Saturday, August 29, 2026

द्रौपदी नहीं थीं महाभारत का कारण ,असली वजह! | Ami Ganatra | The Mumta Podcast

द्रौपदी नहीं थीं महाभारत का कारण ,असली वजह! | Ami Ganatra | The Mumta Podcast

Author Name:The Mumta Podcast

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Transcript:
(00:00) जब आप महाभारत की बात करते हैं तो एक बुरा [संगीत] कैरेक्टर जिसे कहते हैं ये तो शकुनी सबको पता है कि शकुनी कौन है? जो लोगों को लगता है कि शकुनी स्ट्रेटजी बना रहे हैं ऐसा कुछ भी नहीं है। शकुनी का सबसे बड़ा रोल वो द्वत कड़ा में है। उसके बाद कुछ नहीं है। युद्ध में वो लड़ते हैं पर वो कोई ऐसे मास्टरमाइंड नहीं है। जो पासे थे अस्थियों से बने थे वो पासे। शकुनी बहुत ही स्किल्ड प्लेयर थे। पर उसमें कुछ मैजिक था पासों में या कुछ पिता के अस्थियों से? पिता तो जीवित थे यार। तो कहां से होगा? मां-बाप की दूसरी जड़ जो कहते हैं कि द्रोपदी थी।
(00:29) अंधे का पुत्र अंधा यह बिल्कुल भी ऐसा नहीं हुआ है। द्रोपदी ने अंधे का पुत्र अंधा कहा ही नहीं है। जब द्रोपदी को लेकर आया जाता है। उनके पीरियड्स चल रहे थे। पीरियड्स डेफिनेटली चल रहे हैं। और वो कह रहे हैं कि मुझे इस अवस्था में तुम मत ले जाओ। जब दुशासन खींचने उनको लेने आता है। विदुर और कर्ण दो ही जन है [संगीत] जो कहते हैं ये गलत है एकदम करना। तब कर्ण बीच में आता है। और कर्ण कहता है पांचप पुरुषों के साथ संबंध रखती है। वैश्या होती है ऐसी स्त्रियां। वेश्या को तो आप एक वस्त्र में लाओ या निर्वस्त्र लाओ क्या फर्क पड़ता है?
(00:58) कृष्ण आए हो या साड़ी बड़ी है ऐसा कुछ नहीं हुआ। नहीं उसमें है कि कपड़े बहुत हो गए। कृष्ण के आने का कोई उल्लेख नहीं है। ये माधुरी वाला रूल बताइए। पांडू और [संगीत] माधुरी जो है वो वॉक पे गए होते हैं। पांडू एकदम कामुक हो जाते हैं। एंड ही अप्रोचेस माधुरी और माधुरी डर जाती है कि भई आप मत ऐसे करो। और उसमें फिर देहांत हो जाता है। जो कर्स है वो लग जाते हैं। शांतनु जैसे राजा जो [संगीत] थे इन्होंने गंगा से शादी की थी। तो यह कैसे पॉसिबल है? मतलब वो प्रेम में पड़ते हैं दोनों एक दूसरे के। ये जो पांचों पांडव जो थी एक मंत्र दिया
(01:30) गया था कुंती जी को उससे ये पैदा हुए थे। अगर मंत्र से बच्चे पैदा हो [संगीत] जाते तो किसी को बुलाने की क्या आवश्यकता थी? वो मंत्र क्यों है? कि आप किसी भी श्रेष्ठ पुरुष को बुला सकते हो। ओके। उस मंत्र के उस मंत्र के द्वारा। पांडु स्वयं बच्चे पैदा नहीं कर सकते थे। जिस क्षण तुम्हारा स्त्री से संगम होगा वही क्षण तुम्हारा अंतिम क्षण होगा। उस परिस्थिति में भी नियोग हुआ है। कैसे नियोग होता है? तो वो [संगीत] कहते हैं कि जो पुरुष है वो शरीर पे पूरा ऐसे तेल चुपड़ के आएगा। ताकि स्त्री को [संगीत] उससे आकर्षण ना हो। वेदव्यास जी के अपने खुद के
(02:05) बच्चे है ना धृतराष्ट्र, पांडु, विदुर। दानवीर जैसा हो तो कर्ण जैसा। बेचारे ने सहा है। बेचारे को [संगीत] यह हुआ है। लेकिन आप कह रहे हो कि सारी जड़ ही वो था। जय माता दी। क्या आपके भी काम नहीं बन रहे हैं और आप भी एस्ट्रोल्जर्स को महंगी फीस देकर थक गए हैं या फिर आपको लग रहा है कि इतनी फीस हम अफोर्ड नहीं कर सकते हैं तो क्या करें? कैसे अपने सवालों के जवाब पाए? तो इसके लिए मैं आपकी हेल्प के लिए लेकर आई हूं वेबसाइट। जैसे मेरी वेबसाइट आपको स्क्रीन पर दिख रही होगी। वहां पे मनी का यानी कि एआई के थ्रू आपके जो सवाल हैं उनके आपको जवाब मिलेंगे। जो भी आपके फोर
(02:36) टू फाइव क्वेश्चंस [संगीत] हैं वहां तक आपको जवाब मिलेंगे। अगर उसके बाद भी आपको लग रहा है कि मैम से मुझे गाइडेंस चाहिए [संगीत] और मैम का स्लॉट बुक करना है तो आप आगे प्रोसीड कर सकते हैं। वहीं अगर आप अपनी कुंडली देखना चाहते हैं, आप डेली अपने हॉरोस्कोप चाहते हैं, आप डेली अपने बारे में जानना चाहते हैं कि आज मेरा दिन कैसा रहेगा, [संगीत] आने वाला टाइम मेरा कैसा रहेगा? तो उसमें आप सब्सक्राइब कर सकते हैं और डेली आपको अपने हॉरोस्कोप आप चेक कर सकते हैं। वहीं अगर आप किसी से प्यार करते हैं और आप देखना चाहते हैं कि क्या हमारा फ्यूचर सही [संगीत] रहेगा?
(03:00) क्या हमें शादी करनी चाहिए? तो आप अपनी कुंडली भी मैच कर सकते हो इस ऐप में फ्री में। तो वहां पर आपको सिर्फ सब्सक्राइब [संगीत] करना है। वहां जाइए वेबसाइट से आप जो हेल्प क्योंकि आपको अगर लग रहा है कि अफोर्ड नहीं [संगीत] कर सकते। हम बहुत ज्यादा चार्जेस हैं और एस्ट्रोलॉजर्स से भी आपको वैसे जवाब नहीं मिल रहे हैं जो आप ढूंढ [संगीत] रहे थे तो जरूर एक बार इस वेबसाइट पर आपको जाकर हेल्प लेनी चाहिए। जय माता दी। [संगीत] जय माता दी। जय माता दी। कैसे हो आप? एकदम बढ़िया। कैसे हैं आप? मैं बहुत बढ़िया। अ सबसे पहला आज क्योंकि ऑब्वियसली आपने
(03:42) महाभारत आप इतनी खुलकर बात करते हैं। रामायण आपने पढ़ी है। तो एक जो टर्म यूज़ होता है माइथोलॉजी क्या ये टर्म सही है? तो माइथोलॉजी अगर उसका टेक्निकल डेफिनेशन देखा जाए ना तो टेक्निकल डेफिनेशन ऐसे होता है कि बिलीव सिस्टम ऑफ अ ग्रुप ऑफ पीपल लाइक कोई समाज है उसकी कोई श्रद्धा स्थान के कोई कथाएं हो। ठीक है? अब जो मानता है उसके लिए तो वो सच ही है। उनके लिए तो सत्य ही होगा। पर जो नहीं मानता वो कहेगा कि ये तो मिथ है, लेजेंड है। उनके लिए सही हो सकता है। पर क्योंकि इसको वेरीफाई नहीं कर सकते। इसके कोई रिकॉर्ड्स नहीं है। इसीलिए इसको
(04:20) हम सत्य नहीं मान सकते। ऐसा कहते हैं। परंतु जो मानता है उसके लिए सत्य है। तो यह सत्य भी है नहीं भी सत्य है। इसको माइथोलॉजी कहते हैं। माइथोलॉजी मतलब झूठा ऐसा जरूरी नहीं है। परंतु अगर हम महाभारत रामायण की बात करें तो हमारे ऋषियों ने बहुत क्लियरली इनको इतिहास कहा है। हमारे यहां माइथोलॉजिकल अगर हम रेफरेंस कहें तो वो भी है जो पुराणों की कथा है। है ना? उसको हम प्रूफ तो नहीं कर सकते। अगर आप वैष्णव हो, मैं शैव हूं, कोई शाक्त है तो हमारी अपनी-अपनी कहानियां भी है। है ना? और हमारी कहानियां हमारे लिए उतनी ही सच है। परंतु वो इस इस भूमि पर नहीं हुई। वो
(04:56) देवासुर संग्राम लेवल पे है। है ना? तो उसको हम लेजेंड्स माइथोलॉजी ये कह सकते हैं। पर महाभारत रामायण जो है वो तो इस भूमि में हुए हैं। मनुष्य अवतार में है जो भी हुआ है। है ना? और उसके रिकॉर्ड्स भी हैं। तो महाभारत और रामायण हम इतिहास कहते हैं। इतिहास मतलब इतिहा आस जो पहले हुआ है। तो इतिहास की अगर हम व्याख्या भी लें तो बहुत ही क्लियरली कहते हैं पूर्ववृत्तम कथायुक्तम पूर्ववृत्तम जो पहले हुआ है। इसकी जो पहले हुआ है और कथा रूप में बताया गया है उसको इतिहास कहते हैं। और इतिहास में हम केवल वेदव्यास महाभारत और वाल्मीकि
(05:35) रामायण को हम इतिहास मानते हैं। तो यह क्लेरिटी बस होनी चाहिए। माइथोलॉजी अपने अपने आप में झूठ ऐसा नहीं है। श्रद्धा की वस्तु श्रद्धा की कथाओं को माइथोलॉजी कहते हैं। परंतु इतिहास वो है जो डेफिनेटली पहले हुआ है। क्योंकि कहीं पे भी जब भी कुछ ऐसी बातें होती है ना तो कह देते हैं हिंदू माइथोलॉजी में ये कहा गया हिंदू माइथोलॉजी। तो मिथ वर्ड जहां आ जाता है ना तो लोग इसलिए कहीं ना कहीं जजी या जो अपकमिंग जनरेशंस हैं उनको लगता है कि जब मिथ ही आ गया तो कहां सच्चाई है हां क्योंकि वो मिथ की समझ ही गलत हो गई है। इसीलिए थोड़ा सा ऐसे हो गया और दूसरा
(06:07) क्या है कि जो हमारा इतिहास भी रहा है उसको इतने वर्षों से केवल मिथ कहा गया है। अब हिंदू माइथोलॉजी की जब बात होती है तो उसमें बहुत सारी बातें आती है। जैसे अलग-अलग देवताओं की कथाएं देवासुर संग्राम की जो कथाएं हैं। है ना? वो सारी लार्जर माइथोलॉजी का भाग है। अगेन माइथोलॉजी मतलब झूठा मिथ्या ऐसा नहीं माइथोलॉजी मतलब लोगों के श्रद्धा के के लेजेंड्स की कथाएं कथाएं जो जो मानता है उनके लिए तो सही है। ठीक है? परंतु इस चक्कर में हुआ क्या है कि मतलब क्योंकि हमारे पास ग्रीक माइथोलॉजी है, इजिप्शन माइथोलॉजी है, रोमन माइथोलॉजी है। ये सारे माइथोलॉजी है। अभी
(06:43) एक मूवी आई है ओडसी। राइट? तो वो ओडिसिस जो है वो भी ग्रीक माइथोलॉजी में आते हैं। क्यों ग्रीक माइथोलॉजी में आते हैं? क्योंकि उसमें वो पोज़ाइडन वगैरह-वगैरह उनके जो भगवान देवता गॉड्स जिनको कहते थे वो लेजेंड्स में आते हैं। इसलिए उसे माइथोलॉजी में कहा जाता है। परंतु जब महाभारत रामायण को माइथोलॉजी करके केवल ऐसा कह दिया जाता है कि ये तो आपके श्रद्धा के स्थान है। इसका सच कुछ नहीं है। तब इसमें इश्यूज होने लगते हैं। क्योंकि ये केवल श्रद्धा के स्थान नहीं है। ये इतिहास है जिसका हमारे लिए तो पूर्ववृत्तम है। मतलब हमारे पूर्वजों की
(07:18) ये कथा है। कोई माने या ना माने यह हमारे पूर्वजों की कथा है जो कथा रूप में बताई गई है। तो क्योंकि कथा रूप में बताई है। तो जब हम कथा कहते हैं तो थोड़ा सा एग्जाजरेशन होता है। थोड़ा सा लार्जर दन लाइफ हम दिखाएंगे। थोड़ा उसे और रसिक बनाएंगे। राइट? पर जो मूल कथा है कौरवों पांडवों की जो कथा है उनका जो संघर्ष है श्री राम के जीवन का जो संघर्ष है वो सब तो हुआ ही हुआ है हुआ है वेदव्यास महाभारत और वाल्मीकि रामायण और इतिहास इसलिए भी हमें हम केवल उन दोनों को इतिहास मानते हैं कारण वेदव्यास जी और वाल्मीकि जी जिस समय वो घटनाएं घटित हो
(07:58) रही थी तब वहां मौजूद थे ये समझना भी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि आज आप देखिए बहुत लोग कहेंगे रामायण तो बहुत सारे हैं तो सब चलता है नहीं उस समय कौन मौजूद था जिन्होंने श्री राम को देखा श्री राम के जीवन को देखा जो उस समय श्री राम से मिले भी थे वो कौन है वाल्मीकि जी सेम फॉर वेदव्यास जी वेदव्यास जी तो वेदव्यास जी के अपने खुद के बच्चे हैं ना धृतराष्ट्र पांडु विदुर वैसे देखा जाए तो उनके ही द्वारा नियोग हुआ था अंबिका अंबालिका और उनकी जो जो उनको उनके यहां सेवा करती थी उनका है ना तो इनके द्वारा ये तीन बच्चे हुए हैं। तो उनमें जो लहू है
(08:35) वो तो वेदव्यास का है। राइट? और पांडव और कौरव की बात करें तो पांडव और कौरव तो फिर वैसे देखा जाए तो वेदव्यास जी के ही बेटों के बेटे हैं। जो आपने कहा कि अंबालिका जैसे जितना मैंने जाना है पढ़ा है। अंबालिका और अंबिका है ना? तो ये जो थे ये इनके जो संतान जो हुई थी वो नॉर्मल हस्बैंड वाइफ वैसे नहीं हुई थी। एक ऋषि को बुला के और वैसे हुआ था। एक तो आप थोड़ा सा इस पे क्लेरिटी दीजिए क्योंकि मैंने इसको पढ़ा हुआ है। बट आप अगर बताएंगे ऑडियंस को तो ज्यादा अच्छा उनको सच समझ आएगा कि कैसे संतान एक ऋषि के और क्या वो सही था क्योंकि आज के टाइम पे मतलब बहुत गलत नजर
(09:17) से देखेंगे। अगर हस्बैंड वाइफ का तो कहेंगे आईवीएफ। इवन आईवीएफ को भी लोग ऐसे देखते हैं कि क्या सच में ही हमारा क्योंकि ये केस अभी चल भी रहा है तो लोग बहुत ज्यादा उसमें भी आ जाते हैं कि क्या यह सही है? लेकिन ये पहले जैसे होता था कि अगर हस्बैंड नहीं हो पा रहा है या उसमें कुछ कमी है कुछ भी रीजन है तो किसी ऋषि मुनि को जो कि जो कि सही है हो परिवार में कोई हो तो ये कैसे हुआ था ये तो इसको ना नियोग कहा जाता है ओके अब गृहस्थ आश्रम जो होता है गृहस्थ आश्रम मतलब जो विवाह होता है वो विवाह का उद्देश्य क्या है एक तो है कि आप ठीक है
(09:50) सबका ध्यान रखो पैसे बनाओ ये सब तो एक चीज है परंतु उसका मूल उद्देश्य है संतान संतान प्राप्ति। ओके। अब संतान प्राप्ति क्यों? क्योंकि अगर समाज में बच्चे ही नहीं होंगे तो समाज आगे कैसे बढ़ेगा? इसलिए बच्चे तो होने चाहिए ना। अगर आपको समाज समाज बना हुआ रहे, समाज समाज आगे बढ़े तो बच्चे तो चाहिए। बच्चे तो गृहस्थ आश्रम में ही होंगे। उनकी जो परवरिश है वो भी गृहस्थ आश्रम में होगी। इसीलिए हमारे पूर्वजों के समय में एटलीस्ट संतान प्राप्ति को बहुत महत्व दिया जाता था। अब समझिए और पहले तो शादियां भी जल्दी हो जाती थी। है ना? तो आप समझिए कि पति या
(10:26) तो बच्चा ना दे पाए ऐसे कुछ तो प्रॉब्लम हो उनमें है ना या फिर बहुत जल्दी उनका देहांत हो गया हो और कोई बच्चा ना हो तो क्या उस परिवार में बच्चा होना ही नहीं चाहिए क्या वो जो स्त्री है वो हमेशा संतान से विलुप्त ही रहनी चाहिए क्या ये सब सोचकर एक व्यवस्था का निर्माण किया गया था जो शास्त्रों द्वारा अलाउड था ठीक है जिसे कहा नियोग। अब नियोग में यह होता है कि पति अगर जीवित है पर बच्चा ना कर पाए तो उसके परमिशन से या फिर अगर पति गुजर गए हैं तो परिवारों के परमिशन से पति के परिवार मतलब ससुराल के परमिशन से और ऑफ कोर्स स्त्री के परमिशन से आप किसी पुरुष
(11:12) को जो या तो ऋषि हो या तो परिवार में कोई हो उनको आप बुलाओ यूजुअल प्रोसेस के लिए पर कंसीव करने के लिए मतलब बच्चे के लिए थी वो आज अगर लोग समझे कि वो वन नाइट स्टैंड ऐसे नहीं था वो वो एक उद्देश्य से होता था वो अट्रैक्शन हो गया और प्यार में पड़ गए वैसे नहीं केवल बच्चे के लिए होता था और जब बच्चा हो जाए तो फिर उनका कोई संबंध भी नहीं है। वो केवल बच्चे तक ही सीमित होगा। ठीक है? और जिसके द्वारा मतलब जिसका वो स्पर्म है वो तो उस बच्चे को क्लेम भी नहीं कर पाएंगे। इसीलिए धृतराष्ट्र धृतराष्ट्र और पांडु जो हैं वो हम डायरेक्टली व्यास जी के बच्चे
(11:52) नहीं कहते हैं। कहते हैं हम आज भी उन्हें कौरव हम जबकि वो कुरु वंश के किसी के नहीं है। है ना? पर कहते हैं कुरु वंश के ही उन्हें कहते हैं। क्योंकि उनके पिता तो विचित्र वीर्य ही माने जाते हैं। परंतु क्योंकि उनका देहांत हो गया था और ससुराल वाले मतलब सत्यवती थी उन सबके परमिशन से भीष्म के परमिशन से यह व्यवस्था बनाई हुई थी। इसीलिए उनको फिर कौरव कुरु वंश का ही कहा जाता है। लेकिन भैया इसमें ऐसा नहीं होता होगा कि डीएनए का कितना रोल रहता होगा क्योंकि अगर एक डीएनए तो व्यास जी का ही है ना ऑफ कोर्स तो क्या जैसे डीएनए का अगर एक ऋषि का
(12:27) बच्चा है तो उसके गुण या उसमें कुछ तो वैसे होंगे ना देखिए इसमें कैसा है ना बात तो आपकी सही है डीएनए तो आता ही है डीएनए से फिजिकिटी और मेंटली ये दोनों ही उस पे असर करेगा परंतु आज भी आप देखिए कोई अच्छे मनुष्य का बच्चा अच्छा ही हो ऐसा तो जरूरी नहीं है है ना रावण भी तो किसी ऋषि का बेटा था। विश्वश्रवा ऋषि का बेटा था। पर उससे तो कुछ नहीं हुआ। और ऐसा भी नहीं है कि अगर पिता किसी के बुरे हो तो बेटा बुरा ही हो। क्योंकि बेटे में हां डीएनए तो आता है पर अपना भी तो स्वभाव उसमें एडेड है ना। फुल 100% वैसा का वैसा तो नहीं होता। पर आपने
(13:01) एक और चीज पूछी वो भी मुझे क्लेरिफाई करनी है कि ये सही है कि नहीं है। है ना? तो आज जो आपने कहा आईवीएफ है या वो पता है विक्की डोनर वाली मूवी थी उसमें वो क्या है? स्पर्म डोनर है तो स्पर्म किसी और का है और वो स्पर्म लेने कौन जाता है जो परिवार या तो कोई सिंगल लड़की हो जो चाहती हो कि नहीं शादी हुई ना हो मुझे बच्चा चाहिए पर अधिकतर तो कपल जाते हैं जिनको बच्चे ना हो रहे हो तो वो स्पर्म को लेते हैं है ना क्योंकि मे बी एग या जो भी जो जो मेल का जो स्पर्म है वो शायद स्ट्रांग नहीं है या जो भी कोई कारण हो और वो स्पर्म को लेते
(13:33) हैं और अपना बच्चा पैदा करते हैं उस समय इसको आप स्पर्म बैंग के जैसे ही देखो ओके उसी का क्योंकि स्पर्म ही तो ले रहे हैं ना व्यास जी से स्पर्म ही लिया जा रहा है। पर क्योंकि टेक्नोलॉजी आज स्पर्म आप अलग से डालो यह व्यवस्था नहीं थी तो उन्होंने इस प्रकार का सिस्टम बनाया था। सही गलत की बात इसमें इसलिए नहीं आती क्योंकि ये कोई अफेयर या काम लोलुपता या लस्ट के कारण नहीं होता था। हम कि चलो अब अफेयर शुरू हो गया। ऐसा नहीं था। सीमाएं तब भी होती थी। और सीमाओं के अंदर रह के तो जो डिस्क्रिप्शन जब नियोग के बारे में ना पूरा प्रोसीजर कहा गया है
(14:10) कि कैसे नियोग होता है तो वह कहते हैं कि जो पुरुष है वो शरीर पे पूरा ऐसे तेल चुपड़ के आएगा ताकि स्त्री को उससे आकर्षण ना हो हम सिर्फ प्रोसेस हो क्योंकि केवल कंसेप्शन के लिए ही है। तो इस तरीके का उसमें कहा गया है। जबकि फिर शास्त्र यह भी कहते हैं कि कलयुग में नियोग नियोग नहीं होना चाहिए। ऐसा भी कहते हैं क्योंकि लोगों के अपने जो काम है उस पे कंट्रोल कम हो गया है। जो शायद पहले होता था वह अब कम हो गया है। इसलिए नियोग कहते हैं कि कलयुग के लिए निषेध है। पर कलयुग में और टेक्नोलॉजीस आ गई है ना जैसे आईवीएफ है, स्पर्म डोनर है।
(14:44) इसलिए सेम प्रोसेस पर अलग तरी मतलब सेम उद्देश्य टेक्नोलॉजी के द्वारा हम अचीव कर पाते हैं। आपकी भी लाइफ में प्रॉब्लम्स चल रही हैं। आप भी कहीं ना कहीं भूत प्रेत बाधा से तकलीफ में है। पितृ दोष हैं या आपको समझ नहीं आ रहे हैं कि लाइफ के आप उस फज़ में हैं जहां आपको क्लेरिटी नहीं मिल रही है। बिज़नेस करें या जॉब करें? लव मैरिज या अरेंज मैरिज। आगे फ्यूचर क्या है? मोक्ष की राह पर चल भी रहे हैं कि नहीं? आपको अपने इष्ट देव के बारे में पता भी है। लाइफ का पर्पस क्या है? करने क्या आए हैं? इस धरती पर कभी भी कोई भी ऐसे ही जन्म नहीं लेता है। हर एक आत्मा का एक लक्ष्य
(15:20) होता है। कुछ करने वो आई है। इन सबकी क्लेरिटी कहां मिलेगी? इन सबकी क्लेरिटी आपको आकाशिक रीडिंग में मिल जाएगी। जहां आपके ही मास्टर्स, जहां आपके ही पूर्वज, जहां आपका ही इष्ट देव यह बताएगा कि आपको क्या करना चाहिए। इस पूरी लाइफ में आपका क्या पर्पस है और पास्ट लाइफ में आप क्या करके आए थे। कोई कर्म पेंडिंग तो नहीं था जो आपको पूरा करना चाहिए। क्या आपके पूर्वज जो इस धरती पर नहीं है कुछ कहना तो नहीं चाहते हैं? इन सारे सवालों के जवाब सिर्फ और सिर्फ आपको आकाशिक रीडिंग के सेशन में मिल जाएंगे। अगर आप भी अपनी रीडिंग करवाना चाहते हैं, आप भी क्लेरिटी
(15:54) चाहते हैं लाइफ को लेकर तो नीचे दिए गए नंबर पर आप कांटेक्ट कर सकते हैं। बुक कर सकते हैं अपना स्लॉट। तो अपने बारे में जानिए। क्लेरिटी लीजिए लाइफ में कि करना क्या है? सशंस पाइए अपने इष्ट देव से, अपने पूर्वजों से। जय [संगीत] माता दी। जब आप महाभारत की बात करते हैं तो एक बुरा कैरेक्टर जिसे कहते हैं या एक दिमाग में जब भी हम कहते हैं कि इवन अगर आज के टाइम पर लूडो भी खेल रहे हैं तो शकुनी सबको पता है कि शकुनी कौन है। तो शकुनी का जो रोल था क्योंकि जो आपने बताया है वो बहुत अलग बताया है क्योंकि हमने बचपन से या जो टीवी सीरियल्स में हमें दिखाया है कि उसका
(16:26) परिवार मार दिया गया था। वो बदला लेने के लिए आया था और यहां तक कि एक जगह मैंने सुना भी था कि उसकी पूरी फैमिली जो थी जितने उसके फादर उसके भाई जो थे वो जेल में थे और सब अपना अपना खाना उसको खिलाते थे कि तू एक बच जाए हम सब मर जाएं और उसने उसने ही फिर बड़े हो के जानबूझ के ये करवाया तो एक मैं एक तो उसकी सच्चाई जानना चाहूंगी। दूसरी चीज ये जो मेरे मन में आता था जब मैं देखती थी कि इतने महारथी जो हैं जैसे भीष्म पितामह हैं, कृपाचार्य इतने लोग हैं ये इसको क्यों रख के बैठे हैं? करेक्ट सही आपका आपका प्रश्न बहुत अच्छा है। जब घर में एक आपको पता है एक इंसान ऐसा है
(17:03) तो इसको घर में रखा ही क्यों है? कोई तो ये कहेगा कि चलो तुम निकलो। तुम दुश्मन को और वो भी आप सोचिए। बाकी सारे भाइयों को मार दिया। इसे क्यों जिंदा छोड़ा भाई? है ना? तो पहली बात तो ये पूरी क्लेरिटी तो ये पूरी कथा ही बकवास है। ऐसा कुछ भी वेदव्यास महाभारत में नहीं है। वो गांधारी के साथ आया ही क्यों था? पहली बात वो गांधारी के साथ वैसे आया ही नहीं है। वो गांधार का राजा है और उसे कोई ऐसे 99 भाइयों की भी बात नहीं है। ठीक है। इनफैक्ट अगर आप देखें तो बी आर शुपड़ा महाभारत भी जो हुआ था उसमें भी ऐसा नहीं दिखाया गया है बैक स्टोरी कोई उसकी।
(17:32) हम बी आर चपड़ा महाभारत में उसे लंगड़ा दिखाया गया पर वो तो लंगड़ा भी नहीं है। वेदव्यास महाभारत में तो वो लंगड़े भी नहीं है। वो लंगड़ापन तो गुफे पैंथर के कारण आया। ठीक है? क्योंकि वो उनको कुछ पांव पे लगा था। फिर वो रह गया और उनको लगा हां इसको हम जो विशेस कैरेक्टर दिखाना चाह रहे हैं तो उसमें ये अच्छा लगेगा। इस हिसाब से वो लंगड़ा क्यों और उसमें लंगड़ा दिखा दिया। फिर कोई तमिल लिस्ट में वो लंगड़े थे। फिर आगे वो लंगड़े ही हो गए। जबकि इतिहास या वेदव्यास महाभारत में ऐसा कुछ भी नहीं है। अब लंगड़े हो गए हैं। सबको लगता है अब वो
(18:02) लंगड़े हैं तो उसकी बैक स्टोरी क्रिएट करनी है। इसीलिए ये सारी कहानी आई है। इनफैक्ट बी आर चोपड़ा महाभारत में भी ऐसी कोई कथकथा नहीं आई है। ये सब अभी इंस्टा रील्स के कारण शुरू हो गई है कि बैक स्टोरीज दिखा दी है। एक जन तो यह भी कहते हैं कि गांधारी मांगलिक थी और वो मांगलिक थी और उसकी उसका विवाह किसी बकरे से करा दिया था। यह जानकर बहुत गुस्सा आ गया भीष्म को कि क्यों बताया नहीं हमें। इसीलिए उन्होंने पूरे परिवार को कैप्चर किया। किसने कहां है? आप इंस्टा पे देखिए हर प्रकार की कहानियां चलती है। अब जैसे आपने पूछा इतने सों को मार दिया
(18:34) तो शकुनी को क्यों कोई जिंदा छोड़ेगा भाई? कोई आप सोचिए इतने समझदार सब थे तो अपने शत्रु को ऐसे ही छोड़ देंगे क्या? और बोलेंगे नहीं नहीं तुम हमारे घर पे ही आके रहो। ऐसा कोई करेगा। पर ऐसा हुआ ही नहीं है ना। इसलिए इवन ये बात कि उनके पिता को मार दिया वो भी गलत है। क्योंकि उनके पिता जो है और शकुनी के बाकी भाई है 99 है कि नहीं मालूम नहीं। पर जो भी भाई तो थे वह सब युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में आए हैं। शकुनी के भाइयों ने तो युद्ध में भाग लिया है। कुरुक्षेत्र युद्ध में भाग लिया है और बहुतों का उसमें देहांत हुआ है। इसलिए ऐसा
(19:05) कुछ भी नहीं है जो बैक स्टोरी की बात है। इनफैक्ट जो विवाह हुआ है गांधारी और अह धृतराष्ट्र का उसमें भी ऐसे कोई नहीं चाहता था और जबरदस्ती शाह जबरदस्ती शादी हो गई। ऐसी भी बात नहीं है। भीष्म तो बहुत प्यार से गए हैं क्योंकि वो अपने बच्चों के लिए देख रहे हैं। अब धृतराष्ट्र है तो युवराज ही ना। प्रिंस है वो हस्तिनापुर जो एक बहुत ही समृद्ध राज्य था उसके प्रिंस है वो। तो वो रिश्ता लेके जाते हैं गांधार। क्योंकि उन्होंने सुना है कि गांधारी बहुत सुशील लड़की है। और वहां वो बताते हैं। वो कहते हैं कि मेरा जो बेटा है वो अंधा है।
(19:43) हम पर मैं आपकी बेटी का हाथ चाहता हूं। अब उनके जो पिता हैं गांधारी के पिता सुबल वो यह जानते हैं क्योंकि बताया गया है कि धृतराष्ट्र अंधे हैं। पर वह यह सोचते हैं कि ये कितना बड़ा राज्य है। कितना समृद्ध है। परिवार कितना अच्छा है। मेरी बेटी खुश रहेगी। ये सोच कर वो भेजते हैं। आप सोचिए छोटे राज्य को अगर बड़े राज्य अगर समधि बन जाते हैं तो उनके तो फायदे में है ना। यह सोच समझकर गांधारी का विवाह किया जाता है और उनको छोड़ने शकुनी जाते हैं। फिर वो हमेशा कोई वहां रह रहे हैं। ऐसे नहीं है। वो तो गांधार फिर तो गांधार के युवराज है
(20:19) वो। हम पर हां क्योंकि वो दुर्योधन के मामा है। है ना? और अगर दुर्योधन राजा बन जाता है हस्तिनापुर का तो वो गांधार के इंटरेस्ट में है। ओके। राइट? इसलिए शकुनी हमेशा उसके साथ रहे हैं। पर बहुत सारी चीजें जो लोगों को लगता है कि शकुनी स्ट्रेटजी बना रहे हैं। ऐसा कुछ भी नहीं है। शकुनी का सबसे बड़ा रोल वो दत क्रीड़ा में है। उसके बाद कुछ नहीं है। युद्ध में वो लड़ते हैं पर वो कोई ऐसे मास्टरमाइंड नहीं है किसी भी चीज के। तो क्योंकि पर अब हमको आदत ये हो गई कि शकुन ही बुरे क्योंकि हमने देखा है ना विजुअली वैसे वो जब आएंगे तभी वो आवाज भी एक
(20:53) स्पेसिफिक प्रकार की आएगी। भांजे करके बात करेंगे। ऐसे वो एक्सप्रेशन ऐसे तो वो विजुअल इंपैक्ट इतना इतना जबरदस्त होता है कि हमको लगता है यही सबसे बुरा है। हां इसने ही किया है। हम तो वही सोचते हैं कि महाभारत जो है दुर्योधन का जो ब्रेन वाश किया है जो भी हुआ है ये सारी जड़ बचपन से इसने ही बचपन से उसके दुर्योधन के दिमाग में डालना स्टार्ट किया कि देखो वो ज्यादा काबिल है तुमसे तुम अच्छा अगर ऐसा होता ठीक है तो अगर आप महाभारत पढ़े पढ़े तो वेदव्यास जी क्लियरली कहते हैं कि ये जो मन्यु नामक महाड्रूमर ये मनु नामक वृक्ष है दुर्योधन
(21:26) ठीक है ये दुर्योधन का जो स्कंध है वो कर्ण है शकुनी तो शाखा है दुशासन फूल पत्ते हैं और जो मूल है वो धृतराष्ट्र है। ऐसा वो कहते हैं। अगर शकुनी ने ही सारा गेम किया होता तो वो शकुनी को मूल बोलते हैं। धृतराष्ट्र को क्यों बोलते? वो शकुनी को तो कर्ण से भी कम मानते हैं। हम इस पूरे स्ट्रेटजी में शकुनी तो शाखा है जो सपोर्ट अवश्य कर रहे हैं। जो सपोर्ट देने हमेशा रहे हैं। पर वो मूल नहीं है। और द्रौपदी का जैसे एक दूसरा अगर हम देखें कहते हैं महाभारत की दूसरी जड़ जो कहते हैं कि द्रौपदी थी। द्रौपदी ने अगर नहीं कहा होता, द्रौपदी ने ऐसा
(22:04) नहीं किया होता तो महाभारत नहीं होती। ये कितना सच है? ये तो एकदम गलत है। ये तो बिल्कुल भी सच नहीं है। और मैंने बहुत बार इसे क्लेरिफाई भी किया है। ये जो हमने टीवी में देखा है ना अंधे का पुत्र अंधा द्रोपदी ने कह दिया इसीलिए युद्ध हो गया। यह बिल्कुल भी ऐसा नहीं हुआ है। द्रोपदी ने अंधे का पुत्र अंधा कहा ही नहीं है। अंधे का पुत्र अंधा वेदव्यास महाभारत में है ही नहीं। द्रोपदी ने भी नहीं कहा और किसी ने भी नहीं कहा है। किसी ने भी ये नहीं कहा है। परंतु जब युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ होता है तब क्या होता है कि सारे जो कौरव हैं क्योंकि वो
(22:37) काका के बेटे हैं ना परिवार है। तो जैसे हमारे यहां आज शादियां होती है तो आप देखिए मामा आ जाएंगे। बुआएं आ जाएंगी। सब काम में लग जाएंगे। कोई गेस्ट अतिथियों का ध्यान रख रहा होगा। कोई खाने का दिख रहा होगा। कोई कपड़े भी मदद कर लेगा। राइट? इसी प्रकार जो कौरव थे उन वो भी सारे काम में लग गए थे। दुर्योधन को काम दिया गया था गिफ्ट्स लेने का। विदुर का कुछ और काम था। भीष्म पितामह का कुछ काम था। तो जैसे परिवार एक साथ आता है उस प्रकार सबको बुलाया गया है। अब होता क्या है कि जब यज्ञ समाप्त हो गया है। सारे चले गए। फिर भी दुर्योधन को और दो दिन रुकना है।
(23:10) क्योंकि जब बंटवारा हुआ था हस्तिनापुर का तो दुर्योधन को तो हस्तिनापुर हस्तिनापुर मिला था। जो समृद्ध राज्य था पांडवों को खांडवप्रस्थ मिला था। जहां कुछ भी नहीं था। तो उसके दिमाग में तो ये था ना कि इनको मैंने खांडवप्र दे दिया है। वहां कुछ भी नहीं है। पर अपनी मेहनत से कुछ ही वर्षों में पांडवों ने खांडवप्रस्थ का इंद्रप्रस्थ बना दिया। समृद्ध राज्य बना दिया और राजसूय यज्ञ कर दिया और चक्रवर्ती बन गए खुद के परिश्रम से। तो जब दुर्योधन ने देखा कि इनका राज्य कितना समृद्ध है। इनकी शक्ति कितनी है। सभी लोग इनको इतना आदर सम्मान देते
(23:51) हैं। इतना धनधान्य है। इतने पैसे हैं। इतना ऐश्वर्य है। यह देखकर वो पूर्णतः जल जाता है। पूर्णतः जल जाता है। और वो कहता है मैं तो यह मैं तो जी ही नहीं पाऊंगा। पांडवों को इतना समृद्ध और खुश देख के मैं जी ही नहीं पाऊंगा। और वो तो क्योंकि उसके मन में यही है कि पांडव मेरे शत्रु हैं और वो उनका बस छीन लेना चाहता है। इसलिए वो स्किपिंग शुरू करता है और सबसे पहले तो वो अपने पिताजी को बोलता है कि आप कुछ करिए क्योंकि मैं यह नहीं देख पाऊंगा कि पांडव इतने समृद्ध हैं। उस समय पहले तो शकुनी कहते हैं दुर्योधन से अरे पर तुम्हारे पास
(24:23) भी तो सब है। तुम्हारे पास किस बात की कमी है? तो तुम क्यों कर रहे हो? पर दुर्योधन इस लाइक नहीं मैं तो जी ही नहीं पाऊंगा। क्योंकि वो अपने शत्रु समृद्ध हो। यह तो किसी योद्धा ने सहन करना ही नहीं चाहिए। इसलिए मैं नहीं कर पाऊंगा। अब तो अभी अभी उनको हराए कैसे? युद्ध में हराना तो नामुमकिन था क्योंकि इतने राजसु चक्रवर्तीन हो गए थे वो। तो कैसे हराए? तो फिर शकुनी कहते हैं ठीक है तुम युद्ध का मत सोचो। हम दत करते हैं। दत क्रीड़ा करते हैं। उसमें मैं एक्सपर्ट हूं। उसमें मैं इनको हरा दूंगा। फंसा दूंगा इनको। इस प्रकार वो पूरा स्कीमिंग हुआ है। तो इसमें
(24:58) द्रौपदी का बेचारी का कोई रोल ही नहीं है कि उसने कुछ कह दिया। और द्रौपदी का जो कैरेक्टर है वो इतना सुंदर है कि वो ऐसा कह भी नहीं सकती। शी इज़ एन एक्सट्रीमली ग्रेसफुल लेडी। पर वही है लोगों को मसाले मसाला छिड़कने में अच्छा लगता है ना। लड़की ने बोल दिया। लड़कियों की तो जुबान ही ऐसी होती है। उनको तो कंट्रोल ही नहीं होता। कुछ भी बोल देती है। झगड़ा करने वाली झगड़ालू सबसे ज्यादा क्लेशी। हमको तो आदत है ना ये सारे लेबल्स लगाने को स्त्रियों पर। तो लगा दो उस पे। इजी आंसर। ज्यादा सोचना नहीं है। सारे जो पुरुष हैं उनका कोई इसमें ओनरशिप
(25:30) नहीं है। लड़की के कारण हो गया। और ये कितना सच है कि अ जो पासे थे क्योंकि इसको लेकर भी बहुत मिथ है कि वो जो पासे हैं अब जैसे आप कह रहे हो कि उनके फादर के वो है ही नहीं। वो तो हुआ ही नहीं था। लेकिन कहते हैं कि उनके अस्थियों से बने थे वो पासे। ये इतना सच है। जीवित थे क्योंकि राजसू यज्ञ के समय वो जीवित थे। ये कितना सच है? कहते हैं कि वो तो इसलिए वो थी वो मानते थे क्योंकि वो अस्थियों से बने थे। ऐसा कुछ नहीं था। शकुनी बहुत ही स्किल्ड प्लेयर थे। ठीक है? उनके पास ही उनके हिसाब से पड़ते थे क्योंकि वो बहुत अच्छा वो जानते थे वो कैसे खेलना है। जो एक
(26:04) अच्छा खिलाड़ी होता है वो हर प्रकार के राइट एंड रॉन्ग वेज़ जानता है ना खेलने का वो वैसा था। पर उसमें कुछ मैजिक था पासों में या कुछ पिता के अस्थियों से पिता तो जीवित थे यार तो वो तो कहां से होगा? तो नहीं ऐसा कुछ नहीं है। जब द्रोपदी को लेकर आया जाता है सभा में लेकर आया जाता है। तो कहीं जगह बताया कि उनके पीरियड्स चल रहे थे। कई जगह बताते हैं कि नहीं नहीं पीरियड चल रहे थे इस पर थोड़ी सी क्लेरिटी दीजिए नहीं उनके पीरियड्स चल रहे थे इसलिए वो एक वस्त्रा कहा गया है शायद जब किसी का पीरियड चल रहा हो ना तो वो किसी प्रकार के
(26:34) कपड़े पहनते होंगे उस समय तो पीरियड्स डेफिनेटली चल रहे हैं और वो कह रहे हैं कि मुझे इस अवस्था में तुम मत लेके जाओ जब दुशासन खींचने उनको लेने आता है पहले तो उन्होंने दुशासन सबसे पहले नहीं गया है सबसे पहले तो जो उनके मैसेंजर्स होते हैं ना दूत उनको भेजा गया द्रोपदी को लेने एंड द्रौपदी इस लाइक तुम मुझे ऐसे ऐसे कैसे लेने आ गए? ऐसा क्या हुआ? तो वो दूत बताता है कि ऐसे-ऐसे हुआ। युधिष्ठिर सब कुछ हार गए। युधिष्ठिर अपने सारे भाइयों को हार गए। युधिष्ठिर अपने आप को हार गए हैं। तो द्रौपदी कहती है कि जो अपने आप को हार गया वो मुझे कैसे दांव पे लगा सकते हैं? तो
(27:07) तुम तो पहले जाकर पूछो उन्हें कि ऐसे कैसे मैं हार गई? उन्होंने मुझे अपने से पहले युधिष्ठिर ने मुझसे मुझे पहले दांव पर लगाया या बाद में? क्योंकि बाद में लगाया तो मैं क्यों आऊं? तो ये पहले तो दो बार दूत को वापस भेज देती है। तब दुर्योधन को आता है गुस्सा। वह कहता है ऐसे कैसे नहीं आएगी? उसे जाकर खींच के लेकर आओ। तो दुशासन को भेजा जाता है खींच के लाने के लिए। उस समय विकर्ण कहता है आप लोग जो कर रहे हो बहुत गलत है। विदुर विदुर और विकर्ण दो ही जन है जो कहते हैं यह गलत है एकदम करना। तब कर्ण बीच में आता है और कर्ण कहता है अरे इसमें
(27:37) क्या गलत है? यह तो बंध की है। यह तो वेश्या है। क्योंकि इसके तो पांच पुरुषों से विवाह हुआ है। इसलिए यह तो वेश्या है। वेश्या को तो आप एक वस्त्र में लाओ या निर्वस्त्र लाओ। क्या फर्क पड़ता है? ऐसा वह कहता है और फिर वही वह दुशासन खींच के लाया और यह सब है तो सबसे ज्यादा किसी का अपमान शब्दों से कि द्रोपदी का किसी ने किया है तो वह कर्ण ने किया है। तो ये इस प्रकार है पर हां वो रक्त हां वो वो पीरियड्स में है रजस वाला है उस समय वो क्लियरली लिखा गया है। एक और चीज़ जब मैं बचपन से जैसे महाभारत को देखती थी, पढ़ती थी, तो मुझे यह होता था कि वह अग्नि से
(28:12) जन्मी है। तो क्योंकि मैं ऑब्वियसली देवी भक्त हूं जैसे हम ऑफ कैमरा बात कर रहे थे तो जब मां सती एक अग्रेशन एक लेडी का जब अग्रेशन एक्सट्रीम लेवल चला जाता है तो वो काली रूप या अपना वो अलग रूप आ जाता है उसका और वो तो अग्नि से जन्मी थी। तो जब उनको लेकर आए गया तो उन्होंने सबसे रिक्वेस्ट भी किया सबको बताया भी। बट उन्होंने मतलब मैं ना जब वो देखती थी ना सीरियल मैं सोती ये कर्स क्यों नहीं कर रही है सबको लाइक कि तुम तो अभी अभी जल जाओगी कर सकती थी वो बहुत पावरफुल है वो सब क्यों नहीं हुआ देखिए अग्नि जो है ना अग्नि का पॉजिटिव और
(28:45) नेगेटिव दोनों ही एस्पेक्ट्स हैं। पॉजिटिव आस्पेक्ट्स क्या है? अग्नि में सोना पहले जब तपता है तब एक्चुअली सोने का कुछ आप कर सकते हो। हम अग्नि में जब लोहा पिघलता है तो वह काम का बनता है। तो अग्नि के नरिशिंग क्वालिटीज भी हैं। आप अगर द्रोपदी को देखो तो उसमें वो सारे वो तपस और संकल्प वो उसमें कैरेक्टरिस्टिक्स है। इनफैक्ट जब उसके साथ इतना अन्याय भी हुआ है तो भी आप देखिए वो बाकियों के जैसे टूट नहीं गई है। वो वहां सभा में भी इतनी ऐसी परिस्थिति में भी इतनी ह्यूमिलिएशन में भी न्याय की बात कर रही है। है ना? वो सबसे न्याय के
(29:22) बारे में पूछ रही है कि आप मुझे बताइए सही क्या है? अच्छा उसके बाद जब यह पूरा होता है तो अंत में वो कहती है वो द्रोपदी कहती है कि मुझसे अब और नहीं सहा जा रहा। आप मुझे उत्तर दीजिए नहीं तो ऐसा ना हो कि मैं कुछ नहीं करने का कर दूं। पर उस समय भी कोई उस समय फिर ऐसे कहा जाता है कि वो भेड़ियों के चीखने की आवाज आ गई। ये वो और गांधारी भागते-भागते आई और उन्होंने समझाया इसको धृतराष्ट्र को कि आप क्या कर रहे हो? अच्छा तब तक फिर भीम ने भी प्रतिज्ञा ले ली थी। पहले कि मैं दुर्योधन की जांघ तोड़ के उसे मार दूंगा और दूसरा दुशासन का ये
(29:56) जो छाती फाड़ के लहू पी लूंगा। तो जब यह सब हो गया तब फिर धृतराष्ट्र एकदम डर गए। तब तक तो उनको था कि हार गए ना अच्छा है। तो वो तो जब इवन जब पांडव हार रहे थे एक-एक करके एक-एक करके तो वो तो वहां हंस रहे थे और पूछ रहे थे जिताम जीते कि नहीं जीते? जीते कि नहीं जीते? मेरा बेटा जीता कि नहीं जीता। इवन जब द्रोपदी की बारी आती है तब भी वह यह पूछ रहे हैं। इतने बेशर्म निहायती वह नालायक इस प्रकार की उनकी हरकत उस समय रही है। पर जब भीम ने यह प्रतिज्ञा कर ली और द्रोपदी कह रही थी कि मुझसे अब नहीं सहा जा रहा और वो जो चीखने चिल्लाने
(30:31) की वो भेड़ियों के चीखने की और आंधी की आवाज और ये सब आने लगा। तब उनको लगा यार अब तो बहुत कुछ अब मेरे बच्चों पे कुछ हो जाएगा अगर मैं नहीं रुका तो। तब फिर वो कहते हैं कि अच्छा नहीं नहीं ये सब जाने दो अब द्रौपदी तुम तो मेरी बेटी जैसी हो मुझसे कुछ तुम ये मांग लो वरदान मांग लो अच्छा उस समय भी द्रौपदी सब कुछ भी मांग सकती थी पर द्रोपदी ने क्या किया वही वो जो अग्नि तत्व है ना कि अग्नि को क्या कहते हैं अनल जो अपने आप अग्नि में कुछ भी डाल दो वो उसे प्यूरिफाई कर लेगा या तो भस्म कर लेगा तो उस परिस्थिति में उस इंसल्ट को भी वो प्यूरिफाई किस प्रकार
(31:09) करती है आप देखिए उसे तो उसे कहा गया तुम मुझसे वरदान मांगो। तो वो कहती है पहले तो मेरे जो क्योंकि द्रोपदी को दांव पे लगाने से पहले सारे भाई दास बन गए थे। युधिष्ठिर स्वयं दास बन गए थे। ऐसा तो नहीं हुआ था कि सबसे पहले आके उन्होंने कहा द्रोपदी को दांव पे लगाओ। ऐसा तो नहीं हुआ था। जब सब कुछ चला गया था। कुछ भी नहीं बचा था। बचा था तब शकुनी के इन इंसाइटमेंट पे उन्होंने भड़काने पे उन्होंने द्रोपदी को लगाया था। तो पहले वो कहती है कि आप मुझे पहला वरदान दीजिए कि मेरे जो पति हैं युधिष्ठिर उनको आप दासत्व से मुक्त कीजिए क्योंकि मैं
(31:50) नहीं चाहती कि मेरा जो सबसे बड़ा पुत्र है जो युधिष्ठिर का पुत्र है उसे कोई दास कह के बुलाए तो वो कह देते हैं धृतराष्ट्र नहीं नहीं ठीक है तुम्हारी बात मैं दासत्व से मुक्त करता हूं युधिष्ठिर को तुम और कुछ मांगो मैं और तुम्हें कुछ देना चाहता हूं तो वो कहती है ठीक है मेरे जो बाकी की चार पति है उनको भी आप दासत्व से मुक्त कीजिए और उनके जो सारे शस्त्र हैं वो उनको वापस दीजिए। मतलब पांडवों के पास उस समय शस्त्र या कुछ भी नहीं है। सब कुछ दांव पे लग चुका है। ठीक है? तो उनके जो शस्त्र है वो आप उन्हें वापस दे दीजिए। तो वो मान जाते हैं। फिर धृतराष्ट्र कहते
(32:24) हैं और कुछ मांगो। अब फ्रैंकली जिसे देना हो तो आप ऑलरेडी सब कुछ दे सकते थे ना। उसकी मांगने की आप क्यों रुके हो? बट खैर चलो वो यही कह रहे हैं। तब द्रोपदी कहती है कि नहीं मैं और नहीं मांग सकती क्योंकि मैं एक क्षत्रिय रानी की मर्यादा जानती हूं। एक क्षत्राणी की मर्यादा मैं जानती हूं। मैं दो ही वरदान मांग सकती हूं जो मैंने मांग लिए। मैंने जो करना था वो मैंने कर दिया। अब मुझे मेरे पतियों के पुरुषार्थ पर पूरा विश्वास है। अब आगे जो लेना है हस जो भी इंद्रप्रस्थ वापस लेना है या जो भी है वो अपने बल के बूते पर करेंगे। वह मुझे नहीं
(32:58) करना है। मैंने जो करना था वह मैंने कर दिया। मैं अपनी मर्यादा नहीं तोडूंगी। उस समय भी वह यह कह रही है। यह है उसका तप। यह है उसका संकल्प और यह है उसका तेज। नहीं तो आप सोचिए ऐसी भरी सभा में इतना इंसल्ट हो और फिर भी उसे याद है कि मेरी मर्यादा क्या है। ये द्रोपदी है। और जो कृष्ण का जो दिखाते हैं वो कितना सच है। जो कृष्ण का जो उनको जो साड़ी दे रहे हैं वो दिखाते हैं। है ना? वो तो उसमें कैसा है कि वेदव्यास महाभारत के ना अलग-अलग मैनुस्क्रिप्ट्स हैं। तो जो गीता प्रेस वाला मैनुस्क्रिप्ट है उसमें ये दिखाते हैं ऐसा दिखाया गया है कि जब वो वस्त्रहरण
(33:39) जैसा हो रहा था तब कृष्ण ने आकर वो साड़ी का ये होता गया। राइट? परंतु अगर आप जो क्रिटिकल एडिशन है जिसे अथॉरिटी माना जाता है उसमें आप देखो तो उसमें कृष्ण के आने का कोई उल्लेख नहीं है। केवल इतना कहा गया है कि जब एकदम पूर्णतः वो जब असहाय हो गई है तब वो हरि पर छोड़ देती है। हम हरि की प्रार्थना करती है और कुछ ऐसा अद्भुत होता है कि दुशासन कुछ कर नहीं पाता। तो कई बार पता है ऐसा कुछ हो जाता है हमारे जीवन में कि ऐसे लगे कि अब तो सब खत्म हो रहा हो पर अचानक से कहीं से कुछ हो जाए और हम बच जाते हैं। हम क्या कहते हैं भगवान ने हेल्प किया। यह उस तरीके का
(34:16) उसमें दिखाया गया है। उसका कारण क्या है कि उसका कारण यह है कि जब फिर वो लोग को वनवास मिल चुका है ना तब कुछ दिन बाद जब पांडव वनवास में आए तब कृष्ण और सत्यभामा उनसे मिलने आते हैं। और कृष्ण बहुत गुस्से में है। क्रोधित है। वो कहते हैं कि अगर मैं होता तो मैं ये रोक ही देता। मैं ये होने ही नहीं देता। तो युधिष्ठिर पूछते हैं कि आप क्यों नहीं थे? क्योंकि बाकी सारे राजाओं तो राजा तो आए थे। आप क्यों नहीं आए थे? तब कृष्ण कहते हैं कि मैं द्वारका के युद्ध में मैं बिजी था। अच्छा द्वारका में वो जो शाल्व क्योंकि इसके पहले राजसू यज्ञ करने के लिए
(34:54) कृष्ण अर्जुन और भीम को लेकर जरासंध को मारने गए थे। है ना? और जरासंध का का वध किया था भीम ने। पर दिमाग जो था वो तो कृष्ण का था। तो जरासंध के जो मित्र थे जैसे शाल्व वगैरह-वगैरह उन सब ने मिलकर द्वारका पर आक्रमण कर दिया था। जब हस्तिनापुर में ये सब चल रहा था। तो कृष्ण कह रहे हैं मैं वहां पर बिजी था इसलिए मैं नहीं आ पाया और इसके कारण ये सब हो गया। नहीं तो मैं इन नहीं तो मैं बीच में आता और सबको समझाता और ऐसा होने नहीं देता। अब उसका अर्थ है फिजिकली तो कृष्ण वहां नहीं है। परंतु कुछ ना कुछ तो हुआ है। प्रभु कृपा तो हुई है। अगर आप प्रभु कृष्ण मानते हैं
(35:30) तो कृष्ण कृपा हुई है। पर कृष्ण पर्सनली वहां मौजूद है ऐसा नहीं है। यानी कि जो दिखाया जाता है जो हमने सुना है कि वो जो साड़ी है वो बढ़ा दी गई थी और कृष्ण तो ये हुआ ही ये नहीं है। कुछ अद्भुत हुआ। कुछ अद्भुत हुआ जिसकी वजह से वो कुछ कर नहीं पाए। बट कृष्ण आए और या साड़ी बढ़ी है। ऐसा कुछ नहीं हुआ। नहीं उसमें है कि कपड़े बहुत हो गए। ओके। ठीक है। ऐसा है। अब कुछ-कछ लोग ऐसा मानते हैं कि वो स्पेसिफिक प्रसंग मतलब ह्यूमिलिएशन तो हुआ है। उसे वेश्या कहा गया। ये सब तो हुआ है। पर वो जो स्पेसिफिक प्रसंग है वो खींचने वाला उतना पार्ट शायद
(36:03) ना हुआ हो। क्योंकि जब वो कहते हैं ना कि इसके वस्त्र उतारो। तो पांडव भी अपना जो ऊपर का वस्त्र है वो उतार के दे रहे हैं। ठीक है? वो भी अपना ऊपर का वस्त्र जो अंग वस्त्र वो लोग पहनते होंगे वो उतार के दे रहे हैं। इसने तो एक ही वस्त्र पहना था अ द्रोपदी ने तो वो क्या साड़ी जैसा ही पहना था या किसी और तरीके से पहना था ये हम एग्जैक्टली नहीं जानते। तो ये एक इमेजिनेशन है कि इस प्रकार हुआ होगा। पर यह बात पक्की है कि उसे निर्वस्त्र तो नहीं कर पाए थे। यह बात तो पक्की है। इतना तो डेफिनेटली दिखाया कि मतलब इसमें आता है कि निर्वस्त्र तो नहीं कर पाए थे और
(36:42) निर्वस्त्र नहीं दुशासन जैसा शक्तिशाली निर्वस्त्र नहीं कर पा रहा और वो द्रोपदी बच जाती है तो ये किसी प्रकार तो कोई अद्भुत दैवी कार्य हुआ है। अब दैवी कार्य क्योंकि हुआ है और कृष्ण को देव मानते हैं तो आप ये कह सकते हो कृष्ण ने किया है। पर कृष्ण फिजिकली वहां प्रेजेंट नहीं है। और जो ये भी सच है क्या जो कहते हैं कि दुर्योधन ने या दुशासन ने या करण ने मुझे नहीं याद है किसने कहा था कि जांघ पर बिठाने के लिए ये किसने कहा था ये ये क्या होता है कि जब वो प्रसंग हो रहा है और द्रोपदी पूछ रही है कि आप सब मुझे पहले बताइए कि पहले तो आपने
(37:19) युधिष्ठिर को खेलने ही क्यों दिया क्योंकि वो कोई एक्सपर्ट नहीं है। आप सब जानते हैं कि वो एक्सपर्ट नहीं है। फिर भी आपने दबाव डाला उन पर और उनको खेलने लगाया। अब [गला साफ़ करने की आवाज़] वो तो चलो हो गया। आप मुझे बताइए कि पहले युधिष्ठिर अपने आप को हार गए। अब युधिष्ठिर दास बन गए। अब जो स्वयं दास बन गया हो वो किसी और को कैसे दांव पर लगा सकता है? तो आप मुझे इसका उत्तर दीजिए। अब ये प्रश्न तो बहुत अच्छा है। पर इसका जो उत्तर है ना ये थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड है। कॉम्प्लिकेटेड इसलिए है क्योंकि अगर पति दास बन जाए तो पत्नी क्या है?
(37:55) ऑटोमेटिकली दासी ही बन जाएगी। तो या तो आप कहो कि तुम तो वैसे ही दासी बन गई क्योंकि तुम्हारे पति दास बन गए। या तो कहो कि पति और पत्नी का अब रिलेशन ही नहीं रहा क्योंकि पति दास बन गया। राइट? तो क्योंकि ये प्रश्न पूछ रही है और भीष्म टेक्निकल जवाब दे रहे हैं। भीष्म कह रहे हैं कि मैं इसका उत्तर नहीं दे सकता क्योंकि धर्म बहुत गहन है। अब वो क्या कहे इस बारे में? क्योंकि अगर कहे कि भाई नहीं नहीं लगा सकता तो तो फिर तुम दोनों का कोई रिलेशन ही नहीं है क्योंकि वह तो दास ही बन गया है। वह कहे नहीं नहीं लगा सकता है तो फिर इसका
(38:24) पूरी तरह सम्मान टूट जाएगा। इसलिए वह कुछ नहीं कहते। वह कहते हैं धर्मस्य घना गति कि धर्म की गदगति बहुत गहन है। उस समय कर्ण कहता है कि अब तो चलो ये तो तुम्हारे पति नहीं है। अब तुम किसी और पति को ढूंढ लो। ओके। क्योंकि अगर तुम नहीं मान रहे कि वो तुम्हें दांव पे लगा सकते हैं तो फिर यह तो तुम्हारे पति नहीं अब तुम किसी और पति को ढूंढ लो और वो हंसते हंसते हैं सारे तब दुर्योधन वो नालायक अपनी जंघा दिखाता है हम कि यहां आके बैठ जाओ क्योंकि ऐसे कहते हैं ना कि वामा कहा जाता है कि वामा मतलब जो लेफ्ट जो लेफ्ट जंघा है वो पत्नी के है
(39:00) पत्नी के है तो पत्नी को मिलता तो इसलिए वो वो लेफ्ट जंघा दिखाता है कि यहां आके बैठो हम ऐसे कि मैं मेरे पास आके बैठो तो इतनी नालायक इतनी क्या कहते हैं कि गंदी हरकत वो तब करता है और जब ये दुर्योधन करता है पर उकसाया है कर्ण ने। जब यह युद्ध की बात महाभारत की बात चलती है कि महाभारत होगी युद्ध होगा तो यह कितना सच है कि जो कृष्ण आते हैं शांतिदूत बनकर और दुर्योधन उनको भी बंदी बनाने लग जाते हैं ये हुआ ये तो है [हंसी] और ये तो है वो ये सोचते हैं कि पांडव को क्या लग रहा है कि पांडवों को इतना कॉन्फिडेंस इसलिए है ना क्योंकि कृष्ण उनके साथ हैं।
(39:40) अगर कृष्ण को ही हम बंदी बना ले तो वो क्या करेंगे? ऐसे तो वो कृष्ण को बंदी बनाना चाहते हैं। आल्सो दुर्योधन को थोड़ा गुस्सा भी आया है क्योंकि दुर्योधन कृष्ण को अपने घर पे अतिथ्य स्वीकार करने बुलाते हैं। और कृष्ण कहते हैं मैं तुम्हारे मित्र के तौर पे नहीं आया हूं। मैं पांडवों के दूत के तौर पे आया हूं। इसलिए मैं तुम्हारा अतिथि बन मैं तुम्हारा अतिथि बन के आया ही नहीं हूं। इसलिए तुम्हारे घर में नहीं रहूंगा। मैं दूत बन के आया हूं। दूत की जो मर्यादा है उसका मैं पालन करूंगा। तुम्हारे घर का खाने नहीं आया हूं। और वो विदुर के घर जाते हैं।
(40:08) तो इसलिए उस बात का उसे गुस्सा भी है। उसे यह भी लग रहा है कि इसी को पकड़ ले तो पांडव क्या करेंगे? तो इसलिए हां तो यह यह डेफिनेटली है कि वह प्रयत्न करते हैं। पर सात्यकी को यह पता चल जाता है और सात्यकी कृष्ण को बताते हैं कि वो ऐसा-सा करने वाले हैं। इसमें जब ये सारा हम देख रहे थे तो महाभारत के बारे में जब हम देखते हैं तो एक साइड वो भी आती है। कृष्ण वाली भी साइड आती है। इसको लेकर भी बहुत ज्यादा मिथ्स हैं। सच्चाई कोई नहीं जानता है। कुछ कहते हैं कि रुक्मणी जी को भगा कर लेकर आए थे। कुछ कहते हैं कि घर से लेकर आए थे। इस पर भी क्लेरिटी
(40:42) चाहिए कि हुआ क्या था। तो रुक्मणी जी को भगा के लेके आना मतलब तो चाहती तो रुक्मणी जी ही थी ना। हम रुक्मणी जी की का जो विवाह था वो उनके पिता और भाई स्पेशली भाई शिशुपाल से करना चाहते हैं। यस रुक्मणी जी शिशुपाल को नहीं चाहती। रुक्मणी जी कृष्ण को चाहती है क्योंकि रुक्मणी जी ने इतना सुना है कृष्ण के बारे में कि देखे बिना ही उनको ये है कि मेरा पति तो कृष्ण ही होगा। इसलिए वो यह मैसेज भिजवाती हैं कृष्ण के पास कि मैं रुकी हूं आपके लिए और कृष्ण आते हैं लेने। अब जब कृष्ण लेने आते हैं तो वो रुक्मणी जी को ले जाते हैं। ऑफ कोर्स वैसे देखा जाए तो
(41:15) उनका हरण किया है। बट हरण करने के बाद वो चैलेंज भी करते हैं उन्हें। तो फिर रुक्मणी जो है उसके लोग उनकी जो सेना है वो आती है। उनके साथ युद्ध होता है और फिर कृष्ण जीतकर उनको हरा कर तो क्या सिर्फ ये चाहते थी और मैसेज भिजवाया और इतने में हुआ। कोई उससे पहले कुछ ऐसा हां वाओ सच में हां मतलब ये थोड़ा सा सोच के ऐसा लग रहा है कि मैं किसी ऐसे इंसान को चाह रही हूं जो कि बहुत वो है एंड मैं उनको कि मैं तुम्हारे लिए वेट कर रही हूं देखिए आज भी एग्जांपल्स हैं कि कितनी सारी फिरंग लड़कियां कई बार वो इंटरनेट पे बात कर करके भारत के किसी गांव में रहने वाले
(41:56) बंदे के लिए आ गई और यहां बस भी गई ऐसा भी तो हुआ है तो प्यार क्या-क्या नहीं करवाता बट ये सच में ये बहुत मतलब पहले मुझे लगा था शायद पहले मिले हुए ऐसा कुछ आप कुछ ऐसा बताओगे बट पहले कुछ नहीं था सिर्फ उसके थ्रू बट वो लक्ष्मी रूप थी सिर्फ सुना था बट वैसे देखा इवन नल दयंती का सर तो जो इसमें नल दमयंती की कथा भी ऐसी है कि दोनों नल और दमयंती ने एक दूसरे के बारे में सुना ही सुना था कि दोनों इतने अच्छे हैं और दोनों एक दूसरे के प्रेम में बिना बिना जाने बिना मिले ही प्यार में प्यार में पड़ गए जितना मैंने आपके बारे में जाना है देखा
(42:31) है तो क्योंकि आपने ना बिल्कुल एक ऑोजिट साइड बताई है। जैसे आपने एक तो आपने इमेज तोड़ा है कि जो हम कृष्ण जी को कहते थे कि साड़ी जो बढ़ती गई है। हमने ऑब्वियसली वही देखा है। आज भी अभी जो महाभारत आई थी कुछ टाइम पहले उसमें भी वही दिखाया गया था कि साड़ी बढ़ रही है। एक आपने वो मिथ तोड़ा है। दूसरा बचपन से जो मैंने भी पर्सनली सुना है कि मेरी दादी कहती थी कि दानवीर जैसा हो तो कर्ण जैसा। इवन मेरे कजन का नाम ही कर्ण इसलिए रख दिया था कि दानवीर है वो। तो कर्ण क्योंकि हम अगर देखेंगे दुर्योधन और ये सब नाम कभी किसी के नहीं सुने होंगे बट कर्ण नाम होता है सबका मतलब
(43:03) मिल जाएगा आपको ईली दानवीर माना जाता है बेचारे ने सहा है बेचारे को ये हुआ है लेकिन आप कह रहे हो कि सारी जड़ ही वो था हम इस पर बताइए क्या है जड़ वो नहीं था स्कंध वो था मतलब इतना सारा कराने का एक बहुत बड़ा भाग वो था अगर वो ऐसा नहीं करता तो शायद युद्ध नहीं होता ये मैं कहती हूं मूल जड़ तो धृतराष्ट्र है क्योंकि राजा तो धृतराष्ट थे ना कोई युद्ध रोक पाता कोई अपने बच्चे को संभाल पाता तो वो धृतराष्ट्र ही थे उन्होंने नहीं किया इसलिए उनको जड़ कहा गया है सबसे ज्यादा अगर किसी का कर्तव्य भी बनता था यह रोकने का युद्ध रोकने का सबसे ज्यादा जिसका कर्तव्य बनता था
(43:41) पांडवों का की रक्षा करने का उनका भी ध्यान रखने का सबसे ज्यादा किसी का कर्तव्य बनता था धर्म स्थापित करने का तो वो राजा का था जो धृतराष्ट्र थे उन्होंने नहीं किया क्यों नहीं किया पुत्र मोह में अपने बेटे को सब मिल जाए अपने बेटे की सारी आकांक्षा पूरी हो जाए तो वो कुछ भी करे उसमें नहीं रोकने का काम उसे सजा नहीं देने का काम उसे रो उसे डिसिप्लिन में नहीं रखने का काम धृतराष्ट्र ने नहीं किया और अन्याय को होने दिया और अन्याय होने का भाग भी बने इसलिए जड़ जो है वो तो धृतराष्ट्र ही है। परंतु वो जड़ के साथ उस पेड़ को खड़ा रखने
(44:17) का काम जो किया है वो कर्ण ने किया है। पर एक बात जो मिथ की आपने बात कही ना कि कृष्ण जी के साड़ी की बात तो मैं बस ये कह देना चाहती हूं कि आप अगर गीता प्रेस के अनुसार देखें तो उसमें वो वैसा ही डिस्क्रिप्शन है। ठीक है? गीता प्रेस में वो वैसे ही दिया हुआ है कि वो वो कपड़ा बढ़ता गया। ठीक है? तो मैं उसको पूर्णतः गलत ये नहीं कहूंगी क्योंकि एटलीस्ट एक वर्जन में तो ऐसा है। कि कृष्ण जो थे सिर्फ ये है कि उसमें भी कृष्ण फिजिकली आके कुछ नहीं कर रहे। वह तो भाव ही था ना कि कोई डिवाइन इंटरवेंशन हुआ था। पर कृष्ण क्यों नहीं है उसका कारण तो हमें
(44:52) गीता प्रेस में भी मिलता है क्योंकि कृष्ण अपने वहां ही बिजी थे। इसलिए आप जो भी कहते हैं ना कि जो एकदम अनोखी चीज हो जाए उसे आप क्या कहोगे भगवान की कृपा है उस दृष्टि से इसे देखना चाहिए। बस इतना मैं कहना चाहूंगी। क्योंकि सीरियल जो सीरियल है ना जो उसमें दिखाया गया है क्योंकि मेरे को तो याद है वो जब वो हो रहा है तो कृष्ण और रुक्मणी जी वो बैठे हुए हैं तो वो देख रहे होते हैं ना बहुत बुरा लग रहा होता है तो रुक्मणी जी कहती है कि आप जा क्यों नहीं रहे हो मदद क्यों नहीं कर रहे हो तो वो कहते हैं कि मुझे बुलाया ही कहां है नहीं ये ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है ये उसने
(45:24) फिर ऐसे ही डाल दिया कि जब तक मुझे बुलाया नहीं जाएगा मैं कैसे तो जब वो बुलाना स्टार्ट करते हैं फिर वो जो द्रोपदी ने उनको एक बार अपनी साड़ी फाड़ के जो बांधी थी ये कहानी महाभारत में नहीं है ये बाद में सारी ऐड हुई ओके। हां। कि ये कहानी कि भाई उन्होंने अपनी साड़ी फाड़ के बांध दिया। ऐसा कुछ नहीं हुआ है। पर कुछ-कुछ कहानियां अच्छी होती है। है ना? कुछ-कुछ कहानियां भले ही बनाई गई हो, भले ही लोक वार्ता हो, उससे आपके धर्म के समझ में कुछ गलत नहीं होता। ये वैसी कहानियां है। तो ठीक है। कुछ-कुछ कहानियां जैसे पूरे युद्ध का जड़
(46:03) द्रोपदी को बना देना। उसे धर्म और अधर्म समझना ही कठिन हो जाता है। राइट? जो गलत है उसको फ्री ये मिल जाता है कि उसने तो कुछ नहीं किया। सारी गलती जिसने कुछ भी नहीं किया उसके सर पे मर दी गई। और उस इतिहास के को जो समझने के लिए हमें बताया गया उससे हम कुछ नहीं सीखे। वो जो मिथ्स है वो जो भ्रांतियां हैं वो क्लियर होनी ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए अगर कोई मानता भी है कि यह कथा हुई थी और कृष्ण ग्रुप में नहीं बैठे थे तो कोई फर्क नहीं पड़ता। पर हां एक्चुअल महाभारत में ऐसा कुछ नहीं है। एक्चुअल महाभारत में इसलिए इसलिए नहीं है क्योंकि कृष्ण स्वयं युद्ध
(46:38) में बिजी थे। है ना? और टू बी ऑनेस्ट कृष्ण अगर सारे राजाओं को हर जगह से बुलाया तो कृष्ण को भी बुलाया ही होता। पर वो क्योंकि युद्ध में बिजी थे इसलिए वो नहीं आए थे। ये वो क्लियरली कह रहे हैं। तो वो सच्चाई वो है। बस इतना हमें फर्क होना चाहिए। ये जो पांचों पांडव जो थे ये एक मंत्र के मतलब एक मंत्र दिया गया था कुंती जी को उससे ये पैदा हुए थे। एक फल खाने से मतलब जैसे तो ये कैसे है ये थोड़ा सा समझ मंत्र वाली बात है वो भी हमने शुरुआत में जो नियोग की बात करी ना वो उसी से रिलेटेड है ओके कि मंत्र से क्या होता है मंत्र से बच्चे
(47:12) नहीं पैदा होते मंत्र से अगर मंत्र से बच्चे पैदा हो जाते तो किसी को बुलाने की क्या आवश्यकता थी हम पर क्या कहे वो मंत्र क्यों है कि आप किसी भी श्रेष्ठ पुरुष को बुला सकते हो ओके उस मंत्र के द्वारा उस मंत्र के द्वारा ओके इसीलिए पहले सूर्य फिर इंद्र ऐसे ऐसे सबको बुलाया गया है। अगर मंत्र से ही हो जाता तो किसी और की आवश्यकता ही क्या थी? राइट? तो वह भी नियोग ही है। नियोग क्यों है? क्योंकि पांडु बच्चे चाहते हैं। पर पांडु स्वयं बच्चे पैदा नहीं कर सकते थे। क्योंकि पांडु पे वो श्राप था ना कि अगर आप अपनी पत्नी के पास भी आओगे तो मृत्यु
(47:47) हो जाएगी। हम इसलिए वो तो कुछ नहीं कर सकते थे। पर वो चाहते थे कि उनके बच्चे तो हो। हम इसीलिए नियोग उस परिस्थिति में भी नियोग हुआ है। एग्जैक्टली जैसे पांडु का स्वयं का जन्म हुआ है। तो वह भी नियोग है। तो जैसे अह एक जबजब देखते हैं तो कर्ण को अर्जुन से इतनी दिक्कत क्यों थी? अगर उनमें से बड़ा युधिष्ठिर से होनी चाहिए थी। मतलब अपनी ऐज का तो थोड़ा सा ही अर्जुन में और उसमें तो काफी गैप होगा ना क्योंकि ये शादी से पहले हो गए थे कर्ण। और अर्जुन बहुत बाद में हुए हैं तो आई थिंक हुआ होगा। 15 20 साल कितना गैप होगा उनकी एज में अगर
(48:20) अगर कम से कम भी देखा जाए ना कम से कम तो कुंती का विवाह कर्ण के जन्म के बाद होता है और कुंती को जब कर्ण हुए हैं हम तब कुंती ऐसे कहा जाता है कि उनका पीरियड जस्ट शुरू शुरू हुआ था तो शुरू शुरू अगर पीरियड हुआ है किसी लड़की का तो वो 11 12 साल की रही होगी हम मैक्स है ना उससे या छोटी भी रही हो तो भी 10 12 के बीच ही रही होगी तो चलो अगर हम 11 12 भी समझे तो उसके बाद विवाह हुआ है। उसके बाद स्वयंवर हुआ है। तो आप एटलीस्ट एक आध डेढ़ दो साल तो समझ लो 13 14 साल की वो रही होंगी। 13 14 साल के होने के बाद अगर तब विवाह हुआ स्वयंवर जो हुआ और ये क्योंकि
(49:00) उस समय जल्दी शादियां होती थी इसलिए मैं 1415 कह रही हूं। ठीक है? 1415 रही होंगी वो। उसके बाद तो तुरंत बच्चे भी नहीं हुए क्योंकि उसके बाद तो माधुरी के साथ विवाह हुआ। पांडू का और वो विश्व वो जो सारे विजय यात्रा पर निकल गए थे उसमें दो-ती साल चले गए होंगे तो अब 1820 18 19 20 का टाइम होगा तब फिर जाके उनको वो श्राप लगता और ये मैं कम से कम बता रही हूं इससे ज्यादा भी हो सकता है मैं लोअर लिमिट्स बता रही हूं ठीक है तो सपोज 20 साल की वो है जब वो श्राप लगता है अब श्राप लगने के कुछ टाइम बाद युधिष्ठिर का जन्म हुआ है ठीक है तो अगर 12 साल पे कर्ण हुआ है तो
(49:40) आठ आठ साल तो कम से कम युधिष्ठिर और कर्ण में फर्क है। छ से आठ साल कम से कम। ठीक है? अब वो युधिष्ठिर के कम से कम दो ढाई तीन साल बाद अगर एक-ए साल में नहीं होते हैं तो भी दो तीन-ती साल हो गया। राइट? तो 8 से 10 वर्ष का फर्क तो कम से कम कर्ण और अर्जुन में है। कम से कम। अब क्यों जलता था कर्ण अर्जुन से? क्योंकि दोनों ही द्रोणाचार्य के गुरुकुल में पढ़ते थे। एक तो लोग जो कहते हैं कि द्रोणाचार्य ने पढ़ने से मना कर दिया वो तो एकदम गलत है। ओके। कर्ण जो है वो द्रोणाचार्य के गुरुकुल में पढ़ा पढ़ा है। और द्रोणाचार्य के गुरुकुल
(50:23) में ही उसकी दोस्ती जो है वो युधिष्ठिर वो द्रोणा दुर्योधन से हुई है। तो दुर्योधन और कर्ण द्रोणाचार्य के गुरुकुल से मित्र बने हैं। और मित्र क्यों बने हैं? क्योंकि उन दोनों को ही पांडवों से नफरत थी। हां, द्वेष था। उन दोनों को ही था। अब कर्ण को यह लगता था कि यह इतना लड़का इसको बहुत ज्यादा भाव मिलता है और यह बहुत अच्छा है। मेरा अगर कोई कंपटीशन है तो केवल यही है। ओके। इसे मैं कैसे हराऊं? क्योंकि कर्ण कोई बुरा योद्धा था ऐसा नहीं है। पर कर्ण को लगता था अगर मैं सर्वश्रेष्ठ नहीं बन पा रहा हूं तो किसके कारण? अर्जुन के कारण। तो वो कॉम्पिटिटिवनेस हमेशा था।
(51:06) वो बच्चा जो उससे 10 साल छोटा है ये उसमें भी जब ये तो जब उनका स्वयंवर हो रहा था जब भी ये चीज दिखाई जाती है कि वहां पे कर्ण भी आया हुआ था और वो वो कर सकता था जो अर्जुन ने जैसे तीर लगाया वो भी लगा सकता था लेकिन वो वहां पे भी उस बेचारे के साथ उसको हमिलेट किया गया ये कितना सच है ये ना ये जैसे मैं कह रही थी कि वेदव्यास महा महाभारत की भी थोड़ी अलग-अलग मैनुस्क्रिप्ट्स हैं तो उसमें अगर आप क्रिटिकल एडिशन देखें जो 1200 प्लस मैनुस्क्रिप्ट्स को एकत्रित करके एनालाइज करके करा है तो उसमें तो यह प्रसंग ही नहीं है। ओके कि उसने ऐसा कुछ
(51:41) उठाने का प्रयत्न किया था और उठाने नहीं दिया। तो सूतम ना वरयामि कि मैं इस सूत से शादी नहीं करूंगी। ऐसा है ही नहीं प्रसंग। उसमें ऐसे आता है कि बाकी शब्द भी नहीं उठा पाए बाण और ये भी नहीं कर पाया। ठीक है? जो सदर्न रिसेंशन है जो साउथ में जो मैनुस्क्रिप्ट पाई गई है उसमें तो क्लियर क्लियर वर्णन दिया गया है कि कैसे कर्ण ने प्रयत्न किया और वो नहीं उठा पाया। ओके। तो 1200 मैनुस्क्रिप्ट्स के एनालिसिस से जो क्रिटिकल एडिशन बना है उसमें यह वर्णन नहीं है पर इतना है कि वो भी नहीं उठा पाया और जो बाकी सब नहीं उठा पाया वो भी नहीं उठा पाया। सदर्न रिसेशन में तो
(52:20) प्रॉपर वर्णन है कि नहीं उठा पाया। गीता प्रेस में यह आता है कि सूतम ना वरयामि। द्रोपदी कह रही है सूतम ना वरयामि। पर गीता प्रेस में ही उसके नीचे उन्होंने एक नोट लिखा है कि यह जो प्रसंग है यह प्रक्षिप्त है। यह इंटरपोलेटेड लग रहा है क्योंकि वो होने के पहले और बाद दोनों टाइम कहा गया है कि अरे यह तो कर्ण शाल्व दुर्योधन यह कोई भी नहीं उठा पाया और फिर जब अर्जुन जो तब ब्राह्मण वेश में है वो जब उठता है क्योंकि कोई नहीं उठा पाया तो लोग कह रहे हैं कि अरे ये क्या जो ये कर्ण दुर्योधन फलाना ढिकाना ये लोग नहीं उठा पाए ये ब्राह्मण कैसे उठाएगा
(52:56) ब्राह्मण कैसे उठाएगा तो जिसमें ये है सूतम नवर्यामी जहां से उन्होंने लिया हुआ भी होगा शायद क्योंकि केवल उसमें वो है उसमें भी नोट दिया गया है कि भाई यह विश पर कंप्लीटली विश्वास नहीं कर सकते। ओके चलो मान भी लो कि उसने यह कहा तो वो स्वयंवर था। स्वयंवर में किससे शादी करनी नहीं करनी। ये तो स्त्री का अधिकार है ना। इसलिए तो वो स्वयंवर है। तो अगर वो नहीं चाहती किसी से शादी करना तो क्या? क्योंकि दिखाते हैं कि द्रोपदी ने जो इंसल्ट ये की थी इसी की वजह से वो जब उसका चिरहरण हो रहा था तो करण को तो वैसे ही उससे गरजिश थी कि अच्छा इसने तो मेरी
(53:32) इंसल्ट की तो हम लोग वो रिलेट करके हमें दिखाया गया था। मैं भी यही सोच रही थी क्योंकि कर्ण को ऐसे ही बोलना तो ऑब्वियसली एक इंसान की उसकी मेल ईगो कर्ण मुझे एक बात बताइए जी आपने किसी को शादी करने से मना कर दिया हम कोई भी कारण ठीक है छोटा है मोटा है ना कुछ भी कारण रहा हो तो क्या उसे अधिकार मिल जाता है आपका वस्त्र हरण करने का या किसी के किसी भी स्त्री के साथ राइट आपका तो मैं भूल से बोल रही हूं ऐसे नहीं कह रही किसी का भी राइट कोई स्त्री किसी को रिजेक्ट कर दे तो क्या वो कुछ भी कर सकता है क्या क्योंकि इंसल्ट हो गया ये कहां का तरीका है ये कौन से
(54:03) सभ्य समाज में ऐसा होता है स्वयंवर जब होता था तो एक को अगर चुना है तो बाकी तो सबको रिजेक्ट ही किया ना तो वो स्त्री को कैसे देखिए महाभारत में यही दिखाने की कोशिश की गई है जो टीवी में कि एक जगह तो उसने कर्ण की इंसल्ट कर दी दूसरा फिर उसने दुर्योधन की कर दी तो कहीं ना कहीं द्रोपदी को ही दिखाया गया था कि लाइक बहुत एोगेंट लेडी है इंसल्ट कर देती है तो मेल ईगो हर्ट हो गई है एंड उसी को एक ज्वालामुखी बनी है हो जाए तो सब चलता है ऐसा होता है क्या वही दिखाने की कोशिश की गई इसीलिए सारा पाप का घड़ा द्रो द्रौदी द्रोपदी के सर पे फोड़ दो।
(54:36) हां हां इजी है ना मानना बाकी सब तो सोचना पड़ेगा कि भ क्यों ऐसा इतना सब होने के बाद भी दुर्योधन क्यों पीछे पड़ा हुआ है? क्यों इतना जल रहा है उनसे? ये सब प्रश्न आते हैं जो फिर मनुष्य स्वभाव में जाते हैं। मनुष्य स्वभाव में जाते हैं तो हमें इंट्रोस्पेक्ट करना पड़ता है। हस्तिनापुर अभी मेरठ राइट? मेरठ साइड हां। ये मेरठ ही है हस्तिनापुर। हां, मेरठ के आसपास जो है। और ये कांधार अफगानिस्तान। हां। जो गंध कांधहर जो कहते हैं वो गंधार। अब वो एक्सक्टली वही स्थान है ये हम नहीं जानते [हंसी] पर उस एरिया में पड़ता है। ओके उस तरफ पड़ता है
(55:07) और ये एक और जो नाम प्रस्थ दिल्ली हां दिल्ली है ओके ये दिल्ली दी गई थी एंड ये खंड पूरा बड़ा रहा होगा ओके जिसका फिर बंटवारा किया और ये पार्ट जो है वो दिल्ली वाला पार्ट वो पांडवों का रहा होगा और ये क्योंकि गुरुग्राम जो है ये तो ऑब्वियसली गुरु द्रोणाचार्य द्रोणाचार्य जी का तो हां ये कुछ जगह तो पता है ओके तो एक चीज और जैसे आपने बताया कि दो बीवियां थी कुंती और माधुरी से मादरी का ना तो ज्यादा रोल दिखाया गया है और एक बार थोड़ा सा उनको भी पता नहीं मुझे लगता है ना कि महाभारत जो दिखाई है ना इसमें लेडीज के साथ बहुत वो दिखाया गया है। मतलब मेल डोमिनेंट सोसाइटी
(55:53) के उस पर्सपेक्टिव से बहुत ज्यादा वो कुंती हुई चाहे माधुरी हुई चाहे द्रोपदी हुई चाहे वो लास्ट में वो गांधारी को भी ऐसे दिखा दिया है कि पुत्र मोह में आके उसने कृष्ण को श्राप दे दिया है तो कहीं ना कहीं लेडीज के साथ बड़ा घुमा के वो किया गया है। अब जो मादरिका है उसका भी बेचारे का क्योंकि अगर मैं आपने उस माइंडसेट से अभी तो ऑब्वियसली पढ़ के बात अलग है। बट उस टाइम पे जब स्टार्टिंग में देखा था तो मुझे लगा था लो इसने तो बेचारे ने पांडु को मरवा दिया। आया था हर किसी का ऑब्वियसली [हंसी] [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
(56:28) बट [हंसी] मेरी टिकली गिर गई [हंसी] लड़कियां सबको मरवा ही रही है ना उसमें [हंसी] अरे कोई नहीं कोई नहीं कहीं आपकी भी लाइफ में प्रॉब्लम्स चल रही हैं। आप भी कहीं ना कहीं भूत प्रेत बाधा से तकलीफ [संगीत] में हैं। पितृ दोष हैं या आपको समझ नहीं आ रहे हैं कि लाइफ के आप उस फज़ में है जहां आपको क्लेरिटी नहीं मिल रही है। बिजनेस करें या जॉब करें? लव मैरिज या अरेंज मैरिज। आगे फ्यूचर क्या है? मोक्ष की राह पर चल भी रहे हैं कि नहीं? आपको अपने इष्ट देव के बारे में पता भी है। लाइफ का पर्पस क्या है? करने क्या आए हैं? इस धरती पर कभी भी कोई भी ऐसे ही
(57:13) जन्म नहीं लेता है। हर एक आत्मा का एक लक्ष्य होता है। कुछ करने वो आई है। इन सबकी क्लेरिटी कहां मिलेगी? इन सबकी क्लेरिटी आपको आकाशिक रीडिंग में मिल जाएगी। जहां आपके ही मास्टर्स, जहां आपके ही पूर्वज, जहां आपका ही इष्ट देव यह बताएगा कि आपको क्या करना चाहिए। इस पूरी लाइफ में आपका क्या पर्पस है और पास्ट लाइफ में आप क्या करके आए थे। कोई कर्म पेंडिंग तो नहीं था जो आपको पूरा करना चाहिए। क्या आपके पूर्वज जो इस धरती पर नहीं है, कुछ कहना तो नहीं चाहते हैं। इन सारे सवालों के जवाब सिर्फ और सिर्फ आपको आकाशिक रीडिंग के सेशन में मिल जाएंगे।
(57:46) अगर आप भी अपनी रीडिंग करवाना चाहते हैं, आप भी क्लेरिटी चाहते हैं [संगीत] लाइफ को लेकर तो नीचे दिए गए नंबर पर आप कांटेक्ट कर सकते हैं, बुक कर सकते हैं अपना स्लॉट। [संगीत] तो अपने बारे में जानिए, क्लेरिटी लीजिए लाइफ में कि करना क्या है? सशंस पाइए अपने इष्ट देव से, अपने पूर्वजों से। जय माता दी। तो मेन जब मैं देख रही थी ना स्टार्टिंग में जब मैंने देखा था तो सत्यवती वाला देखते हैं तो लगता है कि उस पर तरस आ जाता है वो जो भीष्म के जो फादर थे शांतनू तो उन पर तरस आता है कि अरे बेचारा राजा मतलब ये तो बहुत स्मार्ट है मतलब मुझे एक था रानियां बहुत स्मार्ट
(58:22) मतलब लेडी बहुत स्मार्ट तो मैंने कहा ये देखो ये मछली मछुआरे की बेटी थी अब इसी ने शादी कर ली नाउ शी इज़ वेरी स्मार्ट इसके फादर ने कंडीशन रख दी कि हम मेरे धोते जो हैं वो बनेंगे राजा तो ही मैं शादी करूंगा। मैंने कहा वाओ अभी राजा प्यार में इतने पागल शांतनु तो मैंने फिर वो देखा मैंने कहा देखो कितने प्यार में भीष्म ने मतलब अपने फादर को ही देख नहीं पाए हैं कि अच्छा मेरा फादर कैसे रहेगा तो वो कह देता है ठीक है मैं अब शादी नहीं करूंगा वहां पे मुझे एक वो ये दिखा कि ओके सेकंडली फिर जब हम आगे देखते हैं तो मुझे माधुरी वाला
(58:53) वो एंगल वो लगता है कि मैंने कहा इन लो वो दिखता है कि तो वहां पे मैंने कहा अब क्योंकि इतना दिमाग नहीं था ना वो एक ऐज होती है तो वहां पे मुझे मुझे लगा कि नहीं जिस प्रकार से दिखाते हैं आपकी बात एकदम सही है। ऐसे ही लगता [हंसी] है ऐसे ही लगता है। दिखाया वैसे ना तो मैंने कहा इसे बेचारा पांडव भी मरवा दिया। अब तो मतलब ये राजा बनता अब ये बेचारी विधवा है। पांच बेटे हैं। अब कैसे आगे चलेगा? देन वो द्रोपदी का दिखाते हैं कि वो कर्ण का जो उसने तो फिर वो लगता है कि अगर नहीं बोला होता तो इसकी ईगो हर्ट हो रही है। ऐसे नहीं होता।
(59:26) ऑब्वियसली राजा है मेल ईगो तो होती ही है सुपीरियर ये मानते ही हैं। फिर वो दिखाते हैं दुर्योधन को जो अंधे का बेटा अंधा वो दिखा दिया वो हंस रही है देन उसको क्योंकि एक इंसान पहले से ही है उसको आप और उंगली कर रहे हो तो ऑब्वियसली तो वो जो देखते आ रहे थे ना वो ऐसा लग रहा था कि हर जगह ना लेडी को दिखा दिया कि इसकी वजह से हो सकता है वो जानबूझ के वैसा किया लेकिन जब मैंने बुक्स पढ़ी जब मैंने जाना तो मैंने कहा नहीं इतना ऐसा है नहीं जैसा दिखाया गया है क्योंकि कहीं ना कहीं अगर सत्यवती थी तो उसको अप्रोच किया गया। वो खुद आई राजा के
(1:00:00) पास कि देखो मैं कितनी सुंदर हूं एंड मैं ऐसी हूं। राजा ने खुद उसके बार-बार जाके उसको अप्रोच कर रहे हैं। तो उसकी ऑब्वियसली कोई भी है तो वो शादी करेगी। अपना फ्यूचर तो प्लान करेगी वो पहले ही। ये मादरी वाला रोल बताइए। ये बहुत एक तो मुझे ये है कि दूसरी शादी ही क्यों की? कुंती जब थी वो सुंदर थी सब थे। उन्होंने धृतराष्ट्र ने तो नहीं की दूसरी शादी। हां। इन्होंने दूसरी शादी ही क्यों की? क्योंकि उस समय ना बहु पत्नित्व का होता था हम जो पॉलीगैमी जिसे हम कहते हैं कि एक से अधिक पत्नियां होती थी और स्पेशली राजा के लिए क्योंकि विवाह जब होता है तो राजा के
(1:00:36) लिए वो एक संबंध है एक नए राज्य से बना है है ना तो आपके मित्र और बढ़ गए मतलब आप और शक्तिशाली हो गए अगर स्पेशली आपके मित्र भी शक्तिशाली है तो और वहां पे शांति हो गई उनके साथ युद्ध नहीं होगा राइट इसीलिए बहु पत्नीत्व तो था और राजाओं के केस में तो और भी होता था ठीक ठीक है। धृतराष्ट्र तो ऑलरेडी अंधे थे। है ना? और मतलब वो तो राजा भी बाद में बने। पहले तो पांडु ही था। तो पांडु का विवाह तो सोच समझ के स्ट्रेटेजिकली करा गया था। माधुरी से कि कुंती जो स्वयंवर हुआ था वो तो स्वयंवर था। जिसमें कुंती ने स्वयं चूज़ किया था। और मादरी का साथ तो उन्होंने सिलेक्ट की
(1:01:12) थी कि अच्छा माधुरी से करनी है। मध्य प्रदेश की जो जो राजा है उनके बहन से करनी है। वो कहां है? वो क्या है अभी? मध्य प्रदेश भी वहीं पे आता है। पंजाब के उस तरफ मतलब आज का जो पाकिस्तान वाला जो एरिया है ना सिंध जो सिंध का एरिया है वो पंजाब वो सब उधर ही आता है। इट इज ऑल दैट साइड। एंड कुंती कहां से थी? कुंती थी कुंती भोज तो जैसे राजस्थान के साइड से ओके। उस तरफ से जहां से चंबल नदी जहां से जाती है क्योंकि जब सबसे पहले जो कर्ण को छोड़ दिया गया है वही वो चंबल नदी में डाला हुआ है तो वो उस तरफ से है क्योंकि वो भी वैसे देखा जाए तो वो सारे
(1:01:45) जो यदुवंशी कहते हैं ना उसी परिवार से हैं वो उनके जो पिता है कुंती भोज वो भी तो वो सब उस तरफ सटे हुए थे ओके हां क्योंकि मैं यही सोचती थी कि दूसरी शादी ही की ही होंगी और फिर उनका ज्यादा रोल भी नहीं दिखती तो माधुरी का ये है कि वो तो रही बहुत कम टाइम है तो पहले तो विवाह होता है और विवाह होने के बाद जब वो आती है तब यह लोग और विजय यात्रा पे चले गए हैं पांडू। फिर जब वापस आते हैं पांडू विजय यात्रा से उसके बाद तो तुरंत वो श्राप वाला प्रसंग हो जाता है। जब वो लोग ब्रेक पे होते हैं, वेकेशन पे होते हैं जब तो श्राप लग जाता है। अब जब श्राप लग जाता है तो तो
(1:02:18) उन्होंने ऑलमोस्ट वो क्या कहते हैं कि वानप्रस्थ ले लिया है जिसमें आप तपस्या करोगे। कोई रिलेशन एस सच नहीं रखोगे पत्नी के साथ। हम्म। और इतने टाइम तो वैसा ही रहा। हम्म। कि रिलेशन नहीं रखा। नियोग द्वारा बच्चे हुए। यह सारा हुआ। अब श्राप जो था वो पांडु पे यह था कि वो अपने पत्नियों के पास जाएंगे तो उनकी मृत्यु हो जाएगी। अब पत्नियों ने ऐसा कुछ नहीं किया कि वो उनके पास आए। पर एक बार क्या होता है? पांडू और माधुरी जो है वो वॉक पे गए होते हैं। ठीक है? विचरने गए होते हैं जंगल में और कई बार आप जब प्रकृति में हो तो ठंडी सी हवा चलती है
(1:02:58) और शायद वो वसंत जैसा वो माहौल रहा होगा तो पक्षियों के कलकल की आवाज आ रही थी। ठंडी हवा बह रही थी। सुगंध अच्छी सी थी। तो वो वो उस वातावरण में ऐसा कहा है कि पांडु एकदम कामुक हो जाते हैं। हम एकदम रोमांटिक से शायद हो गए। एंड ही अप्रोचेस माधुरी और माधुरी एकदम डर जाती है कि भ आप मत ऐसे करो पर ही इ है सो ओवरकम कि ही अप्रोचेस माधुरी और उसमें फिर देहांत हो जाता है जो कर्स है वो लग जाता है तो इस प्रकार हुआ है अब माधुरी को तो वो गिल्ट लग रहा है माधुरी ने स्वयं से ऐसा कुछ नहीं किया कि मैं उनको आकर्षित करूं ऐसा उन्होंने नहीं किया
(1:03:41) पर वो निमित्त बनी इस परिस्थिति का और इस बात का ही उनको इतना ज्यादा गिल्ट था कि वह कहती कि नहीं मैं तो सती हूंगी| क्योंकि मैं इस गिल्ट भाव से जी ही नहीं सकती हूं। इसलिए उन्होंने फिर अपना वो सत्य सती हो गए वो पांडु के साथ। और आपने जो सत्यवती की बात कही वो भी जैसे आपने कहा वो एकदम ठीक है अ कि शांतनु ने उन्हें अप्रोच किया था। अच्छा वो प्रसंग भी कैसा है देखिए शांतनु एकदम प्रेम में पड़ जाते हैं सत्यवती के और सत्यवती कहती है कि मैं तो कोई निर्णय नहीं ले सकती। आपको मेरे पिता से बात करनी होगी। पिताजी जो है वह कहते हैं कि मैं आपसे शादी करने को तैयार हूं।
(1:04:20) मेरी बेटी को आपके जैसा राजा मांग रहा है तो क्या ही और तो क्या ही हो सकता है। परंतु मैं इसका विवाह उसी से करूंगा जो मुझे जो प्रतिज्ञा करे कि इसी का जो बेटा होगा वो राजा बनेगा। अब तब तो वो जो शांतनु है वो वापस चले जाते हैं क्योंकि तब तक भीष्म पितामह जिनका नाम उस समय देवव्रत था। हम्। उनको तो युवराज घोषित कर दिया गया है और वह बहुत अच्छे हैं। बहुत ही कैपेबल है। सामर्थ्य है। उनमें सब कुछ है। अब उनको लगता है कि जो मेरा बेटा ऑलरेडी है, इतना बड़ा बेटा है, उसको मैं कैसे कहूं कि तुम तुम राजा नहीं बनोगे। इसलिए वो वापस चले
(1:04:54) जाते हैं। पर वापस जाने के बाद उनका मन ही नहीं लग रहा। वह ना शासन कर रहे हैं, ना दरबार में जा रहे हैं। एकदम दुखी दुखी होकर बैठे हुए हैं। तो ऑब्वियसली सब चिंतित हैं। भीष्म भी चिंतित है। तो भीष्म पिता से पूछते हैं कि क्या हुआ पिताजी आप ठीक नहीं है। सब ठीक है। क्या प्रॉब्लम है आप बताइए। जैसे बेटा जाएगा पूछने। तो शांतनु क्या कहते हैं? सुनिए। शांतिनु कहते हैं मुझे तो केवल एक चिंता है कि तुम मेरे बेटे हो। तो तुम्हारे में बहुत सामर्थ्य है। ये सब ठीक है। परंतु अगर तुम्हें कुछ हो गया तो मेरा वंश आगे बढ़ाने के लिए तो कोई है ही नहीं।
(1:05:32) इस बात की मुझे चिंता होती है। अब आप ऐसा कह रहे हो उस बच्चे को। ठीक है? तो इनको लगता है कि कोई तो बात है। इसीलिए फिर वो उनके जो सारथी हैं शांतनु के सारथी को पूछते हैं कि क्या हुआ? तो शांतनु के सारथी बताते हैं कि ऐसा-ऐसे हुआ। वो दाशराज की कन्या है जिन पर आपके पिता मोहित हो गए हैं। पर वो दासराज के जो दाशराज है वो विवाह करने शायद तैयार नहीं है कुछ। इसलिए फिर भीष्म जाते हैं कि आप बताइए क्या हुआ? आप क्यों मेरे पिता से विवाह नहीं करना चाहते? क्योंकि उनको समझ आ गया ना अगर शांतनु को ऐसा होता कि नहीं करना है तो फिर वो मन बना लेते। राजा है
(1:06:09) एट द एंड ऑफ़ द डे। राइट? हम फिर भीष्म में जाते हैं देवव्रत रादर उस समय जाते हैं तो दाशराज कहते हैं कि ऐसीऐसी मैं कोई मना नहीं कर रहा हूं मैं तो खुश होऊंगा राजा के साथ विवाह हो जाए पर मेरी अब मेरी मेरी ये कंडीशन है कि भाई शादी तभी होगी जब इसका बेटा पुत्र बनेगा तो पहले तो भीष्म कहते हैं ठीक है मैं राजपाट से अपना जो मैं नहीं बनूंगा राजा मैं छोड़ देता हूं अब मेरा जो भी अधिकार राज पर था छोड़ देता हूं आपका जो पौत्र हो दोहित्र होगा जो भी उसी उसी का वो ही बनेगा राजा। पर दाशराज बहुत स्मार्ट है। अच्छा इसमें सत्यवती तो कहीं आई ही नहीं
(1:06:46) है। बाय द वे। ठीक है। दाशराज कहते हैं ठीक है तुम तो राजा नहीं बनोगे और तुम पर मुझे विश्वास है। परंतु तुम्हारे बच्चे तो कह सकते हैं ना कि राज्य पर अधिकार है क्योंकि बेटे तो तुम भी हो। तो तुम्हारे बच्चे जब ऐसा करेंगे और तुम इतने शक्तिशाली हो तो फिर इसके बच्चे कहां से बन पाएंगे? राजा। उस समय फिर भीष्म कहते हैं और आदर देवव्रत उस समय कहते हैं कि ठीक है अगर आपको विश्वास आपको मुझ पर भरोसा करना है तो मैं एक और प्रतिज्ञा लेता हूं और यह प्रतिज्ञा लेता हूं कि मैं विवाह भी नहीं करूंगा और आजीवन ब्रह्मचर्य पा लूंगा। परंतु क्योंकि मैंने यह
(1:07:24) प्रतिज्ञा की है और मेरे पिता के लिए जो भी किया है इसलिए मैं यह भी प्रार्थना करता हूं देवताओं से कि क्योंकि मुझे पुत्र ना हो तो भी मुझे स्वर्ग मिले। हम ऐसे वह कहते हैं और आजीवन ब्रह्मचर्य का वह पालन पालन मतलब पालन करते हैं और प्रतिज्ञा करते हैं। तो इसलिए फिर उनको भीष्म नाम दिया गया कि इतनी भीषण जिसने प्रतिज्ञा की वो उनको भीष्म नाम ही उसी से मिला। पर अगेन इसमें कौन ये सब रोक सकता था शांतनु? हम यार आप राजा हो। आप इतने ज्यादा मोहित हो गए हो कि आपके बेटे के साथ आप ऐसे बात कर रहे हो कि मुझे तो चिंता उस बात की है और चिंता हो सकती है नो डाउट राइट चिंता हो
(1:08:03) सकती है बट आपने उसका तो सारा सब कुछ ले लिया करेक्ट उसका तो सब कुछ इसने शादी नहीं की उसने कुछ भी नहीं अपनी पूरी लाइफ ऐसे निकाल दी तो कितना बड़ा सैक्रिफाइस सोचा नहीं होगा उस समय बट हां अगर आप ऐसे बात करते हो तो बेटा सोचेगा ना कुछ तो हुआ है तो अगेन इसमें सत्यवती का कोई दोष है ही नहीं जैसे आपने कहा वो तो कोई सामने से नहीं आई थी कि अरे मैं मोहित कर देती हूं राजा को ऐसा कुछ नहीं हुआ था राइट राजा ही इतने मोह में पड़ गए थे। शांतनु जैसे राजा जो थे इन्होंने गंगा से शादी की थी। तो यह कैसे पॉसिबल है? गंगा से अच्छा अब गंगा उनका नाम है।
(1:08:36) हम अब कोई उन्हें लिटरल नदी कहता है वो तो एक चीज है। वो तो आप मेटाफोरिकली कह सकते हो। बट गंगा तो स्त्री ही थी ना उस समय तो। हम्म। और वो भी बहुत सुंदर थी और उन पर पहले मतलब वो प्रेम में पड़ते हैं दोनों एक दूसरे के। ओके। कि वो स्त्री जैसे हम गंगा को हमेशा हम वैसे देखते हैं कि शिव पर विराजी हुई है एक और बस नहीं मैं ऐसे बहुत मैं मैं उसे एक नॉर्मल स्त्री ही गिनती हूं जो शायद उस प्रदेश से आई होगी जहां गंगा बहती है ओके ऐसा कुछ तो रहा होगा पर वो है तो स्त्री ही हम वही है ना कि कई बार इतिहास जो पूर्वत्तम जो पहले हुआ है वो कथा रूप में कहा जाता
(1:09:13) है तो इस प्रकार हुआ होगा वो मैं तो उनको स्त्री ही मानती हूं आपका बेस्ट कैरेक्टर क्या है महा महाभारत में क्योंकि आपने इतना डीपली इसको स्टडी किया है। मैंने भी मतलब पहले कुछ और थे। मेरे जब क्लियर चीजें हुई तो मेरा तो पर्सपेक्टिव काफी चेंज हुआ। आपका फेवरेट कैरेक्टर कौन सा है? एक्चुअली महाभारत में सभी कैरेक्टर्स बहुत अच्छे हैं। सबसे कुछ-कुछ सीखना है। हम दुर्योधन से भी है, कर्ण से भी है, युधिष्ठिर से भी है, द्रोपदी से भी है। सबसे कुछ-कुछ सीखना है। किसी से यह सीखना है कि क्या करना है, किसी से यह सीखना है, कुछ क्या नहीं करना है। पर सीखने का सबसे
(1:09:44) है। और मतलब कृष्ण तो है ही। कृष्ण जब हो तो वो फेवरेट होते ही हैं। राइट? पर मुझे लगता है प्रत्येक कैरेक्टर के साथ न्याय किया है वेदव्यास जी ने। अर्जुन से ये सीखना है तो मैं मैं सभी को कहती हूं कि आपके बच्चों को ना अर्जुन की कथा तो अवश्य सुनाइए। क्योंकि अर्जुन सर्वश्रेष्ठ योद्धा था। पर वो सर्वश्रेष्ठ कैसे बना? वो इतना एक्सीलेंट कैसे बना? कोई जन्म से नहीं होता है पर वो प्रैक्टिस से होता है। इसीलिए एक्चुअली मैंने एक बच्चों की बुक लिखी है। माय फ्रेंड अर्जुन वो पुस्तक है जो बच्चों के लिए है कि उसमें एक स्टूडेंट के क्या गुण होने चाहिए? कैसा फोकस होना
(1:10:22) चाहिए? कैसी प्रैक्टिस होनी चाहिए जिससे वो सर्वश्रेष्ठ बने। और फिर जीवन में हर समय डिसीजन कैसे लेना चाहिए? कैसे मेंटर्स को चूज़ करना चाहिए? वो आप अर्जुन से सीखते हो। दूसरा भीम का जो कैरेक्टर है, कितना कमिटेड है वो कैरेक्टर। भीम के मन में कभी भी सही गलत के बीच कंफ्यूजन नहीं रहा। जिस समय जो करना है करना है। परंतु जिस समय किसी ने कहा कि अभी यह किसी ने मतलब अगर जिनको वो मानते हैं कुंती मां है, विदुर जी हैं या युधिष्ठिर हैं उन्होंने जब कहा कि नहीं ऐसा नहीं करना है। यह सही नहीं है। तो उन्होंने वो भी माना है। तो कमिटमेंट भी है और क्लेरिटी भी है। और एक
(1:11:03) बार जो वो ठान लेते हैं तो फिर करना ही है। जो उनका कमिटमेंट अपने माता माता के प्रति है, भाइयों के प्रति है, द्रोपदी के प्रति है वो सभी जानने जैसा है। बहुत ही सुंदर कैरेक्टर है। युधिष्ठिर का स्वयं का कैरेक्टर इतना अच्छा है। लोग समझते हैं अरे वह तो कैसे हैं? वो निर्णय नहीं लेते वगैरह-वगैरह। पर जब आप लीडर होते हो ना तो आप कोई भी निर्णय कर दिया। ऐसा नहीं होता है। आपको लंबा सोच के लेना पड़ता है। किसी एक्शन का रिएक्शन क्या होगा? सेकंड ऑर्डर इफेक्ट्स क्या होंगे? ये सभी आपको सोचना पड़ता है और धैर्य की आवश्यकता होती है। भले आपको भले लोगों को
(1:11:39) लगे कि आप गलत कर रहे हो उस समय। पर धैर्य बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है कि ऐसा कुछ ना हो जाए। आप ऐसा कुछ ना कर दो जिससे फिर प्रायश्चित करना पड़े। उसका अर्थ ऐसा नहीं है कि गलत नहीं हो सकता। आपके आपके द्वारा या आपके साथ अगर गलत भी हुआ भी है तो उससे आप बाहर कैसे निकल सकते हो। कैसे जो सही है वही कर सकते हो। वो युधिष्ठिर से सीखना है। कुंती का जो कैरेक्टर है ओह माय गॉड। अबब्सोलुटली ब्यूटीफुल कैरेक्टर। उनके बारे में भी कम बात होती है। तो जो पुस्तक है उसमें मैंने ट्राई किया है कि सर सारे जो कररेक्टर्स हैं महाभारत एंड रावण में यह सभी
(1:12:12) कैरेक्टर्स पर फोकस हो और उन सबसे क्या सीख सके ये थोड़ा बाहर लाने का प्रयत्न किया हुआ है। तो एंड करते हैं पॉडकास्ट बहुत क्लेरिटी मिली क्योंकि मैंने जैसे आपको बताया ना एक माइंडसेट ही अलग कर दिया है। एंड कास्ट का सीरियल्स में जो दिखाते हैं ना उसको इतना घुमा फिरा के इतना कुछ दिखा देते हैं कि लगता है कि सच क्या है? गलत क्या है? इस पे मैं एक बार हम एक और पडकास्ट करेंगे जिस पे मैं रामायण पे भी ये सब चीजें क्लियर करना चाहूंगी क्योंकि रामायण को लेकर भी बहुत सारे ऐसे हैं यहां तक कि सबसे बड़ा जो डाउट रहता है कि कहते हैं कि
(1:12:43) लंका वो लंका है ही नहीं। ये वाला बहुत बड़ा क्वेश्चन रहता है कि क्या सच में वही लंका है या दूसरी लंका है? तो हम रामायण पर भी आप लोग प्लीज वोट करिएगा अगर आप चाहते हो कि रामायण पर भी हम एक पाठ करें क्योंकि मैं जानती हूं अभी टाइम हो गया है। सो थैंक यू सो मच आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा। थैंक यू। थैंक यू सर। आपको कैसा लगा पडकास्ट? कमेंट्स में जरूर बताइएगा। जो आपकी राय है वह कमेंट्स में जरूर दीजिएगा। और आप यह पडकास्ट यहां तक अगर आपने पूरा पडकास्ट देखा है तो मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगी कि चैनल को सब्सक्राइब जरूर करिएगा। जय माता दी।
(1:13:15) [संगीत]

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