Thursday, September 3, 2026

Can LASIK Go Wrong? Dominant Eye, Cataract & Eye Surgery Truths | Dr. Ritin with

Can LASIK Go Wrong? Dominant Eye, Cataract & Eye Surgery Truths | Dr. Ritin with GunjanShouts

Author Name:GunjanShouts

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Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=oyF4tU4aNUg



Transcript:
(00:00) राइट हैंड डोमिनेटिंग होता है। कईयों का लेफ्ट [संगीत] हैंड डोमिनेटिंग होता है। ऐसा आईज में भी होता है। हां बिलकुल। यह ऐसे ट्रायंगल बनाओ। और यह मेरी फिस्ट है। आप इसको इस ट्रायंगल के सेंटर में ले आओ। और एक आंख बंद करने पे देखा आपने हिलाया अपना ट्रायंगल इसका मतलब आंखें कमजोर होती क्यों हैं? और अगर चश्मा नहीं लगाए तो क्या होगा? अगर आपने चश्मा नहीं लगाया तो आपका नंबर बढ़ता चला जाएगा। द एविडेंस फॉर दिस इज वेरी वीक। एंशिएंट टाइम्स में कैसे करते थे जब आंखें कमजोर होती थी तो। गांधी जी को फर्स्ट टाइम चश्मा 21 इयर्स की ऐज पे लगा था। लेकिन अगर आप गांधी जी
(00:31) के [संगीत] यंग ऐज की कोई भी फोटोग्राफ देखो, एक भी रिकॉर्डेड फोटोग्राफ नहीं है गांधी जी की चश्मे के साथ। चश्मे लोग लगाना नहीं चाहते, दिस फीलिंग हैज़ बीन कॉमन। आज इस डिस्कशन में इस वीडियो में ये बोल दूं, मेरे पास एक ऐसी पीली गाजर है। जो मेरे ही खेत में उगती है। अगर आप इसको एक साल तक खाते रहेंगे, तो आपका चश्मा हट जाएगा। कल सुबह आपके घर के बाहर लाइन लगी होगी। ये वीडियो वायरल हो जाएगा। नीचे पार्क में वो बैठे ऐसे कर रहे थे। ऐसे कर रहे थे, ऊपर कर रहे थे। हां। यह आई योगा से आईज पे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। Lick में नेक्स्ट ब्रेक थ्रू क्या आने
(01:10) वाला है? कंटूरा, वेवलाइट सिल्क स्माइल क्लियर। कितने ही नाम आ रहे हैं। लेसिक टेक्नोलॉजी अपने पीक पे पहुंच गई थी आज से 20 साल पहले। इसमें और स्कोप नहीं है। सो एक नंबर हटाने में लगभग डेढ़ से 2 सेकंड का लेजर लगता है। तो अगर किसी का सात नंबर है तो उसमें टोटल लेजर डिलीवरी टाइम 14 से 15 सेकंड का ही होने वाला है। वंस द सर्जरी इज डन उसके बाद उनकी अपीयरेंस के अलावा और क्या बदलता है? द हाईएस्ट नंबर जो मैंने ट्रीट किया है आज तक दैट इज -30। अब आप सोचो एक बच्चा एट -30 उसको क्या दिखता होगा चश्मे के बिना। उसको यहां दिखता है सर। यहां पे पड़ा हुआ
(01:46) ये जो ग्लास भी है ना उसको वो भी ठीक से नहीं दिखा। जब वो चश्मा हटाते हैं ना उनके फेस पे एकदम ब्लैक लुक होती है सर। क्योंकि उन्होंने आज तक कभी अपने आप को शीशे में देखा ही नहीं चश्मे के बिना। एंड द हायर द नंबर द मोर लाइफ चेंजिंग इट इज। एंड इफ एट ऑल इफ एट ऑल सर्जरी में कुछ गड़बड़ हो जाए तो क्या वो इंसान अपनी विज़न हमेशा के लिए लूज कर सकता है? इज दैट आल्सो पॉसिबल? अगर आप अपनी आईज और आई हेल्थ के बारे में अच्छे से समझना चाहते हैं। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपको कौन सा चश्मा खरीदना चाहिए और उस पे कितने पैसे इन्वेस्ट करने चाहिए। अगर आप स्पेक्स
(02:30) रिमूवल सर्जरीज के बारे में कंसीडर कर रहे हैं और कंफ्यूज्ड हैं कि कौन सी सर्जरी करवाएं और क्या कोई इसके साइड इफेक्ट्स तो नहीं होंगे। इन सभी चीजों को हमने डिस्कस किया है आज के इस एपिसोड में ईज़िएस्ट एंड मोस्ट इंटरेस्टिंग तरीके से डॉक्टर रितिन गोयल के साथ। इन्हें इस फील्ड में 15 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है और वो लगभग 40,000 आई सर्जरीज कर चुके हैं। हमारे इन पॉडकास्ट का सिर्फ एक पर्पस है कि हम इंडिया के टॉप डॉक्टर्स एंड लीडिंग एक्सपर्ट्स की क्रेडिबल नॉलेज को आपकी स्क्रीन तक लेकर आ पाए। और हमें हमारे इस मिशन में सपोर्ट करने के लिए आपको बस एक
(03:02) छोटा सा काम करना है। चैनल को सब्सक्राइब करें। तो चलिए आज की ये डिस्कशन स्टार्ट करते हैं। [संगीत] एक हॉस्पिटल में अगर एक टाइम पर चार बच्चे पैदा हुए हैं तो वो चारों बच्चों के उनकी हाइट अलग होगी, उनका वेट अलग होगा, आइज का कलर अलग हो सकता है। बालों की डेंसिटी अलग हो सकती है। स्किन टाइप, स्किन कलर ये सब चीजें अलग होती हैं। आई वांट टू नो कि क्या आंखें भी अलग होती हैं? द हेल्थ ऑफ देयर आईज, द पावर ऑफ देयर आईज। क्या एकदम हर बच्चा एकदम परफेक्ट आईसाइट परफेक्ट विज़न के साथ पैदा होता है या फिर बेबीज
(03:47) में ये चीज भी डिफरेंट होती है? सो बेसिकली बच्चे के पैदा होने से पहले गर्भ में मां के पेट में पूरी बॉडी एक सिंगल सेल से बनती है। जब अल्ट्रासाउंड कराती है मदर तो वो चेंज होता है ओवर नाइन मंथ्स। ये मैंने अभी रिसेंटली पूरा एक्सपीरियंस किया है। सो आई नो इट। [हंसी] सो इनिशियल पहला महीना है ना उसमें वो एक फिश की तरह लगता है। फिर एक फ्रॉग की तरह लगता है। ऐसे करतेकरते लगभग डेढ़ से दो महीने पे हमारे को एक ह्यूमन बेबी का आकार दिखना शुरू होता है। ऐसे ही आई का फॉर्मेशन भी उस बच्चे के अंदर होता है। एक छोटा सा बड होता है जो धीरे-धीरे
(04:20) करके ऐसे पहले फ्लावर की तरह और फिर बल्ब की तरह यू नो इट इनक्लोजेस एंड इट मेक्स अ होल ग्लोब। आई बॉल कंप्लीट बनती है। बच्चे को पैदा होते ही उसका विज़न बहुत ब्लर्ड होता है। उसका एक्चुअली आंख का नंबर बहुत हाई होता है। भगवान ने हमें बनाया ही ऐसे है। और वो बच्चे की नजर बहुत ही कमजोर होती है। लेकिन जब लाइट का स्टिमुलेशन उसको मिलता है, चीजें दिखनी शुरू होती है तो आंख डेवलप होना शुरू होती है। ये कैमरा आंख ये जो आंख जो कैमरा भगवान ने दिया है ये स्विच ऑन करते ही नहीं चल पड़ता। यह स्विच ऑन करते ही देखना शुरू करता है और जैसे देखता जाता है, सीखता जाता है, बेटर
(04:57) होता जाता है। सो अगर बच्चे की आंख में कोई डिफिटी पैदा होते हुए नहीं हुई, आंख में पैदा होते ही कोई बीमारी जैसे मदर्स को कई बार ड्यूरिंग प्रेगनेंसी कोई इनफेक्शन रहा हो। इन कारणों से हो सकता है कुछ बच्चों की आंखें ठीक ना बने। उसमें कुछ बीमारियां एट बर्थ भी हो। बट बाय एंड लार्ज बच्चे अच्छी आंखों के साथ ही पैदा होते हैं। ओके। अगर तीन चार पांच बच्चे या 100 बच्चे एक हॉस्पिटल में एक दिन में पैदा हुए हैं। चांसेस आर कि 98 99 ऑफ़ देम उनकी नजर उनकी आंखें परफेक्ट ही होंगी। ओके पर डॉक्टर का काम है कि वो एक दो को आइडेंटिफाई करना है। इसीलिए बच्चों का
(05:36) बहुत अर्ली स्टेज में ही आई टेस्ट किया जाता है। पीडिएट्रिशंस इसका ध्यान रखते हैं और जैसे ही उनको कुछ दिखता है तो वो आई डॉक्टर के पास रेफर करते हैं। और जैसे जब हम पैदा होते हैं तो एक बाय डिफॉल्ट ह्यूमंस में एक चीज होती है कि कई लोग होते हैं जिनका राइट हैंड डोमिनेटिंग होता है। कईयों का लेफ्ट हैंड डोमिनेटिंग होता है। ऐसा आइज में भी होता है। हां बिल्कुल। आइज में ऐसा होता है ना? सो देखिए आप अपने हाथ से ना ऐसे एक ट्रायंगल बनाओ। क्या जो लोग हमें सुन रहे हैं वो भी यह साथ में एक्टिविटी कर सकते हैं या अब्सोलुटली उनको मोबाइल रखना पड़ेगा
(06:04) अगर उसपे देख रहे हैं तो आप अपना ये ऐसे ट्रायंगल बनाओ लाइक इसको दूर करो अपने से ओके ओके ओके और ये मेरी फिस्ट है आप इसको इस ट्रायंगल के सेंटर में ले आओ ठीक है ठीक है आप लोग कोई भी ऑब्जेक्ट अपने इस ट्रायंगल के बीच में रख सकते हो हां जैसे आपके कमरे में कोई घड़ी है आप दूर का कोई ऑब्जेक्ट उसको कोई भी इस ट्रायंगल के सेंटर में ले आओ ठीक है अब मैं आपको क्विकली बोलूंगा पहले एक आंख बंद करनी है फिर उसको खोल के दूसरी आंख बंद करनी क्विकली जैसे मेरी आंख ऐसे और फिर ऐसे राइट देखिए वेरी गुड सो एक में ये ऑब्जेक्ट सेंटर में रहा होगा हम और एक आंख बंद करने पे देखा आपने हिलाया
(06:42) अपना ट्रायंगल इसका मतलब सो कौन सी आंख बंद करने से ये ऑब्जेक्ट सेंटर से हट गया था लेफ्ट आंख बंद करने से हट गया था सो दैट मींस दैट यू आर लेफ्ट आई डोमिनेंट क्या मतलब है लेफ्ट आई डोमिनेंट का जैसे मैं राइट हैंडेड हूं मैं राइट हाथ से लिखता हूं ओके और मैं भी आपकी की तरह लेफ्ट आई डोमिनेंट हूं। मतलब मैं लेफ्ट आई से देखता हूं। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं दोनों आई से नहीं देखता। लेकिन मेरा ब्रेन पहले लेफ्ट आई से देखता है और फिर राइट आई की इमेज को उसके ऊपर ऐड करता है। सो माय प्राइमरी आई इज माय लेफ्ट आई। और ऐसा सब लोग अपने घर पे कर सकते
(07:15) हैं। एंड इट विल ऑलवेज गिव मी द सेम रिजल्ट। अगर मैं फिर से करूंगी तो मुझे फिर से वही लेफ्ट आई डोमिनेंसी दिखाई देगी। यस। बट दिस इज अ वैरी गुड क्वेश्चन एक्चुअली। अनलेस आपके लेफ्ट आई में कोई बीमारी ना आ जाए जिससे उसकी विज़न खराब हो जाए। मान लो उसमें कैटक्ट हो गया धीरे-धीरे करके उसकी विज़न खराब हो गई तो आपका ब्रेन आपको राइट आई डोमिनेंट बना देगा देगा। जैसे मेरा राइट हैंड सपोजिंग खराब हो गया तो मैं लेफ्ट हैंड से भी लिखने लगूंगा। एक्जेक्टली। ठीक है? और जब वो वापस अगर मैंने इसको ट्रीट कर दिया तो ब्रेन की टेंडेंसी होगी वापस राइट हैंड पे आने की। ऐसे ही ब्रेन
(07:50) की टेंडेंसी होगी आपकी लेफ्ट आई की तरफ वापस आने की। तो जैसे हम हैंड डोमिनेशन की बात करते हैं मोस्टली लोगों का राइट हैंड डोमिनेटिंग होता है और उससे वो काम बेहतर तरीके से कर पाते हैं रादर देन दी अदर हैंड सेम गोज़ विद आईज आल्सो इट डज इट मीन कि मैं लेफ्ट आई से बेटर देख पाती हूं और राइट आई से उतना अच्छा नहीं दिखता है नो नो इट डजंट मीन लाइक दैट ये देखो ये मेरा फोन है ना इसमें तीन कैमरा है हम अब आपको पता है कि ये iPhone इतना महंगा इस कैमरे की वजह से ही है हम और ये तीनों कैमरे बराबर नहीं है हम्म देयर इज अ प्राइमरी कैमरा कैमरा डिजाइन ये
(08:23) हमारी आंख के ऊपर ही बेस्ड है सारा। ओके। ऑल कैमरा आर डिज़ लाइक आवर आई। अब हाउ डू वी यूज़ दिस डोमिनेंस? हम हम एक आंख से हम प्राइमरी फोटो बनाते हैं और दूसरी आंख से उसके ऊपर एडिशनल फोटो फ्यूज करते हैं। जब आप देखो कोई 3D मूवी देखते हो हॉल में। तो यू वेयर ग्लासेस राइट? या। अगर आप वो ग्लासेस उतार दो हॉल में, तो सब कुछ ऐसा धुंधला दिखता है इन अ 3D मूवी। इट डजंट मेक एनी सेंस कि यह क्या हो रहा है? और वो ग्लासेस जो आप पहनते होली पहले तो ऐसे ही होते थे। एक तरफ ब्लू कांच है और एक तरफ रेड है। सो व्हाट इट डस इज कि आपको दो अलग-अलग इमेज दिखाई जा रही है और उनको फ्यूज कर
(09:05) रहे हैं। हम इसी से थ्री डायमेंशंस देखते हैं। ओके। ठीक है? इसको मैं डेमोंस्ट्रेट कर सकता हूं। जैसे हमारे सामने ये कप है। राइट? आप सामने अपने कप रखिए। और एक आंख बंद कर लीजिए। इस कप को थोड़ा दूर कर लो अपने से। अब मेरी तरफ देखना। एक मिनट के लिए इसको भूल जाओ। हाथ टेबल से हटा लो। अब आप देखो वो ग्लास है आपके पास। हम उसको उठाइए। ठीक है? और इस जल्दी से इसमें थोड़ा पानी डालना। ये यू आर वैरी गुड। बट इफ कोई भी इसको ट्राई करेगा ना। ऑलमोस्ट एट आउट ऑफ़ 10 पीपल। इस ग्लास में पानी नहीं डाल पाएंगे। ये आपका टेबल है। आपको दूरियां पता है।
(09:43) बट एक्चुअली इट वास नॉट वैरी इजी। मतलब मेरे को लिटरली ऐसे फोकस पूरा अगर आप फटाफट डालेंगे सो तो वेरी हाई चांसेस कि वो गिर जाता ये क्यों होता है क्योंकि हमें जो डेप्थ परसेप्शन है जो हमारे को थ्री डायमेंशनल दिखता है कि चीजों की दूरी कितनी है उसके लिए हमें दोनों आंखें चाहिए अगर आप Instagram पे देखोगे बहुत सारी इसकी रील्स हैं एक आंख बंद करके आप ये पेन के ऊपर ढक्कन लगा रहे हैं कितने लोग कर सकते हैं पानी डाल रहे हैं नहीं हो पाता ये फॉर डेप्थ परसेप्शन वी नीड बोथ आईज सो ये तो मुझे समझ में आया किेंस वो डेप्थ परसेप्शन बनती है जब दोनों आंखों से इमेज
(10:16) क्रिएट होती है। बट यह कैसे बनती है? थोड़ा सा आप इसको लेमन लैंग्वेज में एक्सप्लेन कर सकते हैं। हाउ दिस डेप्थ परसेप्शन इज फॉर्म्ड। अगर मैंने एक आंख बंद कर रखी है तो मुझे सब कुछ दिख रहा है। जब मैंने दूसरी आंख खोली तो मुझे सब कुछ दिख रहा है। बट एक थोड़े से अलग एंगल से दिख रहा है। हम्म। अब यह फोटो और यह फोटो ऑलमोस्ट मिलती जुलती है। इनको जब हम फ्यूज करते हैं ना तो मुझे यह अंदाजा मेरे ब्रेन को ये अंदाजा मिलता है कि क्या चीज आगे है क्या चीज पीछे है। तो अगर हम एक आंख बंद करके सीढ़ियां उतरने की कोशिश कर रहे हैं हम तो हमें गलती लग सकती है।
(10:53) ठीक है? अगर एक आंख बंद करके आप क्रिकेट की बॉल कैच करने की कोशिश कर रहे हो वो मुंह पे आके लगेगी। यू नो नवाब पटौदी हम टाइगर पटौदी जो सैफ अली खान के फादर थे उनको एक बार कार एक्सीडेंट में चोट लग गई एंड ही लॉस्ट विज़न इन वन आई बट ही वाज़ अ बैट्समैन हम ही फाउंड्स सो मेनी वेज़ टू गेज द बॉल कि वो कैसे आ रही है मेरे पास वो टोपी थोड़ी टेढ़ी पहनते थे उनको दो-दो बॉल्स नजर आती थी तो वो एक बॉल को इग्नोर करते थे एंड ही स्कोर्ड ऑलमोस्ट 3000 रंस आफ्टर लूजिंग वन आई दिस इज एक्सेप्शनल। अब आप और मैं टाइगर पटौदी की तरह नहीं है। अगर हम एक आंख बंद
(11:34) करके सीढ़ी भी उतरेंगे तो हम गिर जाएंगे। इसके चांसेस बहुत ही डेवलप्ड दैट स्किल। यस। सो इट इज इट इज डिफिकल्ट बट फॉर 3D हम इमेज मतलब हमें सब कुछ लाइफ थ्री डायमेंशंस में देखने के लिए दोनों आइज का बहुत रोल है। इट टेक्स टू टू टेंगो। यस। व्हाट इज द नीड ऑफ़ हैविंग अ डोमिनेटिंग आई इन द फर्स्ट प्लेस। क्यों है ये? मतलब ऐसा क्योंकि एक आंख ज्यादा डोमिनेटिंग हो होती है। नहीं ये हमारे ब्रेन का सॉफ्टवेयर है। ठीक है? सो ब्रेन ने सीखा है एक आंख से पहले देखना और दूसरी आंख को एडिशनल सपोर्ट के लिए यूज करना। रियली? जैसे हम ब्रेन ने सीखा है एक हाथ से
(12:11) लिखना। जैसे ब्रेन ने सीखा है एक पैर से किक करना। तो इट इज समवट सिमिलर टू दैट। देयर आर लॉट ऑफ़ पीपल हु राइट विथ बोथ हैंड्स। यस। देयर आर आल्सो पीपल जब वो ऐसे ट्रायंगल बनाएंगे तो उनकी दोनों इमेज दोनों साइड पे ना इमेज बराबर मूव करेगी। सो दे आर कोड डोमिनेंट और इससे कोई फायदा होता है? सो डोमिनेंस इज नॉटेंट फॉर ऑल ऑफ दिस अगर आपकी दोनों आइज की विज़न अच्छी है। ओके? तो आपकी विज़न अच्छी है। आपको थ्री डायमेंशंस में दिखेगा और ये सब चीजों की कोई भी प्रॉब्लम नहीं है। ओके? डोमिनेंस का फायदा डॉक्टर को है। जब आपने चश्मा हटवाना है तो हम यह कोशिश करते हैं कि भाई जो
(12:50) डोमिनेंट आई है उसकी विज़ अगर एकदम क्रिस्टल क्लियर होगी तो यू विल बी हैप्पीियर। मान लीजिए किसी का ट्रीटमेंट किया और दोनों आईज में परफेक्ट रिजल्ट नहीं आया। थोड़ा सा 1920 आया 19 किस में चल जाएगा और 20 किस में जरूरी चाहिए। अच्छा उस पॉइंट ऑफ व्यू से। ह्यूमन आई को एक कैमरा के साथ आपने कंपेयर करके बताया। अभी कैमरास इतने ज्यादा इवॉल्व हो गए हैं। मतलब इट स्टार्टेड फ्रॉम 0.
(13:16) 1 मेगापिक्सल टू नाउ कम्स इन 200 मेगापिक्सल 4K, 8K स्टेबलाइजेशन नाउ एआई इंटीग्रेशन एंड वी गेट हाई एंड कैमरास। क्या अभी भी ह्यूमन आई एक्सपेंसिव मोस्ट एक्सपेंसिव कैमरा से बेटर परफोर्म करती है। ऑफकोर्स। जितने कैमरा हम बना रहे हैं। वो ह्यूमन आई को कॉपी कर करके ही बना रहे हैं। वी आर स्टिल ट्राइंग टू रीच। दिस आई थिंक दिस iPhone इज फैंटास्टिक। यू नो आई थिंक यू हैव अ बेटर वर्जन ऑफ़ iPhone। दे आर टेकिंग सच ब्यूटीफुल पिक्चर्स। हम्म लेकिन इसके अंदर है क्या? कैमरा में। आई आई विल जस्ट एक्सप्लेन यू नो हाउ आई वर्क्स एंड देन यू विल आल्सो अंडरस्टैंड हाउ कैमरा वर्क्स। ये देखो ये हमारी आई का
(13:53) एक मॉडल है। ठीक है? ओके। ये आपको दिख रही है आंख। ये मेरी आंख है। हम इसके आगे बाहर एक कांच है। कॉर्निया। हम इसके अंदर भगवान का दिया एक लेंस है। ठीक है? और पीछे यह एक पर्दा है रेटिना। यह कैमरा की तरह काम कर रही है। आप बैठे हुए मुझे क्लियर दिख रहे हो क्योंकि मुझे कोई चश्मे का नंबर नहीं है। तो मेरी आंख के अंदर यहां पर्दे पे एक गुंजन जी की फोटो बन रही है। हम ये पर्दा सेंसर है जो कि इस नर्व या वायर के थ्रू मेरे ब्रेन में मुझे दिखा रहा है कि गुंजन जी बैठे हुए हैं। राइट? अगर ये लेंस क्लियर है, कॉर्निया क्लियर है, पर्याप्त दूरी पे है, सब कुछ फोकस में
(14:29) है, तो मुझे एकदम क्रिस्टल क्लियर दिखेगा। फोन भी इसी तरह से है। इसका बाहर एक कांच है। इसके अंदर एक मेन लेंस है और पीछे एक सेंसर है। और जो सेंसर पर इमेज बन रही है वो हमें स्क्रीन पे दिखती है। ठीक है? इट वर्क्स लाइक दैट। लेकिन इस कैमरा में भगवान के दिए हुए आई के कैमरा में बहुत सारे फीचर्स हैं। इसमें एक प्यूपल है जिसको हम बोलते हैं अपर्चर। क्योंकि लाइट तेज होती है तो छोटा हो जाता है ताकि लाइट की मात्रा कम जाए आंख में। अगर अंधेरा होता है तो पुतली फैल जाती है। हम ज्यादा लाइट आने देते हैं। इसीलिए जब आप सिनेमा हॉल में एकदम घुसते हो तो अंधेरा लगता है।
(15:04) 5 मिनट के बाद में आपको सीढ़ियां दिखने लग जाती है। आप अपनी चेयर तक पहुंच जाते हो। दिस अपर्चर इज नॉट देयर इन मोबाइल फोन कैमरास। अभी लीक्स तो ये बता रही है कि iPhone 18 जो आने वाला है उसमें अब अपर्चर भी आने लगेगा। यस यस यस। सो हम आंख के कैमरा को मिमिक करने के लिए चलते जा रहे हैं। लेकिन आंख तो ऑर्गेनिक है। इसका जो रेटिना है इट इज सो सेंसिटिव हम कि आप जो एट 4K 8K देख रहे हो हम आपको 4K 8K इसीलिए दिख रहा है ना क्योंकि इस रेटिना में वो क्षमता है। वो 16 के अभी देख पाएगी। वो सिर्फ ज्यादा भी आप बना नहीं पा रहे हो जितना हम देख सकते हैं।
(15:42) व्हाट इज द मेगापिक्सल इक्विवेलेंट टू? अगर कैमरा में हम मेगापिक्सल्स बोलते हैं तो आंखों का मेगापिक्सल क्या है? देखो मेगापिक्सल अगेन बाय इटसेल्फ इज नॉट अ वेरी गुड नंबर। आपको याद है आज से 10 साल पहले जब कैमरास आए थे तो iPhone में 12 मेगापिक्सल का कैमरा था और फिर शुरू हुए OPPO, Vivo 48 120 बट उसकी फोटो कभी भी उसके जितनी अच्छी नहीं थी। सो मेगापिक्सल इज़ ओनली रेजोल्यूशन। या मेगापिक्सल का मतलब यह है कि वो कि एक फोटो अगर हमने ले ली है उसके अंदर कितनी डेंसिटी है पिक्सल्स की कि हम इसको कितना भी बड़ा प्रिंट कर लें तो वो अच्छी
(16:21) दिखेगी। आंख उसके लिए नहीं बनी। राइट? यू नो? एक्सक्टली। सो मैं आपको एक एक एग्जांपल देता हूं। आप अगर आंख के कैमरा को हम फोन के कैमरा या डी इस एलआर कैमरा से कंपेयर कर रहे हो तो वो ऐसा होगा जैसे आप चिड़िया को एरोप्लेन से कंपेयर कर रहे हो। कौन सा बेटर उठता है? अब क्या चिड़िया 300 माइल्स पर आवर की स्पीड से उड़ सकती है? नहीं। लेकिन क्या प्लेन ऐसे हवा में डायरेक्शन चेंज कर सकता है? क्या प्लेन आपकी बनेरी पे आके लैंड कर सकता है? ब्यूटीफुल। सो यू नो इट इज इट्स डिफरेंट। जो भगवान का बनाया हुआ है वो अलग है। और जो इंसान का बनाया हुआ है उसमें खाली फीचर्स है।
(17:02) देयर इज़ नो कंपैरिजन। उसमें हम फीचर लोड कर सकते हैं। वो ब्यूटी ऑफ़ नेचर को रिप्लेस नहीं कर सकते। चश्मे का प्राइस अलग होता है। उसके ग्लासेस का प्राइस अलग होता है। इट स्टार्ट्स फ्रॉम [संगीत] 1000 गोज अप टू 10,000, 20,000 एंड मे बी इवन मोर। ब्लू कार्ड, एंटी स्क्रैच कोटिंग, एंटी स्मज कोटिंग, अनब्रेकेबल। [संगीत] जब आप यह एक्स्ट्रा खर्चा करते जा रहे हैं ना, तो आप अपनी आइज के लिए नहीं कर रहे। एज अ डॉक्टर व्हाट आई वांट इज [संगीत] कि आप ऐसी कोई चेक लिस्ट है कि ये दो-तीन चीजें जरूर कंफर्म करो कि क्या मेरे चश्मे में जो आप चश्मा मुझे बना के दे रहे हैं उसमें
(17:34) यह है ये है ये है। हम इन पूरे एपिसोड्स की मिनी क्लिप्स को टॉपिक वाइज एक दूसरे चैनल पे अपलोड करते हैं जिसका नाम है गुंजन टॉक्स क्लिप्स। इस चैनल पे आप कम टाइम में भी अपने फेवरेट टॉपिक को आसानी से रिवजिट कर सकते हैं। गुंजन टॉक्स क्लिप्स का लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। अभी आपने जो ह्यूमन आई मॉडल से एक चीज बताई थी उससे मेरे को एक आई जस्ट गॉट क्यूरियस टू नो दिस कि आपने बोला इस तरह से वो लाइट एंटर करती है और फिर वो पीछे इमेज बनती है हमारा ब्रेन उसे प्रोसेस करता है। लेट्स अस्यूम दो लोग हैं और उन दोनों की विज़न एकदम नॉर्मल है। तो
(18:09) क्या उन दोनों लोगों को गुंजन एकदम सेम दिखाई देगी? उनके माइंड में जो मेरी इमेज बनेगी विल दैट एक्सैक्टली बी द सेम? यस। दोनों को गुंजन सेम दिखती है। ओके। लेकिन ब्रेन में उनको क्या दिख रहा है इसको दिखाने का कोई तरीका नहीं है। इन आंखों की स्क्रीन ब्रेन के अंदर है। मुझे तो मुझे तो मेरा ही दिख रहा है। करेक्ट। लेकिन हम इसके सरोगेट चीजें देख सकते हैं कि दो बहुत अच्छे आर्टिस्ट्स एक ही फोटो को अगर देखेंगे तो वो एक ही तरीके से उसको रीटच करके बताएंगे हां ये स्किन टोन एकदम रियल उनसे मैच कर रहा है। यू नो काफी हद तक हम बता सकते हैं। बट
(18:47) देयर इज नो वे टू नो। देयर इज़ नो वे टू आंसर दिस क्वेश्चन प्रिसाइजली एक्यूरेटली बट इट हैज़ टू बी द सेम। आईडिया ऑफ कोर्स इट शुड बी द सेम बट क्योंकि ये ब्रेन की प्रोसेसिंग पे डिपेंड करता है एंड एव्री ब्रेन कैन प्रोसेस थिंग्स डिफरेंटली। सो व्हिच इज व्हाई सो मैं इसको एक डिफरेंट नजरिए से सोचता हूं। मोनालिसा वन ऑफ़ द मोस्ट फेमस पेंटिंग्स। या पिकासो वन ऑफ़ द मोस्ट फेमस पेंटर्स। एमएफएस एनजी इंडियन सब लोगों को उन्हीं की पेंटिंग क्यों अच्छी लग रही है? सबको हम वही दिख रहा होगा ना हम तभी तो वो हमें सबको वही चीज क्यों खूबसूरत लग रही और जिस जो चीज हमें नहीं
(19:26) अच्छी दिख रही हमें उसी चीज से बराबर क्यों आती है आंखें कमजोर होती क्यों है मेरी ऐज बढ़ रही है तो मेरी आंखें वीक होंगी इज इट बाउंड टू हैपन बट देन देयर आर पीपल जिनको चश्मा काफी ज्यादा एज तक नहीं लगता कईयों को बचपन में ही चश्मा लग जाता है। सो व्हाट इज दिस व्हाट इज द प्रॉब्लम? वेयर इज द प्रॉब्लम? सो हम चश्मे की बात कर रहे हैं। राइट? हम आंख का कमजोर होना और चश्मा लगना यह दोनों बातें अलग-अलग हैं। एक आंख जिसमें जिसको चश्मे की जरूरत है हम उसमें कोई बीमारी नहीं है। उसमें कोई कमजोरी नहीं है। उसमें कुछ भी प्रॉब्लम नहीं है। वो सिर्फ
(19:58) आउट ऑफ फोकस है। वो कैमरा जो है वो सही है। सिर्फ उसका फोकस बिगड़ा हुआ है। अब मैं आपको फिर से एक बारी ये बताऊं। ये मेरी आंख है। ये आपको देख रही है। इसका बाहर एक कॉर्निया है। एक बीच में लेंस है। पीछे पर्दा है। राइट? इस कॉर्निया की एक पावर है। इस लेंस की एक पावर है। और यह मिलके आपको मेरे पर्दे के ऊपर परफेक्टली फोकस कर रहे हैं। क्योंकि यह दूरी पर्याप्त करेक्ट है। मेरी आंख परफेक्टली इनफोकस है। मुझे चश्मे की जरूरत नहीं है। अब कोई पेशेंट है जिसका -3 तीन या चार नंबर है। उसकी आंख में क्या डिफरेंस है? ये जो दूरी है रेटिना की ये
(20:31) थोड़ा पीछे है। उनकी आंख थोड़ी लंबी है। ओके? इस वजह से जो इमेज जहां बननी चाहिए पर्दे के ऊपर जैसे सिनेमा हॉल की इमेज पर्दे पे बनती है वो आउट ऑफ फोकस है। सामने से एक लेंस उसके और लगा देते हैं। ठीक है? और ये इमेज पीछे शिफ्ट हो के पर्दे पे क्लियरली दिख जाती है। इतना ही है चश्मे का नंबर। हम अगर आप इसको सरल तरीके से समझो तो एक एवरेज इंडियन मेल की हाइट 5 9 510 लगभग। राइट? हम बट क्या सबकी हाइट 5 9 और 510 है? नहीं। कोई 5 फुट के भी है, कोई 6.
(21:05) 5 फुट के भी है। ऐसे ही आई बॉल का साइज भी अलग-अलग है। एवरेज ज्यादातर लोगों की आंख में साइज वही है। और वेल इन फोकस है। इसलिए उनको चश्मे की जरूरत नहीं है। जिन लोगों की आंख ज्यादा बड़ी है उनको माइनस पावर या मायोपिया की प्रॉब्लम है। जिनकी आंख छोटी है उनको प्लस पावर या हाइपरमेट्रोपिया की प्रॉब्लम है। और जो हम अधिकतर लोगों को देखते हैं उनको माइनस पावर या लंबी बड़ी आंख की वजह से चश्मे की जरूरत है। व्हेन वी से आंख बड़ी है इसका मतलब है कि वो जो इमेज है वो थोड़ा पर्दे से पहले बन रही है। करेक्ट और हम सामने से लेंस चश्मे का लगाते हैं जिससे वो इमेज शिफ्ट हो जाती है
(21:41) और पीछे पर्दे पे सही पड़ने लग जाती है। तो आपने ऐसे क्यों बोला कि चशमा लगना और आंखों का वीक होना दो अलग चीजें हैं। चश्मा क्यों लग रहा है? फोकस की प्रॉब्लम है। वो समझ में आ गया। देन व्हेन डू वी से कि आईज वीक है। आंख वीक है का मतलब यह है कि मैंने चश्मा लगा भी दिया तब भी क्लियर नहीं दिख रहा। चश्मा लगा लिया तो फिर क्यों नहीं ठीक दिखेगा। मैंने फिक्स कर लिया ना फोकस की प्रॉब्लम को। और भी तो बीमारियां हो सकती है। आपको कैटक्ट हो सकता है, ग्लूकोमा हो सकता है, पर्दा खराब हो सकता है। अब सिंपल बात इतनी है। अगर मैंने अपने फोन
(22:15) से आपकी फोटो ली वो फोटो धुंधली आई तो आप देख के मुझे बोलोगे डॉक्टर इतनी ये धुंधली फोटो है। आउट ऑफ फोकस है फिर से लो। लेकिन अगर मैंने अच्छे से फोकस कर ली फिर भी फोटो नहीं अच्छी आई तो आप मुझे बोलोगे डॉक्टर रितिन ये लो मेरा कैमरा आपका कैमरा कमजोर है। सो यू सेइंग कि एक है फोकस की प्रॉब्लम और दूसरी है मेडिकल प्रॉब्लम। आंख में चश्मे का नंबर बीमारी नहीं है। सिर्फ आंख आउट ऑफ फोकस है अपना साइज बड़ा होने की वजह से। ओके। उसको हम चश्मे से करेक्ट कर सकते हैं। और यदि हम चश्मा हटाना चाहें तो और कई तरीके हैं उसको करेक्ट करने के।
(22:45) वी विल डिस्कस दो। अगर किसी का इमेज ठीक नहीं बन रही है, फोकस इज आउट ऑफ फोकस तो क्या चश्मा लगाना ही जरूरी है और अगर चश्मा नहीं लगाएं तो क्या होगा? सो इसके पीछे बहुत सारे लोग ये बोलते हैं आपको चश्मा लगा हुआ है। अगर आपने चश्मा नहीं लगाया तो आपका नंबर बढ़ता जाएगा। बढ़ता जाएगा। राइट? द एविडेंस फॉर दिस इज वेरी वीक। ठीक है? ऐसे बहुत लोग हैं जिनको चश्मे की जरूरत है आज। हम आज से 100 साल पहले, आज से 200 साल पहले, आज से 500 साल पहले जब चश्मे होते भी नहीं थे तब भी राइट राइट। तो उन्होंने तो किसी ने चश्मा नहीं लगाया था। तो इसका मतलब उनका जीवन भर चश्मा
(23:26) बढ़ता ही चले जाना चाहिए था। सो अगर चश्मा नहीं लगाएं तो पावर और बढ़ जाएगी। इसका आप बोल रहे हो कोई कोई मेडिकल अभी तक वी डोंट हैव सॉलिड प्रूफ्स। लेकिन अगर चश्मा नहीं लगाओगे तो क्वालिटी ऑफ़ लाइफ तो घट जाएगी। ऑब्वियसली। हां। क्लेरिटी कम होगी। वो बच्चा स्कूल में पढ़ाई में पीछे हो जाएगा। जब वो पढ़ाई में पीछे होगा तो लोग उसको बुली ज्यादा करेंगे। वो बच्चा प्रोग्रेस कम करेगा। सीखेगा कम फ्यूचर में उसकी जॉब अच्छी नहीं लगेगी। सो अच्छी विज़ आज की डेट में मॉडर्न लाइफ में इज वेरीेंट और जब ₹200 300 का चश्मा आता है। अगर आप अपने घर से निकलो और विदिन 15 मिनट के
(24:05) आपको आई डॉक्टर कोई ना मिल जाए ऐसा एटलीस्ट दिल्ली एनसीआर में तो नहीं हो सकता। आजकल कुछ कंपनीज़ हैं जो एट होम आई टेस्ट का ऑप्शन देती हैं। इज इट इक्वली गुड एस गोइंग टू एन आई क्लीनिक? सो घर बैठे आई टेस्ट और डॉक्टर को दिखाना ये सेम नहीं है। दिस इज वेरीेंट। घर बैठे आई टेस्ट जो होता है वो एक कंपनी जो चश्मे भेजती है हम वो आपके घर आ के चश्मे का नंबर टेस्ट करके आपको चश्मा दे देते हैं। दैट इज आई फेयर। या व्हेन यू गो टू अ डॉक्टर वो आपकी आंखों का चश्मे के नंबर के साथ-साथ पुतली फैला के आंख का लेंस रेटिना हर स्ट्रक्चर एग्जामिन करते हैं। यूजुअली
(24:43) यंग लोगों में खास करके चश्मे का नंबर अगले दिन देते हैं। हम क्योंकि एक दिन वो आंख का नंबर मेजर करते हैं और दूसरे दिन वो पहना के चेक करते हैं कि चश्मे का नंबर क्या है। इसको हम पीएमटी या पोस्टमेडियाटिक टेस्ट बोलते हैं। ओके? इससे जो स्पेक्स का नंबर आता है बिल्कुल एक्यूरेट आता है। बट दिस इज आई केयर। हम आईवेयर इज डिफरेंट फ्रॉम आई केयर एट होम आई टेस्टिंग हम जो कि अब हमारी बहुत बड़ी-बड़ी कंपनीज़ है लेंस कार्ड वो घर भेज के भी करा देते हैं। हम बहुत बढ़िया है ये हम इसको गांव में करो जहां पे एक्सेस नहीं है रीच नहीं है। लेकिन अगर ये हम दिल्ली, बॉम्बे,
(25:20) हैदराबाद, बोर जैसे बड़े शहरों में कर रहे हैं। तो हम लोगों को ये फीलिंग दे रहे हैं कि आपने हर साल आई टेस्ट करा लिया किसी को घर बुला के। जबकि आपने सिर्फ चश्मे के नंबर का टेस्ट कराया था। हम एक एग्जांपल में मेरे पेशेंट्स को ये बोलता हूं। इट्स लाइक आपने गाड़ी में पेट्रोल भरवाया और आपने सोचा गाड़ी सर्विस हो गई। हम ठीक है। आप पेट्रोल डलवाओ रेगुलर बट सर्विस तो साल में एक बार करानी पड़ेगी ना। एक बार चेक तो कराना ही पड़ेगा। सो गाड़ी चल जाएगी अगर पेट्रोल डाल दिया है तो। बट देन वो फुल मेंटेनेंस नहीं हुई है। उसके अंदर क्या प्रॉब्लम चल रही है? आपको
(25:52) पता ही नहीं चल रहा है। एंशिएंट टाइम्स में कैसे करते थे जब आंखें कमजोर होती थी तो। व्हाट यूज्ड टू बी द फिक्स देन? हम चश्मे हैव बीन अराउंड फॉर ऑलमोस्ट 800 इयर्स व्हिच इज अ वेरी वेरीरी लॉन्ग टाइम या ठीक है और आई थिंक अकबर या उनके टाइम के कुछ जो हिस्टोरियंस हैं उनके पोट्रेट्स में उन्होंने छोटे-छोटे चश्मे भी लगाए हुए हैं। ठीक है? सो ग्लासेस बनने तो लगे थे। उनका मटेरियल ओवरटाइम चेंज हुआ है। दे वर वेरी क्रूड। दे वर वेरी यू नो नॉट सो गुड। बट एक चीज व्हिच हैज़ बीन कॉमन इज कि चश्मे लोग लगाना नहीं चाहते। दिस फीलिंग हैज़ बीन कॉमन। आई विल गिव यू एन
(26:34) एग्जांपल। हमारे सबसे फेमस इंडियन फिगर जिसको सब हम जानते हैं। हमारे नोट पे भी है गांधी जी। उनको चश्मा लगा हुआ है। राइट? स्वच्छ भारत में हम उनके चश्मे को ही यूज़ कर रहे हैं हर चीज के लिए। डू यू नो कि गांधी जी को फर्स्ट टाइम चश्मा 21 इयर्स की ऐज पे लगा था। वो उस समय पे लॉ की पढ़ाई कर रहे थे इन लंदन। हम्म हम्म। वहां पे उन्होंने एक चश्मा खरीदा दी आर कॉल्ड विंसर ग्लासेस। वैसे राउंड वाले जो स्वच्छ भारत वाले चश्मे हैं जो हैरीपॉटर भी लगाते हैं। ठीक है? और उन्होंने लगाया। ही वास वेरी प्रोएक्टिव। उनको टेक्नोलॉजी पे बहुत भरोसा था और उनको
(27:07) हर चीज एकदम परफेक्शन से चाहिए थी। हम्म। लेकिन अगर आप गांधी जी के यंग ऐज की कोई भी फोटोग्राफ देखो तब कैमरास नहीं तो पिक्चर्स नहीं है बट पोर्ट्रेट्स हैं। तो उसमें उन्होंने एक बड़ी अच्छी यू नो धारणा ऐसे ली हुई है। अच्छी बड़ी मूछे वेल ड्रेस्ड हेयर और ही इज़ वेरिंग अ वेस्टर्न सूट टाई के साथ या कुछ भी एक भी रिकॉर्डेड फोटोग्राफ नहीं है गांधी जी की चश्मे के साथ चश्मे वाले राइट। सो इसका मतलब ये है गांधी जी को चश्मा था [गला साफ़ करने की आवाज़] लेकिन अपनी यंग ऐज में वो चश्मा वो भी नहीं लगाना चाहते थे। राइट? राइट। और एक बार जब वो इंडिया आए और
(27:41) उन्होंने अपनी टोटल ट्रांसफॉर्मेशन कर ली इमेज की खादी कपड़ा और यू नो बकरी साथ में लेकर चलना और चश्मा लगाना तो उन्होंने उस चश्मे को अपनी पर्सनालिटी का पार्ट बना लिया। हम्म अगर गांधी जी के पास यंग ऐज में ऑप्शन होता हम तो मुझे लगता है शायद वो अपना चश्मा हटवाने का लेजर करवाते। [हंसी] लेजिक नहीं था उस टाइम पे। सो जैसे हम देख रहे हैं कि छोटे बच्चों में ही अब इतनी ज्यादा पावर होती है। तो इतनी कम ऐज में इतनी ज्यादा पावर फिर कैसे हो जाती है? हम हमेशा गैजेट्स को स्क्रीनंस को ही ब्लेम करते हैं। इज इट लाइक कि स्क्रीनंस ही इज
(28:17) इट लाइक द मेन रीज़न जो आजकल ये जो मायोपिया एपिडेमिक चल रहा है या छोटे बच्चों में आंखें कमजोर हो रही हैं। क्या इसका रूट कॉज ये स्क्रीन्स ही है ये? चलो एक मिनट के लिए हम स्क्रीन को छोड़ देते हैं। हां। ठीक है? जो स्टडीज आज कहती हैं वो ये कहती है कि हाफ द वर्ल्ड्स पपुलेशन हम को चश्मा लग जाएगा बाय द ईयर 2050। हम ठीक है? ये जो स्टडी है ये कहां से आई है? ये लगभग पिछले 50 60 साल के डेटा से आई है। स्क्रीन्स तो अभी पिछले 20 साल से आए हैं। सो देयर इज अ ट्रेंड कि नंबर ऑन एवरेज बढ़ रहे हैं। बट इज स्क्रीन ओनली टू ब्लेम। एक जर्मनी में बहुत अच्छी स्टडी हुई। हम
(28:57) जिसमें उन्होंने यह देखा कि विलेज के स्कूल्स में हम हम कम बच्चों को चश्मे की जरूरत थी वर्सेस अर्बन हाई डेंसिटी जगहों पे और ये स्क्रीन से पहले की स्टडी है। ओ ठीक है। सो एक बात जो सामने रिपीटेडली आई है। चाहे हम साउथ ईस्ट एशिया देखें जहां पे बहुत ज्यादा स्पेक्स हाई पावर्स का प्रॉब्लम है। इंडिया का उससे कम है। वेस्टर्न कंट्रीज में उससे और कम है। इसका शायद रेस से कुछ रिलेशन है। अच्छा। राइट? सो जेनेटिक्स प्लेज़ अ ह्यूज पार्ट। अगर आपके दोनों पेरेंट्स को चश्मा है तो आपका चश्मा होने का चांस ज्यादा है। जैसे आपके अगर दोनों पेरेंट्स
(29:34) गोरे हैं तो आपका रंग गोरा होने का चांस है। अगर उनकी हाइट ज्यादा है तो आपकी हाइट ज्यादा होने के चांस है। ऐसे ही अगर उनकी आइज लंबी है और उनको चश्मा है तो आपकी भी ग्रोथ में वो उसी फीचर्स में आएगी। उसके चांसेस तो है ही। बट अगर आपका सनलाइट का एक्सपोज़र कम है। तो ये पलट-पलट के रेगुलरली ये बात आई। ओके? के डेफिनेटली ग्रोइंग इयर्स में रेगुलर सनलाइट एक्सपोज़र रिड्यूसेस द चांसेस ऑफ आईबॉल इलोंगेशन एंड स्पेक्स की जरूरत। इसको दो तरीके से देखा जा सकता है। चिकन एंड एग भाई जो बच्चों को धुंधला दिखता है दूर का पास का ठीक दिखता है वही
(30:10) ज्यादा स्क्रीन देखते हैं। वही ज्यादा मोबाइल देखते हैं। वही ज्यादा वीडियो गेम खेलते हैं। तो इसीलिए उनको चश्मा चढ़ रहा है। या फिर उनका इंटरेस्ट ही इसी चीज में है। लेकिन आज से 40 साल पहले जो आई डॉक्टर थे जब स्क्रीन नहीं थी तो वो ये पढ़ाई के बारे में बोलते थे। तो वो ये सिंगिंग के बारे में बोलते थे। और ये कहते थे कि शायद जिनका दूर का चश्मा दूर की विज़न क्लियर है उनको स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट होता है। जिनकी दूर की धुंधली है उनको पढ़ाई में इंटरेस्ट होता है। ओके। अब हम उस सारी चीजों को स्क्रीन्स पर ब्लेम कर देते हैं। मैं अपने सारे
(30:40) पेशेंट्स को ये बात जरूर बताता हूं। स्क्रीन आपकी आंख खराब कर रही है या नहीं? ये शायद आने वाले 15 20 सालों में और कंफर्म पता चलेगा। आज की डेट में एविडेंस एकदम क्लियर नहीं है। लेकिन ये आपका दिमाग पक्का खराब करेगा। [हंसी] हम क्योंकि जब आप स्क्रीन देख रहे हो जो कंटेंट आप देख रहे हो वो बना है आपको इंगेज करने के लिए आपका अटेंशन लूज करा रहा है ब्रेन र तो हो ही रहा है ना कंप्लीटली आपकी साइकोलॉजी चेंज कर रहा है आपकी दोस्तों से बात करने की इच्छा को चेंज कर रहा है ये सब चीजें एक लूप है जो आपको घर से बाहर निकलने से रोक रही है
(31:14) और जब आप घर से बाहर नहीं निकलोगे तो आपका चश्मे का नंबर बढ़ सकता है। अब किसने क्या चीज करी है ये तो कहना मुश्किल है। बट डेफिनेटली बट कनेक्टेड है देयर इज़ अ कनेक्शन देयर इज़ अ कनेक्शन वेदर इट्स अ डायरेक्ट कनेक्शन विथ द स्क्रीन ऑर नॉट इज टफ टू से बट आउटडोर इज डेफिनेटली इम्पोर्टेन्ट और हम स्क्रीन्स के लिए बिकॉज़ वी आर टॉकिंग अबाउट स्क्रीन्स तो जो ये ब्लू लाइट कटिंग ग्लासेस [गला साफ़ करने की आवाज़] वगैरह होते हैं डू दे हेल्प सो ब्लू लाइट कटिंग ग्लासेस का आई डोंट थिंक दैट देयर इज मच रोल ठीक है ब्लू लाइट कटिंग ग्लासेस हैव कम
(31:43) अराउंड फॉर वन रीज़न कि स्क्रीन से निकलने वाली जो ब्लू लाइट है अगर हम इसको कट करेंगे तो देखने वाले को थोड़ा सा स्ट्रेन इनकम पड़ेगा। एक चीज जो ब्लू लाइट खराब करती है जो हमें पता है वो हमारी सिरकेडियन रिदमम या दिन और रात की परसेप्शन मेरी आंखों को ब्लू लाइट से ही पता चलता है कि दिन है कि रात है। बॉडी इस तरह से बनी है। अगर मैं रात में बैठा मोबाइल स्क्रोल कर रहा हूं। मेरे को नींद बड़ी मुश्किल से आएगी। मेरी बॉडी में जो मेलाटोनिन सेक्रेट होता है नींद के लिए वो देर से होगा। मेरी नींद खराब होगी। सो स्लीप साइकिल को ठीक करने
(32:15) के लिए ब्लू लाइट फिल्टर ग्लासेस आए हैं। बहुत बेनिफिट नहीं है क्योंकि अब तो सारी स्क्रीन्स भी ऑलरेडी उसमें ट्रू टोन बिल्ट इन है। रात के समय में वो ऑलरेडी थोड़ी सी येलोइश हो जाती है। उसमें से ब्लू लाइट निकलनी बंद हो जाती है। ब्लू लाइट का एक और पार्ट ये है कि अल्ट्रावायलेट लाइट जो बहुत सनलाइट में बहुत ज्यादा है। ये हमारे रेटिना को एज रिलेटेड मैकुलर डीजनरेशन कॉज करती है। ऐसा हम सोचते हैं। अभी ये भी पिछले 50 साल की ही रिसर्च है। तो इसको देखते हुए इसको पुश करा जाता है कि ब्लू लाइट कटिंग ग्लासेसेंट। बड़ा मुश्किल है इस चीज को प्रूव करना। एक
(32:49) इंसान जो 15 साल की उम्र से ही ब्लू लाइट कटिंग ग्लासेस पहनेगा तो 70 की साल साल की उम्र में उसको एआरएमडी या एज रिलेटेड मैकुलर डीजनरेशन होगी या नहीं? इसके लिए तो स्टडी कितनी लंबी चाहिए। कंट्रोल ग्रुप कितना बड़ा चाहिए और उनको कंपेयर कैसे करोगे? एक आंख में पहना दो ब्लू लाइट कटिंग ग्लास और दूसरी में उसके बिना 15 साल के बच्चे को और फिर 70 पे देखो फिर तो शायद हम कुछ सही पकड़ पाएंगे। सो जो भी रिसर्च एकदम से आती है ना लेटेस्ट मैं उसको थोड़ा सा पिंच ऑफ साल्ट के साथ हम देखना भी है सीखना भी है। हम जैसे ये ब्लू लाइट कटिंग ग्लासेस की
(33:25) बात कर रहे हैं। इस तरह से अदरवाइज भी जब हम एक चश्मा खरीदने जाते हैं तो उसके जो ग्लासेस हैं हमेशा जो ऑप्टिशियन है या फिर जब हम जाते हैं स्टोर पे तो चश्मे का प्राइस अलग होता है। उसके ग्लासेस का प्राइस अलग होता है। और वो ग्लासेस का प्राइस बहुत ज्यादा वेरीरी करता है। इट स्टार्ट्स फ्रॉम 1000 गोज़ अप टू 10000 20000 एंड मे बी इवन मोर तो क्या डिफरेंस है? क्या सच में उस ग्लास के ऊपर इतना पैसा इन्वेस्ट करना वर्थ इट है? ₹10,000 का भी मोबाइल फोन आता है। [हंसी] ₹1.
(34:01) 5 लाख का भी मोबाइल फोन आता है। क्या डिफरेंस है? बात तो फोन पे उतनी ही होती है। हम राइट? लेकिन डिफरेंस है भी। देखिए एज अ डॉक्टर व्हाट आई वांट इज कि आप करेक्ट नंबर का चश्मा पहने। हम चाहे वह सिर्फ एक कांच का टुकड़ा हो और उसका पावर एकदम एक्यूरेट हो तो भी आपको उतना ही क्लियर दिखेगा। चाहे आप उससे महंगा ब्लू कट एंटी स्क्रैच कोटिंग, एंटी स्मज कोटिंग अनब्रेकेबल जब आप यह एक्स्ट्रा खर्चा करते जा रहे हैं ना तो वो आप अपनी आइज के लिए नहीं कर रहे। हम वो आप वो चश्मे की लाइफ के लिए कर रहे हैं। उसकी क्वालिटी के लिए कर रहे हैं। उसकी सुंदरता के लिए कर रहे हैं। फोन पे
(34:38) बात करने के लिए ₹10,000 का फोन काफी है। लेकिन सुंदर फोटो लेने के लिए ₹1.5 लाख का फोन लेना पड़ता है। हम पॉइंट ए से पॉइंट बी पे जाने के लिए गाड़ी काफी है। लेकिन उस गाड़ी से जब मैं उतरूं तो सारी दुनिया मुझे देखे उसके लिए 5 करोड़ की गाड़ी लेना भी जरूरी है। सो वो जो हम एक्स्ट्रा पैसा खर्च रहे हैं वो उसमें। बट हां कुछ देयर आर सम फीचर्स जैसे बायफोकल ग्लासेस हैं दूर और पास के इकट्ठे उसकी जगह आजकल प्रोग्रेसिव ग्लासेस आ गए हैं। सो उसमें हर डिस्टेंस का विज़न होता है। वाइड कॉरिडोर के प्रोग्रेसिव ग्लासेस थोड़े और कॉस्टली हो जाते हैं जिसमें कि हम काफी
(35:12) चौड़ाई तक साइड टू साइड भी आइज को मटका के देख सकते हैं। सो देयर आर सम बेनिफिट्स बट बहुत सारा जो हम खर्चा ग्लासेस पे कर रहे हैं वो ग्लास की सुंदरता, ग्लास की लाइट वेट, ग्लास की लाइफ उसके ऊपर भी स्पेंड कर रहे हैं। तो एक ऑर्डिनरी पर्सन कैसे डिसाइड करेगा कि मुझे किन फीचर्स पे स्पेंड करना है और किन पे नहीं करना। बिकॉज़ सिर्फ 600 और 10,000 के बीच में भी बहुत बड़ी रेंज होती है। सो कहां पर अगर किसी का एक सेट बजट है तो उसको वो बजट किन चीजों पे लगाना चाहिए और किन चीजों को इग्नोर करना चाहिए? देखिए मैं तो सबसे पहले ये कहूंगा कि इस
(35:45) बजट में से ना ₹0000 12000 निकाल के पहले प्रॉपर आई टेस्ट कराओ और एक एक्यूरेट नंबर ले लो। ये नंबर लिया हुआ उसके बाद आप चश्मे की दुकान में जाना। उनकी स्टोरी सुनना। जो स्टोरी अच्छी लगेगी आपके बजट से मैच करेगी वो चश्मा ले लेना। ओके। अगर करेक्ट नंबर का चश्मा होगा तो ₹1000 वाला भी बहुत बढ़िया है। और अगर गलत नंबर का चश्मा होगा तो ₹00 वाला भी बेकार है। पेशेंट्स जो चीज बहुत वैल्यू करते हैं वो लाइट वेट के ग्लासेस वैल्यू करते हैं। सो जिसका चश्मे का नंबर हाई है -5 6 8 10 15 18 20 राइट। अब इन लोगों के केस में एक रेगुलर ग्लास के साथ चश्मे का वेट और थिकनेस बहुत
(36:24) बढ़ जाती है। हाई इंडेक्स ग्लासेस जो होते हैं उस वो थोड़े पतले होते हैं और लाइट वेट होते हैं। हम इसके ऊपर खर्चा करना काफी बेनिफिशियल है उसके लिए जो चश्मा ज्यादा यूज़ करते हैं। एक अच्छे क्वालिटी का ग्लास जो कि जल्दी-जल्दी नहीं टूटता। आई थिंक CR39 मटेरियल है आजकल स्टैंडर्ड। जैसे पहले कांच के ग्लासेस होते थे। उससे पहले क्वट्स के ग्लासेस होते थे 100 साल पहले जो आप पूछ रहे लेकिन अभी जैसे CR39 का ग्लास है उसमें बॉल लगने से चोट लगने से वो ग्लास शैटर हो के आंख में चला जाएगा। इसके चांसेस बहुत कम है। हम तो सेफ्टी बढ़ गई। राइट?
(36:59) हम मटेरियल वेट किड स्क्रैच रेजिस्टेंस ये सब चीजों के ऊपर हम एक्स्ट्रा खर्चा कर रहे हैं। व्हिच व्हिच इज़ बेनिफिशियल बट इफ योर पॉकेट अलाउ यू कैन गो एस फार एस यू वांट। बट आई आई टोटली अग्री कि वो जो लाइट वेट वाला जो एक फीचर आपने बताया बिकॉज़ हम आपने हर वक्त चश्मा लगा के रखना है। सो वो जितना इजी ऑन योर आइज होगा उतना आपके लिए बेटर है। अगर कोई इंसान चश्मा लेने जाता है तो ऑप्टिशियन से वो कोई ऐसी कोई चेक लिस्ट है कि ये दो तीन चीजें जरूर कंफर्म करो कि क्या मेरे चश्मे में जो आप चश्मा मुझे बना के दे रहे हैं उसमें ये है ये है
(37:34) ये है। बहुत ज्यादा कुछ तो नहीं। एक आपके पास चश्मे का नंबर जो है वो एक्यूरेट होना चाहिए। जब आपने चश्मा बनवाया हम वो चश्मा बन के आया उसके बाद डिलीवरी के समय आपने एक बार चश्मा उनसे क्रॉस चेक कराना है कि ये जो नंबर मैंने दिए बनाना था और जो बन के आया क्या वो सही है या नहीं मैंने दिया चश्मे का नंबर -2 बन के आ गया - डेढ़ मैंने लगाया मुझे लगभग ठीक लग रहा है मैं घर ले गया क्योंकि मुझे बेटर तो दिख ही रहा है बेटर तो दिख ही रहा है लेकिन उसको एक बार दोबारा चेक करो भाई -2 दिया था -2 बना तो है दैट्स वन दूसरा ये है कि जितने आज की
(38:07) डेट में अच्छे ऑप्टिशंस हैं जो अच्छा चश्मा बनाते हैं। चश्मा लगा के सेंटर मार्क करते हैं। जो भी आपने फ्रेम सेलेक्ट किया उसका तो जो लेंसेस होते हैं वो बड़े होते हैं। जो आपने फ्रेम सेलेक्ट किया उसमें से उतना लेंस कट के उसमें लगेगा। वो लेंस अगर आपके आंख के सेंटर से मैच करता होगा तो उस चश्मे का कंफर्ट बहुत ज्यादा होगा। सो दिस इज दी फ्रॉम माय साइड। आई थिंक आर वैरी गुड पॉइंट्स। बाकी यू पिक अ गुड ग्लास, गुड ब्रांड जो आपके बजट में आता हो या आई वांट टॉक अबाउट सम होम रेमेडीज क्योंकि बहुत लोग इस तरह के टोटके भी अपनाते हैं और बचपन से हम सुन रहे हैं गाजर खाओ आंखें
(38:44) तेज होंगी। हाउ ट्रू इज दैट? कुछ साइंस है इसके पीछे या बस इट्स इट गिव्स यू गुड न्यूट्रिशन फॉर योर आईसाइट। इट गिव्स यू गुड न्यूट्रिशन फॉर योर बॉडी। अब गुर्जन मैंने देखा आप एक कंपनी रन करते हैं आई एम बाऊ हम जो कि लोगों को डाइट्स बताती है उनको हेल्दी होने के लिए बताती है आप हम जानते हैं ये सब चीजें कैल्शियम खाओ हड्डियों के लिए अच्छा है आप मुझे बताओ मुझे उंगली के लिए क्या खाने की जरूरत है [हंसी] ऐसा कुछ अलग नहीं हो सकता ना अब गाजर का क्या है गाजर में विटामिन ए है अगर आपको विटामिन ए की डेफिशिएंसी है तो आपको विटामिन ए चाहिए शायद वो सिर्फ गाजर
(39:20) खाने से पूरा नहीं होगा एक इस दुनिया में हम चाहते हैं सुपर फूड्स। हम्म। हम चाह रहे हैं कि ऐसा कोई न्यूट्रिशन हो जिससे कि मेरी प्रॉब्लम बीमारी सॉल्व हो जाए। और मेरी वो एग्जैक्ट प्रॉब्लम को ही वो टारगेट करे। करेक्ट। मैंने आपको गांधी जी का एग्जांपल दिया था। आपको पता है गांधी जी ने अपने लाइफ टाइम में बहुत सारी होम रेमेडीज ट्राई करी। वो एक डॉक्टर को फॉलो करते थे डॉक्टर विलियम बेट्स। ओके। ही वाज़ अ ऑ्थमोलॉजिस्ट आई डॉक्टर अमेरिका के। और उनका एक मेथड था बेट्स मेथड। उन्होंने चार पांच चीजें सजेस्ट करी बेट्स मेथड में आइज का नंबर कम करने की
(39:57) जिसको गांधी जी ने रेगुलरली फॉलो किया ठीक है गांधी जी का चश्मा नहीं हटा क्लियरली ही डिडट्ट लाइक ह ग्लासेस क्लियरली ही डिड लाइक [हंसी] ह ग्लासेस वो क्या चीजें थी आप हाथों को ऐसे रगड़ो और आंखों को सेक दो धूप में बैठो आइज बंद रख के और साइड टू साइड अपना हेड रोटेट करो ताकि आइज के अंदर वो एनर्जी जाए मड पैक लगाओ आइज बंद करके खुली आंखों से एक टब में ठंडे पानी के टब में आंखों को खुला खुला रखो। ये इस इसको बेट्स मेथड कहते हैं। 1940 में अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने इसको स्ट्रिक्टली बैन करा कि ये टोटली गलत है और ये नहीं काम करता।
(40:36) और आज भी ये टोटके जो हैं हम Instagram और सोशल मीडिया पे चल रहे हैं। भाई मैं आपके चैनल पे आज इस डिस्कशन में इस वीडियो में ये बोल दूं मेरे पास एक ऐसी पीली गाजर है जो मेरे ही खेत में उगती है। अगर आप इसको एक साल तक खाते रहेंगे तो आपका चश्मा हट जाएगा। कल सुबह आपके घर के बाहर लाइन लगी होगी। ये वीडियो वायरल हो जाएगा [हंसी] क्योंकि लोगों की इच्छा है कि ऐसा सुपर फूड मिल जाए जिससे बीमारियों का इलाज हो जाए। तो उसको बेचने वाले बहुत लोग इस दुनिया में रहने वाले हैं और एल्गोरिदम जो हमारे YouTube के Instagram के हैं वो उसको बूस्ट करने ही वाले हैं। रील्स वो
(41:13) वायरल होने ही वाली है। हम इसको नहीं रोक सकते। बट इन जनरल ऐसा कोई जड़ी बूटी नहीं है। कोई दवाई नहीं है। कोई सुपर फूड नहीं है जो आपके चश्मे को रोक सकता है या उसका नंबर वापस ला सकता है। इट इज नॉट पॉसिबल। ऐसी कोई साइंटिफिक एविडेंस नहीं है। सो बेसिकली वी कैन से कि अच्छा न्यूट्रिशन, अच्छी डाइट आपकी आंखों को हेल्दी रखती हैं। बट ऐसा नहीं है कि ये आपका चश्मा उतार सकती हैं। बिल्कुल भी नहीं। चश्मे का नंबर आई बॉल के साइज पे है। राइट राइट राइट। जो कि हाइट की तरह है। आईबॉल का साइज कम होने से चश्मे का नंबर कम होगा। हम ना हाइट कम होने वाली है ना आई बॉल का
(41:49) साइज कम होने वाला है। हम अगर आपको माइनस पावर का चश्मा है हम तो आपको यह नंबर रहने वाला है। हम अगर आपका नंबर जो है वो हर टेस्टिंग में थोड़ा सा चेंज हो रहा है तो या तो टेस्टिंग गलत है या फिर ये एक नेचुरल बॉडी का वेरिएशन है। टेस्टिंग रीटेस्टिंग में जो फर्क आ रहे हैं। आपको एक दिन आधा नंबर बेटर अच्छा लग रहा है। इतना आधा नंबर कम अच्छा लग रहा है। बट ये बाय एंड लार्ज हाइट की तरह एक ऐज में जाके रुक जाता है। उसके बाद अच्छा नहीं चेंज होता। उसके बाद नहीं चेंज होता। जी। मान लीजिए आपका नंबर -5 है। हम ठीक है? और आप मेरे पास आए कि मुझे लेजर
(42:23) कराना है। हम मेरा सबसे पहला दायित्व क्या बनता है? कि नंबर -5 पे रुका हुआ है तो मैं -5 का लेजर करूं ना। अगर मुझे इस बात का डर है कि -5 से -6 हो सकता है साल बाद, 2 साल बाद। तो मुझे बोलना चाहिए ना गुंजन रुक जाओ 2 साल। भर जाने दो। एक बार रुक जाएगा इसके बाद ही करेंगे। मैं यह लेज़िक और बाकी सारे जितने भी मेडिकल ट्रीटमेंट्स हैं, इंटरवेंशंस हैं, इनको डिटेल में डिस्कस करूंगी आपके साथ। क्योंकि हमने ये सुपर फूड्स की बात की है। तो यहां पर एक और चीज है जो हम जिसे मिस नहीं कर सकते। कुछ इस तरह की एक्सरसाइजज़ भी बताई जाती हैं जो आपकी
(42:56) आंखों की पावर को इंप्रूव करती हैं। किसी एक चीज पर देर तक फोकस करना और यह वाली बहुत सारी इस तरह की एक्सरसाइजज़ हैं। इनका क्या रोल है? डू यू थिंक दे आर ऑफ एनी यूज़? आई एक्सरसाइजज़ आर हेल्पफुल? इन टू वेज़? जब हम पास का देखते हैं ना तो एक हमारी आंख में कन्वर्जेंस रिफ्लेक्स होता है। नियर रिफ्लेक्स हम उसको बोलते हैं। दोनों आइज अंदर की तरफ टर्न होती है। हमारे प्यूपल का साइज चेंज होता है और हमारी आंख के अंदर का जो लेंस है वो अपनी पावर चेंज करता है पास का देखने के लिए। ठीक है? दूर का फोकस करते हैं। हम पास का फोकस करते हैं। ये चीज। अब कुछ लोगों में
(43:29) ये मसल्स वीक होती हैं। अच्छा। उन लोगों को पेन पुश अप एक्सरसाइजज़ हम बताते हैं कि आप सुबह के समय में एक पेन को दूर रखिए। इसकी टिप को देखिए और धीरे-धीरे करके नजदीक लेके आइए। जहां धुंधला दिखे या दो दिखे वहां पे इस पर कंसंट्रेट कीजिए और क्लियरली इसको देखो और यहां पे 10 सेकंड के लिए उसको रोक के रखो। ऐसा रोज सुबह 15 टाइम्स करो। जिन लोगों का नियर पॉइंट ऑफ कन्वर्जेंस ये हम 30 सेंटीमीटर से ज्यादा दूर है। एक फुट से ज्यादा दूर है। उनको ये इनसफिशिएंसी है। एक महीने 15 या 20 दिन के बाद इस एक्सरसाइज के बाद ही वो नियर पॉइंट नजदीक आ जाएगा।
(44:02) ये लोगों को स्क्रीन टाइम पे हेडेक होता है ज्यादा। इन लोगों का हेडेक कम हो जाएगा। ओके। ठीक है? ये चीज का तो फायदा है। लेकिन मैंने देखा है हमारे यहां पे सोसाइटी में नीचे पार्क में वो बैठे हैं ऐसे कर रहे हैं। फिर ऐसे कर रहे हैं। फिर ऊपर कर रहे हैं। फिर हाहा ये जो आई योगा हो रही है। ये आई योगा से आईज पे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। ये मेंटल रिलैक्सेशन के लिए अच्छी एक्सरसाइजज़ हैं। बट दे आर नॉट इंप्रूविंग योर आईसाइट। दे आर नॉट इंप्रूविंग एनी आई कंडीशंस। दे आर नॉट इंप्रूविंग एनी आई डिजीजेस। हम आई डिजीज का ट्रीटमेंट तो ट्रीटमेंट से
(44:36) होगा ट्रीटमेंट से और आई एक्सरसाइजज़ आर वेरी गुड वे ऑफ़ मेंटल रिलैक्सेशन हम बट दे आर नॉट गोइंग टू चेंज मच इन द आई। तो सर अब मेडिकल ट्रीटमेंट की तरफ चलते हैं। लेजर के बारे में द मोस्ट फेमस टेक्नोलॉजी एंड ट्रीटमेंट टू रिमूव स्पेक्स एज वी ऑल नो इज लेजर। अब सबका कॉर्निया भी अलग होता है। तो क्या इस पे डिपेंड करेगा कि उनके लिए लेजर कितना इफेक्टिव होने वाला है? 100% 100 में से अबाउट फोर टू फाइव पेशेंट्स ऐसे निकलते हैं जिनके कॉर्निया में लेजर सर्जरी करना सूटेबल नहीं होता। अभी भी इतने लोग हैं जो चश्मा लगाते हैं और उसमें से बहुत लोग हैं जो अफोर्ड भी
(45:14) करते हैं बट तब भी क्यों नहीं करवाते? आंख एक बहुत सेंसिटिव चीज है। उसका ऑपरेशन कराना मेंटली सोचना ही बहुत टफ है लोगों के लिए। द फियर ऑफ द अननोन इज वैरी बिग। अगर आप इन पॉडकास्ट के ऑडियो वर्जनंस को एंजॉय करना चाहें ताकि आप अपना काम करते हुए, वॉक करते हुए या फिर ड्राइव करते हुए भी इन एपिसोड्स का पूरा फायदा ले सके तो आप हमें स्पॉटिफाई पे फॉलो कर सकते हैं जिसका लिंक डिस्क्रिप्शन में है। तो सबसे पहले ये लेजर वर्क कैसे करता है? यहां से स्टार्ट करते हैं। सो देखो फिर दोबारा हमें वही आंख का मॉडल और कैमरा भी समझना होगा। ये हमारी आंख आउट
(45:48) ऑफ फोकस है। ठीक है? हम इस आंख के अंदर दो लेंस है। एक आंख के भीतर का लेंस जिसमें उमर के साथ सफेद मोतिया हो जाता है और ये लेंस धुंधला हो जाता है और एक बाहर आंख का कॉर्निया। यह दोनों मिलाकर के आंख में एक इमेज बनाते हैं। आंख आउट ऑफ फोकस है क्योंकि इस आई बॉल का साइज बड़ा है। एक कॉमन आईबॉल का साइज इज अबाउट 22 मि.मी.
(46:13) 22.5 मि.मी. जिन लोगों को चश्मे का नंबर है इनकी आईबॉल का ये डायमीटर 23 मि.मी. 24 मि.मी. ऐसे-ऐसे ज्यादा होता है। अब आंख का साइज कम करने का कोई तरीका नहीं। लेकिन सबसे आसान तरीका चश्मा हटाने का है कि हम बाहर का यह जो कॉर्निया है इसका पावर चेंज कर दें। सामने से एक लेजर करें जो कि इसके सेंट्रल पार्ट को थोड़ा फ्लैटन कर दे। इसका पावर कुछ कम कर दे। ओके? ये पावर कम होने से जो आंख की इमेज है आंख के अंदर बनने वाली इमेज वो धीरे-धीरे पीछे शिफ्ट होती जाती है। जितना नंबर हटाएंगे उतना पीछे शिफ्ट होगी। एक्सैक्टली जितना नंबर हमने हटाना है, हम उतने पावर का लेजर
(46:51) इस कॉर्निया को तराश सकते हैं। उसको शेव ऑफ कर सकते हैं। और एग्जैक्टली वी कैन टारगेट ज़ीरो एंड अचीव ज़ीरो इन 99% ऑफ़ केसेस। ओके। सो व्हेन वी से तराश सकते हैं। वी आर लिटरली तराशिंग इट। वी आर लिटरली मतलब हम उसको स्क्रब कर रहे हैं और उसको पूरा शेव ऑफ कर रहे हैं। हम एक्सक्टली जैसे एक पुतला बनाते हैं ना कि एक मिट्टी रखी और महीन तरीके से उसको तराशते तराशते शेव गफ करते करते उसका स्कल्प्चर बना लिया हम कॉर्निया को कार्व कर रहे हैं। कार्व कर रहे हैं। लेजर से इट्स अ कूल लेजर एंड इट्स वेरी फास्ट। ओके। सो एक नंबर हटाने में लगभग 2 सेकंड का
(47:29) लेजर। 1ढ़ से 2 सेकंड का लेजर लगता है। तो अगर किसी का सात नंबर है या 7 नंबर है तो उसमें टोटल लेजर डिलीवरी टाइम 14 से 15 सेकंड का ही होने वाला है। सो वो बहुत ही स्पीड से काम करता है और जिससे कि आपके कॉर्निया को वो परमानेंटली चेंज कर चेंज कर लेता है। सो सिंस यहां पर हम सारा काम कॉर्निया पे कर रहे हैं। अब सबका कॉर्निया भी अलग होता है। थिकनेस ऑफ़ द कॉर्निया एंड हेल्थ ऑफ़ द कॉर्निया। तो क्या इस पे डिपेंड करेगा कि उनके लिए लेजर कितना इफेक्टिव होने वाला है? 100% एक आई सर्जन जो चश्मा हटाने का ऑपरेशन कर रहा है हम उसका प्राइमरी काम यही ढूंढना है कि कौन
(48:08) वो ऐसा पेशेंट है जिसकी आंख में ये लेजर जो है वो हानि करेगा नुकसान करेगा उसके अलावा नहीं तो हम दुकान ही खोल ले ना आओ लेटो लेजर करे चश्मा हटा दे हम हम एव्री पेशेंट जो स्पेक्स रिमूवल लेजर सर्जरी के लिए आता है उसके एक बैटरी ऑफ टेस्ट्स होते हैं जिसके अंदर हम आंख का नंबर चश्मे का नंबर नंबर आंख का प्रेशर, कॉर्निया की थिकनेस, कॉर्निया की शेप, कॉर्निया की स्ट्रेंथ, आंख के अंदर कोई एडिशनल बीमारी तो नहीं है। जैसे कि लेंस में कोई कैटक्ट, आंख के पर्दे में कोई छेद तो नहीं है या कोई और गंभीर बीमारी आंख के अंदर तो नहीं है। इसके साथ ही साथ आंख के बाहर कोई
(48:46) सिग्निफिकेंट ड्राई आई तो नहीं है। ओके? ये सभी चीजों को देखते हैं। इसमें सबसे इंपॉर्टेंट टेस्ट जो है यह कॉर्निया का ही है। क्योंकि हम कॉर्निया को ही परमानेंटली ऑल्टर कर रहे हैं। कॉर्निया में से हमें जितना नंबर हटाना है हम उतनी थिकनेस उसमें होनी चाहिए। नंबर हटाने के बाद तराशने के बाद जो थिकनेस कॉर्निया की बचे हम वो गाइडलाइन से ज्यादा होनी चाहिए। ताकि ये कॉर्निया अपनी लाइफ लॉन्ग तक स्ट्रेंथ और शेप मेंटेन कर सके। आफ्टर ऑल कॉर्निया का जो पावर है उसका जो फोकस करने का काम है वो उसकी शेप से ही है। अगर ये शेप खराब हो गई क्योंकि हमने उसकी
(49:24) स्ट्रेंथ को करेक्टली नहीं जांचा था, नापा था, एस्टीिमेट किया था तो ये हमारा एक फेलियर होगा लेजर सर्जरी में। एक अच्छे आई टेस्ट के बाद लेजर सर्जरी से पहले हम क्लियरली बता सकते हैं कि इस आंख में रिस्क है हम और उसको छोड़ देना चाहिए। कितना फ्रीक्वेंट है ये। हम हम 100 में से अबाउट फोर टू फाइव पेशेंट्स ऐसे निकलते हैं जिनके कॉर्निया में लेजर सर्जरी करना सूटेबल नहीं होता। उनको हम एडवाइस करते हैं कि बॉस आपका चश्मा लेजर से नहीं हटेगा। देयर आर अल्टरनेट प्रोसीजर्स। लेजर आप लेजर कर ही नहीं सकते। चश्मा तो फिर वो बाद की बात हो गई। पहले तो लेजर ही
(50:04) नहीं आपकी आंखों में। नहीं नॉट एलिजिबल फॉर इट। और मैं उनको यह बात बोलता हूं कि आपने लेजर नहीं कराना। मुझसे नहीं कराना। किसी से भी नहीं कराना। क्योंकि हो सकता है कोई गलती से यह सोच ले कि नहीं नहीं इसमें हो जाएगा ठीक रहेगा क्योंकि प्रॉब्लम अगले दिन नहीं आएगी। प्रॉब्लम 2 साल तीन साल बाद आएगी। सो ये हमारा मेन दायित्व बनता है। टू नो कि सेफ है या नहीं। आफ्टर ऑल देखो चश्मा हटाना एक चॉइस है। एक कॉस्मेटिक प्रोसीजर है। आप अपनी मर्जी से करा रहे हो। ये यंग बच्चे हैं। हम 19, 20, 22, 25 साल का एक यंग एडल्ट उसकी पूरी लाइफ उसके सामने है। उसके हाथ में
(50:39) कोई बीमारी नहीं है। चश्मे से उसको अच्छा दिखता है। अगर हमने लेजर करके आंख में कोई बीमारी इंट्रोड्यूस कर दी तो यह एक बहुत ही बड़ा फेलियर होगा हमारी साइड से। इसके ऊपर बहुत ध्यान रखना है क्योंकि मैं कॉर्निया स्पेशलिस्ट हूं तो मैं इंडिया भर में से लेसिक के कॉम्प्लिकेशंस, कॉर्निया के कॉम्प्लिकेशंस के पेशेंट्स को डील करता हूं। ये मेरा मेन फे एरिया है। तो मुझे पता है कि प्रॉब्लम्स कितनी गंभीर हो जाती है। तो जहां चीजें बॉर्डर लाइन पे आती हैं मैं पेशेंट को ये बात समझाता हूं कि देखिए देयर आर अल्टरनेट ट्रीटमेंट्स कि आईसीएल
(51:10) सर्जरी है। उसमें हमने कॉर्निया को कुछ भी नहीं करना है। हम उससे आपका चश्मा हटा सकते हैं। क्यों लेजर पे ही हम अटके जिस पे हमें 1% डाउट हो। देन हाउ इज लेजर डिफरेंट देन आईसीएल? व्हाट इज आईसीए? सो लेजर सर्जरी हमने किया आंख की पुतली के ऊपर। हम ये लेजर किया। इसका नंबर चेंज हो गया। आंख फोकस में आ गई। विज़न क्लियर हो गई। अब इस कॉर्निया पे तो हमें डाउट है। इसको तो हम छेड़ना नहीं चाह रहे। तो हमारे पास एक सेकंड प्रोसीजर है जिसके अंदर आंख के अंदर ये नेचुरल लेंस था ना हमारा। हमने इस नेचुरल लेंस के बिल्कुल बराबर में आईसीएल ये एक्चुअली आईसीएल का ही मॉडल है।
(51:45) ये आईसीएल लेंस वो इसके सामने रख दिया। ओके। ओके। जैसे हम कांटेक्ट लेंस बाहर से पहनते हैं। अगर मेरे जैसे किसी सर्जन ने ऑपरेट करके आंख के अंदर एक परमानेंट लेंस रख दिया जो कि आपके चश्मे के नंबर से ही कैलकुलेटेड है। ओके? तो आपका स्पेक्टिकल पावर हमेशा के लिए हट जाएगा। ये लेंस आंख के अंदर जाने के बाद बॉडी के इम्यून सिस्टम को इनविज़िबल हो जाता है। इस लेंस की एक खास कोटिंग होती है जिससे कि बॉडी के प्रोटंस इसको कोट कर लेते हैं। सो ये इंप्लांट तो एक फॉरेन बॉडी की तरह नहीं। बिल्कुल भी नहीं। ठीक है? और इसकी ब्यूटी यह है कि आपने कॉर्निया को कुछ चेंज नहीं
(52:21) किया। कोई ड्राईनेस नहीं इंड्यूस करी। हम ऑपरेट करके इस लेंस को हम जैसे आंख में डालते हैं उतना ही आसान है इसको निकालना। मान लीजिए आज से 10 साल बाद 20 साल बाद कोई मेडिकल एडवांस ऐसी आ गई जिसके कारण से हम ये लेंस निकालना चाह रहे हैं। उम्र के साथ आपको मोतियाबिंद हो गया। तब हमें मोतियाबिंद तो निकालना ही है। उस समय पे भी इन लेंसेस को रिमूव करा जाता है। अगर आंख में से इस लेंस को रिमूव किया गया। आंख आपकी वापस उसी ओरिजिनल स्टेटस में चली जाएगी। माइनस पांच नंबर था तो उतना ही, 10 था तो उतना ही, 15 था तो उतना ही। ओके। ओके।
(52:54) आईसीएल सर्जरीज अधिकतर हाई नंबर्स में किए जाते हैं। क्योंकि हम कॉर्निया को उस लेवल पे नहीं छेड़ना चाहते। नहीं। कॉर्निया में इतनी क्षमता ही नहीं है। आठ नंबर से ज्यादा कॉर्निया हटाने कॉर्निया में से शेव ऑफ करने के बाद वो इतना पतला रह जाएगा वो खराब हो सकता है। हम क्वालिटी ऑफ़ विज़न इतनी खराब आएगी। सो, अप टू सेवेन जिसकी पावर हो उसके लिए अप टू -8 यूजुअली हम लोग करेंगे लेसिक और एनी ऑफ़ द ब्रांड नेम्स ऑफ़ लेसिक। बेसिकली कॉर्निया में लेजर करेंगे। ओके। और एट से अबव आईसीएल के एडवांटेजेस जो हैं वो लेजर से बेटर हो जाएंगे। और ब्यूटी ऑफ़
(53:28) आईसीएल इज़ कि क्वालिटी ऑफ़ विज़ नंबर पे डिपेंडेंट नहीं है। सो ये थोड़ी सी टेक्निकल है बात। -3 का लेसिक के बाद जो क्वालिटी ऑफ़ विज़न आने वाली है क्वांटिटी तो आएगी 6/6, 6/5, -3 की, -6 की, -9 की सभी की लेकिन जो कंट्रास्ट है, जो नाइट ग्लेयर है वो जितना कम नंबर का लेजर करेंगे उतना बेटर होगा। जितना हायर नंबर का लेजर करेंगे कंपैरेटिवली थोड़ा थोड़ा थोड़ा ऐड होता है। आईसीएल में प्रॉब्लम नहीं है। -5, -10, -15, -20 आप जिस भी पावर का लेंस लगाएंगे क्योंकि कॉर्निया अनटच्ड है। तो कंट्रास्ट और क्लेरिटी और शार्पनेस उसमें कोई डिफरेंस नहीं आएगा।
(54:06) यू विल बी सरप्राइज टू नो द हाईएस्ट नंबर जो मैंने ट्रीट किया है आज तक दैट इज -30। ओह वाओ। ठीक है? अब आप सोचो एक बच्चा जिसको -30 नंबर का पावर है। आप इमेजिन कीजिए कि एट -30 उसको क्या दिखता होगा चश्मे के बिना? उसको यहां दिखता है सिर्फ। ये यहां पे पड़ा हुआ ये जो ग्लास भी है ना उसको वो भी ठीक से नहीं दिखेगा। हां। उसको बहुत बाहर जाके देखना पड़ेगा उसके लिए। हम्म। उसकी लाइफ कितनी डिफिकल्ट है। आपको ये पता है चश्मे जो है ना -20 से हायर पावर के मिलते ही नहीं है। बहुत मुश्किल है उसको लेना। -20 पावर का जो चश्मा होता है वो सेंटर से इतना पतला
(54:44) होता है और साइडों से इतना थिक होता है कि अगर आपने उसको जोर से टेबल पर रख दिया तो वो इमीडिएटली क्रैक हो जाता है। तो जो लोग हाई पावर के चश्मे लगाते हैं उनके लिए आईसीएल जादू की तरह काम करता है। इट चेंजेस देम। आप ट्रांसफॉर्मेशन कराते हो लोगों का। मैंने आपके जो व्यूअर्स हैं, जो आपके फॉलोअर्स हैं, उनके कमेंट्स पढ़े हैं। लोग आपसे इतने इंप्रेस्ड है कि आपने उनको डाइट सजेस्ट करी, एक्सरसाइज सजेस्ट करी। उनकी लाइफ चेंज हो गई। यह जो आईसीएल के पेशेंट्स हैं ना -12, -15 वाले, मैंने उनकी शक्ल चेंज होते हुए देखा है। हम जब आप इनको ऑपरेट करते हैं, जब ये फर्स्ट
(55:19) टाइम मेरे पास आते हैं, वो मोटे से चश्मे के पीछे एक बहुत ही सुशील, बहुत बढ़िया इंसान होता है। लेकिन जब वो चश्मा हटाते हैं ना उनके फेस पे एकदम ब्लैंक लुक होती है सिर्फ। म गॉड। क्योंकि उन्होंने आज तक कभी अपने आप को शीशे में देखा ही नहीं। चश्मे के बिना। बट यही बच्चे आईसीएल से 6 महीने के बाद आते हैं तो खिले हुए आते मतलब उसका फेस चेंज हो चुका होता है। देयर इज सो मच ट्रांसफॉर्मेशन दैट कम्स व्हेन यू रिमूव हाई पावर्स इट इज अनबिलीवेबल। और उनके पेरेंट्स से आप सुनो वो बताते हैं कि कॉन्फिडेंस चेंज हो गया। रील्स बनाने लगी वही बच्चे जो पहले उनको
(55:55) बिल्कुल कोई इंटरेस्ट नहीं था। सोशल मीडिया सिर्फ देखते थे। अब क्रिएटर बन गए। यू नो सो इट इट मेक्स अ ह्यूज डिफरेंस। तो फिर लेज़िक करवाना ही क्यों है? व्हाई नॉट जस्ट आईसीएल एंड ऑलवेज आईसीएल इवन विद पावर टू क्यों कॉर्निया को छेड़ना है? जब मैं एक ऐसा लेंस लगवा सकती हूं जिसको जब चाहे निकलवा सकती हूं जिससे कुछ गलत गड़बड़ होने के चांसेस बहुत ही कम है। देन व्हाई नॉट जस्ट आईसीएल देखिए लेजर सर्जरी बहुत ज्यादा आसान है। डॉक्टर्स के लिए डॉक्टर्स के लिए पेशेंट्स के लिए दोनों आंखों की सर्जरी एक साथ ही करी जाती है। कॉस्ट कम है।
(56:28) ओके। बहुत [गला साफ़ करने की आवाज़] फास्ट रिकवरी है। रिजल्ट्स बहुत ही एक्यूरेट है। आईसीएल सर्जरी का अगर डाउन साइड हम लेजर से कंपेयर करें तो इन बेसिव सर्जरी है। हम आंख के अंदर तो जा रहे हैं ना लेजर लाइक अ फुल ब्लोन सर्जरी आईसीएल मतलब चार से पांच ही मिनट लगते हैं उसको भी करने में। समय तो बहुत ज्यादा नहीं है। बट उसमें पूरा सब खुलता है क्या? नहीं खुलने का कुछ भी नहीं। एक बिल्कुल ही छोटे से 2 मिलीमीट
(56:56) र 2.5 मि.मी. के इंसिजन से आंख के अंदर ये लेंस को इंजेक्ट किया जाता है और ये लेंस अंदर जाकर के खुल जाता है और ये अपनी पोजीशन ले लेता है। इट्स अ वेरी वेरी स्मूथ सोफेस्टिकेटेड सर्जरी। बट स्टिल ये सर्जरी आंख के अंदर करी जा रही है ना आप समझिए कि मैं नाखून बाहर से काट रहा हूं। हम या फिर मैं एक पेसमेकर हार्ट के अंदर लगा रहा हूं। ठीक है? अगर दोनों का काम सेम है तो अगर नाखून काटने से हो जाएगा तो ईजी चीज़ जो है उसको तो पहले ट्राई करना चाहिए लेकिन आईसीएल कोई बड़ी चीज कोई मुश्किल नहीं है। ओके यू नो कई हजारों आईसीएल करने के बाद आई एम वेरी कॉन्फिडेंट अगर मेरे बच्चों को
(57:34) भी चश्मा होगा फ्यूचर में तो उनका लेजर या आईसीएल सर्जरी करने में मुझे बिल्कुल भी हिचक नहीं होगी। इतने सालों का इतना अच्छा डाटा और इतना सब कुछ हमारे सामने है। दीज़ आर वेरी वेरीरी सेफ प्रोसीजर्स। थोड़ा सा आई वांट टू डिस अ लिटिल बिट मोर अबाउट लेज़िक सर्जरी क्योंकि बहुत सारे टाइप्स की लेज़िक होती है। अभी स्माइल सिल्क एपिक कॉनरा और अभी आजकल ये वेव लाइट द मोस्ट रीसेंट वन इज आल्सो ट्रेंडिंग तो क्या ये बस एवोल्यूशन है एववोल्यूशन ऑफ लेजिक सर्जरी आर दी डिफरेंट वन बेटर देन दी अदर देखिए इनकी ब्रांडिंग तो बहुत अच्छी है सबको पता चल रहा है कि कौन सी मशीनें हैं।
(58:16) बट एक्चुअली ये जितनी चीजें हैं ना इसमें टेक्नोलॉजीस बहुत थोड़ी हैं और ब्रांड नेम ज्यादा है। इनको ऐसे करके समझाया जा रहा है जैसे ये फर्स्ट जनरेशन है, ये सेकंड जनरेशन है, ये थर्ड जनरेशन है। ऐसी चीजें नहीं है। पहली बात तो ये है सभी लेजर्स का प्रिंसिपल एक ही है कि कॉर्निया में से नंबर हटाते हैं। हम अब कॉर्निया में से नंबर हटाने के लिए हम एक्सेस कैसे कर रहे हैं कॉर्निया को? ओके? उसकी बात है। एक एग्जांपल सिंपल सा दूंगा मैं। एक बुक है। हम मान लो कि वही हमारा कॉर्निया है। हमें उसके कुछ पेजेस रिमूव करने हैं। हम ठीक है? और ये पेजेस हमें बीच में से
(58:50) निकालने हैं। हम अब इसको निकालने के तीन तरीके हो सकते हैं। हम ऊपर से लेजर करके हम बुक का कवर भी उड़ा दें और कुछ पेजेस भी जला दें। और ये कवर की एक प्रॉपर्टी है कि ये रीजनरेट हो जाता है। ओके। ठीक है? तो ये है सरफेस प्रोसीजर जैसे कि अभी कॉन्टोरा जिसका आपने नाम लिया। दूसरा है लेसिक जो कि सबसे पॉपुलर है। इतने सालों से चल रहा है। इसमें हमने कवर को खोल दिया। फिर लेजर किया और इस फिर इस फ्लैप को वापस रख दिया। ओके। ठीक है? इसमें आ जाते हैं वो प्रोसीजर जिनके आपने नाम लिए जैसे कि कॉन्टूरा विज़ या वेवलाइट। ये एक्चुअली ब्रांड नेम्स
(59:29) हैं। लेजर के ये मशीनों के नाम है। लेजर प्रोग्राम्स के नाम है। बट एक्चुअल प्रोसीजर तो या तो सरफेस प्रोसीजर है पीआरके या तो फ्लैप वाला प्रोसीजर है लेसिक। पीआरके के कुछ एडवांटेजेस हैं कि टोटल कॉर्निया जो बचता है उसकी थिकनेस ज्यादा होती है। लॉन्ग टर्म सेफ्टी उसमें ज्यादा है। लेकिन डिसएडवांटेज ये है कि इसमें पहले तीन-चार दिन तक थोड़ा पेन रहता है। विजुअल रिकवरी में दो-ती हफ्ते का समय लगता है। लेकिन ये अनडिटेटक्टेबल है। सो बहुत सारे लोग जो कि मेडिकल टेस्ट पास करने के लिए ऑपरेशंस कराते हैं दे चूज़ दिस कि मैं 2 महीने पहले ऑपरेशन कराऊंगा।
(1:00:02) लेकिन फ्यूचर में डिटेक्टेबल नहीं होना चाहिए। अधिकतर पेशेंट्स जो ऑपरेशन कराते हैं वो लेसिक ऑपरेशन है। लेजर सर्जरी इतनी पॉपुलर हुई ही फ्लैप की वजह से। फ्लैप का बेनिफिट यह है कि सिर्फ फ्लैप के एज पे हीलिंग होनी है। जिसको सिर्फ 4 घंटे लगेंगे। आपका ऑपरेशन मैंने किया शाम को 5:00 बजे। रात को 9:00 बजे आपका डिसकंफर्ट खत्म हो जाएगा। आपको दिखने लगेगा। मे बी स्लाइटली फॉगी। बट व्हेन यू वेक अप नेक्स्ट मॉर्निंग द विज़न विल बी वेरी-वेरी क्रिस्टल क्लियर। और जो रिजल्ट आपको नेक्स्ट डे मिलेगा यह लाइफ लॉन्ग रहेगा। इसके चांसेस 99% से ज्यादा है।
(1:00:35) सो लेसिक प्रोसीजर्स और फ्लैप प्रोसीजर्स दैट इज माय बेस्ट माय फेवरेट चॉइस। अब सिल्क स्माइल ये एक थर्ड वे है चश्मा हटाने के। इसके अंदर जो हमारा यही किताब के बीच के जो पेजेस हैं उसको बिना फ्लैप खोले लेजर से दो लेवल्स पे मार्क कर दिया और पिंच करके नोच करके निकाला जा रहा है। इन थ्यरी बहुत अच्छा है। इसकी मार्केटिंग बहुत ही स्ट्रांग है। इसकी कुछ कमियां है जो कि मुझे कम पसंद है। इसकी एक्यूरेसी और क्वालिटी ऑफ़ विज़न सरफेस और फ्लैप प्रोसीजर से कुछ कम है। इसमें कुछ ड्राई आई कम होती है। ये इसका बेनिफिट है। चोट लगने पे हमने कुछ छेड़ा ही नहीं। फ्लैट पे टच भी
(1:01:13) नहीं करा। सो बिकॉज़ इसके अंदर कॉर्नियर नर्व्स का डिस्टर्ब डिस्टरबेंस कम है। उस पॉइंट ऑफ व्यू से। बट मुझे लगता है कि जो मेरे से चश्मा हटवाने के लिए आया है, उसके लिए क्वालिटी ऑफ़ विज़न, सबसे प्रिस्टीन होना, एक्यूरेसी ऑफ़ सर्जरी सबसे प्रिस्टीन होना, दैट इज द फर्स्ट लाइन ऑफ़ थॉट। बट देखिए, दिस इज़ बायस्ड। हम यह जो सवाल है ना वो यह है कि हल्दीराम से आप पूछ रहे हो बर्फी किसकी बेस्ट है? भाई मैं फ्लैप प्रोसीजर करता हूं तो मेरे लिए तो वही बेस्ट है। जो स्माइल प्रोसीजर करता है वो बोलता है वही बेस्ट है। आपको जिसमें फेथ हो आप उसको
(1:01:46) कीजिए। मैं पर्सनली ये बता सकता हूं कि मोर देन 100 आई डॉक्टर्स या उनके बच्चों का मैंने फ्लैप बेस्ड प्रोसीजर अपने हाथों से किया है और मैं यह भी बता सकता हूं कि मैं आज तक भी पर्सनली किसी को ना आई डॉक्टर ना ही उनके किसी बच्चे को जानता हूं जिन्होंने स्माइल सर्जरी सिल्क सर्जरी या ये लेंटिक्यूल प्रोसीजर्स बोलते हैं इनको जो पिंच करने वाले हैं वो कराया हो। अब आपने एक नाम लिया वेव का। वेव लाइट के ऊपर इतनी मार्केटिंग है। एआई वाला लेसिक फ्यूचर प्रूफ लेसिक हम फ्यूचर मतलब ये आपकी आज की नजर हटाएगा। फ्यूचर की भी हटा देगा। और ये कुछ क्रांति
(1:02:24) आ गई है। वेव लाइट लेजर मशीन का नाम 2013 से इंडिया में है। इंडिया में हमारे पास भी है। और लेकिन हम इसको इस तरह से मार्केट नहीं करते। आज की डेट में दिल्ली में 30 आई सेंटर्स हैं जहां लेसिक सर्जरी होती है। उनमें से 10 के पास वेवलाइट मशीन है। वेवलाइट मशीन के कुछ बहुत अच्छे फीचर्स हैं। हम उसका यूजर इंटरफेस बहुत अच्छा है। उसकी मेंटेनेंस बहुत आसान है। ये आप मशीन की बात कर रहे हो। हां। तो से एंड यूजर का कोई लेना देना? मतलब ये नहीं है। वो गाड़ी है जिसका ओनर और ड्राइवर को तो बहुत मजा आएगा। लेकिन [हंसी] अगर आपका पर्पस सिर्फ पॉइंट ए से पॉइंट पी पे जाना
(1:03:05) है। और आपके लिए मशीन सिर्फ टैक्सी है तो आपको वेवलाइट से कोई मतलब नहीं है इन रियलिटी। सो इट्स अ वेरी गुड मशीन। इट्स अ वेरी गुड टूल। बट उसको जो जिस तरह से मार्केट करा जा रहा है वो थोड़ा अनफॉर्चूनेट है। कुछ हम भी डॉक्टर्स शायद इसको फोमो की तरह दिखा रहे हैं। ये उससे 6/6 होगा। इससे 6/5, 6/4, 6/3 डॉक्टर्स को ऐसा बोलना शोभा नहीं देता है। डू यू मीन वो क्लेम्स गलत है? देखिए क्लेम्स गलत हो या नहीं हो हम हमारा काम है आई केयर देना एजुकेट करना करेक्टली फोमो क्रिएट करना स्पेशली यंग लोगों में 20 से 25 साल वालों की उम्र में हम हम
(1:03:44) और फिर उसी टेक्नोलॉजी को महंगा करके डेढ़-ढ़ लाख दो-दो लाख के पैकेजेस बनाना आई थिंक एट सम लेवल इट्स नॉट ग्रेट। देखिए एक एक पेशेंट है जो चश्मा हटवाना चाहता है। उसके पास इतने सारे ऑप्शंस हैं। इतने सारे अच्छे आई डॉक्टर्स हैं। सभी लोग अच्छी इक्विपमेंट, अच्छी लेजर मशीनंस यूज़ करते हैं। लेकिन उसको इतना ब्रांडिंग में कोट कर देना कि ये वेवलाइट वाला, एआई वाला, ईगल विज़न वाला है। हमने अपना डाटा देखा। ₹9% से ज्यादा पेशेंट्स को फर्स्ट डे पे 6/6 विज़न आता है। सिंपल लेसिक की बात कर रहा हूं। एक सिंपल ₹0000 का प्रोसीजर नथिंग हाईाई नो हाईफाई लेजर
(1:04:23) प्रोग्राम वी यूज़ द वेवलाइट प्लेटफार्म 6/5 जो उससे एक लाइन बेटर होती है जिसको लोग सुपरविज़न क्लेम करते हैं हम ये 90% से ज्यादा लोगों में आता है। 6/4 कुछ लोग इसको ईगल विज़न क्लेम करते हैं। ये 60% ऑफ़ पेशेंट्स में आता है। जस्ट एज इट इज़। लेकिन अगर हम इसको इस तरह से बेचने लगे कि आप यह वाला प्रोसीजर कराओगे इसमें 6/4 आएगा। इसमें 6/3 आएगा तो कहीं ना कहीं हम एक डिसर्विस कर रहे हैं। मेरा पर्पस यह है कि भ आपको चश्मा हटवाना है। आपको चश्मे जितनी अच्छी नजर या उससे थोड़ी बेटर अगले दिन से मिल सके उसके लिए मेरे पास जितनी टेक्नोलॉजी है मैं वो सब लगा दूं और आपको
(1:05:05) अच्छे से अच्छा रिजल्ट दूं। और अगर आपकी आंख में 1% रिस्क है तो आपकी सर्जरी एकदम ना करूं। आपको पहले ही उसके लिए एजुकेट करूं कि प्लीज बॉस मत कराना। मेरे से नहीं, किसी से भी नहीं। आपके लिए प्रोसीजर प्रोसीजर्स अच्छे नहीं है। और मैं किसी को डाइट प्लान बनाकर दे रही हूं। एक मैं बोल रही हूं कि इससे आपका वेट लूज होगा और दूसरे डाइट प्लान से आपका वेट लूज भी होगा। आपकी स्किन भी ग्लो करेगी। तीसरे से आपकी स्किन भी ग्लो करेगी। आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा। एक्चुअली तो वो फर्स्ट डाइट प्लान से भी स्किन ग्लो करेगी। अगर आप अच्छा खा रहे हो तो आपका
(1:05:33) कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। तो सारे पर्पस सॉल्व एनीवे होने ही हैं। इट इज जस्ट दैट कि माय डिफरेंट डाइट प्लान्स आर मार्केटेड डिफरेंटली। करेक्ट। और उसमें लास्ट वाले डाइट प्लान में आप डालोगे चिया सीड, किनोवाकाडो जो फैंसी नेम होंगे फिर वो फैंसी एक्सपेंस पे बिकेगी। हम लोग डॉक्टर इसके लिए नहीं बने थे। नहीं डाइटिशियनंस भी इसके लिए नहीं बने। [हंसी] वी डोंट डू दैट। ट्रू। मतलब यह कोई और प्रोडक्ट के लिए यह चल सकता है। भाई एक फ़ ऐसे बेचा जा सकता है। 16 Pro, 17 Pro, 18 Pro यह लेजर प्रोसीजर्स वंस इन अ लाइफ टाइम है। एक अच्छे ट्रस्टेड डॉक्टर के पास
(1:06:09) जाइए। अगर आपको उनकी सारी बातें जची। उन्होंने आपसे प्रोज़ एंड कॉर्न सारे डिस्कस किए और आप जाओगे भी उनके पास सिर्फ तभी हम क्योंकि आपके पास एक फर्स्ट हैंड रेफरेंस होगा किसी का बहुत अच्छे ट्रीटमेंट का। इसके बिना मैं इतने सालों में मैंने किसी को नहीं देखा जो अपने घर से उठ के रील देख करके डॉक्टर के पास पहुंच जाए कि मुझे ऑपरेट आप ही से कराना है क्योंकि मुझे जम गया कि आपकी टेक्नोलॉजी जो है वो बेस्ट है। एट द एंड ऑफ द डे आपको उसको ट्रस्ट करना होगा। एंड देन इट शुड बी अ म्यूचुअली वेल वेल एजुकेटेड डिसीजन इनफॉर्म डिसीजन। लोगों का अभी इतनी जो
(1:06:46) टेक्नोलॉजी है एडवांस कर चुकी है। हमारे पास इतने टाइप के प्रोसीजर्स हैं। मैंने ऑब्जर्व किया कि अभी भी ना लोगों को डर है ये ट्रीटमेंट लेने के लिए। मतलब अभी भी इतने लोग हैं जो चश्मा लगाते हैं और उसमें से बहुत लोग हैं जो अफोर्ड भी करते हैं। बट तब भी क्यों नहीं करवाते? सो देखिए अगर किसी को चश्मा लगाना पसंद है। तो उसको तो लेजर सर्जरी कराने की जरूरत ही नहीं है। लेजर सर्जरी इज अ चॉइस। जिसका मन है चश्मा हटाने का उसी को करने की जरूरत है। जो डर की आपने बात करी डर बहुत रियल चीज है। किसको किस चीज से डर लगता है ये बताना बहुत मुश्किल है।
(1:07:21) हम द फियर ऑफ़ द अननोन इज वैरी बिग। आई थिंक इट्स इट्स मोस्टली दैट। नहीं आप देखो एक आंख एक बहुत सेंसिटिव चीज है। उसका ऑपरेशन कराना मेंटली सोचना ही बहुत टफ है लोगों के लिए। लेकिन जब आप देख लेते हो ना अपने पड़ोसी को कि गए 15 मिनट में ऑपरेट कराया उसके बाद अगले दिन सुबह से बिल्कुल क्लियर दिख रहा पूछा दर्द हुआ तो वो कहता है नहीं मेरा तीन साल का बेटा है मुझे अभी भी याद है जब उसके नाखून काटने होते थे हम तो वो कितना रोता था अब आप मुझे बताइए कि आपने अपनी लाइफ में अपने नाखून कितनी बार काटे होंगे 500 बार हम मैंने उससे 200 गुना सर्जरी करी है नाखून
(1:07:59) काटने में कोई कॉम्प्लिकेशन हो सकता है हो सकता है क्या हो सकता है आप गलती से उंगली भी काट सकते हो ब्लीडिंग हो सकती है, इनफेक्शन हो सकता है। ऐसे सर्जरी में भी कॉम्प्लिकेशन होने को तो हो सकता है। बट एक एक्सपीरियंस हैंड्स में द चांसेस ऑफ़ हैविंग अ कॉम्प्लिकेशन इज़ क्लोज टू ज़ीरो। और अगर कुछ होगा तो एक एक्सपर्ट उसको इज़ली मैनेज करेगा। उसका ट्रीटमेंट सही सही डायरेक्शन पे करेगा। उसको आप करेक्टली इनफॉर्म करेगा। सो ये जो फियर्स हैं ये ह्यूमन नेचर है। हम लेकिन ये फियर्स लोगों के अपने दिमाग में बहुत बड़े बना लेते हैं। चश्मा हटाना बहुत
(1:08:28) ज्यादा इजी है। लेजर सर्जरी इज़ वेरी वेरीरी ईजी। 10 मिनट प्रोसीजर टोटल हॉस्पिटल स्टे टू आवर्स रिकवरी विद इन वन डे। सो देयर इज लाइक ऑलमोस्ट नो डाउन टाइम। या एकद दिन के हम आपको कुछ प्रिकॉशन बताएंगे कि दो दिन के लिए गले से नीचे-चे नहाना, फेस स्पोंज कर लेना। यू नो शुरू के पहले दो-तीन दिन में कुछ आई ड्रॉप्स थोड़े फ्रीक्वेंटली डालने होंगे। आइज में चोट-वोट ना लगे इस चीज से बचा लेना। नलके का पानी आंख में ना चले जाए। कहीं कोई इनफेक्शन ना हो जाए। दीज़ आर सम बेसिक प्रिकॉशन। बट यू कैन सी फ्रॉम द नेक्स्ट डे। ओके। यू कैन गो आउटडोर्स। यू डोंट हैव टू वेयर
(1:08:58) सनग्लासेस। हर समय चश्मा लगाने की जरूरत नहीं है। आप फोन देख सकते हो, लैपटॉप देख सकते हो, कंप्यूटर देख सकते हो, आप कुछ भी देख सकते हो। आप धूप में जा सकते हो। हम आप मूवी देखने जा सकते हो। सो ये सभी चीजें मतलब देयर इज प्रैक्टिकली इट इज वेरी वेरी कंफर्टेबल। एंड इफ एट ऑल इफ एट ऑल सर्जरी में कुछ गड़बड़ हो जाए तो क्या वो इंसान अपनी विज़न हमेशा के लिए लूज़ कर सकता है? इज दैट आल्सो पॉसिबल? अब लेजर सर्जरी को आज 35 साल हो गए हैं। हम और वेल रिपोर्टेड होता है। अगर मेरा कोई पेशेंट हो होगा ऐसा कभी टच मेरे लाइफ टाइम में ऐसा ना हो बट किसी पेशेंट के साथ कोई
(1:09:37) इतना बड़ा कॉम्प्लिकेशन हो गया कि उसकी विज़न थ्रेटनिंग हो गई या जाने वाली है या चली गई तो मेरा ये रिस्पांसिबिलिटी बनता है कि मैं इसको पब्लिश करूं विश्व भर के आई डॉक्टर्स को इसके बारे में पता चले। ऐसी रिपोर्ट्स पूरे वर्ल्ड में पिछले 35 साल में एक आधी है। ठीक है? आप समझिए व्हाट इज व्हाट कैन गो रॉन्ग। थ्री थिंग्स जो कि रेयर रेस्ट ऑफ रेयर कॉम्प्लिकेशंस फर्स्ट केस सिारियो ऑपरेशन के दौरान कोई हादसा हम ऑपरेशन के बाद कोई इंफेक्शन ओके या कोई ऐसी दवाई ऐसा रिएक्शन कर गई जो हम एक्सपेक्ट नहीं कर सकते थे इस चीज का चांस 10 से 2000 आईज में से एक में होगा दैट इज
(1:10:19) 0.0001 टू 0.002 वेरी वेरी रेयर यू नो और अगर ऐसा कुछ होगा तो इनसे भी ब्लाइंडनेस होगी। यह वन ऐसे 10,000 केसेस में से एक को कंप्लीट ब्लाइंडनेस बिकॉज़ यह बहुत अर्ली डिटेक्ट होगा। उसी समय पे उसके करेक्टिव एक्शन एंटीबायोटिक मेडिसिनस या कोई भी चीज शुरू करी। हां, ऐसा हो सकता है कि वर्स्ट केस में किसी पेशेंट की थोड़ी सी विज़न करेक्शन पूरी 100% नहीं हुई। कुछ नंबर रह गया। हम कुछ थोड़ा सा विज़ डैमेज हो गया। दीज़ आर वेरी रेयर पार्ट्स बट इट कैन हैपन। बट कंप्लीट ब्लाइंडनेस नहीं होगा। इस चीज से डरना उतना ही डर मतलब यह तो उतना ही डर है कि अगर मैं सड़क
(1:11:01) पे चलूंगा तो एक्सीडेंट होएगा तो मैं मर जाऊंगा। आई वास गोइंग टू से दैट कि इससे ज्यादा रिस्क फैक्टर तो सड़क पे निकलने में देखो मैं मेरे पेशेंट्स को हमेशा ये एग्जांपल देता हूं। अगर आपने सड़क क्रॉस करनी है तो एक्सीडेंट का रिस्क तो लेना होगा। अगर आप घर बैठे रहेंगे तो आपको रोड एक्सीडेंट नहीं हो सकता लेकिन आप सड़क के उस पार भी नहीं पहुंचेंगे। इस तरह की चीजें यूजुअली सिक्स सिग्मा सर्टिफाइड होती हैं। क्या ये टेक्नोलॉजीस भी सिक्स सिग्मा सर्टिफाइड होती है? यस ऑफकोर्स देखिए विश्व भर में सिर्फ चार या पांच ऐसी कंपनीज हैं जो कि लेजर मशीनंस बनाती हैं।
(1:11:32) हम ये सभी मशीनंस जो है एफडीए अप्रूव्ड होती है। हम एफडीए अप्रूवल के लिए इनको 12 13 साल की रिसर्च डाटा दिखाना पड़ता है कि ये एक्सजेक्टली उतनी सेफ है। एग्जैक्टली जो नंबर ट्रीट करने वाले हैं वही करेंगे। हर सर्जरी हर दिन से पहले इसमें एक कैलिब्रेशन टेस्ट किया जाता है जिसमें कि हम एक लेंस लगा के उस पे लेजर फायर करते हैं और चेक करते हैं कि अगर हमें एग्जैक्टली 3.
(1:11:59) 00 नंबर हटाना है तो क्या वो 3.00 आज भी हटा रही है इंस्पाइट ऑफ व्हाट इज द टेंपरेचर इंस्पाइट ऑफ व्हाट इज द ह्यूमिडिटी इन दैट रूम प्रोटोकॉल नो वो काम ही नहीं करेगी मशीन हां मशीन का फर्स्ट स्टेप ही है जैसे आप फोन ऑन करते हो पहले उसका एप्पल घूमता है ना पहले उसकी चकरी घूमती है वो फोन अपने इंटरनल सारी सारी चीजें चेक करता है। उसके बाद ही चालू होता है। नहीं तो वो एरर दे देगा। मशीनंस भी इसी तरह से काम करती है। सो दिस इज़ दिस इज़ वेरी वेरीरी एक्यूरेट टेक्नोलॉजी एंड इट 35 इयर्स ओल्ड टेक्नोलॉजी। इट्स वेल एस्टैब्लिश्ड। लेज़िक में नेक्स्ट ब्रेक थ्रू क्या आने
(1:12:31) वाला है? लेसिक में रोज बहुत सारे नए-नए ब्रेक थ्रूज आ रहे हैं। जितने ब्रेक थ्रूज आ रहे हैं उससे ज्यादा नए नाम आ रहे हैं। राइट? आपने इतनी सारे नामों की मुझे लिस्ट बताई। अ कंटूरा वे लाइट सिल्क स्माइल क्लियर कितने ही नाम आ रहे हैं हम मेरी ऑनेस्ट ओपिनियन ये है लेसिक टेक्नोलॉजी अपने पीक पे पहुंच गई थी आज से 20 साल पहले और उसके बाद से ये प्लैटो हो गई है इसमें और स्कोप नहीं है अगर क्रिकेट की पिच पे आप शॉट खेल रहे हो तो छह रन से ज्यादा लेने का स्कोप नहीं बचा है। हां बैट हल्का हो सकता है। हम ठीक है और चीज़ कंफर्टेबल हो सकती है। सो
(1:13:11) मशीनंस बेटर हो रही है डॉक्टर्स के लिए। द इक्विपमेंट इज़ गेटिंग बेटर। प्रोसीजर्स आर गेटिंग फास्टर एंड यू नो एक्यूरेसी इज़ गेटिंग जस्ट दैट लिटिल लास्ट माइल लास्ट लिटिल बिट बेटर। बट बाय ए लार्ज आई थिंक वी आर एट द कस्टम ऑफ जितना पॉसिबिलिटी है हम ऑलरेडी अचीव कर रहे हैं। और अभी से नहीं पिछले 10 से 12 साल से कर रहे हैं। आई वांट टू आस्क फ्यू मोर क्वेश्चंस अराउंड आईसीएल। क्योंकि इसमें हम एक एक्सटर्नल लेंस लगा रहे हैं। तो इस लेंस को कुछ आफ्टर एक बार एक बार हमने इंस्टॉल कर दिया। उसके बाद इसको कुछ मेंटेनेंस, क्लीनिंग कुछ इस तरह
(1:13:51) के रिक्वायरमेंट्स भी होती है या फिर वंस डन इट्स डन फॉर ऑल। बिल्कुल भी नहीं। हमने एक बार सर्जरी करी 5 मिनट की सर्जरी। हम टोटल हॉस्पिटल स्टे दो घंटे का। अगले मॉर्निंग से आपको बिल्कुल क्लियर दिखेगा। ये लेंस आपकी आंख में चला गया। सही स्टेबल अपनी पोजीशन में है। यह लाइफ लॉन्ग ऐसे ही रहने वाला है। ना आपको कभी फील होगा ना सामने वाले को कभी दिखेगा और ना आपको इसका कोई मेंटेनेंस करना है। ओके? ठीक है? इट इज वेरी वेरीरी स्टेबल वेरी गुड। ओके? अगर आप आईसीएल का हिस्ट्री देखो हम। सो आंख में चश्मा हटाने के लिए लेंस लगाया जाए। ये आईडिया इज नॉट न्यू। पिछले 50 साल
(1:14:28) में आई थिंक 1980 से कई तरह के लेंसेस ट्राई किए गए। दिस इज इवन बिफोर लेजर। लेजर आया है 90ज में। 80 से ही डॉक्टर्स कोशिश कर रहे थे कि आंख के अंदर डिफरेंट-डिफरेंट पोजीशंस में विद इन द आई इनसाइड द आई सर्जिकली एक लेंस लगा के चश्मे का नंबर हटाएं। हम प्रॉब्लम ये थी कि वो जो लेंस के मटेरियल्स थे और वो जो लेंस की पोजीशंस थी वो अच्छी नहीं थी। कोई भी जो लेंस आता था कोई कैटक कर देता था। कोई लेंस ग्लूकोमा कर देता था। कोई लेंस कॉर्निया खराब कर देता था। वो लेंस विद इन वन टू टू इयर्स विथड्रॉ हो जाते थे। जब आते थे उस समय तो बड़ा शोर
(1:15:05) होता था कि नेक्स्ट ब्रेक थ्रू माइनस 10 नंबर का चश्मा हट सकता है अब इस लेंस से। लेकिन विद इन टू इयर्स रियलाइज हुआ कि नहीं यार ये लेंस तो फेल है। उसके बाद लेजर सर्जरी आ गई व्हिच वास सो सक्सेसफुल। तो हम 8 9 10 11 12 नंबर तक का लेजर करने लगे। हम 2006 में आईसीएल का लेंस आया है और 2006 से आज हम 2026 में यह लेंस का सेम मटेरियल सेम डिजाइन एज इट इज स्टेबल है। इसके साथ ना ग्लूकोमा हो रहा है ना कैटक्ट हो रहा है ना कोई कॉर्निया की प्रॉब्लम हो रही है। और 20 इयर्स के बाद भी मेरे 2006 के देखिए करे हुए पेशेंट्स तब के ऑपरेटेड
(1:15:39) पेशेंट्स आज भी हमारे साथ फॉलो अप में है और उनका लेंस और उनकी आंख एकदम ऐसे लगती है जैसे कल ही ऑपरेट हुई थी। तो उसमें कोई प्रॉब्लम ही नहीं है। सो दी आर वेरी वेरीरी स्टेबल एंड एक्सीलेंट लेंसेस। देयर यूएसएफडी अप्रूव्ड एंड सो दे हैव गॉन थ्रू द रिसर्च आल्सो। एव्री आई डॉक्टर सेस कि 40 के बाद तो आपको पास का चश्मा लगना ही है। व्हाई इज दैट? सो द प्रॉब्लम इज कि इसमें अब आई बॉल का साइज स्टेबल है। कॉर्डिया का पावर स्टेबल। बट आंख के अंदर का जो नेचुरल लेंस है, उस लेंस को के अंदर एक मैकेनिज्म होता है ऑटोफोकस का। इसको हम अकोमोडेशन बोलते हैं।
(1:16:14) एक्टिविटी बताता हूं। जो लोग अभी हमें स्क्रीन पे देख रहे हैं वो अपने सामने की दीवार की तरफ देखें और स्क्रीन हाथ में रखें तो उनको दिखेगा कि फोन धुंधला हो गया। अभी फोन की तरफ देख रहे हैं अगर तो पीछे की दीवार धुंधली है। ऑटो फोकस फोकस ये पोर्ट्रेट मोड जो है हमारी आंख कर रही है। ये कैसे कर रही है? यह इसलिए करनी है क्योंकि हमारी आंख के अंदर का जो लेंस है वह अपना पावर चेंज कर सकता है। जैसे आप कैमरामैन को देखते हो वैसे करके फोकस करता है ना हमारी आंख खुद ब खुद उस चीज को एडजस्ट कर लेती है। एडजस्ट करती है। ये जो अकोमोडेशन की पावर है जिस मसल से
(1:16:46) होती है ये मसल अपनी स्ट्रेंथ 40 के बाद लूज करना शुरू करती है। इस प्रॉब्लम को ना लेजर ना आईसीएल नहीं ट्रीट कर सकता। ओके? क्योंकि इस ऑटो फोकस के मैकेनिज्म के चेंज होने की वजह से आपका दूर और पास का नंबर अलग-अलग हो गया। अच्छा अब लेजर और आईसीएल एक ही नंबर ट्रीट कर सकते हैं। या तो दूर का या तो पास का क्योंकि 40 तक एक ही है तो दोनों हटे रहते हैं। इतनी एडवांसमेंट्स हो रही हैं। क्यों नहीं दोनों नंबर फिक्स हो सकते? मतलब अभी हमारे पास सॉल्यूशन नहीं है। बट कैन वी एक्सपेक्ट कि फ्यूचर में कोई ऐसा सॉल्यूशन आएगा जब ये वाली प्रॉब्लम को भी हम फिक्स
(1:17:24) कर लेंगे। ऐसा तो नहीं है कि ये टेक्नोलॉजी हमारे पास नहीं है। दूर और पास का हम चश्मे का नंबर आज भी हटा सकते हैं। इसके लिए हमें फ्यूचर की वेट करने की जरूरत नहीं है। देन व्हाट इज स्टॉपिंग? सो अधिकतर लोग जो चश्मा हटवाने वाले हैं वो आते हैं इन देयर 20 और 30 हम क्योंकि उनका दूर और पास दोनों का नंबर सेम है। हम उनकी अकोमोडेशन दूर और पास का फोकस करने की एबिलिटी इंटैक्ट है। तो सिंपलेस्ट स्यूशन इज़ लेजर और आईसीएल। बट जब कोई अपने 45 50 55 की एज में चश्मा हटवाने की सोचता है। तो उनके केस में जो सर्जरी करी जाती है उसको हम बोलते हैं आर एलई सर्जरी या
(1:18:03) रिफ्लेक्टिव लेंस एक्सचेंज जिसके अंदर प्रॉब्लम हमारे आंख के अंदर के लेंस में है ना तो हम उस लेंस को निकाल देते हैं और उसकी जगह एक दूसरा लेंस लगा देते हैं और ये मल्टीफोकल लेंस होता है। ये वंस इन अ लाइफ टाइम लेंस है। ये परमानेंटली हमेशा आपकी आंख में रहेगा। बिकॉज़ कैटक्ट में भी हम यही कर रहे हैं। उस लेंस को चेंज कर रहे हैं। सो, अगर आंख के लेंस में धुंध आ गई, तो हम उसको बोलते हैं कैटक्ट। ऑपरेट करके उस लेंस को निकाल दिया और उसकी जगह दूसरा लेंस डाला। दिस इज कैटक सर्जरी। अगर ये लेंस मल्टीफोकल होगा तो ये दूर और पास दोनों का नंबर हटा देगा।
(1:18:34) अगर आपके आंख में अभी कैटक्ट नहीं आया बट हमने ये आपके नेचुरल लेंस को निकाल के मल्टीफोकल लेंस डाल दिया तो आपका दूर और पास का दोनों का नंबर हट जाएगा। इसको हम बोल देते हैं आरएल ई सर्जरी। आरएल सर्जरी के बाद आपको कैटक्ट दोबारा कभी आने वाला नहीं। सो हर कोई मल्टीफोकल लेंसेस ही क्यों नहीं लगवाता फिर? मॉडर्न कैटक सर्जरी हैज़ बीन अराउंड फॉर नाउ 50 इयर्स। हम जिसके अंदर से कि आंख के अंदर का कैटर निकाल दिया जाता था टिल इन 70 एंड 80। उस टाइम पे हमारे पास टेक्नोलॉजी नहीं थी कि आंख में लेंस डाला जा सके। हम तो जैसे आप देखते हो ना मोटे-मोटे चश्मे
(1:19:07) लगाते थे हमारे ग्रैंड फादर्स या ग्रेट ग्रैंडफादर्स के टाइम पे या जैसे हेराफेरी में बाबूराव जी के मोटे परेश रावल जी ने चश्मे पहने हैं हम वो वो है कि कैटक निकल गया और लेंस नहीं लगा। समटाइम इन द 90ज लेंसेस आए जो कि आंख में कैटक को रिप्लेस करके लेंस लगाया जाता था। एक्यूरेसी पावर की उतनी नहीं होती थी। पेशेंट को दूर और पास दोनों के चश्मे की नंबर की जरूरत होती थी। अब सिंस लास्ट 15 20 इयर्स एक्यूरेसी इज वेरी हाई हम और आंख में डलने वाले लेंस के साथ सभी पेशेंट्स का दूर का चश्मे का नंबर हट जाता है। लेकिन अकोमोडेशन अभी भी नहीं आया।
(1:19:45) पेशेंट को दूर के साथ-साथ हम हम पास का भी देखना है। अब पास के लिए कैट सर्जरी के बाद लोगों को रीडिंग क्लास लगाना पड़ता है। अगर हम मोनोफोकल या सिंगल फोकस का लेंस यूज़ करें। यह लेंस अगर हम मल्टीफोकल यूज करेंगे या आजकल इडफ लेंसेस है एक्सटेंडेड डेप्थ ऑफ फोकस लेंसेस तो यह दोनों काम कर सकते हैं दूर और पास के बट देयर इज नो फ्री लंचेस एक मोनोफोकल लेंस पूरा लेंस दूर की विज़न बहुत अच्छी देता है और जब चश्मा लगा लो तो वही पूरा लेंस पास की विज़न बहुत अच्छी देता है मल्टीफोकल और इड ऑफ लेंसेस लाइट को डिवाइड करते हैं। ओके दूर की विज़ का थोड़ा सा कंट्रास्ट चुरा के
(1:20:22) नाइट विज़न की क्वालिटी थोड़ी सी चुरा के पास की बड़ी अच्छी विज़न दे देते हैं। ओके ये चीजें अ लेडीज को बहुत पसंद है। देखिए कोई भी आज इंडियन ग्रेनी साड़ी पहनने के बाद चश्मा नहीं लगाना चाहती। ना दूर का ना पास का। तो अमंग लेडीज इट इज वेरी पॉपुलर कि कैटर सर्जरी के अंदर मल्टीफोकल लेंस यूज़ किया जाए। यह लेंजेस थोड़ा सा नाइट ड्राइविंग में तंग करते हैं। तो मेल पेशेंट्स इसको थोड़ा अवॉइड करते हैं। बट वी हैव द टेक्नोलॉजी अवेलेबल। सो जो भी चाहे वो इसको ऑप्ट करके दे कैन गेट रिड ऑफ देयर ग्लासेस फॉर एवर बीड पास का या दूर का। दैट इज ट्रू। एंड टेक्नोलॉजी अवेलेबल नहीं
(1:21:05) है। करते ही है। हम जितने लोगों की कैट सर्जरी करते हैं एज अ साइड इफेक्ट उसमें से 90% लोगों का दूर का चश्मा हट जाता है। हम जो लोग ऑप्ट करते हैं व्हिच इज अबाउट 20 टू 30% पेशेंट्स उनका दूर और पास दोनों का चश्मा हट जाता है। सो जो आपने आरएलई के बेनिफिट्स बताए इफ इट इज सो गुड देन व्हाई डोंट वी जस्ट गो फॉर आरएल? व्हाई डू वी गो फॉर लेसिक और आईसीएल? आरएल इज वेरी गुड प्रोसीजर फॉर समवन हु इज लुकिंग फॉर स्पेक्स रिमूवल आफ्टर द एज ऑफ़ 45 और 50 हम बट आरएलई में तो कुछ कॉम्प्रोमाइज हैं जो हमें करने होते हैं। एंड आर एलई में कभी कैटक्ट भी नहीं होगा।
(1:21:40) नहीं हमारी आंख का जो नेचुरल लेंस है उसमें कैटक्ट होता है। आरएल में तो हमने उस लेंस को ही निकाल दिया। उसकी जगह आर्टिफिशियल लेंस लगा दिया जो 100 सो आई एम सेइंग कि अगर किसी ने सर्जरी करवानी ही है वो लेज़ या आईसीएल कंसीडर कर ही रहा है तो वो एक ही बार आरएल ही करवाए एंड देन ही इज़ गुड फॉर लाइफ देखिए आरएलई सर्जरी में जो लेंसेस यूज़ हो रहे हैं ना ये लाइट को स्प्लिट करते हैं हम जो पास की विज़न दे रहे हैं ये दूर की थोड़ी सी विज़न कॉम्प्रोमाइज करके दे सो अगर हम मल्टीफोकल लेंसेस यूज़ कर रहे हैं तो वो नाइट ड्राइविंग में तंग करेंगे
(1:22:10) अगर हम एक्सटेंडेड डेप्थ ऑफ़ फोकस लेंसेस यूज़ कर रहे हैं तो वो इंटरमीडिएट अच्छी दे देंगे लेकिन नियर की विज़न में स्ट्रगल करनी है। ओके ओके। भगवान का दिया हुआ जो अकोमोडेशन है उसका कोई मुकाबला नहीं है। और वो अकोमोडेशन आईसीएल और लेसिक में इंटैक्ट रहता है। तो हम उसको प्रिजर्व करना चाहते हैं जितना दूर तक जा सकता है। इसीलिए मैं मेरे पेशेंट्स को सजेस्ट करता हूं कि आरएल सर्जरी उनको करानी चाहिए जिनको चश्मा हटाना ही है। एंड द गुड एज इज अराउंड 50 टू 55 इयर्स। उससे पहले करना इज टू सून। जब आप थोड़ा कैटक की एज ब्रैकेट के नजदीक आ गए हो
(1:22:47) तब इसको कराएं। आल्सो कुछ पावर्स हैं जिसके अंदर आरली सर्जरी मे नॉट बी द बेस्ट। जिन पेशेंट्स को दूर का चश्मा लगा हुआ है और वो हटा करके पास का अच्छा देखते हैं। 45 50 साल की उम्र में। टिपिकली ये वो लोग हैं जिनका माइनस तीन चार नंबर का चश्मा है। हम्म। इन लोगों को चश्मा हटवाने का ऑपरेशन इस उम्र में नहीं कराना चाहिए। पांच से 10 साल वेट कीजिए। कैटक्ट आएगा तभी ऑपरेट कराइएगा। वेरी वेरी यूज़फुल इनफेशन। अभी हम थोड़ी देर पहले डिस्कस कर रहे थे दैट यू हैव जस्ट टर्नड 40। सो डू यू यूज़ रीडिंग ग्लासेस? नो नॉट येट। सो या आई जस्ट टर्न 40 और
(1:23:23) लेकिन मैं नोटिस कर सकता हूं कि जो मेरी यहां 20 सेंटीमी छ आठ इंच पे नजर थी ना अब वो उतनी शार्प नहीं है। थोड़ा सा मुझे हम 30 सें.मी. एक फुट पे लेके आना पड़ता है। ये नेचुरल है। ये मेरे साथ हो रहा है। आपके साथ होगा। लेसिक पेशेंट्स के साथ होगा, आईसीएल पेशेंट्स के साथ होगा। ये गॉड गिवन है। हमारा अकोमोडेशन लाइक क्लॉक वर्क चलता है। 38 के बाद हमारी नियर विज़ एव्री ईयर थोड़ीथोड़ी नियर पॉइंट दूर होते जाता है। बहुत लोग इसको 45 साल की उम्र तक यहां तक ले जाते हैं। हम 50 की उम्र में ये हमारी हाथ की लेंथ से निकल जाता है। जिनको चश्मे की जरूरत होती
(1:24:02) है वह अगर चश्मा नहीं लगाएं देन देयर इज अ डिसकंफर्ट इन यू नो लुकिंग एट थिंग्स और रीडिंग और इसकी वजह से सिर में दर्द भी होता है। डिसकंफर्ट रहता है। तो अगर 40 या 50 के बाद किसी की पास्ट की नजर कमजोर हो गई है और अगर वो चश्मा नहीं लगाता तो उसे भी डिसकंफर्ट होता है। आई एम एक्सपीरियंसिंग इट फर्स्ट एंड आई हैव जस्ट टर्न 40। मैं आई एम अ एबिट रीडर। मुझे पढ़ना बहुत पसंद है। अब मैं रियलाइज करता हूं कि भ पास मेरी थोड़ी सी रीडिंग स्पीड कम हो गई है। थोड़ी टायर्डनेस बढ़ जाती है। यू नो दिस इज वेरी कॉमन एट द एज ऑफ़ 40 41 42 और बहुत लोग ये चीज एक्सपीरियंस कर रहे होंगे
(1:24:39) कि यार अब पढ़ने में उतना मजा ही नहीं आता जो पहले आता था। आप चश्मा लगाइए रीडिंग का। आपको दोबारा वही मजा आने लगेगा। और ये नेचुरल एजिंग का प्रोसेस है। इसके लिए अभी आपको और कुछ करने की जरूरत नहीं है। एक रीडिंग ग्लास लगाना चाहिए या फिर आरएल करवा लो। देखिए आरएल सर्जरी आपको तब करानी चाहिए अगर आपका डियर विज़ फंक्शनली इंपेयर्ड है। आरएल सर्जरी एकदम कूद के कराने वाली चीज नहीं है। ओके। जो लोगों ने कसम ही खा ली है कि मैं चश्मा लगाऊंगा ही नहीं। मैं यू नो मेरे पास इतने सारे पेशेंट्स ऐसे आते हैं जो जिनको पास का बहुत धुंधला दिखता है
(1:25:15) और उनको सिर्फ चश्मे की जरूरत है रीडिंग ग्लास और मैं उनसे बोलता हूं कि जी आपको दिखता ही नहीं आप कैसे काम चलाते हो वो कहते हैं मैं इसको बोलता हूं ये पढ़ के सुना देते [हंसी] ये क्या तरीका है लाइफ जीने का कि भाई उसको बोलता हूं पढ़ के सुना दे तू तो इन पेशेंट्स को मैं कहता हूं जब आपने लगाना ही नहीं है तो चलो हम आरएल सर्जरी करते हैं आरएल सर्जरी इज नॉट समथिंग जो कि हमें जंप करके करना चाहिए एक बार सोच के एक बार प्रोज़ एंड क्स जान के फिर करना चाहिए। इट्स अ वेरी वेरीरी सेफ सर्जरी। इट्स बेसिकली अ कैटक सर्जरी व्हिच इज प्रीपोंड।
(1:25:47) आपको 10 साल बाद करानी थी। हमने पहले ही कर ली। ठीक है? और कुछ पेशेंट्स में ये बहुत ज्यादा अच्छी इफेक्टिव है। खास करके वो पेशेंट्स जिनकी दूर का प्लस का पावर है और पास की उनकी नजर बहुत ही धुतली है। दे विल बी द हैप्पीएस्ट विद आरएल सर्जरी। तो ये कराई जा सकती है। बट जनरली बिटवीन द एज ऑफ़ 40 टू 50 हम जैसे कि मैं हूं। हम अभी अपनी आरएल सर्जरी नहीं कराऊंगा। ओके। सो अभी आपने होल्ड करा हुआ है उसको। हां। लेकिन यही मेरा आंसर 50 और 55 की उम्र में जा के बदल जाएगा और मैं शायद आरएल सर्जरी करा भी लूं ताकि मुझे बांस का भी अच्छा दिखे, दूर का भी अच्छा दिखे।
(1:26:23) जब कैटक डेवलप होना स्टार्ट होता है, ऑब्वियसली इट डजंट हैपन ओवरनाइट। आज स्टार्ट हुआ है तो धीरे-धीरे वो प्रोग्रेस करेगा। सो आरएल करवाने का सही टाइम क्या है? देखिए आंख के नेचुरल लेंस में धुंध दाने को कैटक कहते हैं। ठीक है? क्या चीज है ये? जैसे हमारे घर का कांच है खिड़की का। इसमें थोड़ी सी धुंध आनी शुरू हुई है। क्या हम इमीडिएटली वो कांच चेंज करा देते हैं? आपकी गाड़ी की विंड स्क्रीन में अगर थोड़ी थोड़ी सी स्क्रैचेस बड़ गए तो क्या आप उसको इमीडिएटली चेंज कराते हैं? लेकिन ओवर टाइम वो धुंध सिग्निफिकेंट इनफ हो जाएगी तभी तो उसको चेंज कराना है। कैटक
(1:26:56) सर्जरी इमरजेंसी सर्जरी नहीं है। कैटक की सर्जरी आपको कब करानी है ये डॉक्टर ने यूजुअली नहीं बताना। डॉक्टर ने देख के ये बताना है करने लायक हो गया है। जी। ओके। आप अभी करा लो। दो-ती महीने के बाद करा लो। छ महीने के बाद करा लो। कन्वीनिएंट टाइम देख के करा लो। ओके। सो वेट टिल यू कैन। वेट टिल यू कैन और वेट व्हेन यू वांट। जिस दिन आप कराओगे उससे नेक्स्ट डे आपकी विज़न बहुत अच्छी होगी। हम और डिपेंड करता है आप और मैं मेरी विजुअल रिक्वायरमेंट अलग है। मैं एक सर्जन हूं। मुझे थोड़ी सी विज़न भी मेरी खराब होगी ना, मेरी लाइफ बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाएगी।
(1:27:33) हम और एक आदमी फार्मर है। उसकी दो गाय है, दो भैंस हैं। उसको सिर्फ यह पता चल जाए कि भ दो दोनों दो-दो हैं। तो वो बहुत देर तक वेट कर सकता है। [हंसी] राइट? सो इसीलिए हर एक आदमी के बहुत बढ़िया निकाल के लाते हो। [हंसी] वै नाइस। सर आपने बहुत सारे सेलिब्रिटीज के के भी ट्रीटमेंट्स किए हैं। तो जस्ट आउट ऑफ क्यूरियोसिटी आई वांट टू नो कि उनकी क्या आस्क होती है। इज इट लाइक दे कम विद अ डिफरेंट सेट ऑफ एक्सपेक्टेशन देन एन ऑर्डिनरी पर्सन? देखिए जी मेरे को तो सेम ही लगता है क्योंकि मुझे लगता है मेरा हर पेशेंट सेलिब्रिटी है। यू नो। सो मेरे को हम लोग
(1:28:10) फैमिली ऑफ़ आई डॉक्टर्स हैं। मेरे फादर भी, मेरे ब्रदर भी। तो हमारे घर में एक वैल्यू सिस्टम है कि आप आंख को ट्रीट करो। और जो व्यक्ति है उसको फैमिली मेंबर करो। अब इसके बाद उनका क्यादा है उससे फर्क नहीं पड़ता। जनरली सेलिब्रिटी का जो मैंने देखा है वो ये है कि उनको क्विक रिजल्ट्स तो चाहिए क्योंकि डाउन टाइम वो नहीं ले सकते और वो नहीं चाहते कि ज्यादा लोगों से डिस्कशन हो इसके बारे में। मैं एक बड़ी अजीब सी बात आपको बताता हूं। हमारे कितने सारे फेमस नेता हैं जिनकी कैटक सर्जरी रिसेंटली हो चुकी है पिछले 510 सालों में बट वो सब लोग अभी भी
(1:28:49) चश्मा लगा रहे हैं। हम आई एम श्योर उन्होंने इंडिया के नामी हॉस्पिटल्स नामी डॉक्टर से ऑपरेट कराया हुआ है और उनके चश्मे के नंबर जीरो हैं। बट वो फिर भी चश्मा लगाते हैं। एक पब्लिक पर्सनालिटी ने जब एक बार यह परसोना बना लिया कि मैं चश्मे के साथ हूं। जैसे अमिताभ जी, राइट। जैसे मोदी जी, यह बिना चश्मे के ना आपको अच्छे ही नहीं लगेंगे। हम्म। तो वो उस चश्मे के साथ अब ट्रैप है। आई थिंक वो एक क्रेडिबिलिटी भी एसोसिएट हो जाती है कि एक एक वो सीरियसनेस उस पोजीशन पे स्पेशली इन केस ऑफ पॉलिटिशियंस। करेक्ट? आई थिंक पॉलिटिशियंस, फिल्म स्टार्स, न्यूज एंकर्स जो चश्मा लगाते हैं
(1:29:28) वो छोड़ते नहीं है। क्योंकि वो उनकी इट इज पार्ट ऑफ देयर पर्सोना। कभी किसी ऐसे व्यक्ति के साथ आपने किसी का ट्रीटमेंट किया जब आपके भी हाथ कांपे हो? हाथ तो नहीं कांपते। टच वुड बहुत अच्छी ट्रेनिंग रही है। बट सर्जरीज कैन बी डिफिकल्ट। आई जैसे मेरे फादर बहुत ही नाम आई सर्जन है। हम तो मेरा ये सौभाग्य था कि मैंने उनकी कैटर सर्जरी करी। तो सर्जरी के दौरान वो मेरे से पूछ रहे थे। कि लेंस ठीक से लगाया कि नहीं लगाया? ये तो एक्सिस में रखा एक्सिस में। मैंने कहा अरे मैं कर रहा हूं भाई मुझे कर रहे हो [हंसी] तो वो थोड़ा इट कैन बी डिफिकल्ट बट
(1:30:08) ओनली ही कैन डू दिस है ना वही आपसे पूछ सकते हैं हां मुझे जवाब भी देना पड़ेगा तो नहीं पड़े बीच में सर्जरी के [हंसी] या वाओ वै नाइस हम सारे सक्सेसफुल केसेस की बात कर रहे हैं बिकॉज़ एज यू सेड कि इसमें सक्सेस ही होती है। वो एक बहुत ही एक यूनिवर्सल केस स्टडी बन जाती है अगर कुछ इफ इफ एट ऑल एनीथिंग गोज़ रोंग। बट क्या कोई ऐसे सिनेरियोस होते हैं जहां पर पेशेंट डिसटिस्फाइड या अनहै होके जाए। आई एम आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट यू। आई एम टॉकिंग इन जनरल कि व्हाट मेक्स अ पर्सन अ पेशेंट अनहै इफ एट ऑल आफ्टर सच अ सर्जरी। हजारों कारण हो सकते हैं।
(1:30:50) रियली। देखिए आफ्टर ऑल इट इज अ सर्विस। हम ठीक है? आप इंडिया के बड़े से बड़े होटल में जाकर के खाना खाइए। खाना कितना भी स्वाद हो डिसटिस्फाइड होने के तो हजार कारण हो ही सकते हैं। हम खाना अच्छा ना होना भी एक कारण हो सकता है। हम हम सो सर्जरी के बाद जो आउटकम है पेशेंट्स उससे नाख हो ऐसा होता है। इसके कॉमन रीज़ंस ये है कि कुछ तो इनिशियल पीरियड में आइज में इरिटेशन होना, वाटरिंग होना, किसी पेशेंट को कोई दवाई नहीं सूट करना इस कॉमन। जिस चीज से हमें डर लगता है वो यह है कि कि पेशेंट के साथ का जो जो हमने प्रोसीजर चूज़ किया है वो शायद उसके लिए बेस्ट सूटेबल नहीं था।
(1:31:32) यू नो एक पेशेंट जो रात में गाड़ी चलाता है उसकी कैटक सर्जरी में हमने मल्टीफोकल लेंथ एडवाइस कर दिया। उन्होंने चूज़ कर लिया कि दूर का पास का चश्मा हट जाएगा और अब उनको गाड़ी चलाने में दिक्कत हो रही है। इसीलिए मुझे ऐसा लगता है कि पेशेंट के साथ 15 या 20 मिनट का समय आप सर्जरी से पहले उनकी लाइफस्ट, उनकी प्रॉब्लम्स, उनकी दिनचर्या समझ लो हम तो चांसेस बहुत ही कम रह जाते हैं कि पेशेंट डिसटिस्फाइड होके। ट्रू डॉक्टर आप बहुत सारे लोगों के चश्मे हटाते हो। एंड आफ्टर वंस द सर्जरी इज डन उसके बाद उनकी अपीयरेंस के अलावा और क्या बदलता है?
(1:32:11) सो देयर आर सो मेनी बेनिफिट्स। इट्स नॉट जस्ट कॉस्मेटिक। हम इट्स अ ट्रांसफॉर्मेशन। आपसे बेटर ट्रांसफॉर्मेशन कौन जानता है? आप इतने लोगों को वेट लॉस का रास्ता बताते हैं। और आप देखते हैं ना उनकी शक्ल चेंज हो गई। उनकी स्किन ग्लो करने लगी। मुझे लगता है कि जो लोग ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी पे हैं उनके लिए स्पेक्स रिमूवल इज आल्सो वन थिंग व्हिच इज इन देयर माइंड। हम मैं आपको एक बात ये बताता हूं। इतने सालों से मैं स्पेक्स रिमूवल सर्जरीज कर रहा हूं। लेस एक आईसीएल। हम मैंने आज तक भी किसी दुखी आदमी को अपना चश्मा हटवाते हुए नहीं देखा।
(1:32:51) पेशेंट जब भी हमारे पास आते हैं सर्जरी कराने के लिए दे आर ऑलवेज ऑप्टिमिस्टिक। कोई डिप्रेशन में स्पेक्स रिमूवल नहीं कराता। कोई डिप्रेशन में वेट लॉस नहीं करता। कोई डिप्रेशन में अपनी बॉडी में एक पॉजिटिव चेंज नहीं लेके आता। इट इज अ हैप्पी मोमेंट व्हेन यू डिसाइड टू स्टार्ट एक्सरसाइजिंग यू डिसाइड टू स्टार्ट टेकिंग केयर ऑफ योर स्किन। यू वांट टू गेट रेड ऑफ़ योर ग्लासेस। तो आई थिंक इट्स अ वेरी वेरीरी पॉजिटिव मोमेंट टू गेट एसोसिएटेड विद अ पेशेंट एट दैट टाइम। आई एम सो थैंकफुल टू गॉड कि मुझे लोग रोज खुश ही मिलते हैं हम और वो ट्रीटमेंट के बाद और खुश ही हो जाते
(1:33:28) हैं। इट्स बिकॉज़ दे वांट टू एलिवेट देयर लाइफस्टाइल करेक्ट। दे आर एट अ सर्टेन प्लेस। तो अब उनको पता है कि हमारी ये सब चीजें सॉर्टेड हैं। अब अगर हमें अपनी लाइफ को और ज्यादा इंप्रूव करना है, लाइफ स्टाइल को और ज्यादा इंप्रूव करना है। अब मुझे चश्मा नहीं पहनना या कांटेक्ट लेंसेस का हसल से बचना है। अब मुझे स्विमिंग पूल में ऐसे ही बस घुस जाना है। बारिश को एंजॉय करना है। होली खेलनी है। तो मुझे यह करवाना है। करेक्ट। आई थिंक इट्स मच मोर देन जस्ट स्पेक्स रिमूवल। या। आई थिंक इट्स अ इट्स लाइफ चेंजिंग। दे शुड से दैट इट हैज़ चेंज देर लाइफ एंड द हायर द नंबर द
(1:34:01) मोर लाइफ चेंजिंग इट इज़ 7 से ऊपर का नंबर तो इंश्योरेंस कंपनीज़ भी मानती है कि एक हैंडीकैप है वो आपको ट्रीटमेंट्स के पैसे भी देती है हम हम अच्छा या सो ये यू नो कॉस्मेटिक सर्जरी तो ये है डेढ़ दो तीन पांच नंबर तक का ट्रीटमेंट बिय्ड अ सर्टेन नंबर इट इट इज़ कवर्ड अंडर इंश्योरेंस यस प्राइवेट इंश्योरेंसेस गवर्नमेंट इंश्योरेंसेस ऑल इंश्योरेंसेस आर कवरिंग स्पेक्स रिमूवल सर्जरी बोथ लेसिक और आईसीएल फॉर नंबर्स अबव 7.
(1:34:32) 5 ये पिछले चार या पांच साल से हाउ अबाउट कैटक्ट इज दैट कैट इज़ 100% कवर्ड अंडर एनीवे हो सकता है उसमें सर्जरी में कुछ गैप हो आप कोई बहुत एक्सपेंसिव लेंस चूज़ कर रहे हो वो शायद आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी में ना कवर्ड हो बट एक एक अच्छी बेसिक से सर्जरी कवर्ड ऑफ कोर्स क्योंकि अटैक तो सबको होना है तो वो ट्रीटमेंट तो इंश्योरेंस में कवर्ड ही होता एंड सर हाउ मेनी पेशेंट्स यू हैव डेल्ट विद अभी तक कितनी सर्जरीज करी है आपने अपने हाथों से आई इट विल बी अराउंड मोर देन 30000 मे बी क्लोज टू 40 सर्जरी सो फार अभी तक आपको अपने पापा की सर्जरी छोड़कर और कौन सी सर्जरी है जो अच्छे से याद है?
(1:35:07) देखिए हम रोज इतनी सर्जरीज करते हैं के आई ओनली रिमेंबर हैप्पी फसेस द सर्जरीज व्हिच स्टिक विद यू या जो आप नहीं भुला पाते वो वो होती है जहां पे आपने मैच हरवा दिया है अगर आप विराट से भी पूछेंगे कोहली साहब से तो वो कौन सी ऐसी इनिंग्स है जो उनको नहीं याद जो वो भूल नहीं पाते तो वो वही होगी जहां कोई बड़े मैच में वो नहीं कर पाए एंड इट विल हैपन टू एव्री सर्जन कॉम्प्लिकेशंस आर पार्ट ऑफ इट टू टेक इट ऑनेस्टली टू डू योर बेस्ट इज़ मोस्टेंट बट वी आर वैरी फॉर्चूनेट कि हम लोग आई सर्जरीज कर रहे हैं कैटग लेसिक आईसीएल इसमें कॉम्प्लिकेशन रेट इतना लो है
(1:35:49) 10 15 हजार सर्जरीज में कोई एक आधा मिस्टेक जो कि थोड़ी कॉस्टली पड़ सकती है बट आई आई रियली अप्रिशिएट द ऑनेस्टी एंड दैट नॉट जस्ट शोज़ दैट यू आर सच अ एक्सपर्ट एंड क्रेडिबल डॉक्टर दैट आल्सो शोज़ दैट यू आर सो हंबल एंड इगर टू लर्न जैसे आप बोल रहे हो कि अगर विराट कोहली से पूछे तो वो उसको वो मैच याद होगा वेयर ही कुड नॉट परफॉर्म एंड दैट इज व्हाट मेक्स हिम अ विनर एंड व्हिच इज व्हाई अगर हम उन चीजों पे फोकस करते हैं दैट मींस हम सिर्फ प्रोग्रेसिव सोच रखते हैं या सो कांग्रेचुलेशंस टू व्हाट यू आर डूइंग दैट इज फिनोमिनल और मैं इस चीज को
(1:36:27) बहुत अच्छे से समझ सकती हूं कि किसी को विज़न देना और किसी को बिना चश्मे के एक एक इस तरह की पर्सनालिटी देना कि उसको वो पहनने की जरूरत नहीं पड़े। हाउ मैजिकल इट वुड बी बिकॉज़ आई शेयर अ सिमिलर काइंड ऑफ़ वर्क ट्रांसफॉर्मेशन वाला। तो मुझे पता है ये कितना रिवॉर्डिंग होता है। सो थैंक यू। थैंक यू बेस्ट। यू आर डूइंग अ एक्सीलेंट जॉब। मैंने आपके बहुत सारे पॉडकास्ट देखे हैं। आप हर फील्ड के एक्सपर्ट्स को ला के उनके साथ वो सवाल पूछ रहे हो जो लोगों को जानने की जरूरत है। लोगों को पता भी नहीं है कि उनको यह सवाल जानने की जरूरत है। एंड हमें आपके जैसे और
(1:37:09) लोग चाहिए जो कि हर फील्ड इस मेडिकल फील्ड को मासेस तक ले जाएं। उनको इस बात को के लिए एजुकेट कर सके कि हमारा इंडियन मेडिकल सिस्टम इतना स्ट्रांग है। इतना एक्सीलेंट है। इतने एक्सपीरियंस्ड लोग हैं। इतनी कम उम्र में जो आपका ट्रीटमेंट इतने कम पैसों में कर सकते हैं। वी आर डूइंग दी ट्रीटमेंट्स एट 10% 12% द कॉस्ट ऑफ यूएस, यूके, ऑस्ट्रेलिया एंड वी आर डूइंग इट बेटर यू नो एंड पीपल लाइक यू आर ब्रिंगिंग दिस इन टू द मासेस। हर इंसान को ये चीज पता चल पा रही है आपके थ्रू, सोशल मीडिया के थ्रू। सो थैंक यू सो मच मुझे बुलाने के लिए। आई एम जस्ट द कैटलिस्ट सर। सारी जो
(1:37:50) नॉलेज इन है वो आपने ही दी है। एंड आई एम 100% श्योर कि लोगों ने इसका बहुत ज्यादा फायदा लिया होगा और अब दे विल बी एबल टू मेक एन इनफॉर्म डिसजन। थैंक यू सो मच वंस अगेन। प्लेजर आई होप इस पॉडकास्ट से आपको अपने सभी सवालों के आंसर्स मिल गए होंगे। कौन सा पार्ट सबसे ज्यादा इंटरेस्टिंग लगा? प्लीज लेट मी नो इन द कमेंट्स बिलो। और अगर आपके पास कोई गेस्ट या फिर कोई टॉपिक सजेशन है तो उसे कमेंट में जरूर बताइए। आ विल सी यू इन द नेक्स्ट एपिसोड।

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