Thursday, April 9, 2026

How Energy Shapes Your Emotions, Health & Relationships | TJW 125 With @ANURAGRISHI

How Energy Shapes Your Emotions, Health & Relationships | TJW 125 With @ANURAGRISHI

Author Name:Shobha Rana

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@iamshobharana

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=2WNORNlLPRk



Transcript:
(00:00) तो हम आज अन्नमय कोष से आनंदमय कोष तक कैसे पहुंचेंगे? कुछ हम उसको उस कन्वर्सेशन को इवॉल्व करने की कोशिश करेंगे। हमको स्टेप बाय स्टेप स्टार्ट करना पड़ेगा। और ये स्टार्टिंग कहां से होगी? सबसे पहले कि मेरी वाइब नहीं मैच होती। मुझे उनकी एनर्जी नहीं पसंद। तो अगर एनर्जी को डिफाइंड करना हो एक फंडामेंटल तौर पर, तो व्हाट इज एनर्जी? एनर्जी अच्छी या बुरी नहीं है। उनके पास यह मेमोरी तक नहीं है पिछले 20, 30, 40 सालों की कि व्हेन वास द लास्ट टाइम आई वाज सो हैप्पी? इज इज इट लाइक अ लाइट स्विच बटन? कि आपने बटन ऑन किया तो आप अपडेट में आ जाएंगे
(00:33) अवेयरनेस में। इज इट लाइक दैट सिंपल? क्योंकि जब हम इवॉल्व करना शुरू करते हैं और हम ये सोचे कि हम एकदम से डिटच होकर हम बुद्ध हो जाएंगे नहीं हम बुद्धू ही हैं। इंक्लूडिंग मी? थोड़े क्लियर साइंस बताइए। दैट इंडिकेट दैट वन नीड्स टू ट्रांसफॉर्म। स्ट्रेस इज द मोस्ट ब्यूटीफुल मैकेनिज्म गॉड हैज़ गिवेन अस। मैंने देख लिया कौन है? मैं यह नहीं हूं क्योंकि मैंने उसको देख लिया कि यार सब कुछ एनर्जी है। देयर इज नो मैटर और लाइफ कभी भी पूरी जिंदगी एक जैसी नहीं रहती। जिंदगी हमेशा अप एंड डाउन लेती रहती है। मतलब तो जब सब कुछ बढ़िया चल रहा
(01:04) है। दिस इज द राइट टाइम। दिस इज द बेस्ट टाइम। दिस इज द बेस्ट टाइम। कि एक अच्छा दोस्त आपकी जिंदगी में किसी बड़े अच्छे सर्जन से, किसी अच्छे बड़े डॉक्टर से कम नहीं है। जी। मैं ट्रिगर जिस चीज से हुआ, मैं उस स्टेट में बना ना रहूं। दैट इज मोस्टेंट। मैं उस स्टेट को अपना टेंपरामेंट और उसी स्टेट को अपनी पर्सनालिटी ना बना लूं। दैट इज मोरेंट। हाउ डस वन आइडेंटिफाई कि वो इमोशनली नम हो रहे हैं। नमस्ते। द जर्नी विद इन पडकास्ट में आपका स्वागत है। मेरे यानी शोभा राणा के साथ। मैं एक इमोशनल इंटेलिजेंस और माइंडसेट कोच हूं और साथ ही इस पॉडकास्ट की होस्ट और
(01:49) क्रिएटर भी हूं। द जर्नी विद इन पॉडकास्ट का ऐ है कि आपको आपकी बेस्ट लाइफ, ड्रीम लाइफ को डिज़ाइन करने में मदद कर सकें। और यह हम करते हैं बाय टेकिंग द जर्नी विद इन अपने अंतर्मन की तरफ लौट आना, अपने इनर वर्ल्ड की तरफ लौट आना, खुद की तरफ लौट आने से और जानने से कि हम अपने थॉट्स, फीलिंग्स, इमोशंस, लाइफ इवेंट्स को कैसे प्रोसेस करते हैं, कैसे समझते हैं। अपनी लाइफ का पर्सपेक्टिव कैसे बिल्ड करते हैं ताकि जिस खूबसूरत जिंदगी को, जिस ड्रीम लाइफ को हम जीना चाहते हैं, उसकी एक बेहतर समझ पैदा हो सके और उस तक जाने का कोई रास्ता तय हो सके। आज के इस एपिसोड में हम
(02:24) द जर्नी विद इन करने वाले हैं। थ्रू द लेंस ऑफ अंडरस्टैंडिंग एनर्जी। जो हम एनर्जी की बात करते हैं, वाइब मैच नहीं करती बोलते हैं। यह एनर्जी का मतलब होता क्या है? हम सभी अगर एनर्जी से बने हैं, इस पूरे यूनिवर्स में, ब्रह्मांड में सब कुछ एनर्जी है, तो एनर्जी है क्या? इसके कौन-कौन से कॉम्पोनेंट्स हैं? इनको समझना क्यों जरूरी है? इनको समझकर मेरी लाइफ में उसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन क्या है? हमने हीलिंग की भी बात की है। हमने ट्रांसफॉर्मेशन की जर्नी की बात की है। ट्रॉमाज़ एंड ट्रिगर्स की बात की है। इमोशनल नंबिंग की बात की है। और अपनी लाइफ
(02:56) को एक साइंटिफिक और एक स्पिरिचुअल दोनों एंगल से समझकर एक गहरी समझ पैदा करने की आज इस एपिसोड में कोशिश की है। आज हमारे साथ हैं होलिस्टिक वेलनेस कोच अनुराग ऋषि जी जो अपने कई सालों का एक्सपीरियंस और विज़डम आज इस पॉडकास्ट पर लेकर आए हैं। लेकिन उनसे मिलने से पहले आपसे एक रिक्वेस्ट कि चैनल को सब्सक्राइब कीजिए, लाइक, कमेंट और शेयर कीजिए क्योंकि जब आप हमें सपोर्ट करते हैं तो हम और भी गेस्ट तक पहुंच पाते हैं। उनको इस प्लेटफार्म पर बुला पाते हैं और YouTube हमें और लोगों तक पहुंचा पाता है। सो आपके सपोर्ट की बहुत सख्त जरूरत है। साथ ही साथ एक डाटा
(03:28) आपके साथ शेयर करना चाहूंगी कि हमें पता चला है कि 85% लोग जो हमारा पॉडकास्ट देख रहे हैं या सुन रहे हैं वो अभी तक हमारे सब्सक्राइबर्स नहीं है। तो अगर आप उन लोगों में से हैं तो प्लीज सब्सक्राइब कीजिए क्योंकि इसमें आपका कुछ जाता नहीं है और हम लोगों को एक एनकरेजमेंट मिलता है और बाकी और बड़े गेस्ट तक जाने का एक एक रास्ता तय हो पाता है। थैंक यू फॉर दैट एंड नाउ लेट्स मीट अनुराग ऋषि ऑन द जर्नी विद इन पॉडकास्ट। [संगीत] थैंक यू सो मच फॉर हैविंग मी या हियर। थैंक्स अ लॉट। अनुराग जी आपको बहुत टाइम से मैं चाहती थी कि इस पॉडकास्ट पे आए। आप
(04:12) होलिस्टिक वेलनेस के बारे में बात करते हो। जितने ज्यादा लोग होलिस्टिक वेलनेस को समझना चाहते हैं उतने ही लोग हैं जो इसको लेके कंफ्यूज्ड हैं। तो सबसे पहले सिंपलीफाई करते हैं कि होलिस्टिक वेलनेस होता क्या है? जैसे एक टर्म है। ये टर्म ही हमें बता रहा है होलिस्टिक का मतलब है ओवरऑल कि हर एक आस्पेक्ट में। अब जब हम ओवरऑल की बात करते हैं या होलिस्टिक की बात करते हैं तो इसमें बहुत से ऐसे आस्पेक्ट्स हैं जिनको लोग जानते नहीं हैं। इसलिए हम होलिस्टिक को समझ ही नहीं पाते बेसिकली। और मुझे लगता है कि शायद हम आज उनकी बात करेंगे कि
(04:41) हम सिर्फ एक फिजिकल बॉडी नहीं हैं। हमें ऐसा लगता है कि हम फिजिकल बॉडी हैं या हमें कोई हीलिंग की जरूरत होती है तो हम बॉडी को हील करना चाहते हैं। बॉडी के थ्रू ही हील करना चाहते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। हमारे अंदर बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिनको अगर हम टैप इन करते हैं तो हम रियल में उस होलिस्टिक डेवलपमेंट होलिस्टिक हीलिंग की तरफ बढ़ सकते हैं। जैसे अगर मैं इसको थोड़ा सा टेक्निकल टर्म्स में बताने की कोशिश करूं या हमारे एंशिएंट इंडियन साइंसेस के हिसाब से हम अह आज से लगभग 3000 साल पहले एक उपनिषद हुआ जिसमें जिनको तैत्रीय उपनिषद कहा जाता है। उस तैत्रीय
(05:13) उपनिषद में बताया गया कि हम पंचकोषों से बना हुआ एक पिंड है। पंचकोष यानी कि फाइव बॉडीज। फाइव शीट्स, फाइव लेयर्स। अब वो जो फाइव शीट्स हैं वो बेसिकली क्या शीट्स हैं? सबसे पहले को बोला गया अन्नमय कोष द फिजिकल बॉडी। लेकिन हम क्योंकि बाकी सभी चीजें इतनी ज्यादा सटल हैं कि हम उस लेवल पर कई बार जा नहीं पाते। तो हम सिर्फ अन्नमय कोष यानी जो अन्न से बना हुआ शरीर है, शीत है, लेयर है हम उसी पर स्टक होकर रह जाते हैं। द सेकंड लेयर इज़ प्राणमय कोष। थर्ड लेयर इज़ मनोमय कोष। फोर्थ लेयर इज़ विज्ञानमय कोष एंड फिफ्थ लेयर इज़ आनंदमय कोष। तो जब हम होलिस्टिक डेवलपमेंट
(05:51) की बात करते हैं, होलिस्टिक हीलिंग की बात करते हैं, तो हम बेसिकली इन सब एरियाज में टैप इन करते हैं जिससे कि हम एक टोटिटी में ओवरऑल हम डीप विद इन जाकर अपने उस रूट सोर्स के साथ कनेक्ट करके अपने आप को हील कर पाएं। तो यानी कि जब हम वेल बीइंग की बात करते हैं तो मे बी हम सिर्फ अन्नमय कोष पे बात करते हैं। व्हिच इज़ लाइक फिजिकली आप कैसा फील कर रहे हैं? बॉडी में कोई पेंस हैं, एग्स हैं, कोई फिजिकल सफरिंग है, कोई बीमारी है। सो दैट इज अन्नमय कोष। लेकिन आपने और चार लेयर्स की बात की है ना तो हम आज अन्नमय कोष से आनंदमय कोष तक कैसे पहुंचेंगे कुछ हम उसको
(06:24) उस उस कन्वर्सेशन को इवॉल्व करने की कोशिश करेंगे तो मैं भी बहुत सालों से योग की स्टूडेंट रही हूं तो मैंने भी इस बारे में काफी पढ़ा है तो सबसे पहले मैं चाहती हूं कि हम लोग एक जो कांसेप्ट है जिसको हम होलिस्टिक हीलिंग कहिए या होलिस्टिक वेलनेस कहिए उसमें सबसे ज्यादा बात करते हैं दैट इज एनर्जी कि एनर्जी और आजकल बहुत ज्यादा लोग कॉमनली ऐसे टर्म्स भी यूज़ करने लगे हैं कि मेरी वाइब नहीं मैच होती मुझे उनकी एनर्जी एनर्जी नहीं पसंद। तो अगर एनर्जी को डिफाइन करना हो एक फंडामेंटल तौर पर तो व्हाट इज एनर्जी? सो ब्यूटीफुल क्वेश्चन। सबसे पहले तो आप देखो
(06:55) कि जब हमें पढ़ाया गया साइंस में भी हमने ये चीज पढ़ी कि ये जो पूरा यूनिवर्स है ये दो चीजों से मिलकर के बना है। हमने एक को बोला जड़, एक को बोला चेतन, एक को बोला मैटर, दूसरे को बोला एनर्जी। ये बहुत पुरानी बात थी। जब तक न्यूटन थे, न्यूटन ने इस कांसेप्ट को वैलिडेट किया कि हम दो चीजों से मिलकर के बने हैं एनर्जी एंड मैटर। धीरे-धीरे जैसे-जैसे साइंस ने इवॉल्व किया और जो क्वांटम पार्ट था साइंस का वो अनवील होना शुरू हुआ। आइंस्टीन आया आइंस्टीन का टाइम टाइम आया तो उन्होंने ये चीज दुनिया को बतानी शुरू की कि हम लोग सिर्फ एनर्जी हैं। हम लोग मैटर है ही
(07:29) नहीं। ये एक बहुत कंट्राडिक्टरी है। लाइक मैं अभी आपसे बात कर रहा हूं। ये माइक है, सॉलिड है। सब कुछ मैटर है। सब कुछ मैटर है। एवरीथिंग इज़ मैटर। लेकिन एक 1925 के आसपास उन्होंने ये एक्सपेरिमेंट शुरू किया और 19 आई थिंक 37 के आसपास वो लोग इस चीज को प्रूव कर चुके थे। इसको बाद में थॉमस यंग ने एक एक्सपेरिमेंट बना के लोगों के सामने रखा जिसको बोला गया डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट या उसको यंग्स एक्सपेरिमेंट भी कहा जाता है। उस डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट में देखा गया कि एवरीथिंग इज़ एनर्जी। क्यों? क्योंकि जो हमारा जैसे अगर हम एक टाइनीस्ट पार्टिकल तक जाएं जिसको हम
(08:02) लोग एटम बोलते हैं। एटम को अगर ब्रेक डाउन करो तो उसके अंदर हमको सब एटॉमिक पार्टिकल्स मिलते हैं जिसको हम हमने इलेक्ट्रॉन फोटॉन न्यूट्रॉन करके बोला। हमें ऐसा लगता था कि वो जो इलेक्ट्रॉन, फोटन, न्यूट्रॉन है वो बहुत सारे उस एटम के अंदर हैं और वो सॉलिड हैं। लाइक लाइक द पीसेस ऑफ सैंड हमको रेत के छोटे-छोटे हैं। जगह पर हैं या वो सॉलिड हैं। लेकिन जब उनको भी सब एटॉमिक पार्टिकल्स को ब्रेकडाउन किया गया तो पता चला कि उनके अंदर कुछ नहीं है। सिर्फ एक वेव है। लेकिन उस वेव की वेवलेंथ या उस वेव की जो स्पीड है वो इतनी ज्यादा है कि वो हमको सॉलिड
(08:35) फील होती है। लेट मी गिव यू एन एग्जांपल। अगर मान लो कोई फैन है। अगर वो फैन को चला दिया जाए, टर्न ऑन कर दिया जाए। अब फैन में तीन ब्लेड्स हैं। फॉर एग्जांपल अगर उस फैन को टर्न ऑन कर दिया जाए तो अब ब्लेड कहां पर है? नहीं बता सकते। एवरीवेयर अगर मैं उस डाया में जो उसका डायामीटर है अगर उसके डाया में मैं किसी भी जगह पर हाथ डालूं। हाउ मेनी चांसेस आर देयर कि मेरा हाथ कट जाएगा? 100% इट मींस द ब्लेड इज एवरीवेयर। क्यों? क्योंकि हमने उसको टर्न ऑन कर दिया। अगर मैं उस फैन को टर्न ऑफ कर दूं और अब अगर जो उसका दो ब्लेड्स के बीच का ए्पटी स्पेस है अगर मैं
(09:10) अब हाथ डालूं तो क्या मेरा हाथ कटेगा? ऑब्वियसली नॉट ऑब्वियसली नॉट क्योंकि वहां पर मैटर नहीं है। नहीं है। अब एक छोटी सी चीज बड़ी गहरी अगर ये कांसेप्ट लोगों का क्लियर कर दें लेकिन है बहुत छोटी सी। अगर हम जिसको आरपीएम बोलते हैं। जैसे हमारा जो कैमरा लगा हुआ है ना इसके अंदर भी एफपीएस होता है फ्रेम पर सेकंड। मतलब जो ये वीडियो बन रहा है, एक्चुअल में ये वीडियो नहीं है। ये छोटे-छोटे इमेजेस लिए जा रहे हैं। आपके कैमरा में मान लो 60 FPएस पे ऑपरेट कर रहा है। तो व्हाट इट मींस? कि 60 फोटोज 1 मिनट में क्लिक की जा रही हैं। उनको कंबाइन करके ये वीडियो एक सेकंड में
(09:43) क्लिक की जा रही है। एक सॉरी एक सेकंड में क्लिक की जा रही है और उसको कंबाइन करके एक वीडियो बन रहा है। तो पुराने टाइम पर वो जो थिएटर में रील्स चलती थी आपने देखा होगा उसमें ऐसे देखते थे तो एक-एक करके सीन दिखता था। ठीक उसी तरह वो जो फैन का ब्लेड जिसको हमने रोका हुआ है अगर हम उसको टर्न ऑन कर दें और अगर मेरे एफपीएस या मेरा आरपीएम जिसको जो भी नाम दे सकते हैं मेरे हैंड का आरपीएम उस ब्लेड की स्पीड से ज्यादा तेज हो तो हाउ मेनी चांसेस आर देयर कि मेरा हाथ कट जाएगा। लाइक आई एम डूइंग इतनी स्पीड से कि मुझे वो दिख रहा है कि ब्लेड
(10:14) कट सकता है। 100% बच सकता हूं क्योंकि मेरी उससे डबल स्पीड है। आर यू गेटिंग दिस थिंग? आप आइडेंटिफाई कर पा रहे हो। स्पीड को समझ पा रहे हो। अगर हम नेकेड आई से देखेंगे तो हमें वो स्पीड किस हिसाब से चल रहा है हमें पता नहीं है। तो कहीं भी हम बात अगर दें और जितनी भी जल्दी से दें वो कटने ही वाला है। कटने ही वाला है। लेकिन अगर मेरी स्पीड उससे ज्यादा है। अगर मुझे पता हो कॉन्शियसली कि वो क्या स्पीड चल रही है और किस सेकंड पे या किस माइक्रो सेकंड पे ब्लेड वहां पे नहीं है? और उसी सेकंड में मैंने अपने हाथ टच करके वापस आया तो डेफिनेटली नहीं करता। और अगर मेरी
(10:43) स्पीड उससे डबल है तो वो फैन मेरे लिए रुके जैसा ही है। करेक्ट। है ना? करेक्ट। तो यह जो कांसेप्ट था इस कांसेप्ट ने पूरी दुनिया को एक चीज बताई कि वो जो हमको मैटर लग रहा है बेसिकली उसके अंदर एनर्जी इतने तेजी से फ्लो कर रही है कि हम जहां भी टच करते हैं हमको सॉलिडेफाई होने का सॉलिड होने का एक एहसास होता है। क्यों? क्योंकि हमारी जो एफपीएस है, हमारी जो स्पीड है, वो उसकी स्पीड से मैच नहीं कर रही। इसीलिए वो लोग जो ध्यान में बहुत गहरे उतरे कॉन्शियसनेस के लेवल पर बहुत गहरे गए और उस गहरा जाने के लिए उन्होंने क्या किया? अपनी फाइव सेंसेस को शटडाउन किया। क्योंकि
(11:23) ये जो बॉडीली एक्सपीरियंस है इन फाइव सेंसेस के पास वो कैपेबिलिटी नहीं है कि वो फैन की स्पीड से पार जा सकें। जैसे ही मैंने अपने आईज को क्लोज किया मेडिटेशन करने के लिए। जैसे ही मैंने सुनना बंद किया और मैं इनवर्ड मेरा ट्रांजिशन होना शुरू हुआ। जैसे ही मैंने मौन धारण किया, मैं चुप हुआ, मेरी बहुत सारी सेंसेस काम होने लगी। जैसे हम कई बार देखते हैं ना कि बहुत से ऐसे स्पीशीज हैं, बहुत से ऐसे इंसेक्ट्स होते हैं जिनको बारिश आने से पहले बारिश का पता चल जाता है। हमें अगर Google ना बताए तो हमें पता नहीं चलेगा। राइट? उनको कैसे पता चल जाता है? जिसके
(11:55) पास सेंस जितनी कम होती जाएगी उसकी सिक्स सेंस उतनी ज्यादा बढ़ती जाएगी। और आपने नोट भी किया होगा बहुत से लोग जिनकी आंखें चली जाती है उनके पास कुछ एक्स्ट्रा वो डिवाइन सुप्रीम बीइंग दे देता है। उनके गले में सुर आ जाएगा। उनकी जो सेंसिंग एबिलिटी है बड़ी अच्छी हो जाएगी। क्यों? एक सेंस कट डाउन हुई तो हमने वो जो एनर्जी वो कहीं और ट्रांसफॉर्म हो जाती है। हमारे पास एक बैटरी है इनवरर्टर होता है ना जैसे बैटरी है उसकी कैपेसिटी सब सपोज़ कीजिए 1000 वाट है। अब हमने ये सब लाइट्स ऑन कर रखी हैं और हमको एक मेन स्टूडियो लाइट जो 1000 वाट की है वो जलानी है। ये लाइट नहीं
(12:29) जल पाएगी अगर बाकी सब लाइट्स जल रही हैं क्योंकि उसकी पूरी कैपेसिटी वहां यूज़ हो रही है। लेकिन अगर मैं बाकी सभी लाइट्स को कट डाउन करता हूं तो मैं इसकी लाइट को पूरा फोर्स वहां पे आ जाएगा उस लाइट का। तो हमारी जो पूरी एनर्जी हमारी सेंसेस से सुनने में, बात करने में, बकब-बग करने में, ऑब्जर्व करने में जो सारी एनर्जी लगी है, जब हम उसको इनवर्ड शांत करते हैं तो वो एनर्जी वो सिक्स्थ जो एनर्जी गेटवे है वहां पर जाकर हिट करना शुरू करती है। जिससे कि हम उस लेवल क्योंकि मेरे पास यह कैपेसिटी नहीं है कि मैं वो फैन के ब्लेड्स को चलता हुआ देख पाऊं। मेरे
(12:59) आरपीएस उतने नहीं है। लेकिन जो कॉन्शियसनेस है, जो हमारी चेतना है, उसकी जो एनर्जी है, जब हम उसके साथ कनेक्ट करते हैं, तो हम महसूस कर पाते हैं कि और इसीलिए मैं अक्सर यह बात बोलता हूं कि जब गौतम बुद्ध अपना ध्यान करके जब उनको कहते हैं ज्ञान प्राप्त हुआ तो उनके सबसे पहले शब्द थे गहा करा का दत्तितोसी पुनः गह नकाहासी। ओ हाउस बिल्डर यू हैव सीन। घर बनाने वाला देख लिया गया। पुनः गहम ना नकाहासी। अब दोबारा मेरा आवागमन नहीं है क्योंकि देखने वाला देख लिया गया। करेक्ट। आई एम कॉन्शियस अबाउट द कॉन्शियसनेस। राइट? मैंने देख लिया कौन
(13:36) है? मैं यह नहीं हूं क्योंकि मैंने उसको देख लिया कि यार सब कुछ एनर्जी है। देयर इज नो मैटर। तो आइंस्टीन के टाइम से और धीरे-धीरे जब ये डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट हुआ तो क्वांटम मैकेनिक्स, क्वांटम फिजिक्स, क्वांटम साइंस जब आई, हमने उस पार्टिकल के डीपेस्ट लेवल जिसको हम क्वांटा बोलते हैं जो कि एक एनर्जी पैकेट है सब एटॉमिक पार्टिकल्स का। हम वहां तक उतरे तो पता चला कि मतलब अभी तो रीसेंट अभी हम ऑफ द कैमरा भी बात कर रहे थे। अभी रीसेंट जो दो साल पहले जो नोबेल प्राइज है हर एक कैटेगरी में दिया जाता है। फिजिक्स कैटेगरी में भी दिया जाता है। जिंदगी में
(14:07) पहली बार फिजिक्स कैटेगरी में नोबेल प्राइज क्वांटम फिजिक्स को मिला है। राइट? और क्या एक्सपेरिमेंट था? क्वांटम एंटेंगलमेंट उसका नाम था। क्वांटम एंटेंगलमेंट का मतलब कि एक पार्टिकल जो यहां है वो करोड़ों लाइट इयर्स दूर किसी दूसरे पार्टिकल से भी कनेक्टेड है। कनेक्टेड है। बिकॉज़ जब हम उस एनर्जी फील्ड में जाते हैं तो देयर इज नो टाइम, देयर इज नो स्पेस। इट कैन बी एनीवेयर और एवरीवेयर एज वेल। वो एक टाइम पर दो जगह पर भी हो सकता है। क्योंकि वो इतनी स्पीड से मूव कर रहा है क्योंकि उसके लिए टाइम और स्पेस इट इज बिय्ड टाइम एंड स्पेस। तो जो टाइम एंड
(14:43) स्पेस के बिय्ड है वो कहीं भी हो सकता है, कभी भी हो सकता है और कितना ही हो सकता है। जो आप बातें कर रहे हो क्योंकि मैंने जैसा पहले भी कहा कि मैं योग काफी टाइम से पढ़ती रही हूं, पढ़ाती रही हूं। तो वहां पे भी जैसे आपने कहा एक पार्टिकल एक वक्त पे दो जगह भी हो सकता है। तो कुछ इस तरह की सिद्धियों के बारे में बात होती है। जो हमारे कुछ ऋषिज थे उनके पास ऐसी सिद्धियां थी कि वो एक वक्त पे कई जगह पे सीनंस देख सकते थे। मतलब वो वहां उनकी कॉन्शियस प्रेजेंट हो सकती फिजिकल फॉर्म में वो यहीं पर हैं। इसी कमरे में हैं। इसी कुर्सी पे बैठे हुए हैं या इसी आसन में
(15:10) बैठे हुए हैं। लेकिन उनकी कॉन्शियसनेस कई जगहों पर ट्रैवल करके वापस आ जाती है। और आपने कहा कि जैसे इंसेक्ट्स को पता चल जाता है बारिश आने वाली है। ये सिर्फ इंसेक्ट्स की कॉन्शियसनेस ही मुझे लगता है अगर हम अपने भी हिस्ट्री में जाएं। अगर हम अपने ऋषियों पे जाएं या अगर हम आज से ज्यादातर नहीं 100 150 साल पहले भी चले जाए तो बहुत ज्यादा लोगों को पता चल जाता था। इनफैक्ट जो खेती करते हैं, फार्मर्स हैं उनको पता चल जाता है कि कब बारिश होने वाली है या तीन दिन में मौसम कैसा होने वाला है। बिकॉज़ यू आर कनेक्टेड टू टू द नेचर एट दैट लेवल। जब हम आज इतने
(15:41) डिस्ट्रैक्टेड हैं कि हमें हमें इन सब चीजों को फंडामेंटल तौर पर समझना पड़ रहा है। तो आपने एनर्जी को डिफाइन किया। देखिए एनर्जी जो मुझे भी समझता है जैसे हमने कुछ साइंस की भी बात की। तो दो लेवल्स पे इसकी बात करते हैं। एक तो साइंटिफिक लेवल पर है जो एनर्जी को जैसा आपने बताया एटम है, वेव है, फ्रीक्वेंसी है, वाइब्रेशन है। एक दूसरा लेवल है स्पिरिचुअल लेवल ऑफ एनर्जी। जहां पे हम इसको प्राण के रूप में डिफाइन करते हैं। जहां पे हम इसको अगर चाइनीस फिलॉसफी लूं तो ची के ची कहा जाता है। या फिर यू नो लाइफ फोर्स अगर इंग्लिश का शब्द
(16:12) यूज़ करूं तो। तो ये जो दोनों साइंस और स्पिरिचुअलिटी के जो दोनों कांसेप्ट्स हैं मतलब साइंस मतलब जो ग्रॉस लेवल पर है एक्सिस्ट करता है जिसे हम एक्सपेरिमेंटेशन के थ्रू प्रूफ कर सकते हैं। और जो स्पिरिचुअल लेवल पर है जो हम कॉन्शियसनेस की बात कर रहे हैं। चेतना की जो बात कर रहे हैं उस लेवल पे। ये दोनों लेवल पे कहां जाके मैरी होते हैं। कहां जाके ये ये कांसेप्ट एक ऐसा कांसेप्ट बनता है जो आज की डेट में मेरी लाइफ के लिए रेलेवेंट है। मतलब ये जानना बहुत अच्छी बात है। ये कांसेप्ट्स पता होना बहुत अच्छी बात है। बट मेरी लाइफ में इसका क्या यूसेज है? अगर
(16:41) एनर्जी के बेसिस पे मैं डिसाइड करती हूं कि मुझे किसी की एनर्जी पसंद आएगी या नहीं आएगी। मुझे खुद की एनर्जी लो लग रही है, हाई लग रही है, नेगेटिव लग रही है। वाइबेशंस नहीं मैच हो रही है। अगर इस वाइब के बेसिस पे मैं इतने डिस्टेंस बना रही हूं तो ये ये इस इसका पूरा ये ये कहां पे आके कांसेप्ट ये कंसोलिडेट होता है एक इंडिविजुअल के लिए। अमेजिंग। और मैं इसको एक छोटा सा एग्जांपल कोट करके समझाना चाहूंगा। सपोज अभी आप एक जगह पर हो जिसको हम नाम देते हैं पॉइंट ए। आपको जाना है पॉइंट ए से 1 कि.मी.
(17:09) पीछे। ठीक है? पॉइंट ए से 1 किलो वहां कोई रास्ता नहीं है। लेकिन उसका दूसरा रास्ता बना हुआ है जो कि पॉइंट ए से होकर के पूरे अर्थ का ग्लोब का पूरा चक्कर लगाकर पॉइंट बी तक पहुंचेगा। जो कि आपसे जस्ट 1 कि.मी. पीछे है। यानी डिस्टेंस कितना हुआ? बहुत थोड़ा। लेकिन क्योंकि वहां रास्ता नहीं है। हमको वो रास्ता विजिबली जो दिख रहा है वो आगे की तरफ दिख रहा है। तो हम उस आगे के रास्ते पर चलकर उसको पूरा पार करके पीछे से पहुंचेंगे। यह जो आगे से चलने का रास्ता है दिस इज़ व्हाट साइंस इज़ डूइंग। और वो जो पीछे 1 कि.मी.
(17:39) जंप करना था वो स्पिरिचुअलिटी वो कर रही थी। यह मैं आपको थोड़ा सा और इसको डिटेल में जाकर पावरफुल अगर इसको हम सच में अभी जैसे आप जो प्लेसमेंट बता रहे हो मैं उसको अपने माइंड में प्ले कर रही हूं तो इतना पावरफुल है ये स्टेटमेंट और एग्जांपल जो आपने दिया कि एकदम से समझ में आता है कि हाउ साइंस एंड स्पिरिचुअलिटी आर कमिंग टुगेदर टू सॉल्व अ प्रॉब्लम फॉर मी। और यह मैं इसलिए नहीं कह पा रहा हूं क्योंकि मैंने ये कहीं पढ़ा है या मैंने सुना है। मैं डेली बेसिस पर हजारों लाखों लोगों को एक्सपीरियंस करता हूं। जैसे मैं इवेंट की भी बात कर रहा था।
(18:06) लोग आते हैं तो वो अपनी आंखों के सामने मैंने एक्सपीरियंस किया है जो हम सुनते थे कि यह ऋषि होते थे, यह मुनि होते थे, यह साधु होते थे। वो लोग वो एक्स्ट्रा सेंसरी परसेप्शन जिनको हम ईएसपी बोलते हैं जिनकी आप बात कर रहे थे। चाहे वो क्लै वंस हो, क्ल कॉग्निशन हो, टेलीपैथी हो, इन सब के बारे में। तो लोग जब उस रेल्म में जाते हैं, मेडिटेटिव एक्सपीरियंस में जाते हैं, नो मैटर व्हाट उसने जिंदगी में कभी मेडिटेशन किया हो या ना किया हो, वो तीन-चार दिन के अंदर यह एक्सपीरियंस करने लगते हैं कि उनको पहले से कई चीजों का आभास होने लगता है। कुछ मैसेजेस आने लगते
(18:37) हैं। कुछ डिवाइन लोग उनको आकर के कुछ चीजें बताने लगते हैं। जो लाइफ के बहुत सारे ब्लॉकेजेस हैं उनको ओपन कर देता है। खैर अगर हम इस टॉपिक पर वापस आए तो अगर वह जो लोग हमारे जो एंशिएंट टाइम्स में हुए जो योगीज हुए उन्होंने एक बहुत खूबसूरत बात बोली उन्होंने बोला यथा ब्रह्मांडे तथा पिंडे जो इस ब्रह्मांड में है वही इस पिंड में है। और आपको मैं इसके इतने एग्जांपल्स दे सकता हूं। गैलीलियो गैली को तो हुए कितने मतलब कुछ ही साल हुए मतलब एक एक टाइम लिमिट मेरे ख्याल 1400 1500 के आसपास गैलीलियो गैली हुए। जिन्होंने टेलिस्कोप उन्होंने देखकर गैलीलियो
(19:13) गैलीलियो से पहले तो हमें लगता था कि यार ये सन जो है ये हमारे चक्कर लगा रहा है। ये आया ये गया ये रोज आता है रोज जाता है। पहली बार तब पता चला कि सन इज़ नॉट रिवॉल्विंग अराउंड द अर्थ दैट अर्थ इज रिवॉल्विंग अराउंड द पहली बार हमें कब पता चला जब उन्होंने वो देखा ब्रह्मांड के अंदर। लेकिन जो लोग हमारे अंदर उतरे उन्होंने तो अंदर उतर के बताया कि यह नवग्रह हैं। हमारे यहां हजारों साल पहले नवग्रह के मंदिर बना करते थे। जब स्पेस में ट्रैवल करने के लिए पॉसिबिलिटी नहीं है तो आपको कैसे पता चल रहा है कि यह बृहस्पति है ये ये जुपिटर है। यह सन है,
(19:45) यह मून है, यह मार्स है, यह सैटर्न है और सैटर्न के अराउंड रिंग है। ये कैसे पता चल रहा है? सैटर्न के अराउंड जो लेयर है वो एट शेप लेती है। एट नंबर क्यों दिया गया सैटर्न को? वो उन्होंने अंदर उतर के जाना। और ये कहां अंदर उतर के जाना उन्होंने? बहुत अच्छी बात है। जब हम अभी स्टार्ट कर रहे थे तो मैंने एक चीज की बात की कि यह जो फिजिकल बॉडी है जिसको हमने फिजिकल बॉडी समझा यह बेसिकली फाइव लेयर्स से बना हुआ एक पिंड है। जिसमें सबसे जो ग्रॉस लेवल पर जो हमें दिख रहा है दैट इज आवर अन्नमय कोष फिजिकल बॉडी। लेकिन जो इसके अंदर की कुछ
(20:17) लेयर्स हैं जिसको हमने प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष और आनंदमय कोष बोला। तो जब हम उन लेयर्स में धीरे-धीरे टैप इन करना स्टार्ट करते हैं तो धीरे-धीरे हम उस ब्लिस बॉडी जिसको बोला या निर्वाण शरीर हमने उसको बोला हम उस तक धीरे-धीरे टैप इन कर पाते हैं। और ये आज कोई ऑकल्ट या कोई सूडो साइंस नहीं है बल्कि एक ऐसी प्रैक्टिस है जिसको हम लोग तो डेली रूटीन में हम लोग तो प्रैक्टिस करते हुए ना सिर्फ खुद करते हैं बल्कि सैकड़ों हजारों लोगों को देखते हैं। तो इसके लिए हमें टैप इन करना पड़ता है अन्नमय कोष से प्राणमय कोष में। अब यह कैसे होता है? प्राणमय कोष
(20:50) से मनोमय कोष में यह कैसे होता है? उसका एक प्रॉपर मेथड है मनोमय कोष से विज्ञानमय कोष में। तो हर एक चीज के जब हम मेथड्स को फॉलो करते हैं। जैसे फॉर एग्जांपल एक चीज मैं आपको बताता हूं। अन्नमय कोष हमारी फिजिकल बॉडी है। उसके बाद आता है प्राणमय कोष जिसमें हमारी 72,000 नाड़ियां प्रवाहित हो रही हैं। हमारे प्राणमय कोष में। उन्हीं 72,000 नाड़ियों में हमारे शरीर को रेगुलेट करने वाले सेवन चक्रास भी हैं। उन्हीं 72,000 नाड़ियों में ईथर नाम का एक तत्व जिसको आज मॉडर्न मेडिकल साइंस या क्वांटम साइंसेस डिस्कवर कर रही हैं कि ये ईथर जो है जिसको हमने आकाश तत्व बोला
(21:22) है। ये ईथर जो है ये हमको चलाए हुए हैं। तो हमने ये हजारों साल पहले जाना कि ये ईथर तत्व जिसको हमने प्राण ऊर्जा बोला। आज आप देखोगे ब्रेथ की बहुत बात होती है। और मैं अक्सर ये एग्जांपल भी कोट करता हूं कि ब्रेथ इज नॉट द ओनली लाइफ फोर्स। मींस मींस ब्रेथ इज़ द लाइफ फोर्स। बट जैसे हमारा ब्लड है तो ब्लड में कितने कॉम्पोनेंट्स होते हैं? एक एमच्योर के लिए या एक वो इंसान जो किसी मेडिकल फील्ड को नहीं जानता उसके लिए ब्लड इज़ ब्लड। हम लेकिन एक डॉक्टर को पता है कि इसके अंदर डब्ल्यूबीसीस भी हैं। इसके अंदर आरबीसीज भी हैं। इसके अंदर प्लेटलेट्स भी हैं।
(21:54) उसके अंदर कितने सारे कॉम्पोनेंट हैं। क्या अगर किसी एक आम आदमी को वो ब्लड दिया जाए वो क्या उसमें से प्लेटलेट्स और वो सब कुछ निकाल सकता है? उसके लिए पॉसिबल ही नहीं है नेकेड आइज से वो देखना। ठीक वैसे ही जो हम सांस ले रहे हैं जिसको हमने श्वास बोला इस श्वास के अंदर आकाश तत्व अलग है। इस श्वास के अंदर प्राण तत्व अलग है जो इसके साथ प्रवाहित कर रहा है। और इसका सबसे बड़ा एग्जांपल आप देखोगे शोभा तो वो यह है कि जब भी एक इंसान इस दुनिया से चला जाता है उसकी प्राण मुक्ति निकल गए उसके बाद कितनी भी ऑक्सीजन उसको दो वो वापस से खड़ा नहीं हो पाएगा। मैं यह नहीं
(22:27) कह रहा हूं ऑक्सीजन हमें नहीं चलाती। चलाती है। लेकिन जो यह प्रकृति हमें ऑक्सीजन दे रही है, उस ऑक्सीजन के अंदर एनर्जी भी है जिसको हमने ची बोला। लाउड्स ने उसको ताऊ बोला। उसी को हमने वाइटल फोर्स बोला और उसी के साथ ये ईथर एलिमेंट भी है जो हमारे मनोमय कोश और आनंदमय कोष तक को भी प्रभावित कर रहा है। लेकिन उसको निकेड आईज से देख पाना हमारे लिए पॉसिबल नहीं है। उसको हम एक्सपीरियंस कर सकते हैं थ्रू सर्टेन मेडिटेशंस एंड अदर प्रैक्टिससेस। श्वास का भी बेसिकली दो लेवल्स पे हम एक तरह से डिवाइड कर सकते हैं। वन इज द ग्रॉस लेवल जो कि फिजिकली
(22:59) ऑक्सीजन जो है O2 जो है वो जा रही है। एंड द सेकंड इज़ द सल लेवल जो आप देख नहीं सकते, छू नहीं सकते, पकड़ नहीं सकते। बट दैट लाइफ फोर्स जिसकी हम बात कर रहे थे अभी कि प्राणशक्ति। तो ये स्पिरिचुअल और जो साइंस के दोनों का जो एक अमल्गमेशन है, ये आज की डेट में हम लोग यूज़ कर रहे हैं टू सॉल्व अ लॉट ऑफ ह्यूमन प्रॉब्लम्स जो आज की डेट में मेरी लाइफ में फिजिकल एलिमेंट्स हैं, मेंटल हैं, इमोशनल है, स्ट्रगल्स हैं। इनको हम कैसे सॉल्व करें विद विद विद ऑल ऑफ़ दीज़। अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ ऑल दिस कि साइंस के साथ-साथ स्पिरिचुअलिटी का एंगल भी बहुत इंपॉर्टेंट होता जा रहा
(23:29) है। और मुझे लगता है जो आने वाला टाइम है, अगले पांच सालों में इस पे और ज्यादा रिसर्च भी होने वाली है और ज्यादा फॉलोअर्स भी बढ़ने वाले हैं। क्योंकि ओनली साइंस आई थिंक जो जैसा आपने कहा कि एक रूट तो वहां से भी बनता है लेकिन एक रूट और बनता है जिसके लिए आई थिंक अब अब ज्यादा काम हो रहा है। तो हम एन एनर्जी के बारे में बात कर रहे थे। प्राण को हमने समझने की कोशिश की। सटल लेवल पर भी समझने की कोशिश की। नाउ अगर एनर्जी का कांसेप्ट जो है जो एनर्जी है इतनी इंपॉर्टेंट है और इतनी सीक्रेड है। है ना? मेरी बॉडी में इतने सारे फंक्शनैलिटीज को चला रही है। एंड बॉडी के
(24:02) बाहर मेरे रिश्ते कैसे होंगे? मेरा माइंडसेट क्या होगा? मेरे गोल्स कैसे दिखेंगे? मुझे पर्पस की समझ कैसे होगी? लाइफ में क्या करना है? ये सब भी एक तरीके से गवन कर रही है। राइट? कि मैं किन लोगों के साथ कनेक्टेड फील करूंगी या नहीं फील करूंगी। तो जो एनर्जी है इसका नेचुरल फॉर्म क्या है? और ये अपने नेचुरल फॉर्म से एक डेविएटेड फॉर्म जिसे हम नेगेटिव एनर्जी कहते हैं उसमें कैसे चली जाती है? क्यों एनर्जी नेगेटिव हो जाती है? कैसे आइडेंटिफाई करेंगे? अमेजिंग। पहले तो बहुत अच्छा क्वेश्चन है आपका। लेकिन इस पर मैं आपको एक छोटी सी चीज जरूर बताना चाहूंगा।
(24:35) देखिए जब हम एनर्जी की बात करते हैं, एनर्जी अच्छी या बुरी नहीं है। हम ऐसा नहीं कह सकते कि ये एनर्जी बुरी है, नेगेटिव एनर्जी है, ये पॉजिटिव एनर्जी है। हम उसको मतलब ऐसा डिफाइन तो करते हैं, लेकिन एनर्जी इन इटसेल्फ इज नॉट अ गुड और बैड थिंग। इट्स जस्ट एनर्जी। इट्स जस्ट एनर्जी। हम कहां पर हम डीविएट होना शुरू हो जाते हैं? हम वापस से एक ही चीज से सब चीजों को अगर कनेक्ट करके देखें। हमने जितना अपने आप को बॉडी समझा उतना ज्यादा हम इस एनर्जी से डेविएट होने लग जाएंगे। जितना मैंने इसे मैटर समझा उतना ज्यादा मैं इस मैटर के साथ
(25:08) कनेक्ट होना शुरू हो जाऊंगा। और जितना मैंने इससे डिस्टेंस बनाने की कोशिश की उतना मैं इससे लिबरेट होता जाऊंगा। अगर सिंपल टर्म्स में इसको समझने की कोशिश करें तो आप ऐसा देखो कि हम हर चीज बॉडी के लिए कर रहे हैं। हमारे सारे प्लेजर्स बॉडी से एसोसिएटेड हैं। हमारी जिंदगी की हर एक अचीवमेंट हम बॉडी के लिए कर रहे हैं। इनफैक्ट आज मैं लोगों को पूछता हूं कि आप लास्ट टाइम खुश कब हुए थे? तो वो कहते हैं सर परसों हुआ था। मैंने कहा नहीं आनंद आया। ब्लिस बिल्कुल। कब लास्ट खुश कई बार हम मेडिटेशंस करते हैं तो आप हैरान हो गए। लोग सीधा अपने बचपन में चले जाते हैं।
(25:40) उनके पास यह मेमोरी तक नहीं है पिछले 20 30 40 सालों की कि व्हेन वास द लास्ट टाइम आई वास सो हैप्पी। मेरे पास ये मेमोरी नहीं है। उनको 40 साल पुरानी बात याद आती है जब वो बहुत खुश थे। मतलब क्या इन 40 सालों में ऐसा कुछ हुआ नहीं? कुछ नहीं हुआ। और अगर नहीं हुआ तो क्या आपने इतनी अनकॉन्शियस लाइफ जी? क्योंकि हमने कॉन्शियसली कभी अपनी लाइफ को जीने की कोशिश ही नहीं की। हम हमेशा से बॉडी के साथ ही अटैच रहे। हर प्लेजर बॉडी के साथ अटैच किया और जितनी भी चीजें जिंदगी में चाह रहे हैं या हमको कोई सेटबैक्स भी लग रहे हैं वो भी फिजिकल लेवल पर लग रहे हैं।
(26:11) लेकिन अनुराग मैं ये प्रॉब्लम भी समझती हूं लोगों की कि बॉडी से या मटेरियल से या मैटर से हम इतना अटैच्ड क्यों हैं? क्योंकि जो भी मेरे एक्सपीरियंसेस इस वर्ल्ड में होने वाले हैं। मेरा बॉडी उसका एक गेटवे है। उसी के थ्रू होंगे। अगर मुझे आपके साथ दोस्ती करके बहुत अच्छा लगेगा तो इस बॉडी के थ्रू ही वो एक्सपीरियंस अनलॉक होगा। आई एम रियली रियली सॉरी। आई एम इंटरप्टिंग इन बिटवीन। बॉडी के थ्रू एक्सपीरियंसेस जरूर होंगे लेकिन बॉडी के थ्रू मैं वो फील कर पाऊंगा लेकिन एक्सपीरियंसेस मेरे प्राण और मेरे मन के थ्रू हो रहे हैं। वही चीज़ है जहां पे मुझे
(26:39) लगता है गैप आ रहा है क्योंकि हम सिर्फ इसी लेवल तक समझ रहे हैं कि अगर मुझे कुछ खाने से अच्छा टेस्ट लगेगा तो बॉडी को ही लगेगा। अगर मुझे घूमना पसंद है तो बॉडी को पसंद है। तो इसीलिए सब लोग बॉडी लेवल पर मुझे लगता है अटक गए हैं। तो जो हम दूसरे डायमेंशन की बात करें उस पे थोड़ा इलैबोरेट करते हैं। यू नो आई जस्ट वांट टू हाईलाइट कि जो व्यूअर इसे देख रहा है दे शुड आल्सो फील कि ये बहुत नेचुरल है। अगर हम बॉडी से कनेक्टेड भी हैं और बॉडी के थ्रू ही सब कुछ यू नो रिलेट कर रहे हैं। इट इज ओनली नेचुरल। क्योंकि सारे एक्सपीरियंसेस बचपन से जिस तरह से हम बड़े
(27:08) होते जा रहे हैं। बॉडी के थ्रू ही मुझे सब कुछ मिला है। और जो ब्लिस वाली फीलिंग लोग 40 साल पुरानी भी याद करते हैं वो भी बॉडी के थ्रू ही कुछ हुआ होगा। किसी ने कोई ऐसी बात कही होगी जहां आपको कुछ ऐसा फील हुआ होगा या आपने कुछ ऐसा किया होगा या आपको कुछ ऐसी चीज मिली होगी जिसके थ्रू इट इज़ ऑल कनेक्टेड टू बॉडी। सो इट इज़ ओनली ऑब्वियस दैट पीपल आर कंफ्यूज्ड दैट एवरीथिंग अराउंड मी रिवॉल्व्स अराउंड माय बॉडी। है ना? इसीलिए फिजिकल पेन होता है तो फटाफट से हमें इलाज चाहिए। फिजिकल प्लेज़र नहीं हो रहा है तो उसका सशन चाहिए। फिजिकल प्लेज़र को समझना है तो उसके लिए
(27:37) डिटेलिंग चाहिए। लेकिन ये जो दूसरी डायमेंशन है जिसकी आप बात कर रहे हो इसके बारे में ध्यान नहीं है। तो क्योंकि अब हम इस कन्वर्सेशन में थोड़ा एस्टैब्लिश कर चुके हैं कि देयर इज़ अ सेकंड डायमेंशन टू इट। उसके बारे में थोड़ा और इवॉल्व करते हैं कन्वर्सेशन। जैसे शोभा आप एक चीज देखिए कि मान लो अगर मैंने एक एफडी किया बैंक में और मुझे पता है कि ये 10 साल का एफडी है तो 10 साल के बाद वो मैच्योर हो के बहुत ब्यूटीफुल हैंडसम अमाउंट या जो भी मैंने कहीं इन्वेस्ट किया या हमारे एनसेेस्टर्स ने लैंड ली या कुछ भी इन्वेस्ट किया तो वो 10 साल 20 साल 100
(28:03) साल के बाद जिसको मिला वो वो नहीं था जिसने वो इन्वेस्ट किया था वो कोई और बीइंग था| इनफैक्ट कई बार स्पिरिचुअलिटी में ये टर्म यूज़ किया जाता है कि जिस नदी में आप एक बार डुबकी लगाते हो दूसरी डुबकी भी वापस उस पानी में नहीं लगा सकते क्योंकि वो भी निकल चुका है ना वो पानी सेम है ना आप सेम हो ना आप सेम हो आप भी वो नहीं रहे हो सो ट्रू तो अब जिसको वो एक्सपीरियंस हो रहा है ऑब्वियसली वो बॉडी के लेवल पर हो रहा है लेकिन जिसके थ्रू वो एक्सपीरियंस हो रहा है वो हमारा मन और हमारे प्राण हैं और जहां तक अभी जैसे आपने थोड़ी देर पहले एक बात बोली ना कि अब शायद
(28:34) इसकी नीड बढ़ रही है या लोगों का अवेयरनेस बढ़ रहा है या आने वाले टाइम में स्पिरिचुअलिटी की बात बहुत ज्यादा होने वाली है। मैं आपको एक चीज बताऊं ये जितने भी इनवेडर्स आए हमारे कंट्री में इनके आने से पहले स्पिरिचुअलिटी वास द ओनली मीडियम। देयर वाज़ ओनली वन रिलीजन एंड दैट रिलीजन वाज़ हैप्पीनेस। सिर्फ इन चीजों की बात की जाती थी और आप यकीन मानो कि हमारे यहां से जो ट्रेजर था मतलब कोहिनूर वाज़ नॉट द रियल ट्रेजर। रियल ट्रेजर नालंदा विश्वविद्यालय में हमारे पास लॉक्ड था। तक्षशिला में हमारे पास लॉक्ड था। और यह टाइम वो टाइम था जब बाहर से लोग हमारे पास यहां पढ़ने
(29:10) के लिए शिक्षा लेने के लिए आया करते थे। तब सिर्फ और सिर्फ स्पिरिचुअलिटी की बात थी। लेकिन इस सबको इतना ज्यादा मतलब हमसे दूर ले जाया गया कि हमको ये क्योंकि 10 बार अगर आप किसी झूठ को दोहराओ ना वो भी सच लगने लग जाता है। ठीक उसी तरह ये जब टाइम हमारे से गया और वो सब एविडेंसेस हमारे पास से गए जो हमारे लिए एक टेस्टिमनी का काम करते थे कि एक इंसान यह कर रहा है तो मैं भी यह करके इस चीज को अचीव कर सकता हूं वो हमसे दूर कर दिया गया। इसलिए हमने ये बॉडीली कनेक्शन ज्यादा एस्टैब्लिश किया। लेकिन मुझे लगता है इसको ब्रेक करने में कोई 10 20 50 साल का
(29:40) सिद्धि योगी होना जरूरी नहीं है। अगर द मोस्टेंट थिंग इफ यू आर रेडी ऑल द थिंग्स आर हियर? इज इट लाइक अ लाइट स्विच बटन कि आपने बटन ऑन किया तो आप उस स्टेट में आ जाएंगे अवेयरनेस में। इज इट लाइक दैट सिंपल। इट्स दैट सिंपल इफ यू आर रेडी फॉर इट? ये डिपेंड करता है। व्हाट डस दैट मीन? वो कंडीशन क्या है? इफ यू आर रेडी का मतलब क्या है? जैसे मान लीजिए कि सपोज आप एक एक्सपर्ट स्विमर हो। आपको स्विमिंग बहुत बढ़िया, बहुत शानदार आती है। अब ऑल ऑफ अ सडन कुछ ऐसा हुआ कि चारों तरफ पानी ही पानी है। अब हाउ मच टाइम यू विल टेक टू यू नो गेट इंटू द वाटर एंड स्विम?
(30:16) लाइक दैट ओनली। मुझे स्विमिंग बिल्कुल नहीं आती है। मुझे स्विमिंग की 10 20 25 किताबें जरूर पढ़ाई गई कि ये बटरफ्लाई स्ट्रोक होता है। ये बैक स्ट्रोक होता है। ये ऐसा ये ऐसा। अब अगर मेरे सामने वो सिचुएशन आती है तो मुझे कितनी देर लगेगी स्विमिंग करने में? आई विल नॉट बी एबल टू। देर छोड़ो मेरा हैप्पी बर्थडे हो जाएगा उस पानी में। क्यों? दोनों के लिए सिचुएशन सेम थी। एक क्यों कर पाया? क्योंकि उसको पहले से उस चीज का एक्सपीरियंस था। तो ये कांसेप्ट जो स्पिरिचुअलिटी में जिसको हम लोग बोलते हैं ओल्ड सोल कि आप कितना इवॉल्व हो के आ रहे हो? आपकी चेतना
(30:45) किन-किन एक्सपीरियंसेस को लेकर के आ रही है। ऑफबीट है लेकिन लेट मी गिव यू दिस एग्जांपल। एक इंसान मेरे पास आए। वो बोले कि सर शी वास अ गर्ल। और वो मुझे बोली कि ये एक इंसान मुझे बार-बार धोखा देता है। इसने मुझे पांच बार धोखा दिया है। बड़ा गहरा है। लेकिन हम कनेक्ट कर पाएंगे। पांच बार इसने मुझे धोखा दिया है। मैंने कहा जी उसने तो आपको एक ही बार दिया है। चार बार तो आपने खुद लिया है। कोई भी इंसिडेंस हमारी लाइफ में इसलिए हो रहा है ताकि हम उससे एक्सपीरियंस लेके इवॉल्व हो सकें। एवरी गुड एंड बैड थिंग इज हैपनिंग जस्ट बिकॉज़ कि हम उससे
(31:21) एक्सपीरियंसेस लें। मुझे दिस इज़ माय पर्सनल नोशन। मैं किसी को यह थोपता नहीं हूं। मेरा अपना विश्वास है। मुझे लगता है कि इस रेल्म में हम लोग कुछ एक्सपीरियंसेस लेने आए हैं। हमारी सोल इवॉल्व होने आई है सोल के लेवल पर कि वो अपने सोर्स के साथ कनेक्ट हो सके और उसके कनेक्शन के लिए मुझे बहुत सारी चीजों से डिटच होना पड़ेगा। बहुत सारी चीजों से लर्निंग लेनी पड़ेगी और वो लर्निंग लेने के लिए अब भगवान स्वयं तो मेरे आगे प्रकट नहीं होंगे। वो मुझे एक्सपीरियंसेस देते हैं। मीडियम्स बनते हैं, माध्यम बनते हैं। उन माध्यम को अगर मैं पेन से एसोसिएट करता
(31:54) हूं तो मैं इमोशनल ट्रॉमा में जाता हूं। अगर मैं उसको लर्निंग से एसोसिएट करता हूं तो मैं विज़डम की तरफ जाता हूं। तो कहने का मतलब यह है कि वो व्यक्ति जो आज कई चीजें एक्सपीरियंस नहीं कर पा रहा। उसने बहुत से एक्सपीरियंसेस को पेन समझकर अपनी जिंदगी में सफरिंग समझकर वो स्टक है। और वो लोग जैसे मैं अक्सर एक एग्जांपल देता हूं। अरुणिमा सिन्हा ट्रेन में ट्रैवल कर रही थी। लड़कों ने कुछ उठाकर ट्रेन से फेंक दिया। उसकी टांग कट गई लड़की की। अब वो चाहती तो वो सुसाइड कर ले। वो कहती मेरा तो लाइफ खत्म हो गया। मैं क्या करूं? लेकिन वो उठी वापस और उसने
(32:29) कहा कि अब मैं माउंट एवरेस्ट चढ़कर के दिखाऊंगी कि मैं वीक नहीं हूं। एंड शी क्लाइम्ड माउंट एवरेस्ट। उसके बाद किलो मंजर हो। उसके बाद और बहुत सारे पीक्स उसने तो ये चेतना कहां से आई कि बहुत सारी चीजों से हमारी सोल इवॉल्व होती हुई आई है। लर्निंग लेती हुई आई है। पेन लेती हुई नहीं आई। इसीलिए कहीं ना कहीं ये जो टर्म है ना जो होता है अच्छे के लिए होता है। ये हर कोई व्यक्ति नहीं समझ सकता। लेकिन अभी बहुत सारे लोग हैं अनुराग जो इस पेन और ट्रोमा की साइकिल में फंसे हुए हैं। जैसा आपने कहा कि पांच बार धोखे मिले उन्हें और वो उसी साइकिल के रेपटेशन में
(33:01) अटके हुए हैं लोग। तो ट्रॉमा को भी थोड़ा समझने की कोशिश करते हैं। हमने समझा कि एनर्जी सिर्फ एनर्जी है ना पॉजिटिव है ना नेगेटिव है। तो हम उसको कैसे चैनलाइज करें अपने ट्रॉमा को बेटर अंडरस्टैंड करने में और हीलिंग क्या होता है? एक फंडामेंटल लेवल पे अगर हीलिंग को हम समझें तो क्या यह सिर्फ एक यू नो पेन फ्री स्टेट है, एब्सेंस ऑफ़ पेन है या फिर कोई एक प्रोफाउंड इंटरनल शिफ्ट है। प्रोफाउंड इंटरनल ट्रांसफॉर्मेशन है जो आपके लिए और कुछ अलग तरीके के एक्सपीरियंसेस अनलॉक करेगा? देखिए मैं अगर पहले हीलिंग की बात करते हैं हम लोग फिर ट्रॉमास की बात करते
(33:35) हैं। हमें ऐसा लगता है कि हम जीरो पर हैं और हमें हीलिंग के लिए 10, 20, 50, 100 कदम आगे बढ़ना पड़ेगा। मतलब हम जीरो पर हैं और हमें 100 पे जाना पड़ेगा व्हिच इज अ वेरी डिफिकल्ट टास्क। लेकिन हीलिंग हमारी एक नेचुरल स्टेट है जिसको साइंस ने बोला होमियोस्टेसिस। होमियोस्टेसिस का मतलब क्या है? कि हमारी बॉडी के पास एक ऐसी नेचुरल एबिलिटी है जो इसको बिल्कुल नेचुरल स्टेट में रख सकती है। अब जब हम हीलिंग की बात करते हैं तो यहां से एक चीज समझ में आएगी कि हमको हीलिंग के लिए 100 स्टेप्स आगे नहीं जाना। हम खुद 100 स्टेप्स पीछे हुए हुए हैं। हमको जीरो पे
(34:07) आना है। अगर हम ये सोचेंगे कि बहुत सारे नए स्टेप्स मुझे लेने हैं तो मेरे लिए हमेशा ये डिफिकल्ट टास्क रहेगा। लेकिन जब मैं ये समझूं कि मैं तो अपनी नेचुरल स्टेट पे जीरो पे ही वापस आ रहा हूं। सिर्फ जो कुछ एक ट्रॉमाज़ या कुछ एक जो इमोशंस या कुछ एक ऐसी सफरिंग्स जिनको मैंने स्टक कर लिया माइंड और बॉडी में सिर्फ उनको रिलीज करना है। और जब हम उनको रिलीज करते हैं देयर आर वेज़ कि हम उनको कैसे रिलीज कर सकते हैं। जब हम उनको रिलीज़ करते हैं तो हम वो 100 स्टेप्स ऊपर नहीं लेते बल्कि हम अपनी नेचुरल स्टेट में आ सकते हैं। जिसको हम लोग बेसिकली हीलिंग बोलते हैं। तो जो
(34:38) हमारा नेचुरल स्टेट है जैसे मैं अभी कुछ देर पहले आपसे एनर्जी की नेचुरल स्टेट की भी बात कर रही थी कि वो क्या है? तो एनर्जी का नेचुरल स्टेट एक इजी हील्ड अ फ्री फ्रॉम पेन ऐसा कुछ वर्जन है। बट जो पेन आ गया है आप कह रहे हो कि वो आप 100 स्टेप्स पीछे चले गए हो। आपको नेचुरल स्टेट में वापस आना है। व्हिच इज़ एट ईज़। ये आप कह रहे हो। राइट? सो हीलिंग का जो कॉम्पोनेंट है क्या वो सिर्फ इस पेन को खत्म कर देना है? या इस पेन का ना होना है या फिर कुछ ऐसे प्रोफाउंड इंटरनल शिफ्ट्स हैं, कुछ ऐसे गहरे भीतरी बदलाव हैं जो हीलिंग को डिफाइन
(35:12) करते हैं। होता क्या है? मतलब आई वांट टू अंडरस्टैंड एट द ग्रॉस लेवल। फिजिकल लेवल पे आपने बात की होम्योस्टेटस का है कि हमारा यू नो नेचुरल स्टेट क्या है और बॉडी के अंदर वो कैपेसिटी है। बॉडी हम बॉडी की बात कर रहे हैं। बट हीलिंग जो है वो बहुत सारे लेवल्स पर होती है। बॉडी की भी होती है, माइंड की भी होती है, इमोशंस की भी होती है। बहुत सारी सिचुएशनंस लाइफ में उसकी हीलिंग होती है। तो हाउ हाउ डू वी अंडरस्टैंड ऑल दिस? सो ब्यूटीफुल। सबसे पहले तो इसमें आपके चार क्वेश्चंस हैं। सबसे पहले वाले क्वेश्चन पर आते हैं। मैं बहुत कोशिश कर रही हूं ऐसा सीखने की। मुझे
(35:41) कभी-कभी कमेंट्स भी आते हैं कि आपके क्वेश्चंस थोड़े लंबे हो जाते हैं। लेकिन मैं उस थॉट में चली जाती हूं और थोड़ा डीप चली जाती हूं। तो इट बिकम्स लगर। तो आई वुड लाइक टू अपोलजाइज टू माय ऑडियंस आल्सो। ओके। तो सबसे पहले हम उस बात पर आते हैं जहां पर आपने कहा कि पेन को खत्म करना है। नहीं हमें पेन को खत्म नहीं करना। मैं एक एग्जांपल देता हूं। इसके लिए मेरा एक दोस्त था। एक दिन वो गायत्री मंत्र का जाप कर रहा था। तो मैंने उससे पूछा मतलब वे बैक मैंने उससे पूछा मैंने कहा यह जो तुम मंत्र कर रहे हो इससे क्या भगवान तुमको दिक्कत नहीं
(36:09) देगा? ही गव मी अ वेरी ब्यूटीफुल आंसर। उसने मुझे बोला दिक्कतें तो आएंगी लेकिन इससे मुझे उनको सहन करने की शक्ति मिल जाएगी। हमें पेन को खत्म नहीं करना। हमें उससे कैसे डिटच होना है हमें यह सीखना है और हमारे यहां पर तो अगर हम हीलिंग की बात करें शोभा तो आप यह देखोगे कि शल्य की चिकित्साएं हुई, सुश्रुत की चिकित्साएं हुई या और बहुत सारे भाव प्रकाश की चिकित्साएं हुई। ये लोग लोगों की सर्जरीज कर दिया करते थे उनको उनके उस पर्टिकुलर पेन से डिटच करके और यह मैं हजारों साल पहले की बात कर रहा हूं। कब कर दिया करते थे? जब मेडिकल साइंस भी इतनी इवॉल्व नहीं
(36:44) हुई थी। लेकिन हमारा दुर्भाग्य प्लास्टिक सर्जरी कुछ हुआ ही नहीं करता था। तब सुश्रुत ने पूरी अपनी पुरण लिख दी। हां। कहने का मतलब यह है कि और इसमें सबसे बड़ी गलती हमारी भी है कि वो जो सुश्रुत या जो चरक थे वो जितने काम कर गए उसको हमने आगे नहीं बढ़ाया। हम आज भी उन्हीं की गुडविल पे जिंदा हैं। हम आज भी उन्हीं का ही नाम ले रहे हैं कि सुश्रुत ने ये कर दिया, चरक ने ये कर दिया। लेकिन मॉडर्न मेडिकल साइंस ने इवॉल्व किया। उसने एक्सपेरिमेंट्स किए। उसने धीरे-धीरे और चीजें की और हम एक आयुर्वेद का टप्पा लगा के उनका सुश्रुत का
(37:12) नाम लेके और हम यहां पर कहते हैं कि जब तक हम उन चीजों को हमने कितना उसमें एक्सपेरिमेंट्स किए हमने कितनी रिसर्चेस की उनके बाद उनके जाने के बाद जो चीजें नालंदा से तक्षशिला से छीन ली गई उनको दोबारा से इस्टैब्लिश करने के लिए हमने क्या किया? हमने नहीं किया। तो सबसे पहली चीज जो हमें करनी है एव्री इंडिविजुअल कैन डू दैट वो ये करना है कि हमें पेन से डिटच होना है। अब डिटच होना क्या इतना ज्यादा आसान है कि मैंने कह दिया और हो गया नहीं। इसीलिए हमारे यहां गुरु शिष्य की एक परंपरा होती थी कि वो व्यक्ति जो चीजों को जानता है वो दूसरों को वो बता सके क्योंकि
(37:43) खुद से एक्सपीरियंस लेने में कई बार उम्रें निकल जाती है। जैसे मैं कई बार कहता हूं कि एक बुक पढ़ना किसी इंसान की पूरी जिंदगी को पढ़ लेना है। उसने अपनी पूरी जिंदगी का निचोड़ एक बुक में दिया है। बुक क्यों नहीं पढ़ते हो? और अगर आपने 10 लोगों की किताबें पढ़ी समझो 10 फिलॉसोफर्स की 10 ब्यूटीफुल सोल की 10 पावरफुल थिंग टैंक्स की आपने यू नो एक्सपीरियंस को आपने इतनी जल्दी अब्सॉर्ब कर लिया तो ठीक उसी तरह हमारे पास सबसे पहली चीज जो एक अच्छा गाइड या टीचर किसी को बता सकता है जो मैं एक गाइड या टीचर नहीं हूं लेकिन हां आपके पॉडकास्ट के
(38:17) माध्यम से अगर कोई ये व्यक्ति समझना चाहे तो सबसे पहली चीज कि बहुत सारे इमोशंस बहुत सारी ऐसी चीजें जो हमारे सरफेस लेवल पर हैं उनको उनको हमको एक डिस्टेंस से देखना पड़ता है। अब हम उनको डिस्टेंस से क्यों नहीं देख रहे हैं? वापस से कनेक्ट करते हैं। क्योंकि हम बॉडी के साथ इतने ज्यादा एसोसिएटेड हैं कि मुझे हर एक पेन मेरा ही पेन लगता है। मुझे लगता ही नहीं कि मुझ में और उस पेन में कोई डिस्टेंस है। वो एक ही है। एक ही है। अगर मेरी आंखों के सामने ऐसे कोई बुक रख दी जाए तो कितने चांसेस हैं। मैं उसको पढ़ पाऊंगा और अगर मैं उसको यहां रखूं तो बहुत क्लियरली
(38:48) पढ़ पाऊंगा। आचार्य रजनीश ने इसके ऊपर एक बहुत खूबसूरत एग्जांपल दिया है। उन्होंने कहा है कि एक इंसान का दोस्त था। उसके फ्रेंड के घर में कोई मिसहैपनिंग हो गई और वो वहां पर उनके घर पर जाता है। वो दोस्त उसका रो रहा है। बहुत परेशान है। वो कह रहा है कोई बात नहीं रो मत। आत्मा अमर है। शरीर नश्वर है। ये तो होता है। अच्छा लोक मिलेगा। ये वो सब बातें करके वापस आ जाता है। 10 ही दिन के बाद वो जो पहला दोस्त था उसके घर कोई कैजुअलिटी हो गई। अब यह रो रहा है और वह आकर बता रहा है आत्मा अमर है, शरीर नश्वर है। जब हम किसी चीज को डिस्टेंस से देखते हैं ना तो डिस्टेंस से
(39:21) हम उस चीज से डिटच हो जाते हैं। और एक क्लेरिटी एमर्ज होती है। एक लेडी जा रही है रोड पे। उनकी एज है लगभग 70। वो रोड से गिर जाती हैं। मुझे कितना दर्द होगा? ऑब्वियसली थोड़ा सा लगेगा मैं उनको जाकर हो सकता है थोड़ा हेल्प कर दूं। लेकिन वहीं अगर उस लेडी की जगह हमारी मदर हो तो और ज्यादा दर्द होगा। क्यों? क्योंकि मैं है अब मुझे बहुत ज्यादा दर्द क्यों हो रहा है? एक ही सिचुएशन में अरुणिमा सिन्हा कुछ और बोल रही है और हम छोटी सी ब्रेकअप के बाद भी हम सुसाइडल थॉट्स में क्यों आ रहे हैं? तो समझना यहां पर यह है कि हमारा अटैचमेंट उसके साथ बहुत ज्यादा है। तो
(39:57) बेसिकली हीलिंग जो है वो सिर्फ पेन का एब्सेंस नहीं है और सिर्फ पेन से और अपनी सफरिंग से लड़ाई नहीं करनी है। दिस इज अ पॉइंट दैट आई वांटेड कि आप बहुत क्लियर शब्दों में क्लेरिफाई करो जो कि आपने किया भी कि मैक्सिमम जो मैं देखती हूं आज की डेट में और ये सिर्फ यंगस्टर्स की बात नहीं है। यह किसी भी ऐज ग्रुप में 70 इयर्स के लोगों को मैं देखती हूं। आप भी कोच हैं। मैं भी कोच हूं। आई एम श्योर आपके पास भी ऐसे क्लाइंट्स आते होंगे जहां पे आपको भी यह दिखता होगा कि ये लोग अभी भी उसी उसी क्वेस्ट में है कि ये पेन कैसे खत्म हो जाए। यू नो ये एक्सटर्नल जो बाहरी
(40:28) चीज है ये कैसे खत्म हो जाए ये कैसे बदल जाए या परिवर्तित हो जाए राइट रादर देन डिस्टेंसिंग देमसेल्व्स फ्रॉम दैट पर्टिकुलर थिंग जो आप कह रहे हैं दूरी बनाने का तो ये दूरी बनाने को थोड़ा सा और इबोरेट कीजिए कैसे बनेगी ये दूरी कैसे डिस्टेंस आएगा कि हमें थोड़ी क्लेरिटी दिखाई दे क्योंकि जैसा आप अभी एग्जांपल भी दे रहे थे आचार्य रजनीश वाला कि उनके घर में कैजुअल्टी हुई तो दूसरे इंसान का बोलना आसान था और इनके घर में कैजुअल्टी हुई तो इनका बोलना आसान था लेकिन अपने घर में जो हो रहा है दोनों लोगों को हालांकि दोनों के पास पास ज्ञान है। राइट? लेकिन
(40:57) एक वक्त पे जब वो ट्रिगर आता है, कोई भी इमोशनल ट्रिगर हो सकता है, ट्रोैटिक ट्रिगर हो सकता है, ब्रेकअप हो सकता है, जॉब लॉस हो सकता है, किसी अपने पर्सनल रिलेशनशिप का लॉस हो सकता है। कुछ भी हो सकता है। राइट? जब एक ट्रिगर आता है तो सारा ज्ञान जो है विज़डम है वो जीरो पर चली जाती है। मैं ऐसे बहुत सारे लोगों को जानती हूं जो पिछले पता नहीं 30, 35, 40 सालों से स्पिरिचुअलिटी में प्रैक्टिस कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही एक ट्रिगर आता है और मैं बड़े ट्रिगर्स की बात नहीं कर रही हूं। मैं छोटे-छोटे ट्रिगरर्स की बात कर रही हूं जो हम घर में अमूमन तौर पर कभी
(41:27) अपनी हाउससेल्फ से झगड़ा करते हैं, कभी किसी बाहर वाले पड़ोसी से कुछ अनबन रखते हैं या मन में कुछ थॉट्स ऐसे रखते हैं। ट्रिगर आती है वो सारा विज़डम चला कैसे जाता है? तो ट्रिगर से और खुद खुद के मनोस्थिति के बीच में डिस्टेंस कैसे पैदा करें? बहुत बढ़िया। इसमें भी चार क्वेश्चंस हैं। मैं एक-एक करके सबका जवाब देने की कोशिश करता हूं। सबसे पहले तो लास्ट वाले पर आते हैं जहां पर आपने यह बात की कि वो विज़डम चला कैसे जाता है? मैं आपको यहां क्लियर करना चाहूंगा कि ये विज़डम आया ही नहीं था। देयर इज अ बिग डिफरेंस। देयर इज अ बिग डिफरेंस बिटवीन इंफॉर्मेशन एंड
(41:58) नॉलेज। इंफॉर्मेशन मींस मुझे यहां से जयपुर जाना है। कितनी दूर है? मैं Google से इनफार्मेशन ले सकता हूं। मिल जाएगी बहुत ईजीली कि यहां से इतने किलोमीटर्स है। लेकिन अगर आप जयपुर रेगुलर ट्रेवल करते हो और मैं आपसे पूछूं कि मुझे जयपुर जाना है। तो आप मुझे ना सिर्फ किलोमीटर्स बताओगे बल्कि आप मुझे ढाबा भी बताओगे। यहां पर रुक कर खाना खा लेना। यहां पर थोड़ा सा ना वर्क इन प्रोग्रेस है और यहां पर ऐसे होगा। और जब सीकर पहुंचने वाले हो तो बाहर से बाईपास से कट ले लेना। दिस इज़ व्हाट? दिस इज़ नॉलेज। आपने उस चीज को एक्सपीरियंस किया है। जिसके पास विज़डम है
(42:26) ट्रू विज़डम वो वो वो स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस में नहीं है। मतलब वो स्पिरिचुअल प्रैक्टिससेस से ऊपर है। जो उस सिचुएशन में घबरा जा रहा है या जिसके पास वो ऐसा चैलेंज आ रहा है। इसका मतलब अभी वो इनफेटिव लेवल पर चीजों को जान रहा है। उसने अपने अंदर उन चीजों को उतारा नहीं है। ये इंटेलेक्चुअल इंफॉर्मेशन जेन्युइन ट्रू ट्रांसफॉर्मेशन और विज़डम में कब शिफ्ट होती है? कैसे शिफ्ट होती है? क्योंकि मैं देख रही हूं इंटेलेक्चुअल इनफेशन बहुत लोगों को मिल रही है। हमारे पॉडकास्ट के थ्रू भी इंटेलेक्चुअल लेवल पे हम यहां पे बहुत सारे हैवी वर्ड्स डाल
(42:57) सकते हैं। क्वांटम फिजिक्स डाल सकते हैं। मेटाफिजिक्स डाल सकते हैं। स्पिरिचुअलिटी एंड डिटचमेंट एंड ब्ल ब्ल ब्ल बहुत सारी टर्मिनोलॉजीस डाल सकते हैं। बट इनको सिर्फ इंटेलेक्चुअल लेवल पर समझ लेना कि डिटचमेंट एज अ कांसेप्ट क्या है? ट्रॉमा एज अ कांसेप्ट क्या है? बट एक्चुअल में यह मेरी पर्सनल इंटरनल विज़डम में फीड हो जाना ताकि जब मेरे पास ये ट्रिगर आए तो मैं इतना विचलित ना होऊं जितनी मैं आज हो रही हूं। वो स्टेट कैसे? हाउ दैट ट्रांसफर हैपेंस? एक कांसेप्ट दिया गया। एक ऑथर थे। उन्होंने एक बहुत अच्छा कांसेप्ट दिया। उन्होंने कहा कि हम तीन स्टेजेस में काम
(43:27) करते हैं। हैविंग, डूइंग एंड बीइंग। अगर हम इसको रिवर्स कर दें तो यह एक वो नेचुरल स्टेट है जिससे हम यह थोड़ा डिस्टेंस कर सकते हैं कि हम किसी भी चीज को एक्सपीरियंस करने से पहले उसको करने से पहले हम उसके बीइंग के स्टेट में आ जाए। होना और कुछ भी चीज जब वो हमारे विज़डम के लेवल पर उतरेगी, उसके उतरने के लिए हमको कुछ प्रैक्टिससेस करनी पड़ेंगी। जिन प्रैक्टिससेस से हम ऑब्वियसली वो इंटरनल स्टेट को इवॉल्व कर पाएंगे। क्योंकि ये जो भी ट्रोमेटाइज हम हो रहे हैं या जो भी पेनफुल मेमोरीज हमारे पास बंधी हुई बैठी हुई हैं। जिन सिचुएशन से हम ट्रिगर हो रहे
(43:59) हैं। बेसिकली इसका ट्रिगर होने का सबसे बड़ा कारण ही यही है कि हमने कभी भी वो जो नॉलेज हमारे पास इंफॉर्मेशन हमारे पास आ रही थी। हमने उसको अप्लाई नहीं किया। और मैं अक्सर लोगों को देखता हूं, बोलता भी हूं कि लोग स्टक्स पे स्टैक्स बनाने जा रहे हैं। एक वीडियो, दूसरा वीडियो, तीसरा वीडियो, चौथा और इतनी इंफॉर्मेशन गैदर कर रहे हैं। जैसे मान लो हमारे घर में गेहूं की एक बोरी आए जिससे आटा बनता है। वो एक बोरी आ गई। आपके घर में चार लोग हैं खाने वाले और हमने क्या किया? एक के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा और हमने 50 बोरी वो घर
(44:28) में इकट्ठी करके रख ली। लेकिन हम कंज्यूम कितना कर रहे हैं? अब बहुत सारे चांसेस हैं कि बाकी की 49 रटन हो जाएंगी। खराब हो जाएंगी। लेकिन अगर एक-एक करके वो आती और हम उसको कंज्यूम करते रहते तो ना कुछ खराब होता। हम उसको इजीली डाइजेस्ट भी कर पाते। यही हो रहा है कि इंफॉर्मेशन एज में इंफॉर्मेशन इतनी ज्यादा ओवरलोडेड है और हम उसको रेगुलरली स्टेप बाय स्टेप स्टेप बाय स्टेप कंज्यूम करते जा रहे हैं लेकिन हम उसको इंप्लीमेंट नहीं कर रहे। मान लो अगर आज आपके पडकास्ट के थ्रू मैं कोई एक टेक्निक बताता हूं कि आपको यह वाला ब्रेथ वर्क या यह प्राणायाम या यह मेडिटेशन करना
(45:00) चाहिए। 99% लोग उसको देख के बहुत अच्छा वीडियो को लाइक भी कर देंगे, कमेंट भी कर देंगे। लेकिन कितने ऐसे लोग हैं जो इस वीडियो के बाद बंद करेंगे कि नाउ YouTube इज क्लोज्ड। मैं तो 99.999% लेके जाऊंगी उस नंबर को। कि अब बंद हो गया। मैंने यहां से एक अच्छी चीज सीखी। अब मैं सट डाउन आराम से बैठूंगा। रिलैक्स करूंगा। अपनी ब्रेथ पे ध्यान लगाऊंगा और मैं ये प्रैक्टिस करने वाला हूं। दिस क्रिएट्स द बिग डिफरेंस। और सबसे बड़ी दुख की बात यह है कि जिसकी लाइफ में आज शायद सब स्मूथ चल रहा है। वो तो चाहे एक बार इग्नोर भी करे। लेकिन जो सफर भी कर
(45:31) रहा है जो एक्सजेक्टली उन्हीं क्वेश्चंस का आंसर ढूंढ रहा है जो हम बात कर रहे हैं वो तक अप्लाई नहीं करना चाहते हैं। वो अप्लाई कर भी नहीं पाएगा। फ्रैंकली सेइंग वो अप्लाई कर भी नहीं पाएगा। एक बहुत अच्छी बात हमारे लोग कह करके गए कि दुख में सुमिरन सब करें। सुख में करे ना कोई। जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होए। हम जब बड़ी बुरी कंडीशन में फंसते हैं तब हम ढूंढते हैं कि हमें क्या-क्या करना है। लेकिन वह बुरी कंडीशन ना आए उसके लिए क्या-क्या करना था। वो हम कभी भी उसको हम प्रेफरेंस नहीं देते हैं। मैं अक्सर लोगों को एक बात बोलता हूं। कई
(46:05) बार कुछ लोगों को बुरी लग जाती है कि जब तक लाइफ में कोई बैड न्यूज़ नहीं आ जाती, बुरी रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक हम ट्रांसफॉर्मेशन के लिए तैयार नहीं है। जब वो आती है फिर हम ट्रांस ट्रांसफॉर्म करना चाहते हैं। अब हमारा बीइंग किसके साथ कनेक्टेड है? पेन के साथ, बहुत सारे सफरिंग के साथ, बहुत सारे ट्रॉमाज़ के साथ। अब उसके लिए वह 100 स्टेप्स नीचे है। अब कवर उसको 100 स्टेप्स ही करने हैं। लेकिन जब आप जीरो पर थे, आप क्यों नहीं 10-20 कदम और आगे बढ़ा लेते थे कि पीछे भी जाएं तो कभी माइनस में ना जाएं। हम लेकिन कहते हैं ना ट्रेजडी इज़ द डोर वे टू
(46:37) ट्रांसफॉर्मेशन। ट्रेजडी के वक्त पे ही आपको समझ में आता है कि अब कुछ बदलाव की जरूरत है। तो हम ट्रिगर्स की बात कर रहे हैं। ट्रेजडी की बात कर रहे हैं और जो व्यूअर्स इसे देख रहे हैं वो अपनी लाइफ में जो भी सिचुएशन में आज स्टक फील कर रहे हैं जहां पे ट्रिगरर्ड फील करते हैं। चाहे वो किसी फैमिली मेंबर के साथ ट्रिगरर्ड फील करते हैं। किसी के किसी बिहेवियर की वजह से ट्रिगरर्ड फील करते हैं या कोई रिलेशनशिप लॉस है उसकी वजह से फील करते हैं। ब्रेकअप है या कोई रैंक नहीं आ रही है किसी एग्जाम में। कोई अपने पसंद की जॉब नहीं मिल रही है या किसी भी वजह से
(47:04) ट्रिगरर्ड फील करते हैं लाइफ में। उनके लिए इनिशियल स्टेप्स क्या हो सकते हैं टुवर्ड्स हीलिंग? बहुत बढ़िया। सबसे पहले तो मैं यह कहूंगा कि वह ट्रिगरर्ड फील करेंगे। दिस इज कंप्लीटली नॉर्मल। अगर मैं यहां पर बैठकर बड़ी-बड़ी बात कर रहा हूं। मैं भी ट्रिगरर्ड फील करूंगा तो इट्स कंप्लीटली नॉर्मल। लेकिन उस जो मैं ट्रिगर जिस चीज से हुआ, मैं उस स्टेट में बना ना रहूं। दैट इज मोस्टेंट। मैं उस स्टेट को अपना टेंपरामेंट और उसी स्टेट को अपनी पर्सनालिटी ना बना लूं। दैट इज मोरेंट। क्योंकि जब हम इवॉल्व करना शुरू करते हैं और हम यह सोचे कि हम एकदम से डिटच होकर हम
(47:37) बुद्ध हो जाएंगे। नहीं हम बुद्धू ही हैं। इंक्लूडिंग मी। हमको स्टेप बाय स्टेप स्टार्ट करना पड़ेगा। और यह स्टार्टिंग कहां से होगी? सबसे पहले एक चीज से कि जो भी हमको डे टू डे एक्सपीरियंसेस हो रहे हैं उन एक्सपीरियंसेस को हम डे बाय डे ऑन अ डेली बेसिस खत्म करना सीखें। कि वो जो मुझे इमोशंस आज फील हुए उसके लिए मैं क्या प्रैक्टिससेस कर सकता हूं। जिसमें सबसे ब्यूटीफुल दो प्रैक्टिससेस आपको बताता हूं। द फर्स्ट इज जर्नलिंग। जॉट डाउन एवरीथिंग। जो भी सब कुछ दिन में हुआ राइट इट डाउन। एक-एक इमोशन लिखो। सिर्फ यह नहीं कि मैं उनको
(48:13) मिला और उनको मिलकर के मुझे बहुत बुरा। नहीं उन्होंने क्या किया? कैसा किया? राइट इट डाउन। क्योंकि जब आप उसको लिखते हो तो एक किस्म से आपने उसको अपने अंदर से बाहर निकाल दिया। दिस गिव्स योर माइंड अ सिग्नल कि दिस पर्टिकुलर थिंग इज नो लगर इन माय माइंड नाउ दिस पर्टिकुलर थिंग इज नो लगर जस्ट यू एक डिस्टेंस आ गया एक डिस्टेंस आ गया वो कहते हैं ना उसको जला दो उस पेपर को ये कर दो बहुत सारे ऐसे रिचुअल्स होते हैं एक्साक्ट्ली पीपल आर डूइंग द सेम हमारा जो इवेंट हमारा इवेंट होता है नो दसेल्फ हम उसमें बड़ी-बड़ी आग की लपटें हमारा एक प्रॉपर सेशन होता है इस टेक्निक
(48:45) को बोला जाता है कैथारसिस कैथारस सिगमेंट फ्रॉयड ने एक बहुत ब्यूटीफुल कांसेप्ट दिया था सिग्मनट फ्रॉयड ही वाज़ द फादर ऑफ साइकोलॉजी द फाउंडर ऑफ़ साइको एनालिसिस और उनके एक एक उनके कोलीग थे। उनका नाम था जोसफ ब्रूअर। मैंने बहुत पढ़ा है उनके बारे में और जितना पढ़ता जाता हूं मुझे लगता है मुझे कुछ नहीं आता। मतलब इतना मैंने देखा है। उन्होंने ये टेक्निक दिया कैथारसिस। कैथारसिस में क्या होता है? आपके अंदर जो भी कुछ है आप उसको बाहर निकालते हो। एंड देयर आर सेवरल वेज़ टू टू डू दिस। इफ यू स्क्रीन आप अपने अंदर से कुछ बाहर निकाल रहे हो। इफ यू राइट इट
(49:16) डाउन आप अपने अंदर से कुछ बाहर निकाल रहे हो। आप पंचिंग बैग पे पंच करते हो। योर मैस्कुलर स्केलेटन सिस्टम गेट्स एक्टिवेटेड। आप अपने अंदर से कुछ बाहर निकाल रहे हो। सो देयर आर सेवरल वेज़ बट द मोस्ट ब्यूटीफुल वे इज कि आप उसको राइट इट डाउन करो लिखो क्योंकि आपकी पांचों सेंसेस से आपने उसको ऑब्जर्व किया अपने से बाहर एक डिस्टेंस पर देखा और एक प्रॉपर चैनल फॉलो हुआ कि मैंने इसको बाहर नहीं और फिर उसके बाद हम उसके बाद कुछ ब्रेथ वर्क्स करते हैं। एक बहुत ब्यूटीफुल हमारा मेडिटेशन होता है। एक घंटे का रिदममिक रिलीज हम उसको बोलते हैं कि हमारे अंदर से
(49:47) हम सोल फ्लो करके उस मेडिटेशन के थ्रू अपने अंदर से सब बाहर निकालते हैं। एक हमारे पास लेडी आई। आई जस्ट वांट गिव यू एन एग्जांपल केस स्टडी के माध्यम से। जी उनकी वाइफ थी। तो जब हमने मेडिटेशन शुरू किया करना था कैथारोसिस का प्रोसेस तो वो बोली मेरे जीवन में कुछ भी नहीं है। ऐसा कुछ बेकार जो हो मेरे को अपने अंदर से कुछ भी नहीं निकालना। तो मैं क्या करूं? तो मैंने उनको कहा कि आप नोटपैड और पेन अपने आगे रख लो। जब आप यह एक आवर लॉन्ग मेडिटेशन से बाहर निकलोगे तो आप देख लेना। और आप यकीन मानिए उस लेडी ने जिनके पास लिखने को कुछ नहीं था। था। वो कह रही थी
(50:19) सब ब्लिस ही ब्लिस है। जब वो मेडिटेशन खत्म हुआ उन्होंने चार पेज भर दिए। यह कहां से आया? डीप विद इन सबकॉन्शियस लेवल पर बहुत सारी चीजें इस जन्म की नहीं बल्कि बहुत सारी और लाइफ्स की भी हमने सप्रेस करके रखी हुई हैं। क्योंकि हम जितना बॉडी से अटैच होते गए सप्रेशन होता गया। तो कैथारसिस में हम वो नोट डाउन करते हैं, राइट डाउन करते हैं और फिर हम उसको जलाते हैं, बर्न करते हैं हमारे इवेंट में। मतलब हम जो फायर लगाते हैं और फिर हम सबको बोलते हैं कि इसमें डालो नेचर के साथ कनेक्ट करिए। इट्स अ ब्यूटीफुल प्रोसेस। मतलब मैं आपको चाहूंगा कि इसके बाद हम
(50:52) आपको वो वीडियो दिखाएं कि हम कैसे कथासिस करते हैं और लोग अपने 20 25-25 साल पुराने पेनफुल मेमोरीज को बर्न कर जाते हैं। वो कहते हैं जिस चीज ने मुझे स्टक किया हुआ था मुझे आज तक फाइंड आउट ही नहीं कर पा रहा था मैं कि क्या वो चीज है जिसने मैं एक लड़की का अक्सर एक एग्जांपल देता हूं उनको अस्थमा था और पिछले लगभग 10-15 सालों से अस्थमा था और वो जब वो मुझे बोली कि सर अब तो बस सुसाइड ही इज द ओनली ऑप्शन मतलब मेरे पास मैं सब कुछ ट्राई कर चुकी हूं। अब तो मैं इन्हेलर के भी उस लेवल पर हूं कि मुझे तो एक एक्टिविटी होती है। उस एक्टिविटी के
(51:27) बाद उनके अंदर से मतलब उन्होंने यह बात बोली और मैंने एक पॉडकास्ट पे भी जिक्र किया था और फिर उनका मेरे पास उसके बाद कॉल भी आया। उन्होंने यह बात जब वो उस मेडिटेशन में डीप विद इन गई तो मेडिटेशन से बाहर निकली। शी वाज़ लिटरली क्राइंग। शोभा अभी भी मैं मैं मतलब आई हैव गूस बम्स राइट नाउ। वो लड़की छोटी सी बच्ची वो मुझे बोली कि सर व्हेन आई वाज अ किड अ फाइव ईयर ओल्ड मेरे चाचा मतलब सर मुझे सर मेरा मुंह बंद कर देते आई वाज आल्सो लाइक मतलब मैं जब उसको सुन रहा था मुझे भी कहते सर मेरा मुंह बंद कर देते थे सर सर मुझे सांस नहीं आता था
(52:08) सर मैं चिल्लाती थी अब उसका अब आप कह रहे हो कि डॉक्टर अस्थमा ठीक करेगा ऑब्वियसली डॉक्टर्स हमारे लिए गॉड से कम नहीं है। लेकिन यह जो चीज है यह बॉडी के लेवल पर है ही नहीं। उसकी सांस अंदर से बंद है। और जैसे ही उसने उसको रिलीज किया फिर उसको लिखा डेढ़ घंटे तक वो बच्ची रोती रही। उसके बाद उसने उसको बर्न किया। रिदममिक रिलीज किया। अपनी बॉडी को सोल फ्लो में डाला। एक पर्टिकुलर प्रोसेस होता है। वो दिन है और आज का दिन है। वो लड़की जो 15 साल से इस प्रॉब्लम में थी। सिर्फ 7 दिन के अंदर शी इज फ्रॉम पास्ट टू इयर्स शी इज लिविंग अ हेल्दी एंड ब्यूटीफुल
(52:44) लाइफ। बोलती है सर आपने मैंने कहा मैंने तो कुछ भी नहीं किया। आपके अंदर था सिर्फ हमने तो एक रास्ता दिया। सो दिस इज़ हाउ इट वर्क्स। जैसे हमने स्टार्टिंग में बात की ना मैं उसके साथ कनेक्ट करूं वापस से। अन्नमय कोष से प्राणमय कोष से मनोमय कोष। मनोमय कोश में इतने सारे इमोशंस, इतनी सारी फीलिंग्स जो हैं वो ट्रिगर हो के हो के ट्रिगर होना इज़ गुड। स्ट्रेस आना इज गुड। स्ट्रेस इज़ द मोस्ट ब्यूटीफुल मैकेनिज्म। गॉड हैज़ गिवेन अस द मोस्ट ब्यूटीफुल। स्ट्रेस नहीं आता। महेंद्र सिंह धोनी लास्ट बॉल पे नहीं लगा सकता है। स्ट्रेस नहीं आएगा आप एग्जाम में
(53:16) बढ़िया नहीं कर सकते हो। स्ट्रेस नहीं आएगा किसी चीज का काम करने का तो यू यू कांट परफॉर्म वेल। स्ट्रेस इज़ गुड। पर आप उसको टेंपरामेंट बना लो और पर्सनालिटी बना लो उसको रिपीट कर कर के। दैट इज बैड। परमानेंट स्टेट बन जाए। एक तरीके से स्टेट बन गया। अब उसको रिलीज़ करने के लिए देयर इज़ अ प्रोसेस कि हम उसको कथासिस के थ्रू रिलीज़ करें। फिर हम अपनी बॉडी से उसको शेड करें जिसको हम रिदममिक रिलीज मेडिटेशन से करते हैं। एंड देन सम ब्रेथ वर्क्स आर रिक्वायर्ड ताकि हम अपने प्राणमय कोष से भी अपने प्राणों को उस चीज से डिसएसोसिएट करें। एंड देन वो हमारे आनंदमय कोश में
(53:47) स्पॉनटेनियस रिफ्लेक्ट करने लगता है। स्पिरिचुअलिटी में एक चीज कही जाती है कि आपको अच्छे या बुरे से डिटच नहीं होना है। आपको इमोशन से डिटच होना है। यह एक सिक्के के दो पहलू हैं। मान लो मैं आपको कहता हूं यह एक कॉइन है। इसका हेड्स आप रख लो। टेल मुझे दे दो। इज इट पॉसिबल? अगर मैं किसी को कहता हूं कि बैड इमोशंस को तो रिलीज कर दो। अच्छे को पकड़े रहो। इज इट पॉसिबल? आप इमोशन से डिटच हो सकते हो। गुड और बैड से डिटच नहीं हो सकते। अगर हम स्पिरिचुअलिटी के एंगल से देखें। लेकिन अगर हम इसको दूसरे लेवल पर देखें इस फिजिकल बॉडी के
(54:20) साथ कनेक्ट करके देखें तो यहां पर हम एक बहुत ब्यूटीफुल चीज कर सकते हैं। किसी भी चीज को सिर्फ रिलीज करने से काम नहीं चलेगा। मतलब मेरे पास कोई आता है वो बोलता है कि मैं एडिक्ट हूं। मैं कुछ भी ड्रग कुछ भी या सिगरेट या कुछ भी अल्कोहल मैं कुछ भी लेता हूं और अगर मैं उसको बोलता हूं कि आप इसको छोड़ दीजिए तो देयर आर नो वेज़ कि वो उसको छोड़ेगा। हम क्या करते हैं? हम उसके उस पर्टिकुलर इमोशन को रिप्लेस करते हैं एलिवेटेड इमोशन से। जो प्लेजर का एसोसिएशन इस चीज के साथ हो गया है। अब उस प्लेजर का एसोसिएशन बदलना है। मुझे उस प्लेजर का एसोसिएशन बदलना है।
(54:57) कोई और चीज के साथ जो वैसी सी है या उससे बेहतर फीलिंग दे पाए। उससे बेहतर फीलिंग दे पाए जो कि दे सकती है और वो हमारे लिए हार्मफुल भी ना हो। तो हम क्या करते हैं? बेसिकली हम एक व्यक्ति को वो जो इमोशंस उसके पास हुए क्योंकि ये जितनी बात मैं कर रहा हूं ना इसको फील करने के लिए हमको उस मेडिटेटिव स्टेट में जाना पड़ता है। जो यह सुन के सिर्फ समझेगा उसको लगेगा यह बिल्कुल एक फिलॉसफी है ये। यह बोलना बहुत आसान है। लेकिन जब हम उस मेडिटेटिव स्टेट में जाते हैं, हमारा एक डिस्टेंस क्रिएट होता है तो मुझे वो इमोशन क्लियरली दिखने लगता है। मुझे उसके पेन पॉइंट्स दिखने
(55:30) लगते हैं। और मुझे उससे क्या चैलेंज आया वो भी दिखने लगता है और मुझे उससे क्या लर्निंग मिल रही थी यह भी दिखने लगता है। तो जब हम उस मेडिटेटिव एक्सपीरियंस से बाहर आते हैं उस लर्निंग को लेकर के और उसके बाद उसको हम रिप्लेस करते हैं कुछ ब्यूटीफुल इमोशंस से। आपके इंटरनल लेवल पर हमारा ब्रेन अलग-अलग ब्रेन वेव्स में ऑपरेट करता है। मैं जितनी बात बोल रहा हूं ये जो भी इस बात को सुन रहा है वो इसको बेटा अल्फा वेव में सुन रहा है। अल्फा से मतलब अल्फा के भी चांसेस बहुत कम है। बीटा में ही सुन रहा है। लेकिन अगर मैं ये बात जो बोल रहा हूं इसको कोई अल्फा या हायर
(56:05) अल्फा से मिड अल्फा, लोअर अल्फा और उसके बाद थीटा में लेवल पे आ जाए। यूं स्पॉनटेनियस रिमिशन होता है 100% क्योंकि आपका इंटरनल सेल्फ जो कि वह चीजों को स्टोर किए बैठा था आपका कॉन्शियस लेवल तो बातें सुनकर के सबकॉन्शियस तक पास ही नहीं होने देता इंपैक्ट ही नहीं क्रिएट करता तो सुख और दुख एक सुख सिक्के के दो अलग-अलग पहलू हैं। अगर हम स्पिरिचुअल एंगल से देखें तो हमें दोनों से डिटच होना है। और अगर हम इस मटेरियल एंगल से देखें तो इसके लिए हमको डिटच होने से पहले उसके मीनिंग को चेंज करना है कि वो करना है। उस इवेंट का मीनिंग क्या था? जैसे किसी ने बोला
(56:40) ब्रेकअप हो गया। इसका मीनिंग आप क्या ले रहे हो? कोई मुझसे मिलता है तो मैं पूछता हूं हाउस लाइफ गोइंग ऑन? एक तो डिस्टेंस है जो वक्त के साथ-साथ आएगा जो आपको कहते हैं टाइम हील्स वक्त बलवान है और विधि है और नेचर है और व्हाटएवर है और दूसरा है कि आप वो समझ पैदा करके जो हम ये कन्वर्सेशन कर रहे हैं वो प्रैक्टिससेस करके उनमें जिसमें हमने मेडिटेशन की बात की जिसमें हमने कैथारसिस की बात की, हीलिंग की बात की। इनको समझ के कुछ-कुछ काम करना शुरू करें तो शायद जिस ग्रीफ के पीरियड में आप 5 साल बिता देते हैं जिस एक्सपीरियंस के साथ जुड़े हुए शायद वो आप 2 साल में एक
(57:11) साल में एक दिन में खत्म कर पाए तो ये ये यहां से मैं टेक अवे ऑडियंस के लिए समराइज करने की कोशिश कर रही हूं कि ये जो जितनी हम बात कर रहे हैं इसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन उनकी जिंदगी में क्या है? प्रोसेस ऑफ़ ट्रांसफॉर्मेशन ये ओवरवेल्मिंग ना लगे कि यार ये तो बहुत सारी चीजें करनी पड़ेंगी। ट्रांसफॉर्मेशन मतलब फिजिकली भी करना पड़ेगा। और जितने लोगों ने फिजिकली ट्रांसफॉर्म किया उनको पता है कि जब फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन करते हैं तो पूरे दिन से लेकर रात तक हर एक चीज में उसका रिफ्लेक्शन होता है कि आप कब उठेंगे, कब सोएंगे, क्या एक्सरसाइज करेंगे, क्या खाना
(57:39) खाएंगे, किनसे मिलेंगे, कहां नहीं जाएंगे, लेट में क्या नहीं करेंगे। मतलब योर लाइफ रिवॉल्व्स अराउंड जस्ट दैट। और हम यहां होलिस्टिक वेलनेस और होलिस्टिक ट्रांसफॉर्मेशन की बात कर रहे हैं। जहां पर मेंटल, इमोशनल हर तरह की ट्रांसफॉर्मेशन है। तो थोड़ा सिंपलीफाई कीजिए इसको। देखिए सबसे पहले तो जो ट्रांसफॉर्मेशन है इसकी शुरुआत ही यहां से होती है। जिसको हम लोग कहते हैं वेल बिगन इज हाफ डन। जब आप सबसे पहला तो आप डिसीजन लेते हैं सिर्फ सुनने का नहीं बल्कि प्रैक्टिस करने का। आप उन चीजों को अपनी जिंदगी में उतारने का डिसीजन लेते हैं।
(58:06) सबसे पहला ट्रांसफॉर्मेशन यहां से शुरू होता है। ये ये सबसे बड़ा जॉइंट लीप है। मतलब लोग इसी लेवल पर रह जाते हैं। सुनने सुनने के लेवल पर उसको अपनी जिंदगी में उतारने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं करते हैं। तो ट्रांसफॉर्मेशन शुरू होती है जब आप ये इनिशियल स्टेप लेते हो कि मुझे अब ये प्रैक्टिसेस करनी है। मुझे अच्छा किसको ये प्रैक्टिससेस करनी है? किसको ट्रांसफॉर्मेशन की जरूरत है? हर एक को ट्रांसफॉर्मेशन की जरूरत? अगर मेरी लाइफ में सब हंकी डोरी चल रहा है। मेरे पास वैसा पार्टनर भी है जैसा चाहिए। मेरे फाइनेंससेस भी सॉर्टेड हैं। मेरी नौकरी भी
(58:33) बढ़िया है। तो फिर मुझे क्यों करना है ट्रांसफॉर्म? जब आज मेरे पास कोई भी ऐसी सिचुएशन आई जो अनवांटेड सिचुएशन है जिसको मैं नहीं चाहता था कि मेरी जिंदगी में आए। यह शायद उसी फेज के बाद आई होगी जब सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा था। अगर मैंने उस बढ़िया फेज में ट्रांजिशन अपना कर लिया होता। ट्रांसफॉर्मेशन किया होता तो शायद ये सिचुएशन जो मुझे जैसे मैंने आपको एक एग्जांपल दिया कि अचानक से पानी बहुत ज्यादा आ गया। अब मुझे तैरना नहीं आता है। मैं क्या करूं? लेकिन अनुराग यहां पे ना इग्नोरेंट या इग्नोरेंस इज़ अ ब्लिस का जो कांसेप्ट है वो भी लोग बहुत यूज़ करते हैं।
(59:03) मतलब मैंने देखा जो लोग स्पेशली वेल ऑफ हैं जिनके पास पैसे भी हैं कहने के लिए रिलेशनशिप्स भी हैं और काम भी ठीक चल रहा है। धंधा भी बढ़िया चल रहा है। वो लोगों को अगर कुछ बहुत ट्रैजिक एक्सपीरियंस या नेगेटिव एक्सपीरियंस आता भी है तो इग्नोर करके चले जाते हैं। मतलब अगर कोई लाइफ में लर्निंग सिखाने के लिए कुछ आया भी कोई ऐसा मानिए ब्रेकअप हो गया या कुछ फ्रेंड के साथ हो गया या फादर के साथ स्प्लिट हो गया या बिज़नेस में कुछ स्प्लिट हो गया। दे लाइक मूव ऑन करो क्योंकि हमारे पास एक एक फाइनेंसियल जो फ्रीडम है वो भी एक बहुत बड़ा आस्पेक्ट है लोगों का ट्रांसफॉर्मेशन
(59:31) को ना देख पाने का तो तो ऐसे लोगों के लिए या किसी जो लोग समझते हैं कि ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए है जो बड़ा लाइफ में डिप्रेस्ड और लॉस्ट और डिजेक्टेड और सप्रेस्ड फील कर रहे हैं। तो व्हाट डू वांट टू से अबाउट दैट? थोड़े क्लियर साइन बताइए दैट इंडिकेट दैट वन नीड्स टू ट्रांसफॉर्म? वेरी ब्यूटीफुल। अब देखिए, सबसे पहले तो हम इस चीज पर आते हैं कि वह लोग जिनको लगता है कि एवरीथिंग इज गोइंग वेरी वेल। सब कुछ बहुत ठीक है। फाइनेंसियली भी अबंडेंट है और हर चीज बहुत बढ़िया है। हर एक चीज हमारी लाइफ में जो भी हमें मिल रही है वो सिर्फ फाइनेंसियल
(1:00:06) आस्पेक्ट से नहीं मिल रही है। और लाइफ कभी भी पूरी जिंदगी एक जैसी नहीं रहती। जिंदगी हमेशा अप एंड डाउन लेती रहती है। मतलब जो कई बार ऐसा होता है कि मैं एक एग्जांपल भी एक दिन दे रहा था कि दो भाई थे। दोनों को बराबर-बराबर उनके पापा ने सारी प्रॉपर्टीज दी, सारा पैसा दिया। आज एक भाई हिंदुस्तान का सबसे अमीर आदमी है और दूसरा बैंकप्सी फाइल कर चुका है। तो अगर एक इंसान के साथ इस लेवल पर पहुंचने हम तो उस लेवल पर नहीं है भैया। तो अगर कोई 36,000 करोड़ होने के बावजूद आज एक बहुत बड़े डे में हो सकता है तो लाइफ कभी भी शिफ्ट हो सकती है। और आप
(1:00:39) एक चीज बड़े ध्यान से देखो कि वो लोग शायद आपको ध्यान हो तो मेरे लिए बहुत दिल दहला देने वाली ये पिक्चर्स थी जो अफगानिस्तान से आ रही थी जब वो लोग प्लेेंस के ऊपर लटकलक कर जा रहे थे। कब किसके साथ क्या सिचुएशन क्रिएट होती है हमको उसका बिल्कुल भी नहीं पता और वही बात दोबारा से रिपीट करूंगा कि दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे ना कोई जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होए तो जब सब कुछ बढ़िया चल रहा है दिस इज द राइट टाइम दिस इज द बेस्ट टाइम दिस इज द बेस्ट टाइम कि आपको सबसे ज्यादा जरूरत है इस टाइम ट्रांजिशन की और ट्रांसफॉर्मेशन की और आपके अंदर वो एनर्जी
(1:01:13) है जो उसको फैसिलिटेट भी कर पाएगी। फैसिलिटेट भी कर पाएगी। आपके पास वो पोटेंशियल है, आपके पास टाइम है, आपके पास मनी है, यू हैव एव्री रिसोर्स अवेलेबल। तो आप क्यों नहीं कर रहे हो? तो आप क्यों नहीं कर रहे हो? क्योंकि और ये सिर्फ क्योंकि ये जो जिंदगी है ना ये सिर्फ ये वाली लाइफ नहीं है। इसके पहले भी बहुत सारी लाइफ्स थी। इसके बाद भी बहुत सारी लाइफ्स होंगी। तो हम इसको जैसे आप तो वीडियो बनाते हो तो आपने वीडियोस को ना उस पे देखा होगा जो एडिटिंग सॉफ्टवेयर होता है। देखा आपने उस पे एडिटिंग सॉफ्टवेयर पे। तो उस पे एक एक जगह
(1:01:43) होती है जिसको हम लोग बोलते हैं टाइमलाइन। उस टाइमलाइन पर हम एक पूरा वीडियो डाल देते हैं। अगर हम उसको स्ट्रेच करते हैं तो हमको फ्रेम पर सिर्फ 1 मिनट का ही वीडियो दिख रहा होता है। लेकिन अगर हम उसको थोड़ा सा श्रिंक करें तो पता लगता है अरे यार ये वीडियो तो इतने से पार्ट में खत्म हो गया। 13.
(1:02:00) 8 बिलियन इयर्स की जर्नी जिसको हम जानते भी नहीं है। जिसके लिए हो सकता है यह जो हमको हेल्दी वेल्थी रिलेशनशिप सब कुछ अबंडेंट है। शायद हमको यह एनवायरमेंट दिया गया हो कि नाउ दिस इज द राइट टाइम यू हैव एवरीथिंग एंड नाउ लेट्स डू इट। आपको ये करना है तो मुझे ऐसे लगता है वो जो ट्रांसफॉर्मेशन का फज़ है ना वो सुख में सबसे ज्यादा आसान है दुख वाले के लिए तो वो मुश्किल है। उसके लिए तो वो एकदम से सिर पे पड़ा है। हर तरह की एनर्जी लानी पड़ेगी। उसके पास फिजिकल एनर्जी भी नहीं है अभी क्योंकि दुख ने इतनी आपकी एनर्जी सक कर ली होती है। इमोशंस को सप्रेस किया हुआ है। आप अगर सब कुछ बढ़िया
(1:02:33) फील कर रहे हो। सो मतलब व्हाट आई फील दिस इज द राइट टाइम। इसीलिए बहुत से लोग ये एग्जांपल अलग है लेकिन बहुत से लोग जो लाइफ में थोड़ा सा भी ग्रो कर जाते हैं ना उसके बाद वो बहुत ज्यादा रेस्टिंग मोड में चले जाते हैं और ये एक बहुत बड़ा रीजन बन जाता है कि वो आगे चलके जिन हाइट्स को टच कर सकते थे उनको टच नहीं करते शाहरुख खान का एक बहुत अमेजिंग डायलॉग है उसने बोला वो कहता है कि जब स्ट्रगल होता है तो सब लोग मेहनत करते हैं। किसी ने शाहरुख खान से पूछा कि आप में आप इतना ज्यादा काम करते हो और बाकी लोगों में क्या डिफरेंस है? वो कहता है जब स्ट्रगल में होते हैं
(1:03:03) सब लोग मेहनत करते हैं लेकिन सक्सेसफुल होने के बाद जो मेहनत शाहरुख खान करता है वो कोई नहीं कर सकता क्योंकि मुझे पता है एवरीथिंग इज टेंपरेरी और मैं जितना ज्यादा अपनी स्टेट को सॉलिडिफाई कर सकूं मैं उसको जितना ज्यादा मजबूत बना सकूं गॉड ने मुझे ये अपॉर्चुनिटी दी है कि सक्सेसफुल होने के बाद नाउ आई हैव ऑल द रिसोर्सेज अवेलेबल माय हेल्थ इज इंटैक्ट माय हैप्पीनेस इज एट पीक तो अब मैं जो कर सकता हूं वो शायद वो इंसान नहीं कर सकता। सो दिस इज द राइट टाइम कि आप इसमें वो ट्रांजिशन वो शिफ्ट लेके आ सकते हो और नोबडी इज परफेक्ट। हम
(1:03:34) तो बेसिकली ट्रांसफॉर्मेशन जो है वो सबके लिए है। स्पेशली वो लोग जो लोग अभी अच्छी स्टेट में हैं उनके लिए इजी है। उनके लिए और ज्यादा आसान है और शायद जरूरी भी है क्योंकि लाइफ का जो साइकिल है वो अच्छी स्टेट के बाद थोड़े बुरी स्टेट फिर और अच्छी स्टेट वो सब साइकिल भी चलती रहती है। और वो ये साइकिल सिर्फ ये एक लाइफ नहीं है। सिर्फ ये एक लाइफ नहीं है। अभी तो हम अभी तो आज धीरे-धीरे जो जब हम जैसे-जैसे क्वांटम की तरफ बढ़ रहे हैं क्वांटा को हम एक्सप्लोर कर रहे हैं तब हम ये जान रहे हैं कि ये पास्ट लाइफ्स हैं। हमारे मैं यह नहीं कह रहा हूं हमारे
(1:04:03) योगियों को मानो या हमारे यहां पर जो पूर्व जन्म का कांसेप्ट है उसको मानो। नहीं मैं कह रहा हूं आज साइंस भी इस बात को प्रूव कर रही है। कितने रिबर्थ ऐसे हुए हैं जिनको मैं खुद उसमें से एक बहुत बड़ा एग्जांपल हूं कि मुझे अपना पास्ट लाइफ जो है एक साल की उम्र में मुझे याद था। तो ऐसे बहुत से एग्जांपल्स हैं। तो दिस इज़ नॉट द ओनली लाइफ। लेकिन इस लाइफ में अगर आपको सब कुछ हेल्दी वेल्दी यंकी वैकी मिला है तो दिस इज द राइट टाइम कि आप इवॉल्व करो ताकि जब भी कोई टफ फेस आए उसमें आपके पास वो एजिलिटी हो। वो मेंटल टफनेस हो कि आप किसी भी सिचुएशन से ओवरकम कर सको।
(1:04:32) अनुराग आप इमोशनल नंबिंग को कैसे देखते हो? देखिए अभी हम सेम यही बात करेंगे कि जब हम किसी भी इमोशनल स्टेट में होते हैं उस इमोशन का उस टाइम पर आना एक नॉर्मल सी बात है। वो आएगा। लेकिन अगर हम उस स्टेट को टेंपरामेंट और पर्सनालिटी बना लेते हैं तो हम उस नंबिंग की स्टेट में जाते हैं। नमनेस ऐसे नहीं आएगी कि मैं अभी यहां बैठा हूं और मेरे लेग में नमनेस आ गई। नहीं आएगी। यह कब आएगी? जब मैं कंटीन्यूअसली इसी स्टेट में बैठा रहूंगा तो थोड़ी देर के बाद ब्लड का फ्लो रुकने लगेगा। तो वो जो इमोशनल नमनेस है ना वो पता है किसकी आ रही है जो उस स्टेट में लगातार बना रह रहा
(1:05:07) है। या तो उसके पास ये अवेयरनेस नहीं है या उसको ये अवेयरनेस देने वाला कोई नहीं है। इसलिए जब हम जैसे हम कथासिस की बात कर रहे थे तो मैं यहां पर एक और बात भी बोलता हूं कि एक अच्छा दोस्त आपकी जिंदगी में किसी बड़े अच्छे सर्जन से किसी अच्छे बड़े डॉक्टर से कम नहीं है। लोगों को लगता है रिलेशनशिप का मतलब है सिर्फ एक कोई हस्बैंड या वाइफ या यह मैं कहता हूं कि ये जो दोस्त हैं यह आपके सबसे ब्यूटीफुल जिनको आपने चूज़ किया है जो आपकी सोल से रेजोनेट करते थे आपके साथ आके कनेक्ट हुए हैं तो मैं कहता हूं जितने हो सकता है दोस्त अच्छे दोस्त क्योंकि एक
(1:05:44) अच्छा दोस्त आपको किसी भी ट्रोमेटाइज सिचुएशन से यूं बाहर निकाल सकता है यूं अभी पीछे रिसेंटली एक सोशल मीडिया पे एक ऐड भी बहुत चल रहा था वायरल भी बहुत हुआ एक लड़का ऊपर खड़ा हुआ है छत के ऊपर हम एक दिन बात भी कर रहे है वो अपने ऊपर पूरा यू नो पेट्रोल वेट्रोल डाल के और पूरा नीचे उसका दोस्त आता है एक वो बाइक को स्टैंड लगाता है तीन फ्लोर नीचे और वो उसका दोस्त बोलता है वो कहता है हां क्या वो भीगा हुआ है पेट्रोल से उसका दोस्त बोलता है हां उसको ऊपर से नीचे क्या हुआ बोला यार लाइफ में सब खत्म हुआ पड़ा है मुझे नहीं लगता कुछ मुझे जिंदगी में करना है मुझे सुसाइड
(1:06:13) मुझे कुछ नहीं करना और वो जो ऊपर खड़ा हुआ जो अभी अबाउट टू यू नो पेट्रोल डाला वो बोला नहीं ऐसा नहीं करना तुझे दो मिनट वहीं रुक मैं अभी आता हूं दो मिनट वेट कर मेरा सो इट्स अ ब्यूटीफुल थिंक यह कौन कर सकता है? यह वो दोस्त कर सकता है जिसका आपके साथ एक सोल का कनेक्शन हो। तो मुझे ऐसे लगता है जो इमोशनल नमनेस है ना यह हम तब उस कंडीशन में जाते हैं जब हमारे पास वोमिट करने के लिए वोमिट मींस कि आपके पास जो अंदर दबा पड़ा है उसको बाहर निकालने के लिए कोई नहीं है। अनुराग लेकिन इमोशनल नंबनेस को आइडेंटिफाई कैसे करें? क्योंकि जो लोग
(1:06:44) इमोशनली नम होते हैं वो उनका इतना बड़ा डिफेंस मैकेनिज्म या कोपिंग मैकेनिज्म बन जाता है कि उनकी रियलाइजेशन तक खत्म हो जाती है कि मैं नम हूं। उनको लगता है कि इसको डील करने का यही तरीका है या फिर ऐसे ही रिएक्ट करना है। मैं इमोशनल नहीं होता हूं। मैं इमोशनल नहीं होती हूं। मैं आई आई आई आई डोंट यू नो माइंड दिस और आई डोंट गेट इंटू दिस? ये कहकर हम निकल जाते हैं। सो हाउ डस वन हाउ डस वन आइडेंटिफाई कि वो इमोशनली नम हो रहे हैं। क्लियर साइंस बताओ मुझे तीन प्रिसाइज। बहुत अच्छी बात है। सबसे पहले तो आप यह देखिए कि जब भी हम इमोशनल नम होंगे ना, हम उस चीज को रिलीज
(1:07:17) नहीं करेंगे। हम उसको सप्रेस कर लेंगे। रिलीज करना और सप्रेस करना इसमें बहुत ज्यादा डिफरेंस है। मुझे कोई पेन हुआ और मैं उसको कंटीन्यूअसली अवॉयड कर रहा हूं। लेकिन इसमें क्या मुझे लगता है ना अनुराग कि लोगों को पता नहीं होता है कि मैं इसे सप्रेस कर रहा हूं। उनको लगता है कि मैं इग्नोर कर रहा हूं। मतलब मेरे अंदर वो शक्ति है। मेरे अंदर वो कैपेबिलिटी है। मेरे अंदर वो इनर अवेयरनेस है कि मेरे को तो फर्क ही नहीं पड़ रहा है। ये तो बाद में जाके 10 साल, 20 साल, 15 साल बाद जब वो एनालिसिस होता है तो पता चलता है कि वो सप्रेस्ड इमोशंस थे। और बहुत कम लोग हैं
(1:07:48) जो उस एनालिसिस के लिए रेडी हैं लाइफ में या उनकी लाइफ में कुछ ऐसे सिचुएशनंस हो गए कि नाउ दे हैव टू ओपन द डोर। डोर के पीछे बहुत कचरा इकट्ठा हो रहा था और हम भरते जा रहे थे कमरा क्योंकि कमरे की कैपेसिटी कई हजार टन की थी और हमने भरते गए भरते गए। लेकिन अब वो सिचुएशन लाइफ में आ गई है कि वो दरवाजा खोलना ही पड़ेगा क्योंकि स्मेल बहुत आ रही है। लेकिन बहुत सारे लोग तो उस लेवल तक पहुंचते नहीं है। पहुंचना नहीं चाहते हैं। तो कैसे मालूम चलेगा कि मैं मेरे इमोशंस को सप्रेस कर रहा हूं या फिर मैं एक हेल्दी तरीके से इग्नोर कर रहा
(1:08:14) हूं। जब भी हम इमोशंस को सप्रेस करेंगे ना दो चीजें बहुत क्लियरली हमको विज़िबल होंगी। जिसमें सबसे पहली है लैक ऑफ हैप्पीनेस। हम कभी भी किसी भी सिचुएशन में सेटिस्फाइड नहीं फील करेंगे। मतलब आपका जो हैप्पीनेस का एक्सप्रेशन है वो कम हो जाएगा। कम हो जाएगा। बहुत ज्यादा इवन बहुत से लोगों में तो वो एक्सप्रेस करने की एबिलिटी खत्म ही हो जाती है। वो एक्सप्रेस ही नहीं कर पाते। और आप देखो जब तक हम उस हैप्पीनेस को एक्सप्रेस नहीं करेंगे या उस हैप्पीनेस को फील नहीं करेंगे तब तक जो है हमारी लाइफ ब्लिस की स्टेट में उस आनंदमय कोश की जिसमें हमने बात की हम उस स्टेट
(1:08:46) में कभी भी नहीं जा सकते। तो जो नमनेस है उसका बहुत बड़ा एक जो क्लियर साइन है वो ये है कि मैं किसी भी स्टेट में अपने आपको हैप्पी फील नहीं कर रहा हूं। इट्स जस्ट न्यू नॉर्मल। अब ये ठीक है बिल्कुल। मैं उसके लिए ना तो हैप्पी फील कर रहा हूं और ना ही मैं उसके लिए ग्रेटफुल हूं। अच्छा मैं इसमें कॉन्ट्ररी व्यू यहां पे देना चाहती हूं क्योंकि हम योग की भी बात कर रहे हैं स्पिरिचुअल एंगल से भी निकाल रहे हैं तो वहां पे एक बोलते हैं कि समता के भाव में आना ऐसे इक्वनिमिटी की स्टेट में आना जहां ना आप बहुत ज्यादा खुश हो रहे हो ना आप बहुत ज्यादा दुखी हो रहे हो तो जो
(1:09:13) आप बात कर रहे हैं और जो मैं ये बात कह रही हूं क्योंकि मुझे मुझे कुछ साल पहले ऐसा लगा कि मुझे उस उस स्टेट में खुद को लेके आना है जहां पे मैं बहुत ज्यादा अफेक्ट नहीं हो रही हूं ना हैप्पीनेस से ना सैडनेस से राइट और हम नमनेस की बात करें तो ये दो स्टेट्स के बीच का अंतर भी बताइए एक तो देखो सबसे अच्छी बात इसमें पता है क्या है? मैं एक लाइन जो दो बार रिपीट कर चुका हूं मैं उसी को तीसरी बार करना चाहूंगा कि जब भी हम सैडनेस से अपने आप को डिटच करेंगे तब-तब यह इंपॉसिबल हो जाएगा। इसकी शुरुआत जैसे मान लो मैं समता के भाव में आना चाहता हूं ना इस समता के
(1:09:42) भाव की शुरुआत कभी भी सैडनेस के मोड से नहीं होगी। अभी जो हम इमोशनल नमनेस की बात कर रहे हैं ये नमनेस क्यों है? पर्टिकुलर एक इमोशन नेगेटिव इमोशन के कारण नमनेस है। वो नेगेटिव इमोशन की नमनेस पॉजिटिव इमोशन में भी रिफ्लेक्ट कर रही है। तो मुझे अगर समता के भाव में आना है तो मुझे पहले जो हैप्पी इमोशंस हैं उनसे डिटच होना पड़ेगा। मुझे नेगेटिव इमोशंस के प्रति सप्रेशन नहीं रखना है। मुझे पहले जो हैप्पी इमोशंस हैं उसमें हां ठीक है। बहुत बड़ी बात अच्छा हुआ। बहुत बढ़िया हुआ। लेकिन यहां पर ग्रेटट्यूड फिर भी है। समता के भाव में
(1:10:15) आने के लिए जब कुछ अच्छा हो रहा है, मैं उसके प्रति बहुत ज्यादा एक्साइटेड नहीं होता। मैं मतलब मैं ही मैं हूं। मैंने कॉज कर ढिंढोरा नहीं पीटता कि मैंने ये लेकिन मैं उसके लिए शुक्र अदा करता हूं उस परमात्मा का क्योंकि मैं जानता हूं अंदर से मेरा इंटरनल स्टेट जानता है कि यह चीज इनफैक्ट ये जो चार सांसे अभी आई हैं यह भी बहुत ब्यूटीफुल मुझे जिंदगी बनाकर देकर के गई हैं। तो मैं उसके लिए ग्रेटफुल जरूर होता हूं। लेकिन मैं उसका एक्सप्रेशन जो है उससे मैं डिटच हो जाता हूं कि मैं उसमें बहुत ज्यादा मैं उसमें बहुत ज्यादा यू नो सेलिब्रेट करने लगूं या बहुत पैसे उड़ाने
(1:10:46) लगूं या व्हाटएवर जो भी जिसका एक्सप्रेशन है लेकिन मेरा इंटरनल बीइंग हैप्पी है। मेरा इंटरनल स्टेट हैप्पीनेस से भरा हुआ है। क्यों? क्योंकि मैं ग्रेटफुल हूं। और ग्रेटफुल जब भी हम होंगे ना आप देखोगे ग्रेटफुल ग्रेटफुलनेस होना आपके इंटरनल स्टेट के लिए एक ब्लिस जरूर लेकर के आएगा। देयर इज़ अ बिग डिफरेंस बिटवीन हैप्पीनेस एंड ब्लिस। एक्सटर्नल एक्सप्रेशन ऑफ हैप्पीनेस एंड इंटरनल स्टेट ऑफ़ ब्लिस। स्टेट ऑफ़ ब्लेस आर टू डिफरेंट थिंग्स जो यहां पे बहुत क्लियरली हम लोग हाईलाइट कर रहे हैं। क्योंकि जो एक्सटर्नल स्टेट ऑफ़ हैप्पीनेस है वो तो किसी भी मटेरियल
(1:11:13) पोजीशन से भी आ सकता है जिसको हमने प्लेजर भी बोला। सपोज मुझे ये गाड़ी मिल गई मुझे बहुत प्लेजर मिल रहा है। लेकिन प्लेजर इज़ टेंपरेरी ब्लिस इज परमानेंट। अगर एक बार आपने इंटरनल ब्लिस को एस्टैब्लिश किया फिर आपको उस हैप्पीनेस के लिए अलग-अलग गाड़ी, फोन, घर, बंगला, ऑफिस, मोबाइल की जरूरत नहीं है। बिकॉज़ यू ऑलरेडी स्टेट है। यू हैव ऑलरेडी एक्सपीरियंस्ड इट। और वो आपके अंदर है। वो बाहर नहीं है कहीं। तो हम इमोशनल नमनेस की बात कर रहे थे अनुराग। तो कौन से ऐसे तीन क्लियर साइन हैं जिनसे पता चलेगा कि आप इमोशनली नम होते जा रहे हैं।
(1:11:44) एक तो सबसे पहला मैंने यही बात की कि हम उस चीज को सप्रेस करने लगेंगे। हम उसको एक्सप्रेस नहीं करेंगे कभी भी। दूसरा मुझे लगता है कि जो लोग इमोशनली नम हो जाते हैं ना ये लोग अपने आप को डिटच भी करना शुरू कर देते हैं लोगों से, सोसाइटी से, समाज से। इनको लगेगा कि हम आइसोलेट करें अपने आप को। मैं किसी से ज्यादा उतना इंटरेक्ट ना करूं, मैं उतना बात ना करूं। क्योंकि अगर मैं करता हूं तो कहीं ना कहीं बाकी सब लोग तो बहुत ज्यादा एक्सप्रेसिव हैं। ये तो बहुत छोटी सी बात पे भी ये बात कर रहा है। ये तो रो पड़ती है बड़ी छोटी सी बात
(1:12:11) पर। तो वो क्या है उन लोगों से डिटच होने की कोशिश करेंगे कि कहीं ना कहीं यह मेरा जो नमनेस का जो एक्सप्रेशन है ये ना आए। और तीसरी एक बहुत जरूरी चीज बहुत से लोगों को यह लगता है कि जब भी कोई नेगेटिव सिचुएशन मेरे पास आती है तो मेरे पास एक इननेट एबिलिटी है जो अंदर ही अंदर उसको हैंडल कर लेती है। लेकिन मुझे धीरे-धीरे पता चलता है ओवर द पास्ट फ्यू डेज या वीक्स या मंथ्स कि वो सिचुएशन अभी भी मुझे बार-बार ट्रिगर कर रही है। अभी भी मेरे दिमाग में वही थॉट आ रहा है। जबकि मुझे लग रहा था कि मेरे पास एक एबिलिटी है और मैंने इसको कॉन्करर कर लिया है। जब आपने
(1:12:45) किसी को कंकर कर लिया है ना, तो वह सिचुएशन दोबारा से नहीं आएगी। लेकिन अगर आप इन लोगों को बड़ा ध्यान से क्लोजली ऑब्जर्व करोगे तो आप देखोगे 4 दिन बाद भी यह बैठकर उस बात के बारे में इंटरनली बता नहीं रहा। लेकिन इंटरनली वो री जिसको हम लोग बोलते हैं रूमिनेट करना कि बार-बार वो उस चीज को रूमिनेट करने लगेगा अपने अंदर। बताएगा नहीं। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है कि आपने किसी सिचुएशन को आपको लगता है डील कर लिया आपने या उससे आप अनफेक्टेड हैं। आपको कोई फर्क नहीं पड़ रहा। लेकिन कुछ दिनों के बाद भी आप उसके बारे में सोचते हुए खुद को पाते हैं तो इसका मतलब आप कहीं
(1:13:15) ना कहीं ठीक तरीके से उसके साथ डील नहीं कर रहे हैं। कहीं ना कहीं खुद को नम कर रहे हैं। नम कर रहे हैं। आप एक बार 10th क्लास में आए आपने 10th का बोर्ड का एग्जाम दिया। आप पास हो गए। कितने चांसेस हैं कि आप 10th में दोबारा बैठोगे? 0% आप दोबारा 10th में क्यों बैठ रहे हो? क्योंकि कहीं ना कहीं जो एग्जाम था वो क्लियर नहीं हुआ है कोई ना कोई। अगर वो चीज दोबारा से मेरे माइंड में फिर से आ रही है और मैं उसको रूमिनेट कर रहा हूं और मैं फिर से उसी इमोशनल एक्सपीरियंस को उसी फीलिंग को जो मेरी बॉडी को उस टाइम पर आई थी अगर मैं उसको दोबारा से एक्सपीरियंस
(1:13:44) करता हूं तो इट क्लियरली मीन्स कि मैंने उन इमोशंस को सप्रेस कर दिया था वेंट आउट नहीं किया था और उनको लेट गो भी नहीं किया था तो मुझे लगता है कि अगर इस पे थोड़ा सा एक व्यक्ति ध्यान दें और वो थोड़ा सा इनवर्ड जर्नी को शुरू करे तो वो इसको क्लियरली आइडेंटिफाई करके उसको वेंट आउट कैसे करना है उसको इराडीगेट कैसे करना है तो नेक्स्ट स्टेप है पहला स्टेप तो यह बेसिक अवेयरनेस है करना है कि मैं ये आइडेंटिफाई तो करूं कि मैं इमोशनली नम हूं। क्योंकि बहुत सारे मैं आजकल देखती हूं यंगस्टर्स में क्योंकि आजकल मेरे पास भी जो क्लाइंट्स आते हैं बहुत सारे लोगों
(1:14:13) के आजकल चारप ब्रेकअप्स होना आम है। अगर आप 30 की उम्र तक आ रहे हैं तो आपके चारप ब्रेकअप्स व्हिच इज़ आई डोंट नो हाउ टू पुट इट इन अ वे कि जो थोड़ा सा ऑफेंसिव ना लगे। ऐसा होता है कि चार पांच छह ब्रेकअप्स लोगों के हो जाते हैं। तो वो रिलेशनशिप्स को लेके नम जैसी स्टेट में मैंने देखा है लोग आ जाते हैं कि हां अगर किसी पार्टनर के साथ अट्रैक्शन भी हुआ शादी भी कर रहे हैं। लेकिन फिर भी वो इंटरनल जो एक एक डीपर प्योर फीलिंग ऑफ लव है ना वो नहीं है। इनफैक्ट लोग इसके बारे में वोकल भी हैं कि लव क्या होता है। यू नो इट्स लाइक साथ में रहते हैं और चीजें
(1:14:46) कर लेते हैं। बस दैट इज इट। तो वो जो कभी उनको फील करना आता भी होगा शायद 10-15 साल पहले वो चीज से आगे निकल गए हैं या अलग हो चुके हैं या वो फीलिंग को नहीं टच कर पा रहे हैं तो वैसे लोगों के लिए व्हाट इज योर आंसर व्हाट इज योर सलूशन पहली बात तो ये है कि मैंने कभी ऐसा कुछ एक्सपीरियंस नहीं किया लेकिन हां ऐसा ऐसा जरूर है कि ऐसे लव एक्सपीरियंस नहीं किया प्यार में नहीं पड़े मैंने ब्रेकअप से एक्सपीरियंस किया ब्रेकअप नहीं किया तो इसलिए मुझे मुझे पर्सनल उसका एक्सपीरियंस कम है लेकिन हां क्योंकि जितनी चीजों की बाकी मैं बात
(1:15:14) कर रहा हूं मैंने अपनी लाइफ में ट्रोमेटाइज सिचुएशनंस भी देखी मैंने मैंने पेनफुल मेमोरीज के साथ अटैच हो के भी देखा। मेरे पास एंग्जायटी, डिप्रेशन और डिजीजेस को भी मैंने फेस किया। तो उन चीजों से मैं बाहर निकला। नाउ अनुराग एस वी आर नियरिंग टुवर्ड्स द क्लोज़र ऑफ़ दिस कन्वर्सेशन मैं यूजुअली अपने सभी गेस्ट से उनकी डेफिनेशन ऑफ़ सक्सेस पूछती हूं। तो आज हम जो भी बात कर रहे हैं, जिस भी साइंटिफिक, स्पिरिचुअल रियल में अपनी लाइफ को डिजाइन करने की बात कर रहे हैं। बेस्ट लाइफ क्रिएट करने की बात कर रहे हैं। आपके हिसाब से एक सक्सेसफुल लाइफ होती क्या है?
(1:15:42) दिखती कैसी है? देखिए अगेन यह एक सब्जेक्टिव चीज है क्योंकि हर एक इंसान के लिए उसकी सक्सेस किसी को लगता है कि मैं अपनी फैमिली के साथ टाइम स्पेंड कर लूं तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी सक्सेस है। किसी को लगता है मैं पैसे बहुत ज्यादा कमा लूं तो यह बहुत बड़ी सक्सेस है। लेकिन मैंने लाइफ के सभी आस्पेक्ट से जब गो थ्रू करके देखा मतलब वो टफ फेस जो थे वहां से भी निकलने के बाद और सक्सेस क्या होती है या मनी क्या होती है या हर चीज से बाहर निकलने के बाद मुझे ऐसा लगता है कि सबसे बड़ी सक्सेस ये है कि जब आप अपने उसको हमने जैसे मैं बात कर रहा था द जर्नी विद इन जैसे आप बोल
(1:16:13) रहे हो जिसको हम लोग नो दसेल्फ बोलते हैं हमारा जो सेशन होता है तो मुझे ऐसे लगता है कि जब आप सब चीज से निकल कर एक ऐसे पाथ पर आने लगते हो जहां पर यू आर रेडी कि आप उस नो दसेल्फ को कर पाओ। आप जान पाओ कि मैं कौन हूं। क्योंकि उससे पहले जितनी भी चीजें हैं मुझे ऐसे लगता है कि वह हमारे लिए बिल्डिंग ब्लॉक्स हैं। वो हमारे लिए अलग-अलग स्टेजेस हैं जो अल्टीमेटली मुझे लेकर के वहां जाएंगी कि मुझे अंत में जानना तो अपने आप को ही है। तभी मैं लिबरेट हो सकता हूं। तो मुझे ऐसा लगता है कि जब वो टाइम आता है कि मैं इस पाथ पर चलना शुरू करता हूं। स्पिरिचुअलिटी के
(1:16:48) अपने आप को जानने के, अपनी इंटरनल स्टेट को यू नो ट्रिगर करने के पाथ पर चलता हूं। तो मुझे लगता है कि ये वो मोमेंट है जहां मुझे लगता है कि मैंने अब बहुत कुछ अचीव किया और मैं शायद अगर इस पाथ पर चलने के लिए अभी मुझे परमिशन मिली है मैं कैपेबल हुआ हूं तो शायद ये मेरे लिए एक बहुत बड़ी सक्सेस है। आप इस पूरे पाथ में खुद को कहां देखते हो? कहां तक आप उस जर्नी में आप आए हो जहां जहां पर आप खुद को जान पा रहे हो? कितना जान पाए हो खुद को? देखिए अगर मैं स्पिरिचुअलिटी की बात करूं या बहुत सी मेडिटेशन प्रैक्टिससेस की बात करूं तो मैंने बहुत अलग-अलग एक्सपीरियंसेस
(1:17:19) भी लिए जो शायद अभी इतने छोटे से टाइम में मैं नहीं बता पाऊंगा लेकिन हां बहुत से मिस्टिकल एक्सपीरियंसेस भी हुए और वही चीजें आज मैं अपने पार्टिसिपेंट्स के साथ जो है रेगुलरली सेशंस में प्रैक्टिस भी कर रहा हूं। कोई एक एक्सपीरियंस अगर आपको शेयर करना हो जहां आपको लगा कि ये कुछ अनलॉक हो रहा है मेरे लिए। बिय्ड मी मैं जा रहा हूं। मुझे एक एक्सपीरियंस ऐसा हुआ जहां से मेरा मेरी ये जर्नी जो है वो और ज्यादा यू नो रिगरसली मैंने फॉलो करना शुरू किया। मैं जहां पर हमारा मैं बता रहा हूं जहां पर हमारा रिट्रीट होता है नो दसेल्फ रिट्रीट मसूरी में मैं उसी जगह पर
(1:17:51) था और वहां पर मैं अक्सर मेडिटेशंस के लिए या अपना सॉलीट्यूड के लिए या अपना टाइम स्पेंड करने के लिए जाता था। तो एक दिन ऐसा हुआ कि मैं वहां पर सुबह मेडिटेट करने के लिए बैठा हूं। सुबह का टाइम है और जैसे धूप वहां पर आती है तो सन बेदिंग हुई। उसके बाद मैं मेडिटेशन के लिए बैठा था और यूजुअली मैं रोज उस टाइम पर वहां मेडिटेट करने के लिए बैठता था और 30 से 45 मिनट्स का 1 घंटे तक का भी मैं मेडिटेशन मेरा रहता था कि मैं उसको करता था। तो जब मैंने उस प्रोसेस को शुरू किया तो मेरा मेडिटेशन ओवर होता था। उसके बाद मैं रेस्टोर वहीं
(1:18:24) रिसोर्ट में ही मैं खाना खाने के लिए चला जाता था। तो मैं मैं बैठा हूं और बैठने के बाद मुझे जिंदगी में पहली बार ऐसा लगा कि यार मेरी ना 5 मिनट के बाद आंख खुल गई है कि मैं ज्यादा देर पता नहीं क्या हुआ कि मैं ज्यादा देर कर नहीं पाया लेकिन 5 मिनट मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं मतलब आई वाज इन टोटल ब्लेस आई वास नोवेयर मैं कहीं था ही नहीं और वो एक बहुत पावरफुल डिवाइन फीलिंग जो मुझे मुझे लगा 5 मिनट में इतनी ब्यूटीफुल फीलिंग मतलब आई वास स्टंट और मैं रूम के अंदर बैठा हुआ था तो जैसे जैसे ही मुझे लगा कि चलो बाहर निकलते हैं। मैं मेडिटेशन
(1:18:58) के बाद एक वॉक के लिए निकलता हूं और फिर खाना खाने के तो जैसे ही मैं बाहर मैंने डोर ओपन किया बाहर अंधेरा था। आई वास लाइक मतलब मुझे अभी भी मुझे समझ में नहीं आया उस टाइम पे। मैंने कहा यार 8 घंटे हो गए मुझे बैठे हुए। स्ट्रेट 8 आवर्स। और मुझे लग रहा है कि मैं 5 मिनट बैठा हूं। और मुझे यह पता ही नहीं कि मैं कहां पे हूं। आई वाज नो वेयर। देयर वाज नो टाइम। टाइम देयर वास नो स्पेस और वो जो पहला ऐसा एक्सपीरियंस और फिर जब वो मुझे एक्सपीरियंस हुआ आई वास इन टोटल ब्लिस और फिर अपुन को लगा कि भगवान तो अपुन ही चाहिए कि क्या एक्सपीरियंस हो गया अगले
(1:19:37) दिन मैं फिर बैठा मैंने कहा आज तो अपन 10 घंटे ऐसे ही बैठेंगे वो दिन था और अगले 6 महीने थे मैं दोबारा मेडिटेट नहीं कर पाया वाओ क्योंकि मैं यह एक्सपेक्ट करने लगा था कि मैंने तो बहुत कुछ जान लिया मैं तो एक ऐसे रेल में चला गया था एक ऐसी स्टेट में चला गया था आई वास आउट ऑफ बॉडी आउट ऑफ स्पेस आउट ऑफ टाइम तो जब वो फीलिंग मेरे पास आ गई ना दैट ईगो दैट ईगो कि मैं यह जानता हूं और मैं यह कर चुका हूं। कर सकता हूं और मैं दोबारा भी कर मैं आज फिर करूं छ महीने फिर मुझे ये जिस दिन यह मुझे समझ में आया कि मुझे इससे डिटच होना है कि मुझे यह एक्सपीरियंस हुआ
(1:20:12) था और नेक्स्ट टाइम मुझे यह एक्सपेक्ट नहीं करना कि मैं मेडिटेशन इसलिए कर रहा हूं कि मुझे वो मिस्टिकल एक्सपीरियंस हो। उसके बाद दैट थिंग अगेन हैपेंड। और फिर मुझे ऐसे लगता है कि बहुत मतलब बहुत सी ऐसी चीजें हैं लेकिन वो एक ऐसा इंसिडेंस था जो मेरी लाइफ में एक बहुत बड़ा ट्रिगर बना वो 6 महीने के बाद जब दोबारा मुझे एक्सपीरियंस हुआ और वहां पर ऐसे लगता है कि मुझे कि कई चीजें जो मेरी लाइफ का पर्पस थी जो मुझे आइडेंटिफाइड नहीं थी एज आई वास टेलिंग यू कि आई वाज अ कॉर्पोरेट ट्रेनर और मैं किसी अलग जॉन्रा में काम कर रहा था उस दिन के बाद मुझे ऐसा
(1:20:45) लगा कि नहीं मैं इसके लिए नहीं बना हूं मुझे कुछ और करना है और वहां से फिर मेरी यह जो जर्नी है जो वेलनेस की जर्नी है, खुद पे काम करने की जर्नी है, लोगों की लाइफ को ट्रांसफॉर्म करने की जर्नी है। मुझे लगता है इसने वहां से जन्म लिया जब मैं उस चीज उस एक्सपीरियंस से आगे बढ़ा और चीजों को करने लगा। तो ये मेरे लिए एक बहुत बड़ा ब्यूटीफुल एक्सपीरियंस था। थैंक यू अनुराग। थैंक यू फॉर शेयरिंग योर एक्सपीरियंसेस विद अस। बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके और हमने काफी सारी बातें जो मैं पहले समराइज भी कर चुकी हूं। बहुत सारी चीजों के बारे में बात की। की एंड आई
(1:21:16) एम श्योर कि यह एपिसोड बहुत सारे लोगों के लिए बहुत हेल्पफुल होने वाला है। थैंक यू फॉर जॉइनिंग मी फॉर दिस। मुझे भी बहुत अच्छा लगा। आपके क्वेश्चंस बहुत ही ब्यूटीफुल थे और मुझे ऐसा लगता है कि शायद अगर इससे मैं कोई एक मतलब जितने आपके क्वेश्चंस का जो लेवल था अगर मैं उस पे 1% भी क्लेरिटी दे पाया हूं तो मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात होगी। थैंक यू सो मच फॉर हैविंग मी हियर। और जितना आपको अच्छा लगा उससे ज्यादा मुझे अच्छा लगा है कि हम कुछ मीनिंगफुल कुछ ब्यूटीफुल कुछ अच्छा अगर लोगों के लिए दे पाए और मुझे ऐसा लगता है कि अगर मान लो 1 लाख लोग भी किसी एक चीज
(1:21:47) को देखते हैं और उसमें से कोई एक इंसान भी उसको अपनी जिंदगी में उतार लेता है तो यह बहुत बड़ी बात है कि किसी एक इंसान की लाइफ में आप वो चीज लेकर के आ पाए और आप इसका जरिया बने तो थैंक यू सो मच फॉर हैविंग मी थैंक यू अनुराग वेरी वेरीरी काइंड इज ऑल माइंड थैंक यू एंड टू आवर व्यूअर्स आप अब तक इस एपिसोड में बने हुए हैं तो इसका का मतलब आपने बहुत कुछ सीखा, बहुत कुछ जाना। कौन सी बातें सबसे अच्छी लगी उन्हें कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताइए। अगर आपके कोई क्वेश्चंस अनआंसर्ड रह गए हैं या कुछ और जानना चाहते हैं वो भी लिखकर बताइए। एंड ओवरऑल इस एपिसोड को
(1:22:19) अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए। फैमिली के साथ शेयर कीजिए। लाइक, कमेंट कीजिए, चैनल को सब्सक्राइब कीजिए क्योंकि आपके सपोर्ट से ही YouTube एल्गोरििदम्स हमारे इस एपिसोड को और लोगों तक भी पहुंचाएगा। सो आपके सपोर्ट की बहुत जरूरत है। जितने ज्यादा लोग हमारे चैनल को सब्सक्राइब करते हैं, उतने ही ज्यादा हम और बड़े गेस्ट को भी बुला सकते हैं और एक्सपीरियंस लोगों को भी आपके पास तक ला सकते हैं। सो हेल्प अस टू रीच टू अ वाइडर ऑडियंस बाय लाइकिंग, कमेंटिंग, शेयरिंग एंड सब्सक्राइबिंग। थैंक यू फॉर वाचिंग दिस एपिसोड ऑफ द जर्नी विद इन पडकास्ट। आई विल सी यू इन द
(1:22:49) नेक्स्ट वन। नमस्ते।

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