Stop Using I‑Pill as a Fix! Contraception Options No One Talks About | TJW 151
Author Name:Shobha Rana
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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=KL2ZX-oMD9I
Transcript:
(00:00) टॉप थ्री टिप्स टू कीप योर सेक्सुअल हेल्थ एंड चेक। नंबर वन यूज कंडोम्स। मल्टीपल पार्टनर्स डजंट मीन मोर एसटीआईज। एक पार्टनर भी आपको एसटीआई दे सकता है। कितना सेफ है आईपीएल को रेगुलर यूज करना? आईपीएल कंट्रासेप्शन का आंसर नहीं है। स्पर्म बनेगा जरूर। पर वो पीनेस से बाहर नहीं आ पाएगा। औरतों की फर्टिलिटी कंट्रोल करना इज़ मच इज़। क्योंकि महीने में एक बार अंडा निकलता है। कि एक सेकंड में आदमी 1500 स्पर्म बनाता है। आप कितने रोक लेंगे? अगर आप किसी की 90% भी फर्टिलिटी कम कर दें आदमी की, वह फिर भी फर्टाइल है। वह फिर भी इंप्रेगेंट कर सकता है। वैजिनस में से एक
(00:32) ऐसी कंडीशन होती है जिसमें वाइना ओपन ही नहीं करता है। वाइना एकदम बंद रहता है। वहां ऐसे मतलब दरवाजा सा लग गया हो। पार्टनर्स आके बोलते हैं इट फील्स लाइक हिटिंग अ वॉल और मैं पेनिट्रेशन नहीं कर पा रहा हूं। हम हमेशा वाइना की जब बात करते हैं ना तो हम इस एरिया की बात करते हैं। जबकि ये वाइना होता ही नहीं है। लोगों को पता नहीं होता कि ओवुलेशन कब हो रहा है। तो उनको पता नहीं है सेक्स के लिए टाइमिंग क्या रखनी है। सिज़ेरियन को वो इज्जत नहीं मिलती है जितनी मिलनी चाहिए। मैं अगर बच्चा करूंगी तो मैं तो सिज़ेरियन ही कराऊंगी। बिकॉज़ मुझे पता है कि
(01:00) ओनली 40% ऑफ़ फर्टिलिटी इज़ वुमेन। 40% इज़ मैन एंड बचा हुआ 20% अनक्लेंड इनफर्टिलिटी होती है। हमें पता ही नहीं क्यों हो रहा है ये। तो ऑलमोस्ट 30% ऑफ़ ऑल प्रेगनेंसी एंड अप इन मिसकैरजेस। लोग इतना मॉनिटर ही नहीं करते हैं। आजकल स्पर्म्स हेल्दी क्यों नहीं है? व्हाई मैन आर आल्सो बिकमिंग इनफर्टाइल? एक पहली फॉल आती है अराउंड 32 इयर्स ऑफ़ एज। ऑन एवरेज 32 के करीब थोड़ा सा डिक्लाइन आता है फर्टिलिटी में औरतों की। एंड दूसरा 37 37 के अराउंड एक और डिक्लाइन आता है। अगर जिंदगी में एक डिसीजन लेना है अपनी हेल्थ के लिए और कोई डिसीजन ले ही नहीं
(01:31) सकते तो [संगीत] नमस्ते। वेलकम टू द जर्नी विद इन पॉडकास्ट वि मी शोभा राणा। मैं एक इमोशनल इंटेलिजेंस और माइंडसेट कोच हूं और साथ ही इस पॉडकास्ट की होस्ट और क्रिएटर भी हूं। द जर्नी विद इन पडकास्ट का ऐ है आपको आपकी बेस्ट लाइफ, आपकी ड्रीम लाइफ को डिज़ करने में, उसको क्रिएट करने में मदद करें। आज इस एपिसोड में हम द जर्नी विद इन करने वाले हैं। खुद को बेहतर जानने समझने वाले हैं। थ्रू द लेंस ऑफ़ सेक्सुअलिटी एंड रिप्रोडक्शन। यू नो सेक्स एजुकेशन एक अभी तक भी टबू टॉपिक है। कई सारे घरों में इस बारे में
(02:15) ओपनली बात नहीं होती है। तो आज इस एपिसोड में हमने जो स्कूल, कॉलेजेस और आपकी फैमिलीज़ आपको सेक्स एजुकेशन देने में अह कहीं ना कहीं कामयाब नहीं हो पाई है। उस गैप को ब्रिज करने की कोशिश की है। आज हमने सेक्स एजुकेशन से लेकर फर्टिलिटी, रिप्रोडक्शन, मेल एंड फीमेल सेक्सुअल इशूज़, स्पर्म क्वालिटी, एग क्वालिटी, इनफर्टिलिटी बहुत सारी इन कॉन्वर्सेशंस इन कॉन्सिक्वेंसेस के बारे में बात की है। आजकल जो डेटिंग एप्स का कल्चर है, मल्टीपल पार्टनर्स होने का कल्चर है, उसका आपकी सेक्सुअल हेल्थ पर क्या इंपैक्ट पड़ता है और कैसे आप अपने आप को वहां पर सेव कर
(02:47) सकते हो? बहुत ही ओपन कन्वर्सेशन है। इसको एंड तक जरूर देखिएगा। एंड यह मैन एंड वुमेन दोनों को देखनी ही चाहिए। बल्कि मैं कहूंगी जो कपल्स हैं वो साथ में बैठकर इस कन्वर्सेशन को देखें ताकि आपके बीच में जो एक एक बहुत माइनर सा डिसकंफर्ट या एक मैं क्या कहूं उसे एक जो हेजिटेशन होती है कुछ टॉपिक्स को लेकर वो ओपन अप होगी इस कन्वर्सेशन को सुनने के बाद। नाउ शेयर इट विद योर फ्रेंड्स एंड फैमिली। हमारी इस कोशिश को सपोर्ट करने के लिए प्लीज सब्सक्राइब टू द चैनल। लाइक, कमेंट एंड शेयर ताकि यह मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस और भी लोगों तक पहुंच पाए और उनकी बेहतर हो
(03:22) पाएं। आज हमारे साथ इस पॉडकास्ट के लिए जो गेस्ट हैं, वह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर डॉ. क्यूटस के नाम से बहुत फेमस हैं। इनका नाम है डॉ. तन्या नरेंद्र और यह अपने कंटेंट के थ्रू सेक्सुअलिटी, वुमेन सेक्सुअल हेल्थ, इवन मेन सेक्सुअल हेल्थ, रिप्रोडक्टिव हेल्थ, हमारे जेनेटल्स इन सबके बारे में ओपन कन्वर्सेशंस करती हैं और लोगों को एजुकेट करने का काम कर रही हैं। करेंटली यह मास्टर्स कर रही हैं गनेकोलॉजी में और मुझे इनकी सबसे अच्छी बात लगती है कि इनके कंटेंट में एक एक शोर क्लेरिटी तो है ही लेकिन साथ ही साथ बहुत सारी काइंडनेस है एंड दैट काइंडनेस एंड
(03:59) क्लेरिटी आई वांट टू ब्रिंग टू ऑल ऑफ यू थ्रू दिस कन्वर्सेशन। सो डू वाच इट टिल द एंड एंड नाउ लेट्स वेलकम डॉ तन नरेंद्र ए के डॉ क्यूटस ऑन द जर्नी विद इन पॉडकास्ट। [संगीत] सो वेलकम डॉक्टर तान्या उर्फ डॉक्टर क्यूट्रस ऑन द जर्नी विद इन पॉडकास्ट। थैंक यू सो मच फॉर हैविंग मी। आई एम वेरी हैप्पी कि मैं आज यहां पहुंच पाई फाइनली। मैं इतनी एक्साइटेड हूं इस कन्वर्सेशन के लिए क्योंकि हम एक साल से ट्राई कर रहे हैं टू हैव दिस कॉन्वर्सेशन जस्ट टू स अक्रॉस अ टेबल एंड हेल्प इंडिया लर्न हाउ टू हैव सेफ सेक्स। टू लर्न मोर अबाउट देयर
(04:43) सेक्सुअलिटी। जो टॉपिक सेक्सुअल एजुकेशन का हमारे स्कूल कॉलेजेस हमें नहीं दे पाते हैं और जिसकी वजह से बहुत सारे प्रॉब्लम्स आगे चलके होते हैं। समथिंग दैट यू स्टैंड फॉर आपको सबको एजुकेट करना है अपने प्रॉप्स को लेकर, अपने एनालॉजीस एग्जांपल्स को लेकर। दैट्स व्हाट यू हैव बीन डूइंग एंड यू आर डूइंग इट फिनोमिनली वेल एंड वांटेड टू हैव यू हियर ऑन दिस पॉडकास्ट। सो टेल मी फर्स्ट अप कि इस कन्वर्सेशन को सुनने के बाद आज लोगों को क्या मिलने वाला है? व्हाई शुड दे लिसेन टू यू। थैंक यू फॉर हैविंग मी पहली चीज। मुझे बहुत खुशी हो रही है कि हम इस बारे
(05:13) में इतना बात कर पा रहे हैं। इस बारे में इतना कन्वर्सेशन नॉट ओनली लोग इंटरेस्टेड हैं बट आल्सो रिस्पेक्टफुली ये कन्वर्सेशन हो रहा है जो होना चाहिए। एंड दैट इज द मेन थिंग जो मैं चाहती हूं लोग लेके जाएं कि सेक्स के बारे में बात करना कोई डिसरिस्पेक्टफुल बात नहीं है। यह हर कोई करता है। दुनिया में हर कोई जो आया है सेक्स के थ्रू ही आया है। चाहे आप आईवीएफ से भी क्यों ना आए हो। कुछ ना कुछ सेक्स का इन्वॉल्वमेंट होता ही है। एंड यह एक नेचुरल बॉडी प्रोसेस है जिसको हमने बिना बात पे उस पे ऐसे शर्म का टोकरा रख दिया है। जबकि इसमें इतने हेल्थ कॉन्सक्वेंसेस
(05:42) होते हैं। मैं तो बहुत ही मरीज देखती हूं सारे। इस लैक ऑफ नॉलेज की वजह से जो बिना बात को लोग मरीज बन जाते हैं। उसको मैं देखती हूं। तो मैं चाहती हूं लोग इस चीज को जरूर समझें कि सेक्सुअल हेल्थ इंपॉर्टेंट होती है। आपकी हेल्थ का एक पार्ट होती है और अपने शरीर को जानना बिल्कुल गलत बात नहीं है। एंड मैं कोशिश करती हूं सेक्स एजुकेशन की जगह मैं वर्ड यूज़ करती हूं बॉडी लिटरेसी कि आप लिटरेट हो जाएं। आप समझ सकें अपनी बॉडी को विदाउट जजमेंट, विदाउट शर्म। मतलब कितने ताज्जुब की बात है। जिस बॉडी में हम रहते हैं, जिस बॉडी के थ्रू हम ये पूरी दुनिया में सब
(06:18) कुछ एक्सपीरियंस करते हैं। चाहे वो खाना पीना है, कपड़े पहनना है, कैसा दिखना है, कहीं पे जाना है, किसी से मिलना है, पर्सनालिटी है, वो सब कुछ इस बॉडी ने कंटेन किया हुआ है। और हम अपनी ही बॉडी के को कितना कम जानते हैं। स्पेशली जब हम इंटिमेट पार्ट्स की बात करते हैं, जब हम प्राइवेट पार्ट्स की बात करते हैं तो बहुत ही कम जानते हैं। और आज के कॉन्टेक्स्ट में डॉ.
(06:41) तन्या जब एप्स का कल्चर है, डेटिंग कल्चर है, हुक अप्स वन नाइट स्टैंड्स हो रहे हैं। आई फील यह कन्वर्सेशन और ज्यादा रेलेवेंट हो जाती है। क्योंकि रिसेंटली वन ऑफ़ माय फ्रेंड ही कॉन्ट्रैक्टेड एड्स फ्रॉम द एनकाउंटर्स दैट ही हैड ऑन वन ऐप। एंड दैट जस्ट ओपन माय आइज लाइक नथिंग। लाइक ऑफ कोर्स हमें पता है यह ऑन एंड ऑफ कन्वर्सेशन होती है कि जब लोग मल्टीपल पार्टनर्स के साथ इंगेज करते हैं तो इस तरह के खतरे होते हैं। लेकिन जब आपका कोई अपना जिसे आप जानते हो वहां पे जब इस तरह की चीज हो जाती है तब आपको एक ग्लेयरिंग रियलिटी चेक मिलता है कि क्या चल रहा है और लोगों को कितना कम अवेयरनेस है और
(07:14) जिनको अवेयरनेस है। मैं पढ़े लिखे लोगों की बात कर रही हूं। दिल्ली गुड़गांव में रहने वाले लोगों की बात कर रही हूं। राइट? जो यहां पे रहते हैं वो लोग भी ऐसी चीजों का शिकार हो रहे हैं। ऐसी बीमारियों में पड़ रहे हैं। सो प्लीज हेल्प अस डिकोड दिस डीमिस्टिफाई। लेट्स स्टार्ट विद अ मिथ। द मोस्ट कॉमन मिथ दैट यू हैव हर्ड इन दिस स्पेस। इन दिस स्पेस तो जो सबसे कॉमन मिथ है वो यह है कि आपके जितने ज्यादा पार्टनर्स होंगे उतना आपका इनफेक्शंस का रिस्क बढ़ेगा। आई थिंक यह बहुत बड़ा मिथ है क्योंकि मैं इलाहाबाद से आती हूं। मेरे मेरा शहर इतना इन
(07:45) आस्पेक्ट्स में उतना शायद मॉडर्न ना हो जितना दिल्ली, गुड़गांव है। और इलाहाबाद में भी यही सब कंप्लेंट्स हैं। मैं दुनिया के किसी भी कोने में चली जाऊं वहां पे भी यही सब कंप्लेंट्स हैं। बहुत सारे लोगों को पहला उनका इंफेक्शन का एक्सपोज़र एक मोनोगमस रिलेशनशिप में है। वो एक ही पार्टनर के साथ रहे हैं। फिर भी उनको हो जाता है। तो एक हां हमने थोड़ा सा शर्म एसोसिएट करना शुरू कर दिया है इनफेक्शंस के साथ। जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। वो वही बात हो गई कि अगर आप किसी को जुकाम हो गया तो उनके चरित्र पे सवाल उठ गया कि जुकाम कैसे हो गया? भाई बहुत सारे लोगों से मिला
(08:16) होगा तभी जुकाम हो गया है। तो आई थिंक यह एक बहुत बड़ा प्रॉब्लम है। आपको इंफेक्शन पाने के लिए आपको बहुत ज्यादा पार्टनर्स की जरूरत नहीं है। आपको एक पार्टनर से भी उतने ही इंफेक्शन हो सकते हैं जितना 40 पार्टनर्स से ना हो सकते हैं। तो फर्स्ट एंड फॉरमोस्ट हम कंडोम्स के बारे में बात करने में बहुत हेजिटेट करते हैं। बहुत हाहा ही करते हैं। बट कंडोम दुनिया का इकलौता ऐसा कंट्रासेप्टिव ऑप्शन है जो आपको प्रेगनेंसी से भी बचाता है। अगर आप प्रेगनेंसी नहीं चाहते हैं। बट आल्सो आपको इनफेक्शन से बचाता है। कंडोम्स लिटरली एक प्रोटेक्टिव लेयर होती हैं। जिनसे आपको
(08:49) सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इनफेक्शन से बचाव मिलता है। वो आपके आर्मर की तरह काम करती हैं। एंड हमने हमेशा बड़े ऐसे जोक्स सुने हैं कि भ पान फ्लेवर का कंडोम आया है या काला खट्टा या काला खट्टा फ्लेवर का कंडोम आया है। ये हम जोक्स में बात करते हैं। बट एक्चुअली कंडोम्स का फ्लेवर होने का रीज़न यही होता है ताकि आप उन्हें ओरल सेक्स में भी यूज़ कर सकें। वो माहौल बढ़ाने के लिए नहीं होते हैं। और हर टाइप के सेक्सुअल एक्टिविटी में हमें कंडोम यूज़ करना चाहिए। अगर हम फीमेल के साथ ओरल सेक्स कर रहे हैं, तो हमें डेंटल डैम यूज़ करना चाहिए।
(09:20) तो, यह चीजें प्रोटेक्ट करने के लिए होती हैं। एंड अगर हम इन दो चीजों का ध्यान में रखें कि प्रोटेक्शन हमेशा यूज़ करना चाहिए। एंड मल्टीपल पार्टनर्स डजंट मीन मोर एसटीआईज़। एक पार्टनर भी आपको एसटीआई दे सकता है। अगर हम ये दो चीजें ध्यान रखें तो हम जनरली अपना सेक्सुअल बिहेवियर सेफ कर सकते हैं। तो इसका मतलब यह है कि हर किसी को चाहे आप एक पार्टनर के साथ इंगेज कर रहे हैं या मल्टीपल पार्टनर्स के साथ इंगेज कर रहे हैं। आपको इस बारे में एब्सोल्यूट नॉलेज एब्सोल्यूट ट्रुथ्स पता होने जरूरी हैं। डॉक्टर तन्या अगर हम सेक्सुअल हेल्थ की बात करें तो अगर मैं
(09:52) फाउंडेशन की बात करूं तो व्हाट वुड बी अ राइट फाउंडेशन फॉर सेक्सुअल हेल्थ? द राइट फाउंडेशन मैं तो कंडोम्स की बहुत बड़ी फैन हूं। वो तो हर जगह जाके बताती हूं कंडोम यूज़ करना चाहिए। तो पहली चीज़ तो ऑब्वियसली कंडोम्स। सो आई हैव अ लिस्ट। आई कॉल इट दैट्स डॉक्टर सीज़ डॉक्टर क्यूट्रस फाइव सीज़। पहली चीज़ है कंसेंट। कंसेंट के बारे में एजुकेट होना बहुत जरूरी है। कंसेंट का मतलब बेसिकली मंजूरी होता है कि आप जो भी कर रहे हैं। आप उसकी मंजूरी लेके करें। दोनों पार्टीज से मंजूरी लेके करें। जस्ट बिकॉज़ कोई लड़का है, इसका मतलब यह नहीं है
(10:22) कि वो ज़रूरी है कि वह मंजूर होएगा हर चीज़ के लिए। जस्ट बिकॉज़ वो लड़की है जिसके पहले बॉयफ्रेंड रह चुके हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वो हर चीज के लिए मंजूर रहेगी। तो मंजूरी बहुत जरूरी है। दूसरी चीज कम्युनिकेशन बहुत जरूरी है। आप जो भी करेंगे उसके बारे में क्लियर कम्युनिकेशन होना चाहिए। आपकी बाउंड्रीज़ आपको क्लियर होनी चाहिए कि मैं किस करने को तैयार हूं। पर मैं सेक्स में नहीं इंगेज करना चाहती। या मैं अपनी रिलेशनशिप इतनी आगे नहीं बढ़ाना चाहती हूं। या मैं चाहती हूं कि हम कभी सेक्स ना करें। हम जब तक शादी ना कर लें। मतलब जो भी है व्हाटएवर योर सरकमस्ट्ससेस
(10:53) आर आपको कम्युनिकेशन करना बहुत जरूरी है। तीसरी चीज़ ऑफ़ कोर्स कंडोम्स। चौथी चीज़ क्लेरिटी। आई थिंक हम लोग बहुत ज्यादा ना अजमशंस पे काम करते हैं। जब हम अपनी सेक्सुअल हेल्थ के बारे में बात करते हैं। हम सोचते हैं कि कुछ भी नहीं होगा। हम सोचते हैं प्रेगनेंसी नहीं होगी। हम सोचते हैं इंफेक्शन नहीं होगा। हम सोचते हैं इंजरी नहीं होगी। बट व्हेन इट कम्स टू क्लेरिटी अबाउट योर सेक्सुअल हेल्थ वो सिर्फ आपके और आपके पार्टनर के साथ की नहीं होती है। वो आपकी अपनी सेक्सुअल हेल्थ भी होती है। अगर आपका पार्टनर नहीं है लाइफ में इसका मतलब यह नहीं कि आपकी सेक्सुअल हेल्थ नहीं
(11:25) है। आपकी अपनी हेल्थ अकेले भी है और उसका भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अपने रेगुलर टेस्ट कराएं। अपनी सेफ्टी रखें। कैंसर के चेक करें। वो आपके सेक्सुअल हेल्थ में पार्ट आते हैं। एंड लास्टली द मोस्टेंट सी मेरे ख्याल से जो है बिकॉज़ मैं फर्टिलिटी एंगल से आती हूं। मैं बोलती हूं कंट्रासेप्शन बहुत जरूरी है। आप कंट्रासेप्शन आल्सो कसेप्शन। कनसेप्शन मतलब प्रेगनेंसी चाहना और कंट्रासेप्शन मतलब प्रेगनेंसी ना चाहना। और उसके लिए आप क्या कर रहे हैं? तो इंडिया की पॉपुलेशन इतनी हाई है। हम जानते हैं कि यहां पे कंट्रासेप्टिव का कन्वर्सेशन इतना नहीं
(11:57) होता है। लोग बच्चे को भगवान की मर्जी समझते हैं। पर वो आपकी मर्जी ज्यादा होनी चाहिए। आपको प्लानिंग होनी चाहिए। आपको तैयारी होनी चाहिए बच्चे के लिए या ना के लिए। तो कंट्रासेप्शन का कन्वर्सेशन करना बहुत जरूरी है और आईपीएल कंट्रासेप्शन का आंसर नहीं है। आईपीएल एक इमरजेंसी सिचुएशन के लिए होता है। आईपीl आईसी अनवांटेड 72 जितने भी ब्रांड्स आते हैं ये सब एक इमरजेंसी में आपको प्रोटेक्ट करने का तरीका है। यह आपका मेन कंट्रासेप्शन नहीं बन सकते हैं। कंट्रासेप्शन की रिस्पांसिबिलिटी हमेशा शेयरर्ड होनी चाहिए। सिर्फ एक पार्टनर पे नहीं आनी
(12:29) चाहिए। आपने बहुत परफेक्टली ले डाउन किए यह फाइव सीज़ जो आपके एंड आई वांट टू टॉक अबाउट देम इंडिविजुअली। तो सबसे पहला सी जो आप बात कर रहे हो कंडोम के बारे में। यू नो कंडोम्स के बारे में भी बहुत सारे नोशंस हैं कि मेरे पार्टनर को पसंद नहीं है या द मैन डजंट वांट टू यूज़ इट या फिर फीमेल नहीं चाहती है कि यूज़ किया जाए। तो इस वाले सिचुएशन में क्या करें? व्हेन देयर इज़ नो एग्रीमेंट। और व्हेन वन पार्टनर इज़ लाइक कि यार मुझे ऐसे ही करना है। मेरा प्रेफरेंस यह है एंड द सेकंड पार्टनर इज़ सो मच इन लव या फिर व्हाटएवर इन द फ्लो ऑफ़ द मोमेंट नहीं करते। तो हाउ
(13:00) डू यू काइंड ऑफ़ ट्रेन योर माइंड और ट्रेन और हैव दैट हेल्दी कन्वर्सेशन विद योर पार्टनर एंड कम ऑन सेम पेज। यह वही बात हो गई कि मुझे गाड़ी चलानी है। मुझे तेज गाड़ी चलाने का शौक है। पर मुझे सीट बेल्ट नहीं पहननी है। मेरी प्रेफरेंस है। ठीक है? आपको नहीं पहननी है। कोई बात नहीं मत पहनो। पर आपकी गाड़ी में एयर बैग तो होने चाहिए। आपको हेलमेट गाड़ी में हेलमेट पहन के पहन बैठ जाओ। बट कुछ अपने लिए प्रोटेक्शन रखो। तो अगर आप कंडोम्स एज अ कंट्रासेप्शन नहीं यूज करना चाहते हैं तो अच्छी बात यह है कि हमारे पास बहुत सारे कंट्रासेप्टिव ऑप्शन हैं। आप जो भी
(13:31) यूज करना चाहते हैं अगर आपको रोज कुछ यूज़ करना है तो आपके पास पिल्स हैं। अगर आपको हफ्ते में एक बार कुछ यूज़ करना है तो हमारे पास ऑप्शंस हैं। अगर आपको महीने में एक बार कुछ यूज़ करना है। अगर आपको एक बार लगा के छ साल के लिए भूल जाना है तो हमारे पास हर चीज का टॉक अबाउट दीज़ ऑप्शंस। थोड़ा डिटेल में बताइए इनके बारे में। उसके बारे में मैं बस सेकंड में घुसती हूं। फर्स्ट आई वांट टॉक अ लिटिल बिट अबाउट। अगर आपको कंडोम नहीं यूज करना है और आपके पास सिंगल पार्टनर से ज्यादा पार्टनर्स हैं। एंड व्हेन आई से मल्टीपल पार्टनर्स आई डोंट मीन कि आपने एक साथ छह
(13:59) गर्लफ्रेंड बना रखी हैं। आई मीन कि आपकी एक पहले कोई पार्टनर रह चुकी है। अब आपकी कोई दूसरी पार्टनर है। उससे ब्रेकअप हो गया। अब आपकी कोई तीसरी पार्टनर है। उससे ब्रेकअप हो गया। मल्टीपल पार्टनर्स डजंट मीन कि एक साथ सारे। एक इंसान से भी ज्यादा अगर आपका सेक्सुअल एक्सपोज़र हुआ है तो आपका एसटीआई का रिस्क बढ़ेगा। जितने लोगों से मिलेंगे उतने इनफेक्शन से एक्सपोज़र होएगा। तो अगर आप ऐसी सिचुएशन में हैं और आप कंडोम्स नहीं यूज करना चाहते हैं तो आपको एसटीआई टेस्टिंग करना बहुत जरूरी है। बेसिकली आपको अपने डॉक्टर के पास जाके हर हर नए पार्टनर से पहले एक
(14:30) टेस्ट कराना जरूरी है यह देखने के लिए कि आपको कोई सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन तो नहीं हो गया है। जैसे आपने आपको बताया आपके फ्रेंड्स आपके एक फ्रेंड को एचआईवी डायग्नोस हुआ। तो एचआईवी अगर हम सही समय पर पकड़ लें तो हम उसको इंटरवीन करके उसमें दवाइयां दे के उसको लाइफ थ्रेटनिंग डेडली एड्स बनने से रोक सकते हैं। उसी तरह से अगर किसी को सिफलस हो गया हो तो हम उसको मतलब लाइफ ऑल्टरिंग लाइफ चेंजिंग कॉन्सक्वेंस से पहुंचने से पहले ही हम इंटरवीन करके उसको ठीक कर सकते हैं। तो एसटीआई टेस्टिंग बहुत जरूरी है। वह आइडेंटिफाई करता है कुछ गड़बड़ हुई है कि
(15:06) नहीं। एंड देन यू कैन स्टॉप एट द राइट मोमेंट। बेस्ट स्ट्रेटजी इज़ यूज़ कंडोम्स प्लस हैव एसटीआई टेस्टिंग। सिर्फ एक पार्टनर के लिए नहीं, दोनों पार्टनर के लिए करना जरूरी है। नाउ इफ यू स्टिल डोंट वांट टू यूज़ कंडोम्स एंड यू वांट टू ट्राई अनदर कंट्रासेप्टिव ऑप्शन। तो अनफॉर्चूनेटली गिवेन द कॉन्टेक्स्ट राइट नाउ हमें डाटा से यह पता चला है कि 85% लोग जो हमारा पडकास्ट देख रहे हैं या सुन रहे हैं अभी तक उन्होंने चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है और यह एक बहुत बड़ा गैप है। यह पॉडकास्ट क्रिएट करना एक बहुत ही टीडीएस प्रोसेस है। एक एक बहुत ही
(15:37) बड़ा जॉब है और आपका एक-एक सब्सक्रिप्शन एक-एक लाइक, कमेंट और शेयर मुझे एनकरेज करता है कि मैं यह कन्वर्सेशन आपके लिए हफ्ते दर हफ्ते लाती रहूं। हमने लगभग 150 एपिसोड्स अभी तक रिलीज़ कर दिए हैं। एंड ट्रस्ट मी इट टेक्स अ लॉट टू कम एंड टॉक अबाउट सचेंट टॉपिक्स एव्री वीक हियर एंड टू ब्रिंग इट टू यू। सो इफ यू लाइक दिस कोशिश ऑफ़ अस प्लीज डू सपोर्ट अस बाय सब्सक्राइबिंग टू द चैनल। थैंक यू। एंड नाउ लेट्स गेट बैक टू द कन्वर्सेशन। आदमियों के लिए हमारे पास सिर्फ दो कंट्रासेप्टिव ऑप्शन है। एक हो गया रिवर्सिबल में कंडोम जो आपने यूज़ किया,
(16:11) काम किया, खत्म कर लिया। दूसरा ऑप्शन है हमारे पास वसेक्टमी। वसेक्टमी जिसे हम नसबंदी बोलते हैं। वसेक्टमी में क्या करते हैं? जो लेट्स यूज़ दिस एस एन एग्जांपल। चलो ठीक है। अगर ये पेनस है और ये टेस्टिकल्स हैं तो टेस्टिकल्स में आपका स्पर्म बनता है और अंदर की बहुत लंबी वायरिंग होती है। अंदर का बहुत लंबा पाथवे होता है जिससे वो बाहर निकल के इजेकुलेशन के टाइम पे ऑर्गेनिज्म के टाइम पेनस से बाहर आ जाता है। हम व्टमी में क्या करते हैं कि जैसे यह एक तार है। इसको हम इस तार को समझ लेते हैं कि यह तार स्पर्म को ट्रांसपोर्ट कर रही है। हम इस
(16:50) तार को काट देते हैं। तो स्पर्म बनेगा जरूर। पर वह पीनेस से बाहर नहीं आ पाएगा। बट द थिंग इज कि यह एक परमानेंट ऑप्शन है। यह टेंपरेरी ऑप्शन नहीं है। अगर आपने रेक्टमी कर दी तो दिस इज़ यूजुअली डन जब आपकी फैमिली कंप्लीट हो गई। एंड यू नो यू डोंट वांट एनी मोर चिल्ड्रन। व्हिच इज़ नॉट द केस फॉर मोस्ट पीपल हु विल बी लिसनिंग टू दिस। सो आल्सो आई वांट टू एम्फसाइज़ कि वसेक्टमी रिवर्सिबल भी हो सकती है। बट बहुत सक्सेसफुल जरूरी नहीं है कि वो हो। तो दिस इज़ एन ऑप्शन। जब आपकी फैमिली पूरी कंप्लीट हो गई और आप तैयार हो। आपको कुछ नहीं करना है। देन यू गो फॉर अ वसेक्टमी।
(17:23) नाउ कमिंग टू दी अदर साइड औरतों के पास बहुत सारे ऑप्शंस हैं। एंड द रीज़न व्हाई वी हैव मोर ऑप्शंस फॉर वुमेन एंड नॉट फॉर मैन इज नॉट जस्ट बिकॉज़ औरतों की फंडिंग औरतों की रिसर्च में बहुत कम फंडिंग होती है। ऑनेस्टली स्पीकिंग कम पैसा जाता है औरतों की हेल्थ को रिसर्च करने में और फर्टिलिटी यूजुअली औरतों का प्रॉब्लम समझा जाता है। इसलिए इतना उसमें ना रिसर्च इंटरेस्ट है ना रिसर्च का पैसा है। नंबर वन। नंबर टू, औरतों की फर्टिलिटी कंट्रोल करना इज़ मच ईज़ियर। क्योंकि महीने में एक बार अंडा निकलता है। स्पर्म तो पूरे समय धकाधक धकाधक बनता रहता है। मतलब एवरेज नंबर यह
(18:00) है कि एक सेकंड में आदमी 1500 स्पर्म बनाता है। आप कितने रोक लेंगे? अगर आप किसी की 90% भी फर्टिलिटी कम कर दें आदमी की। वो फिर भी फर्टाइल है। वो फिर भी इंप्रेग्नेट कर सकता है एक किसी को। वो बहुत सारे लोगों को इंप्रेगनेट कर सकता है। तो इट इज़ इज़ियर कि आप ओवुलेशन ही बंद कर दो। मतलब आप 1000 चैनल बंद करने की जगह एक टीवी ऑफ कर दो। सो दैट इज व्हाई वी हैव मोर ऑप्शंस फॉर वुमेन। एंड उसमें हमारे पास अलग-अलग तरीके होते हैं। अगर आप रोज-रोज़ लेने को तैयार हैं दवाई जैसे मैं कंट्रासेप्टिव पिल खाती हूं क्योंकि मुझे एक बीमारी है जिसको बोलते हैं
(18:31) एंडोमेट्रियोसिस। कंट्रासेप्टिव पिल के नॉन कंट्रासेप्टिव एडवांटेजेस भी होते हैं। जैसे मेरे केस में मेरे केस में इससे मेरा एंडोमेट्रियोसिस का दर्द नहीं होता है। मुझे मेरी डिजीज आगे बढ़ने से रुक जाती है। बट अगर अगर मैं डिवोर्स्ड हूं तो मेरे कोई पार्टनर नहीं है। बट अगर मेरा कोई पार्टनर होता और मैं उसके साथ एक्टिव होती तो मुझे इसका कंट्रासेप्टिव बेनिफिट भी मिलता। अगर मेरे पास यह समय नहीं है कि भ मैं रोज-रोज़ दवाई लेने का सोचूं। ये टाइम नहीं वेस्ट करना है मुझे उतना। तो मेरे पास और ऑप्शंस में आता है कि मैं हर 3 महीने के लिए एक इंजेक्शन लगवा सकती
(19:05) हूं। जिसको हम डिंपा बोलते हैं। वो 3 महीने के लिए काम करती है। आप उसको डॉक्टर के पास जाके आपके आर्म में लग जाती है। एंड 3 महीने के लिए आपको फुल प्रोटेक्शन मिल जाएगा। ओनली कंट्रासेप्शन एसटीआई प्रोटेक्शन नहीं मिलेगा। तो यानी कि आप प्रेग्नेंट नहीं हो सकते हैं। लेकिन आप फिर भी इनफेक्शंस कैच कर सकते हो और अब एसटीआई हो सकता है। व्हिच इज़ सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इनफेक्शंस वो हो सकते हैं। एंड ये तीन महीने के लिए आपको प्रोटेक्शन मिलेगा। वो उसका पीरियड ओवर हो गया। आप अपने डॉक्टर के पास फिर से वापस जाइए फिर लगवा लीजिए। इसके अलावा हमारे पास ऑप्शन
(19:33) है कि अगर आपको रोज भी नहीं आपको इंजेक्शन भी नहीं लगवाना है तो आप डायरेक्टली ना होम बेस पे अटैक कर दीजिए कि आप डायरेक्टली यूट्रस के अंदर कुछ ऐसा लगा दीजिए। इसको हम बोलते हैं लॉन्ग एक्टिंग रिवर्सिबल कंट्रासेप्टिव लक। यूट्रस में हम एक चीज लगा सकते हैं। इसको हम बोलते हैं आईययूडी इंट्रा यूटाइन डिवाइस। और यह बेसिकली उस एग को जो आपका एग रिलीज़ हो रहा है उस स्पर्म को वहां तक पहुंचने नहीं देगा। बीच में ऐसे बैरियर कर जाएगा कि इस बाउंसर की तरह यूं खड़ा हो जाएगा। तो डिपेंडिंग ऑन हाउ मच यू वांट टू यू नो यूज़ समथिंग और आपके और इंडिकेशंस क्या
(20:07) हैं? जैसे नॉन कंट्रासेप्टिव बेनिफिट्स होते हैं हर कंट्रासेप्शन के। अगर आपको बहुत हैवी ब्लीडिंग हो रही है तो उसमें आईओडी हेल्प कर सकती है। हॉर्मोनल आईओडी हेल्प कर सकती है। तो फॉर एग्जांपल इन माय केस मैं कंट्रासेप्शन के लिए नहीं बट मैं नॉन कंट्रासेप्टिव बेनिफिट के लिए कंट्रासेप्टिव पे लेती हूं। तो डिपेंडिंग ऑन आपका यूज़ केस क्या है? आपकी सेक्सुअल एक्टिविटी कितनी है? आपकी फैमिली स्टेटस कितना है? आपके कितने बच्चे हो चुके हैं? बच्चों का आगे प्लान है कि नहीं? वी कैन एडवाइस यू डिफरेंट कॉनंट्रासेप्टिव ऑप्शंस। इसीलिए एक कंट्रासेप्टिव ऑप्शन
(20:36) बेस्ट किसी के लिए नहीं होता है। एक्सेप्ट फॉर कंडोम्स वो सबके लिए अच्छा होता है। तो आप अपने डॉक्टर से अपने इंडिविजुअल केस के बारे में बात। तो आपने इतने सारे ऑप्शंस बताए और इसमें मैं मैंने सुना इंजेक्शन। मैंने सुना दवाइयां। कितना सेफ है कंट्रासेप्टिव पिल्स। आईपीएल की बात करते हैं जो एक बहुत पॉपुलर पिल है जो यूजली इमरजेंसी पिल भी जिसे कहा जाता है। कितना सेफ है आईपीएल को रेगुलर यूज़ करना क्योंकि यह इतना एडवरटाइज हुआ है हमने टीवी पे इतना सुना है कि मैं बात कर रही हूं यंग ऑडियंस के पर्सेक्टिव से जो टीनएजर्स होते हैं जिनको अभी कुछ पता नहीं
(21:04) है और अगर कुछ पूछेंगे किसी से तो किसी को पता ना लग जाए फियर्स भी बहुत होते हैं। तो आपके दिमाग में एक ही नाम आता है आईप? तो हाउ सेफ इट इज़? शुड दे यूज़ इट? शुड दे नॉट यूज़ इट? एंड कितना ऑफन? क्योंकि मैंने ऐसा भी केस देखा है कि जहां पे बहुत यंग बच्चे बहुत रेगुलरली पॉप कर रहे हैं पिल्स क्योंकि दे आर इंगेजिंग इंटू दीज़ एक्टिविटीज। उन्हें ज्यादा कुछ पता नहीं है। ज्यादा किसी से पूछ नहीं सकते हैं। इंटरनेट पे जाते हैं तो बहुत कंफ्यूजिंग इनफेशन मिलती है। आपको समझ में नहीं आता किस पे ट्रस्ट करें, किस पे नहीं ट्रस्ट करें। तो जो एज ओल्ड सुना सुनाया यू नो
(21:33) मेथड है उस पे चले जाते हैं। तो प्लीज टेल मी अबाउट दैट। सो आई थिंक इमरजेंसी कंट्रासेप्शन के नाम में ही हमें क्लू मिलता है कि हमें कैसे यूज़ करना चाहिए। यह इमरजेंसी सिचुएशन में यूज़ करना चाहिए। जब आपने प्रिकॉशंस लिए हैं और प्रिकॉशंस फेल कर गए हैं। व्हाई वी कीप एम्फसाइजिंग दिस इज़ बिकॉज़ पहली चीज़ इमरजेंसी कंट्रासेप्शन 100% फेल प्रूफ नहीं होता है। जरूरी नहीं है वो आप पे काम करे। अगर आपका ओवुलेशन ऑलरेडी हो गया है तो तो खैर प्रेगनेंसी भी नहीं होने वाली है। बट अगर आपका ओवुलेशन अभी-अभी हुआ है। आज ही हुआ है और आपने उस पे आईपल खा ली। तो जरूरी नहीं है कि वो
(22:05) आपको प्रेगनेंसी से प्रोटेक्ट करें। नंबर टू बॉडी वेट का भी बहुत इफेक्ट पड़ता है। आफ्टर अ सर्टेन बॉडी वेट पिल्स काम नहीं करती हैं। इमरजेंसी पिल्स तो फेलियर फिर भी हो सकता है। एंड लास्टली इनमें बहुत हैवी डोज़ ऑफ़ हॉर्मोस होता है। बेसिकली आप इसको ऐसे समझ लीजिए कि आपके घर में एक कॉकरोच घुस गया है। आपको उस कॉकरोच को मारने के लिए आप डायरेक्टली कॉकरोच के ऊपर हिट मार सकते हैं या आप अपने पूरे घर में आग लगा सकते हैं कि कॉकरोच मर जाएगा। इमरजेंसी कंट्रासेप्टिव पिल है कि आपने पूरे घर में आग लगा दी है कि कॉकरोच मर जाए। अगर बहुत इमरजेंसी सिचुएशन हो गई है
(22:40) और आपको पता है कि आप किसी भी तरह से प्रेगनेंसी अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। एंड यू हैव टेकन अदर प्रिकॉशंस एंड इट्स नॉट वर्क्ड तो घर में आग लगा ली। मैं फिर भी एक बार मान लिया। बट इसका मतलब यह नहीं है ना कि घर में एक भी बार कॉकरोच निकला आप हर बार अपना घर जला देंगे। राइट? सो द थिंग इज़ दैट इमरजेंसी कंट्रासेप्शन के लॉन्ग टर्म कोई परमानेंट साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं। दैट वी नो ऑफ राइट नाउ। अच्छा लेकिन यह बहुत एडवर्टाइज भी होता है कि इमरजेंसी कंट्रासेप्टिव के बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हैं। इमीडिएटली यस। लॉन्ग टर्म में ऐसा
(23:10) नहीं है कि आपकी फर्टिलिटी हैंपर कर देंगे या आपका कैंसर का रिस्क बढ़ा देंगे। ये ये जरूर यह कर सकते हैं कि इतना हॉर्मोनस दे देके कि आप अपना साइकिल ही खराब कर लें। आप अपना हॉर्मोंस को इतना ज्यादा डिस्टर्ब कर लें कि आपके हॉर्मोंस ना रिकवर करें। बट दैट्स नॉट नेसेसरी। ये हम हमने साइंटिफिकली ये इतना डॉक्यूमेंट नहीं किया है कि मैं एकेडेमिकली आके ये बात बोल दूं। बट यस इमीडिएट साइड इफेक्ट्स बहुत होते हैं। फेलियर भी बहुत होता है। तो पूरे घर में बार-बार क्यों आग लगानी है? इससे अच्छा थोड़ा हीट रख लो घर में। तो बेसिकली कंडोम्स यूज़ कर लो या फिर जो आपने रेगुलर
(23:44) पिल्स बताए या जो और भी दूसरे तरीके बताए वो यूज़ कर लें रादर देन बैंकिंग ऑन इमरजेंसी पिल्स। अब्सोलुटली। देन मैं एक और चीज़ ऐड करना चाहती हूं यहां पे वो है कि इमरजेंसी पिल्स नॉर्मल कंट्रासेप्टिव पिल्ल से अलग होती हैं। इमरजेंसी पिल्स वो होती हैं जो आप 72 आवर्स ऑफ़ अनप्रोटेक्टिव सेक्स में लेते हैं। और नॉर्मल कंट्रासेप्टिव पिल वो होती है जो आप हर हर रोज लेते हैं महीने में। ये आपको प्रेग्नेंट ये प्रिवेंशन का स्ट्रेटजी है। मुझे याद है बचपन में एक मालाडी की ऐड आती थी। इज दैट यू आर टॉकिंग अबाउट द हां मुझे याद है हमारे उस टाइम पे टीवी पे
(24:13) बड़ा डीडी नेशनल हुआ करता था उस जमाने में एक पॉपुलर चैनल अब तो खैर बहुत अलग टाइम हो गया है और उस टाइम पे मालाड़ी की बहुत एड्स आती थी और हम बहुत छोटे होते थे उस टाइम पे 7 आठ साल पांच छ साल तो आपको समझ में नहीं आता क्या है बट वो टोमर्स आपके साथ रह जाती है शायद वहीं कहीं आईपीएल सुना हुआ होगा जो अभी तक दिमाग में मतलब यू नो एनगेंड है एंड वही हमारी सेक्स एजुकेशन थी हमारी जनरेशन के लिए मुझे याद है सेक्स एजुकेशन तो छोड़िए बहुत सेवंथ एथ नाइंथ 10थ ग्रेड में आई थिंक वो कंपनीज़ लाइक स्टे फ्री, विस्पर एटसेट्रा स्टार्टेड कमिंग टू स्कूल कि हमें बच्चों
(24:43) को मेंस्ट्रुअल हेल्थ के बारे में एजुकेट करना है। वो तब होने लगा और सेक्स एजुकेशन वाज़ नॉट अ पार्ट ऑफ़ व्हेन वी वर ग्रोइंग अप। सो ऐसे लोग जो ग्रोइंग अप जिनको सेक्स एजुकेशन नहीं मिला है। आज वो लोग क्या लैक कर रहे हैं? आपको क्या लगता है उनके साथ क्या चैलेंजेस हैं? क्या प्रॉब्लम्स आ रहे हैं? इवन इफ दे आर वेल इन टू देयर 30ज एंड 40ज। सो मैं स्कूल्स में बहुत वर्कशॉप्स करती हूं जिसमें मैं पेरेंट्स से, टीचर्स से, बच्चों से सबसे इंटरेक्ट करती हूं। एंड सबसे मजे की बात यह है कि मैं जाती हूं वो मेन माइंडसेट से मैं ऐसे क्यूट
(25:11) क्यूट से टॉयज ले जाती हूं कि मैं बच्चों से बात करूंगी और उनको यू नो कंफर्टेबल फील कराऊंगी। बट मोर देन द किड्स पेरेंट्स और टीचर्स मुझसे सवाल पूछते हैं। बिकॉज़ उन्हें लाइक यू सेड किसी ने ये इनेशन दी ही नहीं है। तो हम आजकल ये बहुत सुनते हैं कि हमें अपने बच्चों से गुड टच, बैड टच, सेक्स एजुकेशन, कम्युनिकेशन ये सब बात करनी चाहिए। पर हम कहां से बात करेंगे जब हमें पता ही नहीं है हमें किस बारे में बात करनी है और कंफर्ट भी नहीं है। बिल्कुल कंफर्ट जिस चीज के बारे में नॉलेज नहीं है डेफिनेटली उसके बारे में कंफर्ट बहुत कम होगा। जो आपने खुद ही बहुत हिचक
(25:40) के किया है या जिसके बारे में आपने कभी कोई कन्वर्सेशन नहीं की। आप अपने प्लेजर के बारे में ही बात नहीं करते हो एज अ वूमन एज अ मैन आल्सो ओपनली तो फिर आप कैसे आगे अपने बच्चों को यह सिखाओगे या समझाओगे? एक्साक्ट्ली राइट। एंड द थिंग इज कि जिस तरह के हम आजकल कल्चर में रह रहे हैं ना मतलब एक जनरेशन बहुत पीछे रह गई है इन टर्म्स ऑफ हमारा एक्सपोज़र क्या है हमारा कंफर्ट लेवल क्या है और हमारा एजुकेशन क्या है और दूसरी जनरेशन वैसी है जिसके पास एक्सेस हर चीज का है वो ग्राफिक्स से ग्राफिक कौन देखना चाहे उनको देखने में मिल जाएगा वो टेक्निकल से टेक्निकल हेल्थ
(26:14) टॉपिक के बारे में समझना चाहे वो समझ सकते हैं तो वो जो एक गैप आ गया है उस वजह से द इनेशन गैप दैट एक्सिस्ट्स उसकी वजह वजह से बच्चों के पास कोई सेफ स्पेस नहीं है। एंड द थिंग इज़ बिटवीन इंटेलिजेंस बिटवीन नॉलेज एंड विज़डम एक बड़ा अंतर होता है। और वो विज़डम उम्र के साथ ही आता है। तो जस्ट बिकॉज़ उनको वो नॉलेज मिल गई है। डजंट मीन दे हैव द विज़डम टू यूज़ दैट नॉलेज करेक्टली। और वो विज़डम के लिए उनको गाइडेंस चाहिए जो हम दे नहीं पाते हैं क्योंकि हमें खुद नहीं पता है। राइट? दैट इज़ अ गैप वी नीड टू फिल। तो वहां पर व्हाट कैन पेरेंट्स डू या जो मैं पूछ रही
(26:46) थी आपसे कि वेल इंटू देयर 30, 40? क्या गैप है लोगों के? क्या कंसर्न्स है अबाउट देयर सेक्सुअलिटी? किस चीज को लेकर? जैसे हमने गिल्ट और शेम की पहले भी बात की कि बहुत ज्यादा शेम अटैच करते हैं। तो उसका कॉन्सिक्वेंस क्या है? अगर मैं शेम अटैच करके भी चलूं और चलती रहूं लाइफ में और सही है मेरी फैमिली है, दो बच्चे हैं। अच्छा चल रहा है सब कुछ तो जानने की भी क्या जरूरत है? और मेरी लाइफ अच्छी निकल गई तो मेरे बच्चों को भी निकल ही जाएगी। देयर आर पीपल हु टॉक लाइक दिस। राइट? सो, आई वांट यू टू मेक दिस कन्वर्सेशन रेलेवेंट फॉर देम आल्सो। एक मेडिकल कंडीशन
(27:14) होती है उसको हम बोलते हैं वैजिनिस्मिस। वैजिनस्मिस में क्या होता है कि नॉर्मली जब आप सेक्स करने के लिए आप एक पेनस एक वाइना के अंदर जाता है हेट्रोसेक्सुअल एक आदमी और औरत के बीच में अगर सेक्स हो रहा हो तो वाइना के अंदर जगह होनी चाहिए इस पेनस को जाने के लिए। वाइना को ओपन अप करना होगा। जैसे आपको खाना खाना है तो आपको मुंह खोलना पड़ेगा उसके लिए। आप ऐसे ही खाना नहीं चला जाएगा आपके अंदर। उसी तरह से अगर आप मुंह नहीं खोलेंगे तो खाना अंदर नहीं जाएगा। एंड वजनस एक ऐसी कंडीशन होती है जिसमें वाइना ओपन ही नहीं करता है। वाइना
(27:47) एकदम बंद रहता है। वहां ऐसे मतलब दरवाजा सा लग गया हो। इसको हम मेडिकल टेक्स्ट बुक में क्लासिकली हम ये हमेशा डिस्क्राइब करते हैं कि पार्टनर्स आके बोलते हैं इट फील्स लाइक हिटिंग अ वॉल। ऐसा लग रहा है कि मैं एक दीवार लड़ जा रही है और मैं पेनिट्रेशन नहीं कर पा रहा हूं। तो वजिनिस्मस काफी रीज़न से हो सकता है जिसमें सेक्सुअल असॉल्ट भी आता है जिसमें इंफेक्शन भी आता है कि आपका शरीर ही डर गया है पेनिट्रेशन के आईडिया से। बट बहुत ज्यादा हम इमेजिनिस्मस शर्म की वजह से देखते हैं क्योंकि हमें इतना ज्यादा यह सिखा दिया जाता है कि सेक्स इज बैड, सेक्स इज
(28:20) शेमफुल, सेक्स हव वाली बात है। लड़कों से बात, शादी के बाद करना, सीधे बच्चा कर लेना फिर कि आपका बॉडी इसको इंटरनलाइज इतनी जोर से कर लेता है कि आपकी मसल्स पेनिट्रेशन ही नहीं अलऊ करती हैं। और मतलब ये फिजिकल कंडीशन बन जाती है। एक लिटरली एक फिजिकल इलनेस, डिजीज, कंडीशन, सिम्प्टम जो भी बोलिए बन जाती है। एंड पेनिट्रेशन हो ही नहीं सकता है। सो आपकी मैरिटल लाइफ हो ही नहीं पा रही है इन दैट वे। एंड इट इज सो कॉमन। आई कांट टेल यू मेरे इनबॉक्स में मैं ईजीली बता रही हूं। दिन में पांच ईमेल इस बात के आते हैं। तो हस्बैंड से या वाइफ से। एक बहुत ही पॉपुलर कंटेंट
(28:53) क्रिएटर हैं जिन्होंने इस बारे में बात की थी क्योंकि उनका शायद एक एक्सपीरियंस ऐसा किसी के साथ हो गया जहां से उनकी बॉडी इतनी ज्यादा डर गई जैसा आप बता रहे हो। इट इज़ माय इंटरप्रिटेशन। अ तो उन्होंने काफी इसके बारे में कंटेंट भी पोस्ट किया था और मुझे लगा कि और जब आप इस तरह की मेंटालिटी से डील कर रहे हैं एंड शी वास वै यंग लाइक अ 21 ईयर ओल्ड होंगी या 20 ईयर ओल्ड होंगी और वो इस तरह का कंटेंट बार-बार बार-बार अपना पोस्ट कर रही है। अपने एक्सपीरियंस शेयर कर रही थी और मुझे लगा कि जो लोग उनके इन्फ्लुएंस में हैं और जो सब सीख रहे
(29:20) हैं उनको भी क्या इंफॉर्मेशन जा रही है और क्या उनको लग रहा है कि यू नो कि ये करना ही बेकार है। इसका आईडिया बेकार है। पता नहीं मतलब आई थिंक बहुत दो एक्सट्रीम्स में कन्वर्सेशन हो रही है। तो ओवर एक्सप्लोरेशन कि आपने कहा कि बहुत ज़्यादा एक्सेस है तो भर-भर के आप एक्सेस को अेल कर रहे हो। और एक है कि इतना ज़्यादा गिल्ट शेम फियर है और ज्यादा नॉलेज होने का मतलब यह नहीं होता है। ज्यादा नॉलेज अवेलेबल होने का मतलब यह नहीं होता है कि सही नॉलेज भी अवेलेबल है। राइट? आप उस इनेशन से एक्सट्रैक्ट कैसे करोगे? आपके रेलेवेंट जो है। तो वो वो एक बहुत बड़ा गैप है।
(29:52) राइट? तो उसकी वजह से आई थिंक बहुत ज़्यादा और ज्यादा शेम अपने ऊपर आ रही है अपनी बॉडी को लेके। एंड ऑफ कोर्स आज के डे एंड एज में जहां सोशल मीडिया है तो हर तरह के बॉडी इमेज इशूज़, हर तरह के वाइटनिंग क्रीम्स जिसके बारे में आप बहुत बातें करते हो। टाइटनिंग क्रीम्स पता नहीं क्या-क्या 10 तरह के प्रोडक्ट्स हैं उनके बारे में भी लेट्स टॉक अबाउट। सो आई थिंक एक चीज बहुत जरूरी है जो आपने मेंशन करी कि इतनी ज्यादा इनफेशन है एंड वी डोंट नो इसमें मिसइफेशन क्या है, डिसइफेशन क्या है और एक्चुअल इनफार्मेशन क्या है? तो इट इज़ वेरीेंट टू रिकॉग्नाइज़ कि आप किससे इनेशन
(30:24) ले रहे हैं, किसे फॉलो कर रहे हैं। मेक श्योर यू आर लुकिंग फॉर क्वालिफाइड वॉइससेस। जिनको पता है कि वह किस बारे में बात कर रहे हैं। वह साइंस की तरफ से आ रहे हैं और साइंटिफिकली आपको चीजें बता रहे हैं। बिकॉज़ मैंने ऐसे इंटरनेट पे कोट अनकोट डॉक्टर्स भी देखे हैं जो एक्चुअली डॉक्टर नहीं है। बस अपने नाम के आगे ऐसे डॉक्टर समथिंग समथिंग लिख दे रहे हैं और गलत इनफेशन फैला रहे हैं। तो यू हैव टू बी वेरी वेरीरी केयरफुल। आप किससे ये इनफेशन कंज्यूम कर रहे हैं। मेक श्योर कि उस बेसिक ह्यूमन बॉडी की कोई ट्रेनिंग हो। बेसिक कोई साइंटिफिक क्वालिफिकेशन हो इन
(30:53) दैट फील्ड। जस्ट बिकॉज़ उन्होंने जियोलॉजी में पीएचडी कर रखी है। उसका मतलब ये नहीं कि वो आपको सेक्स एजुकेशन आगे समझा सकते हैं सही से। सो बी केयरफुल व्हेयर यू कंज्यूमिंग इनफेशन फ्रॉम। द सेकंड थिंग इज कि इतना ज्यादा सोशल मीडिया पे एक्सेस बढ़ गया है। आप कुछ भी कहीं भी तुरंत घर पर डिलीवर करा सकते हैं। व्हिच मींस दैट हमें एक्चुअल लाइक द होल विज़डम कन्वर्सेशन हमें विज़डम तो नहीं मिल रही है कि ये कैसे करना है। एंड बिकॉज़ हमें बैड फेथ एक्टर्स हैं जो हमें बता रहे हैं कि वाइना टाइट करना चाहिए कि वाइना लाइटन करना चाहिए। दैट डजंट मीन दैट्स फ़क्चुअर। एंड यह इतनी बड़ी
(31:30) प्रॉब्लम है कि मैं अपने कंटेंट को एक्सप्लेन करने के लिए ना मॉडल्स बहुत सारे यूज करती हूं। और मैं जब सर्च कर रही थी एक ऐसा मॉडल जिसमें मैं हिंदुस्तानी लोगों को उनके जेनेटल्स के बारे में औरतों को उनके वलवा के बारे में समझा सकूं। मुझे एक मॉडल ऐसा नहीं मिला जिसमें इंडियन स्किन टोन नजर आया। वो सब कुछ बड़ा वाइट लोगों वाला स्किन टोन था। बड़ा गोरा गोरा सब कुछ था। इतनी बड़ी प्रॉब्लम हो गई कि मैंने एक्चुअली बेकिंग सोडा के डब्बे पे क्ले लेके यह बनाया है। जस्ट टू शो कि यह अलग कलर होता है और यह नॉर्मल है। क्योंकि हम मेडिकल टेक्स्ट बुक में भी देखें ना तो
(32:05) भी बड़ा वाइट वाइट वाइट वाइट सब कुछ गोरा गोरा पिंक पिंक दिखाते हैं। दैट्स नॉट व्हाट इट्स लाइक इन इंडियन स्किन टोंस। एंड बिकॉज़ हमारा पॉपुलर परसेप्शन यही है। तो लोगों को मिसगाइड करना बहुत इजी है। एंड इस वजह से ये जेनेटल लाइटनिंग क्रीम्स बिकती हैं हिंदुस्तान में जिनका कोई मतलब नहीं है। सो देयर कांसेप्ट इज़ कि मिसइंफेशन जो वो फैलाते हैं वो यह है कि अगर आप बहुत सेक्सुअली एक्टिव हो गए हैं। आपने बहुत सारा सेक्स कर लिया है तो आपके जेनेटल्स डार्क हो जाएंगे। अच्छा या आप मतलब आपने अपने साथ कुछ-कुछ गलत कर लिया है। आप अपने अंदर ध्यान नहीं रखा है।
(32:36) इसलिए आपके जेनेटल्स डार्क हो गए हैं। बट जबकि एक्चुअली बात यह है कि हमारे जेिटल्स डार्क होते हैं। दिस इज व्हाट इंडियन स्किन टोन इज़ लाइक। इट्स लाइक सेइंग कि आपने अपने आपने बहुत ज्यादा गाड़ी बाइक पे घूम लिए हैं इसलिए आपके बाल सफेद हो गए हैं। आपके बाल सफेद होते हैं। दैट इज द कॉन्सक्वेंस ऑफ़ एज। ह्यूमन स्किन ह्यूमन जो जेनेटल्स होते हैं उनमें एक पिगमेंट होता है। हमारी स्किन में एक पिगमेंट होता है जिसको हम बोलते हैं मेलेनिन। मेलेनिन हमारा स्किन टोन डिसाइड करता है। जो हमारा जेनेट जो भी ऐसे सरफेससेस होते हैं ना जिसमें फ्रिक्शन
(33:07) ज्यादा होता है जिसमें प्रोटेक्शन की ज्यादा जरूरत होती है। उन एरियाज में मेलेनिन ज्यादा होता है। तो आप देखेंगे आपकी स्किन फोल्ड में भी थोड़ा डार्कनेस रहेगी। क्योंकि वहां बार-बार फ्रिक्शन हो रहा है। इसलिए आपकी बॉडी उस एरिया में मेलेनिन ज्यादा बना देती है। थोड़ा प्रोटेक्शन ज्यादा दे देती है। राइट? इसलिए आपके जेनेटिल एरिया में बिकॉज़ सेक्स का फ्रिक्शन बहुत होता है। इसलिए यू हैव मोर मेलेनिन इन दैट एरिया। इसलिए ज्यादा पिगमेंटेशन होता है। एंड दैट इज कंप्लीटली नेचुरल एंड नॉर्मल। इसीलिए वो डार्क होता है। इसीलिए वो डार्क होता है।
(33:32) अभी उसमें आप ब्लीच लगा के उसको ब्लीच कर देंगे। तो पहली चीज आप हमें प्रोटेक्शन हटा रहे हैं। दूसरी चीज वहां की स्किन बहुत पतली होती है। तो वहां पे आप ब्लीच लगा के नॉट ओनली आपको बॉडी में वो अब्सॉर्ब करके नुकसान कर सकता है। बट वो स्किन जल सकती है और नॉट जस्ट जल सकती है। जलती है। मेरे बहुत मरीज आते हैं। ज्यादा वैक्सिंग करा ली, ज्यादा ब्लीचिंग करा ली। उसकी वजह से बर्न्स हो गए हैं। थिक हो गई है। स्किन परमानेंट डिस्कलरेशन हो गया है। परमानेंट डार्कनेस हो गई है। तो अंडरस्टैंड योर बॉडी। लर्न अबाउट व्हाट योर बॉडी। लर्न व्हाट इज हाउ इट्स सपोज टू
(34:04) बी इन योर बॉडी। और जब आपको यह पता रहेगा तो आप यह फालतू के स्कैम में नहीं फसेंगे। अच्छा हमने वाइना को लेकर जो सुना है कि डार्क होती है। इंडियन स्किन टोन में आपने कहा कि डार्क ही होती है। एंड ऑब्वियसली इतनी शेम हमारे प्राइवेट पार्ट्स के साथ हम बड़े होते हैं कि हमें लगता है डर्टी भी है और कुछ एक्चुअल भी बिकॉज़ बहुत कंस्ट्रिक्टेड एरिया में है तो कुछ डर्टी भी होता है। तो क्या कोई स्पेशल तरीका है टू कीप योरसेल्फ क्लीन? या कुछ करना भी चाहिए जैसे बहुत सारे वजाइनल वॉशज़ आते हैं, क्रीमज़ आते हैं, सब आते हैं। व्हाट इज अ हेल्दी प्रैक्टिस टू कीप योर
(34:29) प्राइवेट पार्ट्स क्लीन? आई एम वेरी ग्लैड यू आस्क दिस क्वेश्चन बिकॉज़ हम हमेशा वाइना की जब बात करते हैं ना तो हम इस एरिया की बात करते हैं। जबकि यह वाइना होता ही नहीं है। वाइना अंदर होता है। यह हो गया कि हम नाक की बात करते हैं तो नाक ये होती है। जो नाक के अंदर होता है वो भी नाक ही होती है। पर जैसे आप अपने उसके अलग-अलग नाम होते हैं उन पार्ट्स के। बेसिकली। तो इस पार्ट का जो बाहर का पार्ट होता है जो हमें दिखता है जो जिस पे बाल उगते हैं जिस पे हमारे कपड़े छूते हैं ये सब वलवा होता है और जो अंदर होता है वो वाइना होता है। आप इसको ऐसे समझ लीजिए कि
(35:01) अगर आपको फेस वॉश यूज़ करना है तो आप अपना पूरे मुंह पे फेस वॉश यूज़ करेंगे। नाक के अंदर फेस वॉश कभी नहीं डालेंगे। राइट? उसी तरह से आपको वलवा साफ करना है तो सिर्फ वलवा साफ करिएगा। अंदर कभी कुछ मत डालिएगा। और लोग अंदर उंगली डाल के सफाई करने की कोशिश करते हैं। लोग अंदर वजाइनल वॉश डाल लेते हैं। यह होता है बहुत कॉमनली होता है। बहुत सारे मरीज आते हैं इन सब प्रॉब्लम्स के साथ। सो यू डोंट नीड टू पुट एनीथिंग वजाइनल वॉश नाम ही गलत है। तो फिर ये मार्केट ऐसे क्यों हो रहे हैं? कंपनीज़ वजाइनल वॉश क्यों लिख रही हैं? क्योंकि हम मिस इनफार्मेशन से जूझ रहे हैं
(35:28) और लोग उस पे कैपिटलाइज कर रहे हैं। तो अगर कोई वलवा वॉश है और आप यूज़ कर रहे हैं। मैंने सुना ही नहीं आज तक कभी। एग्जैक्टली बिकॉज़ हमें औरतों के शरीर के बारे में हम सीखते ही नहीं हैं। मुझे भी एमबीबीएस में आके पता चला कि यह वलवा होता है और अंदर वाइना होता है। क्योंकि मेरे मम्मी पापा दोनों डॉक्टर हैं। हमने मतलब और मेरा घर बहुत ही सेक्स पॉजिटिव है। हमने हर चीज डिस्कस करी है। बट मैंने कभी यह सोचा ही नहीं था कि इसका नाम ही अलग होता है। एंड अंदर कुछ भी नहीं डालना है आपको। अगर आपको अपना वलवा साफ करना है तो नॉर्मल पानी से
(35:58) साफ हो जाता है। अगर आप नॉर्मल साबुन यूज कर रहे हैं आउटसाइड पे तो ठीक है। आइडियली अवॉयड साबुन क्योंकि साबुन बहुत हारश हो सकता है। अच्छा ये पीएच चेंज हो जाएगा आपकी अंदर डिस्टर्ब हो जाएगी। ये दैट्स द थिंग। यही सब तो बेवकूफी है कि वो बोलते हैं आपको पीएच बैलेंसिंग वॉश बेच देंगे। ये कितनी बेवकूफी की बात है क्योंकि अगर थोड़ी सी भी किसी ने केमिस्ट्री पढ़ी हो तो एक एसिडिक और बेसिक पीएच पता होता है। एसिडिक एक एंड पे होता है या बेसिक दूसरे एंड पे होता है। आपका वाइना एसिडिक होता है। कोई भी दुनिया का कौन सा साबुन क्यों ना
(36:29) हो वो बेसिक होता है। अगर आप एसिडिक एनवायरमेंट में बेसिक चीज घुसाएंगे तो पीएच खराब हो ही जाएगा ना। डेफिनेटली। तो आप कितना भी पीएच बैलेंसिंग साबुन बना दीजिए इन एन एसिडिक एनवायरमेंट। यू कांट पुट एन अल्कलाइन थिंग। यू कांट पुट अ बेसिक थिंग। इट्स वेरी सिंपल लॉजिक। बट बिकॉज़ हमें ये कोई सिखाता नहीं है। कोई समझाता नहीं है। मेरी एक रील बड़ी वायरल हो गई थी कि वाइना में दही वाले बैक्टीरिया होते हैं। और उस पे इतना हाहा हाहा ही हो गई। बट द पॉइंट ऑफ़ दैट रील वाज़ दिस कि वाइना में जो दही वाले बैक्टीरिया होते हैं, वह एसिडिटी क्रिएट करने के लिए होते
(36:56) हैं। वह एसिडिक एनवायरमेंट मेंटेन करने के लिए होते हैं। और जब आप साबुन डाल देते हैं, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया भी मर जाते हैं। सो, वाइना अंदर नाक के अंदर जैसे कभी साबुन नहीं डालना है, वैसे वाइना के अंदर कभी साबुन नहीं डालना है। नाक बाहर से जैसे साफ कर सकते हैं, वैसे वलवा बाहर से साफ कर सकते हैं विद अ सोप। अगर अभी तक आप सोप यूज़ कर रहे हैं, आपको कोई दिक्कत नहीं हुई है, इट्स फाइन। आई डोंट रेकमेंड यूज़िंग अ सोप। मैं तो कहती हूं पानी से साफ करो। पानी से और हाथ से साफ करो। अगर सोप यूज करना भी है तो नॉर्मल ग्लिसरीन का
(37:23) साधारण जो साबुन आता है जिसमें ज्यादा सेंट ना हो, ज्यादा कलर ना हो, स्पार्कल शार्कल कुछ ना हो। बहुत ही जेंटल सोप यूज़ करना है अगर करिए। इनफैक्ट इफ पॉसिबल जो एकदम सेंसिटिव फेस वाले फेस वॉश आते हैं ना वो भी यूज़ कर लीजिए। बट यू डोंट नीड अ डेडिकेटेड वॉश फॉर योर जेनिटल्स। और ये तो बहुत वॉश नहीं सुना होगा। हां। हमेशा वाइना वाश क्योंकि गर्म औरतों की बॉडी से इतनी जल्दी लेकिन अब कुछ कुछ आने लगे हैं मेनस बॉडी वाश समथिंग समथिंग मेंस बॉडी वाश आता है बट कभी पीनस वॉश नहीं सुना होगा कभी बॉल सैक वॉश नहीं सुना होगा कभी स्क्रोटम वाश नहीं सुना होगा कभी
(37:55) टेस्टिकल वॉश नहीं सुना होगा वाइना के साथ इतनी शर्म क्यों रोक रखी है वाओ तो मतलब ये सब एक मार्केटिंग प्रोपगेंडा है और दे नो ट्रुथ टू इट पूरी तरह से अच्छा हम लोग डिस्कस कर रहे हैं मेन एंड वुमेन का सेक्सुअलिटी उनका एक दूसरे की बॉडी के बारे में जानना जिसको हम सेक्सुअल एजुकेशन या आप अपनी लैंग्वेज में लिटरेसी बॉडी लिटरेसी कहते हैं। राइट? तो हम इसके बारे में बात करें। अभी इनेशन बहुत सारी है। नॉलेज भी बहुत सारी है। बहुत सारे सोर्सेस भी हो गए हैं। इसके साथ-साथ जो चीज बढ़ गई है लोगों में वो है क्यूरियसिटी। तो आपको क्या लगता है कि
(38:30) व्हाट अ मैन इज मोस्ट क्यूरियस अबाउट व्हेन इट कम्स टू वुमस बॉडी। और एक औरत एक आदमी की बॉडी को लेकर सबसे ज्यादा क्यूरियस क्या रखती है? आई थिंक क्यूरियोसिटी हमेशा से अब बस एवन्यूज़ ओपन हो गए हैं जिसमें उस लोग उस उस बारे में लोग बात कर पा रहे हैं। पहले हमारे पास कुछ कम रिसोर्सेज थे। अब रिसोर्सेज बढ़ गए हैं। बट आई थिंक दिस इज़ एन इंडिविजुअल थिंग। ऐसा कुछ जनरलाइज़ नहीं है कि आदमियों को किसी पर्टिकुलर वुमस बॉडी के किसी पर्टिकुलर एंगल पे ज्यादा इंटरेस्ट होता है। कुछ लोगों के कुछ सवाल होते हैं, कुछ लोगों के कुछ सवाल होते हैं। एंड द सेम वे
(39:03) लाइक ह्यूमंस आर क्यूरियस पीपल इन जनरल। एंड हमको हर चीज़ के बारे में जानने में बड़ा इंटरेस्ट होता है। एंड दैट्स दैट्स दैट्स व्हाट इट इज़। आई थिंक डॉक्टर तन्या नाउ आई वांट टू टॉक अबाउट फर्टिलिटी क्योंकि इन द रीसेंट फ्यू इयर्स ना एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम बन गई है। मैं देख रही हूं हर साल बहुत धड़ल्ले से आईवीएफ क्लीनिक्स खुले ही जा रहे हैं कि नेचुरली कंसीव करना बहुत डिफिकल्ट हो गया है लोगों के लिए। नेचुरली बर्थ करना भी बहुत डिफिकल्ट हो गया है। तो मुझे इस पूरे फर्टिलिटी स्पेक्ट्रम के थ्रू आप लेके जाओ। इस जर्नी के थ्रू लेके जाओ एंड इट
(39:30) हेल्प द ऑडियंसेस अंडरस्टैंड कि जो हो रहा है वो क्यों हो रहा है और हम कहां पे गलत जा रहे हैं। कहां पे हम क्या सही कर सकते हैं। एक्चुअल में कितना हमारे हाथ में है भी। यू नो कितना ये नेचर की देन है और हमारी बॉडी का डिजाइन है। यह हमारी डिफॉल्ट सेटिंग है जिससे हम पैदा हुए हैं तो ये चेंज नहीं हो सकती है। उस तरह की कन्वर्सेशन है। है क्या ये फर्टिलिटी? क्योंकि हम इतना घर में अब्यूज हो रहा है। अब तो न्यूज़ में हम कितना कुछ देखते हैं कि अगर आपने अब पहले तो सब लड़का पैदा करने तक होता है। अब तो बच्चे ही नहीं हो रहे हैं। तो यह बांझ है या ये अनलकी है।
(40:00) कितना उसमें एक आदमी का रोल है। जस्ट टेक मी थ्रू दिस होल स्पेक्ट्रम ऑफ़ फर्टिलिटी। सो इंडिया में बच्चा पैदा करना एक एक लाइफ गोल ही नहीं है। एक मोरल रिस्पांसिबिलिटी होती है। आप आपने अपने एनसेेस्टर्स की तरफ अपनी ड्यूटी नहीं पूरी करी अगर आपने बच्चा नहीं पैदा किया। ये हमारे बिलीफ होती है। तो देयर इज़ अ ह्यूज डिजायर। लोगों को बहुत इच्छा होती है। यह कांसेप्ट ही हमारे यहां बहुत ही एलियन है कि आपने बच्चा नहीं किया है या कोई औरत कह रही है कि आई वांट टू बी चाइल्ड फ्री बाय चॉइस। कोई आदमी कह रहा है आई वांट चाइल्ड फ्री बाय चॉइस। ये कांसेप्ट ही बड़ा एलियन
(40:34) है। तो अभी तक हम एक लाइफ का एसेंशियल पार्ट इसको मानते हैं। द डिफरेंस नाउ इज़ दैट अब हमारे पास ऑप्शंस आ गए हैं। अब हमारे पास तरीके आ गए हैं। अगर इनफर्टिलिटी है या सबफर्टिलिटी है तो उसको एड्रेस करने के हमारे पास ऑप्शंस आ गए हैं। जिस तरह से पहले बहुत सारे रेस्टोरेंट नहीं होते थे। लोगों को लोगों के दिमाग में ये कांसेप्ट ही नहीं था कि बाहर खाना खाने जा सकते हैं और जा सकते हैं तो एक ढाबा होगा पूरे शहर। नहीं और अगर चाइनीस खाना है तो सिर्फ चाउमीन खानी है और कुछ ऑप्शन नहीं है। एक्सक्टली। अब हमारे पास अब लोगों को यू नो पैेट एक्सपेंड कर गया है तो रोज नए
(41:09) रेस्टोरेंट खुलते हैं। उसी तरह से आजकल रोज नए आईवीएफ सेंटर खुल रहे हैं। बिकॉज़ वो टेक्नोलॉजी आ गई है। एंड फाइनली दैट टेक्नोलॉजी इज अफोर्डेबल। अभी भी बहुत महंगा है आईवीएफ। बट आज से 20 साल पहले जितना महंगा था उतना महंगा नहीं है। आईवीएफ टेक्नोलॉजी ही 50 साल पुरानी है। कितना महंगा है आईपीएफ? ऑन एवरेज कहीं नहीं तो आपका ₹1.
(41:29) 5 लाख तो रुपए जाना ही है एक साइकिल में कहीं नहीं तो आप और यह सिर्फ कंसीव करने तक का खर्चा है। उसके बाद अलग खर्चा है। राइट? सिर्फ एम्ब्रियो बनाने तक का खर्चा है। जरूरी नहीं इंप्लांट का खर्चा कि वो आप में जम जाएगा। अच्छा पहले आईवीएफ को भी पूरा डिस्कस करेंगे क्योंकि एम्ब्रियो ये सब टेक्निकल टर्म्स है। तो जस्ट ब्रेक इट डाउन फॉर द जनरल ऑडियंस क्योंकि ये मेडिकल टर्म्स है। समझ में नहीं आएंगे ऑडियंसेस को। तो हम फर्टिलिटी के पूरे स्पेक्ट्रम की बात करें। फर्स्ट लेट्स एड्रेस दैट एंड देन वी विल टॉक अबाउट आईवीएफ। ओके? सो फर्टिलिटी के लिए हमें क्या करना होता है? हमें
(41:55) मेनली दो आइटम चाहिए होते हैं। हमको एक एग चाहिए होता है। हमको एक स्पर्म चाहिए होता है। एग जो है वो फीमेल एग माने अंडा जो फीमेल से निकलता है। मेल माने स्पर्म सॉरी स्पर्म माने शुक्राणु जो मेल से निकलता है। इनका मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। एग निकलता है तो सिर्फ 24 घंटे के लिए जिंदा रहता है। अब उस 24 घंटे में आपका सेक्स भी होना चाहिए। उस 24 घंटे में एक हेल्दी स्पर्म भी होना चाहिए जो बाकी सारे स्पर्म को आउटकंपीट करके उस एग को फर्टिलाइज भी कर दे। उससे मिल भी जाए। अगर यह फर्टिलाइजेशन हो गया तो 10 दिन के टाइम में यह एम्ब्रियो और यह
(42:33) फर्टिलाइजेशन आपके यूट्रस के अंदर नहीं होता है। आपके ट्यूब के अंदर होता है। तो यहां ओवरी है। ओवरी से एक एग निकला। यहां तक टहलते टहलते पहुंचा। यहां से स्पर्म आया। उसने वाइना पार किया। उसने सर्विक्स पार करी। उसने यूट्रस पार किया। फिर वो ट्यूब में घुसा और यहां उसने एग ढूंढा और फिर यहां उसने उसको फर्टिलाइज़ किया और यह एग जो है केमिकल्स रिलीज़ करता रहता है टू अट्रैक्ट द स्पर्म टू इट। यहां से लेकर के यहां तक पहुंचने का टाइम जो ये यहां मेन कैविटी में पहुंचे उसमें करीब 10 दिन का समय लगता है कि वो यहां आ के जम जाए इंप्लांटेशन। सो जब ये एग और
(43:10) स्पर्म मिलते हैं तो जो चीज बनती है उसको हम बोलते हैं एम्ब्रियो। और ये एम्ब्रियो बड़ा हो के हो के डिवाइड कर कर के वो एक सिंगल सेल से बड़ा हो के एक बेबी बन जाता है जो बाद में ऑब्वियसली डिलीवर होता है। सो दिस दिस लिटिल फ्यूज़ ये जो होना है यह बड़ा ही कॉम्प्लिकेटेड होता है। बहुत सारी चीजें इसमें इनवॉल्वड होती हैं। अक्सर क्या होता है कि या तो इसलिए अपना साइकिल का टाइमिंग जानना भी बहुत जरूरी है। अक्सर क्या होता है कि लोगों को पता नहीं होता कि ओवुलेशन कब हो रहा है। तो उनको पता नहीं है सेक्स के लिए टाइमिंग क्या रखनी है। आप बताओ तो
(43:44) आप सब कुछ बता के जाओ आज इस पॉडकास्ट पर। मैं चाहती हूं कि एक ऐसा होलिस्टिक कन्वर्सेशन बने जिसके अलावा लोगों को कुछ और देखने सोचने की जरूरत नहीं पड़े। मैं ये नहीं चाहती हूं कि वो ना करें लेकिन एटलीस्ट एक बहुत तगड़ा फाउंडेशन बन जाए यहां से क्योंकि बहुत बड़ा गैप है यहां पर। बहुत बड़ा गैप है। एंड हमें फर्टिलिटी एजुकेशन मिलती ही नहीं है। तो जिस सरकमस्ट्ससेस में एक्चुअली नेवर माइंड आई विल एक्सप्लेन इट लाइक दिस। आपका ओवुलेशन जो होता है वह आपके पीरियड आने से 14 दिन पहले होता है। अगर आज मेरा पीरियड आया है तो आज से 14 दिन पहले मैंने ओव्युलेट किया
(44:16) होगा। मेरा एग रिलीज़ हुआ होगा। यह ऑब्वियसली आप हिस्टोरिकली बैक इन टाइम जाके तो नहीं कैलकुलेट कर सकते हैं कि आज पीरियड आया होगा तो हमें 14 दिन पहले सेक्स करना हुआ होगा। सो इसलिए अपना साइकिल ट्रैक करना बहुत जरूरी है। अगर आपके आप साइकिल्स ट्रैक करते रहेंगे तो आपको रफ्ली पता चल जाएगा कि भाई इस समय मेरा इतने दिन पे पीरियड आता है। तो अगर मेरा 28 तारीख को पीरियड आने वाला है तो मैं उसे कैलकुलेट कर लेती हूं। उससे 14 दिन पहले 14 तारीख होगी। तो 14 तारीख को हमें अनप्रोटेक्टेड सेक्स करना है। इफ यू इफ यू वांट टू गेट प्रेग्नेंट। तो
(44:43) साइकिल्स अपनी ट्रैक करिए। अपनी साइकिल समझिए एंड देन ट्राई टू टाइम योर साइकिल। उसके अलावा मार्केट में ओवुलेशन स्ट्रिप्स भी आती हैं। बट क्यों इतना कॉम्प्लिकेशन करना है? सीधे-सीधे अपना कैलकुलेट कर लो ना। साइकिल मार्क कर लो। अब आजकल क्या हो गया है कि हमारी लाइफस्टाइल बहुत बदल गई है। स्ट्रेस बहुत ज्यादा बढ़ गया है। एंड आपकी बॉडी आपके जो ये स्पर्म होते हैं, आपके जो एग्स होते हैं, बहुत सेंसिटिव होते हैं टुवर्ड्स स्ट्रेस। आपका स्ट्रेस बढ़ेगा। आपके हॉर्मोंस चेंज होंगे। द साइकिल्स आर सपोज टू फ्लो इन उस तरह से नहीं करेंगे। एंड
(45:14) एंड हॉर्मोन बैलेंस करना बहुत ही बकवास बात होती है बाय द वे क्योंकि आपके हॉर्न कभी बैलेंस में नहीं होते हैं। आपके हॉर्मोन हमेशा ऐसे-से कर रहे होते हैं और इसी तरह से आपके हॉर्मोनों्स काम करते हैं। इफ एनीबडी इस ट्राइंग टू टेल यू कि वो आपके हॉर्मोनस बैलेंस करेंगे तो उनको नहीं पता है वो क्या बात कर रहे हैं। सो आपके जो हॉर्मोन की नेचुरल चेंजेस होने चाहिए वो नहीं होते हैं। स्ट्रेस से रिसोंड करते हैं वो। एंड इसकी वजह से या तो एग की ग्रोथ सही से नहीं होती है या एग का रिलीज सही से नहीं होता है। द सेम वे या तो स्पर्म की ग्रोथ सही से नहीं होती
(45:41) है। स्पर्म का रिलीज सही से नहीं होता है। और भी बहुत सारे फैक्टर्स हैं। मेल फैक्टर भी होता है, फीमेल फैक्टर भी होता है। अनक्लेड इनफर्टिलिटी भी होती है। एंड सबका अच्छा वेटेज होता है। लोग सोचते हैं फर्टिलिटी इज़ ओनली अ वुमस बिज़नेस। बट एक्चुअली ओनली 40% ऑफ़ फर्टिलिटी इज़ वुमेन। 40% इज़ मैन एंड बचा हुआ 20% अनक्स््लेंड इनफर्टिलिटी होती है। हमें पता ही नहीं क्यों हो रहा है ये। बस वही हो रहा है। सब कुछ ठीक है पर नहीं हो रहा है। तो दोनों का इन्वॉल्वमेंट बहुत होता है। कपल का इन्वॉल्वमेंट बहुत होता है। अभी आईवीएफ में क्या होता है कि फॉर व्हाटएवर रीजन
(46:12) अगर आपका एग या तो सही से रिलीज हो के नहीं पहुंच पा रहा है या आपका स्पर्म वहां तक नहीं पहुंच पा रहा है या स्पर्म में कोई दिक्कत है या एग में कोई दिक्कत है। आईवीएफ में हम क्या करते हैं कि ऐसे समझ लीजिए कि आपका यहां पे ट्रैफिक जाम लगा हुआ है। और ट्रैफिक जैम में से घुस के टाइम वेस्ट करके रास्ता निकालने की जगह आप हाईवे आप बाईपास ले लीजिए तो हम बायपास कर लेते हैं आईवीएफ में। हम एग को बॉडी से बाहर निकाल लेते हैं और सीमन तो देना इजी होता है थोड़ा तो हम वहां से स्पर्म लेते हैं। डोनर बहुत लोगों ने देखी है। तो पीपल नो व्हाट व्हाट इट इज?
(46:48) यस। तो हम इस बायपास में एग को हमने डायरेक्टली सर्जिकली बॉडी से बाहर निकाल लिया। हम हॉर्मोनस देते हैं ताकि ढेर सारे एग डेवलप हो। नॉर्मली एक एग रिलीज़ होता है। हम हॉर्मोन्स देते हैं ताकि मल्टीपल एग्स रिलीज़ हो ताकि एक प्रोसीजर में खाली एक अंडा ना मिले। हमें ढेर सारे एग्स मिले। ढेर सारे चांसेस मिले। एंड इन एग्स को हम स्पर्म से मिलने देते हैं और एक आर्टिफिशियल एनवायरमेंट एक लैब में। और मैं एक्चुअली एम्ब्रियोलॉजिस्ट हूं। मेरी पहली मास्टर्स एम्ब्रियोलॉजी में है। तो दिस इज़ द प्रोसीजर आई डू। मतलब इन माय डेली लाइफ। अब तो मैं गायनेकोलॉजी
(47:15) ट्रेनिंग में आ गई हूं। बट हम इस एग को इस स्पर्म से मिलवाते हैं इन द लैब। और अगर यह स्पर्म ने फर्टिलाइज कर दिया, हम एग को चूज़ करने देते हैं कि कौन सा बेस्ट स्पर्म होएगा। हम अपने आप से नहीं करते हैं। अगर स्पर्म में इतनी इशूज़ हैं कि इतना कम अमाउंट है या स्पर्म इतने अनहेल्दी हैं, तो हम सर्जिकली भी कर सकते हैं कि हम एक बेस्ट लुकिंग स्पर्म चूज़ करें और उसको हम आर्टिफिशली एग के अंदर डाल दें। और यह भी आप स्टडी कर सकते हो कि बेस्ट स्पर्म इनमें से कौन सा है। हां, कौन सा हेल्दीियस्ट लुकिंग है। वाओ। तो, इसको हम इ बोलते हैं यह प्रोसीजर। एंड
(47:47) यह भी हम एम्ब्रियोलॉजिस्ट ही करते हैं। तो यह दो तरीके हैं कि आपने फ्यूजन करा दिया। अब फ्यूजन करा दिया इसका मतलब यह नहीं है कि एम्ब्रियो बनेगा। पहली चीज कि एम्ब्रियो बन रहा है कि नहीं। सेकंड चीज हेल्दी एम्ब्रियो बन रहा है कि नहीं। थर्ड चीज हेल्दी एम्ब्रियो बन के ग्रो कर रहा है कि नहीं। जब वो ग्रो करके करीब पांच दिन का हो जाता है। बिटवीन थ्री टू फाइव डेज। बट बेस्ट प्रैक्टिस इज़ फाइव डेज। पांच दिन का जब एम्ब्रियो बड़ा हो गया है तब हम इसको बॉडी में यहां वापस डाल देते हैं। एंड वह अगले पांच दिन अपना पैर जमाना शुरू करता है। 10 दिन तक प्रॉपर
(48:21) इंप्लांटेशन हो जाती है। अब इंप्लांटेशन का मतलब यह नहीं है कि जस्ट बिकॉज़ आपको प्लॉट अच्छा लग गया। आपने जमीन खरीद ली। इसका मतलब यह नहीं कि आप वहां मकान बनाएंगे। आप बहुत साल वो प्लॉट खड़ा छोड़ सकते हैं। इंप्लांटेशन हो गया उसके बाद भी पहले तो इंप्लांटेशन फेलियर हो सकता है। इंप्लांटेशन हो गया उसके बाद भी यह नहीं है कि वो हेल्दी ग्रो करे वो और यह हर प्रेगनेंसी में होता है। दिस इज़ नॉट जस्ट इन आईवीएफ। आईवीएफ में हम इतना मॉनिटर करते हैं इसलिए हमें पता होता है फेलियर होता है। बट ऑलमोस्ट 30% ऑफ़ ऑल प्रेगनेंसीज़ एंड अप इन मिसकैरजेस। हमें
(48:52) अक्सर पता ही नहीं चलता है मिसकैरज हो गया है। बिकॉज़ नॉर्मल साइकिल में वो निकल जाता है। पता भी नहीं चलता है। लोग इतना मॉनिटर ही नहीं करते हैं। इस सब के बाद अगर ग्रोथ आ गई दैट इज़ हाउ एन आईवीएफ प्रेगनेंसी हैपेंस। नाउ व्हेन इट कम्स टू द डिलीवरी। हम नेचुरल वर्सेस अननेचुरल की बात करते हैं। व्हिच आई डोंट लाइक। आई डोंट लाइक टू से नेचुरल बिकॉज़ चाहे आप कैसे भी बच्चा पैदा कर रहा है बच्चा नेचुरल ही है। बच्चा कोई आर्टिफिशियल नहीं हो रहा है। मैं बोलती हूं हमेशा कि वजाइनल डिलीवरी वर्सेस ऑपरेटिव डिलीवरी। और वजाइनल डिलीवरी में
(49:21) भी ऑपरेशंस हो सकते हैं। कट लगता है, इंस्ट्रूमेंट्स लगते लगते हैं। तो पहले तो वजाइनली आप बेबी निकाल सकते हैं। अब वजाइनल डिलीवरी में इंडिया में प्रॉब्लम्स क्या आती हैं? हम वेस्ट से डाटा कंपेयर करते हैं। हमारे सिज़ेरियन ज्यादा होते हैं। जबकि हमारे यहां प्रॉब्लम्स भी अलग हैं। हमारे यहां प्रॉब्लम्स क्या-क्या आती है? पहली चीज़ इनफेक्शन का रेट बहुत हाई है। हम बेसिक प्रिकॉशंस नहीं फॉलो कर पाते हैं। हमारे पास ऑनेस्टली देश में इतना पैसा नहीं है कि लोग किस तरह का इनफेक्शन हो सकता है। आपको डिलीवरी के टाइम पर डिलीवरी से पहले
(49:51) भी इंफेक्शन हो सकता है। बच्चे में इंफेक्शन फैल सकता है वो। बच्चे को न्यूट्रिशन अच्छा नहीं मिल रहा हो। उसके ग्रोथ में प्रॉब्लम्स आ रही हो। बहुत सारे रीज़ंस हो सकते हैं जिसकी वजह से यू माइट नीड एन ऑपरेटिव डिलीवरी। सिज़ेरियन इज़ अ लाइफ सेविंग प्रोसीजर। सिज़ेरियन इज़ एन इमरजेंसी प्रोसीजर। सिज़ेरियन को वो इज्जत नहीं मिलती है जितनी मिलनी चाहिए। लोग उसको जबरदस्ती बुरी चीज समझते हैं। जबकि मैं मानती हूं कि हां बहुत सिज़ेरियंस ऐसे भी होते हैं। बट इट इज़ अ वेरीेंट एंड लाइफ सेविंग प्रोसीजर। मैं अगर बच्चा करूंगी तो मैं तो सिज़ेरियन ही कराऊंगी। ऐसा क्यों कह
(50:21) रहे हो आप? बिकॉज़ मुझे पता है कि आई विल जस्ट एक्सप्लेन दिस पार्ट। हां। मुझे पता है कि प्रेगनेंसी कितना आपकी बॉडी को इंपैक्ट करती है। और हमारे इंडिया में पेल्विक हेल्थ का कांसेप्ट है ही नहीं। और मुझे पता है मैं देखती हूं डे इन एंड डे आउट कि अनवांटेड डिलीवरी के टाइम पे भी जब आपको सिज़ेरियन करना चाहिए। फिर भी प्रेशर होता है डिलीवरी का। उसके बाद पेल्विक फ्लोर की क्या हालत होती है? इंडिया में कितनी औरतों को यूरिन होल्ड नहीं कर पाती हैं। उनकी यूरिन लीक करती रहती है क्योंकि जबरदस्ती डिलीवरी करने में उनका पेल्विक फ्लोर डैमेज हो जाता है। इंडिया में कितने
(50:56) ज्यादा लोगों को इस बात की प्रॉब्लम होती है कि पूरी बॉडी ही ऑल्टर हो जाती है डिलीवरी के बाद। वो बस एक प्रेशर की वजह से। एंड आई डोंट मीन टू टेक अवे फ्रॉम द फैक्ट कि हां अननेसेसरी सिज़ेरियंस भी होते हैं। मैं इस बात को रिस्पेक्ट करना चाहती हूं। बट कमिंग फ्रॉम द एंगल ऑफ़ साइंस मैं ये बता रही हूं कि सिज़ेरियन भी बहुत इंपॉर्टेंट प्रोसीजर होता है। मेरी मम्मी मेरे भाई को वजाइनली पैदा किया है और मेरे टाइम पे मम्मी को सिज़ेरियन की जरूरत पड़ी थी बिकॉज़ सिचुएशन ऐसी थी कि इट वाज़ रिक्वायर्ड फॉर द फॉर द हेल्थ ऑफ़ हर एंड फॉर द हेल्थ ऑफ़
(51:24) मी। अब क्या इशूज़ हो सकते हैं? इंडिया में और सिज़ेरियन क्यों होते हैं? पहली चीज़ हमारे पास इनफेक्शन का रेस बहुत हाई होता है। दूसरी चीज़ इंडिया में एंड यू मे डिसएग्री विथ दिस बिकॉज़ बहुत सारे लोग जो ये देख रहे हैं वो इस बात को फेस नहीं करना चाहते हैं कि आज भी इंडिया में औरतों का न्यूट्रिशन पूरा नहीं होता है। इन द वास्ट मेजॉरिटी ऑफ़ हाउसहोल्ड्स। जब घर के सब लोग खाना खा लेते हैं तो बचा हुआ खाना मम्मीियां खाती हैं। बचा हुआ खाना घर की लड़कियां खाती हैं। लड़कियों को दूध नहीं मिलता है। उतना ग्रोथ अच्छी होती ही नहीं है। लड़कों को एक्सरसाइज
(51:55) करना नहीं अलाउड होता है। तो आपकी बोन स्ट्रांग नहीं हो पाती। आपकी हाइट नहीं बढ़ पाती है। एंड वेस्ट के डेटा से कंपेयर करिए तो इंडियन औरतों की हाइट कम होती है। हाइट कम होती है मतलब उनका बॉडी का स्ट्रक्चर कम होता है। मतलब उनकी पेस भी छोटी सी होती है। पेल्विस छोटी होएगी तो वहां बेबी फिट नहीं आता है सही से। इसको हम बोलते हैं सेफेलो पेल्विक डिस्रपोर्शन बेबी का हेड सेफेलो मदर की पेल्विस पेल्विक और डिस्रपोर्शन मतलब इसमें प्रोपोर्शन मैच नहीं कर रहा है मतलब है बड़ा है पेल्विस के एरिया से तो वो निकलना नेचुरली बाहर बहुत डिफिकल्ट हो जाता है जिसको हम वैजिनल
(52:27) डिलीवरी कहते हैं नॉर्मल डिलीवरी कहते हैं वो होनी बहुत डिफिकल्ट है एक्सक्टली एंड जबरदस्ती हम करते हैं उसकी वजह से पेल्व फ्लोर डैमेज हो जाता है जो कि क्रॉनिक इशू है जिसके बारे में कोई बात ही नहीं करता है मैं अगर वंस माय गनेकोलॉजी इस ओवर मैं तो पेल्व फ्लोर थेरेपी में ही स्पेशलाइज करूंगी। बिकॉज़ यह इतनी बड़ी प्रॉब्लम है हमारे यहां। तो यूरोगानेकोलॉजी जिसे हम बोलते हैं पेल्विक फ्लोर के उसमें पोस्ट बर्थ जो भी वहां चेंजेस आते हैं एंड एनीबडी हु हैज़ गिवेन बर्थ विल नो कि उनका पेल्विक फ्लोर बदल जाता है आफ्टर प्रेगनेंसी। मेरे लिए तो ये
(52:56) कन्वर्सेशन बहुत ज्यादा आई ओपनिंग है क्योंकि अभी मेरा जस्ट 3 मंथ्स पहले आई हैड अ डॉटर। और यह सब जो मैं सुन रही हूं आपसे। थैंक यू। यह जो सब मैं आपसे सुन रही हूं, दिस इज़ मेकिंग सो मच सेंस। एंड आई विश यह मैंने पहले सुना होता या पहले मुझे पता होता। बट थैंक गॉड कि आजकल डॉक्टर्स भी आपको कुछ ऐसी गाइडेंस देते हैं। यू हैव थेरेपिस्ट लाइक दिस जो आपको रिकवर और हील करने में मदद करते हैं। बट दिस नॉलेज रियली नीड्स टू गो आउट टू मासर्स जो लोग ये सुन रहे हैं आपको। आई होप कि कुछ लोगों के दिमाग में वो घंटी बजे कि यू नो यह भी चीजें हैं सिर्फ प्रेगनेंसी, इनफर्टिलिटी,
(53:29) बच्चा पैदा करना, पीरियड्स यह जो कॉमन टर्मिनोलॉजीस के बारे में बात करते हैं। उसके अलावा बहुत सारे कॉम्प्लिकेटेड इशज़ हैं ह्यूमन बॉडी में फीमेल बॉडीज में। तो हम बात कर रहे थे आईवीएफ की। तो आपने बात की वैजिनल डिलीवरीज वर्सेस ऑपरेटिव कि कब हमें ऑपरेटिव भी चूज़ करना चाहिए और और कई केसेस में समझदारी है वो चूज़ करना। आपकी हेल्थ के लिए भी बढ़िया है। तो एक तो आपने मुझे आईबीएस का कॉस्ट भी बताया कि 1.
(53:50) 5 लैक्स होता है। सिर्फ मिनिमम कहीं नहीं गया इतना तो ये तो लगेगा ही लगेगा। ये सिर्फ आपका एक्सट्रैक्शन का और एक्सट्रैक्शन और फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो वापस डालने में लग जाता है। अब्स बहुत महंगे आते हैं जो हम यूज़ करते हैं। राइट? और जो आप हॉर्मोंस डालते हैं जो ज्यादा एग्स एक्सट्रैक्ट करते हैं। अब मेरे कुछ ऐसे फ्रेंड्स हैं, कई फ्रेंड्स हैं इनफैक्ट जो आईवीएफ ऑप्ट कर रहे हैं। एक एक तो मैंने जो कन्वर्सेशन जो मुझे लगता था कि आईवीएफ शायद एक ही बार हो सकता है। लेकिन वो मुझे पता चला कि पांच छह सात बार भी आप कर सकते हो। क्या इतनी बार
(54:19) आईवीएफ करना सेफ है? जो लोग पांच छह सात साइकिल्स आईवीएफ की करते हैं बिकॉज़ दे आर डेस्पिरेट टू हैव अ चाइल्ड। बट नहीं हो रहा है कंसी। इंप्लांटेशन हो रहा है लेकिन वो बैठ नहीं रहा है वहां पे। तो क्या करें वो लोग? सो पहली चीज तीन आईवीएफ फेलियर के बाद तो थरो इन्वेस्टिगेशन होना चाहिए कि ये क्यों नहीं हो रहा है। बहुत सारे इम्यून कंडीशंस होते हैं जिसमें प्रेगनेंसी नहीं हो पाती है। सो हर स्टेप पे आपका इंटरवेंशंस अवेलेबल होते हैं। तो तीन फेलियर के बाद हम समझने की कोशिश करते हैं कि रेकरेंट इंप्लांटेशन फेलियर क्यों हो रहा है? वी इन्वेस्टिगेट
(54:51) इट। बट दैट्स अ सेपरेट स्टोरी। द थिंग इज कि जब हम जभी भी आईवीएफ करते हैं, हम जितनी बार एग्स को स्टिमुलेट करते हैं, हम एक अंडा नहीं निकालते हैं। जितने एग्स ग्रो करते हैं, हम सारे निकाल लेते हैं। तो हमारे पास ऑप्शंस होते हैं। तो आजकल जो बेस्ट प्रैक्टिस होती है, वो यह होती है कि जब आपने एम्ब्रियो बना लिया, तो सारे एम्ब्रियो हम अंदर नहीं डालते हैं। बेस्ट प्रैक्टिस इज़ सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर। एक एम्ब्रियो आपने जाके डाल दिया। अब आपके पास पांच एम्ब्रियो बने हुए हैं। चार एम्ब्रियो आप फ्रीज़ करके रख लीजिए। अगर यह इंप्लांट नहीं हुआ, देन यू प्रेप द पेशेंट
(55:21) अगेन। इसमें आपको बिना सारा प्रोसीजर कराए बिकॉज़ इन प्रोसीज़र्स का भी स्ट्रेस होता है बॉडी में। तो बिना एक्सट्रैक्शन कराए आप पुराना वाला एम्ब्रियो जो आपने फ्रीज़ करके रखा हुआ है आप वह इंप्लांट करने की कोशिश करी है। सो देयर आर मल्टीपल ट्रायल्स वी कैन गेट बट ऑल ऑफ़ दिस डिपेंड्स ऑन आप कितने एग्स हार्वेस्ट कर पाए हैं। पहली बात। इसीलिए यह फर्टिलिटी एजुकेशन इतना ज्यादा जरूरी है बिकॉज़ फर्टिलिटी आपकी एज के साथ डिक्लाइन करती है। एंड औरतों की फर्टिलिटी बहुत स्ट्रांगली एज डिपेंडेंट होती है। अच्छा अगर आप ज्यादा एग्स एक्सट्रैक्ट कर रहे हो
(55:49) आईवीएफ में ऐसा बोला जाता है कि आप नंबर ऑफ़ एग्स आपके गिवन होते हैं जब आप पैदा होते हो तो डिसाइड होता है कि इस वुमन को इत इतने एग्स हैं इसके अंदर अवेलेबल और हर महीने एक आता है और एक सर्टेन ऐज पे आपका पीरियड साइकिल खत्म हो जाता है। राइट? तो अब जब मल्टीपल एग्स एक्सट्रैक्ट करते हो तो इसका मतलब कि आप उस बैंक में से खत्म कर रहे हो। लाइक आज अगर आप बोर्न हुए हो 100 एग्स के साथ और आप हर महीने एक-एक रिलीज़ करके एक सर्टेन नंबर ऑफ इयर्स तक वो एग्स रिलीज़ कर रहे हो। तो जब आप एक ही साइकिल में आठ एग्स निकाल रहे हो जो आईवीएफ साइकिल है तो क्या आपके 100 में से
(56:16) वो आठ माइनस होते हैं? हाउ द कैलकुलेशन वर्क्स या फिर ये कुछ अलग एग्स हैं जो पैदा हो रहे हैं। व्हाट इज? तो हर साइकिल में एक एग ओवुलेट होता है। पर डेवलप मल्टीपल होते हैं। तो एव्री साइकिल ऐसे आप समझ लीजिए जैसे मैं हमेशा ये समझाती हूं कि औरतें जब पैदा होती हैं ना तो अपने बैंक में कुछ अमाउंट ऑफ पैसे के साथ पैदा होती हैं। और जिंदगी आपकी चलती जाती है। वो पैसे आप खर्च करते जाते हैं और आपका ऐसेसे अराउंड एज 40 42 इंडिया में एवरेज एज ऑफ़ मेनोपॉज़ 42 है। उस समय आपके एग्स काफी कम हो जाते हैं। आपका पीरियड बंद हो जाता है। आपकी
(56:48) फर्टिलिटी खत्म हो जाती है। फुल स्टॉप आ जाता है उस एट दिस पॉइंट। बट इसको इंस्टेड ऑफ़ थिंकिंग ऑफ कि हर महीने आपका पैसा खर्च हो रहा है। इसको आप ऐसे समझ लीजिए कि हर महीने आप एक बड़ा एक्सपेंस कर रहे हैं। एव्री मंथ एक बड़ा आपका बल्क जा रहा है पेमेंट। चलिए रेंट जा रहा है हर महीने। बट आप रेंट देने के अलावा और भी तो खर्चे करते हैं। सब्जी भी तो खरीदते हैं। ऑटो का भी तो पैसा देते हैं। शैंपू भी तो खरीदते हैं। तो छोटे-छोटे छोटे-छोटे खर्चे और भी होते हैं। आपका धीरे-धीरे बैंक कम हो ही रहा है। हम आईवीएफ में क्या करते हैं कि आपसे
(57:21) 1 महीने में आठ बार रेंट दिलवा देंगे। सो एक महीने में हम आपके नॉर्मली इन अ नॉर्मल साइकिल आपके 10-12 अंडे डेवलप हो रहे होते हैं। जिसमें से एक अंडा सबसे बड़ा बन जाता है और वही रिलीज होता है। आईवीएफ में जो आपके छोटे-छोटे अलावा भी जो आपके बेबी एग्स डेवलप हो रहे हैं मेन एग के अलावा हम उनको भी इतना न्यूट्रिशन देते हैं कि वो सब बड़े हो जाएं और हम सबको हार्वेस्ट हार्वेस्ट कर सकें। सो आइदर वे आपके 10-12 अंडे तो हर महीने वेस्ट हो ही रहे हैं। एक रिलीज़ हो रहा है। हम आईवीएफ में बस उसको कैपिटलाइज़ कर देते हैं कि अच्छा चलो इतने
(57:53) जा ही रहे हैं तो इन्हीं को हम यूटिलाइज मतलब आईवीएफ करने का ये मतलब नहीं है कि आपका पीरियड स्टॉप या में ये क्या बोलते हैं मेनोपॉज जल्दी हो जाएगा। बिल्कुल नहीं। इसका मतलब नहीं है। एक्ट हम एक नेचुरल साइड इफेक्ट को हम ऑप्टिमाइज करके अपने बेनिफिट के लिए यूज़ कर लेते हैं कि हम फर्टिलिटी के चांसेस कैसे बढ़ा सकते हैं। बढ़ा सकते हैं। राइट? अच्छा इसमें जब एग रिलीज़ होता है और आप उसको कलेक्ट करते हो। जरूरी नहीं है कि वो स्पर्म के साथ फ्रीज़ करे। लाइक रिसेंटली एक मेरी फ्रेंड ने आईवीएफ साइकिल ट्राई किया। उनके छह एग्स रिट्रीव किए। लेकिन पांच फ्यूज ही नहीं
(58:23) हुए। पांच एग्स बेकार हो गए और सिर्फ एक ही एम्ब्रियो बना। नाउ शी इज़ वरिड कि मैं एक एम्ब्रियो के साथ आगे नहीं जा सकती हूं। क्योंकि मुझे अगर यह इंप्लांट नहीं हुआ तो। तो मुझे वापस एक साइकिल करना है आईवीएफ का एक्सट्रैक्शन का। फिर से पांच छह सात आठ एग्स निकले और फिर से हम देखें हम दो तीन दो तीन चार चांसेस लेकर रखना चाहते हैं अपने फ्यूचर के जब भी वो प्लान करें वो इस स्टेज पे इस ऐज पे प्रेगनेंसी नहीं चाहती हैं। सो शी इज़ लाइक इवन इफ इट इज़ इन माय 40ज आई शुड हैव सम अकाउंट क्योंकि मेरा भी अब खत्म होता जा रहा है एग्स का ये बैंक राइट तो फिर ऐसा क्यों
(58:53) होता है? मतलब ये क्या स्पर्म हेल्थ पर डिपेंड करता है कि आपका एग एम्ब्रियो नहीं बना पा रहा है साथ में फ्यूज होकर या ये एग की हेल्थ पर डिपेंड डिपेंड करता है और ये एग और स्पर्म की हेल्थ किस पर डिपेंड करती है? एक तो आपने बोला कि स्ट्रेस इज अ वेरी बिग फैक्टर। इसके अलावा क्या फैक्टर्स हैं? आजकल स्पर्म जो है वो हेल्दी क्यों नहीं है? व्हाई मैन आर आल्सो बिकमिंग इनफर्टाइल इन अ वे। सो यस दोनों की एग हेल्थ पर दोनों की सॉरी गोनाडल हेल्थ पर डिपेंड करता है। दोनों के गेमेट्स अच्छे होना जरूरी हैं। एग भी अच्छा होना जरूरी है। स्पर्म भी हेल्दी
(59:24) होना जरूरी है। एग के साथ एज तो बहुत बड़ा इन्फ्लुएंसरर होता है। द ओल्डर यू आर। द लोअर नंबर ऑफ़ एग्स यू विल हैव एंड द लोअर क्वालिटी ऑफ़ एग्स यू विल हैव। तो दैट्स व्हाई मेरे अभी कोई प्रेगनेंसी के प्लांस नहीं है। आई एम 32। मैंने 30 पे अपने एग्स फ्रीज़ कर लिए कि जबभी भी मैं अपना मास्टर्स वास खत्म करती हूं मेरा प्रेगनेंसी का प्लान बनता है व्हेन आई एम 36 तो मेरे पास 36 ऐज वाले एग्स नहीं होंगे। मेरे पास मेरे 30 ऐज वाले एग्स होंगे। सो देयर विल बी अ हायर चांस ऑफ़ कंसीविंग। दी अदर थिंग इज़ कि व्हाट इज़ वेरी वेरीरीेंट इज़ योर लाइफस्टाइल ऑन बोथ एग
(59:54) हेल्थ एंड स्पर्म हेल्थ। द थिंग इज स्पर्म हेल्थ में थोड़ा सा हमको लीवे मिलता है। बिकॉज़ स्पर्म हर तीन महीने हर 72 डेज पे ना ऑन एवरेज नया स्टॉक डिलीवर होता है। आपके पूरे स्पर्म पूरे समय तैयार नहीं रहते हैं। आपके स्पर्म के स्टेम सेल्स रहते हैं जो टाइम आने पे उनको करीब 72 दिन लगते हैं मैचुरेशन में और वो मैच्योर होते हैं। तो हर तीन महीने पे नया स्टॉक आता है रफली ऐसा। तो मतलब ये वाला स्टॉक एक तरह से एक्सपायर हो गया है। फ्रेश स्टॉक निकल जाएगा बॉडी से। चाहे वो सेक्स के थ्रू निकले, मास्टरबेशन के थ्रू निकले, नाइट फॉल के थ्रू निकले या बॉडी में रिअ्सॉर्ब
(1:00:26) हो जाए, वो हट ही जाएगा। सो वही बेसिकली आपकी दूध की फैक्ट्री अगर मान लीजिए तो आपके पास नया दूध आता रहेगा। खराब हो जाएगा तो आप फेंक देंगे उसको। तो फिर ये जो नो फैप की कन्वर्सेशन है या फिर ये कन्वर्सेशन है कि मास्टरबेशन से आपकी स्पर्म क्वालिटी खराब हो जाती है। ये तो मुझे वैलिड नहीं लग रही आपकी आपकी आर्गुमेंट के बाद। इट्स अ इट्स इट्स मोर ऑफ़ अ स्पिरिचुअल एंड मेंटल डिसिशन। उसका बायोलॉजी बायोलॉजी से लेना कुछ नहीं है। अगर आपकी क्वालिटी खराब हो रही है। क्योंकि मैं जानती हूं बहुत सारे ऐसे आदमी लड़के डिस्टर्बड हैं कि हमने तो बहुत सारा मास्टरबेशन कर लिया यंग
(1:00:56) एज में तो अब डिफिकल्टी हो रही है प्रेगनेंसी में तो इट इज़ बिकॉज़ ऑफ़ दैट। लेकिन आप कह रहे हो कि हर तीन महीने में चेंज ही हो जाता है। कंप्लीटली किया है उसको ये पता है कि चाहे वो कितना नो फैट क्यों ना कर ले नाइट फॉल होता है। बिकॉज़ द बॉडी विल जैसे बोलते हैं ना वेयर इज़ अ विल देयर इज़ अ वे। वेयर देयर इज़ अ स्पर्म देयर इज़ अ वे। वो बाहर आएगा। चाहे वो बॉडी में रिअ्सॉर्ब क्यों ना हो जाए। चाहे वो नाइट फॉल के थ्रू आ जाए। एंड मुझे स्ट्रेस इसीलिए होता है यह चीजें देख के बिकॉज़ बहुत सारे लोग अपने आप को फेलियर फील करने लगते हैं कि मैंने इतना ध्यान रखा फिर भी
(1:01:26) मैं तो मैं मैं ही बेकार हूं। मैं ही खराब आदमी हूं। मेरे से ही कंट्रोल नहीं हुआ। दिस इज़ बेसिक बायोलॉजी। यह वही होगा कि आपकी अगर नाक आपको जुकाम है तो आपकी नाक बह के रहेगी। चाहे आप कितना ही सुक क्यों ना ले कहीं ना कहीं बाहर आ ही जाएगी वो। करेक्ट। तो इट्स इट्स लाइक दैट। बट विथ दैट सेड कि अगर मास्टरबेशन इतना ज्यादा प्रॉब्लमैटिक हो गया है या आपको मास्टरबेशन से इतना खराब फील होता है आपका मोटिवेशन हिल जाता है देन यू डोंट हैव टू डू इट मतलब और इजाकुलेशन चाहे सेक्स हो चाहे कुछ भी हो दिस इज़ मोस्टली अ स्पिरिचुअल एंड अ पर्सनल
(1:01:56) डिसीजन मेंटल हेल्थ डिसीजन एज़ अपोज टू अ बायोलॉजी डिसजन तो एक तो यह बात हो गई कमिंग बैक टू दी आईवीएफ एंगल ऑफ़ थिंग्स सॉरी द एग हेल्थ एंड स्पर्म हेल्थ एंगल ऑफ़ थिंग्स हमारी लाइफस्टाइल का बहुत ज्यादा इंपैक्ट पड़ता है सो प्राइमरी तो एज हो गया। स्पर्म हेल्थ पे भी ऐज का फर्क पड़ता है। बट उतना ड्रामेटिकली नहीं पड़ता है जितना एग हेल्थ पे पड़ता है। एंड हम दो मेन फर्टिलिटी क्लिप्स देखते हैं औरतों की उसमें एंड यह एवरेज है। इसका मतलब यह नहीं है कि सब में ऐसा होता है। एक पहली फॉल आती है अराउंड 32 इयर्स ऑफ़ एज। ऑन एवरेज 32 के करीब थोड़ा सा डिक्लाइन आता है
(1:02:29) फर्टिलिटी में औरतों की। एंड दूसरा 37 37 के अराउंड एक और डिक्लाइन आता है। इसका मतलब यह नहीं है कि 37 के बाद आप प्रेग्नेंट नहीं हो सकते। माय मदर हैड मी व्हेन शी वाज़ 40। सो बहुत सारे लोगों की ऐसी प्रेगनेंसी होती हैं। बट इफ यू इफ फर्टिलिटी इज अ डिसीजन फॉर यू इफ यू वांट टू हैव चिल्ड्रन तो आपको यह नंबर्स के बारे में अवेयर होना चाहिए कि आपकी ऐज बढ़ते-बढ़ते आपका क्वालिटी और नंबर डिक्लाइन करेगा। द अदर थिंग दैट इज़ रियली रियली इंपैक्टफुल इज़ योर लाइफस्टाइल पर्टिकुलरली स्मोकिंग। अगर जिंदगी में एक डिसीजन लेना है अपनी हेल्थ के लिए और और कोई डिसीजन ले ही नहीं
(1:03:01) सकते तो सुत्ता छोड़ दो। मैं तो यह कहती हूं आदमी औरत दिस इज वन थिंग दैट इज हॉरेबल फॉर यू इन एव्री सिंगल वे फॉर योर सेक्सुअल हेल्थ फॉर योर फर्टिलिटी हेल्थ अल्कोहल आल्सो अभी हमें नया-नया डाटा आ रहा है एंड वी आर लर्निंग दैट एनी अमाउंट ऑफ़ अल्कोहल इज़ बैड फॉर यू पहले हम सोचते थे थोड़ा वाइन पीना हार्ट के लिए अच्छा होता है ये सब बकवास बातें हैं इन सब स्टडीज की जो यू नो हम हम ये पढ़ पाए कि व्हाई दीज़ आर बैड स्टडीज व्हाई दीज़ आर नॉट गुड क्वालिटी स्टडीज और अब हमें समझ में आ रहा है कि एनी अमाउंट ऑफ़ अल्कोहल इज़ ऐड फॉर यू। एंड आजकल ड्रिंकिंग स्मोकिंग का कल्चर तो मतलब
(1:03:36) मैं तो किसी कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर मैंने देखा ही नहीं है कि पांच बच्चे खड़े होकर के ना सिगरेट पी रहे हो। उसमें से दो लड़के होंगे, तीन लड़के होंगे। मतलब इट्स इट्स अ मिक्स थिंग नाउ। स्मोकिंग इज़ नॉट समथिंग दैट ओनली मैन डू। औरतें भी बहुत स्मोक करने लगी हैं। एंड इट इज़ रियली रियली इंपैक्टफुल ऑन योर लाइफ। एक तो आपके लाइफस्टाइल हैबिट्स ठीक नहीं है। स्मोकिंग अल्कोहल, पार्टी कल्चर इतना ज्यादा है और जब आप यह करते हो तो नेचुरली आपका सोने उठने का रिदमम नहीं है। बहुत कुछ आपकी बॉडी में सब गड़बड़ चल रहा है। उसके ऊपर से आप यह भी डिसाइड करते हो कि मैं लेट
(1:04:03) शादी करूंगा, लेट बच्चे पैदा करूंगा। तो नेचुरली इनफर्टिलिटी विल बिकम अ बिग इशू। एंड आई एम वेरी प्रो लेट मैरिज। आप आराम से करो। डिसीजन लेके करो। समझ के करो कि आप कैपेबल हो कि नहीं उसके कि आप तैयार हो कि नहीं। उसके शादी बहुत बड़ी रिस्पांसिबिलिटी होती है। शादी में बहुत चेंजेस आ जाते हैं लाइफ में। फाइनेंसियली स्टेबल होना बहुत जरूरी है। बच्चा पैदा करने से पहले। अपने तो खर्चे समझ नहीं रहे। बच्चे का खर्चा और उठा लो। तो आई आई बिलीव इन टेक योर टाइम बट बी अवेयर। प्लानिंग आप इस हिसाब से करिए कि आपके पास एक लिमिटेड अमाउंट ऑफ़ टाइम होता है
(1:04:35) बायोलॉजिकली। इफ यू डू वांट टू हैव अ चाइल्ड मेक योर प्लांस इन अ वे दैट अगर आप 32 पे शादी कर रहे हो तो 33 से ट्राई करना शुरू कर दो। तो जो लड़कियां ये पडकास्ट सुन रही हैं द वुमेन आर लिसनिंग टू दिस पडकास्ट उनके लिए ज्यादा इंपॉर्टेंट है ये कन्वर्सेशन क्योंकि बायोलॉजिकल क्लॉक उनके सर पर खड़ी है अनफॉर्चुनेटली मेन डोंट हैव दिस प्रॉब्लम दे कैन इंप्रेग्नेट वेल इन देयर 50 एंड 60ज आल्सो आई थिंक एंड इवन लेटर राइट लेकिन वुमेन के साथ ये रियलिटी है आप कितना भी फेमिनिज्म बोलो आप कुछ भी बोलो व्हाटएवर आई एम आल्सो वन ऑफ़ दोज़ वी
(1:05:07) वुमेन यू आर आल्सो सिटी हियर वी आर वी वी आर ऑल अ करियर ओरिएंटेड वुमेन एंड यू नो हमें एक सर्टेन फाइनेंसियल अह हेल्थ सिक्योर करनी है ताकि हम आगे फैमिली बढ़ाएं। वो सब एंगल्स ठीक है। बट यह अवेयरनेस होना कि मेरे सर पे एक बंदूक है या एक एक क्लॉक है जो चलती जा रही है। वो बहुत बहुत ज्यादा जरूरी है। क्योंकि बाद में आप बहुत लोगों का मैं देखती हूं एक ऊप्स मोमेंट आ जाता है कि अब तो हो ही नहीं रहा है। अब तो हो ही नहीं सकता है। इनफैक्ट आई वास टॉकिंग टू अ गननेकोलॉजिस्ट इसी पॉडकास्ट पर और उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास एक पेशेंट आई जो 34 35 इयर्स
(1:05:36) ओल्ड थी और सडनली उनका पीरियड नहीं आया दो महीने या तीन महीने समथिंग लाइक दैट। एंड शी थॉट कि शायद वो प्रेग्नेंट हो गई क्योंकि वो सेक्सुअली एक्टिव थी और जब वो प्रेगनेंसी टेस्ट उनका पॉजिटिव नहीं आ रहा था और वो गननेकोलॉजिस्ट के पास आए तो पता चला कि उनका मेनोपॉज आ गया है। अब वो कभी प्रेग्नेंट हो ही नहीं सकती हैं। एंड उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि 34 इयर्स ऑफ़ एज पे मैं मेनोपॉज हिट कर जाऊंगी। सो ये है ट्रेमेश ओवेरियन फेलियर ऐसा मतलब दिस इज़ अ रेयर केस। बट हां ऐसा होता है। एंड दैट इज़ व्हाई आई एम अ बिग एडवोकेट ऑफ़ लर्निंग। आप समझ लो।
(1:06:08) फिर अपने सोच समझ के आप अपना डिसीजन प्लान कर सकते हैं। तो फिर यह ना हो ना रिग्रेट ना हो आगे। एंड इट इज़ सोेंट कि हम इसको और प्रायोरिटाइज़ करें। बिकॉज़ हमको कोई यह बताता नहीं है। एंड अक्सर क्या होता है? द बिगेस्ट रीज़न व्हाई प्रोसीजर्स इतने बढ़ रहे हैं इज़ बिकॉज़ हम ट्राई करते रहते हैं विदाउट इनवॉल्विंग अ डॉक्टर। विदाउट इनवॉल्विंग अ स्पेशलिस्ट। एंड दैट इज़ेंट बिकॉज़ हमारा जो डिक्टर्म हम जो फॉलो करते हैं अगर आप 35 से कम के हैं और आप एक साल से अनप्रोटेक्टेड सेक्स कर रहे हैं प्रेगनेंसी नहीं हो रही है देन यू नीड टू सी अ डॉक्टर। अगर आप 35 से ऊपर के हैं और
(1:06:41) आप छ महीने से अनप्रोटेक्टेड सेक्स कर रहे हैं प्रेगनेंसी नहीं हो रही है देन नीड टू सी अ डॉक्टर। सो टाइमलाइंस बदल जाती हैं। बिकॉज़ एज रियली इंपैक्ट्स द एबिलिटी टू गेट प्रेग्नेंट एंड द एबिलिटी टू कैरी ऑन दैट प्रेगनेंसी। सो मतलब आपके एग हेल्थ पर लाइफस्टाइल का इंपैक्ट है। स्मोकिंग अल्कोहल जो हमने डिस्कस किया उसका इंपैक्ट है। ऐज का भी इंपैक्ट है। स्ट्रेस का इंपैक्ट है। तो मल्टीपल फैक्टर्स हैं जो डिटरमिन कर रहे हैं आपकी फर्टिलिटी को। तो इन और इन मल्टीपल फैक्टर्स को रिसेट करना या इनकी कॉग्निजेंस होना बहुत जरूरी है। नहीं तो आप आप किसके साथ खेल रहे हो आपको
(1:07:11) यह नहीं पता। सो वी हैव टॉक्ड अबाउट द होल स्पेक्ट्रम ऑफ़ सेक्सुअल हेल्थ। आपने बहुत कुछ बातें की कंट्रासेप्टिव के बारे में, कंडोम के बारे में, इनफर्टिलिटी के बारे में, फर्टिलिटी के बारे में। आईवी बहुत कुछ आपने डिटेल में एक्सप्लेन किया ना टू रैप अप दिस कन्वर्सेशन। टॉप थ्री टिप्स टू कीप योर सेक्सुअल हेल्थ एंड चेक। नंबर वन यूज़ कंडोम्स बैक टू सर्कल वन। नंबर टू एचपीवी वैक्सीन सबको लगवाना चाहिए। एचपीवी वैक्सीन के बारे में मैं बहुत बात करती हूं। यू कैन हेड टू माय प्रोफाइल एंड फाइंड आउट मोर। इफ यू हैव मोर क्वेश्चंस। एंड नंबर थ्री
(1:07:44) फर्टिलिटी एजुकेशन बहुत जरूरी है। इसको समझ के अपने लाइफ प्लानिंग करें। दैट शुड बी अ पार्ट ऑफ योर जैसे हम फाइनेंसियल लिटरेसी सिखाते हैं। हमको फर्टिलिटी लिटरेसी बहुत जरूरी है। जैसे हम एसआईपी डालते हैं। वैसे हमको अपने फर्टिलिटी की प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। अच्छा और सेक्सुअल एजुकेशन को लेके और सेक्सुअल हेल्थ को लेकर जो शेम है उससे कैसे डील करें? बात करें? ढेर सारी बातें करें। बातें करते जाएंगे। शेम कम होती जाएगी। डेफिनेटली। एक क्वेश्चन जो मैं एंड में अपने सभी गेस्ट से पूछती हूं। दैट इज देयर डेफिनेशन ऑफ़ सक्सेस। सो फ्रॉम योर स्टैंड पॉइंट जो
(1:08:17) आप लाइफ में देख रहे हो अपनी पर्सनल लाइफ में जो आप प्रोफेशनली देख रहे हो आप जहां पे भी आप खड़े हो ऐज के जिस मजेदार में आप खड़े हो व्हेरएवर आप सक्सेस को कैसे देखते हो? क्या लगता है आपको सक्सेस की डेफिनेशन हो सकती है? सो एन आईडिया। सक्सेस की डेफिनेशन फॉर मी सक्सेस इज़ बीइंग एट पीस विद वेयर आई एम विद माय गोल्स। अगर यह जरूरी नहीं है कि मैंने अपने सारे गोल्स अचीव कर लिए हो। बट उनकी तरफ मेरी ग्रोथ कितनी हो रही है? क्या मैं एट पीस हूं कि मैं किस लेवल से अपने गोल्स की तरफ काम कर पा रही हूं? दैट्स वर्किंग फॉर मी। आई कंसीडर मायसेल्फ सक्सेसफुल।
(1:08:50) वंडरफुल। आई एम विशिंग यू टन्स ऑफ़ सक्सेस। यू आर डूइंग अ लॉट ऑफ़ न्यू थिंग्स इन योर लाइफ। आप अभी दोबारा से मास्टर्स कर रहे हो। गनेकोलॉजी में दोबारा पढ़ रहे हो। और पता नहीं क्या-क्या करते रहते हो आप। यू नो इन टर्म्स ऑफ़ एजुकेटिंग योरसेल्फ। कितने सारे आई कीप सीइंग योर कंटेंट? इट्स ऑल अबाउट हाउ मच एजुकेशन। यू कीप गेटिंग फ्रॉम हियर इन देयर सर्टिफिकेशन। दिस एंड दैट ब्ल ब्ल। आई विश यू ऑल द सक्सेस। थैंक यू फॉर टेकिंग टाइम। जॉइनिंग मी फॉर दिस कन्वर्सेशन। एंड यहीं पे ही आई एम रीइवाइटिंग यू इन फ्रंट ऑफ़ द कैमरा फॉर अनदर कन्वर्सेशन। दैट विल बी इवन मोर
(1:09:18) काइंड। क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ-कुछ चीजें आ रही है दैट वी कैन टॉक अबाउट। बट आई वांट टू ऑफ कोर्स सीक योर कंसेंट बिफोर। लव इट। सी वी हैव टू कीप ब्रिंगिंग बैक दीज़ राइट? एक समरी तो करना पड़ेगा एपिसोड का। अब्सोलुटली। आई लव। सो थैंक यू डॉक्टर तन्या एंड इन द एंड इफ यू हैव टू समराइज दिस एपिसोड वेरी क्विकली इन अ मिनट हाउ वुड यू डू दैट? ओके फर्स्ट थैंक यू सो मच फॉर हैविंग मी। मुझे बहुत मजा आया एंड आई ऑलवेज एंजॉय टॉकिंग अबाउट दिस बट बीन सच अ लवली होस्ट। थैंक यू सो मच। थैंक यू। एंड इस कॉन्वर्सेशन को हर किसी को इसलिए सुनना
(1:09:49) चाहिए बिकॉज़ आपको अपनी बॉडी जानना बहुत जरूरी है। आपको अपनी सेक्सुअल हेल्थ से शर्म हटाना बहुत जरूरी है और आपको अपनी फर्टिलिटी जानना अपनी लाइफ प्लानिंग के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है ताकि आगे थोड़ा कम रिग्रेट होए। थैंक यू फॉर वाचिंग। थैंक यू अगेन। सी यू सून। थैंक यू फॉर वाचिंग टुडेेस एपिसोड। आई एम श्योर आपने इस कन्वर्सेशन में बहुत कुछ सीखा होगा। अपनी फीडबैक, अपने सजेशंस, अपने ऑब्जरवेशंस, अपनी जस्ट जनरली जो आप बातें करना चाहते हैं, कमेंट सेक्शन में लिखकर मुझ तक पहुंचाइए क्योंकि मैं एक-एक कमेंट को खुद पर्सनली जरूर पढ़ती हूं। और द जर्नी विद
(1:10:20) इन पॉडकास्ट की कोशिश जो भी हम क्रिएट करने की कोशिश कर रहे हैं मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस, आपकी हेल्थ को, आपकी लाइफ को जो इंपैक्ट करती हैं। इन्हें जरूर सपोर्ट कीजिए बाय सब्सक्राइबिंग टू द चैनल। लाइक, कमेंट और शेयर कीजिए। एंड आई विल सी यू ऑन द नेक्स्ट एपिसोड। नमस्ते।
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