Sunday, July 26, 2026

Marriage is dangerous? Our ancestors disagree! | Ft. Ami Ganatra

Marriage is dangerous? Our ancestors disagree! | Ft. Ami Ganatra

Author Name:TheBohoSapiens

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@thebohosapiens

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=d13MrP-o1G0



Transcript:
(00:00) लड़कियों के लिए ज्यादा रूल्स हैं। मंगलसूत्र पहनो, सिंदूर लगाओ। पीरियड्स के समय पूजा नहीं कर सकते, किचन में नहीं जा सकते। एंड एंडलेस [संगीत] लड़कों के लिए नहीं है। ऐसे करोगे तो पाप लगेगा। इजी आपको और कुछ एक्सप्लेन नहीं करना है। पर हमेशा तो कोई मानेगा ऐसा नहीं। हम पूछेंगे क्यों भाई काहे को पाप लगेगा? किसी का बुरा कर रहा है क्या? पर लड़की ने फ्रॉक पहन लिया, पैंट पहन लिया तो बोलेंगे अरे संस्कार चले गए। संस्कार रखने का ठेका तो लड़की तूने तो नहीं रखा है। हो क्या गया है? लड़के करते नहीं है। एक्सपेक्टेशन ज्यादा लड़कियों से ही रखा जाता है। लड़के तो जो
(00:29) भी है करेंगे। [संगीत] हमारे किसी भी पुस्तक में, किसी भी ग्रंथ में ऐसा देखा है कि पाक कला वास एक्सक्लूसिव टू वुमेन। नो भीम भीम वाज़ एन एक्सीलेंट कुक। इनफैक्ट जब वो लोग वनवास में भी थे या उसके बाद जब अज्ञातवास में थे तो भीम ने क्या काम किया? रसोई का काम किया। आज भी बहुत सारे जो शेफ्स है वो कौन है? फेमिनिज्म जो शुरुआत हुआ वो कैसे हुआ? वोटिंग राइट्स के लिए संघर्ष है वो शुरू हुआ। एज अ थियोलॉजिकल नहीं अब्राहमिक रिलिजन में कहा जाता है ना वो तो आधी ही है। आधी बुद्धि है। तो उनको वोटिंग राइट्स नहीं थे। टोबैको सिगरेट्स वाले यूएस में
(01:07) ये सब शुरू हुआ। तो उनको लगा यार ये तो 50% मार्केट है। ये लोग स्मोक नहीं करते हैं। इफ वी टेल देम दैट आप ये करो भी दैट इज दिस स्मोकिंग इज एम्पॉवरमेंट। व्हाट अबाउट द मैन हु वांट टू टेक केयर ऑफ़ कम। रोज घर पे पहुंचे उसके पहले वो बच्चा सो रहा है। पहचानते नहीं है। पिताजी को देखा नहीं है दिन तीन-तीन चार-चार दिनों तक। क्या उसको वो आवश्यकता नहीं है? देन व्हाई आई मेक इट मैस्कुलिन नॉट फेमिनिन। लोगों को बहुत बुरा लगता है जब मैं कई बार इस बारे में बात करती हूं। कुछ तो गड़बड़ हुई थी ना [संगीत] कि वो संयुक्त परिवार टूटने लगे।
(01:38) अब्सोलुटली। संयुक्त परिवार का जो फंडा [संगीत] था सपोर्ट सिस्टम का उसके बजाय वो ट्रॉमा पासिंग हो गया। प्रॉब्लम संयुक्त परिवार की नहीं है। प्रॉब्लम जो आश्रम व्यवस्था के टूटने [संगीत] की है वो है। थैंक यू सो मच फॉर कमिंग अमित जी। वी हैव टेकन अबाउट होल डे ऑफ़ इयर्स एंड वी हैड अ ग्रेट कन्वर्सेशन इवन बिफोर दिस पडकास्ट। आपका स्वागत है। बहुत-बहुत आभार। जैसे ही मैंने एंटर करा ना तो आपका ये सेटअप इतना सुंदर है। आई ऑलरेडी शोल्ड यू राइट। लवली लवली गुड जॉब। थैंक यू। वि सेटिंग दिस अप। ग्रेट। आप ही के साथ में इसका शुभारंभ होना था।
(02:17) दिस वास डेस्टिन। कुछ साल पहले आई रेड योर बुक रामायण अनरेवल्ड और महाभारत अनरेवल्ड। बट देन आप उस पुस्तक के बाद देन यू केम टू राइटिंग फॉर चिल्ड्रन। बच्चों के लिए आप पुस्तक लिखने लगे। तो ऐसा क्या हुआ कि आपको लगा कि बच्चों के लिए मुझे पुस्तक लिखनी है। तो जब रामायण महाभारत आई। इनफैक्ट जब रामायण महाभारत लिखी उसके पहले भी मैंने ये नहीं सोचा था कि मुझे लिखना लिखना है। भाई कई बार यह होता है ना कि चीजें हो रही होती है और आप निमित्त बन जाते हो। आई थिंक ऐसा हुआ। आई वास ऑलरेडी स्टडीिंग बहुत टाइम से क्योंकि मुझे प्रश्न बहुत सारे थे और फिर
(02:53) लिखने का अवसर मिला मुझे प्रवीण तिवारी है। मैं हमेशा कहती हूं अब तो ही इज़ अ वैरी गुड फ्रेंड। उस समय ही वाज़ अ पब्लिशर वि डम्स और उन्होंने मेरे कुछ ब्लॉग्स पढ़े होंगे, मेरे कुछ पोस्ट पढ़े होंगे। जैसे ही रीच्ड आउट एंड ही सेड कि आप लिखते क्यों नहीं हो? एंड मैंने कहा यार महाभारत रामायण पे तो इतना लिखा जाता है। ही वास लाइक सारा फिक्शन होता है। आप जो बात कर रहे हो वो तो एक्चुअल वेदव्यास और वाल्मीकि जी वाले इतिहास की बात कर रहे हो तो आप लिखो। तो उससे शुरू हुआ एंड फिर महाभारत हुआ। फिर पार्ट टू हुआ उसका और फिर रामायण हुआ। फिर उन्होंने ही कहा।
(03:27) इनफैक्ट बहुत सारे लोग कह रहे थे। अब बच्चों के लिए कुछ लिखिए। बच्चों को बच्चों तक यह बातें पहुंचानी आवश्यक है। तो यह मन में था कहीं। पर वन पॉइंट फिर प्रवीण मूव्स टू ब्लू वर्निंग एंड ही इज लाइक अम्मी बच्चों के लिए कुछ करना है। तभी मेरे मन में एक कथा थी तो मैं टॉक्स के लिए जाती थी ना बाय देर तो कई बार बच्चों के साथ होती तो भागवत पुराण की एक कथा है जो अवधूत की है वेदांत से रिलेटेड वो ज्ञान है। अवधूत जो है वो हमेशा खुश रहते हैं और कैसे खुश रहते हैं? तो वो कहते हैं मेरे मेरे जो बहुत सारे शिक्षक मेरे गुरु मुझे पढ़ाते हैं। तो यदु
(04:05) राजा उनसे पूछता है कि कौन है आपका गुरु? मुझे बताइए मैं भी उनके पास जाना चाहता हूं। और अवदूत कहता है अरे कोई एक नहीं है मेरे 25 गुरु हैं और वो प्रकृति के अलग-अलग वस्तुएं जो है किसी देखिए आप किसी से भी सीख सकते हो। अगर आपका मन का भाव है सीखने का कि यू आर ओपन माइंडेड हो ना तो किसी से भी सीख सकते हो। तो वो वेदांत दर्शन की बात करते हैं कि कैसे वो सीख रहे हैं। तो मैंने सोचा ये कांसेप्ट इतना प्यारा है ये बच्चों में अगर बचपन से वो क्यूरियोसिटी होगी कि आप पेंसिल से भी सीख सकते हो आप पेयर से भी सीख सकते हो आप कुत्ते से भी सीख सकते हो जो बच्चों को
(04:40) समझ आया तो मैं जनरली वो कथा कहा करती थी एंड बच्चों को बहुत मजा आता था उसमें क्योंकि इट वुड बी लाइक अ क्यूएनए कि भाई बताओ आप पेयर से क्या सीख रहे हो और वो अपने-अपनी आइडियाज देंगे तो मैंने कहा लेट्स यूज़ दैट एनीवेज भागवत पुराण से है तो थोड़ा सा उसे बच्चों के लिए अडप्ट करके सो दैट्स हाउ अवधूत हैपेंड और उसका बहुत अच्छा रिसेप्शन हुआ। लोगों को बहुत अच्छा लगा। फिर वही आया कि एक बार शुरू करो तो फिर हो ही जाता है। तो अब बच्चों की चार पुस्तकें आ गई। सो दैट्स हाउ इट हैपन। एंड इट्स अमेजिंग। तो हमारे साथ में एक और स्टोरी टेलर जुड़ी हुई हैं जो बच्चों के
(05:14) लिए छोटे बच्चों के लिए स्टोरी टेलिंग करती हैं। स्कूल्स के साथ में भी जाके और अलग से। तो कुछ दिन पहले उन्होंने एक बुक लेकर आई थी वो। उन्होंने बुक दिखाया मैं। उस बुक का नाम था असुरा टेल्स। हम अब अ इट वा इट पास जस्ट पास्ड बिफोर माय आइज बट उदित सेंस समथिंग ही सेड कि असुरा टेल्स क्यों है? व्हाई इज असुरा द लीड प्रोटागोनिस्ट हियर वो हीरो क्यों है? तो फिर हमने और रिसर्च किया और उन ऑथर के बारे में फिर पता चला उनकी बहुत सी बुक्स हैं जिनमें ही हैज़ प्रमोटेड फ्रीक्वेंटली द डिवीज़ ऑफ ब्राह्मणिकल एंड द ड्रविडियन वाले डिवीज़ को प्रमोट किया गया है। सो दैट
(05:57) फ्लैग्ड अस कि यहां यहां पे भी बहुत ज्यादा कल्चरल इन्वज़न हो रहा है बच्चों के दिमाग से ही। और उन उन राइटर्स की जब हमने यह जो रिसर्च की, तो हमने यह भी पाया कि एक सिस्टमैटिक प्रमोशन ऑफ असुराज़ इज देयर। अब असुर कौन है? क्या असुरों की कथा, उनकी कहानी बच्चों को हम ऐसे प्रेजेंट कर सकते हैं। हालांकि उस बुक में ऐसा कुछ नहीं था जो बहुत रेडिकलाइज करने वाला हो। बट देन यही सेम स्टोरी तो बाल गणेश की है, बाल हनुमान की है बट पात्र बदल गया है। पात्र वहां असुर आ गया है। एंड दैट वास अ क्वेश्चन मार्क कि यह क्या हो रहा है? तो मुझे पता है आप किसकी बात कर रहे हो?
(06:43) जी ओके जी कई बार क्या होता है ना ऑथर्स अपनी क्रिएटिविटी। सो इट्स क्रिएटिव राइटिंग राइट? असुर क्योंकि एक नॉर्म है जिसमें हम टिपिकली समझते हैं कि असुर जो है वो विलंस है। ये समझा जाता है और जो देवता है वो हीरोज़ हैं और उनके बीच का युद्ध। ये हमारे बहुत सारे कथाओं का यही थीम रहा। तो जब आप क्रिएटिव राइटिंग करते हो तो आपको लगता है नहीं ऐसा क्यों? जरूरी थोड़ी है कि वो बुरे ही हो। एंड आप देखिए जिस प्रकार से कॉलोनियल हिस्ट्री लिखी जाती है तो उसमें कैसा है कि वी से ना कि जो जीतता है वही अपनी कथा लिखता है। द विक्टोरियस द हिस्ट्री इस
(07:24) रिटन बाय विक्टर्स। ऐसे कहते हैं। तो जब अपने लिख अपनी विक्टर्स अपनी हिस्ट्री लिखेंगे तो वो अपने को तो हीरो ही बनाएंगे। राइट? कॉलोनियल हिस्ट्री वैसे लिखी गई है और हम जानते हैं ये कि अपने आप को हीरो बताने के लिए और जिनको आपने हरा दिया वो सही है कि गलत का प्रश्न ही नहीं है। पर वो विलेन हो गए। आप उनके लिए कहानियां घड़ेंगे उनको बुरा दिखाने के लिए। अब क्या होता है? वही लेंस आप अगर हमारी कथाओं पर लगाओ तो हम भी कह सकते हैं हां यार बात तो वही है जिसे हम बुरा कह रहे हैं हो सकता है वो अच्छे हो पर ये तो देवता जीत गए इसीलिए उनको बुरा बना दिया गया राइट अब
(08:00) सोशियोलॉजिकली या कॉलोनियल इंपीरियल हिस्ट्रीज आप देखो तो वो एक चीज है हमारी जो कथाएं हैं वो किसी को ग्लोरिफाई करने के लिए या किसी को बुरा बनाने के लिए नहीं कि ओ असुर प्रजाति बुरी देवता प्रजाति अच्छी दैट वास नॉट द पर्पस एट ऑल दी कथास वर मेंट टू टीचर्स वैल्यूस जो हम मूल्यों का सिंचन कहते हैं वो ये कथाएं हैं। अब देव और असुर देव और असुर बच्चों के लिए या इवन कथाओं में तो आप देव असुर ऐसे दिखाओगे परंतु आसुरी संपत और दैवी संपत इसका एक भगवत गीता में एक पूरा चैप्टर है कि दैवी संपत क्या है और आसुरी संपत क्या है दीज़ आर पर्सनालिटी गुणास
(08:41) या ठीक है कि जिसमें शांति हो ज्ञान पाने की जिज्ञासा हो क्षमा भाव हो सच बोलने सच बोलना अहिंसा इसके प्रति जिसकी टेंडेंसी हो वो पर्सनालिटी जिसे हम सात्विक पर्सनालिटी कहते हैं। ठीक है? उसे दैवी गुण संपत कहा जाता है कि उसमें ये देवता गुण ऐसे कहा जाता है। आसुरी किसे कहा जाता है? जिसमें बहुत ज्यादा रजस तमस हो, गुस्सा बहुत ज्यादा आता हो, लोभ बहुत ज्यादा हो, किसी की छीन लेने की टेंडेंसी हो। इसको आसुरी संपत कहते हैं। अब इसको जब आप एक्सटेंड करो तो जिन लोगों में ऐसे गुण थे। ठीक है? जो बहुत क्रोधी थे, बहुत लोभी थे, उनको असुर कहा गया।
(09:27) जिनमें गुण ऐसे हैं कि भाई वो लोग अच्छा बोलने वाले थे, ऐसे कार्य करते थे जिससे समाज का अच्छा हो। उनको देव कहा गया कथाओं में। है ना? तो देव असुर का जो देव और असुर का जो फर्क है वो गुणों का फर्क है। सोसाइटीज ग्रुप्स का फर्क नहीं है। वो तो फिर कथाओं में हो जाता है। बट कोई सोशल ग्रुप को आप बुरा बोल रहे ऐसा नहीं है उन व्यक्तियों को जिनमें वो गुण है वो दिखाने का प्रयत्न करो देवता और असुरों की जो कथा है वो असुर वो देखिए हमेशा कैसे होता है कथा में और ये कथा हर जगह जगह आती है फिर आप दुर्गा जी की कथा देख लो विष्णु पुराण
(10:04) देव शिव पुराण सब में आता है देवता जो है वो क्या करते हैं देवता एक तो हम किसे कहते हैं जो इंद्र वरुण वायु सूर्य ये सारे प्रकृति के देवता या एनर्जी जिसके कारण समाज चलता है ये जो वर्ल्ड है वो चलते चलते रहता है। है ना? प्रकृति चलते रहती है। जीवन है, बारिश आती है। ये सब महत्वपूर्ण है। जीवन चलता रहे उसके लिए। असुर क्या करते होते हैं? वो चाहते हैं कि वो देवताओं का काम ले ले। ठीक है? और वो जब स्वर्ग पे आक्रमण करते हैं। कथा ऐसी होती है कि वो जब स्वर्ग पे आक्रमण करते हैं तब इमंबैलेंस हो जाता है। इंद्र का आसन डोल जाता है।
(10:38) हां। इंद्र का आसन तो जब डोल जाता है तो क्या होता है? आंधी आने लगती है। है ना? पानी उड़ने लगता है या तो कहीं फेमिन आ जाता है। जीवन धरती पे जीवन नाश हो जाता है। तो वो क्या है कि एक साइड की एनर्जी ऐसी है जो प्रिजर्व कर रही है। दूसरे साइड की एनर्जी ऐसी है जो डिस्ट्रॉय कर रही है। इन दोनों के बीच का संग्राम है वो देवासुर संग्राम है। ठीक है? अब उनको कुछ नाम दिए गए हैं और उनकी कथाएं हैं। अब सिर्फ क्रिएटिव राइटिंग के लिए कोई कहे नहीं नहीं असुर है उसे भी आप रियल मानकर उसको आप ग्लोरिफाई कर दो। क्रिएटिव राइटिंग के लिए ठीक है। पर मुझे लगता है
(11:20) बच्चों के लिए ना ये कई बार बहुत डेंजरस इसलिए भी हो जाता है क्योंकि हम आप हम उनको ये कह रहे हैं कि जो विलंस जिनको बताया गया है उनके गुणों के कारण वो एक्चुअली लोगों ने इंपोज कर दिया है। है ना? वो कोई बुरे नहीं थे। और जिनको आप हीरो मान रहे हो जिनसे आपको आपके घर वाले कह रहे हैं कि सीखना चाहिए वो कोई हीरो ही नहीं थे। अब इसमें आप देखो बच्चों के मन में आइडेंटिटी क्राइसिस कितनी हो जाती है। बिकॉज़ ये जो हीरोज़ और विलेनंस हैं वो केवल नाम के लिए धुरंधर में देख लिया ऐसे नहीं है। ये हमारे इष्ट स्थान भी हैं। हमारे जिनको हम पूछते हैं। है ना? जिनसे सीखने
(11:55) के लिए। तो अब आप अब आपने ये कह दिया कि उनसे सीखने जैसा कुछ है ही नहीं। अच्छे तो ये लोग भी थे। है ना? फिर आप गुण क्या है? सही क्या है? गलत क्या है? वो कैसे बताओ? कौन से एग्जांपल का लेकर बताओ? राइट? तो जब आप विलंस को ग्लोरिफाई करने लगते हो तो ये गुणों का कंफ्यूजन हो जाता है सोसाइटी में। फिर आपको लगता है इसमें बुरा क्या है? है ना? रावण भले ही कितना ही बुरा था। उसमें भी अच्छी बातें तो थी। तो कोई कुछ खास बुरा नहीं है वो। रावण को तो ऐसे ही बुरा बोल दिया गया है। अब उसका फिर नेक्स्ट स्टेप क्या होता है? उसके ग्लोरिफिकेशन में और कथाएं बनती है।
(12:31) जो उसे और अच्छा कहा जाती है। जब तक रावण को अच्छा बोलने की बात है तब तक तो ठीक है। उसके ऑोजिट में क्या होता है? बिकॉज़ हीरो और विलेन तो चाहिए तो विलेन कौन बन जाते हैं? श्री राम है ना? और कथाएं उनके घड़ी जाती है कि भ वो तो बुरा ही कर रहे थे। उन्होंने तो बिना वजह रावण को मार दिया। श्री राम और रावण का युद्ध कोई धर्म अधर्म का युद्ध नहीं था। वो तो आर्यन द्रविड़ का युद्ध था। ऐसे हो जाता है। फिर वो बच्चों तक सीमित नहीं है। फिर तो ये सोशल स्ट्रगल हो जाता है ना। आपने वो डिवाइड एंड रूल वाला सीड शो कर दिया कि जो वहां साउथ के हैं उनको लगता है हां ये तो
(13:07) नॉर्थ इंडियंस हम पर राज करने आए थे। हमारा राजा कोई बुरा नहीं था। पर ये तो वो हम पर एक्सपेंशनिस्ट जैसे अंग्रेज आ गए वैसे ये हम पर एक एक्सपेंशनिस्ट के तौर पे इन्होंने हम पर आक्रमण कर दिया। तो आपने हमेशा के लिए साउथ इंडियंस और नॉर्थ इंडियंस को लड़ा दिया। राइट? जबकि वाल्मीकि रामायण में आर्य शब्द अनार्य शब्द का उपयोग हुआ है। ठीक है? आर्य किसे कहा गया है? रावण की पत्नियां रावण को भी आर्य कहती हैं। इनफैक्ट रावण भी खुद को आर्य कहता है। रावण जब विभीषण जब विभीषण बता कह रहे हैं रावण को कि आप जो कर रहे हो वो ठीक नहीं है। तो रावण को ऑब्वियसली गुस्सा आता है
(13:44) क्योंकि किसी ने कभी कहा ही नहीं है कि तुम गलत कर रहे हो। वो अहंकार इतना है। तो वो तो वो विभीषण को कहते हैं कि तुम तो अनार्य हो। तुम मुझसे जलते हो। ठीक है? इसलिए रावण तो खुद को आर्य ही मान रहा है। वो अपने आप को अनार्य और द्रविड़ और ये कुछ नहीं मान रहा। वो अपने आप को आर्य मान रहा है। वो अपने आप को सेम आर्य अगर आप प्रजाति भी कहो तो उसी से मान रहा है जैसे श्री राम भी है। वो कोई अलग ग्रुप नहीं है। सिमिलरली सुग्रीव जो वानर जो हैं वन वानर वनचार्यणः जो वन में रहने वाले जो ग्रुप्स थे उनके पत्नियां भी उनको आर्य ही कह रही
(14:16) हैं। क्योंकि आर्य इज नॉट अ रेशियल शब्द। आर्य इज अ जैसे हम आज कहते हैं ना अ जेंटलमैन भद्र पुरुष। भद्र पुरुष उसके उसका कहा गया है। जब कैकई ने कहा कि भ राम को वनवास भेज दो तो दशरथ उनको कह रहे हैं कि तुम अनार्यों जैसा क्यों बिहेव कर रही हो? पर रावण खुद को ये नहीं मान रहा। तो एक्चुअल अगर आप टेक्स्ट पढ़ो ठीक है? तो उसमें देवासुर क्या है वो भी क्लियर हो जाएगा। गुणों से रिलेटेड है वो क्लियर हो जाएगा। आर्यन द्रविडियन ऐसा कोई डिवाइड है ही नहीं वो क्लियर हो जाएगा। राइट? पर जब आप ऐसे बुक्स लिखते हो तो एक नैरेटिव तो होता ही है। भले ही आपका कोई भी एजेंडा या
(14:52) प्रोपगेंडा रहा हो। तो ऑफ कोर्स हम हमारे यहां क्रिएटिव लिबर्टी हमेशा से रही है। इसलिए मैं ये नहीं कहती कि वो बुक्स को बैन कर दो या ऐसे कुछ ऐसा नहीं होना चाहिए। पर जो पढ़ते हैं उनको तो उतना जागरूक होना ही चाहिए। तो बेसिकली हिस्ट्री को डिस्टोर्ट करने का मोटिव है मेंटल कंफ्यूजन क्रिएट करना लोगों के माइंड में। और बच्चा तो छोटा है। वो तो कन्फ्यूजन को अपने कॉन्फ्लिक्ट्स को खुद तो डाइससेक्ट कर नहीं सकता। इसलिए इसलिए मां-बाप क्या पढ़ते हैं, क्या पढ़ाते हैं उनको पता होना आवश्यक है कि आप बच्चों को क्या पढ़ा रहे हो। हमको ऐसा
(15:28) नहीं है कि हमको किसी के लिए बुरा फीलिंग कराना है। आज कौन है जो रावण के फैमिली से ऐसा तो कोई है नहीं कि हम उनको विक्टिमाइज कर रहे हैं। ऐसा तो कुछ है नहीं। ये गुणों की बात है। तो श्री राम स्टैंड्स फॉर सर्टेन गुणास। रावण स्टैंड्स फॉर सर्टेन गुणास। रावण का फॉल होने का कारण उसका आर्यन या द्रविणी होना नहीं है। रावण के पतन का कारण उसका खुद का स्वभाव है। उसका अहंकार है। राइट? और कुछ नहीं है। पर आप बच्चों को वो समझा ही नहीं रहे हो। आपने सीधा ही उससे शुरू कर दिया कि नहीं वो तो अलग ग्रुप है। आपको नफरत नहीं होनी चाहिए।
(16:02) बात नफरत की है ही नहीं। बात गुणों की है तो यह पर्सपेक्टिव आने की आवश्यकता है और यह बड़े कमाल की बात है। हमारे जो दो बड़े एपिक ग्रंथ है रामायण उसका दूसरा स्वरूप रामचरितमानस और महाभारत ये लिखे ऐसे गए हैं कि ये टाइमलेस है यानी कि यह स्वभाव ये गुण ये प्रवृत्तियां आपकी समय-समय पर किसी कालखंड में ऊपर जाएंगी नीचे जाएंगी। कभी आप तामसिक होंगे, कभी राजसिक होंगे। हर चीज को एड्रेस किया गया है वहां पे। बट हम इसको कथा स्वरूप ले लेते हैं और रेलेवेंस ही नहीं ढूंढ पाते। वि मींस कि आज के परिपेक्ष में अगर एक ऑफिस में कोई परेशान है अपनी जॉब से देयर
(16:41) मस्ट बी समथिंग दैट यू कैन एक्सट्रैक्ट फ्रॉम दीज़ एपिक सागास। कथा तो क्या एक चीज बताती हूं। ये जब मैं कॉर्पोरेट में थी तब की बात है। 2014-15 के आसपास 15-16 के आसपास। अ मैं ना एक जर्मन केमिकल कंपनी में काम करती थी और हमारा एक फास्ट ट्रैक लीडरशिप प्रोग्राम होता था। तो आई वास चोजन फॉर द फास्ट ट्रैक लीडरशिप प्रोग्राम। तो पूरे विश्व से क्योंकि दिस वास अ ग्लोबल कंपनी तो पूरे विश्व के हम कुछ 20 लोग थे जिनको सेलेक्ट किया गया था और हमारी एक स्पेशल ट्रेनिंग हुई थी। तो जर्मनी के एक वहां तो विलेज कहते हैं बट दे आर लाइक ब्यूटीफुल।
(17:20) ठीक है? बहुत अच्छे से सारी सुविधाएं होती है सब कुछ। तो वहां पे एक विलेज रिसोर्ट था जहां तीन दिन की ट्रेनिंग थी। काफी अच्छी ट्रेनिंग थी। तीसरे दिन जो हमारे ट्रेनर थे हु वाज़ अ ब्रिटिश पर्सन यूके से आए थे तो हमारी कंपनी ने बहुत पैसा खर्च किया था। वाज़ टॉप नच लीडरशिप फर्म और तीसरे दिन आई वेंट अप टू हिम। तो वो 20 जन में हम दो जन इंडिक ओरिजिन के थे। भारतीय मूल के थे। तो उनके पास मैं गई और मैंने कहा कि सर द टू डेज वर फैंटास्टिक। एंड आई कुड रिलेट टू अ लॉट ऑफ़ व्हाट यू आर ट्राइंग टू टेल अस कि मुझे समझ आपने जो कहा उससे मैं बहुत रिलेट कर पा रही हूं
(17:56) क्योंकि आपने बहुत कुछ कहा ना वो हमारा एक सीक्रेट ग्रंथ है। मैं उनको बता रही हूं कि हमारा एक सीक्रेट ग्रंथ है जिसको भगवत गीता कहा जाता है। उसमें भी ऐसी परिस्थिति थी। अर्जुन नाम का एक योद्धा है। ही वास कंफ्यूज्ड अबाउट व्हाट वाज़ हिज धर्म हिज ड्यूटी बिकॉज़ देयर वर डिफरेंट प्रायोरिटीज़। क्योंकि हमारा ट्रेनिंग वाज़ ऑल ऑन एथिक्स एंड प्रायोरिटीज़ एंड ऑल दैट। ठीक है? उसकी अलग-अलग प्रायोरिटीज़ थी। एंड देन कृष्णा वॉक्स हिम थ्रू इट कि कैसे डिसीजन लेना है। तो आई ऑलमोस्ट फेल्ट लाइक दिस ट्रेनिंग वास लाइक दैट। मुझे लग रहा था मैं कितना बता रही हूं कि देखो आई मेड
(18:29) अ कनेक्शन कि वाओ यू नो हमारे साथ मिलताजुलता है। तो आई वास वै हैप्पी कि देखो सेम सेम है। वो ब्रिटिश बंदा मुझे देखता है ही स्माइल्स एंड ही लाइक अमीन आई स्पेंट फोर इयर्स इन ऋषिकेश स्टडिंग द भगवत गीता एंड द वेदांता। ठीक है? हमको लगता है कि यह क्या वो रिटायर होकर होने के बाद वाले पढ़ने वाले ग्रंथ हैं। कोई गुजर जाता है तो पाठ होता है तभी पढ़ने वाले ग्रंथ हैं। जबकि गिव इट टू देम। वो लोग ने हमारे ग्रंथों का रेलेवेंस समझा और उससे पैसा भी बना रहे हैं। ठीक है? वैल्यू वैल्यू भी दे रहे हैं। है ना? उसे सिखा भी रहे हैं। उससे पैसा भी बना
(19:11) रहे हैं। अब अगर मैंने पूछा नहीं होता तो उन्होंने कहा नहीं था कि मैंने भगवत गीता से सीखा है। वाइट लेबलिंग। हां? वाइट लेबलिंग। फिर भी तुम सोचो वो यूज़ तो कर रहे हैं। है ना? उनको वैल्यू दिखा। हमको हमारे ग्रंथों का वैल्यू नहीं दिख रहा। एक्जेक्टली। राइट? हम भाई फिर अगर ये बताऊं ना मैं तो Twitter पे सपोज ये चीज मैं डालूं। तो सब लोग गौरव को गाली देने लगेंगे। वो हमारा एप्रोप्रियेट कर रहे हैं। ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। वो एक चीज है। ठीक है? वो कैसे एप्रोप्रियेट कर पा रहे हैं? क्योंकि आपने कुछ किया ही नहीं ना। हम आपने अगर आपके पास ऑलरेडी आपने कुछ बना
(19:47) दिया होता यह रेगुलर ट्रेनिंग हमारे यहां होती कि भगवत गीता से आप कर रहे हो कॉर्पोरेट ट्रेनिंग्स वगैरह तो कोई कैसे एप्रोप्रिएट कर सकता था कोई नहीं कर पाता था राइट पर हमने कुछ किया ही नहीं हमको लगता है कोई गुजर गया उसके वक्त पढ़ने का ग्रंथ है कितने सारे यंगस्टर्स जब पढ़ते हैं तो आज भी देखिए माता-पिता कहेंगे कि भ स्यास ले रहा है क्या ऐसे कहेंगे ये सब क्यों पढ़ रहे हो तो बट लोगों को तो रेलेवेंस है जो आपका प्रश्न है बहुत ज्यादा रेलेवेंस है और क्यों रेलेवेंस है क्योंकि अगर हम भगवत गीता ही देखें तो अर्जुन क्या किस परिस्थिति से गुजर रहा है उसे
(20:24) निर्णय लेना है ना एक तरफ परिवार है एक तरफ उसका राजधर्म है कि जो अन्याय है उनको आपको दंड देना है वो राजा का कर्तव्य है पर जो अन्याय है वो खुद का परिवार है और हर एक मनुष्य का अपने परिवार के प्रति भी तो कर्तव्य है तो परिवार को मारो ये तो कहीं नहीं लिखा राइट तो आप कौन सा धर्म कुटुंब धर्म और राज धर्म किसे प्रायोरिटी दो उस समय दोनों ही महत्वपूर्ण है राइट तो इसे हम क्या कहते हैं धर्म संकट एथिकल डायलेमा राइट आप क्या करो उस समय और दोनों महाभारत और रामायण में मैं में प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक व्यक्ति इसी धर्म संकट से गुजर रहा है। आप धृतराष्ट्र को देख लो।
(21:07) उन्होंने निर्णय क्या लिया वो दूसरी बात है। पर स्ट्रगल क्या है कि एक तरफ बेटा है दूसरी तरफ राजधर्म है। है ना? बेटे को खुश करने में यह भूल गया कि भाई वो राजा भी है। और बेटे को खुश करने के चक्कर में पूरे परिवार का विनाश करा दिया। पर था तो धर्म संकट ही। राइट? श्री राम लो, दशरथ लो, कुछ भी। दशरथ जी ने अपने निर्दोष बेटे को वनवास भेज दिया। ठीक है? हम कहते हैं श्री राम पिताजी की बात मानी। वो तो श्री राम ने करी पर दशरथ जी ने क्या किया? एक तरफ प्रजा को जो वचन दिया था कि राम को मैं राजा बनाऊंगा। दूसरी तरफ पत्नी का दिया हुआ वचन। ज्यादा प्रायोरिटी किसकी है? वो
(21:46) भी धर्म संकट था। और वही तो आज भी हम गुजर रहे हैं उसी धर्म संकट से। आप लोग अपना वेंचर कर रहे हो। अभी हम जब बात कर रहे थे इसके पहले है ना? आपका खुद का वेंचर है। आपने रिस्क लिया हुआ है। ठीक है? शायद अगर आप जॉब करते तो यू वुड हैव अ फिक्स सैलरी जो आती है ना? ये सब आप नहीं करते। यू वुड हैव योर लाइफ। आप मजे करते, बाहर जाते, सब कुछ है। आपने यह मार्ग चुना, जो रसावर आप जो कर रहे हो, जो स्टोरी टेलिंग का कर रहे हो, कल्चरल स्टोरी वो मार्ग आपने चुना वो कठिन है। इट वाज़ आल्सो अ डिसजन यू मेड। एंड जब आपने ये डिसीजन लिया तो आपने कुछ
(22:21) छोड़ा भी। दिस इज़ द ट्रेड ऑफ़ वी आर ऑलवेज मेकिंग। अब ये नहीं कह रहे कि जो जॉब करने जाता है वो गलत है। बात वो नहीं है। पर हर बंदे को अपने लिए वो डिसीजन लेना है। पर वो कैसे लो? राइट? किसी किसी के जीवन में फैमिली रिस्पांसिबिलिटीज बहुत ज्यादा है। तो उस समय आप कहोगे कि नहीं आपका पैशन फॉलो कर रहे हो। आप कहेंगे नहीं पहले वो निभाओ फिर देखेंगे। राइट? तो ये परिस्थिति सबकी अपनी-अपनी है। गीता, महाभारत, रामायण क्या बताते हैं कि इन परिस्थितियों में आप सोचो किस प्रकार? कैसे सोचोगे तो क्या होगा? ट्रेड ऑफ तो हर एक में है। कौन सा ट्रेड ऑफ लेने को आप
(22:56) तैयार हो? और निर्णय किस भाव से आ रहा है? क्या उस भाव से आ रहा है कि भाई मैं सही कर रहा हूं या गलत कर रहा हूं या उस भाव से आ रहा है मुझे क्या चाहिए मेरा ईगो क्या कहता है मुझे कैसे कह दिया उनके पास मुझसे ज्यादा कैसे है उस भाव से आप निर्णय ले रहे हो या ये सोच के ले रहे हो कि भाई हम सबके लिए क्या अच्छा है समाज की प्रगति कैसे होगी उसके लिए क्या कर रहे हो तो किस भाव से निर्णय ले रहे हो उससे आपका उत्तर सेम भी रह सकता है बदल भी सकता है बट दैट प्रोसेस एंड कल्टीवेटिंग द माइंड। कोई भी निर्णय लेने के लिए आपकी आपका मन और बुद्धि व्यवस्थित होना चाहिए।
(23:35) राइट? उस मन और बुद्धि को कैसे आप सीख से लाओ, ठीक से लाओ, समझाओ, क्या सोचो वो सब सीखना आपको महाभारत, रामायण, भगवत गीता से मिलता है। और इसीलिए आज भी वो रेलेवेंट है। आज भी उतना ही स्ट्रेस है। आज भी धर्म संकट है, सब कुछ है। युद्ध नहीं करना बाकी रोज का युद्ध तो लड़ना ही है। अच्छा दूसरी क्या बात हुई है? इसे मैं नेगेटिव भी नहीं कह रही बट कई बार उसका असर नेगेटिव हो जाता है। जब कोई गोरा या कोई बाहर वाले इसे पढ़ते हैं हमारे टेक्स्ट को तो वो उसे केस स्टडी के रूप में देखते हैं। स्पेशली वो पढ़ना चाहते हैं उनके साइड के प्रोपगेंडा वालों की मैं
(24:11) बात नहीं कर रही हूं। ठीक है? जो सोशल नैरेटिव वाले बात करते हैं उनकी बात मैं नहीं कर रही हूं। पर जो सीखना चाह रहे हैं जो हमारे ग्रंथों को यूज़ भी कर रहे हैं। सीख रहे हैं उनसे। वो लोग इसे कैसे देखते हैं? केस स्टडी के रूप में देखते हैं। तो क्या सीखना है वो आसानी से आ जाता है। हम हमारे में क्या हो गया? क्योंकि भक्ति भी इनवॉल्वड है। राइट? तो उसके कारण एक्चुअल महाभारत रामायण ना पढ़कर मतलब इतिहास ना पढ़कर उनके ऊपर लिखे गए बहुत सारे जो भक्ति ग्रंथ है वो हम पढ़ते हैं। जब भक्ति ग्रंथ का एक भाव होता है जो समर्पण भाव है। अपने स्थान पर वो सही है।
(24:45) परंतु हर चीज आप उसी दृष्टि से नहीं देख सकते। इसके कारण जिस नजरिए से हम देखते हैं महाभारत रामायण तो फिर महाभारत का युद्ध अह अह कृष्ण रोक सकते थे। उन्होंने नहीं रोका। ऐसी बात होती है। रादर देन थिंकिंग अबाउट इट इंटेलेक्चुअली कि भाई क्यों नहीं रोका? उनका क्या रोल था? ठीक है? कृष्ण ने किया तो ठीक होगा या राम ने किया तो ठीक होगा। हां राम ने किया तो ठीक होगा। पर क्या उनका प्रोसेस आप समझ पा रहे हो ताकि आपके जीवन में आए तो आप उनके अनुसार निर्णय ले पाओ। श्री राम और श्री कृष्ण हमारे लिए भगवान ही है। पर वो भगवान मनुष्य अवतार में है।
(25:19) मनुष्य अवतार में होने का कारण ही यही है कि हम उनसे सीख पाए। राम ने किया तो हमें कुछ नहीं करना। ऐसा नहीं होना चाहिए वो। राइट? नहीं तो तो उनको जरूरत ही नहीं थी मनुष्य अवतार में भाग लेने की। वो तो ऊपर बैठ के ही कुछ भी कर सकते थे। है ना? तो मनुष्य अवतार में ताकि हम उनसे सीख पाए। ये हमारी भी दृष्टि हमें डेवलप करने की आवश्यकता है। और सब चीज हम और को ब्लेम नहीं कर सकते। तो ये कभी-कभी विचार आता है मेरे मन में कि जब हम श्री राम और श्री कृष्ण को बहुत सारे लोग कंपेयर करने लगते हैं। और लड़ने लगते हैं। बहुत सारे लोग तो कि
(25:52) विष्णु जी और शिव जी को लेकर लड़ने लगते हैं। एक और एग्जांपल दूंगा मैं बाद में उस बात का भी। बट मैं मुझे यह लगता है कि अगर श्री राम पुरुषोत्तम है और उनके द्वारा दी गई जो भी एक उनका चरित्र निर्माण किया गया है, ग्रंथों में जो लिखा गया है और हमको वो परोसा गया है कि आप उसको फॉलो करो। अगर वो परफेक्ट है तो फिर श्री कृष्ण को उनके आगे का अवतार बताया गया है। दिस अपग्रेडेशन इज हैपनिंग ऑल द टाइम। हम तो यह कंपैरिजन करना तो अपने आप में बेवकूफी है। करना बेवकूफी है। पर पता है हो क्या गया है? देखो मुझे लगता है कंपेयर करने में भी
(26:35) कोई हर्ज नहीं है। ठीक है। परंतु हम जिनको कंपेयर कर रहे हैं ना क्या वो वैसे हैं? मतलब हम सही चीज का कंपैरिजन कर रहे हैं क्या? क्योंकि मैं के क्यों कह रही हूं? क्योंकि यूज़ली हम क्या कहते हैं श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम। मतलब एकदम रिजिड। राइट वाइट इज़ वाइट, ब्लैक इज़ ब्लैक। है ना? कह दिया तो कह दिया अब उसमें कुछ नहीं। श्री कृष्ण का हम क्या समझते हैं? एवरीथिंग इज ग्रेट। बात बातबात पर रूल तोड़ दो। बात बातबात पर रूल तोड़ दो। दोनों भी ऐसे नहीं है। पर कंपेयर हम क्या करते हैं? ये दो एक्सट्रीम्स। हम ठीक है? और हमको लगता है देखो ये इनसे ही
(27:08) अपग्रेड हो गए। ठीक है। पर क्या ये ऐसा है? बिल्कुल नहीं है। अगर ऐसा है तो वाली को पीछे से क्यों मारा श्री राम ने? ठीक है। अगर आप वाल्मीकि रामायण पढ़ोगे तो श्री राम डजंट कम अक्रॉस एस सो रिजिड। वो राजा थे। राजा को डिप्लोमेसी होनी पड़ती है। जो भी राजा को धर्म संस्थापन के लिए करना चाहिए वह करना ही पड़ता है। श्री राम को वाल्मीकि रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं कहा गया। उसका अर्थ ये नहीं है कि वो मर्यादा में नहीं रहते हैं। ठीक है? पर उनकी मर्यादा समझने की बजाय हमने हमारी मर्यादाएं उन पर थोप दी है। एंड वी एक्सपेक्ट हिम टू बिहेव दैट वे।
(27:48) ऐसा नहीं है। उनके लिए जो शब्द का प्रयोग हुआ है वाल्मीकि रामायण में वह है रामो विग्रहवान धर्मः। राम धर्म का मूर्तिमंत प्रतीक है। पर्सोनिफिकेशन ऑफ धर्म। एंबॉडीमेंट ऑफ धर्म। कृष्ण क्या कह रहे हैं कि मैं धर्म संस्थापन के लिए आता हूं। अब धर्म के लिए अब धर्म क्या है? धर्म है रिलिजन सिर्फ नहीं। धर्म इज द सस्टेनेबिलिटी प्रिंसिपल धारयति इति धर्म वह सिद्धांत जिसके कारण कोई भी व्यवस्था चलते रहती है। सिंपल सा एग्जांपल मैं देती हूं। आज अगर मैं चाहती हूं कि मैं 80 साल की हूं तो भी मेरा शरीर मुझे साथ दे। ठीक है? तो मेरा शरीर अगर मैं 80 साल में मुझे
(28:34) साथ तभी देगा अगर मैं आज से उसका ध्यान रखती हूं। खाना पीना कसरत जो भी है। पर मैं पूरा जंग की खाती रहूं। ठीक है? और फिर एक्सपेक्ट करूं मेरा शरीर मुझे साथ दे तो होने वाला है क्या? तो मेरा शरीर कंटिन्यू रहे। उसके लिए मेरा अपने शरीर के प्रति कोई कर्तव्य है। राइट? फॉर द कंटिन्यूटी। व्हाट इज दैट कर्तव्य? तो हम कहेंगे वर्चुअ का है। अच्छा खाना खाओ, जंक मत खाओ। जंक खाना बुरा है। अधर्म है। सही खाना धर्म है। राइट? सिंपल बात है। उसी को आप एक्सटेंड करो। परिवार। हम सबको परिवार से कुछ ना कुछ मिलता है। प्यार मिलता है, नरिशमेंट मिलता है, पैसे मिलता है। थिंग्स
(29:14) गेट टेकन केयर ऑफ। राइट? तो परिवार से यह सब मिलता है। परंतु अगर हम ये कहें लेना तो मुझे सब है। देना कुछ नहीं है। तो ऐसे चलेगा माय वे और हाईवे। नहीं आप मेरे को देते रहो बस। ना कुछ पूछो ना कुछ। वैसा परिवार टिकेगा क्या? तो अगर स परिवार को सस्टेन करना है। जैसे शरीर को सस्टेन करने की हमने बात कही। परिवार को सस्टेन करना है। परिवार संयुक्त रहे, मजबूत रहे तभी हमें उसे कुछ ना कुछ मिलेगा। वो कब होगा? जब परिवार का प्रत्येक सदस्य जो अपना कर्तव्य है वो निभाएगा। ठीक है? जो उसे करना चाहिए वो भी करेगा। कभी थोड़ा ज्यादा कभी थोड़ा कम। ये तो जो सदस्य हैं उनके
(29:53) बीच की बात है। जब वो सब करेंगे तभी ही वो सस्टेन रहेगा। राइट? दैट इज इसीलिए तो हम कहते हैं पुत्र धर्म, पिता धर्म ये सब क्या है? दैट इज धर्म व्हिच अलाउस द सस्टेनेंस ऑफ एनी सिस्टम एंड सस्टेनेंस मतलब केवल एक्सिस्टेंस नहीं सस्टेन मतलब थ्राइविंग सस्टेनस मतलब प्रोग्रेस प्रगति सबका अच्छा होना चाहिए राइट एज अ सिस्टम सबका अच्छा होना चाहिए तो श्री राम क्या है विग्रहन रामो विग्रहवान धर्म उनके समाज को उस समय का जो समाज था उसका वो धारण होता रहे वो चलता रहे वो थ्राइव करता रहे उसके लिए जो भी करना था उन्होंने किया और वही श्री कृष्ण ने भी किया है। अब उनकी
(30:34) पर्सनालिटीज अलग-अलग हैं। परंतु हम जो कंपेयर कर रहे हैं ना वो भी सही नहीं है। हम्म। क्योंकि हमको लगता है कृष्ण बात में रूल्स तोड़ रहे हैं वैसा भी नहीं है। अगर एक समाज में ऐसा प्रेसिडेंट सेट हो जाए कि बात बाद में आपको रूल तोड़ना पड़े। तो क्या होगा? समाज चलेगा क्या? बात-बा में जो देखो वो रूल तोड़ रहे हैं। पर ऐसा नहीं हुआ है। वो बात में रूल्स नहीं तोड़ रहे है। आधी चीजें तो थोपी गई है उन पर। हमने थोप दिया है महाभारत पढ़े बिना। कि बात तोड़ दिया। हां देयर आर प्लेसेस व्हेयर ही इज एक्सप्लेनिंग कि भाई क्या सही है करना आप
(31:06) हिंसा अहिंसा किसे समझते हो सत्य बोलना ये तो सही बात है हम सब जानते हैं असत्य बोलना चाहिए अगर समाज में सभी झूठ बोलने लगे एक दूसरे से तो समाज तो रहेगा नहीं ठीक से रिलेशनशिप्स नहीं रहेंगे तो सत्य बोलना चाहिए पर अगर कोई लुटेरा ठीक है किसी इनोसेंट निर्दोष के पीछे पड़ गया हो और आपसे पूछे कि भ वो कहां गया तो उसे क्या सच बोलना चाहिए क्या तो उस चीज उस केस में सत्य गुण है या अवगुण है? धर्म है या अधर्म है? तो उस न्यूस को कृष्ण समझाते हैं। उसका अर्थ यह नहीं है कि बात बाद बात में रूल्स तोड़ दो। तो इसी इंटरप्रिटेशन वाली बात से एक चीज
(31:42) मेरे दिमाग में आई। आज सुबह ही मेरी एक बहन ने मेरे से पूछा कि मेरी मां ने मुझे कहा कि आयरन सॉल्ट मस्टर्ड ट्यूसडे और सैटरडे को नहीं खरीदते। तो जब पूछा गया कि क्यों? क्यों? क्योंकि शनिदेव नाराज हो जाते हैं। तो ये कोई सेटिस्फेक्टरी आंसर तो नहीं है। अब एक यंग माइंड है, क्यूरियस माइंड है वो तो पूछेगा और इस तरह के कितनी चीजें हैं पूछने को कि ये इस दिन क्यों नहीं करते हैं और ये क्यों करते हैं? ऐसे ही क्यों बिहेव करते हैं? ऐसे नहीं करते हैं। तो उसका एक सेटिस्फेक्टरी आंसर नहीं मिलता है यूजुअली। अभी जो जनरेशनल शिफ्ट हो रहा है, अभी जो
(32:17) क्यूरियोसिटी को खुलने का मौका मिल रहा है बाहर वो घर पे उसका सशन नहीं मिल रहा है। ऐसे में फिर क्या होता है? रिबेल मोड में आ जाते हैं। योगा तो ज्यादातर रिबेल मोड में आ जाते हैं। अब ऐसे में मेरे से अगर कोई यंग पूछता है तो अगर शास्त्रों के बारे में कुछ पूछता है तो मुझे तो जितना है कि इन चीजों से समझ में आया जैसे वेदांत का कैंप मैंने अटेंड किया। तो मैं सबको रेकमेंड करता हूं कि वो कैंप अटेंड करो। देखो वहां पे जाके एक्चुअल में समझ में आएंगी चीजें। तो उसमें भी लोग कहते हैं कि वही कि हमारे मां-बाप जाने तो नहीं देंगे। तो ऐसे में
(32:52) मेरे मेरे सामने भी धर्म संकट होता है कि मैं क्या उनको रिबेल करने को कहूं या इस प्रॉब्लम को कि घर वाले इतना इजीली इस चीज को ग्रास्प नहीं करते अब इंटेलेक्चुअली चीजों को समझना बिकॉज़ वो भक्ति भाव से उन्होंने फॉलो किया चीजों को तो इस चीज को एक युवा कैसे डील करें? दिस इज अ क्वेश्चन फॉर टू यू। स्पेशली एक लड़की के केस में। लड़के तो फिर भी रिबेलियंस ज्यादा होते हैं। तो मैं आपका प्रश्न ना दो भाग में देखती हूं। एक तो जो रीति रिवाज वाला है और दूसरा स्टडी जो पढ़ाई करनी है शास्त्रों की या वेदांत की या कोई भी गीता की या कुछ
(33:28) तो जो पहला है ना वो कैसा है कि वो एक तो मान्यताएं अलग-अलग घरों में अलग-अलग परिवारों में अलग-अलग जगहों में अलग है। मैं कह रही थी कि हमारे हमारे परिवार में ये कुछ नहीं है कि इस दिन आप ये नहीं खरीद सकते हैं। उस दिन आप वो नहीं खरीद सकते। पर आप देखो क्या होता है ये सारी जो मान्यता है ना वो कई बार रीजन स्पेसिफिक होती है। किसी समय के कारण होती है। जैसे आप देखिए आज भी कुछ-कुछ लोग मानते हैं कि नाग पंचमी के दिन ये वो लोग काटते नहीं है सब्जियां। ठीक है? अब आज तो आप बिल्डिंग में रहते हो। आपके घर पे तो कहीं कोई नाग नहीं आने वाला। तब क्या होता होगा? वो लोग
(34:05) गांव में रहते थे। वो जमीन पे रहते थे तो तब आपको एनश्योर करना है कि भ कुछ कटवट ना जाए किसी स्पेसिफिक इससे। तो शायद कुछ मान्यता रही होगी। आज एज अ नस्टजिया इफ यू वांट टू कंटिन्यू दैट दैट्स परफेक्टली ओके। जस्ट नो दैट और आपके बच्चों को आप कहो और अगर आप ना समझा पाए तो लेट देम हैव द फ्रीडम टू फिगर आउट। उनको ये कहो कि हर समय हम कोई ना कोई रिचुअल्स तो करते ही रहते हैं। राइट? जीवन रिचुअल के बिना तो नहीं चलता। सुबह उठ के जाना वो भी एक रिचुअल है। अपने अनुसार हम अपना-अपना रिचुअल्स बनाते रहते हैं। दीज़ आर सम। किसी किसी का कोई कारण होगा। किसी किसी का नहीं
(34:40) होगा। तो दैट्स परफेक्टली ओके। राइट? अपने आप अनुसार आपको जो ठीक लगता है करो। अब आज लोग बाहर रहते हैं, अकेले रहते हैं। कई बार ऐसा हो कि आप नहीं फॉलो कर पाते हो कितनी सारी चीजें। जैसे आज भी किसी किसी परिवार में होता है पर्टिकुलर डे पे बाल ना काटो। ऐसा जब सब होता है। राइट? पर जब आप जब बाहर गए हो, कुछ प्रोग्राम्स है, कुछ इंपॉर्टेंट इवेंट्स है तो आप क्या करो? और उससे कोई पाप पुण्य का तो लेना देना है नहीं। वो तो लाइफस्टाइल की बात है। तो दीज़ थिंग्स एव्री परिवार हैज़ टू सिट एंड फिगर आउट। ठीक है? मुझे लगता है इन चीजों पे बहुत ज्यादा अगर आपके पास
(35:11) एक्सप्लेनेशन है और आप समझा रहे हो तो बहुत अच्छी बात है। अगर नहीं है, ठीक है? तो बिना वजह दिस इज़ नॉट अ पॉइंट टू पिक फाइट्स। ऐसा मुझे लगता है। बच्चों को भी समझना चाहिए कि भ आपको उत्तर मिला। ठीक है? नहीं मिला तो मां-बाप को खुश करने के लिए कर भी दिया तो क्या है? मेन तो ये है ना कि परिवार में खुशी रहे। फिर आप अपने अनुसार करो ना करो ये आप पर है। पर जब तक उनको खुशी मिल रही है। आप उनके घर पे रह रहे हो। तभी तो आप जहां रहते हो उनके रूल्स फॉलो करते हो। तो उनके अच्छे के लिए कर लो यार। हर चीज़ को इंटेलेक्चुअलाइज़ करने की जरूरत भी है।
(35:42) क्या पता शायद आपको उसका फायदा किसी समय समझ आए। जैसे कोई कारण आपके मां-बाप को ना पता था और ना पता है तो डोंट कंटिन्यू। जहां तक दूसरी बात है ना मुझे लगता है इसमें। इसमें क्या हो गया है कि एक समय बहुत ज्यादा अ देखो तो हमारे में आश्रम व्यवस्था होती थी। ब्रह्मचारी गृहस्थ आश्रम फिर वानप्रस्थ और सन्यास बहुत ज्यादा जो भक्ति का या वेदांत की जो पढ़ाई पहले वानप्रस्थ में होती थी ठीक है पर उस समय जीवन शैली अलग होती थी यू आर सो फिजिकली बिजी ठीक है परिवार परिवार बड़े-बड़े होते थे आपके काम में आप लगे हो और फिर समय है सब रिटायर हो गए तो
(36:27) अब आप प्रिपेयरिंग फॉर योर देह त्याग आप कर लो जबकि वो एक एस्पेक्ट है स्पिरिचुअलिटी आध्यात्म का पर उसका दूसरा एस्पेक्ट भी है जो हम जानते हैं अब कि उससे स्ट्रेस कम होता है। सोचना जो सोचने की पद्धति है वो ठीक है। आज तो इतने सारे डिस्ट्रैक्शंस हैं। तो ये कुछ-कुछ जैसे योग है। योग तो चलो उसका तो फिजिकल बेनिफिट्स भी बहुत सारा है। मेडिकल बेनिफिट्स भी बहुत सारा है। ध्यान धारणा भगवत गीता जब लोग पढ़ते हैं तो क्लेरिटी मिलती है जीवन जीने की। राइट? रामायण महाभारत तो गृहस्थों के लिए है। वो कोई आप जब भगवत गीता सुनाई जा रही है तो वो वन
(37:04) में नहीं सुनाई जा रही है। वो युद्ध मैदान के बीच सुनाई जा रही है। गृहस्थ को सुनाई जा रही है। लड़ने के लिए सुनाई जा रही है। भाग जाने के लिए सुनाई नहीं जा रही है। राइट? तो ये तो आपको टिक कर लड़ने के लिए जीवन जीने के लिए सिखा रहा है। तो वो तो आपको तभी पढ़ना पड़ेगा ना। तभी सीखना पड़ेगा। स्पेशली आज जब पहले के जैसे सिस्टम्स सपोर्ट सिस्टम नहीं है तो हमको हमारे काम पर नहीं हमारे मन पर काम करना है। अब मां-बाप को या बड़ों को हमेशा ये बात समझाना आसान नहीं है क्योंकि उन्होंने देखा है बहुत सारे लोग ये करते रहते हैं। फिर एक दिन पता चला मंक बन गए।
(37:39) ठीक है? अब ये मां-बाप नहीं चाहते कि अपने अपने वाले मंक बन जाए। सबको ऐसा है कि नहीं नहीं मेरा बेटा तो ग्रास करे, बच्चे करे, ये करे, वो करें। तो आपके पास आपने जब किया और आपके फ्रेंड्स के पास जाते हो तो जाते हो उनके पेरेंट्स को भी मिलो। हम उनको भी बताओ क्या है? ये जो पढ़ा रहे हैं वो आपको सब छोड़ दो सब डिटच कर दो। ऐसा नहीं पढ़ा रहे हैं। वो आपको भाई आपका जीवन कैसे जियो ये सिखा रहे हैं। सही निर्णय कैसे दो वो सिखा रहे हैं। राइट? तो जब उनको पता चलेगा उनको ये समझ आएगा तो कोई थोड़ी ना मना करेगा। राइट? वो पर्सपेक्टिव समझाने की जरूरत है
(38:13) क्योंकि ऐसा हुआ है परिवारों में कि वो बहुत ज्यादा अध्यात्म आध्यात्म करने लगा फिर खत्म और कोई चाहिए ही नहीं लाइफ में कुछ चले जाओ वैसे भी है ही है ना वैसे स्कूल्स भी है चाहे ऐसा पढ़ाया जाता है तो आई थिंक वो जो पढ़ा रहे हैं और जो पढ़ रहे हैं उनको साथ में और अलाइन होने की जरूरत है और ऑफ कोर्स मां-बाप को भी ये समझाने की जरूरत है कि भाई इसका फायदा हमें और जब वो देखेंगे। ठीक है? देखो कई बार क्या होता है? वैसे तो मतलब बच्चे भी ना बहुत छाड़े होते हैं। जो करना है करते हैं। इसमें मां-बाप के कहने के लिए रुके। क्यों भाई? है ना? आप पढ़ो। आपका आप पढ़ रहे होंगे तो
(38:53) आपके हाथ से किताब लेकर तो नहीं जाने वाले ना। पढ़ो आप और आपके जीवन में दिखाओ। क्यों कोई मना करेगा? घूमते समय बाद झूठ बोल के भी चले जाते हैं। तो इसमें भी करो ना। ये तो आपके लिए अच्छा है। मां-बाप को क्यों पोछ रहे हो? इफ यू वांट टू डू इट। मां-बाप कोई बीच में तो नहीं आने वाले। बट हां समझा दो उनको अच्छे से। आपने एक बात कही कि लोगों को लगने लगता है कि मैरिज शादी जो है वो बीच में आ जाती है आपके स्पिरिचुअल ग्रोथ में। ऐसा लगता है मतलब कि इसका फ्लिप होना चाहिए एक्चुअली। मे बी इट इज अ वे टू स्पिरिचुअल ग्रोथ। हाउ कैन अ यंग माइंड कंसीव दिस आईडिया? ये
(39:30) समझ में कैसे आएगी बात कि मैरिज एक स्पिरिचुअल ग्रोथ के लिए यू का एक टूल हो सकता है। थोड़ा सा मैं अलग इससे बताती हूं। ठीक है? लेट मी ट्राई टू एक्सप्लेन इट बिकॉज़ मैं भी आई एम थिंकिंग अलाउड। जी जी बिल्कुल आपको जब यू वांट टू गेट बिय्ड समथिंग दैट कैन ओनली हैपन यू एक्सपीरियंस दैट। राइट? मेरे पास गाड़ी है नहीं और मैं कहूं अरे मैंने गाड़ी त्याग दी। अरे भाई [हंसी] औकात तो मैं कहा पहले गाड़ी त्यागने की। हम तो जब आपने गृहस्थ आश्रम को एक्सपीरियंस ही नहीं किया है तो व्हाट आर यू वेटिंग बियों्ड दैट? मनुष्यों के लिए अगर हम इवन
(40:08) हिंदू दर्शन के अनुसार देखें, वर्ल्ड व्यू के अनुसार देखें तो हम यह मानते हैं कि हम पांच ऋण लेकर जन्म है। ठीक है? पांच ऋण कौन से हैं? देव ऋण, ऋषि ऋण, पितृ ऋण, मनुष्य ऋण और गोत्र ऋण। देव ऋण ऑफ कोर्स क्योंकि देवता है तो हम सब है तो उस ऋण को आप कैसे चुकाते हो जो पूजा वगैरह आप करते हो पहले यज्ञ करते थे है ना जो जो वैदिक यज्ञ जो होते थे श्रवत यज्ञ वगैरह होते थे नित्य अग्निहोत्री जो होते हैं तो देवताओं को प्रसन्न रखने के लिए उनके लिए अपना ग्रेटट्यूड या कृतज्ञता एक्सप्रेस करने के लिए आप हमारा ध्यान रखिए हम आपको आपका
(40:48) ध्यान रखेंगे उस तरीके से तो दैट वास देवर ऋषिरण मतलब क्या हम जो कहते हैं कि हिंदू संस्कार हमारे हमारे मूल्य, हमारा संस्कृति जो भी हम हमारी संस्कृति की जो हम बात करते हैं वो कैसे है वो हमारे ऋषियों ने हमारे ग्रंथों में संजोया एनश्योर किया कि हर अगला जनरेशन वो समझे वैसा जिए राइट तो उनके प्रति हम जब कहते हैं कि हमारे हिंदू मूल्य है या हम हिंदू हैं। तो वो क्यों है? क्योंकि हम उस संस्कार को जी रहे हैं आगे और उसे आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है। उस ज्ञान की धरोहर को अगले जनरेशन को देना भी महत्वपूर्ण है। कैसे होगा? हम पढ़ें और
(41:27) उनको पढ़ाएं। राइट? पितु ऋण। आज हम जो हमारा नाम कहते हैं आप आपको मैं पूरा नाम पूछूं। आप क्या कहोगे? अनंत सेठ। अनंत सेठ। तो ये सेठ ये कहां से आ रहा है? ये आइडेंटिटी आपने चूज़ की थी क्या? नहीं। जिस परिवार में आपने जन्म लिया वहां से आई। ठीक है? यू माइट से कि आज मुझे नाम नहीं लगाना। पर उस परिवार में जन्म लेने का आपको फायदा तो हुआ है ना। आइडेंटिटी आप भले ना कहो कि मैं सर ने ना लगाऊं पर आपके आसपास सारे तो जानते हैं कि भ ये इनके बेटे हैं। आई कैन सी माय थ्री फोर जनरेशन दैट एवरीथिंग इज़ पास्ड ऑन योर थिंग। एक्सक्ट्ली [गला साफ़ करने की आवाज़]
(42:01) राइट। द होल आइडेंटिटी। योर आइडेंटिफिकेशन इज़ बिकॉज़ ऑफ़ योर फैमिली एंड विलनेज। राइट? तो उसे आप कैसे आगे बढ़ाओ या एक तो उसको आप उस ऋण को आप कैसे झुकाओ जो हम पितरों का श्राद्ध वगैरह करते हैं चीज है बट प्रत्यक्ष पितु कौन है मां-बाप राइट मां-बाप का ध्यान रखना एक्सटेंडेड फैमिली का ध्यान रखना बट इट डजंट एंड देयर हम धर्म की बात [गला साफ़ करने की आवाज़] कर रहे हैं तो द कंटिन्यूटी हैज़ टू हैपन कंटिन्यूटी ऑफ़ व्हाट ऑफ़ दैट परिवार दैट यू आर अ पार्ट ऑफ़ राइट तो वो कैसे होगा जब आप विवाह करके बच्चे पैदा करोगे तो ही तो वो नेक्स्ट नेक्स्ट जनरेशन में जाएगा तो वो
(42:38) भी एक ऋण है आप पर और फिर जो मनुष्य ऋण जो आप सेवा के द्वारा अतिथि सेवा जो भी है उसके द्वारा और वो ऋण जो आप इकोलॉजी की सेवा करते हो या इकोलॉजी के लिए जो करते हो प्रिजर्वेशन कंजर्वेशन की जो हम बात करते हैं वो हमारे धर्म का मूल है। ठीक है? ये पंच ऋण के साथ हमने जन्म लिया है। एंड द पर्पस ऑफ़ आवर लाइफ इज टू फुलफिल ऑल दिस। तो जब कोई गृहस्थ आश्रम में नहीं है तो शायद ऋषि ऋण तो निभा रहा है पर पितु ऋण नहीं निभा रहा। ठीक है? अब किसी किसी के लिए मैं ये नहीं कह रही कि सबके लिए ये सब करना आवश्यक है। किसी किसी के लिए दैट माइट बी दैट वे किसी किसी का मार्ग वो
(43:16) निश्चित है। वो उसी मार्ग पे जाएंगे। पर अधिकतरों के लिए तो ये महत्वपूर्ण है। नहीं तो आप किसके लिए समाज की बात कर रहे हो? कौन होगा उस समाज में? अगर आपके ही बच्चे नहीं है तो। राइट? वो समाज तो आपको क्रिएट करना पड़ेगा ना। हम तो वो भी आप पर है। और जो आपने कहा वो आपने बहुत बहुत अच्छी बात कही कि इट हैज़ टू बी अ मैरिज हैज़ टू बी अ पाथ इन दैट प्रोसेस ऑफ़ रियलाइजेशन। बट दैट इज़ व्हाट अ मैरिज डज़ ना। जब स्ट्रगल्स आएंगे जब आप एक दूसरे से मिल रहे हो। एक तो यह है कि भाई वो इतना अच्छा आपका ट्यूनिंग है कि ऑलरेडी यू आर अलाइन। आप साथ में करो। आप साथ में इस मार्ग पे
(43:56) जाने जा तो अच्छा क्या हो सकता है? कोई भी मार्ग में ठीक है। अगर वैसी ट्यूनिंग है और आपके साथ कोई हमसफर है जो साथ में जा रहा है तो उसे उससे अच्छा तो कुछ हो ही नहीं सकता। लड़के बच्चे लड़के लड़कियां सब क्यों नहीं कर रहे? क्योंकि डर है कि अरे ठीक से भी हुआ तो। बट देन आप सोचिए हम पॉजिटिव थिंकिंग की बात करते हैं। हम स्टार्ट ही नेगेटिव से कर रहे हैं कि वो रोड़ा है। है ना? वो ऑब्सकल है। अब आपने सोचा ही वही है। तो फिर क्या होगा? ये भी तो सोच सकते हो कि अरे भाई साथ में अगर हम अलाइंड है तो साथ में कुछ कर सकते हैं हम। एक तो दूसरा इट्स जस्ट लर्निंग ना एव्री
(44:30) फेस एव्री रिलेशनशिप इज़ मेंट टू टीच यू समथिंग भाग क्यों रहे हो अगर आपको लग रहा है नहीं दैट्स व्हाई पुल मुझे वही करना है दैट्स फाइन पर अगर आप एस्केपिस्ट बनके ये कह रहे हो कि नहीं पापा Twitter पे बहुत ब्लैक फिलिंग चल रहा है इसलिए अब मुझे शादी नहीं करनी लड़कियां तो सब बुरी होती है इसलिए शादी नहीं करनी या लड़के सारे बुरे होते हैं पैट्रिय्कल इसलिए तो फिर आपने आपका जो आपके जीवन में जो संभावनाएं हो सकती थी वो तो आपने देखी नहीं ना। मैं यह नहीं कह रही कि अच्छी होंगी या बुरी होंगी। बट एटलीस्ट गिव इट अ चांस जो भी होगा आपको आगे ही ले जाएगा।
(45:04) अगर आपका एटीट्यूड आगे जाने का है। आपका एटीट्यूड रोते रहने का है तो कोई कुछ भी नहीं कर सकता। वो कितने भी अच्छे हो तो भी कुछ नहीं होगा। फिर अगर आप ऐसा नहीं है कि जो माम इंस्टीट्यूट्स है या ऑर्गेनाइजेशंस है उसमें इंटरनल पॉलिटिक्स नहीं होते। सब कुछ ह्यूमन बीइंग है ना। इवेंचुअली हम सबका क्या स्ट्रगल है? काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर्य उसको ओवरकम करना है। वो नहीं होगा तो आप भगवा कपड़ा भी पहन लो। सारा वो भाव तो रहेगा ही रहेगा। शादी करो ना करो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। और अगर वो इंपल्ससेस पर काबू कर पाए तो शादी कर भी
(45:41) आप आध्यात्म में हो। आध्यात्म क्या है? जो हम कहते हैं कि आध्यात्म। व्हाट इज आध्यात्म? मुझे लगता है कहीं पर वही कंफ्यूजन है। हम कहते हैं आत्मा का साक्षात्कार हो। वो तो इवेंचुअल है। पर आत्मा का साक्षात्कार कब होगा? तो मैं सबको कहती हूं कि आप भगवत गीता पढ़िए पर साथ में पतंजलि योग सूत्र भी पढ़िए। ठीक है? कब होता है? तो जो शुरुआत है पतंजलि योग सूत्र की अतः योगानुशासन योगम चित्त वृत्ति निरोधा योग मतलब चित्त की वृत्ति। चित मतलब रफली मन नॉट एग्जैक्ट। ठीक है? रफली मन। मन में जो विचार चलते रहते हैं चलते चलते रहते हैं उनको शांत करना क्या होगा तब योग
(46:27) चित्तव योगा चित्तवृत्ति निरोध तदा दृष्टु स्वरूपे अवस्थानम जब वो आपका मन की वृत्तियां शांत होगी तब आपका जो स्वरूप है जो आत्मा रूप है वो तब साक्षात्कार आपको होगा कब होगा जब वो मन के जो वृत्तियां है वो शांत होगी मन की वृत्तियां कब शांत होगी तब तभी होगी जब आपका आपके सारे इंपल्ससेस क्योंकि इंपल्स ही तो चल रहा है ना दिमाग में ये है वो है ये है कहीं कभी किसी चीज पे गुस्सा आ रहा है कोई चीज चाहिए किसी पे किसी से कोई जेलसी हो रही है ये है वो वही चल रहा है आपके दिमाग में ये नहीं वो नहीं वो ये नहीं वो नहीं ऑल दैट इज गोइंग ऑन वो
(47:04) जब शांत होंगे तभी आत्मा का साक्षात्कार होगा पर वो शांत कब हो गए सिर्फ भगवा कपड़ा पहनने से शांत हो जाएंगे क्या या शादी नहीं करने से शांत हो जाएंगे क्या नहीं वो शांत करने के लिए आपको स्वयं को प्रयत्न करना पड़ेगा हम्म और शांत होना अगर बाहर हलचल चल रही है और उसमें आप शांत हो पाए तो वो एक्चुअल शांति है। कुछ है ही नहीं। आपने कभी कुछ किया ही नहीं। तब भी आपको लगता है कि मन शांत हो जाएगा। नहीं। अगर आपने इन इन इंपल्ससेस को कंट्रोल नहीं किया तो आप भले ही एक्सटर्नली बिहेव करो कि हम शांत हैं। मन तो चलता ही रहेगा। लोग नहीं जानेंगे।
(47:44) आप तो जानोगे। राइट? तो मेन इज द मेन ऑब्जेक्टिव ऑफ आध्यात्म इज कि उस चित्त की वृत्तियों को शांत करो और वो कोई भी ना शादी उसमें बीच में आती है ना मंख बीच में आता है ना कुछ आता है वो आपके स्वयं के प्रयत्न से ही हो सकता है। वो बैटल फील्ड में खड़े हो के भी हो सकता है। बैटल फील्ड का नाम लिया ना अनंत ने अभी जो भी चाहे हमारे सिख गुरु हैं अच्छा और और भी जो हमारे चाहे महावीर है, बुद्ध है, ये क्षत्रिय ही थे। इट मीन्स द केस इन अ क्षत्रियस लाइफ विल इवेंचुअली लीड यू टुवर्ड्स दिस इट शुड
(48:27) इट शुड इफ यू वांट इट टू बिकॉज़ देन यू हैव अ करज है ना आपके अंदर कि आप अपनी बाउंड्रीज को पुश कर रहे हैं। इट मींस द इंटेलेक्चुअल बाउंड्रीज ऑफ़ द फियर्स। जब तक फियर है कोई भी इतना सा भी तब तक तो नहीं हो सकता है। तो यू हैव टू ओवरकम दैट यू नो। सी अध्यात्म तभी होगा। मैं मैं यंगस्टर से भी यही कहती हूं कि आपको लगता है कि बाहर की परिस्थितियां ठीक हो जाए तो आपका अध्यात्म हो गया। ऐसा नहीं होता है। ठीक है? इसीलिए तो लोग हगते हैं ना। उनको लगता है कि एक्सटर्नल इश्यूज है। इशज़ एक्सटर्नल नहीं है। इशज़ अंदर का है। कृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है। उनकी आठ
(49:01) आठ पत्नियां थी। ठीक है? शादी कहीं बीच में नहीं आई होंगे। और बाकी 16,000 आदमी वो तो अलग बात है। बट जो मेल है वो तो आठ है। राइट? पूरा हलचल हर जगह चल रही है। उनकी आंखों के सामने उनका पूरा परिवार एक दूसरे को मार देता है और वो शांत है। लोगों को कई बार लगता है अरे कृष्णा इस ऑल फन है ना कृष्ण से हम रिलेट कर पाते हैं। सच्ची में आप अपने आंखों के सामने पूरे परिवार को मरता देख रहे हो और आप शांत हो। क्या वो शांति आप डेवलप कर पाते हैं अपने अंदर? वो आपका करना है। इसीलिए कृष्ण योगेश्वर है। हम वो तो नहीं बन सकते। उनको वो बनने की बात नहीं है। परंतु एक्सटर्नल
(49:43) चीजों को बदलकर इंटरनल शांति नहीं मिल सकती। इंटरनल शांति के लिए आपको स्वयं को काम करना पड़ेगा। और जब इंटरनल शांति होगी तो आपका एक्सटर्नल जो जीवन है वो भी ज्यादा अच्छा होगा। दैट्स द होल पॉइंट। ऑफकोर्स जब आपके साथ कोई है तो आपको आपके अलावा उनका भी ध्यान रखना पड़ता है। राइट? तो वो स्ट्रगल कब होगा? बटली वर्थ इट। सो डोंट रन अवे। बाकी जो कृष्णा इच्छा हम इसी को बोलते हैं ना एक्सपेंशन कि अपने तक सीमित नहीं हो आप। अभी आपके पास प्लस वन हो गया ध्यान रखने के लिए और वो वही एक्सपेंड होता है। चेतना का विस्तार स्वयं से सब्जेक्टिव से
(50:19) ऑब्जेक्टिव क्योंकि ऑब्जेक्टिव आपको मिलेंगे तभी आपको टारगेट्स तो बाहर ही मिलेंगे ना। हम एक इंपॉर्टेंट क्वेश्चन जो मैं पूछना चाहता हूं वो थोड़ा अनरिलेटेड वापस हमारे पीछे जाना पड़ेगा इज कि स्पेशली बहुत सारे जो रूल्स एंड रेगुलेशंस होते हैं। खास करके जब हम रिलीजियस पॉइंट ऑफ व्यू से देखें तो ऐसा लगता है कि वुमेन के लिए ज्यादा रूल्स हैं। लड़कियों के लिए ज्यादा रूल्स हैं। मंगलसूत्र पहनो, सिंदूर लगाओ। पीरियड्स के समय आप पूजा नहीं कर सकते। किचन में नहीं जा सकते। एंड एंडलेस लड़कों के लिए नहीं है। तो और अगर उसके अब उसके अगेंस्ट अगेन
(50:59) रिबर्टल आता है। नहीं। या तो उस फॉर्म में आता है या तो क्यूरियोसिटी के फॉर्म में आता है और क्यूरियोसिटी का भी आंसर मिलना कठिन है। तो क्या ऐसा फैक्ट है यह कि ऐसा ही है रूल्स ज्यादा है वुमेन के लिए या उसके पीछे कोई बहुत रीजन है और अगर है तो उसको समझना कैसे है? कहां समझना है? मुझे लगता है रूल्स तो दोनों के लिए है। ठीक है? आज बहुत सारी चीजें हम फॉलो नहीं करते वो अलग बात है। परंतु जो लड़के भी है वो जब विवाह हो जाता है तो पहले मेरे ख्याल से वो तीन धागों का यज् पवित्र पहनते हैं। विवाह हो जाता है तो छह वो है ना वो धागे बढ़ जाते हैं उसके। उसको कैसे
(51:35) पहनना है? क्या करना है? रिचुअल के समय क्या-क्या करना है? वगैरह उसके भी शिख चली गई, तिलक चला गया। पर हमने रखा नहीं वो। रखा नहीं। हो क्या गया है? लड़के करते नहीं है। एक्सपेक्टेशन ज्यादा लड़कियों से ही रखा जाता है। है ना? लड़के तो जो भी है करेंगे। ट्रेडिशनल कपड़े भी कौन पहने? लड़की पहने। लड़का तो पैंट शर्ट में ही घूमता है। उसे कोई नहीं कहता कि भ तुम्हारी धोती कहां है? और अगर वो पट शर्ट में घूमे तो कोई कुछ नहीं कहता। पर लड़की ने फ्रॉक पहन लिया, पैंट पहन लिया तो बोलेंगे अरे संस्कार चले गए। संस्कार चला रखने का ठेका तो लड़की
(52:05) तूने तो नहीं रखा है। अगर दोनों रखेंगे अच्छा और कपड़ों से केवल संस्कार नहीं होते। पहली बात तो ये है क्योंकि कपड़े तो ओवरटाइम बदले ही है ना। आज क्या हम उस समय नहीं जा सकते जैसा कपड़ा पहन रहे थे। बिल्कुल नहीं पहन रहे। उस जमाने है कि आप मंदिर वगैरह देखो आज कोई भी ऐसा पहन रहा है। आज अगर वैसा पहनेंगे तो भाई वो ब्लास्ट फेम हो जाएगा। राइट? हो जाएगा कि आज वैसे कपड़े पहन के घूम रहे हैं। तो कपड़े पहनना वगैरह तो बदलता रहता है। हम उसको ही केवल संस्कार और परंपरा मान लेते हैं। वैसा नहीं है। पर एनीवेज टू आंसर योर क्वेश्चन। ऐसा नहीं है कि रूल्स इन पे
(52:40) ज्यादा है या रूल्स उन पे ज्यादा नहीं। रूल्स तो दोनों पे हैं। फॉलो एक जन से कराया नहीं जाता। दूसरे से एक्सपेक्टेशन ज्यादा रखी जाती। ऐसा है। बाकी ये जो पीरियड्स की आपने बात की वो तो अलग है ना। वो तो इट्स मोर लाइक देखिए क्या होता है ना बहुत सारी चीजें अ रिलिजन से जोड़ दी जाती है। ऐसे करोगे तो पाप लगेगा। इजी आपको और कुछ एक्सप्लेन नहीं करना है। और आप जब तक जब तक बिलीफ है तब तक कोई कुछ पूछता नहीं है। इट कंटिन्यूस। पर हमेशा तो कोई मानेगा ऐसा नहीं। वो पूछे क्यों भाई काहे को पाप लगेगा? किसी का बुरा कर रहा है क्या? तब वो ऐसे पूछते हैं। और सही बात
(53:15) है पूछना। पर उस समय क्यों ऐसा कहा गया? जब पीरियड है तो यू नीड अ ब्रेक राइट फ्रॉम द रेगुलर थिंग्स दैट यू आर डूइंग व्हिच इज अ गुड ब्रेक। जब वो पाप पुण्य के साथ जोड़ दिया जाता है फिर उसमें ऐसे आई तो ये तो बुरा है। ये तो अच्छा है। और एक जमाने में था भी बिकॉज़ उस जो हाइजीन जो जो प्रोसेससेस थे वो सब अलग थे। है ना? जब कोई ब्लीड कर रहा है तो यू वुड वांट देम कंस्ट्रेंट इन वन प्लेस एंड नॉट मूव अराउंड। आप कहोगे कि भ नहाना नदी में जाके होता था। हम्। तो आप वैसे नहीं जाओगे तो तीन दिन नहाना नहीं है। आज तो वो सब बदला है ना। तो उसके
(53:49) साथ-साथ आप रूल्स क्या रख रहे हो वह भी आप सोचो। पहली बात। दूसरी बात भाव समझो। भाव हाइजीन का था वो बात तो मैटर नहीं करता। पर जो ब्रेक का है वो तो करता है। राइट? एंड अगर ब्रेक का है आपका हार्मोनल डिस्टरबेंस हो रहा है और कोई कह रहा है कि भ उस मंदिर में आप मत जाओ। किसी और की मान्यता है। मत जाओ ना। अपने घर पे बैठ के करो जो करना है वो। या जहां आप जा सको वहां करो। द पीरियड रूल आई डोंट रियली सी इट एस अ बिग डील क्योंकि वो तो हम देखता है कि एस वुमेन वी डू गो थ्रूली द फर्स्ट टू यू गो थ्रू इमोशनल अप्स एंड डाउन एंड ऑल दैट एंड यू विल रादर हैव अ ब्रेक राइट
(54:25) पर उसे जब अच्छा बुरा पाप पुण्य से जोड़ा जाता है तब फिर रेबल ज्यादा आ जाता है नहीं तो किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं होता तो आई थिंक दैट्स व्हाट इट इज एंड जस्ट द एक्सपेक्टेशन कि भाई रूल्स है वो लड़की को ही जैसे पूरा सन ट्रेडिशन का ठेका उसने ले रखा है। ऐसा जब हो जाता है तो रेबल बढ़ेंगे ही बढ़ेंगे। आप साथ में करो। व्हाई नॉट? ये पैटर्न है। एक्चुअली जैसे कोई ताकतवर है वो कमजोर को दबाता है। मस्कुलेनिटी को टिकल करने के लिए आपको फेमिनिन चाहिए। लेकिन जब आप फिजिकल मैनिफेस्टेशन में अगर आप देखें मैस्कुलिनिटी विल ऑलवेज ओवरपावर फिजिकल एट्रिब्यूट्स में फेमिनिन बट दिस
(55:13) इज द एनिमल एट्रिब्यूट एनिमल ट्रेट है ये। अ जो भी आज के समय में अगर हम बैकलैश देख रहे हैं। अब जैसा पेंट किया जा रहा है। आई एम जस्ट प्रेजेंटिंग द पिक्चर कि फेमिनिस्ट फेमिनस जैसे वर्ड्स यूज़ किए जाते हैं। कि जो एक स्त्री का एक वह स्वरूप निकल के आ रहा है जो शायद अगर आप रिलेट करें तो एक रेबल जो आ रहा है वो उसका कारण ही यह है कि कलेक्टिव कॉन्शियसनेस ऑफ़ फेमिनिन वाज़ ऑप्रेस्ड फॉर सेंचुरीज़ एंड सेंचुरीज़ एंड सेंचुरीज़। और अभी यह प्रेशर कुकर सिचुएशन है। दिस एनर्जी ऑलवेज वांट्स टू मैनिफ़ेस्ट इन अ प्रोडक्टिव एंड प्रोग्रेसिव वे। बट
(55:58) दैट प्लेटफार्म वाज़ नेवर गिवन टू देम। वि मींस कि उसको ऐसी रियलिटी में मैनिफेस्ट होने का मौका ही नहीं दिया गया। बिकॉज़ अगेन दी मे बी साइंटिफिक बट नॉट एक्सप्लेंड एनफोर्स रूल्स एंड प्रोटोकॉल्स जो किसी की समझ में तो आए नहीं और उनको बस थोप दिया गया और बस उनको मॉडस अप्रेंडी बना दिया गया। तो तभी तो ये जो पतन जो हम देख रहे हैं और ये कॉन्फ्लिक्ट जो देख रहे हैं जिसके विषय में हम चर्चा कर रहे हैं कि दो एनर्जीज़ क्यों नहीं मिल पा रही हैं आपस में? क्यों नहीं समझ पा रही है? यू फील यही हो रहा है। एंड्स ग्लोबली हो रहा है। देखिए सो आई थिंक आपने बहुत अच्छे से इस
(56:36) बारे में कहा। आई एम सो ग्लैड टू हियर अ मैन से दैट फेमिनिज्म जो शुरुआत हुआ जो फर्स्ट फेमिनिज्म वो कैसे हुआ? अपने यहां नहीं हुआ। ठीक है? अपने यहां शायद हमें क्योंकि हमको इंडिपेंडेंस लेट मिली। डेमोक्रेसी लेट आई। ठीक है? इसलिए शायद इतना नहीं झूझना पड़ा। बट जो वेस्ट में वो शुरुआत हुई उसका कारण क्या था आप जानते हैं? हाउ डिड द फर्स्ट फेमिनिस्ट वेव स्टार्ट? उनको वोटिंग राइट्स नहीं थे। वेस्ट में डिड नॉट हैव वोटिंग राइट्स। क्योंकि उनको एज अ थियोलॉजी भी अब्राहमिक रिलिजंस में कहा जाता है ना वो तो आधी ही है। आधी बुद्धि है। तो उनको वोटिंग राइट्स
(57:17) नहीं थे। वोटिंग राइट्स के लिए यह पूरा जो संघर्ष है वो शुरू हुआ। ठीक है? फिर धीरे धीरे धीरे वो मतलब इट वास अ राइट कॉज राइट इट वास अ वेरी वैलिड कॉज जिससे वो शुरू हुआ एंड इट वास रिक्वायर्ड फिर जाके क्या होता है जैसे हर चीज का होता है है ना देन बोटिंग राइस भी मिल गया फिर मार्केटिंग के लिए मार्केट जो बिनेस वाले थे उनको लगा यार 50% मार्केट है ये टोबैको सिगरेट्स वाले यूएस में ये सब शुरू हुआ तो उनको लगा यार ये तो 50% मार्केट है ये लोग स्मोक नौकरी करते हैं। अब इफ ही गेट देम टू स्मोक एंड मेक वो कैसे करेंगे? इफ दे बिलीव दैट दिस इज देयर राइट। ठीक
(58:00) है? इफ ही टेल देम दैट आप ये करोगे दैट इज दिस स्मोकिंग ह एंपावरमेंट। उनका तो मार्केट डबल हो गया। राइट? एनीथिंग दे पेंटेड एस मैस्कुलिन एट्रिब्यूट एंड इट वाज़ न्यू कि आप उसको एली मूवर बन जाओ। उसको अडैप्ट कर लो। दैट इज़ एंपावरमेंट। दे फेमिनिज्म वि वास अबाउट गेटिंग द राइट्स व्हिच दे रियली डिर्व बिकम सेव एज मैन व्हिच इनहेरेंटली वाज़ एन एक्सेप्टेंस दैट द मैन इज़ बेटर तो एमावरमेंट मतलब आप पुरुष बन जाओ ऐसे हो गया। इसका अर्थ ऐसे भी है कि देयर वर नो वैलिड कॉज़ वैलिड रीज़ंस फॉर इट टू हैपन। बहुत सारे थे। इवन हमारे लोगों को बहुत
(58:44) बुरा लगता है जब मैं कई बार इस बारे में बात करती हूं। वी ऑलवेज से कि अरे हमारा तो संयुक्त परिवार टूट गया। अरे संस्कार दिस दैट तब यूएस में एक टॉक था तब तब ये बात चल रही थी। एंड क्रिप्ट के एक स्पीकर ने कहा ये तो संयुक्त परिवार टूट गया इसलिए ये सब प्रॉब्लम है। संयुक्त परिवार टूट गया इसलिए ये प्रॉब्लम है। और परिवार क्यों टूटा? क्योंकि इकोनॉमिक जॉब्स-वब्स के लिए लोग बाहर गए। मैंने कहा भाई इतना अच्छा आपका संयुक्त परिवार था तो आज तो पैसे हैं। क्यों सब भाग नहीं रहे हैं वापस संयुक्त परिवार में? बताओ मुझे। वाइफ आप लोग बोल रहे हो आप लोग जा रहे हो क्या
(59:18) संयुक्त परिवार में उनकी बेटियों की शादी भी संयुक्त परिवार में नहीं की है क्यों भाई क्यों नहीं किया है इतना वो नस्टाल्जिया और इतना रोजीरोजी सब था तो कर देते ना कुछ तो गड़बड़ हुई थी ना कि वो संयुक्त परिवार टूटने लगे अब्सोलुटली क्या था वो बिकॉज़ संयुक्त परिवार का जो फंडा था सपोर्ट सिस्टम का उसके बजाय वो ट्रॉमा पासिंग हो गया सास को लगता है मैंने तो इतना सहा अब वो भी सहे रादर देन थिंकिंग कि मैंने सहा उसको उसको मैं प्रोटेक्ट करूंगी। नहीं नहीं नहीं हम हमने तो ऐसा किया था। तुम तुम तो तुमको तो भाई तुम्हारे लिए तो कुकर भी आ गए। ये मैं और [हंसी] की बात कर रही
(59:57) हूं। सही बात है। ये मतलब हमारी मांओं ने सुना है यार। बाकी सब तो जाने दो। और कितने मतलब मैं मेरी स्पेसिफिक बात नहीं कर रही हूं। कितने में हुआ? कि हमको नहीं मिला तुम करो। अच्छा अब पता है ब्रेक कहां हुआ? आश्रम व्यवस्था में। आश्रम व्यवस्था क्या थी? ब्रह्मचारी गृहस्थ आश्रम फिर वानप्रस्थ वाहन प्रस्थ मतलब क्या रिटायरमेंट है रिटायरमेंट ऑफ व्हाट बाहर का काम और घर का काम ठीक है जिसका मतलब कि अब आपके बच्चे की शादी हो गई है वो थोड़े बड़े हो गए हैं तो घर का कामकाज उनको संभालने दो आपका हो गया वो हो गया का फंडा ही नहीं एंड तक वो जो सास है
(1:00:34) वही मैं ही डिसाइड करूंगी घर का सारा मरने तक राइट बहू को दबाए रखा है फिर बहू की जब बहू आती है हो सकता अब मेरा चांस है। मैंने सेवा की वो भी करें। कैसे चलेगा ऐसा? ये तो आपका टूट गया ना आपका जो सपोर्ट सिस्टम रहा ही नहीं। टॉर्चर मैकेनिज्म हो गया और केवल स्त्रियों पर नहीं। ठीक है? मैंने मैंने एक टॉक में जब कहा ये मैंने कहा प्रॉब्लम संयुक्त परिवार की नहीं है। प्रॉब्लम जो आश्रम व्यवस्था के टूटने की है वो है। वो हमें समझना चाहिए। परिवार व्यवस्था तो स्ट्रक्चर है। जो मूल्य है वो तो आश्रम व्यवस्था वाले था कि जो डिटच कर लो यार हो
(1:01:10) गया। हमने हमारे समय देख लिया। अब उनको जीने दो अपना जीवन। राइट? मुझे अपना अधिपत्य थोकने की जरूरत नहीं। अब हो गया। जैसे आप आप ऑफिस से रिटायर हो जाते हो। फिर हो गया ना। फिर ऑफिस में जो भी डिस्कशन कर रहे हो हम आप नहीं चाहते कह रहे कि मैं कहूंगा वो डिसजन लूं। राइट? वो जब खत्म हो गया तो संयुक्त परिवार टूटने लगे। ये सिंपल सी बात है। आप स्ट्रक्चर को अटैच मत हो जाओ। आप मूल्य को समझो। तब जबभी टॉक हुआ तो एक बुजुर्ग 70 ईयर ओल्ड वो आए एंड ही लिटरली हैड उनके आंखों में आंसू थे और उन्होंने कहा कि मैम आपने बात स्त्रियों की कही पर ये पुरुषों पर भी
(1:01:45) उतनी लागू होती थी ही लाइक आज मुझे 30 साल हो गए घर छोड़े हुए मैं बहुत बड़े संयुक्त परिवार से कहीं यूपी से थे वो संयुक्त परिवार से आता हूं 30 35 साल मुझे आज हो गए पर आज भी जब मैं मेरे जीवन का सोचता हूं ना तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते मैं कुछ कर ही नहीं पाता था पहले पापा आ और फिर बड़े भाई ने जितना कहा है उतना ही करना है। मेरा मुझे क्या चाहिए? मेरा क्या सपना है? किसी को कुछ पढ़ नहीं है। पर जब मैं भाग गया वहां से जब मैं निकल आया तो अब मैं खुश हूं। मेरी पत्नी के साथ हूं। खुश हूं। मुझे कभी नहीं जाना। ना ही मैं अपने बच्चों के लिए चाहता हूं।
(1:02:20) अब ये अगेन संयुक्त परिवार केवल एक स्ट्रक्चर है। जो हम भूल गए वो हमारे आश्रम व्यवस्था का मूल्य है। वो भूल गए। और यही चीज हर जगह होती है। अब फेमिनिज्म भी देख लो। जो फेमिनिज्म शुरू किस बात से हुई? हो क्या गया राइट जब आप उसका ओरिजिन जो मूल कारण जब वो भूल जाते हो और केवल स्ट्रक्चर्स पे केवल उसके आउटवर्ड शो पर रह जाते हो इस पे रह गए आज लोगों को लगता है लोग कहते हैं अरे लड़कियां बड़ी-बड़ी हो जाती है पर फाइनशियस इंडिपेंडेंस में लगी हुई है शादी नहीं करती वो क्यों है क्या कोई मां-बाप चाहते हैं आपकी बेटी शादी ना करे कोई भी नहीं चाहते सब लोग
(1:02:56) चाहते हैं करे पर क्यों आप मां-बाप को ही सपोर्ट कर रहे हैं क्योंकि जब फाइनशियल इंडिपेंडेंस नहीं थी तो कितना सहा है वो उनकी मांओं ने देखा है। राइट? तो अब वो अपने बच्चे के लिए वो चाहेंगे क्या? तो क्या एज अ समाज आर वी एबल टू अंडरस्टैंड द रूट कॉजेस रादर देन ओनली आउटरेच? अब हो क्या गया है? जो पिछले जनरेशन के साथ हुआ। इस जनरेशन के साथ तो कुछ नहीं हुआ। ठीक है? पिछली जनरेशन के साथ हुआ। वो उसी बात को अटैच होके सबको बुरा मान रहे हैं कि सब जगह ऐसे ही होता है। ऐसा नहीं है। चीजें बदली है। राइट? गिव इट अ चांस। वी ट्राई टू कंट्रोल वी ट्राई वी वी वांट
(1:03:39) टू कंट्रोल एवरीथिंग अराउंड अस सो मच। ये जो कंट्रोल कंट्रोल कहा है ना कि मेरा जीवन भी मैं डिसाइड करूं। मैं कंट्रोल करूं। ऐसा नहीं होता है। थोड़ा सा यहां तक भगवान लाए हैं। आगे भी ले जाएंगे। उतना विश्वास तो रखो। माता के साथ बुरा हुआ तो हमारे साथ बुरा होगा। पिताजी के साथ खराब हुआ। ऐसा नहीं है। राइट? दे एनश्योर दे हैव गिवन अस अ गुड लाइफ। यहां से आप यह समझ के चलो कि आपका एंड गोल क्या है? क्या आप चाहते हो कि आपका अच्छा पार्टनर हो? क्या आप चाहते हो कि आपका परिवार अच्छा हो? कई बार यंगस्टर से जब मेरी बात होती है तो दे आर लाइक मैम बट सही रोल क्या
(1:04:15) होना चाहिए? मैंने कहा सही रोल की आप बात ही मत करो। आप यह सोचो आपको आपका परिवार कैसा चाहिए? क्या आप चाहते हो कि एज अ यूनिट आपकी प्रगति हो फिजिकली, इमोशनली, स्पिरिचुअली, मटेरियली। सबको पैसा चाहिए। राइट? तो अगर वो पैसा भी चाहिए और इमोशन भी चाहिए तो लेट इट बी अ कॉमन गोल ना आपके और आपकी पत्नी का दोनों का। ये आप क्यों अटक के रह गए हो कि इतना पैसा मेरे को ही कमाना चाहिए। उसे किचन में लेना चाहिए। ऐसा क्यों? लड़की को ऐसा क्यों लग रहा है कि नहीं नहीं मुझे बाहर ही करना चाहिए। किचन का काम खराब है। ऐसा क्यों लगना चाहिए? कैन बोथ ऑफ यू मेक इट वर्क? दोनों
(1:04:50) कमाने जा रहे हो। क्या किचन में भी साथ कर सकते हो? कैन यू डिवाइड दोज़ एस वेल रादर देन बीइंग टू हंग अपॉन मेरा पुरुष का रोल या मेरा स्त्री का रोल? कैन वी टॉक अबाउट द एंड गोल दैट मैटर्स एंड सी कि उस परिवार को आगे बढ़ाते रहने के लिए हम दोनों क्या-क्या कर सकते हैं। आज पहले के रोल्स तो नहीं रहे हैं। राइट? और अगर कोई चाहे कि पहले ही रुके रोल्स में चले जाएंगे। क्लियर कट डिवाइड वो नहीं होने वाला है। दैट इज नॉट गोइंग हैपन। दैट इज दिस इज द ट्रुथ टुडे। आई एम वेरी ऑनेस्टली। मैंने मेरे एक मेरे जो फ्रेंड सर्कल वगैरह में देखा है। इतने अच्छे लड़के हैं। ठीक है?
(1:05:26) लड़कियां तो है ही बट इतने अच्छे लड़के हैं। दे आर सच ग्रेट फादर्स। लोग कहते हैं कि नहीं नहीं फादर कैन नॉट टेक केयर ऑफ यंगशेस। नो दे डू। वो घर का भी देखता है, बाहर का भी देखते हैं। वाइफ्स भी घर का भी देख रही है, बाहर का भी देख रहे हैं और खुशी-खुशी रह रहे हैं। तो ऐसा नहीं है कि नहीं हुआ है। पर वो माइंडसेट चेंज है। राइट? अगर उस समय आपके घर वाले फिर कह रहे हैं अरे यह देखो मुझू का गुलाम गुलाम आ गया और आपको वो लग रही है बात तो तो फिर कुछ नहीं हो सकता और मां-बाप को भी समझने की जरूरत है कि भाई कर रहा है ना तो आपके पति ने नहीं किया
(1:05:57) आपको तो बुरा लगा आपका बेटा अब कर रहा है तो खुश रहो ना वो लोग खुश रह रहे हैं वो आप देखो बेटे ने अब आपके चाय का कप बना दिया तो क्या हो गया ठीक है इसमें आपको इतना क्या बुरा लग जा रहा है ठीक है तो वो दोनों तरफ होना चाहिए मैं ये नहीं कह रही कि लड़के को ही करना चाहिए लड़की को भी समझना चाहिए कि भाई केवल बाहर बाहर जाके पैसे लेके आना इज नॉट इनफ एट द एंड ऑफ द डे दोनों को साथ रहना है। कभी थोड़ा उनको देखना पड़ेगा। कभी उनको थोड़ा देखना पड़ेगा। कई बार कोई 70% करेगा कोई 30% कभी उल्टा होगा। पर जब एंड गोल आपका जब विज़न ऑफ द परिवार
(1:06:28) इस अलाइव तो फर्क नहीं पड़ेगा। यू विल वर्क इट अराउंड। पर आप स्ट्रक्चर और रोल्स में उलझ के रह जाए। आपने कभी किसी हमारे किसी भी पुस्तक में, किसी भी ग्रंथ में ऐसा देखा है कि पाप कला वास एक्सक्लूसिव टू वुमेन? नो। भीम भीम वास एन एक्सीलेंट कुक। इनफैक्ट जब वो लोग वनवास में भी थे या उसके बाद जब अज्ञातवास में थे तो भीम ने क्या काम किया? रसोइए का काम किया। इनफैक्ट वो तो जाने दो। आज भी बहुत सारे जो शेफ्स हैं वो कौन है? मेल है सब। जो आपके घरों में भी देखा होगा जब जब पहले उत्सव वगैरह होते थे तो घर पे खाना बनाना आते। हम कहते हैं ब्राह्मण आओ से करें। गुजराती
(1:07:12) में जो तो रसोइया वो ब्राह्मण होते थे वो आते थे वो बनाते थे क्योंकि उन पे विश्वास ज्यादा होता था कि अच्छा ही करेंगे सात्विक करेंगे लेडीज थोड़ी आती लेडीज भी आती थी ऐसा नहीं है बट मेल्स ही आती थी कैसे खाना बनाना ना आता होता तो हो सकता है क्या पाक दर्पण करके एक पुस्तक है 16 17 सेंचुरी वो नल राजा नल के नाम से लिखी गई है बट वो तो सिर्फ कथा है वो भी किसी पुरुष ने ही लिखी है कैसे तो उसमें ऐसा लिखा गया कि राजा नल दमयंती की जो कथा तो वो जो नल राजा जब उनका सब कुछ चला गया था वो जुए में हार गए थे ना फिर सब कुछ चला गया था जब तब कहीं रह के वो रसोई थे और
(1:07:48) उनकी उनकी रेसिपीज इतनी अच्छी थी कि राजा ने कहा भाई इसको डॉक्यूमेंट कर लो वो वो केवल कॉन्टेक्स्ट सेटिंग है एक्चुअल ये तो ये जो पुस्तक है वो तो 16 17 सेंचुरी की है बट कई बार वो आप उसके साथ फिक्शन के साथ मतलब टाई एंड कर रहे थे वैसे पर वो भी किसी पुरुष ने ही लिखी है तो ऐसा कभी नहीं था इनफैक्ट मुझे याद है मेरे नाना लाइक मुझे शायद शायद मेरी नानी रोज नानी खाना पकाती थी। पर जो सारी स्पेशल डिशेस होती थी ना वो मेरी नानी ही पकाते थे हमेशा। और कितना अच्छा बनाते थे। कैसे? तो ऐसा कभी नहीं था। इनफैक्ट जो मेगा किचनस होते हैं उनमें
(1:08:23) मोस्टली जो कुक्स होते हैं वो होते हैं। सिख पंथ में गुरुद्वारों में सब मिलके बनाते हैं। ये है कि गैप क्या होता था ना कि आज जो टेक्नोलॉजी है वैसा नहीं था। आज ऑफिस में भी जा रहे हैं। लड़का लड़की दोनों तो हम कैसे जा रहे हैं? ऑफिस में बैठे हैं। एसी रूम्स है। कंप्यूटरटर्स पे काम कर रहे हैं। कोई खेत में जाके हल नहीं चला रहा है। अधिकतर लोग है ना? और अगर खेत में जाके हल चलाना हो तब लेडीज को फिर लड़कियों को फिर इक्वलिटी की बात नहीं याद आएगी। ठीक है? दे रादर सिट एट होम। राइट? घर का करेंगे। पर जब घर पे भी काम करते थे तो ऐसा तो नहीं था कि मशीन लग
(1:08:59) गया है। 10 काम वालियां है या डिशवाशर आ गया है। ऐसे नहीं था। सब हाथ से करना पड़ता था। नल है। ऐसा भी नहीं था। पानी लाने जाना था। तो दोनों का ही काम फिजिकली टैक्सिंग था। राइट? दोनों ही काम उतने फिजिकली टैक्सिंग थे। बाहर का हो या घर का हो तो वो बैलेंस आउट हो जाता था। अब आप घर का भी करो, बाहर का भी करूं ये पॉसिबल नहीं था। और बाहर का जो काम इतना फिजिकली टैक्सिंग था जो लड़कियों के लिए पॉसिबल नहीं था कि युद्ध कर रहा है जाकर, हल चला रहा है जाकर। ऐसा नहीं पॉसिबल था। सो दे वर मैनेजिंग होम न्यू नीडेड समबडी टू मैनेज हो। टेक केयर ऑफ़ ऑल दैट। सो द
(1:09:32) गर्ल्स वर वेरी क्लियरली डिफाइंड। ठीक है? कि घर का वो बाहर जाके आ रहा है। अब घर पर ये कर रहे हैं। सब लोग काम करते थे उतना। आज वैसा नहीं है। आज टेक्नोलॉजी बदल गई है। राइट? दोनों के लिए लाइफ हैज़ बिकम फिजिकली इज़ियर। उसके अनुसार रोल्स भी चेंज होंगे और होने भी चाहिए। महत्वपूर्ण वैल्यूस हैं। रोल्स और स्ट्रक्चर्स तो इवॉल्व होता है। फ्लूइड है वो। हम्। इसको अगर थोड़ा सा स्पिरिचुअल फिलॉसोफिकल पॉइंट ऑफ व्यू से हम देखें तो एक जो फेमिनिन एनर्जी है वो नर्चरिंग है और अ जो मैस्कुलेनिटी है वो प्रोटेक्शन द प्रोटेक्टिव लेयर का वो काम करती है। अह
(1:10:21) वह अल्फामेल थ्योरी की बात करते हैं कि जो अल्फामेल होता है वहां पे अट्रैक्शन ज़्यादा होता है। तो अल्फामेल अल्फामेल कौन होता है? उसके ट्रेट्स क्या होते हैं? अगर हम ह्यूमन के अंदर देखें एंड व्हाई द अट्रैक्शन इज़ टुवर्ड्स हिम। शायद इसलिए कि वह सही मायनों में मैस्कुलेनिटी का प्यरेस्ट वर्जन है। एंड मुझे ऐसा लगता है कि जब आप मैस्कुलेनिटी के प्यरेस्ट वर्जन को अडॉप्ट करते हो तो आप फेमिनिन के भी प्यरेस्ट वर्जन को अट्रैक्ट करते हो। एंड बिकॉज़ फेमिनिन इज़ नर्चरिंग इट इज़ इनविटेबल। अगर आप खेत में अच्छे से काम करोगे वो आपको ज्यादा उपजाऊ
(1:11:03) फसल देगी। आप अगर विद्या जो अगेन एक फेमिनिन का स्वरूप है अगर उसको ज्यादा पढ़ोगे तो विज़डम भी आपकी ज्यादा बढ़ेगी। आई थिंक लेकिन जब ये हुआ कि समर्पण से या भक्ति से यह चीज हुई होगी एक समय पे कि ऋषि मुनि घोर तपस्या में लगे हुए हैं। और शिव शक्ति का जैसे स्वरूप है कि वो उनको बैठ के नहीं हारती रहती है। लक्ष्मी जी उनके पैर बिकॉज़ वन इज पुटिंग हिमसेल्फ इनू एक्सट्रीम्स। सो देयर कम्स अ नर्चरिंग नेचर जो उसको कंफर्ट देना चाहता है। बट ये फिर उसको एनफोर्स कर दिया गया। इसकी स्पिरिचुअल मीनिंग्स को नहीं समझा हमने। आप अगर जो आप एनर्जी की बात कर रहे हो ना
(1:11:44) तो उसमें यह भी देखिए कि हां शिव शक्ति है और शिवजी के लिए शक्ति का समर्पण और सेवा भाव है। पर जब शक्ति काली का रूप लेती है तो शिवजी भी उनके चरणों में आने को तैयार है। राइट? दैट इज पार्टनरशिप। हम हम लोग ने रिजिडिफाई कर दिया सब। राइट? अब द स्टोरी सिंबॉलिक राइट बट दिस इज व्हाट इट मीन्स कि आप एक दूसरे के पूरक बन रहे हो क्या? पूरक बनने का मतलब यह भी है कि जब ये थोड़ा इस तरफ जाए तो आप और आप भी उसके अनुसार बदलो। जब इसको आवश्यकता हो तो आप उसके लिए भी बदलो। दैट फ्लेक्सिबिलिटी हैज़ टू बी देयर। रादर देन सेइंग मैं तो
(1:12:29) ऐसे ही रहूंगा और तुमको ऐसे ही रहना पड़ेगा। दूसरी बात आपने जो अल्फा मेल वाली बात कही राइट? अल्फा मेल और फीमेल। क्या हर एक बंदा अल्फा मेल है? अल्फा मेल एक ग्रुप में एक ही होता है। तो बाकियों का क्या राइट? बाकियों का कुछ है नहीं क्या? और अल्फा मेल को पहले तो चलो अलग बात है कि 10-10 शादियां भी कर लो चलता था। आज तो वैसे भी नहीं कर सकते। तो हां अल्फा मेल तक का तरफ का अट्रैक्शन है। बट सारे तो अल्फा नहीं हैं। और अगर सारे अल्फा नहीं है पर उनकी एक्सपेक्टेशन एक्सट्रीम फेमिनिन है। वो हो सकता है क्या? और कितने सारे परिवार आप ऐसे भी देखोगे कि
(1:13:07) नाम के लिए पुरुष पुरुष है बट डिसीजन सारे स्त्रियां ले रही हैं। इतनी सारी बात मतलब आज की जनरेशन की तो बात अलग है। पर आपके दादियों की जनरेशन में देखो जो हस्बैंड्स है वो तो बहुत जल्दी गुजर गए। स्त्रियों ने अगर वो अल्फा मेल वाला रोल नहीं लिया होता तो परिवार बिखर गया होता। पांचप 6-छ 10-10 बच्चे थे। तो स्त्रियों ने भी वो कार्य किया है क्योंकि आवश्यकता थी। राइट? तो मुझे लगता है कि हां अल्फा जो नेचुरली अल्फा होता है वो एक चीज है पर वो सभी नहीं होते। बाकी सबको तो हर एक बाकी सब वो स्पेक्ट्रम में है। ऐसा भी नहीं है कि
(1:13:42) बंदे नर्चरिंग नहीं होते। मेरा भाई है ही इज़ एन एक्सीलेंट फादर। राइट? बहुत नर्चरिंग हिम। एंड देयर आर वुमेन हु आर न्चरिंग बट आल्सो एक्सट्रीमली कंपेटिटिव एंड ऑल दैट। देखो आप कितने सारे कॉर्पोरेट्स में है ऐसी स्त्रियां। और ये हमेशा से रहा था। यस। आज दोनों साइड को एक्सप्रेशन का अवसर ज्यादा है। पहले ज्यादा क्योंकि टेक्नोलॉजी ऐसी थी या टेक्नोलॉजी नहीं थी उसके कारण स्पेसिफिक था। तो इनफैक्ट आज का जो समय है ना मेरे ख्याल से हम उस फ्लक्स से गुजर रहे हैं कि जिसमें टेक्नोलॉजी बदल गई है। रोल्स का सॉर्ट ऑफ चेंज हो रहा है। तो उस
(1:14:22) इनफैक्ट हमारे मतलब मेरे मां का जनरेशन शायद वो जनरेशन ज्यादा था जहां वो लोग बेचारे दोनों तरफ से पिसे कि उनके पहले के परिवार हैड सर्टेन एक्सपेक्टेशन फ्रॉम देम। पर उनके बाद का इस नॉट डूइंग एनीथिंग व्हाट व्हाट दे एक्सपेक्टेड टू। ठीक है। आई थिंक इसके बाद का जनरेशन थोड़ा ज्यादा कंफर्टेबल हो रहा है विद नो इक्वल तो नहीं हो सकता बट अ कॉम्प्लीमेंटरी रोल्स एंड फिलिंग इंटू दैट। सो नाउ यू सीन दैट थिंग्स आर चेंजिंग एंड पीपल आर मेकिंग देयर पीस विथ चेंजिंग रोल्स इन फॅमिलीज। तो यह तो चलते रहेगा। हम् दिस डिस्कशन कुड गो ऑन फॉर सो लॉन्ग
(1:15:02) नहीं आई आई वांट टू आस्क वन मोर एंड क्वेश्चन एक विचार बिकॉज़ दिस इज़ मोर लाइक फुलफिलिंग वैरी फुलफिलिंग तो मैं कैसे सोचता हूं इस बात को आई वर्क्ड इन कॉर्पोरेट फॉर ऑलमोस्ट 11 इयर्स नाउ [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] और मुझे बहुत बाद में ये बात समझ में आई ऑब्वियसली शक्ति की के स्वरूप को भिन्न-भिन्न स्वरूप तो अब स्त्री एक स्वरूप में आपके सामने खड़ी है। वो तो बहुत एक प्रोफाउंड वर्जन ऑफ दैट फेमिनिन है जो कि मैनिफेस्ट हो गया। बट ऐसे बहुत सारी चीजें हैं। जैसे मैं बोलता हूं कि स्लीप भी फेमिनिन है। वो डिवाइन एम्ब्रेस है वो। अगर आप उसकी
(1:15:44) रेस्पेक्ट नहीं करोगे तो प्रॉब्लम होंगी। फूड इज आल्सो दैट। बहुत सारी चीजें हैं आपके। अराउंड लैंड लैंड है, रिवर रिवर है। तो ये सारी चीजें बहुत गिविंग है। मैं एक बात आपको बताती हूं। डॉक्टर की नींद की बात कही। हां जो दुर्गा सप्तशती की जो शुरुआत है उसमें क्या है उसमें निद्रा देवी को बोल रहे हैं कि भाई क्योंकि विष्णु जो है वो सोए हैं और ये मधु कैतब जो है वो असुर बन के आ गए और वो तबाही मचा रहे हैं। ठीक है? और ब्रह्मा जी को मारने के लिए तैयार हो गए। अब क्या करें? अभी ये कि भ कैसे इससे बचे? इनको मारना तो पड़ेगा विष्णु को ही
(1:16:28) बट विष्णु तो निद्राधीन है तो स्तुति निद्रा देवी देवी की जो हो रही है वो निद्रा देवी की हो रही है कि आप छोड़िए उनको योग निद्रा योग निद्रा की हो रही है तो जब निद्रा देवी अनुग्रह करती है और वो छोड़ती है उनकी आंखों से निकलती है तब विष्णु उठते हैं और मैं मधु कैटव को मारते हैं तो उनको तो देवी कहा ही गया [हंसी] ब्यूटीफुल मेरा तो जो क्वेश्चन था कि अमित कि आप एक बहुत ही यूनिक करियर पाथ पे हैं। अ ऑथर भी हैं, कल्चरल रिसर्चर भी हैं। तो बहुत सारे यंग लड़के लड़कियां आपसे कंसल्ट भी करते होंगे कि हम अपना करियर को दिशा कैसे दे?
(1:17:10) तो मे बी इस वीडियो के माध्यम से भी क्या धर्म के इस पैराडाइम में आज के समय में अर्थ है? क्या यहां पर भी आके व्यक्ति पैसा भी कमा सकता है और फुलफिलिंग करियर भी क्रिएट कर सकता है? आपको कहां पर ओपोरर्चुनिटीज दिखती हैं? एक यंग माइंड को कैसे इसको नेविगेट करना चाहिए? देखिए अर्थ के बिना तो कुछ नहीं होता और मैं तो गुजराती हूं। [हंसी] क्या बेटे भजन है? पैसा तो चाहिए। और पैसा महत्वपूर्ण है। मैं आपको वेद का उदाहरण देती हूं। ठीक है। आपने रुद्राभिषेक जानते हैं आप? रुद्राभिषेक करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन किया वैसे भी। उसमें क्या बोलते हैं श्री रुद्रम में
(1:17:51) क्या बोलते हैं हम जानते हैं एक वो चमकम और एक नवकम होता है ठीक है चमे चमे चमे चमे ऐसे वो होता है और नमकम में वो शिव जी के अलग-अलग नाम है पर जो चमकम होता है उसमें चमे चमे चमकम इसलिए कहा गया है क्योंकि हर शब्द को चमे चमे चमे ऐसे चमे च मतलब एंड और संस्कृत में च मतलब और मे मतलब मेरे को ठीक है ये भी मुझको दो वो भी मुझको दो फलाना भी मुझको दो ठिकाना दिस इज लिटरली दैट जिसमें 150 चीजें हैं। ऋषि मांग रहे हैं कि मुझे यह भी चाहिए, मुझे यह भी चाहिए। मतलब क्या धन चाहिए, ध्य चाहिए, घर चाहिए, बीवी बच्चे चाहिए, गाय चाहिए, पशु चाहिए, भूमि चाहिए,
(1:18:31) अधिपत्य चाहिए, शांति चाहिए, सब कुछ चाहिए। अच्छा जो भी आप मांग सको वो सब कुछ आर्थिक दृष्टि से आप जो भी मांग सको वो उन्होंने मांग लिया है। अगर आज होती तो वो कहते लैपटॉप भी दे दो, आईपैड भी दे दो, MacBook भी दे दो, सब कुछ दे दो। वो उन्होंने कहा है। ठीक है? और यह हमारे वेद में आप अगर जब जब यज्ञ करते हैं तब इंद्र को जब बुलाया जाता है तब इतने सारे जो सूक्त ऋग्वेद में है वो कहते हैं कि भाई तुम हमारे एनिमीज़ को मार दो और हमको पूरे राज्य का सब सर्वश्रेष्ठ बना दो। पैसा दे दो, धन दे दो, ध्य क्योंकि समाज का अच्छा कैसे होगा? पैसेवैसे के बिना आपको दान भी
(1:19:09) करना है तो पैसा तो चाहिए। द हिंदू व्यू इज कमाओ बट वहीं पर अटको मत। इसीलिए चाणक्य कहते हैं सुखस्य मूलम धर्म। आपको एक सुखी समाज चाहिए तो वो धार्मिक धर्म पर नहीं बसा होगा तो नहीं होगा। राइट? धर्म मतलब न्याय, कर्तव्य परायण सब कुछ। पर आप धर्म भी कैसे निभाओगे? अगर पैसा ही नहीं है तो। एक पॉवर्टी मतलब क्या? जो वो कहते हैं ना कि एक अबंडेंस माइंडसेट है और एक पॉवर्टी माइंडसेट है कि जब कुछ है ही नहीं तो आप एक दूसरे का छीनना चाहते हो। देने का ही नहीं भाई हमारे पास कमी है। जब कमी है तो आप किसी के साथ क्या शेयर करोगे? तो आपको अगर धर्म
(1:19:54) भी करना है तो आपके पास अबंडेंस होना देने के लिए होना चाहिए। जो राम राज्य का डिस्क्रिप्शन हमको वाल्मीकि रामायण में मिलता है वो कोई गरीब राज्य नहीं है। वो अत्यंत समृद्ध राज्य है। अत्यंत समृद्ध समृद्ध हर तौर पे अर्थ के तौर पे भी। तो हमारे वर्ल्ड व्यू में हमारे दृष्टिकोण में कभी भी यह नहीं कहा गया कि आप पैसे मत कमाओ। या आप एंबिशन मत रखो। ये राजसु यग्न क्यों करते थे? या अश्वमेद यज्ञ क्यों करते थे? बहुत एंबिशन था। ठीक है? पैसे का एंबिशन था, पावर का एंबिशन था, सब कुछ था। केवल इतना है कि जो पैसा और पावर मिल रहा है उसका उपयोग आप किस लिए कर रहे
(1:20:37) हो? और केवल वहां अटक रहे हो या आपकी मानसिकता ऐसी कि जब वो है तब है पर जब लगे कि अब हो गया तो वो सब छोड़ के आप जा भी सकते हो। हम आपका जीवन का वो एक टूल है। वो आपका जीवन नहीं है। इसीलिए ऋग्वेद में एक ओर पर ये सारे सूक्त है और सारा धन देव ये सारा है। और दूसरी ओर पर वो लोग ब्रह्म तत्व की भी बात करते हैं। वो त्याग की भी बात कर रहे हैं। वो एक्सट्रीम फिलॉसफिकल रियलिटी की भी बात कर रहे हैं। फिर वह यह भी कह रहा है जो फिर आगे जाके वह आपको दूसरे उपनिषदों में वेदों में मिलता है ईशा वासम सर्वक्त यक्तन भजिता इसको त्याग कर आप एंजॉय करो
(1:21:22) बट वो त्याग की भावना रखो क्योंकि सब कुछ तो ई है सब कुछ तो ईशा ईशा ईश का ही वास्य सब में है। है ना हम तो छोड़ना भी सीखो हम इससे बाहर भी निकलो और वही आश्रम व्यवस्था है कि जब गृहस्थ हुआ हो तब आप कमाओ आपका हमारे चार पुरुषार्थ है धर्म अर्थ काम मोक्ष राइट मोक्ष तो चलो इंडिविजुअल है बट अर्थ और धर्म पैसा भी चाहिए पैसा कमाना है प्लेजर भी चाहिए इवन फिजिकल क्योंकि बच्चे कैसे होंगे अगर अट्रैक्शन ही नहीं है तो राइट तो खुद का ध्यान भी रखना है प्लेजर भी लेना है। सब करना है। सब कैसा हो? धार्मिक। धार्मिक मतलब क्या? दैट व्हिच सस्टेंस। राइट? सस्टेन मतलब क्या? अगर आप
(1:22:06) पूरे टाइम केवल पैसे पैसे पैसे के पीछे भाग रहे हो तो क्या सुख क्या? क्या आपका परिवार बिखर गया और आप पैसे के पीछे पड़े हो। क्या वो सस्टेनेबल है? हम जो वर्क लाइफ बैलेंस की बात करते हैं। वही तो है जब अर्थ और काम धर्म से संयुक्त हो। नो वेयर टू स्टॉप, नो हाउ टू बैलेंस, नो हाउ टू मैनेज एंड नो हाउ टू गिव बैक। हम दैट इज द होल आईडिया राइट वो गृहस्थ आश्रम में वानप्रस्थ आते-आते वो भी आपका भाव होना चाहिए कि अब हो गया मैंने कर लिया अब खत्म हो गया जब ना हो जब कम हो उसमें भी जी पाओ दैट इज द होल आईडिया तो धर्म का बिल्कुल भी अर्थ से धर्म और अर्थ जुदा नहीं है
(1:22:51) धर्म के लिए अर्थ चाहिए अर्थ कैसा हो धर्म से संयुक्त मतलब जो आप पैसा जनरेट कर रहे हो वो भी सही तरीके से हो। किसी के एक्सप्लइटेशन से ना हो और उसका उपयोग भी जो आप कर रहे हो वो अच्छे काम के लिए भी कर रहे हो। केवल अपना अपनापना नहीं सोच रहे औरों का भी सोच रहे हो। जो आपका मनुष्य ऋण है जो भूत ऋण है वो भी चुकाने का काम। तो जिस सन्यास की हम बात करते हैं वानप्रस्थ का जो एक बीच में जो पार्ट था वह फेस था वह एक्चुअली टू गेट रेडी फॉर सन्यास था कि आप जैसे वो मार शारदा शारदा ने बोला था कि एक बदाशे की चाह भी आपको 100 जन्मों के चक्कर लगवा सकती है कि अब
(1:23:30) आप मृत्यु शैया पे पड़े हो लेकिन आपके मन में विचार यह चल रहा है कि मेरी तिजोरी का दरवाजा खुला तो नहीं रह गया तो अगर यह रहेगा तो फिर आप अगले जन्म में भी आप तिजोरी को ही ध्यान में रखते हुए आओगे तो आई थिंक थिंक सही समय पे अपनी जिम्मेदारियों को ट्रांसफर कर देना ताकि अगली पीढ़ी जिम्मेदार बन सके। अ दैट इज वास द मॉडल। सर आप देखिए जो राजा लोग होते थे वो पहले राज करते थे फिर वानप्रस्थ में चले जाते थे। नेक्स्ट राजा बनाकर फिर ये नहीं देखते थे अरे वो सही से रूल कर रहा है कि नहीं। फिर उसकी मगजमारी। वो तो वन में चले गए। उनको जो करना है करो। वो राज्य का विनाश
(1:24:06) हो जाए कोई परवाह नहीं। मेरा हो गया। मेरा काम था रूल करना वह मैंने अच्छे से किया। मेरा काम था सही राजा देना वो मैंने दे दिया। अब हो गया। अब उसके सर पर बैठ के उसको माइक्रो मैनेज नहीं करना है 24 घंटे कि भाई ये करो वो करो उसे करने दो ना जैसे आपने किया। दे जस्ट वॉक अवे और वॉक अवे कुछ लिए कुछ भी लिए बिना मतलब बिना कुछ लिए चले गए हैं। राइट? वो भाव भी होना चाहिए। दैट इज़ जो हम वैराग्य कहते हैं जो डिटचमेंट कहते हैं वो वो है। इट इज़ नॉट इनफरेंस। पोस्ट एपेटाइट सेटिस्फेक्शन ब्यूटीफुल हम एक तो बात हो गई कि यह प्रॉब्लम आइडेंटिफिकेशन हमने जो करी है बहुत सारी
(1:24:45) कि देयर वाज़ इमंबैलेंस अंडरमाइनिंग ऑफ वन एनर्जी अंडरमाइनिंग ऑफ समवन हु इज़ मोर नर्चरिंग मोर केयरिंग सॉफ्ट बट देन डोमिनेंस केम एंड टेक टेकन ओवर हमने बहुत सारी चीजें जो अडॉप्ट की हैं वेस्ट से उसमें कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर भी है हमारा तो जैसे आपने कहा कि 5 दिन के लिए अगर अब कोई स्त्री पीरियड्स वाले फेस से गुजर रही है। क्या यह कॉर्पोरेट इतना फ्लेक्सिबल नहीं हो सकता था कि अब आप अगर यह देख रहे हो कि आपको 9 से पांच की जॉब अगर करवानी है। एक पुरुष उसको जाके कर सकता है
(1:25:31) वो डिफॉल्ट बाय डिफॉल्ट उसके लिए वो एलिजिबल है। बट देन आप यह चाहते हो कि स्त्री घर भी संभाले देन फिर जॉब भी करे देन फिर उसकी यह फिजिकल जो बायोलॉजिकल चीजें हैं। क्या हम इसमें कोई ऑल्टरेशन मॉडिफिकेशन नहीं कर सकते थे? क्या हम उसी ही उस सीटीसी में या उसी पे रोल पे ऐसा कोई मॉडल नहीं दे सकते थे जो स्त्री अपने घर से ही काम कर सके जो फाइनेंसियल इंडिपेंडेंस उसको मिल सके। बट देन हमने क्या किया? अगेन अंडर माइनिंग ऑफ दो दैट डिफरेंट दोज़ डिफरेंशिएटर्स जो कि एक स्त्री के अंदर होते हैं हमने उसको धकेल दिया उसी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में जो कि
(1:26:12) फंडामेंटली एक मेल के लिए बना था। तो आई थिंक दिस कुड बी डन। हमारा रसावर्स में यह एक विचार रहता है कि वी विल हायर दोज़ अ फीमेल्स। जो जो करना चाहती हैं वो फैमिली को भी चलाना चाहती हैं। वह बच्चे भी पालना चाहती हैं। वो अच्छा कमाना भी चाहती हैं। आर्ट्स क्रिएटिव भी करना चाहती हैं। बट वी नीड टू ब्रिंग दैट फ्लेक्सिबिलिटी। करेक्ट। और वो हमारे कॉर्पोरेट में मिसिंग रही हमारे। पर ये क्या सिर्फ लड़की के लिए है? व्हाट अबाउट द मैन हु वांट टू टेक केयर ऑफ़ फैमिली? क्या उन बेचारों को उसकी आवश्यकता नहीं है क्या कि बच्चे के पास जाना है रोज
(1:26:51) घर पे पहुंच उसके पहले वो बच्चा सो रहा है पहचानते नहीं है पिताजी को देखा नहीं है दिन तीन-तीन चार-चार दिनों तक क्या उसको आवश्यकता नहीं है क्या देन व्हाई आई मेक इट मस्कुलिन और फेमिनिन राइट आल्सो जो आपने पांच दिन की बात कही एक तो प्रत्येक स्त्री का शरीर भी अलग-अलग है नॉट एवरीबडी गोस टू दैट नॉट एवरीबडी नीड्स दैट राइट तो फिर जिनको नहीं चाहिए उनको वो चॉइस भी होनी चाहिए राइट कॉर्पोरेट में जो मैंने देखा कॉर्पोरेट में आजकल तो बहुत सारे कॉर्पोरेट आर वेरी विलिंग टू कंसीडर दी थिंग्स एंड दीज़ आर जेंडर इरिस्पेक्टिव ऑब्जेक्टिव राइट
(1:27:27) लड़के लड़की दोनों को ही सबटिकल देते हैं वो भी दोनों को देते हैं आजकल तो जो पेटर्निटी लीव्स भी देने लगे तो वो समझ आने लगी है क्योंकि क्यों क्यों ये हो रहा है क्योंकि वो देख रहा है कि रोल्स चेंज हो रहे हैं पहले पेरजा नहीं है सपोर्ट सिस्टम भी पहले नहीं है बहुत सारे कपल्स अकेले रहते हैं राइट तो ये कॉर्पोरेट्स में हो रहा है वो वो कैसे होगा? जब डिमांड वैसे होगा जब लोग मांगेंगे तभी ऐसे होगा। पर मैं कह रही हूं केवल ये लड़की के लिए मत देखिए। ये लड़के के लिए भी देखिए क्योंकि अगर दोनों साइड से होगा तो लड़की भी बाहर जाके उतना काम पाएगी। अगर किसी दिन द पति कैन
(1:27:59) कम होम ऑन टाइम राइट एंड शी कैन टेक केयर। अब्सोलुटली। तो ये भी हो सकता है। इनफैक्ट आज तो मैंने देखा है अभी परसों ही किसी फ्रेंड से बात हो रही थी। शी इज़ अ कंसलटेंट। एंड दे जस्ट हैड अ बेबी। मतलब तो दो साल का हो गया। शी टू अ 9 महीने का उसने ब्रेक लिया और वापस कंसल्टिंग शुरू कर दी। अब उसका ट्रैवल का जॉब होता है। बट उसके उसके जो पति है वो पहले कुछ तो मार्केट्स का काम करते थे। ही हैड एन ऑफिस बट ही कैन वर्क फ्रॉम होम। तो वो जब ट्रेवल करती है तो वो घर से काम करता है। राइट? एंड इट वर्क्स परफेक्टली। अच्छा ये भी कैसे है? क्योंकि लड़का अपने
(1:28:30) सर पे ये ईगो चैनल लगा के नहीं चल रहा कि मैं कैसे देखूं? मैं क्यों डायपर चेंज करूं? वो कैसे बाहर जा रही है। वो ये नहीं सोच रहे। है ना? एंड ऑनेस्टली बहुत अच्छे बंदे हैं। लाइक मेरे फ्रेंड्स हैं जो इतने अच्छे जो समझते हैं। ठीक है? तो ये हो रहा है और ये होगा ये आगे जाके और भी होगा। आई एम श्योर। पहले तो जब जब समाज आपके वो फ्लक्स मोड में हो ना तो दोनों को ही पता नहीं है कि वो चाहते भी क्या है। समाज में क्योंकि कोई सब लोग ऐसा नहीं कर कोई कह रहे हैं सो इट इज टाइम फॉर तो उनके परिवार वालों का अरे बेचारा मेरा बच्चा बीवी तो चली जाती है उसी को करना है। पर
(1:29:09) अगर आसपास में सभी ऐसे कर रहे हैं तो इट बिकम्स नॉर्मलाइज्ड। ऐसे ही फिर चीजें बदलती है। तो आप जब रसा वर्ड्स का भी देखते हो तो दोनों के लिए वो कि वो फ्लेक्सिबिलिटी दोनों को होनी चाहिए। बट अच्छा है कि आप सोच रहे हो। आई होप आज जो कन्वर्सेशन हुई है इट विल बी अ गुड नेविगेशन फॉर अ लॉट ऑफ़ पीपल एंड इट वास डिफरेंट फ्रॉम योर यूजुअल कन्वर्सेशन। दैट इज व्हाट आई फ्ट और मैं आपके माध्यम से आपके ऑडियंस को कहना भी चाह रही हूं कि ये बहुत एकदम एक्सटेंपोर कन्वर्सेशन रहा है। राइट? तो मैंने जो मेरे विचार है वो शेयर करने का प्रयत्न किया है। जो आपको ठीक लगे वो रखिए
(1:29:46) ना लगे वो कोई बात नहीं। वी ऑल लर्न वी ऑल इवन एक्सीलेंट दैट इज द फ्लूइडिटी यही पूरे कन्वर्सेशन का सार था फ्लूइडिटी एंड दैट इज द कॉमन फीडबैक दैट वी गेट कि वी आर नॉट वेरी एजेंडा ड्रिवन पीपल देयर इज अ रीज़ वी हैव असेंबल्ड हियर एंड इट्स इन द डिज़ नहीं वो तो जो ऐसा कन्वर्सेशन वही कर सकता है जो स्वयं सोचते भी हो ये कोई कोई क्वेश्चन सोच के दे दे ऐसे नहीं होता जब अंदर से आते हो तो ही ऐसे प्रश्न भी आ सकते हैं बहुत मजा थैंक यू सो मच आप लोग मुझे भी बहुत सोचने फिर बनूं क्या? अगली बार और ज्यादा सोच पाएंगे। ग्रेट। थैंक यू। थैंक यू सो मच।

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