Thursday, April 9, 2026

Brahmacharya Ka Palan Kaise Kare? Life-Changing Benefits & Rules Explained |@YogiVarunanand TJW120

Brahmacharya Ka Palan Kaise Kare? Life-Changing Benefits & Rules Explained |@YogiVarunanand TJW120

Author Name:Shobha Rana

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@iamshobharana

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=0JmmGlJ6xkQ



Transcript:
(00:00) जब रक्त के बिना आपका शरीर नहीं चल सकता है तो शुक्र के बिना भी आपके शरीर में कहीं ना कहीं डिफिशिएंसी होती है और कितने ही डॉक्टर्स ऐसे हैं कि जो कहते हैं कि भाई कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कितने ही हमारे संपर्क में भी ऐसे हैं जो कहते हैं कि बहुत फर्क पड़ता है और अगर आप एक समय तक निश्चित समय तक ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करेंगे तो आप तो कौन सा ऐसा सबसे आसान तरीका हो सकता है खुद को बेहतर समझना देखो इसके लिए होते हैं दो मार्ग अक्सर व्यक्ति को मैं देखता हूं कि वो और बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं कि चक्रा हीलिंग की बात करते हैं चक्रा अलाइन करने की बात
(00:29) करते हैं अरे कोई थोड़ी ना है कि हाथ से पकड़ कर के अलाइन कर दोगे तो ये समझ होनी जरूरी है तब रिजल्ट आएगा जो हट योग का मार्ग है जो नाथ संप्रदाय है यह भगवान शिव द्वारा प्रणित है उनके द्वारा दिया गया है फिर आगे जो हमारी जनरेशन है वो कैसे आएगी अगर सभी ब्रह्मचारी बन गए तो जब तक विवाह ना हो तब तक तो अपान वायु एक ऐसा मैदान है जिस पर जैसे एक प्लेग्राउंड है जिस पर खिलाड़ी खेल सकते हैं खेलेंगे कब जब वो मैदान साफ होगा घास होगी अच्छी व्यवस्था होगी फ्लैट होगा तभी तो खेल पाएंगे इसी तरीके से मूलाधार चक्र जो है वो तभी विकसित होगा जब आपकी अपान वायु संतुलित
(01:03) होगी ब्रह्मचर्य प्रैक्टिस में दिखता कैसा है ऐसा है कि जबरदस्ती ब्रह्मचर्य हो ही नहीं सकता क्या इसमें स्त्रियों के लिए कोई जगह नहीं है ब्रह्मचर्य में ये बहुत सारे प्रश्न मिलते हैं कि स्त्रियों के लिए ब्रह्मचर्य के क्या नियम होंगे मैं कहता हूं कि जैसे भी बहुत हाल फिलहाल में हमने आईआईटी बाबा को भी देखा जो काफी पॉपुलर हो गए कुम के द्वारा कि हमारे धर्म में कहीं भी और कभी भी यह नहीं कहा गया है कि किसी चीज को छोड़ कर के आप भागे या फिर आप सन्यास मार्ग पर होंगे तभी आप श्रेष्ठ मार्ग पर हैं ऐसा बिल्कुल नहीं कहा गया है
(01:37) और अगर आप यह सोचते हैं कि किसी भी तरीके की साधना में आपको सुलफा पीना मदद कर सकता है तो ऐसा बिल्कुल नहीं कौन सी एक सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मेटिव हैबिट हो सकती है जो मैं कल से शुरू करूंगी इसमें जो सबसे ज्यादा प्रभाव मैंने देखा अगर मैं बचपन की बात करूं तो चैलेंजिंग में मुझे लगता था लेकिन उसने बहुत बड़ा बदलाव जो किया वो है [संगीत] नमस्कार द जर्नी विद इन पॉडकास्ट में आपका स्वागत है मेरे यानी शोभा राणा के साथ मैं एक इमोशनल इंटेलिजेंस और माइंडसेट कोच हूं और साथ ही इस पॉडकास्ट की होस्ट और क्रिएटर भी हूं द जर्नी विद इन पॉडकास्ट
(02:16) का एम है कि आपको आपकी द जर्नी विदन कराने में मदद कर सके यानी कि आपके अंतर मन की तरफ यात्रा अपने खुद को बेहतर समझने की कोशिश अपने इनर वर्ल्ड से और ज्यादा अवेयर होने की कोशिश करने में आपकी मदद करा सके आज हम इस एपिसोड में द जर्नी विद इन करने वाले हैं योग और योग की फिलॉसफी के दृष्टिकोण से हमने पहले भी कई सारे एपिसोड्स योग की फिलॉसफी और योग पर बनाए हैं और बहुत ही ज्यादा अह अच्छे-अच्छे उनमें इंसाइट्स मिले आप लोगों को और आपने कमेंट्स में लिख के बताया कि किस तरह से उन एपिसोड्स ने आपकी लाइफ को ट्रांसफॉर्म किया है तो आज का यह एपिसोड भी उसी दिशा
(02:51) में एक कोशिश है आज हम कोशिश करेंगे योग को बहुत गहरे रूप में समझने की कौन सी लाइफ की मूल समस्याएं हैं जहां पर योग डायरेक्टली हमें मदद कर सकता है योग और ब्रह्मचर्य में क्या कनेक्शन है और ब्रह्मचर्य की वास्तविकता में जरूरत भी क्या है हमने बहुत आध्यात्म को डीपर लेयर्स में जाकर समझने की कोशिश इस एपिसोड में की है जब हम योग की बात करते हैं या इनर ट्रांसफॉर्मेशन की बात करते हैं तो क्या उसमें ग्रॉस चीजें जैसे कि आहार हमारा फूड डाइट उसका भी कुछ रोल होता है इन सब चीजों को समझने की स्पिरिचुअलिटी या आध्यात्म को समझने की हमें जरूरत भी क्यों
(03:28) है आज का एपिसोड कुछ इस तरह के सवालों से आपको आपकी जिंदगी को झांकने में मदद करेगा और आज हमारे साथ इस डिस्कशन के लिए हैं योगी वरुणा नंद जी जो कि एक योगा प्रैक्टिशनर हैं योग अभ्यासी हैं और साथ ही साथ एक योग के टीचर भी हैं ये अपने youtube3 साथ इनका खुद का जो अनुभव है योग की यात्रा में वो कई कई सालों का है लगभग 1215 साल से य योग के मार्ग पर चल रहे हैं और जो एक एक पूरी जर्नी होती है जिस तरह से आप गुरुकुल में जाते हैं वहां शिक्षा लेते हैं गुरुओं के साथ काम करते हैं और अपने आप के अंदर ट्रांसफॉर्मेशन और बदलाव
(04:12) क्रिएट करते हैं वैसी कुछ इनकी जर्नी रही है तो चलिए आज के इस एपिसोड में योग का दर्शन करते हैं एंड अपने आप को बेहतर समझने की कोशिश करते हैं विद योगी वरुणा नंद जी [संगीत] नमस्कार नमस्कार शोभा जी बहुत सुंदर तरीके से आप यह जो कार्य कर रहे हैं सबसे पहले तो इसके लिए मैं साधुवाद देता हूं क्योंकि जिस दिशा में आप काम कर रही हैं उस दिशा में काम बहुत जरूरी है कि किया जाए और
(04:57) लोगों तक वो चीजें पहुंचाई जाए जो कहीं ना कहीं आज के समय में विलुप्त होती जा रही हैं या जिनकी तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है और अगर व्यक्ति को यह मात्र पता चल जाए कि यह कितनी जरूरी चीजें हैं तो निश्चित रूप से इन चीजों की तरफ ध्यान देगा लेकिन उसे यह सजगता तो होनी ही चाहिए ना कि यह कैसे काम करती हैं क्या हमारे जीवन में इन सब चीजों का महत्व है और विशेष रूप से मैं कहूंगा जो आपके नाम से ही और जिस तरीके से आप यह काम कर रही हैं कि द जर्नी विदन योग भी हमें यही सिखाता है हम परंपराओं में कहा गया है कि यदा पंचावती ज्ञानानी मनसा
(05:34) सह बुद्धि नव चिति तामु ही परमाग ता योग मिति मनते सिराम इंद्रिय धारणा कि योग क्या है कि योग है जो आपकी सेंसेस है जो आपकी इंद्रिया है वह बहिर्मुखी हो जाती हैं यानी कि वह बाहर के विषयों से जुड़ना शुरू हो जाती हैं जो बाहर से उन्हें मिलता है उसी को वो सुख समझने लगती हैं उन इंद्रियों को मोड़ कर के अंतर्मुखी करना और पांचों इंद्रियों को को मन के साथ जोड़ना और मन को जो कि इंद्रियों का संचालक होता है और जिसे एक उभय इंद्री कहा जाता है उसको बुद्धि से जोड़ना यही परम गति की अवस्था कहा गया है इसे तो जो यह जर्नी विदिन जो एक शब्द है इसमें हम अगर
(06:15) बात करें तो ये अंतस की यात्रा है और योग का जो मूल आधार है व भी अंतस की यात्रा ही है तो मैं कहूंगा कि इससे बेहतर शब्द योग के लिए भी कुछ नहीं हो सकता क्योंकि यह पूरी तरह से योग के उद्देश्य को डिफाइन करने वा है और अगर हम इस अवस्था में पहुंच जाते हैं तो उसे ही परम गति योग के दृष्टिकोण में कहा और परम गति खाली ऐसा ही नहीं कि यह उन लोगों के लिए है जो सिद्धि चाहते हैं ऐसा नहीं आप अगर अपने जीवन में सामान्य सुख चाहते हैं और बहुत सारी जीवन में जो तकलीफें आती हैं उनसे बचना चाहते हैं तो वहां पर भी योग सटीक बैठता है और आपके लिए काम करता है इसी विषय पर कहीं ना
(06:51) कहीं हम आज बात कर रहे हैं आपने बहुत ही खूबसूरत तरीके से योग का हमारी आज की जिंदगी में क्या एक एक कहां पर फिट बैठता है वह बता दिया बहुत ही सरल तौर से और जैसा कि आपने कहा कि हम बाहर मुखी होते जा रहे हैं बाहर की तरफ बहुत ज्यादा देख रहे हैं जिस तरह की आजकल की जिंदगी है वरुणा आनंद जी बाहर की तरफ देखना कहीं ना कहीं प्रैक्टिकल भी होता जा रहा है क्योंकि अगर आज हमें अपनी लाइफ स्टाइल को सस्टेन करना है आज के इस इस दौड़ भाग की जिंदगी में अपनी एक जगह बनानी है और और खुद से जब हम रात को सोते हैं ये फील करना है कि हां मैंने कुछ अच्छा किया आज तो उसके लिए कहीं
(07:28) ना कहीं बाहर की दु दुनिया में जो मापदंड है मार्कर्स है हमें खुद को आंकने के और नापने के उन पर भी ध्यान देना जरूरी है लेकिन वह हमारी जो होड़ है वह इतनी बड़ी ना हो जाए कि हम अंतर रूप में अपने आप से कनेक्ट करना अपने मन को बुद्धि से जोड़ना जैसे आपने कहा वो प्रक्रिया को पूरा ही मिस कर दें और जैसा आपने कहा ना कि विलुप्त होती जा रही है इस तरह की बातें यहां पर एक सबसे बड़ा जो मुझे लगता है खतरा है कंफ्यूजन है या डेंजर है वो ये है कि कई लोगों ने इसको एज एन अपॉर्चुनिटी देख लिया है क्योंकि ये बातें विलुप्त होती जा रही है तो इनका इंट्रोडक्शन कुछ
(07:59) इस तर तरीके से किया जा रहा है लाइफ में जो मुझे लगता है सही नहीं है जैसे कि योग को आजकल का जो स्पेशली युवा है वो एक तरह से एस्केप रूट की तरह भी देख रहा है मैं देखती हूं बहुत सारे आध्यात्मिक शिविरों में मुझे जाने का मौका मिला मैं खुद योग की एक तरह से छात्रा नहीं हूं पिछले 10 11 सालों से टीचर भी रही और बहुत कुछ चीजें मैं योग के क्षेत्र में पढ़ती रहती हूं तो कई मैंने आध्यात्मिक शिविर देखे ऋषिकेश में हरिद्वार में भी देखे मैं अभी कुंभ मेले में जाने का मुझे सु अवसर मिला तो वहां पर भी मैंने कुछ 15 दिन बिताए वहां भी बहुत कुछ देखा फिर अभी से लगभग तीन चार
(08:30) महीने पहले जब कावड़ यात्रा थी वहां भी मैंने कुछ दिन बिताए और मैंने वो भी सब माहौल देखा तो मैंने देखा जो युवा है उसके अंदर एक एक प्यास तो है अ कुछ एक ऐसी डायमेंशन को छू जाने की अपने अस्तित्व की जहां से एक एक अल्टीमेट हैप्पीनेस मिले एक एक अल्टीमेट खुशी की प्राप्ति हो एक फुलफिल्ड लाइफ जैसी फीलिंग आए लेकिन वो इस आध्यात्म को एक ऐसे मार्ग की तरह भी यूज कर रहा है कि अपनी जिंदगी की जो जिम्मेदारियां हैं या जो आज की बैटल्स है परेशानियां है उनसे भागने के लिए जैसे भी बहुत हाल फिलहाल में हमने आईआईटी बाबा को भी देखा जो काफी पॉपुलर हो गए कुम के
(09:06) द्वारा तो जिस तरह की उनकी उनकी भाषा शैली रही है जिस तरह से उन्होंने अपने अनुभव लोगों के सामने बताए हैं तो काफी बातें एक सवाल उठता है कि क्या आप अपनी जो जो अमूमन जिंदगी की जिम्मेदारियों से भाग कर एक योग और आध्यात्म का सहारा ले रहे हैं या फिर आप सच में एक ऐसे बड़े मार्ग पर चलना चाहते हैं जहां पर आप आपका कुछ और लक्ष्य है तो समझने में थोड़ा मदद कीजिए कि एक जो युवा है वो वो सही मार्ग को कैसे चुने यहां पर आपके दो प्रश्न हो जाते हैं मेरे अनुरूप पहला प्रश्न जो आपने कहा के इन चीजों से जुड़ना भी तो जरूरी है जीवन यापन
(09:41) के लिए व्यक्ति को प्राथमिक आवश्यकताएं हैं उसका घर चलाने के लिए आवश्यकता है उसके अपने जीवन की आवश्यकताएं हैं और कहीं ना कहीं व्यक्ति एक अच्छा जीवन जीना चाहता भी है तो इसे हम आध्यात्मिक दृष्टिकोण से कैसे देखें यहां पर मैं सबसे पहले यह कहना चाहूंगा कि हमारे धर्म में कहीं भी और कभी भी यह नहीं कहा गया है कि किसी चीज को छोड़ कर के आप भागे या फिर आप सन्यास मार्ग पर होंगे तभी आप श्रेष्ठ मार्ग पर हैं ऐसा बिल्कुल नहीं कहा गया है और जो ये एक अवधारणा बनती जा रही है कि यह जो अध्यात्म का मार्ग है यह योग का मार्ग है यह योगियों के लिए है या जो विरक्त हो गए
(10:16) हैं उनके लिए है यह सामान्य व्यक्तियों को अध्यात्म से काटता है यह उन्हें ऐसा अनुभव कराता है कि हम इसके लिए योग्य नहीं है हम इस यहां पर इस स्थान पर फिट नहीं होते हैं और इसी वजह से कहीं ना कहीं युवा पीढ़ी आध्यात्म से और योग से नहीं जुड़ पा रही है भगवान ने स्वयं गीता में कहा है कि यत सांख्य प्राप्य स्थानम तद यो गैर पि गम्य एकम सांख्य च योगम च य पश्च स पश्तीन कि जहां पर एक अध्यात्म के उस शिखर पर एक सन्यास का मार्ग पालन करने वाला या विरक्ति का मार्ग पालन करने वाला पहुंचेगा वहीं पर एक गृहस्थ का मार्ग पालन करने वाला भी पहुंचेगा क्योंकि अंत जो है वो एक
(10:53) ही है उद्देश्य जो है वो एक ही है वो नहीं बदलता है एकम सत विप्रा बहुता वदंती एक ही सत्य को विद्वानों ने अलग-अलग तरीके से कहा है तो उद्देश्य तो एक ही हो गया ना अब उस उद्देश्य तक पहुंचने के मार्ग अलग-अलग हो गए हैं हमारे यहां पर चार आश्रम बताए गए हैं कि भाई पहला तो आपका ब्रह्मचर्य आश्रम होगा दूसरा ग्रस्त होगा तीसरा वानप्रस्थ होगा और चौथा सन्यास होगा तो यहां पर कहा यह गया है कि अगर एक व्यक्ति ब्रह्मचर्य आश्रम में है एक बालक है तो उसे तो अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना है और ब्रह्मचर्य का पालन करना ही है लेकिन ब्रह्मचर्य का पालन करते-करते अगर
(11:27) वो इस वैराग्य की स्थिति तक पहुंच जाता है कि उसकी किसी भी भोग सामग्री से विरक्ति हो जाती है तो वह सीधा ब्रह्मचर्य से सन्यास के मार्ग में आ सकता है अपने आप ही विरक्ति हो अपने आप अपने आप विरक्ति हो वो ऐसी कोई अपॉर्चुनिटी देख कर के सन्यास में ना चला जाए कि यहां तो मुझे कोई पद मिल रहा है यहां पर मुझे कोई गद्दी मिल रही है यहां पर मैं मटा दीश बन रहा हूं या फिर कुछ ऐसी चीजें करने की फ्रीडम मिल जाए जैसे मैंने देखा ये बहुत ही दुख के साथ मुझे कहना पड़ रहा है लेकिन आध्यात्मिक के जो शिविर है वहां पे कुछ तरह का नशा कुछ तरह का एक एक मिस डायरेक्शन भी है हम और
(11:59) जो यूथ बहुत ज्यादा कनेक्ट करता है कि गुरुजी तो चिलम पीते हैं गुरुजी तो ये करते हैं तो इसीलिए चलो अभी क्योंकि मैं 17 18 19 वर्ष का हूं 202 वर्ष का हूं तो इन चीजों में रुचि भी ज्यादा होती है तो इस वजह से भी वो कहते हैं कि हम तो ब्रह्मचारी हैं जी हम गुरुजी को फॉलो कर रहे हैं एक मैंने वो भी एक ट्रेंड जैसा देखा है हां बिल्कुल और अगर हम इस तरीके से योग को और अध्यात्म को देखने लगेंगे कि भाई आप अपनी इंद्रियों के विषयों में और ज्यादा लग गए यानी कि एक व्यक्ति जो एक युवा है अगर वो घर पे है और वो अपने माता-पिता के सामने ने सिगरेट
(12:32) फूंकतायन भी करें शायद उस पर मार भी पड़ सकती है लेकिन एक बाबा के यहां छोटा सा बच्चा वो सुल्फा पी रहा है उसे कुछ नहीं कहा जा रहा है उसे सोचा जा रहा है कि भाई ये तो इनका मार्ग है भा मार्ग तो कहीं भी नहीं है जो हठ योग का मार्ग है जो नाथ संप्रदाय है ये भगवान शिव द्वारा प्रणित है उनके द्वारा दिया गया है और अगर आप यह सोचते हैं कि किसी भी तरीके की साधना में आपको सुल्फा पीना मदद कर सकता है तो ऐसा बिल्कुल नहीं आपको बड़ी ही सचेत होकर के सावधान होकर के इस मार्ग पर चलना पड़ता है क्योंकि आप अपने विचारों पर दृष्टि रख रहे हैं इसे मैं एक उदाहरण से कहूं तो आपके मन
(13:06) का एक चेतन स्तर है एक अवचेतन स्तर है आप यहां पर जो भी कुछ देख रहे हैं एक व्यक्ति है हमारे दर्शक हैं जो कि फोन के माध्यम से इस पॉडकास्ट को देख रहे हैं माइक काम कर रहा है चेतन स्तर पर वैज्ञानिकों ने कुछ चीजों को ऑब्जर्व किया और उस ऑब्जर्वेशन के परिणाम स्वरूप उन्होंने इस इन यंत्रों का निर्माण किया यह चेतन स्तर पर है लेकिन सभी को पता है कि चेतन स्तर छोटा है और अवचेतन स्तर बहुत बड़ा है हमारे योगियों ने अवचेतन स्तर पर होने वाली घटनाओं को और जो बदलाव होते हैं उनको देखा उन पर ध्यान दिया और तब ये योग मार्ग हमें दिया है हम ध्यान कहां देते हैं
(13:41) अवचेतन स्तर पर क्या हो रहा है हम ध्यान ही नहीं देते हैं अवचेतन स्तर मतलब सबकॉन्शियस माइंड सबकॉन्शियस माइंड बिल्कुल चेतन स्तर मतलब कॉशस कॉन्शियस माइंड बिल्कुल अब अगर एक व्यक्ति को बहुत क्रोध आता है तो ये कहेगा मैं बहुत क्रोधी हूं लेकिन कभी वो एकांत में कमरे में बैठ कर के जब उसे क्रोध आता है यह समझने की कोशिश नहीं करेगा कि क्रोध क्यों आ रहा है अगर वह देखे तो कहीं ना कहीं वह अपने अवचेतन पर काम कर रहा है वो उस इमोशन को सप्रे नहीं कर रहा है क्योंकि किसी भी चीज को चेतन स्तर पर अगर आप दबा देंगे तो आप अभिनय कर रहे हैं क्योंकि आंतरिक तल पर आप
(14:12) क्रोधी ही बने हुए हैं लेकिन ऊपर से आपने उसे दबा दिया तो आपका स्वभाव बदला नहीं बल्कि आप जो वो दबाव दे रहे हैं उसके कारण आपका जो वो क्रोध है अंदर ही अंदर और पलेगा और उसका एक ऐसा विस्फोट होगा कि आपसे वो कोई धन्य अपराध करा सकता है यहां तक कि जितने भी तनाव की स्थितियां आज बनी हुई हैं वो क्यों बनी हुई है क्योंकि व्यक्ति ध्यान नहीं दे रहा है कि यह तनाव हुआ क्यों आप देखें कि जितने भी तनाव में और मैं तो क्योंकि इन विषयों पर काम करता हूं डिप्रेशन पे एंजाइटी पे कितने हमारे पास लोग आते हैं जितने भी लोग ये तनावग्रस्त हैं वास्तव में जो मूल में
(14:45) तनाव का कारण है व ऑथेंटिक कारण है ही नहीं एक माता है उसका पुत्र गुजर जाता है उसके लिए उससे बड़ा आघात जीवन में और हो ही नहीं सकता और मेरे संपर्क में ऐसी बहुत सारी माताएं हैं जिनके पुत्र आज नहीं है लेकिन वो ठीक-ठाक जीवन जी रही है एक जैसा ठीक जीवन होना चाहिए और जैसी मनस्त ठीक होनी चाहिए वैसी है उससे बड़ा आघात कोई नहीं हो सकता एक माता का उसका पुत्र नहीं रहा लेकिन फिर भी वो डिप्रेशन में नहीं गई अगर एक बड़ा आघात जीवन में जो मिला है वही डिप्रेशन में चले जाने का कारण होता तो वो डिप्रेशन में जानी चाहिए थी और एक व्यक्ति
(15:17) छोटा सा कि पूछे कि कारण क्या है डिप्रेशन का कि अरे बहुत विचार आते हैं मेरे विचार मुझे बहुत परेशान करते हैं मैं एक चीज को पकड़ लेता हूं तो उसी सोचता रहता हूं ओवरथिंकिंग कर रहा हूं क्यों हो रही है उसके जीवन में कोई बड़ा कारण नहीं है क्योंकि उसने अपने अवचेतन मन में इकट्ठा हुए कचरे को बैठ कर के देखने की कोशिश नहीं की है इसीलिए उसने बड़ा रूप धारण कर लिया और आज उसे वो डिप्रेशन में घेरे हुए हैं हमारे योगियों ने जो काम किया वो अवचेतन स्तर पर काम किया और वहां से उन्होंने जो मार्ग दिया वो योग मार्ग है और किसी भी चीज को ऑब्जर्व करने के लिए
(15:50) सजगता चाहिए सजगता के बिना ऑब्जर्व नहीं कर सकते आप जो चेतन स्तर प मैंने कहा ये सारे निर्माण हुए हैं सजगता से हुए हैं तो आप कैसे सोच सकते हैं कि आप मदहोश होकर के आप सुट्टा लगा करके आप बीड़ी पी करके और नशे करके आप क्या किसी भी तल पर अंतस की यात्रा में प्रवीण हो सकते हैं आप आगे बढ़ सकते हैं बिल्कुल नहीं बस हमने बस देखी सुनी चीजों को सही समझ लिया और उन्हीं लोगों को हमने विरक्त समझ लिया जो सुल्फा पीते हैं बल्कि ऐसा कुछ नहीं इस कन्वर्सेशन में आगे जाने से पहले आपसे यह अनुरोध है कि कृपया चैनल को सब्सक्राइब कीजिए लाइक कमेंट और शेयर कीजिए ताकि
(16:29) आप एक तो हमें मुझे बहुत बढ़ावा देते हैं कि मैं हफ्ते दर हफ्ते यह काम कंसिस्टेंसी से आपके लिए कर सकूं दूसरा आप हमें और भी बहुत सारे गेस्ट को बुलाने में मदद करते हैं क्योंकि जब बहुत ज्यादा लोगों तक कन्वर्सेशन पहुंचती हैं तो आसान हो जाता है और भी गेस्ट को यहां पर लेकर आना यकीन मानिए ये काम आसान नहीं है हफ्ते दर हफ्ते कंसिस्टेंटली यहां पर शो करना हम लगभग 120 एपिसोड्स अब तक रिलीज कर चुके हैं और हर एपिसोड एक डीपर इनर ट्रांसफॉर्मेशन की बात करता है तो मैं आपसे ये भी कहना चाहूंगी कि बाकी एपिसोड्स को भी देखिए वहां भी
(17:00) आपको अपने बहुत सारे सवालों के जवाब मिलेंगे और अब क्योंकि आपने चैनल को आई होप अब तक सब्सक्राइब लाइक कमेंट और शेयर कर दिया होगा तो चलिए बढ़ते हैं आज की इस पॉडकास्ट में जब आप बहुत यंग होते हैं एक युवा अवस्था में इस तरह की चीजें आपको लिबरेशन जैसी लगती है क्योंकि अगर हम अल्टीमेट गोल की बात करें योग का क्या है जो निर्वाण है कैवल्य है अगर मैं योग दर्शन की भाषा में बात करूं जिसको लिबरेशन कहा जाता है तो युवाओं को लगता है कि मैं तो पूरा लिबरे हो गया हूं क्योंकि मैं ऐसी कुछ एक्टिविटी कर रहा हूं तो मैं किसी और स्तर पर या किसी और प्लेन पर जो मेरा
(17:34) माइंड है वो चला गया है तो मैं इस प्लेन से उठ गया हूं मैं लिबरे हो गया हूं तो मुझे वो वाली फीलिंग आ रही है ये कंफ्यूज कर दिए है लोगों ने दो चीजों को तो हम यहां दो स्तरों पर बात कर रहे हैं दो लेवल्स पर बात कर रहे हैं एक तो है चेतन स्तर कॉन्शियस लेवल एंड एक है अवचेतन स्तर सबकॉन्शियस लेवल तो आप कह रहे हो कि जो ये इमोशंस है हमारे जैसे कि गुस्से की हमने बात की एंगर की बात की जेलेसी की बात करें जलन की बात करें ईर्ष्या रिजेंट मेंट अ मन के अंदर बातें रख ना दूसरों के लिए जिनको हम अमूमन तौर पर नकारात्मक इमोशंस की तरह नेगेटिव इमोशंस की तरह देखते हैं आप कह
(18:06) रहे हो ये इमोशंस जो है वो चेतन स्तर पर है जो दिख रहे हैं जो जैसे अभी हो रहे हैं घटित हो रहे हैं और एक इसका एक अवचेतन स्तर है एक सबकॉन्शियस लेवल है जहां पर कुछ और ही कहानी है बकुल बकुल तो हमारी लाइफ में जो ऊपर ऊपर जो हमें इमोशंस दिख रहे हैं जिनकी वजह से बहुत सारी गुथ हों में हम उलझ गए हैं गुस्से की वजह से लालच की वजह से मोह की वजह से अटैचमेंट इन सबज से बहुत सारे हम ऐसे ऐसी चीजों में फसते जा रहे हैं लाइफ की प्रॉब्लम्स में जहां से हमें लगता है कि देयर इज नो वे आउट इतना गुस्सा कर देते हैं कि चीजें आसपास खराब हो जाती हैं इतना लालच कर लेते हैं
(18:40) कि पता नहीं चलता कि कब रुकना है जो हमने बात की पहले की बाहर की दुनिया में भी देखना बहुत जरूरी है लेकिन कब रुकना है वो नहीं पता होना तो अवचेतन स्तर पर सबकॉन्शियस लेवल पर क्या सही करें और योग में कौन सी ऐसी प्रैक्टिसेस है जो मेरे चेतन स्तर पर उभरने वाले इमोशंस को ठीक ठाक बैलेंस कर सकती है यहां पर सबसे पहली बात तो यह है जो मैं इससे पहले मैंने शुरुआत की थी वहां से मैं थोड़ा सा बताना चाहूंगा कि जो अध्यात्म का मार्ग है वह शरीर की साधना नहीं है वो अभिव्यक्ति यानी कि आप कैसा अपने आप को दिखा रहे हैं उसकी साधना नहीं है अध्यात्म की और योग की पूरी
(19:13) साधना ही अवचेतन की है या फिर अंतस का ये मार्ग है अब जो मैंने शुरुआत में ही कहा कि कई लोग सोच लेते हैं कि जो अध्यात्म का मार्ग है वह तो घर छोड़ देने का मार्ग है या फिर वो तो कुछ विशेष तरीके के कपड़े पहन लेने का मार्ग है ऐसा बिल्कुल नहीं है आपने वेशभूषा कैसी पहनी है वो आपका व्यक्तिगत चुनाव हो सकता है मैं ऐसे कपड़ों में अच्छा अनुभव कर रहा हूं तो मैंने ऐसे पहने हैं लेकिन इस बात का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि अगर मैं कोई दूसरे प्रकार के वस्त्र पहन लेता हूं तो मेरी आध्यात्मिकता पर उसका कोई विशेष प्रभाव पड़ जाएगा इन चीजों का एक
(19:44) साइंटिफिक रीजन जरूर है हम तिलक लगाते हैं हम माला पहनते हैं या फिर हम अलग-अलग प्रकार की इन सब चीजों का पीछे कारण है कुछ रंग पहनते हैं हां कुछ रंग पहनते हैं कारण है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि इनसे ही हम अपने आध्यात्म को डिफाइन करते हैं बात यह है कहा गया है तेन तक तेन भुंजा प्रयोग करो लेकिन त्याग पूर्वक प्रयोग करो आपको कोई वस्तु चाहिए आपको उसकी आवश्यकता है और आपको कोई वस्तु चाहिए ही चाहिए इन दोनों में बहुत अंतर होता है यानी कि आप उसके बिना रह ही नहीं सकते एक आध्यात्म और योग का अनुगमन करने वाले व्यक्ति के लिए कोई भी वस्तु ऐसी
(20:18) नहीं होती है कि उसके बिना वह रह ही ना सके यद्यपि वह प्रयोग कर रहा है जो आज आधुनिकता बढ़ रही है हम फोन का प्रयोग नहीं करेंगे हम गाड़ी का प्रयोग नहीं करेंगे जी हम पैदल पैदल ही चलेंगे हम तो पुराने समय को फॉलो करेंगे इस बात में कोई प्रसंगिकता नहीं है हमें केवल सिद्धांत फॉलो करने होते हैं और वो सिद्धांत ही हमें अवचेतन तल पर विकसित करते हैं संसार में कोई भी चीज ऐसी नहीं है जो कि अभ्यास से के बिना विकसित हो जाए हर चीज के लिए अभ्यास चाहिए हम कहते हैं भाई योग आपके लिए कुछ कार्य नहीं कर सकता जब तक आप योग का अभ्यास नहीं करोगे योग के अंतर्गत कोई
(20:51) एक आसन भी ऐसा नहीं है जो आप करें और आप सिद्ध हो जाएं समाधि स्त हो जाएं हर एक अभ्यास ऐसा ही है जिसका आपको निरंतर अभ्यास करना है हम कह रहे हैं अभ्यास अभ्यास शब्द हम आसनों से जोड़ रहे हैं यानी कि उसकी प्रैक्टिस ही करनी है इस बात से इंगित होता है तो आपको इस डिटैचमेंट की भी प्रैक्टिस करनी होती है या फिर अपने अवचेतन को शुद्ध करने का भी अभ्यास करना होता है अपने साथ बात करनी होती है और एकांत में बैठ कर के अपने विचारों पर ध्यान देना पड़ता है तो धीरे-धीरे जो प्रकाश है अध्यात्म का वो आपको स्पष्टता देनी शुरू करता है तो मूल तौर पर अपने
(21:24) भीतर झांकना शुरू करना पड़ता है बिल्कुल तो कौन सा ऐसा सबसे आसान तरीका हो हो सकता है जिससे हम इस मार्ग पर चलना शुरू कर सकें खुद को बेहतर समझना खुद के अंदर झांकने की एक तरह से चेतना भी पैदा कर पाएं देखो इसके लिए होते हैं दो मार्ग अक्सर व्यक्ति को मैं देखता हूं कि वह दूसरे पायदान पर कदम रखता है पहले को छोड़ देता है एक होता है व्यवहार पक्ष और एक होता है साधना पक्ष अक्सर व्यक्ति साधना करने के लिए आतुर हो जाता है कि हम आज ही मैट खरीद के आए लाए हैं कल बिछाएंगे और कूल भी है ना बस ध्यान करना शुरू करेंगे कूल भी है ना कि अ एक एक तरह से ट्रेंड
(22:00) में भी है आज की डेट में एक तरह से उसके जो रिजल्ट्स हैं वो बहुत टेंज बल भी है टेंज बल मतलब छू सकने वाले हैं कि अगर आपने तीन महीने तक उस तरह की एक्टिविटी की तो आप एक सर्टेन तरीके से रिजल्ट्स को पा जाएंगे तो रिजल्ट्स का भी एक माइंडसेट होता है कि उसकी तरफ जाना कि मैंने तीन महीने तक अगर योग अभ्यास किया लेकिन अगर ऐसे रिजल्ट आ सकते होते तो फिर तो सबको रिजल्ट मिल जाने चाहिए थे आज कौन व्यक्ति है और शहरों में तो विशेष रूप से सब ध्यान से परिचित है आपको पार्कों में भी लोग सुबह बैठे हुए दिख जाएंगे आंख बंद करके लेकिन वो चीजें काम नहीं कर कर रही है ना
(22:29) तो प्रश्न करना पड़ेगा ना खुद से कि भाई क्यों काम नहीं कर रही है चीजें तो वही जो मैंने कहा एक व्यवहार पक्ष जो है उसको छोड़ रहे हैं हमारे यहां पर जितने भी मार्ग दिए गए हैं जैसे कि अष्टांग योग की आप बात कर लें जिसे राजयोग भी कहा जाता है और हठ योग का उद्देश्य ही है राजयोग तक पहुंचना सर्वण प हठ अभ्या से राजयोग फलावदा जाएंगे यानी कि आप अगर आसन कर रहे हैं प्राणायाम कर रहे हैं तो उनका एकमात्र उद्देश्य यह है कि आपको वो ध्यान तक पहुंचा सके लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि प्राणायाम की या आसन की आवश्यकता नहीं है उस ध्यान तक पहुंचने के लिए अष्टांग योग
(23:03) की बात करें तो यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि ये है यम के अंतर्गत अहिंसा सत्य अस्ते ब्रह्मचर्य परिग्रह शोध संतोष तब स्वाध्याय ईश्वर प्रण दन ये एक मार्ग है और इसको जब व्यक्ति के अंदर जिज्ञासा होती है ना तो कोई भी ये कोई ऐसा नहीं है दुर्लभ है सब चीजें उपलब्ध है थोड़ा सा सर्च करेगा तो उसे मार्ग मिल जाएगा यानी कि उसे ब्लूप्रिंट मिल गया कि मुझे कैसे साधना करनी है अब एक व्यक्ति अगर यह सोचता है कि यम का पालन नहीं करूंगा नियम का नहीं करूंगा सीधा मैं ध्यान करूंगा नॉट पॉसिबल हो ही नहीं सकता है अगर वो सोचेगा कि मैं
(23:35) प्राणायाम को छोड़ देता हूं आसन को छोड़ देता हूं ध्यान कर लेता हूं हो ही नहीं सकता है या मैं सीधा प्रत्याहार तक पहुंच जाता हूं हो ही नहीं सकता है असंभव है ऐसा आपको इन पूरे प्रोसेस में इवोल्व होना ही पड़ेगा इस पर भी मुझे एक छोटा सा दृष्टांत याद आता है कि एक बार एक युवक होता है मोहन नाम का वो अपनी माता के साथ उसकी माता जो है एक राज महल में वो वो सेविका होती है तो उसकी माता कहती है कि चलो मेरे साथ चलो मैं तुम्हें राजमहल दिखा कर के लाती हूं उसे वो ले जाती है राजमहल में और जैसे ही वो एंटर करता है तो उसे राजकुमारी
(24:08) दिखाई देती है तो राजकुमारी बड़ी सुंदर थी देख कर के मोहित हो जाता है मोहित अत्यधिक हो गया कामा तरर हो गया जैसे भी वो घर आ जाता है लेकिन फिर वो खाना पीना सब कुछ छोड़ देता है उसकी स्थिति बिगड़ने शुरू हो जाती है उसकी किसी चीज में रुचि नहीं रहती है उसकी स्थिति गंभीर तो माता पूछती है कि तुझे हुआ क्या है वैद्य बुलाए जाते हैं सब कुछ कराया जाता है लेकिन कोई लाभ नहीं मिलता तो माता पूछती है तो मुझे बता तो सही बड़ा आग्रह करने पर कहता है कि मेरा जो मन है वह आकर्षित हो गया है राजकुमारी के प्रति अब मुझे अगर उससे विवाह ना हो तो
(24:40) मैं मर ही जाऊंगा अब माता तो अपने मरते हुए पुत्र को या कष्ट प्रद स्थिति में नहीं देख सकती है तो वह बड़ी घबरा जाती है कि हम तो सेवक हैं हमारी तो कोई उनसे हम ये तो आग्रह भी नहीं कर सकते लेकिन फिर भी वो सकुचाती हुई महारानी के पास जाती है और उनसे कहती है कि मेरी हैसियत तो नहीं है लेकिन मैं एक आग्रह करना चाहती हूं मेरा जो पुत्र है वो आपकी बेटी के ऊपर अत्यधिक मोहित हो गया है और मरणासन्न हो गया है खाना पना छोड़ दिया है आप इसके लिए कुछ करें मैं यह नहीं कहूंगी विवा ही करा दे लेकिन कुछ करें महारानी उसे बड़ी समझदार थी बुलाती है बैठ आती है और पूछती है कि
(25:11) तुम्हें क्या हो गया है कि मुझे राजकुमारी से प्यार हो गया है कि तुम्हें राजकुमारी की किस चीज से प्यार हुआ है तुमने उनसे बात नहीं की उनका व्यवहार नहीं देखा उनका शील नहीं देखा उनके गुण नहीं देखे किस चीज से प्यार हुआ तो वो कहता है कि मुझे तो क्योंकि सोच में पड़ जाता है क्योंकि बात तो की नहीं है कि मुझे उनकी आंखें बहुत अच्छी लग लगती है मुझे उनका मुख मंडल बहुत अच्छा लगता है उनकी ऐसी मुझे सारा शारीरिक सोव अच्छा लगता है तो वो समझ जाती है कि इसका आकर्षण मात्र है कि चलो मैं तुम्हारा विवाह राजकुमारी से करा दूंगी लेकिन
(25:39) तुम्हें एक वर्ष देना होगा एक वर्ष जैसे मैं कहूंगी वैसे रहना होगा और एक वर्ष के बाद तुम्हारी परीक्षा होगी अगर परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाते हो तो राजकुमारी से विवाह करा दिया जाएगा तो कहा जाता है कि एक कक्ष है एक कमरा है उसमें रहो उससे बाहर नहीं जाना है और यहां पर जो कोई आवेगा उनकी बात को सुनना है और जो कहा जाएगा वो करना है परीक्षा भी होगी अब परीक्षा होनी है तो वो सोच में पड़ जाता है कि भाई ध्यान देना पड़ेगा शुरुआत में अरुचि से ध्यान देता है शुरुआत में रुचि नहीं है लेकिन जो आ रहा है आचार्य आ रहे हैं ऋषि आ रहे हैं जो भी आ रहे हैं उनकी
(26:10) बातें सुनता है और क्योंकि परीक्षा होगी सब चीजों का ध्यान देता है एक वर्ष बीत जाता है दोबारा उसे बुलाया जाता है महारानी उसे बुलाती हैं पूछती हैं कि तुमने क्या सीखा उससे बहुत सारे प्रश्न पूछे गए फटाक से उसने सारी चीजों का जवाब दिया तो महारानी कहती है कि अच्छा तब तुम अब योग्य हो गए हो अब तुम्हारा विवाह में राजकुमारी से करा देती हूं कि कौन राजकुमारी वो पूछती है कि जिससे तुम परेशान थे जिससे तुम विवाह करना चाहते थे जिसके बिना तुम रह नहीं पा रहे थे कि वो तब की बात थी वो आज की बात नहीं है मुझे अब समझ आ गया है कि वो मोह था मुझे अब समझ
(26:43) में आ गया है कि उसमें कोई सार नहीं था मुझे अब समझ आ गया है कि वहां से मेरा कोई कल्याण नहीं होगा वास्तव में अगर मैं काम से या मोह से प्रेरित होकर के किसी चीज को प्राप्त कर भी लेता हूं तो वो मुझे काम ही देगी मोह ही देगी कल्याण नहीं देगी और जीवन का उद्देश्य कल्याण को प्राप्त करना है मुझे अब समझ आ गया है उसकी अवस्था ऊंची हो जाती है और फिर वह बड़ी साधनाएं करता है और एक बड़ा तपस्वी हो जाता है वो कैसे हुआ क्या उसको उस समय पर कहा जाता जब वो कह रहा था कि मेरी तो आसक्ति रानी के प्रति महारानी के प्रति राजकुमारी के प्रति हो गई है तो क्या उसको ये कहा जाता
(27:16) कि तुम ध्यान करो संभव ही नहीं था उसे कहा जाता कि तुम प्रत्याहार की स्थिति में आओ इंद्रियों को समेट संभव ही नहीं था उसे एक प्रोसेस में डाल दिया गया शुरुआत में रुचि नहीं थी लेकिन उसे प्रोसेस में को उसने निरंतर फॉलो किया करता रहा करता रहा करता रहा तो वो एक एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया जो वास्तव में एक योगी की स्थिति होनी चाहिए इसी तरीके से एक प्रोसेस है अगर आप ध्यान की बात करें अगर आप प्रत्याहार की बात करें इंद्रिय निग्रह की बात करें तो एक प्रोसेस है जिस तरीके से उसे एकांत में रखा गया तो आपको एकांत भी चाहिए होगा जिस
(27:50) तरीके से उसने स्वाध्याय किया तो आपको स्वाध्याय भी करना होगा जिस तरीके से उसके आचार्य और महापुरुष ही उसके परिवेश में आए तो आपको ध्यान भी देना होगा ध्यान के ध्यान में प्रगति के लिए कि आपका परिवेश कैसा है आपके कानों में गलत चीजें तो नहीं पड़ती हैं क्या आपके आपके आसपास के लोग इस तरीके के हैं जिस ओ आप जाना चाहते हैं उस ओर बढ़ाने वाले हैं या बाधक है उसने बहुत सारी चीजों का ध्यान दिया तो वो एक समय के बाद उस अवस्था तक पहुंच सका अगर तुरंत वह जाने की कोशिश करता तो संभव ही नहीं था इसी तरीके से मैं कहता हूं ध्यान के लिए
(28:21) हमारे पास भी बहुत सारे प्रश्न आते हैं जिज्ञासा आती है और लोग आते हैं कि हम कैसे उस अवस्था में पहुंचे अरे भाई एक प्रोसेस है उसको फॉलो करो और वह कोई दुर्लभ नहीं है ऐसा नहीं है अष्टांग योग का किसी को नहीं पता ऐसा नहीं है भक्ति योग का नहीं पता ऐसा नहीं है कि नाम जपया इत्यादि दूसरे मार्ग हैं उनका नहीं पता है पता है लेकिन व्यक्ति चाहता है तुरंत रिजल्ट फिर क्या होता है आतुरता में बहुत सारी ऐसी जगहों पर वो फस जाता है जो कहते हैं कि हम माथे पर अंगूठा रख के और कुंडली और बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं कि चक्रा हीलिंग की बात करते हैं चक्रा अलाइन
(28:52) करने की बात करते हैं अरे कोई बोन थोड़ी ना है कि हाथ से पकड़ कर के अलाइन कर दोगे ऐसा नहीं होता अंतस की साधना है उस चीज को जब तक आप एक प्रोसेस में नहीं आओगे और सारे कदमों को फॉलो नहीं करोगे तब तक आप कहीं नहीं पहुंचो ग तो ये समझ होनी जरूरी है तब रिजल्ट आएगा तो अगर बहुत सरल तरीके से विश्लेषण किया जाए इस प्रोसेस का तो क्या होगा क्योंकि जो इस पॉडकास्ट को लोग देख भी रहे हैं हम अष्टांग योग की बात कर रहे हैं आप इतने सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं मुझे भी इस चीज की कुछ समझ है क्योंकि मैं काफी सालों से पढ़ रही हूं
(29:21) लेकिन जो एकदम नया व्यक्ति है जो जुड़ना चाहता है लेकिन यम नियम आसन ये बहुत बड़े-बड़े वर्ड्स लगते हैं नहीं समझ आता कि मैं इसको कैसे प्रैक्टिस करूं इनफैक्ट मुझे भी इस जर्नी में 11 12 साल हो गए हैं बट कई चीजों पर मैं खुद को भी अटका हुआ महसूस करती हूं कि अगर अगर हम सत्य की बात करें अगर हम जो हमारे यम नियम का पाठ है अगर हम ब्रह्मचर्य की बात करें तो कहीं ना कहीं कुन चीज कुछ चीजों में आप उसे अपना पाते हो कर पाते हो और कई चीजों में आप नहीं कर पाते हो क्योंकि अगर जैसे सपोज कीजिए आप एक बिजनेसमैन है और आपको अ जैसे कि आजकल एक कंट्रोवर्सी भी चल रही है
(29:54) रणवीर अलाबाद वाली वो तो खैर टॉपिक अलग है बट मैं एक बिजनेस मैन पॉइंट ऑफ व्यू से बात कर कर रही हूं कि चाहे आप आध्यात्मिक हो या आप उस मार्ग पर चलना चाहे लेकिन अगर आपका कार्यशैली ऐसी है कि जहां पर आपको हो सकता है थोड़ा सा दूसरे तरीके से चीजों को प्रेजेंट करना पड़े अ लोग जॉब्स में जाते हैं प्रेजेंटेशंस में कुछ तरीके से चीजों को एमप्लीफाई करके दिखाना पड़ता है रिजल्ट्स के लिए तो मैं कहना चाह रही हूं कि एक एक पूर्ण तरीके से इस मार्ग पर चलना मुझे लगता है बहुत ज्यादा एक्सेसिबल नहीं है और वहां पे कंफ्यूजन खड़ी होती है
(30:23) लोगों के लिए कि मैं आज की जीवन शैली देखूं या मैं इतनी हाई ऑर्डर बातें करूं हाई ऑर्डर थिंकिंग करूं कि मैं तो सत्य करूंगा मैं ब्रह्मचर्य करूंगा और जो ब्रह्मचार्य के उदाहरण भी है मैं आपसे ब्रह्मचर्य के बारे में भी एक्चुअली डिटेल में बात करना चाहती हूं कि है क्या और इसका प्रोसेस क्या है जो जिस जिस प्रोसेस वर्ड को बार-बार यूज कर रहे हैं उसको हम आज के आधुनिक परिवेश में कैसे सरल बना सकते हैं एक एक सिंपल सा अगर आपको मुझे थ्री स्टेप मॉडल देना हो या वन स्टेप मॉडल देना हो तो क्या होगा ताकि जो बिगनर है एक तरह से कुछ जुड़ाव तो बन सके उसे कुछ ऐसा
(30:55) समझ तो आ सके कि हां यहां पर ऐसा करने से ऐसा होगा क्योंकि जितने भी हम योग दर्शन की बात करें अब दर्शन तो कौन ही पढ़ने जाएगा अगर हम हमारी इंडियन फिलॉसफी की बात करें छह उसमें दर्शन है एक जिसम से यो योग दर्शन है कौन दर्शन की किताबें उठाएगा पढ़ेगा सब तो मैं चाह रको कॉम्प्लिकेट ना करके अगर सिंपलीफाई करना चाहे जहां पर आप कुछ एक एंट्रेंस का तरीका एक एंटर होने का तरीका सिंपल मॉडल दे सके उस प्रोसेस की गुथी को सॉल्व करने का सबसे पहली बात तो जो आपने कहा है कि ध्यान के लिए हम यम नियम का नहीं पता है इत्यादि एक छोटी सी बात समझ
(31:30) लें कि आत्मन प्रतिकूल नि परे शम ना समाचरेत कि जो हमें अपने लिए अच्छा नहीं लगता है वोह हम दूसरों के साथ नहीं करेंगे ये एक छोटी सी बात है और इसमें बहुत सारी चीजें फिर आ जाती हैं हमें क्रोध हमारे ऊपर करे कोई अच्छा नहीं लगता हम दूसरों के साथ नहीं करेंगे हमारे साथ कोई हिंसा करे हमें अच्छा नहीं लगता दूसरों के साथ नहीं करेंगे हमारे साथ कोई गलत आचरण करे गलत तरीके से हमारी भावनाओं को नहीं समझे अरे भाई हम दूसरों की भावनाओं को जरूर समझेंगे अपने परिवार की भावनाओं को जरूर समझेंगे अगर जो हमें क्योंकि हमें हमारे लिए सब कुछ अच्छा चाहिए लेकिन दूसरों को हम क्या
(32:02) दे रहे हैं उसके लिए हम कभी शायद ध्यान ही नहीं देते हैं तो हमारे शास्त्र हमारे महापुरुषों नेय कहा है कि अगर तुम इतना भी कर लो कि जो तुम्हें खुद के लिए नहीं चाहिए वो दूसरों को तुम नहीं दोगे तो बहुत सारी चीजें ये अहिंसा हो गई चाहे सत्य हो गई चाहे अपरिग्रह हो गई बहुत सारी चीजें अपने आप तुम्हारे जीवन में आएंगी ये हम सुनते बचपन से आ रहे हैं लेकिन जब अप्लाई करने की बारी होती है इस इस चैनल का माध्यम से मैं यही सॉल्व करना चाहती हूं लोगों के लिए कि जो सुनी सुनाई चीजें जो बचपन से सुनते आ रहे हैं सच बोलो ऐसा आचरण रखो ऐसा व्यवहार रखो लेकिन जब एप्लीकेशन
(32:34) की बात आती है तो हम नहीं कर पाते हैं चाहे से वो बचपन से ही सुनते आ रहे हो मुझे नहीं लगता कोई भी अपने बच्चों को सिखाता है कि झूठ बोलो मैनिपुलेट करो गुस्सा करो या फिर लालच करो घृणा करो ईर्ष्या रखो यह सब कोई नहीं सिखाता है लेकिन जब एप्लीकेशन की टाइम आती है तो ये वाले इमोशंस एमप्लीफाई होकर आ जाते हैं और बाकी जो हमने सीखा होता है सब साइड पे हो जाता है इसका प्रैक्टिकल बताइए मुझे चित्त की शुद्धि जब तक नहीं हो यानी कि हमारे मन की अवस्था जब तक ठीक नहीं होगी तब तक हम चीजों को ना समझ पाएंगे और ना इंप्लीमेंट कर पाएंगे उसके
(33:06) लिए हमें शुरुआत में छोटे-छोटे स्टेप लेना शुरू करना पड़ेगा और यह माध्यम क्या बन सकता है शायद यह आपकी पॉडकास्ट माध्यम बन सकती है हम इस बारे में बात कर रहे हैं आपने यह कहा तो हो सकता है क्या इतना पर्याप्त नहीं है कि मैं यहां पर बैठ कर के कह रहा हूं कि भाई आपको जीवन में थोड़ा सा सावधान हो जाने की जरूरत है आप अपने जीवन पर खुद ध्यान दो हम आपकी बेहतरी के लिए कुछ कह रहे हैं और जदा नहीं कुछ समय तक हमारे इन जो तरीके हैं इनको फॉलो करने की कोशिश करो यह कारण हो सकता है उस मार्ग पर चलने का अब आप यह कहे कि कारण क्या होगा कारण कैसे बनाए कारण तो यही होगा कि
(33:39) कहीं से सुन लिया कहीं से प्रेरणा मिल गई या जीवन में कोई घटना ऐसी हो गई जिससे जिससे आप बहुत आहत हो गए आपको लगा कि जीवन में कष्ट क्यों है तो जब कष्ट होता है ना तो उसके निवारण की तरफ व्यक्ति बढ़ता है और बहुत सारे लोगों ने यह भी कहा कि अध्यात्म का मार्ग दुख से शुरू होता है जीवन में जब परेशानिया आती है तभी लो लोग सोचते हैं कि अरे अध्यात्म को समझते इस मार्ग को देखते हैं इस पर क्या है तो कारण बहुत सारे हो सकते हैं और कारण आपके पास हैं बस आप डिले ना करके छोटे-छोटे स्टेप लेना शुरू कर सकते हैं और उससे जो आप आज जिस तरीके से सोचते हैं ना शायद उस तरीके
(34:12) से सोचते हुए आप इस अध्यात्म के मार्ग प योग के मार्ग प नहीं बढ़ पाएंगे लेकिन आपके मन की अवस्था भी बदल जाएगी जैसे कहते हैं कि उल्टा नाम जपत जग जाना वाल्मीकि ई ब्रह्म समाना उनके गुरु ने उन्हें कह दिया कि तुम राम राम कहो राम राम भी नहीं मरा मरा कहना शुरू कर दिया लेकिन फिर भी धीरे-धीरे वो शब्द बोलते गए बोलते गए बोलते गए अभ्यास में आता चला गया धीरे-धीरे भाव जुड़ते चले गए और धीरे-धीरे मन शुद्ध हो गया जब चित्त शुद्धि हो जाती है तो सोचने का ढंग बदल जाता है जिस तरीके से मैं सोचूंगा शायद एक व्यक्ति जो मदिरापान कर रहा है और भोगों में संलग्न
(34:42) है वो उस तरीके से नहीं सोचेगा जो चीजें मुझे अच्छी लगेंगी प्रिय लगेंगी शायद उसको वो बड़ी ही बुरी लगेंगी आज उसको बुरी लग रही है लेकिन वो मेरी जैसी अवस्था तक आपकी जैसी अवस्था तक या और भी जो बहुत ऐसे योगी लोग हैं उनकी अवस्था तक पहुंच सकता है लेकिन कैसे शुरू होगा वो उसे छोटे-छोटे स्टेप आज से लेना शुरू करना होगा और इस तरीके से नहीं सोचना होगा कि मुझे फट से रिजल्ट मिले क्योंकि फट से कुछ होता नहीं है आप अगर देखें कि महीने में एक हैबिट तो बनाई जा सकती है एक अच्छी आदत तो अपने जीवन में जोड़ी जा सकती है अगर साल भर में देखें तो 12 आदतें बनाई जा सकती हैं लेकिन
(35:13) कितने लोग हैं जो जीवन में एक साल में तीन चार हैबिट भी अच्छी ला रहे हैं कि भाई चलो सुबह 5:00 बजे उठेंगे ब्रह्म मुहूर्त में उठेंगे या सुबह उठ के योग करेंगे प्राणायाम करेंगे एक घंटा रोज स्क्रिप्चर को पढ़ना शुरू करेंगे बहुत सारी ऐसी आदतें हो सकती है कितने लोग बना रहे हैं एक महीने में एक आदत बनाई जा सकती है लेकिन नहीं कर रहे हैं तो आपको यहां पर ध्यान देना होगा और बहुत आतुरता से दिमाग में ये नहीं सोचना कि बस आज जीवन बदल जाए आप करते रहो करते रहो करते रहो तब जीवन में चेंज या कोई मुझे एक ऐसा शॉर्टकट मिल जाए जैसा आपने कहा कि आपके जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी
(35:44) है कुछ कारण ऐसे हो सकते हैं जिसकी वजह से आप खुद को अटका हुआ महसूस कर रहे हैं अ कभी-कभी क्या होता है जब हम उन अटके हुए सवालों को सुलझाने की कोशिश करते हैं क्योंकि कोई भी डिप्रेशन में नहीं रहना चाहता कोई भी उस स्थिति में नहीं रहना चाहता जहां वो अपने आप को लेकर बहुत बुरा या छोटा महसूस कर रहा है कोशिश सभी करते हैं लेकिन जब आप अपनी कोशिशें कर ले और तब भी वो स्थिति अगर इंप्रूव नहीं हो रही है तो कहीं ना कहीं हमें समझना चाहिए कि जो हम यह बात कर रहे हैं या जो आप बातें जिनको हाई ऑर्डर थिंकिंग कहा जाता है कि ये ऊपर ऊपर की बड़ी बातें हैं या फिर ये
(36:14) प्रैक्टिकल एप्लीकेशन नहीं है उनके लिए थोड़ा सा ओपन होकर देखें कि क्या पता वहां से कुछ सलूशन निकल जाए क्योंकि जब भी कोई कोई सिचुएशन डिफिकल्टी लाइफ में आती है हर व्यक्ति अपने बस में जितनी चीजें होते हैं साम दाम दंड भेद सब कुछ लगाने की कोशिश करता है कि मैं वो प्रॉब्लम से निकल जाऊं किसी कारणवश अगर आप वहीं पर अटके रहते हैं तो शायद आपको कुछ ये इस तरह के टूल्स जैसे कि योग है जिसको मैं एक टूल कहकर एक बहुत ही सूक्ष्म रूप में एक तरह से मुझे लगता है रिड्यूस कर रही हूं लेकिन हां उसको उसको भी एज अ कांसेप्ट आप लेकर अपनी लाइफ
(36:44) में वहां से एंट्री ला सकते हैं शुरू में कंफ्यूजन हो सकता है हो सकता है कुछ समझ में ना आए हो सकता है कि यह आसन करने से अपने श्वास पर नियंत्रण रखने से क्या फर्क पड़ेगा मेरी मानसिक स्थिति पर इस तरह के सवाल आए और बहुत परेशान भी करें लेकिन बाकी और कुछ में भी तो नहीं मिल रहा ना तो इसको ट्राई करने में क्या क्या बुराई है तो यहां पर मैं आपसे जो अगला सवाल करना चाहती हूं वो यह है कि हमारी जो श्वास है उसका हमारे मानसिक थिंकिंग पर क्या इंपैक्ट है इमोशंस पर क्या इंपैक्ट है यहां पर देखो सबसे पहली बात तो मैं यह कहूंगा कि परिवर्तन की
(37:17) अगर बात करते हैं परिवर्तन दो तल पर होते हैं हमने प्रयास किया और परिस्थितियां बदली या फिर नहीं बदली एक बात दूसरी बात यह है कि हमने प्रयास कि किया और हम बदले या फिर नहीं बदले ऐसा हो सकता है कि आपने प्रयास किया जैसे आपने कहा कि एक व्यक्ति तनाव में है डिप्रेशन में है वो हर संभव प्रयास करेगा कि चीजें बदले तो उसके प्रयास के बाद स्थिति बदली या फिर नहीं बदली बाहरी स्थितियां या उसके जीवन में जो आ रहा है वो हो सकता है कि ना बदले क्योंकि वो आपके प्रारब्ध के आधार पर होती हैं है ना जो आपने पूर्व में किया आपने इस जीवन में किया हो इससे पूर्व के हमारी
(37:53) संस्कृति में तो माना जाता है पूर्व के भी संस्कार आते हैं तो हो सकता है परिस्थिति ना बदले लेकिन आपके सोचने का ढंग ना बदले यह हो ही नहीं सकता है ना काम क्रोध भवंस युक्त स सुखी नरा के काम क्रोध आदि वेगो पर अगर आप संयम करते हैं नियंत्रण करते हैं जीवन में व्यवस्था लाते हैं तो भले ही बाहरी परिस्थितियां आपकी ना बदले लेकिन आप जो समस्या आपके जीवन में आ रही है उससे अप्र भावी जरूर हो जाएंगे हमारे संतों महापुरुषों के जीवन में क्या तकलीफें नहीं आए हैं अगर अध्यात्म और योग में आने से तकलीफें समाप्त हो जाया करती तो फिर तो उनके जीवन में उनको विष पिलाए गए उनको आहत
(38:28) किया गया उनके शरीर में रोग आ गए फिर तो ऐसा कुछ होना ही नहीं चाहिए था परिस्थितियां तो आएंगी लेकिन आप उनसे अप्र भावी रहेंगे और यह उदाहरण आपको स्पष्ट दिखेंगे कि अप्र भावी ही रहे हैं जो वास्तव में संत रहे हैं जीवन में चाहे जितनी भी परेशानियां आई हो तो हमें यह सोच कर के हताश नहीं होना है कि हमने सब कुछ कर लिया लेकिन बदला नहीं अरे भाई आप बदल रहे हो मुझे बहुत अच्छा लगा जिस तरह से आपने कहा कि कभी-कभी क्या होगा परिस्थितियां बदल जाएंगी अगर आप लॉस में है तो हो सकता है फायदे में आ जाए तो आपकी मन स्थिति बदल जाए कि चलो आप चीजें सुधर
(38:58) गई है और कभी ऐसा होगा कि आप बदलेंगे परिस्थितियां सेम रहेगी क्योंकि मैं देखती हूं बहुत सारे लोग हैं एक बहुत बड़ा लॉस नहीं प्रोसेस कर पाते हैं ग्रीफ जिसे हम कहते हैं एक बहुत ही डीप लेवल ऑफ सडसुख कुछ ऐसा इंसीडेंट हो गया है अब वो वापस नहीं आ सकते मतलब परिस्थिति तो नहीं बदल सकती लेकिन आप बदल सकते हैं कि आप उसको फिर अप्रोच कैसे कर रहे हैं अपनी लाइफ में तो कुछ कुछ उस डीपर लेवल पर काम करने की हम बात करते हैं और मुझे लगता है वही सच में जो एक ट्रांसफॉर्मेशन होता है वो होता है इनर ट्रांसफॉर्मेशन जिसे कहा जाता है आंतरिक मौलिक तौर पर आप क्या
(39:32) परिवर्तन कर सकते हैं शायद वो एक पक्का परिवर्तन होता है जिसमें परिस्थितियों पर डिपेंडेंट नहीं है आपकी मनस्त हम बात कर रहे थे श्वास की कि ब्रेथ का क्या रोल है मनु स्थिति पर हां तो दरअसल क्या है कि हमारे योगिक मार्ग में तुरंत अगर हमें किसी चीज का समाधान चाहिए तो उसके लिए भी कुछ तरीके हैं और कुछ ऐसे हैं जो सूक्ष्म तलों पर बदलाव लाते रहते हैं तो जो प्राण है वो दो तलों पर काम करता है तो तुरंत आपको रिजल्ट दे देगा और एक ये है कि उसका रिजल्ट आएगा धीरे-धीरे और आध्यात्मिक उन्नति होगी आपके शरीर में पांच कोष होते हैं सभी को पता है अनमय
(40:08) प्राणम मनोमय विज्ञान में और आनंदमय कोष होता है तो जो आपका जो प्राणम कोष होता है वो आपके मनों में से कनेक्ट होता है तो जब आप ब्रीथिंग पर ध्यान देते हैं और विशेष तरीके से श्वसन करते हैं तो तुरंत आपकी मानसिक स्थिति आपके नियंत्रण में आनी शुरू हो जाती है आप तो योग मार्गा अनुगामी है तो आपको तो इन चीजों का पता ही है लेकिन हमारा जो ऑडियंस है जिनको नहीं पता प्राणम कोष क्या है मनोमय कोष क्या है थोड़ा सा इसको एक्सप्लेन भी कीजिए ब तो ये एक तरीके से अगर देखें तो ये लेयर्स है जैसे एक लेयर के बाद दूसरी है दूसरी की तीसरी है
(40:38) और जैसे एक लेयर के बाद जो ऊपरी सतह है वो नीचे वाली सतह के साथ जुड़ी हुई रहती है और उसका हायर वर्जन है एक तरीके से एक हायर वर्जन है तो अगर हम प्राणम कोष पर काम करते हैं तो हमारा हां वो उस हमारा जो मनोमय कोष है वो अपने आप उससे प्रभावित हो जाता है जैसे कोई व्यक्ति है जो कि बहुत गुस्से में आ गया जो उसे बहुत क्रोध आ गया तो अपने आप बैठे-बैठे उसकी सांसों की गति तेज होनी शुरू हो जाएगी कहीं पर भी अगर आप सामान्यत कहेंगे कि अभिनय करो गुस्से का तो सबसे पहले वो सांसों की गति तेज करेगा और उस तरीके से अपनी भाव बंगी माओ को
(41:10) बनाएगा क्योंकि वो जो आप जब गुस्से में होंगे तो सांस आपके तेज होंगे अब इसी तल पर अगर सांसों को धीमा कर दिया जाए तो जब दिमाग का सांसों पर असर हो रहा है तो सांसों का क्या मन पर असर नहीं होगा निश्चित रूप से होगा तो केवल सांसों को धीमा करने से भी और उनको गहरा करने से भी आप अपनी मानसिक स्थिति को बदल सकते हैं साथ ही जब आप सांस लेते हैं तो हम जैसे ही सांस लेते हैं तो हमारी जो डायफार्मा छाती के यहां नीचे तक और यहां से जो हमारा पूरा पाचन तंत्र है वहां पर समान वायु काम करती है और उससे नीचे अपान वायु काम करती है तो जब आप गहरा सांस लेते
(41:53) हैं तो सिद्धांत ये कहते हैं कि आपके पेट जब आपका बाहर आता है सामान्यत जब हम उथली छोटी सांस लेते हैं तो केवल वो लंग्स में रह जाती है और लंग्स का भी केवल अपर लोब में रह जाती है जब प्राणवायु लोअर लोब में जाती है तो नीचे के तरफ ही ग्रेविटी के कारण ब्लड का सर्कुलेशन ज्यादा रहता है तो गहरी सांस लेने से जो ऑक्सीजन है वो ब्लड में ज्यादा जा पाती है और पूरे शरीर में प्राणवायु का स्तर बढ़ता है साथ ही साथ जब आपकी डायफार्मा वायु प्रभावित होती है और वो प्रभाव केवल यहां तक नहीं होता कमर सीधी करके अगर आप गहरा श्वसन करते हैं तो व
(42:29) आपकी अपान वायु को भी व्यवस्थित करता है और अपान वायु का जो क्षेत्र है वहीं पर ही मूलाधार चक्र होता है रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स के आसपास का जो क्षेत्र बिल्कुल जो वो मूलाधार चक्र है अगर उसको आप स्पंदित करते हैं तो जितनी भी आपके जीवन में नेगेटिविटी तामसिक जो भी गलत विचार और जितनी भी तरीके की जो नीचे की तरफ खींचने वाले भाव होते हैं वो तभी आते हैं जब आपका जीवन मूलाधार चक्र के स्तर पर चल रहा होता है तो अपान वायु एक ऐसा ग्राउंड है एक ऐसा मैदान है जिस पर जैसे एक प्लेग्राउंड है जिस पर खिलाड़ी खेल सकते हैं खेलेंगे कब जब वो मैदान साफ होगा घास होगी अच्छी
(43:05) व्यवस्था होगी फ्लैट होगा तभी तो खेल पाएंगे इस उसके बाद हमें अपने प्लेयर्स चाहिए वो खेलेंगे इसी तरीके से मूलाधार चक्र जो है वो तभी विकसित होगा जब आपकी अपान वायु संतुलित होगी और प्राण वहां तक पहुंचेगा प्राण वहां तक पहुंचेगा हमारा तो सामान तक ही नहीं पहुंच पा रहा हा तो आप जब ये गहरा श्वसन करते हैं तो आपका जो समान वायु और अपान वायु प्रभावित होती है जिससे कि मूलाधार चक्र भी प्रभावित हो होता है और जब हम अल्टरनेटिव नोस्टल ब्रीथिंग जो अनुलोम विलोम या नाड़ी शोधन मूल रूप से उसका नाम है जब यह करते हैं तो होता यह है जो हमारी पिंगला है और ड़ा है
(43:37) लेफ्ट जो हमारा नोस्टल है वो ठंडा होता है चंद्र स्वर होता है और राइट नोस्टल हमारी सूर्य स्वर होता है तो जब हम नाड़ी शोधन प्राणायाम में शुरुआत कहां से करते हैं लेफ्ट नोस्टल से ही हम शुरुआत करते हैं क्यों करते हैं लेफ्ट से क्योंकि हमारे जीवन में हमें वास्तव में लेफ्ट नोस्टल की ही जरूरत होती है आज के समय में जो आप देख हर व्यक्ति गुस्से में भागदौड़ में ईर्षा में क्रोध में और बहुत सारे उसके जीवन में ऐसी आफत हैं जिसकी वजह से यह सारे काम क्या है राइट नोस्टल को एक्टिवेट करने वा और जो आहार होता है जिसमें मिर्च मसाले ज्यादा होते हैं स्पाइसी होता है और ये
(44:13) सारे आहार जो होते हैं यह भी आपके सूर्य स्वर को ही ज्यादा उत्तेजित करते हैं तो हर एक व्यक्ति को आज के समय में लेफ्ट नोस्टल की जरूरत है कि यह स्वर जो है आपका ज्यादा सक्रिय हो जब आप नाड़ी शोधन प्राणायाम में राइट बंद करके लेफ्ट से सांस लेते हैं तो वो जो ड़ा नाड़ी जो है यह नीचे की तरफ जाती है यूं और ये मूलाधार तक जाती है और मूलाधार के बाद जब आप सांस को राइट से छोड़ते हैं तो फिर ये यूं आती है तो आपको लगेगा कि हम अनुलोम विलोम तो यहां से कर रहे हैं केवल नासिका से ज्यादा से ज्यादा यहां तक फर्क पड़ना चाहिए आपके स्थूल स्तर पर तो यहीं तक प्रभाव पड़ रहा
(44:45) है लेकिन जो नाड़ियों गमन करती हैं वो नीचे तक करती है और मूलाधार तक पहुंचती हैं तो केवल नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से क्यों कहा गया है कि 72000 नाड़ियों की शुद्धि करने के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम करें ये तो हमारे ग्रंथ में भी है तो क्यों कहां कहां है वो नाड़ियों वो इसी तरीके से है कि जो आपकी नाड़ियों है वो पूरे शरीर में फैली हुई है और उन नाड़ियों को उनमें सूक्ष्म चीज ही जा सकती है और प्राण से सूक्ष्म कुछ और नहीं हो सकता तो इसीलिए जब नाड़ी शोधन करते हैं तो प्राणियों जो नाड़ियों की जो है अशुद्धि दूर होती है और मूलाधार चक्र भी एक्टिवेट
(45:17) होना शुरू होता है जिससे मानसिक प्रभाव तुरंत होते हैं क्योंकि जितने चक्र ऊपर की तरफ जाएंगे उतनी ही मेंटल क्लेरिटी बढ़ती चली जाएगी जो व्यक्ति मणिपुर चक्र पर जीवन जी रहा है उसका जीवन अलग होगा जो व्यक्ति मूलाधार पर जी रहा है अलग होगा जो सहस्त्र आधार पर जी रहा है वो तो योगी लोग होते हैं तो वो एक अलग-अलग स्थिति आपकी होती चली जाती है और यह काम जो आधार है इसका वो आपकी सांस बनती है थोड़ा सा इस तरीके से इसको समझ सकते हैं हमने आपन वायु के बारे में अभी बात की वर्णा अनंद जी अपान वायु जो है जिसका क्षेत्र आपके रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स के
(45:51) आसपास का एरिया है जो लोग योग से अवगत है वो जानते होंगे कि बंध भी हम लगाते हैं बंधों का प्रयोग करते हैं अपने मूल दवार को थोड़ा सा बंद करके स्वास लेने की कोशिश उस तरह की प्रैक्टिसेस भी करते हैं इस अपान वायु पर कंट्रोल पा जाना क्योंकि यहीं पर बॉटम में हमारी कुंडलिनी एनर्जी भी है स्पाइन के एकदम निचले हिस्से पर जिसे कुंडलिनी का स्थान कहा जाता है तो ये लोअर रीजन ऑफ द बॉडी का बहुत ज्यादा महत्व है योग में और इसीलिए शायद ब्रह्मचर्य की बहुत ज्यादा बात होती है कि आप इस क्षेत्र पर नियंत्रण पा पाए तो ब्रह्मचर्य सबसे पहले सिंपल सीधे सरल शब्दों में है क्या
(46:23) और ब्रह्मचर्य को फॉलो करने का पर्पस क्या है हां तो अगर हम नाम से ही देखें तो वह आचरण जो हमें ब्रह्म की ओर ले जाए यह तो इसका शाब्दिक अर्थ है तो हर एक मैं कई बार लोग सोचते हैं कि केवल एक इंद्रिय पर काबू कर लेना यह ब्रह्मचर्य होता है लेकिन ऐसा नहीं है ब्रह्मचर्य के विषय में कहा गया है सर्व इंद्रिय संयम यानी कि आपकी जितनी भी इंद्रिया हैं उन सब पर आप जब कंट्रोल करते हैं तब आप ब्रह्मचर्य की स्थिति में जाते हैं कारण उसका यह है कि जैसे आपकी जीववा है आपकी आंखें हैं जन्य इंद्रिय है तो उनमें से अगर किसी भी एक इंद्रिय पर आप
(47:01) नियंत्रण करेंगे तो उससे आपका मन सधे यानी कि मन ऊपर बैठा है और उससे यह पांचों इंद्रियां जुड़ी हुई है तो अगर एक इंद्रिय पर नियंत्रण किया तो उससे भी मन सधा दूसरी पे किया उससे भी मन सधा और अगर ज्ञान इंद्रियों की आप बात कर रहे हो कर्म इंद्रियों की अभी बात नहीं कर रहे हम ज्ञानेंद्रियों में अगर हमने नियंत्रण किया चार पे और एक को हमने खुला छोड़ दिया तो मन तो फिर उसी अवस्था में पहुंच गया मन तो फिर आ गया तो इसीलिए हम ब्रह्मचर्य की बात करते हैं तो हम सर्व इंद्रिय संयम यानी कि आपको अपने जीवन में हर तरीके से अपने आप को संयमित रखना होगा ऑल फाइव
(47:36) सेंसेस हां जी तो उसके बाद फिर अगर हम बात करते हैं कि ब्रह्मचर्य से लाभ के विषय में या इससे क्या प्रभाव होते हैं उससे पहले ब्रह्मचर्य प्रैक्टिस में दिखता कैसा है लोग इसको सेक्सुअल एनर्जी से बहुत रिलेट करते हैं कि सेक्सुअल एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट ना करने को ब्रह्मचर्य या सेलेबस का जीवन कहा जाता है और आप जो बात बात कर रहे वो एक गहरे स्तर पर बात कर रहे हो कि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण पा जाना ऐसा है कि जबरदस्ती ब्रह्मचर्य हो ही नहीं सकता अगर जबरदस्ती ब्रह्मचर्य किया जा सकता तो मैं अभी ये कहता कि भाई कर लो लेकिन अगर आपका मन मन से आपका उस उन चीजों
(48:14) से डिटैच आप नहीं हुए और निरंतर आपने चिंतन उनका ही बन रहा है और आप किसी तरीके की क्रिया नहीं कर रहे हैं चाहे वो फिजिकल रिलेशन हो या फिर किसी भी तरीके की ऐसी सेक्सुअल एक्टिविटी हो उनसे आप अगर बचे हुए हैं कर नहीं रहे हैं लेकिन मन में निरंतर वही चल रहा है तो कहा गया है कि अधोगति है जो कि मन से प्रभावित होती है और वो एक जैसे मथानी जैसे दही को मथ करके मक्खन निकाल दिया जाता है जब हम चिंतन करते हैं तो हमारे शुक्र धातु जो कि हमारे शरीर में रहता है उसको उसका अधोगति मतलब स्पर्म वीर्य की बात कर रहे हां जी हां जी तो वो नीचे की तरफ बहेगा तो
(48:55) येन केन प्रकारेण किसी ना किसी तरीके से वो शरीर से बाहर जाएगा ही उसे रोका ही नहीं जा सकता है तो बलपूर्वक तो ब्रह्मचर्य फिर हो ही नहीं सकता तोय ब्रह्मचर्य जो है जो इसके जो टर्मिनोलॉजी भी जैसे हमने शुक्र की बात की एक धातु है सात धातुओं में से जिससे हमारा शरीर बनता है ये सारी बातें बड़ी मेल सेंट्रिक लगती है कि यह पुरुष विशेष के लिए है योग का मार्ग भी जैसे हम बहुत इनलाइटें स्पिरिचुअल बीइंग या योगी की बात करते हैं तो 99.
(49:24) 99% पुरुष ही है तो क्या इसमें स्त्रियों के लिए कोई जगह नहीं है ब्रह्मचर्य में वो कैसे ब्रह्मचर्य आश्रम को फॉलो करें और इसका क्या पर्पस है ये बहुत सारे प्रश्न मिलते हैं कि स्त्रियों के लिए ब्रह्मचर्य के क्या नियम होंगे मैं कहता हूं कि अलग से नियम नहीं है क्योंकि आपका पूरा शरीर एक जैसा और आपके जो अगर साधना की बात करें तो उसी तरीके का सब कुछ है बस बाद में एक धातु यानी कि रस रक्त मांस मेद अस्थ मज्जा शुक्र और वहां पे कहा गया है कि रज धातु होता है वहां पे शुक्र धातु होता है तो हमारे आयुर्वेद में और हमारे सिद्धांतों में तो इस तरीके से कहा गया है और दोनों ही धातु महत्त्वपूर्ण
(49:54) होते हैं तो अगर आप इस तरीके के एक्टिविटी में एक लड़की भी लगी रहती है स्त्री भी लगी रहती है तो वो भी निस्तेज होना शुरू हो जाएगी वो भी मानसिक स्थिरता को खोना शुरू हो जाएगी उसकी भी रुचि जो है वो सारी नकारात्मक चीजों में बढ़नी शुरू हो जाएगी वो भी अपने मूलाधार चक्र के स्तर पर जीवन जीना शुरू कर देगी तो वो सारी चीजें उसके साथ भी होंगी और वो सारी चीजें पुरुष के साथ भी होंगी इनमें दोनों में कोई बहुत भारी अंतर नहीं है तो इसका पर्पस तो समझ में आता है कि अपनी जो शक्ति है अपनी जो ऊर्जा है उस पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर
(50:24) रहे हैं ताकि हम उस ऊर्जा को डायरेक्ट कर सके कुछ एक अच्छी दिशा में जो हो सकता है एक अच्छे मार्ग पर योग के मार्ग की बात करें या अल्टीमेट लिबरेशन निर्माण की बात करें कैवल्य की बात करें यह तो पर्पस तो कहीं ना कहीं क्लियर हो रहा है हमारी इस बातचीत से कि ब्रह्मचर्य का ये पर्पस है लेकिन जब हम हम ब्रह्मचर्य को आज की लाइफ में प्रैक्टिकली देखें इतने सारे लोग हैं और फिर आगे जो हमारी जनरेशन है वो कैसे आएगी अगर सभी ब्रह्मचारी बन गए किसकिस के लिए ब्रह्मचर्य है और किसके लिए नहीं है अगर ब्रह्मचर्य ना फॉलो करें तो क्या और और ऐसे तरीके हो सकते हैं जिससे हम अपनी
(50:58) ऊर्जा को नियंत्रण में रखकर पॉजिटिव तरह लगा सके क्योंकि मैं भी यह मानती हूं कि बहुत ज्यादा ऊर्जा आपकी जाती है अगर आप सेलिबेसी प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं तो इस इसमें कोई दोराहे नहीं है लेकिन वो भी एक एक जिंदगी की मुझे लगता है एक एक रिक्वायरमेंट है और हमारा जो डिजाइन है फिजिकली जिस तरीके से हुआ है अगर हमें ईश्वर ने बनाया है परमात्मा ने बनाया है तो हमारे डिजाइन में इंटीग्रेट करके क्यों भेजा है इतनी स्ट्रांग सेक्सुअल इंस्टिंक्ट क्यों है ठीक है देखो सबसे पहली बात तो मैं ये कहूंगा कि एक समूह है एक ग्रुप लगा लें और उस ग्रुप में बहुत
(51:32) सारी आदतें हैं एक समूह में बहुत सारी आदतें हैं उन आदतों को अगर आप अपने जीवन में बना के रखते हैं तो आप संयम के मार्ग से हट जाते हैं आप योग के मार्ग से हट जाते हैं क्योंकि ये दो विपरीत शक्तियां हैं या तो आप सात्विक ही होंगे या आप तामसिक ही होंगे आप ऐसा नहीं हो सकते कि मैं सात्विक भी हूं तामसिक भी हूं मतलब मैं एक समय में ये हूं एक समय में ये हूं आप ऐसा नहीं तो अगर आप ब्रह्मचर्य को फॉलो नहीं करते हैं तो आप तामसिक का की तरफ जाते हैं और तामसिक का आपको अध्यात्म से दूर कर देती है योग से दूर कर देती है और संयम से दूर कर देती है तो ब्रह्मचर्य
(52:04) फॉलो करना केवल शरीर के लिए नहीं है निश्चित रूप से जब अगर हम रस रक्त मांस मेद स्थि मज्जा शुक्र इन धातुओं को देखते हैं तो रस से महत्त्वपूर्ण रक्त रक्त से महत्त्वपूर्ण शुक्र और फिर इस तरीके से आगे जितने धातु हैं एक के बाद दूसरा उससे अधिक महत्त्वपूर्ण होता है तो हम ये नहीं कह सकते हैं कि ब्लड की तो हमारे शरीर में जरूरत है बोन मेरो की तो हमारे शरीर में जरूरत है और दूसरे फैट की मसल्स की तो जरूरत है लेकिन शुक्र की जरूरत नहीं है जब रक्त के बिना आपका शरीर नहीं चल सकता है तो शुक्र के बिना भी आपके शरीर में कहीं ना कहीं डिफिशिएंसी होती है और कितने ही
(52:34) डॉक्टर्स ऐसे हैं मॉडर्न साइंस के कि जो कहते हैं कि भाई कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कितने ही हमारे संपर्क में भी ऐसे हैं जो कहते हैं कि बहुत फर्क पड़ता है और अगर आप एक समय तक निश्चित समय तक ब्रह्मचार्य का पालन नहीं करेंगे तो आपको बहुत सारी समस्याओं को देखना पड़ सकता है ये निश्चित समय कौन सा होता है निश्चित समय अगर हम आधुनिक पॉइंट ऑफ व्यू से कहते हैं तो बहुत सारे डॉक्टर कहते हैं कि 90 दिन का समय ऐसा होता है कि 90 दिन के समय में एक जो शुक्र होता है वो मैच्योर होता है एक सर्टेन लेवल तक जो कि एक सही स्थिति चाहिए जिसमें पूरी तरह से में चोर होता है
(53:06) लेकिन अगर हम बात करें आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यौगिक दृष्टिकोण से तो अगर हमें अपने सभी धातुओं को पुष्ट करना है तो उसमें कम से कम एक साल का समय लगता है जैसे हमारे पास बहुत सारे लोग आते हैं जो कि ब्रह्मचर्य का पालन जिन्होंने पूर्व में नहीं किया अब वो कहते हैं कि जी हमें ऐसी ऐसी ऐसी ऐसी दिक्कतें हो रही हैं हमें रेक्टल डिस्फंक्शन प्री मैचर एजकुलेशन बहुत सारी समस्याएं वो बताते हैं हम कहते हैं उने कितना समय लग जाएगा तो हम कहते हैं एक वर्ष का समय आपको लगेगा पुनः अच्छी सक्षम अवस्था में आने के लिए इतना समय आपको देना होगा लेकिन अगर हम अपने
(53:37) सिद्धांतों के अनुरूप देखें तो आपका जो 18 वर्ष का या फिर जब तक आपका विवाह नहीं हो रहा है 18 वर्ष में पहले लगभग हो जाया करता 181 वर्ष में हो जाया करता था लेकिन अब तो और ज्यादा आगे ले जा रहे हैं अगर हम एक सही दृष्टिकोण से देखें तो बहुत लेट शादी करना लेट विवाह करना ये भी अच्छी बात नहीं है तो आप ब्रह्मचर्य में ही आप विवाह नहीं कर रहे हो बात अलग लेकिन विवाह करना है तो एक सर्टेन लेवल पे आकर के कर ले ऐसा अगर उतना संयम आपका नहीं है तो विवाह तो कभी भी हो रहा है कितने भी लेट एज में हो रहा है लेकिन ब्रह्मचर्य का पालन उस एज तक
(54:05) नहीं हो र उस एज तक उस एज तक नहीं हो रहा है तो जब तक विवाह ना हो तब तक ब्रह्मचर्य का पालन करना ही है ऐसा कहा गया है और उसी से फिर वो एक ऊर्जा व्यक्ति के अंदर विकसित होती है जिसे चाहे वो कुंडलिनी जागरण के लिए लगाए चाहे वो अपनी किसी दूसरे दिशा में उसे लगाए लेकिन वो ऊर्जा एक ही है उसका प्रयोग अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है बहुत सारे उदाहरण ऐसे भी हैं जो ब्रह्मचारी रहे और उन्होंने विलक्षण शारीरिक क्षमता को प्राप्त कर लिया जैसे देव दयानंद सरस्वती विशेष शारीरिक उनकी क्षमता थी वो अद्भुत ही उनके अंदर बल था उनके और जैसे दूसरे कई लोग
(54:35) योगी ऐसे मिलेंगे जो कि आपको शरीर से बहुत ज्यादा दुबले पतले और ऐसे मिलेंगे लेकिन वो है तो ब्रह्मचारी सब तपस्वी है सिद्ध है महापुरुष हैं फिर शरीर से दुबल पतल ग हो ऊर्जा वही थी उन्होंने उसको शरीर में भी प्रयोग कर लिया साधना में प्रयोग कर लिया उन्होंने केवल साधना में प्रयोग कर लिया और उन्होंने अपने शरीर को अलग तरीके से तपाया शायद वो आहार भी नहीं ले रहे हैं शायद वो वर्षों वर्षों तक की साधना कर रहे हैं तो ऊर्जा एक है वो आपको इकट्ठा करनी ही पड़ेगी अगर आपको किसी भी दिशा में प्रगति चाहिए हमारे सिद्धांत के कह तो ये चीजें क्यों हो रही है क्योंकि उन्होंने
(55:05) फिजिकल तो वो हो गए लेकिन उसके बाद जो वो संस्कार उनके बन गए ना उसको वो हैंडल ही नहीं कर पा रहे हैं इतनी वो वेग हो गया हमारे यहां पर परिणाम बताए गए हैं कि अगर आप किसी भी भोग को भोगते हैं तो उसके आउटकम होंगे परिणाम ताप संस्कार गुण वृत्ति विरोध ये चार तरीके के परिणाम ताप संस्कार दुखर गुण वृत्ति विरोध दुखमे सवेक योग सूत्र के अंदर आता है तो यानी कि आप किसी के साथ फिजिकल हुए परिणाम परिणाम क्या होगा कि आपकी जो इंद्रियों का तेज है वो कम होगा एक दुख हुआ परिणाम क्योंकि आपने शेयर कर लि हां हां ताप दुख क्या होगा ताप दुख है एक बार तो आपने वो संपर्क
(55:41) कर लिया लेकिन दोबारा व्यवस्था नहीं हो रही है क्योंकि विवाद हुआ नहीं है दोबारा व्यवस्था नहीं हो रही है ताप दुख उसी चक्कर में व्यक्ति फिर लगा हुआ है कि मैं किस तरीके से पुनः उसी सुख को लूं उसका मन उसे भटका रहा है संस्कार दुख यानी कि आप फिर पढ़ने बैठे और संस्कार आपके बन गए भोग के तो वो जो पढ़ाई वाले संस्कार है वो बन ही नहीं पा रहे हैं वो जो भोग के संस्कार है वो या करके आपको इंटरप्ट कर डोमिनेट कर रहे हैं हां और फिर गुणवती विरोध यानी कि जब आप साधना करेंगे तो साधना की वृत्ति का गुण अलग है और भोग की वृत्ति का एक स्वभाव
(56:10) अलग है तो उस साधना की वृत्ति को भोग की वृत्ति आकर के इंटरप्ट करती है फिर ध्यान नहीं लगेगा फिर नाम जप में रुचि नहीं होगी इसीलिए लोग कहते हैं कि नाम जप करने बैठते हैं इतनी जलन होती है कि चाहे हमसे कोई सेवा करा लो उनके भाव तो हैं वो मंदिर जाकर के सफाई कर देंगे सेवा दे देंगे पैसे का दान कर देंगे सब कुछ कर देंगे लेकिन सबसे बड़ी कठिनाई है आंख बंद करके बैठना क्यों स्थिरता से बैठना नहीं हो पाएगा गुण वृत्ति विरोध जो आपकी वृत्ति थी वो आपने 24 घंटे वहां लगा कर के रखी जो यह जो योग की वृत्ति है इससे बिल्कुल अलग है अगर हम
(56:40) इसको पाप पुण्य या फिर निर्वाण या उन चीजों से भी हटा दें आपकी स्टेट ऑफ माइंड क्या हो रहा है किसी चीज को जुड़ने के बाद वो देखना पड़ेगा और वो भोग का स्टेट ऑफ माइंड बिल्कुल अलग होता है और किसी भी चीज में जहां आपको फोकस चाहिए उसका स्टेट ऑफ माइंड अलग होता है और वो फिर रहता नहीं है वो इंद्रिय सुख आपको फिर खींचते हैं अनुभव खींचते हैं और आप डिस्ट्रेक्ट हो जाते हैं तो ये एक बड़ा कारण है तो हमने काफी सारी ना योग दर्शन के बारे में बात की हमने कुछ मेडिटेशन अध्यात्म के बारे में बात की हमने ब्रह्मचर्य के प्रिंसिपल के बारे में
(57:07) बात की योग एवरीडे लाइफ में कैसा दिखता है कैसा दिखना चाहिए कौन सी मानसिक लेवल पर इसका जो काम है वो होता है योग किस तरह से आपके मन स्थिति पर प्रभाव डालता है हमने श्वास के मूल्य के बारे में भी बात की कि सांस लेना उसको ठीक करना क्या कितना जरूरी है आई एम श्यर कि लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिला होगा इस इस कन्वर्शन से आपने बताया कि योग को अपनी जिंदगी में उतारना है तो सबसे पहले शारीरिक सिंपल तरीके से कौन सी एक ऐसी हैबिट हो सकती है सिर्फ एक हम एक घंटे की बात ना करें हम कोई बहुत डिफिकल्ट चीज लोगों को ना बताएं कौन सी एक
(57:42) सिंपल सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मेटिव हैबिट हो सकती है जो मैं कल से शुरू करू इसमें जो सबसे ज्यादा प्रभाव मैंने देखा और जहां से कहीं ना कहीं मैंने भी शुरू किया शुरुआत में क्योंकि अगर मैं बचपन की बात करूं तो मेरे लिए वो बहुत लेजिंग भी मुझे लगता था और ऐसे भी लगता था कि अरे अब ये कैसे क्या शुरू कर दिया लेकिन उसने बहुत बड़ा बदलाव जो किया वो है सही टाइम पर उठना और उस समय का सही प्रयोग करना वाह क्यों ऐसा मैं कह रहा हूं क्योंकि अगर मैं थोड़ा सा योगिक दृष्टिकोण से भी जाता हूं तो हमारी जो रात होती है वो चार अलग-अलग भागों में बटी हुई
(58:17) होती है पहला जो होता है वो रुद्र काल होता है जो कि 9:00 बजे से लेकर के रात्रि 6:00 बजे से लेकर के 9:00 बजे तक का होता है दूसरा जो काल होता है राक्षस काल होता है जो कि 9:00 बजे से लेकर के 12:00 बजे तक होता है उससे अगला काल जो होता है गंधर्व काल होता है जो 1200 बजे से लेकर के 3:00 बजे तक होता है और 3:00 बजे के बाद का समय जो होता है वह मनोहर काल होता है अगर हम इस चीज को नहीं सुधारते हैं तो होता यह है कि जो राक्षस काल जो कहा गया है ना यह वाकई बहुत सारी मानसिक अस्थिरता को लेकर के आता है आज के समय में जो हमारा यूथ है हमारे जो लोग हैं उनको जो आदत हो
(58:51) गई है कि फोन चलाएंगे और लेटे रहेंगे वो फिर 12:00 बजे तक फोन चला रहे हैं उसके बाद कहीं जाकर के जो ये राक्षस काल है इसमें अपने मन को स्थिर रखना भी बहुत कठिन होता है जो ब्रह्मचर्य के नियम हमारे से पूछे जाते हैं हम जो सबसे पहले कहते हैं हम कहते हैं कि देर तक फोन का प्रयोग करना या देर तक चैटिंग करना और यह सब चीजें करना य आपको छोड़नी होंगी क्योंकि उस समय पर आप मन पर नियंत्रण नहीं रख सकेंगे और गलत तरीके के चित्र देखना गलत तरीके की बा बातें करना बहुत सीके की गलत आदतें आपके जीवन में आ सकती हैं तो इस समय पर सो जाना यानी कि 9:00 बजे से 10
(59:26) बजे के बीच में अगर आप सो जाते हैं तो आप कहीं ना कहीं उस टाइम से बच जाते हैं जो कि आपकी मानसिक अस्थिरता का टाइम था जो गहरी नींद आपको आती है वो भी 3:00 बजे से पहले ही आती है 3:00 बजे के बाद जो है आपकी नींद टूटने लगती है गहरी नहीं होती है और कई तरीके की समस्याएं होती हैं जो अंतिम हमने काल बताया मनोहर काल जो हमने कहा उसी में ब्रह्म मुहूर्त का ये समय होता है तो अगर आपको अपने जीवन में कुछ भी बेहतर लेकर के आना है तो समय का बहुत बड़ा महत्व है ब्रह्म मुहूर्त इसीलिए कहा क्योंकि इसमें हम जो प्रैक्टिस करेंगे वो बहुत जल्दी रिजल्ट देंगी हमें और जल्दी
(1:00:03) हमें हमारे उस गंतव्य तक जोड़ें चाहे कोई विद्यार्थी है वो पढ़ाई भी करे उसमें भी काम करेंगी और जो योगिक हमारे मार्ग हैं उसमें तो अगर आप ध्यान करें योग करें कुछ भी करें तो आपके लिए वो बहुत ही अच्छा काम करेगी लेकिन मैं ये भी कहना चाहूंगा कि एकदम से अगर आपकी 7:00 बजे उठने की आदत है और एकदम से आप कहेंगे कल से 4:00 बजे उठेंगे तो वो भी ठीक नहीं होगा अपने आप को थोड़ा सा धीरे-धीरे बदलने की कोशिश करें जिससे कि आप वास्तव में बदल पाएं अगर आप दो दिन करें और आपको मुश्किल लगे जी बस फिर हो नहीं रहा है हमसे तो होता नहीं है तो अपने आपको को यह ना कहने दे आधा घंटा
(1:00:32) पहले करें फिर और फिर आधा घंटा पहले तो उठ रहे हैं लेकिन सोए भी फिर आधा घंटा पहले तो इस तरीके से करते-करते जब आप ब्रह्म मुहूर्त के समय में आ जाते हैं ब्रह्म मुहूर्त का समय अगर सामान्य तौर पर कहूं तो सूर्य उदय होने से 1 घंटे पहले का समय है तो इस समय पर अगर आप उठते हैं और आप अपने आप को एक सही स्टार्ट देते हैं दिन का तो मैं कहता हूं कि बड़े बदलाव फिर होते हैं और जो भी आप जैसे हम मेनिफेस्टेशन की भी बात बहुत सारे लोग करते हैं तो हम उसको अलग तरीके से देखते हैं लेकिन अगर आप उस समय पर मेनिफेस्ट भी करते हैं कुछ भी चीजें अपने जीवन में
(1:01:03) चाहते हैं और उस समय पर उन चीजों को लेकर के आते हैं जीवन में तो ज्यादा रिजल्ट मिलेगा तो यहां से शुरुआत की जा सकती है सबसे बड़ी हैबिट जो आपने बोला जो ट्रांसफॉर्मेशन लाइफ में क्रिएट कर सकती है वो है टाइम पर उठना और टाइम पर सोना निश्चित रूप से आर भी लेना अगर आप उठना रेगुलेट करते हैं तो बहुत सारी चीजें ऑलरेडी आपकी लाइफ में रेगुलेट हो जाती है जब हम लेट उठते हैं अलार्म के साथ उठते हैं तो फिर अगला टास्क के साथ माइंड में उठते हैं कि किसको फोन करना है कैसे ऑफिस जाना है कौन सी फाइल बनानी है क्या काम है वो उसके साथ आप उठते हैं तो नेचुरली आप
(1:01:33) अपनी लाइफ में अपने को समय देने वाली जो एक्टिविटीज है जिसमें हम योग कहे चाहे प्राणायाम कहे चाहे कुछ जर्नलिंग कहे जो कु किसी के लिए कुछ भी हो सकती है उसके लिए निश्चित रूप से समय नहीं निकल सकता तो समय पर उठना तो जो व्यूवर्स इसे देख रहे हैं अगर वो इतना भी यहां से ले पाए हमने बहुत सारे बिंदु दिए हैं बहुत सारे पॉइंट्स दिए हैं जो लोग उठाकर अपनी लाइफ में ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ जा सकते हैं गहरा परि जिसे हम कहते हैं द जर्नी विदन अपने अंतर मन में समझकर एक बहुत गहरा बदलाव ला सकते हैं जिससे वो अपनी ड्रीम लाइफ जो हर कोई डिजाइन करना चाहता है
(1:02:04) क्रिएट करना चाहता है जीना चाहता है उसको अनलॉक कर सकते हैं तो बहुत सारे तरीकों से आपने बताया कैसे कर सकते हैं और आई होप कोई भी एक तरीका अगर यहां से कुछ लोग भी ले पाए और मैं चाहूंगी कि जरूर वो कमेंट सेक्शन में लिखकर भी बताएं ताकि हमें भी पता चले कि जो हमय कोशिश कर रहे हैं जो कार्यक्रम कर रहे हैं आप भी बहुत लंबी यात्रा करके तकरीबन 300 250 300 किलोमीटर की यात्रा करके आज इस कन्वर्सेशन के लिए आ हैं मैं भी पिछले दो ढाई मही दो ढाई हफ्तों से बहुत ज्यादा फिजिकल तौर पर थोड़ा शारीरिक रूप से सही अवस्था में नहीं हूं एक अस्थमा का अटैक मुझे कुछ दिनों
(1:02:38) पहले हुआ और उसी के थ्रू अभी मैं मैं जा रही हूं फिर भी हमय कोशिश कर रहे हैं कि लोगों के लिए कुछ ऐसी चीजें ले आ पाए जो उनकी लाइफ में ट्रांसफॉर्मेशन क्रिएट करे तो आई होप लोग इस कोशिश को अगर समझ पाए पकड़ पाए तो जरूर वो हमें भी इनकरेज करेंगे कमेंट सेक्शन में लिखकर बताकर एक जाते जाते मतलब सब बातें तो बहुत है मेरे दिमाग में भी इतने सारे सवाल भी आ रहे हैं लेकिन क्योंकि हमें अब इस कन्वर्सेशन को कंक्लूजन की तरफ लेकर जाना है तो मैं अपने हर गेस्ट से एक सवाल जरूर पूछती हूं कि आपकी सफलता की परिभाषा क्या है आप अपनी लाइफ में जो भी कर रहे हैं हर
(1:03:14) किसी का एक अलग-अलग दृष्टिकोण है एक अलग-अलग पर्सपेक्टिव है लाइफ को लेकर और वो पर्सपेक्टिव अमूमन तौर पर उनके जो एक्सपीरियंस हैं उनसे बनता है आपके एक्सपीरियंस मेरे एक्सपीरियंस से व्यूअर के एक्सपीरियंस से बहुत अलग है तो मैं चाहती हूं कि आप अपनी सफलता की परिभाषा बताएं ताकि हम अपनी लाइफ से में अगर उस परिभाषा से कुछ सॉल्व कर पाए खुद के लिए अपनी लाइफ को किसी तरह से बेहतर तरीके से देख पाए एक बेटर पर्सपेक्टिव बिल्ड कर पाए तो बहुत अच्छा होगा बिल्कुल मैं ये कहूंगा कि हमारे सबका अपने हम अलग-अलग स्थानों पर जीवन में खड़े हुए होते हैं और हम जिस
(1:03:48) स्थान पर खड़े हुए होते हैं उस स्थान के आधार पर कुछ ऐसे कार्य होते हैं जो हमें करने ही होते हैं उन्हें हम कर्तव्य कहते हैं तो एक कर्तव्य जो है वह कहीं ना कहीं ईश्वर हमें प्रेरित करते हैं और हम उस मुकाम पर जाकर के एक जीवन के खड़े हो जाते हैं कि भाई आपको यह करना है उन चीजों को अगर हम पूरी ईमानदारी से 100% कर पा रहे हैं और करते हैं और उन कार्यों को करते हुए हमारे जीवन में हमारे मन में एक प्रतिशत भी प्रमाद नहीं आता है हर स्थिति में हम अपने आप को 100% वहां लगा देते हैं तो मुझे लगता है कि वो जीवन की सफलता है जैसे कि मेरे लिए मुझे परमात्मा ने एक
(1:04:28) बचपन से ही एक परिवेश दिया एक मार्ग दिखाया और मुझे यहां पर लाकर के खड़ा किया कहीं ना कहीं हमने स्वाध्याय किया गुरुजनों का संग मुझे प्राप्त हुआ और एक दुर्लभ योग मार्ग जो कि आज कलयुग में बड़ा ही मैं कहूंगा कि कठिन है कि इस मनोवृत्ति में व्यक्ति पहुंच सके कि हमें इस मार्ग का अनुगमन करना है तो इस मार्ग पर चलने के कारण और यहां तक पहुंचने के कारण मेरा एक कर्तव्य है समाज के लिए राष्ट्र के लिए मेरे अपने लोगों के लिए मेरे से जुड़े हुए एक-एक व्यक्ति के लिए और मुझे सुनने वाले एक-एक व्यक्ति के लिए मेरा एक कर्तव्य है जो चीजें मुझे उन तक डिलीवर करनी है जो
(1:05:02) चीजें उन्हें पता होनी चाहिए और जो मेरे लिए मुझे लगता है कि यही एक सेटिस्फैक्ट्रिली वो निर्बाध रूप से चलता रहे मुझे बहुत अच्छी लगी आपकी सफलता की परिभाषा क्योंकि कहीं ना कहीं आपकी सफलता की परिभाषा कर्म प्रधान है यह फल प्रधान नहीं है कि रिजल्ट क्या होगा रिजल्ट हम सभी पाना चाहते हैं करना चाहते हैं इसीलिए हम जो भी कर रहे हैं वो कर रहे हैं लेकिन उसमें जब आप कर्म पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं तो मुझे लगता है उससे बेहतर कोई तरीका नहीं हो
(1:05:46) सकता क्योंकि फिर एवरी डे यू आर एंजॉयिंग व्हाट यू आर डूइंग सो सो बहुत ही खूबसूरत तरीके ये भी कहा जाता है कि कर्म प्रधान विश्व करी राखा जो जस कर सफल चा कर्म प्रधान विश्व करि राखा यानी कि यहां पर हम कई बार कई लोग हस्त रेखा में पड़ जाते हैं कई बार लोग किस्मत में पड़ जाते हैं कई बार लोग हताश हो जाते हैं मेरी किस्मत में तो है ही नहीं भगवान कहते हैं कि मैंने ये जो संसार बनाया है ना कर्म की प्रधानता से बनाया है हो सकता है तो आज मेहनत करे और तुझे समुचित रिजल्ट ना मिले क्योंकि तेरे प्रारब्ध वैसे नहीं है अभी वो चीजें नहीं
(1:06:16) मिलनी है लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि तू एक कदम आगे अपने उस मुकाम तक उस लक्ष्य तक जो तूने निर्धारित किया है वहां तक ना पहुंचे थोड़ा आगे बढ़ जाएगा अगली बार और प्रयास कर हो सकता है तेरी बगल में कोई उसी मार्ग पर चल रहा हो जल्दी पहुंच जाए पहुंचेगा तू भी बस तू लगा रहे क्योंकि ये कर्म प्रधान है यहां पर अन्याय नहीं हो सकता है तो आगे पीछे हो सकता है हमें एक समय पर हम लग सकता है कि रिजल्ट नहीं आ रहे लेकिन हमें केवल देखना है कि हमारे अधीन क्या है हमारे अधीन कर्म विभाग है हमारे अधीन परिणाम विभाग है ही नहीं तो वो परमात्मा प
(1:06:47) छोड़े और अपना कार्य ठीक सा करें तो ये मुझे लगता है ठीक है वरुणा आनंद जी द जर्नी विदन पॉडकास्ट में आने के लिए अपना समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और मैं आशा करती हूं कि हम कभी फिर दोबारा मिलेंगे और एक वैल्यू एडिशन अपने व्यूवर्स के लिए क्रिएट कर पाएंगे निश्चित रूप से निश्चित रूप से हमारे व्यूवर्स के लिए हम जो भी ये काम कर रहे हैं बहुत ही शिद्दत से बहुत ही प्योरिटी से कर रहे हैं ताकि आपकी लाइफ तक कुछ बहुत इंपॉर्टेंट जो लर्निंग्स है वो बहुत सिंपलीफाइड प्रैक्टिकल तरीके से पहुंच पाए और आप अपनी बेस्ट लाइफ को डिजाइन कर पाएं अगर आज इस
(1:07:20) कन्वर्सेशन ने आपके लिए ऐसा कुछ किया है तो कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताइएगा अपने विचार शेयर कीजिए किस चीज ने आपको ज्यादा प्रभावित किया कोई अगर सवाल आपके रह गए हैं तो वह भी आप लिखकर बता सकते हैं इस कन्वर्सेशन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर कीजिए ताकि अ जिन लोगों को अ लाइफ में एक एंकर की जरूरत है एक एक किसी कहते हैं ना एक बिंदु जहां पर टिक कर वो अपनी लाइफ को और बेहतर तरीके से समझ पाए उसकी जरूरत है यह बातचीत ये कन्वर्सेशन उनके लिए उस एंकर का काम कर सकती है थैंक यू फॉर वाचिंग दिस एपिसोड एक बार फिर से रिमाइंड कराना चाहूंगी कि चैनल को
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