Hidden Truth of Maa Baglamukhi- Black Magic Remedies,Home Worship Guide, Yantras & Tantras |Shlloka
Author Name:SHLLOKA
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Transcript:
(00:00) बगलामुखी को महा शमशान वासनी भी कहा जाता है। क्या है इसके पीछे की बात? माता जी के यहां पे चार श्मशान है। उसमें एक श्मशान आपको जो भगवती के समीप है वो जागरत श्मशान की श्रेणी में आता है। पुराण में जागरत श्मशान के पास किया गया जप इत्यादि कर्म तंत्र के विषय में अत्यधिक प्रभाव देता है। संजय दत्त जी हो गए। बड़े-बड़े फिल्म स्टार में अनु मलिक जी हो गए। बहुत बार इनके घर पर जाकर भी ब्राह्मण देवता बगलामुखी का हवन कर्म संपन्न करके आते हैं। अंबानी परिवार का भी नलखड़ा नगर आना हुआ है। भगवती के दर्शन कर्म प्राप्ति के लिए गुप्त रूप से उनकी भी साधना
(00:29) इत्यादि चलती रहती है। भगवती राजनेताओं की कुलदेवी है। महाराष्ट्र के जो चुनाव क्षेत्र अभी हुए इस क्षेत्र में यह मानिए कि 50% लोगों का जो वहां कार्य हुआ था बगलामुखी मंदिर में उन्हें सभी को विजय श्री की प्राप्ति हुई। कोर्ट कचहरी के लिए यदि कोई व्यक्ति काफी समय से चिंतित है, बगलामुखी कर्म करवाता है तो उसके जीवन क्षेत्र में उसको अच्छा निदान देखने को मिल सकता है। जिसको भगवती की साधना करनी हो क्या भगवती के स्थान में आकर ही वह साधना करी जा सकती है। घर पे भी वो साधना करी जा सकती है। आपके घर पे तेल का दीपक जल रहा है। वो
(01:03) आपको बंद नहीं करना है। यदि भगवती का यंत्र आपके घर पे है या यंत्र नहीं है तो एक खाली पात्र में एक सुपारी रख के बगलामुखी देवीय नमः बोलते हुए 36 बार भगवती का अर्चन कर्म कर सकते हैं। शाम के समय जो हरिद्रा उसमें एकत्रित होती है भोजन बनाते समय उस पात्र में आप उसको मिला सकते हैं। आपके शरीर में समस्त रोग बाधाओं का निवारण करता रहेगा। भगवती की मूर्ति कभी भी किसी भक्तों को अपने घर पर विराजमान नहीं करना चाहिए। आचार्य अभिषेक शर्मा अलबेला नलखेड़ा के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के ब्राह्मण हैं। उन्होंने मां बगलामुखी को समर्पित कई
(01:40) भजन और स्त्रोत लिखे हैं और मां बगलामुखी चालीसा भी लिखी है। स्फटिक में कुर्मू यंत्र आता है। कछुए के ऊपर पीठ पर श्री यंत्र बना होता है। वो सिद्ध कराकर अपने घर में व्यापार के लिए रखते हैं। आपको व्यापार में इतनी पदोन्नति कराता है जिसकी कल्पना भी आप नहीं कर सकते हैं। लाल मिर्ची का प्रयोग भगवती को बाध्य करने के लिए कि आपकी इच्छा है या नहीं है हमारी इस मनोकामना को आपको पूर्ण करना है। आपके जीवन में कोई व्यक्ति बार-बार आपको परेशान कर रहा है उसके लिए नाग केसर का प्रयोग आता है। शत्रु स्तंभन के लिए सबसे मुख्य जो औषधि बताई जाती है वह बताई जाती
(02:12) है हड़ताल। एक कमलाक्ष लेकर के आप अपने घर की तिजोरी इत्यादि में रख सकते हैं। लक्ष्मी का अच्छा प्रभाव देखने को मिल सकता है। जिसको हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं तो क्या क्रिया करी जा सकती है? मंदिर में भी और घर में खुद से भी। अपने घर पर सरसों का तेल का दीपक लगाएं। उसके अंदर काली मिर्च और लौंग डालें पर डे और इन दो उंगलियों से आपका हवन कर्म संपन्न होता है। यह आपकी बुद्धि का नाश करती है। यह आपकी लक्ष्मी का नाश करती है। जप और तप करते समय इन दोनों को वर्जित किया गया है। काले तिल के 27 लड्डू हम बनाएंगे। 27 स्लिप में एक साइड में अपना नाम गोत्र
(02:45) लिखना है। दूसरी साइड में जो भी समस्या आपको आ रही है, शाम को 4:00 से 6:00 के बीच में मां बगलामुखी पर रिसर्च करने के साथ मंदिर में वह बिजनेस ग्रोथ, डिजीज से छुटकारा, एनिमीज़ से प्रोटेक्शन और पॉलिटिकल सक्सेस जैसी चीजों के लिए विधिविधान से पूजा करवाते हैं। आज हम बड़े उत्सुकता के साथ उनको बॉडी टू बीइंग पॉडकास्ट पर स्वागत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि रावण के तांत्रिक पावर्स को रोकने के लिए राम ने इस देवी की आराधना करी। कौन थी वह देवी? मां बगलामुखी। और ऐसे ही कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने महाभारत के पहले बगलामुखी मां की आराधना करी जिससे उनको विजय में
(03:26) प्राप्ति मिली। बगलामुखी ऑनलाइन थर्ड मोस्ट सर्च्ड वर्ड है। क्यों? क्योंकि लोग रुकावटों से बहुत पीड़ित हैं। क्योंकि लोगों को आज के टाइम में हर तरफ से रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। चाहे वह करियर ग्रोथ में रुकावट हो, संतान प्राप्ति में रुकावट हो, लव एंड रिलेशनशिप्स में रुकावट हो, पैसे में रुकावट हो। तो मां बगलामुखी रुकावटों को न्यूट्रलाइज करती है। उनको खत्म करती है। तो आज हमारे साथ जो व्यक्ति जुड़ रहे हैं, वह बगलामुखी मंदिर के एक पंडित हैं जिनके साथ हम करेंगे एक मास्टर क्लास। तो हम बगलामुखी देवी के बारे में समझेंगे। हम
(04:03) उपाय, नुस्खे, क्रिया, कर्म सब चीजों के बारे में बात करेंगे जो आप मंदिर में कर सकते हैं और जो आप घर में रह के भी कर सकते हैं। तो प्लीज हमसे जुड़े रहिए। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करिए और अगर तो आपने हमारा चैनल सब्सक्राइब नहीं किया हो तो प्लीज दोबारा रिकंसीडर करिए। बिकॉज़ इससे हमारे कंटेंट चैनल दोनों को ज्यादा विजिबिलिटी मिलती है। पंडित जी हजारों साल पुराना नालखेड़ा का बगलामुखी मंदिर के बारे में कुछ ऐसे रहस्यमई और अद्भुत चीजें बताइए जो लोगों को पता नहीं है। नलखेड़ा जो कि है यह उज्जैन महाकाल मंदिर
(04:40) आपने नाम सुना होगा। बड़ा प्रसिद्ध है। 12 ज्योतिर्लिंग में आता है। वहां से 100 किलोमीटर दूर नलखेड़ा नगर स्थित है। वहां पर भगवती विराजमान है। बगलामुखी देवी। इनका पुराणों में मुख्यतः नाम आता है वलगा। पर समय व्यतीत होते वकार का बकार हो गया और वगामुखी का बगलामुखी नाम हो गया। अच्छा। बाकी मुख्य यदि पुराणों में आप देखेंगे तो इनका वर्णन आता है बगलामुखी नहीं वल्गामुखी जो वेग के समान है। आपकी तरफ आते हुए हर प्रहार को क्षण भर में क्षीण करना परिवर्तित करना यह भगवती का मूल कार्य होता है। जिनका वलगा वर्णन पुराणों में आपको देखने को मिलता है। अब
(05:17) समय व्यतीत होते होते वलगा से बगला हुआ तो पहली मेंटी लोगों के माइंड में यह बैठती है कि बगलामुखी नाम है तो बगले के ऊपर विराजमान होगी या ऐसा कुछ विषय होगा। बल्कि ऐसा नहीं है। भगवती को दो सिंहासन अति प्रिय बताए जाते हैं। एक होता है पीत सिंहासन जो कि स्वर्ण से रहित है और एक होता है प्रेत सिंहासन जो कि प्रेतों से रहित है। उस पर भगवती विराजमान होती है। प्रेत मतलब भूत जी भूत प्रेत इत्यादि उस पे भगवती विराजमान होती है। ऐसा वर्णन पुराणों में देखने को आपको मिलता है। तो क्या कारण है कि इनका सिंहासन प्रेत और स्वर्ण का बना हुआ है।
(05:50) क्या होता है कि जैसे कि दो विषय इनमें होता है। एक होता है सिद्ध पीठ का एक होता है शक्तिपीठ का जहां पर माता सती के अंग गिरे और भोलेनाथ जी द्वारा उनकी स्थापना की गई वो सभी शक्तिपीठ कहलाते हैं और ये स्टोरी आप थोड़ा बताइए लोगों को शक्तिपीठ की स्टोरी शक्तिपीठ का ये है कि जब महायज्ञ होने का था महादेव को आमंत्रित नहीं किया गया पार्वती मां के पिताजी के द्वारा तो वहां पर फिर भी पार्वती मां का जाना हुआ उन्होंने वहां पे बहुत अवेलना सहा तो उन्होंने देह अपना त्याग दिया था तो तब जाकर के फिर भगवान विष्णु ने उनके चक्र चला करके अलग-अलग पिंड में टुकड़े कर दिए
(06:23) थे। तो वह जहां-जहां जाकर के गिरे वह सभी शक्ति पीठ के रूप में विराजमान हुए। जहां भोलेनाथ जी द्वारा उनकी स्थापना की गई। एक-एक करके सिद्ध पीठ वो होते हैं जहां पर किसी ने स्थापना नहीं की है। स्वयं उनकी इच्छा से उजागर हुए हो। उन स्थानों को सिद्ध पीठ कहा जाता है। तो जो नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर में भगवती विराजमान है वह सिद्ध पीठ है जो कि तीन रूप में विराजमान है। बगलामुखी, महालक्ष्मी, महासरस्वती एक आपके शत्रुओं से आपकी रक्षा करती है। एक आपको धन संपत्ति इत्यादि प्रदान करती है। एक आपको बुद्धि विवेक आदि प्रदान करके आपको तीनों से परिपूर्ण भगवती का आशीर्वाद
(06:56) प्राप्त होता है। अब वहीं पर यदि भगवती की आप बात करें तो भगवती जो है यह 10 महाविद्याओं में आती है। पूरी पृथ्वी पर जो तंत्र चलता है, उसमें कोई भी व्यक्ति चाहे तंत्र कर रहा हो, कोई अघोरी हो, कोई ब्राह्मण हो, कोई तांत्रिक हो, इन 10 महाविद्याओं में से किसी एक महाविद्या से पावर लेकर के उसे उसका कार्य संपन्न करना होता है। उसमें आठवें स्थान पर आती है बगलामुखी माता जिन्हें अष्टम महाविद्या कहा जाता है। पंडित जी भगवती के दरबार में किस-किस प्रकार के क्रिया हवन संपन्न करे जा सकते हैं? मैं आपसे एक-एक करके पूछूंगी। सबसे पहले बिजनेस ग्रोथ की बात करते हैं। मैं
(07:29) अगर तो अपना बिजनेस ग्रो करवाना चाह रही हूं तो किस प्रकार की हवन क्रिया मुझे करनी चाहिए? देखिए इसमें ऐसा होता है कि भगवती के दरबार में मुख्यतः भगवती की जो क्रियाएं होती है वो चार क्रियाएं होती हैं। एक सात्विक कर्म होता है जिसमें आपके घर की सुख शांति इत्यादि के कर्म आता है। आपका विवाह इत्यादि के लिए कर्म आता है। आपको मानसिक शांति प्राप्त हो इस निमित्त कर्म आता है। वह आपकी सामान्य क्रिया में संपन्न किया जाता है। दूसरी क्रिया आपकी होती है राजस्व क्रिया। जहां भी विजय श्री का पक्ष आता है चाहे शत्रुओं के ऊपर हो, व्यापार के लिए हो, कोर्ट कचहरी के लिए
(07:58) हो, राजनीति के लिए हो, वहां पर राजकीय राजस्व कर्म संपन्न किए जाते हैं। तृतीय और चतुर्थ कर्म जो होता है वो होता है अघोर कर्म और तामसिक कर्म जो कि नलखेड़ा नगर में संपन्न नहीं होता है। क्योंकि उसमें बहुत बार आपको बलि इत्यादि भी देना होता है। मदिरा का भी प्रयोग होता है। लाल मिर्ची का भी प्रयोग होता है। इस कारण बगलामुखी मंदिर में वो क्रिया नहीं होती है। सात्विक और राजस्व ये दोनों क्रिया वहां पर आपकी संपन्न की जाती है। यदि कोई व्यक्ति सात्विक क्रिया इत्यादि करवा रहा है तो उसमें सुख शांति इत्यादि के लिए भी आ जाएगा। बिजनेस ग्रोथ इत्यादि
(08:28) के लिए भी आ जाएगा। प्लस राजस्व क्रिया यदि कोई व्यक्ति करवाता है तो जैसे आपने अभी पूछा बिजनेस ग्रोथ कैसे कर सकते हैं? जो विधिवत क्रिया उसकी होती है वह उसमें ऐड हो जाती है क्योंकि वह सर्व बाधा निवारण के लिए अनुष्ठान कर्म होता है। उसमें जो प्रयोग किया जाता है। अब इसमें भी दो-तीन प्रकार के अलग-अलग क्रियाएं होती हैं। जैसे मंदिर में तो कुछ सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है तीन प्रकार के कि यह हवन कर्म आप संपन्न करवा सकते हैं। उसकी अपेक्षा यदि आपके नाम गोत्र से आप विधिवत कर्म कराना चाहें जैसे हमारे पुराण में दो चीज का वृतांत आता है। पहला
(08:57) आता है हवन कर्म जो कि आप किसी एक मनोकामना को लेकर के यदि कर्म कर रहे हैं तो आपको हवन कर्म का चयन करना चाहिए। कोई भी मनोकामना कोई भी मनोकामना हो सकती है। दूसरा यदि आप सर्व बाधा निवारण के लिए और आपके पूरे गोत्र के लिए कर्म करना चाहते हैं तो उसमें आपको अनुष्ठान कर्म का चयन करना चाहिए जो आपके पूरे परिवार पर प्रभाव करता है। अब वो आपका किस लिए रहता है? व्यापार वृद्धि रोग निवारण कोर्ट कचरी राजनीतिक तंत्र मंत्र बाधा अच्छे करियर के लिए अच्छे भविष्य के लिए बालक इत्यादि के लिए सभी विषयों के लिए कर्म करते हैं तो उसमें विधिवत कर्म
(09:29) होता है जैसे हमारे पुराणों में आता है जप उपरांत तप कर्म तत्पश्चते पूर्ण फल जप कर्म आपका होता है जप कर्म के पश्चात हवन कर्म इत्यादि होता है तब जाकर के आपको उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है अन्यथा नहीं होता है। अब हवन कर्म की कल्पना क्यों है? क्योंकि हर व्यक्ति इतना संपन्न नहीं होता है कि वो विधिवत कर्म करवा सके। तो फूल नहीं तो पाखड़ी ऐसा बोला जाता है कि भगवती के दर पर जा रहे हैं तो कुछ भी उनको अर्पण करके आए। अब कोई व्यक्ति मान लो विधिवत कर्म नहीं करवा पा रहा है तो वो मायूस होता है कि आज मैं इतना सक्षम होता भगवती मुझे उतना सक्षम बनाती तो वहां
(10:03) विधिवत कर्म संपन्न कर सकता। यदि कोई घर से इतना सक्षम नहीं है तो फिर हवन कर्म की व्यवस्था उनके लिए है। वो सामान्य को दक्षिणा देकर के हवन कर्म इत्यादि संपन्न करवा सकते हैं। पंडित जी धन प्राप्ति के लिए मनी अट्रैक्शन के लिए क्या करना चाहिए? इसके लिए देखिए यदि आप मंदिर में अपने घर पे कुछ प्रयोग करा रहे हैं तो इसमें धन प्राप्ति के लिए सबसे अच्छा प्रयोग जो माना जाता है वह बताया जाता है कमला प्रयोग। उसमें श्रीसूक्त आपने नाम सुना होगा। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए पाठक किया जाता है। तो उसका प्रयोग हम लोग करते हैं कमला प्रयोग में। वो कैसे होता है वृतांत
(10:35) में जब कोई व्यक्ति कराता है तो पूरा एक्सप्लेन हम करते हैं। पर कमला प्रयोग यदि कोई व्यक्ति करवाता है 10 साल के लिए एक कमला प्रयोग होता है। मनुष्य जीवन में आप एक बार वो कर्म करवाते हैं कमला प्रयोग तो आपको 10 वर्ष तक दूसरा प्रयोग करवाने की आवश्यकता नहीं होती है। कमला प्रयोग में दूसरा प्रयोग यदि सामान्य में कुछ प्रयोग कर्म करवाना चाहें तो आप उसमें भगवती का 36,000 जप कर्म का प्रयोग करवा सकते हैं। जिसमें 5 से सात घंटे का समय आपका लगता है। खुद से आप जो कर सकते हैं जो मंदिर में आप करवा सकते हैं। उसमें 5 से सात घंटे का समय आपको लगता है।
(11:06) ब्राह्मण देवता भगवती के मूल मंत्र से जप कर्म करते हैं। अब जप कर्म क्या होता है? ओम हिम बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचम मुखम पदम स्तंभय जिवाम कीलय बुद्धिम विनाश ह ओम स्वाहा। अब इसका वर्णन क्या होता है? ओम हिम बगलामुखी सर्व दुष्टा नाम जो भी दुष्टगण हैं जिन्हें आप जानते हैं वह भी जो अज्ञात हैं वह भी वाचम मुखम पदम स्तंभ जो आपके बारे में बुरा बोलते हैं बुरा सोचते हैं बुरा करने के लिए कदम आगे बढ़ा रहे हैं भगवती उन्हें वहीं पर स्तंभ ही करें वह आपका अच्छा ना चाहे तो आपका बुरा भी ना कर सके इस महामंत्र से ब्राह्मण देवता जप कर्म करते हैं और जप कर्म के बाद
(11:41) फिर उसका हवन कर्म होता है तो एक लक्ष्मी प्राप्ति के लिए आप इसका प्रयोग भी कर सकते हैं और शत्रु बाधा निवारण के लिए भी इसका प्रयोग आप करवा सकते उसमें यदि ऐसा है कि आप थोड़ा खर्च कर सकते हैं तो ब्रह्मास्त्र प्रयोग कराएं तो वह आपको ज्यादा बेटर इसमें फल देखने को मिल सकता है। खुद से आप कर सकते हैं। तो श्रीसूक्त का पाठ आपको आता है या ज्यादा श्रीसूक्त आपकी इतनी संस्कृत शुद्ध नहीं है तो महालक्ष्मी नमः इसका जप कर्म आप कर सकते हैं। कमलाक्ष कमल गट्टे अपने घर पे ला सकते हैं। श्री यंत्र होता है। श्री यंत्र यदि आपके घर पे नहीं है तो एक सुपारी जो
(12:13) आती है जो संकल्प में हम लेते हैं उस सुपारी को श्री यंत्र के प्रारब्ध में मान करके उस पे आप कमल गट्टे से उसका अर्चन कर्म कर सकते हैं। चतुर्दशी तिथि को भी कर सकते हैं या किसी अमावस्या को भी आप इसका प्रयोग कर सकते हैं। तो आपको महालक्ष्मी नमः अर्चयामि महालक्ष्मी नमः अर्चयामि ऐसा करते हुए कमलाक्षी का प्रयोग आप करें। अर्चन कर्मा आपका हो जाए। या फिर जो भी नदी समुद्र आपके समीप हो वहां जाकर उन कमलाक्षी इत्यादि को विसर्जन कर सकते हैं। उसमें से एक कमलाक्ष लेकर के आप अपने घर की तिजोरी इत्यादि में रख सकते हैं। तो आपको लक्ष्मी का और उसमें अच्छा प्रभाव
(12:44) देखने को मिल सकता है। अच्छा बढ़िया बिजनेस ग्रोथ के लिए घर पे क्या क्रिया करी जा सकती है? बिजनेस ग्रोथ के लिए घर पे देखिए बगलामुखी का हवन कर्म पूजा कर्म तो आपको संपन्न नहीं करना चाहिए। अच्छा क्योंकि आप नलखेड़ा के ब्राह्मण जन के अलावा उज्जैन के भी कुछ ऐसे ब्राह्मण हैं उनसे आप बोलते हैं कि हमको भगवती का कर्म करवाना है तो वो आपको स्पष्ट मना कर देते हैं कि हम नहीं करेंगे किसी जो वहां के ब्राह्मण देवता है उनसे हम आपका संपन्न करवा सकते पर घर में बुलाया जा सकता है। हां घर में आकर के आपकी क्रियाएं हो सकती है। अब इसमें दो विषय होता है कि बहुत सारे
(13:14) व्यक्ति होते हैं जो कि वहां पर नहीं पहुंच पाते हैं। चाहे किसी बीमारी को लेकर या उनके दैनिक क्रिया में इतना समय नहीं निकाल पा रहे हैं कि वहां पे आके वो कार्य संपन्न करवाएं। तो फिर हम उनके घर पे जाकर के हवन कर्म पद्धति जो सारी क्रियाएं होती है वो संपन्न करते हैं। बस ये है कि उसमें आने जाने का खर्च ये थोड़ा सा आपका इंक्लूड हो जाता है। बाकी आपके घर पे भी आपको वर्ष में कम से कम एक या दो बार कुछ क्रिया संपन्न करवाना चाहिए। उसमें जो नेगेटिव एनर्जी होती है वो पूरी तरह से समाप्त हो जाती है। क्योंकि बहुत सारे व्यक्ति होते हैं जो आपकी ग्रोथ नहीं
(13:44) देख पाते। हम जीवन में व्यक्ति जितनी ग्रोथ करता है उसके उतने बाहरी और आंतरिक दोनों शत्रु धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं जो आपको पता नहीं होता है। बाहरी वो होते हैं जो आपके बिजनेस के हो सकते हैं। आपके गली के हो सकते हैं। आपके मोहल्ले के हो सकते हैं। निज निवास के हो सकते हैं। आंतरिक वो होते हैं काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ। हम यह भी आपके आंतरिक शत्रु है। भगवती इनसे भी आपकी सुरक्षा करें। ऐसा भाव लेकर आपका कार्य संपन्न होता है। अब शत्रु बाधा का एक बहुत अच्छा भावार्थ आता है। आप YouTube इत्यादि इंस्टा इत्यादि देखेंगे तो उसमें
(14:15) बहुत सारी रील ऐसी आती है। बगलामुखी मंदिर जाइए लाल मिर्ची का प्रयोग कीजिए। अपने शत्रुओं को समाप्त कर दीजिए। हां हां हां बल्कि ऐसा कुछ नहीं होता है। एक बालक है एक मां के मान लो दो बेटे होते हैं। एक माता का बहुत ज्यादा ध्यान रखता है। वह भी उसके लिए समान है और कोई उसकी सेवा पूजा नहीं कर रहा है तो वह भी उसके लिए समान है। पुत्र का पुत्र होता है। माता कभी कुमाता नहीं होती है। तो शत्रु बाधा का भावार्थ होता है कि कोई व्यक्ति यदि आपका गलत करने के लिए कदम आगे बढ़ा रहा है। गलत विचार कर रहा है तो भगवती सामने वाले के मस्तिष्क से आपका नाम हटा
(14:48) देती है। वह आपका अच्छा नहीं करता है तो आपका बुरा भी नहीं कर पाता है। यह शत्रु बाधा का भावार्थ होता है ना कि किसी व्यक्ति को समाप्त कर देना। यह शत्रु बाधा का भावार्थ होता है। और जहां तक कि लाल मिर्ची का वर्णन आता है किसी भी वेद पुराण अत्यंत में लाल मिर्ची का प्रयोग नहीं आता है कि सात्विक कर्म और राजस्व कर्म में आपको उसका प्रयोग करना चाहिए। अघोर और तामसिक कर्म में उसका प्रयोग आप कर सकते हैं। एक जगह वर्णन जहां तक मेरे ध्यान में आ रहा है जलती चिता के ऊपर लाल मिर्ची, मांस और मदिरा तीनों का मिश्रण प्रयोग करके हनुमान बैठक में बैठ
(15:20) के आप उसमें आहुति प्रदान करते हैं। तब आपको उसका तत्काल प्रभाव देखने को मिलता है। अच्छा। पर तब भी भगवती आपको श्रापित करती है। आपको नहीं तो आपके आने वाली पीढ़ी को उसका दुष्परिणाम देखने को मिलता है। क्योंकि वो अघोर तंत्र क्रिया में आता है। अच्छा। अब उसमें क्या है कि दो प्रयोग मैं आपको बताता हूं कि मेरा आपसे बहुत अच्छा अटैचमेंट है। आप मेरी सब बात मानते हैं। सब क्रिया करते हैं। तो मैं आपको कोई ऐसे कार्य के लिए संपर्क करूंगा जो आपको पसंद नहीं है। फिर भी आपने एक बार मेरी मेरे प्रति आप भाव रखते हैं। तो आपने कहा ठीक है अभिषेक जी ने कहा है तो मुझे एक बार ये
(15:53) कार्य करना होगा। अब दूसरी बार वापस मैं आपको किसी अन्य कार्य के लिए फोन लगाऊंगा। तो आप मेरा फोन उठाने में संकोच करते हैं कि यार पिछली बार इन्होंने मुझे यह कार्य बताया था। ठीक नहीं लगा। पता नहीं इस बार क्या बताएंगे तो मैं इनका फोन इग्नोर करती हूं। तो व्यक्ति फिर आपको इग्नोर करना प्रारंभ कर देता है। और वह सब क्रिया किसके लिए होती है? लाल मिर्ची इत्यादि का प्रयोग ये सब प्रयोग भगवती को बाध्य करने के लिए कि आपकी इच्छा है या नहीं है हमारी इस मनोकामना को आपको पूर्ण करना है। वो उन सबके लिए ये सब सामग्रियां प्रयुक्त बताई
(16:21) गई है और यदि भगवती का प्रसन्नता का आशीर्वाद चाहिए आपको भगवती का सात्विकता से आशीर्वाद चाहिए तो इन सभी सामग्री का प्रयोग ना करते हुए जितनी और भिन्न हजारों करोड़ों प्रकार की सामग्रियां हैं हमारी पृथ्वी पर। अलग-अलग औषधियां हो गई, जड़ी बूटियां हो गई, मिष्ठान हो गए। मिष्ठान इतने हो जाते हैं कि कुंड पूरा भर जाएगा पर मिष्ठान समाप्त नहीं होंगे। तो वो सब आप भगवती को प्रेम पूर्वक ग्रहण कराइए। जैसे कि मुझे कुछ सामग्री के बताइए जो से जैसे कि नागरमोथा हो गया। नागफणी हो गई है। शत्रु बाधा निवारण के लिए आप प्रयोग कर सकते हैं। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए आप
(16:52) कमलाक्ष का प्रयोग कर सकते हैं। लक्ष्मी मतलब धन की प्राप्ति धन की प्राप्ति के लिए। कमलगट्टे का प्रयोग आपका कमलाक्ष जिसे कहा जाता है। छाड़ छड़ीले का प्रयोग हो गया। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कर सकते हैं। मुलेठी का प्रयोग हो गया। वह आप लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कर सकते हैं। शरीर में किसी प्रकार का रोग है, बहेड़ा करके औषधि आती है, उसका प्रयोग आप उसके लिए कर सकते हैं। यदि आपके जीवन में कोई व्यक्ति बार-बार आपको परेशान कर रहा है, उसके लिए नाग केसर का प्रयोग आता है, उसका प्रयोग आप कर सकते हैं। और शत्रु स्तंभन के लिए सबसे मुख्य जो औषधि
(17:19) बताई जाती है, वह बताई जाती है हड़ताल। पीली हड़ताल कुछ पत्थर आते हैं जो खदानों में से निकलते हैं उन्हें हड़ताल कहा जाता है। अब हड़ताल दो-तीन प्रकार से आती है। कोई हड़ताल आपको दो 5000 किलो की भी मिल जाती है। कोई दो ढाई लाख किलो भी आपको पड़ती है। तो उस औषधि का आप प्रयोग करते हैं। कुछ आपके विधिवत प्रयोग होते हैं। विधिवत प्रयोग में भी दो-तीन प्रकार से अलग-अलग क्रियाएं होती है। कुछ सामान्य कर्म होते हैं। कुछ विधिवत प्रयोग होते हैं। कुछ सर्व बाधा निवारण के लिए होते हैं। कुछ ब्रह्मास्त्र प्रयोग होते हैं। कुछ सर्वार्थ सिद्धि महायज्ञ होते हैं। तो
(17:50) वैसे फिर यज्ञों में और ब्रह्मास्त्र प्रयोग इत्यादि में पीली हड़ताल का प्रयोग आपको किया जाता है क्योंकि वो थोड़े कॉस्टली इसलिए पड़ते हैं क्योंकि उनमें ऐसी सामग्रियों का प्रयोग होता है। राजतंत्र इत्यादि के लोगों उसको करवाते हैं। किसी का अच्छा बड़ा व्यापार है। व्यापार में पदोन्नति इत्यादि और हो कोई व्यक्ति उनको परेशान ना करे जो कॉम्पिटिट उनका होता है उनसे वो पीछे ना रहे। उसके लिए वो ब्रह्मास्त्र प्रयोग इत्यादि का प्रयोग करा सकते हैं। उनको उसमें शीघ्र लाभ की प्राप्ति होती है। बहुत सारे लोगों ने क्या करते हैं? पंडित
(18:15) जी जल्दबाजी हमको तो एक घंटे में सारा कार्य संपन्न कर देना है। अब एक घंटे में कुछ कर्म नहीं होता है। जिस कारण आप इतने बिजी हुए हैं वो व्यापार को खड़े करने में भी कम से कम 10 15 दो पांच साल आपको लगे तब जाकर के आप इतने बिजी हो पाए हैं। आज की तारीख में इतनी लक्ष्मी का आगमन आपको हो रहा है तो उसका प्रोटेक्शन करने के लिए यदि आप कर्म करवा रहे हो तो कम से कम पूरा समय आपको उसमें देना चाहिए। एक घंटे में आधे घंटे में घंटे में कोई क्रिया संपन्न नहीं होती है। कुछ कार्य विधिवत आप कर रहे हैं तो उसमें आपका समय लगता है। हम लोगों ने जल्दबाजी में कर तो लेते भी
(18:48) परिणाम नहीं मिलता है तो फिर उनका भाव वहां से उठ जाता है कि यार हम वहां पर गए थे तो थे हमने कर्म किया पर उसका अच्छा परिणाम देखने को हमको नहीं मिला। नहीं मिला। अब ऐसे ही बहुत सारे लोगों ने घर पे साधना कर्म इत्यादि करते हैं। वो बोलते हैं हम तो दो चार से 5 साल से 2 साल से जब कर्म इत्यादि कर रहे हैं। पर हमारे जीवन में कोई फल देखने का उसको अब तक नहीं मिला। अब वो लोग क्या करते हैं? जल्दबाजी में जैसे आजकल बहुत सारे काउंटर आपने देखा होगा जप कर्म करने के लिए काउंटर का प्रयोग करते हैं। काउंटर वो काउंट गिनने के लिए आते हैं। काउंटर का
(19:16) प्रयोग करते हैं। चलते फिरते काउंटर में नाम जप कर्म कर रहे हैं ये कर रहे हैं। वो आपकी मन शांति के लिए उचित हो सकता है। कि आपका मन कहीं और दूसरी चीजों में ना भटके। आपका मन शांत रहे। प्रतिदिन आपके मन में जप कर्म चल रहा है तो उस मन शांति के लिए सबसे अच्छा प्रयोग है। वह आप कर सकते हैं। यदि उससे आप चाहे जो मन इच्छित फल है वह आपको प्राप्त हो वो आपको नहीं होता है। उसका पूरा प्रोसेस होता है। अपने घर पे आप आसन लगाइए। आसन पर विराजमान होइए। जल का पात्र अपने पास में रखिए। उसे तीन बार आचमन करके पवित्रीकरण करके फिर जो भी आपका
(19:46) गुरु मंत्र है या नाम मंत्र है उसका जप कर्म आप प्रारंभ करें। अब जपकर्मा पूर्ण होने के पश्चात फिर थोड़ा सा जल लीजिए। जिस आसन पर आप विराजमान है आसन को उठाइए। उसके नीचे जल छोड़िए। छूटे हुए जल को नेत्रों से लगाइए, मस्तिष्क से लगाइए। तब जाकर अपना आसन त्यागना है। उसके पहले यदि आप आसन त्यागते हैं तो भी आपको उसका फल प्राप्त इसका संकल्प क्या है? आपने बोला ये जो आप क्रिया बता रहे हैं। यह आप किसी भी भगवान प्राप्ति के लिए या किसी मनोकामना प्राप्ति के लिए यह क्रिया किसी भी मनोकामना कर सकते हैं। अब बहुत सारे लोगों ने आसन डायरेक्ट छोड़ देते हैं। माला कर्म हुआ।
(20:16) उठ गए। आसन छोड़ के चले गए। अब इसमें एक वृतांत आता है कि ब्राह्मणों ने इतना जप कर्म इत्यादि किया पृथ्वी पर कि जो इंद्र का सिंहासन था वो तक डोलने लगा। अब इंद्र भगवान बड़े चिंतित हो गए कि ब्राह्मण इतने प्रभावशाली हो गए तो मेरा सिंहासन मुझसे छीन सकता है। तो फिर वो महादेव की आराधना कर्म करने लगे। महादेव प्रसन्न हो करके आए। वो वर प्राप्त मांगा उनसे तो उन्होंने कहा पृथ्वी लोक पर जो भी व्यक्ति जितना जप तब आराधना कर्म करेगा। उसका पूर्ण फल मुझे प्राप्त हो। ऐसा आशीर्वाद आप मुझे दीजिए। अब भोले शंकर तो दयालु है। उन्होंने कहा
(20:50) वर तो देना है पर मैं आपको ऐसा वर नहीं दे सकता कि उनके साथ अन्याय हो जाए। तो बोले फिर क्या होगा? बोले ऐसा आप कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति मान लो साधना कर्म इत्यादि करता है और बिना जल छोड़े अपना आसन त्याग देता है तो उसका पूर्ण फल आपको प्राप्त होगा। अच्छा। और यदि पूरी प्रोसेस करके वह अपना कार्य संपन्न करता है तब जाकर के उसका अर्जित किया गया कर्म उसके पास होता है। तो 99% व्यक्ति आज की तारीख में डायरेक्ट आसन छोड़कर चले जाते हैं तो उसका पूर्ण फल जो है इंद्र को प्राप्त हो जाता है। तो जो क्रियाएं होती है वह व्यक्ति उचित प्रकार से नहीं करता
(21:24) है और फिर दोष देता है कि मेरा कार्य पूरा नहीं हुआ नहीं हुआ है। काफी लोगों को लगता है कि मुझ पे ब्लैक मैजिक किया गया है। मुझे बुरी नजर का साया है या फिर कोई तंत्र मुझ पे करा गया है। तो इसका निवारण कैसे किया जा सकता है? देखिए इसमें ऐसा होता है कि हमारे पास बहुत सारे ऐसे केसेस आते हैं। अभी एक बालिका का हमारे पास केस आया था। वो बिल्कुल सामान्य मतलब मुश्किल से ये माने कि 20 22 वर्ष के अंतराल में वो बालिका थी। उसके ऊपर तंत्र प्रयोग इत्यादि का कार्य किया गया था। जिसमें जो उसका मासिक धर्म होता है वह आना भी बंद हो गया था।
(21:59) करीबन 8 वर्ष से पीरियड पीरियड्स जो होते हैं आठ वर्ष से वह तक नहीं आए थे। प्लस बार-बार उनको अन्य-अ्य प्रकार की आवाजें सुनाई देती थी। कभी किसी लेडीज की आवाज आ रही है, कभी किसी जेंट्स की आवाज आ रही है। ऐसा ही उनके ऊपर तंत्र प्रयोग करके अलग-अलग प्रकार के जिन जिन्नात इत्यादि का प्रयोग किया गया था। सब दूर से चिंतित परेशान होकर के वो आए। बाद में कहीं पे मेरा पडकास्ट इत्यादि उन्होंने देखा YouTube वगैरह पर देख के मुझसे संपर्क किया कि पंडित जी ऐसा-ऐसा पूरा व्याख्यान है। तो इसके निमित्त दो से तीन क्रियाओं का प्रयोग हमने किया। जिसमें दो प्रयोग दो
(22:32) दिवस के होते हैं। एक प्रयोग तीन दिवस का होता है। वह प्रयोग हमने संपन्न किया। आज भगवती के आशीर्वाद से पूर्ण रूप से वह स्वस्थ हैं। अपने अध्ययन क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। और शायद अभी लेट अस मेरे पास उनके माता-पिता का संपर्क आया था कि उनका विवाह इत्यादि भी तय हो चुका है और अच्छे से अब उनका जीवन व्यतीत हो रहा है। तो कोई ज्यादा ही व्यक्ति तंत्र के अति संबंधित परेशान हैं तो वह यदि भगवती का कर्म करवाता है तो उसको निश्चित ही उसमें अच्छा परिणाम देखने को मिलता है। अब तंत्र होता क्या है कि जैसे किसी व्यक्ति ने ज्यादा
(23:01) पदोन्नति कर लिया, किसी व्यक्ति ने ज्यादा लक्ष्मी का इनकम कर लिया, कुछ भी कर लिया तो जो उसके समीप रहते हैं, उसके साथ रहते हैं, उसके परिवार के लोगों उसे ज्वलनशील महसूस होते हैं कि ये हमसे इतना आगे कैसे बढ़ गया? तो उसके ऊपर कुछ ना कुछ क्रिया टोटके कर्म इत्यादि करवाते रहते हैं। अब इसमें बहुत सारे लोगों को मैंने देखा है कि वो फोन लगाते हैं आप आ रहे हैं कि पंडित जी हमको इस क्रिया से समस्या है तो पंडित जी बोलते हैं कि आप इनके फोटो लेकर के आइएगा इसमें प्रयोग होगा और फोटो मंगाते हैं उस फोटो को हवन कुंड के अंदर डाल देते हैं बल्कि ऐसी कोई क्रिया नहीं
(23:34) होती है। कुंड जो है वो यज्ञ भगवान का मुख समान है। मुख में आप उनकी आहुति कर्म प्रदान करते हैं। जो देवी देवताओं तक आहुति पहुंचती है। अब उसमें आप किसी व्यक्ति का फोटो डाल रहे हैं तो वह पूर्णतः वर्जित बताया गया है। मतलब फोटो डालना मतलब उनको ग्रहण करवाना। किसी व्यक्ति को माता जी को आप किसी व्यक्ति को ग्रहण करवा रहे हैं तो उसका आपके जीवन में कितना नेगेटिव फल देखने को मिलेगा। यह आप कल्पना कीजिए। तो जहां भी आप कर्म क्रिया कराने जाते हैं, थोड़ा सा इन छोटी-छोटी सावधानी आपको रखना चाहिए। आपको ध्यान होना चाहिए क्या कर्म हो रहा
(24:10) है कैसे सावधान आप पूरा बताइए थोड़ा एक तो आपने बोला सावधानी कर्म ऐसा है कि सबसे पहली बात तो ये कि यदि कोई शत्रु बाधा से आप परेशान है जैसे वर्णन अभी हम प्रारंभ हमने किया तो उसमें फोटो कोई मंगवाता है तो फोटो ले जाने की आवश्यकता तब पड़ती है जब आप स्वयं वहां पर उपस्थित ना हो समझ गए आप स्वयं वो भी व्यक्ति सिर्फ यह अपने माइंड में रखता है सामने वाले जो ब्राह्मण देवता होते हैं कि यह आपके पक्ष के हैं यह आपके विपक्ष के हैं। इनके निमित्त कर्म करना है। इनके निमित्त कर्म नहीं करना है। इसके निमित्त फोटो की तब आवश्यकता होती है
(24:39) यदि आप स्वयं जा रहे हैं तो आपके मस्तिष्क में तो वो विराजमान है। आप जैसे ही आंख बंद करेंगे उनकी नाम लेंगे कल्पना करेंगे वो आपके मस्तिष्क में आ जाता है कि भगवती मुझे इन व्यक्ति से सुरक्षा चाहिए तो वहां आपका वो कार्य संपन्न हो जाता है। तब आप स्वयं जा रहे हैं तो फोटो की आपको आवश्यकता नहीं होती है। दूसरा विषय यह आप जा रहे हैं तो जो कर्म क्रिया आप करवा रहे हैं जैसे भोक्त लोगों ने करवाते हैं। अभिषेक कर्म करवाते हैं। बहुत लोग भगवती का अर्चन कर्म इत्यादि करवाते हैं। तो इनमें छोटी-छोटी सावधानी यहां ये रखें अर्चन कर्म जो आपका होता है यह दो
(25:09) उंगलियों से आपका अर्चन कर्म और हवन कर्म संपन्न किया जाता है। इन दो उंगलियों से आपका हवन कर्म संपन्न होता है। यह आपकी बुद्धि का नाश करती है। यह आपकी लक्ष्मी का नाश करती है। जप और तप करते समय इन दोनों को वर्जित किया गया है। यदि आहुति आप लगाते हैं इन दो उंगलियों से सीधा आप आहुति प्रदान करते हैं तो आपके देवी देवता के निमित्त आहुति प्रदान करती है। वहीं आपका हाथ उल्टा हो जाता है तो आपके पितरों के निमित्त आहुति प्रदान होती है। ऐसे कभी भी देवी देवता के निमित्त आप आहुति प्रदान कर रहे हैं तो ऐसे आपको लगाना चाहिए। ऐसे
(25:38) हाथ आपका नहीं होना चाहिए। और पितरों के निमित्त आप लगा रहे हैं तो ऐसा आपका हाथ होना चाहिए। ऐसे हाथ आपका नहीं होना चाहिए। पितरों के निमित्त कर रहे हैं तो उल्टी आहुति प्रदान हो। देवी देवताओं के निमित्त कर रहे हैं तो सीधा आपका आहुति प्रदान हो। वही जप तप कर्म कर रहे हैं तो उसमें भी आपको इन तीन उंगलियों का ही प्रयोग करना है। इन दो उंगलियों का प्रयोग आपको नहीं करना है। इन तीन उंगलियों का प्रयोग से ही आपको अपना जप कर्म इत्यादि भी संपन्न करना होता है। तो इन छोटी-छोटी साधना क्रियाओं का ध्यान आप रखेंगे तो आपको उसमें उसमें आपको पूर्ण फल
(26:06) प्राप्त होता है। यदि ऐसा है कोई व्यक्ति अपने घर में कुछ कर्म करना चाहता है। जैसे छोटे बच्चे होते हैं उनको नजर इत्यादि लग जाती है। ये होता है। बड़ों को भी लग जाती है। तो बड़े इत्यादि सबको लग जाती है। तो उसमें आप थोड़ा सा आपको काली राई लेना है। नमक लेना है उसको उस व्यक्ति पर से या बालक पर से 21 बार उतार करके जहां पर भी तराहा होता है तीन रास्ते होते हैं वहां जाकर के उसको आपको फेंक देना है। तीन रास्ते मतलब ऐसा ऐसा है फर्स्ट सेकंड थर्ड ऐसे तीन रास्ते होते हैं वहां जाकर आप उसको फेंक देंगे तो उससे जो बालक पर बुरी नजर का असर हुआ है या किसी व्यक्ति
(26:36) पर बुरी नजर का असर हुआ है तो उसका वृतांत उसमें समाप्त हो जाता है। अगर तो पति पत्नी के रिश्तों में अड़चन आ रही हो मैरिटल डिस्कर्ड हो रहा हो तो आप क्या उपाय बताएंगे? देखिए इसके लिए ऐसा है यदि या तो पहले यह होता है कि लड़का लड़की का विवाह तय नहीं हो पाता है। पहला विषय यह आता है कि कोई लड़की है विवाह कहीं करना चाहती है या कहीं करने की इच्छुक नहीं है पर विवाह करने का भाव है कि विवाह होना चाहिए। में होती है तो उसके लिए हमारी कुंडली का बहुत बड़ा योग होता है। यदि आपकी कुंडली में मंगल है तो आपका विवाह संपन्न होने में हमेशा देरी
(27:10) होती है। तो आपको मंगल की पूजा होती है। उज्जैन नाम मैंने बताया आपको वहां पर अंगारेश्वर करके महादेव का मंदिर है। वहां जाकर के आप वो पूजा कर्म संपन्न कराते हैं। तब आपकी कुंडली में उस दोष का समाप्त होता है। मंगल दोष जो होता है। तब जाकर के फिर आपका विवाह इत्यादि शीघ्र ही कहीं ना कहीं संपन्न होता है। बहुत बार ऐसा होता है कि किसी ने पूजा कर्म संपन्न नहीं किया पर योग बने और उनका विवाह तय हो गया तो फिर वहां पर उनका मेंटालिटी एक दूसरे से बैठ नहीं पाता है। बात पर झगड़ा कर लेना ऐसा एक्टिवेट हो जाना, क्रोधित हो जाना ये एक्टिविटी वहां
(27:43) पर होना प्रारंभ हो जाती है। तो भले आप विवाह के पश्चात भी दोनों जाकर के मंगल दोष का पूजन इत्यादि कर्म करवा सकते हैं। उसमें आपको थोड़ा बेटर रहेगा। प्लस इसमें ही जैसे कोई व्यक्ति होता है हर बात पे चिड़चिड़ हो जाना। चाहे कोई जेंट्स हो या लेडीज हो कोई भी हो तो उनकी कुंडली में अंगारक दोष होता है बहुत बार तो उसमें क्या होता है व्यक्ति छोटी-छोटी बात पर क्रोधित हो जाता है तो उसकी भी पूजा उज्जैन में ही होती है अंगारक करके वह पूजा यदि आप संपन्न कराते हैं तो जो आपका नेचर है हर बात पे चिड़चिड़ा हो जाना वो धीरे-धीरे फिर आपका समतल होना प्रारंभ हो
(28:13) जाता है तो इन दोनों में से आप कोई सा भी करवाते हैं तो उसमें अच्छा परिवर्तन आपको देखने को प्राप्त होता अच्छा अभी शादी हो चुकी है लेकिन पति-पत्नी में अह प्यार की कमी है। प्यार को अगर तो बढ़ाना है तो क्या आप उपाय सजेस्ट करेंगे? उपाय देखिए इसमें सबसे बढ़िया उपाय यह रहेगा एक घी का दीपक आपको जलाना है। उसमें आप प्रयास करें कि पतंजलि का घी इत्यादि या कोई सा भी शुद्ध गाय का घी मिल सके तो सबसे बढ़िया रहेगा। वो घी आपको सुबहशाम अपने घर पर जलाना है। प्लस कहीं ना कहीं आपके घर में पितरों को लेकर कुछ समस्या होता है। जिसमें आपके वंश वृद्धि में भी
(28:46) समस्या आता है। आपके पारिवारिक जीवन में भी समस्या आता है। तो इसके लिए एक छोटा सा प्रयोग अपने घर पे आप कर सकते हैं। जहां पर परीडी होता है गैस स्टैंड। आज की भाषा में बोला जाए। गैस स्टैंड पे हम जल का पात्र रखते हैं। बहुत सारे लोग आरो वगैरह लगाकर भी रखते हैं। तो वहां पर आपको एक सरसों का तेल का दीपक प्रज्वलित करना है। चार बत्ती वाला। उस प्रज्वलित करने के पश्चात उसमें थोड़ा सा काले तिल आपको डाल देना है। यह प्रतिदिन संध्या के समय आपको क्रिया करना है। अगर यह क्रिया आप कंटिन्यू करेंगे तो जो आपके पित हैं वह आपसे थोड़े से प्रसन्न होते हैं। आप पर
(29:17) आशीर्वाद बताते हैं तो इसमें आपको वंश वृद्धि में भी समस्या नहीं आएगी। आपके पारिवारिक जीवन भी इससे अच्छा चलता रहेगा। बार-बार झगड़े वगैरह होना। आपके पितृ रुष्ट होते हैं तो इस कारण से यह क्रियाएं क्रिएट होती हैं। यदि पित आपसे प्रसन्न रहेंगे तो यह क्रिया आपकी समाप्त हो जाएगी। पंडित जी बगलामुखी मंदिर में किन-किन लोगों का आना होता है? जैसे कि फिल्म स्टार्स या कोई आपके पास ऐसे कुछ एक्सपीरियंस में है बिजनेसमैन? जी बिल्कुल। अब इसमें क्या होता है कि अह अलग-अलग प्रकार की सभी क्रियाएं होती हैं। तो आज की तारीख में यह स्पष्ट हो चुका है।
(29:47) यदि किसी व्यक्ति को किसी भी फील्ड से वो जुड़ा हुआ है उसमें प्रोग्रेस चाहिए तो कहीं ना कहीं आपको साधना कर्म से जुड़ना आवश्यक है। चाहे किसी भी प्रकार की देव साधना से जुड़ना हो या देवी साधना से जुड़ना हो पर अपने जीवन में अच्छी प्रोग्रेस आपको चाहिए। तो आपको किसी साधना से जुड़कर रहना आवश्यक होता है। अब जैसे हमारे प्रधानमंत्री जी हैं उनका भी आप देखेंगे तो बहुत बार ऐसा वृतांत आता है नवरात्रि जब महापर्व होता है उसमें हां जो भी सामान्य गुप्त नवरात्रि कोई सी भी हो वर्ष में चार नवरात्रि होती है दो गुप्त नवरात्रि आती है दो मेन नवरात्रि
(30:18) आती है तो उसमें बहुत बार सुनने को मिलता है कि मोदी जी ने अन्न जल इत्यादि त्याग करके रखा है साधना कर्म वो करते हैं सिर्फ जल के ऊपर वो जीवित रहते हैं तो वह साधना करते हैं साधना से इतना प्रभाव मिला है कि आज तीन बार तो प्रधानमंत्री रूप में चुनकर के वह आए हैं। आगे भी हो सकता है भगवती का आशीर्वाद बना रहे तो उनका वापस चयन हो। प्लस इसके बाद में आप देखेंगे जितने बड़े-बड़े फिल्म स्टार इत्यादि हैं चाहे संजय दत्त जी हो गए बड़े-बड़े फिल्म स्टार में अनु मलिक जी हो गए जो फिल्म प्रोड्यूसर हैं। प्लस इसके साथ में बहुत बार इनके घर पे जाकर भी ब्राह्मण देवता
(30:48) बगलामुखी का हवन कर्म संपन्न करके आते हैं और बहुत सारे फिल्म स्टार नलखेड़ा नगर भी आते हैं जो कि अपनी साधना कर्म इत्यादि संपन्न करवाते हैं। अब उद्योगपतियों में आप अंबानी परिवार का जिक्र भी कर सकते हैं। अंबानी परिवार का भी नलखड़े नगर आना हुआ है। भगवती के दर्शन कर्म प्राप्ति के लिए गुप्त रूप से उनकी भी साधना इत्यादि चलती रहती है जो उनके जीवन में आज प्रोग्रेस के मार्ग पे उनको आगे लेकर के जा रही है। ऐसे बहुत सारे लोगों ने जो फिल्म इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए भी भगवती का कर्म इत्यादि करवाते हैं। क्योंकि जो इनका कार्य करता है उसमें एक
(31:17) आकर्षण का प्रभाव वाग शक्ति भी प्राप्त होती है इनके साधक को और जीवन में आगे बढ़ने के लिए यह चीज अति महत्वपूर्ण है कि आप कुछ वार्तालाप कर रहे हैं। आप कुछ बात कर रहे हैं तो सामने वाले के ऊपर उसका प्रभाव होना चाहिए। तब जाकर के वो आपको ध्यान केंद्रित होकर सुनेगा, श्रवण करेगा, विचार करेगा कि नहीं इस व्यक्ति को चयन करना चाहिए या नहीं करना चाहिए। उससे आपकी वाणी का बहुत प्रभाव पड़ता है और वह शक्ति आपको बगलामुखी देवी प्रदान करती है। तो इस कारण इनके आराधना कर्म आप करेंगे तो कोई सा भी आपका फील्ड हो राजनीतिक फील्ड हो शत्रुओं
(31:49) के ऊपर हो कोर्ट कचहरी के ऊपर हो आपको उसका शीघ्र ही परिवर्तन देखने को मिलता है। पंडित जी शत्रु बाधा और कोर्ट कचहरी के मामले में बोला जाता है कि आप भगवती की आराधना करें और साथ ही यह भी बोला गया है कि भगवती राजनेताओं की कुलदेवी है। तो इसके बारे में थोड़ा बताइए और इसका थोड़ा उपाय भी मुझे बता दीजिए। देखिए इसमें ऐसा है कि आज की तारीख में यह स्पष्ट हो चुका है यदि किसी व्यक्ति को राजसीय पद प्राप्ति चाहिए तो उसे बगलामुखी की आराधना कर्म करना चाहिए तो उसको शीघ्र ही इसका अच्छा परिवर्तन देखने को मिलता है। अभी नाम नहीं लूंगा मैं आपको। एक
(32:25) महाराष्ट्र के जो चुनाव क्षेत्र अभी हुए इस क्षेत्र में यह मानिए कि 50% लोगों का जो वहां कार्य हुआ था बगलामुखी मंदिर में उन्हें सभी को विजय श्री की प्राप्ति हुई। अच्छा चाहे वो विधायक के रूप में हो, कैबिनेट मंत्री के रूप में हो या सीएम के रूप में हो जिनका भी वहां पर कर्म इत्यादि संपन्न हुआ। सभी लोगों ने वहां पर कार्य संपन्न करवाए और भगवती के आशीर्वाद से आज अच्छे दायित्व पर सभी लोग विराजमान हैं। तो ऐसे कर्म यदि आप करवाते हैं तो आपको शीघ्र ही भगवती का अच्छा परिवर्तन देखने को अपने जीवन क्षेत्र में मिलता है। इस कारण ही
(32:57) कहा जाता है बगलामुखी को राजनेताओं की कुलदेवी क्योंकि जिस क्षेत्र में आगे बढ़ना हो व्यक्ति उस क्षेत्र में उस देवी देवताओं के आराधना कर्म करता है और इनके आराधना कर्म आप करेंगे तो आपको निश्चित ही पद प्रतिष इत्यादि प्राप्त होती है। वहीं विषय आता है कोर्ट कचहरी के लिए यदि कोई व्यक्ति काफी समय से चिंतित है। किसी कोर्ट कचहरी को लेकर ज्यादा परेशान हो चुका है तो वह भी यदि बगलामुखी का कर्म करवाता है तो उसके जीवन क्षेत्र में उसको अच्छा निदान देखने को मिल सकता है। चाहे छोटा केस हो, बड़ा केस हो, डिवोर्स को लेकर के हो, किसी भी विषय को लेकर के हो।
(33:28) यदि आप अपने स्थान पे उचित हैं क्योंकि ऐसा नहीं है कि आपने कुछ गलत कर्म किया और उसमें भी आपने बगलामुखी कर्म करवा दिया। उसमें आपको विजयशन मिलेगा। यदि आप आपके स्थान पे उचित है तब जाकर के आपको इसमें अच्छा परिवर्तन भाग देखने को मिलता है। आपको करवाना चाहिए। पंडित जी जिसको भगवती की साधना करनी हो क्या भगवती के स्थान में आकर ही वो साधना करी जा सकती है या घर पे भी वो साधना करी जा सकती है और कैसे? देखिए इसमें ऐसा है कि जब तक आपका दीक्षांत कर्म संपन्न नहीं होता है। आप किसी भी मूल मंत्र या बीज मंत्र का प्रयोग नहीं कर सकते।
(34:00) मतलब जिसने दीक्षा आपको दी है। गुरु दीक्षा। आप जब तक गुरु दीक्षा नहीं ग्रहण करते हैं तब तक आपको कोई भी मूल मंत्र या बीज मंत्र जपने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है। पहले आप गुरु से वह दीक्षांत कर्म में मंत्र लेते हैं तत्पश्चात उस मंत्र को जपने का अधिकार आपको प्राप्त होता है। तो यदि घर पर कोई व्यक्ति साधना कर्म कर रहा है। पहली यह गलती बहुत सारे लोगों ने कर देते हैं कि जैसे आजकल आप Instagram खोलेंगे, YouTube खोलेंगे, Facebook खोलेंगे तो उसमें बहुत सारे ऐसे लोगों आते हैं। इस मंत्र का प्रयोग कीजिए लक्ष्मी आपको प्राप्त हो
(34:28) जाएगी। इस मंत्र का प्रयोग कीजिए। शत्रुओं से आपकी रक्षा हो जाएगी। इस मंत्र का प्रयोग कीजिए। आपकी बुद्धि बहुत तीव्र हो जाएगी। तो बहुत सारे लोगों ने उसमें बहुत सारे बीज मंत्र बताते हैं और लोगों ने उनको सुनकर के फिर उस मंत्र का जपतप करना प्रारंभ कर देते हैं। तो बहुत बार ऐसा देखने को मिलता है कि उसका दुष्परिणाम देखने को उनको मिल रहा है। कार्य होना तो कार्य बनते बनते और बिगड़ जाता है। बिगड़ जाते हैं। तो इस कारण ही होता है क्योंकि आपने दीक्षांत कर्म नहीं लिया। बिना गुरु की दीक्षा के आपने कार्य प्रारंभ किया। फिर आपको उसका दुष्परिणाम
(34:58) देखने को मिलना ही है। अब नॉर्मली आप समझिए कोई युद्ध लड़ने आपको जाना है और बिना बुलेट प्रूफ जैकेट के आप जाएंगे तो कोई भी शत्रु यदि आप पर गोली से प्रहार करेगा तो आराम से आपकी मृत्यु हो सकती है। यदि बुलेट प्रूफ जैकेट रहे तो कुछ 50% चांसेस होते हैं कि आप उससे सेफ्टी आपकी रहेगी। ऐसा ही आपके साधना कर्म में गुरु कार्य करता है। यदि आप गुरु दीक्षा इत्यादि कर्म से संपन्न है और फिर साधना कर्म कर रहे हैं। यदि उसमें कोई त्रुटि भी हो जाती है तो जो आपके गुरु होते हैं उन गुरु का इतना जप तप कर्म इत्यादि होता है कि उस त्रुटि को वो नष्ट कर देता है। उसका
(35:31) जहां दुष्परिणाम आपको देखने को मिलना है वह आपको नहीं मिलता है। यदि कोई व्यक्ति बिना गुरु के दीक्षांत करना चाहे तो पुराणों में इसका वर्णन आता है कि आप नाम जप कर सकते हैं। जैसे प्रख्यात में नाम जप की आज महिमा की आप छोटी सी बात करें तो प्रेमानंद जी महाराज का आपने नाम अत्यधिक सुना होगा। उन्होंने राधा राधा नाम जप करके नई जनरेशन को जो अपनी ओर आकर्षित किया है भगवान भक्ति में जो लीन किया है वो उनकी महिमा भगवती ही जानती है। तो नाम जप की महिमा इतनी होती है कि एक सामान्य सन्यासी आज नई जनरेशन को इतना अटैच कर रहा है कि व्यक्ति अपॉइंटमेंट लेते हैं उनसे
(36:06) मिलने के लिए। तो ऐसे ही भगवती का आप बगलामुखी देव नमः इस जप से अपने घर में आराधना कर्म कर सकते हैं। इसमें आपको कहीं भी दुष्परिणाम देखने को नहीं मिलेगा। सरसों का तेल का एक दीपक प्रज्वलित आप कीजिए। Amazon पे आपको पीला आसन, हल्दी की माला इत्यादि भी अवेलेबल मिल जाती है। किसी को सिद्ध करी हुई चाहिए तो वह भी आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। तो उसमें आपको प्रदान करते हैं। अगर नहीं हो पा रहा है तो Amazon से आप मंगवाइए। आसन बिछाइए, माला इत्यादि लीजिए और भगवती का नाम मंत्र का जप कर्म आप प्रारंभ कीजिए। क्योंकि यदि आपके भाव उचित है तो भगवती यह नहीं देखती
(36:40) है कि आप मूल मंत्र जप रहे हैं, बीज मंत्र जप रहे हैं या नाम मंत्र जप रहे हैं। आप कुछ भी मंत्र जप रहे हैं। आपके मन से भाव से यदि आप भगवती को पुकारते हैं तो भगवती आपकी सभी समस्याओं का निवारण शीघ्र करती है। कितनी बार नाम जपना हुआ? नाम जप ऐसा है कि कम से कम आप तीन माला पर डे या तीन माला भी आपको ज्यादा लग रही है तो एक माला पर डे आप कर सकते हैं। तो उसमें भी आपको भगवती के आशीर्वाद से अच्छा प्राप्त होता है। और गुरु मंत्र में आपको कोई भी गुरु मंत्र मिला है यदि आपने शुद्धता के साथ निर्मल मन के साथ उसका जप कर्म किया है तो
(37:12) आपको उसका अच्छा परिणाम देखने को मिलता है। ऐसे एक ग्रामीण में एक संत महाराज आए थे। तो वहां पर सब लोग उनको सुनने के लिए गए। पीपल के वृक्ष के नीचे वो बैठे थे। कथा सुना रहे थे। तो एक ग्वाला वहां से निकला तो उसने कान में बात पढ़ ली कि जो भी हमारे द्वारा दिए गए गुरु मंत्र का जप कर्म करता है उसको भगवान की प्राप्ति होती है। अब यह बात उसके माइंड में बैठ गई। अब वो वहां जाकर बैठ गया। पूरी अमृतवाणी गुरु जी की सुनी उसने। फिर उसके बाद जैसे ही गुरु जी वहां से जाने लगे। गुरु जी के पास वो गया कि गुरु जी मैं भी आपसे गुरु मंत्र
(37:43) लेना चाहता हूं। आप मुझे मंत्र दीजिए। मैं भी भगवान का जप कर्म करूंगा और उनकी प्राप्ति करूंगा। उनके दर्शन कर्म का मेरे मन में भाव है। तो गुरु जी ने सोचा कि कोई सामान्य व्यक्ति है। क्या करें? थोड़ा इसको टाल देते हैं। तो उन्होंने कहा कि मैं अभी जा रहा हूं। मैं कुछ दिन और यहां पर रुका हुआ हूं। तो जैसे ही मैं जाऊंगा उसके पहले आप मुझे ध्यान दिलाइएगा। मैं आपको गुरु मंत्र देकर के चला जाऊंगा। अब दूसरा दिन हुआ फिर वो गोला वहां पर आकर बैठ गया। गुरु जी ने वृतांत पढ़ा। फिर वो जाने लगे। फिर उसने ठोका गुरुजी गुरु मंत्र दीजिए। तो फिर उन्होंने कहा मैं कल
(38:10) फिर आऊंगा। कल आप मुझसे कीजिएगा। अब ऐसे कर करते-करते 15 दिन का समय व्यतीत हो गया। अब गुरु जी का जाना हुआ। जाने से पहले एक भक्त के यहां भोजन करने वह गए तो वह ग्वाला वहीं घर के बाहर जाकर के बैठ गया। अब जैसे ही गुरु जी बाहर आए तो गुरु जी को जोड़ मतलब लघु शंका जाना था। अब लघु शंका जाने के लिए गुरु जी दौड़ते हुए जा रहे हैं कि मैं जाता हूं लघु शंका हो करके आता हूं। तो वहीं उस ग्वाले ने उनका हाथ पकड़ लिया। के गुरु जी आज आप मुझे गुरु मंत्र देंगे क्योंकि मुझे पता चला है कि आज आप जा रहे हैं। तो आज आप गुरु मंत्र दीजिए। तभी मैं आपको छोडूंगा तभी जाने
(38:43) दूंगा। अब गुरु जी को तुरंत जाना भी था। तो गुरु जी ने धत विमोचन धत विमोचन अर्थात होता है कि भाग जा यहां से अच्छा ऐसा ऐसा उसको बोला कि धत विमोचन धक्का देते हुए और वहां से भाग करके चले गए अब वो ग्वाला इतना प्रसन्न हुआ कि गुरु जी ने मुझे गुरु मंत्र दे दिया तो वही माला एक माला ले ली पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गया और वही मंत्र वो जपने लगा दतपुचन दत कुपचन दतपचन जपने लगा जपते जपते करीबन कई माह बीत गए वो उस मंत्र के भाव में इतना लीन हो गया अब बैठे-बैठे बैकुंठ में भगवान श्री विष्णु को ख्याल ख्याल आया कि कोई मेरा भक्त है। कोई मेरा भक्त है जो सच्चे
(39:20) दिल से मुझे पुकार रहा है। मुझे उससे भेंट करने के लिए जाना है। तो माता ने उसको उनको रोका भगवान विष्णु को कि आप रुकिए लक्ष्मी माता ने कि मैं जाती हूं। पहले आपके भक्त से मैं मिलकर आती हूं। पहले मैं देखती हूं कि आपका भक्त आपसे कितना अटैच है। कितना भाव आपसे वो रखता है और मुझे वो पहचान पाता है या नहीं पहचान पाता है। तो जैसे माता वहां पर आई। उन्होंने उनको बोला कि क्या कर रहे हैं। आप किनकी आराधना कर्म कर रहे हैं? तो ऐसे गांव की जो भाषा होती है गांव की भाषा में बोलते हैं कि तेरे पति का नाम जप रहा हूं। एक गुस्सा टाइप
(39:48) जिसको आता है ऐसा वो बोलता है। तो जब बार-बार माता ने उनको परेशान किया तो ऐसे गुस्से में उनको धक्का दिया कि आपके पति का नाम जप रहा हूं। आपको क्या करना? तो माता बड़ी प्रसन्न हुई। प्रसन्न होकर वापस भगवान के पास गई। उन्होंने कहा आपका भक्त तो बहुत अंतर्यामी है। उसने बिना आंख खोले ही मुझे पहचान लिया कि मैं आपकी पत्नी बोल रही हूं। वो तो आपसे ही मिलना चाहते हैं। आप उनसे मिलने जाइए कि भगवान स्वयं उनको दर्शन देने आए भगवान का दर्शन उनको प्राप्त हुआ। ऐसे ही गुरु से यदि कोई सा भी मंत्र आपको प्राप्त होता है। उस मंत्र की इतनी शक्ति होती है। उस मंत्र के प्रति
(40:18) यदि आप समर्पित होते हैं तो आपको जीवन में ऐसा परिवर्तन देखने को मिलता है कि जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। किसी भक्त को अगर तो भगवती की आराधना घर पर करनी है तो किन-किन चीजों का ध्यान करना चाहिए? चढ़ावा क्या होना चाहिए? जैसे काफी कुछ चीजें होती हैं। मैं अभी आपको बता रही थी हमारे एक महाकालेश्वर के पंडित आए थे। जी उन्होंने कहा था कि मूर्ति को सिर्फ अंगूठे जितना है। अंगूठे से कम अंगूठे से ज्यादा नहीं। तो ऐसी कुछ चीजें जो आप बता सके प्रैक्टिकल? देखिए मेरा यह मानना है कि भगवती की जो भक्त आराधना कर्म करता है। भगवती का सौम्य
(40:48) स्वरूप भी है तो रूद्र स्वरूप भी है। तो भगवती की मूर्ति कभी भी किसी भक्त को अपने घर पे विराजमान नहीं करना चाहिए। अच्छा आप भगवती का फोटो लेकर के जा सकते हैं जो कि आप हां जैसे भगवती का फोटो विराजमान है ऐसे आप भगवती का फोटो अपने घर पर लेकर जा सकते हैं। घर पे लगा सकते हैं। उनका दिया बत्ती कर्म प्रतिदिन आप कर सकते हैं। पर मूर्ति कर्म आपको नहीं ले जाना चाहिए। क्योंकि इनमें दो प्रतिष्ठा होती है। एक चल प्रतिष्ठा एक प्राण प्रतिष्ठा। चल प्रतिष्ठा वो होती है जहां पर मूर्ति हम इधर-उधर लेकर के जाते हैं। उनकी चल प्रतिष्ठा की जाती है। एक प्राण प्रतिष्ठा
(41:18) होती है जो एक मंदिर में हम मूर्ति स्थापित करते हैं वह प्राण प्रतिष्ठा कहलाती है। ऐसे ही घर पे आपको भगवती को विराजमान नहीं करना चाहिए क्योंकि सेवा पूजा जो होती है वो नियमित रूप से हमसे कंटिन्यू नहीं हो पाती है। तो आप एक फोटो ले जाइए। फोटो ले जाकर प्रतिदिन सरसों का तेल का दीपक सुबह शाम दोनों समय भगवती के सामने प्रज्वलित कीजिए। वह क्यों करना चाहिए? क्योंकि आपके घर पे बहुत सारी नेगेटिव एनर्जी होती है। कहीं से आप बाहर गए हो सकता है आपके घर के अंदर ना हो तो आपके साथ कुछ नेगेटिव एनर्जी चल करके आपके साथ आ जाती है। तो यदि सरसों का तेल का
(41:48) दीपक आपके घर पे प्रतिदिन प्रज्वलित हो रहा है तो वो नेगेटिव एनर्जी को समाप्त करता है। सकारात्मकता ऊर्जा का प्रभाव वो बढ़ाता है। प्लस इसके साथ-साथ में भगवती को आप पीला कुछ भी भोग लगा सकते हैं। पीली मिठाई इत्यादि हो गए, कदली फल इत्यादि हो गए। उनका आप भोग इत्यादि लगा सकते हैं। यदि कर सकते हैं तो मंगलवार के दिन क्योंकि भगवती का जो उद्गम बताया जाता है जिस दिन भगवती प्रकट हुई थी मंगलवार के चतुर्दशी तिथि बताई जाती है। वर्ष में बहुत कम संयोग ऐसा बैठता है कि जिस दिन मंगलवार भी होता है और चतुर्दशी तिथि भी होती है। वर्ष में दो
(42:20) चार संयोग ही ऐसे बैठते हैं। तो यदि यह संयोग में आप करते हैं तो बहुत अच्छा विषय है। वरना चतुर्दशी तिथि को या मंगलवार को अपने घर पे प्रयोग कर सकते हैं। यदि भगवती का यंत्र आपके घर पर है या यंत्र नहीं है तो एक खाली पात्र में एक सुपारी रख के बगलामुखी देवय नमः बोलते हुए 36 बार आप भगवती का अर्चन कर्म कर सकते हैं। बगलामुखी देव नमः बगलामुखी देव नमः फिर जो अर्चन प्रातः आपने किया है शाम के समय जो हरिद्रा उसमें एकत्रित होती है उस हरिद्रा को जो आपका भोजन कक्ष होता है भोजन कक्ष में जिस पात्र का आप प्रयोग करते हैं जिसमें हल्दी वगैरह सब होता है भोजन बनाते
(42:54) समय उस पात्र में आप उसको मिला सकते हैं तो पूरा साप्ताहिक आप भगवती का प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं जो आपके शरीर में समस्त रोग बाधाओं का निवारण करता रहेगा तो यह प्रयोग भक्त अपने घर पे कर सकते हैं कर सकते हैं बहुत बढ़िया पंडित जी बगलामुखी की साधना में अलग अलग-अलग यंत्र यूज़ होते हैं। जी। अलग-अलग सामग्री यूज़ होती है और इनका अलग-अलग पर्पस होता है। जी। जैसे कि हम जब पीली मस्टर्ड सरसों यूज़ करते हैं तो वो हमको दुश्मनों से जो नेगेटिव एनर्जी आती है उससे उससे बचाती है। तो ऐसे हमें अलग-अलग यंत्र अलग-अलग सामग्री उनका क्या महत्व है
(43:30) और उनका उपाय क्या-क्या है? यह थोड़ा डिटेल में बताइए। बिल्कुल। यदि आपको शत्रु बाधा ज्यादा परेशान कर रही है, ज्यादा लोग आपको परेशान कर रहे हैं, तो उसके निमित्त भगवती का बगलामुखी का यंत्र आता है, वह आप पहले पूजा पाठ इत्यादि करवाएं। बहुत सारे लोग उनके प्रयोग करते हैं श्लोका जी के यंत्र ले लिया। कहीं भी दुकान पर गए जैसे हरिद्वार घूमने गए कहीं भी घूमने गए तो वहां से उनको व्यापार वृद्धि यंत्र पसंद आ गया। बगलामुखी यंत्र पसंद आ गया। दस महाविद्या का यंत्र पसंद आ गया। वाहन दुर्घटना यंत्र पसंद आ गया तो वहां से वह ले लेते हैं। लेकर के अपने पर्स में या घर
(44:02) पर ले जाकर उसको विराजमान कर देते हैं। जबकि वह यंत्र आपके लिए कोई प्रभावशाली नहीं होता है। जब तक यंत्र में आपके नाम गोत्र से पूजा पाठ क्रिया इत्यादि संपन्न हो के उसको अभिमंत्रित नहीं किया जाता है तब तक वह आपके लिए कोई कार्य का नहीं है। सामान्य धातु है। धातु आप अपने घर पे रख रहे हैं। उसका कुछ वह प्रभाव बता सकती है। बाकी यंत्र वो आपके लिए वो कार्य नहीं करेगा जो करना चाहिए। सामान्य भाषा में आप समझिए एक शव है। शव में से यदि प्राण निकल जाते हैं तो शव तो पूरा है। शव उसके बाद कोई भी एक्टिविटी नहीं कर सकता है। जैसे ही उसमें प्राण आएंगे तभी वह हिलना, चलना,
(44:40) बोलना कुछ कार्य करने की शक्ति उसमें आती है। वैसे ही यंत्र जो होते हैं जब तक आपके नाम, गोत्र से अभिमंत्रित नहीं होते हैं, तब तक वो आपके लिए प्रभावशाली नहीं होते हैं। इसलिए कुछ भी आप यंत्र लेकर के आ रहे हैं, पहले उसकी आप पूजा कर्म इत्यादि कराइए, ब्राह्मण देवता से अर्चन कर्म इत्यादि कराइए, अभिषेक कर्म इत्यादि कराइए। तब जाकर के आपके निमित्त वो प्रभाव करेगा। कार्य करके आपको देगा। अच्छा। अब इसमें यदि आप घर पर कुछ यंत्र इत्यादि पूजा करना हो तो जो सिद्ध करके आप यंत्र घर पर लेकर गए हैं उसमें आप अलग-अलग प्रकार की पद्धतियां होती हैं। यदि आपको
(45:10) भगवती लक्ष्मी की आराधना कर्म करना है तो उसके लिए श्री यंत्र का आपको प्रयोग करना चाहिए। श्री यंत्र भी दो तीन प्रकार से आते हैं। एक अष्ट धातु का आता है। एक आपका स्फटिक का श्री यंत्र आता है। सबसे प्रभावशाली जो होता है वो स्फटिक का श्री यंत्र होता है। स्फटिक सफेद सफेद श्री यंत्र आता है। सफेद कलर का रहता है। उसमें ज्यादा प्रभावशाली क्यों होता होता है कि अष्ट धातु का जो होता है उसमें हम अलग-अलग धातु मिलाकर के उसको श्री यंत्र को क्रिएट करवाते हैं और जो स्फटिक का होता है वह एक ही पत्थर में से कट के पूरा यंत्र बनता है तो एक भी उसमें अलग से कोई
(45:40) चीज ऐड नहीं होती है तो वो आपको अत्यधिक प्रभाव देता है और वहीं स्फटिक में यदि आपको पीला स्फटिक मिलता है बहुत कम लोगों को प्राप्त होता है मिल पाता है बहुत कम आते हैं वो पीला स्फटिक यदि आपको मिल रहा है तो वो आपके जीवन में वो परिवर्तन दे सकता है जो कोई दूसरा यंत्र आपको नहीं दे सकता जैसे कि जैसे जैसे कि स्फटिक की शिवलिंग भी आती है। प्लस स्फटिक में कुर्मू यंत्र आता है। कुर्मू मतलब कछुआ होता है। कछुए के ऊपर पीठ पर श्री यंत्र बना होता है। यदि आप वो सिद्ध कराकर अपने घर में व्यापार के लिए रखते हैं तो वो आपको व्यापार में इतनी पदोन्नति कराता है जिसकी
(46:14) कल्पना भी आप नहीं कर सकते हैं। तो स्फटिक का आपको यंत्र बहुत प्रभावशाली आपके जीवन में करता है। और वहीं आप वाहन दुर्घटना यंत्र हो गए, पॉकेट यंत्र हो गए। यह सब तो भले आप अपने पर्स में निर्वाह कर सकते हैं पर बाकी जो मूल यंत्र इत्यादि होते हैं इनको आपको अभिमंत्रित करा के अपने घर पे रखना चाहिए। अब यदि आपने भगवती श्री विद्या की आराधना कर्म आपको करना है तो उसमें जो श्री यंत्र होता है श्री यंत्र पर नौ दिन का परिकल्प वो होता है। अलग-अलग दिन अलग-अलग सामग्रियों का वर्णन आता है। पहले दिन आप कुमकुम हल्दी कुमकुम जो होता है। बहुत सारे लोगों कुमकुम में भी आजकल
(46:46) आर्टिफिशियल कंकु आता है उसका प्रयोग करते हैं। उसका आप तिलक भी लगाते हैं तो वो निशान छोड़ देता है। रिएक्शन करता है। उसकी अपेक्षा आप हल्दी कुमकुम का प्रयोग कर सकते हैं। प्रतिदिन लगाने में भी तो भगवती का जो प्रथम दिवस है आप वो हल्दी कुमकुम से अर्चन कर सकते हैं। दूसरे दिन हल्दी से अर्चन कर सकते हैं। तृतीय दिन आप जो पंचमेवा आता है पंचमेवा से अर्चन कर सकते हैं। उसके अगले दिन गुलाब की पंखुड़ी से आप अर्चन कर सकते हैं। उसके अगले दिन जो बिल्व फल आते हैं बिल्व फल से आप अर्चन कर्म कर सकते हैं। फिर बिल्व फल के जो पत्ते आते हैं उन पत्ते पर भगवती का बीज
(47:16) मंत्र लिख करके उनका अर्चन कर्म आपको करना चाहिए। ये ऐसे नौ दिन तक अलग-अलग सामग्री द्वारा उनका अर्चन कर्म कोई व्यक्ति संकल्प लेकर के संपन्न करता है या ब्राह्मण देवता से संपन्न करवाता है तो उसको धन वैभव सुख संपदा तीनों चीजों की वृद्धि अपने जीवन में देखने को प्राप्त होती है। अच्छा अच्छा जैसे कुछ होता है ना लेडीज को मेंुअल साइकिल हो रहा है तो करा जा सकता है क्रिया देखिए ऐसा है कम से कम सात दिवस आपका पूर्ण हो जाए सात दिवस पश्चात स्नान इत्यादि करके आपको कर्म इत्यादि संपन्न करने बैठना चाहिए ये बहुत सारे ऐसे हमारे जजमान है बाहर विदेशों से भी आते हैं वहां
(47:49) पर बोलते हैं पंडित जी अब मेरा टाइम आ गया क्या कर सकते हैं तो फिर हम उनसे आग्रह करते हैं अगर हो सकता है तो आप स्वयं यहां पर रुके समय दें 7 दिवस पश्चात अपना कार्य कार्य संपन्न कराएं या नहीं हो सकता है तो आप जा सकते हैं आपके नाम गोत्र से कर्मा हम आपका संपन्न करेंगे। जिसको हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं जी तो क्या क्रिया करी जा सकती है? मंदिर में भी और घर में खुद से भी। देखिए मंदिर में यदि आप प्रयोग करवा रहे हैं तो उसमें इंद्राक्षी स्तोत्र करके एक स्तोत्र आता है। उसका पाठ्यक्रम आप करवाएं। प्लस इसके साथ में आप भगवती का अपराजिता स्तोत्र का पाठ भी ऐड करवा सकते
(48:20) हैं। यह दोनों पाठ साथ में आपके ऐड होते हैं। यह क्रिया की जाती है तो आपको रोग बाधा इत्यादि में अच्छा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। बाकी घर में यदि आप ऐसा कुछ कर्म करना चाहिए जिसमें हेल्थ में आपको अच्छा हो तो इसमें आपका प्रयोग आता है दो प्रकार से। पहला व्यक्ति हेल्थ कब उसकी कुंडली के आधार पर या फिर सामान्य में उसका रोग निवारण कुछ बाधा समस्या देखने को आपको मिलती है। एक समस्या आपको देखने को मिलती है जब आप कुछ सेवन करते हैं सेवन सेवन आप किसी भी चीज का करते हैं जो कि दिव्य पदार्थ में आते हैं। पदार्थ अर््यात हो गया, मदिरापान हो गया, धूम्रपान हो
(48:54) गया। इन सबके यदि आप सेवन करते हैं तब भी आपके स्वास्थ्य में आपको हानिकारक देखने को मिलता है। तो पहला प्रयोग तो अपने घर पे ये करें। जो सरसों का तेल का दीपक मैंने आपको बताया है उसके अंदर एक काली मिर्च और एक लौंग आपको पर डे यदि अपने घर पे आप प्रज्वलित कर रहे हैं तो उसमें आप डाल सकते हैं। उसमें थोड़ा सा स्वाद संबंधित आपको देखने को मिलेगा। और जो व्यक्ति इन व्यसनों से चिंतित है, परेशान है, उन व्यसनों को तागना चाहता है, तो अदरक का नाम आपने सुना होगा। अदरक जो आता है, अदरक के आप छोटे-छोटे टुकड़े कर सकते हैं। छोटे-छोटे टुकड़े करके उसको सूखा
(49:24) लीजिए। उसमें थोड़ी सी हरी और थोड़ा सा नमक सूखने के बाद चिटक दीजिए और जो भी व्यक्ति सेवन करता हो व्यसन का उसकी जेब में रख दीजिए। दिन भर में चारप बार उनको उसको चूसना है। चूस करके उसको वो थूक सकते हैं। अब इसमें क्या होता है कि हमारे मस्तिष्क में यहां पर एक नस होती है। वो नस जैसे ही मस्तिष्क से थोड़ा सा दूर होती है आपको सेवन करने की तलब लगती है। हां कि मुझे उसको ग्रहण करना है। चाहे सिगरेट हो गया, तंबाकू हो गया, मदिरा हो गया, कुछ भी हो गया। अब अदरक क्या करता है? अदरक जैसे ही आप अपने मुख में रखते हैं उसका रस जो होता है अंदर आपके जाता है उस नस को
(49:57) वापस वो चिपका देता है तो उससे आपको उसका तलब नहीं लगता है तलब आपका छूट जाता है तो यह प्रयोग यदि व्यक्ति महीने भर भी कर लेगा तो उसके बाद फिर एक बार उससे छूट गई वो महीने भर तक उसने सेवन नहीं किया तो कहीं ना कहीं फिर वो धीरे-धीरे उसको त्यागने में सक्षम हो जाता है तो यह प्रयोग भी व्यक्ति अपने घर पे कर सकता है। पर जिसको ये एडिक्शन की प्रॉब्लम नहीं है। ऐसी हेल्थ खराब है तो वो अपने घर पे सरसों का तेल का दीपक लगाएं। उसके अंदर काली मिर्च और लौंग डालें पर डे और धुमावती माता जो है धुमावती माता का मंत्र आता है। यदि आपने दीक्षांत कर्म संपन्न करके रखा है तो उस
(50:31) मंत्र का आप प्रयोग कर सकते हैं। वो भी आपके रोग बाधा निवारण में अच्छा सिद्ध अगर तो वो अगर तो दीक्षा नहीं मिली है तो कुछ ऐसा नाम दीक्षा कर्म नहीं किया तो जो बगलामुखी देवी नमः मैंने बताया है उसका भी आप करेंगे तो आपको समान फल प्राप्त होगा। समझ गए? पंडित जी हम अक्सर मंदिर देखते हैं कि जंगलों में होते हैं या पहाड़ों में होते हैं या शहरों के बीचोंबीच होते हैं। लेकिन यह मंदिर श्मशान घाट पे है और आपने जैसे कुछ टाइम पहले मुझे बोला कि बगलामुखी को महाश्मशान वासनी भी कहा जाता है। क्या है इसके पीछे की बात? जैसे कि मैंने आपको अभी बताया भगवती के
(51:00) यहां पर जो कर्म होते हैं वह तंत्रोक्त कर्म भी होते हैं। वेदोक्त कर्म भी होते हैं। दोनों का मिश्रण कर्म होकर के आपका कार्य संपन्न किया जाता है। तो भगवती जो आती है वो 10 महाविद्याओं में आती है। जैसा मैंने आपको अभी बताया वह तंत्र की देवी मुख्यता आती है। तो जो नलखेड़ा वाला मंदिर है वह चारों दिशाओं से श्मशान से घिरा हुआ है। पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण चारों दिशाओं में श्मशान बने हुए हैं। श्मशान के बीच में भगवती विराजमान है। इस कारण भगवती को श्मशान वासिनी भी कहा जाता है। और जो दतिया वाला मंदिर आप देखेंगे और वनखंडी वाला मंदिर देखेंगे
(51:32) वहां पर श्मशान का इतना कुछ महत्व देखने को नहीं आता है। वहां पर नहीं है। और जो नलखेड़ा वाले मंदिर की प्राचीनता रहस्यमय चीज यही है कि भगवती श्मशान के समीप विराजमान है। प्लस सभी मंदिरों में भगवती जहां आप देखेंगे अत्यधिक एक रूप में विराजमान होती है। पर नलखेड़ा वाला मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर भगवती त्रिशक्ति में विराजमान है। जहां पर तीनों देवियों का आपको प्रसन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। एक होता है भगवती का रौद्र स्वरूप और एक होता है भगवती का सौम्य स्वरूप। तो जो नलखेड़ा नगर में भगवती विराजमान है बड़े सौम्य स्वरूप में
(52:02) भगवती वहां पर विराजमान है। अगर वहां के त्रुटिमान आपसे कुछ हो जाता है भगवती की साधना में कुछ त्रुटि हो जाती है। ये हो जाती है तब भी व्यक्ति को इतना कुछ दुष्परिणाम देखने को नहीं मिलता है क्योंकि भगवती वहां पर बहुत शोभावान है। बहुत सौम्य स्वरूप में विराजमान है। इत्यादि वो आपको दुष्परिणाम नहीं देती। अच्छा जी पंडित जी एक तो है वो महिला ठीक है दूसरा आप कह रहे हो सौम्य रूप में भी है और ऊपर से वो श्मशान घाट में है तो ये थोड़ा तीनों का मुझे बताइए कि सिग्निफिकेंस क्या है वह डिपेंड करता है आप किस भाव से भगवती की आराधना कर्म कर रहे हैं अब कोई व्यक्ति
(52:36) जाता है भगवती के दरबार पर पहली मान्यता यह करता है कि मैं अच्छा रहूं मेरा परिवार अच्छा रहे मेरा समाज अच्छा रहे उसके लिए भगवती सोम रूप से उसको आशीर्वाद प्रदान करती है अब कोई व्यक्ति जाता है कि उस व्यक्ति ने मेरा बहुत अहित किया है। उसका मुझे अहित करना है या भगवती जो उसने मेरे लिए अपराध किया है उसका दंड आपको प्रदान करना है। तो वह व्यक्ति के लिए सौम्य रूप में भगवती उस समय होती है। पर जो व्यक्ति दंडनीय है उसके लिए फिर भगवती रौद्र रूप में प्रकट होती है। और तीसरा रूप होता है जहां पर बुद्धि विवेक इत्यादि का होता है।
(53:08) जैसे भगवती त्रिशक्ति में विराजमान है। बगलामुखी, महालक्ष्मी, महासरस्वती। तो जो व्यक्ति अपनी विद्या बढ़ाने के लिए जाता है कि भगवती मुझे ऐसा आप वर दीजिए कि मेरी बुद्धि का विकास हो। जितना हो सके मैं जनहित में कार्य कर सकूं। सभी प्रजाजन के लिए कार्य कर सकूं। जैसे बहुत सारे राजकीय इत्यादि भी वहां पर आते हैं तो भगवती उन्हें बुद्धि इत्यादि प्रदान करती है ताकि अच्छे समय में उनका कार्य हो सके। प्लस भगवती के साथ-साथ महालक्ष्मी भी वहां पर विराजमान है। जो दरिद्रता से परेशान है। जिनके घर में लक्ष्मी माता नहीं आती है। वह भी यदि बगलामुखी की आराधना कर्म
(53:39) करता है, तो वह लक्ष्मी से भी सुसज्जित होता है। तो इसमें एक शत्रुओं से आपकी रक्षा हो गई। एक आपकी बुद्धि विवेक आदि प्रदान हो गया। एक धन संपदा से आप परिपूर्ण हो गए। अगर त्रिशक्ति का ये आशीर्वाद आपको प्राप्त हो जाता है तो व्यक्ति को फिर जीवन में कुछ संकोच करने की आवश्यकता ही नहीं होती है। पंडित जी मुझे अभी भी ये समझ नहीं आ रही कि श्मशान घाट में क्यों विराजमान श्मशान घाट का विराजमान इस कारण मुख्य क्योंकि भगवती तंत्र के देवी में आती है। कोई व्यक्ति सात्विक रूप से इनके आराधना कर्म कर रहा है तो वो कहीं पे घर बैठकर भी इनके
(54:06) आराधना कर्म संपन्न कर सकता है। और दूसरा विषय यदि श्मशान श्मशान क्या होता है कि जागृत श्मशान होते हैं और कुछ सामान्य श्मशान होते हैं। जागृत मतलब जागृत मतलब जहां पर भूत प्रेत इत्यादि भ्रमण इत्यादि करते रहते हैं। जैसे किसी का देह संस्कार इत्यादि हुआ उसको मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो पाई तो वहीं पर भटकता रहता है। वह बहुत बार आप सुनने को मिलता है कि शम्मशान के पास में कोई गए उनको उनके ऊपर कोई हावी हो गया भूत, चुड़ैल, डाकिनी, शाकिगनी और कुछ श्मशान होते हैं जो बंधक श्मशान होते हैं। जहां पर आप आराम से जाकर के आ सकते हैं। आपको कोई उसका
(54:37) दुष्परिणाम देखने को नहीं मिलता है। तो जो माता जी के यहां पे चार श्मशान है उसमें एक शमशान आपको भगवती के समीप है, वह जागृत श्मशान की श्रेणी में आता है। इस कारण ऐसा बताया जाता है पुराणों में जागरणात शमशान के पास किया गया जप इत्यादि कर्म जो तंत्र के विषय में आप कर रहे हैं वह आपको अत्यधिक प्रभाव देता है। इस कारण श्मशान का विषय आता है क्योंकि वहां पर व्यक्ति भिन्न-भिन्न प्रकार की मनोकामना इत्यादि लेकर के आते हैं। व्यापार वृद्धि के लिए, रोग निवारण के लिए, शत्रु बाधा के लिए, राजनीति में विजय प्राप्ति के लिए, कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्ति के लिए तो वैसे
(55:09) फिर भिन्नता में उनके कार्य संपन्न किए जाते हैं। अब कुछ तो भगवती की महिमा भगवती ही इतना दिव्य स्वरूप वहां पर विराजमान है कि आदि उनके दर्शन कर्म के सौभाग्य से ही व्यक्ति का कार्य हो जाता है और कुछ महिमा उसकी है कि उस भूमि पर जहां पर भगवती विराजमान है करोड़ों की संख्या में आज वहां पर जप तप हवन अनुष्ठान कर्म हो चुके हैं तो व्यक्ति वहां पर कदम रखता है तो वहां की जो एनर्जी इतनी पॉजिटिव होती है कि वह आपके मन को प्रफुल्लित कर देती है। आपका आधा कार्य वहीं से हो जाता है। भगवती को पीतांबरा पीठ क्यों कहा जाता है? अलग-अलग देवियों की अलग-अलग साधना कर्म
(55:43) इत्यादि होता है। हम जो बगलामुखी माता है इनकी साधना जो होती है मुख्यतः पीली चीजों से भगवती को अति प्रिय होता है। अब वो क्यों होता है कि अलग-अलग देवी देवताओं के अलग-अलग नाम वर्ण होते हैं। अलग-अलग गणेश होते हैं। बगलामुखी माता के गणेश जी है। यह हरिद्रा गणेश है जो कि हल्दी से निर्मित है। इस कारण भगवती को पीला अति प्रिय है। पीत वर्ण पीत वर्ण धारी सिंहासन पर बैठी बगलामुखी मात हमारी ऐसा बहुत सारा वर्णन करते हैं। तो इस कारण ही भगवती को पीला अति प्रिय माना जाता है। क्योंकि कोई बोलता है जैसे जब बगलामुखी आभूषण ले लो उनके उनके कपड़े ले लो सारा
(56:20) पीला है तो ऐसे लगता है जैसे तपते हुए सोने में जो चमकता है वो वैसे दिखती है तो इसका तंत्र में ये पीलेपन का क्या कारण है? पीलेपन का साधना से तुरंत जुड़ाव देखने को मिलता है आपको कि आप इनकी आराधना कर्म करते हैं तो पीला आसन होना चाहिए। पीली हल्दी की माला होना चाहिए। सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करके आपको भगवती की आराधना कर्म प्रारंभ करना चाहिए। पीली पीसी हुई हल्दी से भगवती का अर्चन इत्यादि करना चाहिए। हो सके तो उसमें पीला फलाहार जो आता है जैसे केले इत्यादि हो गए, पीली मिठाई इत्यादि हो गई। इनकी साधना के दौरान आपको यह सब चीजें ग्रहण करनी चाहिए। इससे
(56:53) आपको अति शीघ्र प्रभाव देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि भगवती को पीतांबरा पीठ भी कहा जाता है। अब इसमें आपको अत्यधिक यह भी देखने को मिलता है कि कोई व्यक्ति भगवती के दरबार में आता है तो भगवती के भी श्रृंगार प्रतिदिन चेंज होते हैं। या प्रतिदिन नहीं तो कम से कम दो से तीन दिवस में भगवती का जो चोला होता है वह परिवर्तित किया जाता है। भगवती को दो चोला चढ़ता है वहां पर। एक रजत चांदी का और एक सोने का। तो जब भगवती सोने के श्रृंगार में आती है, चांदी के श्रृंगार में तो अतिमोहन लगती ही है। पर जब सोने का श्रृंगार भगवती को चढ़ता है। उनके जब आप
(57:25) दर्शन कर्म करते हैं तो आपका मन इतना लुभाववान हो जाता है कि बस उसको आनंद की आप अनुभूति कर सकते हैं। आप अंदर जाते हैं भगवती को निहारते हैं। आप किसी भी दिशा में खड़े होकर भगवती को देखें। जैसे सामने आप भगवती है। आप यहां पर खड़े होकर दर्शन करते हैं गर्भ के अंदर से। तो यदि आप इस ओर खड़े होकर भी भगवती को निहार रहे हैं तो उनकी आंखें भी इतनी मनमोहक होती है कि ऐसा लगता है वो आपको ही निहार रही है। आप इस ओर खड़ी होकर देखेंगे तो भी ऐसा आपको प्रतीत होगा भगवती आपको ही निहार रही है। उस समय भक्त और भगवती का जो कनेक्ट होता है वो आपकी आंखों में अश्रू लाने के लिए
(57:57) पर्याप्त होता है। इतना मनमोहक भगवती का आपको वहां पर दृश्य देखने को मिलता है। बहुत बढ़िया। पितृ दोष के लिए क्या करा जा सकता है? देखिए पितरों के निमित्त हमारे पुराणों में तीन प्रकार की व्याख्याएं बताई गई हैं। पहली होती है पितृ भागवत। जैसे कि आपने मूल भागवत सुनी होगी। हमारे सब बड़े-बड़े कथाचार्य इत्यादि करते हैं। वो घर के बाहर होती है। सार्वजनिक रूप से होती है। वहीं आपके घर के अंदर होती है पितृ भागवत जो कि आपकी गोत्र के लोग ही उसमें आमंत्रित होते हैं। आपके परिवार के लोग आमंत्रित होते हैं। सभी मिलकर के आपका वह कार्य संपन्न कराते हैं। तो सबसे पहला
(58:27) प्रयोग आपका यह होता है जो सात दिवस तक चलता है सेवन डेज तक। दूसरी जो क्रिया होती है उसमें आपकी नारायण बलि कर्म होता है। पहली पीढ़ी से ले आठवीं पीढ़ी तक कोई व्यक्ति मान लो अधोगति में गए हो तो उनके निमित्त अधोगति अर्थात अकारण मृत्यु रोड एक्सीडेंट में मृत्यु हो जाना जलकर मर जाना पानी में डूबकर मर जाना ये अकारण मृत्यु होती है सुसाइड अटेंड कर लेना इसमें यदि कोई व्यक्ति है जो मोक्ष को प्राप्त नहीं हो पाए हैं उनके निमित्त नारायण बलि कर्म आपका संपन्न किया जाता है। तीसरा कर्म आपका होता है पंचबलि कर्म जो आपकी पहली पीढ़ी से लेके 16 पीढ़ी तक
(59:02) के लोगों के लिए संपन्न किया जाता है। इसमें पांच वृद्धियां होती है। नागबलि, भूत बलि, प्रेत बलि, नारायण बलि ऐसी पांच अलग-अलग बलियां होती है। बलि अर्थात इन पांच व्याधियों में आपका जो पित्र है वो होते हैं। इनके बंधन में होते हैं। आप यह पूजा कर्म करा के इन बंधनों से उनको मुक्त करते हैं। जैसे कि आपका कोई वंश का है पहली, दूसरी, तीसरी पीढ़ी में जो अधोगति में प्राप्त हो गया। आपको जानकारी नहीं है। आप उनके वंश के हैं तो वो आपसे भाव रखते हैं कि आप ऐसा कुछ कर्म करें जिनसे उनको मोक्ष की प्राप्ति हो सके। घर में क्या करा जा सकता है पंडित जी? कोई
(59:38) भी अमावस्या के दिन आप पीपल के पेड़ के यहां पर जाकर खीर पूरी का भोग आपको वहां पर लगाना है और एक सरसों का तेल का एक बत्ती वाला दीपक आपको वहां पर करना है। इससे आपके पितृ को भोग प्रसादी प्राप्त होगा तो आपके जीवन में आनंद बना रहेगा या कोई व्यक्ति कर सकता है तो एक कार्य कर सकता है। काले तिल जो आते हैं काले तिल के 27 लड्डू बनाना है। लड्डू जो सकरात को हम बनाते हैं वैसे ही काले तिल के 27 लड्डू हम बनाएंगे। जैसे सिक्का हम रखते हैं लड्डू के अंदर वैसे आपको 27 स्लिप लेना है। 27 स्लिप में एक साइड में अपना नाम गोत्र लिखना है। दूसरी साइड में जो भी
(1:00:13) समस्या आपको आ रही है, जो परेशानी आपको आ रही है या पितरों से प्रार्थना करना है कि हमसे कुछ भूल चूक हुई तो क्षमा करें। वह लिख के स्लिप को फोल्ड कर लेंगे। एक-एक लड्डू के अंदर एक-एक स्लीप आपको रखना है। अब किस शाम के शाम को 4:00 से 6:00 के बीच में किसी भी नदी, तालाब इत्यादि के पास में जाकर के एक-एक लड्डू को 27 बार अपने सर पे से घुमा करके अपनी मनोकामना का चिंतन करते हुए नाम गोत्र का चिंतन करते हुए नदी में आप उसको प्रवाहित कर देंगे। इससे जो मनोकामना है आपकी वो भी आपको प्राप्त होगी। आपके पितृ इत्यादि है वह भी आपसे प्रसन्न।
(1:00:46) बढ़िया बढ़िया। पंडित जी जो बगलामुखी मंदिर है वो 10 महाविद्या में से जो आठवीं देवी हैं उनको समर्पित है। थोड़ा इसके बारे में बताइए। इसमें ऐसा होता है कि मूलतः इनके तीन मंदिरों का वर्णन आता है। बगलामुखी माता के यूं तो बहुत सारे मंदिर अब विख्यात हो चुके हैं। पर जो पुराण तत्व के अनुसार तीन मंदिर है। वह मंदिर आते हैं। एक आपका नलखेड़ा में आता है। एक दतिया में आता है। एक वनखंडे में आता है। भजन बहुत सारे लोगों ने सुना होगा। बगलामुखी मां वनखंड बसिया ऐसा करके भजन है। एक बहुत प्रचलित हुआ था वह। तो उसमें ये तीन मंदिरों का
(1:01:19) मुख्य व्याख्यांत आता है। जो नलखेड़ा में स्थित है वह सिद्ध पीठ में आता है। जहां पर भगवती स्वयं उनकी इच्छा से उजागर हुई हो। इसका वृंदा इतना पुराना आता है कि जब महाभारत का युद्ध होने का था। तब पांडवों को वनवास के पश्चात एक वर्ष का अज्ञातवास हुआ था। उसमें भगवान श्री कृष्ण के कहने पर पांडव इत्यादि नलखेड़ा नगर आए थे। उन्होंने वहां पर भगवती की आराधना कर्म इत्यादि की विजय श्री प्राप्त के लिए वहां पर वो रुके। उन्होंने आराधना कर्म संपन्न किया। तत्पश्चात वो गए। तब जाकर के उनको कुरुक्षेत्र के युद्ध में विजय की प्राप्ति हुई थी। इतना पुराना वृतांत है
(1:01:52) कि इतना पुराना मंदिर है। उससे और कितना पुराना है ये किसी को ज्ञात नहीं है। आपके हिसाब से कितना पुराना होगा ये मंदिर? यही महाभारत कालीन के समय का ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उससे पुराना वर्णन कहीं पे देखने को मिलता नहीं है। क्योंकि हमारे कुछ प्राचीन ग्रंथों में लिखा है हजारों साल। हजार साल से भी अधिक होगा ना? आराम से मान सकते हैं इतना आप इसलिए मंदिर को पांडव कालीन मा बगलामुखी मंदिर कहा जाता है क्योंकि उतना पुराना स्पष्ट लिखत आता है इस कारण मंदिर और पांडव की किस टाइम की हम बात कर रहे हैं ये महाभारत कालीन भगवान श्री कृष्ण के समय
(1:02:21) का द्वापर युग की बात हो रही है भगवान श्री कृष्ण के समय का तो हजारों हजारों हजारों साल पुराना हुआ है तो जी बिल्कुल 5000 वर्ष शाह तक आप लॉजिकली मान सकते हैं। उससे और कितना पुराना है ये किसी को ज्ञात नहीं है। इसके बाद फिर जो दतिया का मंदिर आता है ऐसा वृतांत आता है कि नलखेड़ा नगर से ही जोत ले जाकर के वहां की स्थापना की है। तो स्थापित मंदिर में आता है। दतिया का जो मंदिर है वहां पर उन्होंने दो मंदिर की स्थापना की है। पीतांबरा पीठ नाम से भगवती की और भगवती के साथ ही दस महाविद्या में धुमावती माता भी आती है। तो साथ ही में उन्होंने धुमावती
(1:02:52) माता का मंदिर भी वहां पर स्थापित किया है। अब धुमावती माता का बहुत अच्छा एक लॉजिकली वर्णन आता है कि विवाहित स्त्रियों को उनके दर्शन कर्म नहीं करने चाहिए। क्योंकि धुमावती माता जो है वह विधवा के रूप में है। सफेद साड़ी पहन के तो कोई भी जोड़े से उनके दर्शन कर्म नहीं कर सकता है। अच्छा पुरुष दल को अकेले जाकर ही उनका दर्शन कर्म का लाभ लेना चाहिए। जो उनकी साधना कर्म करना चाहता है वह भी इस बात का अत्यधिक ध्यान रहे। जब तक उनकी साधना कर्म इत्यादि चलती है तब तक इन सब विषयों से वह थोड़ा भिन्नता में रहे। तब जाकर के आपको मूल जो कर्तव्य है आपका वो प्राप्त होगा।
(1:03:25) तृतीय मंदिर जो आता है वह वनखंडी का बताया जाता है जो श्री राम जी के समय का बताया जाता है। ऐसे तीन मंदिरों का मुख्य वृतांत आता है। अब 10 महाविद्याओं में आठवें स्थान पर बगलामुखी माता जो आती है इनका वर्णन आता है कि कोई भी व्यक्ति आपकी तरफ प्रहार कर रहा है। जैसे कोई व्यक्ति आपकी तरफ फेंकी जाती है। उसे जैसे ही पल भर में आप रोकते हैं ये भगवती की साधना कार्य करती है। जैसे कि मैंने आपकी तरफ कुछ प्रहार किया, कुछ हथियार फेंका तो उसे आप जैसे एक पल में रोकते हैं ऐसे भगवती आपके तरफ आते हुए हर प्रहार को क्षण भर में परिवर्तित कर देती है।
(1:03:55) अच्छा अल्प आयु को भी ये रोकती है। जी बिल्कुल। अब जैसे कि कोई व्यक्ति आपके बारे में गलत विचारधारा भी आप अपने मस्तिष्क में ला रहा है तो भगवती वहीं से उसको परिवर्तित कर देती है। वह आपका ना तो अच्छा चाहता है तो बुरा भी नहीं कर पाता है। अच्छा भी नहीं कर पाता है। अच्छा। उसकी सामने वाले की बुद्धि से आपकी पूरी विपरीत कर देती है भगवती। आपके मार्ग में फिर कभी दखल वो नहीं देता है। अल्प आयु को भी यह लंबी आयु में कन्वर्ट कर देती है। देखिए इसमें ऐसा है कि यह डिपेंड करता है आपके कर्म के आधार पे। यदि आप भगवती आराधना कर्म साधना कर्म इत्यादि करते हैं
(1:04:27) तो मनुष्य का जीवन जो है इसकी कुंडली पर निर्धारित होता है। कितने वर्ष जिएंगे, क्या करेंगे, क्या-क्या संघर्षमय जीवन रहेगा, क्या-क्या आनंदमय जीवन रहेगा, यह सब आपकी कुंडली पर डिपेंड करता है। और भगवती की जो आराधना कर्म करता है, उसकी कुंडली भी भगवती के अनुसार परिवर्तित भगवती कर सकती है। तो वहां आपके जीवन में मान लो ऐसा लिखा है कि आपके यहां पे कुछ रोग बाधा इतनी से आपकी मृत्यु होना है कुछ करना है और साधक मान लो उचित प्रकार की साधना करके विधिवत सारा कार्य संपन्न करके भगवती की आराधना कर्म करता है तो ऐसा भी बहुत बार देखा गया कि उनकी आयु बढ़ बढ़ती
(1:04:59) जाती है। अच्छा पंडित जी बगलामुखी मंदिर में बलि प्रथा चलती है। देखिए क्योंकि लोग अक्सर मैं आपको बताती हूं लोग अक्सर जब बंगलामुखी की बात सुनते हैं ना तो उनको लगता है तंत्र मंत्र करने वाले लोग आपने भी आए होंगे लोग इसी ध्यान से हां तो बताइए तो इसमें दीदी ऐसा है कि जिस भाव से आप भगवती की सेवा कर्म इत्यादि करते हैं जो आपके मन से भाव आते हैं वह भगवती स्वीकार करती है बलि प्रथा मेरे अनुसार ठीक नहीं है कि होना चाहिए अभी नहीं होती नलखेड़ा में तो नहीं होती है बलि प्रथा पूर्णत प्रतिबंधित है पर जहां कहीं भी होती है मेरा यह मानना नहीं
(1:05:33) है कि भगवती किसी की बलि लेगी तभी आपका कार्य पूर्ण करेगी। पर आपने यदि मन में भाव रख लिए हैं क्योंकि दुनिया में बहुत सारी चीजें हैं कराने के लिए। आप संकल्प कर सकते हैं यदि मेरे घर पर बालक हुआ बालिका हुआ तो मैं गरीबों को भोजन करवाऊंगा। किसी बाल बालिका है जिसके माता-पिता नहीं है उनका अध्ययन कर्म करवाऊंगा। उनका विवाह कर्म का मैं संकल्प लेता हूं। ऐसे संकल्प लेकर के भी ऐसी मनोकामना रखकर भी भगवती आपका कार्य शीघ्र संपन्न कर सकती है। पर लोग उनके मनोकामना रखते हैं कि मेरा कार्य हो गया तो मैं बकरे की बलि दूंगा। मेरा कार्य हो गया तो
(1:06:05) मैं भैंस की बलि दूंगा। इसकी अपेक्षा आप जैसे पुराणों में वर्णन आता है बलि प्रथा अर्थात क्या? बलि प्रथा आपके मन के जो भी कुरुकृत भाव है उनको समाप्त करना उसे बलि प्रथा कहा जाता था। ना कि किसी जीव जंतु की बलि देना। यह धीरे-धीरे समय व्यतीत होते हम हर भाव का प्रादुर्भाव करने लगे। वह किस कारण से वह प्रथा प्रारंभ हुई थी वह तो हमने नोटिस किया ही नहीं। और आज भी उस प्रथा को लेकर के हम बैठे हैं। तो मेरे हिसाब से बलि प्रथा की अर्थात या बलि प्रथा करना ही है। तो जिसका कोई फल नहीं होता बिल्कुल। मतलब जिस फल के अंदर कोई बीज नहीं होता
(1:06:41) उसकी बलि भी मान्य होती है। जैसे जैसे कि नींबू हो गया। नींबू की बलि दे दो। अच्छा। नारियल हो गया। नारियल की बलि आप दे सकते हैं या फिर एक भूरा गोला करके आता है। तरबूज जैसा फल आता है। ऐश गॉड बोल रहे हो आप उसको सफेद पेठा ना हां सफेद पेठा जो भुरा गोला हमारे क्षेत्र में उसे कहा जाता है। नवचंडी का जो हवन कर्म होता है उसमें उसकी बलि प्रदान की जाती है। तो उन चीज की भी भगवती बलि स्वीकार करती है। उसकी आप बलि देंगे तो वो ज्यादा उचित रहेगा ना कि किसी जीव जंतु की बलि देने की अपेक्षा। पंडित जी हिस्टोरियंस और काफी प्राचीन ग्रंथों में ये बोला गया है कि आई थिंक
(1:07:17) आपने भी ये बात मेंशन करी थी पर मैं दोबारा व्यूअर्स के लिए बोल लेती हूं। कृष्ण के कहने पर जी युधिष्ठिर ने बगलामुखी की साधना करी थी। जी जिसके कारण उनको विजय की प्राप्ति हुई थी। बिल्कुल तो ये बगलामुखी साधना है और काफी हद तक आज जो हमने कन्वर्सेशन करी वो बगलामुखी साधना पे है। है ना? एक बगलामुखी तंत्र भी होता है। बगलामुखी तंत्र क्या होता है? देखिए इसमें ऐसा होता है कि महाभारत कालीन का आपने जिक्र किया है तो उसमें अलग-अलग योद्धा के पास अलग-अलग अस्त्र का वर्णन आता है। किसी के पास पशुपदास्त्र था। किसी के पास विष्णु अस्त्र था, किसी के पास
(1:07:49) गधा, किसी के पास खड़कग ऐसा ही आपने सुना होगा ब्रह्मास्त्र अर्जुन इत्यादि के पास में ब्रह्मास्त्र था। तो जो भगवती बगलामुखी देवी है ब्रह्मास्त्र विद्या भी इनको कहा जाता है। जहां पर कोई अस्त्र आपका कार्य नहीं आ रहा है। कोई पूजापाठ आपका कार्य नहीं आ रहा है। कोई आपके कर्म कार्य नहीं आ रहे हैं। वहां पर आप बगलामुखी का कार्य करते हैं। चाहे वह तंत्र के विषय में हो, राजस्व के विषय में हो, कोर्ट कचहरी के विषय में हो। तत्काल आपको इसका परिवर्तन देखने को मिलता है ब्रह्मास्त्र विद्या का प्रयोग करने से। तो इस कारण भगवती को तंत्र की देवी
(1:08:22) में मुख्यतः माना जाता है। प्रथम तंत्र की आप बात करें तो कामाख्या मंदिर का आपने नाम सुना होगा। तंत्र का मेन गण कामाख्य मंदिर को बताया जाता है। जहां पर सारी तांत्रिक क्रियाएं अघोरी लोगों ने संपन्न करते हैं। उसके बाद यदि किसी का आप नाम सुनेंगे तो आपको बगलामुखी नाम ही अत्यधिक सुनने में आता है। और यह नाम अभी-अभी व्याख्यात हुआ है। बिल्कुल। बगलामुखी के बारे में इतनी कोई चर्चा नहीं करता है। इतना कोई नहीं करता। पर सन 2010 के बाद जब YouTube, Instagram वगैरह इन सब का थोड़ा व्याख्या बढ़ने लगा, लोगों ने इन पे ध्यान देने लगे। तब जाकर
(1:08:55) के आप तो एक तो गुप्त नवरात्रि और बगलामुखी यह दो चीज आपको देखने को बहुत अत्यधिक मिला है। लोगों ने सर्च किया, जानना प्रारंभ किया, सुनना प्रारंभ किया तो लोगों ने फिर क्रिया करने का विचार किया कि एक बार करके देखते हैं प्रैक्टिकल क्या होता है और जब उन्होंने करके देखा तो उनके जीवन में उनको यह परिवर्तन देखने को मिला जहां पर कहीं परिवर्तन देखने को उनको नहीं मिला था। तब से व्यक्तियों ने यूज़र्स ने इसको अपनाया और भगवती के निमित्त क्रिया करना प्रारंभ करा। अच्छे-अच्छे बड़े से बड़े विद्वान हो। बड़े से बड़े सेलिब्रिटी हो,
(1:09:25) बड़े से बड़े उद्योगपति हो, इनसे जुड़ना उन्होंने प्रारंभ किया। जब इनसे जुड़े तो उनके जीवन में उनको वो मुकाम हासिल करने को मिला जो उन्होंने कल्पना मात्र कभी किया था कि मुझे वो पद प्रतिष्ठा, मान सम्मान, धन संपदा प्राप्त होना चाहिए। भगवती के आशीर्वाद से आज वो पद पे, दायित्व पे मान सम्मान पे वो विराजमान है। साधना ऐसा है जो व्यक्ति अपनी स्वयं की साधना के लिए करता है। स्वयं की शक्ति के लिए करता है। स्वयं के मन को शांत करने के लिए करता है। वो साधना का भाव होता है। तंत्र का भाव वो होता है जहां पर हम किसी का अभीष्ट करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं।
(1:09:55) गलत गलत करने के लिए। पर तंत्र तो पॉजिटिव तंत्र भी राइट हैंड मार्ग लेफ्ट हैंड मार्ग बोलते हैं ना जो सात्विक मार्ग होता है। सात्विक मार्ग और तंत्रोक्त मार्ग में दो ही परिवर्तन होता है। सात्विकता हम स्वयं की सुरक्षा के लिए करते हैं। दूसरे की भलाई के लिए करते हैं। वह भी तंत्र के विषय में आता है। और एक तंत्र होता है। आपने सुना होगा वशीकरण करना। उच्चाटन करना, मारण प्रयोग करना। यह सब आते हैं आपके तंत्र के अभीष्ट अंग में। हम्म। यह व्यक्ति करने का तो बहुत लोग सोचते हैं कि हमें ये कर्म करना है या करवाना है। पर यह करवाने से करने वाले को
(1:10:26) भी और करवाने वाले को भी इसका विपरीत परिणाम देखने को मिलता है। इसलिए मेरा आप लोगों से यही आग्रह रहेगा आपकी स्वयं की सुरक्षा हो। ऐसा कर्म आप तंत्र में करवाएं ना कि दूसरे का अभीष्ट करने के लिए क्योंकि दूसरे का तो होगा ही होगा क्योंकि तंत्र कभी विफल नहीं जाता है पर आपको नहीं तो आपके आने वाली पीढ़ी को उसका दुष्परिणाम देखने को मिलना तय है। ओके पंडित जी जो बगलामुखी मंदिर की जो आर्किटेक्चर है ना वो एक बहुत ही रेयर तांत्रिक ट्रेडिशन पे बेस्ड है। तो मैं आपसे जानना चाहती हूं कि मंदिर की ऐसी क्या-क्या और विशेषताएं हैं। जैसे कि
(1:11:01) कहा जाता है कि वो पूरा मंदिर 16 पिलर 16 खंभों में स्थित है। उसके ऊपर 64 शिखर हैं जो 64 योगिनियों को दर्शाता है। तो ऐसी कुछ विशेषताओं के बारे में बताइए और अंदर कौन-कौन से भगवान विराजमान है? जैसे ही मंदिर में आप प्रवेश करते हैं, शेर मुखी द्वार बना हुआ है। शेर मुखी द्वार से आप मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं। जैसे आप मंदिर में जाएंगे, भगवती का जो मेन मंदिर है, वो 16 खंब पर विराजमान है। जिसे सोडस मात्रिका के रूप में पूजा जाता है। वहीं आप भगवती के शिखर को देखेंगे वहां 64 कलश विराजमान बताए जाते हैं। कुछ-कुछ शोधकर्ता बताते हैं, वो 64
(1:11:35) कलश 64 योगिनी के रूप में विराजमान वहां पर बताए जाते हैं। अब वहीं आप देखेंगे तो साथ-साथ में भगवती के मंदिर प्रांगण में ही राधे कृष्ण मंदिर भी विराजमान है। वहां पर जो कृष्ण भगवान की मूर्ति है वो पारा धातु से निर्मित है। मर्यूरी अच्छा इस धातु की मात्र शिवलिंग का निर्माण होता है। पर पूरे भारतवर्ष में एकमात्र कृष्ण भगवान का मंदिर ऐसा है जो कि पारा धातु से निर्मित है। और जो राधे रानी है वो अष्ट धातु से निर्मित है जिसमें स्वर्ण की मात्रा सबसे अधिक है। उन्हें पारदेश्वर राधे कृष्ण मंदिर कहा जाता है। वहीं आप देखेंगे तो भगवती के प्रांगण में भैरव
(1:12:08) महाराज का भी स्थान आपको मिलेगा। अब भैरव के भी अलग-अलग रूप होते हैं। अष्टांग भैरव, दिव्य भैरव, काल भैरव, आनंद भैरव, श्मशान भैरव। तो भगवती के जो भैरव है वो आनंद भैरव आते हैं। वो आपके जीवन में आनंद की प्राप्ति करते हैं। आनंद का अनुभव करवाते हैं। ऐसे भैरव का आशीर्वाद वहां से आपको प्राप्त होता है। वहीं पर आप देखेंगे तो दक्षिण मुख में हनुमान जी महाराज वहां पर विराजमान है जो आपके सभी संकटों का निवारण करते हुए आपको जीवन क्षेत्र में आगे बढ़वाते हैं। वहीं भगवती के प्रांगण में दीप मालिका विराजमान है। दीप मालिका का शोध बहुत अच्छा है कि जिस भी मंदिर का
(1:12:43) राजा विक्रमादित्य द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया हो बनने के पश्चात खंडित हो गया। वापस नवीनकरण उसका कराया गया हो। वो राजा विक्रमादित्य के दौर में वहां पर संपन्न किया था। तो जिस भी मंदिर में उन्होंने करा है निशानी के रूप में दीपमालिका एक आपको देखने को वहां पर मिलेगा। चाहे उज्जैन में महाकाल मंदिर का आप देख सकते हैं। उज्जैन में ही शक्तिपीठ है। एक हरसिद्धि माता का मंदिर। वहां पर आकर देख सकते हैं। बगलामुखी माता मंदिर में देख सकते हैं। कुछ शोधकर्ता बताते हैं भगवती खड़े हैं। भगवती हमें यहीं तक दिखाई देते हैं। भगवती के चरण भी है। पांडव
(1:13:13) इत्यादि भगवती के चरणों में पुष्प अर्पण करते थे। बाकी सेंटली ये महिमा आप देख सकते हैं। बहुत अच्छा वृतांत वहां का आता है। भगवती के चारों दिशा में श्मशान इत्यादि बने हुए हैं। वहां पर कुछ समाधि स्थल देखने को भी आपको मिलेंगे। जो कई वर्ष पहले सन्यासी इत्यादि थे जिन्होंने स्वयं को देवी को समर्पित कर दिया था। ऐसे भी समाधि स्थल वहां देखने को मिलेंगे। वहां समीप बैठकर मान लो आप कुछ समय के लिए जप तप ध्यान कर्म इत्यादि करते हैं तो आपको एक बहुत अच्छी अच्छा एनर्जी वहां से प्राप्त होती है। जैसा दिव्य भगवती का मंदिर प्रांगण बना
(1:13:44) हुआ है। एक बार सभी को भले कर्म करने ना आए दर्शन कर्म करने आना चाहिए पर वहां पर पधारना चाहिए। दर्शन का सही तरीका क्या है बगलामुखी मंदिर में? सबसे बड़ी चीज तो निर्मल भाव लेकर के आप मंदिर में प्रवेश करें। और जैसे आजकल ट्रेन चल रहा है जाते फोटो खींचना, वीडियो बनाना यह सब छोड़ते हुए भगवती से डायरेक्ट आपका समाग्रह हो रहा है। यह मानिए कि नलखेड़ा नगर में या फिर स्पष्ट रूप से यह है कि जिसको भगवती को दर्शन देना है बिना उनकी अनुमति के कोई उनके दर्शन कर्म का सौभाग्य भी प्राप्त नहीं कर सकता है। भगवती की इच्छा होगी तो तुरंत ही आप दर्शन
(1:14:18) कर्म का सौभाग्य प्राप्त कर लेंगे। हमने इतनी बातें करी जी। बगलामुखी साधन आपने इतने अच्छे-अच्छे उपाय हमको दिए एक साधक के लिए उनका दिनचर्या कैसे होना चाहिए? उनका खानपान कैसे होना चाहिए? बिकॉज़ ये बहुत जरूरी है ना नियम वो थोड़ा नियम के बारे में बताइए। उस समय कुछ भी आप ऐसे पदार्थ का सेवन ना करें जो कि आपके मांसाहारी तत्व इत्यादि में आते हैं। प्लस लहसुन प्याज इत्यादि जो आते हैं उसका भी आप सेवन उस समय के लिए तामसिक पदार्थ जो भी आते हैं उन सभी का सेवन उस समय के लिए आप बंद रखें तो वह ज्यादा उचित आपका रहेगा। यदि मदिरापान को
(1:14:50) सेवन इत्यादि आप करते हैं, धूम्रपान इत्यादि करते हैं तो उस दौरान साधना के दौरान आप बंद रखें। वह भी आपके लिए उपयोगी रहेगा। क्योंकि इस प्रकार की किसी भी क्रिया का सेवन करना साधना के दौरान आपको नकारात्मकता शक्तियों से अटैच कर सकता है। अच्छा किस टाइम पे करना चाहिए साधना? साधना कर्म देखे हो तो तीनों समय बताए जाते हैं। प्रातः भी आप कर सकते हैं। दोपहर में भी कर सकते हैं। संध्या समय भी कर सकते हैं। रात्रि में भी कर सकते हैं। पर मेरा जितना मानना है सुबह स्नान के बाद आप कर्म करें तो वो ज्यादा प्रभावशाली होता है। क्योंकि
(1:15:20) किसी व्यक्ति से आप स्पर्श होकर के भी आ रहे हैं। गलती से आपका स्पर्श भी हो गया। अब वो उस व्यक्ति के मन में क्या परिकल्पना उस समय चल रही है। क्या भाव चल रहे हैं? वह भी आपके कार्य को अविष्ट कर सकते हैं। तो सुबह जैसे आपका स्नान से आप परिपूर्ण होते हैं, तुरंत आप जब कक्ष जो आपका बना हुआ हो वहां पर आप जाएं साधना कर्म आपके संपन्न करें। तत्पश्चात ही आप दूसरा कार्य प्रारंभ करें। पंडित जी ऑनलाइन पूजा का ऑनलाइन दर्शन हो गए पूजा का बहुत बड़ा कांसेप्ट निकला था कोविड से और अब तक चलते आ रहा है वो। तो ये ऑनलाइन पूजा चल मतलब काम करती है क्या?
(1:15:51) क्योंकि मैं आपको बताऊं मेरे मुझे ऐसा लगता है नहीं करती क्योंकि आप एनर्जी कैसे दे सकते हैं? जैसे हम भी जब मैं योग सिखाती हूं तो ऑनलाइन हम एडवांस योगा नहीं सिखा सकते क्योंकि वो एनर्जी प्रोसेस होता है तो आप तक एनर्जी तो तभी आएगी जब हम आपस में साथ-साथ हो ना जी नहीं तो ऑनलाइन में कैसे आ सकते हैं? इसमें प्रोसेस ये होता है यदि आप कुछ समय पहले जाते हैं थोड़ा समय व्यतीत में हम जाते हैं पुराण तत्व इत्यादि में तो उसमें ऐसा वर्णन आता है कि यज्ञशाला के अंदर जजमानों का जाना पूर्णतः वर्जित था। जितने भी आप ऋषि मुनि इत्यादि देखेंगे वहां कभी
(1:16:19) भी जाकर के किसी भी राजा इत्यादि ने बैठकर कर्म इत्यादि संपन्न इत्यादिति नहीं किया है। जजमान के नाम गोत्र से ब्राह्मण देवता संकल्प लेकर के पूरा कार्य उनका संपन्न करते थे। कोई भी आपकी पूजा कर्म इत्यादि हो रही है उसमें मेन होता है संकल्प कर्म। संकल्प कर्म में जिस भी व्यक्ति के नाम गोत्र का प्रयोग हुआ है, उसका पूर्ण फल उस व्यक्ति को प्राप्त होना है। चाहे आप वहां पर उपस्थित हैं या उपस्थित नहीं है। बहुत सारे हमारे विदेशों के जजमान हैं अमेरिका के, न्यूजीलैंड के, न्यूयॉर्क के तो वो तो बार-बार आवागमन कर नहीं सकते क्योंकि
(1:16:51) जितने पेमेंट में वो वहां से इंडिया आएंगे, बगलामुखी मंदिर पहुंचेंगे, उतने में उनकी पूजा वहां पर संपन्न हो जाती है। तो उनको बहुत ज्यादा खर्च हो जाता है। प्लस समय भी इतना नहीं मिल पाता है। तो, वीडियो कॉल के माध्यम से वहां पर ऐड होते हैं। जिन ब्राह्मणों को संकल्प दिया जाता है उनको एक बंधन प्रयोग होता है। एक रक्षासूत्र उनके हाथ पर बांधा जाता है कि यह कर्म हो रहा है। यह कर्म जब तक चलेगा इस कर्म के दौरान जितना पाठ कर्म, पूजा कर्म, संकल्प कर्म, अर्चन कर्म, अभिषेक कर्म आप जो करेंगे, इस नाम गोत्र के व्यक्ति को वो फल प्राप्त हो। पहला तो
(1:17:21) मेरा आग्रह यही होता है 99% जजमानों से कि आप स्वयं आकर के आपका कार्य संपन्न करवाएं। यदि कोई सा ऐसा विशेष कारण हो रहा है कि आप नहीं आ पा रहे हैं तब जाकर के आपके नाम गोत्र से हम कार्य संपन्न करते हैं। क्योंकि ब्राह्मण देवता कितना भी प्रयास कर लें कहीं ना कहीं वो 20% छूट जाता है जिस भाव को लेकर के आप कर्म कर सकते हैं। यदि आपका भाव है आपकी बालिका का विवाह होना चाहिए। इस भाव को लेकर के आप भगवती का कर्म करवा रहे हैं तो पूर्णतः भाव मुक्त हो के आप हवन कर्म संपन्न करेंगे। और वही मैं यदि कर्म करवा रहा हूं तो मैं क्या करूंगा कि जजमान श्री का नाम गोत्र
(1:17:57) ये है यह मनोकामना है इनके निमित्त भगवती ये कार्य करवा रहे इनको फल इसका प्राप्त होना चाहिए जो भाव आपके मन से आएंगे वो मैं चाहकर भी नहीं ला सकता ये नहीं है कि मैं कर्म में कुछ त्रुटि रखूंगा कर्म आपका विधिवत ही होगा पर जो भाव आपके मन से आप जागृत कर सकते हैं मैं चाहकर भी उस भाव को नहीं ला सकता हूं तो पहला आप प्रयास कीजिए 99% के आप स्वयं उपस्थित हो सके और नहीं हो सकते हैं तो फिर हम लोग कार्य करते हैं और भगवती के आशीर्वाद से उतना ही प्रभाव उतना ही परिवर्तन आपके जीवन क्षेत्र में आपको देखने को मिलता है। परफेक्ट पंडित जी ऑनलाइन हवन तो ठीक है
(1:18:30) लेकिन बहुत सारा फ्रॉड चलता है। जी मैं आपको बताऊं हम केदारनाथ की जैसे यात्रा हम कर रहे थे एक हमारे यू नो यात्रा चलते रहते हैं धार्मिक यात्रा वो हेलीकॉप्टर बुकिंग करा ऑनलाइन वुल गायब वो हेलीकॉप्टर बुकिंग वाला फेक निकला तो ये जहां धर्म से कुछ चीजें जो ऑनलाइन रिलेटेड होती है उसमें बहुत ये धोखाबाजी चलती रहती है तो क्या करा जाए देखिए सबसे अच्छा विषय यह है कि बगलामुखी मंदिर में यदि आपको कुछ कर्म करवाना है तो वहां पर सरकार के लिस्ट में 200 प्लस ब्राह्मण देवता है जो कि हवन कर्म इत्यादि रजिस्टर ब्राह्मण देवता जो कि संपन्न
(1:19:03) करवाते हैं। उन 200ों की भिन्नता में 7 800 और ब्राह्मण देवता हैं जो कि नलखेड़ा नगर से ही बिलोंग करते हैं। वह भी विधिवत पूर्ण से उनका कार्य संपन्न करते हैं। उनसे भी आप संपन्न करवा सकते हैं। या फिर मंदिर की एक ऑफिशियल वेबसाइट बनी हुई है। उसको भी आप सर्च करके वहां देख सकते हैं। सभी ब्राह्मण देवताएं हैं। वहां से आपका विश्वास और बढ़ जाता है। या किसी ब्राह्मण से आप डायरेक्ट संपर्क कर रहे हैं तो सबसे पहले आप उन्हें वीडियो कॉल करें। वीडियो कॉल करके ब्राह्मण देवता से वार्तालाप करें। वार्तालाप करने के बाद मंदिर में भगवती के दर्शन कर्म करें। यज्ञशाला सरकार
(1:19:32) ने वहां पर बना के रखी है। यज्ञशाला का दर्शन कर्म करें। तब जाकर के आप उनको पेमेंट डालें तो आपके साथ फर्जीवाड़ा होने का चांस बहुत ही कम हो जाएगा। समझ गए? तो यह आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। तो पहली प्राथमिकता यह दें पूरा प्रयास करें वो नलखेड़ा नगर के ही ब्राह्मण देवता हो। तब जाकर के वो आपका कार्य करेंगे। वरना पर डे कम से कम मानिए लाखों का फर्जीवाड़ा अच्छा। बगलामुखी नाम से पर डे होता है। जिसमें अत्यधिक विदेशों में जो लोग रहते हैं उनके साथ होता है। प्रदेश में भारत में जो लोग रहते हैं उनके साथ होता है। तो कम से कम इन छोटी-छोटी
(1:20:05) सावधानी का आप ध्यान रखेंगे तो फर्जीवाड़ा होने से आपका बच सकता है। अच्छा पंडित जी आप भी रजिस्टर्ड है ना ऑनलाइन अगर तो कोई आपसे कराना चाहे तो क्या करें? जी बिल्कुल मेरा भी 200 में ही रजिस्ट्रेशन है जो सरकार ने करके रखा है। तो अगर आपकी इच्छा है कि मुझसे करवाना है तो मुझसे भी आप करवा सकते हैं। वरना और भी बहुत सारे ब्राह्मण उनसे करवाने की इच्छा हो तो उनसे भी आप संपन्न करवा सकते हैं। जैसे बहुत लोग बोलते हैं कि पंडित दूसरों का तो करवा लेते हैं क्रियाकर्म लेकिन वो खुद पे क्यों नहीं लागू करते? वो तो गरीबी में रहते हैं। तो मैं लोगों को बताना
(1:20:35) चाहूंगी कि आपने एक्चुअली खुद भगवती की साधना करके आप में कितना एक आप कह रहे हैं ना जैसे आप बहुत उन्नति की तरफ आपने प्रोग्रेस किया। जी बिल्कुल एक समय ऐसा भी रहा कि यह मानिए अन्न कैसे कब आएगा घर में राशन वगैरह कैसा आएगा वह समय पे भी विचार करने वाला एक समय रहा है कि कैसे आना चाहिए क्या करना चाहिए भगवती की आराधना कर्म में आगे बढ़े साधना कर्म में आगे बढ़े तो आज भगवती के आशीर्वाद से विचार नहीं करना होता है कि यह चीज ₹1000 की है तो लेना है या नहीं लेना है या 10 हजार की है तो लेना है या नहीं लेना है इतना जीवन में परिवर्तन मैंने देखा स्वयं ने अनुभव
(1:21:09) किया है उस चीज को इस कारण से भक्तों को भगवती के बारे में मैं पूर्ण रूप से एक्सप्लेन करता हूं कि यदि भाव विश्वास समर्पण रखते हैं तो आपके जीवन में परिवर्तन होना तय है। क्योंकि जितना भाव विश्वास समर्पण आप रखेंगे उतनी आपकी परीक्षाएं भी कठिन होती है। यदि आप सात्विकता से जुड़े हुए हैं, किसी साधना से जुड़े हुए हैं, किसी कर्म से जुड़े हुए हैं तो ऐसा नहीं है आपके जीवन में समस्याएं नहीं आएगी। समस्याएं तो आना है पर समस्याओं से कैसे आप लड़कर के जीवन क्षेत्र में आगे निकल जाएंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा। और बहुत सारे बोलते हैं पंडित
(1:21:41) जी हमारा कार्य करवा रहे हैं। आपको ₹000 ₹00 दे रहे हैं। तो कितने दिन में हमारा कार्य हो जाएगा? हम तो मेरा बताना ये है कि पंडित जी भी इंसान है। पंडित जी भगवान या भगवती नहीं है कि मैंने आपको बोल दिया 10 दिन के अंदर कार्य आपका हो जाएगा। आपका कार्य हो जाए। हम सिर्फ एक समय सीमा तक आपका कार्य करके दे सकते हैं। उसके बाद आप भगवती के प्रति जितना भाव विश्वास समर्पण रखते हैं उतना शीघ्र आपको परिवर्तन देखने को मिलता है। हो सकता है दो दिन में भी मिल जाए तो कहीं ना कहीं दो महीने भी लग जाते हैं। कहीं ना कहीं छ महीने भी लग जाते हैं। पर जिस भाव को लेकर
(1:22:15) के आप आए हैं यदि वह आपको प्रदान नहीं हो रहा है तो जो आपके लिए उचित है हम भगवती के आशीर्वाद से वो आपको प्राप्त होगा। अभिषेक शर्मा अलबेला जी थैंक यू सो मच मैंने आपसे बिहाइंड द स्क्रीन्स काफी बातें करी और मैं जैसे आपसे कह रही थी कि ना कई लोग कहते हैं कि हमारा देश कहां जा रहा है जब यंगस्टर्स आप जैसे इतने ज्ञान है आपको इतनी नॉलेज है और ऑथेंटिसिटी मतलब ये बहुत जरूरी है क्योंकि आप जानते हैं धर्म के नाम पे क्या-क्या चल रहा है। है ना? धर्म का नाम बिगड़ा ही इसलिए क्योंकि पूरा कमर्शियलाइजेशन हो चुकी है और धोखा चल रहा है पैसे के नाम
(1:22:50) पे। तो जब लगता है कि एक्चुअल आप जैसे नगीने आ रहे हैं, यंग लड़के, यंग बच्चे जो इस देश को बढ़ा रहे हैं, स्पिरिचुअलिटी सनातन धर्म को बना रहे हैं। दिल से मुझे इतना अच्छा लगता है, बहुत गर्व महसूस होता है। तो थैंक यू सो मच और विशिंग यू ऑल द स्ट्रेंथ आप और आगे आगे बढ़े और आप और लोगों को मदद करें और और ज्ञान बांटे और थैंक यू सो मच फॉर कमिंग। जय माता दी। जय माता। इन केस यू लाइक टू बी अ पार्ट ऑफ आवर ऑनलाइन एंड इनपर्सन योगा, डाइट एंड स्पिरिचुअल प्रोग्राम्स। यू कैन जॉइन आवर WhatsApp ग्रुप बिलो वेयर वी पोस्ट ऑल आवर अपकमिंग प्रोग्राम्स एंड गिव फ्री टिप्स
(1:23:21) ऑन हेल्थ, डाइट एंड लाइफस्टाइल।
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