How to Boost Brain Power? Memory Loss, Mental Health, Parkinson’s Disease & Brain Health Tips
Author Name:Shobha Rana
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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=Qn_y5KKhF_A
Transcript:
(00:00) तो सबसे इंपॉर्टेंट होता है वो हेडेक जो एक सेकंड में ऐसा लगे कि आपका सर फट जाए डिस्पिरिन खाना एस्पिरिन खाना वो खाना सर दर्द के लिए बहुत ही डेडली हो सकता है डिस्प्रिन आई थिंक दुनिया की सर दर्द की सबसे ज्यादा मिसयूज्ड दवाई है डिस्प्रिन खाने से यही सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है कि मैंने उसको वो मैंने चाबी पता नहीं कहां रखी चश्मा मेरे सर पे लगा हुआ था मैं सारे घर में ढूंढता रह गया डॉक्टर साहब मेरी तो मेमोरी जा रही है तो पार्किंसन एक प्रकार की बीमारी है इससे मिलती-जुलती सात और बीमारी होती पार्किंसन के लक्षण हमेशा एक साइड होंगे अब आप सोच के देखो एक 70
(00:34) साल का आदमी है आप अगर जो डिनर 11 बजे कर रहे हो ब्रेकफास्ट भी 11 बजे कर रहे हो और लंच जो है 3:00 बजे कर रहे हो तो आप तीन विकल्प पैदा कर रहे हो बीमारी कॉज कर डिमेंशिया फिर दो प्रकार का होता है एक वो जिसको हम क्योर कर सकते हैं फिर होते हैं अल्जाइमर्स एक लाइफ थ्रेटनिंग डिजीज भी हो सकती है डॉक्टर साब इसका कोई पूरे विश्व में कोई इलाज नहीं डॉक्टर साहब रोज कॉफी पीना सही है यस इट इज एब्सलूट फाइन बट पॉइंट इज जब वही एक्टिविटी इसलिए होती है कि मैं चार घंटे की नींद लूंगा और चार कॉफी पी लूंगा और काम चलाता रहूंगा तो आपका ब्रेन कहीं ना कहीं जाके एक बहुत
(01:09) बुरी स्थिति में पहुंचेगा तो कौन सी ऐसी तीन चीजें हैं जो हम आज से शुरू कर सकते हैं अपनी ब्रेन हेल्थ को इंप्रूव करने के लिए सबसे पहली चीज है यूज इट और लूज इट ये जो ब्रेन है और माइंड है डॉक्टर साहब कि दो अलग एंटिटीज है बिल्कुल जी आप बताइए ब्रेन और माइंड में क्या डिफरेंस है बहुत सिंपल सा तरीका समझाने का जो दिखाई दे रहा है वो ब्रेन है जो दिखाई नहीं दे रहा वो माइंड है ब्रेन हेल्थ के लिए हम ऐसा क्या कर सकते हैं कि हमारी प्रोडक्टिविटी इंक्रीज हो जाएगी सिंगल मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग फॉर प्रोडक्टिविटी [संगीत] [प्रशंसा] इज नमस्कार एंड वेलकम टू द जर्नी विद इन
(01:50) पॉडकास्ट विद मी शोभा राना मैं एक इमोशनल इंटेलिजेंस और माइंडसेट कोच हूं और साथ ही इस पॉडकास्ट की होस्ट और क्रिएटर भी हूं द जर्नी विद इन पॉडकास्ट का एम है कि आपकी द जर्नी विद इन करने में मदद कर सके जब आप द जर्नी विद इन करते हैं अपने अंदर की तरफ लौटते हैं अपने अंदर झांकते हैं अपने इनर वर्ल्ड को समझते हैं तो आप अपनी करंट लाइफ की जो आज आपकी लाइफ में पोजीशन है उसकी एक बहुत गहरी अंडरस्टैंडिंग डेवलप करते हैं जब आप ये समझते हैं कि आप लाइफ में आज कहां है तो आप जहां जाना चाहते हैं जो भी आपके गोल्स हैं आपकी ड्रीम लाइफ है आपका
(02:28) परसेप्शन ऑफ सक्सेस है उस तक जाने का रास्ता तय हो सकता है इस पॉडकास्ट में हम अपने गेस्ट से बात करते हैं उनके एक्सपीरियंस के बारे में लर्निंग्स के बारे में और उनके एक्सपर्टीज जो उनके क्षेत्र जिसमें वह काम करते हैं उसमें है और इन सभी लाइफ लेसंस में से हम यह निकालते हैं कि आप जो इस पॉडकास्ट को देख रहे हैं वह अपनी लाइफ में आज की डेट में कौन सा मीनिंगफुल ट्रांसफॉर्मेशन क्रिएट कर सकते हैं कौन से वह एक्शंस ले सकते हैं जहां से आप अपनी लाइफ को खुद को मास्टर कर पाएं [संगीत] [संगीत]
(03:15) आज हमारे साथ है डॉक्टर सुमित सिंह हु इज द डायरेक्टर ऑफ न्यूरोलॉजी एट आर्टेमिस हॉस्पिटल आज का य एपिसोड में हम द जर्नी विदन करने वाले हैं खुद को बेहतर समझने वाले हैं फ्रॉम द स्टैंड पॉइंट ऑफ न्यूरोलॉजी न्यूरोलॉजी होती क्या है है ब्रेन को कैसे बेहतर हम समझ सकते हैं ब्रेन जो है हमारा एक बहुत ही फैसटिकट सप्लाई कंज्यूम करता है और इसमें जो सेल्स होते हैं नंबर ऑफ सेल्स वो पूरे प्लेनेट की पॉपुलेशन से भी तीन गुना ज्यादा है तो इतने सारे सेल्स आपस में बात कर रहे हैं इतनी सारी एक्टिविटी ब्रेन में हो रही है केमिकल सक्री हो रहे हैं और ब्रेन हेल्थ
(03:54) का डायरेक्ट इंपैक्ट है हमारी प्रोडक्टिविटी पे किस तरह से हम सिचुएशन से डील करते हैं उस पर और बहुत सारे डिसऑर्डर्स या बीमारियां जो इससे रिलेटेड है सबसे कॉमन जैसे कि हेडेक्स तो आज हम बहुत सारी ऐसी चीजों को इस एपिसोड में डिस्कस करेंगे ये एपिसोड बहुत ही इंटरेस्टिंग होने वाला है और बहुत ज्यादा आपको इंफॉर्मेशन देगा अबाउट इंप्रूविंग योर ब्रेन हेल्थ जहां आप सही इंफॉर्मेशन से अपनी लाइफ में आज जहां पर है वहां पर इंप्रूवमेंट कॉज कर सकते हैं सो लेट्स मीट डॉक्टर सुमित सिंह ऑन द जर्नी विद इन पॉडकास्ट हाय नमस्कार डॉक्टर साहब नमस्कार
(04:27) अ इट इज सच अ प्लेजर टू हैव यू ऑन द पॉडकास्ट क्योंकि आप न्यूरोलॉजी के स्पेस में बहुत सारे नेशनल लेवल पर इंटरवेंशंस होस्ट भी करते हैं आप डॉक्टर्स के नेटवर्क को मैनेज भी करते हैं एंड आपका जो एक्सपीरियंस है वो बहुत ही स्पेशलाइज्ड और बहुत ही मैं कहूंगी लंबा भी है और गहरा भी है सो इससे पहले कि हम यू नो ब्रेन के डिसऑर्डर्स न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स पर जाए सबसे पहले लेट्स स्टार्ट विद अंडरस्टैंडिंग व्ट ब्रेन इज हमारा जो ब्रेन है यह होता क्या है इसका क्या स्ट्रक्चर होता है क्या फंक्शनालिस ब्रेन से ज्यादा हमें अपने पूरे नर्वस सिस्टम को समझना जरूरी है तो
(05:04) ब्रेन इज समथिंग जो हमारे खोपड़ी के अंदर होता है यह हमारा स्कल है स्कल के अंदर ब्रेन है इसके बाद ब्रेन का ही एक एक्सटेंशन होता है जिसे हम स्पाइनल कॉर्ड बोलते हैं हिंदी में इसको मेरूरज्जू बोला जाता है उससे कुछ नर्व्स निकलती हैं वह नर्व्स निकलती हैं और हमारे बॉडी में रन करती हैं और जाकर फिर वह मसल्स के साथ कनेक्ट हो जाती है जब वो मसल्स से कनेक्ट होती है नॉट डायरेक्टली उनके बीच में एक छोटी सी स्स होती है जिसे हम न्यूरोमस्कुलर जंक्शन बोलते हैं और न्यूरोमस्कुलर जंक्शन का एक पार्ट नर्व में होता है दूसरा पार्ट मसल में होता है
(05:39) तो राइट फ्रॉम ब्रेन टू द मसल एवरीथिंग इज नर्वस सिस्टम सो इट्स अ ह्यूज ऑर्गन ब्रेन का काम होता है सारी चीजों को कंट्रोल करना ब्रेन स्पाइनल कॉर्ड को कंट्रोल करेगा नर्व्स को कंट्रोल करेगा मसल्स को कंट्रोल करेगा आपको लगता होगा कि आपका हाथ उठाए बस उठ गया अब इसमें इतने कॉम्प्लिकेटेड इवेंट्स इवॉल्वड है सबसे पहले यह वाली मसल कांट्रैक्ट करेगी यह कितनी कांट्रैक्ट करेगी कब तक कांट्रैक्ट करेगी और किस स्पीड से कांट्रैक्ट करेगी यह ब्रेन डिसाइड करता है तो यह एक मसल कांट्रैक्ट कर रही है बट जब यह कांट्रैक्ट करेगी यह वाली मसल को रिलैक्स होना जरूरी
(06:18) है अगर जो दोनों एक साथ कांट्रैक्ट करेंगे य हाथल भी नहीं सकता सो सिंपल मूवमेंट लाइक दिस कितने सारे इसमें सेगमेंट्स इवॉल्वड है कौन-कौन से ब के सेगमेंट्स इवॉल्वड हैं यू कांट इवन इमेजिन सो दिस सिंपल एक्ट इसमें कम से कम आठ या नौ डिफरेंट एक्टिविटीज साइमल नियस ली हो रही है डॉक्टर साहब ब्रेन के अ कॉमन हिस्से जिसके बारे में लोगों को थोड़ी बहुत जानकारी है आई वुड लाइक यू टू शेड सम लाइट ऑन दैट जैसे प्री फ्रंटल कॉर्टेक्स के बारे में कुछ लोग जानते होंगे कुछ लोग नहीं भी जानते होंगे लिंक सिस्टम ऐसे डिफरेंट ब्रेन के जो पार्ट्स हैं और वो किस तरह से
(06:57) काम करते हैं उसके बारे में वी कैन टच अपऑन बीली या तो ब्रेन के चार मेन और हिस्से होते हैं जिसको हम कॉर्टेक्स बोलते हैं जिसको बड़ा ब्रेन बोला जाता है उसके गहराई में कुछ ऑर्गन्स होते हैं जिसको हम एक्स्ट्रा पिरामिडल सिस्टम बोलते हैं इसके अलावा एक हिस्सा होता है जिसे हम ब्रेन स्टेम बोलते हैं जैसे पेड़ का तना होता है उस तरीके से ब्रेन स्टेम और एक होता है हमारा छोटा दिमाग जिसको हम सेबल बोलते हैं तो जो बड़ा दिमाग है कॉर्टेक्स उसके चार हिस्से होते हैं ऑन ईच साइड तो राइट फ्रंटल कॉर्टेक्स लेफ्ट फ्रंटल कॉर्टेक्स लेफ्ट ऑक्सीप्रो राइट टेंपोरल एंड लेफ्ट प राइटल
(07:40) एंड राइट प राइटल तो इस तरीके से आठ सेगमेंट्स हो गए इसमें हर एक का अलग-अलग काम है अब आप यह समझ लीजिए कि जो ब्रेन का आगे वाला हिस्सा है जिसे हम फ्रंटल कॉर्टेक्स बोलते हैं वह एक साइलेंट हिस्सा समझा जाता था अब तक बट जैसे जैसे रिसर्च हुई पता चला कि यह तो सबसे इंपोर्टेंट एरिया है ब्रेन का हां आजकल बहुत सारी बात हो रही है प्री फ्रंटल कॉर्टेक्स की जी आपने बिल्कुल सही कहा तो फ्रंटल कॉर्टेक्स में हमारे सारे हायर फंक्शंस सारे एंबेडेड वहां पे होते हैं राइट साइड इज मोर कंसर्न विद द एब्स्ट्रेक्ट पार्ट एंड द लेफ्ट पार्ट इज मोर कंसर्न विद द फिजिकल पार्ट
(08:16) जैसे हमें कुछ बोलना है या हमें कुछ समझाना है तो व लेफ्ट साइड से आएगा बट कोई पिक्चर हम देख रहे हैं उसकी ब्यूटी को समझना है वो राइट साइड से आएगा मतलब इमेजिनेशन क्रिएट जो है वो राइट ब्रेन का काम है और जो फिजिकल एटिबल बनले का काम है अब जैसे आपके घर में शादी है अब आपको शादी की प्लानिंग करनी है पहले आपको लड़की ढूंढनी है लड़के के लिए या लड़का ढूंढना है लड़की के लिए उसके बाद आप कौन-कौन से फंक्शंस होंगे वह डिसाइड करेंगे फिर उसकी गेस्ट लिस्ट डिसाइड करेंगे उसके बाद आप कपड़े डिसाइड करेंगे फिर वेन्यू डिसाइड करेंगे फिर मेन्यू
(08:55) डिसाइड करेंगे फिर इवेंट्स डिसाइड करेंगे फिर विदाई करेंगे तो इस सेगमेंट में देयर इज अ पर्टिकुलर प्लानिंग देयर इज अ सीक्वेंस ऑफ इवेंट कि कौन सी चीज पहले कौन सी चीज बाद में ऐसा नहीं हो सकता ना कि विदा पहले करवा दे और फिर उसके बाद हो जाए तो यह सीक्वेंस प्लानिंग यह सारी चीजें फ्रंटल लोब में होती है तो यह बोला जाता है इनको हायर फंक्शंस ऑफ द ब्रेन या एग्जीक्यूटिव फंक्शंस ऑफ द ब्रेन हमने सुना होगा ना सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तो हमारे ब्रेन का सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर या सीईओ इज द फ्रंटल पार्ट देन द मूवमेंट जो फिजिकल मूवमेंट होते हैं और जो
(09:33) सेंसेशंस होती है यह वाला हाथ हमारा राइट साइड से कंट्रोल्ड है और ये वाला हाथ हमारा लेफ्ट साइड से कंट्रोल है सो उल्टा होता है राइट पार्ट ऑफ ब्रेन जो है वो आपके लेफ्ट वाले हाथ का कंट्रोल करेगा बॉडी का बॉडी और जो लेफ्ट पार्ट ऑफ ब्रेन है वो राइट साइड वाली बॉडी को कंट्रोल करेगा ये मोटा है ये मोटा मोटा हिस्सा है समझाने के लिए लोगों को अगर जो हम इसकी डेप्थ में जाए तो आपको पता चलेगा कि 10 पर राइट हैंड इज कंट्रोल्ड बाय लेफ्ट साइड एंड 10 पर ऑ द अदर साइड इ आल्सो कंट्रोल्ड बाय द सेम साइड सो इट्स वेरी कॉम्प्लिकेटेड बट समझाने के लिए हम यह कह
(10:05) सकते हैं कि अगर जो राइट ब्रेन डैमेज होगा तो लेफ्ट साइड के बॉडी पर इफेक्ट पड़ेगा तो दो पार्ट्स है एक वो जो मूवमेंट कर रहा है और एक वह जो सेंसेशन ले रहा है तो मैं अपने हाथ को टच करता हूं यहां पर तो हमारे राइट साइड के ब्रेन को पता चलता है इसी तरीके से यह वाला जो मूवमेंट है यह मेरा राइट साइड का ब्रेन कंट्रोल कर रहा है इसमें भी सिंपल सेश होती है और कॉम्प्लिकेटेड सेंसेशन होती है लाइक आई टच मैंने छुआ तो मुझे पता चला कि मुझे छुआ यह एक सेगमेंट है कितने प्रेशर से छुआ यह दूसरा सेगमेंट है उस टच का टेंपरेचर क्या है यह तीसरा सेगमेंट है एक जगह पर छुआ या
(10:46) दो जगह पर छुआ ये चौथा सेगमेंट है सो एवरीथिंग इज कंट्रोल्ड बाय डिफरेंट एस्पेक्ट्स ऑफ द पैराइटल लोब और ये सारी इंफॉर्मेशन ब्रेन रिकॉर्ड कर रहा है कि छूते हुए क्या टेंपरेचर है क्या प्रेशर है कितने पॉइंट्स है यह सब रिकॉर्ड हो रहा है जी क्योंकि आपने एक दफा आपका हाथ जल गया तो अगली दफा आपको पता है कि किसी गर्म चीज को नहीं टच करना नहीं तो फिर जलेगा सो दैट इज च इज द ब्रेन इज लर्निंग कांस्टेंटली लर्निंग एवरी सिंगल सेकंड फिर तीसरा पार्ट होता है टेंपोरल लोब तो टेंपोरल लोब है जो मेमोरी से संबंधित है तो राइट साइड का ब्रेन म्यूजिक एब्स्ट्रेक्ट टाइप की
(11:25) मेमोरीज विजुअल मेमोरीज पर ज्यादा कंट्रोल करता है और लेफ्ट साइड का जो टेंपो लो है वह लिंगुअल मेमोरीज को ज्यादा कंट्रोल करता है वर्बल मेमोरीज को ज्यादा कंट्रोल करता है तो आपने यह वाली पिक्चर पहले देखी हुई है जैसे ही आपने व पिक्चर देखी आपको एकदम याद आ जाएगा अच्छा इसका हीरो अमिताभ बच्चन था अगर जो आपने कोई गाना सुना तो उस गाने की जो म्यूजिक वाला कंपोनेंट है व राइट साइड का ब्रेन देखेगा बट उसके जो लिरिक्स है वो लेफ्ट साइड का ब्रेन देखेगा वा और जो फाइनल सॉन्ग है वो ब्रेन का सेंट्रल वाला पोर्ट जिसको हम बोलते हैं वहां पर जाकर आपको जो एंजॉयमेंट मिलता है
(12:03) एक सॉन्ग को सुनने के बाद दैट इज पर्सीवड एट द लेवल ऑफ द अमला बिकॉज इमोशंस आर इन द अमला च इ सेंट्रल पार्ट ऑफ द ब्रेन आपने जो दो तीन एग्जांपल बताए म्यूजिक से रिलेटेड या हाथ जलने से रिलेटेड तो ब्रेन ये सारी रिकॉर्डिंग करके कहीं स्टोर कर रहा है हमारी मेमोरी में स्टोर कर रहा है तो डॉक्टर साब मेमोरी क्या होती है बनती कैसे है मेमोरी एब्सलूट मैं इसको एक बहुत सिंपल तरीके से समझा सकता हूं कंप्यूटर के द्वारा कंप्यूटर में होती है रीड ओनली मेमोरी रैंडम एक्सेस मेमोरी और एक होती है हार्ड डिस्क तो सबसे पहले जब आप कोई चीज टाइप करते हैं तो क्या होता है वह चीज रम
(12:39) पर जाती है ठीक है रम पर वह चीज स्टोर हो जाती है पर्टिकुलर टाइम के लिए उसके बाद आप क्या करते हो उसको एडिट करते हो अरे इसमें तो सुमित की स्पेलिंग में डबल ईटी डाल दिया इसको काट के आईटी करना है उसके बाद यह लेटर ठीक नहीं थाय ग्रामर ठीक नहीं थी फिर उसके बाद आप क्या करते हो उसको दोबारा पढ़ते हो फिर सेव पर क्लिक करते हो जब आप सेव पर क्लिक कर देते हो तो व हार्ड डिस्क में चला जाता है इसी तरीके से हमारी ब्रेन की मेमोरी है सो फर्स्ट मेमोरी च द ब्रेन पर्सीव पहली चीज आती है वह आती है समझना कि मेरे से क्या बोला जा रहा है जब
(13:16) तक आप समझोगे ही नहीं मैं आपसे बंगाली में बात करनी शुरू कर दू एंड यू आर फ्रॉम केरला तो आपको यह नहीं समझ में आएगा मैं क्या बोल रहा हूं तो जब आप यह समझोगे नहीं कि मैं क्या बोल रहा हूं तो आप उसको अट टिली सुनने की कोशिश ही नहीं करोगे पता नहीं क्या बोल रहा है और प्रोसेस करना तो फिर दूर की बात बहुत ही दूर की बात है तो सबसे पहले आपको रजिस्टर करना पड़ेगा कि भाई मेरे से बोला क्या जा रहा है या मैं क्या देख रहा हूं जब आपने उसे रजिस्टर कर लिया फिर आप उसको रिपीट करते हो जैसे आपको कुछ याद करना है तो सबसे पहले क्या करते हैं पढ़ते हैं फिर समझते हैं कि हमने क्या
(13:51) पढ़ा फिर दोबारा उसके बाद उसे रिवाइज करते हैं तो जो रिवीजन वाला कंपोनेंट है जो समझने वाली कंपोनेंट है जैसे मैंने बताया रजिस्ट्रेशन वो होती है इमीडिएट मेमोरी मतलब तुरंत मेमोरी यह बहुत कम सेकंड्स के लिए रहती है और जब तक आप इसको बहुत ध्यान से नहीं सुनेंगे जब तक आपकी अटेंशन उस पर प्रॉपर नहीं होगी तब तक वह आपकी इमज शॉर्ट टर्म मेमोरी में नहीं जाएगी मतलब रैम पे नहीं जाएगी तो रजिस्ट्रेशन इज लाइक टाइपिंग एंड रिपीटेशन इज लाइक पुटिंग इट इनटू द इंटरमीडिएट मेमोरी या रम या शॉर्ट टर्म मेमोरी शॉर्ट टर्म तो शॉर्ट टर्म मेमोरी का मतलब यह है कि
(14:31) मैंने अभी मेरे पास किसी का फोन आया था किसका फोन आया था मुझे उसको फोन करना है फिर या ऐसा कि उसने मेरे को यह फलाना मैसेज दिया था मुझे यह सेकंड पर्सन को या थर्ड पर्सन को प्रोवाइड करना है सो दिस इज द शॉर्ट टर्म मेमोरी एंड देन दिस शॉर्ट टर्म मेमोरी को रिपीट करते रहते हैं रिपीट करते रहते हैं तो फिर वह लॉन्ग टर्म मेमोरी में चली जाती है तो यह तीनों कंपोनेंट्स मेमोरी के अलग-अलग टाइप की बीमारियों से संबंधित होते हैं आपका अटेंशन ठीक नहीं होगा तो आपकी शॉर्ट टर्म मेमोरी में जाएगा ही नहीं और शॉर्ट टर्म मेमोरी में नहीं जाएगा तो लॉन्ग टर्म
(15:06) मेमोरी में रजिस्टर हो की स्टोर नहीं होगा तो शॉर्ट टर्म मेमोरी और इमीडिएट मेमोरी एक्चुअली न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स के लिए ज्यादा इंपॉर्टेंट है लॉन्ग टर्म मेमरी उतनी इंपॉर्टेंट नहीं है हमारे अक्सर बोला जाता है कि मेरे दादाजी को तो यह भी पता है कि उनकी शादी में पंडित कौन आया था लेकिन वो यह भूल जाते हैं कि सुबह नाश्ता क्या था यानी कि लॉन्ग टर्म मेमोरी तो स्ट्रांग है लेकिन शॉर्ट टर्म मेमोरी डॉक्टर साहब लॉन्ग टर्म मेमोरी की हम जब बात करते हैं तो कई सारे हमारे साथ ऐसे इवेंट्स हो जाते हैं जो एक बहुत ज्यादा हैप्पीनेस दे जाए या बहुत ज्यादा
(15:59) मैंने बताया था ना कि उसमें वो हमेशा स्टोर्ड रहता है बट हार्ड डिस्क की एक पर्टिकुलर कैपेसिटी होती है तो आप क्या करते हो बीच-बीच में अपनी हार्ड डिस्क को साफ करते रहते हो ना तो जो चीज इंपॉर्टेंट थी वो बचा के रख लेते हो इसी तरीके से जो चीजें या जो इवेंट्स आपकी जिंदगी में इंपैक्ट करके चले गए वो हमेशा वहीं रहेंगे वो कहीं नहीं जाने वाले लेकिन कुछ ऐसी चीजें हां ठीक है मेरी शादी में पता नहीं कौन-कौन आया था भूल गए कोई प्रॉब्लम नहीं है मेरे साथ में मेरी क्लास में 55 लोग थे उसमें से मेरे फ्रेंड्स तो सात थे वो सात याद है बट बाकियों में हो सकता है 10 12
(16:33) के नाम भूल जाए दैट इज नॉट इंपॉर्टेंट सो जो चीजें आपकी लाइफ पर इंपैक्ट बनाती हैं वो इंपैक्ट है जो हमेशा रहेगा आपके साथ वो कहीं नहीं जाने वाला कभी भी नहीं जाएगा आप कुछ भी कर लीजिए डॉक्टर साहब तो ये कितना इवोलेट होता है और कितना वॉलंटरी होता है कि आप अपने लॉन्ग टर्म मेमोरी में क्या स्टोर के रखो स्टोर करके रखो इसमें कितना आपका खुद का कंट्रोल और इवॉल्वमेंट है और कितना यह अपने आप एक एक बुरी की तरह या एक अच्छे अचीवमेंट की तरह आपके साथ चिपक गया है ब्रेन में यस दैट अ वेरी इंपोर्टेंट क्वेश्चन एंड अ वेरी गुड क्वेश्चन तो द
(17:08) इवेंट्स च्च हैपन जो आपके साथ हो जाता है वो तो कुछ भी करके आप नहीं निकाल सकते हैं बट जो आप लर्न करते हो वो आपके वॉलंटरी कंट्रोल में होता है डॉक्टर साहब आपने जो बहुत इंटरेस्टिंग एक बात की वो ये कि शॉर्ट टर्म मेमोरी प हम ज्यादा ध्यान देते हैं क्योंकि इसका ज्यादा रोल है एक मूवी भी आई थी गजनी करके जिसमें था शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस हो गया है तो शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस होता क्या है और इसका क्या इंपैक्ट है हमारी जिंदगी में वही मैं कह रहा था आपसे कि लॉन्ग टर्म मेमरी या तो अफेक्टेड ही नहीं होगी या बहुत लेट अफेक्टेड होगी उसको हम किसी भी बीमारी के
(17:46) साथ को रिलेट नहीं करते क्योंकि हमें मालूम है कि लॉन्ग टर्म मेमरी ना जाना बीमारी नहीं है हमारे लिए बीमारियां वो होती है जिसमें शॉर्ट टर्म मेमरी जाती है वो हमारे लिए इंपॉर्टेंट है कैसे कि मम्मी ने मेरी खाना खाया या नहीं खाया वह भूल गई उन्होंने बोला मेरे से कि आज तो तुम्हारी वाइफ ने मुझे खाना ही नहीं दिया तो दिस इज अ पॉइंट ऑफ कॉन्फ्लेट इन द हाउस बट उन्हें याद ही नहीं है यह शॉर्ट टर्म है मेरी है इसका लॉस इंपॉर्टेंट है आपने मम्मी को कोई मैसेज दिया वह आपकी वाइफ को बताना भूल गए दैट इज इंपोर्टेंट लेकिन उनको यह लगता है कि वो बता चुके हैं
(18:27) वो बता चुकी है तो ये चीज इंपॉर्टेंट इसलिए है क्योंकि पेशेंट को इसके बारे में जानकारी नहीं है उसको पता ही नहीं है कि उसने ये कर लिया ये चीजें इंपॉर्टेंट होती हैं बीमारियों के लिए तो जब हम डिमेंशिया की बात करते हैं या मेमोरी लॉस की बात करते हैं तो हमारे पास पेशेंट्स अक्सर आते हैं कि डॉक्टर साहब इनकी मेमोरी तो बहुत ही बढ़िया है इनको यह भी याद है कि शादी में कितने लोग आए थे इनको यह भी याद है कि गांव में बाढ़ आई थी इनको ये भी याद है उस टाइम पे कितने दिन तक पानी भरा रहा था गांव में ये सब चीजें उनको पूरी तरीके से याद है डॉक्टर साहब मेमोरी तो बहुत ही
(19:02) अच्छी है इनकी फिर मैं उनसे पूछता हूं अच्छा यह बताइए आज आपने सुबह नाश्ते में क्या खाया था आज तो मैंने पोहा खाया था तो फिर रिश्तेदार बताते हैं पोहा तो घर में भक्तों से नहीं बना तो दिस इज व्हाट इज इंपॉर्टेंट हमें जाना था वॉशरूम हम पहुंच गए किचन दैट इज इंपॉर्टेंट आपकी ओवरऑल लाइफ की फंक्शनालिस पेशेंट को कन्विंसिंग लेकिन उनकी मेमोरी तो यही बता रही है कि नहीं मैंने किया ही नहीं या फिर मैंने तो पोहा ही खाया है लेट्स से तो फिर कैसे कन्विंसिंग ऑफ व्यू से उ कविंस कर पॉइंट
(19:55) यह है कि कौन सी चीजें इंपोर्टेंट है किसी बंदे को समझने के लिए कि उसे मेमोरी लॉस है कई दफा क्या होता है पेशेंट बहुत ज्यादा डिप्रेस्ड होते हैं उनको यही नहीं पता होता कि वह कहां है क्या कर रहे हैं तो दे कम अप विद देर मेमोरी प्रॉब्लम्स तो अगर जो कोई पेशेंट कंप्लेंट कर रहा है कि उसे मेमोरी काल प्रॉब्लम है तो यूजुअली उसे मेमोरी का प्रॉब्लम नहीं होगा जब रिश्तेदार बोलते हैं कि भाई इसको तो यही नहीं याद रहता कि सुबह इसने कपड़े क्या पहने थे यह जूते हाथ में पहनने लगता है या कमीज जो है पैरों में पहनने ल कपड़े जो है उनको सीधे देंगे तो यह उल्टा
(20:32) करके पहन लेंगे तो जो पेशेंट्स खुद कंप्लेंट करते हैं कि मुझे मेमोरी मेरी को तो कुछ भी नहीं याद है डॉक्टर साहब मुझे तो कुछ भी नहीं याद मैंने आज सुबह क्या किया मुझे याद ही नहीं रहता मैंने आज किससे मुलाकात करी मुझे याद ही नहीं रहता अक्सर वो पेशेंट्स नॉर्मल होते हैं और जब पेशेंट्स के रिलेटिव्स कंप्लेंट करते हैं कि डॉक्टर साहब मुझे लग रहा है इनकी मेमोरी जा रही है धीरे-धीरे करके वो एक्चुअली बीमारियों से ग्रस्त होती तो हम उन्हीं प्रॉब्लम्स के लिए होते हैं जो रिलेटिव्स बताते हैं जो बीमारी वाला मरीज है वह अक्सर बड़ा खुश होता है बिकॉज वो तो
(21:07) अपनी जिंदगी में मस्त है उसने पुआ खाया था उसने रात को पिक्चर देखी थी और उसने अपने घर में एक बहुत अच्छा म्यूजिक का प्रोग्राम किया था उसको यह याद है और उसके हिसाब से व बहुत बढ़िया है रिश्तेदारों ने कहा कि डॉक्टर साब ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है तो दैट इज एक्चुअली अ मेमरी प्रॉब्लम न द पेशेंट से डॉक्टर मुझे कुछ नहीं याद है यह कौन ये मेरे साथ कौन बैठी है मैं नहीं जानता इसको डॉक्टर साहब एक ऐसी कॉमन प्रॉब्लम जो आजकल मैं अपने बहुत सारे फ्रेंड्स के साथ अपने साथ भी महसूस कर रही हूं वो ये है कि जैसे हमने अपना गाड़ी के विंडोज ऊपर किए या नहीं किए हम घर का ताला
(21:42) लगा के आए या नहीं आए हमने गैस ऑफ की थी या नहीं की थी हमने मोटर चलाई थी या नहीं चलाई थी इस तरह की चीजें बहुत सारे लोग इसके साथ स्ट्रगल करते हैं कि मुझे याद ही नहीं और बार-बार जाके चेक करना तो क्या ये अटेंशन वाला जो है उसका प्रॉब्लम है या फिर ये शॉर्ट टर्म मेमोरी क्योंकि आपने कहा अटेंशन है शॉर्ट टर्म मेमोरी है लॉन्ग टर्म मेमोरी दिस इज वेरी कॉमन एंड दिस इज एब्सलूट नॉर्मल ये कोई अर्ली साइन नहीं है डिमेंशिया का बिल्कुल भी नहीं है यही सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है कि मैंने उसको वो मेरी चाबी पता नहीं कहां रखी चश्मा मेरे
(22:10) सर पर लगा हुआ था मैं सारे घर में ढूंढता रह गया डॉक्टर साहब मेरी तो मेमोरी जा रही है यह बिल्कुल नॉर्मल है आप अपने कमरे से निकले किचन में गए क्योंकि आपको बिस्किट लेना था और किचन में पहुंच के आप भूल गए कि आप क्यों आए थे करेक्ट दिस इज एब्सलूट नॉर्मल आपने गाड़ी की चाबी गाड़ी में छोड़ दी और आप घर के अंदर आ गए दैट इज एब्सलूट नॉर्मल क्योंकि वो चीज आपके लिए इंपॉर्टेंट नहीं है आपके लिए क्या इंपॉर्टेंट है आपके लिए इंपोर्टेंट क्या फर्क पड़ता है आप कमरे में जाओगे अरे यार मैं तो भूल गया पता नहीं क्यों आया था मैं कोई फर्क नहीं
(22:43) पड़ता आप वापस जाओगे दो मिनट में फिर से याद आ जाएगा हां मेरे को तो बिस्किट लेने थे उससे आपकी लाइफ पर कोई मेजर इंपैक्ट नहीं पड़ रहा हां चाबियां से मतलब गाड़ी वाड़ी चुड़ सकती है वो बात अलग है लेकिन इन जनरल कोई फर्क नहीं पड़ने वाला को अमूमन तौर पर इंडियन हाउसहोल्ड में लापरवाही कहा जाता है केरलेससवीडियो और उसी चीज को सॉरी अटेंशन ट्रैम नहीं है
(23:33) जो आप टाइप कर रहे हैं कंप्यूटर में दैट इज अटेंशन जो आप सेव कर रहे हैं वह रम है और जो आपके कंप्यूटर पर सिस्टम पर चल रही है जो पर्सिल परमानेंटली रिकॉर्ड हो गई है वह लॉन्ग टर्म है तो अटेंशन जब लंबे समय तक रहती है तभी वह शॉर्ट टर्म मेमरी में जाती है जब तक आपकी अटेंशन प्रॉपर नहीं होगी वो लॉन्ग टर्म मेमोरी में जाएगी ही नहीं तो तो अटेंशन इज द फर्स्ट थिंग व्हिच इंसाइट्स यू टू लर्न समथिंग डॉक्टर साहब जैसा कि मैं अभी बच्चों की बात कर रही थी यंग एडल्ट्स में भी ये प्रॉब्लम है एक्चुअली हर एज ग्रुप में ये प्रॉब्लम है कि हमारे अटेंशन स्पैन
(24:13) जो है अब बहुत कम होते जा रहे हैं तो अटेंशन को या फोकस को कंसंट्रेशन को कैसे इंप्रूव कर सकते हैं देखिए सबसे पहली प्रॉब्लम यह है कि जो हमारा ब्रेन है उसकी अच्छी एक्टिविटी के लिए रेस्ट सबसे ज्यादा जरूरी है और रेस्ट आता है डिक्रीज एक्टिविटी से इंक्रीजड एक्टिविटी से नहीं तो स्लीप सबसे ज्यादा जरूरी है और टाइम पर सोना उससे ज्यादा जरूरी है हमारे साथ में प्रॉब्लम क्या है कि जो हमारी लाइफ है वह चार पांच यंत्रों के चारों तरफ घूम के रह गई है जब आप जाते हैं बेड पर तो सबसे पहले तो आपका सबसे बड़ा दुश्मन होता है स्लीप के लिए आपका
(24:57) टीवी उसके बाद नेक्स्ट होता है आपका मोबाइल फोन और उसमें भी यह पांच छह चीजें जो हैं इंस्टा फसबुक सारी चीजें आप कर रहे होते हैं तो जो स्लीप का सबसे अच्छा टाइम है वह चला जाता है हमारी जो नींद है वह सबसे अच्छी आती है रात को 9:30 10 बजे से लेके और 12 बजे तक उसके बाद जो सेकंड साइकिल स्लीप आती है व
(25:43) सुबह : बजे आती है और वो वाली स्लीप उतनी रेस्टफुल नहीं होगी आपको सुनकर आश्चर्य होगा स्लीप इज नॉट अ नेगेटिव फेनोमेन यह एक नेगेटिव एक्टिविटी नहीं है कि ब्रेन थक गया तो सो गया सोना भी एक कॉम्प्लिकेटेड पॉजिटिव एक्टिविटी है तो ब्रेन को सोने के लिए भी काम करना पड़ता है ऐसा नहीं है कि आप ब्रेन शांत हो जाता है ब्रेन की एक्टिविटी डिफरेंट टाइप की हो जाती है सोने के लिए तो वह जब तक उस एक्टिविटी को छह से सात घंटे तक नहीं कवर करेगा तब तक अटेंशन होगी नहीं प्रॉपर तो स्लीपिंग इन टाइम स्लीपिंग फॉर एप्रोप्राइटिंग जो आपकी अटेंशन को बेटर कर
(26:28) सकता है और यही एक चीज है जो हमारे इस टाइम की जनरेशन में प्रॉब्लम आ रही है क्योंकि उनका स्लीप टाइम होता है रात के 1:30 बजे 2 बजे : बजे और फिर सुबह उठेंगे अपने मन से एंड देन दे विल मोस्ट लाइक स्किप दे ब्रेकफास्ट और हैव अ कप ऑफ कॉफी उसके बाद व जाएंगे ऑफिस में और यह सारी चीजें उनकी अटेंशन को अफेक्ट करती है डॉक्टर साहब ड्रिंक्स जैसे कि कॉफी एनर्जी बूस्टर्स हाई शुगर ड्रिंक्स जो हम लेते हैं इंस्टेंट डोज ऑफ एनर्जी के लिए क्योंकि जैसा आपने कहा जो लोग अच्छे से सही टाइम पर नहीं सोते हैं उनके अंदर सुबह उठते ही एक एनर्जी डेफिसिट होता है चाहे
(27:04) वो इस बात को माने या ना माने बहुत सारे लोग ये स्टेटमेंट बोलते हैं कि मैं कॉफी के बिना दिन नहीं शुरू कर पाता हूं या मुझे तो कुछ पीना होता है कोई स्टिमुलेटिंग की एक्टिविटी पे क्या इंपैक्ट व्हाट आई एम ट्राइट आस्क इज कि कॉफी जो है उसका क्या इंपैक्ट है आपके ब्रेन हेल्थ पर यस कॉफी इज अ स्टिमुलेटिंग ऑर्गन वो है केमिकल्स वो है मेलाटोनिन और एक्टिविटी बढ़ाने वाले एक केमिकल होता है उसे बोलते हैं हम रक्सिन तो इनके बीच में एक बड़ा नाजुक सा रिलेशनशिप रहता है राइट तो मेलाटोनिन की एक्टिविटी शाम को करीब 4:30 5 बजे से शुरू होती है और 10 10:30 बजे तक मैक्सिमम
(27:46) पहुंचती है वच इज द बेस्ट टाइम फॉर स्लीपिंग और यह एक्टिविटी करीब 3:30 4 बजे के बाद खत्म हो जाती है उसके बाद रेक्शन आनी शुरू होती है रेक्शन धीरे-धीरे करके आपकी वेक फुलनेस को बढ़ाती है तो कैफीन में स्टिमुलेटिंग को कम करता है तो उसकी वजह से आपका अटेंशन बेटर हो जाता है तो जब आप चाहते हैं कि आपको नींद बनी है तो आप कॉफी ले लेंगे या चाय ले लेंगे दोनों में अलग-अलग टाइप के केमिकल स्टिमुलेटिंग बट एक कॉफी आप सुबह लेते हैं तो उसमें कोई
(28:31) प्रॉब्लम नहीं है पॉइंट इज जब वही एक्टिविटी इसलिए होती है कि मैं चार घंटे की नींद लूंगा और चार कॉफी पी लूंगा और काम चलाता रहूंगा तो आपका ब्रेन कहीं ना कहीं जाकर एक बहुत बुरी स्थिति में पहुंचेगा जब आपको चार घंटे की स्लीप भी प्रॉपर नहीं हो पाएगी क्योंकि आपने अपना पूरा सिस्टम ही उल्टा पुल्टा कर लिया एक्स्ट्रा कॉफी पी के डॉक्टर साहब कुछ 15 साल पहले करीब एक बहुत बड़ी स्टडी आई थी जिसमें बताया था कि डिस्पिन खाना एस्पिरिन खाना जो भी दवाइयां है जिनके लास्ट में रिन आता है या इन आता है वो खाना सरदर्द के लिए बहुत ही डेडली
(29:07) हो सकता है उसके बारे में आप कुछ बताना चाहेंगे या बिल्कुल आपने सही कहा कि डिस्प्रिन आई थिंक दुनिया की सर दर्द की सबसे ज्यादा मिसयूज्ड दवाई है आपको सुनके आश्चर्य होगा कि डिस्प्रिन खाने से आपका ब्लड पतला हो जाता है और यदि आप रेगुलर ब डिस्पिन खाते हैं और आपको कहीं चोट लग गई आप कहीं गिर गए तो आपके ब्रेन में ब्लीडिंग हो सकती है आपके शरीर में ब्लीडिंग हो सकती है आपकी इंटेस्टाइंस में ब्लीडिंग हो सकती है और वो ब्लीडिंग कई दफा इतने हल्के रिसाव के रूप में होती है कि आपका हीमोग्लोबिन कम होता चला जाता है बट आपको पता ही नहीं चलता कि ब्लीडिंग हो
(29:47) भी रही है तो डिस्प्रिन को कम से कम लेना चाहिए इनफैक्ट नहीं लेना चाहिए वो पेन किलर के रूप में एक अच्छी दवाई है परंतु वो सिर्फ पेन किलर नहीं है और कई पेशेंट्स उसको अब्यूड़ोस दिन में दो दो तीन तीन डिस्पिन खाते हैं क्योंकि डिस्पिन होती है उस अब इजली अवेलेबल होती है हिंदुस्तान में ओवर द काउंटर मिल जाती है कई दफा तो ऐसा भी होता है कि मरीजों को पेन किलर की वजह से पेन होने लगता है तो डिस्पिन एक बहुत खराब दवाई है सर दर्द को ठीक तो डॉक्टर साब कौन सी सेफ दवाइयां है जो ले सकते हैं देखिए इसके लिए ना यह जवाब देना ही नहीं चाहिए बेस्ट कि आप अपने
(30:29) डॉक्टर से मिलिए यदि आपको हेडेक है समझिए कौन से प्रकार का हेडेक है और यह देखिए कि वो एक्चुअली हेडेक सीरियस है या सिर्फ सीवियर है अगर जो सीरियस एडेक है तो उसके आइडेंटिफिकेशन है या टेंशन टाइप हेडेक है तो आपका डॉक्टर आपको बताएगा कि आपके लिए यह पर्टिकुलर दवाई बेस्ट है डॉक्टर साहब सबसे सीरियस हेडेक के कौन से तीन सबसे बड़े रेड फ्लैग्स हैं जहां से हमें पता चलेगा कि यह बात हाथ से निकलती जा है बिल्कुल तो सबसे इंपॉर्टेंट हम इस तरीके से बताएंगे कि वो जो लाइफ थ्रेटनिंग होते हैं और वो जो लाइफ कॉम्प्रोमाइजिंग होते हैं और वो जो लाइफ
(31:07) अल्टरनेटिंग होते हैं लेट्स पुट इट दिस थ्री वेज तो सबसे इंपॉर्टेंट होता है वो हेडेक जो एक सेकंड में ऐसा लगे कि आपका सर फट जाएगा मतलब मरीज बोले कि डॉक्टर साहब मैं 9:1 प बिल्कुल ठीक था और विदन सेकंड्स मुझे ऐसा लगा कि मेरे सर में कोई बम फट गया तो एक बीमारी होती है जिसे हम सबरे कनड हेमरेज बोलते हैं उसमें दिमाग के अंदर छोटे-छोटे गुब्बारे बन जाते हैं ब्लड वेसल्स में और व गुब्बारे फट जाते हैं तो जब वह फटते हैं तो एक सेकंड में ब्लड निकलता है और वह ब्रेन की जो झिल्ली होती है उसको इरिटेट करता है एक बड़ी मजेदार बात है कि हमारा ब्रेन
(31:46) पेन सेंसिटिव होता ही नहीं है तो यदि हम ब्रेन तक पहुंच गए हैं और ब्रेन को काट भी दे तो आपको पता भी नहीं चलेगा ब्रेन की ब्लड वेसल्स ब्रेन की झिल्ली और ब्रेन की जो गंदा खून खाने लाने वाली वनस होती है सिर्फ वो सेंसिटिव होती है ब्रेन के लिए ब्रेन में एक्चुअली पेन के पर्सीव करने का कोई सिस्टम ही नहीं है पेन सेंटर्स नहीं है ब्रेन में जी नहीं बिल्कुल नहीं तो जो ब्लड झिल्ली को इरिटेट करता है उससे एकदम दर्द होता है और वो इसको हम थंडर क्लैप हेडेक बोलते हैं तो ये सबसे सीरियस बीमारी है जब यह नस फटती है तो 50 पर पेशेंट डोंट
(32:26) सरवाइव और य नस अगर जो फट गई हमने उसका इमीडिएट ट्रीटमेंट नहीं किया तो और यह दोबारा ब्लीड कर गई तो 80 पर विल नॉट सरवाइव 80 प्र लोगों की मृत्यु हो जाएगी उसी क्षण तो ये सबसे सीरियस है उसके बाद कोई ऐसा हेडेक जो नया नया शुरू हुआ हो जैसे मेरे को हेडेक नहीं होते अगर जो सडन मुझे हेडेक होने लगे और ऑलमोस्ट डेली होने लगे फिर वो हेडेक्स जो अर्ली मॉर्निंग हो या वो हेडेक्स जिनके साथ में बॉडी का कोई हिस्सा वीक पड़ने लगे जैसे एक साइड की पैरालिसिस आने लगे धीरे-धीरे करके एक साइड का बॉडी कर्म करना बंद कर दे या ऐसा हो कि एकदम से विजन लॉस हो गया सर दर्द के
(33:08) साथ यह होते हैं जो लाइफ थ्रेटनिंग होते हैं थ्रेटनिंग क्या मतलब वो मार ही देते हैं पे ए लाइफ एंडिंग टाइप्स के लाइफ थ्रेटनिंग तो ऐसे पेशेंट्स का मतलब ब्रेन में कोई ट्यूमर हो गया कोई इंफेक्शन हो गया या कोई ऐसा पेशेंट जिसको हेडेक के साथ में बुखार हुआ या हेडेक के साथ में पेशेंट बेहोश हो गया तो यह सारे सीरियस हेडेक्स है फिर एंड ऑफ लाइफ या बिगिनिंग ऑफ लाइफ में जो हेडेक्स होते हैं जैसे बच्चे में हेडेक है बच्चों को बहुत सीरियसली लेना चाहिए हेडेक्स को क्योंकि बच्चे अपनी चीजों को पूरी तरीके से एक्सप्रेस नहीं कर पाते वह बता नहीं
(33:47) पाते ओल्ड लोग हैं जैसे 60 साल के बाद नया हेडेक शुरू हुआ किसी को तो एक्सट्रीम्स ऑफ एज पर कोई हेडेक होता है दैट इज इंपोर्टेंट देन दोस हेडेक्स च आर सीन जिन को ऑलरेडी कोई बीमारी है मान लीजिए किसी को एचआईवी है या मान लीजिए किसी को कैंसर है या किसी की किडनी खराब है लिवर खराब है उसको सडन हेडेक स्टार्ट हो जाए तो यह सारी चीजें ऐसी है जिनको हम रेड फ्लैग्स बोलते हैं तो अगर किसी को भी इस तरह की कोई सेंसेशन फील हो रही है तो उनको डॉक्टर को कंसल्ट करना चाहिए इटली करना चाहिए विदाउट वेस्टिंग टाइम ये बहुत बड़े रेड फ्लैग्स है जी डॉक्टर साहब एक और कॉमन
(34:24) न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जो है वो है पार्किंसन जिसके मरीज हालांकि कम है अब तक लेकिन बढ़ते भी जा रहे हैं साल दर साल हम देख रहे हैं तो लेट्स टॉक अबाउट पार्किंसन नाउ हां तो देखिए ऐसा है कि पार्किंसन के चार मुख्य लक्षण होते हैं एक होती है स्टिफैन सेबिल मतलब थोड़ा सा आगे झुक के चलना और चौथे होते हैं टमस कंपन तो ये चारों चीजें ओल्ड एज में भी बहुत कॉमन है ज्यादातर अमूमन तौर पर ओल्ड एज
(35:12) में क्योंकि मस्कुलर स्ट्रेंथ भी कम हो जाती है बोन डेंसिटी भी कम हो जाती है तो ट्रम होना या ठीक से अपनी मूवमेंट को कंट्रोल ना कर पाना ये उसकी वजह से भी हो सकता है लेकिन आप कह रहे हो कि ये पार्किंसन के भी साइन हो सकते हैं तो इतने ओवरलैपिंग साइंस है इतने कन्फ्यूजिंग साइंस है कि आपको पता नहीं चलता है कि आपकी हेल्थ कम है या फिर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हो रहा है जी इसीलिए कई दफा पेशेंट हमारे पास लेट पहुंचते हैं तो अब इनको कैसे आइडेंटिफिकेशन के लक्षण हमेशा एक साइड होंगे अब आप सोच के देखो एक 70 साल साल का आदमी है उसका
(35:59) राइट हैंड और लेफ्ट हैंड दोनों 70 साल के होंगे ना तो अगर जो टमर होने हैं उम्र की वजह से तोव दोनों साइड होने चाहिए अगर जो अकड़ा हट है तो दोनों साइड होनी चाहिए ऐसा नहीं हो सकता ना कि लेफ्ट हैंड 65 साल का ही रह गया राइट हैंड 70 का हो गया तो पार्किंस का सबसे इंपॉर्टेंट चीज है एसिमेट्री तो एक साइड ट्रैमर होगा एक साइड में स्टिफ्ट साहब लेकिन जैसे मैं योग की काफी समय से स्टूडेंट रही हूं पिछले 10 सालों से मैं प्रैक्टिस भी कर रही हूं दिखा भी रही हूं तो हमने जो अपनी प्रैक्टिस में देखा है वो देखा है कि बॉडी का अमूमन तौर पर एक हिस्सा जो है वो दूसरे हिस्से से
(36:35) ज्यादा एक साइड दूसरी साइड से ज्यादा स्टिफ्ट होगी दूसरी तरफ की को आप शायद ज्यादा स्ट्रेच कर पाएंगे तो मैं मतलब ओवरलैप ढूंढने की कोशिश कर रही हूं कि कंफ्यूजन कितना ज्यादा क्रिएट हो सकता है क्योंकि ये तो एक नॉर्मल सिमट भी है अगर हम ऐसे व्यक्ति हैं जो कोई किसी तरह की एक्सरसाइज करते आए हैं तो हमने अपने कोचेस से अपने टीचर से सुना ही होगा कि एक साइड की बॉडी सबकी ज्यादा अभी वो इंसान अभी 60 का हो गया 70 का हो गया तो वो सोच रहा है कि तो नॉर्मल है हां वही मैं बता रहा था तो पार्किंसन में पॉजिटिव सिम्टम्स आते हैं यह सारी चीजें
(37:08) जो होती है जो स्टिफ्ट सिमम तो पॉजिटिव सिमम हाथ ऐसे हिलता है तो दिस इज कॉल्ड एज पिल रोलिंग टमर जैसे कोई माला जप रहा है या ड्रम बीटिंग टमर जैसे कोई ढोलक बजा रहा है यह एक साइड हो यह पॉजिटिव सिमट है यह हाथ मूव ना करे या स्टिफ्ट है तो पॉजिटिव और नेगेटिव सिमम एक साइड के बॉडी में होना दैट इज वेरी इंपोर्टेंट यह बहुत इंपोर्टेंट सिमम है पार्किंसन का फिर पेशेंट्स के फेशियल एक्सप्रेशंस बदल जाते हैं ऐसा लगता है जैसे हम बोलते हैं ना जैसे आप रमी खेलते हो तो आप किसी को नहीं दिखाना चाहते मेरे पास कौन से पत्ते हैं तो दिस इ कॉल्ड ए
(37:43) पोकर फेस या रमी वाला फेस जब आप नहीं बताना चाहते कोई एक्सप्रेशन ही नहीं है डल एक्सप्रेशनलेस फेस फिर जब आप चलते हैं तो आपके हाथ हिलते हैं दोनों हाथ अल्टरनेटिवली स्विंग करते हैं यह पैर आगे जाता है तो यह हाथ आगे जाता है पार्किंसन के मरीजों में यह सबसे पहले चला जाता है तो वेन दे वक उनके हाथ स्विंग नहीं करते अक्सर पेशेंट की फैमिलीज बताती है कि डॉक्टर साहब जब यह चलते हैं तो इनका तो यह वाला हाथ हिलता ही नहीं यह वाला हाथ दूसरा ला ठीक चलता है फिर माइक्रोग्राफिया राइटिंग छोटी हो जाती है फिर स्वेटिंग ज्यादा होने लगती है स्मेल बहुत जल्दी
(38:22) जाती है पार्किंसन पेशेंट को कॉन्स्टिपेशन बहुत जल्दी होता है पार्किंसन पेशेंट को और य पार्किंसन के पेशेंट्स को यह वाले सिमटम्स कई दफा बीमारी आने से पहले चले जाते हैं तो स्मेल किसी की जल्दी चली जाए किसी पेशेंट की कॉन्स्टिपेशन होने लगे या राइटिंग छोटी होने लगे तो दैट कुड बी अ वेरी अर्ली साइन ऑफ पार्किंसन डॉक्टर साहब हमने रिसेंटली एक एपिसोड कैंसर पर भी किया है जिसमें हमने डिफरेंट स्टेजेस ऑफ कैंसर की बात की है तो क्या पार्किंसन के भी ऐसे कोई डिफरेंट स्टेजेस होते हैं जिसमें आपके पास पेशेंट्स आते हैं कि ये तो थर्ड स्टेज
(38:56) प आ गया तो मतलब डिफिकल्ट हो गया अभी फर्स्ट स्टेज प आ गया तो मतलब अर्ली डिटेक्शन हो गया तो क्यर आसान हो सकता है दैट्ची में आने का तो कोई विचार नहीं है ना डॉक्टर साहब मैं न्यूरोलॉजी साइकोलॉजी फिलोसोफी इतना पढ़ती हूं आप बिलीव करेंगे 2021 में मैंने छ महीने ब्रेन को इतने डिटेल में पढ़ा कि मुझे मेरे घर वाले कहने लगे कि तुम डॉक्टर बॉक्टर बनना है क्या तुमको लेकिन मुझे इतना इंटरेस्ट है मुझे इतनी क्यूरियोसिटी है लाइफ में मुझे सब चीजें जाननी है और सीखना है और और उसको फिर आगे भी अगर मैं कि की मदद कर पाऊ उस नॉलेज से जो हम कर रहे हैं कोशिश पॉडकास्ट
(39:30) के थ्रू मुझे मुझे चीज बहुत इंस्पायर करती है वेरी इंटेलिजेंट क्वेश्चन एक्चुअली उसके लिए एक बहुत जरूरी चीज है कि हम यह समझ ले कि पार्किंसन और पार्किंसन से मिलती जुलती बीमारियां कैसे होती हैं तो पार्किंसन एक वर्टिकल है एक प्रकार की बीमारी है इससे मिलती जुलती सात और बीमारियां होती है ठीक है उसमें मल्टी सिस्टम एट्रोसिटी मैं कोई भी नाम ले दूं आपको तो इंपॉर्टेंट यह है कि मैं तो सारे नाम ले दूंगा बट आपके व्यूवर्स को या जो लोग इसको देख रहे हैं उनके लिए कोई खास वैल्यू नहीं रहेगी तो आप ये समझ लीजिए एक है पार्किन सनस डिजीज जो क्लासिकल बीमारी है और एक है
(40:12) पार्किन सोनि जम जो पार्किंसन से मिलती जुलती बीमारी है जैसी है जैसी है इनमें फर्क करना क्यों जरूरी है क्योंकि जो भी हम दवाइयां देते हैं लिव डोपा है ब्रोमो क्रिप्टन है प्रेम पिक्सल है ये दवाइयों के नाम तो यह पार्किंसन में तो बहुत अच्छा काम करेंगी बट पार्किन सोनि जम में हमारे पास कोई नई दवाई नहीं है दवाई यही देंगे लेकिन इधर 100 में से 100 लोग 80 से 90 पर फायदा उठाएंगे और इधर 100 में से 20 लोग 20 से 25 पर फायदा उठाएंगे तो डिफरेंशिएबल विद नियर नॉर्मल लाइफ
(40:58) दवाइयों से रिस्पांडर पार्किंसन प्लस या पार्किन सोनि जम मिलती जुलती बीमारी है बट वह दवाइयों से रिस्प ही नहीं करेगी फिर ऑपरेशन होता है पार्किंसन के लिए बहुत अच्छा उसे डीप ब्रेन स्टिमुलेशन बोलते हैं जिसमें दिमाग के अंदर सूक्ष्म तार डालते हैं और एक पेसमेकर से उसको स्टिमुलेटिंग के सिमटम्स ऑलमोस्ट खत्म हो जाते हैं इट जस्ट लाइक अ कायाकल्प यह सिर्फ पार्किंसन डिजीज में किया जा सकता है पार्किंसन प्लस या पार्किन सोनिम में नहीं किया जा सकता तो यह समझना बहुत आवश्यक है उसके बाद हम स्टेजेस पर आए तो बेहतर रहेगा तो जो पार्किन सनस की स्टेजेस
(41:42) है व पांच स्टेजेस होती है पट फ टूथ फर 5 फव का पेशेंट जो है वो बेड रेडन या व्हीलचेयर बाउंड हो जाता है और पॉइंट फ में बीमारी सिर्फ एक साइड होती है और पेशेंट को खुद पता नहीं होता कि उसे पार्किंसन है उसके पेशेंट्स के रिलेटिव्स या डॉक्टर्स उसे बताते हैं कि तुम्हें पार्किंसन हो गया दैट इज पॉइंट फव स्टेज वन में एक साइड की बीमारी है लेकिन पेशेंट को टैमर्स आने शुरू हो गए हैं अकड़ा हट आनी शुरू हो गई है स्टेज टू में दोनों साइड की बीमारी हो गई है स्टेज थ्री में दोनों साइड की बीमारी हो गई है और चलने फिरने में प्रॉब्लम होने लगी है स्टेज फोर में उसको
(42:24) कॉम्प्लिकेशंस होने लगे हैं दवाइयों के और स्टेज फाइव में बेड प आ गया है तो यदि टाइम पर ट्रीटमेंट स्टार्ट हो जाए तो कोई भी पेशेंट स्टेज थ्री से आगे नहीं जाता पार्किंसंस डिजीज में और पार्किन सोनिजी में तीन से 5 साल में पहुंच जाएंगे यह डिफरेंस है डॉक्टर साहब एक और कॉमन न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जो अब होता जा रहा है या बढ़ता जा रहा है दैट इज डिमेंशिया याददाश्त चले जाना फॉरगेटफुल स हो जाना तो सबसे पहली बात तो फॉरगेटफुल बस होता क्या है क्या लिफाई करता है फॉरगेटफुल पर क्योंकि हमने भी कुछ देर पहले बात की कि अगर आप अपनी चाबी भूल जाते
(43:03) हैं आप अपनी गैस ऑन आपको याद नहीं किया आपने ऑन की थी या ऑफ की थी इस तरह की जो रोज आपके साथ 10 चीजें होती है आप भूलते हो क्या ये भी फॉरगेटफुल में काउंट होता है नहीं जी मैंने आपको बताया था जैसे तो इसको बेहतर तरीका यह बताने का कि वो प्रॉब्लम्स जो आपकी डेली लाइफ को इफेक्ट करने लगे वो मेमोरी प्रॉब्लम्स इंपॉर्टेंट होती है और वो डिमेंशिया का इंडिकेटर होता है तो आपने नहा लिया नहाने के बाद में आपको मोजे उल्टे पहन लिए या दो मोजे अलग-अलग टाइप के पहन लिए ट इज इंपॉर्टेंट थिंग आप जूते को हाथ में पहनने लगे दस्तानों को मोजे की जगह पहनने लगे या कमीज को पैर में
(43:45) पहनने की कोशिश करने लगे और उसे पता ना हो कि मैं यह गलत कर रहा हूं डिनायल ऑफ अ प्रॉब्लम इज आल्सो वेरी इंपोर्टेंट साइन फिर खाना खाया या नहीं खाया दई खाई है या नहीं खाई है फिर वॉशरूम में जाना है किचन पहुंच गए मैंने जैसा एग्जांपल दिया या इससे भी एडवांस लेवल पर जाकर किचन में जाकर टॉयलेट कर दिया ठीक है आपके जो बहुत क्लोज कांटेक्ट में लोग बाग हैं उनके बारे में आपको कंफ्यूजन होने लगे कि मेरे बेटे का नाम क्या था मेरे हस्बैंड का नाम क्या है मेरी बहू का नाम क्या है यह सारी चीजें यह जब होने लगती है ट इ इंपोर्टेंट ड साब डिमेंशिया
(44:27) पार्किंसन दोनों ऐसा लगता है कि एज के साथ एसोसिएटेड बीमारियां है जब आप एक एज पर पहुंच जाते हैं तब आप ज्यादा यू नो क्या कहेंगे उसे प्रोन हो जाते हैं इन बीमारियों के लेकिन आजकल क्या आप इसे यंगर जनरेशन में भी देख रहे हो पार्किंसन और डिमेंशिया दोनों क्योंकि मैं ऐसे कई यंग लोगों को जानती हूं जिनके हाथ हमेशा हिलते हैं नर्वसनेस की वजह से नहीं नर्वसनेस में तो मैंने देखा अच्छे-अच्छे लोग जो स्टेज प स्पीकर होते हैं उनके हाथ भी हिल रहे होते हैं कई लोग मेरे पॉडकास्ट गेस्ट होते हैं उनके भी हाथ हिल रहे होते हैं हालांकि उनमें से कई लोग डॉक्टर्स होते हैं बहुत
(44:56) अमलेश लोग होते हैं अपने क्षेत्र में लेकिन वो एक नर्वसनेस से टमर आना इज अ डिफरेंट थिंग एंड पार्किंसन इज अ डिफरेंट थिंग सो आई वांट टू नो कि एज पर क्या इसका इंपैक्ट है और कितना हमें ध्यान शुरू से देना चाहिए तो हमें इसके बारे में हमें ये डिस्कस करना चाहिए एक देर इज अ मेंटल एज एंड देर इज अ फिजिकल एज योर मेंटल एज इज कांग्रजूलैशनस बट यही प्रॉब्लम 40 साल में होने लगे तो दैट इज इंपोर्टेंट क्योंकि मेंटल एज एक 40 साल के बंदे की वो 40 साल की फिजिकल एज से मैच करनी चाहिए अगर जो आपकी 40 साल की फिजिकल एज में आपकी मेंटल एज 70 में पहुंच
(45:41) गई है वहां पर प्रॉब्लम आती है और फिर जैसे टर्स की बात आपने करी तो दोनों हाथ एक साथ कांप रहे हैं वह जेनेटिक प्रॉब्लम हो सकती है उसको हम एसेंशियल टमर बोलते हैं बट एक साइड का हाथ हिलना वो पार्किंसन है टमर छह या सात प्रकार के होते हैं हम उसकी डिटेल में नहीं जाएंगे बट जो भी पार्किंसन के अलावा वाले ट्रीमर्स है वो दोनों हाथों में होंगे फिर टिमस मल्टी एगल मल्टी प्लानर ऐसे ऐसे होंगे कभी कभी ऐसे हिलेगा हाथ कभी ऐसे हिलेगा यह जेनेटिक टैमर्स है ऐसे हाथ कांपना ऐसे हाथ कांपना यह पार्किंसन ये कांस्टेंटली ऐसे ही होगा यही मूवमेंट आता है हाथ को ऐसा वाला नहीं आता
(46:23) है पार्किंसन के ट्रीमर्स रेस्ट प होंगे मतलब जैसे हाथ मैंने ऐसे र रखा है तो बैठे-बैठे हिल रहा है मुझे पता भी नहीं कि हिल रहा है जो दूसरे टैमर्स है वो तब होंगे जब मैंने ये कप उठाया ये कप उठाया हाथ ऐसे ऐसे कांप रहा है पार्किंसन के मरीज का हाथ ऐसे नहीं कांपे वो बड़े आराम से कप उठाएगा खाना खाएगा वापस रख देगा लेकिन जब खाली बैठा होगा तब उसका हाथ लेकिन खाली हाथ बैठा होगा तो हाथ ऐसे ऐसे इवोलेट हिलता रहेगा जो दूसरे टैमर्स होते हैं वो तब होते हैं जब पेशेंट कोई एक्टिविटी करता है तो दे आर एक्शन ट्रीमर्स पार्किंसन आर रेस्ट टर्स तो
(46:58) डॉक्टर साहब जैसा आपने कहा कि मेंटल एज और फिजिकल एज बहुत सारे लोग जिनको य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स होते हैं बचपन से होता है सेरेब्रल पाल्सी है और भी बहुत सार के ऐसे डिसऑर्डर्स हैं जिसमें आपकी फिजिकल एज तो बढ़ती रहती है लेकिन मेंटल एज नहीं बढ़ती आपकी फिजिकल एज आप 20 साल के हो गए लेकिन आपका दिमाग शायद अभी दो साल के बच्चे के जैसा है एक साल के बच्चे के जैसा है आपने यह केस भी बताया कि आप 40 साल के हो गए लेकिन दिमाग आपका 70 साल का हो गया तो जो ये एक्चुअल न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम है जिसमें कि एज के साथ आपके दिमाग का डेवलपमेंट नहीं हुआ वो तो समझ
(47:30) में आता है कि बचपन से कुछ ऐसे आपके साथ सिचुएशन है कंडीशन है वूम में हो सकते हैं मां के गर्भ से हो सकते हैं या बाहर आने से कुछ ऐसे चीजों से आप एक्सपोज हो गए जिसकी वजह से हो सकते हैं लेकिन य 40 में 70 की एज आना में हमारा कितना रोल है ट्स व्ट आई एम ट्राइम टू टेल ये जो आप सेरेब्रल पॉलिसी की बात कर रही हैं या ब्रेन डैमेज की बात कर रही हैं दिस इज अ नॉन प्रोग्रेसिव डिसऑर्डर ये रिकव डिसऑर्डर होता है रिकवर हो सकता है जी जो भी पेशेंट सेबल पॉलिसी के होते हैं जिनका मस्तिष्क काम नहीं करता बचपन में वह धीरे-धीरे करके इंप्रूव करते
(48:03) हैं लॉस ऑफ लर्न स्किल इ डिमेंशिया जो आप सीखे हुए थे वह आप भूलने लगे तब डिमेंशिया है आपको कपड़े पहनने हमेशा से आते थे अब भूलने लगे यह डिमेंशिया है आप कपड़े पहनना नहीं जानते थे और पहनने लगे वह सेरेब्रल पॉलिसी वाला मेंटल सबनॉर्मेलिटी है डॉक्टर साहब मैं जो पूछने की कोशिश कर रही हूं यह कर रही हूं कि आज से सपोज कीजिए मैं 36 इयर्स की हूं लेकिन मेरे मेंटल एज अभी 65 हो गई है तो मैं ऐसी क्या चीजें कर रही हूं जिसकी वजह से मेरी मेंटल एज 65 हो रही है क्योंकि मैं इस पे तो मुझे काम करना चाहिए ना ताकि मेरी मेंटल एज और ज्यादा ना
(48:40) हो जाए ऐसे तो फिर मैं 40 45 साल में 80 इयर्स की हो जाऊंगी मेंटली तो जो बीमारी 80 साल के इंसान के लिए जो सिमटम्स आने चाहिए वो मुझे 40 में आ जाएंगे जी तो एक नॉर्मल आदमी की मेंटल और फिजिकल एज हमेशा कांग्रुअस है तो इसका मतलब ये बीमारी है उस बीमारी के कारण है डिमेंशिया डिमेंशिया फिर दो प्रकार का होता है एक वोह जिसको हम क्योर कर सकते हैं जो ट्रीटेबल डिमेंशिया होते हैं जैसे ब्रेन में ट्यूमर है मेमरी उस एरिया की चली मैंने बताया टेंपोरल लोब मेमरी को कंट्रोल करता है मान लीजिए टेंपोरल लोब में कोई ट्यूमर बन गया मेमरी चली जाएगी आप ट्यूमर निकाल देंगे मेमरी
(49:17) ठीक हो जाएगी ब्रेन में कोई इंफेक्शन हो गया पेशेंट बेहोश हो जाएगा उसे याद ही नहीं होगा बट इंफेक्शन ठीक करेंगे फिर से ठीक हो जाएगा ठीक है ना तो यह होते हैं ट्रीटेबल डिसऑर्डर फिर होते हैं डिजनरेटिव डिसऑर्डर्स तो भूलने की बीमारी को ही डिमेंशिया बोलते हैं और डिमेंशिया फिर कई प्रकार का होता है उसमें जो सबसे कॉमन होता है वह अल्जाइमर्स होता है तो अल्जाइमर्स एक लाइफ थ्रेटनिंग डिजीज भी हो सकती है डॉक्टर साहब इवेंचर डिजीज बट इट इज नॉट समथिंग जो क्या इमरजेंसी करती है यह हमेशा धीरे-धीरे होती है धीरे धीरे बढ़ती रहती है इसका कोई पूरे
(50:00) विश्व में कोई इलाज नहीं है डॉ साब हम न्यूरोलॉजी की ब्रेन हेल्थ की बात कर रहे हैं तो कौन सी ऐसी तीन चीजें हैं जो हम आज से शुरू कर सकते हैं अपनी ब्रेन हेल्थ को इंप्रूव करने के लिए यह बिल्कुल फ्री की चीजें हैं जिनका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और 100% इफेक्टिव है सबसे पहली चीज है यूज इट और लूज इट जितना ब्रेन को यूज करेंगे उतना ही आपको वो रिवर्ट करेगा पहेली सॉल्व करना है क्रॉसवर्ड सडको पजल सॉल्विंग यह तो हम उन मरीजों को बताते हैं जिनको के डिमेंशिया हो जाता है तो कुछ ऐसी वेबसाइट्स हैं जो वो आपको रजिस्टर करके वो आपको रोजाना एक एक्सरसाइज भेज देती है बट
(50:43) आपकी फ्री की एक्सरसाइज आपके न्यूज़पेपर में रोज आती है सुड को आता है क्रॉसवर्ड आता है पजल सॉल्विंग स्किल्स आती है मेज आते हैं मेजस को कवर कर सकते हो मेंटल मैथमेटिक्स दैट हेल्प्स अ लॉट देन कीपिंग योरसेल्फ एज कम एज पॉसिबल जैसा कि आपने बताया एंड आई थिंक द जिस्ट ऑफ टुडेज प्रोग्राम इज स्टेइंग इन प्रेजेंट तो नॉट थिंकिंग अबाउट योर फ्यूचर एंड योर पास्ट टू मच तो रिलैक्सेशन प्रॉपर स्लीप एंड प्रॉपर फूड इन प्रॉपर टाइम आप अगर जो डिनर 11:00 बजे कर रहे हो ब्रेकफास्ट भी 11:00 बजे कर रहे हो और लंच जो है 3:00 बजे कर रहे हो तो आप
(51:21) तीन अपने दिनचर्या में तीन विकल्प पैदा कर रहे हो बीमारी कॉज करने के सो यू कैन मैनेज योर थ्री ए नॉर्मेलिटी एवरी डे इफ यू हैव थ्री मील्स एट प्रॉपर टाइम एवरीडे जस्ट बाय टाइमिंग योर मील्स राइट एब्सलूट आप कुछ भी खाइए लेकिन टाइम पर खाइए भूख रहना नहीं है आप दिन में छह दफा खाइए छोटा मोटा वो एक आजकल बड़ी बीमारी हो गई है कि स्टार्वक है खुद को फिर जब भूख लगे अच्छा एक और डॉक्टर साहब यहां पर काउंटर आर्गुमेंट क्या आता है कि जब बॉडी सिग्नल दे भूख लग रही है तभी खाओ वरना मत खाओ कोई जरूर नहीं है दिन में तीन मील्स खाना दो ही मील्स खाओ एक ही मील्स
(51:59) खाओ यह सब तरह के ट्रेंड्स भी आ रहे हैं फिर यहां पर क्या करें हम देखिए हमारे शास्त्रों तक में ये लिखा हुआ है कि तीन मील्स एब्सलूट इंपॉर्टेंट है जो आपका नाश्ता है वह राजा के जैसा होना चाहिए जो आपका लंच है वह एक व्यापारी के जैसा होना चाहिए और आपका डिनर एक भिकारी जैसा होना चाहिए तो यह बहुत जरूरी चीज है यह आज की बनाई हुई नहीं है यह तब से बनाई है जब से हमारे शास्त्र पुराण वेद तब सेय बताया हुआ है तो आप खुद सोचिए ऐसा क्यों बनाया गया है वो इसलिए बनाया गया है क्योंकि आप एक मील लेते हैं उस वक्त आपके बॉडी में रात भर की स्टार्विंग है मॉर्निंग में आपने
(52:39) खाना खाया तो आपके बॉडी को जितने रिक्वायर्ड न्यूट्रिएंट्स थे वो मिल गए वो रिक्वायर्ड न्यूट्रिएंट्स पेट्रोल की तरह होते हैं आप यह नहीं हो सकता ना कि आप 10 लीटर पेट्रोल डलवाओ गाड़ी में और बोलो मैं तो जम्मू कश्मीर जाऊंगा तो वो चार पाच घंटे ही प्रॉपर रहेंगे फिर आपके बॉडी में वो न्यूट्रिएंट्स कम हो जाएंगे बट आपके ब्रेन तक जब वो सिग्नल जाएगा भूख क्रिएट करने के लिए तब तक तो लेट हो सकता है तो आपका टाइमिंग इंपॉर्टेंट है और आप यदि अपना टाइमिंग रेगुलेट कर लेंगे तो आपको भूख उसके हिसाब से लगने लगेगी क्योंकि ब्रेन लर्न्स कि अब मेरे मील का टाइम आ
(53:14) गया है डॉक्टर साहब ब्रेन लर्न कैसे करता है इसके बारे में तो हमने कुछ बात की ब्रेन अनलर्न कैसे करता है क्योंकि आजकल बहुत सारी ऐसी खराब आदतें हैं बहुत सारे ऐसे जैसे आपने कहा टेक्नोलॉजी का ओवर यूज लाइफस्टाइल हैबिट ऐसे हो गए हैं जो हम अनलर्न नहीं कर पा रहे हमारा ऑटोमेटिक बिहेवियर बन गया कि मैं उठते ही फोन तो देखूंगी अब मुझे अनलर्न करने के लिए जान निकल जाती है तो फिर ब्रेन अनलर्न कैसे करता है कैसे उसको स्ट्रेंथ करें दिस इज जस्ट लाइक ब्लैक मेल ब्लैक मेेल से बाहर निकलना हमेशा अनकंफर्ट बल होगा और ब्लैक मेेल हमेशा पहले वाले अटेम्प्ट से ज्यादा
(53:46) होगा आपको मान लीजिए किसी ने मर्डर करते हुए देख लिया और वो कहता है आपसे मुझे 00 दे दो तो वो अगली दफा % डिस्काउंट देगा नहीं देगा वो अगली दफा एक मांगेगा आप एक दोगे वो दो मांगेगा अगर जो आपको इस मर्डर वाले सेगमेंट से निकलना है इस ब्लैक मेल की साइकिल से निकलना है तो आप अपने आप को पुलिस के हवाले कर दो जेल में जाओगे भुगतो ग परेशान होगे क्योंकि आपने गड़बड़ करी है ना तो उससे निकलने का रास्ता सीधा साधा तो हो ही नहीं सकता बट ब्लैकमेल से बचने का तरीका सिर्फ वही है और कोई तरीका नहीं है तो दिस डिस्कंफर्ट इज समथिंग च यू शुड
(54:29) एक्सेप्ट एंड यू शुड बी रेडी टू फेस दोस कंसीक्वेंसेस नहीं तो आप छूट ही नहीं सकते कभी भी तो मतलब डिस्कंफर्ट से और बोर्डन से दोस्ती करनी पड़ेगी बिल्कुल करनी पड़ेगी क्योंकि उसका जो फाइनल रिजल्ट है उसमें डिस्कंफर्ट भी जाएगा हेल्थ भी आएगी और बडम भी खत्म होगा यह जो ब्रेन है और माइंड है डॉक्टर साहब दो अलग एंटिटीज है बिल्कुल जी आप बताइए ब्रेन और माइंड में क्या डिफरेंस है बहुत सिंपल सा तरीका समझाने का जो दिखाई दे रहा है वो ब्रेन है जो दिखाई नहीं दे रहा वो माइंड है माइंड इ समथिंग जो कि एब्स्ट्रेक्ट है वह एक काल्पनिक सी चीज है जिसको हम महसूस नहीं
(55:09) कर सकते फील नहीं कर सकते किसी फिजिकल तरीके से जिसको हम छू भी नहीं सकते व तो फिजिकल तरीके से नहीं महसूस कर सकते फील कर सकते हैं एक तरीके की फीलिंग है माइंड तो जो भी एब्स्ट्रेक्ट है दैट इज माइंड जो प्रेजेंट है फिजिकल है दैट इज ब्रेन ब्रेन के हिस्से हैं चार माइंड का कोई हिस्सा नहीं माइंड इसी वक्त चाहे तो यूएसए पहुंच सकता है इसी वक्त चाहे मंगल ग्रह पर पहुंच सकता है और हो सकता है कि बृहस्पति प पहुंच जाए वहां पर जाकर किस तरीके से मैं रहूंगा यह सोचने लगे वहां पर मैं कैसे झुपड़ी बनाऊंगा यह सोचने लगे इट कैन डू एनीथिंग इट वांट्स एट अ ड्रॉप ऑफ अ
(55:47) सेकंड जबक ब्रेन एक फिजिकल चीज है जो हम जानते हैं कि यह वाला हिस्सा यह करता है यह वाला हिस्सा यह करता है उसकी बीमारी है तो हमें किस तरीके से अप्रोच कर ना चाहिए माइंड की बीमारियों के लिए पूरा सिस्टम ही अलग है तो माइंड इज टेकन केयर ऑफ बाय साइकोलॉजिस्ट एंड साइकेट्रिस्ट एंड हीलर्स लाइक यू एंड ब्रेन इज टेकन केयर ऑफ बाय न्यूरोलॉजिस्ट लाइक मी तो डॉक्टर साहब लेकिन कितनी फैसटिकट जो कि ब्रेन से सेपरेट है और आपने बहुत बिल्कुल क्लियर दो तरीके बता दिए जिससे आप कह रहे हो माइंड है और यह ब्रेन है लेकिन फिर भी दोनों की बीमारियों में कितना ओवरलैप हमें देखने को
(56:26) मिल रहा है एब्सलूट ब्रेन कॉसेस ऑल द प्रॉब्लम ऑफ माइंड एंड माइंड कैन आल्सो कॉज माइंड कैन नॉट बी फेल्ट सो इंटरेस्टिंग डॉक्टर साहब ब्रेन को एक्टिव रखना चाहिए आपने कहा यूज इट और लूज इट है ना आज की डेट में हर कोई इंसान अमूमन तौर पर दिन से तीन दिन में तीन से चार घंटे स्क्रीन देखता है और मैं डेटा पढ़ रही थी कि एवरेज शॉर्ट फॉर्म कंटेंट जिसे हम रील कहते हैं जो एक मिनट डेढ़ मिनट का कंटेंट होता है वो एक इंसान नॉर्मल इंसान अडल्ट आज की डेट में दो से ढाई घंटे कंज्यूम कर रहा है ये मैं नहीं कह रही हूं ये स्टडीज कह रही है कुछ लोग इससे कई ज्यादा भी करते
(57:03) हैं कुछ लोग इससे कम भी करते होंगे लेकिन एवरेज इ 2.5 आवर्स तो जब आप एक रील के बाद दूसरी में जाते हैं एक ट्रेवल वाली आ गई एक खाने वाली आ गई एक फैशन वाली आ गई एक शॉपिंग वाली आ गई जब इतने आपके ब्रेन को आप स्टिमुलेटिंग के स्ट्रोक बहुत अर्ली एज में हो रहा है स्ट्रोक का स्क्रीन टाइम से डायरेक्ट रिलेशन है मैं का स्क्रीन टाइम से डायरेक्ट रिलेशन है एनीथिंग विच इज मोर देन टू आवर्स ऑफ स्क्रीन टाइम अ डे इज इंजस टू र ब्रेन तो हम इसको यूसेज ऑफ ब्रेन नहीं कहेंगे जो आप कह रहे थे ना यूज करो यूज करना नहीं हुस मिसयूज ऑफ ब्रेन अच्छा लोगों को य लगता है मैं तो बारबार
(57:49) स्टिमुलेटिंग होती है उसका डायरेक्ट एक्सटेंशन रेटिना है हमारी जो आख का पर्दा होता है उसको हम रेटिना बोलते हैं यदि हमारे ब्रेन में कोई चेंजेज हैं तो रेटिना में सबसे पहले रिफ्लेक्ट होते हैं क्योंकि ब्रेन का सीधा एक्सटेंशन जिसे हम डायरेक्टली मशीनों के द्वारा देख सकते हैं ब्रेन को तो नहीं देख सकते ना हम एमआरआई करवाते हैं उसमें ब्रेन के सेक्शन दिखाई देते हैं ब्रेन नहीं दिखाई देता हम रेटिना को जब देखते हैं तो वह ब्रेन से रिलेटेड है आप जब भी कोई चीज को देख रहे हो तो व आपकी रेटिना को स्टिमुलेटिंग को स्टिमुलेटिंग को कहां यूज कर रहे हो आप कैसे यूज कर
(58:35) सकते हो फैशन फूड लाइफस्टाइल एट द सेम टाइम आपके किसी काम के नहीं है वो वो आप उस टाइम को यूटिलाइज कर रहे हो जब आप कुछ नहीं कर रहे हो डॉक्टर साहब अपनी प्रोडक्टिविटी को अगर इंक्रीज करना हो तो उसमें ब्रेन हेल्थ का क्या रोल है और ब्रेन हेल्थ के लिए हम ऐसा क्या सकते कि हमारी प्रोडक्टिविटी इंक्रीज हो जाएगी मैंने ये सारी चीजें एक तरीके से रिपीटेशन ही होगा बट सिंगल मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग सिंगल मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग फॉर प्रोडक्टिविटी इज कीप ऑन डूइंग समथिंग च इज प्रोडक्टिव फॉर योर लाइफ और योर प्रोफेशन नॉट समथिंग चच इज जस्ट कंजूमिंग
(59:20) योर ब्रेन जैसे कि फ है इ है उसमें आप क्या करते हो चीज टाइप करते हो पोस्ट करते हो फिर इंतजार करते हो अरे किसी ने देखा नहीं देखा कितने लोगों ने देखा अरे ये तो बहुत कम है फिर आप उसको फॉरवर्ड करोगे आप किसी को टैग करोगे तो वह चीज एक कांस्टेंट इफेक्टिविटी आपके दिमाग में चला के रखती है कि यार यह सबसे इंपॉर्टेंट चीज है मेरे लिए जबकि उसकी कोई वैल्यू नहीं है आपके जितने सोशल मीडिया फ्रेंड्स हैं दे आर जस्ट एब्स्ट्रेक्ट ना उनके साथ आप टाइम व्यतीत कर सकते हो ना आप उनसे बात कर सकते हो ना मुसीबत के समय उन्हें याद कर सकते हो
(59:57) वो मेरे हिसाब आई एम नॉट एट ऑल एक्टिव ऑन सोशल मीडिया यू विल बी सरप्राइज टू नो आई हैव अकाउंट्स ऑफ एवरी प्लेटफार्म बट मैं किसी पर मेरे ख्याल से पिछले सात साल से मैंने कोई पोस्ट नहीं डाली व इसलिए नहीं डाली है क्योंकि वह मेरे हिसाब से किसी भी चीज में मेरे को फायदा नहीं कर रहा मेरी प्रोडक्टिविटी उसको देख के सिर्फ डिसयूज हो रही है मिसयूज हो रही है हुत अच्छी चीज मेरे लिए है क्योंकि मैं उसमें क्या देखता हूं एक बंदे को स्ट्रोक हो गया उसने उसका वीडियो बना के मुझे भेज दिया मुझे डिसाइड करना है अब इसका यह ट्रीटमेंट हाथों हाथ
(1:00:30) करो दैट इज वेर आई यूज सोशल मीडिया दैट इज द ओनली प्लेटफॉर्म आई यूज तो बेसिकली जो लोग जिनकी प्रोफेशन का भी एक इंपॉर्टेंट हिस्सा है कि वो सोशल मीडिया या स्क्रीन टाइम है उनकी लाइफ में उन लोगों को थोड़ा ध्यान ज्यादा रखना पड़ेगा और उसको रेगुलेट करना पड़ेगा बहुत जरूरी क्योंकि कई लोग हैं वो नहीं कंप्लीट कट ऑफ भी कर पाएंगे जैसे मेरी अपनी भी बात करूं तो कंपलीटली कट ऑफ करना लेकिन हां रेगुलेट करना जैसे की अगर मैं बात करूं तो मैं हफ्ते या 10 दिन में एक पोस्ट करती हूं किसी दिन मन आता है तो एक दिन में पांच स्टोरीज डाल देती हूं मन नहीं आता तो पाच दिन तक कोई
(1:01:04) स्टोरी नहीं डालती हूं तो मतलब रेगुलरली खुद को रेगुलेट करना और डिटॉक्स प्लान अपना बनाना कि अगर मुझे अवेलेबल होना भी है इस प्लेटफार्म प तो मैं जो मेरी कंसिस्टेंसी कहिए या फ्रीक्वेंसी कहिए वो मैं डिसाइड करूंगी वो प्लेटफॉर्म या कोई और डिसाइड नहीं करेगा बिलकुल सही कहा आपने देखिए मैं आपको एग्जांपल देता हूं आपने जैसे बहुत आपने अपने आप को रेगुलेट कर रखा है विच इज कमेंडेबल मैं अपनी भी तारीफ करता हूं कई मामले में कि आईम सो कंट्रोल्ड अबाउट द सोशल मीडिया एडिक्शन बट आई हैव माय किड्स व जब खाने के लिए किसी रेस्टोरेंट में जाएंगे सबसे पहले फोटो
(1:01:38) खींचेगा उसके बाद उसकी पोस्ट बनेगी एक ं पे उसके बाद उसके कमेंट्स का इंतजार होगा फिर उसमें उसके फ्रेंड्स टैग होंगे कि आज मैं यहां पर गया हूं मैंने यहां पर खाना खाया है दैट इज देयर लाइफ तो दिस इज समथिंग विच वन हैज टू रिस्ट्रिक्टिंग सोशल मीडिया इज बैड दस प्लेटफॉर्म्स आर प्रोब्लेमे िक बट द पॉइंट इज एक पर्टिकुलर पॉइंट के बाद वो आपकी लाइफ को कंट्रोल करने लगते हैं आप उनको कंट्रोल नहीं करते तो वॉलंटरी से जब वो इवॉलेंट स्पेस में चला जाए तो मतलब खतरे की घंटी बहुत जोर-जोर से बज रही है अब मतलब आपके हाथ से कंट्रोल से बाहर चला गया क्योंकि
(1:02:17) सीधा आप उठा रहे हो आपको पता भी नहीं कि आपने उठा लिया फोन आपने देख लिया फोन या आपने इतनी सारी एक्टिविटी कर ली डॉक्टर साहब बहुत सारी इंटरेस्टिंग बातें की आपके साथ एक इतना फैसटिकट जो कि ब्रेन है उसके बारे में बहुत कुछ जानने को मिला और बहुत सारे एक्शन पॉइंट्स मिले जहां पे हमें अपने आज में क्या बदलाव करना है और जो बदलाव अंदर से आएंगे द जर्नी विदन करने से आएंगे उनकी भी एक तरह से चाबी और एक्सेस पॉइंट मिला है जाते-जाते मैं अपने सभी गेस्ट से एक सवाल पूछती हूं और वो है उनकी सक्सेस की डेफिनेशन हर एपिसोड के थ्रू मैं ये ना एक तरह से कुंजी बना रही हूं कलेक्ट
(1:02:51) करने की कोशिश कर रही हूं कि अलग-अलग लोग डिफरेंट एक्सपीरियंस के डिफरेंट एज ग्रुप के डिफरेंट प्रोफेशन के सक्सेस को दिखते क्या कैसे हैं क्योंकि सक्सेस की जो चिड़िया है ना वो ऐसी हो गई है कि सब इसके पीछे भाग रहे हैं लेकिन हमने इसको इतना एक तरह ही बना लिया कि हमें लगता है यही एक तरीका सही है सो आई वांट टू नो फ्रॉम यू कि आप कैसे देखते हो सक्सेस को बहुत ही अच्छा क्वेश्चन पूछा और मेरा बिल्कुल क्लियर इसमें आई एम क्रिस्टल क्लियर माय अ डेफिनेशन मेरी सफलता का जो मापदंड जिसे आप बोलेंगे वो यह है कि मैं जब शाम को घर पर जाता हूं तो मैं 20 मिनट अपने कुत्तों के
(1:03:24) साथ बड़े आराम से खेल सकूं और उसके बाद मैं रात को जब मैं चाहूं तब सो सकूं बिना किसी बात को सोचे हुए कि कल सुबह मेरे साथ क्या होने वाला है मैं जब भी सोने जाता हूं यह मान के चलता हूं मैं शायद कल का सुब रज ना देख पाऊ और मैं उसके लिए बिल्कुल तैयार हूं सो दैट इज माय डेफिनेशन ऑफ सक्सेस कि मुझे इस बात की एक पैसे की चिंता नहीं होती कि कल सुबह क्या होने वाला है मेरा डेफिनेशन ऑफ सक्सेस ये है इसके आगे मुझे चाहिए नहीं कुछ तो मतलब डॉक्टर साहब आपने फियर को तो कनकर कर दिया है है जो मेरे पास है जिसको हम मटेरियल इसिक चीजें बोलते हैं वह मेरे साथ नहीं
(1:04:01) जाने वाला मेरे साथ जाने वाला है मेरा नाम और मेरा काम तो मैं उसी चीज के लिए काम कर रहा हूं और मेरे लिए टाइम पर सोना जब मैं चाहूं जो चाहूं जो मुझे अच्छा लगता है वो करना दैट इज माय डेफिनेशन ऑफ सक्सेस आई रियली होप कि आपकी इस डेफिनेशन से जो व्यूवर्स इसे देख रहे हैं वो कुछ सीख पाए और अपनी सक्सेस की परिभाषा खुद डिफाइन कर पाए राद देन कि मां-बाप ने बोला है कि सफल तुम हम तुम्हें तभी कहेंगे जब तुम ये कर लोगे दुनिया ने बोला है हम तुम्हें सफल या सक्सेसफुल तभी समझेंगे जब तुम्हारे पास ये ये चीजें हो जाएंगी जो भी एक्सटर्नल
(1:04:34) फैक्टर्स हमारी सक्सेस की डेफिनेशन को ड्राइव कर रहे हैं वो सब ठीक है आप रेफरेंस पॉइंट ले सकते हो क्योंकि मुझे लगता है हम जो भी चीजें सोचते हैं सब बरोड आइडियाज हैं कहीं ना कहीं से यह परिभाषा भी आई जो आप देख रहे हो आपका भी कहीं ना कहीं से वो आया दैट इज ऑल ओके लेकिन आप में इंडिविजुअल तड़का उसमें कितना लगा रहे हो कि वो आपके लिए मीनिंगफुल हो रही है बहुत जरूरी है ऐसा नहीं कि सबके लिए मीनिंगफुल क्रिएट करते करते कि वो मुझे शाबाशी देंगे वो मुझे इज्जत देंगे वो मुझे पैसा वो मुझे फेम देंगे लेकिन एट द एंड आपके अंदर वो वैसे ट्रांसलेट नहीं हो रहा
(1:05:00) क्योंकि आपने खुद को समझा ही नहीं सो आई रियली होप दैट यू नो लोग आपकी सक्सेस की परिभाषा से भी अपनी जिंदगी में झांक पाए द जर्नी विदन कर पाए और समझ पाए कि वो अपनी बेस्ट लाइफ कैसे क्रिएट कर सकते हैं दैट वुड बी ग्रेट थैंक यू सो मच डॉक्टर साहब फॉर कमिंग ऑन द जर्नी वि थंक यू दैट आईड अ वंडरफुल इंटरेक्शन और आज की बड़ी अच्छी डिस्कशन रही मेरे भी बहुत सारे दिमाग के पेज खुले बहुत अच्छा लगा यह तो मेरे लिए बहुत खुशी की बात है कि आप कह रहे हो कि आपने भी यहां से कुछ एक तरह से सीखा या आपके दिमाग के पेज खुले ये तो बहुत ही बहुत ही खुशी की फर्स्ट पॉडकास्ट डॉक्टर
(1:05:35) साहब फर्स्ट पॉडकास्ट है तो आपका एक्सपीरियंस फर्स्ट पॉडकास्ट का अच्छा है बहुत अच्छा रहा बहुत ही ज्यादा अच्छा रहा आई नेवर एक्सपेक्टेड कि इस तरीके से होता है ये तो मेरे लिए पहली दफा हुआ है डॉक्टर साहब हम कोशिश करेंगे कि आपको दोबारा भी बुलाएं और जो व्यूवर्स यहां देख रहे हैं अगर आपके कुछ भी न्यूरोलॉजी से रिलेटेड आप सीखना चाहते हैं समझना चाहते हैं अपने ब्रेन को हैक करना चाहते हैं आज आज कल बड़ी ये पॉपुलर टर्म चल रही है हाउ टू हैक योर ब्रेन कि अपने ब्रेन को हैक करेंगे तो लाइफ को हैक कर लेंगे या कुछ भी और टॉपिक्स हैं जिसके बारे में आप जानना
(1:06:03) चाहते हैं कोई अन आंसर्ड सवाल रह गए तो कमेंट सेक्शन में लिखिए पार्ट टू लिखिए तो हम डॉक्टर साहब को बुलाने की जरूर कोशिश करेंगे डेफिनेटली थैंक यू फॉर योर टाम डॉक्टर साहब नमस्कार नमस्कार अगर आप इस एपिसोड में यहां तक पहुंच गए हैं इसका मतलब आपने एपिसोड पूरा देखा है तो कमेंट किए बगैर जाइएगा नहीं लाइक और शेयर कीजिए अपने फ्रेंड्स एंड फैमिली के साथ और किन्हीं ऐसे तीन लोगों के साथ शेयर कीजिए जिन्हें आपको लगता है अटेंशन की प्रॉब्लम है मेमोरी से रिलेटेड कोई इश्यूज हैं या आज के इस एपिसोड में हमने जो भी बातें की जो भी डिजीज के बारे में बात की उनकी
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