कल्चर ही अलग है। वहां के कल्चर ही ऐसा है। और इस कल्चर को तो हमने नहीं बनाया है ना। तो बहुत सदियों से आ रहा है। अभी सदियों में तो बहुत सारी स्टोरी होंगे कि शायद
(26:30) उसमें उस जगहों में कुछ और खाना अवेलेबल नहीं था। शायद उसमें मछली ही ज्यादा अवेलेबल था क्योंकि हम समुंदर की साइड से है ना तो ज्यादा मछली अवेलेबल था। तो इसीलिए वो लोग मतलब इजी लाइफ स्टाइल्स के लिए वो खाने को ही उनको ऐसा है कि वही हमारा खाना है। तो खाने को लेकर आप कोई भी टिप्पणी करने से पहले कुछ थोड़ा सा सोच के करना चाहिए। अभी मैं भी सात साल पहले नॉन वेजिटेरियन थी। अभी मुझे ऐसा धीरे-धीरे होते हैं ना जब योग पहले भी मैं योग करती थी। योगा आसन करती थी। मैं गोल्ड मेडलिस्ट हूं तो मैं करती थी। प्राइस बहुत ज्यादा ये है। लेकिन
(27:06) उस टाइम पे तो मैं नॉन वेजिटेरियन नहीं मतलब सॉरी वेजिटेरियन नहीं थी मैं नॉनवेज लेती थी लेकिन धीरे-धीरे जब फ्रॉम 2017 जब मैंने अपने लिए काम करना स्टार्ट किया खुद के लिए काम करना स्टार्ट किया मेरे खाने पे ध्यान दिया सब कुछ किया ना तो धीरे धीरे धीरे धीरे आपके जो एनर्जी है ना वो चेंज होने लगे फिर मैंने नहीं छोड़ा वो सारे चीजों को वो सारी चीज मुझसे छोड़ गए वाओ ये बड़ा शानदार है ना तो नॉन मतलब मतलब जो भी नॉनवेज है मैं नहीं बोलूंगी कि आप नॉनवेज छोड़ दो। मैं होती कौन हूं कि आपको बोलने वाली कि आप नॉनवेज छोड़ दो। हम ये आपके डिसीजन है। लेकिन आप अगर देखते हो
(27:49) कि नॉनवेज जब आप ले रही हो ना तब इसको काटते हैं। फिर इससे एक दर्द आते हैं ना तो उनके दर्द को आप ले रही हो। तो फिर आप सोचिए आपके अंदर क्या हो रहा है? आप तो खुद के भी दर्द होते हैं कितने होते और फिर आप जो जानवर आप ले रही हो उसके भी दर्द आप अच्छा सिद्धांत बना दिया है एक पता नहीं आप लोग जानते हो ना जानते हो मांसाहार में मुझे चाइना देश में एक बात पता चली वहां जो भारतीय रेस्टोरेंट्स हैं वो लोग चिपका के रखते हैं झटका एवं हलाल मीट दो तरीके का मीट देते हैं लोग मैंने पूछा कि इसका क्या तात्पर्य है तो पता नहीं वो हलाल का
(28:30) कुछ बताया कि तड़पा तड़पा के मारने को हलाल बोलते हैं। झटका वाले में जो हिंदू होते हैं वो झटका मीट खाते हैं। यानी बिना दर्द दिए किसी को काट देते हैं तो वो ये भी कोई कांसेप्ट है [हंसी] मुझे पता नहीं मैंने भी सुना है और इसको मैंने ज्यादा रिसर्च नहीं किया। हां ये मतलब मैंने सोचा देखिए आदमी कितना लालची है। लालची तो होते हैं। लालची है। चलिए बहरहाल मैं तो बस वही है खाना जो होते हैं ना वो खुद के होते हैं और अगर आपके अपना लाइफस्टाइल धीरेधी धीरे-धीरे आप ठीक करोगे और अगर आप अगर आप योग अभ्यास हर रोज करते हैं ना तो आपकी एनर्जी चेंज होने लगेंगे। चलिए अब
(29:09) आते हैं थोड़ा बिल्कुल कट शॉट पे कि आप अनुलोम विलोम बड़ा पॉपुलर टॉपिक माना जाता है। आप प्राणायामों में जितने भी प्राणायाम है चाहे नाड़ी शोधन हो, चाहे सूर्यभेदी हो, चाहे चंद्रभेदी हो, चाहे प्लावनी हो, चाहे शीतली शीतकारी जो भी हो इन सब में कौन से अभ्यास को आपने महसूस किया? क्योंकि आप प्रतिदिन अभ्यास करती हैं। कौन से अभ्यास को महसूस किया है कि एक योग शिक्षक के साथ-साथ सामान्य जनता के लिए भी बहुत जरूरी प्राणायाम है। सम ऑब्वियसली बहुत जरूरी होते हैं। आसन से पहले भी मैं बोलूंगी प्राणायाम प्रैक्टिस करिए। कौन-कौन से प्राणायाम को आप महत्वपूर्ण?
(29:48) मैं तो बोलूंगी सूर्यावेदी पहले प्रैक्टिस करिए। हर रोज सुबह उठकर ही सूर्यवेदी प्रैक्टिस करिए। सूर्य वेदी का अभ्यास बड़ा सूर्यवेदी हां वो करना ही करना चाहिए। उसके बाद मैं बोलूंगी फिर अनुमो करिए आप और रात को सोने से पहले फिर से मैं बोलूंगी चंद्रादी प्रैक्टिस करिए कि हां हां रात को सोने से पहले आप चंद्रावेदी प्रैक्टिस करिए 15 मिनट्स के लिए और 15 मिनट्स के बाद आप बिल्कुल भी आंखें मत खोल के मतलब एकदम सोना ही है आपको उससे पहले आपका जितना काम करना है कर लीजिए जितना मोबाइल देखना है देख लीजिए जितना स्क्रोलिंग करना है कर लीजिए बट जब आपको
(30:21) मन करेंगे कि अभी मैं सोने जा रही हूं उससे पहले आप 10 मिनट के लिए चंद्रावदी कर लीजिए जैसे कि सांस लेना है लेफ्ट से छोड़ना है राइट से वो चंद्रावेदी करके आप फिर सो जाइए जाइए और सुबह उठकर फिर से आपको सूर्यावेदी करना है जो कि क्या है देखिए सूर्यवेदी से आपको तो बॉडी में हीट्स मिलते हैं एक्टिवेट होते हैं बॉडी क्योंकि इतनी देर तक हम सोके उठे तो अभी तो हमें काम करना है तो आपको एक्टिवेट तो करना ही है बॉडी को माइंड को पहले और फिर सोने जाने के टाइम पे अगर रात को आप इतने ज्यादा इतने लोगों से आप मिलते हो इतने काम कर रहे हो और फिर सारी चीजों को लेकर
(30:57) सोते हो ना तो वो नींद कभी नींद नहीं होते। ऐसा नहीं होंगे कि आपने सोया और मतलब सो गए वो नहीं होंगे। आप चार घंटा सो लेकिन वो नींद अगर नींद जैसा ही हो कि आप बस इस दुनिया में नहीं हो तो उसी के लिए आपको सोने से पहले चंद्रावती करना है। जो आपको काम डाउन करनी है। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। एक चीज़ मैं बियों्ड द थोड़ा सा टॉपिक जा रहा हूं फिर से। योग में राजनीति बहुत है। खास करके पश्चिम बंगाल के क्षेत्र में। आप मानती हैं इसको? देखिए राजनीति तो हर एक जगह में है। सिर्फ पश्चिम पश्चिम में ही क्यों होंगे? हर एक जगह में है। और उसका लाभ भी है
(31:38) और उसका जिस चीज में लाभ होते हैं उसमें नुकसान भी होते हैं। तो आपको मतलब लेना है। आप लाभ लेंगे या नुकसान लेंगे। है ना? तो आपको डिसजन लेना है आप कौन सी ओर जाएंगे? अच्छा वहां से बड़े-बड़े योगाचार्य निकले। खूब बड़े-बड़े योगाचार्य निकले। पूरे विश्व में है। हम अगर मैं आपसे पूछूं कि किसी व्यक्ति को बहुत बड़ा शिक्षक बनना है। फेमस शिक्षक बनना है। आपका क्या राय है इसमें? कौन से डिपार्टमेंट में हैं? किसी भी तरीके से चाहे देखिए पहले तो यही यही सिद्ध हो जाएगा कि बड़े में आप किसको बड़ा मानती हैं। नेम फेम वाले को क्योंकि आप ऑलरेडी शिखर पे बैठी हुई हैं। 2025 लाख
(32:16) इसलिए देखिए शायद जनता ना जानती हो लेकिन जिसके 20-25 लाख फॉलोअर हो सब मिला के तो 20-25 लाख लोग जिसे फॉलो कर रहे हैं वो कहीं ना कहीं जन सामान्य से तो ऊपर बैठा हुआ है। नंबर एक चीज आप अपनी इंडस्ट्री में एक तरीके से शानदार शिखर पे हैं। तो मैं ऑडियंस की तरफ से यह जानने में बड़ा इंटरेस्टेड हूं कि शिखर से निचली दुनिया कैसी दिखती है? जब राकेश शर्मा पहुंचे चंद्रमा पे तो इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि भारत कैसा दिखता है? तो राकेश शर्मा ने कहा कि सारे जहां से अच्छा मैं यही बात पूछ रहा हूं क्योंकि आप भी एक चांद पे हैं। कहीं ना कहीं 25 लाख लोग आपको फॉलो
(32:54) कर रहे हैं तो आप ऊपर हैं। बहुत ऊपर हैं। जब आप इतने ऊंचाई पे हैं तो एक जनसामान्य शिक्षक जो योग टीचर है जो डेली कक्षा लेके आता है और फिर शाम को बैठता है, इंतजार करता है अपने आप को अमीर बनाने का। वो स्वप स्वप्न बुनता है। एक दिन घर होगा, एक गाड़ी होगी और इसी में उसका आधा जीवन निकल चुका होता है कि मैं कक्षा ले लेते घर बनाऊंगा। कक्षा लेते लेते गाड़ी खरीदूंगा। कक्षा लेते लेते अपना जीवन बनाऊंगा और इतने में आधा जीवन उसका निकल चुका है। फिर या तो वो स्विच कर जाता है। योगा छोड़ देता है। या तो मैं ये जानना चाहता हूं कि सफलता एक योग शिक्षक की है।
(33:29) हम ऊपर से पहले तो दिखती कैसी है? योगा जीवन कैसा दिखता है आपको? और एक योग शिक्षक क्या करें कि वो सफल हो। हम् दो प्रश्न अब आपके पास उत्तर दो प्रश्न है ठीक है तो पहले तो मैं बोलूंगी मैं अपने अह लाइफ के एक्सपीरियंस से मैं आंसर करना चाहूंगी क्योंकि दूसरों के बारे में मुझे पता नहीं है मैं अपने गुरुओं को देखे देख देख के बरी हुई हूं तो मैं उस हिसाब से अगर बोलूं तो मैं जहां पे भी हूं मुझे ऊपर से अगर मैं नीचे देखती हूं तो मुझे कैसा लगता है ना तो पहले बात तो है अगर आपको ऐसा लग रहा है कि मैं ऊपर हूं तो मुझे ऐसा लग रहा है ना
(34:04) कि वो सारे मेरे ऊपर है और मैं नीचे नीचे हूं क्योंकि जब नीचे से मैं ऊपर चढ़ रही थी ना तब मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं चढ़ रही हूं और अभी चढ़ने के बाद मुझे ऐसा लग रहा है कि वो लोग ही असल में मेरे ऊपर हैं। अच्छा ऐसा क्यों लग रहा है? क्योंकि अभी हो गई है रिस्पांसिबिलिटीज। और जब मैं चढ़ रही थी सीढ़ियां तब था मुझे चढ़ना है ऊपर चढ़ना है ऊपर चढ़ना है। अभी चढ़ने के बाद ऐसा लग रहा है ना नीचे तो सारे बहुत सारे लोग हैं। वो मेरी रिस्पांसिबिलिटीज है। जब चढ़ रही थी तब मैं कुछ भी पोस्ट कर लेती थी। तब मैं कुछ भी कर लेती थी। अभी मुझे पोस्ट करने से पहले भी मुझे सोचना
(34:42) पड़ रहा है कि मैं क्या पोस्ट करूंगी। अच्छा तो मुझे अभी क्या हो रहा है ना मेरा मेरा अभी लर्निंग स्टेज स्टार्ट हुआ है जब मैं चढ़ रही थी तब मेरा लर्निंग स्टेज नहीं थी तब मेरा शायद आप बोल सकते हैं कि स्ट्रगलिंग स्टेज था और अभी मेरा लर्निंग स्टेज स्टार्ट हुआ है तो मैं अभी और भी ज्यादा सीख रही हूं क्योंकि मुझे उन लोगों को सिखाना है और देना है तो क्या हुआ ना अल्टीमेटली मैं ही नीचे हूं क्योंकि मुझे और भी ज्यादा सीखना है और बहुत कुछ करना करना है शायद इसीलिए लाइफ में है शायद करना होगा। दूसरी चीज़ जो आपने बोले कि कि जैसे कि घर खरीदना है, वो करना है, वो
(35:26) करना है। अगर कोई योगी अगर आप योग फील्ड में हो और अगर आप हमेशा सोच रही हो कि मुझे घर खरीदना है, गाड़ी खरीदना है। इसीलिए हमें पैसा कमाना है तो मुझे ऐसा नहीं लगता कि ज्यादा दूर जा पाएंगे। अच्छा ज्यादा दूर जा पाएंगे। मैं ये ट्रुथ बल बोल रही हूं मैं। ज्यादा दूर नहीं जा पाएंगे और पहले तो बात है कुछ करने से पहले पैसों के बारे में मत सोचिए पैसा तो ऐसा आएंगे ऐसे जाएंगे पैसा क्या है एक कागज का टुकड़ा ही तो है ना तो पहले आपने आप अच्छा बड़ा अच्छा हुआ आपने मैल नहीं बोला मैं तो इंतजार कर रहा था होता क्या है लोग इतने बेवकूफ हैं लक्ष्मी को बोलते हैं कि
(36:00) हाथ का मैल नहीं आपने चलिए अच्छा बोला कि कागज का टुकड़ा है हां तो कागज के टुकड़ा में हम बहुत कुछ लिख सकते हैं तो इसमें 50 पैसा लिख के उसको 50-50 बना दिया फिर से इसको रिसाइकल करके इसको ₹1000 बना देंगे। तो ये हो गए एक कागज के टुकड़ा जो बहुत पावरफुल होता है। इतना पावरफुल है कि आपके पास है तो मैं अभी आपके साथ इस चेयर में हूं। नहीं होगा तो मुझे मैं नहीं आती। ये ट्रुथ है। मानना होगा। लेकिन कागज के टुकड़ों में जो कागज के जो एक टुकड़ा है ना उसमें 50 लिखोगे या 1000 लिखोगे या 2000 लिखोगे ये आपके ऊपर डिपेंड होंगे। तो आपके स्किल बढ़ाना है।
(36:39) स्किल पे कार्य करना बहुत एक्सक्ट्ली। तो अगर आप योग शिक्षक हो ना तो आप पैसों के बारे में मत सोचिए। आप सोचिए कि मैं और क्या करूं कि मैं और ज्यादा लोगों के पास जा पाऊं। आपको रहना है दिमाग में कि मैं कैसे लोगों के पास पहुंचूं। हम और ऑब्वियसली उसमें प्यार होना चाहिए। और प्यार कैसे रहेंगे? अगर आप अच्छे काम करोगे तभी आपको प्यार मिलेंगे। ऐसा नहीं है कि मैं बोल रही हूं सिर्फ आपको प्यार चाहिए। नहीं नहीं नहीं अगर अगर सब लोग आपको प्यार करते हैं तो आप दुगले हो। हम ऐसा हो ही नहीं सकता कि इस रूम पे हम पांच लोग हैं और पांच ही लोगों के मन में मेरे
(37:11) लिए सिर्फ प्यार है। इंपॉसिबल अगर ऐसा है तो मैं तो भाई श्री कृष्णा को भी ऐसा नहीं है। श्री शिव शिवा भी ऐसा नहीं है। जो शिव भक्त है वो बोलते हैं कृष्णा ही बहुत महान है। और जो कृष्णा भक्त है मतलब सॉरी जो शिव भक्त है वो बोलते हैं कि शिव ही महान है। और जो कृष्णा भक्त है वो बोलते हैं कृष्णा ही महान है। तो भक्तों में ही इतना अंतर होते हैं। तो हम और आप तो ऐसे ही एक छोटे-मोटे इंसान हैं। तो क्या होता है ना आप सोचो कि आप अपने मतलब खुद में कैसे स्किल और ज्यादा बढ़ाओगे और फिर सोच अच्छा रखो फिर एक गाड़ी वारी जो भी है ना पैसा जो भी
(37:49) होता है ना वो पीछे ऐसे ही आएंगे क्योंकि अगर आप अच्छे दिशा में होंगे ना तो ये बाउंड है कि हां मानी आना मतलब ये आना ही आना है ये सब रास्ते में खड़े हैं हां ये सब रास्ते में बहुत सारे खड़े हैं हां आपको आपको सही रास्ते को आपको वर्क करना राइट। अच्छा एक चीज खास करके मतलब मेरी छात्राएं देखेंग जो बच्चियां हैं महिला सशक्तिकरण एक योग की कक्षा में 100 छात्र होते हैं। तो हर व्यक्ति ये जानता है कि तकरीबन 70 से 80% महिलाएं होती हैं। योगा टीटीसी हो, योगा मास्टर डिग्री हो, ग्रेजुएशन हो। लेकिन शिक्षिका बनके भारत में गिने-चुने दो चार लोगों का नाम है टॉप में। हंसा मां
(38:35) का नाम आ जाता है। आजकल इरा त्रिवेदी को लोग कैलकुलेट कर लेते हैं। तथाकथित योग शिक्षकों में शिल्पा शेट्टी को भी अगर मैं ले लूं तो ऐसे दो चार नाम है रैंडम में मिल जाता है। योग गुरुओं में हमारे पास लाइन लगी पड़ी है। सैकड़ों हजारों गुरुओं का नाम है। तो ये महिलाएं पढ़ तो रही हैं। माने यूनिवर्सिटी से निकल तो रही हैं लेकिन बीच रास्ते में कहां गायब हो जा रही हैं? इसमें तो बहुत बड़ी बात होना चाहिए। मुझे जो लगता है ना और मेरे सामान ने जो मेरे जो ज्ञान है जो बहुत ही छोटे हैं जितना भी है उसमें से मुझे जो लगता है ना कि एक
(39:16) जमाना से ही चल रहा है कि हम जो लड़कियां है ये घर में लो बच्चों को संभालने के लिए फिर घर के जो चीजें हैं वो करने के लिए हमारी जन्म हुई है। ठीक है? देखिए जो जैसे कि हम छोटे से जब बड़ी हुई हूं तो मां ने बोला कि आपको खाना पकाना सीखना है। हम आपको ये करना सीखना है। घर के काम सीखना है। लेकिन मेरे भाई को ऐसे नहीं बोला बुलाया। मेरे भाई को सिखाया है कि आपको बाहर जाना है। वो करना है। ऐसा करना है। मैंने देखा है ये छोटे मतलब मैं बचपन से ये सब देख के बड़ी हुई हूं। तो अभी के जमाने में 2025 में अभी देखिए कि पेरेंट्स बहुत मतलब बहुत ही ज्यादा हो
(39:55) गए हैं कि वो लोग ऐसे बोलते हैं कि नहीं आपको भी करना है ऐसा बोलते हैं तो लेकिन जो पहले से चल के आए हैं वो तो ऐसे ही नहीं मतलब मीट नहीं जाते ना तो क्या होता है वो सारे लड़कियां भी सारे सीखते हैं लेकिन वो अंदर ही रहते हैं हम वो अंदर ही रह गए हैं वो बाहर आउटब्रस्ट होके नहीं आए हैं हम जैसे कि वह लड़कियां होते ही है शक्ति हम लेकिन वह शक्ति कहीं ना कहीं वो घर के कामों में ज्यादा इन्वेस्ट हुई है। हम मैं नहीं बोल रही क्योंकि घर के काम छोटी है। वो तो बहुत बड़ा काम होते हैं कि जैसे कि शारदा मां शारदा मां ने भी बहुत संभाला
(40:34) है। सारे बच्चों को संभाला है। क्या आप बोलोगे कि शारदा मां योगी नहीं है। तो वो भी तो योगी है ना। वो तो बहुत महान योगिनी है शारदा मां। हमारे शारदा तो उन्होंने क्या सिर्फ आसन प्रैक्टिस किया है? नहीं उन्होंने कर्म योगा किया है ना हम सही बात है तो वो भी योगिनी है तो ऐसे नहीं सोचिए कि लड़कियां क्यों ऐसे नहीं दिखे शायद उनके जो दिखने के जो प्रोसेस है वो थोड़ा सा अलग है वो मानना होगा वो थोड़ा सा अलग है और अगर हम बोले कि एक लड़का और एक लड़की समान है तो वो मैं मानती नहीं हूं कि एक लड़का और एक लड़की कभी भी वो समान नहीं हो सकते हैं।
(41:16) यूनिवर्स में अलग जन्म है। वो दोनों अलग है। आप ऐसे बिट नहीं कर सकते। मतलब नहीं नहीं हम दोनों एक ही है। कैसे आप दोनों एक ही हुए हो? अब मुझे बताओ कैसे एक हुए हो? बॉडी अलग है। सारे सिस्टम्स अलग है दोनों में। दोनों जन्म लिए हैं दो अलग काम के लिए। हम हमें क्रिएट करना ही है। हमें मां होना ही है। हमें क्रिएट करना है। उसमें लड़कों का भी योगदान है। योगदान है। लेकिन मां आप ही हो। हम तो शक्ति हामी है। तो मां होने के बाद ना एक मां बोलते हैं ना कि एक मां की कर्तव्य बहुत ज्यादा होते हैं। तो उसमें भी तो वो योगिनी है। सही बात है। तो ये भी थोड़ी अष्टांग योग
(41:59) में ही आप आगे बढ़े। हां। रास्ता अलग है। उस रास्ते में चलते-चलते ऐसा हो गया है कि प्रश्न यह है कि आज की महिलाएं जो शिक्षिकाएं हैं वो अष्टांग योग को ही सारा योग मान बैठी हैं। उन्हें कर्म योग से कुछ लेना देना नहीं। जब कर्म योग को वो स्वीकार कर लेती हैं तो उन्हें लगता है कि हाय राम यह कहां फंस गए हम। इसलिए क्योंकि कर्म योग पे बात करने के लिए कृष्ण कितनी बार आएंगे? कृष्ण एक बार आते हैं 18 अध्यायों में दुनिया भर की बातें करके जाते हैं। है कि नहीं? परंतु हम उसे पढ़ते नहीं है। और फिर हम सोचते हैं कि नहीं नहीं अष्टांग योग, अष्टांग
(42:42) योग क्योंकि ज्यादा पॉपुलराइज्ड है वही इस समय हठ योग और अष्टांग योग सबको वही प्राप्त करना है। इट्स वेरी डिफिकल्ट। हर सुबह की एक शाम होती है और संभवतया मैं समझता हूं कि फेमिनिज्म के दृष्टिकोण से महिलाएं जो कि जिन्हें लगता है कि वो आगे नहीं है वो जहां आगे हैं वो मार्केटाइज्ड नहीं है आगे तो हैं ही है वो आगे ही तो है और वो फेमिनिज्म हो गया तो आपने ना मेरा भी दृष्टिकोण चेंज कर दिया एक्चुअली मैं भी इस बात को मैं भी सोचता था कि ये प्रश्न मेरा भी था कि आखिर ये महिलाएं चली कहां जाती है लेकिन वो जहां जा रही हैं हमारा वो रास्ता नहीं है
(43:16) हम उसे देख नहीं पा रहे वो [हंसी] कहीं किसी आपके रास्ता चेंज कर गए आप पुरुष के हम सोच रहे हमारे ही रास्ते पे क्यों नहीं आ रही है हमारे ही रास्ते पे वो क्यों नहीं क्यों है वो मैं आपके रास्ते पे मेरे रास्ता मेरे यूनिवर्स ने दूसरा देके रखे हैं दूसरा कार्य उसमें ही मैं ग्रेसफुल होके और सुंदरता के साथ मैं उभार के आऊंगी मेरे ऊर्जा लेके आऊंगी मैं आपके रास्ते पे क्यों आऊं ये बहुत अच्छी बात है अच्छा एक एक बात मैं आपको बताता हूं अब अगेन फिर हम लोग हॉरिजन चेंज कर रहे हैं कई असल में आजकि क्या है मैं दर्शकों को बताना चाहता हूं कि मैडम
(43:52) का अपॉइंटमेंट मिलना इतना कठिन है और उसमें भी आज हमने इनको पकड़ा हुआ है अनुरोध करके हाथ पैर जोड़ के तो मैं चाहता हूं खूब सारी बातें आपसे कर लूं एक प्रश्न मेरे मन में आ रहा था खासकर इधर हमारे तरफ पश्चिम में आपके लिए पश्चिम और यहां के लोगों के लिए पूरब बंगाल ये माना जाता है कि बंगाल में तंत्र योग खूब फला फुला हम परंतु अब तंत्र योग कहीं नहीं दिखता उतना नहीं दिखता ये माना जाता है पहले लोग आजकल लोक लोकगीतों में आप देखते हैं कि लोग मानते हैं कि जो बंगाल के लोग होते हैं उनके लिए तंत्र करना बहुत आसान होता है। तंत्र के विषय में वो काफी ज्ञानी होते
(44:26) हैं। परंतु अब वो तंत्र योग उस तरीके से नहीं है समाज में। तो अभी क्या अभी भी पहला प्रश्न तो यही है कि क्या वहां अभी भी भूत, प्रेत, पिशाच, बैताल इत्यादि की पूजा कर ली जाती है, रोक लिया जाता है, कंट्रोल कर लिया जाता है। और तंत्र योग है तो क्या तांत्रिक गतिविधियां अभी भी बंगाल में है? पहला प्रश्न तो यह है कि तांत्रिक गतिविधियां हैं। आप बताएंगी क्योंकि आप वहीं से हैं और दूसरा यह कि क्या तंत्र योग समाज के कल्याण के लिए भी साबित हो सकता है? क्या एक अष्टांग योगी भी तंत्र योगा सीख सकता है? देखिए हर एक स्ट्रीम अलग होता है और हर एक
(45:00) योगी की इच्छा अलग होता है। तो अगर किसी को तंत्र योग सीखना है तो ऑब्वियसली यू आर वेलकम। आप सीखिए और उसमें अगर आप अच्छा देखिए एक चीज से ना दो चीज़ होते हैं। आप अगर तंत्र योग सीख रहे हो उस उसको आप यूटिलाइज करके खराब भी कर पाओगे और अच्छा भी कर पाओगे। अगर ये अगर आप आपके ऊपर डिपेंडेंट है आप अच्छा करोगे या खराब करोगे। लेकिन एक चीज तो है तंत्र योग यूज़ करके अगर आप कुछ खराब कर रहे हो किसी के लिए वो आपके ऊपर ही आएंगे। हम वो तंत्रा में है। आप मानो या ना मानो वो तंत्रा में है कि अगर आप किसी के खराब कर रही हो तो वह आपके ऊपर ही आएंगे एक टाइम
(45:37) के बाद। हम ठीक है? हर एक चीज यूनिवर्स यूनिवर्स ऐसा गोल होते हैं। अगर वो आप यहां पे कुछ कर रहे हो ऐसे घूम के ये आपके पास ही फिर से आएंगे। तो ध्यान में रख के करिए। जो भी करना है। दूसरी बात आपने जो बोले कि पश्चिम में ये जो अभी तंत्रवंत्र बहुत ज्यादा होते हैं। भूत की जो कहानियां होते तो मैं बोलूंगी कि पश्चिम क्या अलग है भारत से? नहीं भारत का ही पश्चिम तो भारत का ही है। तो ऐसा नहीं है कि सिर्फ उसी जगह में भूत होते हैं। [हंसी] अगर वहां पे भूत सिर्फ पश्चिम में नहीं होते। सारी जगहों पे होते हैं। भगवान अगर सारे वृंदावन में भी भगवान है तो वृंदावन में
(46:18) भूत भी है। विश्वास भी है। सारे जगहों में ऐसे होते हैं। तो हो गई है कि लोग कौन से कौन से भगवान के ज्यादा या फिर फॉलोअर्स है ऐसा है तो पश्चिम में ये शिक्षा होते हैं एवं है अच्छा अभी भी है अभी भी ऐसा नहीं है अभी भी नहीं है हमेशा रहेंगे लेकिन जो पश्चिम को लेकर लोग सोचते हैं वो नहीं है वो नहीं है लोग थोड़ा सा क्या होता है ना अगर इतना है तो इसको इतना बोलते हैं और पश्चिम में आके लोग सीख के बाहर जाके उसको अलग से यूटिलाइज करते हैं। अगर पश्चिम में आया आपको अच्छा कुछ सिखाया है और आप वह बाहर जाके कुछ और ही कर रही हो तो क्या वो
(47:00) पश्चिम के फौल्ट है? नहीं है ना तो पश्चिम में वो है मां मां की शक्ति है। अगर आप पश्चिम में देखो वहां पे सिर्फ मां की भक्ति है। मां क्या कभी कोई संतान के कुछ खराब कर सकते हैं? बिल्कुल है। बिल्कुल नहीं है। तो हां शिक्षा तो है। आप सीख के जाके आप खराब करोगे या भला करोगे ये तो आपके ऊपर है। अच्छा ये माना जाता है कि काली तंत्र जो है तांत्रिक शिक्षाओं में काली तंत्र का बड़ा नाम है औरकि काली माता को कलकत्ते में स्थापित है और विभिन्न स्वरूपों में स्थापित है। यह भी माना जाता है कि बैतालों के बैतालों को समाप्त करने के लिए पिशाचों को
(47:36) समाप्त करने के लिए माता काली का बड़ा योगदान रहा है। तो जो कोलकाते का काली मंदिर है तात्विक गतिविधियों में अभी वह इन्वॉल्व है या नहीं? देखिए वो बहुत ही कंट्रोवर्शियल प्रश्न है। अगर हम ना करें तब भी अच्छे होंगे। यह बहुत ही मां के साथ रिलेटेड है। लेकिन मेरा मानना है जहां पे अच्छे अच्छा कुछ होता है वहां पे बहुत कुछ खराब भी होते हैं। हम दोनों चीज को मान के ही चलना पड़ेंगे और दोनों चीज को हम दिमाग में रख के आपके पथ आपको चुनना है। बहुत बढ़िया। फैंटास्टिक। एक योग शिक्षक के स्वरूप में मेरे प्रश्न में हमेशा मेरे मस्तिष्क में ये प्रश्न हमेशा जागृत होता
(48:15) है कि एक योग शिक्षक जब वो जब योगासनों की बात करता है जब प्राणायाम की बात करता है तो इन सब में वो समाधि को भूल जाता है। हम अब उसे हम योगाचार्य बोले योग गुरु बोले चाहे जो भी बोल लें लेकिन वो अपने मूल उद्देश्य को भूल के इधर ही किधर भटक रहा है रास्ते में ही हम क्या एक योग शिक्षक को समाधि याद रखना चाहिए? क्या एक योग शिक्षक को समाधि के लिए प्रयासरत रहना चाहिए? क्या एक योग शिक्षक के लिए समाधि का कोई अर्थ भी है या ऐसे ही पतंजलि से गलती हो गई? [हंसी] सर जी आप जो बोले कि ये योग शिक्षक के लिए कि समाधि की कोई अर्थ है या नहीं है।
(49:00) समाधि के अर्थ कोई योग मतलब जो टीचर है वो बोलेंगे कि समाधि की कोई अर्थ है या नहीं है। वो तो पतंजलि बोल के गए हैं। है ना? है द थिंग सर मुझे लगता है कि समाधि को लेकर अभी लोग बात नहीं करते या फिर वह प्रैक्टिस नहीं करते कि वो बहुत हार्ड प्रैक्टिस है अगर आप समाधि प्रैक्टिस करोगे तो आपको सब कुछ मतलब ऐसे आपके आप ऐसे ही आपके जीवन से सब त्याग हो जाएंगे और ये है कलयुग कल कलयुग है तो कलयुग में कैसे लोग हर कुछ छोड़ दें लोगों का तो इतना अच्छा कर्म ही नहीं है कि लोग सारे कुछ छोड़ दें इतना सारा साधक साधु लोग साधु संत लोग हैं जो जो कि बैठे हुए हैं।
(49:40) अभी वो लोग भी ब्रॉडकास्ट कर रहे हैं। वो लोगों का भी ऐसे हर रोज चैनल में मतलब अच्छे-अच्छे बातें आ रहे हैं। तो आप सोचिए वो लोग भी इतने सारे लोगों को ठीक करने में करने के लिए वो बैठे हुए हैं। अभी वो भी वही काम कर रहे हैं। तो कलयुग का ना मुझे ऐसा लगता है कलयुग का पथ अलग है। कलयुग का समाधि वही है कि आप इस युग में रखे रह के यहां पे काम करो और कर्म अच्छा करो और वही आपकी समाधि है। हां वो मुझे लगता है क्योंकि अभी हां क्योंकि ये कलयुग है ना कलयुग में बैठ के अगर मैं सोचूंगी नहीं मुझे शांत रहे रह के आंखें बंद करके नदी में जाके बैठ के कुछ करना है
(50:20) तो करो और नदी में जाके बैठ के आप करो फिर आप ही करते-करते चली जाओ तो आप क्या किया वो तो लोगों के पास ही नहीं जाएंगे और आई एम नॉट सेइंग कि वो गलत है वो भी अच्छे हैं वो भी है जो लोग कर पा रहे हैं वो लोग तो भगवान की श मतलब वो लोग स्वयं भगवान हैं जो आए कुछ काम करके फिर वो चले गए हिमालय में बैठे हैं और हिमालय में साधना कर रहे हैं। लेकिन जो इस कलयुग में भी बैठ के वो टीचर लोग हैं ले लीजिए या फिर बड़े-बड़े संत लोग ले ले लीजिए साधु लोग ले लीजिए ना हमारे तो मुझे ऐसा लगता है वो लोग भी समाधि ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। लेकिन इस
(50:56) कल योग की जैसा कर रहे हैं। हां ये ये सही बात कहा आपने। ये मुझे लगता है पता नहीं मैं कितनी सही हूं। ये इसको अगला प्रश्न वैलिडेट कर देगा। लोग दर्शकों का यह मानना है कि आप बॉलीवुड से आई हैं। नहीं आई मीन आई मीन आई मीन फिल्मों से आई हैं। फिल्मों से आई हैं। फिल्मों को हम लोग बॉलीवुड ही बोल देते हैं जनरली कि आप फिल्मों से आई हैं और आपने योग को आत्मसात कर लिया। अब आप योगिनी हैं। तो आप सिर्फ बातें करती होंगी। मंत्र वगैरह आपको शायद ही आता हो कुछ। जबकि मैं व्यक्तिगत तौर पे जानता हूं ये कि काफी सारे शानदार मंत्र आप उच्चारित
(51:32) करती हैं। तो मैं चाहता हूं कि एक वो मंत्र जो आप भोजन के दौरान करती हैं अक्सर। ये शायद दर्शक ना जानते हो। मैं बताऊंगा इसके बाद एक बार कोई दो तीन मंत्र अगर आप उच्चारित करें संस्कृत का ताकि जनता इसको जाने एटलीस्ट कि राई कोथा हवा की योग शिक्षिका नहीं है। हवा में योग शिक्षिका नहीं है। रूटेड डीप रूटेड योग शिक्षिका है। एनी कोई भी मंत्र तो अभी अगर बोल दिया है कि हां मैं आई हूं। मैं टॉलीवुड से बिलोंग करती हूं। हम तो हां मैंने भी सीखे हैं जब बहुत कुछ सीखे हैं। मैंने ऐसा भी हुआ है कि मैं छछ महीना आश्रम में रही हूं। तीन-ती महीना मैं आश्रम में रही हूं। जब
(52:12) मैं ये लाइफस्टाइल स्टार्ट किया तो इतना आसान नहीं था मेरे लिए ये लाइफस्टाइल स्टार्ट करना। शायद आसान ही था शायद क्योंकि मैं बोलूंगी मुझसे भी ज्यादा साधना वाले लोग हैं। वो लोग हैं तो मैं कुछ भी नहीं हूं। लेकिन ऐसा था कि मेरे लिए भी ऐसा लगता था कि जब मैं वॉकिंग कर रही थी इस पाथ में तो मेरा दरवाजा ऐसे खोल रहे थे खोल रहे थे तो सारे फैमिलीियों से दूर रहना मैं सिर्फ ईयर में साल में सिर्फ मैं दो बार अपने फैमिलीियों से मिलती हूं दो ही बार साल में मैं और वो भी सिर्फ वन वीक और टू वीक्स के लिए टू वीक्स ज्यादा हो जाएंगे ऐसा नहीं है कि मैं रेस्पोंसिबिलिटीज नहीं
(52:45) लेती हूं मैं अपना रेस्पोंसिबिलिटीज बहुत अच्छे से निभाती हूं और लेकिन ऐसा है कि इसको हम मेरा टाइम अगर इतना टाइम फैमिली को देना है तो इतना ही देती हूं। उसके बाद मैं अपने जीवन में फिर से लौट के आती हूं। तो ये जो एक लाइफ स्टाइल्स होते हैं कि वन काइंड ऑफ आप अलग रह रही हो। अपने एनर्जी को सेव कर रहे हो। अपनी एनर्जी को सही तरह के शरीर सही तरह से काम करने के लिए आप अपने एनर्जी को सेविंग्स कर रही हो। तो ये जो लाइफ स्टाइल में आने के बाद मुझे मंत्र सीखना पड़ा और मैंने स्टार्ट किया कि नहीं मुझे और भी ज्यादा मंत्र सीखना है और मंत्रा से जो
(53:25) पावर मिलते हैं ना मैं बोलूंगी कि कहीं और चीजों से नहीं होते हैं। जप करने से जो आपको पावर मिलेंगे वो किसी चीज में नहीं मिलेंगे। और जो पावर तो आप सोच छोड़ दो। जो शांति आपको मिलेंगे ना और जो क्लेरिटी आपको मिलेंगे ना वो आपको कहीं पे नहीं मिलेंगे। तो मैं बोलूंगी कि सारे जो भी लोग मुझे देख रहे हैं कि आप जप करिए। कोई भी जप ले लीजिए। राधे-राधे बोलिए। हरे कृष्णा बोलिए। शंभू सिद्ध बोलिए जैसे कि मैं मैं बोलती हूं। हां एक दो एक दो मंत्र बोल के बता। तो अभी जो हमारा एक मंत्र अभी YouTube में आया है। आप सारे ऑडियो प्लेटफार्म में आप
(54:02) सुन पाओगे। वो मंत्र जैसे कि मैं बोलना चाहूंगी। मेरे शिव जी के शिव जी को याद करके और मेरे गुरु को याद करके योनि शक्ति शिवा शिवोहम योनि शक्ति ज्ञानम सोहम लिंगाम शंभो शिवा शिवा आप 15 मिनट्स के ये मंत्र है। आप सुनिए मंत्रों के संदर्भ में लोग यह मानते हैं कि लाइको था जो अपनी इंडस्ट्री से नहीं रही और वापस योग ने इन्हें आत्मसात किया। उन्हें मंत्रों का कोई ज्ञान नहीं होगा। आपने अभी सुना कि कितने शानदार तरीके से और बहुत ही विनम्रता के साथ आपने एक मंत्र
(54:47) को प्रषित किया आप सभी के मध्य में। मैम एक प्रश्न बड़ा आवश्यक मैं समझता हूं। वो है उद्यमिता। उद्यमिता जब हम योग की बात करते हैं तो इसमें यह माना जाता है कि फ्री में योग करावाएं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि नहीं नहीं योग पैसे से नहीं कराया जाना चाहिए। योग को समाज में मतलब ऋषियों ने कल्याण के लिए भेजा था। लिहाजा सूर्य पैसा नहीं लेता चमकने का चंद्र पैसा नहीं लेता है ना प्रकृति हर वो चीज जो बहुत महंगी है वो फ्री है। मुफ्त है तो फिर योग भी मुफ्त होना चाहिए था और योग शिक्षकों को मुफ्त में योग कराना चाहिए था। आपकी क्या राय है इसमें?
(55:22) जो ऋषियों के बारे में आपने अभी बोला वो कौन से योग के बारे में बात कर रहे हैं आप? मतलब [हंसी] वाली बात है। जी तो अभी ये कल योग है। अभी के जो लोग है ना जो मतलब जो सीखने के लिए आते हैं ना वो भी चेंज हो चुके हैं। सब कुछ चेंज हो चुके हैं। तो मेरा मानना है बिना पैसों से मतलब दक्षिणा लेकर ही कुछ करना चाहिए। मैं फ्री योगा कभी सपोर्ट नहीं करूंगी और मैं आज तक कभी किया नहीं। अच्छा लोग एक बात कमेंट करेंगे कि क्यों करेंगी आप फ्री? क्योंकि आपका तो अपना ही चार्ज है। घंटे पीछे आप ₹1 ₹100 ले लेती हैं। इस तरीके का मतलब आप स्वयं भी बहुत
(56:02) ज्यादा बहुत एक्सपेंसिव योग शिक्षिका हैं। तो मुझे ऐसा मानना होता है जीवन में ना सबसे कीमती चीज है समय। अगर मैं अपना समय दे रही हूं और अगर जो ले रहा है उनको लगता है कि मेरे पास आना है और मेरा समय लेना है तो उसका दक्षिणा तो मैं लूंगी। चलिए अब बहुत क्विकली मैं कुछ आपसे रैपिड फायर प्रश्न पूछता हूं। हां। योग को आध्यात्म में रहने दें या योग को मॉडर्नाइज किया जाना चाहिए? दोनों लेकिन हमें जो पतंजलि ने सिखाया हमारे जो गुरु परंपरा उसमें रहे वो मैं बोलूंगी। अच्छा एक चीज बताएं योग शिक्षकों को योग शिक्षकों के जैसा वस्त्र धारण करना चाहिए
(56:43) या वो कुछ भी ऊटपटांग पहन के जा सकते हैं। नहीं उत्पटंग तो कैसा होता है वो उसको उस विषय में बहुत सारे बातें करना पड़ेंगे। ऊटपटांग वाला क्या होता है? अगर मैं बोलूंगी कि सिर्फ साड़ी पहन के योग करो वो पॉसिबल नहीं होता है। तो मैं बोलूंगी कि हां जो जो ड्रेस योग के लिए सुंदर है वो पहनिए और करिए। अच्छा अष्टांग योग ही इतना क्यों पॉपुलर है? अन्य योग क्यों नहीं? मुझे तो ऐसा नहीं लगता है कि अष्टांग योगा ही सिर्फ पॉपुलर है। शायद किसी को लगता है मुझे लगता नहीं है। और रही बात कि शायद इसमें सिर्फ एडवांस कुछ करते हैं और शायद कुछ सिर्फ उसमें आसन के बारे में और
(57:22) एडवांस चीजों के बारे में ही बोलते हैं। एक जिम्नास्ट वाले में एक जो शरीर जो तोड़ने वाला जोकर है उसमें और एक योग शिक्षक में वो जो अच्छा एडवांस आसन कर लेता है। इन दोनों में मौलिक अंतर क्या है? बहुत मौलिक अंतर है। जो जिम वाले हैं ना वो फ्लेक्सिबल नहीं होते हैं। और जो योग सीखते हैं जिम जिम्नास्टिक्स वाले जो बहुत अल्ट्रा फ्लेक्सिबल होते हैं। अल्ट्रा फ्लेक्सिबल जो होते हैं जिम्नास्टिक्स वाले बच्चे होते हैं। हां तो अभी इसमें जो जिम्नास्टिक वाले बच्चे होते हैं ना इसमें अंतर थोड़ा सा तो है। वो लोग सिर्फ बॉडी को लेकर काम करते हैं।
(57:50) और जो योगा सीख के आसन सीखने के बाद जो फ्लेक्सिबल होते हैं ना वो सांस बॉडी फिर मन को लेकर भी करते हैं। ठीक बात है। एक चीज एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है वो है साधना की। योग शिक्षक साधक नहीं बचा। इस समय आपका क्या आपकी क्या टिप्पणी है इसमें? साधक नहीं बचा। साधक नहीं है। योग शिक्षक साधक नहीं है। आज का योग शिक्षक पूरी तरीके से समाज में संलिप्त है। व्याप्त है। सामाजिकता को आत्मसात किए हुए हैं। मौलिक रूप से वो उन साधनाओं को स्वीकार नहीं कर पाता है सिवाय सिर्फ बोलने के। तो जो व्यक्ति साधक नहीं बचा। अह तो मुझे मुझे ऐसा लगता है कि सारे ऐसे नहीं है। अह
(58:28) कुछ है ऐसा ही और कुछ अपने साधना भी कर रहे हैं और समाज माध्यम में वो सारे लोगों के बीच में द्वैध भाव है बहुत सारे शिक्षकों में ड्यूल फेस हर एक शिक्षक द्वैदि भाव का शिक्षक है। वो सामने अपने क्लाइंट्स के सामने जाता है तो बोलता है कि आपको सुर और सुरा से दूर रहना चाहिए। आपको और खुद भी वो संध्या के समय मधुशाला पहुंच जा रहा है। ऐसे में आपकी क्या टिप्पणी है? टिप्पणी कुछ नहीं है। मतलब इसमें मैं क्या बोलूं लेकिन अच्छा है कि आप करिए आपका मन का करिए लेकिन सामने आके ये सब मत बोलिए कि आप ना करें। हां हां कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए।
(59:04) हां अंतर होने चाहिए। अच्छा ठीक है। एक एक बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न ये है वो हमेशा से योग शिक्षकों को प्रभावित करता है कि योग शिक्षक विदेश में स्थापित होना चाहता है।कि आप तो पूरे विश्व में स्थापित हैं। फॉरेन जाने के लिए या एक व्यक्ति को क्या ऐसा क्या-क्या ऐसा गुण लेना चाहिए कि वो विदेश चला जाए। देखिए इसमें बहुत बहुत सुंदर प्रश्न है। बहुत ही सुंदर तो मेरा ऐसा मानना है कि आप विदेश जाइए और जो योग हमारे इंडिया के जो योग है वो सारे विश्व में आप विचार करिए और सारे स्टूडेंट्स को सिखाइए लेकिन बास आपके ना इंडिया में ही हो वही अच्छा है।
(59:42) देखिए वृंदावन बास बोलते हैं ना तो ऐसा भी बहुत सारे साधु हैं संत है जो वृंदावन से हैं कथावाचक है जो वृंदावन से है लेकिन उन लोगों की अभी वृंदावन में बास नहीं होते हैं क्योंकि उन लोगों का बहुत सारा प्रोग्राम्स होते हैं बहुत सारा बहुत होते हैं वो जाते हैं प्रोग्राम करते हैं फिर वृंदावन एक आश्रम बना रही हैं आप हां किस तरीके का आश्रम बना रही हैं आप वो आश्रम योगा आश्रम होगा मतलब जहां पे आप आ पाओगे सारे बच्चे आके जैसे कि चीचा ट्रेनिंग ले पाएंगे और उससे भी ज्यादा जैसे कि आप ऐसा होता है ना कि सारे काम में आप अपने खुद को ही भूल जाते हो। तो
(1:00:18) बेसिकली उस आश्रम में आप 21 डेज के हमारे जो एकांत निवास होंगे जहां पे आप आके एकांत में अपने खुद के साथ विदेशी कंपनियां भारत में योग योग बिजनेस को योग इंडस्ट्री को पूरी तरीके से ग्रास्प कर चुकी हैं बांध चुकी हैं। जिसमें खास करके योगा अलायंस 13 लाख9000 समथिंग करोड़ डॉलर उन लोगों ने पिछले दो वर्षों में कमाया है। ये उनकी टोटल आय है। योगा अलायंस शब्द मेरा मौलिक शब्द ये है। क्या एक भारतीय योग शिक्षक को योग अलायंस से सर्टिफाई होना अनिवार्य है? कोई जरूरी आवश्यकता नहीं। एकदम नहीं मैं सपोर्ट नहीं करती। आप सपोर्ट नहीं करती।
(1:00:54) मैं सपोर्ट नहीं करती। एक अंतिम प्रश्न राय कोथा का गुरु कौन है? अ मेरा तो वैसे मेरा पहले शिक्षा जो मिले थे मेरी ग्रैंड मां से मिले थे। उसके बाद मेरी बड़ी मां से मिली है। और उसके बाद मैंने मेरा कोच रहे हैं चंदना मैम और उसके बाद गुरु विश्वकैतू जी मेरे लाइक स्पिरिचुअल फादर। स्पिरिचुअल फादर। बड़ा अच्छा लगा आपसे मिलके और मैं समझता हूं कि ये एक ऐतिहासिक पडकास्ट है। एक ऐसी लड़की जो जो स्टारडम में रहा करती थी एक ऐसी लड़की जो बहुत निश्चलता से अपने अपने क्रियाविधि को आगे अग्रित कर रही थी और उस पे सफलता प्राप्त भी कर रही थी। परंतु उस सफलता के दौरान
(1:01:32) उसे कुछ ऐसा लगा कि जो उसके लिए बहुत अनिवार्य नहीं था। एक ऐसी विषयवृत्ति जहां पर रायकोथा अपने आप को थोड़े दिन के लिए सस्टेन नहीं कर पाती हैं और एक ऐसा एक्सीडेंटल YouTube वीडियो जो जाता है जिसे जनता बहुत सराहती है और फिर रायकोथा वहां से अपने विचारों में व्यापक परिवर्तन लेके आती है। रायथा को लेके आने वाले समाज के उस उस अभिजात्य वर्ग ने जिसने इन्हें चुना योग शिक्षक के तौर पे वो कहीं ना कहीं साधुवाद का पात्र है। धीरे-धीरे राय को था। वर्ष 2017 के उपरांत योग शिक्षा में आती चलती चली जाती हैं और यह शिक्षा इतनी शानदार होती है और इतनी व्यापकता से
(1:02:06) होती है कि आज रायकोता एक साधना एक साधक बनती चलती चली जा रही है। इस दौरान जब रायता एक साधक हैं उस दौरान ये नहीं भूलती हैं कि इन्हें अपने अपने धन अपने दौलत इत्यादि का भी विशेष ध्यान रखना है क्योंकि योग शिक्षक खाएगा क्या? आज योग शिक्षकों से पूरी जनता पूरा विश्व यह अपेक्षा करता है कि वह चाहे खाए कुछ भी लेकिन वो पैसे ना ले हमें ठीक कर जाए परंतु हमसे पैसे ना ले। ये एक कष्ट का कारक है। मैं समझता हूं कि समाज को इससे थोड़ा सा परिवर्तन लेना होगा और यह परिवर्तन लाने के लिए आपको रायता जैसे शिक्षकों का और ऐसे बहुत सारे लोगों का
(1:02:38) अनुसरण करना चाहिए। जिन लोगों ने अपने जीवन को पारदर्शिता के साथ से सुचिता के साथ में आध्यात्मिकता के साथ में लौकिक आनंद को कहीं ना कहीं आत्मसात ना करते हुए थोड़ी सी दूरी बनाते हुए एक अभिलिप्सा का त्याग करते हुए एक एक नैतिक स्तर तक उठाया है। मैं समझता हूं कि आप सभी लोग योग शिक्षक जो इस वीडियो को देखेंगे वो इन वीडियो से अपने आप को थोड़ा सा थोड़ी सी प्रेरणा जरूर ले पाएंगे और ऐसे व्यक्ति जो टॉप पे बैठे हुए जो 20-25 लाख फॉलोवर्स के साथ में ऊपर बैठा हुआ है वह भी अपने आप को बड़ा सूक्ष्म मानता है। ईश्वरीय सत्ताओं के सामने सूक्ष्म मानता है। अपने कर्म को
(1:03:09) ही महत्वपूर्ण मानता है और इस दिशा में कोई फल की अपेक्षा ना करते हुए जैसा कृष्ण ने गीता में कहा कर्मण्यमा अधिकारस्ते मा फलेशु कदाचन उस भावना को आगे अग्रसित करते हुए और विश्व को अपना अपना घर मानते हुए उदारता का संपूर्ण परिचय देते हुए अपने आप को स्थापित कर रहा है। आप भी स्थापित करें। राय कोथा के यदि समग्र मैं पडकास्ट को अगर सम करूं तो एक बात जो इन्होंने कहा अयं निजम परम वेती गणा नाम लघु चेतसाम उदार चरिता नाम तू वसुधैव कुटुंबकम इस भावना को आपको आत्मसात करना चाहिए पूरी वसुधा ही हमारा कुटुंब है ना यह मेरा है ना यह तेरा है यही इस पॉडकास्ट का सम टोटल
(1:03:46) है बहुत-बहुत धन्यवाद हो सकता है कि भविष्य में फिर आपसे किसी ऐसी शख्सियत के साथ मुलाकात हो जिसका पडकास्ट करने का मुझे मेरी आत्मा को आत्मा स्वयं कहे कि इनका जरूर पॉडकास्ट करना करना चाहिए और आप सभी तक भेजना चाहिए। मैं समझता हूं कि आपके पास भी बहुत सारा विचार होगा। आपका विचार संप्रेषण का एक अनन्य माध्यम है मुझ तक पहुंचने का। अपेक्षा करते हैं। हम अन्य वीडियो में जरूर मिलेंगे। तब तक के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। ओम शांति शांति शांति

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