Sunday, August 30, 2026

DEFENCE'S DARKEST TRUTH: Agniveer HIV Case, Suicides & Discrimination | MARCOS Praveen Teotia

DEFENCE'S DARKEST TRUTH: Agniveer HIV Case, Suicides & Discrimination | MARCOS Praveen Teotia

Author Name:Accompany Akki

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Transcript:
(00:00) आर्मी में डिस्क्रिमिनेशन हो रहा [संगीत] है। वह तो ब्रिटिश इरा से ही है। बैटल कैजुअल्टी पेंशन अधिकारी की ज्यादा थी। खून मैंने भी उतना बहाया लेकिन एक को मिल रही है ₹1 लाख। एक को मिल रही है ₹10,000। ये ट्राई सर्विज का इशू है। पूरे डिफेंस का इशू है। पूरा का पूरा एक जगह पर खाना नहीं है। खाना भी अलग है। अलग खाना है। सबसे बेहतरीन ब्रेकफास्ट है डिफेंस फोर्सेस का। पूरी, सब्जी, चाय। मैं जो भी शर्म कर जाएगा यार क्या बनाया है तुमने? आपने देखा है डिक्टेटर टाइप? मैं तो झेला हूं सब कुछ। मैं एक दिन ड्यूटी पे था। तो सीईओ आया। मास्टर भूसमेट को बुलाओ।
(00:28) 2 मिनट तक उनका थोड़ा कन्वर्सेशन हुआ। उसके बाद सीओ [संगीत] ने उसको गालियों की बौछार मार दी। मतलब क्या-क्या नहीं कहा गया। वो सुसाइड केस देखो इंडिया में कितना हायर है सेना [संगीत] में। जिस जवान ने अपना सब कुछ न्योछावर देश के लिए कर दिया हो। क्या उसको ओनरी रैंक दी? ओनरी रैंक दी है क्रिकेटर्स को। धोनी को दी। उससे पहले [संगीत] कपिल सचिन तेंदुलकर तो अब कोहली को भी दे देंगे। अगर आपको मोदी जी बुलाए मोदी जी भी कर सुन नहीं सकते [संगीत] ना कुछ भी। मतलब आप बोल रहे हो प्राइम मिनिस्टर प्राइम मिनिस्टर के पास पावर नहीं है कि
(00:53) डिफेंस फोर्सेस के अंदर एक एक रिफॉर्म की बात कर सके। अभी ये अग्निवीर में एचआईवी वाला जो केस चल रही है वो एक अग्निवीर एक फीमेल है। फिजिकल अब्यूज कह सकते हैं 57 उनके आसपास जो संख्या पे पहुंची है उनमें से 11 एचआईवी पॉजिटिव अभी तक [संगीत] मिले हैं। इन यूरोपियन वुमेन आर्मी और नेवी में फिट नहीं बैठती बैटल के लिए। नहीं वहां एक मेल की [संगीत] बराबरी कैसे कर पाओगे आप? महीने के तीन से चार दिन तो ऐसे ही जाने हैं आपके। फिर आपका मूड स्विंग [संगीत] है। उसको कौन संभाले? जी। मैं कहता हूं चले भी गए। फिजिकल स्टैंडर्ड को आप मीट कर रहे हो। पुलिस में ही मीट
(01:25) नहीं कर रहे आप। डिफेंस में कहां से मीट करोगे? बट स्टैंडर्ड बढ़ा नहीं सकते विद ट्रेनिंग। इतने सब चीज़ होने के बाद क्या पैट्रिएटिज्म बचता है? वेलकम वेलकम प्रवीण कुमार तेतिया जी कैसे हैं सर आप? एकदम ईश्वर कृपा। अभी ये अग्निवीर में ये सोशल मीडिया वगैरह पे जो चल रहा है ये एचआरवी वाला जो केस चल रहा है ये क्या है? मतलब एक्चुअली क्या अभी सोशल मीडिया पे तो नहीं है। कुछ एक नेवी के एक यूनिट में इस तरह का कुछ केस आया है जो कि उसकी छानबीन चल रही है। हम तो उसमें करीब-करीब एक अग्निवीर एक फीमेल है। उसके उसका कुछ फिजिकल अब्यूज कह सकते
(02:04) हैं हम लोग उसका हुआ है। हम और 57 के आसपास जो संख्या पे नहीं पहुंची है। उनमें से 11 एचआईवी पॉजिटिव अभी तक मिले हैं। अब जो अंदर की रिपोर्ट्स हैं। कुछ सूत्रों के द्वारा जो बताया गया है हम वो चल रहा है। अभी इन्वेस्टिगेशन चल रही है। जहां पर भी फीमेल आ गई हम वहां पर चाहे कॉर्पोरेट हो चाहे कोई भी डिपार्टमेंट हो वहां पर तो इस तरह की चीजें आएंगी ही आएंगी। आएंगी आएंगी। हां कहीं पे भी हो। चाहे वो कॉर्पोरेट हो चाहे कहीं पे भी हो। वो अमेरिका में बहुत पुराने हैं। वहां पे देख लो आप कितना सेक्सुअल अब्यूज होता है। हां क्यों नहीं होता? वहां पे भी होता है।
(02:40) बस 57 तो बहुत बड़ा नंबर है। इतने तो मतलब ये तो एक तरह से बहुत ही इनह्यूमन चीज हो गया ना कि अब क्या कर सकते हैं? और अभी तो इसका मतलब वो पूरा वो आया नहीं है ना कि मतलब इन्वेस्टिगेशन अंदर अंदर चल रही है। देखो दूसरा है कि अग्निवीर में जो फीमेल हैं हम मेरे हिसाब से तो सबसे पहले मेल को ज्यादा क्योंकि ये देश में मेल की संख्या बहुत ज्यादा है। हम और अमेरिका या यूरोपियन कंट्रीज में आपकी स्ट्रेंथ कम है। हम मैं मैन पावर कम है। तो इस वजह से आपने फीमेल को हम लेकर आए। यहां पे पहले से ही स्ट्रेंथ इतनी ज्यादा है। हम बहुत स्ट्रेंथ है। बहुत मैन पावर है।
(03:20) हम तो फिर आप फीमेल को लाने का कोई औचित्य नहीं बनता था यहां पर। हम नहीं वो बोलते हैं ना कि मैन एंड वुमेन बोथ कैन नॉट कैन नॉट रन टुगेदर। इसमें नहीं कर सकते। नहीं नहीं क्यों? मिलिट्री नेवी में तो वुमेन जाना चाहे तो नहीं जा सकते। उनको सही नहीं है उनकी। इनफेंट्री में तो जा ही नहीं सकते आप। नहीं जा सकते। ना इनफेंट्री में है ही नहीं। तो ये क्राइटेरिया है ऐसा कि मतलब नहीं कर ही नहीं सकते आप। पूर्ति नहीं कर सकते आप। वैसे मार्कोस में भी नहीं कर सकते। नहीं नहीं आप उस उस लेवल के उस लेवल की फिटनेस उस लेवल की आप टफनेस नहीं ला सकते।
(03:51) आज के टाइम में तो यही बोला जाता है कि औरत क्या नहीं कर सकती मर्द? सब कुछ कर सकती है। वॉर वॉर जोन में जाके दिखाइए फिर आप कितने कितने परसेंट है जो वो और डेली का है वहां पे। ऐसा नहीं है कि आप एक एक दिन का युद्ध लड़ के आ गए। हम् तो डेली वहीं पे रहना है। तो इन योर ओपिनियन वह जो वुमेन है वह आर्मी और नेवी इन सब में फिट नहीं बैठती बैटल के लिए। नहीं बट अभी जा रही है कि कोटा नहीं अब वही आपका एडमिन ड्यूटीज है सारी की सारी उनके पास। सब डेस्क जॉब है। बैटल वाला जॉब्स नहीं है। ड्यूटीज है। नॉर्मल ड्यूटीज हैं। खड़े होकर ड्यूटीज करते रहो।
(04:26) अच्छा नहीं ये वो फाइटर जेट्स तो उड़ाती हैं आज के टाइम में कुछ-कुछ। तो एयरफोर्स में है। हां। अभी नेवी में भी आ गया वो। हम अधिकारी लेवल की बात है। ये मैं नीचे की बात कर रहा हूं। अच्छा जवान लेवल जवान लेवल की बात कर रहा हूं। वहां पे नहीं कर वहां पर अब कैसे कॉम्पिटिटिव चीजों को कर पाओगे? वहां एक मेल की बराबरी कैसे कर पाओगे आप किसी चीज को भी लेके आपके महीने के तीन से चार दिन तो ऐसे ही जाने हैं आपके। उससे पहले का फिर आपका मूड स्विंग है। उसको कौन संभाले? जी। बहुत सारी चीजें हैं। जो हार्मोंस चेंज हो रहे हैं उनको आप थोड़ी बदल सकते। इट्स अ
(05:03) ह्यूमन बॉडी। हम एक मेल कंट्रोल कर लेता है चीजों को। फीमेल कितना कंट्रोल कर रही है जबकि सारी चीज़ उसके आसपास में ही है। हम नहीं लेकिन लोअर लेवल पे भी अगर देखें तो मतलब जो वुमेन है वो बहुत ज्यादा मेहनत तो करती ही है। तो वो तो मैं वही कह रहा हूं कि वहां यूरोप यूरोप की बात और इंडिया की बात अलग है ना। आप तो फिर आप उतने लड़कों को अनइंप्लॉय कर दिया ना फिर आपने। हम अनइंप्लॉयमेंट तो अलग चीज हो गया। मतलब मैं बोल रहा हूं फिजिकली हां फिजिकली वाली बात नहीं की ना मैंने। फिजिकल वाली बात दूसरे नंबर पे आ जाती है। पहले तो आपके पास में इतनी मैन पावर इतनी
(05:33) है मेल की हम उसको यूटिलाइज बट अगर चाहेंगे कि मैं मतलब जैसे आप मार्कोस में बात करेंगे बट आप मार्कोस में जैसे जिस लेवल की ट्रेनिंग के साथ में शॉर्टलिस्ट होते निकले आप राइट 150 में से 1520 जो आपके निकलते हैं आपने बोला वहां पर वो कितने बचेंगे हां तो वहां पे एक तो पहला बात है कि क्या इनिशिएटिव लेते हैं वुमेन आना चाहते हैं क्या उन्होंने वो कैंडिडेट चलो मैं कहता हूं चले भी गए हम क्या आप उस फिजिकल स्टैंडर्ड को आप मीट कर रहे हो। पुलिस में ही मीट नहीं कर रहे आप। डिफेंस में कहां से मीट करोगे? पुलिस का आप दोनों का स्टैंडर्ड ले लो। एक तो
(06:10) कांस्टेबल का आप लगाइए एक फीमेल कांस्टेबल का जो स्टैंडर्ड है फिजिकल स्टैंडर्ड है वो कितना है? और फीमेल सब सब इंस्पेक्टर का स्टैंडर्ड क्या है? दोनों का अलग-अलग है ना। मेल का अलग है, फीमेल का अलग है। हम तो फिर ऐसा क्यों है? जब आप कहते हो बराबर होना चाहिए तो बराबर में लाओ ना भाई उनको। स्टैंडर्ड सेम स्टैंडर्ड सेम नहीं है। फिजिकल स्टैंडर्ड सेम नहीं है तो फिर बाकी के सारे स्टैंडर्ड आप क्यों मीट करा रहे हो? फिर उनकी पेमेंट भी कम रखो। हम सेम विद द डिफेंस फोर्सेस। सेम विद द फाइटर पायलट सेम रहती है। क्या है? सब कुछ सेम ही है।
(06:39) सब कुछ स्केल सेम है। सब कुछ सेम है। तो जब वो क्राइटेरिया आप उस लेवल को मीट नहीं कर पा रहे हो। आप रस्सी नहीं चढ़ पा रहे हो। आप बीओसी नहीं कर पा रहे हो। आप उस लेवल की फिटनेस नहीं है। उस लेवल का स्टैंडर्ड आपका नहीं है फिजिकल का। तो आप उस चीज के भी अधिकारी नहीं। हम क्यों हम आपके ऊपर एहसान जताएं? क्यों पुलिस आपको स्टैंडर्ड आपका लो करके आपको ले रही है? क्यों डिफेंस आपका स्टैंडर्ड लो करके ले रही है? क्योंकि ये तो सिक्योरिटी की बात आ जाती है। ये तो सारा देश की सिक्योरिटी की बात है ना। आप उसके साथ क्यों खेल रहे हो? सेम
(07:10) विद द पुलिस भ सेम रखो ना आप। चाहे आपको 10 मिले हम 1000 में से 10 मिले चाहे 10 ही लो। इसमें कोटा होता है। 30% तो किया हुआ है आजकल तो हर जगह पे डिफेंस आर्मी वगैरह सेम वहां पे देखिए आप हां उसमें ऐसा कुछ नहीं है। अभी तक उसमें नहीं ऐसा कुछ नहीं है। पुलिस में तो है पुलिस में भी है तो डिफेंस ने भी अपना वैकेंसीज निकाली हुई है कि इतने में इतनी लेंगे हम बट फिल फिल नहीं होते। तो फिल भी हो रही है। हो रही है। फिल भी हो रही है। लेकिन मैंने बोला ना आप आप स्टैंडर्ड डाउन कर दिया आपने उनके लिए। आपने अपना ही स्टैंडर्ड डाउन कर दिया।
(07:45) क्यों? आपने अपना फिजिकल स्टैंडर्ड डाउन कर दिया। वो पुल अप नहीं मार पा रही है। अब वो कुछ नहीं कर पा रही है। आप उसको फिर भी भर्ती करा रहे हो। क्योंकि भरना है। नहीं भरना है भाई। हमें तो भरना है। ऐसा थोड़ी होता है। तो मैंने वही बोला ना। हमको जो दिखाया जा रहा है आप फाइटर पायलट की ही बात करें। क्या एक मेल फाइटर पायलट का जो फिजिकल स्टैंडर्ड है क्या फीमेल का सेम है? क्या उतने में ही उसकी जो पीईटी है फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट है सेम स्टैंडर्ड का है जो एक फाइटर पायलट जो मेल का है नहीं है तो फिर क्यों नहीं मैं मेरा तो इसका स्टैंडर्ड क्यों आप क्यों
(08:22) स्टैंडर्ड लो कर रहे हो बट स्टैंडर्ड बढ़ा नहीं सकते विद ट्रेनिंग वि गाइडेंस और वो जितना इंडोरेंस साइकोलॉजी तो बढ़ाओ ना पहले ही मैं बोला ना पहले ही बराबर करके रखो ना आप नहीं नहीं हमको तो बनाना है जी तो बनाइए उसको प्रमोट करना है आपको प्रमोट करना है तो प्रमोट करिए लेकिन आप स्टैंडर्ड डाउन कर दिए। हम आपके हिसाब से सही नहीं है। मेरे हिसाब से बिलकुल सही नहीं है। मेरे हिसाब कहते है बराबर हम आप फिजिकल स्टैंडर्ड बराबर लाइए दोनों का। बराबर पेमेंट दे रहे हो बराबर एमएसपी दे रहे हो। बराबर सब कुछ है। सारी फैसिलिटी सब कुछ बराबर है। तो भाई यहां पर क्यों आप
(08:54) अपना उनका स्टैंडर्ड लो कर रखा है। यहां पे भी तो बराबर लाओ उनको। हम अगर एक जवान भर्ती होने के लिए 5 मिनट में 5 से 5 मिनट में 1600 मीटर कर रहा है तो फीमेल क्यों नहीं कर रही है उतने में उसको भी उतना ही ले लो भैया हम नहीं उसके लिए हम 8 मिनट रखे हुए हैं क्यों भाई क्यों उनके ऊपर एहसान दिखा रहे हो सही बात है ड्यूटी तो वो भी करेगी ना हम पेमेंट तो वो भी लेगी ना मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं मैं देश के विषय के बारे में सोच रहा हूं अभी आपने अच्छी बात बोली है इसमें हमने बात किया था आपने मेरे को थोड़ा सा कॉल पे बताया भी था। आर्मी में डिस्क्रिमिनेशन हो
(09:29) रहा है। मैं उसके बारे में जानना चाहता हूं क्योंकि मुझे सुनके ही शॉक लगा कि जैसे ये भी आप जो बोल रहे हो एक तरह से वही दिख रहा है। डिस्क्रिमिनेशन है ना तो एक जवान एक मेल जवान एक फीमेल जवान दोनों की सैलरी सेम है। सब कुछ सेम है। स्टैंडर्ड अलग-अलग है। और आपने ऑफिसर और जवान के बीच की भी बात। वो बहुत ज्यादा है। वो तो ब्रिटिश इरा से ही है। क्या है ये डिस्क्रिमिनेशन? कैसे दिखता है वो? हर जगह पर है। जैसे आप एमएसपी ले लो। एक अधिकारी की एमएसपी और एक जवान की एमएसपी बिल्कुल अलग है। हम अलाउसेस दोनों के डिफरेंट है। जैसे कि आप सियाचीन में भी जा रहे हो तो सियाचीन में
(10:06) एक अधिकारी का जो अलाउंस है वो जवान के अलाउंस से ज्यादा है। एक स्पेशल फर्सेस का अलाउंस मैं मार्कोस की बात करूं तो मार्कोस का जो स्पेशल फर्सेस का जो अलाउंस है वो जवान का अलग है और अधिकारी का अलग है। सेम आपका सबमरीन का है। सबमरीन में भी सेम है कि एक जवान का जो अलाउंस है वह कम है और अधिकारी का ज्यादा है तो पूरा का पूरा डिस्क्रिमिनेशन है। एक रुको ना एक जगह पर हो ना भर्ती एक जगह से हो ना एक जैसे दिखते हो ना एक कोर्स किया हुआ है ना तो फिर आपकी सैलरी आपका अलाउंस अलग-अलग क्यों है? आपका एमएसपी अलग क्यों है? हम नेक्स्ट में आती है आपकी बैटल कैजुअल्टी
(10:48) पेंसिल। हम जब मुझे भी सेम गोली लगी सेम इंजरी मुझे है सेम इंजरी एक कर्नल को ब्रिगेडियर को है तो उसकी जो पेंशन है बैटल कैजुअल्टी की पेंशन वो करीब-करीब 80 से ₹90 बैठेगी अच्छा जबकि एक जवान की एक हवलदार की मेरी पेंशन ₹100 तो 90 करीब-करीब 80 से 90 हजार का डिफरेंस उसी में आ गया एक बैटल कैजुअल्टी पेंशन में जब गोली सेम है इंजरी सेम है बॉडी सेम है बस अधिकारी होने से या फिर उसकी बेसिक पे होने से उसको फायदा क्या मिला? उसको बैटल कैजुअल्टी पेंशन ज्यादा मिली। इंजरी वंड सेम है। सेम ऑपरेशन सब कुछ सेम है। लेकिन पेंशन उसकी ज्यादा है। तो चुभता
(11:33) है ना भाई। गोली तो मैंने भी खाई। खून तो मैंने भी देश के लिए बहाया। उतना ही बहाया। उतना ही पेन मैंने भी लिया देश को बचाने के लिए, जनता को बचाने के लिए। लेकिन यहां पे बैटल कैजुअल्टी पेंशन अधिकारी की ज्यादा हम भाई उतना तो पेन पेन मैं भी ले रहा हूं ना। उतना ही पेन वो ले रहा है। उतनी ही इंजरी उसको है। उतनी ही इंजरी मुझे है। तो वुंड अलग-अलग कैसे हुए? वुंड की पेमेंट अलग-अलग कैसे हो सकती है? क्वालिफिकेशन बेसिस पे क्वालिफिकेशन अलग है ना? आप उसके लिए तो आपकी पेंशन अलग है। आपको बेसिक अलग दिया जा रहा है। करेक्ट। बेसिक पे मैं बात ही नहीं कर रहा। आपकी
(12:05) फैसिलिटी और सारी चीजें मैं उस पे बात नहीं कर रहा हूं। लेकिन भाई जिसने खून बहाया है खून तो सेम बहा ना। हम इंजरी तो सेम है ना। उसके जान की वैल्यू ज्यादा क्यों है? ऐसा हां। नहीं नहीं जान की वैल्यू नहीं बैटल कैजुअल्टी पेंशन उसकी ज्यादा क्यों है हम पेंशन ज्यादा क्यों है उसकी पेंशन तो बराबर होनी चाहिए या तो मेरी भी उतनी हो या उसकी मेरे पेंशन तो बेस सैलरी पे ही होती है ना वो नहीं होनी चाहिए ना बैटल कैजुअल्टी तो हम मैं स्पेशली बैटल कैजुअल्टी की बात कर रहा हूं हम समझ गया मैम वुंड से मैं खून मैंने भी उतना बहाया देश के लिए रिस्क भी मैंने मैंने उसके बराबर
(12:40) ही लिया हम दर्द मैंने भी उतना ही बराबर झेला फेफड़ा मैंने भी गवाया हियरिंग मैंने भी गवाई लेकिन एक एक को मिल रही है ₹1 लाख एक को मिल रही है ₹10 तो यह तो कहीं ना कहीं गलत है ना क्या आर्मी के अंदर दो अलग इंडियन ये आर्मी की बात नहीं मैं ट्राई सर्विज की बात कर रहा हूं ये ट्राई सर्विज का इशू है हम एमएसपी भी ट्राई सर्विज का इशू है पूरे डिफेंस का इशू है पूरा का पूरा तो डिफेंस में क्या दो अलग इंडिया चलता है इस तरह से वहां पर अलग-अलग इंडिया है वहां पर देखो वो एनडीए अलग है ओटीए अलग है आईएमए अलग है जवान अलग है जवान से जो अधिकारी बना वो
(13:14) अलग सब अलग-अलग दिखता है वहां पे। बाहर जनता को तो यह सब पता नहीं लगता है। उनको लगता है कि हां सब हमारे जवानी है, सोल्जर्स ही हैं। और बस हां ये ओवरऑल मोटा-मोटा पता लगता है कि हां इसमें ऑफिसर्स लेवल अलग होते हैं। बट इतना ज्यादा अंदर डिफरेंसेस हैं। क्लब्स बोल रहे हो आप, आप बेसिक राइट्स की बात कर रहे हो। आज तक किसी भी क्लब में किसी भी अध किसी भी जवान की एंट्री है क्या? क्या उसको उसकी मेंबरशिप मिल सकती है क्या? नहीं मिलेगी। क्यों नहीं मिल रही? मैं वही चीज तो कह रहा हूं कि मेरा कॉइन हेड आई टेल आई मेरा। मैं एक अधिकारी हूं या एक टॉप में बैठा
(13:58) हूं। मैं रूल किसके लिए बना रहा हूं? अपने लिए या नीचे वालों के लिए? नीचे वालों के नीचे वालों के लिए। अपने रूल अब मैं अपने लिए रूल का बनाऊंगा। किस क्लब में किसी की एंट्री ना हो बस हम लोग बैठे हैं। तो ऐसा क्यों? जो बाकी के जो देश के लिए खून बहा रहे हैं, जीवन अपना दांव पर लगा रहे हैं, उनके लिए वो क्लब क्यों नहीं है? उनके लिए वो जगह क्यों नहीं है? अब मैं आपको बात बताता हूं नीरज चोपड़ा कि उनको ऑनरी लेफ्टिनेंट कर्नल बना दिया गया। हम क्या किसी परमवीर चक्र विजेता को जीवित को जीवित ही है। तीन तो जीवित ही हैं। क्या कभी उन तीनों में से किसी को अपलिफ्ट
(14:33) किया गया ऑर्डिनरी रैंक के लिए उस लेवल पर? कि इन्होंने देश के लिए परमवीर चक्र इनको दिया गया इनकी बहादुरी के लिए हम या उन्होंने एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी काम किया प्रमोट किसको कर रहे हो फिर आप स्पोर्ट्स को स्पोर्ट्स को जबकि आप खुद कौन हो डिफेंस फोर्सेस हो नेक्स्ट में हम बात करते हैं कि मेरा एक बैचमेट हम जो कि कॉमनव्थ 2010 में हुए उसने 10 मिनिस्टर पिस्टल से गोल्ड जीता। उसको सेम टाइम जेसीओ बना दिया गया। जबकि मेरी प्रमोशन पे तुम कुंडली मार कर बैठे हुए हो। मैंने देश के लिए खून बहाया। मैंने लोगों की जान बचाई। मैंने नेवी का नाम रखा। मैंने नेवी का मान रखा। अपने
(15:14) कैडर का मान रखा वहां पर और खुद इंजर्ड हुआ। अपने आप को बर्बाद किया। मेरे ऊपर टारगेट गोली चला रहा है। मैं टारगेट के ऊपर जो गोली चला रहा हूं। मैं कागज पर गोली नहीं चलाई ना मैंने। जबकि मेरे बैचमेट ने कागज पर गोली चलाई और उसको जेसीओ बना दिया गया। मुझे मेरा ही प्रमोशन नहीं दिया गया। तो क्या कर रहे हो भाई? फिर आप डिफेंस में स्पोर्ट्स को ज्यादा प्रमोट किया जाता तो फिर तो फिर आप इसको स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री बनाओ ना फिर आप इसको डिफेंस मिनिस्ट्री के अंडर में क्यों दे रखा है फिर वो आपको अगर प्रमोट करना है आपको अपने हीरोज़ काउंट
(15:46) करने हैं तो स्टार्टिंग कहां से होगी फिर आपकी वो तो जायज बात ही नहीं है डिफेंस से के हीरो बनने चाहिए ना तो नहीं बन रहे ना और एक भी केस ऐसा नहीं है कि मतलब एक भी नहीं है नॉट ए सिंगल केस बहुत स्ट्रेंज है अभी धोनी जी है एमएस धोनी आई एम बिग फैन उनका उनका भी मैं वहीं पे आ रहा हूं। कभी किसी जवान जिस जवान ने अपना सब कुछ न्योछावर देश के लिए कर दिया हो क्या उसको ओनरी रैंक दी ट्राई सर्विसेस की बात कर रहा हूं। लेकिन आर्मी ने कितने लोगों को अब तक ओनरी रैंक दी है क्रिकेटर्स को धोनी सबसे धोनी को दी। उससे पहले कपिल हम कपिल एयरफोर्स ने किसको दी? सचिन तेंदुलकर को
(16:27) हम तो तुम किसको पूछ रहे हो भाई? और हमारे डीजीएमओ जो अधिकारी थे वो कहते कि मैं तो कोहली का फैन हूं तो अब कोहली को भी दे देंगे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो यह आया कहां से चलन कि स्पोर्ट्स में ऐसे स्टार्ट कैसे हो? ये तो वही जाने मैं तो आपको बता रहा हूं मुझे दिख रहा है मैं उसकी बात कर रहा हूं। क्या आर्मी में वो क्लास का तो आपने बात किया। डिफरेंट क्लास पे डिस्क्रिमिनेशन हो रहा है जो आप बोल रहे हो। कास्ट के बेसिस पे भी नहीं कास्ट बेसिस पे नहीं। एक ही कास्ट है वहां पे सैनिक व्हिच इज गुड। एटलीस्ट ये क्योंकि मेरे दिमाग में भी एकदम डाउट आया कि ऐसा भी
(17:00) होता है क्या? क्योंकि एक तरह का डिस्क्रिप्शन देख रहे हैं। प्लस यह जो आप मुझे वही बहुत बड़ी है। वहां पे अलग-अलग ओआर अलग है। जेसीओ अलग है, एनसीओस अलग हैं। वो जाती तो अलग ही होगी ना वहां। एक जगह पर खाना नहीं है। एनसीओ ओआर्स अलग खाते हैं। जेसीओस अलग खाते हैं। ऑफिसर्स अलग खाते हैं। सबका अलग-अलग है। वहां पे एक खाना नहीं है। खाना भी अलग है। अलग खाना है। टॉयलेट तक अलग है। अलग है। मेसी ही अलग है। सारा ही अलग है। जो अधिकारी हैं वो यूरोपियन स्टाइल में खाते हैं। अच्छा जो जेसीओस हैं वो फिर उनका अलग इंडियन कल्चर है। हां कि चलो चम्मच
(17:37) चम्मच से खा लेते हैं। हां [नाक से की जाने वाली आवाज़] और नीचे लेवल पे आ गए तो वो अपना देसी वाले जुगाड़ आ जाता है। फिर वो क्या जुगाड़ होता है? जो हवलदार और नीचे हैं वो आ रहे हैं। वो कैसे भी खाओ जमीन पे बैठ भी खाते हैं। क्यों नहीं खाएंगे? मिलता है वो मैस में होता है कि बाहर की तरफ कर देते हैं। मॉर्निंग में ब्रेकफास्ट ही बाहर होता है। आर्मी के अंदर तो स्पेशली है। बाहर ही मैक्सिमम बाहर बाहर ही होता है ब्रेकफास्ट। मैथ्स के अंदर बहुत कम होता है। क्यों? बस ऐसे ही है। चाय बाहर, पूरी बाहर, सब्जी बाहर। हां, ये भी मैंने सुना था कि ब्रेकफास्ट
(18:08) में पूरी, सब्जी और सबसे बेहतरीन ब्रेकफास्ट है डिफेंस फोर्स का। ट्राई सर्विज का बता रहा हूं मैं आपको। सबसे बेहतरीन ब्रेकफास्ट पूरी, सब्जी, चाय। क्या हेल्दी ब्रेकफास्ट है। क्या डब्ल्यूho भी शर्म कर जाएगा यार क्या बनाया है तूने वो जो प्रोटीन और जो चीजें चाहिए अंडा या कुछ भी ऐसा वो कभी-कभी मिल जाता है वो कभी-कभी देखने को जो स्पेशल ब्रेकफास्ट हां स्पेशल में आ जाता है वो इंडिया स्वावलंबी कैसे बने? इंडिया ऐसा कैसे बने कि वह खुद से जैसे आपने बोला अपने सामान खुद साफ रखना है। अपने आसपास की सारी चीजों का आपको खुद टेक केयर करना
(18:45) है। जो मिलिट्री में, आर्मी में, नेवी में सिखाया जाता है फ्रॉम द स्कूल बिगिनिंग। ये इंडिया में ये जो कल्चर है, ये डिसिप्लिन जो है ये बाकी लोगों को कैसे आएगा? कैसे इंप्लीमेंट कर सकते? डिसिप्लिन कभी भी इनफोर्स नहीं किया जा सकता। नहीं ये वहां तो किया जा रहा है ना। वहां पर आप बंधे हो। अभी यही बात मैं कहूं कि अग्निवीर के ऊपर लागू नहीं हो रही है। हां अग्निवीर का एक केस आया। क्या हुआ है ये? अग्निवीर के ऊपर सेल्फ डिसिप्लिन या डिसिप्लिन काम ही नहीं कर रहा है। क्यों? क्योंकि उसको पता है चार साल बाद मुझे निकल जाना है। तो बंधता कौन है? बंधता है। फिर वो एक चक
(19:20) एक सर्कल में फंसता है। एक लूप में फंसता है फौजी। हम इसकी वजह से उसको उन सब नियमों का उन सब कानूनों का पालन करना पड़ता है जो लिखे हुए भी नहीं है। अच्छा अनरिटन है ऑर्डर बोलते हैं उनको फिर वर्बली ऑर्डर है जो कहीं पर लिखित नहीं है उनको भी वो फॉलो करता है क्योंकि उसके पास में एक एक लूप में आ जाता है हम कि भाई अपने सीनियर को आप मना नहीं कर सकते एक रूल आ गया लेकिन जो अनैतिक कार्य हैं हां वो भी उसी के अंदर आ गए आपकी अनियमितताएं भी उनके अंदर आ गई अनैतिक कार्य भी उनके अंदर आ गए सारा कुछ आ गया जो एक ऑफिसर लॉबी है देश के अंदर सेना के अंदर
(19:57) उन्होंने अपने अनितैतिक अनैतिक कार्यों को भी डिसिप्लिन के अंदर घुसेड़ दिया। कैसे क्या अनैतिक कार्य करते हैं? जैसे अपना कुछ काम कराना है। जी कैसा? अपना रिजर्वेशन करवाना है। अपना फ्लाइट बुकिंग करानी है। अपना सिटी से कुछ काम है। अपने घर पे राशन पहुंचवाना है। अच्छा। अपना खुद का छोटे-मोटे काम है। कहीं से कुछ लाना है, कहीं को कुछ पहुंचाना है। गेस्ट आ रहे हैं। गेस्ट को रिसीव करवाना है। गेस्ट को घुमाना है। ये सब वो वेटेड नहीं है। बट नहीं लिखित में नहीं है। लेकिन वो करवाया जा रहा है। बच्चों की फीस जमा करवानी है। तो जा रहा है बंदा ऑफिस।
(20:33) वो सालों से कराया जा रहा है। वैसे ब्रिटिश एरा से चालू है वो। हम तो वो वो अभी भी चालू है। ये पर्सनल स्लेवरी हां यू कैन से तो मैंने बोला ना अनैतिक कार्य है। उनको आपने डिसिप्लिन का नाम देकर उसको चोला उड़ा दिया है। लेकिन वो अनैतिक ही हुआ ना। आप उसको डिसिप्लिन नहीं कह सकते। बंदा क्यों फंसा हुआ है? उसको पता है कि यार जैसे तैसे 15 साल कट जाए। हम मेरी पेंशन और मैं यहां से निकल जाऊं। बट ये अग्निवीर के साथ नहीं हो पा रहा। अग्निवीर तो बिल्कुल ही उल्टा पड़ गया। अभी जो स्कीम थी डिफेंस की स्कीम वो डिफेंस के ऊपर ही उल्टी पड़ रही है
(21:07) क्योंकि चार साल में वो वो उसको मतलब नहीं है उसको मतलब नहीं है उसकी तनख्वाह भी कम है हां कितनी है तनख्वाह अभी 25 ₹00 तनख्वाह है उसकी और करेगा क्या उसमें हम वो मोबाइल का बिल ये बिल वो बिल उसी को पूरा कर पा रहा है पढ़ाई उसकी उस लेवल पर हो नहीं रही है दूसरी बात ये है कि मान लो कि वो चार साल की सर्विस में उसको आपने कोई इंटरव्यू के लिए कॉल नहीं दे रहे हो आप उसको एसएस एसएससी का शॉर्ट सर्विस कमीशन का या आउटीए का आईएमए का या फिर एयरफोर्स एकेडमी का या एनडीए का वो भी आप अपनी अपॉर्चुनिटी दे रहे हो जबकि ये अपॉर्चुनिटी आप एनसीसी कैडिट्स को दे
(21:44) रहे हो हम अग्निवीर को नहीं दे रहे हो क्यों यही तो बात है आप तीन साल को बच्चा एनसीसी करता है उसमें क्या सीखता है परेड ही तो सीखता है लेफ्ट राइट और थंब हम फ्लूट इसके अलावा कुछ सीखता हो तो मुझे बता दो हम छोटे-मोटे नेविगेशन फर्स्ट एड यह वो छोटा-मोटा हो गया हम वेपन को खोलना बांधना हो गया हम जब जबकि आपको जो एक सोल्जर है उसको एक के फायरिंग है पिस्टल फायरिंग्स है वो सारी चीजें सिखाई जाती है विद इन सिक्स मंथ वो सीख लेता है हम जो एक एनसीसी कैडिट तीन साल में सीख रहा है वो एक आर्मी का जवान हम छ महीने में सीख रहा है लेकिन एनसीसी के
(22:26) जो बच्चे हैं हम उनको आपने एक इंटरव्यू की अपॉर्चुनिटी दे दी हम कि आप डायरेक्ट इंटरव्यू दे सकते हो सॉफ्ट सर्विस कमीशन का। लेकिन वो अपॉर्चुनिटी आपने एक सैनिक को नहीं दी। क्यों? ऐसा क्यों है? मतलब ये तो वही बताएं ना। क्या ऐसा है कि क्योंकि एजुकेशन का फैक्टर वो ले रहे हैं कि किसी का सर्टिफिकेशन को ज्यादा वैल्यू दे रहे हैं और उनको ज्यादा क्वालिफाइड मान रहे हैं कि आप एज अ ऑफसर लेवल के आप थिंकिंग वाले लोग हो। इसलिए ऐसा कर रहे हैं। तो वो भी तो डिफेंस का पार्ट है। उसको भी ग्रेजुएशन करा दो भाई। जब आप एनडीए में भी तो ग्रेजुएशन ही कर रहा है ना बंदा।
(22:58) हम तीन साल में क्या कर रहा है? एजुकेशन पूरी कर रहा है और अपनी ट्रेनिंग कर रहा है। तो वो पार्ट तो वहां पे भी पूरा कर सकता है। हम उसका बेसिक डाउट क्लियर है। बेसिक फंडामेंटल डाउट्स जो है सॉरी हम बेसिक फंडे जो है फौज के उसके सारे क्लियर है कि नहीं है? करेक्ट। आपको जो जो चीज सिखानी थी उसने सीख ली कि नहीं सीख ली? वो 12्थ ही है चाहे। अब आप उसको डायरेक्ट एनडीए के लिए 10% 20% कोटा दे सकते हो कि नहीं दे सकते हो? आप कोटा कहां दे रहे हो? पैरामिलिट्री में। पुलिस में क्या बनेगा जा के कांस्टेबल? हम क्या उसमें से एक भी या 10% या 20% बच्चे
(23:32) ऐसे हैं नहीं कि जो अधिकारी बनने की क्वालिटी रखते हैं और डायरेक्ट एनडीए क्वालीफाई कर सकते हैं? बिल्कुल कर सकते हैं। जब वो टेस्ट देकर ही गया ना अंदर तो फिर उसको दोबारा टेस्ट देने की जरूरत क्या? डायरेक्ट इंटरव्यू लो। हम नहीं नहीं आपको अगर ग्रेजुएशन चाहिए तो वो करवा। ग्रेजुएशन तो आप कर रहे हो ना। रिक्वायरमेंट का क्राइटेरिया लो। नहीं नहीं हम तो इनको उधर ही डालें। आप खुद नहीं सोच पा रहे हो उतना बड़ा। जब सोच ही आपकी बड़ी नहीं है तो देश के बारे में कैसे आप बड़े निर्णय ले सकते हो? आप अपने सैनिकों के बारे में निर्णय ले नहीं ले पा रहे हो ठीक से। हम
(24:04) बहुत सारे सैनिक हैं जो ग्रेजुएट हैं हम। आप उनका भी डायरेक्ट इंटरव्यू नहीं करवा रहे हो। उनको कैसे फिर लेते हैं? एग्जाम दो। फिर से एग्जाम दो। हां एग्जाम दो। तो फिर एनसीसी कैडिट से भी आप एग्जाम लो। हम तो आप एक कोटा तो बनाओ। आप एक अट्रैक्शन का पॉइंट तो बनाओ कि फौज क्यों अट्रैक्टिव बने? हम फौज अट्रैक्टिव है ही नहीं। फिर वो वो अग्निवीरों के लिए तो और भी डिस्ट्रक्टिव होगी। फिर वो हम वो तो ऐसा कि कुछ नहीं है तो फिर अग्निवीर बन जाओ। कुछ नहीं है तो फिर अग्निवीर बन जाओ जी वाला हिसाब हो गया फिर वो जबकि इतना उसके बारे में मतलब माहौल बना
(24:42) था अग्निवीर के बारे में और इतना चर्चा हुई थी जब आया था तब। तो अभी क्या हो रहा है? वो तो उल्टा पड़ गया। क्योंकि एक चीज होती है भाई। कि आप बांध बांध बांधोगे कैसे किसी चीज को? अब चारों लूप तो आपने खुले रख दिए। अब आप कह रहे हो जी घोड़े को दौड़ाओ। हम चारों लूप आपने खुले रख दिए। अब कहते हो घोड़े को दौड़ाओ दौड़ेगा क्या? सब कुछ निकल जाएगा। वो अकेला ही दौड़ जाएगा फिर वो तो वही आपका हाल हो रहा है। स्लेवरी वाला आपने बोला आर्मी में स्लेवरी जो जिस तरह का हो रहा है ये बहुत ही स्ट्रांग वर्ड होता है ऐसे क्योंकि अभी जो और आपने
(25:13) बताया भी कि कैसे अपना ही काम करवा लेते हैं ये। तो ऐसा मतलब ये सिस्टम में ऐसा कैसे आ गया ये? ये ब्रिटिश सिरा से अडॉप्टेड है सब कुछ। अच्छा सब कुछ ब्रिटिश इरा से अडॉप्टेड है। आपके नेवी एक्ट भी है, आर्मी एक्ट भी है, एयरफोर्स एक्ट भी है। उनमें ऐसा कहीं पर नहीं है कि आप किसी व्यक्ति को अपने अधीन करके अनैतिक कार्य या फिर इस तरह से करो। ऐसा कुछ है नहीं। हम लेकिन जो चल रहा है उसको रोके कौन? उसको रिफॉर्म कौन करे? नए सोल्जर्स बनाने के लिए नई माइंडसेट को कहां से लाए? आप जो लॉबी है वो पूरी की पूरी तो खिलाफ है। सरकार इसमें कोई दखल अंदाजी करती नहीं है।
(25:50) ये पार्लियामेंट में भी मुद्दे उठे हैं। कई बार उठाया मुद्दा कि ये लोग इस तरह से अपना ऑर्डरली बनाते हैं या उनको बड्डी सिस्टम है। सारा कुछ पार्लियामेंट तक में डिस्कशन हुआ। लेकिन कभी डिफेंस फोर्सेस से नहीं पूछा गया कि भाई ऐसा क्यों है? क्या है? कैसे? तो किससे पूछेंगे? डिफेंस मिनिस्टर से पूछते हैं। बस वहीं पर मामला घूम जाता है कि यह तो सेना का मामला है। सेना जाने और सेना किसी के लिए जवाबदेही नहीं रखती है। जनता के लिए ऐसी कोई जवाबदेही नहीं है। सिंपल सी चीज बताता हूं मैं। एक छोटी सी मैं हम लोग गए थे फ्रेंच कमांडोज़ के साथ में
(26:24) हम एक्सरसाइज करने के लिए और यूएस सील के साथ में एक्सरसाइज थी। मैं भी उस टीम में था। हम तो वहां पर बिल्कुल अलग सिस्टम है। बिल्कुल अलग। वहां पर अधिकारियों की नहीं चलती। वहां पर एक चीफ रहता है उसी के चलता है। वही सर्वे सर्वा है सब कुछ। चीफ है। हां फ्रेंच में और यूएस में भी सेम। वो चीफ ही है सब कुछ। चीफ ही करेगा सब कुछ। अधिकारियों को साइड में कर दिया जाता है। साइड हो जाओ। बाकी वही है मैन। हम तुमने देखा बहुत कुछ देखा। बहुत कुछ सीखा। तो वो तो फुल सेंट्रलाइज हो गया। फुल एक सेंटर बंदा है। चीफ है। चीफ ही है। चीफ नीचे से जो बन कर गया है।
(27:01) हम नीचे से जो बन कर गया वो चीफ है। उससे ऊपर वो रैंक नहीं जाएगा। अधिकारी नहीं बनेगा। लेकिन वही सर्वे सर्वा है। वही मैन है। मैन ऑफ़ ऑनर देख लो। उसमें चीफ ही मैन है। हम मैन ऑफ़ ऑनर देखी आपने। उसमें एक चीफ ही मैन है। चीफ ही है। पूरा सेंट्रलाइज। अब सेंटर पिलर जो देखोगे चीफ ही है तो चीफ के इर्द-गिर्द ही पूरी कहानी घूमती है। चीफ और वो बंदा बस लेकिन यहां पर ऐसा नहीं है। तो जैसे हम लोग वहां पे एक्सरसाइज वगैरह सारी चीजें करके आए सब कुछ हुआ तो हमारे अधिकारी ने कहा कि जो यहां जो देखा है जो कुछ देखा है जो कुछ सीखा है यहीं पे भूल
(27:32) जाओ। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये चीज वहां पर एक्सरसाइज नहीं हो सकती। [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्योंकि जब हमने शाम को पार्टी थी फ्रेंच वालों के साथ में हमारी पार्टी शाम को पार्टी हुई। फिर हम तो पार्टी के बाद में हम थोड़ा सा बाहर निकले बैरक से घूम रहे थे तो देखा जो सीओ था उनका वो जूनियर मोस्ट था सब में रैंक वाइज नहीं सर्विस वाइज जूनियर मोस्ट था वो बंदा कचरा उठा रहा है सीईओ क्यों कचरा उठा रहा है वो सारा जो फैला था सब कुछ कचरा उठाकर वो डस्टबिन में डाल कर आया सारा कचरा सब कुछ उठाया उसने बट वहां पे ऐसे वो नहीं था सिस्टम की
(28:10) सिस्टम ही यही है यही सिस्टम है उनका वहां पर बट वो उसके लिए थोड़ी बना है सीओ हां तो वही तो बता रहा हूं मैं आपको यहां पे उठा देगा सीओ इसी के लिए तो बना है वो ही इस ही वास अ जूनियर मोस्ट इन सर्विस तो वही वही वही करेगा चीफ का ऑर्डर है और चीफ का आर्डर ही सब कुछ है तो ऐसा नहीं है सिर्फ इंडिया में ही है बाहर भी और ज्यादा क्या नहीं ये तो सिंपल है ना जो अधिकारी रैंक वाइज हो गया ना फिर वहां पे तो यहां पे थोड़ी करेगा सीओ यहां पे तो कैप्टन बनने के जस्ट क्या जैसे ही कैप्टन बना है वही पता नहीं क्या है वो कचरा ना उठाए हम वह चार लोगों को भेजेगा
(28:45) जाओ उधर से यह करो वह करो लेकिन वहां पे एक अकाउंटेबिलिटी दी उसको हम किसको चीफ ने अकाउंटेबिलिटी दी कि ये सारा कचरा तुम उठाओगे हम उठा रहा है वो चीफ तो फिर जूनियर में किसी को भी कुछ भी दे सकता है कि भाई तुम ये करो चीफ का है ना सब कुछ सीओ वहां पे नहीं है मैन वहां पे चीफ मैन है चीफ जो नीचे से पहुंचा है एक सिपाही से बनकर सिपाही से लेकर अपनी यात्रा जिसने पूरी की है सर्विस उसकी सबसे ज्यादा है उसने वहां पे क्वालिफिकेशन का कोई कोई रोला ही नहीं है क्वालिफिकेशन का कौन कितना क्वालिफाइड है क्या अधिकारी है ना तो उसकी सारी चीज़ अलग है वर्क फैसिलिटी
(29:19) सारी चीज़ अलग है केबिन वेबिन सब कुछ अलग है लेकिन दैट डजंट मीन कि वो सारी चीजों से बच जाएगा इट्स ईयर ऑफ़ सर्विस ईयर ऑफ़ सर्विस एंड एक्सपीरियंस ऑफ़ सर्विस हां आपने किस लेवल का कंट्रीब्यूट किया उसके बेसिस पे आपका वो पहुंचते हो आप चीफ बनते हो एक्सक्ट्ली तो चीफ मैन है वहां तो ये तो फॉलो किया जा सकता है लेकिन यहां पे कौन मानेगा उसको यहां पे एजुकेशन बेस ज्यादा मुझे लगता है कि वो एजुकेशन एक तो एक बेसिक हरारकी हरार्की को एजुकेशन से आपने प्लस ब्रिटिश इरा और इन सब चीजों से आपने कर दिया। फॉलो किया। फॉलो किया है। तो आप उसको उसी को अभी भी
(29:52) फॉलो कर रहे हो। तो क्या ये ब्यूरोक्रेसी और ये जितने सिस्टम बने हैं क्या ये हमारे एक्चुअली मिलिट्री ऑपरेशन को स्लो करती है? बहुत जगह पे स्लो करती है। अच्छा कैसे? बहुत ज्यादा इफेक्ट करती है। मोरल अगर किसी भी सेना का मोरल डाउन है किसी वजह से तो कहीं ना कहीं तो इंपैक्ट आएगा। कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं तो ब्लास्ट होगा। कहीं ना कहीं तो गलतियां होंगी। तो जहां पर ज्यादा गलतियां होंगी वहां पर आपके ज्यादा कैजुअल्टी होगी। गलतियां भी इस वजह से क्या जवान लोगों का कम होता है। आप देखो सुसाइड केस देखो इंडिया में कितना हायर है सेना में।
(30:26) हम सुसाइड केस कितना बढ़ा हुआ है। ये पार्लियामेंट का भी इशू था। पार्लियामेंट में भी इस पर चर्चा हुई थी। हम्म। तो सुसाइड केस बहुत हैं जो लोअर लेवल पे बहुत हायर रेंज है। किस लिए लोग सुसाइड करते हैं? उसके पास ऑप्शन नहीं रहता कुछ छुट्टी नहीं मिल रही है या फिर कुछ और चीज़ हैं उसके पास फ्रीडम नहीं है किसी चीज़ की हम वो फंसा हुआ है तो क्या करता है कई बार क्या होते हैं वो सीधा लेता है तो खुद को गोली मार लेता है दूसरे को गोली मार के खुद को गोली मार लेता है हायर रेट है इंडिया का ऑल ओवर द वर्ल्ड वी आर नंबर वन नंबर वन हां सुसाइड केस में डिफेंस फोर्सेस सुसाइड
(31:03) केस में इंडिया सबसे ऊपर है सैड टू हियर दैट कभी सुना सुनात थे ये बातें कहां इतना मतलब न्यूज़ में आएगी या कोई नहीं बताना तो मैंने बोला ना पार्लियामेंट क्या कहती है बोले सेना का मामला है जी सेना जाने सेना में डिपार्टमेंट बना दिए हैं इनके ठीक है चल रही है और वीआईपी कल्चर किसको दिया जाता है सब अधिकारी और सब उनके सब कुछ उन्हीं के कंट्रोल में है सब कुछ सो जब देश अ सोल्जर को हीरो बोलता है तो सिस्टम क्यों नहीं बोलता है सिस्टम क्यों ऐसा है बोलता है ना सिस्टम मरने के बाद ये हमारा हीरो है दो दो केस बताता हूं मैं आपको मेरी ही मार्कोस के
(31:42) दो बंदों ने पैराशूट से फ्री फॉल किया हम एक बंदा एक्सपायर हो गया एक बंदे को कमर में चोट लगी वो कमर खराब हो गई जो बंदा शहीद हो गया उसके गांव में उसकी डेड बॉडी को लेकर जाया गया और सब नारे जब तक सूरज चांद रहेगा तुम्हारा नाम रहेगा उसके बाद में मार्बल की मूर्ति वहां पर लगा दी गई। यूनिट में कांसे की मूर्ति लगा दी गई। गांव में गेट लगा दिया गया उसके नाम का। हम और कंट्रीब्यूशन करके उसको करीब-करीब 25 30 लाख सभी मारकोस ने उसको घर पे दे दिया। हम अब जिसकी कब्र टूटी है हम
(32:25) उसको बैटल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट दे दिया। हम जिस डेट से उसको चोट लगी थी हम और अब तक जो सर्विस में था उसको कैडर से डीइंडक्ट कर दिया। कैडर से बाहर निकाल दिया। और जब तक उस कैडर में रहा, जब से चोट लगने तक जब तक और जब तक उसको डीइंडक्ट किया, कितनी जितनी उसकी मारको अलाउंस उसने लिया, करीब-करीब ₹ लाख उसकी रिकवरी बिठा दी। ₹ लाख भी ₹ लाख भी रिकवर कर रहे हैं। क्यों? यह तो बैटल कैजुअल्टी डिक्लेअ किया। कैडर से बाहर भी फेंक दिया क्योंकि उसकी कमर खराब हो गई। वह ऑपरेशन में गया। वो पैराशूट से जंप करते हुए उसकी कमर खराब हो गई। दो लोग दोनों के साथ में अलग
(33:07) बिहेव। मैं आपको करंट सिचुएशन बता रहा हूं। जो केस मैं फॉलो कर रहा हूं। मैं केस सेफ्टी में है उसका कि मैं उसकी रिकवरी के खिलाफ हूं। वो रिकवरी जो पहले पैसे दिए थे वो जब से चोट लगी है जब तक वो डीइंडक्ट हुआ हम तब तक जो पैसे मिले उसमें जो ढाई से दो ढाई साल का जो हम पीरियड रहा हम उसमें जो उसको उसमें जो मार्कोस अलाउंस मिला हम उसको ड उसको रिकवर कर लिया गया वो करीब सात हां मतलब कट रहा है ना अभी तो रिकवरी है आपने आर्डर पास कर दिया ना तो रिकवरी है वो जब तक कि उसका हायर अथॉरिटीज के पास में जाके कोर्ट में जाके उसको चैलेंज ना क्या उसको पैसा नहीं मिल रहा है जो उसको
(33:46) मिल रहा नहीं नहीं उसके सैलरी से कट रहा है क्या क्या पेंशन मिलती है सैलरी है उसकी तो अभी सैलरी आ रही है उसके 25 ₹00 फिर हम ₹00 35000 आप काट रहे हो उसके हम मार्कोस को कितनी मिलती है सैलरी भी सैलरी अलग-अलग है ना सबका रैंक वाइज रैंक वाइज हां रैंक वाइज है कितने से कितने अलाउंस 25000 है मान लो हम 22000 समथिंग है मार्कोस का अलाउंस है 22000 हम डीप मनी अलग से है डीप मनी जो डीप मनी मतलब गोताखोरी की तो वो बंदा गोताखोरी भी नहीं कर पाएगा ना मार्कोस रह पाएगा तो उसका डैमेज कितना हुआ 40 से 45000 पर मंथ का डैमेज हुआ ऊपर से आपने क्या किया उसको कैडर से बाहर कर दिया
(34:23) बेचारे चोट कहां कहां पर लगी उसको देश के लिए काम करते हुए देश के लिए चीजें करते हुए दो लोग दोनों अलग-अलग एक के साथ आपने क्या बिहेव किया और दूसरे के साथ आपने क्या बिहेव किया हम मतलब जिंदा रहो तो कोई वैल्यू नहीं है मरने की नहीं जिंदा रहोगे तो आपको लात और मारी जाएगी जैसे मैंने बोला ना उसको कैडर से ही बाहर कर दिया हम कि तुम अब इस कैडर में नहीं रहोगे तुम्हारी सेवा नहीं उसकी तुम्हारी सेवा समाप्त हम क्योंकि तुम फिट नहीं होगी उसके लिए तो अब तुम तुम निकलो यहां से इसका कोई एक स्पेशल प्रोविजन नहीं है कोई प्रोविजन नहीं है तुम प्रोविजन लाओ तो
(34:56) कोर्ट में जाके अपना डिसाइड कर लो तो फिर एक एक ही कैडर या एक ही सेना दो व्यक्तियों के साथ में अलग-अलग बिहेव कैसे कर सकती है? एक व्यक्ति के लिए बोला जा रहा है जब तक सूरज चांद रहेगा क्योंकि वो शहीद हो गया। एक व्यक्ति उसी ऑपरेशन में घायल हो गया। उसको तुमने क्या किया? कैडर से ही बाहर कर दिया। बैटल कैजुअल्टी पकड़ा और कैडर से बाहर कर दिया। तो जिनके जिनकी डेथ हो गई पोस्टमस उनके परिवार को कुछ पैसे जाते हैं। वो तो सेना का अलग पार्ट है। वो जो जाएगा जितने भी उसके जितना भी बनेगा वो तो जाएगा ही जाएगा। नहीं पर मंथ बेसिस पे आ गया
(35:30) वो तो पेंशन आ गया ना फिर पेंशन आ जाएगी फैमिली पेंशन आ जाएगी फिर तो हम वो फैमिली पेंशन में आ गया तो जब तक वो जब तक उसकी सर्विस है तब तक उसकी फैमिली पेंशन है तब तक सर्विस काउंट है उसकी हम तब तक उसकी फैमिली पेंशन है फिर नॉर्मल पेंशन है हम और जो जो इंजर्ड हुआ उसको उसको कैडर से ही बाहर कर दिया तो अब उसको कुछ नहीं मिलेगा उसका तो पैसे वो रिकवर कर लिए ना क्या मिलेगा उसको और कोई पेंशन या कुछ भी नहीं कहां से पेंशन मिलेगी वो तो सर्विस में ही है वो पेंशन कहां से मिलेगी सर्विस के बाद उसको देंगे सर्विस के बाद कुछ जैसे सब सोल्जर है वो
(36:06) भी एक इंजर्ड सोल्जर है बहुत स्ट्रेंज है ये ये पॉलिसी बनाया किसने ये सोचने की वही तो बोल रहा हूं मैं आपको मैंने तो बनाया नहीं है देखो बोला पॉलिसी किसके लिए बोला मेरे लिए सिस्टम रेस्पेक्ट नहीं करता है सोल्जर्स को ये बात तो क्लियर आ रहा है कि कौन करता है समाज में मुझे बता दो एक का नाम नहीं मतलब ऐसे बात किया जाए तो तो सोल्जर को काफी रेस्पेक्ट किया जाता है। उस रेस्पेक्ट से 2 किलो आटा ला के दिखा दो मुझे। हां ये वेटरंस हमेशा ही ये कंसर्न आजकल उठा रहे हैं कि पोस्ट रिटायरमेंट सपोर्ट और पेंशन का सपोर्ट वो सही नहीं है। सफिशिएंट
(36:40) नहीं है। तो ये चेंज क्यों नहीं हो रहा है? इसको इसके लिए ये रिफॉर्म्स इतने पेंडिंग क्यों है? करे कौन? जो हायर वो करेंगे क्योंकि पॉलिटिशंस कर सकते हैं। पॉलिटिश को मतलब नहीं है ना। वोट बैंक नहीं है। हम सैनिक इस देश के अंदर वोट बैंक नहीं है। अच्छा इसीलिए कोई भी नेता, कोई भी प्रधानमंत्री, कोई भी रक्षा मंत्री सेना के जवानों की तरफ नहीं देखते हैं। और ना ही उनके वेलफेयर के लिए कुछ करते हैं। आपको नौकरी की चाहिए तो ठीक है भैया। कहीं और देख लो गार्ड वार्ड का इधर उधर का जो अधिकारी हैं रिटायर हुए हैं। उन्होंने अपनी दुकान खोल रखी है। सिक्योरिटी
(37:19) एजेंसीज हैं। ये सब चीजें हैं। उन्होंने खोली हुई है। आ जाओ बाहर निकलो मेरे पास ही आके काम कर। हम प्राइवेट हां प्राइवेट है। तो लेकिन वोट बैंक क्यों नहीं है? मतलब वोट बैंक सैनिक है ही नहीं। कभी नहीं रहा है। मेजॉरिटी में नहीं है कभी सैनिक। कितने लाख हैं? हम कितने लाख सेना है? 25 से मैक्स टू मैक्स 25 लाख सारा मिला के 15 16 लाख आर्मी हो गई। चलो मैं स्टेट गवर्नमेंट की बता देता हूं। कितने सैनिक विहार बनाए हैं यूपी गवर्नमेंट ने किसी भी गवर्नमेंट ने सैनिकों के लिए कितने घर दिए हैं किसी भी स्टेट गवर्नमेंट ने सेंट्रल गवर्नमेंट ने
(37:51) कितने सैनिकों के लिए घर बनाए हैं जीरो कंसर्न है जीरो बहुत बड़ा कंसर्न है ये कौन से वेलफेयर की बात कर रहे हो एक छत नहीं है एक सैनिक के पास में क्या इस देश की कोई भी पॉलिसी सेना की सैनिकों के लिए है भाई चलो हम आपका कंसर्न रखते हैं आपके लिए चलो यहां पे एक एक छोटी मोटी सिटी बनाते हैं ये सेइंग याद आती है कि जो बोला गया था कि ये मत पूछो कि आपको देश ने क्या दिया? ये पूछो कि आपने देश को क्या [हंसी] दिया? [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] तो मैं भी तो वही कह रहा हूं कि आप दो लेकिन कंट्री को आप दो लेकिन कंट्री आपको कुछ नहीं देगी। ये ये श्योर
(38:26) है। ये बिल्कुल श्योर है। नहीं मैं तो पूछूंगा। मैं पूछूंगा देश के सैनिकों के लिए आपने क्या किया? पहले तो मैं पूछूंगा सारे तीनों सेना अध्यक्षों से कि आपने सैनिकों के लिए क्या किया? फिर मैं डिफेंस मिनिस्टर से पूछूं सेना कि देश ने सैनिकों के लिए क्या किया क्योंकि यह मेरा इशू नहीं है। मेरा कंसर्न नहीं है। यह सभी जितने भी सैनिक हैं जो देश के लिए कुर्बानी दे रहे हैं उनके लिए है। इतने सब चीजें होने के बाद क्या पैटिज्म बचता है? आर्मी, नेवी सारी फर्सेस में डिफेंस तो देखो देश के अंदर है। मैं सैनिकों को मानता हूं। उनके अंदर पूरा है, जज्बा है,
(38:59) जोश है, जुनून है, देश की सेवा में लगे हुए हैं। उनको पता है ये मातृभूमि है। हम ही इसके रक्षक हैं। हम वो मर भी जाते हैं तो भी उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है। मर गए। हम ये चीजें तो हमें सोचनी चाहिए ना। बाहर निकल कर आ गए। उनके लिए आवाज उठाएं। उन्होंने जो कुर्बानी दी है उनको सही वैल्यू मिले। हम जो कंट्रीब्यूशन है उसका देश के लिए उसको सही स्पेस दिया जाए। हम उसका नाम सिर्फ शहीद स्मारक पर तक नहीं लिखा जाए। हम उसकी कहानी किताबों तक जाए। ये किसकी जिम्मेदारी है? हमारी जिम्मेदारी है। जो जो बाहर गए हैं जो लोग आवाज उठा सकते जिनके अंदर
(39:37) कैपेबिलिटी है? तो वही बता रहा हूं कि परमवीर चक्र जितने तीनों है जीवित हैं। क्या उनकी कहानी किसी किताब में है जो स्कूल में पढ़ाई जा रही है। किसकी कहानियां है? मुगल्स की। वो तो किसकी कहानियां है? महाराणा प्रताप की। अरे भाई जो अब के महाराणा प्रताप है जिन्होंने भी पिछले 15 20 साल के अंदर जो देश के लिए कार्य किया है देश के लिए गोलियां खाई है उनकी कहानियां तो डालो आप तीन परमवीर चक्र जीवित है किसी की कहानी किसी किताब में किसी सिलेबस के अंदर है क्या आप किसको पढ़ा रहे हो क्या पढ़ा रहे हो आप जो जीवित है उनकी कहानी तो सिखा दो कुछ तो बता दो इस देश के
(40:12) बच्चों को हम क्या सिखा रहे हो फिर आप जो कॉकरोच पार्टी है उनके उनको नहीं पता होगा परमवीर चक्र कितने हैं जीवित है उनको पूछ लो जाके नहीं है। क्यों? पढ़ाया नहीं कभी। पढ़ाया क्या है? कौन सी हिस्ट्री पढ़ा रहे हो फिर आप? कारगिल ही पढ़ा दो। एक चैप्टर डाल दो कारगिल। नहीं एक कारगिल एक चैप्टर डाल दो 261 चैप्टर डाल डाल दो 1971। अरे बच्चों को सिखाओ तो सही। युद्ध भी कोई चीज होती है। हमें अपने देश की सुरक्षा करनी है। रक्षा करनी है। हमारे सिटीजंस हैं। हम उनकी रक्षा कौन कर रहा है? फिर कैसे करेंगे फिर हम? एनसीआरटी पढ़ा क्या रहा है? सीबीएसई पढ़ा क्या रहा है?
(40:52) आपके लाइफ में सबसे ज्यादा बड़ा दुश्मन आपको कौन लगा? जो टेररिस्ट से आप लड़े हो या उसके बाद जो आप ब्यूरोक्रेसी में और इस समय सिस्टम जो कुर्सी पर बैठे हुए लोग हैं वो वो है सबसे इस देश के दुश्मन मेरे नहीं हम मेरा कोई दुश्मन नहीं हम मेरा कोई दुश्मन नहीं है। समाज के दुश्मन है। वो समाज टेररिस्ट से ज्यादा बड़े। टेररिस्ट से ज्यादा वो ज्यादा बड़े हैं। क्यों? क्यों? उनकी ईगो बहुत बड़ी है। वो बड़ा नुकसान दे रहे हैं। बड़ा नुकसान देश की जनता का और देश का कर रहे हैं। मेरा कोई पर्सनल एजेंडा नहीं है। पर्सनल इशू मेरे नहीं है। मैं एक लाइन बना
(41:25) रखी है। लाइन में लग के मिलेंगे तो मैं भी डीएम से लाइन में लग के मिल लेता हूं। क्या वहां पे ग्रीन चैनल है सोल्जर्स के लिए? कुछ नहीं है। क्या अपनी बात को कह पाता है किसी से? नहीं। क्या इंडिया में सोल्जर्स को सिर्फ वॉर टाइम में याद किया जाता है? उसको तो कभी याद नहीं किया जाता। व टाइम में वही जानता है वो याद कर रहा है। [हंसी] उसको क्या पता कौन याद कर रहा है। नहीं मीडिया चैनल सर जो तो मीडिया मीडिया तक है ना मीडिया तो सब बिकाऊ है। हम कौन सा मीडिया चैनल उठा रहा है? आज तक किसी बड़े मीडिया चैनल ने मुझे बुलाकर कुछ पूछा है। किसी की हिम्मत नहीं है। लाइव
(41:58) लाइव करा दो आप। मैं बताता हूं सबको जितने बैठे हो क्याटिज्म होता है? क्या आप कर रहे हो? क्या नहीं कर रहे हो? क्या-क्या किया आपने? डैमेज कर रहे हैं आप देश। आप नेगेटिविटी फैला रहे हैं। दुबे का नाम सबने सुन लिया होगा। गाड़ी पलट के मर भी गए। लाइव कर रहे हैं उसके पीछे। क्या किसी सोल्जर के लिए आपने ऐसा किया? मैं तो 30 कि.मी.
(42:17) दूर रहता हूं सारे स्टूडियो से। मेरा घर ही 30 कि.मी. है। क्या कोई बड़ा कोई भी चैनल मेरे घर तक गया आज तक? पाकिस्तान में कसाब के घर तक पहुंच गई मीडिया। बीबीसी तक पहुंच गई। मेरे घर पे तो नहीं आई। मैंने लोगों को बचाया। वो 168 लोगों को मारने में भूमिका थी। मैंने 180 लोगों को बचाया तो भी मेरे घर तक मीडिया नहीं आई। बीबीसी कसाब के घर पहुंच गया। हम सब लोग जानते हैं। इट्स नॉट माय फॉल्ट। इट्स नॉट माय फॉल्ट। एंड नन ऑफ माय बिनेस। ये इनको खुद को देखना चाहिए। आईने में झांक कर देखना चाहिए। तुम कर क्या रहे हो। और तुम किस लेवल पर देश को गिरा रहे हो और
(42:56) तुम किस लेवल तक गिर चुके हो। नहीं नहीं दिखाई दे तो आईना मैं दिखा दूंगा भाई तुम्हें। आ जाओ बैठा हूं मैं य पे मैं मेरी लड़ाई नहीं लड़ रहा हूं ये मेरे कोई पॉइंट नहीं है मेरा कोई एजेंट मैं तो देश के सैनिकों की बात कर रहा हूं उन वो देश के अंदर और कितना कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं वो कितने कैपेबल है उनकी कैपेसिटी को और कैपेबिलिटी को कैसे और एनहांस किया जा सकता है देश को नई ऊंचाइयों पर कैसे लिया जा लेकर हम जा सकते हैं और सैनिक की भूमिका उसमें सबसे ऊपर है क्योंकि सबसे पहले कुर्बानी सैनिक देगा हम जनरल नहीं देगा सैनिक देगा, एक सिपाही खड़ा होगा। जनरल
(43:36) आहुति नहीं देगा। एक सिपाही आहुति दे रहा है। तो सिपाही की सुनी जानी चाहिए ना कि जनरल की। ऐसा क्या कठोर सच है सबसे बड़ा जो आपको लगता है कि मिलिट्री के बारे में, आर्मी के बारे में सिविलियंस को नहीं पता है जो उनको झेलना पड़ता है। बहुत कुछ नहीं पता है। [हंसी] जैसे तीन उनकी वो और उनकी फैमिली जानती है। तीन तीन ऐसा सच बताइए। जैसे मैं अपनी बात बताता हूं। हम मुझे मैं एक बार मार्केट जा रहा था हम फैमिली के साथ में बाहर टाउन में गया मैं तो मुझे फ़ करके बुला लिया कि तुम्हारी ड्यूटी है जबकि मेरी ड्यूटी थी ही नहीं मेरी ड्यूटी अलग से लगवाई गई
(44:13) अच्छा स्पेशली बोला बुलाओ उसको दूसरा बड़ा बहुत भयंकर सच है हम लेकिन मैं बताता हूं आपको कि मैं एक दिन ड्यूटी पे था तो सीओ आया सीओ ने मुझे बोला कि माशी बोसमेट को बुलाओ जो यूनिट का सबसे सीनियर जो लोअर रैंक का बंदा रहता है मास्टोसमेंट सबसे ऊपर रैंक होती है उसकी उसको बुलाओ तो सीओ अपने कुत्ते के साथ में था कुत्ते को आप आप आप करके नाम था और उसको आप आप करके कुत्ते को ठहला रहा है फिर वो बंदा आया मैंने बुलाया तो आया कि सर ऐसे सीओ साहब बुला रहे हैं य पे गार्ड रूम में ठीक है आया दो मिनट तक उनका थोड़ा कन्वर्सेशन हुआ हल्का सा उसके बाद सीओ ने उसको गाली ियों
(44:59) की बौछार मार दी। तू तड़ाक पे पूरी बात की। पूरा का पूरा कन्वर्सेशन था। आधे घंटे का था। उसमें तू तड़ाक और मतलब क्या-क्या नहीं कहा गया। मैं वहीं पे खड़ा हूं। तो मैंने बोला जिसकी 34 साल सर्विस में एक कुत्ते के बराबर भी इज्जत नहीं है। सीओ का कुत्ता बड़ा हो गया। वो देश का सैनिक उसके सामने छोटा हो गया। 34 साल सर्विस करके भी वो बंदा आज गालियां सुन रहा है। ऐसा कोई महापाप तो नहीं कर दिया कुछ राइफल बेच दिए हो या कुछ कर दिया ऐसा तो कुछ है नहीं हम करप्शन कभी हुआ नहीं कुछ नहीं छोटी मोटी बात हो सकती है हम लेकिन ये क्या है हमने कहा देखो कान पकड़
(45:42) के भैया अगर 34 साल सर्विस करके भी मैं यहां पे इज्जत नहीं पा रहा हूं हम कुत्ते के बराबर तो ऐसी सर्विस मुझे नहीं करनी है मैं यहां पे 15 करूंगा। जय जय हिंद जय भारत करूंगा और निकल जाऊंगा। उस 15 साल तक मुझे जो सुनना पड़ेगा मैं सुनूंगा। जो करना पड़े मैं करूंगा। सुना आपने बहुत कुछ सुना। बहुत कुछ एक लेवल होता है उससे भी ऊपर सुना है मैंने। अगर आपको अभी प्राइम मिनिस्टर मोदी जी बुलाए बोले कि यार त्योतिया बैठो। बताओ क्या कर सकते हैं इसमें चेंज। तो क्या बताओगे? नहीं मोदी जी भी कर नहीं सकते ना कुछ भी। नहीं वो चाहते तो कर सकते हैं। नहीं
(46:23) पॉसिबल मतलब आप बोल रहे हो प्राइमर प्राइम मिनिस्टर के पास पावर नहीं है कि डिफेंस फर्सेस के अंदर एक एक रिफॉर्म की बात कर सके। सच बड़े रिफॉर्म की बात है। बहुत पेन है। हम बहुत पेन है। बट उससे हायर पावर जिसकी पहले से ही पांचों उंगलियां घी में हो और सर कढ़ाई में हो वो चेंज करने देगा क्या कुछ? विश्वास नहीं होता है। एग्री विद डिसए्री यू आर डिसए्री [हंसी] आई बट मैं तो मैं तो खुला बोलता हूं नहीं चेंज कर सकते वो चाह तो चेंज नहीं कर सकते चाह तो नहीं चेंज कर सकते मतलब थोड़ा बहुत कर किया जा सकता है फुल रिफॉर्म की बात करें तो बहुत पेनफुल है
(47:02) बहुत पेनफुल है

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