Saturday, August 29, 2026

Kailash's SHOCKING Secret: Shambhala Mystery, Kalki Avtar & Astral Travel | Sanjiv Malik | EP 115

Kailash's SHOCKING Secret: Shambhala Mystery, Kalki Avtar & Astral Travel | Sanjiv Malik | EP 115

Author Name:Supertalks by themovingship

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Transcript:
(00:00) व्हाट इज शंभाला? और वहां पर आपने क्या किया? शंभाला अपने आप में इस धरती से दूसरे ग्रहों को कनेक्ट करने वाला एक बहुत ही पावरफुल हाई एनर्जी बॉर्डर है। अंदर एक क्रिस्टल का गुफा जैसी थी। उस गुफा में जैसे एंटर किया तो वहां पर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे सामने मेरी पूरी मेमोरीज को अनफोल्ड किया जा रहा है। कालचक्र टेक्स्ट में भी संभाला के बारे में कई बार लिखा है कि जो मैत्री बुद्धा आएंगे वो शंभाला से आएंगे। और जो हिंदूज़्म में मैत्री बुद्ध है वो है कल्कि अवतार। एक ऐसी जगह है जो टाइम के पार है। आप एक सेकंड में अपना पास्ट और एक सेकंड में
(00:33) अपना प्रेजेंट और एक सेकंड में अपना फ्यूचर ऐसे देख लेते हो। इसकी लोकेशन क्या थी? देखो प्रैक्टिकली कहूं तो ये कैलाश के डायरेक्शन में ही था। ऐसा लग रहा था कि सारा कंट्रोल ओवरऑल मास्टर इज द सुप्रीम महाकाल यानी कि भगवान शिव। ट्रेवल। ये आपने पहली बार कब किया था? मेरी एज रही होगी लगभग 14-15 साल की। गजब का अनुभव था। ये कोई भी अपनी लाइफ में फॉर रियल एक्सपीरियंस कर सकता है। नमस्ते। नेपाल फ्लड्स बहुत ही बुरे थे। जब विजुअल्स देखे अंदर से रोक कांप गई। सिर्फ परिवार ही नहीं बल्कि पूरे के पूरे घर उजड़ गए।
(01:17) टू सपोर्ट ऑल द पीपल जो वहां पर इफेक्टेड हुए हैं। हमने डिसाइड किया है कि इस वीडियो का एक सिग्निफिकेंट प्रोपोर्शन जो हम अर्न करेंगे वो हम नेपाल फ्लड्स में डोनेट करेंगे। और मुझे लगता है सुपर डॉग्स के लिए ब्लेसिंग है क्योंकि पिछले साल हमने पंजाब फ्लड्स में भी डोनेट किया था। अभी रिसेंटली आसाम फ्लड्स और अब नेपाल क्योंकि मुझे लगता है नेपाल भारत से अलग नहीं है। हमारे पशुपतिनाथ वहां पर हैं। और दिस इज अ मैसेज टू ऑल द पीपल ऑफ नेपाल। इंडियन गवर्नमेंट ने भी सपोर्ट भेजा है और एज ए कॉमन सिटीजन यह मेरी की तरफ से नहीं बल्कि हम सबकी तरफ से दिस इज अ स्मॉल
(01:54) जेस्चर जो हुआ है वह दर्द तो हम आपसे नहीं ले सकते पर जो हम कर सकते हैं अपनी तरफ से इंडिया स्टैंड्स विद नेपाल और अगर कुछ नहीं हम सब इस वीडियो के माध्यम से उन सभी डिपार्टेड सोल्स के लिए प्रे करेंगे ओम शांति एस्टल का एक्सपीरियंस करवाऊं थोड़ा करा प्रैक्टिकली है ना में करेंगे शुरू करते हैं हां जैसे आपको हां मतलब लोगों को अगर करवाना है अगर कोई पूछता है तो क्या-क्या मेथड होते हैं क्यों किया जाता है कैसे किया जाता है क्योंकि यही रियल एक्सपीरियंस में ये है कि लोग अपने आपको एक सोल रूप में अनुभव कर पाएं कि मैं शरीर नहीं हूं मैं शरीर से डिफरेंट हूं ये
(02:37) एक्सपीरियंस ही अपने आप में बहुत बड़ी चीज है और ये एक्सपीरियंस ही हमारी पूरी कॉन्शियसनेस का पूरी सर्च इसका जो आधार है कि मैं शरीर नहीं हूं, मैं आत्मा हूं। यह वाला जो अनुभव है ना यह बहुत बड़ी बात है कि मैं कॉन्शियसनेस हूं और मैं बॉडी से अलग हो सकता हूं। इसको हम एस्ट्र लेवल से एक्सपीरियंस कर सकते हैं। आप ये कह रहे हैं मतलब एस्ट्र लेवल इज़ दिस ओनली कि मैं शरीर को अगर मैं अलग कर पाऊं। अभी तो मैं सिर्फ थ्योरिटिकली लोग कहते हैं ना कि मुझे पता है कि नहीं नहीं शरीर हम थोड़ी हैं। ये तो थ्योरी थ्योरी है ये। प्रैक्टिकली यह शरीर पड़ा हुआ है और ये
(03:08) मैं ऊपर उठ के इसे देख रहा हूं। दिस इज़ एस्ट्रियल ट्रेवल। जब मैं देख रहा हूं तो इसका मतलब डेफिनेटली अब मैं नहीं हूं। अभी तक मैं केवल शब्द बोल रहा था और मेरा अनुभव है कि यह शरीर है और यह मैं हूं। ये अनुभव अपने आप में मिरेकुलस है। मतलब बंदे के अंदर पूरा 360 डिग्री शिफ्ट मार रही है। ऐसा एक्सपीरियंस है ये। ये आपने पहली बार कब किया था? मेरी ऐज रही होगी लगभग 15 या 14 15 साल की। मंदिर में कहीं पर कुछ कर रहे थे। मतलब मंदिर में हम लोग मतलब जैसे जब खास तौर पे जब जन्माष्टमी का दिन हुआ करता था तो बड़ी बड़ी सेवा करने का बड़ा उत्साह होता था, जोश होता था चलो भाग
(03:44) भाग के सेवा करें तो उसमें ना तो उसमें मतलब ऐसा था कि इतना थक चुके थे ना पूरा दिन काम कर सेवा लगा पंडित जी को भी लगता था कि बच्चे सबसे ज्यादा काम कर उनको लपेट दो उनको पूरा दिन काम करके इतने थक गए थे शाम को ना ऐसे ही बैठे मंदिर में गणेश गणपति जी के सामने बैठे हुए थे ऐसे में मैं वैसे ही बैठा चलो 5 दो मिनट के लिए थोड़ा ऐसे करके साइड में बैठा और मैं जैसे ही बैठा लगा कि ये खट से शरीर से बाहर और मैं शरीर को पड़ा हुआ देख रहा हूं तो बड़ा हैरानी हो रही है कि भ ये मैं हूं ये ये मैं हूं इट वास सो डिफरेंट इतना हल्का शरीर और इतना आनंद उस उस समय के अंदर ना
(04:19) जो कि सोच से भी बाहर था मेरी सोच में नहीं था मतलब कि इतना ऐसा कैसे हो सकता है और वो जो मैं अपने आप को देख रहा हूं ना मैं मतलब जैसे टच करके देख रहा हूं 15 साल के बच्चे को क्या समझ होती होगी यह क्या है यह क्या है मैं हाथ ऐसे टच करके देख रहा हूं फिर थोड़ा डर भी लगे और जैसे ही डर लगा खट से शरीर के अंदर वापस घुस गया। फिर यह क्या हो गया? दिस बॉडी इज़ जो था मतलब फिजिकल बॉडी वहां पड़ा हुआ है और मैं उससे अपने आप को सेपरेट अनुभव कर पा रहा हूं। ये वन ऑफ द एक्सपीरियंस था जो कि बेहतरीन था। गजब का अनुभव था। ये कोई भी अपनी लाइफ में
(04:53) फॉर रियल एक्सपीरियंस कर सकता है। यस। मुझे लगता है कि जरूर करते होंगे लोग। हो सकता है होता हो लेकिन उनको यह पता ना हो कि यह एस्ट्रल है। मुझे भी बहुत बाद में समझ आया कि वास्तव में एस्ट्र लेवल था। एक और बार में ऐसे बहुत सीरियसली बीमार था। मतलब बहुत भयंकर वाला बीमार था। पूरा शरीर तप रहा था और पूरा दवाई लेकर पड़ा आराम से पूरा शरीर में इतनी इतनी हीट थी कि जैसे अब उस समय भी ऐसे ही हुआ कि मतलब एकदम से कहां तो पूरा बॉडी तप रहा है और कुछ सेकंड में ही अनुभव किया कि मैं एकदम नॉर्मल हूं और मैं तो मुझे ये शरीर बिना अभी तक मैं इतना उसको कंबल वंबंबल लपेट के
(05:27) क्यों पड़ा हुआ है मेरा शरीर? ये समझ में नहीं आ रहा। एंड जस्ट आई एम लुकिंग एट फ्रॉम फ्रॉम माय बॉडी फ्रॉम आउटसाइड। ऐसे हवा में तैरता हुआ मैं खुद को देख रहा हूं और शरीर नीचे पड़ा हुआ है। यह अनुभव था लगभग मेरी शायद 23 24 साल की रही होगी तब तब बोर का अनुभव है ये। ये अपने आप होता है ये क्योंकि जैसे आप बता रहे हैं आपको भी कॉन्शियसली अब यू वर नॉट अवेयर। हां। जब आप अवेयर नहीं है तो हुआ क्यों? यह पिछले जन्मों की स्मृतियां भी होती हैं। आपकी चेतना इतनी हाई लेवल की है। यह भी बताती है आपको कि आप इस एक्सपीरियंस के लिए आपके लिए कोई नया एक्सपीरियंस नहीं
(05:58) है। क्योंकि जब मृत्यु भी होती है तब भी चेतना अलग ही तो होती है ना। बॉडी ये पड़ा और ये मैं हूं। अनुभव तो यही होता है ना। लेकिन उस समय अलग हो चुकी होती है और कोड भी अलग हो चुकी होती है। मतलब फिजिकल और आपकी जो एस्ट्रल बॉडी होती है उनके बीच में कनेक्शन पूरी तरह कट हो चुका है। वो तो मृत्यु हो गई। वो तो डेथ हो गई और इरिकवर रिकवरेबल प्रोसेस है। लेकिन यह रिकवरेबल है। यहां तो आप देख रहे हो और आप इंटेंशन डालते हो। अरे नहीं नहीं मुझे तो वापस जाना है। एंड जैसे ही आप सोचते हो वापस एंटर कर जाते हो अपनी बॉडी के अंदर। आज हम इसको रियल करके देखेंगे। आप आज सबको
(06:31) शरीर से बाहर लेकर आ जाओ और आज करके देखते हैं। परफेक्ट। उससे पहले मैं आपके कुछ और अनुभव जानना चाहता हूं क्योंकि हमने एपिसोड अपने शो पर अक्सर बात हिमालय की की है। कैलाश की की है और जब भी कैलाश का जिक्र आता है तो संभाला कहीं ना कहीं आ जाता है। आपकी कुछ महीने पहले मैंने एक वीडियो देखी जिसमें आपने कहा कि मैं संभाला गया। क्या है आपका एक्सपीरियंस संभाला का? व्हाट इज संभाला? और वहां पर आपने क्या देखा शभाला अपने आप में इस धरती का मैं कहूं कि इंटरस्टाइलर गेट अवे जिसको बोलते हैं ना
(07:16) इस धरती से दूसरे ग्रहों को कनेक्ट करने वाला एक पोर्टल है। एक बहुत ही पावरफुल हाई एनर्जी पोर्टल है। और इसकी कोई फिक्स लोकेशन भी नहीं है। ऐसा जरूरी नहीं कि मैं कहूं कि यह फिक्स इसी जगह पर है। वास्तव में आपको अपनी एनर्जी को इतना हाई करना पड़ता है उसकी फ्रीक्वेंसी से कनेक्ट होने के लिए। ओके। ठीक वैसे ही जैसे आप अपने मोबाइल में रिसीवर को कनेक्ट करते हो तो किसी भी व्यक्ति से बात कर सकते हो। हम तो आपकी जो भी फ्रीक्वेंसी है वो शिफ्ट हो जाती है। चेंज हो जाती है या कनेक्ट करती है एक पर्टिकुलर से। हम तो आप भौतिक रूप से कहीं नहीं जा रहे हो।
(07:50) अगर वैसे कहो तो पढ़े तो आप अपने घर के बेड पे ही हो। लेकिन आपकी कॉन्शियसनेस इतनी पावरफुली अपलिफ्ट करती है कि आप उस हायर डायमेंशन को फील कर पाते हो। राइट? तो संभाला का जो मेरा अनुभव है पहली बात तो मैं आपको बताऊं कि मेरे इसके लिए मेरे गुरुदेव से जब मैंने प्रार्थना करी क्योंकि मैं अपने श्री परमहंस सतगुरु जी की आज्ञा के बिना कोई काम नहीं करता। मैंने गुरुदेव से जब प्रार्थना करी मैंने कहा प्रभु यह संभाला जाने का एक बार भाव है। क्या करोगे? पहली बात इंटेंशन सेट करो। उनका सीधा आया इंटेंशन सेट करो। क्यों जाना चाहते हो? मैंने कहा जी हायर
(08:22) गाइडेंस लेने के लिए सुप्रीम विडम प्राप्त करने के लिए तो गुरुदेव ने कहा ठीक तुम्हारा अनुभव क्योंकि तुम्हारा तुम एक पहले साधु रह चुके हो अनेक जन्मों में तो तुम्हारे अनुभव के हिसाब से सूट करता है लेकिन याद रखो आज की तुम्हारी फ्रीक्वेंसी उस फ्रीक्वेंसी से डिफरेंट है तो यू हैव टू प्रिपेयर योरसेल्फ टू बी देयर यानी एक इतनी हायर डायमेंशन की प्लेस पर जाने के लिए तुम्हें खुद को उसके लिए तैयार करना पड़ेगा मैंने कहा जी डेली मेडिटेशन तो आपकी कृपा से होता है लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने कहा कि नहीं इतना ही नहीं और भी बहुत कुछ करना पड़ेगा उसके लिए। तो
(08:52) मेंटली अपने आप को प्रिपेयर करना एक पार्ट फिजिकली भी कुछ चीजों में रिस्ट्रेन करना। मतलब कि जैसे हम दिन भर में ऑफिस भी होता है, बाकी काम भी होते हैं। तो थोड़ा उन चीजों से अपने आप को हटाओ। तो कॉन्शियसनेस फैल जाती है ना। भले ही काम है, सेवा है लेकिन फिर भी कॉन्शियसनेस फैली। आपके 10 150 चीज आपके दिमाग में चल रही हैं। तो कहा कि धीरे-धीरे अपने को समेटो। अगले 15 दिन अपने आपको पूरा रेस्ट्रिकशंस में रखो और मिनिमम चीजों से इनवॉल्व हो। तो अपनी कॉन्शियसनेस को समेटो। बिकॉज़ कॉन्शियसनेस को एक अपलिफ्ट बूस्ट चाहिए। तो वो एक पार्ट। तीसरा खानपान के ऊपर जबरदस्त
(09:27) कंट्रोल करने को कि वैसे भी हम लोग कोई ऐसा हमेशा वेज ओवर हो ये फूड ही होता है। लेकिन उसमें भी कि इवन गार्लिक और ये सब भी किसी भी तरीके से अवॉइड करना है हर हालत में। और खाना जहां तक हो सके शुद्ध हाथों से शुद्ध व्यक्तियों के द्वारा बनाया गया हो। मतलब इतनी बेसिक रेस्ट्रिक्शन कि जिससे हमारी कॉन्शियसनेस में तनिक भी ऐसा डाउनवर्ड फीलिंग ना हो। कोई भी ऐसी चीजों हमें नीचे गिरा सके। तो फिर जब खाने पीने पे इन चीजों पे पूरा कंट्रोल किया। फिर एक रात को डिसाइड किया लगभग जैसे 11:30 का टाइम लगभग डिसाइड किया कि रात को एस्ट्र ट्रेवल करेंगे ये वाला।
(09:59) उससे पहले एस्ट्रोवल की हमने बहुत बार अपने शरीर को तैयारी करवाई अच्छे से और तैयारी कराने का मतलब यह प्रोसेस ये प्रोसेस खाना नहीं खाना और ये भी और इसके अलावा भी बहुत कुछ होता है। वो मैं आपको अभी स्टेप बाय स्टेप एस्ट्रल ट्रेवल वाला अगर आप कहते हो तो मैं वो पूरा बताता हूं कि वो प्रोसेस क्या होता है कि एस्ट्र टेल खुद को तैयार कैसे किया जाता है। क्योंकि आप कहीं प्लेन में बैठ के थोड़ी जा रहे हो। आप लेट रहे हो और अपने आप को स्टेप बाय स्टेप इंस्ट्रक्शन देकर अपनी शरीर को एस्ट्रल बॉडी को फिजिकल बॉडी से अलग कर रहे हो। श्योर
(10:29) नाउ दिस प्रोसेस इज एस्ट्रल ट्रेवल सेपरेशन जिसको कहा जाता है। तो इसको मैं अभी कहूं तो अभी या तो फिर बाद इसके बाद आता है। इसके बाद हमला में स्टार्ट कर ही दिया है। हां तो संभाला में अब वास्तव में तो यहां से तो ये है बेसिक तैयारी और साथ में उन्होंने कहा कि परमिशन लेके जाओ। परमिशन क्या है? प्रार्थना करो उन ऋषि मुनियों से, उन हायर सोल से, उन सेंट से, उन संतों से जो वहां पर चला रहे हैं। उस डायमेंशन को चला रहे हैं। वहां के जो एक तरीके से वहां के जो कंट्रोलर्स हैं उनके आगे चरणों में प्रार्थना करो कि मैं आपके दर्शनों के
(11:00) लिए और डिवाइन विज़डम पाने के लिए आपके यहां आना चाहता हूं। प्लीज ग्रांट मी परमिशन। तो उन्होंने बड़ी सॉफ्टली इंटरनल नोड यस आया। मैंने कहा कि गुरुदेव ने कहा मेरी रेफरेंस देके बात करना। नहीं तो तुम्हारी बात नहीं समझेंगे लोग। तो मैं यह कहना चाह रहा हूं एक परमिशन बहुत बड़ी बात होती है। आपकी आपकी चेतना आपकी कॉन्शियसनेस कितनी ऊंची उठी है उस पर डिपेंड करता है बहुत कुछ। फिर यहां से तैयारी उसके साथ-साथ फिर चेतना फिर परमिशन और फिर एक सरेंडर का भाव कि भाई मैं कुछ कर नहीं जा रहा हूं। मैं किसी मैलिशियस इंटेंशन से या नेगेटिव इंटेंशन से नहीं जा
(11:34) रहा। मैं समर्पण के एंगल से जा रहा हूं। मैं तो आपके आगे पड़ा हूं। शरणागत हूं। अब मुझ पर कृपा करना। मुझे ब्लेस करना। क्योंकि कोई ऐसे गुरुदेव ने फरमाया कि ऐसे भी लोग हैं जो जैसे तंत्र इत्यादि जो जानने वाले लोग हैं वह अपनी कॉन्शियसली भी अपनी बॉडी को वहां ले जाकर नेगेटिव इंटेंशन के साथ ले जाते हैं कि वहां के खजाने पर वहां के नॉलेज बेस को हथिया लिया जाए, चुरा लिया जाए। लोगों की मेमोरीज का पूल वहां पर पड़ा हुआ है। लोगों की मेमोरीज का डेटाबेस वहां पर पड़ा हुआ है। उन उसको चुराया जा सकता है। तो एस्ट्रल लेवल पर नेगेटिव चीजें भी काम करती हैं।
(12:08) तो गुरुदेव ने कहा कि उन सब से रक्षा करने के लिए इस पे यहां पर अनेक तरह की प्रोटेक्शन लेयर बनी हुई हैं। तो तुम्हें वो भी क्रॉस करनी पड़ेंगी। तो जब यहां से हमने मैंने मतलब शुरू किया विद परमिशन अपने बॉडी को धीरे-धीरे इससे सेपरेट किया एस्ट्रल बॉडी को और सिर्फ मन में एक इंटेंशन हल्का सा ये डाल के पूरा अपने ओरा को लॉक करके इंटेंशन डाल के कि मुझे अपनी चेतना को ऊपर उठाना है। तो जैसे ही यह यात्रा को आंतरिक रूप से शुरू किया। बस एक इंटेंशन भाव से डाला कि मुझे अपने आप को इस फिजिकल बॉडी से अलग करके मुझे उस डिवाइन डायमेंशन से कनेक्ट होना है जहां
(12:42) मुझे डिवाइन विज़डम मिल सके। और यह इंटेंशन जब डाला तो अपने आप को कुछ ही टाइम में हवा में बिल्कुल झूलता हुआ पाया। अब यह जो स्टेप मैंने बोला यह इतनी सहजता से बोल रहा हूं क्योंकि इसी को बताने में बाद में हम इसको एक्सप्लेन करेंगे। फिलहाल के लिए यह मान लेते हैं कि हम हवा में पहुंच चुके हैं। अब यहां से सिर्फ इंटेंशन काम करता है। जब तक आप इस फिजिकल बॉडी से कनेक्टेड हो तब आप पूरी तरह से शरीर हो। जैसे ही आप फिजिकल बॉडी से अपने एस्ट्रल बॉडी में गए उस समय आप एक सोल की तरह बिहेव करते हो। और सोल के लिए सिर्फ इंटेंशन काम करते
(13:16) हैं। आपको कोई डायरेक्शन नहीं देनी। कोई प्लेन तो चलाना नहीं है कि लेफ्ट लेना है कि राइट लेना है। यू जस्ट हैव टू पुट क्लियर इंटेंशन कि मुझे उस जगह पर जाना है जो मैक्सिमम हाईएस्ट एनर्जी का सोर्स है। और जहां से मुझे डिवाइन विज़डम लेनी है। तो जैसे ही इंटेंशन डाला अपने आप को हवा में झूलता हुआ पाया। और कुछ ही समय में ऐसा दिख रहा है जैसे पूरी धरती से मेरी बॉडी जो है सेपरेट होती है। पहले तो अपना शरीर दिख रहा है। अपना रूम, अपनी बिल्डिंग इत्यादि और फिर धीरे-धीरे अपने आपको ऊपर खड़ा हुआ पाया कि यहां से नाउ फ्रॉम हियर आई कैन जस्ट पुट माय इंटेंशन कि मैं शभाला
(13:46) की तरफ मूव करूं। और उसमें भी कोई ऐसा नहीं है कि आप एक्चुअली उड़ के जा रहे हो और या आपके हाथ ऐसे-ऐसे कर रहे हो। नथिंग लाइक दैट। यू जस्ट पुट एन इंटेंशन हियर यू आर देयर। ऐसा लग रहा है कि जैसे कुछ सेकंड में ही आई एम स्टैंडिंग इन फ्रंट ऑफ़ दैट। द डिवाइन एक ऐसा सिटी है, एक ऐसा दिव्य मतलब मैं उसकी शोभा का बयान करते-करते मेरी आंखें अगर मैं शायद मेरे पास शब्द कम पड़ जाए। एंड इट्स सो ब्यूटीफुल। सो ब्यूटीफुल। ऐसा लगता है जैसे सच में किसी अलौकिक धाम में भगवान के धाम में आप आप पहुंचे हो। उससे कोई कम कंपैरिजन नहीं किया जा सकता। इट इतना ऐसे एक-एक चीज चमक
(14:20) रही है और फिर उसके डायमेंशन चेंज हो रहे हैं। उसके कलर बदल रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि कोई सिटी कभी दिख रहा है, कभी डिसअपीयर भी हो जा रहा है बीच-बीच में। एंड यू जस्ट लुकिंग एट दैट। गुरुदेव ने आंतरिक रूप से फरमाया कि देख यह सारे प्रोटेक्शन है क्योंकि प्रोटेक्शन की वजह से एक आम इंसान अगर कुछ देखेगा तो उसको पल्ले ही नहीं पड़ेगा कि क्या हो रहा है। पर क्योंकि तुमने अपनी प्रार्थना करी है। तुमने इतनी तैयारी करी है। नाउ यू आर हियर। तो फिर वहां पर जो जैसे उसके गेट के सामने पहुंचे तो वो गेट जो है वो एक तरीके का मतलब कोई ऐसा फिजिकल द्वार नहीं है कि
(14:50) बड़ा सा गेट लगा हुआ है और ऐसे खोलोगे तो खुल जाएगा। वास्तव में वो एक कॉन्शियस गेट है। ऐसा लगता है चैतन्य है वो। आपको उस गेट के आगे भी प्रार्थना करनी है कि प्रभु मैं आया हूं और मैं प्रार्थना करके मैं यह हूं। मैं अपना छोटा सा परिचय दो लाइनों का दिया और मैं यहां पर इस इंटेंशन से आया हूं। तो वो गेट भी एक तरीके से कॉन्शियसनेस का गेट है जो खुल रहा है जो आपको अलऊ कर रहा है। और जैसे ही आप एंटर कर जाते हो वो गेट फिर बंद हो जाता है। अभी तक फिजिकली कोई नहीं था। अभी तक फिजिकली नोबडी इस देयर। सिर्फ आप एक स्पेस में है जहां पर एक जगह
(15:18) दिख रही है और है कोई नहीं। पर कॉन्शियसली आपको पता है कि यहां पर अगर मुझे आगे जाना है तो यू आर प्रंग टू अ हायर टू द हायर स्पिरिट राइट और जैसे-जैसे आप उस जगह पर जा रहे हो ना अंदर एक ऐसी डिविनिटी बढ़ती चली जा रही है। ऐसा लग रहा है जैसे शरीर अपनी जो सोल है जो कॉन्शियसनेस है वो और लाइट होती जा रही है एंड और फ्रेगरेंस बढ़ रही है। इतनी ब्यूटीफुल है वहां का मतलब जो एटमॉस्फियर है ओवरऑल कहें तो क्योंकि हमारी जो चेतना के जितने डायमेंशन को हम जानते हैं। आंखें कुछ देख रही हैं। लेकिन आंखों के सामने जो दिख रहा है ना वो वो सूक्ष्म जगत की बात
(15:50) है। वो डिवाइन से भी डिवाइन होता चला जा रहा है। वो इतनी सी नहीं है कि कोई लाल पीले कलर नजर आ रहे हैं। कलर तो आपको यहां पे भी दिख जाएंगे बाहर की दुनिया में भी। लेकिन वहां जो दिख रहा है ना इस आंखों से भी कुछ बियों्ड है जो इतना सूदिंग है और कहीं ना कहीं वो आपकी आंखों को और कानों में एक ऐसी फीलिंग सी मधुर सा संगीत सा गूंजने लगा है जो कि जैसे ऐसा लगता है जैसे अनाहद नाद की गूंज बड़ी जोर से ओ ऐसे गूंज रहे हो। तो एक डिवाइन साउंड, डिवाइन विज़ और फिर डिवाइन फ्रेगरेंस। तो हमारी जो बाहर की इंद्रियां हैं वही पर्सीव करती हैं। तो उनसे भी पर्सीव हो
(16:25) रहा है कि जैसे आप किसी ऐसी जगह पर हो जो बहुत फ्रेगरेंस से भरी हुई है जो कि सामान्य यहां से मेल नहीं खाती। मेरे को नॉर्मली फ्रेगरेंस का शौक नहीं है। लेकिन फिर भी मतलब ऐसा था कि कुछ ऐसा है दिव्य जो शायद हमारी सोल को अंदर तक जाके झकझोर दे रहा है कि भ तेरा यू आर पार्ट ऑफ इट। ऐसा लग रहा है कि मैं यहां पहली बार नहीं आया हूं। मैं यहां पे बार-बार आया हूं और यह मेरा अपना घर है। समथिंग लाइक जैसे अपनापन जैसे फील होता है ना कि जैसे वेलकम टू द गैंग यू नो आप अपने घर में आइए। अपने घर में आपका स्वागत है। तो ऐसी कुछ फीलिंग आ रही है। पूरा सिटी ऐसा लग रहा है जैसे
(16:56) एंब्रेस कर रहा हो वो और वहां पर अब अब जो अब जैसे आप उसमें एंटर कर रहे हो तो वहां पर दिख रहा है कि अलग-अलग ना चेंबर जैसे बने हुए हैं। एनर्जी के चेंबर बने हुए हैं। ऐसा लग रहा है कि वहां पर कुछ डिवाइन टास्क परफॉर्म किए जा रहे हैं। कुछ हायर बीइंग्स के द्वारा। अब किसी किसी जगह पर कोई लोगों का आना मतलब लोग का मतलब फिजिकली कोई लोग नहीं दिख रहे हैं। बट देयर आर बीइंग्स ऑफ लाइट हु आर मूविंग फ्रॉम हियर टू देयर। वो अलग-अलग प्रकाश के चिन्ह जो हैं आपको दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे आप उनका ओरा दिखाई पड़ता है बाहर-बा ऐसा दिखता है कि जैसे एक डिवाइन ब्यूटी का एक
(17:27) मतलब एक ओरा चला चला जा रहा है। अलग-अलग कलर्स हैं। उसके अंदर किसी में स्पार्कलिंग वाइट लाइट है। किसी में गोल्डन लाइट का है। किसी में पिंक या वाइटिश इस टाइप की लाइट है। लाइट किसी शेप की थी। लाइट किसी शेप की यस कोई शेप लेके जा रही है। जैसे ऐसा लग रहा है कि जैसे हम जिनको अगर हम जानते हैं ऋषि मुनि टाइप में तो इस टाइप की कोई सेंटली फिगर है जो जा रही है। कोई योगी हैं जो ऐसे बैठे-बैठे ही उड़े चले जा रहे हैं हवा में। ऐसे आप उनको देख पा रहे हो। तो अब जैसे ही और वहां पर आपकी कोई विज़न मतलब आप किसी से पूछने के लिए नहीं बैठे हो कि कोई पूछ रहा हां जी
(17:58) भाई साहब ये क्या हो रहा है? मतलब देयर इज़ नोबडी लाइक दैट। तो हो रहा है। कुछ हो रहा है। आपको सिर्फ इंट्यूटिव नॉलेज आ रही है। अगर मैं इंटेंशन डालता हूं ना कि अच्छा ये क्या हो रहा है? तुरंत मेरे मन में कुछ नाम आता है। एक अंदर से कुछ एक नॉलेज इंट्यूटिव नॉलेज अंदर से आ रही है कि ये जो हो रहा है ये जो अभी-अभी जो तुमने देखा ये बीइंग्स को एक बहुत बड़ा एक हवन टाइप का या एक यज्ञ टाइप का परफॉर्म करने जा रहे हैं एक खास जगह पर जहां से ये लोग अर्थ के डायमेंशन को शिफ्ट करने की के लिए जो तैयारी चल रही है ये उस जगह पर कुछ हवन
(18:28) करने जा रहे हैं। ये काइंड वो मैसेज कैसे आया? यह मैसेज अंदर से ही आ रहा है। मैं वही बोल रहा हूं ना कि कुछ उस वक्त ये इंट्यूटिवली आपको मन में आ रहा है कि शायद यह वहां जा रहे हैं। ऐसा हो रहा है। ये वहां पर जा रहे हैं जो कि अर्थ का डायमेंशन चेंज करने के लिए जो हवन चल रहे हैं ये लोग ये लोग कर रहे हैं। ऐसा अब जैसे हम लाइट की शेप कह रहे हैं तो इस तरह से लाइट दिख रही है और एक ऐसा शेप ऐसा। मतलब आप इसको ऐसे ही कह सकते हो। लेकिन इसमें भी जैसे एक ना डॉट डॉट डॉट डॉट ऐसे बने हुए हैं। एक शेप जैसी बनी हुई है। मतलब जैसे अगर मैं कहूं कि मेरे को
(18:56) फेस नहीं दिख रहा। लेकिन मेरा ओरा दिख रहा है समझो किसी व्यक्ति का एक ओरा जैसा दिख रहा है तो आपको कोई चेहरा नहीं नजर आ रहा डायरेक्टली हां अगर आप किसी पर गौर करते हो तो वो भी दिखना शुरू हो जाता है मतलब अगर आप किसी व्यक्ति पर किसी पर बहुत ध्यान से देखो कि कौन है ये तो फिर वो एक शेप आपके लिए ले लेते हैं क्योंकि आपके नेत्र अभी उन्हीं को प्रसीव इसी रूप में करते हैं तो आपके लिए वो एक शेप सी ले लेते है आपने ऐसे देखा किसी हां तो वहां पर जैसे मैंने बताया ना कि वह एक सा एक योगी जैसे दिखाई पड़ रहे है तो मैंने जस्ट ऐसे प्रार्थना करी कि मुझे डिवाइन विडम
(19:25) चाहिए मुझे प्लीज यहां यहां पर मैं सरेंडर कर रहा हूं और मुझे डिवाइन विज़डम दीजिए जिसके लिए मुझे धरती पर भेजा गया है। तो उसके उस समय जब मैंने प्रार्थना करी तो मुझे एक इशारा किया गया कि यू मूव ऑन टू दिस डायरेक्शन ऐसे जैसे कोई कॉन्शियसनेस को अंदर से गाइड कर रहा है तो वहां से जाके देख रहा हूं कि वहां एक मंदिर टाइप की कोई जगह बनी हुई है और इतना वो विराट है और इतना उसके डायमेंशन समझ में नहीं आ रहे कि आप कहां से प्रवेश कर रहे हो और कहां उसका उसका कितना बड़ा आकार है। अंदर जैसे जाया जा रहा है तो वहां पर असिस्टेंस लोग उपलब्ध हैं। और लोग जो हैं मतलब
(19:57) असिस्टेंट जो देने वाले जो लोग हैं जो सब जो गाइडेंस दे रहे हैं अब वो भी डिवाइन बीइंग्स ऑफ़ लाइट हैं वो कुछ बोल नहीं रहे हैं। मतलब हल्का सा इशारा करते हैं और आपको लगता है कि बस यू हैव टू मूव लाइक दिस। और जैसे-जैसे वहां जा रहे हैं ना आपकी कॉन्शियसनेस का जैसे स्कैनिंग नहीं की जाती तो स्कैनिंग की जा रही है। पहले आपके सारे इमोशनल लेवल पर स्कैनिंग हो रही है कि आपकी इमोशन में कोई ऐसा नेगेटिव इंटेंशन तो नहीं है जो यहां पर आप आए हो। किस इरादे से आए हो? फिर आपको मतलब हार्ट लेवल पर आपकी फीलिंग्स को चेक किया जाता है डीप लेवल पर जाकर के कि जैसे
(20:29) कोई आपको अंदर से चेक कर रहा है कि देख रहा है टेस्टिंग हो रही है आपको अंदर जाने से पहले मेटल डिटक्टर से जैसे बाहर होता है। तो यहां इंटरनल स्कैनिंग चल रही है। और तीसरा फिर आपके भाव क्या है और आपके इमोशंस क्या है? और फिर आपकी एनर्जी का लेवल है या परमिशन है या नहीं है। यह सब आपकी स्कैनिंग हो रही है। और जैसे ही स्कैनिंग कंप्लीट होती है फिर अंदर जो है वो जो जो डिवाइन पोर्टल जैसा बना हुआ है वो मुझे वहां से दिखाई दे रहा है। एंड इट्स मतलब मार्वलस वो इतना सुंदर है कि उसके हर कोना अपने आप में ऐसा लग रहा है कि जैसे कहने को एक मंदिर है वो। लेकिन
(21:00) वहां एक पूरा इंटरडाइमेंशनल स्पेस है। ऐसा लग रहा है कि जैसे अलग-अलग जैसे लोक से ऋषि मुनिगण या अन्य दिव्य आत्माएं वहां पर आ जा सकती हैं। बड़ी आसानी से वो ऐसा पोर्टल है और जहां से ऐसा मतलब काइंड ऑफ जैसे हमने आ रहे यहां समझो कि एक जैसे एयरपोर्ट है एयरपोर्ट पे ये प्लेन जा रहा है कि ये ऑस्ट्रेलिया की तरफ जा रहा है या ये रशिया जा रहा है वगैरह वगैरह। तो वहां से ऐसे ही लोग जा रहे हैं कि एक पूरा का पूरा ग्रुप ऑफ पीपल या कभी-कभी इंडिविजुअल सोल इतनी पावरफुल है। ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई ऋषि मुनिगण अपनी पूरी शिष्यों की टीम को लेके आ रहे
(21:32) हैं। ही कैन फील दैट कि समथिंग लाइक कि एक बहुत पावरफुल सोल है। उसके साथ कुछ अन्य आत्माएं हैं और वो पूरी-पूरी सोल यहां पर आप आ रही हैं। एंड दे आर डूइंग समथिंग। और वहां पर जो टास्क चल रहे हैं वो मेंटली एक दूसरे से कुछ बातचीत चल रही है। एंड दे आर डूइंग सम वंडरफुल थिंग्स लाइक जैसे एनर्जी ट्रांसफर हो रही है। नॉलेज ट्रांसफर हो रही है। ऐसा लग रहा है कि सब कुछ पर्सनिफाइड दिखाई दे रहा है। मतलब जो हम सोचते हैं जैसे वेदों के बारे में सोचते हैं, नॉलेज के बारे में सोचते हैं, ज्ञान सोचते हैं। श्लोक सोचते हैं। तो श्लोक आपके सामने पर्सनिफाइड दिख रहा है। ऐसा लग
(22:02) रहा है कि दिस इज़ ऑल एनर्जी। अब मैं ओम त्र्यंबकम यजामह फॉर एग्जांपल हमारा जो महामृत्युंजय मंत्र है वह गूंज रहा है। लेकिन अगर वह गूंज रहा है तो वह केवल शब्दों से नहीं दिखाई दे रहा। मुझे फील हो रहा है कि वो एक पूरी शेप लेता चला जा रहा है। ऐसे एक शिवलिंग जैसी शेप लेता चला जा रहा है वहां पर। एंड यू कैन यू कैन सी दैट एंड इट्स सो ब्यूटीफुल। आप उसको जिस एंगल से भी देखो कुछ अलग ही नजारा दिखाई देता है। तो उसमें वो जो बीइंग्स हैं वो जो ऋषि गण हैं जैसे ऐसा कुछ दिख रहा है। अगर मैंने जब मैंने प्रार्थना करी कि मुझे मेरे लिए क्या संदेश है? तो एक एक डिवाइन
(22:33) बीइंग जिनके मुंह बिल्कुल बंद है एंड जस्ट शी इज़ देयर ऐसा लग रहा है जैसे पूरी नॉलेज का भंडार है। मुझे कहा जा रहा है कि आप इनके चेहरे की तरफ देखो। बस दैट्स इट। तुम्हें कुछ नहीं करना। ये मंदिर के अंदर है। हां ये मंदिर के अंदर चल रहा है। मुझे कहा जा रहा है कि बस यू लुक एट ह फेस एंड दैट्स इट। एंड जस्ट यू आर लुकिंग एट हिम एंड एंड दैट नॉलेज इज़ ट्रांसफरिंग। वो कुछ बोल नहीं रहे हैं। बट नॉलेज ऐसा लग रहा है कि वो अंदर से ट्रांसफर हो रही है। मुझे ऑटोमेटिकली समझ आ रही है कि अच्छा यह करना है मुझे। मुझे यह करना है। मुझे अलग-अलग
(23:00) चीजें अंदर से प्रकट होने लगी हैं। तो ज्ञान के पोर्टल खोले जा रहे हैं मेरे अंदर से। ऐसा लग रहा है जैसे दिमाग के अंदर कुछ ना कुछ स्विच से अपने आप ही अनस्क्रू किए जा रहे हैं। कुछ हिलाया जा रहा है। बुद्धि के कुछ गेटवेट अपने आप ही समथिंग दे आर डूइंग इट। नॉट ओनली वर्डिंग नहीं बोल रहे हैं कि ऐसा करो या वैसा करो। हां, लेकिन कुछ रेस्ट्रिक्शन भी बोली जा रही है। दिमाग में लाई जा रही है कि दुनिया के साथ बिहेव करते हो। यू हैव टू बी बैलेंस्ड। कुछ बातों पे वो बोला जा रहा है ऐसे करके। एंड फिर इस पूरे उसमें एक जगह पर बहुत जैसे जो गाइडेंस मिली ऐसे
(23:32) अन्य मुझे ऐसा फील हुआ कि जैसे वो जो देव जो गाइडेंस देने वाली जो हस्तियां हैं उनमें से एक तो भगवान बुद्ध जैसे दिखाई पड़ रहे थे और मन यही कह रहा था कि यह भगवान बुद्ध हैं अंतरात्मा से ऐसा निकल रहा था। कुछ संत अन्य भी संत थे। हमें पता है कि एक महर्षि अगस्त थे कोई महर्षि अगस्त वो वहां पर किसी पर्पस के लिए वहां पर मौजूद थे। तो वो ही वास डूइंग समथिंग और मुझे बोला गया कि यह वो हस्ती हैं और यह तुम्हें कुछ गाइडेंस प्रदान करेंगे। उन्होंने आके मतलब उन्होंने अपनी डिवाइन हैंड उनका जैसे मेरी उन्होंने अपने ऐसे हाथ बढ़ाया और मेरी चेस्ट के ऊपर यहां पे
(24:05) ऐसा कुछ रखा एंड दे डीड समथिंग तो कुछ यहां पर चेंज किया उन्होंने एग्जैक्ट क्या हुआ? बड़ी इतना इतनी लविंग फीलिंग थी जैसे किसी मां बच्चे को गले से लगा के एकदम लविंग वाली जो इतना एकदम सूदिंग सी तो वो फीलिंग और मुझे रियल पता चल रहा है कि मैं अपनी मैं एक डिवाइन सोल हूं और मैं एक विशेष पर्पस के लिए यहां पर भेजा गया हूं जो टास्क मुझे परफॉर्म करना है एंड नाउ द टाइम हैज़ कम टू मेक श्योर दैट आई कंप्लीट दैट टास्क और मुझे सारी डिवाइन गाइडेंस टाइम टाइम पर मुझे मिलती रहेगी। ऐसा उनकी तरफ से एश्योर किया जा रहा है कि चिंता मत करो हम तुम्हारे हर काम में साथ हैं।
(24:42) तो फिर वो फील किया गया। फिर अंदर एक क्रिस्टल का गुफा जैसी थी। उस गुफा में जैसे एंटर किया तो वहां पर सारा वो क्रिस्टल जो है वास्तव में ऐसा लग रहा है जैसे क्रिस्टल बात कर रहे हैं आपसे। तो आपको ही आपका पूरा आपकी पूरी हिस्ट्री समझाई जा रही है। आपको बताया जा रहा है तुम हो कौन हो? यहां आए क्यों हो? व्हाई यू आर हियर? तो मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे सामने मेरी पूरी मेमोरीज को अनफोल्ड किया जा रहा है। ऐसे सामने कुछ आता जा रहा है एंड यू कैन सी ऑल योर मेमोरीज। ऐसा लगा पूरी मेमोरीज का डेटाबेस है। तो वहां पर कुछ क्लीनिंग की जा रही है और कुछ आपके
(25:13) सामने दिखाया जा रहा है। तो वो क्लीन होता जा रहा है। एंड यू कैन यू कैन वॉच इट। और आपको पूरा कि यह इस जन्म में कुछ ऐसा था, कुछ ऐसा सीन था। लेकिन इतनी फास्ट है वो कि जैसे कुछ ही देर में तुमने पूरा स्कैन कर लिया गया और लगभग चीजें क्लियर करके फिर तुम्हें बताया गया कि देखो यहां से तुम्हारी सारी लर्निंग का जो डेटाबेस है वो यहां से कनेक्ट होता है। नाउ यू हैव टू परफॉर्म समथिंग मच मच हायर जो भी तुम्हें अब तक कहा गया इससे बहुत बियों्ड तुम्हें अब काम करना है। राइट? इस टाइप से गाइडेंस मिला। यह तो मुझे पहली बार पता चला कि जो
(25:43) संभाला एक पोर्टल है उसके अंदर भी एक और पोर्टल है। उसके अंदर भी पोर्टल है। सो इसका मतलब वहां इसका मतलब एक और जगह और भी जगह होंगी संभाला जैसी। और भी हो सकती हैं संभाला जैसी जगह। वो जो ऋषि आ रहे हैं वो कहां से आ रहे हैं? जाहिर सी बात है जैसे उनके भी अपने लोक हैं। मुझे पता लगा कि जैसे ऋषि लोक नाम की भी एक जगह है। अब ऋषि लोक कहीं और हायर लेवल पर स्थापित है। जैसे हमारे यहां पर कहा जाता है ब्रह्मलोक एक लोक है। विष्णु लोक एक लोक है। है ना? ऋषि लोक भी एक लोक है। ऐसे ही सत्यलोक भी कहा जाता है। ऐसे है भूलोक भूवर लोक हम सुनते तो हैं ना स्वर्ग
(26:20) लोक है ना वहां पर तो इन ऋषियों का भी अपना एक लोक है। तपह लोक ये सुना है आपने शायद तपस्वीयों का एक लोक है। तो लोक का मतलब एक पूरा का पूरा एरिया इन सारे जो सेम टाइप के बीइंग्स हैं उनका एक ग्रुप है। जिनको इस कॉन्शियसनेस में एक जगह दे दी गई है। उनका एक लोक है। उसको हम लोग कह रहे हैं। राइट? तो अब संभाला के अंदर जो हम ऋषि जिनके हमें दर्शन हो रहे हैं तो क्या सिर्फ वहां ऋषि थे या कोई सिविलाइजेशन या कोई और एक जिंदगी चलती हुई भी दिख रही थी जो समझ आया मुझे मैं वो बता रहा हूं कि ये जो काम कर रहे हैं ना ये हायर बीइंग्स का
(26:57) ने अपनी एक जगह बना रखी है एक पोर्टल बना रखा है जैसे एक समझो सारे साइंटिस्ट ने मिलके एक लैबोरेटरी बना रखी है मान लो अब इस लैबोरेटरी में सारा वो सामान मौजूद है जो आपको प्रयोग करने के लिए चाहिए अब ये क्या कर रहे हैं ये कॉन्शियसनेस पर काम कर रहे मुझे फील हुआ कि यह कॉन्शियसनेस को अपग्रेड करने के लिए इनके पास बहुत सारी टेक्निक्स हैं। और उन्होंने ऐसा लग रहा है कि जो वेद है ना वास्तव में वेद वहां पर पर्सनिफाइड होकर बैठे हैं। दे आर द रियल नॉलेज। ऐसा लग रहा है कि वो जो एनर्जी के पुंज बने हुए थे। ऐसा लग रहा था यह एनर्जी
(27:26) का एक पोर्टल सा बना हुआ है। पर ये खुद वेद हैं। दिस इज़ वेद। आपको कोई शब्द बोलने नहीं पड़ रहे। बट वो नॉलेज अपने आप उतरती चली जा रही है। फिर उससे वो वो ये देखना चाह रहे हैं कि यह जो नॉलेज है इसका जन कल्याण के लिए क्या यूज किया जाए? आज के टाइम में कैसे लोगों को ये कनेक्ट किया जाए नॉलेज लोगों को पास ऑन कैसे की जाए? एंड दैट्स व्हाट दे आर डूइंग और धरती पर जो डिस्ट्रक्शंस हो रहे हैं, जो नेगेटिव चीजें हो रही हैं। ये भी मुझे बताया गया कि ये सब तुम अपने दिमाग में से हटा दो कि तुम इन चीजों को छेड़ोगे या तुम कुछ कंट्रोल कर पाओगे या तुम इनके बारे
(27:57) में कुछ बुरा या नेगेटिव मत सोचना। यह सब कठपुतलियां है जो हम चला रहे हैं। मुझे यह क्लियर बोला गया। जैसे मेरे मन में एक कहीं ना कहीं डोन्ड ट्रंप को लेकर बड़ा नेगेटिव था भाव कि यार क्या यह बंदा कैसे लड़ाई मार कटाई करवाया जा रहा है। इतनी जंग खत्म नहीं होके दे रही मरवाया जा रहा है। मुझे यह बोला गया यू डोंट नीड टू वरी अबाउट इट। दिस इज़ नॉट योर डायमेंशन। तुम सिर्फ होते हुए देखो। उसको वो एक कठपुतली है जिससे जिससे हम काम करवा रहे हैं। तो मतलब यह जो भी कुछ हो रहा है तुम्हें तुम बस एक अपने अंदर सरेंडर का भाव पैदा करो। भरोसे का भाव पैदा करो कि इतने बड़े
(28:28) डायमेंशन इतने बड़े ब्रह्मांड को चलाने वाली कोई छोटी-मोटी सत्ता नहीं है। कोई छोटी-मोटी पावर नहीं है। जो इतने पावरफुल लोग हैं जो इतनी पावरफुल ऋषि मुनि गण जो बैठे हैं वहां पर वो क्या संसार के छोटे-मोटे युद्धों को कंट्रोल नहीं कर सकते। पर कुछ चीजों को वो अलऊ करते हैं कि ये होने दो क्योंकि डिस्ट्रक्शन के बाद ही रियल क्रिएशन होता है। तो यू डोंट नीड टू मेरे मन में चिंता जैसी थी ये और उन्होंने मुझे चिंता को ऐसे ढंग से दूर किया और मुझे बताया गया कि आगे जो आने वाला समय रियलिटी में जो प्रलय के बाद सृजन होता है ना वैसा प्रोसेस अभी चालू होगा समय के बाद
(28:58) लेकिन अभी प्रलय होनी है एक काइंड ऑफ प्रलय होनी है रियल वाली प्रलय नहीं कह रहा हूं अभी विदिन कलयुग के अंदर भी मल्टीपल टाइप के प्रलय होंगी तो वो प्रलय भी होने वाली है जिसमें से कुछ चीजें बड़े लेवल पर बदलेंगी बहुत से लोग डिस्ट्रॉय होंगे और फिर कॉन्शियसनेस का एक हायर डायमेंशन वाले लोग उस पे डाले जाएंगे दोबारा से तो ये एक इसको ऐसा बोल सकते हैं जिस तरह से आप बता रहे हैं कि एक कंट्रोलिंग सेंटर है तो दुनिया को जो कंट्रोल कर रहे हैं वो लोग संभाला में आप ऐसा कह सकते हैं पॉजिटिव लोग शुद्ध पॉजिटिव लोग हायर कॉन्शियसनेस वाले लोग
(29:32) ऐसी नेगेटिविटी के भी डायमेंशन है जिसको हम सूतल लोग पाताल लोक वीतल लोग धरती से नीचे भी सात लोग हैं उनके भी अपने नीचे केंद्र बिंदु बने हुए हैं राइट तो जैसे वो हैं तो यहां धरती पर भी उन्होंने एक पोर्टल बनाया जो हायर पोर्टल से कनेक्ट होकर धरती को जैसे अपना एक वो बेस बना लिया समझो आपने कहा था लाइट है फिर उनकी हाइट कैसे दिख रही थी मतलब एटलीस्ट पता तो लग रहा था कि जैसे जिस डायमेंशन पे मैं देख पा रहा हूं जैसे मैं अब आपकी एक एक अंदाजा लग रहा है कि लगभग 5 6 फीट जितनी हम नॉर्मल देखते हैं तो हमारी सोच से वो बहुत ऊंचे हैं 8 9 10 फीट ऐसे
(30:06) दिख रहा है कि इतनी विराट चेतना उनकी जो है ना इतनी फैली हुई है तो वह शायद मतलब सिंबॉलिक है या कैसे है सिंबॉलिक का मतलब है कि इतनी विराट चेतना है उनको इस बॉडी में समेटना ही मुश्किल हो रहा है उस उस एंगल से और वो संभाला इतना सा नहीं है कि हमें मैं मुझे लग रहा है कि वो एक इतनी सी एक लिमिटेड डायमेंशन में है। वो ऐसा लग रहा है कि ये भी अनंत तक फैला हुआ है। इस इस लाइक एक्सपेंडिंग इन द इन द इंफिनिटी। ऐसा लग रहा है कि बहुत विराट है ये। अंदर ही अंदर बहुत कुछ चल रहा है। अलग-अलग डायमेंशन पे अलग-अलग जैसे पेंटागॉन टाइप का एक स्ट्रक्चर है ना वो पेंटागॉन में
(30:39) ऐसे ऐसे स्ट्रक्चर बना हुआ है। उस उस शेप से ही तो अलग-अलग शेप बनी हुई है वहां पर। और अलग-अलग आकृतियां बनी हुई हैं। तो वो भी एक एक ऐसा जहां पर कोई बहुत बड़े लेवल के प्रयोग चल रहे हैं जिसके बारे में सारी नॉलेज तो मुझे भी नहीं दी गई। मतलब मेरा उससे कोई कंसर्न नहीं था। लेकिन मुझे बताया गया कि बहुत बड़े लेवल के एक्सपेरिमेंट कर चल रहे हैं जो कि ह्यूमन कॉन्शियसनेस को उठाने के लिए और इन लोगों के जो सफरिंग को कम करने के लिए अलग-अलग तरह की एक्टिविटीज यहां पर हो रही हैं। हायर लेवल पर यही बताया गया। क्या यहां पर महावतार बाबा जी के भी यस इनकी भी फुल
(31:16) मौजूदगी वहां पर प्रेजेंट है। इट इज देयर उनकी और उनकी पूरी जो उनकी जो लीनियर चली आ रही है ना उसमें परमहंस योग परमहंस योगानंदा जी लाहरी महाशय जी और बाकी उनके बाद जो उनके एक और भी शिष्य थे और उनकी और भी वो हैं जो हम जिनको हम नहीं जानते शायद उन्होंने कुछ कुछ छुपा के भी रखा मतलब पब्लिक अपीयरेंस से वो दूर रहे हैं लेकिन उन पर भी वो लोग भी इनवॉल्वड हैं और महावतार बाबा जी का तो ऐसा मुझे मतलब जो फीलिंग है मैं इनसे पहले भी मेरा दो-तीन बार परिचय रहा और वो परिचय भी इतना इतना गजब का था कि मतलब मुझे मुझे ऐसा लगा कि जैसे ये मुझे कह रहे हैं कि तुम्हें
(31:53) महावतार का मतलब पता है क्या होता है? महावतार का मतलब जो सामान्य अवतार के रूप में नहीं है वो जिस रूप में तुम पाओगे तुम हमें ही पाओगे। ही इज दैट महावतार वर्ड ऑफ़ महावतार। उन्होंने मुझे ऐसे क्लियर किया। मुझे वो इतनी क्लेरिटी के साथ दिमाग में बैठा हुआ है कि महावतार मतलब मैं ही शिव हूं। मैं ही योगी हूं। मैं ही मच्छंद्रनाथ हूं। मैं ही इस रूप में हूं। मैं गोरखनाथ हूं। मैं हर रूप में मैं ही मौजूद हूं। ये महावतार होता है। मतलब मुझे ऐसा लगा कि जैसे ही इज द सुप्रीम संभाला में यह कैसे आपको फील हुआ वहां पे? ये ये मैं ये बता
(32:24) रहा हूं कि जो प्रेजेंस है वहां पर अब प्रेजेंस में उनका अपना एक डायमेंशन कनेक्ट हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे एक जैसे समझो कि सारे सारे साइंटिस्ट मिलके एक जगह पर एक दूसरे से कनेक्टेड हैं। एक नेटवर्क जैसा बना हुआ है। तो उनका भी अपना एक डायमेंशन जो कि हिमालयज पर है वो कनेक्टेड है संभाला के साथ। दे आर ऑल कनेक्टेड और यह सब भगवान शिव की गाइडेंस में हो रहा है। तो मैं यह भी नहीं कह सकता कि एक्चुअली कैलाश और शभाला बहुत दूर-दूर हैं और उनका आपस में कोई लिंक नहीं है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दे आर ऑल कनेक्टेड ऑल डिवाइन प्लेसेस का एक
(32:58) सेंट्रलाइज वो बना रखा है और सब एक दूसरे से कनेक्टेड हैं। जैसे हम धरती पर एक छोटा-मोटा इंटरनेट बना के इतने राजी हो जाते हैं कि भ भाई मैं यहां पे कुछ भी कर रहा हूं। मुझे सारे वर्ल्ड को बताने में मुझे 1 मिनट लग रहा है कि भ यह मैंने वीडियो बनाया, यह किया। व्हाटएवर है ना? जैसे हम लोगों की नॉलेज स्प्रेड होती है। इन लोगों ने भी अपनी पूरी हायर डायमेंशंस के पूरी नॉलेज को एक दूसरे से कनेक्ट किया हुआ है। और इनके लिए तो ये बच्चों का खेल है। इनको लगता है मतलब हम तो अब इस चीज को समझ पा रहे हैं कि इंटरनेट आज आज इतना हाई लेवल पर गया है। लेकिन इनके लिए तो लगता
(33:27) है कि सालों से या मिलियंस ऑफ इयर्स से ये सब करते आ रहे हैं। यह कोई आज की घटना नहीं है। दे आर दे आर देयर फॉर देयर। कुछ तो ऐसा लग रहा था जैसे कुछ इतने पुराने ऋषि मुनिगण हैं जैसे जो शायद बहुत पहले हम किताबों में या पढ़ते होंगे या उनके बारे में सुनते होंगे या शायद कभी हमें कल्पना करते होंगे दे आर देयर एंड दे आर वर्किंग फॉर दैट बेनिफिट ऑफ मैनकाइंड और वो अलग-अलग रूपों में कार्य कर रहे हैं कुछ लोग। अब जैसे अब अपीयरेंस जैसे आपने कहा वो तो नहीं पता चल रहा था। एक लाइट के अपीयरेंस में था। तो हैविंग सेड दैट ये तो आई एम श्योर कि सबकी थर्ड आई एक्टिवेटेड
(34:01) होगी। यह हमारा सोचने का ढंग है कि यस थर्ड आई अगर आप उसको थर्ड आई की भाषा में कहना चाहते हो तो यस पर उनके डायमेंशन उनकी जो सोच उनकी जो एनर्जी है हमारी थर्ड आई की एनर्जी से भी बहुत हाई है। अभी मैं आपसे ऑफलाइन जब मैं बात कर रहा था तो मैंने कहा था ना कि हम इन सात चक्रों को ही जानते हैं। लेकिन वास्तव में जो चक्र हैं हमारे तो हमें लगता है कि थर्ड आई तक मतलब छठे चक्र तक पहुंच जाना भी बहुत बड़ी बात लगती है हमें। हम लेकिन वास्तव में 12 चक्र तो हमें नॉर्मली बहुत नोन है। टोटल 112 चक्राज़ हैं जिसमें ओवर इंटरगैलेक्टिक चक्रास भी शामिल हैं।
(34:34) हायर डायमेंशन के चक्रास भी हैं। कभी इसके बारे में विस्तार से बात करेंगे लेकिन शॉर्ट में कहने के लिए कि यस दे आर मल्टी मल्टी हायर डायमेंशन बीइंग्स। एक ना जैसे तिब्बतम जो क्योंकि काफी शला के बारे में तिब्बतम जो मंग्स हैं वो भी बात करते हैं तो तिब्बत में एक टेक्स्ट है जिसका नाम है कालचक्र कालचक्र तो कालचक्र टेक्स्ट में भी संभाला के बारे में कई बार लिखा है और उसमें एक टेक्स्ट में ये लिखा था कि जो मैत्रीय बुद्धा आएंगे वो शभाला से आएंगे और जो हिंदूइज़्म में मैत्री बुद्धा है वो है कल्कि अवतार हम तो इसका लिंक आपको हमारे यहां संभाला से
(35:14) कुछ दिखता है? देखो कालचक्र जिसको आप कह रहे हो ना वास्तव में कंट्रोलिंग द टाइम सीधी भाषा में यह है कि टाइम को कैसे कंट्रोल किया जाए। वहां पर टाइम का कोई कांसेप्ट नहीं नजर आता। मतलब एक ऐसी जगह है जो टाइम के पार है। उसमें ना कोई पास्ट जैसी कोई चीज है ना कोई प्रेजेंट और ना कोई फ्यूचर। आप 1 सेकंड में अपना पास्ट और 1 सेकंड में अपना प्रेजेंट और 1 सेकंड में अपना फ्यूचर। ऐसे देख लेते हो। जैसे एक स्ट्रेट लाइन ऐसे बनी पड़ी है। आप यूं नजर डालो। एंड यू आर देयर। तो इसको कुछ लोग इसको ऐसे घुमा के दिखाते हैं। तो उसको हम कालचक्र बोलते हैं। कालचक्र का मतलब है
(35:48) यहां से जो शुरू हुआ वो ऐसे घूमेगा और अंत में यहीं पर आएगा। तो ओवर ए पीरियड ऑफ़ टाइम दिस विल कीप ऑन रोटेटिंग। इसको हम कालचक्र बोलते हैं। तो कालचक्र में इस चीज का जिक्र है। आपने कहा ना कि कालचक्र के बुक में इसके बारे में ऐसा जिक्र है। तो वास्तव में काल ये लोग टाइम को भी कंट्रोल करने की पावर रखते हैं। यह मुझे 100% क्लियर है। दे हैव द पावर ऑफ़ कंट्रोलिंग द टाइम। इनके लिए पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर जैसा कुछ नहीं है। ये दे कैन डू एनीथिंग। तो फ्यूचर की घटनाओं को प्रेजेंट में देख पाना इनके लिए मतलब बच्चों का खेल है कि आप ये देख पा रहे हो
(36:20) कि ऐसा होने वाला है। तो ये जो आपने बात कही है ये वाली बात बिल्कुल सही है। होगी जहां तक मैं फील कर पा रहा हूं इस बात को कि वहां इतनी हायर बीइंग्स को तैयार किया जा रहा है ह्यूमैनिटी को अपलिफ्ट करने के लिए। तो इसका मतलब यह है कि जो धरती पर अभी एकिस्टिंग लोग हैं उनको गाइडेंस देना। उनके साथ एक मेंटल कनेक्टिविटी जैसे हम जैसे लोग हैं, आप जैसे लोग हैं। कहीं ना कहीं आप भी तो डिवाइन गाइडेड हो ना। आपको कहीं ना कहीं से डिवाइन गाइडेंस आ रही है। भले ही आपको लग रहा है कि मेरे कॉन्शियस प्लेन में कुछ मेरे मैसेज आया कि मुझे इस
(36:49) पर काम करना चाहिए। वरना अगर आप ये सवाल ना करते ये नॉलेज बताता कौन? शेयर कौन करता? आपने सवाल किए, आपके मन में डाला गया तो आपने आपके मन में प्रश्न पैदा हुए। प्रश्न पैदा हुए तो कहीं ना कहीं से उत्तर भी आया। तो, यह कौन तैयार कर रहा है? यह समझो कि आप यह वह हायर्ड बीइंग्स हैं जो हमें तैयार कर रहे हैं कि इस नॉलेज को अब लोगों के लिए ओपन करो। तो लोगों का माइंडसेट इतना हायर जाए फिर इन्हीं लोगों को उनके द्वारा और इंस्ट्रक्शन दी जाएंगी। जब आपने आज इनकी यह इंस्ट्रक्शन पकड़ ली तो अगली इंस्ट्रक्शन भी आपके दिमाग में अगर डालेंगे तो पकड़ लोगे। तो दिस इज़ हाउ
(37:23) दे आर कंट्रोलिंग द पीपल। जैसे बुरे लोग बुरे लोगों के साथ उनका जैसे अपना नेटवर्क स्थापित कर लेते हैं वैसे ही यह अच्छे हायर बीइंग्स जो हैं हम लोगों के थ्रू जो वाइड बीइंग्स हैं, लाइट बीइंग्स हैं, हम लोगों के थ्रू यह संसार को में शुभ कार्य को फैलाने का यह जो संकल्प है, यह ऐसे है और इनके लिए टाइम का कोई जैसे मैंने कहा कोई डायमेंशन नहीं है। तो टाइम के लिए आने वाला समय जैसा भी आएगा ऐसा लगता है कि ये जरूर वहां वहां से भगवान बुद्ध का या जो भी आगे अवतरण होगा ना किसी रूप में वो वो वहीं से आएगा। इसमें बिल्कुल लॉजिकल लगती है बात। मतलब यह आप
(37:58) यह कह रहे हैं क्योंकि वहां पर तैयारी हो रही है। तो इसीलिए कल्कि अवतार का होना भी यहीं से ही यस एक्सैक्टली यही कह रहा हूं मैं कि वहां तैयारी हो रही है। तैयारी होते हुए यह है कि वो तैयार कर रहे हैं कि एक दिन वो फाइनल रूप में भी वो आएंगे। लेकिन अभी भी अगर आप वैसे एंगल से देखो तो कल्कि का एक रूप में अवतार तो हो चुका है। कल्कि केवल एक व्यक्ति के रूप में थोड़ी आएंगे। चेतना के रूप में भी तो कल्कि आ गए हैं। कल्कि इस नॉट ओनली इन एक एक व्यक्तित्व के रूप में जब आएंगे तब आएंगे। लेकिन कॉन्शियसनेस तो शिफ्ट की है ना करेक्ट
(38:28) तो उस एंगल से तो आए आए ही गए हैं अगर हम कह सकते हैं तो इसकी लोकेशन क्या थी देखो प्रैक्टिकली कहूं तो ये लगभग कैलाश के डायरेक्शन में ही था पर कैलाश क्यों लगा आपको कैलाश की फीलिंग इसलिए आई क्योंकि वहां ऐसा फील हो रहा था कि जैसे ये दिस इज ऑल कंट्रोलोल्ड बाय द डिवाइन लाइट ऑफ जो मैंने कैलाश की माउंट कैलाश की जब मैंने मानसिक या एस्टल ट्रेवल से यात्रा की थी तो वहां जो डिवाइन फीलिंग थी ना वो सेम सेम पावर ऐसी की ऐसी यहां पर कंट्रोल कर रहे हैं। ऐसा लग रहा था कि सारा कंट्रोल ओवरऑल मास्टर इज द सुप्रीम महाकाल यानी कि भगवान शिव। इस जगह के जो
(39:04) टोटल कंट्रोलर है ना इज दैट हिम। तो ऐसा पूरी 100% फीलिंग थी। तो जब उनके कंट्रोल में है तो कैलाश वाली फीलिंग आना बिल्कुल स्वाभाविक था। एक डायमेंशनल स्टेट बोल सकते हैं इसे। यस आप इसे कह सकते हो। रियल आंखों से तो कोई नहीं देख सकता। नहीं ना आंखों से कोई नहीं देखता बिल्कुल जैसे जैसे एक फ्रीक्वेंसी की बात है समझो अब मेरे यहां पर देखो इस रूम में हजारों फ्रीक्वेंसीज आसपास से जा रही हैं हम है ना बस मेरा रिसीवर ही तो कनेक्ट नहीं हो रहा ना अगर मैं यहां पर एक टीवी या मोबाइल या कुछ और रख दूं जो कि उस फ्रीक्वेंसी से कनेक्ट कर दे तो मैं अभी
(39:39) पकड़ लूंगा अब जैसे जो लोग वहां पर जाते हैं उनमें से कई लोग अपने उस एक्सपीरियंस को फील कैसे कर पाते हैं जैसे एक रशियन पेंटर थे निकोलस रोच हमने सुना होगा इनके बारे में तो इन्होंने ने अपनी किताब में लिखा संभाले इन सर्च ऑफ न्यू कि जब वो वहां पर थे उन्हें कुछ महसूस हो रहा था। जब वो उस एरिया में गए तो उन्हें कुछ अंदर से लग रहा था कि यहां पर कुछ है कुछ आसमान में जाता हुआ दिख रहा था। तो ये क्या कोई सिग्नल्स भी दिए जाते हैं कई लोगों को? यस यस बिल्कुल सच है ये बात। यह बात सेम कैलाश के बारे में भी है। कैलाश भी देखो फिजिकली भी एक लोकेशन है ना लेकिन फिजिकली
(40:17) आप ड्रोन से लेकर अभी दुनिया भर के वीडियो वहां पर वायरल हो रहे हैं कि ड्रोन से दिखाओ उसके ऊपर का नजारा लेकिन वास्तव में क्या भगवान शिव बैठे दिख रहे हैं वहां पर किसी को? नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। तो वो जो डायमेंशन है फिजिकली भले ही वो एक लोकेशन है लेकिन वहां कोई ऐसी डेविनिटी मौजूद है जो सिंपली आपके कैमरे के नजरों में नहीं आएगी। अब ऐसा तो है नहीं कि भगवान शिव बैठे होंगे आ बेटा तू लेकर आ और मैं देख तुम्हें दर्शन देता हूं डेफिनेटली नो ना वो हमारे कैमरे नहीं पकड़ पाएंगे उनको पर यस मौजूदगी है वहां पर तो फिजिकल और नॉन फिजिकल डायमेंशन वहां
(40:49) मीट हो रहे हैं हम भी तो ऐसे ही है ना ये फिजिकल दिखने वाला शरीर और इसके भीतर कंट्रोल करने वाली वो जो सुप्रीम चेतना जिसको मैं आत्मा कह रहा हूं वो भी शरीर के अंदर भी एक कॉम्बिनेशन घटित हुआ है। ठीक वैसे ही वहां पर फिजिकल जगह है और फिजिकल जगह के आसपास में एक्चुअल डेविनिटी मौजूद है। तो इन्होंने जो एक्सपीरियंस लिखे हैं इन या इन जैसे और भी लोगों ने जो अनुभव शेयर किए हैं उन्होंने कहा कि एक जगह के आसपास जाकर ऐसा फील होता है जैसे आकाश में कोई डिवाइन लाइट्स वगैरह चमक रही हैं वहां पर दिशा भ्रम बहुत होता है। टाइम का डायमेंशन खो जाता है। लोग कहते हैं हम चले
(41:21) तो इस दिशा में थे थोड़े समय में पाया कि हम ईस्ट से पता नहीं वेस्ट क्यों हो गए हमें नहीं पता। आपने अगर इनकी पूरी स्टोरी पढ़ना मैंने पढ़ मैंने बहुत डिटेल में पढ़ी हुई है। एक इनकी नहीं और भी एक और हैं। एक पूरा ग्रुप गया था। यूके वाले थे ये और ये तब ये लोग थे कि तुम बड़ी-बड़ी बातें सारे संसार के लिए करते हो। तब अब हम क्योंकि हमारा पूरे संसार पर राज चलता है। ये उस समय की बात आई है जब इंडिया आदि और बाकी कंट्रीज पे इनका कंट्रोल था। तो उन्होंने एक पूरा ग्रुप भेजा था और उसमें उन्होंने पूरा जिक्र किया है कि हम पूरा फतेह करके
(41:52) दिखाएंगे। मतलब इसको भी जीत कर दिखाएंगे। और जब वहां पर वो लोग गए थे इतना भ्रमित हो गए थे। इतना भ्रमित हो गए थे। पागल होने की नौबत आ गई थी। लाशमित्रा हिमाम करते हुए वापस आए थे। यह कहकर कि भाई यहां हम नहीं देख सकते। यहां हमारे लॉजिक नहीं चलेंगे। तो आप ईस्ट जा रहे हो थोड़ी देर में आप पा रहे हो कि आप तो वेस्ट में घूम रहे हो या कुछ और आपको दिशा भ्रम हो रहा है या आप अभी तक तो बादल छाए हुए थे और मिनटों में आपको अभी सूरज दिखाई पड़ रहा है या कुछ और तो इतना ज्यादा भ्रमित है। इतनी ज्यादा इसको इल्ल्यूजन या माया बोलते हैं। तो माया की वजह से वो आम इंसान को तो
(42:24) भ्रमित ही कर दिया जाता है। पता ही नहीं लगने देता था कि ये हो क्या रहा है। राइट राइट गॉट इट। आपके और भी कुछ एस्ट्रल ट्रेवल के एक्सपीरियंसेस थे। क्या अर्थ के अलावा भी और कुछ प्लनेट्स हैं? ये थोड़ा सा मैं बता देता हूं ताकि चीजों को कनेक्ट करना आसान हो जाए। देखो हम अपने यहां पर आज तक जिन लोकों की बात करते रहे हैं। जैसे हम कहते अगर मैं ये बात कहता स्वर्ग लोक विष्णु लोक ब्रह्मलोक ये तो समझ आ रहा है। ये हमें समझ आ रहा है ना? अब यही बात एक अंग्रेज को कैसे समझ में आएगी? वो आज के टाइम में एक साइंटिफिक जगह को जानते हैं। है ना? जिसका नाम जैसे एक
(42:59) पर्टिकुलर जगह है जैसे प्लेडियस एक जगह का नाम है एक्चुअली ये प्लेडियस एक सोलर एक स्टेलर सिस्टम है मतलब वहां पर एक्चुअली स्टार हैं तो प्लेडियस एक जगह का नाम है एंड्रोमिडा एंड्रोमिडा एक गैलेक्सी का नाम है आप सभी आपको थोड़ा बहुत सभी को आईडिया है ना ये तो फिजिकल एक्सिस्टेंस वाली चीजें हैं अब ये लोग जब बात करते हैं ना इन्हीं के बारे में ये कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति जो अपने आप को वहां से कनेक्टेड फील कर रहा है यानी कि मैंने किसी का पास्ट लाइफ किया मैंने जैसे मैंने आपने मेरे शायद पुराने पास्ट लाइफ में मैंने में बताया था। मैंने प्रेमानंद जी महाराज
(43:29) जी के बारे में विस्तार से जिक्र किया था। तो मैंने कहा था कि एक सोल जिसका पास्ट लाइफ में हम उसको लेकर गए तो उस सोल ने देखा कि मृत्यु के बाद मेरी चेतना उनसे कनेक्ट हो रही है। प्रेमानंद जी महाराज जी से और अल्टीमेटली भगवान विष्णु जी से भगवान कृष्ण जी से कनेक्ट हो रही है उनकी चेतना। तो ये हमारे सोचने का ढंग है। अब यही बात को कोई अंग्रेज करवाता पीआर। उनके लिए विष्णु लोक का पता नहीं उन्हें क्या है। वो अपनी भाषा में अगर कनेक्ट करते तो किससे कनेक्ट करते। अब वो अपने प्लनेट्स को जानते हैं कि यहां पर एक सभ्यता है जो मुझे पता है। जैसे आर्कटोरियन एक प्लनेट
(44:00) है। आर्कटोरियन एक प्लनेट है। सीरियस बी एस आई आर आई यू एस सीरियस ये वाला सीरियस बोला नहीं। तो सीरियस ए और सीरियस बी नाम के दो प्लनेट्स हैं। इनका एक सो एक एक सेलर सिस्टम चलता है वहां पर। तो वो माना जाता है कि वहां पर एक सभ्यता वहां पर एक हमारी जैसी सिविलाइजेशन ह्यूमन बीइंग जैसी मौजूद है। तो वहां से अब इन्होंने जब नाम दिया इन्होंने उस डायमेंशन से कनेक्ट कर दिया। हम जिसको कह रहे हैं कि एक ऐसी आत्मा थी जो विष्णु लोक से आई थी। अभी हमारे लिए समझना बड़ा आसान है। यही बात को वो लोग बोलेंगे आर्टूरियन से आई हुई एक आत्मा। ये वो बोलेंगे। आप मेरी बात को समझ
(44:35) पा रहे हो। मैं दोनों को कनेक्ट करने का प्रयास कर रहा हूं कि हम जो अपनी भाषा में बात कर रहे हैं हमारे लिए भी तो कोई डायमेंशन ही है ना। है ना? हमारे लिए विष्णु लोक अगर मैं पूछूं तो कहां है फिजिकली? कोई नहीं बता सकता। एक ऐसी दिव्य जगह है, एक ऐसा दिव्य स्थान है जो सभी संतों का अल्टीमेट डेस्टिनेशन है। सारे प्रेम और करुणा से भरे हुए संत जिस जगह से आते हैं वो विष्णु लोक है। अब यही भाषा में अगर मैं स्टार सीड की फॉर्म में बोलूं तो आर्टूरियन एक ऐसी प्लेनेट है। वो लोग ऐसा बोलते हैं कि जहां से सारे करुणा और प्रेम से भरे हुए जो लोग हैं वो वहां से
(45:07) आते हैं। प्लेडियस भी एक ऐसा ही जगह है आज के टाइम में जहां से लोग वहां से आते हैं और इस धरती पर आकर अपनी हीलिंग्स इत्यादि के द्वारा दुनिया को हील करने का प्रयास करते हैं। और बाकी जो प्लनेट्स हैं बाकियों के बारे में भी इसी प्रकार से अलग-अलग जगह के सोलर सिस्टम्स के बारे में कुछ बातें बताई गई। एंड्रोमेडा के बारे में क्या पता है? एंड्रोमडा के बारे में यह है कि एंड्रोमडा में जो लोग हैं वह बहुत ज्यादा स्वतंत्रता पसंद टाइप के लोग हैं। फ्रीडम टाइप के लोग हैं। मतलब एंड्रोमिडा गैलेक्सी देखो अभी हमारे यहां से 25 लाख लाइट ईयर दूर है।
(45:40) अगर मैं फिजिकली कहूं तो एंड्रोमिडा गैलेक्सी पर आम लोगों के मन में सवाल आ सकता है। भाई तुम तुमने तेरे को जाके देखा है। कोई मेरे से पूछे कि तुमने क्या जाके देखा है? मैंने जाके तो नहीं देखा। पर मैं इस बंदे का यहां पे कर रहा हूं। पास्ट लाइफ रिग्रेशन में कर रहा हूं। और वह लेडी अपने आप को देख रही है पास में। जब मैं उससे पूछ रहा हूं कि तुम कहां पर हो? तो कहती है मैं मुझे जो जगह नाम या दिमाग में आ रहा है वह है एंड्रोमेडा। तो मैं एंड्रोमडा गैलेक्सी में हूं। और वो बता रही है वहां के बारे में कि यहां कोई सरकार, कोई गवर्नमेंट कोई ऐसा ऐसा कुछ
(46:10) नहीं है यहां पर। यहां की चेतना धरती की चेतना से बहुत हायर है। बहुत हर। अगर मैं धरती को कहूं कि हमारी धरती अभी 3D में है तो वो कम से कम 7 डी में है। सेवंथ डायमेंशन में पहुंचे हुए हैं। हमसे कई कई कई गुना आगे हैं। 3D वाली चेतना क्या होती है? ईगो बेस्ड, अहंकार बेस्ड कॉन्शियस जैसे अभी जो चल रहा है युद्ध बेस्ड मणिपुर चक्र हमारी भाषा में और सेवंथ डायमेंशन का मतलब है जो क्राउन वाली चेतना होती है जो इतनी हायर है कि उसको इन छोटी-मोटी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। तो वहां से आई हुई चेतना है। यह लेडी बोल रही है कि मैं वहां से आई चेतना कॉन्शियसनेस हूं। और
(46:44) इसने जो अपने सिम्टम बताए अपने अपने आप के वो भी सब मैच करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा शुरू से इस संसार में ऐसा लगता है मैं इस दुनिया की नहीं हूं। आई एम हियर जस्ट टू गिव। मैं शरीर पर अपने करोड़ कष्ट उठाकर भी मैं लोगों को देना चाहती हूं। पर यह लोग मेरा मेरे मुझे सिर्फ मुझे चीजों को यूज़ करते हैं। मेरी मेरी मेरी हेल्प लेते हैं। लेकिन मुझे रिटर्न में कुछ नहीं देना चाहते। उस लेडी ने अपने बारे में जो बताया फिर मैंने एंड्रोमडा गैलेक्सी के जो सिम्टम है उससे मैच करके देखा और यह जो मैंने आपको बताया कि वो ऐसे लोग जो बहुत
(47:15) ही हायर बीइंग्स हैं बहुत ही हायर लेवल की कॉन्शियसनेस से आते हैं। ये उस टाइप की सोल है। महाभारत के युधिष्ठिर भी क्या एंड्रोमेटा से आए थे? महाभारत के युधिष्ठिर के बारे में तो हम जानते हैं ना कि हमारी भाषा में वो वो जो है धर्मराज का का अंश अवतार थे। है ना? धर्मराज का अंश अवतार थे। अब धर्मराज कहां के हैं? हम अपनी भाषा में कहें तो यमलोक के स्वामी हैं। है ना? यमलोक के स्वामी हैं। अब यमलोक को अगर मैं आज की उनसे कनेक्ट करके देखूं तो यमलोक हम हम अपने दिमाग में कैसे ले आते हैं? यमलोक कहां पर होगा? हम यमलोक कहीं पे भी होगा। अल्टीमेटली एक एक वहां के
(47:52) मास्टर हैं और उनके अंश रूप में यहां पर वो हमें हमने कहा कि युधिष्ठिर धरती पर आए। ऐसे ही बाकी भी हैं। जो भीम थे वो भी वायुदेव का अवतार थे। हम आपने सुना ही होगा नकुल और सहदेव जो थे अश्विनी कुमारों का अवतार हुआ करते थे। मतलब ये सुनने में तो आता ही है ना अर्जुन थे इंद्र का एक अंश अवतार थे। ऐसा सुनने में आता है। तो अंश का मतलब क्या होता है कि उनकी ऊर्जा का एक पार्ट इनमें मौजूद है। हम ठीक वैसे हनुमान जी के बारे में कि शिव के रुद्र के रुद्र अंश कहा जाता है उनको। है ना? तो अब हम ये कैसे मान लेते हैं इतनी आसानी से? क्यों? क्योंकि हम इसके
(48:22) हैबचुअल हो चुके हैं सुनते सुनते। मतलब ऐसा कैसे हो सकता है? मैं कहूं कि मेरा अंश अवतार ना वहां पर मौजूद है। अब ये कितनी बड़ी बात है। अगर आप ऐसे एंगल से सोचो तो मैं एक सामान्य भाषा में इस भाषा को उतारने का प्रयास कर रहा हूं कि आम लोगों को समझ में आए। तो मैं आपके जो व्यूअर्स हैं उनसे भी पूछना चाहता हूं। आपको कितनी बात समझ में आ रही है? आर यू गेटिंग इट जो हम बात कर रहे हैं। हम सुनते हैं जिन बातों को हम इतना हैबचुअल हो के सुनते हैं। वास्तव में कितना टफ है वो बात। क्या कितनी आसान है बातें कि कहना कि अच्छा उसका अंश के रूप
(48:49) में आए थे। उस अंश के रूप में तो आप भी हो। क्या आप भी किसी भी आत्मा का कोई किसी ना किसी कहीं से तो आ रहा होगा जरूर आ रहा होगा यही मैं समझाने का प्रयास कर रहा हूं जो आपके हमारे व्यूअर्स हैं क्या ये भी किसी दिव्यता आत्मा का अवतार नहीं हो सकते हो मैं कुछ सिम्टम बताता हूं जिससे आपको यह पता चले कि क्वाइट पॉसिबल कि मैं भी किसी का अंश अवतार हूं आपकी बात कर रहा हूं मतलब मैं व्यूअर्स की बात कर रहा हूं मैं तो चलो तो अब उसमें देखो पहली बात आपके अंदर कोई ना कोई ऐसी विलक्षण प्रतिभा मौजूद है जिसके कारण आप दुनिया को डीपली इंप्रेस कर पाते हो। सुनते जाना
(49:28) एक-एक करके और मैच करके देखना कितनी बातें आपसे मैच करती हैं और आपके व्यूअर्स भी मैच करके देखना कि कितनी बातें मैच करती हैं। दूसरा आप कहीं ना कहीं दुनिया से कनेक्ट नहीं होते। मतलब आप सेवा तो करते हो सबकी लेकिन कहीं ना कहीं डिस्कनेक्टेड भी फील करते हो, डिटच्ड भी फील करते हो। आपको लगता है अगर मुझे यहां से मतलब मृत्यु हुई ना मुझे एक मिनट लगेगा वापस जाने में। मतलब मुझे ज्यादा कोईाने वाली चीज नहीं है। तो मैं भले ही मैं संसार में हूं लेकिन मैं डिटच्ड हूं पूरी तरह से। क्या आपके लिए ट्रू नहीं है ये? क्या मेरे लिए ट्रू नहीं है? और अपने व्यूअर्स से
(50:00) पूछ रहा हूं क्या आपके लिए ट्रू नहीं है? जरा देखना अपने अंदर झांक कर देखो। कैन यू फाइंड इट आउट? मुझे लगता है मेरे लिए इतना इजी है ये। मतलब जिस दिन ऐसा होगा ना कि बस यूं नजर फेरी और संसार छूटा। जब तक यहां पर हैं एक रोल परफॉर्म कर रहे हैं। इसी तरह और देखना आपको नेचर से और स्पेशली तारों से बहुत डीप कनेक्शन लगता है। भीड़भाड़ कुछ समय तक तो आप रह लेते हो लेकिन एक टाइम के बाद आपकी आत्मा अंदर से बहुत वो कचोटती है कि यार मुझे फ्रीडम चाहिए। मुझे बिल्कुल एकदम इसी फ्रीडम का दूसरा नाम मोक्ष है। हमारी आत्मा बंधन बर्दाश्त नहीं करती। और कोई आपको बहुत
(50:34) ज्यादा रोब से या कोई दवाएं या कुछ ऐसा सप्रेस कभी बर्दाश्त नहीं होगा। मैंने जो अभी आपको एंड्रोमडा गैलेक्सी के सिम्टम बताए ना वास्तव में वह वही सिम्टम है कि फ्रीडम सीकर्स होते हैं लोग। मुझे तो मुक्ति चाहिए चाहिए। अब भले ही उसको मुझे पूरी डेफिनेशन ना पता हो मुक्ति क्या है? मोक्ष क्या है? बट मुझे यह नहीं चाहिए कि कोई मुझे किसी तरह के बंधनों में बांध बांध के रखे। ये मुझे बर्दाश्त नहीं है। तो ये एक सिम्टम है उन लोगों का जिनकी चेतना बहुत हायर लेवल की है। उन्हें बंधन बर्दाश्त नहीं होता। राइट? तो ये वाले जो लोग हैं ये एंड्रोमडा से हैं। हम ये कह
(51:05) रहे हैं। मैं आपको यह कहना चाह रहा हूं कि केवल एंड्रोमिड की ही बात नहीं है। हायर डायमेंशन वाली जितनी भी सोल होंगी ना एंड्रोमिडा तो उनके कहने का ढंग है। हमारे लेवल पर विष्णु लोक भी तो है ना। राइट? हमारे ये तो बात हमने इस्टैब्लिश कर दी ऑलरेडी कि जो इंग्लिश नेम्स हैं हमारे वोस्पोंडिंग कोस्पोंडिंग हमारे वो है। हिंदी नेम है। जैसे ब्रह्मलोक हो गया, विष्णु हो गया। तो यह बस वर्ड को समझने के लिए है पर वो इवेंचुअली है एक इंडियन नाम ही और उसको समझने के लिए अगर आज अगर ज्यादा लोग इससे समझ पा रहे हैं या जो जिससे कनेक्ट कर पा रहा है वो उसके
(51:40) कैरेक्टरिस्टिक्स बता सकते हैं। हम ऐसे बोल रहे हैं। राइट? तो इसमें अगर हम जैसे मैं भी कई कई मैंने सुना आप ही की वीडियो में कि जो प्लेडियन प्लनेट से लोग होते हैं वो काफी धरती में जो इस वक्त बहुत इमोशनल होते हैं वो वहां से आता है। ये सच है एक्सट्रीम इमोशनल वाली। यस ये दयालु होंगे और हीलर सोल्स होती हैं। अपनी भाषा में बात करूं तो शिवलोक इमोशन डीप इमोशन आप देखो जितने भी लोग भगवान शिव से प्रेम करते हैं मैं सबकी बात कर रहा हूं क्योंकि इतने हैवी इमोशंस है ना भगवान शिव के प्रति लोग मर मिटने को तैयार हैं। हम मतलब मैं एक एक व्यक्ति को स्पेसिफिकली
(52:17) जानता हूं। उस व्यक्ति ने कहा कि मेरा संसार में सिवाय भगवान शिव और मां भगवती के कोई दूसरा नहीं है। ऐसा नहीं कि परिवार नहीं है। सब है। लेकिन वो कहता है कि मेरे दिल में इतना गहरा प्रेम है। और जब मैंने एक्चुअली उसका पास्ट लाइफ किया। मैंने उसको कहा कि वेयर यू कैन सी योरसेल्फ। तुम अपने को कहां देख रहे हो? वो पहला था आई एम इन शिवलोक। और उन्होंने जो डिस्क्रिप्शन भगवान शिव का दिया। मां भगवती का, नंदी जी का और गणपति जी का जो दिया ना वो इतना ओवरवेल्मिंग था। मतलब रुला दिया था उन्होंने सबको कि मैं देख पा रहा हूं। मेरे सामने सगुण साकार भगवान
(52:47) खड़े हुए हैं और इतना सुंदर इतनी रो-रो के उन्होंने जो बोला था ना तो वो एक-एक वर्ड टू वर्ड जो है ना आम इंसान सुने तो वो वो पागल हो जाए। मुझे लगता है कि वो जो डीपली इमोशन है ना और मैंने उससे पूछा कि अच्छा तुम फिर वहां आए क्यों हो? चलो इतनी तुम रहे शिवलोक में। तुम यहां क्यों आए हो फिर? उन्होंने कहा कि सिर्फ यहां लोगों की सेवा करने के लिए मुझे भेजा गया है। एक छोटी सी कोई मिस्टेक थी उनकी। वहां पर हमें बोला गया कि देखो यहां अहंकार ठीक नहीं है। तुम जाओ धरती पर और प्रेम और करुणा का अभ्यास करके आओ। तो यह कहकर उन्हें धरती पर भेजा गया। नाउ ही इज डूइंग
(53:18) नासिक में वह लोकेटेड है। मैं इससे ज्यादा डिटेल में नहीं जा सकता। नाम इत्यादि लेकिन लोकेटेड है एंड इट इज़ डूइंग सर्विंग द पीपल एज मच एज ही कैन। वह अपने फुल पोटेंशियल से लगे हुए हैं और ऐसा लगता है कि हाथों में एक शफा है कि जिस तरफ भी अगर अपनी सेवा का कार्य शुरू कर देना और लोग अपने आप फील ही होना शुरू हो जाते हैं। तो एक डीप कनेक्टिविटी है। मतलब कि मैं यह कहना चाह रहा हूं हम सबके अंदर भी क्वाइट पॉसिबल कि कभी ना कभी एक बहुत हायर डायमेंशन से हम कनेक्टेड रहे हो। तो आपके जो व्यूअर्स हैं हम हम अपने आप को एक सामान्य बीइंग ना समझे। जैसे हम एक
(53:51) अवतार वर्ड यूज़ करते हैं। अवतार का मतलब क्या है? हम् ए हायर डायमेंशन बीइंग कमिंग ऑन द प्लेनेट टू डू सम टास्क। जैसे श्री कृष्ण एक अवतार हैं। विष्णु जी के अवतार हैं। धरती पर आए। जबजब धर्म की हानि बढ़ी तो वो आए। हम श्री राम आए। ऐसे ही हो सकता है आप भी आए हो। हम मैं सभी से कह रहा हूं कि आप भी आए हो। हो सकता है मैं भी आया हूं। हम किसी बड़े टास्क के लिए आए हैं और यहां आकर भूल गए। अपना टास्क भूल गए और चीजों में थोड़ा उलझ के रह गए। क्या एक बार यह जो अहम ब्रह्मास्म वाली डेफिनेशन है अगर हम खुद को याद दिलाएं कि मैं भी उस ब्रह्म का अंश
(54:24) हूं। मैं भी परमपिता परमात्मा का अंश हूं। क्या मेरी आत्माएं नहीं कह सकती? और अगर एक बार मेरी आत्मा ने जान लिया अहम ब्रह्मास्मि यकीन मानना मुझे कुछ और कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। धरती पर आने का सारा पर्पस सॉल्व हो जाएगा। अगर मैं कह सकूं अहम ब्रह्मास्म। पर यह बात इस बात को घुमा फिरा कर कहना पड़ रहा है ताकि इनकी लॉजिकल बुद्धि थोड़ी सी एक्सेप्ट कर ले इस बात को वरना आसान नहीं है। मतलब यह मैं जो कह रहा हूं ओवरऑल और मेरी फीलिंग्स ऐसी जुड़ी हुई है ना इस वर्ड के साथ ऐसा लगता है मेरी मेरी आत्मा में उतरा हुआ शब्द है मैं कि बाहरी शब्दों की बात नहीं कर रहा
(54:55) हूं इट्स पार्ट ऑफ माय बीइंग यस अहम ब्रह्मास्मि अगर मैं पब्लिकली कहूं मैं शायद चीख-चीख कर कहूं लोगों के सामने पता है मैं कौन हूं पर मैं इगोइसिस्टिकली नहीं कह रहा हूं तुम भी वही हो तत्वमसी श्वेत के ये हमारे यहां एक और शब्द है हमारे उपनिषदों में निकला हुआ तत्वमसी तुम भी वही हो तुम वही हो तो वो वो वो बताने का इस पूरी कहानी का अगर मैं पर्पस समझूं तो अपनी आइडेंटिटी को शिफ्ट करना। मैं अपने आप को सामान्य सा घिसा पिटा सा इंसान मानकर कि मेरे तो कोई चक्र जागृत नहीं है। मेरे तो बस बच्चों की रोजीरोटी से अलावा मेरे को कोई लेना देना नहीं है दुनिया से।
(55:27) मैं कह रहा हूं थोड़ा सा बड़ा सोचना शुरू करो। व्हेन यू फील दैट आई एम समथिंग ग्रेट यू आर एक्चुअली ग्रेट। जितना तुम सोच सकते हो तुम उतने महान हो। और आप जैसे या जो और हायर लोग हैं जो शायद थोड़ा बहुत मेरे अंदर भी कुछ अंश हो जिन्होंने खुद को थोड़ा सा पहचान लिया है वो पहचानते कहते हैं यार तुम क्यों दुखी हो रहे हो है ना तुम क्यों दुखी हो रहे हो किस बात के लिए अपने को इतना संकोचित करके बैठे हो छोटा समझ के बैठे हो तुम इतनी विराट का अंश हो तुम परमपिता परमात्मा का अंश हो तुम ये बात अपने अंदर जान कर और फिर बिहेव करो संसार के साथ देखो संसार की प्रॉब्लम
(56:01) तुम्हें कितनी छोटी लगनी शुरू हो जाएंगी राइट अगली बार फिर इस पर चर्चा करेंगे बहुत अच्छा लगा संजीव जी हर बार की तरह आपकी एक किताब आई थी तो मुझे लगा था कि मैं अ उसके बारे में भी चर्चा करूंगा। स्माइलिंग योगी हां ये नाम बहुत अच्छा लगा। क्या मन में बेचारा है? बस एक बेस ये है इसका कि मतलब कि जो जो भी जो भी आध्यात्मिक लोग हैं ना वो कभी-कभी बड़े सीरियस हो जाते हैं। मतलब कि एकदम उदास गंभीर से लोगों को लगता है कि यार ये क्या बंदा मतलब ये डिस्कनेक्ट हो चुका है दुनिया से। स्माइलिंग योगी का्सप्ट मेरी सदगुरुदेव भगवान जी ने 1 जनवरी की रात को 2 मुझे
(56:37) दिया था 1 जनवरी 2026 की रात को 2:00 बजे गुरुदेव ने कहा कि चेहरे पर स्माइल लेकर आ गंभीर मत हुआ कर मुझे ही उन्होंने सीधासीधा आके बोला कि गंभीर मत हुआ कर चेहरे पे स्माइल लेकर आ और अब क्या समझ में आया उन्होंने बोला फिर मेरे मन में जो संकल्प उन्होंने डाला स्माइलिंग योगी ये वर्ड आया कि एक ऐसा व्यक्ति जो कनेक्टेड भी है लेकिन वो हंसता खेलता गाता हुआ प्रैक्टिकल इंसान भी है हम तो वो एंजॉय करता है संसार के साथ रहता है लेकिन वो जब चाहे अपने आप को इनसे अलग भी कर सकता है। तो इसमें आपने स्टोरीज दी हैं। नहीं इसमें मतलब एक स्माइलिंग योगी
(57:10) की डेफिनेशन बताई है और उसके बेस पे कैसा व्यवहार हमें किस स्थिति में करना चाहिए? बड़ी मजेदार वे में है। मतलब इसमें कोई भी ऐसी कुछ बोरिंग कहानी कुछ किसी के बारे में नहीं बताई है। बट एक ऐसा व्यक्ति अलग-अलग कंडीशन में क्या बिहेव करेगा? जब उसके कोई मान लो पत्नी डांट रही है। अब अब डांट रही है तो एक स्माइलिंग योगी का बिहेवियर कैसा होगा? एक सामान्य इंसान होगा तो वो अलग ढंग से बिहेव करेगा। हो सकता है वो लड़ना शुरू कर दे। लेकिन एक स्माइलिंग योगी किस तरीके से अपने इमोशंस को अलग करते हुए और अपने आप को एक आत्मा जानते हुए उसका बिहेवियर कैसा
(57:40) होगा? तो इसके ऊपर ये है और बेहतरीन चीज है। जरूर पढ़ें। Amazon पे भी उपलब्ध है ये और बाकी हमारी जो वेबसाइट है उस पर तो है ही है। ब्यूटीफुल। और एक जर्नी बिय्ड डेथ करके दूसरी बुक भी है। रिसेंट अभी लिखी है। तो राइट। जर्नी बियों्ड डेथ। जर्नी बियों उसकी इनके लिंक्स हम जरूर डिस्क्रिप्शन में डाल देंगे। बहुत-बहुत शुक्रिया संजीव जी हर बार की तरह कुछ नया सीखने को मिलता है और आज तो हमने एक्सपीरियंस भी किया तो बहुत आसानी से आप ऐसे डीप टॉपिक समझा देते हैं तो सबके बिहाफ पर थैंक यू सो मच जी थैंक यू थैंक यू जी थैंक यू आज का पूरा शो देखने के लिए दिल से
(58:17) शुक्रिया एपिसोड कैसा था मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा चैनल को सब्सक्राइब भी अवश्य करें क्योंकि सुपर टॉक्स एक मूवमेंट है जो हमारे देश का भविष्य उज्जवल बना रहा है जय ने

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