Can Love Survive Without Sex? | The Psychology Behind It
Author Name:Mind With Dr. Aditi
Youtube Channel Url:https://www.youtube.com/@DrAditiAchraya_Metta
Youtube Video URL:https://www.youtube.com/watch?v=mwfcp6sKc4k
Transcript:
(00:00) तो क्या शादी बिना सेक्स के सर्वाइव कर सकती है? शादी करने के बाद जो बहुत बड़ा प्रॉब्लम आता है एक फीमेल की लाइफ में कि वो इनलॉ से परेशान हो जाते हैं। मेरे पास एक कपल आया था। उसकी जो वाइफ थी बहुत ज्यादा सुंदर थी। तो सब कुछ वो sg से मंगाती है। एक महीने बाद देखा तो उसका बिल आया। बिल आया तो एकदम ₹1 लाख। चीटिंग कौन सी ज्यादा डेंजरस है? फिजिकल या फिर इमोशनल? जब औरतें प्रेग्नेंट होती है तो उस टाइम पे हाई चांसेस होते हैं कि उनके पति किसी और औरत के साथ इनवॉल्व होते हैं फिजिकली। तो ये ऐसा क्यों करते हैं? मेरा हस्बैंड रोमांटिक ही नहीं है। देखो हस्बैंड्स आर
(00:39) लाइक चैटिंग। आप जैसा प्रम दोगे वैसा ही आपको आउटपुट मिलेगा। सो हेलो डॉक्टर आदिति। तो आज हम ना एक बहुत ही इंटरेस्टिंग टॉपिक पे डिस्कस करने वाले हैं जो है शादी। तो मेरा सबसे पहले सवाल यही है कि क्या शादी करनी भी चाहिए कि हम लोग सिंगल या फिर डेटिंग फेस में ऐसे लाइफ लॉन्ग रह नहीं सकते क्या? बहुत अच्छा सवाल है। रहने के लिए तो रह सकते हैं डेटिंग फेज में हमेशा के लिए। लेकिन कैसा होता है कि हर एक रिलेशनशिप की नीड होती है। थोड़े दिनों में वही चीज का बोर्डम आ जाता है कि अरे वही हो रहा है। मोनोटोनी सेट इन हो जाती है। जब आप शादी
(01:19) करते हो तो बहुत सारी चीजें बदलती है। बच्चे आते हैं। आप उनके लाइफ्स में बिजी हो जाते हैं। आपके फैमिली मेंबर्स होते हैं। तो बहुत सारी चीजें होती है जो कोई लोगों को बहुत इंटरेस्टिंग लग सकती है। कोई लोगों को लग सकता है नहीं यह सब क्या है? मुझे तो डेटिंग फेस में यहीं रहना है। तो यह हर इंडिविजुअल हर आदमी पे डिपेंड करता है कि वो किस तरह से शादी को देखता है। तो ओके डॉक्टर मतलब शादी तो करनी चाहिए। तो शादी में भी कौन सी शादी करनी चाहिए? क्योंकि लव मैरिज भी है, अरेंज्ड मैरिज भी है। तो कौन सी बेस्ट है आपके हिसाब से? मेरे हिसाब से आप कुछ भी करो। लव करो,
(01:56) अरेंज करो लेकिन सही इंसान चुनो। सही इंसान चुनने से आप जो भी करोगे वो अच्छा रहेगा। अच्छा ही होगा। सक्सेसफुल होगा आगे जाके। लेकिन अगर आप गलत इंसान के साथ अटक जाते हो तो फिर यह चांसेस बढ़ जाते हैं कि उसमें आपको प्रॉब्लम आ सकती है। गुस्सा, मनमुटाव ये सब चीजें होती है। तो आपके क्लीनिक में ना कौन से पेशेंट ज्यादा आते हैं? जिनकी अरेंज मैरिज हुई है या फिर जिनकी लव मैरिज हुई है। वैसे देखा जाए तो दोनों आते हैं क्योंकि दोनों में प्रॉब्लम्स होती है। जो प्रॉब्लम्स आपको पहले पता नहीं चलती वो शादी के बाद पता चलती है क्योंकि आप वो
(02:31) इंसान के साथ 24 घंटे बिताते हो। पर मैं कह सकती हूं कि ज्यादा अरेंज मैरिज के लोग आते हैं क्योंकि वो खुद से चीजें रॉल्व करने की कोशिश कम करते हैं। देखो आपकी जब लव मैरिज होती है तो आपकी रिस्पांसिबिलिटी पे आपने किसी को चुना है। तो फिक्स करने के लिए भी आप पहले कोशिश करते हो। छोटी-छोटी बातें आप नजरअंदाज करना सीख जाते हो। लेकिन अरेंज मैरिज में थोड़ा क्या होता है कि आपके मम्मी पापा ने डिसाइड किया है आपके लिए। तो फिर अरे नहीं नहीं यह है ही नहीं सही। यह गलत ही है। मुझे तो करना ही नहीं था। इन सब कारणों की वजह से कभी-कभी ऐसा होता है कि छोटी-छोटी
(03:12) बातों पे भी जल्दी प्रॉब्लम्स होने लगती है। यस करेक्ट। सो डॉक्टर अगर मुझे शादी भी करनी है मतलब किसी को भी अगर शादी करनी है तो सामने वाला इंसान हमारे लिए करेक्ट है कि नहीं या फिर वो मेरे लिए सही है या नहीं? तो यह हमें कैसे पता चलेगा? मतलब ऐसे कुछ क्राइटेरिया हमें देखना चाहिए शादी के पहले सो दैट हमारी शादी सक्सेसफुल हो जाए। डेफिनेटली सी शादी जैसे जो डिसीजंस हैं लाइफ के इंपॉर्टेंट डिसीजंस वो बहुत सोच समझ कर हमें लेने चाहिए। जैसे बाकी की चीजें हैं देखो फाइनेंससेस है। घर कैसा है? फैमिली मेंबर्स कैसे हैं? इन सब बारे में हम ज्यादातर जांच करते हैं।
(03:55) लोगों से पूछते हैं। हमारे पेरेंट्स भी पूछते हैं। लेकिन जहां तक वो इंसान का सवाल होता है कि वो एक्सैक्टली कैसा है? वो हमें अक्सर पहले ही मीटिंग में पता चल नहीं सकता। क्योंकि क्या है कि जब आप किसी से मिलते हो तो यू पुट फॉरवर्ड द बेस्ट वर्जन ऑफ योरसेल्फ। यस। करेक्ट। तो वो सब अच्छा अच्छा रोजी रोजी ही लगता है। लेकिन इसलिए हमें उसे कम से कम चार पांच बार मिलना चाहिए। अलग-अलग सेटिंग्स में मिलना जरूरी है। जब हम बाहर जाते हैं, कोई होटल में जाते हैं तो वह इंसान जैसे वेटर्स है, ड्राइवर्स है, इनसे कैसे बात करता है, कितना रिस्पेक्टफुली बात करता
(04:32) है, वह देखना जरूरी है। क्योंकि हर एक इंसान में जब भी आप शादी के लिए किसी को देख रहे हो, तो यह इनहेरेंट रिस्पेक्ट बात करते वक्त यह बहुत जरूरी है। क्योंकि आगे जाके लड़ाईयां तो हर मैरिज में होनी है। तो आगे जाके जब लड़ाई भी होती है तभी वह रिस्पेक्ट बरकरार रखना चाहिए। अगर वह रिस्पेक्ट आप बरकरार नहीं रख सके तो फिर वो शादी में प्रॉब्लम्स आने ही वाले हैं। तो रिस्पेक्ट पहली बात दूसरी बात एमथी आपकी वाइफ है, आपका हस्बैंड है जो थका हुआ है। तो सिंपल एक ग्लास ऑफ़ वाटर ला के देना। कोई भी हो हस्बैंड हो या वाइफ हो। सामने वाले की फीलिंग्स को समझ के उस
(05:12) हिसाब से रिसोंड करना उसे हम एमथी बोलते हैं। तो वह इंसान कितना एमथेटिक है यह जानना जरूरी है। यह आप अलग-अलग सेटिंग्स में जान सकते हो। फिर उसका वर्क एनवायरनमेंट कैसा है? उसके कलीग्स कैसे हैं? यह भी आप समझ सकते हो। अचानक से आप कभी उसके अनअ अनाउंस्ड बिना बताए जब आप जाते हो और उससे मिलते हो तो फिर आपको समझ में आ सकता है कि उस वो उसका इंटरेक्शन उसके कलीग्स के साथ कैसा है? कैसा व्यवहार है? ये आप समझ सकते हैं। फिर उसके साथ-साथ उसके घर वालों के साथ उसका इंटरेक्शन कैसा है? उनके इंटरपर्सनल कॉन्फ्लिक्ट्स तो नहीं है। यह भी समझना
(05:52) बहुत जरूरी है। तो वही मैं कहना चाहती हूं कि एक बार मिलने से आप डिसाइड मत कीजिए। उनसे बार-बार मिलिए। बार-बार मिलने के बाद भी आपको 100% सब कुछ पता नहीं चलेगा। आफ्टर ऑल एंड में यही मैं बोल सकती हूं कि ये फ्लूक जैसा ही है। लगा तो लगा। पर जितना हम जान सकते हैं उतना अगर हम जाने तो फिर चांसेस कम हो जाते हैं कि आगे चलके कुछ गड़बड़ हो सकती है। प्रॉब्लम्स नहीं होंगे। आजकल लोग ना सोशल मीडिया देख के बहुत इन्फ्लुएंस हो जाते हैं डॉक्टर कि वो कंपेयर करते हैं अपनी पर्सनल लाइफ को उनसे अगर जैसे बहुत सारे कपल्स हैं जो कंटेंट बनाते हैं तो उनमें
(06:33) वो दिखाते हैं कि वो उन्हें बहुत सारे गिफ्ट्स देते हैं आउटडोर मतलब फॉरेन ट्रैवल करते हैं तो लोग हमेशा उनकी मैरिड लाइफ और अपनी मैरिड लाइफ को कंपेयर करते हैं। सो ये कितना सही है और कितना गलत है आप प्लीज बता सकते हो? यस कैसा है कि यह जो इन्फ्लुएंसर्स दिखाते हैं टीवी पे जो हम देखते हैं कैमरा पे वो सब जो उनके अच्छे मोमेंट्स हैं वही दिखाते हैं या कभी-कभी एक्टिंग करके भी दिखाते हैं। मतलब वो ट्रू है ये नेसेसरी नहीं है। ऑन द अदर हैंड कैसा है कि उनके जो स्ट्रगल्स हैं कैमरा बंद होने के बाद वो कितना एक दूसरे को पीटते हैं, मारते हैं,
(07:13) झगड़ते हैं। वी डोंट नो दैट। तो इसलिए उनके लाइफ से खुद की लाइफ को कंपेयर करके खुद दुखी होना यह तो मैं बोलूंगी एकदम गलत बात है। मेरे पास एक पेशेंट आती थी मतलब एक कपल था तो अ हस्बैंड हमेशा मुझे बताता था कि ये बहुत कंपेयर करती है। मेरी वाइफ बहुत कंपेयर करती है। कुछ भी छोटी-छोटी चीजें अगर मैं ला ला के देता हूं तो भी वो खुश नहीं होती है। वो बोलती उसमें क्या बड़ी बात है? वो मेरी फ्रेंड के हस्बैंड ने तो उसको गोल्ड का नेकलेस गिफ्ट दिया। आपने इतना सा लाया तो उसमें क्या हुआ? कहीं रेस्टोरेंट में भी ले जाता हूं तो ये क्या
(07:50) है? ये नॉर्मल सा रेस्टोरेंट है। वो देखो वो कितने अच्छे-अच्छे रेस्टोरेंट्स में जाती है। तो ऐसी छोटी-छोटी बातें कंपेयर करना या सेलिब्रिटीज तो बहुत दूर की बात है। अपने ही फ्रेंड्स डालते हैं। कभी Instagram पे स्टोरी डाल दी। ये थाईलैंड विजिट किया, हांगकांग विजिट किया, वियतनाम विजिट किया। तो फिर चालू हो जाता है लोगों का कि अरे ये तो इतना घूम रहे हैं। मैं तो इधर भी इंडिया के इंडिया में मुझे नहीं घुमा रहे हैं। ऐसा भी बोलते हैं। तो क्या होता है ये कंपैरिजन की कोई लिमिट नहीं है। आप कितना भी किसी के भी साथ कंपेयर करोगे तो आप दुखी होने वाले हो। यू हैव टू
(08:28) राइट योर ओन स्टोरी। आप दूसरे से कंपेयर मत करो। आपकी जिंदगी कैसी चल रही है? पहले कैसी थी और अभी कैसी है? वो हिसाब से आप देखोगे तो आप हमेशा खुश रहोगे। यस करेक्ट। अभी यह है फॉरेन ट्रैवल। लोग फॉरेन घूमने जाते हैं लेकिन वो अगर वहां पे हस्बैंड वाइफ एक दूसरे के लिए इमोशनली अवेलेबल ही नहीं है। दोनों अपने मोबाइल्स में खुद के फोटो निकाल रहे हैं, सेल्फीज़ निकाल रहे हैं तो उसका क्या फायदा है? आप फैंसी रेस्टोरेंट्स में जाते हैं लेकिन आप ही ऑर्डर करते हो। आप वाइफ को पूछते ही नहीं हो। उसको क्या चाहिए? तो उसका क्या फायदा है? तो स्ट्रगल्स हर एक रिलेशनशिप
(09:05) में रहती है। लेकिन आप जब किसी को ऑनलाइन कुछ देखते हो तो अच्छे जो मोमेंट्स हैं वही वो दिखाते हैं। वो क्यों दिखाएंगे? हम कैसे लड़ते हैं? हम कैसे एक दूसरे के साथ झगड़ते हैं। वो नहीं दिखाएंगे। तो वैसे ही आप भी नहीं दिखाओगे किसी को कि आपके लाइफ में क्या स्ट्रगल्स चल रहे हैं। किसी को आपको देखकर भी लगता होगा अरे ये कितने आइडियल कपल है और हम कैसे झगड़ रहे हैं। तो ये भी एक एंगल है उसका। तो इसीलिए एक कपल का केमिस्ट्री दूसरे कपल के साथ कंपेयर करना इज लाइक कंपेयरिंग एप्पल्स टू ऑरेंजेस। हमें कुछ नहीं पता होता एक दूसरे के बारे में। कुछ आईडिया नहीं होता है कि
(09:43) पास्ट में क्या हुआ है, अभी क्या चल रहा है। और बस जो हमें दिखता है ऑनलाइन उस बेसिस पे हम अपना जजमेंट बना लेते हैं और उस हिसाब से खुद की लाइफ को कंपेयर करते हैं और खुद दुखी होते हैं। डॉक्टर एक चीज मैंने ना नोटिस की है कि जब भी लोग शादी करने जाते हैं तो स्पेशली लड़कों में तो वो लुक्स को बहुतेंस देते हैं। तो जो लड़की गुड लुकिंग होगी तो उसे इजीली उसकी शादी भी हो जाएगी। जैसे लोग भी कहते हैं। तो आपका क्या कहना है कि लुक्स देखने चाहिए या नहीं देखनी चाहिए? लुक्स देखो कैसा है कि फर्स्ट टाइम आप जब किसी से मिलते हो तो ऑफ कोर्स लुक्स इज
(10:19) काइंड ऑफ़ द फर्स्ट इंप्रेशन दैट यू गेट अबाउट द पर्सन कि अच्छा अरे वाह ये सुंदर है। ये अच्छी है। तो उससे उसकी वजह से अट्रैक्शन लगता है इंसान के बारे में। लेकिन इसमें धोखा यह होता है कि अक्सर लुक्स के चक्कर में हम बाकी 10 रेड फ्लैग्स होंगे कि जो नहीं बोल रहे हैं नहीं नहीं नहीं ये इंसान सही नहीं है। हम उसे नजरअंदाज करते हैं क्योंकि इतने हम उसमें वही गंगा में हम तैरने लगते हैं। तो इसके कारण क्या होता है कि हम फंस सकते हैं। मतलब हमारा डिसीजन गलत हो सकता है। अभी जैसे रिसेंटली मेरे पास एक कपल आया था तो वो लड़का बहुत ही ज्यादा फ्रस्ट्रेटेड
(10:58) था। वो कह रहा था कि अरे मेरी शादी अभी 6 महीने पहले हुई। उसकी जो वाइफ थी बहुत बहुत ज्यादा सुंदर थी। वेरी ब्यूटीफुल एकदम मतलब एकदम फीचर्स कार्व्ड आउट एकदम ऐसे। और वो बंदा मुझे बता रहा था कि जब से शादी हुई है उसने पहले तो बताया कि मुझे अह शादी के बाद नौकरी नहीं करनी है। तो उसने जॉब छोड़ दी लड़की ने। तो शी वाज़ एट होम। यह बंदा काम पर जाता था। फिर उसने बोला कि सी मुझे कुकिंग वकिंग ये सब ऐसी चीजें मुझे करनी नहीं है। मैं इतनी पढ़ी लिखी हूं। मुझे क्या जरूरत है ये सब? मैं ये मैं नहीं करती तो हम ऑर्डर करेंगे। तो सुबह से लेके रात तक चाय से लेके लंच,
(11:45) डिनर सब कुछ वो sविg से मंगाती थी। ओ हो अभी ये बंदे ने देखा नहीं नई शादी थी। उसने कुछ ज्यादा बोला नहीं, टोका नहीं। लेकिन 1 महीने बाद देखा तो उसका बिल आया। बिल आया तो एकदम ₹1 लाख sविg का बिल। तो वो देख के वो थोड़ा हैरान रह गया कि अभी ये कैसे चल मतलब घर कैसे चल सकता है? घर का किराया देना है। सब कुछ है बाकी रिस्पांसिबिलिटीज है। तो ये तो नहीं हो सकता है। तो उसने बोला कि अरे ठीक है तुम्हें बनाना नहीं है। हम मेड हायर करते हैं कि वो बनाएगी। वो लड़की ने बोला नहीं नहीं ये सब कौन करेगा? झमेला सब लाके देना, चीजें रखना फ्रिज में। ये सब कौन
(12:25) करेगा? मुझे यह सब नहीं करना है। मैं यह सब हैंडल नहीं कर सकती। तो बेसिकली उस लड़की को खाना बनाना भी नहीं था। ध्यान भी नहीं रखना था घर का। घर का ध्यान रखने को बोला तो बोलती है कि अरे मैं थोड़ी मेड हूं। मैं नौकरा नहीं हूं क्या? इसलिए तुमने मुझसे शादी की है क्या? मैं क्यों ये करूं? यह मेरा काम नहीं है। तो, ऐसे प्रॉब्लम्स होते हैं। अभी यह ऐसी चीजें हैं कि यह बहुत बेसिक चीजें हैं कि खाना बनाना खाना बनाना एज अ लाइफ स्किल दोनों को आना चाहिए। क्वेश्चन यह है कि कौन अवेलेबल है उस टाइम पे? अगर पत्नी फ्री है तो वो बना सकती है। अगर पति घर पे फ्री है
(13:04) उस टाइम पे तो वो बना सकता है। बट इट इज़ एन एसेंशियल लाइफ स्किल जो सबको आना चाहिए। पर इन बातों पे डिस्कशन ही नहीं हुआ क्योंकि वह बंदा सिर्फ लुक्स के चक्कर में पूरी तरह उसका बह गया था और उसका डिसीजन मेकिंग हाईजैक हो चुका था। ओ तो ऐसी भी स्टोरीज होती है कि व्हिच आर वेरी अनफॉर्चूनेट मतलब कि सिर्फ 6 महीने हुए शादी को और ऐसी सिचुएशन में आ गए दोनों कि नहीं रह सकते साथ में। हम सो डॉक्टर कभी-कभी क्या हो जाता है कि शादी तो हो गई। ठीक है? लेकिन शादी करने के बाद जो बहुत बड़ा प्रॉब्लम आता है एक फीमेल के लाइफ में वो है इन लॉस। तो मैंने सुना है
(13:45) कि इंडिया में जो डिवोर्सेस होते हैं तो उसमें एक मेजर रीजन है कि वो इन लॉस से परेशान हो जाते हैं। इसलिए वो डिवोर्स लेते हैं। तो क्या यह बात सच है? बहुत हद तक सच है इंडियन कॉन्टेक्स्ट में। क्योंकि इंडिया में अक्सर हम जॉइंट फैमिलीज में रहते हैं। जहां पर इनलॉस भी साथ में रहते हैं। तो उनके हिसाब से चीजें करनी पड़ती है। उनका किचन रहता है। आप नए एंट्री मारते हो किचन में तो फिर उनके हिसाब से कौन सा पतेला यूज़ करना है, क्या करना है, किस में दूध उबालना है? इससे प्रॉब्लम्स चालू हो सकते हैं। इतनी छोटी-छोटी चीजों से भी प्रॉब्लम्स होते
(14:20) हैं। तो इंडियन कॉन्टेक्स्ट के लिए डेफिनेटली डिवोर्स का बहुत इंपॉर्टेंट रीजन है कि इन लॉस लेकिन अगर इसमें देखना यह जरूरी है कि आप इनलॉज़ की तरफ से कुछ आपकी अगर अंडरस्टैंडिंग का इशू है तो आपके हस्बैंड का रोल इसमें क्या है? आपका हस्बैंड है, आपका पार्टनर है, वह कितना सपोर्टिव है? अगर वो आपके सपोर्ट में है, वह बोलता है कि ठीक है, नजरअंदाज करो चीजें। जो तुमको करना है, तुम्हारा करियर तुम्हारे इसमें मैं 100% तुम्हारे साथ हूं। तो फिर आप मतलब थोड़ा बहुत इनलॉज़ के साथ इधर-उधर एडजस्ट करने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। पर अगर मानो हस्बैंड ही खुद कुछ स्टैंड
(15:03) नहीं ले पाता है। मम्मी पापा ने बोला तो शांत रहता है। मम्मी पापा ने बोला नहीं काम करने का कल से काम पे नहीं जाने का तो नहीं नहीं तुमको सुनना पड़ेगा। तुमको यह करना पड़ेगा। वो बोल रहे हैं वो बड़े हैं तो करना पड़ेगा। अगर ऐसा उसका स्टैंड है तो फिर आपको आपके लिए स्टैंड लेना जरूरी है। तो मैम अगर हम शादी सक्सेसफुल करने की बात करें तो आपको क्या लगता है? हस्बैंड ज्यादा रिस्पांसिबल होता है या फिर वाइफ? दोनों इक्वली रिस्पांसिबल होने चाहिए आइडियली आइडियल सिचुएशन में। शादी हमेशा इट इज़ अ वर्क इन प्रोग्रेस। आप ऐसा नहीं कह सकते कि अभी शादी कर ली, अभी एक दूसरे
(15:39) को समझ लिया, अभी सब ठीक चलेगा। तो इट्स लाइक एक झाड़ है बड़ा वृक्ष है वो बड़ा होने के लिए यू कास्टेंटली नीड कि आप पानी दो उसको रेगुलरली उसको कट करो सब ट्रिमिंग करो तो वैसे ही शादी इज काइंड ऑफ़ वर्क इन प्रोग्रेस तो ये हमको समझना है और अक्सर ऐसा होता है कि कंप्लेंट्स तो मतलब एस्पेशली फीमेल्स ज्यादातर औरतें ऐसा कंप्लेंट करती है कि अरे इतने साल हो गए मेरी शादी को लेकिन मेरे मन में क्या है? मुझे क्या चाहिए? यह मेरे हस्बैंड को पता ही नहीं चलता है। हस्बैंड से आप जब बात करते हो तो वह बोलता है कि मुझे कैसे पता चलेगा कि उसके मन में क्या चल रहा है? अगर
(16:22) वो मुंह से नहीं बोलेगी कभी तो मुझे कैसे पता चलेगा? उसने मुझे बोला होता कभी तो मैं तुरंत ला के देता। तो अभी इसमें गलती किसकी है? तो ये जो इन्हेरेंट बिलीफ है औरतों का कि अरे सब बातें समझनी चाहिए। ऐसा कोई भी नहीं होता है। ऐसा माइंड रीडर ही हो सकता है। और माइंड रीडर दुनिया में कोई नहीं होता है। कोई इधर अंतर्यामी नहीं है। यस। तो ये बातें समझना बहुत जरूरी है। बहुत छोटी-छोटी बातें होती है कि जिनकी वजह से बेब बन जाता है दोनों के बीच और मनमुटाव होता है। जैसे मैंने ये बात बताई या फिर रोमांटिक मेरा हस्बैंड रोमांटिक ही नहीं
(16:57) है। ऐसा ज्यादातर औरतें बोलती हैं कि रोमांस की बातें करना नहीं जानता। ऐसे बोलती है कि इमोशंस एक्सप्रेस करना नहीं जानता। लेकिन इसमें हमें समझना यह जरूरी है कि मैन आर वायर्ड डिफरेंटली। तो जितनी औरतें एक्सप्रेसिव होती है, बहुत भरभर के बोलती है वैसे मर्द वैसे ही बोलेंगे ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ परसेंटेज होते हैं कि जो एक्सप्रेस कर सकते हैं। लेकिन आप अगर सोचते हो कि नहीं वो करते हैं वो इतने एक्सप्रेसिव है। वैसे मेरा हस्बैंड होना चाहिए। तो हमको यह समझना चाहिए कि लव और केयर दिखाने के अलग-अलग तरीके होते हैं। आपका हस्बैंड भले आपके
(17:37) आपके साथ बैठ के रोमांटिक बातें नहीं करें लेकिन जब आप ठीक नहीं है आपको तब आपकी देखभाल करना आपको गर्म पानी लाके देना, गरम-गरम खाना परोसना ये बहुत छोटी-छोटी बातें होती है। लेकिन इससे दिखता है कि सामने वाला अपने लिए लव है। उसके मन में केयर है। यह दिख जाता है। तो ये बातें समझना जरूरी है। ये इमोशनल मैच्योरिटी की बात है जो धीरे-धीरे आती है। जैसे इंसान बड़ा होता है वैसे आती है। तो शादी में ना औरतों की एक कंप्लेंट हमेशा रहती है कि ना मैं मेरे पति को एक काम बोलती हूं। वो वही करके वापस आ जाता है। बाकी आजू-बाजू की चीजें
(18:16) वो देखता ही नहीं है। वैसे ही नेगलेक्ट करके वैसे ही निकल के चला जाता है। तो आपका क्या थॉट है इसमें? यह अक्सर बहुत कंप्लेंट करती है। आप सही कह रहे हैं। इसमें मुझे यह बताना है सबको कि देखो हस्बैंड्स आर लाइक चैट जीपीटी। आप जितना जैसा प्र्प दोगे वैसा ही आपको आउटपुट मिलेगा। तो अगर आपको चाहिए कि आपका हस्बैंड किचन में जाए। तीन काम करके आए तो आपको लाइन में उसको वो तीन काम ठीक से बताने होंगे वेरी क्लियरली तो ही वो हो पाएंगे। नहीं तो अगर आप एक्सपेक्ट करते हैं कि जैसे आप किचन में जाते हैं आपने चाय चाय निकाली फिर उसके बाद सब क्लीन कर
(18:55) दिया फिर बर्तन घसे फिर बाहर आकर बैठे वैसे वो करेंगे बिना बताए यह बहुत ज्यादा एक्सपेक्टेशन हो गई इतनी तो कभी भी किसी की भी होने नहीं वाली है तो अगर आपको उन्हें बताना है कि आपको अंदर जाके किचन में जाके तीन काम करने हैं तो आपको इस हिसाब से बताना होगा कि अंदर जाओ पहले चाय निकालो फिर बाजू में जो कचरा गिरा है वह वो डस्टबिन में डालो और फिर बराबर पोछा लगा के फिर बाहर आना। ऐसा क्लियरली आप जब भी बोलेंगे तभी आपको वो आउटपुट मिलेगा। नहीं तो बहुत-बहुत मुश्किल है। सो डॉक्टर एक कंप्लेंट है ना बहुत सारे कपल्स करते हैं। स्पेशली
(19:34) लड़कियां कि शादी से पहले उनके जो पार्टनर है या फिर हस्बैंड है वो उनके छोटी-छोटी बातों पे बहुत ध्यान देते थे। उन्हें बहुत स्पेशल ट्रीट करवाते थे। लेकिन आफ्टर मैरिज वो सारी चीजें चली जाती है। वो इतना एफर्ट्स नहीं डाल रहे। उन्हें मैं बीमार हूं या फिर नहीं हूं। ऑफिस गई नहीं गई। इस चीजों से फर्क ही नहीं पड़ता है। या फिर पहले वो घंटों बातें करते थे। लेकिन अभी सीधा एक हाय हेलो बोलने के लिए भी ना उन्हें बहुत ही एफर्ट लगता है वो सारी चीजें। तो आपको क्या लगता है कि शादी में वो स्पार्क रहने के लिए तो कौन सी चीजें जो जरूरी है?
(20:11) अभी कैसा हमें एक समझना चाहिए इसमें कि रिलेशनशिप्स इवॉल्व होते रहते हैं। तो इनिशियली जब रिलेशनशिप के शुरुआत होती है तब आप एक दूसरे को जानते हो तो जानने के लिए आप घंटों बातें करते हो एक दूसरे के साथ नोवेल्टी फैक्टर जो होता है वो थ्रिल होता है इनिशियली डोपामिन किक होता है। तो इसलिए आपको लगता है कि इससे ही बात करो 24 घंटे भी कम पड़ जाते हैं बात करने में। फिर ऐसे करते-करते आप शादी करते हो। जब शादी करते हो तो शादी के बाद आप यू आर स्टेइंग टगेदर फॉर 24 आवर्स। तो आप 24 घंटा जब एक दूसरे के साथ रहते हो तो नेचुरली वो जो नोवेल्टी है, जो थ्रिल है
(20:48) वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम होता है। जैसे पहले था वैसे नहीं रहता है। उसके साथ-साथ एडेड रिस्पांसिबिलिटीज होती है। घर का भी करना है। पहले कैसा होता है कि आप कभी कबभार मिलते हो, घूमने जाते हो। सिर्फ उतना ही लाइफ है। ऐसा उस टाइम पर लगता है। जब शादी होती है तो अरे घर का काम भी करना है, खाना भी बनाना है, बर्तन भी करने हैं। ये सब होने के बाद जो टाइम मिलेगा बचेगा उसमें यह सब बातें आप आपके ध्यान में आएगी। लेकिन उसमें भी ऐसा है कि जैसे आप आगे बढ़ते हैं, वैसे रिलेशनशिप्स इवॉल्व होती है। जो बातें पहले बहुत अच्छी लगती थी, बहुत रोजी लगती थी। एक शादी के दो चार
(21:29) साल बाद आपको वैसे बात करना पसंद भी नहीं आएगा कई बार। यस। तो लेकिन वो शादी में अगर बोलते हैं ना कि वो एक नयापन रहने के लिए तो क्या ऐसी चीजें करनी चाहिए कपल्स के क्योंकि शादी इज लाइक वेरी लॉन्ग प्रोसेस। आप देख सकते हो 30 साल 40 साल लोग 50-50 साल एक दूसरे के साथ रहते हैं। तो वो एक बोर्डम नहीं लगना चाहिए। तो उसके लिए हम क्या कर सकते हैं? तो वो स्पार्क अलाइव रखने के लिए आपको कास्टेंटली उस पे काम करना चाहिए। जैसे भले आपके बच्चे हैं अगर तो बच्चों के सिवाय भी आपको भी वेकेशन पे जाना चाहिए। जस्ट दोनों ने तो वहां पर जो आपके पहले जो चीजें थी जैसी
(22:10) थी दैट यू कैन रिजुमिनेट अगेन तो वैसे कर सकते हैं या फिर नॉर्मली जैसे बाहर वेकेशंस पे जाना भी अगर पॉसिबल नहीं है तो आप सिंपल एक कॉफी डेट पे लेकर जा सकते हो आपकी वाइफ को यस वंस अ वीक वंस अ मंथ जो भी फ्रीक्वेंसी आप डिसाइड करो लेकिन दैट कनेक्टेडनेस शुड ऑलवेज बी मेंटेंड मतलब वो इमोशनल कनेक्ट फील होना चाहिए जब डिस्कनेक्ट होता है दो पार्टनर्स के बीच तब फिर बाकी की चीज़ें जैसे एक्स्ट्रामराइटल अफेयर्स वगैरह यह चीज़ चालू हो सकती है। ओके। सो डॉक्टर ये ना देखा गया है कि जब औरतें प्रेग्नेंट होती है तो उस टाइम पे हाई चांसेस होते हैं कि उनके पति किसी और
(22:52) औरत के साथ इनवॉल्व होते हैं फिजिकली। तो जब सबसे ज्यादा जरूरत उनकी वाइफ को उनकी होती है। सो दे गेट इनवॉल्वड मतलब फिजिकली हुआ या फिर इमोशनली हुआ। तो ये ऐसा क्यों करते हैं उस टाइम पे? नहीं सब लोग नहीं करते हैं। परसेंटेज थोड़ा बढ़ जाता है लेकिन सब लोग नहीं करते। जो लोगों को थोड़ा सा जिनके मोरल्स थोड़े से उनको रोकते नहीं है कि नहीं नहीं ये चीज गलत है करना। वो ईजीली इसमें बहक जाते हैं कभी-कभी। और दूसरी बात कि जो बहुत इंपल्सिव होते हैं कि मेरे मन में ख्याल आया मुझे अर्ज आई। मैंने कर लिया। मैंने आगे पीछे का कुछ सोचा नहीं। हम्।
(23:29) तो, इतने इंपल्सिव जो लोग रहते हैं, तो वह ऐसी चीज़ कर सकते हैं। तो, अक्सर यह कपल्स में देखा गया है कि उनका कहना यह होता है कि अगर बच्चे नहीं होंगे ना, तो हम एक दूसरे के साथ रह ही नहीं सकते। हम एक दूसरे को तुरंत डिवोर्स दे देंगे। सिर्फ बच्चे हैं इसीलिए हम इस शादी में टिके हुए हैं या फिर एक दूसरे को झेल रहे हैं। तो क्या यह शादी भी कितनी सही है, कितनी गलत है? आपको क्या लगता है? देखिए, कैसा होता है कि लोग कहते तो हैं कि हम बच्चों के लिए साथ में रह रहे हैं। लेकिन बच्चों के लिए क्या आप झगड़ा अवॉइड कर रहे हैं? साथ में रह के अगर झगड़ा
(24:03) अवॉइड कर पा रहे हो तो अलग बात है। लेकिन अगर बच्चे रोज देख रहे हैं कि दोनों झगड़ रहे हैं। एक दूसरे को जो नहीं बोलना चाहिए सब कुछ बोल रहे हैं। एक दूसरे को कभी कोई गाली वाली भी दे गाली दे रहे हैं। कोई हस्बैंड वाइफ को पीट रहा है। मार रहा है। तो फिर इस इन सब चीजों का उनके डेवलपिंग ब्रेन पे असर होता है। तो आप मुझे बताइए अगर उन्हें मेल चाइल्ड है तो उसके ब्रेन पे कैसे इफेक्ट होगा? भाई मेल चाइल्ड अगर यह देख रहा है तो वो यही अस्यूम करेगा कि अरे मारना पीटना वाइफ को ये सब नॉर्मल है। ये सब सहन करके भी मेरी मां जैसे रहती है वैसे आगे चलके मैं
(24:41) भी करूंगा तो मेरी वाइफ भी सह लेगी और ऐसे ही होता है घरों में ये एक बात है और दूसरी बात है कि ऐसे बच्चे अक्सर एंग्जायटी डिप्रेशन कभी-कभी पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस के भी शिकार हो जाते हैं। तो अगर उनके घर पे कोई फीमेल चाइल्ड है तो उसके ब्रेन पे कैसे इफेक्ट होगा ये सारी चीजें? वो लर्न हेल्पलेसनेस सीख रही है कि कितना भी आप कुछ भी करो जैसे मेरी मां ने सहा है वैसे ही मुझे भी सहना ही पड़ेगा ओ हां औरतों का यही भविष्य है वो ये सीख रही है और उसके साथ-साथ कुछ नहीं बोलना पति कुछ भी बोले हमें कुछ नहीं बोलना है हमें सब सुनना है
(25:20) ये उसके माइंड में बैठता है और उसके साथ-साथ जैसे मैंने मेल चाइल्ड के लिए बोला वैसे ही ए्जायटी डिप्रेशन और ये सब देखने के बाद का जो ट्रॉमा है पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस यह सब चीजें ऐसे बच्चों में दिखाई देती है। सो मुझे लगता है कि बेटर है अगर आप ये सारी चीजें अवॉइड नहीं कर रहे हो तो सेपरेट होना इज अ बेस्ट डिसीजन फॉर योर चाइल्ड। यस अब्सोलुटली फॉर योर चाइल्ड। क्योंकि कई बार सिंगल पेरेंट फैमिलीज़ जो होती है जहां पे सिर्फ मां है, पापा है और दूसरा जो पेरेंट है, ही इज़ विजिटिंग। यस। लेकिन पीस पीस जहां है, पीसफुल फैमिलीज़ है तो वो बच्चे अक्सर नॉर्मल जैसे बाकी
(25:56) फैमिलीज़ हैं वैसे ही अ बड़े होते हैं। सो डॉक्टर कुछ रैपिड फायर क्वेश्चंस है तो आपको मुझे एकदम क्विक आंसर्स देने हैं। लव मैरिज या अरेंज मैरिज? बोथ ओके। तो फिजिकल केमिस्ट्री ज्यादा इंपॉर्टेंट है या फिर कंपैटिबिलिटी? डेफिनेटली कंपैटिबिलिटी। तो शादी में जो जेलसी होती है वो हेल्दी हो सकती है? नेवर नेवर। तो क्या खुशी कभी भी हेल्दी नहीं होती है। हां। तो क्या शादी बिना सेक्स के सर्वाइव कर सकती है? कर सकती है बट डिफिकल्ट है। क्या पार्टनर्स के फोन पासवर्ड हमें पता होने चाहिए? नॉट रिक्वायर्ड। अगर आप ट्रस्ट करते हैं तो जरूरत ही नहीं है।
(26:35) चीटिंग कौन सी ज्यादा डेंजरस है? फिजिकल या फिर इमोशनल? इमोशनल ज्यादा डेंजरस है। शादी को सक्सेसफुल बनाने के लिए क्या बच्चा होना जरूरी है? नॉट एट ऑल। शादी करने के लिए पेरेंट्स का इन्फ्लुएंस होना जरूरी है। आप उनको एक गाइडलाइन की तरह यूज कर सकते हैं। मतलब पूछ सकते हैं कि सब सही है या नहीं है? बट अल्टीमेटली द डिसीजन हैज़ टू बी यर्स। ओके? एक आदमी को अपने वाइफ से क्या एक्सपेक्टेशन नहीं करना चाहिए? हर एक आदमी को अपने वाइफ से एक्सपेक्ट नहीं करना चाहिए कि वो हर टाइम परफेक्ट रहेगी। परफेक्ट बहू, परफेक्ट मां, परफेक्ट होममेकर। तो यह बहुत-बहुत डिमांडिंग है।
(27:16) और एक औरत को अपने हस्बैंड से क्या चीजें डिमांड नहीं करनी चाहिए? हर औरत को यह समझना चाहिए कि मेरी मन की फीलिंग्स वो सब समझ देगा। वो रोमांटिक बातें करेगा। वो मैं जैसे बोलती हूं वैसे ही करेगा। ऐसे सब नहीं होने वाला है। तो ये एक्सपेक्टेशंस नहीं रखनी चाहिए। ओके डॉक्टर ये सेंटेंस को आपको कंप्लीट करना है। आप बहुत सारे ऑप्शंस में डाल सकते हो। ज्यादातर शादियां फेल हो जाती है। क्योंकि शादी यह वर्क इन प्रोग्रेस होता है। दोनों हस्बैंड वाइफ को इक्वली उसमें कंट्रीब्यूट करना होता है। जब आप शादी करने का डिसीजन लेते हैं तो यह लाइफ
(27:54) का सबसे इंपॉर्टेंट डिसीजन होता है। तो यह हमेशा सोच समझ के लेना चाहिए। आप बाकी चीजें तो देखते ही हैं। जैसे फाइनेंससेस है, घर है, घर वाले हैं। यह तो आप सब देखते ही हैं। लेकिन उसके साथ-साथ थोड़ी सी जांच उसके स्वभाव की भी करनी चाहिए। किस तरह का स्वभाव है? बहुत गुस्से वाला तो नहीं है। किस तरह से बाकी लोगों से वह बर्ताव करता है। यह होने के बाद जब आप शादी करते हैं तो शादी के बाद भी इनिशियली तो एडजस्टमेंट्स बहुत होती है। नया घर है, नया संसार है तो घर के साथ एडजस्टमेंट, घर वालों के साथ एडजस्टमेंट। तो इसमें भी काफी सारी चीजें आपको करनी पड़ती है। इस
(28:35) दौरान हो सकता है कि आप में अनबन हो जाए, कुछ झगड़े हो जाए। लेकिन झगड़े सुलझाने का भी तरीका होता है। एक दूसरे से बातचीत करने का भी तरीका होता है जो सीखा जा सकता है। अभी बहुत सारे मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स होते हैं, साइकेटिस्ट है, साइकोलॉजिस्ट हैं जो आपको अच्छी तरह से गाइड कर सकते हैं कि एक दूसरे के साथ व्यवहार कैसा सुधार सकते हैं। हमेशा यह याद रखना जरूरी है कि जब दो इंसान एक साथ शादी करते हैं, तो वह हर चीज पे एक जैसा ही उनका ओपिनियन होगा। यह बिल्कुल जरूरी नहीं है क्योंकि वह दो एसेंशियली अलग लोग हैं जो अलग तरह से पले बड़े हैं तो उनके ओपिनियंस होंगे
(29:18) उनके जो खुद के एक्सपीरियंसेस हैं उस हिसाब से वो बिहेव करेंगे तो यह जरूरी नहीं है कि सब सेम हो या हर टाइम हम सेम पेज पे हो लेकिन यू हैव टू अग्री टू डिसए्री हम जब डिसए्री भी होते हैं तो किस तरह से बात करते हैं एक दूसरे से उससे सब फर्क पड़ता है तो अगर अगर आपके कोई भी कंसर्न्स है, मेंटल हेल्थ कंसर्न्स है तो जरूर क्वालिफाइड साइकेट्रिस्ट या साइकोलॉजिस्ट से जरूर मिलिए।
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