Acting is Just Drama? Brutally Honest Truth by Pankaj Jha on Life, Ego & Reality
Author Name:Shobha Rana
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Transcript:
(00:00) जो आप फिल्में करते हो या आप वेब सीरीज करते हो आपको पसंद है? मैं मेरे मैं पैसे के लिए करता हूं। इसलिए मैं उन लोगों के साथ ज्यादा कंफर्टेबल होता हूं जो थोड़ा सा ग्राउंडेड लोग हैं, सिंपल लोग हैं, साधारण लोग हैं। उन लोगों के साथ में मैं कभी किसी से काम मांगता नहीं। मैं कुछ भी नहीं मांगता हूं। तो मैं आपसे ये पूछ रही थी कि आप अपने इमोशंस को और अपनी पर्सनल लाइफ को उस कैरेक्टर से कैसे डिफरेंशिएट कर पाते हो? कुछ नहीं होता। करैक्टर फटरेक्टर ये सब बकवास वाली बात है। लाइन होता है लाइन होता है। ऐसे करके सुनो ए तुमसे बात कर
(00:33) रहे हैं। हां नहीं नहीं नहीं तुमसे तुमसे इतना ही होता है। कुछ नहीं होता। सुनिए मुझे मुझे बहुत तकलीफ मुझे लग रहा है कि मुझे डर लग रहा है। इतना ही ड्रामा होता है। कुछ नहीं होता है। इमोशन प्रमोशन ये सब कहां है? ड्रामा है यार। ड्रामा है यार। मैं जैसे शाहिद कपूर को सुन रही थी कि वो कौन सी फिल्म की उन्होंने? कबीर सिंह। कबीर सिंह के बाद मैं बहुत फिजिक मेरे लिए बहुत मुश्किल हो गया था उस कैरेक्टर से को डिसअसोसिएट कर पाना। आलिया भट्ट भी कह रही थी कि मैंने उड़ता पंजाब किया तो तो मैं जिस ज़ोन में चली गई थी मेरे लिए बहुत डार्क ज़ोन हो गया था। ऐसा
(01:13) रणवीर सिंह भी कह रहे थे कि जब उन्होंने पद्मावत की खिलजी का जब रोल किया तो बहुत एक डार्क स्पेस में चले गए थे और पर्सनल लाइफ में उसको डिसोसिएट कर पाना डिफिकल्ट हो रहा था। तो इस इस तरह की बातें सुनने को मिलती है कि हम इतना उस कैरेक्टर को जिए अ उस एक साल के दौरान या 2 साल या जितने भी साल लगे उस मूवी को बनने में कि हमको अपने इमोशनल स्टेट को उस कैरेक्टर के इमोशनल स्टेट्स के बीच में फर्क करना मुश्किल ऐसा आपके साथ भी हुआ क्या? घर में लोग डार्क स्पेस में हैं। घरों में डिप्रेशन में हैं। कैरेक्टर में कहां जा रहे हो डिप्रेशन में?
(01:48) एक कैरेक्टर को पढ़ना उसके सारे डिप्रेशन करैक्टर सब ये जो अरे यार हमारे यहां कहावत है कि की देखिए कल के गप तो कल के द लोपे लॉप मतलब क्या बोल रहे हैं तो गप दे रहे हैं तो बोलते फिर तो लपे लप दीजिए ना मतलब छोटा-छोटा क्यों दे रहे बोलना होता है [हंसी] बड़ी-बड़ी बातें करनी होती है ना क्योंकि आपने बड़ा बनाया है ना भाई नाम ले रहे हो ना आप एक किसान खेती करके खीरा उगा रहा है और करेला उगा रहा है और आप जाते हो बोलते कितने का मिलेगा तो बोलेगा ₹5 का हम आपको 1ढ़ किलो दे देंगे तो आपको थोड़ी लगेगा कुछ भी हमने उसको बड़ा बना
(02:32) रखा है ना बड़ा नाम बोलते हैं ना बड़ा-बड़ा हम लोग बात करते हैं ना बड़ा आदमी बड़ा साहित्यकार बड़ा एक्टर ये सब डिजीज है सब बीमारी है अक्सर वो मेरी कविता है ना के गिरे हुए लोग ज्यादा ऊंचे दिखते हैं। ऐसा क्योंकि हर आदमी को इतना नेगलेक्ट किया गया है ना हर आदमी खुद को निर्मित करने में लगा हुआ है कि आई एम समथिंग। मुझे हल्के में मत लेना। अब मैं बोलता हूं कि मैं तो बोलता हूं मैं एक्टर भी नहीं हूं। मैं पेंटर भी नहीं हूं। मैं राइटर भी नहीं हूं। आई एम जस्ट अ ह्यूमन बीइंग। सिंपल। मैं एक आदमी नहीं हो सकता क्या?
(03:20) पर आपको आपकी इंडस्ट्री में अपने जैसे लोग मिलते हैं जो आपका थॉट शेयर करते हो। हमको कहां से किसी का थॉट अभी हमारा दुनिया देखेगा थॉट इतना जो बोल रहे हैं चार टेक्स करके आए हैं बोल रहे हैं। अभी पूरी दुनिया बुला रही है मुझे बोलने के लिए। मेरा थॉट मेरा कुछ मुझे मजा आता है मैसेज देने में। हम हम पंकज जी आज जैसा मैंने सोचा था कि आपके करियर और कुछ फिल्मों के बारे में बातें करेंगे। वो सब तो हमने की नहीं लेकिन हां लाइफ को देखने का जो एक नजरिया है जो आपका है कि यू नो द जर्नी विद इन पॉडकास्ट पे हम लोगों को डिफरेंट-डिफरेंट लाइफ के पर्सेक्टिव्स दिखाने की कोशिश
(03:54) करते हैं कि लाइफ ऐसी भी होती है, ऐसी भी होती है, ऐसी भी होती है। क्योंकि आजकल हम लोग बहुत लाइफ के एक फिक्स्ड आईडिया को लेकर स्ट्रगल कर रहे हैं। जैसा आपने भी बात की कि मां है तो ऐसी ही होनी चाहिए। पिता है तो ऐसा ही होना चाहिए। नौकरी है तो ऐसी ही होनी चाहिए। पैशन है तो ऐसा ही होना चाहिए। इस तरीके से ही दिखना चाहिए मेरी लाइफ में। तो हम क्या इन रिश्तों को इन अपने हैबिट्स को इन अपने कामों को अलग-अलग नजरिए से देख सकते हैं? तो आई थिंक आपने एक बहुत ही अपना ऑथेंटिक नजरिया दिया है। जैसा आप सोचते हैं जिसमें आप मानते हैं। अभी ऑडियंसेस को उसमें से क्या
(04:24) समझ में आता है? उनकी लाइफ में क्या एप्लीकेबल होता है? यह ऑडियंसेस को देखना है। लेकिन मुझे लगता है कि जब कोई एकदम रॉ और ऑथेंटिक सेल्फ हो पाता है तो उसकी थोड़ी बातें जैसा हमने एक वर्ड का यूज़ किया पागलपन जैसी लगती है। नहीं मैं यूनिक हूं। मैं इंडिविजुअल हूं और हर आदमी यहां इंडिविजुअल ही होने के लिए आया है। मैं भीड़ की भाषा नहीं बोलता हूं। अगर भीड़ की भाषा बोलता मैं बता देता हूं मैं कैसे बात करता। नमस्ते। हां मैं अपनी कविता सुनाता हूं। बड़ा अच्छा लगा सब अभी मेरा वो आया है दो तीन। अभी मैं आया था फिल्म हमारा हमारी ये कविता है। जी हां
(04:59) बड़ा अच्छा लगा। हमने देखा था आपको ऐसे करके। हां मुझे मीरा नायर जी ने ऐसे करके बुलाया था। फिर ऐसे-ऐसे करके व्हाई व्हाई? इतना गरीब क्यों है आदमी? आई एम इंडिविजुअल। आई एम यूनिक। ओशो कहते हैं इंडिविजुअल को कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता है। तुम भीड़ की भाषा नहीं बोलोगे। तुमको भीड़ कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। खुश आदमी को कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता। दुखी आदमी के दोस्त होते हैं। खुश आदमी को कोई दोस्त नहीं होगा। हो आप जैसे भी सोचते हो आप इसलिए सोचते हो कि आपको यूनिक बनना है या फिर सोचते हो यूनिक बनना नहीं यूनिक सब है ही वो सबको
(05:40) यूनिक ही बनाता है आप जब एक रोड साइड में जाके इतना कंकर पत्थर उठाओगे ना एक कंकर दूसरे कंकर से नहीं मिलता है एक पेड़ के पत्ते जो है ना एक पेड़ का जितने भी पत्ता है ना एक पत्ता दूसरे यहां प्रकृति कोई रिपीट करता ही नहीं है सिर्फ आदमी इसलिए आदमी का इतना हाल है आप इंडिविजुअल हो गए मैं अपने सेंस से अपनी जिंदगी जीता हूं। दैट्स इट। ओशो ने कहा मैं तुमको तुम आंख दे दूंगा। उस आंख से तुम अपनी जिंदगी जीना। मैसेज यही है कि आदमी से पूछता है आदमी कि किधर मिलेगा आदमी? आदमी नहीं मिलता है। एक्टर मिलता है, पेंटर मिलता है, डायरेक्टर मिलता है, राइटर मिलता है,
(06:21) ब्रॉडकास्टर मिलता है और थेरेपिस्ट मिलता है और योगा टीचर मिलता है, आदमी नहीं मिलता है। कि आदमी से पूछता है आदमी कि किधर मिलेगा आदमी दूसरे की निगाहों में खुद का पता पूछता है आदमी अपने घर वापस कब आएगा आदमी आदमी से पूछता है किधर मिलेगा आदमी ऐसा पंकज जी जो लोग इस पॉडकास्ट को सुन रहे हैं अपनी लाइफ में कौन से ऐसे चेंजेस ला सकते हैं कल से कि वो खुद को थोड़ा और करीबी से जान पाए। सच बोलने लगे घर में अगर टूट जाता है घर तो टूट जाने दे लेकिन जो बचेगा बहुत खूबसूरत बचेगा जीवन बच
(07:05) जाएगा बेवकूफ ना बनाए ना किसी को भी खास करके खुद को क्योंकि आपके पास टाइम बहुत कम है बुद्ध ने कहा कि तुम्हारी सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि तुमको लगता है तुम्हारे पास बहुत टाइम है और टाइम ऐसे जा रहा है ऐसे ऐसे जा रहा है किसी को ना बेवकूफ बनाएं और ना खुद को बेवकूफ बनाएं छोटा सा जीवन है जी के चले जाए ये आपका घर नहीं है। यहां कुछ भी पक्का नहीं है। कौन कब कहां से चला जाएगा? हम लोग कब्रिस्तान में जी रहे हैं। कब्रिस्तान में खरीद रहे हैं जमीन। कब्रिस्तान में खरीद रहे हैं जमीन। आमीन। आमीन। आमीन। और उस जमीन को अपना मकान कह रहे हैं।
(07:50) हां। तो जो घरों में द पीपल आर ओनली वेटिंग फॉर डेथ। जासूस रखें। पता नहीं कि पत्नियों पर जासूस होता है। पति पत्नियां पतियों पर जासूस रखते हैं। ऐसा किसको सुनना है और यह सब तमाशा है। कोई किसी को लाइफ को सबको सब कुछ पता है। सबको वही करना है जो वो कर रहे हैं। किसी का लाइफ अपनी चेंज हो। जिसको चेंज करना होता है लाइफ उसको किसी को सुनने की जरूरत नहीं होती है। वो कर देता है। एकलब को कोई जरूरत नहीं था कि मतलब उसको शिष्य गुरु ही मिले वह मूर्ति वह बनाकर मतलब सबसे बड़ा धनधर बन गया था तो जब आपको झटका लगता है ना जब आपको लगता है नहीं यार
(08:35) मुझे जीना है ये तब जब आपको जब आपको बुद्ध जब निकले बाहर महल से जब देखा ना मौत तो झटका लगा ना वो क्या रियलाइजेशन हुआ कि जिसके लिए आदमी अपनी आत्मा बेच के बड़ी गाड़ी और बड़ी गाड़ी और लोगों वाली गाड़ी और छह सीटर वाली गाड़ी और ड्राइवर इसके चक्कर में अपनी आत्मा बेच देते हैं। मतलब क्या कर देते हैं और बुद्ध वो महल छोड़ के निकल गए। वो क्या दिखा उनको आदमी ने कि एक आदमी मर गया है। सारथी को बोले कि वो वापस करो कि अगर यह आदमी हम मर जाएंगे एक दिन तो समझो हम मर ही गए वापस करो व्रत और बुध घर छोड़ के चले गए। वो क्या रियलाइजेशन
(09:16) होगा? पंकज जी आपके अर्ली इयर्स में पेन और सफरिंग का क्या रोल रहा है? पेन मतलब दर्द। आपने देखा है अपनी लाइफ में सफरिंग दर्द जो है ना वो गिफ्ट है कैसा देख मतलब आपका बचपन कैसा रहा मैं ये जानने की कोशिश कर मेरा बचपन मुझे लगा मुझे लगा बचपन बचपन ये सब बड़ी बकवास वाली ये सब कवियों वाली बात है बचपन मुझे लगता है मैं वैसा ही हूं जैसा मैं था बच्चा मेरा सेंस मेरा बोलने का तरीका मैं ऐसे ही देखता था लोगों को ये बचपन बचपन क्या होता है ना मैं मैं और ज्यादा बच्चा हो गया हूं मैं अपना बहुत बेवकूफ आदमी बोलता हूं मैं कोई समझदार आदमी नहीं हूं हूं। मैं बच्चे जैसा हूं।
(09:55) मुझे जो दिल करता है वो बात करता हूं मैं। बच्चा तो ऐसी तो करता है। और अगर आप से कुछ गलत हो जाए तो क्या आप माफी भी मांग लेते हो? नहीं। क्यों? हां गलत होगा तो गलत होगा ही नहीं। और माफी क्यों मांगना है? कि अगर आपकी बात से करेंगे ही नहीं तो माफी क्यों? किससे मांगने का? यहां माफ कौन करने वाला है? कौन है जो हमको माफ करेगा भाई? इतना अधिकार तो ना दिया किसी को। तो आप ऐसा नहीं समझते हो कि आप किसी को हर्ट भी कर सकते हो। आप किसी नहीं हर्ट वर्ड कुछ नहीं होता है। हर्ट वर्ड जो है ना हार्ट का जो काम होता है ना सिर्फ ब्लड पंपिंग करने के लिए होता है।
(10:38) आपकी अपेक्षाएं हर्ट होती है। सिर्फ आपका एक्सपेक्टेशन हर्ट होता है। जिसको हम ब्रेकअप बोलते हैं। जो प्यारव्यार प्यारव्यार जैसा कुछ नहीं होता है। आपका एक्सपेक्टेशन आपका गुब्बारा फूटता है ना। हम जब प्रेम में जाते हैं किसी के तो हम इमेजिनेशन में जाते हैं ऐसे करके तो वो गुब्बारा फूटना ही है तो फूटना है जैसे मैं डिप्रेशन को बोलता हूं डीप ऑपरेशन जो आपने जो महल बनाया था आपने जो गुब्बारा बनाया ये वो इसीलिए सारी लड़कियों का वो डिप्रेशन में रहती है ना क्या आपको कभी ऐसा डिप्रेशन वाले लोग दिन भर टीवी देखते हैं ना डिप्रेशन वाले लोग ही शादी किसी को
(11:14) चाचा के मामा के लड़की की शादी में भी तैयारी हो रही है सब जा रहे हैं क्योंकि दे आर इनसाइड नॉट हैप्पी ना इनसाइड होता क्या है? कौन है हमें अंदर से? इंसाइड यू, योर ब्लिस, योर फ्रीडम, यू ब्रीथ, यू सी, यू एंजॉय, यू वाच, छोटी-छोटी चीजें हैं। कोई आया, कोई प्यारा सा बंदा है, उससे बात कर रहे हैं। किसी को देख के लगा कि इसको भूख लगी है, इसको कुछ खाना दे देते हैं। किसी को लगा देना ही भूल गए हैं ऐसा। तो जो इनसाइड है हमारा अगर इतना ही सिंपल है तो फिर सब इससे टच में क्यों नहीं है? सब नहीं है वो सब जाने ना। हमने थोड़ी हम हमारा थोड़ी ये काम है। उस सबको खुद ही
(11:58) इंक्वायर करना पड़ेगा ना। सेल्फ रियलाइजेशन इज रियल एजुकेशन। बाकी सब धंधा पानी मैंने पढ़े लिखे आज तक समझदार लोगों से नहीं मिला हूं। मुझे पढ़े लिखे मूर्खी मिले हैं आज
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