The Ancient Breath Practice That Could Change Your Health Forever | Kumbhak Explained
Author Name:Women Wellness First
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Transcript:
(00:00) व्हाट इफ आय टोल्ड यू दैट यू कुड रिवर्स योर थायरॉइड जस्ट बाय होल्डिंग योर ब्रेथ यू वोंट बिलीव [संगीत] इट। ही हेल्प थाउजेंड्स ऑफ पीपल रिवर्स पीसीओएस, थायरॉइड इम्बैलेंसेनेस, क्रोनिक कार्डियाक इश्यूज एंड [संगीत] इवन कैंसर। जस्ट बाय होल्डिंग देयर ब्रेथ। 100 साल में एक भी डायबिटिक ठीक नहीं हुआ। नॉट वर्किंग। डायबिटीज बढ़ रही है कम हो रही है दुनिया? ह्यूमन बॉडी। नो, ह्यूमन बॉडी वाज़ नॉट डिज़ फॉर कंसमशन ऑफ केमिकल्स। तो, पुटिंग केमिकल्स इनसाइड दिस बॉडी एंड होपिंग दैट विल बिकम हेल्दी। ओनली अ फूल कैन डू दैट थोड़ा ज्यादा बल लगाने के लिए एफर्ट देने लगाने के लिए बल
(00:37) बढ़ाने का फिर क्या नियम हुआ ब्रेथ होल्ड हम सो ब्रेथ होल्ड आपकी किसी भी एक्टिविटी को सही से करना या ज्यादा इंटेंसिटी के साथ में करने में सहायक है। यानी आपकी बल वृद्धि करता है ब्रथोड। आपका शरीर आपको ठीक कर सकता है। इस दुनिया में कोई ताकत आपको ठीक नहीं। एंपावर नहीं कर सकती। हेलो एवरीवन एंड वेलकम बैक टू द पॉडकास्ट। टुडे आई हैव समवन वेरी स्पेशल विद मी। समवन हुज वर्क आई हैव एक्सपीरियंस्ड फर्स्ट हैंड एंड ऑनेस्टली इट लेफ्ट मी अमेज्ड। आई एम टॉकिंग अबाउट स्वामी राजविभु। अ कुंभक स्पेशलिस्ट। हुज अप्रोच टू हिज़ एंशियंट प्रैक्टिस इज अनलाइक
(01:23) एनीथिंग आई हैव कम अक्रोस इन मेनी इयर्स ऑफ़ वर्किंग इन दिस स्पेस। व्हाट इफ आय टोल्ड यू दैट दैट दैट दैट दैट दैट दै यू कुड रिवर्स योर थायरॉइड जस्ट बाय होल्डिंग योर ब्रेथ। यू वोंट बिलीव इट। आई नो इवन आई डिडन्ट। बट दिस इज एक्जेक्टली व्हाट माई गेस्ट टुडे स्पेशलाइजेस इन। कुंभक इज़ एन एंशिएंट टेक्निक। नॉट वेरी मेन स्ट्रीम। नॉट समथिंग यू वुड फाइंड इन एनी योगा स्टूडियो। एंड येट इन द राइट हैंड्स इट हैज़ अ पावर टू डू व्हाट मॉडर्न मेडिसिन ऑफन कैन नोट। रिवर्स डिजीज एट इट्स रूट। ही हैज़ हेल्प थाउजेंड्स ऑफ पीपल रिवर्स पीसीओएस, थायरॉइड इम्बैलेंसेस, क्रोनिक
(01:55) कार्डियाक इश्यूज एंड इवन कैंसर। जस्ट बाय होल्डिंग देयर ब्रेथ। सो फ्रेंड, होल्ड योर ब्रेथ। टुडे वी विल एक्सप्लोर व्हाट कुंभक रियली इज एंड व्हाई आई बिलीव एवरीवन नीड्स टू नो अबाउट दिस। स्वामी जी वेरी वेरीरी ऑनर्ड टू हैव यू ऑन आवर पॉडकास्ट। थैंक यू फॉर कमिंग। आई एम वेरी वेरीरी ऑनर्ड। थैंक यू फॉर इनवाइटिंग मी। सो आज तो मेरे जितने भी क्वेश्चंस हैं वो सारे आपसे मैं पूछूंगी जो इतने सारे मेरे दिमाग में क्वेश्चंस घूम रहे हैं। बिकॉज़ आई हैव बीन इनू योगा प्राणायाम फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम। एंड देन थ्रू वन ऑफ द रील्स आई केम अक्रॉस योर स्टफ एंड देन आई वास
(02:36) वेरी एक्साइटेड। मैंने देखती गई। मुझे और समझ में आता जाए। मुझे लगा ये तो बहुत अलग चीज है जो मैंने अभी तक कभी नहीं देखी है। देन आई मीन मेरे को पर्सनल कोई हेल्थ इशूज़ ऐसे नहीं है। फिर भी मैंने कहा एक कोर्स में एनरोल कर लेती हूं। सो मैंने थायरॉइड कोर्स में आपके एनरोल किया था कुछ समय पहले एंड देन द होल वर्ल्ड ऑफ़ कुंभक ओपन अप फॉर मी एंड आई वास लाइक दिस इज़ मैजिक। दिस इज़ समथिंग दैट नीड्स टू कम आउट टू एवरीवन अराउंड बिकॉज़ इट सो सिंपल। येट सो प्रोफाउंड। इट कैन गिव यू रिमारकेबल रिजल्ट्स। सो और मैंने एक थोड़ा सा थोड़ी सी जहमत करी। मैंने मैसेज कर दिया कि शायद
(03:13) मैं आपको इनवाइट करूं और आपने हां बोला तो आई एम वेरी वेरीरी ऑनर्ड दैट यू सेड यस एंड यू आर हियर टुडे। आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और आप लोगों की आंखें खुलनी चाहिए। यू शुड बी एबल टू सी द वर्ल्ड थ्रू अ राइट काइंड ऑफ़ अ लेंस। जी। इसमें मैं जितना भी करूं उतना कम होगा। सो आई एम जस्ट ट्राइंग टू रीच आउट टू एवरीवन कि शायद इस तरफ हम देख नहीं रहे एंड व्हाटएवर वी आर डूइंग एट दिस पॉइंट ऑफ़ टाइम वी आर गोइंग डाउनवर्ड्स ओनली इन टर्म्स ऑफ़ हेल्थ फिजिकल मेंटल नॉट ओनली जस्ट हेल्थ बट योर रिलेशनशिप विद द एक्सटर्नल वर्ल्ड
(03:57) यस आपके और परिवार के साथ में समाज के साथ में ये रिलेशनशिप बिल्कुल खराब होता जा रहा है। दैट मींस यू आर लुकिंग इन अ रॉन्ग डायरेक्शन। तो सही दिशा क्या है? यही एक पर्पस है मेरी लाइफ का। अगर मैं देख पा रहा हूं वो दिशा तो सभी को दिखा सकूं। जी जी। वही हमारा नेवर है कि हमारे पडकास्ट के थ्रू वी कैन रीच आउट टू मोर पीपल। मोर पीपल कैन कम टू नो अबाउट कुंभक व्हिच इज़ आवर एंशिएंट टेक्नोलॉजी। जी आई वुड से जो कि आपकी लाइफ को बहुत प्रोफाउंडिंगली चेंज कर सकती है। कैंसर, थायरॉइड डिजीजेस और मैंने आपके
(04:42) इतने सारे टेस्टिमोनियल्स देखे हैं वेबसाइट पे जिसमें लोगों ने कहा कि चीजें रिवर्स हुई हैं। जो कि हम आजकल रिवर्सल की तो कोई बात ही नहीं करता कि चीजें रिवर्स हो सकती हैं या चीजें क्योर हो सकती हैं। पीसीओएस हो गया, लाइफ लॉन्ग हो गया। डायबिटीज हो गई, लाइफ लॉन्ग हो गई। थायरॉइड है तो गोली खानी ही खानी है। सो नोबडी इस टॉकिंग अबाउट रिवर्सल व्हिच इज़ व्हाट द फर्स्ट थिंग आई हर्ड ऑन योर वेबसाइट एंड ऑन योर चैनल कि चीजें रिवर्स भी हो सकती हैं। एंड दैट वाज़ समथिंग व्हिच वाज़ वेरी वेरी अमेजिंग। एंड सो आई थॉट वी विल एक्सप्लोर दैट कि क्या डिजीज का
(05:12) रिवर्सल पॉसिबल है। सबसे पहले तो फिर हमको डिजीज को डिफाइन करना होगा। तो हमारी जो करंट डेफिनेशंस हैं वह पूरी तरीके से डिजीज को डिफाइन नहीं कर पाते। ओनली वह डिजीज के इकोसिस्टम के एक हिस्से को केवल डिफाइन करते हैं। और जब हम बहुत सारे ऐसे डेफिनेशन को इकट्ठा करेंगे इट डजंट मीन दैट वी नो द प्रॉब्लम। जैसे डायबिटीज क्यों है? ब्लड में ग्लूकोस लेवल ज्यादा है। और क्यों ज्यादा है? क्योंकि इंसुलिन प्रॉपर्ली काम नहीं कर रहा। हम
(05:54) या इंसुलिन लिवर में काम करता है तो लिवर कमजोर होगा। हम और क्या हो सकता है? आपके पनक्रियाज कमजोर हो सकते हैं। और क्या हो सकता है? जो इंसुलिन रिलीजिंग हॉर्मोन जो पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलता है वो नहीं निकल पा रहा। यानी पिट्यूटरी इनसफिशिएंसी हो सकती है। और क्या हो सकता है? पिट्यूटरी ग्लैंड को ट्रिगर नहीं मिल रहा। तो वो एक और दूसरा हॉर्मोन है उसे लेप्टिन कहते हैं। तो लेप्टिन मिस सिग्नलिंग भी हो सकती है डायबिटीज। अच्छा अभी भी करंट डेफिनेशन में जो हम देख रहे हैं उसमें ऐसे बहुत सारे चीजें हैं। इंसुलिन अमाइलीन तो हम देख नहीं रहे
(06:30) क्योंकि अमाइलीन का मैन्युफैक्चरिंग नहीं हो सकता तो केवल इंसुलिन मैन्युफैक्चर हो सकता है तो वो दे अमाइलीन की वजह से भी डायबिटीज हो सकता है। हम ग्रेलिन एक और हॉर्मोन है उसकी वजह से भी डायबिटीज हो सकता है। नाउ है क्या डायबिटीज? इतनी सारी चीजें हमने बता दी। मगर व्हाट इज डायबिटीज? हम हमने कोई भी चीज ऐसी नहीं बताई जिसको कि हम खुद ठीक कर सकते हैं। हम अगर कुछ कमी हमें लगे तो बाहर से कंपनसेेट कर लो। सो यू गो टू अ डॉक्टर। डॉक्टर कहता है टेस्ट करो। पता चला इंसुलिन का प्रॉब्लम है तो इंसुलिन डाल लो। किसी और चीज का B12 का प्रॉब्लम है B12 डाल लो। दैट मींस यू
(07:10) वांट टू मैनेज योरसेल्फ फ्रॉम आउटसाइड। आप अपने आप को बाहर से मैनेज करके एमावर नहीं हो सकते। फॉर मिलियंस ऑफ इयर्स हमको कभी बाहर से सपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ी। एंड टुडे वी हैव कम टू असिस्टेड लिविंग। जो कुछ करना है शुगर डाउन करना है तो गोली खाओ। ब्लड प्रेशर कम करना है तो गोली खाओ। आपका शरीर तो कुछ नहीं कर पा रहा। हम और फिर आप असिस्टेड लिविंग पे आ जाएंगे तो जनरेशनल कमजोरी आ जाएगी। जेनेटिक कमजोरी आ जाएगी। बिल्कुल। क्योंकि व्हीलचेयर पर बैठ के पांव मजबूत नहीं होते। आप स्ट्रांग नहीं हो जाएंगे अगर आप बाहर से अपने मैनेज करें अपने आपको। इफ यू आर
(07:53) एबल टू मैनेज फ्रॉम विद इन बाय योरसेल्फ देन योर लाइफ विल इंप्रूव। तभी आपका डिजीज रिवर्सल होगा। डिजीज क्या है? आप का कोई ऑर्गन या कोई फंक्शन नहीं हो पा रहा ठीक से। हम ऑर्गन काम नहीं कर पा रहा। ऑर्गन की स्ट्रेंथ कमजोर हो गई। वह ठीक से काम नहीं कर पा रहा। कोई फंक्शन मेटाबॉलिज्म होता है तो वो ठीक नहीं है। तो कोई ना कोई फंक्शनल एबिलिटी के कमजोर हो जाने को या खराब हो जाने को, डीविएट हो जाने को हम डिजीज बोलेंगे। ठीक है? ठीक है? तो इसका मतलब कोई ना कोई स्ट्रेंथ फैक्टर
(08:40) बल आपके शरीर का जो शायद हार्ट को बीट कराता है। हार्ट की स्ट्रेंथ है जो किडनी की स्ट्रेंथ है जो लिवर की स्ट्रेंथ है जो वो कोई बल कोई स्ट्रेंथ आपके शरीर का कमजोर हो गया। करेक्ट। तो डिजीज को अगर हम बल के साथ जोड़ दें, स्ट्रेंथ फैक्टर के साथ में जोड़ दें तो अगला स्टेप क्या होगा? उसको क्या इंप्रूव किया जा सकता है? हम क्या आपके फंडामेंटल स्ट्रेंथ फंडामेंटल बल जो शरीर के हैं क्या उसको इंप्रूव किया जा सकता है? तो आपसे मैं अगर सवाल करूं क्या फूड से आपको स्ट्रेंथ मिलता है? तो आप क्या बोलेंगे? मिलता है।
(09:26) मिलता है। सभी एग्री करेंगे। मगर आपके एक्सपीरियंस में यह सच नहीं है। यानी आप अपने एक्सपीरियंस को भी झूठ ला सकते हैं। अगर आपको कोई इंफॉर्मेशन दे दी जाए। हम वो इंफॉर्मेशन गलत ही क्यों ना हो लेकिन उसको हम मानने पे मजबूर होते हैं। दैट इज व्हाट एजुकेशन इज डूइंग टू अस। हम वो हमको ऐसी चीजें मानने पे मजबूर कर रहा है क्योंकि हमको उसमें वो पढ़ा दिया गया है। व्हिच इज नॉट वर्किंग। 100 साल में एक भी डायबिटिक ठीक नहीं हुआ। नॉट वर्किंग। डायबिटीज बढ़ रही है या कम हो रही है दुनिया में? बहुत बढ़ रही है। इनफर्टिलिटी बताइए। बहुत बढ़ रही है।
(10:01) बढ़ रही है ना? तो हमको जो भी पढ़ाया गया या जो हम बोल रहे हैं वो सब गलत है। हम क्या हम ये इस बात को मान सकते हैं? इफ वी आर नॉट शोइंग रिजल्ट। तो पहले तो डेफिनेशन भी ऐसा होना चाहिए जिससे कि हम उसको ठीक कर सकें। और दूसरे हमारे रॉन्ग आइडियाज को खत्म करना है। फूड से स्ट्रेंथ नहीं मिलता। अगर मिलता तो 80 साल का इंसान 16 साल के बच्चे से कहीं ज्यादा ताकतवर होता। हम क्योंकि उसने 80 साल फूड लिया। 80 इयर्स फूड, 16 इयर्स फूड या 20 इयर्स फूड। तो 80 साल का इंसान कमजोर कैसे है? फूड से हमको स्ट्रेंथ तो मिल नहीं रहा। फूड से हमारी स्ट्रेंथ कमजोर हो रही है।
(10:45) मगर हम बहुत जल्दी मान लेंगे इस बात को। फूड से स्ट्रेंथ मिलता है और आपको कोई डाइट प्लान बेच देगा। तो आप जब कोई चीज चाहे वो मार्केटिंग कर रहे हैं उसकी चाहे वो हम ले रहे हैं आपका दिमाग तो खुला होना चाहिए। गुड फूड इज गुड। या बट इट डजंट मीट इट विल क्योर यू। इट विल इंप्रूव योर स्ट्रेंथ। नहीं। आपके स्ट्रेंथ के ऊपर फूड डाइजेस्ट होता। अगर आपका स्ट्रेंथ ज्यादा अगर ज्यादा खाएं तो ज्यादा स्ट्रेंथ मिलना चाहिए। हम ऐसा होता है क्या? नहीं। ज्यादा खाएं तो आप वीक फील करते हैं। जी। तो ज्यादा भोजन करने से ज्यादा स्ट्रेंथ हमको नहीं मिलता।
(11:31) जी। सो आप ये कह रहे हैं कि अगर आपकी बॉडी में कोई बीमारी है इसका मतलब आपकी स्ट्रेंथ कमजोर हो रही है। हां। तो कोई ना कोई स्ट्रेंथ स्ट्रेंथ बहुत सारी कैटेगरीज की हो सकती है। ओके? फंडामेंटली 84 कैटेगरीज में इसको हम डिवाइड कर सकते हैं। आज के टाइम के हिसाब से तो वो उसमें से कोई ना कोई फैक्टर कोई ना कोई स्ट्रेंथ कमजोर हुआ। अब ये बल कहते हैं इसको। इसको बल कहा जाता है संस्कृत में। तो बल कैसे बढ़ेगा? फूड से तो नहीं बढ़ रहा। हम मेडिसिन आपका फंडामेंटल बल अगर बढ़ाता तो मेडिसिन आपको हेल्दी कर देता। तो जस्ट अ कंपैरिजन 100 इयर्स बैक नाउ 100 साल की
(12:14) मेडिसिन का जमाना हमने देखा तो इतने में बीमारियां बढ़ी या कम हुई ह्यूमन फंडामेंटल स्ट्रेंथ बढ़ा या कम कम हो गया। हम तो कम करने में एक मेजर फैक्टर है ऑल द केमिकल मेडिसिन। एक बात और भी मैं इसको समझाता हूं इस तरीके से कि क्या आप एक पेट्रोल की गाड़ी में डीजल डालेंगे? पेट्रोल फ्यूल जो लेता है क्या उसमें डीजल डालेंगे? नहीं डालेंगे। सो वर यू डिज़ फॉर कंजम्पशन ऑफ केमिकल्स? ह्यूमन बॉडी? नो ह्यूमन बॉडी वाज़ नॉट डिजाइन फॉर कंजम्पशन ऑफ केमिकल्स। तो पुटिंग केमिकल्स इनसाइड दिस बॉडी एंड होपिंग दैट विल बिकम हेल्दी। ओनली अ फूल कैन डू दैट।
(13:01) तो यह ना सोें कि जिसे आप साइंस कहते हैं उसमें साइंस है ही। साइंस इज अ मार्केटिंग गिमिक इन टुडेज़ टाइम। एंड इफ वी कांट सी द बिगर एस्पेक्ट ऑफ़ हाउ दैट दिस लाइफ सस्टेंस हम तब तक हम जो भी करेंगे वो गलत हो सकता है। एंड वी हैव सीन दिस इन लास्ट 100 इयर्स। 100 25 इयर्स मैक्सिमम। तो हमने एक दवाई बनाई, एक दवाई से दो और उसके हिसाब से दवाइयां बढ़ गई। मगर बीमारी भी बढ़ गई। जी। ऐसा नहीं कि बीमारी कम हो गई। तो व्हेन वी हैव इन्वेस्टेड इन मेडिसिन वी आल्सो इन्वेस्टेड इन डिजीज। हम यानी जहां आप इन्वेस्ट इन्वेस्टमेंट करते हैं वो बढ़ता है। लक्ष्मी का नियम है। तो
(13:46) आपने दवाइयों पे इन्वेस्टमेंट किया, दवाइयां बढ़ गई और उसके साथ-साथ डिजीज बढ़ गई। यह हमको सोचना पड़ेगा कहीं ना कहीं। तो पहली बात हमको तो उसको डिफाइन ही इस तरीके से करना पड़ेगा कि उस डेफिनेशन के अंदर ही देयर इज अ स्यूशन। तो जब हम कहते हैं बल कोई कमजोर हो गया तो उसको बढ़ाने का नियम क्या है? है हम तो अगर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में भी देखेंगे तो आप भी जब भी आपको ज्यादा एफर्ट लगाना पड़ता है हम सपोज यू आर पुलिंग हम है ना उंगलियों उंगलियों को फंसा के खींचे नॉर्मली आपको आभास नहीं होगा इस बात का मगर बहुत ज्यादा अगर जोर लगाएंगे तो पता
(14:25) चलेगा अरे आपको सांस रोकना पड़ता है हम या आप पुश करके देखें ज्यादा जोर से पुश करेंगे तो आपको सांस रोकनी पड़ेगी या वेट उठा के देखें वेट वेट थोड़ा ज्यादा उठाएंगे तो आपको सांस रोकनी पड़ेगी। आपको जंप करना है तो सांस रोकना पड़ेगा। आपको फोकस करना है तो सांस रोकना पड़ेगा। आपको याद करना है तो सांस रोकना पड़ेगा। ओके? आपको कुछ भी कीजिए। वॉकिंग, जॉगिंग, योगा, जुम्बा, एरोबिक्स, डांसिंग, सिंगिंग कुछ भी करते हैं। आप एक वेरिएबल प्रपोर्शन में ब्रेथ होल्ड करते हैं। थोड़ा ज्यादा बल लगाने के लिए, एफर्ट देने लगाने के लिए। बल बढ़ाने का फिर क्या नियम
(15:11) हुआ? ब्रेथ होल्ड। हम सो ब्रेथ होल्ड आपकी किसी भी एक्टिविटी को सही से करना या ज्यादा इंटेंसिटी के साथ में करने में सहायक है। यानी आपकी बल वृद्धि करता है ब्रेथ होल्ड। ब्रेथ होल्ड से आपकी स्ट्रेंथ बढ़ती है। तो इसे कुंभक कहते हैं इन अ वेरी वेरी जेनेरिक एंड सिंपल सेंस। बिल्कुल। ठीक है? ह्यूमन को लेके। लेकिन क्या नेचर में कुंभक होता है? हां जी। तो कुंभक को अब मैं थोड़ा अलग तरीके से डिफाइन करूं। एग्रीगेशन, कंडेंसेशन, इकट्ठापना, प्रेशर जिसको हम कहते हैं। प्रेशर से ही फंक्शन होता है। डायनेमिक
(15:58) वर्ल्ड है ये। कार्य क्रियात्मक दुनिया है। इसमें क्रिया जो है वो प्रेशर से होती है। यानी कोई भी एक्टिविटी प्रेशर फॉर्मेशन के बाद होता है। चाहे बादल को इधर से उधर जाने हो। करेक्ट। चाहे टेंपरेचर बढ़ना है तो प्रेशर बढ़ेगा तभी टेंपरेचर बढ़ेगा। चाहे पेड़ों में पानी नीचे से ऊपर जाना हो फ्रॉम हाई प्रेशर टू लो प्रेशर। प्रेशर ग्रेडियंट में ही काम होता है। नेचर में भी ऐसा ही काम होता है। यूनिवर्स में भी एक ऐसे ही काम होता है जिसको ब्रह्म अंड अंडा हम कह रहे हैं। ब्रह्म का ब्रह्मांड। ब्रह्मांड तो वो अंडाकार है, एलिप्सोइड है क्योंकि
(16:35) उसी के अंदर प्रेशर फॉर्मेशन हो सकता है। तो ये दुनिया पैदा होती है कुंभक से। समय का बनना। टाइम का मतलब वो होता है चेंज। हम टाइम इज इक्वल टू चेंज। हम जिस हिसाब से चेंज होगा उस हिसाब से टाइम कैलकुलेशन हो सकती है। टाइम वेरीरी करता है। टाइम का मतलब ही चेंज होता है और चेंज का मतलब एक्टिविटी होती है। वो कुंभक से होती है। तो टाइम का फॉर्मेशन भी कुंभक से ही होता है। स्पेस का फॉर्मेशन जिसको हम स्पेस कहते हैं जहां पे क्रिएशन आती है वो भी कुंभक से होता है। और एलिप्सोइड फॉर्मेशन हमेशा हुआ लिंगाकार। जी। तो भारतीय परंपराओं में हमने हमेशा
(17:18) शिवलिंग उसको बोला। शिव तत्व इज द इनफाइनाइट एंटिटी। उसको फिनिटी में लाने के लिए, फाइनाइटनेस में लाने के लिए लिंगाकार शेप यूज़ होता है। द एंट्री पॉइंट ऑफ़ लाइफ एंड द एग्जिट पॉइंट ऑफ़ लाइफ इज़ लिंगाकारा। ओके? एलिप्सोइड। बट द फॉर्मेशन उसका क्रियात्मक पक्ष कुंभक है। गॉट इट? तो कुंभक के बगैर लाइफ नहीं हो सकती, एक्टिविटी नहीं हो सकती। और एक्टिविटी में अगर कमजोरी आ गई तो उसी को डिजीज कहते हैं। तो डिजीज अगर आपको ठीक करना बल वृद्धि करनी है। कोई चीज जो ठीक से एक्टिविटी नहीं कर पा रही करवाना है तो कुंभक करना ही पड़ेगा। ओके।
(18:02) आपका शरीर आपको ठीक कर सकता है। इस दुनिया में कोई ताकत आपको ठीक नहीं। एंपावर नहीं कर सकती। भगवान भी आ जाएं तो भी नहीं करेंगे। स्टैंप पेपर पे लिख लो। बिकॉज़ ही हैज़ डन एवरीथिंग फॉर लाइफ। नाउ इट्स योर टाइम। आप उसको कैसे जीते हैं, यह आपके ऊपर डिपेंड करता है। करेक्ट? तो डिजीज रिवर्सल दवाई से नहीं हो सकता। एनी काइंड ऑफ़ अ मेडिसिन, इफ योर बॉडी हैज़ दैट काइंड ऑफ़ अ स्ट्रेंथ, जी। मेडिसिन कैन हेल्प हम बी केमिकल मेडिसिन और नेचुरल मेडिसिन। फ़ूड से आप ताकतवर नहीं बनते। फ़ूड गिव्स यू सर्टेन अमाउंट ऑफ एनर्जी बट द एनर्जी, अमाउंट ऑफ एनर्जी डिपेंड्स ऑन द स्ट्रेंथ।
(18:41) अगेन वंस अगेन। गॉट इट। ठीक है? यू ब्रेकिंग इट डाउन? हाउ? यस यस आप कितना भोजन यूज़ कर पा रहे हैं वो आपकी बॉडी के स्ट्रेंथ के ऊपर वो आपके मेटाबॉलिक स्ट्रेंथ के ऊपर डिपेंड है। करेक्ट करेक्ट तो स्ट्रेंथ बढ़ाने का एक ही नियम है दैट इज कुंभक हम वो आज के समय पे पूरे पृथ्वी के लोगों को इस वक्त में इमरजेंसी में जरूरत है उसकी। जी बिल्कुल क्योंकि मैं इस बात से ये समझ पा रही हूं कि जैसे हम एक जैसे हम छोटे होते हैं तो ऑब्वियसली अभी सिर्फ बोर्न ही हुए हैं तो हमारी हालत इतनी खराब हुई नहीं है तो कुंभक हमारा स्ट्रांग होगा उस टाइम और तो आपका
(19:22) मेटाबॉलिज्म बहुत फास्ट होता है। जो खाया पचा लिया भाग लिए इधर चले गए उधर चले गए थकान होती ही नहीं है। एज वी स्टार्ट एजिंग तो खाने के ब्रेकडाउन भी थोड़ी मुश्किल हो जाती है। अगर थायरॉइड हो गया तो आप खाने को ब्रेकडाउन नहीं कर पा रहे हो। आपका मेटाबॉलिज्म स्लो होता चला जाता है और आपका वेट धीरे धीरे धीरे बढ़ने लग जाता है। सो इज दिस द सेम थिंग दैट यू आर ट्राइंग टू एक्सप्लेन? हां आपने बहुत अच्छे से इसको दिखाया। मैं इसमें थोड़ा सा कुछ और ऐड करना चाहता हूं। व्हेन यू आर होल्डिंग योर प्राण हम लाइफ फोर्स हम अगर आप होल्ड करते हैं जब आप पैदा होते
(19:59) हैं उसमें होल्डिंग फैक्टर ज्यादा होता है। ओके। यू आर एबल टू होल्ड योर लाइफ फोर्स प्रॉपर्ली एंड यू आर एबल टू यूज़ इट आल्सो। एक बच्चे को देखो वो शांत नहीं बैठता। एक्टिविटी एक्टिव एक्टिविटी आप परेशान हो जाएंगे उससे। यानी एक तो उसके अंदर वो होल्डिंग फैक्टर अभी ताजा ही है। ज्यादा है। और उसको यूज करके वो ज्यादा एफर्ट लगा रहा है और उसको और ज्यादा बढ़ा रहा है। हां। करेक्ट। तो वो एक्चुअली जब एफर्ट लगाता है तो वो कुंभवक कर रहा है। गॉट इट। वो जंप कर रहा है बच्चा। वो कुछ ना कुछ खींचने की, काटने की, पुश करने की कोशिश करता रहता है। चलने की कोशिश करता है, उठ
(20:40) रहा है, गिर रहा है। जितनी एक्टिविटी वो करता है। और एक यंगस्टर जैसे वो टीम्स में आ जाए तो उसकी एक्टिविटी आप देखेंगे और बढ़ जाती है। हम तो वो एक्टिविटी कर कैसे रहा है? कुंभक के जरिए कर रहा है और उससे वो अपने शरीर को भी ग्रो कर पा रहा है। हम वो कुंभक से ही शरीर भी ग्रो कर रहा है और हम वो पार्ट नहीं देख पा रहे क्योंकि वो सेटल है। जी वो सेटल है। जैसे आप जिम में जाते हैं। आप एक हाथ से वेट उठाएं। हां। है ना? कोई भी एक डंबल करें, पुल अप करें और एक महीने तक करें। आप वो हाथ में ग्रोथ ज्यादा हो जाएगी। ऐसा देखेंगे। मगर आप वेट कैसे उठाते हैं?
(21:17) सांस पकड़ के। सांस पकड़ के वेट उठाते हैं, सांस रोक के वेट उठाते हैं। तो कुंभक से ही वो डेवलप हो रहा है। मसल डेवलपमेंट होता है। वाओ। नाउ दिस इज़ इनक्रेडिबल। हां। सो द मेन की टू योर लाइफ इज कुंभक। एक्चुअली हम व्हिच इज सो सल वी डोंट वी डोंट इवन ऑब्जर्व दैट। या या मतलब मैं आपका जब कुंभव का प्रोग्राम मैंने अटेंड किया उसके बाद व्हेनएवर आई मेरी बेटी को मैं सॉक्स पहनाती हूं। मैं हर बार यह याद आता है मुझे जब आपकी बात याद आती है। क्योंकि जब मैं उसको सॉक्स पहनाती हूं एव्री टाइम आई एम होल्डिंग माय ब्रेथ बिकॉज़ इट टेक्स एन एफर्ट टू पुट द सॉक्स अप तो शूज पहनाने
(21:58) में जितनी बार मैं उसको शूज पहनाती हूं उतनी बार मुझे कुंभग याद आता है कि आई कन नॉट डू दिस इफ आई डोंट होल्ड माई ब्रेथ। एंड आई थिंक इज दैट द रिलेशनशिप व्हाई स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पे इतना ध्यान दिया जा रहा है आजकल बिकॉज़ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इज़ गिविंग गुड रिजल्ट्स। इज इट बिकॉज़ देयर कुंभक इस इम्प्रूविंग? यस, कुंभक दे डोंट इवन सी व्हाट इज एक्चुअली इंप्रूविंग द स्ट्रेंथ। वो जिम में जा रहे हैं, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रहे हैं बट वो कुंभक कर रहे हैं। योगा करने से जिसको फायदा हो रहा है वो बेसिकली कुंभक कर रहा है। तब फायदा हो रहा है।
(22:26) एक्सरसाइज करने से जिसको फायदा हो रहा है तो वो कुंभक कर रहा है। बट देन आप देखो ना वहां पे कुंभक पे नजर नहीं है। यानी कुंभक को ऐसे हमने डिजाइन नहीं किया ताकि वो एक पर्टिकुलर प्रॉब्लम को एड्रेस कर सके। तो हम अनजाने में कुंभक कर रहे हैं। जब हम योगा कर रहे हैं तो हम अनजाने में कुंभक कर रहे हैं। योगा इज नॉट डिजाइन फॉर हेल्थ। योगा को हेल्थ के लिए कभी ये तो यूएस ने इसको हेल्थ सेंट्रिक बना दिया। जी। योगा इज अ जस्ट लाइक अ स्पेसक्राफ्ट। व्हिच कैन टेक यू इन अदर डायमेंशंस। बट उसको हम एक मोबाइक की तरह मोटर बाइक की तरह यूज करने लग गए कि इसको इससे हेल्थ
(23:08) क्रिएट करना है। एंड द ओवरऑल अंब्रेला ऑफ़ योगा हैज़ कंफेड टू हेल्थ नाउ जी व्हिच इज समथिंग रोंग दैट द होल ह्यूमैनिटी हैज़ डन। आपने बहुत हाईटेक चीज को लो टेक बना दिया और उसी में खुश हो रहे हैं क्योंकि उससे इतने रिजल्ट्स आ रहे हैं। उससे रिजल्ट्स जो आ रहे हैं उससे उसकी डायरेक्शन तो नहीं चेंज हो रही। आपको मालूम होना चाहिए इफ समबडी इज़ डूइंग योगा 50 इयर्स डाउन द लाइन उसका [नाक से की जाने वाली आवाज़] लाइफ एनर्जी का डायरेक्शन क्या हो जाएगा? 20 इयर्स डाउन द लाइन वि डायरेक्शन द लाइफ एनर्जी टेक्स और वो डायरेक्शन हमको मालूम होना चाहिए
(23:52) पहले हम कि अगर आप ये प्रैक्टिस कर रहे हैं तो इससे अल्टीमेटली कहां पहुंचेंगे ये तो मालूम होना चाहिए ना अगर आप वो नहीं बता रहे लोगों को तो गलत कर रहे हैं जी तो ये समझने के लिए कोई भी योगा की किताब उठा लीजिए हम देयर आर 20 योगा उपनिषद कोई भी एक उठा लो ऑनलाइन मिल जाएगा पढ़ो पतंजलि योगसूत्र घण संहिता शद दर्शन समुच्चक बहुत-बहुत किताबें हैं। हर किताब में मान लीजिए पतंजलि योग सूत्र को उठा लेते हैं। उन्होंने अष्टांग योग का नियम डाला। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान समाधि। जी। अल्टीमेटली क्या मिलेगा आपको? समाधि।
(24:32) समाधि। दैट्स द अल्टीमेट। दैट्स द अल्टीमेट। योगा फैक्ट्री का प्रोडक्ट क्या है? समाधि। जी। डू यू वांट इट? नोबडी इवन नोज़ व्हाट इज समाधि। आपको मालूम ही नहीं समाधि का टेस्ट कैसा होता है। मीठा होता है, खट्टा होता है, कैसा होता है? वी आर टॉकिंग समाधि। जी। बट इन टर्म्स ऑफ एक्सपीरियंस वी डोंट नो समाधि। वी आर टॉकिंग सो मेनी डिफरेंट वर्ड्स नाउ बिकॉज़ द बुक्स आर अवेलेबल ऑनलाइन एंड पीपल आर डिस्कसिंग ऑन दोज़ थिंग्स। हम मगर कैलिबर है क्या उस एस्पेक्ट को डिस्कस करने का सभी का? नहीं है। ज्यादातर लोगों का नहीं है। हम तो वो हमेशा रॉन्ग इंटरप्रिटेशन ही
(25:08) इस इकोसिस्टम में फैला रहे हैं। जी जो नॉलेज का इकोसिस्टम जिसे हम आज के टाइम पे सोशल मीडिया कह रहे हैं उसमें ज्यादातर चीजें गलत आ रही है। तो ये हमको जिम्मेदारी कभी ना कभी लेनी पड़ेगी। यही हमने जब यूएस में योगा पहुंच गया दे लिमिटेड इट टू हेल्थ। जी। बट क्या मगर क्या एक आप योगा करते हैं आपका डायरेक्शन किस तरफ में जाएगा और वो जाएगा ही जाएगा स्पिरिचुअलिटी की तरफ जाएगा आपको लेकर जाएगा स्पिरिचुअलिटी यानी संसार के विरुद्ध जाएगा ओके अल्टीमेटली आप या तो सच में स्पिरिचुअलिटी चाहते हैं हम तो आप उस लाइन पे आ जाएंगे या आप मेंटली डिरेंज हो जाएंगे
(25:50) ओके और ज्यादातर लोगों को स्पिरिचुअलिटी नहीं चाहिए उनको दे डोंट इवन नो कि वो क्या है वो टिक मार्क लगाने के लिए चाहिए। फैशन के लिए चाहिए कि आई एम डूइंग मेडिटेशन। मैंने टिक मार्क लगाया तो ताकि बाकी लोग आपको अच्छा समझे। हम इसके अलावा कुछ भी नहीं है। हम तो योगा को लोग अपना रहे हैं हेल्थ के लिए। मगर योगा डायरेक्शन उनकी चेंज कर सकता है। हम मैं ये भी आपको बोलूंगा। हैविंग सेड इट मैं ये भी बोलूंगा। ज्यादातर लोग योगा जानते नहीं हैं। ज्यादातर लोग योगा नहीं कर रहे हैं। दे आर डूइंग सम स्ट्रेचिंग। सम एक्सरसाइज सम्स या नहीं तो उनकी लाइफ एक दूसरे ही दिशा बहुत
(26:34) फास्ट ले लेगी। अच्छा है कि योगा लोगों को मालूम ही नहीं है। अच्छा है कि दुनिया में योगी बहुत कम है। अदरवाइज कभी डिस्टोर्ट हो जाता है। ओके? बिकॉज़ हम फॉर्म में कर रहे हैं तो इतना नुकसान तो इसको और आसानी से समझाने के लिए मैं बताता हूं। आपको पृथ्वी पे जन्म लेना है तो क्या करना पड़ेगा? आपकी जो एनर्जी है उसको अर्थ पे इस्टैब्लिश होना पड़ेगा। करेक्ट? तो वो इस्टैब्लिश आपके शरीर के थ्रू होता है। शरीर शरीर में एक जगह है जिसे हम मूलाधार कह रहे हैं। द सेंटर ऑफ मास ऑफ योर बॉडी एंड द सेंटर ऑफ़ एनर्जी इकोसिस्टम ऑफ योर बॉडी इज़ मूलाधारा।
(27:13) करेक्ट। वो मूलाधार पे आपको एनर्जी को रोकना पड़ेगा। अटकाना पड़ेगा। है ना? इसको हम समझने के लिए कह सकते हैं ऊर्जा को नीचे अधोगमन करना होगा। करेक्ट। ठीक है ना? अब जरा अ इसको हम एक और शब्द से बोलते हैं जो कि मैं इसको एक्सप्लोर करने के तरफ मैं जा रहा हूं। काया अवरोहन। ओके। कायाकल्प नाम सुना होगा आपने। तो काया अवरोहण बेसिकली एनर्जी का डायरेक्शन होता है जो काया कल्प कर सकता है। ओके ठीक है ना? तो काया अवरोहण लेकिन मुक्ति के लिए मोक्ष व्हेन वी से समाधि व्हाट आर द सिनोनिम ऑफ समाधि मुक्ति मोक्ष एनलाइटनमेंट सेल्फ रियलाइजेशन निर्वाण
(28:00) कैवल्य ये सब सिनोनिम है। उसके लिए ऊर्जा को ऊपर उठाना होता है। करेक्ट। उध गमन करना होता है। आरोहन करना होता है। अवरोहन नहीं आरोहन करना होता है। द होल मेथोडोलॉजी डिज़ फॉर अपलिफ्टिंग द एनर्जी एंड फ्रीिंग यू फ्रॉम द प्रोसेस ऑफ़ लाइफ। जीवन से निकालने का तरीका है योगा। जीवन में स्थापित करने का तरीका है आयुर्वेद। आयुर्वेद जड़ी बूटियां नहीं है। 92 92% ऑफ आयेदा हैज़ बीन लॉस्ट आउट ऑफ दैट 8% 2% इज जड़ी बूटियां। ओके।
(28:43) सो आये इज अ साइंस टू एस्टैब्लिश लाइफ। काया अवरोहण का तरीका है आयुर्वेद। इसमें जो कुछ करना चाहिए उसका 92% तो खत्म है। 92% इज लॉस्ट। तो इफ 92% इज लॉस्ट। आज मैं अगर बोलता हूं मैं जो करा रहा हूं वो आयुर्वेद है तो लोगों को समझ में नहीं आता। जी। बिकॉज़ द नैरेटिव इज डिफरेंट। हम तो ये चीज तो क्लेरिटी आ गई कि योगा प्राणायाम में जो कुंभक कराया जाता है बाह कुंभक और आंतरिक कुंभक ये वो चीज नहीं है। दिस इज अ पार्ट ऑफ़ आयुर्वेद व्हिच इज मोर और लेस बल्कि मैं इसको बोलूंगा द डिज़ इज डिफरेंट। जी बाह्य कुंभक आंतरिक कुंभक यही तो ऑप्शन
(29:26) है। आप सांस रोकेंगे तो या तो सांस लेके सांस रोक सकते हैं या सांस छोड़ के रोक सकते हैं। तो लेके जो रोकेंगे आंतरिक कुंभक कह देंगे बाह्य कुंभक वो तो प्रोसेस है। ठीक है? बट द वे इट इज डिज़ फॉर एग्जांपल मैं आपको एक सिंपल सी चीज बताता हूं। इसको और डिटेल में समझने के लिए। किसी का लिवर अगर प्रॉब्लम में है और किसी का किडनी प्रॉब्लम में है। हम दोनों की ब्रेथ को अगर आप ऑब्जर्व करेंगे तो उसमें एक फंडामेंटल डिफरेंस देखेंगे। ओके? लिवर जिसका भी प्रॉब्लम है उसकी एक्सेलेशन लंबी होती है। ओके? और किडनी जिसका प्रॉब्लम है उसकी इन्हेलेशन लंबी होती है।
(30:02) वाओ। नाउ लुकिंग एट दैट वी कैन डिज़ाइन अ फार्मूला। है ना? जैसे एक्सेलेशन लंबा हो, इन्हेलेशन छोटा हो। हम सपोज़ करो कि मैंने कहा कि आप केवल 3 सेकंड का इनेलेशन करो, 3 सेकंड का होल्ड करो और उससे ज्यादा एक्सेल करो। हम मैं ऐसा भी बोल सकता हूं कि आप 12 काउंट का एक्सेल करो या 15 काउंट का एक्सेल करो। लंबा एक्सेलेशन करना है। एंड यू होल्ड अ लिटिल आफ्टर दैट। नो काउंट है। तो दिस बिकम्स अ फार्मूला। डिपेंडिंग अपॉन द स्टेट ऑफ अ पर्सन वी कैन इंक्रीज और डिक्रीज द एक्सेलेशन लेंथ। कितना कोई झेल पाएगा उसके हिसाब से भी उसको एडजस्ट करना पड़ेगा। करेक्ट।
(30:46) मगर किडनी वाले को जस्ट द ऑोजिट यू इन्हेल लॉन्ग होल्ड अ लिटिल एक्सेल अ लिटिल एंड देन होल्ड अ लिटिल अ लिटिल लिटिल। तो आपके पास में दो अलग फार्मूले आ गए। बट द थिंग इज़ दिस इज़ नॉट द कंप्लीट अ नो हाउ ऑफ कुंभक। हम बिकॉज़ अगर अगर आप लिवर को रिजुमिनेट कर रहे हैं किसी तरीके से तो केवल लिवर को ही रिजुमिनेट नहीं कर सकता है। उसके सपोर्टिंग ऑर्गन्स हैं। डाइजेशन फैक्टर है उसको भी आपको इंप्रूव करना होगा। बॉडी का कूलिंग डाउन फैक्टर है उसको भी आपको बढ़ाना पड़ेगा कि रिलैक्सिंग फैक्टर जिसको कहते हैं उसको भी आपको कहीं ना कहीं बढ़ाना
(31:25) पड़ेगा। करेक्ट। सो फॉर डीलिंग वि अ पर्टिकुलर प्रॉब्लम हम अ कंप्लीट अ वे ऑफ़ लुकिंग एट द प्रॉब्लम इज नीडेड एंड अ कंप्लीट मॉड्यूल इज़ आल्सो नीडेड पूरा मॉड्यूल चाहिए उसके लिए इट इज़ नॉट एज सिंपलिस्टिक एज आई एम एक्सप्लेनिंग क्योंकि लिवर आपके हार्ट के बगैर काम नहीं करता। हार्ट किडनी के बगैर काम नहीं करती। किडनी आपके लंग्स के बगैर काम नहीं करता। सब आपस में जुड़े हुए हैं। हम वो जो आपस में उनका सिंक्रोनाइजेशन है उसको भी इस्टैब्लिश करना पड़ता है। करेक्ट करेक्ट। सबसे पहले कितना समय देना पड़ेगा इस चीज को? और क्या ये हमेशा कस्टमाइज्ड ही रहेगा कि आपके हिसाब से
(32:06) उसको बनाया जाएगा या एक जेनेरिक सिंपल कोई फॉर्मेट है जो कि सभी लोग कर सकते हैं। देखिए हेल्थ की बात जहां तक आती है जब हेल्थ बोलते हैं। यू वांट टू लिव अ इन योर टर्म्स जी और बेसिकली आपकी अपनी क्वालिटीज को आप लाइफ में एक्सिबिट करते हो एंड यू वांट टू एक्सपीरियंस लाइफ थ्रू व्हाट यू कॉल एस योरसेल्फ आप तो अलग हैं सबसे तब हेल्थ की बात आती है तो कस्टमाइजेशन इज वेरी नेसेसरी अगर आध्यात्म की बात आती है तो सेम चीज सिखाया जा सकता है। ओके? इसीलिए योगा में सेम चीज ही सिखा रहे हैं। करेक्ट। है ना? वो एक स्टैंडर्ड मॉडल है वो सिखा रहे हैं। क्या कुंभक में ऐसा स्टैंडर्ड
(32:46) मॉडल डेवलप कर सकते हैं? हां मगर वो जनरिक हो जाएगा फिर। जी हेल्थ के लिए होगा जेरिक होगा हम ऐसा कर सकते हैं मतलब प्रिवेंटेटिव स्पेस में स्पेस में भी आपको कैसी प्रिवेंशंस मान लीजिए कि मैं एक बहुत सिंपल से तरीके से आपको बताता हूं मान लीजिए कि यू आर अ कफ डोमिनेटिंग पर्सन करेक्ट कफ आपके अंदर ज्यादा बनता है ज्यादा बनता है तो इसका मतलब आपका लंग्स एंड अपर पार्ट ऑफ द बॉडी विल बी वनरेबल तो आपको सर्वाइकल होने के चांस होंगे माइग्रेन होने के चांस होंगे हेडेक होगा ग्लूकोमा होगा एसिड रिफ्लेक्स होगा। ठीक है ना? ये चीजें आपके अंदर ज्यादा चांसेस
(33:22) है। ठीक है? तो आपकी वीकनेस तो अलग है ना? हम वात वाला पर्सन होगा उसको कमर और कमर से नीचे में प्रॉब्लम ज्यादा आएगी तो उसकी प्रॉब्लम अलग है। हम तो क्या एक जेनेरिक मॉडल सभी को दिया जा सकता है? मतलब परफेक्ट सेंस में तो नहीं हो सकता। नहीं। हां थोड़ा सा वाटर डाउन वर्जन हम जरूर दे सकते हैं। जी। वो भी ठीक है। एटलीस्ट समबडी इज मेकिंग एफर्ट। लाइफ में थोड़ा ज्यादा एफर्ट और उसका कुंभक बल बढ़ेगा। उसकी लाइफ अच्छी ही होगी। ओके। ओके। सो कस्टमाइजेशन इज़ेंट। स्पेशली इफ यू आर टॉकिंग अबाउट रिवर्सल ऑफ़ समथिंग। हां। इफ इट इज़ प्रॉब्लम सेंट्रिक देन
(34:02) कस्टमाइजेशन। 100% या तो कितना टाइम देना पड़ता है इसमें? ये कितना कठिन होता है सीखना? सबसे पहली बात तो आप कुंभक के बगैर जिंदा नहीं रह सकते। ओके। सो कुंभक इज एन इंटीग्रल पार्ट ऑफ योर लाइफ। यह बात आपको समझना पड़ेगा। नाउ दैट फैक्टर इज बिकमिंग वीक। अगर हम केवल इफ यू जस्ट गो थ्री जनरेशन बैक आल्सो। तीन जनरेशन आपके दादा-दादी नाना नानी को याद करो या उनके एक जनरेशन पहले याद करो। उनको भी याद करेंगे तो वो शरीर से ज्यादा काम कर सकते थे या आप कर सकते हो? वो लोग वो लोग ज्यादा कर सकते थे। उनका वो ज्यादा एफर्ट लगा सकते थे लाइफ में। हम नहीं लगा
(34:37) सकते। उनकी टॉलरेंस ज्यादा थी। हमारी कम है तो उनका क्या फैक्टर स्ट्रांग था? उनक फैक्टर स्टंग था। ब्रेथ होल्ड स्ट्रांग था। हमारा कमजोर हो गया। इज इट बिकॉज़ दे वर फिजिकली डूइंग अ लॉट ऑफ़ लेबल। वन रीज़न वाज़ दैट द सेकंड रीज़ इज़ वी आर चेंजिंग द इकोसिस्टम फॉर व्हिच वी वर डिज़। हम लाइक जिस वातावरण के लिए हमारा डिज़ था आज हमने बदल दिया। हां पूरा चेंज हो गया। चेंज हो गया। तो हम कंफर्टेबल तो नहीं है। हम हम इसमें एडप्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। उसी अड अप्टेशन को आप डिजीज बोल रहे हैं। वो भी गलत है। द वेरी वे द वेरी थिंग यू आर कॉलिंग डिजीज मे नॉट बी डिजीज। इट मे
(35:19) बी अडप्टेशन। शुगर लेवल आपका बढ़ रहा है तो इट मे बी अडप्टेशन। इट विल रिमेन लाइक दैट फॉर टू थ्री इयर्स एंड विल बिकम फाइन। ऐसा भी हो सकता है ना? मगर 2 साल तीन साल उसको आप रहने देंगे क्या? उसके पहले ही दवाई खाना शुरू कर देते हैं। जी। तो यानी आप दवाई खा के ह्यूमंस को अडप्ट नहीं करने दे रहे। इज इट अकराइंग ऑ नॉट? अगर आप किसी को अडप्ट नहीं करने दे रहे तो हमें बहुत सोच समझ के बोलना होगा कि जो हम बोल रहे हैं वो सही है कि नहीं है। हम है कि नहीं? तो ये चेंज एनवायरमेंट फूड हम हाइब्रिड इनऑर्गेनिक प्रोसेस जेनेटिकली मॉडिफाइड। जी
(35:59) ये फूड हमारा चेंज हो गया। हमको 5 साल में आम की जगह 2 साल में चाहिए। तो हम नेचर के टाइमलाइन को अ चेंज कर रहे हैं। करेक्ट? है ना? क्रैश कर रहे हैं। उसके टाइमलाइन से अलग जाने की कोशिश कर रहे हैं। आपकी बॉडी नेचर के टाइमलाइन को सम पकड़ती है। समझती है। सिंक्रोनाइज है उसके साथ में। जैसे सरकाडियन रिदमम आप बोल देते हैं। तो वो नेचर का टाइमलाइन है। आप नेचर के टाइमलाइन से अलग कोई चीज आप इस शरीर को दिखाओगे तो ये पहचानेगा नहीं। हां। तो आपका शरीर हाइब्रिड फूड जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड को पहचान ही नहीं रहा। तो कितना मेटाबोलाइज करेगा उसको? द
(36:38) मेटाबॉलिज्म हैज़ कम डाउन बिकॉज़ यू आर गिविंग द बॉडी समथिंग व्हिच इट इज़ नॉट रिकॉग्नाइजिंग। या है ना? नेचर का टाइमलाइन ही हमारी बॉडी का रिकॉग्निशन है। तो ये जो ब्लू लाइट का एक्सपोज़र है जैसे एलईडी और गैजेट एक्सपोज़र ये भी काफी नया है। फॉर अस ये भी नया है और शायद हमें ये नहीं दिख रहा कि ये जिस फ्रीक्वेंसीज और वेवलेंथ पे काम कर रहे हैं वो हमारे आसपास में एक डिस्टॉर्शन तो ला ही रहा है। वो भी है। पर जब हम सारा इकोसिस्टम ही बदल देंगे हम [गला साफ़ करने की आवाज़] जहां हम रह रहे हैं हमने क्लोज कर दिया अपने आप को हम कंडीशनिंग एनवायरमेंट की कंडीशन एयर
(37:25) कंडीशनिंग कर दी हमने नेचर से एक्सपोज़र कम कर दिया तो अपने आप को कट ऑफ कर रहे हैं उस रिदमम्स के साथ जी नेचर की टाइमलाइन से थोड़ा दूर जा रहे हैं हम तो पूरा इकोसिस्टम अगर हम बदल देते हैं तो हमारी बॉडी कंफर्टेबल फील नहीं होती है। आजकल एक और चीज देखने को मिल रहा है कि सब कुछ अच्छा है। पैसा भी है, कबूलियत भी है। उसके बाद भी मन शांत नहीं है। अंदर से पता नहीं किस बात का दुख है। हम ऐसे बहुत लोग आ रहे हैं। बहुत तो ऐसी सिचुएशन में सबसे पहली चीज क्या करनी है? देखिए ये सब खराब हो जाने के बाद भी कुछ लोग हेल्दी हैं। हम हां वो क्यों हेल्दी हैं? उनका टॉलरेंस बहुत
(38:06) अच्छा है। ओके। वो टॉलरेंस अगर हम बढ़ा लें अपना तो वि अ डेविएटेड इको सिस्टम वी विल बी एबल टू सर्वाइव बेटर। मगर टॉलरेंस होता क्या है? हम अगर आप 10 किलो का वेट अपने सर पे रखें तो कैसे उठाएंगे और सर पे रख के झेलेंगे कैसे? कहीं ना कहीं सांस रुक रोकेंगे। तो सांस रोकना ही आपका टॉलरेंस होता है। आपके दर्द होता है तो आपकी सांस रुक जाती है। जी। डर लगता है तो सांस रुक जाती है। कोई धक्का दे गिराने की कोशिश करे तो आप सांस रोक के अड़े रहते हैं। तो टॉलरेंस है क्या आपका? सांस रोकने की क्षमता। अगर टॉलरेंस आपका कम हो गया तो इम्यून सिस्टम बार-बार ऊपर उठेगा। उसे
(38:52) ऑटोइ्यून सिंड्रोम बोल देंगे। जी। ऑटोइ्यून डिसऑर्डर बोलेंगे। क्या वो ठीक हो सकता है? बिल्कुल हो सकता है। अगर आप अपना टॉलरेंस बढ़ा दें, मेटाबॉलिज्म बढ़ा दें। मेटाबॉलिज्म आप किसी फूड से, किसी मेडिसिन से और किसी और एक्सटर्नल सब्सटेंस से अपना अगर आप डेविएट करते हैं अपना मेटाबॉलिज्म तो वो डिजीज ही करेगा। ओके? यानी कि आप अपने मेटाबॉलिज्म को इन अ राइट मैनर बाहरी चीजों से नहीं उठा सकते या इंप्रूव कर सकते हैं। आप कुंभक से कर सकते हैं। अच्छा। अच्छा क्योंकि आपके ही जीवन का वो एक अंग है कुंभक। तो कुंभक से आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ सकता है। कुंभक से आपका
(39:35) टॉलरेंस बढ़ जाएगा। ये दोनों चीज बढ़ाएंगे तो ऑटोइ्यून सिंड्रोम ठीक हो जाएगा। वाओ तो जो आपके जीवन की चाबी है आज उसको इस्तेमाल करना शुरू कीजिए। तभी ये जीवन सही तरीके से खुलेगा। टोलरेट कर पाएंगे आप। जो भी आपके भले आपका लाइफ का चैलेंज है या फूड का चैलेंज है जो भी सरकमस्ट्ससेस आपके सामने आ रहे हैं उसको आप झेल पाओगे। फिजिकली जब हम बात करते हैं तो इट आल्सो परस टू मेंटली क्योंकि फिजिकल और मेंटल अलग-अलग नहीं होता। जी साइकोसोमा है ये। जी। तो आपका मेंटल टॉलरेंस भी बढ़ेगा। स्ट्रेस लेवल्स कम हो जाएंगे। हम मेंटल डेविएशन, फ्लक्चुएशन या फिर कह लो
(40:14) कि आपका कंट्रोल का खो जाना आपके माइंड के ऊपर। थॉट्स का अपने आप ही आ जाना। वो सब खत्म होंगे। अ आज के समय पे अगर शरीर में डेविएशन आ रहा है, माइंड में उससे ज्यादा डेविएशन आ रहा है। राइट? 80% वर्ल्ड इस वक्त में किसी ना किसी मेंटल चैलेंज को फेस कर रही है। एंड आई थिंक बिकॉज़ अब विद एआई कमिंग व्हेन द नंबर ऑफ़ आवर्स दैट यू विल बी पुटिंग इन वर्क विल बी मैसिवली रिड्यूस्ड। तो यू विल बी फ्री फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम। तो फिर माइंड तो आपका बहुत इधर-उधर भागेगा और बहुत इनफैक्ट इट विल इंक्रीस योर मेंटल प्रॉब्लम्स बिकॉज़ यू विल हैव नथिंग टू डू
(40:52) ऑल डे। अ सी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात करते हैं। दैट कैन बी अ ह्यूज सपोर्ट फॉर अस। हम क्योंकि आप जो रिपीटेड वर्क है वो सब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को दे देंगे। करेक्ट। बट देन यू विल हैव टू बी मोर इंटेलिजेंट। यू विल हैव टू बी मोर क्रिएटिव। यस। तो आप अपना क्रिएटिव आस्पेक्ट अपना इंटेलिजेंस और ज्यादा इस्तेमाल करें। इसकी अपॉर्चुनिटी मिल सकती है। दूसरा पक्ष ये भी है कि अगर आप सही से अपने आप को हैंडल नहीं किया अपना। हां। तो फिर मेंटल डिअरेंजमेंट आ जाएगा। जी। तो इट इज़ नॉट अप टू एआई टू हैंडल ह्यूमन बीइंग्स। इट इज़ अप टू
(41:37) ह्यूमन बीइंग्स टू हैंडल देमसेल्व्स। एब्सोलुटली। ठीक है ना? एआई तो आपके हेल्प के लिए ही है। हम एआई तो आपको सपोर्ट ही करेगा। अब रिपीटेड वर्क में इतना टाइम गवाते हो क्रिएटिव वर्क में लगाओ अपना। तो अपने को एंगेज करना क्रिएटिव वर्क में ये जरूरी बन जाएगा। हम और जितना एंगेजमेंट होगा उतना दिमाग कम चलता है। इफ यू इनवॉल्व योरसेल्फ विद एनी क्रिएटिव वर्क। आप देखेंगे आपका दिमाग नहीं चलता। हम वो उस तरफ ही आपका सारा फोकस रहता है। जी। तो एक्चुअली क्योंकि हम इनवॉल्व नहीं हो पा रहे लाइफ के साथ में प्रॉपर्ली हम अपने माइंड को हैंडल नहीं कर पा रहे हैं।
(42:17) और इसमें एक कारण एक कारण टू मच ऑफ स्पिरिचुअलिटी भी है। बिकॉज़ स्पिरिचुअलिटी इज ट्राइंग टू पुल यू आउट ऑफ द संसार। जी। नहीं नहीं है। स्पिरिचुअलिटी इस ट्राइंग टू मेक यू सेटिस्फाइड। नहीं संतुष्टि लाओ। नॉट अ गुड थिंग। सांसारिक लोग के लिए यह सब बिल्कुल सही चीज नहीं है। आई एम ग्लड यू आर सेइंग दिस। हम पीपल यू शुड बी वेरी वेरीरी एंबिशियस। हम पीपल शुड बी वेरी वेरी एंडेवरिंग। रेडी टू टेक चैलेंजेस। ऐसा होना तभी जीवन जिया जाता। जी। आपको आध्यात्म चाहिए तो कट ऑफ करके जाओगे सब कुछ। आपका इंटरेस्ट ही नहीं रहा किसी
(43:02) चीज में। तो आध्यात्म आपको जीवन से हटा देता। तो आपका इन्वॉल्वमेंट नहीं होगा किसी चीज में तो दिमाग ही चलेगा फालतू का। सो नोबडी वन ऑफ द रीज़न इज दैट बट देन देयर आर अदर रीज़ंस। हम क्योंकि आपके पास अब सहूलियत हो गई बटन दबा के काम कर चल जाता। यू आर नॉट इनवॉल्विंग विद थिंग्स टू दैट एक्सटेंट। हम द थर्ड थिंग इज फ्लक्चुएटिंग इकोसिस्टम। यानी आप मोबाइल में देखते हो, रील्स घुमाते हो तो इट इज़ जस्ट फ्लक्चुएटिंग। है ना? कोई स्टेबल चीज नहीं है जिसे आप देख रहे हो। करोड़ों लाइट फ्लक्चुएट कर रहे हैं। और आप छोटी-छोटी रील्स पहले शायद आपका
(43:40) जो एक जगह फोकस करने की एबिलिटी ज्यादा थी तो आप लंबी किताबें पढ़ ले मोटी किताबें पढ़ लेते थे। बट अब आपका एक जगह फोकस करने की एबिलिटी इतनी कम हो गई है कि आपको केवल 10 सेकंड की रील चाहिए। 15 सेकंड की रील चाहिए। अब वो छोटे 15 मिनट वाले पॉडकास्ट में नहीं चलेंगे। हां। अब श्स मतलब बहुत छोटे छोटा जितना छोटा कर सको करो क्योंकि वो कंसंट्रेशन या फिर एक जगह पे टिके रहने की एबिलिटी नहीं रही हम और एक जगह पे आप कैसे टिकते हैं अगर आप स्टचू कर लो अपने आप को स्टैचू बोल दो और स्टैचू की मतलब हिलना नहीं तो क्या आपकी सांस भी रुक जाएगी
(44:21) तो एक जगह पे टिके रहने की एबिलिटी खो गई यानी कुंभक कैपेसिटी कम हो गई उसको बढ़ाएंगे तो बढ़ेगा बट इकोसिस्टम सिस्टम को आप क्या चेंज कर पाएंगे? नहीं। बड़ा मुश्किल है। बहुत टाइम बाद। अगर आप कहते हैं नहीं नहीं बच्चों को मोबाइल मत दो। पर मोबाइल तो इंफॉर्मेशन का भी जरिया है। जी। जितना इंफॉर्मेशन आज एक छोटे 12 साल के बच्चे के पास में होता है। पहले शायद वो 30 साल 40 साल के व्यक्ति के पास भी नहीं होता था। तो इट आल्सो एमावर्स। जी। बट देन अगर आप किसी चीज को गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं और आपको नुकसान कर रहा है तो वो आपके ऊपर ही है कि उसको सही
(44:56) से इस्तेमाल करें। है कि नहीं? इट इज द ओन इज अपॉन ह्यूमन बीइंग्स हम टू यूज़ थिंग्स इन अ राइट मैनर नॉट टू अब्यूस थिंग्स मगर आप सोचेंगे नहीं पेड़पधे बदल जाएं जानवर वापस आ जाए वातावरण साफ हो जाए तो ये नहीं होने वाला लोग बदल जाए तो ऐसा नहीं होने वाला मोबाइल चला जाए तो नहीं होने वाला एआई खत्म हो जाए तो नहीं होने वाला तो आप दुनिया को बदलने की जगह अपने को बदलें और आप देखेंगे दुनिया दुनिया आपके लिए सुंदर हो जाएगी। अमेजिंग अमेजिंग दिस इज अमेजिंग स्वामी जी। सो कुंभक इज द स्यूशन टू लिव अ फुलर लाइफ। फुल लाइफ या यस
(45:42) हेल्दी लाइफ, फुल लाइफ, मोर टू गेट मोर एक्सपीरियंस आउट ऑफ। आउट ऑफ लाइफ, या, बिकॉज़ यू कैन एक्सपीरियंस मोर विद हैप्पीनेस, एंड विथ लॉट ऑफ़ एनर्जी इन योर बॉडी एज़ वेल। ओनली इफ यू एक्सपीरियंस फुल्ली, द डोर वे टू स्पिरिचुअलिटी विल ओपन अप। अबब्सोलुटली स्पिरिचुअलिटी का रास्ता संसार से होके जाता है। संसार के विरुद्ध नहीं जाता। अगेंस्ट में नहीं है। यू विल हैव टू लिव अ लाइफ टू बिकम स्पिरिचुअल। इफ यू कांट लिव अ लाइफ फॉरगेट अबाउट स्पिरिचुअलिटी। अगर वो जी भी नहीं पा रहे हैं ठीक से स्पिरिचुअलिटी तो बहुत दूर की कौड़ी है। बिल्कुल बिल्कुल। तो इसमें
(46:19) मैंने जब आपके लेक्चर सुने तो आप फूड के बारे में भी आप काफी चीजें एक्सप्लेन करते हैं कि किस तरह का खाना चाहिए खाना और मैंने यह भी सुना देखा है कि आप बहुत ज्यादा घी कंज्यूम करते हैं और आप शक्कर भी खाते हैं तो आप सब कुछ मतलब फुल्ली एंजॉय कर पा रहे हैं अपनी सारी मील्स। जैसे आजकल कोई प्लेट पे कोई चीज रखता है तो बोलते हैं हम ये नहीं खा सकते। हमें यह मना है, हमें यह मना है। हम ये इससे हमारी शुगर बढ़ जाएगी। इससे हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा। तो सो व्हाट यू आर ट्राइंग टू से इज कि अगर कुंभक किया जाए तो यू विल बी एबल टू एंजॉय ऑल द फ्लेवर्स ऑफ लाइफ एंड
(46:52) फूड। 100% ट्रू बिल्कुल सही है। और ये बात मैं क्योंकि हमारी क्लासेस में लोग कहते हैं कि हमें डाइट रेस्ट्रिक्शन क्या करना पड़ता है? तो मैं उनको कहता हूं कि अगर मैं आपकी डाइजेशन स्ट्रेंथ बढ़ा दूं और कुछ भी आप खा सकें तो क्यों रेस्ट्रिक्ट करना अपने आपको? हम आप इसीलिए नहीं खा रहे क्योंकि आपका शरीर आपके कंट्रोल से बाहर है। जी वो जो रिजल्ट पैदा करना चाहिए जिस फूड के साथ में वो नहीं कर पा रहा। हम तो आप अपना कंट्रोल ले आओ ना। हम हम अगर आपको पत्थर पचाने के लायक भी बना रहे हैं तो क्यों रेस्ट्रिक्ट करना अपने और रेस्ट्रिक्ट करके आपको फुलफिलमेंट तो
(47:28) नहीं मिलने वाली। हमारे प्रोग्राम में कई लोग आते हैं। वो कहते हैं 10 साल बाद आम खाया इस बार। मेरी आम खाने की हमेशा इच्छा होती थी। मैं नहीं खा पाता था। 10 साल के बाद एंड व्हाट अ जॉय टू हैव मैंगो व्हाट अ जॉय व्हाट इज दिस लाइफ ऑल अबाउट इफ यू डोंट हैव जॉय तो आप क्यों हारे हैं क्यों जी रहे हैं जीने का कोई तो रीज़न होना चाहिए यू वांट टू एक्सपीरियंस लाइफ दैट्स व्हाई यू हैव कम टू लाइफ यस और यू हैव कम इन दिस लाइफ जीवन में आप आए क्यों जीने के लिए आए ना और जीने का मतलब क्या होता है एक्सपीरियंस करना हर एक एस्पेक्ट जितने आयामों को आप
(48:02) अनुभव करेंगे उतने ही सेटिस्फाई होते जाएंगे अनुभव ही नहीं कर पा रहे। यह शरीर ही इस लायक नहीं है कि वो एक्सपीरियंस नहीं कर पा रहा। शरीर ही बीमार है। ना तो संसार मिलेगा ना अध्यात्म मिलेगा। बिल्कुल। तो पहले इस लाइफ को एमावर करना बहुत जरूरी है। जी। तो आपके माध्यम से अगर कुंभक हमें लोगों की तरफ स्प्रेड करना है। हाउ इज द हाउ व्हाट्स द बेस्ट वे टू गेट इन टच विद यू? हाउ लाइक प्रिवेंटेटिव जो लोग करना चाहते हैं वो आए आपके पास या जो बीमार है वो आए और कैसे आए आपके दरअसल दोनों तरीके के व्यक्तियों को आना चाहिए। प्रिवेंशन के लिए भी आना चाहिए और बीमार
(48:43) हैं उनको भी आना चाहिए। जी हमने प्रोग्राम एक्चुअली प्रॉब्लम ज्यादा किन-किन को होती है? डर किनको लगता है या फिर डिसएवर्ड कौन होते हैं? जो बीमार होते हैं। तो उनके लिए हम अलग-अलग प्रोग्राम करते हैं। तो जैसे डायबिटीज का रिवर्सल के लिए प्रोग्राम करते हैं। ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज के रिवर्सल के लिए प्रोग्राम करते हैं। व्हिच इज़ नंबर वन कॉज़ ऑफ़ डेथ। जी एट दिस पॉइंट ऑफ़ टाइम थायराइड के रिवर्सल के लिए करते हैं। अस्थमा एलर्जीस के रिवर्सल के लिए करते हैं। कैंसर के रिवर्सल के लिए करते हैं। एंटी एजिंग के लिए करते हैं। अच्छा हम फिर देन देयर इज़ अनदर प्रोजेक्ट जिसमें
(49:19) हम जोड़ों के दर्द जो है अर्थराइटिस रिमेटॉइड इस तरीके के नर्व से लेके कुछ भी मस्थिनिया ग्रेविस पार्किंसन मस्कुलर डिस्ट्रोफी जी तो तो ऐसे तमाम जो फिजिकल बॉडी को की प्रॉब्लम्स है उसको रिवर्स करने के लिए अलग से रिलेटेड पार्किंसन के लिए अलग प्रोग्राम होता है। मस्कुलर डिस्कफी के लिए अलग प्रोग्राम होता है। अष्टांत चिकित्सा है वो अर्थराइटिस रूमेटाइडिंग्स के लिए होता है। तो इस तरीके के प्रोग्राम एक अलग प्रोजेक्ट के अंडर न्यूरो मस्कुलोस्केलेटल प्रॉब्लम है ना। फिर हम फर्टिलिटी के लिए कर रहे हैं। देयर इज़ अ कंप्लीट वर्टिकल व्हिच इज़ कंप्लीटली
(50:05) डिवोटेड और फुल्ली डिवोटेड टू फर्टिलिटी और शायद हमारा प्रोग्राम दुनिया में ऐसे रिजल्ट्स लाता है जो अदरवाइज नहीं आ सकता तो एएमएच काउंट बढ़ जाता है क्रोमोजोमल डिफेक्ट ठीक होता है कुंभक करने से यानी आपकी जेनेटिक प्रॉब्लम भी ठीक होती है हमारे पास में लैब रिपोर्ट्स है वाओ फर्टिलिटी के बाकी फैक्टर्स अजूस्पर्मिया मेल में अजूस्पर्मिया बहुत हो रहा है आज के टाइम पे स्पम बन ही नहीं रहा कॉमन है बहुत कॉमन है वो अजूस्पर्मिया ठीक होता है कुंभव करने से और किसी चीज से ठीक नहीं होता। हां स्पर्म के रिलेटेड प्रॉब्लम मोटिलिटी, मोटलिटी, मॉर्फोलॉजी
(50:40) जी वो सारी चीजें कुंभक करने से ठीक होती है। एग की क्वालिटी फॉलिकल से एग रिलीज नहीं हो पा रहे हैं। क्वालिटी डिग्रेड हो रही है। इस्ट्रोजन प्रोजेस्टरॉन लेवल्स ठीक नहीं आ रहा है। इवन मेल में टेस्टोस्टरॉन लेवल्स का आज बहुत प्रॉब्लम आ रहा है। कुंभक करने से ठीक होता है वो। बढ़ते हैं लेवल्स। नॉट ओनली जस्ट फर्टिलिटी हॉर्मोंस की बात नहीं कर रहा मैं। ऑल काइंड्स ऑफ हॉर्मोनस इवन हैप्पी हॉर्मोनस की आजकल ज्यादा बात चलती है। है ना? डॉनफिन डोपामिन ये सब की बात ज्यादा चलती है। वो कुंभक करने से बढ़ता है। डोपामिन कुंभक करने से उसके लेवल ठीक होता है। तभी
(51:18) हम पार्किंसन का प्रोग्राम कर पा रहे हैं। पार्किंसन में लोगों को बहुत मदद हो पा रही है। अगर हॉर्मोन के और प्ले की बात करें तो फीमेल्स में हॉर्मोन का इकोसिस्टम बहुत सेंसिटिव होता है। तो वो बहुत जल्दी हॉर्मोन डेविएशन या डिस्फंक्शन में आ जाते हैं। हॉर्मोन को कैसे बैलेंस कर सके ताकि लाइफ में ज्यादा अचीवमेंट हो पाए। हम अह इन टर्म्स ऑफ़ करियर, इन टर्म्स ऑफ हेल्थ, इन टर्म्स ऑफ़ फर्टिलिटी, इन टर्म्स ऑफ रिलेशनशिप ज्यादा अच्छा हो पाए। तो एक हॉर्मोन रिलेटेड प्रोग्राम करते हैं मीरांबिका। वै नाइस। वो भी फीमेल सेंट्रिक है वो पूरा का पूरा।
(51:58) ओके। जो वो मेदिनी फर्टिलिटी केयर का जो वर्टिकल है वो फीमेल सेंट्रिक है पूरा का पूरा। उसको रन भी फीमेल्स ही करती हैं सर। ओके। मेरे सारे प्रोजेक्ट्स में अगर आप देखें तो 80% फीमेल्स हैं। ओके। सो वो फर्टिलिटी का एक डेडिकेटेड प्रोग्राम है जहां पे हम गर्भाधान कुंभक फॉर कंसेप्शन। जी। और दूसरा अष्टांग गर्भ संस्कार। ओके। टू स्प्रेंड द जेनेटिक्स ऑफ ऑफस्प्रिंग। ओके। टू एनहांस द एबिलिटीज ऑफ द नेक्स्ट जनरेशन एंड टू एनश्योर दैट दे रिमेन प्रिवेंटिव और दे कैन प्रिवेंट देमसेल्व फ्रॉम द क्रॉनिक डिजीज एपिसोड्स व्हिच इज़
(52:44) इंक्रीजिंग इन द वर्ल्ड। जी। क्योंकि हम आज मान के चल रहे हैं छोटे-छोटे बच्चों को डायबिटीज हो रही है, थायराइड की प्रॉब्लम हो रही है, कैंसर हो रहा है तो वह अपने आप को बचा सके अगर एक मां गर्भिणी जो है वो अष्टान गर्भ संस्कार करें। तो वो इंश्योर कर सकती है कि उसकी डिलीवरी, पोस्टपार्टम, प्रीपार्टम डिफिकल्टीज एंड द क्वालिटी ऑफ द चाइल्ड कैन बी एनहांस्ड ड्रास्टिकली। अमेजिंग। तो यह फर्टिलिटी रिलेटेड प्रोग्राम आ गया। बच्चों के लिए अलग प्रोग्राम होता। अच्छा। है ना? उसमें हम कुछ चीजें अभी एक्सप्लोर कर रहे हैं। क्योंकि एजुकेशन सिस्टम जो है
(53:23) वो बच्चे को एंपावर नहीं करता। हम आप कुछ भी काम करेंगे थ्रू द एबिलिटी ऑफ़ योर बॉडी एंड माइंड। यू विल बी एबल टू अचीव समथिंग। आपका सक्सेस इज़ लेस डिपेंडेंट ऑन व्हाट यू हैव डन इन टर्म्स ऑफ एजुकेशन। मोर डिपेंडेंट ऑन योर क्वालिटी ऑफ लाइफ। जी। तो इसको बढ़ाने का नियम अभी हमारे पास में नहीं है। जैसे फॉर एग्जांपल अवधान विद्या। हम अवधान विद्या का मतलब होता है अ मेमोरी एक फैक्टर हम बोले बहुत क्योंकि श्रुति जब हम कहते हैं जब आप किसी चीज को बहुत फोकस होकर सुनते हैं तब मेमोरी बिल्ड अप होता है।
(54:07) है ना? तो एक श्रुति कहते हैं मेमोरी को। राइट? फिर एक श्रुति अगर आएगा तो स्मृति बढ़ती है। मेमोरी का फैक्टर बढ़ेगा। बट देयर इज़ अनदर फैक्टर कॉल्ड इंटेलिजेंस। अगर आप कई चीजों पे एक साथ फोकस कर सके हम। दैट इज कॉल्ड एज अवधाना। देन यू कैन एनहांस योर इंटेलिजेंस। इंटेलिजेंस। यू कैन सी मेनी थिंग्स। तो वो कैसे बढ़ाया जाए? वो फिर विस्तार गुरुकुल करके प्रोजेक्ट है हमारा। अच्छा जिसमें हम एक जेनेरिक सर्वसिद्ध कुंभक करवाते हैं। ओके। देन ये फैक्टर्स हम ऐड कर रहे हैं। देन देयर इज़ अनदर प्रोग्राम वी डू स्ट्रेटेजिक विज़ फॉर सक्सेस एसवीएस।
(54:54) उसके अंदर हम देखते हैं कि हाउ टू हाउ टू प्रिपेयर योरसेल्फ फॉर क्लियरिंग अ एन एग्जामिनेशन फॉर प्रिपेयरिंग फॉर एन इंटरव्यू क्लियरिंग एन इंटरव्यू। वो कैसे करें आप? हाउ टू एनहांस योर मेमोरी हाउ टू प्रिपेयर मेकिंग क्वांटम नोट्स हम ऐसी चीजें वहां पे भी हम ये फैक्टर अवधान विद्या या एक श्रुति या इस तरीके की चीजों को जो कि परंपरा में था पहले मगर आज शायद बहुत गिनती के लोग होंगे जो उसको जानते भी हैं। उसको रिवाइव करना है हमको। अगर हम कुंभक की भी बात करें तो यू नो इफ यू साइंटिफिकली एवरीबडी वांट्स टू अंडरस्टैंड जैसे कई लोग पूछेंगे कि भ साइंटिफिकली
(55:38) क्या हो रहा है जब आप ब्रेथ को होल्ड कर रहे हैं तो फिजियोलॉजिकली आपकी बॉडी में क्या ऐसा हो रहा है जिससे ये इतने चेंजेस आ रहे हैं तो हमने क्या किया कि देखो ये ऑब्जरवेशंस है साइंस बेसिकली एक तरीका ऑब्जरवेशन साइंस को सिर पे मत चढ़ाओ क्योंकि साइंस ने वेस्ट ने साइंस का ठेका लिया हुआ हम और साइंस का ठेका वेस्ट का नहीं है हम तो साइंस इज एन ऑब्जरवेशनल मेथड। हम आप टेक्नोलॉजी यूज करके ऑब्जरवेशन कर सकते हैं। तो वी डिड द फर्स्ट साइंटिफिक रिसर्च इन द वर्ल्ड। ओके? कोरिलेटिंग कुंभक वि समथिंग कॉल्ड एज माइटोकांड्रिया हेल्थ। माइटोकांड्रिया इज़
(56:16) एन ऑर्गनेल इन योर बॉडी। आपके बॉडी में ऑर्गनेल है व्हिच इज पावर हाउस। वो ग्लूकोस खाता है। एनर्जी रिलीज़ करता है। बिल्कुल। दूसरा इनफ्लेमेशन फैक्टर इन द बॉडी। तो जब चार हफ्ते का हमने एक कैटेगरी को कुंभक कराया तो पता चला कि उसका माइटोकांड्रिया हेल्थ बहुत इंप्रूव हो गया। हम आगे आने वाले पांच से 10 साल में आप सुनेंगे जितनी क्रॉनिक डिजीज है एवरीथिंग इस रिलेटेड टू माइटोकांड्रिया हेल्थ। वो आ गया है। अब तो सभी आ रहा है। हमने पहले ही रिसर्च करके बैठे हुए हैं। हम यानी कुंभक करने से माइटोकांड्रिया हेल्थ इंप्रूव होता है। कुंभक करने से
(56:47) इनफ्लेमेटरी फैक्टर्स डाउन होते हैं। कुंभक करने से और क्या होता है? अब मैं आपको अगर बायोकेमिकल लेवल पर बताऊंगा तो बायोकेमिकल एक्सचेंज व्हेन वी आर सेइंग हॉर्मोनस हॉर्मोन प्रोडक्शन बढ़ जाता है। हम होमवर्क करने से प्रोटीन प्रोडक्शन बढ़ता है। प्रोटीन इज नॉट समथिंग यू टेक फ्रॉम आउटसाइड। प्रोटीन इज़ समथिंग योर बॉडी मेक्स बाय इटसेल्फ। चिकन खा के कोई चिकन बना आज तक? ह्यूमन ही बनता है ना? है कि नहीं है? एक्सक्ट्ली। ये क्वेश्चन था मेरे उसमें कि प्रोटीन के बारे में जो इतनी बात चल रही है आजकल जिसको देखो कह रहा है 50 ग्राम 70
(57:22) ग्राम 80 ग्राम नहीं नहीं वो अल्टीमेटली ब्रेकडाउन तो आपको खुद वो तो आप देखो कि सबसे पहली बात फूड का स्टैंडर्डाइजेशन करना सबसे गलत है हम आपकी बॉडी की क्षमता के हिसाब से आपको भोजन करना चाहिए। आयुर्वेद में एक नियम है कि आप कभी बीमार ना पड़े। अगर आप खूब भूख लगने पे भोजन कराएं हम इतना सिंपल है। देन देयर इज सम टेस्ट यू लाइक सम टेस्ट यू डोंट लाइक। इट डिपेंड्स ऑन एव्री पर्सन। यस। तो यानी उसका शरीर वो टेस्ट मांग रहा है। स्टैंडर्डाइजेशन कैसे करोगे? अगर स्टैंडर्डाइजेशन कर दिया तो आप शरीर ख़राब कर लोगे। राइट? तो आप डाइट प्रोटोकॉल अगर बिल्ड अप
(58:03) करें तो मे बी फॉर अ लिमिटेड पीरियड ऑफ़ टाइम यू मे फील गुड अबाउट योर बॉडी बट देन अल्टीमेटली इट विल डिटोरेट मोर प्रोग्रेसिव डिटोरेशन हो जाएगा बॉडी का बिकॉज़ योर बॉडी इज नॉट डिज़ फॉर स्ट इसीलिए आप अलग-अलग क्वांटिटी का भोजन करते हो। कोई मिर्च ज्यादा खाता है, कोई नमक ज्यादा खाता है, कोई मीठा ज्यादा खाता है, कोई अलग टेस्ट ज्यादा अच्छा लगता है उसको। हम तो वो टेस्ट ही उसका मेडिसिन है। राइट? अगर आपका शरीर जो डिमांड कर रहा है उसको आप सप्लाई नहीं करोगे तो बीमार हो जाएगा। हम तो ये भी आपको समझना पड़ेगा। दूसरी चीज ये भी लेकिन ट्रेडिंग दिस पाथ
(58:40) हम थोड़ा डिफिकल्ट इसीलिए बता रहा हूं क्योंकि आप शरीर को आदत भी लगा सकते हो कुछ उसी चीज की उसी चीज की हम तो इसीलिए फ्रीडम इन माइंड इज समथिंग व्हिच इज़ अ डायर नीड आउट दिस एट दिस पॉइंट ऑफ़ टाइम। पूरी दुनिया एक तरीके से गुलाम हो गई है एक इंफॉर्मेशन के। वी आर नॉट इवन ऑब्जर्विंग आवर बॉडी। हम ऑब्जर्व ही नहीं कर रहे अपने शरीर को। हमें शरीर को अगर ऑब्जर्व करें तो शरीर सभी इंडिकेशन दे रहा है कि आपको क्या करना चाहिए। उसको आप अगर स्टैंडर्डाइज कर तो गड़बड़ है। प्रोटीन आपकी बॉडी मैन्युफैक्चर करती है। इसलिए आप घिया खा के घिया नहीं बनते। चिकन खा के
(59:17) चिकन नहीं बनते। बकरा खा के बकरा नहीं बनते। आप आप ही बनते हैं। यानी वो शरीर वो प्रोटीन वैसे लेता ही नहीं। इसको अपनी प्रोटीन में कन्वर्ट करता है और उसके बाद डालता है। आप बाहर से कितना भी सप्लाई करो वो उसकी कन्वर्टिंग कैपेसिटी उसके स्टैमिना पे डिपेंड करती है। करेक्ट। स्टैमिना अगर वीक हो गया तो प्रोटीन से एलर्जी हो जाएगी। दैट इज कॉल्ड एज थायरॉइड। थायराइड का अलग डेफिनेशन बता रहा हूं मैं आपको। टी3, टी4 टीएसएस से हट के बता रहा हूं। क्योंकि उससे आप ठीक कर सकते हो थायराइड। हमारे पास में बहुत लोग थायराइड का प्रोग्राम करते हैं और ठीक हो जाते हैं।
(59:54) हम दवाइयां खा छूट जाती है उनके। लेकिन आपको अलग तरीके से देखना होगा। आपकी बॉडी का स्टैमिना कम हुआ, प्रोटीन बनना कम हो जाएगा। राइट? तो प्रोटीन मेकिंग स्ट्रेंथ और प्रोटीन का इकोसिस्टम फीमेल्स के लिए ज्यादा सेंसिटिव होता है। बिकॉज़ दे हैव टू प्रोड्यूस अ बेबी। करेक्ट? है ना? तो वो इकोसिस्टम प्रोटीन का सेंसिटिव होता है फीमेल के लिए। इसलिए प्रोटीन का इकोसिस्टम खराब हुआ, स्टैमिना वीक हुआ, फीमेल विल गेट इंटू थायराइड एंड इनफर्टिलिटी। अच्छा पीसीओडी आ जाएगा उसे जिसको आजकल वो हर पांच साल में डेफिनेशन बदल देता है एलोपैथी पहले पीसीओडी कहता था अब पीएमओएस कह रहा
(1:00:28) है अब वो दो साल बाद शायद कुछ और कहे तो इतना भी आप सर्टेन लेके मत बैठो कि व्हाटएवर इज बीइंग टोल्ड टू यू इज एन एब्सोल्यूट ट्रुथ नो नॉट एट ऑल पर पत्थर की लकीर नहीं है दो साल बाद डेफिनेशन बदल जाएगा दो साल बाद कहेंगे कि कैंसर इस वजह से नहीं इस वजह से होता है दो साल बाद कहेंगे कि डायबिटीज या ब्लड प्रेशर इस वजह से होता करेक्ट तो वी हैव नॉट रीच टू द अल्टीमेट नो हाउ ऑफ़ हाउ दिस लाइफ वर्क्स। ये जीवन कैसे चलता है हमें नहीं मालूम। वी हैव टू कीप सर्चिंग ऑन डिफरेंट एस्पेक्ट्स टू लुक एट लाइफ। कैसे देखा जाए उसको एंड वी हैव टू कीप डूइंग रिसर्च।
(1:01:04) हम अभी जो भी रिसर्च 100 साल में हुआ इट्स अ डेविएटेड मोनोक्रोमेटिक रिसर्च। वो रिसर्च एक्चुअली किसी काम का नहीं है। हमें और भी तरीके से रिसर्च करना चाहिए। तो उसके लिए पीपल हु आर इंटू डिफरेंट काइंड्स ऑफ़ अ नॉलेज सिस्टम दे नीड टू गेट टुगेदर कि दे शुड कीप देयर माइंड ओपन एंड एक्सेप्ट अदर पॉसिबल वेज़ ऑफ़ लुकिंग एट द सेम कंडीशन इन अ डिफरेंट मैनर एंड रीच टू अ सॉल्यूशन इन अ डिफरेंट वे। तो एलोपैथी को अपने आप को केवल पैसे बनाने की मशीन नहीं रखनी चाहिए। है ना? वो बिग फार्मा जो है उसी को पैसा आए और वो दूसरों पे राज करे। हम इस तरीके का सिस्टम जब तक नहीं जाएगा
(1:01:44) कोलप्स ऑफ़ डॉलर अगर डॉलर कोलैप्स हो जाए तो दुनिया में हेल्थ आने लग जाएगा। एक चीज तो आपने क्लियर बता दी कि लो कार्ब डाइट या हाई प्रोटीन डाइट या फ्रूट बंद कर दें या शुगर बंद कर दें। ये सब करने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपनी बॉडी में इनफ स्ट्रेंथ जनरेट कर सकते हैं टू मेटाबोलाइज एनीथिंग दैट यू आर ईटिंग फ्रॉम आउटसाइड। यहां ये तो बिल्कुल सही है। यही बात मैं कहना चाहता हूं। बट इसके अलावा भी एक चीज और हमें ध्यान रखना चाहिए। वी शुड नॉट गो अगेंस्ट नेचर। हम प्रकृति की पैदाइश हैं आप। तो अगर इसीलिए मतलब ऐसा समझिए कि दिस इज़ योर बॉडी बिकॉज़
(1:02:24) योर सेंसेशंस आर लिमिटेड टू दिस। हम लेकिन यही सेंसेशन अगर आप बढ़ा भी सकते हैं। एंड यू विल फील द होल यूनिवर्स इज़ योर बॉडी आल्सो। सृष्टि शरीर अष्टांग शरीर के बारे में आयुर्वेद जब बात करता है तो उसमें एक मेजर आस्पेक्ट है सृष्टि शरीर सृष्टि यानी पूरा का पूरा यूनिवर्स इज योर बॉडी दैट इज व्हाई एवरीथिंग वाज़ रेडी फॉर यू टू ईट व्हेन यू वर बोर्न उसका ध्यान किसने रखा इस पूरी सृष्टि ने हम तो ये सृष्टि का इंटेलिजेंस आपकी बॉडी में काम करता है हम यू आर नॉट सेपरेट एंटिटी फ्रॉम दिस यूनिवर्स ये भी आपको समझना पड़ेगा जस्ट बिकॉज़ यू आर सेंस आर लिमिटेड टू योर बॉडी।
(1:03:06) यू थिंक दिस इज़ यू। एवरीथिंग एल्स इज़ समथिंग एल्स। बट देन व्हेन एवरीथिंग कम्स टुगेदर देन ओनली लाइफ क्रिएट्स। पूरी सृष्टि को पूरे यूनिवर्स को कंस्पायर करना पड़ता है। तब जाके एक लाइफ पैदा होती है। हम तो अपने को कट ऑफ नहीं करना। और उसकी टाइमलाइन से डिबेट मत करो। ओके? एटलीस्ट सीजनल फ्रूट्स खाएं ना। हम्। जो जिस सीजन में पैदा होता है एंड इफ यू ईट थिंग्स व्हेयरवर यू आर बोर्न 50 कि.मी.
(1:03:34) टू और 100 कि.मी. के रेडियस में जो कुछ उगता है अगर खाएं तो आप हेल्दी हो जाएंगे। बिकॉज़ द इंप्रेशन ऑफ दैट नियर बाय इकोसिस्टम एक्चुअली मोल्डेड यू विद इन द वम आउटसाइड ऑफ योर रूम। जहां पैदा इसीलिए उसे मातृभूमि कहते हैं। जी। क्योंकि उसने आपको पैदा किया है। है ना? माता की भूमि नहीं है वह। माता की भूमि भी हो सकती है। बट वह मातृभूमि इसलिए क्योंकि उस इकोसिस्टम ने आपको पैदा होने में मदद किया है। हां जी। तो उसके हिसाब से फूड लोकलाइज होना चाहिए। हम जैसे ये प्रोटीन का जो चल रहा है मैं मुझे मतलब वही एक इंट्यूटिवनेस से मैं समझ रही
(1:04:19) हूं कि हो सकता है कि एक वेसनर बहुत अच्छे से पचा पाए नॉन वेजिटेरियन फूड को क्योंकि वो लोग ठंडे इलाके में रहते हैं और यू नो जब वहां पे सर्वाइवल का पॉइंट है तो ऑब्वियस्ली यू विल हैव टू ईट द रेड मीट एंड एंड व्हाटएवर कुछ जनरेटस हीट सो यू कैन कीप योर बॉडी वार्म अह वही ट्रॉपिकल कंट्री में पीपल आर ईटिंग सो मच प्रोटीन अह व्हिच इज़ वार्मिंग अप देयर बॉडी एंड फिर हम दे लॉट ऑफ़ वुमेन हु कम टू अस एंड से दे हैव एक्ने, दे हैव लॉट ऑफ़ हीट दैट दे फील इनसाइड द बॉडी एंड बिकॉज़ दे आर टेकिंग प्रोटीन। पहली चीज अगर आपको ज्यादा प्रोटीन चाहिए
(1:04:54) तो आप घास खाओ, पेड़ के पत्ते खाओ, पेड़ की टहनियां उसमें ज्यादा प्रोटीन होता है। पर आप वो नहीं खा सकता है। नहीं। क्योंकि आपका शरीर एक्सेप्ट नहीं करेगा। आप जंगल में चले जाइए। आप देखिए आप क्या खा सकते हैं। दैट इज़ योर फ़ूड। हम नाउ इफ यू मेक समथिंग इनू अ गलपेबल फॉर्म जी तो आप तो शरीर को समझ ही नहीं रहे कि वो उसको चाहता भी है कि नहीं चाहता हम अगर आप प्रोटीन पाउडर बना लें उसमें कई ऐसे इंग्रेडिएंट्स डाल लें जिसको खाने में आपको बड़ा मजा आए बट आपका शरीर वो प्रोटीन नहीं चाहता तो इट विल डू अ डैमेज राइट और हमेशा प्रकृति ने फूड को पैकेज किया इस
(1:05:34) तरीके से एवरीथिंग व्हिच ही इज़ नीडेड टू डाइजेस्ट दैट फूड इज़ इज़ आल्सो विद इन दैट राइट? तो इंस्टेड ऑफ़ हैविंग द होल फूड वी आर एक्सट्रैक्टिंग थिंग्स आउट ऑफ हम फूड मटेरियल्स व्हिच योर बॉडी ऑब्वियसली विल नॉट रिकग्नाइज़। हम है ना? तो आपका शरीर वो प्रोटीन को पहले तो रिकॉग्नाइज़ ही नहीं कर पाता कि ये क्या चीज है। क्योंकि अगर वो पेड़-पौधे पे लगा नहीं है तो आपका शरीर कैसे रिकॉग्नाइज़ करेगा? तो वह जो डब्बे में आप प्रोटीन मैन्युफैक्चर करके दे रहे हो आपका शरीर उसे रिकॉग्नाइज़ नहीं करता। तो मोस्ट ऑफ इट इज गेट्स वेस्टेड। ओके? इवन मेडिसिन में आपको 500 मिलीग्राम का
(1:06:11) पैरासिटोमॉल दिया जाता है। हाउ मच यू नीड? 5 मिलग्र। व्हाई 500 इज़ गिवन? बिकॉज़ 495 योर बॉडी विल थ्रो आउट। ओके? तो आपके बॉडी को ओवरलोड किया जाता है। दैट इज़ दैट इज कॉल्ड एस डोस टाइट्रेशन। ताकि वो घुस जाए 5 मिलग्र। यानी कि जबरदस्ती किया जाता है। सो बॉडी इज़ इंटेलिजेंट इनफ टू थ्रो इट अप। यस। या बट देन उसको ओवरलोड किया जा रहा है। हम गेटकीपर इतना हैंडल नहीं कर पाएगा। हम तो 5 मिलीग्राम तो खिसक ही जाएगा। हम दैट इज हाउ वी आर लुकिंग एट हेल्थ। हम कम ऑन मतलब मतलब सबसे बेवकूफी भरा तरीका जीवन के साथ में डील करने का उसको साइंस बोल रहे हैं हम।
(1:06:49) वो साइंस है ही नहीं किसी भी तरीके से। तो अल्टीमेटली इट नॉट रिजल्ट इन हेल्थ ऑफ द वर्ल्ड। एंड वी आर सीइंग दैट वी हैव एनफ एविडेंस। आजकल तो रिसर्च भी होता है जो कहते हैं कि हॉस्पिटल बंद हो जाए तो लोग हेल्दी हो जाते हैं। हम ऐसे रिसर्च आ रहा है लोगों को सो कॉल्ड वेस्टर्न मॉडल में सिविलाइज किया जाए तो बीमार हो जाते हैं। तो हम हमारी आंखें खोलनी पड़गी हमको कहीं ना कहीं। सो द होल पैकेज दैट नेचर क्रिएट्स विद इट्स टाइमलाइन इज़ एक्चुअली फूड। राइट? रेस्ट ऑफ़ द थिंग यू कांट इवन कॉल्ड एस फूड। राइट? बट देन यू कांट अवॉयड दोज़ थिंग्स। सब कुछ
(1:07:28) हाइब्रिड ही मिल रहा है आजकल। जेनेटिकली मॉडिफाइड मिल रहा है। यूएस में सब कुछ तो उससे बचना कैसे है? इफ यू हैव टॉलरेंस टू दैट। इफ यू हैव योर स्ट्रेंथ इन योर सिस्टम आप शायद बचे रहेंगे। आप शायद काफी समय तक अपने आप को चला सकते हैं। वरना कोई चारा नहीं। सो देयर आर फ्यू थिंग्स वि आर प्रेवेंट राइट नाउ इन टर्म्स ऑफ या तो कुछ ऐसे टर्म्स हैं जो बहुत ज्यादा आजकल फ्लोट हो रहे हैं हेल्थ कम्युनिटी में और या तो कोई ऐसी प्रॉब्लम्स हैं जो कि बहुत ज्यादा हो गई हैं। तो आई विल जस्ट कवर फ्यू ऑफ़ दोज़ एंड यू कैन टेल अस हाउ टू गो अबाउट इट। सो
(1:08:03) एक तो है आपने इनफ्लेमेशन को कवर किया कि माइटोकांड्रियल हेल्थ और इनफ्लेमेशन दोनों में आपने साइंटिफिकली आपने स्टडी किया है कि कुंभक से उसमें इंप्रूवमेंट आता है। तो वो एक बड़े बज़ वर्ड्स हैं आजकल कि इनफ्लेमेशन कम करो, इनफ्लेमेशन कम करो। तीसरी चीज जो बहुत ज्यादा आजकल देखने में आई है वो है फटीग। लाइक जनरली पीपल आर ऑलवेज लाइक दिस इज द मोस्ट कॉमन थिंग दैट आई हियर फ्रॉम पीपल दैट आई इंटरेक्ट विद कि बहुत थकान है। आई एम फीलिंग वैरी टायर्ड। लाइक आई एम ईटिंग ऑल द गुड थिंग्स। आई ऍम स्लीपिंग आल्सो वेल। आई एम डूइंग माय 8 आवर्स ऑर स्लीप। आई एम
(1:08:37) एक्सरसाइजिंग आल्सो। बट येट देयर इज़ जस्ट जनरल फटीग इन द बॉडी। वंस अगेन। लेट अस कोरिलेट इट विद एनर्जी। हां जी। एनर्जी लेवल कम है? हम एनर्जी कौन बनाता है? माइटोकांड्रिया माइटोकांड्रिया की हेल्थ खराब हो रही है। बट ये हो रहा है। माइटोकांड्रिया की हेल्थ इंप्रूव कर लो। कुंभक से आप देखेंगे आपकी एनर्जी बढ़ जाएगी। राइट? और देन अपार्ट फ्रॉम दैट मेटाबॉलिज्म हाउ मच फूड योर बॉडी इस एबल टू यूटिलाइज। हम ये भी एक फैक्टर है जो इंप्रूव करना होगा जो कुंभक से इंप्रूव होता है। ओके? तो भी आपकी फटीग लेवल्स कम हो जाएंगे। कम हो जाएंगे। हां। बट ये है कि इंपैक्ट ऑफ द एक्सटर्नल
(1:09:14) इकोसिस्टम विल ऑलवेज बी देयर। तो आपको एनर्जी लेवल्स कभी बढ़ गए और कभी फिर क्रैश भी होंगे तो अगर आप कुंभक को अपनी लाइफ में हमेशा रखेंगे तो आप देखेंगे कि आपके क्रैश बहुत कम हो जाएंगे। ओके ओके ओके। एंड व्हाट अबाउट हेयर फॉल एंड हेयर थिनिंग? दिस इज समथिंग दैट हैज़ लाइक बहुत ज्यादा बढ़ गया है ये अभी पिछले कुछ सालों में। हेयर थिनिंग और हेयर फॉल। तीन तरीके से इसको समझते हैं। शुरुआत ऊपर से करते हैं कि जो दिखता है वह बिकता है। [हंसी] कुछ भी बताते हैं लोगों को तो जो कुछ भी दिखा देते हैं लोग उसको मान के फिर हां आपके हेयर फॉल में एक्चुअली जड़ से आपका
(1:09:56) हेयर ना निकल जाता है। हम जो जड़ है हम वहां पे शॉर्टेस्ट लिविंग स्टेम सेल्स होते हैं। ओके। पूरी बॉडी में जितने स्टेम्स होते हैं शॉर्टेस्ट लिविंग स्टेम सेल्स आपके हेयर के रूट में होता है। यानी इसका मतलब क्या होता है? उसको बहुत जल्दी न्यूट्रिशन चाहिए। ज्यादा न्यूट्रिशन चाहिए। अच्छा। अच्छा आपका मेटाबॉलिज्म अगर वीक होगा। हां। दूसरा आपका ट्रांसपोर्टेशन फैक्टर वीक होगा। हम यानी कि जहां पे मेटाबॉलिज्म हो रहा है आपका गट इकोसिस्टम हम वहां से स्किन तक आपके न्यूट्रिशन को मूव करने में हम सबसे ज्यादा टाइम लगता है।
(1:10:42) बिकॉज़ वो लास्ट एंड है वो। वो लास्ट एंड है। जी। तो अगर आपके बॉडी में ट्रांसपोर्टेशन फैक्टर खराब होगा। यानी कि कफ ज्यादा है। हम कफ की प्रवृत्ति ज्यादा है तो बीच में ब्लक्स आ जाएंगे। यानी जैसे मलाई जम गई है। हां। चाय की छननी में तो चाय नहीं छननेगी। तो कफ बॉडी जो होती है खास करके फीमेल में हां। कफ प्रकृति ज्यादातर फीमेल्स की होती है। हम तो उनमें क्या होगा कि ट्रांसपोर्टेशन फैक्टर ठीक नहीं होगा। हम ट्रांसपोर्टेशन मेटाबॉलिज्म ठीक नहीं है। कफ में मेटाबॉलिज्म भी वीक होता है। मेटाबॉलिक वीकनेस आ गया। ट्रांसपोर्टेशन फैक्टर वीक आ गया तो शॉर्टेस्ट लिविंग
(1:11:21) स्टेम सेल्स को न्यूट्रिशन नहीं मिलेगा। राइट? तो वो पकड़ खो देंगे अपनी। ओके? दूसरा हाइड्रेशन खो देंगे अपनी जिससे वो निकलने के चांसेस ज्यादा होंगे। अच्छा। तो अब इन तीन चीजों को आपस में बस जोड़ना है आपने। हम वहां मेटाबॉल मेटाबॉलिज्म को इंप्रूव करना है। हाउ मच बॉडी और हाउ मच फूड योर बॉडी इस एबल टू यूटिलाइज। या है ना? वो कुंभक से ठीक होगा। ट्रांसपोर्टेशन ठीक करना। वो प्रेशर ग्रेडियंट में होगा। वो भी कुंभक से ठीक होगा। क्योंकि वो प्रेशर क्रिएट होगा तब वो खाना वहां तक पहुंचेगा। और तीसरा पार्ट तब जाके उसको न्यूट्रिशन मिलेगा। अब तीसरा पार्ट
(1:11:56) मैं पकड़ रहा हूं। बता रहा हूं आपकी पकड़ अच्छी होनी चाहिए। अच्छा। जितनी पकड़ आपके हाथ से ऐसे पकड़ते हैं किसी चीज को जितनी टाइट होगी उतने आपके बाल रुक पाएंगे। सो योर होल्डिंग फैक्टर अगेन कुंभक क्या है? होल्डिंग। होल्डिंग है। तो उसको भी बढ़ाएंगे तो पकड़ आपकी मजबूत होगी तो ही आपके बाल जो है वो रुक पाएंगे। अमेजिंग। दिस इज कंप्लीटली डिफरेंट पर्सपेक्टिव टू हेयर फॉल राइट? लाइक ये कभी आपने किसी से भी नहीं सुना होगा कि ये रियल पर्सपेक्टिव है। उसको डिफरेंट इसलिए बोल रही हूं क्योंकि कोई और दूसरा पर्सपेक्टिव चला रहा है। बिल्कुल बिल्कुल
(1:12:34) उसे रिजल्ट मिले नहीं मिले वो नहीं पता है मगर नैरेटिव चला रहे हैं। ना कुछ और चल रहा है। हां हम सो अब आते हैं हम लोग वुमेन हेल्थ पे क्योंकि वो हमारा हमारी सबसे ज्यादा जो बड़ी कम्युनिटी है वो वुमेन हेल्थ से रिलेटेड है जिसमें पीसीओएस है, एंडोमेट्रियोसिस है, थायरॉइड के प्रॉब्लम्स हैं, इनफर्टिलिटी है, पोस्टमार्टम इशूज़ हैं। पोस्टमार्टम डिप्रेशन एक बहुत बड़ी चीज है जिससे कि कई महिलाएं जूझ रही हैं। तो इन सब चीजों के बारे में थोड़ा सा डिस्कस कर सकते हैं कि जैसे गर्ल्स में मैंने देखा है 15 इयर्स, 16 इयर्स ओल्ड में पीसीओएस हो रहा है। नॉन
(1:13:09) अल्कोहलिक फैटी लिवर की प्रॉब्लम आ रही है बच्चियों में बहुत छोटी। द अदर मेजर प्रॉब्लम इज़ दैट दे आर हिटिंग प्यूबर्टी वेरी अर्ली। तो एट इयर्स नाइन इयर्स में प्यूबर्टी आ रही है जो कि पहले हमें 14 13 साल में हमें दिखती थी। तो ये इससे रिलेशन में आप कुछ बताएं कि कहां गलत हो रही हैं चीजें। पहली बात हम बहुत सारे फैक्टर्स के बारे में पीछे से बात करते आ रहे हैं। मगर फेमिनाइन एस्पेक्ट जो है ना इनको हमें अलग से ट्रीट करना पड़ेगा। वो जो हम मेल और फीमेल को एक जैसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बड़ी बेवकूफी इस दुनिया में नहीं हो सकती। कुछ
(1:13:51) आपने बहुत अच्छी बात बोली क्योंकि यही वुमेन वेलनेस फर्स्ट में हम यही बात करते हैं कि डोंट ट्रीट देम इक्वल बिकॉज़ दे आर कंप्लीटली डिफरेंट। दे आर कंप्लीटली डिफरेंट। आप किसी का कम नहीं कर सकते। फीमेल काेंट उतना ही है। मेल का इंपॉर्टेंट उतना ही। बल्कि हम अगर सच में देखें तो नेचर ट्रीट्स फीमेल मोर ग्रेसफुली या जेंटली देन मेल। यस। क्योंकि वो वो जीवन के कारक हैं। क्रिएटर। हमारे शास्त्रों में बल्कि हमारी परंपरा में तो यह कहा जाता है कि दिस होल यूनिवर्स इज़ फ़ेमिनाइन। हम त्रिपुर सुंदरी ये फेमिनाइन है। कहानी भी यही कहती है कि व्हेन द शक्ति वांटेड टू क्रिएट यूनिवर्स
(1:14:36) शी स्टार्टेड वुइंग शिवा हम है ना? उसको रिझाने लग गई कि भाई तू मटेरियल है। आई वांट टू मोल्ड यू इन अ डिफरेंट वे क्रिएटिव वे। ओके। तो वही कहानी है कि वो कहती है नहीं उनसे विवाह करेंगे। है ना? इसका एक्चुअली क्रक्स आप समझे तो यू विल अंडरस्टैंड हाउ दिस नेचर केम इनू एकिस्टेंस। और उसका नेचर कैसा है? प्रकृति कैसी है उसकी? तो द होल यूनिवर्स इस फेमिनिन। ये फेमिनाइन के लिए बनी है। मेल तो मजदूर है। हम बेसिकली ये फीमेल के लिए ये सारा यूनिवर्स बना है। तो शी इज मोर रिस्पांसिबल टुवर्ड्स लाइफ देन अ मेल। मेल ज्यादा मुक्ति के लिए जाता है। इसीलिए
(1:15:19) कि मुझे नहीं जीना। [हंसी] फीमेल ज्यादा जीना चाहती है। ज्यादा लाइफ की तरफ में जाती है। तो ओरिएंटेशन इज़ डिफरेंट। फेमिनाइन में नेचुरली जो उसकी एनर्जी फ्लो होता है वो इनवर्ड्स फ्लो होता है। राइट? मेल में ये आउटवर्ड्स फ्लो होता है। करेक्ट? तो द वे इन व्हिच अ फीमेल लुक्स एट एनीथिंग हम इज डिफरेंट। जब वह बाहर भी देख रही होती है तो थ्रू हर ओन इमोशनल स्ट्रक्चर शी इस लुकिंग आउट एंड द मेल इज लुकिंग थ्रू ह लॉजिक यस दोनों का कहीं भी साठगांठ नहीं बैठेगी हम फिर मेल यही कहेगा कि इसको तो भगवान भी
(1:16:04) नहीं समझ सकता है हम मगर सच बात है ये आप उस तरीके के हो ही नहीं सकते हम फेमिनाइन पर्सपेक्टिव नीड्स टू बी डिफरेंट नीड्स टू बी हैंडल्ड इन अ डिफरेंट मैनर। इसलिए आप देखेंगे कि शरीर में प्रॉब्लम होती है तो फीमेल की प्रॉब्लम अलग तरीके की होती है। हम हालांकि उसको आज के टर्म्स में हम उसी तरीके से ट्रीट कर सकते हैं। तो मैं अगर आपको थोड़ी स्टोरी सुनाऊं तो उसमें ये सारे प्रॉब्लम्स फीमेल की बॉडी की स्टोरी सुनाऊं। ओके? हमारा एक प्रोजेक्ट है उसको कहते हैं मेदनी। हम मेदनी एक शब्द है जिसे गर्भवती स्त्री को मेदनी कहते हैं। मगर मेदनी एक और मीनिंग से मेद धातु जिसके
(1:16:49) अंदर ज्यादा होगा वो मेदनी होगी तो मेद धातु कौन सी धातु है जिससे कि बॉडी में शाइन आता है जिससे कि चाम आता है वो मेद धातु आप देखेंगे जेनेटिक इवननेस है फीमेल में इसीलिए फिजिकल अ फिजिकिटी में में भी एक स्मूथनेस है। हम एक्शन में भी एक ग्रेस है। हम मेल में जेनेटिक इवननेस नहीं है। एक टांग टूटी एक जेनेटिक की है ना? एक एक्स है, एक व है। राइट? एक टांग टूटी हुई है ना? तो इसीलिए उनकी लाइफ में अलग तरीके से और हमने कल्चरली फीमेल को इवन नंबर से डिनोट किया। मेल को ऑड नंबर से डिनोट किया।
(1:17:39) ओके? अगर आप एक तरीके से हमारे यहां पर एक चांट है और सबसे वन ऑफ द मोस्ट पावरफुल थिंग्स वी हैव क्रिएटेड इज श्री रुद्रम। ओके। श्री रुद्रम में नमकम और चमकम दो पार्ट है। अच्छा। चमकम में एक व्यक्ति डिजायर कर रहा है मुझे यह चाहिए। हम ये भी चामा चामा ये भी चाहिए। यह भी चाहिए। यह भी चाहिए। यह भी चाहिए। हम और लास्ट में वो कहता है मुझे एक 3 5 7 9 11 13 15 17 इस तरीके से 33 तक जाता है। मुझे यह चाहिए। फिर कहता 4 और 4 8 12 16 20 24 28 32 36 44 तक जाता। अच्छा कहता है मुझे ये भी चाहिए।
(1:18:27) सो ये जिसे अर्धनारेश्वर कहते हैं। मेल एंड फीमेल ये अर्धनारेश्वर पर्सपेक्टिव ऑफ लाइफ डुअल पर्सपेक्टिव ऑफ़ लाइफ ये इसको डिनोट करता है। बट इसमें सारे फोर के टर्म्स में जो डिफाइन किए गए हैं वो फेमिनाइन एस्पेक्ट है और ऑड नंबर में जो डिफाइन किए हैं वो मेल एस्पेक्ट है। ओके? मैस्कुलिन एस्पेक्ट है। अब ये दोनों एक जैसे नंबर भी नहीं है। हम तो मेद आपको सुंदर बनाता है। ओके? मेद से ही आपके टिश्यूस बनते हैं। जी। तो जिसे कहते हैं ना प्रोटीन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम फीमेल का बहुत सेंसिटिव होता है।
(1:19:12) हम दूसरा मे नीड्स हीट टू कन्वर्ट। ओके। उसके शरीर को गर्मी चाहिए होते हैं। ओके। तो शी इज मोर रेिलेंट। हम लाइफ में भी देखें तो फीमेल ज्यादा रेजिलेंट होती है। मेल के मुकाब मेल थोड़ा नाजुक होता है। फीमेल थोड़ी स्टंग स्टंग होती है। हां तो अब यही मेद बहुत सारी चीजें उसके अंदर रोकता भी है। ओके। जैसे बहुत आप लॉजिकली हम सोचेंगे तो फेमिनिन आस्पेक्ट बिगड़ जाएगा। हम फीमेल को बहुत जल्दी रिएक्ट करके भूलना चाहिए।
(1:19:58) तो हम कहते थे जो बबलीनेस है ना हम जो जीवंतता है एक परिवार की जीवंतता फेमिनिन होती है। हम जब लड़की हम लड़के और लड़की को पसंद करते हैं तो लड़की कैसी पसंद की जाती है? लड़का शांत पसंद किया जाएगा। मगर लड़की बबली पसंद की जाएगी। थोड़ी जीवंत हो। हां। तो वो बोल भी दे, इमोशनल से ज्यादा खेले। वो बोल भी दे मगर भूल भी जाए। हम वो लड़ाई करे और ठीक भी कर ले। हम बहुत समय तक दिमाग में ना घुसा के रखे। वो मेल आयाम है। बहुत समय तक किसी चीज को दिमाग में पकड़ के रखना। तो ये मेद की वजह से आता है उसके अंदर। ओके? वो फीमेल जितनी ज्यादा बबली होगी एक्टिव
(1:20:43) होगी हम उतनी ज्यादा रिप्रेजेंट करेगी लक्ष्मी को ओके लक्ष्मी एक्टिविटी है एक्टिविटी से ही चीजें बनती है हम तो हम कहते हैं वो हमेशा फीमेल को हम लक्ष्मी के साथ में कोरिलेट करते हैं। और गर्भवती को हम मेदिनी बोलते हैं। उसी मेद को उसने यूटिलाइज करके एक बेबी बनाया तो उसके शरीर में अब मेद अगर ज्यादा है एक अच्छी चीजें भी ज्यादा होंगी। कुछ उसका नेगेटिव भी है। नेगेटिव क्या होगा? तो अगर आप कोई भी वस्तु खाते हैं, भोजन लेते हैं, मान लीजिए आपके शरीर की गर्मी कम हो गई किसी वजह से। हम मेद के कारण ही कम हो जाते हैं। तो क्या होगा? लीवर में मेद का डिपॉजिशन हो जाएगा।
(1:21:30) अच्छा। फैटी लिवर जिसको कहते क्योंकि मेद ज्यादा है। मेद प्रोटेक्टिव भी है। अब आपने केमिकल दवाई खाई जाएगा कहां? वो केमिकल फूटेगा कहां? केमिकल बम कहां फूटेगा? लिवर में। तो लिवर अपने आप को कैसे बचाएगा? आपके इनफ्लेमेशन हो गया। जलन हो रही है। कैसे बचाओगे? कोई केमिकल रगड़ लीजिए तो इनफ्लेमेशन होगा। हां। कैसे बचाओगे उसको? थोड़ा घी लगाओगे तो कम हो जाएगा। हम मेद इनफ्लेमेशन को कम करता है। ओके। तो जिसका भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है हां आप क्लप करो खुशी मनाओ अपने बॉडी को थैंक्स बोलो कि उसने आपको बचाया हुआ है कोलेस्ट्रॉल कम हो जाएगा आप गए
(1:22:10) हम डोंट क्रिब ऑन कोलेस्ट्रॉल फैटी लिवर हो गया बचाया मगर रिस्क क्या दिया आपने हम आप उसको देखना पड़ेगा ना आपने केमिकल खाया जी लिवर में इनफ्लेमेशन हुआ इनफ्लेमेशन में कि थोड़ा घी बढ़ा दिया उसने फैट बढ़ा दिया बचा लिया अपने आपको हां फैटी लिवर इज अ प्रोटेक्टिव थिंग। नाउ फैटी लिवर हुआ तो उसका नुकसान भी है। बचा तो लिया उसने लेकिन अब काम कम कर रहा है। इंसुलिन कहां गिरता है आपका? लिवर में जाके गिरता है। जैसे छननी में आप फैट जमा दो तो उसमें कोई चीज छनेगी नहीं, जाएगी नहीं। उसका एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसपोर्टेशन ठीक से नहीं होगा। परमिएट नहीं कर पाएगी।
(1:22:49) करेक्ट। तो इंसुलिन अब आपके लिवर में नहीं गिर रहा। नहीं जा पा रहा। फैट ज्यादा है, ब्लड में ज्यादा रुक रहा है। और ब्लड का यूटिलाइजेशन फीमेल में ज्यादा कहां पे होता है? ओवरी, फैलोपियन ट्यूब, यूट्रस वहां पे ज्यादा होगा। अब वहां पे ये इंसुलिन अंदर नहीं गया। ब्लड में आया ब्लड में इंसुलिन ज्यादा हो गया। ओवरी, फैलोपियन ट्यूब, यूट्रस वहां पे जो ब्लड है उसमें इंसुलिन ज्यादा है। ओके? इंसुलिन एक ग्रोथ हॉर्मोन है। करेक्ट? वो वहां पे ज्यादा करेगा क्या? उसके पास और कोई काम तो बचा नहीं। तो वहां पर अननेसेसरी ग्रोथ करवा रहा है। राइट?
(1:23:26) तो उस सिस्ट के फॉर्म में ग्रोथ करवा रहा है। वो फिलोपियन ट्यूब ब्लॉकेजेस जो बंद अननेसेसरी टिश्यू ग्रोथ करवा रहा है। और यूट्रस में ग्रोथ डेविएशन करवा रहा है। हम यानी यूट्रस में या तो उसकी लाइनिंग ठीक से नहीं बन पा रही है। क्योंकि वहां पे अ एक्चुअली जो हमारा ग्रोथ फैक्टर है शरीर का वो बिगड़ रहा है। कुछ भी अननेसेसरी मेडिसिन हम खा रहे हैं तो। ओके। जैसे सिंगल पैरासिटामॉल और पेन किलर्स की ही बात करूं तो प्रोस्टाग्लैंडिन इनबिटर्स हैं। यानी प्रोस्टाग्लैंडिन जो आपके बॉडी का ग्रोथ फैक्टर है उसको इनबिट करते हैं। तो ग्रोथ डेविएशन होगा। साथ में आप
(1:24:03) इंसुलिनीमिया हाइपर इंसुलिनमिया यानी ब्लड में इंसुलिन फालतू इंसुलिन का घूमना इसको जोड़ दीजिए। तो देखेंगे जहां ग्रोथ होना चाहिए वहां नहीं हो रहा। जहां नहीं होना चाहिए वहां पे ग्रोथ हो रही है। तो क्या होता है? आजकल एक टॉपिक प्रेगनेंसी ज्यादा हो रही है। यानी कि ग्रोथ कहां है? फैलोपियन ट्यूब के नजदीक। तो फीटस फैलोपियन ट्यूब के नजदीक में जाके अपने आप को अटैच करता है मगर ग्रो नहीं कर पाता वहां क्योंकि जगह नहीं है। तो फिर वो गिर जाता है उसका एक तरीके से जिसे हम कहते हैं कि उस कंडीशन को एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहते हैं। मगर उसकी वजह से वो मिसकैरज हो जाता है।
(1:24:39) जी। दूसरी बात अ पीसीओडी के कारण फॉलिकल से एग प्रॉपर्ली निकल नहीं पाते। हां। तो एक रिजवायर में क्वालिटी ऑफ एग खराब हो रही है। फॉलिकल्स से निकलने का प्रोसेस डिले हो पा हो रहा है या नहीं हो रहा? फपेटिव ब्लॉकेजेस की वजह से एग का ट्रांसपोर्टेशन प्रॉपर्ली नहीं हो पा रहा। ब्लॉक आ गया तो एग वहां से ओवरी से आपके यूट्रस की तरफ में जो जाएगा वहां रुक जाएगा। तो उस वजह से मेटिंग नहीं हो पाएगी। स्पर्म के साथ में मेटिंग नहीं हो पाएगी। प्रेगनेंसी नहीं हो पाएगी। कंसेप्शन नहीं हो पाएगा। तो अब इसमें आप क्या करोगे? अगर यूट्रस या [नाक से की जाने वाली आवाज़] फैलोपियन
(1:25:20) ट्यूब्स कोई स्क्रेपिंग करवाता है। उसकी लाइनिंग थिक हो गई या फिर ब्लॉक आ गया तो स्कैप करवाते हो तो वो वापस आ जाएगा। पीसीओडी कैसे ठीक करोगे? तो आजकल उसको पीएमओएस बोलते हैं। तो अ कैसे करेंगे? इसका सशन कहां पे है? इसका सॉल्यूशन आपके मेटाबॉलिज़्म को इंप्रूव करने में है। इसका सॉल्यूशन आपके मेटाबॉलिक हीट को बढ़ाने में है। इसका सॉल्यूशन है लिवर फंक्शन को इंप्रूव करने में। और वो काम कुंभक करता है। इसलिए कुंभक करने से पीसीओडी ठीक हो जाता है। यहां तक देखा गया कि फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेजेस भी प्रेशर बिल्ड अप होने के कारण अपने आप ही ठीक हो जाता है।
(1:25:56) ओके। अगर फैलोपियन ट्यूब में कमजोरी है या कोई स्क्रीपिंग करवा लेने के कारण भी कई बारी डैमेज हो जाता है। तो एक फैलोपियन ट्यूब को काट देते हैं, बंद कर देते हैं। हां। और उसमें भी अगर आप देखेंगे अगर बंद नहीं किया हुआ तो उसके रिवाइव करने के चांसेस बढ़ जाते हैं। अच्छा यूटस की लाइनिंग प्रॉपर्ली आने आ जाती है। कुंभक करने के बाद में हमारे पास में ऐसे बहुत लोग आते हैं कहते हैं कि पीरियड्स हैवी हो गए। हम तो वो हमेशा हर चीज को प्रॉब्लम के तरीके से देखते हैं। हम कहते हैं कि तो बधाइयां है फिर तो क्योंकि अगर ग्रोथ प्रॉपर है तभी एक बेबी बन पाएगा। हम
(1:26:28) मेद ज्यादा है मतलब मेद ज्यादा है उससे टिश्यू ग्रोथ बन रही है प्रॉपर्ली तभी तो एक बेबी बेबी उसी यूट्रस के ग्रोथ के ऊपर ही तो डेवलप होता है करेक्ट ब्लड का फ्लो ज्यादा अच्छा हो पाएगा यूट्रस में तो फिर प्रॉपर्ली टिश्यू ग्रोथ में वो हेल्प करता है। तीसरी चीज अगर प्रेशर फैक्टर ऑफ यूट्रस सही होगा तो आप देखेंगे यूट्रस के साइज और शेप में कोई डेविएशन है वो भी ठीक होता है। अच्छा चौथी चीज अगर बल कारक कम है, बल वृद्धि कुंभक करता है। बल का मतलब अगर आप सीधा हार्ट की स्ट्रेंथ से जोड़ें। अगर फीमेल की हार्ट की स्ट्रेंथ अच्छी नहीं होगी तो
(1:27:03) बेबी की हार्ट बीट नहीं आ पाती। हम और शायद उसका प्रॉपर हम डायग्नोसिस भी नहीं जानते कि ये कैसे करेंगे। उसका कोई अवेलेबिलिटी नहीं है डायग्नोसिस की। मगर एक चीज देखा गया है कि हार्ट बीट ना आने के कारण जिसमें मिसकरेज बहुत होते हैं। दो बार, तीन बार, चार बार, पांच बार तक मिसकरेज हो गए हैं। वो कुंभक करने के बाद में पूरे हो जाते हैं, कंसीव कर पाते हैं और डिलीवर कर पाते हैं। इसके अलावा ये आ गई थायराइड से रिलेटेड। इसी को हम कहते हैं थायराइड की कंडीशन। राइट? बट एक बात समझिए कि थायराइड को और तरीके से भी हम देख सकते हैं। यानी बॉडी में स्टैमिना कम हो गया।
(1:27:45) हम मेटाबॉलिक वीकनेस मैंने बता दिया वो थायराइड का एक रीजन है। स्टैमिना कम हो गया। मेटाबॉलिज्म के साथ में जुड़ा भी हुआ है। लेकिन स्टैमिना कम हो गया तो मैन्युफैक्चरिंग ऑफ प्रोटीन का प्रोसेस जो होता है तो वीक हो जाता है। ओके? और फीमेल में आज के टाइम पे स्टैमिना कम होता जा रहा है। तो मेल बने हैं झटके से काम करने के लिए। फीमेल बनी है स्लोली काम करने के लिए। ओके? यानी फीमेल बनी है लंबे समय तक काम करने के लिए। मेल बनी है शॉर्ट स्पॉट फिर रेस्ट फिर जोर लगा के काम करना। फिर रेस्ट फिर जोर लगा के काम दोनों का लाइफ स्टाइल बिल्कुल अलग होना चाहिए। मगर हमारे
(1:28:19) कल्चरली हमने देखा है कि फीमेल को जो काम दिया जाता है वो लगातार दिया जाता। हम यानी इवन मां भी जो है वो फीमेल को जल्दी बैठने नहीं देती थी। और बूढ़ी पुरानी औरतें तो गर्भवती महिलाओं को रेस्ट करने ही नहीं देती थी। इसको हम आज डिस्क्रिमिनेशन बोलते हैं। मगर वो उनकी बॉडी को उसी से आराम मिलता है। अच्छा इफ दे स्लोली वर्क फॉर अ लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम। हम इसी को स्टैमिना भी कहते हैं। लो इंटेंस लो इंटेंसिटी वर्क बट अ लॉन्ग पीरियड। फॉर अ लॉन्ग ड्यूरेशन फॉर अ लॉन्ग ड्यूरेशन। ओके? तो ये नेचर ने फीमेल के लिए इस तरीके का लाइफस्टाइल बनाया। मेल के लिए अलग तरीके
(1:29:00) का लाइफस्टाइल बना है। दोनों आपस में एक दूसरे को कंपेयर ना करें। हम एक दूसरे के जैसा बनने की कोशिश नहीं करें। नहीं तो सारी फीमेल्स इनफर्टाइल हो जाएंगे। अब स्टैमिना कम हो जाना एक फैक्टर है। कुंभक से स्टैमिना बढ़ेगा। स्टैमिना कम हो जाने से प्रोटीन से एलर्जी हो जाती है। तो थायराइड क्या है? प्रोटीन से एलर्जी है। एंड थायराइड इज़ मोर कॉमन इन वुमेन। थायराइड इज मोर कॉमन इन क्योंकि प्रोटीन इकोसिस्टम वुमेन का सेंसिटिव होता है। सेंसिटिव तो अगर वो खराब हुआ तो फीमेल ज्यादा सफर करेंगे। ठीक है ना? जबकि जो फोर्सफुल एक्टिविटी है उससे आपके बॉडी में ग्लूकोस अब्सॉर्प्शन
(1:29:40) सफर करता है। अगर मेल फोर्सफुल एक्टिविटी को छोड़ दें। हैवी काम करना छोड़ दें तो उनको डायबिटीज होगी। सो डायबिटीज़ मेल में ज़्यादा प्रल रहता है। बट दोनों ही केस एक तरीके से देखा जाए तो दोनों ही चीजों में हार्ट इंपैक्ट होता है। अलग-अलग तरीके से इंपैक्ट होगा। फीमेल में टैकीकारिकार्डिया, ब्रडीकारिकार्डिया इस तरीके की चीजें ज्यादा होती है। लो ब्लड प्रेशर के इश्यूज भी फीमेल में ज्यादा ज्यादा होते हैं। जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द नेचर ऑफ द बॉडी। उसको अगर हम समझेंगे तो हम उसको सही कर पाएंगे। जी। चांसेस ज्यादा हैं सही करने के। बट एक चीज
(1:30:15) है अगर ग्रोथ का डेविएशन होता फीमेल उसको सफर करती है ग्रोथ के डेविएशन को मगर मेद ज्यादा होने के कारण हम सर्टेन काइंड ऑफ कैंसर इज मोर प्रिवेंलेंट इन फीमेल्स राइट जैसे ब्रेस्ट कैंसर लिंफेटिक कैंसर सर्विकल कैंसर ये चीजें फीमेल में ज्यादा प्रवेंट है जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द नेचर ऑफ द बॉडी राइट तो अगर आप अपने को सही तरीके से ट्रीट नहीं करते, सही लाइफ स्टाइल अगर आपके लिए डिजाइन नहीं होता है तो इवेंचुअली एव्री फीमेल विल गेट इंटू सम काइंड ऑफ प्रॉब्लम व्हिच इज ड्यू टू मेद। हम
(1:30:59) मेद उसका कारक होगा। ओके? तो यंग एज में अगर तीन स्टेजेस में डिफाइन करें, कैटेगराइज करें लाइफ को, ह्यूमन लाइफ को तो फर्स्ट स्टेज जो होता है वो मेद डोमिनेंट होता है। जी पहले अगर 75 साल के बारे में बोले 25 25 मेद डोमिनेंट होगा। सेकंड स्टेज 25 पित्त डोमिनेंट होगा। थर्ड स्टेज 25 वात डोमिनेंट होगा। करेक्ट। तो कफ की एज एंड फीमेल दोनों एक साथ हो जाते हैं टीनएज में। राइट? दोनों एक साथ हो रहे हैं। तो दोनों चीजें एक साथ हो रही है। दोनों चीजें एक साथ हो रहे हैं। तो उसके
(1:31:44) कारण हॉर्मोनल डेविएशन ज्यादा हो रहा है। ज्यादा हो रहा है। अब हॉर्मोनल डेविएशन के कारण मैं तो देख रहा हूं कि टीनएज में थायराइड बढ़ रहा है। बहुत हम प्यूबर्टी में हॉर्मोन डेविएशन के कारण उसका टाइमलाइन सफर कर रहा है। केवल इतना ही नहीं है कि अर्ली आ रही है। हम अर्ली आने का कारण में एक और कारण है। द काइंड ऑफ़ मेंटल एक्टिविटी अ किड इज़ डूइंग इन यंगर एज। हम जिससे हार्मोनल फ्लो का फैक्टर इंक्रीस हो जाता है और वो बाद में जाके डेविएट और डिक्रीज हो जाता है। राइट? आप किसी चीज को ज्यादा यूज़ कर लो पहले तो बाद में उसकी यूज़ करने की शक्ति कम हो
(1:32:27) जाएगी। और पहले वो ज्यादा एक्टिवेट हो जाता है। पहले वो ज्यादा एक्टिवेट हो जाता है। तो अर्ली प्यूबर्टी देखने को मिलता है। कई बारी हम आज भी मेरे पास ऐसे भी केस आते हैं जहां पे कि प्यूबर्टी आती ही नहीं है। ऐसे भी आ थायराइड 12 13 साल के लड़कियों को थायराइड हो रहा है। अर्ली स्टेज कैंसर भी हो रहा है। और अगर देखा जाए तो मेंटल इशूज़ माइंड से रिलेटेड इश्यूज बहुत ज्यादा आ रहा है। थायराइड में एक और कंडीशन है जिसकी वजह से थायराइड होता है। वि इज नॉट रियली थायराइड। 92% फीमेल्स को थायराइड की प्रॉब्लम नहीं है। अच्छा जिनको टैग किया गया है थायराइड।
(1:33:06) ओके? उनको बेसिकली एड्रिनल ओवर एक्टिविटी की प्रॉब्लम है या फिर पिट्यूटरी इनसफिशिएंसी की प्रॉब्लम है। यानी कि शरीर के अंदर शरीर समझ रहा है कि खतरा है। तो खतरे का स्विच आपके एड्रिनल ग्लैंड्स होते हैं उसको एक्टिवेट कर देता है। जिसके कारण कि ए्जायट आती है, घबराहट आती है, टैकीकारिकार्डिया होता है। यानी हार्ट रेट तेज हो जाता है, पल्स रेट तेज हो जाता है। दिमाग घूमने लग जाता है। है ना? ना ब्लड प्रेशर थोड़ा ऐसा लगता है कि बढ़ गया है या फिर रेडिशनेस आ गया। इनफ्लेमेटरी फैक्टर्स आपके बॉडी में बढ़ जाते हैं। इम्यूनिटी एक्टिवेट हो जाती है। बाद में चल के वाटर
(1:33:43) इम्यून सिंड्रोम में कन्वर्ट हो गई। तो ये और दूसरा पिट्यूटरी इनसफिशिएंसी टीएसएच थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलता है। तो आपका शरीर खतरे में आता है तो वो ज्यादा रिलीज करेगा। तो टीएसएच जिनको ज्यादा है उनको बेसिकली एंजाइटटी का इशू हम एड्रिनल हो रहा है ओवर एक्टिविटी ओके है ना ये भी हमको थोड़ा नैरेटिव समझ के इसको बदलना पड़ेगा तो उसमें क्या कर सकते हैं वो डिसाइड करना पड़ेगा तो कुंभक वहां भी हेल्प करता है कुंभक करने से पिट्यूटरी ग्लैंड का कंट्रोल और कैल्सिफिकेशन रुक जाता है हम उसको वापस से सफल बना सकते हैं
(1:34:20) उसकी इनसफिशिएंसी को दूर कर सकता है समझिए टॉलरेंस बढ़ाने से आपका ए्जायटी का इशू रॉल्व हो जाता है। जितना टॉलरेंस होगा आपका पिट्यूटरी एक्टिविटी जो एड्रिनल एक्टिविटी को हम अरेस्ट कर पाएंगे। तो टॉलरेंस बढ़ाना जरूरी है। मेटाबॉलिज्म को इंप्रूव करते हैं तो इम्यूुनिटी फैक्टर नॉर्मलाइज होता है। तो मेटाबॉलिज्म का फैक्टर हर बीमारी के साथ में जुड़ा ही हुआ है आज के टाइम में। तो मेटाबॉलिक फैक्टर को इंप्रूव करना, मेटाबॉलिक स्ट्रेंथ को इंप्रूव करना कंपलसरी बन जाता है आज के समय में। क्योंकि मेटाबॉलिज्म इंप्रूव होगा तो एनर्जी कन्वर्शन बेटर होगा। एंड देन यू बी
(1:34:55) एबल टू यूज़ द फूड दैट यू आर ईटिंग इफेक्टिवली यूज़ द एंड ट्रांसपोर्ट इट योर टॉलरेंस विल इंप्रूव यू फील मोर एनर्जेटिक आपका रिकवरी फैक्टर अच्छा होगा रीजनरेटिव फैक्टर अच्छा होगा रिजुमिनेशन फैक्टर अच्छा होगा डिटॉक्स फैक्टर अच्छा होगा सब तो वहां से शुरू हो के कनेक्ट हो जाएगा बिल्कुल या सो थैंक यू सो मच स्वामी जी आपने बहुत ज्यादा इनेशन क्रिटिकल दी है हमें स्पेशली फॉर वुमेन हेल्थ आई थिंक दिस हैज़ दिस इज़ अ वेरी क्रिटिकल पॉइंट दैट डोंट ट्रीट देम लाइक मेन एंड यू हैव टू अंडरस्टैंड दैट योर बॉडी इज़ डिफरेंट। एंड यू नीड टू ट्रीट इट इन अ लिटिल डिफरेंट
(1:35:29) वे। एंड आई थिंक दैट्स फंडामेंटल टू एववरीथिंग दैट वी आर फेसिंग टुडे। थैंक यू सो मच फॉर कमिंग एंड ऑनरिंग आवर पॉडकास्ट। एंड वी वुड लव वी वुड पुट डाउन योर डिटेल्स ऑन आवर डिस्क्रिप्शन। सो दैट दे कैन कांटेक्ट यू डायरेक्टली एंड दे कैन जॉइन द क्लासेस एंड बेनिफिट फ्रॉम व्हाट यू हैव टू ऑफर। ऑफकोर्स। कर सकता है। थैंक यू सो मच। थैंक यू। थैंक यू। [संगीत]
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