Swami Yo Returns - Predictions, Tantric Secrets & Manifestation Techniques | TRS
Author Name:Ranveer Allahbadia
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@ranveerallahbadia
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=3TNysVuIHhA
Transcript:
(00:00) नमो नारायण सर। नमो नारायण। मैंने हमारे पिछले एपिसोड को स्कैन करा और वह एक प्रेडिक्शन वाली सेक्शन बहुत वायरल गई थी। ग्रहों का एक समीकरण आ रहा है। यह वो पोजीशन बना रहे हैं जो महाभारत के समय या बड़े-बड़े युद्धों के समय ग्रह बनाते हैं। दुनिया में एक युद्ध होगा, महायुद्ध होगा। हां। स्टार्स के मुताबिक एक्साक्ट्ली क्या एटमॉस्फेयर में? ये संधि काल है। फुल ह्यूमैनिटी। एक ऐसे फेस के अंदर एंटर हो रहे हैं और उस ट्रांजैक्शन में से निकलने के लिए कुछ लोग जाएंगे। उनको जाना है। हजार दिन रफ टफ है। निकाल लो किसी भी तरह से और उसमें भी धर्म
(00:42) की शरण में आ जाओ। एट पॉइंट ऑफ़ एनलाइटनमेंट 99% पीपल उनका देहांत हो सकता है। आप छोड़ोगे नहीं। छूट ही जाएगा। समुंदर की इतनी वो सुनामियां उठती है ना हिलोरे आनंद की कि आप झेल नहीं पाओगे उसको। दिस बॉडी इज नॉट मेड फॉर दिस। क्या फिर हम स्वर्ग में चले जाते हैं? ये सब समाज को डिसिप्लिन करने के रास्ते हैं। दिस इज द धर्मदंड। आप स्वयं परमात्मा स्वरूप हो पर ड्यू टू अज्ञान भूल गए कि मैं परमात्मा स्वरूप हूं। द मोमेंट यू रियलाइज कि हम ब्रह्मास्म शरीर छोड़ दोगे। हो गया बी एंड। ओके। आपके जीवन में कार्मिक बॉम्ब क्या थी? एवरी सिंट हैज़ अ पास्ट एंड एव्री सिनर हैज़
(01:24) अ फ्यूचर। सो आई वाज इन द जेल एस अंडर ट्रायल और वो 7 साल मैंने 18 घंटे जो बाहर जॉब करता था तो 18 19 घंटे की मेरी साधना अंदर है। वहां कलेक्ट की हुई ऊर्जा है। टोटल नेगेटिव वाइबेशंस है और उतनी नेगेटिव वाइब्रेशन आपकी श्मशान में भी है। वो वाइब्रेशन आपको थोड़ा मजबूत बनाने के लिए परमात्मा भेजता है। कौन से मंदिर में आपको सबसे इंटेंस अनुभव हुए हैं? मेरा एक अनुभव हो गया भीमाशंकर मंदिर के अंदर। मंदिर में कोई नहीं था। काफी बारिश तेज थी। एंड देन व्हेन आई एंटर्ड भीमाशंकर तो वो भीमा नदी का जो जल है वो बिल्कुल काला है भाई। और जब मैं मंदिर की सीढ़ियां
(02:03) उतर रहा हूं और शिवलिंग को दर्शन ले रहा हूं। स्वामी ओ वही स्वामी जी है जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को प्रेडिक्ट करा था हमारे पडकास्ट पे। इनफैक्ट ढाई साल पहले वो रिकॉर्डिंग हुई थी और जब भी मैं वो वाला एपिसोड देखता हूं ना मुझे बहुत रिग्रेट फील होता है क्योंकि आई फील आई वाजंट प्रिपयर्ड फॉर स्वामी ओ बैक देन मुझे एक और चांस चाहिए था स्वामी जी के साथ बहुत-बहुत रिस्पेक्टेड फिगर है वो साधना कम्युनिटी में सनातन कम्युनिटी में बहुत डीप कन्वर्सेशन हमने करी अबाउट सोल्स जर्नी अबाउट स्पेस अबाउट साधना अगर हमारे टीआरएस के स्पिरिचुअल पॉडकास्ट आपको अच्छे
(02:46) लगते है ना ये एक मेगा एपिसोड है स्वामी यो की वजह से। उनके साथ मेरी एक और कनेक्शन है कि जब कंट्रोवर्सी हुई थी ही वाज़ वन ऑफ़ द अर्ली पीपल हु मेड अ क्रिटिसिज्म वीडियो। उसकी भी बात हमने करी। तो मैं जितना रॉ हो सकता था इस एपिसोड में उतना रॉ बना और सर के साथ एक आइकॉनिक एपिसोड क्रिएट करा। इट्स अ लॉन्ग वेरी डेंस वेरी डीप एपिसोड। मेरे लिए यह एक बहुत आइकॉनिक मोमेंट है मेरे पूरे पॉडकास्टिंग करियर में। आई होप यू एंजॉय दिस वेरी स्पेशल एपिसोड ऑफ स्वाहा ब्रिंग्स यू द रणवीर शो। याद रखिए जो भी मेरी खुद के स्पिरिचुअल लर्निंग्स हैं जो
(03:21) मैंने खुद के स्पिरिचुअल जर्नी से सीखा है इन टर्म्स ऑफ़ मेडिटेशन इन टर्म्स ऑफ़ साधना वो सारी चीजें प्रोग्राम्ड इन है मेरी ऐप स्वाहा में लिंक इज गिवन डाउन बिलो बट फॉर नाउ लेट्स गेट इंटू द स्पेशल एपिसोड ऑफ स्वाहा ब्रिंग्स यू द रणबीर शो स्वामी जी आपका स्वागत है। नमस्कार। बहुत कुछ कहना है आपसे। नमो नारायण।
(04:04) नमो नारायण सर। भैरव बाबा के नाम में मैं इस एपिसोड की शुरुआत करना चाहूंगा। क्या बात है। जय भैरव बाबा। ओम नमः कैसे हो सर? बहुत बढ़िया। इस पडकास्ट के स्पिरिचुअल एपिसोड मैं हमेशा रिवॉच करता हूं। ताकि अगर कोई चीज मिस हो गई है तो मैं फिर से उसे समझता हूं। मैंने हमारे पिछले एपिसोड को स्कैन करा और वो एक प्रेडिक्शन वाली सेक्शन बहुत वायरल गई थी। हां बिल्कुल। ऑपरेशन सिंदूर से पहले बट उस एपिसोड में इतनी सारे स्पिरिचुअल बातें हुई थी। हम्। जहां मैं शायद यंग था, इमच्योर था और आपकी हिंदी बहुत हाई लेवल की थी। तो मैं डेप्थ में नहीं जा पाया।
(04:45) हम तो कोसता गया खुद को कि यार व्हाई डिटंट आई आस्क मोर हियर? ये और जानना था वगैरह-वगैरह। तो वो एक की पिलर है। बिहाइंड दिस एपिसोड। दूसरा रीज़न सर। अगेन ये मैं खुल के बता रहा हूं। जब कंट्रोवर्सी हुई थी। आई हैड सीन योर वीडियो। एंड ऐसा जेन्युइनली मुझे लगा कि एक एल्डर ब्रदर मुझे सलाह दे रहे हैं। इवन दो बहुत सारे लोगों को लगा आपको गुस्सा महसूस हो रहा था। आई डोंट थिंक इट वास गुस्सा। इट वास मोर लाइक कंपैशन इन सम वे वो मुझे फील हुआ। तो बस इन पर्सन सॉरी कहना था आपसे। यू आर वन ऑफ़ द फ्यू पीपल जहां मेरे को लगा इनको अपोलजाइज करना है
(05:27) मुझे। अ तो आई रिमेंबर सीइंग दैट वीडियो एंड आई डिडन्ट फील बैड। आई जस्ट वांटेड टू से सॉरी बट इन पर्सन तो यह मेरी दो रीज़ंस हैं। इसलिए मैंने कहा कि मुझे एकदम रॉ पॉडकास्ट करना है आपके साथ। तो आई एम वेरी वेरीरी हैप्पी टू बी सिंग वि यू। मुझे पता भी नहीं आज कैसी बातें निकल के आएंगी। ऑफ कोर्स मैं आपसे और प्रेडिक्शनंस मांगूंगा। जैसे गुरुदेव। हायर पडकास्ट होस्ट मांगता है आपसे। बट आई एम एक्चुअली हियर टू जस्ट लर्न क्योंकि आई डोंट फील वी डीड जस्टिस द लास्ट टाइम। और आपसे बस मिलना था फिर से। माय प्लेजर मेरा सौभाग्य जिस एपिसोड की आपने बात की कि
(06:06) मैंने उसको एज एल्डर ब्रदर की तरह बनाया था वास्तव में उस उसके बाद मुझे बहुत गालियां पड़ी कि आपने रणबीर को प्रोटेक्ट किया है क्योंकि मैंने उसमें एक शब्द का प्रयोग किया था कि रणबीर जो भी हो अगर आज आप उसको जो गालियां देते हो तो उस कमल तक पहुंचने के लिए जो सफर किया आपको जो सारे गहने मिले जो बड़े-बड़े जेम्स मिले वो थ्रू रणबीर मिले हैं। एंड इट्स ग्रेटट्यूड फ्रॉम मां सरस्वती कि सुनने वाले पडकास्ट के जितने भी लाखों करोड़ों लोग हैं आज अगर वह बड़ी-बड़ी हस्तियों से परिचित हुए या उन्होंने जो भी आध्यात्मिक गेन किया डायरेक्टली इनडायरेक्टली बट क्रेडिट गोस
(06:44) टू यू एंड ऑफ द डे यू हैव मेड सच अ यू नो फैबुलस मतलब एक मुझे लगता है ये इतिहास का हिस्सा होगा मैंने यस ब्रदरली उस चीज को कहा कि किसी को भी थोड़ा सा हर्ट होता है बट जितना भी मैं रणबीर को जानता हूं। रणबीर शब्द का अर्थ क्या है? जो वॉर में से जीत के वॉरियर की तरह बाहर आए। मुझे पर्सनली भी बहुत कॉल्स आए। स्वामी जी आप भी उनको जानते थे। आपने पडकास्ट किया। आपका तो चेहता है। तो वो हीट तो मैंने झेल ली। तो मैंने उनको यह कहा था कि व्हाट आई ऑब्जर्व। मेरा कोई बहुत बड़ा संबंध उनसे नहीं। बट जितना भी है मुझे उसमें मैं उस पॉडकास्ट पे पहुंचा था। था रणबीर अगेन आई
(07:26) विल से वेरी ऑनेस्टली यह व्यासपीठ है। मैं किसी के मर्जी से या किसी के निमंत्रण से आया हुआ व्यक्ति नहीं हूं। मैं उस गेरवा में हूं जो नित्य मुक्त शुद्ध बुद्ध सच्चिदानंद स्वरूप में रहते हैं। आई केम फर्स्ट टाइम दैट वाज़ इंस्ट्रक्शन फ्रॉम महावतार बाबा जी और आज भी अगर मैं आया हूं तो अवतार बाबा जी की वजह से हूं। नहीं थैंक यू सर। थैंक यू। हम मेरे लिए आई थिंक इस एपिसोड के थ्रू हम बस सर्विस कर रहे हैं। सनातन वी हैव डन दैट डन दैट यू डोंट यू डोंट नीड एनी सर्टिफिकेट फ्रॉम ए्री टॉम डिकनरी एंड सो सेम विथ हियर। मुझे पता है कि इसको सुनने के बाद भी कई
(08:04) लोग ऐसे अंटिशंट कमेंट करेंगे। बट आई एम नॉट अकाउंटेबल एंड आंसरेबल टू एव्री टॉम डिकनरी। थैंक राइट। थैंक यू सर। थैंक यू। आपसे पूछना चाहूंगा कार्मिक बॉम्ब्स के बारे में। जहां एक शॉट में आपके इतने कर्म साफ हो जाते हैं क्योंकि कहते हैं कि जब आप साधना से जुड़ते हो तब कार्मिक बॉम्ब्स फटते हैं आपकी लाइफ में। ऐज 25 से लेके 30 तक रफली अ मैं क्रिया योगा में बहुत ज्यादा जुड़ा हुआ था। एंड आई थिंक जब हम मिले सर मेरी साधना की जस्ट शुरुआत हुई थी। अ क्रिया योगा के टाइम ऑलमोस्ट कोई कार्मिक बम्ब्स नहीं फटे। हम
(08:48) एक बहुत बुरा ब्रेकअप हुआ था। बस वही इकलौता कार्मिक बम था। बट वो झेल पाया। हम फिर साधना में आकर बहुत कुछ हुआ जिंदगी में। बहुत कुछ मिला। फिर कार्मिक बॉम्ब्स भी फूटे। अब एकदम मतलब स्ट्रांग बन चुका हूं। दो सवाल है आपके लिए। पहले तो आपके जीवन में कार्मिक बॉम्ब क्या थी? आपके ह्यूमन लाइफ में प्री साधना या जस्ट व्हेन यू स्टार्टेड साधना। और दूसरा जनरली ये कार्मिक बॉम्ब्स के बारे में। क्योंकि वी ऑल नो इट टेक्स यू क्लोजर टू द पॉइंट ऑफ मोक्ष। हम तो जहां से भी आप शुरुआत करना चाहोगे क्योंकि ये बहुत जरूरी टॉपिक है हर इंसान के लिए।
(09:26) एवरी सेंट हैज़ अ पास्ट एंड एव्री सिनर हैज़ अ फ्यूचर। सेंटेंस मेरा नहीं है। जी पर मुझे पसंद है। वो रणबीर की शरारती जो आंखें हैं ना वो पूछती तो एक आध सवाल है लेकिन उसमें बहुत कुछ यू नो पूछा जाता है। सो डायरेक्टली यू हैव आस्क कि भाई मेरे कार्मिक बम्स के विषय में मैं बहुत मतलब इस चीज को बोल चुका हूं। नथिंग न्यू इट्स ऑन रिकॉर्ड और वेरी मच वैलिड रिकॉर्ड्स के साथ है कि व्हेन आई वास इन 11th मैं बॉम्बे से पढ़ा लिखा बच्चा हूं। जी और मैं रामकृष्ण मठ खार मठ से जुड़ा हुआ उन दोनों वाशानंद जी महाराज थे आदेशक मैं वम रूपानंद जी द वन ऑफ द मोस्ट सीनियर मंक
(10:09) ऑफ द रामकृष्ण ऑर्डर इन नागपुर मठ उनसे कांटेक्ट में था कि मुझे रामकृष्ण मठ मिशन का तो सन्यासी बनना है। सो जो फॉर्मेलिटी होती है कि आप ग्रेजुएशन करके आ जाए क्योंकि मिनिमम क्वालिफिकेशन रामकृष्ण मठ मिशन की उन दिनों कि ग्रेजुएशन होना चाहिए। आई डीड माय ग्रेजुएशन आल्सो एंड विद वेरी गुड नंबर। सो ठीक हो गया और फिर मैंने उनको लिखा कि हो चुका है मैं आऊं। उन्होंने 15 पैसे वाले उन दोनों के जो पोस्ट कार्ड है ओपन पोस्ट कार्ड पर लिख दिया कि आप आ सकते हैं और रामकृष्णम एडमिशन को आप आएंगे तो बता दिया जाएगा क्या प्रोसीजर वगैरह है तो और वो पोस्ट
(10:46) कार्ड मेरी माता श्री के हाथ में लग गया और उससे कुछ साल पहले ही मेरे पिताजी मैंने आपको लास्ट टाइम बताया था चार वर्ण होते हैं ब्राह मतलब ब्रह्मचर्य गृस्थ वानप्रस्थ और सन्यास और हम उस परंपरा का निर्वाह करने वाले लोग जिस परिवार में मेरा परिवेश हुआ है पीढ़ियों से हम लोग उसका निर्वाह करते हैं। तो पिताजी कुछ साल पहले ही सन्यासी हो गए थे। वाओ हम लोग बहुत फाइनेंशियल क्राइसिस से निकल रहे थे। तो मां ने कहा कि अगर तुम भी चले जाओगे तो फिर ये कोई बात तो हुई नहीं। थोड़ा सा परिवार के लिए कुछ करो और कंट्रीब्यूट करो। बहन की शादी बाकी थी एक
(11:21) सिस्टर थी मेरी। एंड सम हाउ कार्मिक कहो कि मैंने उस चीज को एज अ चैलेंज लिया और मैंने सन्यास वाला लेटर छोड़कर के दुबई जाना पसंद किया। मेरे बड़े ब्रदर वहां ही थे। माय एज वास हार्डली 19 एट दैट टाइम। मैंने दुबई के उस तपती धूप के अंदर मतलब भले वाइट कॉलर जॉब भी लेकिन 18 19 घंटे डबल किया है टू अर्न। काफी सक्सेस मिला। काफी अर्न किया और वो भी टाइम आया जब 7 साल था। इस बीच में मैं तुरंत डेढ़ साल के अंदर ही अपने पैसे से वापस बेलूर मठ गया और मैंने महाराज जी को बताया कि मैं तो सन्यास लेने के लिए आया हुआ था और महाराज जी ने मतलब जिनसे मेरी
(12:01) दीक्षा होती है परम पूज्य भूतेशानंद जी महाराज स्वामी भूतेशानंद जी महाराज उन्होंने देखा और उन्होंने कहा कि देयर इज सम वर्क फॉर यू ठाकुर वांट्स टू गेट इट डन उस काम के बाद तुम्हारा सन्यास होगा मतलब सन्यास तो अभी भी नहीं होगा और उन्होंने कहा जैसे कहा जाता है वैसे करो यू एंटर्ड इनू दैट सेम यू नो लाइनज वापस से गृहस्ती का उन्होंने आर्डर दिया। आई एंटर्ड इनू दैट दुबई रहा। फिर वहां से मेरा परमानेंट रेजिडेंस कनाडा हुआ। कनाडा में भी प्रमथानंद जी महाराज रामकृष्ण मिशन के बहुत सीनियर उनके सानिध्य में रहने मिला। और यात्रा करते-करते यू नो वो काम ठाकुर
(12:39) ने क्या रखा था मुझे समझ में नहीं आ रहा था। मैं हर बड़ा काम कर रहा था। और एक दिन अचानक से जब मुझे पता पड़ता है कि हमें अब तो स्वर्गीय हैं। हेमंत करकरे जी ढूंढ रहे हैं और वह हिंदू सैफरन केस के अंदर और मुझे घर से भागना पड़ता है और मैं घर से भागता हूं और ऋषिकेश पहुंचता हूं और वो मेरी मुलाकात टर्निंग पॉइंट थी महावतार बाबा जी की कृपा ऋषिकेश की एंड देन जब उन्होंने इंगित किया कि सात साल तुम्हारा साधना का और है यू नो बंधन योग की साधना तो आई एम नॉट अंडरस्टैंडिंग द टर्म बंधन योग में। बंधन मींस मुझे लगा कि न्यास व्यास करके अपने
(13:23) को साधना करनी है। उन्होंने कहा कि यही साधना कर लो। मैंने कहा नहीं नहीं आई हैव गॉट फैमिली। मेरी रिस्पांसिबिलिटीज हैं। तो ठीक है। करना तो पड़ेगा। करोगे तुम। बट आई नेवर थॉट बंधन साधना बंधन योग की साधना क्या होगी? सो आई वाज़ इन द जेल एज अंडर ट्रायल। बाजत भरी है पर 7 साल बिना किसी कारण के कटवाई तो सही और वह सात साल मैंने 18 घंटे जो बाहर जॉब करता था तो 18 19 घंटे की मेरी साधना अंदर है उसमें गायत्री के पुर चरण है डेली सभी पूरी गीता का पाठ करना 18 अध्याय 700 श्लोक सप्तशती दुर्गा सप्तशती का पाठ ललिता सहस्त्रनाम श्री विद्या के जो मंत्र
(14:06) हैं दूसरे भैरव साधना इत्यादि 18 19 घंटे की साधना आज भी मेरे उन पुराने जेलों के जो संपर्क हैं वि ऑल ऑल ड्यू रिस्पेक्ट मतलब बहुत रिस्पेक्टफुली मेरे संपर्क है। जेल में साधना हां जेल में साधना और भाई मुझे मिला भी मुझे मिला भी। मेरे जो एडवोकेट थे वो कहते थे योर आईज एंड योर ओरा वास टोटली डिफरेंट। यू नो आदमी को एक एक ओरा तो क्रिएट होती है। तो मुझे जो आप कार्मिक बम बोलते हो तो शायद मुझे लगता है कि एक वो जो काम था मेरा नाम उस शेफरन टेररिज्म के अंदर मास्टरमाइंड में लगाया एंड आई यू नो प्राउडली अभी मैं कहता हूं कि जो आपने दिया है उसको सहने दो फिर आई
(14:46) डोंट हैव एनी कंप्लेंट्स विद सोसाइटी। आई डोंट हैव कंप्लेंट विथ एनी लीगल सिस्टम। आई डोंट हैव कंप्लेंट विथ एनी पुलिस ऑफिसर हु मिस बिहेव विथ मी। वो चीज पास्ट हो चुकी है बट वो कार्मिक चीज थी कि मुझे अंदर रहना था साधना करनी थी और मैं इसमें कृपा मानता हूं मेरे महावतार बाबा जी की मुझे पता नहीं अगर मैं आपसे पूछूं महावतार बाबा जी की मुलाकात के बारे में या जेल के बारे में दोनों चीजों के बारे में जानना मैं अंदर आया तो मेरे साथ सिर्फ जैसे अपनेप मान्यताओं के अनुसार मेरे मेरे पास रामकृष्ण परमहंस की छोटी तस्वीर मां शारदा और विवेकानंद तीनों ट्रायो की मैं हमेशा
(15:30) अंदर रखता था लॉक पे खुद का जेल सेल था मैंने मैंने अपने वंटियरली जज साहब को लिख करके दिया था कि मुझे सॉलिट्यूड में साधना करने के लिए अकेले 100 सेल दिया जाए जेल में तो पनिशमेंट होती है वो उन्होंने कहा आर यू श्योर तो मैंने कहा कि यस आई एम श्योर मुझे साधना करनी है तो यस वो कम हम इंसान हैं और हमारी लिमिटेशंस तो होती है हम ह्यूमन बॉडी में है तो ऑफ कोर्स तो मैंने ठाकुर को रामकृष्ण को एक बार पूछा कि क्या यही करवाने के लिए तुमने मुझे अंदर लाया? ऐसा तो कुछ किया नहीं है कि इतनी तकलीफों में रख रहे हो। तब उन्होंने पहली बार जैसे
(16:05) इंगित किया कि तुम्हें कहा था ना साधना योग है सात साल का बंधन योग तुम माने नहीं। तुम चाहते तो तिब्बत में कर लेते। हिमालय में कर लेते। तुमने कहा मेरी फैमिली है। मुझे जाना है तो गए। बट साधना तो तुम्हें करनी थी। इसीलिए तुम अंदर हो। तो क्या मेरा यही काम था? बोले जो करना था वो मैंने करवा लिया। नाउ बाहर जब तुम जाओगे तो अब तुम अपना जो शेड्यूल है काम का वो करोगे। तो ये अवतार और उनके कॉस्मिक काम और उसके कॉस्मिक कर्म ये हम अपने सूक्ष्म इसमें शुद्र शरीर से समझना यह हमारी कैपेसिटी नहीं है। इस माइंड के अंदर उतना ही समझ सकते हो। जितना लॉजिक समझाती है आपको या
(16:49) रीजनिंग समझाती है। दैट्स इट। बट जो वो विराट है उस विराट को समझने के लिए आपको अपनी उस चेतना को विराट करना पड़ता है। तब जाकर के उसके कुछ चीजों को हम समझ सकते हैं। कुछ नॉट ऑल। तो जेल भी मेरे लिए बाबा जी का एक साधन है और बाबा जी भी उसके कहीं ना कहीं कनेक्टेड मिलते हैं। कुछ-कुछ लोगों से बात हुई है शो पर जिन्होंने जेल को एक्सपीरियंस करा। हम उन्होंने डायरेक्टली तो यह नहीं कहा बट उनकी बातें सुनकर मेरे को ऐसा लगा कि जेल मस्ट बी अ प्लेस विथ अ लॉट ऑफ़ एंटिटीज़। हम बिकॉज़ बहुत सारे लोगों की पीड़ा होती है जेल में। हम्। वहां बैठकर साधना करने का एक्सपीरियंस
(17:32) कैसा था? हां, यह एक्सेप्शनल केस था। मैं आपको ऑन रिकॉर्ड बताता हूं। यू कैन वेरीफाई इट। मेरे पास अक्सर उस सेल के अंदर आसपास जो बजते थे वो एक सुपरिडेंट हमारे साथ मतलब इतने जिसको कहते हैं ना क्लोज हो गए थे। बहुत प्रभावित भी थे इससे। तो दो-तीन उन्होंने एक्सपेरिमेंट्स किए। हार्ड कोर शार्प शूटर कुछ दिनों के लिए मेरे साथ छोड़ दिए जाते थे। छ सात दिन के अंदर उनमें बहुत परिवर्तन हो जाता था। अभी भी एक शार्प शूटर है। मैं नाम इसलिए नहीं लेता हूं बेवजह विवाद हो जाता है। ही इज़ अ शार्प शूटर फॉर वन ऑफ द मोस्ट टॉप माफिया का। व्हेन ही केम टू जेल
(18:10) के उस 14 नंबर वार्ड में जयपुर जेल की बात कर रहा हूं। मैंने उसे उतना ही कहा कि क्या तुम्हारे जीवन का देह ऐसे शूट करके पैसे उगाई करना यह है। डू यू थिंक ह्यूमन लाइफ इसके बर्थ है? तो क्या करना चाहिए? स्टार्ट विद हनुमान चालीसा। मिरेकल्स हो जाएंगे। तुम यह मत सोचो तुम्हारे 30 35 25 साल हो गई उम्र तो मतलब तुम नहीं अचीव कर सकते। तुम कर लोगे। एंड ही वास हैविंग वेरी गुड रिस्पेक्ट फॉर मी। उनको मैंने एक कहा कि तुम स्वीकार कर लो। ये सब झंझटों से साढ़ तीन चार-चार साल की एक जगह जमा करके वो कंक्रीट कर लेते हैं ना। तो लाइफ इंप्रज़मेंट में उसका आया।
(18:47) 7 साल आठ साल कट चुकी थी। छ सात साल में वो फ्री हो के निकल भी गया होगा। मेरा कोई संपर्क नहीं अभी। तो ऐसे तो बहुत एक ट्रैफिकर था। हिंदुस्तान का नामीगरामी वह भी मेरे साथ रखा गया। एंड ही टोल्ड मी जो रियल है कि मैं एक शरीफ परिवार से आता हूं। वो जो मर्डर या ड्रग्स में वो बाद में आएगा परिस्थितिवश जेल सबको बना देती है क्योंकि सर्वाइवल था उसका। उसने कहा बचपन में मैं कई लोगों को गीता का पाठ करते हुए सुनता था। वो राजस्थान के ही हैं विश्नोई समाज का। तो उसने कहा कि एक मन के अंदर सूक्ष्म विचार आया कि कड़कड़ाहट गीता मैं किस दिन चट करूंगा और मैं डेली गीता
(19:28) चट करता हूं आवाज से जोर से आवाज जो मीटर है उसी में तो बोले शायद मुझे इसीलिए जेल में आना पड़ा कि गीता सीखनी थी गीता का बहुत अच्छा स्टूडेंट रहा वो मेरा मैं जहां भी रहा मेरे साथ उन लोगों ने जो भी साथ में रहे कम से कम गीता का 15वा अध्याय या पूरा पूरा पाठ सीखे सो यू कैन से इट्स अ जर्नी यस व्हाट यू सेड कि वहां की वाइबेशंस वगैरह हिमालय में भी तो अपने को कोई फैसिलिटी नहीं है। हम लोग अपने कंफर्ट ज़ोन को छोड़कर के जाते हैं। खानपान, रहन-सहन कुछ नहीं होता। फिर क्यों करते हैं हम वहां पर? मुंबई जैसे शहर में या दूसरे शहरों में एसी लगाकर बैठकर तपस्या की जा सकती
(20:04) है। व्हाई हिमालय तो वहां कोई कलेक्ट की हुई ऊर्जा है। कोई वाइब्रेशन है। सेम थिंग जेल में टोटल नेगेटिव वाइबेशंस है और उतनी नेगेटिव वाइब्रेशन आपकी श्मशान में भी है। तो हमारे तो श्मशानों के राजा महादेव जी तो श्मशान में ही रहते हैं। तो आप तो कहोगे कि श्मशान में साधना नहीं होनी चाहिए। त्रिलिंग स्वामी की जो मुख्य साधना है वो श्मशान में है। अघोरियों की श्मशान में है। योगियों की श्मशान में है। मैं मानता हूं कि वो वाइब्रेशन आपको थोड़ा मजबूत बनाने के लिए परमात्मा भेजता है। जब हम उस फेस पे जाते हैं। हम जेल जाते क्यों है? तो तो कृष्ण का जन्म होना ही नहीं
(20:43) चाहिए था वहां पर। हम तो परमपिता परमेश्वर क्यों झेल जाएंगे भाई? तो मुझे लगता है कि कोई हमारी प्रारब्ध की जर्नी वर्तमान की जर्नी में कुछ कमी रह जाती है। नहीं कोई एक पर्टिकुलर विटामिन कम हो जाए तो उसकी टेबलेट खानी पड़ती है। बी12 है या डी एग्जांपल दे रहा हूं। तो वो जो मजबूत बनने का हमारा जो फेस है ना वो उसी ही फेस से निकल के हो सकता है। देयर इज़ नो अदर ऑप्शन। देयर इज़ नो एस्केप रूट आल्सो एंड नॉट टू फील बैड। है ना? मुझे मेरे उस समय के लिए गर्व महसूस होता है। अगर मैं वहां नहीं होता तो आज मैं गेरुआ में भी उतना नहीं होता। सो
(21:18) आई एम आई एम रियली थैंकफुल टू ऑलमाइटी व्हाट आई एम टुडे। आई एम टुडे बिकॉज़ ऑफ़ दैट जेल यात्रा बंधन योग। ओके। आई एम सॉरी कि मैं इस तरह से ये चीज कह रहा हूं। बट मेरे एडिक्शन प्रॉब्लम्स रहे हैं कॉलेज में। हम काफी हद तक और बहुतों के रहते हैं। हम आई रिमेंबर बेसिकली टर्निंग टू एनी एडिक्शन बी एट अल्कोहल जो भी क्योंकि मुझे एस्केप करना था मेरी रियलिटी को मैं मानता हूं कि जब कोई किसी चीज से गुजर रहा होता है तो एक तरह की सेल्फ पिटी कह लो, सफरिंग कह लो कुछ ना कुछ होने लगता है। दुनिया को कोसना ये सब होने लगता है। आई वुड लाइक टू नो अगर आप भी वो सेल्फ
(22:02) पिटी सफरिंग महसूस करते थे। आपकी भी एक ह्यूमन साइड होगी। डेफिनेटली वो ह्यूमन साइड क्या सोचते थे जीवन में जितने मेरे तो बेर दीक्षाएं चलती हैं तो मैं बिल्कुल ब्लंटली पूछता हूं डाइट नॉनवेज है वेज है अल्कोहल लेते हो कि नहीं लेते हो कुछ बंद नहीं करना है पर बता दो उस हिसाब से हम ओरा को सेट करके मंत्र को तुम्हें बीज मंत्र को देंगे भाई तो हमें पता होना चाहिए कि क्या होने वाला है। तो जब वह कहते हैं कि ज्यादा करके एनआरआई या विदेश के मेरे बहुत अच्छे डिसाइपल्स हैं। तो वह कहते हैं कि स्वामी जी यू नो ऑन आवर लाइफ स्टाइल वी टेक अल्कोहल एंड ऑल दिस थिंग्स।
(22:41) मैं बोला अगर मेरे दिए हुए मंत्र में गुरु के द्वारा गुरुजनों की कृपा से अगर शक्ति होगी तो तुम्हें प्रयास नहीं करना है इसको छोड़ने का। मंत्र करवा लेगा। अगर मंत्र में ताकत है तो अपने आप होगा। और मंत्र में ताकत नहीं होगा तो जाहिर है तुम चिपके रहोगे। इसके गहराई में उतरे कि आदमी एडिक्शन में है क्यों? वो कुछ समय के लिए किसी अलग दुनिया में जुड़ना चाहता है जो उसको थोड़ा सा यू नो इस सामान्य तकलीफों से अलग करके सुकून देती है उसको। तो वह क्या ढूंढ रहा है? वो ढूंढ रहा है अपने ही स्वभाव को ढूंढ रहा है। जो हमारा सतचित आनंद स्वभाव है। एक्सिस्टेंस नॉलेज
(23:20) एब्सोल्यूट ब्लिस वो एब्सोल्यूट ब्लिस एब्सोल्यूट जो है ना उसको ढूंढ रहा है। अब वो देख रहा है या तो एलएसडी में उसको ब्लिस मिलती है या अल्कोहल में मिलती है या स्मोकिंग में मिलती है ये मिलती है। और उसको जब फील होता है कि ये परमानेंट नहीं है ब्लिस। ये टेंपरेरी है तो उसको गिल्ट फील होता है। वो उससे बाहर आना चाहता है। वो स्ट्रगल कर रहा है। लेकिन समाज में हम लोग तुरंत से फ्रेम बना लेते हैं कि यह यहां गया इसने ये किया ये गलत हो गया। है ना? ओपिनियन बना लेते हैं और हम उस ओपिनियन के शिकार भी हो जाते हैं। कई बार परिवार सपोर्ट नहीं करता। तो वह उस गर्त
(23:50) में और गिरता चला जाता है। मुझे लगता है कि यह कोई बहुत बड़ी ना तो बात है और ना कोई बहुत बड़ा अपराध है। यह समाज का कलेक्टिव अपराध है। अगर कोई एडिक्ट हमारे परिवार में है या अल्कोहल ले रहा है या स्मोक कर रहा है तो उसको पूछो भाई क्यों कर रहे हो? क्या मिल रहा है इसमें से? तो बता देगा। उसको अगर ऑब्जरवेशन होगी तो। एंड देयर इज़ अ रूट कि उसके बाद वो यात्रा उस तरफ ब्रह्मानंद की तरफ करना शुरू करेगा तो वो छूट जाएगा। और हम सब अपनेप प्रारब्ध और कर्मा के अनुसार यात्रा करते हैं और अपने देश, काल, परिस्थिति, पात्र और टेस्ट के अनुसार उसको
(24:24) सेलेक्ट करते हैं। उसमें से लर्न करते हैं। ह्यूमन लाइफ इज लर्निंग। अपने आप को ग्रो करना होता है। आप भी ग्रो हुए हो, मैं भी ग्रो हूं। हर पल में हम ग्रो कर रहे हैं। और फिर उस यात्रा में जो लगता है कि यूज़लेस है उस चीज को छोड़ दिया। और जो यूज़फुल है उसको लेके पकड़ के आगे यात्रा कर ली। उसके लिए क्या शोक करना, क्या दुख करना, क्या रिपेंट करना, क्या सॉरी बोलना, मस्ती में रहो, आनंद में रहो। कभी वो सेल्फ पिटी सफरिंग फील हुई आपको? नहीं, मैं मेरे जीवन में ऐसा कुछ चीज रहा ही नहीं। एक पेटी आती थी मेरे जीवन में बहुत बड़ा अपराध बहुत कि मेरे अंदर आने से मेरी
(24:59) बच्ची जो उस समय छ सात साल की थी। उसके साथ जैसे गृहस्ती का नियम होता है। सैटरडे संडे आउटिंग है। समुंदर किनारे चले गए। मैं छ महीने तक जेल में सैटरडे संडे खा नहीं सका, सो नहीं सका। मुझे वह याद आता था कि मैं अपने बच्ची के साथ होना चाहिए। मुझे यू नो मैं उसको अपने हिस्से का वो प्यार नहीं दे पाया देश प्रेम के या धर्म प्रेम के चक्कर में और वो लोग मुझे किसी काम में भी नहीं आ रहे। दैट वाज़ आल्सो लर्निंग फॉर मी। तो यस वो थोड़ा सा गिल्टी रहा कि मैंने वो समय अपनी बेटी को नहीं दे पाया और यू नो वी गिल्ट फील होना चाहिए। पिता को होना चाहिए।
(25:38) और उसका कोई इलाज भी नहीं है। आई मीन उसमें आपको जीना ही है और 2020 फीट की दीवार आपको मन बाहर ले जा सकती है। तन को तो अंदर ही रखती है ना। ये जेल का फज़ क्या आपकी साढ़ेसाती थी? क्या एक ये कोई शनि महादशा टाइप फेस था? कौन कौन सी दशा थी? राहु राहु दशा। मैं उसका बताऊंगा। इफ यू अलव मी। यू कंप्लीट योर क्वेश्चन नो प्रॉब्लम। नहीं राहु दशा के बारे में। मैं मैं बता रहा हूं। मैं ये चीज बताऊंगा। आपको अच्छा भी लगेगा। वो इंसान अभी भी जीवित है। धरती पर है। राजस्थान एटीएस के उस समय डिप्टी सुपरिडेंट थे सत्येंद्र सिंह राणावत और उनके एटीएस की पूरी टीम
(26:15) मतलब मैं छ महीने ऑफ द रिकॉर्ड पुलिस कस्टडी में रहा हूं। ऑफ द रिकॉर्ड कोई मेरी सुनवाई नहीं हुई इस देश में और अब शिकायत भी नहीं है। अब तो चीजें बदल गई। तो मुझे लगा कि भाई हमारे जैसा व्यक्ति इसमें से प्रताड़ित हो रहा है। क्या कारण है? एंड दे यूज्ड टू रिस्पेक्ट मी अ लॉट। देखते थे ना मेरा रहना करना जीवन दो। तो बोलते थे अपने सीनियर्स को कि सर इसका कहीं है नहीं लेकिन उनके सीनियर ने एक मन बना रखा था हमारे विरुद्ध थे और थोड़ा उनका माइंडसेट भी पॉलिटिकल दूसरी पार्टी के लिए था तो मिस बिहेवियर था तो मैंने उनको एक रिक्वेस्ट की कि सर मेरे से एक
(26:47) ज्योतिषी मेरे मित्र हैं राजस्थान जयपुर के वो मिलने आएंगे तो आप 5 मिनट का टाइम देंगे बोले हां हां था तो ऑफ द रिकॉर्ड ही एटीएस कस्टडी तो वो आए शर्मा जी हमारे विष्णु शर्मा और जैसे पुलिस वाले होते हैं क्या लाए हो तो उन्होंने बताया उनकी जन्म कुंडली है इधर क्या लिखा है इसमें तो बोले बोले बोल दो हमारे सामने ही बोल दो अब वो पंडित उनके सामने बोल रहा है डीएसपी के ऑफिस में तो वो कहता है कि अभी आपकी राहु की महादशा प्रारंभ हो गई है राहु की महादशा में राहु की अंतरर्दशा है और पांचों पांच राहु लग गए हैं मतलब जो साइकिल्स हैं तो आप अरेस्ट होने वाले हो
(27:26) उस समय मेरी ऑफिशियल अरेस्टिंग नहीं हुई थी तो डीएसपी बोल रहे हैं कोई अरेस्टिंग वस्टिंग नहीं है यह विटनेस है हमारा तो बोल रहे हैं ठीक है मैं मुझे जो कहना था तो मैंने कहा ठीक है विष्णु जी आप मुझे यह बताओ मेरे लिए समाधान क्या है तो उन्होंने कहा राहु जो है ना वह खतरनाक इल्लुजन का ग्रह माना जाता है आपको ऐसे गहरे कुएं में छोड़ देगा कि आप आवाजें सुन पाओगे कि ऊपर कोई है लेकिन आप बचाने के लिए ना हाथ उठा सकते हो ना कोई हाथ नीचे आएगा। सो वो टाइम आपका चैलेंजिंग होगा। यू वोंट बिलीव मेरी बेल राजस्थान के जयपुर हाई कोर्ट से पास हो
(27:59) चुकी ऑलमोस्ट दो जज साइन करते हैं। उसमें दो की बेंच थी। एक ने कर दिया। दूसरे ने पॉलिटिकल माइंडसेट से साइन करना बाकी रखा था। और मेरी किस्मत या राहु का खेल बोलो कि वो रिटायर हो गए और दूसरा जो उनकी जगह पे आए वो प्लांटेड किस्म का ही था। तो उन्होंने बेल रिजेक्ट कर दी। मेरे वकील ने मुझे गले लगा करके कहा था। गिल साहब बहुत भारत के माने जाने वाले वकील हैं जयपुर के। गिल साहब ने कहा कि आपकी 100% हो रही है बेल। चिंता मत करो। और मैंने जब विष्णु शर्मा जी को पूछा कि क्या कहते हो? बोले दुनिया इधर की उधर आपको साथ-साथ कोई बाहर
(28:36) निकाल ही नहीं सकता। मैंने कहा भाई तुम मेरे दोस्त हो या कानून के दोस्त हो। तो दुश्मनी की बातें कर रहे हो। एंड यू वोंट बिलीव जिस दिन रिजेक्ट हो गई बेल। मेरे वकील साहब आए और उनको लगा इनको बुरा लगेगा। गले लगा करके खूब मुझे सांत्वना दी। बट क्योंकि मुझे पता था कि यह एक कॉस्मिक डिजाइन से हम निकल रहे हैं और आई एक्सेप्टेड इट। और फिर मेरा माइंड पूरा बन गया। विष्णु शर्मा ने जब मुझे बताया कि आप इस समय से पहले नहीं निकल सकते हो। आई सरेंडर एवरीथिंग टू ऑलमाइटी। गुरु जी मेरे साथ थे और पूजा पाठ था। बट इन चीजों को मानना पड़ता है कि यस दशाएं होती है और
(29:12) यह चीजें बहुत बड़ा रोल प्ले करती है। आई आल्सो फील कि जहां तक मेरी समझ है और जहां तक मेरी बात एस्ट्रोलॉजर से हुई है। हर किसी के चार्ट में एक ऐसा ड्राई पैच या हार्ड पैच आ ही जाता है। इफ नॉट नाउ देन व्हेन यू आर 60 70 इयर्स ओल्ड। हां बेड पे लगा देगा वो आपको। कभी-कभी दो-तीन बैड पैचेस मोर देन दैट मोर वो हम हम बोलते हैं क्या घटिया प्रारब्ध लाए हो। ये प्रारब्ध है। पास्ट कर्मास झेलना ही है। कोई एस्केप प्रूफ नहीं सिवाय इसके। आप निकल सकते हो उसमें से। अपनी मेहनत से साधना के बलबूते निकल सकते हो। गुरुजनों की कृपा से निकल सकते हो। स्पिरिचुअलिटी
(29:50) के मार्ग से निकल सकते हो। बट जब आप कह रहे हो कि स्पिरिचुअलिटी के मार्ग से निकल सकते हो। इट्स मोर लाइक खुद के दिमाग को 360 चेंज करना। थोड़ा ऑल्टर करना। माइंडसेट को ऑल्टर करना। वो घटना घटेगी। हम आपको बस माइंडसेट बदलना होगा। ये बिना कृपा के नहीं होता है। आई आई आई विल से उसमें ग्रेस काम करती है। गुरु की कृपा काम करती है। यानी माइंडसेट बदलने में भी। हां। वो प्रेरणा देती है आपको। हम इंस्पायर करती है। गुरु अगर आपका है मेरा सौभाग्य था कि मैं उन परिस्थितियों में गुरुमुखी था। बच गया। अगर मैं गुरुमुखी नहीं होता मैं बिल्कुल
(30:27) मतलब गर्त में गिर जाता। हम दैट वाज़ अ टाइम यू नो या तो मेक होगा या ब्रेक होगा। तो उसमें से ही गढ़ करके बाहर आना था। तो मैं तो उसकी क्रेडिट अपने गुरुजनों को ही दूंगा। वो 18 19 घंटों की साधना में आप रोते थे? कभी? परमात्मा के लिए रोता था। मोह माया छूटा, डिटचमेंट आई। मैंने बताया ना बेटी के लिए मैं पागल था छ महीने तक। फिर धीरे-धीरे मुझे लगा कि यू नो मतलब इन चीजों को कितना कैमरा पे बोलना चाहिए मुझे नहीं पता। जो हमारे एक्सपीरियंसेस होते हैं। तो उसमें जैसे ठाकुर पूछ रहे थे कि इस जन्म की बेटी के लिए मेरे से बात कर रहे हो। तुम्हारे
(31:02) पिछले जन्म की जो संताने हैं उसके लिए मैं क्या करूं? वो भी तुम्हें ढूंढ रही होंगी। उनको याद करो और आने वाले जन्मों के जो रिश्ते होने वाले उनको याद करो। तो सबके लिए रोओगे। यह जो अटैचमेंट्स है मैं यह नहीं कहता हूं निर्मोह हो जाओ बट यू नो सेंस ऑफ डिटचमेंट जो होता है ना कई लोग नहीं होते हैं फैमिली में डेथ हो जाती है उसको नहीं झेल पाते हैं तो इमोशनल ब्रेकडाउन हो जाता है न जाने कितनी दवाइयां खाते हैं बट ये फैक्ट है लाइफ का कि जीवन मरण मृत्यु बिछना बिछड़ना मिलना ये पार्ट एंड पार्सल ऑफ लाइफ मानते हैं कि जज्बात हमारे दुश्मन होते
(31:38) हैं आर इमोशंस एनिमीज़ इमोशन एनिमीज़ नहीं है इमोशंस माइंड की एक क्वालिटी िटी है माइंड मन जो इंद्रियों का राजा है इंद्रियां मतलब आंख कान नाक आपकी त्वचा यह है हम माइंड नहीं है हु एम आई तो मैं सोल हूं मैं आत्मा से अपने को कनेक्ट करूंगा माइंड से नहीं माइंड उसका इनफीरियर वर्जन है जब तक आप माइंड में हो सेंसेस में हो तब तक यह आप लोअर थोड़े से रहोगे जिस दिन आप कनेक्ट हो जाओगे अपनी आत्मा से मेरे स्वरूप से स्वयं के स्वरूप से खत्म या मतलब कभी-कभी तीन चीजों की वजह से एक ट्रैप वाली फीलिंग फील होती है। हम बॉडी फिजिकल बॉडी या
(32:21) लगता है कि ये एक पिंजरे की तरह फील होने लगे अ दूसरी चीज यही सेंसेस और सेंसरी प्लेजर सेंसरी पेन ये सब और थर्ड यही जज्बात इमोशंस आई काइंड ऑफ़ फील लाइक ब्रेकिंग अवे फ्रॉम दीज़ थ्री थिंग्स और फिर मैं कभी-कभी सोचा कि शायद प्रीसन्यास भी यही फीलिंग होती होगी। इसको शब्द है सनातन में विरक्ति विरक्ति विरक्ति डिटचमेंट डेवलप होता है। हमारे रामकृष्ण कहते हैं कि तीन प्रकार के सन्यास होते हैं। एक तो पत्नी ने मां ने बहन ने बच्ची ने झाड़ दिया तो डिटर्ज क्या ये दुनिया में इतना कर रहे हैं फिर भी कोई ग्रेटट्यूड नहीं है। और एक होता है श्मशान
(33:04) वाला सन्यास। किसी को अंत्यष्टि में गए तो कोई कहेगा देखा दुनिया क्या है? कल तक तो यह नाच कूद रहा था। बेचारा चल गया तो लाएगा यार अपने को कुछ करना चाहिए काइंड ऑफ और तीसरा जेन्युइन सन्यास जो कर्मों के आधार पर गुरुजनों की कृपा से परमानेंट रहेगा जो श्मशान वाला सन्यास है वो 24 घंटे में हट जाएगा मरने वाला मर गया अभी ठीक है ना अपना तो है शेयर मार्केट में लगा रहे हैं सोने को परचेस कर रहे हैं दुबई घूमने जाना है काइंड ऑफ यू नो और किसी रिलेशन से हर्ट हुए हो तो दो-चार दिन में वो भी ठीक हो जाता है बट जो परमानेंट सन्यासी होता है
(33:36) नेचर में आ गया कृपा से वो फिर देखना शुरू करता है महसूस करना शुरू करता है। उसके ऑब्जरवेशन में वो चीज आती है। एक्सपीरियंस में वह चीज आती है। वह ऐसा ही है जैसे भगवान बुद्ध को देव जगाने के लिए आते थे कि जागो तुम किस लिए पैदा हुए हो? दिस इज नॉट द यू नो पर्पस ऑफ योर लाइफ। उठो टू बी अ प्रिंस। हां। ये सिर्फ हां प्रिंस होने के लिए तुम नहीं हो। तुम दुनिया को मार्ग दिखाने के लिए आए हो। तो वो सन्यास सही सही में सन्यास है। और मैं सन्यास को अपनी तरफ से इंटरप्रेट करता हूं। सम न्यास स्वयं का न्यास जब पूजा पाठ और जप करते हैं तो न्यास करते हैं ना तो
(34:11) अपने आप को एक मतलब कमिटेड कर लेते हैं। तो जब तक वो कमिटमेंट स्वयं के अंदर से नहीं आती तब तक आपका सन्यास पकता नहीं है। गेरुआ तो सब कहीं डाल देते हैं। लेकिन उस गेरुआ के पर्पस तक पहुंचते कितने हैं? लेकिन यही एक मार्ग है जब आपको अपने होने का एहसास होता है। अपने पपस का पता चलता है और वास्तविक जगत की तभी खिड़कियां खुलती हैं आपके लिए। इस चीज का अनुभव अरविंदो घोष ने किया। इसी चीज का उल्लेख विवेकानंद करते हैं और इसी चीज का सारे सन्यासी करते हैं। कि इतनी मूर्खता थी कि जब तक हम जगत में थे, सेंसुअल प्लेजर्स में थे तब तक लगता था सब सही था लेकिन वो
(34:49) गलत था। अब सही है। तो सन्यास बोरडम नहीं है। सन्यास एक्चुअली राजाओं का धर्मा है। आप राजा बनते हो। बट जो लोग सन्यास में नहीं टिक पाते व्हाट इज द रीज़? कई फैक्टर्स हैं। उसके प्रारब्ध को भी लेकर के है। गुरु के प्रति उसकी निष्ठा नहीं है। उसकी साधना ठीक नहीं है। खानपान, रणसन, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, ब्रह्मचारी इत्यादि जो पैराटर्स होने चाहिए। इसीलिए सन्यास लोग गेरुआ देखकर समझते हैं वो सन्यासी है। सन्यास की भी कैटेगरीज होती हैं। जैसे सन्यास में द लास्ट कैटेगरी परमहंस सन्यास होता है जो गुरु कृपा से मुझे प्राप्त है। अदरवाइज
(35:25) ब्रह्मचर्य उसमें होता है। नैष्ठिक सन्यास होता है। तीन लेवल्स होती हैं जिसमें कभी शिख वो मेंटेन करते हैं। जनेऊ मेंटेन करते हैं। वो अभी सन्यासी नहीं हुआ है। गेरवा पहन लिया लेकिन सन्यासी हुआ नहीं है। तो जो अंतिम परमहंस सन्यासी होते हैं वो सबसे परमहंस का मतलब ही यही है। परमहंस वो होता है जो दूध को और पानी को अलग कर सकता है। इट्स अ सेइंग यू नो पानी में दूध मिला हुआ है। वह दूध दूध खा लेगा पानी पानी छोड़ देगा। तो परमहंस भी संसार संसार छोड़ देगा और परमार्थ परमार्थ पकड़ लेगा। हम तो वो सन्यास की तीन कैटेगरीज को भी समझना
(35:59) पड़ेगा। हम आपको लगता है यह आपका आखिरी जन्म कुंडली तो कह रही है ओके केतु आपके 12थ हाउस मैं मानता हूं कि एक चक्र से हमें थोड़ी देर के लिए ब्रेक दिया जाता है। जैसे कबड्डी कबड्डी खेल देते हैं ना खोखो फिर वो प्लेयर को कहते हैं कि थोड़ी देर तू बाहर बैठ जा दूसरा आएगा तो इट्स काइंड ऑफ यू नो गुरुजन हमें कहते हैं कि तुम्हारा असाइनमेंट था ये तुम्हारी असाइनमेंट है हो गई अब थोड़ी देर आराम कर जब जरूरत पड़ेगी फिर ला देंगे सो दिस इज माय पर्सनल बिलीफ थोड़ी देर के लिए वो विश्राम हो जाता है उसको हम शायद मोक्ष कहते हैं फिर वापस आना होता रामकृष्ण परमहंस कहते
(36:36) हैं कि जो नित्य मुक्त जीव होते हैं थ्री कैटेगरीज ऑफ जीव वह मछली के एग्जांपल से समझाते हैं कि जाल फेंकता है मछुआरा तो उसमें जो जाल में मछलियां फंस गई तो 95% वह सोचती है फंस गए ना अभी अंदर ही बैठो तो वो कट के फिर सब्जी बनेगी उसकी दो पांच जो है वो स्ट्रगल कर लेती है जंप कर लेती है उसमें से तो वो बच गई और जब मछुआरा फेंक रहा होता है तभी एक दो मछली उसको देख लेती है कि जाल आ रही है उसके पहले से निकल लेती है तो वह जो देखते ही पहले निकल गई वह नित्य मुक्त होते हैं उनको पता है बंधन आ रहा है उसके अलर्ट हो जाओ और जो संसारी
(37:13) जीव है वो 95% फिशेस की तरह वो पकड़े जाते हैं। है ना? मतलब यहां हमारी सब्जी बकरी है। इस इस दुनिया में हां लेकिन इट्स अ लर्निंग। इट्स अ ग्रोइंग यू नो। हम सब उसमें से लर्न कर रहे हैं। एनलाइटन कैसे होगे? बुद्ध को भी इस मार्ग से निकलना पड़ा है। निकलना तो है। दैट्स अ वे। वी हैव अ इंटर टू सफर। आई विल नॉट से सफर। सफर वर्ड नेगेटिविटी वाला है। लर्निंग इज वेरी गुड सब्जेक्ट। एवरीडे ए्री मोमेंट वी आर लर्निंग हम क्या आपके मन के अंदर किसी इंसान को देख के ही आपको उनके चार्ट के बारे में पता चल जाता है ये छोटाम बड़ी बात है मतलब सोशल मीडिया पे
(38:01) ऐसे बोलना अपनी ही मतलब डफली बजाना है बट जैसे मैं बता रहा हूं अपने अनुभवों से जी हम मंत्र दीक्षा जब देते हैं उसमें से सिलेक्शन प्रोसेस होता है मंत्र मंत्र दीक्षा का एक तो उसका प्रोसेस भी होता है उसके यज्ञ वगैरह पूरे करके जब मंत्र दीक्षा लाने के लिए वो मेरे सामने आता है प्रत्यक्ष तो उसका ओरा से पता पड़ जाता है कि उसका इष्ट कुल वगैरह क्या है उसको मंत्र क्या देना है देना भी है कि नहीं देना है मेरे लिस्ट के अंदर कई ऐसे 101% शिष्य हैं जिनको मैंने मंत्र उसमें कहा कि यू डोंट डिर्व राइट नाउ अभी इस इस प्रोसेस में से जाओ बट द टाइम विल कम जब होगा बहुत
(38:36) अच्छा है बट अभी नहीं और कई बार ऐसा होता है कि वो बहुत छोटी छोटी सी मतलब रिक्वायरमेंट लेके आता है कि मुझे इतनी साधना है तो हमें पता है कि इसकी साधना पूर्व की हुई है तो उसको कहते हैं कि थोड़ा बड़ा अनुष्ठान दे रहा हूं करो फायदा होगा। भगवान की दया से ऐसे भी शिष्य हैं कि आज वो एक लेवल पर हैं। बहुत अच्छी तरह से दिखना शुरू होता है। अनुभव शुरू होता है। तो वो चीज सिर्फ जन्म कुंडली तो सहायता देती है। जैसे हमारे सन्यास के पहले गुरुदेव ने जन्म कुंडली दिखाई थी ज्योतिषी को कि भाई ये हमारे आश्रम के लिए एसेट वैल्यू है, लायबिलिटी है वो देखा
(39:09) जाता है। तो उन्होंने कहा था कि यस यस इनका सूर्य और गुरु की युक्ति जो है वो अद्भुत है। सन्यास के लिए है। तो आप इनको मतलब गादी तक भी दे सकते हैं। यू कैन यह आगे ले जाएंगे। तो, यह चीजें विज़िबल होती हैं। जन्म के चार्ट से दिखती हैं। हम हम ओके। मेरी बातें काफी सारे कंटेंट क्रिएटर्स के साथ होती है। और कंटेंट क्रिएटर्स ना आई फील एक्चुअली उनकी कला है थोड़ी सी फ्यूचर को प्रेडिक्ट करना। ये देखना कि सोसाइटी कहां है और उस के मुताबिक कंटेंट बनाना। हम मैं अभी 11 सालों से कर रहा हूं ये। हम दिस एक्सैक्ट जॉब। अच्छा। और पहली बार मुझे ना कंफ्यूजन फील हो रही
(39:49) है फ्यूचर के बाद में कि पता नहीं इंसानों का दिमाग अब कहां है। वी एट्रिब्यूटेड टू शॉर्ट कंटेंट। बट आई थिंक और भी फैक्टर्स होंगे। अ सारे कॉन्टेंट क्रिएटर्स काफी हद तक ना कंफ्यूज है। किसी को नहीं पता कि आने वाले एक दो तीन सालों में क्या होगा। हम साथ में दुनिया में युद्ध चल रहे हैं। इतना कुछ हो रहा है। स्टार्स के मुताबिक एग्जैक्टली क्या हो रहा है? इतनी कंफ्यूजन क्यों है एटमॉस्फियर में? क्या दुनिया भर एक-एक कंफ्यूजन का माहौल है? इसको हम कहते हैं ट्रांजैक्शन पीरियड। घर्षण काल जब टलाइट टाइम होता है ना संध्या और रात मिलने वाली होती है या रात के बाद अर्ली
(40:28) ब्रह्म मुहूर्त होता है तो वो वो संधि काल होता है। जी ये संधि काल है। हम एक ऐसे फेस के अंदर एंटर हो रहे हैं। फुल ह्यूमैनिटी इट्स नॉट ओनली इंडिया। हम् पूरी ह्यूमैनिटी पूरा वर्ल्ड और उस ट्रांजैक्शन में से निकलने के लिए ऐसा ही है कि वह उसकी परिपक्वता के लिए मैच्योरिटी के लिए लर्निंग के लिए जरूरी है। कुछ लोग जाएंगे उनको जाना है। और मैंने उस वक्त भी कहा था 1000 डेज आज हम मिल रहे हैं तो 500 600 दिन निकल चुके हैं। करीब 400 दिन बाकी हैं। इफ यू रिमेंबर मेरे कई पडकास्ट में एक ही बस है कि हजार दिन रफ टफ है निकाल लो किसी भी
(41:09) तरह से और उसमें भी धर्म की शरण में आ जाओ बी स्पिरिचुअल पर्सन थोड़ा सा स्टार्ट करो 24 घंटे के 24 मिनट सब ठीक होगा जो बच जाएंगे वो सेकंड फेज में जाएंगे सेकंड फेज वाले फिर बच जाएंगे थर्ड फेज में जाएंगे और यह पूरी आप समझ लो शांति होगी 2040 के आसपास सेटल होगा तूल तो थोड़ा सा रफ है आई मीन डरने की बात नहीं है 10 साल 10 20 से ज्यादा हो गया। 26 चल रहा है तो 14 साल बट पहले 400 दिन अभी टफ है। जब मैं आपसे बात कर रहा हूं ना मैं मेरे मुताबिक मैं दो लोगों से बात कर रहा हूं। एक सन्यासी बैठे हैं मेरे सामने। आई एम सॉरी इफ आई एम सेइंग। बट कुछ हद तक ना एक
(41:51) ब्रो भी बैठे हैं। आई एम ऑनर्ड। आई एम ऑनर्ड। वो उस ब्रो से बात करना चाहूंगा थोड़ा। बिल्कुल। फील फ्री। ये एलियंस की न्यूज़ आपने पढ़ी? हां आजकल तो फाइल्स भी पब्लिक फोरम में आ गई है। हां मतलब ब्रो लेवल पर आपके क्या राय है वो एलियंस को लेके? मैं जिस देश में धर्मों में और परिस्थितियों में पैदा हुआ हूं उसमें तो पहले हजारों सालों से हमने तो इन चीजों को माना ही है। यक्ष है, किन्नरव है, गंधर्व है, यक्ष है, चारण है, नाग है। हमने तो हर योनि को स्वीकार किया हुआ है। हमने उनके चित्रण भी किए। उसके पुराण लिखे, उपनिषद लिखे। पूरा ब्यरा दिया। अब इससे ज्यादा और
(42:30) क्या दे सकते हैं? टेक्नोलॉजी के हिसाब से वो जाके अब स्वीकार करती है वेस्टर्न वर्ल्ड कि हां ये कोई चीज है क्योंकि प्रूफ है सबूत है एज इन सबूत पब्लिकली निकला है हां तो लेकिन जिन लोगों के दर्शन हो चुके हैं या कर चुके हैं अनुभव में तो वो तो हमारे ऋषि मुनि या संत महात्मा आज भी इस चीज को बोलते हैं कि ये सब चीजें इंक्लूडिंग जब कैलाश मानसरोवर की यात्रा वगैरह के अनुभव होते हैं नर्मदा परिक्रमा की यात्रा के अनुभव होते हैं तो यस ये एंटिटीज से कभी ना कभी थोड़ा बहुत इंटरेक्शन हो ही जाता है। तो ये जो हायर बीइंग्स आपने नेम करे गंधार
(43:06) यारारी व्हिच ऑफ देम इज लिंक टू एलियन लाइफ नहीं एलियन शब्द अपने आप में ये हमारा शब्द एलियन नहीं है। हम पराग्रही कह सकते हैं। पराग्रही पराग्रही मींस ग्रह मींस प्लनेट पर मींस जो हमसे परे है या हमसे दूर है। हमसे अलग है। है ना? परग्रही हमारा हो सकता है। एलियन तो उनका शब्द है। वह तो एलिनेट कर लेते हैं ना। उनकी पूरी लॉजिक और सब चीजें जो सीखने की है वो थोड़ा नेगेटिव टच के साथ आती है। हमारी पॉजिटिविटी ग्राह्य स्वीकार्य भाव से होती है। तो हम कहते हैं परग्रही हम इस ग्रह के हैं। तुम परग्रह के हो। भाई हो तो हमारे वाले ही हो।
(43:44) क्योंकि तुमको भी पैदा करने वाला वो परमपिता परमेश्वर वही है। मतलब मैं मानता हूं कि अंतरिक्ष या यूनिवर्स यह भी परमात्मा ने ही बनाया। बनाया मतलब ऐसे नहीं मिस्त्रीविस्त्री लगा के बनाया होगा उसकी इच्छा मात्र से हो जाता है जैसे परमात्मा ने चाहा उसकी चाहत से उसकी इच्छा से हो गया और ये इच्छा हम क्यों नहीं समझ पा रहे हैं क्योंकि इट्स इंफिनिटी हरि अनंत हरि कथा अनंता वो नहीं बोलते हैं अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक राजाधिराज योगीराज परब्रह्म श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईंनाथ महाराज वो अनंत कोटि ब्रह्मांड का जो नायक है उसके सामने कैटेगो िकली हम कितने हैं?
(44:26) शुद्र है। हमारी कैपेसिटी नहीं है। इंफिनिटी को हम क्या नापेंगे? हम उसको नापने के लिए हमें भी इंफिनिटी के लेवल पे आना पड़ेगा। थोड़ी सी एक लंबी एक्सप्लेनेशन है। मैं शॉर्ट में बताने की कोशिश करूंगा। बेसिकली मानते हैं कि अगर एलियंस हमसे 100 साल भी पुराने हैं। तो 100 सालों में टेक्नोलॉजिकल एडवांस बहुत ज्यादा हो जाते हैं। जैसे अभी एडवेंट ऑफ़ एआई की वजह से बहुत कुछ अभी हो रहा है दो-ती सालों में। तो अगले 100 सालों में क्या होगा? एलियंस के पास बहुत ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी है। दिस इज द ऑब्वियस थ्यरी। उस वजह से वो यूएपी, यूएफओस उस तरह के बना
(45:03) रहे हैं। हम मैं सोच रहा हूं अगर इतनी बेहतरीन टेक्नोलॉजी है उनकी मतलब उनका इंटेलेक्ट भी बहुत ज्यादा होगा। और अगर इंटेलेक्ट बहुत ज्यादा उन्होंने भी भगवान के बारे में सोचा होगा। आप जब वेदांतिस्ट बनते हो, अद्वैत वेदांत को जब पढ़ते हो तो आप भगवान को अपने से अलग नहीं समझते हो। आपको खुद फील आता है अहम ब्रह्मास्मि ब्रह्म हो जाते हो खुद ही तो जो उस लेवल पर हैं ना वो ब्रह्म से अलग नहीं है। वह ब्रह्म का ही स्वरूप है। अहम ब्रह्मास्म जब हम बोल सकते हैं तो उनको अनुभव में नहीं होगा। इजिप्ट के पिरामिड्स हो या हमारे एजेंडा एलोरा की केव्स हो या इतने भव्य और
(45:46) दिव्य मंदिर हो या कैलाश की बातें हो वो कहीं भी जिस जिस फादर की सपोज़ करो मेरे प्रॉपर्टी है तो बचपन में हम नहीं कहते पापा मुझे एक चॉकलेट लेके दीजिए एग्जांपल तो हम सोचते हैं कि पापा बड़े हैं या पापा की प्रॉपर्टी है और वो तो मुझे चॉकलेट जितना ही चाहिए बट जिस दिन आप समझ जाते हो कि आप ही उनके वारसदार हो यह प्रॉपर्टी आपकी है तो आप क्या पापा से पूछते हो कि चॉकलेट ले आऊं दुकान से आप मालिक हो बॉस की सीट पे बैठते हो तो अहम ब्रह्मास्म उस लेवल की स्पिरिचुअलिटी है कि आप ब्रह्म बन जाते हो। तो वह तो ऑलरेडी उस रिले में चल रहे हैं। उनके साथ ही चल रहे हैं। मैं
(46:21) नहीं मानता हूं भगवान ये चीजें बहुत अच्छी सनातन के अंदर कैटेगोरिकली दी गई है कि देव कौन है? भगवान कौन है? ईश्वर कौन है? परमेश्वर कौन है? यू नो जैसे-जैसे आप रीड करोगे, आपका कंफ्यूजन दूर हो जाएगा कि वाह! कितने हायर लेवल की फिलॉसोफी के साथ मतलब ये चीजें बताई गई हैं। तो भगवान तो पांच एलिमेंट्स में ब से बू है, ग से गगन है, व से है ना आ से अग्नि है, न से नीर है, व से वायु। तो पांच तत्वों को जो अपने अधीन कर ले, वह भगवान। भगवान ऐसे थोड़ी है कि भगवान परमपिता परमेश्वर नहीं बोल रहे हैं। भगवान तो आप और यह सनातन पूरी छूट
(46:57) देता है। आप भी भगवान बन सकते हो। हम भी भगवान बन सकते हैं। नहीं संत के आगे भगवान श्री लगते हैं। हम गुरु भगवान बोलते हैं। भगवान है। भगवान कोई बहुत बड़ी बात नहीं। पद है। लेकिन परमपिता परमेश्वर वह एक है। परमेश्वर एक है। जैसे हायर लेवल मतलब और वो सब को एक ना एक दिन उस स्वरूप में मर्ज होना है। ऐसा शास्त्र भी कहता है। आप अल्टरनेट टाइमलाइंस में बिलीव कर दो। कि अलग-अलग रियलिटीज हो सकती हैं। जहां अलग यूनिवर्स में, अलग रियलिटी में स्वामी और रणवीर से बात कर रहे हैं। बट और कुछ चल रहा है। वहां दोनों झगड़ा कर रहे हैं एक दूसरे।
(47:39) मतलब सनातन धर्म क्या कहता है ये अल्टरनेट टाइमलाइंस अल्टरनेट रियलिटीज के। मैं हमेशा कहता हूं कि सपोर्टिंग एविडेंस और एक उसकी होनी चाहिए प्रूफ। तो यह चीज कृष्ण और अर्जुन से रिलेटेड मैं बहुत छोटे में ही आपको बता दूं कि जब अर्जुन के पांचों पुत्रों का वध हो जाता है अश्वत्थामा के द्वारा तो वो कहते हैं कि मुझे कृष्ण वो संभल नहीं रहे थे सोचो तो कृष्ण उनको कहते हैं कि तुम क्या चाहते हो? तो बोले एक बार मुझे अपने बेटों से मिलाना एक बार आखिरी बार मैं देखना चाहता हूं। कृष्णा से मांग रहे हो बहुत छोटी चीज है। कृष्ण कहते हैं मिल लो लेकिन कोई
(48:16) फायदा होगा नहीं। क्योंकि तुम जिस लेवल पर हो वह अलग लेवल है और वह जिस लेवल पर चले गए वह लेवल अलग हो गई। उनकी डिटचमेंट हो चुकी है। फिर भी तुम मिलना चाहते हो तो चलो। तो वो देखते हैं कि पांच पुत्र खेल रहे हैं। तो करुणावश प्रेमवश पिता का प्रेम हृदय उनको बुलाते हैं कि बेटा आओ तो उनके पास उस प्रेम से आते ही नहीं है। तो वो पूछते हैं कि कृष्ण क्या हुआ? यह भूल गए। बोले नहीं नहीं ये जो भी डिटचमेंट थी यह धरती का खेल था। और समझो आपके प्रश्न के सेकंड हाफ को पूरा करता हूं। बोले यह पेड़ देख रहे हो? वो पूछते हैं कि कृष्ण फिर यह माया क्या है? तो बोलते मैं बता
(48:54) रहा हूं। ये सामने पेड़ देख रहे हो तो बोलते हां क्या है ये? तो बोले जामुन का पेड़ है। काले जामुन होते हैं। नजदीक जाकर देखो। तो इन श अर्जुन जब जाते हैं तो एक-एक जामुन एक-एक गैलेक्सी है। वो दर्शन का विवरण है हमारे शास्त्रों में। तो अनंत क्या होता है? है वो अनंत उर्द मूलम अद शाकम 15वा अध्याय गीता का वही डिस्क्रिप्शन आएगा तो यह जो आप चीज बोलते हो ना मल्टीपल हम मतलब देखते हैं गैलेक्सीस में मल्टीपल मतलब हो सकता है एक रणबीर वहां भी बैठा हुआ है एक वहां पे यो बैठा हुआ है ये क्वाइट पॉसिबल नहीं है लेकिन हमारी शद्र बुद्धि के अंदर वो सब
(49:29) चीजें फिट हो नॉट नेसेसरी इंसानों का इंटेलेक्ट वहां तक नहीं पहुंचा जहां इसे समझ सके बट शास्त्रों के मुताबिक ये है है और जिन लोगों की मतलब वो अंडरस्टैंडिंग और क्लेरिटी आ चुकी है उन्होंने इस चीज को स्वीकार भी भी किया और अच्छे से एक्सप्लेन भी किया हुआ है। हम हम सद्गुरु ये कहते हैं उन्हें पूछा गया आई थिंक के बारे में ही और उन्होंने कहा मेरी आंखों को देखो हम मैं हमेशा स्टोन रहता हूं। ये मैंने बहुत सारे साधकों के साथ देखा है कि वो थोड़े ब्लिस्ड आउट रहते हैं। इसका तिनका ना मैं महसूस करने लगा हूं आजकल। बहुत बहुत ही ज्यादा शांति है। अ
(50:11) आई जस्ट फील कि मैंने एक ट्रांसफॉर्मेशन एक्सपीरियंस करी अब तक। आई वंडर कि आपने जो 18 19 घंटों की साधना करी आपका भी दिमाग बदला होगा। हां वो ट्रांसफॉर्मेशन की फीलिंग क्या होती है? जो डलजंस हैं या अपने कंफ्यूजनंस हैं या लाइफ के हम माइंड में ब्लॉक्स ले चलते हैं। वो धीरे-धीरे टूटने लगते हैं। हम हम सही और गलत को समझने की अपनी वो कैललेबर को डेवलप कर लेते हैं। मेरा कौन है? मेरे लिए कौन है? वास्तव में कौन है? यू मस्ट हैव एक्सपीरियंस दी थिंग्स कि उस क्राइसिस के टाइम पे कौन खड़ा था। कोई विरोध नहीं है। अभी किसी से शिकायत भी
(50:52) नहीं है। पर वो चीजें समझ में आ गई। अब हमें पता है कि किसके लिए क्या कैसे करना है। और मेरे पर्सनल के लिए यह समझ में आ गई कि मेरी प्रायोरिटीज़ क्या हो गई। हमें हमारे जीवन की प्रायोरिटी समझ में आ जाती है। मतलब ओवरथिंकिंग बंद हो जाती है। ओवरथिंकिंग क्लेरिटी या बहुत क्लेरिटी हम पता नहीं क्यों बस महातारा से शुरुआत करनी है। आप कुछ भी कहना चाहोगे मैं दश महाविद्या का जिसमें कहेंगे हमारे गुरु रामकृष्ण परमहंस काली के बामा केपा तारा के उपासक रहे। मैं 10 नाम हमेशा साधकों को अपने कहता हूं कि अपनी पूजा में इस चार लाइनों को जोड़ो
(51:32) तो 10 महाविद्या से कनेक्ट हो जाओगे। काली तारा महा विद्या शोशी भवनेश्वरी भैरवी छिन मस्तिका च विद्यामावती तथा बगला सिद्ध विद्या च मातंगी कम एता दश महा विद्या सुध विद्या प्रकीर्तिता दोमावती मां के सानिध्य में है सब एंड
(52:22) तारा की बात करना चाहते हैं एक्चुअली क्या है दश महाविद्या विद्या एक ही है सती की कहानी से जब चलेंगे सती दहन कर लेती है उसके पहले की ये दश महाविद्याएं क्रिएट होती है। जब वह शिव जी को कहती है कि मैं जाना चाहती हूं। मेरे पिता का यज्ञ है। दक्ष का इनविटेशन आया है। आप चलो। शिव जी कहते हैं मुझे इनविटेशन नहीं आया। तो तुम्हें नहीं जाना चाहिए। नारद जी ने अपना खेल खेल चुके हैं। वो स्टोरी है। तो सती जो है शिव जी को पहले काली का रूप दिखा देती है कि मुझे जाना है। शी इस गेटिंग एंग एंग्री काली। और फिर शिव उस दिशा को छोड़कर के 10
(53:01) डायरेक्शन दूसरी दिशा पकड़ते हैं। तो फिर वह तारा फिर वो शोशी फिर वो भुवनेश्वरी फिर दुमा दस 10ों दिशाओं में उसको दिखा दिया कि वो मैं ही हूं। तुम शिव हो एग्रीड लेकिन शिव की वो जो संस्कृत या हिंदी में आगे की इ की मात्रा निकाल दो तो क्या वर्ड बनेगा? छोटी मात्रा निकाल दो तो शव बनेगा। विदाउट शक्ति तुम शव हो। तो इसीलिए काली के चरणों में है शिव तारा एक्चुअली उस समय अखंड भारत या सनातन को हम कहेंगे तारा की मूल पीठ चाइना में है हम और ये मैं हजारों साल दूर की बात करूंगा कि चाइना में है तो मतलब मां ने स्थान छोड़ा थोड़ी होगा वो तो फिर ऋषि ले आते
(53:46) हैं अगस्त उसको बंगाल के अंदर जो देखते हो उस उसके बाद की पीठ है मतलब तिबेट हां हां तिबेट ओके उस समय चाइना जैसा कोई ऐसे वर्ड नहीं है ना जी जी तो वो भारत के उस क्षेत्र में है तारा तो वो वहां से लाते हैं और फिर स्थापना होती है और बामा खेपा जी का अवतार जो है उसका मतलब अद्भुत आप फील करोगे कि मां को भोजन करवा रहे हैं और इतना मतलब एकाकार हो गए हैं। ये दोनों समकालीन है। रामकृष्ण परमहंस और बामा के पास समकालीन है। एक काली का बच्चा है। एक तारा का है। और वो जब तारा को भोजन करवाते हैं तो तारा उनको भोजन करवाती है। और सामने देखने वाले को
(54:25) क्या दिखता है कि बामा केपा अपना झूठा भोजन देवी को करवा रहे हैं। तो पंडित ने बोल दिया जो भी ट्रस्टी वगैरह रहे होंगे कि यह तो स्वीकार्य नहीं है अभी ऑलराइट। बामाखेपा तो एक ऑर्डिनरी पुजारी की कैटेगरी में है वहां पर तो उन्होंने बोल दिया कि मंदिर के बाहर चले जाओ। जब बामा खेपा मंदिर के बाहर कर दिए गए तो मां को जब भोग लगाया गया तो यह हर मंदिर में होता है। जो भी प्रतिष्ठित शक्तिपीठ के मंदिर हैं, शिव जी के मंदिर हैं उसमें आपने देखा होगा गर्भगृह बंद कर दिया जाता है। तो ठाकुर भगवान वो स्वरूप ग्रहण करते हैं वो और आपको अनुभव आता है। होता है आज
(55:03) भी होता है। सब में होता है। तो वो देख रहे हैं कि मां भोजन नहीं प्रसाद नहीं ले रही है। और फिर वह जो भी हर्ताकर्ता उस समय के थे उनके स्वप्न में आई कि मेरे बेटे को तुमने बाहर निकाल लिया मैं अपने बेटे के हाथ से ही खाऊंगी। तो हाथ जोड़कर के बामा कैपा को लाना पड़ा कि मां को भोजन करवाओ। अब क्या रिलेशन रहा होगा? यह कोई बहुत दूर की कहानी नहीं है। 150 200 साल पुरानी है। तो क्या साधना की होगी? क्या तारा के मतलब साथ उनकी वो रही होगी? तो हम दश महाविद के अपने मतलब टेंपरामेंट को ध्यान में रखते हुए हो सकता है मेरे लिए काली हो आपके लिए तारा
(55:40) हो उनके लिए दो अलग हो कोई शोडशी हो तो वो देश काल परिस्थिति पात्रता अपनी पात्रता को ध्यान में रखते हुए और गुरु के निर्देशन में जो विद्या को आप करना चाहते हो तो ही वह सफल होती है। अदरवाइज उसी विद्या के अतिरेक करने से लिमिट्स क्रॉस करने से वही विद्या आपको मार देगी। इसीलिए दश महाविद्या की जो साधना है थोड़ी कड़क है उग्र है। सतर्क होकर करनी चाहिए। प्रोसीजर है उसकी स्टेजेस है कि पहले नाम से करोगे फिर रूप में आओगे फिर धीरे धीरे धीरे बढ़ोगे स्तत्र नॉट एक दिन में किसी को सिद्धियां प्राप्त नहीं होती है। रामकृष्ण परमहंस की स्ट्रगल को अगर आप
(56:17) पढ़ेंगे बाबा कृपा की स्ट्रगल को पढ़ेंगे तो इट टेक्स टाइम। ऐसे नहीं होगा कि अब्रप्टली आपको बस मां कृपा कर लेंग और इस एलुसिनेशन से निकल जाना है कि जब हम काली को उपासना करते हैं तो हम काली मतलब हमारे अंदर आ जाएगी जीभ बाहर आ जाएगी। ऐसा नहीं हुआ है भाई। ऐसा नहीं होता है। शरीर फट जाएगा। वो चेतना वो जो एनर्जी है वो इतनी शुद्ध नहीं है। इतनी छोटी नहीं है कि हमारे जैसे दूषित शरीर में भी प्रवेश करेगी। हां यह है कि उनकी जो योगनिया होती है उनकी जो मतलब उपदेवियां हैं वो अपना कार्य करती है एग्रीड पर देवी पूर्ण रूप में नहीं होती कभी भी प्रवेश में तो मेरा
(56:57) तो गुरु कृपा से जो मैंने अपने चॉइस ली एक होता है ना आपने जैसे हम बोलते हैं तुम्हारा कुल देवता क्या है और इष्ट क्या है तो मैं अपने इष्ट के लिए कहूंगा कि दो आई बिलोंग टू रामकृष्ण परमहंस जी की इष्ट काली है तो रामकृष्ण मेरे गुरु हैं तो मुझे काली करनी चाहिए नहीं मेरी श्री विद्या में छोड़ है और मैं उस स्वरूप से संतुष्ट हूं। उन्हीं की पूजा पाठ में करता हूं। तो हमेशा मैं इस चीज को कहता हूं कि किसी बड़े घराने की बुफे डिनर में जाते हो शादी में तो देयर आर वैरायटीज ऑफ यू नो पुलाव हैं, बिरयानीज हैं, दाल है, मिठाइयां हैं। आपको जो पचता है ना उतना ही
(57:34) भोजन लो। ज्यादा करने जाओगे वोमिट हो जाएगी। डाइजेशन आपको ध्यान में रखना है। सो इफ आई एम कंफर्टेबल एंड कंपेटेबल टू दैट श्री विद्या ऑलराइट आई एम हैप्पी। फिर मुझे दूसरी जगह मुंह नहीं मारना चाहिए कि यह भी करूं वो भी करूं। एक साधे सब सधे सब साधे सब जाए। सब करने जाओगे छूट जाएगा। स्पिरिचुअलिटी का नियम है। यू हैव टू फोकस ऑफ़ माइंड। जो वो मैग्नीिफाइड ग्लास होता है ना एक ही जगह फोकस करोगे तो अग्नि प्रज्वलित होगी। घुमाते रहोगे तो कुछ नहीं। तो गुरुजन भी यही कहते हैं कि आप कम विथ योर फुल सेंसेस। क्या चाहिए? टेक का, टेक टाइम। हम आपको समय देते हैं। आप थोड़ा
(58:10) प्रेयर करो, यह करो। थोड़ा सा इनिशियल जो होता है फिर समझ में आ जाता है कि मेरी जो चॉइस है या मेरा जो इष्ट है वो यह है और वो कुछ भी हो सकता है किसी का बैरव हो सकता है किसी का तारा हो सकता है ये हो सकता है सो उनकी कृपा उनकी सिलेक्शन हमारा सरेंडरी आपने कोर साधना को समझाया है और हमारे पहले वाले पॉडकास्ट में भी मैंने बहुत सारे सवाल पूछे थे आपको साधना से रिलेटेड बेसिकली गुरु की जरूरत होती है आपने कहा कि फोकस िस्ट पाथ की जरूरत है। हम हमारे ये पिछले हाफ में आपने भगवत गीता मेंशन करी। हम मेरी खुद की जिंदगी में ना सोशल वर्क बहुत
(58:55) भयानक तरीके से बढ़ रहा है। हमेशा था पांच छ सालों से था। और भी बढ़ रहा है। और तीसरी चीज क्रिया क्योंकि हम कांस्टेंटली मावदार बाबा जी के पार। ये तीन फैक्टर्स। भगवत गीता, अह सोशल वर्क और क्रिया तंत्र साधना से कैसे जुड़े हुए हैं? ये सब है ही तंत्र है एक्चुअली तो। तंत्र क्या है? मैंने पिछली बार भी कहा था। एवरीथिंग इज तंत्र। देश में रहते हो लोकतंत्र। प्रजातंत्र। टेक्निक वर्ड का ट्रांसलेशन है तंत्र। तंत्र मींस टेक्निक। सचिन तेंदुलकर अगर बैटिंग करते हैं तो आचरेकर जी उनको टेक्निक सिखाते हैं। तो यह क्रिकेट का तंत्र है। हम और आपका एकिस्टेंस है तो हम
(59:42) किस वजह से आज धरती पर हैं? वी हैव टू एक्सेप्ट इट। कामतंत्र मानना पड़ेगा। तो तंत्र तो सब में लगेगा। अब अब यह कैमरास चल रही है, शूटिंग हो रहा है, पूरा रिकॉर्ड हो रहा है। तो उसमें टेक्निकल स्टाफ का काम है। वह तंत्र ही तो कर रहा है। बट वो रिलेटेड टू यह पॉडकास्ट तंत्र कर रहा है। तो उस परमात्मा तक पहुंचने के मार्ग के लिए हम जिस तंत्र का सहारा लेते हैं, वह स्पिरिचुअल तंत्र है। तो अब जैसे कैमरा वाले को छूट है कि लाइट्स ऑन करे कि लाल करे कि पीली करे कि नीली करे कि बंद करे, शूट जैसे उसको करना है। सेम थिंग स्पिरिचुअलिटी का जो तंत्र
(1:00:15) है वो सात्विक है, राजसिक है, तामसिक है। देयर इज नो कन्फ्यूजन। आप अपनी चॉइस, कैपेसिटी और अंडरस्टैंडिंग के हिसाब से उस पद पर जाते हो। भगवत गीता जो है वह कॉस्मिक कॉन्स्टिट्यूशन है। और कर्म करने की जो आपने कहा सोशल वर्क कर रहे हो। मैं इस पर सिर्फ एक ही चीज कहूंगा जो विवेकानंद जी ने कर्म कही। उनसे बड़ा कार्मिक सन्यासी आज तक पृथ्वी पर नहीं हुआ। वह इतने कार्मिक रहे कि उनको बंधी साधु तक कहा गया कि स्कूलें खोलते हो, अस्पतालें खोलते हो। उस समय साधुओं का यह काम ही नहीं था। तो उनके गुरु भाई ने पूछा उनको नरेंद्र विवेकानंद को कि जब शास्त्र
(1:00:55) में कहा गया है कि यू हैव टू गेट डिटच फ्रॉम ऑल दी थिंग्स। इस कर्म से ऊपर उठकर के परमात्मा से जुड़ना है तो फिर यह अस्पताल का और ये स्कूलों का धंधा हमसे क्यों करवा रहे हो? इस कर्म के करने से परमात्मा मिल जाएंगे। बोले नहीं मिलेंगे। तो फिर क्यों करवा रहे हो हमसे? रामकृष्ण एडमिशन करता है। क्यों करवा रहे हो? बोलो यह जो समाज कार्य तुम कर रहे हो ना तो याद रखो अब उनके शब्द मैं बोल रहा हूं समाज कुत्ते की पूंछ है जैसे कुत्ते की पूंछ टेढ़ी है और उसको हर बार हम सीधा करते हैं तो वह सीधी नहीं होती सोशल वर्क वो है परंतु यह काम करतेकरते समाज सीधा
(1:01:35) नहीं होगा तुम सीधे हो जाओगे तो तुम समझ जाओगे क्या करना है पर तुम्हारे मन की जो इच्छाएं हैं इतने जन्मों का प्रारब्ध का जो संस्कार है कि मैं यह करूं, वो करूं, भूखों को अनाज दूं, कुत्तों को खिलाऊं, गाय को खिलाऊं, ये करूं। यू नो ये इच्छाओं से मुक्त हो जाओ, कर्म योग करके कर्म। तो जब इच्छाएं मुक्त हो गई, हमारी डिजायर्स अंदर वाली जन्मों की हो गई। आप कर्म योग छोड़ दोगे। यू विल कम टू नो थ्रू रीडिंग यू नो लॉट्स ऑफ बुक्स अवेलेबल। जहां पर सन्यासी कर्म योग प्रारंभ करते हैं और फिर डिटच हो जाते हैं। फिर सोते हैं कि ठीक है
(1:02:06) कर लो। तुम्हारी इच्छा। अभी भी वह शरीरों में हैं। कई बाबा अल्मोरा के अंदर हैं। कल्याण दास बाबा जी कर्म योग किया लेकिन खुद डिटेस्ट है। कई अस्पतालें बनवा देते हैं। कई स्कूल बना देते हैं। वो हमारी लर्निंग है इसमें से बाहर आने की। सो व्हाट यू आस्क कि भाई मुझे सोशल वर्क करने की ये जो हो रही है ये इश समाप्त हो जाएगी। यू विल बी डिटेस्ट हो गया। पैक अप है ना? मानते हो कि जब आप साधना करते हो तो वह जो भी शिव तत्व देवी तत्व जब ग्रो होता वही आपसे काम करवाता है। डेफिनेटली यस हम देवी तत्व के अलावा कुछ है ही नहीं। हमारा एक्सिस्टेंस हो ही
(1:02:46) नहीं सकता है। जब प्रकृति परमात्मा की है यह सब कुछ परमात्मा का है तो मैं कैसे परमात्मा से अलग हो सकता हूं? और उसका प्रमाण भी दूं कि सब कुछ अगर परमात्मा का है तो पापी भी परमात्मा का है। पुण्यशाली भी परमात्मा का है। कभी आपने सुना है कि सूरज चमक रहा है आकाश में और वो पापी को बोल रहा है कि मैं तुम्हें सूर्य की रोशनी नहीं दूंगा। तुम्हारे ऊपर तो 15-20 केस लगे हुए हैं। नो नो पापी भी उसी का है। रुद्री पाठ करोगे ना जिसकी हम बात कर रहे थे। रुद्र के अंदर आप यू विल बी सरप्राइज। उसका ट्रांसलेशन आप पढ़ोगे तो चोरों में श्रेष्ठ चोर भी मैं हूं। शिव जी कहते हैं
(1:03:23) जो भी श्रेष्ठतम है वह मैं हूं। तो जब श्रेष्ठतम वह है तो उसका जो निष्कृष्ट है वह भी वही है। सो व्हाटएवर इन दिस कॉस्मस जो भी है ब्रह्मांड में जो कुछ है वो सब ब्रह्ममय है। वो सब चैतन्य है। इस दुनिया में ऐसा कोई कण नहीं है जो ब्रह्म से रहित हो। वो क्लेरिटी अपनी डेवलप हो जाने के बाद वो सब डिटच हो जाओगे आप। तीसरा फैक्टर क्रिया एंड इज इट द सेम एस धारणा। महावतार बाबा जी के माध्यम से जो क्रिया योग मिला तो क्रिया योग पहले आप उसको अगर फील करोगे तो श्वास प्रवास की क्रिया ये फिजिकल फ्रेम को तैयार करना है फॉर हायर लेवल ऑफ साधना
(1:04:04) हां ओके जैसे हम स्कूल में गए तो एक 12th तक की पढ़ाई की फिर ग्रेजुएशन करेंगे फिर पोस्ट ग्रेजुएशन करेंगे फिर पीएचडी करेंगे क्रिया योग पे रुकना नहीं है क्रियायोग से प्रारंभ कर लिया यात्रा तो अनंत की है हमारी आ रही है। आगे बढ़ो। यही मार्ग है। ओके। जैसे कहते हैं ना कि रात के 12:00 बजे से सुबह के 3:00 बजे के बीच अगर आप एडवांस नहीं हो एटलीस्ट तो फिर साधना नहीं करनी चाहिए। हम मतलब अगर आपको कोई गाइड कर रहा है तो वो अलग बात है। हम बट मोस्ट ऑफ़ द पीपल वाचिंग दिस। अ शुड अवॉइड साधना आफ्टर 12 am पर क्या हम मेडिटेशन कर सकते हैं? डस दैट आल्सो काउंट
(1:04:52) साधना? कुछ दिन पहले मैं मेडिटेशन कर रहा था। अपना अनुभव शेयर कर रहा हूं। आइंस्टाइन ने सबसे ज्यादा ट्रैवल करने वाला कौन सा नाम बताया है? लाइट। लाइट। और सबसे स्लो ट्रैवल करने वाला कौन सा पार्टिकल है? क्या चीज है? इस पृथ्वी पर किसी ने बताया ही नहीं है। मैं बता रहा हूं, क्लेम नहीं कर रहा हूं। मैं मेडिटेशन का अनुभव बता रहा हूं। तो ठाकुर जी को प्रणाम करके जब मैंने कहा कि जब सबसे ज्यादा रोशनी ट्रैवल कर रही है तो सबसे स्लो कौन है? तो यह जो अनुभव आपने बताया इससे मैं रिलेटेड हो के ही बोल रहा हूं। यू कैन से ब्लैक होल। अभी तो मैं
(1:05:35) इसका प्रमाण नहीं दे पाऊंगा। आई एम नॉट अथॉरिटी आल्सो। आने वाले सालों में साइंस इसको प्रूव करेगा कि ब्लैक होल सबसे स्लो ट्रैवल करने वाली चीज है। बहुत अंतिम स्लो वही है। उसका एक एक मतलब कण बोल सकते हो वो रात है। ब्लैक होल का रिप्रेजेंटेशन ब्लैक बच्चा अंधेरा देख के डरता क्यों है? कई बच्चे मेजॉरिटी क्यों डरते हैं? अंधेरे से हमें क्यों डर लगता है? या कहीं पर एकांत में है, अंधेरे में है तो हमें अजीबोगरीब ख्याल क्यों आते हैं? तो ब्लैक होल का रिप्रेजेंटेशन है। वह स्लो चलता है। तो जब स्लो चलता है तो टाइम एंड स्पेस का आपको बहुत कुशन ज्यादा मिलेगा। स्लो चल
(1:06:17) रहा है ना? तो उसमें किया हुआ आपका जप अगर एक माला है तो वो मैं कहता हूं एग्जांपल 100 फोल्ड में ले लो। तो अगर वह एनर्जी उस दिशा में ट्रैवल कर रही है और आप उसके लिए फिजिकल फिट नहीं हो, मेंटली फिट नहीं हो और गुरु की कृपा नहीं है तो उसी जोन में ब्लैक के दूसरी एंटिटीज भी तो चल रही हैं अपनी साधना में तो वो आपको विक्षेप करती है और हर एक का अपना-अपना चार्ट होता है। अपनी-अपनी वो तैयारियां होती है और हर एक के एंड रिजल्ट्स अलग होते हैं। सेम नहीं होते हैं। तो जो चीज मेरे लिए रात के 12:00 से 3:00 तक अच्छी है वो नॉट नेसेसरी आपके लिए अच्छी हो। तो
(1:06:53) गुरु गाइड कर लेता है कि बेटा आप यह करो वो करो कौन सा मंत्र लेना है क्या आसन लेना है क्या पोश्चर है क्या करना है क्या नहीं लाइक दैट मनमुखी करने का कोई फायदा नहीं है अपने मन से करने का कोई ग्रोथ नहीं आएगा बैड एक्सपीरियंस होने की संभावना है तो मेरे ख्याल से व्हाट यू आस्क आई ट्राई टू गिव इट बेस्ट ऑफ द बेस्ट वाटर मतलब कर्म तेजी से फिर साफ हो जाएंगे 12 से तीन के बीच अगर साधना करी अगर प्रोसीजर सही है मंत्र सही है गुरु की दिशा सही है दैट दैट इज द बेस्ट टाइम। बट क्या आप वो झेल पाओगे या नहीं? हां वो क्योंकि स्लो मोशन में हो ना आप
(1:07:30) हम हम वो ट्रेवल स्लो कर रहा है। स्लोएस्ट मोमेंट में हो आप। आपका सारा एक्सपीरियंस लॉन्ग हो जाएगा। जैसे नहीं वो सपने में हम देखते हैं कि खड्डे में गिर रहे हैं तो गिरते ही जाएंगे। तो आपका लॉन्ग शॉट हो जाएगा। स्लो मोशन हो जाएगा। धारणा करने से भी हां धारणा धारणा। इनफैक्ट उस टाइम पर आपकी जो धारणा बनती है वो प्रगार होती है। बहुत अच्छा आप शब्द बोल रहे हो। धारणा आई एम थैंकफुल टू यू कि आपने मेडिटेशन नहीं कहा ध्यान नहीं कहा धारणा के बाद ध्यान आएगा ध्यान के बाद समाधि आएगी पतंजलि योग सूत्र यमन यम आसन प्राणायाम लाइक दैट उस का क्रम
(1:08:04) है बट अवॉइड बिटवीन 12 टू थ्री जो गुरुमुखी हैं और उनको इंस्ट्रक्शन है तो तो ठीक है बट अगर 12 टू थ्री सेट नहीं होगा तो साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम होने की संभावना बनती है उसमें और ये साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम जिनको नींद नींद का प्रॉब्लम होता है। वो आप जो सारे केसेस हम सुनते हैं वो उसी से रिलेटेड होते हैं। तो आपको जब रात में ध्यान करना होता है तो सनसेट के पहले जितना खाना था खा लो। उसके बाद फिर अन्नग्रहण नहीं होता है। दैट्स अ कंडीशन। इसमें कई पैराटर्स दूसरे भी लगेंगे। पानी कितना लेना है? वस्त्र कौन से रहेंगे? टोटल डार्क रखना है
(1:08:40) या एक दिया प्रज्वलित रहेगा वो नियम लगते हैं उसमें। ओके। ओके। कौन से मंदिर में आपको सबसे इंटेंस अनुभव हुए हैं यहां। कौन से क्षेत्र में भारत के? इट डिपेंड्स फ्रॉम इंडिविजुअल टू इंडिविजुअल। मैं मतलब प्रिजुडाइस ऑफ माइंड नहीं कहूंगा पर मेरा अपना एक अनुभव हो गया भीमाशंकर मंदिर के अंदर। मैं जुलाई अगस्त के महीने में खूब बरसात। आप तो जानते हो उस महाराष्ट्र के विस्तार में कैसी होती है। एंड आई रीच्ड इन द अराउंड आफ्टरनून 33 3:30 के आसपास। मंदिर में कोई नहीं था। काफी बारिश तेज थी। राउट व सब बंद थे। हम लंबे से चल करके वहां पहुंचे थे तो एंड
(1:09:23) देन व्हेन आई एंटर्ड भीमाशंकर तो वो भीमा नदी का जो जल है वो बिल्कुल काला है भाई तो ये हृदय फट जाए ऐसा उसका दृश्य था और जब मैं मंदिर की सीढ़ियां उतर रहा हूं और शिवलिंग को मतलब दर्शन ले रहा हूं पता नहीं एज ऑफ आई वास कनेक्टेड टू यू नो वो प्रारब्ध की पास्ट लाइफ्स के साथ कनेक्ट हो रहा हूं। मेरी आंखें खुली हैं। मतलब 3:30 4:00 हैं। बारिश हो रही है। वह दृश्य मैं आज तक नहीं भूल सकता हूं। मैं डेढ़ 1 घंटा वहां पर था। और वो मेरी जिंदगी का मतलब एक ऐसा मोमेंट है। आई रियली रेलिश। जब भी मैं थोड़ा सा याद मतलब करके खुद को उस पे लाना चाहता हूं तो वो
(1:10:00) दृश्य हमें याद रखना चाहिए कि कौन से दृश्य से आप अपलिप्त होती हो। तो भीमा शंकर का वह अनुभव हुआ। बाकी तो ऐसे कई अनुभव हैं। जैसे ज्ञानेश्वर जी की समाधि है या अजंता एलोरा की केव्स हैं। काफी उसमें अनुभव अच्छे रहे। पर ये भीमाशंकर का अनुभव ऐसा है कि आप पडकास्ट की भाषा में वो बूस बम्स जिसको बोलते हैं ना काइंड ऑफ़ दैट इट्स रियली अ मेमोरेबल फॉर मी। बहुत इंटेंस आपके जर्नी के लिए बहुत जरूरी जगत है। हां मैं मैं मानता हूं आज भी मैं शिव से एकाकार जब करता हूं खुद को या रुद्री पाठ का अनुभव करता हूं तो मुझे ऐसा ही लगता है कि मैं भीमाशंकर में बैठकर के ही कर रहा
(1:10:36) हूं। आई रियली एंजॉय दैट। नहीं अजंता एलोरा केव्स का नाम लिया। जी अह आप मानते हो कि समाज अब तक समझा है अजंता एलोरा केव्स को पूरी तरह से? एक तो उसके कई रूट्स या जो पॉकेट्स हैं वह बंद हैं। एक्चुअली वो एक अलग सिविलाइजेशन का क्रिएशन है। अजंता एलोरा किसने बनाया? कब बनाया और अगर बनाया तो उसका निकला हुआ पत्थर कहां चला गया? और एक रॉक पर इतने हजार साल पहले कौन सी टेक्नोलॉजी लगाई? तो जो एलियन शब्द आपने बताया परगंग रही एक्चुअली उस गुफा को अगर आप देखे जाओ आई विश कि इन चीजों को मुझे अनुभव करने के लिए रात का समय मिलता यू नो मुझे परमिशन
(1:11:21) मिले अद्भुत मतलब वहां पर जो बुद्धिज्म के मक्स का ध्यान है वहां पर जो शिव शिव के उपासकों का ध्यान है वो ध्यान अभी भी मिटा नहीं है वो ध्यान है वहां पर अगर आप तैयार हो उसको लेने के लिए तो आपको दिन में भी फील आएगा बट लोग वहां क्या जाते हैं? रील बनाने के लिए जाते हैं। कैमरा हू हल्ला हल्ला गोश वो हो रहा है। कोई न्यूसेंस है। प्योर न्यूसेंस बट अगर आप स्पिरिचुअल फील करने के लिए जाओगे बी कनेक्टेड क्योंकि ध्यान तो वहां पर है। अभी भी है और ये बहुत मतलब विरला विलक्षण एक्सक्लूसिव ये साधारण नहीं है। और हम इन धरोहरों के मालिक होते हुए भी भटक रहे हैं। ये बहुत
(1:12:04) दुर्भाग्य है इस देश का। यूथ जो कहते हैं ना कि यह करो वो करो वी हैव सो मेनी थिंग्स यू नो इसको एक्सपीरियंस करना अजंता एलोरा मेरे एक्सपीरियंसेस में मैं मैं विश करूंगा कि मुझे अलव किया जाए तो मैं वहां एक ध्यान का एक्सपेरिमेंट अपने साथ करना चाहूंगा अब उनका कुछ पर्पस है या कुछ पर्पस से बनाए गए थे हां डेफिनेटली यस डेफिनेटली जितने भी ये आप केव्स देखते हो ये तो मेडिटेशन के लिए है ना ध्यान वो तो लग्जरी तो उसमें कुछ है नहीं आप शिवलिंग वगैरह जो भी देखते हो या बुद्ध बुद्धिस्ट मंकी अगर देखते हो वो एक पीढ़ी की बनाई हुई नहीं है। उसमें
(1:12:38) कंटिन्यूएशन है। काम होता रहा बरसों तक ऐसा लगता है कि वह एक-एक पोर्शन आगेगे बढ़ते गए। जैसे बिल्डिंग चलती है ना फर्स्ट फ्लोर सेकंड फ्लोर ऐसे तो वो चीज आप देखोगे वो डिटच हो के एकांत समाज से लेकर के वो उस परमात्मा के परम तत्व को अनुभव करने वाली जगह है। और उसके कुछ ही किलोमीटर की रेडियस में गुष्मेश्वर है। ज्योतिर्लिंग। हम तो वह जगह और भीष्मेश्वर की ऊर्जा और उनको अगर आप कनेक्ट करोगे तो यू विल गेट द आंसर बिकॉज़ दैट एरिया इज़ नॉट ऑर्डिनरी वो ज्योग्राफिकल आप जो भी बोलो जगह है बट फ्रॉम अ स्पिरिचुअल पॉइंट ऑफ व्यू आई विल से वो ऊर्जावान क्षेत्र है। गजब क्षेत्र
(1:13:18) है। मैं कभी-कभी सोचता हूं हमारे जो 12 ज्योतिर्लिंग है हम उन्हें मैं कनेक्ट करता हूं वैदिक टाइम से कभी-कभी। हम क्योंकि मैं यह जानता हूं कि रुद्र नाम के देवता मेंशन हुए हैं वेदों में जो शिव जी से जुड़े जाते हैं। बिल्कुल शिव वन ऑफ द रुद्र है। वन ऑफ द रुद्र हां शिव नाम है 11 रुद्रों के 12 आदित्य आठ वसु दो अश्विनी कुमार उसको ही काउंट करोगे तो 33 होंगे। 33 वही 33 कोटि भगवान हैं। 33 कोटि मतलब कोटि मींस प्रकार उसी को ही इनसेकुलरिस्टों ने कम्युनिस्टों ने या दूसरे अंग्रेजों ने 33 करोड़ बना दिए। इट इज़ नॉट 33 करोड़। इट इज़ 33 टाइप्स ऑफ़
(1:13:59) गॉड जिसमें 11 रुद्र हैं। और 11 रुद्रों के नाम में अगर आप Google करोगे तो वन ऑफ़ द नेम इज शिवा। हम तो क्या ये ज्योतिर्लिंग जो अभी है 12 ज्योतिर्लिंग ये वैदिक टाइम्स में बनाए गए थे या वैदिक टाइम्स में इनकी अहमियत थी जो शंकराचार्य जी के स्तोत्र का हम सहारा लेते हैं सौराष्ट्र सोमनाथं चशले मलिकार्जुनम उजन्याम महाकाल ओमकारम अमलेश्वरम परल्याम वैदनाथ च डाकन्याम भीमा शंकरम सेतु वंदे रामेशंम नागेशंम दारुकावनी वाराणस्यांतु विश्वेश्वंम त्रंबकम गौतमी तटे हिमालयतु केदारम कुरमेशम च शिवालय यतानी ज्योतिर्लिंगानी सायं प्रात पठनर सप्त जन्म कृतम पापम
(1:14:41) स्मरण विनति शंकराचार्य कहते हैं कि 12 ज्योतिर्लिंगों का अधना स्तोत्र का स्मरण मात्र करने से आपके हर पाप नष्ट सप्त जन्म सातों जन्मों के सात जन्म की साइकिल है उसका एक लॉजिक है अभी उसमें नहीं जा रहे पहले तो क्या था अगर वेद को पढ़ोगे तो शिवालय है राम जी किसकी पूजा कर रहे शिवालय में कृष्ण जाएंगे तो उनके आराध्य क्या होंगे शिवालय है शिवालय मींस व्हाट जिस शिव को हम जानते हैं सिर्फ एक शिव उसको स्वरूप में नहीं शिव मींस कल्याणकारी जो सबका हितैषी है जो कहता है कि सुर भी मेरे असुर भी मेरे हैं चोर भी मेरे हैं उपचके भी मेरे हैं सब मेरे हैं उनका शिव
(1:15:17) वो प्रतीक है शिवलिंगम जिसमें शक्ति मैंने बताया ना शक्ति साथ में है और वो सिंबॉलिक 12 जगहों पर 12 ज्योतिर्लिंग है तो हैं और धीरे-धीरे करते हुए हजारों सालों की जर्नी हुई जितने आक्रांता आए उन्होंने हमने जाना कि इस देश का जो सत्ता है जो ताकत है जो आध्यात्मिकता है वो इनो शिवलिंग से है या ज्योतिर्लिंग ज्योतिर्लिंग उसको हम कहते हैं शिवलिंग नहीं कहते यह ज्योति पुंज भारत को ऊर्जा दे रहे थे या दे रहे हैं अभी भी दे रहे थे मतलब उनको लगा कि इनको नाश करने से होगा सभी ज्योतिर्लिंगों पे हमला हुआ जिसमें से सोमनाथ को तो नस्तेनाबूद कर
(1:15:56) दिया यह तो 1947 के बाद नई सरकार जब चुन के आई तो सरदार ने इनिशिएटिव लिया और आज तो खैर ठीक है बट इस चीज में से जितनी ऊर्जा लेने चाहे नए मंदिर बनाने की मैं बताता हूं अभी कोई विशेष जरूरत नहीं है। हमारे पास पर्याप्त पौराणिक उतने मंदिर हैं जिसमें से आप पूरी ऊर्जा ले सकते हो। बट जाओ उस हृदय के साथ जाओ। हमने क्या कर दिया? टिकट्स लगा दिए, वीआईपी दर्शन कर लिए, कॉरिडोर्स बना दिए और धीरे-धीरे भगवान की वो अनुभूति चाहिए। भगवान वही है। भगवान कहीं गया नहीं। लेकिन हमारी अनुभूति के लिए वो बैरियर्स आ गए। हमारे ईगोस आ गए काइंड ऑफ
(1:16:33) क्या 12 ज्योतिर्लिंग को एक ऑर्डर में विजिट करने से कुछ बदलता है किसी के जीवन में हां डेफिनेटली 100% इनकी जैसे बताया जाता है शिव पुराण में अगर आप पढ़ोगे तो क्लियर कट आपको गाइडेंस मिल जाता है और उसमें यह है कि आपको सारे ज्योतिर्लिंग करने के बाद जैसे कोई यात्राएं होती है तो गंगाजल आप उत्तर से लोगे तो दक्षिण में चढ़ाओगे रामेश्वरम वगैरह में तो यह शिव पुराण में क्लियर कट लिखा हुआ है आप उसको उसको पढ़ के समझो उसको अंधविश्वास नहीं तो 12 ज्योतिर्लिंग का सर्किट विजिट तो होता है आजकल लोग करते हैं गाड़ी लेकर के या आई हो उसका जो अपना
(1:17:11) माइंडसेट क्या है एक ऑस्टरिटीज जिसको शब्द आता है ना तपस्या युक्त हमारी जीवन हो उसकी थोड़ी प्रिपरेशन करना बहुत जरूरी होता है। एक टूरिस्ट माइंडसेट से यात्रा करना और एक साधक के माइंडसेट से यात्रा करना बहुत अंतर है। तो जब भी हम 12 ज्योतिर्लिंग का करते हैं तो उसमें एकम वस्त्रम होना चाहिए। भोजन की सादगी होनी चाहिए। सोने के लिए आपको शैया जमीन की होनी चाहिए। चलने के लिए आपको पांव से चलना चाहिए। ठीक? तो अपने जवानी में यह कर ले तो उसका एक फील और उसका एक अनुभव अलग आता है। लेकिन हम लोग तो क्या पैसे कमाने के बाद जब मरने की कगार पे आते हैं तो
(1:17:50) घूमने निकलते हैं। मतलब आप कह रहे हो पैदल जाना होता है। ज्योतिर्लिंग। जो कांसेप्ट है वह तो यही है। शंकराचार्य थोड़ी कोई कार में घूमे हैं या ट्रेन या प्लेन लेकर घूमे। भारत की पूरी परिभ्रमण कर लिया। इस देश को अखंड कर दिया। भाई चाणक्य जब चले थे तक्षशिला से नालंदा तक तो थोड़ी कोई घोड़ा लेकर चले थे या गाड़ी लेकर चले थे। बुद्ध जब इस देश में चले हैं तो कोई थोड़ी बुलेट लेकर चले हैं। तो क्या तकलीफ क्या है? नर्मदा की जो परिक्रमा होती है 100 दिन में आप पैदल कर सकते हो। आप क्यों नहीं कर सकते हो? हम कांसेप्ट यह है कि उस जमीन से आप जुड़ते
(1:18:23) हो जहां से संत गुजरे ऋषि गुजरे वो कण-कण आपके बॉडी से स्पर्श करता है। वो एक वाइब्रेंट देता है आपको। मंदिर में पांव नंगे रख के जाना जूता बाहर रखने का क्या कांसेप्ट हो सकता है? आजकल तो आप देखोगे गंदगियां है। लोग हाईजीन को देखते हैं। ये देख बट उसका रीज़न क्या है? कि आप उन ऊर्जा के कणों को अनुभव कर सको। अपने जीवन में उतार सको। वो ऊर्जा आपके शरीर में प्रविष्ट कर सके। देयर इज़ नो अदर रीज़। आपको अनकंफर्टेबल करने के लिए हमारे ऋषि मुनियों ने नहीं कहा कि भाई जूते उतार दो। तो ज्योतिर्लिंग को विजिट करने का एक तरीका होता है जो शिव
(1:18:56) पुराण में लिखा है। मुझे लग रहा है कि सबसे चैलेंजिंग चीज यही है लोगों के लिए मॉडर्न लोगों के लिए। लेकिन अवेलेबल है। आजकल तो बहुत ऐसे टूर्स वगैरह हो रही हैं। जहां पैदल जा सकते हो। पैदल नहीं लेते हैं। अब तो समय और सोर्सेस लोगों के पास मतलब लिमिटेड हो गए। टाइम ज़ोन कम हो गए। पर पैदल करने वाले करते हैं। मेरे पास जस्ट दो महीने पहले आईआईटी प्रोफेसर थे जो सन्यास लेकर आए तो मेरे पास आए थे। वो पैदल आए थे। कहां से पैदल आए थे? हरिद्वार से पैदल आए थे। और बिना मोबाइल उन्होंने जो व्रत ले रखा है कि एकम वस्त्रम भोजन भी एक ही नहीं का लिया। शयन
(1:19:31) भी धरती का है तो अनंगे पाव थे। कैन यू इमेजिन इस तरह का व्यक्ति मतलब संकल्प ले चले और वह खाली हाथ मरेगा? नहीं। परमात्मा इज बाउंड टू गिव। एक जैन मुनि आए थे शो पे हाल ही में। जी। उन्होंने वो लोच के बारे में बात करी जहां उनके बाल खींच के निकाले जाते हैं। और जब मतलब वो सन्यास ले लेते हैं जैन मुनि तब वो सिर्फ पैदल जा सकते हैं एक जगह से दूसरी जगह। और उन्होंने कहा कि यही सबसे बड़े चैलेंज रहते हैं लोगों के लिए इन ऑर्डर टू टेक सन्यास और नॉट। और मेरे मुताबिक आपकी भी बातें सुनकर मुझे ये लग रहा है कि एक बहुत हाई लेवल की तपस्या है और लाइफ लॉन्ग
(1:20:10) साधना है इनकी। अगर आपको कंफर्टेबल जोन से बाहर आना ही नहीं था फिर सन्यास लिया क्यों? हम अपने उद्धार के लिए आए हो ना आत्मन मोक्षार्थ उस उद्धार के लिए जो पैराटर्स हैं ऋषियों के गुरुजनों के तो रिजल्ट तो तभी आएगा। इसका फल क्या होता है? फल यह होता है कि आपका जो मन शुद्र मन है जो भटकता है सेंसेस में अननेसेसरी चीजों के अंदर वह उन चीजों से विड्र हो के आप सीख जाते हो कि इन चीजों की वास्तव में कोई जरूरत नहीं है। जैसे मान लो कई लोग होते हैं ना 10-10 जोड़ी कपड़े लेकर के निकलते हैं तीर्थ यात्रा पर भी नर्मदा परिक्रमा के अंदर आपको पैदल चलना है और
(1:20:49) बैग खुद उठानी है तो आप अपने आप दो ही कपड़े लोगे। तो डिटचमेंट हो गया ना कि दो से जिया जा सकता है। एक मैट के सोया जा सकता है। एक रोटी पर रहा जा सकता है। मैंने जीवन भर अगर भिक्षा नहीं किया तो वहां तो अन्य क्षेत्र में बेटा बड़े भी हो तो बैठकर के अन्य क्षेत्र में ग्रहण करना पड़ेगा। सीख जाता है। तो वो अपनी मैच्योरिटी अपनी डेवलपमेंट, अपनी लर्निंग है। एनलाइटनमेंट उसी से आता है। अभी साईं बाबा का चरित्र दिख रहा है मेरे दिमाग में। क्योंकि आपने मेंशन करा कि उनके बारे में बात करनी है। रीजन यह था कि आज थर्सडे है और हम तो बाबा
(1:21:25) के खानदान से हैं ना दत्त परंपरा से हैं। अत्री गोत्र हैं। तो मैं जब आ रहा था तो आई मतलब हमारे लिए तो परिवार के वल हैं। वो बड़े हैं। तो किसी ने मुझे दो दिन पहले मैसेज किया नोन पर्सन था कि आपने बाबा के ऊपर कोई एपिसोड क्यों नहीं बनाया? शिरडी के साईं बाबा के ऊपर। तो मैंने उसे कहा कि बना सकता हूं पर पता है क्यों नहीं बना रहा हूं। जैसे विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस के साथ बहुत क्लोज रहे पर उन्होंने कभी भी विवेकानंद ने रामकृष्ण के ऊपर बुक नहीं लिखी। कोई लेक्चर भी नहीं दिया। एस सच तो किसी ने पूछा कि स्वामी जी आपने अपने गुरु के बारे में कभी कुछ नहीं कहा है।
(1:22:09) कोई लेक्चर नहीं बुक नहीं। स्वामी जी का उत्तर था कि मेरे गुरु जो है ना वह शिव है। और मैं उनके सामने शुद्ध रहूं। रामकृष्ण चाहते तो मट्टी ऐसे उठा के बोलते हजार विवेकानंद हो जाए तो हजार विवेकानंद हो जाए। वो वो हस्ती हैं। और मैं उनके ऊपर अगर बोलूं और लिखूं और मुझसे कुछ त्रुटि हो जाए तो यह ऐसा ही होगा कि शिवजी पे लिखने को गया और बंदर लिख के आ गया। तो साईं के ऊपर शिरडी के साईं के ऊपर मैंने कभी भी एपिसोड इसलिए नहीं बनाया क्योंकि वह जो अवतार है सनातन का आप उसको जस्टिफाई नहीं कर सकते हो शब्दों में। तो दिस इज अ राइट टाइम बाबा के लिए तो मतलब मैं काशी
(1:22:48) में था तो बाबा की फोटो देख रहा था कई मंदिरों में है मैं जहां भी जाता हूं बाबा तो मुझे मिल ही जाते हैं भाई कहीं कार में मिलेंगे कहीं कार के पीछे मिलेंगे कार के अंदर मिलेंगे आपको दूसरे भैरव जी दिखे ना दिखे बाबा दिख जाएंगे क्योंकि बाबा भैरव से भी तो कनेक्टेड है उनकी साधनाएं हैं भाई लेकिन हर एक के जैसे है ना रामकृष्ण परमहंस कहते हैं जतो मत ततोपथ हर एक अवतार के साधना करने का अपना तरीका है टेममे महाराज स्वामी महाराज जो है हम अवदूत मानते हैं। वो भी बाबा के समकालीन अवदूत मानते हैं। तो ऐसे आठ एक साथ चल रहे थे। कुल मिलाकर
(1:23:27) हम सनातनी जो है वो बाहर की गसिप पर ज्यादा ध्यान देते हैं। अपना रिसर्च नहीं करते। मैं तो देखो डंके की चोट पर हम अत्री गोत्र के हैं। बाबा दत्तात्रेय के अवतार हैं। हम दत्तात्रेय भगवान के उपासक हैं। और यह उसी लाइनज में है और उसका प्रमाण चाहिए तो पाथरी में जाकर देख लो। उनके बचपन की कई चीजें और भी घर की वगैरह की सामान उनके परिवार का व्यक्ति भी भाई आज तीसरी चौथी पीढ़ी का है। हैदराबाद में है। अब इससे ज्यादा क्या मतलब करोगे? हम हम दत्तात्रेय भगवान पर बहुत कम कंटेंट बना है इंटरनेट पर पता नहीं क्यों डेप्थ इतनी है ना इट्स अ कॉम्बिनेशन लाइक
(1:24:09) ब्रह्मा विष्णु महेश के कंबाइंड अवतार हैं। तीनों तत्व हैं उसमें और श्री विद्या के भी एक ब्रांच के हर्ताकर्ता मतलब दत्तात्रेय जी हैं। दत्तात्रेय के ऊपर बनना मेरे ख्याल से एक ब्लेसिंग्स भी कहो कि जब किसी को कोई गुरु नहीं बोलता तो हम कह देते हैं कि दत्तात्रेय जी का फोटो लगा करके भी उनको गुरु मान लो क्योंकि वह गुरुओं के गुरु हैं महा और दत्तात्रेय जी के स्वयं के 24 उपगुरु हैं। गुरु नहीं बोल रहा हूं गुरु उपगुरु हैं। सो इट शोज़ कि आप गुरु एक ही बनाओगे जीवन में। पर लर्निंग करने के लिए अगर कहीं पे उपगुरु करते हो तो देयर इज़ नो हार्म। पर गुरु एक ही
(1:24:48) रहेगा। और दत्तात्रेय जी की जो आज हम श्री यंत्र जो देखते हैं ना जगत में जो भी श्री यंत्र इसकी ज्योमेट्री जो है वो दत्तात्रेय जी की देन है और ऑफ कोर्स मां अनुस्या उनकी माता है और अत्री पिता हैं। आपको जानकर बड़ा आश्चर्य भी होगा कि उनके भाई दुर्वासा भी हैं और उनके भाई चंद्र भी हैं। तो ये दोनों कॉम्बिनेशन अवधूतों में आप देखते हो। तो अवधूत परंपरा दत्तात्रेय से आती है। तो अवधूत परंपरा के अंदर हम लोग लोडेड होते हैं। कभी-कभी नहीं कहते हैं कि बहुत गाली गलौज देता है। गुस्से वाला है बाबा हम हम तो वो दुर्वासा वाला थोड़ा आ गया लाइन और शीतलता चंद्र की है
(1:25:30) तो वो भी क्योंकि भाई है आपस में और पूर्ण रूपेण जब दत्तव्य परंपरा के अंदर आप दीक्षित होते हो अभिषेक विगि वगैरह सब हो गई आपकी तो उसमें आप देखते हो कि ब्रह्मा विष्णु और महेश का पूरा का पूरा जो फिर आप जिस तरफ से आगे बढ़ जाओ प्राप्त है प्राप्त है पर दत्तात्रेय जी को एक बार चरित्र पठन करना दत्तात्रेय जी की एक मतलब एटलीस्ट प्रणाम तो करना ही चाहिए। हर हर सनातनी को आई फील सो कि यस हर सनातनी को बट क्योंकि उनको माऊली जैसे कोल्हापुर में है या महाराष्ट्र में दत्त को ज्यादा टेब्बे महाराज की वजह से ज्यादा प्राथमिकता मिली या यहां के संतों ने कर्नाटक और आंध्र के
(1:26:14) संतों ने दत्तात्रेय परंपरा को काफी एनकरेज किया। तो इस वजह से दक्षिण भाग में हम दत्तात्रेय ज्यादा देते हैं। उत्तर में थोड़ा कम है पर आजकल तो मीडिया का जमाना है। लोग जान चुके हैं। सर आप अपने वेदों की पढ़ाई करिए। मैं ऐसे बोलना ठीक नहीं समझूंगा। मैं अभी भी पढ़ रहा हूं। पढ़ पढ़ रहे हो? आई एम स्टिल लर्निंग। आई एम स्टूडेंट। एंड आई विल बी स्टूडेंट टिल माय लास्ट ब्रीथ अप लाइफ। आई विल बी नेवर मास्टर। आई डोंट वांट टू बी द मास्टर। कि हमने कुछ-कुछ ऋग्वेद एपिसोड, कुछ-कुछ अथर्ववेद एपिसोड करें। हम बहुत सारे लोग ना वेदों को एक हिस्ट्री
(1:26:51) टेक्स्ट बुक की तरह देखते हैं। जहां से भारत के इतिहास की एक झलक मिल जाती है। आप ये मानते हो? इतिहास तो नहीं बोलूंगा मैं। इतिहास इज़ नॉट करेक्ट वर्ड फॉर दैट। बट रादर देन मेकिंग इट यू नो थोड़ा सा थिक कंटेंट। एक चीज जो है सर्व उपनिषदो गाव दोगदा गोपाल नंदन पार्थो में सुधीर भोक्ता दुग्धम गीता। सभी उपनिषदों का सार गीता है और उपनिषद जो है रिप्रेजेंट करते हैं वेदों को। आप समझ गए? आप डायरेक्ट वेद पढ़ने जाओगे नहीं समझ पाओगे। वेदों के अंदर हमारी योग्यता होनी चाहिए। जैसे आप किसी हॉस्पिटल में जाते हो तो रिसेप्शन या लॉबी तक तो आप जा सकते हो।
(1:27:35) क्या आप आईसीयू तक जा सकते हो अंदर? या किसी डीन डॉक्टर के कैबिन तक जा सकते हो। यू हैव टू गो थ्रू प्रॉपर प्रोसीजर। तो कुछ शास्त्र ऐसे हैं जिनको गुरु के मुख से ही सुनकर ब्रह्मनिष्ठ और श्रोतव्य गुरु से ही समझना और सुनना चाहिए। मैं गीता के लिए भी बोल देता हूं। आप श्रीमद् भगवत गीता पढ़ लो। एकेडमिकली पढ़ लोगे आपको क्रम कर लोगे श्लोक पर उसकी डेप्थ को समझ नहीं पाओगे। उसको समझने के लिए आपको गुरु के चरणों में बैठकर के मतलब कुर्सी पर बैठकर भी पढ़ लो, समझ लो तो ही कंसेप्चुअल क्लेरिटी आएगी। अपने से आएगी ना पढ़ने से पढ़ लो बट 100%
(1:28:11) आपकी क्लेरिटी नहीं होगी। बट यह कॉनसेप्चुअल क्लेरिटी है क्या भगवत गीता को ले मतलब एग्जजेक्टली समझ क्या आता है मैंने जैसे बोला कि इस ब्रह्मांड में जो भी है वो सब भगवत गीता में है और जो भगवत गीता में नहीं है समझ लो ब्रह्मांड में नहीं है लोगों ने अपने मन से इंटरप्रिटेशन उसकी बहुत अंटशंट कर ली यू नो इंटेलेक्चुअली एकेडमिकली बट गीता को बोलने के लिए मैं रामकृष्ण जी का ही सपोर्ट लूंगा कि राम रामकृष्ण परमहंस बहुत ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे। तो काशी के पंडित यू नो काशी के पंडित तो महान होते हैं। उन्होंने आगे ठाकुर रामकृष्ण को कहा कि आप राम कृष्ण परमहंस
(1:28:53) खुद को बोलते हो। तो अगर परमहंस बोलते हो तो आपने गीता पर कोई कुछ शास्त्र पे रखी है कमेंट्री। गीता पे है आपका कुछ नहीं। यू हैव टू प्रूव योर पांडित्य बाय राइटिंग सम कमेंट्री ऑन गीता। या किसी उपनिषद पे। बोले नहीं मैं तो नहीं लिखा। अब जब वह ज्यादा बोलने लगे तो फिर आप परमहंस कैसे? आपकी क्या रियलाइजेशन है कि उन्होंने कहा भाई देखिए यह तो हमारे शिष्य गण हमको परमहंस बोलते हैं। बट फिर भी गीता जो आप बोल रहे हो गीता इटसेल्फ वन वर्ड इज एक्सप्लनेटरी। उसको पढ़ने के बाद तो बहुत कुछ है पर एक शब्द में भी आप समझ जाओगे। बोलो वो कैसे? बोले आप मेरे साथ बोल दो
(1:29:30) पांच बार गीता गीता गीता। तो बोलने लगे तो गीता गीता गी त्यागी त्यागी त्यागी जिस रनंसिएशन एंड डिटचमेंट की हम बात करते हैं गीता वो आपको एक्सप्लेन करता है। त्यागी गीता गीता बोलने से त्यागी हो गया। त्याग मतलब गर्मी से भागना नहीं है। जागना है। सपोज़ करो आपको शक्कर खाने से डायबिटीज होती है। उसका त्याग कर लो। तीखा खाने से और बीमारी होती है। त्याग दो। स्मोकिंग से लंग्स कमजोर हो रहे हैं। त्याग दो जो धन आपके लिए परेशानी का कारण बनता है थोड़ा दान करके त्याग दो। पूरा सनातन धर्म का जो कोर है ना वन वर्ड इज त्याग।
(1:30:15) गीता का ही 12व अध्याय का 12वा श्लोक कि वो कहते हैं कि पहले स्तुति करो, स्तोत्र करो, यह करो, वो करो। यह सब करने के बाद ध्यान करो। लेकिन लास्ट में उसी श्लोक के अंदर आता है कि सबसे पहले फल की जो अंत बोलता है कि फल के किसी भी कर्म के फल की इच्छा का त्याग करना त्यागात अंतर शांतिराम सबसे श्रेष्ठ कर्म के फल को त्याग कर देना है। सपोज़ करो मैंने फिल्म बनाई ऑस्कर मिला तो ठीक है। ऑस्कर के लिए फिल्म बनाऊंगा दुखी हो जाओगे। मिल गया। ऑलराइट। उसकी कृपा। तो उस कर्म के फल को मैंने त्याग दिया। यह पडकास्ट हम रिकॉर्ड कर रहे हैं तो क्या इसको 1 मिलियन देखेंगे
(1:30:58) क्या? हम इसके लिए कर रहे हैं क्या? नहीं मैं तो नहीं करता हूं। आप भी नहीं। तो उस फल से रहित हो जाओ। आनंद है। राइट नाउ हम लाइव एक दूसरे को एंजॉय कर रहे हैं ना। आप मुझे आंखों से पी रहे हो। मैं आपको पी रहा हूं। मोर देन इनफ जो सुन रहे हैं वो लकी है। तो फल के एक्सपेक्टेशन से जो किया गया कर्म है वो हमारे बंधन का कारण बनता है। ऐसा गीता कहती है। यही सार है गीता का। त्यागा अंतर शांति का एक ऑब्वियस सा सवाल है। आई एम श्योर किसी और ने भी आपसे यही सवाल पूछा होगा। बट अ जब आप रिजल्ट्स के सोच विचार को एक्चुअली त्याग देते हो फिर आप ऑपरेट कैसे कर सकते हो मटेरियल
(1:31:38) वर्ल्ड में क्योंकि बचपन से ये सिखाया जाता है या ट्यून इन किया जाता है कि जितना है ये हमारी अपब्रिंगिंग का सबसे बड़ा फॉल्ट है मेरी साड़ी उसकी साड़ी से सफेद कैसे मेरा बच्चा जब भी पड़ेगा नंबर वन आएगा हम जाने-अजाने अपने बच्चों को उस होड़ में उस रेस में लगा देते जिस रेस के लिए वह पैदा ही नहीं हुआ था। हम बच्चों को पज़ेस कर लेते हैं एज ए पेरेंट्स। बट वी आर नॉट उनके मालिक नहीं है। वी आर कस्टोडियंस। परमात्मा ने हम पर कृपा करके बच्चे दिए हैं कि भैया संभाल लेना। मिल्कत मेरी है। मैं ले लूंगा ले लूंगा। जब तक चले चले मेरा है। पर हमने उनको पज़ेस कर
(1:32:16) लिया। तो हम फिर डिसाइड करते हैं कि इंजीनियर बनेगा, डॉक्टर बनेगा। कोई बच्चा पैदा होते ही बोलता है मैं इंजीनियर बनूंगा, डॉक्टर बनूंगा। नहीं हरिहरण अच्छे म्यूजिशियन है। उनको बाप ने बोला इंजीनियर बनना है। फिर इंजीनियर बनने के बाद फिर म्यूजिशियन हो गए। तो हम एक डेस्टिनी लेकर पैदा होते हैं। और वही हमारा स्वभाव है। स्वधर्म नदनम श्रेय पर धर्मो बयाव। लेकिन आजकल क्या हो रहा है इस कंपटीशन के चक्कर में हम स्वधर्म मतलब मेरा जो नेचर होना चाहिए। सपोज़ करो मुझे कारपेंटर बनना था। तो ये क्या प्रोफेशन होता है कारपेंटर? अरे नहीं नहीं तुम तो मतलब जो है ना एआई
(1:32:49) को देखो कंप्यूटरटर्स में जाओ। बट वो मन मार के कर रहा है। जिस लड़की को डॉक्टर नहीं बनना है डॉक्टर बना दो। सो व्हाट आई थिंक कि गीता उसमें बहुत बहुत क्लियर है कि तुम वही करो जिसके लिए तुम पैदा हुए हो जो तुम्हारा स्वभाव है और जिसको तुम्हें धारण करना है। धारा यति धर्मा जिस काम करने से मजा आता है। मजा से ज्यादा मजा अभी भी थोड़ा हल्का शब्द है। आत्म तृप्ति स्पिरिचुअल मजा। आनंद आनंद जो है ना वो सेंसेस के ऊपर है। मजा जो है वो सेंसेस में है। मुझे कंटेनमेंट आना चाहिए कि हां आई रियली आई अचीव्ड इट। यू आर नॉट आंसरेबल एंड अकाउंटेबल एवरी डम डिकनरी कि मैं यह काम
(1:33:33) करूं। मुझे थोड़ा सा ये ये चाहिए। अरे नहीं हम कई बार काम कर लेते हैं। उसकी रिकॉग्निशन नहीं आती है। कोई दान करते हो तो रिकॉग्निशन मिलती है क्या? लोग नहीं करते हैं। गौ दान करते हैं, अन्नदान करते हैं या तीर्थों के अंदर कहीं हर जगह नाम थोड़ी लिखा जाएगा। नाम के लिए लोग जो काम करते हैं वह तो एक अलग कैटेगरी है। बाकी आपको आनंद लेना है कि इसका अन्नदान दे दिया। बात खत्म दे दिया। वो पूछते भी है नाम आ रहा है। गुमनाम कर दो। गुप्त दान है। छोड़ो। यह फल को छोड़ दिया उसने। उसका मजा है। अगर सचिन तेंदुलकर ग्राउंड पे उतरे और पहले बॉल से सोचे कि
(1:34:05) मुझे 100 रन करनी है। वो बहुत टेंस हो जाएगा भाई। 100 रन पूछते पहुंचते थक जाएगा। लेकिन यू कम यू एंजॉय द गेम और खटखट करके करते जाओ स्कोर बनता जाएगा और जहां पर बैकअप हो गया हो गया ये परफॉर्म्ड स्वधर्म सबसे जरूरी है जिंदगी में स्वधर्म ढूंढना कि अब किस वजह से पैदा हुआ स्वधर्म जानना रादर देन आई से जानना जानना खुद खुद का पता नहीं है तो जान लो जैसे यंग लोग पूछते हैं हाउ टू फाइंड माय पैशन हां तो वही मतलब मैं आपको स्वधर्म के बारे में पूछना चाहूंगा गीता ने कोई टेक्निक जिससे स्वधर्म पता पता चलता है। हां बिल्कुल अगर आप अपने साथ कुछ समय यह
(1:34:44) मां-बाप को जो चीज देनी चाहिए संस्कार में कि बेटे बच्चे को बेटी को बच्चों को अपने साथ रहने की ट्रेनिंग दो बचपन से अपने साथ होना नॉट मेडिटेशन एग्जैक्टली जस्ट टू बी विद यू देयर इज़ नो एक्टिविटी हम 24ों घंटे एक्टिविटी में रहते हैं। कभी खेल रहा है बच्चा कभी पढ़ रहा है कभी लिख रहा है। वो अपने साथ होता ही नहीं है। और जिंदगी के 24 में 25 साल तक वो अपने साथ नहीं होता है। और जब उसको लगता है होना चाहिए तब उसकी शादी होती है। फिर सोचता है होना चाहिए तो बच्चे होते हैं। फिर होना चाहिए तो उसकी शादियों की तैयारी एजुकेशन हम अपने साथ कब होते हैं प्योरली अपने साथ
(1:35:17) मैं दिन में कहता हूं 24 घंटे हैं 24 मिनट अपने साथ हो लो देन यू विल कम टू नो आपके मन में पहले दो पांच हफ्ते तो बहुत ऐसे-ऐसे ख्याल आएंगे तूफान उठ जाएगा कि क्या हो रहा है भाई और फिर देखोगे ये शांत हो गया तूफान और फिर आपको अपना मार्ग दिखने लगेगा कि नहीं भाई ये जो मैं कर रहा हूं ना यह बैंक बैंक की जॉब मेरी नहीं मैं तो क्रिएटिव म्यूजिक बनाने वाला इंसान हूं। मैं कंपोजर बनूंगा। मैं आर्टिस्ट बनूंगा। मैं एनिमेशन में आऊंगा या मैं सो एंड सो काम करूंगा। तब अपने स्वधर्म का पता पड़ता है। हम यू हैव टू बी विथ योरसेल्फ एट लीस्ट
(1:35:52) स्टार्ट जर्नी। हम कुछ गोल ऑफ लाइफ के बारे में बताया गया कि जीवन के अंत तक क्या होना चाहिए? मुझे व्यक्तिगत लगता है कि हम इंसान होकर पैदा हुए हैं। दो पैरों वाले। हम मरते मोस्टली इंसान होकर मरते हैं क्या? कई लोग भटक के जानवर ही हो जाते हैं। जैसे जानवर वाली वृत्ति हमारी हो जाती है। आई थिंक टू अचीव द हाईएस्ट पॉइंट ऑफ ह्यूमैनिटी। मैं इंसान हो के पैदा हुआ था। जिसको कबीर साहब कहते हैं कि ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया। जीनी रे जीनी जीनी चदरिया। अब चद्दर बनाने वाली वो टेक्निक नहीं बता रहे। चद्दर बनाने की विधि है मतलब मनुष्य
(1:36:34) गढ़ने की विधि है। जीनी रे जीनी जीनी चदरिया बहुत गढ़ भजन है तो ज्यों की त्यों धर लीनी चदरिया बच्चा कैसे मां के गर्भ से निष्पाप पैदा होता है इनोसेंट किसी को हर्ट नहीं करना किसी के लय पचर में नहीं पड़ना नो पॉलिटिक्स नथिंग तो जब परमात्मा के घर में जाओ उसी पोजीशन में जाओ दैट्स योर जर्नी एंड दैट्स योर अचीवमेंट दाग मत लगाना इंटेग्रिटी जिसे कहते हैं हां टोटल इंटीग्रिटी नियत साफ होनी चाहिए जिस पर्पस के लिए हमारा जन्म हुआ वो पर्पस सॉल्व हो गया खत्म वेदों को पढ़ने के बाद क्या आपको इंद्र भगवान, वरुण भगवान से कनेक्शन फील होती
(1:37:13) है? नहीं, मैंने कहा ना यह कंसेप्चुअल क्लेरिटी गलत है हमारी। वो पद है। वो कोई व्यक्ति नहीं है। इंद्र पद है। पद समझते हो? जैसे मैं बोलूं बुक लिख देता। हां टाइटल है कि प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया। अब प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया आजीवन काल तक मोदी नहीं है। आप बोलोगे प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया नेहरू से स्टार्ट करोगे घोड़ा भी आ जाएंगे, गुजराल भी आ जाएंगे। यू नो इंदिरा जी भी आ जाएंगी। पर वह उस चेयर पर हैं। पद पर हैं। इंद्र पद है। उस पर कुछ वर्षों के लिए या कुछ काल के लिए कोई आसीन होता है। फिर वह कर्मों से होता है। क्योंकि वह भोग है योनि
(1:37:47) हमारी योनि जो है मनुष्य योनि कर्म योनि हम कर्म करने की छूट रखते हैं। वो नहीं रखते। देव कभी कर्म नहीं कर सकता। देव भोग करने के लिए आता है। तो जैसे उसके भोग समाप्त हो जाएंगे वो इंद्र के पद से चत हो जाएगा। फिर दूसरा बनेगा। जैसे वर्तमान के जो ब्रह्मा हैं इस 64व मनवंतर के जो भी वर्तमान है आने वाले जो युग होगा उसमें हनुमान जी ब्रह्मा बन जाएंगे। अब इसमें जब इस लाइन में आप चलते हो तो आपको काफी कुछ मिलेगा कि कौन प्रमोशन की लाइन में खड़ा है, कौन डिमोशन की लाइन में खड़ा है। वाह मतलब देवताओं के भी प्रमोशन डिमोशंस होते हैं।
(1:38:20) पद के। पद के। आप भी ब्रह्मा बन सकते हो। यह सनातन अरेंजमेंट देता है। आप इंद्र बन सकते हो। आप अग्नि बन सकते हो। आप वरुण बन सकते हो और ये मैं नहीं बोल रहा हूं। ये वेद बोल रहा है। जैसे तंत्र में कहते हैं कि द गोल इज नॉट लिबरेशन। यानी कि मोक्ष एक पॉइंट है। उसके बाद भी गोल्स होते हैं। अ इस पूरे टॉपिक को खोलते हैं। सर एनलाइटनमेंट को सनातन धर्म में क्या कहते हैं? मोक्ष। नहीं यह इस दृष्टि का दुर्भाग्य रहा कि यह मोक्ष शब्द तो है ऐसी बात नहीं है मोक्ष पर हमने उसकी इंटरप्रिटेशन बहुत गरीब की हल्की की और गलत की। मैं अक्सर कई कॉलेजेस
(1:39:04) यूनिवर्सिटीज में मेरे लेक्चर्स होते हैं तो मैं ऐसे पूछता हूं टीनएजर से क्या चाहिए? परमात्मा तुम्हारे सामने खड़े हो 30 सेकंड्स क्या चाहिए? तो बड़ा दुख होता है जब वो कहता है कि मुझे मोक्ष चाहिए। तो मोक्ष का मतलब क्या है तुम्हारे लिए? तो वह कहता है कि मुझे वापस जन्म नहीं लेना है। तो तुम्हें किसने कहा तुम्हारा जन्म होगा? तुम तो भरोसा कर रहे हो ना। आज तक कोई राम, कोई कृष्ण, कोई रामकृष्ण, कोई विवेकानंद उतर के कह रहा है कि मेरा जन्म हुआ है सो एंड सो एड्रेस है मेरी। कोई आया है आपके पास? क्यों उस झंझट में पड़ रहे हो? तो वर्तमान के कर्मों को भूल करके
(1:39:38) भविष्य में ना होने वाली या होने वाली चीजों में हम रह गए। इसीलिए हम भटक गए। मैं मानता हूं मेरे लिए मोक्ष क्या है? मोह शय डल्यूजन विसर्जित हो जाए विसर्जित हो जाए डल्यूजन दैट इज मोह शय इति मोक्ष मोह क्षय मतलब मैंने गलत एक नोशन से गलत चीजें समझ रखी है है तो रस्सी मैं सांप समझ के बैठा हूं तो मुझे उससे मोह भंग हो गया मोह क्षय हो गया मुझे पता पड़ गया यह सांप नहीं है रस्सी है मोक्ष मैंने जिस चीज को सोच रखा है कि मनुष्य का जीवन खानपान रहसन बच्चे पैदा करने के लिए है नहीं तो वो एनलाइटनमेंट आ गई कि उसके हायर पर्पस के लिए मोक्ष हो गया। मोक्ष
(1:40:21) मोक्ष ऐसा नहीं होगा कि कहीं पे पानी के अंदर बस घुल जाओगे ऐसा ऐसा नहीं होगा। ऐसा है भी नहीं। अगर ऐसा होता तो गीता का एक श्लोक है ना कि कर्म यदा यदा ही धर्मस्य गला निर्भवती भारतान धर्मस तदात्म मानम सजाम फिर वो कहते हैं परित्राणाय साधु नाम विनाशाय दुष्कृता धर्म संस्थापनार्थाय संभवाम युगे युगे मैं बार-बार आ जाऊंगा तो तो फिर मोक्ष मतलब डाउटफुल है बुद्ध मैत्री अवतार में आएंगे तो बुद्ध मैत्री अवतार में आएंगे उनका जन्म होगा तो उनका जन्म हो रहा है आपके मोक्ष के अनुसार तो नहीं होना चाहिए था वो जो हमने पिछले हाफ में बात करी केतु
(1:40:58) 12थ हाउस हम अच्छा तो फिर मोक्ष का कारक वो क्या इंडिकेट करता है वो एक पर्टिकुलर साइकिल खोखो की साइकिल चल रही थी तीन बार आना जाना था उसमें से फर्स्ट राउंड में आपको बाहर बिठाया सेकंड में फिर बुला लेगा हम ओके बट जब आप फिर लौटोगे हम आप एज अ ऋषि लौटोगे या एज अ गीता में यह प्रश्न अर्जुन ने किया जो आप कर रहे हो कि हे केशव मेरी आध्यात्मिक यात्रा या साधक के आध्यात्मिक यात्रा जो जहां तक है मृत्यु के बाद उसके अगले जन्म में उसको कहां से स्टार्ट करना पड़ेगा? तो कृष्ण के वचन कि हे अर्जुन जो जिस पोजीशन पे अपने शरीर को छोड़कर के जाता है और
(1:41:39) अगला जन्म लेकर आता है उसको उतनी एनलाइटनमेंट मिलती है। वहीं से स्टार्ट करेगा। से फॉर एग्जांपल चार साल का बच्चा तबला बहुत अच्छा बजाता है। कौन सिखाता है उसको? तो वो यात्रा है उसकी। जी। कई बच्चे आप देखते हो श्लोक धड़ाधर बोल रहे हैं। कौन सिखा रहा है उनको? तो यात्रा है उनकी। सो हम यात्रा में हैं। जहां यात्रा को विराम दिया वहीं से कंटिन्यू कर लेंगे। और यहां हम सिर्फ ह्यूमंस की बात करें। ह्यूमन सोल्स कुछ देर पहले आपने ये कहा कि जैसे इंद्र भगवान एक पद है। उसी तरह ब्रह्मा जी भी एक पद है। और फिर आपने कहा कि हनुमान जी वो भी पद है।
(1:42:16) हनुमान जी भी पद है। ये सब पद में आएंगे। अब आपका लेवल ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग है कि आप कैसे उसको लेते हो। व्यक्ति से नाम जोड़ते हो। जैसे राम है। ठीक है? आप कितने राम जानते हो? तो आप बोलोगे कैसी बात कर रहे हो? राम एक ही है सीता वाले। लेकिन कबीर बताते हैं कि एक राम दशरथ का प्यारा, एक राम घट घट सिन्यारा, एक राम का सकला पसारा, एक पांच राम बताएं। अखंडानंद सरस्वती महाराज जी के मैं जब रामायण को कमेंट्री पढ़ रहा था उसमें यह प्रसंग आया था कि राम जाते हैं ऋषि की कुटिया पे बजाते हैं दरवाजा तो वो पूछते हैं कौन तो कहते हैं कि राम तो ऋषि
(1:42:55) पूछते हैं कौन से राम तो कहते हैं कि दशरथ नंदन राम ओ 64वें राम हो आप समझे इसमें से तो हजार रामायण किसकी हुई है दशरथ नंदन राम की है या राम की है तो राम तत्व है हम यह जो पूरे ब्रह्मांड की एक देख रहे हो नासा इसको मानती है रिदिम है। रिदिम है। यह रिदिम जो हो रही है यह रिदिम क्या है? यह ह मंत्र है। तो यह फेमिनिन शक्ति का मैंने बीज मंत्र बताया आपको। प्रकृति का ह प्रकृति के पुरुष वर्जन में जब आओगे तो वह राम का राम मंत्र है। वह बीज आपको देता भी नहीं है कोई। मैंने भी आपको सही प्रोनाउंसिएशन से
(1:43:41) नहीं दिया बट एग्जांपल करके बताया है ना तो वह रिदमम जो होता है वह रिम से होता है रिम रिदमम और यह सब रिदमम हो रही है बस हो रहा है जगत है नहीं है नहीं हो रहा है नदी है नहीं नदी हो रही है बह रही है ना अभी जहां पर पानी देखा और आगे पहुंच गया तो उसको अगर आपने समझ लिया इस चक्कर को कि जो कुछ है वह हो रहा है घट घट में जो घट रहा उसी को राम पहचान एव्री मोमेंट अभी जो हो रहा है यह राम है। यह राम का विस्तार है। राम दाढ़ी मूछ में आएगा, लठ ले आएगा कि तलवार लेके आएगा? नथिंग लाइक दैट। मैं और गहराई से इसे समझने की कोशिश कर रहा हूं।
(1:44:23) कोई भी साधक जब साधना करने बैठता है। अगर वो शिव जी के भक्त है तो वो कोशिश करते हैं कि शिव तत्व खुद में बढ़ाएं। एट सम पॉइंट वो मोक्ष का पॉइंट क्रॉस हो जाता है। उसके बाद भी शिव तत्व बढ़ाने की कोशिश करता है। जब तक वह पूरी तरह से शिव तत्व के साथ जुड़े उस पॉइंट तक फिर आप में और पूरे शिव तत्व में कोई अंतर नहीं होता। देन डू यू बिकम द शिवा रादर आई विल से यम, नियम, आसन, प्राणायाम, ब्रह्मचर्य वगैरह लेते हुए जब वो आगे बढ़ता है मूलाधार से चलते हुए सहस्त्रार में आ गया। जी। यहां शिव शक्ति का अंतिम मिलन है। तो जब वह सहस्त्रार में आएगा 99.99
(1:45:12) यह फट के वो निकल जाएगा। उसको शरीर छोड़ना पड़ेगा। दैट इज कंडीशन। ओनली अवतारी पुरुष कैन रिटेन बॉडी एक्सेप्शनल। उनमें से साइंटिफिकली प्रूवन एक अवतार जो हमारी परंपरा में मैं बता रहा हूं। रामकृष्ण परमहंस है। चैतन्य महाप्रभु हैं। हु रियली आई मीन जिन्होंने अपने शरीर को बचाए रखा। बाकी ऑर्डिनरी आदमी कभी भी नहीं बचा सकता है। कितना भी बड़ा साधक हो उसको शरीर छोड़ देना पड़ेगा। क्योंकि आपने एप्लीकेशन ही बड़े के लिए की तो निकल गए। अब अब ऊपर की जो व्यवस्था हुई उसको नैरेट कैसे करेगा? कौन करेगा? कौन बताएगा ये? तो ये तो गूंगे का गुड़ है कि आप खाओगे तो
(1:45:50) मीठा है कि खट्टा है कि कड़वा है? कौन बताएगा? गूंगे का गुड़। वाओ। वाओ। ओके। एक बात है कि मैंने जैसे बताया ब्रह्मा जी का पद है एक बात निश्चित मानो नथिंग टू फील बैड सनातनी को इतना गर्व होना चाहिए कि हमारे ऋषियों ने हमें बहुत मैच्योर समझा है कि जिसका नाम है जिसका नाम है नेम जिसका रूप है फॉर्म जिसका रस है जिसकी गंध है स्मेल जिसका नाम है रूप है रस है गंध है वो अवश्यभावी मृत्यु को प्राप्त करेगा शास्त्र कहता है मैं नहीं तो जो ब्रह्मा है जो विष्णु है वह महेश है वह भी एक दिन
(1:46:34) कल्प अंतर होगा तो उनका भी विलय हो जाएगा फिर वो एक ओकार सतनाम निराकार में है फिर तो वो निराकार की यात्रा है बट बिकॉज़ श्रीमद् भगवत गीता का आगे मैं सपोर्ट लूंगा जब वो अर्जुन पूछते हैं 12व अध्याय में ही आता है शायद चौथा श्लोक कि फिर कौन सी साधना करूं फॉर्मलेस और फॉर्म तो वो कहता है कि हे अर्जुन इट इज वेरी डिफिकल्ट। तुम निराकार की साधना फॉर्मलेस करने जाओगे तो पहला टेंपरामेंट सेट ही नहीं होगा। सो यू बेटर स्टार्ट विद यू नो सम फॉर्म। आधार लो कुछ और आधार से आगे बढ़ोगे देन दे विल गाइड यू योर गुरुज एंड दिस थिंग। तो आप स्वरूप से
(1:47:16) पूजा कर लो। और फिर धीरे धीरे धीरे धीरे जब यात्रा शुरू करोगे आप निराकार में हो जाओगे। दैट्स द रीज़ आप मैच्योर्ड जब सन्यासी या संत को देखते हो तो लास्ट में वो मूर्ति पूजा में नहीं आते। रामकृष्ण परमहंस आखिरी दिनों में कोई काली के दर्शन को पूजा करने नहीं जाते थे कि अगरबत्ती जलाऊंगा कि मैं धूप करूंगा। ओ नो उसकी काली सब जगह हो गई। वो काली मैं हो गया सब कुछ। भाई घांस पे वो आदमी चल रहा है। एक्सपेरिमेंट वो कर रहे हैं। आप अगर पढ़ोगे रामकृष्ण परमहंस वचनामृत तो कहता है कि कि क्या ठाकुर उस घांस में भी आप हो? जब रामकृष्ण कहता है
(1:47:49) कि मैं काली में हो गया। तो कहता है कि घास में आप हो बोला हां तो बोला प्रमाण तो बोला चल के देख चलता है और उसके पांव के छापे उनकी छाती पर आ जाते हैं। दिस इज रिटन दिस इज साइंटिफिक तो आपकी वो अवस्था होती है कि जब आप ब्रह्ममय हो जाते हो तो हर चीज नहीं ऋषि मुनि कहते हैं कि इसको तो मारते हो मच्छर भी मारते हो तो हिंसा आ जाती है हमारे ऊपर सबके लिए वह वैलिड नहीं है पर जो उससे कनेक्ट हो जाएगा वो हो जाएगा। आपकी चेतना का विस्तार हो गया ना? आपकी चेतना बढ़ गई। इसी को एनलाइटनमेंट बोलते हैं। एनलाइट लाइट में से आगे विस्तार हो गया। इतनी
(1:48:26) सेंसिटिविटी हो जाती है वो। एंड 99% पीपल एट पॉइंट ऑफ़ एनलाइटनमेंट उनका शायद देहांत हो सकता है। छोड़ देते हैं शरीर। छूट जाएगा आपसे। आप छोड़ोगे नहीं। छूट ही जाएगा। क्योंकि आप मतलब उतना इमोशंस और वो मतलब समुंदर की इतनी वो सुनामियां उठती है ना हिलोरे आनंद की कि आप झेल नहीं पाओगे उसको छोड़ देना पड़ेगा आपको दिस बॉडी इज नॉट मेड फॉर दिस फिजिकल बॉडी पर क्या फिर हम हिंदू स्वर्ग में चले जाते हैं नहीं तो हेवन तो क्रिश्चियनों का भी होता है और जन्नत तो मुस्लिम की भी होती है ये सब समाज को एक्चुअली डिसिप्लिन करने के रास्ते हैं डोंट फील बैड आई मीन मैं किसी
(1:49:08) को हर्ट नहीं करना चाहता हूं। आपके परिवार में कोई एक पूर्वज आया है कि वो बोल रहा है कि ऊपर मजे हैं भाई। मैं स्वर्ग में हूं। कहीं आपने ऑथेंटिकली पढ़ा है? हेलुसिनेशंस वो गरुड़ पुराण पढ़ते हो ना। आधा अच्छा लिखा। लेकिन विधर्मियों ने हमला कर दिया तो पंडितों ने सोचा थोड़ा डराधमका के धर्म को कब्जा करते हैं तो उसमें आधा पढ़ोगे तो मतलब गिन आ जाएगी कि वो पकोड़े की तरह तल रहा है चाबूक मार रहा है अरे भाई आदमी को तो आपने जला दिया नीचे फिर कौन किसको तल रहा है आत्मा जिसको बोलता है नैन चिनती शस्त्राण नैन दति पावक ना जल डुबो सकता है
(1:49:47) ना अग्नि जला सकती है तो कृष्ण को तो झूठा साबित कर दिया आपने आप उसको तल रहे हो लेकिन समाज को चलाने के लिए डंड ंडा अगर पुलिस हटा दो महाराष्ट्र के बॉम्बे से पुलिस हटा दो तो देखो फिर ट्रैफिक होगा आपसे कंट्रोल तो पुलिस के हाथ में हमने डंडा दे दिया कि लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करो सो दिस इज अ धर्म दंडा उसको डराओ धमकाओ कि तुम पापी हो जाओगे नरक जाओगे कीड़े पड़ेंगे कोई परमात्मा की आपसे दुश्मनी नहीं है भाई क्योंकि आप स्वयं परमात्मा स्वरूप हो पर ड्यू टू अज्ञान भूल गए कि मैं परमात्मा स्वरूप हूं मैं ब्रह्म स्वरूप हूं मैं ही ब्रह्म हूं अहम ब्रह्मस्मि
(1:50:25) लेकिन बोलना और उसको महसूस करना दैट्स लॉट्स ऑफ डिफरेंस और पूरी जो जीवन की साधना है जो पूरा सन्यास है वह यही यात्रा है अहम ब्रह्मास्म तक पहुंचने की द मोमेंट यू रियलाइज कि हम ब्रह्मास्मि शरीर छोड़ दोगे हो गया द एंड इट टेक्स टाइम इट टेक्स एफर्ट्स इट टेक्स लाइफ टाइम्स हां लाइफ्स कंटिन्यू प्रोसेस है भाई हजारोंज़ों जन्म निकल जाते हैं यह कोई सोशल मीडिया थोड़ी है जो दो रील दे के दश महाविद्या सीखेगा हमारे पास आर्डर आते दशमावध्या सीखनी है। नथिंग लाइक इट। ऐसा नहीं होता है। यह सब जानना आपके पीड़ा को झेलने का सफर और बहुत आसान कर देता है।
(1:51:07) या सब जानकर मेरे जीवन के कई भ्रम टूट गए। कई भ्रांतियां टूट गई। कई कंफ्यूजन हट गए। मैं आजकल तो मैं हमेशा बोलता हूं। नित्य मुक्त शुद्ध बुद्ध सच्चिदानंद स्वरूप वास्तव में बताता हूं। मतलब मैं निजानंद में हूं। मुझे अगर यह वस्त्र पहन करके पूछो कि क्या मिला? तो मटेरियलिस्टिकली मेरी सब चीजें चली गई है शायद। मेरे नाम पे शायद कुछ भी ना हो। पर मेरे अंदर की संपदा अगर है तो अनंत कोटि ब्रह्मांड का मेरा वो नायक जो है वो मेरा बाप है। तो मैं उसका बच्चा हूं। तो मेरी प्रॉपर्टी क्या है? सोचो। दैट्स अ ब्लिस। आई मीन उफ। बस यही था आज का एपिसोड में। मैं
(1:51:51) चलते-चलते कहूं कि मैं क्यों जब आया तो ध्व में था मतलब इसलिए तो मैंने जब कैमरा ऑफ था तो मैंने आपसे बताया मैं अपने जीवन का अभी मेरे आपके पॉडकास्ट से स्टार्ट हुआ है। इट्स माय ग्रेटट्यूड थैंकफुलने मिस टू यू। आई स्टार्टेड माय पॉडकास्ट जर्नी विद रणबीर अलावादिया। एंड दिस इज माय लाइव्स लास्ट पॉडकास्ट वि रणबीर अलावा। आई विल बी नो मोर अवेलेबल ऑन पडकास्ट। थैंक यू नमो नारायण नमो नारायण थैंक यू सर थैंक यू ऑनर्ड हैव नथिंग टू से अदर देन थैंक यू एंड लॉट ऑफ़ ग्रेटट्यूड एंड रियली रियली थैंक यू लव यू एंड आई एम रियली प्राउड ऑफ यू रणवीर
(1:52:36) यू हैव करेज सत्य के साथ रहे हो सनातन के साथ रहे हो और मैं मानता हूं ऐसा ब्रह्म से जुड़ा हुआ व्यक्ति ही कर सकता है यू हैव टू हैव गट्स एंड आई एम रियली प्राउड ऑफ यू थैंक यू थैंक यू नमो नमो नारायण हम एक इंटेंशन सेटिंग करते हैं हर एपिसोड से पहले और जब मैं यहां बैठता हूं तब इंटेंशन और ज्यादा क्लियर हो जाती है। बट क्योंकि हम इतना ज्यादा रॉ कर रहे हैं। मुझे बस एक ही इंटेंशन दिख रही है कि सरस्वती माता खुद इस पॉडकास्ट में रहेंगी और बाकी सब जो होना है हो जाए। तो आप वही देखिए। दैट्स ग्रेट। बट कुछ मीनिंगफुल चीज निकल के आएगी आज
(1:53:11) उतना मुझे पता है। ओ
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