Friday, September 4, 2026

Underworld Crime Investigation | Real Crime stories | Ex-Cop Tanaji Desai | Ambika Babbar | EP 12

Underworld Crime Investigation | Real Crime stories | Ex-Cop Tanaji Desai | Ambika Babbar | EP 12

Author Name:The Ambika Babbar Show

Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@theambikababbarshow

Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=dEfG7_iwC1Q



Transcript:
(00:00) वो लड़के को है ना कुछ खिला दिया मतलब ये बटंस वगैरह रहते हैं नशे [संगीत] वाले खिलाने के बाद वो थोड़ा सा अनकॉन्शियस बेहोश होता है आदमी उसके हैबिट्स नहीं रहते उसको तो वैसा हो गया वो और उसके साथ वो लोग ने फिर गलत काम किया [संगीत] ये ऑफिसर है ना आर्थरोड जेल से गया था उधर तो रोड में कैसा है इधर गैंगस्टर सब राजन वाले दाऊद वाले बाद में मुझे मालूम पड़ा ऐसा कि ये तकलीफ देने के मतलब सुपारी जैसा पैसा लेते हैं ना किसी एक गैंगस्टर [संगीत] ने सुपारी दी है। इन लोग को जितना हो सकता है तकलीफ दो। हम जब आरोपी पकड़ते हैं वही उधर है।
(00:39) डेंजर और डेंजर ज़ोन में गए हम लोग। [संगीत] वहां के अलग-अलग अनुभव है। अलग-अलग हिस्से हैं। एक यूपी का गैंगस्टर था। जावेद खान उर्फ़ फिरदौस वो यूपी से वांटेड था। उसके ऊपर 2523 केसेस थे। रॉबरी मर्डर्स, एक्सट्रोशन सब। खासदार थे बीजेपी के। अच्छा। अच्छा कृष्णानंदन राय वो केस में वांटेड था। फिर और एक पप्पू गौशाला था कृपा शंकर चौधरी था। वो वही केस में थे। ये दो लोग ने तो मुन्ना गैंग मुन्ना बजरंग का गैंग में काम करते थे तो एक वेपन पकड़े थे हम लोग छोटराजन गैंग के। मलेशिया से जेएनबीटी में भेजा था उसने। मेरा तो 20 साल का सर्विस चला गया। 13 साल जेल में
(01:23) निकाले। फैमिली से दूर रहा। अभी छोटे-मोटे जो क्रिमिनल्स हैं, गरीब लोग भी आते हैं, एक्सीडेंटली केस में आते हैं। लेकिन उनके [संगीत] पास वकील करने के लिए पैसे नहीं होते। तो फाइट वकील ही नहीं रहेगा तो फाइट नहीं कर सकते। समझो एक चोरी के केस में है तो उसका शिक्षा समझो फॉर एग्जांपल है 3 [संगीत] साल है छोटी-मोटी चोरी में। अगर वो 4 साल काट रहा है तो उसका प्रॉब्लम है कि उसके पास वकील नहीं है। कोई सुविधा नहीं है। उसको निकालने वाला कोई नहीं है। जब तक वो केस अंडरटाइल में रहेगा केस 4 साल के बाद होगा और शिक्षा मिलेगी 3 साल
(01:55) की तो क्या करेगा? मेरा खुद का केस 8 साल के बाद चला है। रिटायरमेंट प्लान होता है लोगों का। इनका रिटायरमेंट प्लान क्या है? ये मर जाएंगे या फिर ये जेल के अंदर होंगे। आप जैसे स्पेशल ब्रांच जो बनते हैं और उसके अंदर जो भी ऑफिसर्स और जो भी भर्ती होते हैं स्टाफ उनके लिए कुछ ऐसा एक फैसिलिटी या कानून होना चाहिए। आगे सेफ हो जाए। जरूर होना चाहिए। क्यों? 120 रिवार्ड दिए गए पुलिस डिपार्टमेंट से आओ और 120 रिवार्ड 120 रिवार्ड है। हेलो एंड वेलकम। आई एम योर होस्ट अंबिका बब्बर। आप सभी का स्वागत है मेरे YouTube चैनल द अंबिका बब्बर शो पे। आज के टॉपिक
(02:41) से रिलेटेड नॉलेज अगर आपको पूरा चाहिए तो यह एपिसोड अंत तक जरूर देखें। इसे स्किप ना करें। नीचे दिए हुए बटन पे क्लिक जरूर कीजिए। यह चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें। यह टॉपिक आपको अगर अच्छा लगा हो तो लाइक एंड कमेंट जरूर कीजिए। आज मुंबई सेफली सो रही है। हम चैन की नींद सो रहे हैं। इंडिया चैन की नींद सो रहा है। कभी सोचा है क्यों? क्योंकि क्राइम अंडर कंट्रोल है। मैं बात कर रही हूं डोर टू डोर गली टू गली जो क्राइम होते थे वो कंट्रोल में है। गैंगस्टर नजर नहीं आ रहे
(03:26) हैं। इसलिए हम सेफ हैं। आज के जो हमारे गेस्ट हैं वो स्पेशल है। उनकी जर्नी कोल्हापुर से शुरू होके मुंबई आके थम गई। ईयर 93 में जो करियर शुरू हुआ 2010 में आकर क्यों थम गया? और आज वह इतनी तकलीफों से क्यों जूझ रहे हैं? उनकी फैमिली इतनी तकलीफों से क्यों जूझ रही है? हमने मूवी देखा अब तक 56 और अब एक मूवी आ रही है अब तक 112। तो हम जिससे मिलने वाले हैं वो है अब तक 26। सभी लोग जानते हैं यह नाम। दाऊद गैंग, छोटा राजन गैंग, अरुण गौली गैंग, मुन्ना बजरंगी गैंग, अमरनायक गैंग और ऐसे काफी सारे गैंग और उनके नीचे फैले हुए
(04:18) बच्चे जिन्होंने दहशत फैलाया हुआ था। जिनको कंट्रोल किया यह पर्टिकुलर ब्रांच ने। जब मैं ब्रांच बोल रही हूं मतलब एक सेक्शन ने पुलिस के एक सेक्शन ने इस पूरे क्राइम को कंट्रोल में लाया और उसे खत्म किया। आज हम जिनको अपने पडकास्ट में एज अ गेस्ट लाए हैं वो है वही पर्सन जिन्होंने बड़े-बड़े एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के साथ पार्टिसिपेट किया है बड़े-बड़े एनकाउंटर पे। हमने बड़े नाम तो सुने ही हैं। प्रदीप शर्मा जी, रविंद्र आंग्रे जी इनका नाम सभी ने सुना है। यह एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बोले
(05:05) जाते हैं। जिन्होंने क्राइम जड़ से हटाया है। जी हां, यह उनके स्पेशल टीम मेंबर हैं। जिन्होंने उनके साथ बड़े-बड़े एनकाउंटर में साथ दिया है। प्लीज वेलकम आवर स्पेशल गेस्ट टुडे तानाजी देसाई जी दी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट [संगीत] [संगीत] वेलकम सर टू माय पडकास्ट आप आए आज मुझे बहुत खुशी हो रही है क्योंकि ये इतना इंपॉर्टेंट टॉपिक है लाइक जो लोग मिलेनियम जनरेशन से हैं वो यह
(05:53) टॉपिक के बारे में गवाह है। उन्होंने यह टॉपिक को इतने क्लोजली देखा है। शायद जे इसके बारे में नहीं जानते जो न्यू जनरेशन है। बट जजी आज की तारीख में यह भी एक्सपीरियंस नहीं कर रहे हैं कि गैंगस्टर क्या होता है? एनकाउंटर क्या होता है? क्राइम क्या होता है? बिकॉज़ आज के तारीख में इंडिया बहुत शांत है। थैंक्स टू आप लोगों के वजह से जो आप लोगों ने उस टाइम पर इतना क्राइम जो चल रहा था धूमधाम से हर जगह क्राइम हो रहा था और हर कोई अनसेफ फील करता था उस टाइम पे नॉर्मल सिटीजन इतना अनसेफ फील करते थे कि कहीं भी क्राइम हो रहा है एक्सटॉशन हो रहा है
(06:34) धमकियां आ रही है कहीं भी गोलियां चल रही है कुछ भी हो रहा है मतलब एक नॉर्मल इंसान घर से निकलने से पहले डरता था कि हम बाहर निकलेंगे तो क्या होगा कोई थोड़ा सा अपर मिडिल क्लास है तो डरता था कि एक्सटॉशन का कॉल ना आ जाए। कोई जवान लड़की घर से निकलने से डरती थी कि कहीं बाहर निकले तो रेप ना हो जाए। क्राइम अपने इतने पीक पे था उस टाइम पे। अगर आप लोग ना होते आप लोग मतलब जो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट थे जो इस पे बहुत पर्टिकुलरली काम कर रहे थे और अपना पूरा योगदान दे रहे थे और इतने ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे और निभा रहे थे इस
(07:15) ड्यूटी को। जान का जोखिम डाल के मतलब यह इतना डेंजरस जॉब है। मैं इसके बारे में सोचती हूं तो मेरे लिटरली रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि इतना डेंजरस है ये। आप जानकर जुखम लगा के गैंगस्टर के सामने जाते हो। कैसे फील्डिंग लगाते हो, कैसे उनको पकड़ते हो और नेक्स्ट लेवल काम है ये। तो मैं पूरे ऑडियंस के तरफ से आपको थैंक यू बोलना चाहती हूं कि आप टाइम निकाल के यहां आए हो। नई जनरेशन को कुछ नॉलेज दोगे और कुछ लाइमलाइट दोगे कि यह टॉपिक क्या है और उस वक्त रियलिटी में क्या हुआ है क्योंकि उस टाइम पे क्या हुआ था ना सर एक रियलिटी तो चल रही थी जो दबी हुई थी जो
(08:00) जो कर रहे थे वही जानते थे और एक अफवाह भी चल रहा था अफवाह मतलब बहुत मिक्स्ड मैच चीजें आ रही थी मतलब क्राइम एक तरफ पूरा खत्म किया जा रहा था जो सिटीजंस के लिए बेस्ट था और जिसकी वजह से आज शांति में हम है। उसका रिजल्ट आज देखने मिल रहा है। शायद उस वक्त लोगों को समझ ना आया हो कि यह जो आज दिख रहा है कि आगे जाके अगले 20 इयर्स में 15 साल में हमको इसका क्या बेनिफिट होने वाला है। आज वो बेनिफिट हमको दिख रहा है कि हम चैन की नींद सो रहे हैं। राइट? तो सर आप हमें बता सकते हो कि ये जो क्राइम से रिलेटेड जो एक ब्रांच खोला था उसका रीजन क्या था?
(08:47) और ये गैंगस्टर क्या होते हैं? बिकॉज़ हमारे लिए तो सिर्फ वर्ड है। हमने तो कभी वन टू वन देखा ही नहीं है। बट इनके नाम और मूवीस जरूर देखे हैं। तो थोड़ा सा हमको गैंगस्टर के बारे में भी बताइए और थोड़ा सा हम हमको यह भी थोड़ा बताइए कि ये क्राइम रिलेटेड ये ब्रांच क्यों खुला था उस टाइम पे? मैं एक किसान का लड़का है। किसान का लड़का था। मेरा गांव था सिरसंगी। ये तहसील मेरा आजरा और जिला कोल्हापुर था। महाराष्ट्र के ओके तो मैं मैम मैं 1985 में मुंबई में आया तब मैं नाइंथ स्टैंडर्ड में था
(09:31) तो मैं इधर आया तो एक्चुअली मेरे को मतलब गांव का थोड़ा प्रॉब्लम था इसके लिए मैं चला आया इधर और फिर इधर थोड़ी पढ़ाई की बाद में इधर आने के बाद फिर इधर आने के बाद मैं दादर में था दादर में आया रहने के लिए मेरा एक रिलेटिव था उसके साथ में दादर में आया एक रेस्टोरेंट में कहां मिला मेरे को? वो था दादर के अग बाजार में। अच्छा तो अगर बाजार का नाम मतलब आप भी आप सबको मालूम पड़ रहा है कि पिक्चर के वजह से तो अगर बाजार क्या था? ये मान्या मान्या सुरवे। यस मान्या सुरवे का एरिया इलाका करके जाना जाता है। तो मैं एक रेस्टोरेंट में था।
(10:11) उसका नाम था जय महाराष्ट्र। अच्छा हां। और एक दूसरा एक रेस्टोरेंट है मोदकम। अभी जिधर वो सिद्धि विनायक मंदिर के बाजू में ओके वो गायकर फैमिली का एक महाराष्ट्रियन फैमिली का रेस्टोरेंट थे तो तो मैं उधर आके काम करने लगा रहने लगा फिर वहां से आबाद जिधर रेस्टोरेंट था उसके सामने कीर्ति कॉलेज है थोड़ा आगे जाके और पीछे एक स्कूल था महाराष्ट्र हाई स्कूल करके तो सब मराठी लोग थे तो इतना थोड़ा सेफ महसूस करता था लेकिन जैसे जैसा मैं 85 हो गया, 86 हो गया, 87 हो गया। तो थोड़ा-थोड़ा मैं उधर अग बाजार को जान रहा था। इधर एक मन सुर करके था। इनका एनकाउंटर हो गया है।
(10:56) पोत्या भाटकर है प्रभा देवी। अच्छा पोत्या भाटकर है। उनका भी एनकाउंटर हो गया। मतलब ये दाऊद के भाई को इन लोगों ने मारा था। ऐसा सब स्टोरी मैं सुनता था। अभी मैं पुलिस में नहीं था। तो मेरी स्टार्ट वहां से हुई है कि मन्या सुरवे का इलाके से हुई है। तो मैं मेरे को थोड़ा इंटरेस्ट था कि क्रिमिनल कैसे होते हैं? पुलिस क्या कर रहे हैं? तो मैं पेपर भी पढ़ता था तभी तो स्टोरीज पढ़ता था। ये सब चालू था। लेकिन मेरे को इंटरेस्ट था पुलिस में जाने का। अच्छा। तो मैं वो इधर आने के बाद नाइट स्कूल में गया। फिर पढ़ाई किया। फिर 93 में 93 में
(11:35) मैं भर्ती हो गया। पुलिस कांस्टेबल एस कास्टेबल करके। फिर ट्रेनिंग करके आया। ट्रेनिंग करके आने के बाद अ मैं हेड क्वार्टर नायगांव दादर उधर मैं मेरा पोस्टिंग हो गया तो उधर पोस्टिंग करतेकरते जो काम देते थे मतलब कभी आरोबी को लेके जाना है कोर्ट के लिए बंदोबस्त करना है ये सब काम देते हैं हेड क्वार्टर में अच्छा तो मैं हर डेली ये काम वो काम तो थोड़ा नॉलेज आ जाता था कैसा होता है वर्क पुलिस का तो उधर विजय सालस्कर साहब उनका पोस्टिंग था उधर ओके हां वो क्राइम ब्रांच में थे उनका कुछ टर्नओवर होने के बाद उधर आ गए वो पर वो
(12:21) तभी मेरे को नहीं मालूम था सालस्का साहब कि इतने बड़े एनकाउंटर स्पेशलिस्ट है वो 83 बैच के थे अच्छा तो उनका तो 10 साल सर्विस हो गया था मैं जब जॉइ किया तभी तो वो उधर थे एक लक्ष्मण दुबे साहब करके थे वो भी उनके बैच के थे 83 बैच तो उधर मैं ऑफिस वर्क देखता था तो वहां से वह होने के बाद एक साल उधर मैं हेड क्वार्टर से निकाला। फिर मैं बीडीएस में गया बॉम्ब डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड। ओके। तो उधर मुंबई के लिए पहला स्क्वाड बना हुआ था। उसमें मेरा सिलेक्शन हो गया था। मैं ट्रेनिंग गया 45 डेज का बॉम्ब का कैसा मतलब एक्सप्लोसिव क्या है ये सब बेसिक
(13:05) ट्रेनिंग रहता है। वो मैंने किया पुणे में। अ उसके बाद फिर वो रूटीन हमारा चालू हो गया कि थ्रेट्स आते थे बिल्डिंग इधर बम रखा है उधर हमारा वो काम था चेक करना और पेसिफिक गवर्नमेंट के जो कुछ ऑफिसिसेस है मतलब मंत्रालय हो गया हमारा डीजी ऑफिस है कमिश्नर ऑफिस है वो डेली चेक करना पड़ता था यह हमारा काम था तो 98 में क्या हुआ एक इंटरनल परिपत्रक होता है वहां से एक डीसी भी थे परमवीर सिंह साहब करके उन्होंने ये परिपत्रक निकाला था जिसको क्राइम ब्रांच डिटेक्शन में काम करना है उनका नाम ले लो अच्छा
(13:49) हां तो मैं वहां से उधर नाम दे दिया अच्छा मुझे करना है तो मैं एक दो बार जाके मिला उनको साहब वो डीसीपी साहब थे तभी मिला फिर बोले करता हूं मैं अपुन देखेंगे ऐसा चालू होता है फिर तो मुझे उस दौरान मैं साहब को मिलने गया था मुझे अरविंद्र आंगरे साहब मिले उधर वो भी 83 बैच के हम तभी वो उनका स्पेशल स्क्वाड था उनका मतलब प्रदीप सावंत साहब के अंडर और परमवीर सिंह साहब के अंडर एक स्पेशल स्क्वाड था उनका अच्छा तो मेरा उधर ट्रांसफर हो गया उनके साथ में रविंद्र आंग्रे साहब के साथ में और ये मेरी जर्नी अभी चालू हो गई ओके हां हेड क्वटर्स बीडीडीएस अलग-अलग मतलब
(14:34) फिर ये आ गया तो ये काम मेरे लिए बहुत डिफिकल्ट था मतलब मतलब मतलब इधर काम क्या चलता था? क्रिमिनल्स को पकड़ना है। अ जो भी इंफॉर्मेशन आती है उसके ऊपर वर्कआउट करना है। ये सब काम होता था उधर। ओके। हां। तो ऐसे करते-करते एक दो महीने उधर चले गए। भाई सीख रहा था थोड़ा सा। कैसे इनफॉर्मर रहते हैं उनको कैसे मिलते हैं? क्या बोलना पड़ता है? वो लोग इंफॉर्मेशन लाते हैं। तो अपने को वर्कआउट कैसा करना है उनके साथ में। तो ये जो हम पिक्चर में देखते हैं कि इनफॉर्मर्स होते हैं वो आके टिप देते हैं। फिर उस पे एक्शन लेके क्रिमिनल्स को पकड़ा जाता है। ये रियल है।
(15:16) हां अभी कैसा है? वो क्रिमिनल टिप देते हैं। मतलब क्या है? वो क्रिमिनल तो अपना गुनाह करते रहते हैं। लेकिन वो क्या है? उसमें का कोई एक इनफॉर्मर बनता है या कोई भी प्रोफेशनल रहते हैं। वह बता दे कि वह टीप ऐसे ऐसे सब क्रिमिनल इधर घूम रहे हैं या फलाना फलाना जगह पे है तो हम लोग उसके ऊपर वर्कआउट करते हैं। फिर वर्कआउट में एक महीना लगेगा, दो महीना लगेगा, तीन महीना पकड़ने के लिए सब चालू रहता है। फिर एक टीम रहती है उसके अंदर दो-तीन ऑफिसर, कांस्टेबल्स रहते हैं। तो अलग-अलग जैसा खबरी लोग आते हैं वो खबर लेके तो उसके ऊपर दो-दो तीन-तीन लोग को वो लोग फॉलो करते
(15:56) हैं वो खबर के ऊपर तो फिर इंफॉर्मेशन कलेक्ट करके फिर उसके ऊपर एक डिसीजन लिया जाता है। अच्छा मुझे ये किया गया था तो हम लोग मैं रवि पुजारी साहब ने बताया कि इसके ऊपर वर्कआउट करो और इसका इनेशन निकालो। इतनाइतना केसेस है और वो गिरगांव अ जो एरिया था गिरगांव एरिया लेमंडन रोड वगैरह सब ये इसमें उन लोग की दहशत थी व्यापारी लोग हैं ना वहां यस दहशत थी और ये अमरनायक गैंग के लिए काम करते थे और अच्छा उसके आगे शशिकांत सागवेकर उर्फ बाबू अच्छा हां चिकना बाबू बोलते थे उसको उसके अंडर ये लोग काम करते थे रवि पुजारी हो गया सुरेश देव कलंबेकर उर्फ जीटी और
(16:41) गुलिया खुद चिकना बाबू यह लोग काम करते थे मतलब एक्सट्रॉशन लेना है अच्छा उनको मारना है ऐसे बहुत सारे केस थे उनके ऊपर मर्डर्स भी थे खंड के केस थे ऐसे उनका सिलसिला चालू था तो वो खबरी ने ऐसा ये किया कि एक कोई तो ऐसा मतलब पुजारी करके कोई तो आ रहा है बड़ा गैंगस्टर है और ऐसा है तो वो मेरा लाइफ का पहला केस था मतलब मतलब ऐसा बड़ा रवि रुकोया पुजारी का तो उधर हम लोग गए तो उधर पकड़ने के लिए फील्डिंग लगाया फिर वहां से हमारे जो बॉस था उन्होंने आंग्रे साहब थे तो उन्होंने उसको थोड़ा सा ये इशारे में किया कि बाबा
(17:26) सरेंडर हो जाए हम लोग पुलिस वाले ऐसा बोल दिया लेकिन उन्होंने डायरेक्ट फायरिंग चालू किया हम लोग सामने से सामने से तो फिर हम लोग ने भी उसके जवाब खिलाफ जवाब दिया और फिर उसको को भी गोली लगी। फिर वो मेरा वो इन फर्स्ट एनकाउंटर था लाइफ का। ओके। तो दो दिन मैं सोया नहीं था। [हंसी] अच्छा। ऐसा। ओके। हां। वो 99 में हो गया था। ए फर्स्ट ए तो ऐसे बहुत सारे क्रिमिनल्स थे उनके साथ में। फिर वही गैंग के चिकना बाबू का भी एनकाउंटर हो गया। हमारे टीम ने किया था। फिर सुरेश देव कांबेकर जेटी। जीटी क्यू बोला जाता था उसको
(18:09) अच्छा वो जीटी हॉस्पिटल में जॉब करता था ओके और उस वही नाम से उसको उर्फ जीटी बोला जाता जीटी भाई अच्छा उधर आना फिर ये करना सब ये था तो एक सिलसिला था फिर उसके बाद एक मंगेश कुली करके था अच्छा मंगेश कुली कुलाबा का गस्टर था वो पुलिस के हाथ से भागा था वो क्या करता था उसका मसेंट क्या था रात को आना झोपड़पट्टी में घुसना चाकू लगाना जो दिल में मर जाए वह करना अरे बाप रे ऐसा घर में घुस के तो उसके ऊपर भी 19 181 केसेस थे खंडनी के केस थे मर्डर थे पुलिस से भागा हुआ था
(18:55) मैं उसके बाद में मैं ऐसा भी सुनता था कि ये लोग वही जिधर रहते थे कुलावा में कुलावा मार्केट के अंदर रहता था वो वो रेप केसेस भी थे लेकिन डर के मारे वो लोग एफआईआर नहीं कर पाते थे पुलिस स्टेशन में। क्यों? उसकी ऐसी दहशत ही थी पूरी। अच्छा मतलब उसने ऐसा दहशत था कि वो डर के मारे कोई भी घर का सदस्य उसके खिलाफ बात नहीं करता था। अच्छा हां तो हम लोग भी उसके लिए बहुत बार गए फील्डिंग लगाए यहां से वहां से फिर एक दिन खुला हुआ मार्केट में हमको रात को मिला वो। ओके। हां। मतलब ये करा तो जैसा वो सर फिरा था एकदम कोई भी पुलिस दिखेगा उसको डाउट भी
(19:37) आया ना तो फायरिंग करता था शॉप पर वो पिस्तल या जो भी सामान रहेगा लोड करके ही घूमता था मतलब ऐसे हम लोग वर्कआउट करते थे हर एक आदमी से धीरे-धीरे जाके कॉन्फिडेंस में ले लिया आदमी लोग को फिर थोड़ा थोड़ा थोड़ा उसके बारे में नॉलेज है क्या तो बाकी का तो रिकॉर्ड तो था उसका कोलाबा पुलिस स्टेशन में क्राइम ब्रांच में तो उसने भी फायरिंग किया तो हम लोग के गोली से वो मर गया। ओके तो यहां तक आपका मतलब एक जो जर्नी मैं देख रही हूं आपने जो एक मैनिफेस्ट किया था जब आप वो रेस्टोरेंट में काम कर रहे थे कि आपको पुलिस में ये जाना है तो फाइनली आपको आपका
(20:19) लाइफ वही ले आया जो आप चाहते थे। राइट? जो एनकाउंटर वर्ड है इसका एक्चुअली मतलब क्या होता है? मतलब क्योंकि लोगों को क्लेरिटी नहीं है इस चीज को लेके कि एनकाउंटर का मतलब क्या होता है और यह एनकाउंटर ब्रांच जो बनाया गया था वो किस रीजन से बनाया गया था। वैसे एनकाउंटर के मतलब बहुत अलग-अलग है। ओके। अभी पुलिस के पॉइंट पुलिस के पॉइंट ऑफ व्यू में अभी एक वर्ड हुआ है कि मतलब पुलिस के आमनेसामने फायरिंग किया गुंडा और पुलिस क्रिमिनल और पुलिस में तो उसको एनकाउंटर नाम दे दिया चकमक। अच्छा। हां चकमक चकमक होती है उसको इंग्लिश में एनकाउंटर
(21:00) वर्ड दे दिया वैसा अलग-अलग उसके अंदर पहलू है एनकाउंटर के अगर अच्छा सोशल में जाएंगे तो लेकिन इसमें एक एनकाउंटर नाम पड़ा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एनकाउंटर हो गया एनकाउंटर हो गया तो फेमस हो गया बाकी इसमें एक अच्छा ऐसा कोई स्पेसिफिक नहीं है स्पेसिफिक ऐसा कोई मतलब ये नहीं है ऐसा पुलिस पॉइंट ऑफ व्यू इसका कोई ये नहीं कोई नहीं कोई नहीं ओके सो यहां हमको एक क्लेरिटी मिलती है कि पुलिस पॉइंट ऑफ व्यू एनकाउंटर कुछ नहीं था। हां। बट यह जनता ने एक वर्ड बोल दिया कि हां भाई इन लोग मिले सामने आए और गोलीबारी हुई तो एनकाउंटर हो गया। एनकाउंटर एक वर्ड बन गया है।
(21:38) सो यहां जब आप बात कर रहे थे मुझे एक चीज समझ आई कि जैसा मैं भी कंफ्यूजन में थी पहले जब मैं रिसर्च कर रही थी। आपने जैसे यह बताया क्लियरली कि जब आप कहीं फील्ड पर जाते हो आपको खबर मिलती है या टिप मिलता है या जो भी है या आप उस पे बहुत महीनों से काम कर रहे हो आपको जैसे ही पता लगता है यह गैंगस्टर ये क्रिमिनल इस पॉइंट पे ये जगह पे है तो आप लोग पहली कोशिश यही करते हो कि वो सरेंडर हो जाए। राइट? अगर वो सरेंडर नहीं होता है तो भी आपकी कोशिश जारी रहती है। अंटिल अनलेस वो फायरिंग स्टार्ट करता है सामने से तो तो भी आप लोग उस पे धीरे-धीरे काम करते हो और
(22:18) जब यह मामला हाथ से आगे बढ़ता है और आप क्रिमिनल को लूज़ करते हो अपने हाथ से वो भागने लगता है या कोई कारण हो जाता है तब आप रिटर्न फायर करते हो 85 के बाद 85 से लेके जब हमारा 2006 का एनकाउंटर था मेरा लास्ट ओके 85 से ले 2006 तक मैं तो 93 में भर्ती हो गया। लेकिन मुंबई के अंदर इतना क्राइम बढ़ चुका था 85 के अंदर। मैं तो मुंबई में था लेकिन अभी मैं तो पेपर में आता था एक्सट्रॉशन करना व्यापारी लोग को धमकाना फिर उनको तकलीफ देना और तभी तो हर एक मुंबई के अंदर ऐसा खुद का एक वर्चस्व दिखाने के लिए किधर भी फायरिंग करना ये
(23:04) लोग था एक डी कंपनी दाऊद गैंग फिर इधर गौली गैंग अमरनायक गैंग ये सब तभी चालू था राजन गैंग पहले एक थे बाद में अलग हो गए। लेकिन ये इनका खुद का एक वर्चुअस दिखाने के लिए इनोसेंट लोगों का मर्डर हो रहा था। खून हो रहा था मुंबई के अंदर। अपना दबदबा दिखाने के लिए। दबदबा दिखाने के लिए। मर कौन रहा था? अच्छा नॉर्मल लोग नॉर्मल लोग इन लोग को कुछ फर्क नहीं पड़ता था। मतलब एनकाउंटर एक तो एक गवर्नमेंट पॉलिसी हो गई है। मतलब थी तभी कि बाबा गोली का जवाब गोली से दो। बराबर है। अभी ये लोग सुन रहे। एक मर्डर होता है। एक्सीडेंटली हो गया। करेक्ट।
(23:47) नेक्स्ट दूसरा, तीसरा, चौथा ऐसा हो जाएगा तो उसका मतलब धंधा ही बन गया है। ऑर्डर करो, पैसा कमाओ। तो इनको किधर तो लगाओ किसी ने लगाम देना चाहिए। करेक्ट जो हमारे सुपीरियर थे डीसीपी रहते हैं क्राइम जॉइंट सीपी सीपी ये लोग रहते हैं उनका एक मीटिंग होता है उनका या गवर्नमेंट के साथ बातचीत होता है अभी इसके ऊपर कंट्रोल कैसा लाए कि मुंबई तो अपना जागतिक राजधानी है राजधानी है अपना तो इसके ऊपर कंट्रोल कैसा पाए अप नहीं तो व्यापारी निकल जाएंगे मुंबई से भाग जाएंगे हां सेफ ही नहीं है तो क्यों रहेंगे हां तो अभी ये तो मैंने आपको अरविंद रांडे
(24:29) साहब के साथ में ही गया था। उसके बाद में भी मतलब खाली एनकाउंटर ही नहीं किया। बहुत सारे ऐसे रॉबर्स गैंगस्टर्स पकड़े हैं। वेपन्स ये पकड़े तो ये सिलसिला मेरा आगे बढ़ता है। अंग्रे साहब का बदली हो जाता है। अच्छा थाना में। अच्छा तो उधर दूसरे सीनियर आ जाते थे। जोशी साहब थे अनिल वने साहब थे विनायक व साहब थे। ऐसा सिलसिला बढ़ते जाता है। उनके साथ में काम करता हूं। तो मेरे पास एक इंफॉर्मेशन आई थी। विशाल थकान करके था। अच्छा विशाल थकान करके था। एक क्रिमिनल था छोटा राजन गैंग का। तो मेरे पास मेरे जो इनफॉर्मर था उन्होंने बोला भाई ऐसा-सा
(25:10) मेरे पास इंफॉर्मेशन है। आप थोड़ा वेरीफाई करो। तो मैं उसका रिकॉर्ड निकाला तो उसका केसेस था। वांटेड भी था। तो मेरे मेरे जो उस टाइम सीनियर थे वह बिजी थे दूसरे काम में तो क्या होता है अगर अपुन एक इनफॉर्मर आया अपुन रिजल्ट नहीं दिया तो वो आदमी दूसरे जगह जाता है तो एक टाइम तक रुकता है क्योंकि वो जो क्रिमिनल हार्ड क्रिमिनल रहते हैं एक जगह पे नहीं रुकते इधर आठ दिन इधर 15 दिन उनको जान का खतरा है उस टाइम कैसा एनकाउंटर का ये ज्यादा चल रहा था हम विशाल सरना और उसके साथ और कुछ लोग तो मैं एक ऑफिसर को मिला दिया एक इनफॉर्मर को
(25:54) नितिन विचारी साहब करके थे उनको मिलाया फिर मैं उनका रिकॉर्ड लाने के लिए यूनिट 11 में गया था क्राइम ब्रांच यूनिट 11 अच्छा तभी उधर सीनियर थे प्रदीप शर्मा साहब अच्छा 2000 दो तीन की बात है तीन हां तीन की बात है उधर हम लोग को ढूंढ रहे थे वो लोग भी कैसा होता है एक क्रिमिनल के रह गया ना सब मुंबई के अंदर एक से 12 यूनिट है क्राइम ब्रांच के अलग अलग-अलग एरिया में ओके डिटेक्शन क्राइम ब्रांच के तो 11 नंबर कादिवली में 12 नंबर एंड अपना दसर में अच्छा हां उलावे से लेके दस तक 12 यूनिट है हमारे ओके सबमल इधरउधर सब तो मैं बोला सर ऐसा-सा मेरे पास इनफॉर्मर है
(26:39) लेकिन वो थोड़ा आपकी जानकारी के लिए मेरे को ये डोजर मांगता है लेकिन वो बोला अरे तुम लोग नहीं कर पाओगे इसके आगे की इंफॉर्मेशन हम लोग के पास है साहब के पास तो इनफॉर्मर को मैं उनको मिला दिया। अभी वो इधर-उधर जा ही रहा था कि हम लोग नहीं कर रहे इसके लिए। तो उनको मैं मिला दिया। फिर वो काम हो जाता है। फिर उसमें AK के-47 मिला। तो उनको जब पकड़ा गया ना तो अभी बोलते हैं ना एनकाउंटर क्यों नहीं होता है कि अभी इसको भी एनकाउंटर हो कर सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं कि उसके पास AK-47 था और भी वेपन थे और पांच छ लोग पकड़े गए उधर। अच्छा हां तो फिर कैसा है जो मेरा इनफॉर्मर था
(27:25) हां तो पैसा देना पड़ता है पुलिस को हम तो मैं एक बार गया था उनको लेके सर उसका जो भी है कुछ हक का पैसा दे दो रिवॉर्ड रिवॉर्ड तो रिवॉर्ड देने के लिए लेके गया तो मैं बात किया फिर शर्मा साहब मुझे मिले अरे वेरी गुड कांग्रेचुलेशन अच्छा काम हो गया तो बोला तेरे लिए क्या क्या है बोला मैं सर मेरे मेरे को आपके साथ काम करना है। ये मेरा रिवॉर्ड है। ये मेरा रिवॉर्ड है। बस बोले डन। मौका देखते ही मैं तेरे को अभी तो स्टाफ है मेरे पास। थोड़े दिन जाने दे फिर मैं लेता हूं। तो एक दो महीने ऐसे गए तो मैं उधर ही क्राइम ब्रांच में काम करता था। फिर
(28:12) प्रदीप शर्मा साहब ने मेरे को अपने यूनिट में ले लिया। अच्छा। हां। ये कौन सा ईयर था? 20045 ओके हां 20045 से टिल टुडे उनके साथ में है। वेरी नाइस। तो सर प्रदीप शर्मा जी के साथ आपका कैसा एक्सपीरियंस रहा? मतलब आपने उनके साथ कितने क्रिमिनल्स पकड़े या कितने एनकाउंटर्स किए और वो ओवरऑल एक्सपीरियंस क्या था आपका? प्रदीप शर्मा साहब एक मतलब तभी तो सभी जानते हैं 83 बैच के उनका जो बैच है अच्छा फेमस बैच है उनके बैच के सभी दो मतलब विजय सालस्कर साहब हो गए आंग्रे साहब हो गए दुबे साहब है और सारे बहुत सारे लोग है वो
(28:59) फेमस बैच है इसमें और उन्होंने अच्छा है अपने मुंबई के लिए महाराष्ट्र के लिए अच्छा काम किया है ये बैच के अंदर उसके अलावा भी बहुत सारे लोग हैं। तो लेकिन उनको मैं इतना नहीं जानता हूं। उन लोगों को मैं जानता हूं मैं बता रहा हूं। अभी उसमें नितिन विचारी भी थे दया नायक साहब है। ये लोग सब मतलब अच्छा महाराष्ट्र वो मुंबई के लिए अच्छा काम उनका काफी नाम है। हां नाम है। मतलब उन लोगों को मैं जानता हूं। तो शर्मा साहब ने जो मुझे क्राइम ब्रांच में अपने यूनिट में लेने के बाद जिन उनको जैसा मैं मतलब रिजल्ट दिया मतलब उनको मतलब कैसा है मुंबई पुलिस में
(29:43) तो 500 फोर्स है। करेक्ट लेकिन एक यूनिट में 10 15 लोग रहते हैं 20 लोग रहते हैं। अच्छा अगर 12 यूनिट का एक करेंगे 200 300 लोग रहते हैं। करेक्ट। उसमें एक मैं था। अच्छा। उसमें एक मैं था। और 83 बैच के दो ऑफिसर के साथ मैंने तीन ऑफिसर बोलेंगे। वो ऑफिस में थे। उनके साथ मैं काम किया था। दो ऑफिस के ऑफिसर के साथ में मैंने काम किया। तो मुझे जब 85 से लेके जब 2006 तक जो मैं काम कर रहा था 2010 तक जो काम चालू था उसमें का मेरा मुंबई क्राइम कम करने में मेरा छोटा सा हिस्सा है। मैं वह प्राउड फील करता हूं। करेक्ट। इसके लिए मैं मैं बताना चाहता हूं कि अभी
(30:28) जो काम तो बहुत सारे किए अभी मुंबई का तो पूरा मतलब हम लोग हमारा वो तो एनकाउंटर मेरे ख्याल से 2006 का एनकाउंटर था वो आखिरी होगा अच्छा जो हमारा जो एलगेशंस हुआ है कि फर्जी एनकाउंटर वगैरह मैं आपको मैं आगे जाके बताऊंगा वो शायद उसके बाद एक या दो एनकाउंटर हो गए बस ओके 2006 के बाद उसके बाद एनकाउंटर खत्म हो गए जो पूरा क्राइम ही खत्म कर दिया था करेक्ट हम लोग ने पूरा तो उसमें का एक मैं हिस्सा होता हूं इसके लिए प्राउड फील करता हूं और हक से बोल सकता हूं कि मैंने काम किया है कि ऐसा नहीं कि मैं खाली पुलिस में भर्ती हो गया डब्बा लेके गया खाना खाया आया
(31:10) पेमेंट लिया फिर ऐसा नहीं है जितनी भी ड्यूटी की मैं हक से ईमानदारी से की है इसके लिए मैं आपको अभी बोलूंगा शर्मा साहब के साथ में बहुत सारे एनकाउंटर हो गए अभी गिनने जाएंगे तो उनका अभी एक ये भी आ रहा है। 112 उनके हो गए हैं। हां और 113वा जो था वो हमारा एक 2006 में हो गया था। तो उसमें क्या आपको मैं एक मेनमेन बताता हूं। बड़े-बड़े क्रिमिनल्स है। अभी एक यूपी का गैंगस्टर था। अच्छा जावेद खान उर्फ फिरदौस अच्छा। वो यूपी से वांटेड था। उसके ऊपर 2523 केसेस थे। रॉबरी मर्डर्स अ एक्सट्रोशन सब तो यूपी स्पेशल स्टाक फोर्स और हम लोग ने
(32:01) उसको एक किया और उसका एनकाउंटर हो गया था वो खासदार थे बीजेपी के अच्छा कृष्णानंदन राय वो केस में वांटेड था अच्छा कई केस में वो ये चल रहा था फरार चल रहा था ऐसा था वो एक केस था बड़ा फिर और एक पप्पू गौशाला था कृपा शंकर चौधरी वो वही केस में थे ये दो लोग ने तो मुन्ना गैंग मुन्ना बजरंगी का गैंग में काम करते थे तो हां वो बहुत फेमस था बजरंगी उनके अंडर एक काम करते थे वो गैंग में तो ये दो बड़े नाम है कि इसमें मेरा हिस्सा उनके साथ में काम कर चुका हूं वो एनकाउंटर में और इधर तो मुंबई और महाराष्ट्र के जितने भी थे उनके साथ में तो बहुत सारे
(32:45) ऐसे है कि तो एनकाउंटर फिर एक वेपन पकड़े थे हम लोग छोटराजन गैंग के अच्छा अच्छा वो 36 वेपन थे मलेशिया से जेएनबीटी में भेजा था उसने। अच्छा हां कैसे? वो जो ग्रीस के ड्रम में डाल के वहां से इधर भेजा था। ओ राउंड्स और ये वेपन सब तो 36 वेपन थे और 1200 राउंड्स थे। बाप रे अतूस तो एक एक बड़ा काम था उनके साथ में तो ऑपरेशन में मैं था और हमारे जॉइंट सीपी मीरा बरंकर मैडम थी कमिश्नर ए एन रॉय थे ओके
(33:29) तो उसमें मैं मुझे रिवार्ड मिला है ₹000 तभी का गवर्नमेंट की तरफ से मेरे को 5000 रिवार्ड मिला है वै नाइस उसके अंदर और ऐसे बहुत सारे केसेस ओपन किए है मेरे ख्याल से 100 से ज्यादा वेपन्स रिकवर की है उसमें मैं था और ढाई 3000 कारतूस रहेंगे सब मिला के जो केसेस अब तक आपने मेरे करियर में किए सेवा के दरम वो इतने है तो उसके लिए मुझे 120 रिवॉर्ड दिए गए पुलिस डिपार्टमेंट से और 120 रिवार्ड 120 रिवॉर्ड है और अपना प्रमाण पत्र बोलते हैं उसको ओके
(34:11) हां वो 20 है अरे बाप रे वाओ अलग-अलग मतलब मेंडोसा साहब के हाथ से दिया है डी शिवंदन साहब है ए एन रॉय साहब है ऐसे सब मैंने काम किया है तो मेरे को मुझे ऐसा बोलना था जब हम काम करते हैं जब हम काम करते हैं लेकिन अभी 2006 में एक मेरे साथ में हम लोग ने मैं तो उसको नहीं जानता था लखन भैया इनकाउंड केस आपने सुना रहेगा। हां हां तो केस में मुझे एक्यू्यूज बनाया गया बनाया है और उस दरमियान क्या हो गया? एनकाउंटर हो गया लेकिन उसके ऊपर एलगेशंस हो गए। फर्जी एनकाउंटर है।
(34:55) अच्छा कॉन्ट्रैक्ट किलिंग है। अच्छा ये सब ऐसा है। वो अभी कोर्ट में मैं ज्यादा नहीं बोल पाऊंगा। यहां आपको मैं रोकना चाहती हूं क्योंकि ये बहुत इंपॉर्टेंट है। अ तब मैं छोटी थी तो उस टाइम पे क्या एक बहुत कंफ्यूजन स्टेट चल रहा था। तभी सोशल मीडिया नहीं था। अपना पेपर्स आते थे। न्यूज़पेपर आते थे। वो भी दो-तीन गिनती के न्यूज़पेपर थे। फिर लोकल न्यूज़पेपर थे और लिमिटेड चैनल थे। न्यूज़ चैनल। तो नॉर्मल पब्लिक तक करेक्ट न्यूज़ पहुंचना बहुत मुश्किल था। अंटिल एंड अनलेस उसका कोई बहुत बड़ा ऑफिशियल रिलीज हो रहा है या कुछ हो रहा है
(35:37) वो भी लोगों से मिस हो जाता था क्योंकि हमको थोड़ी पता है कि इतने बजे कोई ऑफिशियल रिलीज होने वाला है। हम बैठे हैं टीवी खोल के तो इंफॉर्मेशन कहीं बिखर जाती थी उस टाइम पे। हम तो उस टाइम पे क्या हुआ था कि एक जिसके बारे में हम आगे भी बात करेंगे कि उस टाइम पे जो क्राइम आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था कि पहले तो एक मेन ऑपरेशनल गैंग्स थे जो इंडिया में भी ऑपरेट कर रहे थे और आउट ऑफ इंडिया भी ऑपरेट कर रहे थे और फिर उसके बाद उनके नीचे बच्चे पैदा हुए उनका खानदान वो खानदान जब आने लग गया मैंने काफी रिसर्च की है इस पे और मैंने रिसर्च ने क्या पाया? जब ये बच्चे पैदा
(36:18) हुए ये बच्चे भी आपस में लड़ रहे थे। मेन लोग तो लड़ नहीं रहे थे। मेन के नीचे जो बच्चे पैदा हुए हैं वो बच्चे छोटे-छोटे छोटे-छोटे बहुत मिनी मिनी गैंग्स बने थे तभी और वो मिनी गैंग क्या करते थे? क्योंकि बड़े जो मेन ऊपर बैठे हुए हैं, वह लोग इतना नीचे वालों का ध्यान नहीं रख रहे थे कि वह क्या कर रहे हैं। तो यह जो छोटे-छोटे खानदान के एक्सटेंडेड फैमिली मेंबर्स जो बने थे वो लोग लोकली जैसा आपने थोड़ा पहले बताया कि दहशत के लिए कुछ भी स्लम एरिया में जाके करना। तो ये लोग जो दहशत फैला रहे थे उस टाइम पे लड़कियों को उठाना नॉर्मल दुकानदार आदमी जो हार्डली कुछ
(36:59) कमाता है जिससे उसका मुश्किल से गांव में पैसे जाते हैं उससे जाके पैसा वसूली करना छोटे-छोटे व्यापारी लोगों को सताना लड़कियों को सताना और जो स्लम एरिया झोपड़पट्टी में जिस झोपड़पट्टी जिसको बोलते हैं मुंबई में अंदर-अंदर आप जाओगे आपको पता लगेगा लोग डर के जीते थे उधर क्योंकि कौन किसका गला काट दे कौन किसको मार मार दे। यह तो चल ही रहा था। प्लस आपके घर का लड़का पसंद करता है ना करता है। उसको गैंग अगर जॉइ करने बोला है तो जॉइ करना ही पड़ेगा। नहीं तो उसको एग्जांपल के लिए मार दिया जाता था। तो यह बहुत इंटरनल रिसर्च मैंने की है कि झोपड़पट्टी के अंदर काफी लड़के
(37:40) लोग मारे गए क्योंकि उन्होंने उनके फैमिली ने प्रेशर किया कि तुम जॉइ नहीं करोगे इस टाइप का गैंग। तो एग्जांपल के तौर पर उनको मारा गया था। लड़कियां छेड़ना। अगर वह लड़की किसी को पसंद आ गई, अगर उसकी फैमिली ने या उसने लड़की ने मना कर दिया तो उसको एग्जांपल सेट करने के लिए वो लड़की को दिन दहाड़े उठा लेना, गैंग रेप करना। इस टाइप के झोपड़ पट्टी के अंदर इतने गंदे एग्जांपल सेट किए गए थे उस टाइम पर कि नॉर्मल बेचारा जो इंसान एंड ऑफ द डे छोटा सा पैसा कमा के जाता है डर डर के जी रहा है वो इतना और डरा हुआ है कि और प्लस हफ्ता देना
(38:20) वो अलग ये गैंग्स को अच्छा बेस्ट पार्ट है ये ऊपर के लोगों तक पैसे नहीं जा रहे हैं ये छोटे-छोटे आपस में सही बात है मिल बांट के खा रहे हैं और बाद में इनके वजह से जो इंटरनली जो गैंग वॉर्स होते थे वो एक अलग झमेला जो नॉर्मल लोग झेलते थे दुकान बंद करके भाग रहे हैं ऑफिस से जल्दी भाग रहे हैं कि भाई गैंग वॉर हो रहा है इधर गोलीबारी की आवाज आ रही है इतना क्राइम रेट उस टाइम पे ऊपर था तो ये जो आप टॉपिक बात कर रहे थे ये इतना इंपॉर्टेंट है मतलब मैंने आपको रोका सॉरी लोगों को ये जानना इंपॉर्टेंट है क्योंकि हम बैठे हैं फ्लैट के अंदर। हमको पता नहीं नीचे क्या
(39:05) हो रहा है। हमको आईडिया ही नहीं है। और स्लम में जो झोकर पट्टी में लोग आते हैं वो थोड़ी आके हमारे घर पे ठक ठक ठक ठक करके बोलेंगे हमारे साथ यह हो रहा है। और आप देखोगे आज की तारीख में मेंटालिटी क्या है? उनके लिए ये नॉर्मल है। अब यह गैंगस्टर्स के पहले यह नॉर्मल नहीं था। बराबर आज आप किसी के घर पर झुपर पट्टी में जाइए। यह लड़के मारपीट करना, चाकू निकालना यह नॉर्मल है। सही बात। क्योंकि साइकोलॉजी इन्होंने बना दी है ऐसी कि ये नॉर्मल है। हमारे लिए मुंबईकर के लिए तो स्पेशली नॉर्मल है। सब मैडम कैसा होता है? ये जो आप बोल रहे हैं कि आपस में जो भाई बनते हैं और आपस
(39:46) में ही लड़ते हैं। कैसा होता है? अभी समझो एक एरिया है। एक एरिया में दो चार भाई तो रहते हैं। तो दो चार भाई रहने की वजह से क्या होता है? कोई गौली गैंग में कभी अमरनायक अमरनायक गैंग में है। करेक्ट। तो एक वर्चस्व की लड़ाई रहती है इसकी। अभी समझो एक गोरेगांव हो या कोई भी एरिया एक पीसीबी का ऐसा मैं ये नहीं करूंगा। दारू के धंधे होते हैं। तभी तभी मीटिंग चलती थी। कोई भी स्मगलिंग छोटी-मोटी होती है। फिर क्लब्स वगैरह होते हैं। इनका क्या होता था? पैसा इन लोग को दादागिरी जैसा मतलब दादागिरी जो भाई लोग रहते हैं। एक दो केस करके आते हैं एरिया में दो चार लोग
(40:28) लेके घूम घूमना। फिर उनको टिप मिलता था कि कैसा वो भाई मीटिंग वाला तो उसको पैसा दे रहा है। उसके खबरें नहीं उसकी भी खबरें रहती है उन लोग के भी। अच्छा उनकी भी खबरें होती। उनके भी भाई लोग की भी खबरी होती है ना। अच्छा हां कि उधर क्या चल रहा है रे उधर क्या तो उसको पैसा दे रहा है वो वेटिंग वाला तो मेरे को भी मांगता है। चल अपुन मारेंगे। ऐसे वो वर्चस्वी मतलब आपस में ऐसे लड़ते थे। अगर तो नहीं मानता है फिर खबरी मतलब गैंग अभी देखो अपने को मुझे एक को अगर समझो बड़े क्रिमिनल्स को पकड़ना है दोनों में आपस में लफड़ा हो गया तो एक
(41:07) पुलिस के पास आएगा अच्छा खबर हमको कैसे मिलेगी क्राइम वो जो गैंगस्टर है हमको टिप देंगे वायावाया अरे सर ऐसा है उधर है उधर घूम रहा है एरे में इतना मतलब ये ऐसा होता था जैसा मतलब जिसका नेटवर्क जितना पावरफुल हम रखेंगे उतने लोग अट्रैक्ट हो जाते थे हमारे खबरी लोग तो ऐसे आपसपस में ये लोग टिप देना ये सब तभी चालू था आपस में लड़ रहे थे आपस संत लोग तो नहीं देंगे क्रिमिनल की खबर कौन देगा क्रिमिनल क्रिमिनल ही देगा हां तो वही देते थे और तभी उस टाइम कैसा था ये मोबाइल तभी नहीं थे या इतना मतलब अभी जो सब इंस्ट्रूमेंट इतने आ गए कि पूरा अच्छा
(41:55) डेवलपमेंट है। तो इतना अभी ये नहीं करना पड़ता है। फिजिकली घूमना नहीं पड़ता है। एक खाली मोबाइल नंबर मिला तो सब जगह पे मिल जाता है। ऐसा है। अच्छा है। हम तो तभी का वो सिचुएशन था और खास करके कैसा हमारे जो मुंबई के अंदर स्लम है। स्लम में ये भाई गिरी का दिमाग में फैट ज्यादा था। हां करेक्ट। भाई वाइट शर्ट डालेंगे, कपड़ा लेके घूमेंगे, चैन डालेंगे, सोना डालेंगे। अभी एक भाई बना तो चार लड़के लोग देखते हैं ना तो उसके ऊपर उसको असर हो जाता है। तो वो अभी वैसी बात नहीं रही है। हम लोग ने तो पूरा सफाई कर दिए। तो अभी थोड़ा सा मतलब अच्छा चेंजेस है और उस टाइम जो काम
(42:38) किया सब लोग ने मुंबई पुलिस ने। इसकी वजह से आज शांति है। शांति है थोड़ी मुंबई के अंदर। अभी के अभी जो नए-नए पुलिस आ रहे हैं भर्ती हो रहे हैं वो भी जो अभी जो मतलब क्राइम अलग टाइप का हो गया है इधर मुंबई के अंदर या किधर भी साइबर क्राइम ज्यादा हो रहा है अभी करेक्ट हां अभी छोटे-मोटे रॉबर्स है वो अभी कैसा होता है अभी गोल्ड है गोल्ड का भाव है लाख रुपए एक स्नैचिंग किया लाख रुपए मिलता है करेक्ट हां अब एक खन्नी का केस किया तो 10 साल से ले सात साल लेके सजा होती है। करने क्या होता है?
(43:21) एक्सटॉशन एक्सटॉशन। अच्छा एक्सटॉशन लेना तो एक बार केस गिर गया हो तो पांच सात साल अंदर रहना पड़ता है। उससे अच्छा स्नैचिंग करो। मोबाइल आ गया अभी करेक्ट। मोबाइल एक किया तो मालूम नहीं पड़ेगा। छोटामोटा केस बनता है। ऐसा सब अभी तो क्राइम बहुत कम है। हम एक टॉपिक पे थे। वहां से मतलब कन्वर्सेशन हमारा यहां आ गया। तो मैं थोड़ा रिवाइंड हो रही हूं कि हम बात कर रहे थे कि आपका 2006 केस का हां बराबर है। तो 2006 केस में जो है कि उस टाइम पे 2006 के पहले की बात कर रही हूं मैं। हां जी। 2006 के पहले जो रीज़न मैं ये टॉपिक को यहां तक लाई हूं ताकि जनता को पता लगे कि
(44:06) उस उस ड्यूरेशन में क्या-क्या हो रहा था। क्योंकि पिक्चर में जैसा दिखाते हैं दाऊद और मानिया सुरवे और यह वो सिर्फ वो बड़े लोगों को दिखाते हैं। बट बड़े लोग तो है वो कहीं छोटे से स्टार्ट किए और बड़े जाके बैठ गए थे। बड़े बनने के बाद क्या होता है? इट इज़ लाइक आप चेयर पे बैठे हुए हो और नीचे जनता काम कर रही है। तो जनता बहुत थी उस टाइम पे। तो जनता के वजह से जो गैंग्स ओवर हो रहे थे आपस में। हां जी। तो उस टाइम पे एक अफवाह उड़ी थी। अफवाह इसलिए बोलूंगी क्योंकि यह कभी क्लेम प्रूव नहीं हुआ है। तो यह अफा ही है। यह कभी प्रूफ किसी ने किया ही नहीं ना आज तक
(44:43) कभी प्रूफ हुआ है। ये अफवाह फैलाया गया था कि उस टाइम पे हो सकता है ये अंडरवर ने फैलाया हो या जो भी है। आई डोंट नो। मैं एक क्वेश्चन पूछ रही हूं कि अफवाह ये थी कि जो क्राइम वाले हैं जो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट जिनको नाम दिया गया था वो पहले जो जनता के लिए क्राइम क्लियर कर रहे थे वो बाद में इन्हीं अंडरवर लोगों का सुपारी लेके इनको मार रहे थे। तो यह आपसे बेहतर कोई नहीं जानता बिकॉज़ आपने अगर इतने टाइटल्स जीते हैं, इतने अवार्ड जीते हैं और आज आप इतनी तकलीफ से गुजरने के बाद आए हो तो आपसे बेटर सच कोई नहीं बोल सकता। तो आप बताओगे रियलिटी
(45:28) क्या है? अ जो अभी वो बोला जाता था कि सुपारी दाऊद से लेते हैं और छोटा राजन जो गैंग है उनको मारते हैं। छोटा राजन बोलेगा मेरे उसका मारा तो बोला इससे सुपारी ले वैसा कुछ होता नहीं है। दाऊद या छोटा राजन कहां थे आउट ऑफ कंट्री। करेक्ट बराबर है। मेरे को इंफॉर्मेशन मिलती है कहां से भी वो कौन दे रहा है? हमसे कुछ लेना देना नहीं है। लेकिन हमको काम करना है। बड़े से बड़े गुनहगार का इंफॉर्मेशन निकलना मतलब मुश्किल होता है। ये लोग जितने ज्यादा बड़े गैंगस्टर उतना उनका सोच भी बड़ा रहता है। कि यहां से वहां वहां से वहां एक जगह तो
(46:13) नहीं रहते। कहां से हमको टीप मिलती है। अगर छोटा राजन को छोटा राजन का मारा तो बोले दाऊद ने सुपारी दिया। ऐसा कुछ भी नहीं होता है। आज मैं यूनिट में काम करता हूं। करेक्ट। मिनट के ऊपर भी कुछ है ना कि सीनियर बैठे हुए हैं, डीसीपी बैठे हुए, जॉइंट सीपी है, कमिश्नर है, उनको तो मालूम पड़ता है। करेक्ट कैसा ये चल रहा है और हमारा आईबी है, रॉ है, अगर बात कर रहा है तो उनको मालूम ही पड़ेगा तो इनपुट आ जाता है। ऐसा कुछ एलगेशंस होते हैं। जो काम करता है उसके ऊपर ही एलगेशन होते हैं। करेक्ट। जो काम नहीं करेगा उसके ऊपर एलगेशंस नहीं होंगे।
(46:49) करेक्ट। और एक काम ऐसा है मैम। आउट ऑफ वे जाके अगर काम करोगे तो ही रिजल्ट आपको मिलेगा। करेक्ट। दायरे में रह के तो मिलता है। दायरे में मुंबई है। मुंबई में इतना मतलब आप बोलेंगे अभी यहां से जाओ ये एरिया में घूमो। फिर ये मेरा एरिया नहीं है। ऐसा होगा तो काम ही नहीं हो सकता है। करेक्ट। उस दिन अभी उस टाइम कैसा है? फिजिकली ज्यादा मैन टू मैन बात करना बोलना हर एरे में जाके उसका जो भी इंफॉर्मेशन मिलती है वो निकालना वो ये एकदम डेंजर काम था सब अभी मैं खुद जा रहा हूं तो मेरे लिए भी मेरे जान को भी खतरा है
(47:32) करेक्ट बराबर है इतना जो सोचते हैं अपुन इतना आसान नहीं है अभी क्या होता है हां लेकिन एक मेरे अभी सीनियर प्रदीप शर्मा साहब है तो उनका सपोर्ट रहेगा तो मैं जाऊंगा ूंगा करेक्ट वो बोले तुझे और कुछ रहेगा तो आपके हिसाब से करो काम करेक्ट अगर तेरे को कोई गोली मार रहा है मारने आया तो तू तेरे हिसाब से कर करेक्ट पूछने की जरूरत नहीं है ये सपोर्ट होना चाहिए तो अभी प्रदीप शर्मा है उनके ऊपर कमिश्नर डीसीपी कमिश्नर है उनको भी वो सपोर्ट रहेगा तो काम करेंगे करेक्ट और वो कमिश्नर साहब को गवर्नमेंट का सपोर्ट होना चाहिए करेक्ट एक एक चैन है
(48:10) तो ऐसा चलता है अभी इतना वो क्राइम नहीं रहा है और ये अभी के पुलिस है उनको इतना ही नॉलेज नहीं है। अभी बहुत सारे और भी पुलिस वाले हैं कि अभी तभी के ये 83 बैच के पहले भी पुलिस वाले उन्होंने भी काम किया है। सब लोग ने मतलब अच्छा ही काम किया। अभी मैं देखता हूं चैनल पे तो सब लोग बता रहे हैं अपनेप कहानियां। मैंने तो मेरे स्वार्थ के लिए काम नहीं किया है। करेक्ट। डिपार्टमेंटली काम समाज के लिए काम किया। अभी आगे जाके मुझे मिला गया है। करेक्ट। आगे जाके मुझे मिला गया है। हां। तो यहां आप दर्शकों को बता सकते हो कि 2006 में अ वो क्या इंसिडेंट हुआ था जिसके
(48:52) वजह से आपकी पूरी टीम को एक एलगेशन लगा था। हां। और वो क्लेरिटी थोड़ा दे सकते हो। वो केस क्या था? मैडम क्या है? मेरा जो केस है अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। एक शॉर्ट में आपको बताऊंगा। ओके। जो ये केस हुआ लखन भाई एनकाउंटर केस ना मेरा दोस्त था ना दुश्मन था ना मैं कभी उसको देखा था करेक्ट तो हुआ क्या था एनकाउंटर हो गया वो ओरिजिनल हमारे आज भी स्टैंड है कि हम लोग ने ओरिजिनल गया अभी एलगेशन है कोर्ट में उसमें मुझे शिक्षा भी हुई है मेरा मैंने 13 साल शिक्षा निकाली है मतलब जेल में था जेल के अंदर रह चुका हूं मैं 13 साल तो वो
(49:36) अभी पेंडिंग केस है मैं आपको शॉर्ट में बता लेकिन उसमें कैसा हो गया था कॉन्ट्रैक्टलिंग यह जो शब्द है वही सुपारी वाला जो मैंने सुपारी वाला सुपारी ले मारा यह हो गया यह सब गलत था और उस टाइम हमारी बदनामी हो गई ये सुपारी लेके मारा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था सेशन कोर्ट हाई कोर्ट ने उसके अंदर एक जजमेंट में एक वर्ड भी नहीं दिखा है कि सुपारी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग है ये मुझे क्लियर करना है बाकी ठीक है ओके चालू है वो चालू रहेगा वो मैं फेस कर रहा हूं मैं आज मैं खुद अपील सुप्रीम कोर्ट में लेके पे किया हूं। तो ये एक था और उसके अंदर एक एलगेशन दूसरा
(50:19) भी लगा था। मैंने उसके अंदर कोई फायरिंग वगैरह नहीं किया था। ओके। वो फायरिंग मेरे पे डाला गया है। वो फायरिंग किसी ने अलग नहीं किया था। वो तो आप नेट पे भी देख सकते हैं। सब है। ये दो चीज है। लेकिन वो एनकाउंटर का मैं हिस्सा था। मैं अभी तक मतलब डिनाई नहीं कर रहा हूं। वो मैं हिस्सा था और उसके ऊपर भी मतलब कैसा है पांच छह मर्डर था। ऐसे 101 केसेस थे। ओके हां इतना ही आपको मैं बताना चाहूंगा अगर लेकिन मुझे ये कहना है या मेरे जो सुपीरियर रहेंगे या गवर्नमेंट को एक मैसेज आपके माध्यम से देना चाहूंगा कि अगर ऐसे प्रॉब्लम्स आते हैं पुलिस को।
(51:04) अभी मैं एक कांस्टेबल लेवल का एक आदमी था। करेक्ट। तो मेरे पे केस हो गया तो आगे क्या है? सेशन कोर्ट, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्टे। उसके लड़ने के लिए हमको क्या मिला है? करेक्ट। उसको केस लड़ना है तो वकील का पैसा आ गया। करेक्ट। फैमिली डिस्टर्ब है। तू डिस्टर्ब हूं। करेक्ट। 13 साल जेल में कैसा मैं रहा हूं वो मुझे ही मालूम है। अभी एक एनकाउंटर का जो वर्ड है एक एनकाउंटर वर्ड ने मेरा पूरा 20 साल का लाइफ खराब कर दिया। 20 साल मेरी सर्विस चली गई। बच्चे कैसे बड़े हो गए मुझे देख नहीं पाया। वो अभी ग्रेजुएट होके ये क्या किया? तो यह है जस्टिस मिलेगा
(51:51) नहीं मिलेगा वो बाद की बात है लेकिन जो मेरा काम था वो मैंने कर दिया मेरे उसके ऊपर कुछ ज्यादा बात नहीं करना चाहता हूं लेकिन ऐसा अगर होता है तो पुलिस के लिए मतलब एक स्टाफ के लिए कुछ तो ऐसा गवर्नमेंट ने ये करना चाहिए कि मतलब प्रोटेक्शन चाहिए पुलिस को ये मेरा कहना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए ठीक है मैं संविधान को मानता हूं संविधान के हिसाब से सब जो भी चलता है। लेकिन अगर यह ओरली अभी कैसा होता है? एनकाउंटर या कोई लिखित में नहीं देता है। एनकाउंटर करो ऐसा करो। करेक्ट बराबर है। ओले ऑर्डर्स रहते हैं। लेकिन हम जब निकलते हैं किसी को पकड़ने के लिए
(52:36) तो इसका एनकाउंटर करना ऐसा नहीं होता है। डिपेंड है कि डिपेंड करता है कि वो सिचुएशन के ऊपर है। हम समझो गोरेगांव से निकले लोखंड वाले के लिए तो उधर एक आरोपी आ रहा है। क्रिमिनल्स आ रहा है। गैंगस्टर आ रहा है। तो उसको पकड़ना है। तो खबरी बोल देता है कि सब ऐसासा है। तो हमको तो तैयार होकर जाना पड़ता है वेपंस वगैरह सब सिचुएशन के ऊपर डिपेंड करता है कि उधर वो सामने से क्या करेगा तभी वो चकमक हो जाते फिर ऐसा हो जाता है लेकिन अभी जो एलगेश मेरे भी एलगेशंस है तो ऐसे बहुत सारे एलगेशंस होते हैं और एक आपको किस्सा मैं बताता हूं यह जो आते हैं बड़े-बड़े
(53:21) गैंगस्टर्स एक मसल रहते हैं अगर मैं इधर रॉबरी करने जाना है या किसका मर्डर करने जाना है। उनको मालूम रहता है ना कि मैं यह काम के लिए जा रहा हूं। तो एक फैक्स करके निकल जाता है। वकील को बोलता है मेरे नाम का फैक्स मारो। वो क्या होता है? फैक्ट्स ऐसे सेफ्टी के लिए है। अभी ये तो सिलसिला है। पुलिस पकड़ती नहीं है। ठोक देती है सीधा। हां। तो वो बोल सकता है कि वो मैंने फैक्ट्स किया था। आप पकड़ोगे मुझे मारोगे तो। ये उनका मॉडस ऑपरडी तभी था। अच्छा। मतलब के पहले फैक्ट्स मतलब लिख देते हैं कि मैं इधर अभी समझो उसको जान को खतरा रहता है
(54:05) बराबर है तो उसमें लिखेगा कि मैंने फैक्ट्स किया है पुलिस पकड़ेगी मेरे को मारेगी ऐसा फैक्ट्स में लिखा जाता है। अच्छा मैं यहां एक जगह पे हूं और पुलिस यहां आके मुझे मार सकती है। अच्छा इतना दिमाग दिमाग लगा दे। अरे बाप ऐसा है तो ये सब बहुत सारे बहुत सारे मतलब इश्यूज है तो मेरे लाइफ का एक बड़ा मतलब अभी मैं ऑफिसर बन जाता था ये मेरा अपॉर्चुनिटी गया है करेगा क्या सब डिस्टर्ब है ये जो हम बात कर रहे हैं ये लखन भैया हां जी हां क्योंकि हमने नाम नहीं लिया हम नाम लेना भूल गए ये लखन भैया का जो केस के बारे में बात कर रहे हैं
(54:49) हां सो आप दर्शकों को बताओगे क्या कि एस एन पुलिस पर्सन आपने एक गांव से जर्नी स्टार्ट की। आप ये तो सोच के नहीं आए थे कि मुझे जेल जाना है। राइट? आप मुंबई आए। आपने एक छोटे से रेस्टोरेंट में काम किया। हां जी। वहां से आपने एक मुंबई का एक रूप देखा जिसको मान्या सुरवे करके जाना चाहते थे उस टाइम पे कि ये मुंबई का एक पहलू है तो आपने वहां विलेन बनने की जगह पे कि मैं ये गैंग जॉइ करता हूं क्योंकि उस टाइम पे तो ओपोरर्चुनिटीज ही ओपोरर्चुनिटीज थी लड़कों को और जो डेरिंग लोग हैं ना उनको उनको तो पहले ही लिया जाता था अंदर
(55:33) तो आपने क्या सोचा मैं तो पुलिस में जाके इनको आपका थॉट कितना क्लियर क्लियर था तो आपने स्ट्रगल करके जो भी अपने आपको प्रूव करते करते आप यहां तक आए जहां एंड में जाके आपके ऊपर एलगेशंस लगे। सो आपके जितने टाइटल्स आपने बताए, आपने जो अचीवमेंट्स किए एज अ नॉर्मल पर्सन मैं या इवन जनता भी यही बोलेगी नीचे कमेंट्स में क्योंकि उनको भी यही फील होगा रियलिटी कि एक इंसान इतना अचीवमेंट के बाद एक जगह पे जाके अपनी लाइफ क्यों खराब करेगा? क्योंकि उसके जितने भी अपने अचीवमेंट्स है वो जीरो हो जाएंगे। हम प्लस जेल की लाइफ देखने के बाद वह इंसान
(56:18) पूरा खराब हो जाता है। तीसरा वो तो अंदर है ही है जो और आप गांव से आए हुए इंसान है। ऐसा नहीं कि आपके पास करोड़ों रुपए हैं। कि आप बड़े मजे से जेल चले गए हो। लाइफ चली जा रही है। राइट? और मुझे पता है आप कहां रहते भी हो। वो बहुत पीछे वाला इलाका है। ऐसा भी नहीं कि आप कोई मुंबई के पौश इलाके में रहते हो। [हंसी] अगर आप पौश इलाके में रहते तो शायद मेरे माइंड में ये आता कि नहीं कुछ गड़बड़ है। आप मैंने देखा है आप कहां रहते हो। आप मुंबई भी नहीं मुंबई के बाहर में चले जाते हो डिस्ट्रिक्ट में। इतने पीछे रहते हो और कोई पॉश लाइफ जीते भी नहीं हो आप ना आपका
(56:56) पॉश है फैमिली मॉनिटरली तो आप बता सकते हो थोड़ा सा जो अपना जर्नी है जेल की जर्नी और वो जेल के साथ जो आपके फैमिली इधर फेस कर रहे थे आप थोड़ा सा बता सकते हो ताकि लोगों को नॉलेज पड़े कि एक इंसान पुलिस सर्विस में जब जाता है तो उसकी लाइफ की कोई गारंटी नहीं होती है कि कुछ भी कभी भी कुछ भी हो सकता है। तो जो भी बच्चे पुलिस में जाना चाहते हैं स्पेशली आपके टाइप के जो ब्रांचेस है क्राइम हो गया, नारकोटिक्स हो गया, नारकोटिक्स बम वाला डिपार्टमेंट हो गया। ये इतना खतरनाक है बिकॉज़ यहां जो लोग गैंगस्टर बैठे हुए हैं जो इंटरनेशनलली
(57:38) ऑपरेट कर रहे हैं और लोकली भी ऑपरेट कर रहे हैं बहुत खतरनाक होते हैं। हम उसके बारे में भी बात करेंगे। पहले आप अपनी फैमिली के बारे में बताइए कि ये जो 13 इयर्स आप जब अंदर थे आपके फैमिली ने क्या-क्या देखा? मैं पहले आपको यह बताना बताऊंगा। मैं जब मुंबई में आया था 85 से लेके 93 मुझे मेरे आठ साल थे। ये आठ साल के अंदर मैंने उतार चढ़ाव सब देखे। ओके। कुछ मतलब प्रॉब्लम आता है। कैसा फेस करना है। मुंबई क्या है? है वो पहले मैंने सीखा वो उस टाइम और मैं मोस्टली उधर ही मैं भर्ती होने तक पुलिस भर्ती पुलिस भर्ती होने तक मैं दादर में रहता था अगर बाजार में ही वही
(58:22) रेस्टोरेंट के पीछे हमारा स्टाफ क्वार्टर्स वगैरह था दो रेस्टोरेंट तो मैं उधर अभी सीनियर बन गया था 8 साल मतलब काफी टाइम होता है एक एक ही जगह पे रहना करेक्ट तो बाकी लोग बाकी वैसे मैंने मतलब अ छोटे-छोटे कोर्सेज भी किए उस टाइम मैम मैं जो आपको मैं बोलना चाह रहा था कि मैं 85 से लेके 90 तक जो आठ साल मैंने निकाला वो इधर मेरा तो कोई था नहीं अकेला था वो रेस्टोरेंट में काम करो मेरा एक रिलेटिव था बालू गोरपड़े करके उन्होंने मुझे इधर लेके आए थे तो उनके पास मैं उधर रहता था तो हम लोग मैं होटल में ही रहता था तो मतलब वहां से स्टाफ के साथ में रहता था तो
(59:05) मेरा कैसा था वो स्टाफ के साथ में ज्यादा उठना बैठना नहीं था अपना काम हो गया 8 घंटे मेरा फील्ड अलग मैं कबड्डी रनिंग करता था मतलब जिम वगैरह करता था मेरे पास एक छोटा साइकिल लिया था मैंने उस साइकिल पे मैं घूमते रहता था तो दादा जाना है कभी शिवडी जाना है कभी वरली जाना है ऐसा और मैं कबड्डी खेलता तो मैं साइकिल से ही जाता था तो मेरी उधर पहचान बढ़ती गई सब तभी की बात तभी तो फिर धीरे-धीरे समझ में आया कि वो भाई कुछ तो करना चाहिए कि रेस्टोरेंट में कितना दिन निकालेंगे फिर मैंने छोटे छोटे-मोटे कोर्सेस किए थोड़ा छोटे-मोटे धंधे बिजनेस के वो कुछ हुआ नहीं। फिर
(59:46) पुलिस के पहले एक मुझे नौकरी लगी थी एफसीआई में था मैं। अच्छा हां तो वो भी दो महीना नौकरी गया गवर्नमेंट का तो छोड़ दिया। बाद में ये पुलिस जॉइ किया। तो मुझे थोड़ा वो आदत सी हो गई कि मैं कोई भी मतलब प्रॉब्लम आता है तो कैसा फेस करना चाहिए। फेस करना अगर किसको बताना चाहिए तो अपनी हंसी मजाक उड़ा दे। उससे अच्छा आप अपनी कुछ कूल माइंड रह के अपनी सोचो और उसके ऊपर अच्छे से रहो। तो वही जो मेरा अनुभव है पुलिस में मुझे काम आया और पुलिस और जो पीछे का आठ साल का वो अनुभव मुझे जेल में 13 साल मैं पांच जेल में था। पांच जेल कौन? पांच जेल में 13 साल में अ
(1:00:26) थाना ठाणे जेल ठाणे सेंट्रल जेल नासिक सेंट्रल जेल एरोड़ा सेंट्रल जेल फिर तड़ोजा सेंट्रल जेल और एक लास्ट का जेल था वो एरोड़ा में ओपन जेल ओके ऐसे ओपन जेल क्या होता है ओपन जेल मतलब कैसा है एक्सीडेंटली केस होता है जिसका बिहेवियर अच्छा है उनका एक जो उधर जेल के सुपीरियर है वो मतलब चूज़ करते या अच्छा है तो उसको ओपन जेल में 7 आठ साल होने के बाद वो उनका ओपन जेल में ट्रांसफर करते हैं लोग मतलब डालते हैं तो ओपन जेल मतलब कुछ ऐसा दीवार नहीं होता है खाली उनको काम दिया जाता है काम करने का और रिटर्न आ जाते है मतलब भरोसे के ऊपर
(1:01:10) चलता है सब मतलब भागेगा तो भाग सकता है ऐसा भी कुछ नहीं लेकिन उनको भी कुछ तकलीफ नहीं होती है वो ऐसा एक सिस्टम ही है ऐसा है तो जो मेरे को जेल हुई उसके बाद थाना जेल में चला गया। फिर वो सिस्टम के हिसाब से चलना पड़ता है। जाओ पहले वो पूरा झड़ती करते हैं। फिर झड़ती क्या होता है? झड़ती मतलब पूरा कपड़ा निकाल के सर्च करते हैं लोग। जैसे पिक्चर में दिखाते हैं रियल। हां रियल में करते पहले जो एंट्री होती है तभी वो करते हैं फिर पहला बाल उनके हिसाब से काटना पड़ता है उनके रूल्स सब फॉलो करना पड़ते हैं जेल जो जेल प्रशासन के
(1:01:56) वो क्या होता है मतलब जब आप एंटर करते हो क्या रूल्स होते हैं उनके एंटर करने एंटर जब एंटर करते हैं तब चेकिंग होती है तो फिर आगे चेकिंग होती है फिर अंदर बैरेक्स वगैरह है तो अलग-अलग सेल में रखा जाता है कैदी लोग को तो हमारा कैसा हम पुलिस पुलिस वाले थे तो हम जब आरोपी पकड़ते वही उधर है मतलब और डेंजर तो पावर डेंजर जोन में गए हम लोग फिर हमको सेपरेट रखा गया था एक सेपरेट एक सेल था तो उधर रखा गया था तो वहां के अलग-अलग अनुभव है अलग-अलग हिस्से हैं अभी बताओगे आप थोड़ा हां तो उधर क्या होता है अगर हम खुद डिसिप्लिन में रहेंगे तो हमको कुछ कुछ कोई
(1:02:41) करेगा नहीं प्रॉब्लम नहीं है जेल प्रशासन अगर हम कुछ गलत करते हैं उधर जाकर लफड़े करते हैं झगड़े कर रहे कुछ एलगेशंस कर रहे झूठा ऐसा करेंगे तो वो लोग तकलीफ देते हैं उनका रूल फॉलो करना पड़ता है सवेरे उठना है तो उठना है बंद होना है तो बंद ही बोलते हैं उसको बंद होना है सवेरे 7:00 बजे खुलते 12:00 बजे बंद होते फिर 3:00 बजे खुलेंगे 6:00 बजे बंद कर देते हो गया हमारा दिन पूरा अंदर बैठो अंदर रहो तो उधर कैसा होता है एक महीना गया हमको कुछ एक महीना दो महीने में कुछ समझ में नहीं आ रहा था जेल क्या है कैसा मतलब वो जर्नी कैसी है कैसा रहना चाहिए तो
(1:03:27) यहां से दो महीने के बाद हमारा नासिक ट्रांसफर किया वहां से फिर थाना में आ गए वो थोड़ा पॉलिटिक्स आप बोलते हैं ना पॉलिटिक्स कि तकलीफ तकलीफ देने वाले भी लोग हमको उभारते थे। जब हम अंदर गए तो इनको कैसी तकलीफ होगी? क्योंकि आपने पहले काम किया था ना काफी सारे क्रिमिनल्स को अंदर किया था। फिर एनकाउंटर में कुछ मारे गए थे तो आपके दुश्मन बहुत बाहर थे। हां जो अंदर सेटिंग में आपको तकलीफ दे रहे थे। दे रहे थे। तो दो महीने के बाद ऐसा क्या हो गया? हम लोग को नासिक जेल में भेजा जाता है। बराबर उधर तो ऐसा सिचुएशन था। पूरा वही सेम जेल टू जेल अगर जाते हैं तो
(1:04:05) इतना झड़ते नहीं लेते। क्यों? कुछ नहीं रहता है। हम जेल टू जेल गए थे। उधर भी ऐसा मतलब ये थाना से उधर बदतर हो गए। एकदम मतलब ज्यादा मतलब पूरा सब तकलीफ सोचते हैं कि उनको हमको मालूम पड़ता है कि अभी इनको तकलीफ देना है। उनकी भाषा कुछ बताया गया रहेगा उधर कि ये लोग आ रहे हैं। मालूम पड़ता है। आ रहे तो हमको छोड़ना नहीं है। सब कायदे से करो। बोला ठीक है अंदर गए तो मुझे वो 14 दिन में एक अनुभव आ गया एक आपको मैं किस्सा बताता हूं 14 दिन में मैं बीमार था मेरे को बुखार वगैरह आता था लेकिन वो खाना मेरा कोर्ट के कोर्ट का आर्डर था वो कोर्ट का आर्डर से
(1:04:52) मेरे को खाना आता था अच्छा हां तो उधर जब आ गए तो मेरे घर वाले ने उधर टिफिन लगाया था फिर वो टिफिन आता था डेली दो टाइम तो चेक वगैरह करके अंदर आता था। तो उधर एक ऑफिसर था। अभी मैं नाम लूं नहीं लूंगा। ठीक है? अ उन्होंने इतना तकलीफ दिया मेरे को। इतना तकलीफ दिया ऐसा कि मैं सोच नहीं सकता है। तो वो बराबर है ना वहां पे गया ना तो उसको पहले दिन वो यारार्ड जेलर बोलते हैं उसको। यारार्ड जेलर था। हमारा यारार्ड का जेलर है। तो जब आरोपी आते हैं तो उनको जो भी सुविधा मिलते है बिस्तर मिलता है जो भी
(1:05:37) उनके हिसाब से जो भी जो भी सामान वगैरह मिलता है वो दे देते हैं। बिस्तर तो उधर से लेना पड़ता है बर्तन और हमारे पास क्या रहता जेल टू जेल एक बकेट रहती है और मग वगैरह साबुन ये सब जो भी उधर मिलता है ईजीली मतलब कैंटीन में वही सामान रहता है वो ऑफिसर ने ऐसा किया मैं तो बीमार था मेरे को खाना है जब खाना जैसा अंदर आ गया ना तो वो अंदर आ गया जैसा खाना मेरे रूम में आ गया टिफिन मेरा आ गया वो उसके साथ में आ गया तो क्या हो गया था जब प्रदीप शर्मा साहब बीमार थे वो भी बीमार चल रहे तो वो दो चार दिन के बाद एडमिट हो गए थे नासिक में बीमार थे तो मैं
(1:06:25) भी बीमार था बहुत सारे लोग बीमार है ट्रेस के वजह से थोड़ा ज्यादा ये हो जाता है तभी ये होता है तो ये ऑफिसर है ना अर्थ रोड जेल से गया था उधर अच्छा हां तो अर्थ रोड में कैसे है इधर गैंगस्टर सब हम राजन वाले दाऊद वाले तो यह सब बाद में मुझे मालूम पड़ा ऐसा कि एक तकलीफ देने के मतलब सुपारी जैसा लेते हैं ना इसने सुपारी लिया था एक ऑफिसर ने कि तकलीफ देना है इन लोगों को बस तो मैडम खाना जब मैं खा रहा हूं तो अभी साथ में मेरे दो लोग हैं एक रूम में तीन लोग रहते हैं तो मेरा एक टिफिन आया तो उनके वो खाना लेके रखते हैं तो मैं तो बीमार था मैं
(1:07:12) खाना ही रहेगा तो मेरे बाजू वाले थोड़ा-थोड़ा उसके में के खाना खा रहे दे तो आके ऐसा खड़ा हो गया बोला ए इधर आ तेरे को समस्या है कि नहीं क्या है तू क्या कर रहा है मतलब ऐसा रसली बात कर रहा है मैं अपना नम्रते से अपुन बोल रहे सर क्या हो गया मैं बीमार हूं ऐसा हो रहा तो बोला तू ज्यादा बात करता है बोला ज्यादा नहीं बात करता हूं सर तो ऐसे बातों बातों में मेरे को यह समझ में आया कि ये किसी गैंग गैंगस्टर ने सुपारी दी है। इन लोग को जितना हो सकता है तकलीफ दो। अभी मैं तो दो महीना पहले इधर थाना में था। हमको ऐसा कुछ ऐसा लगा ही नहीं कि मैं
(1:07:57) ऐसा तकलीफ देने का कुछ वजह है। उधर के उधर भी ऑफिसर थे। लेकिन ये जो ऑफिसर था ना वो अर्थ रोड से आया था। तो वजह समझी तो इसने ऐसा किया तो उसका मेरा तू मैं तू मैं हो गया। गाली गलौज गाली दिया मैंने भी गाली दिया उसको तो मैं अभी बोला मैं एक लेटर लिखा सुपरिटेंड तब सा मैडम थी स्वाति सा मैडम अच्छी ये है तो मैंने क्या किया जब मैं 3:00 बजे बाहर आया तो बोला अभी मैं मैडम अगर इधर नहीं आएगी तो मैं अंदर नहीं जाऊंगा और मुझे तुमने जो गाली दिया मेरे केस करना है उसने जानबूझ के सब इतना तकलीफ दिया इतना तकलीफ दिया उसके बाद मैं मेरे खुद
(1:08:40) में चेंजेस किया जितना आप डोगे ना उतने लोग डराएंगे। जेल में ऐसा होता है। यस। जब आप खुद डोगे तो वो डराते हैं। तो अभी वो वापस में हम लोग 14 दिन के बाद इधर आ गए। 14 दिन के बाद आने के बाद कुछ साल के बाद है। सब बाद में बताऊंगा। लेकिन इसका भी पूरा आपको मैं बताता हूं। ऑफिसर थाना में आ गया। तभी मैं सीनियर हो गया था। उधर चारप साल जेल काटा था। तो मेरा नॉलेज बढ़ा था उधर। 2017 की बात बोल रहा हूं। 2017 में क्या हो गया था? प्रदीप शर्मा साहब थाना पुलिस में आ गए थे। उनका सब बड़े होकर वो आ गए थे। जब मैं नासिक में था वही
(1:09:26) ऑफिस सर 2016-17 में थाना में आ गए वापस। तो का शिफ्ट हां वो मतलब उनका ट्रांसफर होते रहता है ना दो-द साल में। अच्छा तो अर्थ रोड से थाना नासिक गए नासिक से वापस थाना आ गए पुलिस में रिटर्न आ गए थे वह लेकिन उनका ड्यूटी लगा थाना अच्छा थाना में आए थे वो तो उनको एंटी एक्सोसेंशियल में पोस्टिंग दिया गया था सीनियर करके तो जेल के एकदम सामने था उनका ऑफिस था अच्छा जेल के सामने हम लोग अंदर थे तब क्या होता था जो ऑफिसर आता था ना तो मैं उससे बात नहीं करता था बिल्कुल मैं दिमाग में ही रखा था उसको लेकिन तब मेरा छ सात साल हो गया था कि कैसा चलता है क्या नहीं होता है
(1:10:14) तो मेरे पास मेरे मेरे मेरे इसमें क्या होता था जो छोटे-मोटे आरोपी थे उनको आर आरजी लिखने नहीं आती थी तो मेरे पास आते थे भाई आरजी लिखो आरटीआई लिखो ये सब छोटे-मोटे उनको ये मैं पेपर वर्क करके देता था तो ये क्या करता था जो ऑफिसर है तो वो तकलीफ देता था उधर वो जेल के अंदर एक ऐड दिया था उसको वो यारार्ड के अंदर तकलीफ देता था लोगों को जैसे मतलब उधर क्या है वो तकलीफ देगा तो भी पैसा मिलेगा तो वही एक ही ऑफिसर ऐसा था कि वो पैसा लेता था ओके हां तो उसके ऊपर है ना कैसा जेल के अंदर एक सिस्टम है ज्यादा तकलीफ देगा ना पॉटी
(1:10:59) रहता है ना वो पार्ट में भर के मार देते जो कैदी लोग कैदी लोग मारते ऑफिसर के ऊपर। अच्छा। तो उसके ऊपर मारा था। तो उधर के सुपरिटेंडेंट बाकी के ऑफिसर सब अच्छे। स्टाफ भी बहुत सारा मतलब 99% स्टाफ वगैरह सब अच्छे थे। एक दो ऐसे खराब रहते हैं। तो ये पैसे का डिमांड ज्यादा करता था। अच्छा। हां। रहना है, खाना है, कुछ ये करना है। कुछ भी किसके लिए भी पैसा मांगेगा। ऐसा था। तो क्या होता था? यह लोग एलगेशन कैदी लोग एलगेशन करते हैं। सुपरिडेंट के पास देते हैं। कोर्ट में देते हैं। फिर अभी पैसा मांग रहे हैं। तो मेरे पास भी आए पांच छह लोग आए। बोला हमसे पैसा मांग रहा
(1:11:42) है। पैसा मांग रहा है मतलब खनी हो गया। तो बोले तुम्हारा साहब है डालो उधर। खंडनी के बोला तुम दो भाई। मैं नहीं मैं भी कह दिया हूं। तुम दे दो। मैं एड्रेस जो सामने है उनको दे देंगे। तो ये बातचीत क्या होती है? उधर भी बहुत खबरें रहती है उन लोग के। तो जो बात करते किसी ने सुना अरे वह देसाई के पास पांच छह लोग गए थे अब पैसा मांग रहे हैं तो अभी वो आरजी भेजने वाले हैं ऐसा वैसा तो उसको मालूम पड़ा ऑफिसर को मालूम पड़ने के बाद वायावा एक ऑफिसर को मेरे पास लेके आया तो मैं तानाजी के नाम से जाना जाता है लेकिन ताना जी अरे बोले तानाजी
(1:12:28) क्या मैं अभी तो भला नहीं है क्या उस टाइम का है बोला सब मैं कभी भूलता नहीं है बेवजह मैं कुछ मैं क्रिमिनल हूं क्या मैं मतलब कौन हूं रेपिस्ट हूं क्रिमिनल हूं क्या मैं क्या है मैं एक जैसा समाज सेवक मतलब पुलिस का काम किया है मैंने हो गया ठीक है जो भी है लेकिन तुम लोग जो तुम्हारा जो बिहेवियर था मेरे उस टाइम मैं तभी नया था बोला जेल के अंदर तभी इतना मुझे नॉलेज नहीं था लेकिन मैं नहीं गया बोला किसी के पास कि आपके खिलाफ कुछ करो लेकिन अभी आप कुछ भी नहीं कर सकते क्यों मैं खुद डिसिप्लिन में रहता हूं और अगर आप कुछ करते हो तो उसका
(1:13:11) क्या करना है मुझे अच्छे से पता है अभी मैं पेशेंट पहला था अभी मैं डॉक्टर बना हूं यूनिवर्सिटी ऐसी है कि हर एक इतने कैदी हर एक केस का मतलब पूरा अलग अनुभव है वो जस्ट लाइक वो वकील बन जाते हैं उधर ऐसा होता है इतना नॉलेज आता है उधर जाके तो ऑफिसर ने जितना तकलीफ दिया था ना जितना साल था उधर मेरा तब देखा भी नहीं उसने अगर वो देखा तो बोला मेरा बॉस मैं भी मेरा बोला मेरा बॉस बैठा है बाहर उधर मैं कुछ नहीं करूंगा एक आरजी बाहर गया तेरे खंडे में लेके जाएगा वो हां ऐसा और सही में तकलीफ था तभी वो वो बोला भाई मुझे माफ कर दे गिलास शिकवा छोड़ दे सब कुछ बोला सर
(1:13:58) माफ ही किया लेकिन बोला देखो फोर्स मैं एक डिपार्टमेंट का फोर्स का आदमी है। मैं ऐसा नहीं चाहता हूं कि कुछ मेरे से गलत हो। मेरे हाथ से कुछ गलत हुआ। मेरे को पनिशमेंट मिला है। वो मैं भुगत रहा हूं। अभी वो बाकी है। कोर्ट में बाकी है। ये करेगा। वो जो भी है देखा जाएगा। लेकिन तुम्हारा यह नहीं है। सरकार हम को सपोर्ट करती है। बाकी के जितने भी लोग हैं कि एक मतलब एक मैं अलग मैं पुलिस वाला हूं। मैं एंटी करप्ट में पकड़ा गया, रेप केस में पकड़ा गया। देखने का देखने का नजरिया गलत होता है। लेकिन मैंने जो काम किया है ना वो समाज का समाज के लिए काम किया है।
(1:14:39) मैं नहीं समझता हूं कि आई एम नॉट गिल्टी। मैं पहले ही बोलता है कोर्ट में। मैं खुद को गिल्टी समझता ही नहीं हूं। मैं आप मुझे गिल्टी ठहरा वो बात ठीक है। लेकिन मैं कभी गिल्टी खुद को नहीं समझता हूं। मैंने अच्छे समाज के लिए काम किया। बस ये मेरा इंटेंस है। तो अभी यह तो हो गया ऑफिसर का पार्ट। अभी मैं आपको पांच जेल का मैं थोड़ा सा अनुभव आपको मैं बताता हूं। मतलब कैसा होता है? अच्छे के साथ अच्छा बुरे के साथ बुरा भरता होता है। लेकिन वहां पे गलत भी होता है, अच्छा भी होता है। और अच्छे लोग भी है और गलत लोग भी हैं। मिक्स है। तो मिक्स है। स्टाफ में भी। जिसको पैसा
(1:15:18) कमाना है वह हर दिमाग लगाता है। 5000 कह दे उनकी कुछ तो ख्वाहिश रहती है। मुझे यह चाहिए, मुझे वह चाहिए। मतलब वसन भी रहते हैं। कोई सिगरेट पीता है, कोई गांजा पीता है, कोई नशा करता है। वो चीजें कहां से लाएंगे? तो वो डायरेक्टली कहां से ऊपर से तो नहीं आते? करेक्ट। ऐसे गिनेचुने लोग रहते हैं स्टाफ में वो सब ये चीजें करते हैं। उसकी वजह से प्रशासन बदनाम हो जाता है। करेक्ट। तो ये चीजें चरस गांजा अगर कुछ कैदी ऐसे अगर नहीं ले सकेंगे तो वो बेचैनी हो जाते हैं वो लोग। फर्स्टेड हो जाते हैं और फिर ममारी ये करो
(1:16:03) वो करो। कोई कोई पेड़ भी चढ़ जाता है। अरे बाप रे जो बड़े-बड़े पेड़ है जेल के अंदर उसके ऊपर चढ़ जाता है। ऐसे ऐसे किस्से हैं सब फिर यह जो सब सिस्टम है सिस्टम पूरा मतलब लेनदेन का अभी आपको एक चीज लाना है ₹100 की चीज अंदर भाव रहता है ₹1000 बाप रे हां एक फॉर एग्जांपल एक गांजे की पूड़ी ₹100 में मिलती है तो आपको उधर ₹500 देना है तो काम करेंगे ऐसी दिन में 10 पूड़ी आ गई कितना हो गया बहुत पैसा हो बहुत पैसा होता है। तो डेली का यह काम चालू है। यह अंदर आता कैसे है? मानिक चंद है, गोवा है। मिलता है ₹20 का। उधर बेचेंगे ₹100 में।
(1:16:48) लेकिन जेल के अंदर आता कैसे है? स्टाफ गिनेचुने स्टाफ उनकी चेकिंग नहीं होती है। चेकिंग होती है लेकिन उनके अलग-अलग ये रहते हैं छुपाने का। ऐसा एक एग्जांपल सॉक्स है बूट में। हम टोपी है। हम ले आते हैं। अलग-अलग है। छोटे-छोटे चीजें पहले बोला जाता था कि अरे वो लड़कियां आती है। ऐसा कुछ नहीं होता है। लड़कियां वगैरह उस टाइम होता रहेगा। लेकिन अभी वैसा नहीं है सिचुएशन। पहले होता था गैंगस्टर उसके टाइम गैंगस्टर के टाइम जो जुने है ना 85 90 के आसपास वो होता रहेगा। वो मुझे नहीं मालूम है। लेकिन
(1:17:35) इधर ऐसा होता है प्रैक्टिकली। और यह जो अह जो एक अनक्लियर बात चलती है इसको लेके जेल को लेके कि अंदर क्योंकि कैदी जो होते हैं जो सीनियर होते हैं या बहुत बड़े-बड़े क्राइम्स करके जो अंदर से अपना सत्ता चलाते हैं और उनके नीचे जो अदर कैदी जॉइ कर लेते हैं क्योंकि उनके पास चारा नहीं होता है। इधर ग्रुपिज्म होता है हां गैंगस्टर्स का तो जैसे कितने इतने साल उन लोग कितने कितने साल अंदर वो रह रहे हैं तो सेक्सुअल नीड डेफिनेटली एक ह्यूमन बीइंग है और एक सर्टेन ऐज पे है तो सेक्सुअल नीड तो होगी और वो पूरी नहीं हो सकती अंदर तो ऐसा सुनने में आया है और जो रिसर्च बोलता है
(1:18:19) जो डाटा बोलता है कि अंदर जो है जो नए कैदी लोग आते हैं स्पेशली जो रेप वाले हैं या एसॉल्ट वाले वाले हैं। लड़की बच्चे लोगों को रिलेटेड जो चीजें होती है उनको यह लोग उनके मर्जी के बिना उनके साथ जबरदस्ती सेक्सुअल रिलेशन बनाते हैं। और ऐसा भी बोला जाता है कि वहां सर्टेन प्रवृत्ति के जो मर्द होते हैं अ उनको भी शिकार किया जाता है अपने सेक्सुअल नीड के लिए। मैडम कैसा होता है? वो जो जेल है पूरा जेल एक जेल है तो उसमें कैसा है छोटे-छोटे बैरेक्स है उधर ओके रूम्स है तो एक कैपेसिटी होती है एक एक बैरेक्स की कैपेसिटी फॉर एग्जांपल एक 100
(1:19:07) है हम 100 कैदी रहते हैं हम तो अगर अगर वहां अपुन 200 डालेंगे 180 डालेंगे तो और क्राउडेड हो जाता है वो करेक्ट बराबर है जो आज का सिचुएशन सोने की जगह है ना सोने की जगह इतनी सी होती है के छोटी करवट बदल लिया जगह वाशरूम में गया तो मालूम नहीं पड़ता वो किधर सोया है उसकी जगह ही मालूम नहीं पड़ती है ऐसा सिचुएशन है तो उसमें क्या होता है जबरदस्ती ऐसा कोई नहीं करता है एक्चुअली देखो अभी 200 लोग है और एक ऑलरेडी 10-10 साल पांचप साल होते हैं वो लोग रहते हैं और कोई नया आता है और उस टाइप का रहेगा गे टाइप लड़का रहेगा तो उसको घेरा जाता है
(1:19:46) अच्छा कभी-कभी कभी-कभी मालूम भी नहीं पड़ता है अंदर के अंदर वो आई टू आई बात करता है वह ज्यादा करके फिर ऐसी हरकतें देखेंगे ना वो जो सीनियर रहता है ना वह पहचान लेता है अगर उसके संबंध मतलब दोनों के क्या बोले सम्मति से अगर हो सकता है ऐसे करते होता है छुप छुप के लेकिन मेरे मेरे उस दरमियान मैं जब उधर था तो एक ऐसा यह हो गया था इंसिडेंट हो गया था कि आपको मैं बताता हूं रूम्स रहते हैं। एक रूम में तीन या पांच डालते हैं लोग। दो नहीं डालते कुछ हुआ तो प्रॉब्लम्स तीसरा फूट सकता है। दो नहीं फूटते।
(1:20:29) करेक्ट। ऐसा इसके लिए उनके कुछ नियम है। तो हिसाब से डालते हैं। तो क्या हुआ? अ पांच सात डालते हैं। तो ऑलरेडी एक रूम में कम होता है ना तभी कभी डाल देते हैं। तो जो एक रूम था ना उसके अंदर चार जन थे। फिर वो पांचवा आदमी आ गया ऑलरेडी उधर वो बटंस खाना गर्दुल्ले लोग रहते हैं ना इस टाइप के थोड़े से चरचुल्ले थे तो वो लोग ने क्या किया मैंने नेक्स्ट डे मुझे ऐसा मालूम पड़ा जब कैसा है जेल में कोई बात छुपती नहीं है बाहर नहीं जाती लेकिन जेल के अंदर सब मालूम पड़ता है वो बैरेक में क्या हो गया इधर क्या हो गया ये सेल में क्या हो गया ये रूम में क्या
(1:21:12) हो गया सब जब मिलते हैं ना मिलने का ठिकाना किधर है हॉस्पिटल एक जरिया है मुझे मुझे हॉस्पिटल में जाना है। मुझे ऑफिस वर्क के लिए जाना है। तो मिलनाजुलना होता है। अरे भाई इधर ऐसा हो गया। रात को इधर ऐसा हो गया। ये बैरक में तो ये मतलब ओरिजिनल चीज है। वो लड़के को है ना कुछ खिला दिया। मतलब ये बटंस वगैरह रहते हैं नशे वाले उसको खिला दिया। और अह खिलाने के बाद वो थोड़ा सा अनकॉन्शियस बेहोश होता है आदमी। कभी वो जो उसके हैबिट्स नहीं रहते उसको। तो वैसा हो गया वो और उसके साथ वो लोग ने फिर गलत काम किया गलत काम किया अभी जब सब उठा उसको मालूम पड़ा
(1:21:57) मेरे साथ कुछ गलत हुआ है इस टाइम कैसा होता है किसको बोल नहीं सकता अगर बोलेगा ना वो शर्म से खुद की मैं खुद फांसी ले लेगा और वो दो-चार दिन के बाद छूटने वाला था अच्छा ऐसा भी होता है मतलब इसका कोई मैं तो मेरे पास कोई ऐसा कोई एविडेंस नहीं लेकिन यह प्रैक्टिकल नॉलेज है। मेरे पास जो मैं वो प्रैक्टिकल बोल रहा हूं। अगर कोई बोलेगा कि ये ऐसा नहीं होता है तो मैं डंके की चोट पे बोल सकता हूं कि बहुत कुछ होता है उधर। बहुत कुछ होता है। लेकिन बोल नहीं पाते। डर के मारे डर के मारे। क्यों? अभी मैं रहता हूं। मैं उधर 13 साल का जर्नी मतलब बहुत बड़ा जर्नी
(1:22:42) है। लेकिन प्रैक्टिकल में जो हुआ है उधर के जो लोग अपने से जुड़े हैं स्टाफ ऑफिसर्स एक आदमी गलत हुआ। अगर मैं बोलने जाऊं तो रिलेशन खराब होते हैं। इसके लिए कुछ बोलते नहीं है। फॉर एग्जांपल मेरे साथ अच्छे भी लोग मेरे को संभाला भी है उन्होंने। एक आदमी की वजह से ना बहुत कुछ होता है। बोल सकता हूं मैं। लेकिन वो मन दुखी की बात होती है। करेक्ट। हां कुछ अभी आपने देखा रहेगा वो जो होता है वो सच है। जेल के अंदर गवर्नमेंट सब देती है लेकिन उधर तक पहुंचना है। अभी खाना एकदम बेकार सबसे कुछ चीज बनती है तो खाना आप खा नहीं पाओगे। वो खाना अभी
(1:23:29) अपनी लाइफ में समझो दिन जो दिनचर्या होती है। डे में अपुन 1:00 बजे 2:00 बजे खाना खाते हैं। उधर खाना 10:00 बजे लेना पड़ता है। जो मिलता है वह तुम 10:00 बजे खाओ, 11:00 बजे खाओ, 12:00 बजे खाओ। वो ठंड हो जाता है पूरा ठंडा। खाना बनता है 5:00 बजे। फिर बांटते बांटते 10 बजे आता है। फिर वो 2:00 बजे खाओ, 3:00 बजे खाओ। पूरा खराब खाना। उसमें ना ऑल है, ना कुछ है, ना टेस्ट है। ऐसा एकदम बेकार खाना। एक एक बुरी चीज है वह अभी थोड़ा फिलहाल मतलब खाने की मतलब यह अच्छा हो गया ऐसा मैंने सुना है और पहला कैसा होता था कैंटिंग जो
(1:24:16) एक कैदी है उसका एक लिमिट रहता है ₹2000 महीने में खर्च करना है उनको जो भी लेना है साबुन साबुन है चॉकलेट्स ऐसा बीड़ी सिगरेट जो भी है खाने के लिए सब ले सकते हो लिमिट रहता है अभी वह 10,000 है तो 20,000 में कुछ नहीं होता है। एक महीना निकालना है उनको तो उधर कैसा होता है? 6030 या 60 70 30 मतलब आप ₹10,000 दोगे 7,000 का माल मिलेगा। माल मिलेगा। जो 30% है वह जो माल देगा उसको देना है। ऐसी भी बातें हैं।
(1:25:00) बाप रे हम तो मैंने ये एक चीज सुना है जेल के अंदर स्पेशली जो रिसर्च बोलता है कि रेप वाले जो एक्यूज़्ड होते हैं उनको अंदर बहुत कैदी लोग टॉर्चर करते हैं। टॉर्चर मतलब मैम क्या होता है? एक वह भी कैदी भी रहेंगे तो भी एक समाज का हिस्सा है और वह लोग भी फैमिली के उनके घर में भी फैमिली है तो ऐसे ऐसे कहते हैं छोटा बच्चा हो गया दो साल का तीन साल का ये रेप हम लोग मैं भी सुनता हूं तो मेरा हो जाती है तो मैं तो बोला इसको इधर ही शूट कर दो ऐसा होता है अंदर के अंदर तो कुछ लोग रहते हैं उसको मारते हैं पहला
(1:25:47) अगर थोड़ा भी मतलब वो देखने का एक नजरिया है मर्डर वाले को कुछ नहीं करेंगे। बाकी कुछ भी काम करो रेप वाला बोलो उसको मार खाना है उधर। मतलब वो ऐसा सोच के नहीं मारेगा कि उसको अभी मारना है। वो फॉल्ट ढूंढेगा। उसको मारने का है। उसने बहुत छोटे बच्चे के ऊपर रेप करते हैं। रेपिस्ट बोलेगा तो उसको मारते हैं। ये आईजी लोग तो मारते हैं। आराम से एक दो मतलब ग्रुप में एक ही मारेगा। ये बैरेक में है तो बोलेगा भाई मार दे तेरे साथ में हम लोग हैं। ग्रुप तो मार नहीं सकता है। तो पनिशमेंट्स अगले सबको मिलती है तो मारते हैं खास करके तो आपके जेल टाइम में कोई बड़ा गैंगस्टर
(1:26:28) था उस टाइम पे आपके सात उसी जेल में सात जेल के अंदर जितने बड़े से बड़े गैंगस्टर्स तभी थे अभी ठाना जेल में अ बहुत सारे ऐसे अभी नाम गिन नहीं पाऊंगा जितने भी बड़े थे तो मैं उनको सबको जानता था अह अरुण गौली हो गए। अरुण हां जेल के अंदर अरुण गोली मिला है वो डीके राव मिला है फिर मैंने पकड़े थे वो वो भी लोग मुझे मिले उधर थाना जेल में है गड़ी गैंग का सुनील घाटे वो मैंने पकड़ा था लास्ट में जब मैं एक लास्ट उनका केस हो गया था तभी ऐसे सबको अभी तो यूनिवर्सिटी है वो मतलब कैसा है
(1:27:15) जेल के अंदर 13 साल के अंदर जब जब मैं पुलिस में था यह काम दिल से लगाया दिल दिल से किया तो खबरी या पुलिस का दोस्ती हो गया था। अभी ऐसा हो गया वो सब गैंगस्टर का दोस्ती हो गया। [हंसी] तो यूनिवर्सिटी हुई तो मतलब वही रहना है तो उनसे बात करना पड़ेगा। करेक्ट। मैं पुलिस हूं ये हूं ये होगा। वो भूल जाने का अभी प्रेजेंट आया उसको फेस करो आप और अच्छे से पॉजिटिव रहेंगे तो जेल कटता है। अच्छा नेगेटिव में जाएंगे तो बीमार गिरा है। हार्ट अटैक से मर जाएगा। आप मॉर्निंग उठोगे पॉजिटिव सोचो जो भी वॉक करो कुछ भी करो जो भी आपको जमता है पड़ो तो आप टिक पाओगे नहीं तो जेल में
(1:27:58) रहना इतना आसान नहीं है। थ्री क्वेश्चंस जो मैं आपसे पूछना चाहती हूं वो है फर्स्ट थिंग क्या ये सही है जो बड़े लेवल के गैंगस्टर होते हैं वो जब जेल के अंदर जाते हैं तो उनको स्पेशल फैसिलिटीज मिलती है? स्पेशल फैसिलिटीज मतलब अलग रूम जैसा वो शिवराज का किस्सा था। नहीं अलग रूम नहीं मतलब उनके लिए नहीं बनाया गया। वो ऑलरेडी वो जेल प्रशासन का उन्होंने बनाया है कि अभी समझो एक वीवीआईपी है। थ्रेट्स है उनको कि मार सकते हैं। बड़े पैसे वाला है। उसको मतलब डरा के फुचला के ऐसा कुछ कर सकते हैं। उसके लिए बाजू में एक सेल में रखा जाता है। अच्छा लेकिन ये ऑफिशियल है
(1:28:44) हां ऑफिशियल है उधर है ना सेल है उधर रूम्स है मतलब एक रूम में तीनती कैदी एक बैरेक्स जो बड़े रहते उसमें 150 200 कैदी रहते और जो रूम्स है तीन या पांच सिर्फ तीन या पांच में रख देते ओके अंडा सेल है अंडा सेल में रखते ओके जैसे कसाब को रखा था हां अंडा सेल है वहां पे ये रखते हैं ओके सेकंड क्वेश्चन मुझे ये पूछना था कि ये बात रिसर्च सच में आती है कि जो बड़े गैंगस्टर्स होते हैं वो अंदर से भी ऑपरेट करते हैं। जब वो अपना जेल टाइम कर रहे होते हैं तो अंदर से वो ऑपरेट करते हैं। ये सच है सच है। ओके। ऑपरेट करना मतलब क्या है? कैसा है? अभी
(1:29:27) जब एक गैंगस्टर अंदर आता है। उसका कम्युनिकेशन टूट जाता है। करेक्ट। बराबर है। वो फिर उसको ऑपरेट कैसा करेगा? एक तो फोन चाहिए। करेक्ट। या मैन टू मैन। करेक्ट। वकील तो दे नहीं सकते। वकील को बुलाते हैं लेकिन वकील नहीं कर सकता है। एक तो उधर के जो स्टाफ के थ्रो वो ऑपरेट होता है। खाली मैसेजिंग समझो वो गैंगस्टर का बंदा बाहर है। तो वो खाली चिट्ठी देगा। फिर वो आगे ऑपरेट करेगा। एक होता है वह दूसरा जब उनकी कोर्ट की तारीख होती है समझो महीने में 14 दिन में एक तारीख होती है तो उसके पहले ही वो सेटअप लगा डालता है इस तारीख को बुला
(1:30:13) देना कोर्ट में इसको बुलाओ उसको बुलाओ ये करना है वो करना है फिर ये वहां से ऑपरेट करता है बैठ के अच्छा हां पुलिस को क्या मालूम है रिलेटिव है हम बैठेंगे बागड़े पे बोला ऐसा है वैसा है खाना खा रहे तो तब जो वक्त मिलता है ना उसमें ऑपरेट करते हैं और स्पेसिफिक फोन तो अभी तो बहुत कम है पहले इतना मालूम नहीं था लेकिन अभी फोन ये जेल में तो नहीं है थाना जेल हो गया पुणे जेल हो गया अभी कुछ-कुछ पकड़े गए हैं ना थाना में फिलहाल का तो मालूम नहीं है अभी ओके लेकिन ये ऐसे ऑपरेट तो करते हैं कैसे भी किधर भी रहे अंदर भी रहेगा तो ऑपरेट करते
(1:30:55) हैं ये लोग ओके हां और अगर ऑपरेट करेंगे पैसा नहीं आएगा तो इनकी भाईगिरी कैसी चढ़ेगी? ऐसा है। तो एक और वेरीेंट क्वेश्चन गैंगस्टर को लेके कि अ ऐसा भी सुनने में आता है कि कभी-कभी ऐसे गैंगस्टर्स को जेल के अंदर मार दिया जाता है। मतलब उनकी सुपारी निकलती है बाहर से और अंदर के अंदर वो मतलब कुछ गुनाह करके वो इंसान अंदर जाएगा उसको मारने के लिए। स्पेसिफिकली टारगेटेड होता है वो कि वो गुनाह करेगा और फिर उसको जेल होगी। उसका एक्सजेक्टली उधर ही पोजीशन होगा और फिर वो अंदर जाके उसको मार देता है। ऐसा होता है स्पेसिफिकली तो नहीं होता है क्योंकि अ एक
(1:31:39) अलर्ट रहता है जेल प्रशासन कि उनको मालूम रहता है। अभी ये छोटा राजन गैंग वाला है। ये दाऊद गैंग वाला है तो उनके साथ में नहीं रखेंगे। वो अलग-अलग करते हैं। उनको पता चलता है उसका हिस्ट्री हिस्ट्री कार्ड रहता है। हिस्ट्री वो मालूम ही पड़ता है कौन से गैंग का है। तो मोस्टली पहले दिन तो कुछ नहीं करते। अलग-अलग सेल है उसमें रख देते हैं। मर्डर करना वगैरह आज के टाइम में नहीं होता है। अंदर जाके इतना बड़ा अभी कोई बचा ही नहीं है। तो ऐसा अभी तो होता नहीं है। फिलहाल पहला हुआ रहेगा। मतलब जो अमरनायक बाबू रेसी में गैंग थी तभी वह वो तो पहले खिसे है तो तभी
(1:32:19) होता रहेगा अभी तो फिलहाल तो ऐसा नहीं है ओके और दूसरा इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है सिंस आप जेल इतने साल रहे हो और इंपॉर्टेंट जेल्स में रहे हो हां जी तो आपने बहुत क्लोज एनकाउंटर क्रिमिनल्स के साथ किया है अलग-अलग टाइप के क्रिमिनल्स एक जनरल टर्म दे रही हूं क्रिमिनल्स वो कोई भी हो सकता है मतलब मर्डर भी हो सकता है कोई भी टाइप केम तो एज अ पुलिस बिकॉज़ आपका माइंड तो पुलिस जैसा है। तो आप साइकोलॉजिकली क्या फील करते हो? वो ऐसा क्यों करते हैं? मतलब व्हाट इज द रीज़न वो क्रिमिनल बनते हैं। क्रिमिनल बनते हैं। हां। अभी क्रिमिनल बनने के बहुत सारे रीज़न है
(1:32:56) मैम। क्योंकि जहां पे आप रहते हैं और पहला कैसा था? एक फैशन बन गया था। क्रिमिनल भाई बनना मतलब एक फैशन था। फैशन था। हां। जैसा जैसा मालूम पड़ गया कि वह पुलिस प्रशासन या जेल प्र जेल जो है तो स्ट्रांग हो स्ट्रांग है अभी तो एक गुनाह किया तो बेल नहीं मिलता है अगर कुछ भी गुनाह पुलिस पकड़ के लाती है ये जब पहला कैसा होता था अभी गुनाह किया तो दो-ती साल के बेल हो जाता था ऐसा मैं सुना था सीनियर लोगों से मेरे तो ऐसा बेल हो जाता था बेल लेना फिर वो तो अभी ऐसा नहीं होता है अभी कोर्ट ही बेल नहीं देती है 10-10 साल साल पांचप साल पेंडिंग
(1:33:38) नहीं नहीं अभी मैंने मर्डर किया हां तो मैंने मर्डर करने मैं मेरे को बेल नहीं मिलेगा 5 साल तो भूल जाओ पांच सात साल ओके तो आदमी कोलैप्स हो जाता है उधर 7 साल में क्या करेगा तो ये अभी जो कंट्रोल आया है पुलिस और कोर्ट के वजह से थोड़ा बहुत कंट्रोल आया आ गया उनके पास तो ऐसा नहीं होता है कि वो फैशन थे अभी तो अभी तो मैं तो समझता हूं कि एक अ गैंग गैंग तो बची नहीं है लेकिन क्रिमिनल अभी नई पीढ़ी बनना नहीं चाहिए। करेक्ट। नहीं लेकिन इधर एक पॉइंट मेरे दिमाग में एकदम आया है। जैसा आपने बोला ना कि फाइव 10 इयर्स से इयर्स बेल नहीं होती
(1:34:20) है। तो बिकॉज़ मेरे लॉयर्स फ्रेंड्स भी हैं जो स्पेशली ये जो कैदी लोग हैं जो बेल के काबिल है। मतलब उन्होंने बहुत छोटे-छोटे गुनाह किए हैं। फर्स्ट टाइम गुनाह किए हैं। जिन्होंने गुनाह किया ही नहीं है। बिकॉज़ ये सिस्टम ऐसा आ गया है और उनकी अपील जाती ही नहीं है आगे। मैंने यह सुना है और मेरी एक फ्रेंड है वो इस डिपार्टमेंट को लेके एनजीओ चलाती है जो कैदी है जो रोंगली एक्यूज़्ड है या फिर जिनके पास पैसे नहीं है अपील करने के या उनकी अपील अंदर से बाहर जाती ही नहीं है तो शी इस फाइटिंग फॉर देम तो मेरा सवाल इधर ये था कि एक तरफ ही
(1:35:04) अच्छा है मतलब आपने जो ये बात बोला कि उनको बेल नहीं मिलता है तो उनका जो सोच साइकोलॉजी खत्म हो जाती है टूट जाती है लेकिन लेकिन यहां दो पहलू आ जाते हैं। एक पहलू ये है कि साइकोलॉजिकली कुछ ना कुछ उनका माइंडसेट है या साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर या डिजीज है उनको जिसकी वजह से वो क्राइम कर रहे हैं। क्योंकि नॉर्मल इंसान तो करेगा नहीं। आपको वैसा सोचना पड़ेगा या वैसा चीजें देखना पड़ेगा तब आप वो कर पाओगे ना। जैसा आपने फर्स्ट टाइम एनकाउंटर किया आप दो दिन सोए नहीं। क्योंकि आपके लिए वो नॉर्मल नहीं था। सही बात है। आपको भी टाइम लगा ना उस चीज को समझने के
(1:35:38) लिए। तो वैसा अगर ये कोई क्रिमिनल है फर्स्ट टाइम करता है जो आपने खुद बोला कि एक बार गलती होती है दो बार गलती होती है कंटीन्यूअस गलती नहीं हो सकती तो ऐसे काफी सारे क्रिमिनल्स हैं जो कंटिन्यूस कर रहे हैं तो वो क्रिमिनल है क्रिमिनल है तो उनकी साइकोलॉजी तो टूटने से रही मुझे नहीं लगता मेरा पर्सनल व्यू है मे बी आई एम रोंग मुझे नहीं लगता कि उनका माइंडसेट बदलेगा हम क्योंकि वो माइंडसेट ही ऐसा है इसलिए वो उनको थ्रिल आता है ये करके वो एक अपना वजूद पाने में उनको मजा आता है और बाकी जो लोग हैं बाय डिफॉल्ट ये कर गए हैं लाइफ में उनको सेकंड चांस मिलना चाहिए
(1:36:15) बिकॉज़ यह सिस्टम ऐसा बन गया है। आपको नहीं लगता कि ये उनके लिए खराब है। अभी क्योंकि फाइव इयर्स में तो वो अंदर कुछ और बन जाएंगे। आप आप जब आप जब बात कर रहे थे ना कि आप देखो पुलिस वाले हो वो भी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और आपने 26 मिनिमम एनकाउंटर किए हैं यस और आपने इतने अवार्ड्स जो भी जीते हैं तो आपका क्या जर्नी रहा होगा मैं जस्ट माइंड में रन कर रही हूं क्या सुपर्ब जर्नी रहा होगा और आपका नसीब भी देखो आपने बेस्ट के साथ काम किया है यस जिनको मतलब बहुत रेग्नाइजेशन मिला है तो मेरा पॉइंट एकदम यहां ये आता है कि आप जैसा इंसान जो पुलिस वाला है जिसको एक
(1:36:56) स्पेशल ट्रीटमेंट अंदर मिलना चाहिए था एज अ पुलिस आप अपनी जर्नी बता रहे हो जेल के अंदर कि आपको कैसे टारगेट किया गया था आप खुल के नहीं बता पा रहे हो बहुत सारी चीजें बिकॉज़ मैं आपकी आंखों में देख रही थी आप बहुत डिस्टर्ब हो रहे थे उस टाइम पे मतलब अनकंफर्टेबल हो रहे थे शायद ऐसीऐसी चीजें हुई है जो आप बात नहीं करना चाहते दैट इज़ ओके दैट इज़ योर पर्सनल डिसीजन बट दिख रहा है क्लियरली कि कि आप इतने डिस्टर्ब हो रहे हो सोच के तो वहां क्या बीती होगी आप पुलिस होने के बाद यस और उसके बाद जब आप फोर फाइव इयर्स आपके निकल गए आपने क्या बोला फोर इयर्स मेरा
(1:37:33) निकल गया अब मैं डॉक्टर बन गया अब मैं पेशेंट नहीं हूं डॉक्टर बन एक बंदे ने सताया उधर टारगेट करके यस यस जब आप डॉक्टर बने तो आपका माइंडसेट पूरा अलग हो गया एंड प्लस आपने क्या बताया कि पहले मैं पुलिस वालों के साथ दोस्ती रखता था जब मेरा लाइफ बदल बदल गया तो मुझे अपने को बदलना पड़ा उधर सर्वाइव करने के लिए। तो सेम जब आप इतने पढ़े लिखे और इतने समझदार और अलग टाइप से दुनिया देखते हुए आए हुए इंसान हो आप यह चीज को भी सह नहीं पाए जो आपको वहां मिला। तो जो नॉर्मल इंसान गलती से जिससे क्राइम हो गया है वो अंदर जाता है। उसके साथ क्या-क्या होता है
(1:38:16) अंदर और वो क्या बन जाता है अंदर वो फाइव इयर्स में? तो आप एज अ कॉप एज अ एक्स कॉप आपको यह नहीं लगता कि एक पॉइंट और ऐड करूंगी कि काफी सारे अंदर कैदी है जिनको राइट है अपना अपील करने का प्लस अपने इनोसेंस वो एक इंग्लिश में कहावत है ना इनोसेंट टिल प्रूवन गिल्टी टिल प्रूवन इनोसेंट ऐसा कुछ तो भी है तो उनको तो हक भी नहीं मिल रहा अंदर बराबर तो फाइव इयर्स में क्या बन के निकली लेंगे वो पक्के क्रिमिनल्स कैसा होता है मैम अभी छोटे-मोटे जो क्रिमिनल्स है गरीब लोग भी बहुत गरीबी गरीब लोग भी आते हैं एक्सीडेंटली केस में आते हैं लेकिन उनके पास वकील करने के लिए
(1:39:02) पैसे नहीं होते एक्सक्टली यस यस तो फाइट वकील ही नहीं रहेगा तो फाइट नहीं कर सकते तो क्या होता है बहुत सारे अभी कोर्ट ने ये किया है कि अ जब कोर्ट में पेश होते हैं तो कोर्ट ही पूछता है तुमको गवर्नमेंट का वकील चाहिए क्या अभी तो फैसिलिटी दी गई है बहुत सारी पहले भी थी अभी अभी भी है लेकिन अभी ज्यादा मात्रा में मैं नहीं मानती फैसिलिटी होगी फैसिलिटी मतलब क्या है वो सरकारी वकील नहीं नहीं फैसिलिटी होगी बट मैं आपको बताती हूं बिकॉज़ ये मेरे आंख के सामने का किस्सा है हां मतलब मैं वो लॉयर को अपने पॉडकास्ट में ला रही हूं तो इतने केसेस है ना जो अंदर से अपील करना
(1:39:41) चाहते हैं लेकिन उनको पता ही नहीं कि कैसे करें जैसे आपने बताया आप अवेलेबल थे आपने हेल्प किया लोगों को लेकिन जिनको आपने हेल्प नहीं नहीं वही मैं आपको मैं बता रहा हूं कि अभी कैसा है अह जो संस्था है कुछ ऐसा मतलब अह संस्था काम कर रही है गरीब कैदी के लिए कि वकील लाना देना ये जो संस्था है उनको मदद भी कर रही है पैसा फंडने के लिए मतलब वकील के लिए वो अभी चालू है अगर कोर्ट ने अभी ऐसा ये किया है कि मतलब समझो एक चोरी के केस में है तो उसका शिक्षा समझो फॉर एग्जांपल है 3 साल छोटी मोटी चोरी में अगर वो चार साल काट रहा है तो उसका प्रॉब्लम है। क्यों? क्यों
(1:40:25) प्रॉब्लम है? कि उसके पास वकील नहीं है। कोई सुविधा नहीं है। उसको निकालने वाला कोई नहीं है। जब तक वो केस अंडर टाइल में रहेगा केस चार साल के बाद होगा और शिक्षा मिलेगी तीन साल की तो क्या करेगा? तो अभी ऐसे संस्था भी हेल्प कर रही है कि अभी थोड़ा-थोड़ा पॉजिटिव कर रहे हैं। मतलब पहले ऐसा नहीं था कि घर गया तो 8 99 साल केस नहीं चला। मेरा खुद का केस 8 साल के बाद चला है। आफ्टर 8 इयर्स यस। पहले सेशन कोर्ट में 3 साल लगा। 13 के बाद 24 तक के 24 को मैं फाइनल हो गया हाई कोर्ट में 13 और 10 साल के बाद एक
(1:41:08) अभी मेरा सेशन कोड एक पॉइंट मेरे दिमाग में आ रही है जो हमेशा मेरे दिमाग में चलती है मतलब ऑल द टाइम लाइफ में जब से मैंने लाइफ में चीजें देखी है मैंने बचपन से बहुत कुछ देखा है मतलब पॉलिटिकल और फिल्म बैकग्राउंड से आती हूं तो बचपन से घर के अंदर बहुत सारी चीजें देखी है। लोगों को देखा है। तो मुझे एक चीज समझ आ गई है। गरीबी कभी जाएगी नहीं। हम क्रिमिनल्स चले गए। क्राइम कभी नहीं जाएगा। क्राइम क्योंकि जब तक गरीबी रहेगी तब तक क्राइम होता रहेगा और क्राइम होगा तो ये जेल जाएंगे। जेल जाएंगे तो फिर वही गरीबी होगी। मतलब गरीबी की वजह से क्राइम किया।
(1:41:52) क्राइम के वजह से जेल गए। जेल की वजह से उनको क्या बोलते हैं वकील की जरूरत पड़ेगी, कोर्ट की जरूरत पड़ेगी। उसके लिए फिर गरीबी का सामना होगा क्योंकि पैसे नहीं होंगे और वो अंदर सड़ेंगे और उसके बाद क्या होगा कि माइंडसेट ऐसा बन जाएगा ठीक है मतलब मेरा खराब हुआ तो पूरी तरह अब वो माइंडसेट से बाहर आएंगे और क्राइम करेंगे। राइट? तो ये नेवर एंडिंग लूप है। तो जैसे आप अपील कर रहे थे खुद को लेके मतलब इट्स एक पुलिस वाले के साथ यह हो सकता है। तो जो ये गरीब लोग हैं जो अंदर जेल में बिना वजह अटके हुए हैं। उनके साथ क्या होगा? एक पुलिस वाला आज जब
(1:42:35) ऑफ द रिकॉर्ड काम कर रहा है। क्राइम तो ऑफ द रिकॉर्ड ही था ना कंट्रोल यूनिट जो बनाया गया था। उसका कोई एक ये नहीं था। मतलब क्या बोलते हैं कि एक परमानेंट अह ऐसा कोई डिपार्टमेंट नहीं कि थ्रूउ चले जा रहा है। होता है ना? उस टाइम क्राइम रेट बढ़ा हुआ था तो वह क्राइम डिपार्टमेंट बना था। तो जिसजिस को ऐसा फील हुआ कि नहीं वो इस चीज में अपनी जान का खतरा देके आगे जा सकते हैं। उन्होंने जॉइ किया ये चीज को और उसका एक सिस्टम बनाया गया था। तो एक पुलिस वाला एंड में जाके अगर एक्यूज़्ड हो सकता है और एक्यूज़्ड हो के वो जेल चला गया है और
(1:43:13) 13 इयर्स जैसा एक साल और वो रहते तो वनवास हो जाता। [हंसी] वो अभी बाकी है वो सॉरी इसको मैं जोक की तरह बोल रही हूं बिकॉज़ थोड़ा माहौल को लाइट कर रही हूं। ही गए हैं। वैसा तो 10 में अरेस्ट हो गया और 24 में आ गया तो 14 साल हो गए हैं। तो वनवास जैसा ही हो गया। तो एक तो आपने आपका जो ब्रांच और जो लोग थे जिन्होंने इस पे काम किया है उन्होंने क्राइम को कंट्रोल किया और वो कंट्रोल से आज हम चैन से बैठे हैं। जैसा मैंने पहले भी दो-तीन बार इस कन्वर्सेशन में एपिसोड में बोला है। तो आप ये करने के बाद भी एक्यूज़्ड होते हो। आप जेल चले जाते हो और 13 इयर्स
(1:43:58) आप अटके हुए हो और अभी भी अटके हुए हो। आगे कितना अटकने वाले हैं वो तो आईडिया ही नहीं अभी कि अभी क्या होगा मालूम नहीं आगे का तो कुछ है ही नहीं मेरे को ऐसा अंदर से लग रहा है कि मेरे को जस्टिस मिलेगा ओके आई आल्सो प्रे फॉर इट अभी मैम ऐसा है अभी 13 पुलिस वाले हम लोग जॉबलेस है जॉब नहीं है किसी का दो साल बाकी है तीन साल बाकी है अभी थोड़ा अभी कैसा है हमको सब लोग भूल गए अभी करेक्ट सरकार से लेके पब्लिक से लेके मतलब अभी बोलते हैं ना कि मतलब सब हमारे हमारे लिए वो खत्म हो गया। ऐसा लग रहा है। प्लस आपको एज अ लोग पहले एनकाउंटर
(1:44:34) स्पेशलिस्ट को लेके वाहवाह किया दुनिया ने। उसके बाद उसी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को लेके सब लोगों ने थू थू किया। जस्ट बिकॉज़ कि अंडरवर हां हां ऐसा हो गया। ऐसा हो गया कि अगर आप मेरा पर्सनल व्यू अगर आप रोंग हो अगर आप रोंग हो तो आप 13 इयर्स जेल में क्या कर रहे हो? इफ यू हैव द मनी आपके पास अगर पैसा है और आप पुलिस वाले हो वह भी एक स्पेशल यूनिट वाले जिनका होल्ड हर ब्रांच के अंदर होता है तो आपके लिए तो बहुत आसान होना चाहिए था बाहर निकलना फर्स्ट थिंग आप 13 इयर्स जेल के चक्कर काट रहे हैं और बाहर आने के बाद भी अभी भी फ्री नहीं हो आप और इस सब
(1:45:15) के बाद आपके लिए कोई सिस्टम नहीं बनाया गया था कि सपोज़ सपोज कुछ भी ऐसा होता है तो ये पुलिस वालों को आफ्टर टेकन केयर कैसा होगा? मतलब इनका कैसा टेक केयर होगा? इनका नहीं इनके फैमिली का होता है ना कि जैसे रिटायरमेंट प्लान होता है लोगों का वैसा ये ब्रांच का कोई रिटायरमेंट प्लान होता है ना इनका कोई रिटायर इनका रिटायरमेंट प्लान क्या है? ये मर जाएंगे या फिर ये एक्यूज़्ड हो जाएंगे। यस या फिर ये जेल के अंदर होंगे। तीनों में से एक चीज इनके लाइफ में चलने वाला है। यह ऐसा नहीं होगा कि यह बहुत एंड तक जाने वाले हैं और एकदम ऑफिशियली वो
(1:45:57) स्टार वार लगा के रिटायर [हंसी] होने वाले हैं। ऐसा कुछ भी नहीं है। तो एक इनकाउंटर है उसने हमारा मेरा तो 20 साल का सर्विस चला गया। 13 साल जेल में निकाले फैमिली के साथ फैमिली के फैमिली से दूर रहा और सारे बाकी मेरे को इतना ही मैं खाली मेरा ज्यादा फैमिली से ज्यादा मैं वो मेरे नौकरी को मैं प्यार करता था क्योंकि मैं वो वहां से मैं आया था मेरा जो जर्नी था वहां से मैं मेरे लिए वो बोलते हैं ना कमिश्नर से बड़ा पोस्ट था मेरे लिए कास्टेबल भी और मैंने वो वो पोस्ट को जस्टिस दिया है मैम। ऐसा नहीं है कि मैंने कुछ इसके लिए मैं मेरे को बहुत
(1:46:41) अंदर से अंदर ना बहुत बुरा लगता है कि जो भी था लेकिन काम बढ़िया किया है। बढ़िया बड़ा काम सब किया है मैंने। हक से मैं बोलता हूं ऐसा है। और इसमें परेशानी क्या हो गई है कि फैमिली सबकी फैमिली डिस्टर्ब। अभी मेरी वाइफ बोलो, लड़की है, लड़का है। सब ने लेकिन मैंने एक उसी टाइम एक बात थाम ली थी कि मतलब मेरा तो नुकसान हो गया। मुझे दिख रहा है अभी मतलब अटका हुआ हूं मैं। तो मैं फोकस हूं बच्चे लोग के ऊपर कि उनको पढ़ाना है। कुछ भी करके पढ़ाना है। बस ये फोकस किया। बाकी चलता रहेगा। बोला केस तो चलता रहेगा। बड़े हो अभी जॉब कर रहे हैं। बच्चे लोग
(1:47:27) मैं सुकून से है और गवर्नमेंट ने भी सपोर्ट किया हमको। ऐसा नहीं है कि गवर्नमेंट ने सपोर्ट नहीं किया। गवर्नमेंट ने उस टाइम की जो गवर्नमेंट बीजेपी है, शिवसेना है, मनसे है, सब लोग ने एनसीबी सब सब पार्टी ने हमको थोड़ा-थोड़ा मोरली सपोर्ट दिया है। ऐसा नहीं बोलूंगा कि मैंने सपोर्ट नहीं किया। दिया सपोर्ट लेकिन लेकिन आप कुछ जो कायदे का जो दायरा है उसके अंदर वो कुछ ज्यादा नहीं कर सकते। लेकिन अभी हम लोग बाहर आए हैं बराबर बेल पे है तो अभी मैं मेरा सर्विस बाकी है तीन साल अगर गवर्नमेंट चाहेगा तो मेरे को ले सकती है सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है वो तब देखा
(1:48:10) जाएगा लेकिन मेरा साल तो ऐसे ही जा रहे है ना कि मैं कोई क्रिमिनल नहीं है मैं अगर क्रिमिनल नहीं गवर्नमेंट के ऊपर है अभी ले भी सकते हैं ऐसा कुछ भी नहीं है तो आप यहां कुछ एक पॉइंट करना चाहते हो कि सपोज आप जैसे स्पेशल ब्रांच जो बनते हैं और उसके अंदर जो भी ऑफिसर्स और जो भी भर्ती होते हैं स्टाफ उनके लिए कुछ ऐसा एक फैसिलिटी या कानून होना चाहिए। जरूर होना चाहिए। आगे सेफ हो जाए। जरूर होना चाहिए। क्यों? मुझे ये बोलना है मैम अपील मतलब फॉर एग्जांपल मैं एक आपको मैं देता हूं। हमारे पुलिस की जो कैटेगरी है कांस्टेबल से ले इंस्पेक्टर तक इंस्पेक्टर का एसीबी
(1:48:58) बनता है और डायरेक्ट वो डीसीबी भी बनते हैं लेकिन वो मपोसे रहते हैं आईपीएस अभी एक आईपीएस के लिए एक ऐसा यूनियन है उनका ओके बराबर है तो कांस्टेबल से लेके इंस्पेक्टर तक हम पकड़ दें तो ऐसा कोई इनके लिए यूनियन नहीं है ना इनका कोई बाजू लेने वाला कुछ ऐसा ये नहीं है तो उसके लिए उनके लिए कुछ ऐसा सिस्टम मतलब गवर्नमेंट ने ऐसा करना चाहिए कि कुछ भी प्रॉब्लम होता है देखो अभी जो काम करता है उसका वही उससे प्रॉब्लम होता है एकदम डिसिप्लिन में जाएंगे काम नहीं बनता है करेक्ट लेकिन हमारे लॉ के हिसाब से चलना पड़ता है
(1:49:43) वो हिसाब से कभी-कभी गलती हो जाती है कोई आदमी अगर पुलिस होगा वो भी एक इंसान है करेक्ट तो ऐसा नहीं होता है कि में यह यह नहीं हो रहा है कि गलती नहीं होएगी बराबर गलती हो जाती है तो उसके लिए कुछ ऐसा उसको ट्रीट होना नहीं चाहिए कि जैसा आरोपी के लिए किया जाता है कि डालो उसको पकड़ो केस बनाओ तुरंत नहीं ऐसा डाल दो जेल में ऐसा नहीं होना चाहिए करेक्ट तो उसको सही तरीके से कुछ ऐसा हमारे गवर्नमेंट ने ऐसा कुछ करना चाहिए कि उनके लिए कुछ थोड़ा तो मतलब कम से कम उसको नौकरी से निकाल दो लेकिन वो जेल बिल के चक्कर चक्कर में मत फसाओ। करेक्ट।
(1:50:21) ऐसा मेरा कहना है। ये अपील मैं करता हूं। ओके। तो आपका बोलने का मतलब ये है जो स्पेशल ब्रांचेस बनते हैं स्पेशल कॉजेस के लिए जहां कोई प्रॉपर लॉ एंड ऑर्डर के वजह से नहीं बनता है वो वो मतलब लॉ एंड ऑर्डर के वजह से ही बनता है। बट वहां कोई प्रॉपर लॉ एंड ऑर्डर नहीं होता है। वो किसी चीज को कंट्रोल करके उसको प्रॉपर रास्ते में लाने के लिए एक सर्टेन ब्रांचेस बनाए जाते हैं विद इन जुरिडिक्शन। तो उसमें जो लोग काम कर रहे हैं हां जी। स्पेशली जो लोअर लेवल में काम कर रहे हैं अगर कुछ ऐसा एक्विजिशन हो एक्विजिशन होता है उनके ऊपर जो प्रूव नहीं
(1:50:58) है हां तो उनके लिए कुछ ना कुछ आफ्टर एक संविधान बनना चाहिए जिससे उनकी फैमिली ना सफर करे और वो इंसान सफर ना करे बिना कोई कारण के आप ये अपील करना चाहते हो जैसा आईपीएस दर्जे के जितने लोग हैं और ऊपर के लोग हैं उनके लिए कुछ ना कुछ संविधान है वगैरह यूनियन यूनियन है संविधान में ऐसा कुछ नहीं लेकिन यूनियन उनके कि वह बाजुए कर सकते हैं। लेकिन संविधान में अभी बहुत सारे बदलाव भी आ रहे हैं। तो डिफेंस के लिए या पुलिस के लिए कुछ ऐसा होना चाहिए। डिफेंस के लिए तो है स्ट्रोंगली फील हो रहा है। हां आप ये जेल पे करते हो ना जब प्रेशराइज
(1:51:37) मुझे ऐसा फील होता है कि आपने बहुत गंदा लाइफ देखा है जेल में। 100% और श्योर क्योंकि फर्स्ट टाइम हम ये पॉडकास्ट कर रहे हैं तो आप शायद उस लेवल पे अभी कंफर्टेबल नहीं हो पूरी बात करने के लिए तो मैं जरूर चाहूंगी कि हम और एक पॉडकास्ट करें जब जिस दिन आप बहुत कंफर्टेबल हो जाओ अपनी जेल लाइफ के बारे में और खुल के बताने के लिए ताकि जनता को पता लगे कि आपने क्या तकलीफ देखी है और आप ये जो स्पेशली बोल रहे हो जेल [हंसी] ना जाना वाला कहानी तो ये जो जेल में आपने जो भी चीजें देखी है आई एम श्योर वो बहुत गंदी है। आई कैन फील इट। इसकी वजह मैम आपको मैं बताता हूं। एक
(1:52:16) क्रिमिनल रहता है और एक पुलिस है या कोई भी गवर्नमेंट सर्वेंट है। इसमें तो फर्क है। क्रिमिनल को मालूम है मैं अगर मैं इधर मर्डर कर रहा हूं या रॉबरी कर रहा हूं। मुझे आज नहीं कल चल जाना है। उन लोग का हमारा वैसा नहीं है। आप माइंड से रेडी नहीं हो उस चीज से। माइंड से रेडी नहीं है। क्योंकि मेरा जो काम है लोगों को जेल भेजना। जेल भेजना या जो गलत काम होता है उनको भेजना है मेरा काम था बराबर है उस जगह मैं जाके बैठूं तो उससे तो आपके लिए तो मौत का एक जगह बन हुआ और वहां पे जाने के बाद कैसा होता है अभी ये जेल है खाली ऊपर का वो खाली आकाश
(1:52:52) दिखता है कुछ भी मतलब पक्षी की आवाज है बाकी कुछ आप कुछ भी नहीं कर सकते उनके रूल फॉलो करना पड़ते हैं मतलब अभी ऐसा बोला जाएगा तो मतलब वो गलत होगा जैसा जैसा रेप होता है मन के खिलाफ वैसा ही है। इधर का लाइफ यस उधर का लाइफ हमारे हमारे दिल से कुछ भी नहीं होता है या हमारे बोलने से कुछ भी नहीं होता। उनका उनके वो जैसा बोलेंगे वैसा ही रहना पड़ता है। उनके लॉ उनके कायदे कानून से रहना पड़ता है। अगर अपुन उसके खिलाफ कुछ करने जाएंगे तो फिर हमको कुछ अलग भुगतना पड़ता है। ऐसा है तो मतलब फिर लाइफ इतनी सीधी साधी रहेगी जेल काटना।
(1:53:38) ओके। बहुत प्रॉब्लम है। तो माहौल को थोड़ा हल्का करते हुए। मतलब मैं आपको कांस्टेंट देख रही हूं। डायरेक्टली देख रही हूं तो दिख रहा है मुझे आपकी आंखों में चीजें। तो जैसा अब तक छप्पन बना मूवी हां जी अभी इनका प्रदीप सर का मूवी आ रहा है अब तक 112 वैसा हम कब देखेंगे आपका मूवी अब तक 26 आप चाहेंगे तो हो सकता है जरूर बनाना बनना चाहिए आपके ऊपर मूवी बिकॉज़ आपकी स्टोरी बहुत ही रियल है और बहुत ही दुखदाई है बहुत सैड स्टोरी है और आप बहुत जेंटलमैन हो आप बहुत मतलब कॉप कॉप कैसा होता है? गाली गलौज यह
(1:54:25) वो हम यही एक्सपेक्ट करते हैं। बट आपको जब से मैंने देखा है आप बहुत सॉफ्ट हो। तो और आप बहुत सारी चीजें बोल भी नहीं पाते हो। खुल के अपनी दुख जो भी है बट आई होप आपका जो भी दुख है लाइफ में आगे सॉल्व हो जाए। हम्म। तो यह पिक्चर जब बनेगा तो पिक्चर तो मसाले पे चलता है। तो आप थोड़ा सा कुछ अपना एकदम मूवी पॉइंट ऑफ व्यू अपने एनकाउंटर से रिलेटेड कोई एक्सपीरियंस एक जल्दी से शेयर करना चाहते हैं? एनकाउंटर अभी एनकाउंटर तो एग्जांपल ओके मैं थोड़ी एक्साइटेड हो रही हूं। नहीं एनकाउंटर रात को होता है या दोपहर को भी होता एनकाउंटर
(1:55:08) नहीं ऐसा कुछ मतलब जैसा इंफॉर्मेशन आता है वैसा निकलते है डे में भी होता है डे में कितने एनी टाइम एनी टाइम हो सकता है ऐसा कुछ भी नहीं है अभी ये जो हम लोगों ने यूपी जो गैंगस्टर था वो मलाड में जो एनकाउंटर हो गया वो खासदार कृष्णन राय उनको उन्होंने मारा था तो दिन में 2 2:30 बजे हो गया है जॉन बालो छोड़न और इसी इसी मार्केट के अंदर 1:30 बजे एनकाउंटर करीब करीब-करीब 7:00 बजे 8:00 बजे ये तो एनकाउंटर 8:00 बजे होता है। कभी ऐसा कुछ नहीं है कि यह पिक्चर जो बना था लोखंड वाला शूट आउट और लखन वाला वडाला उसमें तो दिखाया था काफी दिन तक ये झड़प चली थी ऐसा बहुत दिन
(1:55:49) या बहुत घंटे चलती है घंटे मतलब वो तभी चली थी थे हम लोग ने भी मैं तभी छोटा था अ लेकिन चला था दिन भर चला था वो तो ऐसा टाइम लगता है मतलब टाइम लगता है ना वो आरु ऊपर थे वहां से वो ऊपर से फायरिंग कर एक्सपीरियंस है। हां आपके एक्सपीरियंस में ये कभी ऐसा हुआ कि बहुत टाइम लगा है। नहीं नहीं नहीं नहीं कभी क्विक हो जाता है। वििन सेकंड लगता है उसको ऐसा कुछ भी नहीं है। अगर कुछ करना हो अगर वहां से फायर हो रहा है तो अपने को जवाब देना है उसको। ओके हां वििन सेकंड में काम होता है। ऐसा नहीं है कि वो उसको वेट करे गोली आने का। ऐसा कुछ नहीं होता।
(1:56:29) आपको कभी गोली लगी है? नहीं मुझे नहीं गोली लगी। थैंक गॉड। नहीं नहीं। [हंसी] और एक बहुत इंटरेस्टिंग क्वेश्चन ये है हम कि जैसे आपके नाम पे या आपके टीम के नाम पे कभी कोई ऐसा थ्रेट होता है ना फैमिली को थ्रेट किया गया या आपको थ्रेट दिया गया या आपके कोई टीम मेंबर ऐसे रहे जहां आपने सुना है कि अंडरवर से उनको थ्रेट गया है होता है ना आप उनके अगेंस्ट नहीं हमारे अभी कैसे है सर हमारे जो एक बॉस है अभी मेरे बॉस रविंद्र अंग्रेजे है या प्रदीप शर्मा है उनको तो थ्रेट्स कैसा है हम लोग ज्यादा पिक्चर में नहीं आते एक फेस दिखेगा ना तो क्रिमिनल को हम लोग शायद वो
(1:57:14) दाढ़ी बड़ा हो फिर ऐसा हो हम लोग घूमना रहता है मतलब स्लम एरिया में या किधर भी तो हमारा ऐसा पर्सनालिटी नहीं दिखना चाहिए कि मैं पुलिस वाला हूं तो मैं पुलिस वाला जाके मैं खड़ा रहूंगा तो क्रिमिनल भाग जाएगा करेक्ट तो हमारे बेस बदल के हम लोग जिधर अभी समझो थोड़ा मुस्लिम एरिया है तो वो हिसाब से कैप डाल के को जाना पड़ता है तो हम लोग का इतना फेस ये नहीं करते अभी जो हमारा सीनियरियो तो वो हैंडल करता है वहां से बैठ के ऑफिस से तो उनको तो थ्रेट्स बहुत है शर्मा साहब को तो अभी भी प्रोटेक्शन है उनको अच्छा हेलो है सबको आते हैं थ्रेट्स सबको आते
(1:57:55) हैं तो यहां से एक बात याद आई आप के सेल के पास संजय दत्त रहते रहते थे। हां मैं पुणे में पुणे में था। तभी मेरे मैं मैं जिधर रहता उसके संजय दत्त जिस सेल में थे उनके पीछे ही मेरा सेल था। अच्छा तो मुझे आना जाना है कैंटीन लेना हो या पेपर वर्क करना है कोर्ट के बारे में। तो वहां से जाता था तो मैं सलाम दुआ था बाबा कैसे क्या है? तो वो सब चलता था। बाबा पे लगे रहते थे। जिम करो सिगरेट पियो। कभी कम पड़ा तो हम लोग के पास से मैसेज भेजते थे। अरे भाई जाओ अपने एनकाउंटर वाले उनसे मंगा लो। जैसा अभी लेटेस्ट एक एक बहुत अभी की बात कर रही हूं। एक वायरल न्यूज़ चल रहा है कि
(1:58:40) लोग सर्टन जो लोग हैं लोग मैं बोल रही हूं क्योंकि मिक्स्ड मैच है। सब डिफरेंट जगह से है। वो यह बोलते हैं कि अगर संजय दत्त ने AK-47 अपने पास नहीं रखा होता तो शायद वह मुंबई जो बम जो भी ब्लास्ट हुआ था या जो भी हुआ था वह उसका जो इफेक्ट कम हो सकता था आप यह मानते हो? नहीं अभी कैसा है जैसा मैं पुलिस मैं मैं पुलिस वाला हूं तो जिन्होंने उनको पकड़ा है पकड़ा है तो कुछ तो रहेगा इसके लिए पकड़ा है। लेकिन तभी की बात मैं बता नहीं सकता हूं। जिसका जो पनिशमेंट मिलना था उसको मिल गया।
(1:59:23) करेक्ट। राइट? हम अभी अफवाह पब्लिक और पुलिस में फर्क रहता है। पब्लिक को वाया हुआ पेपर में थोड़ा चढ़ा के होता है। लेकिन जो पेपर वर्क पेपर पे है उतना ही उसका रोल था। उसको मिला है पनिशमेंट। ओके। तो उसने अपनी सजा काट ली। सजा काट ली है। ऐसा है ना? अभी कैसा है? उसका फैमिली बैकग्राउंड देखो। वो कुछ क्रिमिनल नहीं था। ठीक है। एक सर्टन एज में रहता है थोड़ा लेकिन वो सब हो गया कम हो गया। अभी करेक्ट। हां। तो था वो दिखाना था या खुद की सेफ्टी के लिए भी तभी उसको थ्रेट्स थे। मतलब उसकी फैमिली वैसा बैकग्राउंड था ना और उनको भी कैसा थोड़ा वो तभी का माहौल था। शकील भाई,
(2:00:09) दाऊद भाई उनको भी थोड़ा सा कीड़ा था ये लोक में तो वो सब कम हो गया। अभी ओके। एक इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है। ये जो भी एनकाउंटर वाला एक एरा चढ़ा चला था बहुत और और उसी एरा में सबसे बड़े गैंगस्टर्स आए हैं और क्रिमिनल्स आए हैं तो आपको ऐसा फील कहीं होता है या आपको ऐसा लगता है कि अगर उस टाइम पे यह ब्रांच नहीं बना होता तो आज क्राइम रेट नेक्स्ट लेवल पे होता 100% तभी कैसा होता था मैम? मेरा मेरे नॉलेज के हिसाब से मैं 85 से मैं बोलूंगा ना
(2:00:54) 2010 तक 800 या 850 गैंगस्टर मारे गए एनकाउंटर में उसके ज्यादा उससे ज्यादा इनोसेंट लोग मारे गए हैं। इसके वजह से एनकाउंटर का जो पॉलिसी था गवर्नमेंट का वो चालू करा चालू किया था। ओके ऐसा है। तो यह जो गवर्नमेंट का जो भी पॉलिसी था लाइक गुड आपने ये आंसर किया गवर्नमेंट का यह पॉलिसी जो बना जिसके अंदर लोग भर्ती हुए इंक्लूडिंग आप और फिर जाके वही लोग जेल की चार दीवारी के अंदर चले गए। आपको कहीं ना कहीं ऐसा लगता है कि क्योंकि मुझे ऐसा फील होता है पर्सनली कि ये जो पॉलिटिक्स है जो बिग लेवल पे चलती है पॉलिटिक्स और जो
(2:01:41) सर्टेन पॉलिटिशियंस हैं उनके चक्रव्यूह में छोटे लोग फंस जाते हैं। जैसे आप मैं पॉलिटिक्स लोगों को मैं कोई किसी को दोष नहीं दूंगा। लेकिन जो सिस्टम है और सिस्टम के अंदर जो लोग काम करते हैं उन्होंने देखना चाहिए। अभी मैं 13 साल में जेल में रहा हूं। तो अभी कुछ हुआ तो लोग जाते हैं घर पे लोगों के। अरे बुरा हुआ ये हो गया। ये ऐसा मतलब पॉलिटिशियन भी जाते हैं। आमदार जाते हैं। वैसा हमारे घर पे कोई नहीं आया आज तक। ओके मैं जेल में गया लेकिन हमारा परिवार कैसा जी रहा है कौन क्या खा रहा है कौन क्या है ऐसा कोई भी पॉलिटिशियन हमारे घर पे नहीं
(2:02:24) आया क्यों मैं एक सिस्टम का हिस्सा था पुलिस अगर वही पब्लिक रहता ऐसा अभी क्या कैमरा लेके चले जाते बोला ये दिया वो किया जिसके ऊपर अन्याय हो गया तो मैं वो खड़ा हूं ऐसा एक भी हमारे साथ में आया नहीं लेकिन अंदर अंदर से कोई पॉलिटिशियन लोग ने भी मदद की है 13 पुलिस है उनके अलग-अलग जो है अपने हिसाब से मदद की है उन्होंने ऐसा है लेकिन ये कुछ जैसा अभी जो माहौल देख रहा हूं ना वो हमको ऐसा इतना ये नहीं मिला कि सपोर्ट नहीं मिला कि जो हमको लगता था कि सपोर्ट मिलेगा इतने हम लोगों ने काम किया जो हमारे दिमाग में हवा दी अरे इतना हम लोगों ने अच्छा काम किया समाज के लिए
(2:03:09) गवर्नमेंट है हमारे साथ में इतने बड़े-बड़े आईपीएस लोग आए लेकिन इतना सपोर्ट नहीं किया वह बड़े दुख की बात यह है। मैं मेरा पर्सनली एक्सपीरियंस मैं बता रहा हूं। अभी लोग क्या बोलते हैं? अरे तू तो प्रदीप शर्मा का आदमी है। तो प्रदीप शर्मा ने सपोर्ट करना चाहिए। प्रदीप शर्मा ने जब भी सपोर्ट करना चाहिए तो किया। लेकिन प्रदीप शर्मा के ऊपर जब आया तो वो लोग ने करना चाहिए ना। उसके ऊपर वाले हैं। उनके ऊपर वाले वो लोग नहीं करना चाहिए। यह भूल जाते हैं लोग। पिक्चर क्या है और प्रदीप शर्मा है तो सब है लिमिटेशन लेकिन लिमिटेशन है लिमिटेशन है
(2:03:52) यहां से एक बात याद आई पॉलिटिशियंस ने टेररिस्ट बनाए पॉलिटिशियंस ने क्रिमिनल्स बनाए पॉलिटिशियन ने सबको बनाया और जब वक्त आया अच्छे लोग जो काम कर रहे थे उनका साथ देने का सबसे पहले उन्होंने अपना हाथ उठा दिया आप एकदम करेक्ट एग्जांपल हो कि इतना सिंसियरिटी के साथ आपने काम किया 100% आपको जस्टिस बहुत पहले मिलना चाहिए था और आपकी फैमिली को बिल्कुल तकलीफ नहीं होनी चाहिए थी व्हेन यू वर नॉट देयर बट सबने सफर किया इंक्लूडिंग हमारा अरेस्ट ही गलत है आपकी पूरी लाइफ विदाउट परमिशन विदाउट परमिशन कोर्ट ने क्या किया वो अलग बात है जब मुझे जो
(2:04:36) अरेस्ट है ना वो गवर्नमेंट का एक मैं गवर्नमेंट सर्वेंट हूं तो गवर्नमेंट सर्वेंट के लिए अगर अरेस्ट करना हो कुछ भी इसमें तो गवर्नमेंट से परमिशन लेना चाहिए। करेक्ट परमिशन ही नहीं है। तो तभी की जो सरकार थी तभी सवाल उठने चाहिए थे। क्यों करेक्ट? शर्मा मार गए। ऐसा है तो आप अरेस्ट किसने किया? फिर अरेस्ट पुलिस ने किया। एसआईडी कम कही गई अच्छा एसआईडी ने किया है लेकिन अभी भी वो क्वेश्चन मार्क है कि परमिशन विदाउट परमिशन जो बाकी के लोग में है तो बहुत सारे लोगों को परमिशन लेते हो हम लोग को परमिशन क्यों
(2:05:21) नहीं लेगा करेक्ट सीआरपीसी 197 करेक्ट परमिशन लेना जरूरी होता है ये कोर्ट का जजमेंट है कोर्ट ने ही बताया गया रूल है ऐसा तो वहां से गलत है तो अभी कैसे आगे जाने के बाद एक बार बोलता है ना स्टैंप लग जाता है तो गलती हो जाता है तो फिर उंगली उठाना चालू करते हैं। वैसा है। तो इसी बात से मेरा एक फाइनल क्वेश्चन है क्यों आपने लाइफ इतनी क्लोजली देखा है एज अ पुलिसमैन और आपने तो एक ऐसे ब्रांच को ब्रांच के साथ पार्टिसिपेट किया है जो बहुतेंस रखता है। अगर कोई लड़का या लड़की आजकल तो लड़कियां भी आगे हैं।
(2:06:06) हां जी। तो लड़का या लड़की कोई भी आप जैसा करियर पर्स्यू करना चाहते हैं तो उनके लिए आपका क्या एडवाइस है? उनको क्या-क्या प्रिपरेशन करना है और प्लस उनको मेंटली कैसे अपने आपको तैयार करना है? मेंटली मतलब अभी एक बार डिपार्टमेंट में भर्ती हो गई या कांस्टेबल हो या ऑफिसर हो अपनी जो अभी की जो जनता है एडवांस है तो उससे एडवांस पुलिस होनी चाहिए तो कांस्टेबल से लेके इंस्पेक्टर तक लेवल इंस्पेक्टर तो होते हैं लेकिन उन्होंने मेन है पेपर वर्क समझना चाहिए कांस्टेबल से लेके ये अगर उसका पेपर वर्क ढीला है लूज उसको कुछ आता नहीं। खाली
(2:06:50) ऑफिसर बना है लेकिन पेपर वर्क में ध्यान नहीं देगा तो वो जाके आगे जाके अटकेगा। ओके। मेन जो पुलिस है वो पेपर वर्क में होशार होनी चाहिए। पहली बातों में स्मार्ट ओके। होना जरूरी है। हम जनता के सेवक हैं। करेक्ट। मालक नहीं है। वो हिसाब से बात करना चाहिए। अभी के जो कुछ लोग पुलिस में डिपार्टमेंट में है उनको बोलने का बोलने का तरीका या थोड़ा कुछ थोड़े कुछ लोग हैं ऐसे कि वो फेस कर नहीं पाते तो मेरा ऐसा कहना है कि वो स्मार्ट बनो पुलिस है ना स्मार्ट होनी चाहिए और महाराष्ट्र में मुंबई की तो पुलिस स्मार्ट ही होनी चाहिए थी एक टाइम पे
(2:07:34) हां अभी कैसा हो रहा है पहले ऐसा था कि मुंबई के पुलिस सन कास्टेबल बन रहे मतलब मतलब ये रहता था मुंबई के मुंबई के लोग इधर समझो कोल्हापुर में है तो कोल्हापुर वाले उधर भर्ती हो जावे पहला ऐसा था अभी ऐसा नहीं महाराष्ट्र में कहीं भी भर्ती हो सकता है अच्छा तो इधर का कैसा पुलिसिंग था कि इधर के जो पुलिस सन है या पुलिस ये मुंबई के लड़के लोग हैं उनको ये मुंबई क्या चीज है कैसा बर्ताव करना है ये सब मालूम था अभी वैसा थोड़ा मेरे को नहीं दिख रहा है कि मतलब गांव से मैं भी गांव से आया हूं लेकिन मैंने कुछ सीखा का पहला दो आठ साल थे
(2:08:15) लेकिन बाद में जो हमारे सीनियर जो ऑफिसर्स है या कांस्टेबल थे उन लोग में बैठना उठना फिर कैसा वो बात करते हैं जो हमारे पास पब्लिक आती है कंप्लेंट लेके या वो अभी वैसा नहीं होता है थोड़ा सा गांव के लोग हैं थोड़ा पॉलिश होना चाहिए जरूरी है बातों में या सीखना चाहिए ऐसा मेरा कहना है ओके और उनकी फैमिली को साइकोलॉजिकली कैसा तैयार रहना चाहिए किसके पुलिस वालों के जिसको भर्ती पुलिस वाले के तो साइकोलॉजी जब वो शादी करके आ जाती है तभी वो साइकोलॉजी पहले ही बता देता है पुलिस वाला भाई ये मेरा काम है आपको ये दायरे में रहना है ओके हां तो वो तो बन जाते हैं ऑटोमेटिक
(2:08:59) स्ट्रांग ऐसा कुछ भी नहीं है स्ट्रांग रहना जरूरी है स्ट्रंग रहना जरूरी है क्यों 12 घंटा ड्यूटी है करेक्ट तो घर पे आ नहीं सकते ड्यूटी पे मतलब 24 आवर्स से उनका यह चालू रहता है लेकिन वो स्ट्रांग हो जाते हैं वो घर वाले स्ट्रांग बन जाते तो इसी से मैं यह बोलना चाहती हूं कि क्या सही गलत मैं तो जज नहीं हूं और ना मैं इतना ये रखती हूं क्या बोलते हैं एजुकेशन बट मैं पर्सनल व्यू से देखती हूं आप एक बहुत जेंटलमैन है और बहुत अच्छे इंसान हैं आपको जस्टिस मिले मैं यही यही प्रे करती हूं और आने वाले पीढ़ी में कोई भी इस टाइप
(2:09:45) की चीजें होती है तो वहां एक सिस्टम होना चाहिए जहां हर कोई सिक्योर है और मैं चाहती हूं कि ये जो सिस्टम हमारा जो गरीबी के वजह से बहुत क्राइम में जा रहा है। पहले गैंगस्टर बन रहे थे। क्रिमिनल्स बन रहे थे। अब साइबर क्राइम चला गया है। तो क्राइम है बट सिर्फ शिफ्ट हो रहा है तरीका। तो अगर यह गरीबी और जो घर का माहौल ठीक हो जाए तो हर लड़का लड़की साइकोलॉजिकली यस बेटर हो जाएंगे हो जाएंगे और ये क्राइम रेट कम हो जाएगा मुझे यही कह है ना मैम जो मेरे लाइफ में मैंने भुगता है 13 साल 14 साल जो भी है
(2:10:30) जेल में ये किया मैंने जो मेरे मेरे जो कलीग है मेरे साथ जो पुलिस है मेरे अभी उनके साथ में ऐसा नहीं होना चाहिए ऐसा मेरा कहना है। क्यों? ये बहुत मतलब डेंजर जोन में डालने जैसे एक पुलिस को करेक्ट। अगर ये जेल में डालेंगे तो काम करके जेल जाना मतलब एक गलत मैसेज जाएगा। बोले यूज़ एंड थ्रो वाला ये पॉलिसी होगा। तो मेरे साथ मैंने बोला ना मेरे साथ मेरे साथ मेरे को बहुत फील होता है ये बताने में कि और मतलब इतना इनोसेंट और मतलब फैमिली से कम और डिपार्टमेंटली वर्क ज्यादा दिया है इतने काम के है और मेरे जर्नी में 120 रिवॉर्ड्स है और बहुत सारे
(2:11:17) अच्छे काम किए है तो मेरे को थोड़ा दुख होता है बाकी कुछ नहीं तो बाकी पुलिस है उनकी लाइफ में ऐसा नहीं होना चाहिए इसके लिए मैं उनको बोले कि अच्छा काम करो और गलत चीजें मत सुनो। गलत ऑर्डर मत फॉलो करो। करेक्ट। जो आपको दिखता है अगर दिखता है आपको सही लगता है वही करो। अगर कोई बोलता है गलत करने के लिए मत करो। यही नोट पर पॉजिटिव नोट पर और एकदम प्रॉपर जस्टिस के साथ मैं थैंक यू बोलूंगी आपको कि आप मेरे पडकास्ट में आए और मेरी दिल से इच्छा है कि जिस दिन आपको ऐसा लगता है कि आप और खुल के कॉन्फिडेंस के साथ बोल सकते हो तो हम एक डिटेल में और पडकास्ट करेंगे।
(2:12:06) एंड डेफिनेटली अगर जनता पुलिस से रिलेटेड इनके ब्रांच से रिलेटेड कोई भी डिटेल्स जानना चाहती है और इसकी गहराई में जाना चाहती है गहराई में जाना चाहती है तो आप कमेंट में नीचे जरूर लिखिए हम इनको वापस बुलाएंगे और डिटेल्ड पडकास्ट करेंगे थैंक यू वंस अगेन आप मेरे पडकास्ट में आए एंड जस्टिस आपको मिले थैंक यू थैंक यू यह एपिसोड अंत तक देखने के लिए आपको यह एपिसोड अच्छा लगा हो तो नीचे दिए गए बटन पे क्लिक जरूर कीजिए और मेरे चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिए। कमेंट में इस पॉडकास्ट से रिलेटेड आपको क्या अच्छा लगा? कौन से कौन से टॉपिक अच्छे लगे उसको लिखना
(2:12:52) ना भूलें। अगर स्पेसिफिकली आपको कोई टॉपिक अच्छा लगा हो तो उसे नीचे लिखिए। तो हम यह गेस्ट को वापस बुलाएंगे और उस टॉपिक से रिलेटेड डीप कन्वर्सेशन करेंगे और आप तक उसका फुल नॉलेज लेके आएंगे। अगले हफ्ते फिर मिलेंगे सैटरडे 9 PM इसी जगह द अंबिका बब्बर शो पे एक नए गेस्ट और एक नए टॉपिक के साथ ताकि आपको हर तरह का नॉलेज मैं पहुंचा सकूं। यह पडकास्ट को जरूर अपने फ्रेंड्स एंड फैमिली के साथ शेयर कीजिए। इस चैनल द अंबिका बब्बर शो पे जुड़े रहने के लिए धन्यवाद। थैंक यू।

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