Thursday, April 9, 2026

Anxiety Attack & Depression: Signs You Shouldn’t Ignore! | Dr. Kashika Jain | TJW121

Anxiety Attack & Depression: Signs You Shouldn’t Ignore! | Dr. Kashika Jain | TJW121

Author Name:Shobha Rana

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@iamshobharana

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=xy4dw0NcTLc



Transcript:
(00:00) पैनिक अटैक बहुत सडन होते हैं एक इंसान को ऐसा लगता है कि अब वो मर जाएगा या क्या कोई ऐसी सिंपल टेक्निक्स हैं जो हम कर सकते हैं पैनिक और एंजाइटी को दूर रखने के लिए ना तो खुद को ब्लेम करें और ना दूसरे को ब्लेम करें अपनी लाइफ आपको ओवरथिंकिंग हो रही है आपको कुछ इंट्रूसिव थॉट बन रहे हैं आपका माइंड ब्लैंक हो जाता है आपको कंसंट्रेशन में डिफिकल्टी आती है तो आपका माइंड खुद बता रहा है कि इस टाइम आप आउट ऑफ रेंज चल रहे हैं फर्स्ट टाइम जब किसी को पैनिक अटैक आता है तो इसमें डिफरेंशिएबल मोस्ट सेम है बस हार्ट अटैक में क्या होता
(00:36) है एकदम तो जब हम एंजाइटी को सीरियसली नहीं लेते हैं तो उसके क्या नुकसान हो सकते है तो जब आप बॉडी पे सफर करने लगते हैं एक्चुअल में हो एंजाइटी एक इमोशन से एक कंडीशन कब बन जाती है तो फैमिली वाले कहते हैं इसके फमिली बात मत करो है ना इसको घबराहट हो जाएगी पैनिक हो जाएगा इसको आप और उसको कमजोर बना रहे हैं आप उसके साथ बहुत तो हमारे अंदर रिप्लेसमेंट बहुत जल्दी हो जाता है किसी चीज को अगर आप छुड़ाने की कोशिश करेंगे तो बहुत मुश्किल होगी लेकिन अगर आप किसी चीज को छुड़ाने की कोशिश ना करें और रिप्लेस करने की कोशिश करें तो बहुत ही आसान हो जाएगा आपको पता
(01:10) है सबसे ज्यादा पेन में मजा आने लगता है इमोशनली उनको इतना पेन हो रहा होता है कई बार सेल्फ हार्म करके वो पेन को शिफ्ट करने की कोशिश करते हैं बट पे करें क्योंकि जब एंजाइटी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो वो ऑब्सेशंस का रूप भी लेती है तो जब पैनिक अटैक तक कोई इंसान आ जाता है उसकी मेमोरी जो नेक्स्ट पैनिक अटैक को एक तरीके से इनवाइट करती है क्योंकि इंसान हाइपर विजिलेंट हो जाता है और उसको यह डर सताता रहता है नेक्स्ट ना आ जाए नेक्स्ट ना आ जाए और उसका अगर ऐसे में ध्यान किसी एक बॉडी पार्ट पर चला गया सिलेक्टिव अटेंशन हो गई उसकी तो वो हल्की सी भी
(01:39) हार्ट बीट अगर नमस्कार द जर्नी विद इन पॉडकास्ट में आपका स्वागत है मेरे यानी शोभा राना के साथ मैं एक इमोशनल इंटेलिजेंस और माइंडसेट कोच हूं और साथ ही इस पॉडकास्ट की होस्ट और क्रिएटर भी हूं मेरा इस पॉडकास्ट को लेकर ये एम है कि आप अपनी बेस्ट लाइफ अपनी ड्रीम लाइफ को डिजाइन कर सकें इस पॉडकास्ट के थ्रू मैं आपको कुछ ऐसे टूल्स रिचुअल्स प्रैक्टिसेस हैबिट्स दे पाऊं एक डीपर लेवल पे एक डीपर लेवल पे ट्रांसफॉर्मेशन क्रिएट कर पाए आपकी लाइफ में ताकि आप अपनी बेस्ट लाइफ डिजाइन कर पाएं ये हम करते हैं बाय टेकिंग द जर्नी विद इन अपने अंदर की तरफ
(02:21) वापस लौट आना अपने इनर वर्ल्ड को अपने ट्रू सेल्फ को अपने इनर सेल्फ को समझना हम अपने थॉट्स फीलिंग्लेस की प्रोसेस कैसे करते हैं और इस प्रोसेसिंग में क्या गड़बड़ हो जाती है कि हमारी लाइफ का पर्सपेक्टिव जो है वह सही नहीं सेट हो पाता और हमारे लाइफ का जो एक्सपीरियंस है इसीलिए बहुत अच्छा नहीं हो पाता है तो आज इस पॉडकास्ट में हम द जर्नी विदन करेंगे थ्रू द लेंथस ऑफ एंग्जाइटी एंड पैनिक अटैक्स नाउ एंजाइटी और पैनिक अटैक्स अगर हम ग्लोबली डटा देखें तो पिछले 10 सालों में बहुत ज्यादा बढ़ गया है पिछले 10 सालों में इसके बहुत सारे डायग्नोज केसेस
(02:56) अब रिपोर्ट हो रहे हैं और यू नो बहुत सीवियरिंग भी इशू की बढ़ती जा रही है फ्रॉम अ वेरी यंग एज टू एनी एज ग्रुप य सब लोगों को इंपैक्ट कर रहा है आज हमारे साथ है साइकोलॉजिस्ट कशि का जैन जो कि पिछले 12 सालों से क्लिनिकल साइकोलॉजी के फील्ड में काम कर रही हैं एंजाइटी डिप्रेशन ओसीडी पैनिक अटैक्स इनका एरिया ऑफ एक्सपर्टीज है तो आज हम इनके साथ एंजाइटी और पैनिक अटैक्स को डेप्थ में समझेंगे और अपनी लाइफ को कैसे हम ट्रांसफॉर्म कर सकते हैं वो सीखेंगे लेट्स मीट डॉ कशि का जैन ऑन द जर्नी विदन पॉडकास्ट [संगीत] [संगीत]
(03:46) थैंक यू सो मच शोभा हम यह दूसरा एपिसोड शूट कर रहे हैं और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि आपने मुझे फिर से इनवाइट किया और आज लोगों को सलूशन देंगे हम एंजाइटी पैनिक क्योंकि आजकल बहुत बढ़ रहा है जैसे कि आपने अभी कहा कि ये प्रैक्टिस करते करते मेरे एक्सपर्टीज एरिया बन गए तो मैं बहुत लोग देखती हूं जो इतना एंजाइटी और पैनिक में है तो आपने बहुत ही रेलीवेंट इंपॉर्टेंट टॉपिक चूज किया है थैंक यू डॉक्टर कशि का द जर्नी विद इन पॉडकास्ट के थ्रू हमारा एम है कि हम जो कॉमन प्रॉब्लम्स है लोगों की उनको सलूशन की तरफ ले जा पाएं और उनकी लाइफ में वो आज क्या
(04:19) बदलाव ला सकते हैं उसके बारे में बात करें थैंक यू फॉर एक्सेप्टिंग द इनवाइट आप दोबारा आए जो हमने पिछली कन्वर्सेशन की थी नार्सिसिस्म एंड नार्सिसिस्टिक अब्यूड़ोस से भी काफी फायदा हुआ और आज इस कन्वर्सेशन के थ्रू ही थ्रू भी ऐसी ही कुछ कोशिश है तो एंग्जाइटी और पैनिक अटैक्स ये दो हमारे जो आज मेन टॉपिक हैं सबसे पहले एंग्जाइटी से शुरुआत करते हैं एंजाइटी होती क्या है और डिफरेंट लोगों में कैसे मेनिफेस्ट करती है एंजाइटी एक नॉर्मल ह्यूमन इमोशन है जो सबको होता है और एंजाइटी हमारे अंदर नेचुरली ही हम फील करते हैं सो आप देखिए कि जब आप स्कूल में
(04:58) थे एग्जाम देने जाते हैं तो उस टाइम पर भी थोड़ा सा एंसिस फील करते हैं ना उस टाइम पर भी दिमाग में चलता है कि क्वेश्चन पेपर डिफिकल्ट ना आ जाए या मैं कहीं हार जाकर भूल ना जाऊं ये सब क्या है ये एंग्जाइटी है लेकिन हमें टर्म देना नहीं आता हमें लगता है नॉर्मल है थोड़ा सा स्ट्रेस तक हमें पता रहता है लेकिन ये भी एक हेल्दी एंजाइटी है एंजाइटी बहुत जरूरी है और कुदरत ने हमें दी है जैसे अगर आपके सामने कोई भी डेंजर सिचुएशन आ जाए कहीं आग लग जाए कोई जंगली जानवर आ जाए तो उस टाइम पर आपकी बॉडी में जो नेचुरल रिस्पांसस आएंगे आपकी हार्ट रेट बढ़ सकती है आपकी ब्रीदिंग
(05:31) जो है ना अनइवन हो सकती है आपको घबराहट हो सकती है आपको बहुत डर लग सकता है आपके दिमाग में ऐसी थॉट्स चल सकती है अगर मैं फस गया स्टक हो गया या मुझे खा गया या मैं जल गया तो क्या होगा यह सब एंजाइटी ही है तो एंजाइटी एक नॉर्मल ह्यूमन इमोशन है जिसको हम सब फील करते हैं जैसे हमारी बॉडी में अगर आप और मैं अपनी पैथोलॉजिकल टेस्ट कराएंगे डायबिटीज की कोलेस्ट्रॉल की रेंज तो हम सबके अंदर आएगी पर हम यह नहीं कहेंगे अगर वो विदन रेंज है कि हम डायबिटिक है लेकिन अगर वो आउट ऑफ रेंज हो जाएगी तो हम क्या कहेंगे यह डायबिटीज हमें डायग्नोज हो गई है सो लाइक वाइज एंजाइटी
(06:05) हम सबको फील होती है हेल्दी वे में अगर वो फील हो रही है तो बिल्कुल नॉर्मल है क्योंकि ये एक बहुत ही ब्यूटीफुल इमोशन है जिससे कि हमारी परफॉर्मेंस बढ़ जाती है हम थोड़ा ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं और उस टाइम पर हम वो भी कर गुजरते हैं जो हम नॉर्मली रिलैक्स मोड में शायद ना कर पाए तो यह बहुत ही अच्छा एक हेल्दी इमोशन हमें कुदरत ने दिया है जिसकी वजह से हम बहुत अच्छा परफॉर्म करते हैं पर प्रॉब्लम तब आती है जब एंजाइटी का डायग्नोसिस बनता है या एंजाइटी फील करना भी नॉर्मल है जब एंजाइटी डिसऑर्डर में आप फंस जाते हैं तो एंजाइटी नॉर्मल है बट एंजाइटी डिसऑर्डर्स
(06:38) नॉर्मल नहीं है सो डॉक्टर कशि का जो एंजाइटी है जैसा आपने बताया ब्यूटीफुल इमोशन है और जब आपको एंजाइटी होती है तो आप ओवर परफॉर्म कर देते हैं आपकी बॉडी में कुछ इस तरह के केमिकल रिलीजस होते हैं कि आपकी परफॉर्मेंस भी बहुत बूस्ट हो जाती है आपकी सारी जो एनर्जी है मेंटल फिजिकल वो उस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए लग जाती है यू नो ये मेरे पर्सनल एक्सपीरियंस भी हैं क्योंकि एग्जाम्स के टाइम बचपन में मैं पढ़ाई को लास्ट तक डालती थी क्योंकि मुझे पता होता था मैं लास्ट के चार घंटों में क्रैक कर लूंगी ना वो मैं शायद बहुत सारे दिन लगा के भी नहीं क्रैक कर पाऊंगी
(07:08) क्योंकि उस टाइम एक अलग ही लेवल ऑफ कंसंट्रेशन एक अलग ही लेवल ऑफ फोकस वो एक टक ध्यान जिसे बोलते हैं ना वन पॉइंटेड नेस वो उसी मोमेंट में आई थिंक आ पाती है तो इसका प्लस पॉइंट तो ये है कि इट्स अ ब्यूटीफुल इमोशन और अगर नहीं होगी तो आप खुद को प्रोटेक्ट नहीं कर पाएंगे आप शेर अगर आपके सामने आ गया तो आप भागेंगे नहीं अगर आपको एंजाइटी या स्ट्रेस नहीं होगा आप अपने जॉब्स में अपने रिलेशनशिप्स में अपने आप को अ परफॉर्म करने के लिए या फिर अपने आप को बेटर करने के लिए एक एक चैनल नहीं ढूंढ पाएंगे लेकिन एंजाइटी एक इमोशन से एक कंडीशन कब बन जाती है यह हमारी ही गलतियों
(07:42) से बनती है जैसे अभी हम बात कर रहे थे कि अगर कोई भी नेचुरल डेंजर आएगा तो उसमें हमें एकदम से एक्टिव होने के लिए एंजाइटी बहुत जरूरी है अब कोई भी रेंज से हम आउट होंगे तो हमारे लाइफस्टाइल प्रॉब्लम की वजह से हमारे सोचने के तरीके से हम कैसे अनसर्टेनटीज करते हैं हमारी एक्सेप्टेंस पावर कितना है कुछ लोग बहुत ज्यादा हाईली परफेक्शनिस्ट होते हैं तो बहुत सारे हमारे खुद के पर्सनालिटी ट्रेट्स हमारी लाइफ के इवेंट्स सिचुएशंस और हमारी किसी भी सिचुएशन को हैंडल करने की जो कैपेसिटी होती है हमारा लाइफ स्टाइल जैसे हमारा डाइट खराब कर लिया हमने हम एक्सरसाइज नहीं
(08:17) कर रहे हैं बहुत लेट नाइट सो रहे हैं छोटी-छोटी बातों को बहुत दिल पे ले रहे हैं तो कुछ डेली बेसिस पर हमसे ऐसी गलतियां हो रही होती है जिसकी वजह से स्ट्रेस लेवल बढ़ता है कॉर्टिसोल डरनल जैसे स्ट्रेस हार्मोंस हमारे अंदर बहुत ज्यादा रिलीज होते हैं और हम ज्यादातर सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम में फाइट फ्लाइट में ही रहते हैं और वो हैबिल हो जाती है हमारी बॉडी हमारा माइंड उस चीज के लिए एक जोन में रहने के लिए फिर हम उन सिचुएशन में भी एंसिस फील करने लगते हैं पैनिक फील करने लगते हैं जिनको नॉर्मल तरीके से संभाला जा सकता है क्योंकि हम वो डाइट
(08:50) नहीं ले रहे होते हैं जैसे बहुत सारे लोगों को आदत होती है फैंसी डाइट लेने की अगर किसी चीज का सीजन चला गया तो अभी मुझे बिना सीजन के भी वो चीज खानी है आपकी बॉडी ऐसे डिजाइन नहीं की गई है कुदरत ने डिजाइन किया है कि आपको जिस मौसम में जो खाना है आपके शरीर में वो केमिकल्स बनाने के लिए जो चाहिए वो कुदरत ने मौसम के अनुरूप आपको दिया है कि सर्दियों में ये सब्जियां और फल आएंगे गर्मियों में ये आएंगे अगर आप वो नहीं करते हैं तो आपकी बॉडी कोई भी केमिकल बनाती है वो किस मटेरियल से बनाएगी जो आप फूड खाते हैं या जो भी आपकी एक्टिविटीज
(09:20) होती हैं जो भी आप सोचते हैं उन सब से आपके केमिकल्स ऊपर नीचे होते हैं तो फूड का भी एक बहुत इंपॉर्टेंट रोल होता है तो एंजाइटी आपके बॉडी से भी एंटर कर सकती है एंजाइटी आपके माइंड से भी एंटर कर सकती है दोनों समझाती हूं मैं जैसे बॉडी से एंटर कब करेगी आपका बहुत ही पैसिव लाइफ स्टाइल है आप कोई भी एक्सरसाइज नहीं करते हैं आप उल्टा सीधा जंक फूड बहुत ज्यादा खा रहे हैं आप बहुत ज्यादा कैफीन इंटेक कर रहे हैं आप बहुत ज्यादा अल्कोहल ले रहे हैं आप ड्रग्स की तरफ चले गए हैं तो इस सबसे बॉडी में इंबैलेंस आएगा आप बॉडी को अब्यूड़ोस मोड में जाएगी अपने आप को बचाने के लिए वो
(09:55) कुछ ऐसे लक्षण पैदा करेगी जिससे कि आप स्टॉप हो जाए वो चीक चक कर बोलेगी तो बॉडी से ऐसे एंटर करते हैं माइंड से ऐसे एंटर करते हैं कि छोटी-छोटी सिचुएशन के आपने पर्सनल मीनिंग निकालने शुरू कर दिए कि ऐसे कोई मेरे साथ कैसे कर सकता है या कोई आपसे गलती हो गई आपने उसको एक्सेप्ट ही नहीं किया ऐसी गलती मुझसे कैसे हो सकती है मुझे हर चीज परफेक्ट मिी अब आप एंसिस फील कर रहे हैं कोई अनसर्टेनटीज सर्टेन होनी चाहिए पहले से पता होनी चाहिए लाइफ इतनी अनपेक केबल है अनसर्टेन है और वही ब्यूटी है लाइफ की अब आप हर चीज को फिक्स करने में लग जाएंगे कि
(10:28) पहले से आप सब चीजें पता हो आप क्या है अपनी कैपेसिटी बढ़ाने की बजाय आप एक्सटर्नल चीजों को कंट्रोल करने की कोशिश करें लोगों को इवेंट्स को यहां पर आप बिल्कुल वो कदम उठा रहे हैं जो आपको एंजाइटी की ओर लेकर जा रहे हैं डॉक्टर साहब अ कौन से ऐसे लोग हैं जो एंग्जाइटी के ज्यादा प्रोन है जैसे आपने बात की परफेक्शनिस्ट जो होते हैं जिनकी खुद की टेंडेंसी होती है कि हर चीज परफेक्ट होनी चाहिए और उसका बहुत ज्यादा स्ट्रेस ले लेते हैं एंजाइटी ले लेते हैं पहले तो स्ट्रेस और एंजाइटी के बीच में डिफरेंस क्या है हम ये भी डिकोड करेंगे और एक
(10:59) दूसरी चीज जो ओवर अचीवर्स होते हैं क्या वो भी ज्यादा प्रोन है एंजाइटी के देखिए जैसे स्ट्रेस है एक नॉर्मल रिस्पांस है बॉडी का जभी भी आप अपनी बॉडी को उसकी नेचुरल कैपेसिटी से ज्यादा यूज करेंगे तो बॉडी स्ट्रेस में जाएगी वो नेचुरल डिफेंस से ये बताने का आपको कि रुक जाओ लिमिट हो गई है इसी तरीके से आप मेंटल स्ट्रेस बहुत ज्यादा रिस्पांसिबिलिटीज ले लेंगे आप सब में बिल्कुल ही ऐसे बनना चाहेंगे कि मैं ही हूं रिस्पांसिबल हर चीज के लिए आप बहुत हाई एक्सपेक्टेशन सेट करेंगे तो जो आपकी एक्सपेक्टशंस है या जो अपनी कैपेसिटी से ज्यादा कर रहे हैं तो
(11:34) उससे रियलिटी के बीच का जो डिफरेंस है वो स्ट्रेस क्रिएट करता है क्योंकि जो भी गैप रह जाता है हमारे माइंड की एक नेचर है उसके पीछे भागना अधूरापन फील करना तो वहां पर आपके अंदर नेचुरली स्ट्रेस का लेवल बढ़ता है स्ट्रेस का हो या एंजाइटी का हो ये सब केमिकल रिएक्शंस है इवन हैप्पीनेस भी सब केमिकल रिएक्शंस है तो हमारे अंदर अलग-अलग ग्लैड्स हैं तो कुछ गलैंड्स स्ट्रेस हार्मोस रिलीज करते हैं कुछ हैप्पी हार्मोस रिलीज करते हैं तो जभी भी आप अपनी बॉडी को या माइंड की कैपेसिटी से ऊपर कूदने की कोशिश कर रहे हैं तो सबसे पहले आपको इनिशियली स्ट्रेस फील होना शुरू
(12:06) होगा उस स्ट्रेस के जो सिम्टम्स आएंगे आपकी बॉडी में टायर्ड बहुत ज्यादा हो रही है आपको पेन होने लग गया है कहीं पर भी आप एग्जॉस्ट हो रहे हैं माइंड ब्लैंक हो गया है कंसंट्रेट करने में डिफिकल्टी हो रही है आपको आपकी स्लीप डिस्टर्ब हो गई आपकी एपेटाइट डिस्टर्ब हो गई है इस तरीके के आएंगे आपने स्ट्रेस पर ध्यान नहीं दिया आपने कोपि स्किल्स नहीं यूज किए स्ट्रेस को रिलीज करने के लिए आपको एंडोर्फिन बढ़ाना है अपने अंदर एक्सरसाइज कर करने से वो है या कुछ हेल्दी डाइट लेने से आपने वो सब कुछ करेक्शन नहीं किए तो धीरे-धीरे स्ट्रेस एंजाइटी में कन्वर्ट होने लगेगा
(12:38) और फिर वहां से जो आपकी एंसिस स्टेट जो नॉर्मल रहती थी अब वो बेस लाइन से ऊपर क्रॉस कर जाएगी यानी कि आउट ऑफ रेंज हो जाएंगे आप जो नॉर्मल सिचुएशनल कभी-कभी एंजाइटी हुई कि एग्जाम आया कोई जॉब इंटरव्यू आया या कुछ और भी ऐसा बड़ा लाइफ इवेंट आया थोड़ी देर के लिए आप एंसिस हुए वो इवेंट गया आप नॉर्मल हो गए लेकिन फिर वो छोटी-छोटी बातों पर भी एंजाइटी फील करने लगेंगे आप जिस सिचुएशन को आप इजली हैंडल कर सकते थे उसमें आप अननेसेसरी पैनिक होने लगेंगे मतलब आपकी जो एबिलिटीज है कॉग्निटिव एंड फिजिकल वो डिक्लाइन होने लगेंगी और इवेंट्स और लोग आप पर हावी होने
(13:13) लगेंगे इस कन्वर्सेशन में आगे जाने से पहले आपसे यह अनुरोध है कि कृपया चैनल को सब्सक्राइब कीजिए लाइक कमेंट और शेयर कीजिए ताकि कि मैं हफ्ते दर हफ्ते ये काम कंसिस्टेंसी से आपके लिए कर सकूं दूसरा आप हमें और भी बहुत सारे गेस्ट को बुलाने में मदद करते हैं क्योंकि जब बहुत ज्यादा लोगों तक कन्वर्सेशन पहुंचती हैं तो आसान हो जाता है और भी गेस्ट को यहां पर लेकर आना यकीन मानिए ये काम आसान नहीं है हफ्ते दर हफ्ते कंसिस्टेंटली यहां पर शो करना हम लगभग 120 एपिसोड्स अब तक रिलीज कर चुके हैं और हर एपिसोड एक डीपर इनर ट्रांसफॉर्मेशन की बात
(13:54) करता है तो मैं आपसे ये भी कहना चाहूंगी कि बाकी एपिसोड्स को भी देखिए वहां भी आपको अपने बहुत सारे सवालों के जवाब मिलेंगे और अब क्योंकि आपने चैनल को आई होप अब तक सब्सक्राइब लाइक कमेंट और शेयर कर दिया होगा तो चलिए बढ़ते हैं आज के इस पॉडकास्ट में तो बेसिकली जिस बेस एबिलिटी के साथ आप ने शुरू किया था जैसे मानिए अगर आप 100 मीटर भाग सकते थे और आपको दो मीटर 200 मीटर भागना है यानी कि आपकी फिजिकल कैपेसिटी अभी 200 की डेवलप नहीं हुई है लेकिन आपका बेस 100 था आपने कहा कि हम ये स्ट्रेस को अगर लेते रहे लेते रहे लेते रहे जब वो एंजाइटी में कन्वर्ट हो जाता है
(14:27) तो आप खुद के बेस लेवल से भी 100 से आप 80 50 30 पर आ जाएंगे दैट इज व्हाट यू आर सेइंग कि आपकी खुद की जो नेचुरल बेस लाइन थी उस तक को आप डैमेज कर देंगे तो आगे पहुंचना तो मतलब दूर की बात है या हो सकता है लाइफ के सर्टेन एरियाज में आप आगे भी चले जाए विद एंजाइटी मैंने ये भी देखा है कि जिन लोगों को एंजाइटी होती है कुछ एरियाज में बहुत ही ब्रिलियंट परफॉर्म करते हैं क्योंकि जैसा आपने कहा रियलिटी और एक्सपेक्टेशन के बीच का जो गैप है उसके पीछे इस कदर भागते हैं एक कंसंट्रेशन के साथ कि उस एरिया में शायद बहुत एक्सेल कर जाते हैं बट बाकी सारी एरियाज ऑफ लाइफ में
(14:57) एक इंबैलेंस क्रिएट हो जाता है वेरी ट्रू अगर मैं अपनी कैपेसिटी बढ़ाऊ जैसे आपने एग्जांपल दिया कि 100 मीटर दौड़ने की मेरी है मैं 200 तो मैं इसको धीरे-धीरे तो बढ़ा सकती हूं ना जैसे आप जिम में जाते हैं तो पहले दिन थोड़ी ना आप 50 किलो वेट उठा लेते हैं पहले तो आप 2 किलो से 5 किलो से शुरू करेंगे धीरे-धीरे आप अपनी बॉडी की कैपेसिटी बढ़ाते हैं लाइक वाइज मेंटल कैपेसिटीज भी धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है अब कोई इंसान सोचे कि मैं एकदम तीर मार लूं वो पॉसिबल नहीं है कुछ लोग एंजाइटी स्टेट में ज्यादा अच्छा परफॉर्म करते हैं हम सब अपनी नॉर्मल रेंज से बेटर ही परफॉर्म करते
(15:30) हैं बट कुछ लोग उससे भी ज्यादा अच्छा वो करते हैं क्योंकि उनका नेचुरल बेस बहुत अच्छा होता है वो उनको क्लेरिटी होती है उनमें नेचुरली कॉन्फिडेंस होता है ड्रीमर्स होते हैं उन्होंने अपने गोल्स में क्लेरिटी लाई हुई होती है टीम होती है बहुत सारे फैक्टर्स होते हैं जो कंट्रीब्यूटिंग फैक्टर्स नॉर्मल से ज्यादा अच्छा परफॉर्म करते हैं बट लॉन्ग रन में वो लोग जब कोलप्पुरम हो गए मतलब अगर वो बीच में ऐसा हो जाता है उनकी एक स्टेट ऐसी आती है कि एक टर्म होती है इसमें स्माइलिंग डिप्रेशन के साथ जी मतलब अंदर बॉडी एंड माइंड सिग्नल दे रहा
(16:02) है कि कुछ सही नहीं है रुको ब्रेक लो लेकिन आप उसे अब्यूड़ोस अंदर एंजाइटी फील कर रहे हैं आपको पता है ब्रेक की जरूरत है आप सैड भी फील कर रहे हैं आपको बैडल एक अपने लिए समय चाहिए ब्रेक चाहिए बट आप फेक उस मेकअप के साथ जो मेंटल मेकअप होता है उसके साथ आप जाए जा रहे हैं पर आप धीरे-धीरे एंजाइटी से कब स्माइलिंग डिप्रेशन वाले फेज में भी शिफ्ट हो गए एंड वहां पर एक दिन आप बुरी तरीके से बॉडी एंड माइंड से टॉर्चर सहने के लिए तैयार हो गए अब आपका उठने का मन नहीं करेगा जो काम आपको बहुत ज्यादा करने पसंद है आप उसको नहीं कर पाएंगे क्योंकि जितना
(16:40) एब्यूज आपने किया जब बॉडी एंड माइंड आपको ब्यूज करने पर आएगा तो आप सोच भी नहीं सकते जितना आपने ब्यूज किया उससे 100 गुना वो आपको टॉर्चर करेंगे तो बेसिकली आपकी जो नॉर्मल फंक्शनालिस फंक्शनल बिल्कुल डिस्फंक्शनल हो जाएंगे आप बहुत डाउन चले जाएंगे तो इसीलिए हमें एंजाइटी को जो है समझना और समझ के उसको मैनेज करना कंट्रोल करना बहुत जरूरी है पहले तो डॉक्टर कशि बताइए क्या एंजाइटी को कंट्रोल कर सकते हैं अगर यह बॉडी का नॉर्मल रिस्पांस है तो यह तो आएगा ही तो अगर कंट्रोल नहीं कर सकते तो फिर मैनेज कैसे कर सकते हैं देखिए एंजाइटी को खत्म तो बिल्कुल नहीं करना
(17:14) होता है अगर एंजाइटी बिल्कुल भी फील नहीं होगी तो हमारा तो सर्वाइवल ही खतरे में आ जाएगा तो एंजाइटी को सिर्फ नॉर्मल रेंज में रखना होता है तो उसके लिए आप सबसे पहले एक्सेप्टेंस लोग डिनायल में रहते हैं नहीं ये तो नॉर्मल है सबके साथ होता है हमने सब चीजों को इतना नॉर्मलाइज कर दिया है हमें लगता है ये सबके साथ होता है कोई बात नहीं है पर डॉक्टर साहब एक बात बताओ कि ये एंजाइटी की नॉर्मल रेंज होती क्या है जैसे मुझे ब्लड प्रेशर का पता है कि 80 बा 120 इज नॉर्मल शुगर का पता है कि 120 से ज्यादा होगी तो प्री डायबिटिक आ जाएगी 200 से ज्यादा होगी तो डायबिटीज हो जाएगी
(17:46) बहुत क्लियर नंबर्स है मेरे पास फिजिकल सिमटम्स को फिजिकल डायग्नोसिस के बट ये एंजाइटी का कौन सा ऐसा मीटर है जहां पे मैं मेरे को पता चले कि ये अब नॉर्मल रेंज से बाहर हो गई है क्या आपको सेल्फ डायग्नोसिस आप करते हो खुद आप अ खुद से समझने लगो कि मुझे एंजाइटी है या किस लेवल पर आपको एक मेडिकल प्रोफेशनल या एक साइकोलॉजिस्ट की मदद लेनी चाहिए कैसे समझे क्योंकि बहुत बड़े स्पेक्ट्रम की हम बात कर रहे हैं और एंजाइटी ना जैसे हम शुरू में बात कर रहे थे हर किसी को डिफरेंट तरीके से मेनिफेस्ट होती है अब किसी को बहुत ज्यादा फिजिकली फील हो रही है बॉडी
(18:18) में बहुत कंपन है बॉडी स्वेटिंग हो रही है ये सब हो रहा है और किसी को उस तरह से उतनी फील नहीं हो रही है सिचुएशन की इंटेंसिटी से भी डिफरेंट होता है जैसे हो सकता है मुझे अगर अगर अगर मेरी 100 मीटर दौड़ने की कैपेसिटी है तो मैं 120 दौड़ू 150 दौड़ू तो शायद उतनी एंजाइटी मेरी बॉडी में ना जनरेट हो जितनी शायद आपकी हो जाए यू नो हो सकता है आपकी 110 में ही बिल्कुल गिव अप करने की कैपेसिटी आ जाए तो ये मैं एग्जांपल इसलिए कोट कर रही हूं इतने लंबे स्पेक्ट्रम की हम बात करें तो ये है क्या थोड़ा इसको डिफाइन करने की कोशिश करते हैं
(18:47) देखिए क्या है कि एंजाइटी के लिए सबसे ज्यादा अच्छा जो टेस्ट है वो आप सेल्फ ही घर में रोज कर सकते हैं आपकी बॉडी कब हेल्दी मानी जाती है जब आपको अपनी बॉडी पार्ट्स की अवेयरनेस डेली बेसिस प ना रहे कि आपका कोई पैर भी है हाथ भी है लेकिन जभी भी आपकी किसी भी बॉडी पार्ट में कुछ भी प्रॉब्लम होती है तो आपका अटेंशन जाता है नहीं जाता है वहां पर आपके दांत में दर्द है या आपकी हार्ट बीट नॉर्मल रेंज से ऊपर चल रही है एकदम अप हो गई है तो आपको पता चलता है इसका मतलब है कि बॉडी आपको बता रही है कि आप अपनी नॉर्मल रेंज से आउट हो गए हैं इसी तरीके से आपको ओवर थिंकिंग
(19:20) हो रही है आपको कुछ इंट्रूसिव थॉट बन रहे हैं आपका माइंड ब्लैंक हो जाता है आपको कंसंट्रेशन में डिफिकल्टी आती है तो आपका माइंड खुद बता रहा है कि इस टाइम आप आउट ऑफ रेंज चल रहे है और जैसे कोई हमारे पास आता है तो हमारे पास पूरे क्वेश्चनर होते हैं हम जैसे डिप्रेशन एंजाइटी स्केल के बहुत सारे हमारे ऐसे टेस्ट होते हैं जिसमें हम इसी तरीके से क्वेश्चंस लेते हैं जैसे अगर आपको ट्रैफिक में रुकना पड़ जाए तो उस एक मिनट के या डेढ़ मिनट के आपके स्टॉपेज में आपको कैसा फील होता है कि आपको गुस्सा आता है आप सबको नाप देते हैं कि ट्रैफिक सेंस नहीं है कहीं पर भी
(19:51) रोक देते हैं मुझे इतना जल्दी जाना था इरिटेट हो जाते कैसे इस तरह से हमारे बहुत सारे क्वेश्चंस होते हैं कि आप अलग-अलग सिचुएशन में क्या करते हैं तो उसके बेसिस पर हम पूरा इसे डायग्नोसिस करते हैं कि इस पर्सन की जो एंजाइटी है वो माइल्ड लेवल की मॉडरेट है या सीवियर लेवल की घर बैठे जो भी लोग हैं इसका डायग्नोसिस करना चाहते हैं सेल्फ डायग्नोसिस बहुत इजी है और एक्यूरेट ही होता है ऑलमोस्ट तो जैसे बॉडी के लेवल की बात है अगर आपको कहीं पर भी लग रहा है अन एक्सप्लेन पेन है तो वो एंजाइटी की वजह से होता है आपको लग रहा है कि आपकी
(20:19) रेस्टस फील हो रही है आपको ब्रेथलेस फील हो रही है आपको ऐसा लग रहा है कि आपका किसी पर्टिकुलर पार्ट पर ध्यान ज्यादा जा रहा है आप बैठे हैं आप जल्दी टायर्ड हो जाते हैं या माइंड में आपके वर्स केस सिनेरियो बन रहा है कैटास्ट्रोफिक थिंकिंग व्टफ बहुत ज्यादा चल रहा है अगर ऐसा हो गया अगर वैसा हो गया आप बहुत ज्यादा पर्सनल मीनिंग निकालने लगे आपकी इमोशनल सेंसिटिविटी बहुत ज्यादा कम होती जा रही है आप छोटी-छोटी बातों पर हर्ट होने लग गए हैं आप माइंड ब्लैंक हो जाते हैं किसी से बात कर रहे हैं आपको समझ भी नहीं आता व्हाट नेक्स्ट आपके पोजस बहुत ज्यादा लंबे
(20:52) हो रहे हैं आप बस्तर पर लेटते हैं आपका नींद में जाने का टाइम बढ़ता जा रहा है आप छोटी-छोटी बातों पर इरिटेट हो जाते हैं बाद में आपको गिल्ट तो होता है लेकिन आप कंट्रोल नहीं कर पाते आपको ऐसा लगता है कि मैं इनफ नहीं हूं मतलब आपकी क्योंकि अगर आप इस तरीके के लूप में आ रहे हैं तो डेफिनेटली आपकी परफॉर्मेंस सफर करेगी और जब परफॉर्मेंस किसी इंसान की सफर करती है तो धीरे-धीरे वो उसकी सेल्फ एस्टीम पर अटैक करने लगती है क्योंकि उसकी एक्सपेक्टेशन तो ज्यादा होती है अब वो कर नहीं रहा है तो उसे उसके अंदर सेल्फ डाउट पैदा होने लगते हैं तो जब सेल्फ डाउट पैदा
(21:24) होने लगे थिंकिंग ओवर हो जाए आपकी और आपका माइंड ब्लैंक भी होने लगे के कंसंट्रेशन करने में प्रॉब्लम हो मन ना लगे जिसको कहते हैं नींद ना आए ये सारी चीजें इनफ होती है सिर्फ इतने से साइंस भी इनफ होते हैं यह पता लगाने के लिए कि मैं स्ट्रेस या एंजाइटी के उसम आ गया हूं हमने इनको इतना नॉर्मलाइज कर दिया कि हम हम एंजाइटी को सीरियसली नहीं ले रहे हैं तो जब हम एंजाइटी को सीरियसली नहीं लेते हैं तो उसके क्या नुकसान हो सकते हैं लॉन्ग टर्म इंपैक्ट क्या है एंजाइटी का जैसे एंग्जाइटी अलग-अलग लेवल पर फील होती है आपके फिजिकल लेवल पर भी होती है
(21:56) साइकोलॉजिकल लेवल पर भी होती है इमोशनल लेवल पर भी होती है और बिहेवियरल लेवल पर भी होती है तो चारों लेवल पर इसके सिम्टम्स आते हैं तो जब सोमेटिक एंजाइटी हो जाती है बॉडी के लेवल पर आती है सोमा मतलब आपकी बॉडी बॉडी के लेवल पर जब आपकी एंजाइटी का इफेक्ट बॉडी पर आता है यानी कि आपके पेट में बहुत दर्द हो रहा है आपको आईबीएस हो गया है यानी कि इरिटेबल बॉल सिंड्रोम आपको बार-बार कॉन्स्टिपेशन या डायरिया रहता है तो जब आप बॉडी पे सफर करने लगते हैं एक्चुअल में होश तब आता है जब तक ये मेंटल लेवल पर होता है नींद नहीं आ रही है ओवर थिंकिंग हो रही है तो ये सब
(22:28) न ल करने की हमें आदत सी पड़ गई है अब ये लाइफ हमारी है तो डिसीजन भी हमारा ही होगा कि हम इस सब चीजों को एक्सेप्ट करें और इसके लिए हेल्दी कपिंग स्किल्स को अपनाए या फिर इसे नॉर्मलाइज करके बहुत टॉर्चर करें क्योंकि जब एंजाइटी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो वो ऑब्सेशन का रूप भी लेती है लोग ओसीडी आज ओसीडी इतना ज्यादा बढ़ गया है लोगों में जैसे कि आप यहां से उठे तो आपको अर् जाएगी कि तुम्हारा कोई समान तो नहीं रह गया ये किस लिए है क्यों क्योंकि आपका माइंड फोकस्ड ही नहीं था आप 10 जगह और पजल थे तो आपके दिमाग में ये आईडिया आया और आपने चेक करना शुरू किया पता चला
(23:03) आपको धीरे-धीरे हैबिट पढ गई और आपको चेकिंग ओसीडी ही डेवलप हो गई इस तरीके से बहुत सारे इंट्रूसिव थॉट बनाता है दिमाग कहीं पर भी कछ तो एंग्जाइटी से ओसीडी भी हो जाती है तरह-तरह के सर्टेन फोबिया फियर्स हमारे डेवलप होते हैं सोशल एंजाइटी है परफॉर्मेंस एंजाइटी है ट्रेवल एंजाइटी है एंजाइटी की बहुत सारी फॉर्म होती है सबके ट्रिगर्स अलग होते हैं सबके लाइफ इवेंट्स जिसकी वजह से उनको एंजाइटी ट्रिगर होती है या बॉडी कंडीशन बिल्कुल अलग-अलग होते हैं डॉक्टर कशि एंजाइटी के कौन से डिफरेंट स्टेजेस होते हैं बेस लेवल क्या होता है और एक्सट्रीम सिचुएशन क्या होती
(23:37) है देखिए जैसे मैं बता रही हूं कि एंजाइटी नॉर्मल तो होती ही है आप माइल्ड लेवल की भी एंजाइटी है कि जिसमें कि आप नॉर्मल से ज्यादा थोड़ा सा एंसिस हो गए जैसे कि कोई इवेंट आ रहा था उसमें एंजाइटी नॉर्मली बढ़नी थी लेकिन अब वो इवेंट चला भी गया तब भी वो क्या हुआ उसमें मैंने क्या किया क्या नहीं किया क्या छूट गया वही कंसर्न में आप अटके हुए हैं यानी कि आप पास्ट में स्टक हो रहे हैं और ये थोड़ी देर में घंटा दो घंटे में आप नॉर्मल हो जाते हैं कुछ ऐसा आप अपने माइंड को दे देते हैं कि हां ठीक है जो हुआ सो हुआ या किसी से बात कर
(24:07) ली चला गया वो घंटे दो घंटे में आपके दिमाग से निकल गया तो ये होता है एक माइल्ड लेवल जिसमें जनरली फिजिकल सिम्टम्स ऐसे नहीं आते हैं फिर एक होता है मॉडरेट लेवल जो आपका एक दो तीन दिन तक भी स्ट्रेच हो जाता है जिसमें कि आपको कुछ फिजिकल सिमटम्स भी लगते हैं और कुछ अर्जेस भी आती है कि रिअरेंज चेक कर ले कुछ मेंटल रिकॉलिंग कर ले इसमें आप फिजिकल लेवल पर भी ऐसा महसूस करते हैं कि आपको कुछ हार्टबीट या अनइवन कुछ डिस्कंफर्ट सा लग रहा है आपको अपनी बॉडी में मतलब नॉर्मल ईज पर नहीं लग रही है और वो चीज आपके दिमाग से एक दो दिन तक नहीं निकल रही और आपका माइंड बहुत ज्यादा
(24:40) अजमन में जा रहा है आपको कुछ फेक चीजें भी ऐसी लग रही है कि शायद ये बोली थी और ये नहीं बोली थी और आगे के लिए भी कुछ ऐसा प्लानिंग हो रही है तो ये हम मॉडरेट लेवल तक रखते हैं एक होता है बिल्कुल सीवियर लेवल कि एक बात को पकड़ लिया है तो वो छूट नहीं रही है बिल्कुल भी रात को नींद भी नहीं आ रही है खाना भी नहीं आप खा रहे हैं बहुत ही ज्यादा हाईली एंसिस स्टेट में आ गए जिसकी वजह से आपको गुस्सा भी आ रहा है आपकी बॉडी में बहुत ज्यादा सफरिंग हो रही है कोई डिस्टर्ब कर रहा है नॉइस भी हो रही है आपको छोटी सी भी नॉइस हो रही है किसी
(25:07) भी तरीके से कुछ भी छोटी सी भी सराउंडिंग में बात हो रही है जसे आपका लेना एक ना देना तो वो भी आपको इरिटेट कर रही है बिन बात के आपके अंदर इरिटेशन हो रही है फ्रस्ट्रेशन डेवलप हो रही है ये कह रहे हैं कि अब आपकी एंजाइटी जो है ना वो टॉलरेट नहीं कर पा रहे हैं आप छोटे-छोटे से ट्रिगर जो न्यूट्रल है एनवायरमेंट के वो भी आपको ट्रिगर कर रहे हैं इस टाइम पर सब ट्रिगर्स ऐड हो गए हैं एक सबसे बड़ा जो एंजाइटी का फिजिकल मेनिफेस्टेशन है दैट इज पैनिक अटैक्स आजकल पैनिक अटैक्स बहुत कॉमन हो गए हैं छोटे-छोटे बच्चों से लेकर एवरी एज ग्रुप में हम पैनिक अटैक्स के केसेस
(25:38) देख रहे हैं तो सबसे पहले तो पैनिक अटैक होता क्या है पैनिक अटैक बहुत सडन होते हैं और बहुत इंटेंस उसमें फिजिकल सिमटम्स आते हैं जो कि एंजाइटी की ही एक सीवियर फॉर्म होते हैं एक नॉर्मल होते हैं एंजाइटी अटैक्स जो धीरे-धीरे बिल्ड होते हैं और उसमें कभी इतना इंटेंस पैनिक नहीं आता कि एकदम से इमरजेंसी कंडीशन आ जाए कि एक पर्सन है एंजाइटी अटैक में जाएगा पैनिक अटैक सीजर या फिर हार्ट अटैक ये इसमें बड़ा कंफ्यूजन होता है तो मैं थोड़ा उसको क्लियर कर देती हूं डिटेल में मैं बता दूं इसके बारे में तो जैसे एक एंग्जाइटी अटैक होता है कोई पर्सन एंजाइटी में चल रहा है
(26:14) तो नॉर्मली धीरे-धीरे धीरे-धीरे वो एंसिस हो रहा है तो उसने एक बात को बार-बार पकड़ लिया और वो आपसे बार-बार उसी बात को पूछ रहा है बहस कर रहा है और वो चाह रहा है कि सब कुछ सेटल हो जाए आसपास एनवायरमेंट में फिक्स हो जाए जब तक इश्यूज उसके हिसाब से सेटल नहीं हो रहे हैं वो एंसिस स्टेट में है जब उसने देखा कि इश्यूज उसके हिसाब से सेटल हो गए हैं उसकी एंग्जाइटी ड्रॉप होना स्टार्ट हो गई तो इसको कहते हैं हम इसको इस टाइम एंजाइटी अटैक आ रहा है ये उस स्टेट में पहुंच गया है पैनिक अटैक बहुत ही ज्यादा सडन और इंटेंस होते हैं प्रिडिक्टेबल और अनप्रिडिक्टेबल दोनों
(26:43) होते हैं यानी कि एक्सटर्नल ट्रिगर मिला तो ये है कि अगर लिफ्ट में जाना है तो रिस्पांस देगी बॉडी वो जो अंदर मेमोरी फीड है जो रेफरेंस फीड है उसकी वजह से रिस्पांस आएगा तो ये हो गया कुछ प्रिडिक्ट कर सकते हैं कि अगर इसको एक्सपोजर कराया बोला ये जाएगा तो ऐसा हो सकता है र राइट क्योंकि अगर आपके पास्ट एक्सपीरियंस ऐसे थे जहां आप कभी लिफ्ट में फंस गए हो या कभी लाइट चली गई या कुछ सडन बहुत ज सुन लिया आपने कि कोई फस गया था उसके साथ ये हो गया था तो सुने सुनाई बातों से भी ऐसा होता है तो कोई भी पांचों सेंसेस से आपको देखकर सुनकर स्मेल से किसी भी चीज से आप
(27:18) ट्रिगर हो गए तो वहां पर भी पैनिक फेज में आप जा सकते हो और कई बार एक्सटर्नल ट्रिगर नहीं होते हैं सिर्फ बॉडी डीप प्रोग्राम हो गई है या मेमोरी बेस ट्रिगर होते हैं और वो एकदम सडन आते हैं और लोग बड़ा कंफ्यूज होते हैं कोई तो ट्रिगर भी नहीं था इसको तो किसी ने कुछ नहीं बोला पैनिक अटैक बहुत ही ज्यादा सीवियर होते हैं एक इंसान को ऐसा लगता है कि अब वो मर जाएगा या पागल हो जाएगा उसका कंट्रोल खो जाएगा तो कई बार लोग एनवायरमेंट से खुद से खुद की बॉडी से भी डिस्कनेक्टेड फील करते हैं हार्ट रेट बहुत होता है सांस लेने में तकलीफ हो रही होती है ऐसा लग रहा होता है
(27:49) जमीन में धसे जा रहे हैं ऐसा होता है कि बिल्कुल ही मर जाएंगे पागल हो जाएंगे बहुत बुरी तरीके से उनको फीलिंग आती है कंफ्यूज हो जाते हैं कि हार्ट अटैक आया है अब वो स्टेट जो होती है कंट्रोल के एकदम बाहर हो जाती है बॉडी एकदम कभी-कभी शट डाउन भी कर देती है कि आपकी एकदम फ्रीज हो जाते हो अकड़ गई है पूरी बॉडी आपकी मैंने ऐसे भी केसेस देखे हैं जहां पे हैंड मूव नहीं हो रहा है ऐसा लगता है कुछ पैरालिसिस टाइप का अटैक हो गया है क्योंकि थोड़े छोटे टाम लोग जो है ना ऐसे छटपटा भी लग जाते हैं बहुत ज्यादा रोने लग जाएंगे बहुत ज्यादा
(28:17) बुरी हालत से छटपटा लग जाएंगे कुछ लोग तो अपने बाल भी इस तरीके से करने लग जाएंगे बहुत बुरी तरीके से ऐसे लोग जो भी आसपास देख रहे होते हैं वो कंफ्यूज हो जाते हैं वो सोचते हैं उसको हार्ट अटैक आया है और और वो भी चला रहा होता है मैं मर जाऊंगा कई बार ऐसे और कई बार नहीं तो उसके सिम्टम्स बता रहे होते हैं तो ये एक मेडिकल फर्स्ट टाइम जब किसी को पैनिक अटैक आता है तो इसमें डिफरेंशिएबल मोस्ट सेम है बस हार्ट अटैक में क्या होता है एकदम पागल होने का या एकदम मरने का वो नहीं होता चेस्ट में बहुत पेन आ रहा होता है और उसका जो जॉ और आर्म्स में पेन
(28:48) ज्यादा जा रहा होता है लेकिन कौन पता लगाए रिस्क कौन ले अगर कुछ हो गया तो तो फर्स्ट टाइम में सब लोग एकदम मेडिकल इमरजेंसी में भागते हैं डॉक्टर कषिका ये तो हमने एंजाइटी और पैनिक का फिजिकली बॉडी और माइंड में क्या रोल होता है किस तरह से आते हैं और उसके बारे में बात की अब बात करते हैं कि पैनिक अटैक्स और एंजाइटी जब हमारी लाइफ का पार्ट बन जाता है तो हमारी लाइफ में किस तरह से डिस्फंक्शन अलग-अलग चीजों में क्रिएट करते हैं अगर रिलेशनशिप्स में देखा जाए अगर आपके पार्टनर हैं जिनको पानि अटैक्स आते हैं या अ बच्चा है जिसको पानि अटैक आता है या
(29:22) पेरेंट है जिसको पैनिक अटैक्स आते हैं जो बहुत एंसिस हैं तो यूजुअली क्या होता है जैसा कि मैं पहले भी कह रही थी कि आसपास वाले लोग या तो बहुत सेंसिटिव हो जाते हैं और जब हम ज्यादा सेंसिटिव हो जाते हैं उनके सामने ऐसी बात मत करो उनको स्ट्रेस हो जाएगा ये बहुत कॉमन टर्मिनोलॉजी है जो घर में यूज होते है कि पापा के सामने ये मत कहना उनको स्ट्रेस हो जाएगा या अगर वो कार्डियक पेशेंट है तो और ज्यादा ऐसी बातें नहीं करते हैं अच्छा हमने यह भी देखते हैं कि अगर बच्चा है जो बहुत जिसको पैनिक अटैक्स आते हैं तो उसके सामने भी उसको यह चीज चाहिए तो दे दो ऐसा कर दो
(29:53) उसको फैसिलिटेट कर दो कि वो कंफर्टेबल कन्वीनियंस रहे लेकिन मैंने देखा कि ये सब कंफर्ट और के बाद भी इन कंट्रोलेबल है अगर अगर वो आपकी कंडीशन है तो आप उस कंडीशन में जाते हो अगर आपका एक्सटर्नल कितना भी आपको कंड्यूस मिल जाए है ना एक तो यह होता है और दूसरा होता है कि जो पैनिक अटैक का विक्टिम या पेशेंट है वो या तो फिर उसका जो बहुत क्लोज पर्सन है नेक्स्ट वो बाहर चीजों पर ब्लेम करना शुरू कर देता है जैसे कि इनको तो मम्मी की वजह से पैनिक अटैक्स आते हैं इनको तो भाई की वजह से आते हैं इनको बॉस की वजह से आते हैं और ब्लेम करने
(30:27) में मुझे लगता है चलिए मानिए कोई प्रॉब्लम भी नहीं अगर हम ये भी अज्यू कर ले लेकिन ब्लेमिंग में सलूशन भी तो नहीं है ना तो ये ब्लेमिंग जो है जिसमें कोई सलूशन नहीं है ये एक बहुत कॉमन स्पेशली अगर इंडियन हाउसहोल्ड्स की बात करूं तो देखा जाता है कि जो जिसको अटैक है या तो वो ब्लेम करना शुरू हो जाता है सारे लोगों को या तो फिर जो उसका बहुत क्लोज रिलेशनशिप है या उसकी मान सिस्टर ही बहुत क्लोज है तो वो कहना शुरू हो जाएंगे कि तुम्हारी वजह से तुम्हारी वजह से इसकी वजह से इसकी वजह से और लोग अपनी जॉब्स भी छोड़ देते हैं रिलेशनशिप्स में भी क्विट कर लेते हैं और
(30:55) इवेंचर पता चलता है कि ये एक्सटर्नल से तो उतना कनेक्टेड था जितना मेरा डीपर लेवल पे एक साइकोलॉजिकल इशू था तो जो लोग इस पॉडकास्ट कोभी देख रहे हैं जो ब्लेम ज्यादा करते हैं अनफॉर्चूनेटली आज हम ड्यू टू मल्टीपल लेयर्स ऑफ एक्सपोजर चाहे फिर हम मीडिया से एक्सपोजर कहे चाहे बहुत सारे कन्वर्सेशन इस तरह के पॉडकास्ट कहे बहुत सारी ऐसे कन्वर्सेशन हो रहे हैं जिसमें टॉक्सिक वर्ड का बहुत यूज होता है और टॉक्सिक ज्यादातर लोग बाहर की चीजों के लिए यूज करते हैं टॉक्सिक फूड हम घर के खाने को टॉक्सिक नहीं बोलते हम बाहर के खाने को टॉक्सिक बोलते हैं तो टॉक्सिक
(31:28) ट्रेड हम अपनी बात नहीं करते दूसरों की बात करते हैं तो एक्सटर्नलाइज करना हम बहुत ज्यादा शुरू हो गए हैं तो जो ऐसे लोग हैं जो जो इस बिहेवियर पैटर्न में स्टक हो गए हैं ब्लेमिंग के जहां उन्हें सलूशन कोई नहीं मिल रहा है वो क्या करें वो इस चीज से कैसे बाहर लेकर खुद पर रिस्पांसिबिलिटी शिफ्ट करें और मैं जब रिस्पांसिबिलिटी शिफ्ट करने की बात कर रही हूं तो ब्लेम शिफ्ट करने की बात नहीं कर रही हूं उसमें अपनी जिम्मेदारी लेने की बात कर रही हूं तो ये हम कैसे समझे और डीपर साइकोलॉजिकल लेवल पर जाकर कैसे रिसेट करें देखिए जब भी कोई बहुत एंसिस होता है या उसको पैनिक
(31:57) अटैक आ रहे होते तो आपने बात कही कि उसकी लाइफ पर क्या इंपैक्ट पड़ता है तो जब पैनिक अटैक तक कोई इंसान आ जाता है तो उसमें जो उसके सिम्टम्स आए हुए होते हैं वो भी बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन होता है उसकी मेमोरी जो नेक्स्ट पैनिक अटैक को एक तरीके से इनवाइट करती है क्योंकि इंसान हाइपर विजिलेंट हो जाता है और उसको यह डर सताता रहता है नेक्स्ट ना आ जाए नेक्स्ट ना आ जाए और उसका अगर ऐसे में ध्यान किसी एक बॉडी पार्ट पर चला गया सिलेक्टिव अटेंशन हो गई उसकी तो वो हल्की सी भी हार्ट बीट अगर इरेगुलर होगी तो उसको लगेगा पैनिक आ रहा है हल्का भी सांस ऊपर नीचे
(32:27) होगा तो उसको लगे दोबारा से कंडीशन बन रही है तो यह जो इंटरप्रिटेशन निकालते हैं मीनिंग निकालते हैं यह इनवाइट कर रही होती है धीरे-धीरे दूसरे पैनिक को और ऐसे लोग हाइपो क्रिक हो जाते हैं और वो google3 का नंबर तो बाद में ही आता है सब चीजों का ठीक है तो सबसे पहले जो जाते हैं वो कार्डियोलॉजिस्ट के पास जाते सब तमाम टेस्ट कराते हैं लेकिन उनको सब लग रहा होता है कि कोई उनकी कंडीशन नहीं समझ रहा है डॉक्टर साहब से कुछ मिस हो रहा है तो सबसे पहला जो ब्लेम जाता है वो डॉक्टर साहब पर जाता है फिर जब बहुत सारे डॉक्टर शॉपिंग कर लेते हैं वो और ग ग प पढ़कर
(33:11) बहुत अपना दिमाग वो कर लेते हैं और खुद ही अपने आप को डॉक्टर समझने लग जाते हैं और जरा जरा से सिम्टम्स को बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंस देने लग जाते हैं जो कि नॉर्मल भी हो जाते हैं तो इसलिए वो पैनिक के फेस से बाहर नहीं आ पाते तो सबसे पहले जो लाइफ स्टाइल पर इंपैक्ट आता है वो यही आता है कि वो चेज करते रहते हैं अपने मस को चेक करूं इरेगुलर लोग तो बी बीपी की मशीन से लेकर अलग-अलग टेस्टिंग मशीनस भी अपने घर पर इंस्टॉल करना शुरू कर देते हैं तो यहां पर लाइफस्टाइल इस तरह से इंपैक्ट होता है कुछ लोग एक जो ओसीडी की फॉर्म होती है जिसमें कि हेल्थ एंजाइटी आपकी होती है तो
(33:45) इसमें ना बहुत बुरी तरीके से स्टक हो जाते हैं जिनको पैनिक अटैक्स आते हैं और यहां पर वो वर्क करने लायक भी नहीं रहते हैं चेज करते रहते हैं पैसे बहुत वेस्टेज होती है और डॉक्टर्स भी भगाने लग जाते हैं कि अब जाओ टेस्ट वाला भी भगा देता है जाओ भाई क्या है तुम हर रोज आ जाते हो यहां नहीं टेस्ट करना वो फिर दूसरा देखता है तो सबसे पहले यहां पर मेडिकल प्रोफेशनल भी लोग ब्लेम डाल देते हैं कि उनको समझ में नहीं आ रही है मेरी कंडीशन मुझे इतनी प्रॉब्लम फिर आप जो बात कर र थ कि फैमिली की तो फैमिली वाले कहते हैं इसके सामने बात मत करो है ना इसको घबराहट हो जाएगी पैनिक हो
(34:15) जाएगा इसको आप और उसको कमजोर बना रहे हैं आप उसके साथ बहुत बड़ा अत्याचार कर रहे हैं क्योंकि आप घर का तो एनवायरमेंट ऐसा कर लेंगे आप घर में ही कैद करके रखेंगे क्या उसको बाहर नहीं निकलेगा वो इंसान उसकी कंडीशन एक्चुअली इतनी डाउन हो जाती है वो ऐसा एक्सपेक्ट करता है कि सब लोग अब इसी तरीके का मुझे एक एनवायरमेंट दे जो मेरे लिए फेवरेबल हो जो कि इंपॉसिबल है सब लोग वही करें जो मैं चाहता हूं चा हूं बिल्कुल तो यहां पर फैमिली को ये समझना है कि आपको अपने पर्सन को जिसको भी पैनिक अटैक आ रहा है उसको वीक नहीं बनाना है बल्कि आपको उसके साथ समझते हुए कि उसको
(34:49) क्या चीज बॉदर कर रही है क्या उसकी कंडीशंस बन रही है धीरे-धीरे ग्रैजुअली उससे उसको कॉन्फिडेंस में लेकर उससे बात करनी है डिफरेंट डिफरेंट एंगल से अल्टरनेटिव स्पेक्टिव से उससे बात करनी है और उसकी अंदर की पावर्स को बढ़ाना है उसके अंदर की रेजिस पावर जो नेचुरल हमारे अंदर होती है उसको इग्नाइट करना है कभी-कभी हमारा जो लव होता है ना अपने लव्ड वन के लिए वो इनेबल कर देता है ऐसी चीजें वीकनेस इनेबल कर देता है तो जो लोग थोड़ा वीक फील करते हैं फिजिकली नहीं इमोशनली मेंटली थोड़ा वीक फील करते हैं अंडरकॉन्फिडेंट फील करते हैं वो सिर्फ ये ना सोचे कि मैं
(35:23) कॉन्फिडेंट कैसे बनूं इसके साथ-साथ ये भी सोचे कि मेरे अंडर कॉन्फिडेंस का रूट कॉज कहां से आ रहा है अगर वो रूट कॉज कुछ डीप इश्यूज में सीटेड है जो बचपन से आ रहे हैं यू नो उसको बहुत प्रोटेक्टिव रखा गया उसको व एक्सपोजर नहीं होने दिया अगर एक्सपोजर किया भी और वहां पर कुछ गलत हो गया तो वापस से अपनी शेल के अंदर आ गए तो इसमें कन्वर्सेशन जो है ना बहुत इंपोर्टेंट है कंफर्ट जोन की तो डॉक्टर कशि का आपको लगता है कि जब हम अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलते हैं तो हम अपनी एंजाइटी को अपने पैनिक को सीधा अटैक करते हैं उसको उसके ऊपर एक एक जीतने का जैसा एक एक प्लान जैसा
(35:56) बनने लगता है हमारी बॉडी की एक आदत होती है कंफर्ट बना लेने की और हम सभी का कोई ना कोई कंफर्ट जोन है कंफर्ट जोन कभी बुरा नहीं होता लेकिन अगर हम अपने अंदर फ्लेक्सिबल रखें कि हम अपनी लिमिट्स को धीरे-धीरे स्ट्रेच करेंगे और हम चेंज के लिए रेडी होंगे तो हम जब अपने आप को यह बताएं कि लाइफ में बहुत सारे चेंजेज आते हैं और मैं चेंज के लिए रेडी हूं और उन चेंज को मैं एंब्रेस जब करता हूं तो मुझे पता है कि वो जो ट्रांजिशन पीरियड होगा उसमें जो मेरे लिए इजी गोइंग चीजें थी अप्रोचेबल थी या सपोर्ट था वो टेंपरेरी नहीं होगा और नया कंफर्ट जोन
(36:33) बनने में थोड़ा सा टाइम लगता है तो अगर आपके अंदर यह रेडीस है तो आप अपने कंफर्ट जोन को तोड़ते हैं लेकिन जभी भी कंफर्ट जोन तोड़ेंगे आप तो आपके माइंड को उस नए चेंज को एक्सेप्ट करने में और आपकी बॉडी को टाइम लगता है अच्छा माइंड तो एक मिनट में चेंज हो जाता है बार-बार पलट रहता है बॉडी रेजिस्ट करती है क्योंकि बॉडी जब एक बार कोई हैबिट डेवलप कर लेती है तो उसको चेंज होने में टाइम लगता है आप देखिए जब आप छोटे होते हैं तो आप अपनी बॉडी को एकदम ट्रेन नहीं करते जैसे आपको किसी ने कोई भी वर्बल इंस्ट्रक्शंस दिए तो आप बॉडी के लेवल पर उसको ट्रेन करने में टाइम लगता है
(37:07) जैसे एक छोटे बच्चे को हमने उंगली पकड़ कर चलना सिखाया वो एक बार में नहीं चलता उसकी बॉडी बैलेंस बनाने में टाइम लगाती है जैसे ही प्रैक्टिस कराते हैं तो उसकी बॉडी ऑटोमेटिक वो करने लग जाती है आप और हम अभी उठेंगे तो हम माइंड्स ऐसे उठ जाएंगे आराम से हम कदम भी सोच के नहीं रखेंगे अपने आप ही बॉडी हैंडल कर रही है तो जो कंफर्ट जोन है वो बॉडी लेवल पर तोड़ना बड़ा मुश्किल होता है क्योंकि माइंड के लेवल पर तो पता ही होता है हमें मतलब कॉग्निटिव तरीके से हम समझ सकते हैं कि कंफर्ट जोन है इससे बाहर कैसे निकलना है हमें सब पता होता है
(37:35) लेकिन बॉडी नहीं कर पाती एक्शंस नहीं हो पाते जैसे कि मनी अगर मुझे पता है कि मेरा ये कंफर्ट फूड है मेरा कंफर्ट जोन फूड का यही है कि मुझे 30 पर टाइम्स जंक खाना अच्छा लगता है 20 पर टाइम्स कुछ ऐसा अच्छा लगता है बाकी 30 तो कुल मिलाजुला के जो मेरी फूड चॉइसेज है वो अनहेल्दी की तरफ जा रहे हैं लेकिन अनहेल्दी मेरा कंफर्ट जन बन गया है अब उसको कॉग्निटिवली समझना कि ये मेरा कंफर्ट जोन है और ये सही नहीं है मुझे इसके बाहर निकलना पड़ेगा मुझे जैसे सैलेड खाना मेरा कंफर्ट जोन नहीं है मैं नहीं खा सकती हूं सैलेड सपोज कीजिए कोई एक
(38:02) इंसान की हम एग्जांपल ले कि मुझसे रॉ चीजें नहीं खाई जाती है मुझसे सैलेड नहीं खाया जाता है लेकिन आपकी बॉडी की वो नींद है आपकी बॉडी को रॉ फाइबर चाहिए राइट तो उस कंफर्ट जोन को तोड़ना मेंटली तो थ्योरी में सब समझ में आ गया है कि फाइबर का है पांच बॉडी को न्यूट्रिएंट्स चाहिए ये चाहिए वो सब समझ में आ गया लेकिन बॉडी जब खाने की बात आती है तो फिर आपका मन नहीं करता सैलेड खाने का फिर उसे देख के आपको आपकी पहली फीलिंग रिजेक्ट की होती है थोड़ा बहुत खा भी लिया रोते पीते तो मुझे लगता नहीं उसका कितना असर भी आपकी बॉडी प होगा क्योंकि अगर आप इतने नेगेटिव फीलिंग
(38:33) के साथ खा रहे हो तो इट डजन सो बेसिकली बॉडी इज नॉट रेडी टू एक्सेप्ट दैट चेंज देखिए जैसे हमारे कॉन्शियस माइंड को अवेयरनेस आई कि ये चेंज मेरे लिए रिक्वायर्ड है जैसे आपने सैलेड का बहुत अच्छा एग्जांपल दिया कि अब मुझे पता चल गया कि सैलेड मेरी बॉडी के लिए बहुत अच्छा है अब यह बात मुझे अवेयरनेस आ गई लेकिन मेरे अंदर जो टेस्ट वर्ड प्रोग्राम हुए हुए हैं जो मेरी बॉडी सर्टेन तरीके से प्रोग्राम हुई हुई है उस टेस्ट के लिए जो मैं पहले से ही उसको देती आ रही थी रिपीटेडली तो वही डिमांड करेगी मुझसे तो शुरुआत में जो अवेयरनेस मेरी आई है उस पर
(39:06) नेचुरल एक्शन लेने का मेरा बिल्कुल मन नहीं करेगा तो शुरुआत में आपको फोर्सफुल एक्शन लेने पड़ते हैं क्योंकि बॉडी की प्रोग्रामिंग तभी चेंज होगी जब आप रिपीटेडली न्यू एक्शंस लेंगे तो आपके सबकॉन्शियस माइंड और बॉडी को इंटेलिजेंट होते हुए भी ये इंटेलिजेंस नहीं है कि एक्चुअल में आपके लिए क्या सही है और क्या गलत है उसको आप जो भी रिपीटेडली वो उस टेस्ट को उस हैबिट को परमानेंट कर देगा धीरे-धीरे बनाते रिपीटेशन हर चीज को परमानेंट कर देता है तो अब आपने पहले जंक की आदत डाल ली है आपने किसी भी चीज की आदत बहुत ज्यादा डाल ली है अब आपकी बॉडी और
(39:41) आपके सबकॉन्शियस माइंड को वही सब चीजों की एक हैबिट हो गई है तो आपके अंदर वही अर्जेस आएंगी वही आपकी बॉडी डिमांड करेगी उसी चीज को ज्यादा अच्छी तरीके से एक्सेप्ट करेगी अब आपकी अवेयरनेस का लेवल बढ़ गया है तो अवेयरनेस का लेवल कॉन्शियस माइंड का लेवल तो कभी भी एक सेकंड में कहते हैं ना 10 साल का अंधेरा एक रूम में 10 साल से अंधेरा था आपने एकदम स्विच ऑन किया 10 साल का अंधेरा एक सेकंड में खत्म हो गया लेकिन ये बॉडी के लेवल पर ऑटोमेटिक हो आपके साथ नेचुरल हो जिसको कहते हैं ना नेचुरली आए तो मैं करूं ये तो वो नेचुरली कैसे आएगा जब आपने पहले सेही गलत
(40:14) प्रोग्रामिंग कर रखी है अब आपको नेचुरली चाहिए तो आप पहले आपको कॉन्शियस एफर्ट्स डालकर प्रोग्रामिंग करनी होगी जैसे मैंने बताया ना बच्चे को पहले आपको चलाना पड़ेगा तो वो थोड़ा सा रेजिस्ट करेगा उसकी बॉडी नहीं एकदम से चलेगी लेकिन जब आप लगातार चलाएंगे तो फिर वो दौड़ेगा पहले दिन बच्चे को नहीं पता कि चलना मेरे लिए कितना जरूरी है तो हम उसे जबरदस्ती चलाते हैं उसको तो बड़े होने के बाद ही समझ में आता है ना कि काश मैंने सीखा होता लेकिन उसको पता नहीं होता हम बड़ों को पता होता है तो हम उसको चलना सिखाते हैं और फिर धीरे-धीरे वो
(40:43) एंजॉय करने लगता है उस चीज को बच्चे को आप पहले दिन स्कूल छोड़ कर आओ वो रोता है लेकिन थोड़े टाइम के बाद जब आप उसे रोज छोड़ कर आओ परवाह ना करो कि उसके रोने की एंजॉय करने लगेगा तो लाइक वाइज आपकी बॉडी को ऐसे ही ट्रेन करना है शुरुआत में आपने सैलेड की प्लेट अब आपका मन नहीं कर रहा है लेकिन आपको बार-बार एक्सप्लेन करना है कि मेरे लिए इंपोर्टेंट है आपको उसकी स्मेल लेनी है उसको देखना है उसको एंजॉय करके खाना है एस इफ मानो प्रिटेंड करो क्योंकि सबकॉन्शियस माइंड को और बॉडी को ये नहीं पता कि आप सिर्फ प्रिटेंड कर रहे हैं या एक्च में र
(41:14) सच में एंजॉय करें आप जस्ट एस इफ उसको एंजॉय करो आपकी बॉडी को आपके सबकॉन्शियस माइंड को यह मैसेज जाएगा और फिर धीरे-धीरे जैसे ही आप इसको रिपीट करोगे वो पुराना पैटर्न रिप्लेस करके नया बना लेगा यानी कि पुराने से मत लड़ो नया उसके सामने रिपीट करना शुरू कर दो तो वह पुराना छोड़ देगी क्योंकि आपका मन जो है ना व एक बच्चे की तरह है वह कहेगा एक खिलौना ले रहे हो तो दूसरा दो कोई और बढ़िया देना टक्कर का देना ऐसा नहीं है कि मुझसे बढ़िया वाला खिलौना ले लो चाहे उसको पता नहीं ना कि यह डेंजरस खिलौना है लेकिन उसको लग रहा है यह अट्रैक्टिव है यह बढ़िया है तो वह कह रहा
(41:45) है कि अच्छा यह ले लो पर मुझे कुछ दो तो हमारे अंदर रिप्लेसमेंट बहुत जल्दी हो जाता है किसी चीज को छुड़ाया अगर आप छुड़ाने की कोशिश करेंगे तो बहुत मुश्किल होगी लेकिन अगर आप किसी चीज को छुड़ाने की की कोशिश ना करें और रिप्लेस करने की कोशिश करें तो बहुत ही आसान हो जाएगा हम में से ज्यादातर लोग प्रॉब्लम्स को इसीलिए मतलब सॉल्यूशंस की तरफ नहीं जा पाते क्योंकि वो छुड़ाने में सलूशन ढूंढते हैं कि मैं बहुत नेगेटिव थिंकिंग करती हूं मैं नेगेटिव थिंकिंग कैसे छोडूं मैं ओवर थिंकिंग कैसे छोडूं मैं जंग खाना कैसे छोडूं मैं यू नो घर पे ही बैठी रहती हूं
(42:18) मैं बाहर निकलना कैसे सीखूं या मैं इसको कैसे तो हमारी जो जो सलूशन की तरफ जाने की भी जो प्रोसेस है ना वो नेगेटिविटी से ही शुरू हो रही है कि छोड़ू जैसे कि मेरी लाइफ का बहुत ही एक बड़ा प्रॉब्लम है मुझे इसको हटाना है एंड जितना आप नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव तरीके से अप्रोच करते हो उतना डिफिकल्ट हो जाता है सॉल्यूशन को भी लेकर आ पाना तो इसकी जगह अगर हम वो करें जो आपने बताया कि मैं क्या छोड़ूं चलो ठीक है वो तो मुझे पता है कॉन्शियस माइंड को कि मुझे ये वाली चीजें छोड़नी है बट फिर मैं क्या करूं लेट्स फोकस ऑन दैट थोड़ा ये कर लिया थोड़ा ये कर लिया ऑटोमेटिक आप फिर
(42:47) ये चीजें ज्यादा करने लगोगे जैसे आपने बताया कि कंफर्ट जोन से जब आप बाहर निकलते हो फोर्सफुल फोर्स एक्शंस लेकर ही निकलते हो आपको फोर्स लगानी पड़ती है अगर आपका जैसे हम 100 मीट दौड़ने की बात कर रहे थे अगर आपका गोल 200 है तो जब आप 150 दौड़ो ग तो फोर्सफुली ही दौड़ो ग राइट तो शुरू का कंफर्ट जन के बाद वो एक अनकंफर्ट बल जन होता है जिसमें फोर्स के साथ आप उन हैबिट्स को उन एक्शंस को उन नेसेसरी स्टेप्स को लेते हो उसके बाद फिर आपको एक न्यू कंफर्ट जन बन जाता है ऑटोमेटिक बन जाता है जो पुराने कंफर्ट जन से थोड़ा बड़ा होता है अगर पुराने कंफर्ट जन में
(43:18) 100 मीटर भाग के मैं आराम से बैठ के एंजॉय कर सकता था तो अब आप 150 भाग के भी बैठ के एंजॉय कर पाओगे हो सकता है थोड़े दिन लगे उस हैबिट फॉर्मेशन उस अनकंफर्ट बल जन के थ्रू नेविगेट करने में हम तो यह भी बात करना बहुत जरूरी है क्योंकि जब लोग एंजाइटी पैनिक या मेंटल हेल्थ के चैलेंज से डील कर रहे होते हैं तो कंफर्ट जोन एक बहुत इंपॉर्टेंट स्पेस बन जाता है कि मुझे मेरा कंफर्ट फूड चाहिए इसलिए बहुत ईटिंग डिसऑर्डर्स भी हो जाते हैं जिन लोगों को एंजाइटी होती है या तो एकदम खाना छोड़ देते हैं या बहुत सारा खाना खाते हैं बहुत वेट गेन हो जाता है तो कंफर्ट की तरफ हर
(43:49) चीज मतलब फूड में कंफर्ट ढूंढते हैं लाइफस्टाइल में जैसे कि सिर्फ बैठे रहना मुझे मिल रहा है उसका तो हमने जो डिस्कस किया जो हमने जो एनवायरमेंटल फैक्टर्स में फैमिली किस तरह से आपको इनेबल कर देती है आपकी रेसिलियंस को बिल्ड नहीं होने देती है ये सारी बातें इसलिए करी ताकि हम उस डिस्फंक्शन को हाईलाइट किए जाए जो उस कंडीशन की वजह से जो डिस्फंक्शन है वो तो है ही लेकिन आसपास के फैक्टर्स उसको और इनेबल कैसे कर रहे हैं तो डॉक्टर कशि एक बात बताइए कि फिर ट्रू सेंस में एंपैथी कैसे हम एक्सप्रेस कर सकते हैं ऐसे लोगों के लिए जिनको पैनिक अटैक्स आते हैं जो
(44:26) एंजाइटी के शिकार हैं अगर हम उन्हें कंफर्ट जोन भी ना दें उनको प्रोटेक्ट भी ना करें तो फिर हम उनको जेनुइनली अपना प्यार अपनी एंपैथी कैसे दिखाएं क्योंकि बहुत सारे पेरेंट्स जो ये कर रहे हैं या बहुत सारे पार्टनर्स हस्बैंड वाइफ्स जो ये कर रहे हैं वो इसीलिए कर रहे हैं कि इसको कुछ कोई तो अपना फील हो अगर मेरा बच्चा या मेरा हस्बैंड या मेरी वाइफ को ऐसा लग रहा है बहुत विक्टिम मोड में चले जाते हैं बहुत एंजाइटी लेते हैं हर तरफ से परेशान रहते हैं तो चलो मैं इसको थोड़ा ज्यादा प्यार कर लेती हूं चलो मैं इसको थोड़ा ज्यादा कंफर्ट दे देती हूं क्योंकि कोई तो
(44:55) उसे अपना फील हो वो बड़े अच्छे इंटेंशन से कर रहे होते लेकिन इवेंचर है उसकी रेजिल नहीं डेवलप हो पाती क्योंकि फिर उसको वो थ्रश होल्ड जो हमने बात की वो 100 मीटर से फिर 50 80 प आ जाता है राइट तो फिर एक सही तरीका ट्रू एंपैथी कैसी दिखेगी यहां पर हम दोनों पॉइंट से बात करते हैं क्योंकि एक तो पर्सन जो सफर कर रहा है तो यहां पर उन लोगों के लिए ये समझना जरूरी है कि मन जो भी एक बार हैबिट डेवलप कर लेता है पैटर्न डेवलप होता है तो उसको तोड़ना नहीं जाता मतलब मन के लेवल पर मन अपना कूड़ा भी नहीं छोड़ना चाहता आपको पता है और लोग लाचारी की बीमारी में फंस
(45:30) जाते हैं और फिर उसी दुख में उन्हें मजा भी आने लगता है आपको पता है सबसे ज्यादा पेन में मजा आने लगता है और लोग अपने इमोशनल पेन को फिजिकल पेन प भी शिफ्ट करते हैं इमोशनली उनको इतना पेन हो रहा होता है कई बार सेल्फ हार्म करके वो पेन को शिफ्ट करने की कोशिश करते हैं बट पेन में ही रहते हैं उसे रिजॉल्व करने की कोशिश नहीं करते हैं तो वहां पर जब लोग लाचारी की बीमारी में फस जाते हैं और उसी लूप में एंजॉय भी करना शुरू कर देते हैं जैसे मुझे एक केस याद आ रहा है लेडी जिनको बहुत एंजाइटी हुई एंजाइटी इसीलिए हुई थी क्योंकि हस्बैंड बहुत बिजी रहते थे टाइम
(46:01) नहीं दे पाते थे तो अब उनको बहुत क्रेविंग होती थी बहुत ज्यादा वो हस्बैंड से शिकायत करती थी मुझे टाइम दो मुझे आपकी जरूरत है हस्बैंड बोलते थे सब कुछ कर तो रहा हूं तुम लोगों के लिए कैसे बिजनेस को ऐसे कर दूं कम लेकिन क्या हुआ कि हस्बैंड सुन नहीं रहे थे बहुत लंबे समय तक ये चला धीरे-धीरे उनको एंजाइटी हुई और एंजाइटी में पैनिक भी हो जाती थी और एंजाइटी तो लगी रहती थी सोती भी नहीं थी जब कंडीशन ज्यादा बिगड़ गई तो फिर अब तो घर वालों को अलर्ट होना ही पड़ेगा दिखाया तो ऐसा हुआ कि हस्बैंड ने थोड़ा टाइम देना शुरू कर दिया अब हस्बैंड ने जब टाइम देना शुरू कर
(46:33) दिया तो वो एक हो गया गेन कि जो चाहिए था मेरी जो सबकॉन्शियस डिजायर थी मेरे लिए सबसे बड़ा वो था वो मुझे मिलना शुरू हो गया तो वहां पर क्या हुआ कि वो जो स्टेट थी उसको एंजॉयमेंट शुरू हो गया सब ऐसा नहीं करते हैं मैं सबके लिए नहीं कह रही हूं लेकिन कुछ लोग इस चीज का भी एक एडवांटेज लेने लग जाते हैं और वहां पर उ मैं अगर एंजाइटी शो करती हूं तो मुझे ये मिलता है हां एंजाइटी शो कर रहे हो या मैं रो रही हूं या मुझे यह कंडीशन हो रही है तो यहां पर मेरे को अटेंशन मिल रही है या मेरा हस्बैंड है अब मुझे टाइम दे रहा है डॉक्टर साहब ये अगर माइंड के लेवल प बात
(47:06) करें और अगर कॉन्शियसली कर रहे हो तो ये मैनिपुलेशन है लेकिन अगर आपकी बॉडी ने डीप लर्न कर लिया बिहेवियर सबकॉन्शियस लेवल पे कि बॉडी शट डाउन में ही चली गई है बिकॉज बॉडी डजन नो द डिफरेंस बकुल बिटवीन द टू थिंग्स राइट तो बॉडी तो कंप्लीट शट डाउन में चली गई है तो आप यह कह रहे हो कि अगर आपको पैनिक अटैक्स आते हैं बॉडी एकदम शटडाउन में जाती है तो कहीं ना कहीं वो एक कॉन्शियस प्रोग्रामिंग है अटेंशन सीक करने की भी बिल्कुल ये ना एक कॉन्शियस लेवल पर होता है एक सबकॉन्शियस बॉडी अपने आप कुछ नहीं कर सकती या तो कमांड कॉन्शियस लेवल
(47:36) से आ रही है या सबकॉन्शियस लेवल से आ रही है क्योंकि अगर बॉडी अपने आप कुछ कर सकती होती तो फिर इंसान के जाने के बाद भी कुछ हो जाता ना बॉडी अपने आप कुछ नहीं कर सकती या तो वो कमांड रिसीव करे कॉन्शियस माइंड से या सबकॉन्शियस माइंड से अब ये जो पर्सन का मैं वो दे रही हूं इनको बहुत ज्यादा लोंगिंग थी इस चीज की कि मेरा हस्बैंड मुझे टाइम दे और बड़े लंबे समय तक इनके डीप सबकॉन्शियस माइंड में ये था अब उसने सेंस कर लिया कि जो चाहिए था वो मिल रहा है तो ऐसा नहीं कि हर बार ये जानबूझ के ऐसा करती थी इनके साथ सबकॉन्शियसली ऐसा जैसे ही हस्बैंड का फोन आता वो कहीं बिजी
(48:07) हो जाते या जाने का नाम लेते तो इनके सिम्टम्स बढ़ने लगते थे क्योंकि सबकॉन्शियस माइंड को लगता था फिर थ्रेट है फिर जा रहा है रोको तो वो अपने आप ही वहां से मेमोरी बेस थ्रेड बेस सिम्टम्स बढ़ जाते थे तो हस्बैंड ज्यादा टाइम देते थे तो उसमें एंजॉय करने लगी हल्की अवेयरनेस होती है कि इस सबसे तो एक इंसान यह सोचता है कि अगर ऐसे भी मेरी मर्जी पूरी हो रही है तो ऐसे ही सही इसकी भी एक परसेंटेज होती है आप कहते ना कि सारे लोगों के बीच में कुछ केसेस ऐसे भी होते हैं यहां पर हम अपना नुकसान कर रहे हैं लेकिन जैसे ही हमें अवेयरनेस आ जाए कि हम सिर्फ किसी की
(48:41) अटेंशन के लिए या इस गेन के लिए जो हमारा सबकॉन्शियस गेन है हम अपने आप को एक तरीके से जोन में कैद कर रहे हैं वह सही नहीं है यहां पर वह चीज की अवेयरनेस होना बहुत ज्यादा जरूरी है ताकि आप इस जोन से बाहर निकल सके डॉक्टर साहब इंडियन क्स में बात करूं तो ऐसी घरों में बात होती है कि जैसे अगर मदर इन लॉ आ जाती है तभी इनको एंजाइटी होती है वरना तो बढ़िया रहती है तो उसका मतलब यही है ना कि उन्होंने उस इंसान के साथ डील करने का अटेंशन पाने का कि मेरा अगर ये डिजायर है कि मेरे सामने यह पर्सन ना रहे तो फिर मैं मेरी बॉडी ने लर्न कर
(49:13) लिया सबकॉन्शियस प्रोग्रामिंग हो गई कि मैं शटडाउन में चले जाऊं ताकि मेरे हस्बैंड या बाकी लोग कहने लगे कि आप माता हो या थोड़ा डिस्टेंस मेंटेन करें या फिर मुझे कहीं और लेकर जाए क्योंकि हम इंडियन कॉन्टेक्स्ट में लैंग्वेज बहुत कॉमनली देखते हैं कि अच्छा इनको डिप्रेशन सिर्फ मेरे लिए ही है बाकी टाइम तो ठीक रहती हैं बाकी टाइम तो खुश रहती हैं तो इस सिचुएशन में इंसान क्या करे डॉक्टर साहब अब यह हर बार यह सोचे कि एक्सटर्नल चेंज हो जाए लोग ये लोग आए ना मेरे घर यह लोग बदल जाएं या फिर वह खुद क्या करें यह ना इसको कहते हैं कंडीशनिंग हो गई है इसको कहते हैं
(49:41) ट्रिगरिंग इफेक्ट यह सेम केस अभी मेरे पास चल रहा है व एक लेडी है बहुत सेंसिबल बहुत अच्छा अपना इंडिपेंडेंट बिज़नेस रन करती है और करोड़ों का टर्न ओवर है तो उनकी मदर इन लॉ जो कि उनके पास एक्सपीरियंस हैं कि उनके ब्रदर इन लॉ के घर में उनके सिस्टर इन लॉ के घर में प्रॉब्लम क्रिएट करा चुकी है और ज्यादा प्रॉब्लम क्रिएट करा चुकी हैं तो उनके माइंड ने भी उन्हें थ्रेट की तरह ले लिया तो अभी उनकी बेबी हुई तो उस टाइम पर मदर इन लॉ उनके पास रहने आई और उनके दिमाग ने उन रेफरेंसेस को उठाकर एज्यूम करना शुरू कर दिया कि अब ये हमारे
(50:09) बीच में भी झगड़ा इससे पहले भी वो कुछ कुछ बोलती आई होंगी घर में जैसे नॉर्मली होते हैं तो उनके माइंड ने उसको ट्रिगर की तरह ले लिया कि अगर यह लेडी घर में है तो मैं सुखचैन से नहीं रह सकती और वो उनका डीपर्सनलाइजेशन और डी रिलाइजेशन जो कि आपका एक टेंपरेरी डिस्कनेक्ट होता है एक डिफेंस मैकेनिज्म होता है यानी कि यहां से मुझे सेंस ऑफ कनेक्टिविटी फील नहीं हो रही है मैं अपनी बॉडी से कनेक्टेड फील नहीं कर रही हूं एनवायरमेंट से नहीं फील कर रही हूं मुझे एंजाइटी के फुल फ्लश सिम्टम्स आ रहे हैं पैनिक फील हो रहा है और इंसान से तो मैं कनेक्टेड फील करती ही नहीं हूं और
(50:38) करना भी नहीं चाहती नहीं करना चाहती तो हस्बैंड ने क्या किया कुछ टाइम के लिए अपनी मम्मी को भेज दिया कि मम्मी आप चली जाइए बट अब यहां पर माइंड ने क्या किया आएगी तो है ही ना अभी भेजा है 15 दिन के लिए महीने भर के लिए फिर दोबारा आ जाएगी फिर प्रॉब्लम क्रिएट करेगी तो वो 15 दिन भी एंजॉय नहीं कर रहा इंसान क्योंकि उसको यह लग रहा है कि आएगी तो वहां पर यह भी कंडीशन होती है तो यहां पर उनकी खुद की वीकनेसेस होती है तो हम बोलते हैं आप देखो आपकी लाइफ की वैल्यूज किस तरह से चेंज हुई आप एक बिजनेस वुमन थे आपके हमेशा से वैल्यू एक ग्रोथ थी अब आपकी सारी
(51:06) रिलेशनशिप पर आकर अटक गई है जब आप एक ही चीज को इतना हाई वैल्यू दोगे तो आपका माइंड तो आपकी वैल्यूज के अराउंड ही रिवॉल्व करता रहेगा और वो छोटी-छोटी वो बातें भी नोटिस करेगा जो आपने कभी नोटिस की नहीं थी और आप अपने ऊपर अपने रिश्ते के ऊपर भरोसा रखो ना कि कैसे कोई मिसअंडरस्टैंडिंग क्रिएट करा देगा अगर कोई कराएगा भी तो क्या आपका रिश्ता इतना कच्चा है कि आपके हस्बैंड वाइफ के बीच में कोई बात नहीं होगी कोई भी आएगा और कान भरेगा और टूट जाएगा तो यहां पर आप अपने हस्बैंड से अपना बॉन्ड स्ट्रांग करो एक विश्वास बनाओ सॉल्यूशन उसमें है मदर इन लॉ मां तो
(51:38) आ को ब्लेम करके निकाल दे मां तो आएगी ना ऐसे कैसे हो सकता है कि एक लड़का अपनी मां को बोल दे मेरे घर में तुम्हारी एंट्री नहीं है और जिसमें कि एक्टिवली अभी तक कोई प्रॉब्लम भी नहीं क्रिएट करा आपका एंटीसिपेशन है कि किसी और के घर में करा सकती है तो मेरे घर में भी करा स ये भी आपकी सुनी सुनाई बातें है ना कि उन्होंने वहां प्रॉब्लम क्रिएट करा दी आपको क्या पता वो कैसे नहीं एक्चुअल में कराई थी में जो मैं बता रही हूं एक्चुअल में कराई थी बट उनकी क्या अपने रिश्ते की वीकनेस थी ये भी तो देखिए आप उनके क्या इश्यूज चल रहे थे अब आपके घर में क्या इश्यूज है मेरे घर
(52:05) में क्या इश्यूज है ये दूसरे को कैसे पता आईडिया लग सकता है बट पहले से ही हमारा रिश्ता कमजोर था किसी की बात हुई तो ब्लेम उस पर चला गया कि इसने तुड़वा दिया लेकिन वो पहले ही टूटने की कगार पर था तो आप ये देखिए ना कि आपका रिश्ता कितना मजबूत है तो हमने बोला तुम अपनी पावर्स बढ़ाओ ना कि मदर इन लॉ के चक्कर में रहा वो तो आएगी ही और तुम ये भी तो एंजॉय कर सकते हो ना कि मुझे अपना बच्चा नौकर पे नहीं छोड़कर जाना मदर इन लॉ कितनी भी बुरी हो लेकिन आपके साथ ऐसा बुरा नहीं करेगी ना कि आपके बच्चे की केयर नहीं करेगी एटलीस्ट नौकर से तो मतलब कहना नहीं
(52:35) चाहिए वर्ड्स अच्छे नहीं है लेकिन घर का मेंबर जो कि चाहे मैं कह रही हूं कितना भी टॉक्सिक भी हो वो हमेशा बेटर रहता है किसी आप बाहर वाले पर इतना भरोसा कर रहे हैं और आप अपने घर वाले पर जिसने एक्टिवली आपकी लाइफ में कुछ प्रॉब्लम नहीं क्रिएट करी है सिर्फ आपका एक अजमन है कि वो ऐसा कर सकती यहां कर सकते हो तो यहां पर भी तो यहां पर इस केस को ऐसे रिजॉल्व किया कि आप अपनी पावर्स बढ़ाओ आप देखोगे आपकी मम्स को चेज करने की बजाय वो सब माइंडसेट कहां गया अब आपको वो भी चीजें नोटिस हो रही है जो सेंसलेस बातें हैं तो जैसे ही ये शिफ्ट
(53:04) किया उसको समझ में आया कि अच्छा ये हो रहा है तो ऐसे हमें किसी का फोकस शिफ्ट करना होता है अब एक आपने जो बात पूछी थी वो और बातों में वो रह गई कि कैसे एंपैथी दिखाए कि उसको हम संभाले या नहीं संभाले बिल्कुल ना तो फैमिली सपोर्ट भी बहुत जरूरी है और ओवर सपोर्ट भी नुकसानदायक है जैसे एक बच्चा है छोटा था जिसके मां-बाप ने बिल्कुल भी उसको क साथ नहीं दिया तो वो क्या सेंस करेगा कि मेरा कोई नहीं है जो करना है वो मुझे ही करना है मेरे को कोई नहीं समझता एक ये है कि जिसके मां-बाप ने बात-बात पे कहा तू रहने दे अभी तो छोटा है मैं कर लेता हूं तो वो क्या है बहुत
(53:38) ज्यादा डिपेंडेंट हो जाएगा तो बैलेंस क्रिएट करना तो जब फैमिली सपोर्ट की बात आती है तो मैं हमेशा कहती हूं कि आप समझो अगर कोई इंसान कंप्लेन कर रहा है कि मुझे डिस्कंफर्ट हो रहा है बॉडी में मुझे नींद नहीं आ रही है मेरे साथ ये परेशानी है तो एक्नॉलेज करो उसको हेल्प दिलाओ या जो आप हेल्प कर सकते हो वो शिकायत कर रहा है कि घर का एनवायरमेंट ठीक नहीं है तो घर का एनवायरमेंट ठीक करो वो कह रहा है मुझे ट्रीटमेंट चाहिए तो ट्रीटमेंट दिलवा हो सब चीजें करो जो एक्चुअल इश्यूज है उन्हें एड्रेस करो इस तरह से सपोर्ट करो क्या सपोर्ट नहीं करना है तू यहां मत जा यह मत
(54:07) कर इसको छोड़ दे रिश्ता तोड़ दे जॉब छोड़ दे यह सब नहीं करना है इससे आप उस पर्सन को वीक कर रहे हो आपको लग रहा है कि आप सपोर्ट कर रहे हो आप लॉन्ग रन में उसके साथ बहुत गलत कर रहे हो तो सपोर्ट करना है वह ऐसे सपोर्ट करना है कि आपके सपोर्ट से वो इंडिपेंडेंट बने उसकी पावर बढ़े और वो कैपेबल बने अपने इशू उससे ओवरकम करने में डॉक्टर साहब मेरे माइंड में एक ऑब्जर्वेशन आ रही है आपने दो केसेस बताए कि या तो एक बच्चा जिसको बिल्कुल ही सपोर्ट नहीं मिला तो वो इतना हाइपर इंडिपेंडेंट हो गया कि मुझे ही सब कुछ करना है और एक दूसरा बच्चा
(54:39) जिसको इतना ओवर प्रोटेक्टिव एनवायरमेंट में रखा गया कि वो अपनी बेसिक एबिलिटीज भी डेवलप नहीं कर पाया अब मुश्किल सबसे ज्यादा तब बढ़ जाती है जब इन दो लोगों की शादी हो जाती है यू नो एक तो एकदम हाइपर इंडिपेंडेंट तो उसके थॉट पैटर्स भी वैसे हैं उसका लाइफ को लेकर नजरिया वैसा है अपने काम को लेकर अपने रिलेशनशिप्स को लेकर एक सर्टेन तरीके से ऑपरेट करते हैं और जो दूसरे तरह के जो बहुत प्रोटेक्टिव एनवायरमेंट से आ रहे हैं उनका कंपलीटली अपोजिट है और जब साथ में को एजिस्ट करना होता है तो फिर बहुत डिफिकल्ट होती है और तब हम एक दूसरे को टॉक्सिक लेबल करना
(55:09) क्योंकि उनकी जो दुनिया और हमारी जो दुनिया जहां से हम आ रहे हैं बिल्कुल अलग थी और इसलिए हम बिल्कुल अलग तरीके से एक सिचुएशन को सोचते हैं राइट फिर उनके आपस में बहुत ज्यादा झगड़े होते हैं पेरेंटिंग स्टाइल को भी लेकर अगर उनका बच्चा पैदा हो जाता है ये ऐसा क्यों करते हैं वो ऐसा क्यों करती हैं यू नो एक दूसरे को लेकर बहुत ज्यादा कन्फ लिट बढ़ जाता है इट्स जस्ट एन ऑब्जर्वेशन दैट आई वांटेड टू शेयर कि ऐसा भी हो जाता है तो अगर आप ऐसे सिचुएशन में खुद को स्टक पाते हो तो फिर क्या करना चाहिए आप देखिए ना जो भी हमारे अर्ली यर्स होते हैं जो भी हमने अपने
(55:38) पेरेंट्स से अब्जॉर्ब किया होता है उनको देखकर कई बार उन्होंने जो हमें बताया होता है और जो उन्होंने बताया नहीं हमने सिर्फ देखा कि जैसे मेरा बिहेवियर पैटर्न कैसा रहता है जब मेरी लाइफ में कोई स्ट्रेस आता है तो मेरे पास अगर मेरा बच्चा है तो वो कैच कर रहा है कि मम्मा कैसे स्ट्रेस को हैंडल करती है मैंने उसको बैठकर नहीं बताया लेकिन उसने देख लिया मेरी मम्मा कैसे अपनी सेल्फ केयर को मैनेज करती है या सिर्फ एक ही एरिया में बहुत ज्यादा फोकस्ड है और दूसरे एरियाज को नेगलेक्ट करती है तो हर समय आपका बिहेवियर आपकी बातें एक डेमोंस्ट्रेट दे रही है और
(56:07) आपके आसपास जो एनवायरमेंट में है वो उसके अंदर सबकॉन्शियस प्रोग्रामिंग हो रही है तो जैसे एक बच्चा है जिसको बिल्कुल सपोर्ट नहीं मिला तो वह या तो बहुत इंडिपेंडेंट हो जाएगा या बहुत रिजेक्टेड फील करने की वजह से बहुत लो जोन में चला जाएगा और उसको ऐसा लगेगा कि मेरे पास कोई सपोर्ट नहीं है तो मैं कुछ बड़ा नहीं कर पाऊंगा और एक जो बहुत ज्यादा डिपेंडेंट हो जाएगा क्योंकि उस पे आपने बहुत ही ज्यादा पैंपरिंग ओवर पैंपरिंग तो उसके अंदर क्या होगा कि ना सुनने की आदत नहीं होगी उसको हर बात में सपोर्ट चाहिए वो इंडिपेंडेंट डिसीजन नहीं
(56:35) ले पाएगा तो 253 साल का भी मम्मी आप बताना इसमें क्या करूं मैं ठीक है ना तो वहां पर वो चीज डिपेंडेंसी कल को मम्मी नहीं तो वाइफ से पूछेगा वो मतलब डिपेंडेंट बहुत ज्यादा बन जाएगा और जब एक्चुअल वर्ड से उसका एनकाउंटर होगा फेस करेगा वो तो उसको अपने ऊपर से कॉन्फिडेंस बहुत हिल जाएगा उसका मैंने एक फादर आए मेरे पास कंप्लेंट करते हुए कि मैम एक बात बताइए 24 साल का हो गया इतना फुदु है कुछ नहीं कर पाता बिल्कुल ही उन्होंने वर्ड यूज किया इतना मतलब करना नहीं चाहिए किसी के लिए कि बिल्कुल लूल है ऐसे एक वर्ड यूज कर देते हैं अबूसिव फॉर्म में कि ऐसा है तो मैंने
(57:09) उनसे बोला कि जब ये छोटा था तो आपने इसका एक्सपोजर कितना किया आपको ट्रेनिंग कैसे करी नहीं जी हम कर देते थे सब कुछ इनको तो मैडम हमने ऐसे पाला है इनकी पढ़ाई के लिए इनकी किताब कॉपी से लेकर इनके कपड़े लते यूनिफॉर्म सब हम लाते थे इनको तो हमने बिल्कुल हाथ नहीं हिलाने दिया लेकिन अ ये बड़े हो गए अब ये कर क्यों नहीं रहे अब इन्हें जिम्मेदारी क्यों नहीं समझ में आ रही है ट्रेनिंग तो आपने कभी दी नहीं उसको तो सब कुछ पापा ही लाकर देंगे पापा ही कर उसका कॉन्फिडेंस बिल्कुल डेवलप नहीं हुआ उसके अंदर इतना लो कॉन्फिडेंस उसको पता ही
(57:38) नहीं सोशल सिनेरियो कैसे करने है बारगेनिंग कैसे करनी है चॉइस कैसे करनी है अब क्योंकि ऐसे इंसान को पता ही नहीं है कि यह सब कैसे करना है उसके एब्सलूट ब्लाइंड स्पॉट में है ये चीजें तो व कैसे अपना डिस्कवर करे कि मेरा ब्लाइंड स्पॉट है फिर मैं क्या कर सकता हूं वो जर्नी ऑफ इंप्रूवमेंट कैसे शुरू होगी अब जब आप रिलाइज कर रहे हैं आपका एक्सटर्नल से कांटेक्ट हो रहा है आप इतने बड़े हो गए हैं कि घर वालों ने आपकी शादी करा दी है तो वहां पर आप देखिए कि जो सिचुएशन नॉर्मली लोग फेस करते हैं और मुझे फेस करते वक्त डर लगता है मेरे अंदर नेगेटिव
(58:08) थॉट्स चलनी शुरू हो जाती है मेरे अंदर से एक आवाज आती है कि तेरे से नहीं होगा और बाकी लोग इजली करते हैं तो ऑब्जर्वेशन से हम सीखते हैं तभी हमें समझ में आता है कि बॉस इस सिचुएशन में यह लोग तो कर पा रहे हैं ठीक से तुम नहीं कर पा रहे हो तो प्रॉब्लम तुम्हारे लेवल पर है भाई कोई भी सिचुएशन को अगर 10 लोग 100 लोग आपको फेस करते हुए दिखाई दे रहे हैं और सिर्फ आपके लिए डिफिकल्ट है वो तो यानी कि आप एक्सेप्ट करो कि यह सिर्फ आपके लिए डिफिकल्ट है एक्चुअल में सिचुएशन में प्रॉब्लम नहीं है तो सबसे पहले अपनी लिमिटेशन को अपनी ब्लाइंड स्पॉट्स को
(58:39) फाइंड आउट करने के लिए ऑब्जर्वेशंस और ऑब्जर्वेशन के बाद जैसे ही आपने ऑब्जर्व कर लिया आप उसे एक्सेप्ट करें और फिर उसके बारे में इंफॉर्मेशन लेना शुरू करें ऑब्जर्वेशन से भी ले कि कोई पर्सन कैसे इस सिचुएशन को हैंडल करता है आप उसके बारे में कुछ पढ़े लोगों से बात करें डायरेक्टली इनडायरेक्टली और उस सब से जो इंफॉर्मेशन कलेक्ट हो उससे अपने आप को बोले कि मैं ट्राई कर रहा हूं और अब जब मैं इसको फेस करने जाऊंगा ट्राई करने जाऊंगा तो जो मेरी प्रीवियस प्रोग्रामिंग है वो मुझे रोकेगी मुझे डर लगेगा मुझे ऐसा लगेगा कि मुझसे नहीं हो रहा क्योंकि मैंने
(59:11) कभी किया ही नहीं है मेरे पास एक्सपीरियंस नहीं है कॉन्फिडेंस कैसे आता है एक्सपीरियंस से आता है आपके तो मेरे पास इसका कोई एक्सपीरियंस नहीं है इसलिए मुझे कॉन्फिडेंस नहीं आएगा बट मुझे ट्राई करना है क्योंकि ट्राई करने से एक्सपीरियंस आएगा वो एक्सपीरियंस मुझे आगे के एक्सपीरियंस के लिए मोटिवेट करेगा और जैसे ही मैं चार पांच बार करूंगा मुझे कॉन्फिडेंस आ जाएगा तो जब आप इतना अपने आप से बात कर लेते हैं और एक अंदर से विलिंग लेकर आते हैं कि मुझे भी अपग्रेड करना है अपने आप को तब जाकर आप सीख जाते हैं डॉक्टर कशि का एक आखरी सवाल जो मैं अपने
(59:41) सारे पॉडकास्ट में पूछती हूं आज थ्रू द लेंस ऑफ एंजाइटी समझाने की कोशिश कीजिए कि सक्सेस को कैसे देख सकते हैं थ्रू द लेंस ऑफ एंजाइटी सक्सेस का अगर एंजाइटी सफरर की मैं बात करूं कि उनके लिए सक्सेस क्या होगी एंजाइटी फ्री लाइफ जीना और हर सक्सेस के लिए आपको हार्ड वर्क करना पड़ता है हर जगह स्मार्ट वर्क नहीं चलता स्मार्ट वर्क भी बहुत जरूरी है कि आपने टेंपरेरी फटाफट से कुछ भी ऐसे एंजाइटी फील हो रही है आपने फिजियोलॉजी चेंज करी है सब कुछ ऐसा बट आपको हार्ड वर्क करना पड़ेगा यानी कि डीप डाउन अंडर की जर्नी जा करनी पड़ेगी इश्यूज
(1:00:13) को रिजॉल्व करना पड़ेगा जैसे ही आप ये हार्ड वर्क प्लस स्मार्ट वर्क भी जरूरी है दोनों का कॉमिनेशन करेंगे तो आपको बहुत बड़ी सक्सेस मिलेगी और आपको अपनी बॉडी का बिना एहसास हुए आप बॉडी को एंजॉय करेंगे आपका माइंड एकदम मोमेंट में रहेगा बिल्कुल काम रहेंगे आप जबी भी आपका माइंड एनालिसिस निकालेगा आपको कुछ सलाह देने की कोशिश करेगा क्योंकि ये बाज नहीं आएगा ये सलाह जरूर देगा लेकिन इसके पास मटेरियल खराब है तो ये खराब माल प्रोड्यूस करेगा खराब थॉट्स लेकिन अगर इसके पास माल क्वालिटी माल है यानी कि जो भी आपने स्टोर कर रखा है एस मेमोरी वो क्वालिटी है तो ये आपको
(1:00:46) क्वालिटी थॉट्स देगा तो आपके लिए सबसे बड़ी सक्सेस होगी जब आपकी बॉडी का एहसास ना हो और जब आपका माइंड एकदम से लाइट रहे और इस सक्सेस को आपको करना है कोई और आपके लिए अर्न नहीं कर सकता क्योंकि मैं आप आप हमारे फैमिली मेंबर्स हमारे लिए बैठकर एक्सरसाइज नहीं करेंगे हमारे लिए बैठकर थॉट्स को सॉल्व नहीं करेंगे हमारे लिए बैठकर कोई स्टेप नहीं लेंगे उनका जो सपोर्ट होगा वो एक्सटर्नल सपोर्ट टेंपरेरी शॉर्ट पीरियड के लिए होगा तो बेसिकली द जर्नी विद इन करनी ही पड़ेगी 100% करनी पड़ेगी इसीलिए हमने इस पॉडकास्ट को डिजाइन भी किया है यू नो मुझे लगता है कि
(1:01:21) माइंडसेट ट्रांसफॉर्मेशन माइंडसेट में शिफ्ट लाने की जो बात है अ इंडिया में अभ ये थोड़ी थोड़ी कन्वर्सेशन अब होनी शुरू हुई है लेकिन ये कन्वर्सेशन बहुत जरूरी है क्योंकि हम रिजाइन हो जाते हैं जैसे हमारी जिंदगी चल रही है उसमें जो हमारे आइडिया से जो पैटर्न सेट हो गए हैं जो बीमारियां सेट हो गई है जो डिसफंक्शन सेट हो गया है रिलेशनशिप में हम रिजाइन हो जाते हैं कि ऐसा ही रहेगा लेकिन थोड़ा अगर हम ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ बात करें अगर द जर्नी विद इन करें अपने आप को इमोशनली मेंटली और माइंडसेट वाइज शिफ्ट करने की कोशिश करें तो बहुत सारे अमेजिंग चेंजेज
(1:01:51) आपकी लाइफ में पॉसिबल है दैट इज वन लार्ज मैसेज दैट आई वांट टू गिव थैंक यू डॉक्टर कशि फॉर जॉइनिंग मी फॉर दिस कन्वर्सेशन थैंक यू सो मच ये पॉडकास्ट शूट करके बहुत अच्छा लगा और आई होप कि सारे व्यूवर्स को ये बहुत हेल्प करेगा थैंक यू टू ऑल द व्यूवर्स जो अब तक इस एपिसोड में बने हुए हैं जिन्होंने पूरा कन्वर्सेशन देखा है इसका मतलब कहीं ना कहीं इस कन्वर्सेशन में आपने अपनी लाइफ को देखा है और आप अकेले नहीं है आपके जैसे बहुत सारे लोग हैं जो इन इश्यूज से स्ट्रगल कर रहे हैं स्टक फील कर रहे हैं अगर आप ऐसे किसी लोगों को जानते हैं या जो लोग जिनकी आप बहुत केयर
(1:02:22) करते हैं परवाह करते हैं प्यार करते हैं उनके साथ इन कन्वर्सेशन को शेयर कीजिए ताकि वो लोग भी अपनी लाइफ में एक इंप्रूवमेंट यू नो क्रिएट कर पाए क्योंकि हर बार जब आप किसी मेंटल हेल्थ कंडीशन से डील कर रहे होते हैं जरूरी नहीं होता है कि आप उसके लिए बहुत ओपनली बात करें यू डोंट नो हु यू आर हेल्पिंग आप किसी ऐसे इंसान तक भी पहुंच सकते हैं जो आपको लगता था कि इनकी लाइफ में तो सब कुछ बहुत सही है लेकिन जेनुइनली कोई क्या सफर कर रहा है ये यह किसी को भी नहीं पता है थैंक यू फॉर वाचिंग दिस एपिसोड डू सपोर्ट द चैनल लाइक कीजिए सब्सक्राइब कीजिए शेयर कीजिए एंड आई
(1:02:53) विल सी यू इन द नेक्स्ट एपिसोड

No comments:

Post a Comment