Sunday, August 30, 2026

The Truth About Cleaning Products | Ft. Aditya Co- Founder of Beco

The Truth About Cleaning Products | Ft. Aditya Co- Founder of Beco

Author Name:Food Pharmer

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@Foodpharmer

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=GQgSgxVsCOk



Transcript:
(00:00) जो क्लीनिंग प्रोडक्ट्स का जब बात करते हैं हाउ कैन कंपनी फूल यू? जो मिथ है यह कैटेगरी में पहली चीज हमको लगती है कि ज्यादा झाग होता है तो बेटर क्लीनिंग होती है। सेकंड थिंग इज इन इंडिया देयर इस नो रेगुलेशन। आप कुछ भी लिख सकते हो आप कुछ भी कर सकते हो। आज हमारे साथ है आदित्य अरोहिया वन ऑफ द थ्री फाउंडर्स ऑफ बीको एंड इको फ्रेंडली कंस्यूमर ब्रांड। मैंने डिटर्जेंट में बहुत सारे ऐड्स देखे हैं जो एकदम ऐसे एक टीशर्ट है। ऐसे आएगा ऐड और सफेद हो जाएगा टी-शर्ट। सफेदी पे इतना फोकस क्यों होता है? जो डिटर्जेंट्स आजकल मार्केट में मिलते हैं, वह आपके वह
(00:29) स्टेन रिमूवल पे बहुत फोकस करते हैं। बट आपके 90% ऑफ़ द टाइम आपके स्टेन इतने लगते ही नहीं है। तो वो आपके कपड़ों की लाइफ को बर्बाद कर देता है। डिटर्जेंट और डिशवाशर्स में क्या इंडिया और यूएस में फर्क है? जो इंग्रेडिएंट्स ये लोग डाल रहे हैं इंडिया में वो काफी इंग्रेडिएंट्स यूरोप और ऐसे कंट्रीज में कंट्रोल में अलाउड है। और इधर इंडिया में वो मेजर के भी ऊपर जा चुके हैं। हाउ शुड द कंज्यूमर बाय अ प्रोडक्ट? अगर इंग्रेडिएंट्स ही मेंशंड नहीं है। प्रॉब्लम यही है कि कोई इंग्रेडिएंट बोलता भी नहीं है, कोई मांगता भी नहीं है। तो जो
(00:58) ज्यादा मार्केटिंग करता है, जो ज्यादा एडवरटाइजिंग करता है उसका ज्यादा सेल है। सपोज आप कल बाहर जा रहे हो और आप एक बिल बोर्ड देखें जिसमें लेफ्ट में आपका ब्रांड है और राइट में कोई नया ब्रांड है और वो लिखे स्विच टू देयर ब्रांड। आपका क्या रिएक्शन होगा? मैं सालों साल से लोग को बोल रहा हूं खाने का लेबल पढ़ने के लिए। लेकिन जो प्रोडक्ट्स हम यूज करते हैं अपना प्लेट धोने के लिए, अपना बर्तन धोने के लिए, उसका लेवल का क्या? आज हमारे साथ है आदित्य जिन्होंने फाउंड किया बीको अ होम केयर ब्रांड जो डिटर्जेंट्स, डिशवाशर्स, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स बनाते हैं एंड वो
(01:33) हमें सिखाएंगे कि ये सब प्रोडक्ट्स के लेबल्स हम कैसे पढ़ सकते हैं। थैंक्स श्री फॉर हैविंग अस हियर। एंड वुड लव टू स्पीक अबाउट एवरीथिंग क्लीनिंग एंड हम लोग जो रोज प्रोडक्ट्स यूज़ कर रहे हैं उनका एक्चुअल में मतलब क्या है? उसमें डालते क्या है? वो काम कैसे करता है? हमको कैसे कंज्यूमर्स को अवेयर होना चाहिए कि कौन सा चूज़ करें? कौन सा नहीं चूज़ करें? सो थैंक यू फॉर हैविंग अस हियर। थैंक यू फॉर बीइंग हियर। सो जब मैंने लेबल पढ़ेगा इंडिया मूवमेंट शुरू किया था। मैंने सोचा था फूड इंडस्ट्री के बारे में। हम तो लोग मुझे एक्सपेक्ट करते हैं कि जस्ट
(02:07) बिकॉज़ मैं खाने का लेबल के बात करता हूं। लोग एक्सपेक्ट करते हैं कि मुझे सब लेबल्स की जानकारी है लेकिन ये ट्रू नहीं है। सो मुझे आपसे जानना है कि ये सब लेबल्स हम कैसे पढ़ सकते हैं? जब कोई डिशवाशिंग का लेबल हुआ या कोई ल्ड्री डिटर्जेंट है। ये सब का लेबल्स कैसे पढ़ सकते हैं? आई थिंक फूड में काफी हद तक रूल्स कुछ बन चुके हैं कि आपको यह इंग्रेडिएंट्स शो करने हैं। आपको बैक ऑफ पैक पर लिखना है। बट यह कोई भी चीज होम केयर में या जो घर के हमारे क्लीनिंग एवरीडे क्लीनिंग प्रोडक्ट्स में है वो सब में यह एप्लीकेबल नहीं है। बट इज़
(02:43) जो क्लीन करता है क्या वो प्रोडक्ट खुद क्लीन है? इसका कभी मुझे आईडिया नहीं है। इट्स अ गुड क्वेश्चन। जो प्रोडक्ट क्लीन करता है वो खुद प्रोडक्ट क्लीन है या नहीं? दैट इज वी नेवर थॉट अबाउट। एंड जैसे आपने बोला खाने में फिर भी रूल्स है। फिर भी न्यूट्रिशन लेबल्स, इंग्रेडिएंट ले सब है। डिटर्जेंट ये सब में कोई सोचता भी नहीं है कि क्या जा रहा है। आपको तीन चीजें चाहिए डिटर्जेंट में या कोई भी क्लीनिंग लिक्विड में। फर्स्ट थिंग इज योर क्लीनिंग एजेंट जो आपका सर्फेक्टेंट होता है। अलग-अलग टाइप के सरफेक्टेंट्स होते हैं। तो इवेंचुअली
(03:12) कस्टमर को यह देखना चाहिए कि कौन सा सर्फेक्टेंट जा रहा है। मेरे कपड़ों को या मेरे बर्तन को एक्चुअल में साफ क्या कर रहा है। सेकंड इज़ योर प्रिजर्वेटिव। क्या प्रोडक्ट आपको मैन्युफैक्चरिंग से आपके घर तक अच्छे क्वालिटी में पहुंचाने के लिए क्या प्रोडक्ट्स नेसेसरी है? तो प्रिजर्वेटिव्स का मेन एडवांटेज यह है कि वो प्रोडक्ट की क्वालिटी और शेलफ लाइफ को बढ़ाता है। बट उसका यही और प्रॉब्लम है कि वो आपके स्किन को भी इफेक्ट कर सकता है। आपके आइज को भी इफेक्ट कर सकता है। अगर आप कपड़े काफी टाइम तक दिन में पहनते हैं तो आपके कॉन्सेंटली वो स्किन टचिंग है। तो वो
(03:42) आपको वो आपके लिए हानिकारक हो सकता है। वो आपके लिए हार्मफुल हो सकता है। तो प्रिजर्वेटिव्स का यह एक बड़ा सा डिसएडवांटेज है। द थर्ड थिंग इज द सेंसरी अपील। क्या कलर है प्रोडक्ट का? क्या फ्रेगरेंस है? उसमें ऑप्टिकल ब्राइटनर है कि नहीं? वो कैसा दिखता है? वो शायद ज्यादा गाढ़ा हो, पतला हो। ज्यादा गाढ़ा या पतला होना भी क्लीनिंग एफिकसी पे कोई डिपेंड नहीं करता। सो ऑल ऑफ़ दीज़ थिंग्स आर मोर फॉर द कंज्यूमर प्रेफरेंस रादर देन फॉर क्लीनिंग। सो डिटर्जेंट को लेके सबसे बड़े मिथ्स कौन से हैं? जो मिथ्स है ये कैटेगरी में ये बहुत सिंपल
(04:14) है। हमको पहली चीज हमको लगती है कि ज्यादा झाग होता है तो बेटर क्लीनिंग होती है। हम राइट? राइट? या एज अ कंज्यूमर वी हैव बीन कंडीशंड टू थिंक कि मोर फोम मीन्स बेटर एफिकसी। सो दैट इज नॉट ट्रू। राइट? इट नॉट नेसेसरी मीन दैट मोर फोम एंड ये काफी हमारे घरों में भी काफी सालों तक चलते आ रहा है। हां टू बी वैरी ऑनेस्ट इवन मी नॉट ओनली डिटर्जेंट में बट इवन शैंपू सब में भी लोग को वही लगता है कि ज्यादा झाग मतलब बेटर। करेक्ट। बट केमिकली दिस इज़ नॉट ट्रू। हम सो, यह हम लोग काफी कंडीशन हो गए हैं। यह थॉट को कि झाग मतलब बेटर है एफिकसी। इवन
(04:49) दो द एक्चुअल क्लीनिंग माइट बी मच लेसर। अह द सेकंड थिंग इज़ द फ्रेगरेंस। हम लोग कोई भी रूम में एंटर करते हैं वी थिंक कि अगर फ्रेश स्मेल कर रहे हैं रूम, तो अच्छे से क्लीन हुआ है। ज्यादा हाइजीनिक है। राइट? दैट इज़ नॉट ट्रू। फ्रेगरेंस हैज़ नथिंग टू डू विद द क्लीनिंग एस्पेक्ट। फ्रेगरेंस इज़ ओनली फॉर अ सेंसरी अपील। उससे क्लीनिंग से कुछ कनेक्शन नहीं है। कुछ कनेक्शन वो अच्छा वाइब दे रहा है। मतलब आपको लग रहा है कि वो ज्यादा क्लीन हो गया। हां। मतलब वो हमको क्योंकि हम लोग देख नहीं सकते कि एक्चुअली क्लीन हुआ है कि नहीं। इट इज वन वे ऑफ़ नोइंग कि हां ये क्लीनिंग
(05:22) लिक्विड अप्लाई हुआ है। और किसी ने साफ किया है या हमने खुद नहीं किया है या किसी और ने किया है। बट वी नो कि ये रूम साफ हुआ है। तो दैट इज द जो महक आती है वो हैज़ नथिंग टू डू विद क्लीनिंग। इट इज़ जस्ट टू अपील टू द कंज्यूमर दैट बिकॉज़ देयर इज़ फ्रेगरेंस इट इज़ स्लाइटली मोर हाइजीनिक और यह साफ हुआ है। द थर्ड थिंग इज़ मोर अराउंड द फ्रंट ऑफ द पैक हैज़ एक्चुअली बिकम द प्राइमरी मोड ऑफ़ कम्युनिकेशन। एंड कोई बैक ऑफ द पैक देखता ही नहीं है। तो नींबू, लैवेंडर, ऑरेंज इन सब पे पूरी स्टोरी बन गई है। हम एंड दिस क्रिएट्स अ हेलो इफ़ेक्ट ऑन द
(05:56) एंटायर प्रोडक्ट। कि ये सिट्रेस बेस्ड है तो ये अच्छा ही करेगा। उसमें प्रोडक्ट में और क्या-क्या इंगडिएंट्स हैं। जैसे आपने आई हैव सीन अ लॉट ऑफ योर वीडियोस ऑन वीट बिस्किट्स या आलमंड बिस्किट्स। उसमें एक्चुअल में कैशू कितना है, आलमंड कितना है और कितना मैदा या कितना शुगर एक्चुअली डालते हैं। तो दिस इज द सेम थिंग। हम लोग कितना जो मेन इंग्रेडिएंट जो हम लोग फ्रंट ऑफ द पैक कॉल आउट करते हैं वो एक्चुअल में कितना है वो तो कभी डिस्कशन होता ही नहीं क्योंकि बैक ऑफ द पैक ओनली डज़ नॉट एक्सिस्ट। सो जस्ट सी द इनेशन गैप। कस्टमर को कुछ
(06:28) पता ही नहीं है और कुछ जानने के लिए कुछ इंफॉर्मेशन भी नहीं है तो वैसे ही कोई डिटर्जेंट भी कोई कुछ क्लेम कर सकता है कोई एक इंग्रेडिएंट लेकिन जरूरी नहीं है कि वो बैक ऑफ द पैक में ज्यादातर वही रहेगा आई एम सेइंग दैट देयर इज़ नो वे टू फाइंड आउट देयर इज़ नो वे टू इवन नो लाइक मेरे को एक चीज समझना है लाइक फॉर एग्जांपल फूड में एफएसएसआई मैंडेट करता है आपको कंपलसरी है हर एक इंग्रेडिएंट लिखना तो क्या ये डिटर्जेंट ये सब में नहीं होता इन इंडिया देयर इज नो रेगुलेशन तो आप कुछ भी कर सकते हो। आप कुछ भी लिख सकते हो। आप कुछ भी कर सकते
(07:01) हो। फ्रंट में आप कुछ भी लिख दो और बैक में आपको कुछ इंगडिएंट लिखने की जरूरत ही नहीं है। सो देयर आर डिफरेंट ऑर्गेनाइजेशंस लाइक लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, सीसीपीए, एस्की टू सम एक्सटेंट दैट इज़ एक्चुअली सेइंग कि आप कोई भी एडजेक्टिव्स नहीं डाल सकते। आपको प्रूफ तो देना पड़ेगा। हम द बिगेस्ट फ्रस्ट्रेशन आई हैव विथ दिस कैटेगरी इज़ दैट इंडिया में करोड़ों लोग यह प्रोडक्ट्स यूज़ करते हैं डेली। हम डेली आप कपड़े पहनते हो। डेली आपके कपड़े धुलते हैं। डेली आप खाना खाते हो। तीनचार बार दिन में आप ही नहीं आपके सारे परिवार वाले आपके बच्चे आपके पेट्स आपके पेरेंट्स
(07:43) काफी सीनियर सिटीजंस है कोई अनवेल हो सकते हैं तो इन सो मच बीइंग केयरफुल ऑफ एवरीथिंग दैट वी आर कंज्यूमिंग एंड पुटिंग विद इन अस व्हाट वी आर अपाइंग ऑन अस एज वेल ये हर कोई इंडिया में कर रहा है और जब यह सरफसेस और या जब यह प्रोडक्ट्स यूज हो रहे हैं दे हैव द अनयूजुअल प्रिविलेज ऑफ ऑफ़ जस्ट बीइंग हैबिचुअल कि ये सालों साल बस चलते आ रहे हैं। पता ही नहीं है लोग को कि इंग्रेडिएंट क्या है? तो लोग पूछेंगे भी क्या? तो एटलीस्ट लोग को और क्यूरियस होना चाहिए कि आपके ये सब प्रोडक्ट्स में है क्या? एंड सिस्टम हिस्टोरिकली हैज़ अलाउड द
(08:21) कंज्यूमर टू नो वेरी लिटिल। हम तो मैं जब डिटर्जेंट्स के एड्स देखता हूं तो मैं बहुत बार देखता हूं कि एक कुछ इफ़ेक्ट आएगा और टीशर्ट एकदम चमकीला एकदम बहुत सफेद हो जाएगा। सो ये क्या प्रोडक्ट्स एक्चुअली इतना सफेद करते भी हैं? आर दी डिटर्जेंट्स गुड फॉर योर क्लोथ्स? इट्स नॉट गुड फॉर योर क्लोथ्स। इट्स नॉट गुड फॉर यू। तो काफी डिटर्जेंट एक्चुअली ब्लीच डालते हैं अपने प्रोडक्ट में जो सभी को मालूम है कि ब्लीच आपके लिए अच्छा नहीं है। या ऑप्टिकल ब्राइटनेस डालते हैं जो आपको इल्लुजन देता है कि एक्चुअली द क्लोथ हैव बिकम ब्राइटर। उसमें होता क्या है कि
(08:54) हमारे कपड़ों का कलर फेड हो जाता है। हम लोग हमारे डिस्फिगर हो जाते हैं। बहुत सारा कपड़ों का वेट कम हो जाता है। बिकॉज़ बहुत सारा लिंट रिमूव हो जाता है। तो दैट इज द नीड फॉर टुडेेस कंज्यूमर। द कंज्यूमर हैज़ एक्चुअली इवॉल्वड सेइंग मुझे वो सफेदी शायद नहीं चाहिए। बट मैं चाहता हूं कि मेरे कपड़े तो 10 बार पहनने के बाद भी वो सेम लगे कि आजकल कपड़े पहले खराब हो जाते हैं और गंदे गम होते हैं। तो वो ज्यादा जरूरी है कि हम लोग उसके लिए कुछ बनाएं। तो यार इट मेक्स सेंस यार आदित्य कि अभी भी कंपनीज फोकस कर रहे हैं दाग पे लेकिन हमारी डे टू डे लाइफ में दाग तो शायद 6
(09:34) महीने में एक बार तीन महीने एक में एक बार लगते हैं। हर दिन थोड़ी ना मैं अपने टीशर्ट में चाय गिरा रहा हूं या कुछ मेरे ऊपर टीशर्ट में लग रहा है। सो मुझे वही समझ में नहीं आता कि सब एडवर्टाइजमेंट डार्क पे क्यों हो रहा है। तो रेगुलर डे टू डे प्रोडक्ट्स जो डे टू डे लाइफ पे क्यों नहीं हो रहा है? क्योंकि ये कैटेगरी में इनोवेशन और डिसरप्शन इतना देखा ही नहीं है। जो हम लोग रोज नए ब्रांड्स देख रहे हैं फूड में, पर्सनल केयर में होम केयर जैसी बोरिंग कैटेगरीज जो आपके डिटर्जेंट्स है, फ्लोर क्लीनर है, बर्तन धोने का साबुन है, ये सब बोरिंग कैटेगरीज है। तो, यह डेकेड्स
(10:10) तक सेम तरीके से चलते आ रहे हैं। कभी किसी ने क्वेश्चन नहीं किया कि क्या मुझे इसकी जरूरत है कि मुझे कोई और चीज की जरूरत है? एंड आई थिंक दैट्स व्हाई वी लव बोरिंग कैटेगरीज क्योंकि हमको लगता है उधर एक बहुत अच्छी अपॉर्चुनिटी है कंज्यूमर को कुछ नया बताने की उनके एजम्पशनंस को क्वेश्चन करने की उनको इंफॉर्मेशन देने के लिए उनके लिए इनोवेट करने की एंड जब भी हम लोग वो सारी चीजें करेंगे कंज्यूमर्स विल देन हैव अ चॉइस टू पिक बेटर आज कंज्यूमर्स को मालूम ही नहीं है कि कौन सा उनका क्या चीज दाग हटाएगा क्या चीज उनके लिए अच्छा है क्या चीज उनके लिए अच्छा नहीं है सबको
(10:42) एक खाने का ब्रांड शुरू करना है लेकिन मेरे को बहुत कम लोग आके बोलते हैं कि मुझे एक डिटर्जेंट बनाना है। मुझे फ्लोर क्लीनर बनाना है या मतलब यह सब बोरिंग कैटेगरीज में किसी को घुसना नहीं है। तो इट इज़ गुड दैट देयर इज़ सम इनोवेशन फाइनली हैपनिंग इन दीज़ कैटेगरीज़ एज़ वेल। अब्सोलुटली। एंड आई रिमेंबर व्हेन आई जॉइ वर्क एंड आई हैव यूज़्ड टू गो टू दी ऑफिस। आई यूज़्ड टू रियलाइज़ दैट माय वार्ड्रोब सडनली हैज़ बिकम मोर एक्सपेंसिव। मैं कपड़े और महंगे खरीद रहा हूं। पहले मैं कोई ब्रांड से खरीदा था। अभी मेरे एस्पिरेशंस भी बढ़ गए हैं। मुझे और बेटर ब्रांड से
(11:16) कपड़े खरीदने हैं और नए खरीदने हैं और ज्यादा खरीदने हैं। बट मैं देख रहा हूं कि मेरा वार्ड्रोब मेरा ज्यादा महंगा हो गया। मेरे कपड़े महंगे हो गए हैं। बट वो लास्ट और भी कम कर रहे हैं। तो मैं ज्यादा भी पे कर रहा हूं और वो कम भी लास्ट कर रहे हैं। तो दिस बेसिकली मेड अस क्वेश्चन कि क्या ये क्यों हो रहा है और काफी कुछ क्लोथ्स के फैब्रिक पे भी है। उनके मटेरियल पे भी है। बट काफी रिस्पांसिबिलिटी जो हम लोग उस कपड़ों जिससे धोते हैं उनकी भी है और वो काफी हमारे मटेरियल को अफेक्ट करता है। तो इसलिए हमने सोचा कि यार यह बोरिंग कैटेगरी
(11:51) हो लेकिन इसमें कस्टमर्स ने कभी पूछा ही नहीं कि इसमें और क्या बेटर है। कैन यू टेल मी बेसिकली जब मैं कोई प्रोडक्ट देखता हूं चाहे डिशवाॉशर हो या कोई फ्लोर क्लीनर हो। मैं कुछ-कुछ वर्ड्स देखता हूं। जेंटल हम नेचुरल हम प्लांट बेस्ड अ सेफ और बहुत सारे और शब्द मैं देखता हूं। आर दीज मार्केटिंग वर्ड्स और डू दे हैव सम ग्राउंड विद ग्राउंड इन इट? आई थिंक अल ऑफ़ दिस विल हैव टू बी प्री प्री प्री प्री प्रूव्ड बैक इफ आई सेइंग आई एम प्लांट बेस्ड हाउ व्हाट आर द इंग्रेडिएंट्स? डू यू हैव लैब टेस्ट टू शो योर फॉर्मूलेशन? डू यू हैव एविडेंस टू
(12:28) प्रूव दैट यू आर एक्चुअली जेंटल? सो आई थिंक एंड दैट अप्लाई फॉर अस आल्सो। दैट अप्लाई फॉर ऑल ऑफ अस। आई थिंक वी वांट टू होल्ड एववरीवन बाई द सेम स्टैंडर्ड। व्हाई इज एव्री कंपनी लाइक मैं बस टी-शर्ट को वाइट बनाऊंगा। मतलब कि आई मेयर अ ब्लू टी-शर्ट। आई जस्ट वांट कि ब्लू टी-शर्ट ब्लू रहे। तो 90% ऑफ द टाइम योर क्लोथ्स आर एक्चुअली नॉट गेटिंग स्टेन। बट यू यूजिंग द सेम डिटर्जेंट्स हु आर सेइंग हम लोग इतने दाग आपके हटाएंगे। हम लोग आपके कपड़ों को पूरा अच्छे से साफ कर देंगे। तो मुझे रोज ऐसे में ऐसे डिटर्जेंट से कपड़े नहीं धोने जो इतने दाग हटाए जब मेरे कपड़ों पर
(13:04) दाग ही नहीं लगते। तो यह डिटर्जेंट्स इवेंचुअली हमारे कपड़ों की लाइफ को बहुत अफेक्ट करते हैं। तो हम तो यह बोलते हैं कि कपड़े अच्छे हैं और कपड़ों की लाइफ बढ़ानी चाहिए। दैट इज व्हाट इज मोरेंट एंड दैट इज द नीड फॉर टुडेज़ कंज्यूमर्स। टुडेज़ कंज्यूमर्स आर नॉट एट सफेदी। दे आर नॉट एट देयर आर टाइम्स इन द मंथ वेयर पीपल नीड दिस। बट मोरेंटली टुडेज़ कंज्यूमर हैज़ इवॉल्व्ड मोर एंड दी इंडस्ट्री अनफॉर्चुनेटली हैज़ नॉट इवॉल्व्ड एस फास्ट एस द कंज्यूमर्स नीड्स। तो हर दिन आपको इतना हारश डिटर्जेंट नहीं जरूरत है। आपको जब कुछ बहुत ज्यादा दाग लग गया तब हो सकता
(13:42) है आपको एक हारश डिटर्जेंट चाहिए होगा। मुझे आपसे एक सवाल है जैसे फूड में फूड में सेम प्रोडक्ट यूरोप में अलग इंग्रेडिएंट्स बेचते हैं और इंडिया में अलग इंग्रेडिएंट्स। फॉर एग्जांपल फैंटा यू यूरोप फैंटा यूरोप में सिर्फ चार चम्मच चीनी डालते हैं पर 300 ml लेकिन इंडिया में 10 चम्मच चीनी डालते हैं पर 300 ml हम एंड और भी बहुत सारे कि वो फैंटा यूरोप में अलग रंग यूज़ करते हैं। इंडिया में एकदम ब्राइट ऑरेंज यूज़ करते हैं। और भी दो दो चार और फर्क हैं। सो मुझे जानना है कि डिटर्जेंट और डिशवाशर्स में क्या इंडिया और यूरोप और यूएस में फर्क है? आर वी कंज्यूमिंग सेम
(14:23) क्वालिटी डिटर्जेंट्स एंड डिशवाशर डिशवाशिंग लिक्विड्स एज द यूएस एंड यूरोप और इज इट इंफीरियर इन एनीवे? सो यूएस एंड यूरोप और कोई भी ये नेशंस जो डेवलप्ड नेशंस हैं उसमें पहले तो ये लोग इंग्रेडिएंट्स डिक्लेअर करना पड़ता है। ये लोग इंग्रेडिएंट्स डिक्लेअर करते हैं। इंडिया से कंपैरिजन करना बहुत डिफिकल्ट है। बिकॉज़ इंडिया में इंग्रेडिएंट्स मालूम ही नहीं है कि कौन से हैं। तो आप कंपेयर किस चीज का करोगे? तो वो बेटर भी डाल रहे हैं तो पता नहीं, वर्स भी डाल रहे हैं तो पता नहीं। मोस्ट लाइकली वर्स ही होगा। यह वर्स बोल भी सकते हैं विद प्रूफ। बिकॉज़
(14:54) जो इंग्रेडिएंट्स ये लोग डाल रहे हैं इंडिया में जो हमने टेस्टिंग के थ्रू, एविडेंस के थ्रू फाइंड आउट किए हैं, वह काफी इंग्रेडिएंट्स यूरोप और ऐसी कंट्रीज में कंट्रोल में अलाउड है। एक सर्टेन मेजर तक अलाउड है। और इधर इंडिया में वो मेजर के भी ऊपर जा चुके हैं। सो वी कैन विद प्रूफ से दैट द क्वालिटी ऑफ इंग्रेडिएंट्स बीइंग यूज्ड इन इंडिया एट द कॉस्ट दैट वी बाय टुडे इज प्रोबेबबली नॉट द वन व्हिच इज़ बेटर देन द वर्जन दैट एक्सिस्ट इन द यूएस और एन अदर डेवलप नेशंस। सो आप बोल रहे हो कि व्हाइल कंपनीज़ खुद डिक्लेअर नहीं करते इंग्रेडिएंट्स आपने
(15:30) टेस्टिंग कराया है और उससे टेस्टिंग के कारण आपको पता है कि वो क्या इंगडिएंट्स यूज़ करते हैं। और हम लोग रेगुलरली ये टेस्टिंग करते हैं। हम लोग बाकी के प्रोडक्ट जो कंज्यूमर्स यूज़ कर रहे हैं वो भी टेस्ट करते हैं। हम लोग जो मार्केट में सबसे ज्यादा बिकते हैं वो भी टेस्ट करते हैं। हम लोग खुद के भी प्रोडक्ट्स टेस्ट करते हैं रेगुलरली। उससे हमारी काफी फाइंडिंग्स होती है। उससे हम लोग इंप्रूव करते हैं कि इसमें और क्या बेटर हो सकता है। आपने एक रिसेंटली कैंपेन शुरू किया था जो आपके टीशर्ट में भी है। हम वॉर ऑन व्हाट्स हिडन। तो मैं मुंबई में ट्रैवल कर रहा था और
(16:00) मैंने एक होर्डिंग देखा आपका जो अभी नहीं है एंड मुझे तो लगा कि पहले कि ये बहुत ज्यादा बोल्ड मूव है कि एक कंपनी ओपनली दूसरे कंपनी को ना का नाम ले रहा है लोगो दिखा रहा है सो मुझे समझना है कि यह कैंपेन कैसे शुरू हुआ? व्हाट इज हिडन? वॉर ऑन व्हाट्स हिडन आपके टीशर्ट में लिखा है। व्हाट इज हिडन? वॉर ऑन व्हाट्स हिडन इज एंटायरली अ इंफॉर्मेशन गैप। जो ब्रांड्स को मालूम है जो इंग्रेडिएंट्स वो प्रोडक्ट में डाल रहे हैं वो प्रोडक्ट वो इंग्रेडिएंट्स कस्टमर्स के लिए क्या अच्छा कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे हैं क्या काम कर रहे हैं वो कस्टमर्स को नॉलेज नहीं है
(16:37) ये जो जानकारी में गैप है हम लोग उसके लिए फाइट कर रहे हैं कि जो फूड में रेवोल्यूशन हो चुका है और जो स्टैंडर्ड्स फूड में आज हम लोग फॉलो करते हैं जो पर्सनल केयर में सबको मालूम है कि ये ये इंग्रेडिएंट्स से मेरा बेनिफिट होता है ये इंग्रेडिएंट्स शायद मेरे लिए अच्छे नहीं है पैराबिन फ्री फास्फेट फ्री सल्फेट फ्री ये काफी टर्म्स यूज़ होते हैं होम केयर में कुछ मालूम ही नहीं है हमको और हमें नहीं किसी को भी नहीं मालूम तो वो प्रूफ कैसे लिया जाए वो कस्टमर को बताया कैसे जाए तो वॉर ऑन व्हाट्स हिडन इज़ एक्चुअली समथिंग दैट इज़ हिडन टुडे दैट पीपल आर नॉट नोइंग अबाउट
(17:08) दैट वी वांट टू ब्रिंग अबाउट सो आपको मन है कि लोग जाने कि वो क्या कंज्यूम कर रहे हैं क्या डिटर्जेंट में उनका क्या जा रहा है डिशवाशिंग लिक्विड में क्या जा रहा है लोग को पता हो ये ये आज हमको कांसेप्ट थोड़ा वियर्ड लगता है क्योंकि हमने कभी देखा नहीं है बट अगर मैं यह 5 साल बाद फॉरवर्ड कर दूं और 10 साल बाद फॉरवर्ड कर दो। हम लोग सेम वीडियो देखेंगे। हमें लगेगा कि यह तो बेसिक था। यह तो स्टैंडर्ड है। राइट? मुझे तो अभी भी समझ नहीं आ रहा कि एडवरटाइजिंग क्लीनिंग इंडस्ट्री में सिर्फ और सिर्फ ये फ्रूट या नींबू या लैवेंडर या इन सब पे क्यों बनी
(17:40) है? या ये दाग पे क्यों बनी है? ये क्यों साइंस और इंग्रेडिएंट्स पे नहीं बनी है। जब बाकी सारे कैटेगरीज मूव हो चुके हैं। कंज्यूमर शिफ्ट हो चुका है। कंज्यूमर को बेटर मालूम है तो ये कैटेगरी क्यों पीछा छोड़ा जाए? नो इट मेक्स सेंस। इफ यू हैव द राइट टू नो व्हाट्स इन योर फ़ूड, यू आल्सो हैव द राइट टू नो व्हाट्स इन योर डिटर्जेंट, इन योर डिश वाशिंग लिक्विड, इन वॉटएवर एल्स यू कंस्यूम इन योर परफ्यूम, इन योर टूथपेस्ट, इन योर एनी एंड एव्री प्रोडक्ट, यू हैव अ राइट टू नो व्हाटस इन इट? राइट। सो, व्हाई इज इट दैट सम कंपनीज़ आर मोस्ट कंपनीज़ आर नॉट डिक्लेयरिंग इट। दैट
(18:17) मेक्स सेंस। दैट एव्री कंपनी शुड डिक्लेयर व्हाट इज़ इन देयर प्रोडक्ट? इससे लोगों का भी एहसान होगा टू बाय एंड ट्रस्ट अ कंपनी। आई हैव मिक्स्ड फीलिंग्स टू बी वेरी ऑनेस्ट। मैं अप्रिशिएट करता हूं कि ये आपके कैंपेन के कारण अब और लोग डिटर्जेंट के लेबल्स के बारे में बात कर रहे हैं जो पहले नहीं करते थे। हम एंड आई एम श्योर इससे अवेयरनेस और इनक्रीस होगी। लोग भी और दो बार सोचेंगे कि कोई डिटर्जेंट खरीदेंगे। पहले सिर्फ एक बॉलीवुड एक्टर या कोई एक बड़े से क्लेम के कारण नहीं खरीदेंगे। अब लोग और रिसर्च करेंगे। व्हिच इज़ आई थिंक द पॉजिटिव साइड
(18:51) ऑफ़ दिस। वेदर और नॉट टेकिंग द नेम वाज़ द राइट थिंग ऑर नॉट। आई डोंट नो। आई मीन आई नो आई टेक नेम्स आल्सो ऑल द टाइम। याह। बाय द सेम टाइम प्रोटीन इंडस्ट्री वेयर आई एम लाइक यू नो आई हैव अ ब्रांड। आई डोंट टेक नेम्स। लाइक यू नो आई डोंट टेक नेम्स ऑफ अदर प्रोटीन कंपनीज़ वेयर आई यूजुअली स्टे अवे फ्रॉम। बाकी कैटेगरीज व्हेयर आई एम नॉट इनवॉल्व्ड। आई टेक नेम्स। मैंने नोटिस किया था आपने यह बिलबोर्ड इंडिपेंडेंस डे के एक दिन पहले लगाया अगस्त 14th को लाइक यू नो ऑन अ वीकेंड हम सो वाज दैट स्ट्रेटजिक कि कोर्ट्स बंद है तो अभी हम लगा देते हैं सब ये सब बिलबोर्ड
(19:30) कि अभी तो अब कुछ कंपनी नहीं तीन चार दो-तीन दिन कुछ कर भी नहीं पाएंगे सो वाज इट अ टाइम लाइक यू नो वाज़ इट प्लान टू अ परफेक्शन और वाज़ इट जस्ट अ कोइंसिडेंस सी कोर्ट्स 24 घंटे के लिए बंद है या 48 घंटे के लिए बंद है अ कैंपेन दिस लार्ज डज़ डजंट डिपेंड ऑन द कोर्ट्स फॉर शटिंग फॉर वन और टू डेज। आई थिंक द बिगर क्वेश्चन इज़ विल द फैक्ट्स स्टैंड अप व्हेन द कोर्ट्स रीओपन कि 24 घंटे बाद या 48 घंटे बाद जब कोर्ट्स खोलेंगे मैं आपको इसलिए पूछ रहा हूं कि जब मैंने अपना शुगर बोर्ड मूवमेंट ल्च किया था व्हेयर आई ओपनली नेम एट डिफरेंट सॉफ्ट
(20:09) ड्रिंक कंपनीज़। सो उसके पहले यूजुअली मैं अपने वीडियोस में एक ब्रांड के ऊपर वीडियो बनाता हूं। हम्म। फिर पहली बार लाइफ में मैं आठ ब्रांड को साथ में एक वीडियो में बात कर रहा हूं। सो मेरे को था कि अब तो पक्का कोई मेजर कोर्ट केस या कुछ ना कुछ होने वाला है। तो मैंने जानबूझ के ये वीडियो को मैंने ऑनेस्टली बोल रहा हूं। मैंने वीडियो को रिलीज किया हुआ था नवंबर 18th सैटरडे को। नवंबर 18th 2023 एंड सबने मेरे जो एडिटर हैं सब लोग ने बोला था मत करो क्योंकि नवंबर 19th वास द इंडिया ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप फाइनल। हम सो लोग बोल रहे हैं आपका वीडियो कोई देखने
(20:47) नहीं वाला है। आप नवंबर 18th को रिलीज कर रहे हो। संडे को फाइनल नेक्स्ट डे फाइनल्स है। मैं बोला नहीं ये वीकेंड को ही होना है। अब मैं एक दो वीक और पोस्टपोन नहीं करूंगा। उसमें पता नहीं क्या चेंज हो जाएगा। तो मैं नवंबर 18th को किया। इवन दो इट वाज़ द नेक्स्ट डे वाज़ संडे एंड वर्ल्ड कप फाइनल। हम्म एंड द वीडियो इवेंचुअली ब्लू अप 25 30 मिलियन व्यूज गॉट शुगर बोर्ड गॉट मैंडेट। बट द आईडिया वाज़ कि कोर्ट्स विल बी शट फॉर सैटरडे संडे। अब वो मंडे कब होगा फिर देखेंगे। एटलीस्ट दो-तीन दिन तो वायरल हो जाएगा मेरा शुगर बोर्ड। हम सपोज़ आप कल कोई आप बाहर जा रहे हो और आप
(21:24) एक बिलबोर्ड देखें जिसमें लेफ्ट में आपका ब्रांड है। हम और राइट में कोई नया ब्रांड है और वो लिखे स्विच टू देयर ब्रांड। हम आपका क्या रिएक्शन होगा? एविडेंस दिखाइए। आई थिंक एस लॉन्ग एज द एविडेंस इज ट्रू एस लॉन्ग एज इट्स फैक्ट बेस्ड अ लाइक एज एव्री एव्री स्टार्टअप एव्री इंडियन स्टार्टअप हैज़ द अपॉर्चुनिटी टू दे हैव देयर ओन फ्रीडम कमर्शियल फ्रीडम ऑफ़ स्पीच एंड आई थिंक एज़ लॉन्ग एज़ दे आर सेइंग द ट्रुथ एंड एस लॉन्ग एज़ दे आर गिविंग फैक्ट्स टू द कंज्यूमर देयर इज़ नथिंग रोंग विथ इट। इट इज़ इक्वल ओनर्स ऑन अस टू एक्चुअली कीप इंप्रूविंग एंड कीप
(22:05) मेकिंग इट बेटर। इट्स अ गुड रिस्पांस एविडेंस दिखाओ हम एंड अगर एविडेंस सही है देन इट मेक्स सेंस यू शुड इंप्रूव हाउ हाउ डिड यू कम अप विद बीको मतलब आपने कैसे शुरू किया सोचना कि मैं डिटर्जेंट डिशवाशिंग टिश्यू पेपर और ये सब सब कोई फ्लोर क्लीनर ये सब बनाऊंगा आप कैसे घुसे इसमें तो वी आर एक्चुअली थ्री कोफाउंडर्स अक्षय अनुजय एंड थ्री ऑफ़ अस आर लाइक ब्रदर्स वी आर ब्रदर्स एंड बी इको एक्चुअली स्टार्टेड विद इंटेंट ऑफ हेल्पिंग कंज्यूमर्स बिकम मोर इको फ्रेंडली। सो बी इको ओ इट्स बी इको या इट्स एक्चुअली कोई बेको बुला रहा है, कोई बीको बुला रहा है।
(22:46) तो सबका अलग-अलग तो हमारा इंटेंट हमेशा था बी इको के पीछे कि हम लोग कंज्यूमर्स को वी गिव देम अ कन्वीनिएंट ईजी चॉइस टू हैव एन एनवायरमेंटली फ्रेंडली इंपैक्ट। एंड हम लोग कंज्यूमर्स के लिए वो बिल्ड कर रहे एंड हम लोग कंज्यूमर्स को जितना बेटर जानने लगे हमको हम लोग और जान पाए कि वह क्या प्रोडक्ट्स यूज़ कर रहे हैं। उसमें क्या हार्मफुल इंग्रेडिएंट्स हैं और हाउ वी कैन रिप्लेस देम विथ समथिंग बेटर। सो आई थिंक दैट्स हाउ आवर जर्नी स्टार्टेड। बट वी ऑलवेज न्यू दैट टू मेक एन इंपैक्ट इट वाज़ंट नेसेसरी फॉर जस्ट मिलियंस ऑफ पीपल टू बिकम एनवायरमेंटलिस्ट। हम लोग
(23:21) नहीं चाहते कि बस लाखों लोग एट दम एनवायरमेंटलिस्ट बन जाए। बट इफ आई कैन गेट हम लोग करोड़ों लोगों को एक बेटर प्रोडक्ट दे पाए जो वह लोग एवरीडे यूज कर रहे हैं जो मल्टीपल टाइम्स इन अ डे भी यूज कर रहे हैं और अगर वह कंपाउंड होते जाए तो जो उसका इंपैक्ट होगा वो और भी ज्यादा बड़ा होगा। सो द आईडिया बिहाइंड बिकॉज़ वाज़ नेवर टू बी अ नीश या एक लाइफस्टाइल चॉइस बट इट हैड टू बी अ बिगर क्लीनर बेटर चॉइस एंड मेक दैट द डिफ़ॉल्ट चॉइस। एंड आई थिंक आवर एंटायर फोकस ऑन प्रोडक्ट आरएडी फॉर्मुलेशन अ इज़ एक्चुअली द जेनेसिस ऑफ बी इको एंड द थॉट बिहाइंड द क्रिएशन ऑफ द कंपनी टू से
(24:02) दैट हाउ वी कैन मेक द क्लीनर एंड बेटर चॉइस द डिफ़ॉल्ट चॉइस फॉर कस्टमर्स? वाओ इट्स अ वैरी इंटरेस्टिंग स्पेस क्योंकि आप लोग ने शायद से 2019 2020 के समय शुरू किया है एंड उस समय तो एटलीस्ट इसके बारे में कुछ बात ही नहीं कर रहा था। राइट। वेयर यू सी बी कॉइन इन द नेक्स्ट फाइव इयर्स। व्हाट आई कैन से इज़ दैट वेर आई वांट द कैटेगरी टू बी एंड आई थिंक द कैटेगरी शुड बी दैट अ क्लीनर एंड ग्रीनर चॉइस नॉट जस्ट फॉर मी बट फॉर एनवायरमेंट इज़ एक्चुअली द डिफ़ॉल्ट चॉइस फॉर मी एंड आई डोंट वांट इट टू बी एन ऑप्शनल चॉइस उसके लिए इंडिया को काफी हमारे एज़ अ कंट्री वी
(24:34) नीड टू मूव अहेड राइट वी नीड टू मूव बियनड द मूवमेंट्स दैट यू हैव स्टार्टेड आई वांट दोज़ टू ट्रिकल डाउन टू आवर कैटेगरीज एंड आई थिंक इट हैपेंस बाय स्टार्टिंग अ कन्वर्सेशन इट डज़ नॉट चेंज डज़ नॉट हैपन बाय विशिंग फॉर चेंज टू हैपन आई थिंक वी नीड टू ब्रिंग द चेंज। एंड वी नीड टू मेक द चेंज हैपें। सो आई थिंक बियन्ड ऑल द कन्वर्सेशंस अराउंड, अह यू नो अह हाउ मार्केटिंग हैज़ हैपेंड एंड व्हाट द एस्पेक्ट्स ऑफ इट आर। आई थिंक द मोर इम्पोर्टेन्ट थिंग इज़ कि हाउ डु वी ब्रिंग अबाउट दैट चेंज? एंड हाउ डू वी हाउ डू वी ब्रिंग अबाउट द चेंज फॉर द कंज़ूमर फॉर द
(25:09) कैटेगरी एंड हाउ वी क्लीन द कैटेगरी? डिटर्जेंट्स मेरे हिसाब से वन ऑफ द मोस्ट लीस्ट इंटरेस्टिंग कंज्यूमर कैटेगरीज हैं। लाइक यू नो जब आप अपने दोस्त के साथ बैठते हो तो आप बात करते हो खाने के बारे में। आप बात करते हो कि अगला मोबाइल का लॉन्च क्या हो रहा है? लोग कंपेयर करते हैं iPhone और Android को एकदम पैशनेटली। कोई दो दोस्त मिल रहे हैं पार्टी में। कोई ये नहीं पूछ रहा है आप कौन सा डिटर्जेंट यूज़ करते हो? ऑन टू कोई डिटर्जेंट के बारे में बात नहीं करता है। आई थिंक वन थिंग यू ऑल हैव डन इज यू ऑल हैव मेड द डिटर्जेंट कैटेगरी स्लाइटली मोर इंटरेस्टिंग।
(25:47) बट मुझे समझना है कि व्हाट लेड यू टू थिंक ऑफ स्टार्टिंग इन डिटर्जेंट्स। मतलब दुनिया में हजारों कैटेगरी हैं। डिटर्जेंट से क्यों शुरू किया आपने? डिटर्जेंट्स, डिशवाश, जेल, फ्लोर क्लीनर्स। ये सभी कैटेगरी इंडिया में बहुत बड़ी है। बहुत घरों में यूज़ होती है। एवरीडे यूज़ होती है। बट बिकॉज़ ये सालों साल सेम तरीके से यूज़ हो रही है। किसी ने कभी क्वेश्चन नहीं किया कि क्या एक्चुअली आ रहा है। हमको बोरिंग कैटेगरीज पसंद है। क्योंकि उसमें ना इतना इनोवेशन और इतना डिस्टरप्शन कंज्यूमर्स को शायद बेटर मिला ही नहीं है उसमें। एंड आई थिंक शायद हमने
(26:17) ही सिर्फ इंटरेस्टिंग नहीं की है। आई थिंक कंज्यूमर्स ने भी काफी इंटरेस्टिंग की है। एंड आई थिंक अगर मैं अगर सोचूं इंडिया में कि लाखों और करोड़ों कस्टमर्स ये डिटर्जेंट या डिशवाश जेल या फ्लोर क्लीन अप देखने खरीदने के पहले एक बार घुमा के पीछे देख ले जो कभी नहीं होता। वो शेलफ पे जाते ले लेते हैं या वो मोबाइल पे डायरेक्ट ऐड टू कार्ड करके चेक आउट कर लेते हैं। उनको मालूम है उनको कौन सा प्रोडक्ट कौन सा ब्रांड चाहिए। अगर वो एक बाग स्वाइप करके बैक ऑफ द पैक देख ले कि क्या इंगडिएंट्स इसमें है। आई थिंक द कस्टमर्स वुड हैव मेड द कैटेगरी वै
(26:46) इंटरेस्टिंग। एंड आई थिंक दैट्स व्हाट अ चैलेंजर ब्रांड हैज़ डन। अ चैलेंजर ब्रांड हैज़ आस्क द कस्टमर्स टू आस्क अ डिफरेंट क्वेश्चन टू व्हाइल बाइंग द कैटेगरी। जो कैटेगरी में बोलता है कि हां ये साफ करता है। ठीक है चलो मैं इसको ले लेता हूं। अभी कस्टमर्स शायद कोई अलग क्वेश्चन ये कैटेगरी को पूछेंगे। एंड आई थिंक दैट्स रियली व्हेन थिंग्स गेट वेरी इंटरेस्टिंग। सो मुझे जानना है कि कस्टमर्स को डिटर्जेंट्स में इंग्रेडिएंट से फर्क पड़ता भी है या नहीं? लाइक खाने में कस्टमर्स को इंग्रेडिएंट से फर्क पड़ता है। अब पड़ना चालू हुआ है लास्ट कुछ साल
(27:17) से। लेकिन डिटर्जेंट्स में लोग को इंग्रेडिएंट से फर्क पड़ता है या वो सिर्फ प्राइस देख के खरीदते हैं। पहले तो डिटर्जेंट्स में सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा उनको चाहिए कि साफ करता है कि नहीं। ये बर्तन में भी है। यह आपके फर्श के लिए, आपके फ्लोर्स के लिए भी है। क्लीनिंग इज द मोस्टेंट थिंग फॉर द कस्टमर एंड प्राइस इज इक्वलीेंट। तो ये दोनों चीज तो ये कैटेगरी के लिए एंट्री टिकट हो गई है। टेबल स्टिक्स हो गया है कि यह तो आपको देना ही है। फर्क क्यों पड़ता है जब आपके कपड़े ज्यादा टाइम लास्ट नहीं करते। जब आपके बच्चे और पेट्स फ्लोर पर खेलते हैं। उनकी
(27:52) हेल्थ अगर डॉक्टर्स वेट्स खुद सजेस्ट कर रहे हैं कि आपके पेट्स के लिए आपको कोई अलग प्रोडक्ट यूज़ करना चाहिए क्योंकि उनको रैशेस हो सकते हैं। उनको यह एलर्जी हो सकती है। तो पीपल डिड नॉट केयर अबाउट दी इंग्रेडिएंट्स टिल दे फेस द साइड इफेक्ट्स ऑफ इट। एंड आई थिंक दैट्स रियली व्हेन पीपल स्टार्टेड गिविंग मोरेंस टू इट। जब लोग बर्तन के लिए कंप्लेन करने लगे कि जब मैं बर्तन करता हूं, मेरे हैंड्स ड्राई हो जाते हैं, रैशेस हो जाते हैं। इतने आप Amazon रिव्यूज देखेंगे या कमेंट्स देखेंगे तो कितने लोगों ने लिखा है भाई डिटर्जेंट इंडस्ट्री 2035 में लाइक आज से
(28:24) 9 10 साल बाद कैसा लगेगा उसमें क्या चेंजेस आएंगे ये रेवोल्यूशन ऑलरेडी आ चुका है और पूरी ये अगले 10 साल में ये काफी कुछ बदल जाएगा डिटर्जेंट सिर्फ अभी यही नहीं बोलेगा कि आपको यह फ्रेगरेंस मिलेगा और यह कलर मिलेगा कि आप पाउडर से लिक्विड चले जाइए या आप ऐसे यूज़ कर लीजिए। डिटर्जेंट का बॉटल उस चीजों के लिए यूज़ होगा जो कस्टमर्स के लिए एक्चुअली इंग्रेडिएंट बैक्ट हो और साइंस बैक हो। यह पूरा कैटेगरी जो आज मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग पे काफी ग्रो हुआ है वो अभी साइंस और इंग्रेडिएंट्स पे ग्रो होगा और वही उसकी स्टोरी होगी। तो 10 साल बाद हमको लगेगा कि
(29:02) यार एडवरटाइजिंग में ये लोग स्टेन, फोम, फ्रेगरेंस बोलते थे बट कभी इंग्रेडिएंट्स की बात ही नहीं हुई। जो आज हमको फूड में लगता है कि काफी ऑब्जर्व है। वो अभी 10 साल बाद हमको डिटर्जेंट देखने लगेगा कि यार यह कैटेगरी ऐसी चल रही थी लेकिन होना वो यही चाहिए था। तो 10 साल में आप देखेंगे पूरा इसमें बदलाव आ जाएगा। एंड दैट इज आवर सिंपल एंबिशन कि हाउ डू वी ब्रिंग अबाउट दिस चेंज एंड हाउ डू वी बिकम अ कैटलिस्ट टू दिस चेंज? क्योंकि वेस्ट में ऑलरेडी वो चेंज आ चुका है। बट इंडिया में वो चेंज कोई ला नहीं पा रहा है और बहुत बड़े ब्रांड्स हैं जो शायद इसके लिए
(29:35) इंक्लाइंड नहीं हो कि यह चेंज लाए। आपने बोला कि कंज्यूमर्स को इंग्रेडिएंट्स के बेसिस पर खरीदना चाहिए उनका डिटर्जेंट। लेकिन अगर इंग्रेडिएंट्स मेंशंड नहीं है तो कंज्यूमर क्या करें? हाउ डू दे हाउ शुड द कंज्यूमर बाय अ प्रोडक्ट? अगर इंग्रेडिएंट्स ही मेंशंड नहीं है। प्रॉब्लम यही है कि कोई इंग्रेडिएंट बोलता भी नहीं है, कोई मांगता भी नहीं है। तो जो ज्यादा मार्केटिंग करता है, जो ज्यादा एडवरटाइजिंग करता है, उसका ज्यादा सेल है। वही कस्टमर्स को समझ आता है। बिकॉज़ वो मार्केटिंग पे ही पूरा चल रहा है। कोई साइंस और इंग्रेडिएंट की सुन ही नहीं रहा
(30:08) है, ना पूछ रहा है, ना कोई बोलने वाला है। मैं फुल्ली एग्री करता हूं कि जैसे ही लोग खाने के लेबल पढ़ते हैं, स्किन केयर के लेबल पढ़ना शुरू कर रहे हैं। अब उन्हें डिशवाशिंग, डिटर्जेंट, फ्लोर क्लीनर और बाकी सारे इंडस्ट्री लाइक टूथपेस्ट, परफ्यूम, शैंपू सबके इंग्रेडिएंट लिस्ट पढ़ना चाहिए। थैंक यू सो मच फॉर कमिंग हियर, शेयरिंग अस, टीचिंग अस हाउ टू रीड अ लेबल ऑफ ऑल दीज़ अदर इंडस्ट्रीज। एंड ट्रूली वाज़ वेरी इंसाइटफुल। थैंक यू। तो आज मैंने इस एपिसोड में सीखा कि लेबल पढ़ेगा इंडिया। सिर्फ फूड तक सीमित नहीं है। सिर्फ जो खाने अपने बॉडी के अंदर डाल
(30:46) रहे हो उसके तक सीमित नहीं है। आपको स्किन केयर का भी लेबल पढ़ना चाहिए। और मोरेंटली आपको डिटर्जेंट, डिशवाशर, फ्लोर क्लीनर और बाकी इंडस्ट्रीज जो हम लोगों ने इस एपिसोड में कवर नहीं भी किया कि चाहे परफ्यूम हो कि टूथपेस्ट हो कि सोप हो या एक मॉस्किटो रिपेलेंट भी हो सब में लेबल होता है और हम सबका जानकारी हमें इनक्रीस करना चाहिए ताकि हम बेटर चॉइसेस ले पाएं। लेबल पड़ेगा इंडिया तभी तो स्वस्थ रहेगा इंडिया।

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