Saturday, August 29, 2026

Baba Ramdev Unfiltered: Hindu Rashtra, Kangana Ranaut, Gen Z, Modi, Yoga & Deep State | EP-445 | 4K

Baba Ramdev Unfiltered: Hindu Rashtra, Kangana Ranaut, Gen Z, Modi, Yoga & Deep State | EP-445 | 4K

Author Name:ANI News

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Transcript:
(00:00) नारे लगाते हैं आजाद वी वांट फ्रीडम वी वांट जस्टिस और गुलाम किसके गर्लफ्रेंड के बॉयफ्रेंड के गुलाम आप आजाद कहां हो चमड़ी दमड़ी के गुलाम है किसी का ऐसा नाक देखा ऐसा चेहरा देखा ऐसी आंखें देखी आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल हमें दिल की ऐ धड़कन ठहर गई मिल गया कातिल हमें ये काया है ये सब हिंदू के लिए ना मुसलमान के लिए जीना है तो जिए हिंदुस्तान के लिए आपसी मतभेद हमें जीने नहीं देंगे देश ना रहा तो हम कैसे रहेंगे? एक है लहू का रंग पहचान के लिए। जीना है तो जिए हिंदुस्तान के लिए। आप गुरु कम और बिजनेसमैन ज्यादा है।
(00:47) बिजनेस करें, व्यापार करें। उसको ये दृष्टि से घृणा की दृष्टि से देखते हैं। यह इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। कुछ ही दिन पहले दिल्ली में ही बच्चे आए हुए थे और वह कह रहे थे धर्म भी खतरे में है, भारत भी खतरे में है, संविधान भी खतरे में है। जैन जीसस का मतलब आपने छोटे कपड़े पहनने शुरू कर दिए। आपने मोबाइल रखना शुरू कर दिया। उसमें आपने कुछ फॉलोवर बना लिए। उसमें कुछ गाली गलौज कर लिया। कुछ व्यूज पा लिए। कुछ कपड़े पहन के कुछ नंगे हो के व्यूज पा लिए। कुछ गाली गलौज करके व्यूज पा लिए। इसको इसको बदलता हुआ भारत नहीं कहते। 2011 में आपने किया क्या आप भी कर
(01:20) सकते हैं 2026 में क्यों नहीं खड़े होंगे सन्यासी कोई मठों में बैठने के लिए है भंडारा खाने के लिए बने हैं हम सन्यासी हम देश के लिए सन्यासी 2015 में आपने भरोसा दिलाया था कि विदेशों में जो धन है वो मोदी जी आज तक उन्होंने काम किया कुछ-कुछ उसमें कदम उठाए और भी उठाना बाकी आपने कोरोना के टाइम वो बनाया तो करोड़ों लोगों की जान बचाई और उसके ऊपर 30 से ज्यादा रिसर्च पर अभी भी है आपके पास प्रमाण है प्रमाण है और आपको अपोलॉजी करना पड़ा। फिर अपोलॉजी तो जबरदस्ती की है। आज भी बोल रहा हूं। फिर आपका नाम ही तो जुड़ता है। अरे भाई नाम जुड़ने से थोड़ी हो जाता है।
(01:57) देश तो संविधान से चलता है ना। मैंने कोई सुप्रीम कोर्ट में भी इस बात को कहा। 2014 में जब बीजेपी की सरकार आई थी। कौन से ऐसे वायदे हैं जो आपको लगता है कि अभी तक पूरा नहीं हुआ और अर्जेंटली पूरा करना चाहिए। एक तो जनसंख्या पर नियंत्रण 100% होना चाहिए। ज्यादा बच्चे पैदा करें उनके वोटिंग राइट्स छीन लेने चाहिए और उनको गवर्नमेंट बेनिफिट पास ऑन नहीं होने चाहिए। आपका नाम रामकृष्ण यादव था। देखा आपने भी यादव बोल दिया ना? यही खुराफात मैं आपके दिमागों की खत्म करना चाहता हूं। इसीलिए मैं आप मैं साधु होने के बाद आपने जाति सूचक शब्द
(02:27) क्यों बोला? मुझे इससे आपत्ति है। क्यों आपको बुरा? इस रूप में है कि साधु होने के बाद जाति खत्म। इतने सारे विदेशी प्लेटफॉर्म्स हैं और उनके जो भारत का मानस आज अमेरिका के हाथों में है। जैसा चाहता है वैसी वो हमारी धार्मिक, हमारी राजनीतिक, हमारी सामाजिक, हमारी आर्थिक वो हमारी मान्यता बना रहे हैं। सत्ता बदल रहे हैं साहब। अमेरिका में बैठे हुए लोग। दिस एपिसोड इज पावर्ड बाय डेल्टा एक्सचेंज, इंडियास लीडिंग क्रिप्टो एक्सचेंज। नमस्ते, जय हिंद। यू आर वाचिंग और लिसनिंग टु अनदर एडिशन ऑफ़ द एनआई पॉडकास्ट विथ स्मिता प्रकाश। माई गेस टुडे इज बाबा
(03:06) रामदेव। फ्यू पीपल हैव ब्लड द लाइंस बिटवीन योगा बिज़नेस एंड पॉलिटिक्स। क्वाइट लाइक बाबा रामदेव। ही ब्रौट योगा इनटू मिलियंस ऑफ इंडियन होम्स बिल्ट पतंजलि इनटू अ बिज़नेस एंपायर बिकम अ पावरफुल वॉइस इन द एंटी करप्शन मूवमेंट एंड हैज़ नेवर बीन अफ्रेड ऑफ़ कंट्रोवर्सी। फ्रॉम रामलीला मैदान टू हिंदू राष्ट्र फ्रॉम टेकिंग ऑन मल्टीीनेशनल कंपनीज़ टू टेकिंग ऑन द मेडिकल एस्टैब्लिशमेंट। बाबा रामदेव हैज़ प्रोवोक्ड, पर्सुएड एंड पोलराइज्ड इन इक्वल मेजर बट बिहाइंड द हेडलाइंस एंड द सैफरन रोब्स, व्हाट डज़ बाबा रामदेव रियली बिलीव? एंड हाउ मच पावर एंड इन्फ्लुएंस डस
(03:44) ही व्हील्स टुडे। सो एस आई सेड आई एम सो हैप्पी टू हैव इन द स्टूडियो वि मी बाबा रामदेव इट्स बीन अ विश टू स्पीक टू हिम फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम एंड आई एम वेरी हैप्पी दैट ही इज़ इन द स्टूडियो विथ मी टुडे बाबा जी धन्यवाद आप स्टूडियो सीधा यूके से आ रहा हूं जी धन्यवाद मैं तो सिर्फ यहीं पे 2 किलोमीटर दूर पे लेकिन आपके मैंने प्रधानमंत्री जी से लेकर के देश और दुनिया की बड़ी हस्तियों के साथ इंटरव्यू देखे और उसमें जो विषय है जो प्रश्न है सवालों की गंभीरता से लेकर के और उसकी समग्रता को और आपकी प्रामाणिकता को प्रणाम करता हूं। बहुत अच्छा आपका जो
(04:26) आधिपत्य है पूरे विषयों पर और आपका जो ट्रैक रिकॉर्ड है और जो आपकी एक निष्पक्ष दृष्टि है उसको और एएनआई के पूरे पुरुषार्थ को प्रणाम करता हूं। मैं बहुत कई बार मजाक में कहता हूं। एएनआई मत पंचायती चैनल कोई भी ले सकता है इसकी फीड। वो बिल्कुल सही कहा आपने। मतलब अगर डेमोक्रेसी की बात चल रही है तो फिर चैनल है डेमोक्रेटिक चैनल सबके लिए जी और आप जहांजहां जाते हैं हमारा कैमरा आपके साथ होता है हमेशा हां और एक बाइट आपने हाल ही में दिया था मैं उसी से शुरुआत करती हूं इंटरव्यू को आपने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र होकर रहेगा या आपने एए एनआई को एक बाइट दिया था
(05:05) तो मैं और वो बाइट वायरल हो गया था हर जगह लगा है देश में विदेश में हर जगह क्योंकि सब जानना चाहते हैं कि सबका एक अलग ही नजरिया होता है कि हिंदू राष्ट्र का की परिभाषा क्या है? तो आपके हिसाब से हिंदू राष्ट्र की परिभाषा क्या है और आज का जो भारत है अगर हिंदू राष्ट्र कमाने क्या है और अगर होगा उसकी क्रियान्वति क्या है? तो इसमें मैंने दो बातें कही थी। एक तो हिंदू राष्ट्र भारत था है और हो करके ही रहेगा। और हिंदू राष्ट्र का मीनिंग जो है वो किसी मजहबी उन्माद से नहीं है और कोई उसके अंदर मजहबी कोई उसका लक्ष्य भी नहीं है। मैंने कहा राम का रामत्व
(05:52) कृष्ण का कृष्णत्व शिव का शिवत्व देवों का देयत्व वीरों का वीरत्व जब हमारे भीतर होगा हम सब ऋषि ऋषिकाओं वीर वीरांगनाओं के संतान है। हम सब के पूर्वज एक हैं। हम और उन पूर्वजों का चरित्र जब हमारे भीतर से अभिव्यक्त होगा हमारे आचरण से हिंदू राष्ट्र होगा। कोई मठों से मंदिरों से कोई धार्मिक प्रतीकों से कोई एक दूसरे को गाली गलौज करने से कोई सियासी लोग और मजहबी लोग एक दूसरे को लड़ाते हैं और ये बड़ा ही शर्मनाक है। ये अलोकतांत्रिक है। असंवैधानिक अमानवीय या अनैतिक है और धर्म अध्यात्म से तो कोई इसका लेना देना नहीं। धार्मिक कृत्य है जो
(06:30) धर्म के नाम पर एक दूसरे को लड़ाते हैं। तो मैंने कहा कि हमारे जीवन में राम की मर्यादा यही तो है रामत्व कृष्ण का योग और कर्म योग शिव का शिवत्व यही तो है हिंदुत्व सनातन। अब इसके बजाय लोग क्या करते हैं? हिंदू खतरे में है। हिंदू धर्म खतरे में है। कोई कहता है इस्लाम खतरे में है। यह इससे कोई हिंदू राष्ट्र का मतलब नहीं है। तो हमारे धर्म का मतलब ही आचरण तो हिंदू राष्ट्र बनेगा अपने आचरण से और हिंदुत्व का मतलब भी यही है। और दूसरी बात मैंने कही थी कि हमारे पूर्वज एक है। हमारा डीएनए एक है। हमारे पूर्वजों का चरित्र बहुत महान था।
(07:06) वो अपने जीवन में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को अपना धर्म मानते थे। अर्थात अपने कर्म को अपना धर्म माना और उसे अपने आचरण की पवित्रता से सुचिता से हर क्षेत्र में चाहे वो एग्रीकल्चर हो इंडस्ट्री हो पॉलिटिक्स हो मीडिया हो किसी भी क्षेत्र में आप काम कर रहे हैं जो सुचितापूर्ण तरीके से जो आपका अर्जित अर्थ है उस उपार्जित अर्थ से अपने जीवन के जो भी संकल्प हैं उनकी पूर्ति करना और उससे फिर आप एक ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हो जहां जहां अपनी कोई चाह नहीं रहती इसको कहते हैं धर्म अर्थ काम मोक्ष इसको कहते हिंदुत्व इसको कहते हैं सनातन धर्म
(07:41) भारत में सनातन धर्म की प्रतिष्ठा हिंदू राष्ट्र की प्रतिष्ठा बट स्वामी जी जब आप कहते हैं कि सभी भारतीयों के पूर्वज सनातनी थे लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि भारत जो है एक धर्मनिरपेक्ष कुछ लोग मानते नहीं है भारत है ही एक धर्मनिरपे धर्मनिरपेक्ष पंथनिरपेक्ष या धर्मनिरपेक्ष जिस जो भी आप कहें तो अगर हमारे पूर्वज सनातनी थे लेकिन कुछ लोगों के लिए ये मानना कि हमारे पूर्वज होंगे सनातनी लेकिन अब तो हम इस्लाम धर्म धर्म को कबूल कर चुके तो फिर हम कैसे आप कह रहे हैं इस्लाम के अनुसार वो नमाज पढ़ते हैं या इस्लाम की कुछ अच्छी बातें मानते हैं
(08:19) कुरान की हदीस की है जो कुछ बातें नहीं वो तो धर्म परिवर्तन कर चुका सभी जगह कुछ ही बातों को मानते हैं। चाहे हिंदू है चाहे सिख हैं चाहे जैन है चाहे बौद्ध कुछ ही बातों को मानते हैं। यदि सब अच्छी बातों को मान ले ना तो ये मजहबों के नाम पर जो भी आपस में लड़ाई झगड़े चल रहे हैं सब खत्म हो जाएंगे। सबके भीतर एक ही पंचमहाभूत है। हम द ये जो शरीर बना है दिस बॉडी इज अ कंपोजिशन ऑफ़ फाइव एलिमेंट्स। जी बिहाइंड दिस फिजिकल बॉडी एवरी वेयर सोल इज़ एवरीवेयर इक्वल एंड द सुपर सोल इज एवरीवेयर इक्वल। आदमी में भेद कहां है? पंचमहाभूतों का संघात है। ये शरीर इसके
(08:56) पीछे इंद्रियां मन चित्त चेतना आत्मा और सबका परमात्मा उसको चाहे ऑलमाइटी गॉड कहो, वाहगुरु अकाल पुरुष कहो, खुदा कहो, अल्लाह कहो, भगवान कहो, परात ब्रह्म कहो भेद कहां है? भेद तो आदमी के प्रारब्ध और पुरुषार्थ का जो भी जन्म धर्मांतरों का संचित कर्माशय जन्म में भी जो उसके अलग-अलग प्रकार का जो उसका थॉट प्रोसेस है इमोशंस है एक्शन भेद तो आदमी का प्रारब्ध और पुरुषार्थ के आधार पर है बाकी तो अभेदी दृष्टि है तो यदि यह दृष्टि सब में पैदा हो जाए अभेद दृष्टि एकत्व अनुपश्यत सर्व यत्र भ यत्र विश्व भवत एक नीडम एको वशी सर्वभूत एकत्व की प्रतिष्ठा हो जाए फिर तो
(09:32) सारे लड़ाई झगड़े खत्म हो जाएंगे तो एकत्व में क्या होना चाहिए फिर एकत्व में यह होना चाहिए कि हम सब का देश एक है। हम हम सब मनुष्य हैं। तो मानव धर्म हमारा एक है। तो धर्म मानव धर्म मानव धर्म हिंदू धर्म होना चाहिए। मानव धर्म का मतलब मानवीय कर्तव्य। धर्म हमारे कर्तव्य अर्थ में प्रयोग होता है। और जो मजहब शब्द का प्रयोग होता है या जो रिलीजन शब्द का प्रयोग होता है। अलग-अलग प्रकार के रिचुअल्स अलग-अलग प्रकार के तो हिंदू राष्ट्र में मजहब है, धर्म है। क्या है फिर? हिंदू एक यदि उसको एक जीवन पद्धति है। यदि उसको आप व्यापक अर्थ
(10:04) में कहें तो वो अपने कर्तव्यों का प्रामाणिकता से निर्वहन है। धारण किया जाए जीवन में वो धर्म जैसे अग्नि का धर्म उष्णता है। जल का धर्म शीतलता है। हम पवन का धर्म गतिशीलता है। धरती का धर्म धैर्य है। आकाश का धर्म विराटता है। तो धर्म तो एक उसका एक स्वाभाविक नैसर्गिक गुण है जो सनातन है, शाश्वत है, सार्वभौमिक है, वैज्ञानिक है। तो अपरिवर्तनीय तत्व धर्म है। अगर मेरा नाम से फातिमा है और मेरे पूर्वज दो या तीन पुश्तों से दो तीन पांच 10 पुश्तों से उन्होंने इस्लाम को कबूल किया है। तो अगर वो आपके पास आती है तो आप उनको हिंदू मानेंगे।
(10:43) कि मुझे कोई किसी इस्लाम से या किसी की ईसाइयत से जरिज्म, बुद्धिज्म, सिखिज्म से हिंदूज्म से कोई आपत्ति नहीं। हिंदू शब्द भी तो बहुत अर्वाचीन है। तो हिंदू राष्ट्र से मैंने कहा हम सबके आ पूर्वज आर्य हिंदू वैदिक सनातनी थे। शब्द प्रयोग में इसलिए कई बार शब्दों में बड़ा झमेला है। सब मूल तत्व एक ही है ना। तो ये सारी सृष्टि एकत्व के आधार पर चलती है। जब आप जैसे थॉट लीडर्स जो हैं जब कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र होगा। चाहे आरएसएस के कोई लीडर्स हो या आप हो। जब आप हिंदू राष्ट्र कहते हैं देखिए जो अलग-अलग लोग जो बोल रहे हैं ना अलग-अलग जो संगठन है या अलग-अलग जो
(11:17) व्यक्ति है ना वो हिंदू धर्म को या हिंदू राष्ट्र को अ बहुत ही क्षुद्र और संकीर्ण अर्थों में वो मजहबी तौर पर उन्मादी तौर पर उनको जब संबोधित करते हैं वो गलत है। हम यदि आप एक देश एक संविधान देश का मतलब क्या है? देश का एक संविधान है तो देश लोकतांत्रिक संवैधानिक मानवीय नैतिक आध्यात्मिक मूल्यों से चल रहा है। उन नैतिक संवैधानिक मानवीय अह अह नैत आध्यात्मिक मूल्यों का निर्वाहन है हम वही एकत्व को में बांधता है हमको और उसी को कहते हैं राष्ट्रीय एकता हां एकता अखंडता संप्रभुता तो एकता का जो भाव है ना ये जो बंटवारे हो रखे हैं ना जाति
(11:59) पंथ वर्ग समुदायों के नाम पर ये बड़े खतरनाक है ये भी तो हिंदुओं ने ही किया है ना हिंदुओं ने कियाति के पिता जी ये गलत है ये ये जो जाति बटवारे हैं जाति वर्ग समुदायों के नाम पर पंथों के नाम पर कहां बाहर से लोगों ने आकेति बनाई है ना कह रहा हूं जाति की जो प्रणाली है हिंदुओं जाति की प्रणाली हिंदू मेंति शब्द नाम का कोई तत्व ही नहीं वेद में दर्शनों मैं तो चारों वेद वेद दर्शन उपनिषद रामायण महाभारत भगवत गीता पुराण पढ़ के बैठा हुआ हूं इसमें कहीं पर भी जाति शब्द है ही नहीं हम ये सब जो कहीं पर विशेष अर्थों में प्रयोग भी किए जाते थे ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य
(12:35) शूद्र ये भी कोई जाति सूचक शब्द नहीं है ब्रह्म है ब्रह्म का अर्थ नहीं वो भी ब्रह्म का अर्थ है ज्ञान और जो ब्रह्म से ज्ञान से जो अप्लावित है या ब्रह्म का अर्थ है अनंत विराट जो विराटता के संकीर्णताएं जिसकी भीतर से खत्म होगी वो ब्रह्म है ब्राह्मण है हम और क्षत्रिय क्या है क्षत माने भय त्र माने रक्ष भय से रक्षा करो क्षत्रिय वैसे क्या है जो चारों तरफ समाज में घूम करके अभाव की को दूर करे अज्ञान को दूर करे वो ब्राह्मण अन्याय को दूर करे वो क्षत्रिय अभाव को दूर करे वो वैश्य और अशुच िता अपवित्रता को दूर करे वो शूद्र ये तो
(13:10) शाब्दिक अर्थ है इनका तो ये ये ना जाती है ना ये वर्ग है ये तो एक समय में जैसे आजकल विधायिका कार्यपालिका न्यायपालिका ऐसा बोल दिया कि भाई ये ये चार बड़े और और लोग व्यवसाय के हिसाब से फिर एक एक तरह से एक ऐसा एक आज भी तो जैसे ये भाई ये गए बुरे कृषि के लोग हैं मीडिया के लोग हैं ऐसा है ना तो ये ये जाति नहीं थी दरअसल जातियों के नाम पर एक व्यवस्था इस्लामिक समय में और जो है अंग्रेजों के समय समाज को बांटा फूट डालो राज करो यही है। इसलिए यह जो विभाजन है ना एक परिवार में स्मिता जी चार बच्चे हैं। एक पढ़ने पढ़ाने का काम कर रहा
(13:47) है। एक जो है उसके अंदर ही कहीं क्लर्क की नौकरी आई उसमें या सफाई कर्मचारी की कहीं नौकरी आई। अब आदमी आजीविका के लिए अपनाता ही है। एक फौज में भर्ती हो गया। एक पॉलिटिक्स से एक ने पॉलिटिक्स जाइन कर ली। एक मान लीजिए मेरी तरह से कोई साधु बन गया। तो कहां इसमें भेद रहेगा? आजीविका भेद को कभी भी हम भेद दृष्टि से नहीं देखते। एक परिवार में 10 आदमी 10 तरह के काम ना फिर उसके लेकिन आजीविका का भेद भी ठीक नहीं है। जातीय भेद भी ठीक नहीं है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र के नाम पर भी भेद ठीक नहीं है। मैं तो कहता हूं गरीब अमीर
(14:17) के नाम पर भी गरीब अमीरों को अमीर गरीबों को गाली देने में लगे हैं। ये भी गलत है। जैसे किसी को एससी एसटी कह कर के अलग-अलग जाति सूचक शब्द कह के अपमानित करना या किसी को ब्राह्मणवाद से आजादी, क्षत्रियवाद से आजादी, सामंतवाद से आजादी ये शब्द क्या है? यह आपस में एक दूसरे को लड़ाना, भिड़ाना और इससे अपने सामाजिक अपने मजहबी और अपने सियासी सब जो मकसद है उनकी पूर्ति करना यह कुछ ताकतवर लोगों का एक वर्चस्ववाद का एक अलग प्रकारे अगर जाति वगैरह अगर ये डिवीजंस नहीं है तो हम धर्मांतरण हिंदू धर्म में क्यों नहीं अलाउ करते और अगर करते हैं तो फिर अगर वो
(14:56) किस जाति में जाते हैं? आर्य समाज में अलाउड है लेकिन और तो कोई करते नहीं है। क्यों? अगर हिंदू धर्म से बाकी धर्म में धर्मांतरण हो रहा है तो हिंदू धर्म के अंदर धर्मांतरण शब्द को ही उचित नहीं मानता। आदमी को अपना जीवन बदलना चाहिए। अपना आचरण बदलना चाहिए। अपने ज्ञान को उन्नत बनाना चाहिए। अपनी संवेदनाओं को बड़ा बनाना चाहिए। ये जो आदमी कहीं नमाज पढ़ रहा है, कहीं किसी देवी देवता का स्त्रोत्र पढ़ रहा है या कहीं मस्जिद में जा रहा है, गिरजागर में गुरुद्वारे में जा रहा है। ये ये सच में धर्म नहीं है। ये धर्म के प्रतीक है। जी। न ही लिंगम धर्मस्य कारणम हमारे सनातन
(15:31) के शास्त्रों का प्रमाण आपको दे दिया लिंग जो है चिन्ह जो है वो धर्म का कारण नहीं है हम जो धारण किया जाए वो धर्म है और धर्म की हमारे परिभाषा क्या दी गई धति क्षमा दम शचम इंद्रिय निग्रह धीर विद्या सत्यम अक्रोध दशकम धर्म लक्षणम शताम धर्म सर्वसम श्रत चवधारतम आत्मन प्रतिकुलाने परेशाम न समाचित जो आप अपने लिए अच्छा नहीं मानते हो दूसरों के लिए मत करो धर्म का अर्थ है धैर्य धति क्षमा दूसरों को माफ करना अपने शरीर इंद्रियों मन पर नियंत्रण करना धर्म को अपने आचरण से ही सीधा जोड़ा है। हम तो ये ये सब धर्म के नाम पर भ्रम ज्यादा
(16:08) है। तो कन्वर्शन नहीं होना चाहिए। देखिए कन्व रोकने के नाम पर देखो मैंने आज तक एक भी व्यक्ति को मेरे पास तो लाखों नहीं करोड़ों लोग आए हैं इस्लाम के जैनिज्म जैनिज्म को सिखिज्म को अलग-अलग थॉट प्रोसेस को फॉलो करने वाले। मैंने तो किसी का धर्मांतरण नहीं किया। इसकी आवश्यकता ही नहीं है ना। आदमी को फोकस करना चाहिए अपने कर्म में। कर्म ही धर्म है हम और भगवत गीता यही कह रही है वेद यही कह रहे है स्वेन कृतना संदित कुरने वेह कर्माण जीजी विच छतंग समस्त स्वकर्मणात अभ्यर्थ सिद्धिम मिंदति मानवा काय कवे कैलासा हमारे यहां तो कर्म को ही धर्म कहा
(16:40) है तो क्या वो आपके पास आए कि हमें हिंदू धर्म में कन्वर्ट होना है और आपने कहा जरूरत नहीं है। मैंने कहा कि हमसे बोले कि हम आपके शिष्य हैं। हम योग को फॉलो करते हैं। आयुर्वेद को फॉलो करते हैं। अपने प्राचीन ऋषियों की जो चरित्र हैं आदर्श उनको फॉलो करते हैं। मैंने कहा ठीक है। वो हिंदू धर्म की का अनुयायन करते क्या करते हैं फिर कहना कुछ लोगों ने अपनी दुकानदारी चला रखी है मठाधीश हो के कि मैं हिंदुओं का गुरु हूं कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं इस्लाम का गुरु हूं वो कह रहे हैं कि मैं सिखिज्म जैनिज्म को और उसका ठेकेदारी है ना ये गड़बड़ है
(17:12) मेरी बहन तो आप मजहबी तौर पर लोग कहते हैं हिंदू धर्म खतरे में कुछ कहते हैं इस्लाम खतरे में है ये सब बेकार की बातें कोई खतरे में नहीं ये देश लोकतंत्र से संविधान से चल रहा है और लोकतांत्रिक संवैधानिक मानवीय नैतिक आध्यात्मिक मूल्यों को फॉलो करना ही धर्म है। चाहे उसको आप आध्यात्मिक धर्म कहो, चाहे उसको संवैधानिक धर्म कहो। बाबा जी कुछ ही दिन पहले दिल्ली में ही कुछ किलोमीटर दूरी पर बच्चे आए हुए थे और वो कह रहे थे धर्म भी खतरे में है। भारत भी खतरे में है, संविधान भी खतरे में है। सब खतरे में है और उसकी उसकी वजह यह है कि
(17:46) जो आज की सरकार है वो बच्चों की बातें नहीं समझ रहा। वो फ्रस्ट्रेशन नहीं समझ रहा। वो हमारी बातें नहीं समझ रहा कि भारत जो है फ्रस्ट्रेशन में कौन बचे हैं? जो बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं तो फ्रस्ट्रेशन में नहीं है। मेरे पास तो 10,000 बच्चे हैं। एक भी बच्चा फ्रस्ट्रेशन में नहीं है। जो अच्छे से पढ़ाई कर रहे हैं जो बच्चे अच्छे से अपने करियर बिल्डिंग पर ध्यान दे रहे हैं। जो अपने पढ़ाई में मेहनत कर रहे हैं। पढ़ाई के बाद अपने काम में मेहनत कर रहे हैं। उनको तो फ्रस्ट्रेशन नहीं है। तो फ्रस्ट्रेशन उनको है जो नीट के बच्चे पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। देखो नीट के पेपर
(18:17) लीक होना जो है और जो स्टेट गवर्नमेंट के इसलिए प्रॉब्लम प्रॉब्लम नीट ही नहीं है। जितने भी कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम्स हैं, बोर्ड है, हां, अभी फ्रस्ट्रेशन है। क्यों? आप बोर्ड के एग्ज़ाम की कोई वैल्यू नहीं है। 10वीं, 12वीं में आपके कोई ना कितने नंबर आ गए, उसके आधार पर आपका किसी यूनिवर्सिटी में एग्जाम एडमिशन नहीं होता। ना आप आईएएस बन सकते, ना आईपीएस बन सकते, ना आईएम आईआईटी में आपका जो है डॉक्टर नहीं बन सकते, इंजीनियर बन सकते। फिर पढ़ क्यों रहे हो? तो वन नेशन, वन एजुकेशन सिस्टम होना चाहिए। 12वीं तक सब बच्चों की पढ़ाई निशुल्क होनी चाहिए और उसके बाद में
(18:51) करियर ओरिएंटेड जो है केस के सक्सेस जो केस स्टोरी होती है उनके आधार पर पढ़ाईयां होनी चाहिए। तो फिर लर्न बाय डूइंग सही तो कह रहे थे फिर इसलिए मैं कह रहा हूं जो पद्धति गलत है ना इसलिए मैं कह रहा हूं केवल किसी शिक्षा मंत्री के बदल जाने से केवल नीट और जी जो है जी के एग्जाम्स में पेपर लीक वो एक बड़ा मुद्दा है। मैं कहा सारे मुद्दे अपनी जगह हैं। लेकिन व्हाट इज द राइट डायरेक्शन ऑफ एजुकेशन? देश बदलेगा सिस्टम से। सिस्टम है वन नेशन, वन एजुकेशन, वन नेशन, वन हेल्थ सिस्टम अर्थात आपको जब आप प्राइवेट स्कूल में जाते हैं, प्राइवेट यूनिवर्सिटी
(19:32) में जाते हैं तो वहां आपके लिए एक अलग प्रकार की व्यवस्था है। गवर्नमेंट स्कूल में जाओ, गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी में जाओ, कुछ का छोड़ के बाकियों का जब आईआईएम, आईटीज अच्छी कर सकती हैं। जब गवर्नमेंट के मेडिकल कॉलेजेस अच्छा कर सकते हैं। तो ये बाकी स्कूल कॉलेज क्यों नहीं अच्छा कर रहे हैं? हम तो आपको सारे स्कूल, सारे कॉलेज, सारी यूनिवर्सियों को ठीक करना पड़ेगा। एक जितने भी आपके एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज हैं उनको ठीक करना पड़ेगा। आपको पूरा हेल्थ सिस्टम को सही दिशा में लाना पड़ेगा। जितने भी गवर्नमेंट के जितने भी हॉस्पिटल हैं गवर्नमेंट अब जब एम्स
(20:05) बहुत अच्छा कर रहा है तो बाकी बाकी हॉस्पिटल अच्छा क्यों नहीं कर रहे? हम बहुत बुरी हालत है। देश में जितना खराब हेल्थ सिस्टम है उससे भी ज्यादा एग्रीकल्चर खराब है। उससे भी ज्यादा तो हेल्थ, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, नेचर एनवायरमेंट का क्या हाल है? आप दिल्ली एनसीआर से लेकर के पूरे देश में आप गैस चेंबर में जीते। एक्यूआई जो है 500, 700,00 800 होता है। पूरी दुनिया के अंदर एक क्यूआई 5 से 15, 20, 25, 50 अधिकतम जाता है। तो यह 500 क्यों? 800 क्यों? 1000 क्यों? हम आप शुद्ध हवा, शुद्ध पानी जीने का अधिकार सबको है ना। उसके बाद आप आपका करियर आता
(20:41) है, आपका बिजनेस आता है। उसके बाद राजनीति आती है, धर्म आता है। तो देश में नेचर एनवायरमेंट के लिए बहुत भयंकर चैलेंजेस हैं। देश में चैलेंजेस सारे डिपार्टमेंट्स में। फिर उससे भी बड़ा चैलेंज ये है कि पढ़ने लिखने के बाद में कोई लड़का बेरोजगार ना हो। महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा और सबसे बड़ी चीज है पपुलेशन। अनएुकेटेड पपुलेशन। अनप्रोडक्टिव पपुलेशन। क्वालिटी पपुलेशन होना चाहिए ना। ऐसे ऐसे बच्चे होने चाहिए जो बहुत पढ़े लिखे हो, बहुत समझदार हो, बहुत मेहनती हो, बहुत ईमानदार हो और वो देश के लिए काम करें। पर ये तो पढ़े लिखे ये पढ़े लिखे बच्चे थे
(21:18) ना जो आए थे क्योंकि वो कह रहे थे हमें रोजगारी नहीं मिल रही है क्योंकि पेपर लीक हो जाता है। अच्छा तो ये आंदोलन के बाद तो रोजगार मिल गया उनको। तो वही मैं पूछ रही हूं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा होने के बाद उनका उनका फ्यूचर ठीक हो गया? हम्म। क्या मिला क्या इस आंदोलन से? मैं आपसे पूछ रहा हूं। आप तो बहुत विवेकशील पत्रकार हो। सब तरह से सब बातों को जानते हो इस व्हाट इज द आउटकम ऑफ दिस एजिटेशन क्योंकि आपने कहा था कि स्ट्रीट कैन नॉट डिसाइड क्योंकि कुछ आंदोलनकारियों ने कहा कि स्ट्रीट विल डिसाइड कि क्या और आपने कहा प्रधानमंत्री डिसाइड करेंगे लेकिन
(21:49) प्रधानमंत्री ने स्ट्रीट की बात मान ली ना देखो संसद से ही देश की नीतियां बनती है। सड़क से आप आंदोलन कर सकते हो और आंदोलन भी लोकतांत्रिक संवधानिक तरीके से अहिंसक तरीके से सड़कों पर गाली गलौज करने से सड़कों पर जो है वाहियात बातें करने से तो वो वो तो देश नहीं चलेगा तो इसमें तीन तरह के आंदोलनकारी थे एक जो सही मुद्दे की बात उठा रहे थे एक उनके पीछे जो गाली गलौज कर रहे थे मां बहन बेटी कितनी भद्दी भद्दी गालियां वो कोई सभ्य समाज ना सुन सकता है ना दे सकता ना उसको कभी अलऊ कर सकता नहीं लेकिन जंतरमंतर के मन से तो एक बार भी
(22:21) नहीं कहा भाई गाली गलौज मत करो तीसरे वो लोग थे जो अभी पुलिस वालों ने लिस्ट बना रखी है जो कुछ इसमें मर्डर करने वाले रेप करने वाले और अलग-अलग तरह के मजहबी असामाजिक तत्व असामाजिक तत्व थे जो अलग-अलग मंसूबे को लेकर के आए हुए थे तो देखो आंदोलन को हमने भी किया 2009 से लेकर के द्वारिका से लेकर के दिल्ली तक तो लाखों लोग उसमें सम्मिलित हुए 20 लाख किमी के लगभग मैंने यात्रा की लेकिन हमने अपने उसमें कहीं गालीगलौज नहीं होने दी हमने कभी भी उसको अलोकतांत्रिक असंवैधानिक हिंसक नहीं होने दिया तो बगावत विद्रोह अलग चीज है और आंदोलन और क्रांति अलग चीज
(22:56) होती है। तो आंदोलन क्रांति तो पूरे देश में होगी। सिस्टम सुधारना ही पड़ेगा। मैं पक्ष विपक्ष से तीन बातें कहना चाहता हूं। हम् देश में हर जगह छोटे पुलिस थाने से लेकर के स्कूल कॉलेज से लेकर के खेत खलिहान से लेकर के लोगों के वैयक्तिक जीवन से लेकर के पारिवारिक जीवन से लेकर के सामाजिक ताने-बाने में सब जगह आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है और यदि परिवर्तन एक दिन में तो नहीं होगा लेकिन परिवर्तन की दिशा में सबको आगे बढ़ना चाहिए और सब जगह जहां झूठ फरेब उस चारों तरफ जो चोरी चकारी तो ये आंदोलन से होगा सही तो इसमें एक तो सत्ता पक्ष को एक तो सत्ता
(23:34) पक्ष पक्ष को जिनके ऊपर यह दायित्व है कि राइट डायरेक्शन में देश आगे बढ़ना चाहिए उनको यह काम करना चाहिए। फिर वहां गड़बड़ी हो तो विपक्ष को वहां सबसे पहले खड़ा होना चाहिए और फिर विपक्ष भी निकम्मा बन जाए तो समाज को खड़ा होना चाहिए। और मैं तो एक बात और कह देता हूं। यदि पक्ष, विपक्ष और समाज के अलग-अलग जो वर्ग घटक हैं जो अलग-अलग पीड़ाओं को झेल रहे हैं। ये तीनों भी यदि जो है अपने दायित्व को ना निभा सके किसी कारण से चूक गए तो जहां हमारी जरूरत पड़ेगी हम जाकर के खड़े हो जाएंगे। 2011 में आपने किया क्या आप भी कर सकते हैं 2026 में?
(24:12) क्यों नहीं कर सकते? इसलिए देश हमारा है और जहां हम देखेंगे कि पक्ष विपक्ष और अलग-अलग जो समाज के घटक हैं जिन जिनके साथ जुल्म जाति हो रही है। यदि ये तीनों ही अह जो है उसमें नाकामयाब रहे तो क्यों नहीं खड़े होंगे? सन्यासी कोई अह मठों में बैठने के लिए है। भंडारा खाने के लिए बने हैं हम सन्यासी। हम देश के लिए सन्यासी। हम सनातन के वो सन्यासी हैं जो संविधान को सबसे ऊपर रखते हैं। हमारे लिए दो दो बातें सबसे ऊपर है। एक भगवान का विधान अर्थात नैतिक आध्यात्मिक मूल्य और मुझे तो नैतिक आध्यात्मिक और हमारे वैदिक सनातन मूल्यों में और संवैधानिक मूल्यों में कोई फर्क ही
(24:52) नहीं दिखता। हमारा संविधान भी वही कहता है और हमारा जो है सनातन भी वही कहता है। यतो धर्म सतो जय सत्यमेव जयते हमारे न्यायपालिका के हमारे शासन के भी सबसे बड़े उद्घोष यही है और उनका स्रोत सनातन ही है। बाबा जी 2011 में आप आए थे भ्रष्टाचार के खिलाफ 11 12 13 खूब 11 12 13 तब आपने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में आपने हिस्सा लिया और उस समय जो स्थिति थी और आज की स्थिति जो है उनमें समानताएं क्या हैं और आपको क्यों लगता है कि शायद वक्त आ गया कि आप फिर से आ जाए आंदोलन में। नहीं मैं तो ऐसा कह रहा हूं कि देखो यह बात केवल एक व्यक्ति की नहीं है। पक्ष
(25:37) विपक्ष की नहीं है। किसी एक वर्ग की नहीं है। सभी दिशाओं में देश में एक बहुत बड़े आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। हम चारों तरफ देश में गंदगी फैलती है। मोदी जी कहते हैं स्वच्छ भारत अभियान चलाओ भाई। कूड़ा खचरा तो अभी भी सड़कों पर है। कम से कम लोगों के दिमाग में इतना जरूर आ गया। एक एक थॉट प्रोसेस तो डाल दिया कि भाई कूड़ा फैलाना नहीं चाहिए। अच्छी बात नहीं। लेकिन देश तो साफ नहीं हुआ अभी तक भी। हम हां कुछ चीजें वो मोदी जी ने अच्छी की है। जैसे जो लाभार्थी लोग हैं अलग-अलग जो गवर्नमेंट की योजनाएं हैं तो उसमें जो घोटाले होते थे तो जनधन अकाउंट खोल दिए
(26:13) डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर हो गया उससे कुछ घोटाले आदि कम हो गए लेकिन अभी भी क्या एक व्यक्ति के साथ अन्याय हो रहा है और थाने में जाएगा तो एफआईआर दर्ज हो जाएगी हम 99% एफआई दर्ज नहीं होगी जब तक कोई पॉलिटिकल आदमी फोन नहीं करेगा हम तो बात चाहे विधायिका की हो कार्यपालिका की हो न्यायपालिका की हो और चाहे मीडिया की हो चारों तरफ पतन की पराकाष्ठा तो है। हम सुधार सभी तरफ है अपेक्षित और वो करना ही पड़ेगा और वो यदि सुधार अपेक्षित नहीं हुआ अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो चारों तरफ से फिर आंदोलन के साथ-साथ बगावत विद्रोह और फिर अराजकता अनारकी भी फैल सकती है। वो
(27:00) देश के लिए खतरनाक है। इसलिए क्या भारत उस कगार पर है अभी? नहीं अभी मैं ऐसा नहीं मानता हूं। भारत में समग्रता में अराजकता नहीं आ सकती। आंशिक रूप से कहीं-कहीं लोग अराजकता कर सकते हैं। हम समग्रता में देश में इतने संवेदनशील लोग हैं। देश बहुत बड़ा है और उसमें अलग-अलग धड़े हैं। कुछ लोग बहुत समझदार हैं। कुछ लोग थोड़े बहुत उत्तेजक हैं और एक एवरेज पॉपुलेशन है। तो पूर्ण अराजकता वाली स्थिति मतलब जो बांग्लादेश में हुआ, अह जो श्रीलंका में हुआ या जो नेपाल में हुआ वैसी स्थिति तो भारत में नहीं आ सकती। क्योंकि क्या आनी चाहिए? मैं मैं उसका
(27:38) पक्षधर नहीं हूं। नहीं है। अराजकता से देश नहीं बनता। हां। लेकिन जहां गलत हो रहा है उसका विरोध होना चाहिए। विरोध और विद्रोह में बगावत में और अराजकता में फर्क है। क्रांति में फर्क है। तो क्रांति गलत है। क्रांति क्रांति 100% सही है। तो क्रांति एक बहुत बड़े उद्देश्य को लेकर के होती है। और वो सुनिश्चित परिणाम तक किसी भी कार्य को ले कर के जाती है। उस आंदोलन को लेकर के जाती है। तो जो अ इंडिया अगेंस्ट करप्शन मूवमेंट था क्या वो क्रांति सही थी? उसके मुद्दे अच्छे थे लेकिन उसके अंदर जो लोग थे लोगों की जो मंशा थी वो एक राजनीतिक पार्टी बनाने की थी तो वो एक
(28:14) पार्टी बन गई। अगर वो नहीं बनती तो क्या वो सही होता? अ हां उसमें कुछ बातें कुछ मूलभूत परिवर्तन जो होने चाहिए थे वो होते तो ज्यादा बेहतर होता। तो अगर कॉकरोच जनता पार्टी एक राजनीतिक रूप ले लेती है तो क्या वो सही होगा? क्योंकि एक प्रेशर ग्रुप है अभी वो अभी राजनीतिक रूप नहीं धारण किया उन्होंने अगर वो हो जाता यदि मुझसे आप एकदम 100% ईमानदारी से पूछे मैं टालम बटोल करके डिप्लोमेटिक आंसर भी दे सकता हूं लेकिन मैं आप कभी करते नहीं वैसे डिप्लोमेटिक आंसर नहीं दूंगा जी डिप्लोमेटिक आंसर तो ये है कि कांग्रेस जनता पार्टी एक पार्टी बन जाए या एक
(28:52) प्रेशर ग्रुप बना रहे प्रेशर ग्रुप बन करके भी कुछ हासिल नहीं होगा मैं आपको बता रहा हूं हम और राजनीतिक पार्टी बन जाएगी तो पूरी भदही पिट जाएगी जाएगी क्योंकि इनके पास कोई स्ट्रक्चर नहीं है ना हम और राजनीतिक पार्टी ऐसी नहीं बनती रातोंरात और उसका पूरे यदि अरविंद केजरीवाल जी ने राजनीतिक पार्टी बनाई तो उनके पास एक 15 20 साल का एक्सपीरियंस था दिल्ली में काम करने का कुछ लोग जुड़ गए थे कुछ संगठन जुड़ गए थे इसलिए वो चीज बन गई पूरे देश में आप कांग्रेस जनता पार्टी बना देंगे पहली बात तो इस नाम को एक्सेप्ट नहीं करेंगे करेंगे देश।
(29:31) हां। दूसरी बात फिर पॉलिटिकल सिस्टम बनाने के लिए आपको बूथ लेवल तक ऑर्गेनाइजेशन खड़ा करना पड़ता है। वो ऑर्गेनाइजेशन कैसे खड़ा किया जाता है? हमने पिछले 30 सालों में ऑर्गेनाइजेशन खड़ा किया इसलिए हमको पता है। वो ऐसा नहीं होगा। और रही बात प्रेशर ग्रुप की तो प्रेशर ग्रुप में फिर यदि इनको करना है तो फिर सभी राजनीतिक पार्टियों से समान रूप से दूरी बनानी पड़ेगी जो अभी तक नहीं हो रहा है हम और दूसरा अपना कररेक्टर ऐसा बनाना पड़ेगा क्योंकि अभी तक तो इनका कोई बहुत बड़ा कोई कंट्रीब्यूशन है नहीं कि भाई ये कह सकें कि हमने देश के लिए किया है
(30:05) हमने हेल्थ में एजुकेशन है एग्रीकल्चर ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है ना तो वो कोई बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन किया नहीं है तो देश ऐसे किसी पर भरोसा नहीं इस देश ने महात्मा गांधी पर विश्वास किया तो महात्मा गांधी के 50 साल लगे तब जाकर के महात्मा गांधी को महात्मा कहा लोगों ने आज स्वामी रामदेव को लोग मानते हैं तो 30 साल स्वामी रामदेव के लग गए आज मोदी जी को देश मानता है तो उनके 50 साल लग गए हम आरएसएस में रहते हुए संगठनों में रहते हुए फिर राजनीति में रहते हुए 50 साल लगे तब जाकर के उनको देश मानता है। आज कांग्रेस को देश मानता है तो 100 साल हो गए उस
(30:36) पार्टी को। तब जाकर के उसको मानता है। कोई भी आज अखिलेश जी को कुछ लोग मानते हैं। शरद पवार जी को कुछ लोग मानते हैं। तो उनके 3030 40 40 50-50 सालों की लेगसी है। तो कोई भी चीज को करने के लिए ये जो थोड़ा धीरज रखना पड़ेगा। भाई ये जो युवा है वो कहते हैं ये लेगसी ही इनको मार रही है क्योंकि ये समझ नहीं रहे है कि भारत बदल चुका है। एक बात मैं बाबा जी मैं आपसे एक बात पूछता हूं। भारत बदल चुका है। ये सारा देश जिस देश में दिख रहा है। उस बदलते हुए भारत में हेल्थ में, एजुकेशन में, रिसर्च में, इनोवेशन में, इंडस्ट्री में, एग्रीकल्चर में, कैपिटल मार्केट में
(31:13) पूरी दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में लोग अच्छा कर रहे हैं ना। तो जो अच्छा कर रहे हैं वो बदलते हुए लोग नहीं है। खाली गाली गलौज करने वाले एजिटेशन करने वाले लोग जो बदलते हुए भारत के हिस्सा हैं। तो बदलते हुए भारत में जो लोग काम कर रहे हैं और वो बदलते हुए युवा गवर्नमेंट सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर में अलग-अलग इंडस्ट्री में अलग-अलग दिशाओं में देश के लिए दुनिया के लिए काम कर रहे हैं ना। पूरी दुनिया में भारत के लोग छाए हुए हैं। तो जजीस का मतलब आपने छोटे कपड़े पहनने शुरू कर दिए। आपने मोबाइल रखना शुरू कर दिया। उसमें आपने कुछ फॉलोवर बना लिए।
(31:48) उसमें कुछ गाली गलौज कर लिया। कुछ व्यूज पा लिए। कुछ कपड़े पहन के कुछ नंगे होकर के व्यूज पा लिए। कुछ गाली गलौज करके व्यूज पा लिए। इसको इसको बदलता हुआ भारत नहीं कहते। भारत बदलता हुआ का मतलब है कि आप दुनिया में नया रिसर्च करें। भारत बदलता हुआ और चेंजेस का बदलता हुआ है कि आप जो है इकोनॉमिक सेक्टर में ऐसी धाक जमाएं कि आप 10, 2000 500 करोड़, लाख, करोड़, बिलियन, बिलियन, ट्रिलियंस का कोई आर्थिक साम्राज्य खड़ा करें। भारत बदलता हुआ और उसके अंदर अपनी भागीदारी निभाता हुआ कि आप कोई नया डायरेक्शन दे ना हेल्थ में एजुकेशन में एग्रीकल्चर में इंडस्ट्री
(32:21) में नेचर एनवायरमेंट में कुछ नया करें ना देश में और दुनिया में पूरी दुनिया के बड़े-बड़े तंत्रों में आप छा गए कि पूरी दुनिया को आप लीड कर रहे हैं। सोशली इकोनॉमिकली पॉलिटिकली रिलीजियसली आप लीड कर रहे हैं। इसको बदलता हुआ महाभारत कहते हैं। बाबा जी के इसमें दिक्कत क्या है कि क्या मां-बाप अपने बच्चों को समझा नहीं पा रहे कि आपका कर्तव्य क्या है? आपका अधिकार क्या है? व्हाट इज योर ड्यूटी? ये बात बहुत गंभीर बात आपने कही है। बदलता हुआ भारत का मतलब भारत अब कुछ लोग जैन जीज ने कुछ नई भाषा बना ली है। कुछ आपस में गपशप में कुछ गोशप में कुछ भाषा बोलते हैं।
(32:56) न्यू टर्मिनोलॉजी ठीक है। न्यू टर्मिनोलॉजी से देश नया नहीं बन जाता। उसे कोई करियर नहीं बन जाता। कोई फ्यूचर नहीं बन जाता। कोई नए इनोवेशन इन्वेंशन नहीं हो जाता। तो ये जजीस के नाम पर कुछ लोग अलग तरह के ड्रेस पहन लेते हैं। अलग तरह से अपने बालों बाल जैसे चाहो वैसे रखो ना। पूरे गंजे रहो। 10 तरह की कटिंग कराओ। 10 तरह के कपड़े पहनो मैं छोटे कपड़े पहनो पूरे कपड़े पहनो। आधे कपड़े पहनो वो आपकी आजादी हम उसमें कोई और मैं तो वैसे उसका पक्षधर नहीं हूं कि लड़की लड़की के साथ ब्याह करके आ रही है। लड़का लड़के के साथ ब्याह करके आ रहा है
(33:27) या लिविंग रिलेशनशिप में रहने। मेरी मर्जी मेरा लिंग और मेरी मर्जी मेरी शादी जो भी बर्बादी जो भी करना है करो। लेकिन वो मैं उसका पक्षधर नहीं हूं। फिर भी मैं कहता हूं आजादी का मतलब जजीज का मतलब कुछ चौचलेबाजी नहीं होना चाहिए। इन चौचलेबाजियों से कुछ नारे लगाने से कुछ खास तरह के वीडियो बनाने से अलग तरह के जो है मुंह ऐसे होठ आगे करके फोटो खींचने से जज आपको डिफरेंशिएशन आपका खाली कुछ एक्टिविटीज के आधार पर कुछ आपके बॉडी शेप के आधार पर कपड़ों के आधार पर लैंग्वेज के आधार पर पूरी दुनिया जो है में जो भी कुछ हुआ है जो पिछ पिछले
(34:13) 50 सालों में परिवर्तन हुआ है। तो चाइनीस लोगों ने परिवर्तन किया। किसके आधार पर किया? रिसर्च के आधार पर किया। अपनी मेहनत के आधार पर किया। एक स्ट्रेटजी के आधार पर किया। एक दिशा में पूरा देश लगा रहा। भारत से आज कम से कम मैं बोल रहा हूं। तीन चार गुना आगे है। तीन चार गुना आगे चीन। अलग-अलग क्षेत्र में। तो वहां के जैनजी ने तो कोई फोहड़पना नहीं किया। आज जापान भारत से आगे है। कई मामलों में हम आज यूरोप के छोटे-छोटे देश भारत से कई मामलों में आगे हैं। कोरिया जैसा छोटा सा देश दो देश लड़ रहे थे। साउथ कोरिया, नॉर्थ कोरिया और वो लोग
(34:52) आगे बढ़ गए। वहां के जजीज ने तो किसी तरह की कोई बकवास नहीं की। बकवास करना अलग है। छपास होना अलग है। कहीं फोटो छप जाना अलग है। अलग-अलग ये ये जजीज को लोग समझ नहीं रहे हैं। और उसमें मैं देखता हूं कुछ सोशल मीडिया के जो है कुछ ठलवे कुछ हम कुछ सुबह से शाम तक बकवास ही करते रहते हैं। कुछ सुबह से शाम तक सोशल मीडिया पर वीडियो बनाते तू किया क्या तूने ये बता हेल्थ में एजुकेशन में रिसर्च में एग्रीकल्चर में इंडस्ट्री में वेल्थ क्रिएशन में तूने किया क्या है? खाली बैठकर के गाली देना। तो कुछ लोग जो है मोदी जी को गाली देने में लगे हुए हैं।
(35:30) कुछ लोग जो है मोदी के विरोधियों को गाली देने में लगे हैं। ये दोनों ही गलत है। पक्ष को गाली देना, विपक्ष को गाली देना या कोई और कुछ नहीं तो कुछ लोग इस्लाम को गाली देने, कुछ हिंदू धर्म को गाली देने, कुछ तो राम, कृष्ण, हनुमान शिव को हमारे देवी देवताओं को गाली देने में लगे पड़े। ये प्रजातंत्र है ना यहां पे सबको अधिकार है बोलने का। अधिकार देखो अधिकार और कर्तव्य फिर वही बात आ गई। हां वही इसीलिए मैं बोल रहा हूं। इसलिए देखो आपको अधिकार है आप कुछ भी कह सकते हैं। लोकतंत्र में आपको बोलने का अधिकार है। बोलने की आजादी है, लिखने की आजादी
(35:59) है, अभिनय की आजादी है। बहुत कुछ आजादी है आपके। लेकिन आप कि मेरे को आजादी है कि मैं नंगा रह सकता हूं। हम लेकिन उसमें ये भी कहा है भाई सभ्यता से व्यवहार भी तो करना सीखो। तो आपको नंगा रहना है तो अपना कमरा बंद करके रहो। या फिर दिगंबर साधु बन जाओ। अवधूत साधु बन जाओ। कोई दिक्कत नहीं। फिर शरीर शरीर इंद्रिय और मन के अति ट्रांसडेंट स्टेज में जाओ ना फिर आप। तो देखो आजादी का मतलब खाली लोगों ने बहुत ऊपरी स्तर पर ले लिया है। कभी भी स्थर पर बात नहीं बनती है। हमको अंदर जाना पड़ेगा। तो सरफेस से ना जीवन चलता है ना देश चलता है ना सिस्टम चलता है डीपली आपको
(36:39) अंदर इनवॉल्व होना पड़ता है और जो कुछ नीति रीति नीति है कुछ मूल्य है कुछ सिद्धांत है कुछ आदर्श है उनके आधार पर जाना पड़ता है उसी को उसी को लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया कहते जब आप आंदोलन में उतरे थे उस वक्त ऐसी ऐसी क्या बात थी जो आपको लगा कि अब मैं इस दुनिया से निकल के उस दुनिया में जाकर परिवर्तन लाना चाहता हूं जो बात आप यदि आंदोलन ंदोलन की करते हैं तो हमारे आंदोलन के विषय थे काला धन भ्रष्टाचार व्यवस्था परिवर्तन और वो विषय आज भी है हम इस समय भी काला धन एक बड़ा मुद्दा है आर्थिक पारदर्शिता आर्थिक असमानता उन उन विषयों में काम करने की जरूरत इस
(37:20) समय भी मैंने कहा ना पूरे देश में एक परिवर्तन की जरूरत है और उसका आधार होगा एजुकेशन हम और मैं इस मामले में देश के प्रधानमंत्री जी को और गृह मंत्री जी को और जो अभी नहीं शिक्षा मंत्री को भी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक काम तो किया हम कि भारतीय शिक्षा बोर्ड बनाया कि भ हमारा मानस में भारतीयता होनी चाहिए। हमारे चित्त में चेतना में हमारे रगरग में देश के प्रति प्रेम होना चाहिए। भारत में रहकर के लोग भारत के प्रति कितना गद्दारी की बातें करते हैं। भारत का ही विरोध करते हैं। भारत के टुकड़े होंगे और फलाना होगा और यह होगा और वो होगा। तो जो
(37:59) भारत का युवा है उसका मानस उसके चित्त चेतना में भारतीयता होनी चाहिए और उसका जो दिमाग के साथ-साथ फिर उसके कर्मों में आचरण में जो न्यू वर्ल्ड के साथ कनेक्टिविटी होनी चाहिए तो मैं दो शब्द बोल रहा हूं विरासत और विज्ञान दृष्टि और दक्षता शोध और बोध हमारी प्राचीन आईडियोलॉजी मॉडर्न टेक्नोलॉजी के साथ देश आगे बढ़े ऐसा एजुकेशन सिस्टम होना चाहिए वो हमने भारतीय शिक्षा बोर्ड में भारत सरकार से एक ने बोर्ड बनाया जिसको हम आगे बढ़ा रहे हैं हम चाहते हैं कि उस तरह से देश के बच्चों का मानस निर्माण हो कि वह देश के निर्माण में खुद लेंगे। देश के कोई
(38:33) प्रधानमंत्री, कोई राष्ट्रपति, कोई प्रेशर ग्रुप या कोई गिनेचने लोग नहीं बनाएंगे। 135 145 करोड़ लोग मिलकर के देश बनाएंगे। हम और वो देश बनाने के लिए जो मानसिकता चाहिए वो देश बनाने के लिए जो मानस चाहिए पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा रामचरितमानस बच्चों के चित्त में चेतना में चरित्र में रामत्व, कृष्णत्व, शिवत्व हो। उनके भीतर अपने पूर्वजों का महान चरित्र हो। तब त्याग हो, सत्य हो, धर्म हो, न्याय हो और उसके बाद वो जीवन में कुछ करेंगे तो देश बनेगा ना। ऐसे तो नहीं बन जाएगा। उस वक्त ऐसी क्या स्थिति थी कि आप आंदोलन में उतर आए और अब
(39:08) क्या स्थिति बदल गई है और आप समझते हैं कि जो मोदी जी कर रहे हैं वो सही कर रहे हैं। हां, धीरे हो रहा है। लेकिन बदलाव हो रहा है। देखिए मोदी जी की मंशा अच्छी है। अच्छा करना चाहते हैं। एकदम से तो परिवर्तन नहीं आएगा। और उनका साथ बच्चे कह रहे हैं 12 साल हो चुके हैं। आप सरकार में रह चुके हैं और आपने आप बदलाव नहीं कर पाए। अच्छा देखो एटलीस्ट वो जो सीजेपी वाले बच्चे हैं वो कह रहे हैं। पक्ष और विपक्ष की बात नहीं कर रहा हूं ना जो है सीजेपी की बात कर रहा हूं। मोदी जी ने अच्छी मंशा से बहुत से अच्छे काम भी किए हैं। हम उससे पहले भी बहुत से अच्छे काम हुए हैं।
(39:42) मैं कोई जवाहरलाल नेहरू का क्रिटिक नहीं हूं। इतना ज्यादा कुछ मामलों में क्रिटिक हूं। वो तो कोई भी व्यक्ति जब किसी भी विषय में जब डीपली जाकर के सोचेगा तो कुछ मामलों में असमति हो सकती है। आज भी मेरी कुछ असमतियां हो सकती है। हम तो पहले भी बहुत कुछ अच्छा हुआ लेकिन और अच्छा हो सकता था। आज भी बहुत कुछ अच्छा करने की कोशिश कर रहे हैं प्रधानमंत्री और अच्छा हो सकता है। आप मिले हैं प्रधानमंत्री से आपने बात की और इसके बाद मैंने कई बार की शिक्षा के विषय में शिक्षा के बारे में बात की और चिकित्सा के बारे में भी बात की है। एग्रीकल्चर के
(40:17) बारे में भी बात की है। नेचर एंड एनवायरमेंट के बारे में बात की और वो भी खुद इन मामूलों में संवेदनशील है। तो प्रधानमंत्री जी अच्छा करना चाहते हैं। और जो 2015 में आपने भरोसा दिलाया था कि विदेशों में जो धन है वो मोदी जी वापस तक उन्होंने काम किया। कुछ-कुछ उसमें कदम उठाए और भी उठाना बाकी है। तो मैं तो कहूंगा कि कभी भी कोई कार्य पूर्ण नहीं होता है। चरई वेती चरई वेती की यात्रा है। आपको क्या लगता है कि 2014 में जब बीजेपी की सरकार आई थी कौन से ऐसे वायदे हैं जो आपको लगता है कि अभी तक पूरा नहीं हुआ और अर्जेंटली पूरा करना चाहिए। तीसरे टर्म से
(40:52) खत्म होने से पहले। देखिए इसमें चारप काम जो अच्छे काम किए हो तो किए ही है। को जी जो है मोदी सरकार ने आने के बाद जैसे मैंने कहा जो गरीबों को बेनिफिट होता था लाभार्थी जिनको बोलते हैं या सोशल वेलफेयर के लिए जो स्कीमें जाती थी नहीं जो करना चाहिए अब एक मिनट अर्जेंटली करना चाहिए तो अच्छे काम किए तो उसमें एक तो जो बेनिफिट ट्रांसफर होता था डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर हां डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में जो बात आती थी कि भाई 85 पैसा तो पाइप लाइन में खत्म हो जाता है एक तो ये ये उससे से देश को उभारा कि भाई जिसको बेनिफिट जा रहा है
(41:32) वो होना चाहिए वो मिलना चाहिए तो मिल गया स्वच्छ भारत को से लेकर के डिजिटल इंडिया से लेकर के और बहुत सारे और भी अब एम्स हैं तो पूरे देश भर में उनका जाल बिछा है केवल दिल्ली तक एम सीमित था यहां पर लोग सड़कों पर जो है माने एम्स में लोग ऐसे बदहा बहुत बुरी हालात में पड़े रहते थे कॉरिडोर्स के अंदर तो पूरे देश में नए-नए एम्स भी बनाए। आयुष्मान भारत योजना शुरू की। मतलब मैं कोई गवर्नमेंट का प्रवक्ता की तरह बात नहीं कर रहा हूं। ये लंबी चौड़ी बात हो जाएगी। मैंने आप यदि अच्छे कामों की सोचे तो 100 से ज्यादा अच्छे काम किए होंगे मोदी साहब ने। लेकिन अभी जो
(42:13) करने की बात है वो भी तो है ना। हम अब वन नेशन वन एजुकेशन सिस्टम होना चाहिए देश में। हम यह बहुत जरूरी है और यह जो कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स और जो बोर्ड के एग्जाम्स हैं और रेगुलर जो डिग्रियां आपके पास में ग्रेजुएशन पोस्ट ग्रेजुएशन की उनकी कोई कोई वैल्यू नहीं रह गई है। तो इसको दूर करने के लिए वन एजुकेशन वन नेशन ये जो सिस्टम है ना ये ये होना चाहिए और इसमें पढ़ाई के बाद इतना स्किल्ड अब स्किल इंडिया और बहुत सारे कार्यक्रम शुरू तो किए हैं। आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के बहुत सारे सपने हैं मोदी जी के। लेकिन अभी इसमें तीन काम एक साथ होंगे तब यह बात
(42:52) बनेगी। कब? एक तो देश में क्वालिटी पॉपुलेशन होना चाहिए। जनसंख्या इतनी बढ़ रही है रोज। अब जितने बच्चे पास आउट होते हैं उतनी नौकरियां है ही नहीं। ना गवर्नमेंट जॉब में ना प्राइवेट जॉब में और लोग फिर अपने घर में काम भी नहीं करना चाहते। किसान है खेती में काम नहीं करना चाहता। लोग हैं अपने घर में काम नहीं करना चाहते। बाहर जाकर के नौकरी कर लेंगे। तो श्रम को जो सम्मान देने वाली बात है वो देश के लोगों को भी सोचना पड़ेगा। सारे काम मोदी जी तो नहीं करेंगे। एक तो जनसंख्या पर नियंत्रण 100% होना चाहिए। हम जो ज्यादा बच्चे पैदा करें उनके वोटिंग
(43:23) राइट्स छीन लेने चाहिए और उनको गवर्नमेंट बेनिफिट पास ऑन नहीं होने चाहिए। एक तो ये कानून बहुत जरूरी है। तो कुछ चीफ मिनिस्टरर्स तो कह रहे हैं और बच्चे पैदा करें। अरे इसलिए मैं कह रहा हूं ना उसका अब जो प्रोपोशननेट है ना वो वो वो देश में समान रूप से होना चाहिए। हम आप इतने लोग अपने देश में हैं। आप बेरोजगारों की संख्या कितनी होगी? हम कम से कम नहीं होगी। तो आप यदि फुल टाइम जॉब देखो तो 80 करोड़ लोग होंगे। आधी आबादी होगी करीब हम 70 से 80 करोड़ लोग होंगे जिनको फुल टाइम जॉब नहीं है। अब इतने लोग होने के बाद भी लोग कहते हैं कि हमारे यहां तो बच्चे कम
(44:02) है। अरे भैया अभी जो हैं इनको काम दे लो हम और कुछ दिनों तक एक बच्चा पैदा कर लो। बाद में दो बच्चे पैदा करने वाली स्कीम ले आओ। मैं तो कहता हूं चलो दो ही कर लो। दो ही कर लो। यह क्या क्या हो रहा है इस देश में? यदि कोई ऐसी बात कर रहा है कि अभी भी हमारे यहां जनसंख्या की कमी है तो उससे ज्यादा तो मूर्ख कोई होगा नहीं। फिर देश में जो करप्शन वाला मैटर है इसमें अभी और इनको बहुत सख्ती से काम करना पड़ेगा। एक पुलिस थाने से लेकर के और मैंने कहा ना स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी से लेकर के चारों तरफ तंत्र के अंदर लोग जो है आप तो वही कह रहे हैं जो आपने 2011 में
(44:35) कहा। वही बात और ज्यादा अरे भाई आपने पूछा तो मेरे को बोलने तो दो। पर फिर उसका मतलब है कि अभी तक कुछ नहीं हुआ ना अगर 2017 बोला कि कुछ भी नहीं हुआ। नहीं अगर 2011 में भी करप्शन था और अब भी करप्शन है तो फिर क्या मैं आपसे पूछता हूं क्या करप्शन नहीं है? वो इसलिए मैं पूछ रही हूं कि 2011 में आप मेरे से मत पूछिए। आप आंदोलन मैं जो आपने जो आपने पूछा मैं उत्तर दे रहा हूं स्मिता जी करप्शन है तो उसको दूर करने के लिए और ज्यादा सिस्टम एंड प्रोसेस ऐसे बनाने चाहिए और जो करप्शन करें उनको इतना जबरदस्त तरीके से दंडित करना चाहिए। इसके लिए यह यह दरअसल ना इतना
(45:08) गहरा है यह जो रोग है करप्शन का भ्रष्टाचार का उसको आप किसी एक शब्द से परिभाषित नहीं कर सकते कोई एक जो है लोकपाल बिल ला के उसको खत्म नहीं कर सकते लोकपाल बिल का हुआ क्या है कोई जानता भी नहीं है एक बात कह रहा हूं इसलिए मैंने आपको बोला ये कोई एक व्यक्ति केंद्रित व्यवस्था नहीं है केवल सत्ता केंद्रित व्यवस्था नहीं है केवल समाज केंद्रित व्यवस्था नहीं है इस ये बहुआयामी पक्ष है व्यक्ति ईमानदार होना सबसे बड़ी बात तो आप मुझसे कहेंगे तो क्या होना चाहिए मैं तो कहूंगा प्रधानमंत्री राष्ट्रपति नहीं इस देश के 145 करोड़ लोग ईमानदार होने चाहिए।
(45:38) आप इतने सारे नेताओं से मिलते हैं। यह यह जो क्या आपको किसी में भी लगता है कि आप जब उस वक्त आप प्रणव मुखर्जी से मिले थे, कपिल सिबल से मिले थे। उन सब से मिले थे। अब आप मोदी जी से मिलते हैं, अमित शाह से मिलते हैं, योगी जी से मिलते हैं। इन सब से मिलते हैं। से मिलता हूं। मैं तो एक बात मिलने वाली बात छोड़ो आप। क्या सब अच्छा ये किसी व्यक्ति से या कोई आंदोलन से या किसी प्रेशर ग्रुप से आप पूछो कि भाई व्यक्ति तो हटाएंगे ना क्या विकल्प है हां क्या भाई मोदी जी कोई कहता है हम तो मोदी जी को हटाना चाहते हैं बीजेपी को हटाना चाहते हैं मान लीजिए कोई
(46:11) ऐसा बोल रहा है कि हम तो इस सरकार से को हटाना चाहते हैं वो व्हाट इज द सेकंड ऑप्शन आपके पास विकल्प क्या है आप बताइए आपके इसलिए मैं कह रहा हूं विकल्प यही है कि 145 करोड़ लोगों के अंदर ईमानदारी का भाव हो 145 करोड़ लोगों में मेहनत का भाव हो। एक राष्ट्रीय जो उत्तरदायित्व जिसको बोलते हैं वो पैदा करना पड़ेगा और क्वालिटी पॉपुलेशन लाना लाना पड़ेगा। और जो भी लोग कहीं पर भी हैं उनको किसी भी प्रकार से अनैतिक आचरण से असंवैधानिक लोकतांत्रिक आचरण से भ्रष्टाचार से किसी भी प्रकार के लूटखसोट से अपने आप को बचाना पड़ेगा। बाबा जी ये कोई एक व्यक्ति के केंद्रित बात नहीं
(46:52) है। आप अब व्यक्ति की बात संबंधों में अच्छा बताओ इसमें पति पत्नी के विश्वासों में कमी आई इसके लिए मोदी जी जिम्मेदार हैं। 2014 बाप और बच्चों के बीच में समाज में कमी आई इसके लिए मोदी जी जिम्मेदार हैं। पढ़े लिखे नशेड़ी गजेड़ी भगड़ी दारुड़े बच्चे तैयार हो रहे हैं। इसमें मोदी जी जिम्मेदार हैं। आपस में बच्चे जैन जी जो है वो कई प्रकार से दुराचार व्यभचार में फंस गए। एक दूसरे एक-एक लड़के के दो-दो तीन-तीन लड़कों के साथ एक-एक लड़के दो-दो तीन-तीन लड़कियों के साथ जो संबंध होंगे इसके लिए मोदी जी जिम्मेदार हैं। तो समाज को समग्रता से अपना उत्तरदायित्व समझना
(47:23) पड़ेगा। तो समा में भी सुधार की जरूरत है। समाज में भी सुधार की जरूरत है। और जो सबसे बड़ी बात है एक-एक व्यक्ति के चरित्र निर्माण की जरूरत है। एक एक व्यक्ति यदि ईमानदार होगा ना तब ये देश के अंदर पूरी सुचिता ईमानदारी की प्रतिष्ठा होगी। 2014 में आप जैसे थॉट लीडर सब ने यही कहा था कि अब सिस्टम इतना करप्ट हो चुका है। मोदी जी आएंगे तो सब कुछ सुधार देंगे। चाहे सुब्रमण्य स्वामी हो, चाहे आप हो, चाहे आरएसएस के सारे जो नेता हैं सारे के सारे सब ने कहा था कि मोदी जी आएंगे सब कुछ हो जाएगा। अच्छे दिन आ जाएंगे। अब 2014 से अब हो
(48:02) चुके हैं 12 साल। इसीलिए फ्रस्ट्रेशन है यूथ में कि वो तो जानते ही नहीं है ना मोदी जी के अलावा किसी को जानते ही नहीं है। एक ही व्यक्ति को जानते हैं क्योंकि वो तो प्री स्कूल में थे उस वक्त तब से प्रधानमंत्री एक ही है। तो इसीलिए वो मोदी जी से ही अपेक्षा रखते हैं। फ्रस्ट्रेशन से क्या हासिल हो जाएगा? मैं आपसे फ्रस्ट्रेशन अगर है तो उसको दूर करना है। सब में फ्रस्ट्रेशन नहीं है। जी जो बच्चे मैंने कहा अच्छे से पढ़ाई कर रहे हैं उनमें फ्रस्ट्रेशन नहीं है। हां एक बात का जरूर है सबको कि भाई ये जो हम बोर्ड के एग्जाम देते हैं यूनिवर्सिटी से
(48:38) डिग्रियां लेते हैं। इसके बाद में हमारे फ्यूचर का क्या ये फ्रस्ट्रेशन बहुत से लोगों में होता है और फिर जो है कई बार पेपर लीक हो जाते हैं। कई इंटरव्यू देने जाते हैं तो वहां पर भी सिफारिश लग जाती है। खास वर्ग विशेष के कई लोग लगा दिए जाते हैं। और इंटरव्यू के नाम पर मैं तो कहता हूं ये जो इंटरव्यू वाला मामला है ना ये 99% जो है इसमें फ्रॉड होता है। 99% अभी भी चाहे किसी की सरकार है। कोई राज्य सरकार है, कोई केंद्र सरकार में है। 99% फ्रॉड होता है। हां। क्यों? आदमी जरा सा ऊंचानीचा कर देता है और बोले भाई इतने लोग एलिजिबल हैं। अब
(49:10) इसमें से इतनों को निकालना है तो भाई उसमें या तो लाइकिंग डिसाइजिंग जाति वर्ग समुदाय के नाम पर हो जाती है या माल मसाले के आधार पर हो जाती है। तो ये कंप्यूटर के थ्रू होना चाहिए। आप क्या समझते हैं? यह यह तो अह यह यह चीज़ों में सुधार की ज़रूरत है। बाक़ी मैंने कहा देखो जो लोग अभी भी मेहनत कर रहे हैं ईमानदारी से जीवन को जी रहे हैं। चाहे वो किसान हैं, चाहे वो मजदूर हैं, चाहे वो व्यापारी है, हां अलग-अलग तरह से किसी भी तरह से किसी को सताया जाना नहीं चाहिए। सत्ता का मतलब सताना नहीं होता है। हम सत्ता जो है वो सत्य पर आधारित होनी
(49:44) चाहिए। न्याय पर आधारित होनी चाहिए। भगवान राम के बारे में क्या कहा है? श्रीमद हमारे वाल्मीकि रामायण में रामो विग्रहवान धर्म साधु सत्य पराक्रम राम धर्म के विग्रहवान स्वरूप है। उनके जीवन से उनके आचरण से धर्म अभिव्यक्त होता है। इसलिए मैं कह रहा था धर्म हमारा आचरण है। और वो उनके स्वभाव में साधुता है। सत्ता वालों में किसी के अंदर भी किसी भी प्रकार से कोई डेमोक्रेसी के नाम पर हिपोक्रेसी नहीं होनी चाहिए और अहंकार तो लेष मात्रा भी नहीं होना चाहिए। रावण को क्यों नहीं मानते लोग? कंस को क्यों बुरा मानते हैं? जरासंध को क्यों बुरा मानते हैं? हिटलर को
(50:22) क्यों बुरा मानते हैं? औरंगजेब को क्यों बुरा मानते हैं? उनके कर्मों से अहंकार आ गया था। सत्ता से का अहंकार नहीं आना चाहिए। और दूसरी बात सत्ता जो है वो सत्य पर आधारित होनी चाहिए। धर्म और न्याय पर आधारित होना चाहिए। लोगों की भलाई पर आधारित होनी चाहिए। रामो विग्रहवान धर्म साधु सत्य पराक्रम है। सत्य पराक्रम का सत्ता का पराक्रम नहीं है वहां। हम और इसलिए हमारे यहां सत्यमेव शासन का उद्घोष हमारा यतो धर्म सतोज तो यह धर्म चक्र परिवर्तन आए तो यह यह तत्व यही है। अब इसमें अब इसमें क्या है? जिसको हम लाइक करते हैं उसको कहते हैं ये
(50:59) तो बड़ा विनम्र है। जिसको डिसलाइक करते हैं ये तो बड़ा अह अहकारी है। ऐसा नहीं होना चाहिए। आदमी के टोटल एंटी में उसके कररेक्टर का हमें एनालिसिस करना चाहिए और उस व्यक्ति का कंट्रीब्यूशन भी देखना चाहिए। जहां और करेक्शन की कहां गुंजाइश नहीं रहती है। आप करेक्शन की आपके इतने फॉलोवरर्स हैं। आप आपके लाखों करोड़ों लोग आते हैं आपके पास। आप अहंकार को दूर कैसे रखते हैं अपने आप से? देखिए मैं अपने आप को कभी भी मालिक मानता ही नहीं। मैं तो अपने आप को सेवक मानता हूं। भगवान का सेवक। इसलिए हम भगवान के दासत्व में जीते हैं। शरणागति में जीते
(51:29) हैं। देश का सेवक और जो भी मेरे पास में आरोग्य के लिए आते हैं, हेल्थ के लिए, एजुकेशन के लिए आते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में हम तो क्योंकि 100 से ज्यादा क्षेत्रों में हम लोग काम करते हैं। हेल्थ में, एग्रीकल्चर में, इंडस्ट्री में, एग्रीकल्चर में, कररेक्टर बिल्डिंग से लेकर के, नेचर एनवायरमेंट से लेकर के गौ माता से लेकर के मानवता के हर हर लगभग आयाम को छूते हैं। समाज की एकता अखंडता संप्रभुता को देखना चाहते हैं। समाज में जो घालमेल हो रखा है। एक दूसरे से घृणा नफरत उसको दूर करना चाहते हैं। लोगों के आहार विचार वाणी व्यवहार स्वभाव में आचरण में
(52:03) दिव्यता लाना चाहते हैं। तो हम अपने आप को लेकिन एक मानते हैं कि हमारे पास जो भी ज्ञान है, सामर्थ्य है, योग्यता है सब भगवान की दी हुई है। हम अपने आप को भगवान का सेवक मानते हैं। देश का सेवक मानते हैं। लोगों का सेवक मानते हैं। और हमारे प्रधानमंत्री जी का भी थॉट प्रोसेस तो यही है। वो भी कहते हैं मैं देश का सेवक हूं। अब कुछ लोग उनको ट्रोल करते हैं वो अलग बात है। आपको भी ट्रोल करते हैं। जो आपके अपोज करते हैं वो कहते हैं कि आप 100 से ज्यादा अगर अधिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं तो आप गुरु कम और बिजनेसमैन ज्यादा हैं। अब देखो इस देश में ये दो चीजें बहुत बुरी
(52:37) हैं। कोई इस देश में काम करें, पुरुषार्थ करें, बिजनेस करे, व्यापार करे उसको हे दृष्टि से, घृणा की दृष्टि से देखते हैं। यही इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। अरे मैं आप कह रहे हो कि आप मैं काम कर रहा हूं। अब उसको व्यापार संज्ञा दो आप। ठीक है? उसका परिणाम क्या है? जो मैं पुरुषार्थ कर रहा हूं उससे अर्जित जो अर्थ है जिसको वो कह रहे हैं कि मैं व्यापार कर रहा हूं। हमने जो है बड़ी-बड़ी एमएसीज को की जड़े उखाड़ दी। उनको हमने जो उनकी औकात बता दी। तो उससे जो अर्थ आया अर्थ उसको हमने किस में लगाया? स्वामी रामदेव ने क्या अपने लिए
(53:10) हम ₹1 का भी प्रयोग किया। स्वामी रामदेव ने गुरुकुल बनाए, आचार्य कुल बनाए, यूनिवर्सिटी बनाई, भारतीय शिक्षा बोर्ड बनाया, स्वामी रामदेव ने लाखों लोगों को शिक्षा दी। करोड़ों लोगों को आरोग्य दिया। करोड़ों लोगों को निर्वेसनीय जीवन दिया। कररेक्टर बिल्डिंग किया। नेशनल बिल्डिंग का काम किया। अलग-अलग दिशाओं में से ये सारे काम बिना पैसे के तो होंगे नहीं। नंगा क्या नहेगा और क्या निचोड़ेगा? जो असमर्थ है वो अनर्थ तो कर सकता है। जो समर्थ है वो सेवा कर सकता है। तो यदि हमने जो है कारोबार बढ़ाया, साम्राज्य बढ़ाया तो साम्राज्य वो अर्थ जो है परमार्थ में
(53:47) लगा है ना। हमारे तो हमारा तो सीधा सिद्धांत है अर्थ परमार्थ के लिए है। प्रोस्पेरिटी फॉर चैरिटी देश बिना अर्थ के चलेगा क्या? तो इस देश में व्यापार को इस देश में कर्म को पुरुषार्थ को रेस्पेक्ट मिलना चाहिए। दूसरी बात लोग जो है मैं तो ये तो व्यापार और ये तो बहुत बड़ी चीज हो गई। दूसरा मेहनत को। अब मैं चुपचाप बैठा रहूं। हाथ पर हाथ धरे बैठे और आपने आंख मोदी बैठा रहूं तो ठीक है। यदि कटोरा लेकर के भीख मांगूं तो ठीक है। ऐसा तो नहीं होना चाहिए ना। इस देश में व्यापार को भी सम्मान मिलना चाहिए। इस देश में कर्म को पुरुषार्थ को सम्मान मिलना चाहिए। और इस
(54:22) देश में ईर्ष्या ये जो लोग जेलसी करते हैं ना अच्छा स्वामी रामदेव ने किसी का क्या बिगाड़ा है? स्मिता जी आप बताइए। मल्टीीनेशनल का तो बहुत बिगाड़ा। मैंने किसी व्यक्ति का किसी इंस्टीट्यूशन का किसी भी जाति वर्ग समुदाय का रत्ती भर भी बुरा किया हो तो बताओ। अब देश में अब यह मैं कहता हूं शिक्षा की गुलामी यह चिकित्सा की गुलामी आर्थिक गुलामी वैचारिक सांस्कृतिक गुलामी गुलामी कुंठाएं और देश में नशेड़ी गजेड़ी भंगेड़ी जो तैयार हो रहे हैं हमारी नई पीढ़ी में जो चारों तरफ पतन आ रहा है इससे तो देश को बचाना चाहिए तो बीमारियों से बुराइयों से मुक्त और
(54:56) भेदभाव से मुक्त समाज बनाने के लिए मैं बात करता हूं तो ये तो अच्छी बात है ना तो ऐसे सन्यासी तो और होने चाहिए स्वामी रामदेव जैसे तो हजारों क्या लाखों लोग होने चाहिए पतंजलि जैसा ब्रांड क्या पतंजलि जैसा व्यापार जो उपकार से प्रेरित है। लोगों के उपचार और उपकार से प्रेरित है। ऐसे तो पतंजलि जैसे हजार नहीं लाख ब्रांड होने चाहिए। ये तो अच्छी बात है। पर ब्रांड वॉर्स में आप ब्रांड वॉर्स में आपने रूह अफजा का नाम जिहाद से जोड़ दिया तो फिर तो वो तो उसमें क्या गलत बोला? जो हिमालय के पास पैसा आता है, जो हमदर्द के पास पैसा आता है, यदि वो इस्लाम में
(55:30) लगाते हैं, तो वो उनका अधिकार है। हम्म। फिर आपने जिहाद के साथ। अरे मैं क्या कह रहा हूं। वो उनका भाई वो इस्लाम को फॉलो करते हैं और अपने पैसे से वो यदि मदरसे में पैसा लगाते हैं तो मस्जिद में पैसा लगाते हैं तो क्या गलत कर रहे हैं अपने मजहब के आसार से ठीक कर रहे हैं व मैं उसी पैसे को गुरुकुल में लगा रहा हूं गौशाला में लगा रहा हूं विश्वविद्यालय में लगा रहा हूं उसको सनातन धर्म के जो मूल मूल मूल्य है मूल अधिष्ठान है उनको प्रतिष्ठापित करने में लगा रहा हूं तो दो थॉट प्रोसेस अलग हो सकते है ना एक देश में इसमें क्या है ये तो ये हमारा संवैधानिक
(56:01) और लोकतांत्रिक अधिकार है कर्तव्य है क्या दिक्कत है इसमें कोई दिक्कत नहीं आपका कितना वक्त साधना और योग में लगता है और कितना वक्त व्यापार को बढ़ाने में लगता है? मैं सुबह 3:00 बजे उठता हूं। 3:00 से 4:30 बजे तक वैयक्तिक साधना करता हूं। शिव उपासना करता हूं। परबह्म को भी शिव के रूप में मानता हूं। और इस सारी सृष्टि को शिव का साक्षात विग्रह मान स्वरूप मान करके मैं भगवान को केवल अदृश्य एक चेतना नहीं मानता। ओम सर्वम खरो इदम ब्रह्म वासुदेव सर्वम सियाराम सब जग जानी मैं सबके भीतर शिवत्व का दर्शन करता हूं तो मैं फिर 4:30 बजे से
(56:38) रनिंग करता हूं फिर पौने बजे 5:00 बजे नहीं से 5 मिनट पहले तक आ जाता हूं मैं आस्था चैनल पर लाइव होता हूं फिर उसके बाद एक इंडिया टीवी उसके ऊपर लाइव रहता हूं फिर Facebook लाइव रहता हूं मैं करीब 5:00 बजे से लेकर के 10:00 बजे तो 5 घंटे तक तो योग हेल्थ अवेयरनेस लोगों की बीमारियां और अलग-अलग प्रकार के सामाजिक आर्थिक राजनीतिक जो भी करंट इश्यूज होते हैं उसके बारे में बात करता हूं तो इसको को सही डायरेक्शन मिले। इसके लिए काम करता हूं। 5 से 10 फिर 10:00 बजे से लेकर के रात को 10:00 बजे तक मैं कर्म योग करता हूं। हेल्थ में, एजुकेशन में, एग्रीकल्चर में,
(57:07) इंडस्ट्री में अलग-अलग प्रकार से जो मैंने कहा ना शताधिक जो देश की सेवाओं का कार्य चल चल रहा है पतंजलि से उसमें अपना समय लगाता हूं। ये मेरी 365 दिन की दिनचर्या है। हम और कोई भी देख सकता है। ये ओपन है। खुली किताब है। पतंजलि के जो प्रोडक्ट प्रोडक्ट्स हैं क्या वो 100% स्वदेशी हैं? पतंजलि के प्रोडक्ट 100% स्वदेशी हैं। उनमें 100% प्रामाणिकता है, पवित्रता है, रिसर्च है। 5 लाख लोग उसके पीछे पुरुषार्थ करते हैं, मेहनत करते हैं और करीब 1 करोड़ से ज्यादा हमारे निस्वार्थ भाव से कार्यकर्ता उसमें मेहनत करते हैं। 5000 के करीब हमारे
(57:40) डॉक्टर और साइंटिस्ट उसके पीछे रिसर्च करते हैं। 10,000 से ज्यादा रिसर्च प्रोटोकॉल फॉलो करके हमने 500 से ज्यादा बड़े रिसर्च पेज पर तो इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश कराए। जो काम आज तक हमदर्द ने नहीं किया। डाबर हिमालय ने नहीं किया। डाबर ने झंडू ने वैद्यनाथ ने नहीं किया। प्रधानमंत्री जी जब पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन के उद्घाटन पे गए थे तो उन्होंने कहा था कि आयुर्वेद को लोग जो है फ़ूड सप्लीमेंट के तौर पर देखते हैं। तो हमने सेलेंट ट्रायल, एनिमल ट्रायल, ह्यूमन ट्रायल करके ड्रग डिस्कवरी का इतना बड़ा काम किया कि आज हमने लिवर फेलियर, किडनी
(58:10) फेलियर, डायबिटीज, बीपी, शुगर, थायराइड यहां तक कि कैंसर को रिवर्स करने के लिए औषधियां बना दी। पूरा रिसर्च का डाटा है। हम अब उसके ऊपर भी कोई विवाद करें कि यहां तो ड्रग एंड मैजिकल, रेमेडी एक्ट ऐसा बना दिया। अंग्रेजों ने बेहूदा बना करके चले गए कि आयुर्वेद को खत्म करने के लिए कि एलोपैथी में तो बीमारियों का कंट्रोल हो सकता है। आयुर्वेद में भी कंट्रोल ही कर सकते हैं। क्योर नहीं हो सकता? तो यदि आयुर्वेद में इन बीमारियों का क्योर है और हमने करके दिखा दिया। मैंने तो सुप्रीम कोर्ट में भी यही बोला था कि आप हमारी बात तो सुन लो। बोले नहीं आप एक्ट चेंज कराओ
(58:37) पहले तब आपकी बात सुनेंगे। और आपको अपोलॉजी करना पड़ा फिर। अपोलॉजी तो जबरदस्ती की है। आज भी बोल रहा हूं। अरे मैं आदमी को इस संविधान में मैं बोलने की आजादी अभिव्यक्ति की आजादी और जो भी सत्य कहने की आजादी नहीं है क्या तो मैंने कहा मैं भी सत्य बोल रहा हूं और मैं उसका पार्टी नहीं हूं जिस कंपनी पर आपने केस किया उस पतंजलि आयुर्वेद में ना कोई शेयरहोल्डर हूं मैं ना उसमें कोई मेरे पास में मैं उसमें सीएमडी नहीं हूं उसमें चेयरमैन नहीं हूं मैं क्या हूं वहां पर आपका नाम ही तो जुड़ता अरे भाई नाम जुड़ने से थोड़ी हो जाता देश तो संविधान से चलता है ना मैंने कोई
(59:12) सुप्रीम कोर्ट में भी इस बात को और आज भी कह रहा हूं वापस कि देश परसेप्शन से नहीं चलता। देश चलता है संविधान से, कानून से तो लॉ के अकॉर्डिंग मैं मेरे को कोई इसमें विषय नहीं बनता था। आपने कहा देखो इसलिए मैं कह रहा हूं सब जगह संशोधन की जरूरत है। और यदि मैं इस तरह के इश्यूज के ऊपर खड़ा हो जाऊं तो फिर मेरे काम बाधित हो जाएंगे। वहां जगह आग लगती है सीने के अंदर जब गलत होता है। हमारे साथ भी गलत हुआ है। आप इसको जस्टिफाई नहीं कर सकते कि स्वामी रामदेव को अपमानित किया तो ठीक किया। और आप यदि किसी को ऐसा लगता है और आपको ऐसा
(59:45) लगता है कि स्वामी रामदेव को मुझे अपमानित कर लो लेकिन आप सत्य को अपमानित नहीं कर सकते ना तो सत्य उसमें क्या था क्या सत्य मैंने बताया ना आपको डायबिटीज को मैं बोल रहा हूं फिर वापस बोल रहा हूं हमारे पास जो औषधियां है फैटी लिवर लिवर सिसिस हेपेटाइटिस को रिवर्स करने के लिए आयुर्वेद में हमारे पास औषधियां हम कर रहे हैं अभी भी कर रहे हैं क्या 100% रिवर्सल कैसे हो सकता है क्यों नहीं हो सकता आपको ज्ञान नहीं है तो आप अपने अज्ञान को ठीक करो आप मैं कह रहा हूं टाइप वन डायबिटीज टाइप वन, टाइप टू, टाइप थ्री डायबिटीज और डायबिटीज के
(1:00:15) कॉम्प्लिकेशंस को रिवर्स किया जा सकता है। लीवर प्रॉब्लम होने के बाद उसको रिवर्स किया जा सकता है। हमारे पास तो 5 करोड़ से ज्यादा एविडेंस है। मैंने कहा वी हैव साइंटिफिक एविडेंसेस। वी हैव रियल वर्ल्ड एविडेंसेस। हमारे पास एविडेंस है ना आप लो तो सही। देखो तो सही। मैंने तो सुप्रीम कोर्ट में भी बोला। वो तो दिखाते नहीं आप लोग। तो मैं आज आपसे फिर वापस कह रहा हूं। जी। लीवर की प्रॉब्लम, किडनी की प्रॉब्लम, डायबिटीज की प्रॉब्लम, ब्लड प्रेशर। अब यदि आपको बीपी है तो मैं आपको मुक्तावटी देता हूं। आज अभी लो और एल एलोपैथी की जो टेलमा आदि और दूसरी शुगर के लिए जो
(1:00:48) एलोपैथी के अंदर मेफोर्मी और इंसुलिन आदि उससे ज्यादा प्रभावी औषधियां ना हो तो बताओ आप और फिर वो सिम्टोमेटिक होते हैं। हमारे पास सिस्टम है। कुछ दिन लगातार लेते हैं तो बीमारी खत्म हो जाती है। कितने मूर्खतापूर्ण बात है कि कोई आदमी किसी कारण से उसको कोई प्रॉब्लम हो जाए। बोले तो रिवर्स ही नहीं होगी जिंदगी भर। किसी कारण से कोई आदमी गरीब रह जाए। किसी आदमी से कोई आदमी को कोई चोटिल हो जाए। किसी आदमी किसी कारण से कोई आदमी को कोई भी प्रॉब्लम हो जाए। बोले यह रिवर्सबल ही नहीं है। जिंदगी भर दबाव खाओ। यह तो मैं कहता हूं इसीलिए तो यह ड्रग माफिया है। यह
(1:01:15) अब इन्होंने शब्द प्रयोग कर दिया। ड्रग माफिया मेडिकल माफिया उनको सपोर्ट करने वाले पॉलिटिक माफिया उनको सपोर्ट करने वाले इंटेलेक्चुअल माफिया उनको सपोर्ट करने वाले कुछ रिलीजियस माफिया वो सब हमारे पीछे पड़ जाते हैं। आपने कोरोना के टाइम वो कोरोना तो करोड़ों लोगों की जान बचाई और उसके ऊपर 30 से ज्यादा रिसर्च पर अभी भी है। आपके पास प्रमाण है। प्रमाण है ना? कोई देखना ही नहीं चाहे और खाली प्रश्न पूछता रहे। तो ये ये ये इलॉजिकल है। ये एक ईर्ष्यापूर्ण है। ये द्वेषपूर्ण है। तो दरअसल लोगों को ये हजम नहीं हो रहा कि एक सन्यासी इतना साइंटिफिक रिसर्च कैसे कर
(1:01:45) सकता है। एक सन्यासी वो कैसे कर सकता है जो डब्ल्यूho नहीं कर पाया। मॉडर्न मेडिकल साइंस नहीं कर पाया। बड़ी-बड़ी सरकारें नहीं कर पाई। किया है ना हमने? तो ये गौरव होना चाहिए इससे। तो आपसे ये सोचते हैं कि कंस्परेसी है। डब्ल्यूसी क्यों नहीं है? मल्टीीनेशनल अरे भाई देखो मैं जो काम कर रहा हूं। मैं तो कहता हूं आपको ये इंटरव्यू ना हरिद्वार में आकर के करना चाहिए था। पहले एक बार पता घूमो स्मिता जी आकर के। आप तो एक बहुत संवेदनशील बहन हो। आपका कोई एजेंडा नहीं है। स्वामी रामदेव को नीचा दिखाना, योग आयुर्वेद को नीचा दिखाना या किसी कोई गाली
(1:02:10) गलौज करना। आप एक बार आकर करके देखो। जितना बड़ा रिसर्च पतंजलि में हो रहा है। आप खुद कहोगे अरे मैं तो सारे बड़े-बड़े फार्मा कंपनियों के सन फार्मा से लेकर के आधार पोना वाला जो वर्ल्ड में सबसे ज्यादा हर दूसरा आदमी जिसको पोलियो के वैक्सीन लगाता है। मैंने सबके सामने जब डाटा रखे सब कहते हैं ये काम तो किसी को पता ही नहीं है। तो हमने रिवर्स किया है लिवर प्रॉब्लम को, किडनी प्रॉब्लम को, बीपी को, शुगर को, थायराइड को, अस्थमा को, अर्थराइटिस को, सोरायसिस को। हमने रिवर्स कैंसर तक को किया है। कैंसर में भी जो मल्टीपल कैंसर्स तक को
(1:02:41) और सारे डाटा है, रिसर्च है। ऐसे मुंह जबानी हिसाब किताब नहीं है। हम बयान बयानबाजी पर नहीं चलते हैं। और स्वामी रामदेव ने चलो ये तो राजनीतिक मुद्दे तो अलग होते हैं। स्वामी रामदेव ने हेल्थ के बारे में, एजुकेशन के बारे में, धर्म अध्यात्म के बारे में, जीवन के मूल्य आदर्शों के सिद्धांतों के बारे में जो भी कुछ बोला एक भी कोई बात गलत बोली हो, कोई जातिगत उन्माद फैलाया हो, किसी तरह से कोई ढोंग आडंबर पाखंड फैलाया हो, शनि केतु, राहु, भूत, प्रेत के नाम पर लोगों को डराया हो। हां। क्या किया है बताओ? मैंने हमेशा चाहे टेंपरामेंट के साथ अपने
(1:03:12) कर्तव्य, अपने उत्तरदायित्व का पालन किया। बल्कि अपने अधिकारों का तो कहीं उपयोग ही नहीं किया। कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर उन्होंने कहा हुआ है कि अब आयुर्वेद के जो डॉक्टर्स हैं वो सर्जरी कर सकते हैं। वो एलोपैथी ड्रग्स भी दे सकते हैं। तो ऐसे क्यों है कि कुछ राज्यों में सही मैंने कहा ना कि ये ये अब हेल्थ और एजुकेशन सिस्टम में अमूल पूल परिवर्तन की जरूरत है। एजुकेशन में तो जो भारतीय शिक्षा बोर्ड में हुआ है और आगे जो मैंने कहा ना कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स हैं जो रेगुलर एग्जाम्स हैं डिग्रियां उनमें सब में एक बहुत बड़े सुधार की जरूरत है। से
(1:03:40) एजुकेशन हेल्थ में जो भी एमबीबीएस एमडी बनता है ना उनको कम से कम एक साल तक योग आयुर्वेद नेचुरोपैथी और हमारी जो परंपरागत ट्रेडिशनल एजुकेशन चाइना में पढ़ाते हैं ना यहां क्यों नहीं पढ़ाना चाहिए तो वो क्यों निंदा करते हैं क्योंकि उन्होंने पढ़ा ही नहीं है पर अगर आयुर्वेदिक डॉक्टर एलोपैथिक ड्रग्स देना चाहता है तो वो एमबीबीएस करें ना बीएएमएस करने की क्या जरूरत है आप बहन बात तो सुनो ना आयुर्वेद के डॉक्टर को आयुर्वेद के ही ड्रग देने चाहिए इमरजेंसी में भी वो कोई देता है तो वो गवर्नमेंट ने अलऊ कर रखा है उसको हां पर क्यों अरे सुनो तो सही इमरजेंसी में मान लीजिए
(1:04:11) किसी ने 99% लोग तो आयुर्वेद से ठीक ही हो जाते हैं। हम तो सर्दी, जुकाम, बुखार, उल्टी, दस्त, बीपी, शुगर, थायराइड, कोलेस्ट्रॉल, लिवर, किडनी प्रॉब्लम, कैंसर तक को ठीक करें और क्या चाहिए आपको और होते हैं तो करना ही चाहिए। अब मान लीजिए किसी ने कभी कोई पैरासिटामोलिया, या क्रोसिन आदि कोई दवाई दे दी हैं। कोई आयुर्वेद का जो है जो डॉक्टर है वो कोई ब्रेन की सर्जरी तो कर नहीं रहा। कोई हार्ट की सर्जरी तो कर नहीं रहा। कोई नीड ट्रांसप्लांट तो कर नहीं रहा है। और उसको सर्जन बनना है तो सर्जन तो कोई भी बन सकता है। आयुर्वेद का भी डॉक्टर सर्जरी बिल्कुल
(1:04:40) अलग, मेडिसिन बिल्कुल अलग सब्जेक्ट है। तो जैसे आयुर्वेद के डॉक्टर को नो सामान्य ज्ञान एक जो है एलोपैथी का होता है। मॉडर्न मेडिकल साइंस का होता है। मैं भी मुझे भी तो ज्ञान है ना। मैं तो मॉडर्न मेडिकल साइंस में कोई एमबीबीएस एमडी नहीं हूं। लेकिन एमबीबीएस एमडी डॉक्टर को बैठा हूं। मैं 99% उसके हर क्वेश्चन का आंसर दे सकता हूं। ये कैपेबिलिटी है मेरे अंदर। तो ऐसे एलोपैथी के डॉक्टर को भी एमबीबीएस एमडी बनने वाले को एक साल उसको यदि बेसिक नॉलेज इसको योग आयुर्वेद का दिया जाता है और वो बेसिक मेडिसिन आयुर्वेद की यूज़ करना चाहता
(1:05:12) है तो इसी को तो इंटीग्रेटेड मेडिसिन सिस्टम बोलते हैं। ये मानवता की भलाई के लिए है ना ये खेमा में क्यों बांटते हो? जैसे जातियों के नाम पर विभाजन खतरनाक है। चिकित्सा पद्धतियों के नाम पर भी विभाजन मानवता के लिए खतरनाक है। रोगियों के लिए खतरनाक है। सिंपैथी होनी चाहिए। एलोपैथी बड़ी नहीं होनी चाहिए। सिंपैथी बड़ी होनी चाहिए। पर हर जो सिस्टम है होम्योपैथी हो, आयुर्वेदिक हो या फिर एलोपैथी हो उनकी प्रधान चिकित्सा एक होनी चाहिए। स्मिता जी देखो ये ये इलॉजिकल बात है। ये ये एक ये एक एकेडमिक बात है। ये अल्टरनेट ये इंटरव्यू की बात नहीं है।
(1:05:48) प्रधान चिकित्सा एक की एक होगी। एलोपैथी होगी, होम्योपैथी होगी, नेचुरोपैथी होगी, योग आयुर्वेद आदि होगा, जो भी होगा लेकिन इंटीग्रेशन भी होना चाहिए। तो इंटीग्रेटेड नॉलेज और इंटीग्रेटेड प्रैक्टिस दिस इज गुड फॉर ए ह्यूमन बीइंग। तो फिर इसको रीडू करना चाहिए पूरा। पूरे सिस्टम में एक अमूलचूल यही तो मैं शुरू से कह रहा हूं आपके पूरे इंटरव्यू में एक देश में समग्र परिवर्तन की आवश्यकता है। हेल्थ में, एजुकेशन में, नेचर एंड एनवायरमेंट में, एग्रीकल्चर में, इंडस्ट्री में, एक पूरे आर्थिक क्षेत्र में सब जगह मीडिया में भी परिवर्तन की
(1:06:19) जरूरत है। आप बताइए मीडिया में क्या मीडिया में जो है कोई कहता है ये गोदी मीडिया है। कोई कहता है ये स्वतंत्र मीडिया है। कोई कहता है ये मीडिया है। ये कोई कहता है फलाना मीडिया है। सब एक दूसरे को गाली तो हर मीडिया में है। आप सोशल मीडिया में भी है। रोज इसलिए तो मैं तो इंटीग्रेशन में विश्वास रखता हूं। आस्था पे भी है। हर हर चैनल में आस्था पर मैं धार्मिक चैनल पर भी हूं। मैं न्यूज़ चैनल पर भी हूं। एंटरटेनमेंट चैनल पर बज जाता हूं। तो सबसे ज्यादा टीआरपी लेकर के आता हूं। तो मैं तो समग्रता में विश्वास रखता हूं। देखो हर आदमी को सबसे बड़ी चीज
(1:06:52) देखो यह सब एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश है कि हम तो स्वतंत्र मीडिया बाकी गोदी मीडिया हो गया हम और उनके कर्म देखो उनके आचरण देखो और उनकी फंडिंग देखो पीछे की तो सारी पोल पट्टी खुल जाएगी ऐसे किसी को कुछ भी कह देने से कुछ नहीं होता देखो ये मैंने कहा ना एक दूसरे के प्रति कटाक्ष करना एक दूसरे से जेलसी एक दूसरे को नीचा दिखाना एक दूसरे से अपने आप को महान बताना ये कि भाई राहुल गांधी महान है कि नरेंद्र मोदी महान है। दोनों में इंटरेस्ट नहीं होना चाहिए। भारत महान है। इसमें इंटरेस्ट होना चाहिए। हम अब तो राहुल गांधी योगा करने लग गए
(1:07:28) हैं। उन्होंने कहा अभी-अभी सीखने लग गए हैं। अच्छी बात है ना। सबको करना चाहिए योग तो। आपके पास आए हैं कभी? मिले हैं आप उनसे। क्यों नहीं मिले? हम तो सबसे मिले। लगभग भारत में लगभग लगभग 99% पॉलिटिशियन से मैं मिला हूं। क्या बातें हुई आपकी राहुल गांधी से? ठीक है। पुरानी योगा की बात है। पुरानी बात होगी। 10 साल 12 13 14 साल पुरानी बात होगी। राहुल गांधी जी हैं। बहुत बड़ी अच्छी बात सोनिया जी से भी मिले। प्रियंका जी से भी मिला, मनमोहन सिंह जी से भी मिला। सब मिनिस्टर कौन किससे नहीं मिला मैं? अब पिछली बातें क्यों खोद खोद के पूछ रहे हो
(1:07:58) आप? लेकिन उन्होंने बड़ी उत्सुकता से मेरे से पूछा। भारत और भारत में जो सनातन धर्म क्या है? धर्म की अवधारणा क्या है? सनातन धर्म में और ये जो पूरा जो उस समय हमारे आर्थिक मुद्दे थे तो इकोनॉमिक्स के बारे में आर्थिक प्रश्न भी पूछे धार्मिक प्रश्न भी पूछे तो भारत के बारे में समझ के बारे में उन्होंने कुछ जीजा ऐसे मेरे सामने रखी पर ज्यादातर जब ये नेता या अभिनेता लोग आपसे मिलने आते हैं तो धर्म के बारे में पूछते हैं या योगा के बारे में फिटनेस के बारे में सभी तरह के अपनी जो से लोग धर्म के बारे में पूछते हैं अर्थ के बारे में भी पूछते हैं तो यदि कोई अपने
(1:08:34) जो है कॉर्पोरेट सक्सेस के बारे बारे में पूछता है। स्टार्टअप्स के बारे में पूछता है। कोई हमसे धर्म के बारे में पूछता है। योग के बारे में पूछता है। हेल्थ के बारे में पूछता है। बिनेस टिप्स मांगते हैं आपसे। क्यों नहीं मांगते? पर क्यों? बिनेस टिप्स क्यों मांगते हैं आपसे? जब पतंजलि एक सक्सेसफुल ब्रांड है तो वो पूछते हैं कि इसकी सक्सेस के पीछे मंत्र क्या है? तो हम उनको बोलते हैं। मेरा टूथपेस्ट नहीं विक्रम। मैं आपसे आपके जैसे अपना टूथपेस्ट क्यों? क्यों आप उनको बताएंगे? नहीं हम तो सबको बताते हैं। हम कहते हैं सब बढ़ो। हां।
(1:09:02) मोदी जी कहते हैं ना सबका साथ, सबका विकास। हां सबका प्रयास, सबका पुरुषार्थ और सब में एकत्व का भाव। मैं तो तो जब आपके पास आते हैं और ज्यादातर लोग समझेंगे इनके पास धन संपत्ति इतनी है। इनको क्या दिक्कत है? लेकिन आते होंगे लोग आपके पास बताने के पूछने के लिए कि देखिए मेरे पास गरीब भी आता है। स्वामी रामदेव एक वर्ग का गुरु नहीं है। देखो थोड़ा अपने बारे में आत्मशलाघा की श्रेणी में आ जाता। अमान्यता की श्रेणी में आ जाता है। इसलिए मैं इसके ज्यादा बोलता नहीं हूं। ज्यादातर गुरु एक जाति विशेष को टारगेट करके अपना दबदबा अपना रुतबा उसको बना के रखते हैं।
(1:09:42) और कई जगहों पर तो जाति के आधार पर ही उनके पद भी निर्धारित होते हैं। मैं इससे ज्यादा बोलूंगा नहीं। ठीक है? स्वामी रामदेव किसी जाति को रिप्रेजेंट नहीं करता है। किसी वर्ग विशेष को रिप्रेजेंट नहीं करता है। कुछ यह अमीरों के गुरु भी हैं। यह इंग्लिश स्पीकिंग वालों के गुरु हैं। ये इनके इस भाषा वालों के गुरु उस भाषा वालों के गुरु हैं। मैं ना अमीरों का गुरु हूं। ना मैं गरीबों का गुरु हूं। ना केवल मिडिल क्लास का गुरु हूं। मेरे पास गरीब भी आता है। मेरे पास मिडिल क्लास भी आता है। मेरे पास अपना मिडिल क्लास भी आता है। मेरे पास इंग्लिश स्पीकिंग भी आते हैं।
(1:10:12) मेरे पास गुजराती स्पीकिंग भी आते हैं। सब भारत की भाषाएं हैं। और करीब 10 भाषाएं मैं खुद भी बोलता हूं। तो मैं यह यह जो मैंने कहा ना जो विभाजन वाला भेद वाली दृष्टि है ना मैं उसको नहीं जीता। स्वामी रामदेव के संस्थान में सब जाति वर्ग समुदाय के लोग काम करते हैं। स्वामी रामदेव के इंस्टीट्यूशन से लेकर के ऑर्गेनाइजेशन में 600 जिलों में 5000 तहसीलों में 3 लाख से ज्यादा गांव में हमारा ऑर्गेनाइजेशन है। सब जाति वर्ग समुदाय के लोग हमारे पास में रहते हैं। और आपने एक बार भी नहीं सुना होगा कि मैंने कहा कि ये जाति वाले महान है। मैं कहता
(1:10:43) हूं हम सभी महान हैं। सभी एक समान है। सब एक ईश्वर की संतान है। एक भारत माता एक धरती माता की संतान है। ये मैं कहता हूं और इसको जीता हूं। आपका आपका जन्म एक किसान परिवार में हुआ। आपका नाम रामकृष्ण यादव था। आपने भी यादव को बोल दिया ना यही खुराफात मैं आपके दिमागों की खत्म करना चाहता हूं। इसीलिए मैं मैं साधु होने के बाद आपने जाति सूचक शब्द क्यों बोला? मुझे इससे आपत्ति है। क्यों आपको बुरा इस रूप में है कि साधु होने के बाद जाति खत्म। और एक कुल में पैदा हुआ हूं। इसलिए मैं आप मुझे बताइए कि कब आपको लगा कि मैं इसी के बंधन में बात करता हूं।
(1:11:18) मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता के बारे में। जाति के बारे में मैं इसलिए कह रहा हूं कि ये जानबूझकर के आप लोग छेड़ते हो कि जो है राम कृष्ण यादव अरे मैं जब सन्यासी हूं तो मैं मेरे सन्यास के बारे में बात कर रहा हूं ना आपको सन्यास का दूसरा जन्म हो जाता है। सन्यास के बाद में पूरा जन्म खत्म। ये सन्यास की मर्यादा है। पर मैंने यह सवाल योगी आदित्यनाथ से पूछा। मैंने यही सवाल मोदी जी से भी पूछा है। मैं यही सवाल देखो वो वो वो राजनीति में वो राजनीति में मैं सन्यासी में हूं। मैं ना एमएलए हूं, ना एमपी हूं, ना सीएम हूं, ना पीएम हूं, ना बनना चाहता हूं। मैं
(1:11:51) सन्यास को जीता हूं। तो यदुवंश बहुत गौरवशाली वंश है। भगवान कृष्ण का वंश है। अब जो लोग जाति के नारे लगाते हैं, मैं उसके मैं मुझे किसी जाति से कोई ना नफरत है ना किसी जाति से गौरव है। मैं कहता हूं सब जाति एक समान है। सब जाति वर्ग समुदाय बाद में कर्म के आधार पर आजीविका के आधार पर बने। इसलिए अब लोग कहते हैं ब्राह्मण सबसे श्रेष्ठ होता है। लेकिन पूछते किसको हैं? भगवान रामकृष्ण को। वो क्या है? क्षत्रिय है तो ये ये श्रेष्ठता किस कहां रहेगी फिर इसी जाति वर्ग समुदाय का यह व्यक्ति ऐसा हो सकता है वैसा हो सकता है तो मैं इसलिए
(1:12:21) इस कहता हूं मैं जातीय व्यवस्था के खिलाफ व्यक्ति हूं मैं कहता हूं कोई भी आजीका कोई भी कर सकता है कोई भी कथाकार हो सकता है कोई भी नेता हो सकता है कोई भी वैज्ञानिक हो सकता है। कोई भी मीडिया मैन हो सकता है। कोई भी साधु हो सकता है। कोई भी रिसर्च कर सकता है। कोई भी बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर सकता है। आजीविका का भेद कहां रह गया? उसमें जाति कहां आ गई? कोई जातिपात नहीं होना चाहिए। तो जाति वर्ग समुदायों के नाम पर जो भेदभाव और एक जो आग्रह बुद्धि है ना यादव ऐसे होते हैं, अहीर ऐसे होते हैं, जाट ऐसे होते हैं, गुर्जर ऐसे होते हैं।
(1:12:51) मैं सो कहावत बोलते हैं लोग ब्राह्मण ऐसे होता है। उस ब्राह्मणों में भी ये ब्राह्मण ऐसे होते हैं। वो ब्राह्मण ऐसे होते हैं। कुछ लोग बकवास करते रहते हैं। मैं कहता हूं सब जाति वर्ग समुदाय सब बराबर हैं। हमारी राजनीति तो पूरी उसी में लगी हुई है। लेकिन ये गड़बड़ है ना। स्वामी रामदेव ये नहीं करता। और मैं इसको नहीं जीता। और इसमें इससे मुझे नफरत है इस बात से कि कुछ लोग बोलने में कहते हैं कि जाति मुक्त भारत बनना चाहिए लेकिन खुद जातिवाद को जीते हैं जब थोड़ा सा मंच से अलग होते हैं। जरा जब कोई बड़ा निर्णय करना होता है ना जब उनको पॉलिटिक्स में कोई अपने
(1:13:24) इंस्टीट्यूशन में अपने राजनीतिक पार्टी में या अपने वैयक्तिक जीवन में अपने आर्थिक जीवन में सामाजिक जीवन में बड़े निर्णय लेने होते हैं। अरे तू तो हमारी जाति का है। तू तो हमारी बिरादरी आपसे आके कहते हैं। मैं कह रहा हूं समाज में ऐसा होता है। मैं इस बात को फॉलो नहीं करता। मैंने तो अपने मेरे पास करीब 200 सन्यासी हैं। सब जाति वर्ग समुदाय के सन्यासी हैं मेरे पास। हम जो सनातन पर ये कलंक लगाते हैं कि जातिवादी हैं ये लोग। स्वामी रामदेव ने 200 सन्यासी बनाए। सब जाति वर्ग समुदाय के बनाए। स्वामी रामदेव ने अपने इंस्टिट्यूशन में अपने ट्रस्ट में सब जाति वर्ग समुदाय
(1:13:55) के बच्चे रखे हैं। स्वामी रामदेव के जो सब कार्य ये बहुत बड़ी बात होती है। आदमी जब अपना किसी को उत्तराधिकारी बनाता है उस समय अपनी जाति का देख लेता है। जब किसी बड़े ओदे पर बैठाना होता है किसी ऑर्गेनाइजेशन में कहीं पॉलिटिक्स में किसी अपने संगठन में तब अपने जाति वाले को बैठा देता है। फिर कहता है हमारे लिए सब जातियों के द्वार खुले हुए हैं। तो आप बड़े निर्णय करते हो तब आप जो है अपने जाति वर्ग समुदाय के लोगों को देख लेते हो। हम और बाकी आप कहते हो जाति मुक्त भारत बनना चाहिए। मैं इस पाखंड में विश्वास नहीं रखता। भीतर से होना चाहिए आपके भीतर कि सब
(1:14:27) मेरे नारायण के स्वरूप है। सब एक ब्रह्म के अंश हैं। वासुदेवा सर्वम ओम सर्वम खरो इदम ब्रह्मा सब सीताराम के स्वरूप है। लक्ष्मी रानी के स्वरूप है। सब शिव शक्ति के स्वरूप है। मैं इस बात को मानता हूं जीता और अंतिम श्वास तक जिऊंगा। और आज मैं कह रहा हूं स्मिता बहना थोड़ा मैं वो तो प्रवाह में मैंने थोड़ा आपको कुछ ऊंचाचा बोल दिया हूं। क्षमा करना। स्वामी रामदेव अंतिम स्वास तक इस बात के लिए लड़ेगा और भारत को जाति मुक्त बना करके छोड़ेगा। इस देश के लोग करोड़ों लोग मुझे मानते हैं और मैं सबसे कहता हूं बार-बार जाति वर्ग समुदायों के
(1:15:00) नाम पर घृणा नफरत मत करो। यूपीएससी एग्जाम को लेकर आपके यहां ट्रेनिंग भी होती है। आप वो भी इसलिए कर रहे हैं। उसमें भी मैं पूछना चाहती हूं रिजर्वेशन को लेकर आपके क्या विचार हैं? तो देखो मैं कह रहा हूं प्रशासनिक नेतृत्व हो, राजनीतिक नेतृत्व हो, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका हो या हेल्थ हो, एग्रीकल्चर हो, इंडस्ट्री हो, कहीं बिजनेस हो सब जगह सब जाति वर्ग समुदायों के लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। और कुछ जाति वर्ग समुदाय ऐसे रहे कई ऐसे बीच में कारण बने 100 200, 500 सालों में कि कुछ जाति वर्ग समुदायों के लोगों के
(1:15:32) साथ अन्याय हुआ, भेदभाव हुआ तो वो पहले नहीं होना चाहिए था। हो गया। अब तो उन लोगों को कहीं रिजर्वेशन मिल रहा है तो मैं उसका विरोध नहीं करता हूं। हम अर्थात कुछ मामलों में तो उनको आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए ना। कुछ लोगों का ही आधिपत्य या वर्चस्व नहीं रहना चाहिए। और पर वो जो इंटरव्यू के दौरान जो है वो कुछ कहते हैं कि वहां पर हो जाता है। हां वो तो मैं बोला आपने भी कहा मैं कह रहा हूं ना आज भी कह रहा हूं। यह गलत है और उसमें देखो यह चीजें तो पतंजलि सीवरेज सर्विज एकेडमी पतंजलि कैरियर एकडमी आज फ्रस्ट्रेशन है। हमारे यहां नीट और जेई
(1:16:05) की तैयारी करने वाली 60% 50 से 60% हमारा सक्सेस रिजल्ट है। बच्चे क्लियर कर लेते हैं। और उसमें कोई कास्ट फैक्टर नहीं है। कोई कास्ट फैक्टर नहीं है। हम अब सिविल सर्विज में भी ऐसा ही हाल है। हमारे यहां मुसलमान बच्चे भी कर रहे हैं। हमारे यहां ब्राह्मण बच्चे भी हैं। क्षत्रिय वैश्य शूद्र में दलित आदिवासी सब हैं। दूसरे समुदाय से भी लोग आते हैं आपके यहां सीखने के लिए। तो मैं इसलिए कह रहा हूं यह जो आपस में ना ये ये विभाजनकारी चीजें ठीक नहीं है। देश तो संविधान देखो संविधान हो या भेद का विधान हो कहीं पर भी अभेद दृष्टि रखिए। एक
(1:16:37) शब्द बोल रहा हूं बार-बार अभेद दृष्टि। भेद और भेदभाव ये ना भेद की दृष्टि है नहीं संविधान की दृष्टि है ना सनातन की दृष्टि है। हम इससे मुक्त होना चाहिए देश। सो ये आगे हमारा सपना है जो हमारे आईएस, आईपीएस, आईआरएस, आईएफएस पीसीएस आदि भी नहीं बन पाएंगे। वो सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक नेतृत्व करेंगे देश में। हम इस तरह से बच्चों को तैयार कर रहे हैं। उनको घर जैसा वातावरण, घर जैसा खाना, पूरा सुरक्षित वातावरण और पूरा संयमित वातावरण। कोई यहां गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड बनाने के लिए नहीं जा रहे हैं। वहां कोई नशेड़ी गजड़ी बच्चे हम नहीं पैदा करना चाह रहे। बहुत से लोग
(1:17:09) आए, आईपीएस की तैयारी करते हैं। जरा सा स्ट्रेस होता है। सिगरेट का सुट्टा मार लेते हैं। कुछ बीच-बीच में वाइन और जो है वो भी पी लेते हैं। क्या कहते हैं? थोड़ा लाइट क्या ये आज जो जो हो रही है स्ट्रेस और इससे इसको इसको रिलीज करने के लिए एक्सरसाइज है मेडिटेशन है अच्छा एनवायरमेंट है खुशी का वातावरण है ये देना पड़ता है क्योंकि आजकल मां-बाप ये बीड़ी सिगरेट शराब पीने से स्ट्रेस दूर नहीं होता हां लौंडिया बाजी करने से लड़काबाजी लड़कीबाजी करने से ये इससे तो कोई स्ट्रेस दूर नहीं होता है जी अरे पढ़ाई कर रहे हो अभी पहले कुछ बन जाओ कितने गर्लफ्रेंड है कितने बॉयफ्रेंड है
(1:17:48) इसे इससे करियर बन जाएगा। इससे फ्रस्ट्रेशन दूर हो जाएगा। ये चरित्रहीनता है। तो हमें समझना पड़ेगा आजादी में और चरित्रहीनता में और बर्बादी में और श्रृंखलता में क्या फर्क है? आजादी नारे लगाते हैं आजादी। वी वांट फ्रीडम वी वांट जस्टिस। और गुलाम किसके? गर्लफ्रेंड के बॉयफ्रेंड के गुलाम है। बर्गर पिज़्ज़ा के गुलाम है। कोका कोला पेप्सी के गुलाम है। सॉफ्ट ड्रिंक के कोल्ड ड्रिंक के और एनर्जी ड्रिंक के गुलाम है। छोटे-छोटे जूते चप्पलों के गुलाम है। छोटे-छोटे एमएसी के विदेशी कंपनियों के गुलाम है। ब्रांड्स के गुलाम है। आप आजाद कहां हो?
(1:18:22) चमड़ी दमड़ी के गुलाम है। किसी का ऐसा नाक देखा, ऐसा चेहरा देखा, ऐसी आंखें देखी। आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल हमें। दिल की ऐ धड़कन ठहर गई। मिल गया कातिल हमें। ये काया है ये सब। तो ये ये जो आजादी के देखो हमें हर चीज को समझना पड़ेगा। जीवन चलेगा गंभीरता से प्रामाणिकता से और आजादी के नाम पर बर्बादी का रास्ता अख्तियार नहीं करना पड़ेगा। समाज के जितने भी बड़े हैं माता-पिता हैं। देखो मैं मुझे पता है मैंने पिछले पांच छह इंटरव्यू दिए हैं बड़े और उसमें कड़वा भी बोला है। जानबूझ के बोला है। हां मैं मुझे कुछ जजीज स्वामी रामदेव
(1:18:57) जिंदाबाद। ये करें कोई फर्क नहीं। में रामदेव मुर्दाबाद गाली और ताली से देश नहीं चलता। आपको जो सही है वो बोलना चाहिए। जेंजीस को भी वो बोलिए जो उनके लिए हितकारी है। और खाली बच्चों के और जवानों की बात नहीं हर जाति वर्ग समुदाय के बारे में वो बोलिए जो सही है। लोग जरा सा कोई किसी को अपने बस किसी की सहानुभूति लेने के लिए किसी को अपने फेवर में खड़ा करने के लिए कोई किसी जाति, किसी वर्ग, किसी समुदाय के पक्ष में बोल रहा है। कोई विपक्ष बोल रहा है। अगर मैं पहला सन्यासी हूं जिन्होंने ये कहा है कि एससी, एसटी, दलित, शोषित, वंचित को
(1:19:34) गाली देना भी अपराध है। वो भी असंवधानिक लोकतांत्रिक अन्यायपूर्ण है पापपूर्ण है। वह भी अपराध है और ब्राह्मण को भी गाली देना अपराध है। क्षत्रिय वैश्य को भी गाली देना अपराध है। पक्ष को भी गाली देना अपराध है और विपक्ष को भी गाली देना अपराध है। ये क्या फालतू में बात हो रही है? अगर लोग राहुल गांधी को गाली देने में लगे। कुछ मोदी को गाली देने में इसे देश बनेगा। ये भी गलत है। नहीं अगर वो लोग गाली दे रहे हैं तो क्या उनसे बात करनी चाहिए। बात अपनी सभ्य तरीके से कोरोना हम सिविल क्या उन सोसाइटी पर हम एक सभ्य समाज के सदस्य हैं।
(1:20:10) हमको राजनीति में भी धर्म में अध्यात्म में समाज में सब जगह हमें गाली गलौज से बचना चाहिए। घृणा नफरत से बचना चाहिए। कर्म को पूजा मानना चाहिए। सबको एक सूत्री कार्यक्रम होना चाहिए। स्मिता बहन देश के रुपए की कीमत डॉलर प के बराबर कैसे होगी? देश के भारत के पासपोर्ट की वैल्यू अह ब्रिटिश पासपोर्ट के बराबर यू यू यूके यूएसए के पासपोर्ट के बराबर भारत के पासपोर्ट की वैल्यू कब होगी? भारत के हेल्थ का एजुकेशन का सिस्टम यूके यूएसए के बराबर कैसे होगा? हमारे देश के बच्चे वहां पढ़ने जा रहे हैं यूरोप में, अमेरिका में, ऑस्ट्रेलिया में। वहां के बच्चे यहां
(1:20:45) पढ़ने कब कब आएंगे? इस पर ध्यान देना चाहिए। देश बनाने पर ध्यान होना चाहिए ना। फालतू की बातें लेकर के बैठ जाते हैं। मीडिया वाले भी जो है 90% ऐसे क्वेश्चन करते हैं जो प्रेडिक्ट ही नहीं होते। अल्टीमेट आउटकम कुछ नहीं निकलता। खाली सुर्खियां क्या चल रही है? इस समय क्या इस समय के क्या मुद्दे हैं? ब्रेकिंग न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ कहां से मिलेगी? अरे मेकिंग न्यूज़ होनी चाहिए। देश कैसे बनेगा? ये बात होनी चाहिए। इसके इस तरफ ध्यान होगा ना तब ये देश बनेगा और हम तो इस काम में लगे पड़े और लगे रहेंगे। डिफरेंस ऑफ़ ओपिनियन जो है वो हर
(1:21:15) ऑर्गेनाइजेशन में होता है। क्या पतंजलि में भी ऐसे होता है? आचार्य बालकृष्ण जी आपके साथ इतने साल से रहे हैं। क्या आपके और उनके विचार कभी-कभी अलग होते हैं तो किसका फिर प्रिवेल करता है? देखो डिफरेंस ऑफ़ ओपिनियन जो आपने बात की ना यह तो अच्छी बात है। हमारे यहां तो इसको शास्त्रार्थ कहा जाता है। हमारे यहां इसको संवाद कहा जाता है। विमर्श कहा जाता है। मंथन कहा जाता है। एक संदर्भ में 10 प्रकार के प्रश्न हमारे यहां तो वेद, दर्शन, उपनिषद, रामायण, महाभारत पूरे पुराण प्रश्न उत्तर पर भरे पड़े हैं। तो सवाल, प्रश्न अलग-अलग प्रकार के जो है
(1:21:47) जिज्ञासाएं तो ये तो होनी चाहिए और उसके बाद में जो सही है वो वो वो हमें करना चाहिए। क्या होता है ऐसे? ऐसा होता है स्वस्थ स्वस्थ हमारे यहां पर संवाद हिम्मत होती है लोगों में खूब जबरदस्त होती है अरे लोग तो हमारे सामने आपकी बोर्ड मीटिंग्स होती है जहां पर आप बोर्ड मीटिंग में ये होता है कि दिस इज नॉट राइट दिस इज रोंग दिस इसके ऊपर फाइट होती है पूरी और कई बार तो वातावरण इतना गर्म हो जाता है कि एसी जो है वो 16 पर करना पड़ता है किस बात पर होती है मीडिया को लेकर होती है हर आपने ऐसे क्यों कहा फला क्यूट देखो ऐसा देखो मैं तो आजकल वैसे
(1:22:19) भी बहुत कम बोलता हूं मैं कहीं जाकर के किसी के गले नहीं पड़ता। मैं कहीं पर मीडिया में बयान देने में कोई जो इंटरेस्ट नहीं रखता। जब बहुत ज्यादा आग्रह करते हैं कि स्वामी जी आए बहुत दिन हो गए। अब तो बात करो। मैं ना बोलूं तो बाबा मोनो हो गए। बोलूं तो बोले बाबा के बिगड़े बोल। बाबा बाबा हुए बेकाबू। ऐसा लोगों को ना इन चीजों में मजा आता है। तो ये सब फालतू की बातें हैं। इनमें कोई इनमें कोई सार नहीं है। कोई तंत्र नहीं है। है ना? इसलिए मैं कहता हूं सब जगह। मैं तो कहता हूं राजनीति में भी जो है स्वस्थ विमर्श होना चाहिए। उसमें वाद प्रतिवाद होना चाहिए और सभी
(1:22:55) प्रकार के जो अपनेप वैचारिक पक्ष रखे जाने चाहिए और जो फिर सही हो देश के लिए सही हो सबके लिए सही हो क्योंकि इनटॉलरेंस इतना हो गया आप देखिए संसद में भी इसलिए ये इंट्रोलेंस अच्छा नहीं है ये ये जो आपस में एक दूसरे के प्रति असहिष्णुता और एक दूसरे के प्रति असम और एक दूसरे के प्रति गाली गलौज हम और एक बात और कह रहा हूं इस्लाम में इस निंदा के लिए कानून बना रखा है ना कि इस निंदा नहीं कर सकते। हम तो इस्लाम के खिलाफ आपने देखा होगा हम कोई भी व्यक्ति ब्लासमी कोई भी व्यक्ति गलत बात नहीं बोल सकता। प्रॉफेट मोहम्मद साहब के बारे में कोई गलत
(1:23:37) बात नहीं बोल सकता। तो ईश निंदा के खिलाफ कानून है। ईसाइयत में भी इस्लाम में भी। हम मैंने आने से पहले चैट जीबीटी से पूछा था। बोले 56 देश इस्लामिक कंट्री कहलाते हैं। उनमें 50 50 देशों में 50% ज्यादा जो है इस्लाम को मानने वालों की आबादी भी है। सब जगह कानून है कि आप प्रॉफेट मोहम्मद साहब का और इस्लाम की आप निंदा नहीं कर सकते। हम कुरान की हदीसों की निंदा नहीं कर सकते। सेम ईसाई देशों में भी ऐसा है। हम ठीक है? थोड़े बहुत डिफरेंट ओपिनियन होते हैं। वो बहुत मामूली से हैं। भारत में भी इस्लाम के खिलाफ, ईसाइयत के खिलाफ ना के बराबर कुछ लोग बोलते हैं। कभी-कभी बोलते
(1:24:15) हैं तो उसको कानून अपना काम करता है। लेकिन भारत में राम के खिलाफ, कृष्ण के खिलाफ, हनुमान के खिलाफ, साधु के खिलाफ, ब्राह्मण के खिलाफ, अलग-अलग जाति वर्गों के खिलाफ, शूद्रों के खिलाफ, एससी, एसटी के खिलाफ रोज लोग जहर उगलते हैं। ओके? इसके लिए स्पेशल चैनल बने हुए हैं। मैं तो कहता हूं ये जो जातीय नफरत वर्गीय नफरत जातीय वर्ग समुदायों के नाम पर जो नफरत फैलाने वाले YouTube चैनल उन पर बैन लगना चाहिए। प्राइम टाइम चैनलों पर जो बहसें होती हैं जातीय वर्ग समुदायों के नाम पर हिंदू मुसलमान के नाम पर इन पर बैन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को इसके ऊपर कानून
(1:24:45) आना चाहिए। गवर्नमेंट को सोशल मीडिया के लिए कानून लाना चाहिए। चाहे Facebook है, YouTube है, इंस्टा है, एक्स है। क्योंकि सोसाइटी में विग्रह पैदा कर रहे हैं। समाज में आप विघटन पैदा कर रहे हो, घृणा नफरत पैदा कर रहे हो। समाज के अंदर आप एक तरह का अनारकी अराजकता पैदा कर रहे हो। इनके ऊपर बैन लगना चाहिए। मैं इसके सख्त खिलाफ हूं। और समाज के जो सभ्य लोग हैं संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार लोग हैं। अरे भारत का भविष्य क्या होगा? किधर जा रहे हैं हम? इसलिए मैंने आपसे एक ही कहा। मैंने 100 प्रश्न आप पूछ लेना। मेरे से मैं सबका उत्तर दूंगा। व्हाट इज द राइट डायरेक्शन
(1:25:20) ऑफ़ नेशन? ये सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए और इसके ऊपर चर्चा होनी चाहिए। बाकी इधर-उधर की बातें छोक करके करंट इश्यूज के नाम पर, ब्रेकिंग न्यूज़ के नाम पर, कॉनस्परेसी के नाम पर फालतू की चीजें करने से सनसनी फैलाने से इतने सारे विदेशी प्लेटफॉर्म्स हैं और उनके जो उनका मानस आज अमेरिका के हाथों में है। जैसा चाहता है वैसी वो हमारी धार्मिक, हमारी राजनीतिक, हमारी सामाजिक, हमारी आर्थिक वो हमारी मान्यता बना रहा है। हम इन्फ्लुएंस में काम कर रहे हैं। कैसे कपड़े पहने, कैसी साड़ी पहने, कैसा सूट पहने, कैसे गहने पहने? कैसे अपने बालों की
(1:25:55) कटिंग करनी है? क्या क्रीम पाउडर आपको लगाने है? इन्फ्लुएंस में आकर के हम कर रहे हैं। मैं कहता हूं दबाव में, अभाव में, प्रभाव में जो आदमी काम कर रहा है वो सही निर्णय नहीं हो सकता। तो भारत में लोग इन्फ्लुएंस में और वो इन्फ्लुएंस पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस किसका होगा? किसका? सत्ता बदल रहे हैं साहब। हम अमेरिका में बैठे हुए लोग तो पूरी पूरी दुनिया जो चल रही है स्मिता जी आप तो इन इंग्लिशों को मुझसे भी ज्यादा समझते हैं वो भारत से नहीं चल रही है कुछ इंटरनेशनल थिंग टैंक्स हैं मुश्किल से 20-25 लोग हैं वो पूरी दुनिया का निर्धारण करें पूरी
(1:26:28) दुनिया क्या पहनेगी क्या ओढ़ेगी क्या खाएगी कैसे दवाई करेगी कैसे उपचार करेगी कैसे बच्चे पैदा करेगी कैसे रिलेशनशिप में रहेगी लोगों की रिलेशनशिप जो है अब वो मीडिया निर्धारित कर रहा है लोगों के परिवार कैसे चलेंगे वो बच्चे पढ़ाई भी क्या करेंगे और बच्चे देखने में कैसे अच्छे लगेंगे कैसे क्या होगा क्या पहनेंगे क्या खाएंगे कैसे जिएंगे सब सब कुछ आपका करियर से लेकर के सब कुछ वहीं से तय हो रहा है तो उसमें चलो कुछ चीजें ठीक है कुछ चीजों के अंदर हम छोड़ देते हैं लेकिन कम से कम ये जातीय घृणा जातीय वर्ग समुदायों के नाम पर घृणा विभाजन और हमारी सब चीजें
(1:27:03) जो अमेरिका से तैय हुई है विदेशों से तय हुई हैं कुछ सो कॉल्ड सोशल मीडिया के इन्फ्लुएंसर्स तय कर रहे हैं कुछ यूटर्स तय कर रहे हैं मैं उसके सख्त के खिलाफ हूं आदमी को अह सच और झूठ के आधार पर। सही और गलत का जो निर्णय है, वह आपके लिए तात्कालिक रूप से और दीर्घकालिक रूप से क्या आपके लिए हितकारी है, इसके आधार पर तय होना चाहिए ना। इंस्टेंट चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात, थोड़ी देर की खुशियां, जिंदगी भर का गम, थोड़ी देर का सुख, जिंदगी भर का दुख। ये जो क्षणिक वाद चल रहा है ना, थोड़ी-थोड़ी चीजों से हम इतने ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं। इतने
(1:27:34) ज्यादा आवेग में आ जाते हैं। आक्रोश में आ जाते हैं। आभा खो देते हैं। यह सब बंद होना चाहिए। यह अराजकता है। यह यह आजादी नहीं है। यह अराजकता है। और यह बंद होनी चाहिए। सोशल मीडिया के लिए भी कानून बनाना चाहिए सरकार को और प्राइम टाइम पर भी जो जाति वर्ग समुदायों के नाम पर घृणा और नफरत पैदा करने वाले जो डिबेट्स हैं इन पर भी बैन लगना चाहिए। मैं तो अब जाती नहीं हूं इन डिबेट्स में। मुझे डर लगता है। रात को नींद नहीं आती। स्वामी जी। देखिए हम तो इतनी मेहनत करते हैं मेरी बहन 18 18 20 घंटे तो हमको नींद तो अच्छी आ जाती है और फिर
(1:28:08) जो है थोड़ा बादाम रोग नाक में डाल लेते हैं अनुलोमविलोम कर लेते हैं और ओम नमः शिवाय का जप कर लेते हैं नींद बहुत अच्छी आती है और रात को हमें कभी थोड़ा बहुत सपना भी आता तो भगवान का आता है लेकिन हां मन बहुत व्यथित होता है जब मैं समाज में अच्छा हमको लोग गाली भी दे दे ताली भी दे दे क्या फर्क पड़ता है लेकिन गाली नहीं फर्क पड़ता आपको सच में हम हमने गाली प्रूफ हो गए गाली प्रूफ तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अच्छा नहीं लगता हम अब जिस तरह से अब लेवल इतना नीचे आ गया देखो आलोचनाओं का भी हमारे यहां पर कभी किसी को बोला भी जाता था ना कठोर
(1:28:40) हम तो बोला बोला जाता था ए मूर्ख हम अ वाचालः मतलब ज्यादा से ज्यादा किसी को धूर्त मूर्ख ये बोल दिया बहुत बड़ी गाली हो गई और आप तो मां बहन और इतने इतने गंदे जो मतलब ह्यूमन जो प्राइवेट पार्ट्स होते हैं उनके बारे में जो उनको गालियों के रूप में रिलीजंस हमारे रिलेशनशिप को मां बहन बेटी की गाली दे रहे आप अपनी मां बहन बेटी को गाली दे रहे हो ना क्या कहां आपका सर आ गया है और फिर एक दूसरे से घृणा कर रहे हो भाई आप ये बताओ मैं तो कहता हूं राजनीतिक पार्टियों को अब बहस ये नहीं करनी चाहिए कि किस जाति किस वर्ग किस समुदाय के लिए आप क्या करेंगे आप ये बहस करो कि आप
(1:29:18) संविधान को देश में किस तरह से फॉलो करोगे सारे राजनीतिक पार्टियों को मैंने एक बार बोला था बहुत लोगों ने मेरे को गालियां दी मैंने कहा सारे राजनीतिक पार्टियों को ना अपना जो क्या बोलते हैं अपना घोषणापत्र हम्म क्या बोलते हैं अंग्रेजी में उसको? मेनिफेस्टो मेनिफेस्टो। अपनी मेनिफेस्टो कॉन्स्टिट्यूशन को बना देना चाहिए कि वी विल फॉलो 100% द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन। भारत के संविधान को हम लोग फॉलो करेंगे। ये हमारा घोषणापत्र है। और राष्ट्रवाद और दूसरा फिर उनको कुछ विशेष योजनाएं चलानी है तो बस उसके बारे में बात करें। जाति वर्ग समुदायों के नाम पर घृणा नफरत
(1:29:54) और फिर आपको यह भी बताना चाहिए कि भाई जो है कि आप यह करेंगे तो किन व्यक्तियों के माध्यम से करेंगे? एक व्यक्ति कभी भी देश नहीं चलाता। चाहे पक्ष हो या विपक्ष हो। ये जो व्यक्ति केंद्रित जो राजनीति होती जा रही है, व्यक्ति केंद्रित जो धर्म होता जा रहा है, व्यक्ति केंद्रित जो मीडिया होता जा रहा है, ये मीडिया का सबसे बड़ा एंकर ये राजनीति का सबसे बड़ा धुरंधर। ये धर्म का सबसे बड़ा धुरंधर। अब ये जमाने लद गए साहब। यह वर्चस्ववाद खत्म हो चुका है। पूंजीवाद, आधिपत्यवाद, अधिनायकवाद यह सब खत्म हो चुका है। हम आप किन लोगों के साथ
(1:30:31) या खत्म होना चाहिए? खत्म तो नहीं हुआ। मतलब बौद्धिक रूप से तो खत्म हो चुका है। वैचारिक के तौर पर तो लोग मान चुके हैं ना कि भाई ये चीजें नहीं होनी चाहिए। हम तो आप क्या करेंगे और किन लोगों के साथ करेंगे? लेकिन आपके ऑर्गेनाइजेशन में नाम तो आप ही का है। तो कैसे? देखिए मैंने अपने ऑर्गेनाइजेशन में अपने जैसी सोच के 1 करोड़ से ज्यादा लोग तैयार किए। एक सक्सेशन प्लान है। आप रिटायरमेंट तो नहीं करने वाले पर फिर भी देखो मैं आपसे बात कह रहा हूं। फिर भी देखो मैं 200 से ज्यादा सन्यासी बनाए हैं। इससे ज्यादा क्या सक्सेशन प्लान होगा?
(1:31:08) लोगों के तो दो भी बच्चे अच्छे ठीक से उनके अनुकूल नहीं होते हैं। बहुत से ग्रुप है ऐसे। मैं किसी के बारे में बात नहीं करना चाहता। और सब जाति वर्ग समुदाय योग्यता क्षमता पात्रता और यह भी ईश्वर का अनुग्रह है कि सब जाति वर्ग समुदाय के बच्चे हमारे पास आए तो हमारा तो सक्सेस प्लान है। हम हमने तो पतंजलि योगी ट्रस्ट में दिव्य मंदिर ट्रस्ट में पतंजलि आयुर्वेद में सारे जितने भी इंस्टीटशंस हैं सारे इंस्टीटशंस में सब जाति वर्ग समुदायों के बच्चों को हमने समावेश कर दिया है। ट्रस्टी बना दिया। उनको अधिकार दे दिए हैं। बहुत अच्छी बात है।
(1:31:39) ये ये मैंने मुंह जबानी हिसाब किताब नहीं है। ये करके दिखाए ना कोई जो लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं धर्म के नाम पर घोषणा करो कि सब जाति वर्ग समुदाय के लोग सभी प्रकार के धार्मिक उत्तरदायित्व में भागीदार होंगे। ये इस्लाम वालों को भी करना चाहिए। इस्लाम वालों को बोलना चाहिए। मस्जिद में स्त्रियां और पुरुष दोनों आएंगे। और मुल्ला मौलवी ये एक ही एक ही पुरुष ही क्यों बन रहा है? जो कहते हैं यह उलेमा है। यह बड़ा मौलाना साहब है। यह उसके प्रमुख हैं। एक भी क्या धर्म के प्रमुख एक भी लेडी है? ईसाइयों में मुसलमानों में नहीं है। हमारे यहां पर है। जहां नहीं है वहां पर
(1:32:20) भी वो और करवा देंगे। तो ये सब बॉयकॉट करना चाहिए। ये सब ये जो अलग-अलग प्रकार के जातीय उन्माद है ना जाति वर्ग समुदायों के नाम पर जो उन्माद है ये खत्म होना चाहिए और सब धार्मिक लोगों को राजनीतिक लोगों को भी ये करना चाहिए सब अलग-अलग संगठनों को करना चाहिए कोई भी संगठन है हम चाहे वो सामाजिक संगठन है सांस्कृतिक संगठन है सब लोगों को इन बातों को मानना चाहिए स्वामी जी एक आखिरी सवाल जो मेरी टीम ने पूछा है कि इतिहास आपको अह जब इतिहास आपको याद करेगा तो आप किस रूप में याद किए जाना चाहेंगे? उस व्यक्ति के रूप में जिसे जिसने योग को
(1:32:59) भारत के घर-घर तक पहुंचाया या उस व्यक्ति के रूप में जिसने एक विशाल कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया है। देखिए कुछ साम्राज्य तो बहन देखो क्या है बहुत स्थूल दृष्टि है लोगों की। कोई साम्राज्य नहीं। स्वामी रामदेव का कोई साम्राज्य नहीं। योग का साम्राज्य है। अरविंद का साम्राज्य है। ये सनातन धर्म के ऋषि परंपरा के गौरव का साम्राज्य है। देश का साम्राज्य है। सब कुछ जब देश के लिए हो रहा है तो ये व्यक्ति कहां गया इसके बीच में? तो ये लोगों की संकीर्ण सोच है। तो स्वामी रामदेव का कोई साम्राज्य नहीं है। स्वामी रामदेव को लोग इस रूप में याद
(1:33:27) करेंगे। एक सन्यासी था जो अ योगी भी था, कर्म योगी था। और अभी तो था वक्त है अभी। अभी तो 50- 100 साल और इंतजाम इंतजार करना पड़ेगा। हां। और हर अह कोई भी सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय कोई इशू आता था उसके ऊपर अपनी बात भी रखता था। और जिसने सनातन को टुकड़ों-टुकड़ों में नहीं जिया, जिसने धर्म को टुकड़ों-टुकड़ों में नहीं जिया, धर्म को समग्रता में जिया और समाज को टुकड़ों-टुकड़ों में नहीं बांटा। समाज को भी समग्रता में देखा और समग्रता के साथ आगे बढ़ाया। तो मैं किसी एक जाति विशेष का किसी वर्ग विशेष का मैं रहनुमा नहीं बनना
(1:34:06) चाहता। मैं सारे देश को एक दृष्टि से देखता हूं और मैं तो कहता हूं पूरे विश्व को यत्र विश्वम भवत एक नीड एकत्व अनुप अयं निज परते घचित उदार चरितम वसुदेव कुटुंबकम मैं एक अभेद दृष्टि से देखता हूं। कोई भेदभाव की दृष्टि नहीं रखता। स्वामी जी इंश्योरेंस सेक्टर में भी आपने एंट्री लगा ली है। अब क्यों किया आपने? इसकी क्या जरूरत थी? देखिए सभी क्षेत्रों में एमएसी जो है ना वो भारत को लीड कर रही है। रूल कर रही हैं। हम मेरा बस मैं सभी क्षेत्रों में घुस जाऊं। और एमएसी को उखाड़ फेंकूं। हां देखिए कोई भी देश आगे बढ़ता है तो आर्थिक स्वावलंबन उसमें सबसे बड़ा प्रश्न होता
(1:34:45) है। तो महात्मा गांधी जी भी कहते थे राजनीतिक आजादी के साथ आर्थिक आजादी शिक्षा चिकित्सा की आजादी वैचारिक आजादी सबसे बड़ी होती है राजनीतिक आजादी से भी तो इसलिए महगमा भी हमने एक्वायर किया है और आने वाले समय में और भी कंपनियां हम एक्वायर कर सकते हैं जो हमारे नेचर के अनुकूल हो और जिससे देश का हित होता हो तो इंश्योरेंस में भी अब स्वदेशी का डंका बजना चाहिए। स्वदेशी से स्वावलंबी आत्मनिर्भर विकसित भारत बने। ये एक मूलभूत सिद्धांत है। देश का धन देश में रहे और देश की सेवा में लगे। इस भावना के साथ हमने मैग्मा का एक्विजिशन किया है।
(1:35:17) जी और वो जो भजन है जो काफी वायरल हुआ है जाति और वर्गों को को लेकर वो जरा मैं गाता रहता हूं। जाति पंथों के बंटवारे झूठ कहाए तेरे द्वारे तेरे लिए सब एक समान कोई नीच ना कोई महान सारा जग तेरी संतान सबको सन्मति दे भगवान रघुपति राघव राजा राम पतित पतित पावन सीताराम हिंदू के लिए ना मुसलमान के लिए हिंदू के
(1:36:05) लिए ना मुसलमान के लिए जीना है तो जिए हिंदुस्तान के लिए आपसी मतभेद हमें जीने नहीं देंगे देश ना रहा तो हम कैसे रहेंगे एक है लहू का रंग पहचान के लिए जीना है तो जिए हिंदुस्तान के लिए उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती देश है पुकारता पुकारती मां भारती रगों में तेरे बह रहा है खून राम श्याम का जगद गुरु गोविंद और राजपूत शान का तू चल पड़ा तो चल पड़ेगी साथ तेरे भारती देश है पुकारता पुकारती मां भारती देश सबसे ऊपर होना चाहिए और रामकृष्ण हनुमान शिव का गौरव अपने पूर्वजों के
(1:36:49) शौर्य वीरता का पराक्रम का चरित्र का गौरव हर एक हिंदुस्तानी के दिल में हमेशा रहना चाहिए इसलिए ऐसा शत्रु शत्रु धन धना रहा कुछ राष्ट्र विरोधी ताकत तो देश को तोड़ने में लगी वे तो हम को जोड़ने का काम करना है शत्रु धन धना रहा चहु दिशा में देश की पता बता रही हमें किरण किरण दिनेश की ओ चक्रवर्ती विश्व जय मां त्रिभुनिहारती देश है पुकारता पुकारती मां भारती तोड़कर धरा को फोड़ आसमा की कालीिमा जगा दे सुप्रभात को फैला दे अपनी लालिमा तेरी शुभ्र कीर्ति विश्व संकटों को तारती देश है पुकारता पुकारती मां भारती देश है पुकारता पुकारती मां भारती
(1:37:32) धन्यवाद स्वामी जी आप हमारे स्टूडियो में आए पहली बार इसके बाद आप एटलीस्ट 2026 के बाद 2000 2027 बोलूं या 2028 और मैं आऊंगा और मैं आपको एक बात और कहता हूं आज जो हम कह के जा रहे हैं कि हम सब मिलकर के देश बनाने में लेंगे। ये सब बातें जो इधर-उधर की वाहियात बातें हैं इनको छोड़ें। देश की करेंसी नंबर वन कैसे होगी? देश का पासपोर्ट, देश का नागरिक दुनिया में नंबर वन कैसे होगा? और भारत दुनिया में नंबर वन कैसे होगा? भारत और भारतीयता को पूरी दुनिया में कैसे सम्मान मिलेगा? इसके लिए 145 करोड़ लोगों को काम करना चाहिए। इधर इधर की छिछोरी
(1:38:08) बातें, इधर-उधर की ईर्ष्या, द्वेष, जेलेसी को छोड़ के एक भारत और श्रेष्ठ भारत के लिए काम करना चाहिए। भारत माता की जय। वंदे मातरम। हिंदुस्तान जिंदाबाद। थैंक यू फॉर वाचिंग और लिसनिंग टू दिस एडिशन ऑफ़ द एनआई पडकास्ट वि स्मिता प्रकाश। डू लाइक और सब्सक्राइब ऑन व्हिच एवर चैनल यू सीन दिस और हर्ड दिस। नमस्ते। जय हिंद। दिस एपिसोड इज पावर बाय डेल्टा एक्सचेंज। इंडियास लीडिंग क्रिप्टो एक्सचेंज। क्लिक हियर टू वॉच द प्रीवियस एपिसोड्स।

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