Thursday, April 9, 2026

R@pe Cases Exposed|Women’s Condition In India | R@pe & M@rder case Kolkata | Yogita Bhayana | TJW#78

R@pe Cases Exposed|Women’s Condition In India | R@pe & M@rder case Kolkata | Yogita Bhayana | TJW#78

Author Name:Shobha Rana

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@iamshobharana

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=qi0UzbbHBU4



Transcript:
(00:00) 19 साल की लड़की यहां कॉल सेंटर में गुड़गांव में जॉब करकर अपने घर जा रही थी दिल्ली में तो तीन लड़कों ने किडनैप किया और उनका बलात्कार किया और उनको कहीं दूर हरियाणा में जाकर फेंक दिया उनको हम उत्तराखंड की निर्भया बोलते हैं किरण नेगी देखिए निर्भया केस में नौ साल लगे बट निर्भया के पहले के भी केसेस चल रहे हैं और निर्भया के बाद के भी केसेस हैं जो अभी तक जस्टिस कहीं तक नहीं पहुंचे जस्टिस में इतना डिले क्यों लगता है आई जेनुइनली फील दैट जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड जी बिल्कुल आपकी बात सही है और यहां तो ना डिले भी होता है और डिनाइड भी होता है
(00:32) बहुत कम कन्विंसेस में मर्डर कहते हैं ना फिट ऑफ रेज में होता है रेप नहीं होता फिट ऑफ रेज में वो फिट ऑफ अर्ज भी नहीं होता जो बहुत सारे लोग जस्टिफाई करते हैं अर्ज हुई और उसने रेप किया ऐसा भी नहीं है सेक्सुअल अर्ज कैन बी यू नो पसिफाइड ऐसे तो फिर सारे ही रेपिस्ट हो जाए देखिए सबसे इंपॉर्टेंट है उन तक पहुंचना स्पेशली उन महिलाओं तक पहुंचना जिनको कंसेंट नहीं पता है जिनको उनके हस्बैंड रोज रेप करते हैं बलात्कार करते हैं जिनको नहीं पता उनके साथ रोज बलात्कार हो रहा है क्योंकि वो उनकी मर्जी के विरुद्ध हो रहा है लीगली भी इसमें डिफाइंड है कि अगर आपकी मर्जी के
(01:10) विरुद्ध हो रहा है तो वो बलात्कार है देखिए प्रवादानविटा वेलकम टू द जर्नी विद इन पॉडकास्ट विद मी शोभा राना मैं एक इमोशनल इंटेलिजेंस और माइंडसेट कोच हूं और साथ ही साथ इस पॉडकास्ट की होस्ट और क्रिएटर भी हूं इस पॉडकास्ट के थ्रू मेरी यह कोशिश है कि आप अपनी लाइफ में झांक सकें और अपने आप से कनेक्ट कर सकें अपनी द जर्नी विद इन कर सके ताकि आप अपनी जिंदगी में वो बदलाव जो चाहते हैं जैसी जिंदगी आप अपने लिए क्रिएट करना चाहते हैं वो क्रिएट कर सके आई
(01:55) जेनुइनली बिलीव दैट द पावर टू क्रिएट योर बेस्ट लाइफ लाइज इन योर ओन हैंड्स और इस पॉडकास्ट का सिर्फ यह मुद्दा है कि आपको आपकी इंटरनल पावर से कनेक्ट कराने में हम हेल्प कर सक आज जो हम कन्वर्सेशन करने जा रहे हैं वह बहुत ही इंपॉर्टेंट है बहुत ही सेंसिटिव [संगीत] है आज हमारे साथ हैं योगिता भयाना जो कि फाउंडर है पीपल अगेंस्ट रेप इन इंडिया मूवमेंट की ये रेप विक्टिम्स और सरवाइवर्स के साथ उनको जस्टिस दिलाने और उनकी जिंदगी को फिर से दोबारा शुरू करने में मदद करती हैं आज की कन्वर्सेशन बहुत ही इंपॉर्टेंट है और साथ ही साथ बहुत ही सेंसिटिव है यह
(02:43) बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हमारे देश में एक लार्ज परसेंटेज ऑफ विमेन ने किसी ना किसी तरह का फिजिकल अब्यूड़ोस करना बहुत डिफिकल्ट भी है लेकिन एट द सेम टाइम बहुत जरूरी भी है क्योंकि जब तक बात नहीं होगी तब तक सलूशन नहीं निकलेगा और जब तक सलूशन नहीं निकलेगा तब तक ना पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन होगा ना एक सोसाइटी का ट्रांसफॉर्मेशन होगा आज के इस एपिसोड को एंड तक जरूर देखिएगा क्योंकि हमने बात की है रेप विक्टिम्स के बारे में उनके चैलेंज के बारे में सरवाइवर्स के बारे में लीगल सिस्टम में क्या प्रॉब्लम्स है कैसे रिफॉर्म्स किए जा सकते हैं पॉलिटिकल
(03:22) इन्फ्लुएंस का क्या रोल है करप्शन और मनी किस तरह से इसमें एक रोल प्ले करता है एक रेपिस्ट जो है उसका माइंडसेट क्या होता है अ कैसे हम ट्रेनिंग और डेवलपमेंट कर सकते हैं अपनी पुलिस फोर्सेस की कैसे उनको और सेंसिटिव बना सकते हैं और भी कई सारी बातें और सोलूशंस इस एपिसोड में हमने सुझाव देने की कोशिश की है और आपके सपोर्ट से आपके शेयर्स के थ्रू इस वीडियो को हम चाहते हैं बहुत सारे लोगों तक पहुंचाया जा सके ताकि इस बारे में बात होना और बुलंद आवाज होना शुरू हो नाउ लेट्स गेट इन टू दिस एपिसोड विद योगिता भयाना ऑन द जर्नी विद इन पॉडकास्ट वेलकम टू द पॉडकास्ट
(03:59) योगिता थैंक यू सो मच फॉर इनवाइटिंग मी एज अ वुमन आई एम सो प्राउड ऑफ यू जो आप काम करती हैं मैं जब आपके बारे में रिसर्च कर रही थी तो आपका काम देखा और मैं लगभग उस पूरे टाइम बहुत ज्यादा इमोशनल थी क्योंकि एक बहुत सेंसिटिव टॉपिक है तो इस कन्वर्सेशन की शुरुआत में करना चाहूंगी हमारे देश की जो प्रेजेंट हालत है वहां से मैं डब्ल्यू पीएस इंडेक्स देख रही थी जो कि वमन पीस एंड सिक्योरिटी इंडेक्स है मेमन को कितना जस्टिस मिलता है कि कितनी उनकी आवाज सुनी जाती है कितना उनका सेफ्टी और सिक्योरिटी है उस बारे में हमारा देश पूरी दुनिया में
(04:36) 128 नंबर पर आता है 128 वच इज सच एन अलार्मिंग न्यूज मतलब हमारे देश की इतनी हालत खराब है इस बारे में आपका क्या कहना है मुझे उसका कोई सरप्राइज नहीं लग रहा है इंडेक्स में जो हमारा रैंक है उसको लेकर क्योंकि क्योंकि इतने सालों से क्योंकि इट्स बीन 17 इयर्स लगभग 17 सालों से जब मैं काम कर रही हूं महिलाओं के लिए तो मुझे यह समझ में आ गया कि बहुत ही दुर्दशा है और जो हम बात करते हैं या हम इंटरेक्ट करते हैं इंटरव्यूज में भी वो टिप ऑफ द आइसबर्ग बता पाते हैं जो हमारी महिलाओं की दुर्दशा है इस देश में इनिक्वालिटी है या इंजस्टिस है वो
(05:15) इतना ज्यादा है कि कुछ घंटों की बातचीत में भी बयान नहीं हो पाएगा मतलब हम सबको पता है सबसे बड़ी बात तो यह हम सबको पता है पुरुषों को पता है महिलाओं को खुद भी कहीं ना कहीं पता है पर व उस चीज के साथ जीना सीख लेती हैं उनको ओके हो जाता है दे आर फाइन विद इट यह सबसे बड़ा डेंजरस है हमारा जो साइन है इसकी वजह से कुछ इवॉल्व नहीं कर पाते क्योंकि हमारी सोसाइटी का जो फैब्रिक है या स्ट्रक्चर है वो उन्हें अ उस चीज को नॉर्मलाइज करता है अगर यह इंडेक्स की भी बात अगर यह फिगर निकल के आई भी है आप बताइए इस पे क्या चर्चाएं हुई है आपके अलावा मुझसे आज तक यह सवाल सिस्टम के
(05:55) किसी अधिकारी से बात हो या कहीं पॉलिटिशियन हो इन्होंने उठाई हो नहीं कुछ-कुछ कुछ मीडिया या कुछ आप जैसे सेंसिटिव लोग इस चीज पर बात भी करते हैं कहां बात हुई हमारी बताइए आपने बिल्कुल सही कहा जब मैं रिसर्च भी कर रही थी इस एपिसोड के लिए तो जो बहुत पॉपुलर और वायरल तरीके के केस हो गए हैं फॉर द लैक ऑफ अ बेटर वर्ड उनके बारे में देखने को मिलता है लेकिन जो रोज मर्रा इतनी लड़कियों का रेप हो रहा है और ह्यूमन ट्रैफिकिंग हो रही है उसके बारे में हार्डली आपको कुछ कुछ ज्यादा इंफॉर्मेशन मिलती है सो सबसे पहले बेसिक रूट कॉज से ही स्टार्ट करते
(06:28) हैं आप इंडिया के कोने कोने में जाकर इन रेप सरवाइवर्स के साथ काम करते हो इन विक्टिम्स के साथ काम करते हो जस्टिस में इतना डिले क्यों लगता है आई जेनुइनली फील दैट जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड अगर किसी केस में 10 15 20 साल बाद कोई फैसला आ भी जाता है तो उसका क्या फायदा है मतलब आपकी लाइफ के 20 साल निकल गए उस फैसले तक पहुंचने में जी बिल्कुल आपकी बात सही है जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड और यहां तो ना जस्टिस डिनाइड भी है डिले भी होता है और डिनाइड भी होता है बहुत कम अ कन्वे है 28 पर से भी कम कन्वे है हमारे देश में अगर वो भी रिपोर्टेड केसेस की अगर हम बात
(07:10) करें तो अगर 100 केस रिपोर्ट होते हैं तो 28 में सजा होती है बाकी सब छूट जाते हैं क्योंकि हमारे यहां जो सिस्टम है जो एविडेंस कलेक्शन के प्रोसेस है या सेंसिटिविटी है या हॉस्टाइल्स इतना टॉर्चर अस है ना दैट पूरा का पूरा प्रोसीजर कि कोर्ट में आपको जाना पुलिस में धक्के खाना ये जो धक्के धक्का खाना लिटरली धक्का खाना चप्पल घिसना हम सुनते थे ना वो लिटरली विक्टिम्स के साथ होता है और जो एंड ऑफ द डे ऑलरेडी विक्टिम है जिसके साथ इतना ग्रूसम क्राइम हुआ है उसको उसको न्याय लेने के लिए इतना जद्दोजहद करना पड़ता है कि वो गिव अप कर देते हैं
(07:49) अपनी फाइट को तो वो अ विटनेस नहीं देते या वो फिजल आउट हो जाते हैं या हो स्टाइल हो जाते हैं या वो पैसा ले लेते हैं व्हाट एवर इट इज मैं उस चीज को डिनायल छोड़ देते हैं कन्विंसेस में 28 से भी कम की एवरेज है और यह वह केसेस हैं जो रिपोर्ट होते हैं हमारे देश में तो ज्यादातर 80 90 पर से अधिक केसेस रिपोर्ट ही नहीं होते हैं क्योंकि जो भी हमारा सोशल फैब्रिक है सोशल स्ट्रक्चर है तो जस्टिस डिनाइड ही है डिलेड भी तो बाद की बात है डिनाइड है और टॉर्चर है और बहुत ही बेहूदा जर्नी है मैं ओपनली आपके पॉडकास्ट प बोल रही हूं कि बहुत ही बहुत ही ज्यादा अ
(08:30) ऐसी जर्नी है जिसको कोई ना जिए तो मैं क्या बोलूं कि जस्टिस डिनाइड डिलेड एंड टॉर्चर्स जैसा आपने कहा कि 28 पर से भी कम लोगों को न्याय मिल पाता है या उनके जो अपराधी हैं जो कन्वे हो पाता है उन केसेस में राइट इसका मतलब है 72 पर जो ऐसे रेपिस्ट हैं वो हमारे बीच में ही घूम रहे हैं जी वो एक सोसाइटी का फैब्रिक बन गए हैं उनके लिए तो बहुत आसान है वापस से सोसाइटी में आके घुलमिल जाना बट इन रेप सरवाइवर्स की क्या स्टोरी होती है यह कैसे रिइंटीग्रेट होते हैं सोसाइटी में एक तो इतना बड़ा आप आप ये क्राइम अपने साथ झेलते हो बहुत मुश्किल से हिम्मत जुटाकर जैसा
(09:09) आपने कहा 90 पर केसेस गो अन रिपोर्टेड सिर्फ 10 पर केस हैं जिनकी रिपोर्टिंग होती है तो एक लड़की जिसके साथ यह हुआ है वो जाकर पहले रिपोर्ट करती है सिस्टमिक लेवल पर वहीं से रेजिस्टेंस आना शुरू हो जाता है हमारी पुलिस भी कहीं ना कहीं थोड़ी इन सेंसिटिव है इन केसेस को लेकर सो लेट्स लेट्स टॉक अबाउट एक्चुअली सिस्टमिक रिफॉर्म्स आल्सो और ये सिस्टम की कन्वर्सेशन ना मैं कुछ लेयर्स में करना चाहती हूं आपके साथ द फर्स्ट लेयर इज व्हेन समथिंग लाइक दिस जज हैपेंड तो लड़की के घर पे क्या कन्वर्सेशन होती है अ और क्यों वो रिपोर्टिंग के लिए नहीं जा पाते
(09:41) हैं देखिए पहले तो यह समझने की बात है कि हमारी डिवाइड इतनी ज्यादा है हमारी सोसाइटी हमारे इंडिया में इन इक्वलिटी इतनी ज्यादा है मैं और अब जब यहां इस अच्छे सुंदर स्टूडियो में बैठ के बात कर रहे हैं वहां पर जब हम बात करें एक महिला की जो एक गांव में दूर दराज में जहां पर वो गैया चलाती है या एक जहां पर ट्रांसपोर्ट भी नहीं है और वह वॉशरूम जा रही है और उसके साथ ऐसी दरिंदगी हो गई है कहीं मतलब एक छोटी बच्ची क्योंकि हम बच्चों की बात नहीं कर रहे हैं बट आई एम काउंटिंग दैट इन हम क्योंकि ज्यादातर बच्चों के साथ भी काम करते हैं जो कि
(10:12) बिल्कुल अनटच है टॉपिक महिलाओं की सुरक्षा की बात है महिला बोल सकती है यहां बच्चों के साथ इतना कुछ हो रहा है तो वह तो कोई बात ही नहीं करता तो जब वोह छोटी बच्चियां टीनेजर बच्चियां या इवन बॉयज मतलब विलेज के उस उस स्थान पर है जहां पर पर हम लोग मतलब रिलेट भी नहीं कर सकते ऐसी जगह हमारे यहां एजिस्ट करती है इतनी गरीबी है या यहां पर माइग्रेंट लेबर्स के जो बच्चे हैं या कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के जो जो डेली वेजर्स के बच्चे हैं जिनके साथ य अपराध होते हैं या उनकी वाइफ्स वल्नरेबल होते हैं या वो महिलाएं जो उस घर में रहती है तो ये देखिए ये किस बैकग्राउंड से है उनके
(10:51) साथ ये हुआ तो एक ये सबसे बड़ा कारण था कि उनके पास आर्थिक जो व्यवस्था है वो नहीं है तो वो सबसे बड़ा उनका एक रुकावट बनता है उनको रिपोर्ट करने में क्योंकि उनकी जो आर्थिक स्थिति है उनके पास उनको पता नहीं पुलिस स्टेशन जाने के लिए भी कैसे जाएंगे वह आप बताइए अगर ऐसा कोई अपराध हुआ और अगर करने वाला थोड़ा सा भी पैसे वाला हुआ पहली बात तो वह कैसे निकल के उस चीज को रिपोर्ट करेंगे तो रिपोर्ट ही नहीं होते हैं क्योंकि उसको अगर वह एक दिन का दिहाड़ी छोड़कर रिपोर्ट करने जाएगा तो उसका दिहाड़ी का नुकसान होगा और वहां पर जो पैसा लगेगा फिर वहां
(11:26) पुलिस कैसी है मुझे बताने की जरूरत नहीं हम को पता है उस पर भी तो पूरे एपिसोड्स बन सकते हैं कि वहां उसकी क्या ही सुनवाई होगी वह 100 200 500 देक अपनी सुनवाई भी कराएगा ब्राइब भी देगा अपनी रिपोर्ट लिखा मतलब उस महिला की बात करही हूं महिला अकेले तो जा ही नहीं सकती उसको कोई सपोर्ट चाहिए तो बहुत सारे फैक्टर्स सोशल फैक्टर्स हैं आर्थिक फैक्टर्स है जो ऐसे क्लास की मैं बात कर रही हूं जो आर्थिक आर्थिक स्थिति में नहीं है और जो इकोनॉमिकली उस पोजीशन में नहीं है कि रिपोर्ट कर पाए और व रिपोर्ट नहीं करते हैं तो न्याय तो फिर दूर की बात है
(12:02) रिपोर्ट करने के बाद भी न्याय के लिए भी पैसा खर्च होता है जितनी भी प्रो बोनो सर्विस हो जितना भी हम बोले कि फ्री की चीजें उपलब्ध है या फ्री सर्विस उपलब्ध है वह सिर्फ कागजों में है अच्छा दिखता है फ्री हेल्पलाइन नंबर्स है लीगल सर्विस अवेलेबल है ऐसा लेने के लिए फ्री सुविधा या मुफ्त सुविधा मतलब उसके लिए भी एक जद्दोजहद है तो यह तो हुआ उस सेगमेंट की बात अब मिडिल क्लास देन अपर मिडिल क्लास जो थोड़ी बहुत मिडिल क्लास महिलाएं निकल के बच्चियां निकल के केसेस रिपोर्ट होते हैं जदो जह तो स्ट्रगल उनकी है अब रही प्रिविलेज क्लास की बात प्रिविलेज क्लास
(12:37) में भी पहली बात तो दे आर लेस वल्नरेबल मैं यह नहीं कह रही हूं कि नहीं होता है होता है वहां की महिलाओं के साथ भी यन उत्पीड़न या बट रेप जैसा ऐसा जैसे ब्रूटल रेप करके कोई भाग गया ऐसा नहीं है बहुत कम केसेस देखे जाते प्र वरे बिलिटी फैक्टर्स अलग-अलग है और क्योंकि एजुकेशन है तो थोड़ा सा रिपोर्टिंग इजी है उनकी सुनवाई जल्दी हो जाती है उनकी रिपोर्ट जल्दी लिखी जाती है उन परे एक्शन कारवाई और प्रोसीडिंग दे कैन अफोर्ड लॉयर्स तो वह सारी फैक्टर्स बहुत मायने रखते हैं तो मतलब रिपोर्टिंग ना होने का सबसे इंपोर्टेंट रीजन यह है कि सोसाइटी किस तरी
(13:12) से देखती है और आर्थिक जो दिक्कतें आती है इकोनॉमिक दिक्कतें की पुलिस स्टेशन तक जाने का पैसा और बार-बार जाने का पैसा और अगर आपको लीगल एडवाइस मानिए प्रो बोनो भी मिल रही है मतलब फ्री ऑफ कॉस्ट भी मिल रही है लेकिन बार-बार कोर्ट जाने का पैसा अपना दिन का काम छोड़ कर जाने का पैसा उस सब के चक्कर में वो लड़ाई इतनी बड़ी लगने लगती है कि आपको लगता है कि मैं अपनी रियलिटी एक्सेप्ट कर लू जो भी मेरे साथ हुआ है वो हो गया एंड लेट मी लिव वो मूव ऑन कर जाते हैं वहां से पहला सिस्टमिक तो यह हुआ कि रिपोर्टिंग क्यों नहीं होती है सेकंड
(13:40) सिस्टमिक चैलेंज जो आता है कि अगर रिपोर्टिंग करने कोई पुलिस स्टेशन भी जाती है महिला तो इज आवर पुलिस सेंसिटिव इनफ कि वो एक केयरफुल तरीके से उनको हैंडल करें उस विक्टिम को या फिर वहां पर भी इनसेंसिबल इनसेंसिबल की भी बात अजीब लगती है कि एक महिला जिसके साथ शोषण हुआ पहले तो अगर जैसा बताया आर्थिक स्थिति से कमजोर है या गई है तो वैसे भी उसको बिठा देंगे एक घंटों एफआईआर लिखा उनको बोलना भी विचारों को नहीं आता उनसे बातचीत कैसे करें और सामने से पुलिस हमारी ऐसी नहीं है कि सामने से कर ले बहुत अच्छे पुलिस वाले भी हैं ऐसा नहीं है कि सब एक जैसे हैं बट
(14:18) माइन्यूट है बहुत नंबर तो अगर वो मतलब सेंसिटिविटी तो एक बहुत बड़ा शब्द है उनके लिए वो अगर नॉर्मल अपनी ड्यूटी भी कर ले विदाउट बीइंग सेंसिटिव भी कर ले तो बड़ी बात है मैं बहुत बड़ी बात आपसे यहां कह रही हूं कि सेंसिटिव तो एक हम ओवर एक्सपेक्ट कर रहे हैं उनसे अगर वो अपना काम भी कर ले अगर वो बोले मुझे एफआर करनी है और वो कर दें वो बड़ी बात है तो यह बहुत सारे रिफॉर्म्स और ट्रेनिंग हुए निर्भया केस के बाद जेंडर सेंसटाइजेशन और मैं खुद पुलिस की ट्रेनिंग करती हूं व जो फ्रंट डेस्क पे बैठने वाले हैं स्पेशली ये जो महिलाओं के लिए महिलाएं बैठी हैं अभी
(14:54) बट वो भी बहुत इनसेंसिबल कम मिलेंगे जो जिनको लगेगा कि और वो वहीं जज करने लगते जब मैं अपनी ट्रेनिंग भी करती हूं तो मैं उन्हें बोलती हूं कि आप जज मत करिए आप कमेंट मत करिए आप जो कह रही है आप उसको प्राम फेसिया मानिए और क्योंकि यह है ये लॉ भी कहता है कि जो लड़की कह रही है या औरत कह रही है उसके साथ हुआ है तो मानिए उसको एज इट इज लिखिए बट ये अपने कमेंट लगा देते हैं अच्छा तुम झूठ बोल रही हो स क्या ऐसे चली गई तुम वहां क्यों गई तुमने यह क्यों किया तुमने वो क्यों किया अच्छा मैं यहां पर एक डाकटर द्वंद देख रही हूं जब एक लड़की अपनी शादी के बाद कोई केस लेकर जाती
(15:27) है डाउी का अपने इनलॉज पर दहेज का या फिर किसी उत्पीड़न का या उनके परिवार के शोषण का किसी भी तरह का केस लेकर जाती है तो उनकी सुनवाई और रिपोर्ट बहुत जल्दी हो जाती है इस हद तक जल्दी हो जाती है कि जो लड़के की फैमिली वाले उनको भागना पड़ता है छुप पड़ता है और वहीं पर अगर एक लड़की जिसकी शादी नहीं हुई है जिसके साथ रेप हो गया है वो इस तरह का केस लेकर जा रही है तो उनकी सुनवाई नहीं है क्या ये दो लॉज बिल्कुल बिल्कुल अलग डायरेक्शन में नहीं है मतलब हाउ इज इट पॉसिबल देखिए अभी वो भी 498 जो उसकी आप बात करें वो भी बहुत तरह बहुत ज जद्दोजहद है मेरे पास वैसे भी
(16:00) केसेस आते हैं उसमें भी बहुत आसानी से रह नहीं गया है बट वहां फिर भी थोड़ा सा क्योंकि जो औरत उत्पीड़न की कंप्लेंट लेकर जा रही है डॉरी की या जो भी वो फिर भी मिडिल क्लास और अपर मिडिल क्लास वाले ज्यादा जा रहे हैं तो वहां थोड़ा सा मॉनेटरी एक्सपेक्टेशन हो जाता है पुलिस को और मुझे लगता है वहां मॉनेटरी एक्सचेंज की वजह से थोड़ी मोटिवेशन है यहां पर उन्हें कुछ नहीं मिलना है क्योंकि वो इतनी गरीब लड़की है जो रिपोर्टिंग के लिए आई है इतना गरीब परिवार है कि वहां पर मोनेटरी मोटिवेशन नहीं है ये एक फैक्टर भी है और अभी 498 का भी बहुत ज्यादा बुरा हाल है
(16:35) और वहां पर भी बहुत आसानी से कंप्लेंट्स नहीं हो रही है बट बलात्कार का क्या है ना कि यहां पे जैसे जो मानसिकता पुलिस वालों की भी है वो अ इमीडिएट रेजिस्ट करते हैं एक तो अपनी रेपुटेशन उनकी ये कि हमारे थाने में थाने का एक एरिया में बलात्कार की घटना दर्ज होगी तो व ब्लैकलिस्ट होता थाना यह मैं बार-बार बोलती हूं कि इनको रिवॉर्ड होना चाहिए अगर ये लिखते हैं एफआईआर बट अनफॉर्चूनेटली जिस थाने में कम से कम एफआईआर होती है स्पेशली रेप्स की वो थाना अच्छा माना जाता है तो इस चक्कर अपनी रेपुटेशन को बचाने के चक्कर में भी वो कम करते हैं ऊपर से माइंड सेट ऐसा है कि वो
(17:11) मानना ही नहीं चाहते कि बलात्कार हुआ है और क्योंकि फिर इन्वेस्टिगेशन ये वो और वो सब चक्रों में नहीं पड़ना चाहते हैं बहुत सारे इश्यूज हैं जो पुलिस के एक पुलिस वाले का जो माइंडसेट है ना उस उस परे काम करने की सबसे ज्यादा जरूरत है हमें डाटा से पता चला है कि 92 पर लोग जो हमारा पॉडकास्ट देख रहे हैं या सुन रहे हैं वह अभी तक हमारे सब्सक्राइबर्स नहीं हैं तो अगर आप उन लोगों में से हैं तो प्लीज हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए लाइक कमेंट और शेयर कीजिए क्योंकि इससे ये तो हमारा सेकंड लेयर सिस्टम का है
(18:01) पुलिस जहां पर जाकर रिपोर्टिंग होगी पहला लेवल की हमने बात की घर पर किस तरह से हमको देखांगे सोसाइटी किस तरह से इक्विप्ड है सेकंड इज पुलिस अब चलिए पुलिस में रिपोर्टिंग भी हो गई अब लीगल बैटल शुरू हो गया थर्ड जो है लॉ एंड ऑर्डर लॉ एंड जस्टिस के लेवल पर बात करते हैं उस लेयर प बात करते हैं वहां पर क्या काम हो रहा है जैसा कि हमने बहुत सारे पॉपुलर केसेस में देखा है जो बलात्कार के बहुत ज्यादा यू नो वायरल केसेस हो गए जैसे कि निर्भया का केस भी इतने सालों बाद जाकर जस्टिस मिला तो ये हमारा प्रोसेस इतना लेंडी क्यों है और अभी
(18:31) ऐसे क्या रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं जस्ट टेक मी थ्रू दिस प्रोसेस कि होता क्या है देखिए अ प्रोसेस पहले भी वही स्पीड है और अभी थोड़ा सा थोड़ा सा फास्ट ट्रैक में आया है बहुत ज्यादा फास्ट ट्रैक में नहीं आया हालांकि फास्ट ट्रक कोट्स असाइन हुए हैं बट अगर उनकी स्पीड देखी जाए तो मेरे पास केसेस हैं जो निर्भया के समय से ही मैंने क्योंकि इसमें काम करना शुरू किया था इस मुद्दे पर अभी तक वो केसेस चल रहे हैं ट्रायल कोर्ट्स में भी चल रहे हैं तो वो जो प्रोसेस बहुत स्लो है अ बहुत स्लो है और कोर्ट डेट्स बहुत [ __ ] ऑन करती हैं छुट्टियां पड़ जाती हैं बहुत सारे इश्यूज
(19:07) हैं लीगल प्रोसेस में कई बार उस साइड से कोई नहीं आता इधर से नहीं आता या विटनेसेस हॉस्टाइल्स हैं केस बट एट द सेम टाइम कन्वे अगर 2 साल के अंदर हो जाए तो हमें बहुत अच्छा रिजल्ट दिखने को मिलेगा बट वो हो नहीं रहा है हमने निर्भया के बाद से हमने जो जस्टिस वर्मा रिकमेंडेशंस में सबने मिलकर उसमें योगदान दिया और उसमें अच्छी गाइडलाइंस दी गई बट उनकी इंप्लीमेंटेशन नहीं हो पा रही है टाइमली एविडेंस कलेक्शन नहीं होते टाइमली चार्जशीट फाइल नहीं होती और बहुत सारे लूप होल्स हैं जिनको कवर करने की जरूरत है व सिस्टमैटिक रिफॉर्म्स जो लीगल सिस्टम में
(19:43) आने चाहिए वह हो नहीं रहे हैं अनफॉर्चूनेटली टाइमली एविडेंस क्यों नहीं कलेक्ट हो पाता है टाइमली चार्ट शीट क्यों नहीं फाइल हो पाती है क्योंकि हमारी जो पुलिस है वो वी डोंट हैव अ स्पेशल टास्क फोर्स है ना इसके लिए रेप केसेस के लिए अलग से टास्क फोर्स नहीं है वही पुलिस वाला किसी वीआईपी की ड्यूटी भी कर रहा है वही पुलिस वाला एक एक्सीडेंट वाले को हॉस्पिटल भी ले गया वही डाउी का केस भी देख रहा है मतलब ही इज डूइंग मल्टीटास्किंग मतलब वो इलेक्शन ड्यूटी में भी चले जाता है तो वो एक एक्सपर्ट और फोटे नहीं आ पाता है किसी केस को डील करने का
(20:15) और उनकी नॉलेज उनकी ट्रेनिंग इतनी पुअर है बट बहुत कोशिश की है सरकार ने वो मतलब बट वो बहुत सुपरफिशियल लेवल पर करी है कि हां ऑन पेपर्स आप बताइए ट्रेनिंग है उनकी उनको रिसोर्सेस अगर मैं उनकी बात करूं तो उनके पास रिसोर्सेस नहीं है उनकी इनफ स्लीप नहीं है उनके वर्किंग आवर्स बहुत ज्यादा है लेट्स टॉक अबाउट देयर इश्यूज आल्सो ना मैन पावर कम है पुलिस वाले जितने होने चाहिए पर नागरिक पर नहीं है तो वो एक अलग ही एक पूरा डिस्कशन है आई थिंक एक पुलिस ऑफिसर का आप इंटरव्यू करेंगे तो वो ज्यादा अच्छे से उस चीज पर उभार पाएंगे वो उनकी
(20:49) प्रैक्टिकल इश्यूज है जो मैं डिनायर हूं बट एट द सेम टाइम हु सफर्स एंड ऑफ द डे सफर कौन करता है एक विक्टिम और जहां हम जिस चीज की बात करें एक रेप विक्टिम तो हर तरह से हमारा जो उसकी वजह से जब वोह अपनी रिप्रेजेंटेशन कोर्ट में ठीक से नहीं दे पाते हैं चार छ टाइम से फाइल नहीं कर पाते हैं या मतलब बहुत सारे लूज एंड होते हैं इन्वेस्टिगेशन के जो छोड़ देते हैं जिसकी वजह से ट्रायल चलते रहते हैं लंबे तो वो उसका रिपल इफेक्ट कोर्ट में आ जाता है तो यह सारा है सो नॉर्मली ऑन एन एवरेज कितना टाइम मिलता है जस्टिस मिलने में एक फैसले कवाने में रिपोर्टिंग से लेकर देखिए
(21:25) निर्भया केस में न साल लगे बट निर्भया के पहले के भी केसेस रहे हैं और निर्भया के बाद के भी केसेस हैं जो अभी तक जस्टिस कहीं तक नहीं पहुंचे तो हां लोअर कोर्ट में कन्वे हो भी जाती है तो फिर वह हाई कोर्ट चले जाते हैं हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट चले जाते हैं सुप्रीम कोर्ट में [ __ ] ऑन होते रहते हैं तो कोई डिफाइन टाइम नहीं है इन माय करियर आ हैव नॉट सीवन सीन इवन वन केस कंक्लूजन व्हिच इज निर्भया वो सुप्रीम कोर्ट तक गया क्योंकि वो बहुत हाइलाइटेड केस था बाकी सब अभी तक कन्विंसिंग हो जाते हैं तो कहीं ना कहीं लटक जाते हैं कन्विंस्ड दे दिया है तो मतलब एविडेंस
(22:00) चार्ट शीट यह सब काम तो किया ही होगा उसके बाद ही जजमेंट आया होगा तो फिर वो ट अपर कोर्ट वो तो हमारे यहां है ही तो अगर कन्विंस्ड और अगर मतलब कि मेरे साथ गल कशन हु है तो वो उनके लॉयर्स उनको गाइड करते हैं या मतलब एक प्रोसेस है टू रीच आउट टू हाई कोर्ट एंड अपर कोर्ट्स और अगर यहां पर क्विटल है तो यहां पर विक्टिम फैमिली कोर्ट जाती है तो वो कहीं ना कहीं कहीं लटकता रहता है मामला और 10 12 15 साल तो एक बहुत छोटी एज है लीगल एज ऐसे भी केसेस है कि जिसमें लोअर कोर्ट ने सजा दे दी है लेकिन ऊपर कोर्ट्स में जाकर उनको बेल मिल गई या फ्री हो गए जी बिल्कुल लोअर कोर्ट
(22:41) में हमारे पास एक केस था निर्भया से पहले का जिसमें लोअर कोर्ट ने भी फांसी दी हाई कोर्ट ने भी फांसी दी अब सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल बरी कर दिया उनको बिल्कुल बरी कर दिया और दे आर राइट नाउ अराउंड अस कहीं हीं कहीं कोई कैब चला रहा होगा कोई क्या तो उन्होंने जो कि लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट ऐसा क्यों छोड़ा लेकिन उन्होंने क्योंकि कहीं ना कहीं उन्होंने चैलेंज जैसा किया आरोपियों ने क्योंकि फांसी की सजा थी इसमें तो फांसी की सजा में जब उन्होंने रिइन्वेस्टिगेशन में दो-तीन लूप होल्स पाए जिसमें पुलिस ने अपना काम ठीक से नहीं किया था उनको बेनिफिट ऑफ डाउट देने के लिए
(23:13) इन्होंने एक्यूज को छोड़ दिया अच्छा पुलिस की गलती की वजह से जो पीड़ित महिला थी जो पीड़ित तो महिला मार दिया गया ब्रूटली रेप करके अच्छा वो नहीं है वो पहाड़ की थी वो उत्तराखंड की एक बच्ची थी उनको हम उत्तराखंड की निर्भया बोलते हैं किरण नेगी जिनका निर्भया से पहले बलात्कार हुआ और बहुत जघन्य अपराध ऐसा हुआ कि उनकी बॉटल्स तक इंसर्ट कर दी गई उनको ब्रैंड कर दिया गया गरम गरम पाना लगाया गया शरीर पर छोटी सी वो 19 साल की लड़की यहां कॉल सेंटर में गुड़गांव में जॉब करकर अपने घर जा रही थी दिल्ली में द्वारका का ही केस था और जब वह
(23:46) वहां से अपने घर की तरफ पहुंची तो तीन लड़कों ने किडनैप किया और उनका बलात्कार किया और उनको कहीं दूर हरियाणा में जाकर फेंक दिया उनको दो दिन लगे मरने में तड़प तड़प के वो लड़की दो दिन मरी है और बिल्कुल ठंड में ऐसे ठंड के दिनों में जब हम लोग बिल्कुल सोच भी नहीं सकते हैं बाहर रहना रात भर वहां पड़ी रही और जब अ उनकी बॉडी रिकवर हुई तब यहां पर कुछ आरोपियों को संदेह में पकड़ा गया कि इन्होंने किया क्योंकि उनकी दोस्त साथ में थी तो उनके सामने किडनैप हुआ तो लड़कियों ने पहचाना जो उसकी दोस्त थी ये गाड़ी यही थी और यही लड़के थे उनके बिना पर ये लोग अरेस्ट हुए
(24:23) फिर इनसे पूछताछ की गई तो यह खुद ही लेकर गए कि हां हमने एक बलात्कार करके यहां फेंका है इस गांव में फिर वो लेकर गए वहां बॉडी रिकवर की फिर हम उस बच्ची कोब तब तक मैं नहीं मिली थी उसके बाद वह फ्यूनरल हुआ जो भी हुआ पोस्टमॉर्टम हुआ उनके बयान के आधार पर उनको अरेस्ट किया गया उन आरोपियों को उन्होंने कन्फेस किया बट हमारा कोर्ट नहीं मानता है वो कन्फेशन वो कहता है प्रूफ करो कि इन्होंने किया तो पुलिस को प्रूफ करना था तो पुलिस ने कुछ जो सैंपल्स कलेक्ट किए थे साइट से वो दो दिन पुलिस स्टेशन से नहीं निकल पाए किसी भी रीजन से क्योंकि एज आई सेड कि वो भी ओवर बर्डन है
(24:56) या जो भी है व्हाट एवर रीजन वो सैंपल कनेक्शन नहीं हुआ और वो गाड़ी उन्होंने लॉक नहीं की सील नहीं की तो वह दो बिना पर इन्होंने सुप्रीम कोर्ट ने छोड़ दिया उन्हें और यह उन लोगों को जो रेपिस्ट थे उनको यह लीगल लोप होल्स उनके लॉयर्स बताते हैं कि आप इस तरह से अप्रोच करो या नहीं उनको जरूरत ही नहीं पड़ी उनको तो सरकारी वकील मिलते हैं यू नो हर केस में आरोपी को भी सरकारी वकील का एक्सेस है तो उनको सरकारी वकील मिले बट उन्होंने कुछ नहीं ये पुलिस का पूरा गुफ अप है मतलब उनको कुछ करना ही नहीं पड़ा लोअर कोर्ट ने तो फासी दे दी हाई कोर्ट ने भी दे दी पर सुप्रीम कोर्ट
(25:31) में जब पहुंचा केस बहुत सारी पॉलिटिक्स भी हुई है इस केस में बट कहीं ना कहीं यह तीनों छूट गए फांसी से नहीं आजीवन कारावास में नहीं कन्वर्ट हुआ वो बकुल छूट गया तो बरी होते ही अभी पिछले साल का य केस है पिछले व बाहर निकलते ही एक ने ऑटो ड्राइवर का मर्डर लूट किया और मार दिया उसको वह वापस अंदर चला गया बिकॉज ही किल्ड वन ऑटो ड्राइवर दो अभी भी हमारे बीच में है वाओ मतलब क होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट से वो लोग छूट जाते हैं यह इस तरह के केसेस भी होते हैं कि जो पीड़िता होती है वह उसका परिवार अगर वो बच गई है तो और अगर नहीं है अगर उन्होंने अपनी जान खो दी
(26:09) है तो उनकी फैमिली या जो भी उनके जस्टिस के लिए लोग लड़ते रहते हैं इवेंचर नहीं मिलता है आपकी आपकी नॉलेज में और आपके काम के मद्देनजर में कितने लोगों को आपने जस्टिस मिलते हुए देखा है अगर मैं परसेंटेज की बात करूं तो आई डोंट थिंक सो मैं उसको जस्टिस नहीं बोलूंगी जस्टिस तो क्या ही मिलेगा इन केसेस में आप जरा से जल्दी से जल्दी सजा सुनाइए जैसे निर्भया केस में हुआ न साल के बाद बट वैसे मैंने अभी अपने अपने एक्टिविज्म के करियर में अभी तक कन्वे लाइफ टाइम की एक हुई है और यह निर्भया का केस बाकी सब ये इंजस्टिस होगा क् उसमें मैंने 10 साल दिए इस केस
(26:47) में जो मैंने आपको बताया कि रगी का केस तो लाइक वाइज मैं नहीं बोलूंगी कोई मैंने बहुत ज्यादा सक्सेस स्टोरीज देखी है देर इज नो सक्सेस ओनली हमने जो देखा है वो फेलियर देखा है सिस्टम का और हमारे सिस्टम ने हमारे समाज ने सबने मिलकर हमारी बेटियों को फेल किया है सबने मतलब आप कह रहे हो कि सक्सेस स्टोरीज है ही नहीं कि जहां पर पीड़िता को न्याय मिल गया हो जस्टिस मिल गया हो न्याय मिल भी जाए तो क्या फायदा है ऐसे न्याय का आपने आजीवन कारावास दे दिया एक बच्ची का अभी मैं बताती हूं जिसका मैं बता केस एक और केस था निर्भया के आसपास य हुआ था पा साल की
(27:24) बच्ची गांधीनगर की गुड़िया उसकी बलात्कार करके आरोपियों ने उसको क्या नहीं किया ब्रूटालिटी वो बच गई वो उसकी किस्मत थी वोह कोमा में थी वेंटिलेटर पर थी फिर वह धीरे-धीरे रिकवर की वोह बच गई वो वो उसका लक है बट इन्होंने तो अपनी तरफ से उसको मार दिया और उन आरोपियों को आपने आजीवन कारावास दिया मींस 20 साल में वो बाहर आ जाएगा 20 साल अभी 10 साल हो मतलब 10 साल से ऑलरेडी जेल में है 10 साल बाद बाहर आ जाएगा तो मतलब ही वाज 23 43 की एज में वो बाहर होगा वो हमारे बीच में होगा व्हाट काइंड ऑफ जस्टिस इज दिस क्या वो दोबारा नहीं करेगा क्या रिफॉर्म्स हुए क्या जेल
(27:58) में उसको कुछ आत्मज्ञान हुआ या आपने कुछ उस परे वर्क किया मैं इसको जस्टिस नहीं बोलूंगी मतलब आपके अकॉर्डिंग सक्सेस स्टोरी भी नहीं बोलूंगी अगर कन्विसिटी एज में वो वापस से सोसाइटी में फिर से गुलमल जाएगा तो फिर उन केसेस में मतलब व्हाट डू यू थिंक इज द राइट जस्टिस देखिए प्रवादानविटा सरकार ने दिया है फांसी की सजा कि जैसे ही कोई बच्ची का बलात्कार होता है तो उसमें फांसी की सजा का प्रावधान है बट कोई दे ही नहीं रहा जुडिशरी में कोई मानता ही नहीं है कि हमें किसी की लाइफ मतलब वो बहुत
(28:44) उन्हें लगता है कि ब्रूटल है किसी की जिंदगी लेना जिसने चाहे को कैसा भी क्राइम किया हो तो वो बहुत रिलक्टिविटी में बदल जाए तो अभी तकक हमने फांसी सिर्फ निर्भया केस में देखी है सिस्टम को लेकर एक एस अ सिटीजन आप क्या कर सकते हो और विक्टिम को क्या करना चाहिए कुछ इस तरह की आपने उसम बातें लिखी कुछ पॉइंट्स आप की पॉइंट्स हाईलाइट करना चाहोगे जैसे कि कुछ की पॉइंट्स यही है कि जैसे अब किसी के साथ अगर अपराध हो जाता है तो आप एक शिकायत करता बन सकते हैं अ जरूरी नहीं है जिसके साथ हो वही शिकायत करता बने स्पेशली बच्चों के केस में पॉक्सो केस में या कोई
(29:26) भी महिला के साथ ऐसा होता है तो आप उसको रिपोर्ट कर सकते हैं और किसी भी थाने में रिपोर्ट कर सकते हैं जरूरी नहीं कि आपको उसी पर्टिकुलर एरिया के थाने में जाना है आप कहीं प भी रिपोर्ट करें पुलिस को बयान दर्ज करना ही पड़ेगा मजिस्ट्रेट का बयान होगा ही होगा वो सारी चीजें बहुत सारी टेक्निकल चीजें हैं सबूत जैसा कि मैंने बोला सब कुछ सबूत इकट्ठा करने पर ही अगर सबूत ठीक से इकट्ठा नहीं हुए इन्वेस्टिगेशन ठीक से नहीं हुई तो पूरा केस बर्बाद हो जाता है तो केस होता ही नहीं है तो इन्वेस्टिगेशन ठीक हो जांच हो अगर आपने किसी पीड़िता को देखा है तो उसके
(29:58) कपड़े नहीं चेंज कराने हैं उसका सबसे पहले फॉरेंसिक क्या मतलब उसकी पहले मेडिकल जांच करानी है नियरेस्ट हॉस्पिटल किसी भी हॉस्पिटल में ले जा सकते हैं सो ये सारे पॉइंट्स है और अगर कोई रिपोर्ट नहीं लिखे रिपोर्ट करने से मना कर दे नहीं लिखना चाहे एफआईआर वो वो आप किस तरह से उनको बता सकते हैं य कि नहीं ये आपना अधिकार है आपका राइट है ये राइट टू रिपोर्ट सच अ केस आपने कहा कि फॉरेंसिक टेस्टिंग फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए जाना चाहिए उनका पूरा मेडिकल चेकअप होना चाहिए लेकिन बहुत सारे केसेस में वो विक्टिम को जला देते हैं या उनके साथ इतनी ब्रूटालिटी कर देते हैं
(30:32) उनको कहीं छोड़ देते हैं कि वो कई दिनों तक वहीं पड़े हैं अगर सरवाइव कर गए तो कर गए नहीं भी किए तो उस केस में एविडेंस तो मतलब कितना रह जाता है बहुत ही कम रह जाता है बट जो भी है तो उसमें विक्टिम का बयान सबसे ऊपर होता है फिर उसमें अगर विक्टिम ने बोल दिया कि मेरे साथ हुआ तो उसी को आप एविडेंस मानते हैं इफ शी इज अलाइव व्हाट एवर शी सेज द थिंग समस्या वहां आती है जब ब्रूटालिटी की बात वो नहीं रहती है तो उसमें प्रूव करने में थोड़ा इशू है बट जब वह जिंदा है और वह पहचान रही है और बता रही है तो उसी को आधार माना जाता है अच्छा इसी वजह से शायद
(31:05) बहुत सारे जो रेप विक्टिम्स होते हैं उनको वो लोग रेप के बाद मार देते हैं या उनके साथ कुछ ऐसा कर देते हैं कि वो अब इस लायक ही नहीं बचे कि वो रिपोर्ट कर पाए सच्चाई है इसीलिए अगर विक्टिम्स नहीं रहे तो पुख्ता जांच सबसे जरूरी है क्योंकि इसी डर से वह एक्यूज ज्यादा हत्याएं भी कर रहे हैं मैं आपसे सवाल तो पूछ रही हूं बट अंदर ही अंदर बिकॉज आई एम आल्सो वुमन ये इतना डिफिकल्ट ये टॉपिक और इतना सेंसिटिव है कि आप मतलब आपकी बहुत हिम्मत है कि आप इसके बारे में इतनी दूर तक इतने सारे लोगों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं बट ये बहुत ही सेंसिटिव बातें हैं करना अ इस टॉपिक की
(31:40) सेंसिटिविटी को मैं डेफिनेटली एज अ वुमन भी समझती हूं एज अ सिटीजन ऑफ दिस कंट्री भी समझती हूं और जहां आपने लॉ एंड ऑर्डर की बात की हम जहां लेयर्स की बात कर रहे थे इस कन्वर्सेशन में तो हमने सोसाइटी की लेयर की बात की हमने पुलिस या रिपोर्टिंग की लेयर की बात की हमने लॉ एंड ऑर्डर की रिपोर्ट की के लेयर की भी बात की ना फोर्थ लेयर जो मुझे लगती है यहां पे वो कहीं ना कहीं हमारा एजुकेशन सिस्टम है बहुत सारा जो हम एंड न आई से एजुकेशन सिस्टम आई डोंट मीन ओनली द फॉर्मल एजुकेशन सिस्टम जो स्कूलों में पढ़ाई होती है मैं सिर्फ उसकी
(32:06) बात नहीं कर रही हूं बल्कि क्या ऐसे रिफॉर्म्स क्रिएट किए जा सकते हैं लोगों को ज्यादा एजुकेट करने में अबाउट अबाउट रेप इन आवर कंट्री जो आपने अभी फोर्थ लेयर की बात की है वह सबसे इंपोर्टेंट लेयर है आई थिंक एजुकेशन इज द की यह सलूशन भी है और प्रिवेंशन भी है अगर अगर अच्छी एजुकेशन सही एजुकेशन अगर स्कूल्स की बात की जाए लेट्स स्टार्ट फ्रॉम स्कूल तो अगर बच्चों में अगर हम अच्छी शिक्षा संस्कार वाली श मैं वो वाले संस्कार नहीं बोल रही हूं जो कि हम टिपिकली इंडिया में संस्कार इंडियन वो हिंदू वाले संस्कार नहीं मोरल एंड एथिकल वैल्यूज वो सबसे ज्यादा जरूरी है अब
(32:44) वो किसी भी पद्धति से आए वो सबसे ज्यादा अगर आपने दे दिए तो आपका सलूशन तो वही है बट मीन वाइल जैसा कि अभी हम लोग जो अवेयरनेस कर रहे हैं लीगल एजुकेशन और अवेयरनेस प्रोग्राम जो पंचायत लेवल तक मेरा विजन है ले जाने का कि अगर यह जिस गांव की मैं बात कर हूं उस गांव में पंचायत को पता होता कि ऐसा करना है तो हो सकता है उस बच्ची को अच्छी चिकित्सा मिल जाती अच्छा हेल्थ मिल जाता तो हो सकता है वो बच सकती थी कहां किस हॉस्पिटल ले जाना है ये वो तो उन पर भी हम काम करें वो एजुकेशन भी लाइफ स्किल्स हर केस को लेके नॉट ओनली कि हम सिर्फ रेप विक्टिम्स की
(33:20) रेप की बात कर रहे हैं बाकी ओवरऑल अवेयरनेस भी जरूरी है तो वो वो चीजें जब हमारे देश में आ जाएंगी तो वो बड़ा बहुत बड़ा रिफॉर्म है और वह सबसे बड़ा वो है लेवल है तो आपकी रिसर्च के हिसाब से एक रेपिस्ट का माइंडसेट क्या होता है देखिए माइंडसेट की अगर बात की जाए तो माइंडसेट भी मल्टीपल है ऐसा नहीं है कि एक पर्टिकुलर माइंडसेट से वह बलात्कार करता है कई बार देखिए अगर आपने आपके मन में रेप करने का एक अंदर से एक कुछ अर्ज हुई कि मुझे रेप ना है और आपने आपने देखा हु इज द सॉफ्टेस्ट टारगेट आपने यह देखा आपने आप और मैं और अगर एक
(34:06) छोटी बच्ची है और किसी लेबर की बच्ची है और हम साथ में ही है अ रेपिस्ट विल टारगेट हर बिकॉज उस उसको पता है यहां पर नोबडी विल रिपोर्ट वो बच्चा कुछ बोलेगा नहीं आप समझ रहे हैं मेरा कहने का मतलब यह है कि मनोवैज्ञानिक स्थिति में भी वह किस तरह से वो परखे कि किस फैक्ट किसको टारगेट करना है रेपिस्ट को वो भी पता है तो दे आर आल्सो लाइक स्मार्ट इन देर हेड ऐसा नहीं मतलब सोच समझ कर ही करते हैं वो जब करते हैं रेप इ एन एक्ट च इ थॉट वेरी प्रोफेशनली इन द सेंस मतलब वो अच्छे से सोच समझ के होता है मर्डर कहते हैं ना फिट ऑफ रेज में होता है रेप नहीं होता फिट ऑफ
(34:43) रेज में वो फिट ऑफ अर्ज भी नहीं होता जो बहुत सारे लोग जस्टिफाई करते हैं अर्ज हुई और उसने रेप किया ऐसा भी नहीं है सेक्सुअल अर्ज कैन बी यू नो पसिफाइड इट्स नॉट समथिंग च ऐसे तो फिर सारे ही रे हो जाए इट्स समथिंग व्हिच इज लाइक वेरी थॉटफुली प्लान अब आपको बच्चे को पिक अप करना है बच्चे सबसे सॉफ्ट टारगेट है तो वो सबसे पहले बच्चों को टारगेट करते हैं आपकी रिसर्च के अकॉर्डिंग जो ज्यादा विक्टिम्स होते हैं वो बच्चे ही होते हैं अंडर द एज ऑफ 18 होते हैं जी जी बिल्कुल अच्छा स्पेशली जो बोल नहीं पाते आजकल बहुत ज्यादा उनको टारगेट किया जा रहा है इसीलिए
(35:20) मैं बार-बार बोलती हूं जब मैं सुरक्षा की बात करती हूं मुझे बच्चों की ज्यादा फिक्र है महिलाओं का तो हमें पता है कि एटलीस्ट वो बता पाएंगे किसने किया बच्चे तो बता भी नहीं पाएंगे और वो रिपीट ऑफेंडर्स हो जाते हैं फिर ट्स द होल थिंग कि क्योंकि वो छूटा फिर उसने बाहर आके फिर से किसी के साथ किया फिर नहीं पकड़ा गया ही कंटिन्यूज देन लेकिन मल्टीपल अगर किसी के ऊपर ये एक्यूजेशंस लग रहे हैं रेप के जैसा आपने कहा वो छूटा उसने फिर किसी के साथ किया फिर दोबारा छूटा मतलब पकड़ा नहीं गया पकड़ा ही नहीं गया अच्छा तो वापस से फिर से वो दोबारा से करते हैं
(35:51) और ये एक रेपिस्ट का माइंडसेट है कुछ ऐसे हैबिट्स है उनके या कुछ ऐसे पैटर्स है जिससे हम रिकॉग्नाइज कर पाए रेपिस्ट को देखिए इस पे कोई रिसर्च ही नहीं हुआ हमारे हिंदुस्तान में नहीं हुआ कि बहुत इस पे सबसे ज्यादा अ मुझे लगता है इन्वेस्ट करने की जरूरत है अनफॉर्चूनेटली नहीं हुआ और मेरा काम ज्यादा विक्टिम्स की तरफ है तो उस परे मेरा भी ध्यान नहीं गया बट अभी आई एम आल्सो वर्किंग टुवर्ड्स दिस बहुत सारे मेंटिस और साइकोलॉजिस्ट और यह सब मिलके इस पे वर्किंग करने की जरूरत है रिसर्च करने की जरूरत है पैसा खर्च करने की सरकारों को
(36:25) जरूरत है इस पे कुछ ना कुछ एक अ मैपिंग करने की जरूरत है वो हो नहीं रहा है अनफॉर्चूनेटली और अभी पर से डिफाइन करना मुश्किल है बट एट द सेम टाइम अप ब्रिंगिंग का बहुत बड़ा फैक्टर है पर्टिकुलर कम्युनिटीज है कुछ डोमिनेट करती है मतलब आई डोंट वांट टू स्पीक लाइक नाउ ऑन इट बट वन आई हैव सम एक्सपर्ट ओपिनियन वी विल डेफिनेटली टॉक कि किस तरह के फैक्टर्स है जो प्रोवोकेट करते हैं और जो प्रमोट करते हैं जो जेंडर वाला कल्चर है जो जेंडर सप्रे सिंग कल्चर किसस कुछ कुछ कम्युनिटीज का बहुत हावी होता है दोज आर द फैक्टर थोड़ा माचो कल्चर जो कहते हैं ना मैं
(37:00) थोड़ा इस इस कन्वर्सेशन के थ्रू य जानना चाह रही हूं कि हम कैसे आइडेंटिफिकेशन नाउ उस सिचुएशन में अ उन लड़कियों को अपने खुद के राइट्स के बारे में भी नहीं पता एंड मेरिटल रेप भी एक रियलिटी है उन लोगों के साथ मतलब उन उन लोगों को उन मैरिड लड़कियों को भी ये नहीं पता है कि उनके क्या राइट है कंसेंट का क्या मतलब होता है जी और ये कन्वर्सेशन जो है ये उन घरों में
(37:46) नहीं हो रही है तो उन लोगों तक कैसे पहुंचा जाए मतलब दैट्ची लोग हैं जो बिलो पावर्टी लाइन लोग हैं जो सॉफ्ट टारगेट होते हैं उन तक कैसे पहुंच सकते हैं हम लोग देखिए सबसे इंपॉर्टेंट है उन तक पहुंचना स्पेशली उन महिलाओं तक पहुंचना जिनको कंसेंट नहीं पता है जिनको उनके हस्बैंड रोज रेप करते हैं बलात्कार करते हैं जिनको नहीं पता उनके साथ रोज बलात्कार हो रहा है क्योंकि वो उनकी मर्जी के विरुद्ध हो रहा है लीगली भी इसमें डिफाइंड है कि अगर आपकी मर्जी के विरुद्ध हो रहा है तो वो बलात्कार है मर्जी एक सबसे कंसेंट जो है वो सबसे इंपॉर्टेंट है बट हमारे यहां मेरिटल रेप
(38:26) तो बड़ी अभी दूर की लड़ाई है लंबी लड़ ई है और स्पेशली अंडर प्रिविलेज वमन जिनको लगता है ओके ही इज माय हस्बैंड वो कुछ भी कर सकता है और वह कुछ भी कर ले क्योंकि उसने चार फेरे लिए या सात फेरे लिए हैं या उसने कुछ लीगल पेपर साइन किए तो उसकी पूरी राइट है मेरे ऊपर यह सबसे पहले यहां की जर्नी वहीं शुरू होगी जहां महिलाओं को बताने की जरूरत है क्योंकि मैंने बहुत सारी महिलाओं से बात की उनको सच में नहीं पता कि कंसेंट होता क्या है हां कंसेंट होता क्या है बहुत ज्यादा टॉर्चर हो रही है एवरी डे ब्रूटल मतलब ब्रूटालिटी उन के साथ मारपीट भी होती है खाली ये नहीं कि
(38:59) बलात्कार के साथ साथ ब्रूटालिटी मारपीट वो उसका हिस्सा जो पूरा ब्रूटालिटी का हिस्सा है वो सहती है ये सोच के कि वो मेरा पति है और यह उसका अधिकार है तो यह एक बहुत मेजर अवेयरनेस करने की जरूरत है स्पेशली उसमें और अननेचुरल सेक्स बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा इश्यूज आ रहे हैं हमारे पास कंप्लेंट्स आती है बट देन अगेन अननेचुरल सेक्स मतलब मींस दे आर नॉट डूइंग इन अ नेचुरल वे वेर वमन इज नॉट गेटिंग इवन रिचिंग आउट टू दैट प्लेजर ऑफ सेक्स एंड वे आर जस्ट मेन दे आर हैविंग सेक्स एंड अ इन टर्म्स ऑफ पुशिंग देम सेल्फ इन टू समथिंग विच मेमन इज नॉट कंफर्टेबल वो मतलब उस चीज
(39:39) के लिए कंफर्टेबल नहीं है बट उस चीज को वो मतलब डिमांड करते हैं और उसको रेप की कैटेगरी में लाया जाता है बट अनफॉर्चूनेटली वी डोंट पर ये उन क्योंकि उन औरतों को पता ही नहीं है उन के बारे में उनको भी नहीं पता और लॉ भी सपोर्ट अभी मेरिटल रेप्स को नहीं कर रहा है तो अगर हम औरतों को इस बारे में बता भी दें लेकिन जो मेन है उनके माइंडसेट के साथ कैसे काम किया जाए उनको कैसे कंसेंट का रिस्पेक्टिंग योर पार्टनर का उस स्पेशली अंडर प्रिविलेज जो लोग हैं उस कैटेगरी में आप कैसे पेनिट्रेट कर सकते हैं क्या आइडियाज है आप बहुत बड़ा एक स्पेस है
(40:10) जिसको मतलब एक तरह से सोशल रिफॉर्म है पूरा बहुत बड़ा बट उसको बहुत जैसे कि उसमें पूरी एक जनरेशन जाएगी इट कैन स्टार्ट नाउ विद यंगर किड्स ओनली मतलब हम बात करें कि औरतों को भी ये जस्टिफाइड लगता है जो वायलेट हो रही है उन्हें भी जस्टिफाइड लग रहा है तो करने वाले को तो बिल्कुल ही आम सी बात लगती होगी जब तक वो आवाज नहीं उठाएंगे जब तक वो मना नहीं करेंगी जब तक वो रेजिस्ट नहीं करेंगी कि नहीं यह ठीक नहीं है तब तक अवेयरनेस का फायदा भी नहीं है तो महिलाओं से ही बात करें इसमें तो बेटर रहेगा इसमें पुरुषों को हम क्योंकि पुरुषों को अब उस उस स्टेज
(40:41) प बताने का कोई मुझे नहीं लगता कोई औ चत है आई थिंक वी शुड टॉक टू यंगर किड्स जो अब बड़े हो रहे हैं और वमन शुड स्टार्ट हैविंग अ डायलॉग कि ये मेरे लिए ओके नहीं है मैं कंफर्टेबल नहीं हूं चाहे वो पढ़ी लिखी नहीं भी है उनको हम जैसी संस्थाओं की हम जैसी महिलाओं की जरूरत है ट होल्ड कैसे हम मतलब कुछ ऐसे कैंप्स ऑर्गेनाइज कर सकते हैं यंग बच्चे जो अभी 15 16 17 जैसे हम सेक्स एजुकेशन की बात करते हैं या डिफरेंट स्टाइल ऑफ एजुकेशन की बात करते हैं अबाउट दिस मैटर इन फॉर्मल स्कूल्स यहां पे जो बड़े शहरों में स्कूल हैं तो क्या गांव
(41:13) में जो बच्चों को एजुकेशन की एक्सेस नहीं है जो बार-बार फेल हो जाते हैं स्कूल ड्रॉप आउट कर लेते हैं उनके लिए भी कुछ इस तरह के कैंप्स ऑर्गेनाइज कर सकते हैं जहां पे उनका एक माइंड सेट क्योंकि 14 13 14 की एज पे एक एक माइंडसेट बनना शुरू हो जाता है सेक्स को एक तरीके से देखना शुरू कर देते हैं बिल्कुल तो उस उस लेवल प जाकर कुछ रिफॉर्म्स किए जा सकते चाहते हैं कि सरकार करे कुछ क्योंकि देखिए हम एनजीओ लेवल प बहुत कुछ करना भी चाहे हमारे पास इंफ्रास्ट्रक्चर रिसोर्सेस की कमी है गवर्नमेंट को हमने ये प्रपोज कर रखा है ऑलरेडी और यह आज नहीं 10 साल पहले मैं खुद
(41:41) इस कमेटी का हिस्सा थी जिसमें यह ड्रॉपआउटस कु एनालाइज करने के लिए प्रोग्राम्स और एजुकेशन में रिफॉर्म्स और मोरल एजुकेशन जेंडर एजुकेशन जेंडर न्यूट्रल काइंड ऑफ अप्रोच जेंडर अ ये जो इनिक्वालिटी है उसके ऊपर वर्क करने के लिए पूरा करिकुलम दे रखा है हमने 10 साल से तब वो प्रीवियस गवर्नमेंट थी उन्होंने कुछ नहीं किया अभी करेंट गवर्नमेंट को हमने रीफ उसको पुश किया आई थिंक ये सरकारों को करना चाहिए आई थिंक वी शुड कंटिन्यू पुशिंग देम टू डू इट वी कैन डू इट इन आवर लिमिटेड कैपेसिटी जितना हमारे पास रिसोर्सेस हैं बट क्योंकि हमें विक्टिम्स
(42:13) को भी सपोर्ट करना है तो या फिर ज्यादा से ज्यादा संस्थाओं को आपस में जुड़ के काम करने की जरूरत है और संस्थाएं भी नहीं आई थिंक लोगों को आने की जरूरत है आगे जरूरी नहीं है कि संस्थाओं को ही काम करना है इसमें तो हर एक का एक हर एक के घर में बच्चे हैं लाए हैं और आई थिंक इट्स अ इट्स अ एवरी बडी इशू सबको मिलके एक तरह से एक सिविक ड्यूटी भी है कि हम किस किस लेवल प जाके हम अपना कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं और मुझे लगता है एक्टिविज्म ही सिर्फ एक अकेला तरीका नहीं है जो एक्टिव एक्टिविज्म जो आप कर रहे हो ग्राउंड पर जाके उन लोगों
(42:44) से मिलना पीड़ितों से मिलना फिर उनके लीगल बैटल में उनकी हेल्प करना या उनको उनको सही चैनल बताना एक तो वो तरीका है जो है एक्टिव एक्टिविज्म दूसरे बहुत सारे तरीके हैं जहां पे आप ट्रेनिंग करने में आप एजुकेशन करने में आप मोनेटरी कंट्रीब्यूशन कर सकते हो पैसे भी डोनेट कर सकते हो आप अपने लेवल पर अगर आपके आसपास में एरिया में जो स्कूल्स हैं जो कॉलोनी है वहां पे आप क्या कर सकते हो तो आई थिंक बहुत सारे ऐसे छोटे-बड़े स्टेप्स हमें सबको मिलकर करने पड़ेंगे जहां से हम हम थोड़ा बहुत आई थिंक वल बी एबल टू मूव द नीडल अ लिटिल बिट आई थिंक कलेक्टिव एफर्ट्स इज द ओनली
(43:17) सॉल्यूशन और सबको सरकारों को समाज को समाज में लोगों को नागरिकों को सबको मिलके काम करने की जरूरत है एक्चुअली हमारी पॉपुलेशन इतनी ज्यादा है कि हमें एक दूसरे का सहारा बनना ही पड़ेगा अगर हम सिस्टम से उम्मीद करते रहेंगे तो इतने सारे लोगों के ऊपर एक पुलिस वाला है मतलब इतनी ज्यादा वह क्या बोलेंगे उसको रेशो जो है वो इतना खराब है मतलब जो होना चाहिए उससे 100 गुना से भी ज्यादा खराब है तो उसको कब तक हम ठीक कर पाएंगे तो आई थिंक हम एक दूसरे की आवाज एक दूसरे का साथ एक दूसरे का सपोर्ट बनके ही शायद इस बैटल को कहीं थोड़ा शुरुआत की जा
(43:48) सकती है बदलाव तो मुझे लगता है भी बहुत जिस तरह से आपसे बात करके मुझे लग रहा है कि बहुत ही दूर का सपना लगता है लेकिन हां कर सकते हैं थोड़ा बहुत शुरुआत उसमें की जा सकती है योगिता आपकी अपनी पर्सनल स्टोरी क्या है जब कोई भी इंसान कुछ इस तरीके का काम करता है तो कहीं ना कहीं एक पर्सनल इंस्पिरेशन या मोटिवेशन होती है आज का टॉपिक मेरे लिए डिफिकल्ट बात करना इसलिए भी है क्योंकि मेरी बहुत सारी जो फ्रेंड्स हैं जिनसे मैं बात करती हूं बहुत ही उनमें से कम परसेंटेज है जिनके साथ किसी तरह का सेक्सुअल वायलेशन ना हुआ हो या वह किसी एल्डरली इन द फम ने
(44:27) किया हो या वो किसी सड़क पर चलते हुए किसी आदमी ने किया हो लेकिन आई थिंक हम सबने इंक्लूडिंग माय सेल्फ एक बार नहीं मल्टीपल बार यह महसूस किया है और कई लोगों ने तो उस जगह से महसूस किया जहां वो शायद सेफ फील करती थी मतलब ये मैं अ अपनी कहानी बता रही हूं अपने मेरे जैसे जो और मेरी फ्रेंड्स है उनकी उनकी भी कहानी बता रही हूं आपको व्हाट हैज बीन योर पर्सनल स्टोरी देयर आपको कहां से ये इंस्पिरेशन मिला और क्यों आप ये काम करते हो देखिए मुझे इंस्पिरेशन देखिए शुरू से मुझे सामाजिक कार्यों में बहुत रुचि थी थी बचपन से ही मुझे लगता था मैं सीनियर सिटीजन होम्स में
(45:01) बहुत एक्टिवली वॉलेटर करती थी ऑर्फनेजेस में करती थी महिलाओं के लिए बहुत सारे मैंने एंटरप्राइजिंग वाले जो काम है जैसे ड्राइविंग स्किल्स और ये सेल्फ हेल्प ग्रुप्स बनाना वो मैं 2007 से कर रही थी पर जब निर्भया हुआ तो मैंने रिलेट किया काफी उस केस से मुझे लगा कि इट कुड हैव बीन मी पता नहीं ये मुझ में कब आया वो चीज और बिकॉज मे बी आई वाज इन द सेम प्लेस वेर शी वाज इन द सेम मॉल उस समय पे मैं भी वही थी हो सकता है वी मस्ट हैव क्रॉस पथ्स तो मुझे यह लगा मैं वो रिलेट इसलिए कर पाई और फिर जब पूरी दुनिया में इसकी ब चर्चा हुई तो मुझे उससे पहले ही मैं ऑलरेडी एज आई
(45:38) सेड कि मुझे कहीं ना कहीं लगा कि यह बहुत ब्रूटल हुआ है और आई स्टार्टेड रिलेटिंग टू हर तो मुझे यही लगता था कि इस परे काम होना बहुत जरूरी है और ऐसा कुछ मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस नहीं था वही एक रेगुलर इंडिया में जो एक महिला के साथ छेड़छाड़ यह सब वो तो हुआ ही है उसमें तो कोई डिनायल नहीं है वो तो सब आए दिन की बात है वो अभी भी कंटिन्यू ही है अ बट उसके अलावा ऐसा कुछ ब्रूटल नहीं हुआ कि जो मुझे इस लाइन में लाए कि मुझे करना है और आई थिंक उसका कोई रेलीवेंस भी नहीं है बिकॉज़ बहुत सारे विक्टिम्स जो हमारे साथ हैं जो अभी रिहैबिलिटेट हो चुके हैं जिनको मैं कहती
(46:15) हूं आओ वॉलंटिज्म को नहीं है अंदर से मोटिवेशन कि इस मुद्दे पे काम करना ऐसा नहीं है तो अ तो ऐसा जरूरी नहीं है किसी की पर्सनल जर्नी में ऐसा हुआ हो फिर उस स्पेस में काम करें मे बी अ व्हाट एवर माय कॉलिंग वाज आई एम वर्किंग ऑन दिस इशू बट एट द सेम टाइम अ अ मैं और भी जैसे हेल्थ रिलेटेड और और भी जैसे सोशल इश्यूज पे आवाज उठाती हूं एनी इंजस्टिस बट यह वाला क्योंकि वी रिलेट बेटर बीइंग वुमेन मुझे लगता है कि और जब यह बच्चों के साथ इतनी ब्रूटालिटी होती है वो मुझे कहीं ना कहीं से मतलब झग झोड़ देती है मतलब अभी भी मैं आई हैव स्लीपलेस
(46:55) नाइट्स बच्चों के साथ जो हो रहा है बहुत गलत हो रहा है हमारे देश में और और हम इसको चर्चा भी नहीं कर पा रहे हैं सबसे बड़ी बात है निर्भया का जो एक केस था वो एक तरह से टर्निंग पॉइंट था हम सभी के लिए मैं आई वास आल्सो वेरी यंग देन और हमने जाके कैंडल मार्च निकाला और उसमें शामिल हो गए बट मुझे लगा उससे ज्यादा हम क्या ही कर पाए कभी-कभी लगता है शायद उतना सपोर्ट भी नीडल मूव करने के लिए मिल जाए तो वो भी काफी है लेकिन कभी-कभी लगता है कि उससे ज्यादा भी किया जा सकता था मतलब दिस इज आल्सो वन बैटल दैट आई हैव विद इन माइसेल्फ जो अपने अंदर एक अंदरूनी लड़ाई होती है कि
(47:26) हम हम ट्रांसफॉर्मेशन की बात कर रहे हैं द जर्नी विद इन पॉडकास्ट का थीम ही है कि आप अपने आप को कैसे डिस्कवर करें आप अपने आप को कैसे बेहतर समझे आप अपनी बेस्ट लाइफ कैसे क्रिएट करें ट्रांसफॉर्मेशन कैसे लाएं जब मैं बातें करती हूं तो कहीं ना कहीं मुझे भी ऐसा लगता है कि हम हम कोशिश कर रहे हैं लेकिन हम हम कितना कर पाएंगे आई रियली होप कि इस पॉडकास्ट इस कन्वर्सेशन के थ्रू और जो लोग हैं वो थोड़े सेंसिटिव हो रहे हैं इस मैटर को लेकर और आपकी जिस तरह से मदद कर पाए और आपके जैसी जो संस्थाएं हैं एनजीओस हैं उनकी जिस तरह से हम मदद कर पाएं लाइक आई
(47:55) सेड कि बहुत सारे तरीके हैं एक्टिव एक्टिविस्ट है लेकिन आप आप मनी भी डोनेट कर सकते हो आप ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट का हिस्सा भी बन सकते हो आप इंडिविजुअल लेवल पर भी शुरू कर सकते हो वॉलंटस बनिए चेंज मेकर हमारा एक प्रोग्राम है जिसमें आप जुड़िए हम आपको ट्रेनिंग देंगे और आप सिर्फ मदद कीजिए लोगों की और आपको ज्यादा समय भी नहीं देना है एक अवेयरनेस प्रोग्राम का एक हमारा एक हिस्सा है और एक विक्टिम सपोर्ट का जिसमें भी आपको कंफर्टेबल जिस स्पेस में आप कंफर्टेबल हो आप किसी भी तरह से जुड़ सकते हो कर सकते हो एनरोल करिए एज अ चेंज मेकर एंड यू कैन
(48:29) वेरी मच टेक ट्रेनिंग एंड गो अहेड आपकी वेबसाइट का लिंक हम अपने डिस्क्रिप्शन बॉक्स में डालेंगे और जितनी इंफॉर्मेशन आपके बारे में दे सकते हैं आपके एनजीओ के बारे में दे सकते हैं हम जरूर कोशिश करेंगे ताकि बहुत सारे लोग आप आपके साथ हाथ बटा सके इस इस मुहीम में योगिता आप सिस्टम के खिलाफ बोलते हो आप पुलिस ऑफिसर्स के खिलाफ बोलते हो और आप उन लोगों में से हो जो नाम लेकर बोलते हो पार्टी का नाम भी लेकर बोलते हो आपको अपनी खुद की खुद के लिए डर नहीं लगता देखिए मुझे लगता है कि वो फेज मेरा निकल चुका है कभी कभार हो जाता है कई बार मेरे को हरासर हरासर आता
(49:02) है कई बार बहुत रैंडम कॉल्स आते हैं तब मैं थोड़ा सा मुझे हरासमेंट होता है बट एट द सेम टाइम मेरे को कोई डिमोटिवेट नहीं कर पाया आज तक और मुझे लगता है कि मैं और ज्यादा अग्रेसिव हो जाती हूं कि अगर ये मुझे अपना वो दिखा रहे हैं तो ठीक है ऑल द मोर रीजन आई हैव टू फाइट दिस आउट अब हम लोगों को अगर वो डी डिमोटिवेट कर सकते हैं इस तरह के थ्रेट्स देके अटैक होता है रेगुलर आते हैं बट बट फिर मुझे लगता है कि फिर उन बचा मतलब उन लोगों का क्या जिनके पास कोई सपोर्ट नहीं है हम लोगों को तो फिर भी थोड़ा बहुत सपोर्ट है हम लोग इतने सारे लोग हमें फॉलो करते हैं और हम सब
(49:39) मिलके कहीं ना कहीं अकाउंटेबल कर देंगे उन लोगों को बट फिर मुझे वो करेज आ जाता है हालांकि कहीं कहीं कहीं ना कहीं फेयर फैक्टर माइन्यूट आता है आई एम अ ह्यूमन बीइंग बट एट द सेम टाइम वो करेज भी साथ-साथ ज्यादा आ जाता है तो एक मूवी में कुछ डायलॉग था कि इतना मत डराओ कि डर से ही डर लगना बंद हो जाए एटली तो कभी-कभी आप डर से इतने ज्यादा रूबरू हो जाते हो वो आपकी एवरीडे लाइफ का पार्ट बन जाता है इस तरह के कॉल्स तो रोज ही आ रहे हैं थ्रेड तो मुझे रोज ही लोग दे रहे हैं पावर का ब्यूज मेरे साथ रोज ही हो रहा है तो फिर आप कहीं ना कहीं उसके उससे डरना भी थोड़ा
(50:12) कम हो जाता है जी मैंने अभी जो कोविड था उससे मुझे बहुत इनकरेजमेंट मिला है कोविड में हमारे ऐसे ऐसे लोग चले गए जिन्होंने बहुत हर चीज फूक फूक के करी और बहुत जीवन बहुत प्रोटेक्टिव रखा और एकदम से कोविड उने ले गया तो मुझे बहुत मोटिवेशन वहां से हुआ कि लाइफ कैन गो एनी टाइम तो उस चीज में डरना क्या है वो कोविड जैसा एक वायरस आपको किल कर देगा और अगर हम इतना सोचे कि हम दूसरे की मदद इसलिए ना करें कि आपके जीवन को थ्रेट है तो मुझे लगता है यह मेरे लिए सब सबसे बड़ी जागृति कोविड में हुई है यू नो आजकल जो कंट्री का माहौल है हम धर्म के बारे में
(50:50) फिलोसोफी के बारे में संस्कृति के बारे में बहुत बात कर रहे हैं लेकिन मुझे लगता है उस उसी सेम टाइम पर हमें आपके जैसे लोगों को भी देखना चाहिए और सैल्यूट करना चाहिए जिनकी लाइफ ही एक तरह से एक फिलॉसफी इन इट सेल्फ है यू नो जो लाइफ ही उस तरीके से जीते हैं जहां पे इतने बड़े-बड़े लाइफ लेसंस हैं जैसे कि आपने कहा डर से आप कैसे डील करते हो करेज कैसे आप लेके आते हो आज जहां पर हम महिलाओं की बात करें जिनके लिए खुद की आवाज उठाने तक का करेज नहीं है वहां पे आप इतनी सारे लोगों की आवाज बन रहे हो तो दीज आर सम रियली इंपोर्टेंट लाइफ लेसंस जो आपकी आपकी जर्नी से जो लोग
(51:22) इस पॉडकास्ट को देख रहे हैं वो ले सकते हैं अलोंग विद द इंस्पायरिंग वर्क दैट यू आर डूइंग योग्यता योगिता अकाउंटेबिलिटी की बात करते हैं ठीक है यह क्राइम हो गया रेप हो गया किसी के साथ किसकिस को अकाउंटेबल ठहराया जा सकता है और किसकिस हद तक ठहराया जा सकता है आई थिंक हम सभी अकाउंटेबल है आप मैं हम भी अकाउंटेबल हैं और समाज अकाउंटेबल है क्योंकि इस तरह की ये जो रेपिस्ट मेंटालिटी है वह कहीं ना कहीं समाज से ही निकल के आ रहे हैं उस घर से निकल कर आ रहे हैं वो घर अकाउंटेबल है जिस घर में ऐसी परवरिश हुई और सिस्टम है अकाउंटेबल फॉर श्यर क्योंकि
(51:56) सिस्टम ने भी फेल किया क्योंकि जब वहां फेल हुआ और यहां पर भी उन्होंने उनको मतलब इनकरेज ही किया सिस्टम ने ऐसे आरोपियों को और और मतलब विक्टिम शेमिन को या इस तरह की प्रवृत्ति को और जब सरकारों की बात करें क्योंकि हम अपने नेताओं को चूज करते हैं हम वोट करते हैं उन्हें टैक्स पेयर से सैलरी देते हैं बंगले देते हैं गाड़ियां देते हैं और वह जब इस बात पर चुप रह जाते हैं कुछ टिप्पणी नहीं करते सिर्फ और सिर्फ राजनीति करते तो वहां मेरा सबसे ज्यादा खून फ कलता है क्योंकि आप देश में सिर्फ बड़ी-बड़ी स्कीम्स लच करने के लिए सिर्फ वा वाई लूटने के लिए नहीं आए आपको ग्रास
(52:36) रूट प काम करने की जरूरत है और जब वह नहीं करते स्पेशली ऐसे डिपार्टमेंट्स जो जि डायरेक्टली आंसरेबल है होम मिनिस्ट्री हुई या वमन एंड चाइल्ड मिनिस्ट्री हुई ये डायरेक्टली लिंक्ड है इस मुद्दे से तो जब वह चुप रहते हैं कुछ बयान नहीं देते और कोई काम नहीं ऐसे कोई मेजर रिफॉर्म्स नहीं किए तो फिर वोह कहीं ना कहीं होता है और फिर सवाल उठाने का करने का मन करता है और फिर मैं कंट्रोल नहीं कर पाती हूं फिर हमें लगता है कि नहीं सवाल तो पूछना बनता है चाहे कोई भी हो आप तो काफी वोकल हो आपके सिटीजन की तरह इज्जत भरी जिंदगी जीने के
(53:29) लिए क्या समाज इनको इजाजत देता है बड़ा मुश्किल है नहीं है देखिए दो तरह से इश्यूज आ रहे हैं प्रैक्टिकली एक तो यह है सोच लोगों की जो सोच है बलात्कार पीड़िता के प्रति तो वह एक सिस्टम और वो सॉरी एक सोच उन्हें नकारात्मक करती है कि वह नॉर्मल लाइफ जिए और दूसरा सिस्टम में जो एक इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट होना चाहिए फिजिकल एक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे उनको एक रखने की ऐसी जगह जहां उनको स्किल्स दिए जाए या ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है हमारे पास देयर इज नो इंफ्रास्ट्रक्चर बाय वो सपोर्ट होनी चाहिए सरकारों की वो भी नहीं है समाज भी एक्सेप्ट नहीं करता है और
(54:08) हमारे पास ऐसे होम्स नहीं है जहां हम उन्हें रख पाए सुरक्षित रख पाए होम्स तो है जहां पर उनका और बलात्कार होता है बहुत सारे शेल्टर होम्स की आपने सुनी होगी तो हम शेल्टर होम्स में क्यों पटक देते हैं उन्हें क्यों नहीं उनके लिए रिहैबिलिटेशन सेंटर्स हो जहां वो स्किल सीखे जहां पर वो डिग्निटी से रहे एज अ ह रहे आए जाएं काम करें सुरक्षित रहे कुछ है ही नहीं सेम फॉर डोमेस्टिक वायलेंस सरवाइवर्स उनके लिए भी कोई जगह नहीं है जाने के लिए जब उनको यहां पति से पिटाई पड़ती है वो रोज वहीं रहते रहती हैं उसी घर में क्योंकि उनको लगता है कि बाहर कहां जाएंगे मायका रखेगा
(54:41) नहीं ससुराल में पिट रही हैं और कोई जगह नहीं है पैसा है नहीं स्किल है नहीं तो कहां जाएंगे तो ऐसे सेंटर्स ही नहीं है हमारे देश में फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग्स की बात कर रही हूं तो वो सरकारों की नीतियों की समस्या है उन्होंने आज तक इसमें इन्वेस्ट ही नहीं किया सबसे इंपॉर्टेंट चीज है जो और यहां पर सोच ऐसी है कि समाज उनको एक्सेप्ट नहीं करता है उनको नौकरियां नहीं देता मैंने कितनी रेप विक्टिम्स और सरवाइवर्स की नौकरियों के लिए बहुत सारी जद्दोजहद करी बहुत सारी कंपनीज में हमें तो बोल दिया जाता है आ हाय नेगेटिविटी मत लाइए यहां पर ये मत
(55:10) करिए आप मत हमें रेफर करिए कोई और लगवा दीजिए यह मैं पढ़े लिखे कॉरपोरेट्स की बात कर रही हूं तो हर कोई एक्सेप्ट नहीं करता है ये भी एक समस्या है ये आई हैव वर्ड मेरे मुंह से इसलिए निकला एक बहुत परिचित दोस्त ने मुझे यह वर्ड से शुरू किया जब मैंने उन्हें बोला आप नौकरी दीजिए नौकरी दीजिए उनका स्कूल है मैं बता भी दूं उनका स्कूल है मैंने कहा आप इनको नीचे रख लीजिए तो उन्होंने ये वर्ड सबसे पहले बोला आय हाय तो मे माइंड में गूंज रहा था सॉरी मैंने बोला बट आपकी पॉडकास्ट के जरिए मैं उनको भी बताना चाहती हूं कि ये ये पहला शब्द था उनका एक टीचर या प्रिंसिपल या ओनर
(55:46) स्कूल के जो भी वो रहे होंगे आपके ओनर स्कूल के मालिक उन्होंने सबसे पहला वर्ड आय हाय बोला एक वो मेरे मुंह से भी सवा तभी वो मेरे मुंह से भी यही निकला कि वो बोलते मतलब ये पढ़े लिखे वो लोग हैं जिन जो अपने स्कूल्स चला रहे हैं उनका अगर ये एक्सेप्टेंस लेवल है तो हम बाकी लोगों से क्या एक्सेप्ट कर सब नहीं होता सब इनकरेज भी करते हैं कुछ लोग ऐसा नहीं है बट मेजॉरिटी मैंने जब बात की तो बोले कहीं शादी करा दीजिए ना उनकी क्या आप जॉब ढूंढ पा रहे हैं ये उसको सेटल करा दीजिए बहुत अलग-अलग लोगों के रेंडम रिस्पांस आते हैं तो बड़ा दुख होता है व्हाट इज योर विजन
(56:18) फॉर आवर सोसाइटी इन द फ्यूचर आई थिंक मेरा विजन मेरा क्या हम सबका ही होना चाहिए आपका मेरा और सोसाइटी का कि जहां देयर इज नो रेप लाइक रेप फ्री इंडिया रेप फ्री वर्ल्ड तो वो एक विजन लेके हम चल रहे हैं आई नो मुझे लोग बोलते हैं ये बहुत ही मतलब नहीं हो पा पॉसिबल नहीं होने पाने वाला एक ड्रीम है आपका बट एट द सेम टाइम अगर हम सब कलेक्टिवली काम करेंगे रिफॉर्म्स पे काम करेंगे रिहैबिलिटेशन इज अ सेकंड थिंग बट प्रिवेंशन पे काम करेंगे तो मुझे लगता है बहुत सारी चीजें बदलेगी और जो भी हमने आज चर्चा की उसमें काफी सारी हमने प्रिवेंट
(56:52) बातें भी की हैं और अगर हम एजुकेशन रिफॉर्म करें मोरल एजुकेशन एथिकल एजुकेशन और जो अच्छे विचार और जो और माइंड सेट चेंज की बातें अगर हम करें तो मुझे लगता है चीजें बदलेंगे एंड वी विल डेफिनेटली सी अ डे वेयर वमन आर नॉट एब्यूज्ड और रेप्ड इन दिस कंट्री दैट इज द विजन वी आर गोइंग अहेड विद एंड वी नीड मोर एंड मोर चेंज मेकर्स फॉर दैट एंड दैट्ची है कि हम विक्टिम्स को शेम करना उनकी गलती निकालना जब बंद करें हमारे यहां पर मिनिस्टर्स जो हैं सिटिंग मिनिस्टर्स वो ऐसे स्टेटमेंट दे देते हैं कि कि लड़के क्या करेंगे और लड़कियां ऐसे ड्रेस अप
(57:37) करेंगी तो उनको तो अर्ज होगा ही मतलब इस इस तरह की बातें अगर ना हो तो हम विक्टिम्स को इस तरह से शेम ना करें उनकी हिम्मत को इस तरह से ना तोड़े या जो अ परपेट्रेटर्स हैं जो बलात्कार करते हैं उनके हौसले को ऐसे ना बढ़ावा दे स्पेशली जिनके हाथ में पावर है जो मतलब मिनिस्टर्स हैं सिटिंग मिनिस्टर्स हैं ये एक मेरा विजन रहेगा कि हम पावर का थोड़ा सा बेटर यूज देखें एंड अगर वो बेटर यूज ना भी करना चाहे तो एटलीस्ट शांत रहे कम से कम नेगेटिवली यूज ना करें पावर को एक वो विजन मैं डेफिनेटली यू नो देखना चाहूंगी एंड आई रियली होप दैट रेप फ्री इंडिया बिकम अ
(58:13) रियलिटी आपकी मेहनत और आपके जैसे और भी जो एनजीओस हैं उनकी मेहनत के साथ आई एम रियली होप फुल कि काम हो रहा है थैंक यू सो मच फॉर कमिंग ऑन द जर्नी विद इन पॉडकास्ट एंड शेयरिंग योर स्टोरी विद अस थैंक यू सो सो मच फॉर इनवाइटिंग मी एंड हैविंग डिस्कस सच अ इंपोर्टेंट इशू आई रियली होप दैट वी आर एबल टू रीच टू द मासस थ्रू दिस कन्वर्सेशन और कहीं अगर हम थोड़ा सा भी कुछ बदलाव किसी में ला सके अगर कोई एक वॉलेटर ही बनना चाहे आप जैसी संस्था के साथ या कोई एक अपने पर्सनल लेवल पर थोड़ी जिम्मेदारी लेकर अपने आसपास ही सुधार का काम करना
(58:45) चाहे क्योंकि हम सभी के घरों में आजकल हाउस हेल्प आती है कितना कुछ है अगर हम उनसे ही बात करें और उनसे ही जाने कि डोमेस्टिक वायलेंस रेप सेक्स विदाउट कंसेंट इस सब का क्या हाल है तो शायद हम अपने इंडिविजुअल लेवल पर थोड़ा-थोड़ा बदलाव कॉज कर सकते हैं बहुत बहुत बड़ी बात आपने कही और बिल्कुल ठीक है आसपास में ही मदद करना शुरू कीजिए थैंक यू अगेन योगिता थैंक यू सो मच थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग दिस एपिसोड ऑफ आवर पॉडकास्ट आई एम श्यर यह एपिसोड थोड़ा ज्यादा इमोशनल था हम में से कई लोगों के लिए मेरे लिए भी इसे प्रोड्यूस करना काफी डिफिकल्ट था एज अ
(59:18) वुमन एंड एज समबे सेक्सुअल अब्यूड़ोस एपिसोड को देखा इसको शेयर कीजिए और लोगों तक मैसेज पहुंचाए हम योगिता के एनजीओ का लिंक अपने डिस्क्रिप्शन बॉक्स में डाल रहे हैं आप किसी भी तरह की मदद उनकी करना चाहे तो जरूर जरूर जरूर वहां पर क्लिक करें और हेल्प करें उन लोगों की जो कुछ अच्छा काम कर रहे हैं थैंक यू

No comments:

Post a Comment