How Colonialism Destroyed India’s Economic Power | Prachyam
Author Name:Prachyam
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(00:03) जब आपने जॉब डिग्निटी ही खत्म कर दी। आपने बोला कि यह तो अच्छी बात हो गई। व्यापारी आपसे बड़ा है। किसी ने बोला ब्राह्मण व्यापारी से बड़ा है। तो जो सिस्टम के अंदर में उन्होंने पहले तो पैदा करना शुरू किया है कि द स्टेट इज न्यूट्रल। सोसाइटी इज़ नॉट न्यूट्रल टू यू। स्टेट इज़ सेक्युलर। सोसाइटी इज़ नॉट सेकुलर। जब तक मुगल नहीं आए तब तक हम पे क्या अटैक हुआ। देखिए पहले कारखाने स्टेट ओनड। मुगलों के जमाने में आए। उसके पहले कारखाने कोई स्टेट ओल्ड नहीं थे हिंदुस्तान। डाका मुस्लिम आठ अलग-अलग कम्युनिटी आठ अलग-अलग स्टेज करती थी। आठवीं कम्युनिटी थी रफूकार
(00:38) थी। वो रफूकार किसी जमाने में शायद हिंदू रहे होंगे लेकिन मुसलमान बन चुके थे डाका मुस्लिम बनाते मनाते। लेकिन आठ अलग-अलग कम्युनिटी उस 1 मीटर का जब फैब्रिक बनाती थी तो ऑटो अपने मन में ओन करती थी। भाई मैं मास्टर रफूगर हूं। मैं मास्टर पहले स्टेज का हूं वगैरह-वगैरह। वो कौन से ऐसे प्रमाण आपको स्पष्ट रूप से दिखे कि आप इस निष्कर्ष पर पहुंचे। सुहरण करके एक पोर्ट है वुमन में। ये फोर्थ सेंचुरी बीसी में पोर्ट क्रिएट हुआ। तो लोएस्ट लेयर जो है फोर्थ सेंचुरी बीसी में। वहां से आपको इंडियन सेलर्स की पूरी मटेरियल एविडेंस मिलती है। तो क्या ये सच है कि जो रोम में
(01:14) बिकता था चाइनीस सिल्क वो कलिंगा कॉटन था। बुद्ध ने की एक साध्वी ने वो वस्त्र पहन करके आती है और बिल्कुल सामने बैठती हैं। तो बुध जो है वह बोलते हैं कि अब से हमारी साध्वी कोई भी जो है वो कलिंग कॉटन नहीं पहनेंगी। एक दौर चला इंपीरियल रोम में पहले 200 साल जैसे रोम कैंपर थे। इलाइट लेडीज थी। यहां तक कि क्लियोपट्रा का भी कहा गया उसके पहले। तो एक फैशन बना कि आप वस्त्र पहन के आ रहे हैं लेकिन आपको अंदर का सब आज जो कई हद तक वापस आज फैशन कहीं आया है तो पूरा जो आपकी जो मतलब हुस्न है पूरा दिखना चाहिए कपड़ों के अंदर भी तो लोग इसको बोलते थे सिलिकॉन कॉटन हमारे लिए
(01:51) सबसे बड़ी आज मैं बोलता हूं कि इंफॉर्मेशन है। इंडिया वाज़ इकोनमिकली फुल्ली इंटीग्रेटेड इन 1200 बीसी। आपका यह भी कहना है कि जो चाइना की जो सिल्क इंडस्ट्री है उसके विकास में भी भारत की बहुत बड़ी भूमिका रही है। [संगीत] [संगीत] दैट्स ए अमेजिंग ऑब्जरवेशन यू नो अमेजिंग आई वुड से अगर भारत का हर व्यक्ति इस बात को समझ ले तो भारत आर्थिक रूप से सबसे समृद्ध देश बन जाएगा पूरे विश्व में। हमें लगता है कि एक लंबा काल बीता है जब आतताई
(02:37) आए, आक्रमणकारी आए, आक्रांता आए, इनवीडर्स आए, बर्बर लोग आए, डेजर्ट कल्ट आया। फिर ये कॉलोनाइजर्स आए, ब्रिटिशर्स आए, पोर्चुगीज़ आए, फ्रेंच आए, डच आए। है ना? इन्होंने जो हमारे सामाजिक ढांचे को पूरी तरीके से विनष्ट किया उसकी वजह से हमें लगता है कि हम अपना सेंस ऑफ बियरिंग आई थिंक हम भूल गए हैं। और यही कारण है कि जो कंटिन्यूटी के मूल आधार स्तंभ थे जिससे हमारी संस्कृति और सभ्यता आगे बढ़ती रही। कहीं ना कहीं हम उसको समझ नहीं पाए हैं। तो यह जो आपका चिंतन है और जो शोध है यह
(03:22) बहुत इंटरेस्टिंग है। एक नए आयाम को प्रकाश में लाती है। शायद उस आयाम को बहुत लोगों ने उस पर काम नहीं किया है अभी। तो ये जो इकोनॉमिक इंटीग्रेशन था जो इकोनमिक ढांचा था वो मूल कारण था कि ऊपर जो राजवंश बदले, राजा बदले जो भी पॉलिटिकल कोलैप्सेस हुए लेकिन मूल जो है भारत का वही रहा और इकोनॉमिक कंटिन्यूटी वो जारी रही। आगे भी हैं। दैट्स वै इंटरेस्टिंग दैट यू हैव यू नो वर्क्ड वेरी वेरी डीपली एज आई कैन से। माय नेक्स्ट क्वेश्चन टू यू इज़ क्या हुआ कि हम इकोनमिक कंटिन्यूटी तो जारी रही लेकिन क्या रीजन है कि भारत के लोग इसको भूल गए या उसको उस गहराई से समझ नहीं पाए
(04:09) या धर्म को उन्होंने एक अलग परिभाषा उसकी बना ली। अर्थ से उसको अलग कर लिया। बहुत ज्यादा भक्ति और पूजा पाठ और इस पर फोकस हो गया। थोड़ा सा ये हुआ क्या है? देखिए बहुत बढ़िया सवाल है। खासकर जो आपने आखिरी जो पार्ट बोला है मैं इसको दो बात दो पार्ट में डिवाइड करता हूं। देखिए जो कोलराइजेशन का पहले का जो पार्ट था एक बड़ी इंटरेस्टिंग बात है कि जब तक मुगल नहीं आए तब तक हम पे क्या अटैक हुआ? मुगलों के बाद क्या चेंज हुआ और कोलराइजेशन में क्या हुआ? ये पहले दो बातें छोटी सी कहूंगा। देखिए पहले कारखाने स्टेट ओनड मुगलों के जमाने में आए। उसके
(04:45) पहले कारखाने कोई स्टेट ओल्ड नहीं थे हिंदुस्तान तो व्हेन द स्टेट स्टार्टेड कॉम्पिटिटिंग विद यू ओ कन्वर्ड कारखाना है ये हिंदुस्तान भारत की शब्दावली में मुगलों के जमाने से है खासकर अकबर के जमाने से उसके पहले तो कुछ था नहीं तो ये हमें समझना होगा अब इसमें कुछ हद तक चोट आई होगी क्योंकि जिसको आज हम फेवरेटिज्म बोलते हैं कॉन्ट्रैक्ट भी लाइसेंसिंग टाइप तो नहीं था लेकिन लाइसेंसिंग भी था ऑन वेरियस रॉ मटेरियल्स केम हियर फॉर द फर्स्ट टाइम तो वो तो ठीक है उसके पहले का जो हम बोलते हैं कि कि भाई अग्रेशन आया दिल्ली सल्तनत के जमाने में तो देखिए कि
(05:17) क्या क्या आया और क्या उसका रिएक्शन था। आया क्या कि प्राइमरली आपकी जो रेवेन्यू एक्सट्रैक्शन बढ़ी जो हमारी ट्रेडिशनल थी वह थी छटांग यानी 16 1/2% जिसको आप जीएसटी बोल सकते हैं इन अ वे वो बढ़ के हुई करीबन 25 27 टका तो 10% आपसे टैक्स बढ़ा क्योंकि आपका एक तो उनको रेवेन्यू एक्सट्रेक्शन चाहिए था और ज्यादा चाहिए था उनकी मिलिट्री संभालने के लिए और उनकी ब्यूरोक्रेसी संभालने के लिए उसके पहले ब्यूरोक्रेसी क्या थी रेवेन्यू टैक्स जो कलेक्ट होता था वो होता था पटवारी पटवारी तो नहीं था उस जमाने पटेल लेवल पे विलेज लेवल पे या श्रेणी लेवल पे या एसोसिएशन
(05:51) लेवल पे तो स्ट्रक्चर में कुछ चेंजेस आई लेकिन फैब्रिक कोप करती रही कि भाई 10 टका टैक्स और देना पड़ेगा। कारखाने आए तो थोड़ा कंपटीशन कितने कारखाने बैठाएंगे वो भी कंपटीशन चल गया। कोई प्रॉब्लम नहीं आई। उसके बाद में तीसरी आई कॉलोनाइजेशन में। अभी कॉलोनाइजेशन के अंदर में जो हमारा सबसे बड़ी प्रॉब्लम वहां से शुरू हुई। 1870 में 1854 में बल्कि मैं प्रिसाइज कहूं 1854 में लंदन में एक बहुत बड़ा एक्सिबिशन हुआ जो शायद मतलब हमें सुमेलियन के जमाने का तो नहीं पता लेकिन किसी भी तरीके से देखें तो विश्व का सबसे बड़ा एक्सिबिशन 1854 में हुआ लंदन में। इस एक्सिबिशन में
(06:31) ब्रिटेन ने अपना विश्व साम्राज्य भी दिखाने की कोशिश की। कि कॉलोनियल पावर्स के साथ मिलकर और भी उन्होंने एक जैसे हम आज बड़ा एक्सिबिशन डालते हैं दिल्ली में उसी तरीके से अलग-अलग पवेलियंस बनाए और अलग-अलग वस्तुएं जो भी उनके साम्राज्य में बनती थी वो वहां दिखाई। प्राइड ऑफ प्लेस वास टू व्हाट इज रेफर्ड टू एस ढाका मुस्लिम वुड्स टी और इन पर पैनल बने वह जमाने में जैसे आज के दुनिया का पहला और आज उसके बाद जो भी एक्सिबिशंस आए हैं वो वहीं से इंस्पायर हो के आए हैं तो पैनल्स बने तो जो भीड़ लगी डाका मलिन वुड स्टील और इन इंडियन प्रोडक्ट्स पे वो कमाल थी।
(07:06) तो 1854 में डिस्पाइट मेकिंग फंडामेंटल चेंजेस इन लॉ एंड वेरियस अदर थिंग्स। वेरियस स्टडीज वर कंडक्टेड अमंग कंज्यूमर्स एंड साइंटिस्ट ऑफ़ दैट टाइम अंडरस्टैंडिंग द ऑल दी फैब्रिक प्रोड्यूस्ड अक्रॉस फ्रेंच मसलिन एज वेल एज आयरिश मसलिन एज वेल एज ब्रिटिश मसलिन वर सिग्निफिकेंटली इनफीरियर टू डाका मसन एंड अदर क्लॉथ्स एंड सो टू अदर प्रोडक्ट्स आई डोंट वांट टू गेट इनू फदर डिटेल्स जस्ट टू एक्सप्लेन अ पिक्चर तो 1855 के बाद में कोलोनाइजर्स ने खासकर ब्रिटिश ने एक बात समझ ली सुपर स्ट्रक्चर तब्दील करके इनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा ठीक है आप इंडिगो
(07:40) फार्मिंग कर लें आप फार्मिंग की पूरी जो है व्यवस्था ही चेंज कर दें जहां पे धान उगता था वहां पे कैश को आप इंडिगो डाल जो कहीं और भेज दे कुछ लोग फेमिन में मर जाएंगे। हुआ वो सब कुछ बंगाल में वो बाद में हुआ लेकिन वो सब कुछ होगा लेकिन अंडरलाइन मैन्युफैक्चरिंग जो 5000 वर्ष से चल रही है इनके सिस्टम नहीं बदलेंगे। इनकी कला नहीं बदलेगी। इनकी कॉम्पिटिटिवनेस नहीं बदलेगी। तो वहां से जो मिशन शुरू हुआ आप अगर देखते हैं कि 1860 65 ये दूसरी एक्सिबिशन रिपीट हुई 1862 में सेम रिजल्ट्स इन अ डिफरेंट पार्ट ऑफ़ लंदन। तो 1870 के बाद अगर आप देखते हैं तो एक
(08:14) बाकायदा प्रक्रिया चली तीन चार दिशाओं में। पहली दिशा यह चली कि जिसको आप अगर आज भी अगर जाते हैं मतलब मैं अपने स्तर पर बोल रहा हूं और मैंने बहुत से और भी लोग देखे हैं कि जो चीज एक बड़ी फुटवेयर कंपनी आपकी फुट आपकी शायद जूतों को ना रिपेयर कर पाए वो मेरे घर के पास का जो लेगसी कॉबलर है उससे सॉल्यूशन ज्यादा मिलेंगे और आपको हर दिशा में मिलेंगे। तो उन्होंने पहले इस चीज को एक प्रोफेशन को कास्ट में तब्दील करके उसको अछूता दिखा के और यह दिखा के कि वाइट कॉलर जॉब्स यानी सरकार के साथ रहना और आप एक अलग किस्म की इलाइट क्रिएट करें।
(08:51) उसके बाद में आप कास्ट के बेस पे इाइट खड़ी करें। यानी जो स्ट्रक्चर जो फैब्रिक था अंडरलाइन व्हिच बेसिकली गव प्राइड टू दी पीपल हु यूज टू डू इट एज अ पार्ट ऑफ़ द सिस्टम। देखिए जी जो आदमी वीवर था ढाका मुस्लिम आठ अलग-अलग कम्युनिटी आठ अलग-अलग स्टेज करती थी। आठवीं कम्युनिटी थी रफूकार थी। वो रफूकार किसी जमाने में शायद हिंदू रहे होंगे लेकिन मुसलमान बन चुके थे डाका मुस्लिम बनाते बनाते। लेकिन आठ अलग-अलग कम्युनिटी उस 1 मीटर का जब फैब्रिक बनाती थी तो आठों अपने मन में ओन करती थी। आठों के पास में अगर आप समाज में जाएं तो कुछ कहने के लिए था। भाई मैं मास्टर अफूगर
(09:26) हूं। मैं मास्टर पहले स्टेज का हूं। वगैरह-वगैरह जब आपने जॉब डिग्निटी ही खत्म कर दी। आपने बोला कि यह तो अच्छी बात हो गई। व्यापारी आपसे बड़ा है। किसी ने बोला ब्राह्मण व्यापारी से बड़ा है। तो जो सिस्टम के अंदर में उन्होंने पहले तो पैदा करना शुरू किया है कि द स्टेट इज न्यूट्रल। सोसाइटी इज नॉट न्यूट्रल टू यू। स्टेट इज़ सेक्युलर। सोसाइटी इज़ नॉट सेक्युलर। यू आर इंडिविजुअलिस्टिक। उसके बाद अगर आप बड़ी इंटरेस्टिंग बात देखेंगे। तो 1700 ये पहले शुरू हो चुका था लेकिन 1800 1857 के बाद में एक्सलरेट हुआ जो आज भी हम देख रहे हैं कि मुस्लिम सिविल लॉ
(10:02) हिंदू सिविल लॉ कॉमन लॉ कोर्ट्स उसके पहले जो था हर आदमी लीगल सिस्टम भी अपने इंडिविजुअल बेसिस पर अपनाया करता था। अब यह बोला जाने लगा कि सिस्टम क्योंकि सबके लिए बराबर है। तो आपको एक हद तक आप अगर इसको वेस्टर्न फिलॉसोफी में देखें जिस तरीके से चर्च बढ़ा लगभग 700-800 साल क्रिश्चियन रोम में जिसको हम बोलते हैं कि ड्राइविंग द एनिमल अवे फ्रॉम द हार्ट। यानी एक आदमी को अपने कम्युनिटी से अलग लेके जाना यानी कम्युनिटी को क्रैक करना। फिर उन्होंने क्रिमिनलाइज करना शुरू किया। अब क्रिमिनल ट्राइब का मतलब क्या है? तो जो वुड स्टील बनाया करते थे उनकी आईआईटी
(10:38) में बड़ी स्टडी हुई है। वो रात को 12 से तीन बनाते थे क्योंकि ह्यूमिडिटी अलग रहती थी वगैरह-वगैरह। तो उनको उन्होंने बोलना शुरू कर दिया कि भाई ये तो क्रिमिनल ट्राइब है। ये तो रात को चोरी करने जाते हैं। तो अगरिया जो ट्राइब बनाया करते थे उनको क्रिमिनलाइज्ड ट्राइब बोला गया। उनको पेड़ काटने से इंकार किया तो पेड़ के बिना कोयला नहीं बना पाए। ये आपका स्टील नहीं बना पाते थे। तो 1872 में धर्मपाल जी की किताब से मैंने देखा था कि द टोटल प्रोडक्शन ऑफ इंडियन स्टील इन स्मॉल फर्नेस अगेन देखिए छोटा कम्युनिटी बेस्ड वाज़ मोर देन रशिया व्हिच इज़ द
(11:11) लार्जेस्ट प्रोड्यूसर इन द वर्ल्ड। यूएस स्टार्टेड प्रोड्यूसिंग द लेवल ऑफ़ स्टील वी यूज्ड टू मेक एज़ अ कंट्री इन 1872 इन अर्ली 1900 आफ्टर इंडस्ट्रियलाइजेशन। तो उन्होंने दो बातें की। एक तो व्यक्ति को समाज से निकाला। दूसरी बात उन्होंने यह की कि जो आप काम कर रहे हो उसकी कोई मतलब सोशल महत्ता नहीं है। तो इकोनॉमिक फैब्रिक को उन्होंने नीचे से काटना शुरू किया और वही बात कम्युनिटी अब आज वही बात कर रहे हैं कम्युनिटी ट्रस्ट बेस्ड फाइनेंसिंग पहले बोलते थे नहीं इंडिविजुअल इज़ मोरेंट नॉट द कम्युनिटी। आज बात कर रहे हैं इकोसिस्टम इज़ मोरेंट। पहले बोलते थे
(11:43) इंडिविजुअल फर्म प्रॉफिट्स आर मोरेंट। पहले बोलते थे कि भाई यू हैव अ सोसाइटी वेयर एवरीबडी यू नो शुड हैव इक्वल राइट्स। अब वो दूसरी बात बोल रहे हैं कम्युनिटी राइट्स। सो एक इकोनॉमिक फैब्रिक उन्होंने काटा और वहां से हुआ यह शुरू कि एक जनरेशन ऐसी पैदा होनी शुरू हुई व्हिच वास कॉन्शियसली कल्टीवेटेड फॉर ऑलमोस्ट 60 70 80 इयर्स वेयर इलाइटिज्म मेंट मेड एंप्लॉयड टू द गवर्नमेंट वेयर कमर्शियल सक्सेस मेंट एंप्लॉयड वि द लार्ज कंपनी वेयर एनी ट्रेडिशनल ट्रेड वाज़ फाउंड अपॉन मास मैन्युफैक्चर टू शेप तो ये एक माइंड शिफ्ट है सर ये ये एक माइंडशिप है जो कम
(12:18) से कम 60 70 सालों में हुआ और ये 60 70 सालों में बड़े ही कॉन्शियसली इसको थ्रू द ब्यूरोक्रेसी एक्सजीक्यूट किया गया और उसके बाद में अनफॉर्चूनेटली आफ्टर 1950 वी कंटिन्यू वि द सेम माइंडसेट एंड द सेम थिंकिंग नाउ लिटिल बिट इफ वी कम बैक यू नो जो आपके रिसर्च थी आपका जो शोध था व्हाइल राइटिंग दिस बुक अगर मैं आपसे पूछूं कि वो कौन से ऐसे प्रमाण आपको स्पष्ट रूप से दिखे जो भारत की जो आर्थिक जो भारत का फुटप्रिंट है वो अलग-अलग स्थानों में विश्व में कहां कैसे आपको देखने को मिला कि आप इस निष्कर्ष पर पहुंचे? बहुत बढ़िया सवाल आपने किया है क्योंकि
(12:58) बहुत सी बातें ऑलदो पब्लिक डोमेन में है आज लेकिन हम इस बात की महत्ता को शायद समझ नहीं पाते। मैं एक-एक करके तीन चार बिंदु आपको बताता हूं। सुमहरन करके एक पोर्ट है। सुहरन शायद उसका आज का नाम है वुमन में। ये फोर्थ सेंचुरी बीसी में पोर्ट क्रिएट हुआ। फोर्थ सेंचुरी बीसी यानी रोमंस के यहां आने के 400 वर्ष पूर्व और यह यहां से अगर आप डिस्टेंस देखें तो डीप सी सेलिंग में ही हो सकता है। ये अलोंग द कोस्ट आप दो मास या सिंगल मास बोस पे नहीं जा सकते। तो लोएस्ट लेयर जो है फोर्थ सेंचुरी बीसी में वहां से आपको इंडियन सेलर्स की पूरी
(13:35) मटेरियल एविडेंस मिलती है। अब इसमें दो बातें होती है कि फोर्थ सेंचुरी बीसी में आप लॉन्ग ट्रेड करते थे। पहली बात। दूसरी बात यह दर्शाता है कि आप जब पोल्ड शुरू हुआ तब तैयार थे। यानी यू आर आल्सो द पाइनियर्स। अग्रणीय थे आप सामने थे। इसी तरीके से मैं अगर एक और बहुत इंटरेस्टिंग बात लेके जाऊं 1800 बीसी के आसपास तो एक बहुत बढ़िया मल्टीडिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट हुआ 2019 में जो अपने आप में एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट मैं बोलता हूं। अह साइंस एंड हिस्ट्री की अह जो लाइन है साइंस हिस्ट्री एंड आर्कियोलॉजी अकरी करके एक जगह है जो सेंटोनरी वोल्केनो मतलब
(14:14) आइलैंड के पास में ऑफ द ग्रीक एशियन आइलैंड्स ऑफ द ग्रीक ईयर। तो यहां पे एक वोल्केनो के चलते पूरा जो शहर था वो तबाह हुआ और वो पूरा लावा जो है आया तो ऐश के चलते वो पूरा प्रिजर्व हो गया। जब वो एक एस्केवेट हुआ आज से करीबन 1950 60 में तो उसका जो सेंट्रल हॉल था यानी आप कम्युनिटी हॉल बोल सकते हैं वह पूरा वेल प्रिजर्व था क्योंकि वोल्केनिक ऐश ऊपर आई तो उसको क्लीन करके निकाला गया निकाला गया तो एक उनको अंदाज हुआ बेस्ड ऑन वेरियस एविडेंस दैट इट हैड अ रिलीजियस कोनोटेशन दैट कम्युनिटी हॉल सम काइंड ऑफ़ रिलजन बीइंग प्रैक्टिस्ड इंटरेस्टिंग बात यह है कि एक
(14:49) रानी है ऊपर और रानी जो है उसको मिलने के लिए छह सात जो है मंकीज़ ऊपर क्लाइम कर रहे हैं 1950 से लेकर 2019 तक यह माना गया कि सबसे क्लोजेस्ट लिंक तो है इजिप्ट। तो इजिप्ट के मंकीज जो हैं वही ड्रॉ किए गए होंगे लेमूर्स वगैरह। 2019 में पहली बार एक मल्टीिप्लिनरी स्टडी हुई जो बहुत यूनिक है हिस्ट्री आर्कियोलॉजी के इतिहास में। एक आर्ग्योस्ट ने एक जिम्मा लिया और बड़ा मुश्किल हुआ उसे। उसने चार की टीम बनाई। एक था उसके अंदर में प्राइमेटोलॉजिस्ट जिसको कोई हिस्ट्री आर्कियोलॉजी से लेना देना नहीं। ही स्टडीड ओनली प्राइमेट्स मंकीज ऑन हिज़ लाइफ। जो देख के बोल सकता है
(15:25) यह कौन सा मंकी है। दूसरा था एक टैक्सोनॉमिक इलस्ट्रेटर जो बेसिकली इलस्ट्रेट करता है उसकी भी मैं बताऊंगा मैं। तीसरा था आर्कियोलॉजिस्ट और चौथा उनकी टीम का था मेरे ख्याल से आर्ट हिस्टोरियन। अच्छा जो स्टाइल्स देख सकता है कि कौन सी स्टाइल में बना है। इंटरेस्टिंग। अब देखिए उसका निष्कर्ष क्या निकला? निष्कर्ष यह निकला प्राइमेटोलॉजिस्ट से बोला कि यह तो इंडियन लंगूर है। यह तो इंडियन लंगूर है। अब इंडियन लंगूर यहां से 2000 ढाई हजार किलोमीटर दूर ढाई हजार बीसी में लगभग 2200 2000 बीसी में वहां पे पहुंचे कैसे? वहां तो है नहीं। आज भी नहीं
(15:59) है। उसने बोला ये लंगूर ही है। दूसरा स्पीशीज हो नहीं सकता। लंगूर यहीं के हैं। मैं लंगूर बैठे। दूसरी बात जो जो टैक्सोनॉमिक वाले ने बोला वो और भी इंटरेस्टिंग है। उसने बोला कि ये जो ड्राइंग है ये सिर्फ लाइव मंकी पे बन सकती है। एक जो खेल के ऊपर कूद रहे हैं। बोला ये मंकी यहीं थे। ओ अगर ये यहां नहीं थे तो ये इतनी रियलिस्टिक बन नहीं सकती। ओ आर्टिस्टोलियन ने बोला कि ये ना इजिप्ट की स्टाइल है ना कहीं और ये कहीं और की स्टाइल है। अब उसने ये जब बिकॉज़ इट इज़ विद इन आउटसाइड इज़ परम्यू बट इट इज़ नॉट अ नोन स्टाइल विद इन ग्रीक्स एंशिएंट ग्रीस। हम
(16:32) नर स्टाइल विद इन इजिप्ट व्हिच इज नेक्स्ट डोर। अब कहां की है? अब आप कोई भी अटकल लगा लें। लेकिन महत्वपूर्ण बात क्या है? रिलीजियस कोनोटेशन समबडी वाज़ वरशिपिंग लंगूर टू हैव ब्रॉट देम फ्रॉम 2500 माइल्स अवे अ किलोमीटर्स अवे टू क्रिएट अ टेंपल विथ देयर इलस्ट्रेशनंस। हम बी इट वाज़ पॉसिबल फॉर ट्रेड टू हैपन ओवर 25,500 कि.मी.
(16:55) सी इट मींस दी इंडिया हैड अ ट्रेड लिंक 25,500 कि.मी. अवे 2200 इयर्स बैक नॉट व्हेन रोमंस लैंडेड इन 26 बीसी। तो डिस्कंटिन्यूटी की बात होती है कि भाई मेसोपोटेमिया 1800 कोलैप्स रोमंस कम इन 26 बीसी चलिए हम आपकी बात मान लेते हैं। साइरस आया अलेग्जेंडर आया उसने भी कुछ ट्रेड किया 1650 बीसी के आसपास यानी इंडस वैली कोलैप्स हो चुका था। अच्छा। तो इसका मतलब यह हुआ कि आफ्टर द कोलैप्स ऑफ़ द इंडस वैली मतलब देयर वाज़ स्टिल ट्रेड बीइंग रिटर्न [हंसी] एंड समबडी वाज़ फेयरिंग लंगूर हाउ हाउ कैन देयर बी डार्क एजेस? हाउ कैन देयर बी डार्के? तो उस पे बड़ी प्रॉब्लम हुई उस आर्कलॉजिस्ट और आज भी फेस
(17:30) कर रही है। अब वो क्या उसकी रिजेक्शंस हो सकती है क्योंकि चारों साइंटिस्ट हैं। अपने-अपने तरीके से एक्सपर्ट्स हैं। एक्सपर्ट्स हैं। तो उसको मैं बोलता हूं कि इनक्रेडिबिलिटी बायस इनका आंसर जो बाकी एक्सपर्ट्स का आता है। ऐसा हो नहीं सकता। तो एक वजह बताइए भ ऐसा हो नहीं सकता। इट इज़ बेसिकली कॉल्ड इनक्रेडिबल बायस। मतलब यह हो ही नहीं सकता। मतलब उसकी कोई और एक्सप्लेनेशन दे पा रहे हैं। जबकि यहां पे एक्सपर्ट एक्सप्लेनेशन है। तो ये तो दो बिंदु बड़े इंटरेस्टिंग लगे। तीसरा एक बिंदु हमें समझना पड़ेगा। इसमें भारत का इतिहास बदल जाता है हर तरीके से। और ये मैं अपने आप
(18:02) मतलब बहुत ही आई एम वेरी प्राउड ऑफ हैविंग टेकन आउट दिस पर्टिकुलर पीस ऑफ़ इनफेशन। जब एलेक्जेंडर ने हमला किया और युद्ध जीता और परर्शियन एंपायर कोलैप्स हुआ तो एक बहुत ही फेमस मिथ्या लोग बोलते थे हिस्ट्री का उनका पीस है बिटवीन परर्शिया एंड ग्रीक दैट वास कॉल्ड द सिल्वर होल्ड द लार्जेस्ट सिल्वर होल्ड इन द वर्ल्ड्स हिस्ट्री दैट टाइम क्योंकि सिल्वर सतपी से आता था वो तीन टन था या पांच टन था जो भी था दैट वाज़ कैरिड ओवर मेनी मेरी मेनी यू नो डोंकीज़ और व्हाट हैव यू हॉर्सेस व्हाटएवर बाय एलेग्जेंडर एंड शिफ्ट टू ग्रीस और जिससे उसने अपनी ग्रीक कॉइंस
(18:42) मिंट करनी शुरू की अपने नाम। ये एक कहानी है ग्रीस और परर्शियन हिस्ट्री की। तो कुछ वैज्ञानिक जो सिल्वर प्रोविंस यानी सिल्वर कहां से आया लेड आइसोटोपी लेकर कहां से ये सिल्वर आया? इन्होंने इस कहानी को साइंस में इवैल्यूएट करने की ठानी नहीं। तो उन्होंने क्या किया कि जो भी कॉइंस स्ट्रक हुए थे एलेक्जेंडर एलेक्जेंडर के 100 साल बाद यानी 300 से लेकर लगभग 150 बीसी तक वो सब इकट्ठे किए सैंपल। अब जब आप सैंपल करते हैं तो फाइंड आउट वेयर द सिल्वर के इन दो स्क्वाइंस। अब आप कंपेयर करते हैं एज अ कंट्रोल तो उन्होंने बोला कि भाई ये जो
(19:19) कंबोज और गांधरा जनपद में उस समय जो कश्यपना ये जो बेंट सिल्वर जिसको वेस्ट कॉइंस नहीं मानता है। लेकिन ठीक है करेंसी के तौर पे चलते थे। तो ये जो बेंट बार्स हैं इनको भी इवैलुएट किया जाए कि ये भी लगभग उसी पीरियड के हैं। 400 500 बीसी के हैं। 500 बीसी के ये सिल्वर हैं। उसी उस जब दारियस ने पैसे इकट्ठे किए थे सिल्वर भाई बाकी 17 पीसेस जो एलेक्जेंडर ले गया तो उन्होंने सिल्वर को भी एक कंट्रोल मोड में रखा। उनके लिए फुटनोट है। हमारे लिए सबसे बड़ी आज मैं बोलता हूं कि इंफॉर्मेशन है। जो गांधार और कंबोज का जो सिल्वर था वो आया टर्की के माइंस से, एनाथोलिया से,
(19:55) ग्रीक से आया और स्पेन से आया और ब्रिटिश आइल से आया। स्पेसिफिक माइन जो सिल्वर डारियस के होस्ट्स में देखा गया वो लार्जली मैकडोनिया से था। क्योंकि मैकडोनिया उसकी 17 बी थी। तो वहां से सिल्वर आया और हमने सिल्वर इन चार जगहों से जनपदों ने उठाया। अब देखिए इसमें ब्यूटी क्या है? ब्यूटी यह है कि जो माइंस एनोलिया और तर्की में थी वह 1200 ईसवी से 1200 ईसा पूर्व से लेकर 12 1200 बीसी से लेकर 960 बीसी तक ही ऑपरेटिव थी। उसके बाद बंद हो गई। भाई ये उनका इतिहास है। उनका इतिहास नहीं है। उनका साइंटिफिक फाइंडिंग वि कंबाइंड विद देयर
(20:31) हिस्ट्री। उसकी वजह थी। वहां पे युद्ध वगैरह वगैरह वगैरह। 960 बीसी में फिनिशंस आते हैं। 1200 से 960 तक भी फिनिशंस आर वन ऑफ़ द पीपल हु माइन दोज़ माइंस। देन हरियम ऑफ टायर एंड किंग सोलमन साइन एन एग्रीमेंट एंड दी म आर शट ऑफ। सो अ वेरी हिस्टोरिकल पीस ऑफ़ साइंटिफिक रिसर्च जो इसी टीम ने की थी। देन टर्न टू आइबेरिया एंड स्पेन। आइबेरिया एंड स्पेन से वो माइन करते हैं। उसके पहले कोई माइन नहीं हुआ था क्योंकि कपलेशन मेथड से माइन होता है जो किसी और ने पहले नहीं किया। बट इज़ वेरी डिफिकल्ट टू माइन फ्रॉम देयर माइंस इन द नॉर्मल प्रोसेस। तो उन्होंने डेवलप किया आजाद
(21:06) किया फिनिशंस ने और उन्होंने 200 वर्ष वो माइंस ऑपरेट की और 200 वर्ष के बाद में एसीन एंपायर कोलैप्स हुआ उनका खुद का विनाश हुआ तो लगभग 650 बीसी में वो माइंस बंद हो चुकी थी तो 850 से 650 बीसी और 1250 से ये अलग-अलग कॉइंस है। अब देखिए ये क्या दर्शाता है कि हम अगर ट्रेड नहीं कर रहे होते तो सिल्वर यहां नहीं आता। बिल्कुल। अगर हमारा कनेक्ट नहीं होता तो सिल्वर नहीं आता। दूसरा यह प्रूव करता है द ओनली पीपल इन कंट्रोल ऑफ दैट सिल्वर वर द फिनिशंस तो फिनिश ट्रेड करते होंगे जो बहुत बड़ा डिबेट है कि क्या फिनिश हमारे साथ ट्रेड किया तो आज वो साइंटिफिक सबूत
(21:41) मिल गया तीसरी बात इसमें यह है कि आपका जो डारियस का जो सिल्वर था उसमें क्यों नहीं आया भाई अगर फिनिशंस डायरेक्ट ट्रेड नहीं करते थे तो ये सिल्वर अगर फिनिशंस अगर समझे किसी वजह से बॉर्डर ईरान के थ्रू आया या परर्शिया के थ्रू आया तो परर्शिया में तो ये सिल्वर है ही नहीं और सबसे बड़ी बात इंपॉर्टेंट यह है कि वह क्रेड क्या था? तो फिनिशर्स का अपना जो ओल्ड टेस्टमेंट के हिसाब से जो रिकॉर्ड बनता है वह इतिहास यह था कि वह यहां से गोल्ड ले जाते थे वगैरह-वगैरह बहुत सी चीजें ले जाते थे। और एक चीज वो ले जाते थे पीकॉक व्हिच दे कॉल
(22:12) एस टूकी इन हब्रू। नाउ टूकी इस टेकन फ्रॉम टोकी व्हिच इज़ अ टमिल वर्ड। तो आज से कम से कम 20 साल से यह हर फोरम में विवाद रहा है कि टोकी मतलब यह टैमिल पोर्ट से करते थे। तो मेरा सवाल प्रण जी बड़ा सिंपल है कि अगर यह टैमिल पोर्ट से करते थे तो भाई सिल्वर नॉर्थ वेस्ट में गांधार में इधर कैसे पहुंचा? तो या तो कोई हमारा इंटरनल कनेक्ट 1200 बीसी में रहा होगा ना। तो कई अंदर की ट्रेड भी 1200 बीसी में यानी इंडिया तब भी एक्टिव रहा होगा। पहली बात मान लीजिए कि अगर ये ट्रेड गांधार जनपद में करते थे जो जिसका एविडेंस ज्यादा है इंडस रिवर के थ्रू तो टोकी वहां पहुंचा
(22:49) कैसे? [हंसी] यानी इंडिया वाज़ इकोनॉमिकली कट इट शॉर्ट। इंडिया वाज़ इकोनमिकली फुल्ली इंटीग्रेटेड एंड देयर आर वेरियस अदर प्रोडक्ट्स आल्सो इंडिया वाज़ फुल्ली इंटीग्रेटेड इन 1200 बीसी इफ बिकॉज़ इफ इट वाज़ नॉट इंटीग्रेटेड दिस प्रोडक्ट वुड नॉट हैव गॉन इन 1000 बीसी। तो हम जो ये बात कहते हैं कि 500 बीसी 300 बीसी वी वर हाइली इंटीग्रेटेड इंटू द ग्लोबल इकॉनमी एज़ अर्ली एस 1200 बीसी। इसका एक लास्ट उदाहरण आपको देता हूं जो बहुत पुराना सबूत है लेकिन कोई इस पे ध्यान नहीं देता। लेमंस लाइन जो है यह दुनिया की पहली कल्टीिवेशन अकॉर्डिंग टू
(23:22) बॉटनी एक्सपर्ट्स एंड यू नो पैली बॉटनी एक्सपर्ट्स द अर्लियस्ट कल्टीिवेशन ऑफ़ लेमन इन द वर्ल्ड इज़ इन नॉर्थ ईस्ट स्लश चाइना जो बॉर्डरिंग एरियाज है यहां के इंडिया के आज और 1300 बीसी का है। द अर्लियस्ट एविडेंस ऑफ लेमन सीड्स नॉट लेमन फाउंड इन संगोल संगोल इज़ समवेयर क्लोज टू आप बोल सकते हैं पेशावर मतलब ऊपर जब जाते हैं मतलब उत्तर पथ के आखिरी छोर बिफोर यू एंटर मतलब डीप बिफोर यू एंटर लाहौर 1300 बीसी 1300 बीसी में एक प्लांट पहली बार कल्टीवेट होता है नॉर्थ ईस्ट में 1300 बीसी में ही उसके सीड्स पाए जाते हैं नॉर्थ वेस्ट में दुनिया में कहीं नहीं पाए
(23:59) जाते उसको स्प्रेड होने में 200 साल और लगता है इसका मतलब 1300 बीसी बीसी में भी ट्रेड का चलता था बिटवीन दिस टू और हम बोल रहे हैं कि भाई 1500 1800 बीसी के बाद में 800 बीसी तक तो आपका डार्क एजता है। यानी ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर हैड ऑलरेडी बिल्ट बाय 1200 बीसी और 1300 बीसी। इतना समय नहीं निकला। तो ये तीन चार साइंस के कुछ इंटरेस्टिंग बिंदु ग्लोबल थे और कुछ इंडियन भी थे जो हमें एक नई दिशा में सोचने के लिए मजबूर करते हैं कि वी आर फार ग्रेटर इंटीग्रेटेड एंड फार ग्रेटर इंटरनली एंड एक्सटर्नली इवन इन दी इवन एज़ अर्लियज़ 300 इयर्स आफ्टर द कोलैप्स ऑफ़ द
(24:36) इंडस वैली सेटलमेंट्स। यू फील सो प्राउड यू नो व्हेन यू डिग आउट टू दीज़ एस्पेक्ट्स ऑफ़ अनफॉर्गन द फॉरगॉटन हिस्ट्री ब्रदर। आपका ये भी कहना है कि जो चाइना की जो सिल्क इंडस्ट्री है उसके विकास में भी भारत की बहुत बड़ी भूमिका रही है। कैन यू एलिब्रेट यू नो ए क्विक पॉज। एव्री स्टोरी वी क्रिएटेड प्राच्यम इज बोर्न [संगीत] फ्रॉम डीप पैशन फॉर भारतीय कल्चर एंड हेरिटेशन। टू हेल्प अस कंटिन्यू दिस अनुष्ठान प्लीज बी ए पार्ट ऑफ दिस। सब्सक्राइब टू दिस ट्रूली भारतीय oटीt एट www.prim.
(25:15) com और स्कैन दिस क्यूआर कोड ऑफ प्राम.org टू डोनेट फॉर दिस कॉज। योर सपोर्ट हेल्प्स अस कीप दिस कल्चरल जर्नी अलाइव बी अ पार्ट ऑफ दिस धार्मिक विसर्जन एव्री ड्रॉप काउंट्स नाउ बैक टू योर एक्सपीरियंस जय श्री राम बहुत बहुत ही बहुत ही इंटरेस्टिंग सवाल है। देखिए चाइना को सिल्क का पायनियर माना जाता है। चाइना का जो सबसे पुराना सिल्क का जो सबसे पुराना सिल्क का एक फ्रेगमेंट अगर कहीं मिला है तो चाइना में है लगभग 6 7000 वर्ष पूर्व का। तो अगर मैं उसी एविडेंस को कंसीडर करें हम लोग बिलकुल सही बात है और यही माना जाता था आज से लगभग 30
(25:56) साल पहले तक तो पहला उसमें क्या चेंज आया चेंज ये आया कि इंडस वैली में वेरियस सेटलमेंट्स में जो बीट्स थे तो बीट्स के बीच का जो फैब्रिक मिला वो सिल्क फैब्रिक था। तो ये माना जाने लगा कि भाई ये भी सिल्क बनाते थे 4500 वर्ष पूर्व शायद 7000 वर्ष पूर्व नहीं बनाते थे। तो ये एक पॉइंट ऑफ कंटेंशन बना कि अब हमें इंडिया के सिल्क की लेगेसी भी शायद रिसर्च करना पड़े। ऐसी कुछ रिसर्च सोचा। अब इसमें मैं मेरा जो शोध है उस पे जाऊं तो कुछ बड़ी ही शॉकिंग बातें सामने आएगी। और ये शोध बड़ा मतलब ऑल दिस आर पब्लिक डॉक्यूमेंट्स एंड ऑल एक्सेप्टेड मतलब ऐसा भी नहीं है कि
(26:32) मतलब ये बट डिफरेंट आप जैसे बोलते हैं जीपीएस पे आप तीन लोकेशन पे आप ट्रंगुलेट करते हैं। ये कुछ इस किस्म की बात है। देखिए ट्रेडिशनली हमने बचपन से सुना है सिल्क वार्म मलबरी सिल्क वर्म। आपने मलबरी कभी सोचा नहीं कि क्यों कहा जाता है। तो बोला मलबरी खाते थे। तो हमें यह ध्यान में रखना होगा कि दो किस्म की सिल्क वर्म्स फैमिलीज़ हैं या वर्म फैमिलीज़ हैं। दो ब्रॉड और ब्रॉड मतलब एज डिफरेंट एज इन सम वेज़ बिटवीन यू नो यू कुड से गोरिल्लाज़ एंड चिंपैंजीज़। मतलब ऐसा भी नहीं है कि इनमें समानता है। असमानता बहुत है। एक है बॉम्बिक्स मोरी, बॉम्बिक्स फैमिली और एक
(27:09) है एंथ्रिया फैमिली। अब इन दोनों में एक मूल फर्क है। मूल फर्क यह है कि बॉम्ब्स मोरी जो है वह मोनोफेगस है। यानी एक ही जो खाना है वो एक ही खाती है। यानी मलबरी खाती है तो दूसरा खाद्य वो एक्सेप्ट नहीं करती। इंटरेस्टिंग। एंथिया फैमिली जो है वो पॉलीिफेगस है। यानी आप कोई भी झाड़ पत्ता दे दे खा लेगी। अच्छा। हम तो ये हम पहला एक डिफरेंस समझ लेते हैं और ये समझते हैं कहां तक ये बात आगे तक जाती है। हिस्टोरिकली चाइनीस सिल्क हैज़ ऑलवेज बीन मेड विद बॉम्बिक मोरी बी मोनोफेगस मलबरी सिल्क हुआ। तो जब हान एंपायर ने लगभग 2000 ढाई 250 ईवी ईसा पूर्व 250 बीसी
(27:50) में पहली बार कमर्शियल सिल्क मैन्युफैक्चर का सोचा तो उनके उन्होंने पहला चेंज ये किया दे शिफ्टेड फ्रॉम बॉम्बिक्स मॉरी टू आंथिया माइली व्हिच इज़ बेसिकली एन सिल्क वर्म व्हिच इज़ फाउंड देयर आल्सो बट नेवर यूज़्ड बट इंडियन वाइल सिक यूज़्ड टू बी मेड प्योरली बेस्ड ऑन आंथिया तो उन्होंने अडॉप क्यों किया होगा बड़ा सिंपल है सोचना कि भ जब आप मास्क में क्रिएट करते हैं तो एक फसी सिल्क बम जो खाली मलबरी खाता है बड़ा मुश्किल हो जाता है। करेक्ट। [हंसी] तो इससे अच्छा एंथिया रेस करते हैं जो बहुत कुछ और दोनों सिल्क में फर्क क्या होता था?
(28:23) बहुत बढ़िया सवाल। देखिए बॉम्बोरी का जो सिल्क है वो बड़ा स्मूथ और बहुत ही मुलायम है। एंथिया का जो सिल्क है वो बड़ा कोर्स और हार्ड है। तो आपको जो स्ट्रिंग मिलेगी इंडस वैली की वो स्ट्रांगर है लेकिन खुरदरी है। ओके। अगर आप बॉम्बे स्मोरी का ट्रेडिशनल सिल्क जो 5000 साल पुराना भी अगर आप देखते हैं तो बड़ा ही मकमली जिसको हम बोलते हैं मकमली है। तो अब इसमें बहुत सी चीजें इस सूर्य के इर्द-गिर्द रिवॉल्व करती हैं। देखिए अर्थशास्त्र जब अष्टाध्यायी लिखा गया तो अष्टाध्यायी में एक ही सिल्क मेंशन करते हैं पाणिनि जो सिल्क था बेसिकली मेड
(28:58) इन इंडियन। 300 वर्ष के बाद में अर्थशास्त्र जब लिखा जाता है तो अर्थशास्त्र दो सिल्क का मेंशन करता है। इंडियन सिल्क एंड चीनी पत्ता जो चीन से आता हो। अब देखिए कि चीनी पत्ता जो है उसके अंदर में जो भी टर्म्स यूज़ होती है आज आज कह रहा हूं मैं तब की बात नहीं चीन के अंदर में वो जो भी टर्म्स यूज़ होती है मेंड्रेन में फॉर दैट सिल्क वर्म कॉल्ड एंड्रिया जिसके बेसिस पे वो सिल्क बनता है वो है तुषार टू यूएसएसएआर और ये तुषार सिल्क कहां से आया तशारा बेसिकली दिस स्पिंडल तो उसके जितने भी वर्ड्स इंटरनल मैन्युफैक्चरिंग में यूज़ होते हैं उसका
(29:35) चाइनीस में कोई रूपांतर नहीं है वो वो सब संस्कृत के वर्ड्स हैं जो प्राकृत में भी आए। तो अब देखिए चीन शिफ्ट करता है अपने ट्रेडिशनल बॉम्बिक्स मॉरिस से एंथरिया में फॉर मास प्रोडक्शन। उसके लिए वो वर्ड्स यूज़ करता है जो हिंदुस्तान में यूज़ होते थे। भारत में संस्कृत में और सडनली आप देखेंगे तो कमर्शियल प्रोडक्शन ऑब्जर्व सिल्क उन्होंने उठाया तो ऑब्वियसली यहां से वो ज्ञान ले गए होंगे। तो शब्द ट्रेवल कैसे करते हैं? शब्द ट्रेवल करते हैं उस चीज के साथ-साथ। और इसका एक बड़ा अच्छा उदाहरण यह है कि अगले 200 300 वर्ष तक उनका सिल्क बहुत खुरदरा रहा। बिका नहीं।
(30:10) खुरदरा क्यों रहा कि आंतरिया बड़े खुरदरी सिल्क बनाता है। लगभग 200 एडी के बाद में चाइनीस सिल्क फाइन तब होने लगा जब उन्होंने इसके अंदर इंटर उन्होंने काम बहुत किया है। ये कहना गलत होगा कि सिर्फ हम पे लेकिन बात यहां से गई। अब कुछ ये भी रिसर्च करने वाले पूछते हैं तो फिर इंडिया ने क्यों नहीं किया? इंडिया ने नहीं करने की एक वजह थी अहिंसा जो गांधी जी ने बताई कि भाई अहिंसा के चलते आप अर्थवर्म को नहीं मार सकते हैं। तो ओनली फ्रॉम दी व्हेन द अर्थवार्म है कन्वर्टेड टू अ बटरफ्लाई तो जो शेल रह जाते हैं उसके कोकून के तो वो ड्राइड
(30:46) कोकून से ही आप निकाल सकते तो उसको थोड़ी खुरदरी हो जाती है। तो अगर आप लाइफ को मारे जो आज का प्रोसेस है गर्म पानी में डाल के कोकून को तो अंदर का जीव मर जाता है। तो बाहर का जो सॉफ्ट निकलता है। इट्स लाइक किलिंग इट वैरी यंग। तो आप यूं देखिए कि चाइना ने इसका आज का अगर इजाद तो बिल्कुल किया लेकिन इतिहास हमारा पुराना है और किसी वजह से हम एंड्रिया करते थे। आंथिया इसलिए करते थे क्योंकि वो हमारे पास भी बॉम्ब्स मोरी था। तो काफी सीख लर्निंग्स यहां से गई। लेकिन एस आई सेड चाइना कॉपीड बट इट डेवलप्ड ऑन दैट जस्ट द वे इट इज डूइंग टुडे देखिए सिविलाइजेशन डोंट
(31:23) चेंज [हंसी] आप देखिए डोंट चेंज आप देखिए वेस्ट अस्ड डू नॉट चेंज करेक्ट अब बारी हमारी है कि वी अनफॉर्गेट अब्सोलुटली चाइना आज भी यही कर रहा है आप देखिए iPhone का लेटेस्ट मॉडल जो है वो रिवर्स इंजीनियरिंग करके बना लेता यह बिलकुल रिवर्स इंजीनियरिंग था। यह रिवर्स इंजीनियरिंग था पूरा तो मैंने किताब में पूरा जिक्र किया कि कैसे रिवर्स इंजीनियरिंग हुई थी। आर दीज़ आर देयर सिविलाइजेशनल वैल्यूज़ हैं व्हिच विल नेवर चेंज। तो क्या ये सच है कि जो रोम में बिकता था चाइनीस सिल्क वो कलिंगा कॉटन था। इसकी वजह ये है कि इतिहास में और मैं आज
(31:58) का इतिहास में आज तक लगभग आज के कम से कम 50 वर्ष पहले तक आता हूं। सिंथेटिक फैबिक्स आने के पहले। ऐसी कोई नेचुरल फैब्रिक नहीं है। कलिंगा कॉटन जो बाद में ढाका मसलीन कहा गया। जहां पे दो बड़े इंटरेस्टिंग किस्से हैं दो एंड ऑफ द चेन पे एक किस्सा है बुद्ध के जमाने का जब गौतम बुद्ध की जो कलिंगा कॉटन था ऐसा बोला जाता था कि अगर आप उसकी छह सात परतें भी पहन ले तो आप इतना मतलब पारदर्शी था कि आपका सब अंदर का जो मतलब हुस्न है जो बाहर दिख जाता था। तो उनकी एक साध्वी ने ये बुद्ध की कहानी और यह बाकायदा तिबेटन मतलब एक बहुत बड़ा ग्रंथ उसमें लिखी गई कि
(32:34) बुद्ध ने की एक साध्वी ने वो वस्त्र पहनकर और उस वस्त्र की भी कहानी है। वो वस्त्र जो है वो कलिंग का राजा उसको गिफ्ट करता है। तो वो गिफ्ट करके जो है वो पहन के आती है और बिल्कुल सामने बैठती हैं। तो बुद्ध जो है वो बोलते हैं कि अब से हमारी साध्वी कोई भी जो है वो कलिंग कॉटन नहीं पहनेंगी। बिकॉज़ मोह भंग होता है बाकी लोग का। यह बकायदा ग्रंथ में लिखा है तिबेटन ग्रंथ में जो मैंने कोट भी किया ग्रंथ अब देखिए 2000 वर्ष बाद चले जाते तो औरंगजेब की जो चहेती डॉटर थी तो उनके रूम में आती है तो वो मतलब बकायदा नाराज है ये भी हिस्टोरिकल
(33:10) इंसिडेंट है इंसिडेंटली तो वो बहुत नाराज होते हैं बोलते हैं कि भाई आप ये अर्धनग्न किस्म की मतलब बेहया किस्म की आप हरकत कर रहे हैं तो बोलते हैं नहीं मैंने सात लेयर पहनी है ढाका मसलन की तो अब ये दोनों फैब्रिक जो हैं पहली बात हमको यह समझना होगा कि यह कॉटन से नहीं बनती है। दोनों को कॉटन कहा जाता था। कॉटन से नहीं बनती है। यह एक वृक्ष होता है जिस पे एक सिमिलर वो छोटा वृक्ष नहीं बड़ा वृक्ष होता है जिसमें से ये फल के अंदर से एक कपास टाइप की चीज निकलती है और उससे यह फैब्रिक बनता है जो बहुत ही मुलायम रहता है। तो ये दोनों इज़ द ओनली फैब्रिक इन द वर्ल्ड
(33:48) व्हिच हैज़ अ क्वालिटी ऑफ वर्चुअल ट्रांसपेरेंसी ऑफ़ द बॉडी। अब आप टर्न कीजिए कि एक दौर चला इंपीरल रोम में पहले 200 साल जैसे रोम कैंपर थे इलाइट लेडीज थी ये कियोप्रा का भी कहा गया उसके पहले तो एक फैशन बना कि आप वस्त्र पहन के आ रहे हैं लेकिन आपको अंदर का सब आज जो कई हद तक वापस आज फैशन का आया है तो पूरा जो आपकी जो मतलब हुस्न है पूरा दिखना चाहिए कपड़ों के अंदर भी तो लोग इसको बोलते थे सिलिकॉन कॉटन ये रोम की भाषा थी कि ये नया फैब्रिक क्या आया है जी सिलिकॉन कॉटन है और यह दो 200 वर्ष में जो कॉटन जो सिल्क भेजा गया ऑफिशियल हिस्ट्री रिकॉर्ड से फ्रॉम चाइना
(34:30) वास कोर्स सो कोर्स सिल्क कि लेबन में एक कॉटेज इंडस्ट्री खड़ी हुई जिसमें वो ट्रांसफॉर्म करते थे एक-एक धागे को निकाल कर वापस उसको रब करके और वापस सिल्क करके बेचते इंटरमीडियरी एंटायर इंटरमीडियरी इंडस्ट्री स्टूड अप तो चाइनीस सिल्क तो सारी हो नहीं सकता था तो माय असमशन इट्स अ स्पेकुलेटिव असशन दैट व्हाट इज कॉल्ड सिल्कन कॉटन इंसिडेंटली दी कॉटन इंसिडेंटली दिस ट्री इन इंडिया टुडे एंड इन कॉमन पार्लेंस आप विकपीडिया या कहीं जाएं इज कॉल्ड द सिल्क कॉटन ट्री [हंसी] ये भी एक मैं बोलता हूं कि मिसए्रोप्रिएशन ऑफ हिस्ट्री है ऑफ वन थिंग दैट इंडिया
(35:10) प्रोड्यूस्ड हमें लगता है कि वैश्विक जो व्यापार है जो ग्लोबल ट्रेड है उनको अब आवश्यकता है कि नए दृष्टिकोण से उनका इतिहास लिखना चाहिए। है ना? ये प्रयास जो आपने किया है। ये बहुत बढ़िया बात की आपने। मतलब ये ये बात मुझे भी स्ट्राइक नहीं हुई। आपकी बात सही है कि वर्टिकल हिस्ट्रीज भी जो है मतलब आप अगर आज स्टील मेकर हैं तो आपको अपना इतिहास कम से कम ढाई 3000 वर्ष पहले से शुरू करना चाहिए। आप अगर स्टेप फैब्रिक वाले हैं तो आपको 3000 वर्ष पहले से शुरू करना चाहिए। जैसे कालीबंगन में एक जॉइंट आया सिविल में। मैं सिविल इंजीनियर नहीं हूं। इट्स अ
(35:47) वे टू बॉन्ड अ पर्टिकुलर वॉल मतलब इट इज द फर्स्ट टाइम इन हिस्ट्री इन कालीबंगन दैट दैट वाज़ यूज्ड एटलीस्ट एस फार वी नो टुडेेस मतलब वर्ल्ड नोज़ इट्स टुडे कॉल्ड द ब्रिटिश बॉन्ड [हंसी] ब्रिटेन तो छोड़िए मतलब वो कॉन्टिनेंट में 4000 वर्ष पूर्व कुछ नहीं था [हंसी] बिल्कुल सो नाउ कमिंग बैक टचिंग अपॉन यू नो फ्यू एसेंशियल फंडामेंटल थिंग्स एंड रिकैपिंग यू नो ऑन आवर कन्वर्सेशन आपने जिन इकोनमिक प्रिंसिपल्स की बात की जो बहुत प्राचीन काल से भारत में रहे हैं जिन्होंने भारत को महान बनाया और जो आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था के मूल में है कहीं ना कहीं इफ टुडे यू नो
(36:30) वी हैव टू जस्ट गो बैक एंड लर्न फ्रॉम द पास्ट फ्रॉम आवर ग्रेट ग्लोरियस ट्रेडिशंस जस्ट फ्यू ऑफ़ देम व्हाट शुड बी लर्न रिकक्रिएट रिजुमिनेट रिएस्टेब्लिश देखिए मैं एक तो उदाहरण बिल्कुल नजदीक का दे देता हूं। बांग्लादेश आज लास्ट कम से कम मेरे ख्याल से 20 साल से टेक्सटाइल मेजर है। हां बिल्कुल। और अगर हम देखें तो शायद उनकी इंटरनल कम्युनिकेशन कहती है नहीं कहती है ये मुझे नहीं मालूम। लेकिन आज से 2000 वर्ष पहले भी जिसको आज हम बांग्लादेश बोलते हैं तब भी टेक्सटाइल मेजर था। तिरुपुर भी था। तो लेकिन फर्क क्या है? तो तिरुपुर को अगर
(37:10) बांग्लादेश को पकड़ लूं अगर दो कंपेरेबल तो यह भी वही वही कम्युनिटीज हैं तिरुपुर में जो आज से 50000 2000 साल पहले भी रोम के साथ ट्रेड करके यही टेक्सटाइल्स निकाला करती थी। लेकिन दोनों में फर्क बहुत बड़ा है। तिरुप अपने आप आया बांग्लादेश आज 20 साल में यह हुआ है जो मैंने पढ़ा है और ऑफिशियली भी सुना है कि अगर ट्रैफिक सिग्नल में एंबुलेंस और एक टेक्सटाइल का जो ट्रक लोडेड है यह दोनों को अगर प्रायोरिटी देनी हो तो आपको शायद टेक्सटाइल एंबुलेंस को देनी टेक्सटाइल को देनी पड़े। यानी कहने का मतलब यह है वो पूरा सिस्टम उन्होंने इंजीनियर किया। द
(37:53) होल सिस्टम माय ऑर्गेनाइजिंग प्रिंसिपल बिकम दैट आई विल बिकम द ग्रेटेस्ट इन टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग इन द वर्ल्ड इन टर्म्स ऑफ़ साइज़। आउटसोर्सिंग होगा। तो आपने एक चीज जो आपकी ट्रेडिशनल हेरिटेज थी उसको मॉडर्नाइज किया। उसको स्टेट ने फोकस एरिया बनाया। उसमें फाइनेंस डाला और पूरी सोसाइटी उसके इर्द-गिर्द क्रिएट की। सोसाइटी आई मीन द लीगल नॉर्म्स कि भाई ये नेचुरल प्रायोरिटी है। सिंगल प्रोडक्ट कंट्री बट आई विल फोकस ऑन द वे इट हैपेंस। इसका मैं एक और रूपांतर बता दूं जो बहुत कम लोग इस बात को नोट कर रहे हैं। करंट अपीवल इन बांग्लादेश अबाउट अ ईयर बैक।
(38:30) एवरीबडी अस्यूम दैट द इंडस्ट्री विल बी ओवर एंड एवरीबडी देयर वा लॉट ऑफ यूफोरिक इंडियंस टॉकिंग ऑन YouTube एंड वेरियस अदर प्लेसेस दैट इंडिया विल बी द बेनिफिशरी इट हैज़ नॉट बीन एंड वी नीड टू नो व्हाई दैट विल टेल अस द मेंटल थिंकिंग बिकॉज़ व्हाट हैपेंड वाज़ दैट दी फैक्ट्रीज़ इन बांग्लादेश वर क्रिएटेड एंड सब्सिक्वेंटली एडप्टेड इवन इन दिस थ्री इयर्स इन टू मशीनंस व्हिच कुड प्रोड्यूस स्मॉलर लॉट्स इन कीपिंग इन टच विथ दी मार्केट वेयर लार्ज लार्ज इन्वेंटरीज, लार्ज स्टक्स, लार्ज फैशन प्रोडक्ट्स, यू यू हैव अ लॉट ऑफ़ अनसर्टेनिटी। सो यू कुड ट्रेड यू कुड टर्न
(39:06) दी बैचेस फास्ट शॉर्टर इन्वेंटरी टाइम्स एंड सो एंड सो फॉर स्मालर बैच साइज़ विथ द सेम इकोनमीज़ ऑफ़ स्केल। यानी देखिए एक इंडस्ट्री की पूरी थिंकिंग ऊपर से नीचे तक है। लेगसी टू थिंकिंग तो हमारे पास तो ऐसी कम से कम मतलब मैं ऑफ द कफ बोलूं तो कम से कम 40-50 इंडस्ट्रीज हैं। तो हर इंडस्ट्री को अगर हम ले लें और उसके अंदर में वही प्रोसेस डालें कि मॉडर्नाइजेशन पुटिंग इन एंबेडेड फाइनेंस पुटिंग इन अ कल्चर विद इन द कंट्री एंड दी सेम कम्युनिटी दैट दिस इज क्रिटिकल टू द नेशन। वो पूरी आपकी कम्युनिटी रेजोनेट होगी। आपकी इकोनमिक नंबर्स ऊपर होंगे। आपके 15 फ्रंट खुल
(39:45) जाएंगे। जो एक फ्रंट पे आज एक बांग्लादेश खड़ा है या वियतनाम खड़ा है। आप वो 30 फ्रंट पे खड़े हो सकते हैं। और वो 30 फ्रंट पे आज चाइना खड़ा है। मैं चाइना का एग्जांपल इसलिए नहीं दिया क्योंकि चाइना हैज़ डन ऑल द 30 इयर्स बैक। सो चाइना हैज़ डन व्हाट बांग्लादेश इज़ डूइंग 30 फॉर 30 इयर्स। बट बांग्लादेश डन इन वन सिंगल प्रोडक्ट सेगमेंट। टुडे आर वी डूइंग द सेम फॉर से डायमंड्स। आर वी डूइंग द बिकॉज़ डायमंड्स में भी आज बहुत प्रॉब्लम्स आ रही है। उसके अंदर में जिओ लोकेशन, सेंशंस, अहम कटिंग क्लोज़र टू मार्केट। नाउ कटिंग क्लोज़र टू मार्केट एंड डिजाइनिंग। वी वर
(40:16) डूइंग इट इन 2000 इयर्स बैक इन पटनाम इन मोज़रिस इन रेड सी पोर्ट्स। वी न्यू दैट दी क्लाइंट वांटेड डिज़ व्हिच आर क्लोजर टू मार्केट। नहीं आज की बात थोड़ी थी। लेकिन आज क्या अब अगर हम हर चीज इंडस्ट्री पे छोड़ देते हैं तो वो उसी तरीके से लड़ेगा जैसे वो लड़ पा रहा है। लेकिन अगर हम इसको नेशनल प्रायोरिटी क्यों नेशनल प्रायोरिटी बनाएंगे? क्योंकि आपका कॉम्पिटिट उसको नेशनल प्रायोरिटी बना रहा है। थाईलैंड टुडे इज़ आउटबिटिंग द इंडियन जेम्स ज्वेलरी इंडस्ट्री प्योरली बिकॉज़ इट हैज़ मूव क्लोज़र टू मार्केट विद नो हेरिटेज इन हिस्ट्री और लिटिल हेरिटेज। आई डोंट से दे
(40:48) डोंट दे डू हैव बिकॉज़ ऑफ़ द इंडियन कलिंग कनेक्शन। तो जब तक हम हर इंडस्ट्री कम से कम 15 फोकस इंडस्ट्रीज को इस तरीके से ट्रीट नहीं करेंगे वेयर स्टेट सपोर्ट इज टू द एक्सटेंट ऑफ क्रिएटिंग एन इकोसिस्टम एंड क्रिएटिंग अ फ्यूचर मैप फॉर द नेक्स्ट फाइव 10 15 इयर्स। अगर हम बड़ी इंडस्ट्री ही चस करेंगे तो देन वी आर एट दी मर्स ऑफ़ ए कंडीशनल कैपिटल। कंडीशनल कैपिटल जो बोलता है कि भाई आप इस किस्म की यू नो शरिया लॉ कंप्लाइंट हो जाए। आप ये यू लॉ कंप्लायंट हो जाए। मतलब इन शर्तों पे मैं आपको फाइनेंस दूंगा। और जिस दिन आप पर प्रेशर डालना हो बोले कि हम 5000 आदमी सेक
(41:25) कर रहे हैं। फैसिलिटी रीोकेट कर रहे हैं। यू आर देयर मर्सी। हियर द इकोसिस्टम फंड्स इटसेल्फ बिकॉज़ इज़ बेस्ड ऑन कैश फ्लो। इट इज़ नॉट बेस्ड ऑन इन्वेस्टमेंट्स। कैश फ्लो इन्वेस्टमेंट्स में 2000 साल से मारवाड़ी ये बात समझता है कि बिज़नेस इज़ अ कैश फ्लो बिज़नेस। बिज़नेस इज़ नेवर एन इन्वेस्टमेंट बिज़नेस। इन्वेस्टमेंट इज़ समथिंग व्हिच इज़ कैश फ्लो फ्रोजन ओवर टाइम। मतलब आप 5 साल 10 साल का आप कैश फ्लो पकड़ते हैं तभी जाके आप प्रेजेंट करंट वैल्यू पे इन्वेस्ट करते हैं। तो आपको वो थिंकिंग जो है बिग इंडस्ट्री से 15 फ्लैक्स पे लानी होगी और
(41:57) अगर बड़ी इंडस्ट्री है जैसे एआई जैसे एक सेमीकंडक्टर है तो आपको स्प्लिट करके इकोसिस्टम में वो 15 बैठाने होंगे जैसे क्लस्टर है। आप ये एक्सपेक्ट करें कि भाई एक बंदा सेमीकंडक्टर की बहुत बड़ी इंडस्ट्री बना देगा और इकोसिस्टम अपने आप बन जाएगा। ये मतलब थोड़ा सा लिविंग इट टू चांस और लिविंग इट टू और और यू विल पॉसिबली नॉट मूव एट द सेम स्पीड एस समबडी एल्स हु प्लस द इकोसिस्टम टुगेदर व्हिच वी यूज़्ड टू डू अर्लियर दैट इज़ सी वन ऑफ़ द थिंग्स दैट चाइना हैज़ डन इज़ दे हैव यूज़्ड पॉपुलेशन टू देयर एडवांटेज आई थिंक भारत में वी हैव टू डू दैट इफ देयर इज़ अ ह्यूज
(42:33) पॉपुलेशन लेट अस यूज़ इट यू नो वो ऐसे ही होगा जैसे आप बोल रहे हैं। जब हम इसको ना बांट देंगे है ना एक पूरा उसका एक ताना-बाना बना देंगे। अजय जी एक बड़ी पावरफुल आपने द लॉग लाइन और द स्वैप लाइन और द पंच लाइन और द बुक और द सबटाइटल ऑफ़ द बुक दैट यू हैव रिटन वेरी इफेक्टिव इट इज़ एंड यू हैव रिटन दैट भारत क्रिएटेड यूरोप असप्टेड एंड चाइना कॉपीड इट। संक्षेप में आप इसको समझाइए और इसको प्रमाणित करिए आपने। देखिए प्रवीण जी अक्सर जब हम यह बात करते हैं कि यूरोप असप्ट और चाइना कॉपीट खासकर जो यूरोप असप्ट तो जहां हमारी कन्वर्सेशंस होती है कि हाउ साइंस वाज़ अस्व बाय द
(43:17) वेस्ट और मैं इस बात पे बिल्कुल डिनाई नहीं करता। बिल्कुल बात सही है। लेकिन देखिए साइंस असर्व हुई और उन्होंने उसके ऊपर विकास किया मतलब काम किया और अप्लाइड हुई वगैरह-वगैरह आज हम चांद तक पहुंच चुके हैं। तो वो अपनी वेस्ट की एक जर्नी है और उनकी कंट्रीब्यूशन को डिनाई नहीं किया जा सकता। लेकिन हम यह बात भूल जाते हैं कि वह जर्नी तो 250 300 साल की है। 400 साल की अगर आप बेस्ट की जर्नी देखें साइंस में लेकिन जो इकोनॉमिक जर्नी है जो उन्होंने असर्व किया और हम चाइना ने कॉपी किया बम मुश्किल से 50- 70 साल और उन 50-70 साल में बिल्कुल ये देखिए कि आप स्मॉल
(43:51) इंडस्ट्री जो एसएमई वर्ल्ड आया ये ऐसे वर्ल्ड 30 साल से पुराना नहीं है। जो भी कैपिटल एलोकेशन आज से पहले होता था बड़ी फर्म्स में होता था। आपको यह जान के आश्चर्य होगा कि ब्रिटेन में आज भी लगभग 60% 65% इकॉनमी जो है वह एसएमएस की इकॉनमी है। क्लस्टर आज भी जर्मन जितने बड़ी गाड़ियां बनती है या जो भी बनता है जर्मन इंडस्ट्री इंजीनियरिंग इंडस्ट्री है वो क्लस्टर और एसएमई इंडस्ट्री है। चाइना पूरा एसएमई पे खड़ा हो गया। आपकी फाइनेंसिंग एंबेडेड हो गई। आपके वेरियस चीजें जैसे माइक्रो फाइनेंस बिल्कुल हम करते थे। नया जामा पहन कर आया। आप देखें
(44:22) कि फाइनेंस के और भी तरीके जैसे कि एंबेडेड फाइनेंस यहां से घूम फिर के गया। आज जो बात हो रही है सेंट्रलाइज्ड करेंसी की जगह डिसेंट्रलाइज्ड हम पहले कर चुके हैं। आज आया नहीं मैं कहीं ना कहीं आया जरूर। हम आगे चलते हैं तो बात करते हैं कि भाई लगभग कोई भी चीज अगर आप देखें तो वो इर्द-गिर्द उसी तरीके से गूंजती है जो हमारा इकोनॉमिक आर्किटेक्चर था। अब मैं इसको इसलिए बोलता हूं कि यह कॉपीड है और यह एक्सेप्ट है क्योंकि यह भी हो सकता है वह उस स्टेज पर पहुंचे अपने मतलब बाय थ्रू देर ओन एवोल्यूशन मैं ये नहीं कह रहा हूं कि एक ही रात में पहुंचे लेकिन अगर
(45:00) उन्होंने असर नहीं किया होता तो आप जिसको असेंबली लाइन बोलते हैं फोल्ड की वो असेंबली लाइन का मतलब क्या था कि भ एक बेसिकली असेंबली लाइन फोल्ड फैक्ट्री वाज़ एन एन एन एन एन एन एन एन एन एन इकोसिस्टम अ क्लस्टर माइटसेल्फ कि एक जगह पे आया एक जगह पे आया आप खड़ा हो भी निकल गए। तो जितनी भी आज आपकी वेस्टर्न इकॉनमीज़ खड़ी हैं जो जिसको डेवलप्ड बोला जाता है और जो डेवलपिंग एंड चाइना है वो इसी बेसिस पे खड़ी है जो इंडिया ढाई हजार वर्ष पहले से करता था। मेरी इसमें सिर्फ एक बड़ी व्हाट वुड आई से रिक्वेस्ट टू ऑल व्यूअर्स एंड टू ऑल ऑफ़ अस इंक्लूडिंग मसेल्फ। इंस्टेड
(45:38) ऑफ बीइंग डिफेंसिव ऑफ आवर पास्ट और इंस्टेड ऑफ फॉरगेटिंग आवर पास्ट और इंस्टेड ऑफ बीइंग नेगेटिव ऑफ आवर पास्ट और अस्यूमिंग दैट द पास्ट इज़ अ पास्ट लुक एट इट फ्रॉम द व्यूज ऑफ ऑल दीज़ एज़ ओनली मॉडर्न पैरेलल्स ऑफ़ व्हाट वी डिड एंड यू विल फील प्राउड ऑफ़ देम। एंड दैट गोज़ फ्रॉम पॉलिसी मेकर्स डाउन टू द लास्ट मैन। अगर एसएमई होकर एसएमई क्लस्टर बनाकर चाइना खड़ा हो सकता है तो हम भी खड़े हो सकते हैं। अगर सिर्फ एक इंडस्ट्री पर वियतनाम खड़ा हो सकता है इनिशियली ओनली कॉटन टेक्सटाइल्स और [नाक से की जाने वाली आवाज़] यहीं पे और देखिए आप विडबना देखिए देयर इज नो कॉटन
(46:14) मैन्युफैक्चरर्ड और कॉटन ग्रोन इन बांग्लादेश इट्स अ कॉटन स्केट इट्स नॉट इन अ कॉटन स्केयर देयर इज़ नो कॉटन कॉटन उगता नहीं है बांग्लादेश और ना ही इंडस वैली में वो सीजें आती थी तो हमें देखना पड़ेगा बार-बार कि हमारा हमारा जो सत्व था हमारा जो अंदर का स्वरूप था और हमारा हमारा जो बेसिक आधार था वो आधार के बेसिस पे हमें अपना भविष्य तय करना होगा और यह भी तय करना होगा कि अर्थ की पर्स्यूट में एज लॉन्ग एज इट इज धार्मिक लीगल इन ऑल फ्रेमवर्क्स पॉसिबल देयर इज नथिंग व्हिच इज रियली इनफीरियर भाई जो आदमी आज आपके अच्छे जूते बनाकर आपकी पैर की पीड़ा को
(46:55) दूर कर सकता है वो उतना ही महत्वपूर्ण है उस वैद्य के बराबर जो आपको एक दवाई देकर आपकी सिर का दर्द हटा सकता है। कि ये दोनों में फर्क जब तक हमें मतलब नहीं लगेगा तभी हम अपने आप को डिग्निफाइड समझेंगे। तो अब ये बात मैं बोल रहा हूं बोथ फ्रॉम द व्यू पॉइंट ऑफ दोज़ प्रैक्टिसिंग एंड फ्रॉम द दोज़ फ्रॉम द व्यू पॉइंट हु आर अवेलिंग ऑफ़ द प्रैक्टिस। वी हैव टू बी प्राउड ऑफ हु वी वर एंड फॉरगेटिंग इज़ नॉट सम ऑफ़ द इशू आई वुड से। आई वुड से जो याद भी करता है तो वो एक पॉजिटिव तरीके से याद करें। और याद करें कि भाई इन्होंने वही किया है तो क्यों
(47:28) नहीं मैं क्यों नहीं करूं। तो दैट इज़ व्हाट आई वुड लाइक टु बिहाइंड एंड धार्मिक होना बहुत अच्छा है। लेकिन बचपन में मैंने एक कहावत सुनी थी कि दरिद्र होने से दुख ही भला है। क्योंकि दुख इज़ अ स्टेट ऑफ़ माइंड। लेकिन दरिद्रता इज़ रियल। यू नो तो हैप्पीनेस कैन कम इन द पुअर एज़ वेल एज़ द रिच। बट दरिद्रता इज़ अ रियल इज़ नॉट अ स्टेट ऑफ़ माइंड। इट्स अ स्टेट ऑफ़ बीइंग। और दरिद्रता से ज्यादा अगर आपको अब मैं इंडिया के बारे में भी बोल दूं तो हम अपने धर्म के बारे में बहुत ही गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ आस्था नहीं धर्म जो हमारा धर्मशास्त्र हो या जो भी है आज से 50 वर्ष
(48:07) पूर्व भी थे। आज से 30 वर्ष पूर्व भी थे। तो आज क्यों आज दुनिया हमसे बात करने को तैयार है? क्योंकि आज आप बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहे हैं। आपको यह क्लियर होना चाहिए कि दुनिया जो है या तो अर्थ को समझता है या दंड को समझता है। मतलब ये सिर्फ धर्म और इथॉस्ट को जो है वो आप अपने आप को संतुष्ट कर सकते हैं या अपने आप को एलिवेट कर सकते हैं। लेकिन रेस्पेक्ट अनफॉर्चुनेटली इन द वर्ल्ड का तो धर्म को आती है या अर्थ को आती है। बिल्कुल सही कहा आपने और जैसा हम हम लोगों ने बात की ये धर्मस्य मूल अर्थ ये तो हमारे यहां हमारे महान विद्वानों ने
(48:43) मनुष्यों ने इस बात को शुरू से माना है। तो अर्थ पे बड़ी अर्थपूर्ण यह चर्चा हमें पूर्ण आशा है कि जो लोग सुनेंगे हमारे पॉलिटिकल डिस्पेंसेशंस में ब्यूरोक्रेसी में हमारे जो पॉलिसी मेकर्स हैं वो जो बिजनेसमैन हैं जो इकोनॉमिस्ट हैं और हमारे जो दर्शक हैं वो निश्चित रूप से बहुत लाभान्वित होंगे। उनको एक नया दृष्टिकोण मिलेगा स्वयं को अपने इतिहास को देखने का और निश्चित रूप से देख के उससे सीख के उसको फिर से वर्तमान में उसको लागू करेंगे। अजय जी बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके साथ ये चर्चा बहुत अच्छी रही। आपको पुनः
(49:32) बहुत बधाई है कि आपने इतनी अच्छी पुस्तक इतने अच्छे से शोध करके लिखी और दर्शकों से यह अनुरोध रहेगा कि वो अवश्य आपकी पुस्तक को खरीदें और उसको पढ़ें। थैंक यू सो मच। आपका शुभच्छा और आशीर्वाद। [संगीत] [संगीत] फ्रॉम द टाइमलेस वेदास टू द वैरिएंट मॉरियर्स फ्रॉम द विज़डम ऑफ द ऋषिज टू द ड्रीम्स ऑफ अ न्यू भारत
(50:18) आवर सिविलाइजेशन हैज़ नेवर स्टॉप्ड इंस्पायरिंग द वर्ल्ड प्राच्यम द वर्ल्ड्स फर्स्ट इंडिक oटीt ब्रिंग्स द ग्लोरी ऑफ भारत टू द वर्ल्ड 400 प्लस फिल्म्स एंड सीरीज फ्रॉम हिस्ट्री टू हेरिटेज फ्रॉम डिवोशन टू डिस्कवरी एव्री स्टोरी इज एन ऑफरिंग टू आवर इटरनल सिविलाइजेशन फ्रॉम जी20 टू टोक्यो यू [संगीत] द वर्ल्ड इज विटनेसिंग द वॉइस ऑफ़ भारत राइज अगेन। बहुत बड़ी सनातन की सेवा हो रही है। ज्ञान का पुनरुद्धारण का कार्य इस डूइंग एन अमेजिंग जॉब।
(51:03) 60 साल में हमने जो खोया है वो वापस लाने का काम कर रहा है। आपका ये प्रयत्न ईश्वर की आराधना ही है। योर कंट्रीब्यूशन इज नॉट अ डोनेशन। इट इज एन आहुति इन दिस महायज्ञ ऑफ द इंडिकेनिस। तो सब्सक्राइब करें प्रा [संगीत] [संगीत] [संगीत]
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