Author Name:The Raavya Sarda Show
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Title:
Watch At Your Own Risk - Tantra, Vashikaran, Devi, Kaala Jaadu Aur Shaitaan | Real Exorcism Stories
Description:
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In todays episode on The Raavya Sarda Show we will take you into the mysterious world of Tantra and Vashikaran with saadhak Pawan Goreeya! In this episode, we uncover ancient tantric secrets, real-life exorcism stories, and the truth behind vashikaran, black magic, and spiritual healing. From the powerful 10 Mahavidyas to shocking cases of negative energy and fake baba exposed this conversation reveals what mainstream media never shows you.
Whether you believe in tantra sadhana, spiritual protection, or want to know how vashikaran really works, this episode is packed with knowledge, mythology, and real stories that will change how you see Indian spirituality.
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Pawan Goreeya Ji — Tantra & Vashikaran Practitioner
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Instagram: @tantrika_pawan_pujari_ji
In this conversation, we discuss:
00:00– Hook & Episode Teaser
01:57– Welcoming Pawan Goreeya & Introduction to Tantra
03:45– Origins of Tantra & Spiritual Epicenters
09:55– The 10 Mahavidyas: Siddhi vs Mahasiddhi
12:13 – Extreme Tests of Goddess Tara & Tara Rani's Story
16:02– The True Spiritual Meaning of 'Bali' (Sacrifice)
18:43– Decoding Panchamakara in Tantra Sadhana
25:58– Changing Destiny Through Sadhana: Gogaji Maharaj
32:02– Real-Life Case: Kukh Bandhan (Womb Binding)
9:14– What is Vashikaran? Story of Queen Bhanumati
43:28– Draupadi's Curse & Gandak Vashikaran
46:57– Vashikaran as a Remedy for Broken Marriages
49:50 – Maran Kriya & Dark Tantric Practices
55:19– Detecting Negative Energy: Red Chili Test & Protection
57:22– Real Exorcism Story: The Levitating Girl in Odisha
01:05:15– Exposing Fake Babas: Coconut Fire Illusion
01:10:47– Gandhari's Sadhana & Duryodhana's Vajra Body
01:15:21– Power of Pure Devotion: Dhanna Bhagat
01:18:11– Uchchhishta Ganapati & Sacred Offerings
01:20:41– The Bond Between Lord Krishna & Goddess Kali
01:23:53– Shiv-Shakti Stone Remedy for Marriages
01:27:17– Closing Remarks & Final Message
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Transcript:
(00:00) ठीक है। एक दो तीन। अब ये नारियल है। बिल्कुल दिख रहा है आपको? अब ये कोई भी चीज है वो साक्षात इसमें सामने भी आ सकती है। राक्ष ओम शांति शांति शांति। क्या ये लो ये हटाओ इसको? यहीं पे आपके दो-दो पार्ट दिखने शुरू हो जाएंगे। इसी कमरे के अंदर मेरे दोद रियल में दिखेंगे। वो बाहर से कोई बंदा आएगा उसको दो राव्या जी दिखेंगे। तंत्र और साधना के अंदर इतनी शक्ति है, इतनी पावर है राव्या जी। इससे किस्मत के लिखे हुए को भी बदला जा सकता है। मैं खुद तंत्र क्रिया करता हूं। लेकिन मैं खुद कहता हूं कि 90% इन चीजों से दूर रहना चाहिए। लेकिन कई बार देखा जाता है जैसे बड़े-बड़े
(00:39) पॉलिटिशियंस हैं, बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज हैं। ये जाके बलि देते हैं। बलि जो है इसके बारे में बहुतों को मालूम ही नहीं है कि बलि हकीकत में होती क्या है या किस चीज की देनी पड़ती है। अंतर क्रियाएं कैसे-कैसे केसेस आज देखे हैं आपने जीवन में। आप यकीन नहीं मानोगे। तो वो लड़की कम से कम इतनी हाइट तक हवा में अपने आप उठती थी। इतनी हाइट तक और वो डिमांड किस चीज की करती थी? हॉनवेज चाहिए और सिगरेट चाहिए। वशीकरण है क्या? दिमाग को कैसे कंट्रोल करता है? अब मैं आपको एक ऐसा वशीकरण बताता हूं जिसको सुनकर के आप हसोगे भी और आप यह भी कहोगे कि गौरिया जी ये कैसे हो सकता है?
(01:11) जिस वक्त यह डॉग सेक्स कर रहे होते उस वक्त अगर किसी साधक की दृष्टि उनके ऊपर पड़ती है तो यह गारंटीड है कि वो वशीकरण इतना पावरफुल होता है काफी सालों तक उसका तोड़ नहीं किया जा सकता कृष्ण मां काली के मेल स्वरूप है राधा जी की जिनसे शादी होती है वो ना मेल होती है ना फीमेल होती है कृष्ण भगवान जो थे उस भाव रूप में राधा जी के पास होते हैं वहां पर राधा जी की रिस्पेक्ट बचाने के लिए कृष्ण जी ने क्या किया अपने आप को काली के रूप में दर्शाया अगर ऐसा किसी के ऊपर कुछ किया कराया है कैसे उसको काट सकते हैं एक इस साइड से एक इस साइड से वहां से गोल
(01:47) पत्थर लेने हैं शर्तें [संगीत] हेलो एवरीवन नमस्ते स्वागत है आपका फिर से एक बार धरा साडा शो में आज के एपिसोड में हम तंत्र से रिलेटेड बात करेंगे कई सारे एपिसोड हमने किए हैं तंत्र को लेकर लेकिन जब भी हम इस तरीके के एपिसोड करते हैं। हर बार लगता है कि बहुत कुछ रह गया है जो हम नहीं जानते हैं। आज हमारे साथ जुड़े हैं पवन गोरैया जी। इनका पहली बार है पडकास्ट शो पर एंड वी विल बी टॉकिंग अबाउट तंत्र वशीकरण मेनी मेनी थिंग्स। और किस तरीके से अह जब छोटे गांव के या कह लीजिए कि शहर के
(02:34) भी लोग जब बाबाओं के पास जाते हैं, विजिट करते हैं, उनका दुख लेके जाते हैं। किस हम आपको यह भी डिकोड करेंगे कि किस तरह उन्हें उल्लू बनाया जाता है। सो यू विल सी अ लॉट मेनी थिंग्स इन दिस एपिसोड और शायद कई सारी चीजें क्लियर भी हो जाएगी। प्लीज वेलकम पवन जी। पवन जी वेलकम टू द शो। स्वागत है आपका। आपका कि आपने मुझे यहां आने का मौका दिया। सबसे पहले तो मैं शुरू करना चाहूंगा हरि ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा शमा शिवा दात्री स्वाहा सदा नमोस्तुते सर्व मंगल मांगल शिव सर्वसाधिक शरणाय त्र्यंबके गौरी नारायण नमोस्तुते ओम या देवी सर्वभूतेषु शक्ति
(03:16) रूपेण संसिता दया रूपेण संसिता करुणा रूपेण संसिता नमस्तस्य नमस्तस नमस्तस्य नमो नम चलिए शुरू करते हैं जी पवन जी जैसे कि मैंने अभी इंट्रोडक्शन में बताया कि हम तंत्र के बारे में बात करेंगे। है ना? जब भी हम यह एपिसोड करते हैं, बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो लगता है कई बार ना कुछ नया निकल कर आएगा जो इनकी जिन इन चीजों के बारे में हम जानते ही नहीं हैं। अब तंत्र भारत में मुख्य रूप से जो नॉर्थ साइड है जी। है ना? वहां से कहते हैं कश्मीर साइड पूर्वी साइड से उदय हुआ है। जैसे कश्मीर है, कामाख्या है। तो इन एरियाज में ज्योग्राफिकली ऐसा क्या है कि ये तंत्र के
(04:02) लिए एपिसेंटर्स बने हुए हैं। जी सबसे पहले तो मैं आपको बताऊं कि हमें ना थोड़ा सा तंत्र के बारे में जान लेना चाहिए कि ये हकीकत में है क्या? हम आज आपको भी मालूम होगा कि बहुत से प्लेटफार्म ऐसे बने हुए हैं जो मैं अपने मुझसे नहीं कहना चाहता हूं लेकिन इसको बिजनेस मान लो या कुछ ऐसी चीजों के अंदर वो प्रमोट कर रहे हैं। तंत्र हकीकत में है क्या? जब तक हमें इस चीज का ही पता नहीं होगा कि तंत्र क्या है? किस लिए बना? किस लिए? क्या-क्या इनसे किया जा सकता है? तब तक आगे की शायद प्रक्रिया अधूरी रह जाएगी। तंत्र वास्तव में एक गुप्त रूप से रहस्यमय
(04:41) तरीके से एक अनुष्ठान है। एक आराधना है, एक उपासना है जिसमें आप शक्ति की उपासना करते हो। यहां पर गौर करने वाली बात है कि शिव जो है देवाधिदेव महादेव शिव जो है वो रियल में शक्ति के बगैर शव के समान है। जी और जो शक्ति है वो शिव के बगैर अधूरी है। तो किसी ना किसी रूप में आप जब जैसे आपने सुना भी होगा 10 महाविद्याओं का जिक्र आता है तो जब आप उनकी आराधना करते हो, उपासना करते हो या इन्हें सिद्ध करते हो तो किसी ना किसी रूप में आपको भगवान शंकर की भी उपासना करनी पड़ती है। अब आपका क्वेश्चन ये था कि ये कश्मीर से लेकर के तक तो ये
(05:21) रियल है क्योंकि तंत्र के लिए बेसिक क्या है कि कुछ ऐसी जगहों की जरूरत आपको पड़ती है जो सुनसान हो गुप्त जगह पे हो जहां पर कोई आता जाता ना हो। आपने सुना भी होगा कि कई बार कई तांत्रिक है जो श्मशान में मिलते हैं पहाड़ियों में मिलते हैं हिमालय की साइड में मिलते हैं या वह ऐसे स्थानों पे मिलते हैं जहां पर कोई आता जाता ना हो। यह इसलिए होता है कि उनको उस माहौल की जरूरत पड़ती है जहां पर वह रियल में एनर्जी होती है। आप कभी देख लेना खुद प्रैक्टिकल ये ट्राई कर सकते हो कि रात को जब 12:00 बजते हैं ना तो 12:00 बजे के बाद यदि आप बाहर
(05:59) देखेंगे तो जो पंछी हैं वो भी अपने आशियानों में गए हुए होते हैं। इंसान है वो भी सोया हुआ आता है। इवन जानवर तक भी रेस्ट कर रहे होते हैं। उस वक्त क्या होता है कि मतलब यह जो एनर्जी है चाहे आप उनको नेगेटिव भी समझे या अच्छी एनर्जी में भी समझे तो जैसे ही वह आपके सामने आते हैं तो आपको आभास होता है आपको महसूस होता है वो वो पता लग जाता है। अब एग्जांपल के तौर पे मैं समझाऊं तो जैसे आप बाबा खाटू शशाम चले जाएं दोपहर के टाइम में लाखों करोड़ों लोग वहां पर है। वहां पर भगवान किसी ना किसी रूम में आपके सामने भी आ जाए तो आप महसूस नहीं
(06:31) कर पाओगे। वो एनर्जी जो चीज है ना वो आप महसूस नहीं कर पाते हो। लेकिन रात का जो समय होता है वह ऐसा होता है कि एक हवा से कोई पत्ते की भी आवाज आती है तो हमें वो महसूस हो जाता है। हमें वो मालूम पड़ जाता है। और जो बात आपने कश्मीर की की है तो ये रियल बात है क्योंकि हिमालय से भगवान शिव वही बात आएगी देवाधिदेव महादेव का वास जो है वो हिमालय के अंदर ही कहा गया है और तंत्र की जो क्रिया है चाहे वो माता पार्वती को ज्ञान के रूप में दी गई हो चाहे देवन गुरु बृहस्पति राक्षस गुरु शुक्राचार्य उनको ज्ञान के रूप में दी गई हो चाहे सबसे बड़े आपको पता होगा पंडित
(07:07) हुए हैं महापंडित महाज्ञानी रावण जी हुए हैं बेशक उनका पुतला जलाया जाता है लेकिन उनके जैसा कोई विद्वान नहीं था तो उनको भी ज्ञान के रूप में दिया गया। तो कहीं ना कहीं मतलब यह जो तंत्र है यह भगवान शिव से ही उत्पत्ति इसकी हुई है। और रही बात माता कामाख्या की तो ये जो प्लेस है ये एक सिद्ध प्लेस है। सिद्ध जगह है। जैसे आपने सुना होगा उज्जैन के अंदर महाकालेश्वर है। हम महाकालेश्वर जो है दक्षिण मुखी महाकालेश्वर है और दक्षिण को मौत का द्वार माना गया। हम् स्वयंभू है तो मतलब कि वहां पर वह किसी आदमी से इंसान से बनाया हुआ शिवलिंग नहीं
(07:42) है। जी वहां पर आप जा करके देखो काल भैरव के स्थान पर जाकर के देख लो और उज्जैन की तो बात ही कुछ और है। आपने सुना होगा राजा वीर विक्रमादित्य भी हुए हैं। भरत हरि भी हुए हैं। यदि आज हम हरिद्वार जाते हैं तो वहां पे नॉर्मली सुनने को मिलता है कि हर की पौड़ी है। शायद आपने सुना भी होगा। लेकिन हकीकत में वो हर की पौड़ी नहीं थी। वो राजा भरत हरि की पौड़ी थी। क्योंकि जब राजा भरत हरि ने राजपाठ छोड़ा था और यह सन्यास का जीवन अपनाया था तो वो वहां पर जाकर के उन्होंने तपस्या भी की तो ऐसे ही माता कामाख्या का प्लेस है। हिमाचल में जाएं आप बंगलामुखी माता का है। नलखेड़ा
(08:16) में बंगलामुखी माता का है। तो यह कुछ प्लेस ऐसे हैं जहां पर वो एनर्जी जो है वो बहुत ज्यादा है। और जब आप तंत्र क्रिया करते हो तो आपको ऐसे प्लेस की जरूरत पड़ती ही पड़ती है। जैसे तंत्र क्रिया के लिए मैं आपको बताऊं कुछ समय कुछ टाइम ऐसे हैं। सूर्य ग्रहण होगा वो बहुत खास मायने रखता है। चंद्र ग्रहण होगा वह बहुत खास मायने रखता है। इवन अमावस की रात जो काली रात जिसको बोलते हैं वह बहुत महत्व रखती है। अभी कुछ समय पहले गुप्त नवरात्रि गए हैं तो यह तंत्र क्रिया के लिए बहुत ही ज्यादा महत्व रखती है। इनके कारण है यह कुछ वरदान रूप में जब आप तंत्र की क्रिया करते हो तो
(08:55) किसी ना किसी रूप में आप 10 महाविदओं की मान लो या गणपति जी की मान लो जब इनकी उपासना आराधना करते हो तो इनसे आपको वरदान के रूप में सिद्धियां और महासिद्धियां प्राप्त होती है। अब बहुत सिद्धि और महासिद्धि प्राप्त होती है। अब बहुत बार सुनने को भी मिलता है। कोई कहता है मैंने काली को सिद्ध कर रखा है। मैंने इसको सिद्ध कर रखा है। मैंने मातारा को सिद्ध कर रखा है। ये गलत है। आप उनको सिद्ध नहीं करते हो। उनकी आराधना, उनकी उपासना करके उनसे वरदान रूपी सिद्धियां और महासिद्धियां ही प्राप्त करते हो। और उन महासिद्धियों के द्वारा जरूरत पड़ने पर
(09:27) नोट करना इस बात का। जरूरत पड़ने पर आप जन कल्याण के लिए इस्तेमाल कर सकते हो ना कि किसी के बुरे के लिए ना कि किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए। और उनका भला करते हुए अपने आप को आप परमपिता परमेश्वर भगवान शंकर जो मुक्ति के दाता है कालों के काल है महाकाल है आप उनकी ओर अपने आप को लेकर जाते हो तंत्र के द्वारा तो ये एक तरीके से भगवान शंकर तक पहुंचने का मार्ग भी है। लोगों की भलाई या लोगों की हेल्प करने का मार्ग भी है और इसमें आपको पता ही होगा कि 10 महाविदओं की उपासना होती है तो उनसे आप सिद्धियां और महा सिद्धियां प्राप्त करते
(10:01) हैं। अच्छा अब आप 10 महाविद्या के बारे में बता रहे हैं। क्या है 10 महाविद्या? दसों महाविद्या जिसे हम कहते हैं। यह क्या होता है? और सिद्धि महासिद्धि इसमें फर्क क्या होता है? सिद्धि किसे प्राप्त होती है? महासिद्धि किसे प्राप्त होती है? इसके बारे में बताएं। मैं आपको बताता हूं कि जैसे आपने अभी सवाल किया है कि सिद्धि और महासिद्धि दसों महाविद्याओं की पहले बात की है। तो माता काली से ही शुरू होती है। माता काली से लेकर के लास्ट तक 10वें नंबर तक माता कमला तक जाकर के रुकती है। 10 देवियां हैं। यह माता पार्वती का ही रूप है। माता पार्वती का ही रूप है। भगवान
(10:37) गणेश जी का आपको पता होगा जब शीश काटा गया था भगवान शंकर के द्वारा तो गुरु रूप जी में माता पार्वती आकर के और क्रोधित हो के 10 महाविदओं की उन्होंने सृजना की थी। उन्हीं 10 महाविद्याओं का जिसमें माता तारा का भी उल्लेख आता है। बंगलामुखी का भी आता है। त्रिपुरा का भी आता है। सोसी माता का भी आता है। धूमबावती माता का भी आता है। कमला माता का और इसमें जो आपने सुना होगा कि वशिष्ठ जी थे जिन्होंने तारा मां तारा की सिद्धि की थी। तो तीन टाइम उनको ये सिद्धि करनी पड़ी थी लेकिन वो सफल नहीं हो पाए। फर्स्ट टाइम उन्होंने की ब्रह्मा जी के कहने पे तो सफल नहीं हो
(11:12) पाए। सेकंड टाइम फिर उन्हें बताया गया कि आप समुंदर के पास जल के किनारे जाकर के करो। वो भी उन्होंने कई साल तपस्या की लेकिन नहीं उसमें सफल हो पाए। फिर उनको तीसरी बार जो था कामाख्या का ही ध्यान करना पड़ा और वो उग्र रूप के रूप में जिसे वाम क्रिया कह देते हैं उस रूप में करना पड़ा। फिर जाकर के उनको यह प्राप्ति हुई। तो सिद्धि और महासिद्धि होती है। सिद्धि वो होती है कि जैसे हम आराधना करते हैं, उपासना करते हैं और हमें थोड़ा डेली की पूजा करते डेली की पूजा तो नहीं कह सकता लेकिन तंत्र विधि के अंदर गुप्त रूप से जो करते हैं उसी के हिसाब से होता है।
(11:47) तो उसमें क्या होता है कि जब थोड़ा मतलब उसमें इतना समय या इतनी आपकी परीक्षाएं नहीं होती है तो वो कुछ वरदान रूपी आपको जो मिलता है उन्हें सिद्धियां कहते हैं। लेकिन जब आपकी पूर्ण रूप से परीक्षाएं होती है और यहां पर मैं अगर आपको बोलूंगा तो शायद आपको लगेगा कि ये क्या बोल रहे हैं। लेकिन साक्षात जब महामाई आपकी परीक्षा लेती है और आप उसमें सफल होते हो हम और फिर आपको जो वरदान मिलते हैं उन्हें महासिद्धियां कहा गया है। तो ये फर्क है इनके अंदर। परीक्षाएं कैसी होती है गुरु जी? परीक्षा है। आपने सुना होगा जब मां भगवती का जागरण
(12:18) करते हैं तो तार रानी की कथा सुनाई जाती है। रात्रि 12:00 बजे के बाद में सुनाई जाती है। तो तार रानी और रुक्मणी जो थी ये दो बहनें हुई है कथा के अनुसार तो वो जागरण जब करवाते हैं तो रुक्मणी जो थी रानी थी और तारा जो थी वो गरीब घर के अंदर उसका निवास था। तो वो जब जागरण करवाती है तो वो तारा को रुक्मणी को अपने घर पे बुलाती है कि माता का रात का जागरण है तो तुम आना। उस वक्त क्या होता था? यह रियलिटी मैं आपको बता रहा हूं। उस वक्त जो माता का जो प्रसाद होता था वो एक तरीके से आज के हिसाब से बोलूं तो उसको मांसाहारी कह सकते हैं। उस वक्त वो चढ़ता था और जब
(12:55) रुक्मण उसके पास आती है या रुक्मण के पति को भी पता लग जाता है तो रुक्मण के पति को जब पता लगता है तो वो भी उसके पीछे आता है तो रुक्मण की झोली में जब वो प्रसाद डाला जाता है तब उसका पति आकर के उसको बोलता है कि तू रानी हो के तू इस गरीब घर में आकर के ये प्रसाद ले रही है। हालांकि वह प्रसाद जो था वह मांस का होता था उस वक्त। तो तब रुक्मण तारा को बोलती है और तारा जो है वह माता के आगे अदास करती है कि हे मां माई मेरी इज्जत अब तेरे हाथ में है। तो जब वो झोली खोलते हैं तो उसमें से मखाने हुए विदाम हुए या पंचमेवा जिसको बोलते हैं ये
(13:26) प्रसाद के रूप में वहां दृष्टांत होता है उसका। तो तब से यही प्रसाद चढ़ना भी शुरू हो गया। तो परीक्षा तो बहुत है। फिर जो रुक्मण के पति थे उन्हें लगा कि मैंने देखा है कि तेरी झोली में मांस डाला गया था और यह अब जो है कि ये मखाने बन गए हैं या पंचमेवे बन गए हैं। तो फिर उसने तारा रानी से पूछा कि मुझे सच्चाई बता क्या है? नहीं तो क्योंकि राजा था वो। बोला नहीं तो या तो सच्चाई बतानी तेरी मृत्यु तय है। तो फिर तारा ने बोला कि सोच ले राजा यह रास्ता बहुत कठिन है। इतना आसान नहीं है जितना लगता है कि आप कहीं भी टीवी में या कहीं भी ये मंत्र देखो और ये बोलो और इनको
(14:01) सिद्ध कर लो। ऐसा कुछ नहीं है। इनके लिए बहुत बड़ी प्रक्रिया करनी पड़ती है। एक तरीके से बहुत बड़ा रास्ता है। ये बहुत बड़ा है। तो जब तार रानी ने उनको राजा को कहा कि सोच ले बहुत कुछ करना पड़ सकता है। वो बोला मैं सब कुछ करूंगा। या तो मुझे ये शक्ति दिखा दे। क्या है? नहीं तो तेरी मौत पक्की है। तो फिर वो तार रानी कहती है कि पक्का है तूने देखना। बोले देखना तो बोले ठीक है। बोले चल फिर अपने महल में चल। उसके महल में जाती है। महल में जाते हैं तो जो राजा था उसका बेटा होता है। तकरीबन 7 आठ साल का होता है। वो खेल रहा होता है। बोली इसको
(14:28) ला उसको लाता है। बोले इसको खत्म कर दे। वो राजा बोला बेटा है मेरा। शक्ति देखनी है तो खत्म करना पड़ेगा। नहीं तो रहने दे। अब राजा था परीक्षा लेनी थी वो राज हट था। उसने अपने बेटे को मार दिया। बेटे को मार दिया। फिर वो उसको उसके अस्तबल में लेके जाती है। सबसे प्यारा घोड़ा होता है राजा का जो उसको बहुत प्रिय उसकी जान से भी प्रिय होता है। बोले इसको भी मार दे। बोला पागल है पहले तूने बेटे को मरवा दिया। अब तू इसको मरवा रही है। बोले मारना पड़ेगा। शक्ति देखनी है तो मारना पड़ेगा नहीं तो रहने दे। अब राजा भी बीच में फंस चुका था।
(14:59) अब ना आगे जा सकता था ना पीछे जा सकता था। तो उसने क्या कहा? उस घोड़े को भी मार दिया। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मारने के बाद रानी को पता तो था कि अब ये भी परीक्षाएं तो पूरी दे रहा। फिर उसने क्या कहा कि उसके बेटे का मांस के पुल छोटे-छोटे टुकड़े करके इसको बना। जैसे हम भोजन बनाते हैं वैसे बना। राजा बोला क्या करूं? भोजन बना दिया। बेटा भी मर गया, घोड़ा भी मर गया। भोजन बना दिया। बोले भोजन बन गया। अब इसको खा। अब वो खाने जब लगता है तो बेटे की जो उंगली होती है उसके मुंह में आ जाती है। अब जब उसके मुंह में उंगली आती है तो था तो इंसान ही ना। कितना
(15:28) भी कठोर बने था तो इंसान। जैसे ही उंगली आती है तो उसकी आंखों से आंसू आने लगते हैं। जैसे ही आंसू आते हैं तो वो रानी उसका हाथ पकड़ लेती है। तारा उसका हाथ बड़ी बड़ी बस राजा। बोले क्या हुआ? बोले तू रो दिया। यह गलती हो गई। अगर तू रोता नहीं तो सब कुछ सही था। बोला मेरा बेटा फिर वो महलों में ले जाती है तो बेटा खेल रहा होता है। बेटा भी वो राजा को देख के बोलता है कि अगर तू नहीं रोता तो मैं माता के दरबार में पहुंच गया था। अस्तवल में ले जाती है तो घोड़ा जिंदा मिलता है। बोले ये क्या घोड़ा तो भी मैंने खुद मारा था। तो घोड़ा भी बोलता है कि अगर तू नहीं रोता तो
(15:56) मैं माता का शेर बन चुका होता था। तो बहुत सी परीक्षाएं हैं। एक परीक्षा नहीं है। काफी परीक्षाएं इसमें अब जैसे नॉर्मली आपने सुना होगा बलि के बारे में बोलते हैं कि बलि देनी है ये देना है। एक्चुअली बलि जो है इसके बारे में बहुतों को मालूम ही नहीं है कि बलि हकीकत में होती क्या है या किस चीज की देनी पड़ती है। जी हिंदू धर्म, सिख धर्म, मुस्लिम धर्म और क्रिश्चियन धर्म। इनके अंदर अगर बलि की बात करें तो क्रिश्चियन धर्म के अंदर यीशु ने दी थी बलि। उसने कभी किसी बकरे को नहीं काटा, कभी किसी कबूतर को नहीं मारा। उसने बलि किसकी दी? खुद की। खुद सूली के ऊपर
(16:30) चढ़ गए जो कि सच्चाई है। मुस्लिम धर्म के अंदर अब ये नाम नहीं लेना चाहिए। शायद यह कंट्रोवर्सी बन जाएगी। लेकिन ये बकरा ईद आती है, और आती है, बकरों को काटा जाता है, ऊंटों को काटा जाता है। हकीकत में कर्बला के अंदर एक युद्ध होता है। जब ये मुस्लिम धर्म में ताजिया नहीं निकलते। बोलते या हुसैन हम नहीं थे, या हुसैन हम नहीं। तो हुसैन ने कुर्बानी दी थी। हुसैन ने बलि दी। किसकी दी थी? अपने आप की दी थी। अपने बच्चे की दी थी। भली जो सिख धर्म की तो बात ही अलग है। सिख धर्म के बारे में तो आप जितना मैं कह रहा हूं कि मैं बोल ही नहीं सकता हूं। वहां पर
(17:02) तो ऐसीऐसी कुर्बानियां है कि जिनका वख्यान ही नहीं किया जा सकता। कोटि कोटि नमन है सिख धर्म को तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] बलि देखनी है तो सिख धर्म को पढ़ के देखो। पता लगेगा कि बलि क्या होती है। तो हकीकत में बलि जो है ना अगर बलि देनी है तो अपने अहंकार की दो, मोह की दो, लोभ की दो, अहंकार की दो। इन चीजों की दो। ये जानवर को मानना और ये करना ये हकीकत में बलि है नहीं। पर लोगों ने बना रखा है। ऐसा कौन सा देवी देवता होगा जो आपको बोलेगा कि आप बकरे को काट दो या उसको काट दो। ऐसा नहीं होता है। हां प्रिय चीज की बलि दी जाती है। या तो अपने आप की दी जाए।
(17:35) वीर विक्रमादित्य थे उनके जैसा कोई भगत नहीं हुआ। उस वक्त उज्जैन की ये कहानी थी कि एक ही रात का राजा बना करता था। और जो राजा बनता था वो दूसरे दिन माता उसका भक्षण करती थी। ये रियल बातें हैं। ये मैं कोई अपने पास से नहीं बता रहा हूं। लेकिन वीर विक्रमादित्य ने दूसरा रास्ता भी अपनाया। लेकिन फिर भी वो माता को सिद्ध करने के लिए जैसे आप कह रहे हो कि सिद्धियां और महा सिद्धियां क्या होती है तो अपने आप को फराई करके भी भोग लगाते हैं। ऐसे ऐसे इंसान हैं जो अपने आप को भी मृत्यु तक ले जाते हैं कि या तो साक्षात परमात्मा मिलेगा नहीं तो मौत मिलेगी तो वह बलि है
(18:05) और वह एक परीक्षा परीक्षा तो आप किसी भी तरीके से देख लो जब भी आप अच्छा करोगे फिलहाल तो खैर कलयुग चल रहा है लेकिन जब भी आप अच्छा करते हो या अच्छाई की तरफ चलते हो ना तो परीक्षा तो आपकी ली भी जाती है वो तो चाहे आप स्कूल से ही शुरू हो जाओ बचपन से स्कूल में जाते हो तो भी आपका इम्तिहान होता है मैरिज हो जाती है तो परिवार में आपका इम्तिहान होता है आपने इतनी सुंदर बात समझाई है अभी बलि के बारे में मुझे आज तक हमने इतने लोगों को बुलाया कभी किसी ने इतने सुंदर तरीके से नहीं किसी भी धर्म के अंदर जाए किसी भी धर्म के अंदर आप एक भी इंसान मेरे को बता दो कि
(18:40) किसी ने उसकी बलि दी हो नहीं दी है हां जरूरत पड़ने पर जब आप जैसे इसमें पंचमकार आते हैं। दसों महाविद्याओं को जब हम उपासना करते हैं, आराधना करते हैं तो इसमें पंचमकार आते हैं। अब पंचमकार के अंदर क्या-क्या आता है? मांस बोला गया है, मदिरा बोली गई है, मुद्रा बोली गई है, मैथुन जिसको सेक्स बोल देते हैं वो बोला गया है, मछली बोली गई है। अब इसमें दृष्टि जो योग है ना वो देखने के दो तरीके हैं। कई बार राव्या जी आंखें देखती है और कई बार आंखों को दिखाया जाता है। हम शास्त्र की नजर से आप देखोगे तो यह कुछ और नजर आएगा। और अपनी आंखों से देखोगे तो कुछ
(19:17) और नजर आएगा। अब एक साधक है, एक तांत्रिक है। वो तंत्र क्रिया करता है। जो तंत्र क्रिया करते हैं उनको तो तांत्रिक बोलते हैं अपनी भाषा के अंदर। तो एक साधक अगर मांस खा रहा है, मछली खा रहा है, मदिरा दारू पी रहा है। इन्हीं चीजों को बोला जाता है। सेक्स कर रहा है या मुद्रा कर रहा है तो फिर आम इंसान में और साधक में फर्क क्या है? ऐसा कौन सा दही देवता है जिसको आप मांस चढ़ाते हो वो खुश हो जाएगा? ऐसा कौन सा दही देवता है जिस जो दारू चढ़ाते हो तो खुश हो जाएगा। अरे भैरू बाबा को बोला जाता है कि दारू चढ़ाते हैं। ठीक। अरे भैरू बाबा ने जब दारू का सेवन किया था तो उस
(19:50) वक्त की कंडीशन देखो। देवाधिदेव महादेव है। उनके बारे में सुना है कि कई आजकल तो गाने भी चल रहे हैं। भोले हम तेरे भगत हैं। चिलम लगा लो, सूटा लगा लो। तो भोले ने तो जहर भी पिया था। जहर तो कोई पीता नहीं। अब जिस कंडीशन में भगवान शंकर जी ने देवाधिदेव ने जहर पिया था वो कंडीशन अलग थी। हम उस वक्त उस जहर को कोई ऐसा था ही नहीं कि जो ग्रहण कर सके। तो देवाधिदेव महादेव ने उसको ग्रहण किया गया। तो अब उनको देख के हम चिलम पीने लग जाए या हम सिगरेट पीने लग जाए तो ये गलत है। ये नशा की बढ़ोतरी है। बाकी वहां तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। तो ऐसे ही ये
(20:28) पंचमकार है। इसमें जैसे मैंने आपको पहले बताया कि मांस है, मदिरा है। तो अगर अपनी नजर से देखते हैं तो ये इस सब चीजें नॉर्मली नजर आएंगी कि हां मांस का भोग लगा दो, रात को इसका भोग लगा दो, उसका लगा दो। लेकिन शास्त्र की नजर से जब आप देखते हो तो सच्चाई क्या है? मांस किसको कहा गया है? जैसे मैं जन्म से अगर लूं तो बच्चा जब गर्भ धारण में जाता है, गर्भ में जाता है तो वो भ्रूण ही होता है। उसके बाद एक छोटा सा मांस का टुकड़ा बनता है। उसके बाद धीरे धीरे धीरे धीरे वो डेवलप होता है। अब मांस यहां पर कहा गया शरीर को। हम ये मांस हार्ड मांस का ही पिंजरा है और
(21:02) कुछ नहीं। इस शरीर को कहा गया भक्षण करना है तो इस शरीर का करो। भोग देना है तो इस शरीर का दो। वो कैसे दोगे कि इसको ऐसा बनाओ कि उस परमात्मा में लीन रह सके। इससे कुछ बुरे काम ना हो। इससे कोई गलत काम ना हो। उस क्रिया से माता आपसे खुश हो गई। ये हुई मास की बात। अब आती है मदिरा की बात। तो शरीर के अंदर सात चक्र है। आपको भी पता होगा। ठीक है? तो सातों चक्रों में सशास्त्र चक्र जो है वो मस्तिष्क के अंदर है। भगवान शिव का भी वास कहा गया। मूलाधार चक्र से जब आप अपनी क्रिया को सश सहस्त्र चक्र तक लेकर जाते हैं। उस भगवान शिव तक
(21:41) मिलाप करते हैं। उसको मैथुन कहा गया है। मिलन को लेकिन लोगों ने क्या जोड़ दिया? इसको सेक्स से जोड़ दिया। ऐसा कौन सा देवी देवता हो सकता है कि जो सेक्स करने से खुश होगा। ये तो हासो हीनी बात है। अजीब सी लगती है। बोलने में भी शायद शर्म आती है। लेकिन मैथुन [नाक से की जाने वाली आवाज़] का मतलब यह था कि आप अपने शक्ति चक्रों को जागृत करते हुए उस भगवान तक पहुंचे जो कि मूलाधार से शुरू हो के सशस्त्र चक्र तक पहुंचता है। सर के अंदर जो है मस्तिष्क के अंदर जो है सॉरी वो भगवान शिव का वास कहा गया। तो इसके मिलन को मैथुन कह लो, मिलन
(22:12) कह लो। लेकिन लोगों ने इसको सेक्स से जोड़ दिया गया। अब इसमें मछली का नाम आता है। मछली का बहुत से बोलते हैं कि मछली चढ़ाई जाए या मछली माता को चढ़ाओ तो माता खुश होती है। मछली यहां पर किसको कहा गया है? जैसे मछली पानी के अंदर मान लो समुंदर में मान लो उछल कूद भी करती है। एक जगह पे टिकती नहीं है। मछली कभी एक जगह पे नहीं टिकेगी। वो चलती रहती है ज्यादातर नॉर्मली। तो ऐसे ही अपना मन है। मन लोभी मन लालची। मन चंचल मन चोर। मन के मते ना चालिए जो पलक पलक भय और ये जो मन है इसको मछली कहा गया है कि ये मछली के जैसा है कभी ये कर लूं कभी वो कर लूं कभी अच्छा कर
(22:46) लूं कभी बुरा कर लूं हालांकि जब हम बुरा करते हैं उसके बाद भी ये हमें डांटता है और अच्छा करते हैं तब तो खैर इसने खुश होना ही होना है तो इस मन को मारने का मतलब है कि भोग देना है तो इस मन का दो इसको मारो इससे जो आपके विचार जो भावनाएं गलत पैदा होती है वो ना गलत पैदा हो वो कभी उनसे कोई ऐसा शरीर या आपकी ऐसी जो जागृति है वह कोई गलत कार्य ना कर सके। उन चीजों को करके और फिर उनकी साधना करनी चाहिए। भगवान है जो देवी देवता है वो तो आपके भाव के हो गए। अगर आपके अंदर भाव नहीं है तो आप जितना मर्जी बड़ा तांत्रिक हो कितनी भी आप अपना
(23:26) कुछ कर लो आप उस चीज की प्राप्ति नहीं कर सकते। वही बात फिर आएगी कि बलि देनी है तो खुद की दो। अपने शरीर के अंगों की दो। अब जैसे आप कह रहे हैं कि कौन से भगवान खुश होते हैं। लेकिन कई बार देखा जाता है जैसे बड़े-बड़े पॉलिटिशियंस हैं, बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज हैं। यह जाके आप कामाख्या में भी देखेंगे कि वहां पर बलि देते हैं कुछ गेन करने के लिए या उस तरीके का पावर गेन करने के लिए। तो फिर इसमें कितना झूठ है? इसमें कितना सच है? गेन होता है या नहीं है। यहां मैं आपको बताता हूं। आपने माता छिन मस्तिका जी का नाम सुना होगा। ठीक है? छिन
(23:59) मस्तिका जी उन्होंने अपने शीश को काटा हुआ। फिर वही बात आएगी कि एक बलि देनी हो तो खुद की दो और मैंने चारों धर्मों के बारे में बताया भी है। वो खुद का सर काट करके और वो जो उनके साथ थे उनको वो रक्त भी पिला रही है और खुद को भी रक्त पिला रही है। तो वो कंडीशन थी जब भगत हुए हैं। अब काली माता के सिद्ध भगत हुए हैं परम राजहंस जी। आपने नाम भी सुना होगा। साक्षात माता उनके साथ बात भी करती थी और वो [नाक से की जाने वाली आवाज़] इतने महान भगत हुए हैं कि उन्होंने कभी ऐसे रास्तों को सही किया ही नहीं। अब जब छिन्न मस्तिका माता ने वह अपने शीश को काटा और
(24:31) उसका रक्त दिया उसकी कंडीशन थी उसकी वजह थी वो समय की मांग थी। लेकिन आज हम जब ऐसा करते हैं तो यह सही नहीं है। आपके कहीं ना कहीं कैसी भी हालत हो आपके भाव ही सबसे बड़े हैं। अगर आपके भाव के अंदर शक्ति है। अगर आपके भाव सच्चे हैं तो सिंदूर को भी अमर बना दिया गया था भाव ने। हकीकत है। अब आप शायद ये पूछेंगे या सोचेंगे कि सिंदूर अमर कैसे हो सकता है? आदमी इंसान को अमर होते हुए सुना होगा कि हां उसने इतनी भक्ति की या उसने ये काम किए तो वो अमर हो गया। सिंदूर को अमर बना दिया गया। कैसे बनाया गया? भाव की बात आती है यहां पे। आपके भाव कैसे हैं? जब आपके भाव अच्छे
(25:09) होंगे तभी आप किसी का भला या बुरा कर सकते हो। भावों के ऊपर ही डिपेंड करता है। अब यह बात मैं क्यों कह रहा हूं? माता सीता जी के बारे में सुना होगा। रामायण काल की बात है। तो वो अपनी मांग में सिंदूर भर रहे थे। अब हनुमान जी हैं भोले भंडारी एक तरीके के वह आ जाते हैं परम भगत थे भगवान राम के तो वह पूछने लगते माता से उन्हें पता नहीं था कि सिंदूर का क्या मतलब है पूछने लगे कि माता ये क्या है तो माता ने उनको कहा कि ये सिंदूर है तो बोले इससे क्या होता है बोले इससे लगाने से भगवान खुश होते हैं प्रभु राम खुश होते प्रभु राम खुश होते हैं बोले हां बस इतना कहना
(25:39) था पूरे शरीर को ही रंग दिया पूरे शरीर को रंग दिया तभी से इनकी लाल इस सिंदूरी रंग में पूजा भी होने लग गई है तो भगवान को खुश करने के लिए और उस भाव की वजह से वो सिंदूर अमर हुआ हम तो जब जब तक आपके अंदर भाव सही नहीं होगा, आपकी नियति सही नहीं होगी, आप कभी किसी का अच्छा या बुरा नहीं कर सकते। दूसरी बात तंत्र और साधना के अंदर इतनी शक्ति है, इतनी पावर है राव्या जी कि मैं यह बात कह रहा हूं, लेकिन सुनने में अजीब सी लगेगी। इससे किस्मत के लिखे हुए को भी बदला जा सकता है। आपके भाग्य में बहुत बार आपने सुना होगा कि भाग्य में लिखे को कोई बदल
(26:16) नहीं सकता है। जो परमात्मा ने लिख दिया ना वो कोई बदल नहीं सकता है। लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आपकी साधना अगर सही होगी उसके अंदर शक्ति होगी तो आप भाग्य के लिखे को भी बदल सकते हैं। अगर यकीन नहीं है तो राजस्थान के अंदर गोगामेड़ी नाम का स्थान है। महाराज कुगा जी की पूजा की जाती है वहां पे। आंचल और बांछल नाम की दो बहनें सखी बहनें थी और उसकी किस्मत के अंदर संतान नहीं थी। किसके आंचल के कुछ पूर्व जन्मों के कर्मों की वजह से तो उन्होंने अपने जो राज ज्योतिषी थे क्योंकि राजा थे तो बड़े-बड़े ज्योतिषी बड़े-बड़े एस्ट्रोलॉजर इनके पास थे तो उनसे पूछा तो
(26:49) उन्होंने जब ज्योतिष विद्या की गणना की देखा तो बोले नहीं आपके भाग्य भी नहीं है। तो रानी ने पूछा कि कोई तो उपाय होगा कोई तो रास्ता होगा कि जिससे मुझे संतान की प्राप्ति हो सके। तो उन्होंने फिर गुरु गोरखनाथ जी के बारे में बोला कि आप उनकी आराधना करें। अगर उनकी कृपा होगी तो कुछ हो सकता है। वो ही इस चीज को बदल सकते हैं। अदरवाइज कोई बदल नहीं पाएगा। तो 12 साल के बाद जब गुरु गोरखनाथ उस नगरी में पहुंचते हैं। आपने कई बार सुना होगा हम आम भाषा में बोलते हैं कि 12 साल के बाद में रूढ़ी की सुनी जाती है। जहां पे हम कचरा आजकल तो खैर ये काफी एडवांस हो
(27:20) चुका है। लेकिन पहले जो कचरा गांव में या शहरों में एक ही जगह पे डाला जाता था। तो कहते नहीं कि 12 साल बाद तो रूढ़ी की भी सुनी जाती है। तो 12 साल बाद जब गुरु गोरखनाथ जी वहां पर आते हैं तो आंचल जो होती है वो बहुत सेवाभाव करती है। उनकी बहुत सेवा करती है। तो गुरु गोरखनाथ उनको बोलते भी हैं कि आप कल आना तो मैं आपको वरदान दूंगा। लेकिन वही बात उनकी किस्मत में था नहीं। तो आंचल की जगह उनकी बहन जुड़वा बहन थी। सेम उसका रूप था। उसकी भी संतान नहीं उसको पता लग जाता है तो सुबह वो आंचल से पहले वो पहुंच जाती है और गुरु जी से वो फल लेके आ जाती
(27:50) है। गुरु जी उनको दो फल देते हैं। दोनों फल वो खा लेती है। उसको दो पुत्र होते हैं। अब आंचल तो फिर वैसी रह गई। अब आंचल हकीकत बता रहा हूं। ये कोई दंत कथा नहीं है। आप वहां जाकर के देख सकते हो। इनको बकायदा वहां शूट भी कर सकते हो। तो वो जब आंचल वहां पहुंचती है गुरु जी के पास तो गुरु जी बोलते हैं कि मैंने तेरे को दे तो दिया। अब तू क्या लेने आई है। बोले गुरु जी मुझे कहां दिया? मैं तो आई नहीं। तब गुरु जी ने ध्यान करके देखा। पता तो गुरु जी को भी था कि ये लीला है। मालूम तो उनको भी था। तो उन्होंने बोला कि आंचल तेरे भाग्य में नहीं है तो मैं क्या करूं?
(28:17) तो आंचल यहां पर भाव देखो। यहां पर साधना देखो क्या करती है। आंचल की साधना थी। उसने कहा गुरु जी या तो मुझे वरदान दे दो नहीं तो मैं यहीं पर मृत्यु को प्राप्त हो जाऊंगी। आपकी भक्ति करते और गुरु जी को पता भी था कि अगर इसकी मन इच्छा पूर्ण नहीं हुई तो यह मृत्यु को प्राप्त होगी। फिर गुरु जी वे माता के पास तक से उसके लेख बदलवाने की कोशिश करते हैं। तो फिर वे माता कहती है मैंने तो लिख दिया मैं कैसे बदल सकती हूं। फिर एक जगह थी राजा परीक्षित हुए हैं। महाभारत काल के अंदर उनके पुत्र थे। उन्होंने सर्प नाश दोष के लिए एक यज्ञ करवाया था। सांपों के लिए
(28:52) टोटल सांप मर जाए। तो उस वक्त उन्होंने अपनी ही आहुति उस यज्ञ में दी थी। यह रियल बात है। और उनकी जो रूह थी वो किसी फल के अंदर पाताल लोक में तक्षक नाग के पास तो गुरु जी वहां से वह चीज ला के फिर रानी आंचल को देते हैं। रानी आंचल इतनी दयावान थी कि वह खुद फल को नहीं खाती है। एक अपनी थोड़ा हिस्सा अपनी घोड़ी को खिलाती है। थोड़ा हिसा अपनी दासी को देती है और थोड़ा आप खाती है। गोगा जी महाराज तक का जन्म हुआ था। तो साधना के अंदर भी बहुत सी पावर है। साधना से आप बहुत लोगों का अच्छा भी कर सकते हो। पर इतना है कि बुरा नहीं करना
(29:22) चाहिए। जी। बहुत से तांत्रिक है। मैं नाम तो नहीं किसी का ले सकता लेकिन कुछ हैं जो प्रेशर की वजह से या पैसों के लालच की वजह से कहीं ना कहीं कुछ गलत कर देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि जब आप इस मार्ग पे चलते हो इस रस्ते पे चलते हो तो वही बात आएगी कि आप अपने जीवन को उस परमात्मा की तरफ ले जाने की कोशिश करते हो। ये तो एक हार्ड मांस का पुतला है। कहां जन्मे, कहां पले, कहां लड़ाई लाड। [हंसी] क्या पता शरीर के कहां खिले क्योंकि अस्थियां भी गंगा जी में जब जल प्रवाहित कर दी जाती है तो उनका भी पता नहीं कि कोई हड्डी किधर जाएगी कोई कहां
(29:54) जाएगी बिल्कुल सही कहा आपने अच्छा आप अभी बेमाता के बारे में बात कर रहे थे कौन है बे माता कभी नहीं सुना बे माता जब बच्चे का जन्म होता है हम तो उस लेख लिखती है वो और ये सच्चाई है जो वो छठी भाग्य लिखती है भाग्य लिखने वाली अलग-अलग अलग-अलग लैंग्वेज जब बच्चा पैदा होता है तो सिक्स रियल में तो वो सिक्स तो मनाते पर होता उसी वक्त है जब बच्चा बोन होता है उसी वक्त माता उसके लेख लिख करके जाती है और जो लिखा जाता है वही भोगना पड़ता है। अब यहां पे कई क्वेश्चन [गला साफ़ करने की आवाज़] ऐसे आ जाएंगे कि जैसे मान लो एक प्रश्न ऐसा पैदा
(30:28) होता है कि जब ग्रहों की वजह से सब कुछ होता है। नक्षत्र की वजह से सब कुछ होता है। भाग्य के लिखे की वजह से सब कुछ होता है। जब परमपिता परमात्मा ने लिख दिया वही होना है तो फिर इंसान के हाथ में क्या है? हम फिर इंसान क्यों भागदौड़ कर रहा है? क्यों अच्छा बुरा कर रहा है? जब होना तो वही है जो नियति में लिखा हुआ है। तो यहां पर मैं आपको बताऊं कि ना तो जन्म हमारी मर्जी से होता है ना मृत्यु हमारी मर्जी से होगी। ना तो जन्म हमने अपनी मर्जी से लिया ना ही मृत्यु हमारी मर्जी से होती है। लेकिन कई घटनाएं ऐसी है राविया जी कि अगर मृत्यु मृत्यु भी मेरी
(31:03) मर्जी से हो। आप अमेजिन कीजिए कि मुझे यह वरदान है कि मेरी मृत्यु जब मैं चाहूंगा तब होगी और मेरी मर्जी से होगी। लेकिन उसके बावजूद भी मेरी मृत्यु जो है वो दुखदायक है। बहुत तकलीफ वाली है। और यह साक्षात भीष्म पितामह जी के साथ हुआ था। महाभारत काल के अंदर उनको इच्छा मृत्यु का वरदान था। और जब उनकी मृत्यु होती है तो बाणों की छयां के ऊपर होती है। तो काफी जगह पर ये जो चीजें हैं ना आप अपना अच्छा करते हो या बुरा करते हो तो ये आपके आगे भी आती हैं। अगर आज आप किसी का बुरा करोगे तो कल किसी का वो बुरा करते हो तो आपके आगे आएगी।
(31:39) अच्छा करोगे तो आपकी आगे आएगी। तो दैट मींस इज़ कि अगर आप इन चीजों में यह पूजा और ये जो है ये तंत्र क्रियाएं जो लोग करवाते हैं और आजकल तो बहुत होने लग गया है। तो आप उनको क्या कहना चाहेंगे? करवाना चाहिए। नहीं जो जो कहेंगे जो एपिसोड देख रहे हैं वो कहेंगे हम तो अपने अच्छे के लिए कर रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो आप आपने खुद ने देखा होगा कि कोई किसी और को हानि पहुंचाने के लिए कर रहे हैं। कैसे-कैसे केसेस आज देखे हैं आपने जीवन में जो एकदम चौंकाने वाले मैं आपको बताऊं सबसे पहले तो जैसे मैं खुद तंत्र क्रिया करता हूं। मैं अपने आप को
(32:11) तांत्रिक नहीं मानता और वह इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि इन चीजों में कभी निपुण हो नहीं सकते इंसान। यह एक तरीके से सागर है। इसके कोई अंत ही नहीं है। कुंभ में कुप समावत है। कुप में कुंभ समावत नहीं। घड़ा घड़ा जो है ना जब तक वो खाली है उसमें चाहे समुंदर डाल दो वो आ जाएगा। [नाक से की जाने वाली आवाज़] लेकिन समुंदर के अंदर घड़ा कभी नहीं आता। कब तक नहीं आता? जब तक वह खाली है। हम जब वह पानी से भर जाता है तो वह भी उसमें डूब जाता है। जी तो यह क्रिया जो है माफ़ चाहूंगा लेकिन इसमें किसी का बुरा करना नहीं चाहिए। लेकिन लोग हैं जो कर भी रहे हैं और करवा
(32:43) भी रहे हैं। आपने ये पूछा कि ऐसी कोई घटना या ऐसा कोई आपकी नजर में आया हो तो ये रियल में दिल्ली की बात है। मेरे बहुत अच्छे नोन है। नाम तो नहीं मैं ले सकता। बहुत बड़े बिजनेसमैन भी हैं। उनके घर में दो लड़के थे। एक बड़ा बेटा, एक छोटा बेटा। अच्छा बिजनेस था, अच्छी फैमिली थी। तो जाहिर सी बात है उनके जो रिश्तेदार है वो भी अच्छे थे। तो बड़े बेटे की शादी हो जाती है। किसी अच्छे घर के अंदर नेक सुंदर सुशील बहू आ जाती है। बहू आ गई तो उनके आगे चलो गुरु महाराज की कृपा से बच्चे भी हो जाते हैं। अब क्या होता है कि छोटा बेटा जो होता है वो भी यंग हो रहा होता
(33:17) है। उसकी शादी का टाइम आ जाता है। हम अब कीड़ा कहां से पैदा होता है? जो गलत भाव है वो कहां से पैदा होते हैं? आप सुनकर के हैरान हो जाओगे जो बड़े बेटे की बहू थी हालांकि वह संपन्न परिवार से थी और संपन्न परिवार में ही ब्याही गई थी उसके दिमाग के अंदर ये कीड़ा आ जाता है कि अगर देवर की शादी हो गई इसका परिवार हो गया इसके बच्चे हो गए तो ये जो बिजनेस है ये जो प्रॉपर्टी है ये डिवाइड हो जाएगी वो तो ऐसे भी होनी है ना नहीं होनी [हंसी] तो है मतलब वो मेहनत करे जो भी है वो पर सबर नहीं है ना सब मैं कैसे चाहूं कि जैसे आप और मैं हूं और प्रॉपर्टी एक है तो डिवाइड
(33:53) कैसे हो नहीं होनी चाहिए वो सोच पैदा हो गई सब कुछ सब कुछ उसी को चाहिए तो अब वो क्या कर सकती थी तो सोचा कि अगर मैं शादी किसी तरीके से रुकवाती हूं तो इसकी शादी तो कहीं ना कहीं हो जाएगी सुंदर सुशील है अच्छे घर का है पैसा भी है सब कुछ है दौलत शहरत सब कुछ है तो वही बात कि वो दिमाग के अंदर कीड़ा पैदा हो गया अब उस कीड़े की वजह से वो किसी तंत्रिक के पास पहुंचती है और उसको जाकर के क्या कहती है कि इसकी शादी होने वाली है तो वो बोलता क्या करूं बोला शादी तो तुड़वाएगा तो ये फिर हो जाएगी तो बोला इसको ऐसा करके इसको कभी भी संतान ना हो। ये 10 साल 20 साल 30 साल
(34:28) जिए। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। रियल बता रहा हूं मैं आपको। मैंने जब मेरे सामने आया तो मैं खुद हैरान हो गया। बोले 10 साल 20 साल 30 साल जिए मुझे कोई परवाह नहीं है। पर ये जो प्रॉपर्टी है डिवाइड नहीं होनी चाहिए। उसने उसके लिए कुख बंधन उसको बोलते हैं। कुख बंधन करवा दी। कुख बंधन का मतलब होता है कि वो औरत जो है कभी प्रेग्नेंट नहीं हो सकती। शादी [नाक से की जाने वाली आवाज़] हुई साल छ महीने हुए दो साल हुए थोड़ा टाइम निकला तो जब हर एक इंसान की होती है खुशी की क्योंकि शादी के बाद सभी को यही भेट होती है कि कभी भी आओ कभी भी हो तो जब साल दो
(34:56) साल निकले तो जाहिर सी बात थी संपन्न परिवार था तो मेडिकल वगैरह भी हेल्प ली डॉक्टर्स की भी हेल्प ली तो कोई प्रॉब्लम नहीं आई यहां तो होना कि कोई कारण है कोई वजह है भी कोई प्रॉब्लम है तो वहां भी कोई प्रॉब्लम नहीं आई अब करते-करते मेरे कोई नोन थे उनके थ्रू वो मेरे से मिले मिले तो उन्होंने बताया कि ऐसे-ऐसे प्रॉब्लम है तो मैं गया देखा अब मुझे भी नहीं पता था कि यह घर के अंदर ही ऐसे हो रहा है। ने देखा तो एक दो बार कुछ क्रिया की तो नहीं पता लगा। फिर लास्ट में देखा तो पता लगा कि हां यह तो गड़बड़ी यही है। अब मेरी प्रॉब्लम ये हो गई कि मैं उस घर वाले को
(35:27) कैसे बताऊं। अगर उसको मैं ये सच्चाई बता देता हूं तो फिर बड़े वाले का या तो घर टूटेगा या लड़ाई होगी। मैं तो बता भी नहीं सकता हूं कि यह तेरे ही घर में ऐसा कुछ किया हुआ है। अगर ऐसा बोलता हूं तो उनके घर में लड़ाई हो जाएगी। लड़ाई तो ठीक है ना गुरु जी सच में फिर मैंने कोशिश यही की गुरु करने वाले तो गुरु महाराज है फिर उस कुख वंदना को तोड़ा गया और उसके बाद उसको भी समझाया थोड़ा बहुत के क्यों ऐसे तो ऐसी चीजें बहुत सी है एक नहीं है लाखों में है और ये लोग मैं माफी चाहूंगा बहुत बार सुनने को मिलता भी है और वही बात आएगी कि भोलेभाले लोगों को
(36:00) पागल बनाया जाता है भोला भाला आदमी कभी इन चक्करों में आएगा नहीं मैं खुद तंत्र क्रिया करता हूं लेकिन मैं खुद कहता हूं कि 90% इन चीजों से दूर रहना चाहिए आप जिस भी धर्म में जन्मे उसको माने मंदिर जाएं गुरु घर जाए अपने काम करें अपनी क्रिया करें अब वही बात आएगी कि आदमी के हाथ में कुछ है ही नहीं सब कुछ भगवान करने वाला तो आदमी क्या करेगा कर्म करो अच्छे कर्म करो आप आपको हाथ दिए हैं दिमाग दिया है इंद्रियां दी है इन सबको आप देखो इनको पहचानो अच्छे कर्म करो सब कुछ अच्छा ही होगा लेकिन सभी एक जैसे नहीं हो सकते वही बात सभी स्वर्ग में जाएंगे तो नर्क में भी
(36:33) तो किसी के लिए है ना उसका भी हे राम प्रभु मतलब लोग देखिए हकीकत अपने आप को भोला कहते हैं। पता है जो आपने अभी बोला है ये मैंने अपनी फैमिली में देखा है। मेरी बुआ है। तो उन्हें नहीं हुआ कभी बच्चा। बहुत ट्राई किया सब किया। नहीं हुआ। उसके बाद उन्होंने बच्चा अडॉप्ट कर लिया। बच्चा अडॉप्ट कर लिया। वो भी बड़ा हुआ। उसकी शादी हुई। उनको भी नहीं हुआ। मतलब मेरी जो भाभी है वो इतनी ट्राई करती रह गई ये आईवीएफ ये टेस्ट ट्यूब बेबी ये वो सब कुछ नहीं हुआ अब ये जो आपने तो कहा कि एक पेट ये तो पता नहीं कैसे पूरी फैमिली पे फिर उन्होंने
(37:20) अभी रिसेंटली अडॉप्ट किया तो ऐसे कहते हैं लोग कि इसीलिए मुझे ये क्लिक हुआ क्योंकि हम ऐसे लोग कहते हैं कि शायद ऐसा कुछ किया हुआ है कुछ कह देते हैं कि यह साइंस का जमाना है। जाहिर सी बात है मैं भी इस चीज को मानता हूं कि साइंस है और हम लोग भी आप मतलब हमने वो जो दुख और पीड़ा है ना एकदम सामने से देखी। वो मेरी बुआ का दुख रोते हुए वो मेरी माता रानी करेगी उनकी अब नो मोर मेरे बुआ फूफा दोनों भी दे आर नो मोर। अभी भैया भाभी है और भाभी को भी शादी को इतने साल हो गए अराउंड 20 इयर्स उनको भी नहीं है। माफी चाहूंगा लेकिन वैसे मैंने उनको सभी में मेडिकलली तो वो हो
(38:03) नहीं सकता। अभी एक में हो सकता है, दो में हो सकता है। ऐसा थोड़ी है कि पीढ़ी दर पीढ़ी ही ऐसे चल रहा है। मतलब लिटरली मैं अभी उन उनका चेहरा मेरे सामने आ रहा है। मैंने उनकी पीड़ा भी देखी है। और पता है ऐसे इसमें क्या हो जाता है ना समाज और मैंने उस सोसाइटी को भी देखा है कि कैसे जीने ही नहीं देते हैं। हकीकत है। जीने ही नहीं। 100% इतने मतलब इतना परेशान कर दिया होगा ना उनको और भाभी हमारी जो है वो इतनी एक्टिव सोसाइटी के फंक्शनंस में ले लो घर के काम में ले लो यूं भी ले लो शी इज वेरी वेरी वेरी एक्टिव लेकिन कैसे ना ये वाला
(38:39) सिचुएशन [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] बच्चा नहीं है या सोसाइटी की वजह से उस प्रेशर में आके वो मेंटल मेंटली आदमी कितना परेशान हो जाएगा लोग नहीं जीने देते लोग नहीं जीने देते यहां तक सुनने को मिलता है खैर खैर सब कहते हैं कि पढ़े लिखे हैं या पढ़ाए। साइंस का जमाना है ये वो लेकिन फिर भी जितने भी पढ़े लिखे हो लोग जीने भी नहीं देते। सुबह-सुबह कहना नहीं चाहिए कि सामने भी आ जाए तो ऐसा बैड लक मानेंगे कि पता नहीं इन्हने कौन से पाप किए। अरे ये हो सकता है कोई कारण होगा। मानते हैं चलो मेडिकलली भी हो सकता है या कोई और भी कारण
(39:09) होगा लेकिन उससे कम से कम ऐसे बिहेव तो ना करो। जी जी अच्छा मुझे एक बात बताएं गुरु जी हम आजकल वशीकरण के बारे में बहुत सुनते हैं। वशीकरण है क्या और वशीकरण जैसे दिमाग को कैसे कंट्रोल करता है? मैंने तो खैर एक फिल्म देखी है। उसके अलावा मुझे दो तीन चीजें बताऊं आपको और यह कोई भी दंत कथा नहीं है। रियल ही है। एक तो भानुमती का नाम सुना होगा आपने। भानुमती नाम की एक रानी हुई। बहुत सुंदर थी। बहुत सुशील थी और हद से ज्यादा सुंदर थी। उस के शहर में ही एक तांत्रिक था। वह तांत्रिक भी बहुत सिद्ध तांत्रिक था। अब समय लगा लो, टाइम
(39:51) खराब लगा लो या उस तांत्रिक का अंत लगा लो उसकी दृष्टि उस रानी के ऊपर पड़ जाती है। तो जैसे ही उसके ऊपर दृष्टि पड़ती है तो विपरीत बुद्धि विनाश का दिन आप कई बार बड़े-बड़े साधु संतों के बारे में ऋषि मुनियों के बारे में सुना होगा। मेनका जैसी रंभा जैसियों ने आकर के मह विश्वामित्र जी जैसों को परेशान किया था। तो जैसे ही उसकी दृष्टि पड़ती है तो वो अपने हावभाव खो देता है। दिमाग के अंदर वो गलत क्रिया उसके उत्पन्न हो जाती है। अब उसे पता था कि यह रानी है और मैं इसको हासिल नहीं कर सकता। तो करूं कैसे? तो उसने क्या किया कि एक इत्र सेंट जिसको
(40:27) बोलते हैं आजकल परफ्यूम आफ्टर से वगैरह बोल दिया जाता है। उसको वो अभिमंत्रित करता है वशीकरण के द्वारा और फिर वो उसकी रानी की भानुमती की रानी की दासी को वो देता है इत्र वो कहता है कि जब यह नहा धोकर के तैयार होगी तू कैसे जैसे करके इसके कपड़ों पे वस्तु इन्हें लगा देना। बाकी जो तू मांगेगी जो तुझे चाहिएगा वह मैं दे दूंगा। अब वह लालच बस आकर के दासी वह ले तो जाती है लेकिन रास्ते में जाकर के वह डर जाती है कि कहीं ना कहीं अगर पता लग गया तो मेरा तो पूरा परिवार ही मार दिया जाएगा तो वो डरती डरती वो क्या करती है रानी को बता देती है भ ऐसे ऐसे तांत्रिक ने दिया
(41:04) और ये अंतर है इस शीशी के अंदर रानी थी समझदार थी वो हम तो उसने सोचा कि चलो वो जो उनके राजगुरु होते हैं राजशी होते हैं तो उनके भी बहुत अच्छे थे सब कोई जानकार थे एक दो उनको बुलाया और उनसे पूछा पूछा कि यह यंत्र दिया उसने और कपड़ों पर डालने के लिए तो वो राजगुरु थे। उन्होंने समझा दिया कि अगर तांत्रिक को इस बात का पता चल गया तो वह कोई और रास्ता इख्तियार करेगा। तो हो सकता है कि हमें इससे बचा जाए या ना बचा जाए। तो ऐसा हो कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। तो उस राजगुरु ने क्या किया कि उस रानी के जैसे ही एक पत्थर की वो शिला बनवाई और
(41:40) इतनी भजनी शिला बनवाई कि जैसे वो अगर आदमी के ऊपर पड़े तो वो खत्म हो जाए और वो जो यंत्र था वो उसके ऊपर डाल दिया। किसके ऊपर? शिला के ऊपर। अब जैसे ही शिला के ऊपर इत डलता है, शिला चलने लगती है खुद ब खुद। अभी आप यकीन नहीं करोगे, लेकिन इसके बाद जो मैं बताऊंगा, आपको यकीन भी होगा कि यह सत्य बातें हैं। तो शिला चलती है और तांत्रिक उधर खुश हो रहा था कि रानी आ रही है। वो अपनी क्रिया के अंदर बैठा था और शिला जाकर के उसके ऊपर गिरती है और तांत्रिक की मौत होती है। सच्चाई है। खैर इसको आप किसी और रूप में भी ले सकते हो। अब मैं आपको बात बताता हूं महाभारत काल की
(42:12) क्योंकि इसकी वशीकरण की परिभाषा के बारे में नहीं पता होगा तो फिर इसके लिए बात करना गलत है। वैसे तो मैं पहले भी कह चुका हूं कि जितनी भी तंत्र क्रियाएं या कितनी भी क्रियाएं सब देवाधिदेव महादेव से ही उत्पन्न हुई है। हम वो माता पार्वती को ज्ञान दिया या जो मैंने पहले बता भी चुका हूं। महाभारत काल के अंदर आपने सुना होगा कुंती माता जी हुई है जो पांडवों की माता थी। जी पांच पांडव कहलवाए। हालांकि ये छह भाई थे। भाई छह थे लेकिन कहलाए पांच ही करण को इनके अंदर गिना नहीं गया और साक्षात यह है महाभारत के अंदर के कुंती पुत्र करण था
(42:46) और वो था भी जी तो माता कुंती के पास वशीकरण क्रिया थी जो माता कुंती थी उनके पास वशीकरण क्रिया थी जो कुंवारी को पुत्र होता है ना करण ये उस क्रिया के द्वारा ही होता है जब वो उस क्रिया को सिर्फ ट्राई करते हैं कि ये सत्य है सत्य है या नहीं है लेकिन जब वो ट्राई करते हैं तो उससे उसकी उत्पत्ति उत्पत्ति होती है किसकी राजा करण की करण जिसको जलपरवाह करती है समाज के लोगों के ड्रग की वजह से कि किसी को पता नहीं लग जाए क्योंकि उस जमाने में आज भी अगर ऐसा कुछ हो तो समाज जो है वो गलत नजरों से देखता है तो जल प्रवाह करवा दिया जाता उनके पास
(43:20) वशीकरण क्रिया थी और वो आज भी है। अब मैं आपको एक ऐसा वशीकरण बताता हूं जिसको सुनकर के आप हंसोगे भी और [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप यह भी कहोगे कि गौरिया जी यह कैसे हो सकता है? महाभारत काल के अंदर ही द्रोपदी हुई। पांचों पांडवों की पत्नी पत्नी तो वह अर्जुन की होनी थी लेकिन वह मां के वचनों की वजह से क्योंकि मां ने उनको देखा नहीं और वो लेकर के आए तो बोले कि जो भी लाए हो आपस में बांट लो तो वो सब और वो वरदान के रूप में होना भी था क्योंकि द्रोपदी जो थी ये विनाश का कारक ही बनना था इनका। कौरवों का जो था विनाश होना था तो वो
(43:54) द्रोपदी के द्वारा ही होना था। इसकी उत्पत्ति इसी कार्य के लिए हुई थी। खैर ये बहुत लंबी बात हो जाएगी। तो द्रौपदी जब क्रिया कर रही होती है इसको आप जो ये कह देते हैं मैथुन कह लो सेक्स कह लो या कर रही होती है तो पूरे ब्रह्मांड के अंदर आप देख लेना चाहे पंछी हो चाहे जलचर हो चाहे जमीन के जानवर हो या इंसान हो जब कोई फिजिकली होते हैं सेक्स करते हैं तो उसके बाद कुछ टाइम के बाद दोनों के शरीर अलग हो जाते हैं नॉर्मली हो जाते हैं किसी भी चीज को देख लो आप पूरे ब्रह्मांड के अंदर। लेकिन यहां पर क्या होता है कि जब द्रोपदी यह कार्य कर रही होती है तो गलती से
(44:35) एक जानवर जिसको कुत्ता बोल देते हैं, डॉग बोल देते हैं वो आ जाता है अंदर और वो उस क्रिया को देख लेता है। हम जब वो उस क्रिया को देख लेता है तो द्रोपदी गुस्से में आकर उसको श्राप देती है। और उसको श्राप क्या देती है कि तूने तो मुझे देखा है। जब तुम धरती के ऊपर यह कार्य करोगे तो तुम्हें पूरा जनता देखेगी। चाहे कोई जानवर हो, कोई भी हो मतलब साइड में ही होते हैं। इतने ओपनली नहीं होते। और जब उनका होपता भी है मान लो सेक्स भी कर रहे हैं तो उसके बाद वो साइड हट जाते हैं शारीरिक रूप से। लेकिन कुत्ता एक ऐसा जानवर है पूरी धरती आप सर्च कर लेना पूरी धरती के ऊपर जब ये
(45:14) मैथुन करते हैं, क्रिया करते हैं तो क्रिया होने के बाद इनकी बॉडी एक दूसरे से दूर नहीं होती। शायद आई डोंट नो आपने कभी देखा या नहीं देखा? रियलिटी है ये। रियलिटी है लेकिन जो वो कुतिया इस साइड भागेगी कुत्ता इस साइड भागेगा लेकिन वो दूर नहीं खो सकते कुछ दिक्कत आती है मैं बोल नहीं सकता हूं कैमरे के सामने ओके तो जब द्रोपदी ये श्राप देती है कि तुम जब ये क्रिया करोगे तो तुम्हें पूरी दुनिया देखा करेगी तो वो श्राप तो मिल गया पर द्रोपदी को एहसास हुआ कि ये तो जानवर था इसे थोड़ी ना पता था कि क्या हो रहा है ज्ञानी और मैंने इसको श्राप दिया फिर उसने
(45:47) उसको एक वरदान रूपी भी दिया यह सच्चाई है इसको गंडक वशीकरण कहते हैं लेकिन यह वही वही कर सकता है जो साधक होगा जो क्रिया को जानता आम आदमी नहीं कर सकता है। जिस वक्त ये डॉग अपनी क्रिया कर रहे होते हैं सेक्स कर रहे होते उस वक्त अगर किसी साधक की दृष्टि उनके ऊपर पड़ती है तो उस क्रिया को अपनी आंखों के द्वारा अपनी रूह तक ले जाना पड़ता है और फिर आंखें बंद करके जहां भी आप क्रिया कर सकते हो चाहे श्मशान घाट हो चाहे ऐसे दे दीवारें सुनसान देवाले सुनसान जगह जहां भी आप क्रिया करते हो तो उस क्रिया को आप अगर वहां जा करके करते हो तो
(46:22) यह गारंटेड है कि वह वशीकरण इतना पावरफुल होता है जिसके लिए भी आप करते हो इतना इतना पावरफुल होता है कि काफी सालों तक उसका तोड़ नहीं किया जा सकता और यह सच्चाई है और यह जो क्रिया करते हैं ये जो सेक्स करते हैं [नाक से की जाने वाली आवाज़] इनका भी एक टाइम पीरियड होता है। जैसे अब सावन चल रहा है तो ज्यादातर इन्हीं पीरियड के अंदर ये करेंगे ऐसे वैसे नहीं करेंगे। आजकल तो खैर वो ब्रीड वाले और ये बहुत से चल पड़े हैं। लेकिन जो आम नॉर्मल आप कॉलोनी के अंदर ये सब देखेंगे ना इंडॉक्स तो ये हकीकत बात है। गंडक वशीकरण कहते हैं। गंडक वशीकरण के द्वारा पर वही बात
(46:56) आएगी कि करने वाले की नींद साफ होनी चाहिए। अच्छाई के लिए करो। वशीकरण एक तरीके से मेडिसिन है। अब आपका सवाल ये होगा कि वशीकरण मेडिसिन कैसे हो सकती है? वशीकरण जो बना वशीकरण क्या जितनी भी क्रियाएं ये बनी है ना किसी ना किसी रूप में इनका कलयुग के अंदर महत्व था। चाहे रामायण काल देख लो, चाहे महाभारत काल देख लो, चाहे सतयुग देख लो। जो भी चीजें हुई है उनका अर्थ था कि आगे कलयुग आएगा और उसके अंदर इनका ये मतलब बनना ही बनना है किसी भी प्रकार से। तो वशीकरण जो है ये एक मेडिसिन इसलिए है कि मान लो कोई हस्बैंड वाइफ है। अब उनकी शादी को 10 साल हो गए।
(47:34) बच्चे भी हैं। एक अच्छा भला हंसता हुआ परिवार है। लेकिन सडनली बैड लक कह सकता हूं कि हस्बैंड जो है वह बाहर किसी और औरत के संपर्क में आ जाता है। वो उससे प्यार करने लग जाता है या उसके सम्मोहन में आ गया तो उससे क्या होगा कि वह अपनी जो वाइफ है, अपनी जो पत्नी है उसकी वह रिस्पेक्ट नहीं कर पाएगा। रियल बात है क्योंकि मन है ये। जब मन इधर से हटा उधर लगा तो उसकी रिस्पेक्ट नहीं कर पाएगा। उसका जो हक है वो नहीं दे पाएगा। उसका जो प्यार है, उसकी जो रिस्पेक्ट है, उसकी जो भावना है, उसकी जो फीलिंग है, उनकी कदर नहीं करेगा। ऐसा ही औरत के साथ है। 10 साल 15 साल शादी को
(48:10) हुए और औरत जो है, वाइफ जो है वो किसी और के संपर्क में आ जाती है। तो वो पति की तरफ देखना बंद कर देगी। पति की रिस्पेक्ट करना बंद कर देगी। और ऐसा हुआ भी है। एक कथा है वो मैं बताऊंगा आगे। तो जब ऐसा होता है तो उससे क्या होगा कि घर के अंदर क्लेश होना शुरू हो जाता है। आपस के अंदर मिसअंडरस्टैंडिंग शुरू हो जाती है। लड़ाई झगड़ा शुरू हो जाता है। कई केसेस में तो ऐसा होता है कि बात तलाक तक पहुंच जाती है। क्योंकि जाहिर सी बात है पत्नी को पता लगेगा। पति गलत कर रहा है तो वो तलाक की तरफ जाएगी और पति को लगेगा तो वो उसकी तरफ जाएगा। तो बात जब तलाक तक पहुंचती है तो
(48:40) उससे क्या होगा कि वो दोनों तो अलग होंगे ही होंगे। इवन उनके जो बच्चे हैं उनका भी भविष्य बर्बादी की ओर चला जाएगा। क्योंकि मां-बाप जब नहीं सर पे रहते हैं तो फिर वो परिवार ही खंडित हो जाता है। तो उस कंडीशन के अंदर उस हालात के अंदर इन दोनों को जोड़ने के लिए इन दोनों को इकट्ठा करने के लिए ये दवाई एक तरीके की वशीकरण थी जो एक दूसरे चाहे वो रिलीव इन रिलेशन में बोल लो या पतिपत्नी बोल लो उनके लिए तो ये करना जायज है। लेकिन आजकल का जो जमाना है वो ऐसा हो गया 10 मिनट में वशीकरण पांच मिनट में वशीकरण एक घंटे में वशीकरण तो होता नहीं ऐसे नहीं हो सकता। सालों साल तो
(49:16) इन क्रियाओं को करने में लग जाती है। तो फिर ये जो आप देखोगे कहीं पर भी वॉल्स पे लगा रहता है। इतनी सारे लिखते हैं ना ये वशीकरण करवा लो। आप सब जानते हो ऐसा नहीं है। इन दीवारों पे आप देखोगे पहली बात तो मैं आपको ये पहली बात तो मैं आपको ये बताऊं कि ये जो क्रियाएं हैं ना ये राविया जी हमेशा जब आपका भाव अच्छा होगा। जब आपकी नीति अच्छी होगी तभी होगा। फिर वही बात आएगी कि साधना जो थी साधना के बारे में मैंने बताया भाव सिंदूर को भी अमर किया और ये हकीकत ये सब गलत है गलत है बिल्कुल ये कोई 5 मिनट 10 मिनट में नहीं हो सकता है सम्मोहन हमने आपने बताया व्हिच इज
(49:51) हिप्नोटिज्म हिप्नोटाइज करके आपको वशीकरण किया जाता है है ना दूसरा आता है उटन फिर आता है मारण क्रिया ये सब क्या है आर दी पार्ट ऑफ वशीकरण नहीं वशी और लोग करते कैसे हैं वशीकरण का पार्ट तो खैर नहीं कह सकते इसको लेकिन जैसे जैसे आपने अब मारण क्रिया की बात की है। सॉरी तो इसमें क्या होता है कि सामने वाले के बालों की जरूरत पड़ती है। वो बाल काट करके उसकी डोल बनाई जाती है। पुतला बनाया जाता है। फिर उसको श्मशान घाट के अंदर कुछ बैड क्रियाओं के द्वारा उसके ऊपर वो क्रियाएं छोड़ी जाती है। तो वो धीरे-धीरे क्या करती है? उस बंदे की लाइफ के अंदर या
(50:28) उसकी जिंदगी को बर्बाद करना शुरू कर देती है। जैसे वह नशे की तरफ जा सकता है या कुछ बैड हैबिट पड़नी शुरू हो जाती है। शुरू-शुर में वो जुआ खेलेगा या कोई गलत काम करना शुरू कर देगा। फिर धीरे-धीरे नशे की हालत में भी जाना शुरू कर देता है। तो उससे क्या होता है कि वो धीरे-धीरे मौत की तरफ जाना शुरू कर देता है। एक साथ ऐसा नहीं होगा कि आज तूने आज उसके लिए मारण क्रिया की और कल उसकी डेथ हो जाएगी। थोड़ा टाइम लगता है इन चीजों में। लेकिन यह है कि यह श्मशान घाट से जब गंदी चीजें आप उनके पीछे लगाते हो उनके पीछे छोड़ते हो तो फिर बहुत से यह वे भी बन जाते हैं जैसे
(51:03) हा कई बार होता है कि पैरालाइज आपने सुना होगा बहुत बार कि पैरालाइज हो गया ये हो गया तो ये जो चीजें हैं बहुत सी ऐसे रूप में भी आ जाती है पर उसका पता नहीं लगता है। मेडिकलली हम अगर जांच करते हैं तो हमें लगता है कि यार पैरालाइज हुआ है या ब्रेन डैमेज हुआ है या कुछ ऐसा हुआ है। लेकिन इसके अंदर जैसे मूठ करनी है। मूठ [नाक से की जाने वाली आवाज़] करनी जब आप किसी के लिए करते हो तो 100% उसका रिजल्ट वह उसकी डेथ के साथ ही होता है। किसी ना किसी रूप से। ऐसे ही ये मारण क्रिया है। तो मारण क्रिया भी जो है आपके शरीर की कोई एनर्जी को सिद्ध करके और उसके बाद जैसे
(51:36) खून जो होता है आपका रक्त होता है वो धीरे-धीरे अंदर से खत्म होना शुरू हो जाता है। अपने आप जैसे किसी पेड़ लाइक किसी कोई पेड़ है अच्छा भला और उसके अंदर कीड़ा या दीमक लग गई और वो खाना शुरू कर दिया। बाहर से तो अच्छा नजर आएगा लेकिन अंदर से उसकी सिचुएशन क्या है? या तो वो पेड़ जानता है या परमात्मा जानता है। तो वैसे ही मारण क्रिया है ये। अब बहुत बार वही बात आएगी फिर दोबारा कि बहुत बार ऐसा भी हुआ है [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि कोई औरत है जो मासिक धर्म में होती है और फिर वो चीजों को कहीं भी फेंक दिया जाता है वो बहुत गलत
(52:05) आप कह रहे हैं कि मेंुअल हां वो बहुत उनके ऊपर वो क्रिया करनी बहुत आसान हो जाती है मतलब कोई भी वो सैनिरी पैड लेके कहीं गलत जगह पे हां बिल्कुल बिल्कुल उसके ऊपर तो बहुत ज्यादा पावरफुल होता है क्योंकि उसमें तो उसका साक्षात वो पूरे शरीर तरीके से क्रिया होती है उसके ऊपर तो बहुत आसान होता है लेकिन खैर यह नहीं चाहिए गलत है डोंट थ्रो एंड देयर ये सब बहुत हजीन वाली बात भी है लेकिन ये जैसे आप कह रहे हैं कि उस पे करना बहुत आसान अंतर क्रिया के अंदर जब आप ये मारण क्रिया करते हो तो उसमें ये बहुत बड़ा जैसे हेल्पफुल ही होता है। ये चीज जिसके हाथ
(52:44) में लग जाती है ना तो वो कुछ भी कर सकता है। तो इसको थोड़ा सेफली आप जहां भी जैसे भी मैं तो कहूंगी हाइजीन पर्पस पर्पस तो होता ही है लेकिन आप देखोगे कि बहुत लोग ना यहां वहां लड़की औरतें फेंक देती है व्हिच इज नॉट गुड ये एक बात हो गई दूसरा क्या कहते हैं किसी जानवर पशु पक्षी किसी के मुंह में चला जाए और ये सब यू नो उसकी वजह से अब जैसे करना ही फेंकना ही नहीं चाहिए इसी में ये है कि अब मान लो मैंने आपके लिए कुछ गलत करना है तो मुझे मुझे आपके बाल की या इन सब चीजों की जरूरत पड़ेगी तो वो कई बार मैं नहीं प्राप्त कर सकता हूं। कई बार मैं आप तक पहुंच नहीं सकता हूं या
(53:23) वो नहीं मुझे मिल सकते। लेकिन ये जो चीज है ये खुद ही आप अगले को प्रोवाइड करवा रहे हो। खुद ही जब फेंकते हो खुद ही फेंकते हो तो पर इन चीजों को कलेक्ट या वही करेंगे जो ये करने वाले हैं। वो आपको बता देंगे जिसने भी करवाना हो उसको बोलेंगे कि कैसे जैसे करके ये चीज मिल जाए। तो ये आसानी से आप खुद ही दे रहे हो। और इसके ऊपर तो इतना पावरफुल होता है ना कि समझ में नहीं आता है। कई बार केसेस आपने देखे होंगे। आज भी बहुत बड़े-बड़े हॉस्पिटल में आप चले जाए देख डॉक्टरी रिपोर्ट जो सही आ रही होगी कि हां इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन वो सूखना
(53:53) शुरू हो रहा है। वो उठ नहीं सकता है। बोल नहीं सकता है। 80 से चल नहीं सकता है। और ऐसा नहीं है कि उसको नजर नहीं आ रहा है। नजर आने लग जाता है। महसूस खुद होने लग जाती है ये चीजें। आपको खुद ब खुद महसूस होगा। 100% है ये कि कुछ ना कुछ है लेकिन आप क्लियर नहीं कर सकते उसको। पूरा नहीं देख सकते कि है क्या। महसूस तो ये होता है कि कोई ना कोई और लड़कियों के साथ सेम है ये वैसे का वैसा ही चाहे लड़का किसी के ऊपर भी अगर जैसे आप कह रहे हैं कि ये बड़ा आसान हो जाता है जब मेंुअल पैड आ जाता है किसी के पास या जो करता है तो क्या प्रॉब्लम्स फेस
(54:26) करनी पड़ती है फिर लड़कियों को लड़कियों को बहुत बार वो तो क्रिया है ना कि आप कर किस लिए रहे हो पहले ये जरूरी समझना जरूरी होता है किसके लिए कर रहे हो अब ज्यादातर मारण क्रिया की अगर बात करें तो वो तो यही होता है कि उसमें तो खात्मा ही होता हकीकत तो यह का मतलब डेथ एंड तो डेथ ही होती है। कई बार ऐसा भी होता है कोई दुश्मनी की वजह से या कोई जलस भावना की वजह से या एलर्जी की वजह से एक दूसरे से कोई ना कोई गलतफहमी होती है उसकी वजह से करवाते हैं। तो माइंड को खराब कर देना जिसको पागलपन कहते हैं या कुछ ऐसी क्रियाएं उसके द्वारा करवा दी जाती है। उस
(54:59) लड़की के द्वारा करवा दी जाती है जिससे उसका इज्जत मान सम्मान सब मिट्टी में मिल जाता है। या कुछ ऐसे वो स्टेप उठा लेती है कि उसके बाद उसको वापस मुड़ने का रास्ता नजर नहीं आता या वह वे ही बंद हो जाते हैं कि वह वापस जाना चाहे तो भी नहीं जा सकती और ये बहुत से केसेस हुए हम ये आपसी जलन भावना से या कोई द्वेष भावना से ही करवाते हैं। वैसे तो किसी को क्या जरूरत पड़ी है? ये सबसे बचना है। तो क्या करना चाहिए? सबसे पाठ या कोई कवच या सबसे पहले तो आप अपने जो इष्ट देव हैं उनकी आराधना करें। हम घर के अंदर जो है आप जितना हो सके हनुमान
(55:36) जी की मूर्ति स्थापित करके श्री गणेश जी की मूर्ति स्थापित करके उसकी उपासना करें क्योंकि गणेश जी और जो हनुमान जी है बालाजी महाराज है ये आपसे रक्षा ही करते हैं। अब एक छोटा सा छोटा सा उपाय है जो मैं आपको बता देता हूं कि कैसे पता लगे कि हमारे साथ ऐसा हो रहा है कि नहीं। आप सात लाल मिर्च ले। साबुत साबुत सात लाल मिर्च लें। आपको भी पता है कि जब साबुत लाल मिर्च को जलाया जाता है तो उसकी स्मेल बहुत तीखी आती है। बहुत ज्यादा आती है। सात साबुत लाल मिर्च ले डंडी वाली होनी चाहिए। थोड़ी सी राई ले लें और थोड़ा सा नमक ले लें। इसको किसी कागज पेपर के ऊपर
(56:11) रख के अपने घर के अंदर या अपने ऊपर से सात बार उारे या घर के अंदर से सात बार उार के बाहर का जो मेन डोर है मेन दरवाजा उसके अंदर की साइड इसको जला दें। तो आप देख लें अगर कोई ऐसी एनर्जी होगी, गलत एनर्जी होगी तो उसमें से स्मेल बिल्कुल भी नहीं आएगी। और यदि स्मेल नहीं आती है तो आपको पता लग जाएगा कि ऐसा कुछ ना कुछ है। दूसरा यह जो गलत चीजें हैं ये आपको सपने में दिखना शुरू हो जाती हैं। बैड बैड सपने आने शुरू हो जाएंगे। कई बार तो ऐसा होता है कि जैसे आपने लड़कियों के लिए पूछा कि लड़कियों के साथ क्या हो सकता है? तो लड़कियों के साथ सोते वक्त उनके साथ ऐसे
(56:46) हादसे होते हैं। यकीन नहीं करता कोई। लेकिन ये रियल मैं बता रहा हूं। उनके शरीर के ऊपर निशान पड़ने शुरू हो जाते हैं। उनके साथ ऐसे ऐसे यह डिपेंड करता है कि आपने क्रिया कौन सी पीछे लगाई है उनके ऊपर। कौन सी ही क्रिया उनके पीछे लगाई है। कई बार उनके साथ रात को सोते वक्त गलत काम भी होते हैं। उनके शरीर के ऊपर निशान भी पड़ते हैं। फिर धीरे-धीरे वो लड़की जो है ना एक पागलपन की तरफ जाना शुरू कर देती है। अच्छा बुरा क्या है उसका पता नहीं लगता। और यह रियल है। हकीकत यह जो चीजें हैं यह मैं रियल बता रहा हूं आपको कि उसके अंदर क्या बहुत बार ऐसे केसेस आते हैं कि
(57:17) उस लड़की को पता ही नहीं लगता है। खुद के शरीर के ऊपर सुबह जब वो उठेगी तो निशान मिलेंगे कुछ ऐसा महसूस होगा। मेरे मेरे साथ हुआ है ये बात बहुत थोड़ी लंबी हो जाएगी। ओसा में कटक से 150 कि.मी. दूर एक लड़की थी। हम तो वो बेचारी 20 या 22 साल की थी। तो उसके अंदर कोई गलत एनर्जी आती थी। तो जब वो गलत एनर्जी आती थी तो वो गलत चीजें होती थी। उसको होश ही नहीं रहता था। हम तो किसी कोईक में मेरे नोन है उनके थ्रू वो मेरे टच में आए तो उन्होंने जब फोन पे बातचीत की तो मैंने उनको बोला कि आप इनको यहां ले आओ तो वो बोले कि यहां नहीं आ सकते ये लड़की आएगी नहीं और परेशान बहुत
(57:53) कर रखा है तो मैं वहां गया कटक से मैं भी 100 किलोमीटर दूर था वहां गया तो जाकर के मैंने उसको देखा चलो जो भी मैंने गुरु ज्ञान सीखा हुआ है उस विद्या के द्वारा उसको ठीक किया लेकिन मैंने उनको कुछ परहेज बताए थे कि आप ये ये चीजें मत करना ये करोगे तो फिर ये दोबारा इसके साथ ऐसा हो सकता है जी शुरू में तो मैंने उनको भी यह सलाह दी थी कि आप डॉक्टरी हेल्प ले लें मेडिकल ले लें क्योंकि ज्यादातर केसेस में ऐसा ही होता है कोई माइंड के अंदर कोई प्रॉब्लम होती है दिमाग की प्रॉब्लम होती है उसकी वजह से भी होता है लेकिन उन्होंने कहा कि हमने सब चेक करवाया पर ऐसा कुछ
(58:23) नहीं है फिर मैं गया उनको बताया चलो वो कुछ टाइम तक उन्होंने उन परहेज को किया तो वो लड़की ठीक रही सडनली 5 छ महीने के बाद क्या हुआ कि वो परहेज तोड़ दिया उन्होंने परहेज तोड़ दिया तो वो चीज उनको फिर से तंग करने लगी परहेज क्या परहेज का मतलब होता है कि इसके जैसे डिसिप्लिन कह दे या नियम कह दे क्या दिक्कत है नियम नियम होता है कि घर के अंदर कोई मांस मछली ना आए, कोई मदिरा ना आए या यह लड़की जो है रात को बाहर ना जाए। जी जी कुछ जहां पर इन चीजों का असर होने का डर रहता है क्योंकि ये गंदी चीजें जो है ना अब गंदी चीजें जो है इनके ऊपर इनका असर
(58:53) ज्यादा होता है। खुशबू वाली चीज लगा के आप रात को अगर बाहर जाते हो श्मशान घाट के पास जाते हो तो बहुत ज्यादा चांसेस होते हैं उनका आपके पीछे प्रभाव पड़ने का। तो जब वो परहेज टूटे परहेज टूटे तो वो दोबारा से वो काम शुरू हो गया। आप यकीन नहीं मानोगे वह लड़की कम से कम इतनी हाइट तक हवा में अपने आप उठती थी इतनी हाइट तक और वह डिमांड किस चीज़ की करती थी? हालांकि उनके घर में कोई सिगरेट पीने वाला नहीं है। वो डिमांड क्या करती थी? नॉनवेज चाहिए और सिगरेट चाहिए। अब उन्होंने मुझे वीडियो कॉल करके दिखाया। चारों उंगलियों में चार सिगरेट डाल के वह लड़की पी रही है और जो
(59:25) नॉनवेज बना होता है उसको फ्लोर के ऊपर ऐसे फेंक करके और बगैर हाथों के अपने मुंह से खा रही है। अब उसने मुझे जब वीडियो कॉल पे दिखाया बोला गुरुजी ये हालत है। तो मैं भी चक्कर में था। पर मेरी प्रॉब्लम ये थी कि मैं उस वक्त इंदौर में था। तो मैं 10 या 12 दिन वहां से निकल नहीं सकता था क्योंकि मैं कोई किसी के लिए कोई साधना कर रहा था। कोई मेरे पर्सनल काम था। तो मैंने उनको कहा कि 12 दिन मैं नहीं आ पाऊंगा। तो वो बोलेगी 12 दिन में वो कंडीशन दिखाई तो मैं भी हैरान जमीन से ऊपर उठ रही है नीचे डाल के ऐसे बगैर हाथों के मुंह से वो खा रही है सिगरेट पी रही है
(59:55) दारू की डिमांड कर रही है सच्चाई है ये अगर चलो वो तो खैर दूसरी बात हो जाएगी नहीं तो मैं वहां ले जा भी सकता हूं खैर वो छोड़ो तो फिर उससे बात हुई उन्होंने वीडियो कॉल भी दिखाया कि बोले ये हालत है तो मुझे लगा कि ये ज्यादा गड़बड़ है तो मैंने उनको फिर बुलाया मैंने कहा मैं तो आ नहीं सकता हूं पर आपको ही आना पड़ेगा वो बेचारे आए हिंदी भी नहीं जानते थे इतनी क्यों उड़िया साइड में उधर वो गोल गोल गोल गोल लिखा होता है मुझे भी उनकी लैंग्वेज इतनी नहीं आती तो वो आए तो तो मैं उनको उज्जैन लेकर के गया। उज्जैन में एक तो आपने नाम सुना ही है महाकालेश्वर जी का
(1:00:22) है। वहीं पर काल भैरव का स्थान है। तो काल भैरव का वो सिद्ध पीठ है। तो मैं वहां पर लेकर के गया। तो वहां पर कुछ परिक्रमा का नियम है। परिक्रमा के अंदर वो चीजें अटैक नहीं करती है। तो मैंने उनको वहां छोड़ा क्योंकि मुझे वो क्रिया वहां करनी थी। वहां पर एक नदी है उज्जैन के अंदर। तो उस नदी के पास मुझे वो क्रिया करनी थी। तो उससे पहले मुझे वहां जाना था। तो मैं उनको काल भैरव के स्थान पे लेके गया। अब गलती क्या होती है कि वो वहां पर जो नियम क्रिया मैंने उसको बताई थी वो थोड़ी सी उससे बाहर आ जाती है। अब आप यकीन नहीं करोगे वो जैसे ही बाहर आती है
(1:00:51) हालांकि मंदिर में ये चीजें अपना असर नहीं दिखा पाती है। मंदिर हो पानी हो या किसी को अगर इन चीजों से डर लगता है या ये चीजें अगर किसी को नजर आती है तो वो हमेशा अपने पास लोहे का चकू रखें। उनसे भी वो काफी फर्क पड़ता है या रात को सोते हो तो पानी का तांबे के बर्तन के अंदर पानी अपने सिराने रख के सोएं तो उनसे भी बहुत फर्क पड़ता है। तो जब वो मंदिर के पास की प्रक्रिया से बाहर हुई तो वो चीज फिर से वो हो गई। अब वो हो गई तो मैं इतना परेशान परेशानी का कारण ये बन गया कि वहां पर जितने यात्रू आए हुए थे क्योंकि वो एक लड़की थी। जितने यात्र आए हुए थे उन्होंने
(1:01:22) भीड़ इकट्ठा हो गई। वहां पे वहां पे पुलिस भी थी और भी थे कई। अब ये जो क्रियाएं हैं ये क्रियाएं गुप्त रूप से ही की जाती है। आप इनका प्रदर्शनी ही नहीं कर सकते हो। दिखावा नहीं कर सकती और मैं तो वैसे ही नहीं कर सकता क्योंकि मेरे गुरु के कुछ वचन हैं। तो अब मेरे लिए यह प्रॉब्लम बन गई कि अब मैं इनके सबके सामने करूं कैसे? फिर बड़ी मुश्किल से वहां पे काफी लेडीज इकट्ठा हो गई। क्या हुआ? क्या हुआ? फिर गुस्सा मुझे भी थोड़ा सा आया। मैंने हार के बोला कि इसमें ऐसी-ऐसी चीजें हैं। अब तो आप दूर चले जाओ। नहीं तो ये आपको भी वैसा करें।
(1:01:47) फिर वो वहां से पीछा छोड़ा। फिर गुरु जी के आदेश लेकर के जल से उससे कुछ ठीक है। आज गुरु महाराज की कृपा है वो लड़की ठीक है। क्योंकि फिर मैंने उस चीज को बोतल के अंदर कहीं ऐसी जगह रखा हुआ है जो वहां पे सेफ है। तो ये होता है 100% होता है। लेकिन ये जाहिर जरूरी नहीं है कि सबके साथ ही हो। काफी हद तक मेडिकलली भी प्रॉब्लम होती है और काफी हद तक ये चीजें भी हैं और ये करवाते भी हैं। लोग करते भी हैं और करवाते भी हैं। पर ये गलत है। इन चीजों से बचना ही चाहिए। जी। तो जैसे आपने कहा कि फिर हनुमान जी बिल्कुल हनुमान जी का और अपने गणेश जी
(1:02:22) का करें हनुमान जी का जो चालीसा है वो घर में पढ़े कोशिश करें जिनके साथ ऐसी चीजें हो रही हैं जिनको महसूस हो रहा है कि हमारे साथ कुछ ना कुछ गलत है सभी के साथ ऐसा नहीं होता है लेकिन कहीं ना कहीं आपको लगता है कि आपके साथ कुछ गलत हो रहा है आप बहुत कोशिश कर रहे हो बहुत मेहनत कर रहे हो सब कुछ अच्छा कर रहे हो लेकिन फिर भी बैड हो रहा है फिर भी गलत हो रहा है तो आप घर के अंदर यही चीजें रखें क्योंकि कि गणेश जी जो है जो आपने सुना भी होगा स्वयं जो माता शक्ति है उन्होंने भी इनको अपनी रक्षा के लिए खड़ा किया था जब इनका शीश काटा गया है
(1:02:55) तो वो तो गणेश जी महाराज हैं ओम गण गणपताय नमः जी और इनका तो इनकी तो जब पूजा भी की जाती है तो प्रथम निमंत्रण आपको पूर्ण कीजिएगा आज उनका नाम लिया जाता है विघ्न हरण मंगलकरण तो विघ्न को हरने वाले हैं मंगल करने वाले हैं रिद्धि सिद्धि के मालिक हैं जी गोरिया जी मुझे ये बताएं ये आम जनता के लिए है कि जैसे घर में किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए कि यह सब ना चीजों से दूर रहा जाए। कुछ टिप्स और अगर आप दे सकते हैं तो इन चीजों से दूर रहने के लिए जैसे एक तो ना किचन होता है। किचन के अंदर आप अपने शूज जूतियां जो बाहर यूज करते हैं वो कभी
(1:03:33) भी अंदर ना लेकर के जाए। तो बाहर के हां इन [गला साफ़ करने की आवाज़] चीजों के द्वारा चप्पल कभी भी किचन क्योंकि किचन के अंदर एक तो वैसे भी अन्नपूर्णा माता का स्थान माना गया पूजनीय स्थान है वो चीज ना लेके आए एक अपने जो घर पे झाड़ू जिससे वो सफाई करते हैं झाड़ू ही बोलते हैं नॉर्मली उस झाड़ू को जितना हो उसको छुपा करके रखें हम अगर उस झाड़ू का तिनका किसी कारणवश बाहर जाता है और वो कोई ऐसे इंसान के हाथ लग जाता है तो उससे ये गलत क्रियाएं बहुत ज्यादा होती है घर में जिसको भी आप मानते हो। जरूरी नहीं है कि किसको मानना जिसको भी आप मानते हो उनका देवालय घर के अंदर
(1:04:09) मनाएं। सुबह शाम Google से धूप करें। ऐसे कर्म करें कि जिनसे एनर्जी जो है ना अच्छी एनर्जी घर के अंदर आए। तो इनसे बचाव रहता है। अपने इष्ट देव की जरूर आराधना करनी चाहिए। अच्छा गोरिया जी ये बताएं कि हम ब्लैक मैजिक ब्लैक मैजिक की बहुत बात करते हैं। तो तंत्र और ब्लैक मैजिक सेम है। ये शायद अलग है। नहीं नहीं ये अलग भी नहीं है। यहां पर भाषा का कोई मिसअंडरस्टैंडिंग हुआ। शायद मैंने आपको पहले भी बताया कि क्रिया जो है अच्छा या बुरा करना। किसी का अच्छा या किसी का बुरा करना। तंत्र साधना के द्वारा ही होता है। साधना की तो बहुत सी शक्तियां
(1:04:45) मैंने बताया कि भाग्य के लिखे लेख को भी बदल देती है। तो तंत्र जो है ना यह अलग है और जो ये काला जादू जो बोलते हैं ये कहीं ना कहीं भाषा का वो गलत यूज़ हुआ है क्योंकि ये बंगाल की साइड का काफी फेमस है। बंगाल का जो है तो वो लोग उनको हिंदी इतनी आती नहीं थी तो वो इसको जादू बोलने लगे। बंगाली जादू कह दिया जाता है। काला जादू जिसको बोल दिया जाता है। हालांकि जादू जो है वो एक हाथ की कला है। वो एक कला हां कला है। जैसे सम्राट जादूगर सम्राट का नाम भी सुना होगा या और भी जादूगर में आता है वो तो वो एक कला है। उससे अच्छा बुरा नहीं।
(1:05:15) आप मानोगे ये बात को कि कई सारे बाबा लोग ऐसे भी होते हैं जो हाथ की सफाई दिखा के लोगों को लोगों को ये कहते हैं कि जैसे हमारे लास्ट एपिसोड में भी एक गुरु जी आए थे। उन्होंने बोला कि मैं बता सकता हूं कि यहां नेगेटिव एनर्जी है। उन्होंने लॉन्ग को उड़ाया था। तो सच में ऐसा होता है बाबा लोग ऐसे उल्लू बनाते हैं लोगों को ऐसे बोल के कि मैं सब सही कर दूंगा। ठीक कर दूंगा। यह पुड़िया ले लो तुम्हारे घर में यह हो रहा है। ऐसा हो रहा है गलत हो रहा है। सब सही हो जाएगा। सच्चाई तो रावि जी यह है। सत्य बात तो यह है कि इन जो चीजों का ज्ञान जिसको होगा ना
(1:05:52) जिसके पास वो सच्ची नॉलेज होगी वो कभी इनकी प्रदर्शनी नहीं करेगा। हम और जो यह प्रदर्शनी करते हैं, जो यह दावा करते हैं कि मैं यह कर देता हूं या यह दिखा देता हूं, दिखावा जिसको बोलते हैं, जो यह चीजें दिखाते हैं, वो काफी हद तक सही नहीं होती है। अभी जैसे आपने बोला कि आपके पडकास्ट में कहा गया था कि भ यहां पे एनर्जी है या नहीं है। तो मैं एक चीज बता देता हूं कि आपके ही शरीर के अंदर कुछ ऐसी चीजें हैं जो सम टाइम आप उसको कंट्रोल नहीं करते हो और वो आपको परेशान भी करती है और वो साक्षात अभी आपके सामने आ जाएंगी और आप खुद देखोगे
(1:06:26) कैसे कौन सी एनर्जी आप इसमें मुझे ना एक नारियल अगर यहां पॉसिबल हो सकता है तो एक नारियल की जरूरत पड़ेगी ठीक है वो हम देखते हैं लेकिन आप करोगे क्या मेरे ऊपर कुछ मत करो आपके ऊपर कुछ नहीं आपके ऊपर नहीं आपके ऊपर कुछ नहीं होगा [हंसी] लेकिन वो वो चीज आपको नजर आ जाएगी कि हां है या नहीं है। आपको बस करना क्या है? उस नारियल को सात बार अपने सर के ऊपर से ऐसे घुमाना है और यहां पे रखना है। बस दैट्स इट। तो उससे क्या होगा? उससे वो चीजें दिखाऊंगा मैं आपको कि कैसी है निकलती है या नहीं निकलती है। क्या है आपके अंदर क्या नहीं है। हालांकि इतना
(1:06:57) टाइम हो गया मुझे आपके पास बैठे हुए। नहीं नहीं कुछ ऐसे गलत नहीं होगा जब तक। नहीं नहीं मेरे को तो है भरोसा वैसे लेकिन मेरे को इन सब चीजों से थोड़ा सा यही होता है। नारियल ला सकते हैं हम। जी। ठीक है। हां जी। ये आपका नारियल आ गया। जी जी अब आपको जैसे मैंने बताया था ना कि आपने बोला कि जो बाबा लोग करते हैं या ऐसा है पीछे से एक केस था मैं नाम नहीं लूंगा वो हनुमान जी के भगत थे तो बहुत जनता भी उनके पीछे थी थे या है मतलब है लेकिन वो अब थे ही कह सकता हूं मैं इसे अच्छा तो उनकी जनता भी बहुत मानती थी उनको लेकिन ये सच्चाई नहीं है स्वयं बालाजी महाराज
(1:07:33) हनुमान जी जिन्होंने पर्वत तक को उखाड़ दिया था वो शरीर में कैसे आ सकते हैं आजकल हर कोई बोल मेरे में बालाजी जी आ रहा है। मेरे में काली माता आ रही है। कैसे इतनी इतनी पावर है आपके शरीर में कि आप स्वयं हनुमान जी को अपने शरीर के अंदर प्रवेश कर करवा सकें। जी ब्लास्ट नहीं हो जाएगा। फट नहीं जाएगा शरीर। माता काली क्या आप ऐसा कैसे कर सकते हो कि आपके शरीर में आ जाए। अभी जो आपकी वो मैंने बताया कि आपके शरीर के अंदर कुछ चीजें हैं ऐसी। तो वो आप देख लेना आपके सामने आ जाएगी। आप एक मिनट अपनी [हंसी] आंखें बंद एक मिनट आप अपनी आंखे बंद करें। थोड़ा सर आगे कर ले
(1:08:09) प्लीज आंखें बंद करके ठीक है गुरुजी थोड़ा सा नहीं कुछ [हंसी] नहीं कुछ नहीं होगा मेरे को घर जा रहे हैं नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा ठीक है एक दो तीन चार पांच छ सात अब आप जिसको भी मानते हो जिस भी दही देवता को मानते हो आप उसका नाम लें ठीक है और मैं कोशिश करता हूं हरि ओम पवित्रम पवित्रम भगवान विष्णु पवित्रम माता सरस्वती पात हे रक्षाम देवी रक्षाम देवी रक्षाम देवी रक्षाम देवी रक्षा अब ये नारियल है। बिल्कुल दिख रहा है आपको? अब ये कोई भी चीज है वो साक्षात इसमें सामने भी आ सकती है। ओम शांति शांति शांति। क्या है?
(1:08:56) ये हटाओ। इसको दूर करो माइक वाइक को। दिख रहा है? हां। मतलब आग हुई। आग आग आई और ये पानी तो हमने ही दिया आपको। अब आइए सब कुछ आपके सामने है। पानी में तो कुछ मिलाया नहीं था आपने। नहीं नहीं पानी तो यही है। आपके सामने ही है। पानी भी है। सब कुछ आपके सामने है। क्या किया आपने? तो ये जो इसकी जो रियलिटी है इसकी जो सच्चाई है वो मैं बताता हूं। खैर ये मजाक की बात थी। अभी ये रियलिटी बताता हूं। तो ऐसे कोई भी साधक कोई भी तांत्रिक जब कुछ ऐसा करता है [गला साफ़ करने की आवाज़] तो यह सच्चे सत्य नहीं होता है। आपने उस नारियल के साथ क्या किया?
(1:09:37) कोई जादू नहीं है और कोई ऐसी चीज नहीं है। यह जो लोग ऐसा करते हैं और ऐसा करके फिर वो आपको भ्रम में डालते हैं या डराने की कोशिश करते हैं। ये उन लोगों के लिए है कि इन सब चीजों में कुछ है नहीं। ये सिर्फ एक हाथ की सफाई समझ सकते हो या एक साइंस है और कुछ नहीं है। सर जी ये बताइए ये जो आपने किया ये तो अभी मतलब आप कह रहे हैं कि हाथ की सफाई है। है ना? यू हैव मेड इट क्लियर। लेकिन क्या सच में साधना से जैसे हम आपने सिद्धि महासिद्धि की बात करी पहले साधना से आप अचीव कर सकते हो जो आपको चाहिए साधना से राबिया जी बहुत कुछ बदला जा सकता
(1:10:17) है बहुत कुछ साधना के अंदर इतनी पावर है इतनी शक्ति है कि राजा कौशिक हुए हैं और साधना के द्वारा तीन कंडीशन ऋषि महषि और ब्रह्म ऋषि ऋषि बनना आसान है। महर्षि बनना आसान है। आसान तो नहीं है लेकिन बना जा सकता है। लेकिन ब्रह्म ऋषि बनना बहुत बड़ी बात है। साधना के द्वारा राजा कौशिक हुए हैं जो विश्वामित्र तक बने हैं। और साधना से क्या किया जा सकता है? साधना कैसे तप कह रहे हैं। तप तप कैसे बदला जा सकता? तप भी इसमें आता है साधना में। वो आपके गुरु ही आपको बताते हैं। जो गुरु का हुक्म होता है ना सर्वोपरि वही होता है। अब साधना कई लोग बोलते हैं कि साधना
(1:10:57) 108 प्रकार की होती है या इतने प्रकार की होती है उतने प्रकार की होती है। इसकी कोई गिनती ही नहीं है। साधना की कोई गिनती नहीं है। अब एक साधना मैं आपको बताता हूं तो आप स्वयं हैरान होंगे कि और रियल है वो। ये नहीं है कि कोई दंत कथा है। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] महाभारत काल के अंदर गांधारी नाम की जी। कौरवों की माता जी थी। ठीक है? धृतराष्ट्र से उसकी शादी होती है। अब धृतराष्ट्र जो थे वो नैनसुक थे। यानी कि उनको दिखता नहीं था। दृष्टिहीन थे। आंखों से नहीं दिखता था। जब गांधारी को इस बात का पता चलता है कि उसके पति जो है वो
(1:11:30) दुनिया नहीं देख सकते हैं तो उसने क्या किया कि अपनी आंखों के ऊपर पट्टी बांध ली कि यदि मेरे पति इस दुनिया को नहीं देख सकते हैं तो मैं भी इस दुनिया को नहीं देखूंगी देखो साधना का रूप क्या है अब कौन सी गिनती आप साधना की बता दोगे कि साधना इतनी प्रकार की होती है और कौन सा रूप आप बता दोगे अब वो साधना ये साधना ही तो हुई ना कि मेरे पति अगर दुनिया नहीं देख सकते तो मैं नहीं देखूंगी और वो सालों दर सालों उस साधना में उसको कंटिन्यू रखती हुई है फिर फिर क्या होता है कि उनके बच्चे होते हैं दुर्योधन जिसमें बड़ा भाई था वो सबसे
(1:12:00) बड़ा मतलब बड़े भी होते हैं आगे उनकी शादी भी हो जाती है उनके बच्चे भी हो जाते हैं फिर ये युद्ध होता है महाभारत काल का युद्ध होता है तो जब कौरव सभी तकरीबन सभी कौरव मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं सिर्फ लास्ट में दुर्योधन बचता है तो जब उसकी माता को इस बात का पता लगता है कि मेरे बेटे तो सभी मारे गए और कल युद्ध होगा और कल दुर्योधन भी मारा जाएगा तो जब उसको उनको पता लगा कि कल दुर्योधन का भी युद्ध होगा और यह मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा। तो मां थी। मां का जो हार्ट होता है ना ये बहुत सॉफ्ट होता है। ये रियल बात है। औरत के अंदर इतनी शक्ति है राविया जी इतनी
(1:12:35) शक्ति है कि उसका व्याख्यान ही नहीं किया जा सकता। यह जब सब्र करने पर आए ना तो इतना सब्र कर सकती है कि इसके जितना कोई सब्र कर नहीं सकता है और विनाश करने पर आए तो ये साक्षात चंडी का रूप भी रक्त बीज वध कारण माता रक्त बीजों को भी जी विनाश कर सकती है तो जब उन्हें पता लगा कि मेरे ये जो लास्ट बेटा बचा है इसकी भी मृत्यु को प्राप्त ये मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा तो वो दुर्योधन को क्या कहती है कि कल सुबह ब्रह्म मुहूर्त के अंदर स्नान करके और निर्वस्त्र निर्वस्त्र का मतलब होता है कि तन के ऊपर कोई कपड़ा ना वैसे का वैसा तू मेरे सामने आ। तो माता का
(1:13:10) आदेश था। दुर्योधन बोला ठीक है माता। दूसरे दिन जब वो सुबह स्नान करके आता है नंगन अवस्था में तो भगवान कृष्ण तो जानी जान थे। सारी लीला ही उनकी थी। तो जब उनको पता लगता है तो वो रास्ते में मिल जाते हैं। मिलते हैं तो वो दुर्योधन का ब्रेन वाश करते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो दुर्योधन को बोलते हैं कि ये क्या है? इस अवस्था में तू मां के सामने जाएगा। तो बोला कि मां का हुक्म है। मैं क्या कर सकता हूं? बोला पागल छोटा बच्चा होता तो और बात थी। अब तो तेरे खुद के बच्चे हैं। अब तू इस अवस्था में कैसे जा सकता है? तो बोला क्या
(1:13:38) करूं? बोला कम से कम और कुछ मत कर जो तुम्हारा ये प्राइवेट पार्ट का हिस्सा है। सॉरी माफी चाहूंगा। बोला वहां पर उसको कवर कर ले। कम से कम उसको तो कवर कर ले। अब वही बात विपरीत बुद्धि विनाश कर ले। दुर्योधन को नहीं पता चला कि ये ही कारण तेरी मौत का कारण बनेगा। वो क्या करता है कि अपने इस जगह को थोड़ा कवर कर लेता है और जैसे ही वो अपनी माता के सामने जाता है तो माता की जो वो साधना थी इतने बरसों की तपस्या थी या तपस्या ही कह सकते हैं उसको वो पट्टी उतार करके जैसे ही दुर्योधन को देखती है जैसे ही उसकी दृष्टि उसके ऊपर पड़ती है दुर्योधन के ऊपर उसका पूरा शरीर
(1:14:14) वज्र का हो जाता है यानी उसका कोई तोड़ नहीं था आजकल बहुत से कह देते हैं कि भाई इस साधना से तंत्र क्रिया से शरीर में क्या फर्क पड़ सकता है या किसी ऐसी चीज में कैसे हो सकता है यह साइंस है? यह मैं वो चीजें बता रहा हूं जो हुई है। इतिहास के अंदर लिखी हुई है। वेद ग्रंथ कदे नहीं झूठे झूठा सोनार। मैं यहां बैठकर के बड़ी-बड़ी बातें करूंगा। मैं गलत हो सकता हूं। ये चीजें गलत नहीं हो सकती। तो जब उस माता की दृष्टि दुर्योधन के ऊपर पड़ती है तो उसका शरीर वज्र का हो जाता है। लेकिन यहां पर चूक ये हो गई कि जहां-जहां से दुर्योधन ने शरीर को कवर किया था वो शरीर
(1:14:45) कच्चा रह जाता है। और दूसरे दिन जब युद्ध होता है भीम के साथ उसका दुर्योधन का युद्ध होता है तो भीम उसको मारना शुरू करता है तो जहां भी लगती है तो वो वज्र का बन गया तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर भगवान कृष्ण कहते हैं कि इसकी इस जगह पे मार फिर मरेगा। तब जाकर के दुर्योधन की मृत्यु होती है। तो साधना से तो बहुत कुछ किया जा सकता है। लिखे को भी बदला जा सकता है और यह साक्षात है। हमारे ऋषि मुनि इतने गुरु पीर हुए हैं और जिन्होंने बहुत से चमत्कार दिखाए भी है। पर शर्त ये है कि कई बार हम इनको मानते हैं। कई बार नहीं मानते हैं। मानते वही है जाते सोई जाने जाने ना
(1:15:16) पीर पराई रे। राविया जी जिसको लगे कि दर्द उसी को होगा। दूसरे को दर्द नहीं हो सकता। जी क्या सच में ऐसा है कि जो ये एनिमल स्वरूप में देवता होते हैं वो ज्यादा जल्दी सुनते हैं। नहीं नहीं ये खैर मैं तो इसके लिए यही कह सकता हूं कि बात फिर वही आएगी। सबसे ज्यादा आपके भाव के ऊपर है। आप किस प्रकार से मतलब आपके भाव कैसे हैं? आपकी सोच कैसी है? एक धन्ना जी भगत हुए हैं। आपने शायद उनकी जीवनी के बारे में सुना है या नहीं सुना है। तो एक बार उनसे किसी ने मजाक में पूछ लिया कि भगवान को कैसे पाया जा सकता है? तो वो पंजाबी में बोला करते थे। तो वो
(1:15:52) कहते हैं कि तन्या रबनों की पौना एथो पुटना एथि लोना। इसका मतलब होता है कि भगवान की प्राप्ति। तो बस ये एक चावल को बीजने जैसे यहां बीच दिया और यहां काट दिया। बोला इतना आसान थोड़ी है। बोला है इतना आसान और उन्होंने करके दिखाया है। पंडित जी जो थे जिनसे धन्ना को ज्ञान मिला है वो पंडित जी को बार-बार जाकर के तंग करता था। आप क्या करते हो? पूजा पाठ करते हो इससे क्या होगा? भगवान मिलेगा तो क्या होगा? पंडित जी उससे पीछा छुड़ाना चाहते थे। हालांकि सालों साल पंडित जी उस मंदिर की पूजा कर रहे हैं। सुबह शाम आरती कर रहे हैं। लेकिन वो चीज उनको प्राप्त नहीं हुई
(1:16:20) जो धनन्ना भगत को प्राप्त हो गई। जब पंडित जी को परेशान किया तो उन्होंने पीछा छुड़ाने के लिए धन्ना से पीछा छुड़ाने के लिए। उन्होंने कहा कि ये भगवान है। तो बोले भगवान से क्या होता है? तो बोला एक बार भगवान खुश हो जाए तो फिर तो जो मर्जी इससे करवा सकता है। तो बोला यार मेरे को दे शालिग्राम था एक तो बोला मेरे को दे। अब पंडित जी सोचे कैसे पीछा छुड़ाया? बोले ठीक है। बोले शालिग्राम तो दूंगा पर तेरे पास दूध देने वाली गाय है वो मेरे को लाकर के दे दे। अब धन्ना भगत गाय भी दे जाता है। पर धन्य के भाव सही थे। जब वो घर पे जाकर के शालिग्राम की उपासना करता है। तो
(1:16:47) बोला कि भगवान आएंगे। कैसे? बोले भोग लगाना भगवान आ जाएंगे। तो वो थाली लेकर के बैठ जाता है। अब जििद लग गई कि आप प्रभु आओगे तो मैं खाना खाऊंगा नहीं तो नहीं खाऊंगा। अब प्रभु को भी पता था कि इसके भाव सच्चे हैं। यह मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा लेकिन इसकी भक्ति जो है, इसकी साधना जो है वह कम नहीं होगी और साक्षात भगवान प्रकट भी हुए हैं। तो ये एनिमल किसी भी रूप में आप देख लो किसी भी रूप में अभी मैंने जैसे आपको बताया कि आंखों के ऊपर पट्टी थी तो ये भी साधना थी। भाव जरूरी है। सबसे बड़ी जैसे एनिमल स्वरूप है ना जैसे गणेश जी है।
(1:17:17) नरसिंह भगवान है। तो कहते हैं कि ये जो भगवान के स्वरूप है इनकी उपासना करने से ये जल्दी मान जाते हैं। गणेश जी जो है ना यह एक तो रिद्धि सिद्धि के मालिक हैं। हम आपने कई जगहों पे बड़े शॉप पे बड़े मॉल में या देखा भी होगा रिद्धि सिद्धि लिखा भी होता है। गणेश जी जो है रिद्धि सिद्धि के मालिक हैं। साक्षात वही बात फिर आएगी। विघ्न हरण मंगलकरण गणनायक गणराज प्रथम निमंत्रण आपको पूर्ण करो। सबको सबसे पहले इनकी तो पूजा की जाती है। इनको वरदान भी है। और साक्षात जो शक्ति थी मां पार्वती है उन्होंने इसको रक्षक के रूप में भी किया। तो यह हमारी रक्षा भी करते हैं और
(1:17:53) जब हम इनकी आराधना करते हैं तो यह बात सत्य है कि जैसे आप भगवान विष्णु की उपासना करते हो, ब्रह्मा जी की करते हो तो उनसे ज्यादा रिद्धि सिद्धि के मालिक हैं। स्वयं लक्ष्मी माता इनके साथ है तो गणपति जी की आप जब उपासना करते हो तो इनकी कृपा जरूर बनती है। बसशर्त ये है कि भाव सभी के अच्छे होने चाहिए। इनका भी तंत्र रूप है। जैसे उच्चिष्ट गणपति हेरम स्वरूप यह स्वरूप कौन से हैं? उच्चिष्ट गणपति के बगैर तो तंत्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती। क्यों नहीं की जा सकती? कि उच्चिष्ट गणपति फिर वही बात आएगी कि आपके रक्षक ही उचिष्ट गणपति बनते
(1:18:29) हैं। जब आप तंत्र की क्रिया करते हो, तंत्र में साधना करते हो। 10 महाविद्याओं को सिद्ध करने की कोशिश करते हो। उनसे सिद्धियां महासिद्धि अब सिद्धियां महासिद्धियां सिद्धि के मालिक कौन है? रिद्धि सिद्धि के मालिक हैं। रिद्धि सिद्धि के तो इनके साथ है। मां लक्ष्मी इनके साथ है। तो उच्चिष्ट गणपति जो है रक्षक के रूप में जैसे जो स्वयं मां शक्ति ने उनको ये मतलब एक तरीके से वो ओपोरर्चुनिटी दी चांस दिया कि मैं स्नान करने जा रही हो तो तुम कोशिश करना कि यहां कोई आ ना सके। तो जब आप यह क्रिया करते हो तो जब आप उच्चिष्ट गणपति जी जैसे उड़ीसा में इनकी बहुत
(1:19:04) ज्यादा पूजा होती है। जी तो जब आप ये क्रिया करते हो तो ये रक्षक के रूप में होते हैं। आपकी रक्षा भी करते हैं। आपको रिद्धियां सिद्धियां भी दिलाते हैं। आपको वरदान भी मिलते हैं। तो उचित गणपति का तो बहुत बड़ा महत्व है। कैसे करते हैं ये उपासना? मतलब क्या मैंने सुना है झूठा भोग लगता है। लोग बोलते हैं कि झूठा भोग लगाना चाहिए। लेकिन यहां पर फिर वह बात आएगी। थोड़ा सा इसको समझना पड़ता है। जैसे आपको पता होगा भगवान राम जी ने शबरी के बेर खाए थे। भगवान राम जी ने शबरी के बेर खाए थे। तो लक्ष्मण जी नाराज हो गए। अब शबरी क्या कर रही है? शबरी उस बेर को
(1:19:39) पहले खुद खाती है और फिर भगवान राम को देती है। अब हमारी आंखों से देखा जाए तो हमें वो झूठन लगेगी। हमारी आंखों से अगर देखा जाए तो झूठन लगेगी। जाहिर सी बात है कि पहले मैं खा रहा हूं फिर किसी को दे रहा हूं तो वो झूठा हो गया। लेकिन शबरी का जो भाव था वो भाव ये था कि कहीं बेर खट्टा ना हो। कहीं भी कड़वा ना हो मीठा होना चाहिए। तो उस भाव से यदि आप उस भगवान की उच्चिष्ट गणपति की उपासना करते हो तो गारंटेड है ये कि आपको फल मिलता है और जब आप यह सोच करके करते हो कि मैं झूठा भोग लगाऊंगा तो यही गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। मेन चीज वही
(1:20:13) आएगी कि आपके भाव शुद्ध होने चाहिए। और जब भी आप ये क्रियाएं करते हो ये क्रियाओं के अंदर वचन भी आपसे लिए जाते हैं। जब आपके पास सिद्धि या मासिद्धि आती है तो ये वचन भी लिए जाते हैं कि जहां तक हो सके जरूरत पड़ने पर किसी का भला करना है। यदि आप गलत करते हो पहली बात तो जो सच्चा साधक होगा वो गलत नहीं करेगा। जैसे ये सब हाथ की सफाई वो सब चीजें मैंने दिखाई है वो सब ऐसा ही है। कुछ है नहीं इन चीजों के अंदर। तो अच्छा करना चाहिए। ये कहने का मतलब जी बिल्कुल जी मुझे ये बताएं कि हम जैसे अभी काला जादू मां काली के बारे में हम इतनी बात कर रहे हैं लेकिन लोगों को शायद
(1:20:48) पता नहीं है कि कृष्ण मां काली के मेल स्वरूप है। क्या ये सच है? ये मैंने कहीं सुना है कि कृष्ण मां काली के स्वरूप है। कहते हैं कि काली और कृष्ण एक ही है। हां। इसमें पता क्या है? कृष्ण है। पहले आप उनको देखो। कृष्ण क्या है? त्याग की मूर्त है। एक जन्म कहां होता है? जेल के अंदर होता है। माता-पिता से दूरी बन जाती है। यशोदा जी के पास जाते हैं वहां भी नहीं रह पाते हैं। प्रेम की मूरत है। त्याग की मूरत है। प्रेम की मूत है। बलिदान की मूरत है। ज्ञान की मूरत है। सीधे रस्ते पे भेजने की है। अर्जुन को कितना ज्ञान दिया? कृष्ण जी ने। तो कृष्ण जो है ये तो एक
(1:21:28) प्यार का भाव है। अब बात आती है माता काली की तो वो उग्र स्वरूप है। रक्त बीज बद कारण माता सदा भक्त जन के सुखदाता। रक्त बीज को तो मारने वाली है लेकिन भक्तों को सुख देने वाली है। अब बहुत से लोग हैं जो काली के स्वरूप से डरते भी हैं। बहुत से लोग डरते भी हैं कि हां काली माता का ये स्वरूप है। लेकिन मां की जब आप आराधना करते हो तो वो रक्त बीज को ही मारने वाली है। भक्तों को मारने वाली नहीं है। तो कृष्ण और काली वैसे एक नहीं है। बोलते हैं इसको एक स्वरूप है। ये क्या हुआ? क्या था कि राधा जी जो थे राधा जी की शादी होती है जिनसे उनकी शादी होती है उन्होंने स्वयं
(1:22:06) भगवान विष्णु से ये वरदान लिया था राधा जी की शादी होती है राधा जी की शादी होती है वो ना मेल होते हैं ना फीमेल होते हैं जिनसे शादी होती है। अच्छा उनको वरदान था कि मैं राधा जी के साथ ही शादी करूंगा। तो जब उनकी शादी होती है तो कृष्ण भगवान जो थे वो राधा से एक भाव तो था ही उनका आपस का एक भाव था। तो जब वो उस भाव रूप में राधा जी के पास होते हैं तो वहां पर राधा जी की रिस्पेक्ट बचाने के लिए कृष्ण जी ने क्या किया अपने आप को काली के रूप में दर्शाया तो वहां से इनको एक बोलने लग गए हैं और राधा जी तो वैसे आपको पता ही है कि वो तो
(1:22:46) एक जो शादी जो थी ना वो एक वरदान था एक और वो शादी किससे होती है शादी वो शादी जो होती है यह भगवान विष्णु के ही सेवक थे और उपासना करते हैं और वह बोलते हैं कि मेरी इच्छा है कि मां लक्ष्मी से क्योंकि राधा जो थी स्वरूप वही उन्हीं का था कि इनके साथ मेरी शादी हो तो भगवान बोले कि यह असंभव है। फिर उन्होंने दृढ़ संकल्प किया दृढ़ तपस्या की और उसके बाद वरदान लिया तो तब उन्हें वरदान तो मिला लेकिन उन्हें यह था कि तू ना औरत रहेगा और ना तू मेल और फीमेल दोनों में से कोई नहीं होगा। वो मंजूर है मुझे। बोला ना मतलब कहने का मतलब कि उनका यह भाव
(1:23:22) था कि मैं राधा को उस दृष्टि से नहीं देख रहा हूं। पत्नी की दृष्टि से नहीं देख रहा हूं। मेरा एक भाव है प्रभु कि मैं जो आपके 24ों घंटे पास है या सब कुछ है तो मैं किसी रूप में उसकी भक्ति कर सकूं या किसी रूप में उसकी आराधना कर सकूं या अलग-अलग इंसान के जैसी जन की आत्मा वैसे भय परमात्मा आप जिस रूप में उनको सिमरोगे जिस रूप में आप उनकी उपासना करोगे जिस रूप में आप चाहोगे वो उसी रूप में आपको दर्शन देंगे। जी कई लोग काल भैरव को शराब पिला के भी खुश है। कई मांस खिला के भी खुश है और कई भूखे रह के भी उसे खुश कर लेते हैं। गुर जी आज का एपिसोड बहुत बहुत ही सुंदर
(1:23:57) था और कई सारी चीजों पे हमने बात करी। एक बीच में आपने बात करी थी पतिप के लिए। अगर हमारे ऑडियंस के लिए आप कोई टिप देना चाहें। मान लो किसी पे हो गया है या कोई ऐसे आप कह रहे हैं कि ऑफ कैमरा भी आपने कहा कि बहुत सारे लोग आपके पास आते हैं कुछ-कुछ गलत चीजें करवाने के लिए यू नो समबडी वांट्स समवनंस हस्बैंड किसी को किसी हस्बैंड चाहिए किसी को किसी लड़की को कोई लड़का चाहिए बड़ी जल्दी उनको प्रेम हो गया तो बस चाहिए तो अगर ऐसा किसी के ऊपर कुछ किया कराया है तो कैसे उसको काट सकते हैं या कोई अगर ऑडियंस के लिए आप यूज़फुल टिप दे सकते हैं तो एट दी एंड आप बताएं।
(1:24:37) हां बिल्कुल इस पता क्या है रवि जी जैसा मैंने [गला साफ़ करने की आवाज़] बताया भी था बहुत बार ऐसा होता भी है। कोई हस्बैंड के लिए गलत होता है। कोई वाइफ के लिए होता है। कोई लड़की के लिए कोई लड़के के लिए तो वो क्या करते हैं कि कोई गलत चीजों का इस्तेमाल करके उनकी हंसी खेलती जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। चाहे वो शादीशुदा हो और कई बार हम सच्चे दिल से किसी को चाहते हैं तो उसमें भी दिक्कत आ जाती है या हमारी वजह से उसमें दिक्कत आ जाती है। कोई थर्ड पर्सन लाइफ के अंदर आ गया। उसने कुछ गलत करवा दिया तो उससे भी दिक्कत आ जाती है। इन चीजों से
(1:25:05) कैसे बचा जा सकता है और या इनके लिए खुद अगर कोई उपाय करना चाहे तो क्या उपाय है? सबसे पहले तो ये तो वैसे सोमवार के दिन होता है लेकिन फिलहाल सावन चल रहा है तो बहुत ही अच्छा है क्योंकि सावन महीने का भी बहुत बड़ा महत्व है। साक्षात माता सती जो थी वो अपने आप को राजा दक्ष के यज्ञ में आहुति देती हैं और वहां पे उनकी कामना थी कि मुझे हर जन्म में भगवान शंकर ही मिले। दूसरा जन्म वो हिमालय राज की पुत्री पार्वती के रूप में भी होती है तब तपस्या करती है तो भगवान शंकर उनको दर्शन भी देते हैं और वरदान भी देते हैं कि इस मास के अंदर सावन के अंदर
(1:25:35) जो कोई सच्चे मन से मेरी उपासना करेगा आराधना करेगा तो उसकी मनोकामना पूर्ण होगी आपको क्या करना है आपको यह एक बहती हुई नदी पानी चलता हुआ होना चाहिए मैदानी इलाकों में तो नहीं मिलते हैं वैसे ढूंढने पे शायद मिल जाए लेकिन मैदानी इलाकों पे नहीं मिलते पहाड़ी इलाके जहां से नदियां शुरू होती है ना तो पहाड़ी इलाकों में मिल जाते हैं शालिग्राम के जैसा जैसे गोल पत्थर दोनों ही किनारे के होने चाहिए। शिव और पार्वती शिव और शक्ति के रूप में एक इस साइड से एक इस साइड से वहां से गोल पत्थर लेने हैं। शर्तें पत्थर टूटा हुआ ना हो बीच में से खंडित ना हो जिसको खंडित बोलते
(1:26:09) वो ना हो। वो दोनों पत्थर लें। दोनों पत्थर लेकर के घर पे लाएं और उनको कच्ची लस्सी से स्नान कराएं। लाल कपड़ा लेकर के आपने अपने घर पे जहां भी पूजा स्थल बना रखा है वहां पर उस लाल कपड़े के ऊपर साक्षात शिव और शक्ति के रूप में उनको विराजमान करें। फिर अपने हाथों से सुबह और शाम उनको भोग लगाएं। जो भी घर के अंदर रूखा सूखा जो भी बना है अच्छा बना है, बुरा बना है, जो भी बना है, बशर्ते नॉनवेज वगैरह नहीं होना चाहिए। उनका भोग लगाएं। ऐसा तकरीबन तकरीबन आप या तो 16 सोमवार करें और अब तो सावन चल रहा है। लेकिन जब तक ये शायद पडकास्ट होगा तब तक सावन चला
(1:26:42) जाएगा। तो सावन में तो बहुत ही बड़ा महत्व है। 16 सोमवार आप स्वयं करके देखें। आपकी श्रद्धा भावना जरूर होनी चाहिए। उनके अंदर साक्षात शिव और शक्ति का रूप लेकर के माने। 16 सोमवार के बाद दोनों को लाल कपड़े में बांध करके गांठ बांध करके और कोई पानी ऐसा हो जहां पर ठहरा हुआ चलता पानी नहीं होना चाहिए। जैसे या तो झील का पानी होता है या कई जगह पे नदी तालाब सूख जाते हैं तो पानी ठहरा होता है। उस जगह उनको आप जल प्रवाहित करें। आप स्वयं देखेंगे कि गुरु महाराज की कृपा से एक नहीं बल्कि हजार गुना आपस के अंदर प्रेम आपस के अंदर भाव आपस के अंदर एक दूसरे की
(1:27:15) रिस्पेक्ट बहुत कुछ बढ़ेगी। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद है गुरिया जी। आप आए और आपने कई सारी बातें करी। जैसे [गला साफ़ करने की आवाज़] मैंने ऑडियंस को शुरू में ही बताया था कि हम तंत्र के बारे में बात करेंगे। लेकिन थोड़ा सा डीप जाके आपने हर चीज को ना डिकोड किया है। हर चीज क्यों की करी जाती है? पहले क्यों की जाती थी? क्यों शुरुआत हुई थी? और अब लोग उसका कैसे गलत फायदा उठा रहे हैं और नहीं करना चाहिए। वह भी आपने बताया। तो जैसे पवन जी ने कहा है कि ना ही करें यह सब। यह सब करने से सब कुछ गलत ही होता है। गलत चीजों में ना जाएं। कुछ ना करें। किसी का नुकसान
(1:27:53) ना करें। और जिसको भी पवन जी से बात करनी है, पवन जी से आपको कंसल्टेशन करनी है, हमने डिस्क्रिप्शन में उनका नंबर वगैरह सब कुछ दिया है। प्लीज गेट इन टच विथ हिम। एंड आपके जो भी ओपिनियन है हमें कमेंट सेक्शन में बताएं। और अगर आप चाहते हैं कि पवन जी वापस हमारे शो पर आए। वापस हम उनके साथ एक एपिसोड करें बढ़िया सा। ही इज़ समंदर है जैसे हम कह रहे हैं कि गोरिया जी समंदर है नॉलेज का और काफी कुछ हम उनसे ले सकते हैं। इस बार जो बात करी है वो तो मेरे ख्याल से बूंद बराबर होगी। सो थैंक यू अगेन। बहुत-बहुत धन्यवाद है आपका। बहुत-बहुत धन्यवाद आपका भी इतना इज्जत मान
(1:28:33) सम्मान देने के लिए। बहुत-बहुत थैंक यू। थैंक यू सो मच। [संगीत]
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